सुगंधा अपनी बेटी के कॉलेज की किताब के साथ-साथ अपने काम की भी किताब खरीद चुकी थी सरस शलील के साथ-साथ मनोहर कहानियां के अंदर रखी हुई उसे अश्लील साहित्य को अपने साथ खरीद लाई थी वैसे तो उसे अश्लील साहित्य का केवल चार-पांच लाइन का ही वह पठन कर पाई थी,,, लेकिन इतना ही कहानी की गहराई को जानने के लिए काफी था,,,,,, बस इतनी सी ही लाइन पढ़कर वह समझ गई थी कि यह कहानी मां बेटे के बीच के अवैध संबंध को लेकर हैं लेकिन क्या है कैसे हैं इसके बारे में वह जानने के लिए पूरी तरह से उत्सुक हो गई थी,,,।
पहली बार इस तरह के अश्लील साहित्य को खरीदने में उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह तो अच्छा था कि वहां कोई दूसरा नहीं था वह केवल अकेली ही थी वहां पर किताब खरीदने वाली क्योंकि शाम ढलने लगी थी इसलिए लोग अपने-अपने घरों की तरफ चले जा रहे थे किसी को भी वहां खड़े रहने की जल्दबाजी दिखाई नहीं दे रही थी,,,, सुगंधा ने जल्दी से अपने बटुए में से पैसा निकाल कर उस किताब वाले को थमा दी थी,,,, और वहां से निकल गई थी ऑटो पकड़ने के लिए,,,, थोड़ी ही देर में वह घर पहुंच गई थी लेकिन इतनी दूरी में भी उसके मन में अजीब सी उथल-पुथल चल रही थी बार-बार उसके मन में वही शब्द चल रहे थे जिसे उसने मदहोश जवानी की किताब के पन्नों को पलट कर पढी थी,,,,, अपनी मां की गुलाबी बुर देखकर संजय का लंड एकदम से खड़ा हो गया,,,,,, संजय अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा,,,
किताब के पन्ने की यही लाइन उसके दिलों दिमाग पर हथौड़े की तरह बज रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, जिंदगी में पहली बार हुआ इस तरह के किताब को अपने हाथ में ली थी जिसके पन्नों को पढ़कर उसके दिलों दिमाग पर गहरा असर पड रहा था,,,, क्योंकि वह पल भर में ही उस मदहोश जवानी की किताब के नायक में अपने बेटे को और उसकी मां में खुद को देख रही थी,,,,,,, वह उसे लाइन में संजय की जगह अपनी बेटी का नाम जोड़कर उसे लाइन को अपने मन में पढ़ रही थी,,,,,,, अपनी मां की गुलाबी बुर देखकर अंकित का लंड खड़ा हो गया,,,,,, अंकित अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा यह सब शब्दों का जोड़-तोड़ करना सुगंधा को काफी रोमांचित कर दे रहा था,,,, उसकी बुर पानी पानी हुए जा रही थी,,, और उसे किताब को पढ़ने की उत्सुकता उसकी निरंतर बढ़ती जा रही थी,,,।
देखते ही देखते हो अपने घर के आगे के चौराहे पर रिक्शा से उतर गई और पैदल अपने घर पर पहुंच गई शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो रहा था उसके दोनों बच्चे घर पर ही मौजूद थे,,, दरवाजे पर दस्तक देने के बाद तृप्ति ने हीं दरवाजा को खोली,,,, और अपनी मां को दरवाजे पर देखते ही वह और कुछ नहीं बस इतना ही पूछी,,,।
किताबें मिल गई मम्मी,,,
हां हां मिल गई,,,,(घर में प्रवेश करते हुए और तृप्ति घर को बंद करके कड़ी लगाते हुए) लेकिन तुझे सिर्फ किताबों की पड़ी है यह नहीं पूछी की इतनी देर क्यों हो गई मेरी तो तुझे फिक्र ही नहीं है,,,
नहीं मम्मी ऐसी बिल्कुल भी बात नहीं है वह क्या है ना की एग्जाम की तैयारी करना है इसलिए किताबें बहुत जरूरी है,,,
और मां,,,(आंखों को ना चाहते हुए एक जगह पर खड़ी होते हुए सुगंधा बोली)
तुम तो जिंदगी की जरूरत हो,,,(और इतना कहने के साथ ही तृप्ति अपने मां के गाल पर चुंबन कर ली और उसके कंधे पर लटके थैले को अपने हाथ से उतारने लगी थी कि उसे रोकते हुए सुगंधा बोली क्योंकि उसे एकाएक याद आ गया था की थैले में वह अश्लील साहित्य भी है,,, इसलिए वह बहाना करते हुए बोली,,,)
अरे कहीं भागी नहीं जा रही हु पहले एक ग्लास पानी तो पिला दे,,,,।
ठीक है मम्मी अभी लाई,,,(इतना कहने के साथ ही तृतीय रसोई घर में पानी लेने के लिए चली गई और सुगंध मौका देखकर तुरंत अपने कमरे में चली गई और जल्दी-जल्दी मनोहर कहानी की किताब में से उसे अश्लील साहित्य को निकाल कर अपने अलमारी के ड्रावर में रखकर उसे लॉक कर दी,,,, और आराम से अपनी बिस्तर पर बैठ गई तब तक तृप्ति हाथ में पानी का गिलास लिए हुए अपनी मां के पास आ गई थी,,,, और सुगंधा उसके हाथ से पानी लेकर पीने लगी,,, और जब तक उसकी मां पानी पीती तब तक तृप्ति थैले में से अपने कॉलेज की किताब को बाहर निकाल कर देखने लगी और बहुत खुश हुई और वहां से चली गई,,,,,।
थोड़ी ही देर में थोड़ा फ्रेश होकर सुगंधा खाना बनाने लगी,,,,,, उसका आज खाना बनाने में मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था अपनी मन में सोच रही थी कि कब वह अपने कमरे में जाएं और आराम से उसे किताब को पड़े क्योंकि अब वह भी किताब की कहानी के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गई थी कि कैसे हालात में एक मां बेटे इतने करीब आ जाते हैं कि दोनों के बीच मर्द और औरत वाला संबंध स्थापित हो जाता है कैसे एक मां अपने ही बेटे के साथ चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है,,, और कैसे एक बेटा जो अपनी मां की बुर से ही जन्म लेने के बाद जवान होने के बाद अपने ही लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी चुदाई करने को तैयार हो जाता है,,,, यही सब सवाल उसे परेशान कर रहे थे और इसी सवाल का जवाब जानने के लिए वह किताब को पूरी तरह से पढ़ना चाहती थी,,,,
और इसीलिए बहुत जल्दी-जल्दी खाना बनाकर तैयार करती हो समय पर अपने बच्चों को खिलाकर कुछ देर टीवी देखने लगी क्योंकि उसके डेली रूटीन में आता था वह हमेशा अपने बच्चों के साथ टीवी देखा करती थी,,,, और जैसे ही समय हुआ वह उठकर बाथरूम में गई और साड़ी उठाकर पेशाब करने लगे उसकी बुर से आ रही तेज सीटी की आवाज अंकित के कानों में सांप सुनाई दे रही थी जो कि उसके रोज का हो गया था और वहां उसे आवाज पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता था लेकिन पल भर के लिए उसके बदन में भी अजीब सी हलचल हो जाती थी जब उसके कानों में इस तरह की आवाज आती थी,,, थोड़ी देर में उसकी मां बाथरूम से बाहर निकली और दोनों बच्चों को सोने की हिदायत देकर खुद अपने कमरे में चली गई,,,।
सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था बहुत जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगाने के बाद,,, अलमारी की तरफ गई और धीरे से अलमारी को खोलकर,,, ड्रावर में से उसे किताब को बाहर निकाल ली,,,, हाथ में एक बार फिर से उसे किताब को लेने के बाद सुगंधा के तन बदन में अजीब सी तरंगे उठने लगी वह मदहोश होने लगी किताब का मुख श्रेष्ठ ही बेहद नशीला था,,,, जिस पर एक खूबसूरत लड़की की तस्वीर बनी हुई थी अंगड़ाई लेते हुए और उसे लड़की के बदन पर केवल जालीदार गाउन था जिसमें से उसके बदन का हर एक हिस्सा नजर आ रहा था,,,, मुख्य पृष्ठ के उस तस्वीर को देखकर सुगंधा की जवानी हीलोर मारने लगी,,,, वह जल्द से जल्द उसे किताब को पढ़ लेना चाहती थी,,,, इसलिए उसे किताब को लेकर जल्दी से अपने बिस्तर पर पहुंच गई और पीठ के बाल लाकर कर के नीचे तकिया लगाकर आराम से उस किताब के पन्नों को पलटने लगी,,,।
किताब पढ़ने के बाद उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह पसीने से तरबतर हो गई लेकिन वह अभी पूरी किताब नहीं पड़ी थी केवल पांच पन्ने ही पड़ी थी कि उसके बदन में उत्तेजना अपना असर दिखने लगी उसके बदन में जवानी चिकोटि काटने लगी,,,, उसने आज तक इस तरह की अश्लील कहानी कभी पड़ी नहीं थी इसलिए पहली बार में ही उसके पसीने छूट गए थे साथ में उसकी बुर का पानी भी निकलने लगा था,,,, पांच पन्ने पढ़ने के बाद उसे इतना तो अंदाजा लग गया था कि कहानी क्या है उसकी जिंदगी में और किताब की कहानी में कुछ ज्यादा फर्क नहीं था किताब वाली कहानी में भी एक औरत जल्द ही विधवा हो जाती है और वह खुद भी एक विधवा थी कहानी की नायिका का भी एक जवान लड़का था और उसके खुद का भी एक जवान लड़का था पर कितना था कि उसकी लड़की नहीं थी,,,,,।
कहानी की नायिका किसी स्कूल में नहीं बल्कि किसी ऑफिस में काम करती थी और घर में केवल वह और उसका बेटा संजय ही रहते थे दोनों में काफी मेलजोल था दोनों एक दूसरे को समझते थे और संजय अपनी मां का पूरा ख्याल रखता था यहां तक की आज तक उसने अपनी मां को कभी गलत नजरिया से देखा नहीं था और नहीं कभी उसे नायिका ने भी अपने बेटे को गलत नजरिए से देखी थी दोनों के बीच में मां बेटे वाला पवित्र संबंध नहीं था लेकिन एक दिन अचानक सब कुछ बदल गया,,,,।
एक दिन बरसात हो रही थी और वह भी बड़े जोरों की,,, उसका बेटा संजय घर पर ही था धीरे-धीरे शाम हो रही थी लेकिन उसकी मां का कहीं भी आता पता नहीं था वह बार-बार दरवाजे पर आकर अपनी मां का राह देख रहा था,,,, और तभी थोड़ी देर बाद उसकी मां भीगती हुई उसे नजर आई,,,, अपनी मां को देख कर संजय बहुत खुश हुआ लेकिन इस बात से वह काफी परेशान हो गया क्योंकि उसकी मां पूरी तरह से बरसात के पानी में भीग चुकी थी ऐसे में तबीयत खराब होने का डर था,,,,।
जल्दी से उसकी मां घर में प्रवेश कर गई लेकिन वह पूरी तरह से भेज चुकी थी उसके बदन के कपड़े उसके खूबसूरत बदन से चिपक गए थे जिसमें से उसका पूरा अंग एकदम साफ नजर आ रहा था,,, जिस पर अभी तक संजय की नजर नहीं पड़ी थी वह जल्दी से कमरे में जाकर अपनी मां के लिए टावल लेकर आया था ताकि वह जल्दी से वह अपने कपड़ों को बदलकर दूसरे कपड़े पहन ले लेकिन जैसे ही वह टावल लेकर अपनी मां के पास आया उसकी नजर अपनी मां की छाती पर चली गई उसकी मां का ध्यान संजय के ऊपर बिल्कुल भी नहीं था वह अपनी साड़ी को करने से उतर कर उसमें से पानी को निचोड़ रही थी,,, और भीगे हुए ब्लाउज में से उसकी मां की मस्त-मस्त बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी क्योंकि उसकी मां ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,,,, इस तरह का नजारा संजू पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था,,,, वह अपनी मां को टावल पकड़ाना भूल गया और प्यासी नजरों से अपनी मां की चूचियों की तरफ देखने लगा जो की पूरी तरह से जवानी से मिली हुई थी और उसे इस बात की भी हैरानी थी कि ब्लाउज के अंदर उसकी मां ब्रा नहीं पहनी थी ब्लाउज के अंदर उसकी मां की चूचियां एकदम नंगी थी,,,,।
और जैसे ही उसकी मां टावल लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाई तो अपने बेटे की नजर को अपनी छातियों पर टिकी हुई देखकर वह अंदर तक सिहर उठी,,, पहले तो उसे तेज झटका सा लगा ताज्जुब हुआ अपने बेटे की हरकत पर क्योंकि आज तक उसके बेटे ने उसे इस नजर से कभी नहीं देखा था लेकिन आज की बात कुछ और थी वह अपनी छातियों की तरफ नजर नीचे करके देखी तो वह खुद शर्म से पानी पानी हो गई,,, उसे इस बात का एहसास हुआ कि वाकई में हुआ ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और उसकी नंगी चूचियां एकदम साफ दिख रही थी,,,,, वह जल्दी से अपने बेटे के हाथों से टावल लेकर,,, बाथरूम में घुस गई लेकिन जाते-जाते यह उसकी किस्मत का ही दोस्त कहो उसकी नजर अपने बेटे की तने हुए तंबू पर पड़ गई जो की पूरी तरह से एकदम खिला हुआ तंबू की शक्ल में पेट के अंदर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,,,, बाथरूम में प्रवेश करते ही वह जल्दी से बाथरूम का दरवाजा बंद कर दी और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है वह अपनी गलती पर शर्मिंदा होने लगी,,,, लेकिन तभी उसे अपने बेटे के पेट में बना तंबू याद आने लगा बरसों गुजर गए थे उसने अपने पति के बाद किसी के लंड के दर्शन नहीं किए थे और अपने बेटे के पेट में बने तंबू को देखकर उसे एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड काफी बड़ा है,,,,
अपने बदल से कपड़े उतारते हुए उसके मन में भी अजीब सी हलचल होने लगी थी हालांकि आज तक उसके मन में अपने बेटे को लेकर कभी भी गलत भावना नहीं जागृत हुई थी लेकिन आज न जाने उसे क्या हो रहा था उसके बदन में अजीब सी उलझन हो रही थी आज उसका दिमाग उसका साथ बिल्कुल भी नहीं दे रहा था,,,,।
वह जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर दूसरे कपड़ों के लिए बाथरूम के हैंगर पर हाथ बढाई तो हैरान हो गई वह तो कपड़ा लाना ही भूल गई थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और फिर वह टावल को अपने बदन से लपेटकर धीरे से बाथरूम से बाहर निकली,,,, और बिना कुछ बोले अपनी कमरे की तरफ जाने लगी वह बड़ी जल्दबाजी में थी क्योंकि वहीं पर उसका बेटा भी बैठकर पढ़ाई कर रहा था लेकिन अपनी मां को बाथरूम से बाहर निकलते हुए वह देख लिया था और केवल टॉवल में देखकर उसे भी अजीब सा एहसास हो रहा था जल्द से जल्द उसकी मां उसकी नजरों से दूर हो जाना चाहती थी इसलिए लगभग थोड़ा सा तेज चलते हुए वह जाने लगी तो अपने आप ही उसके बदन से टॉवल छूट कर नीचे गिर गई और ऐसे हालात में संजय की नजर अपनी मां पर गई तो वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लेकिन वह पीछे से अपनी मां को देख रहा था पूरी तरह नंगी उसकी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसकी मां जल्दबाजी दिखाते हुए जल्दी से टावल को नीचे से उठे और वापस अपने बदन पर लपेटे हुए अपने कमरे में घुस गई,,,,।
थोड़ी देर बाद खाना खाते समय उसकी मां को छींक आ रही थी और संजय को चिंता होने लगी संजय अपनी मां को सरसों के तेल की मालिश करने के लिए बोल रहा था जिसके लिए उसकी मां तैयार हो गई हालांकि वह तैयार तो नहीं होती लेकिन अब उसे भी कुछ-कुछ हो रहा था वह अभी अपने बेटे के हाथों से तेल की मालिश करवाना चाहती थी जिसके लिए वह सारे काम को निपटा कर खुद उसके कमरे में गई और,,, उसके बिस्तर पर लेट गई संजय धीरे-धीरे उसके बदन पर मालिश करने लगा,,, जिसके चलते हैं उसकी मां मदहोश होने लगी संजय की भी हालत खराब होने लगी संजय अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखना चाहता था इसलिए मालिश का बहाना करके धीरे-धीरे उसके बदन पर से वस्त्र को उतारना शुरू कर दिया और जैसे ही वह अपनी बाकी साड़ी को उसकी कमर के ऊपर तक उठाया तो अपनी मां की नंगी बुर देखकर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया जिसका एहसास उसकी मां को भी हो रहा था,,,,,।
(इतना भर सुगंधा ने कहानी को पढ़ी थी और उसकी बुर पानी फेंक रही थी,,,, उसका दिमाग एकदम समय रह गया था पहली बार वह इस तरह की अश्लील कहानी को पढ़ रही थी और कहानी में मां बेटे का उल्लेख को देखकर उसकी जवानी और ज्यादा फूट रही थी,,,,, अपनी भी साड़ी को कमर तक उठाए हुए अपनी बुर को अपनी हथेली से मसलते हुए वह आगे कहानी का अध्ययन करने लगी,,,,)
संजय का हाथ सरसों के तेल की मालिश उसकी मां की बुर पर कर रहा था उसकी मां मदहोश में जा रही थी पूरी तरह से पागल हो जा रही थी देखते ही देखते संजय आगे बढ़ने लगा और अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा वह आज अपनी मां की जवानी से पूरी तरह से खेलने का इरादा बना चुका था और उसकी मां भी अपने बेटे के साथ एकाकार होने का मन बना ली थी,,, देखते ही देखते संजय अपने हाथों को हरकत देते हुए अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलकर उसके बदन से ब्लाउज को उतार कर वहीं फेंक दिया है अपनी मां की नंगी चूचियों पर सरसों के तेल की धार गिरा कर उसे दोनों हाथों में लेकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया,,,(ऐसा पढ़ते हुए सुगंधा की हालत खराब होने लगी और वह अपने हाथ से अपने ब्लाउज का बटन खोलकर अपनी चूचियों को बाहर निकाल कर अपने ही कहां से मसाला शुरू करती और अपने मन में अपने बेटे की कल्पना करने लगी) आगे संजय से रहा नहीं जा रहा था,,,, और वह अपनी मां से इजाजत लिए भी नहीं अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो गई उत्तेजित हो गई उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा और वह अपने बेटे के सर पर हाथ रखकर उसे अपनी छाती पर दबाना शुरू कर दी,,,,,।
देखते ही देखते कहानी का अंतिम प्रस्ठ शुरू हो चुका था जिसमें संजय अपनी मां के बदन पर से सारे कपड़ों को उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया था और यह कार्य खुद सुगंधा अपने हाथों से करके बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, संजय बिस्तर पर अपनी मां की नंगी जवान देखकर पागल हुआ जा रहा था और अपने हाथों से अपने कपड़े उतार कर वह भी पूरी तरह से नंगा हो चुका था बाहर तेज बारिश हो रही थी जिसका फायदा संजय और उसकी मां पूरी तरह से उठा लेना चाहते थे संजय का मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर उसकी मां की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,, संजय की मां अपना हाथ आगे बढ़ाकर,,, अपने बेटे के लंड को पकड़ ली बरसों के बाद उसके हाथ में कोई जवान लंड आया था जिससे वह पागलों की तरह खेल रही थी उसे मुंह में लेकर चूस रही थी और देखते ही देखते सब्जी अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया था और फिर अपनी मां की गुलाबी बुर पर अपने लंड को रखकर एक तेज धक्का मारा और संजय का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर के अंदरूनी अडचने को दूर करते हुए सीधा उसकी मां के बच्चेदानी से टकरा गया और उसकी मां के मुंह से एक तेज चीख निकल गई जो की बरसात के शोर में पूरी तरह से दब गई और फिर संजय मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी मां की कमर को पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया,,,।
कहानी समाप्त हो चुकी थी लेकिन यहां से एक नई कहानी का जन्म होने लगा था सुगंध पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और वहां अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी दो उंगली को अपनी बुर में डालकर अपने बेटे की कल्पना करते हुए बिस्तर पर अंकित अंकित चिल्ला रही थी और जोर-जोर से अपनी दोनों उंगलियों को अपनी बुर के अंदर बाहर कर रही थी और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुर से तेज फवारा फुटा और वह एकदम लहरा कर झड़ने लगी,,,,,,, कहानी को पढ़ने के साथ-साथ अपनी बुर में उंगली करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और अपनी मन में यही प्रार्थना कर रही थी कि काश उसकी जिंदगी भी कहानी वाली नायिका की तरह हो जाती तो कितना मजा आता है और यही सब सोचते हुए वह नींद की आगोश में चली गई,,,।
अश्लील उपन्यास को पढ़कर और वह भी एक मां बेटे वाली कहानी को पढ़कर तो मानो जैसे सुगंधा का दिमाग एकदम से बदल गया था,,,, वह अपने आप को कहानी वाली मां की जगह रखकर और उसके लड़के की जगह अपने बेटे को रखकर वह मन में कल्पना करने लगी और उसे ऐसा करने में बहुत ज्यादा आनंद की प्राप्ति होने लगी वह पूरी तरह से पहन चुकी थी वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी बस शुरुआत करने की देरी थी,,,, अब धीरे-धीरे सुगंधा अपने बेटे के सामने अश्लील हरकत करने की शुरुआत कर दी थी,,,, उसे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन उसकी गर्म जवानी के संपर्क में जाकर उसके बेटे का गरम लावा जरूर पिघलेगा,,,, और उम्मीद पर तो दुनिया कायम थी,,,।
ऐसे ही एक दिन वह किचन में सब्जी काट रही थी,,,,,, और सब्जी काटते काटते उसका कामुक दिमाग बड़ी तेजी से चलने लगा घर में उसे वक्त तृप्ति और अंकित दोनों मौजूद थे तृप्ति पढ़ाई कर रही थी और अंकित यूं ही किचन के सामने ही बैठा हुआ था,,,,,, वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहती थी इसलिए बार-बार सब्जी काटते हुए अपनी कलाइयों की चूड़ियों को बचा रही थी ताकि उसका बेटा उसकी तरफ देखे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था रह रहा कर सुगंधा को अपने बेटे पर गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसकी जगह कोई और जवान लड़का होता तो जरूर उसकी तरफ देखकर मुस्कुराता उसकी हरकतों से उत्तेजित होता और उसकी तरफ आकर्षित होकर खुद भी उसके साथ गंदी हरकत करता लेकिन ऐसा कुछ भी ना होता देखकर सुगंध मन ही मां अपने बेटे को ही भला बुरा कहने लगी,,, लेकिन वह अपनी हरकत को जारी रखते हुए अपने मन में कुछ सोचने लगी और फिर उसके बाद,,,,।
बड़े से बर्तन में आटा लेकर उसमें पानी डालकर आंटा को गुंथने लगी,,,,,,,,, और फिर धीरे से अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन जल्दी-जल्दी खोल दी और अपनी चूची को नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ थोड़ा सा उठा देता कि वह काफी अच्छे आकार में उसके बेटे को दिखाई दे और फिर अपने खुले बालों को दोनों तरफ से अपने गले से नीचे की तरफ लटका दी और कुछ बालों को अपनी आंखों की तरफ कर दी और फिर अपनी साड़ी के पल्लू को एकदम से नीचे गिरा दी,,,, ऐसा करते हुए वह अपने बेटे की तरफ देख रही थी लेकिन उसका बेटा था कि अपने में ही मस्त था वह जवानी से भरी हुई अपनी मां की तरफ देख ही नहीं रहा था,,, और उसी बात का तो उसे मलाल था,,,, और अपने इसी मलाल को वह काम करना चाहती थी इसलिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर चुकी थी,,, वह वापस आटे को गुंथने लगी,,, देखते ही देखते सुगंध अपने दोनों हाथों में आंटा चुपड ली,,,,।
वह पूरी तैयारी कर चुकी थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह अपनी कामुक हरकत को अंजाम देने जा रही थी एक बार वह अपनी छातियों की तरफ देखने लगी जो की अच्छी खासी उभरी हुई नजर आ रही थी,,,, वह अपने बेटे की तरफ देखी और उसे आवाज लगाते हुए बोली,,,।
अंकित ,,,,ओ,,, अंकित,,,
क्या हुआ ,,,?(वह एकदम से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)
जरा इधर आना तो,,,,
क्या हो गया,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी जगह पर खड़ा हो गया और रसोइ की तरफ आने लगा,,,, और और अपनी मां के पास पहुंचकर वह बोला,,,)
क्या हुआ मम्मी,,,,?(अंकित अपनी मां की बेहद करीब था ठीक आमने-सामने अगर उसकी जगह कोई और लड़का होता तो उसकी नजर सीधे सुगंधा की भारी भरकर छतिया पर जाती उसकी अस्त व्यस्त हालत पर जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,,, वह पूरी तरह से सहज था और इसी बात का गुस्सा सुगंधा के मन में भी था क्योंकि उसका बेटा ठीक उसकी आंखों के सामने खड़ा था और जो चीज जवानी की उम्र में देखना चाहिए वह उसे दिखाई नहीं दे रही थी इसलिए वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)
अरे हुआ कुछ नहीं बस मेरे चेहरे पर से बाल तो हटा दे,,,,
ओहहहह,,,(अपनी मां के कहने पर उसकी नजर उसके चेहरे पर उड़ रहे उसकी बालों की लातों पर गई तब उसे पता चला कि मामला क्या है और अपना हाथ आगे बढ़ाकर वह अपनी मां के गाल पर से बालों की लटो को हटाने लगा,,,,, अपने बेटे की उंगलियों को अपने गालों पर उसके स्पर्श का अनुभव होते ही सुगंधा उत्तेजना के मारे एकदम से सिहर उठी उसके बदन में झुनझुनी सी फैलने लगी,,,, और वह उत्तेजित होते हुए अपनी छाती के उभार को कुछ ज्यादा ही आगे तरफ बढ़ा दी और इसका एहसास अंकित को भी अच्छी तरह से हुआ अपनी मां की हरकत पर अंकित की नजर सीधे उसकी चूचियों पर चली गई और अपनी मां के ब्लाउज की ऊपर के दो बटन को खुला हुआ देखकर वह हैरान हो क्या क्योंकि उसमें से उसकी आधी चूचियां एकदम बाहर की तरफ झांक रही थी मानो की कैद में पड़े कबूतर बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे हैं यह पहला मौका था जब अंकित अपनी मां की चूचियों की तरफ इस तरह से देख रहा था आखिरकार अंकित पूरी तरह से जवान था औरत को देखकर आकर्षण पैदा होना लाजिमी था ऐसा तो वह पहले कभी अनुभव नहीं किया था लेकिन आज इतने करीब से अपनी मां की मदद कर देने वाली चूचियों को देखकर वह हैरान हो गया,,,, और ऊपर के दो बटन खुले होने की वजह से उसकी मां की आधे से ज्यादा चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और उसे देखकर ना जाने क्यों अंकित के मुंह में पानी आने लगा ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था वह अपनी मां के बाल के लटो को उसकी खूबसूरत चेहरे से दूर करते हुए अपनी निगाह को वह अपनी मां की छातियों पर ही टिकाया रह गया,,,,।
अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, अपने बेटे को इस तरह से देखा हुआ प्रकार सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वह मदहोश होने लगी उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर से नमकीन पानी बहने लगा क्योंकि वह अपनी युक्ति में अपनी इरादे में कुछ हद तक कामयाब होती नजर आ रही थी,,,, और इस बार सुगंधा एक कदम धीरे से आगे बढ़ाई और अपनी छतिया को गहरी सांस लेते हुए ऊपर की तरफ कुछ ज्यादा ही उठा दी और उसके ऐसा करने से अंकित के चेहरे की टोढी सीधे सुगंधा की चूचियों पर स्पर्श हो गई और तब जाकर अंकित को होश आया वह एकदम से हड़बड़ा गया,,,, और अपने आप को एकदम से पीछे ले लिया मानो कि जैसे बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो,,,, यह देख कर सुगंधा अपने बेटे को सहज करते हुए बोली,,,
क्या हुआ,,, ऐसे क्यों हड बढ़ा रहा है,,,,(और तुरंत अंकित के ध्यान को दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली,,) मेरे साड़ी का पल्लू तो ठीक से कर दे,,,,
ओहहह ,, हां,,,,,,(अपनी मां की बात सुनकर जैसे उसे एकदम से होश आया हो वह तुरंत एक बार फिर से अपनी मां की खूबसूरत बदन की तरफ देखा और उसे इस बात का एहसास सुबह की उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया था जिसकी वजह से उसकी छाती का उभार एकदम साफ नजर आ रहा था,,,,, वह धीरे से अपनी मां के साड़ी के पल्लू को पकड़ा और उसे ठीक करते हुए उसकी मद-मस्त जानलेवा छातियों को साड़ी के पल्लू से ढंकते हुए,,,) क्या मम्मी तुम भी साड़ी के पल्लू को नहीं संभाल पा रही हो,,,,,
(अपने बेटे किस तरह की बात को सुनकर सुगंधा अपने मन में ही बोली,,, सही कह रहा है बेटा तू अब मुझसे मेरी साड़ी का पल्लू संभाला नहीं जा रहा मेरी जवानी मुझसे संभाली नहीं जा रही है मेरी जवानी बेलगाम हो चुकी है इसे अपने लगाम से कस दे मेरे राजा,,,,, और अपने आप को संभालते हुए वह बोली,,,)
क्या करूं बेटा खाना बनाते समय अक्सर ऐसा हो जाता है और हाथ में मेरे आटा लगा हुआ था वरना मैं खुद ही ठीक कर लेती,,,,((मन में तो आ रहा था कि वह अपने बेटे को ब्लाउज का बटन बंद करने के लिए भी बोलते लेकिन न जाने क्यों इस समय वह शर्म महसूस करने लगी थी और वह ऐसा नहीं बोल पाई,,, लेकिन सुगंधा अपनी नजरों को अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच ले जाने से रोक नहीं पाई और जैसे ही उसकी नज़रें अपने बेटे के दोनों टांगों के बीच पहुंची तो वह देखकर हैरान रह गई क्योंकि उसके बेटे की पेंट में आगे वाले भाग में तंबू बना हुआ था और वह तंबू सामान्य बिल्कुल भी नहीं था उसे तंबू का तनाव कुछ ज्यादा ही बड़ा था जिसे देखते ही सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी थी,,,, कुछ पल के लिए तो सुगंधा को लगा कि यह पल यही थम जाए तो कितना अच्छा हो,,,, लेकिन ऐसा संभव नहीं था अंकित अपनी मां की साड़ी के पल्लू को ठीक करके वहां से जल्द से जल्द हट गया और वापस अपनी जगह पर आकर बैठ गया,,,,।
वैसे तो वह अपने आप को हमेशा सामान्य ही रखता था लेकिन आज उसकी मां की ऊभरी हुई छतियो को देखकर उसके होश उड़ गए थे,,, सामान्य तौर पर कभी भी उसकी नजर औरतों की छातियों पर या उनके नितंबों पर पड़ भी जाती थी तो भी वह उस नजारे को गलत नजरिए से नहीं देखता था,,,, लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां की खुली चाहती हो और ब्लाउज के खुले हुए बटन को देखकर पूरी तरह से मंत्र मुग्ध हो गया था,,,, पहली बार उसे एहसास हुआ कि औरतों की छातियों में कितना आकर्षण होता है,,,, वह अपनी जगह पर बैठ कर उसी दृश्य के बारे में सोच रहा था और न जाने क्यों उस द्शय के बारे में सोच कर उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, तभी अचानक उसे इस बात का एहसास हुआ कि पेंट के अंदर उसका लंड एकदम से तन गया है,,,, और इस एहसास से उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी तरफ देखा तो उसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर वह हैरान हो गया था हैरानी उसे इस बात की नहीं थी कि उसका लंड इस समय खड़ा हो गया था हैरानी तो उसे इस बात की थी कि अपनी मां की छातियों को देखकर उसकी हालत हुई थी,,,, इसीलिए उसे बड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि उसने आज तक अपनी मां को गलत नजरिए से नहीं देखा था अपनी मां को क्या वह किसी भी औरत और लड़कियों को गलत नजरिए से देखता ही नहीं था,,,। लेकिन आज न जाने उसे क्या हो गया था उसे ऐसा लग रहा था कि उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई है वह तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हुआ और बाथरूम की तरफ चला गया बाथरूम में जाकर वह बाथरूम का दरवाजा बंद करके अपनी पेंट का बटन खोलकर उसे घुटनों तक खींच दिया और फिर अपने अंडर बियर को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाते हुए खड़े लंड की वजह से ऐसा करने में उसे दिक्कत महसूस हो रही थी,,,, लेकिन फिर भी वह जबरदस्ती करता हुआ अपनी अंडरवियर को नीचे की तरफ खींच दिया और जैसे ही अंडर बियर नीचे गई वैसे ही उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम से स्प्रिंग की तरह उछल पड़ा,,, और तीन चार बार ऊपर नीचे करके होने लगा यह देखकर खुद अंकित भी हैरान हो गया सही मायने में वह अपने खड़े लंड को पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था,,,
अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था उत्तेजना के मारे उसके लंड की नशे एकदम फुल चुकी थी जॉकी लंड के उपर उभरी हुई नजर आ रही थी,,,, अपने लंड की हालत को देखकर खुद अंकित हैरान हो गया था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह धड़कते दिल के साथ अपने खड़े और मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया और न जाने क्यों इस समय अपने लंड को पकड़ने में उसे कुछ ज्यादा ही आनंद की अनुभूति हो रही थी और वह एक बार लंड की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचा तो उसका सुपाड़ा एकदम से आलू बुखारे की तरह खिल उठा,,,, जोकि रक्त के बहाव के कारण एकदम लाल हो चुका था,,, और फिर उसके लंड से पेशाब की धार फूट पड़ी जो कि सामने की दीवार से टकरा रही थी,,,, अनायास ही पेशाब करते समय लंड की चमड़ी को आगे पीछे वह दो-चार बार खींच दिया,,,, और ऐसा करने पर उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे नहीं मालूम था कि उसके बदन में यह बदलाव किस लिए हो रहा था उसे आनंद किस लिए आ रहा है अगर तीन चार बार वह और अपने लंड की चमड़ी को आगे पीछे करके खींच देता तो उसके लंड से वीर्य का फवारा फुट पड़ता,,,, लेकिन वह अपने बदन में जिस तरह की हलचल हो रही थी उसे देखते हुए उसके मन में थोड़ी घबराहट भी थी और वह तुरंत पेशाब करने के बाद अपने लंड को अपने हाथ से छोड़ दिया,,,,और फिर वह अपनी पेंट को पहनकर बाथरूम से बाहर आ गया,,, लेकिन इस बार वह किचन के सामने नहीं बल्कि अपने मन को शांत करने के लिए घर से बाहर टहलने के लिए निकल गया,,,।
अंकित अपनी मां की मस्त-मस्त जवानी के आगे धीरे-धीरे धराशाही हो रहा था और उसे पता भी नहीं चल रहा था,,, उसकी मां सुगंधा ने अपने बालों की लातों को ठीक करवाने के अपने जुगाड़ में पूरी तरह से सफल होती नजर आ रही थी वैसे भी सुगंधा ने पहले से ही अपने ब्लाउज के उपरी बटन को खोलकर अंकित के मन पर गहरी चोट करने के लिए अपने आप को तैयार कर चुकी थी और ठीक वैसा ही हुआ जब अंकित अपनी मां के बाल के लटो को अपने हाथों से ठीक करने के लिए आया तो उसकी नजर सीधे अपनी मां की छातिया पर गई जिसे देखते ही उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गया,,, हालांकि ऐसा उसके साथ पहले कभी होता नहीं था लेकिन यह पहली मर्तबा था और पहली मर्तबा में ही वह चारों खाने चित हो चुका था,,, भले ही अंकित अपने आप को दूसरे लड़कों से अलग समझता हो लेकिन आखिरकार था तो वह एक मर्द ही और मर्द की फितरत में ही होता है कि औरत के खूबसूरत बदन उसके उभार उसके उठाव और कटाव को देखकर उत्तेजित हो जाना,,, फिर भले ही ना उसकी आंखों के सामने उसके रिश्तेदारी की ही औरत हो उस औरत का सगा हो यह सब कोई मायने नहीं रखता था,,,।
अंकित अपनी मां की भरी हुई छातियो की तरफ देखकर जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव अपने बदन में कर रहा था उसे देखते हुए उसे बाथरूम में जाना ही पड़ा और अपनी पेंट को नीचे सरका कर,,, जिस नजारे को उसने देखा था उसे देखकर वह खुद दंग रह गया था,,, पहली बार वह अपने लंड को गौर से देख रहा था और वह भी पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था जिस पर हाथ रखते हैं उसके बदन में गुदगुदी सी होने लगी थी और उसे वह उत्तेजना के मारे धीरे-धीरे दबा भी रहा था अगर कुछ देर तक वह और अपने लंड को दबाता तो उसके लंड से वीर्य का फवारा फूट पड़ता जिसे वह पूरी तरह से अनजान था लेकिन वह अपनी हरकत को इस समय रोक दिया था क्योंकि उसे अपने बदन में हो रहे हलचल को देखकर थोड़ी घबराहट होने लगी थी और वह अपने मन को शांत करने के लिए घर से बाहर टहलने के लिए निकल गया था,,,।
अपने बेटे की हालत को देखकर सुगंधा मन ही मन मुस्कुरा रही थी और खुश भी हो रही थी क्योंकि उसकी युक्ति काम कर गई थी,,, यह पहली बार था जब वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी और जिसमें वह कामयाब हो चुकी थी हालांकि ऐसा करने में उसके खुद के पसीने छूट गए थे माथे से भी और दोनों टांगों के बीच से भी उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,, एक अजीब से दुसाहस का परिणाम वह अपने बदन में अद्भुत तरीके से देख रही थी अपने बेटे के लिए अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोलने उसके लिए किसी पहाड़ चढ़ने से काम नहीं था आखिरकार वह एक शिक्षिका थी और शिक्षा होने के साथ-साथ वह एक मां भी थी और एक मां होने के नाते अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करना बेहद शर्मनाक भी था लेकिन इसमें बेहद हिम्मत की और बेशर्मी की भी जरूरत होती है जिसे मिला-जुला प्रभाव सुगंधा को अपने मन में उमडता हुआ दिख रहा था,,,।
सुगंधा अपने मन में ठान ली थी कि इस खेल में वह धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी अपने बेटे को कभी इस बात का एहसास सही नहीं होने देगी कि जो कुछ भी हो रहा है उसमें उसकी मां की ही चाल है वह सब कुछ ऐसा प्रभाव डालना चाहती थी कि सब कुछ अपने आप हो रहा है और इसी में उसकी भलाई भी थी क्योंकि वह अपने बेटे की नजर में इस तरह से गिरना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे इस बात का डर भी था कि अगर उसके बेटे को कहीं इस बात का भनक तक लग गया कि जो कुछ भी उसकी मन कर रही है वह जानबूझकर कर रही है तो वह उसके बारे में क्या सोचेगा इसीलिए वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस राह में फुंक फुंक कर कदम रखने में ही भलाई है,, ।
रात को खाना खाने के बाद सभी काम को निपटाने के बाद रोज की तरह तीनों बैठकर टीवी देख रहे थे,,,,,, धारावाहिक खत्म होने के बाद सुगंधा धीरे से बाथरूम में घुस गई बाथरूम जो की ड्राइंग रूम से ही सटा हुआ था जिसमें अगर पानी भी गिरता था तो उसकी आवाज एकदम साफ आई थी और इस बात का एहसास सुगंधा को भी था और सुगंधा पहले तो जब उसके मन में इस तरह की हलचल नहीं होती थी तब वह एकदम संभाल कर पेशाब करती थी ताकि उसकी आवाज अंकित के कानों तक ना पहुंच पाए लेकिन अब माहौल पूरी तरह से बदल चुका था सुगंधा अब इसी तरह के मौके की तलाश में रहती थी वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी के जाल में फसना चाहती थी उसे अपनी आकर्षण में डूबा देना चाहती थी ताकि वह अपने बेटे के साथ अपनी जवानी की प्यास को बुझा सके,,,, उसे जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह बाथरूम में प्रवेश कर चुकी थी,,, लेकिन बाथरूम में जाने से पहले रहा धारावाहिक के खत्म होने के बाद टीवी की आवाज को थोड़ा काम कर दी थी यह कहकर की आवाज को ज्यादा है और जानबूझकर टीवी चालू रखी थी ताकि अंकित वहीं बैठा रहे,,,,।
बाथरूम में प्रवेश करने के बाद वह तुरंत अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और अपनी दोनों टांगों के बीच नजर डालकर अच्छी तो उसके होंठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी क्योंकि अब हमेशा किसी न किसी बहाने उसकी बर पानी छोड़ देती थी और उसकी चड्डी क्यों नहीं हो जाती थी ऐसा उसके साथ पहले कभी नहीं होता था लेकिन अब ऐसा बार-बार होता था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी जवानी फिर से वापस लौट आई है और वह भी पूरे शबाब में,,,, अपनी चड्डी की आदत को देखकर वह गहरी गहरी सांस लेने लगी औरत धीरे से अपनी चड्डी को नीचे करके अपनी चिकनी बुर की तरफ देखने लगी जिस पर हल्के हल्के बालों के हुए थे लेकिन उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फुल चुकी थी और यही खुली हुई बुरी औरत की सबसे बड़ी ताकत होती है क्योंकि कचोरी जैसी खुली हुई किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी सामर्थ्य रखती है और इतना तो उसे पूरा भरोसा था कि अगर वह अपनी दोनों टांगें खोलकर अपने बेटे को अगर अपने पास आने का आमंत्रण देगी तो उसका बेटा बिल्कुल भी देर नहीं करेगा उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी बुर में समा जाने के लिए लेकिन ऐसा हुआ करना नहीं चाहते थे क्योंकि ऐसा करने में वह अपनी नजर में गिर सकती थी वह कुछ ऐसा माहौल बनाना चाहती थी कि उसका बेटा खुद अपने लंड को उसकी बुर में डालने के लिए ललाईत हो जाए,,, और उसी के चलते वहां एक बार अपनी हथेली को अपनी बर पर रखकर उसे अपनी हथेली में कस के दबोच ली मानो कि जैसे अपने मन में कल्पना कर रही हो कि जैसे उसका बेटा उसकी चिकनी बुर को देखकर उत्तेजित अवस्था में जोर से उसकी बुर दबा दिया हो,,,, गहरी सांस लेते हुए वहां एक दोबारा अपनी हथेली अपनी बुर पर रगड़ कर पेशाब करने के लिए बैठ गई,,, उसे पूरा यकीन था कि पेशाब करने की आवाज उसके बेटे के कानों में जरूर पड़ेगी,,,,।
इसलिए वह धीरे से अपनी दोनों टांगें फैला कर बैठ गई और पेशाब करना शुरू करती और जैसे ही गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकली,,, वैसे ही एक लाजवाब तेज सिटी की आवाज बुर में से निकलना शुरू हो गई और बाथरूम के दरवाजे के तकरीबन 5 फीट की दूरी पर बैठकर टीवी देख रहे अंकित के कानों में जैसे ही आवाज पहुंची उसके तो मानो होश उड़ गए उसके कान के साथ-साथ उसका लंड भी खड़ा होने लगा क्योंकि अंकित पूरी तरह से जवान था और इतना तो जानता ही था कि यह सिटी की आवाज कैसी है कहां से आ रही है और क्यों आ रही है उसे मालूम था कि बाथरूम में उसकी मां पेशाब करने गई है और पेशाब करने पर ही औरत की बुर से इस तरह की आवाज आती थी जिसे सुनकर वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था और टीवी पर भले ही उसकी निगाहें थी लेकिन कान बाथरूम के दरवाजे पर सटा हुआ था,,,, पल भर में ही अंकित पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और उसकी पेंट में उसका लंड खड़ा होकर तंबू बना दिया वह ना चाहते हुए भी अपने मन में कल्पना करने लगा कि कैसे उसकी मां बाथरूम में बैठकर पेशाब कर रही होगी उसकी गुलाबी बुर से पेशाब की धार निकल रही होगी हालांकि अभी तक अंकित ने किसी औरत को नंगी नहीं देखा था और ना ही उसके खूबसूरत नंगे अंगों को देखा था चुची से लेकर बुर तक अभी तक उसकी आंखों ने औरत के बेस कीमती खजाने को देखा नहीं था इसलिए उसके बारे में कल्पना करना भी उसके बस में नहीं था,,, इसीलिए तो वह अंदर ही अंदर और ज्यादा उत्सुक होने लगता था उसे नजारे को देखने के लिए,,,, लेकिन धीरे-धीरे बाथरूम से आ रही सिटी की आवाज कमजोर पड़ने लगी और उसे इस बात का एहसास होने लगा कि उसकी मां पेशाब करने के आरे पर है और कुछ ही सेकंड में बाथरूम से आ रही सिटी की आवाज एकदम से शांत हो गई क्योंकि सुगंधा पेशाब कर चुकी थी,,,, इसके बाद वह धीरे से खड़ी हुई है अपनी चड्डी को उपर चढकर साड़ी को कमर से नीचे गिरा दी और फिर बाल्टी भरकर पानी गिरने लगी,,, पानी गिराने की आवाज अंकित को सुनाई दे रही थी,,, वह समझ गया कि उसकी मां मुत ली है और किसी भी वक्त बाहर आ जाएगी,,,, और वैसे ही बाथरूम का दरवाजा खुला और उसकी मां बाथरूम से बाहर आ गई लेकिन बाहर आते हैं उसकी नजर सीधे अंकित के पेट की तरफ पड़ी जो कि आगे वाला भाग पूरी तरह से फूला हुआ था और तंबू बना हुआ था जिसे देखकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और उसे इस बात का यकीन हो गया कि वह जब अंदर बैठकर पेशाब कर रही थी तो पेशाब करने की वजह से सिटी की आवाज उसके बेटे के कानों में जरूर पड़ रही थी जिसे सुनकर ही वह उत्तेजित हुआ है,,,, और वह जल्दी टीवी बंद करके सो जाना इतना कहकर अपने कमरे में चली गई,,,।
अंकित कुछ देर तक इस तरह से बैठकर टीवी देखता रहा कोई फिल्म चल रही थी थोड़ी देर बाद वह भी उठकर अपने कमरे में चला गया क्योंकि वह अपने ध्यान को इन सब चीजों से हटाना चाहता था लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था,,,, तृप्ति बेठकर टीवी देख रही थी तभी टीवी में चल रही फिल्म में हीरो हीरोइन का हाथ पकड़ कर उसे खींचकर अपनी बाहों में भर लेता है और उसके होठों पर अपनी हॉट रख चुंबन करने लगता है इस दृश्य को देखते ही तृप्ति खत्म बदन में अजीब सी हरकत होने लगी और उसे फिल्म में दिखाई दे रही हीरोइन की जगह खुद वह और हीरो की जगह संदीप की कल्पना करने लगी,,,,,,।
तृप्ति पल भर में ही उत्तेजित होने लगी भले ही वह संदीप की हरकत की वजह से उससे नाराज थी लेकिन कहीं ना कहीं उसे भी संदीप की हरकत पूरी तरह से मदहोश कर गई थी उसे दिन कोचिंग से लौटते समय जिस तरह से संदीप ने अंधेरे का फायदा उठाते उसे अपनी बाहों में भर लिया था और उसकी दोनों चूचियों पर हाथ रखकर कुर्ती के ऊपर से ही दबाया था और,,, उसकी तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध ना होता देखकर हिम्मत करते हुए वह अपनी हथेली को उसकी कुर्ती में डालकर पेटी के अंदर से उसकी बुर को दबोच लिया था यह सब तृप्ति को पूरी तरह से मदहोश कर जाता था और जब भी उस पल का ख्याल आता था तो,,, तृप्ति को अपनी बुर पानी छोड़ती हुई महसूस होती थी और उसे समय वह पूरी तरह से मदहोश हो जाती थी और इस समय भी उसका यही हाल था,,, टीवी पर चल रहे फिल्म के रोमांटिक दृश्य को देखकर अनायास ही संदीप की कल्पना करके उसकी बुर कचोरी की तरह फूलना शुरू हो गई थी जिस पर वह अनजाने में ही अपनी सलवार पर हाथ रखकर धीरे-धीरे अपनी बुर पर दबाव बढ़ा रही थी,,, और टीवी पर चल रहा है दृश्य धीरे-धीरे अपनी मदहोशी बिखेरना शुरू कर दिया,,, लेकिन तभी फिल्म की हीरोइन को जैसे होश आया हो और वह तुरंत हीरो के हाथ में से दूर होते हुए मुस्कुराकर वहां से भाग गई पर यह दृश्य देखकर तृप्ति को भी होश आ गया और वहां अपनी हरकत पर शर्मिंदा होने लगी और धीरे से उठकर टीवी को बंद कर दी और एक गिलास ठंडा पानी पीकर अपने मन को शांत करने की कोशिश करने लगी और अपने कमरे में जाकर सो गई दूसरी तरफ सुगंधा अपने सारे वस्त्र त्याग कर पूरी तरह से नग्न अवस्था में बिस्तर पर करवटें बदलते हुए अपनी बुर को हथेली में दबा दबा कर उसका पानी निकाल रही थी,,,, आज जो कुछ भी उसने अपनी तरफ से हरकत की थी उसका प्रभाव उसके बेटे पर बहुत ही गहरा पड़ रहा था जिसका अंदाजा उसे अच्छी तरह से था वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा बहुत ही सीधा-साधा है दूसरे लड़कों की तरह बिल्कुल भी नहीं है वरना अब तक कुछ का कुछ कर दिया होता,,,,।
एक दिन रविवार को शाम के समय वह बगीचे में टहलने के लिए गया था,,, बगीचा काफी बड़ा था बगीचे के आगे भाग में थोड़ी भीड़भाड़ थी तो अंकित धीरे-धीरे बगीचे के पीछे वाले भाग में चला गया यहां पर कुछ थोड़ी शांति थी लेकिन जहां-था कुछ लोग बैठे हुए नजर आते थे और वह एक तरफ की कुर्सी पर बैठ गया और ठंडी ठंडी हवा का लुफ्त उठाने लगा,,, तभी उसके कानों में एक लड़की की आवाज आई जो आवाज एकदम जानी पहचानी थी वह तुरंत एकदम जैसे होश में आया हो और वह तुरंत अपने बगल वाली जो कि तकरीबन 5 मीटर की दूरी पर रखी हुई बेंच थी उस पर देखा तो उसकी बहन तृप्ति बैठी हुई थी और वह भी एक लड़के के साथ दोनों आपस में बातें कर रहे थे और दोनों की बातें उसे साफ सुनाई दे रही थी,,,।
संदीप मुझे बगीचे में मिलना ठीक नहीं लगता मुलाकात तो कॉलेज में हो जाती है फिर बगीचा क्यों,,?(अपनी बहन तृप्ति की बात सुनकर तो अंकित के होश उड़ गए और वह दोनों उसे देख ना ले इसलिए वह तुरंत बेंच पर से उठकर एक छोटे से घने फुल के पौधे के पीछे अपने आप को छुपा कर उन दोनों की बातों को सुनने लगा और दोनों की तरफ देखने लगा,,,)
मैं भी जानता हूं तृप्ति इस तरह से बगीचा में मिलना ठीक नहीं है लेकिन क्या करूं तुमसे दो घड़ी मिलकर बातें करने का मन करता है जो की कॉलेज में मुमकिन नहीं हो पता वहां पर बातें करने का मतलब है कि तुम्हारी बदनामी हो जाएगी कोई देख लेगा तो तरह-तरह की बात बनाएगा,,,।
और यहां यहां भी तो वही होने वाला है अगर कोई नहीं देख लिया तो मेरी तो बदनामी हो जाएगी,,,
ऐसा कुछ भी नहीं होगा तृप्ति मुझ पर भरोसा रखो,,,,
तुम पर भरोसा,,,, तुम पर भरोसा करके देखी थी अगर मैं अपने आप को संभाल ली ना होती तो उसी दिन अनर्थ हो जाता,,,,।
(अपनी बहन के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर अंकित एकदम से चौंक गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कैसा अनर्थ हो जाता और वह कौन सी बात कर रही है लेकिन इतना तो वह समझ ही रहा था कि कुछ गड़बड़ वाली ही बात है इसलिए वह दोनों की तरफ देख रहा था और उसे लड़के को पहचानने की कोशिश कर रहा था लेकिन अंकित उसे पहचान नहीं पा रहा था कि वह कौन है लेकिन उसे अंदाजा हो गया था कि उसके साथ पढ़ने वाला ही कोई लड़का है,,,,)
अरे नहीं त्रिप्ति उस दिन जैसी गलती मुझसे नहीं होगी,,, उसे दिन तो अंधेरा और एकांत पाकर में बहक गया था वैसे भी तुम्हारी खूबसूरती देखकर कोई भी बहक जाए,,,,(संदीप काफी शातिर लड़का था,,, वह अच्छी तरह से जानता था की लड़कियों की तारीफ करने पर वह जल्दी पिघल जाती है और ऐसा ही हो रहा था अपनी तारीफ संदीप के मुंह से सुनकर वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी लेकिन थोड़ी ही दूरी पर छुप कर देख रहा अंकित गुस्से से आग बाबूला हुआ जा रहा था,,,,)
चलो रहने दो बेवजह तारीफ करने को,,,,
(अंकित कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी बहन बगीचे में इस तरह से किसी से मिलेगी,,,, और दूसरी तरफ मौके की नजाकत को देखते हुए संदीप पूरा फायदा उठाना चाहता था और इसलिए अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले जाकर उसके कंधे पर रख दिया और अपनी हाथ की उंगलियों को उसकी छाती के उभार पर हल्के हल्के घूमाना शुरू कर दिया जिसका गोलापन संदीप को साथ महसूस हो रहा था और उसे बहुत मजा आ रहा था और वह बोला,,,)
अपनी कसम खाकर कहता हूं कि मैं आज तक तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की देखा नहीं हूं इसलिए तो तुम्हारे पीछे लट्टू हूं,, (इस तरह की मनमोहक बातें करके संदीप तृप्ति की चूची पर अपनी उंगलियों को घुमा रहा था जिसका एहसास तृप्ति को भी हो रहा था,,, और न जाने क्यों तृप्ति को भी संदीप की हरकत से आनंद आ रहा था वह उसकी चूची को होले होले से स्पर्श कर रहा था लेकिन उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर में हलचल हो रही थी,,,, अंकित उसे लड़के की हरकत को देखकर गुस्से से क्रोधित हुआ जा रहा था लेकिन इस समय वह कुछ भी कर सकते की स्थिति में नहीं था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह लड़का उसकी आंखों के सामने ही उसकी बहन की चूची पर हाथ को मारा था लेकिन वह कुछ कह नहीं पा रहा था क्योंकि उसकी बहन भी इसमें शामिल थी,,,,)
चलो अब रहने दो संदीप कल कॉलेज में मुलाकात होगी अब चलते हैं बहुत देर हो गई है,,,
नहीं तृप्ति ऐसा मत करो कुछ देर और रुक जाओ,,,
नहीं मैं नहीं रुक सकती मम्मी घर पर इंतजार कर रही होगी और वैसे भी शाम ढलने वाली है,,,, और वैसे भी इस सिचुएशन पर मुझे एक गाना याद आ गया,,,
कौन सा,,,?
ढल गया दिन हो गई शाम जाने दो घर जाना है,,,
अभी-अभी तो आई हो अभी अभी जाना है,,(आगे की कड़ी को संदीप पूरा करके हंसने लगा और इसी के साथ तृप्ति भी हंसने लगी,,,, और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई लेकिन तभी संदीप उसका हाथ पकड़ लिया और संदीप की ईस हरकत पर तृप्ति पूरी तरह से शर्मा गई और अपने अगल-बगल देखने लगी अंकित जल्दी से झाड़ी के पीछे छुप गया,,,)
यह क्या कर रहे हो संदीप छोड़ो मेरा हाथ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,
ऐसे नहीं छोडूंगा पहले एक पप्पी दो,,,
अरे यह कैसी जिद है,,,(तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली)
यह एक प्रेमी की प्रेमिका से जिद है क्या प्रेमिका इतना भी अपने प्रेमी की जीद को पूरी नहीं कर पाएगी,,,
(तृप्ति का हाथ अभी भी संदीप के हाथ में था तृप्ति मुस्कुरा रही थी और उसकी बात सुनकर अपने इधर-उधर देखकर धीरे से झुकी और उसके गाल पर अपने लाल-लाल हॉट रख दी और मौका देखकर संदीप जल्दी से उसके झुकाने की वजह से कुर्ती में से उसकी चूची को दबा दिया और संदीप की हरकत पर वह एकदम से चौंक गई और बोली,,,)
हाए,,,, यह क्या कर रहे हो,,,
इतना तो कर ही सकता हूं,,, (संदीप की हरकत और उसकी बात सुनकर कुछ देर तक तृप्ति उसे गुस्से से घूरने का नाटक करती रही और फिर मुस्कुरा कर अपना पर्स कंधे पर लटका कर,,, चलने लगी और संदीप की बेंच पर से उठकर खड़ा हो गया और उसके पीछे-पीछे चलने लगा यह सब देखकर अंकित का खून खौल रहा था लेकिन वह कुछ भी कर सके नहीं की स्थिति में नहीं था वह कुछ देर तक वही बैठ कर सोचने लगा क्योंकि उसे अपनी बहन से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,, वह अपने मन में सोच रहा था कि चलकर सब कुछ अपनी मां से बता दे या इस बारे में तृप्ति से ही बात करें लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि इस तरह की बातों का जिक्र भी उसने अभी तक अपने घर में ना तो सुना था और ना ही किया था इसलिए उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कुछ देर बगीचे में बैठने के बाद वह भी वहां से उठकर घर की ओर चल दिया लेकिन घर पर पहुंचने पर भी वह अपनी बहन से या अपनी मां से बगीचे वाली बात का जिक्र नहीं कर पाया,,,)
अंकीत ने जो कुछ भी बगीचे में देखा था उसका जिक्र ना तो अपनी बहन से ही और ना ही अपनी मां से कर पाया था क्योंकि वह ऐसे माहौल में पला बढा नहीं हुआ था जहां इस तरह की बातें होती हो,,, वह हमेशा से ही सीधा-साधा लड़का था यहां तक की जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बावजूद भी उसमें दूसरे लड़कों की तरह बदलाव बिल्कुल भी नहीं आया था,,,,,, सीधा-साधा लड़का होने के नाते वह अपनी मां और बहन के बारे में भी अच्छी तरह से जानता था वह उन दोनों से भी भली भांति परिचित था लेकिन बगीचे में अपनी बहन को दूसरे लड़के के साथ देखकर और जिस तरह की हरकत हुआ लड़का उसके साथ किया था और खुद उसकी बहन ने जाते-जाते उसे एक चुंबन दी थी यह सब देखते हुए उसके तो होश उड़ गए थे वह अपनी बहन के बारे में कभी इस तरह की बात सपने में भी नहीं सोच सकता था वह पहली बार अपने घर के सदस्य को इस तरह की हरकत करते हुए देखा था इसलिए तो उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,।
खास करके अंकित उसे लड़के की हरकत के बारे में सोचकर हैरान था और काफी गुस्से में भी था लेकिन वह अपना सारा गुस्सा पी गया था उससे भी ज्यादा गुस्सा तो उसे अपनी बहन पर आ रहा था क्योंकि उसे लड़के की ऐसी हरकत के बावजूद भी वह कुछ नहीं बोली थी बस मुस्कुरा दी थी ,,, अंकित की जगह कोई और भाई होता तो शायद इस समय उसे लड़के का मुंह तोड़ दिया होता लेकिन अंकित झगड़ा तकरार से हमेशा दूर रहता था इसलिए ऐसा होकर भी नहीं पाया था वरना कौन भाई होगा जब उसकी आंखों के सामने ही कोई लड़का उसकी बहन की चूची दबा दे और वह कुछ ना बोले,,,,,,।
घर पर पहुंचा तो सब कुछ सहज था उसकी बहन तर्प्ति भी अपने काम में मस्त थी,,,,,, अंकित को अपनी बड़ी बहन तृप्ति का यही सादगी भरा रूप सबसे ज्यादा अच्छा लगता था घर का काम करती हुई पढ़ाई करती हुई अपनी मां के काम में हाथ बटाती हुई,,,, तृप्ति के इसी रूप को इसी व्यवहार को अंकित बहुत पसंद करता था ना कि बगीचे वाले व्यवहार को क्योंकि बगीचे में जिस तरह की हरकत उसने उस लड़के के साथ की थी उसे बारे में तो वह कभी सोच भी नहीं सकता था,,, लेकिन तभी बगीचे वाली बात उसे याद आने लगी जब वह लड़का कह रहा था कि उसकी बहन की खूबसूरती में वह पूरी तरह से खो गया था इसलिए बहक गया था,,,।
बहकने शब्द से अंकित को कुछ ज्यादा समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जवान हो चुका अंकित इतना तो समझ ही रहा था कि कहीं उसकी बहन उसे लड़के के बीच शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हो गया है कहीं उसे लड़के ने उसकी बहन की चुदाई तो नहीं कर दिया है और अगर ऐसा हो गया तो फिर वह कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएगा,,,, फिर अपने मन में सोचा नहीं नहीं ऐसा वह नहीं कर सकती आखिरकार उसमें भी तो उसकी मां की संस्कार है वह भला कैसे बहन सकती है लेकिन फिर अपने ही सवाल का ढेर सारा जवाब उसके मन में अपने आप ही उमड रहा था वह अपने मन में यही सोच कर हैरान हुए जा रहा था की कही वाकई में उसकी बहन और उसे लड़के के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो तो क्या होगा यही सोचकर वह एकदम हैरान हो गया था और इस बात की गंभीरता को समझते हुए वह अपनी मां से इस बारे में बात करना चाहता था और अपनी बहन को भी समझाना चाहता था लेकिन अभी खुद उसके मन में ही शंका बनी हुई थी इसलिए वह इस तरह की बात छेड़ने से भी घबरा रहा था,,,।
लेकिन देखते ही देखते 15 दिन गुजर गए और अंकित ने बगीचे वाली बात का जिक्र तक नहीं किया वहीं दूसरी तरफ सुगंधा धीरे-धीरे अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने का सारा जुगाड़ बनाकर उसे पर अमल करने लगी और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा कि उसका बेटा भी उसे देखने की कोशिश करता था उसकी तरफ देखकर आकर्षित होता था,,, लेकिन इस तरह की देखा ताकि से आगे अभी तक कुछ बात बन नहीं पाई थी,,,। और इस बात का मलाल सुगंध को भी रहता था लेकिन इस खेल में भी उसे बहुत मजा आ रहा था रोज ही वह अपनी बेटी को अपनी तरफ आकर्षित करने के चक्कर में अपनी बुर की थी कर लेती थी और फिर रात को अपने बेटे के बारे में कल्पना करके कभी उंगली तो कभी मुली गाजर और खीरा डालकर अपनी जवानी की आदत को बुझाने की कोशिश करती थी लेकिन यह आगे सी थी कि जितना बुझाने की कोशिश करती थी उतनी ज्यादा और भडक जाती थी,,,।
ऐसे ही एक दिन अंकित का दोस्त सूरज बातें करते हुए चाय की दुकान पर बैठा हुआ था की तभी वहां से अंकित के पड़ोस वाली लड़की सुमन हाथ किताब ली अपने घर की तरफ जाने लगी जिसे देखकर सूरज गर्म आहे भरता हुआ बोला,,,।
यार अंकित तेरी पड़ोस वाली लड़की तो देख कितनी जवान हो चुकी है गांड कितनी मस्त हो गई है,,,।
(सूरज की बात पर अनजाने में ही अंकित ने भी अपनी नजर उठा कर उसे लड़की की तरह देख लिया जो कि अपने घर की तरफ चली जा रही थी और उसकी पीठ और नितंब अंकित की तरफ ही थे अनजाने में ही अंकित का ध्यान उसकी गोल-गोल गांड पर चली गई थी जो कि वाकई में कसी हुई सलवार में कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुए नजर आ रही थी,,,, लेकिन जब उसे स्थिति का एहसास हुआ वह सूरज पर नाराज होते हुए बोला,,,)
यार सूरज इस तरह की बातें मत किया कर यह अपनी सुषमा आंटी है ना उनकी लड़की है समझा और उसे भी मैं अपनी बहन की नजरिए से देखता हूं,,,
अंकित तु सच में एकदम पागल है हर लड़की को अपनी बहन की नजर से देखेगा तो शादी किससे करेगा और अगर सच में हर लड़की को अपनी बहन समझेगा तो सुहागरात के दिन चुदाई किसकी करेगा,,, सुहागरात वाली रात को ऐसा बोलेगा,,,।
दीदी जरा सा अपनी कमर उठाओ ना तुम्हारी चड्डी उतारना है,,,(और इतना कहकर वह हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अंकित को बहुत गुस्सा आया लेकिन न जाने क्यों चड्डी उतारने वाली बात पर उसके बदन में अजीब सी हलचल आने लगी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही हलचल महसूस होने लगी,,,, क्योंकि सूरज की बात सुनते ही उसके मन में कल्पना का चित्र उभरने लगा था कि वाकई में जैसा उसका दोस्त कह रहा है वैसा ही वह उसके साथ उसकी चड्डी उतारने के लिए कह रहा है,,, सूरज की बात तो उसे उत्तेजित कर देने वाली लगी थी लेकिन फिर भी वह नाराजगी दर्शाते हुए बोला,,,।)
सच में सूरज तू बहुत बिगड़ गया है तू भी रौनक जैसा हो गया है,,,
मैं रोनक जैसा नहीं हो गया हूं अंकित सारे लड़के रौनक जैसे हैं और वैसे होते ही हैं क्योंकि यह तो प्राकृतिक है,,, लड़कियों और औरतों को देखकर हम जैसे लड़कियां आकर्षित नहीं होंगे तो कौन होगा,,,, लेकिन रौनक मैं तुझे एक बात बताना चाहता हूं तो शायद अपनी पड़ोस वाली लड़की के बारे में कुछ जानता नहीं है इसलिए उसे अपनी बड़ी बहन का दर्जा देता है लेकिन क्या वह तुझे अपने भाई का दर्जा देती है कभी नहीं देती होगी क्योंकि उसके बारे में तु कुछ जानता ही नहीं है,,,,।
चल अब रहने दे सूरज किसी को बदनाम करने से कोई फायदा नहीं है,,,
मैं कहां बदनाम कर रहा हूं वह तो खुद बदनाम है तू नहीं जानता कि उसके कितने लड़कों के साथ चक्कर हैं और वह न जाने कितने लड़कों के साथ सो भी चुकी है इसलिए देखता नहीं है उसकी गांड कितनी बड़ी-बड़ी है,,, उसे उम्र की लड़कियों को देखा उसे देख,,,(एक पल के लिए तो सूरज के मन में ख्याल आया था कि वह सीधे-सीधे कह दे कि तेरी बहन की गांड देखा और उसकी गांड देखा लेकिन ऐसा कहने में बात भी कर सकती थी इसलिए वह अंकित की बहन का उदाहरण नहीं दिया लेकिन अपनी बात को समझने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन सीधा-साधा अंकित उसकी बात समझ नहीं पा रहा था तो आश्चर्य से सूरज की तरफ देख रहा था सूरज उसके मन में उठ रहे सवाल को शायद उसके चेहरे पर पढ़ लिया था इसलिए वह बोला)
देख अंकित जो लड़कियां ज्यादा चुडक्कड़ होती है उनकी गांड सबसे पहले बड़ी हो जाती है जैसा कि तेरी पड़ोस वाली लड़की की गांड कैसी बड़ी-बड़ी है वह न जाने कितने लड़कों से चुदवा चुकी है,,,, अगर मेरी बात करते चाहिए यकीन नहीं होता तो दूसरे लड़कों से पूछ ले सब लोग जानते हैं एक सिर्फ तू ही नहीं जानता,,,,।
(सूरज की बात सुनकर अंकित एकदम से हैरान हो गया था क्योंकि वह अपने पड़ोस वाली सुषमा आंटी की लड़की को सीधी साधी ही समझता था लेकिन सूरज के मुंह से उसके बारे में हकीकत जानकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई थी लेकिन चुदाई वाली बातें से उसके तन-बड़े उत्तेजना की लहर भी उठ रही थी और पल भर में उसे अपनी बहन का ख्याल आ गया क्योंकि वह भी अपनी बहन को बहुत सीधी-सादी समझता था लेकिन बगीचे में अपनी बहन को दूसरे लड़के के साथ देखकर उसका यह भरम धीरे-धीरे टूट रहा था और आज सुमन के बारे में जान कर दो उसे अपने मन में डर लगने लगा था कि कहीं उसकी बहन तृप्ति भी तो नहीं सुमन की तरह लड़कों से चुदवाती हो,,,, फिर अपने ही सवाल का जवाब अपने मन में खुद को देते हुए नहीं-नहीं ऐसा नहीं हो सकता तृप्ति सुमन की तरह नहीं हो सकती,,,,)
अरे क्या सोच रहा है मैं सच कह रहा हूं और सच कहूं तो अपने साथ के जितने लड़के हैं सब कोई,,, उसके पीछे पड़े हुए हैं और अगर वह तैयार हो तो सब छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन किसी का नंबर ही नहीं लग रहा है वह बाहर बाहर ही सब कुछ करवा लेती है और तुझे तो इन सब के बारे में अनुभव ही नहीं है नहीं तो खुद तू अपनी नजर से पहचान लेता उसकी छाती के संतरे कितने बड़े हो गए हैं उसकी गांड कितनी बड़ी हो गई है,,,।
यह सब बदलाव,,,(अंकित उत्सुकता और आश्चर्य जताते हुए दबे स्वर में बोला,,,)
हां अंकित यह सब बदलाव लड़कियों के शरीर में आ ही जाते हैं जब मरद का हाथ लगता है लड़कियों की चूची पर हाथ लगाते ही उन्हें दबाते ही उनका आकार बढ़ना शुरू हो जाता है और गांड भी फैलने लगती है,,,,,(इतना वह कहीं रहा था कि तभी उनका एक दोस्त और भी उनके पास आया जिसे देखकर सूरज उसे बैठने के लिए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ते हुए उस दोस्त से मुखातिब होता हुआ बोला,,) यार तू जरा बता इसे सुमन के बारे में,,,।
अरे उसके बारे में क्या बताना उसके बारे में सब कोई जानता है बस यही पड़ोस में रहकर कुछ नहीं जानता,,
और यह महानुभाव उसे बड़ी दीदी समझते हैं उसे बड़ी दीदी कहकर बुलाते हैं,,,,(सूरज की बात सुनते ही सूरज और उसका दोस्त दोनों तरह के लगाकर हंसने लगे और सूरज का दोस्त हंसते हुए बोला)
बहुत बड़ी दीदी बड़ी दीदी कहता है ना किसी दिन देखना तेरे पर अगर फिदा हो गई तो तेरे लिए अपनी टांग खोल देगी फिर चाटते रहना अपनी बड़ी दीदी की बुर,,,,।
(अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह दोनों की बातों को सुनकर कैसा बर्ताव करें उसके चेहरे के भाव बदल तो रहे थे उसे आश्चर्य हो रहा था क्योंकि आज तक वह सुमन के बारे में अनजान बना था और जिस तरह से उसके दोस्त ने दोनों टांगें फैला कर बुर चाटने वाली बात कहा था उसे सुनकर उसका लंड खड़ा हो गया था,,,, कुछ देर तक तीनों वहीं बैठकर बातें करते रहे और फिर सूरज जाते-जाते बोला,,,)
यार अंकित तेरी बात बन सकती है तू अगर चाहे तो सुमन तुझे जरूर कुछ करने देगी,,,।
धत् यार तू भी,,,,
अरे सच कह रहा हूं बाकी तेरी मर्जी,,,(इतना कहकर सूरज वहां से चला गया और अंकित कुछ देर तक वहीं बैठकर सुमन के बारे में सोचता रहा क्योंकि आज तक उसने सुमन के अंदर कोई इस तरह की हरकत देख ही नहीं था जिसे देखकर सुमन के बारे में उसे कोई शक हो लेकिन उसके दोस्त भी उसे झूठ नहीं बोल सकते थे इसलिए काफी सोच विचार करने के बाद वहां धीरे से वहां से उठाओ और अपने घर की तरफ चल दिया धीरे-धीरे शाम ढल चुकी थी और अंधेरा अपनी चादर बिछाने के लिए उतारू हो रहा था,,, अंकित अपने घर में पहुंच कर सबसे पहले तृप्ति के ऊपर नजर घुमा कर देखने लगा वह अपने दोस्त की बात को अपनी बहन पर आजमा रहा था वह कर नजरों से अपनी बहन की छाती की गोली को और उसके नितंबों के आकार की तरफ देखकर अंदाजा लगा रहा था कि कहीं उसकी बहन भी तो नहीं सुमन की तरह निकल गई लेकिन ,,, लेकिन अपनी बहन की छाती और अपनी बहन की गांड की तरफ देखकर उसे थोड़ा संतोष हुआ कि उसकी बहन की छाती सुमन की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी और गांड का आकार भी एकदम सीमित था भले ही वह थोड़ा उभरा हुआ था लेकिन सुमन की तरह चौड़ा नहीं था इसलिए उसे इस बात का एहसास होने लगा कि अभी तक उसकी बहन में लंड नहीं लिया और जैसे ही अपने मन में अपनी बहन के लिए लंड लेने वाली बात का ख्याल आया,,, तुरंत ही उसका खुद का लंड खड़ा हो गया,,,, जैसे तैसे करके वह अपनी बहन के ऊपर से अपना ख्याल दूसरी तरफ घूमने की कोशिश करने लगा तो वैसे ही उसे खाना बनाती हुई अपनी मां नजर आने लगी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूची देखकर वह उसे पर शक करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था क्योंकि वह तो शादीशुदा और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी थी जहां पर उसकी खूबसूरती चार चांद बन गई थी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूची देखकर उसे इस बात का अंदाजा तो लगी गया था कि उसकी मां दो बच्चों की मां हो चुकी थी और इसके लिए न जाने कितनी बार चुदवा चुकी थी,,, अपनी मां के बारे में इस तरह के शब्द अपने जेहन में आते ही वह पल भर के लिए शर्मिंदा हो गया,,, और अपने ध्यान को दूसरी तरफ बांटने की कोशिश करने लगा,,,,।)
दूसरे दिन रविवार का दिन था और दोपहर के समय सुगंधा एक कटोरी आम का अचार भरकर अंकित को थमाते हुए बोली,,,।
ले अंकित इसे पड़ोस वाली आंटी के वहां दे आना तो,,,
अरे यह क्या है,,,(हाथ में कटोरी को पकड़ते हुए)
आम का अचार है और क्या है दिखाई नहीं दे रहा है क्या,,,!
अरे मुझे दिखाई तो दे रहा है लेकिन इतना सारा उन्हें देने की क्या जरूरत है,,,
अरे बुद्धू सुषमा ने मुझे पहले से ही आचार देने के लिए बोल रखी थी इसलिए दे रही हूं,,,, अब जा जल्दी से पहुंचा दे,,,,
ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर अंकित कटोरी लेकर घर से बाहर निकल गया रविवार का दिन होने की वजह से तृप्ति भी घर पर थी,,, वैसे तो इस समय वह कोचिंग के लिए घर से बाहर चली जाती थी लेकिन आज वह घर पर ही थी इसीलिए सुगंधा भी मन महसूस कर रह गई थी वरना अभी तक तो वह अपने बेटे को अपनी जवानी के जलवे दिखा दी होती,,,।
अंकित हाथ में अचार की कटोरी लेकर दरवाजे पर खड़ा था और दरवाजे की कड़ी बजाकर आवाज दे रहा था,,,, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही थी तो वह धीरे से दरवाजे पर हाथ रखा तो दरवाजा खुद ब खुद खुल गया,,,, वह धीरे से घर में प्रवेश किया वह इधर-उधर देखने लगा लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था तो वह देखते ही देखते सीधा आगे की तरफ बढ़ने लगा और देखते ही देखते वहां घर के अंतिम कमरे की तरफ पहुंच गया और अंतिम कमरे की तरफ पहुंचते ही जैसे ही कमरे की तरफ नजर डाला तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,, वैसे भी अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसके भी होश उड़ जाते क्योंकि अंदर का नजारा ही इतना मदहोश कर देने वाला था कि खुद संस्कारी अंकित का भी इमान डोलने लगा,,,,।
दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और वह दरवाजे पर दस्तक देने ही वाला था कि उसकी नजर कैमरे के अंदर चली गई थी और अंदर का नजारा देखकर उसके तो होश उड़ गए थे क्योंकि अंदर कमरे में सुमन जो की गीले बालों से लग रहा था कि अभी-अभी नहा कर आई थी और उसके बदन पर केवल एक टावर थी जो कि वह टॉवल भी वह इस तरह से पकड़े हुए थे कि टॉवल उसके आधे नितंबों को ही ढंक पा रहा था,,,, और सुमन की खूबसूरत गोरी गोरी गांड और उसके बीच वाली फांक एकदम साफ नजर आ रही थी,,, और ऐसे हालात में सुमन की खूबसूरत गांड आधे चांद की तरह नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर अंकित तन बदन में चार बोतलों का नशा चढ़ना शुरू हो गया था,,।
वैसे भी अंकित के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था और वह अलमारी में से कुछ ढूंढ रही थी और अंकित को समझते देर नहीं लगी कि वह अपने पहनने के लिए कपड़े ढूंढ रही थी और थोड़ी देर में उसे ड्राोवर में से,,, कोई कपड़ा मिल गया लेकिन दरवाजे के पीछे खड़ा अंकित समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या मिला है और वह थोड़ी ही देर में जब पीछे की तरफ हाथ लाकर उसका हुक लगाने लगी तब उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह ब्रा पहन रही थी और दोनों हाथ का उपयोग करने की वजह से उसकी कमर पर लिपटा हुआ टावल एकदम से नीचे उसके कदमों में जाकर गिर गया,,, और वह पूरी तरह से नंगी हो गई और उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके नंगे बदन को देखकर अंकित का बिना कहीं उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और अपनी औकात में आ गया अंकित का तो इस नजारे को देखकर उसकी आंखें फटी जा रही थी उसका दिमाग काम करना बंद हो गया था पहली बार जिंदगी में वहां किसी खूबसूरत लड़की को बिना कपड़ों के देख रहा था उसके अंगों को देख रहा था उसकी मखमली चिकनी पीठ को देख रहा था और इसके नितंबों की गोली को देख रहा था जो कि वाकई में बेहद खूबसूरत उभार लिए हुए थे,,,।
शायद इस बारे में कपड़े पहने होने की वजह से अंकित सुमन की खूबसूरत नितंबों के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकता था,,, लेकिन उसे ऐसा लग रहा था कि शायद जैसे उसकी कल्पना से भी ज्यादा खूबसूरत नजारा वह देख रहा था,,,। उत्तेजना के मारे अंकित का गला सूख रहा था वह गहरी गहरी सांस ले रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके हाथ से अचार की कटोरी छूट न जाए और फिर कहीं इस तरह के खूबसूरत नजारे पर पर्दा ना पड़ जाए,,, अंदर नहा कर कपड़े पहन रही सुमन का ध्यान दरवाजे पर बिल्कुल भी नहीं था उसका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ ही था जो कि अंकित से आने से पहले ही वह बाथरुम से नहा कर अपने कमरे में गई थी,,,।
देखते ही देखते वह अपनी ब्रा का हक बंद करके उसे पहन कर अपनी नारंगियों को उसके कप में ढंक ली थी लेकिन अफसोस की बात यह थी कि उसकी नंगी संतरों को अंकित अपनी आंखों से देख नहीं पाया था,,, उसके अंको की हरकत की वजह से उसके गोल-गोल नितंबो में अजीब सी थिरकन हो रही थी जिसे देखकर अंकित का लंड अंगड़ाई ले रहा था,,, अंकित के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की को नंगी और इतने करीब से देख रहा था इसलिए तो उसकी हालत एकदम से खराब हो गई थी,,,, ब्रा को पहनने के बाद वह वापस ड्रोवर को खोलकर उसमें से फिर से कपड़ा ढूंढने लगी लेकिन इस बार अंकित को अंदाजा हो गया था कि वह क्या ढूंढ रही है पर थोड़ी ही देर में वहां लाल रंग की चड्डी निकाल कर उसे अपने ऊपर करके उसके गोल बड़े छेद में डाली और फिर वापस दूसरी काम को भी उसी तरह से दूसरे गोले में डाल दी और दोनों हाथों से पकड़ कर चड्डी को ऊपर की तरफ खींचने लगी एक औरत का या खूबसूरत लड़की का कपड़ा पहनना कपड़ा उतारना भी मर्दों के लिए बेहद हसीन नजारा होता है जिसे देखने के लिए उनकी आंखें हमेशा ललाईत रहती है लेकिन ऐसा खूबसूरत नजारा और दूसरी औरतों को कपड़े बदलते हुए देख पाना बहुत कम लोगों की किस्मत में होता है और इस समय किस्मत का धनी था अंकित जो कि अनजाने में ही इस तरह के खूबसूरत दृश्य को देखकर उत्तेजित हो गया था,,, जैसे ही वह लाल रंग की चड्डी को कमर पर चढ़ाकर अपनी गोल-गोल गांड को उसे छोटी सी चड्डी में छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी वैसे ही अंकित को भी इस बात का एहसास हुआ कि वह गलत जगह पर खड़ा था,,,। अगर ऐसे में उसकी नजर उस पर पड़ जाती तो लेने के देने पड़ जाते ,,, इसलिए वह धीरे से अपने कदम पीछे लिया और वापस दरवाजे के पास पहुंचकर वहां पर दस्तक देने लगा मानो के जैसे अभी-अभी आया हो,,,, अंकित को अपने कदम पीछे लेता देख कर सुमन मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसकी उपस्थिति को वह अलमारी में लगे शीशे में देख चुकी थी जिस बात से अंकित पूरी तरह से अनजान था और जानबूझकर सुमन अंकित को देखकर ही अपनी टॉवल को नीचे गिर कर नंगी हो गई थी क्योंकि वह अंकित को अपनी नंगी गांड अपना नंगा जिस्म दिखाना चाहती थी क्योंकि उसे अपनी जवानी पर पूरा विश्वास था कि उसके नंगे बदन को देखकर अंकित जरूर कुछ ना कुछ करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ,,, लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि वह अंकित को अपनी जवानी के रस में पूरी तरह से डूबा कर ही रहेगी,,,,।
सुमन जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन ली और दरवाजे के पास आ गई जहां पर वह अंकित को देखकर मुस्कुराने लगी और बोली,,,।
अंकित क्या हुआ कुछ काम था क्या,,,?
कककककक,,, कुछ नहीं,,,(सुमन की खूबसूरत चेहरे की तरफ एक टक देखते हुए अंकित बोला) मम्मी ने आचार भिजवाई थी वह लेकर आया हूं,,,(इतना कहकर उसकी नजर अपने आप ही सुमन की छतियो पर चली गई जिसका अंदाजा सुमन को भी हो गया और वह मन ही मन मुस्कुराने लगी,,,, लेकिन तभी उसकी नजर अंकित के पेंट की तरफ गई तो उसमे बना तंबू देखकर उसके तो होश उड़ गए क्योंकि सुमन अब तक तीन-चार लड़कों के साथ संबंध बन चुकी थी और सबके लंड के बारे में अच्छी तरह से जानती थी लेकिन अंकित के पेट में बना तंबू देख कर उसके होश उड़ गए थे क्योंकि उसे अंदाजा लग गया था कि अंकित के पेंट में मामूली लंड नहीं था,,, वासना से भरी हुई सुमन की आंखों में वासना साफ नजर आ रहा था उसका मन तो कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के पेट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ ले और फिर उसे अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझाने लेकिन एकाएक ऐसा करना उचित नहीं था वह भी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए उससे बोली,,,)
ठीक है अंकित इसे लेकर किचन में आ जाओ,,,(इतना कहकर वहां आगे आगे अपनी गोल-गोल गांड को कुछ ज्यादा ही मटकाते हुए चलने लगी ताकि अंकित का ध्यान उसकी गांड पर रहे और ऐसा ही हुआ उसकी गोल-गोल गांड पर नजर पड़ते हैं अंकित का कलेजा सूखने लगा वह उत्तेजना के सागर में डूबने लगा,,, देखते ही देखते सुमन किचन में आ गई थी और अंकित ठीक उसके पीछे खड़ा था सुमन का दिमाग ऐसी हालत में कुछ ज्यादा ही काम करता था और वह अपने ठीक पीछे खड़े अंकित की तरफ ध्यान न देकर एकदम से नीचे झुकी और किचन के नीचे का ड्रोवर खोलने लगी और जैसे ही वह नीचे झुकी उसकी गोल-गोल गांड सीधे अंकित के खड़े लंड पर जाकर टकरा गई और जैसे ही सुमन को अपनी गांड के बीचो-बीच अंकित का लंड महसूस हुआ वह एकदम से मदहोश हो गई और पल भर में ही समझ गई कि अगर अंकित का लंड उसकी बुर में घुसेगा तो क्या हालत करेगा,,, और दूसरी तरफ,,, अंकित का भी बुरा हाल था उसके झुकने पर जिस तरह से पेट में तना हुआ उसका लंड सुमन की गांड से जाकर टकराया था उसके पूरे बदन में हलचल सी मच गई थी ,,, उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई थी,,,, पल भर में ही उसे लगा कि जैसे कि मानो उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो गया हो,, वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था एक हाथ में उसके कटोरी थी इसलिए वह एक ही हाथ को उसकी गोल-गोल कांड पर रख पाया था वरना वह दोनों हाथों से उसकी गांड की दोनों फांको को थाम लेता,,,, लेकिन अंकित की यह हरकत सुमन के बदले में भी हलचल मचा गई थी उसकी बुर से मदन रस अमृत बूंद बनकर उसकी पतली दरार से बहने लगी थी,,, वह इस हालत में ज्यादा देर तक झुकी नहीं रह सकती थी इसलिए मन मसोस कर खड़ी हो गई और बिना कुछ बोले अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और फिर उसके हाथ से अचार की कटोरी लेकर ड्रोवर में रखने लगी,,, अंकित के हालात का सुमन को अंदाजा हो चुका था सुमन समझ गई किसी उसकी जवानी का तूफान अंकित को रौंद कर रख दिया है लेकिन मुझसे ज्यादा कुछ कर पाती से पहले ही उसके कानों में उसकी मां की आवाज आने लगी जिसे सुनकर वह भी एकदम सकते में आ गई अंकित भी धीरे से किचन से बाहर आ गया और फिर,,, सुषमा को देखकर नमस्ते करते हुए बोला,,,।)
आंटी मा ने अचार भेजा है,,,
सच में तुम अचार लाए हो अंकित,,,
हां मम्मी अंकित अचार लेकर आया था मैं किचन में रखकर आ रही हूं,,,
ओहहहह बेटा तुम्हारी मां कितनी अच्छी है उसे धन्यवाद बोलना,,,
ठीक है आंटी,,,(और इतना कहकर अंकित कमरे से बाहर निकल गया)
पहली बार अंकित को अपने पड़ोस में कुछ देने पर बहुत ज्यादा खुशी महसूस हुई थी और इस खुशी को वह बयान नहीं कर सकता था खास करके शब्दों से तो बिल्कुल भी नहीं लेकिन दोनों टांगों के बीच के लटकते हुए हथियार उसकी खुशी को अच्छी तरह से बयां कर रहे थे जो कि अभी तक तना हुआ था,,,। अंकित ने कभी सपने कभी नहीं सोचा था कि पड़ोस के घर में उसे इस तरह का मदहोश कर देने वाला नजारा देखने को मिलेगा जो कि उसकी कल्पना की बिल्कुल परे था,,, अंकित को अभी भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसने देखा वह सब कुछ सही था उसे तो सब कुछ ख्वाब जैसा ही लग रहा था उसकी कल्पना नजर आ रही थी लेकिन इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानता था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने देखा था वह बिल्कुल सही था क्योंकि आज तक तो उसने इस तरह का कामोत्तेजना से भरा हुआ स्वप्न भी नहीं देखा था,,,।
अंकित का मन सुमन के घर से वापस लौटने का बिल्कुल भी नहीं हो रहा था,,,। और होता भी कैसे पूरी तरह से जवान हो चुके अंकित जैसे जवान लड़के को अगर उसकी आंखों के सामने कोई जवान लड़की जवान से भरी हुई अर्धनग्न अवस्था में खासकर के अपने नितंबों को दिखाती हुई नजर आ जाए तो दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो इस तरह की खूबसूरत नजारे को छोड़कर जाना चाहेगा उसमें से अंकित भी,,, अलग नहीं था वह भी पूरी तरह से जवान हो चुका है एक जवान लड़का था हट्टा कट्टा बांका नौजवान था,,, और जीवन में पहली बार उसने इस तरह की खूबसूरत नजारे को अपनी आंखों से देखा था सुमन की गोल गोल नितंबों को देखकर उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी जिस तरह से उसके दोस्त ने सुमन के बारे में उसके चरित्र के बारे में बताया था उसे देखते हुए,,, अंकित के मन में भी कुछ-कुछ हो रहा था वैसे तो अंकित को सुमन के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था पहले ही वह उसके पड़ोस में रहती थी कभी-कभार ही उससे मुलाकात होती थी लेकिन लेकिन यह इत्तेफाक ही था जो दोस्त के द्वारा सुमन का चरित्र बयां करने के बाद ही उसे सुमन का नंगा बदन भी देखने को मिल गया था उसकी बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गोल गोल गांड देख कर अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,, सुमन की खूबसूरत आकर्षण से वह अपने आप को बचाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था कि तब भी सुमन की तरफ से उसकी एक हरकत नहीं अंकित के तन बदन में आग लगा दिया था,,, जब सुमन किचन का ड्रोवर खोलने के लिए नीचे झुकी थी,,, और उसकी गोलाकार गांड सीधे जाकर अंकित के जवान खड़े लंड से टकरा गई थी हालांकि सुमन की तरफ से यह हरकत जानबूझकर ही हुई थी लेकिन अंकित को नहीं मालूम था,,,। वह तो पल भर के लिए ही सही लेकिन स्वर्ग का सुख का अनुभव किया था उसे नहीं मालूम था कि स्वर्ग का सुख क्या होता है संभोग से जुड़ा सुख क्या होता है लेकिन सुमन के गोलाकार नितंबों का स्पर्श अपने लंड पर होते ही तो जो सुख जो हलचल उसे अपनी तन-बदन में महसूस हुई थी वह अंकित के लिए स्वर्ग की सुख से काम नहीं था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था,,, सुमन के मां के आ जाने की वजह से अंकित मां महसूस कर वहां से लौट कर अपने घर पर आ गया था लेकिन सुमन के घर से बेहद मादकता भरी यादें अपने जेहन में लेकर आया था जिसे याद करने पर कभी भी उसका लंड अपनी औकात में आ सकता था,,,।
घर में जैसे ही अंकित ने प्रवेश किया उसकी मां तुरंत उससे पूछी,,,।
अचार दे दिया ना,,,
हां मम्मी दे दिया,,,,(और इतना कहते हुए अंकित अपने कमरे में जाने लगा लेकिन सुगंधा की नजर,,, उसके पेंट में बने तंबू पर चली गई और उसे देखते ही सुगंध के तन-बदन में हलचल होने लगा उसके मन में सवालों का बवंडर उठने लगा,,, वह उस समय बर्तन धो रही थी सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार दिन में यु एकाएक अंकित का लंड क्यों खड़ा हो गया उसके मन में क्या चल रहा है क्या सोच रहा है कहीं कुछ देख तो नहीं लिया सड़क पर आते जाते किसी खूबसूरत औरत को तो नहीं देख कर मन में कल्पना करने लगा,,, वह बर्तन धो रही थी और इस तरह के सवाल अपने मन में सोच रही थी और उसका जवाब भी अपने मन में ही दे रही थी,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है जो इस तरह से उसका लंड कभी भी खड़ा हो जा रहा है और इस बारे में सोचकर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश भी हो रही थी क्योंकि अंकित के पेंट में बनी तंबू को देखकर बहुत उत्साहित भी हो रही थी क्योंकि यह सब उसके लिए ही अच्छा था,,,, क्योंकि इस बात को अच्छी तरह से जाती थी कि मर्दों का लंड कब खड़ा होता है जब औरतों के बारे में उनके मन में गलत विचार आते हैं जब वह औरत को चोदने के बारे में सोचते हैं या चोदने की तैयारी करते हैं तब उनका लंड हमेशा खड़ा हो जाता है,,, और यह विचार उसके मन में आते ही वह सोचने लगी कि उसके बेटे के मन में भी यही चल रहा है जरूर उसके मन में किसी को लेकर गंदे विचार आ रहे हैं या ऐसा भी हो सकता है कि,,, उसके ही बारे में सोचकर उसके बेटे का लंड खड़ा हो गया है जैसा कि उसे दिन जब वह अपने बाल को सही करने के लिए उसे बोली थी तब,, भी अंकित की हालत ऐसी ही हुई थी और यह ख्याल मन में आते ही उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ने लगी,,,,,, उसके मन में कुछ और भी चल रहा था वह इस मौके का फायदा उठाना चाहती थी लेकिन तृप्ति भी मौजूद थी इसलिए उसे थोड़ा तृप्ति पर गुस्सा भी आ रहा था थोड़ी देर में वह बर्तन साफ करके किचन पर रख दी थी,,, और देखी की तृप्ति हाथ में बैग लेकर कहीं जा रही थी इसलिए वह उत्सुकता बस पूछी,,,।
कहां जा रही हो ,,,?
मम्मी में सहेली के वहां पढ़ने जा रही हूं,,,
(इतना सुनते ही सुगंधा मन ही मन एकदम प्रसन्न होने लगी लेकिन फिर भी जानबूझकर थोड़ा सा तैस दिखाते हुए बोली,,,)
लेकिन आज तो रविवार है आज कहां जा रही हो,,,
वह क्या है ना मम्मी एग्जाम आने वाले हैं उसकी तैयारी करनी है,,।
ठीक है जाओ लेकिन जल्दी आ जाना,,,
ठीक है मम्मी मैं जल्दी आ जाऊंगी,,,(और इतना कहने के साथ ही वह कमरे से बाहर निकल गई और उसके जाते ही सुगंधा जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,, सुगंधा के मन में अरमान मचल रहे थे उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ रही थी खास करके उसकी बुर की हालत खराब होती जा रही थी उसकी बुर से मदन रस का रिशाव हो रहा था,,, वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ी होकर कुछ सोचती रही और फिर तुरंत मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चली गई,,,, और थोड़ी ही देर में अलमारी में से झंडू बाम लेकर वह अपने बेटे के कमरे की तरफ आगे बढ़ गई और उसकी किस्मत अच्छी थी कि कमरा खुला ही था हल्का सा दरवाजा बंद था जिसमें से अंकित का बिस्तर और बिस्तर पर लेटा हुआ अंकित एकदम साफ नजर आ रहे थे लेकिन अंदर अंकित की हालत को देखकर सुगंधा के तन बदन में आग लग गई,,,। वह अंदर के नजारे को एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी वह देख रही थी कि उसका बेटा पीठ के बाल दोनों टांगें बिस्तर पर फैलाए लेटा हुआ है और उसका हाथ पेट में बने तंबू पर घूम रहा था जिसे वह हल्के हल्के पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा रहा था इस नजारे को देखते ही सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,,,, अंकित की हालत को देखकर सुगंधा समझ गई कि उसके मन में जरूर कुछ चल रहा है,,, क्योंकि इस समय भी उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था बस पेंट के अंदर था लेकिन उसके बेटे के मन में जरूर ऐसा कुछ चल रहा था जिसकी वजह से वह परेशान नजर आ रहा था लेकिन इस नजारे को देखकर सुगंधा के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नज़र आने लगे उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,,।
क्योंकि उसे लगने लगा था कि अपने बेटे की हालत को देखकर उसका काम बन सकता है,,,।
यह नजारा भी क्या खूब था दरवाजे पर खड़ी होकर एक मां अपने बेटे की कामुक हरकत को देख रही थी जो कि खुद अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होना चाहती थी लेकिन कैसे यह उसे नहीं मालूम था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन जरूर वह अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में कामयाब हो जाएगी,,, अंकित के मन में सुमन का ख्याल पूरी तरह से छाया हुआ था बार-बार उसकी आंखों के सामने सुमन की गोरी गोरी नंगी गांड नजर आ जाती थी तो कभी उसका एकाएक नीचे झुक जाना जिसकी वजह से उसकी गांड पर वह अपने लंड का स्पर्श महसूस कर पाया था,,, इन्हीं घटनाओं के बारे में सोचकर अंकित का बुरा हाल था,,, तभी उसे दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी वह एकदम से हड़बड़ा गया और अपनी दोनों टांगों को मोड़ लिया ताकि उसकी मां को उसके पेंट में बना तंबू दिखाई ना दे,,,। वह तुरंत जल्दी से उठकर बैठ गया था और दरवाजे की तरफ देखते हुए बोला,,,।
कककक,, क्या हुआ मम्मी कुछ काम था क्या,,,?
(सुगंध को अपने बेटे का इस तरह से हडबढ़ाना बहुत अच्छा लगा था,,, लेकिन वह अपने चेहरे पर दर्द के भाव लिए हुए अपने बेटे के कमरे में दाखिल होते हुए बोली,,,)
कुछ खास नहीं बेटा लेकिन मेरे सर में दर्द कर रहा था इसलिए बाम लेकर आई हूं अगर तुझे कोई काम ना हो तो मेरे सर पर लगा कर थोड़ी मालिश कर दे,,,
हां,, हां,,, क्यों नहीं वैसे भी मैं एकदम फ्री हूं,,, लाओ में बाम लगाकर मालिश कर देता हूं,,,
बहुत अच्छे बेटा बहुत देर से मेरा सर दर्द कर रहा है,,,,(इतना कहते हुए सुगंधा अपने बेटे के बिस्तर की तरफ आगे बड़ी और जाकर बिस्तर पर बैठ गई नरम नरम गद्दे पर सुगंधा की भारी भरकम गांड का दबाव एकदम साफ महसूस हो रहा था और अंकित ने इस नजारे को एकदम साफ-साफ देखा था कि जब उसकी मां गद्दे पर बैठ रही थी तो उसकी गांड के दबाव पर गद्दा भी पूरी तरह से दब गया था और उसकी मां की भारी भरकम गांड गद्दे में एकदम साफ तौर पर धरती हुई नजर आ रही थी इस नजारे को देखकर अंकित का हाल और भी बुरा होने लगा था,,, लेकिन वह अपनी मां के प्रति इस तरह के ख्याल बिलकुल भी नहीं अपने मन में लाता था लेकिन उसके मन में इस तरह का ख्याल इकाई एक ही आया था इसलिए वह अपने आप को संभालने की पूरी कोशिश कर रहा था क्योंकि ऐसा एक बार उसके साथ किचन में भी हो चुका था जब वह अपनी मां के बल के लटो को ठीक कर रहा था,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि है कि बेटे के मन में उसकी मां के लिए इस तरह के गंदे विचार कभी नहीं आने चाहिए क्योंकि यह हर तरीके से गलत है इसलिए वह अपना मन दूसरी तरफ घूमाने की कोशिश करने लगा था,,,।
अच्छे से मालिश करके सर दबाना ताकि दर्द दूर हो जाए,,, मैं भी आज तेरे हाथों का जादू देखना चाहती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा पीठ के बाल एकदम सीधी लेट गई और ऐसा लेटने की वजह से उसके साड़ी का पल्लू उसकी छाती पर से हटकर थोड़ा नीचे चला गया था जिससे उसकी भारी भरकम छाती एकदम साफ नजर आ रही थी और उसकी छतिया के बीच की पतली गहरी लकीर भी एकदम साफ नजर आ रही थी लेकिन अभी तक अंकित का ध्यान उसकी मां की चूचियों पर नहीं किया था अपनी मां के हाथ में से झंडू बाम किसी से लेकर उसके ढक्कन को खोलकर उसमें से थोड़ा सा बम निकाला और उसे अपनी मां के सर पर हल्के हल्के रगड़ने लगा और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,,,,,
अपने बेटे का स्पर्श सुगंधा को बेहद रोमांचित कर रहा था,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से वहां लेटी हुई थी ऐसे में उसके बेटे का ध्यान उसकी भारी भरकम साथियों पर जरूर जाने वाली थी इसलिए तो वह अपनी छाती पर से साड़ी का पल्लू धीरे से एक बहाने से हटा दी थी,,,, कुछ देर तक सब कुछ ठीक चलता रहा अंकित इस तरह से अपनी मां के सर पर बम लगाकर उस पर मालिश कर रहा था,,, लेकिन अंकित की हालत तब खराब होने लगी जब उसकी बहाने अपने सर को उसकी गोद में रखने के लिए बोली,,,।)
बेटा ऐसे ठीक नहीं लग रहा है,,, मेरे सर को अपनी गोद में रख लो फिर मालिश करना तब मुझे अच्छा लगेगा,,,,
ठीक है मम्मी,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित जो कि अपनी मां के सिरहाने बैठा हुआ था वह पलाठी मार लिया,,, ताकि उसकी मां का सर उसकी गोद में ठीक से आ सके,,, और थोड़ी ही देर में सुगंधा अपने सर को अपने बेटे की गोद में रख ली लेकिन इस दौरान उसने बाकी का काम भी तमाम कर दिया था अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से अपने ऊपर से हटा दी थी,,, ऐसे में सर से लेकर उसकी कमर तक सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा था उसकी गहरी नाभि भी किसी छोटी सी बुर से कम नजर नहीं आ रही थी,,,, और बिस्तर पर लेटने से पहले सुगंधा ने चला कि दिखाते हुए ऊपर का एक बटन खोल दी थी जिसकी वजह से उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर ब्लाउज के अंदर लहरा रही थी,,,।,,
अब जाकर ठीक लग रहा है अच्छे से मालिश करना,,,
(अंकित अपनी मां की बात को सुन तो जरूर रहा था लेकिन उसकी आंखों के सामने जिस तरह का नजारा था उसे देखकर उसके होशो हवास गायब हो चुके थे,,, अभी तक उसकी नजर अपनी मां की छातियों पर नहीं गई थी लेकिन जैसे ही चला कि दिखाते हुए सुगंधा ने अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से अपने बदन से दूर हटाई थी ऐसे में अंकित की नजर अपनी मां की गदराऊ चूचियों पर सीधे-सीधे चली गई थी,,, ब्लाउज के ऊपर का बटन खुला होने की वजह से उसकी मां की दोनों चूचियां ब्लाउज से बाहर आने के लिए आतुर नजर आ रही थी जिसका अच्छा खासा भाग अंकित को एकदम साफ नजर आ रहा था अंकित नजर भरकर कमर से ऊपर तक अपनी मां को प्यासी नजरों से देख रहा था हालांकि ऐसी नजर के चलते उसे अपने आप से ग्लानी भी हो रही थी लेकिन वह अपने आप को अपने मन को रोक नहीं पा रहा था,,,, अंकित की तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत ना होता देखकर सुगंधा समझ गई थी कि जो वह दिखाना चाह रही है उसका बेटा वही देख रहा है और इस बात को लेकर उसके मन में खुशी भी झलक रही थी,,, वह धीरे से बोली,,,)
क्या हुआ बेटा मालिश तो कर दर्द पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है,,,
हां,,,हां ,,,, अभी करता हूं,,,(अपनी मां की आवाज सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो और फिर से वह बाम की सीसी में से थोड़ा सा बाम अपनी उंगली में लगाकर वापस अपनी मां के सर पर लगाकर उसे पर धीरे-धीरे मालिश करने लगा,,, लेकिन उसका पूरा ध्यान अपनी मां की छातियों पर था जो की पूरी तरह से खीला हुआ नजर आ रहा था,,,, इस नजारे को देखकर पहले से ही अंकित का लंड खड़ा था अब उसमें और ज्यादा अकड़ बढ़ने लगी और उसमें अकड़ पढ़ने की वजह से वह सीधा पेट में खड़ा हुआ था जहां पर उसकी मां का कर रखा हुआ था लेकिन अनुभव से भरी हुई सुगंधा को अपने बेटे के खड़े लंड का एहसास अपने सर पर हो रहा था जिसकी वजह से उसके बाद में उत्तेजना की चीटियां रेंग रही थी,,, सुगंधा की हालत खराब होने लगी ठीक कर के ऊपर वाले भाग पर उसे अपने बेटे के लंड की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी और उसका कड़कपन भी उसे महसूस हो रहा था,,, जिसके चलते उसकी सांसे उत्तेजना के मारे गहरी चलने लगी जिसकी वजह से उसकी छातियां ऊपर नीचे होने लगी और इस नजारे को देखकर तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,।
सुगंधा निश्चिंत होकर अपने बेटे के गोद में लेटी हुई थी अपने सर की मालिश करवा रही थी और अपनी जवानी का जलवा अपने बेटे के ऊपर भी खेल रही थी जिसमें उसका बेटा पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था अपनी मां की चूचियों के बीच की पतली और गहरी लकीर को देखकर अंकित का मन उसमें डूबने को कर रहा था और वह अपनी मन में कल्पना कर रहा था कि ब्लाउज के अंदर जब उसकी मां की चूचियां ऐसी नजर आती है तो ब्लाउज उतारने के बाद नंगी चूचियां कैसी नज़र आती होगी इस बारे में सोच कर ही उसकी हालत खराब होती जा रही थी वह पसीने से टरपटर हो चुका था उत्तेजना पूरी तरह से उसके ऊपर कब्जा जमा चुका था अभी तक वह एक बेटे का फर्ज निभाते हुए अपनी मां के बारे में अपने मन में गंदे ख्याल लाने से कटरा रहा था लेकिन उसकी आंखों के सामने इस तरह के मदहोश कर देने वाले नजारे को देखकर उसकी आंखों ने भी अपने ऊपर से शर्म मर्यादा और रिश्ते के पर्दे को हटा दिया था और इस समय अंकित को अपनी गोद में लेटी हुई सुगंधा अपनी मां नहीं बल्कि एक औरत नजर आ रही थी जिसका बदन पूरी तरह से जवानी से भरा हुआ था जिनके अंग अंग से जवानी का रस टपक रहा था,,, जिसे पीने के लिए खुद अंकित बेकरार हुआ जा रहा था,,,,।
अंकित बिना कुछ बोले अपनी मां के सर की मालिश किया जा रहा था और आप उसे भी एहसास होने लगा था कि उसका खड़ा नहीं उसकी मां के सर पर स्पर्श हो रहा है और न जाने क्यों अंकित जानबूझकर अपने लंड को अपनी मां के सर पर रगड़ने की कोशिश कर रहा था और खुद सुगंधा भी एक दो बार अपने सर को ऊपर की तरफ ले जा करके अपने बेटे के खड़े लंड को पूरी तरह से उसके कड़कपन को महसूस करके मस्त हो चुकी थी,,, अंकित को अपने बदन में अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी ऐसा हलचल उसे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और उसके लंड की अकड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि उसे अपने लंड में दर्द महसूस हो रहा था,,,,।
अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,(उत्तेजना से भरी आवाज में अंकित बोला,,)
बहुत अच्छा लग रहा है बेटा एकदम आराम लगने लगा है तेरे हाथों में तो जादू है,,,, इससे पहले भी मेरा सर बहुत बार दर्द कर चुका है और मैं तृप्ति से मालिश करवाई हूं लेकिन ऐसा आराम मुझे तृप्ति के हाथों से बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ था जैसा कि तेरे हाथों से आराम लग रहा है,,,
यह तो अच्छी बात है मम्मी की मेरे हाथों से तुम्हें आराम मिल रहा है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित कभी अपनी मां की चूचियों की तरफ तो कभी उसकी गहरी नाभि की तरफ देख रहा था इस समय अंकित को अपनी मां की गहरी मेरी बेहद आकर्षित कर देने वाली लग रही थी अंकित का मन अपनी मां की नाभि में उंगली घुमाने को कर रहा था लेकिन ऐसा करना उचित नहीं था,,,,,,,।
दूसरी तरफ सुगंधा की भी हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उसकी चड्डी पूरी तरह से उसके मदन रस से भीग चुकी थी उसकी बुर लगातार पानी बाहर आई थी इतनी उत्तेजना उसने भी पहले महसूस नहीं की थी एक तो यह दूसरा मौका था जब उसने खुले तौर पर अपने अंग का प्रदर्शन अपने बेटे के बेहद करीब कर रही थी और साथ में अपने बेटे के लंड को अपने सर पर महसूस भी कर रही थी उसका मन तो कर रहा था कि इसी समय अपने बेटे के लंड को पकड़ ले और उसे चोदने के लिए बोले लेकिन वह अपनी मर्यादा को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि एकाएक आगे बढ़ना उचित नहीं है वह धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी,,, ताकि उसके बेटे को ऐसा ना लगे कि उसकी मां जानबूझकर यह सारा खेल उससे चुदवाने के लिए रच रही है,,, वह सारा माहौल ऐसा बनाना चाहते थे की दोनों के बीच चुदाई अपने आप हो जाए और दोनों एक साथ इसके जिम्मेदार हो,,, और इसके लिए सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि अपने बेटे को अपने काबू में करना बहुत जरूरी है और वह अपने बेटे को अपनी जवानी का जलवा दिखाकर ही काबू में कर सकती थी जिसकी शुरुआत उसने कर दी थी और जिसका असर उसके बेटे पर भी होना शुरू हो गया था,,,।
अब तो मैं जब मेरा बदन दर्द करेगा तो तेरे से ही अपने बदन की मालिश करवाऊंगी क्योंकि तेरे हाथों में जादू है और मैं जल्दी से ठीक हो जाऊंगी,,,।
(अपनी मां के बदन की मालिश के बारे में सोचकर ही अंकित की हालत खराब होने लगी और मन में प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और अपनी प्रसन्नता को अपने मन में दबाकर वह बोला,,,)
क्यों नहीं मम्मी मैं कहां भाग जा रहा हूं मैं भी तो यही हूं,,,(इतना कहते हुए अंकित सुमन वाली घटना के बारे में सोचने लगा और अपने मन में या कल्पना करने लगा कि अगर सुमन की जगह उसकी मां उसे अवस्था में दिखती तो कितना मजा आ जाता सुमन की गांड तो फिर भी छोटी-छोटी थी लेकिन उसकी मां की गांड भारी भरकम गोल गोल और बहुत मत कर देने वाली थी हालांकि अभी तक उसने अपनी मां की गांड को नंगी नहीं देखा था लेकिन फिर भी कल्पना करके पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था क्योंकि अब तो कल्पना करने के लिए उसके मन में रेखा चित्र भी था की गांड कैसी दिखती है,, और उसे पक्का विश्वास था कि सुमन से भी ज्यादा खूबसूरत और बेहतर हसीन उसकी मां की गांड नजर आएगी यह सब कल्पना उसके पसीने छुड़ा रहे थे और तभी उसके माथे से पसीना टपक कर सुगंधा के गाल पर गिर गया जिसे अपने गाल पर महसूस करके वह बोली,,)
तू पसीना पसीना क्यों हो गया है तबीयत तो तेरी ठीक है ना पंखा भी चल रहा है फिर भी तेरा पसीना छूट रहा है,,,
कककक,,, कुछ नहीं मम्मी यह तो नॉर्मल है कभी कबार मुझे ऐसा हो जाता है,,,
तब तो ठीक है मुझे लगा कि तेरी तबीयत खराब है,,,(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे का पसीना क्यों छूट रहा है उसकी गदराई जवानी देखकर ही उसके बेटे का पसीना छूट रहा था,,,, और इस बात के लिए वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी उसने अपना जादू चला दी थी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,)
बहुत अच्छा लग रहा है बेटा आप रहने दे तूने अच्छे से मालिश किया है,,,,(और ऐसा कहते हुए वह अपने बेटे के गोद से उठी और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी क्योंकि अब बेहतरीन खूबसूरत मादकता भरे दृश्य पर पर्दा डालने का समय आ चुका था और वह अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए उठकर बैठ गई,,,,, लेकिन संजू की हालत खराब थी वह अपने साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए तिरछी नजर से संजू के पेट की तरफ देखी थी जो की पूरी तरह से बेल को बांधने वाले खुंटे की तरह नजर आ रहा था,,,, जिसे देख कर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी और बिस्तर पर से उठते हुए बोली,,,)
अब थोड़ा जाकर नहा लेती हूं तो मन हल्का हो जाएगा,,,,,(और ऐसा कहते हुए अपने बेटे के कमरे से बाहर निकल गई वह जानबूझकर नहाने की बात कही थी क्योंकि वह अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यास को बुझाना चाहती थी इसलिए वह सीधे बाथरूम में गई और अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई,,, और फिर अपने पैर को नल के ऊपर रखकर,,, एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके अपनी गर्मी को शांत करने लगी और थोड़ी देर बाद ही अपनी गर्मी को शांत करने के बाद ठंडे पानी से नहाकर वह बाथरुम से बाहर आ गई,,,)
सुगंधा की जवानी बेलगाम होती जा रही थी सुगंधा का उसके मन पर और उसके तन पर,,, बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया था तीन प्रतिदिन उसकी इच्छा अपने बेटे के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करने की बढ़ती जा रही थी जिसके चलते वह दो बार इस तरह की हरकत को अंजाम दे चुकी थी और दोनों बार खुद तो पानी पानी हुई थी अपने बेटे को भी उत्तेजित कर चुकी थी एक तो किचन में बालों के लटो को ठीक करवाते समय और दूसरी बार सर दर्द का बहाना देकर सर की मालिश करवाते समय वह अपनी भारी भरकम खरबूजे जैसी चुचियों का प्रदर्शन कर चुकी थी जिसके चलते वह अपने बेटे की उत्तेजना को ठीक अपने सर पर महसूस कर चुकी थी,,, और यह एहसास कर चुकी थी कि उसके बेटे का लंड बेहद दमदार है,,, जिसके चलते हैं वहां मालिश करवाने के बाद तुरंत बाथरूम में नहाने के बहाने चली गई थी और वहां अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी मलाई को अपनी बुर में से बाहर निकाल दी थी,,,।
अपनी मां की मस्त-मस्त कर देने वाली चूचियों को देखकर और अपने लंड को उसके सर पर महसूस करके अंकित उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था वह इतना ज्यादा उत्तेजना अपने बदन में महसूस कर रहा था कि उसके लंड में दर्द होने लगा था हालांकि इस समस्या से निजात पाने के लिए उसे हस्तमैथुन करना नहीं आता था और ना ही इस बारे में वह जानता था अगर जानता तो अब तक न जाने कितनी बार अपने हाथ से हिलाकर वह अपने लंड के दर्द से छुटकारा पा लिया होता,,,।
अपनी मां की खूबसूरत चूचियों की प्रति उसका आकर्षण बढ़ता जा रहा था और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा था कि वाकई में उसकी मां बहुत ज्यादा खूबसूरत है लेकिन फिर भी इस तरह के ख्याल बने आते ही वह अपनी भावनाओं को अपने मन में दबाकर इन खयालों से अपने ध्यान को दूसरी तरफ करने की कोशिश करता था लेकिन नाकाम हो जाता था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां को किस नजरिए से देखें क्योंकि अब तो वह चोर नजरों से अपनी मां की तरफ देखने लगा था उसकी खूबसूरती के रस को अपनी आंखों से पीने लगा था उसके नितंबों के घेराव और कसावपन को देख कर अंदर ही अंदर मस्त होने लगा था,,,। इन सबके बावजूद भी वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जो कुछ भी वह कर रहा है वह गलत है क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है उसकी मां जानबूझकर अपनी छाती पर से साड़ी के पल्लू को थोड़ी हटाई थी उसे यह थोड़ी मालूम था की छाती पर से साड़ी का पल्लू है जाने पर मैं उसे घूर-घूर कर देखूंगा या फिर बालों को ठीक करते समय मेरी नजर उसकी छाती पर चली जाएगी यह सब तो अनजाने में हो रहा था और इस बात का दोष वह अपने ही आपको दे रहा था कि उसकी नजर में ही गड़बड़ है,,,, उसके खुद के देखने का नजरिया बदल गया है जिससे वह निजात पाना जाता था,,,, और इस समस्या से निजात पाने के लिए वह अपने मन में अपनी ही मां की कसम खाकर आइंदा इस तरह से वह कभी अपनी मां को नहीं देखेगा,,,, ऐसा मन में कसम लेकर वह सहज होने की कोशिश करने लगा,,, और धीरे-धीरे इसमें कामयाब भी होने लगा,,,।
लेकिन दूसरी तरफ सुगंधा की बुर की खुजली बढ़ती जा रही थी,,,, उसकी हालत जल बिन मछली की तरह हो रही थी,,,, वह अपनी जवानी की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रही थी अगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद अब तक किसी मर्द का सहारा लेकर अपनी बुर की प्यास को बुझा ली होती लेकिन सुगंधा दूसरी औरतों की तरह बिल्कुल भी नहीं थी एक औरत होने के साथ-साथ वह एक शिक्षिका भी थी और उसे अपनी इज्जत मान मर्यादा का अच्छी तरह से भान था,,,, इतना तो वह जानती ही थी कि उसकी प्यास बुझाने वाला उसके घर में ही मौजूद है लेकिन कैसे इस बात को वो भी नहीं जानती थी लेकिन इतना विश्वास था कि एक ना एक दिन लह जरुर कामयाबी हासिल करेगी,,, इसीलिए वह अपने प्रयास में लगी हुई थी,,,।
दूसरी तरफ सुमन अपने गोल-गोल नितंबों पर अंकित के मोटे तगड़े तंबू का चुभन महसूस करके मदहोश हो चुकी थी तृप्ति और सुमन की उम्र एक जैसी ही थी लेकिन जहां एक तरफ तृप्ति मर्यादा में रहती थी वहीं दूसरी तरफ सुमन अपनी जवानी की आग को संभाल नहीं पा रही थी इसीलिए वह दो-तीन लड़कों के साथ शारीरिक संबंध भी बन चुकी थी और उन लड़कों के साथ बनाए संबंध के अनुभव के जरिए ही उसे इस बात का एहसास हुआ था कि अंकित का लंड बेहद दमदार है,,,,,,, अंकित को ऐसा लगता था कि सुमन के कमरे के दरवाजे पर जब वह खड़ा था तो सुमन को इस बात का अहसास तक नहीं था बल्कि सुमन अलमारी के आईने में सब कुछ देख चुकी थी और इसीलिए जानबूझकर ही अपने तौलियों को नीचे गिराकर एकदम नग्न अवस्था में हो चुकी थी,,, अंकित के चेहरे के भाव को पढ़कर वह अंदर ही अंदर बहुत प्रसन्न भी हो रही थी और जिस तरह से रसोई में आकर वह नीचे झुकी थी और उसकी गांड पर अंकित का लंड एकदम से ठोकर खा गया था उसे अभी तक वह अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी जिसके चलते उसकी बुर से पानी निकल जाता था,,, वैसे तो सुमन भी अंकित से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी कभी कभार ही आमने-सामने आ जाने पर बातचीत हो जाती थी लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि सुमन के मन में कुछ और चलने लगा था,,,, वह भी मौका देखकर अंकित पर अपनी जवानी के डोरे डालने के लिए तैयार हो चुकी थी,,,।
ऐसे ही सभी लोग अपने-अपने तरीके से लगे हुए थे देखते ही देखते दिन गुजर रहे थे लेकिन कोई भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहा था,,, तनख्वाह का दिन था,,, तनख्वाह लेकर शाम को लौटते समय सुगंधा सब्जी मार्केट में सब्जी और बच्चों के लिए नाश्ता लेने के लिए चली गई,,,, घर पर सब्जी बनाने के लिए करेला कद्दू और पटर खरीद चुकी थी,,, लेकिन तभी उसकी नजर बैगन पर गई जो की काफी लंबे और मोटे थे,,,, बैगन पर नजर पढ़ते ही और उसकी लंबाई और मोटाई को देखकर सबसे पहले सुगंधा के मन में अपने बेटे के दोनों टांगों के बीच लटकते हुए लंड का ख्याल आ गया,,,, और उसके बदन में सुरसुराहट सी दौड़ने लगी वैसे उसे बैगन नहीं खरीदना था लेकिन उसकी लंबाई और मोटाई उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी,,, और वह उसे ठेले के पास जाने से अपने आप को रोक नहीं पाई और हाथ में थैला लिए वह उस ठेले के पास पहुंच गई,,,।
ठेले पर पहुंचते ही उसने एक मोटे तगड़े लंबे बैगन को अपने हाथ में उठाकर उसे गोल-गोल घुमा कर देखने लगी और उसकी इस प्रक्रिया का उसके चेहरे पर अद्भुत प्रभाव पड़ रहा था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वहां बैगन को नहीं बल्कि अपने ही बेटे के लंड को अपने हाथ में लेकर खेल रही हो,,,,, वह उसे बैगन को लेकर कल्पना की दुनिया में इतना खो गई कि उसे इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि वह कब अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे को मिलकर उसका गोल छल्ला बना ली और उसे गोल छल्ले में से उसे बैगन को अंदर प्रवेश करा कर दो-तीन बार उसे अपने हाथ के गले में से अंदर बाहर करने लगी और उसकी यह हरकत ठेले वाले ने देख लिया और एकदम से मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर अश्लील भाव लाते हुए बोला,,,।
बहुत मोटा और लंबा है मैडम जी बहुत मजा आएगा,,,
(उसे ठेले वाले की बात सुनते ही सुगंधा को जैसे एकदम से होश आया हो वह एकदम से हड़बड़ा कर उस ठेले वाले की तरफ देखने लगी,,, और अपने दोनों हाथ की तरफ देखी तो एकदम शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि उसका एक हाथ में अभी भी उंगली और अंगूठे को सटकर गोल छल्ला बना हुआ था और उसके बीचो-बीच तक बैगन घुसा हुआ था मानों जैसे किसी औरत की बुर में लंड घुसा हो,,,, अपनी स्थिति का भान होते ही सुगंधा एकदम शर्म से पानी पानी होते हुए अपने चारों तरफ देखने लगी लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे समय उस ठेले पर सिवाय ठेले वाले के ओर कोई नहीं था,,,,)
कककककक,,, कैसे दिए बैगन,,,,(हड़बड़ाहट और घबराहट भरे स्वर में सुगंधा बोली,,,)
अब आपसे क्या मेलजोल करना मैडम₹15 किलो है,,,, तुम 10 रुपया दे देना,,,,,,(कुटिल मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए वह ठेला वाला बोला,,, सुगंधा को अपने मन में उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इस समय एकदम लाचार नजर आ रही थी क्योंकि उसकी हरकत को वह अपनी आंखों से देख लिया था,, इसलिए उसकी बात सुनकर वह धीरे से बोली,,,)
ठीक है 1 किलो कर दो,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा बैगन को अपने हाथों से बिन कर निकालने लगी तभी वह ठेला वाला खुद बैगन के देर में से नीचे से एक मोटा तगड़ा और लंबा बैगन निकाल कर सुगंधा की तरफ दिखाते हुए बोला,,,)
यह वाला दीजिए मैडम तुम्हारे लिए एकदम फिट बैठेगा ,,,,,
(उसे ठेले वाले की बात सुनकर सुगंधा गुस्से से लाल पीली हुई जा रही थी लेकिन उसे कुछ कहने की उसमें हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी,,, सुगंधा उसे ठेले वाले के खाने के मतलब को एकदम सीधा,, समझ रही थी वह जानती थी कि वह किस सुर में बात कर रहा है,,, इसलिए सुगंधा उसे ठेले वाले की बात काटते हुए बोली,,,,)
कोई जरूरत नहीं है मैं ले रही हूं ना,,,
मैं तो तुम्हारी मदद कर रहा था मैडम इसे ले लेती तो और अच्छा होता तुम्हारे लिए ही अच्छा होता है एकदम मेरी तरह है,,,
क्या मतलब,,,!(एकदम गुस्से से उस ठेले वाले को आंख दिखाते हुए बोली,,,)
कुछ नहीं मैडम जी मैं तो अच्छा देख कर दे रहा था,,,
कोई जरूरत नहीं है मैं ले लूंगी,,,
कोई बात नहीं मैडम जैसी आपकी मर्जी आपका समान है जैसा ठीक लगे वैसा ही लेना,,,(वह ठेले वाला एकदम धीमे स्वर में बोला तो सुगंधा फिर से गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए बोली क्योंकि भले ही वह धीरे से बोला था लेकिन सुगंधा ने उसकी बात को सुन ली थी,,,)
क्या बड़बड़ा रहे हो शांति से बैठ नहीं सकते क्या,,!
ठीक है मैडम मैं कुछ कहां बोल रहा हूं,,,, और जल्दी करिए दूसरे ग्राहक को भी आने दीजिए,,,।
मैं रोक कर रखी हूं क्या,,,,
(इतना कहते हुए सुगंधा बैगन को तराजू में रखने लगी जब थोड़ा बहुत बैगन किलो में कम पड़ने लगा तो वह ठेले वाला इस बेगन को वापस तराजू में डाल दिया जिसे वह खुद चुनकर निकाला था इस बार सुगंधा इनकार नहीं कर पाई क्योंकि सुगंधा की नजरों ने उसे बैंगन की मोटाई और लंबाई को भांप ली थी,,, और बैगन को अपने थैले में लेकर वह अपने पर्स में से 10 का नोट निकाल कर उस ठेले वालों को थमा दी,,, और वहां से चलने लगी लेकिन उसे ठेले वाले से रहा नहीं गया और अपने मन की बात अपने होठों पर लाते हुए धीरे से बोला,,,)
ससहहह हाय क्या मस्त गांड है इसकी मिल जाती तो उसकी बुर में बेगन नहीं मैं अपना लंड डालकर चोदता,,,, ।
(उसके धीरे से कहीं हुई बात को सुगंधा सुन ली थी और अंदर ही अंदर बहुत क्रोधी भी हो रही थी लेकिन मुड़कर जवाब देने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह जानती थी कि ऐसे लोग से मुंह लगने का मतलब है कि अपनी ही इज्जत खराब करना ,, लेकिन इस बात से उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी कि वह खुले शब्दों में उसे चोदने की बात कर रहा था और उसे इस बात का मलाल था कि सड़क पर चलते हुए जितने भी मर्दों की नजर उसके खूबसूरत बदन पर उसकी चूचियों पर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर जाती थी वह लोग उसे चोदने का मन बना लेते थे और मन ही मन में उसके बारे में गंदे ख्याल भी करके मस्त हो जाते थे लेकिन एक उसका लड़का ही था जो घर में साथ होने के बावजूद भी उसके मन की बात को समझ नहीं पा रहा था,,,।
सुगंधा को उसे ठेले वाले की बात पर गुस्सा भी आ रहा था और हंसी भी आ रही थी साथ में उत्तेजना का अनुभव भी हो रहा था और अपने आप को वह दोषी भी ठहरा रही थी क्योंकि उसकी हरकत की वजह से ही उसे इतनी हिम्मत हुई थी बोलने की,,, सुगंधा अपने आप से ही बात करते हुए बोली मैं भी कितनी बुद्धू हूं कहीं भी कल्पना करने लगती हूं बैगन को देखते ही मुझे मेरे बेटे का लंड याद आने लगा भले ही मैं उसे देखी नहीं हूं लेकिन पेंट में जिस तरह का तंबू बना होता है उसे समझ में तो आता ही है कि कितना बड़ा और मोटा होगा,,,। बाप रे में कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मैं इस तरह की हरकत करूंगी कैसे अपने हाथ का गोल छल्ला बनाकर उसमें बैगन डाल रही थी निकल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे बुर में लंड घुस रहा हो,,,, अपने आप से ही इस तरह की मन में बात करते हुए सुगंधा के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और उसकी बुर गीली होने लगी,,,,,।
अपनी उलझन में से बाहर निकलने की कोशिश करते हुए वह सब्जी मार्केट में ही स्थित एक समोसे और जलेबी नाश्ते की दुकान पर पहुंच गई और वहां पर गरमा गरम समोसे के साथ-साथ जलेबी भी पैक करवाने लगी कि तभी उसकी नजर उसे समोसे की दुकान के ठीक सामने ठेले पर गई,,, वहां पर एक औरत खड़ी थी जिसे पीछे से भी वह पहचान गई थी वह उसकी सा अध्यापिका नूपुर थी,,, वह कोई सब्जी खरीद रही थी,, नूपुर को देखते ही सुगंधा के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह उससे मिलना चाहती थी उसे वह आवाज देने ही वाली थी कि उसके पास में खड़ा एक जवान लड़का जो कि अंकित की उम्र का था उसकी हरकत से वह एकदम से चौंक गई उसे लड़के ने अपनी हथेली को नूपुर के गोलाकार नितंबों पर रखकर ऊपर से ही हौले हौले से सहलाने लगा,,, इस दृश्य को देखकर तो उसकी हालत खराब हो गई सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सब्जी मार्केट के अंदर वह जवान लड़का,,, बेफिक्र होकर नूपुर की गांड पर अपना हाथ रखकर मजे लेता था वह जल्दबाजी में उसकी तरफ जाना चाहती थी लेकिन तभी उसकी आंखों ने जो देखा उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, उस जवान लड़के से नूपुर हंस हंस के बातें कर रही थी जबकि बातें करते समय भी उसे लड़के का हाथ नूपुर की गांड पर था,,,, यह नजारा सुगंधा को हैरान कर देने वाला था,,,।
जिस तरह से दोनों हंस हंस के बातें कर रहे थे उसे देखकर सुगंधा समझ गई थी कि दोनों एक दूसरे को जानते हैं लेकिन वह लड़का नूपुर का क्या लगता है यह नहीं मालूम पड़ रहा था,,,। उसे नजारे को देखकर सुगंधा के तन बदन में आग लगने लगी थी उत्तेजना के लहर रखने लगी थी उसकी बुर से पानी निकलना शुरू हो गया था क्योंकि जब वह लड़का नूपुर के साथ इस तरह की हरकत कर सकता है तो वह जरूर उसके साथ हम बिस्तर भी होता होगा उसे मजा देता होगा यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके पति का ख्याल आने लगा जो की नूपुर से कई ज्यादा उम्र का था और उसकी उम्र को देखते हुए और नूपुर की जवानी से भरी हुई किया को देखकर सुगंधा अपने मन में तर्क लग रही थी कि जरूर वह अपने पति से बिल्कुल भी खुश नहीं होती होगी इसीलिए तो जवान लड़के से मजा ले रही है,,,,।
सुगंधा का नाश्ता तैयार हो चुका था वह दुकानदार से समोसे और जलेबी या लेकर ठेले में डाल चुकी थी लेकिन वह उसी दुकान पर खड़ी होकर सबसे नजर बचाकर नूपुर की तरफ ही देख रही थी और उसके साथ जो लड़का था वह भी,, बहुत चालाक नजर आ रहा था और वैसे भी वह ठेला भी बड़े से घने पेड़ के नीचे था और शाम का वक्त होने पर धीरे-धीरे अंधेरा भी हो रहा था जब कोई उधर से गुजरता था तो वह लड़का नूपुर की गांड पर से अपने हाथ को हटा दे रहा था नूपुर को भी उस लड़के की हरकत से बहुत मजा आ रहा था और जैसे ही वहां कोई नहीं रहता था फिर से वह उसकी गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू कर देता था यह सब अपनी आंखों से देख कर सुगंधा की बुर कचोरी की तरह फूल गई थी,,,,।
सुगंधा तब तक वहां खड़ी रही जब तक कि नूपुर वहां से चली नहीं गई उस जवान लड़के के साथ सुगंधा का मन तो बहुत हो रहा था कि वह जाकर नूपुर से पूछे कि वह लड़का कौन है लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और वह अपने मन में ही तर्क लगाने लगी थी कि वह लड़का कौन होगा हो सकता है उसका प्रेमी हो या फिर भतीजा हो या फिर कोई रिश्तेदार हो जिसके साथ नुपुर इतना घुल मिल गई है,,,। लेकिन पल भर में ही वह इतना समझ गई कि भले ही वह अपने पति से खुश नहीं है लेकिन उसकी किस्मत से ज्यादा अच्छी है क्योंकि उसकी प्यास बुझाने वाला एक जवान लड़का उसके पास जो है ,, यहां तो हर रात करवट बदल कर ही गुजरती है,,,, नूपुर उसे लड़की के साथ जा चुकी थी और नूपुर उसे लड़के के साथ बहुत खुश भी नजर आ रही थी वरना उसके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती थी सुगंधा भी वहां से अपने घर की तरफ निकल गई,,,।
रात को सब काम से निपट करवा अपने कमरे में गई और ठेले में से लाए हुए उस मोटे तगड़े बैगन को जिसे वह अपने पलंग के नीचे छीपा दी थी उसे धीरे से निकाली और उसे हाथ में लेकर चारों तरफ घूम कर देखने लगी वाकई में उसका आकार एक मोटे तगड़े जानदार लंड से काम नहीं था जिसे देखकर ही उसकी बुर से पानी बहना शुरू हो गया,,,, देखते ही देखते सुगंधा अपने बदन पर से अपनी साड़ी कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी दोनों टांगों को खोलकर वह उसे बैगन के गोल वाले मोटे भाग को अपनी बुर पर रखकर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगी और थोड़ी देर में उसे समझ में आ गया कि उसकी बुर के छेद से बैगन के आगे वाला भाग कुछ ज्यादा मोटा था इस बात को समझते ही वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई और जल्दी से अपनी बिस्तर पर से उठकर वहां अलमारी के पास के टेबल के पास गई जहां पर सरसों के तेल की सीसी रखी हुई थी और वह उसमें से तेल को अपनी हथेली में गिराकर वापस सीसी को वही रखती और फिर उसे सरसों के तेल को बैगन पर अच्छी तरह से लगने लगी खास करके आगे वाले भाग पर ताकि चिकनाहट पाकर वह आराम से उसकी बुर में घुस सके,,,।
थोड़ी ही देर में सुगंध तैयार थी उसे बैंगन को अपनी बुर में डालने के लिए आज उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी थी क्योंकि उसके मन में सब्जी मार्केट का वही दृश्य याद आ रहा था जब वह जवान लड़का नूपुर की गांड को जोर-जोर से दबा रहा था,,, लेकिन आज उसकी कल्पना में उसका जवान बेटा नहीं बल्कि नूपुर थी और वह जवान लड़का था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि वह जवान लड़का कैसे नूपुर के साथ हम बिस्तर होता होगा कैसे उसे चोदता होगा वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना कर रही थी कि वह जवान लड़का नूपुर को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल लाल होठों को चुसता हुआ उसे बिस्तर पर लेटा देता होगा और फिर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देता होगा,,, और नूपुर भी उसे अपनी छाती से लगाकर उसे अपना दूध पिलाती होगी अपने हाथों से उसकी पेंट उतार कर उसके लंड को मुंह में लेकर चूस रही होगी,,,,।
और धीरे-धीरे वह जवान लड़का नूपुर की दोनों टांगों को खोलकर कुछ देर तक उसकी गुलाबी बुर को अपने होठों से लगाकर चाटता होगा और फिर दोनों टांगों को खोलकर अपने मोटे तगड़े लड को नूपुर की बुर में डालकर उसकी जा की चुदाई करता होगा,,, यही सब कल्पना करते हुए वह मोटा तगड़ा बैगन का उसकी बुर में घुस गया और अंदर बाहर होने लगा उसे खुद को नहीं पता चला लेकिन वह काफी उत्तेजित थी इसलिए जल्द ही उसकी बुर से मदन रस का तेज फवारा फूट पड़ा और वह शांत होकर नग्न अवस्था में ही सो गई,,,।
अंकित एक सीधा साधा और सुलझा हुआ लड़का था,,, वह खुद से औरतों के आकर्षण में पडना नहीं चाहता था लेकिन उसे ऐसा लगने लगा था कि जैसे सब कुछ अपने आप ही होते जा रहा है,,, औरतों को देखने का नजरिया उसका बिल्कुल भी गलत नहीं था लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह के हालात उसके सामने पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण औरतों की तरफ जवान लड़कियों की तरफ उनके उभरते हुए अंगों की तरफ बढ़ने लगे थे,,,। जिसकी शुरुआत अंकित के लिए अपनी खुद की सगी मां से ही हुई थी,,,,।
अंकित बेचैन रहने लगा था वह पहले की तरह बिंदास होकर गली मोहल्ले में सड़क पर नहीं घूम पता था क्योंकि अब उसकी नजर जाने अनजाने में राह चलती औरतों और जवान लड़कियों के अंगों पर चली ही जाती थी अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि औरतों के पास बड़ी-बड़ी चूचियां होती है जिसे देखकर उसके जैसे जवान लड़के पागल हो जाते हैं उनकी बड़ी-बड़ी गांड कैसी हुई साड़ी में और ज्यादा ऊपरी हुई नजर आती है जिसे देखने हर मर्द की चाहत होती है और उसे देखकर अपने मन में न जाने कैसे-कैसे कल्पना करते हैं जाने अनजाने में ही सही लेकिन अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि,,, क्यों उसके सभी दोस्त हमेशा लड़की और औरतों की ही बातें करते रहते हैं गली मोहल्ले की औरतों के बारे में गंदी-गंदी बातें कहते रहते हैं रोज उन लोगों के बातचीत का जरिया गली मोहल्ले की एक अलग ही औरत होती थी,,, पहले अंकित को अपने दोस्तों की तरह की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी इस तरह की बातें शुरू होने पर ही वह या तो वहां से उठकर चला जाता था या फिर उन्हें इस तरह की बातें ना करने के लिए बोलता था,,,, लेकिन आप हालात बदल चुके थे उसकी सोचने का रवैया बदल चुका था,,, और यह तब हुआ था जब सुमन के बारे में उसके दोस्त गंदी गंदी बातें कर रहे थे पहले तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन अचार देने के लिए जब वह उसके घर गया था और जिस तरह का वाक्या उसकी आंखों के सामने पेश आया था उसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था हालांकि अभी भी अंकित को इस बात पर पूरा विश्वास नहीं हुआ था कि सुमन का तीन चार लड़कों के साथ शारीरिक संबंध है वह तो उसके साथ कुछ आनंददायक हादसा हो गया था जिसके बारे में सोच सोच कर ही उसका लंड कब खड़ा हो जाता था उसे पता ही नहीं चलता था,,,,,,,
ऐसे ही एक दिन अंकित नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ बैठकर चाय पी रहा था और तभी उनमें से एक लड़का जो कि उनके ही ग्रुप का था वह गाली देते हुए बोला,,,।
अरे यार रमेश एक नंबर का मादरचोद है,,,
(उसकी बात सुनकर दूसरा बोला)
क्यों क्या हुआ,,,?
अरे यार रमेश के घर उसकी बुआ आई है देखने पर एकदम पटाखा लगती है दो बच्चों की मां है लेकिन कम से उसका कसा हुआ पसंद देख कर तो मेरा खुद का लंड खड़ा हो गया था,,,।
क्या बात कर रहा है यार,,,,
हां मैं सच कह रहा हूं,,,,
(उन दोनों की बात सुनकर बाकी लोगों के साथ-साथ अंकित के भी कान खड़े हो गए थे वह भले ही चाय की चुस्की ले रहा था लेकिन उसका पूरा ध्यान उन दोनों की बातें सुनने में लगा हुआ था तभी वह पहले वाला बोला,,,)
कल मैं यार उसे बुलाने के लिए उसके घर गया था दोपहर के समय था उसके घर पहुंचा तो दरवाजा खिड़की संबंध जबकि गर्मी का दिन है लोग दरवाजा ना सही लेकिन खिड़की तो खोल कर ही रखते हैं बाहर से दरवाजा लॉक नहीं था इसलिए मैं समझ गया कि अंदर कोई ना कोई तो होगा ही मुझे लगा आवाज देने पर जरूर कोई बोलेगा लेकिन जब मैं दरवाजे पर दस्तक देने लगा तो अंदर से बिल्कुल भी आवाज नहीं आ रही थी,,,,
फिर क्या हुआ,,,?(दूसरे वाले ने आश्चर्यचक जताते हुए बोला,,,)
अरे फिर क्या मुझे उससे जरुरी किताबें लेनी थी होमवर्क पूरा करने के लिए इसलिए मैं पूरी कोशिश करने लगा कि कोई दरवाजा खोल दे या कोई अंदर से जवाब ही दे दे लेकिन कोई आवाज ही नहीं अंदर से आ रही थी इसलिए मैं दरवाजे को छोड़कर खिड़की के पास गया कि मुझे लगा कि शायद खिड़की तो पूरी होगी लेकिन देखा तो खिड़की भी बंद थी लेकिन अंदर इतना तो महसूस हो ही रहा था कि कोई ना कोई तो जरूर है और जब मैं खिड़की से जो की थोड़ी सी खिड़की में दरार थी उसमें से नजर गडाकर अंदर की तरफ देखा तो मेरा होश उड़ गया,,,
अरे ऐसा क्या देख लिया जो तेरा होश उड़ गया,,,(उनमें से तीसरे वाले ने बोला सबके कान खड़े थे उसकी बात सुनने के लिए सब अंदर से बेचैन हो रहे थे कि वह क्या बताता है और यही हाल अंकित का भी था हालांकि अभी पूरी बात वह सुन नहीं पाया था लेकिन फिर भी उत्सुकता के कारण उसका लंड हरकत में आना शुरू हो गया था,,,,)
अरे यार क्या बताऊं जब मैं खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगा तो अंदर तो ज्यादा उजाला नहीं था लेकिन फिर भी दोपहर का समय होने से इधर-उधर से अंदर उजाला थोड़ा बहुत नजर आ ही रहा था और मैंने देखा कि बिस्तर पर से एक औरत उठकर दूसरी तरफ जाने लगी या का को की अंदर बाथरूम की तरफ जाने लगी मुझे तो ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दिया बस उसकी बड़ी-बड़ी गांड दिखाई दी एकदम नंगी वह पूरी तरह से नंगी थी मेरे तो होश उड़ गए और सही बताऊं तो मेरा तो लंड भी खड़ा हो गया सच कहूं तो पहली बार किसी औरत को मैं एकदम नंगी देख रहा था ,,,,,
(वह जिस तरह से बता रहा था बताते हुए उसकी हालत खराब हुई जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सुनने वाले की तो हालात और ज्यादा खराब हो गई थी अंकित ने सभी दोस्तों के पेट की तरफ देखा तो वह हैरान हो गया क्योंकि सबकी पेट के आगे तंबू बना हुआ था उसकी बात सुनकर सब की हालत खराब थी सबका लंड खड़ा हो गया था उसकआ खुद का भी लंड खड़ा था,,, उसकी बात सुनकर एक आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)
क्या कह रहा है यार क्या सच में तूने इस तरह का नजारा देखा,,,
हां यार कसम खा कर कहता हूं मैं बिल्कुल भी झूठ नहीं कह रहा हूं मुझे तो ऐसा लगा कि शायद रमेश की मम्मी पापा है लेकिन जब मैं बिस्तर पर नजर दौड़ी तो मैं हैरान रह गया क्योंकि बिस्तर पर तो खुद रमेश भाई का नंगा उसका लंड पानी छोड़ चुका था,,,,।
क्या,,,,(एक साथ दो तीन लड़के बोल पड़े क्योंकि सबको हैरानी हुई थी)
हां यार बिस्तर पर रमेश था एकदम नंगा मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था और मुझे झटका तो इस बात का लगा की कहानी वह औरत उसकी मां तो नहीं थी मैं तो एकदम हैरान हो गया मैंने तो सिर्फ सुना था मुझे लगा कि मैं आज अपनी आंखों से देख लिया कि एक बेटा कैसे अपनी मां की चुदाई करता है,,,,,, (इस बात को सुनते ही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत चेहरा नजर आने लगा,,, उसकी मां की साड़ी में कसी हुई गांड नजर आने लगी उसका भरा हुआ स्तन नजर आने लगा जिसे वह नजर भर कर कई बार देख चुका था वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
सच कह रहा हूं यार मेरी तो हालत खराब हो गई थी मेरा लंड सच में पानी छोड़ने वाला था किसी तरह से मैं अपने आप को संभाल कर रखा था,,, मैं तो खिड़की से नजर हटा ही नहीं रहा था मैं देख पा रहा था कि रमेश उसी औरत के पेटीकोट से अपने लंड को साफ कर रहा था,,, और अंदर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी मैं समझ गया कि वह अपनी बुर धोने के लिए गई है,,,।
बाप रे क्या सच में रमेश अपनी मां को चोदता है और उसकी मां उससे चुदवा भी लेती है,,,
हां यार चुदवा लेती होगी देखा नहीं है उसका बाप कितना बीमार रहता है मरियल सा है और उसकी मां अभी भी पूरी जवानी से भरी हुई है बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची मुझे मिल जाए तो मैं खुद ही रात भर उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,(उनमें से एक लड़के ने अपने मन की भड़ास निकलते हुए बोला,,,)
कसम से जैसा तू सोच रहा है मेरा भी ख्याल बिलकुल ऐसा ही है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है काश मैं भी रमेश की जगह होता तो मजा आ जाता,,,(उनमें से दूसरे लड़के ने भी उसे लड़के के सुर में सुर मिलाते हुए बोला तो तभी उसकी बात सुनकर तीसरा लड़का बोला)
तो बन जाना तू भी रमेश तेरी मां कौन सी कम है लाली पाउडर लगाकर कितनी गजब लगती है,,, तेरी मां को भी देख कर मेरा खडा हो जाता है,,,।(इनमें से उसका ही दोस्त चुटकी लेते हुए बोला तो वह भी मजे लेते हुए बोला,,,)
लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है,,,
तो कोई बात नहीं अदला बदली कर लेते हैं तो मेरी मां को मैं तेरी मां को,,,,।
(अंकित हैरान था क्योंकि पहले दूसरों की मां के बारे में बातें होती थी लेकिन आज यह दोनों अपनी ही मन के बारे में गंदी बातें कर रहे थे और वह भी एकदम खुश होकर दोनों के चेहरे पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं था जहां पहले अंकित इस तरह की बातें शुरू होने पर वहां से चला जाता था या इस तरह की बातें करने से मना कर देता था वही आज अंकित वहीं बैठकर चाय की चुस्की के साथ-साथ उन लोगों की बातों का आनंद भी ले रहा था और उसे मजा भी आ रहा था वह अपने मन में उसे दिन की बात सोचने लगा जब क्रिकेट में हर जाने के बाद उसका दोस्त उसे गंदी-गंदी गालियां दे रहा था उसकी मां के बारे में उसकी मां को चोदने के लिए बोल रहा था ना जाने क्यों ना चाहते हुए भी उसकी आंखों के सामने उसे तरह का दृश्य अपने आप नजर आने लगा जैसा कि वह अंकित को गाली दे रहा था कि तेरी मां को चोद दूंगा,,, और उसकी आंखों के सामने कल्पना चित्र उभरने लगा कि कैसे उसका दोस्त उसकी मां की साड़ी उठाकर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा है इस तरह की दृश्य के बारे में सोचते ही अंकित एकदम से अपने आप पर ही गुस्सा होने लगा कि यह क्या सोच रहा है मैं ना चोद दूं उसकी मां को,,,, सभी की बातों को सुनने के बाद वह लड़का बोला,,,,)
यार मैं भी यही सोच रहा था अगर बिस्तर पर से उठकर जो औरत बाथरूम की तरफ गई है अगर सच में उसकी मां होगी तो मैं भी ट्राई करूंगा उसकी मां को चोदने को क्योंकि मैं तो सब कुछ देख चुका था बड़े आराम से उसकी मां मुझे दे देती,,,, लेकिन अंदर कमरे में उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बुआ थी जो कुछ दिनों के लिए उसके घर आई थी अगर मैं उसकी मां को सामने से आई हुई ना देखा तो मुझे ऐसा ही लगता कि रमेश अपनी मां को चोद रहा था,,,।
धत् ,,, सारा मजा किरकिरा कर दिया,,, मुझे तो लग रहा था कि रमेश अपनी मां को ही चोद रहा था,,,,(उनमें से एक लड़का थोड़ा सा निराशा दिखाकर के बोला,,,)
मुझे भी तो ऐसा ही लग रहा था लेकिन जरा यह तो सोचो हम लोग जहां देख भी नहीं पाते हैं बुर को वही रमेश अपनी बुआ की जमकर चुदाई कर रहा है सोचो अपने और रमेश में कितना फर्क है उसकी किस्मत कितनी बुलंदियों पर है और हम लोग अभी भी सिर्फ याद करके हिला के काम चलाते हैं,,,,
हां यार बात तो सही कह रहा है हम लोगों से अच्छा तो रमेश ही है जो बुर का आनंद उठा रहा है,,,।
(कुछ देर तक वहीं बैठने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर की तरफ जाने लगे तो उन लोगों के जाने के बाद अंकित भी उठकर अपने घर की तरफ जाने लगा तभी उसे रास्ते में सुमन आगे आगे जाती दिखाई दी उसके हाथ में सब्जियों का खेला था ऐसा लग रहा था कि वह मार्केट से सब्जी खरीद के आ रही थी अंकित की नजर सुमन के थैले के साथ-साथ उसके पिछवाड़े पर भी चली गई थी जिसकी थिरकन देखकर उसकी टांगों के बीच हलचल होने लगी थी,,, क्योंकि यह वही पिछवाड़ा था जो अनजाने में ही उसके लंड से एकदम सच गया था जिसकी गर्मी उसे अभी तक अपने लंड पर महसूस होती थी,,,, वैसे तो अंकित किसी भी लड़की से बात करने में बहुत शर्माता था लेकिन न जाने उसमें कहां से हिम्मत आ गई और वह पीछे से आवाज लगाते हुए बोला,,,)
सुमन दीदी,,,,ओ सुमन दीदी,,,,,( सुमन को पीछे से आ रही आवाज जानी पहचानी लगी तो वहां अपनी जगह पर खड़ी होकर पीछे की तरफ देखने लगी और पीछे से आ रहे हैं अंकित को देख कर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह एकदम से खुश होते हुए बोली,,,)
अरे अंकित तुम यहां क्या कर रहे हो,,,?
कुछ नहीं दीदी बस दोस्तों के साथ थोड़ा घूम रहा था तुम्हें जाता हुआ देखा तो तुम्हारे पीछे आ गया,,,
ओहहहह तो यह बात है लड़कियों का पीछा किया जा रहा है,,,,(नजर को गोल-गोल घूमाते हुए वह बोली,,,)
नहीं दीदी मैं भला लड़कियों का पीछा क्यों करूंगा मैं यह सबसे दूर ही रहता हूं वह तो तुम थैला लाकर जा रही थी इसलिए आ गया,,, लाए में ले चलता हूं,,,
(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके हाथ से थैला लेने लगा और सुमन भी उसे इनकार नहीं कर पाई,,, दोनों बातचीत करते हुए आगे आगे चलने लगे अंकित केलिए यह पहला मौका था जब वह किसी लड़की से इस तरह से बातें कर रहा था और बातचीत का केंद्र बिंदु केवल पढ़ाई पर ही था पैसे तो लड़कियों से बातचीत करने का अनुभव अंकित के पास बिल्कुल भीनहीं था,,,, लेकिन सुमन खेली खाई लड़की थी लड़कों को अपनी बातचीत के जाल में फसना उसे अच्छी तरह से आता था वह चाहती तो पहली बार में ही अंकित को अपनी बातों के जाल में फंसा कर अपनी जवानी का जलवा दिखा कर उसे बिस्तर पर ले आई लेकिन वह धीरे-धीरे अंकित के साथ आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि पहली बार में ही वह अंकित के मन को पढ़ चुकी थी अंकित सीधा-साधा था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी और इसीलिए उसकी जवानी से जी भरकर खेलना चाहती थी बातों ही बातों में दोनों का घर आ चुका था और अंकित खेला उसके हाथ में पकडाते हुए मुस्कुरा कर अपने घर में आ चुका था और शाम ढलने की वजह से खाना बनाने की तैयारी हो रही थी,,,,।
अंकित हाथ में धोकर चाय पीकर पढ़ने के लिए अपने कमरे में चला गया था लेकिन उसका मन पढ़ने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था क्योंकि शाम कुछ इस तरह से उसके दोस्त ने रमेश की बात ,,,, बताया था उसे सुनकर उसके होश उड़ गए थे बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके दोस्त के बताए अनुसार कि उसे खिड़की से केवल उसे औरत की बड़ी-बड़ी गांड दिख रही थी वही नजर वह अपने मन में कल्पना कर रहा था कि कैसे रमेश बिस्तर पर नंगा लेट होगा और उसकी बुआ एकदम नंगी बिस्तर पर से उतरकर बाथरूम की तरफ जा रही होगी तब तक रमेश अपना काम खत्म कर चुका था इस बात को सोचकर ही उसके बदन में सुरसुराहट होने लगी और उसके दोस्त के बताएं अनुसार उसे एहसास होने लगा कि वाकई में रमेश की किस्मत उन लोगों से कुछ ज्यादा ही अच्छी थी जो इस उम्र में बुर चोदने के लिए मिल रहा था वह अपनी बुआ को चोद रहा था और उन लोगों को तो आज तक बुर के दर्शन भी नहीं हुए थे,,,,,, खैर जैसे तैसे करके रात गुजर गई,,,,।
सुबह उठकर कहां नहा कर बाथरूम से टावल लपेटकर अपने कमरे में चला गया और दरवाजे को बंद कर लिया,,,,, वह इस बात से निश्चिंत था,, की दरवाजा उसने बंद कर दिया है और कोई गीत गुनगुनाते हुआ वह निश्चित होकर अपने बदन से टावल निकाल कर बिस्तर पर फेंक दिया और एकदम नंगा हो गया,,,, नंगा होने के बाद सहज रूप से उसकी नजर अपने लंड की तरफ चली गई क्योंकि सुषुप्त अवस्था में भी गजब का लग रहा था,,,। और वह अनजाने में ही उसके तार को छेड़ते हुए उसे पर हाथ लगाकर थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और वापस अपने हाथ को वहां से हटा लिया लेकिन इतना उसके लिए काफी था,,,, उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा,,,।
और वह अपने कमरे में खड़े होकर,,, अपने लंड की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था उसे यह नजारा अच्छा लग रहा था फिर वह,,, अलमारी के पास जाकर अपने कपड़े ढूंढने लगा,,,, लेकिन इस दौरान लंड खड़ा होने की वजह से ऊपर नीचे हिल रहा था जिसे देखकर वह आनंदित हो रहा था,,, वहीं दूसरी तरफ नाश्ता तैयार कर चुकी सुगंध देर होने की वजह से अपने बेटे को बुलाने के लिए उसके कमरे की तरफ आगे बढ़ गई,,,
वह पूरी तरह से सहज थी और औपचारिक रूप से वह अपने बेटे के कमरे के पास पहुंच गई लेकिन दरवाजा बंद होने की वजह से वह आवाज नहीं लगाई बल्कि अनजाने में ही खिड़की की तरफ आ गई,,, खिड़की का एक पट बंद था और एक पट खुला हुआ था,,,।
वह खिड़की पर खड़ी होकर अंदर आवाज लगाने ही वाली थी कि अंदर का नजारा उसकी आंखों सामने आ गया और अंदर का नजारा देखकर वह एकदम से मंत्र मुग्ध हो गई वह अंतर साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसका बेटा कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगा खड़ा था,,,, और उसके हाथ में उसका अंडरवियर था वह सामने की तरफ मुंह ना करके बगल की तरफ मुंह करके खड़ा उसके हाथों में उसकाअंडरवियर था जिसे वह पहनने की तैयारी में था सुगंधा की हालत एकदम खराब होने लगी अपने बेटे को नग्न अवस्था में देखकर बरसों बाद वह अपने बेटे को नंगा देख रही थी इन वर्षों में काफी कुछ उसके बदन में बदल चुका था उसके बदन में गठीलापन आ गया था कसरती बदन हो चुका था और जैसे ही उसकी नजर नीचे की तरफ गई तो वहां का नजारा देखकर तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि वह क्या देख रही है उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह कोई सपना देख रही है क्योंकि उसे साफ तौर पर दिख रहा था कि उसके बेटे का लंड एकदम अपनी औकात में आकर खड़ा था और कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था अपने बेटे के लंड को देखकर उसे गधा का लंड याद आ गया,, । जिसे वह मार्केट जाते समय बहुत बार खुले मैदान पर देख चुकी थी लटकता हुआ,,,,।
सुगंधा को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि इतने मोटे और तगड़े लंबे लंड के बारे में उसने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, एक बार इसी कमरे में वह अपने बेटे के तंबू को देखकर उसे पर हाथ लगाकर पकड़ने की कोशिश जरूर की थी लेकिन तब भी वह अंडरवियर में था लेकिन आज अंडरवियर के बाहर अपने बेटे के हथियार को देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल होने लगी थी और वह पानी छोड़ने लगी थी,,,,, सुगंधा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था अपने हाथ में अंडरवियर लेकर खड़े अंकित की हरकत को वह देख रही थी और अंकित भी अनजाने में ही अपने लंड को बार-बार हाथ से पकड़ कर ऊपर नीचे करके दिला दे रहा था उसकी यह हरकत सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना भर रही थी अंकित को तो पता भी नहीं था की खिड़की पर उसकी मां खड़ी होकर सब कुछ देख रही है वरना वह कमरे में इस तरह से नंगा होने की हिम्मत ही ना करता,,,।
अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे और खड़े लंड को देखकर सुगंधा की बर पानी छोड़ रही थी अब तो उसकी इच्छा और बढ़ गई थी अपने बेटे के लैंड को अपनी बुर में लेने के लिए अपने बेटे के लैंड को देखते ही अपने स्वर्गवासी पति के लंड के बारे में उसे पूरा याद आ गया जिसके लंबाई चौड़ाई और मोटी सेवा अच्छी तरह से बाकी थी जिसे वह अपनी बुर में ले चुकी थी,,, और इसीलिए उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके पति का लंड तो उसके बेटे के लंड के बच्चे के बराबर था और वह अपनी मन में कल्पना करने लगी कि वाकई में जब उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी कई हुई बुर में जाएगा तो कैसा धमाल मचाएगा इस बात से ही उसकी बुर पानी पानी हो गई थी,,,।
उसकी कल्पनाओं का घोड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा था सुगंध अपने बेटे को लेकर अपने मन में पल भर में ही बहुत सारी कल्पना कर चुकी थी लेकिन तभी यह खूबसूरत दृश्य पर पर्दा डालते हुए उसका बेटा अंडरवियर को अपनी दोनों टांगों में डालकर उसे ऊपर की तरफ खींचकर अपने खड़े लंड को हाथ से पड़कर अपनी अंडरवियर में छुपाने की कोशिश करने लगा जो की नाकामयाब साबित हो रहा था अंदर डालने पर भी उसमें गजब का तंबू बना हुआ था,, ।
वैसे तो सुगंध का मन खिड़की छोड़कर कहीं जाने को नहीं हो रहा था लेकिन अब वहां खड़ा रहना उचित नहीं था इसलिए वह मां महसूस कर उसे बिना आवाज लगाई वापस किचन में आ गई हो गहरी गहरी सांस लेने लगी आज उसकी मां पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था क्योंकि आज पहली बार उसने अपने बेटे के लंड के दर्शन जो किए थे,,, जो की बेहद अद्भुत अविस्मरणीय और अतुल्य था,,,,।
सुगंधा के मन में मार्केट में नूपुर के साथ जो लड़का था उसे लेकर उसके मन में बड़ी द्विधा थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह लड़का था कौन रिश्ते में क्या लगता था जिस तरह की उसकी हरकत थी उसे देखते हुए सुगंधा अपने मन में ही तर्क लग रही थी कि हो ना हो नूपुर के पति की उम्र को देखकर जरूर नूपुर ने अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए कोई जवान लड़का तलाश रखी है वरना वह उसके साथ मार्केट में ही इस तरह की हरकत ना करता,,,। नूपुर के बारे में सोच-सोच कर उसका मन अजीब सी उलझन में फंसा हुआ था,,,।
जैसे तैसे करके दो-तीन दिन गुजर गए थे वह नूपुर से पूछ नहीं पाई थी,,,,, पूछने की तो सुगंधा ने बहुत कोशिश की थी लेकिन हर बार उसके सवाल उसके होठों पर आकर रुक जाते थे उसे हिम्मत नहीं हो रही थी उसे लड़के के बारे में पूछने की कि उस लड़के से उसका क्या रिश्ता है,,,, लेकिन अब सुगंध को नूपुर में बदलाव दिखाई दे रहा था जहां नूपुर कोई कोई सी रहती थी वहीं अब उसके चेहरे पर खुशहाली और प्रसन्नता के भाव साफ नजर आते थे,,,,। और यही बदलाव सुगंधा के शक के कारण को और ज्यादा मजबूत कर रहा था,,,,। हालांकि उसे लड़के को लेकर जिस तरह की उत्सुकता सुगंधा के मन में थी इस प्रकार की चाहत वह अपने बेटे से रखती थी वह चाहती थी कि उसका बेटा भी उसके साथ इस तरह की हरकत करें जैसा कि वह लड़का नूपुर के साथ कर रहा था,,,,। और कभी-कभी तो वह उस मार्केट वाले दृश्य की कल्पना अपने साथ करने लगती थी,,,, आंखों को बंद करके वह उस दृश्य के बारे में सोचने लगती थी,,,वह, एहसास करने लगती थी कि कैसे उसका लड़का ठीक उसके बगल में खड़ा होकर सब्जी खरीदते समय अपनी हथेली को उसकी ऊपरी हुई गांड पर रखकर लड़के-हल्के सहला रहा है,,, और उसकी इस हरकत पर वह पूरी तरह से उत्तेजित और रोमांचित हो उठती थी,,,, उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगती थी मार्केट मैं इस तरह की हरकत करता देख वह अपने बेटे को ,, गुस्से से आंख दिखाती थी जो की उसका गुस्सा ऊपरी मन से था अंदर से वह अपने बेटे की हरकत का पूरा आनंद ले रही थी और कल्पना में भी अपनी मां की आंख दिखाने पर भी अंकित अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रहा था और नितंबों की गोलाई के निचले भाग पर अपनी हथेली रखकर वहां अपनी दो उंगली को साड़ी के ऊपर से ही उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर वाली जगह पर धंसाने की कोशिश करता था और अपनी मनसा में वह कामयाब भी हो जाता था उसकी हरकत से सुगंध अपने बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार महसूस करके पूरी तरह से पानी पानी हो जाती थी और अपने आप पर कबूल ना कर पाने की स्थिति में वह घर पर आते ही सब्जी के थेले को एक तरफ फेंक कर,,, वह खुद अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपने बेटे को बिस्तर पर गिरा कर खुद उसके लंड पर सवार हो जाती थी और फिर अपनी मनमानी करते हुए अपनी जवानी का लावा पूरी तरह से निकाल कर शांत हो जातीथी,,,, इस तरह की कल्पना करके उसके बाद में और ज्यादा रोमांच पैदा हो जाता था लेकिन उसकी उत्सुकता और बढ़ने लगी थी उस लड़के के बारे में जानने के लिए,,,,।
दूसरी तरफ जब से सुमन की सच्चाई अंकित को पता चली थी और अंकित का जिस तरह से उसके घर पर जाना हुआ था और जिस तरह से उसके जवानी के दर्शन उसे करने को मिले थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण सुमन की तरफ और फिर दूसरी औरतों की भी तरफ बढ़ने लगा था एक तरह से औरतों को देखने का रवैया पूरी तरह से उसका बदल गया था अब वह आने जाने वाली औरतों को ताड़ता रहता था खास करके उसकी नजर उन औरतों की चूचियों पर रहती थी और उनके गोलाकार नितंबों पर और हर एक औरत के अंगों के बारे में वह उनकी नग्न अवस्था को लेकर कल्पना किया करता था,,,,।
ऐसे ही एक दिन वह चाय की दुकान पर अपने दोस्तों के साथ बैठा हुआ था तभी उसके दोस्त ने धीरे से उसके कान में बोला,,,।
तुझे एक चीज दिखाउं बहुत गजब की है,,,
क्या है बता,,,(अंकित उत्सुकता दिखाते हुए बोला)
लेकिन जाने दे तुझे दिखाने का कोई मतलब नहीं है तो बाद में गुस्सा करेगा तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा,,,
लेकिन यह तो बता चीज क्या है,,,(उसे चीज के बारे में उत्सुकता दिखाते हुए अंकित बोला जिस तरह से उसने बोला था कि तुझे दिखाने का कोई मतलब नहीं है तू नाराज हो जाएगा इतना तो उसे समझ में आ गया था कि वह जो कुछ भी चीज है वह गंदी है इसलिए तो उसकी उत्सुकता और ज्यादा बढ़ गई थी जब उसका आकर्षण औरतों की तरफ नहीं था तब अगर उसके दोस्त ने उसे कुछ दिखाने की बात करता तो शायद वह इनकार कर देता और इतना उस पर ध्यान भी नहीं देता लेकिन अब हालात बदल चुके थे धीरे-धीरे अंकित भी उन लड़कों की तरह ही होता जा रहा था,,,,)
एक गंदी किताब है लेकिन तुझे दिखाने का कोई फायदा नहीं है तू रहने दे मैं दूसरे को दिखा दूंगा,,,।
(अब तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई वह उसे उस किताब को देखने की उत्सुकता और ज्यादा बढ़ने लगी इसलिए वह बोला,,,)
दिखा तो सही में कुछ नहीं कहूंगा,,,,
नहीं यार तेरा कोई भरोसा नहीं है,,,, तू रहने दे,,,,
जब दिखाना ही नहीं था तो बताया क्यों,,,?(अंकित उस पर गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,,) अब तु मुझसे बात मत करना,,,,(इतना कहकर वह उठने वाला था कि उसके दोस्त ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने पास बैठाते हुए बोला,,,)
यार तू गुस्सा बहुत जल्दी हो जाता है और वैसे भी तू इस तरह की चीज देखना पसंद नहीं करता इसलिए मैं कह रहा था,,,, तू नाराज हो जाता है तो मजा नहीं आता,,,,(सूरज उसे समझाते हुए बोला,,,)
देख ऐसा नहीं है कि मैं उसे देखने के लिए तड़प रहा हूं लेकिन मुझे भी तो पता चले की लड़की किस तरह की चीजे देखते हैं,,,(अंदर से तो अंकित का मन बहुत कर रहा था उसके हिंदी चीज को देखने के लिए लेकिन वह ऊपर से सिर्फ सहज रूप से बता रहा था कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता,,)
अरे सच कह रहा हूं अंकित तू देखेगा तो पागल हो जाएगा बहुत मजा आएगा मैं भी पहली बार ही देख रहा हूं,,,,
अच्छा दिखा,,,,,(अंकित उत्सुकता दिखाते हुए बोला,,,)
पागल हो गया है यहां नहीं चल दीवार के पीछे चलते हैं,,,
ठीक है,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह से खड़ा हो गया और सूरज भी अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला,,)
रुक जरा एक मीठा पान ले लेते हैं उसमें से आधा-आधा खा लेंगे,,,
ठीक है,,,,(और इतना कहने के साथ ही दोनों पास में पान की दुकान पर चले गए और पान की दुकान पर पहुंचते ही सूरज बोला,,)
और पांडे चाचा जरा एक मीठा पान लगाना तो,, (इतना कहने के साथ ही सूरज पान के गले पर टीका लेकर खड़ा हो गया और सड़क की तरफ देखने लगा,,,, तो वह पान वाला बोला,,,)
क्या हुआ बबुआ तुम्हारे पापा नजर नहीं आ रहे हैं,,,,
अरे वो कुछ दिनों के लिए गांव गए हैं इसलिए अगले सप्ताह आने ही वाले हैं,,,,
चलो ठीक है,,,, एक ही बनाना है ना,,,,
हां चाचा एक ही पान,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज की नजर सामने सड़क से गुजर रही है खूबसूरत औरत पर गई जो की लंबाई चौड़ाई में काफी मजबूत थी और उसकी चूचियां भी बड़ी-बड़ी थी और गांड भी तरबूज की तरह निकली हुई थी उसे सूरज घूरता ही रह गया तो यह देखकर उस पान वाले ने बोला,,,)
क्या देख रहे हो बबुआ,, अपने शर्मा जी की बड़ी साली है बंबई से आई है साली की गांड देखकर मेरी खुद की धोती तन जाती है,,,,
क्या बात कर रहे हो चाचा,,,,(सूरज एकदम से उत्सुकता दिखाते हुए बोला उस पान वाले की बात सुनकर अंकित भी हैरान था,,,, उस पान वाले की उम्र तकरीबन 45 से 50 के बीच में होगी,,, इस उम्र में भी उसका देखने का नजरिया बिल्कुल भी नहीं बदला था हर एक औरत को वह प्यासी नजरों से ही देखता होगा इतना तो अंकित समझ ही गया था और इस बात से हैरान भी था कि छोटे-बड़े सभी मर्द औरतों की ताकत झांकी में लगे रहते हैं एक वही पूरी दुनिया में शरीफ बनने चला था,,,,।)
अरे सही कह रहा हूं बबुआ हम तो दिन रात यहीं बैठकर यही करते रहते हैं,,,, देखो तो सही उसकी गांड कैसी निकली हुई है ऐसा लगता है कि जैसे साड़ी में तरबूज डाल दिया गया है,,,। देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,।
सही बात कह रहे हो चाचा वैसे एकदम कमाल की औरत है तभी तो उसे पर नजर पड़ी तो उसे देखता ही रह गया,,,,।
अरे तुम तो आज देख रहे हो बबुआ,,, जिस दिन से आई है उसे दिन से देख रहा हूं सुबह-सुबह टहलने के लिए निकलती है तब देखो नजरा,,, सुबह में केवल मेक्सी पहनी रहती है और एकदम कसी हुई ,,, उसका हर एक अंग एकदम साफ-साफ उभरा हुआ नजर आता है ऐसा लगता है कि माने जैसे उसने कुछ पहनी ही ना हो,,,,(वह पान वाला सूरज को पान थमाते हुए बोला,,,, उसकी आंखों में औरतों के प्रति आकर्षण और हवस एकदम साफ नजर आ रही थी,,,)
चाचा तुम्हारी बातें सुनकर तो मेरी हालत खराब हो गई है लगता है सुबह-सुबह उठना पड़ेगा,,,,
अरे बबुआ वह कहावत सुने हो ना जो सोवत है वह खोवत है और जो जागत है वह पावत है,,,, बिल्कुल ऐसा ही है,,,,।
बिल्कुल सही कह रहे हो चाचा,,,,,(इतना कहकर सूरज उसे औरत को गली के किनारे तक देखता रह गया जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गई,,,, ऐसा नहीं था कि केवल पान वाला और सूरज ही उसे औरत को देखकर मजे ले रहे थे आज अंकित को भी उसे औरत को देखने में मजा आ रहा था,,,, उसे औरत को देखकर अंकित अपनी मां ही मन में सोच रहा था कि वाकई में उस औरत की गांड और चूचियां दोनों बड़ी-बड़ी थी,,, और यहां तक की अंकित तो अपने मन में उसे औरत को नग्न अवस्था में कल्पना भी कर लिया था कि उसके अंग कैसे नजर आते होंगे,,,, हालांकि अंकित अभी तक औरतों के खूबसूरत अंगों से अच्छे से रूबरू नहीं हो पाया था इसलिए कल्पना करने में भी उसे थोड़ी दिक्कत महसूस होती थी लेकिन मजा बहुत आता था जाते-जाते सूरज ने उस पान वाले से बोला,,,)
चाचा यह सब बातें पापा से मत बताना,,,,
अरे बबुआ,,,, हमें हमारा धंधा थोड़ी ना खराब करना है यह सब अगर हम घर वालों को बताते रह गए तो फिर हमारे पान की दुकान पर आएगा कौन,,,,
हां चाचा यह बात तो है सही कहा तुमने अच्छा तो मैं चलता हूं,,,,
(ठीक है बबुआ और इतना कहकर वह हंसने लगा,, , अंकित को आज पूरा यकीन हो गया था कि दुनिया में ऐसा कोई भी मर्द नहीं है जो औरतों के प्रति गंदी नजर ना रखता हो छोटे बड़े सब औरतों को ताकने झांकने में ही लगे हुए थे,,,,, पान की दुकान बड़ी सी दीवार से सटी हुई थी जिसके पीछे उन दोनों को जाना था और दोनों तकरीबन 4 फीट की दीवार को लाख कर दूसरी और उतर गए थे जहां पर खेलने का मैदान था लेकिन इस समय वहां कोई नहीं था और वह दोनों एक बड़े से पेड़ की छाया में जाकर बैठ गई और फिर सूरज अपनी जेब में रखे हुए उस गंदी किताब को धीरे से निकाला,,,, उसे किताब के मुख्य पृष्ठ को देखकर ही अंकित का लंड अंगड़ाई लेने लगा,,,।
शर्मा जी की बड़ी साली को ताड़ने के बाद ,, उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर वैसे ही अंकित उत्तेजित हो चुका था। सूरज का भी यही हाल था,,, सूरज और अंकित दोनों दीवाल लांघकर दूसरी और कूद गए थे,,, यहां पर क्रिकेट खेला जाता था जो कि हमेशा मोहल्ले के लड़कों से यह मैदान भरा रहता था,,, लेकिन दोपहर का समय होने की वजह से कोई भी नहीं था और यही दोनों के लिए अच्छा भी था दोनों ने एक बड़े से पेड़ के नीचे अच्छी सी जगह देखकर बैठ गए,,,।
सूरज अपनी जेब में से वह गंदी सी चीज निकालता है इससे पहले ही अंकित बोला।
यार सूरज अगर पान वाले पांडे जी ने तेरे पापा से सब कुछ बता दिया तो।!
क्या बता दिया तो,,(सूरज आश्चर्य से अंकित की तरफ देखते हुए बोला)
वही कि हम दोनों पान की दुकान पर खड़े होकर शर्मा जी की बड़ी साली को देख रहे थे।
अच्छा वो,,, तू चिंता मत कर पांडे चाचा किसी से भी नहीं बताएंगे क्योंकि दिन भर हम लोग वेट कर वहां से कुछ ना कुछ खरीद कर खाते ही रहते हैं अगर बता दिए तो उनकी बिक्री भी जाती रहेगी और वैसे भी तो वह भी तो देख कर मजा ले रहा था। वैसे सच में शर्मा जी की शादी थी एकदम कमाल अगर औरत मिले तो बिल्कुल उसकी तरह ही जो बिस्तर में एकदम धमाल मचा दे देख नहीं रहा था कितनी भरी हुई बदन की थी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां तरबूज जैसे बड़े-बड़े गांड कसम से चोदने में मजा ही आ जाए।
(सूरज की बातें सुनकर अंकित केतन बताने में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे सूरज की कही बातें बड़ी अच्छी लग रही थी और वैसे भी सूरज जो कुछ भी कह रहा था अंकित के नजरिया सेवा बिल्कुल सच ही था अगर बीवी हो तो शर्माजी की बड़ी साली जैसी भरे बदन वाली क्योंकि उसका भी आकर्षण भरे बदन वाली औरत पर कुछ ज्यादा ही होता था अंकित को भी औरतों की बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां अच्छी लगती थी और अपनी तरफ आकर्षित भी करती थी। चारों तरफ नजर घूमर तसल्ली कर लेने के बाद धीरे से सूरज अपनी जेब में हाथ डाला और जब में से छोटी सी डायरी नुमा रंगीन किताब निकाला,, अंकित का दील बड़े जोरों से धड़क रहा था। वह यह देखने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक था कि उसके जेब में ऐसी कौन सी गंदी चीज है जिसे देखने के लिए उसने एकांत में लेकर आया।)
अब आएगा असली मजा,,,,(सूरज उसे छोटी सी रंगीन डायरी का मुख्य पृष्ठ अपनी हथेली के पर्दे को हटाते हुए और अंकित को दिखाते हुए बोला… उसे रंगीन किताब के मुख्य पृष्ठ को देखकर अंकित के तो होश उड़ गए उसे अंदाजा नहीं था कि सूरज इस तरह की कोई चीज दिखाएगा वह तो आंख फाड़े उस मुख्य पृष्ठ को देखता ही रह गया,,,, अंकित को हक्का बक्का देख सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,)
क्यों बरखुदार हो गई ना हवा टाइट,,,,
बाप रे सूरज यह क्या लाया तू,,,(एकदम हैरान होते हुए अंकित बोला)
अरे यही तो है वह गंदी चीज जो मैं तुझे दिखाने के लिए लाया था,,,।
बाप रे इसमें तो सब खुला खुला है।
तभी तो मजा आएगा मेरे दोस्त,,, देख कैसे टांग उठा कर उसकी बुर में लंड डाल रहा है। (गहरी सांस लेते हुए सुरज बोला,,)
यह सब तो अंग्रेज लग रहे हैं।
तो क्या इन्हीं में तो दम है तुझे लगता है की हमारे देश की औरतें इस तरह का हुनर दिखा पाएंगी।
(सूरज की बात सुनकर अंकित बोल कुछ नहीं बस ना में सिर हिला दिया,,,, अंकित के पूरे बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसने आज तक इस तरह के दृश्य को कभी नहीं देखा था उसे नहीं मालूम था कि इस तरह की भी कोई किताब आती है जिसमें औरतों और मर्दों की गंदी तस्वीर होती है मुख्य पृष्ठ के चित्र को देखकर ही अंकित केतन बदन में आग लग गई थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या देखें,,,, बार-बार उसकी नजर मुख्य पृष्ठ वाली हीरोइन की बड़ी-बड़ी चूचियों पर जा रही थी जो कि एकदम गोल कश्मीरी सेव की तरह लेकिन कुछ ज्यादा ही बड़े नजर आ रहे थे,,,, चूचियों से नजर हटती तो उसका ध्यान उसे औरत के दोनों टांगों के बीच फूली हुई बुर पर चली जाती थी जो की हीरो के मोटे तगड़े लंड को अंदर लेने के बाद उसकी बुर पूरी तरह से छल्ला नुमा गोल बन जा रही थी।
बस एक ही फोटो में तेरा यह हाल हो गया तेरे तो पसीने छूट रहे हैं,,, तू कहता है तो बंद कर दुं,(यह कहकर सूरज अंकित का मन टटोल रहा था लेकिन आप अंकित इनकार करने वाला नहीं था वह धीरे से बोला,,,)
आगे भी ऐसा ही है,,,
अरे यार पूरी किताब भरी हुई है,,,,
तो पन्ना पलट कर दिखा,,,
(अंकित का हाल देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न होने लगा,,,, वह तुरंत पन्ना पलट दिया और उसके बाद अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई क्योंकि इस पन्ने पर हीरोइन घुटनों के बाल बैठी हुई थी और उसके सामने दो हट्टे कट्टे आदमी अपने पेंट में से अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल कर उसे हीरोइन के सामने पकडकर खड़े थे और वह हीरोइन दोनों के लंड को पकड़कर अपने लाल लाल होठों कोखोलकर दोनों के सुपाड़े को चाटने की कोशिश कर रही थी यह देखकर करते हो अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई सूरज भी चुदवासा हुआ जा रहा था,,। वह बार-बार उस हीरोइन की चूची पर अपनी उंगली घूमा रहा था मानों जैसे उसकी आंखों के सामने सच में किसी औरत की नंगी चूचियां हो,,,।
यार अंकित काश ऐसी किस्मत अपनी होती तो मजा आ जाता देख नहीं रहा है कितने मजे से मुंह में लेने की कोशिश कर रही है।
(सूरज औरतों के संबंध के बारे में ढेर सारी जानकारियां रखता था हालांकि किसी भी औरत के साथ अभी तक संबंध नहीं बना पाया था लेकिन अंकित औरतों के मामले में बिलकुल नादान था उसे नहीं मालूम था जो कुछ भी गंदी किताब के चित्र में था वह सब कुछ उसके लिए नया और अनोखा था ,, इसलिए आश्चर्य जताते हुए वह बोला।)
यार सूरज क्या इतनी गंदी चीज को कोई औरत अपने मुंह में ले सकती है।
यार अंकित तू सच में बहुत पागल है तू नहीं जानता औरत क्या-क्या मुंह में ले सकती है और मर्द भी क्या-क्या औरत का मुंह में ले सकते हैं।
लेकिन मुझे तो विश्वास नहीं होता इससे तो पेशाब किया जाता है।
और ईसे बुर में भी डाला जाता है तुझे विश्वास नहीं आता तो रुक तुझे दिखाता हूं,,,( और इतना कहने के साथ ही सूरज उस गंदी किताब का अगला पन्ना पलटा तो अगले ही पन्ने पर एक हीरोइन एक मोटे तगड़े हट्टे-कटे इंसान के लंबे लंड को पूरी तरह से मुंह में लेकर चूस रही थी और अंकित को दिखाता हुआ सूरज बोला,,,)
देख और बता क्या लगता है तुझे,,,।
(अंकित क्या बोलता उसकी तो बोलती बंद हो गई थी सूरज ने उसके शंका का समाधान जो कर दिया था,,, अंकित तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की औरतें इस तरह की हरकत करती हैं लेकिन उसे दृश्य को देखकर अंकित केतन बादल में आग लग गई उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और यही हाल सूरज का भी था जो की पेंट के ऊपर से ही वह उसे हल्के-हल्के दबा भी रहा था। अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी अंकित आंख फाड़े उसी दृश्य को देख रहा था,,, अंकित को इस तरह से देखता हुआ पाकर सूरज बोला,,,)
सो जरा अंकित इस आदमी की जगह तू होता या मैं होता और इस औरत की जगह शर्मा जी की बड़ी साली होती तो कितना मजा आता उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसका नंगा जिस्म उफफ,,, मेरा तो सोच कर ही लंड फटा जा रहा है,,,,।
(सूरज की बातें सुनकर अंकित की भी हालत खराब होती जा रही थी उसके भी लंड में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था और वह भी उसे औरत की जगह शर्मा जी की बड़ी साली को रखकर और उस आदमी की जगह अपने आप को रखकर कल्पना करने लगा था जो की बेहद उत्तेजनात्मक था सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
कल्पना तो कर सकते हैं लेकिन इसकी तरह अपना लंड नहीं है क्योंकि हमारे देश में इतना मोटा और तगड़ा लंबा नहीं होता विदेशियों का इतना ही बड़ा होता है । काश मेरा भी इतना मोटा और लंबा होता तो मजा आ जाता किसी भी औरत को दिखा देता तो वह दीवानी हो जाती,,।
दिखाने से दीवानी हो जाती है मैं कुछ समझ नहीं,,,(अंकित शंका जताते हुए बोला,,,)
अरे पागल जिस तरह से हम लोग चोदने के लिए तड़पते हैं इस तरह से औरतें भी चुदवाने के लिए तड़पती है और औरतों को मोटा लंबा लंड कुछ ज्यादा ही पसंद आता है अगर किसी भी औरत को मोटा और लंबा लंड सही समय पर दिखाया जाए तो वह उसकी दीवानी हो जाती है उसे अपनी बुर में लेने के लिए।
क्या बात कर रहा है सूरज,,,, ऐसा भी कहीं होता है क्या,,,!
तू नादान है अंकित इसलिए तुझे नहीं मालूम है बहुत कुछ होता हैतू ही सिर्फ सीधा बनकर रहता है इसलिए तुझे कुछ नहीं मालूम है।(इतना कहते हुएसूरज उसे किताब का अगला पन्ना पलटा तो अगले पन्ने पर भी कामोत्तेजना से भरा हुआ दिल से था लेकिन अंकित के लिए बिल्कुल अनोखा था,, क्योंकि उसमें एक औरत बिल्कुल नंगी होकर एक मोटे तगड़े लंड पर बैठी हुई थी और उसकी मोती मोती गंद बाहर को निकली हुई थी और उसकी मोटी मोटी गांड पर उस आदमी की मजबूत हथेलियां थी,, जिससे वह उसे औरत की भारी भरकम गांड का वजन संभाला हुआ था,,,,।
अंकित बड़े से वृक्ष के शीतलछाव में बैठकर भी गरमा गरमदृश्य को देखकर पसीने से तरबतर हो चुका था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी किताब का हर एक पन्ना अपनी उत्तेजना की नई कहानी कह रहा था,,, जिसे देखकर अंकित का सीधा-साधा मन बावला हुआ जा रहा था,,, तभी एक पन्ने पर ऐसा दृश्य था जो बाथरूम के अंदर एक लड़का बैठा हुआ था और उसके हाथ में एक गंदी किताब थी और वह अपनी आंखों को बंद करके चुदाई की कल्पना कर रहा था और अपने लंड को हिला रहा था और उसके लंड से तेज पिचकारी निकल रही थी यह देखकर अंकित हैरान हो गया क्योंकि उसके लंड से निकलने वाली पिचकारी एकदम सफेद घाडे रंग की थी,,, उसे लग रहा था कि वह लड़का पेशाब कर रहा है लेकिन सफेद गाड़ी द्रव्य को देखकर अंकित हैरान हो गया था इसलिए वह बोला।
यह क्या है सूरज यह पेशाब तो बिल्कुल भी नहीं है।
(अंकित की मूर्खता भरी बातों पर सूरज जोर-जोर से हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अंकित बोला)
तू हंस क्यों रहा है,,?
अरे हंसो नहीं तो और क्या करूं तुझे इतना भी नहीं पता कि यह क्या कर रहा है।
हां मैं सच कह रहा हूं मुझे नहीं मालूम कि यह क्या कर रहा है और उसके लंड में से यह क्या निकल रहा है,,,(पहली बार अंकित के मुंह से लंड शब्द निकला था जिसके बारे में सोचकर इसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी)
तू सच में बुद्धू है अंकित,,, अरे पागल यह मुट्ठ मार रहा है,,,
मुट्ठ मार रहा है,,, मैं अभी भी कुछ नहीं समझा,,,।
(अंकित की बात सुनकर सूरज उसे आश्चर्य से देखने लगा उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अंकित इस क्रिया के बारे में कुछ भी नहीं जानता उसे लग रहा था कि वह झूठ बोल रहा है लेकिन उसके चेहरे की तरफ देखकर सूरज समझ गया था कि यह बिलकुल नादान है इसलिए धीरे से मुस्कुराते हुए बोला।)
देख यार यह तो तूने मुझे बोल दिया लेकिन किसी और को मत कहना वरना तेरा मजाक उड़ाएंगे,,,(अंकित सूरज की बात को बड़े ध्यान से सुन रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी कौन सी बात हो गई जिसके बारे में सुनकर लोग उसका मजाक उड़ाएंगे सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) देखिए यह चित्र देख रहा है ना इसलिए लड़का कैसे अपना लंड को मुट्ठी में दबाकर पकड़ा हुआ है।
हां,,,,
इसे इसी तरह से पकड़ कर आगे पीछे करके हिलाते हैं इसमें बहुत मजा आता है और यही क्रिया लंड बुर में जाकर करती है बुरे में जब लंड डालते हैं तो अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाते हैं जिससे लंड बुर के अंदर बाहर होता है। और इस क्रिया करने में जितना हम लोगों को मजा आता है उतना ही मजा औरतों को भी आता है समझ में आया और जब इसी तरह से लंड को हिलाते हुए अपने मन में किसी भी औरत की कल्पना करते हैं तो अपनी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती है और इसके बाद इसी तरह से तेज पिचकारी निकलती है और ईतना मजा आता है कि पूछो मत,,,।
क्या कह रहा है तू,,,
मैं बिल्कुल सच कहारहा हूं अंकित अपने सारे दोस्त करते हैं मैं भी तो यही करता हूं क्योंकि हम लोगों के पास जुगाड़ नहीं है,,,
जुगाड़ मतलब,,,
जुगाड़ मतलब बुर औरत यह सब अपने पास नहीं है इसलिए हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ता है अगर औरत होती खूबसूरत लड़की होती तो उसकी बुर में लंड डालकर चुदाई का मजा नहीं लुटते,,,,
जुगाड़,,,,(आश्चर्य से अंकित बोल तो उसकी बात सुनकर मुस्कुराता हुआ सूरज बोला,,)
अपनी मम्मी और अपनी बहन के बारे में सोच कर जुगाड़ मत बना लेना,,,
सूरज अभी बहुत मारूंगा,,,,
यार मैं तो मजाक कर रहा था,,,, लेकिन एक बात कहु बुरा मत मानना जब अकेले में कभी रहना तो अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे अपने हाथ में ले लेना और हिलाते अपनी आंखों को बंद कर लेना और फिर कल्पना करना अपनी मां के बारे में अपनी बहन के बारे में उसे चोदने के बारे में उनके कपड़े उतारने के बारे में तुझे इतना मजा आएगा कि तेरे लंड से इतनी तेज पिचकारी निकलेगी कि सामने की दीवार पर जाकर गिरेगी,,,।
तू भी ऐसा ही करता है क्या,,,?(अंकित थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोला इस बार उसके शब्दों में ज्यादा गुस्सा नहीं था क्योंकि ना जाने क्यों उसे भी सूरज की बातें अच्छी लग रही थी)
मैं तो ऐसा ही करता हूं अंकित मैं आज तक ऐसी बात किसी को बताया नहीं हूं लेकिन तुझे बता रहा हूं मैं भी मुठ मारता हूं और इन सबको देखने के बाद मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया है ,, अब घर पर जाकर मुझे मूठ मारना होगा,,।
अपनी मां के बारे में सोच कर,,,
बिल्कुल सही किसी और के बारे में सोच कर अगर मुठ मारता हूं तो इतना मजा नहीं आता लेकिन अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारता हूं तो इतना मजा आता है कि पूछो मत ऐसा लगता है कि सच में मैं उसको चोदने जा रहा हूं,,,।
यह सब गलत नहीं है,,,
कैसे गलत है थोड़ी ना सच में करने जा रहा हूं मन में सिर्फ कल्पना कर रहा हूं और इस बारे में कहां किसी को पता चल रहा है इसके बारे में भी कल्पना कर सकते हो चाहूं तो मैं तेरी मां के बारे में भी कल्पना करके मुट्ठ मार सकता हूं वैसे भी मुझे बड़ी गांड वाली औरतें बहुत पसंद है,,,।
सूरज अब तु मुझे गुस्सा दिला रहा है,,,।
यार तू नाराज बहुत जल्दी हो जाता है मैं तो मजाक कर रहा हूं तू भी मेरी मां के बारे में बोल सकता है कि उसकी चूची बड़ी-बड़ी है,,,,।
(सूरज की बात सुनकर अंकित के बदन में सायरन सी दौड़ने लगी क्योंकि सूरज अपनी मां के बारे में एकदम खुली की बातें कर रहा था उसे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं था अगर वह कुछ भी उसकी मां के बारे में बोलता तो,,, लेकिन फिर भी वह हिम्मत जुटा कर बोला,,)
मैं भी तेरी मां के बारे में सोच कर मुठ मारूंगा,,,
अच्छा बहुत जल्दी आ गया लाइन पर,,,(सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,)
तू बोलेगा तो मैं भी बोलूंगा ना,,,
चल अच्छा रहने दे मुझे रहा नहीं जा रहा है अब मैं जा रहा हूं घर।
क्या करने,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए अंकित बोला)
मुट्ठ मारने,,,,बदन की गर्मी तो शांत करना पड़ेगा,,,ना
किसके बारेमें सोच कर ,,,
तेरी मां के बारे में क्योंकि तेरी मां की गांड और चूची दोनों बड़ी-बड़ी है बहुत मजा आएगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी जगह से उठ गया और भागने लगा क्योंकि उसे मालूम था कि अंकित उसे मारेगा और उसके पीछे अंकित भी उठकर उसकी तरफ भागते हुए बोला)
मैं भी तेरी मां के बारे में सोच कर मुठ मरूंगा क्योंकि तेरी मां की भी गांड बड़ी-बड़ी है उसको चोदने में मजा आएगा,,,,,(सूरज दीवार को उतर भाग चुका था लेकिन अंकित दीवाल के पास खड़ा हो गया और जो शब्द उसने अभी-अभी अपने मुंह से कहा था उसके बारे में सोच कर उसके बदन में सियहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि इस तरह के गंदे शब्द है उसकी जुबान पर पहली बार आए थे और उसे खाने में उसे इतना आनंद की प्राप्ति हुई थी कि पूछो मत उसका मन बिल्कुल भी लग नहीं रहा था। वह अपने घर भी नहीं किया क्योंकि सूरज की तरह मुठ मारने की हिम्मत अभी उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,,, लेकिन उसका भी लंड पूरी तरह से खड़ा था वह कुछ देर तक इस जगह पर आकर बैठ गया,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें फिर अपनी जगह से उठकर इधर-उधर घूमने लगा जैसे तैसे करके शाम हो गई और वह शाम को अपने घर चला गया लेकिन दोपहर में जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था वह दृश्य उसकी आंखों से ओझल नहीं हो रहे थे बार-बार उसकी आंखों के सामने टेलीविजन के चलचित्र की तरह नाचने लगते थे जिसे वह काफी परेशान और उत्तेजित हो जा रहा था।
अंकित अपनी मां को पेशाब करके खड़ी होता देखकर दबे कदमों से पीछे अपने कमरे में आ गया था,,,, उसके दिल की धड़कन उसका साथ नहीं दे रही थी वह बड़े जोरों से चल रही थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने कुछ अद्भुत और अविस्मरणीय चीज देख लिया हो,,, और अंकित के लिए तो ऐसा ही था,,, अपने कमरे में आकर वह तुरंत अपना दरवाजा बंद करके बिस्तर पर बैठ गया था लेकिन उसकी आंखें अभी भी फटी की फटी थी उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था,,, उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसने जो कुछ भी देखा वह हकीकत था,,,।
और दूसरी तरफ सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, वह पेशाब करके खड़ी हो चुकी थी और अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर चुकी थी उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि आज वह अपने बेटे की आंखों के सामने बैठकर मुत रही थी,,,, इस बात से उसके तन बदन में अद्भुत एहसास हो रहा था उसके बाद में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, उसे अपने आप पर भरोसा नहीं हो रहा था की बेटे की उपस्थिति में ही उसने पेशाब कि है,,,,, और यह सब कुछ अनजाने में ही हुआ था वह जानबूझकर अपनी गांड का प्रदर्शन अपने बेटे के सामने नहीं की थी हालांकि वह बहुत दिनों से अपने बेटे की आंखों के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करती आ रही थी लेकिन इस हद तक वह नहीं गई थी कि अपने बेटे की आंखों के सामने ही साड़ी उठाकर पेशाब करने लगे,,,।
वह जानती थी कि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था लेकिन जो भी हुआ था वह उसके मन का हुआ था,,,, वैसे भी बड़े दिनों बाद वह घर के पीछे आई थी और वह भी खुला हुआ दरवाजा बंद करने के लिए जो कि वह खुद अंकित को बंद करने के लिए बोली थी लेकिन टीवी देख कर जल्दी आने की वजह से वह खुद ही दरवाजा बंद करने के लिए आ गई थी और ऐसे में उसे अपने जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह उसी जगह पर कोने में बैठकर पेशाब करने लगी उसे क्या मालूम था कि ठीक उसी समय उसका बेटा भी वहीं आ जाएगा,,,,।
सुगंधा उसी जगह पर खड़े होकर मंद मंद मुस्कुराते हुए जो कुछ भी हो उसके बारे में सोच रही थी क्योंकि हर किसी आहट मिलने पर वह अपनी नजर को धीरे से पीछे घूम कर देखी थी और दरवाजे पर अंकित खड़ा होकर उसी की तरफ देख रहा था यह नजारा बेहद मदहोश कर देने वाला और उन मादक स्थिति पैदा कर देने वाला था अंकित ने तो कभी सोचा भी नहीं होगा कि दरवाजा बंद करने के लिए वह जाएगा और उसे एक अकल्पनीय और अतुलनीय दृश्य देखने को मिल जाएगा और वह भी अपनी मां की ही तरफ से,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा,, मर्दों के नजरिए को अच्छी तरह से समझती थी और जानती भी थी जिस तरह से अंकित ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड को देख रहा था उसे देखकर सुगंध समझ गई थी कि उसके जवान बेटे में भी एक मर्द छुपा हुआ है जो किसी भी पर बाहर आ सकता है और इस समय वह वही देख रही थी क्योंकि अंकित उसका बेटा था और वह बेटा अपनी मां को पेशाब करते हुए प्यासी नजरों से देख रहा था उसकी नंगी गांड को देख रहा था उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर मदहोश हो रहा था और यह सब सुगंधा को भी मदहोश कर रहा था,,,,।
सुगंधा की तरफ से अनजाने में ही अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए यह कदम उठ चुका था जिसका जादू अंकित पर पूरी तरह से छा गया था अब तक सुगंधा केवल अपनी छातियों और नितंबों के उभार को ही ऊपर से ही बस अपने बेटे को दिखाती थी,,, जिसे देखकर उसका बेटा भी मदहोश हो जाता था और इसका एहसास सुगंधा को भी था लेकिन आज ऊपर से नहीं बल्कि अंदर से अपनी जवानी के दर्शन करा कर वह अपने बेटे को मदहोश कर दी थी,,,,।
सुगंधा पीछे के दरवाजों को अच्छी तरह से बंद कर दी थी लेकिन फिर भी उसे एक बार फिर से व्यवस्थित चेक करके वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी और मन ही मन पीछे के दरवाजे को धन्यवाद देने लगी क्योंकि आज खुले दरवाजे की बदौलत ही वह अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन करवाने में सफल हो पाई थी,,,,, देखते देखते वह अपने कमरे में पहुंच चुकी थी और जो कुछ भी घर के पीछे वाले भाग में हुआ था उसे याद करके वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी तो गई थी और देखते ही देखते वह अपने बदन पर से सारे वस्त्र को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई थी और फिर अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी बेटी की कल्पना करते हुए अपनी बुर में दोनों की डालकर उसे अंदर बाहर करने लगी थी और अपनी आंखों को बंद करके उसे उंगली की जगह अपने बेटे के लंड की कल्पना करके मदहोश होने लगी थी,,,,।
दूसरी तरफ अभी भी अंकित का दिमाग पूरी तरह से काबू में नहीं था वह अपना होश खो बैठा था उसकी सांसे अभी भी बड़ी तेजी से चल रही थी अपने आप को दुरुस्त करने के लिए वह धीरे से उठा और टेबल पर पड़ा पानी का ग्लास को उठाया और उसे एक ही सांस में पी गया,,,, ठंडा पानी पीने से उसे बिल्कुल भी राहत नहीं मिल रही थी क्योंकि उसके तन बदन को उसकी मां की जवानी की गर्मी जो जला रही थी,,,।
उसका बदन पसीने से तर-बतर हो चुका था वह धीरे से अपने बिस्तर पर से उठा और,, सामने की दीवार की तरफ गया और पंखे की स्विच को ऑन कर दिया स्विच के ऑन होते ही पंख चलना शुरू हो गया,,,, अंकित अपनी जगह पर आकर बैठ गया और उसे दोपहर में देखी गई किताब के रंगीन पन्नों पर छपा हुआ रंगी में दृश्य नजर आने लगा बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूचियां लेकिन सब कुछ ऐसा लग रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड के आगे फीका पड़ गया था,,,, उन्हें रंगीन किताब के दृश्य को याद करके जितना मजा नहीं आ रहा था उससे ज्यादा मजा उसे अपनी मां की बड़ी गांड के बारे में सोच कर आ रहा था,,,,। गंदी रंगीन किताब के चित्र उसे बिल्कुल भी आनंद देने में समर्थ नहीं हो रहे थे क्योंकि इस समय उसकी जीवन में उसकी मां की नंगी गांड जो बस गई थी,,,,।
उसे सब कुछ अच्छे से याद था वह दरवाजा बंद करने के लिए घर के पीछे गया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उससे पहले उसकी मां वहां पहुंच चुकी थी और पेशाब कर रही थी,,, अंधेरी रात में वैसे तुम कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन कैमरे से आ रही रोशनी घर के पीछे के कोने में अच्छी तरह से पहुंच रही थी और इस कोने में वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा था उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वहां लेकिन निश्चिंत होकर बैठकर पेशाब कर रही थी उसकी बुर से पेशाब की धार गिर रही थी और उस धार से उसकी गुलाबी बुर से मधुर मदहोश कर देने वाली सिटी की आवाज निकल रही थी जोकि उसके कानों तक बड़े आराम से पहुंच रही थी,,, और उस मधुर संगीत में वह अपने अस्तित्व को पूरी तरह से डुबो दिया था उसे बिल्कुल भी भान नहीं था कि वह कहां पर खड़ा होकर क्या देख रहा है,,,।
पंखा चालू करने के बाद भी उसका बदन पसीने से तारबदर हो चुका था इसलिए वह अपनी कमीज़ उतार कर बिस्तर पर रख दिया और अपने पेट की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए उसके पेट के आगे वाले भाग पर एक अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे वह बड़े गौर से देख रहा था और अपनी मां की नंगी गांड को याद करके अनजाने में ही उसका हाथ पेंट के ऊपर से ही लंड पर चला गया और वह इतना मदहोश और उत्तेजित हुआ कि पेट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,,, उसे तुरंत अपने दोस्त की बात याद आ गई कि इतना बड़ा अगर उसका होता तो कितना मजा आता,,,, अंकित को कहां मालूम था कि वाकई में हर मर्द का लंड अलग आकार और साइज का होता है वह तो ऐसा ही सोचता था कि सबका एक जैसा ही होता है,,,, उसका तो खुद का लंड मोटा और लंबा तगड़ा था इसीलिए तो रंगीन किताब में देखने के बावजूद भी उसे बिल्कुल भी ताज्जुब नहीं हुआ था,,, और इस बात को याद करके उसके मन में उत्सुकता बढ़ने लगी अपने ही लंड को देखने की,,,।
यह बात थोड़ा ताज्जुब वाली थी लेकिन अंकित के मामले में बिल्कुल हकीकत थी वाकई में उसने अपने लंड को कभी दूसरे से देखा ही नहीं था उसे केवल वह पेशाब करने के लिए ही अपने पेट से बाहर निकालता था और उसके बारे में कभी भी सोचता ही नहीं था हालांकि कभी-कभी मन में अजीब सी हलचल होने पर उसमें तनाव होता था और वह इस महसूस भी होता था लेकिन आज की बात कुछ और थी वह अपने लंड को पूरी तरह से देखना चाहता था जी भर के वह देखना चाहता था कि वाकई में उसका लंड रंगीन किताब के मर्द के लंड की तरह मोटा और लंबा है अपनी इस लालच को अपनी उत्सुकता को वह दबाने में नाकामयाब साबित हो रहा था और धीरे से बिस्तर पर से उठा और पेट की बटन खोलने वाला और देखते ही देखते हो अपने पेट को उतार कर नीचे फेंक दिया और फिर केवल अंडरवियर में ही बिस्तर पर बैठ गया,,,
अंडरवियर के ऊपर से ही लंड पर हाथ पडते ही उसमें हलचल होने लगी,,, उसका दिन जोरों से धड़कने लगा उसकी उत्तेजना बिल्कुल भी काम नहीं हो रही थी क्योंकि उसके दिमाग के मानस पटल पर उसकी मां की गांड एक चलचित्र की तरह चल रही थी मानो कि जैसे वह टेलीविजन देख रहा हो,,,, अंडरवियर के ऊपर से ही उसे मजा आने लगा लेकिन वह इससे भी ज्यादा आगे बढ़ना चाहता था इसलिए अंडरवियर के छेद में से वह अपने मोटे-मोटे लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा,,,, वह पहले की ही तरह जैसे पेशाब करने के लिए अपने अंडरवियर के छेद में अपनी दो उंगली डालकर अपने लंड को पकड़ कर बाहर निकलता था उसी तरह से आज भी कोशिश करने लगा लेकिन नाकाम साबित हो रहा था क्योंकि इस समय उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था वह पूरा खड़ा था लोहे के रोड की तरह इसीलिए अंडरवियर की छेद में दो उंगली डालकर उसे केवल अपने लंड को पकड़ने भर का ही जगह मिल रहा था और वह उसमें से उस छेद में से अपने लंड को बाहर निकलने में असमर्थ साबित हो रहा था,,,,। उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था और वह अपने अंडरवियर को निकाल कर नंगा होने की सोचने लगा ऐसा वह नहीं करता लेकिन उसकी आंखों के सामने वही दिल से बार-बार नजर आ रहा था कोने में बैठी हुई उसकी मां बड़ी-बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी और इस दृश्य के बारे में सोचकर वह अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाए अगर धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने अंडरवियर को दोनों हाथों से पड़कर नीचे की तरफ सरकाना शुरू कर दिया उसका लंड इतना ज्यादा खड़ा था और मोटा और लंबा था की अंडरवियर सीधे से नीचे लाने में भी कठिनाई हो रही थी तो वहां अंडरवियर के आगे वाले भाग को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे आगे की तरफ खींचा और अपने खड़े लंड से मानो अंडरवियर का घूंघट उठा रहा हो,,, और इस तरह से वह अपने अंडरवियर को उतार कर एकदम नंगा हो गया वह बिस्तर के बगल में खड़ा था और अपने लंड की तरफ देख रहा था नजर नीचे झुकाकर,,,
अपनी जवानी की गर्मी को शांत करके सुगंधा तो चादर तानकर सो गई थी और वह आज बहुत खुश भी थी क्योंकि उसके मन की जो हो गई थी लेकिन दूसरी तरफ अंकित की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी,,, उसे बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी बल्कि उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी वह अपने ही कमरे में एकदम नंगा खड़ा होकर बड़े गौर से अपने लंड को देख रहा था मानो कि उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसकी टांगों के बीच लटकाने वाला लंड उसी का है,,, क्योंकि आज उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि गंदी रंगीन किताब के नायक के लंड से भी मोटा और तगड़ा लंड उसका था,,, और वह गरम आह भरते हुए,,, अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अनायास ही उसके मन में यह ख्याल आ गया कि
अगर उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी मां की बुर में घुस गया तो उसकी मां की क्या हालत होगी क्योंकि वह रंगीन किताबों में देख चुका था कि जब भी नायक का मोटा लंड किसी हीरोइन की बुर में घुसा होता तो उसके चेहरे के हाफ-भाव पूरी तरह से बदला हुआ होता था,,,, और जैसे ही उसके मन में यह ख्याल आया वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया औरअपनी मुट्ठी में अपने मोटे तगड़े लंड को एकदम से कस लिया,,,और अपने लंड पर यह कसाव उसे और भी ज्यादा आनंददायक लगने लगा वह मदहोश होने लगा,,,।
रंगीन किताबों का नायक जिस तरह से नायिका की बुर में अपना लंड डाल रहा था उसी की तरह हवा अपने आप को कल्पना करके अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाल रहा था और ऐसा करते हुए वह अपनी लंड को जोर-जोर से हिला रहा था।अनजाने में ही वह हस्तमैथुन कर रहा था यह यू कह लो कि वह मुठिया मार रहा था,,, जैसा कि उसके दोस्त ने उसे बताया था कि यह सब तो सभी लोग करते हैं,,,, उसे मुठिया करने में मजा आ रहा था खास करके अपनी मां को कल्पनाओं की नायिका और अपने आप को नायक बन कर जिस तरह के दिल से कि वह कल्पना कर रहा था उसमें वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वह बिस्तर पर पर के बाल आगे बढ़ता हुआ अपनी मां की दोनों टांगों को और ज्यादा खोलकर उसकी कमर को पकड़ कर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डाल दिया था और जोर-जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया था,,,,।और इस तरह की क्रिया करते हुए वह कल्पना में भी अपनी मां के चेहरे के हाव-भाव को बड़ी अच्छी तरह से समझ रहा था उसके हाव-भाव बिल्कुल गंदी किताब की नायिका जैसे हो रहे थे,,,,, अंकित जोर-जोर से अपना हाथ चल रहा था और कल्पना में वह जोर-जोर से अपनी कमरिया रहा था और देखते ही देखते पहली मर्तबा बड़ी जल्दबाजी में उसके लंड से वीर्य का फवारा फूट पड़ा और सीधा जाकर फर्श पर गिरने लगा,,,,। वह बुरी तरह चौंक पड़ा था उसकी आंखें एकदम से खुल गई थी और वह अपने लंड की तरफ देखने लगा था जिसमें से गाढ़ा द्रव्य बड़ी तेजी से निकल रहा था,,, अपने लंड से वीर्य की गाढी पिचकारी निकलता हुआ देखकर वह एकदम से घबरा गया था लेकिन इस क्रिया के होते हुए उसके बाद में अजीब सी मदहोशी जा रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसे स्वर्ग का सुख मिल रहा हो वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था वह अनजाने में ही मुठिया मार दिया था,,, उसे बहुत मजा आया था लेकिन वह इस बात से घबराया हुआ था कि उसके लंड से आखिरकार निकाल क्या रहा था और उसे तभी याद आया कि दिन में वहां गांधी किताब में दो-तीन चित्र ऐसे भी देखा था जिसमें नायक अपना लंड पकड़कर नायिका की चूची पर अपना यही द्रव्य गिर रहा था,,,,
पूरी तरह से वीर्य निकलने के बाद वह बिस्तर पर गिर गया था और जोर-जोर से सांस ले रहा था,,, उसके बदन में थकान महसूस हो रही थी और वह पंखे की हवा खाते हुए वहीं बिस्तर पर उसी अवस्था में लेट गया था,,,। और थोड़ी ही देर में इस अवस्था में ही उसे नींद आ गई,,,।
दूसरे दिन वह अपने बदले में अजीब सा महसूस कर रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था उसकी नजर अपनी मां पर ही थी और उसकी मां भी ऐसा लग रहा था कि उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी शर्मा रही थी और अपनी छातिया को उसकी आंखों के सामने उभार दे रही थी,,,, अपनी मां की कामुक अंदाज देखकर अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो रहा था और वह अपनी मां के साथ एकाकर होने के लिए तैयार हो चुका था,,,
वह अपनी मां,,में पूरी तरह से बदलाव देख रहा था,,, उसे साफ महसूस हो रहा था कि जैसे उसके सामने उसकी मां नहीं बल्कि कोई दूसरी औरत है जो उसे अपनी तरफ आकर्षित करके अपने साथ एकाकार होने के लिए आमंत्रित कर रही है,,, अंकित अपनी मां को ही देख रहा था वह अपने कमरे में से अपने कपड़ों को लेकर बाहर निकली और उसकी तरफ मुस्कुराते हुए बोली,,,।
क्यों बेटा रात कैसी गुजरी,,,(सुगंधा एकदम मुस्कुराते हुए बोली अपनी मां की बात सुनते ही वह एकदम से चौंक गया उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां को पता तो नहीं चाहिए की रात को उसने क्या किया,,,, लेकिन फिर भी अपनी मां के सवाल का जवाब ना देते हुए अंकित बोला,,,,)
कहां जा रही हो मम्मी,,,?(अंकित के ही सवाल में भी एकदम शरारत छुपी हुई थी मदहोशी छुपी हुई थी जिसे सुगंध अच्छी तरह से समझ रही थी और वह भी अपने बेटे के सवाल पर मुस्कुराते हुए जवाब दी)
नहाने जा रही हूं चलेगा क्या साबुन लगाने के लिए,,,,
(और ऐसा कहते हुए मुस्कुरा कर वह बाथरूम के अंदर घुस गई लेकिन उनकी दिया देखकर हिरण था कि उसकी मां बाथरूम में घुसने के बावजूद भी बाथरुम का दरवाजा खुला छोड़ दी थी वह सिर्फ थोड़ा सा बंद कर दी थी लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगाई थी और दरवाजा हल्का सा खुला हुआ दीख रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा उसे अंदर आने के लिए आमंत्रण दे रही हो,,,, अंकित का दील जोरो से धड़क रहा था उससे बिल्कुल भी नही रहा जा रहा था जिस तरह से उसकी मां अपनी गांड मटका कर बाथरूम में घुसी थी उसे देखकर वह पूरी तरह से अपनी मां पर मोहित हो चुका था कुछ देर बाथरूम के बाहर खड़े रहने के बाद वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और सीधे जाकर बाथरूम के पास पहुंच गया और धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर का नजारा देखा तो उसकी होश उड़ गए उसकी मां पूरी तरह से अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर नहा रही थी और अपने बदन पर साबुन लगाने की कोशिश कर रही थी,,, अपनी मां को बाथरूम एकदम नंगी देख कर अंकित का दिमाग काम करना बंद कर दिया और उसकी आंखों में मदहोशी और वासना दोनों नजर आने लगी वह तुरंत बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया और पास में ही पड़ा साबुन लेकर वह अपनी मां की पीठ पर लगना शुरू कर दिया,,, अपनी पीठ पर दूसरे का स्पर्श महसूस करते ही वह समझ गई कि उसका बेटा बाथरूम में आ गया है और वह तुरंत घूम कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।
मुझे पूरा यकीन था कि तू जरूर आएगा,,,
कैसे नहीं आता जब आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत हो और बाथरूम में खुद आने के लिए आमंत्रण देती हो तो दुनिया का कौन सा मर्द होगा जो इनकार कर पाएगा,,,,
बस बेटा अब मुझे बिल्कुल गिरना नहीं चाहता बरसों से प्यासी हुं बुझा दे मेरी प्यास,,,(और इतना कहने के साथ ही उसका हाथ पकड़ कर थोड़ा अपने बदन से चिपका ली और उसे चुंबन करने लगी,,, अंकित भी पूरी तरह से मदहोश हो गया और तुरंत अपने कपड़े को उतारना शुरू कर दिया आज वह पहली बार अपनी मां को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देख रहा था इसलिए वह प्रचंड उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,,।
वह अपनी मां को ऊपर से नीचे पूरी तरह से देख रहा था अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था और वह तुरंत आगे बढ़ाओ अपनी मां की चूची को हाथ में पड़कर पीना शुरू कर दिया अंकित की हरकत पर उसकी मां पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसे अपने आप से एकदम से सटा ली और उसके लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दी,,,,
देखते ही देखते अंकित अपने घुटनों के बल बैठकर और अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया सुगंधा को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि अंकित इस तरह की हरकत करेगा इसलिए उसकी हरकत पर पूरी तरह से मदहोश हो गई और अपनी एक टांग उठा कर उसके कंधे पर रख दी और अपने दोनों हाथों से उसके सर को पकड़ कर अपनी बुर से सटा दी,,, यह सब अंकित के लिए बिल्कुल नया था लेकिन गंदी रंगीन किताब देखकर वहां बहुत कुछ सीख चुका था वह समझ चुका था की औरतों से कैसे खेला जाता है कैसे मजा लिया जाता है,,,।
अंकित पागलों की तरह अपनी जेब लगाकर अपनी मां की बुर का रस चाट रहा था सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी अभी धीरे-धीरे अपनी कमर हिला कर अपनी बुर की ठोकर अपने बेटे के चेहरे पर मार रही थी और गोल-गोरे अपनी गांड घूमा कर अपनी बर को उसके चेहरे पर रगड़रही थी,,,, अंकित पूरी तरह से तैयार हो चुका था अपनी मां की बुर में लंड डालने के लिए इसलिए वह तुरंत खड़ा हुआ और उसकी मां भी बाथरुम के अंदर दीवार पकड़कर खड़ी हो गई और अपनी गांड अपने बेटे की तरफ परोस दी,, अंकित तुरंत अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की गुलाबी छेद में लगा दिया और फिर एक ही धक्के में अपना पूरा लंड अपनी मां की बुर में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया उसे बहुत मजा आ रहा था आज उसकी अभिलाषा शांत हो रही थी जिस काम को करने के लिए वह कल्पना का सहारा लेता था आज हकीकत में वह अपनी मां को चोद रहा था और उसकी मां भी एकदम मजे लेकर चुदवा रही थी,,,,।
सुगंधा भी अपने बेटे का बड़े अच्छे से साथ दे रही थी वह अपनी अपनी गांड को पीछे की तरफ मार रही थी और उनकी अपनी मां की कमर पकड़ कर धक्के पर धक्का लगा रहा था वह दोनों चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे वह दोनों की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक की आवाज होते ही अंकित की आंख खुल गई और वह देखा तो उसके होश उड़ गए वह सपना देख रहा था और बिस्तर में वह पूरी तरह से नंगा था,,,। और दरवाजे पर उसकी मां दस्तक देते हुए बोल रही थी।
घोड़ा बेचकर सो गया क्या,,,
ममम’म,,, मम्मी,,,,अभी आया,,,(एकदम से हकलाते हुए वह बोला)
जल्दी करो 7:00 बजने वाले हैं नहा कर तैयार हो जाओ,,,,
हां मम्मी आ रहा हूं,,,,(इतना कहते हुए दीवार पर टंगी खड़ी पर देखा तो 6:30 बज रहे थे तुरंत बिस्तर पर से नीचे उतरा और अपने कपड़े ढूंढ कर पहनना शुरू कर दिया)
अंकित अपनी मां से नजर नहीं मिल पा रहा था,,, रात को जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था वह सब कुछ उसकी आंखों के सामने बार-बार किसी फिल्म की तरह घूम रहा था ,,,आज तक उसने इतना खूबसूरत और मदहोश कर देने वाला नजारा नहीं देखा था,,, उसे सब कुछ एकदम साफ-साफ याद था जो कुछ भी उसने देखा था,,,, वह मन ही मन अपनी मां को शुक्रिया अदा कर रहा था इस बात के लिए कि उसने उसे पीछे का दरवाजा बंद करने के लिए बोली थी,,,, अगर वह ऐसा ना बोलती तो शायद जिंदगी में कभी भी वह इस तरह का खूबसूरत दृश्य नहीं देख पाता,,,,। उसे इस बात में भी कोई शक नहीं हो रहा था कि जिस तरह से उसकी मां जल्दी से टीवी देख कर अपने कमरे में जाने के लिए उठी थी और वह दोनों बैठकर टीवी देख रहे थे इसीलिए हो सकता है कि वह खुद ही पीछे का दरवाजा बंद करने के लिए चली गई थी और इसीलिए अंकित को इसमें कोई संदेह नहीं था कि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था,,,।
पहली बार उसने अपनी मां की नंगी गांड के दर्शन किए थे और अभी एकदम खूबसूरत जवान से भरी हुई दो-दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी नितंबों का कसाव जवान लड़की की तरह था। अब तक अंकित औरतों के अंगों के बारे में कल्पना करने में सक्षम नहीं था क्योंकि उसने अपनी आंखों से कुछ देखा ही नहीं था लेकिन अपने दोस्त के चलते उसने नंगी गंदी किताब में सब कुछ देख लिया था लेकिन जब तक उसने अपनी मां को पेशाब करते हुए नहीं देखा था तब तक उसकी आंखों के सामने उसके दिलों दिमाग पर दोस्ती दिखाई हुई गंदी नंगी तस्वीरें वाली किताब के दिल से ही उसके दिलों दिमाग पर छाया हुआ था और उन अंगों को लेकर उसके मन में कुतुहल भी बना हुआ था,,, लेकिन जब से उसने रात में अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा था अपनी मां की नंगी गांड को देखा था तब से गंदी रंगीन किताब के सारे दृश्य उसके दिमाग से निकल चुके थे,,, अब उसके दिमाग में केवल उसकी मां की नंगी गांड की पूरी तरह से अपना वजूद जमा लिया था उसने गंदी किताब में कौन सी दृश्य देखे थे सब कुछ भूल चुका था क्योंकि उसने किताब के रंगीन गंदे पृष्ठ से भी बेहतर नजर अपनी आंखों से खुली आंखों से देख लिया था,,,, और जिसके चलते रात को वह मूठ मारना भी सीख गया था।
अपनी बिस्तर से उठकर वह बाथरूम में चला गया था बाथरूम में जाते ही जैसे उसने अपने वस्त्र को उतार कर एक तरफ रख तो उसे एहसास हुआ कि उसके पजामे में तंबू बना हुआ है और एक बार फिर से उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,, जिसके चलते वहां अपने पजामे को उतार कर पूरी तरह से नंगा हो गया,,, बाथरूम के अंदर वह निश्चिंत होकर अपने खड़े लंड को देख रहा था जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर अपना असर दिख रहा था गांधी किताब में देखे गए नायक के लंड से उसका लंड बिल्कुल भी 19 नहीं था बल्कि उससे भी बेहतर और ज्यादा कड़कपन लिए हुए था,,, अपने खड़े लंड को देखकर उसे किताब में देखे गए औरत की बुर का ख्याल आ गया जिसका छेंद काफी छोटा था और औरत के उसे छोटे से छेद के बारे में सोच कर उसे अपने लंड के आगे वाला भाग की गोलाई देख कर आश्चर्य होने लगा वह अपने मन में सोचने लगा कि इतनी छोटे से छेद में अगर उसका मोटा लंड घुसेगा तो कैसा होगा और उसे तो इस बात की भी शंका थी कि छोटे से छेद में घुस पाएगा कि नहीं,,,, उसके मन में यही सब चल रहा था और वह अपने लंड को अपनी मुट्ठी में एक बार फिर से जोर से दबोच लिया और उसे ऐसा करने में अद्भुत आनंद की प्राप्ति होने लगी उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों में मदहोशी जाने लगी और एक बार फिर से ही अनजाने में ही वह रात वाली क्रिया को दोहराने लगा,,, वह अपने लंड की चमड़ी को अपनी मुट्ठी में आगे पीछे करने लगा और ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,।
अंकित जल्दी कर मुझे बहुत देर हो रही है आज तू भी बहुत देर में उठा है ज्यादा देर मत लगा,,,।
(अपनी बड़ी बहन तृप्ति की आवाज सुनते ही उसे ऐसा लगा कि जैसे कोई उसके अरमानों पर ठंडा पानी गिरा दिया हो और वह तुरंत घबरा कर अपना हाथ अपने लंड घर से पीछे खींच लिया,,, बाथरूम के अंदर होने के बावजूद भी उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी बड़ी बहन देख ना ले,,, क्योंकि बाथरूम के अंदर की वह पूरी तरह से नंगा ही था,,,, फिर भी वह एकदम सहज होता हुआ बोला,,,)
हां हां जल्दी नहा रहा हूं,,,,
(और इतना कहने के साथ ही वह अपने अरमान के साथ-साथ अपने बदन पर भी ठंडा पानी गिराने लगा,,,,।
दूसरी तरफ रसोई में खाना बना रही सुगंधा रात वाली घटना से पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूब चुकी थी उसने भी रात को अपनी दो उंगलियों का सहारा लेकर अपनी बुर से नमकीन पानी बाहर निकाल दी थी,,, रात को जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में उसने कोई षड्यंत्र नहीं रची थी कोई पहले से तैयारी नहीं की थी उसे नहीं मालूम था कि ऐसा हो जाएगा जो कुछ भी हुआ था जाने में हुआ था और इसी बात की संतुष्टि उसके मन में भी थी कि जो कुछ भी हुआ अनजाने में हुआ और उसका असर जो भी होगा वह अच्छा ही होगा उसने पहले ही इसका असर होना देख ली थी अपने बेटे की नजरों को देखकर,,, अनुभव से भरी हुई सुगंधा अपने बेटे की नजरों को देखकर ही उसकी नीयत को भांप ली थी,,,। सुगंधा इतना तो जानती ही थी कि दूसरे लड़कों की तरह उसका बेटा भी औरतों की तरफ आकर्षित होने लगा है पहले ऐसा नहीं था लेकिन धीरे-धीरे उसमें बदलाव होना शुरू हो गया था जिसका अंदेशा सुगंधा को अच्छी तरह से हो रहा था,,, अंकित सीधा-साधा लड़का था इस बात को सुगंध अच्छी तरह से जानती थी लेकिन अब धीरे-धीरे उसका नजरिया बदलने लगा था उसके मन में भी औरतों को देखकर कुछ-कुछ होने लगा था,,, और इस बात से सुगंध काफी खुश भी थी क्योंकि यही बदलाव तो उसे अपने बेटे में लाना था ताकि वह उसकी तरफ आकर्षित होकर उसके साथ वही कर सके जैसा कि वह चाह रही थी,,,,।
रात का घटनाक्रम उसकी आंखों के सामने भी किसी फिल्म की तरह घूम रहा था वह रोटी पका रही थी लेकिन उसके मन में कुछ और भी खिचड़ी पक रही थी जिस तरह से वह अपनी साड़ी उठाकर घर के पीछे पेशाब करने के लिए बैठी थी उसी समय उसका बेटा आ गया था जिसका एहसास उसे हो गया था,,, सुगंधा वैसे तो हड़बड़ा जाती लेकिन अपने मन पर काबू करके वह पूरी तरह से सहज बनी रही,,, वरना अनजाने में जो काम बन रहा था वह एकदम से बिगड़ जाता है वह जान गई थी कि उसका बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा है अगर उसके मन में औरतों के प्रति आकर्षण ना होता तो वह उस समय अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर वहां से चला जाता है ना कि दरवाजे पर खड़ा होकर तक की लगाकर उसकी गांड की तरफ देखते रहता और वैसे भी यही तो सुगंधा चाहती ही थी,,, अनजाने में ही सही सब कुछ उसके मन का ही हो रहा था और उसे समय सुगंध कितना मदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी क्योंकि अनजाने में ही वह अपने बेटे को अपनी नंगी गांड दिख रही थी अपनी गांड के दर्शन कर रही थी और वह भी पेशाब करते हुए उसकी बुर से लगातार सिटी की आवाज नहीं कर रही थी जो कि उसे इस बात का भी एहसास था कि वह सिटी की आज उसके बेटे के कानों तक जरूर पहुंच रही होगी,,,, और सुगंधा इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों की ख्वाहिश रहती है औरतों को पेशाब करते हुए देखना और उसकी बुर से निकलने सिटी की आवाज को सुनना क्योंकि मर्द उसे आवाज को सुनकर पूरी तरह से मदहोश और उत्तेजित हो जाते थे ऐसा उसे पहले नहीं मालूम था लेकिन यह बात उसके पति ने ही बताया था,,,,।
उसे अच्छी तरह से याद था जब उसकी शादी हुई थी और शादी के 6 महीने ही बीते थे एक रात को इसी घर में तकरीबन रात के 1:30 बज रहे थे और वहां अपने बिस्तर से उठकर घर के पीछे की तरफ जा रही थी तभी उसके पति की नींद खुल गई थी इस बात का एहसास सुगंधा को नहीं था कि उसके पति की भी नींद खुल गई है वह धीरे-धीरे घर के पीछे चली गई और उसी तरह से ही जैसे की कल रात को सुगंधा इस तरह से अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करने बैठ गई थी,,, और उसकी बुर से बड़ी तीव्रता के साथ सिटी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी उसे तो पहले नहीं मालूम था कि उसके पीछे उसका पति ठीक उसके बेटे की तरह ही दरवाजे पर खड़े होकर उसे ही देख रहा है जैसी वह पेशाब करके अपनी जगह से उठकर खड़ी हुई और दरवाजे की तरफ घूमी वह अपने पति को दरवाजे पर खड़ा देखकर एक एकदम से घबरा गई और बोली,,,।
धत्,, मैं तो डर ही गई,,, आप कब आकर खड़े हो गए,,,,
मैं तो तुम्हारे पीछे-पीछे ही आ रहा था,,,।
(सुगंधा मारे शर्म के पानी पानी हो रही थी क्योंकि उसके पति ने उसे पेशाब करते हुए जो देख लिया था क्योंकि आज तक उसे पेशाब करते हुए किसी मर्द ने नहीं देखा था क्योंकि वह हमेशा चार दिवारी के अंदर और कभी बाहर पेशाब करना होता था झाड़ियां के अंदर जाकर करती थी लेकिन आज उसके पति ने उसे खुले तौर पर उसे पेशाब करते हुए देख लिया था इसलिए वह शरमाते हुए बोली)
किसी औरत को इस तरह से पेशाब करते हुए देखना अच्छा लगता है क्या,,,!
हां बहुत अच्छा लगता है खास करके अपनी बीवी को शायद तुम नहीं जानती सुगंधा तुम्हें पेशाब करते हुए देखने में मुझे कितना आनंद मिल रहा था,,, तुम शायद नहीं जानती कि हर मर्द की ख्वाहिश होती है कि वह किसी खूबसूरत औरत का पेशाब करता हुआ देखे उसकी कमर तक उठेगी साड़ी उसकी नंगी नंगी गांड और बुरे से निकलती सिटी की आवाज यह सब मर्दों को मदहोश कर देती है,,,,।
हाय दइया तो क्या तुम्हें आवाज भी सुनाई दे रही थी,,,,,(सुगंधा एकदम शर्म में से पानी पानी होते हुए बोली,,,)
बहुत अच्छे से और तुम्हें पेशाब करते हुए देखकर रोज तुम्हारी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर देखो तो सही मेरी क्या हालत हुई है,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा के पति ने अपने हाथ आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया और उसे ठीक अपनी पेट के ऊपर आगे वाले भाग पर रख दिया वाकई में सुगंध एकदम से घबरा गई क्योंकि उसके पति का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था,,, सुगंधा मदहोश हो गई थी ,वह तुरंत अपना हाथ अपने पति के पेंट से हटा ली,,,,, अपने पति के खड़े लंड का अहसास होते हुए समझ गई थी कि उसका पति आप ऐसे ही उसे छोड़ने वाला नहीं है और वह कुछ बोल पाती नानुकुर कह पाती इससे पहले ही उसके पति ने उसे तुरंत अपनी गोद में उठा लिया और वहां से अपनी गोद में उठाए हुए वह अपने कमरे में लेकर आया और उसे बिस्तर पर पटक कर तुरंत अपने हाथों से उसके बदन से एक एक करके सारे कपड़े को उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,और फिर उसकी जमकर चुदाई किया सुगंध को वह घटनाक्रम आज भी किसी फिल्म की तरह याद थी इसीलिए तो आज उसे अनायास ही वह घटना याद आ गई थी और तभी से उसे इस बात का एहसास था कि मर्दों को औरतों को पेशाब करते हुए देखने में बहुत मजा आता है और इस बात से उसका बेटा भी अछूता नहीं था जिसका एहसास उसे अच्छी तरह से हो गया था इसीलिए तो उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और वह मन में प्रसन्न भी हो रही थी,,,,। और अपने मन में यही सोच रही थी कि काश उसके पति की तरह ही उसका बेटा भी उसे अपनी गोद में उठाकर उसे अपने कमरे में ले जाता और उसकी जमकर चुदाई करता तो कितना मजा आता यह सब याद करके उसकी बुर पानी छोड़ रही थी उसकी पेंटिं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,।
देखते ही देखते नाश्ता और खाना दोनों तैयार कर चुकी थी और संजू के बाद तृप्ति भी नहा कर तैयार हो चुकी थी अंकीत अपनी मां से नजर नहीं मिल पा रहा था हालांकि उसे यही लग रहा था कि उसकी मां को नहीं मालूम है कि वह उसे पेशाब करते हुए देख रहा था लेकिन फिर भी उसे अपनी नजर में शर्म महसूस हो रही थी कि वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था और उत्तेजित भी हो रहा था,,, और सुगंधा भी यही चाहती थी कि सब कुछ सहज तौर पर चलता रहे,,, रात वाली घटनाक्रम के बारे में वह अपने बेटे से बिल्कुल भी बात नहीं करना चाहती थी वह भी यही चाहती थी कि उसके बेटे को भी यही लगे कि उसे नहीं मालूम है दोनों एक दूसरे के प्रति अनजान बने रहना चाहते थे,,,,।
जैसे-जैसे करके चार-पांच दिन गुजर गए,,, रात को टीवी देखते समय अंकित अपने मन में यही सोचता रहता कि काश उसकी मां घर के पीछे जाए तो वह भी पीछे-पीछे उसे पेशाब करते हुए देखने के लिए जाएगा लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था उसकी मां घर में ही बने बाथरूम में पेशाब करके अपने कमरे में चली जाती थी,,,, सुगंधा भी अपने बेटे को तड़पा रही थी वैसे तो उसका भी मन फिर से कर रहा था उसे अपनी नंगी गांड दिखाने का लेकिन वह अपने बेटे को तड़पाना चाहती थी उसके चेहरे पर उसके प्रति जो भाव उत्पन्न हो रहे थे उसकी तरफ देखना चाहती थी और उसे अपने बेटे के चेहरे पर उसे नंगी देखने की उसे पेशाब करते हुए देखने की तड़प साफ दिखाई दे रही थी,,,,।
एक दिन वह बाथरूम में पेशाब करने के लिए बैठी थी तो उसकी नजर अनायास ही लकड़ी के दरवाजे पर गई और उसमें हल्का सा सुराख नजर आ रहा था जो की पानी लगने की वजह से लकड़ा इधर-उधर हो गया था और उसे छोटे से सुराख को देखकर उसके मन में शरण सोचने लगी और वहां लोहे की पतली सी छड़ लेकर उसे सुराग को धीरे-धीरे लंबा करने लगी,,,, जब सुराग उसके मन के मुताबिक हो गया तब वह मंद मंद मुस्कुराने लगी और फिर शाम को मौका देखकर वह अपने बेटे से बोली,,,।
अंकित बाथरूम के दरवाजे में सुराख पड़ गया है,,, उसे पर कोई स्टिकर लगाकर सुराख को बंद कर दे मुझे तो बहुत शर्म आती है अंदर नहाने में,,,
(बाथरूम के सुराख के बारे में सुनकर इस तरह से उसकी मां ने कही थी कि मुझे शर्म आती है बाथरूम के अंदर तुरंत उसके मन में कल्पना उत्पन्न होने लगी की बाथरूम में किस तरह से उसकी मां साड़ी उतार कर अपने कपड़े उतार कर नंगी होकर नहाती होगी पेशाब करती होगी और सब कुछ सुराख में से देखा जा सकता है,,,,, अंकित पूरी तरह से ख्यालों में खो गया उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो सुगंधा फीर से बोली,,,)
अरे तू सुन रहा है कि नहीं,,,,
हां,,,,हांं,,,,, सुन रहा हूं,,,(एकदम से हडबढ़ाते हुए वह बोला,,,,,, अपने बेटे के चेहरे पर कल्पना के भाव सुगंधा को साफ नजर आ रहे थे और मन ही मन हो मुस्कुरा रही थी,,,, वह फिर से बोली,,,)
उसे जरा ठीक कर देना,,,,
ठीक है मम्मी,,,,,।
(सुगंधा देखना चाहती थी कि उसका बेटा क्या करता है दरवाजे की सुराख को ठीक करता है या फिर दरवाजे के सुराख से कुछ देखने की कोशिश करता है,,,।)
दरवाजे में सुराख वाली बात करके सुगंधा अपनी तरफ से पासा फेंक चुकी थी वह यह देखना चाहती थी कि उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे के सुराख को वाकई में ठीक करता है या उसे सुराख से कुछ देखने की कोशिश करता है,,,। वैसे भी जिस तरह से सुगंधा ने अपने गोलाकार मादकता भरी नितंबो के दर्शन,, कराई थी उसे देखते हुए सुगंधा की हिम्मत धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी,,,। उस पल के बारे में सोचकर बार-बार सुगंधा का बदन उत्तेजना से गनगना जाता था,,,, वाकई में सुगंधा के लिए वह पल अपने जीवन का सबसे मदहोशी भरा पल लगने लगा था क्योंकि उस पल की उत्तेजना और उत्सुकता तो उसे अपनी सुहागरात वाली रात को भी नहीं हुआ था,,,।
दरवाजे में सूराख वाली बात को सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, अपनी मां को तो उसने कह दिया था कि हां ठीक कर दूंगा लेकिन बाथरूम में सुराख वाली बात से ही उसके दिमाग की बत्ती जलने लगी थी उसके मन में कल्पनाओं का घोड़ा दौड़ने लगा था,,,। वह अपने मन में यह सोचने लगा था कि बाथरूम के दरवाजे की सुराख से उसे सब कुछ देखने को मिलेगा अगर किस्मत सही हुई तो,,,, क्योंकि उसे इतना तो पता ही था कि बाथरूम के अंदर औरतें अपने कपड़े उतार कर नंगी होकर नहाती है अगर कपड़े उतार कर ना भी नहाती होगी तो भी कपड़े तो बदलती ही होगी और कपड़े बदलते समय उसे बहुत कुछ देखने को मिल जाएगा इस बारे में सोचकर ही उसके तन-बदन में उतेजना की लहर उठ रही थी और उसे अपना लंड खड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था,,,,।
जिस तरह से सुगंधा सहज रूप से उससे बातें कर रही थी उसे देखते हुए अंकित को लगने ही लगा था कि जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था सब कुछ अनजाने में हुआ था इस बारे में उसकी मां को भनक तक नहीं थी तभी तो वह उसके साथ सहज बनी हुई है वरना,,, उस पर गुस्सा दिखाती,,,, अंकित का आकर्षण अपनी मां के लिए बढ़ता जा रहा था और वह भी वह आकर्षण वासना मिश्रित था,,,, अपनी मां की नंगी गांड देखकर अपनी मां के बारे में न जाने कैसे किसी कल्पना करने लगा था और इस कल्पना के चलते ही अंकित जिंदगी में पहली बार मुठ मारने का सुख भी प्राप्त कर लिया था,,,,।
जब जब अंकित बाथरूम के दरवाजे के करीब जाता है या अंदर जाता तब तक उसकी नजर दरवाजे में बने उसे सुराख पर पडती थी,,, और उसे सुराख को देखकर उसके चेहरे पर मादकता भरी मुस्कान बिखरने लगती थी एक दो बार तो वह उस सुराख में से बाथरूम के अंदर झांकने की कोशिश भी किया था कि वाकई में उसे सुराग से सब कुछ दिखाई देता है या नहीं और उसे इस बात से बेहद खुशी हुई थी कि बाथरूम के छोटे से सुराख से उसे अंदर का सब कुछ साफ नजर आता था,,,, लेकिन उसे इंतजार था तो सही समय का सही मौके का और उसे यह मौका नहीं मिल पा रहा था,,,,।
दूसरी तरफ सुगंधा भी सही मौके की ही तलाश में थी क्योंकि जिस दिन से अनजाने में ही उसने अपनी बड़ी-बड़ी गांड के दर्शन अपने बेटे को कराई थी तब से उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी उसे इस बात का भी एहसास हो गया था कि किस तरह से औरतें अपने अंगों को दिखाकर मर्दों को पूरी तरह से पागल बनाते हैं क्योंकि यही हाल अंकित का भी था वह अपने बेटे के चेहरे को बार-बार पढ़ने की कोशिश करती थी उसके नजरों को समझने की कोशिश करती थी और निष्कर्ष यही निकलता था कि,,, वह चोरी छिपे कर नजरों से उसे ही और उसके अंगों को देखने की कोशिश करता था और इस बात से वह अंदर ही अंदर बहुत खुश भी थी लेकिन वह आने वाले पल के लिए उत्सुक थी,जब वो बाथरूम में जाकर अपने बदन से एक करके सारे कपड़ों को उतार कर निर्वस्त्र होगी और उसका बेटा उसके बदन की खूबसूरत अंगों को अपनी आंखों से देखकर मस्त होगा और उसे पाने के लिए ललाईत हो जाएगा,,,, उसे भी उस पल का बेसब्री से इंतजार था,,,, उसे भी सही मौके की तलाश थी,,, लेकिन उसे भी मौका नहीं मिल पा रहा था,,,,।
इस दौरान वह नूपुर से सब्जी मार्केट वाले उसे लड़के के बारे में पूछने की बहुत कोशिश की लेकिन सही मौका उसे भी नहीं मिल पा रहा था उस सवाल को पूछने के लिए वह उसे लड़के के बारे में जानना चाहती थी जो सब्जी मार्केट में उसकी उभरी हुई गांड पर हाथ फेर रहा था और उसकी हरकत पर वह बिल्कुल भी नहीं बोल रही थी बल्कि उसकी हरकत से खुश हो रही थी,,,,,,, वह अपने मन में यही सोच कर परेशान थी कि नूपुर का मासूम चेहरा देखकर बिल्कुल भी नहीं सकता की उसके अंदर दूसरे तरह की औरत छुपी होगी,,,, अपने मन में उठ रहे सवाल के बारे में सोच कर वह अपने बारे में सोचने लगी कि यह सवाल तो उसके ऊपर भी लागू होता है वह भी तो ऐसी बिल्कुल भी नहीं है लेकिन फिर भी अपने ही बेटे के साथ संभोग रत होने के लिए मचल रही है आतुर हो रही है,,,, अपने मन में उठ रहे इस तरह के सवाल का जवाब अपने मन में ही पाकर वह शर्म से पानी पानी हो गई,,,, और वह अपनी जैसी दूसरी औरतों की मजबूरी के बारे में समझने लगी वह नूपुर के पति को देख चुकी थी जो कि नूपुर से कुछ ज्यादा ही उम्र का और मोटी तोंद वाला था,, उसके पति की हालत को देखकर सुगंधा समझ गई थी कि उसका पति किसी भी सूरते हाल में अपनी बीवी को खुश करने लायक बिल्कुल भी नहीं था और इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि नूपुर जैसी खूबसूरत जवान औरत इस तरह के पति को प्राप्त करके बिल्कुल भी खुश नहीं थी ना तो जीवन में और ना ही शरीर सुख में,,, और इसलिए हो सकता है कि अपनी खुशी के लिए अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए उसे जवान लड़की का सहारा लेना पड़ रहा है,,,, इतना तो सुगंध समझ गई थी,,, लेकिन वह उसे लड़की के बारे में जानना चाहती थी कि आखिरकार वह लड़का है कौन उसका कोई रिश्तेदार है पड़ोसी है,,, कौन है जो खुले बाजार में उसके अंगों से इस तरह से छूट ले रहा था और उसे लड़के की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी की सब्जी मार्केट में सब की मौजूदगी में वह लड़का नूपुर की गांड पर हाथ फेर रहा था और वह भी बिना डरे उसे लड़के की हिम्मत को देखकर सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि काश उसका बेटा भी उस लड़के की तरह हिम्मतवाला होता तो आज घर का माहौल कुछ और होता,,,,।
धीरे-धीरे करके उस उन्मादक पल के इंतजार में एक-एक दिन गुजर रहे थे,,, लेकिन वह सुहावने पल का मौका मिल नहीं रहा था,,, लेकिन आखिरकार वह पल आ ही गया जिसका दोनों को बेसब्री से इंतजार था,,,, रविवार का दिन था,,,, सुगंधा अंदर ही अंदर उतावली हो रही थी अपने बेटे को अपना जिस्म दिखाने के लिए आखिरकार इस खेल में मजा भी तो उसे बहुत आ रहा था ऐसा पहली बार हुआ था कि उसने खुलकर अपने बेटे को अपनी नंगी गांड के दर्शन कराए थे लेकिन उसे इस बात का एहसास ताकि ऐसा करने में अद्भुत आनंद की प्राप्ति होगी और अभी तक उसे इस तरह का मौका नहीं मिला था लेकिन आज रविवार था और उसे मालूम था कि दोपहर के समय तृप्ति अपनी सहेलियों के घर जाती है और ऐसे में घर में केवल सुगंधा और अंकित ही मौजूद रहते हैं और यही सही मौका था सुगंधा के लिए अपनी जिस्म की नुमाइश करने के लिए,,,,।
दोपहर का समय जैसे-जैसे बीत रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था,,, क्योंकि दोपहर के 1:00 बज गए थे,,, लेकिन अभी तक त्रप्ती घर से बाहर नहीं गई थी,,,। अंकित को तो एहसास तक नहीं था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है वह सहज रूप से,,, कुर्सी पर बैठकर पढ़ाई कर रहा था लेकिन तिरछी नजर से अपनी मां को भी देख ले रहा था,,,, उसके अंगों के उतार-चढ़ाव को,,, नितंबों के घेराव को,,, और चुचीयों की शोभा बढ़ा रहे दोनों खरबूजे की तरफ चोर नजरों से देख ले रहा था और इस बात को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी वह अपने बेटे की चोर नजरों से अच्छी तरह से वाकिफ थी,,, और इस बात से वह काफी खुश भी थी बस उसे इंतजार था अपनी बेटी के घर से बाहर जाने का क्योंकि वह समझ रही थी कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी,,, सुगंधा बार-बार बाथरूम के दरवाजे की तरफ भी देख ले रही थी क्योंकि दरवाजे का वह छोटा सा सुराख अभी भी उसी तरह से था उसे बंद करने का कोई भी उपाय नहीं किया गया था और इसी से सुबह समझ गई थी कि उसके बेटे के मन में क्या चल रहा है।
सुगंधा बार-बार अंकित की आंखों के सामने से होकर गुजर रही थी और न जाने कहां से उसने इतनी हिम्मत आ गई थी कि उसके सामने अपनी बड़ी-बड़ी गदराई गांड को कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी और अंकित अपनी मां की इस कामुक चाल पर पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी नज़रें बार-बार अपनी मां की गांड पर चली जा रही थी और सुगंध कुछ ज्यादा ही साड़ी को कसके अपनी कमर से बंधी थी जिसे नितंबों का आकार और उभार एकदम साफ नजर आता था,,,,।
बाप रे आज तो कुछ ज्यादा ही गर्मी है ऐसा लगता है नहाना पड़ेगा,,,,
(सुगंधा जानबूझकर साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे पर हवा देते हुए बोल रही थी और अपने बेटे को नहाने की बात कह कर इशारा कर रही थी,,, अंकित भी अपनी मां के मुंह से नहाने वाली बात सुनकर एकदम से गर्म हो गया था लेकिन उसे इस बात का अंदाजा बिल्कुल भी गई था कि उसकी मां जानबूझकर इस तरह की बातें उससे कर रही है ताकि वह बाथरूम के दरवाजे से अंदर झांकने की कोशिश करें उसे तो ऐसा वैसा ही लग रहा था कि जैसे यह सब कुछ सहज रूप से हो रहा है उसे इसमें अपनी मां की कोई भी चाल नजर नहीं आ रही थी,,, लेकिन फिर भी हम अपनी मां की बात को सुनकर जवाब देते हुए बोला,,,)
हां मम्मी तुम ठीक कह रही हो आज कुछ ज्यादा ही गरमी है,,,,,,।
और ऐसी गर्मी में तृप्ति ना जाने क्यों अपनी सहेलियों से मिलने के लिए जाती है शाम को भी तो जा सकती है,,,,(ऐसा कहते हुए वह जान बुझ कर जोर से तृप्ति को आवाज लगाते हुए बोली) तृप्ति बेटा आज बहुत गर्मी है बाहर मत जाना,,,,,(सुगंधा जानबूझकर इस बात को कहकर तृप्ति को याद दिलाना चाह रही थी कि उसे इस समय बाहर जाना होता है और तृप्ति अपनी मां की बात सुनकर अपने कमरे से ही आवाज लगाते हुए बोली,,,)
नहीं मुझे तो जाना ही होगा मम्मी,,,, सहेली के घर जाने के बाद मुझे कोचिंग क्लास भी तो जाना है,,,,।
अरे शाम को चली जाना,,,,
नहीं नहीं मुझे अभी जाना है,,,,(और इतना कहने के साथ ही वहां अपने कमरे में से हाथ में बैग लेकर बाहर आ गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) जरूरी है जाना,,,,।
अरे शाम को चली जाना,,,,
(सुगंधा अपनी बेटी को रोकने के लिए ऊपरी मन से बोल रही थी जबकि वहां यही चाहती थी कि उसकी बेटी इस समय चली जाए,,,,, अपनी मां की बात सुनकर तृप्ति बोली,,,)
कोचिंग क्लास अटेंड करना बहुत जरूरी है इसलिए जाना ही होगा,,,
चल ठीक है लेकिन दुपट्टा सर पर रखना धूप बहुत है,,,
ठीक है मम्मी मैं चली जाऊंगी,,,,,(इतना कहने के साथ ही तृप्ति घर से बाहर चली गई और सुगंधा दरवाजे को बंद कर दी,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि शाम को 6:00 तक का तृप्ति घर पर आने वाली नहीं थी और इस बीच घर में केवल वह और उसका बेटा ही रहने वाले थे बाथरूम में अपना अंग का प्रदर्शन करने का चाहत वह इस समय के दौरान पूरा कर सकती थी इसलिए,,, कुछ देर के लिए वह ड्राइंग रूम में आकर बैठ गई जहां पर उसका बेटा बैठकर पढ़ाई कर रहा था पढ़ाई क्या कर रहा था वह अपनी आंखों से अपनी मां की जवानी भरी अंगों के पन्ने को अपनी आंखों से ही पलट रहा था,,,,। पंखा अपनी गति से चल रहा था लेकिन आज वातावरण से ज्यादा गर्म सुगंधा की जवानी थी जिसकी वजह से उसके माथे से पसीना टपक रहा था ,,,। और वह अपनी साड़ी के आंचल से अपने माथे के पसीने को साफ करते हुए बोली,,,,।
आज तो बिल्कुल भी राहत नहीं है मुझे नहाना ही पड़ेगा,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई अंकित अपनी मां की बातों को सुन रहा था उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी जब वह अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई थी क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि उसकी मां बाथरूम में नहाने के लिए जाएगी,,,,, और इतना कहने के साथ ही सुगंधा,, ड्राइंग रूम से बाहर चली गई लेकिन जाते-जाते तिरछी नजर करके अपने बेटे की हरकत को देखने लगी और उसे इस बात की खुशी थी कि उसे जाते हुए उसका बेटा उसको ही देख रहा था लेकिन सुगंधा के तन बदन में इस बात से और ज्यादा उत्तेजना भारी आग लगने लगी कि उसका बेटा उसे कम लेकिन उसके नितंबों की तरफ कुछ ज्यादा ही घुर कर देख रहा था,,,,, सुगंधा ड्राइंग रूम से बाहर निकल गई थी अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि कुछ ही देर में उसकी मां बाथरूम के अंदर जाने वाली थी और बाथरूम में एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाने वाली थी अंकित को इस बात का डर था कि कहीं उसकी चोरी पकड़ी गई तो क्या होगा लेकिन वह अपनी लालच को दबा भी नहीं पा रहा था आज वह अपनी मां को नंगी होते हुए देखना चाहता था उसके खूबसूरत अंगों को अपनी आंखों से देखना चाहता था और यह सब तभी हो सकता था जब वह खुद बाथरूम के दरवाजे तक जाकर उसे सुराख से अंदर देखने की कोशिश करता तब और इसके लिए उसे हिम्मत की जरूरत थी और जहां वासना का असर होता है वहां हिम्मत अपने आप ही आ जाती है और ऐसा ही अंकित के साथ भी हो रहा था कुछ देर बाहर खड़ी रहने के बाद सुगंधा दरवाजे को इस तरह से खोली कि उसकी आवाज अंकित के कानों तक साफ सुनाई दे,,,, और बाथरूम में प्रवेश करने के बाद दरवाजे को भी इतनी जोर से बंद की ताकि उसकी आवाज भी उसके बेटे के कानो तक आराम से पहुंच जाए,,,, और जैसा वह सोच रही थी ऐसा हुआ भी दरवाजा के खुलने और बंद होने में अंकित का दिन बड़े जोरों से धड़कने लगा मानो के जैसे कोई उसके दिल के दरवाजे को ही बंद कर रहा हो कुछ देर तक बैठे रहने के बाद अंकित से रहा नहीं गया आखिरकार वह अपनी हिम्मत जुटा कर वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और धीरे-धीरे दबे कदमों से वह देखते ही देखते बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच गया,,,,।
दोनों तरफ से आग बराबर लगी हुई थी,,, जितनी उत्सुकता अंकित कोठी अपनी मां को नग्नावस्था में देखने की उतनी ही ज्यादा उतावली सुगंध भी थी अपने बदन से कपड़े उतार कर नंगी होकर अपने बेटे को अपना अंग दिखाने के लिए,,,, बाथरूम में घुसने के बाद वह कुछ देर तक उसी तरह से खड़ी रह गई थी वह,,, वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा बॉथरूम तक आता है या नहीं और न जाने उसे क्यों अंदर से एहसास हो रहा था कि उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे तक जरूर आएगा इसीलिए उसने अभी तक अपने बदन से कपड़े उतारी भी नहीं थी ,,,बस अपने बेटे के करीब आने का इंतजार कर रही थी,,,, इसीलिए वह अपने बेटे की चहल कदमी पर कान गड़ाए खड़ी थी,,, और जैसे ही उसे हल्की सी अपने बेटे के कदमों की आहट सुनाई थी वह एकदम से सतर्क हो गई और उसके कदमों की आहट को बाथरूम के दरवाजे के करीब महसूस करने लगी,,,।
धड़कते दिल के साथ अंकित बाथरूम के दरवाजे के करीब खड़ा हो गया था लेकिन उसे बाथरूम के सुराख से अंदर झांकने की हिम्मत नहीं हो रही थी० उसका दिल बड़ी जोरों से लड़ रहा था एक तरफ वह अपने इस लालच को रोक भी नहीं पा रहा था वहीं दूसरी तरफ उसे डर भी लग रहा था कि कहीं उसकी मां को पता चल गया तो गजब हो जाएगा,,,, वह कुछ देर खड़े होकर इस बारे में सोच रहा था कि,,, वह सुराख में से अंदर झांके या चला जाए,,, उसके अंतर्मन में मन मंथन चल रहा था वह किसी निष्कर्ष पर पहुंच नहीं पा रहा था लेकिन उसके दिलों दिमाग पर वासना पूरी तरह से अपना असर दिख रहा था और आखिरकार उपासना की जीत हुई और वह मजबूर हो गया बाथरूम के सुराख से अंदर झांकने के लिए,,, और वह धीरे से अपने घुटनों के बल बैठ गया वह पूरी तरह से निश्चित था किसी के आने के लिए क्योंकि वह जानता था कि समय घर पर कोई नहीं आने वाला था दरवाजा बंद था और उसकी बड़ी बहन शाम से पहले आने वाली नहीं थी इस समय घर में केवल उसकी मां और वह खुद मौजूद था और उसकी मां बाथरूम के अंदर थी अंदर से उसे किसी भी प्रकार की आहट की आवाज नहीं आ रही थी और अंदर खड़ी सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि जिस तरह की आहट उसे अंदर सुनाई दे रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि जैसे उसका बेटा अपने घुटनों के बल बैठ रहा हो,,,,।
मां बेटे दोनों अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर लिए थे,,,, अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हुई जा रही थी जिंदगी में पहली बार वह इतनी हिम्मत कर रहा था अपनी मां को नग्न अवस्था में देखने के लिए, उसे अपने बदन से कपड़े उतारते हुए देखने के लिए हालांकि,,,वह पहले भी अपनी मां की गोरी गोरी गांड के दर्शन कर चुका था लेकिन वह अनजाने में हुआ था,,,, उसे समय तो वहां जाने में ही आकर दरवाजे पर खड़ा हो गया था और उसकी आंखों के सामने मदहोश कर देने वाला दृश्य अपने आप ही दिखाई देने लगा था लेकिन यहां तो उसे अपनी मां का गोरा नंगा बदन देखने के लिए हिम्मत दिखाना होगा अपनी मर्दानी ही दिखानी होगी तब जाकर उसे बेहतरीन मदहोश कर देने वाला नजारा देखने को मिलेगा और इसीलिए वह अपने मन को पूरी तरह से तैयार कर चुका था,,,,।
बाथरूम के अंदर खड़ी सुगंध भी बाथरूम के उस छोटे से सुराग की तरफ नजर गडाएं खड़ी थी,, अभी तक वह बाथरूम के अंदर ज्यों की त्यों थी,,, अपने बदन से एक भी कपड़े उसने उतारे नहीं थे,,,, लेकिन जैसे ही उसे महसूस होगा कि बाथरूम का वह छोटा सा सुराख पर हल्की सी परछाई महसूस हो रही है वह समझ गई कि उसके बेटे ने बाथरूम के उस छोटे से सुराख पर अपनी आंखों को जमा दिया है,,, और उसका सोचना सही था धड़कते दिल के साथ अंकित अपनी आंखों को उसे छोटे से सुराख पर जमा दिया था अंदर देखने के लिए,,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था कुछ ही पल में उसे बाथरूम के अंदर का दृश्य एकदम साफ नजर आने लगा बाथरूम थोड़ा लंबाई में ज्यादा नहीं लेकिन फिर भी ठीक-ठाक था उसे,,, अपनी मां संपूर्ण रूप से दिखाई दे रही थी ऊपर से नीचे तक सब कुछ साफ नजर आ रहा था और यही तो वह चाहता था और पहले भी उसे छोटे से सुराख की जांच पड़ताल कर लिया था कि उस छेद से अंदर का कुछ दिखाई देता है कि नहीं,, लेकिन उसकी किस्मत बड़ी तेज थी सबको साथ दिखाई दे रहा था उसे यह दिखाई दे रहा था कि उसकी मां बाथरूम में खड़ी थी और इस बात से हैरान था कि अभी तक उसने अपने कपड़े उतारे क्यों नहीं थे,,,, और इस बात को सुगंधा भी अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि वह काफी देर से बाथरूम के अंदर थी लेकिन अभी तक उसके बदन से एक भी वस्त्र उतरे नहीं थे,,, और इसीलिए वह चाहती थी कि उसके बेटे को जरा भी सपना होगी जो कुछ भी हो रहा है सब उसकी सोच के मुताबिक हो रहा है इसलिए वहां अपने बेटे का ध्यान भटकाने के लिए अपने हाथ में ब्रस ले ली थी और उसे पर टूथपेस्ट लगाकर अपनी दांतों को घिस रही थी और उसकी चालाकी से अंकित को जरा भी शक नहीं हुआ उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां इतनी देर से ब्रश कर रही थी,,,,।
सुगंधा का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था अभी तक उसने अपना प्रदर्शन शुरू भी नहीं किया था लेकिन अंक प्रदर्शन के एहसास से ही वह पूरी तरह से मत भेज रही थी और उसकी इस मस्ती का सागर उसकी दोनों टांगों की पतली दरार से उभर रहा था,,,, उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, चोरी छुपे अपनी मां को देखने का भी एक अलग सुख था जिसका एहसास अंकित बराबर ले रहा था अपनी मां को बाथरूम में खड़ी होकर ब्रश करता हुआ देखकर भी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी और जिसका आंसर सीधा उसके लंड पर हो रहा था जो कि एकदम से टनटना कर खड़ा हो गया था,,,,,। सुगंधा भी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके पास भी पर्याप्त समय है इसलिए वह कोई भी जल्दबाजी नहीं करना चाहती थी वह बड़े आराम से अपने बेटे को अपना हर एक अंग दिखाना चाहती थी ताकि उसका बेटा उसके खूबसूरत अंगों को देखकर पूरी तरह से बावला हो जाए और उसे प्राप्त करने के लिए थोड़ी हिम्मत दिखाएं,,,,।
ब्रश कर लेने के बाद सुगंधा साफ पानी से अपना मुंह धो कर साफ कर ली और फिर शुरू की अपना अंग प्रदर्शन का पहला अध्याय वह अपनी साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर से नीचे गिरा दी और उसे अपनी कमर से खोलना शुरू कर दी यह देखकर अंकित की हालत खराब होने लगी वह समझ गया कि उसकी आंखों के सामने उत्तेजना से भरा होगा नाटक शुरू हो गया है जिसकी नायिका इस समय थी उसकी मां जो कि किसी हीरोइन से कम नहीं थी,,,, और इस बात को भी समझ रहा था कि उसका इस तरह से हिम्मत दिखा कर बाथरूम के दरवाजे से अंदर झांकना निरर्थक नहीं था अंदर का दृश्य उसकी हिम्मत को पूरी तरह से सार्थक कर रहा था,,,,। आज तक उसने उसकी जानकारी में कभी भी अपनी मां को इस अवस्था में नहीं देखा था उसे कपड़े उतारते हुए नहीं देखा था लेकिन आज माहौल और समय बदल चुका था आज वह जानबूझकर अपनी मां को इस अवस्था में देखने के लिए मजबूर हो गया था उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,,। और अंदर खड़ी सुगंध धीरे-धीरे अपनी कमर से बड़ी हुई साड़ी को खोलकर वही बाथरूम में कोने में रख दी और बाथरूम में हुआ केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी इस अवस्था में भी वह बाला की खूबसूरत लग रही थी गोरा बदन बाथरूम के अंदर चमक रहा था,,,, वैसे तो बाथरूम में बल्ब नहीं था लेकिन बाथरूम के अंदर की खिड़की पीछे की तरफ खुलती थी जो कि ऊपर की तरफ से खुली होने की वजह से बाहर की धूप की रोशनी में पूरा बाथरूम जगमगा रहा था और अंकित को सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,,।
अंकित बड़े गौर से अंदर के दृश्य को देख रहा था उसकी सांसे हौले हौले से चल रही थी और वह किसी भी प्रकार की आवाज किए बिना अंदर के नजारे का आनंद लूट रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां जिस तरह से पेटीकोट को बंधी हुई थी और पेटीकोट में जिस तरह से कमर के हिस्से के बगल में हल्का सा पेटिकोट कटा हुआ होता है वहां का गोरा बदन देखकर उसके लंड की हरकत बढ़ने लगी थी क्योंकि उसे पेटिकोट के उसे हिस्से में से अपनी मां की जांघों को जोड़ने वाला त्रिकोण आकार की हम किसी लकीर दिखाई दे रही थी जो की चड्डी पहने होने के बावजूद भी साफ नजर आ रही थी उसे हल्की सी पतली लकीर को देखकर अंकित का मन मचलने लगा था उसे एहसास होने लगा था कि वह पतली लकीर कौन सी जगह पर जाकर खत्म होती होगी क्योंकि वह औरतों के उसे अंग के बारे में जान चुका था क्योंकि उसके दोस्त ने नंगी गंदी किताब जो दिखा दिया थाऔर वहां अच्छी तरह से जानता था की औरतों की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार कैसी दिखती है लेकिन अभी तक उसने अपनी आंखों से असलियत में उसे अंग को नहीं देखा था लेकिन आज उसे लग रहा था कि आज उसकी मन की मुराद पूरी हो जाएगी,,,,।
अंकित बाथरूम के दरवाजे के पास घुटनों के बाल बैठा हुआ था और सब कुछ बड़ी खामोशी से चल रहा था अंदर सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा अंदर के दृश्य को बराबर देख रहा है क्योंकि उसे हल्की सी परछाई नजर आती थी उस पतले से सुराख से,,,,। सुगंधा भी पहली बार ही इतनी हिम्मत दिखा रही थी क्योंकि पहली बार जिस तरह से उसने अपने बेटे को अपने नितंबो के दर्शन कराए थे वह सब कुछ अनजाने में हुआ था,,,, वह कोई जानबूझकर अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करने नहीं बैठ गई थी वह तो सहज रूप से घर के पीछे गलती दरवाजा बंद करने के लिए लेकिन उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी इसलिए वह अपनी साड़ी कमर तक उठकर उसी कोने में पेशाब करने के लिए बैठ गई थी उसे क्या मालूम था कि उसी समय उसका जवान बेटा उधर आ जाएगा और उसे पेशाब करते हुए देख लेगा,,,,। लेकिन उसे दिन जो कुछ भी अनजाने में हुआ था आज सुगंध जानबूझकर करना चाहती थी और उसे दिन भी उसका बेटा अनजाने में उसे जगह पर पहुंच गया था लेकिन आज वह भी जानबूझकर बाथरूम के दरवाजे के सुराख से उसे देख रहा था इसलिए दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी,,,, सुगंधा की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,, इस तरह की हरकत उसने अपने पति के सामने ही की थी लेकिन आज माहौल ऐसा बन चुका था कि आज उसे अपने बेटे के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी होना पड़ रहा था और वह भी अपनी खुशी से ना कि किसी दबाव से,,,।
सुगंधा का दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था,,,, वह दरवाजे के सामने मुंह करके अपने ब्लाउज का बटन खोल रही थी और जैसे-जैसे उसकी नाचे को उंगलियां ब्लाउज के बटन पर हरकत कर रही थी वैसे-वैसे अंकित की हालत खराब होती जा रही थी उसे बाथरूम के अंदर सब कुछ साफ नजर आ रहा था और वह उतावला हुआ जा रहा था अपनी मां की खूबसूरत अंगों को देखने के लिए उसके दोनों दशहरी आम को देखने के लिए जिसे पकड़ कर दबाने की इच्छा वह न जाने कब से अपने मन में दबे हुए था,,,,।
सुगंधा एक-एक करके अपने ब्लाउज के बटन को खोलती चली जा रही थी अंकित यही समझ रहा था कि उसे क्या मालूम है कि बाहर चोरी छुपे उसका बेटा उसकी हरकत को देख रहा है जबकि उसकी मां को सब कुछ पता था यह सब उसकी मां की ही चाल थी जिसमें वह पूरी तरह से शामिल हो चुका था और उसे पता भी नहीं था,,,,।
देखते ही देखते सुगंधा अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोल चुकी थी,,,। ब्लाउज के बटन के खुलते ही उसके पीले रंग की ब्रा एकदम साफ दिखाई दे रही थी गोरा बदन पीले रंग की ब्रा में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था अपनी मां की पीले रंग की ब्रा को देखते ही अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आने लगा वह अपनी मां की ब्रा को फटी आंखों से देख रहा था पर उसकी मां अपने ब्लाउज के दोनों पत्तों को अपने दोनों हाथों में पड़कर उसे अपनी गोरी बाहों से अलग कर रही थी और देखते ही देखते अपने ब्लाउस को उतार कर वह अपने साड़ी के ऊपर फेंक दी जो की कोने में पड़ी हुई थी,,,,,, सुगंधा की भरी हुई छातिया पीले रंग के छोटे से ब्रा में बिल्कुल भी समा नहीं पा रही थी,,,, वह अपने छोटे से ब्रा में अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को बड़ी मुश्किल से कैद करती थी और वह अपनी साइज से दो नंबर के कम ही माप के ब्रा को पहनती थी ताकि उसकी चुचियों का कसावपन बरकरार रहे,,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा ही समय उसकी चूचियों की तरफ देख रहा होगा उसकी ब्रा को देख रहा होगा और मन ही मन मस्त हो रहा होगा क्योंकि वह बिल्कुल भी अपने बेटे से हाथ छुपाना नहीं चाहती थी इसीलिए तो बाथरूम के दरवाजे की तरफ मुंह करके अपने कपड़ों को उतार रही थी और वाकई में बाथरूम के बाहर चोरी चुपके से अंदर का दृश्य देख रहा अंकित पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था अपनी मां को इस रूप में देखकर उसके बटन पर केवल पेटिकोट थी और पीले रंग की ब्रा थी और उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी मां की भारी भरकम दशहरी आम छोटे से ब्रा में बड़ी मुश्किल से कैद थी और वह दोनों उस कैद से बाहर आने के लिए तड़प रहे थे,,,,, अंकित अपने आप से ही बात करते हुए अपने मन में बोल रहा था,,,, जल्दी से उतर अपनी ब्रा मैं तेरी चूचियों को देखना चाहता हूं मैं देखना चाहता हूं कितनी बड़ी-बड़ी है,,,,,।
और ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा अपने बेटे की मां की बात को अच्छी तरह से सुन रही हो और वह जल्दी से अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर के अपनी ब्रा के हकों को खोलने लगी लेकिन इस समय वह अपनी नंगी चिकनी पीठ को बाथरूम के दरवाजे की तरफ कर दी क्योंकि वह जानबूझकर अपने बेटे को दिखाना चाहती थी की औरतों की ब्रा का हो कैसे खोला जाता है और इस समय अंकित अपनी मां की चिकनी मखमली पीठ को देखकर पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था उसके लंड कि ऐंठन बढ़ती जा रही थी,,,,, और उसे हिसाब महसूस हो रहा था कि उसकी मां किस तरह से अपनी उंगलियों को हरकत देते हुए पर जाकर हमको खोल रही थी उसी समय उसे अपनी मां के नितंबों का उभार भी पेटीकोट में एकदम साफ नजर आ रहा था मन तो कर रहा था कि दरवाजा खोलकर वह अंदर घुस जाए और अपनी मां की खूबसूरत बदन से खेलना शुरू कर दे लेकिन इतनी हिम्मत उसमें अभी नहीं थी,,,, और देखते ही देखते अपने बेटे की आंखों के सामने ही सुगंधा अपने पर के हक को खोल दी थी और जैसे ही ब्रा का हक खोली वह तुरंत फिर से दरवाजे की तरह मुंह करके खड़ी हो गई क्योंकि ब्रा का हुक खुलते ही उसकी ब्रा की कटोरी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर से एकदम ढीली हो गई और ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे बड़ी-बड़ी दशहरी आम के ऊपर से उसका छिलका अलग हो रहा हो इस तरह से सुगंधा,, अपनी ब्रा के दोनों कप को अपने हाथों से अपनी चूची पर से हटाकर उसकी डोरियों को अपनी गोरी गोरी बाहों में से बाहर निकाल दी,,,और अपनी ब्रा को बाथरूम के कोने में फेंक दी,,,,। इस समय अंकित की मां जिस अवस्था में बाथरूम के अंदर खड़ी थी इस बारे में कभी अंकित ने कल्पना भी नहीं किया था सच में उसकी मां की चूचियां एकदम पके हुए दशहरी आम की तरह थी,,, जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसे पकड़ने के लिए अपनी हथेली में दबोचने के लिए मचल रहा था,,,,,, अंकित अपनी मां को देखा ही रह गया बाथरूम के अंदर का दृश्य इतना गर्म हो जाएगा उसे अहसास तक नहीं था वातावरण की गर्मी से ज्यादा उसे अपनी मां की जवानी की गर्मी परेशान कर रही थी,,,, सुगंधा भी जी भर कर अपने बेटे को अपनी चूचियों के दर्शन करना चाहती थी इसीलिए इस अवस्था में दरवाजे के सामने मुंह करके खड़ी रह गई थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा जो बाथरूम के सुराख से आंखें लगाए हुए बैठा है इस समय उसकी चूचियों को देखकर पागल हो रहा होगा और यह सही भी था,,,,। वास्तव में उसकी हालत खराब हो जा रही थी अपनी मां की नंगी चूची को देखकर उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था उत्तेजना के मारे उसके कान के दोनों पट एकदम लाल हो गए थे,,,,।
सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी अपने जवान बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारते हुए उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हो रहा था जिसका असर उसे सीधा अपनी बुर की गहराई में महसूस हो रहा था उसे अपनी बुर में खुजली होती हुई महसूस हो रही थी लेकिन वह जानती थी कि यह खुजली खुजलाने से मिटाने वाली नहीं थी इसे मिटाने के लिए मोटा तगड़ा लंड की जरूरत थी जो कि अभी उसके नसीब में नहीं था,,,,। अपने बेटे की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ाने के लिए सुगंधा अपने दोनों हथेलियों को अपनी चूची पर रखकर उसे हल्के से दबा दी,,,, और उत्तेजना के मारे उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए और यह नजारा देखकर तो अंकित के होश उड़ गए उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी मां एकदम चुदवासी हुए जा रही थी,,,, और औरत का यह भाव उसे पहले नहीं मालूम था लेकिन जब से उसके दोस्त ने नंगी औरतों की गंदी किताब उसे दिखाया था तब से उसे बहुत कुछ समझ में आ गया था क्योंकि इस तरह का हाव-भाव को उसने गंदी किताब में छपी औरतों के चेहरे को देखा था,,,,, और बिल्कुल वैसा ही हाव भाव इस समय उसकी मां के चेहरे पर नजर आ रहा था,,,,
सुगंधा धीरे-धीरे अपनी हथेलियों का कसाव अपनी चूचियों पर बढ़ा रही थी वह जानबूझकर अपने बेटे को यह सब दिख रही थी वह अपने बेटे को जताना चाहती थी कि वह अंदर से कितनी प्यासी है,,, जैसे-जैसे अपनी मां की हथेलियां को उसकी ही चूची पर उसका कसाव बढ़ता हुआ देख रहा था वैसे-वैसे अंकित की हालत खराब होती जा रही थी उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे इससे पहले वह शायद इन सब का मतलब नहीं जानता था अगर वह अपने दोस्त के द्वारा बताई गई गंदी किताब को ना देखता तो अपनी मां के मन की भावना को वह समझ नहीं पता अपनी मां की हरकत को देखकर वह समझ रहा था कि वह अंदर से बहुत ज्यादा मस्त हो रही है,,,, और यह सब सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को दिखा रही थी,,, अपने बेटे की आंखों के सामने इस तरह की हरकत करने में उसे शर्म तो महसूस हो रही थी लेकिन न जाने की उत्तेजना के महासागर में वह डुबकी भी लग रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से लगातार मदन रस का बहाव हो रहा था,,,।
कुछ देर तक सुगंधा अपनी हरकत को इसी तरह से जारी रखते हुए अपने बेटे की भावना में कामाग्नि का तड़का लगा रही थी,,, और उसकी यह हरकत वाकई में अंकित के तन बदन में आग लग रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,,, सुगंधा पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी अगर इस समय उसका बेटा दरवाजे को खोलने के लिए कहता है और यह कहता कि मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं तो सुगंधा इसमें बिल्कुल भी देरी न करती और दरवाजे को खोलकर उसे बाथरूम में ले लेती और फिर उसके कड़क अंग को अपने कोमल अंग में उसकी गहराई में लेकर मस्त हो जाती,,,,।
अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर अपनी प्रसन्नता के भाव को और उत्तेजना के भाव को बिल्कुल भी छुपा नहीं पा रहा था उसके कान के दोनों पट एकदम लाल हो चुके थे,,, लंड की नसों मैं रक्त का प्रवाह इतनी तेजी से हो रहा था कि उसमें अद्भुत अकड़न सी आ गई थी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी सांसे गहरी चल रही थी और वह अपनी नजरों को बाथरूम के उसे छोटे से छेद से हटा नहीं पा रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि कुछ ही देर में बाथरूम के छेद से उसकी मां का गुलाबी छेद नजर आने वाला है,,,। कुछ देर अपनी चूचियों से खेलने के बाद वह अपने पेटिकोट की डोरी पर अपना हाथ रख दे और अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए उसकी डोरी को पकड़ ली लेकिन वह अपनी पेटिकोट की डोरी को खींचकर अपनी पेटीकोट को उतार दी इससे पहले पेटिकोट के उस त्रिकोण कटे हुए हिस्से में अपनी दो उंगली डाल दी और फिर उंगली के सहारे से अपनी बुर वाली जगह को हल्के हल्के सहलाना शुरू कर दी,,, हालांकि अंकित को अपनी मां की दो उंगलियां पूरी तरह से नजर नहीं आ रही थी लेकिन पेटिकोट के ऊपरी हिस्से पर उसकी दोनों उंगलियों हरकत करती हुई उभर कर अपनी होने का एहसास कर रही थी और अपनी मां की हरकत पर तो अंकित पूरी तरह से फिदा हो गया,,,,, और उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी है,,,,।
सुगंधा चाहती तो दीवाल की तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती लेकिन इस तरह से वह अपनी जवानी का प्रदर्शन पूरी तरह से नहीं कर पाती क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे के बाहर बैठकर उसके हसीन हुस्न को देख रहा है और इसीलिए सुगंधा अपने बेटे को अपनी जवानी के जाल में फंसाने का कोई भी मौका गवाना नहीं चाहती थी,,,, कुछ देर तक वह अपनी बर वाले हिस्से को पेटिकोट के कटे त्रिकोण वाले हिस्से में अपनी उंगली को डालकर उसे सहलाती रही और फिर धीरे से अपनी पेटिकोट की डोरी को एक झटके से खींचकर उसकी गिठान को खोल दी,,, उसकी कमर पर कई हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन पेटिकोट कमर पर टंगी भी रह गई क्योंकि नितंबों का उभार उसे टिकने का सहारा दिया हुआ था जिसे सुगंधा खुद अपने दोनों हाथों की उंगलियां से ढीली करते हुए उसे कमर के ऊपर से ही उसे अपनी ऊंगलियो से नीचे छोड़ दिया और किसी नाटक के परदे की तरह उसका पेटिकोट भरभरा कर उसके कदमों में जाकर गिर गया,,, और सुगंधा संपूर्ण रूप से नंगी हो गई केवल उसकी बेस कीमती का जाने को छुपाने के लिए उसके बदन पर पीले रंग की पेटी टिकी हुई थी और वह भी आगे से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी क्योंकि उसकी बुर से लगातार मदन रस बह रहा था,,,,।
अंकित के कोमल मन पर बार-बार उसकी मां का हुस्न उसकी गर्म जवानी छुरिया चला रही है,,, पहली बार वह अपनी मां को इस तरह से नग्नावस्था में देख रहा था पहली बार हमसे इस बात का एहसास हो रहा था की साड़ी में जितनी खूबसूरत उसकी मां दिखाई देती है उसे भी ज्यादा खूबसूरत कपड़े उतार देने के बाद नंगी हो जाने के बाद दिखाई देती है ऐसा लगता है कि जैसे स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा बाथरूम के अंदर नहाने की तैयारी कर रही हो,,,, छोटी सी पीले रंग की चड्डी में अपनी मां का खुश ना देख कर उसका गोरा बदन देखकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था पेट के अंदर उसका लंड दर्द करने लगा था और वह पेंट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड़ को देखकर वह मूठ मारना सीख गया था,,,, और इस समय तो उसकी आंखों के सामने उसकी मां पूरी तरह से नंगी होने जा रही थी ऐसे में अंकित को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करेगा,,,,,। सुगंधा दरवाजे की तरफ मुंह करके खड़ी थी अपने बेटे को वह पूरी तरह से अपने नंगे बदन के दर्शन कर रही थी और वह अपने बेटे की हालत को और ज्यादा खराब करते हुए अपनी हथेली को पूरी तरह से पीले रंग की पेंटी पर रख दी और अपनी बुर को अपनी हथेली से दबाते हुए मसलना शुरू कर दी,,,। अंकित को अपनी मां की हरकत और उसके चेहरे का हाव-भाव एकदम साफ दिखाई दे रहा था उसके हवा में और गंदी किताब की हीरोइन के हाव भाव में बिल्कुल भी अंतर नहीं था आज चोरी छिपे अंकित अपनी मां का एक नया रूप देख रहा था,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसकी मां इस तरह की हरकत करती होगी लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसका भ्रम टूटता हुआ नजर आ रहा था,,,,।
सब कुछ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे जल्दबाजी की इच्छा दोनों में नहीं है दोनों हौले हौले से इस मदहोशी भरे पल का आनंद लूट रहे थे लेकिन अब समय आ गया था सुगंधा को नंगी होकर अपने बेटे की जवानी पर कब्जा करने का,,, सुगंधा इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा दूसरे लड़कों से बिल्कुल विपरीत था वह इन सब मामलों में बिल्कुल भी रुचि नहीं लेता था लेकिन उसकी ही वजह से आज उसका बेटा उसके हुस्न का कायल हुआ जा रहा था,,,, सुगंधा कोई समय महसूस हो रहा था कि वाकई में औरत की जवानी उसका नंगा बदन किसी भी मर्द को घुटनों पर लाने के लिए सक्षम होता है और इस समय यही हो भी रहा था वह अपने सीधे-साधे बेटे को एक जवान मर्द बनाने की ओर लिए जा रही थी,,,। और इसीलिए वह अपनी पीली चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे-धीरे नीचे सरकाना शुरू कर दी,,,, इस तरह की हरकत उसने मदहोशी भरे पल में भी अपने पति के सामने नहीं की थी हालांकि वह अपने वस्त्र उतार कर अपने पति के सामने नंगी जरूर होती थी लेकिन इतनी मदहोशी से कभी नहीं,,,, लेकिन आज अपने बेटे के सामने वह सब कुछ करने पर मजबूर हो चुकी थी,,,, ।
अपने दोनों हाथों में अपनी चड्डी के दोनों छोर को पकड़ कर वह उसे नीचे सरकाने की पूरी तैयारी में थी,,, थोड़ा सा वह नीचे सरका भी दी थी,,,, बाहर से देख रहा हूं अंकित पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगा रहा था उसका मुंह खुला का खुला था वह सांस को मुंह से ले रहा था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उसका लंड पेट के अंदर से मचल रहा था बाहर आने के लिए सुगंधा अपने बेटे को अपनी बुर बड़े अच्छे से दिखाना चाहती थी,,,। इसलिए बाथरूम में टंगी टावल को अपने हाथ में लेकर वह थोड़ा दरवाजे के और करीब आई और उसे दूसरी तरफ टांग दी वह सिर्फ एक बहाने से अपने बेटे की और करीब आना चाहती थी वह अपनी बुर को अपने बेटे को और अच्छे से दिखाना चाहती थी,,, क्योंकि सुगंध का मन कहता था कि अब तक उसके बेटे ने बुरे के दर्शन नहीं किए होंगे,,, और यह बात सच ही थी गदी किताब में वह ढेर सारी हीरोइन की बुर को देखा था लेकिन हकीकत में वह पहली बार अपनी मां की बुर को देखने जा रहा था,, जैसे ही उसकी मां दरवाजे के करीब आई अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास हो गया कि इतनी करीब से उसकी मां की बुर और अच्छे से दिखाई देगी,,,,,।
दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी,,, अंकित बाहर से किसी भी प्रकार की आहट नहीं कर रहा था क्योंकि वह अपनी मां को बिल्कुल भी एहसास दिलाना नहीं चाहता था कि बाथरूम के बाहर वह बैठ कर सब कुछ देख रहा है जबकि उसकी मां को सब कुछ मालूम था,,,। सुगंधा से भी अब रहा नहीं जा रहा था वह जल्दी से अपनी चड्डी को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो जाना चाहती थी ताकि वह अपने बेटे को अपनी नंगी जवानी दिखा सके और इसीलिए वह एक झटके से अपनी चड्डी को घुटनों तक खींच दी और उसके इस हरकत पर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई अंकित को सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,, लेकिन वह देख कर कुछ समझ पाता है इससे पहले उसकी मां थोड़ा सा और नीचे झुक गई और अपनी पैंटी को अपने पैरों में से निकलने लगी और उसके भी हरकत पर उसके दोनों दशहरी आम एकदम से झूल गए,,, मानो की जैसे पेड़ पर लटक रहे हो,,, अपनी मां की चूचियों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया,,,,। अंकित का मन कर रहा था कि दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ ले उसे जोर-जोर से दबाए,,,, लेकिन इस समय ऐसा मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था,,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां अपनी पैंटी को निकाल कर पूरी तरह से नंगी हो गई और खड़ी हो गई,,,, अंकित और उसकी मां के बीच केवल 2 फुट की ही दुरी थी कहने के तो यह दूरी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन बाथरूम का दरवाजा इस दूरी को बनाए रखे हुए था क्योंकि हकीकत में अगर दो फीट की दूरी इस अवस्था में होती तो शायद इस समय हालात और नजारा पूरी तरह से बदल गया होता क्योंकि तब ना तो मां को सब्र होता और ना ही बेटा अपने आप पर काबू कर पाता और न जाने कब से उसकी दोनों टांगें फैला कर अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया होता,,,,।
सुगंधा बिल्कुल दरवाजे के पास खड़ी थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी और उसकी बुर के इर्द-गिर्द हल्के हल्के रेशमी बालों के हुए थे,,, अंकित तो इस नजारे को देख कर पूरी तरह से पागल बज रहा था पहली बार हुआ किसी औरत की बुर को देख रहा था और वह भी किसी गैर की नहीं बल्कि अपनी ही मां की बुर को देख रहा था इसलिए उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी उत्तेजना उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से अपना काबू जमा रखे थे वह बिल्कुल अपने होश में नहीं था उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था क्योंकि बाथरूम के अंदर जो औरत इस समय खड़ी थी वह उसकी मां थी लेकिन इस समय उसके देखने का रवैया पूरी तरह से बदल चुका था बाथरूम में खड़ी उसकी मां उसे अपनी मां नहीं बल्कि एक खूबसूरत औरत नजर आ रही थी,,,,, गहरी सांस लेते हुए अंकित को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर की बहार मोतियों के दाने की तरह चमक रहा उसका नमकीन पानी उभरा हुआ था हालांकि औरत की बुरी में से निकल रहे मदन रस के बारे में अंकित कुछ भी नहीं जानता था उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां की बुर की ऊपरी हिस्से पर उसकी पेशाब की बुंद लगी हुई है जो कि इस समय मोती के दाने की तरह चमक रही थी और उसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,, अपने बेटे की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए सुगंधा बेशर्मी दिखाते हुए अपनी हथेली को पूरी तरह से अपनी गरमा गरम बर पर रख दी और उसे अपनी हथेली के नीचे दबा ली और फिर उसे हल्के हल्के मसाला शुरू कर दी और उसकी हरकत पर उसके मुंह से गरमा गरम सिशिकारी की आवाज हल्के हल्के से निकल रही थी जो की अंकित के कानों में पहुंच रही थी,,,।
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सससहहहह आहहहहहहह,,,,,ऊमममममममम ,,
(सुगंधा इस तरह की आवाज अपने मुंह से निकल रही थी हां ना कि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी क्योंकि इस तरह की आवाज तो उसे संभोग करते समय भी उसके मुंह से नहीं निकली थी लेकिन आज वह पूरी तरह से हद से गुजर जाना चाहती थी अपनी मां के मुंह से इस तरह की आवाजों को सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसके मुंह से निकले हुई सिसकारी की आवाज उत्तेजना के बादल को और भी ज्यादा गहरा बना रहे थे,,,,,,, उत्तेजना के सागर में डूबती हुई सुगंधा पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी वह अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी उसका भी मन कर रहा था कि बाथरूम का दरवाजा खोल दे और अपने बेटे को अंदर बुला ले,,, लेकिन यह उचित नहीं था क्योंकि वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी ताकि इसमें उसकी तरफ से किसी भी प्रकार की गलती की गुंजाइश नजर ना आए जो कुछ भी हो हालात के मुताबिक हो,,,, थोड़ी देर में सुगंधा अपनी हथेली को अपनी बर पर से हटाई तो उसकी बुर कचोरी की तरह फूली हुई नजर आ रही थी और अंकित आंख फाड़े अपनी मां की बुर को देख रहा था,,, वैसे तो देखने लायक सुगंधा का संपूर्ण बदन था लेकिन इस समय उसके बेटे की नजर केवल उसकी बुर पर टीकी हुई थी क्योंकि मर्दों का सबसे ज्यादा आकर्षक औरतों का यह छोटा सा गुलाबी छेद ही होता है जिसमें वह पूरी दुनिया को भूलकर डूब जाना चाहता है,,,,,। सुगंधा धीरे से घूम गई और फिर वह सामने की दीवार की तरफ दो कदम आगे बढ़कर साबुन लेने लगी और उसकी हरकत पर उसकी गोल-गोल गदराई गांड एकदम से अंकित की आंखों के सामने नाच उठी और वह एक बार फिर से अपनी मां की नंगी गांड के दर्शन करके धन्य हो गया इस समय वह अपनी मां की गांड को बेहद करीब से देख रहा था वाकई में उसकी गांड बेहद खूबसूरत एकदम मक्खन मलाई की तरह उसे पर बिल्कुल भी दाग नहीं था एकदम गोरी चमक रही थी और बीच का फांक उसके नितंबों की खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था,,,, अंकित से बिल्कुल भी रहा नहीं क्या वह अपनी मां की गांड देखकर एकदम पागल हो गया और वही समय झुककर साबुन उठा रही थी और झुकाने की वजह से उसकी गोल-गोल गांड और भी ज्यादा बाहर की तरफ निकली हुई थी जिससे वह अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाया और धीरे से अपनी पेंट का बटन खोल कर वह जांघ के नीचे तक अपनी पेंट को उतार दिया,,,, और उसका खड़ा लंड एकदम से हवा में लहरा उठा जिसे वह तुरंत अपने हाथ में पकड़ कर थाम लिया,,,।
दरवाजे की दूसरी तरफ अपने हाथ में साबुन लेकर सुगंधा फिर से दरवाजे के करीब आ गई और फिर उसे साबुन को हल्का सा अपनी अपनी बुर पर डालकर उसे साबुन से धोना शुरू कर दी,, उस पर अच्छे से साबुन को रगड़ना शुरू कर दी,,, क्या सब कुछ अंकित के लिए बिल्कुल नया था और सही मायने में सुगंधा के लिए भी इस तरह की हरकत पहली बार ही थी हालांकि वह कभी-कभार अपनी बुर पर साबुन लगाकर उसे साफ जरूर करती थी लेकिन सफाई के लिए लेकिन इस समय वह अपनी बुर पर साबुन लगा रही थी केवल अपने बेटे पर अपनी जवानी का जलवा बिखेरने के लिए,,,,,। वह जानती थी कि अभी भी उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे पर बैठा हुआ है और अंदर उसकी हरकत को देखकर पागल हो रहा है अगर उसे हिसाब अच्छा नहीं लगता तो उठ कर चला गया होता लेकिन वह जानती थी कि दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो औरत को नंगी नहीं देखना पसंद करेगा और उसकी तरह की हरकत का आनंद नहीं देगा उनमें से उसका बेटा भी था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी इसीलिए तो वह अपनी हरकत को जारी रखे हुए थे।
अंकित अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया था,,, और इस हरकत को भी वह अपनी मां की वजह से ही सीखा था उसे नहीं मालूम था कि इस तरह की हरकत करने में बेहद आनंदकी प्राप्ति होती है,,, अनजाने में ही वह इस तरह की हरकत किया था और उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और इस समय भी वह अपनी मां के नंगे बदन को देखकर इस हरकत को दोहरा रहा था जिसमें उसे मजा आ रहा था साबुन लगा लेने के बाद सुगंधा भी पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी उसे भी अपनी जवानी की गर्मी बाहर निकलनी थी,,, इसलिए वह एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी बुर के अंदर डाल दी लेकिन ऐसा करने से पहले वह अपनी एक काम को उठाकर बाल्टी पर रख दी ताकि उसका बेटा सब कुछ एकदम साफ तरीके से देख सके,,,, अंकित तो अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से पागल हो गया वह एकदम से बावला हो गया अभी तक उसे सब कुछ,,, थोड़ा सहज लग रहा था लेकिन अपनी मां की हरकत पर वह समझ गया कि उसकी मां एकदम चुदवासी है उसकी मां को भी मोटा तगड़ा लंड चाहिए जैसा की किताब वाली गंदी औरतें ले रही थी,,,,,, अपनी मां की हरकत देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था की मौसम की गर्मी से उसकी मां ज्यादा परेशान है कि अपने बदन की गर्मी से उसकी हालत को देखकर तो अंकित को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां अपनी जवानी की गर्मी से कुछ ज्यादा ही परेशान है,,,,,।
अंकित को सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था अंकित को एकदम साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां अपनी बर के अंदर दो उंगली को अंदर बाहर करके मजा ले रही थी और उसके मुंह से गरमा गरम से शिकारी की आवाज फूट रही थी और बाहर दरवाजे के बाहर बैठा अंकित भी कुछ कर नहीं था वह भी अपने लंड को बाहर निकाल कर जोर-जोर से मुठ मारना शुरू कर दिया था वह अपनी मां के गोरे बदन को देखकर उसकी गुलाबी बुर को देखकर और अपनी मां की हरकत को देखकर कुछ ज्यादा ही पागल हो गया था,,,,।
अपनी मां की बुर में उसकी दो उंगली को अंदर बाहर होता हुआ देखकर अनजाने में ही अंकित के कल्पना का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा और उसे ऐसा एहसास होने लगा कि मानो जैसे उसकी मां की बुर में घुसने वाली उसकी उंगली नहीं बल्कि उसका मोटा तगड़ा लंड है,,, और वह कल्पना करने लगा कि जैसे वह भी बाथरुम के अंदर है और वह अपनी मां के नंगेबदन को पीछे से अपनी बाहों में भरकर अपने मोटे तगड़े लंड को पीछे से उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके उसकी चुदाई कर रहा है और इस तरह की कल्पना करके वह पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने लगा वह मस्त होने लगा उसे आनंद आने लगा।
सहहहह आहहहह आहहहहहह ऊमममममम ,,, ओहहहहहहहह ,,,, (सुगंधा जानबूझकर ईस तरह की आवाज निकाल रही थी,, वह अपने बेटे को पागल बना देना चाहती थी और ऐसा हो भी रहा था अपनी मां के मुंह से निकलने वाली इस तरह की शिसकारी की आवाज से वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और वह जोर-जोर से अपना लंड हिला रहा था,,, अंकित को इस समय इस बात का एहसास हो रहा था कि अपनी मां को नंगी देखकर लंड मुठीयाने में और ज्यादा मजा आता है,,,,,,, दोनों मां बेटे की हालत खराब होती जा रही थी सुगंध अपनी जवानी के गर्मी शांत करने के लिए अपनी उंगली का सहारा ले रही थी और उसका बेटा अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने के लिए अपनी मुट्ठियों का सहारा ले रहा था,,,।
अपनी मां की गर्म जवानी देखकर अंकीत का लंड और ज्यादा कड़क मोटा और लंबा हो गया था,,, जिसे मुठीयाने में अंकित को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,
अपनी मां की मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी,,, अंकित अपने मन में कल्पना कर रहा था कि जैसे उसकी मां की बुर में उसका लंड अंदर बाहर हो रहा है और उसे इस तरह की कल्पना करने में मजा भी आ रहा था एक तरह से वह इस समय कल्पना करते हुए अपनी मां की चुदाई कर रहा था और हकीकत तो ये भी था कि इस समय उसकी मां भी अपने ही बेटे की कल्पना कर रही थी जो कि बाहर बैठकर उसकी जवानी को देख रहा था वह भी कल्पना कर रही थी कि जैसे उसकी बुर में उसकी उंगली नहीं बल्कि उसके बेटे का मोटा लंड अंदर बाहर हो रहा हो इसीलिए तो उसकी उत्तेजना ओर बढ़ती जा रही थी,,,,।
अंकित को अपनी मां के हाव भाव एकदम साफ नजर आ रहे थे अपनी मां के चेहरे पर उसे गंदी किताब वाली हीरोइन दिखाई दे रही थी जो की लंड लेने के लिए मचल रही थी और लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश हुए जा रही थी,,,,। अंकित को इस समय अपनी मां गंदी किताब वाली हीरोइन नजर आ रही थी जिसे देखकर कर वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,, थोड़ी देर में उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां के मुंह से निकलने वाली सिसकारी की आवाज और ज्यादा तेज हो गई थी और उसकी उंगलियां भी बड़ी तेजी से बुर के अंदर बाहर हो रही थी यह सब देखकर अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी और तभी एक हल्की सी चीज की आवाज के साथ उसकी मां की बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जिसे अंकित उसकी मां से निकलने वाली पिचकारी को पेशाब की धार समझ रहा था,,,,, और यह नजारा देखकर खुद उसके लंड से पिचकारी फूट पड़ी जो कि तकरीबन 1 मीटर की दूरी तक जाकर गिर रही थी अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था मस्त हो चुका था और अपने चरम सुख को प्राप्त कर चुका था।,,, लेकिन जिस झटका के साथ उसके लंड से पिचकारी निकली थी उसकी सांस एकदम से ऊपर नीचे हो गई थी वह एकदम मदहोश हो चुका था और ऐसा आनंद उसे मिल रहा था कि जैसे वह स्वर्ग में शेर कर रहा हो,,,,,।
सुगंधा का भी पानी निकल चुका था उसकी सांसे भी धीरे-धीरे झटका खा रही थी उसकी उंगलियां उसकी बुर से बाहर आ गई थी सुगंधा अपने बेटे को अपनी बर से निकलने वाली पिचकारी को बड़े अच्छे से दिखाई थी बस इस बात की उसे शंका थी की उसका बेटा निकलने वाली पिचकारी के बारे में कुछ समझ पाया या नहीं,,,, और हकीकत तो यही था कि वाकई में अंकित औरतों की बुर में से निकलने वाली पिचकारी के बारे में समझ नहीं पाया था क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसकी मां की बुर से पेशाब की धार फूट पड़ी हो क्योंकि उत्तेजना में निकलने वाले मदन रस के बारे में अंकित कुछ भी नहीं जानता था,,,,।
थोड़ी ही देर में सब कुछ शांत हो चुका था और सुगंधा नहाना शुरू कर दी थी और अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू कर दी थी एक बार वासना का तूफान सर से उतर जाने के बाद अंकित का भी मन शांत हो चुका था लेकिन इस समय भी वह । मां के गोरे नंगे बदन को देख कर उत्तेजित हो रहा था लंड से पानी की पिचकारी निकल जाने के बावजूद भी उसका लंड अभी भी पूरी तरह से उत्तेजना में खड़ा था उसकी उत्तेजना बरकरार थी इसलिए वह अभी भी धीरे-धीरे से उसे हिला रहा था और अभी भी वह छोटे से सुराख से अंदर देख रहा था लेकिन अपनी मां को नहाते हुए देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां किसी भी समय नहा कर बाथरूम से बाहर आ जाएगी और उसकी चोरी पकड़ी जाएगी इसलिए उसका वहां और ज्यादा ठहरना उचित नहीं था,,,। इसलिए वह धीरे से उठकर खड़ा हो गया और अपनी पेट को ऊपर चढ़ा कर अपने खड़े लंड को बड़ी मस्सकत करने के बाद उसे अपनी पेंट के अंदर डाल दिया,,,। और धीरे से अपने कमरे में जाने की जगह वह घर से बाहर चला गया क्योंकि वह अपनी मां से नजर मिलाने में झिझक महसूस कर रहा था।
अंकित अपने दोस्त की बात को सुनकर अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां भी एकदम चुदवासी है,,, उसकी मां को भी मर्द की जरूरत है,,, उसे भी अपनी बुर में लंड की जरूरत है,,, और उसके पास किसी मर्द का जुगाड़ नहीं है इसलिए तो अपनी उंगली से काम चला रही थी,,,, इस बात का ज्ञात और एहसास होते ही अंकित केतन बदन में आग लग गई वह मदहोश होने लगा और अपने मन में ही सोचने लगा कि का स उसकी मां की प्यास बुझाने का शुभ अवसर उसे खुद मिले तो कितना मजा आ जाए,,,, लेकिन ऐसा होगा कैसे,,,,, अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसमें इतनी हिम्मत नहीं है कि आगे चलकर वह अपनी मां के साथ कुछ कर सके की चाहत रखें और उसकी मां ऐसा कभी करने वाली नहीं है इसलिए उसके मन में निराशा फैलने लगी लेकिन इस बात से उसे राहत थी कि कभी कबार उसे अपनी मां के खूबसूरत अंगों को देखने का मौका मिल जा रहा था,, इतने से ही अंकित मस्त हो जा रहा था,,,,।
दूसरी तरफ सुगंधा की जवानी पूरी तरह से उफान पर थी,,,, जिस तरह का प्रदर्शन उसने बाथरूम के अंदर अपने बेटे के सामने की थी उसके चलते उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह जानती थी जिस तरह का नजारा उसने अपने बेटे को दिखाई थी उससे उसका बेटा उसकी जवानी का दीवाना हो चुका था जिसका सबूत उसे बाथरूम के बाहर फर्श पर गिरा मिला था,,,, और इस बात से सुगंधा काफी खुश भी थी क्योंकि उसकी युक्ति काम कर गई थी,,,
अंकित का आकर्षण पड़ोस की मौसी की लड़की सुमन के तरफ भी बढ़ता जा रहा था और वह खुद अंकित को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश करते हैं और पढ़ने के बहाने उसे अपने घर में आने का आमंत्रण भी दे दी थी क्योंकि खेली खाई सुमन अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित के दोनों टांगों के बीच मजबूत हथियार था जिसे वह अपनी बुर में लेकर स्वर्ग का सुख भोगना चाहती थी,,,।
अंकित अपनी मां से नजर नहीं मिल पा रहा था वह घर पर पहुंच कर औपचारिक रूप से खाना खाया और थोड़ी देर टीवी देखने के बाद अपने कमरे में चला गया उसकी हालत को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी उसका बेटा बेहद सीधा साधा है लेकिन जिस तरह का नजारा उसने उसे दिखाई थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसे नजारे को देखकर कोई भी लड़का अपना आपा खो देगा,,,,, जवान हो चुके लड़के को क्या देखना पसंद है इस बात का आभास सुगंधा को अच्छी तरह से ,, और ऐसे हालात में सुगंधा ने तो दो दो बार अपनी जवानी के दर्शन अपने बेटे को कर चुकी थी एक पेशाब करते हुए अपनी नंगी गांड और दूसरी बार बाथरूम के अंदर तो अपने सारे कपड़े उतार कर संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र होकर जो हाहाकार मचाई थी उससे उसका बेटा पूरी तरह से मस्त हो चुका था और अपनी मां के कदमों में घुटने टेक दिया था,,, सुगंधा जानती थी कि उसके बेटे के कोमल मन पर इन सब का क्या असर पड़ रहा होगा,,,। लेकिन सब कुछ जानने के बावजूद भी वह अपने कदम को पीछे नहीं देना चाहती थी क्योंकि उसकी मन बहक चुका था वह वर्षों तक अपने बदले में अपने बदन की प्यास को दबा कर रखी थी लेकिन जिस दिन से पड़ोस की सुषमा ने उसे टीवी में गंदी पिक्चर दिखाई थी सबसे वह चुदवाने के लिए तड़प रही थी,,,।
जैसे तैसे करके कुछ दिन गुजर गए और इस दौरान अंकित को ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल पाया जिससे वह अपनी जवानी की गर्मी को बुझा सके,,, लेकिन इन दोनों सुगंधा ही अपने बेटे को और ज्यादा तड़पने की उद्देश्य से उसे कुछ भी नहीं दिखाई थी,,, क्योंकि वह अपने बेटे की तड़प देखना चाहती थी,,, रात को सोते समय वह पहले ड्राइंग रूम से अपने कमरे की तरफ चली जाती थी लेकिन दरवाजे पर चुप कर यह देखने की कोशिश करती थी कि उसका बेटा कहां जाता है और अक्सर वह देखते कि उसका बेटा भले कुछ भी हो जाए एक नजर घर के पीछे की तरफ जरूर डालता था वहां पर जरूर जाता था यह देखने के लिए कि उसकी मां वहां पर पेशाब कर रही है कि नहीं,,, और अपने बेटे की इस हरकत से वह मन ही मन बहुत प्रसन्न होती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे के बदन में भी एक औरत की जवानी की प्यास पनप रही थी,,,।
स्कूल में वह नूपुर से,, कुछ ज्यादा घुल मिल गई थी लेकिन मार्केट में जो लड़का उसके साथ था जो नूपुर के नितंबों पर हाथ रखा था उसके बारे में पूछने की उसकी हिम्मत नहीं होती थी लेकिन उसकी जानने की उत्सुकता हमेशा बनी रहती थी,,,। लेकिन कैसे शुरुआत करें इस बारे में उसे समझ में ही नहीं आता था,,,,, लेकिन बड़ी हिम्मत करने के बाद वह,,, एक दिन बोली,,,।
नूपुर घर में कौन-कौन है,,,,(क्लास की शुरुआत के पहले वह दोनों खड़ी होकर बातें कर रही थी और बातों ही बातों में सुगंधा ने जिक्र छेड़ दी थी,,,)
कहने को तो बहुत कोई है सुगंधा,,, लेकिन अपना कोई नहीं है क्योंकि मेरे दो देवर हैं और वह दोनों अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं,,, वैसे मैं शुरू से ही साथ में रहने के लिए हिदायत देती थी लेकिन,,, शुरू शुरु में तो सब कुछ सही चला लेकिन जैसे ही दोनों की शादी हुई,,, दोनों अलग हो गए,,,,(सुगंधा को इन सब बातों से बिल्कुल भी मतलब नहीं था सुगंधा को तो उस लड़के के बारे में जानना था,, जो उस दिन मार्केट में उसके साथ था,,,। लेकिन इससे आगे वह कुछ बता पाते उससे पहले ही क्लास शुरू होने की घंटी बज गई और ना चाहते हुए भी सुगंधा को वहां से जाना पड़ा नूपुर भी अपनी क्लास की तरफ चली गई,,,,। और सुगंधा की उत्सुकता, उत्सुकता ही बनी रह गई,,,,।
लेकिन एक दिन अचानक ही उसकी मुलाकात मार्केट में हो गई और वह भी इस मार्केट में जहां पर सुगंधा ने नूपुर को उसे जवान लड़के के साथ देखी थी,,,।
० अरे नूपुर तुम यहां कैसे,,,!(सुगंधा औपचारिकता निभाते हुए बोली…)
मार्केट में लोग किस लिए आते हैं सब्जियां लेने में भी वही लेने आई हूं,,,,(नूपुर मुस्कुराते हुए जवाब दी,,,, तभी किराने की दुकान से सामान लेकर लौट रहा अंकित ठेले में साबुन रखते हुए बोला,,,)
मम्मी मैंने कपड़े धोने वाले साबुन ले लिए हैं,,,,
बहुत अच्छा किया बेटा,, लो इनसे मिलो,,, हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ाते हैं,,,।
(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही अंकित नूपुर की तरफ देखने लगा और मुस्कुराते हुए उसका अभिवादन करते हुए बोला)
जी नमस्ते आंटी,,,
खुश रहो बेटा,,,(इतना कहने के साथ है कि नूपुर अपना हाथ उठाकर अंकित के सर पर रख दी और हल्के से उसके बालों को सहलाते हुए मुस्कुरा दी लेकिन अंकित की नजर,,, उसके हाथ उठाते ही उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर चली गई जो ब्लाउज में पूरी तरह से केक थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसकी चूचियों को समाने के लिए उसका ब्लाउज छोटा पड़ रहा था,,, उसे देखते ही अंकित के मुंह में पानी आ गया और उसकी इस नजर को नूपुर भी पहचान गई थी इसलिए उसके इस नजरिए से उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,,,।)
कभी हमारे यहां भी आ जाया करो बेटा ,,
जी आंटी जरूर आऊंगा,,,,(अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला अभी बातचीत चली रही थी कि पीछे से आवाज आई,,,,)
मम्मी,,,,(इतना सुनते ही सुगंधा के साथ-साथ नूपुर और अंकित भी उसे आवाज की दिशा में देखने लगे सुगंध को उसे लड़के को देखते ही रह गई जो मम्मी कह रहा था वह एकदम पास आ गया था और नूपुर से बोला,,,)
मम्मी मैं भिंडी ले लिया हूं आज भिंडी की सब्जी बनाना,,,,,।
ठीक है बेटा कोई बात नहीं लेकिन इनसे तो मिलो,,, ये है सुगंधा,,, हम दोनों एक ही स्कूल में है,,,।
(इतना सुनते ही,,, वह लड़का थी अंकित की तरह ही सुगंधा का अभिवादन करते हुए नमस्ते बोला तो सुगंधा भी उसे आशीर्वाद देते हुए बोली,,,)
खुश रहो बेटा,,,,(औपचारिकता निभाते हुए सुगंधा उसे लड़के को आशीर्वाद तो दे रही थी लेकिन इस बात का अहसास होते ही कि नूपुर का और उसे लड़के का संबंध आपस में मां बेटे का है उसके तो होश उड़ गए थे उसकी आंखों के सामने वही मार्केट वाला दृश्य उभर कर सामने आने लगा था जब वह अपनी आंखों से देखी थी कि यही लड़का अपनी ही मां की गांड पर हाथ घुमा रहा था और वह बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जता रही थी,,,)
और यह मेरा बेटा राहुल है,,,,
मैंने तो पहले कभी तुम्हारे साथ इसे देखा नहीं,,,
यह यहां नहीं पढता,,, यह बाहर पढ़ता है और कुछ दिनों के लिए यहां आया है,,,।(नूपुर एकदम खुश होते हुए बोली)
चलो अच्छी बात है इसी बहाने तुम्हारे बेटे से मुलाकात हो गई,,,।
(अंकित और राहुल दोनों हम उम्र होने की वजह से एक दूसरे से बातें कर रहे थे और बातों ही बातों में राहुल ने उसे अपने साथ क्रिकेट खेलने के लिए आमंत्रित कर दिया जिसका शहर्स स्वीकार भी अंकित ने कर लिया,,,,,,,
रास्ते भर सुगंधा नूपुर और उसके बेटे के बारे में सोच रही थी उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था लेकिन इतना तो समझ गई थी कि दोनों के बीच किस तरह का हिस्सा है अगर वह मार्केट में उसे लड़के की हरकत ना अच्छी होती तो शायद उसके मन में यह सब ख्याल नहीं आते लेकिन सब कुछ पानी की तरह साफ था जिस तरह से उसका लड़का मार्केट में अपनी ही मन की गांड पर हाथ रख कर दबा रहा था इससे उसे अंदाजा लग गया था कि दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता है और इस बात से वहां खुद सोचनी पड़ गई थी कि क्या मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कायम हो सकता है पहले तो वह सोचती थी और अपने ही ख्याल पर उसे शर्म भी आती थी लेकिन,,, वह खुद इस तरह का रिश्ता बनाने के लिए उत्साहित थी लेकिन एक तरह का उसके मन में डर भी था लेकिन आज नूपुर और उसके बेटे के बीच के रिश्ते को देखकर उसकी हिम्मत बढ़ गई थी आप सही गलत के फैसले पर उसका दिमाग बिल्कुल भी अटका हुआ नहीं था बल्कि अब वह उससे परे हो चुकी थी,,,,।
सुगंधा नूपुर और उसके बेटे के बीच के नाजायज संबंध के बारे में अंदाजा लगा रही थी लेकिन जो हकीकत ही था,,,, क्योंकि वह जानती थी मां बेटे के बीच इतना खुलापन तभी आता है जब दोनों के बीच कुछ चल रहा हो वरना एक बेटे की हिम्मत कहां होती है जो अपनी मां की गांड पर हाथ रखकर उसे सहलाए और उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज ना करें,,,। और दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता किस तरह से पनपा होगा इस बारे में भी वह अंदाजा लगा रही थी क्योंकि वहां उसके पति से मिल चुकी थी जो की काफी मोटा था जिसकी तोंद बहुत ज्यादा निकली हुई थी और उसकी उम्र भी नूपुर की उम्र से बहुत ज्यादा थी ऐसे में वहां अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका पति उसे बिल्कुल भी शारीरिक सुख नहीं दे पा रहा होगा और जिसके चलते,, नूपुर को अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ा जिसमें कोई एतराज भी नहीं था नूपुर के हालात को देखकर वह खुद अपने हालात के बारे में सोचने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि नूपुर का तो पति भी थे लेकिन फिर भी उसके जीवित होने के बावजूद भी वह शारीरिक सुख उसे नहीं दे पा रहा है जिसके चलते नूपुर को अपने ही घर में अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाना पड़ रहा है और वह बहुत खुश भी हैं,,, लेकिन उसका क्या उसके पति के देहांत हुए 5 साल गुजर चुके थे इस बीच में अपनी सारीरीक जरूरत को दबा कर रखी हुई थी,,, ऐसे में अपनी शरीर की जरूरत को पूरा करने में अपने बेटे का सहारा लेने में कोई दिक्कत नहीं है इस बात का ख्याल उसके मन में आते हैं उसके बदन में झुनझुनी सी फैल गई,,,, और उसके चेहरे पर मादक मुस्कान तैरने लगी
अब उसका इरादा पक्का हो रहा था अब वह अपने मन को मजबूत कर चुकी थी वह किसी भी तरह से अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी प्यास बुझाने चाहती थी आगे बढ़ाने के लिए उसे नूपुर का उदाहरण तो मिल गया था लेकिन कैसे आगे बढ़ाना है इस बारे में नहीं मालूम था लेकिन फिर भी वह एक औरत थी वह जानती थी की मर्द को किस तरह से काबू में किया जाता है किस तरह से उसे घुटनों पर लाया जाता है,,
वह अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे नूपुर और उसके बेटे के बारे में ही सोच रही थी रात के 12:00 बज चुके थे लेकिन उसकी आंखों से नींद दूर जा चुकी थी,,, उसके बदन पर साड़ी नहीं थी साड़ी उसके बिस्तर से नीचे बिक्री पड़ी थी वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज में थी और पेटीकोट भी उसकी जांघों तक चढी हुई थी,,, उसकी मोटी मोटी केले के तने की तरह चिकनी जांघें डिम लाइट की लाल रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, उसकी हथेली पेंटी के ऊपर उसकी बुर के अस्तित्व को छुपाए हुए थी,,, रह रह कर नूपुर के बारे में सोचते हुए वह अपनी बुर को हथेली में दबोच ले रही थी,,, जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,।
पंखा बड़ी तेजी से चल रहा था और उससे भी ज्यादा तेज सुगंधा के विचार चल रहे थे वह नूपुर के बारे में सोच रही थी,, जब वह नुपुर से मिली थी तब वह खोई खोई रहती थी,,, उदास रहती थी और उसके पति से मिलने के बाद सुगंधा अपने मन में समझ गई थी कि वह किस लिए उदास है लेकिन कुछ दिनों से उसके चेहरे की लालिमा बढ़ती जा रही थी वह काफी खुश मिजाज नजर आती थी और इसका प्रमुख कारण था उसका बेटा जो की छुट्टी के कारण घर आया हुआ था,,,, इस बारे में सोचकर सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी कि वाकई में नूपुर और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है और अपने मन में कल्पना कर रही थी कि नूपुर कैसे अपने बेटे से चुदवाती होगी,,,। किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता नूपुर में थी,,, एक औरत होने के नाते सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि,,, औरत की खूबसूरती क्या होती है,,, नूपुर भी उसकी ही उम्र की थी,,, लंबी कद काठी गोरा बदन,, खूबसूरत चेहरा लाल लाल भरे हुए होंठ बड़ी-बड़ी चूचियां नितम्बो का आकार भी एकदम गठीला,,, चलने पर गांड की दोनों फाके बड़े-बड़े तरबूज की तरह आपस में टकराती थी,,, और देखने वालों की हालत खराब हो जाती थी सब कुछ तो था नूपुर में और भला एक जवान लड़का कैसे इतनी रसमलाई जवान औरत के पीछे लट्टू ना हो जाए भले ही वह उसका बेटा क्यों ना हो,,,,,,, राहुल भी तू उसके बेटे की तरह एकदम जवान था लंबी कद काठी और चौड़ी छाती ,,,,, नूपुर अपने बेटे की चोडी छाती में पूरी तरह से अपनी अस्तित्व को छुपा लेती होगी,,,।
कैसा लगता होगा जब राहुल खुद अपनी मां के बदन से उसके कपड़ों को अलग करता होगा,,, पहले साड़ी उतारता होगा,,, पीछे से उसे अपनी बाहों में भर कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाते हुए मसलते होगा उसकी हरकत पर उसकी मां मजबूत हो जाती होगी उसका खड़ा लंड पीछे से उसकी गांड में चुभता होगा,,,, नूपुर की मदहोशी और ज्यादा बढ़ जाती होगी और उसका बेटा अपने हाथ को उसकी कमर पर रखकर उत्तेजना से उसे दबाते हुए अपनी हथेली को उसकी पेटिकोट के अंदर सरका देता होगा जहां पर उसकी गीली बुर पहले से ही उसका इंतजार कर रही होगी,,,, गीली बुर पर हथेली पहुंचते ही उसका बेटा मदहोश हो जाता होगा और तुरंत अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी नंगी चूचियों को हाथों में भरकर उसके मुंह से लगा लेता होगा उसे बड़ी-बड़ी से दबा दबा कर पीता होगा,,,, अपने पति से असंतुष्ट नूपुर अपने बेटे की हरकत से पानी पानी हो जाती होगी,,,, उसका बेटा उसे अपनी गोद में उठाकर नर्म नर्म बिस्तर पर ले जाकर पटक देता होगा उसकी पेटीकोट को उसकी डोरी को खोलकर खींचता होगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा देती होगी और उसका बेटा अगले ही पल उसका पेटिकोट उतार कर उसे पूरा नंगी कर देता होगा और फिर अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो जाता होगा,,,, और फिर राहुल अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदता होगा,,,,
उफफफ,,, कितना मजा आ जाता होगा दोनों मां बेटे को,,,, अपने मन में ही यह सब सो कर सुगंधा पानी पानी हो रही थी और अपनी किस्मत पर रो रही थी कि जहां एक तरफ पति होने के बावजूद भी एक मां अपने बेटे के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर रही थी वहीं दूसरी तरफ वह खुद थी जो पति के न होने के बावजूद भी और घर में एक जवान बेटा होने के बाद भी अपनी जवानी की प्यास बुझाने में असमर्थ साबित हो रही थी,,,। वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसे अच्छी किस्मत तो नूपुर की थी जो अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी,,, काश उसका बेटा भी उसकी हालत को समझ पाता तो आज वह भी नूपुर की तरह मजे लुटती,,,।
लेकिन इन सब बातों को सोचकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस बह रहा था और वह अपने दोनों हाथों से अपनी चड्डी को पकड़ कर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाई और एक झटके से उसे नीचे की तरफ खींचकर पैरों का सहारा लेकर अपनी चड्डी को अपने बदन से अलग कर दी,,, और टेबल पर रखे हुए मोटे बैगन को अपने हाथ में ले ली और उसे मुंह में लेकर थोड़ा सा उसे पर थूक लगना शुरू कर दी जब पूरी तरह से गिला हो गया तो वह अपने दोनों टांगों को खोलकर अपनी गुलाबी छेद पर उसे बैगन को रखकर उसे हल्का-हल्का दबाने लगी,,, बुर की चिकनाहट पाकर मोटा तगड़ा बैंगन बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर घुसने लगा और देखते ही देखते हुआ उसकी गहराई नापने लगा जिसे सुगंधा अपने हाथों से पकड़ कर अंदर बाहर करते हुए चुदाई का सुख भोगने लगी,,,, लेकिन वह जानती थी जिस तरह की प्यास उसके बदन में उठ रही थी वह प्यास बैगन से नहीं बल्कि मर्द के मोटे लंड से बुझने वाली थी,,,, इसलिए थोड़ी ही देर में तृप्त होकर वह उसी हालत में सो गई,,,
सुबह में अंकित की नींद जल्दी खुल गई और सुबह औपचारिक रूप से उसके लंड का तनाव पूरी तरह से चरम सीमा पर था,,, वह केवल चड्डी मे ही सो रहा था,,, और उसकी नजर जैसे ही अपनी चड्डी की तरफ गई तो उसके खुद के होश उड़ गए उसमें अच्छा खासा तुमको बना हुआ था जो कि बडा ही मनभावन लग रहा था,,,। वह चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा,,, लेकिन कभी उसे एहसास हुआ कि घर में किसी भी तरह की आवाज नहीं आ रही थी,,,। और वह समझ गया कि आज उसकी मां को उठने में देर हो गई है,,, अपनी उत्तेजना को देखकर उसका मन मुठ मारने को कर रहा था,,,, और इसीलिए वह अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके आगे वाले भाग को ऊपर की तरफ खींचा और अपने लंड को देखने लगा जो की काफी मोटा और लंबा नजर आ रहा था वह धीरे से उसे पीछे की तरफ खींचकर अपने लंड के दूसरी तरफ ले गया और अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर ऊपर नीचे करके हिलने लगा,,,, मुठ मारने में वह कल्पना का सहारा लेता था और उसकी कल्पना की राजकुमारी नहीं बल्कि महारानी होती थी उसकी मां अपनी मां के बारे में सोचकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाता था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करता था,,,,,।
वह मूठ मारना शुरू कर दिया था और ख्यालों में उसकी मां थी जो कल्पना में अपने हाथों से अपने कपड़ों को उतार कर एकदम नंगी हो गई थी,,, और अपनी होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए खुद घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गई थी और अपने बेटे की कमर के ईर्द गिर्द जगह बनाते हुए अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को ,, उसके लंड पर रखकर धीरे-धीरे नीचे की तरफ बैठ रही थी और देखते ही देखते उसकी गुलाबी छेद में अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से छुप गया,,, और अंकित कल्पना में अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ कर अपनी कमर को नीचे से ऊपर की तरफ मारने लगा,,,।
अंकित की कल्पना काफी हद तक,,, वास्तविक ही महसूस होती थी इसलिए अंकित पूरी तरह से मदहोश होकर मूठ मार रहा था,,,, वैसे भी उसकी मां अपनी मां को चोदने के लिए बहुत करता था लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा करने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी और देखते ही चरम सुख की तरफ आगे बढ़ने लगा और जैसे ही उसे एहसास हुआ की उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली है,,, वह तुरंत वापस अपनी चड्डी को ऊपर की तरफ ले लिया और चड्डी के अंदर अपने लंड को जोर से दबा दिया और उसकी पिचकारी निकल गई जो की चड्डी में ही ठहर गई,,,,, वह नहीं चाहता था कि उसकी पिचकारी बिस्तर पर करें और उसकी मां को उस पर शक होने लगे,,,,।
10 मिनट के अंतराल में सुबह अपनी जवानी की प्यास को अपनी मां की बदन की गर्मी से बुझा लिया था भले ही कल्पना में ही सही आनंद उसे बहुत आया था,,,, लेकिन उसे एहसास हुआ कि अभी तक उसकी मां कमरे में सो रही थी और उसकी बहन भी उठी नहीं थी इसलिए वह उठकर कपड़े पहनकर सीधे अपनी मां के कमरे की तरफ गया और दरवाजे पर पहुंचकर जैसे ही दस्तक देने के लिए वह दरवाजे पर हाथ रखा दरवाजा खुद बा खुद खुल गया,,, और वह आवाज देने के पहले अपने हाथ के सहारे से दरवाजे को हल्के से खोल दिया और जैसे ही उसकी नजर सामने बिस्तर पर गई उसके होश उड़ गए सामने बिस्तर पर उसकी मां पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी दोनों टांगें एकदम खुली हुई थी उसकी साड़ी कमर तक चढी हुई थी यह नजारा देखकर,,, उसकी हालत खराब होने लगी,,,। पहली बार अंकित अपनी मां को अस्त व्यस्त हालत में सोते हुए देख रहा था,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ा रहकर अंदर की तरफ देखता रह गया उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत उन्मादक भरा दृश्य नजर आ रहा था,,,, दरवाजे पर खड़े होकर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां साड़ी नहीं पहनी थी उसके बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट था और पेटीकोट भी एकदम कमर तक चढ़ा हुआ था जहां से उसे मोटी -मोटी चिकनी जांघें दिख रही थी,,,,।
अंकित का दिमाग काम करना बंद कर दिया था पहली बार वह अपनी मां को घर के पीछे पेशाब करते हुए देखा था तब से लेकर आज तक उसकी दुनिया ही बदल गई थी लेकिन आज वह अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था,,,, और वैसे भी जिस उम्र के दौर में अंकित था इस उम्र में औरतों के अंग का झलक ही काफी होता है और यहां तो सब कुछ खुला नजर उसकी आंखों के सामने था इसके लिए उसके बदन में मदहोशी नशा की तरह घुल रही थी,,, इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह बार-बार इधर-उधर देख ले रहा था कहीं उसकी बहन तो नहीं आ रही है लेकिन वह भी आज घोड़े बेचकर सो रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज यह मौका बड़ी मुश्किल से उसके लिए ही मिला है कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद जब किसी भी प्रकार की हलचल उसकी मां के बदन में नहीं हुई तो वह समझ गया कि वह अभी भी गहरी नींद में सो रही है इसलिए बात फिर से कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे को हल्के से बंद कर दिया और दबे कदमों से वह अपनी मां के पलंग तक पहुंच गया और उसके करीब पहुंचने पर उसे जब उसकी आंखें उसकी मां की दोनों टांगों के बीच गई तो उसके होश उड़ गए दरवाजे से तो नहीं पता चल रहा था लेकिन इतने करीब आकर उसे सब को साथ दिखाई दे रहा था और उसके होश और ज्यादा उड़े हुए नजर आने लगे क्योंकि उसकी मां पेंटिंग नहीं पहनी थी कमर के नीचे वही समय पूरी तरह से नंगी थी,,,,।
अपनी मां की नंगी बुर देखते ही उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, अपनी मां को पेशाब करते हुए तो वह देख चुका था लेकिन उसकी बुर पर उसकी नजर नहीं गई थी केवल वह अपनी मां की नंगी गांड को ही देखा था लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां की बुर को देख रहा था अपनी मां की बुर क्या और पहली बार औरतों की बुर को खुली आंखों से देख रहा था अब तक उसने केवल किताबों में ही देखा था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने वास्तविक में एक खूबसूरत औरत की नंगी बुर देखकर उसकी आंखों में चमक आने लगी,,,,,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह अपनी मां के बेहद करीब खड़ा था उसकी नजर अपनी मां की कमर के दोनों त्रिकोण पर पड़ी हुई थी और जब ऊपर की तरफ नजर गई तो अपनी मां का खूबसूरत चेहरा देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी वह बेसुध होकर सो रही थी,,,, नीचे देखा तो साड़ी गिरी पड़ी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपनी मां की हालत देखकर,,,, हालात तो ऐसे ही नजर आ रहे थे कि अगर उसके सिवा घर में कोई और मर्द होता तो उसे ऐसा ही लगता है कि उसकी मां रात भर चुदवाई है,,, लेकिन इस तरह का शंका करने का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखों के सामने था उसे देखकर उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठा रही थी उसके पजामे में एक बार झड़ने के बावजूद भी तुरंत तंबू बन गया था,,,।
अभी तक सुगंधा के बदन में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं हो रही थी और इसीलिए अंकित का मन बहक रहा था वह अपनी मां की बुर को अपने हाथ से स्पर्श करना चाहता था उसे छूना चाहता था उसकी गरमाहट को देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि एक औरत की बुर स्पर्श करने में कैसी महसूस होती है,,,,, इस तरह का खूबसूरत नजारा देखकर उसकी मां पूरी तरह से बैठ चुका था और अभी तक उसकी मां के बदन में किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई थी इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह धीरे से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच झुकने लगा,,,, जैसे-जैसे वह अपनी मां की बुर के करीब बढ़ रहा था वैसे-वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही है,,,,।
उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर की हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी बुर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी बाल ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन पहली बार अंकित औरत की बुर और औरत की बुर के ऊपर बाल देख रहा था,,, यह नजारा उसके लिए आश्चर्यचकित कर देने वाला था,,,,, उसे नहीं मालूम था कि जिस तरह से उसके लंड के इर्द-गिर्द बाल उगे हुए हैं इस तरह से औरतों की बुर के ईर्द गिर्द बाल होते हैं,,,, यह नजारा वास्तव में अंकित के लिए उन्मादकता भरा हुआ था,,,।
देखते ही देखते वह अपनी मां की बुर के बेहद करीब पहुंच गया था इतनी करीब कि उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसके नथुनिया में आराम से पहुंच रही थी और इस तरह की खुशबू को वह पहली बार महसूस कर रहा था उसके बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का संचार होने लगा था,,,,,,, इतने करीब आकर अंकित पीछे लौटना नहीं चाहता था वह एक बार अपनी मां की बुर को छू लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपना हाथ अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा लेकिन इस तरह की हरकत करने का डर उसके हाथों की कंपन बयां कर रही थी उसकी उंगलियां कांप रही थी,,,, लेकिन हिम्मत जताकर उसने आखिरकार एक अद्भुत कार्य को अंजाम दे ही दिया वह अपनी मां की बुर को हल्के से अपनी उंगली से स्पर्श कर ही लिया लेकिन जैसे ही उसकी उंगली सुगंधा की बुर पर स्पर्श हुई सुगंधा के बदन में हल्की सी कसमाशाहट हुई और अंकित एकदम से घबरा गया और तुरंत वहां पर एक पल भी रुक अपने कदमों को पीछे लिया और अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया वह पीछे मुड़कर देखा भी नहीं लेकिन अपनी बुर पर अचानक स्पर्श का अहसास होते ही सुगंधा की आंख खुल गई थी और वह सिर्फ इतना ही देख पाई कि उसका बेटा दरवाजे से बाहर निकल कर जा रहा था,,, और जैसे ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ उसके होश उड़ गए,,,।
हाय दइया उसने तो सब कुछ देख लिया होगा उसकी बुर पूरी तरह से उसकी आंखों के सामने ही तो थी यह सब सोते हुए उसे याद आने लगा की रात को वह अपने हाथों से ही अपनी चड्डी उतार कर बिस्तर से नीचे फेरती थी और फिर एक मोटी बैगन को अपनी बर के अंदर बाहर करके अपनी जवानी की प्यास को बुझाई थी और उसी हालत में ही सो गई थी,,, बैगन और चड्डी का ख्याल मन में आते ही वह इधर-उधर देखने लगे और जब वह बिस्तर के दूसरी तरफ नीचे देखी तो वहां पर उसकी चड्डी और बैगन दोनों पड़े हुए थे उसे यह समझ में नहीं आ रहा था और वह हैरान भी हो रही थी कि कहीं उसका बेटा उसकी चड्डी और बैगन को तो नहीं देख लिया यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके मन में घबराहट होने लगी थी लेकिन उसके बदन में उत्तेजना की लहर अत्यधिक उठ रही थी,,, और भला क्यों ऐसा ना हो यही सब तो वह खुद से अपने बेटे को दिखाना चाहती थी लेकिन अनजाने में ही आज उसका बेटा उसके जवानी के केंद्र बिंदु को अपनी आंखों से देख लिया था,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर को देखकर क्या सोच रहा होगा अकेले जैसी मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर उसके तन बदन में हलचल तो जरूर हुई होगी,,, आखिरकार हुआ भी तो एक मर्द है एकदम जवान और ऐसे में एक जवान मर्द के सामने कोई औरत अर्धनग्न अवस्था में भी नजर आ जाए तो ऐसे हालात में उसे मर्द का लंड खड़ा होना जायज है,,, और अगर ऐसा ना हो तो उसे मर्द की मर्दानगी नाजायज है,,,,,।
सुगंधा अपने मन में सोचने लगे कि जरूर उसके बेटे ने आज सुबह-सुबह उसकी बुर के दर्शन किए हैं तभी तो दबे पांव वह कमरे से चला गया था वरना उसे जरूर जगाता क्योंकि आज उठने मे उसे देर हो गई थी,,,,। पता नहीं अपने मन में क्या सोच रहा होगा अपनी ही मन की बुर को देखकर जरूर उसका लंड खड़ा हो गया होगा क्या कमी है मेरे बेटे में पूरी तरह से जवान है और अब तो चोर नजरों से मेरे बदन को देखता रहता है,,,,,,आहहहहह कितना मजा आया होगा मेरे बेटे को मेरी बुर देखकर उसके मन में भी अरमान मचल गए होंगे बुर के अंदर लंड डालने के लिए,,,, क्या वह जानता होगा की औरत की बुर में लंड डाला जाता है तब चुदाई होती है,,,(सुगंधा अपने आप से ही इस तरह की बातें कर रही थी और अपने सवाल का जवाब अपने आप से ही दे रही थी अपनी बात को आगे बढ़ते हुए अपने मन में बोली)..
क्यों नहीं जानता होगा आखिरकार वह भी तो मर्द है और एक मर्द को भले कुछ पता हो ना हो लेकिन औरत की चुदाई करना जरूर जानते हैं,,,, (सुगंधा अपने मन में ही अपने आप से बात करते हुए बोली) जरूर मेरा बेटा मेरी बुर देखकर मुझे चोदने का ख्याल मन में लाया होगा,,,,,,(यह सब सोचकर सुगंधा की बर पानी चोदने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,, वह तो सिर्फ इतना अनुमान ही लग रही थी कि उसका बेटा कमरे में आकर उसकी बुर के दर्शन किया होगा जबकि उसके बेटे ने तो इससे भी ज्यादा उसकी बुर को छू कर देखा था उसकी गर्माहट को अपने अंदर महसूस करके देखा था,,,और अपनी मां की बुर स्पर्श करने के बाद उसे अपने अंदर अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हुआ था उसका लंड खड़ा हो गया था,,,, और अपनी मां को उसे अस्त्-व्यस्त अवस्था मैं उठा बिना ही वह कमरे से बाहर निकल गया था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने के लिए जो कि कुछ देर पहले अपने कमरे में लंड हिला कर वह अपना पानी निकाल चुका था,, लेकिन जिस तरह का नजारा हुआ अपनी मां के कमरे में देखा था अपनी मां को आशीर्वाद अवस्था में देखा था अपनी मां की कचोरी जैसी खुली हुई बुर को देखा था वैसे तो जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत की बुर को देख रहा था और वह भी अपनी ही मन की इसलिए वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जिसके चलते उसके पेट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था और वह अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए अपनी मां के कमरे से निकाल कर सीधा बाथरूम में घुस गया था और फिर वहां पर अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी मां के बारे में सोचते हुए अपना लंड हिला कर पानी निकाल रहा था,,,,,।
सुगंधा अपने कमरे से बाहर निकल जाना चाहती थी लेकिन कुछ देर वह अपने कमरे में यूं ही लेटी रही क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा अभी-अभी कमरे से बाहर निकाल कर गया है और यही सोचकर बाहर निकाल कर गया है कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही हो और ऐसे हालात में वह तुरंत कमरे से बाहर निकाल कर जाएगी तो उसके बेटे को भी शक हो जाएगा कि उसकी मां जग रही थी इसीलिए वह कुछ देर लेटे रहने के बाद धीरे से ऊपर कोई और नीचे पड़ी अपनी चड्डी को वापस पहन ली और बैगन को ले जाकर कूड़ेदान में डाल दी,,,,।
अंकित नहा कर तैयार हो चुका था वह अपनी मां से नजर मिलाने से कतरा रहा था क्योंकि जब जब वह अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर ही नजर आ रही थी,,,, जिंदगी में पहली बार अंकित एक औरत की खूबसूरत बुर को देखा था और वह भी अपनी मां की इसलिए आज उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से उसकी मां की बुर छाई हुई थी,,,, वह कर नजरों से अपनी मां की तरफ देखकर अपने मन में कह रहा था कि उसकी मां जितना ऊपर से खूबसूरत है उतना अंदर से भी बहुत खूबसूरत है अंकित अपने मन में सोच रहा था कि औरत भी कितनी खूबसूरत चीज होती है उसका अंग अंग देखने लायक होता है प्यार करने लायक होता है खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार तो एकदम जान लेवा होती है। अपनी मां की पतली दरार के बारे में सोचकर वह हैरान ईस बात से हो गया था कि,,, पतली सी दरार में मोटा लंड प्रवेश कैसे करता होगा,,, क्योंकि वह अपने मन ही मन में अपनी मां की पतली सी छोटी सी दरार और अपने मोटे तगड़े लंड के बारे में सोच रहा था,,, पर वह अपनी मन में सोच कर और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था कि जब कभी भी उसे मौका मिलेगा अपनी मां की बुर में लंड डालने को तो वह अपनी मां की छोटे से छेंद में अपना मोटा लंड कैसे डाल पाएगा,,,। यह ख्याल उसके मन में अचानक ही आया था और इसी तरह के ख्याल से उसके बदन में झुरझुर्री सी होने लगी थी,,,,, यह सब सोते हुए अंकित की नजर अपनी मां की उभरी हुई नितंबों पर ही थी और जिस तरह से वह कर नजरों से देख रहा था उसी तरह से सुगंध भी कर नजरों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी और इस बात से काफी उत्साहित और उत्तेजित की थी कि इस समय उसका बेटा उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था इसलिए वह कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को उभर कर रोटी पका रही थी और अपने बेटे की नजरों को सेंक रही थी,,,। एकाएक रोटी पकाते हुए अपने बेटे के नजरों को अपने नितंबों पर स्थित देखकर वह एकदम से पूछ बैठी,,,।
ऐसे क्या देख रहा है अंकित,,,,?
(इतना सुनते ही अंकित को तो जैसे सांप सूंघ गया हो वह एकदम से हक्का-बक्का रह गया उसे अपनी मां से इस तरह के सवाल की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी और इस समय उसकी गलती भी थी क्योंकि वह अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ ही देख रहा था और अपने मन में उसकी बुर को लेकर कल्पना कर रहा था इसलिए वह एकदम से हडबडाते हुए बोला,,,।)
कककककक,,,, कुछ नहीं मम्मी,,,,वो ,,,वो मै,,, राहुल के बारे में सोच रहा था,,,,।
(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था और मन ही मन उत्तेजित हो रहा था लेकिन उसके बेटे ने बड़ी सफाई से बात को बदल दिया था लेकिन सिग्मा होने के नाते और एक औरत होने के नाते वह मर्दों के मन की बातों को अच्छी तरह से जानती इसलिए वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उससे झूठ बोल रहा है और वह बोली,,,)
कौन राहुल,,,?
अरे मम्मी वह तुम्हारे साथ पढ़ती है ना नूपुर आंटी उनका लड़का अभी कल ही तो मार्केट में मिले थे,,,
अरे हां याद आया नूपुर का लड़का राहुल,,,(नूपुर का जिक्र आते ही सुगंध की आंखों के सामने उसके बेटे की हरकत याद आ गई और वह अपने मन में सोचने लगी की खास उसका बेटा भी उसी तरह की हरकत उसके साथ करता तो कितना मजा आता लेकिन मन मसोस सोचकर वह बोली)।
अच्छा हां राहुल,,,,, क्या हुआ,,,?(सहज होते हुए सुगंधा उसी तरह से रोटी को तवे पर रखने लगी,,)
अरे हुआ कुछ नहीं मम्मी उसने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया है,,,, मैं यह सोच रहा हूं जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए,,,, तुम ही बताओ ना,,,,
(अंकित की बात सुनकर वैसे तो सुगंधा उसे कोई और समय होता तो नहीं जाने देती लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि लड़के को संगत में ही बिगड़ते हैं और राहुल अपनी मां के साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहा था सुगंधा को पूरा विश्वास था कि दोनों मां बेटे के बीच नाजायज संबंध थे,,, और इसीलिए राहुल की संगत उसके विचार आमतौर पर बिल्कुल भी अच्छे नहीं होंगे औरत के मामले में वह एकदम बिगड़ा हुआ होगा तभी तो अपनी मां के साथ जिस्मानी संबंध बनाता है,,,, ऐसा सुगंधा सिर्फ अनुमान लगा रही थी उसकी हरकत को देखकर जिस तरह से अपनी मां के नितंबों पर हाथ रखकर उसे चल रहा था उसे देखकर वह अंदाजा लगा ली थी कि उसके और उसकी मां के बीच जिस्मानी ताल्लुकात जरूर होंगे,,, और इस समय राहुल के अनुभव का अंकित को बेहद जरूरत थी और सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कोई भी लड़का संगत में ही बिगड़ा है अगर वह राहुल की संगत में आ गया तो राहुल उसे भी अपनी तरह बना देगा और फिर सुगंधा का काम बन जाएगा इसलिए कुछ देर सोचने के बाद वह बोली,,,।)
अगर वह तुम्हें खेलने के लिए बुलाया है तो तुम्हें जाना चाहिए उसके साथ संबंध आगे बढ़ाना चाहिए वैसे भी लड़कों को समय-समय पर दोस्त बदलते रहना चाहिए क्योंकि उनसे कुछ सीखने को मिलता है और वैसे भी वह मेरी सहेली का दोस्त है तो उसके साथ मिलने झूले में कोई बुराई नहीं है,,,, जाना कब है,,,
रविवार को,,,,
चलो कोई बात नहीं ठीक है यही पास में ही तो रहता है चले जाना,,,,।(अपने बेटे को राहुल के पास उसके साथ क्रिकेट खेलेंगे जाने के लिए इजाजत देने से उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने मन में ही सोच रही थी कि उसका बेटा भी राहुल की तरह बन जाएगा अगर राहुल की संगत में आ गया तो और अगर ऐसा हो गया तो जिस तरह की हरकत राहुल अपनी मां के साथ करता है इस तरह की हरकत हुआ भी उसके साथ करेगा यह सोचकर ही उसके बदन में उत्तेजना के लहर दौड़ने लगी,,,,।
आखिरकार रविवार का दिन आ ही गया ,, और अंकित राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया जो कि कुछ ही दूरी पर था,,,।
देखते ही देखते रविवार का दिन आ गया था और अपनी मां से इजाजत लेने के बाद दोबारा है राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया था जो कि कुछ ही दूरी पर था,,,, थोड़ी ही देर में अंकित उसे जगह पर पहुंच गया था जहां पर राहुल ने उसे बुलाया था यह भी एक मैदान था जहां पर लोग क्रिकेट खेल रहे थे पहले तो अंकित वहीं बड़े से पेड़ के नीचे खड़ा होकर ईधर उधर राहुल को ढूंढने लगा,,,, लेकिन राहुल उसे कहीं नजर नहीं आ रहा था उसे लग रहा था कि शायद राहुल उसे बुलाकर ना आया हो उसे कोई काम पड़ गया हो लेकिन तभी उसके कंधे पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ और वह पीछे मुड़कर देखा तो राहुल खड़ा था उसे देखते ही अंकित मुस्कुरा दिया जवाब में राहुल भी मुस्कुराने लगा और बोला,,,।
तेरा ही इंतजार कर रहे थे,,, चल आजा क्रिकेट खेलते हैं,,,।
(दो टीम खेलने के लिए तैयार हो चुकी थी उनमें से अंकित राहुल की टीम में था और वाकई में राहुल का इंतजार हो रहा था उसके आते हैं क्रिकेट का खेल शुरू हो गया था पहले बल्लेबाजी विरोधी टीम की थी और उन लोगों ने 10 ओवर में 80 रन बना चुके थे,,, अब बारी राहुल की टीम की थी,,,,)
यार राहुल सामने वालों ने तो जबरदस्त खेल है 10 ओवर में 80 रन,,,,
हां तु ठीक कह रहा है अंकित,,,रन कुछ ज्यादा ही लग गया है,,,, अपनी बोलींग भी ठीक नहीं थी,,,।,, पता नहीं कैसे बन पाएगा,,,,
कुछ चिंता मत कर बन जाएगा बस आराम से और ध्यान से खेलना है,,,(इतना कहने के साथ यही दोनों एक जगह पर बैठ गए थे क्योंकि ओपनिंग जोड़ी किसी और किसी और दोनों 15 रन बनाने के बाद ही आउट हो गए और उसके बाद तो लगातार तीन विकेट और गई मतलब पांच ओवर में 35 रन और 5 विकेट इसके बाद,,,, राहुल और अंकित दोनों की जोड़ी मैदान में जम चुकी थी दोनों तरफ से रन बनाए जा रहे थे हर एक रन पर हर एक चोके पर राहुल की टीम जोरों से शोर मचा रही थी,, राहुल और अंकित की जोड़ी में हारी हुई बाजी को जीत में बदलने जा रहे थे और आखरी बोलकर तीन रन चाहिए था और बेटिंग में था अंकित,,,, राहुल उसके पास आया और बोला,,,।)
यार टीम की इज्जत तेरे हाथ में है तुझे ही टीम को जिताना है,,,,,।
देख राहुल में पूरी कोशिश करूंगा,,,,,।
(इतना कहने के साथ ही ,,, अंकित क्रीज पर खड़ा हो गया और चारों तरफ देखकर मुआयना करने लगा कि कौन सा खिलाड़ी कहां खड़ा है,,,, और फिर तैयार हो गया बल्लेबाजी के लिए और जैसे ही अगली गेंद उसके करीब आई वह आगे बढ़कर ऐसा जोरदार शॉट मारा की गेंद हवा में बाउंड्री पर हो गई अंकित छक्का जड़ दिया था और इसी के साथ उसकी पूरी टीम एकदम से उत्साहित होकर दौड़ते हुए उसके पास आई और उसे उठा ली,,,, राहुल बहुत खुश था क्योंकि उसने भरोसा करके अंकित को अपनी टीम में शामिल किया था और अंकित ने विजय दिलाया था,,,।
जीतने के बाद राहुल की टीम नाश्ता पानी करने के लिए चाय की दुकान पर गई और वहां पर बैठकर सभी लोग समोसे खा रहे थे तभी राहुल अपने ही साथी खिलाड़ी को बोला,,,,)
मैं तुझे हमेशा कहता हूं कि चौथे नंबर पर मर जाया कर चौथे नंबर पर मुझे आने दिया कर तु हमेशा अपनी मां चुदवा लेता है,,,,।
चल रहने दे पिछली मैच में तुझे ही चौथे नंबर पर भेजा गया था वहां क्या किया अपनी मां की तरह टांग खोल दिया और बोल जैसे लंड बुर में घुसती है इस तरह स्टंप में घुस गई याद है की याद दिलाऊं,,,।
चल रहने दे पीच भी तो तेरी मां की भोसड़े की तरह एकदम चिकनी थी समझ में नहीं आया,,,(चाय की चुस्की लेते हुए बेहद सहज भाव से राहुल बोला राहुल के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर अंकित एकदम हैरान हो गया था क्योंकि राहुल एक शिक्षिका का लड़का था और एक शिक्षिका का लड़का होने के बावजूद भी उसकी बोली भाषा एकदम निम्न स्तर की थी और वह एक दूसरे की मां के बारे में गंदे गंदे शब्द का प्रयोग कर रहे थे हालांकि अंकित को थोड़ा अजीब तो लग रहा था लेकिन उसके बदन में अजीब से सियाराम सी दौड़ने लग रही थी क्योंकि जिस तरह से राहुल का दोस्त राहुल की मां के बारे में बातें कर रहा था यह सुनकर अंकित की आंखों के सामने राहुल की मां का खूबसूरत चेहरा और उसका गदराया बदन नजर आने लगा और अभी कुछ दिन ही हुए थे उसे अपनी मां की बुर का दीदार किए हुए इसलिए अंकित तुरंत राहुल की मां की बुर के बारे में कल्पना करने लगा और यह सब करते हुए वह बेहद उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,।)
अब चल रहने दे तेरी मां की बुर की तरह तो चिकनी बिल्कुल भी नहीं थी जो संभाल नहीं पाया और फिसल गया,,,,, जितने नंबर पर तु उतरता है उतने ही नंबर पर उतरेगा,,,,।
देख ऐसा नहीं है कभी-कभी हो जाता है चौथे नंबर पर उतरता हूं तो मुझे गेंद तेरी मां की चूची की तरह बड़ी-बड़ी दिखती है,,,,
मुझे भी चौथे नंबर पर गेंद तेरी मां की चुची की तरह नजर आती है,,,,
और चुची नजर आती है तभी तो खेल नहीं पता है ना,,,।
यार राहुल क्या बताऊं तेरी मां की चूची के बारे में सोच कर ही दिमाग फेल हो जाता है,,,।
चल अब रहने दे,,, तेरी मां इतनी कसी हुई साड़ी पहनती है कि उसकी गांड ऐसा लगता है कि बाहर निकल जाएगी और जब भी मैं देखता हूं उसी समय मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,।
बस देख कर ही मन बहला लेना अगर कभी उल्टा सीधा करने की सोच भी तो मेरी मां तेरा लंड काट देंगी,,, बहुत गुस्से वाली है,,,।
तेरी मां का गुस्सा शांत करना मुझे आता है देखना किसी दिन मौका मिलेगा ना उसे अपना लंड दिखा दूंगा फिर देखना तेरी मां को उसके ही कमरे में पटक कर चोदुंगा और तू देखते ही रह जाएगा,,,,।
(दोनों जिस तरह से आपस में बातें कर रहे थे बाकी के लोग सुनकर मजा ले रहे थे और वह लोग भी आपस में मां बहन की गाली देते हुए ही बात कर रहे थे आज पहली बार अंकित ऐसे लोगों से मिल रहा था जो भेज दीजिए एक दूसरे को मां बहन की गाली देकर बात कर रहे थे और किसी को भी बुरा नहीं लग रहा था,,,, अंकित चाय की चुस्की लेते हुए सब लोगों के बारे में सोच रहा था खास करके राहुल के बारे में राहुल अपनी मां के बारे में इतनी गंदी बातें बडे आराम से सुन ले रहा था,,, और अगर इस तरह की बातें कोई उससे करता तो शायद वह झगड़ा कर लेता ,, अभी अंकित यह सब बातें सोच ही रहा था कि तभी उनकी टीम का कप्तान उसके पास आया और हाथ मिलाने के लिए अपने हाथ को आगे बढ़ा दिया अंकित भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर मुस्कुरा कर हाथ मिलाने लगा और वह बोला,,,)
यार तूने तो सभी बोलरो की मां चोद दिया,,, क्या छक्का चौका लगाया है,,,, वैसे नाम क्या है तेरा,,,,।
अंकित नाम है इसका,,,,(अंकित से पहले राहुल उसका परिचय देते हुए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) इसकी मां भी स्कूल में पढाती है मेरी मां के साथ,,,
अरे वाह,,, उसकी मां भी तेरी मां की तरह एकदम चिकनी होगी,,,,
बहुत जोरदार मेरी मां से भी जबरदस्त है,,,,।
(उसकी बात सुनकर अंकित तो दोनों को देखा ही रह गया अंकित को यकीन नहीं हो रहा था कि यह दोनों इतने सहज रूप से पहली मुलाकात में ही उससे इस तरह की बातें करेंगे,,, अंकित कुछ बोल नहीं पाया और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
चल कोई बात नहीं आते रहना अगली बार तुझसे ओपनिंग करवाएंगे,,,,
(इतना कहकर वह और उसके साथी धीरे-धीरे वहां से जाने लगे राहुल अभी भी उसके साथ बैठा हुआ था,,,, सबके चले जाने के बाद अंकित बोला,,)
यार तुम लोग आपस में इतनी गंदी गंदी बातें करते हुए दूसरे की मां के बारे में तुम लोगों को बुरा नहीं लगता,,,।
नहीं तो इसमें क्या हो गया भले एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करते हैं लेकिन इससे पता तो चलता है कि किसकी मां सबसे ज्यादा सेक्सी और गर्म है,,,।
क्या,,,,!(अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,)
देख जिसे मैं चौथे नंबर पर खेलने के लिए बोल रहा था उसकी मां की गांड के लिए जबरदस्त है कि जब भी वह साड़ी पहनती है तो ऐसा लगता है कि उसकी बड़ी-बड़ी गांड बाहर निकल आएगी और उसकी गांड देखकर लंड खड़ा हो जाता है,,,, और जो हमारी टीम का कप्तान है उसकी मां एकदम लंबी चौड़ी कद काठी की है उसकी चूचियां बहुत ज्यादा बड़ी है उसकी गांड भी इतनी ज्यादा बड़ी है कि पूछो मत इतना समझ लो कि अगर उसे चोदने का मौका मिले,,, तो तुम पीछे से उसकी ले ही नहीं पाओगे,,,।
मतलब ,,,,!(एक बार फिर से अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)
मतलब किसकी गांड इतनी बड़ी-बड़ी है कि पीछे से तुम्हारा लंड उसकी बुर तक पहुंच ही नहीं पाएगा अगर उसकी लेना है तो उसे बिस्तर पर लेटा कर उसकी टांगें खोल कर लेना होगा,,, यह बात मैंने कई बार अपने कप्तान से कह चुका हूं,,,
क्या कह रहे हो यार और वह कुछ बोला नहीं,,,।
वह क्या बोलेगा वह तो हंसते रहता है पर मेरी बात सुनकर वह भी यही बोलता है कि तू सच कह रहा है,,,
बाप रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,,,
अच्छा एक बात बात कभी किसी को चोदने का मौका मिला है,,,
नहीं,,,,(शब्दों के साथ-साथ इशारे से सर को भी ना है हिलाते हुए अंकित बोला ,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तू,,,,
मुझे तो कई बार मौका मिल चुका है,,,, और हां जिससे मैं चौथे नंबर पर खेलने के लिए बोल रहा था ना उसकी मां की चुदाई में कर चुका हूं लेकिन यह बात उसे मालूम नहीं है,,,,
क्या कह रहे हो यार,,,,
हां तभी तो मैं जानता हूं उसकी मां के बारे में इतना कुछ यह खुद अपनी मां को अभी तक साड़ी में देखा होगा लेकिन मैं उसकी मां की साड़ी को अपने हाथों से उतार कर नंगी कर चुका हूं,,,,।
(राहुल की बातों को सुनकर अंकित का दिल जोरो से धडक रहा था,,,। भले ही टीम का कप्तान उसकी मां के बारे में गंदी बात कह कर गया था लेकिन न जाने क्यों पहली बार उसे दूसरे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर बहुत अच्छा लग रहा था और से इस बात का एहसास भी हो रहा था कि वाकई में उसकी मां बहुत खूबसूरत है क्योंकि राहुल ने भी यही कहा था कि उसकी मां से भी ज्यादा चिकनी उसकी मां है,,,,और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
यार अंकित सच में वैसे तो सब कुछ ठीक है लेकिन उसकी मा बुर एकदम साफ रखती है एकदम चिकनी और मुझे बालों वाली बुर ज्यादा पसंद है,,,,( राहुल की यह बात सुनते ही अंकित के मन में उभरने लगा जब वह अपनी मां के कमरे में उसे जगाने के लिए गया था और पहली बार जिंदगी में अपनी मां की बुर के दर्शन किया था और उसे समय उसकी मां की पूरी एकदम चिकनी थी लेकिन चिकनी बुर अंकित को बहुत अच्छी लग रही थी खूबसूरत लग रही थी,,,)
तुझे कैसी बुर पसंद है,,,?(एकदम से राहुल ने अंकित से पूछ लिया और उसका यह सवाल सुनकर अंकित एकदम से हड़बड़ा गया,,,,, और कुछ बोल नहीं पाया तो राहुल फिर बोला,,,)
अरे बोलना शरमाता क्यों है,,,.
(उसके इतना कहने पर अंकित धीरे से शरमाते हुए बोला)
अब मैं क्या बताऊं मैं तो कभी देखा ही नहीं हूं,,,,।
(इतना सुनते ही राहुल हंसने लगा और हंसते हुए बोला)
यार सच में तू कमाल का लड़का है,,,, मेरी और तेरी उम्र में कोई फर्क नहीं है,,, लेकिन फिर भी तो इस उम्र में भी बहुत पीछे है मुझको ही देखले ना जाने कितनी औरतें की बुर देख चुका हूं और चोद भी चुका हूं,,, यहां पर नहीं जहां रहकर पढ़ाई करता हूं वहां पर यहां पर तो सिर्फ एक ही औरत की चुदाई किया हूं जो मैं तुझे बता रहा था और वहां तो इसके घर में किराए पर रहता हूं उसे और उसकी लड़की दोनों के साथ मेरा चक्कर है,,,,।
(यह सब सुनकर अंकित को अपने ऊपर गुस्सा आने लगा क्योंकि उसके उम्र का ही राहुल जवानी का मजा लूट रहा था और वह भी बहुत सी औरतों को लड़कियों के साथ और वह था कि अभी तक सिर्फ ताका झांकी में लगा हुआ था,,,,)
तू भी कोई चक्कर चला ले और जवानी का मजा लूट और तो इतना मजा देती है कि पूछो मत स्वर्ग का सुख मिलेगा अगर बाहर कहीं जुगाड़ नहीं हो पा रहा है तो घर में ही जुगाड़ बना ले मजा ही मजा लूटेगा,,,।
(इतना कहने के साथ ही राहुल अपनी जगह से खड़ा हो गया और अंकित से बोला)
चल मेरे घर,,,, थोड़ी बातें करेंगे और तू मेरा घर भी देख लेगा,,,,(उसकी बात सुनकर अंकित अपनी जगह से खड़ा हो गया वैसे तो अपने घर जाने की सोच रहा था लेकिन जिस तरह की बातें राहुल कर रहा था उसे सुनकर उसका मन नहीं कर रहा था घर जाने को वह इस तरह की बातें सुनने में आनंदित हो रहा था और खड़े होकर उसके साथ उसके घर की तरफ जाने लगा लेकिन उसके मन में असमंजस बढ़ रहा था क्योंकि अभी-अभी राहुल ने घर में ही जुगाड़ वाली बात कहा था जो कि उसे समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह चलते-चलते ही राहुल से बोला,,,)
तो घर में ही जुगाड़ वाली बात कर रहा था मैं तेरी बात नहीं समझा,,,,
अरे यार तू सच में बहुत भोला है घर में जुगाड़ का मतलब है कि घर में ही किसी स्त्री से संबंध बना ले जो कि बिलकुल सेफ रहता है जिसमें पकड़े जाने का डर भी नहीं रहता,,,,
घर की स्त्री से संबंध मतलब,,,
यार तुझे तो सब कुछ समझाना पड़ता है,,,, देख मेरी बात ध्यान से सन और गुस्सा मत होना बस मेरी बात पर गौर करना जिन लड़कों का बाहर जुगाड़ नहीं होता चोदने का वह लड़के घर में ही संबंध बना लेते हैं,,,,
लेकिन किससे,,,(अंकित को भी थोड़ा-थोड़ा समझ में आ रहा था लेकिन फिर भी वह बोला)
किसी से भी घर में कोई भी स्त्री हो जो एकदम गजब की लगती हो जैसे की चाची हो भाभी हो मामी हो या फिर अपनी खुद की बहन या मां हो,,,,।
(राहुल की बातें सुनकर अंकित एकदम हैरान हुआ जा रहा था क्योंकि राहुल घर के ही औरतों के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रहा था जिनमे मां और बहन दोनों शामिल थी ,, इसलिए वह हैरान होते हुए बोला,,,)
की औरतें मां और बहन के साथ भी,,, पागल हो गया है क्या,,,!
अरे बुद्धू मैं जानता था तू ऐसा ही बोला क्योंकि तू इन सब के बारे में भी कुछ नहीं जानता,,,, जैसा लड़कों को हमेशा बुर की जरूरत पड़ती रहती है उस तरह से औरतों को भी हमेशा लंड की जरूरत पड़ती रहती है मोटा तगड़ा लंड जो उनके बुर में जाकर उनकी प्यास बुझा सके,,,, और तू नहीं जानता घर में अक्सर इस तरह के संबंध स्थापित हो ही जाते हैं क्योंकि घर की औरतों को ज्यादातर घर के लड़के ही हर हालत में देख लेते हैं कपड़े बदलते हुए नहाते हुए नंगी या फिर घर में चुदवाते हुए,,, अच्छा एक बात बात सच-सच बताना लंड खड़ा होता है कि नहीं,,,,
यार अब यह कैसा सवाल है,,,,
अरे जैसा भी है लेकिन सच-सच बताना खड़ा होता है कि नहीं,,,,
हां जरूर होता है,,,,
लड़की और औरतों के बारे में ख्याल आता है कि नहीं उनकी गांड देखकर उनकी चूची में देखकर मन में कल्पना होती है कि बिना कपड़ों की यह कैसी दिखती होगी,,,,
हां जरूर,,,,(अंकित भी धीरे-धीरे खुल के जवाब देने लगा,,,)
और फिर जब बिना कपड़ों की औरतों के बारे में सोचता है तो उनके अंगों के बारे में भी सोचता होगा उनकी बुर के बारे में उनकी चुची के बारे में,,,,
हां,,,,(कुछ देर सोचने के बाद चलते-चलते जवाब दिया,,,)
और फिर जब इतना कुछ खाया जाता है तो फिर बच्चे ख्याल आता होगा कि अगर मैं बुर में लंड डालकर चुदाई करूंगा तो कितना मजा आएगा और यही सोचकर हिलाता भी होगा आप सच सच बताना तुझे तेरी मां की कसम मुठ मारता है कि नहीं,,,।
(अंकित एकदम फस चुका था राहुल बहुत ही चालक लड़का था और वह अपनी चालाकी से अंकित के मुंह से सच बुलवाना चाहता था और अंकित को भी इन सब में मजा आ रहा था इसलिए वह कुछ देर खामोश रहने के बाद बोला)
यह तो सब करते हैं यार,,,,
सब तो करते हैं मुझे पता है मैं भी करता हूं लेकिन तू करता है कि नहीं,,,,
(अब अंकित को जवाब देने में कोई हर्ज नहीं था क्योंकि राहुल ने भी हम ही भर दिया था कि वह भी मुठ मारता है,,, इसलिए वह भी बोला।)
करता हूं,,,,
यह हुई ना बात,,,, देख दोस्त शर्माने का नहीं डरने का नहीं यह उम्र ही होती है मजा लेने के लिए अगर यह सब नहीं किया तो जिंदगी बेकार है,,,, अच्छा जब तुम मुठ मारता है तो तेरे मन में किसका ख्याल आता है,,,,(यह सवाल पूछ कर जवाब भी खुद देते हुए वह बोला) अपनी मां का या अपनी बहन का,,,
(इस बार राहुल का सवाल सुनकर वह थोड़ा झेंप गया ,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्या करें वैसे तो बात सच ही थी कि जब से हुआ मूठ मारना शुरू किया था उसके मन में उसकी कल्पना में केवल उसकी मां ही रहती थी हालांकि अभी तक वह अपनी बहन के बारे में गंदी विचार नहीं रखता था लेकिन अपनी मां को चोदने का उसके मन में ख्याल जरूर आता था,,,। लेकिन अब यह अपने मुंह से कैसे कह दे,,,, फिर भी वह अपने मन को मजबूत करके बोला,,,)
पागल हो गया क्या इस तरह के ख्याल मेरे मन में नहीं आते हां कल्पना करता हूं लेकिन मेरी पड़ोस की आंटी है उनके बारे में सोचकर,,,,(अंकित झूठ बोल रहा था और उसकी बात सुनकर राहुल बोला)
कोई बात नहीं जैसे बिस्तर पर चुदाई के लिए किसी स्त्री का होना जरूरी होता है इस तरह से मुथ मरने के लिए भी ख्यालों में किसी स्त्री की जरूरत पड़ती ही है,,,, और तुझे सच बताऊं,,, मुठ मारते समय मेरे मन में किसका ख्याल आता है,,,,।
किसका,,,,?(एकदम से अंकित बोल पड़ा)
मेरी मम्मी का,,,,(बड़े आराम से राहुल बोला,,, लेकिन जितना सहज होकर वह जवाब दिया उतना असहजता अंकित महसूस कर रहा था एकदम हैरान था और से भी ज्यादा हिरण करने वाली बात यह थी कि राहुल बेझिझक बता रहा था उसके चेहरे पर उसकी बातों में बिल्कुल भी शर्म का एहसास नहीं हो रहा था,,,,)
क्या बात कर रहा है राहुल तु तो एकदम बेशर्म है,,,
देख अंकित,,,, इस तरह के खेल में बेशर्म बनना पड़ता है बिस्तर में या बाथरूम में बेशर्म बनने के बाद ही ज्यादा मजा आता है और मैं सच कह रहा हूं तो भी अपनी मां और बहन के बारे में सोचकर कल्पना करना इतना मजा आएगा कि तू हिलता रह जाएगा और तेरे मुठ की धार बहुत दूर तक जाएगी,,,,
ना बाबा ना मुझे तो यह ना हो पाएगा,,,,
चल कोई बात नहीं लेकिन मेरी बात पर गौर जरूर करना ज्यादा नहीं तो एक बार जरूर अपनी मां का ख्याल अपने मन में लाकर हिलाना चोदने से भी ज्यादा मजा आएगा,,,,, ।
(अंकित हैरान था एक लड़का अपना अपनी मां के बारे में इतना खुलकर कैसे बोल सकता है लेकिन जो कुछ भी वह बोल रहा था उसमें अंकित को बहुत मजा आ रहा था और वह अपने मन में सोचने लगा कि राहुल भी अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारता है इसका मतलब है कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो घर में ही अपनी मां के बारे में सोच कर उत्तेजित होते हैं और मुठ मारते हैं,,,, अंकित यही सब सो रहा था कि राहुल का घर आ गया और राहुल ने दरवाजे पर पहुंचकर बेल बज दिया,,,, और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला तो सामने के दिल से कोई देख कर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई,,,,,
राहुल के द्वारा डोर बेल बजाने के बाद थोड़ी ही देर में दरवाजा खुल गया लेकिन दरवाजे के अंदर का नजारा देख कर तो अंकित के होश उड़ गए थे अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई थी क्योंकि दरवाजा राहुल की मां ने खोली थी और जिस अवस्था में वह इस समय थी इस अवस्था के बारे में अंकित कभी सोच भी नहीं सकता था,,,, क्योंकि दरवाजा खोलने वाली राहुल की मां थी और इस समय वह केवल साड़ी पहनी हुई थी लेकिन ब्लाउज उनके बदन पर नहीं था और ना ही ब्रा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी वह नहा कर बाहर आई हूं क्योंकि साड़ी भी उनके बदन से चिपक सी गई थी,,, और साड़ी से चिपक जाने से उसकी दोनों गोलाईया एकदम उभर कर सामने नजर आ रही थी,,, अंकित देखा तो देखता ही रह गया,,, नूपुर की चूचियां गीली साड़ी में एकदम साफ नजर आ रही थी और चूचियों के बीच की उसकी कसी हुई कड़ी निप्पल कैडबरी चॉकलेट की तरह एकदम साड़ी से चीपके हुई नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई भाले की नोक हो,,,,,।
राहुल की मां का यह रूप देखकर अंकित तो एकदम मंत्र मुग्ध हो गया था कुछ देर के लिए वह अपनी मां को भूल गया था,,,, और भूल कैसे नहीं जाता उसकी आंखों के सामने बाथरूम से अभी-अभी नहा करने के लिए भी खूबसूरत जवान औरत जो थी और वैसे भी नहाने के बाद जवान औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है औरतें और भी ज्यादा जवान नजर आने लगती है और उनके खूबसूरत अंगों का निखार और उभार और ज्यादा बढ़ जाता है,,,। और इस समय जवानी से भरी हुई नूपुर स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा नजर आ रही थी अंकित को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां जानबूझकर ब्लाउज नहीं पहनी किया अनजाने में ही वजह दरवाजे में बिना ब्लाउज के दरवाजा खोलने आ गई थी,,,, पल भर में ही उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे,,,,।
राहुल भी कुछ देर के लिए हक्का-बक्का रह गया था क्योंकि इस तरह से पहले भी उसकी मां दरवाजा खोल चुकी थी लेकिन उसकी मां जानती थी कि दरवाजे पर राहुल है इसलिए वह इस हालत में दरवाजा खोल देती थी लेकिन आज राहुल खुद भूल गया था कि उसके साथ अंकित है और शायद उसकी मां भी इस बात से अनजान थी इसीलिए वह इस वेशभूषा में दरवाजा खोल दी थी,,,, और वैसे भी पल भर के लिए राहुल भी अपनी मां के ऐसे रूप यौवन को देखकर मदहोश हो गया था,,,,,, लेकिन बात को संभालते हुए वह बोला,,,।
क्या हुआ मम्मी नहा रही थी क्या,,,?
(जिस तरह की हालत इस समय अंकित की थी ठीक उस विपरीत हालत नूपुर की थी जहां एक तरफ नूपुर की जवानी को देखकर अंकित उत्तेजित हो रहा था मदहोश हो रहा था वहीं दूसरी तरफ नूपुर एकदम घबरा गई थी उसे ऐसा ही था कि रोज की तरह उसका बेटा ही दरवाजे पर होगा और वह जानबूझकर इस अवस्था में दरवाजा खोलने चली गई थी,,, क्योंकि वह वाकई में नहा रही थी नहाने के बाद वह अपना ब्लाउज पहन चुकी थी लेकिन दरवाजे की बेल की आवाज सुनकर उसके चेहरे पर उत्तेजना के भाव नजर आने लगे और वह ब्लाउज और ब्रा दोनों को उतार कर केवल साड़ी को कंधे पर डालकर दरवाजा खोलना चली गई थी क्योंकि उसका मन बहुत कर रहा था सारी संबंध बनाने के लिए और वह राहुल को जानकर ही इस अवस्था में दरवाजा खोली थी लेकिन दरवाजे पर राहुल के साथ अंकित भी था उसकी अध्यापिका का बेटा इसीलिए वह एकदम से चौंक गई थी और अपनी दोनों जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे क्योंकि साड़ी से छुपाने का कोई मौका उसके पास नहीं था सारी गीली थी और उसकी दोनों चूचियों से चिपक गई थी और अगल-बगल का चूची वाला हिस्सा हल्का सा नजर आ रहा था और साथ ही सूची के बीच की निप्पल एकदम तनी हुई थी जो की साड़ी से एकदम बाहर निकलने को आतुर नजर आ रही थी इन सब पर अंकित की नजर बराबर जमी हुई थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर अपने आप को संभालते हुए वह बोली,,,,)
हा रे में नहा रही थी मुझे लगा तू होगा,,,,
नमस्ते आंटी,,,,(औपचारिकता निभाते हुए अंकित बोल)
खुश रहो बेटा आओ अंदर आओ,,,(अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की नाकाम कोशिश करते हुए वह बोली और इसी के साथ राहुल और अंकित दोनों घर में प्रवेश कर गए और वह दरवाजा बंद कर दी)
तुम दोनों बैठो मैं तब तक कपड़े चेंज करके आती हूं,,,,(इतना कहकर नूपुर वापस बाथरूम में चली गई और जल्दी-जल्दी अपनी के लिए साड़ी को वापस उतार दी और कपड़े पहन कर अपने आप को ठीक करने लगी और आईने में अपने आप को देखकर वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली)
बाप रे यह मैंने क्या कर दी यह तो अंकित है सुगंधा का बेटा,,, मुझे उसके सामने इस तरह के हालात में नहीं आना चाहिए था,,, उसने तो मेरा (अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए) सब कुछ देख लिया गली साड़ी में बिना ब्लाउज और ब्रा के मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों से साफ नजर आ रही थी और उसकी नजर भी तो मेरी छाती पर गड़ी हुई थी,,,,,(यह सब सोचते हुए जहां एक तरफ उसे डर का एहसास हो रहा था घबराहट हो रही थी वहीं दूसरी तरफ एक अनजान लड़के को अपना जिस्म दिखाने पर उसपर मदहोशी भी छा रही थी उसके लिए यह पहला मौका था जब वह किसी अनजान लड़की के सामने इस अवस्था में हाजिर हुई थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अभी भी उसके टांगों में कंपन महसूस हो रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपनी मां को इस बारे में बोल दे तो क्या होगा वह क्या सोचेगी कि दरवाजे पर कौन खड़ा है कौन नहीं है यह सब जाने बिना ही वह अवस्था में कैसे दरवाजा खोल सकती हैं,,, यही सब सो कर हैरान हो रही थी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी नूपुर मर्दों की नजरों को अच्छी तरह से समझती थी उसके ही बेटे का हम उम्र था अंकित और जिस तरह से वह उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था जरूर वह उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था,,,, नूपुर इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि साड़ी के अंदर उसकी नज़रें उसकी चूचियों की गोलाई को नाप रही थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी नजरों से ही उसकी साड़ी को हटाकर उसकी नंगी चूचियों के दर्शन करना चाहता है,,,, यह सब सोचते हुए नूपुर के बदन में दोस्त भेजने की लहर उठ रही थी और नतीजा उसकी बुर गीली हो रही थी,,,, कुछ देर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपनी सांसों को और अपने आप को दुरुस्त करने के बाद वह धीरे से बाहर निकली और एक बार फिर से दोनों के पास गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)
तुम दोनों बैठकर बातें करो मैं चाय बना कर लाती हूं,,,
नहीं रहने दीजिए आंटी इसकी क्या जरूरत है हम दोनों अभी-अभी चाय पी कर आ रहे हैं,,,(अंकित औपचारिकता दिखाते हुए बोला)
अरे कोई बात नहीं फिर से पी लेना वैसे भी तुम मेरे घर पर पहली बार आए हो इसलिए मेरा फर्ज बनता है बस 10 मिनट में आती हुं,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर किचन की तरफ जाने लगी और जाते हुए अंकित उसके पिछवाड़े को ही देख रहा था जो कि कुछ ज्यादा ही खीला हुआ और उभरा हुआ नजर आ रहा था,,,, नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसे मटकता हुआ देखकर,,, अंकित की हालत खराब होने लगी वाकई में कुछ देर के लिए वह अपनी मां की खूबसूरती अपनी मां गदराया बदन,,, उसकी मदहोश करने वाली जवानी को भूल चुका था नूपुर के मदमस्त से यौवन में डूबता चला जा रहा था,,,, अंकित तब तक देखता रहा जब तक की राहुल की मां किचन के अंदर चली नहीं गई,,, और यह सब राहुल तिरछी नजर से देख रहा था अपनी मां के किचन के अंदर जाते ही राहुल बोला,,,,,।
क्या देख रहा हैअंकित,,,?
(राहुल की बात सुनते ही अंकित एकदम से घबरा गया उसकी चोरी पकड़ी गई थी लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए बोला)
कककककक,,, कुछ तो नहीं बस ऐसे ही,,,
बस ऐसे ही नहीं मैं जानता हूं तु क्या देख रहा था,,,
नहीं यार कुछ भी तो नहीं,,,,(अंकित घबराते हुए बोला)
देख हम दोनों एक ही उम्र के हैं और इस हिसाब से मुझे पता है कि तु क्या देख रहा था,,,
(अंकित तो राहुल की बातें सुनकर एकदम से हक्का-बक्का रह गया था,,,, अंकित समझ गया था कि राहुल उसकी नजरों को पहचान गया है,,,, वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
तु मम्मी की गांड देख रहा था ना,,,(इतना सुनते ही अंकित के तो माथे से पसीना छूटने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला) मैं सही कह रहा हूं ना मैं जानता हूं मैं तेरी नजरों को देख लिया था बड़ी-बड़ी है ना मेरी मां की गांड,,,,,
(राहुल की बात सुनकर अंकित एकदम से चौंक गया था उसे यह चिंता लगी हुई थी कि राहुल ने उसकी नजरों को देख लिया था जो कि वाकई में वह उसकी मां की गांड कोई देख रहा था लेकिन वह इस बात से कुछ ज्यादा ही हैरान था क्योंकि राहुल अपनी मां की गांड के बारे में एकदम सहज होकर बोल रहा था उसके चेहरे पर बिल्कुल भी शर्म के भाव नजर नहीं आ रहे थे इसीलिए तो अंकित एकदम हैरान था और हैरान होते हुए बोला,,,)
यह तु क्या कह रहा है राहुल,,,?
मैं एकदम ठीक कह रहा हूं मैं तेरी नजरों के गौर किया था तू लगातार मेरी मां को ही देख रहा था खास करके उनकी गांड को और जब दरवाजे पर खड़ा था तो तू मेरी मां की चूचियों की तरफ देख रहा था ना जो कि वह भी खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी है,,,,
यह तो कैसी बातें कर रहा है अंकित वह भी अपनी मां के बारे में ही,,,
तो इसमें क्या हो गया,,,, खूबसूरत चीज को तो देखी जाती है ना और उनकी तारीफ भी की जाती है तो भी तो पागलों की तरह देख रहा था मेरी मां की चूची और गांड को दरवाजे पर तो सबकुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था मेरी मां की चूची और तनी हुई निप्पल जिस पर तेरी नजर गई थी,,,,।
(अंकित एकदम हैरान हो गया था,,, आपस में मां बहन की गाली देते हुए तो वह देखा था और सुना था लेकिन आज पहली बार एक बेटे को अपनी मां के बारे में गंदी बात करते हुए देख रहा था सुन रहा था इसलिए वह बेहद अंचभित था,,, और वह बोला)
यह कैसी बातें कर रहा है तू राहुल अपनी ही मां के बारे में,,,
यार अभी रास्ते में मैं तुझे क्या समझाया था,,, मैं तुझे बताया था ना कि घर में ही जुगाड़ कर लेने का,,,
तो तेरा,,,,(एकदम आश्चर्य चकित होते हुए अंकित बोला,,)
हां मेरा आकर्षण मेरी मां की तरफ है,,,, देखा नहीं तूने मेरी मां कितनी खूबसूरत और सेक्सी है उसकी बड़ी चूची है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर जो तेरी हालत खराब हो गई तब तुम्हें दिन-रात अपनी मां के साथ रहता हूं तो मेरी क्या हालत होती होगी,,,,
क्या यह सब तेरी मां को मालूम है,,,,
पहले नहीं मालूम था लेकिन धीरे-धीरे मेरी मां को भी समझ में आने लगा कि मैं उनको देखता रहता हूं,,,
फिर तेरी मां ने क्या कहा,,,
कुछ नहीं लेकिन जिस दिन से उसे ऐसा एहसास हुआ कि मैं उन्हें घूरता रहता हूं उसे दिन से उनका सजना सजना शुरू हो गया वैसे एकदम साधारण रहती थी लेकिन धीरे-धीरे उन्हें बदलाव आने लगा जानता है क्यों,,,?
क्यों,,,?
क्योंकि औरतों को भी यही पसंद है मर्द उनकी खूबसूरती खून के खूबसूरत अंगों को जब घुरते हैं तो उन्हें भी अंदर से अच्छा लगता है,,,, और उनकी खूबसूरती और ज्यादा खिलने लगती है,,,, इसलिए तो कहता हूं कि तू भी घर में जुगाड़ बना ले और वैसे भी मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत तेरी मां है बहुत सेक्सी,,,
(राहु के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राहुल इस तरह से बात करेगा लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
पहली मुलाकात में ही मैं तेरी मां को देखा ही रह गया तेरी मां की छाती कितनी खूबसूरत है ऐसा लगता था कि तेरी मां की चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी,,,, तू भी मेरी मां की चूची देख रहा था ना कैसी थी गोल-गोल बड़ी-बड़ी तेरा भी मन कर रहा होगा अपने हाथों में लेकर दबाने के लिए,,, मेरा भी मन कर रहा था तेरी मां की चूची को पकड़ने के लिए और तोड़ तेरी मां का पिछवाड़ा कितना कसा हुआ है मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत और जवान तेरी मां है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां का हर एक अंग एकदम जवान लड़कियों की तरह कसा हुआ होगा और उनमे जरा भी ढीलापन नहीं होगा,,,,।
(राहुल की बातें अंकित के होश उड़ा रही थी और साथ ही उत्तेजना के मारे अंकित का लंड खड़ा हो गया था अपने दोस्त के मुंह से अपनी मां के लिए स्टार की गंदी बात सुनकर जहां एक तरफ अंकित को गुस्सा आता था वही आज न जाने क्यों उसे अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ सुनने में मजा आ रहा था उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा है कि वाकई में उसकी मां कितनी ज्यादा खूबसूरत है की आते जाते जवान लड़के उसकी मां को देखते रहते और न जाने कैसी कैसी कल्पनाएं करते रहते हैं जैसा कि राहुल कर रहा था,,,,)
मैं तो कहता हूं तू भी मेरी तरह नजरिया रखा कर,,,
ना बाबा ना मुझे तो डर लगता है,,,।
(दोनों की बातचीत परवान चढता ईससे पहले नूपुर हाथ में चाय का ट्राय लेकर आ गई और फिर दोनों को चाय नाश्ता देकर खुद भी चाय पीने के लिए बैठ गई,,,, इधर-उधर की बातें करते हुए तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे लेकिन इस बीच लगातार अंकित की नजर राहुल की मां के ऊपर से उसकी बदमाशी कर देने वाली चूचियां उसका खूबसूरत गदराया बदन उसका गोरा रंग,,, और उसका पिछवाड़ा,,,, इन सब के बारे में सोचते हुए अंकित का लंड खड़ा हो गया था,,, बातों ही बातों में नुपुर बोली,,,)
बेटा तुम भी आया करो तुम भी तो मेरे बेटे जैसे हो,,,
जी आंटी में जरूर आता रहूंगा,,,,
और हां राहुल के जन्मदिन पर जरूर आना,,,
जरूर आऊंगा आंटी,, वैसे जन्मदिन कब है,,,
अभी तो काफी दिन है यार मैं बता दूंगा तुझे,,,(चाय का कप टेबल पर रखते हुए राहुल बोला,,, और फिर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और जाने के लिए इजाजत मांगने लगा,, राहुल उसे छोड़ने के लिए बात कर रहा था लेकिन वह बोला कि वह चला जाएगा इसलिए वह घर से बाहर निकल गया और पैदल अपने घर की तरफ निकल गया अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर,,,
अंकित राहुल के घर से निकल गया था अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर राहुल के घर पर जो कुछ भी हुआ था वह अंकित के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,, पहली बार उसकी नजर किसी दूसरी औरत पर गई थी और वह भी राहुल की मां पर जो कि उसकी मां खुद उसकी मां के साथ सहअध्यापिका थी,,,। राहुल की मां के बारे में सोचते हुए वह अपने घर की तरफ चला जा रहा था और राहुल के घर के बाहर जाते ही नूपुर गुस्सा दिखाते हुए राहुल से बोली,,,।
तुझे बताना चाहिए था ना कि घर पर तो अंकित को लेकर आएगा,,,,
तो क्या हो गया मम्मी इसमें नाराज होने वाली कौन सी बात है,,,
तू नहीं जानता क्या बुद्धू बनने का नाटक मत कर देखा था ना उसकी आंखों के सामने में किस हालत में दरवाजा खोली थी,,,,
अरे लेकिन मुझे क्या मालूम था कि तुम नहा कर सीधा दरवाजा खोलना चली जाओगी और वह भी बिना ब्लाउज पहने,,,
मैं तो यही समझी थी कि तू है और मेरा मन भी बहुत कर रहा था इसलिए पहना हुआ ब्लाउज उतार कर गली साड़ी में चली गई थी ताकि तो मेरी चूची देखकर उत्तेजित हो जाए,,,,(सामने की टेबल से उठकर राहुल के बगल में बैठते हुए नूपुर बोली और उसकी बात सुनकर राहुल मुस्कुराने लगा और बड़े प्यार से उसके उलझे हुए बालों को संवारते हुए बोला,,,)
मैं तो तुम्हें देखते ही चुदवासा हो जाता हूं,,,,
लेकिन मैं चुदवासी हो गई थी उसका क्या,,, वैसे तो अंकित देखने में सीधा-साधा ही लगता है लेकिन देखा नहीं दरवाजे पर कैसे मेरी चुचीया देख रहा था,,,
तो क्या हो गया तुम्हें तो खुश होना चाहिए तुम्हारी खूबसूरत चूचियों को देखकर उसकी हालत खराब हो रही थी एक जवान लड़के की मां होने के बावजूद भी तुम्हारी जवानी बरकरार है तुम्हारा बदन अभी भी कसा हुआ है इस बात पर तुम्हें गर्व होना चाहिए,,, अभी भी तुम किसी का भी लंड खड़ा कर सकती हो,,,(अपनी मां की एक चूची दबाते हुए बोला)
अरे वह सब तो ठीक है मुझे भी उसका घूरना अच्छा लग रहा था लेकिन तू नहीं जानता वह किसका लड़का है,,, मुझे तो इस बात का डर है कि कहीं अपनी मां से सब कुछ बता दिया तो कि मैं घर में ऐसे ही घूमती रहती हूं,,,
उसे देखकर लगता है कि वह अपनी मां से इस तरह की बातें करता होगा,,,! बिल्कुल भी नहीं बहुत सीधा-साधा है हां भले ही तुम्हें देखकर उसका लंड खड़ा हो गया था लेकिन फिर भी अपनी मां से तो इस तरह की बात नहीं करता होगा,,,
तुझे कैसे मालूम तू तो मुझसे इसी तरह की बातें करता है,,,,।
मेरी बात कुछ और है मेरी जगह अंकित नहीं ले सकता बहुत भला भला है मेरी तरह बनने में उसे बहुत समय लगेगा,,,, वैसे उसकी मां बहुत ज्यादा चिकनी है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था अगर मौका मिले तो उसकी मां की बुर में लंड डाल दु,,, हाय मेरी रानी,,(एकदम से उत्तेजित होते हुए अपने लंड को दबाते हुए वह बोला तो एक औरत होने के नाते नूपुर अपने बेटे की हरकत से औरअपने सामने किसी दूसरी औरत की तारीफ अपने बेटे के मुंह से सुनकर वह गुस्सा हो गई और गुस्से में एकदम से उठते हुए बोली,,,)
यह बात है तो आप जब भी तेरा लंड खड़ा हो तो उसी के पास चले जाना मेरे पास मत आना,,,,(गुस्से में ऐसा कहकर वह चलने को हुई की राहुल भी मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत अपनी मां की कलाई पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला)
अरे जाती कहां हो मेरी रानी,,,(अपनी तरफ खींचते ही वह एकदम से अपने बेटे की तरफ झुकी और उसकी गोद में जाकर गिर गई,,,) तुम्हारे से भला खूबसूरत कोई औरत मुझे मिलेगी क्या दुनिया में तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,(राहुल अच्छी तरह से जानता था की दूसरी औरत की बात करने की वजह से उसकी मां गुस्सा गई है और अगर ऐसा हुआ तो वह उसे चोदने नहीं देंगी और फिर उसे खड़ा लंड हाथ से हिला कर शांत करना पड़ेगा जैसा कि वह करना नहीं चाहता था,,,)
नहीं नहीं जा उसके पास तुझे तो वह ज्यादा चिकनी लगती है ना,,,
अरे मम्मी अब तुम्हारी बुर से ज्यादा चिकनी बुर किसकी होगी,,, देखो तो सही तुम्हारी गांड की गर्मी पाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,।
(इस बात को सुनकर नूपुर मुस्कुराने लगी क्योंकि वाकई में वह अपने बेटे की गोद में बैठी हुई थी और इसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांव उसके लंड के ऊपर टिकी हुई थी और धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होकर उसकी गांड के बीचों बीच चुभने लगा था,,, जिसका एहसास होते ही नूपुर की बुर से मदन रस बहने लगा था,,,, अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर राहुल बोला,,,)
अब एक राउंड तो बनता ही है,,,,(और इतना कहने के साथ ही राहुल अपनी बलिष्ठ भुजाओं में अपनी मां को गोद में उठा लिया और उसे गोद में उठाए हुए हैं अपनी उनके कमरे में ले जाने लगा क्योंकि ऐसा वक्त उसके पापा घर पर नहीं थे और वैसे भी ज्यादातर उसके पापा घर पर रहते नहीं थे बाहर ही काम के सिलसिले में रहते थे,,,, इसलिए वह दोनों पूरी तरह से निश्चित था थे राहुल अपनी गोद में उठाकर अपनी मां को अपने मां के कमरे में लेकर आया और नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,, गद्दे पर गिरते ही उसकी मां का भारी भरकम शरीर हल्के से उछल कर वापस गद्दे में धंस गया,,, और उसकी साड़ी एकदम से उसकी जांघों तक चढ गई,,, अपनी मां की मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघों को देखकर,,,, राहुल एकदम पर काबू हो गया और उत्तेजना के मारे अपनी मां के कपड़े उतारने से पहले खुद अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,,,।
अपने बेटे को कपड़े उतारकर नंगा होता हुआ देख कर नूपुर से रहने की और वह खुद अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने लगी और देखते ही देखते वह भी अपने बेटे की तरह कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,,, राहुल का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था अपनी मां की नंगी जवानी देखकर वह बेकाबू हो गया था और बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी मां की दोनों टांगें फैला कर अपने प्यासे होठों को अपनी मां की बुर पर लगाने हीं वाला था कि,,, उसकी मां अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपने बेटे की बांह थाम ली और उसे अपनी तरफ खींचने लगी ,,,, राहुल अपनी मां के इशारे को समझ गया था और समझ गया था कि उसकी मां कुछ ज्यादा ही चुदवासी हो गई है इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह अपने चेहरे को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच से ऊपर उठाया और अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर उसे अपनी कमर में लपेट लिया और फिर अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया और तब तक चोदता रहा जब तक की उसकी मां झड़ नहीं गई और उसके बाद वह भाभी अपना गरम लव अपनी मां की बुर में डाल दिया,,,,।
दूसरी तरफ घर पहुंच कर भी अंकित हैरान था जिस तरह से दरवाजा खुला था और दरवाजे पर उसकी मां अर्धनग्नवस्था में दरवाजा खोली थी यह सब अंकित को हैरान कर दे रहा था अंकित को सोचने पर मजबूर कर दे रहा था कि दोनों मां बेटे के बीच क्या चल रहा है क्योंकि ऐसी औरत और वह भी मा क्यों बिना ब्लाउज के साड़ी पहन कर दरवाजा खोलने आएगी और जबकि उसे मालूम हो कि दरवाजे पर उसका बेटा होगा,,,, अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे राहुल की मां को लेकर स्कूल में जब अपनी मां के साथ राहुल की मां से मिला था तब वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि स्कूल में पढ़ाने वाली औरत का ऐसा रूप उसे देखने को मिलेगा,,, जहां एक तरफ राहुल की मां की हरकत से अंकित हैरान सभा की दूसरी तरफ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के दर्शन करके वह धन्य हो गया था,, पर तुरंत उसके जीवन में बाथरूम के अंदर अपनी मां को नंगी देखने वाला दृश्य घूमने लगा और वह अपनी मां की चूची से राहुल की मां की चूची की तुलना करने लगा कुछ ज्यादा खास फर्क नहीं था दोनों की चुचियों में बस इतना फर्क था कि अंकित की मां की चुची बड़ी होने के साथ-साथ एकदम कसी हुई थी,,, और राहुल की मां की चूची में हल्का सा ढीलापन था लेकिन फिर भी अकेली साड़ी में लिपटकर उसकी चूची चार चांद लग रही थी,,,।
अंकित राहुल की मां के बारे में सोच रहा था कि तभी उसे राहुल की बात याद आ गई कि वह अपनी मां को घूरता रहता है अपनी मां की चूची और गांड के बारे में वहां भेजी जब बातें कर रहा था और बात वही बातों में उसने बताया भी था कि उसकी मां को भी यह सब पता है और उसे भी यह सब अच्छा लगता है राहुल से ही पता चला था की औरतों की तारीफ करने से औरतें बहुत खुश होती है खास करके उनके खूबसूरत बदन की तारीफ करने की वजह से तो,,, वह और ज्यादा खुश नजर आती है और अंकित इस बात से भी हैरान था कि उसकी मां को सब कुछ पता था कि उसका बेटा उसे घूरता रहता है लेकिन फिर भी वह कुछ नहीं बोलते बल्कि अंदर ही अंदर खुश होती है और यह बात राहुल ने ही उसे बताया था,,, और बात ही बात में राहुल ने उसकी मां के बारे में भी जिक्र छेड़ दिया था,,, उसकी मां की गांड के बारे में चुची के बारे में सब कुछ बोलकर उत्तेजित हो रहा था अगर कोई और समय होता तो शायद अंकित राहुल के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह के गंदे शब्द नहीं सुन पाता लेकिन न जाने क्या हुआ था कि वह कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था और राहुल खुद अपनी मां के बारे में भी गंदी बात कर रहा था इसलिए अंकित ने भी अपनी मां के बारे में भी गंदी बात सुन लिया था लेकिन उसे इस बात का पता चला था कि जैसा कि राहुल उसकी मां के बारे में उसकी मां की खूबसूरती के बारे में उसकी मां की चूची और गांड के बारे में गंदी बातें कर रहा था उसी तरह से दूसरे लड़के भी उसकी मां को देखकर मन ही मन में या एक दूसरे से गंदी बातें करते रहते हैं और यह सब अपनी मां की खूबसूरती के बारे में लेकर गर्व की बात भी थी ऐसा खुद अंकित ने भी बताया था लेकिन इस बात का निष्कर्ष अभी तक नहीं निकल पाया था कि वाकई में दोनों मां बेटे के बीच क्या चल रहा है अंकित को तो राहुल उसकी मां पर शक होने लगा था कि दोनों के बीच जरूर कुछ चल रहा है लेकिन अपनी आंखों से देखे बिना भला कैसे यकीन कर सकता था,,,।
जहां एक तरफ अंकित राहुल और उसकी मां को लेकर सोच में डूबा हुआ था वहीं दूसरी तरफ सुगंधा अपने बेटे को देखकर खुश हो रही थी वह जानना चाहती थी कि राहुल से मिलकर अंकित ने क्या-क्या किया,,, इसलिए वह खाना बनाने की तैयारी करते हुए अंकित से बोली,,,।
क्यों बेटा कैसा रहा आज का दिन राहुल से मिले थे ना,,,
हां मम्मी मिला था उसके साथ क्रिकेट खेला था और उसने मुझे अपने घर पर भी लेकर गया था,,,।
क्या बात है तुम्हें अपने घर पर भी ले गया,,,,(हरी सब्जी थेले में से निकालकर उसे काटने की तैयारी करते हुए,,,)
हां मम्मी उसके साथ मुझे बहुत मजा आया और उसके घर पर मैं उसकी मां से भी मिला,,,
नूपुर से,,,
हां मम्मी,,,,
कैसी है वह,,,
ठीक है तुम्हारे बारे में पूछ रही थी,,,
मेरा मतलब है कि दोनों मां बेटे खुश तो रहते हैं ना,,,,(दोनों मां बेटे के बारे में पूछ कर उन दोनों के बीच क्या चल रहा है सुगंधा यह जानना चाहती थी लेकिन खुले शब्दों में बोल नहीं पा रही थी,,,, और अंकित राहुल की मां का जिक्र आते ही उसकी आंखों के सामने उसके द्वारा दरवाजा खोलने के बाद जो नजारा दिखाई दिया था वह सब कुछ उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म की तरह घूमने लगा वह अपनी मां को नूपुर के बारे में बता देना चाहता था कि कैसे वह उसकी आंखों के सामने आई थी क्या पहनी थी किस हालत में थी क्योंकि अपनी मां से इस तरह की बात शुरुआत करने पर वह धीरे-धीरे अपनी मां से खोलना चाहता था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थीकी नूपुर के बारे में कुछ भी बोले )
हां मम्मी दोनों खुश थे उसकी मन चाय नाश्ता कर करा ही मुझे जाने दे,,,,
और राहुल,,,, राहुल कैसा लड़का है,,,?
(एक पल के लिए अंकित के मन में आया कि अपनी मां से बता दे कि राहुल कैसा लड़का है वह औरतों को किसी नजर से देखा है यहां तक की अपनी मां को कितनी गंदी नजर से देखा है और साथ ही तुम्हारे बारे में भी गंदे विचार रखता है लेकिन पता नहीं पाया और बात को घुमाते हुए बोला)
बहुत अच्छा लड़का है मम्मी हम दोनों साथ में क्रिकेट खेले थे और टीम को जीत भी दिलाए थे,,,
क्या बात है बेटा इसी तरह से मिलकर खेला करो और टीम को जीत दिलाया करो,,,(सुगंधा आगे भी इसी तरह से आपस में मेल जोड़ बढ़ाने के लिए बोल रही थी,,, क्योंकि सुगंध को पक्का विश्वास था कि दोनों मां बेटे की शारीरिक संबंध है दोनों मां बेटे एक दूसरे को मां बेटे की तरह नहीं बल्कि औरत और मर्द की तरह देखकर ही व्यवहार करते हैं और सुगंध यही चाहती थी कि उसका बेटा भी यही सीखे अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)
ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर वह वापस घूमने वाला था कि तभी उसे राहुल की बात याद आ गई और वह बड़ी हिम्मत जुटाकर डरते हुए बोला,,,)
मम्मी एक बात कहूं,,,
एक क्या 10 बातें बोल तुझे रोका किसने है,,,।( किचन पर सब्जी काटते हुए सुगंधा बोली और उसकी बात सुनकर अंकित घबराते हुए हिम्मत जुटाकर बोला,,,)
तततत,,, तुम,,,, बहुत खूबसूरत लगती हो,,,।
(इतना सुनते ही सब्जी काटते हुए सुगंधा के हाथ एकदम से रुक गए उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, वह एकदम से हैरान होते हुए अंकित की तरफ देखी और बोली,,,,,)
क्या कहा,,,,,?
ककक,,, कुछ नहीं,,,,(और एकदम से जाने को हुआ लेकिन सुगंध तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचने लगी अपनी मां की ईस हरकत से अंकित एकदम से घबरा गया उसे इस बात का डर था कि उसकी मां उसे डाटेंगी,,,, और उसके माथे से पसीना टपकने लगा)
बता क्या बोला तू,,,
कककक,, कुछ नहीं मम्मी,,,,
नहीं नहीं मेरे बारे में कुछ तो बोला तु,,,
सच में कुछ नहीं बोला,,,
देख डर मत मैं तुझे कुछ नहीं बोलूंगी,,,। बता दे क्या बोला तु,,,।
(जिस तरह से सुगंध अंकित का हाथ पकड़ी हुई थी अंकित एकदम से घबरा गया था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां उसे डांटे नहीं लेकिन फिर भी जब उसकी मां बोली कि कुछ नहीं बोलुगी तो उसमें थोड़ी हिम्मत आई और करते हुए बोला,,)
ककक,, कुछ नहीं,,,मे बस कह रहा ताकि तुम बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,
(इतना सुनते ही सुगंधा के चेहरे का भाव एकदम से बदलने लगा पल भर में उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा,,, क्योंकि उसके बेटे ने उसकी खूबसूरती की तारीफ जो कर दिया था सुगंधा अपने चेहरे के भाव को,,, चाहकर भी नहीं छुपा पा रही थी लेकिन औरतों के चेहरे के भाव को पढ़ने में अंकित अभी माहिर नहीं था इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए सुगंधा बोली,,,)
हाय दइया यह तुझसे किसने कह दिया,,,
किसने किया मुझे पता है दिखाई भी देता है की खूबसूरती क्या होती है,,,
क्या होती है खूबसूरती बात तो जरा,,,,
तुम्हारी खूबसूरत घने बाल जब तुम्हारे चेहरे पर इसकी लट आती है तो बहुत अच्छा लगता है और तुम जब किचन में काम करते हुए अपनी साड़ी को कमर से खोंसती हो तब तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगती हो,,,(साड़ी को कमर से खोंसने पर साड़ी का का कसाव नितंबों पर अत्यधिक बढ़ जाता था जिसकी वजह से सुगंधा की गांड और ज्यादा बड़ी और उभरी हुई नजर आती थी और यही अंकित बताना भी चाहता था कि इस तरह से तुम्हारी गांड बहुत मस्त लगती है लेकिन वह खुले शब्दों में बोल नहीं पा रहा था,,, लेकिन सुगंध अपने बेटे के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि जब वह साड़ी कमर से खोंसने वाली बात किया था तब औपचारिक रूप से सुगंधा की नजर अपने पिछवाड़े पर चली गई थी जो की काफी बड़ी और कसी हुई नजर आ रही थी,,, पर वह समझ गई थी कि अंकित किस बारे में बात कर रहा था अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) बस यही कह रहा था,,,,।
ओहहह ,,, तो मेरे बेटे को मे खूबसूरत लगती हुं,,,
लगती नहीं हो तुम हो खूबसूरत मम्मी,,,
चल रहने दे किसी और के सामने मत कहनानहीं तो तुझे बेवकूफी समझेंगे दो-दो बच्चों की मां कभी खूबसूरत हो सकती है क्या,,,
क्या मम्मी तुम तो मजाक समझती हो,,,
रहने दे जाकर पढ़ाई कर और मुझे अपना काम करने दे,,,,(इतना कहकर सुगंधा वापस सब्जी काटने लगी और अंकित वहां से चला गया,,, अंकित के वहां से जाते हैं सुगंधा राहत की सांस लेने लगी क्योंकि ना जाने क्यों इस तरह की बात अपने बेटे के मुंह से उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठने लगी थी और वह बदहवास होते जा रही थी,,, मदहोशी उसकी नसों में घूमने लगी थी बरसों के बाद कोई मर्द उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और इशारों ही इशारों में उसकी गांड की तारीफ कर रहा था इसलिए सुगंधा के तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी,,,, उसकी बर पानी छोड़ रही थी और मन ही मन वह प्रसन्न हो रही थी इस बात पर की राहुल के पास भेजने का उसका मकसद सफल हो रहा था,,, क्योंकि आज ही वह राहुल से मिला था और आज ही वहां उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था यही बदलाव उसमें एकाएक आया था,,,,।
दूसरी तरफ अंकित का वीडियो जोरों से धड़क रहा था पहली बार अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और ऐसा करते समय उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था लेकिन अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करने में उसे आज बहुत अच्छा लग रहा था,,, ऐसे ही दो-तीन में तीन गुजर गए और सुगंधा एक दिन शाम को मार्केट जाने के लिए तैयार होने लगी,,,,।।।।
एक दिन बाहर मार्केट जाने के लिए तैयार हो रही थी और अपने साथ अंकित को भी ले जा रही थी वह अपने कमरे में तैयार हो रही थी,,, और अंकित तैयार होकर कमरे से बाहर कुर्सी पर बैठकर इंतजार कर रहा था,,, और अपनी मां के बारे में ही सोच रहा था,,, अब वह अपने मन में यही सोचता था कि काश उसकी मां राहुल की मां की तरह होती तो कितना मजा आ जाता घर में ही खुला वातावरण देखने को मिलता ,,, क्योंकि राहुल की मां को देखकर मन ही मन वह भी यही चाहता था कि उसकी मां भी राहुल की मां की तरह ही घर में रहे मां बेटे के बीच में किसी प्रकार का पर्दा ना हो सब कुछ देखने को मिले जैसा कि वह खुद अचानक उसके घर पर पहुंच कर देख चुका था उसकी मां का कामुक रूप बड़ी-बड़ी चूचियां उस पर गीली साड़ी,,,उफ्फ,,,, उस दृश्य को याद करके अभी भी अंकित का लंड खड़ा हो जाता था। और इस समय भी उसका यही हाल था,,, राहुल की मां के बारे में सोचकर ही उसका लंड ठुनकी मारता हुआ अपनी औकात में आ चुका था,,,।
बाहर बैठा हुआ अंकित बार-बार अपनी घड़ी की तरफ देख रहा था क्योंकि मार्केट जाने का समय कुछ ज्यादा ही होता जा रहा था,,, वह बाहर से ही आवाज लगाता हुआ बोला,,,।मम्मी तैयार हुई कि नहीं देर हो रही है,,,
अरे हां तैयार हो गई हूं बस थोड़ा सा रह गया है यह ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है,,,।
(उसकी मां का इतना कहना था कि अंकित की कल्पनाओं का घोड़ा पल भर में ही गति पकड़ लिया वह अपनी मां के बारे में कल्पना करने लगा अपनी मां के डोरी वाले ब्लाउज के बारे में कल्पना करने लगा वह अपने मन में सोच रहा था कि उसकी मां डोरी वाले ब्लाउज में कितनी खूबसूरत लगती होगी हालांकि वह पहले भी अपनी मां को डोरी वाले ब्लाउज में देख चुका था लेकिन इतना ध्यान नहीं दिया था लेकिन जब से उसका आकर्षण अपनी मां की तरफ बढ़ा था तब सेवा अपनी मां की हर एक हरकत और उसके रूप को देखकर उसके बारे में गंदी-गंदी कल्पना किया करता था और इस समय भी उसके मन में यही हो रहा था अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां कैसे छोटे से ब्लाउज में समा जाती होगी,,, वह अपने मन में यह सोच रहा था कि पता नहीं उसकी मां कौन से रंग का ब्रा पहनी होगी,,, और अपने ब्लाउज की डोरी को कैसे बांधती होगी,,,,उफ्फ,,, कितना गजब का नजारा होगा अपने मन में इस तरह की कल्पना करके अंकित अपनी मां को इस रूप में देखना चाहता था अपनी मां को कपड़े पहनते हुए देखना चाहता था ब्लाउज पहना हुए देखना चाहता था उसे अंतर्वस्त्र पहनते हुए देखना चाहता था लेकिन वह जानता था ऐसी हालत में अपनी मां को देख पाना नामुमकिन सा है,, क्योंकि जब भी कपड़े पहनना होता था तो उसकी मां अपने कमरे में चली जाती थी और दरवाजा बंद कर लेती थी हां यह बात और ठीक ही वह अपनी मां को अस्त-व्यस्त हालत में धीरे-धीरे कई बार देख चुका था, ।
घर के पीछे रात को पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड के दर्शन करके वह अपने आप को धन्य समझने लगा था और उस समय का पल उसके लिए बेहद उत्तेजनात्मक था,,, और वह बाथरूम में भी अपनी मां को पूरी तरह से नंगी होकर नहाते हुए देख चुका था उसके हर एक अंग को देख चुका था और उसे दृश्य को देखकर वह इस समय अपने लंड को हिला कर अपनी घर में शांत करने की लालच को रोक नहीं पाया था और हस्तमैथुन करके अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश किया था और फिर उसके बाद सुबह-सुबह जब वह अपनी मां के कमरे में उसे जगाने के लिए गया था तब का दृश्य देखकर तो उसके लंड की नसे फटने को हो गई थी क्योंकि कमर के नीचे उसकी मां पूरी तरह से नंगी थी और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर को देखकर अंकित अपनी लालच को रोक नहीं पाया था और हल्के से अपनी मां की बुर को छूने का सुख प्राप्त कर लिया था,,,। अंकित यही सब अपनी मां के बारे में सोच ही रहा था कि तभी फिर से कमरे के अंदर से आवाज आई,,,।
अरे अंकित देखा तो ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है जरा आकर बंद कर देना तो,,,।
(इतना सुनते ही अंकित की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था और यह फैसला भी सोच समझ कर सुगंधा ने ली थी ऐसा नहीं था कि वह अपने हाथ से ब्लाउज की डोरी बंद नहीं कर पा रही थी बल्कि वह अपने बेटे के हाथ से अपनी डोरी को बंद करवाना चाहती थी और उसे उत्तेजित कर देना चाहती थी वह आदम कद आईने के सामने खड़ी थी,,,। और ऐसे हालात में,,, आईने में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में कैद नजर आ रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कैसे हालात में डोरी बातें जैसे मैं उसकी नजर आई नहीं पर जरूर पड़ेगी और वह उसे समय अपने बेटे के चेहरे पर बदलने वाले भाव को देखना चाहती थी उसके दोनों टांगों के बीच की स्थिति को महसूस करना चाहती थी देखना चाहती थी,,,,। अंकित अभी इसी कसमकस था कि उसकी मा सच में उसे अंदर बुलाई है या ऐसे ही उसके कान बज रहे हैं,,, और फिर कुछ देर तक अंकित की तरफ से कोई भी हरकत ना होता हुआ देख कर उसकी मां फिर से बोली,,,,।)
अंकित बेटा जरा अंदर आना तो मेरे ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है जरा बंद कर दे तो,,,,।
(इतना सुनते ही उसकी मां प्रसन्नता से भर गया उसकी मन भंवरा बनकर उड़ने लगा कि उसके कान नहीं बज रहे थे बल्कि सच में उसकी मां यही बोल रही थी जैसा कि वह सुन रहा था वह तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के कमरे के पास जाने लगा दरवाजा अंदर से बंद जरूर था लेकिन सिटकिनी नहीं लगाई हुई थी,,, और हल्के से दरवाजे पर हाथ रखते ही दरवाजा एकदम से खुल गया,,, आंखों के सामने जो दृश्य नजर आया उसे देखकर अंकित के पेट के अंदर हलचल बढने लगी,,,, दरवाजा खुलते ही पीछे ब्लाउज की डोरी को दोनों हाथों से पकड़े हुए उसकी मां दरवाजे की तरफ देखने लगी ऐसी हालत में अंकित की नजर एकदम साफ तौर पर देख पा रहे थे कि उसकी मां आसमानी रंग का ब्रा पहनी हुई थी क्योंकि पीछे के साइड से ही दिख रही थी आगे से तो ब्लाउज का कपड़ा होने की वजह से सिर्फ चुचियों का उभार ही दिख रहा था,,,। अपनी मां की तरफ कामुक नजर से देखते हुए अंकित औपचारिकता निभाते हुए बोला,,,)
क्या हुआ मम्मी,,,?
अरे देख नहीं रहा है ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है,,,,।
अरे कैसे बंद नहीं हो रही मम्मी,,,,
बहुत दिनों बाद यह ब्लाउज पहन रही हुं,,,,
रोज ही तो पहनती हो,,,(अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए अंकित बोला)
अरे पागल हो गया है क्या कहां रोज पहनती हूं,,,।
क्या मम्मी तुम भी बिना ब्लाउज के रहती हो क्या रोज,,,,(अपनी मां के एकदम करीब पहुंचते हुए बोला,,,,, अपनी मां के साथ बात करते हुए ब्लाउज जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए उसके बदन की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी और सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,)
अरे बुद्धू डोरी वाला बहुत दिन बाद पहन रही हूं तो हाउस तुम्हें रोज पहनती हूं लेकिन कभी उसकी डिजाइन तूने देखने की कोशिश किया है तुझे क्या मालूम मैं क्या पहनती हूं क्या नहीं पहनती हूं,,, पहले जो ब्लाउज पहनती थी उसका बटन आगे से,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा तुरंत अपने बेटे की तरफ घूम गई और अपनी छाती दिखाते हुए बोली) बंद होता है लेकिन इस ब्लाउज में बटन भी आगे से बंद होता है और पीछे से डोरी को भी बांधी जाती है समझ में आया तुझे कुछ,,,(ऐसा कहते हुए जिस तरह से सुगंध अपने बेटे की तरफ घूम कर अपनी छाती दिख रही थी हालांकि वह अपने ब्लाउज का बटन दिखाना चाहती थी लेकिन उसका उद्देश्य अपनी चूचियों को दिखाना ही था और वाकई में सूरज की नजर बटन पर तो बाद में लेकिन उसकी भरी हुई छाती पर पहले गई थी जिसे इतने करीब से देख कर पेंट में हलचल सी मचने लगी थी,,,। अंकित क्या कहता है कुछ समझ में नहीं आया उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और यह बदलाव सुगंधा की नजर में आ चुका था वह अंदर के अंदर खुश हो रही थी,,,,, कुछ देर तक वह इस स्थिति में खड़ी रही पीछे से ब्लाउज खुला हुआ था उसकी ब्रा की पिछली पट्टी साफ दिखाई दे रही थी,,, यह किसी भी जवान लड़के की तरह मदहोश कर देने वाला दृश्य था इस तरह के दृश्य देख कर कोई भी मर्द उत्तेजित होकर जुगाड़ ना होने की स्थिति में हस्तमैथुन करके अपने घर में शांत करने की कोशिश जरूर करता और इसमें अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह कुछ सेकेंड तक अपनी मां की भारी भरकम चूचियों की तरफ देखते हुए औपचारिकता वश बोला,,,।)
तो यह बात है मुझे क्या करना है,,,,,।
तुझे ज्यादा कुछ करना नहीं है बस इस ब्लाउज की डोरी को बांधना है,,, इतना तो तुझे आता ही है ना,,,,
ठीक है मम्मी,,,,।
( अंकित की मां इतना सुनते ही वापस आईने की तरफ घूम गई और अपनी चिकनी पीठ को अपने बेटे की तरफ कर दी,,, अंकित तो यह दृश्य देख कर मदहोश हुआ जा रहा था,,, अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांधने के नाम से उसके बदन में उत्तेजना भारी कंपन हो रही थी,,,, वह नजर उठा कर आईने की तरफ देखा उसकी मां सीधे-सीधे आईने में नहीं देख रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा आईने की तरफ देखेगी और उस नजर मिलते ही वह अपनी नजर को घुमा लगा और ऐसा हुआ नहीं चाहती थी वह चाहती थी कि उसका बेटा खुली नजरों से ब्लाउज में कैद उसकी चूचियों को देखें चूचियों के बीच से गुजरती हुई पतली दरार को देखें और ऐसा ही हुआ,,, सूरज नजर उठा कर आईने में देखने लगा जिसमें उसकी मां का खूबसूरत चेहरा और उसकी मां की मदद कर देने वाली ऊभरी हुई उन्नत छाती नजर आ रही थी जिस पर साड़ी का पल्लू नहीं था और साड़ी कमर तक भरी हुई थी और साड़ी का पल्लू नीचे जमीन पर लहरा रहा था एक तरह से यह दृश्य कामोतेजना से भर देने वाला था,,,। अगर इस समय स्त्री से पर किसी और की नजर पड़ जाती तो औपचारिक रूप से इस दृश्य के चलते मां बेटे के बीच गलत संबंध के रिश्ते का ठप्पा लग जाता और वैसे भी इस तरह के दिल से अक्षर प्रेमी प्रेमिका और पति पत्नी के बीच ही देखने को मिलता है और अगर इस समय यहदृश्य तृप्ति देख लेती तो शायद उसकी मां और उसका भाई दोनों उसके नजर से गिर जाते लेकिन इस समय दोनों निश्चिंत्य थे क्योंकि तृप्ति कोचिंग के लिए गई हुई थी,,,,,।
जवान हो चुके अंकित के लिए यह काम बेहद कठिन नजर आ रहा था क्योंकि आज तक कुछ नहीं कभी औरत के ब्लाउज की डोरी नहीं बांधी थी यह पहला मौका था जब उसकी मां खुद ही अपने बेटे से ब्लाउज की डोरी को बंधवाने जा रही थी,,, अंकित ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हुआ था उसके पेट में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जो की एक कदम आगे बढ़ने से ही उसका तंबू उसकी मां की भारी भरकम नितंबों पर स्पर्श करने लगता उस पर रगड़ खाने लगता,,, और शायद इसी रगड़ को सुगंधा महसूस करना चाहती थी क्योंकि वह भी तिरछी नजर से अंकित के पेट में उभरे हुए तंबू को देख चुकी थी और इतना तो समझ ही गई थी कि उसके बेटे का लंड क्यों खड़ा है और इसी के चलते उसे अपनी जवानी पर अपने कसे हुए बदन पर गर्व महसूस हो रहा था,,,, कुछ पल के लिए कमरे के अंदर खामोशी छा चुकी थी मां बेटे दोनों खामोश थे आईने में अंकित की नजर अपनी मां की भारी भरकम छातियों पर टिकी हुई थी जिसके बीच से गुजरती हुई गहरी लकीर किसी नहर से काम नहीं लग रही थी और इसी नहर में अंकित डुबकी लगाना चाहता था,,,, अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि ब्लाउज के अंदर उसकी मां कितना बेश कीमती खजाना छुपा कर रखी है,,, जिसे देखने के लिए उसका मान कितना ललाईत हो रहा है और अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसकी मां राहुल की मां की तरह होती तो कितना अच्छा होता,,, तो उसे भी इस समय अपनी मां की नंगी चूचियों को देखने का सुख प्राप्त हो जाता गली साड़ी में बड़ी-बड़ी चूची और उसके कड़े निप्पल,,,उफ्फ ,,,, यही सब सोच कर अंकित मन ही मन खुश हो रहा था कि तभी उसकी मां बोली,,,।
अरे अब देख क्या रहा है बंद भी करेगा कि खड़ा ही रहेगा मार्केट भी जाना है,,,।
मैंने कभी बंद नहीं किया ना इसलिए समझ में नहीं आ रहा है,,,।
अरे तो सीख लेना चाहिए था, , आखिरकार यह सब आगे चलकर काम आएगा,,,,।
(अपनी मां की बातें सुनकर अंकित अपनी मां के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था और मन ही मन प्रसन्न भी हो रहा था वह धीरे से अपना हाथ आगे बढ़े और अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को अपने दोनों हाथों से थाम लिया,,,, ब्लाउज की डोरी पकड़ने में उसकी हालत खराब हो रही थी माथे से पसीना को पकने लगा था जबकि कमरे में पंखा चल रहा था और गर्मी का एहसास सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं हो रहा था और वही वह पसीने से तरबतर होता जा रहा था,,,, यह सब सुगंधा आईने में अच्छी तरह से देख पा रही थी,,,। देखते ही देखते अंकित ब्लाउज की डोरी को बांधने लगा,,, उसकी उंगलियां कांप रही थी,, अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधा को भी शक हो रहा था कि कहीं उसका बेटा सच में उसकी डोरी बांध पाएगा या नहीं,,,,।
डोरी को बांधते समय अंकित की उंगलियां अपनी मां की चिकनी पीठ से स्पर्श हो जा रही थी और इतने सही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह मदहोश हुआ जा रहा था,,, उसे अपनी मां की नंगी पीठ का स्पर्श भी बेहद आनंददायक लग रहा था,,,, वह अपनी मन में सोच रहा था कि उसकी मां की चिकनी पीठ कितनी कोमल है अगर ब्लाउज उतार दिया जाए तो बस केवल ब्रा की पतली सी पट्टी ही नजर आती है कोई भी शख्स पैसे में उसकी मां की नंगी चिकनी पीठ की कल्पना कर सकता है कि बिगर ब्रा और ब्लाउज की कैसी दिखती होगी,,,,।
यही हाल सुगंधा का भी था,, जब जब उसे अपनी पीठ पर अपने बेटे की उंगली का स्पर्श होता तब तब उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगती थी,,, देखते ही देखते एक गिठान मार कर अंकित दूसरी गिठान मार रहा था,,, उत्तेजना से अंकित की हालत बहुत खराब होती जा रही थी और यही हाल सुगंधा का भी था,,, सुगंधा किसी तरह से अपने बेटे के पेंट में बने हुए तंबू का स्पर्श अपनी नितंबों पर करना चाहती थी लेकिन कामयाब नहीं हो पा रही थी वह हल्के-हल्के अपने नितंबों में हरकत भी दे रही थी कि पीछे की तरफ जाकर बस स्पर्श हो जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था,,,, ऐसे में ब्लाउज की डोरी बांधते हुए अंकित की नजर अपनी मां की गांड पर गई तो उसके होश उड़ गए गांड का उभार बहुत ही गजब का था,, नजर नीचे करने पर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और उसके लंड के बीच केवल दो तीन अंगुल का ही फासला रह गया था हल्का सा कमरक्ष आगे कर देता था उसका लंड उसकी मां के नितंबों से रगड़ खा जाता। लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे इस बात का डर था कि अगर उसकी मां की गांड पर उसका लंड स्पर्श करेगा तो उसकी चुभन से वह कैसा महसूस करेगी,,, नाराज हो जाएगी यही सब सो कर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी जबकि उसकी मां तो चाहती थी कि किसी भी तरह से उसके बेटे का लंड उसकी गांड से रगड़ खा जाए बस इतने से ही सुगंधा प्रसन्न हो जाती और अंकित मत हो जाता लेकिन फिर भी आगे बढ़ने से डर रहा था,,,।
देखते ही देखते अंकित अपनी मां के ब्लाउज की डोरी की गिठान को मार दिया था,,,, और बोला,,,।
लो हो गया,,,,।
बाप रे तूने तो बहुत कस के डोरी बांध दिया है,,,, आगे से देख,,,(एकदम से अंकित की तरफ घूम कर एक बार फिर से अपनी छाती की गोलाई दिखाते हुए) कितना बाहर निकल गया,,, एकदम उभरा हुआ दिख रहा है,,,,।
(अपनी मां की हरकत और उसकी छातिया को देखकर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि वह एकदम से छाती को तानकर अपनी दोनों गोलाईयों को दिखा रही थी,,, अंकित की हालत एकदम खराब होती जा रही थी वह आंख फाड़े अपनी मां की छातियो को ही देख रहा था और सुगंधा को भी अपने बेटे को अपनी चूची दिखाने में मजा आ रही थी भले ही ब्लाउज के ऊपर से लेकिन आनंद बेहद प्राप्त हो रहा था,,,। अपनी मां की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो चुका अंकित अपनी मां की चूचियों की तरफ देखते हुए ही बोला,,,)
सच में यह तो एकदम बड़ी-बड़ी नजर आने लगी लाओ में गिठान खोल देता हूं,,,।
नहीं नहीं रहने दे अच्छी लग रही है,,, क्यों सच कह रही हो,,,।
(अब अंकित क्या बोलता वह तो एकदम से हक्का-बक्का रह गया,,, सीधे शब्दों में उसकी मां खुद अपनी ही मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ कर रही थी और कोई झूठ तारीफ नहीं कह रही थी वाकई में उसकी चूची इस समय कुछ ज्यादा ही बड़ी और बेहद आकर्षक लग रही थी,,, इसलिए गहरी सांस लेते हुए अंकित भी बोला,,,)
सच में मम्मी बहुत अच्छी लग रही है,,,।
हां तभी तो,,, चलिए सब जाने दे बस पीछे से जरा ब्रा की पट्टी को ब्लाउज की डोरी के नीचे कर देना तो वरना दिखेगी तो खराब लगेगी,,,,(इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से सुगंधा आईने की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और अब जिस तरह की बातचीत हुई थी उसके चलते और ब्रा की पट्टी को ठीक करने के नाम से ही अंकित पूरी तरह से अपने बदन में चुदवासा पन महसूस कर रहा था,,,,,, अपनी मां की बात सुनकर एक बार फिर से अंकित की उंगलियां उसकी नंगी चिकनी पीठ को स्पर्श करने लगी और एक औरत के बदन पर उसकी ब्रा की पट्टी को छुने का सुख अंकित प्राप्त करने लगा,,, और अपनी उंगलियों को अपनी मां की ब्रा की पट्टी के नीचे सरका कर वह पट्टी को एकदम ठीक करने हेतु,,, अपनी तरफ खींच जो कि एकदम कसी हुई थी और खींचने की वजह से सुगंधा का बैलेंस एकदम से गड़बड़ क्या और वह एकदम पीछे की तरफ गिरने लगी,,, और उसे संभालने के लिए अंकित तुरंत अपनी बाहों को खोल दिया और पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में ले लिया लेकिन सुगंधा का शरीर थोड़ा गदराया हुआ था जिसके चलते अंकित भी ठीक तरह से अपनी मां को संभाल नहीं पा रहा था और दो-तीन कदम पीछे की तरफ आ गया उसकी मां भी साथ में उसके बाहों में पीछे से उसके ऊपर गिरती हुई और खुद ही बचने की कोशिश करते हुए दोनों बिस्तर के करीब आ गए,,,, लेकिन आखिर में अंकित अपने आप को अपनी मां के भार को संभाल नहीं पाया और बिस्तर पर गिर गया गनीमत थी कि बिस्तर तीन कदम पीछे ही था,,,, इसलिए दोनों बिस्तर पर गिरे वरना नीचे जमीन पर गिर जाते तो दोनों को चोट लग जाती ,,,,,।
इसके बावजूद भी बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा बन चुका था,,, अंकित नीचे था और उसकी मां उसके ऊपर थी,,, पीछे से अपनी मां को बाहों में भरा हुआ था और ऐसे हालात में इसकी भारी भरकम गांड उसके मोटे तगड़े लंड के ऊपर टिकी हुई थी जो की पूरी औकात में आकर खूंटा बना हुआ था,,, पर सीधे-सीधे साड़ी सहित गांड की दोनों फांकों के बीच रास्ता बनाता हुआ,,, उसकी बुर के मुहाने दस्तक दे रहा था,,,,,, जिसका एहसास सुगंधा को एकदम बराबर हो रहा था,,, अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर पर महसूस करते ही वह पूरी तरह से मचल उठी,,,, एकदम से मदहोश हो गई,,, पहले तो बिल्कुल अपरा तफरी का माहौल था क्योंकि गिरते गिरते बची थी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वह बिस्तर पर गिरी है और बच गई है तो राहत की सांस थी लेकिन तभी उसकी यह राहत मदहोशी में बदल गई जब उसे अपनी गांड के बीचों बीच कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ,, और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा के लिए,,, अनुमान लगाना कोई बड़ी बात नहीं देखी उसकी गांड के बीचों बीच जो चीज चुभ रही है वह क्या है,,, और जब उसे यहां एहसास हुआ कि वह चीज कुछ और नहीं बल्कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड है तो यह एहसास ही उसकी बुर को मदन रस से भिगोने लगी वह चारों खाने चित हो चुकी थी,,,।
और यही हाल अंकित का भी था जब उसे भी इस बात का एहसास हुआ कि उसका लंड उसकी मां की गांड के बीचों बीच जाकर कहीं फस गया है तो वह भी एकदम से मदहोश हो गया और वैसे भी वह पीछे से अपनी मां को बाहों में झगड़ा हुआ था और उसे बचाने के चक्कर में अनजाने में उसकी दोनों हथेलियां उसके दोनों खरबुजो पर चली गई थी जिसे वह संभालने के चक्कर में दबा दिया था,,,, और शायद यह एहसास सुगंध को नहीं हो पाया था क्योंकि वह अपनी दोनों टांगों के बीच के एहसास में पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,।
कुछ देर तक दोनों इसी अवस्था में बिस्तर पर पड़े रहे दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी दोनों मदहोश हो चुके थे उत्तेजना दोनों के सर पर सवार हो चुकी थी लेकिन जैसे तैसे करके सुगंध अपने आप को संभाली और यह बोलते हुए उठने लगे की,,,, अच्छा हुआ बिस्तर पर गिरे वरना चोट लग जाती,,,।
और फिर दोनों मार्केट की तरफ निकल गए,,,।।
वैसे उसे पक्का यकीन तो नहीं था कि उसके कहने पर उसका बेटा उसके ब्लाउज की डोरी बांधने के लिए कमरे में आ जाएगा लेकिन जिस तरह के हालात दोनों के बीच पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए सुगंधा को अपनी चाल पर पूरा भरोसा था क्योंकि वह अपने बेटे में आए बदलाव को अच्छी तरह से समझ रही थी उसके नजरीए को समझ रही थी,,, और इसीलिए उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा को पूरा विश्वास था कि जवान हो चुका उसका बेटा एक औरत के ब्लाउज की डोरी को बढ़ने के लिए जरूर ललाईत होगा और ऐसा ही हुआ,,,, लेकिन जो कुछ भी हुआ उम्मीद से ज्यादा हुआ सुगंध तो सिर्फ अपने बेटे से अपने ब्लाउज की डोरी बंधवाना चाहती थी लेकिन जिस तरह से उसके खुद के पर डगमगाए थे और वह अपने आप को समान नहीं पाई थी उसे संभालने के लिए उसका बेटा उसे हाथ बढ़ाकर जिस तरह से उसे अपनी बाहों में भरा था और नरम-नरम बिस्तर पर गिरा था ऐसी हालत में उसे अपनी गांड के बीचो-बीच अपने बेटे का मर्दाना खुंटा गजब का चुभता हुआ महसूस हो रहा था जो कि सीधे उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था वह मंजर वह पल सुगंधा के जीवन का अद्भुत फल था बरसों बाद किसी मोटे तगड़े लंड को अपनी गांड के बीचों बीच महसूस कर रही थी उसकी गर्मी को अपनी बुर के अंदरूनी भाग में महसूस कर रही थी जिसकी वजह से उसकी बुर पसीज रही थी,,, सुगंधा कमरे में ही चारों खाने चित हो चुकी थी अगर उसका बेटा जरा भी होशियार होता तो कमरे में ही उसकी बुर का उद्घाटन कर देता,,,, और जिसमें सुगंध को जरा भी एतराज नहीं होता,,,,।
धीरे-धीरे इस खेल में सुगंधा को बहुत मजा आ रहा था,,, तालाब के पानी की तरह शांत हो चुकी जिंदगी को मानो जैसे नदी में प्रवेश करने का मौका मिल गया हो और वह नदी की तरह उछलती कूदती बांहें फैलाए आगे बढ़ती चली जा रही थी,,, यही तो चाहिए था सुगंधा को यही सुख था जिसे वह ढूंढ रही थी,,, यह वही सुगंधा थी जो अपने अरमानों को पर लगाकर आसमान में उड़ जाना चाहती थी लेकिन पति के देहांत के बाद ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके पर कट गए हो,,, लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि अंकित की वजह से उसे नए पर उग आए हो,,,,।
मार्केट जाते समय सड़क के फुटपाथ पर सुगंधा आगे आगे चल रही थी और तकरीबन 2 मीटर पीछे अंकित चल रहा था,,, जब इस तरह की माहौल घर में नहीं थे मां बेटे के बीच इस तरह का आकर्षण नहीं था तो अक्सर अंकित अपनी मां के बराबर चलता था और खुद सुगंधा ही उसे अपने बराबर लेकर चलती थी,,, लेकिन दोनों की नजरिए में बदलाव आ चुका था,, दोनों का एक दूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था दोनों रिश्तो में मां बेटे सिर्फ दूसरों के लिए रह गए थे दोनों के रिश्ते बदल चुके थे,,एक मर्द बन चुका था और दूसरी औरत बन चुकी थी,,, दोनों एक दूसरे में प्रेमी प्रेमिका ढूंढ रहे थे जो कि पति-पत्नी की तरह एक दूसरे के शरीर से सुख प्राप्त करना चाहते थे अपनी जवानी की गर्मी को बुझाना चाहते थे और ऐसे हालात में दोनों के पास दोनों के सिवा और कोई दूसरा चारा भी नहीं था,,, दोनों के मन में अंदर ही अंदर सब कुछ परिपूर्ण हो चुका था बस देर थी आगे बढ़ने की मर्द और औरत के बीच के रिश्ते को आगे बढ़ाने की,,, दोनों बढ़ाना भी चाहते थे लेकिन कैसे यह दोनों को नहीं मालूम था लेकिन दोनों अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे ज्यादातर कोशिश सुगंधा की तरफ से ही हो रही थी तभी तो वह अपने बेटे को राहुल के पास भेजी थी ताकि राहुल से कुछ सीख पाता और उसका यह नुस्खा कुछ हद तक काम करने लगा था,,,
प्राकृतिक तौर पर अपनी मां के पीछे चलते हुए अंकित की नजर बार-बार अपनी मां की गांड की तरफ ही जा रही थी जो की चलते समय अद्भुत तरीके से लहरा रही थी और वैसे भी उसकी मां ने कुछ ज्यादा ही करके साड़ी बांधी हुई थी जिसकी वजह से गांड की दोनों फांकें बड़े-बड़े तरबूज की तरह बाहर निकली हुई नजर आ रही थी,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित के लंड में हरकत होने लगती थी,,। वह अपने मन में सोचने लगता था कि काश इतनी बड़ी-बड़ी गांड उसके हाथों में होती तो कितना मजा आता,,, वह बड़ी-बड़ी गांड से बहुत प्यार करता है अपनी जीभ से चाटता चुंबन लेता उस पर अपना लंड रगड़ता,,, हर वह चीज करता जो एक मर्द औरत के अंगों से करता है उसकी गांड के साथ करता है,,,, सड़क पर चलते समय आते जाते अंकित ने बहुत सी औरतों को देखा था कपड़ों में उनके अंगों को देखा था लेकिन जिस तरह का उपहार उसे अपनी मम्मी की गांड में नजर आती थी उसे तरह का उभार उसने अभी तक किसी औरत में नहीं देखा था कुछ हद तक उसे नूपुर में अपनी मां का अक्स नजर आता था,,, क्योंकि उसकी भी कद काठी उसकी मां की ही तरह थी,,, लेकिन फिर भी नूपुर उसकी मां से उन्नीस ही थी,,,।
अपनी मां के भरावद्दार नितंबों को देखते-देखते उसकी नजर अपनी मां की चिकनी पीठ पर गई और उसकी डोरी पर गई जिसे वह खुद अपने हाथों से बांधा था,, उसे अब एहसास हो रहा था इस ब्लाउज में उसकी मां की चोरी की एकदम साफ नंगी नजर आ रही थी क्योंकि डोरी वाले ब्लाउज में पीछे से ज्यादा कपड़ा नहीं था केवल पतली सी डोरी थी और उसे ब्रा की पट्टी भी साफ नजर आ रही थी ,, जिसे ब्लाउज के डोरी के नीचे छुपाने के चक्कर में ही,,, वह दोनों बिस्तर पर गिर गए थे,,, अंकित को वह पल पूरी तरह से किसी मूवी के दृश्य की तरह याद था उसे अच्छे से याद था कि उसके ऊपर उसकी मां पूरी तरह से लदी हुई थी,,, इसकी भारी भरकम गांड ठीक उसकी दोनों टांगों के बीच आ चुकी थी,,, अद्भुत अवस्था थी एक तरह का यह आसान ही था जिसमें औरत अपनी गांड रखकर मर्द के लंड पर बैठ जाती और नीचे से मर्द का लंड उसकी बुर की गहराई नापने लगता है,,, अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि किस तरह से उसकी मां उसके ऊपर थी उन दोनों की अवस्था में केवल कपड़े ही बड़ा रूप थे अगर दोनों के बदन पर कपड़े ना होते तो उसे समय उसका लंड उसकी मां की बुर में होता ,,,, और उसे तो इस बात का अहसास तक हुआ था कि उसका लंड उसकी मां की गांड के बीचों बीच धंसा हुआ है,,,,।
इस अवस्था की वजह से पल भर में ही पूरे बदन का लहू अंकित की जननांगों में इकट्ठा हो गया,,, और उसकी सांसे ऊपर नीचे हो गई उसे तब जाकर एहसास हुआ कि वाकई में औरतों की जंननांगो और उनके नितंबों के उभार में कितनी गर्मी होती है क्योंकि अंकित पसीने से तरबतर हो चुका था। , और वही गर्मी का एहसास अंकित को इस समय हो रहा था अपनी मां के पीछे चलते-चलते सुगंधा बार-बार चलते हुए पीछे मुड़कर देख ले रही थी अपने बेटे की तरफ की उसका बेटा क्या देख रहा है और उसे इस बात का अहसास होते ही की उसका बेटा उसके नितंबों की तरफ ही देख रहा है इस एहसास से वह अंदर ही अंदर सिहर जाती थी,,,।
अभी मार्केट थोड़ी दूरी पर था फुटपाथ की दूसरी तरफ जंगल झाड़ी था और काफी दूर तक ढलान था जिसके अंदर जंगली झाड़ियां उगी हुई थी,,, वहीं पर पेड़ के पास एक आदमी खड़े होकर पेशाब कर रहा था और वह आदमी सुगंधा की नजर में चढ़ गया सुगंधा की नजर अनजाने में ही उसकी तरफ चली गई थी और सुगंधा उसे आदमी को पेशाब करते हुए देखने लगी हालांकि वह सहज रूप से चलते हुए ही अपनी नजर को उस तरफ की हुई थी और यह भी वह जानबूझकर ही कर रही थी वह अपने बेटे को दिखाना चाहती थी कि वह मर्दों को पेशाब करते हुए देखने में कितनी उत्तेजना का अनुभव करती है,,,, अंकित को उसे आदमी पर बहुत गुस्सा आ रहा था जो इस तरह से सड़क के किनारे खड़ा होकर पेशाब कर रहा था,,, हालांकि वह जिस तरह से खड़ा था उसका लंड नजर नहीं आ रहा था बल्कि छिपा हुआ था और उसकी इतनी लंबाई भी नहीं थी कि इस अवस्था में दूर से भी दिखाई दे इस बात की खुशी अंकित को जरूर थी क्योंकि अब वह नहीं चाहता था कि उसकी मां किसी दूसरे की तरफ देखें और देखते ही देखते दोनों आगे निकल गए,,,,।
वैसे तो हमेशा ही जब दोनों मां बेटे मार्केट की तरफ जाते थे तो आपस में बातें करते हुए जाते थे लेकिन इस समय दोनों के मन में कुछ और था अंकित अपनी मां को चलते हुए देख रहा था उसके नितंबों के कटाव को देख रहा था उसके उभार को देख रहा था उसकी पतली कमर के बीच की पत्नी लकीर को देख रहा था उसके ब्लाउज की कटिंग के साथ-साथ उसकी उघरी हुई पीठ को देख रहा था,,, और सुगंधा अपने आप को अपने बेटे को दिखाने में व्यस्त थी इसलिए दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी लेकिन दोनों के बीच की खामोशी भी बहुत कुछ कह रही थी,,,,,।
मां बेट दोनों अपनी ही धुन में मार्केट की तरफ आगे बढ़ते चले जा रहे थे सड़क पर वाहनों का आवागमन चालू ही था और आते जाते सबकी नजर उसकी मां पर जरूर पड़ रही थी और इस बात का भी भान अंकित को अच्छी तरह से था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था,,,, ऐसे ही ठीक उसके पीछे कब दो आदमी उससे थोड़ा फीट की दूरी पर चलने लगे उसे पता ही नहीं चला वह अपनी मां की चाल ढाल को देखने में ही व्यस्त था,,, तभी उसके कानों में जो बात सुनाई थी उसे सुनकर उसके होश उड़ गए जो कि उसके साथ चल रहे हैं दोनों आदमियों में से एक ने बोला था,,,।
बाप रे देख रहा है क्या औरत है इसका बदन कितना गदराया हुआ है,,,(इतना सुनते ही अंकित इधर-उधर देखने लगा लेकिन आगे चल रही है अपनी मां के सिवा और कोई औरत आसपास नहीं थी इसलिए वह समझ गया कि यह आदमी उसकी मां के बारे में ही बोल रहा हूं हालांकि उसे गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन राह चलते किसी भी व्यक्ति से इस तरह से उलझ जाना उचित नहीं था,,,, तभी दूसरे आदमी की आवाज उसके कानों में पड़ी,,,)
यार कसम से इतनी गोरी औरत तो मैं आज तक नहीं देखा ऊपर से नीचे तक मलाई है जब ऊपर से इसका वजन इतना गोरा है तो इसकी बुर कितनी गोरी होगी ,,
अरे यार औरतों की बुर गोरी नहीं काली होती है,,(दूसरे आदमी ने बोला)
अरे वह तो दूसरी औरतों की होती होगी लेकिन मक्खन मलाई जैसी औरत की बुरे तो एकदम गोरी होती होगी कम से इसकी बर देखने के लिए तो मेरा मन तड़प रहा है साली का गांड का छेद भी कितना मस्त होगा,,,।
हां यार तू सच कह रहा है देख नहीं रहा है कैसा गांड मटका के चल रही है इसकी गांड देखकर तो ऐसा ही लगता होगा कि 5-10 मिनट में इसका कुछ पता नहीं होगा कम से कम एक घंटा तक जमकर चुदाई होती होगी तब जाकर इसकी प्यास बुझती होगी,,,।
(उन दोनों आदमियों की बातें सुनकर तो अंकित के काम के साथ-साथ उसका लंड भी खड़ा हो गया था वह दोनों उसकी मां के बारे में बातें कर रहे थे उसकी जवानी के बारे में बात कर रहे थे उसके खूबसूरत जिस्म के बारे में बात कर रहे थे और दोनों अपनी अपनी राय दे रहे थे हालांकि शुरू में अंकित को बहुत गुस्सा आया लेकिन एक तरह से वह दोनों उसकी मां की जवानी की तारीफ कर रहे थे इसलिए ना जाने की उसे अपनी मां के बारे में इस तरह की अश्लील बातें सुनने में आनंद आने लगा,,,, तभी दूसरा वाला आदमी बोला)
कसम से इसको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया अभी तो किस्मत ही बेकार है हमारे घर ऐसी औरत होती तो,,, घर छोड़कर कहीं जाने का मन ही नहीं करता,,,
मैं तो दिन रात उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहता,,,
जो भी इसकी लेट होगा वह दुनिया का सबसे खुशकिस्मत वाला आदमी होगा जिसे यह देती होगी अपनी टांगें खोलकर अपनी बड़ी-बड़ी चूची पिलाती होगी,,,,।
अरे यार ऐसी बातें मत करनी तो मेरा यही पानी छूट जाएगा,,,
मेरा भी तो यही हाल है अब घर पर जाकर बीवी की चुदाई करनी पड़ेगी जो कि इसके पैर की धूल के बराबर भी नहीं है,,,
सही कह रहा है तू तू तो खर्च कर अपनी बीवी को छोड़ने का लेकिन मुझे तो हाथ से हिला कर ही काम चलाना पड़ेगा,,,
क्यों क्याहुआ,,, भाभी देती नहीं है क्या?
अरे ऐसी बात नहीं है वह अपने मायके गई हुई है अपने भैया से गांड मरवाने इतना बोला कि मत जा मेरा मन तेरे बिना नहीं मानता लेकिन मानी नहीं और अपने भाई से गांड मरवाने चली गई,,
वह सब छोड़ अगर यह औरत साड़ी उठाकर सिर्फ अपनी बुर दिखा दे तो भी मैं हजार रुपया देने को तैयार हूं,,,।
तू तो हजार रुपया देने को तैयार है मैं तो महीने भर की तनख्वाह देने को तैयार हूं बस यह साड़ी उठाकर अपनी बुर के दर्शन कर दे क्योंकि मैं देखना चाहता हूं कि इस तरह की हाई क्लास औरत की बुर कैसी दिखती है,,,
सही कह रहा है तू अपनी जिंदगी में तो बस गांव की वही गवार औरत ही लिखी है ऐसी पढ़ी-लिखी अंग्रेज टाइप की औरत के बारे में सिर्फ सोच सोच करें पानी निकालना ही किस्मत है,,,।
(वह दोनों की बातें सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना के लहर उठ रही थी उसका पूरा बदन से लग रहा था उसे समझ में आ गया था कि उसकी मां की जवानी देखकर सब लोग यही सोचते हैं रहते हैं लेकिन वह हैरान था कि वह दोनों उसके इतने पास में होने के बावजूद भी इस तरह की बातें आपस में कर रहे थे तभी उसे ख्याल आया कि उन दोनों को क्या मालूम कि मैं उसका बेटा हूं वरना इस तरह की बातें नहीं करते लेकिन अच्छा ही होगा कि वह दोनों की बातें बहुत सुन लिया उसे पता तो चल गया कि उसकी मां कितनी जवानी से भरी हुई और एकदम सेक्सी है,,, उसे इस बात का गर्व भी हो रहा था कि उसकी मां की जवानी देखकर उन दोनों का लंड खड़ा हो गया था,, । अंकित अपने मन में सोच रहा था कि अगर सच में उसकी मां 1 घंटे के लिए भी दोनों को मिल जाए तो 1 घंटे में दोनों उसकी मां की बुर का भोसड़ा बना देंगे इस तरह से पागल हो गए दोनों देखकर,,,, अभी उन दोनों की बातें और सुन पता था इससे पहले ही मार्केट आ चुका था और लोगों की भीड़भाड़ बढ़ने लगी थी,,,,)
कौन-कौन सी सब्जी लेना है मम्मी,,,
चल अंदर देखु तो सही,,,।
(इतना कहकर दोनों मार्केट के अंदर की तरफ जाने लगे क्योंकि अंदर की तरफ अच्छी-अच्छी सब्जियां मिलती थी और एक सब्जी के ठेले पर खड़ी होकर वह,,, भिंडी खरीदने लगी,,, अंकित को सब्जी के बारे में कुछ ज्यादा मालूम नहीं पड़ता था इसलिए वह खड़ा होकर इधर-उधर मार्केट देखने लगा,,, जिस ठेले पर उसकी मां सब्जी खरीद रही थी तीन-चार औरतों और भी थी उसी ठेले पर थी तभी एक आदमी पीछे चाहे और एकदम से उसकी मां के पीछे से सट गया और भिंडी वजन करने के लिए बोलने लगा,,, सुगंधा एकदम से चौंक गई क्योंकि वह आदमी सीधे-सीधे उसके नितंबों से सट गया था,,, तभी वह एकदम से पीछे घूम कर देखी और आदमी एक तरफ हो क्या लेकिन इतने में वह अपना काम कर चुका था अपनी अभिलाषा पूरी कर चुका था दूर से ही वह सुगंधा की खूबसूरत बदन को देख रहा था मानो कि जैसे कोई भंवरा खूबसूरत कली के पीछे-पीछे आ गई हो उसका रस चूसने के लिए उसी तरह से वह आदमी भी सुगंधा की मदहोश कर देने वाली जवानी को देखकर अपने लंड को सुगंधा की गांड पर रगड़ खाने की लालच को रोक नहीं पाया और एकदम से आकर उससे सट गया था सुगंधा को भी अपने नितंबों पर,,, उसके सटने का एहसास हुआ था तभी तो गुस्से से पीछे मुड़कर देखने लगी थी और आदमी एकदम से पीछे हट गया था,,, अंकित भी सब कुछ देख रहा था लेकिन कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं था वह उसे आदमी पर क्रोधित हुआ जरूर था लेकिन कुछ बोल नहीं पाया था और बोलना भी क्या बोलना क्या एग्जाम लगा था उसे यह कहता है कि तू उसकी मां के बदन से क्यों चढ़ गया क्यों अपने लंड को उसकी गांड से रगड़ाया रगडाया ,, उसके इस तरह के इल्जाम से वह खुद और उसकी मां हंसी के पात्र बन जाते क्योंकि भीड़भाड़ में थोड़ा बहुत सटना सटाना हो ही जाता है इसलिए वह खामोश है कुछ बोल नहीं पाया,,,,,।
भिंडी खरीद लेने के बाद तीन-चार सब्जिया और सुगंधा ने खरीद ली,,, सुगंधा चाहती थी की राहुल की तरह उसका बेटा भी उसके नितंबों पर हाथ रखें उसे महिलाएं लेकिन शायद उन दोनों के बीच राहुल और नूपुर की तरह खुला हुआ रिश्ता अभी नहीं बना था,,, सब्जी खरीद लेने के बाद सुगंधा नाश्ते की दुकान पर गई और समोसे और जलेबियां पैक करवाने लगी,,, अंकित कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि आज जो कुछ भी हो रहा था वह पूरी तरह से अंकित को स्तब्ध कर दिया था हालांकि सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश थी लेकिन फिर भी अपने आप को सहज बनाए हुए थी ज्यादातर हैरान दो अजनबी आदमियों की आपस में उसकी मां को लेकर बातचीत ने कर दिया था उन दोनों के विचार उसकी मां के प्रति कितने गंदे थे या फिर उसकी मां की तरह खूबसूरत औरत उन दोनों ने कभी देखा ही नहीं था इसलिए उन दोनों के मन की वासना एकदम से उनके होठों पर आ गई थी जो शब्द के जरिए बाहर निकल रही थी और उनकी बातों को सुनकर अंकित का भी बुरा हाल था,,,,।
तीन-चार दिन की सब्जियां तो हो गई,, और उसके बाद तो बाद में देखा जाएगा,,,,(हाथ में थैला लेकर मार्केट से बाहर निकलते हुए सुगंधा बोली,,,, तभी उसकी नजर केले के ठेले पर गई,,,, और इस समय अंकित की भी नजर केले के ठेले पर गई और अंकित केले के ठेले पर जाकर खड़े होकर केले को हाथ में लेकर देखने लगा जो की काफी छोटा था यह देखकर सुगंध बोली,,,)
ठीक नहीं है बेटा देख नहीं रहा कितना छोटा-छोटा और पतला सा है,,,।
हां सच कह रही हो मम्मी ,,, रहने दो,, (और इतना कहकर दोनों खेल से आगे हो गए और सुगंधा चलते हुए बोली)
केला हो तो मोटा मोटा और एकदम लंबा,,,(सुगंधा बात भले ही केले की कर रही थी लेकिन उसका इशारा दूसरी तरफ था और केले का जिक्र होते ही उसके मोटाई का जिक्र होते ही अंकित भी अपना ध्यान बात की दूसरी तरफ ले गया,,, सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) और उस पतले केले को तो मुंह में ले,,,,(इतना कहने के साथ ही वह तुरंत अपने शब्दों को बदलते हुए बोली) मेरा मतलब है खाने में पता ही नहीं चलेगा कि केला खाए हो,,, अकेले को हमेशा मोटा और लंबा होना चाहिए ताकि एकदम से मन भर जाए एक ही बार में मन भर जाए,,,(यह बोलते समय उसके चेहरे के भाव ऐसी लग रहे थे मानो वाकई में वह बिस्तर पर टांग फैलाए लेटी हुई है और उसकी गुलाबी पुरानी उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड घुसा हुआ है अपनी मां की यह बात सुनकर उसके कहने के मतलब को अंकित अच्छी तरह से समझ गया था,,, इसलिए वह भी हामी भरता हुआ बोला,,)
सही कह रहे हो मम्मी मोटा और लंबा केला की सबसे ज्यादा सुख देता है,,, मतलब की भूख मिटाता है,,,।
(अपने बेटे के मुंह से ज्यादा सुख देता है शब्द सुनकर सुगंधा भी समझ गई थी कि उसके बेटे के कहने का मतलब क्या है और मन ही मन प्रसन्न होने लगी,,, मार्केट से वापस लौटते समय अंधेरा होने लगा था और स्ट्रीट लाइट जगमगाने लगी थी,,, मां बेटे दोनों इस जगह पर पहुंच गए थे जहां पर ढलान था और जंगली झाड़ियां होगी हुई थी यहां पर फुटपाथ पर आवा गमन भी बहुत कम था,,,, अब तक जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा के तन बदन में आग लगी हुई थी वह किसी तरह से अपने बेटे को अपने अंग को दिखाना चाहती थी और भी बिना कपड़ों के,, इसलिए धीरे-धीरे चलते समय जब वहां घनी झाड़ियां वाली जगह पर एकदम बीचो-बीच आ गई और चारों तरफ देखकर अंदाजा लगा ली कि अभी कोई आ नहीं रहा है तो वह उसी जगह पर खड़ी हो गई,,, और इधर-उधर देखने लगी अपनी मां को इस तरह से बीच रास्ते में कड़ी होता देखकर और इधर-उधर देखा हुआ पाकर आश्चर्य से अंकित बोला,,,)
क्या हुआ मम्मी यहां क्यों खड़ी हो गई ,,
अरे मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,(इधर-उधर देखते हुए सुगंधा बोली लेकिन अपने बेटे के सामने जोड़ों की पेशाब वाली बात करके शर्म के मारे उसका चेहरा भी लाल हो गया था और यह बात सुनकर अंकित के लंड में हरकत होना शुरू हो गया था पहली बार उसकी मां खुले शब्दों में उसे पेशाब करने की बात कर रही थी हालांकि अपनी मां को घर के पीछे वह पेशाब करते हुए देख चुका था,, लेकिन अनजाने में उसकी मां को यह नहीं मालूम था कि उसका बेटा देख रहा है,,, ऐसा मानना अंकित का था लेकिन उसकी मां को सब पता था,, लेकिन इस समय मां बेटे दोनों के बदन में उत्तेजना के लिए रुकने लगी थी पेशाब करने के बहाने साड़ी उठाकर सुगंध अपने बेटे को अपनी गांड के दर्शन करना चाहती थी क्योंकि जिस तरह की उत्तेजना उसके तन बदन में हो रही थी वह किसी भी तरह से अपने बदन की सबसे स्वरूप वान और आकर्षक वाले अंग को दिखाना चाहती थी,,, अंकित के मन में भी अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने की इच्छा जगने लगी और वह भी इधर-उधर देखते हुए बोला,,,)
यहां कैसे कर पाओगी मम्मी,, यहां तो कोई भी आ सकता है,(इधर-उधर देखते हुए अंकित बोला,,)
मैं जानती हूं लेकिन अभी कोई नहीं आ रहा है ले जल्दी से थैला पकड़ मैं जल्दी से निपट कर आ जाती हूं,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने हाथ में लिया हुआ था ना अंकित को थमाने लगी और अंकित भी जल्दी से अपनी मां के हाथ में से थेले को थाम लिया,,, पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) कोई इधर ना आने पाए,,
ठीक हैमम्मी,,, (और इतना कहने के साथ है अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा और सुगंध स्टेट लैंप के खंभे के सामने ही ढलान की तरफ जाने लगी वह ऐसी जगह जा रही थी जहां से अंकित उसे बड़े आराम से देख सके,,, सुगंधा का भी दिल जोरों से धडक रहा था,, बाथरूम वाली हरकत के बाद यह उसकी दूसरी हरकत थी जो अपनी तरफ से करने जा रही थी,,, अंकित बार-बार अपनी मम्मी की तरफ तो कभी फुटपाथ की तरफ देख ले रहा था कि कहीं कोई यहां तो नहीं रहा है और अपने मन में वह भी प्रार्थना कर रहा था कि इस समय कोई ना आए ताकि वह अपनी मां की नंगी गांड को आराम से देख सके और ऐसा ही हो रहा था दूर-दूर तक से कोई नजर नहीं आ रहा था बस सड़क पर से गाड़ी आ जा रही थी,,,।
देखते ही देखते आंठ दस कदम की दूरी पर जाकर सुगंधा खड़ी हो गई,,, उसकी पीठ अंकित की तरफ थी क्योंकि वह अपने बेटे को अपनी गांड दिखाना चाहती थी और इधर-उधर देखते हुए अपनी साड़ी को हाथ में पकड़ ली और जल्दी से उसे एक झटके से कमर तक उठा दी,,, और साड़ी के कमर तक उठते ही उसकी नंगी गांड एकदम से सामने नजर आने लगी लालटेन की पीली रोशनी में एकदम चमक रही थी,,, अंकित एकदम से हैरान हो गया अपनी मां की नंगी गांड देखकर तो हैरान था ही लेकिन साड़ी के उठते ही अपनी मां की संपूर्ण नंगी गांड को देखकर और इस बात से हैरान था कि उसकी मां साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनी थी,,,, साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी थी और यह एहसास होते ही उसका दिल जोरो से धड़कने लगा ,, और सुगंधा वहीं खड़े-खड़े एक नजर पीछे की तरफ घूमर अंकित की तरफ अच्छी और अंकित को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर एकदम से उत्तेजना से भर गई,,, और तुरंत बैठ गई पेशाब करने के लिए और उसकी बुर से सरसरा कर धार निकलने लगी,,,,
पेशाब करने के लिए बैठने के बाद भी सुगंधा पीछे की तरफ देख रही थी अंकित अपनी मां की तरफ ही देख रहा था दोनों की नजर आपस में टकराई और दोनों एकदम से शर्म से पानी पानी हो गए अंकित शर्मिंदा होने के बावजूद भी अपनी मां की नंगी गांड पर से अपनी नजर को हटा नहीं पा रहा था अगर नजर हटा भी रहा था तो यह देखने के लिए कि कहीं कोई यहां तो नहीं रहा है लेकिन उसकी किस्मत बहुत तेज थी इस समय फुटपाथ पर से उस ओर कोई नहीं आ रहा था,,,, जी भर के पेशाब करने के बाद और जी भर कर अपनी मां की नंगी गांड देखने के बाद सुगंध तुरंत खड़ी हुई और साड़ी के किनारे को कमर पर से नीचे छोड़ दी और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिर गया,,, करो मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ आने लगी,,, ।
अंकित के पास पहुंचते हैं उसके हाथ से एक थाला अपने हाथ में ले ली और मुस्कुराते हुए बोली,,,।
(अच्छा हुआ कोई आया नहीं नहीं तो मैं कर भी नहीं पाती,,,)
सही कह रही हो मम्मी,,,,।
(इससे ज्यादा अंकित कुछ कह नहीं पाया और अपने बेटे के हाथ में से ठेला लेते हुए उसकी नजर अपने बेटे के पेट के आगे वाले भाग पर पड़ गई थी जिसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी अंकित के मन में ढेर सारे सवाल थे साड़ी के उड़ने ही अपनी मां की गांड को ढकने वाली पेंटिं को न पाकर वह हैरान हो रहा था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां आज पेंटिं क्यों नहीं पहनी,,, वह अपनी मां से यह सवाल पूछना चाहता था लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी और दूसरी तरफ साड़ी के नीचे चड्डी ना पहने की युक्ति सुगंधा की ही थीवह अपने मन में ठान कर आई थी कि आज अपने बेटे को रास्ते में किसी भी तरह से अपनी गांड के दर्शन कराएगी और इसीलिए वह चड्डी नहीं पहनी थी क्योंकि वह जानती थी चड्डी पहनने पर उसे उतरते समय दिक्कत होगी और वह सब कुछ जल्दी जल्दी निपटाना चाहती थी इसलिए चड्डी नहीं पहनी थी,,, थोड़ी देर में दोनों घर पर पहुंच गए थे।)
घर पर पहुंचने पर भी दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे हालांकि सुगंध मन ही मन मुस्कुरा रही थी क्योंकि रास्ते में उसने अपने मन की जो कर ली थी जानबूझकर उसने साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी क्योंकि यह उसके काम यंत्र का ही भाग था जैसे लोग दूसरों को फसाने के लिए षड्यंत्र रास्ते हैं इस तरह से सुगंधा अपने बेटे को अपनी जवानी के जाल में फंसने के लिए काम यंत्र रची थी जिसमें वह सफल हो चुके थे वह जानती थी उसे किस जगह पर अपनी जवानी का बाण चलाना है,,, उसे जगह को वहां अच्छी तरह से जानती थी पहचानती थी और यह भी जानती थी कि शाम ढलते ही वहां पर लोगों का आना जाना बहुत ही कम हो जाता है,,, और इसी का फायदा उठाते हुए उसने उसे स्थान को चुनकर अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी आकर्षक के जाल में फांस ली थी,, या यूं कह लो कि वह अपने ही बेटे को अपनी जवानी का गुलाम बना ली थी,,,,एक औरत होने के नाते और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच जाने पर सुगंधा में भी मर्दों को पहचानने की कला अच्छी तरह से थी वह मर्दों की फितरत से अच्छी तरह से वाकिफ थी जिसमें से उसका खुद का बेटा भी बाकात नहीं था क्योंकि उसका बेटा भी आखिरकार था तो एक मर्द ही,,,, फुटपाथ के नीचे ढलान वाली जगह पर पहुंचकर वह अपने बेटे को बराबर नजर पीछे करके देख ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जब तक उसका बेटा उसकी तरफ देखेगी नहीं तब तक उसकी यह क्रियाकलाप फूटी कौड़ी की भी नहीं थी उसकी क्रियाकलाप में चार चांद तभी लग जाता जब उसका बेटा उसे प्यासी नजरों से देखा और ऐसा ही हो रहा था,,,, जब सुगंधा को इस बात का एहसास हुआ कि उसका बेटा उसी की तरफ देख रहा है उसकी नंगी गांड को देख रहा है तो वह अंदर ही अंदर मदहोश हो रही थी उत्तेजित हो रही थी,,,।
घर पर पहुंच कर सुगंधा खाना बनाने के काम में जुट गई थी,,, तृप्ति भी घर पर हाजिर थी और वह भी सब्जी काटने में अपनी मां की मदद कर रही थी,,, सुकांत जो कुछ भी अपने बेटे की आंखों के सामने की थी उसके बारे में सोचकर अंदर ही अंदर प्रसन्न और उत्तेजित हो रही थी,,, और दूसरी तरफ अंकित अपने कमरे में बिस्तर पर बैठकर अपनी मां के बारे में सोच रहा था उसकी हरकत के बारे में सोच रहा था,,, उसे जहां अपनी मां की हरकत बेहद उत्तेजित कर देने वाली लग रही थी वही वह अपनी मां की हरकत से परेशान भी था उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि वाकई में उसकी मां अनजाने में ही औपचारिक रूप से पेशाब करने बैठ गई थी या इसमें उसकी तरफ से कोई साजिश थी क्योंकि जितनी दूरी पर उसकी मां जाकर पेशाब करने बैठी थी उसकी मां को भी मालूम था कि इतनी दूर से उसका बेटा सब कुछ देख रहा होगा और ऐसे हालात में वह एकदम खुले में बैठी थी ना कि किसी झाड़ियों के पीछे जहां से उसे कुछ दिखाई ना दे लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था,,, उसकी मां एकदम खुले में बैठकर पेशाब कर रही थी जहां से वह सब कुछ देख रहा था और यही बात तो उसे हैरान कर देने वाली लग रही थी और उससे भी ज्यादा हैरान कर देने वालीं बात यह थी कि उसकी मां चड्डी नहीं पहनी थी जबकि अंकित को इस बारे में अच्छी तरह से पता था कि ज्यादा नहीं तो उसकी मां के पास चार-पांच चड्डी जरूर है और इसके बावजूद भी मार्केट जाते समय,,, उसकी मां चड्डी क्यों नहीं पहनी,,,, जहां एक तरफ अंकित अपनी मां की चड्डी वाली बात से हैरान था वही अपनी मां की चड्डी वाली बात से उत्तेजित भी था,,,।
रास्ते भर वह अपनी मां की हरकत के बारे में ही सोच रहा था और अपनी मां से चड्डी वाली बात करना चाहता था और पूछना चाहता था कि उसकी मां साड़ी के नीचे चड्डी क्यों नहीं पहनी थी लेकिन इस तरह के सवाल करने की हिम्मत अभी उसमें नहीं थी,,,, लेकिन अपनी बिस्तर पर बैठे-बैठे वहां कल्पना में ही अपनी मां से चड्डी के बारे में सवाल जवाब कर रहा था,,,।
क्या मम्मी तुम भी,,, तुम्हारे पास इतनी सारी चड्डीया है फिर भी तुम साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनती हो,,,
किसने कह दिया तुझसे,,,
अब ऐसा कौन कहेगा मैं जानता हूं,,,
तू कैसे जानता है तो क्या मुझे कपड़े पहनते हुए देखता है क्या,,?(मुस्कुराते हुए सुगंधा बोली)
कपड़े पहनते हुए नहीं देखता हूं लेकिन मार्केट से आते समय जब तुम पेशाब करने के लिए फुटपाथ के नीचे उतर कर गई थी,,,
तो,,,, इसमें क्या हो गया रास्ते में आते जाते समय बहुत सी औरतों को पेशाब लग जाता है तो वह लोग भी यही रास्ता अपनाती है,,,,(एकदम सहज होते हुए सुगंधा बोली,,,)
अरे मैं यह नहीं कह रहा हूं,,, मेरा मतलब है कि तुम जब साड़ी कमर तक उठाई थी तो मेरी नजर तुम पर पड़ गई थी और मैंने देखा कि तुम साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी,,,।
(ऐसा सुनते ही अंकित के कल्पना में ही उसकी मां एकदम से हैरान होते हुए बोली)
बाप रे तू समय तू मेरी तरफ देख रहा था तुझे शर्म नहीं आई,,,
इसमें शरम कैसी मेरी नजर तो अपने आप ही तुम्हारे पर चली गई थी और तुम जब साड़ी कमर तक उठे तो तुम छुट्टी नहीं पहनी थी तुम्हारी नंगी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी बड़ी-बड़ी,,,
हाय दैया कैसी बातें कर रहा है तु,,, क्या सच में मेरी गांड बड़ी-बड़ी है,,,,
हां,,,,, एकदम साफ तो दिखाई दे रही थी,,,,
मतलब की तो फुटपाथ पर खड़ा होकर दूसरों को देखने के बजाय मुझे देख रहा था,,,
मैं तो यह देख रहा था कि कहीं तुम ज्यादा दूर तो नहीं जा रही हो लेकिन तुम चड्डी क्यों नहीं पहनी थी,,,,।
अरे तो,,मेरे चड्डी नी पहनने से,,,कोन सा आसमान टुट पड़ा है,,,
आसमान नहीं टूट पड़ा लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि ऐसी कौन सी वजह थी जो तुम चड्डी नहीं पहनी,,,।
(कल्पना में ही अंकित पूरी तरह से अपनी मां से सवाल जवाब करने में मजबूर हो चुका था और कल्पना में ही उसकी मां भी एकदम मदहोश होते हुए अपने बेटे के सवाल से उत्तेजित हुए जा रही थी और अपने बेटे के सवाल पर एकदम सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोली)
गीली थी,,, चड्डी सुखी नहीं थी इसलिए नहीं पहनी,,, और तुझे तो पता ही होगा गीली चड्डी पहनने से खुजली हो जाती है,,,।
ओहहहह तो यह बात थी,,, मुझे लगा कि शायद तुम्हारे पास है ही नहीं,,,।
अगर सच में नहीं होती तो क्या करता,,,
नई खरीद कर लाता,,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर उसकी मासूमियत भरे चेहरे की तरफ देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और अचानक ही उसकी नजर अपने बेटे की पेंट के आगे वाले भाग पर गई और वह एकदम से चौंकते हुए बोली,,,)
लेकिन यह तेरे पेंट में तंबू कैसा बना हुआ है,,,।
(उसकी मां का इतना कहना था कि अंकित एकदम से कल्पनाओं की दुनिया से जमीन पर आ गया क्योंकि दरवाजे पर दस्तक हो रही थी उसकी कल्पना टूट चुकी थी लेकिन कल्पना में जिस तरह के सवाल जवाब अपनी मां से कर रहा था वह बेहद मदहोश कर देने वाले थे बाहर उसकी बड़ी बहन खड़ी थी जो उसे खाना खाने के लिए आवाज दे रही थी,,,,)
हांआया,, (ऐसा कहकर अंकित बिस्तर पर पैर नीचे लटका कर बैठ गया और उसका ध्यान अपनी दोनों टांगों के बीच गया तो वह एकदम से स्तब्ध रह गया क्योंकि जिस तरह की कल्पना अपनी मां से बातचीत करते हुए कर रहा था उसे लेकर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था इसलिए वह तुरंत बिस्तर से नीचे खड़ा हो गया और कमरे में इधर-उधर तैरने लगा और अपना ध्यान भटकने लगा क्योंकि वह ऐसी अवस्था में कैमरे से बाहर जा नहीं सकता था क्योंकि ऐसी हालत में उसकी पेंट के ऊपर उसकी मां की नजर जा सकती थी,,, । जब सबको शांत हो गया तब थोड़ी देर बाद वहां कमरे से बाहर निकला और तीनों मिलकर खाना खाने लगे,,,,।
खाना खाते समय त्रप्ती कुछ जल्दबाजी दिखा रही थी उसे इस तरह से जल्दबाजी में खाते हुए देख कर सुगंधा बोली,,,,।
अरे इतनी जल्दबाजी क्यों है कहीं जाना है क्या आराम से खा ,,,
अरे मम्मी मुझे थोड़े नोट्स पूरे करने हैं मैं तो भूल ही गई थी अभी-अभी याद आया,,,
तो क्या हो गया फिर भी आराम से खा,,,,।
(दोनों मां बेटी आपस में बातें कर रहे थे लेकिन अंकित तिरछी नजरों से अपनी मां को देख रहा था,,, क्योंकि खाना खाते समय उसके कपड़े अपने आप ही अस्त-व्यस्त हो गए थे उसकी सारी कंधे से थोड़ा नीचे सरक गई थी जिसकी वजह से उसके ब्लाउज का ऊपरी वाला भाग एकदम साफ नजर आ रहा था और गर्मी का महीना होने के कारण उसकी मां पहले से ही ब्लाउज के ऊपर वाला बटन खोल रखी थी जिससे दोनों चूचियों के बीच की पतली गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, जिसे देखकर अंकित मत हो रहा था,,,, वैसे भी मर्दों की प्यास औरत के बदन से कभी ना तो बुझती है और ना ही पूरी होती है,,, क्योंकि अंकित पहले भी अपनी मां की खूबसूरत बदन को नग्न अवस्था में देख चुका ,,,, उसकी गांड देख चुका था उसकी चूचियां देख चुका था,,, यहां तक कि वह अपनी मां की बुर भी देख चुका था लेकिन इसके बावजूद भी आलम यह था कि इस समय वह केवल अपनी मां की चूचियों की हल्की सी झलक देखकर ही उत्तेजित हो रहा था और यह बात सुगंधा को पता चल गई थी और अंदर ही अंदर भाभी प्रसन्न होते हुए रोटी अपनी बेटी की थाली बढ़ाने के बहाने वह आगे की तरफ झुक गई जिसे उसकी साड़ी पूरी तरह से कंधे से नीचे उतर गई और उसकी भारी भरकम मदहोश कर देने वाली छातिया एकदम से उजागर हो गई,,,, और यह देखकर अंकित का मुंह खुला का खुला रह गया,,,
तृप्ति का ध्यान दोनों की तरफ बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था पर जल्द से जल्द खाना खाकर अपने कमरे में जाना चाहती थी उसे तो यह भी एहसास नहीं हुआ था कि उसकी मां उसकी थाली में एक रोटी और रख दी थी वह पूरी तरह से अपने ख्यालों में खोई हुई थी,,,,।
सुगंधा अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिराकर अपने बेटे को अपनी जवानी से भरी हुई छातियों के दर्शन करा कर अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक कर ली थी,,, और ऐसा बर्ताव कर रही थी मानो सब कुछ अनजाने में हुआ हो अपने बेटे को इस तरह से अपने जवानी के दर्शन करने में उसे बेहद उत्तेजना और अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती थी,,, थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे और तृप्ति बर्तन की सफाई करने के बाद अपने कमरे में चली गई थी आज वह टीवी देखने के लिए ड्राइंग रूम में भी नहीं आई थी,,,,।
कमरे में जाते ही वह अपने किताबों के बैग को बिस्तर पर रखकर उसमें से एक नोटबुक निकाली और उसके पन्नों को पलटने लगी और जल्द ही उसे अंदर रखा हुआ एक पन्ना नजर आया जिसे वह उठाकर पढ़ने लगी,,,।
वह किसी नोटबुक का पन्ना नहीं था,, बल्कि संदीप के द्वारा लिखा गया प्रेम पत्र था जिसे आज ही कॉलेज में उसने नोटबुक में उस पन्ने को रखकर त्रप्ती को थमा दिया था,,, उसे प्रेम पत्र को पढ़ाते हुए तृप्ति का दिल जोरो से धड़कने लगा था क्योंकि उसके जीवन का यह पहला प्रेम पत्र था जिसे संदीप ने लिख कर दिया था,,, उसे प्रेम पत्र में लिखो एक-एक शब्द को पढ़कर तृप्ति के बदन में उमंग जागने लगी उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,, लेकिन कहीं ना कहीं उसके बदन में उत्तेजना की फुहार भी उठ रही थी,,, वह प्रेम पत्र पूरी तरह से संदीप के प्रेम से भरा हुआ था उसका एक-एक शब्द तृप्ति के तन-बाद में मदहोशी भर रहा था जिसका असर उसे अपने दोनों टांगों के बीच हो रहा था,,, पल भर में उसे अपनी बुर फुलती और पिचकती हुई महसूस हो रही थी हालांकि उसे प्रेम पत्र में अश्लील शब्द बिल्कुल भी नहीं थे ना तो कोई अभद्र भाषा का उपयोग किया गया था लेकिन तृप्ति के जीवन का यह पहला प्रेम पत्र था जो संदीप के द्वारा लिखा गया था और मन ही मन में संदीप को प्यार करने लगी थी और जिस तरह की हरकत उसने पहली बार किया था वही हरकत प्रेम पत्र पढ़ते समय उसके जेहन में उभरने लगा था जिसके चलते वह उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, हालांकि ट्यूशन से आते समय संदीप के द्वारा की गई हरकत से उसे समय तो वह काफी क्रोधित हुई थी लेकिन जिस तरह की उन्माद संदीप ने अपनी हरकत से उसके बदन में जगाया था उसके बाद से वह फुहार रह रहकर उसे परेशान करती थी और यह सिलसिला आज तक जारी था इसीलिए संदीप के द्वारा दिए गए प्रेम पत्र को पढ़ते हुए वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी,,,, उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था बहुत जल्दी से उसे प्रेम पत्र को इस तरह से मोड कर नोटबुक में रख दी और उसे अपनी बैग में भर दी और बिस्तर पर पीठ के बल लेटे हुए वह संदीप के बारे में ही सोचते हुए कब नींद की आगोश में चली गई उसे पता नहीं चला,,,।
