शीला की जवानी

भाभी

मैं शीला यादव, उम्र ३२ वर्ष, लंबाई ५’५ इंच तो सांवला रंग, शरीर थोड़ा मांसल तो काली लंबी जुल्फें, चुचियों का जोड़ा मानों पपीते जैसे तो चूतड गोल और गुंबदाकार। मैं अपने पति विवेक और १० साल का बेटा रवि के साथ आरा में रहती हूं जहां मेरे पति सरकारी दफ्तर में काम करते हैं और हम दोनों का जीवन प्यार से भरा रहा लेकिन कुछ महीनों से विवेक की रुचि मेरे में नहीं के बराबर रह गई, शादी के १२ साल हो चुके थे और मैं हमेशा से पति व्रता स्त्री बनकर रह गई, शरीर की भूख और काम क्रिया की इच्छा जागती रहती थी लेकिन विवेक ऑफिस से आकर खाना खाते फिर बेड पर मुझसे चेहरा फेरकर सो जाते और मुझे तो शंका होने लगा की कहीं उनका किसी लड़की या औरत के साथ अफेयर तो नहीं है इसलिए उनके मोबाइल को मैं देखती जब वो वाशरूम में होते लेकिन मुझे कुछ ऐसा नही मिला जिससे विवेक पर शक कर सकूं और मेरा मन तो इधर उधर भटकने लगा फिर एक शाम मुझे खबर मिली कि मेरे छोटे देवर यहां आने वाले हैं जोकि यहीं रहकर एग्जाम की तैयारी करते तो मैं मन ही मन खुश हुई, विवेक ऑफिस से आया तो मैं चाय बनाकर लाई फिर दोनों बैठकर चाय पीने लगे तो वो बोले ” प्रेम कल आएगा तो गेस्ट रूम ठीक कर दो

( मैं बोली ) पटना में वो कोचिंग कर रहे थे तो फिर वहां कोई दिक्कत थी क्या
( विवेक बोले ) नहीं अब कोचिंग क्लास कर चुका है व्यर्थ का खर्च क्यों करें इससे अच्छा यहीं रहकर पढ़ाई करेगा क्यों तुमको कोई प्रॉब्लम
( मैं बोली ) उहूं वो रहेंगे तो मेरा काम कम हो जाएगा, मार्केट से सामान तो बेटा को बस स्टॉप पर छोड़ना ये सब वो करेंगे ” लेकिन मेरी इच्छा तो कुछ और की थी फिर अगले दिन प्रेम घर आया, उसके बारे में बता दूं कि वो २५ साल का होगा तो देखने में स्मार्ट और शरीर से फिट चुकी कसरत करता है साथ ही दौड़ता भी है ताकि दारोगा की परीक्षा को पास कर सके, वो घर आया तो उसके हाथ में दो बड़ा बड़ा बैग था जिसे ऑटो वाले ने बरामदे पर रख दिया और मैं बरामदे पर खड़ी प्रेम को देख बोली ” बोलिए तो एक छोटा वाला बैग उठाकर रख दूं( प्रेम हंस दिया ) नहीं भाभी मैं रख दूंगा आप मेरे लिए एक कप चाय बना दीजिए ” और मैं किचन चली गई फिर दो प्याला चाय बनाकर लाई, दो बेडरूम के साथ बीच में छोटा सा हॉल था और एक वाशरूम जोकि गलियारे से बाहर था और बरामदे के आगे थोड़े से जगह में बागान था, किराए के मकान में रह रही थी और मैं चाय का प्याला लिए हॉल में आई तो प्रेम बैठा हुआ मोबाइल में कुछ देख रहा था फिर मैं आगे की ओर झुकी और प्रेम को चाय का प्याला दी तो मेरे सीने से पल्लू नीचे सरक गया और मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ब्लाउज से बाहर आने को बेताब होने लगी, प्रेम मेरी चूचियों को ध्यान से देख चाय का प्याला हाथ में पकड़ा फिर मैं सीधे खड़ी हुई और साड़ी के पल्लू को सीने पर रख कुर्सी पर बैठ गई, चाय पीने लगी तो प्रेम चाय पीता हुआ मेरे छाती को घूरने लगा, मैं आसमानी रंग की साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट में थी फिर भी साड़ी के रहते हुए भी मेरी चूचियों का कुछ हिस्सा दिख रहा था तो मैं पूछी ” आप चाय पीकर आराम कीजिए फिर भैया भी आ जाएंगे तो खाना बनाऊंगी
( प्रेम बोला ) भाभी आप चाय पीकर रूम ठीक कर दीजिए

( मैं उसको देख मुस्कुराई ) रूम को पहले से ही ठीक कर दी हूं ताकि देवर जी को कोई परेशानी नहीं हो ” और मैं चाय पीकर उठी फिर अपने रूम चली गई, शाम के ०५:३० बजे थे तो दाई के आने का वक्त हो चुका था साथ ही विवेक भी आने पर था तो मैं बेड पर लेटकर प्रेम के बारे में सोच रही थी, शादी से पहले या फिर शादी के बाद कभी भी किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर नहीं हुई लेकिन अब इच्छा होने लगी है और फिर रात के ०९:३० बजे तक हमलोग खाना खा लिए और प्रेम मुझे खाते वक्त भी तिरछी नजरों से देखता रहा।

मैं, विवेक और रवि अपने रूम मे आकर सो गए तो रोज की तरह आज रात भी मुझे कुछ नहीं मिलने वाला था और मैं साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज पहने ही बिस्तर पर लेट गई, थकान के कारण मुझे नींद भी जल्दी आ गई। रात को मेरी नींद खुली तो मैं उठकर एक ग्लास पानी पी ली फिर रूम से निकल गई कारण की मुझे तेज पिसाब लगी थी, मैं गलियारे से होते वाशरूम के पास गई फिर दरवाजा को धकेल उसे खोली और टॉयलेट सीट पर बैठ मूतने लगी, दरवाजा बंद नहीं की थी और इतने में दरवाजा खुला तो मैं हड़बड़ा गई की कहीं प्रेम तो नहीं और वो अपने पैजामा से लन्ड निकाल चुका था तो मैं उसके लन्ड को देखते रह गई तो वो मेरी चूत को, जल्दी में उठकर साड़ी नीचे की तो प्रेम लन्ड को पैजामा में घुसाया और मैं उनसे बचकर निकली फिर हॉल में बैठकर पानी पीने लगी, पता नहीं देवर जी मेरे बारे में क्या सोचते होंगे, शाम को उन्हें चूचियां दिखा दी तो अभी मेरी चूत वो देख लिए, इतने में प्रेम वहां आया ” भाभी आप यहां बैठी हैं जाकर सो जाइए
( मैं उसको देख बोली ) सॉरी देवर जी मुझे गलत मत समझिएगा’

( प्रेम बोला ) क्या हुआ अगर दरवाजा बंद करना भूल गई तो ” मैं शर्म के मारे नजर गड़ाए उठी फिर अपने रूम जाकर सो गई, किसी तरह रात बीत गई तो अगली सुबह उठकर विवेक और रवि के लिए नाश्ता तैयार की तो प्रेम भैया के साथ बैठकर चाय पी रहे थे और मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी, दाई आई फिर वो काम करने लगी तो मैं प्रेम के रूम में गई और वो अपने सामान को जगह पर रख रहा था ” नाश्ता कब करेंगे देवर जी

वो बोला ) आपके साथ नाश्ता करूंगा भाभी आप स्नान कर तो लीजिए ” और मैं हॉल में आकर बैठ इस सोच में डूबी हुई थी की कैसे प्रेम के साथ हमबिस्तर हुआ जाए, मन में दुविधा थी की ये तो पाप है लेकिन शरीर की जरूरत के आगे सब कुछ फीका पड़ जाता है। मैं कामवाली बाई को कुछ काम समझाई फिर कपड़े लेकर वाशरूम चली गई, अंदर से दरवाजा बंद कर कपड़े उतार ली फिर स्नान कर बदन को टॉवल से पोंछ पेटीकोट, ब्रा, ब्लाउज और साड़ी पहन ली, हॉल में आई तो दाई सब्जी काट रही थी तो मैं प्रेम को आवाज लगाई ” देवर जी जाकर स्नान कर लीजिए फिर नाश्ता करना है

( प्रेम उधर से निकला और बोला ) ठीक है भाभी अभी आया ” और मैं किचन जाकर आलू के पराठे बनाने लगी, कुछ देर बाद कामवाली भी काम कर चली गई तो मैं हॉल में लगे टेबल पर लाकर नाश्ता रखी, प्रेम अपने रूम से निकला फिर कुर्सी पर बैठ मुझे देखने लगा तो मैं उसके प्लेट में आलू के पराठे देने लगी और वो खुद सॉस डालने लगा और दोनों नाश्ता करने लगे, मैं तो शर्म के मारे उसकी ओर देख भी नहीं रही थी तभी प्रेम बोला ” भाभी आप मुझसे क्या नाराज हो

( मैं बोली ) बिल्कुल नहीं नाराजगी किस बात की ” और दोनों नाश्ता कर अपने अपने रूम चले गए, सुबह के ११:०० बजे थे तो घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था लेकिन मैं पहल करती इतनी हिम्मत मुझमें नहीं थी और मैं बेड पर जाकर लेट गई रात को नींद अच्छे से नहीं थी इसलिए आंख लग गई। मेरी आंख अचानक से तब खुली जब मुझे किसी के हाथ का स्पर्श पैर पर हुआ और मैं हड़बड़ा कर उठी तो देखी की देवर जी मेरे पैर पर हाथ रख बेड के किनारे पर बैठे हुए हैं ” ये क्या प्रेम जी

( प्रेम बोला ) भाभी घर का काम करते करते थक जाती होंगी तो सोचा की आपकी बदन मालिश कर दूं
( मैं उसे देख मुस्कुराई ) ओह ठीक है तो फिर कीजिए मेरी सेवा ” मैं करवट लिए लेट गई और प्रेम मेरे पैर से लेकर घुटने तक हल्के हाथों से दबाने लगा, मुझे तो अच्छा लग रहा था तभी देवर जी मेरे साड़ी सहित पेटीकोट को घुटनों तक कर मालिश करने लगे और मै उनके स्पर्श से कामुक होने लगी, अभी तो मेरे घुटनों तक को नंगा कर हाथ लगाया है पता नही कहीं साड़ी सहित पेटीकोट को कमर तक करके मेरे नग्न बदन को सहलाने लगे, मैं धैर्य बनाए रखी और प्रेम मेरे घुटने से ऊपर साड़ी पर से ही जांघो को दबाने लगा, मैं अब ” आह ओह बहुत अच्छा मालिश करते हैं देवर जी ” और मैं चित होकर लेटी तो प्रेम मेरे कमर के पास बैठ साड़ी के ऊपर से ही जांघो को दबाने लगा और मैं उसके छुअन से उसकी ओर खींची चली जा रही थी, इतने में देवर जी अपना एक हाथ मेरे साड़ी के अंदर घुसाए तो उनका हाथ मेरे जांघो पर फिसल रहा था और मैं कामुकता के आगोश में समा चुकी थी ” आह ओह प्रेम तुम बहुत अच्छे से मालिश करते हो

( उसका हाथ मेरी जांघ के ऊपरी हिस्से को सहलाने लगा तो मैं उसकी मंशा समझ गई ) देवर जी आप किधर हाथ लगा रहे हैं
( मेरी सांसें तेज हो चुकी थी तो उफान लेती चूचियां ब्लाउज से बाहर आने को बेताब थी ) आपकी जांघें दबा रहा हूं भाभी ” और वो मेरे दूसरे जांघ के ऊपरी हिस्से को भी सहलाने लगा, मैं कामग्नि की गिरफ्त में आ चुकी थी ” आह ओह उह देवर जी आप अब हाथ हटाइए ” लेकिन प्रेम तो मेरी चूत को रात में ही देख चुका था, वो अचानक से मेरी चूत के दोनों फांकों को चुटकी में लेकर मिंज दिया ” आह आउच ” कहते हुए उठ बैठी और मेरे साड़ी की पल्लू सीने से नीचे आ गई, मैं देवर जी के हाथ को पकड़ ली थी तो प्रेम हाथ को झटकते हुए साड़ी से बाहर निकाल दिया और उठकर जाने लगा लेकिन मैं उसके हाथ पकड़ बेड पर खींच ली ” आप मुझे बीच भंवर में छोड़कर नहीं जा सकते ” तो देवर जी मेरे बगल में बैठ मेरे चेहरा को सहलाने लगे फिर साड़ी को पकड़ कमर से खोल उसे बदन से निकाल दिए, मुझसे पूछे ” क्यों भाभी जान भैया आपके बदन की मालिश नहीं करते

( मैं उसको देखने लगी ) वो तो अब मेरे करीब आते ही नहीं, मेरे से मन भर गया है तो मैं प्यासी औरत की तरह बेड पर तड़पती रहती हूं ” फिर प्रेम मेरे गाल चूम लिया और मैं चेहरा फेर बोली ” लेकिन देवर जी यदि उनको ये सब पता चल गया तो

( वो मुझे बाहों में भर गाल चूमने लगा ) भाभी कोई है यहां देखने वाला, आप प्यासी हैं और मैं आपकी प्यास बुझा सकता हूं ” तो फिर मैं भी बेझिझक प्रेम को चूमने लगी और वो मुझे बेड पर लिटा दिया, मेरे चेहरे को चूमता हुआ ब्लाउज पर से ही चूची को पकड़ मसलने लगा तो मैं ” आह ओह उह उई धीरे धीरे दबाओ ना प्रेम ” , वो मेरे ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दिया तो मैं सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ में लेटी हुई उसके ओंठ का प्यार पा रही थी, अब उसके पीठ पर हाथ फेरते हुए प्रेम के ओंठ का प्यार गर्दन पर पा रही थी तो प्रेम मेरे ब्लाउज को उतारने लगा। मैं खुद उसकी बाहों में समाकर मजे लेना चाहती थी, तभी देवर जी मेरे ब्लाउज उतार मेरी बूब्स को नंगा कर दिए और मैं शर्म महसूस करते हुए अपने चेहरा को फेर ली, मेरे बड़े बड़े बूब्स पर हाथ फेरते हुए वो मेरे कमर पर हाथ रखे ” आ ओह उह क्या कर रहो हो प्रेम उधर मत जाओ

( प्रेम मेरी बूब्स के निप्पल को उंगली में लिए मिंजने लगा ) आह ओह आआआह्ह्ह इतना तड़पा रहे हो ” तो प्रेम मेरे पेटीकोट के नाड़ा को खोल कमर से नीचे करने लगा, मैं दोनों जांघो को सटाए चूत छुपा रही थी, शीला तो अब नग्न अवस्था मे बिस्तर पर लेटी हुई थी और प्रेम मेरे बूब्स पर चेहरा किए बोला ” इतनी बड़ी हो गई आपकी बूब्स भाभी

( मैं धीमे स्वर में बोली ) हां बच्चा पैदा करने के बाद जब उसमे दूध उतरती है ना तब बड़ी हो जाती है ” और वो मेरे एक बूब्स को पकड़ उसको मुंह में लिए चूसने लगा तो मैं उसके बाल को पकड़े छाती को थोड़ा ऊपर कर स्तनपान करा रही थी, मेरे पूरे बदन में आग लगी हुई थी और देवर जी मजे से चुस्क चूसक कर चूची चूस रहे थे ” आह ओह अब बस कीजिए देवर जी मेरी बु. खुजला रही है

( वो चूची मुंह से निकाल दिया और मेरी जांघें जोकि फैली हुई थी के बीच हाथ लगाए चूत सहलाने लगा ) इसमें खुजली हो रही है ना भाभी
( मैं उससे नजर मिलाते हुए बोली ) भाभी नहीं शीला बोलो ” तो प्रेम मेरे बूब्स पकड़ दबाने लगा साथ ही मेरे जिस्म को चूमे जा रहा था, उसका दूसरा हाथ मेरी चूत के फांकों के बीच था जिसमें उंगली डाल रगड़ने लगा तो मैं बिस्तर पर चुदाई को आतुर थी लेकिन मेरे देवर जी काम कला में इतने निपुण हैं वो मुझे अब पता चलने वाला था, मैं जांघो को पूरी तरह से फैलाई हुई थी तो उनकी एक उंगली चूत में घुसी और मैं ” आह उह क्या प्रेम एक उंगली से उसका क्या होगा अपना लौड़ा डालो, मैं तो अपना आपा खोकर ऐसे शब्द का प्रयोग कर दी लेकिन प्रेम आराम से मेरी कमर तक को चूमा फिर मेरी चूत से उंगली निकाल पूछा ” लगता है आपको घोड़े का लन्ड चाहिए

( मैं शर्म से अपने चेहरे पर हथेली रख दी ) छीः क्या क्या बोल रहे हैं, जो करना है कीजिए ना ” और प्रेम मेरे जांघो के बीच चेहरा लगाए चूत को चूमने लगा जिस पर छोटे छोटे बाल थे, मैं उसके बाल पकड़ सर को पीछे की ” क्या देवर जी जरा रुकिए अभी साफ कर आती हूं ” और मैं पेटीकोट को छाती से पहन वाशरूम चली गई फिर बूर को साबुन से साफ कर रूम आई तो मेरी नजर प्रेम के पैजामा पर पड़ी जिससे उसके लन्ड का उभार दिख रहा था। मैं बेड पर बैठ उसके पैजामा के डोरी को खोलने लगी ” तुम तो मुझे नंगा कर दिए अब तेरा औजार देखूं ” फिर उसे नंगा कर उसके लन्ड पकड़ सहलाने लगी, लन्ड १५-१६ सेंटीमीटर लंबा होगा और अब शीला बेशर्म होकर उसके लन्ड पकड़ हिलाते हुए उसके ओंठ चूम ली ” प्रेम इतना लम्बा तेरा सामान बिना इसकी पानी पिए नहीं हो सकता ” तो वो मेरे पीठ पर हाथ फेरने लगा फिर मुझे बेड पर लिटाया ” आपके जैसी सेक्सी और हॉट औरत को भैया प्यासा छोड़ देते हैं बहुत गलत बात है

( वो मेरे जांघो को फैलाकर मेरी चूतड के नीचे तकिया लगाया और बूर पर हाथ फेरने लगा ) वाह आपकी चूत कितनी हॉट है जरा चूम तो लूं ” फिर प्रेम मेरे चूत को चूमने लगा और मैं चूतड को थोड़ा ऊपर करने लगी ” उह उई आह मेरी चूत में कितनी गुदगुदी हो रही है प्रेम चाट ना ” और वो बूर के फांकों को उंगली से फैलाकर उसमें जीभ घुसाए चाटने लगा तो मेरी तो जान ही निकलने लगी ” उई मां आह ओह इतना मजा चटवाने में आता है आज मालूम हुआ ” और वो तो पूरा जीभ चूत में घुसाए चाटने लगा।

मैं बिस्तर पर लेटी कामुकता के आगोश में समा चुकी थी और मेरे जिस्म में मानो करेंट प्रवाहित होने लगी, मैं अब सिसकने लगी ” ओह प्रेम आह मेरी बूर कभी कोई चाटा ही नहीं प्लीज अब जीभ निकाल लो वरना मेरी चूत से रस निकल जाएगा

( प्रेम बूर से जीभ निकाल मुझे देखने लगा ) सही में मेरी जान इस उम्र में भी तेरी सेक्सी बदन देख कोई भी तड़प उठेगा ” और फिर वो मेरे जांघो के बीच लन्ड पकड़े बैठा तो मेरी सांसें मानो रूक सी गई, इतने में मेरी चूत में प्रेम के लन्ड का सुपाड़ा घुसा फिर तो लन्ड अंदर समाने लगा, महीनों बाद चुदवाने जा रही थी इसलिए चूत का रास्ता सिकुड़ चुका था और प्रेम का लन्ड मेरी चूत में खंजर की तरह चुभने लगा ” आह ओह तेरा लन्ड तो बूर की तार तार ढीला कर देगा

( प्रेम जोर से धक्का मारा और मैं चींख पड़ी ) उई मां फाड़ दिया, लेकिन प्रेम तेजी से धक्का देते हुए मेरे बूब्स दबाने लगा ” दस साल के बच्चे की मां की चूत फट रही है चूपकर साली रण्डी ” और उसका लन्ड मेरी चूत की गहराई तक जाकर धक्का दिए जा रहा था, मैं जीवन में पहली बार गैर मर्द के साथ हमबिस्तर हुई थी और मेरे बदन की गर्मी बढ़ती जा रही थी ” आह ओह उह आआह्हह्हह और तेज चोद ना महीनों बाद चूत को लन्ड मिली है इसलिए थोड़ी असहज महसूस कर रही हूं

( प्रेम मेरे जिस्म पर लेटकर चोदने लगा और उसके छाती से मेरी बड़ी बड़ी बूब्स रगड़ा खा रही थी ) आह और तेज अब देख मैं क्या करती हूं ” तो मैं अपने चूतड को उछालना शुरू की और प्रेम चोदता हुआ मेरे ओंठ चूम लिया, मेरी चूत तो आग की भट्टी बन चुकी थी और मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में मस्त थी और तभी मेरी चूत से पानी निकलने लगा तो प्रेम मेरे जिस्म पर से उठा और बेड पर लेट गया, उसका लन्ड फुंफकार रहा था तो वो मेरे चूची दबाते हुए बोला ” शीला मेरी लन्ड जरा चूस ना

( मैं बोली ) मुझे शर्म आती है ” फिर भी प्रेम जिद्द करने लगा तो मैं उठकर उसके कमर के पास बैठ गई, उसके लन्ड को पकड़ चूमने लगी और वो हाथ बढ़ाए मेरी चूची दबा रहा था, मैं जीभ मुंह से निकाल उसपर सुपाड़ा रगड़ने लगी तो प्रेम सिसकने लगा ” आह ओह शीला मुंह में लेकर चूस ना ” और मैं उससे नजरें मिलाते हुए मुंह खोल लन्ड अंदर ली फिर चूसने लगी तो वो चूतड को ऊपर कर पूरा लन्ड मेरे मुंह में घुसाना चाहा लेकिन मैं चेहरा थोड़ा उपर कर उसके २/३ लन्ड मुंह में लिए चूसने लगी तो प्रेम ” आह ओह उह चूस साली रण्डी तेरे मुंह में ही वीर्य स्खलित करूंगा ” और मैं सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी तो प्रेम मेरी बाल को पकड़े नीचे से लन्ड का धक्का मुंह में देने लगा फिर मेरे मुंह से लार टपकने लगा तो मैं लन्ड मुंह से निकाल दी और नंगे ही वाशरूम चली गई, वापस आई तो प्रेम मुझे बेड पर कुतिया की तरह कर दिया और मेरी चूतड के सामने बैठ गया फिर मुड़कर देखी तो वो घुटने के बल था, सुपाड़ा सहित आधा लन्ड चूत में घुसाया फिर धक्का देते हुए चोदने लगा तो मैं अब चूतड को हिलाते हुए चुदाने लगी और प्रेम मेरे सीने से लटकते चूची को पकड़ दबाने लगा ” चोद साले और तेज अब तुझे बताती हूं की मैं कितनी बड़ी चुदक्कड हूं

( प्रेम चोदता हुआ हांफने लगा ) आह ओह उह अब मेरा निकलेगा शीला ” फिर तो उसके लन्ड से वीर्य की धार छूट पड़ी और मेरी चूत गीली हो गई, मैं अब उससे अलग होकर बेड पर लेट गई फिर दोनों फ्रेश हुए।

दोपहर में दोनों साथ में खाना खाए तो मैं उनसे नजर नही मिला पा रही थी, थोड़ी आत्मग्लानि महसूस कर रही थी और जीवन में पहली बार कुकर्म की थी तो मन में अपराधबोध हो रहा था और खाना खाते वक्त प्रेम बोला ” भाभी आप क्यों अफसोस कर रही हैं, इसमें आपका क्या कसूर
( मैं उनकी ओर देखी ) कोई अफसोस नहीं है देवर जी मुझे तो अच्छा लगा

( प्रेम मुझे देख हंस दिया ) ठीक है भाभी तो आज रात फिर से ” मैं कुछ नहीं बोली फिर खाना खाकर आराम करने चली गई, दोपहर के २:०० बजे रवि स्कूल से वापस आया फिर उसे खाना खिलाई और रोज की तरह शाम तक बेड पर आराम करती रही लेकिन आज मेरे बदन को सुखद अहसास मिला था, एक तो पति की रुचि मुझमें नहीं रही तो दूसरी ओर कम उम्र के लड़के के साथ हमबिस्तर हुई फिर शाम को पति घर आए तो तीनों साथ में चाय पीने लगे और विवेक बोला ” मैं तो ऑफिस में रहता हूं इसलिए कुछ जरूरत हो तो भाभी से बोल देना
( प्रेम बोला ) हां भैया ” और फिर मैं खाना बनाने लगी तो विवेक टी वी देख रहे थे, प्रेम अपने रूम में जाकर पढ़ाई करने लगा तो मुझे आज रात उसके साथ दुबारा हमबिस्तर होने की इच्छा थी लेकिन उसकी ओर से पहल हो तभी मैं ऐसा कर सकती थी, रात को सब साथ में खाना खाए फिर मैं अपने बेडरूम चली गई, विवेक और रवि बेड पर आते ही नींद की आगोश में चले गए तो मैं बेड पर लेट प्रेम के बारे में सोच रही थी और मुझे भी कुछ देर में नींद आ गई,

मैं आज साड़ी और ब्लाऊज़ के जगह नाईटी पहन रखी थी और मेरी नींद देर रात खुली वो भी पीसाब लगी थी तो मैं उठकर वाशरूम गई फिर फ्रेश होकर वापस आई तो हॉल से ही देखी की प्रेम के कमरे की बत्ती बंद है और मैं उसके रूम की ओर गई, संयोगवश दरवाजा खुला था तो प्रेम गहरी निंद्रा में थे और नाईट बल्ब की रोशनी में मैं उनके बेड के किनारे बैठी फिर उनके पैर पर हाथ फेरते हुए लन्ड के उभार पर हाथ लगाई लेकिन प्रेम गहरी निंद्रा में था और मैं उसके पैजामे की डोरी खोल धीरे से उसे कमर से नीचे कर दी तो उसका गेहूंवा रंग का लन्ड दिखा जोकि अर्ध रूप से टाईट था और मैं उसे पकड़ दबाने लगी फिर भी देवर जी नींद से नहीं जागे तो भी मैं उनके लन्ड को पकड़ हिलाना शुरु की, लन्ड के चारों ओर काली झांट थी जिसमें उंगली डाल घुमाने लगी और उनका लन्ड खड़ा हो गया तो मैं अब सोची की लन्ड को मुंह में लेकर चूसा जाए की प्रेम की आंखें खुल गई और वो मुस्कुराया ” ओह भाभी आप जगी हुई हैं ” तो मैं उसके लन्ड को छोड़ उठ खड़ी हुई लेकिन प्रेम मेरे हाथ पकड़ मुझे अपनी ओर खींच लिया और मैं उसके गोद में बैठ गई, देवर जी मेरे बूब्स को नाईटी पर से ही पकड़ दबाने लगे साथ ही उनका ओंठ मेरी सुराहिनुमा गर्दन को चूमने लगा तो उसका टाईट लन्ड मेरी गांड़ में चुभ रहा था ” ओह आह उई देवर जी प्लीज मुझे जाने दीजिए कहीं भैया जाग गए तो

( वो मेरे चेहरे को चूमते हुए बूब्स दबाने लगा ) आप अपनी मर्जी से आए हैं भाभी जान आराम से रहिए ” और वो मुझे बेड पर लिटा दिया तो मेरी नाईटी की डोरी पर हाथ रख वो खोल दिया और फिर नाईटी को दोनों कंधे की ओर कर मुझे नंगा कर दिया तो मैं आंख बंद किए उसके चुम्बन का एहसास चेहरे पर पा रही थी, वो मेरे जिस्म पर चेहरा झुकाए ओंठ को चूमने लगा तो मैं जीभ निकाल उसके मुंह में घुसाई जिसे वो चूसने लगा और मैं उसके पैजामा की डोरी को खोल लन्ड को बाहर की जोकि पूरी तरह से टाईट था, उसे हिलाने लगी तो प्रेम मेरे जीभ चूसते हुए एक बूब्स को दबाने लगा तो मैं कामुकता वश अपने पैर बिस्तर पर रगड़ने लगी, उसके चेहरे को पीछे कर जीभ मुंह से निकाली तो मेरी सांसें तेज हो चुकी थी साथ ही चूचियां उफान लेने लगी और प्रेम मेरे छाती पर सर रख बोला ” कितनी सेक्सी लग रही हैं आप

( मैं चेहरा फेर ली ) प्रेम जल्दी में जो करना है करो मुझे डर लग रहा है ” और वो मेरे कमर के पास बैठ एक तकिया चूतड के नीचे लगाया, मेरी जांघो को फैलाकर चूत पर हाथ फेरने लगा फिर झुका और बूर पर चुम्बन देने लगा तो मैं खुद अपने बूब्स पकड़ दबाने लगी, प्रेम मेरी चूत की फांकों को फैलाया फिर उसमें जीभ घुसाए चाटना शुरू किया तो मैं आहें भर रही थी ” उफ आह उई बूर मत चाटिए देवर जी बदबू आती होगी
( वो चेहरा ऊपर कर बोला ) क्या भाभी आपकी बूर तो साफ है मानो आप पूरी तैयारी करके मेरे पास आई ” और वो बूर में जीभ घुसाए चाटने लगा, एक हाथ मेरे चूची पर लगाया फिर दबाते हुए मुझे कामुक कर रहा था तो मैं ” आह उह ओह इस चूत में अपना औजार घुसाइए ना ” लेकिन प्रेम बूर चट्टा की तरह जीभ से चूत चाटते रहा और मैं अब चुदाई को आतुर थी फिर भी प्रेम मेरी बातों को नजरंदाज करते हुए चूत चाटने में लगा हुआ था और आखिर में जीभ निकाल लिया।

देवर जी बेड पर लेट गए तो उनका लन्ड जोकि लंबवत था साथ ही फुंफकार रहा था को मैं देखते हुए तड़प उठी फिर उठकर लन्ड पकड़ ली, उसके सुपाड़ा को नाक से लगाए सुंगध लेने लगी तो प्रेम मेरे चूची को पकड़ पुचकार रहा था, मैं अब सुपाड़ा को चेहरे पर रगड़ते हुए ओंठ पर रख रगड़ने लगी तो प्रेम ” आह ओह जान तुम तो बेड पर उस्ताद हो लिपस्टिक की जगह मेरे लन्ड को ही रगड़ रहे हो ” बोला लेकिन मैं झट से मुंह खोल लन्ड अंदर ली फिर चूसते हुए झांट में उंगली घुमा रही थी तो प्रेम मेरे काम कला से प्रसन्न था, अब मैं उसके लन्ड मुंह से निकाल जीभ से चाटने लगी फिर बोली ” आप आराम कीजिए मैं जरा आई ” तो मैं अपने बेडरूम गई, विवेक तो खराटे भर रहा था और रवि भी गहरी निंद्रा में था और मैं वापस देवर जी के पास आई फिर दरवाजा बंद कर लेट गई तो प्रेम मेरे नाईटी को खोल नंगा कर पूछा ” भाभी आगे से डालूं या पीछे से

( मैं बोली ) फिलहाल आगे से अगली बार तेल डालकर उसकी चुदाई करना ” और प्रेम मेरे बूर पर सुपाड़ा रगड़ते हुए अंदर घुसाया और लन्ड पेलने लगा ” ओह तुम्हारी चूत तो रो रही है

( मैं हंस दी ) हां तुम्हारे लोलीपॉप के लिए ही तो रो रही थी अब आराम से उसे चुप कराओ ” इतने में प्रेम जोर से धक्का मारा और चोदने लगा तो मैं दिन में भी चुदाई थी, इसलिए चूत आराम से लन्ड हजम कर चुदवा रही थी और मैं ” आह ओह उह उई आआआह्ह और तेज चोद साले मेरी बूर को लन्ड की भूख लगी है

( प्रेम मेरे जिस्म पर लेट चोदने लगा तो मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने लगी ) वाह जानेमन तू तो मेरे लन्ड से चुदवाकर मस्त है ” मैं चुप रही और वो चोदता हुआ मेरे चेहरे को चूमने लगा तो मैं चूतड स्थिर किए चुदाने लगी, मैं तो प्रेम के बदन के नीचे लेटी हुई थी और दो जिस्म आपस में घर्षण क्रिया कर एक दूसरे को तृप्त कर रहें थे और प्रेम का १४-१५ सेंटीमीटर लंबा लन्ड मेरी चूत को मस्त कर रहा था। मैं अब दुबारा चूतड उछालना शुरू की तो प्रेम मध्यम गति से धक्का देता हुआ मेरे ओंठ चूम लिया ” शिला और तेज चूतड उछाल साली रण्डी तू तो एक नंबर की रण्डी है

( मैं मुस्कुरा दी ) हां साले रण्डी तो तूने मुझे बनाया बाकी मैं तो कभी गैरों की ओर नजर भी नही डाली, ओह आह बूर में आग लगी है ” फिर भी प्रेम धकाधक चुदाई करता रहा और मैं चुदवा रही थी, मैं अब चूतड उछालना बंद कर दी कारण की दिन में भी चुदाई हुई थी सो कमर में दर्द होने लगा था तो प्रेम मेरे ओंठ चूम पूछा ” डार्लिंग थोड़ी देर का ब्रेक ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी फिर वो मेरे बदन पर से हटा और कमर से टॉवल लपेट वाशरूम चला गया, मैं सोची की देखा जाए की विवेक और रवि सो रहे हैं या नहीं तो बदन पर नाईटी डाल रूम से निकली फिर अपने बेडरूम घुसी तो दोनों नींद में थे और मैं वापस प्रेम के कमरे में आई, वो बेड पर बैठा हुआ था तो मैं दरवाजा बंद कर बोली ” अब कमर में दर्द हो रहा है

( वो टॉवेल हटा लन्ड पकड़े बोला ), तो फिर दीवार के सहारे घोड़ी बन जाईए ” मैं वहीं पर दीवार की ओर मुंह किए खड़ी हुई तो प्रेम मेरे कमर में हाथ डाल मेरी चूतड को पीछे किया और मुझे बिल्कुल ही चौपाया जानवर की तरह खड़ा कर मेरे गांड़ के सामने खड़ा हुआ तो मैं पीछे मुड़कर बोली ” अब इंजन स्टार्ट कीजिए देवर जी

( वो लन्ड पकड़े चूत में घुसाने लगा ) आह ओह तेरा लन्ड तो आयरन रॉड की तरह है आराम से चोद साले ” इतने में देवर जी धक्का देकर चोदने लगे तो मेरी छाती से चुचियों लटक रहीं थी जिसे पकड़ वो दबाने लगे, अब मैं भी अपने चूतड हिलाने लगी तो दोनों सम्भोग सुख में मस्त थे और प्रेम का लन्ड चूत की गर्मी को बढ़ा रहा था तो मैं आज दूसरी बार चुदाई कराके थकान महसूस कर रही थी ” आह ओह आहहाह प्रेम तेरा लन्ड रस छोड़ेगा की नहीं बूर तो लहर रही है

( वो पूरे गति से चोदता हुआ हांफने लगा ) शिला तेरी चूत में तो अब लन्ड दम तोड ही देगा लेकिन कल तेरी गांड़ का स्वाद भी लेना है
( मैं चूतड हिलाते हुए पीछे मुड़कर बोली ) अभी क्यों नहीं तेल डालकर चोद मेरी गांड़ क्यों अब तेरा खड़ा नहीं होगा ” प्रेम कुछ नहीं बोला बस चोदता रहा फिर उसके लन्ड से वीर्य स्खलित होकर मेरी चूत को शांत कर दिया, मैं उससे अलग हुई और बूर को टॉवल से साफ की फिर नाईटी पहन फ्रेश हुई, वापस अपने बेड पर जाकर सो गई।

मैं तो देवर जी के आने से काफी खुश थी थोड़ा तो काम का बोझ कम हुआ तो दूसरी ओर बिस्तर पर काम क्रिया करने में मजा मिलने लगा लेकिन मुझे यही लग रहा था की कहीं मैं विवेक को धोखा तो नहीं दे रही हूं, अगली सुबह हरेक दिन की तरह मैं उठकर चाय बनाई फिर चाय पीकर किचन चली गई ताकि विवेक और रवि को नाश्ता देकर ऑफिस और स्कूल भेज सकूं फिर तो देवर जी और मैं ही घर में होते, उनकी मर्जी वो मेरे साथ सेक्स करते या नहीं, सुबह के ०९:२० बजे दोनों घर से ऑफिस और स्कूल के लिए निकल गए तो मैं प्रेम के रूम में गई और वो अब भी गहरी निंद्रा में थे, इसलिए वापस हॉल में आई फिर कुर्सी पर बैठ टी वी देखने लगी और कुछ देर बाद कामवाली बाई आई, वो किचन जाकर बर्तन धोने लगी तो मैं कुछ देर के बाद उठी फिर प्रेम के कमरे में गई तो उसकी नींद खुल चुकी थी और मैं बोली ” क्यों देवर जी रात की थकान दूर नही हुई है क्या

( वो मुझे नाईटी में देख पूछा ) हां दूर तो हो गई लेकिन आप उसी ड्रेस में
( मैं बोली ) जाकर फ्रेश हो लीजिए, चाय बनाती हूं ” फिर मैं किचन गई और चाय बनाने लगी तो कामवाली मुझसे पूछी ” दीदी ये क्या यहीं रहेंगे
( मैं बोली ) हां मेरा देवर है यहीं रहकर एग्जाम की तैयारी करेगा, क्यों कोई बात है
( वो मुस्कुराई ) नहीं दीदी बस यूं ही ” और फिर चाय का प्याला लिए हॉल आई तो कुछ देर बाद प्रेम आकर कुर्सी पर बैठा फिर चाय का प्याला उठाए बोला ” रात को भाभी बहुत

( मैं बोली ) चुपकर प्रेम कामवाली किचन में है सब सुन लेगी
( प्रेम बोला ) बहुत स्वादिष्ट चाय है भाभी, मैं थोड़ी देर में मार्केट की ओर जा रहा हूं कुछ सामान मंगवाना हो तो बता दीजिए ” मैं चुप रही फिर कामवाली तो झाड़ू हॉल में लगाना शुरू की और मैं वहां से उठकर बेडरूम गई, अपने लिए गुलाबी रंग की साड़ी, पेटीकोट और ब्लाऊज़ निकाली फिर ज्योंहि दाई मेरे रूम आई, मैं बोली ” सब्जी निकाल दे रही हूं काट कर जाना

( वो बोली ) ठीक है दीदी ” फिर मैं स्नान करने के लिए वाशरूम जाने लगी तो प्रेम हॉल में बैठकर टी वी देख रहा था ” अभी स्नान करके आती हूं फिर मार्केट जाना समझे ” वो सिर्फ मुस्कुराया, मैं वाशरूम गई फिर झट से नाईटी उतार स्नान करने लगी फिर बदन को टॉवल से पोंछ कर कपड़ा पहन ली, हॉल आई तो प्रेम रूम में था और मैं अपने बेडरूम जाकर आईने के सामने खड़ी हुई और अपने कपड़े को ठीक कर बाल को संवारी फिर ओंठो पर लिपस्टिक लगाकर हॉल आई, तभी कामवाली बाई पूनम सब्जी काटने में लगी हुई थी और मैं झट से ब्रेड को सेंकने लगी फिर ऑमलेट बनाने लगी, तभी पूनम सब्जी किचन में रख बोली ” दीदी शाम को नहीं भी आ सकती हूं कुछ जरूरी काम है

( मैं बोली ) ठीक है वैसे वक्त मिले तो आ जामा ” वो चली गई तो मैं जाकर दरवाजा बंद कर दी, प्रेम स्नान करके सीधे रूम गया तभी मैं नाश्ता टेबल पर रख आवाज लगाई ” देवर जी नाश्ता तैयार है
( वो बोले ) अभी आया भाभी ” फिर दोनों बैठकर नाश्ता करने लगे तो वो मेरी ओर देखते हुए बोला ” आप बहुत सुंदर लग रही हैं
( मैं मुंह चमकाई ) रहने दो पहले तो सुंदर नहीं लगती थी वैसे मार्केट में क्या काम है

( वो मेरी ओर देखने लगा ) बस यूं ही घूमने जा रहा हूं कुछ सामान मंगवाना हो तो बोलिए ” मैं उसे सामान का लिस्ट बताई फिर उसके जाते ही मैं दरवाजा अंदर से बंद कर बेड पर लेट गई, मैं तो प्रेम के खातिर तैयार हुई थी लेकिन वो तो घूमने चला गया, बेड पर लेट उसके बारे में सोचने लगी की इतने में मेरा मोबाइल रिंग होने लगा ” बोलिए देवर जी

( वो पूछा ) भाभी आप बीयर पियेंगी
( मैं बोली ) तुम्हारा दिमाग तो ठीक है, मतलब तुम शराब पीने गए हो
( वो बोला ) नहीं भाभी मैं बस एक बोतल बियर पीकर आ जाऊंगा, वैसे भी थोड़ी गर्मी है और थकावट भी
( मैं बोली ) ठीक है फिर मेरे लिए भी एक बोतल लेते आना ” फिर मैं लेट गई, कुछ देर बाद दरवाजा नॉक हुआ तो मैं जाकर दरवाजा खोली और प्रेम के मुंह से शराब जैसी बदबू आ रही थी, उसके हाथ में पोलिबेग भी था फिर वो दरवाजा बंद कर टेबल पर सामान रखा और रूम चला गया तो मैं पोलिबेग से बीयर की बोतल निकाली साथ में कुछ पैकेट भी था और मैं उसे खोलती उसके पहले ही प्रेम रूम से निकला ” भाभी खाना पैक करा कर लेते आया ताकि आपको खाना बनाना नहीं पड़े

( मैं उठकर खाने का पैकेट ली फिर किचन जाने लगी ) ठीक है देवर जी ” और खाने को बर्तन में रख ढक दी, वापस हॉल आई तो प्रेम सिर्फ कमर से टॉवल लपेटे बैठा था और मैं सामने की कुर्सी पर बैठ बोली ” चलिए ग्लास में बियर डालिए वैसे पहले पी चुकी हूं
( प्रेम बीयर ग्लास में डालने लगा ) वाह भाभी आप तो पहले से ही इसका स्वाद ले चुकी हैं ” और फिर दोनों ग्लास उठाए और बीयर पीने लगे तो बियर ठंडी थी इसलिए आराम से पूरा ग्लास एक ही सांस में पीकर रख दी, प्रेम मुझे देख बोला ” वाह भाभी
( मैं बोली ) भाभी नहीं शीला बोल क्या समझे ” और वो चुप रहा फिर बीयर पीकर दुबारा ग्लास में डालने लगा तो मैं ग्लास उठाई, बीयर पीने लगी और बोली ” आज क्या दिन भर का प्रोग्राम है की खाना भी बाहर से ले आए

( वो ग्लास लिए उठकर खड़ा हुआ फिर मेरे पास की कुर्सी पर बैठता की मैं उसके टॉवल को खींच दी और खिलखिलाकर हंस दी तो वो चढ्ढी पहने मेरे बगल में बैठ गया ) शिला तू सही में काम की मूर्त है साली मुझे लगा की चूची दिखाकर रिझा रही है फिर जब चूत दिखाई ना
( मैं ग्लास टेबल पर रख उसके चढ्ढी पर हाथ फेरने लगी ) दरवाजा बंद करना भूल गई थी प्रेम इतनी जल्दी तुमको चूत नहीं दिखाती ” और फिर दोनों ग्लास रख दिए।

मैं तो बियर पीकर मस्त हो गई, काफी दिनों के बाद बीयर पी थी सो थोड़ा नशा भी हुआ और अब मैं प्रेम के चढ्ढी को कमर से उतारने लगी तो वो मेरे चेहरे को चूम लिया फिर साड़ी के पल्लू को सीने से नीचे कर चूची पकड़ दबाने लगा ” शिला अब बेड पर तुम्हें नंगा करता हूं ” दोनों बेड पर आए और मैं लेट गई तो प्रेम अपना चढ्ढी और बनियान उतार नंगा हो गया, मेरे साड़ी को उतार मुझे नंगा करने लगा तो मैं हाथ उसके लन्ड पर लगाए सहलाने लगी ” रोज रोज मुझे चोदेगा तो तेरा मन ऊब जाएगा इसलिए कभी कभार ही मुझे चोदा कर

( प्रेम मेरे बदन से पेटीकोट और ब्लाऊज़ उतार नंगा कर दिया तो मैं नशे में मस्त हुए बेलज्ज औरत की तरह जांघें फैलाई ) ये बता की पहले क्या सिर्फ मुठ मारकर काम चलाता था ” वो चुप रहा फिर मेरे बदन को सहलाने लगा तो मैं उसके हाथ पकड़ अपने बूब्स पर रख दी जिसे वो दबाने लगा और मैं अब उसके ओंठ का प्यार चेहरा पर पा रही थी ” प्रेम आराम से अपनी रण्डी भाभी को चोद या गांड़ मार लेकिन भैया जान गए तो समझना

( वो मेरे ओंठ चूम लिया ) डरो मत डार्लिंग कौन हमें देख रहा है ” फिर तो मैं उसके मुंह में ओंठ डाल दी जिसे वो चूसने लगा और मैं प्रेम के साथ पहली बार बेझिझक होकर हमबिस्तर हुई थी।

देवर जी के मुंह में जीभ घुसाए चुसवा रही थी और उनका हाथ मेरी चूची को पकड़ मसलने लगा, मैं तो अपनी चूत में हो रही गुदगुदी के कारण जांघ पर जांघ चढ़ाए आपस में रगड़ने लगी और मेरा गोरा चेहरा लाल हो चुका था साथ ही बदन में सिहरन सी होने लगी, मुझे पता था की विवेक ये सब जानकर आग बबूला हो जाएगा लेकिन पेट में भूख लगी हो तो भोजन चाहिए चाहे वो घर का भोजन हो या रेस्तरां का और कुछ देर में मैं प्रेम का चेहरा पीछे कर जीभ निकाली तो देवर जी मेरे कमर पर हाथ फेरने लगे और मेरी जांघें को पकड़ फैला दिए, चूत के दरार में दो उंगली रगड़ते हुए अंदर घुसाए फिर मेरे छाती पर झुककर चूची को चाटने लगे तो मैं उनके पीठ सहलाते हुए ” आह ओह उंगली क्यों पेनिस डाल ना डियर उह उफ ” लेकिन मेरी चूत में उंगली घुसाए प्रेम कुरेद रहा था तो मेरी चूत खुजलाने लगी फिर प्रेम चूची मुंह में लिए चूसने लगा और बूर से ऊंगली निकाल लिया, मैं उसके जांघो के बीच हाथ लगाए लन्ड को पकड़ी फिर उसे इस कदर उपर नीचे करने लगी मानो गाय के थन से दूध धूह रही हूं और प्रेम चूची मुंह से निकाल लिया फिर पूछा ” पहले तुम मेरा लन्ड चूसोगी या मैं तेरी चूत चाट लूं ” मैं उसे चूत चाटने को बोली तो प्रेम मेरी चूतड के नीचे तकिया लगाया फिर बूर के फांक को चूमने लगा तो औरत की सबसे कोमल अंग पर चुम्बन मैं तो तड़प उठी लेकिन देवर जी मेरे चूत की फांकों को फैलाकर उसमें जीभ घुसाए चाटने लगा, उनका पूरा जीभ चूत में था और मैं आहें भरने लगी ” आह उह ओह आआह्हह चाट साले कुत्ते मेरी चूत तो तेरे लन्ड से फैल चुकी है ” और प्रेम कुछ देर चूत को चाटता रहा फिर मेरी जांघों को चूमता हुआ एक उंगली चूत में घुसाया तो मैं कामग्नि में सुलग रही थी और वो मेरी जांघो के ऊपरी हिस्से को चूमता हुआ बूर कुरेदता रहा ” आह ओह देवर जी अब छोड़िए ना क्या लन्ड में ताकत नहीं बची है कि उंगली डाल कुरेद रहे हो

( वो उंगली निकाल बेड पर लेट गया ) अब मेरा लन्ड चूस साली रण्डी ” मैं उसके बगल में बैठकर उसके छाती को सहलाने लगी तो प्रेम मुझे देखता हुआ मेरे बूब्स पकड़े दबाने लगा, मैं अब उसके ऊपर सवार हुई फिर उसके चेहरे को चूमना शुरु की तो प्रेम मेरे गोल गद्देदार गांड़ पर हाथ फेरते हुए चेहरे को चूमने लगा और मैं उसके गर्दन से लेकर छाती तक पर ओंठ रख चुम्बन देने लगीं, मर्द पर हावी होने की इच्छा रखती थी लेकिन मेरा पति विवेक बिस्तर पर चुम्बन के अलावा चुदाई तक ही सीमित रहा, ना तो उसे चूत चाटने की इच्छा कभी हुई और मैं उसके लन्ड को जरुर चूसकर मुंह का प्यास बुझाने लगी। प्रेम के कमर तक चूम ली तो उसका लंबा मोटा लन्ड मेरे हाथ में था और मैं उससे नजर मिलाते हुए सुपाड़ा को ओंठ पर रगड़ने लगी तो देवर जी मेरे पीठ पर हाथ फेर रहे थे ” अब मुंह में लेकर चूसिए तो सही ” मैं सुपाड़ा को चेहरे पर रगड़ते हुए झांट में उंगली डाल घुमाने लगी फिर सुपाड़ा सहित आधे लन्ड को मुंह में लेकर चूसना शुरु की तो प्रेम मेरे बूब्स को पकड़ दबाने लगा ” आह ओह उह मुंह का झटका दे ना साली रण्डी क्यों मुंह बंद कर लन्ड अंदर रखी है ” मैं मुंह से लन्ड निकाल जीभ से चाटने लगी और बोली ” क्यों बूर में उंगली डाले थे तो रोकी थी इसलिए अब मेरी बारी है जो करना है करने दो ” और मैं लन्ड को चाटने के बाद दुबारा से लन्ड मुंह में ली फिर चूसते हुए सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी, मेरी चूत अब गुदगुदी से परेशान थी लेकिन आधे घंटे से ओरल सेक्स में दोनों लीन थे इसलिए मेरी चूत से रस निकलने लगा फिर भी मुखमैथुन करते हुए मस्त थी तो प्रेम आहें भर रहा था ” आह ओह उह आआह्हह्ह्ह अब छोड़ साली मैं तुझे चोदूंगा

( मैं लन्ड मुंह से निकाल दी ) उहून आज तो पीछे से डालना है क्यों लौड़ा में दम नहीं है ” प्रेम उठकर फ्रेश होने चला गया तो मैं नंगे ही हॉल आई फिर एक तेल की बोतल लिए बेड पर लेट गई, प्रेम आया तो मुझे देख मुस्कुराया ” क्यों शिला ऐसे तेल डालकर गांड़ चुदवाना है ये देख क्रीम ”

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