कार में बैठने के बाद मैंने उन्हें कहा-
मैं: जी आपको कुछ बताना है।
राजेश्वर जी: मुझे भी कुछ कहना है।
मैं: ठीक है आप पहले बोलिये।
राजेश्वर जी: मेरे दोस्त मुझे घर में पूजा रखने के लिये कह रहे हैं।
मैं: किस बात की पूजा?
राजेश्वर जी: मेरा घर जल गया इसलिये घर शान्ति की पूजा रखनी है।
मैं: हां, फिर ये तो अच्छी बात है। कहां करनी है पूजा?
राजेश्वर जी: तुम्हारे घर।
मैं: ठीक है। हम इसके बारे में बाद में बात करते है।
राजेश्वर जी: वैसे तुम क्या कहने वाली थी?
मैं: आपके लिये एक सरप्राइज है।
राजेश्वर जी: क्या सरप्राइज है?
मैं थोड़ी आगे झुक गई और उनके कानों में धीरे से बोली, “मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी है” ये सुन कर उनकी आंखें बड़ी हो गई और वो चौंक गए।
राजेश्वर जी: सच में!
मैं: हां बाबा। मैंने साड़ी और ब्लाऊज के अलावा अन्दर कुछ नहीं पहना है।
राजेश्वर जी: ओह दिव्या! इसलिये तुम मुझे अच्छी लगती हो।
ये कह कर राजेश्वर जी ने कार चालू की, और हम होटल में जाने के लिये निकल गए। हम एक 5 स्टार होटल में आ गए। राजेश्वर जी ने गाड़ी होटल के पार्किंग लॉट में पार्क कर दी, और मैं गाड़ी से निकलने वाली थी कि राजेश्वर जी ने मेरा हाथ पकड़ा, और मुझे रोक लिया।
राजेश्वर जी: कहा जा रही हो? अपने पति का लंड तो शांत करो।
मैंने उनकी पैंट के तरफ देखा तो उनका लंड बाहर आने के लिये तरस रहा था।
मैं: जी हां, अभी शांत करती हूं।
मैंने जल्दी से उनका लंड बाहर निकाला और अपना ब्लाऊज उतार दिया। राजेश्वर जी मेरे बूब्स को दबाने लगे, और मैं उनका लंड हाथ में लेके हिलाने लगी। राजेश्वर जी से और रहा नहीं गया। फिर उन्होनें मेरे बाल पकड़े, और खींच के मुझे अपना लंड चुसवाया।
मैं मस्त होकर लंड चूस रही थी, और राजेश्वर जी भी आंखें बंद करके लंड चुसवाने का मजा ले रहे थे। करीब 15 मिनट बाद वो मेरे मुंह में झड़ गए, और मैं एक अच्छी पत्नी की तरह वो सारा माल पी गई।
फिर राजेश्वर जी ने अपना लंड पैंट के अन्दर डाल दिया, और मैंने भी अपना ब्लाऊज पहन लिया, और रुमाल से थोड़ा वीर्य जो मेरे चेहरे पर लगा था, उसे पोंछ लिया। बस जरा सी लिपस्टिक फिर से लगा ली, और मैं गाड़ी के बाहर आ गई।
हम दोनों होटल के अंदर गए और खाना मंगाया। खाना बहुत अच्छा था। राजेश्वर जी और मैं इधर-उधर की बातें कर रहे थे। लेकिन बार-बार राजेश्वर जी मेरे बूब्स को घूर रहे थे। मुझे ये देख कर बहुत मजा आ रहा था। तभी मैंने एक शरारत की।
मैंने जान बूझ कर थोड़ी सी चटनी मेरे बूब्स पर गिरा दी। राजेश्वर जी ने जल्दी से टिशू दिया तो मैंने मना कर दिया। फिर मैंने पहले आस-पास देखा कि कोई देख तो नहीं रहा था। फिर मेरी उंगली से बूब्स पर लगी हुई चटनी ली, और राजेश्वर जी को उसे चाटने बोली। उन्होनें बिना किसी देरी के मेरी उंगली चाटी।
मैं: बस अब तो खुश हो गए? कब से मेरे बूब्स को घूर रहे थे आप।
राजेश्वर जी: क्या करूं, वो है ही इतने सुंदर कि नज़र ही नहीं हट रही मेरी।
मैं: अरे वो तोह आपके ही है, घर जाने के बाद खेल लेना मन भर कर उनके साथ।
राजेश्वर जी और मैं इस बात पर हसने लगे। फिर मैं वाशरूम जाने के लिये उठ गई। मैं वाशरूम में अपने बूब्स साफ करने गई थी। वाशरूम के बाहर आते ही होटल का मैनेजर मुझे देख रहा था। मैं उसे अनदेखा कर दिया और फिर से अपने टेबल पर जा रही थी कि उसने मुझे बुलाया।
मैनेजर: मैडम! रुकिये।
मैं पीछे मुड़ी और उसे इशारों से पूछा “क्या मैं?” तोह उसने हां में सर हिलाया और मैं उसके पास गई।
मैं: जी, क्या हुआ?
मैनेजर: मैडम आप मार्किट में नई आई हो?
मैं: क्या मतलब?
मैनेजर: अरे क्या आप भी नाटक कर रही है। चलो मैं ही काम की बात करता हूं। आप कितना लेती हो?
मैं: जी, मैं कुछ समझी नहीं?
मैनेजर: ओह! मेरे ही मुंह से सुनना चाहती हो? ठीक है। कितने पैसे लेती हो एक टाईम का?
मैं ये सुन कर हैरान रह गई कि ये आदमी मुझे रंडी समझ बैठा था।
मैं: छी-छी, मैं वैसी औरत नही हूं।
मैनेजर: अरे क्यों नाटक कर रही हो? तुम जो बोलोगी वो रकम तुम्हें दूंगा।
मैं: जी आपको गलत फहमी हो गई है।
मैनेजर: अच्छा तो तू उस बूढ़े के साथ क्या इधर नाटक करने आई है?
मैं: जी वो मेरे पति है। तमीज़ से बात करिये।
मैंने उसे मेरे गले का मंगलसूत्र भी दिखा दिया। वो थोड़ा शांत हो गया। फिर वो बोला-
मैनेजर: सॉरी मैडम आपको कुछ और समझ बैठा।
मैं: ठीक है लेकिन आइंदा से याद रखना।
मैनेजर: जी मैडम, सॉरी।
मैं आगे बढ़ ही रही थी कि उसने कुछ ऐसा कहा जिससे मेरी धड़कन थम गई।
मैनेजर: मैडम सिर्फ लंड तोह चूस लो!
मैं: क्या कहा, रुको अभी मेरे पति को बुलाती हूं।
मैनेजर: रुको मैडम, जरा ये तो देख लो।
उसने अपने मोबाइल में एक वीडियो चलाई। मैं वो वीडियो देख कर ठंडी पड़ गई। वो पार्किंग लोट की सी.सी.टी.वी. फूटेज थी, जिसमे मैं राजेश्वर जी का लंड चूस रही थी, ऐसा साफ दिख रहा था।
मैं: देखो ये बहुत गलत बात है। तुम ऐसा नहीं कर सकते।
मैनेजर: कुछ गलत नहीं है। मैं ये वीडियो इंटरनेट पर डाल दूंगा, और तुम्हें तो मालूम है एक बार कोई चीज इंटरनेट पर गई तो वो हमेशा के लिए वहीं रहती है।
मैं: देखो तुम ऐसा नहीं कर सकते।
मैनेजर: अरे मैं तोह तुम्हें चोदने वाला था। मगर तुम शादी-शुदा हो, इसलिये तुम्हें बस लंड चूसने कह रहा हूं।
मैं अब कुछ सोच नहीं पा रही थी। मैंने अखिर में मैनेजर की बात मानने का फैंसला किया, और सोचा कि इसे बाद में मजा चखाती हूं। बस वो वीडियो डिलीट हो जाए एक बार।
मैं: देखो तुम वीडियो तोह डिलीट करोगे ना?
मैनेजर: हां बाबा, मैं अपने वादे का पक्का हूं।
मैं: ठीक है, मैं तैयार हूं। लेकिन यहां नहीं चूस सकती।
मैनेजर: अरे यहां कौन तुझे लंड चुसवाने वाला है।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने केबिन में ले गया, और दरवाजा बंद कर दिया। उसकी केबिन एक-दम कोने में थी, और उसमें कोई खिड़की भी नहीं थी। लेकिन केबिन थी बहुत बड़ी।
मैनेजर: चलो अब शुरु हो जाओ।
मैनेजर का बोलने ढंग एक-दम बदल गया था। वो बहुत रोब जमा कर बात कर रहा था।
मैं: अपना पुर्ज़ा तो बाहर निकालो।
मैनेजर (गुस्से में): तुम मुझे बतओगी कि क्या करना है!
मैं सोच रही थी, कि अब ये मेरे साथ क्या करने वाला था। मैनेजर कुर्सी पर बैठा था और मैं उसके सामने खड़ी थी।
मैनेजर: मेरे सामने क्या खड़ी हो? चलो पीछे जाओ।
मैं पीछे हो गई।
मैनेजर: और पीछे जाओ। कमरे के उस कोने तक जाओ, और चेहरा मेरी तरफ होना चाहिये।
मैंने वैसे ही किया।
मैनेजर: चलो अब अपने बूढ़े पति को फ़ोन लगा, और कुछ तो बहाना बना कर बोल कि तुझे थोड़ी देर होगी।
मैं: क्या बहाना दूं?
मैनेजर: अब क्या वो भी मैं ही बताऊं? कुछ भी बता दे।
मैंने फिर राजेश्वर जी को फ़ोन लगा दिया।
(फ़ोन पर बोलते हुए)
राजेश्वर जी: अरे कहां रह गई हो?
मैं: टॉयलेट में हूं, वो थोड़ा पेट खराब हो गया है।
राजेश्वर जी: ऐसे कैसे?
मैं: पता नहीं शायद इस होटल का खाना ही घटिया है! (गुस्से से मैनेजर की तरफ देखा)
राजेश्वर जी: अच्छा तुम्हें कितनी देर लगेगी?
मैं: पता नहीं शायद 15–20 मिनट लगेंगे।
राजेश्वर जी: ठीक है तुम्हारे आने के बाद हम सीधे डॉक्टर के पास चलते है।
मैं: जी ठीक है।
मेरे पास राजेश्वर जी को मैनेजर के बारे में बताने का मौका था। मगर ना जाने क्यों मैं कह नहीं पाई।
फिर मैंने फ़ोन रख दिया।
मैनेजर: मुझे लगा तुम 10 मिनट मांग लोगी। लेकिन तुमने तो लगभग आधे घंटे तक का समय दिया इस बहाने में।
मैं कुछ नहीं बोली।
मैनेजर: चलो अब अपने कपड़े उतारो।
मैं: ये क्या कह रहे हो? बात सिर्फ चूसने की हुई थी।
मैनेजर: मैंने चूसने की बात की लेकिन कैसे लंड चूसना है उसकी नहीं।
मैं: देखो ये तुम बहुत गलत…
मैनेजर (चिल्लाते हुए): चुप! ज्यादा बोल मत। अब कुछ सवाल नहीं। बस मैं जितना बोलूंगा उतना करो। समझी?
मैंने हां में सिर हिलाया।
मैनेजर: एक और बात, मुझे आप और तुम करके नहीं बोलोगी। तुम मुझे “मालिक” या “साहब” बोलोगी।
मेरे: जी ठीक है।
मैनेजर: अभी क्या कहा मैंने!
मैं: जी मालिक (गलती सुधारते हुए)।
मैनेजर: चलो, तो मैंने तुम्हें क्या आदेश दिया था। वो पूरा करो।
मैंने अपने कपड़े उतार दिये, और उसके सामने पूरी नंगी खड़ी थी। क्योंकि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना था, इसलिये आसानी से कपड़े उतर गए। मैनेजर मुझे नंगा देख पागल हो गया।
मैनेजर: वाह! वाह! क्या टॉप माल है तू। मन कर रहा है कि तुझे चोद दूं, मगर मैंने तुम्हें जुबान दी है कि मैं नहीं चोदूंगा।
दोस्तों मैनेजर भले ही घटिया इन्सान था, मगर अपनी जुबान का पक्का था।
मैनेजर: चलो अब घुटनों पर बैठ जाओ।
मैं घुटनों पर बैठ गई।
मैनेजर: अब कुत्ती बनो।
मैं कुत्ती बन गई।
मैनेजर: अब भौंकना शुरू कर दे।
मैं: क्या?
मैनेजर ने टेबल के नीचे से छड़ी निकाली, और मुझे और मारने के लिए हाथ उठाया। मैं फिर जल्दी से बोली-
मैं: रुको-रुको मैं करती हूं। आप जैसा बोलोगे वैसा करती हूं।
उसने छड़ी नीचे कर दी और मैं उसके कहने के मुताबिक भौंकने लगी।
मैं: भौं! भौं!
मैनेजर मेरी इस हालत का मजा ले रहा था, और जोर-जोर से हस रहा था।
मैनेजर: देख ये तेरी औकात है। बाहर बहुत अकड़ दिखा रही थी साली रांड।
फिर उसने उसके हाथ में जो छड़ी थी, उसे कमरे के दूसरे कोने में फेंक दिया।
उसके बाद वो बोला-
मैनेजर: ऐसे ही जा, और वो छड़ी यहां लेके आ।
मैंने वैसे ही किया। किसी कुत्ती की तरह मैं वहां गई और वो छड़ी हाथ में उठा ली।
मैनेजर: हाथ से नहीं मुंह में पकड़ के ला।
मैंने वो छड़ी मुंह में दांतों के बीच पकड़ ली, और कुत्ती की तरह चल कर उसके सामने रख दी।
मैनेजर: अपनी जुबान बाहर निकाल कर हांफना शुरु कर।
मैंने फिर वैसा ही किया और मैनेजर मुझे देख हस रहा था। उसने मेरे सिर पर हाथ फेरना शुरु कर दिया, जैसे कि मैं कोई सच में कुत्ती हूं।
मैनेजर: क्या हुआ, तुझे अच्छा नहीं लग रहा है?
मैं: अच्छा लग रहा है।
मैनेजर: तो बता मैं कौन हूं तेरा?
मैं: मालिक हो मेरे।
मैनेजर: शाबाश! जल्दी सीख रही हो।
उसने ड्रोवर में से एक बिस्कुट निकाला, और मुझे खाने दिया। मैंने भी वो बिस्कुट खा लिया। फिर उसने दूसरे ड्रोवर में से कुत्ते का पट्टा निकाला, और मेरे गले में बांध दिया।
मैनेजर उठा, और मेरे गले का पट्टा पकड़ कर मुझे पूरे कमरे में घुमाने लगा। वो बीच-बीच में मुझे बिस्कुट खाने देता था। कभी सीधा मेरे मुंह में डालता था, और कभी सीधे जमीन पर फेंक देता था। कमरे के 2-3 चक्कर लगाने के बाद वो एक शीशे के सामने रुक गया और बोला-
मैनेजर: देख अपने आप को।
मैंने शीशे में देखा तो बहुत बुरा लगा। मैंने देखा कि मैं उस मैनेजर के बगल में घुटनों के बल बैठी थी, और मेरे गले में कुत्ते का पट्टा था, जो मैनेजर के हाथ में था। मैं यह देख कर टूट गई, और फुट-फुट कर रोने लगी।
मैं: क्यूं कर रहे हो मेरे साथ ये सब?
मैनेजर: क्योंकि तुझको बहुत अकड़ है। तू असल में रंडी है। बस दुनिया से छुपा रही है। मैं तुम्हारी उस रंडी को बाहर निकालना चाहता हूं।
मैं: देखो प्लीज मुझे जाने दो, चाहे तो पैसे लेलो।
मैनेजर: साली मुझे तेरा पैसा नहीं चाहिये। मुझे तेरे अंदर की रंडी देखनी है।
मैं: ठीक है, मैं अपने अंदर की रंडी बाहर निकाल लूंगी, मगर प्लीज मुझे ऐसे बेईज्जत मत करो।
मैनेजर: अरे ये मेरा स्टाइल है। मुझें तुम्हें बेईज्जत करके मजा आ रहा है।
मेरे बहुत कोशिश करने के बाद भी उसने अपना तरीका नहीं बदला, उल्टा मुझे उसका कहना मानना पड़ा.
मैं: अगर मैं तुम्हारा कहना मानूं, तो मुझे जल्दी छोड़ दोगे?
मैनेजर: हां, अगर तुम भूखी रंडी की तरह मेरा सारा कहना मानो, तो मैं तुम्हें जल्दी छोड़ दूंगा.
मैंने इस बात को मंजूर कर लिया, और उसका कहना चुप-चाप मानना शुरु कर दिया.
मैनेजर फिर कुर्सी पर बैठ गया, और मुझे भी अपने साथ खींच लिया.
मैनेजर: चल अब मेरे शूज उतारो.
मैं: जी मालिक.
मैंने उसके शूज उतार दिये.
मैनेजर: मेरे शूज को किस्स करो और उन्हें चाटो.
मेरे पास कोई और चारा नहीं था, तो मैंने बिल्कुल वैसे ही किया. पहले शूज को किस्स किया, और फिर उन्हें हल्का चाटा.
मैनेजर: अब मेरे सॉक्स उतारो, और उन्हें सूंघों.
मैंने वैसे ही किया, उसके सॉक्स उतार दिये, और उन्हें सूंघा. वो सॉक्स की इत्नी गंदी बदबू थी कि मुझे तो उल्टी जैसा होने लगा.
मैनेजर: अब मेरे पैरों पर अपनी नाक रगड़ और मेरे लंड की भीख मांग.
मैं (उसके पैरों पर अपनी नाक रगड़ते हुए): प्लीज मुझे अपना लंड चूसने दो मालिक, प्लीज.
मैनेजर: ऐसे भीख नहीं मांगते, और थोड़ी कोशिश कर.
मैं: मैं आपसे भीख मांग रही हूं, मुझे अपना लंड चूसने दीजिये. मुझ जैसी गंदी रांड को आपके लंड की प्यास लगी है.
मैनेजर: अब हुई ना बात. ये ले चूस ले.
ऐसा बोल कर उसने झट से अपना लंड पैंट में से निकाला. उसका लंड बस 6 इंच का था, मगर एक-दम कड़क बन गया था. मैं जल्दी से उसका लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.
मैनेजर: कैसा लगा मेरा लंड?
मैं: बहुत बढ़िया है मालिक.
मैंने मैनेजर का लंड ऐसे चूसा, ऐसे चूसा कि मानो दुनिया का अंत हो रहा हो. मैनेजर मेरे सामने 5 मिनट ही टिका. फिर उसका झड़ने वाला था.
मैनेजर: मैं झड़ने वाला हूं, सारा माल पी जाना. एक भी बूंद नहीं गिराना.
वो मेरे मुंह में ही झड़ गया. उसका माल बहुत सारा था. मेरा पूरा मुंह उसके वीर्य से भर गया. मैंने उसका माल एक झटके में गटक लिया.
मैनेजर: होटल में खाना खाने आई थी, साली मेरा लंड खा कर जा अब.
मैं: अब वो वीडियो डिलीट कर दो, और मुझे जाने दो.
मैनेजर: ठीक है जाओ, अब कपड़े पहन कर.
फिर मैनेजर ने वो वीडियो भी डिलीट कर दी, और मुझे कुछ पैसे देने लगा, तो मैंने उन्हें लेने से इन्कार कर दिया. फिर उसने अलमारी में से कुछ चीज निकाली.
मैं: ये क्या है?
मैनेजर: खुद देख लीजिए.
वो एक डॉग बैंड था, जिसे कुत्ते के गले में बांधा जाता है, और उसपर इंग्लिश में “SLAVE” लिखा था, जिसका मतलब मजदूर या नौकर होता है.
मैं: इसका मैं क्या करूं?
मैनेजर: तुम जब भी इस होटल में खाना खाने आओगी, तब ये काउंटर पर दिखाना, तुम्हें फ्री खाना मिलेगा.
मैं: इसकी कोई जरुरत नहीं है!
मैनेजर: अरे रख लो, इसकी कीमत करीब 80 हज़ार से ज्यादा है.
मैं: इतनी महंगी चीज है ये!?
मैनेजर: हां, वो अक्षर सोने से बने है.
मैंने वो डॉग बैंड लिया और मैनेजर के केबिन से बाहर निकल गई. बाहर आते ही मैं सीधा अपने टेबल पर गई. उधर राजेश्वर जी मेरा इंतजार कर रहे थे.
राजेश्वर जी: अरे कहां रह गई थी?
मैं: सॉरी-सॉरी, वो पेट ही खराब हो गया तो.
राजेश्वर जी: लेकिन फिर भी आधा घंटा!
मैं: बाबा सॉरी बोला ना. मुझे घर जा कर शिक्षा देना बस.
राजेश्वर जी: वो तुम्हें मिलेगी ही.
मैं आ तो गई थी, मगर मुझे उस मैनेजर को मजा चखाना था. आखिर उसने मेरा अपमान जो किया.
मैं: जी आपको एक बात बतानी थी.
राजेश्वर जी: बोलो?
मैं: जब मैं टॉयलेट से आ रही थी तब मुझे मैनेजर ने छेड़ा, और मेरे साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश की.
ये सुन कर राजेश्वर जी आग बबूला हो गए.
राजेश्वर जी: क्या! रुको अभी उसको देखता हूं.
राजेश्वर जी मैनेजर को बुलाने वाले थे, मगर मैं उस मैनेजर को उसके ही केबिन में उसके ही तरीके से बेइज्जत करना चाहती थी.
मैं: रुको, यहां तमाशा मत करो. उसके केबिन में जाते है.
हम दोनों फिर मैनेजर की केबिन की तरफ गए. जैसे ही मैनेजर ने केबिन का दरवाजा खोला, राजेश्वर जी सीधे उस मैनेजर पर झपट गए. मैनेजर बहुत डर गया. राजेश्वर जी उसको मारने वाले थे, लेकिन मैंने उनको रोक लिया. राजेश्वर जी ने मेरी बात मान ली, और मेरे बगल में आकर खड़े हो गए. मैंने फिर जा कर केबिन का दरवाजा बंद कर दिया.
मैनेजर जमीन पर बैठा था, और माफी मांग रहा था.
मैं: माफी चाहिये?
मैनेजर: हां.
मैं: चलो तो फिर अपने कपड़े उतारो.
ये सुन कर मैनेजर और राजेश्वर जी दोनों शॉक हो गए.
राजेश्वर जी: दिव्या ये तुम क्या कह रही हो?
मैं: आप रुकिये, इसे मैं सबक अपने तरीके से सिखाना चाहती हूं.
राजेश्वर जी को कुछ समझ नहीं आया, पर मैनेजर समझ गया कि मैं क्या करना चाहती थी.
मैं (मैनेजर को देखते हुए): तुम क्या ऐसे देख रहे हो? मैंने जो कहा वो करो.
मैनेजर अपने कपड़े उतारने लगा. कपड़े उतारने के बाद मैनेजर मेरे और राजेश्वर जी के सामने नंगा खड़ा था.
मैं: अपने घुटनों पर बैठ.
मैनेजर घुटनों पर बैठ गया.
मैंने टेबल पर रखा हुआ कुत्ते का पट्टा लिया, और उसके गले में बांध दिया. जी हां ये वही पट्टा था जो इस मैनेजर ने मेरे गले में कुछ देर पहले बांधा था.
मैं: कुत्ते की तरह भौंक!
मैनेजर: भौं! भौं!
मैं: शाबाश! अब मुझे तुम मालकिन कहोगे.
मैनेजर: जी मालकिन.
राजेश्वर जी ये सब चुप चाप देख रहे थे, और सोच रहे थे ये सब क्या हो रहा था?
मैंने उसके गले का पट्टा पकड़ा, और उसे शीशे के सामने ले गई.
मैं: देख अपने आप को, ये तेरी मेरे सामने औकात है साले कुत्ते!
ये बोल कर मैंने मैनेजर को लात मारी, तो वो गिर गया. उसके गिरने पर मैं जोर से हस पड़ी, और उसका मज़ाक उड़ाया.
मैं: अरे इसका लंड कितना छोटा है! हा हा हा हा हा।
मैनेजर मेरी तरफ गुस्से से देख रहा था।
मैं: क्या हुआ, कुत्ते को गुस्सा आया? चल मेरी चप्पल निकाल और उसे चाट।
मैनेजर ने चुप-चाप वैसा ही किया।
मैं: मेरे पैरों पर नाक रगड़ कर माफी की भीख मांग।
मैनेजर: प्लीज मुझे माफ कर दीजिये।
मैं: ऐसे नहीं, थोड़ी और कोशिश करो।
मैनेजर: मैं आपके सामने माफी की भीख मांगता हूं। मुझ जैसे कुत्ते को प्लीज माफ कर दीजीये।
मैंने उसके गले का पट्टा पकड़ा, और उसे खींच कर दरवाजे की तरफ ले गई, और वो पट्टा दरवाजे को बांध दिया।
मैं: सुन कुत्ते, दरवाजे की रखवाली कर।
मैनेजर: जी मालकिन।
मैं: राजेश्वर जी आप यहां आइये।
राजेश्वर जी मेरे सामने आ कर खड़े हो गए।
राजेश्वर जी: ये सब क्या कर रही हो?
मैं: अरे इन जैसे लोगों को ऐसे ही सबक सिखाना चाहिये।
मैं फिर अपने घुटनों पर बैठ गई, और राजेश्वर जी का लंड पैंट में से निकाला, और उसे हिलाने लगी।
राजेश्वर जी: अरे ये क्या कर रही हो? वो भी उस मैनेजर के सामने?
मैं: आप डरिये मत, बस मेरा साथ दीजीये।
मैंने राजेश्वर जी का लंड चूसना शुरु कर दिया और बीच-बीच में मैनेजर की तरफ देख रही थी। मैनेजर शर्म से मुंडी झुका कर बैठा था। ये देख कर मुझे बहुत सुकून मिला।
मैं (राजेश्वर जी का लंड हिलाते हुए): ये देख कुत्ते, इसे कहते है असली लंड, असली मर्द, समझा क्या?
मैनेजर ने हां मे सिर हिलाया। मैनेजर की आंखों से आंसू बह रहे थे, और उसकी इस हालत का मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने राजेश्वर जी का लंड कुछ देर और चूसा। फिर वो मेरे मुंह में झड़ गए, और मैं उनका सारा माल पी गई।
राजेश्वर जी: चलो अब चलते हैं।
मैं: जी आप आगे बढ़िये, मैं आती हूं।
राजेश्वर जी केबिन के बाहर गए, और मैं मैनेजर के पास गई।
मैं: अब समझे मेरी क्या औकात है?
मैनेजर: जी मालकिन।
मैं: अब तुझे तो मैं बर्बाद करके ही छोडूंगी।
मैनेजर: प्लीज ऐसा मत कीजिये, मेरा घर-परिवार है।
मैं: ये पहले सोचना चाहिए था।
और मैं सीधा केबिन के बाहर चली गई, और मैनेजर वहां अंदर रो रहा था। मैं राजेश्वर जी के पास गई, और उन्हें उस मैनेजर की पुलिस में शिकायत दर्ज कराने बोली।
राजेश्वर जी: उसकी चिंता मत करो, पुलिस कमिशनर मुझे अच्छे से जानते हैं। मैंने सीधे उन्हें फ़ोन किया है। अब वो मैनेजर लंबा फस गया।
फिर हम उस होटल से सीधा बाहर निकल गए और घर चले गए। मैंने रास्ते में जाते-जाते राजेश्वर जी का लंड फिरसे चूसा। हम घर करीब डेढ़ बजे तक पहुंच गए। घर पहुंचने के बाद हम फ्रेश होने के लिए बाथरूम में गए। हम दोनों ने एक साथ शॉवर किया। मैं पहली बार किसी के साथ नहां रही थी। मुझे बहुत मजा आया। हम दोनों ने एक-दूसरे को अच्छे से साबुन लगा कर साफ किया।
अगर आप सोच रहे हो के हमने फिरसे सेक्स किया कि नहीं, तो मैं ये बता दूं, कि नहीं। हम दोनो ने शॉवर सेक्स नहीं किया। वो किसी और दिन हुआ। हम दोनों शॉवर के बाद बाथरुम से बाहर आ गए। हम दोनों ने तौलिया लपेटा था, और हम दोनों लिविंग रूम में सोफा पर बैठ गए, और टी.वी. चालू किया। मैं भीगे बालों में बहुत हॉट दिख रही थी, और राजेश्वर जी की नज़र मुझ पर ही थी।
मैं: क्या हुआ जी, ऐसे क्या देख रहे हो?
राजेश्वर जी: तुम बहुत हॉट लग रही हो। वैसे तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि ये पहले भी हुआ है? कुछ याद आया?
मैं: नहीं। मैं कुछ समझी नहीं।
राजेश्वर जी: याद करो वो रात जब हमने हद पार कर दी थी।
राजेश्वर जी उस रात की बात कर रहे थे, जिस रात हम दोनों ने पहली बार सेक्स किया।
मैं: अरे हां! वो मैं कैसे भूल सकती हूं? आखिर उस एक रात के हादसे ने मेरी जिंदगी जो बदल दी।
हमने कुछ देर और बात की और फिर टी.वी. पर भी कुछ खास लगा नहीं था, तो मैंने टी.वी. बंद कर दी।
राजेश्वर जी: अरे तुमने पूजा के बारे में कुछ कहा नहीं?
मैं: जी मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, आप रखिये पूजा इस घर में।
राजेश्वर जी: थैंक्स दिव्या। मैं कल ही मुहूर्त निकालता हूं।
मैं: क्या आप भी थैंक्स कह रहे हैं। हम कल सारा पूजा का सामान ले आते हैं।
राजेश्वर जी: ठीक है।
फिर हमने टाईम देखा तो बहुत रात हो गई थी। तो हम सोने चले गए। हम दोनों एक बिस्तर पर नंगे बदन ही सो गए जैसे कि हम सच में कोई पति-पत्नी थे। मैंने महसूस किया कि राजेश्वर जी का लंड एक-दम कड़क हो गया था। लेकिन राजेश्वर जी कुछ कह नहीं रहे थे।
मैं: अपका लंड इतना कड़क हो गया है, लेकिन मुझे आप मुझे चोद क्यों नहीं रहे?
राजेश्वर जी: देखो तुम बहुत थक गई हो। तुम्हें चोदूंगा तो तुम्हारी हालत खराब हो जाएगी।
मैं: ओ मेरे प्यारे पति देव, आप मेरी कितनी चिंता करते है।
राजेश्वर जी मुस्कुरा उठे और मुझसे एक-दम चिपक कर सो गए।
अगले दिन की सुबह:-
मैं अब भी सोई हुई थी कि मुझे मेरे चेहरे पर कुछ महसूस हुआ। मैंने अपनी आंखें खोली तो देखा कि राजेश्वर जी अपना लंड मेरे चेहरे पर सहला रहे थे, और उनके चेहरे पर मुस्कान थी।
राजेश्वर जी: उठ गई मेरी डार्लिंग? ये लंड तुम्हारे चेहरे पर कितना अच्छा लग रहा है।
मैं समझ गई कि उनको क्या चाहिए था, और मैंने खुशी से उनका लंड चूसना शुरु कर दिया।
राजेश्वर जी: वाह, बिना बोले ही समझ गई।
मैं लंड चूसती रही और कुछ देर बाद राजेश्वर जी झड़ गए। उन्होंने अपना सारा वीर्य मेरे चेहरे पर छोड़ दिया।
मैं: गुड़ मॉर्निंग मेरी जान।
राजेश्वर जी: गुड़ मॉर्निंग, चलो अब नाश्ता करना है ना?
मैं उठी और घुटनों के बल बैठ गई (डॉगी स्टाइल पोस में)
मैं: पहले आप अपना नाश्ता कर लीजिये।
राजेश्वर जी जल्दी से मेरी चूत चाटने लगे। मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था। राजेश्वर जी अपनी ज़ुबान मेरी चूत पर इतने अच्छे से चला रहे थे, कि मैं तो कांपने लगी। कुछ ही देर में मैं इतने जोर से झड़ गई, कि मैं बेड़ पर फिर से लेट गई और मेरी टांगें कांप रही थी। मेरी ये सही मायने में दिन की अच्छी शुरुवात थी।
राजेश्वर जी मुझे इतने जोर से झड़ता हुआ देख खुद शॉक हो गए। उनका लंड फिरसे खड़ा हो गया था। वो मेरी चूत में अपना लंड डालने ही वाले थे, कि दरवाज़े की घंटी बजी।
