रीता ने मेरी और देखते हुए कहा, “फिर? किरण ने तो आज रात यहीं ख़त्म कर दी। तुम जाओ और किरण को याद दिलाओ की क्या तय हुआ था।” मैंने मन ही मन मुस्काते हुए देखा कि हालांकि रीता मेरा हाथ थामे मेरे साथ चल पड़ी थी, पर वह खुश नहीं थी। आज शायद रीता ने सूरज से चुदवाने का मन बना लिया था। पर किरण ने रीता की उम्मीद पर ठंडा पानी फिरा दिया था।
मैंने कहा, “रीता एक बात पूछूं? ठीक है मैं सूरज जितना हैंडसम नहीं, पर क्या आज के तुम्हारे जन्म दिवस पर तुम मुझे तुम्हारा हर साल वाला तोहफा नहीं दोगी? तुम तो बस सूरज के बारे में ही बात कर रही हो।”
रीता ने अपने आप को समभाला। उसे लगा कि मैं उसके रवैये से कुछ आहत हुआ था। उसने हंसने की कोशिश करते हुए मेरी और मुड़ कर बोला, “तुमने ही मुझे सूरज से चुदवाने के लिए इतना उकसाया और अब यह हुआ। खैर इसमें गलती मेरी है कि मैंने ऐसे रूल के लिए आग्रह किया।
आज बिल्कुल तुम्हारी बारी है। अब तो सूरज और किरण के साथ वाली यह शाम यही ख़तम होने जा रही है। तो हर साल की तरह इस साल भी मैं तुम से खूब बढ़िया तरीके से चुदवाउंगी और वह सब करुंगी जो तुम चाहते हो।”
मैं और मेरी पत्नी जैसे ही हमारे कमरे में पहुंचे, तो मैंने रीता को कमरे का दरवाजा बंद करने का भी मौक़ा तक नहीं दिया। मैंने उसे फौरन अपनी बाहों में उठाया, और बिना कुछ देर किये उसे नंगी कर पलंग पर लिटाया। रीता एक नग्न परी जैसी दिख रही थी।
मैं मेरी पत्नी को इतने सालों से हमारे बैडरूम में नंगी देखता आया हूं, पर उसे नंगी देखते हुए मेरा मन कभी नहीं भरा। मेरी इस तरह की जल्दबाजी देख कर रीता हस कर बोली, “क्या बात है जी? तुम भले ही मुझे कहते ना हो, पर मैं जानती हूं तुम मुझे चोदते वक्त हर बार मुझे किरण समझ कर ही चोदते हो। क्या आज भी मुझे किरण समझ कर ही नंगी कर रहे हो?”
मैंने जवाब में मेरी बीवी की जांघों को अलग कर उनके बीच में रीता की कोमल सी गुलाबी चूत की पंखुड़ियों को चूमते हुए कहा, “मैं आज तुम्हें किरण नहीं, किरण से कई गुना खूबसूरत रीता ही समझ कर चोदूंगा। क्योंकि आज मैंने तुम्हें एक खूबसूरत औरत से एक अति खूबसूरत सेक्सी औरत के रूप में बदलते हुए देखा है।
हर बार तुम चुदाई के मामले में कभी भी इतनी उत्सुक और खुले दिल की नहीं हुई। आज तुमने मेरे सामने सूरज के ग्रुप में ना सिर्फ शामिल होने के लिए हामी भरी पर आज तुमने सूरज से चुदाई के लिए भी तत्परता दिखाई। मैं उसके लिए तुम्हारा तहे दिल से शुक्रगुजार हूं, क्यूंकि मैं जानता हूं की भारतीय नारी कितनी मुश्किल के बाद ही अपनी लाज और मर्यादा का त्याग कर किसी गैर मर्द से चुदवाने के लिए राजी होती है।”
मेरी बात सुन कर रीता बहुत खुश हुई और अपने पांव चौड़े कर बोली, “आज मेरी चूत तुम्हारे चाटने, चूमने और चूसने के लिए बड़ी ही उत्सुक है। आज हम अपनी इस रात को हमारी सुहाग रात से भी बेहतर मनायेंगे।”
मेरी पत्नी का आदेश मेरे सर आंखों पर था। मैं फौरन मेरी बीवी की चूत से रिसते हुए रस का रसास्वादन करने लगा। मैंने अपने कपड़े भी निकाल दिए, और मेरा लंड रीता की खूबसूरत चूत को देख कर अनायास ही फौलाद की छड़ जैसा सख्त हो चुका था।
रीता का स्त्री रस उस रात को मुझे इतना स्वाद लग रहा था जितना पहले कभी नहीं लगा। शायद इसका कारण यही था कि रीता उस दिन पहले से कहीं ज्यादा सेक्सी और कामोन्माद में मस्त लग रही थी। मेरे उसकी चूत चाटने से रीता पलंग पर पलटती हुई मचलने लगी।
कुछ देर तक रीता की चूत चाटने और उसका स्त्री रस पीने के बाद रीता बैठ खड़ी हुई, और मेरा लंड अपनी हथेलियों में लेकर उसे हिलाती हुई उससे खेलती हुई बोली, “तुम्हारा लंड भी देखो कितना सख्त और बड़ा हो गया है। उसमें से तुम्हारा पुरुष रस भी बूंद दर बूंद निकल रहा है। आज वह मुझे चोदने के लिए वाकई में बड़ा उत्सुक दिख रहा है।”
मैंने रीता के हस्तमैथुन का आनंद लेते हुए कहा, “अब चलो भी इसे चूम कर थोड़ी वी आई पी ट्रीटमेंट भी तो दो उसको?”
“क्यों नहीं?” कहती हुई रीता ने मेरा लंड आसानी से अपने मुंह में ले कर उसे धीरे-धीरे ऊपर नीचे कर उसे ओष्ट मैथुन का आनंद देना शुरू किया। रीता की इस हरकत से मेरा लंड और बड़ा हो गया और मेरे पूरे बदन में एक बिजली का झटका सा लगा।
मैं भी रीता की ही तरह पलंग पर मचलने लगा। जब वह मन से चाहती थी तो लंड चूसने की कला में रीता एक-दम निष्णात थी। वह मेरे लंड से अपने मुंह को ऐसे चुदवाती थी कि मैं पागल हो जाता था। पर साधारणतः उसे लंड चूसना ज्यादा पसंद नहीं था।
मुझे उस रात लगा कि रीता काफी उत्तेजना में थी, क्यूंकि रीता अक्सर मरा लंड चूसते हुए शिकायत करने लगती थी कि वह थक गयी है। पर उस रात रीता ने काफी देर तक मुझे औष्ट मैथुन का जबरदस्त आनंद दिया। उसके बाद वह मुझसे तगड़ा चुदवाना चाहती थी।
रीता मेरे सामने पलंग के नीचे उतर कर अपने दोनों हाथों को पलंग के एक छोर पर टिका कर वह अपनी गांड मेरी और कर खड़ी हो गयी। मैं क्या बताऊं? उस समय मेरी रीता इतनी ज्यादा सेक्सी और खूबसूरत लग रही थी, कि मैं वाकई में अपने भाग्य को सराहने लगा था।
मैं हमेशा से शादी के समय से ही मेरी बीवी की सुंदरता और नज़ाकत का कायल था। मैं मेरी पत्नी की कोमलता बनी रहे इसलिए उसे चोदते हुए भी सम्हाल कर चोदता था, जिससे मेरी सुकोमल पत्नी आहत ना हो या उसकी सुंदरता और कोमलता में कोई फर्क ना पड़े।
अपना लंड भी धीरे-धीरे रीता की चूत में घुसेड़ता और उसे हल्के-हल्के धक्के मार कर चोदता। रीता भी मेरी इस सावधानी को समझती थी, और उससे खूब प्रसन्न होती थी। यूं समझिये कि मैं अपनी पत्नी को जैसे एक कीमती कांच का बर्तन हो उस तरह उसे चोदता था।
रीता ज्यादातर मुझे ऊपर सवार हो कर मिशनरी पोजीशन में चुदवाने से खुश रहती थी। जब रीता कोई कारणवश सेक्सुअली ज्यादा उत्तेजित हो जाती थी, तब वह घोड़ी बन जाती थी, और मुझसे पीछे से लंड डलवा कर चुदवाती थी। वह जानती थी कि मुझे उस पोजीशन से रीता को चोदना ज्यादा पसंद था। उस वक्त जब वह सेक्सुअली ज्यादा उत्तेजित होती थी, तब रीता मेरा लंड भी चूस लेती थी, और अपनी चूत जरूर चटवाती थी।
रीता की गांड मैंने कभी नहीं मारी, क्योंकि रीता गांड मरवाना बिल्कुल पसंद नहीं था। वह कहती थी, “गांड मारना अकुदरति है। वह भी एक स्त्री की गांड क्यों मारनी? जब इतनी बढ़िया चूत स्त्री दे रही है तो? गांड तो मर्दों की भी होती है। गांड ही मारनी है तो स्त्रियों के पास क्यों आते हो? गांड मारने से स्त्रियों को बहुत तकलीफ होती है और चुदाई का मज़ा भी नहीं आता।”
इसी कारण मैंने कभी रीता की गांड नहीं मारी। गांड मारना मेरे सिद्धांत के भी विपरीत था। मैं भी मानता था कि गांड मारना औरतों के प्रति क्रूरता का प्रतीक है। जब मैं रीता को घोड़ी बना कर चोदना चाहता था तब तब रीता मुझे पूछती थी कि कहीं मैं मेरा लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश तो नहीं करूंगा ना?
रीता की गांड काफी गोलाई में भरी हुई और सुडौल थी। गांड के दोनों गाल एक-दम गुलाबी रंग के और करारे थे जिसके बीच रीता के गांड के बीच की दरार रीता की गांड की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती थी। रीता के स्तन जो उसके आगे झुके होने के कारण लटक रहे थे, वह लटकते हुए भी दूसरी औरतों के स्तन की तरह झूल नहीं रहे थे, बल्कि जैसे रीता खड़ी हो उसी तरह अल्लड़ दिखते हुए उच्छृंखलता से उद्दंड सख्ती से खड़े हुए थे।
मैंने अपना लंड रीता की खुली हुई जांघों के बीच में केंद्रित किया, और रीता की चूत की पंखुड़ियों को अपनी उंगलियों से दोनों तरफ हटा कर एक हल्का सा धक्का मार कर उनके बीच में से उसे रीता की चिकनी चूत में घुसा दिया।
एक हल्की सी सिसकारी मार कर रीता ने पीछे मुड़ कर थोड़ा सा मुस्कुराते हुए मुझे देखा। वह मेरे लंड के उसकी चूत में प्रवेश होने से अपनी प्रसन्नता जाहिर कर रही थी।
रीता की एक ख़ास खूबी थी। मैं जब जब भी उसे चोदता था, तो रीता हमेशा मुझे जताने से ना चुकती थी कि वह मेरी चुदाई से कितना ज्यादा खुश हो रही थी। कभी कामुकता भरी आहों से तो कभी “बहुत बढ़िया चोद रहे हो तुम, मजा आ रहा है, और चोदो मुझे” कह कर वह मेरा हौसला बढ़ाती रहती थी।
उस रात भी रीता बार-बार कामुक सिसकारियों से आवाजें निकालती हुई कराह रही थी। रीता की कराहटें हमारे रूम में गूंज रही थी। मुझे रीता को इस तरह चोदने में उस दिन बड़ा मज़ा आ रहा था।
रीता ने एक बार मुड़ कर मेरी आंखों में आंखें मिला कर कुछ सहानुभूति जताते हुए पूछा, “मैं जानती हूं, आप इस वक्त मेरी जगह किरण को चोदना चाहते थे। पर क्या करूं, मैं ही ऐसी बेवकूफ निकली कि मेरे ही बनाये हुए रूल के कारण आप को किरण को चोदने से वंचित कर दिया।
अब आज आप को मुझे ही किरण समझ कर चोदना पड़ेगा। फिर जब आगे आपको मौक़ा मिलेगा तब आप किरण को जरूर चोदना। मैं ना आपको रोकूंगी ना टोकूंगी।”
मैंने मेरी पत्नी को अपनी बांहों में भर लिया। रीता की सहानुभूति और समझ के देख मेरी आंखें भर आयी। मैंने रीता की बात का जवाब देते हुए कहा, “रीता, अफ़सोस तो मुझे हो रहा है। तुम अब जान ही गयी हो कि मेरी बड़ी ही तगड़ी इच्छा है कि तुम सूरज के तगड़े लंड से चुदवाओ। आज हमारे पास बहुत ही बढ़िया मौक़ा था और माहौल भी था। पर पता नहीं यह रूल की बात कहां से आ टपकी। सारा मजा किरकिरा कर दिया। आज की रात बेकार हो गयी।”
मेरी बात खत्म भी नहीं हुई थी और मेरा लंड रीता की चूत में ही जमा हुआ था कि हमारे बिल्कुल पीछे से किरण की आवाज सुनाई दी, “अभी आज की रात ख़त्म नहीं हुई। अभी तो पार्टी शुरू हुई है। क्या यार रीता और राज! तुम लोगों में इतना धैर्य भी नहीं है? कुछ देर के लिए भी नहीं रुके? यह काम तो तुम्हें हमारे सामने एक साथ करना था।
तुम तो यहां ही हमारा इंतजार किये बिना ही शुरू हो गए। पर सब से पहले तो रीता तुमने अपना बनाया हुआ रूल तोड़ा है। तुमने कहा था कि हमारे पति आज रात हम को एक-दूसरे के सामने चोदेंगे। हमने यह तय नहीं किया था कि हम अपने पति से चुदेंगे। अब तुमने अपने पति से चुदाई ही शुरू कर दी। ऊपर से तुम मुझे अपने पति से चुदवाने की बात कर रही हो। तुम ही सारे रूल तोड़ रही हो। यह ठीक नहीं है। इसकी सजा होगी।”
मैंने और रीता ने पीछे मुड़ कर देखा तो सूरज और किरण हमारे कमरे के दरवाजे पर खड़े थे। सूरज ऊपर से खुला था। उसने सिर्फ नीचे हाफ पेण्ट माने चड्डी पहन रखी थी। बिखरे हुए बालों में आच्छादित सूरज का चेहरा वाकई किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था। किरण ने पतली पारदर्शक ढीली सफ़ेद सिल्क जैसे चमकते कपड़े की ऐसी गाउन पहनी थी, जिसमें से उसके दोनों स्तनों पर गोरी गोरी निप्पलें साफ़ दिख रही थी।
किरण की दोनों जांघों के बीच में उसकी चूत की झांखी भी हो रही थी। किरण के घूमने से उसकी गांड और उसके दो फूले हुए गाल और उसके बीच की दरार भी साफ़ दिखाई देती थी।
रीता अफरा-तफरी में पलंग की चद्दर खींच कर ओढ़ने का प्रयास करने लगी। मैंने रीता के हाथ से चद्दर खींच कर कहा, “हमें पता है कि तुम्हें स्विंमिंगपूल में सूरज ने पूरा नंगा देख ही लिया है। वह तो तुम्हें चोदने वाला ही था। तुमने सूरज का लंंड भी चूसा है। तो अब प्लीज यह सब लाज और शर्म के नखरे मत करो।
तुमने अभी-अभी उस ग्रुप की सदस्यता की सारी शर्तें स्वीकार कर ली हैं। अब देखने दो हम सब को तुम्हारा अद्भुत नग्न रूप। हम सब तुम्हारे रूप के कायल हैं। मैं, सूरज और किरण भी। तुम हमारी राजरानी हो। हम तुम्हारे ग़ुलाम है।”
रीता ने मुझे कोहनी मार कर नकली तरीके से गाल फुलाते हुए कहा, “अच्छा तो तुम दोनों हमें छिप-छिप कर देख रहे थे? तभी तो मैं सोचूं कि यह सब किया कराया किसका है? मेरी जूठी तारीफ़ करके मत चढ़ाओ मुझे चने के पेड़ पर। मैं ऐसे ही ठीक हूं। किरण तुम मुझे सजा देना चाहती हो ना? ठीक है मैं तैयार हूं सजा भुगतने के लिए। पर सजा छोटी-मोटी नहीं होनी चाहिए। सजा ऐसी होनी चाहिए कि उसको भुगतते हुए मैं चीखने-चिल्लाने लगूं। तुम सब को देखना था ना तुम्हारी राजरानी का नग्न रूप? तो यह लो देख लो तुम्हारी राजरानी का नग्न रूप सब ओके?”
रीता के चद्दर हटा कर अपना नग्न रूप दिखाते ही सूरज चकरा रहे थे। सूरज की आँखें जैसे नशे में डूबी हुई हों ऐसे घिरने लगी। रीता नंगी पलंग पर सीधी लेटी हुई कोई नग्न अप्सरा या हूर से कम नहीं लग रही थी। रीता की गोरी त्वचा और उसके पूरे बदन को जैसे कोई अत्यंत दक्ष शिल्पकार ने संगेमरमर को अपनी पूरी कला का उपयोग करके तराशा हो वैसी मूरत सी लग रही थी। रीता के स्तन गुरुत्वाकर्षण के नियम का अपमान करते हुए उद्द्ण्ड अर्ध गोलाकार में एरोला के बीच घिरी हुई निप्पलों से शोभायमान दो गुंबज के सामान दिख रहे थे।
रीता की एक-दम साफ़ गुलाबी चूत के और कमर के बीच का कामुक उभार देखते ही बनता था। रीता की गांड के गाल और बीच की दरार अच्छों अच्छों का लंड खड़ा कर देने वाली थी। पलंग पर रीता के घुंघराले लम्बे केश बिखरे हुए थे। पूर्णिमा के चन्द्रमा सम खिला हुआ यौवन के कारण उस यौवन का कामुक नशा रीता की आँखों में साफ़ दिख रहा था। जैसे कोई अभिसारिणी अपने प्रियतम से विहार करने की अपेक्षा में नग्न हो कर बैठी हो, वैसे ही रीता अपने प्रीतम से अपनी चुदाई की प्रतीक्षा में अपनी जांघें खोल कर बैठी हुई थी।
रीता चद्दर हटा कर पलंग पर चढ़ कर तकिये के सहारे दीवार से सट कर बैठी हुई थी। रीता किरण पर गुस्से की बात को एक पल में ही भूल गयी और उसने हस कर किरण को अपनी बाहें फैला कर अपने पास बुलाया। किरण फ़ौरन पलंग पर चढ़ कर रीता की बाहों में लिपट गयी, जैसे कोई बच्चा माँ से लिपट जाता है। किरण रीता के मुंह, कपाल, बाल, गाल, स्तन सब कुछ चूमने लगी। किरण एक हाथ में रीता का एक स्तन लेकर उसकी निप्पलों से खेल रही थी और दूसरा स्तन मुंह में लेकर, चूम चूस, चाट और कभी-कभी काट भी रही थी। दोनों खूबसूरत स्त्रियों का यह रूप देखने वाला था।
रीता ने किरण को अपने बिल्कुल बगल में अपने बदन से सटा कर बिठाया और खुद टेढ़ी हो कर अपना एक हाथ किरण के गाउन में डाल कर किरण के स्तनों से खेलना आरम्भ किया। दोनों महिलाओं को एक-दूसरे से खेलते हुए देख सूरज घुटनों के बल पलंग पर चढ़ कर घुटनों पर चलता हुआ किरण की गोद में जा पहुंचा। किरण की गोद में किरण की चूत के ऊपर ही अपना सर रख कर अपने बदन को किरण की दोनों पलंग पर लम्बाई हुई करारी जांघों के बीच जगह बना कर लम्बा हो कर लेट गया।
सूरज किरण का गाउन ऊपर कर अपना मुंह किरण के स्तनों के करीब ले जा कर स्तनों को अपने मुंह से चिपका कर किरण के स्तनों की निप्पलों को मुंह में लेकर उन्हें चूसने लगा। बगल में बैठी रीता का हाथ जो किरण के स्तनों से खेल रहा था वह बार-बार सूरज के मुंह से छूता और रीता प्यार से सूरज के मुंह और उसके होंठों को सहला देती।
मैं नंगधड़ंग पलंग के पास खड़ा हुआ यह सब खेल देख रहा था। मेरी प्यारी खूबसूरत नंगी पत्नी रीता ने अपने हाथ लंबा कर मुझे भी अपनी बाहों में बुला लिया। मैं भी पलंग पर चढ़ सूरज की ही तरह घुटनों के बल चलता हुआ बिल्कुल सूरज की तरह अपनी बीवी रीता की गोद में उसकी चूत के ऊपर ही सर रख कर रीता की टांगें चौड़ी कर उनके बीच पलंग पर लम्बा हो कर लेट गया। मेरा सर रीता के मादक स्तनों को छू रहा था।
रीता ने किरण के गाउन को खींचते हुए कहा, “तुमने मुझे अच्छी तरह से जब फसा ही दिया है, तो अब मुझसे क्या पर्दा?” यह कह कर रीता ने किरण के बदन से वह गाउन उतार दिया और उसे पूरी तरह नंगी कर दिया। नग्न किरण रीता से ज़रा सी भी कम नहीं लग रही थी। किरण की गांड रीता की गांड से थोड़ी ज्यादा भारी थी।
किरण का चेहरा लम्बा था जबकि रीता का गोल। किरण के बाल घुंघराले थोड़े से छोटे कटे हुए थे। रीता के घने लम्बे फैले हुए। बाकी स्तनों में दोनों के स्तन भरे हुए सख्त, अल्लड़, गोल एरोला के बीच सख्ती से फूली हुई निप्पलों से शोभायमान थे।
मुझे और शायद रीता को भी नंगधड़ंग किरण देख कर बड़ी ख़ुशी हुई। मैंने किरण को स्विंमिंगपूल क्लब में नंगी तो देखा था, पर उस समय मैं उसे चोदने की अफरातफरी में था।
उस समय इस तरह इतनी मस्ती से पूरी तरह से किरण का इतना सुन्दर नग्न रूप मैंने इतनी बारीकी से नहीं देखा था। नंगी किरण कमाल की खूबसूरत लग रही थी। किरण के कूल्हे रीता से कुछ ज्यादा भारी और ज्यादा आकर्षक थे ऐसा रीता मानती थी।
किरण ने चड्डी पहने हुए अपने पति सूरज की और देखते हुए कहा, “अभी तुम अकेले ही हो जो कपड़े पहने हुए हो। आ जाओ हम नंगों की टोली में।” यह कह कर किरण ने अपने हाथ लंबा कर सूरज की चड्डी का बेल्ट खोल दिया। सूरज ने फटाफट अपने पांव ऊपर-नीचे कर अपनी चड्डी निकाल फेंकी। अंदर सूरज ने कुछ नहीं पहना था। चड्डी खोलते ही सूरज का तगड़ा मोटा लंड कूद कर बाहर आ गया और सख्ती से खड़ा हुआ ऊपर की तरफ मुड़ा हुआ लंबा हो गया।
इतना लम्बा और मोटा होने के कारण सख्त होते हुए भी पलंग पर लेटे हुए सूरज का लंड कुछ आगे जा कर नीचे की ओर झुका हुआ था। वहाँ लेटे हुए हम सब ने पहले कभी ना कभी सूरज के लंड को देखा था। फिर भी उस समय हम सब तेज रौशनी में सूरज के इतने बड़े, लम्बे और मोटे लंड को आश्चर्य में डूबे हुए एक टक घूरते हुए देख रहे थे। सूरज का लंड जैसे पोर्न मूवी में चोदने वाले मर्दों का होता है, या फिर जैसे घोड़े का लंड जैसा लम्बा और मोटा होता है वैसा था। अपने टोपे पर एक-दम चमकता हुआ गोरा दिख रहा था। सूरज के लंड की आगे ऊपर की त्वचा मुड़ी हुई सूरज के लंड के टोपे की कगार में एक साथ इकट्ठी हो गयी थी।
जब किरण ने हम सब को सूरज के लंड को बड़े ही गौर से घूर कर देखते हुए पाया, तो सूरज का लंड अपनी हथेली में लेकर उसे प्यार से सहलाते हुए बोली, “पहली बार जब मैंने सूरज को नंगा किया, और उसका लंड देखा तो मेरी तो जान ही निकल गयी थी। मैंने तो खेल-खेल में सूरज से चुदवाने के लिए उसके कपड़े उतार कर उसे नंगा किया। पर जब मैंने उसका यह महाकाय लंड देखा तो फटाफट मैं उसको उसकी निक्कर वापस पहनाने लगी।
मैंने उस समय सोचा कि अगर यह लंड मैंने मेरी चूत में डलवाने का प्रयास किया, तो यह लंड तो मेरी नाजुक चूत में जा ही नहीं पायेगा। पर ज्यादा कोशिश करने पर वह अगर जबरदस्ती मेरी चूत में घुसाया गया तो वह मेरी चूत को फाड़ ही देगा और उसको मेरी चूत में लेने की कोशिश करते हुए खून से लथ-पथ हो कर मैं जरूर मर जाउंगी।”
किरण की बात पर किसी को उस समय किसी तरह का कोई शक नहीं था। मेरे लंड के मुकाबले सूरज का लंड कम से कम डेढ़ गुना लंबा और करीब दोगुना मोटा था। मेरा लंड भी सामान्यतः हिंदुस्तानी मर्दों के लंड से ज्यादा ही बड़ा था। तो आप सब सोच सकते हैं कि सूरज का लंड कैसा होगा। सब किरण की और किरण की बात पूरी करने के लिए एक टक देखने लगे।
किरण ने कहा, “पर सूरज मुझे चोदने पर आमादा था। वह शराब पीया हुआ नशे में धुत्त था। मैं सूरज मुझे चोदे उसके लिए उसके पीछे कई महीनों से पड़ी हुई थी। जब से मैं उसके पीछे पड़ी हुई थी, तब से वह मुझे किसी भी हाल में चोदने के लिए राजी नहीं हो रहा था। वह मुझे हमेशा दुत्कारता रहा, वह मुझसे बात ना करता और आगे बढ़ जाता।
उस दिन मैं सूरज को पकड़ कर अपनी कार में जबरदस्ती बिठा कर मेरे कमरे पर उससे चुदवाने के लिए ले आयी थी। मैंने उसके सामने मरे कपड़े उतार फेंके और मैं अपने बूब्स अपने हाथों में दबा कर और अपनी चूत में उंगली डाल कर उसे उकसाती रही। आखिर में जब मैंने उसके कपड़े उतारे तब उसका यह महाकाय लंड देखा।”
किरण ने सूरज का लंड अपनी हथेली में लेकर उसे सहलाने लगी और आगे की त्वचा से पकड़ कर हलके से प्यार से हिलाना शुरू किया और अपनी बात जारी रखते हुए बोली, “पर तब तक देर हो चुकी थी। मेरे उकसाने से पागल हुए सूरज ने नंगे होते ही मुझे उठाया और मेरे ही पलंग पर मुझे लिटाया और फिर मेरे ऊपर सवार हो गया। सूरज का घोड़े जैसा लंड मेरी छोटी सी चूत पर ऐसे लहराने लगा कि मैं डर के मारे आधी तो उसी समय मर गयी थी ऐसा मुझे लगा।
मुझे लगा जैसे कोई घोड़ा अपना लम्बा मोटा लंड मेरी चूत में डालने जा रहा था। मैं आँखें मूंद कर प्रार्थना करती रही और सूरज ने बिना कोई दया के अपना इतना मोटा लंड मेरी चूत में एक झटका मार कर जोर से घुसेड़ने की कोशिश की।
मेरे पूरे बदन में उस समय इतने तीखे असह्य दर्द की टीस उठी, जैसे एक तेज़ धार वाली कटार मेरे बदन के टुकड़े कर रही हो। मारे दर्द के मैं जोर से चीख उठी और धक्के मार कर सूरज को मेरे ऊपर से नीचे उतारने की कोशिश करने लगी। पर इतने ताकतवर सूरज के सामने मेरी क्या चलती?
इतना लंड मेरी चूत के छोटे से छिद्र में ना घुस पाने से कुछ परेशान सूरज ने कहीं से क्रीम ढूंढ निकाली, और मेरी जोर की चीखों की परवाह ना करते हुए काफी क्रीम और अपनी थूक मेरी चूत के अंदर-बाहर अच्छी तरह से लगा-लगा कर और जोर से धक्के मार-मार कर अपना आधा लंड मेरी चूत में घुसेड़ ही दिया। मेरी चूत वाकई में फट गयी थी, और चूत में से खून बह रहा था।
जोर से चीखते हुए मैं दर्द के मारे कुछ ही देर में बेहोश पलंग पर गिर पड़ी। बहते हुए लाल रंग के खून की परवाह ना करते हुए सूरज ने मेरी बेहोशी की भी कोई तवज्जोह नहीं ली, और बेहोश नंगी पलंग पर पड़ी मुझे चोदता ही रहा। मुझे पता नहीं कि कितनी देर सूरज ने मुझे उस हालात में चोदा, पर जब मैं होश में आयी तब रात हो चुकी थी। सूरज बेहोशी में ही अच्छी तरह मुझे चोद कर अपना वीर्य मेरी चूत में उंडेल कर बाहर का दरवाजा ठीक से बंद किये बगैर ही जा चुका था।”
किरण की दास्तां वाकई काफी पीड़ा देने वाली थी और फिर भी बड़ी ही उत्तेजक थी। मैंने देखा कि मेरा लंड यह सब सुन कर लोहे के छड़ की तरह खड़ा हो गया था और किरण और रीता अपनी जांघों के बीच अपनी चूत में उंगलियां डाल कर अपनी चूत से कितना पानी रिस रहा था, उसका अंदाज लगा रही थी। सूरज ने किरण की गोद में लेते हुए ही किरण की निप्पलों को चूमता हुआ बोला, “तुमने मेरे लिए जो किया उसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है। इसलिए मैं अब जिंदगी भर का तुम्हारा ग़ुलाम हूँ।”
किरण ने सूरज को झुक कर चूमते हुए कहा, “ग़ुलाम नहीं तुम मेरे राजा हो। मैंने जब से तुम्हें अपना प्यार माना है तब से तुम्हारी हर ख़ुशी बेशक तुम्हारी है पर तुम्हारा हर एक ग़म मेरा है। तुम जिस स्त्री को जब चाहो चोदो, मैं कोई शिकायत नहीं करुंगी। बस तुम मुझे अपनी बीवी बनाये रखना। जो भी तुम कहोगे मैं करुंगी। तुम जिस बात से खुश होंगे वह मैं करुंगी, पर मुझे ना छोड़ना।
मैं तुम्हारे बगैर जी नहीं पाउंगी। मैं तुम्हारी ख़ुशी नहीं, मैं तुम्हारे ग़म लेना चाहती हूँ। अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने ग़म देदो, इन आँखों का हरेक आंसू मुझे मेरी कसम देदो। अगर मुझसे मोहब्बत है।” हम सब की आंखों में किरण के ऐसे अप्रतिम प्यार के बारे में सुनते हुए आंसू छलक आये।
किरण और रीता पलंग पर एक-दूसरे से बिल्कुल सटे हुए बैठे थे। किरण ने वातावरण को हल्का करने के लिए सूरज के बिखरे हुए बालों को अपनी उंगलियों से संवारते हुए शरारत भरी मुस्कान दिखाते हुए मेरी और देख कर मुझसे जबरदस्त मस्ती के लहजे में कहा, “चलो यह सब रोना धोना छोड़ो। देखो यह तुम्हारी बीवी रीता बेचारी आधी चुदी हुई प्यासी यहां बैठ कर आपका इंतजार कर रही है। हम आकर तुम्हें डिस्टर्ब कर कबाब में हड्डी बन गए।”
किरण की साफ़-साफ़ खुल्लम-खुल्ली बात सुन कर शर्माती हुई रीता ने अपनी कोहनी से किरण को एक ठोकर मारते हुए कहा, “जो मर्जी में आये बोले जा रही है। अरी कुछ तो शर्म कर।”
किरण ने रीता की ओर देख कर वही मस्ती वाले लहजे में कहा, “अच्छा जी, अभी तुम घोड़ी बन कर चुदवा रही थी उसका क्या? अभी कुछ देर पहले मेरे पति से भी चुदवाने के लिए कह रही थी उसका क्या? तू अब मुझे शर्म के पाठ पढ़ाने लग गयी? मैं जानती हूँ अब तेरी चूत में भी खुजली होने लग गयी है। तो अब शर्म छोड़ और कई लंडों से चुदवाने के लिए तैयार हो जा।”
रीता ने मेरे और सूरज की और उंगली दिखा कर कहा, “चुप बैठ री। मैं खुश हूँ इन दो लंडों से। बाकी के लंडों से तू चुदवाना। तूने तो आज तेरे पति से भी मुझे नहीं चुदने दिया। खैर कोई बात नहीं। तेरे पति को तो मैं तुमसे छीन ही लूंगी, पर आज अगर चुदाई करनी है तो तगड़ी होनी चाहिए। तूने सूरज से तेरी तगड़ी “गांड फाड़” चुदाई करवाई तो अब आज ऐसी ही चुदाई होनी चाहिए। आज ढीली-ढाली चुदाई नहीं, ओके?”
किरण ने भी उसी लहजे में कहा, “अरी, तू क्या समझती है? मेरे पति सूरज तुझे छोड़ेंगे थोड़े ही? वह तो तुझे चोदने के लिए बड़े ही ऊपर-नीचे हो रहे हैं। वह तेरी चुदाई करेंगे तो “गांड फाड़” चुदाई ही करेंगे। यह तो मैंने ही उन्हें रोक कर रखा है। और मैं भी तेरे पति को थोड़े ही छोड़ने वाली हूँ? तू अगर मेरे पति से चुदवायेगी तो मैं भी तो तेरे पति से चुदवाउंगी ना? मैंने तुझे प्रॉमिस किया था ना?”
मेरे और सूरज के बदन भी एक-दूसरे से लगभग सटे हुए थे। किरण की बायी नंगी जांघ रीता की दाहिनी नंगी करारी जांघ से सटी हुई थी। मैं और सूरज अपने हाथ हिला कर आसानी से एक-दूसरे को छू सकते थे। रीता और किरण एक-दूसरे के कंधे से कंधा और जांघ से जांघ मिला कर बैठे हुए थे। रीता बार-बार किरण को और उसकी गोद में सर रख कर आधे बैठे और आधे लेटे हुए सूरज को देख रही थी।
सूरज का मासूम लम्बा सुन्दर चेहरा, उस के ऊपर बारीकी से छिली गयी दाढ़ी, बेफिक्र सी लगती हुई मुस्कान, उसके बड़े इत्मीनान से काटे हुए लम्बे घने काले घुंघराले बाल, कसा हुआ सख्त बदन, उसके चौड़े कंधे, उसका फौलादी सीना जिसके दो छाती के चट्टान से पटल, एक-दम पतली कमर, सिकुड़ा हुआ पेट, बीचो-बीच नाभि, फिर उभरे हुए लंड के ऊपर का हिस्सा, पीछे फुले कूल्हे, सख्त जांघें और देखा ना जाए और देखे बिना रहा ना जाए ऐसा मोटा और लंबा लंड सूरज को एक अजीब सी शक्सियत देता था।
रीता को बचपन से ही अपने पति के बारे में इतने सारे आदर्श, कल्पनाएं और आशाएं थीं कि उसने पहले यह सोचा नहीं था कि एक ऐसा वक्त भी कभी आएगा जब किसी गैर मर्द से चुदवाने के बारे में उसके मन में कोई विचार भी आएगा। जब से मैं और किरण रीता को सूरज से चुदवाने के लिए उसके पीछे पड़ गए तब से धीरे-धीरे रीता के मन में ऐसे विचार आने लगे।
काफी देर तक फिर भी रीता इसके बारे में कोई भी बात करने से भागती रही। पर आखिर में कामवासना की जीत हुई और मैंने और किरण ने मिल कर रीता की चूत में हलचल पैदा कर ही दी। आखिर में मजबूर हो कर सूरज से समर्पण करने की कगार पर रीता पहुँच ही गयी।
अब अपने बिल्कुल बगल में लेटे हुए सूरज के बदन और उसके लंड को देख कर रीता के मन में बड़ी तगड़ी उथल-पुथल हो रही थी। रीता ने सूरज का लंड हाथों में पकड़ कर हिलाया था और कुछ देर तक उस लंड का टोपा चूसा भी था। पर उस वक्त अंधेरे में उसे सूरज के लंड की पूरी पैमाइश नहीं हुई थी।
मैंने आँखें चुरा कर देखती हुई मेरी पत्नी रीता को सूरज के लंड को घूरते हुए पकड़ लिया। मैं समझ गया कि वह सूरज से चुदवाने के लिए तो तैयार थी, पर उसकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि सूरज का इतना बड़ा लंड वह अपनी चूत में कैसे ले पाएगी? कहीं उसका हाल किरण के जैसा तो नहीं होगा? मेरे साथ-साथ किरण भी मेरी बीवी के आँखों के भाव पढ़ रही थी।
अचानक किरण चहक उठी। उसने अपने पति की ओर मुड़ कर देखा और बोली, “सूरज जब हम आये थे तो हमने देखा कि रीता और राज बड़ी मस्ती से चुदाई में मग्न थे। हमने एक कामग्रस्त पंछियों के जोड़े की चुदाई में खलल देकर बड़ा ही अपराध किया है। अब हमें चाहिए कि हम उनको वापस चुदाई में लगाएं।”
सूरज ने मेरी और मुड़ कर कहा, “राज, यार लग जाओ वापस चुदाई करने। अब हम तुम्हें डिस्टर्ब नहीं करेंगे।”
मैंने कहा, “ऐसी कैसे होगा यार? हम लग पड़ेंगे और तुम देखते रहोगे?”
किरण ने मेरी बात काटते हुए कहा, “हम देखते क्यों रहेंगे? हम भी चुदाई करेंगे और तुम्हें चुदाई करते हुए देखेंगे भी।” फिर किरण ने रीता की और मुड़ कर कहा, “रीता बेटा चिपक जाओ अपने पति से हो जाओ शुरू।”
जब किरण के कहने पर भी मैं और रीता चुप-चाप बैठे रहे तब किरण ने खड़े हो कर मुझे कमर से पकड़ा और आधा खड़ा कर घुमा दिया। किरण ने रीता को पलंग पर खिसका कर लंबा लिटा दिया। मुझे पकड़ कर रीता के ऊपर चोदने के लिए सवार होने का इशारा किया। किरण ने मेरा लंड अपनी उंगलियों में पकड़ा और उसे हिलाती हुई रीता की और देख कर बोली, “पकड़ तेरे पति के लंड को अपने हाथ में और रख दे उसे अपनी चूत पर। अब तुझे हमारे सामने चुदवाना ही पडेगा।”
रीता बेचारी ने चुप-चाप मेरा लंड अपने हाथ में लिया और अपनी चूत पर रखा। मैं इसी का इंतजार कर रहा था। मैंने एक हल्का सा धक्का देकर उसे रीता की चूत में घुसा दिया। रीता ने मेरे लंड के उसकी चूत में दाखिल होने पर आँखें बंद की ओर उस वाकये का मजा लेने लगी। शायद उसे कुछ हल्का सा दर्द भी महसूस हुआ होगा। एक हल्की सी सिसकारी निकालते हुए वह चुदाई में मेरा साथ देने लगी।
मेरे साथ में लेटे हुए सूरज को उस शाम रीता को चोदना था। शायद यही प्रोग्राम बना कर किरण और सूरज हमारे कमरे में आये थे। अपने ज़हन में कुछ निराश हुआ सूरज मुझे रीता को चोदते हुए देखने लगा। रीता को पता था कि उसकी चुदाई सब देख रहे थे। उनकी नजरों से बचने के लिए रीता ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी।
किरण अच्छी तरह से सब समझ रही थी। किरण ने झेंप रही रीता को ढाढ़स देते हुए कहा, “रीता अब तो यह तुम देखती और दिखाती रहोगी। इसमें झेंपने की या शर्माने की कोई बात नहीं है। पुरुष और स्त्री की चुदाई कोई पाप या गलत कर्म नहीं है। हम सब पुरुष और स्त्री हमेशा युगों-युगों से चोदते और चुदवाते आये हैं। हमारे माँ-बाप भी चुदाई करते थे और हमारे बच्चे भी चुदाई करते रहेंगे। सारी दुनिया बल्कि सारी सृष्टि चुदाई करती है।
अनादि काल से यह सिलसिला चलता आ रहा है। यह सृष्टि का नियम है। ज्यादातर लोग यह काम छिप-छिपा कर करते हैं। एक-दूसरे को चोदते और चुदवाते हुए देखना भी एक गज़ब का उत्तेजक दृश्य है। जिस पुरुष को हम चाहते हैं उसको किसी और औरत को प्यार और उन्माद से चोदते हुए देखना। या जिस स्त्री को हम बहुत प्यार करते हैं उस स्त्री को किसी गैर मर्द से तगड़े से चुदवाते हुए देखना जीवन का सबसे अधिक उत्तेजक और उन्मादक अनुभव है जो बहुत कम दम्पति को नसीब होता है।”
रीता की समझ में यह सब नहीं आ रहा था। उसका यह पहला अनुभव था जब उन की चुदाई बिना रोक-टोक कोई देख रहा था। इससे पहले रीता ने जरूर मर्द औरत को चुदाई करते हुए कई पोर्न मूवी में देखा था। पर यह पहली ही बार था जब किसी युगल ने रीता को प्रत्यक्ष चुदवाते हुए देखा था।
किरण ने रीता का हाथ थामा, और रीता के कान में अपने होंठ ले जा कर एक-दम धीमे स्वर में फुसफुसाते हुए बोली, “मैं जानती हूँ तू मेरे पति से चुदवाना चाहती है। सूरज भी तुम्हें चोदने के लिए अधीर हो रहा है। मैं यह भी जानती हूँ कि तू यह सोच रही है कि सूरज का इतना बड़ा लंड तू अपनी चूत में कैसे ले पाएगी। अरी पगली, औरत की चूत कुछ अलग मिट्टी से ही बनी होती है। छोटी से छोटी चूत भी जब बड़े लंड से चुदवाती है तो पहले उसे जरूर काफी दर्द सहना पड़ता है, पर धीरे-धीरे वह उस लंड को भी अपनी चूत में ले पाती है।
तुझे पहली बार असहनीय दर्द होगा। तेरी चूत सूझ जायेगी। पर साथ-साथ में पहली बार में ही तुझे उस चुदाई के दर्द में भी गजब का आनंद आएगा। उस दर्द का उस आनंद के सामने कोई मुकाबला नहीं। मेरी बात का विश्वास कर। पहली कुछ चुदाई के बाद तुझे ज्यादा दर्द नहीं होगा। इसी चूत में से ही मर्द के बड़े से बड़े लंड से भी बड़ा बच्चा जन्म लेता है। इस लिए तू बिल्कुल चिंता मत कर।
अभी तू कुछ देर तक अपने पति से चुदवाती रह। जल्दी ही मेरे पति सूरज का लंड तेरी चूत में होगा। वह तुझे शुरू में धीरे से ही चोदेंगे। तुझे ज्यादा दर्द नहीं होगा। बाद में जब तू उनका लंड ले पाएगी तब वह तुझे “गांड फाड़” चुदाई का मजा भी देंगे। मुझ पर भरोसा रख।”
यह कह कर किरण ने प्यार भरी नजरों से रीता की ओर देखा। रीता बेचारी शर्म और लज्जा से कुछ बोल नहीं पायी। किरण ने वाकई रीता के मन की बात कह डाली थी।
रीता ने देखा कि किरण ने यह कह कर अपने पति सूरज को अपने ऊपर चढ़ कर उस को चोदने का इशारा किया। इशारा मिलते ही सूरज फौरन किरण की गोद में से उठ कर किरण को अपनी टांगों के बीच में रख कर किरण के ऊपर सवार हो गया।
किरण की टांगों को ऊपर उठा कर अपने कन्धों पर रख कर सूरज ने अपना लंड किरण की चूत पर केंद्रित किया। किरण ने सूरज के लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ा, ताकि सूरज के लंड की चिकनाहट और किरण की चूत का पानी मिल कर किरण की चूत को कुछ स्निग्ध बना दिया था। उसके उपरान्त किरण ने अपना थूक लगा कर सूरज के लंड को चिकनाहट से लथ-पथ भर दिया।
सूरज ने एक हल्का सा धक्का देकर किरण की चूत में अपने लंड का अग्रभाग धीरे-धीरे दाखिल करना शुरू किया, तांकि किरण को परेशानी का सामना ना करना पड़े। फिर भी किरण के मुंह से एक चीख सी निकल ही गयी। किरण ने रीता का हाथ थामा और उसे देख कर आँख मारी और सब कुछ ठीक है इसका इशारा कर सूरज के लंड को अपनी चूत की और गहराइयों में दाखिल होने का इंतजार करने लगी। सूरज धीरे-धीरे अपना लंड किरण की चूत के अंदर बाहर करता हुआ किरण को चोदता जा रहा था। सूरज के हरेक धक्के के साथ-साथ किरण भी चिल्लाती रहती थी। पर रीता का हाथ थाम कर यह दिलासा भी देती की “सब ठीक है।”
रीता मेरे द्वारा चुदाई के धक्कों से पूरी हिलती हुई अपनी आँखों के कोने से टेढ़ी नजर कर सूरज द्वारा किरण की चुदाई का दृश्य जो कि उसके जीवन का पहला जीवंत चुदाई देखने का दृश्य था, उसे देख रही थी। किरण की इस तरह चुदाई होती हुए देख कर रीता के ज़हन में पता नहीं कैसे-कैसे भाव पैदा हो रहे थे।
सूरज का लंड वाकई में कितना मोटा और लम्बा था वह रीता इतने करीब से सूरज द्वारा किरण की चुदाई के दरम्यान देख रही थी। किरण की चूत में जाता हुआ और बाहर निकलता हुआ सूरज का लंड देख कर रीता की जान निकल रही थी। किरण की चूत में वह पूरा जा नहीं पा रहा था। अंदर डालने के बाद भी सूरज के लंड का काफी बड़ा हिस्सा किरण की चूत के बाहर रह जाता था। किरण सूरज की ऐसे लंड से चुदाई कैसे झेल पा रही थी यह सोच कर रीता का बदन डर के मारे कांपने लगा।
सूरज धीरे-धीरे किरण को एक लय के साथ चोदने लगा था। हालांकि सूरज अपना पूरा लंड किरण की चूत में नहीं घुसेड़ पा रहा था, पर सूरज की जांघों की थपेड़ किरण की गांड के गालों से और चूत के बाहरी भाग में लगने से बड़ा ही कामुक “फच्च… फच्च… थप… ठप्प…” की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था।
मैं तो सूरज द्वारा किरण की इतनी बढ़िया चुदाई देखता हुआ अपनी बीवी की चुदाई करना तो जैसे भूल ही गया। किरण अपने पति से इतनी बार चुदी हुई होने के बावजूद भी सूरज के इतने लम्बे मोटे लौड़े को अपनी चूत में आसानी से नहीं ले पाती थी। अपने पति का लंड अपनी चूत में महसूस कर किरण ने सूरज की चुदाई के साथ साथ कराहना भी चालू रखा था। सूरज किरण की चूत में जैसे ही एक झटके से अपना लंड पेलता, किरण वैसे ही चिल्लाने लगती। पर उसके साथ रीता को आँख मार कर सब ठीक है उसका इशारा भी करती रहती थी। रीता किरण का हाल देख कर मुस्काये या रोये वह उसकी समझ में नहीं आ रहा था।
सूरज के एक धक्का मारने से किरण पूरी तरह हिल जाती थी। उसके साथ किरण के भरे हुए स्तन भी हिलने लगते थे। सूरज उन स्तनों को जब भी मौक़ा मिलता था तब अपनी हथेलियों में उठा कर उनसे खेला करता था। जब किरण ने देखा कि रीता उसकी चुदाई और सूरज के लंड के किरण की चूत के अंदर-बाहर जाने की क्रिया को बड़े ध्यान और उत्सुकता के साथ देख रही थी और किरण की कराहटें सुन रही थी, तब किरण ने रीता के कन्धों पर हाथ रख कर कहा, “तुम्हें लगता होगा कि सूरज का इतना बड़ा लंड मैं कैसे ले पा रही हूँ? मैंने तुम्हें बता दिया ना यह चूत बड़ी लचीली है। पहले आसानी से नहीं खुलती, पर धीरे-धीरे खुल जाती है और ऐसे बड़े लंड को भी ले लेती है, जैसे मैं ले रही हूँ।”
रीता ने यह सुन कर किरण को अपना सर साइड में कर प्यार से चूमा। किरण ने रीता का हाथ थाम कर रीता के कानों में कहा, “सूरज में इतना जोश, उसके लंड में इतना वीर्य, और सूरज में इतना धैर्य है कि वह एक घंटे तक अगर चोदता रहे तब भी वह नहीं झड़ता। और मैं तो हर पांच मिनट में ही झड़ जाती थी। आज भी सूरज मुझे चोदता है तो मेरी जान निकाल देता है। पर भगवान ने स्त्रियों का शरीर और ख़ास कर उसकी चूत ऐसी बनायी है स्त्री को थोड़ा बड़ा लंड से चुदवाने में भी दर्द होता है, पर बड़े से बड़ा लंड भी वह ले सकती है।“
किरण का इस तरह का लेक्चर सुन कर तो रीता और ज्यादा कांपने लगी। जब किरण ने कहा था कि सूरज ने उसकी चूत फाड़ कर रख दी थी, तब रीता को ऐसा लगा कि अगर सूरज उसके इतने मोटे और लम्बे लंड से उसको चोदेगा, तो किरण की चूत भले ही ना फ़टी हो, पर रीता की सुकोमल चूत तो जरूर फ़ट जायेगी। क्योंकि मैं तो मेरी रीता की कोमल चूत को बड़े इत्मिनान और प्यार से चोदता था।
मैं भी सूरज और किरण की चुदाई देख कर उन्माद से प्रेरित हो कर रीता को जोर से चोदने लगा। पर मेरी आँखें किरण की चूत पर गड़ी हुई थी। सूरज के अंदर-बाहर होता हुए लंड को देख कर मैं यह चाह रहा था कि काश वह मेरा लंड होता। सूरज ने मुझे इस तरह लालच भरी आंखों से किरण की चूत को घूरते हुए देखा, और वह मुस्काने लगा। सूरज ने मुझे एक आँख मारी और मेरा हाथ थामा। उस समय किरण और रीता दोनों ने अपनी आँखें मूंदी हुई थी। सूरज ने मुझे अपने करीब थोड़ी ताकत के साथ खींचा।
मैं समझ गया कि सूरज मुझ से जगह बदलना चाहता था। मैं तो इसी के इंतजार में था। मैंने झुक कर रीता की आँखों पर एक कपड़ा फेंक कर बोला, “रीता इस कपडे से अपनी आँखें ढक लो। आँखें सख्ती से बंद रखो और अभी मत खोलना।” मैंने रीता को यह कह कर अपना लंड रीता की चूत में से बाहर निकाल लिया। रीता मेरा इरादा समझती हुई भी कुछ ना बोली। वह चाहती थी और जानती थी कि अब सूरज उसकी चूत में अपना लंड पेलने वाला था। रीता इसके लिए मानसिक रूप से काफी समय से अपने आप को तैयार करने में जुटी हुई थी। एक बार उसने अपनी आँखें खोली और मेरी और देख कर अपना सर हिलाते हुए अपनी सहमति जाहिर कर अपनी टांगें वैसी ही अद्धर हवा में रखी हुई आगे क्या होने वाला है उसके इंतजार में अपनी आँखें सख्ती से मूंद कर लेटी रही।
मैं एक ही पल में अपनी जगह से हट कर जहां सूरज अपने घुटनों के बल आधा खड़ा आधा बैठा हुआ अपनी बीवी को चोद रहा था, उसकी जगह लेते हुए सूरज के लिए अपनी जगह खाली कर दी। सूरज ने अपना लंड किरण की चूत में से निकाल लिया था। किरण रीता की तरह आँखें नहीं मूंदी हुई थी। वह तो सूरज के हटने और मेरे सूरज की जगह लेने का इंतजार कर रही थी। शायद उसी ने ही उस समय सूरज को मुझे उसे चोदने के लिए भेजने के लिए इशारा किया होगा।
मुझे अपनी टांगों के बीच में जगह लेते हुए देख कर मुस्कुरा कर किरण ने मुझे आँख मारी और फिर अपनी आँखें बंद कर दी। आखिर में वह भी तो एक स्त्री थी, जो थोड़ी बहुत तो शर्माती थी। मैंने अपना लंड आसानी से किरण की चिकनी हुई चूत में घुसा दिया और मैं किरण की चूत को बड़े ही प्यार और जोश-खरोश के साथ चोदने लगा।
उस तरफ मेरी बीवी अपनी आँखें बंद किये और अपनी टांगें ऊपर उठा कर अपनी चूत के सूरज को पूरी और अच्छी तरह से दर्शन करवाती क्या होने वाला है उसका इंतजार कर रही थी। सूरज के अपनी टांगों के बीच आने का एहसास होते ही रीता ने अपनी आँखें खोली। सूरज को अपनी टांगों में अपने ऊपर देख कर रीता ने कुछ डरते हुए पर हल्का सा मुस्कुरा कर अपनी बाहें फैलायीं। सूरज रीता की फैलाई हुई बाहों में समा गया और मेरी पत्नी रीता के ऊपर अपना पूरा वजन देकर रीता के बिल्कुल ऊपर लेट गया। सूरज का तगड़ा लंड रीता की चूत में घुसने की नाकाम कोशिश करता हुआ रीता की चूत पर इधर-उधर रगड़ता एक साइड में हो गया।
मेरी पत्नी रीता ने मेरे सुनते हुए सूरज को अपनी बाहों में कस के लेकर उसके होंठों को चूमते हुए बोली, “अभी मैं तुम्हारी बीवी हूँ। मेरे पति ने मुझे और तुम्हें यह अधिकार दिया है कि तुम मुझे अपनी पत्नी समझ कर मुझे जैसे चोदना है चोदो। मैं एक आज्ञाकारी पत्नी की तरह तुम्हारे सारे हुकम मानूंगी और तुम्हें खुश करने की जी जान से कोशिश करुँगी। और हाँ, जो तुमने किरण के साथ व्यवहार किया है, वह मेरे साथ तुम्हें करना चाहिए। गुनाह मैंने किया था किरण ने नहीं। तो सजा भी मुझे ही भुगतनी चाहिए। जिस बुरी तरह से तुमने उस समय किरण को चोदा था, और किरण की जान पर बन आयी थी मैं चाहती हूँ तुम मुझे इस वक्त उतनी ही बुरी तरह अपने इस तगड़े लंड से बेरहमी से मुझ पर बिना कोई रहम किये चोदो।“
मैं मेरी बीवी के ऐसे आत्मपरिवर्तन को बड़े ही ख़ुशी भरे अचम्भे से देख और महसूस कर रहा था। रीता ने सूरज को देखते हुए कहा, “जिस तरह किरण को तुमने रुलाया था, और उसके खून निकाल दिया था, मेरी चूत भी तुम उसी तरह पूरी रात भर चोद चोद कर फाड़ दो। जो किरण कह रही है की तुम “गांड फाड़” चोदते हो, वह चुदाई मुझे भी चाहिए। उससे कम नहीं।
मैं भले ही चीखती चिल्लाती रहूं, तुम मुझ पर बिल्कुल रहम मत करना। मैं इसके लिए तैयार हूँ और तुमसे ऐसा करने पर कोई शिकायत नहीं करुँगी। अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे तुम अपने ग़म दे दो। इन आँखों का हरेक आँसू मुझे मेरी कसम देदो। अगर मुझसे मोहब्बत है।”
जब मैंने और किरण ने यह सुना तो किरण मुझसे और ताकत से लिपट गयी, और मेरे कानों में बोली, “राज, आज मेरे लिए यह सबसे बड़ी ख़ुशी का दिन है।”
मैंने किरण के कानों में अपने होंठ रख कर किरण के कानों को चूमते हुए बोला, “मेरे लिए तो यह दोगुनी ख़ुशी का वक्त है। क्यूंकि मुझे तुम्हारा प्यार, तुम्हारा चन्दन सा बदन और तुम्हारी प्यारी चूत मिली है, और साथ-साथ में रीता को सूरज से चुदवाने का मेरा सपना साकार होते हुए मैं आज अपनी आँखों से देख पाउँगा। इससे बढ़ कर मेरे लिए और क्या हो सकता है भला?”
हम सब एक-दूसरे से इतने करीब थे कि शायद मेरी दबी हुई फुसफुसाहट रीता के कानों में पड़ी। रीता ने फौरन मेरी और अपना सर घुमा कर कहा, “मुझे लगता है कि अब हमें यह छिपा-छिपी का खेला बंद कर अपना प्यार, अपनी ख्वाहिशें, अपनी वासनाएं और कामनाएं छिपाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं, नफरत नहीं। प्यार में हम एक-दूसरे का ग़म लेने की बात होती है, देने की नहीं। हम में से हरेक ने आज एक-दूसरे का ग़म लेने की ही बात की है। जब हम सब का उद्देश्य एक दूसरे को सुख और आनंद देने का हो तो फिर गुप्तता क्यों?”
अपनी चूत की पंखुड़ियां हटा कर पंखुड़ियों के बीच में अपनी चूत का प्रेमछिद्र उजागर कर रीता ने सूरज को अपना लंड घुसा ने के लिए इंगित किया। सूरज ने पहले से ही नजदीक में क्रीम और स्निग्धता देने वाले तैलीय पदार्थ रखे हुए थे। सूरज को पता था की रीता की चूत में जैसे ही वह अपना लंड डालेगा, उसकी चूत की त्वचा पहली बार एक ही झटके में इतना ज्यादा तनाव नहीं झेल पाएगी कि सूरज के इतने मोटे और लम्बे लंड को अपने अंदर ले सके।
पहली बार लंड को बड़े ही धीरे, प्यार से चूत में घुसाना होगा। वरना उसकी प्राण से ज्यादा प्यारी रीता की चूत की कोमल त्वचा फट सकती है, आहत हो सकती है, और उसमें से खून निकल सकता है।
धीरे-धीरे रीता के चूत की त्वचा सूरज के लंड की मोटाई के हिसाब से अपने आप को
फैला पाएगी। यह कुदरत का कमाल का नियम है। उसके बाद रीता को कुछ दर्द हो सकता है, पर वह असह्य नहीं होगा।
अपने प्यार के साथ चुदाई का आनंद उस दर्द को ना सिर्फ भुला ही देगा, बल्कि वह दर्द प्यार के आनंद का प्यारा प्रतिक बन कर और मीठा और आनंद दायी लगने लगेगा। प्यार भरी चुदाई में स्त्री का आनंद पुरुष के आनंद से अतिशय ज्यादा होता है। पुरुष का वीर्य पुरुष के जोश और आनंद पर हमेशा हावी होता है। जैसे ही पुरुष का चरम पर पहुँच कर वीर्य स्खलन हुआ तो उसकी चुदाई में से दिलचस्पी गायब। फिर चुदाई की क्रिया उसे एक यांत्रिक प्रक्रिया सामान लगती है। उसका लंड शिथिल हो जाता है और स्त्री को भी आनंद नहीं दे पाता।
इसके विपरीत स्त्री का आनंद पुरुष की त्वचा के घर्षण मात्र से उजागर रहता है। हालांकि स्त्री को भी उसके हॉर्मोन्स चुदाई में जोश देने के लिए बाध्य करते हैं पर एक बार झड़ने के बाद भी स्त्री चुदाई का आनंद बार-बार ले सकती है और चुदवाते हुए वह एक के बाद एक ऐसे कई बार झड़ सकती है और चुदाई का आनंद पुरुषों से कहीं ज्यादा लम्बे समय तक ले सकती है।
सूरज अपनी प्रियतमा रीता को अपने तगड़े लंड से चुदाई का इतना सारा सुख देना चाहता था, जो रीता ने शायद अपनी जिंदगी में पहले कभी महसूस ना किया हो। सूरज मानता था कि शायद इसीलिए उपर वाले ने सूरज को ऐसा बड़ा, तगड़ा लंड दिया था। सूरज चाहता था कि उस तगड़े लंड से रीता की चूत को बहुत सुख मिले दर्द नहीं। पर कहते हैं ना कि सुख और दुःख एक ही सिक्के के दो पासे हैं। सुख के साथ कुछ दुःख तो अन्तर्निहित है।
सूरज ने धीरे से रीता की चूत में अपना चिकनाहट से लथपथ लंड थोड़ा सा घुसाया। जैसे ही रीता ने महसूस किया कि सूरज अपना लंड उसकी चूत में घुसाने जा रहा है, रीता ने अपनी आँखें मूँद ली थी। उसे डर था कि उसकी चूत का छिद्र जो ऐसे बड़े लंड को लेने का आदि नहीं था। वह इतना ज्यादा छोटा भी साबित ना हो कि सूरज के इतने मोटे लंड को अपने अंदर बिल्कुल घुसने ही ना दे।
पर जैसे किरण ने कहा था, स्त्री की योनी लचीली होती है वह जब जरूरत होती है तो अपने आपको फैला सकती है। पर उसे कुछ समय लग सकता है। पहली बार में एक-दम नहीं फ़ैल सकती। रीता की चूत सूरज ने अच्छी तरह से स्निग्ध कर रखी थी। इस लिए सूरज के लंड को चूत में दाखिल होने में शुरू में दिक्क्त नहीं हुई। पर सूरज का लंड रीता की चूत में थोड़ा ही घुस पाया था।
रीता उसे पूरा अंदर लेना चाहती थी। रीता ने अपना मन पहले से बना लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह उस रात सूरज से बड़ी अच्छी तरह से चुदवाना चाहती थी। वह नहीं चाहती थी कि उस रात सूरज उस पर थोड़ा सा भी रहम करे।
रीता ने किरण के समर्पण के बारे में सूना था और रीता चाहती थी कि सूरज रीता को भी उस रात उसी तरह से चोदे जैसा सूरज ने किरण को सालों पहले बेरहमी से चोदा था। वह चाहती थी कि सूरज उसे ऐसे चोदे ऐसे चोदे की उसकी चूत भी फट जाए और उसमें से भी खून बहने लगे।
रीता ने सूरज से कहा, “सूरज आज प्लीज मुझ पर रहम मत करो। मैं जानती हूँ कि तुम मुझसे बहुत प्यार करे हो, और इसलिए तुम मुझे बहुत प्यार से और धीरे से चोदना चाहते हो। तांकि मेरी चूत को हानि ना पहुंचे। पर मैं तुम्हे हाथ जोड़ कर बिनती करती हूँ कि मुझे उसी तरह से उतनी ही बेरहमी से चोदो जैसे तुमने किरण को चोदा था।
अगर तुम मुझे वैसे ही नहीं चोदोगे तो तुमको मेरी कसम। मुझे एक-दम रफ चुदाई करवानी है। वैसे तो मैं रोज चुदती हूँ। अभी तक मेरे पति ने मेरी बड़े प्यार से ही चुदाई की है। आज रात मैं बिल्कुल रहम भरी चुदाई नहीं चाहती। मैं एक-दम रफ मार डालने वाली चुदाई करवाना चाहती हूँ।”
रीता की बात सुन कर सूरज बड़े ही कश्मकश में पड़ गया। वह कुछ परेशान सा मेरी और देखने लगा। मैंने सूरज से कहा, “रीता सही कह रही है। आज तक मैंने रीता की कोमलता और नाजुक बदन को देखते हुए उसे फूल की तरह समभाल कर चोदा है। पर अब मुझे समझ में आ रहा है कि एक स्त्री को रफ चुदाई से ही शान्ति मिलती है।
भगवान ने स्त्री की चूत में गज़ब की सहनशक्ति दी है। वह पुरुषों के लंड की तगड़ी मार भी झेल सकती है। एक स्त्री दो पुरुष के लंडों को एक साथ अपने दोनों छेदों में ले सकती है। यह कोई ख़ास बात नहीं।
कई स्त्रियां तो अपनी चूत में ही एक साथ दो लंडो को ले लेती हैं। यह होता रहता है। मैं भी तुमसे कहता हूँ कि आज मेरी बीवी को पूरी ताकत से बेरहमी से ऐसे चोदो जैसा तुमने किरण को भी नहीं चोदा। रीता के दिल की ख्वाहिश पूरी करना आज तुम्हारा फर्ज है।
आज मुझे यह मानने में कोई झिझक नहीं कि मैं उस तरह से रीता को नहीं चोद पाउँगा। हमने रीता को अब तक तुम्हारे बारे में और तुम्हारे लंड की तगड़ी चुदाई के बारे में बात कर के बहुत तड़पाया है। वह चाह रही है कि तुम उसे रफ तरीके से चोदो। आज तुम उसकी चूत को इसे चोदो की रीता की चूत भले ही फट जाए पर तुम ना रुकना।”
मेरी बात सुन कर सूरज ने फिर लेटी हुई रीता के कोमल खूबसूरत नग्न बदन को देखा। सूरज का लंड रीता की रफ चुदाई करवाने की बात सुन कर ही ऐसा तगड़ा सख्त हो गया था कि इतना लम्बा और मोटा होते हुए भी वह झुकने का नाम नहीं ले रहा था।
सूरज ने रीता को अपनी बाहों में भर कर कहा, “रीता सच कहूं? आज जब तुम मुझसे कह रही हो तो मैं बताता हूँ कि जिस तरह तुमने मुझे उस समय दुत्कार दिया था मेरे लिए वह झेलना नामुमकिन था। तुम मानोगी नहीं, मैंने मेरे मन की ज्वाला के मुकाबले किरण पर तो कुछ भी जुर्म नहीं किया। महीनों तक मैं समंदर के किनारे जा कर पत्थरों को इतनी ठोकरें मारता था कि मेरे पाँव खून से लथपथ हो जाते थे। तुम अगर उस समय होती तो पता नहीं मैं तुम्हारे साथ क्याक्या करता।”
रीता ने सूरज को अपनी बाहों जकड़े हुए सूरज के होंठों को चूमते हुए कहा, “सूरज, मैं एक कोमल सी नरम नाजुक लगती औरत हूँ। तुम तगड़े चट्टान से सख्त जैसे फौलाद के बने मर्द हो। तुम प्यार में चुदाई करवाने के लिए पागल औरत के दिल की बात नहीं जान सकते। आज वह औरत तुमसे ना सिर्फ तगड़ी चुदाई करवाना चाहती है पर जिसे किरण कहती है ‘गांड फाड़ चुदाई’ ऐसी चुदाई चाहती है। आज मैं तुमसे चुदते हुए मर भी जाऊं तो कोई ग़म नहीं।
तुम उस समय मुझसे जो कुछ करना चाहते थे आज रात करो। मैं सब को बिनती करती हूँ कि वह मेरे और सूरज के बीच में ना आये। तुम मुझे जैसे चाहो, जहां चाहो चोदो, जैसे चाहो गांड मारो। तुम मेरे स्तनों को, गालों को, गांड को, निप्पलों को, होंठों को जैसे चाहो काटो। तुम बेशक मुझे चोदते हुए पीटो। तुम चोदते हुए मुझ से जो कुछ भी करो पर मुझे सब अपने ग़म दे दो। जैसे किरण कह रही थी, इन आँखों का हरेक आँसू मुझे मेरी कसम दे दो। अगर मुझसे मोहब्बत है।”
मैं और किरण आश्चर्य से रीता की ओर देखते ही रह गए। मैंने कभी सोचा भी नहीं था की मेरी बीवी अपनी तगड़ी चुदाई के लिए सूरज से इस तरह बात कर सकती है। पर उससे भी ज्यादा मुझे यह अच्छा लगा कि रीता सूरज पर किये हुए मानसिक अत्याचार का ऋण अपनी “गांड फाड़” चुदाई करवा कर चुकाना चाहती थी। रीता के मन की पीड़ा और रीता की चूत की तड़प अब सही रूप में उजागर हो रही थी।
एक औरत जब अपने आप को एक प्रेमी को पूरी तरह से आत्मसमर्पण करती है और अपनी लाज और मर्यादा से बाहर आ जाती है तो वह कामाग्नि में कितनी जलती है उसका मर्द लोगों को अंदाज होना मुश्किल है। सूरज ने मेरी और देखा और मैंने अपना अंगूठा ऊपर कर सूरज को “ओके” का इशारा किया।
सूरज ने रीता को एक बार फिर कस के अपनी बाँहों में जकड़ा। सूरज ने कहा, “रीता, मुझे तुमसे सिर्फ मोहब्बत नहीं, बहुत-बहुत ज्यादा मोहब्बत है, और उसके साथ-साथ बहुत सारी पुरानी बकाया पड़ी हुई शिकायतें भी हैं। मैंने अब तक उन शिकायतों को कूड़े में डाल दिया था। पर आज तुमने वह कूड़े के डिब्बे का ढक्कन खोलने के लिए मुझे मजबूर कर दिया है।
मैं तुम्हारी रफ़ चुदाई जरूर करूंगा। क्योंकि अगर तुम मुझ से मेरे सारे ग़म लेना चाहती हो, तो आखिर मैं भी तो तुमसे मोहब्बत करता हूँ। अगर तुम मेरी ख्वाहिश पूरी करती हो, तो मुझे भी तुम्हारी ख्वाहिशों का सम्मान करना चाहिए।”
रीता ने सूरज के चेहरे को अपने चेहरे से मिला कर सूरज के होंठों को चूमते हुए कहा, “मेरे राजा, तुमने तो मेरी सारी ख्वाहिशें आज पूरी कर दी हैं। आज अगर मैं मर भी जाऊं, तो मुझे कोई ग़म नहीं है। बस मेरी एक ही ख्वाहिश अब बाकी है, जो तुम अब पूरी करोगे और वह है मेरी “गांड फाड़” चुदाई की। मुझे तुम यह सोच कर मत चोदो कि मैं तुम्हारी प्राणप्यारी रीता हूँ। मुझे तुम यह सोच कर चोदो कि मैं वह रीता हूँ, जिसने तुम्हें अपमानित किया, दुत्कारा, बहुत भला बुरा कहा और तुम्हारे सच्चे प्यार को ठोकर मार कर ठुकरा दिया।”
मैंने उस समय जब सूरज को देखा तो सूरज की आँखों में खून आ गया हो ऐसे उसकी आँखें लाल हो रही थी। सूरज ने अपने नीचे लेटी नंगी रीता की ओर ऐसे क्रूरता से देखा कि ना सिर्फ रीता बल्कि मैं और किरण भी डर से कांपने लगे। सूरज नंगी रीता को नीचे लेटी हुई रख कर उठ खड़ा हुआ।
फिर सूरज ने अपना लम्बा लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपने हाथ से सहलाया और रीता के मुँह के ऊपर बैठते हुए सूरज ने अपने लंड को रीता के मुंह में ठूंसना शुरू किया। कहीं ना कहीं मुझे लगा कि सूरज वास्तव में क्रूरता नहीं कर रहा था, पर रीता की ख़ुशी के लिए क्रूरता का प्रदर्शन कर रहा था।
मैंने देखा की अचानक इस तरह के आक्रमण से चौंकी हुई रीता ने अपना मुंह पूरा खोला। पर कहां सूरज का मोटा लंड और पूरी तरह से खुला हुआ रीता का छोटा सा जबड़ा? रीता की आँखें फट गयी, और रीता की सांसे रुक गयी जब सूरज ने अपना लंड घुसा दिया। रीता अपने होंठों को पूरा का पूरा फुला कर सूरज के लंड को अपने मुंह में लेने की नाकाम कोशिश में लग गयी।
पर सूरज कहां थमने वाला था? सूरज ने जैसे ही रीता के खुले मुंह में घुटनों के बल बैठ कर अपना लंड का थोड़ा हिस्सा घुसाया, कि तुरंत उसने रीता के मुंह को चोदना शुरू किया। रीता सांस नहीं ले पा रही थी। रीता की आँखों की पुतलियां ऊपर चढ़ गयी। सूरज इस की परवाह किये बिना रीता के मुंह को बेरहमी से चोदे जा रहा था।
रीता की जान निकलते हुए देख किरण से रहा नहीं गया। किरण ने सूरज को धक्का मार कर रीता के मुंह में अपना लंड और गहरा घुसाने से रोका। उस समय अगर किरण आगे ना आती तो रीता की साँसे रुक जाती, और रीता बेहोश हो जाती।
सूरज किरण से नाराज दिख रहा था। रीता ने भी सूरज के लंड को अपने मुंह में रखे हुए और बिना अपना सर घुमाये किरण को वहां से हट जाने का इशारा किया। किरण के इस तरह धक्का मारने पर भी सूरज ने अपना लंड रीता के मुंह से नहीं निकाला। सूरज ने लंड रीता के मुंह में और ठूंसा, और बेरहमी से रीता के मुंह को चोदता रहा। रीता के गाल पूरी तरह से फूले हुए थे। रीता की आँखों में से पानी बरस रहा था। रीता के गोरे नंगे बदन से पसीने की धारे बह रही थी।
मैं समझ सकता था कि उस समय रीता लगभग बेहोशी की हालत में होगी। पर सूरज रीता के मुंह को चोदे ही जा रहा था। रीता की आँखें फटने की कगार पर थी। रीता ने अपने हाथ खुले हुए होते भी सूरज को नहीं रोका, और ना ही कोई धक्का मार कर उसे हटाया। मैं रीता की सहनशीलता पर हैरान रह गया।
कुछ देर तक रीता के मुंह को चोदते रहने के बाद जब किरण को लगा कि रीता और मुंह की चुदाई झेल नहीं पाएगी, और बेहोश हो जायेगी, तब किरण ने सूरज को रीता के मुंह को चोदने से रोका और वहां से हटाया। रीता की आँखें फट रही थी। सूरज की मुंह चुदाई से रीता का पूरा बदन पसीने से तर हो रहा था। पर रीता ने मुंह से उफ़ तक नहीं निकाली। सूरज के वहां से हटते ही रीता बिस्तरे पर ढेर हो कर गिर पड़ी।
सूरज वहां से हट कर रीता की दो जाँघों के बीच में पहुंचा, और झुक कर अपनी जीभ रीता की चूत की पंखुड़ियों पर रख कर सूरज अपनी जीभ के अग्रभाग से रीता की चूत के कोने कोने को चाटने लगा। यह कार्यकलाप रीता के लिए बड़ा ही रोचक था, और जो कुछ परेशानी रीता ने अपनी मुंह चुदाई से झेली थी, सूरज की जीभ चुदाई से उसे काफी अच्छा लगा। पर इसके बाद सूरज ने रीता की चूत में जब अपनी दो उंगलियां डाली और उनसे रीता की चूत को अपनी उँगलियों से चोदने लगा, तब रीता पलंग पर अपनी गांड पर उन्माद के मारे कूदने लगी।
जैसे-जैसे सूरज ने अपनी उंगली चोदन की फुर्ती तेज की, तब रीता के तोते उड़ने लगे। कुछ देर तक इस तरह से उंगली से रीता की चूत चोदने के बाद जब रीता से रहा नहीं गया। तब रीता ने सूरज की कमर पकड़ी और उसे कहा, “सूरज, अब बहुत हो गया, अब मेरी चूत तुम्हारा लंड चाहती है।
तुम मुझे अपने लंड से ऐसे चोदो की मेरी चूत फट जाए। मैं तुम्हारा पूरा लंड अपनी चूत में चाहती हूँ। चाहे मेरी चूत उसे ले पाए या नहीं। मैं ऐसे नहीं चुदवाना चाहती जैसे अभी तुम किरण को चोद रहे थे। तुम किरण की चूत में अपना लंड पूरी तरह से डाल भी नहीं रहे थे। अगर तुमने ऐसा किया तो मेरा मरा हुआ मुंह देखोगे।”
रीता की बात सुन कर किरण और मैं हैरानगी से एक-दूसरे को देखते रहे। यह रीता क्या कह रही थी? रीता पहली बार सूरज से चुदवा रही थी। उसकी चूत को सूरज के लंड से एडजस्ट होने में काफी समय लग सकता है। उसके लिए रीता को सूरज से धीरे-धीरे कई बार चुदना पडे़गा तब कहीं जा कर धीरे-धीरे रीता की चूत की त्वचा फ़ैल कर सूरज के इतने मोटे लंड को कुछ हद तक अपने अंदर ले पाएगी। किरण इतने सालों से सूरज से चुदने के बाद भी अभी तक सूरज का पूरा लंड अपने अंदर नहीं ले पा रही थी।
रीता ने सूरज को जैसी कसम दी थी तो जाहिर है कि सूरज उस कसम को नहीं तोड़ेगा। उसे रीता को बेरहमी से चोदना ही पड़ेगा। रीता इतनी सरल थी, और उसे सूरज के प्यार का ऐसा अहसास उसे हो रहा था कि वह मरने तक के लिए तैयार थी।
सूरज की आँखों में खून सवार था, फिर भी उसके दिल में रीता के लिए प्यार भरा हुआ था। उसे रीता की दी हुई कसम भी नहीं तोड़नी थी और रीता की जान भी खतरे में नहीं डालनी थी। सूरज की समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे? पर और कोई चारा नहीं था। उसे रीता की चूत में अपना पूरा का पूरा लंड उस रात डालना ही था।
सूरज ने वह तेल जो अपने बगल में रखा हुआ था उसे अपने लंड पर बोतल को उलटी कर के उंडेला। सूरज का पूरा मोटा लम्बा लंड तेल से लथपथ हो गया। अपनी हथेली और उँगलियों में तेल की काफी मात्रा ले कर सूरज ने रीता की चूत में काफी अंदर तक तेल खूब उदारता से लगाया। बेचारी रीता अपनी जाँघें चौड़ी रखती हुई उत्तेजना और डर की मारी सूरज को यह सब करते हुए देखती ही रही। उसकी हिम्मत नहीं पड़ी की सूरज का डरावना चहरा देखने के बाद उसे कुछ कह सके।
पर अपने प्यारे प्रियतम से अपनी चूत में तेल डलवाते हुए भी रीता काफी मचलने लगी थी। उसे लगा कि आज की रात उसकी जिंदगी की सबसे यादगार रात बनने वाली थी। अब वो अपने प्रियतम के लंड को अपनी चूत में घुसने का इंतजार कर रही थी। एक स्त्री अपने प्यारे प्रियतम के लंड से चुदवाने के लिए कितनी बेकरार होती है वह तो स्त्रियां ही जानती हैं।
रीता ने जब महसूस किया कि सूरज अब उसे चोदने के लिए तैयार था, तब उसकी जान उसकी हथेली में आ गयी। इतनी ज्यादा बहादुरी दिखाने के बावजूद भी जब सूरज के लंड का पहली बार रीता की चूत की पंखुड़ियों से स्पर्श हुआ, तब रीता काँप उठी। वह अंदर ही अंदर अपनी आखरी साँसे गिन रही हो ऐसा उसे लगने लगा था।
सूरज ने एक धक्का दिया, और उसके लंड का अग्रभाग आसानी से रीता की चूत में चला गया। रीता को ख़ास कोई परेशानी नहीं हुई। रीता ने कुछ राहत की सांस ली। पर उसे क्या पता था कि सूरज के लंड का सिर्फ टोपा ही रीता की चूत में दाखिल हुआ था। सूरज ने एक और धक्का मारा जब सूरज का लंड रीता की चूत की दीवारों को चीरता हुआ रीता की चूत में घुसने लगा। पहले धक्के में सूरज का एक चौथाई लंड रीता की चूत में क्या घुसा, रीता से सहा नहीं गया और रीता जोर से चीख उठी। रीता की चूत में से आग जैसी अगन उठी।
पर आश्चर्य की बात यह थी कि सूरज को रोकने या कोसने के बदले वह जोर से चीख कर सूरज को और चुनौती दे रही थी और कह रही थी, “बस इतना ही? चोदो, और जोर से चोदो, और अंदर घुसाओ तुम्हारा लंड मेरी चूत में, रुको मत, मेरे दर्द की परवाह मत करो, मैं बिल्कुल ठीक हूँ।” इस का मतलब रीता को जबरदस्त दर्द हो रहा था पर वह फिर भी और दर्द की कामना कर रही थी।
पता नहीं भगवान ने स्त्रियों को कैसी और कितनी मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति दी है कि वह इतनी नाजुक होते हुए भी पुरुषों से कहीं ज्यादा दर्द और परेशानी झेल सकती है।
सूरज ने जब यह सुना तो उसे और जोश चढ़ा। सूरज ने नंगी रीता के मासूम गले पर अपने हाथ की मुठ्ठी की पकड़ कसी और दूसरे हाथ से रीता का एक सख्त मुलायम स्तन अपनी तगड़ी हथेली में पिचकाते हुए अपने घोड़े के लंड के जैसे लम्बे और मोटे लंड को रीता की गुलाबी, नाजुक फूलों की अधखिली कोमल कली सी चूत में और घुसाया।
इस बार रीता की चीख गगनभेदी थी। वह इतने जोर से चिल्ला उठी कि ऐसा लगा जैसे पूरा कमरा ही रीता की चीख से गूंज उठा। यह साफ़ था कि वह इस लंड को अपनी चूत में इतनी गहराई तक जाने के कारण असह्य दर्द झेल नहीं पा रही थी, फिर भी वह जोर से कह रही थी, “और जोर से, घुसाओ और अंदर, चोदो तुम्हारी रण्डी रीता को, निकाल दो अपने अंदर की सारी कड़वाहट और गुस्सा मेरी चूत पर। फाड़ दो मेरी चूत, रुकना मत, याद रहे मैंने आपको अपनी जान की कसम दी है।”
जैसे रीता चिल्लाती गयी सूरज की आँखों में खून की गहरी लालिमा और बढ़ने लगी। सूरज के सख्त तगड़े लंड की नस-नस में सूरज का वीर्य फुंफकारने लगा। सूरज अब रुकने का नाम नहीं ले रहा था। फिर भी कहीं ना कहीं सूरज के जहन में एक हिस्सा था जो उसे रोक रहा था।
वह जानता था कि अगर उसने रीता की चूत में अपना पूरा लंड जैसे रीता चाहती थी वैसे बेरहमी से घुसा दिया, तो सूरज के लंड की मोटाई और लम्बाई के अनुसार रीता की चूत फ़ैल नहीं पाएगी। जिसके कारण रीता की बेहोशी तो तय थी। पर रीता की चूत की त्वचा फट सकती थी, और आतंरिक खून रिसाव के कारण रीता की जान को भी खतरा हो सकता था।
सूरज हालांकि अपना लंड रीता की चूत में घुसाते रहने के लिए मजबूर था। फिर भी वह इस बात से सतर्क था कि रीता की चूत की त्वचा फ़टे नहीं, और कैसे भी करके सूरज का लंड अंदर जा सके। इसलिए सूरज अपना लंड रीता की चूत में अंदर बाहर करता रहता था, ताकि रीता को लगे कि सूरज उसे चोद रहा था। और ऐसा ना लगे कि सूरज उस पर कोई रहम कर रहा था।
सूरज चाहता था कि जब सूरज का लंड बाहर निकला हुआ हो, तब तक तो रीता की चूत को राहत मिले, और रीता की चूत की त्वचा को फ़ैलने का मौक़ा मिलता रहे। सूरज के लंड के अंदर-बाहर आते-जाते रहने के कारण तेल भी रीता की चूत में फैलता रहे जिससे घर्षण कम हो।
मुझे और किरण को बड़ा आश्चर्य हुआ कि सूरज के उस महाकाय लंड को रीता अपनी चूत में लेती जा रही थी। हालांकि सूरज का आधा लंड ही रीता की चूत में घुसा हुआ था। पर यह भी मेरे हिसाब से एक तरह का वर्ल्ड रिकॉर्ड था।
मुझे नहीं लगता था कि रीता की नाजुक चूत सूरज के लंड का टोपा भी पूरी तरह से अपने अंदर ले पाएगी। शायद यह रीता की मानसिक हिम्मत और सहनशीलता का ही कमाल था। कहते हैं कि शारीरिक से कहीं ज्यादा मानसिक शक्ति शरीर को ताकत देती है।
सूरज रीता की चूत को एक लय के साथ चोदने लगा था। शायद रीता की चूत की सूरज के लंड के ऊपर जबरदस्त सख्त पकड़ के कारण सूरज रीता को चोदने में ज्यादा आनंद और उत्तेजना महसूस कर रहा था। सूरज अपना लंड मुश्किल से अंदर डाल पाता था। तो उतना ही मुश्किल लंड को रीता की चूत में से खींच कर बाहर निकालना होता था। इसका कारण शायद यह था कि रीता धीरे-धीरे यह नहीं चाह रही थी कि सूरज का लंड उसकी चूत में से बाहर निकले।
अपने प्रियतम से चुदाई का आनंद यह स्त्री की अमूल्य सौगात है, और यह चुदाई जितनी देर ज्यादा चले प्रियतमा उतना ही अधिक आनंद पाती है। इसीलिए जब पुरुष जल्दी झड़ जाने के कारण अपनी प्रमिका को ज्यादा देर चोद नहीं पाता, तो प्रेमिका को बिल्कुल आनंद नहीं आता।सूरज की चुदाई से रीता को असहनीय दर्द होते हुए भी उसको भी पछाड़ दे ऐसा उत्कट उन्माद, और चूत में एक गजब की त्सुनामी सी उमंग की बाढ़ महसूस हो रही थी।
रीता की चूत में भी धड़कते दिल की धड़कन की तरह बिजली के झटके सी फड़कन हो रही थी। उस फड़कन को सूरज अपने लंड की रीता की चूत द्वारा सख्त जकड़न के कारण आसानी से महसूस कर रहा था। वह फड़कन रीता की चूत की कामुक दशा और उसके बदन में फड़क रही कामाग्नि को दर्शाता था। कई हफ़्तों से कहीं ना कहीं रीता के मन में सूरज से चुदाई करवाने की दिली तमन्ना पनप रही थी। वह साकार होने पर जो उन्माद रीता के दिमाग को पागल सा बना रहा था, उसका अहसास रीता सूरज के लंड के अंदर-बाहर जाने के घर्षण से पैदा हो रहा था।
सूरज जब अपना लंड एक धक्का मार कर रीता की चूत में पेलता था, तो ऐसा दिखता था जैसे सूरज सिर्फ अपना लंड ही नहीं। उसका पूरा बदन यहां तक की उसकी कमर, गांड तक रीता की चूत में चले जाते हों। ऐसा तगड़ा धक्का पेलता था। रीता पूरी सिर से पांव तक हिल जाती थी। रीता के स्तन और रीता की गांड के गाल तक हिल जाते थे। रीता लेटी हुई होने के कारण धक्का लगने पर पलंग पर कभी इधर तो कभी उधर खिसकती रहती थी। पर फिर भी रीता की सख्त छोटी चूत में सूरज का लंड थोड़ा घुस कर रुक जाता था। ज्यादा घुस नहीं पाता था।
रीता की चूत के अंदर की आगे की त्वचा इकट्ठा हो जाती और रीता को बहुत ज्यादा दर्द देती थी। सूरज रीता का दर्द अच्छे से समझ सकता था। पर रीता की चीखें सूरज को रोकने या टोकने के बजाये उसे ज्यादा जोर से ठोकने के लिए ही कह रही थी। चीख कर भी सूरज को और ज्यादा जोर से चोदने के लिए ही कहती रहती थी। सूरज भी समझ नहीं पा रहा था कि भगवान ने इस औरत को किस मिट्टी से बनाया था। यह औरत इतना दर्द कैसे झेल लेती थी।
धीरे-धीरे सूरज का लंड रीता की चूत में घुसता जा रहा था। रीता की जोरदार चीखें धीरे-धीरे कराहट का रूप ले रही थी। सूरज के लंड के रीता की चूत में हरेक धक्के के साथ-साथ रीता की एक कराहट भी निकल जाती थी। सूरज का लंड रीता की चूत में जो उन्माद पैदा करता था, वह रीता एक तगड़ी कराहट के रूप में बाहर निकालती थी।
बाहर बैठे सुनने वाले को तो यही लगेगा जैसे अंदर कोई लड़की लॉन टेनिस खेलते हुए हरेक शॉट पर चीख रही हो। सूरज के बदन से हरेक धक्का जो सूरज का लंड रीता की चूत में थोड़ा और गहराई में घुसने में कामयाब होता नजर आ रहा था। वह रीता की कामाग्नि को और बढ़ा देता था। रीता की चूत में से निकली यह चुदाई की कामाग्नि रीता के दिमाग तक को तरबतर कर देती थी। रीता को समझ में आ रहा था कि क्यों हर औरत को चुदवाने के लिए तगड़े लंड की ही अपेक्षा होती है।
सूरज का लंड जरूर रीता को उसकी नानी याद दिला रहा था। पर साथ-साथ में वह दर्द भी उसे बहुत ज्यादा प्यारा और मीठा लग रहा था। उपर वाले ने भी पता नहीं इंसान के लंड और चूत में क्या स्वाद भर दिया है?
किरण और मैं इस तरह की किरण की सूरज द्वारा तगड़ी चुदाई देखते ही रह गए। सूरज का चिकनाहट से लथ-पथ लंड रीता की चूत में कभी अंदर जाता, तो कभी बाहर आते इतनी प्यारी आवाज कर रहा था कि कुछ देर तक तो हम अपनी चुदाई पर ही ध्यान देना भूल गए, और सूरज के लंड को रीता की चूत में अंदर-बाहर होते हुए देखते ही रहे।
किरण इसके कारण मुझसे कुछ नाराज होती हुई रूठ कर बोल उठी, “तुम्हारे ठीक नीचे एक नंगी औरत तुम्हारी बीवी जितनी खूबसूरत भले ना हो पर उतनी बुरी भी नहीं है। वह तुमसे चुदने के लिए तुम्हारे लंड का बेसब्री से इंतजार कर रही है। अगर तुम अपनी बीवी की चुदाई करवाने से फारिग हो गए हो तो अब उसकी चुदाई भी करो।”
किरण की बात सुन कर रीता और सूरज ने भी हमारी और देखा। सूरज के लंड के धक्कों से कराहती हुई रीता उस हाल में भी कुछ पलों के लिए किरण की बात सुन कर मुस्कुरा दी। सूरज ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे एक धक्का मार कर किरण को चोदने के लिए प्रेरित किया।
मैं उसी शाम स्विमिंग पूल की क्लब में किरण की चूत अच्छी तरह से चाट चुका था, और किरण भी मेरा लंड बढ़िया तरके से चूस चुकी थी। किरण ने मेरा लंड अपने हाथों में लेकर हिलाते हुए उसे धीरे से अपनी चूत पर रखा। इससे पहले सूरज से रीता की चुदाई देखने में मशगूल हो कर कुछ देर के लिए मैंने किरण की चूत से अपना लंड निकाल लिया था। तब फिर मैंने किरण की चूत की पंखुड़ियों को हटाते हुए किरण के प्रेमछिद्र में मेरे लंड को एक ही झटके में घुसेड़ दिया।
रीता और सूरज की गुत्थम-गुत्थी के मुकाबले मेरा लंड किरण की चूत में वैसे घुस गया जैसे मक्खन में छुरी घुस जाए। मैंने घुटनों के बल किरण के ऊपर सवार हो कर अपने लंड से किरण की गुलाबी चूत को चोदना फिर से शुरू किया।
पता नहीं क्यों, अपनी बीवी कितनी भी खूबसूरत क्यों ना हो, हमें दूसरों की बीवी अगर थोड़ी सी भी ठीक-ठाक हो, तो हमारी बीवी से हमेशा ज्यादा खूबसूरत लगती है। मौक़ा मिलने पर हम उसे छेड़ने या चोदने की इच्छा भी रखते हैं।
हालांकि किरण कोई साधारण सी खूबसूरत औरत नहीं थी। वह तो माशाअल्ला बड़ी ही खूबसूरत थी। किरण की चूत का रसीलापन मुझे उस रात को अनुभव करने को मिला।
जिस तरह से किरण मेरी चुदाई के साथ-साथ अपनी गांड हिलाती हुईं मेरी चुदाई का जवाब दे रही थी, वह एक अनूठा अनुभव था। जब हम हमारी बीवी को दिन-ब-दिन चोदते रहते हैं तो वह अनुभव हमारे लिए और हमारी बीवी के लिए भी कोई नया या अनूठा नहीं होता।
हम हमारा लंड बीवी की चूत में डाल कर थोड़े धक्के मार कर अपना वीर्य निकाल कर बीवी से अलग हो जाते हैं। उसी तरह हमारी बीवी भी कुछ धक्कों को बर्दाश्त कर हमें जाने देती है और हमारा काम ख़तम हो जाता है। वह एक व्यायाम होता है।
पर जब हम कोई नयी चूत चोदते हैं या हमारी बीवी कोई नया लंड लेती है, तो वह तो पूरा अनुभव ही एक अलग आयाम होता है। कहते हैं कि “अपनी बीवी को चोदना बस व्यायाम होता है। नयी चूत चोदें तो नया आयाम होता है।”
हालांकि रीता मुझसे बड़े चाव से चुदवाती थी। पर वह सालों साल का पुराना चोदने और चुदवाने का रवैया, वही घिसी पीटी बात-चीत, वही एक-दूसरे से सामाजिक खींचा-तानी और गुत्थम-गुत्थी चुदाई के मजे को किरकिरा कर देती थी। किरण को चोदना मेरे लिए एक ऐसा अनूठा अनुभव था, जिसका मैं शब्दों में नहीं वर्णन कर सकता।
किरण का मेरे लंड उसकी चूत में डालने पर जो सिहरन करना और मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर उसे प्यार से सहलाना। उस लंड को बड़ी ही शिद्द्त से पहले चाटना। फिर उसको अपनी जीभ से छूते हुए होंठों को पूरे लंड के ऊपर लपेट कर चूमना, चूसना इत्यादि।
स्विंमिंगपूल क्लब में जब मुझे किरण की चूत चाटने का मौक़ा मिला, तब मुझे उसकी चूत चाटने में बड़ा ही मजा आ रहा था। किरण की चूत में से रिस रहा उसका स्त्रीरस बड़ा ही स्वाद था। मैं दुबारा किरण की चूत चाटना चाहता था।
मैंने किरण की टाँगें चौड़ी कर मेरा मुंह किरण की चूत के पास ले जा कर मेरी जीभ से उस दिन एक बार फिर मैं किरण की चूत में से रिस रहा रस चाटने और पीने लगा। किरण के लिए इस तरह मेरी जीभ से उसकी चूत पर हो रहा यह कार्यकलाप बड़ा ही रोमांचक साबित हो रहा था। मैंने महसूस किया की किरण का रोम रोम मेरी चूत चटाई से कांपने लगा था।
एक औरत के लिए अपने पसंदीदा गैर मर्द से चूत चटवाना बड़ा ही उत्तेजक और मादक होता है। वैसे भी किसी गैर मर्द का स्पर्श मात्र स्त्री को उकसा देता है। चूत का स्पर्श तो रोमांचक होगा ही। और उसके ऊपर किसी गैर मर्द की जीभ का स्पर्श होने से तो वह स्त्री उन्माद की पराकाष्टा महसूस करने लगती है। किरण भी मेरी जीभ के उसकी चूत को कुरेदने से किरण पलंग पर ही अपने कूल्हे मचलती हुई अपनी उत्तेजना दर्शा रही थी। किरण के मुंह से सिकारियां निकलने लगी थी। कमरे में रीता की चीखें और किरण की सिसकारियों ने रूम के वातावरण को उन्मादक बना दिया था।
उधर मेरी पत्नी रीता और सूरज रफ चुदाई में लगे हुए थे। सूरज मेरी बीवी के गले को अपनी एक हथेली में कस कर दबाते हुए रीता की सांस रुक जाए ऐसी हालत पैदा कर रहा था, और दूसरे हाथ से रीता के स्तनों को बुरी तरह मसल रहा था। पर रीता थी कि सूरज को बिल्कुल रोक नहीं रही थी। मैंने मेरी नग्न कमसिन पत्नी को सूरज से चुदवाने के लिए बड़ी ही आतुर दशा में देखा।
सूरज की चुदाई की अपेक्षा में रीता की चूत भी ज्यादा ही गीली हो चुकी थी, बल्कि रीता की चूत से भी उसका पानी निकल रहा था। रीता सूरज से चुदवाने के लिए बावरी हो चुकी थी। रीता के स्तनों को सूरज अपने हाथों में लेकर मसल रहा था और रीता की फूली हुई निप्पलों को दबा दबा कर जैसे उसमें से दूध निकालना हो वैसे निचोड़ता हुआ उन्हें पिचका रहा था।
किरण के स्तन भी बड़े ही मस्त गोलाई से भरे हुए फुले हुए थे, जिसके ऊपर हलकी चॉकलेट रंग की एरोला के बीच स्तनों की लम्बी फूली हुई निप्पलें उद्दंड सी सख्ती से खड़ी थी।
एरोला के ऊपर कई फुंसियां किरण की उन्मादक स्थिति की चुगली खा रही थी। किरण मेरी चुदाई की उम्मीद में एक-दम उत्तेजित अवस्था में दिख रही थी। किरण ने मेरा लंड अपने हाथ में लिया, और उसे प्यार से सहलाने लगी। मेरे लंड की अग्रत्वचा को अपनी मुट्ठी में लेकर उसे ऊपर नीचा कर वह मेरे लंड को और लम्बा और सख्त बनाना चाहती थी। वैसे ही मेरा तना हुआ सख्त लंड पूरी तैयारी में था। किरण ने मुझे कहा, “बाबा, तुम मेरे मुंह में अपना लंड उस तरह मत ठूंसना जैसे सूरज रीता के मुंह को चोद रहे थे। मैं तो सांस रुकने से मर ही जाउंगी। मुझे इतनी जल्दी मरना नहीं है।”
मैंने किरण को दिलासा दिलाया। मैंने कहा, “मैं तुम्हें नहीं मरने दूंगा। मैं तुम्हें मुंह में नहीं मैं तुम्हारी चूत चोदना चाहता हूँ।”
मैंने अपना लंड किरण की चूत में घुसाया। किरण की स्निग्ध अनुभवी चूत में मेरा तगड़ा सख्त लंड ऐसे घुस गया जैसे मक्खन के ढेर में तेज चाक़ू घुस जाता है। किरण की चूत मुझ से चुदाई की अपेक्षा में उत्तेजना के मारे पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मेरा लंड भी चिकनाहट से भरा हुआ था तो मेरे लंड को किरण की चूत में जाने में कोई दिक्क्त महसूस नहीं हुई।
मैं कामातुर किरण के ऊपर सवार हो कर मेरा दोस्त सूरज जैसे मेरी बीवी रीता को चोद रहा था मैं उसकी बीवी किरण को चोदने लगा। फर्क यह था कि रीता की सूरज से उसके तगड़े लंड से चुदाई के कारण चीखें निकल रही थी, और किरण मेरे लंड की चुदाई से बड़ी ही उन्माद से भरी हुई मेरे नीचे बिस्तर पर अपनी गांड इधर-उधर खिसका कर सिसकारियां निकाल कर मेरी चुदाई का आनंद ले रही थी।
मेरी बीवी की हो रही “गांड फाड़” चुदाई को देख कर मैं और किरण भी उत्तेजित हो कर और तेजी से चुदाई में लगे हुए थे। अपना लंड किरण की चूत में अंदर-बाहर करते हुए मेरी नजर सूरज के मोटे लंड के ऊपर से हटा नहीं पा रहा था। रीता की चूत में सूरज ने धीरे-धीरे करीब-करीब अपना पूरा लंड घुसा दिया था।
हालांकि यह कहना भी ठीक नहीं होगा, क्यूंकि जिस पोजीशन में सूरज रीता को चोद रहा था, उस पोजीशन में सूरज का लंड टेढ़ा होते हुए रीता की चूत में दाखिल हो रहा था, जिसके कारण रीता को पुरे जोश से चोदते हुए भी सूरज के लंड का कुछ हिस्सा रीता की चूत में जा नहीं रहा था। सूरज यह जान बुझ कर कर रहा था, या यह एक इत्तेफ़ाक़ था, यह कहना मुश्किल था।
उस रात किरण और रीता की खूब चुदाई हुई। सूरज ने रीता और किरण को खूब सख्ती से दो बार चोदा। मैंने भी किरण को खूब चोदा। सुबह करीब चार बजे हम सब जब थक कर लुढ़क कर पलंग पर गिर पड़े तब सूरज ने हम सब को देखते हुए कहा, “हम सब को एक-दूसरे से इतनी मोहब्बत है कि हम सब एक-दूसरे के ग़म, दुःख और आंसू शेयर करना चाहते हैं। यही मोहब्बत है। किरण ने मेरा ग़म अपना बना लिया, राज ने रीता को वह सुख दिया जो कम पति अपनी पत्नी को देते हैं, रीता ने मुझे अपना पूरा आत्मसमर्पण कर मुझे जिंदगी का इतना बड़ा तोहफा दिया।”
तब रीता ने सूरज को अपनी बाहों में भर कर कहा, “तुमने तो सब से ज्यादा मोहब्बत की हम सबसे। तुमने मुझे गुमनामी के अंधेरे में से ढूंढ निकाला, और मेरा ऐसा सम्मान किया, जो मेरे जीवन का अमूल्य तोहफा है। उसके बाद आज अभी तुमने मेरी “गांड फाड़” चुदाई की जो हर एक औरत चाहती है। तुमने किरण को सारे सुख दिए और राज का मुझे चुदवाने का सपना भी पूरा किया। जिंदगी में मोहब्बत करो तो ऐसे करो कि महबूब या महबूबा के सारे ग़म आप ले लो और उसका दामन खुशियों से भर दो। यही मोहब्बत का सही फलसफा है।”
