पति ने दोस्त को बुलाके पत्नी को प्रेग्नेट करवया 4

दोस्त की बीवी

वो तीनो तारीफ़ करते हुए मेरे लिए भी ताली बजाने लगे. अपनी हालत मैं ही जानती थी. मुझे उनकी तालिया सुनाई दे रही थी पर मैं कुछ सेकण्ड्स तक वही पड़ी रही.

उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.

मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.

मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”

मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.

पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”

मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”

डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”

अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”

पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”

मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”

पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”

डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”

पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”

अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”

पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”

अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”

पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”

डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”

पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”

मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”

पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”

अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”

पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”

डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.

अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”

डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”

मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”

पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”

मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”

पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”

मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”

पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”

अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”

पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”

डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”

अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”

मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”

पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”

मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”

पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”

डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.

अशोक: “सही हैं, एक लड़की को हम अकेला नहीं छोड़ सकते. अब ओर कोई वोटिंग नहीं होगी. प्रतिमा का हां मतलब दोनों लड़कियों की हां और ना मतलब दोनों की ना.”

मैं थोड़ा सोच में पड़ गयी. सारा दारमदार अब मेरे निर्णय पर था. मैंने अपने पति से नजरे मिलाते हुए आँखों से सवाल पूछा.

अशोक: “मैं अपना निर्णय तुम पर थोपना नहीं चाहता. हम घूमने आये हैं. बस कोई किसी से नाराज होकर न जाये. ख़ुशी ख़ुशी जाए. इसलिए सिर्फ तुम्हारा निर्णय होगा.”

मैं: “ठीक हैं, मैं भी रेडी हूँ. पर रूल पहले से बना लो, वरना पायल पहले की तरह चीटिंग करेगी.”

पायल “मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज हैं. पर क्यों कि चेलेंज मसाज का हैं तो सेक्स छोड़ कर कुछ भी कर सकते हैं उकसाने के लिए. वो ढकने के लिए दुपट्टा याद रखना.”

डीपू: “ठीक हैं मैडम, तो आप ही लेवल टू की शुरुआत करो.”

पायल: “प्रतिमा का लेवल वन देख कर मेरी गीली हो गयी हैं. पहले मैं साफ़ करके आती हूँ.”

पायल अब बाथरूम में चली गयी और थोड़ी देर बाद वापिस आयी. उसके चेहरे पर लेवल टू का तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

डीपू: “बेस्ट ऑफ़ लक, किला फतह कर आना.”

पायल: “थैंक यू. अगर मेरे बाद प्रतिमा ने चेलेंज करने से मना कर दिया तो? मना करने के लिए कोई सजा भी तो होनी चाहिए.”

अशोक: “सभी लोग अपनी मर्जी से कर रहे हैं. ना करने पर सजा का क्या मतलब.”

मैं: “अरे बोला ना, मैं कर लुंगी. पर फिर भी यकीन नहीं तो जो तुम बोलो वो सजा.”

अशोक: “सजा पहले ही लिख लो वरना बाद में कोई बढ़ा चढ़ा सकता हैं.”

पायल ने नोट पैड लिया और छुपा के एक सजा लिख दी. फिर वो कागज़ फोल्ड कर अपने पर्स में डाल दिया.

फिर पायल आकर अब बिस्तर के बीच बैठ गयी. उसके एक तरफ डीपू था तो दुरी तरफ मैं थी. अशोक उसके पांवो की तरफ बैठे थे.

पायल: “अरे मैं कपडा लाना भूल गयी नीचे से ढकने के लिए.”

मैंने उसी का पहले वाला पारदर्शी सफ़ेद कपड़ा संभाल कर रखा था.

मैं: “ये रहा कपड़ा, अब लेट जाओ मैं लगा देती हूँ.”

पायल अब लेट गयी. डीपू अपने मोबाइल के स्टॉप टाइमर के साथ तैयार था. मैंने पायल के कमर से जांघो तक के हिस्से को उस कपड़े से ढक दिया.

अशोक: “पायल रेडी?”

पायल: “उम्म, हां रेडी.”

अशोक: “ठीक हैं मैं अब तुम्हारा पाजामा निकाल रहा हूँ साथ में अंदर के कपड़े भी.”

अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.

मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.

उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.

वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.

डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”

पायल और अशोक: “हां रेडी.”

डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”

अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.

अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.

पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.

अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.

इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.

पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”

आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.

वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.

अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.

मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.

जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.

शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.

पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”

मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”

पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”

मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”

पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”

डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”

मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”

डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”

पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.

मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”

पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”

मैं: “अच्छा ये देखो.”

मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.

पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.

सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.

पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”

अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.

डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”

अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”

पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.

मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.

पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”

सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.

डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”

पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”

अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”

पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”

मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”

पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”

मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”

पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”
पायल के बाद मैं भी चेलेंज के पहले लेवल के तहत अपने मम्मो की मसाज करवा चुकी थी और झड़ते झड़ते बची.

विराट ने कैसे अपनी सगी सगी भाभी की चुदाई करी और उनको अपने लंड को महोताज बनाया, यह जानिए उसकी देसी चुदाई कहानी में उसी की जुबानी.

वो तीनो तारीफ़ करते हुए मेरे लिए भी ताली बजाने लगे. अपनी हालत मैं ही जानती थी. मुझे उनकी तालिया सुनाई दे रही थी पर मैं कुछ सेकण्ड्स तक वही पड़ी रही.

उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.

मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.

मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”

मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.

पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”

मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”

डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”

अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”

पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”

मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”

पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”

डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”

पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”

अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”

पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”

अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”

पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”

डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”

पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”

मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”

पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”

अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”

पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”

डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.

अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”

डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”

मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”

पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”

मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”

पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”

मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”

पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”

अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”

पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”

डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”

अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”

मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”

पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”

मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”

पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”

डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.

अशोक: “सही हैं, एक लड़की को हम अकेला नहीं छोड़ सकते. अब ओर कोई वोटिंग नहीं होगी. प्रतिमा का हां मतलब दोनों लड़कियों की हां और ना मतलब दोनों की ना.”

मैं थोड़ा सोच में पड़ गयी. सारा दारमदार अब मेरे निर्णय पर था. मैंने अपने पति से नजरे मिलाते हुए आँखों से सवाल पूछा.

अशोक: “मैं अपना निर्णय तुम पर थोपना नहीं चाहता. हम घूमने आये हैं. बस कोई किसी से नाराज होकर न जाये. ख़ुशी ख़ुशी जाए. इसलिए सिर्फ तुम्हारा निर्णय होगा.”

मैं: “ठीक हैं, मैं भी रेडी हूँ. पर रूल पहले से बना लो, वरना पायल पहले की तरह चीटिंग करेगी.”

पायल “मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज हैं. पर क्यों कि चेलेंज मसाज का हैं तो सेक्स छोड़ कर कुछ भी कर सकते हैं उकसाने के लिए. वो ढकने के लिए दुपट्टा याद रखना.”

डीपू: “ठीक हैं मैडम, तो आप ही लेवल टू की शुरुआत करो.”

पायल: “प्रतिमा का लेवल वन देख कर मेरी गीली हो गयी हैं. पहले मैं साफ़ करके आती हूँ.”

पायल अब बाथरूम में चली गयी और थोड़ी देर बाद वापिस आयी. उसके चेहरे पर लेवल टू का तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

डीपू: “बेस्ट ऑफ़ लक, किला फतह कर आना.”

पायल: “थैंक यू. अगर मेरे बाद प्रतिमा ने चेलेंज करने से मना कर दिया तो? मना करने के लिए कोई सजा भी तो होनी चाहिए.”

अशोक: “सभी लोग अपनी मर्जी से कर रहे हैं. ना करने पर सजा का क्या मतलब.”

मैं: “अरे बोला ना, मैं कर लुंगी. पर फिर भी यकीन नहीं तो जो तुम बोलो वो सजा.”

अशोक: “सजा पहले ही लिख लो वरना बाद में कोई बढ़ा चढ़ा सकता हैं.”

पायल ने नोट पैड लिया और छुपा के एक सजा लिख दी. फिर वो कागज़ फोल्ड कर अपने पर्स में डाल दिया.

फिर पायल आकर अब बिस्तर के बीच बैठ गयी. उसके एक तरफ डीपू था तो दुरी तरफ मैं थी. अशोक उसके पांवो की तरफ बैठे थे.

पायल: “अरे मैं कपडा लाना भूल गयी नीचे से ढकने के लिए.”

मैंने उसी का पहले वाला पारदर्शी सफ़ेद कपड़ा संभाल कर रखा था.

मैं: “ये रहा कपड़ा, अब लेट जाओ मैं लगा देती हूँ.”

पायल अब लेट गयी. डीपू अपने मोबाइल के स्टॉप टाइमर के साथ तैयार था. मैंने पायल के कमर से जांघो तक के हिस्से को उस कपड़े से ढक दिया.

अशोक: “पायल रेडी?”

पायल: “उम्म, हां रेडी.”

अशोक: “ठीक हैं मैं अब तुम्हारा पाजामा निकाल रहा हूँ साथ में अंदर के कपड़े भी.”

अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.

मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.

उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.

वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.

डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”

पायल और अशोक: “हां रेडी.”

डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”

अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.

अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.

पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.

अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.

इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.

पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”

आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.

वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.

अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.

मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.

जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.

शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.

पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”

मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”

पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”

मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”

पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”

डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”

मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”

डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”

पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.

मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”

पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”

मैं: “अच्छा ये देखो.”

मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.

पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.

सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.

पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”

अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.

डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”

अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”

पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.

मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.

पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”

सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.

डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”

पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”

अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”

पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”

मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”

पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”

मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”

पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”

मैंने चिट्ठी में से सजा पढ़ी और मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी. सजा से मेरा फंसना तय था. कम से कम लेवल टू में कुछ रूल तो थे. मैंने अब गेम पलटने की सोची. मुझे लग रहा था कि मुझे हराने के लिए पायल कोई न कोई रूल जरूर तोड़ेगी तो मैं ये वाली सजा उस पर डाल सकती हूँ.

मैं: “मैं लेवल टू ही कर देती हूँ.”

अशोक: “ऐसा क्या लिखा हैं चिट्ठी में?”

डीपू: “कोई हमें भी तो बताओ?”

पायल ने मेरे हाथ से चिट्ठी ली और वापिस समेट कर अपने पर्स में बंद कर दी.

पायल : “सजा ली ही नहीं तो बताने से क्या फायदा.”

मैं: “मैं तैयार तो हूँ, पर अगर पायल ने कोई रूल तोड़ा तो उसको भी सजा मिलनी चाहिए. ये चिठ्ठी वाली सजा.”

अब पायल का मुँह छोटा सा हो गया. अब डरने की बारी उसकी थी. पर फिर कुछ सोच उसने स्वीकार कर लिया.

मैं अब बिस्तर के बीच जाकर लेट गयी और वो सफ़ेद कपड़ा ले कमर से जांघो तक ढक दिया. अशोक मेरे सिरहाने बैठ गए और डीपू मेरे पावो के पास.

पायल अपने बेग से दो फीते ले आयी और डीपू को बोली इसके दोनों पैर चौड़े कर टांगो को एक दूजे से दूर बिस्तर से बाँध देना ताकि हिल ना पाए.

अशोक: “टांग बांधने की क्या जरुरत हैं, वो तो वैसे भी तैयार हैं.”

पायल: “ये सब ज्यादा उकसाने के तरीके हैं और रूल के अंदर हैं.” पायल ने अब वो ढका कपड़ा मेरे ऊपर से हटा दिया.

पायल: “तुम तो बोल रही थी ना कि तुम बिना कपड़े से ढके करवाओगी. ये कपड़ा नहीं मिलेगा अब तुम्हे.”

फिर पायल ने मेरा एक हाथ सिरहाने लाकर बिस्तर पर दबा दिया और दूसरा हाथ अशोक से कह के बिस्तर पर दबवा लिया. पायल ने अब मेरे स्लीप शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.

मैं: “मसाज नीचे की हैं तो ऊपर के कपड़े क्यों खोलना?”

पायल: “ये तुम्हे तब याद नहीं आया जब मेरा टॉप खोला था.”

उसने मेरे सारे बटन खोल कर शर्ट को सीने और पेट से पूरा हटा कर साइड में कर दिया. थोड़ी देर पहले लेवल वन वाली ही स्तिथि हो गयी थी मेरी.

डीपू: “प्रतिमा अब मैं तुम्हारा शार्ट निकाल रहा हूँ.”

उसने कल रात की तरह एक बार फिर मेरे शार्ट में अपनी ऊँगली घुसाई और धीरे धीरे प्यार से शार्ट को नीचे खिसकाने लगा. फर्क सिर्फ इतना था कि आज मेरे पति और खुद की पत्नी की मौजूदगी में उतार रहा था. मैंने पैंटी अभी भी पहनी हुई थी.

डीपू: “अरे तुम्हारी भी पैंटी गीली हो गयी थी क्या?”

पायल और अशोक भी मेरा हाथ छोड़े बिना, थोड़ी देर के लिए झुक कर देखने लगे. मैं शरमा गयी, उसने सबके सामने बोल दिया, चुप भी तो रह सकता था.

डीपू ने अब अपनी उंगलिया मेरी पैंटी में फँसायी और मजे लेते हुए धीरे धीरे नीचे खिसकाने लगा. मेरे पति के सामने उनकी बीवी को उनका दोस्त नंगी कर रहा था. जैसे जैसे मेरी पैंटी नीचे खिसकी मेरी गोरी गोरी चिकनी सफाचट चूत नजर आती गयी.

मैंने पायल का चेहरा देखा, मेरी सफाई देख उसका चेहरा देखने लायक था. मुझे बहुत ख़ुशी मिली. फिर अगले ही क्षण सोचने लगी मेरे पति क्या सोच रहे होंगे. मैंने ही लेवल टू के लिए हामी भरी थी. अब अगर मैं उनके सामने डीपू के हाथों झड़ गयी तो?

डीपू ने अब मेरी पैंटी टांगो से पूरी निकाल दी थी. डीपू ने अब वो फीते उठाये जो पायल ने उसे मेरी टांग बाँधने को दिए थे और एक एक फीता दोनों एड़ियों के वहा बाँधने लगा.

अशोक: “तुम सही में टाँगे बाँधने वाले हो?”

डीपू: “हां, मैडम की फरमाइश हैं, पूरी करनी पड़ेगी.”

उसने अब मेरी एक टांग पकड़ी और थोड़ा साइड में ले जाकर फैला दिया और उस फीते को पलंग के कोने से बांध दिया. मैं अपनी दूसरी टांग को भी पहले वाली के साथ रखे रही ताकि टाँगे ना खुले.

अब उसने मेरी दूसरी टांग पकड़ी और दूसरी तरफ ले जाकर टांगो को फैला दिया और उसको भी बाँध दिया. मेरी दोनों टांगो के एक दूसरे से दूर फैलते ही मेरी चूत की दरार खुल गयी.

डीपू: “ठीक हैं ना पायल?”

पायल: “देखो छेद खुला कि नहीं, वरना ओर चौड़े करो इसके पाँव.”

डीपू: “आकर देख लो, खुल गया हैं छेद.”

उनकी बातें सुन मैं शरमा रही थी. मैं किसी से नजरे नहीं मिला पा रही थी और छत की तरफ देखने लगी. पता नहीं कैसे मैं इस मुसीबत फंस गयी. किस घडी में मैंने हां बोल दिया और मुझे पता ही नहीं चला था. डीपू मेरी कमर की बगल में आकर बैठ गया.

अशोक: “तुम्हारी तैयारियां हो गयी हो तो शुरू करे? चलो थ्री टू वन गो.”

डीपू ने वहा से शुरू किया जहा अशोक ने ख़त्म किया था. अपनी एक ऊँगली मेरी चूत की दरारों पर रखी और जोर जोर से ऊपर नीचे रगड़ने लगा. उस रगड़ से उत्तेजित हो मैं आहें भरने लगी.

फिर उसने एक बजाय उंगलिया बढ़ाते हुए दो और फिर चार कर दी. अशोक की तरह वो भी तेजी से मशीन की तरह ऊपर नीचे हाथ कर बड़ी तेजी से रगड़ रहा था.

मेरी चिकनी सफाचट चूत की वजह से उसका हाथ अच्छे से फिसल रहा था पर घर्षण वैसा नहीं हो पाया जो पायल के बालों की वजह से पहले हुआ था.

मैं लगातार सिसकियाँ निकाले तड़प रही थी, क्यों कि जब भी उसकी उंगलिया नीचे जाती तो मेरी खुली चूत की वजह से उसकी उंगलिया मेरे छेद में थोड़ी धंसती हुई निकल रही थी.

तीन मिनट ऐसे ही निकल गए और डीपू को लगा कि पैतरा बदलना पड़ेगा. डीपू अब आकर मेरी दोनों फैली टांगो के बीच आकर बैठ गया.

उसने अब अपनी एक ऊँगली मेरे छेद में डाली और तेजी से अंदर बाहर करने लगा. ये तरकीब मेरे लिए ज्यादा परेशानी खड़ी करने वाली थी. उसकी ऊँगली के मेरी चूत को अंदर बाहर भेदने से मुझे मजा आने लगा. मैं जैसे तैसे नियंत्रण कर रही थी.

डीपू अब एक की बजाय दो उंगलियों से निशाना भेदने लगा. मेरी ओर तेज आहें निकलने लगी.

पायल डीपू का उत्साहवर्धन कर रही थी और मेरे पति मेरे कंधे पर एक हाथ फेरते हुए मुझे ढांढस बंधा रहे थे.

अब छह मिनट हो गए थे.

पायल: “दोनों में डालो डीपू दोनों में, जल्दी.”

डीपू थोड़ा ओर झुका और अपना अंगूठा मेरी गांड के छेद में डाल दिया. उसकी दो उंगलिया मेरी चूत के छेद में और अंगूठा गांड के छेद में एक साथ अंदर और बाहर हो रहे थे और मेरे लिए नियंत्रण करना ओर मुश्किल होता जा रहा था.

मैंने तड़प के मारे पाँव को ऊपर नीचे हिलाने की कोशिश की, जिससे जल्द ही पाँव को बांधें रखे वो फीते खुल गए और टाँगे आज़ाद हो गयी. मैं अपना मुँह खुला रख सदमे में सिसकियाँ निकाल रही थी.

अशोक ने घोषणा की आखिरी दो मिनट.

पायल : “डीपू अपना आखरी दांव लगा ही दो.”

डीपू ने अपनी उंगलिया मेरे छेदो से बाहर निकाली और मेरे घुटनो को मोड़ कर टाँगे ऊपर कर चौड़ी कर दी. अशोक और मैंने सोचा नहीं था कि वो ये करेगा.

उसने अपने होंठ मेरी चूत पर रख दिए. मेरी चूत की दोनों पंखुड़ियों को बारी बारी से अपने होंठों में फंसा हल्का सा ऊपर खिंच छोड़ देता.

मेरे दिमाग ने नशे के मारे काम करना बंद किया. मैं जोर जोर से गला फाड़ते हुए चिल्ला रही थी.

अशोक: “ये गलत हैं, इसकी बात नहीं हुई थी.”

पायल: “मसाज हाथ से करो या मुँह से, करना तो मसाज ही हैं. ये रूल के अंदर ही हैं.”

मेरे हाथ अभी भी पायल और अशोक ने दबा रखे थे और मैं तड़प रही थी.

पायल ने अब अपने दूसरे हाथ से मेरी चूंचीयों को दबाना शुरू कर दिया था. मैं अब चारो तरफ से गिर चुकी थी. मैंने हथियार डाल दिए. वो उन्माद मैं सहन नहीं कर पा रही थी. मुझे अब वो झड़ने की शर्मिंदगी झेलनी ही थी.

शायद उत्तेजनाओं को दबाने की शक्ति में, मेरे और पायल के बीच कोई फर्क नहीं था. मैं रह रह कर तड़प के मारे कभी अपने सीने का हिस्सा ऊँचा उठा देती तो कभी कूल्हों को बिस्तर से उठा ऊँचा कर देती.

जानिए कैसे आरती क्लर्क से अपने बॉस की पत्नी बन गयी, उसकी देसी चूत चुदाई ने उसे कहाँ से कहाँ पहोंचाया, इस न्यू सेक्स कहानी में पढ़िए.

जैसे ही मेरा सीना ऊँचा होता तो खिंचाव से मेरे मम्मे और भी तन जाते और मेरे सीने के कर्व ओर भी खूबसूरती सी दिखाई देते.

डीपू चपड़ चपड़ की आवाज करते हुए अपनी जबान से मेरे छेद को चोद रहा था.

मैं अब झड़ने के करीब थी और मैं आह आह आह करते हुए अपना पानी छोड़ना शुरू ही करने वाली थी कि तभी स्टॉप टाइमर बज उठा.

डीपू को उठना पड़ा और बाकि दोनों ने भी मुझे छोड़ दिया.

पायल: “क्या यार एक बार फिर से होते होते रह गया. ये मुंह से मसाज तुम्हे थोड़ा पहले ट्राय करना था.”

डीपू के छोड़ देने के बाद भी मैं उसकी जबान अपनी चूत में महसूस कर पा रही थी. मेरी चूत के होंठ जैसे फड़फड़ाते हुए हलकी मसाज दे रहे थे. मेरे अंदर अभी भी कोई हलचल हो रही थी.

मैंने महसूस किया कि मेरा पानी अंदर ही अंदर धीरे धीरे छूट रहा हैं.

तभी मैंने जल्दी से अपनी पैंटी और शार्ट पहन लिया. मैंने अपना स्लिप शर्ट आगे की और से कवर करते हुए बिना किसी से बात किये भागते हुए बाथरूम में गयी.

मैंने अपनी ऊँगली चूत के अंदर डाल हिलाते हुए अपनी रही सही कसर पूरी कर झड़ गयी और अपनी अच्छे से सफाई की. ऊपर वाले को शुक्रिया कहा कि मुझे एक शर्मनाक स्तिथि से बाल बाल बचा लिया.

जब मैं बाहर आयी तो उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.

मैं: “हो गया तुम्हारा चैलेंज पूरा, तुम्हारे चैलेंज के चक्कर में मैंने अपनी इज़्ज़त गवां दी.”

पायल: “तुम तो ऐसे बात कर रही हो जैसे किसी ने तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बना लिए हो.”

मैं: “अब बचा ही क्या था? कपडे खुल गए, हाथ, मुँह सब तो लगा दिया.”

अशोक: “अरे तुम इतना मत सोचो. ये सिर्फ एक चेलेंज था. और तुमने तो दोनों चेलेंज पार किये हैं.”

पायल: “इस चैलेंज के बहाने पता चला कि हमारी सहनशक्ति कितनी हैं. और इससे भी ज्यादा ये कि हमारे पतियों की सहनशक्ति कितनी हैं. तुमने ध्यान दिया, जब हमारे साथ ये हो रहा था तो पतियों की क्या हालत थी?”

डीपू: “क्या हालत थी? तुम्हारे साथ हुआ तब मैं एकदम नार्मल था.”

मैं: “अब झूठ मत बोलो, मैंने भी देखी थी तुम्हारी हालत.”

पायल: “अभी साबित करती हूँ डेमो देके. अशोक जरा अपनी गोदी में जगह बनाना तो.”

ये कहते हुए पायल अशोक की गोद में जा बैठी और डीपू के हाव भाव पढ़ने लगी.

पायल: “कैसा लग रहा हैं, मैं अशोक की गोद में बैठी हूँ?”

डीपू : “ऐसा कुछ नहीं हैं. एक दोस्त दूसरे की गोद में नहीं बैठ सकता क्या?”

पायल ने अब अशोक का एक हाथ पकड़ा और उसके पंजे को अपनी छाती के उभारो से दो इंच दूर पकड़ कर रखा.

पायल: “अब जलन हो रही हैं क्या?”

मैं: “ये देखो, डीपू के माथे पर शिकन शुरू हो गयी हैं. इसको जलन हो रही हैं.”

मेरे चिढ़ाने से नाराज हो, डीपू ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खिंच कर मुझे अपनी गोद में बैठा दिया.

डीपू : “अब बोलो पायल, तुम्हे कैसा लग रहा हैं?”

पायल ने जो अशोक का हाथ पकड़ रखा था उस पंजे को अपने एक मम्मे पर रख दिया.

अशोक: “अरे, ये क्या कर रही हो. चेलेंज ख़त्म हो चूका हैं.”

पायल : “बोलो डीपू, जलन हुई न?”

डीपू ने तेजी से मेरे स्लीप शर्ट का ऊपर का एक बटन खोल दिया. मैं एक दम चीखी और अपना बटन बंद करने को हाथ बढ़ाया, पर डीपू ने मेरी दोनों पतली कलाइयों को मेरी गोद में रख अपने एक हाथ से झकड़ लिया. मेरे शर्ट के एक बटन खुलने से मेरा क्लीवेज दिखने लगा.

मैं: “तुम दोनों की लड़ाई में मुझे क्यों पीस रहे हो?”

उन दोनों के बीच एक दूजे को जलाने का कम्पटीशन शुरू हो चूका था. पायल ने अब अशोक का दूसरा हाथ पकड़ा और उसके दूसरे पंजे को भी अपने दूसरे मम्मे पर रख दिया. मेरे पति उनकी इस नादानी पर हंस पड़े. पायल डीपू को देखने लगी.

डीपू ने अपने फ्री हाथ से मेरे स्लीप शर्ट का दूसरा बटन भी खोल दिया और अपना हाथ मेरे शर्ट में घुसा कर मेरा मम्मा दबोच लिया. मैं जोर से चिल्लाई “क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे.”

अशोक ने पायल को अपनी गोद से हटाया और डीपू को डांटने लगे “ये अब तुम्हारा ज्यादा हो रहा हैं. चेलेंज तक ठीक था, मर्जी से हो रहा था पर उसकी इच्छा के खिलाफ उसको तुम हाथ नहीं लगा सकते.”

डीपू ने मुझे छोड़ दिया और अशोक से बोला: “सॉरी अशोक, मेरा ये मकसद नहीं था. मैंने मजाक मजाक में लिमिट क्रॉस कर दी. सॉरी प्रतिमा, मैंने तुम्हे गलत नीयत से नहीं छुआ था. बस ऐसे ही पायल को जलाने के लिए किया था.”

पायल: “एकदम सही, मैं यही चेक कर रही थी. डीपू मुझे अशोक की गोदी में नहीं देख पाया और अशोक ये नहीं सहन कर पाया कि कोई दूसरा प्रतिमा को छू रहा हैं. तुम मर्दो ने सिर्फ कहने भर के लिए उस चेलेंज के लिए हां बोला था पर असल में तुम पछता रहे थे.”

अशोक: “मैं तो सिर्फ प्रतिमा को बचा रहा था.”

मैं: “बीवी की रक्षा की वो अच्छा किया तुमने, पर जलन तो हुई थी ना?”

अशोक: “अब मैं कैसे यकीन दिलाऊ. मुझे अच्छा लगा कि तुमने चैलेंज लिया और जीती भी.”

डीपू: “मैं भी समर्थन करता हूँ. जलन वाली कोई बात ही नहीं थी.”

पायल: “अगर प्रतिमा चेलेंज हार जाती फिर भी तुम यही कहते अशोक?”

अशोक: “हां भाई, हार जीत से क्या फ़र्क़ पड़ता हैं. ये कोई असली टेस्ट थोड़े ही था. मुझे अपनी वाइफ पर पूरा यकीन हैं.”

पायल: “शरीर को नियंत्रित करने का ही तो चेलेंज था. अगर इससे थोड़ा मुश्किल टेस्ट होता तो शायद प्रतिमा हार जाती.”

डीपू: “तुम्हारा इशारा चेलेंज के तीसरे लेवल की तरफ तो नहीं हैं?”

अब वो लोग तीसरे लेवल की भी बात करने लगे थे. मुझे अब वहाँ से दूर जाना ही सही लगा.

मैं: “चलो अशोक, अब चलते हैं.”

पायल : “ये लो, ये तो सुनने से भी डर रही हैं. वैसे ये चेलेंज सिर्फ बीवियों का नहीं पतियों का भी हैं.”

अशोक: “फिर तो सुनना पड़ेगा, ऐसा क्या हैं?”

पायल: “इस टेस्ट में सारे कपल एक साथ लेटते हैं. पर कुछ इस तरह कि पति पत्नी आस-पास नहीं लेट सकते. बीवियों को कोशिश करनी हैं कि वो बिना अपने शरीर का नियंत्रण खोये पूरी रात गुजारे. जो बीवी सुबह तक नियंत्रण रख पायी वो जीत जाती हैं. इसी तरह पतियों को कोशिश करनी हैं कि वो दूसरे की बीवियों को उकसा कर उन्हें हरवाये ताकि उनकी खुद की बीवी जीत जाये.”

डीपू: “ऐसे तो कोई भी पति दूसरे की पत्नी के साथ जबरदस्ती भी कर सकता हैं.”

पायल: “रुल के हिसाब से कोई किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता और न ही शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति होती हैं. हार तब होती हैं जब बीवी ये स्वीकार कर ले कि वह अब ओर नियंत्रण नहीं कर पाएगी या फिर उसका खुद ही हो जाये. जैसा मुझे दूसरे लेवल में हुआ था.”

अशोक: “मतलब औरतो की सेफ्टी हैं इसमें. कोई जोर जबरदस्ती नहीं.”

मैं: “ओर पति लोग उकसाने के लिए क्या क्या करेंगे?”

पायल: “कपड़े खोलने और अपने शरीर से उसके शरीर को छूने की खुली छूट हैं, पर मर्द अपना कोई अंग स्त्री के अंगो में नहीं डाल सकते. ऊँगली तक नहीं.”

डीपू: “फिर तो ये बीवियों के लिए बहुत आसान हो जायेगा.”

अशोक: “ये तो पिछले दो लेवल से ज्यादा आसान हैं. मुझे लगा तीसरा लेवल सबसे कठिन होगा.”

मैं: “मुश्किल शायद ये हैं कि क्या मर्द अपनी बीवियों को दूसरे मर्द के साथ रात भर लेटा हुआ सहन कर पाएंगे कि नहीं. भले ही उनके बीच कुछ गलत नहीं हो रहा हो.”

पायल: “एकदम सही, उनके मन में शक का कीड़ा कुलबुलाता रहेगा. खास तौर से जब उनकी बीवी बिना कपड़ों के किसी से चिपक कर सो रही होगी.”

डीपू: “कुल मिला के आप अपनी बीवी पर कितना भरोसा करते हो इसका टेस्ट.”

अशोक: “विजेता का फैसला कैसे होता हैं?”

पायल: “जो बीवीयां सुबह उठ कर बोल दे कि उन्होंने हार नहीं मानी.”

डीपू : “ऐसे तो कोई बीवी झूठ भी बोल सकती हैं.”

मैं: “आस पास दूसरे लोग भी तो होंगे. खास तौर से वो मर्द जो उसके साथ लेटा हैं. वो मर्द किसी ओर को जितवाने के लिए के लिए अपनी बीवी को तो नहीं हरवायेगा.”

अशोक: “सही कहा, दरअसल ये खेल मिया बीवी को मिल कर खेलना हैं. एक को उकसाने का काम करना हैं तो दूसरे को सहने का.”

पायल: “हैं न मजेदार चेलेंज?”

डीपू: “तो ये लेवल पहले करवा देती, शुरू के दो लेवल की क्या जरुरत थी?”

मैं: “मुझे बहुत नींद आ रही हैं अशोक, चलो हम चलते हैं.”

पायल: “प्रतिमा तुम सोने जाओ, वैसे भी तुम्हे कल मैंने लिखी वो सजा मिलेगी.”

मैं: “मुझे क्यों सजा मिलेगी ! मैंने चेलेंज करने से मना थोड़े ही किया था.”

पायल: “चेलेंज के रूल तोड़ने की सजा. हमने कपड़े से ढकने का रूल बनाया था, पर तुमने मेरे ऊपर से कपडा हटा दिया था.”

मैं: “पर तुमने भी तो मुझे कपड़ा नहीं लगाने दिया था.”

पायल: “क्युकी वो तुम्हारी चॉइस थी. तुमने ही तो पहले कहा था कि तुम बिना कपड़ा लगाए करवाओगी.”

डीपू: “हां प्रतिमा ने बोला था वो बिना कपड़े के ढके करवाने को रेडी थी.”

मैं: “पर ये तो गलत हैं, मैं जीती फिर भी मुझे ही सजा. अशोक कुछ तो बोलो, मैं ये सजा नहीं ले सकती.”

अशोक: “अब तुम्ही लोगो ने रूल बनाये, तुम्ही ने तोड़ा और सजा भी बनाई.”

पायल: “अशोक ये अब तुम्हारी जिम्मेदारी हैं कि तुम प्रतिमा से सजा पूरी करवाओगे.”

अशोक: “अरे करवा दूंगा. पर सजा हैं क्या? ”

पायल: “सजा तो कल ही दे पाएंगे. अभी तुम अपनी मम्मी की कसम खाके बोलो तुम प्रतिमा से सजा पूरी करवाओगे.”

मैं: “मत खाना कसम, फंस जाएंगे.”

अशोक: “अरे ऐसा क्या हैं सजा में?”

डीपू : “क्या फर्क पड़ता हैं, छोडो ना, कोई शरारत होगी. तुम खा लो कसम.”

अशोक: “ठीक हैं बाबा, माँ की कसम, प्रतिमा से सजा पूरी करवा दूंगा.”

पायल: “यस, अब मजा आएगा प्रतिमा का.”

अशोक: “वैसे सजा तो तुम्हे भी मिलेगी, रूल तो तुमने भी तोडा था.”

पायल “कौन सा रूल तोडा था?”

अशोक: “आखिरी के दो मिनट में तुमने प्रतिमा की छाती को मसाज दिया. रूल के हिसाब से मसाज सिर्फ डीपू को ही देना था.”

मैं: “यस, वैरी गुड अशोक. डीपू अब तुम कसम खाओ कि पायल से सजा पूरी करवाओगे.”

डीपू: “रूल तो सबके लिए बराबर हैं. दोनों को सजा मिलेगी. मैं भी मम्मी की कसम खाता हूँ, पायल से सजा पूरी करवाऊंगा.”

पायल: “एक काम करो, हम दोनों की सजा को आपस में कैंसिल कर दो.”

मैं: “हां, ये ठीक हैं.”

अशोक: “एक तो तुम हमको बता नहीं रहे हो कि सजा क्या हैं और अब खुद ही कैंसिल करवा रहे हो.”

डीपू: “हमने तो माँ की कसम भी खा ली, अब कुछ नहीं हो सकता. सजा तो पूरी करनी ही पड़ेगी. लाओ चिठ्ठी क्या सजा हैं.”

पायल: “अब कल ही देख लेना क्या है सजा.”

मैं: “चलो अशोक नींद आ रही हैं”.

पायल: “हां तुम सोने ही जाओ, अगर चेलेंज का तीसरा लेवल शुरू हो गया तो तुम्हारी सहनशक्ति की पोल खुल जाएगी.”

मैं: “तुम्हे जो बोलना हैं वो बोल दो, अब मैं तुम्हारी बातों में आ कर कोई चेलेंज नहीं करने वाली.”

अशोक: “पर तूम लोग तो बोल रहे थे कि इस लेवल में असली चेलेंज तो मर्दो के लिए हैं.”

डीपू: “अब सोना ही हैं तो उस कमरे में सोओ या यहाँ, क्या फर्क पड़ता हैं. बेड वैसे भी किंग साइज हैं, चार लोग सो सकते हैं.”

पायल: “मैं तो दूसरा लेवल वैसे ही हार चुकी हूँ, तीसरे का क्या फायदा?”

डीपू: “तुम प्रतिमा को हारते हुए देख पाओगी.”

पायल: “हां, ये फायदा तो हैं. पर हम औरतो के लिए आसान नहीं हैं इस तरह बिना कपड़ो के किसी ओर के साथ सोना.”

मैं: “सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली.”

पायल: “क्या मतलब?”

मैं: “पहले दोनो लेवल में क्या किया था हमने? वहा भी कपडे तो खुले ही थे सबके सामने.”

अशोक: “लाइट बंद रख सकते हैं या चद्दर ओढ़ सकते हैं.”

डीपू: “जब कुछ दिखेगा ही नहीं तो सहनशक्ति कैसे टेस्ट होगा!”

पायल: “तुम मर्दो को अब भी लगता हैं कि तुम में सहनशक्ति हैं! एक मिनट किसी की गोदी में तो देख नहीं पाए.”

अशोक: “चलो मर्द बनाम औरत का मुकाबला हो जाये. किस मे ज्यादा सहनशक्ति हैं.”

पायल: “क्या बोलती हो प्रतिमा, इनको सबक सिखाये?”

मैं: “सोच लो, हमारे साथ क्या क्या बीतेगी.”

पायल: “जो भी बीतेगी, सहन तो इन दोनों को ही करना पड़ेगा.”

मैं: “तुम औरत अकेली ना पड़ जाओ इसलिए साथ दे देती हूँ.”

डीपू: “सब लोग बाथरूम हो आओ. रूल के हिसाब से एक बार लेटने के बाद उठना नहीं हैं सुबह तक.”

औरतों की किटी पार्टी में जाकर कैसे मोहित ने उनकी ग्रुप में चूत की चुदाई करके मजे लिए. उसकी हॉट सेक्स कहानी में जानिए.

हम चारो अब चेलेंज के तीसरे लेवल के लिए तैयार हो गए. मैं और पायल बिस्तर के बीच में आमने सामने मुँह कर करवट लेकर लेट गए. मेरे पीछे डीपू लेटा था और पायल के पीछे अशोक.

हम लेट तो गए पर माहौल बड़ा अजीब सा लग रहा था. पति अपनी पत्नियों को किसी ओर के साथ लेटा देख रहे थे, जैसे वो उनकी नहीं उनके दोस्त की ही पत्नी हो. ऐसा ही हाल हम बीवियों का भी था.

थोड़ी देर पहले तक जो आसान लग रहा था वो इतना भी आसान नहीं था. कुछ सेकण्ड्स तक तो हम लोग ऐसे ही बिना कुछ किये लेटे रहे.

मर्दो के नाजुक अंग हम बीवियों के पिछवाड़े को छू रहे थे, तो शायद थोड़ी ही देर में उनके खम्बे भी जागने लगी थी.

पर अपने दोस्त और बीवी के डर से उनकी हिम्मत नहीं हो पा रही थी. वो दोनों अपनी कोहनियो से तकिया बना कर अपना सर थोड़ा ऊपर उठा कर लेटे थे.

पायल: “अब ऐसे ही लेटे रहना हैं तो इस से अच्छा है सो ही जाए.”

मैं: “मुझे लगता हैं ये दोनों सहन नहीं कर पाएंगे इसलिए आपस में हाथ मिला लिया हैं.”

अशोक: “ऐसा कुछ नहीं हैं. अब देखो.”

ये कहते हुए अशोक ने पायल का टैंकटॉप ऊपर खिसकाना शुरू किया और उसके मम्मो को बाहर कर दिया. फिर पायल के सर से होते हुए पूरा टॉप बाहर निकाल दिया.

पायल: “देखो देखो, डीपू की हालत देखो. तड़प रहा हैं.”

मैंने अपनी गर्दन थोड़ी मोड़ते हुए डीपू के चेहरे को पढ़ा. उसकी हवाइयाँ उडी हुई थी. डीपू नकली हंसी दिखा रहा था. मैं फिर सीधा देखने लगी.

पायल का हाथ उसके सर के ऊपर था जिससे उसकी कांख के छोटे छोटे बाल भी दिखाई दे रहे थे, उसने उनकी भी शायद कुछ समय से सफाई नहीं की थी.

अशोक ने अपने होठ वही पे लगा दिए और चूमने लगा.

चूमते चूमते वो अपने होंठ पायल के साइड बूब्स के उपर ले आया और चूमता रहा. पायल के गहरे गुलाबी निप्पल एक दम तन से गए और उसक सीने के रोंगटे खड़े हो गए. पायल सिसकिया निकालने लगी.

मैंने एक बार फिर गर्दन मोड़ कर डीपू को देखा, वो कड़वे घूंट पी रहा था. खास तौर से जिस तरह पायल सिसकियाँ मार रही थी.

मैं फिर आगे का नजारा देखने लगी. मुझे भी थोड़ी जलन तो हो रही थी पर इससे भी ज्यादा मैं देख चुकी थी दोपहर में अशोक और पायल को.

अशोक ने अब चूमना बंद किया अपने हाथों से पायल की गुलाबी चूंचियो अपने हाथों और उंगलियों से रगड़ने लगा.

पायल: “क्या हुआ मेरे पति, सहन तो कर पा रहे हो ना?”

डीपू ने आव देखा ना ताव और मेरे सीने पर हाथ मार मेरे स्लिप शर्ट के चारो बटन खोल दिए, और मेरे ऊपर की बाजु से शर्ट को पूरा निकाल दिया. फिर आगे झुकते हुए नीचे की बांह से भी शर्ट को खिंच कर पूरा निकाल दिया.

पायल: “लगता हैं डीपू को गुस्सा आ गया हैं. प्रतिमा तूम तो गयी.”

कुछ ही देर पहले पायल की हालत देख मेरे मम्मे वैसे ही तन गए थे. उसके शर्ट खोल देने से हल्की ठण्ड लगी और मेरे भी गूज़बम्प निकल आये.

अब डीपू भी गम कम करने के लिए मेरी चूंचियो को हाथ लगा मलने लगा. पर वो बड़े प्यार से कर रहा था, शायद मेरे मजे लेना चाहता था या फिर मेरा मूड बना मुझे हराना चाहता था.

पायल: “अब अशोक को देखो, अपनी बीवी को अपने ही दोस्त के हाथों नंगे होता देख इसको भी गुस्सा आ रहा हैं, देखो कैसे मसल रहा हैं मेरे सीने को.”

अशोक ने अपना हाथ अब आगे से पायल के पाजामे में डाल दिया. पायल के पाजामे में अशोक का हाथ ऊपर नीचे हिलता हुआ दिख रहा था. पायल नशीली आहें भर डीपू को जलाने लगी.

पायल: “उम्म, आह, आ हा हां, क्या जादू हैं तुम्हारे हाथों में अशोक. डीपू को तो कुछ आता ही नहीं.”

डीपू ने भी बदले की नीयत से अपना हाथ मेरी नाभी पर रखा और घसीटते हुए मेरी चूत पर ले गया, और शार्ट के ऊपर से ही मेरी चूत को एक हाथ से दबोच लिया. फिर शार्ट के ऊपर से ही मेरी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लगा.

मुझे मजा तो आ रहा था पर बता नहीं रही थी, बस मन ही मन मुस्करा रही थी. पायल अपनी चूत को रगड़वाने से आहें भरती जा रही थी.

अब डीपू ने मेरे शॉर्ट्स को रगड़ना बंद किया. अपनी चारो उंगलिया एक दूसर से सटा कर पेट पर रख अपना हाथ धीरे धीरे नीचे फिसलाते हुए उंगलिया मेरी शॉर्ट्स और पैंटी में डाल दी. जैसे जैसे उसका हाथ मेरी पैंटी में घुसता गया मेरी हलकी आहें निकलती गयी.

जैसे ही उसका हाथ मेरी चूत की दरारों को छुआ मेरी एक गहरी सांस से सिसकी निकली. वो अपनी उंगलियों को चूत की दरार पर रगड़ते हुए नीचे छेद तक ले गया.

मैं: “आह्ह, अंदर ऊँगली मत डालना रूल के खिलाफ हैं.”

वो भी अब मेरी चूत की दरारों में अपनी उंगलिया फेरने लगा. मैं आँख बंद करते हुए उसकी मालिश को महसूस कर रही थी और अपनी आहों को दबाने की कोशिश कर रही थी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी चूत को रगड़ना बंद किया. मेरी आँखें अभी बंद ही थी और उसने हाथ मेरी पैंटी से निकाल कर मेरे मम्मो पर रख दिया.

माहौल थोड़ा हल्का हो रहा था. पायल एक राग में हलकी हलकी सिसकिया निकालते हुए जैसे लौरी सुना रही थी. डीपू बड़े प्यार से मेरे मम्मो को सहला रहा था. दिन भर की थकान और उस सहलाने और लौरी से पता ही नही चला मेरी आँख कब लग गयी.

मेरी नींद फिर से खुली. सामने पायल गहरी नींद में सोई हुई थी और उसके पीछे अशोक सोये थे. अशोक का हाथ पायल की कमर को लपेटे हुए था.

पीछे घडी में देखा तो रात के तीन बज रहे थे. एक दम शांती थी सब सो रहे थे. मेरे पीछे कोई चिपक के सोया था और उसका नंगा बदन मैं अपनी पीठ पर महसूस कर पा रही थी.

मुझे कुछ खुला खुला सा लगा और मैं अपना हाथ अपने कूल्हे पर ले गयी, मेरे नीचे के कपडे भी नहीं थे. जब आँख लगी थी तब मैंने शॉर्ट्स पहन रखे थे, शायद उसके बाद डीपू ने ही निकाले होंगे.

मेरी गांड पर मैं डीपू का नरम पड़ा लंड चिपका हुआ महसूस कर रही थी. पायल और अशोक के नीचे के कपड़े भी नहीं थे. हम चारो पुरे नंगे एक दूसरे के पार्टनर के साथ सोये हुए थे.

पता नहीं मेरे सोने के बाद क्या हुआ था. डीपू का हाथ मेरे दोनों मम्मो के बीच की गली में फंसा पड़ा था. मैंने डीपू के कूल्हे को हिलाकर उसको जगाने की कोशिश की. वो जाग गया और पूछा “क्या हुआ सुबह हो गयी क्या?”

मैं दबी आवाज में फुसफुसाते हुए बात करने लगी. “नहीं, अभी तीन बजे हैं. ये बताओ मेरे सोने के बाद क्या हुआ था?”

डीपू: “तुम्हारे सोने के बाद भी ये दोनों मुझे चिढ़ाने के लिए कुछ न कुछ हरकतें करते रहे. अशोक ने पायल का पाजामा और पैंटी निकाल दिया था तो मैंने भी उसको चिढ़ाने को तुम्हारे नीचे के कपड़े निकाल दिए थे.”

मैं: “और तुम दोनों के कपड़े?”

डीपू: “अशोक ने खुद ही अपने कपड़े निकाल दिए पायल के उकसाने पर. तो मैंने भी वैसा ही किया. पर तुम सोई थी तो तुम्हारी कोई प्रतिक्रिया ही नहीं थी तो मुझे भी बोरियत महसूस होने लगी और मैं तुमसे चिपक कर लेटा और फिर पता नहीं कब नींद आ गयी.”

मैं: “तुम जब सोये थे तब ये दोनों जाग रहे थे?”

डीपू: “हाँ.”

मैं: “तुम्हे क्या लगता हैं? इन दोनों ने कुछ किया होगा हम दोनों के सो जाने के बाद?”

डीपू: “नहीं, पायल ऐसा नहीं कर सकती. चेलेंज के रूल के हिसाब से भी अंदर डालना मना हैं.”

मैं: “पायल के नीचे देखो, दोनों जांघो के बीच में अशोक के अंग की टोपी पायल की योनी के एकदम पास.”

डीपू: “शायद पायल को उकसा कर चेलेंज में हराने के लिए दोनों जांघो के बीच लगाया हो, अंदर डाला हो इसके कोई सबूत नहीं.”

मैंने अपनी ऊँगली पायल के नीचे ले गयी और इशारा किया “ये देखो, पायल के नीचे के बाल आपस में चिपके हुए हैं. ऐसा चिकने पानी से होता हैं. पानी तो सूख गया पर बाल चिपक गए. मुझे गड़बड़ लग रही हैं.”

हमारे सोने के बाद क्या हुआ ये एक रहस्य बन गया था. हमें यकीन हो चला था कि नियमो के खिलाफ उन दोनों के बीच जरूर कुछ हुआ था

दोपहर से मैं अपने पति और पायल के बीच बने संबंधो को छुपाने की कोशिश कर रही थी, पर अब इतना कुछ हो गया था तो मैं अब ओर उनको नहीं बचा सकती थी.

मैंने डीपू के मन में भी शक के बीज बो दिए कि पायल और अशोक के बीच शर्तो के खिलाफ जरूर कुछ हुआ हैं. अब आगे इस देसी सेक्स हिन्दी स्टोरी में क्या हुआ जानिए..

डीपू: “सही हैं, इन धोखेबाजो को मैं सबक सिखाऊंगा. मैं तुम्हे अभी चोदूंगा और अपना लंड तुम्हारे अंदर ही रख कर हम सो जायेंगे. सुबह जब ये उठ कर देखेंगे तो इनको पता चलेगा धोखा देना क्या होता हैं.”

मैं: “पागल हो क्या? करना हैं तो कर लो पर इनको नहीं पता चलना चाहिए कि हमने पूरा किया हैं. मेरे पति को मेरे पर भरोसा हैं, वो टूटना नहीं चाहिए.”

डीपू अपना लंड रगड़ कर कड़क करने लगा, उसको मुझे चोदने का मौका एक बार फिर मिल गया था. वैसे भी वो कल शाम को बहुत तड़पा था जब मेरे पति के सामने ही मसाज कर रहा था और आगे कुछ कर नहीं पाया था.

मैं: “कम से कम अब तो कंडोम पहन लो. दो बार बिना प्रोटेक्शन कर चुके हो.”

डीपू : “नहीं हैं, मैं दो रात के हिसाब से दो ही लाया था. एक सुबह घूमने जाने से पहले पायल पर इस्तेमाल कर लिया पर दूसरा मिला नहीं.”

मैं: “दूसरा कहाँ गया?”

डीपू : “नहीं मिला, पायल ने बोला इधर उधर कही बेग में छुप गया होगा, पर मुझे नहीं मिला.”

मैं सोचने लगी, उस रात जब अशोक इतनी देर से वापिस रूम में आये थे, तब हो न हो वो पायल के साथ ही थे, एक कंडोम तब यूज हुआ होगा. शायद पायल को अभी तक पता नहीं हैं कि मेरे पति किसी को माँ नहीं बना सकते.

मैं: “तो फिर पीछे वाले छेद में कर लो.”

डीपू: “आगे लेने में तुम्हारी हालत ख़राब हो जाती हैं, पीछे वाले छेद में ये लंबा वाला लंड सहन कर पाओगी तुम?”

मैं: “नहीं, आगे ही ठीक हैं. पीछे वाले में तो मेरी चीखें ही नहीं रुकेगी.”

डीपू: “चलो मेरा कड़क होकर तैयार हैं. दो बार बिना प्रोटेक्शन किया हैं तो एक बार ओर सही. वैसे भी दोपहर में मैं तुम्हे इमरजेंसी पिल लाकर दे दूंगा.”

मैं: “पक्का दे देना. और धीरे धीरे करना, तुम्हारा बहुत लंबा हैं, मेरी चीख निकली तो भांडा फुट जायेगा.”

डीपू: “दिन में जंगल में किया था तब तो इतनी चीख नहीं निकली थी.”

मैं: “तब तो वो दोनों मेरे सामने उधर नीचे खड़े थे न. बड़ी मुश्किल से रोका था खुद को.”

डीपू “तो अभी ये दोनों तुम्हारे सामने ही तो हैं. फिर से कण्ट्रोल कर लेना, पर मैं तो जैसे करता हूँ वैसे ही करूँगा.”

अब उसने अपना कड़क लंबा लंड पकड़ कर मेरी चूत के मुहाने पर रख दिया, और अपने हाथ से मेरे कूल्हे की हड्डी पकड़ते हुए मेरे कूल्हों के अपनी तरफ खिंचा और खुद को आगे की तरफ धक्का लगाते हुए अपना लंड मेरी चूत में पूरा पेल दिया. मेरी तो चीख निकलते निकलते बची.

वो अब गचागच झटके मारता हुआ मेरी चूत को चोद रहा था, और मैं बड़ी मुश्किल से अपने दोनों होंठों को भींचते हुए अपने कराहने की आवाज अंदर ही अंदर दबा रही थी.

मैं अपनी आँखें खुली रखने का प्रयास कर रही थी. ताकि देख पाऊ सामने लेटे दोनों लोग कही उठ ना जाये पर अपनी सिसकियों की आवाज को दबाने के चक्कर में मेरी आँखें बंद ज्यादा रही.

डीपू के लंड में सचमुच एक जादू सा था, या फिर मेरी चूत इसी तरह के लंड के लिए बनी थी. थोड़ी ही देर में हम दोनों का पानी बनने लगा था. और फच्च फच्च की आवाजे आने लगी.

मैं: “रुको, आवाज आ रही हैं. अब धीरे धीरे करो. थोड़ी देर में पानी छुट जाएगा फिर जोर से कर लेना.”

डीपू अब धीमे धीमे धक्के मारते हुए अंदर बाहर करने लगा. अब चिकने पानी पर लंड के रपटने की हलकी सी चिप चिप की आवाज आ रही थी.

धीरे धीरे जैसे ही वो आवाज बंद हुई तो डीपू ने फिर से जोर से झटके मारना शुरू कर दिया. वो अपने झटके इस तरह से एडजस्ट कर रहा था जहा से कम से कम आवाज आये.

जैसे भी झटके हो मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी. मजा बहुत आ रहा था पर आवाज निकाल ही नहीं पा रही थी.

थोड़ी देर ऐसे ही चोदते चोदते हम दोनों एक के बाद एक झड़ गए. डीपू का लंड अभी भी मेरी चूत में ही था.

मैं: “चलो अब बाहर निकालो.”

डीपू: “अरे रहने दो ना, थोड़ी देर में नरम पड़ कर अपने आप बाहर आ जायेगा.”

मैं: “तुम मरवाओगे मुझे.”

डीपू मुझसे चिपक के लेटा रहा और मेरे मम्मो को हौले हौले सहलाता रहा और कच्ची नींद में उठने से मैं एक बार फिर नींद की आग़ोश में चली गयी.

सुबह मेरी आँख खुली. पायल और अशोक वहां नहीं थे. सामने घडी में देखा आठ बज चुके थे. तभी सामने बाथरूम से पायल और अशोक कपड़े पहने हुए बाहर आये, वो कुछ बातें कर रहे थे. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली.

डीपू मेरे पीछे से चिपक के सोया हुआ था. उसका लंड मेरी दोनों जांघो के बीच फंसा था, चूत के एकदम पास.

मैं सोच में पड़ गयी, अशोक ने पता नहीं क्या देखा होगा. जब अशोक उठा होगा तब तक क्या डीपू का लंड मेरी चूत में ही होगा.

अशोक और पायल अब बिस्तर के नजदीक आते जा रहे थे और उनकी आवाज स्पष्ट सुनाई देने लगी. मैं बिना हिले ढूले उनको बातें सुननी लगी.

पायल: “तुम मानो या न मानो, इन दोनों ने पक्का कोई गुल खिलाया हैं. देखो प्रतिमा की चूत के एकदम बाहर डीपू का लंड हैं.”

अशोक: “तुम प्रतिमा को नहीं जानती, बहुत पतिव्रता हैं. कल भी चेलेंज के टाइम वो कितना घबरा रही थी. उसने कुछ नहीं किया होगा.”

पायल: “तो फिर उसने डीपू को उसका लंड अपनी चूत के इतना करीब कैसे आने दिया, लगभग छू रहे हैं.”

अशोक: “दोनों अंग इतने पास में हैं इसका मतलब ये थोड़े ही न हैं कि अंदर भी डाला ही होगा. अगर डीपू ने प्रतिमा को सोते हुए कुछ किया होता तो प्रतिमा जग जाती और उसको रोक देती.”

पायल: “तुम्हे डीपू के लंड पर सूखा हुआ सफ़ेद पानी नहीं दिख रहा क्या?”

अशोक: “डीपू का थोड़ा बहुत पानी निकल गया होगा, प्रतिमा सो गयी थी, उसको थोड़े ही पता होगा.”

पायल: “चलो अभी इनको उठा कर पूछते हैं.”

पायल और अशोक अब हम दोनों को उठाने लगे. मैंने नींद में होने का नाटक किया, पर डीपू जग गया और उन दोनो को देख हड़बड़ी में मुझसे अलग हुआ.

फिर मैंने भी अपनी आँखों पर हाथ मलते हुए अपनी आँखें खोली. उनको देखते ही मैंने भी जल्दी से वहा पड़े अपने कपड़े उठाये और पहनने लगी. डीपू ने तब तक अपना पाजामा पहन लिया था.

पायल: “अब कपड़े पहनने का क्या फायदा, सब कुछ तो कर लिया तुमने.”

मैं: “क्या बकवास कर रही हो? तुम लोग रात को मस्ती कर रहे थे और मेरी आँख लग गयी, उसके बाद तो मैं अब उठी हूँ. मेरे नीचे के कपड़े किसने खोले?”

अशोक: “चिंता मत करो, हमारे सामने कल रात को डीपू ने ही खोले थे.”

डीपू: “प्रतिमा के बाद मुझे भी नींद आ गया थी. तुम लोगो का क्या हुआ फिर?”

पायल: “क्या होना था, तुम दोनों तो सो गए, फिर अशोक ने मुझे उकसाना जारी रखा और फिर मैंने हार मान ली.”

डीपू: “हार गयी ! मतलब?”

पायल: “ज्यादा शक मत करो, मैंने अशोक को बोल दिया कि अब परेशान करना बंद करो मैं हार मान लेती हूँ.”

डीपू: “मैं शक थोड़े ही कर रहा हूँ. मैं तो ये कह रहा था कि ये राउंड तो तुम्हारे लिए ज्यादा आसान था.”

पायल: “तुमने तो मेरी मदद नहीं की ना. तुम प्रतिमा को हराने की कोशिश कर सकते थे, पर सो गए.”

डीपू: “अब नींद आ गयी तो क्या कर सकते हैं.”

पायल: “मेरे साथ तो गलत हुआ न? प्रतिमा सोने की वजह से बच गयी. ये अनफेयर हैं. देखा जाये तो प्रतिमा ने चेलेंज पूरा किया ही नहीं.”

अशोक: “अरे अब छोडो, नहा धो कर नाश्ता कर लेते हैं. हम चेकआउट करके सामान होटल के लॉकर में रख देते हैं, फिर घूमने निकलते हैं. शाम को हमें घर के लिए निकलना भी हैं.”

मैं: “चलो चलते हैं, हमारा रूम कल रात से सूना पड़ा हैं. एक रात के पैसे बर्बाद हो गए.”

पायल: “चेकआउट तो बारह बजे तक कर सकते हैं. तब तक यही रुकते हैं. वैसे भी आज ज्यादा जगह नहीं हैं घूमने को, तीन चार घंटे में कवर कर लेंगे.”

डीपू: “चेकआउट का बाद में देखते हैं, पहले नहा धो कर नाश्ता कर लो, कैंटीन बंद हो जाएगी.”

अशोक: “आज नाश्ता फ़ोन करके अपने अपने कमरे में ऊपर ही मंगा लेते हैं, क्यों कि नहा के जाएंगे तब तक देर हो जाएगी.”

डीपू: “ठीक हैं नाश्ते के बाद हम तुम्हारे रूम में आते हैं, फिर आगे का प्लान करते हैं.”

मैं और अशोक अब हमारे रूम में आ गए. अशोक मेरे बारे में पूछने लगा.

अशोक: “डीपू ने मेरे सोने के बाद तुम्हे परेशान तो नहीं किया ना?”

मैं: “मैं तो सो गयी थी, पता नहीं. क्यों क्या हुआ तुम्हे कुछ गड़बड़ लगा?”

अशोक: “नहीं, मेरा मतलब. अगर कोई नींद में.. कुछ करने की कोशिश..”

मैं: “हम औरतो को सब पता चलता हैं, बेहोशी में भी कोई करे तो उठने के बाद पता चल जाता हैं. तुम मुझ पर शक तो नहीं कर रहे?”

अशोक: “तुम पर नहीं, डीपू पर, जिस तरह कल उसने मजाक मजाक में तुम्हारे शर्ट में हाथ डाल दिया था.”

मैं: “ये सारा चेलेंज वाला खेल भी तो तुम्ही लोगो ने शुरू किया था. मुझ बेचारी को तो ऐसे ही फंसा दिया. पता नहीं क्या क्या काम करवाया मुझसे बेशर्मो वाला.”

अशोक: “आई एम सॉरी, वो दोस्ती यारी में चेलेंज चेलेंज करते ज्यादा ही हो गया. चलो तुम पहले नहा धो लो. मैं तब तक नाश्ते के लिए फ़ोन कर देता हूँ.”

संजय मिश्रा ने कैसे अपनी मुह बोली देसी भाभी की चुदाई करी और उसे अपनी दासी बनाया. यह उसकी देसी सेक्स हिन्दी स्टोरी में जानिए.

मैं अब नहाने को चली गयी. वापिस आयी तब तक अशोक ने नाश्ता कर लिया था. वो नहाने गया तब तक मैंने भी नाश्ता कर लिया.

फिर मैं और अशोक अभी भी बाथरोब पहने हुए थे कि पायल और डीपू भी आ गए. वो लोग भी हमारी तरह अभी तैयार नहीं हुए थे और बाथरोब में ही थे.

मैं: “हम तो अभी तैयार भी नहीं हुए, तुम बड़ा जल्दी आ गए. और तुम लोग अभी तक तैयार क्यों नहीं हुए, बाहर नहीं जाना क्या?”

पायल: “मुझे न्याय चाहिए. ये डीपू मुझ पर शक कर रहा हैं कि इसके सोने के बाद मैंने कुछ किया हैं अशोक के साथ मिलकर.”

अशोक: “डीपू ये क्या हैं? अपने दोस्त पर यकीन नहीं तुम्हे?”

पायल: “डीपू ही नहीं, ये अशोक भी सुबह डीपू और प्रतिमा को चिपक कर सोते हुए देख शक कर रहा था.”

अशोक: “झूठी, शक तुम कर रही थी, मैं नहीं.”

मैं: “अच्छा ! यहाँ रूम में आने के बाद भी तुम मुझे पूछते हुए शक कर रहे थे, उसका क्या?”

अशोक: “अरे यार तुम दोनों बीवियां तो मेरे पीछे ही पड़ गयी. मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था.”

डीपू: “थोड़ा बहुत पूछ लिया तो क्या हो गया. क्लियर ही तो कर रहे थे.”

पायल: “इसे पूछना नहीं, शक करना कहते हैं. हम बीवियों ने तो तुम पतियों पर शक नहीं किया फिर. तुम ही क्यों करते हो?”

मैं: “वो तो ठीक हैं कि कल रात वाला तीसरा चेलेंज बीच में ही छूट गया, वरना ये दोनों पति तो शक के मारे पता नहीं क्या करते हमारा.”

अशोक: “ना तो हम शक करते हैं और ना ही किसी चेलेंज से डरते हैं.”

डीपू : “चाहिए तो वापिस करा लो चेलेंज.”

पायल: “चेलेंज तो होकर ही रहेगा. मैं प्रूव कर दूंगी कि ये दोनों पति शक्की हैं.”

मैं: “नहीं बाबा, मुझे नहीं करना. मैं अब ओर कपड़े नहीं उतारने वाली फिर से.”

पायल: “चिंता मर कर कपड़े के अंदर कोई नहीं देखेगा.”

अशोक: “तो फिर बाहर घूमने का क्या? हम तो घूमने आये थे.”

पायल: “मुझे सिर्फ एक घंटा दो, तुम दोनों मर्दो की पोल खोल दूंगी.”

डीपू: “आ जाओ, जो करना हैं करो. हम शक नहीं करेंगे.”

पायल: “चल प्रतिमा, बेड पर चल.”

मैं: “पर मैं अब कपड़े नहीं खोलूंगी.”

पायल: “अरे हां, नहीं खोलने, चल.”

मैं और पायल कल रात की तरह बेड के बीच एक दूसरे की तरफ मुंह कर करवट लेके लेट गए.

पायल: “तुम दोनों पति अपने बाथरोब की लैस खोल कर एक दूसरे की बीवियों के पीछे चिपक कर लेट जाओ.”

अपने बाथरोब की लैस खोल कर डीपू मेरे पीछे आकर लेट गया और अशोक पायल के पीछे.

पायल: “अब पहले किसका टेस्ट ले?”

मैं: “पहले तुम ही करके बताओ क्या करना चाहती हो.”

पायल: “ठीक हैं. मैं और अशोक मिल कर डीपू के मन में शक पैदा करने की कोशिश करेंगे. अगर डीपू को शक हुआ तो वो अपनी जगह से उठ कर हमारे पास में आ शक दूर करने की कोशिश करेगा. अगर वो वही लेटा रहा तो मतलब उसे शक नहीं हैं. सिंपल?”

सबने इसमें अपनी हामी भरी.

पायल: “अशोक अपना सामान तैयार करो.”

अशोक: “ऐसे कैसे करू, कुछ मूड नाम की चीज भी तो होती हैं.”

पायल: “ऐसे करो” ये कहते हुए पायल ने अपने बाथरोब की लैस खोल उसको पीछे से ऊपर कर अपनी गांड को बाहर निकाल दिया.

मुझे और डीपू को तो आगे से कुछ नहीं दिखा पर अशोक तो पायल के पीछे ही था, उसे दिखा. अशोक पायल की गांड को घूरते हुए अपना लंड को पकड़ आगे पीछे रगड़ते हुए कड़क करने लगा.

अगले दो तीन मिनट में ही अशोक अपने कड़क सामान के साथ तैयार था.

अशोक: “अब बोलो, तैयार हैं?”

पायल: “मेरे पीछे चिपक कर लेट जाओ और अपना सामान से मेरे पीछे झटके मारो, पर याद रखना मेरी उस जगह के वहा ना जाए.”

अशोक ने अब पायल के पिछवाड़े के उभारो पर जोर जोर से झटके मारना शुरू कर दिया. पायल की गुदगुदेदार गांड से अशोक के शरीर के टकराने से थाप थाप की आवाजे आने लगी.

आगे से देखने पर एकदम ऐसा भ्रम हो रहा था जैसे सचमुच अशोक पायल को चोद रहा हो.

पायल: “डीपू, जब भी तुम्हे शक हो तो आकर देख लेना, कही हम कुछ कर तो नहीं रहे.”

डीपू: “अब तो तुम असली में कर लो फिर भी नहीं आऊंगा.”

पायल ने जानबूझकर सिसकियाँ निकालनी शुरू कर दी जैसे सच में चूदा रही हो. पर डीपू समझ गया था ये उसको फंसाने का जाल था. पायल ने अब अपनी अगली तरकीब लगायी.

पायल: “अशोक, अपना सामान अब मेरे जांघो के बीच रखो. एक दम ऊपर की तरफ जहा दोनों टाँगे मिलती हैं.”

पायल ने अपनी ऊपर की टांग को थोड़ा उठा दिया और अशोक ने पायल की चूत के एकदम पास अपना लंड रख दिया. पायल ने अपनी टांग फिर बंद कर दी.

हमें आगे से सिर्फ पायल की दोनों जाँघे दिख रही थी. अशोक ने अब फिर झटके मारने शुरू कर दिए और पायल ने सिसकिया मारते हुए डीपू को जलाना.

थोड़ी देर ये चलता रहा पर डीपू पर कोई असर नहीं हुआ, हां उसका लंड जरूर कड़क हो, मेरे पिछवाड़े को छू, चुभ रहा था.

पायल: “ये आखिरी प्रयास हैं. प्रतिमा जरा चादर लाकर हम दोनों के कमर से लेकर नीचे टांगो तक ओढ़ा दे.”

मैं सोचने लगी अब ये क्या करने वाली हैं. मैंने वैसा ही किया और फिर अपनी जगह आकर लेट गयी.

उनके नीचे का हिस्सा पूरा ढक चूका था तो कुछ दिख ही नहीं रहा था. अशोक के झटको की वजह से सिर्फ चद्दर हिल रहा था.

थोड़ी देर बाद अशोक के हाथ की उंगलियों की आकृति पायल के कूल्हों पर चादर में से दिख रही थी. धीरे धीरे जरूर पायल की सिसकियाँ तेज होने लगी थी.

फिर थोड़ी देर में अशोक की जोर लगाने वाली हलकी सिसकिया भी सुनाई देने लगी. पायल असल में सिसकियाँ निकाल रही थी या नकली ये कह पाना बहुत मुश्किल हो गया था.

डीपू का लंड अब काफी कड़क हो चुका था और शायद उसने अपने बाथरोब के आगे के थोड़े खुले हिस्से से अपना लंड बाहर निकाल कर मेरे मोटे बाथरोब के बाहर से ही मेरी गांड में घुसाने की कोशिश कर रहा था.

कुछ मिनटों तक ऐसा ही खेल चलता रहा, पर डीपू ने हिम्मत दिखाते हुए अपने शक़ को बाहर नहीं आने दिया. थोड़ी देर बाद पायल जोर जोर से सिसकिया निकालते हुए चीखने लगी.

पायल: “आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह डीपू आओ चादर हटा कर देखो अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह जाओ. देखो मैं सच में चूदवा रही हूँ. ये देखो अशोक का लंड मेरे अंदर तक गया. बचाओ अपनी बीवी को उई माँ अह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मर गयीईई.”

डीपू : “नाटक बाज कही की, मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला.”

थोड़ी देर ऐसे ही आवाजे निकालने के बाद पायल हाँफते हुए चुप हो गयी. थोड़ी देर वो चादर में ही रहे और अपने बाथरोब ठीक करने लगे. फिर उन्होंने वो चादर निकाल दी और अपनी लैस फिर से बाँध दी.

डीपू: “हो गया मेरा टेस्ट या ओर भी करना हैं?”

पायल: “तुम्हारा हो गया अब अशोक का करना हैं. प्रतिमा मैंने किया वैसा ही तुम भी करो और देखो मजे.”

शायद पायल ने सच में अशोक के साथ चुदाई करवाई और डीपू ने उनको पकड़ने तक की जहमत नहीं उठाई. अब मेरा नंबर था, मुझे ये डर था कि कही डीपू सच में कुछ कर ना बैठे और अशोक मुझे रंगे हाथों ना पकड़ ले.

मैं: “डीपू को तो शायद सामान तैयार करने की भी जरुरत नहीं. पहले से तैयार हैं.”

डीपू शरमा गया. पायल ने हाथ आगे बढ़ा कर मेरे बाथरोब की लैस खोल दी और फिर डीपू ने खुद ही पीछे से बाथरोब उठा मेरी गांड को बेनकाब कर दिया.

उसे पहले ही पता था क्या करना हैं. उसने जोर जोर से मेरी गांड पर चोट मारना शुरू कर दिया और थपा थाप कर आवाज शुरू हो गयी. सब कुछ पायल की बनाई स्क्रिप्ट के हिसाब से हो रहा था.

डीपू ने मेरी ऊपर वाली टांग उठा दी, जल्दी में अपना लंड मेरी चूत से अड़ा के वापिस टांग नीचे कर दबा दिया. अब वो झटके मारने लगा जैसे सच में मुझे चोद रहा हो. उसके लंड की टोपी रह रह कर मेरी चूत को बाहर से रगड़ रही थी.

पायल: “प्रतिमा कुछ आवाज तो निकाल, अशोक को अहसास तो करा.”

मैं अब बीच बीच में हँसते हुए आह्ह्हह आह्ह्हह करने लगी.

पायल: ”एक्टिंग नहीं आती क्या? हंसना बंद कर और सिरियस चेहरा बना कर सिसकियाँ निकाल.”

डीपू के लंड की रगड़ से वैसे भी मेरा थोड़ा बहुत मूड बनने लगा था, तो मैंने भी अब चेहरा सिरियस बनाते हुए सिसकियाँ निकालना शुरू कर दिया.

पायल: “हां ये हुई ना बात. अशोक जाओ देखो, अपनी बीवी को चेक करो.”

अशोक ने हंस के टाल दिया. पायल ने उठ कर वो चादर मेरे और डीपू के गले से लेकर पांवो तक पूरी ही ओढ़ा दी और फिर अशोक के आगे लेट गयी.

डीपू को तो शायद इसी मौके का इंतज़ार था. उसने अपना हाथ मेरे बाथरोब में डाल मेरे मम्मो को दबोच लिया.

इतनी देर रगड़ के बाद थोड़ा पानी निकलने से चूत के बाहर चिकना हो चूका था. उसने अपने लंड के झटको की डायरेक्शन बदली और ऊपर की तरफ जोर से झटका मार मेरी चूत में अपना लंड उतार दिया.

मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि वो सच में अंदर डाल देगा. ये तो अच्छा हुआ कि मैं पहले से सिसकियाँ निकाल रही थी तो मेरी चीख से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा.

चादर के अंदर डीपू जोर जोर से झटके मारते हुए मुझे चोदे जा रहा था, और मुझे डर लगा कि कही अशोक को सच में शक ना हो जाये और चादर निकाल दे. पायल ने अब चादर को बीच में से एक जगह पकड़ लिया.

पायल: “अशोक, खींचू क्या चादर?”

मेरी तो सांस रुक गयी. मेरा हाथ मेरी जांघो पर था तो उसको पीछे ले जाकर मैंने डीपू को रोकने की कोशिश की, पर वो तो मुझे पूरा चोदे बिना छोड़ने वाला नहीं था.

क्या ये पायल की चाल थी मुझे और डीपू को रंगे हाथों पकड़ने की? क्यों कि सुबह भी उसे हम पर शक हो गया था.

पायल ने थोड़ी थोड़ी चादर को खींचना शुरू कर दिया. वो एक झटका मारती तो चादर हट जाती और हमारी पोल खुल जाती.

मेरी डीपू को रोकने की सारी कोशिशे नाकाम रही. मैंने अब अपना हाथ अपनी चूत के आगे रख कर उसको ढक दिया ताकि अगर चादर हट भी जाये तो छुपा सकू.

चादर अब धीरे धीरे खिसकते हुए मेरी गांड तक आ गयी थी और आधी गांड चादर के बाहर आ चुकी थी. मैंने चादर को पाँव में फंसा दिया ताकि मेरी कमर से नीचे ना गिर जाये.

डर के मारे मैं मजा लेना ही भूल गयी थी, रह रह के उसके लंबे लंड के झटको की वजह से होने वाले दर्द से मेरी सिसकिया जरूर निकल रखी थी.

मैं: “पायल तुम चादर नहीं खिंच सकती, सिर्फ अशोक खिंच सकता हैं.”

पायल: “अशोक तुम्हारी जगह मैं खींच दूँ चादर? सोच लो तुम्हारी बीवी को रंगे हाथों पकड़ सकते हो.”

अशोक: “तुम बहुत कोशिश कर रही हो कि मैं शक कर के हार जाऊ, पर ये होने वाला नहीं.”

इस बीच डीपू ने एक बार फिर अपना पानी मेरे अंदर छोड़ दिया था. पर उसने फिर भी झटके मारना नहीं छोड़ा.

मैं: “चलो बहुत टेस्ट हो गया, डीपू अब बंद करो.”

डीपू का काम तो वैसे भी हो गया था, तो उसने अपना लंड बाहर निकाल दिया. उसने मेरे मम्मो को दबाना भी बंद किया और चादर को फिर अपने ऊपर खिंच दिया.

मैंने अपना बाथरोब नीचे किया और अपने अंग ढक लिए. फिर मैंने चादर हटाया और लैस बांधते हुए राहत की सांस ली. मुझे लग गया डीपू भरोसे के काबिल नहीं हैं.

दोनों मर्द खुश थे कि वो शक ना करने का टास्क जीत गए, पर शायद उनकी बीवियां टास्क जीती थी जो अपने पतियों के सामने ही गैर मर्द से चुदवाने में कामयाब रही.

हालांकि मैं निश्चित तौर पर ये तो कह नहीं सकती कि उस चादर में अशोक ने सचमुच पायल को चोदा था.

पायल और डीपू अपने रूम में चले गए. हम चारो अपने बेग पैक करके तैयार हो गए और नीचे रिसेप्शन पर मिले.

हम चारो ने आज जीन्स पहनी थी और और ऊपर टीशर्ट. अपने बैग होटल के लॉकर में रखवा कर हम लोग घूमने निकले. हमने लोकल बाजार में शॉपिंग की और फिर वहां से निकलने के लिए कार में बैठे.

वहा माता का एक मंदिर था, उसको देख कर अशोक को कुछ याद आया.

अशोक: “अरे तुम्हारी सजा का क्या हुआ? मैंने अपनी माँ की कसम खायी थी कि मैं प्रतिमा से सजा पूरी करवाऊंगा.”

डीपू: “कसम तो मैंने भी खायी थी, अच्छा हुआ याद दिला दिया.”

मैं: “सजा को भूल जाओ, हम लोग घूमने का मजा लेते हाँ ना.”

अशोक: “ऐसे कैसे भूल जाओ, मैंने माँ की कसम खायी हैं.”

पायल: “हम दोनों आपस में कैंसल करने को तैयार हैं तो क्या जरुरत हैं.”

डीपू: “तो हमको माँ की कसम क्यों दिलवाई. अब तो करनी ही पड़ेगी. लाओ बेग में से चिट्ठी निकाल कर दो.”

पायल ने अपने बेग में से वो चिट्ठी निकाल कर डरते हुए डीपू को दी. डीपू ने अब हम चारो को सुनाते हुए चिट्ठी पढ़ी.

डीपू: “सजा ये हैं कि, अपने पति की आँखों के सामने अपने मुँह, कंट (चूत), और बट (गाँड) को पराये मर्द से चुदवाना हैं, तीनो छेद में दो-दो मिनट के लिए किसी पब्लिक प्लेस में.”

डीपू: “ये क्या मजाक हैं पायल, ऐसी सजा कौन लिखता हैं. तुम्हारा दिमाग ख़राब हैं क्या?”

पायल: “वो मैंने जानबूझकर ऐसी बड़ी सजा लिखी ताकि प्रतिमा दूसरे लेवल के लिए मना ना बोल पाए. मुझे नहीं पता था कि घूम फिरकर ये सजा हम पर आ जाएगी.”

अशोक: “तुमने तो पढ़ा था ना प्रतिमा, फिर भी तुमने रूल तोड़ने की सजा के तौर पर यही वाली सजा चुनी.”

मैं: “मैंने सोचा पायल इस डर से रूल नहीं तोड़ेगी. पर फिर भी गलती से रूल टूट ही गया.”

डीपू: “तो फिर तुम दोनों ने हमें माँ की कसम क्यों दिलवाई?”

पायल: “उस वक्त हमारा मुकाबला चल रहा था और हम एक दूसरे को मुसीबत में डालना चाहते थे.”

अशोक: “तुम दोनों ने तो हम पतियों को फंसा दिया. माँ की कसम बहुत बड़ी होती हैं. अब माँ को बचाये या तुम्हे?”

मैं: “ये कसम वसम कुछ नहीं होती हैं. तुम भूल जाओ.”

डीपू: “नहीं भूल सकते, अगर माँ को सच में कुछ हो गया तो हम अपने आप को ही दोषी मानेंगे.”

अशोक: “पराये मर्द से मतलब, वो दोस्त भी हो सकता हैं. डीपू हमें एक दूसरे की मदद करनी होगी.”

डीपू: “ओर कोई चारा भी तो नहीं हैं. तुम दोनों को कोई आपत्ति?”

हम दोनों पत्नियों ने ना में सर हिला दिया. इससे अच्छा कोई उपाय भी नहीं था. कार में बैठ कर हम हाईवे की तरफ आ गए.

सोच सोच कर ही डर लग रहा था कि अपने पति के सामने कैसे करवाएगा. वैसे तो सिर्फ छह मिनट की बात थी पर करने वाला उनका दोस्त ही होगा.

पुरे रास्ते हम चुप चाप बैठे रहे फिर अशोक ने गाड़ी हाईवे पर एक तरफ लगा दी.

कार के दोनों दरवाजे खोल दिए, जो दीवार का काम करेंगे. जो भी होना था वो कार के इन दो दरवाज़ों के बीच होगा. एक तरफ पहाड़ी थी, दूसरी तरफ रोड. कार एक एसयुवी थी जो काफी ऊँची थी जिससे उसके दरवाज़े भी ऊँचे थे. रोड पर जाने वाले ज्यादा कुछ देख नहीं सकते थे.

मैं खुले दरवाज़े की तरफ बैठी तो पहला नंबर मेरा लगा. मैं उठ कर दोनों दरवाजो के बीच आ गयी. डीपू वही खड़ा था, एक बार फिर वो मेरी लेने वाला था. इस बार मेरे पति से छुपते छुपाते नहीं बल्कि उनकी जानकारी में उनकी आँखों के सामने चोदने वाला था और मेरे पति की सहमति या कहिये मज़बूरी से.

पायल मोबाइल में टाइम गिनने वाली थी. पहला नंबर मुँह का था. मैं डीपू के सामने झुक कर बैठ गयी. उसने अपना जीन्स और अंडरवियर खोल कर नीचे कर दिया. उसका लंड नरम पड़ा था फिर भी चार इंच का रहा होगा.

मैंने उसको अपने हाथ से उठाया और पायल के बोलते ही अपने मुँह में रख दिया. मैं अब उसको अपने मुँह में आगे पीछे कर रगड़ने लगी.

लगभग एक मिनट तक ये करने के बाद उसका लंड कड़क और लंबा हो गया और वो अब अब मेरे मुँह में धक्के मारने लगा, जिससे उसका लंबा लंड मेरे गले में उतरने लगा और मैं चॉक होने लगी. उसका दो चार बूँद पानी भी निकल कर मेरे गले में उतर गया.

मेरे हिसाब से दो मिनट हो चुके थे पर पायल ने अभी तक रोका नहीं, शायद वो जानबूझ कर मुझे परेशान करने के लिए समय बढ़ा रही थी. लगभग तीन मिनट चूसने के बाद पायल ने कहा कि दो मिनट हो गए.

मैंने जल्दी से डीपू का राक्षस अपने अपने मुँह से बाहर निकाला और मुंह में आयी गन्दगी बाहर थूक दी. मेरी लार से डीपू का लंड भी गीला हो गया था. मैं अपने पति से नजरे भी नहीं मिला पा रही थी. अगली बारी मेरी चूत की थी.

मैंने अपने जीन्स का बटन खोल उसे पैंटी सहित घुटनो तक नीचे कर दिया. डीपू ने अब मुझको मेरे पति (जो कार में बैठे थे) कि तरफ घुमाया और कमर से झुका दिया.

मेरा चेहरा मेरे पति के चेहरे के सामने था. डीपू ने मेरा टीशर्ट थोड़ा ऊपर कर दिया. उसका लंड मेरे पिछवाड़े को छू रहा था.

अशोक: “डीपू तुम कंडोम पहन लो, ये सेफ नहीं हैं.”

पायल: “साथ लाये थे वो ख़त्म हो गए.”

डीपू: “कोई बात नहीं, वैसे भी दो मिनट ही करना हैं, इतनी सी देर में कुछ नहीं होगा.”

इसके बाद डीपू ने अपना लंबा लंड पकड़ कर पीछे से मेरी चूत में घुसा दिया. थोड़ी देर पहले उसका चूसने से उसका लंड कुछ ज्यादा हैं सक्रीय हो गया था.

पिछली कुछ चुदाई के मुकाबले इस बार उसका लंड कुछ ज्यादा ही फुल गया था. मेरी चूत में घुसते ही मुझको अहसास हो गया कि लंबाई के साथ अभी इसकी मोटाई से मेरी हालत ख़राब होने वाली हैं.

डीपू ने बिलकुल भी लिहाज नहीं किया कि वो उसके दोस्त की बीवी को उसके दोस्त के सामने ही ऐसे चोद रहा था, जैसे किसी किराये की चूत को चोद रहा हो. गहरे गहरे झटके मारते हुए वो इस स्तिथि में ही मजे ले रहा था.

जब से उसका लंड मेरी चूत में घुसा था तब से ही मैं लगातार सिसकिया भरते हुए कराह रही थी. सामने पति थे तो नजरे झुकाये आहें भरने लगी.

उसके झटके मारने की गति बहुत ज्यादा थी, ऊपर से उसकी लम्बाई और मोटाई मुझसे मेरे अंदर होने वाली हलचल सहन नहीं हो रहा थी.

जल्दी ही मेरा तो पानी निकलने लगा और फचक फचक की आवाज आने लगी. मैं बेहद शर्मिंदा हुई. पायल समय रुकने का इशारा तक नहीं कर रही थी. एक बार फिर वो बदला निकाल रही थी. वहा का माहौल बड़ा ही गरम हो चूका था.

पायल ने लगभग एक मिनट ज्यादा लगाया होगा समय समाप्ति की घोषणा के पहले, तब तक मेरी चूत बुरी तरह से रगड़ चुकी थी और मेरे अंदर पानी पानी हो गया था. उसका लंड निकलते ही मुझे बड़ी राहत मिली.

अशोक: “कुछ हुआ तो नहीं होगा?”

मैं: “डीपू ने पानी अंदर नहीं छोड़ा.”

डीपू: “चिंता मत करो अशोक, वैसी कोई गड़बड़ नहीं होने दूंगा. प्रतिमा तुम ठीक हो तो आगे बढे?”

मैं: “अब थोड़ा धीरे करना, पीछे तो ज्यादा ही दर्द होगा.”

डीपू: “ठीक हैं, मैं ध्यान रखूँगा. चलो अब पलट कर झुक जाओ फिर से.”

डीपू ने सुझाया कि पानी जीन्स पर गिरेगा तो मैं उसको पूरा निकाल दूँ. मुझे उसी जीन्स में वापसी का सफर करना था तो मैंने वो जीन्स पूरी निकाल दी.

मैं एक बार उसकी तरफ पीठ कर आगे झूक कर खड़ी हो गयी. उसने एक बार फिर मेरा टीशर्ट ऊपर खिसका दिया. और अपना मोटा लंबा लंड मेरी गांड में डाल दिया. अंदर जाते ही मैं इतना जोर से चीखी कि मेरी आवाज कार में गूंज गयी.

मैं बता नहीं सकती मोटाई के साथ इतनी लंबाई वाला लंड अपनी गांड में लेना सचमुच की एक सजा हैं. ऊपर से वो बेरहमी से झटके मार रहा था.

मैं लगातार दर्द के मारे चीख रही थी. “आह्ह्ह्ह धीरे डीपू, मेरी गांड फट जाएगी, प्लीज, उह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह आई ओ मम्मी, ओ माय गॉड छोड़ दो डीपू, आअह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआआआ.”

डीपू एक हाथ मेरी पीठ पर रख जोर के धक्के मारता रहा. आगे पीछे होने से मेरी ब्रा का हूक भी खुल गया और मेरे मम्मे नीचे लटक गए. उसके हर झटके साथ मेरे मम्मे लटके हुए आगे पीछे तेजी से हिल रहे थे.

अर्शदीप कौर द्वारा लिखित एक सच्ची चुदाई की कहानी, की एक बार उसे कैसे उसकी मामी समझ कर तीन मर्द एक साथ चोद गये. यह मजेदार सेक्स की कहानी पढ़िए और हिलाते रहिये.

मेरे दर्द का असर ना डीपू पर हुआ ना पायल पर, मुझे एक बार फिर लगा उसने जानबूझ कर समय बढ़ा दिया.

मेरे चीखने के साथ ही डीपू भी सिसकिया भरने लगा “आह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह अह्ह्हह्ह्ह्ह उम्म्म्.”

वो मेरी गांड के अंदर ही झड़ गया और पायल तो जैसे इसी का इंतज़ार कर रही थी. उसके झड़ते ही उसने टाइम ऑफ कर दिया. डीपू ने अपना लंड बाहर खिंच लिया. मैं अब भी झुकी हुई खड़ी थी.

मेरी गांड से रह रह कर पानी झड रहा था. अच्छा हुआ जीन्स निकाल दी वरना गीली हो जाती.

अशोक और पायल ने हम दोनों को नैपकिन दिए पानी साफ़ करने के लिए. पानी साफ़ कर मैंने अपनी जीन्स फिर पहन ली. तब तक डीपू ने मेरी मदद करने को मेरे ब्रा को फिर बाँध दिया.

अशोक: “तुम ठीक तो हो ना?”

मैं: “थोड़ा दर्द हो रहा हैं नीचे.”

मेरे दोनों छेदो में रह रह कर एक टीस उठ रही थी. मैं अब चल कर पीछे वाली सीट तक आयी तब तक पायल मेरी जगह, कार के दोनों दरवाजो के बीच आ गयी. अशोक और डीपू ने भी अपनी जगह आपस में बदल ली.

अब घडी मेरे पास थी. मैं अपना बदला पायल से ले सकती थी.

अशोक ने अपनी जीन्स और अंदर के कपड़े नीचे किये. उसका लंड पहले से ही कड़क हो तैयार था, पहले का गरमा गरम कार्यक्रम देखने का बाद ये हुआ था.

पायल को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और मेरे “गो” बोलते ही वो अशोक का लंड अपने मुँह में ले चूसने लगी.

वो एक माहिर खिलाडी की तरह लंड को अपने मुँह में गोल गोल घुमाते हुए चूस रही थी, और अशोक अपना मुंह भींचे सिसकियाँ मार रहा था. मुझसे ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ और दो मिनट होते ही मैंने उनको रोक दिया.

जब अशोक ने अपना लंड पायल के मुँह से निकाला तो दोनों जगहों से लारे छूट रही थी. अशोक भरा भराया था तो थोड़ा बहुत पानी पायल के मुँह में ही छोड़ दिया था पर पायल ने मुँह में भरा पानी नहीं थुका और गटक गयी.

अब पायल ने अपनी जीन्स को पैंटी सहित पूरी निकाल दी मेरी हालत देखने के बाद. शायद वो अपने पाँव पूरी तरह चौड़े कर चूदवाना चाहती थी.

उसने वैसा ही किया, पाँव पुरे चौड़े कर डीपू की तरफ मुँह कर झुक गयी. उसका टीशर्ट ढीला होने से अपने आप ही ऊपर खिसक गया और ब्रा दिखने लगी.

अशोक ने उसके ब्रा की पट्टी अपने हाथ में दबोची और अपना लंड पायल की खुली चूत में डाल दिया. मैंने स्टॉप वाच शुरू कर दिया. अशोक अब जोर जोर से पायल को चोदते हुए जैसे मेरा बदला डीपू से ले रहा था.

पायल की सिसकिया शुरू हो गयी “उई माँ, अह्ह्ह्हह्ह हम्म्म्म आहह्ह्ह ओहह हम्म आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह.”

साथ में अशोक की सिसकिया भी चालू थी. ज्यादा जोर लगाने से पायल का ब्रा भी खुल गया, या शायद अशोक ने जानबूझ कर किया बदले के लिए. अशोक का बैलेंस थोड़ा बिगड़ा पर वो फिर भी चोदता रहा.

मैं उसमे इतना खो गयी कि घडी से ध्यान ही हट गया. चालीस सेकंड ज्यादा हो गए थे. मैंने तुरंत उनको रुकने को कहा.

अशोक ने तुरंत अपना लंड पायल की चूत से निकाला और अगले ही सेकंड उसकी गांड में डाल कर निर्बाध अपना काम जारी रखा.

पायल को भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा. अभी डेढ़ मिनट ही हुआ था कि अशोक जोर से सिसकियां निकालते हुए पायल की गांड में ही झड़ गया.

समय पूरा नहीं हुआ था तो वो अब भी हलके हलके झटके मार रहा था. जिससे पायल की गांड से निकल कर पानी रिसता हुए उसकी जांघो तक आ गया. जैसे तैसे समय पूरा होने तक वो करता रहा.

उन दोनों ने काम ख़त्म कर अपनी साफ़ सफाई कर कपडे पहन फिर कार में बैठ गए.

सजा तो पूरी हो चुकी थी, पर अब हम एक दूसरे का सामना कैसे करेंगे ये चिंता का विषय था. या फिर इस ट्रेलर के बाद सब लोग पूरी पिक्चर के लिए तैयार थे?

एक बार फिर से देसी कहानी पर पेश है इस लेटस्ट सेक्स स्टोरीज इन हिन्दी का अगला एपिसोड.. सजा से पहले जो माहौल बहुत तनावपूर्ण था वो अब काम ख़त्म होते ही सामान्य होने लगा था.

सभी लोग उस घटना को ज्यादा तवज्जो ना देते हुए उस घटनाक्रम में हुए वाकये को लेकर मजाक बना रहे थे कि कौन कैसे प्रतिक्रिया दे रहा था.

इससे ये फायदा हुए कि हम एक दूसरे से शरमाने और मुँह छुपाने की बजाय उस चीज के बारे में ओर ज्यादा बात करते हुए उसको हंसी में उड़ाने लगे.

शायद कही ना कही सबको मजा तो आया, अपने पार्टनर के सामने, उसकी ही इजाज़त से किसी ओर से चुदाई में.

हम लोग वहा से सीधे लंच के लिए निकले. लंच के बाद हम एक झरना देखने गए. वहां भीड़ काफी थी तो थोड़ा समय के बाद हम लोगो ने उस झरने की नदी के साथ साथ होते हुए गाड़ी लेकर गए, ताकि आगे कोई शांत स्थान मिले जहा हम नदी के पास बैठ सके.

हम रोड से उतर कर, कच्चे रास्ते से होते हुए एक सुनसान जगह हमने अपनी गाड़ी नदी के पास लगाई.

पायल अशोक के पास गयी और बोली: “यहाँ हम थोड़ी देर रुकने वाले हैं तो कोल्ड ड्रिंक ले आओ ना अशोक, पीछे रास्ते में एक शॉप भी थी.”

अशोक हम तीनो को वही उतार कर वापिस कोल्ड ड्रिंक लेने चला गया.

पायल: “प्रतिमा और डीपू मुझे तुमसे एक बात करनी हैं.”

मैं: “बोलो, क्या बात हैं?”

पायल: “कल देर रात मेरी नींद खुली थी. मुझे सब पता हैं तुम दोनों के बीच क्या चल रहा हैं.”

ये सुनकर मेरे शरीर में तो जैसे खून जम गया, मेरी और डीपू की बोलती बंद हो गयी. मैं पायल से आँखें नहीं मिला पा रही थी. डीपू कुछ बोलने की कोशिश करना चाहता था पर पायल ने उसे रोक दिया और कहना जारी रखा.

पायल: “प्रतिमा, पिछले एक साल से मेरे और डीपू के बीच शारीरिक संबंध ठीक नहीं हैं.”

डीपू: “ये तुम क्या बोल रही हो प्रतिमा के सामने.”

पायल: “ये रात को बैडरूम में आता हैं, लाइट बंद करता हैं और सो जाता हैं. तुम मेरी चूत के बालों का मजाक बना रही थी, तुम्ही बताओ मैं किसके लिए अपने बाल साफ़ करू? कौन देखने वाला हैं?”

मैं: “सॉरी, मुझे पता नहीं था.”

पायल: “जिस रात हम होटल में पहुंचे थे, डीपू तुम्हारे और अशोक के साथ गया था और जब लौटा तो मेरा पुराना डीपू बन कर लोटा. वो मुझसे चिपक कर सोया था और सुबह उसने जम कर मेरी चुदाई की, जिसका मैं एक साल से इंतज़ार कर रही थी. चोदते वक्त उसके मुँह से तुम्हारा नाम भी निकल गया था. तभी मुझे पता चला कि ये तुम्हारा जादू हैं.”

उसने कहना जारी रखा और मैं ध्यान से सुनने लगी.

पायल: “एक घंटा तुम्हारे साथ बिताने से इसमें इतना बदलाव आ गया तो मैंने सोच लिया और कल पुरे दिन मैंने अशोक को अपने साथ बिजी रखा, ताकि डीपू तुम्हारे साथ समय बिता सके और मुझे मेरा पुराना रोमांटिक डीपू मिल जाए.”

मैं: “मगर जंगल में मैंने तुम्हे और अशोक को एक साथ…”

पायल: “तुमने वही देखा जो मैं तुम्हे दिखाना चाहती थी. तुम डीपू से खींची खींची सी रह रही थी. तुम हमारा पीछा कर रही थी, इसलिए मैंने ही अशोक को चूमा और उसको मजबूर किया कि वो मेरे साथ कुछ करे. ताकि तुम हमें उस हालत में देखो और डीपू के करीब जाओ.”

डीपू: “मतलब तुमने भी अशोक के साथ सब कुछ कर लिया!”

पायल :”नहीं, मेरा मन नहीं माना, प्रतिमा के वहा से निकलते ही मैं अशोक से दूर हो गयी और उसको दूसरी दिशा में घुमाने लगी.”

मैं: “मतलब तुम ये चाहती थी कि हम दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन जाए?”

पायल:”नहीं, मैं तो बस ये चाहती थी कि डीपू तुम्हारे साथ थोड़ा अकेले समय बिताये और बदल जाए. जंगल में उस चट्टान के पीछे शायद तुम लोग चूदाई ही कर रहे थे. पर मुझे पूरा यकीन नहीं था.”

मैं और डीपू एक दूसरे का चेहरा ताकने लगे.

पायल: “मेरे शक को यकीन में बदलने के लिए मैंने वो मसाज की योजना बनाई और फिर वो संस्कार चेलेंज. वो सजा मैंने सिर्फ इसलिए लिखी थी कि मैं देखना चाहती थी कि तुम वो चेलेंज लेती हो या सजा. अगर तुम चेलेंज छोड़कर वो सजा चुनती तो इसका मतलब तुम्हारा डीपू के साथ चक्कर चल रहा हैं.”

हम तीनो वही पत्थरो पर बैठ गए.

पायल: “ये बात अलग हैं कि बाद में उस सजा में तुम्हारे साथ मैं भी फंस गयी. मेरी रात को रह रह कर नींद खुल रही थी और फिर मैंने तुम दोनों को सेक्स करते देखा. मुझे बहुत गुस्सा आया और तुम्हे पकड़ना चाहती थी, पर अशोक सोया हुआ था और मैं उसके सामने तुम्हे पकड़ना चाहती थी.”

डीपू: “हमने इसलिए किया क्युकि तुम अशोक के साथ पहले ही सब कर चुकी थी. तुम्हारी चूत के बाल चिकने पानी से चिपके थे.”

पायल: “तुम दोनों के सोने के बाद अशोक भी सो गया था. फिर मैंने वही किया जो पिछले एक साल से सोने के पहले करती आ रही हूँ. अपनी उंगलियों को अपनी ही चूत में डाल खुद को खुश करना.”

मैं और डीपू दोनों ही शर्मिंदा थे.

पायल: “सुबह उठ कर मैंने अशोक को यकीन दिलाने की कोशिश की पर वो मानने को ही तैयार नहीं था कि तुम उसे धोखा दे सकती हो. इसलिए मैंने फिर मर्दो को शक वाला चैलेंज दिया. मुझे पता था एक बार चादर में जाने के बाद तुम दोनों फिर से चुदाई जरूर करोगे.”

मैं: “तो फिर तुमने चादर पूरा क्यों नहीं खिंचा? तुम चाहती तो अशोक के सामने मुझे रंगे हाथों पकड़वा सकती थी.”

पायल: “मैं तो करने ही वाली थी कि मुझे डीपू का मजे लेते हुए चेहरा दिख गया. मैंने सोचा प्रतिमा की वजह से मेरा पति फिर से ठीक हो गया हैं तो मैं उसका बुरा क्यों करू.”

डीपू: “आई एम सॉरी पायल, मैंने ये सब तुम्हारी पीठ पीछे किया.”

मैं: “तुमने मुझे बचाया और मैं तुम पर ही शक करती रही. मुझे लगा तुम तीनो मिले हुए हो और मुझे फंसा रहे हो. तुम मुझे माफ़ कर दो, मैंने तुम्हारे पति को समय रहते नहीं रोका.”

पायल: “नहीं नहीं, मैं तो उल्टा तुमसे खुश हूँ. देखो ये हमारा आख़िरी पड़ाव हैं, फिर हम लोग अपने घर लौट जायेंगे. ये एक आख़िरी मौका हैं, तुम दोनों को कुछ करना हैं तो कर सकते हो. अशोक की चिंता मत करो, उसको ध्यान मैं दूसरी तरफ लगा दूंगी.”

डीपू: “कैसी बात कर रही हो. अब मैं कैसे कर सकता हूँ?”

मैं: “अब हम ये नहीं कर सकते.”

पायल: “मुझे धोखे में रख तुमने मेरी मदद ही की थी, अब मैं जान चुकी हूँ तो मेरी मदद नहीं करोगी? मैं तुम्हारे साथ जबरदस्ती नहीं करुँगी, अगर तुम्हारा मन करे तो बाद मुझे इशारा कर देना और मैं अशोक को संभाल लुंगी. मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे पति को रिचार्ज कर दो ताकि कुछ समय तक इसकी चार्ज बैटरी का मैं उपयोग कर सकू.”

तभी सामने से अशोक की गाड़ी आते हुए दिखाई दी. वो भी हमारे साथ आकर बैठ गया. हम लोग पानी में जाना चाहते थे पर अपने साथ कोई कपड़े नहीं लाया था. सब सुबह ही बेग में पैक कर दिए थे. हम नदी के किनारे पड़े पत्थरो पर बैठ गए.

अशोक: “बचपन में मैं तालाब में खूब नहाया हुआ हूँ, सारे कपडे खोल कर.”

डीपू: “तो अभी कौन रोक रहा हैं?”

अशोक: “अब बड़े हो गए हैं तो शरम आती हैं.”

डीपू: “हम चारो के अलावा कौन देख रहा हैं? कोई भी नहीं हैं यहाँ.”

अशोक: “अपनी बीवी और दोस्त के सामने तो नंगा हो सकता हूँ पर पायल के सामने!”

डीपू: “अभी थोड़ी देर पहले ही तो ना सिर्फ नंगे हुए बल्कि पायल को तुमने चो… समझे.”

पायल: “अशोक तुम्हारी इच्छा हैं तो जाओ पानी में मुझे कोई ऐतराज नहीं, अब कैसी शर्म.”

अशोक: “अकेले शर्म आएगी, डीपू तुम भी चलो. इसी बहाने अपना पाप भी धो लेंगे.”

डीपू: “ठीक हैं, वैसे भी पानी में भीगने में मजा आता हैं”.

अशोक और डीपू अपने सारे कपड़े किनारे पर उतार कर पानी में चले गए. घुटनो के ऊपर तक पानी था. वो वहा बैठ गए और पानी उछाल मजे लेने लगे. वो हम दोनों पत्नियों को भी बुला रहे थे पर हमारे पास भी अतिरिक्त कपड़े नहीं थे तो मना कर दिया.

अशोक: “अरे आ जाओ, पानी में मजा आ रहा हैं. जीन्स टीशर्ट निकाल कर, अंदर के कपड़ो में आ जाओ, कपड़े तो सुख जायेंगे.”

पायल: “नहीं, मेरी इच्छा नहीं हैं.”

मैं: “मेरे तो अभी तक थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा हैं, मैं नहीं आ सकती.”

डीपू: “फिर तो तुम्हे जरूर आना चाहिए. पानी के बहाव से एक मसाज जैसा फील होगा और तुम्हारा दर्द चला जायेगा. पानी के बहाव के विरुद्ध पाँव खोल कर बैठ जाना.”

मैं: “नहीं मेरे कपडे इतनी जल्दी नहीं सूखेंगे. मैं बाद में गीले कपडे नहीं पहन सकती.”

पायल: “अरे तो उतार कर आ जाओ ना, वो दोनों भी तो बैठे हैं ऐसे ही.”

मैं: “कैसी बातें कर रही हैं, वो लड़के हैं.”

डीपू: “कर दिया ना लड़को और लड़की में भेद.”

अशोक: “अरे अब छुपाने को क्या रखा हैं, कल से ही तो हम सब देख रहे हैं.”

मैं: “पायल तुम भी चलो, मुझे अकेले शरम आएगी.”

पायल: “अरे यहाँ ओर कौन हैं, वो दोनों भी तो नंगे हैं. तुम जाओ, मैं बाद में आ जाउंगी.”

इस दर्द के साथ शाम को लम्बा सफर करना मुश्किल होगा, ये सोच मैंने अंदर जाने का मन बना लिया. मैंने अपनी जीन्स और टीशर्ट उतार दिया. फिर एक एक करके अपना ब्रा और पैंटी भी निकाल कर दूसरे कपड़ो के साथ रख दिया.

अब मैं जलपरी की तरह धीरे धीरे पानी में उतरने लगी. दोनों मर्द मुझे मुँह फाड़ कर देख रहे थे और तरस रहे थे.

अशोक और डीपू एक दूसरे सामने थोड़ी दुरी पर बैठे थे. अशोक पानी के बहाव की दिशा में मुँह किये हुए थे और डीपू बहाव के विरुद्ध.

मैं उन दोनों से थोड़ा पहले पानी के बहाव के विरुद्ध बैठ गयी और अपने दोनों पाँव खोल लिए. पानी मेरे कंधो के नीचे तक आ रहा था. पानी का बहाव मेरे शरीर से टकरा रहा था. खास तौर से मेरे नीचे के दोनों छेदो से टकरा कर मुझे बहुत राहत मिल रही थी.

दस पंद्रह मिनट तक बातें चलती रही और मेरी पानी वाली मसाज होती रही. फिर मुझे नीचे के कंकर पत्थर चुभने लगे तो मैं खड़ी हो गयी.

डीपू : “क्या हुआ अच्छा नहीं लगा क्या मसाज?”

मैं: “मसाज तो अच्छा लग रहा हैं पर नीचे छोटे छोटे पत्थर चुभ रहे हैं.”

अशोक: “तो इधर आओ, मेरी गोद में बैठ जाओ.”

मैं: “नहीं, तुम पानी के बहाव के साथ बैठे हो, मुझे उसके विरुद्ध बैठना हैं.”

डीपू: “एक काम करो मेरी गोद में बैठ जाओ.”

मैंने अशोक को देखा, उसने कहा “हां, बैठ जाओ, बैठना हैं तो.”

वो किस्मत वाला होता है जिसे एक हॉट देसी पड़ोसन मिलती है, और ऊपर से जब किसी पड़ोसन की कुवारी चूत चोदने का मोका मिले तो क्या ही कहने. देसी कहै पर आप ऐसी बहुत सी लेटस्ट सेक्स स्टोरीज इन हिन्दी पढ़ सकते है.

मैं अब डीपू के पास गयी और पलट कर उसकी गोद में बैठ गयी. पाँव खोल दिए और फिर मसाज लेने लगी. उसकी गोद में बैठने से थोड़ा कुशन मिला.

थोड़ी देर के लिए मैं ये भूल ही गयी थी कि उसने भी नीचे कपड़े नहीं पहने हैं. मैंने ये महसूस किया कि मेरी नरम गांड के संपर्क से उसका लंड कड़क होने लग गया था.

वो अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ टिकाये बैठा था. पानी के अंदर ही वह अब अपना एक हाथ आगे लाया और मेरी जांघो को दबा कर मेरी चूत को छू इशारा कर रहा था कि मैं उसका लंड अपने अंदर ले लू.

मैंने उसका हाथ दबा कर जैसे इशारा किया कि मैं ये नहीं कर सकती.

दो बार मना करने के बाद उसने अपना हाथ मेरी चूत पर रख मालिश करने लगा. मेरे अंदर फिर वासना की तरंगे उठने लगी. उसका लंड मेरी गांड के नीचे दबा था.

मैं थोड़ा उठते हुए ऊपर खिसकी और उसका लंड नीचे से निकाल मेरे आगे कर दिया. उसका लंड अब मेरी चूत को दबाये हुए था.

मैं अब अपना एक हाथ उसके लंड पर रख रगड़ने लगी. वो हलकी हलकी सिसकी मारने लगा. वो अपने दोनों हाथ फिर पीछे टिका कर बैठ गया और मेरे हाथ की मसाज का लुत्फ़ उठाने लगा.

थोड़ी देर बाद हमने देखा कि पायल भी अपने कपडे उतार रही हैं. दोनों मर्द सीटी बजा चिल्लाने लगे. पायल ने अपने सारे कपड़े निकाले और पानी में आकर बोली “कहा बैठु मैं?”

अशोक: “अब बस मेरी गोद खाली हैं.”

पायल: “चलो पहली बार एक औरत आदमी की गोद भरेगी.” बोलकर पायल अशोक की गोद में बैठ गयी.

डीपू बार बार अपने होंठ मेरी पीठ पर लगा चूमने लगा. मैं एक बार फिर थोड़ा उठी और उसका लंड अपनी चूत में घुसा दिया. इतनी देर पानी की मसाज के बाद मेरी चूत फिर तैयार थी एक नया दर्द लेने के लिए.

अब डीपू नीचे से ही हलके हलके धक्के मारते हुआ अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर कर रगड़ रहा था. थोड़ी देर तक ऐसे ही हम धीरे धीरे मजे लेते रहे.

जैसे ही अशोक दूसरी ओर देखता डीपू दो चार झटके जल्दी जल्दी मार लेता. पर हमें लगातार तेज झटको की जरुरत थी.

पायल ने हमारी हालत समझ ली थी. पायल ने बोला कि वो और अशोक दोनों अब किनारे पर जा रहे हैं. जैसे ही वो पलटे डीपू ने जोर जोर से झटके मारने शुरू कर दिए.

फिर पायल किनारे पर जाकर इस इस तरह लेटी कि उसका सर पानी के बाहर किनारे पर था जब कि पीठ से लेकर पाँव तक पानी में डूबे थे. अशोक भी उसके पास जाकर इसी तरह लेट गया.

उन दोनों के मुँह किनारे की तरफ थे, तो हम दोनों इसका भरपूर फायदा उठाते हुए चोदने के मजे लेने लगे. पानी में चुदने का मजा ही अलग था.

मैंने पायल की तरफ देखा और मुझे ग्लानि हुई, मुझे लगा मैं इतना स्वार्थी नहीं हो सकती. मैंने डीपू को कहा और हम चोदना छोड़ उनकी तरफ बढे.

हम लोग भी किनारे पर आ गए. डीपू जाकर कोक की दो बोतल ले आया.

डीपू: “आज मैं तुम सब को एक अलग तरीके से कोक पीने का तरीका बताता हूँ. पायल, ज़रा पानी से बाहर आकर सीधी लेट जाओ.”

पायल किनारे से थोड़ा आगे जा कर सीधा लेट गयी. डीपू ने थोड़ा कोक उसकी नाभी के छेद में डाला और अपने होंठ उसकी नाभी पर रख कोक को चूस लिया. पायल की एक आह निकली.

उसने कुछ घूंट इसी तरह ओर पिए और पायल को मीठी गुदगुदी होने लगी.

डीपू: “बोतल से पीने पर इतना स्वाद नहीं आ पाता.”

अशोक: “क्या बात कर रहे हो?”

डीपू: “आओ, तुम भी ट्राय करो.”

अशोक ने मुझे भी पायल के पास एक हाथ दूर लेटाया और मेरे और पायल के बीच आकर बैठ कर थोड़ा कोक मेरी नाभी में डालने लगा पर डीपू ने टोक दिया.

डीपू: “प्रतिमा की नाभी तो सपाट हैं, क्या पियोगे? इधर मुड़ो, पायल की नाभी से पियो.”

अशोक पायल की तरफ मुड़ा और डीपू ने थोड़ा ओर कोक पायल की नाभी पर डाला और अशोक ने मजे लेते हुए चूस लिया. पायल को मजा आ रहा था अपने पेट पर होती चुम्मियो से.

डीपू: “अशोक, अब हम दोनों एक साथ पीयेंगे. रेडी?”

अब डीपू ने थोड़ा थोड़ा कोक पायल के दोनों निप्पलो पर डाल दिया और झुक कर पायल के निप्पल चूसने लगा. पर अशोक ठिठक कर रुक सा गया. डीपू निप्पल चूसने के बाद सीधा हुआ.

डीपू: “ये ओर ज्यादा मजेदार था, तुमने नहीं पिया? क्यों शरमा रहे हो? अच्छा प्रतिमा तुम आओ.”

मैं आगे बढ़ कर पायल के करीब आयी और डीपू ने फिर थोड़ा कोक पायल के दोनों निप्पलो डाल दिया और मैं और डीपू एक साथ पायल के मम्मो पर टूट पड़े. पायल जोर से सिसकियाँ मारते हुए कराहने लगी.

मैं: “हम्म, मस्त टेस्ट हैं. ऐसे पीने से टेस्ट तो बढ़ जाता हैं.”

डीपू: “चलो अशोक, अब तुम भी ट्राय करो.”

मैं पीछे हट गयी और अशोक को आगे आने की जगह दी.

फिर डीपू ने थोड़ा कोक पायल के बड़े मम्मो के बीच की गली में डाल दिया. अशोक घबरा कर रुक गया. पायल के बड़े मम्मो की ऊंचाई से कोक रिसते हुए उसकी नाभी तक आ गया.

डीपू : “जल्दी पियो, नीचे गिर जाएगा कोक.”

अशोक ने जल्दी से अपनी जीभ पायल की नाभी पर रखी और कोक चाटते हुए अपनी जीभ पायल के मम्मो के बीच की गली तक ले आया.

पायल ने एक सिसकी निकाली और मजे में तड़पते हुए अपनी पीठ जमीन से थोड़ी ऊपर उठा दी.

डीपू ने अशोक को रेडी रहने को कहा और कोक पायल के एक निप्पल पर डाल दिया, अशोक ने जल्दी से उसका निप्पल अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा. पायल की फिर सिसकिया निकलने लगी.

हम दोनों मिलकर अशोक और पायल को करीब लाने में लग गए थे. क्या हम कामयाब हो पाएंगे? या हम दोनों को भी एक आखिरी मौका मिलेगा?

पेश है आपके लिए दोस्त की बीवी की चुदाई की कहानी का अगला एपिसोड.. हम पायल और अशोक को साथ लाने में कामयाब हो गए और वो दोनों चोदने लगे. साथ ही डीपू ने अशोक के सामने मेरा फायदा उठाने की कोशिश शुरू कर दी.

पायल की प्यास शांत करने और अपने पापो का प्रायश्चित करने हम पायल और अशोक को करीब लाने में लग गए थे, शरीर से कोक चाटने के खेल के जरिये. अशोक भी मजे लेते हुए पायल के शरीर को चाट रहा था.

अशोक का लंड कड़क हो चूका था और पायल के बदन पर रोंगटे खड़े हो गए. डीपू ने अशोक को बोला रेडी और थोड़ा कोक पायल की चूत के थोड़ा ऊपर के बालों में डाल दिया. अशोक के होंठ पायल की चूत के बालों में उलझ गए और वहा फंसा पानी पीने लगे.

पायल रह रह कर तड़प रही थी. मैंने पायल के सर की तरफ जाकर उसके दोनों हाथों को ऊपर कर पकड़ लिए. डीपू ने थोड़ा कोक उसकी कांख की प्याली में भर दिया.

अशोक अपने बहाव में पायल की कांख से कोक सुड़क सुड़क कर पीने लगा और फिर उसके कांख के बालों में उलझा कोक चाटने लगा. पायल का मस्ती में कराहना अशोक को अच्छा लग रहा था.

डीपू ने फ़िर पायल की दूसरी कांख में भी यही दोहराया. डीपू ने पायल की टांग घुटनो से मुड़ा कर पाँव चौड़े कर दिए. मैं भी पायल के हाथ छोड़ कर उसकी दूसरी तरफ जाकर बैठ कर देखने लगी, जहा डीपू बैठा था.

अब डीपू ने अशोक को तैयार रहने को कहा और थोड़ा कोक पायल की चूत के थोड़ा ऊपर गिराया जो रिसता उसकी चूत की दरारों में उतर गया.

अशोक ने अपनी जबान वहा रखी जहा कोक गिराया था और वहा से चाटना शुरू करते हुए उसकी चूत की दरारों में उतर चाटने लगा.

पायल अब लगातार आहह्ह्ह आहह्ह्ह करते सिसकियाँ निकाल रही थी और अशोक सब भूल कर बहुत देर तक उसकी चूत ही चाटता रहा. मैं पायल के पास ही लेट गयी और कौतुहल से देखने लगी.

थोड़ी देर बार अशोक का नशा उतरा तो उसको अहसास हुआ कि वो क्या कर रहा हैं. फिर वो पीछे हटा और अपराधी की भांति डीपू को देखने लगा.

डीपू मेरे पांवो के पास ही बैठा था. उसने अशोक की तरफ हंस कर देखते हुए मेरी टाँगे चौड़ी कर दी और बहुत सारा कोक मेरी चूत पर गिरा दिया और अपना मुँह मेरी जांघो के बीच फंसा कर, होंठ मेरी चूत पर रख थोड़ी देर तक चाटता रहा. मैं उसके सर के बालो को पकड़ सिसकियाँ निकालने लगी.

अशोक मुझे ही देख रहे थे. उन्हें लगा उनकी गलती की वजह से डीपू मेरी भी चूत चाट रहा हैं. डीपू ने चाटना बंद किया.

अशोक: “रुको डीपू, हम अपने मजे के चक्कर में इन दोनों को क्यों फंसा रहे हैं?”

डीपू: “अरे देखो, इन दोनों को भी मजा आ रहा हैं. शरम के मारे वो थोड़े ही कुछ बोलेगी.”

पायल: “तुम लोग चिंता मत करो, मजा आ रहा हैं. करते रहो.”

डीपू: “थोड़ा थोड़ा कोक पीने में मजा नहीं आया ना? चलो ज्यादा बड़ा जाम बनाते हैं. अशोक तुम पायल के पैर पकड़ कर ऊपर उठाओ.”

किसी को ज्यादा कुछ समझ नहीं आया, पर अशोक ने पायल की दोनों टांगो को कमर से आसमान की तरफ उठा दिया. पायल ने अपने घुटने मोड़ कर अशोक के कंधे पर टिका दिए.

अब पायल की चूत आसमान की तरफ़ खुली हुई थी. डीपू ने फिर अपनी उंगलियों से पायल की चूत खोल कर उसमे थोड़ा कोक डाल दिया.

पायल की चूत में ठंडा ठंडा कोक जाते ही वो थोड़ा हिल गयी.

अशोक ने जल्दी से पायल की चूत पर मुँह लगाया और कोक चूसने लगा. पायल की चूत के पानी से कोक मिलकर एक कॉकटेल बन गयी जो अशोक मजे लेकर पी गया और फिर चाटता रहा. पायल आहें भरते हुए मजे में चिल्ला रही थी.

फिर अशोक ने अब पायल को फिर नीचे लेटा दिया.

डीपू: “अब मेरा नंबर, अशोक ये कोक पकड़ो.”

अब डिपू मेरी तरफ बढ़ा और मेरे पैर पकड़ लिए और ऊपर उठाने लगा.

मैं: “नहीं डीपू, मेरे साथ नहीं. मुझे ठंड बर्दाश्त नहीं होती. प्लीज, अशोक रोको.”

डीपू: “अरे इतनी देर से बोतले पड़ी हैं, अब ठंडी नहीं हैं.”

तभी डीपू ने मुझे भी उसी तरफ कमर से ऊपर उठा कर पकड़ लिया. उसका मुँह मेरी चूत के करीब था.

डीपू: “अशोक, अब कोक डालो.”

अशोक ने आकर मेरी चूत पर थोड़ा कोक डाला जो रिस कर नीचे उतर गया.

डीपू: “अरे थोड़ा खोल कर छेद में डालो. पूरी प्याली भर दो.”

अशोक ने अपनी उंगलियों से मेरी चूत खोली और अंदर थोड़ा कोक भर दिया. डीपू ने अपना पूरा मुँह खोल कर मेरी चूत को कवर कर लिया और अब मेरी चूत के पानी का कॉकटेल पीने लगा.

मैं रह रह कर प्रेशर निकालते हुए कोक चूत से थोड़ा थोड़ा बाहर निकाल रही थी और डीपू उसे मजे से पी रहा था. मैं नीचे आहें भरते हुए चिल्ला रही थी.

जब उसका मन भर गया तो उसने मुझे फिर नीचे लेटा दिया.

मैं: “तुम लोगो के करो तो पता चलें कितना ठंडा था?”

डीपू: “हमारे भी करते हैं रुको.”

ये कहते हुए हुए डीपू ने थोड़ा कोक अशोक के लंड पर डाल कर गीला कर दिया.

डीपू : “चलो आगे बढ़ो, पायल इंतज़ार कर रही हैं.”

अशोक ने मेरी तरफ देखा और मैंने दूसरी तरफ देखना शुरू कर दिया जैसे मुझे इससे कोई लेना देना नहीं.

फिर अशोक आगे बढ़ा और पायल के मम्मो के ऊपर जा बैठ गया. पायल के मोटे मम्मे अशोक की गांड के नीचे दब कर पिचक गए.

अशोक ने आगे झुक कर अपना लंड पायल के मुँह तक ले आया और पायल ने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया.

अब अशोक आगे पीछे झटके मारता हुआ पायल के मुँह को चोदने लगा. इस बीच डीपू ने अपने लंड को भी कोक से गीला किया और मेरे मम्मो को अपनी गांड से दबाते हुए बैठ गया. मैंने अपना मुँह उसके लंड के लिए खोल दिया और उसने भी मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद अशोक की नजर मुझ पर पड़ी. मैं डीपू को हलका धक्का देते हुए हटाने लगी. वो दोनों एक दूसरे की बीवियों के ऊपर से हट गए.

मैं: “छी, गन्दा. मुँह में क्यों डाला? मुझे अच्छा नहीं लगता.”

वो दोनों हंस पड़े और मजाक में टाल दिया.

डीपू ने पायल के सिरहाने जाकर उसके दोनों हाथ ऊपर की तरफ कसकर पकड़ लिए और बोला “अशोक पायल के ऊपर आओ, उसको अब अधूरा मत छोडो, वो तुम्हारे लिए ही तड़प रही हैं.”

अशोक उसको देखता ही रह गया. एक बार तो उसको यकीन नहीं हुआ कि डीपू क्या कह रहा हैं.

डीपू: “चिंता मत करो, इसके बदले मैं तुम्हारी बीवी के साथ कुछ नहीं करूँगा.”

अशोक मेरी तरफ देखने लगा.

मैं: “मुझे पता हैं तूम भी यही चाहते हो और पायल भी. मेरी तरफ मत देखो, तुम वही करते हो जो तुम्हारा मन करता हैं.”

मैंने कोक की बोतल उठायी और सारा कोक पायल के सीने से लेकर चूत तक गिरा खाली कर दिया. अशोक पायल के पुरे बदन को चाटने लगा और चाटते हुए पायल के ऊपर चढ़ गया.

प्रदीप की बहन नेहा की अल्हड जवानी जब निखर रही थी, तभी उसे अपनी मामा की बेटी की चुदाई करने का मोका मिला. इसके साथ साथ देसी कहानी पर पढ़िए दोस्त की बीवी की चुदाई की कयानियाँ फ्री में!

फिर उसने बिना देरी किये अपना लंड पायल की चूत में घुसा दिया और जोर से झटके मारते हुए चोदने लगा. पायल जोर जोर से सिसकियाँ मारने लगी और अशोक ने भी उसकी सिसकियों में साथ देना शुरू कर दिया.

डीपू ने पायल के हाथ छोड़ दिए और पायल ने अशोक की पीठ को कसकर पकड़ लिया. पायल के दोनों पाँव अजगर की तरह अशोक की कमर से लिपटे हुए थे.

डीपू मेरे पास आया और हम दोनों बैठ कर अपने साथियों को मजे लेते हुए देखने लगे. इस बीच मैं डीपू के लंड को सहला रही थी तो वो मेरी चूत और मम्मो को.

अशोक और पायल के बदन कोक से चिपके हुए थे और उनके झटको के साथ पुरे बदन से चप चप की आवाजे आ रही थी.

अंत में तो ये चप चप की आवाज पायल की चूत से आने वाली फच्चाक फच्चाक की आवाज़ों से दब गयी.

अशोक अब पायल के ऊपर से उठा और घुटनो के बल बैठ पायल के दोनों पैरो को को ऊपर उठा फिर से चोदने लगा. अशोक अब पायल को और गहराई से चोद रहा था.

पायल : “प्रतिमा मेरे मुम्मे चुसो.”

मैं पायल के ऊपर झुक कर उसके मम्मे चूसने लगी और पायल की आहें बढ़ने लगी. तभी डीपू मेरे पीछे आया और मेरे कूल्हे पकड़ कर मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू कर दिया. मैंने पायल के मम्मो को चूसना छोड़ दिया और आहें भरने लगी.

मैं: “आह्ह… डीपू , क्या कर रहे हो? अशोक, … डीपू मुझे चोद रहा हैं.”

अशोक सब देख रहा था पर पायल को चोदने की मदहोशी में सब नजरअंदाज कर रहा था. मैं भी एक लाचार बीवी की तरह नाटक करते हुए मजे लेकर चुदवा रही थी. और रह रह कर अशोक से बचाने की गुहार कर रही थी.

मुझे लगा अगर मैं गर्भवती हुई तो इल्जाम अशोक के सर मढ़ सकती हूँ कि उसने मुझे नहीं बचाया जब डीपू मुझे चोद रहा था. मैंने थकी हुई आवाज में अशोक को कहा.

मैं: “अशोक, डीपू को मुझे चोदने से रोको. अगर डीपू ने पूरा कर दिया तो मैं माँ बन जाउंगी.”

अशोक को एकदम झटका सा लगा और उसने पायल को धक्के मारना बंद कर दिया, पर उसका लंड अभी भी पायल की चूत में ही था. डीपू भी मुझे चोदते चोदते रुक गया.

अशोक: ‘डीपू, तुमने वादा किया था कि मेरे पायल को चोदने के बदले तुम्हे कुछ नहीं चाहिए पर अब तुम जबरदस्ती कर रहे हो.”

मेरा प्लान कामयाब नहीं हुआ. ना तो गर्भवती होने पर इल्जाम डीपू पर डाल पाऊँगी और ऊपर से मैं अधूरा भी छूट गयी. कम से कम एक काम तो मुझे पूरा करना ही था. मैं नाराज हो कर वहा से उठ कर जाने लगी.

वो दोनों मुझे रोकने लगे.

डीपू: “सॉरी, अशोक. मुझे लगा प्रतिमा की भी पायल को देख कर इच्छा हो रही होगी इसलिए मैंने किया. मैं प्रतिमा से माफ़ी मांग लेता हूँ और उसको समझा बुझा कर वापस लेकर आता हूँ. तुम अपना काम जारी रखो.”

मैं गाड़ी के दूसरी तरफ आ गयी और पीछे पीछे डीपू और अशोक भी आ गए. वो दोनों मुझसे माफ़ी माँगने लगे.

डीपू: “अरे नाराज मत हो, चल इधर आ.”

फिर डीपू ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे गले लगा दिया और पीठ सहला कर मुझे झूठी सांत्वना देने लगा.

डीपू: “अशोक, तुम जाओ पायल के पास, मैं इसे मना कर लेकर आता हूँ.”

अशोक वहा से चला गया. डीपू ने मुझे गाड़ी के दरवाजे से चिपका दिया और हाथ ऊपर कर के पकड़ कर अपना शरीर मेरे शरीर से चिपका दिया. मेरे मम्मे उसके सीने से दब गए और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.

हमने गाड़ी की खिड़की के शीशो से देखा, अशोक पायल को बेतहाशा चोद रहा था. इससे पहले की उन दोनों का काम हो जाये हमे हमारा काम करना था.

डीपू ने एक एक कर मेरी दोनों टाँगे उठाई और मुझे कार के बंद दरवाजे से सटा कर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर खड़ा खड़ा ही चोदने लगा.

हमें दूर से पायल के चीखने की आवाजे आ रही थी, तो मैंने अपनी आवाज दबा कर रखने में ही भलाई समझी. ये बहुत मुश्किल काम था, खासकर जब डीपू के जैसा लंबा लंड आपकी चूत को आरी की तरह काटता हुआ अंदर तक दस्तक दे रहा हो.

अपनी आवाज तो मैं दबा रही थी पर मेरी चूत से आने वाली थप थप और फच्च फच्च की आवाजों पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं था, पर वो इतनी तेज भी नहीं थी कि आस पास की आवाजों के होते हुए अशोक तक पहुंच जाए.

कुछ देर इसी अवस्था में मैं अपनी पीठ गाड़ी के सहारे टिका और दोनों पैर हवा में लटकाये चुदवा रही थी. इस चुदाई में पता ही नहीं चला कि पायल की आवाज कब बंद हो गयी और तभी हमें हमारे करीब कुछ आहट सुनाई दी. हमने चौंक कर दाई तरफ देखा तो पायल थी.

पायल: “डरो मत, तुम लोग अपना काम करके उधर आ जाओ. अशोक शरम के मारे तुम्हारा सामना करने की हिम्मत नहीं झूटा पा रहा हैं. तुम्हे कुछ हेल्प चाहिए तो बोलो.”

मैं: “बस अशोक को संभाल कर रखना, इधर ना आ जाये.”

पायल: “डोंट वरी, नहीं आएगा. तुम्हे कितना टाइम लगेगा?”

डीपू: “अभी तो शुरू किया हैं. आखिरी बार हैं तो दस पंद्रह मिनट ओर दो.”

पायल: “ठीक हैं, कोई जल्दी नहीं. आराम से चोदो.”

मैं: “तुम्हारा कैसा रहा अशोक के साथ?”

पायल: “एकदम मस्त, दो दिन से इतना पास आकर भी तड़प रहा था तो सारा प्यार निकाल दिया मुझ पर.”

मैं: “एक राउंड ओर कर लो.”

पायल: “नहीं बाबा, मशीन थोड़े ही हूँ. चलो मैं जाती हूँ, तुम लोग आ जाना आराम से.”

पायल के जाने के बाद डीपू और मैंने जम के हमारी आखरी चुदाई का आनंद लिया. डीपू ने थोड़ी देर मुझे डॉगी स्टाइल में चोदा तो थोड़ी देर मैंने उस पर चढ़ कर चोदा और एक दूसरे को अपने रस से भीगा दिया.

मैं और डीपू बाहर आये और देखा पायल और अशोक पानी में नहा रहे हैं. हम दोनों भी पानी में जा पहुंचे.

डीपू: “अशोक, मैंने प्रतिमा को अच्छे से समझाया हैं और उसने तुम्हे माफ़ कर दिया हैं.”

पायल और डीपू ने मिलकर मुझे और अशोक को गले लगवा कर मेरी नकली नाराजगी दूर करवाई.

उसके बाद हम चारो ने एक साथ नहाने का आनंद लिया. फिर हम लोग कपडे पहन कर होटल लौट आये अपने बेग लेने के लिए.

विदा होने से पहले पायल ने मुझे अकेले में धन्यवाद दिया और कहा कि जल्द ही हम फिर किसी घूमने के कार्यक्रम में मिलेंगे और डीपू को रिचार्ज करेंगे. शायद अगली बार हम मिले तो पायल की चूत के बाल साफ़ मिले.

अशोक के साथ घर लौटते वक़्त रास्ते में याद आया कि डीपू ने इमरजेंसी पिल तो लाकर ही नहीं दी. अब मेरा क्या होगा? ये तो मेरी आत्मकथा की इस श्रृंखला की अगली कहानी में ही पता चलेगा.

वैसे आप कॉमेंट कर के बता सकते हैं कि पहली रात को अशोक जब लौटा था, तो उस के अंग गीले क्यों थे? मुझे लगा था कि शायद पसीने की वजह से हुआ होगा.

अशोक को डायरी लिखने का बहुत शौक हैं, ये मुझे अच्छे से पता था. हिल स्टेशन से घूम कर आने के दो दिन बाद, एक बार वह अपना लैपटॉप खुला रखकर जल्दी में बाथरूम में चला गया.

मैंने उत्सुकतावश उसकी डायरी के पन्नो की फोटो ले ली. आज का बोनस एपिसोड अशोक के साइड की कहानी हैं उन दो दिनों में हिल स्टेशन पर उसके साथ क्या हुआ.

पहला दिन:

हम होटल पहुंच चुके थे पर राज अपनी वाइफ के साथ अभी तक नहीं आया था. काफी समय बाद राज से आमने सामने मिलना होगा, पर असल इंतज़ार राज का नहीं पायल से मिलने का था.

जिस दिन से राज की शादी में पायल को उस दुल्हन के लिबास में देखा था उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया था.

उस दिन मैं ये कामना कर रहा था कि कोई चमत्कार हो और मेरे दोस्त का मेरे प्रति प्यार जाग जाये और उसकी बजाय मुझे सुहागरात मनाने दे पायल के साथ.

खैर वो कामना तो पूरी हो ना सकी, पर उसके बाद जब जब पायल मेरे सामने आती मेरा मुझ पर काबू रखना बहुत मुश्किल हो जाता.

आज काफी समय बाद मैं एक बार फिर पायल को फिर देख पाउँगा, ये विचार आते ही मेरे शरीर में एक अजब सी सिहरन हो रही थी.

आखिर राज का फ़ोन आया कि वो होटल पहुंच चुके हैं. मैं तो मिलने को तड़प रहा था और एक मिनट भी ओर नहीं रुकना चाहता था. पर प्रतिमा ने रोक दिया कि वो लोग थके आये हैं तो फ्रेश होने को थोड़ा समय दिया जाये.

एक एक सेकंड मुश्किल था पर फिर मिलना हुआ. पायल का खूबसूरत चेहरा एक बार फिर देख कर जैसे दिल की प्यास बुझ सी गयी. राज को गले लगाया, सोचा काश पायल भी गले लग जाए तो दिल को थोड़ा सुकून मिले, पर वो तो हुआ नहीं.

पायल का वजन थोड़ा बढ़ा हुआ लग रहा था, पर उसका आकर्षण ऐसा था कि मेरी नज़रे उस पर से हट नहीं रही थी. मेरा तो उसको देख कर मन भी नहीं भरा था कि उसकी थकान की वजह से हम तीनो को वहा से जाना पड़ा.

फ़ोन की घंटी बजी, विश्वास नहीं हुआ कि पायल का फ़ोन था.

उसने मुझे ये बताने से रोका कि फ़ोन उसने किया हैं और मुझे बिना किसी को बताये अपने कमरे में आने को कहा. मुझे समझ नहीं आया क्या हुआ. मैं रिसेप्शन से फ़ोन आने का बहाना बना पायल के कमरे पर पंहुचा. रास्ते में मैं यही सोच रहा था कि क्या वो भी मेरी तरफ आकर्षित थी.

पायल ने मुझे बताया कि राज का शायद किसी ओर महिला से चक्कर चल रहा है. राज काफी समय से उससे ढंग से बात नहीं करता और बहुत कुछ छुपाता हैं.

फिर पायल ने मुझे कुछ नंबर भी दिए जो उसके हिसाब से राज की महिला मित्र के थे. वो मुझसे चाहती थी कि मैं उन नम्बरो पर फ़ोन करके उसको बताऊ कि वो कौन लोग हैं.

मैं तुरंत बाहर गया और पब्लिक फ़ोन से उन नंबरो को घुमा कर पता करने की कोशिश की कि वो किसके हैं. उनमे से एक नंबर किसी महिला ने उठाया था. ज्यादा तो कुछ पता नहीं चल पाया पर जो भी मालुम चला मैंने आकर पायल को बता दिया.

वो बहुत रुआंसी हो गयी थी, मैंने उसको सांत्वना देने की कोशिश की. उसका रोता हुआ चेहरा देख कर मुझे अच्छा नहीं लग रहा था. वो मेरे कंधे पर सर रख कर रोने लगी. मेरे तो पुरे तन बदन में आग लग गयी जब उसने मुझे पहली बार छुआ.

मेरा हाथ बरबस ही उसकी पीठ और कंधो पर था और उसे ढांढस बंधा रहा था. उसका एक मम्मा मेरे सीने को छू रहा था और उसके उन नाजुक अंगो को छु जाने से मेरे शरीर में करंट दौड़ गया.

उसके दूसरे मम्मे के आगे का नुकीला भाग मेरे सीने को थोड़ी थोड़ी देर से चुभ रहा था. पैंट में मेरा लंड खड़ा हो गया था.

इससे पहले कि मैं अपने आप से नियंत्रण खो दू और पायल की नजरो में गिर जाऊ, मैंने उसको अपने आप से दूर किया और उसको चिंता ना करने की सलाह दी. मैंने उसको वादा किया कि मैं राज से बात करूँगा और उसको समझाऊंगा.

मैं उसके कमरे से तो बाहर आ गया पर सोचने लगा मैंने एक अच्छा मौका खो दिया. थोड़ी सी और देर में वो शायद मेरे सामने आत्मसमर्पण कर देती.

मेरा लंड अभी भी कड़क था, अपने कमरे में जाने की इच्छा नहीं थी. मैं रिसेप्शन के पास बने बाथरूम में पंहुचा और पायल को अपने सामने सोचते हुए मैंने हस्तमैथून किया.

रिसेप्शन से जाकर थोड़ी जानकारी जुटाई और फिर अपने रूम पर आ गया.

प्रतिमा मुझसे रात को सोते वक़्त शायद कुछ उम्मीद कर रही थी और मेरे पाजामे में भी हाथ डाल दिया था. पर मेरा तो हो चूका था तो उसकी मदद नहीं कर पाया.

दूसरा दिन:

सुबह पायल का मिजाज बिलकुल बदला हुआ था. कल शाम को जितना निराश लग रही थी आज उतना ही खिली खिली थी. शायद कल रात को मेरी सांत्वना से उसको अच्छा लगा या फिर राज हिल स्टेशन के माहौल में आकर बदल गया था.

शायद पहला कारण ही सही था, पायल सुबह से ही मेरे साथ रही, वो मुझसे से चिपक चिपक कर फोटो ले रही थी. कही वो मुझमें रूचि तो नहीं ले रही थी राज की बेवफाई से तंग आकर.

मेरे सारे सवालों का जवाब जल्द ही मिल गया जब पायल ने अकेले जंगल में मौका देखकर मुझे किस कर दिया. पायल के उस पहले चुम्मन को मैं ज़िंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा. उसके वो नरम होंठ और उनसे छूटता प्रेम रस मेरे होठों को गीला कर रहा था.

मुझे ज्यादा कुछ समझ नहीं आया, शायद इतनी देर से मेरे साथ रहने की वजह से वो मुझ पर इतना यकीन करने लगी थी.

आस पास प्रतिमा और राज नहीं थे तो हम एक छुपी हुई जगह आ गए. मैंने पहली बार पायल के वो मम्मे देखे जिनको देखने के लिए मैं सालों से तड़प रहा था.

मेरा पूरा शरीर रोमांच से कांप रहा था. मेरा लंड पायल की चूत में जाने को लालायित हो रहा था. जब वो अंदर घुसा तो जैसे एक बहुत बड़ी राहत मिली. मेरे लंड में इतनी फड़फड़ाहट थी कि अगर मैं उसके अंदर डाल हिलता नहीं तो भी मेरा हो जाता.

ज्यादा समय नहीं हुआ था कि मैंने उसको डॉगी स्टाइल चोदना शुरू किया था कि वो हड़बड़ाहट में हट गयी. मुँह को लगी प्याली जैसे मेरे हाथों से छूट गयी.

जो कुछ भी हुआ उसके लिए वो आरामदायक महसुस नहीं कर रही थी. उसके हाथ थर थर कांप रहे थे जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया हो. शायद उसको पकडे जाने का डर था.

मैंने उसको बहुत समझाने की कोशिश की के इसमें कुछ गलत नहीं, खासकर जब राज खुद ही किसी औरत के साथ चक्कर चला रहा था. पर वो मानने को तैयार नहीं हुई.

हम लोग फिर से कपडे पहन धीरे धीरे आगे चल पड़े. मगर राज और प्रतिमा गुम गए, उनको जल्द ही ढूंढ निकाला, वो दोनों भी हमें ही ढूंढ रहे थे.

शाम को होटल लौटते वक़्त पता नहीं पायल को फिर क्या हुआ कि उसने मुझसे मसाज करवाने की ठान ली. शायद वो राज को जलाना चाहती थी. पायल की मसाज करते मुझे मजा आने लगा था.

आगे जो हुआ उसके बारे में मैं सोच भी नहीं सकता था, पायल एक के बाद एक धमाके कर रही थी और बाकी हम सारे लोग उसका साथ दे रहे.

मुझे पायल के मम्मे दबाने का मौका मिला और फिर हम लोग इतना खुल गए कि मैं उसकी चूत की मसाज भी कर रहा था.

हलांकि पायल के इस खेल में प्रतिमा भी पीस गयी, राज जैसा बेवफा आदमी मेरी बीवी की चूत चाट रहा था और पायल उसका भरपूर साथ दे रही थी, सिर्फ खुद को जिताने के लिए. पायल को अच्छे से पता था कि राज बेवफा हैं फिर वो उसका साथ कैसे दे सकती हैं.

पायल जब मेरी गोद में एक पत्नी के अधिकार की तरह आकर बैठी तो मेरी दिल की कलिया खिल गयी, यहाँ तक कि उसने खुद मेरे हाथ पकड़ कर अपने मम्मो पर रख दिए.

इस चक्कर में बेवफा राज ने प्रतिमा के कपड़ो में हाथ डाल दिया, गुस्सा तो बहुत आया पर पीना पड़ा.

फिर वो साथ में सोने वाला खेल शुरू हुआ, मुझे पायल के नंगे बदन से अपना नंगा बदन छुआने का अवसर मिला और मैंने भी जी भर के मजे लिए, अपनी भावनाये कैसे रोकी मुझे ही पता था.

मैं ये भी भूल गया कि प्रतिमा को राज ने नंगी कर चिपका के लेटा था और उसके अंगो पर हाथ फेर रहा था. पर उस वक़्त मैं स्वार्थी हो गया था.

प्रतिमा और राज के सोने के बाद मैंने अपना गीला लंड पायल की चूत में उतार दिया, पर उसने मुझे तुरंत मना कर दिया. इसके बावजूद मैं उसको झटके मारता रहा कि उसको अच्छा लगेगा पर वो थोड़ा नाराज हो गयी और खुद ही मेरा लंड पकड़ कर बाहर निकाल दिया.

तीसरा दिन:

शायद मैंने राज पर भरोसा कर ये गलती कर दी थी. सुबह उठते ही पायल मुझे यकीन दिलाने लगी कि राज ने प्रतिमा को भी बेवफाई में शामिल कर लिया हैं. मैं ये मानने को तैयार नहीं था. प्रतिमा से बात करके भी मुझे ये बात साफ़ हो गयी थी कि ये भ्रम हैं.

पायल ने मुझे उकसा कर एक बार फिर वही खेल खेला. चादर लगने के बाद मैं और सब्र नहीं कर सका. मैंने पायल की चूत में लंड डाल ही दिया, क्युकी मुझे पता था कि वो मुझे मना कर भी नहीं सकती थी क्युकि सामने राज था.

पर मैं गलत था, उसने राज को अपनी मदद को पुकारा पर राज को ये सब एक जाल लगा और मदद को नहीं आया. कही न कही पायल को भी मजा आने लगा था. मैंने बिना आवाज किये जितना कर सकता था उतना उसको चोदने के मजे लिए.

पर ये खेल शायद मुझ पर ही भारी पड़ा, राज को एक बार फिर मौका मिला प्रतिमा के साथ सोने का. जैसे ही उसका लंड प्रतिमा की चूत के पास आया मुझे बुरा लगा, ये राज भरोसे के काबिल नहीं. पायल ने उन पर चादर डाला फिर तो माहौल बिलकुल ही बदल गया.

मैं मन ही मन जल रहा था कि कही राज कुछ गलत ना कर बैठे. पर प्रतिमा के चेहरे पर चढ़ी मस्ती को देख कर मेरा मन हल्का भी हुआ.

पायल तो उनका चादर खींचने वाली थी. मैं निर्णय नहीं कर पा रहा था कि पायल वो चादर खींचे या ना, अगर खींच दिया और सच में राज प्रतिमा को चोद रहा होगा तो क्या होगा. मैं इसी सच को मान कर आगे बढ़ा कि चादर में कुछ नहीं हुआ था.

कार में जब सजा के बारे में पता चला तो एक बार तो सदमे में आ गया. फिर लगा कही ये मेरा सपना सच होने जैसा तो नहीं. मेरा सदा सपना रहा कि मैं और प्रतिमा किसी ओर जोडे के साथ मिलकर एक दूसरे के पार्टनर को चोदे. दो दो मिनट के लिए ही सही वो सपना कही न कही सच होने जा रहा था.

प्रतिमा जब राज का लंड अपने मुँह में ले चूस रही थी तो मुझे पहले थोड़ी जलन हुई. उसने अपने मुँह में जमा राज का वीर्य थुंका तो मुझे अच्छा लगा कि उसके लिए ये मजा नहीं सच में सजा हैं.

फिर जब राज ने प्रतिमा को चोदना शुरू किया, तो प्रतिमा ने अपना चेहरा मुझसे छुपा लिया. मुझे उसकी नारी लज्जा पर गर्व हुआ.

एक मर्द और औरत की कमजोरी उसके नाजुक अंग होते हैं, जब उसके साथ वो सब कुछ हो रहा था फिर भी उसे मेरा ख्याल था.

उसने अपना शरीर जरूर कुछ मिनटों के लिए राज को दे दिया था पर मन से वो मेरी ही थी. मगर कही न कही मेरा वो एक ओर सपना पूरा कर रही थी. मैं हमेशा उसको किसी ओर के साथ चुदता देखना चाहता था.

राज ने जब प्रतिमा की गांड मारना शुरू किया तो मुझसे उसका दर्द नहीं देखा गया. वो मुझे भी कभी कभार ही अपने पीछे से करने देती थी पर यहाँ तो मज़बूरी थी. राज पर गुस्सा भी आया कि उसने ज़रा भी नरमी नहीं बरती.

यहाँ तक कि वो प्रतिमा की गांड में ही झड़ गया. उन छह मिनटों में मेरा लंड कड़क हो गया था. मैं राज से अपना बदला निकालने के लिए पायल को निशाना बनाना चाहता था.

पायल भी जिस तरह से मेरा लंड मुँह में डाल अच्छे तरीके से हिला रही थी वो कला तो प्रतिमा के पास भी नहीं हैं. मेरा तो पानी वही निकलना शुरू हो गया था और जिस तरह से पायल ने मेरा वीर्य अपने गले के नीचे उतार दिया मुझे लगा कि वो मुझे स्वीकार कर चुकी हैं.

उसके बाद मैंने उसकी चूत को जमकर चोद प्रतिमा का बदला भी लिया. मैं तो उसकी चूत में ही झड़ने वाला था पर कोई बात नहीं मैंने अपना बाकि का काम उसकी गांड में कर के हिसाब चुकता कर दिया.

बाद में सोचा, अच्छा ही हुआ जो सजा का टास्क हुआ, इस बहाने छह मिनट के लिए ही सही, मेरा एक सपना पूरा हुआ पार्टनर की अदला बदली का.

ये भी ठीक ही हुआ की हम चारो के मन में अब कोई गुस्सा या बदले वाली भावना नहीं रही थी. कही ना कही हम चारो ने इसको अच्छे तरीके से निभाया था.

बरसो बाद नदी में नंगे नहाने का आनंद मिला. प्रतिमा को सामान्य होते देख मुझे ख़ुशी हुई. उसे राज से कोई शिकायत नहीं थी और उस घटना को भूल वो एक अच्छे दोस्त की तरह पेश आ रही थी. मेरे कहने पर वो उसकी गोद में भी बैठ गयी.

जब पायल बिना कपड़ो के मेरी गोद में आकर बैठ गयी, तो मेरी शरीर में फिर तरंगे पैदा होने लगी थी. चोदने की इच्छा तो बहुत हो रही थी पर प्रतिमा और राज के सामने कैसे मुमकिन था.

एक बार सोचा वो सजा फिर शुरू हो जाए, और इस बार दो मिनट की लिमिट ना हो.

दोस्तों देसी कहानी पर आपके लिए हजारों देसी इन्सेस्ट स्टोरीज मोजूद है. जिन्हें पढ़ कर आप पूरा लुफ्त उठा सकते है.

राज और प्रतिमा जब पायल के मम्मो को चाट रहे थे तो मेरी भी बड़ी इच्छा हुई और दूसरे आमंत्रण के बाद तो जैसे मैं पायल पर टूट ही पड़ा.

जिसके शरीर को आप पसंद करते हो उसको इस तरह छूने का मौका मिले तो कौन छोड़ेगा. खास तौर से पायल की कोक भरी चूत को चाटने का स्वाद मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूल पाउँगा.

जब राज ने प्रतिमा के चूत पर कोक डाल चाटना शुरू किया, तो मुझे उसकी मंसा समझ में आयी कि मुझे पायल के साथ लगा कर वो प्रतिमा के मजे लूटने चाहता था.

शायद मैं भी उससे यही बात काफी समय पहले कहना चाहता था पर कभी कह नहीं पाया. मैंने उसका बुरा नहीं माना बल्कि अच्छा लगा जिस तरह प्रतिमा सिसकिया निकालते हुए मजे ले रही थी.

औरतो के अंगो को चाटने तक ठीक था पर राज ने मेरा लंड भी पायल के मुँह में डालने को बोल दिया. मुझे लगा सब लोगो का मूड वैसे भी तैयार हैं तो मैं ज्यादा झिझका नहीं.

जब मामला चोदने तक पहुंच गया तो मैं ठिठक गया. मन में चाहता था कि प्रतिमा भी पास में लेटे लेटे मेरी आँखों के सामने चुदवाये.

पर राज ने बोला उसका ऐसा कोई इरादा नहीं और प्रतिमा भी इस बात से खुश थी तो मैं ज्यादा जोर नहीं देना चाहता था.

मैंने पायल को चोदना शुरू कर दिया वो भी राज और प्रतिमा के आँखों के सामने. थोड़ी घबराहट भी थी कि वो दोनों क्या सोचेंगे पर पायल का लाल चेहरा देख कर मैं सब भूल गया.

पहली बार पायल को आगे से चोद कर मजा आने लगा. वो मुझे ओर उत्तेजित कर रही थी.

ज़िन्दगी में पहली बार बिना मज़बूरी के मैं प्रतिमा के सामने किसी और औरत को चोद रहा था. ये सोच कर ही मेरे शरीर में खून तेजी से दौड़ रहा था.

मैं ज्यादा जोर लगाने के लिए बैठ कर चोदने लगा ताकि मैं प्रतिमा का चेहरा भी पढ़ पाता कि उसको कैसा लग रहा हैं. प्रतिमा मेरा साथ देते हुए पायल के मम्मे चूसने लगी. मुझे लगा उसकी भी इसमें रजा हैं और शायद उसकी भी इच्छा हो रही होगी.

मैंने राज को इशारा कर दिया कि वो प्रतिमा को चोद सकता हैं. राज तो मेरे इशारे का ही इंतजार कर रहा था, उसने जल्दी से प्रतिमा को पीछे से ही चोदना शुरू कर दिया.

प्रतिमा थोड़ा विरोध करने लगी पर मुझे लगा वो शर्म के मारे नखरे दिखा रही होगी. पर उसकी चिंता शायद गर्भवती हो जाने की थी. मैंने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज को इशारे से रोका. तब तक प्रतिमा हमसे नाराज हो चुकी थी.

मुझे लगा हमारा खेल बर्बाद हो गया, प्रतिमा अभी इन सब चीजों के लिए तैयार नहीं हुई हैं. हमने शायद जल्दबाजी कर दी. हम दोनों उसको मनाने गए. राज ने आगे बढ़ कर वो जिम्मेदारी संभाली और मुझको फिर पायल के पास भेज दिया.

मैं भी पायल को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता था. वापस पायल के पास आकर मैंने उसको फिर से चोदना शुरू कर दिया था. अब पता नहीं हम दोनों कितने समय बाद मिले इसलिए मुझे अगले काफी समय के लिए एक साथ चोदना था.

खुले आसमान के नीचे किसी दूसरे की बीवी को उसी की इजाजत से चोदने का क्या मजा हैं वो मुझे पता चला. जिसको चोदने के सपने खुली आँखों से देखते हैं अगर उसी को हकीकत में चोदने का मौका मिल जाये तो फिर क्या कहना.

मैं अपना एक सपना जी रहा था. मुझे नहीं पता मेरे लंड ने इतना सारा पानी कभी एक साथ निकाला हो. पायल की पूरी चूत अंदर बाहर से मेरे और उसके पानी से भर चुकी थी.

हम दोनों उठ कर एक साथ नदी में कूद पड़े और एक दूसरे को रगड़ कर नहलाने लगे. मैं तो भूल ही गया कि प्रतिमा नाराज हुए बैठी हैं. पायल उसको लेने गयी और खाली हाथ लौट आयी. पर उसने दिलासा दिया कि वो अब ठीक हैं और थोड़ी देर में आ जाएगी.

राज जब उसको लेकर आया तो प्रतिमा अपनी मदमस्त चाल में चलती हुई आ रही थी. उसके मम्मे चलने के साथ ही उछलते हुए आ रहे हैं थे. उसे देख कर मुझे लग गया कि वो अब मुझसे नाराज नहीं होगी.

उसने आकर मुझे गले लगा कर माफ़ कर दिया. उसने मेरे गुनाह माफ़ कर दिए, वो भी ऐसा गुनाह करती तो शायद मैं भी उसे बड़ा दिल रखते हुए माफ़ कर देता.

जाते जाते मैंने राज को धन्यवाद दिया कि उसने मुझे अपनी बीवी को चोदने का मौका दिया, उसने भी मुझसे वादा लिया कि अगली बार जब हम फिर घूमने जायेंगे तब मैं उसका ये अहसान चुका दू.

मुझे उस दिन का इंतज़ार रहेगा जब हम चारो फिर से एक साथ घूमने जायेंगे, इस बार मैं प्रतिमा को पहले ही इन सब चीजों के लिए तैयार कर लूंगा. मेरा अदला बदली कर चोदने का सपना शायद अगली बार पूरा हो जाये.

डायरी समाप्त

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *