बेटी बहन से बहू तक का सफ़र 5

बाप बेटी

पाँचों लड़कियाँ एक तरफ हो गयीं और शर्मा जी कबड्डी कबड्डी कबड्डी बोलते हुए उनके पाले में जाने लगे. जैसा शर्मा जी ने बताया था वैसे ही दो लड़कियो ने शर्मा जी को घेर के उनकी टाँगों को पकड़ लिया. अब शर्मा जी तो लंबे तगड़े आदमी थे. उन्हें गिराना लड़कियो के बस का नहीं था, इसलिए वो खुद ही जान के ज़मीन पे लेट गये. दो लड़कियाँ कूद के उनके ऊपर चढ़ गयी. लेकिन इससे पहले कि उनके हाथ को कोई पकड़े शर्मा जी ने लाइन को हाथ लगा दिया. सब लड़कियाँ आउट हो गयी. शर्मा जी बोले,

“देखा तुम सब लोग आउट हो गयी. तुमको प्रॅक्टीस की बहुत ज़रूरत है. अब मैं चलता हूँ तुम लोग प्रॅक्टीस करो.”

“नहीं नहीं पापा, एक बार और. इस बार आपको नहीं बच के जाने देंगे.” कंचन बोली.

“चलो ठीक है. लेकिन ये आख़िरी बार है.”

कंचन अपनी सहेलिओं को एक साइड में ले गयी और उन सबने मिल के प्लान बनाया कि इस बार कैसे शर्मा जी को पकड़ेंगे. काफ़ी देर हकुसूर पुसुर करने के बाद लड़कियाँ फिर मैदान में आ गयी. एक बार फिर शर्मा जी कबड्डी कबड्डी…करते हुए उनके पाले में आगे बढ़े. फिर से दो लड़कियो ने शर्मा जी को घेर के पकड़ लिया. शर्मा जी एक बार फिर जान के ज़मीन पे गिर परे और पीठ के बल चित लेट गये. दो लड़कियाँ उनके पेट पे चढ़ बैठी. इस बार जैसे ही शर्मा जी ने लाइन टच करने के लिए हाथ आगे किया, कंचन ने उनका हाथ पकड़ लिया. शर्मा जी ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की. इतने में उनके हाथ को ज़ोर से दबाने के लिए कंचन कूद के उनके ऊपर आ गयी और उनके सिर को अपनी टाँगों के बीच में दबा कर उनके हाथों को कस के पकड़ लिया. छ्चीना झपटी में अब शर्मा जी का सिर कंचन की टाँगों के बीच फँसा हुआ था और वो उनके मुँह पे बैठी हुई थी. कंचन की स्कर्ट के नीचे शर्मा जी का मुँह च्छूप गया था और कंचन की पॅंटी में कसी हुई चूत ठीक शर्मा जी के होंठों पे थी. शर्मा जी बुरी तरह हड़बड़ा गये. लड़कियाँ काफ़ी उत्तेजित थी कि इस बार उन्होने शर्मा जी को पकड़ लिया. कंचन की चूत का दबाव शर्मा जी के मुँह पे बढ़ता जा रहा था. ..शर्मा जी का दम घुटने लगा तो उन्हें साँस लेने के लिए मुँह खोलना पड़ा. मुँह खुलते ही बेटी की पॅंटी में कसी हुई चूत उनके खुले हुए मुँह में समा गयी. हालाँकि बिटिया की चूत पॅंटी में थी, फिर भी शर्मा जी उसकी चूत की दोनो फांकों का सॉफ एहसास हो रहा था. क्यूंकी शर्मा जी का साँस टूट चुक्का था इसलिए वो हार गये थे. लड़कियो ने उन्हें छोड़ दिया. सब लड़कियाँ बहुत खुश थी. कंचन भी खुशी से कूद रही थी,

“पापा हार गये, पापा हार गये.”

उधर शर्मा जी का बुरा हाल था. उन्हें तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनकी 18 साल की बिटिया की चूत अभी अभी उनके मुँह में थी. वो बुरी तरह बोखला गये थे. लड़कियो ने उन्हें एक बार फिर प्रॅक्टीस के लिए कहा लेकिन उन्होने सॉफ इनकार कर दिया.

“अंकल एक प्रॅक्टीस और हो जाए. देखिए इस बार हमने आपको हरा दिया.” निशा बोली.

“नहीं बेटी अब तो तुम लोग सीख गये हो खुद प्रॅक्टीस कर लो.”

“अच्छा तो पापा अगर आपको खेलना नहीं है तो कम से कम यहाँ बैठ के हमारी प्रॅक्टीस तो देख लीजिए.”

शर्मा जी मना ना कर सके और लॉन में चेर पे बैठ कर लड़कियो को प्रॅक्टीस करते हुए देखने लगे. शर्मा जी को अब अजीब सा लग रहा था. पहली बार शर्मा जी का ध्यान लड़कियो की स्कर्ट के नीचे उनकी नंगी टाँगों पर गया. शर्मा जी सोचने लगे कितनी गोरी गोरी मांसल टाँगें हैं इन लड़कियो की. और अभी तो इनकी उम्र इरफ़ 18 साल ही है. काश आज उनके मुँह पे उनकी बेटी की जगह उसकी किसी सहेली की चूत होती तो उन्हें इतना बुरा नहीं महसूस होता. दूसरे ही पल शर्मा जी अपने आप को कोसने लगे. ये लड़कियाँ उनकी बेटी की सहेलियाँ हैं. उनकी बेटी जैसी ही हैं. ये कैसे विचार आ रहे हैं दिमाग़ में? उधर लड़कियो ने फिर प्रॅक्टीस शुरू कर दी. एक लड़की को गिरा के बाकी चारों लड़कियाँ शर्मा जी के बताए हुए तरीके से उस पे चढ़ बैठी. ……..अभी शर्मा जी अपने आप को कोस ही रहे थे कि उन्होने देखा, निशा जिस को बाकी लड़कियो ने दबोच रखा था अपनी टाँगें छुड़ाने के लिए छटपटा रही थी. उसकी स्कर्ट के नीचे से उसकी सफेद रंग की पॅंटी नज़र आ रही थी. शर्मा जी निशा की टाँगों के बीच से नज़र नहीं हटा पाए. इतने में छीना झपटी और तेज़ हो गयी. इस बार का नज़ारा देख कर शर्मा जी का दिल धक धक करने लगा. कंचन की स्कर्ट उसकी कमर के ऊपर चढ़ गयी थी. सफेद पॅंटी में कसे हुए बेटी के चूतेर शर्मा जी की ओर थे. खेल की छ्चीना झपटी के कारण एक तरफ से पॅंटी उसके चूतरो के बीच सिमट गयी थी और दाहिना चूतेर नंगा हो गया था. पॅंटी भी मिट्टी लगने के कारण थोड़ी मैली हो गयी थी. शर्मा जी की आँखें फटी की फटी रह गयीं. अब तो शर्मा जी के लंड में भी हरकत होने लगी. उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि उनकी गुड़िया अब बच्ची नहीं रही. बिटिया के चूतेर कितने भारी और फैल गये थे.

उस शाम शर्मा जी को अपनी बेटी और उसकी सभी सहेलिओं की पॅंटीस के कयि बार दर्शन हुए. सभी ने सफेद रंग की पॅंटी पहन रखी थी. शर्मा जी सोचने लगे कि कहीं सफेद पॅंटी स्कूल की ड्रेस में तो नहीं है. लेकिन सबसे ज़्यादा सुन्दर और सेक्सी उन्हें अपनी बेटी कंचन ही लगी. प्रॅक्टीस ख़तम होने के बाद सभी लड़कियाँ अपने घर चली गयी और कंचन भी नहाने चली गयी. शर्मा जी भी नहाना चाहते थे क्योंकि उन्हें भी तो लड़कियो ने पटक दिया था. कंचन के बाथरूम से बाहर आते ही वो भी बाथरूम में नहाने के लिए घुस गये. अपने कपड़े उतार के जैसे ही उन्होने धोने के लिए डालने चाहे की उनकी नज़र एक पॅंटी पर पर गयी. ये तो वो ही पॅंटी थी जो कंचन ने अभी अभी पहन रखी थी. शर्मा जी से ना रहा गया. उन्होने अपनी बेटी की पॅंटी उठा ली. पॅंटी पसीने में भीगी हुई थी और मिट्टी लगने से मैली भी हो गयी थी. शर्मा जी अपनी बेटी की पॅंटी का निरीक्षण करने लगे. अब आपको ये बताने की ज़रूरत है की सबसे पहले उन्होने कहाँ का निरीक्षण किया होगा ? जी हां आपने ठीक सोचा, सबसे पहले शर्मा जी ने उस इलाक़े का निरीक्षण किया जो इलाक़ा उनकी बेटी की चूत पे लिपटा रहता था. ये इलाक़ा कुकच्छ ज़्यादा मैला लग रहा था. शर्मा जी जानते थे कि इस इलाक़े में सिर्फ़ मिट्टी का रंग ही नहीं बल्कि बिटिया के पेशाब और शायद उसकी चूत के रस का भी रंग शामिल था. वहाँ पे शर्मा जी को एक लंबा काला बाल भी फँसा हुआ नज़र आया. बाप रे ! जिस बेटी को वो अभी तक बच्ची ही समझते थे उसकी चूत पे इतने लंबे बॉल ! शर्मा जी ने तो सपने में भी कल्पना नहीं की थी की उनकी प्यारी सी बच्ची की चूत पे बॉल भी हो सकते हैं. शर्मा जी का लंड हरकत में आ गया. अब उनसे ना रहा गया और उत्सुकतावश उन्होने बेटी की पॅंटी के उस इलाक़े को सूंघ ही लिया. पसीने, पेशाब और 14 साल की कुँवारी चूत की मिली जुली खुश्बू ने शर्मा जी को मदहोश कर दिया. उनका लंड बुरी तरह फंफना गया था. अपनी पत्नी की पॅंटी तो वो कई बार सूंघ चुके थे लेकिन आज पहली बार उन्हें एहसास हुआ की एक कुँवारी चूत और कई बार चुदी हुई चूत की खुश्बू में कितना अंतर होता है. शर्मा जी का दिमाग़ घूम गया और उन्होने अपनी बेटी की पॅंटी को चूमते और उसकी चूत की खुश्बू सूंघते हुए मूठ मारी. जब तक झाड़ नहीं गये और ढेर सारा वीर्य नहीं निकल गया तब तक शर्मा जी को शांति नहीं मिली. झड़ने के बाद शर्मा जी को गिल्टी फील होने लगी. ये क्या किया. अपनी 14 साल की बच्ची के लिए वासना की ये आग! शर्मा जी अपने आप को कोसने लगे और उन्होने अपने आप से वादा किया की आगे से कभी वो ऐसी हरकत नहीं करेंगे. लेकिन उस रात अपनी पत्नी कविता को इतना जम के चोदा की उनकी पत्नी सोचने लगी आज पति देव को ना जाने इतना जोश कहाँ से आया हुआ है.

इस घटना के बाद शर्मा जी ने अपने ऊपर पूरा कंट्रोल रखने की कोशिश की. बेटी के बारे में जब भी ऐसे वैसे विचार मन में आते तो वो तुरंत उन विचारों को मन से निकाल देते. लेकिन उसके बाद भी शर्मा जी ने पाया की उन्हें बेटी के स्कूल से वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. कारण . अब उन्हें स्कर्ट में बेटी की गोरी गोरी टाँगें बहुत अच्छी लगने लगी थी. जब कभी स्कर्ट थोड़ी ऊपर उठ जाती तो बेटी की गोरी गोरी मांसल जागें देख कर वो मदहोश हो जाते. कंचन थी भी बड़ी लापरवाह, इसलिए शर्मा जी को हफ्ते दो हफ्ते में एक आध बार बिटिया के टाँगों के बीच झाँकने का भी मौका मिल जाता था. लेकिन अभी तक शर्मा जी को बिटिया की पॅंटी की झलक आधे सेकेंड से ज़्यादा नहीं मिल पाई थी. ये झलक मात्र ही शर्मा जी को पागल किए जा रही थी और उनकी उत्सुकता को बढ़ा रही थी. शर्मा जी इस तरह बेटी की टाँगों और उसकी पॅंटी की झलक को आक्सिडेंटल मान कर अपने दिल को तसल्ली देते थे. उन्होने अपने दिल को ये सोच कर भी तसल्ली दे रखी थी कि आख़िर वो बेटी को बचपन में नंगी भी देख चुके हैं. अब अगर उसकी पॅंटी दिख भी गयी तो क्या हुआ? आख़िर है तो उनकी बेटी ही.

शर्मा जी जितना अपने आप को संभालने की कोशिश करते तब तब कोई ऐसी बात हो जाती की शर्मा जी अपना संकल्प नहीं रख पाते. एक दिन कंचन स्कूल से आई. भागती हुई घर में घुसी. उसने दो पोनी टेल्स बना रखी थी. बहुत ही चंचल लग रही थी. शर्मा जी सोफा पे बैठे हुए थे. उसे देखते ही खुश हो कर बोले,

“ आ गयी मेरी बेबी डॉल.”

“ जी, मेरे अच्छे पप्पू.” जल्दी से शर्मा जी के गाल पे किस करती हुई बोली, “ मैं अभी आई. मुझे जल्दी से बाथरूम जाना है. बहुत देर से रोक रखा है.” कंचन अपना स्कूल बॅग वहीं पटक कर बाथरूम की ओर भागी. जल्दी में बाथरूम का दरवाज़ा तक बंद नहीं किया. शर्मा जी भी बेटी के पीछे पीछे चल पड़े. लेकिन बाथरूम का दरवाज़ा खुला देख के रुक गये. फिर ना जाने उनके दिमाग़ में क्या आया, वो बाथरूम के दरवाज़े के बिकुल पास आ कर खड़े हो गये. उनकी बेबी डॉल को शायद बहुत ज़ोर का पेशाब आ रहा था. उसने बाथरूम में घुसते ही जल्दी से पॅंटी नीचे सर्काई और बैठ कर पेशाब करना शुरू कर दिया. प्सस्सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स की ज़ोरदार आवाज़ से पूरा बातरूम गुंज़्ने लगा. शर्मा जी मन्त्र मुग्ध से खड़े बेटी की चूत से निकलता मधुर संगीत सुन रहे थे. शर्मा जी को औरत की चूत से निकलती हुई ये सुरीली आवाज़ बहुत अच्छी लगती थी. बल्कि वो औरत की चूत से निकलती हुई पेशाब की धार को देख कर मदहोश हो जाते थे. बड़ी मुश्किल से उन्होने दो बार अपनी पत्नी कविता को अपने सामने बैठ कर मूतने के लिए राज़ी किया था. उनका मन तो करता था कि पत्नी को कहें की उनके ऊपर बैठ कर उनके मुँह पे ही मूत ले लेकिन शरम के मारे कभी कह ना पाए. अपनी बेटी की झांतों भरी चूत से निकलती पानी की धार की कल्पना करते करते उनका लंड तन गया था. काफ़ी देर से बिटिया ने पेशाब रोक रखा था. दो मिनिट तक प्सस्सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………… का मधुर संगीत चलता रहा. जैसे ही प्सस्सस्स………… की आवाज़ आनी बंद हुई शर्मा जी जल्दी से वापस बाहर सोफा पे बैठ गये. इतने में कंचन भी आ गयी और फ्रिज में से बर्गर निकाल कर डाइनिंग टेबल पर खाने के लिए बैठ गयी. जहाँ शर्मा जी बैठे हुए थे वहाँ से डाइनिंग टेबल के नीचे से उन्हे कंचन की टाँगें नज़र आ रही थी.

कंचन अपनी दोनो टाँगें सटा के डाइनिंग चेर पे बैठी हुई थी, जैसा की लड़कियो को सिखाया जाता है. इतने में एक सेकेंड के लिए कंचन की टाँगें चौड़ी हुई और शर्मा जी को उसकी पॅंटी की झलक मिल गयी. चूत पे चिपकी हुई पॅंटी पर एक बड़ा सा गीला दाग था. शर्मा जी का लॉडा फिर से हुंकार उठा.. वो जानते थे कि बिटिया अभी अभी पेशाब कर के आई है और ये पेशाब का ही दाग था. एक बार फिर शर्मा जी के कसमे- वादे हवा हो गये. बेटी उनका जीना हराम करती जा रही थी.

एक दिन कंचन स्कूल से वापस आ कर बाहर लॉन में लगे झूले पे बैठे हुई थी. शर्मा जी भी ऑफीस से लंच के लिए घर आए. शर्मा जी को देखते ही बोली,

“ पापू, हमे थोड़ा झूला दो ना.”

“अरे गुड़िया अपने आप झूल लो. हमे जल्दी वापस ऑफीस जाना है.”

“ प्लीज़ पपूऊ..! सिर्फ़ एक बार !”

“ ठीक है. तुम तो बहुत ज़िद्दी हो.” शर्मा जी बेटी के पीछे खड़े हो कर उसे धक्का लगाने लगे. कंचन जैसे ही आगे को झूलती हुई जाती उसकी स्कर्ट हवा से फूल जाती. ये देख के शर्मा जी के दिमाग़ में आया कि अगर वो सामने की ओर जा के कुर्सी पे बैठ जाएँ तो बिटिया की टाँगों के बीच का नज़ारा देख सकेंगे. शर्मा जी ने ज़ोर से धक्का लगा कर कंचन से कहा,

“बेटी अब तुम अपने आप झूलो हम थोड़ी देर बैठ जाते हैं.”

“ठीक है पपाऊ.”

शर्मा जी सामने कुर्सी पे बैठ गये. कंचन अपने आप ही झूल रही थी. जैसे ही वो शर्मा जी की ओर झूलती हुई आती उसकी स्कर्ट हवा से फूल कर ऊपर की ओर उठ जाती. शर्मा जी को बेटी की स्कर्ट के नीचे से उसकी गोरी गोरी जांघों ऑर पॅंटी के दर्शन हो जाते. पहले तो शर्मा जी को कंचन की पॅंटी की झलक मात्र ही मिल पाती थी लेकिन आज तो काफ़ी देर तक उन्हें बिटिया की पॅंटी नज़र आ रही थी. शर्मा जी को समझते देर नहीं लगी कि बेटी की चूत भी अपनी मा की चूत की तरह खूब फूली हुई है. आज शर्मा जी ने काई बार बिटिया की पॅंटी के दर्शन किए.

इस तरह समय बीत रहा था. कई बार शर्मा जी निश्चय कर लेते कि अब वो कभी बेटी की टाँगों के बीच नहीं झाँकेंगे और फिर काई दिन तक अपने पर कंट्रोल रख के बिटिया की टाँगों के बीच झाँकने से अपने को रोकते थे. लेकिन अक्सर जब बाथरूम में बेटी की उतारी हुई पॅंटी नज़र आ जाती तो अपने ऊपर काबू खो बैठते और उसकी मादक खुश्बू सूँगते हुए मूठ मार लेते. कंचन थी तो बहुत ही चुलबुली. अक्सर जब शर्मा जी टीवी देख रहे होते तो वो उनकी गोद में आ कर बैठ जाती. कबड्डी वाली घटना के बाद से जब भी कंचन शर्मा जी की गोद में बैठती, उसकी मादक जांघों के स्पर्श से शर्मा जी का लंड खड़ा हो जाता. लेकिन शर्मा जी कभी भी अंडरवेर पहनना नहीं भूलते थे. अंडरवेर होने के कारण कंचन को कभी भी शर्मा जी के खड़े लंड का अहसास नहीं हुआ.

देखते ही देखते कंचन 18 साल की हो गयी और अब वो 12थ में आ गयी थी. चुचियो का साइज़ 38 हो चला था. चूटर भी भारी हो गये थे और बहुत फैलते जा रहे थे. बिटिया की छ्होटी सी पॅंटी के बस में अब उसके भारी भारी चूतेर संभालना नहीं रहा था. आधे से ज़्यादा चूतेर तो पॅंटी के बाहर ही रहते थे. जैसे जैसे दिन गुज़रता जाता, कंचन की पॅंटी उन आधे ढके हुए चूतरो पर से भी सिमट कर दोनो चूतरो की दरार में घुसने की कोशिश करती. अब तो बेटी के चूतेर फैल कर बिल्कुल उतने चौड़े हो गये थे जितने उनकी पत्नी के शादी के वक़्त थे. चलती भी चूतरो को मटका के थी. शर्मा जी के दिल पे च्छूरियाँ चल जाती थी. जैसे जैसे बिटिया बड़ी हो रही थी, थोड़ा चुलबुलापन कम हो गया था और उठने बैठने में सावधान हो गयी थी. अब शर्मा जी को उसकी पॅंटी के दर्शन बहुत ही मुश्किल से तीन चार महीने में एक आध बार ही होने लगे. अब तो बेटी अपनी उतारी हुई पॅंटी भी बाथरूम में नहीं छोड़ती थी. बेटी की चूत की सुगंध लिए तो अब शर्मा जी को महीनों बीत गये थे. लकिन अब भी वो उनकी गोद में अक्सर बैठ जाती थी.

फिर एक दिन कुच्छ ऐसी घटना हुई कि कंचन के लिए सब बदल गया. गर्मियों की छुट्टिया चल रही थी. नीलम, कंचन के घर तीन चार दिन रहने आई थी. दोनो सहेलिओं ने खूब मज़ा किया ओर दुनिया भर की गप्पें मारी. रात को नीलम, कंचन के कमरे में ही सोई. अचानक रात को नीलम ने कंचन को जगाया ओर बोली,

“ सुन कंचन, ये करहाने की आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं?”

“ ओह हो सो जा नीलम. ये तो मेरी मम्मी की आवाज़ें हैं. बेचारी के पेट में बहुत दर्द रहता है.अक्सर तो सारी रात कहराती रहती है.”

“ कंचन तू सुचमुच बहुत भोली है. ये पेट के दर्द की आवाज़ें नहीं है. ऐसी आवाज़ें तो औरत के मुँह से तब निकलती है जब उसकी चुदाई होती है.” कंचन एकदम गुस्से में बोली,

“ क्या बकवास कर रही है तू मेरी मम्मी ओर पापा के बारे में. मम्मी ने मेरे पूच्छने पर खुद बताया था कि उनके पैट में बहुत दर्द रहता है.”

“ ठीक है तो शर्त लगा ले 50 रुपये की.”

“ लगा ले शर्त, लेकिन मेरे पास 50 रुपये नहीं हैं.”

“ कोई बात नहीं अगर तू हार गयी तो जो मैं कहूँगी वो करना पड़ेगा. बोल मंज़ूर है?”

“ मंज़ूर है. हमारे और मम्मी पापा के कमरे के बीच जो खिरकी है उस पर उनके कमरे की ओर से परदा पड़ा है. कल मैं रात को वो परदा साइड में कर दूँगी और वरामदे की लाइट भी ऑन कर दूँगी जिससे हमे उस कमरे में सब कुच्छ नज़र आएगा. खिड़की से लग के खड़े रहेंगे तो आवाज़ें भी सॉफ सुनाई देंगी. सिर्फ़ कल ही का दिन है हमारे पास क्योंकि परसों मम्मी मैके जा रही है.”

“ वाह! कंचन तेरा दिमाग़ तो बहुत चलता है.”

कंचन को पूरा विश्वास था कि शर्त तो वोही जीतेगी. अगले दिन बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतज़ार किया. रात होते ही कंचन ने मम्मी पापा के कमरे का परदा हटा दिया और वरामदे की लाइट ऑन कर दी. फिर उन्होने अपने कमरे की लाइट ऑफ कर दी. अब मम्मी पापा के कमरे में सब कुच्छ सॉफ दिख रहा था.थोरी देर में मम्मी पापा अपने कमरे में आए. उसके बाद जो कुकच्छ हुआ वो देख कर कंचन की आँखें फटी की फटी रह गयीं. पापा मम्मी की बातें सॉफ सुनाई दे रहीं थी. मम्मी बोली,

“ लगता है कंचन और उसकी दोस्त सो गयी. सारा दिन मटर गस्ति करती है.”

“ बच्चे हैं मज़ा करने दो. तो श्रीमती जी हमे अकेला छोड़ कर मैके जा रही हैं. इतने दिन हमारा क्या हाल होगा ये नहीं सोचा.”

“ क्या करूँ जाना तो नहीं चाहती, पर मा बीमार है.”

“ और हमारी बीमारी का इलाज कब करोगी?” पापा मम्मी को अपनी बाहों में खींचते हुए बोले. कंचन के दिल की धड़कन तेज हो गयी. नीलम भी मुस्कुरा रही थी.

“ आपकी बीमारी का इलाज तो रोज़ ही करती हूँ.”

पापा मम्मी को चूमते हुए बोले,

“ आज ऐसी दवाई देती जाओ की अगले 15 दिन दवाई की ज़रूरत ना पड़े.”

“ कॉन सी दवाई चाहिए आपको?” मम्मी मुस्कुराते हुए बोली.

“ ये वाली.” पापा मम्मी की चूत सलवार के ऊपर से दबाते हुए बोले.

“ ओई मा इसस्सस्स….! ले लीजिए ना. किसने रोका है. आज कमरे में लाइट कुच्छ ज़्यादा आ रही है. ठहरिए मैं वरामदे की लाइट बंद करके आती हूँ..”

“ नहीं मेरी जान, रहने दो. बहुत दिनों से तुम्हें ठीक से नंगी भी नहीं देखा.”

“ अच्छा जी! रोज़ रात को तो नंगी करते हैं.”

“ नंगी कर के तो चोदता हूँ मेरी जान लेकिन तुम्हारे नंगे बदन के दर्शन कहाँ हो पाते हैं.” ये कहते हुए पापा ने मम्मी की कमीज़ उतार दी, और सलवार का नाडा भी खींच दिया. नाडा खींचते ही सलवार नीचे गिर पड़ी. अब मम्मी सिर्फ़ पिंक ब्रा और पॅंटी में थी.

“ नहीं नाअ! प्लीईआसए……लाइट बंद कर दीजिए. मुझे शरम आ रही है. अब मैं बहुत मोटी हो गयी हूँ.”

“ नहीं मेरी रानी तुम अब भी बहुत सेक्सी हो. तुम्हें देख कर तो मेरा लंड सारा दिन खड़ा रहता है.” पापा मम्मी के होंठ चूस रहे थे और दोनो हाथों से मोटे मोटे चूतरो को सहला रहे थे. मम्मी की पॅंटी उनके विशाल चूतरो के बीच में धँसी जा रही थी.

“ ये तो पागल है” मम्मी प्यार से पापा के लंड को लूँगी के ऊपर से मुसलते हुए बोली.

नीलम, कंचन की चूत पर चुटकी काटते हुए बोली “ला मेरे 50 रुपये.”

“ शट अप अभी कुच्छ हुआ तो नहीं ना. जब कुच्छ होगा तो बोलना.” कंचन का इतना कहना ही था कि पापा ने मम्मी की ब्रा उतार दी और पनटी नीचे खिसका दी. मम्मी बिल्कुल नंगी थी. 36 साल की उम्र में भी बहुत ही सेक्सी लग रही थी. बड़ी बड़ी चूचियाँ बहुत टाइट तो नहीं लेकिन ढीली भी नहीं थी. गोरी गोरी मोटी मोटी जंघें ओर फैले हुए भारी विशाल चूतर बहुत ही सेक्सी लग रहे थे. इतने मोटे चूतरो के ऊपर कमर काफ़ी पतली लग रही थी. चूत पर बहुत ही घने काले बॉल थे.

“ ऊफ़ ! मेरी जान तुम तो बला की सेक्सी लग रही हो. कोई कह नहीं सकता की दो जवान बच्चों की मा हो. मेरा लंड तो काबू में नहीं आ रहा”

“ किसने कहा है आपको काबू में करने के लिए. आज़ाद कर दीजिए बेचारे को.” ये कह कर मम्मी ने पापा की लूँगी खींच दी. कंचन तो बेहोश होते होते बची. नीलम के पसीने छ्छूट गये. पापा का लंबा मोटा लंड तना हुआ था. कंचन तो पहली बार किसी मरद का खड़ा हुआ लंड देख रही थी. साधु महाराज के मुक़ाबले का लंड था. काला मोटा तना हुआ लंड बहुत ही भयानक लग रहा था. मम्मी नीचे बैठ गयी और पापा का लंड अब बिल्कुल उसके होंठों के सामने था.

“ मुझे भी आपके इस 9 इंच के कॅप्सुल की बहुत ज़रूरत है.” ये कह कर मम्मी ने पापा के लंड को मुँह में डाल लिया और चूसने लगी. लंड इतना मोटा था की मम्मी के होंठों में बड़ी मुश्किल से आ रहा था. मम्मी कभी पूरे लंड पर जीभ फेर के चाटती और कभी लंड के नीच लटकते हुए बॉल्स को. पापा ने मम्मी का सिर दोनो हाथों में पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए. उनका मूसल मम्मी के मुँह में अंदर बाहर होने लगा. बेचारी 4 या 5 इंच ही मुँह में ले पा रही थी. थोरी देर बाद पापा ने मम्मी को बिस्तेर पर लिटा दिया और बोले,

“ कविता, अपनी टाँगें खोल कर एक बार अपनी प्यारी चूत के दर्शन तो करा दो.”

“ हाई राम, रोज़ ही तो देखते हैं. पहले लाइट बंद कीजिए.” मम्मी अपनी टाँगों को चिपका कर बोली.

“ अब मैं नंगा तो बाहर जा नहीं सकता. दिखा भी दो मेरी जान. जो चीज़ रोज़ चुदवाती हो उसे दिखाने में कैसी शरम.” ये कह कर पापा ने मम्मी की टाँगें फैला दी. मम्मी ने मारे शरम के दोनो हाथों से अपना मुँह ढक लिया. मोटी मोटी गोरी जांघों के बीच में काले घने बालों से भरी चूत सॉफ नज़र आ रही थी. क्या फूली हुई चूत थी!

“ कविता तुम्हारी चूत बहुत ही सेक्सी है. तभी तो मैं इसका इतना दीवाना हूँ. कितनी फूली हुई है.” कंचन सोचने लगी मेरी भी चूत काफ़ी फूली हुई है लेकिन मम्मी की तो बहुत ही ज़्यादा फूली हुई थी.

“ इस 9 इंच के मूसल से रोज़ चुदवाने के बाद फूलेगी नहीं तो और क्या होगा. मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो इस उम्र में भी आपको मेरी चूत इतनी अच्छी लगती है. वरना इस उम्र में कौन मर्द अपनी बीवी को रोज़ चोदता है.”

पापा ने मम्मी की टाँगें और चौड़ी कर दी और जीभ निकाल कर चूत चाटने लगे.

“ आआआः ..आ.एयेए..ऊवू! बहुत अक्च्छा लग रहा है. बाल आपके मुँह में तो नहीं जा रहे.?” मम्मी चूतर उच्छाल कर अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. पापा कभी मम्मी की चूत चाटते और कभी बड़ी बड़ी चूचिओ को चूस्ते. थोरी देर बाद 69 की मुद्रा में आ गये. अब मम्मी की चूत पापा के मुँह पर थी और पापा का मोटा लंड मम्मी के मुँह में. काफ़ी देर तक चूमा चॅटी का खेल चलता रहा. फिर पापा ने मम्मी को बिस्तेर पर लिटा कर उनकी मोटी जांघों को चौड़ा किया और लंड का सुपरा उनकी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगे.

“ ऊऊऊः, अब तंग मत करिए. पेल दीजिए पूरा लंड.” मम्मी छूटरो को उचका कर लंड चूत में डालने की कोशिश करती हुई बोली. पापा अपना लंड चूत के कटाव पर रगड़ते रहे और मम्मी को उत्तेजित करते रहे.

“ बस भी कीजिए.! अब और नहीं सहा जा रहा. आपको तो ये दवाई चाहिए थी ना. ले भी लीजिए.”

“ लूँगा मेरी जान, आज तो सारी रात लूँगा.” ये कह कर पापा ने एक ज़ोर का धक्का लगाया. पापा का लंबा मोटा लंड आधा मम्मी की चूत में समा गया.

“ एयाया….आआआः. ऊऊऊऊः….ओई माआअ…….” पापा ने लंड को बाहर खींच कर फिर एक ज़ोर का धक्का लगाया. इस बार तो पूरा लंड मम्मी की चूत को चीरता हुआ जड़ तक अंडर घुस गया. अब पापा के बॉल्स मम्मी की गांद के छेद से रगड़ रहे थे.

“ वी माआअ…..आआआआ, आआआहह! धीरे मेरे राजा धीरे. इतने उतावले क्यों हो रहें हैं. एयेए…..आआआः कहीं भागी तो नहीं जा रही. अभी तो सारी रात बाकी है.”

“सच! सारी रात दोगि?” पापा ने धक्के लगाते हुए पूछा.

“आप लेंगे तो क्यों नहीं दूँगी. आज रात आआआअ…..आआआः….. इतना…. आआ…..आह चोदिए की 15 दिन चोदने की ज़रूरत ना परे.”

“ कविता आज पूरी रात चोद के तुम्हारी चूत फाड़ डालूँगा. बोलो मेरी जान मंज़ूर है?” पापा ने भयंकर धक्के मारते हुए कहा.

“ ओईईई, माआआ….अयाया..ऊऊओ… फाड़ तो आपने सुहाग रात को ही दी थी मेरे रजाआाअ…अयाया ..अब और कैसे फाड़ोगे?”

“ कविता, बीस साल से करीब रोज़ चोद रहा हूँ लेकिन तुम्हारी चूत अभी तक टाइट है. ऐसा लगता है जैसे 16 साल की लड़की की चूत हो”

“ आपका लॉडा है ही इतना मोटा की कोई भी चूत टाइट लगेगी. मैं ही जानती हूँ आपके मूसल ने मेरी चूत का क्या हाल कर दिया है. बीस साल से चोद चोद के इतनी चौड़ी कर दी है की किसी नॉर्मल आदमी का लंड ऐसा लगेगा जैसे कूए में डाल दिया हो”

“ कभी दूसरे आदमी से चुदवाने का दिल नहीं करता तुम्हारा?” पापा ने पूरा लंड बाहर निकाल कर दो तीन ज़ोरदार धक्के मारते हुए पूछा.

“ आआआआहह…..ऊऊओघ…ईइसस्स्स्सस्स…..मार डाला आपने किसी दूसरे के लायक छोड़ी भी है? ऐसा मज़ाक करते आपको शर्म नहीं आती? आपके सिवा मैने आज तक किसी दूसरे मर्द के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा.”मम्मी गुस्सा करते हुए बोली.मम्मी को मनाने के लिए पापा ने उनके होठों को चूमते हुए कहा,

“ गुस्सा ना करो मेरी जान, मैं तो मज़ाक कर रहा था. हम तुमको अभी खुश कर देते हैं.” ये कह कर पापा ने अपना लॉडा मम्मी की चूत से बाहर खींच लिया. उस मोटे लंबे मम्मी की चूत के रूस में चमकते हुए काले नाग को देख कर तो कंचन की चीख ही निकल गयी. मम्मी की चूत के रस में गीला लॉडा एकदम भयानक लग रहा था. पापा ने फिर से मम्मी की झांतों भरी चूत में मुँह दे दिया और जीभ निकाल कर चाटने लगे. मम्मी की सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी. वो चूतर उच्छाल उच्छाल कर अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. आख़िर जब मम्मी से नहीं रहा गया तो बोली,

“ बस करो मेरे राजा. अब चोद कर मेरी चूत की आग ठंडी करो.” पापा ने मम्मी की चूत में से मुँह निकाला और लंड का सुपरा मम्मी की चूत पे रख कर ज़ोरदार धक्का मारा. पूरा 9 इंच का मूसल मम्मी की चूत को चीरता हुआ जड़ तक घुस गया.

“आआआआआ…….आआआआआअ….आआआः, ऊऊ……फ. चोदो मेरे राजा और ज़ोर से चोदो. फाड़ डालो अपनी प्यारी बीवी की चूत.अया ओई माआ……बहुत अच्छा लग रहा है.”

मम्मी पापा के धक्कों का जबाब चूतर उछाल उछाल कर दे रही थी. चूत बुरी तरह गीली थी. मम्मी की चूत से फ़च..फ़च…फ़च ओर मुँह से आआआआ…..ऊओ…ऊऊओफ़ की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज़ रहा था. एक घंटे से चुदाई का मादक खेल चल रहा था. फिर पापा के धक्के तेज़ होने लगे और अचानक ही वो मम्मी के ऊपर गिर गये. पापा के लंड ने ढेर सारा वीर्य मम्मी की चूत में उंड़ेल दिया. दो मिनिट के बाद पापा ने मम्मी की चूत के रस और अपने वीर्य में सना लंड बाहर निकाला और मम्मी के होंठों पे रख दिया. काले मोटे लंड पे सफेद सफेद रंग का मम्मी की चूत का रस और उनका अपना वीर्य चिपका हुआ था. मम्मी पापा के 9 इंच लंबे लॉड को जड़ से सुपरे तक चाटने और मुँह में डाल कर चूसने लगी. मम्मी की चूत में से वीर्य निकल कर उनकी गांद के छेद की ओर बह रहा था चूत बुरी तरह से फूल गयी थी और झाँटें गीली हो कर चमक रही थी. मम्मी ने चाट चाट के पापा का लंड साफ कर दिया. मम्मी बोली,

“ आइए, लेट कर थोड़ा आराम कर लीजिए. दवाई मीठी थी ना?”

“ बहुत मीठी थी. अब तो और भी दवाई लेने का मन कर रहा है.” पापा ने मम्मी के बगल में लेटते हुए कहा.

नीलम जो अभी तक चुदाई का नज़ारा देखने में मस्त थी, बोली,

“ कंचन ला मेरे 50 रुपये. देख लिया तेरी मम्मी के पेट का दर्द?”

“ मेरे पास 50 रुपये नहीं हैं.” कंचन शर्त हार के भी बहुत खुश थी क्योंकि शर्त के कारण ही पापा मम्मी की रास लीला देखने को मिली थी.

“ 50 रुपये नहीं हैं तो मैं जैसा कहूँगी वैसा करना पड़ेगा.” नीलम मेरी चूत को सलवार के ऊपर से ही मुट्ठी में भरते हुए बोली.

“ नीलम ये क्या कर रही है ?छोड़ मुझे.” कंचन ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा. किसी ने पहली बार कंचन की चूत पर इस तरह हाथ रखा था. उसे बहुत अच्छा लग रहा था. इतने में नीलम ने कंचन की सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार को नीचे खिसका दिया.

“ देख कंचन, 50 रुपये के बदले में मैं तेरी चूत देखना चाहती हूँ और तुझे भी अपनी चूत दिखाउंगी.”

“ प्रॉमिस कर की उसके बाद कुछ नहीं करेगी.” कंचन बोली.

“ उसके बाद क्या कर सकती हूँ ? मेरे पास लंड तो है नहीं जो तुझे चोद सकूँ.” ये कह कर उसने अपनी सलवार भी उतार दी. उसके बाद नीलम ने पहले कंचन का कुर्ता और ब्रा उतार के नंगी कर दिया और फिर खुद भी नंगी हो गयी.

“ ऊऊऊः, अब तंग मत करिए. पेल दीजिए पूरा लंड.” मम्मी छूटरो को उचका कर लंड चूत में डालने की कोशिश करती हुई बोली. पापा अपना लंड चूत के कटाव पर रगड़ते रहे और मम्मी को उत्तेजित करते रहे.

“ बस भी कीजिए.! अब और नहीं सहा जा रहा. आपको तो ये दवाई चाहिए थी ना. ले भी लीजिए.”

“ लूँगा मेरी जान, आज तो सारी रात लूँगा.” ये कह कर पापा ने एक ज़ोर का धक्का लगाया. पापा का लंबा मोटा लंड आधा मम्मी की चूत में समा गया.

“ एयाया….आआआः. ऊऊऊऊः….ओई माआअ…….” पापा ने लंड को बाहर खींच कर फिर एक ज़ोर का धक्का लगाया. इस बार तो पूरा लंड मम्मी की चूत को चीरता हुआ जड़ तक अंडर घुस गया. अब पापा के बॉल्स मम्मी की गांद के छेद से रगड़ रहे थे.

“ वी माआअ…..आआआआ, आआआहह! धीरे मेरे राजा धीरे. इतने उतावले क्यों हो रहें हैं. एयेए…..आआआः कहीं भागी तो नहीं जा रही. अभी तो सारी रात बाकी है.”

“सच! सारी रात दोगि?” पापा ने धक्के लगाते हुए पूछा.

“आप लेंगे तो क्यों नहीं दूँगी. आज रात आआआअ…..आआआः….. इतना…. आआ…..आह चोदिए की 15 दिन चोदने की ज़रूरत ना परे.”

“ कविता आज पूरी रात चोद के तुम्हारी चूत फाड़ डालूँगा. बोलो मेरी जान मंज़ूर है?” पापा ने भयंकर धक्के मारते हुए कहा.

“ ओईईई, माआआ….अयाया..ऊऊओ… फाड़ तो आपने सुहाग रात को ही दी थी मेरे रजाआाअ…अयाया ..अब और कैसे फाड़ोगे?”

“ कविता, बीस साल से करीब रोज़ चोद रहा हूँ लेकिन तुम्हारी चूत अभी तक टाइट है. ऐसा लगता है जैसे 16 साल की लड़की की चूत हो”

“ आपका लॉडा है ही इतना मोटा की कोई भी चूत टाइट लगेगी. मैं ही जानती हूँ आपके मूसल ने मेरी चूत का क्या हाल कर दिया है. बीस साल से चोद चोद के इतनी चौड़ी कर दी है की किसी नॉर्मल आदमी का लंड ऐसा लगेगा जैसे कूए में डाल दिया हो”

“ कभी दूसरे आदमी से चुदवाने का दिल नहीं करता तुम्हारा?” पापा ने पूरा लंड बाहर निकाल कर दो तीन ज़ोरदार धक्के मारते हुए पूछा.

“ आआआआहह…..ऊऊओघ…ईइसस्स्स्सस्स…..मार डाला आपने किसी दूसरे के लायक छोड़ी भी है? ऐसा मज़ाक करते आपको शर्म नहीं आती? आपके सिवा मैने आज तक किसी दूसरे मर्द के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा.”मम्मी गुस्सा करते हुए बोली.मम्मी को मनाने के लिए पापा ने उनके होठों को चूमते हुए कहा,

“ गुस्सा ना करो मेरी जान, मैं तो मज़ाक कर रहा था. हम तुमको अभी खुश कर देते हैं.” ये कह कर पापा ने अपना लॉडा मम्मी की चूत से बाहर खींच लिया. उस मोटे लंबे मम्मी की चूत के रूस में चमकते हुए काले नाग को देख कर तो कंचन की चीख ही निकल गयी. मम्मी की चूत के रस में गीला लॉडा एकदम भयानक लग रहा था. पापा ने फिर से मम्मी की झांतों भरी चूत में मुँह दे दिया और जीभ निकाल कर चाटने लगे. मम्मी की सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी. वो चूतर उच्छाल उच्छाल कर अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. आख़िर जब मम्मी से नहीं रहा गया तो बोली,

“ बस करो मेरे राजा. अब चोद कर मेरी चूत की आग ठंडी करो.” पापा ने मम्मी की चूत में से मुँह निकाला और लंड का सुपरा मम्मी की चूत पे रख कर ज़ोरदार धक्का मारा. पूरा 9 इंच का मूसल मम्मी की चूत को चीरता हुआ जड़ तक घुस गया.

“आआआआआ…….आआआआआअ….आआआः, ऊऊ……फ. चोदो मेरे राजा और ज़ोर से चोदो. फाड़ डालो अपनी प्यारी बीवी की चूत.अया ओई माआ……बहुत अच्छा लग रहा है.”

मम्मी पापा के धक्कों का जबाब चूतर उछाल उछाल कर दे रही थी. चूत बुरी तरह गीली थी. मम्मी की चूत से फ़च..फ़च…फ़च ओर मुँह से आआआआ…..ऊओ…ऊऊओफ़ की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज़ रहा था. एक घंटे से चुदाई का मादक खेल चल रहा था. फिर पापा के धक्के तेज़ होने लगे और अचानक ही वो मम्मी के ऊपर गिर गये. पापा के लंड ने ढेर सारा वीर्य मम्मी की चूत में उंड़ेल दिया. दो मिनिट के बाद पापा ने मम्मी की चूत के रस और अपने वीर्य में सना लंड बाहर निकाला और मम्मी के होंठों पे रख दिया. काले मोटे लंड पे सफेद सफेद रंग का मम्मी की चूत का रस और उनका अपना वीर्य चिपका हुआ था. मम्मी पापा के 9 इंच लंबे लॉड को जड़ से सुपरे तक चाटने और मुँह में डाल कर चूसने लगी. मम्मी की चूत में से वीर्य निकल कर उनकी गांद के छेद की ओर बह रहा था चूत बुरी तरह से फूल गयी थी और झाँटें गीली हो कर चमक रही थी. मम्मी ने चाट चाट के पापा का लंड साफ कर दिया. मम्मी बोली,

“ आइए, लेट कर थोड़ा आराम कर लीजिए. दवाई मीठी थी ना?”

“ बहुत मीठी थी. अब तो और भी दवाई लेने का मन कर रहा है.” पापा ने मम्मी के बगल में लेटते हुए कहा.

नीलम जो अभी तक चुदाई का नज़ारा देखने में मस्त थी, बोली,

“ कंचन ला मेरे 50 रुपये. देख लिया तेरी मम्मी के पेट का दर्द?”

“ मेरे पास 50 रुपये नहीं हैं.” कंचन शर्त हार के भी बहुत खुश थी क्योंकि शर्त के कारण ही पापा मम्मी की रास लीला देखने को मिली थी.

“ 50 रुपये नहीं हैं तो मैं जैसा कहूँगी वैसा करना पड़ेगा.” नीलम मेरी चूत को सलवार के ऊपर से ही मुट्ठी में भरते हुए बोली.

“ नीलम ये क्या कर रही है ?छोड़ मुझे.” कंचन ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा. किसी ने पहली बार कंचन की चूत पर इस तरह हाथ रखा था. उसे बहुत अच्छा लग रहा था. इतने में नीलम ने कंचन की सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार को नीचे खिसका दिया.

“ देख कंचन, 50 रुपये के बदले में मैं तेरी चूत देखना चाहती हूँ और तुझे भी अपनी चूत दिखाउंगी.”

“ प्रॉमिस कर की उसके बाद कुछ नहीं करेगी.” कंचन बोली.

“ उसके बाद क्या कर सकती हूँ ? मेरे पास लंड तो है नहीं जो तुझे चोद सकूँ.” ये कह कर उसने अपनी सलवार भी उतार दी. उसके बाद नीलम ने पहले कंचन का कुर्ता और ब्रा उतार के नंगी कर दिया और फिर खुद भी नंगी हो गयी.

पापा के मुँह से अपने बदन और अपनी चुदाई की बातें सुन के कंचन शरम से पानी पानी हो रही थी लेकिन उसे एक अजीब सा मज़ा भी आ रहा था. अपने छ्होटे भाई के लंड के बारे में सुन कर कंचन तो दंग रह गयी. लोगों के छोटे भद्दे पेशाब करते लंड देख कर मूड खराब हो जाता था. यहाँ तो मोटे तगड़े लंड घर में ही मौज़ूद थे. नीलम भी पापा मम्मी की बातें सुन कर उत्तेजित थी. एक उंगली हल्के से कंचन की लार टपकाती चूत में सरकाते हुए बोली,

“हाई कंचन अपने भाई से तो दोस्ती करवा दे.”

“हट पागल, सुधीर को धोका देगी?”

पापा का लंड फिर से तन गया था.

“ अरे आपका तो फिर से खड़ा हो गया. क्या इरादा है.”

“ जिसकी बीवी की इतनी खूबसूरत चूत हो उसका और क्या इरादा हो सकता है?” ये कहते हुए पापा ने मम्मी को चूमना शुरू कर दिया. लगता था चुदाई का एक और दौर होने वाला था. इतने में मम्मी बोली,

“ एक मिनिट रुकिये, ज़रा बाथरूम हो आउ.” मम्मी ने बाथरूम का दरवाज़ा खुला ही छोड़ दिया. मम्मी की चूत से पेशाब करने की प्सस्ससस्स की आवाज़ आ रही थी. इतने में नीलम बोली,

“कंचन एक बात कहूँ बुरा तो नहीं मानेगी?”

“नहीं बोल ना.”

“ इस बार तेरे पापा का लंड तेरी याद करके खड़ा हुआ है.”

“ तेरा तो दिमाग़ बिल्कुल खराब हो गया है. मम्मी को सिकुदे हुए लंड से तो नहीं चोद सकते ना. उनका लंड खड़ा है मम्मी को चोदने के लिए.”

“तू फिर एक बार शर्त लगा ले. हार जाएगी. मैं प्रूव कर दूँगी की तेरे पापा तेरी जवानी पे फिदा होते जा रहे हैं. मैं मर्दों को बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ.”

“ठीक है. प्रूव करके दिखा.” कंचन बोली.

“अगर मैं हार गयी तो मैं तुझे एक हज़ार रुपये दूँगी और अगर तू हार गयी तो तू अपने भाई से मेरी दोस्ती करवाएगी. बोल मंज़ूर है ?”

“मंज़ूर है.”

इतने में मम्मी बाथरूम से आ गयी और बोली,

“ कहिए मेरे राजा अब किस मुद्रा में लेंगे ?”

“हाई मेरी रानी ये ही अदा तो हमे मार डालती है. पहले तुम हमारे ऊपर खड़ी हो जाओ. ज़रा अपनी प्यारी बीवी की चूत तो देख लें.”

“हटिए भी आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे पहले कभी देखी ना हो.” लेकिन मम्मी पापा के बदन के दोनो तरफ टाँगें करके खड़ी हो गयी. पापा पीठ के बल लेटे हुए मम्मी की फैली टाँगों के बीच झांतों से धकि हुई चूत को निहार रहे थे. उनका लंड बुरी तरह तना हुआ था. फिर बोले,

“ आओ हमारे ऊपर बैठ जाओ. मम्मी पापा के तने हुए लंड पे बैठने लगी कि पापा बोले,

“वहाँ नहीं मेरी जान, थोडा आगे आ जाओ.” मम्मी थोड़ा और आगे हो गयी.

“और थोड़ा आगे आ जाओ.” मम्मी समझ गयी पापा उनकी चूत चाटना चाहते हैं.

“ छ्ची ! आप नहीं सुधरेंगे. मैं अभी अभी पेशाब करके आई हूँ और आप वहीं मुँह लगाना चाहते हैं. अभी तो मेरी झाँटें तक गीली हैं.” इस वक़्त मम्मी पापा की छाती के दोनो ओर टाँगें करके ऐसे बैठी हुई थी जैसे पेशाब करने की मुद्रा में बैठी हो. इस मुद्रा में मम्मी की चूत पापा की नज़रों के सामने बिकुल खुली हुई थी. घनी काली झांतों के बीच में से अभी अभी पापा के मोटे लॉड से चुदने के कारण मम्मी की चूत का छेद खुला हुआ नज़र आ रहा था. झाँटें चूत के रस और पेशाब से गीली थी. पापा ने मम्मी की विशाल चूतरो को पकड़ के उन्हें अपने मुँह पे खींच लिया. अब पापा का मुँह मम्मी की चूत के जंगल में खो गया था. धीरे धीरे मम्मी के मुँह से इश्स ..आआआ…..ईीइसस्सस्स….आईईइ…आहह की आवाज़ें आने लगी. मम्मी भी पापा के मुँह पे अपनी चूत रगड़ने लगी थी. पापा का मुँह मम्मी की मोटी मोटी जांघों के बीच मम्मी की चूत और झांतों पे लगा पेशाब और उनकी चूत का रस चाट रहा था. मम्मी सिसकारियाँ भरती हुई बोली,

“हाई राम आप तो सुचमुच बहुत गंदे हैं..इसस्स ..” अच्छी तरह चूत साफ करने के बाद पापा बोले,

“ हाई मेरी जान तुम्हारी चूत रस के सामने तो अमृत भी कुच्छ नहीं. आओ अब तुम्हें कुतिया बना कर चोदेन्गे.” मम्मी बिस्तेर पर कुतिया बन कर लेट गयी. उनकी छाति बिस्तेर पर और चूतर हवा में थे. इस मुद्रा में उनकी मोटी मोटी झंघों के बीच में से बालों भरी चूत सॉफ दिखाई दे रही थी. एक घंटे से चल रही चुदाई के कारण चूत बहुत ही फूली और सूजी हुई लग रही थी. चूत का छेद भी मुँह खोले हुए था. ये पापा के मोटे लॉड का कमाल था.

“ लो राजा मैं तो कुतिया बन गयी लेकिन कुतिया को तो कुत्ता ही चोद्ता है पर अभी तो इस कुतिया के ऊपर सांड चढ़ेगा और अपने घोड़े जैसे लंड से चोदेगा.” पापा मम्मी के चूतरो के पीछे बैठ कर उनके फैले हुए विशाल चूतरो और उनके बीच से झाँकति हुई फूली हुई चूत को निहारने लगे.

“ऐसे क्या देख रहे हैं मेरे राजा ?”

“ सच कविता तुम्हारे जैसे चूतेर तो इस दुनिया में किसी औरत के नहीं हैं. हमे तो इन्होने पागल कर दिया है.”

“सभी औरतों के ऐसे ही तो होते हैं.”

“तुम क्या जानो मेरी जान तुम्हारे चूतेर कितने जान लेवा हैं. सभी औरतों के तो ऐसे नहीं होते, हां अब तुम्हारी बिटिया के ज़रूर ऐसे होते जा रहे हैं.”

“हाई राम ! लगता है आप अपनी बेटी के चूतरो पे फिदा हो गये हैं.”

“अरे नहीं. फिर वही बात कर रही हो. देखो ना तुम्हारे इन चूतरो ने हमारे लॉड का क्या हाल कर रखा है.”

“तो ले लीजिए ना. किसने रोका है. आज हमे भी तो दिखाइए आपको ये कितने अच्छे लगते हैं.” मम्मी अपने विशाल चूतरो को और ज़्यादा उचकाती हुई बोली. अब तो चूतरो के बीच मम्मी की गांद का वो भूरे रंग का छेद भी नज़र आने लगा था. पापा ने मम्मी के विशाल चूतरो को फैला कर उनके बीच अपना मुँह दे दिया और कुत्ते की तरह उनकी चूत चाटने लगे. उनकी नाक मम्मी की गांद के छेद पे टिकी हुई थी. बीच बीच में मम्मी के चूतरो को और ज़्यादा फैला कर उनकी गांद के छेद को भी चाटते. मम्मी के मुँह से अया. ऊवू…..इसस्सस्स. की आवाज़ें आने लगीं. थोरी देर चूत और गांद चाटने के बाद पापा उठे और अपने लंड का सुपरा मम्मी की चूत के खुले हुए मुँह पर रख कर धक्का लगा दिया. चूत बहुत गीली थी और घंटे भर की चुदाई से चौड़ी हो गयी थी इसलिए एक ही धक्के में पूरा 9 इंच का लॉडा मम्मी की चूत में समा गया.

“ आाआईयईईईईईई…….इसस्स्स्स्स्स्सस्स……. ओईईई माआआअ……आआअहह.”

पापा मम्मी की चूचिओ को पकड़ कर अब पूरा लंड अंडर बाहर कर रहे थे. पापा के बारे बारे बॉल्स आगे पीछे होने के कारण पेंडुलम की तरह झूल रहे थे. फ़च फ़च….फ़च….फ़च का संगीत फिर शुरू हो गया था.

“ कविता चुदवाते हुए जितनी आवाज़ तुम करती हो उतनी ही आवाज़ तुम्हारी ये प्यारी चूत भी करती है.”

“ क्या करूँ, सब आपके मूसल का कमाल है. एक दिन तो कंचन ने भी ये आवाज़ें सुन ली थी. मैने उसे बता दिया कि मेरे पेट में दर्द रहता है.”

पापा हस्ते हुए बोले

“ कितनी नादान है हमारी बिटिया. लेकिन तुम्हारी ये चूत जो फ़च फ़च कर रही है इसके बारे में क्या कहा?”

“ हटिए भी, इसकी आवाज़ थोड़ी बाहर जाती है.”

पापा पूरा लंड बाहर निकाल कर जड़ तक पेल रहे थे. मम्मी भी चूतर पीछे की ओर उचका उचका कर चुदवा रही थी. फिर पापा ने पास में पड़ी वॅसलीन की बॉटल खोली, ढेर सारा वॅसलीन अपनी उंगली पे लगाया और मम्मी की गांद के छेद में लगाने लगे.

“आआहह……क्या इरादा है मेरे राजा?” मम्मी गांद उचकाती हुई बोली.“ कविता मेरी जान कयि दिनों से तुम्हारी खूबसूरत गांद नहीं ली. आज मेरा लॉडा तुम्हारी गांद में जाने को उतावला हो रहा है. आज तो अपनी गांद भी देती जाओ.”

“ले लीजिए ना, मैने कब रोका है. आपकी ही चीज़ है. मैं तो आपको इतना तृप्त कर देना चाहती हूँ कि आपको 15 दिन तक मेरी ज़रूरत महसूस ना हो “ अब पापा ने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया और ढेर सारा वॅसलीन अपने लंड पर भी लगा लिया. नीलम कंचन की चूत में उंगली डालते हुए बोली,

“ देख कंचन, उस दिन वो लड़का तेरी गांद मारने की बात कर रहा था तो तू नाराज़ हो रही थी, अब देख तेरे पापा का मूसल कैसे तेरी मम्मी की गांद में जाता है. अच्छी तरह देख ले क्योंकि तेरा पति भी इसी तरह तेरी गांद मारेगा.” उधेर पापा ने लंड का सुपरा मम्मी की गांद के छेद पर टीका कर दबाव डालना शुरू कर दिया था. धीरे धीरे लंड का मोटा सुपरा मम्मी की गांद के टाइट छेद को फैला के अंडर सरक गया. पापा ने थोड़ा और दबाव डाला और करीब 1 इंच लंड मम्मी की गांद में घुस गया.

“ आआआहह….ऊऊऊघ…..क्या मोटा लंड है आपका.” पापा ने आधा इंच लंड बाहर खींच कर इस बार एक ज़ोर का धक्का मारा. 6 इंच लंड अंडर जा घुसा

“आआआआआआआआआआअ……………आआआहह……..मार गाइिईईई…….ऊऊओफ़ धीरे प्प्प्प्प्प्लेआसए…… औइ माआआअ फॅट जाएगी.” पापा ने मम्मी के चूतर पकड़ के पूरा लंड बाहर खींच कर एक बार फिर करारा धक्का लगाया . इस बार लंड जड़ तक मम्मी की गांद में समा गया. अब पापा के बॉल्स मम्मी की चूत पर टीके हुए थे. “ ओईईईईईईईईईईईईईईईई……….ऊऊऊऊऊऊओह……आआ आआआाअघ…उूउउम्म्म्मम, कितने बेरहम हैं ! अपनी प्यारी बीवी की गांद फाड़ देना चाहते हैं? लगता है आपका लॉडा और भी बड़ा हो गया है. इतना दर्द पहले कभी नहीं हुआ.”

“ दर्द हो रहा है तो निकाल लूँ?”

“ नहीं मेरे राजा, ये तो मीठा मीठा दर्द है, बहुत दिनों बाद आपने मेरी गांद चोदि है ना. चोदिए ना, जी भर के चोदिए. फाड़ दीजिए अपनी कविता की गांद.” मम्मी चूतर उचकाते हुए बोली. पापा मम्मी की बातें सुन कर जोश में उनकी कमर पकड़ के ज़बरदस्त धक्के मार मार के पूरा लंड मम्मी की गांद में पेलने लगे. थोरी देर धक्के मारने के बाद बोले,

“ कविता अब मैं तुम्हारे तीनों छेद चोदुन्गा.” ये कह कर पापा ने अपना लंड मम्मी की गांद में से निकाल के उनके मुँह में दे दिया. मम्मी ने अच्छी तरह लंड को चॅटा और चूसा. फिर पापा ने मुँह से लंड निकाल के मम्मी की चूत में पेल दिया. अब वो बारी बारी से मम्मी की चूत , गांद और मुँह में लंड पेलने लगे. चूत के रस में सना हुआ लंड मम्मी की गांद में पेलते और फिर मम्मी गांद से निकाले लंड को चॅट कर सॉफ करती. आधा घंटे ये खेल चलता रहा, फिर अचानक पापा बोले,

“ कविता मेरी जान झरने वाला हूँ, बोलो कहाँ निकालु?”

“ गांद में निकाल दीजिए. केयी दिन हो गये गांद में आपका रस निकले हुए.”

पापा ने मम्मी की गांद में अपना मूसल पेल दिया और कमर पकड़ के भयंकर धक्के लगाने लगे. मम्मी के मुँह से ऊवू….ऊऊहह…. आआआः… ओईइ….की आवाज़ें आने लगीं.15-20 धक्के लगाने के बाद पापा ने ढेर सारा वीर्य मम्मी की गांद में निकाल दिया. जब पापा ने लंड बाहर निकाला तो मम्मी की गांद का छेद बहुत चौड़ा हो गया था और उसमें से वीर्य निकल के उनकी चूत की तरफ बहने लगा. मम्मी ने चाट चाट के पापा का लंड सॉफ किया. आज से पहले कंचन को विश्वास ही नहीं होता था कि आदमी का इतना मोटा लंड औरत की गांद के छ्होटे से छेद में भी जा सकता है, पर आज तो उसने अपनी आँखों से देख लिया. मर्द लोग वाकाई में औरत की गंद भी मारते हैं. पापा ने मम्मी को पूरी रात करीब 6 बार हर मुद्रा में चोदा. सुबह तक मम्मी की चूत बुरी तरह सूज गयी थी और पापा का लंड भी मम्मी की चूत का रस पी कर काफ़ी मोटा लग रहा था. उजाला हो गया था. मम्मी पापा थोड़ी देर के लिए सो गये. नीलम कंचन की गीली चूत में उंगली डालती हुई बोली,

“ कंचन, पसंद आया अपने पापा का लॉडा?”

“चुप, क्या बकवास कर रही है.” कंचन बनावटी गुस्सा करते हुए बोली.

“ हाई राम! क्या मोटा लॉडा है. तुझे पसंद आया कि नहीं ये तो मुझे नहीं पता लेकिन हमें तो बहुत पसंद आया. सच तेरी मम्मी बहुत भाग्यशाली है. कितने प्यार से चोदा है तेरी मम्मी को. कितने दीवाने हैं तेरी मम्मी की गांद के. वैसे तो तेरे इन कातिलाना चूतरो पे भी फिदा हैं तेरे पापा. किसी दिन मौका लगा तो कहीं तेरी गांद भी….. ” नीलम, कंचन के चूतरो पे हाथ फेरते हुए बोली.

“ हट पागल, तेरा तो दिमाग़ खराब हो गया है.”

“कंचन, तू शर्त लगा ले. तेरे पापा को अब तेरी जवानी तंग करने लगी है. मैं इस बात को प्रूव कर सकती हूँ.”

“ तेरी शर्त मंज़ूर है. प्रूव कर के दिखा. जो माँगेगी दूँगी.”

“ठीक है, एक शर्त तो तू हार ही चुकी है. ये भी हार जाएगी. कल तेरी मम्मी माएके जा रही है. हमारे पास 15 दिन का टाइम है. जैसा मैं कहूँ करना, फिर देखना मेरी बात सच है या नहीं.”

कंचन का दिल में पापा के मुँह से अपने बारे में सुन कर और नीलम की बात सुन कर गुदगुदी होने लगी थी. उसने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके पापा अपनी बेटी के जवान होते हुए बदन को ऐसी नज़रों से देखते हैं. मन ही मन सोच रही थी कि शायद नीलम की बात सच हो. लेकिन विश्वास नहीं हो रहा था.

अगले दिन नीलम ने एक प्लान बनाया. वो अपने घर से एक मूवी कॅमरा ले आई. दोनो सहेलियाँ स्कूल से जल्दी घर वापस आ गयी. नीलम , कंचन से बोली,

“तेरे पापा लंच के लिए आते ही होंगे. तू बाहर लॉन में पैर के नीचे उसके तने के साथ पीठ टीका के बैठ जा और अपनी टाँगें मोड़ के सिर अपने घुटनों पे टीका कर सोने का नाटक कर. जब तेरे पापा आएँगे तो उन्हें तेरे चूतरो से ले के पूरी टाँगें नंगी नज़र आएँगी और तेरी पॅंटी के भी खूब अच्छी तरह दर्शन हो जाएँगे. मैं झाड़ी के पीछे से मूवी कॅमरा में उनके पूरे हाव भाव क़ैद कर लूँगी. उसके बाद तू खुद ही देख लेना मेरी बात सही थी या नहीं.”

“ठीक है,जल्दी कर, बस पापा आने ही वाले हैं.” ये कह कर कंचन पेड़ के नीचे टाँगें मोड़ के बैठ गयी. नीलम ने उसकी स्कूल की स्कर्ट इस तरह से अड्जस्ट कर दी कि शर्मा जी को बिना रुकावट के कंचन की पूरी टाँगें नज़र आ जाएँ. उसके बाद नीलम ने कंचन की पॅंटी को भी उसकी चूत पे इस प्रकार अड्जस्ट किया कि पॅंटी के दोनो तरफ से उसकी काली काली झाँटें सॉफ नज़र आ जाएँ और उसकी फूली हुई चूत पॅंटी में और भी ज़्यादा उभरी हुई लगे. फिर उसने हल्के से कंचन की चूत की दोनो फांकों के कटाव में उंगली फेर के उसकी पॅंटी को चूत की दोनो फांकों के बीच में फसा दिया. इतने में शर्मा जी के आने की आवाज़ हुई. नीलम जल्दी से कॅमरा ले कर झाड़ी के पीछे छुप गयी. उधेर शर्मा जी बेटी को ढूड़ने लगे,

“ कंचन ! अरी ओ कंचन ! कहाँ हो? अरे बिटिया चलो खाना खा लें.” शर्मा जी बेटी को ढूँढते हुए लॉन में आ गये. अचानक उनकी नज़र कंचन पे पड़ी और वो एकदम रुक गये. सामने का नज़ारा देख कर उनका दिल धक धक करने लगा. अपनी 18 साल की जवान बेटी की गोरी गोरी मांसल जांघें नंगी देख कर उनका लॉडा हरकत करने लगा. जैसे ही उनकी नज़रें बिटिया की जांघों के बीच में गयी तो उनके होश ही उड़ गये. छ्होटी सी सफेद पॅंटी मुश्किल से बिटिया रानी की चूत को ढकने की कोशिश कर रही थी. लंबी काली काली झाँटें तो दोनो तरफ से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी. ऊफ़ ! क्या फूली हुई चूत थी बिटिया की… जवान बेटी की कुँवारी चूत की फांकों के बीच फसि हुई पॅंटी ने मानो शर्मा जी पे बिजली गिरा दी. उनका लॉडा अंडरवेर फाड़ के बाहर आने की कोशिश कर रहा था. शर्मा जी बेटी की टाँगों के बीच देख के अपने लॉड को पॅंट के ऊपेर से ही सहलाने लगे. शर्मा जी को जी भर के अपनी नंगी टाँगों और पॅंटी के दर्शन कराने के बाद कंचन ऐसे उठी जैसे नींद से उठी हो,

“ अरे पापू, आप! आप कब आए? हमे तो नींद ही आ गयी आपका इंतज़ार करते करते. चलिए खाना खा लेते हैं.” कंचन जल्दी से अपनी स्कर्ट ठीक करती हुई बोली.

“ हाँ बेटी चलो. हम तो कब से तुम्हें ढूंड रहे हैं.”

कंचन अपने चूतेर मतकाती हुई आगे चल पड़ी. शर्मा जी का लॉडा इतना तना हुआ था कि उन्हें चलने में भी मुश्किल हो रही थी.

खाना खाने के बाद शर्मा जी ऑफीस चले गये. उनके ऑफीस जाते ही नीलम अपना कॅमरा ले कर आ गयी.

“ ले कंचन, देख ले तूने अपने पापा का क्या हाल कर दिया था.”

कंचन तो बेसब्री से वीडियो देखने का इंतज़ार कर रही थी.

“ जल्दी दिखा ना यार, देखें तेरी बात कितनी सच है.”

“सोलह आने सच है मेरी जान, ले देख.” कंचन ने जो देखा तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ. वीडियो का फोकस कंचन की टाँगों के बीच में था. कंचन पॅंटी में क़ैद अपनी ही चूत देख कर शर्मा गयी. तभी कॅमरा का फोकस शर्मा जी पर गया. पापा, कंचन की गोरी गोरी टाँगों के बीच में झाँक रहे थे. उनका चेहरा लाल हो गया था और वो बार बार अपने होंठ चाट रहे थे. इतने में कॅमरा शर्मा जी की पॅंट के उभार पे गया. पापा की पॅंट का उभार देख कर कंचन शर्म से लाल हो गयी. उसने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके पापा उसकी चूत देख कर उत्तेजित हो जाएँगे. पापा पॅंट के ऊपर से ही अपना लॉडा सहला रहे थे. नीलम बोली,

“अब तो यकीन हो गया ?”

“ सच नीलम मुझे तो अब भी यकीन नहीं होता. किसी बाप का लंड अपनी ही बेटी के लिए कैसे खड़ा हो सकता है?”

“ तू उनकी बेटी ज़रूर है पर औरत भी तो है. दुनिया में ऐसा कौन मरद है जिसका लंड औरत की चूत देख के खड़ा ना हो जाए. बेटी हुई तो क्या हुआ. चूत तो चूत ही होती है. हां अगर तुझे अब भी विश्वास नहीं होता तो मेरे दिमाग़ में एक और प्लान है.” उसके बाद नीलम ने कंचन को अपना प्लान बताया. प्लान सुन कर कंचन का दिल धक धक करने लगा लेकिन उसे प्लान बहुत पसंद आया.उधेर शर्मा जी की तो नींद हराम हो गयी थी. सारी रात उनकी आँखों के सामने बेटी की कुँवारी चूत की फांकों में फँसी हुई पॅंटी का नज़ारा घूमता रहा. ज़िंदगी में पहली बार शर्मा जी ने किसी की चूत की फांकों में इस तरह पॅंटी फँसी हुई देखी. ओर वो भी 18 साल की जवान लड़की की. आज महीनों बाद उन्हें बेटी की पॅंटी के दर्शन हुए थे. और जब हुए तो ऐसे हुए कि उनकी नींद हराम हो गयी. ऊफ़! क्या जानलेवा नज़ारा था. रात में बेटी की चूत याद करके शर्मा जी ने तीन बार मूठ मारी.

अगले दिन प्लान के मुताबिक कंचन ने स्कूल से वापस आ के वो स्कर्ट पहन ली जो वो 9थ में पहना करती थी और अब तो उसके घुटनों से 10 इंच ऊपर रहती थी. उसके बाद दोनो ने सीधी लगा कर बॅस्केटबॉल पोले पे लगी बास्केट को लटका कर दिया और सीधी झाड़ियो में डाल दी. इतने में शर्मा जी के आने की आहट हुई. दोनो सहेलियाँ बॅस्केटबॉल पोले पे लटकी बास्केट को देखने लगी. शर्मा जी ने आते ही पूचछा,

“ अरे हमारी बिटिया यहाँ क्या कर रही है?”

“ पाप्पू आप आ गये. हम आपका ही इंतज़ार कर रहे थे. ज़रा ये बास्केट ठीक कर दीजिए ना….”

शर्मा जी का तो हाथ वहाँ तक पहुँच नहीं सकता था,

“ बेटी सीधी कहाँ है ?”

“जी पापू वो तो मिल नहीं रही है. मिल जाती तो हम ही ठीक कर देते.”

“बिना सीधी के कैसे काम चलेगा बेटे?”

“ पाप्पो आप ऐसे करो. आप नीचे बैठ जाओ. नीलम आपके कंधों पर बैठ कर बास्केट को ठीक कर देगी.”

“ठीक है. आओ बेटी नीलम. हमारे कंधों पे बैठ जाओ.”

“जी अंकल.” शर्मा जी नीचे बैठे और नीलम उनके कंधों के दोनो ओर टाँगें कर के बैठ गयी. बैठने से पहले उसने अपनी स्कर्ट इस तरह से अड्जस्ट की कि अब उसकी पॅंटी में कसी हुई चूत डाइरेक्ट शर्मा जी की गार्डेन पे रगड़ने लगी. अब शर्मा जी खड़े हो गये. नीलम बास्केट तक पहुँचने का नाटक करने लगी. शर्मा जी को बेटी की जवान सहेली नीलम की चूत की गर्मी अपनी गर्दन पे महसूस होने लगी. नीलम भी खूब हिल हिल के अपनी चूत शर्मा जी की गर्देन पे रगड़ रही थी. थोड़ी देर ये नाटक करने के बाद नीलम बोली,

“अंकल मेरा हाथ तो अब भी नहीं पहुँच रहा. कंचन लंबी है, उसका हाथ पहुँच जाएगा.” ये सुन कर शर्मा जी के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. आज तो बेटी की चूत उनकी गर्देन पे महसूस होगी. वो बोले,

“ ठीक है कंचन बेटी तुम ट्राइ करो.”

“एक मिनिट पापू मैं अभी आई, मुझे ज़ोर का बाथरूम लगा है.”

कंचन भाग के अंडर बाथरूम में गयी और मूतने लगी. नीलम ने उसे बताया था और उसने भी देखा था कि पापा ने कैसे मम्मी की पेशाब की हुई चूत को चॅटा था. मूतने के बाद उसने पॅंटी ऊपेर चढ़ा ली. अपनी टाँगों के बीच में देखा तो मुस्कुरा दी. पॅंटी पे पेशाब का बड़ा सा दाग लग गया था और उस जगह से पॅंटी गीली हो गयी थी.

शर्मा जी बेसब्री से बेटी के आने का इंतज़ार करने लगे. बिटिया की चूत में फँसी पॅंटी अब भी उनकी आखों के सामने घूम रही थी. बिटिया की चूत में से इस वक़्त निकलती हुई पेशाब की धार की कल्पना मात्र से उनका लंड हरकत करने लगा. इतने में कंचन पेशाब करके लॉन में आ गयी,

“चलिए पापा, मैं तैयार हूँ. लेकिन मैं सामने से आपके कंधों पे बैठूँगी ताकि गिरने लगूँ तो आप संभाल लेना.”

“नहीं गिरगी बेटी. खैर जैसे चाहो बैठो.”

शर्मा जी नीचे बैठे और कंचन सामने उनके कंधों के दोनो ओर टाँगें डाल कर बैठ गयी. अब तो शर्मा जी का मुँह बेटी की चूत से सटा हुआ था लेकिन स्कर्ट के ऊपर से. वो खड़े हो गये. कंचन बोली,

“ पापू, थोड़ा ऊपर उठाइए ना.. हाथ नहीं पहुँच रहा.”

शर्मा जी को बेटी को ऊपर की ओर उठाने के लिए उसके चूतरो को पकड़ना पड़ा. जैसे ही उन्होने बिटिया के चूतरो पर हाथ रखा उन्हें महसूस हुआ कि उनका आधा हाथ बेटी की पॅंटी पर और आधा हाथ उसके नंगे चूतरो पर था. उन्हें कुच्छ दिख वैसे भी नहीं रहा था क्योंकि उनका मुँह तो बेटी की टाँगों के बीच में दबा हुआ था.

“और थोड़ा ऊपर उठाओ, पापा.” कंचन चिल्लाई. शर्मा जी ने बेटी के चूतेर पकड़ कर उसे और ऊपर उठा दिया. स्कर्ट तो छ्होटी सी थी ही. कंचन के और ऊपर होने से उसकी स्कर्ट शर्मा जी के सिर के ऊपर आ गयी.

अब तो शर्मा जी का सिर बेटी की स्कर्ट के अंडर छुप गया था और उनका मुँह ठीक बेटी की चूत पर आ गया. अचानक शर्मा जी की नाक में बेटी की चूत की तेज़ महक गयी. आज तो उसकी चूत की खुश्बू बहुत तेज़ थी. इसका एक कारण था. कंचन ने धूलि हुई पॅंटी पहनने के बजाए जान के कल वाली ही पॅंटी पहनी हुई थी. दो दिन से पहनी हुई पॅंटी में से चूत की ज़ोरदार गंध तो आनी ही थी. शर्मा जी तो बिटिया की कुँवारी चूत की ज़ोरदार गंध से मदहोश हो गये. शर्मा जी को अपने होंठों पे गीलापन महसूस हुआ और वो समझ गये कि ये तो बेटी की पेशाब का गीलापन है क्योंकि अभी अभी तो वो पेशाब करके आई थी. अब तो शर्मा जी अपना आपा खो बैठे. उन्होने बेटी को और ऊपर उठाने के बहाने उसके चूतेर पकड़ के अपना मुँह बेटी की चूत में ज़ोर से दबा दिया. शर्मा जी ने अपने होंठ थोड़े से खोल दिए और बिटिया की पॅंटी में कसी फूली हुई चूत उनके मुँह में आ गयी. बिटिया की चूत की तेज़ स्मेल उनकी नाक में जा रही थी और उनका लंड अंडरवेर फाड़ कर बाहर निकलने को हो रहा था. उधेर कंचन को भी अपनी चूत पर पापा की गरम गरम साँसे महसूस हो रही थी. वो भी बास्केट ठीक करने के बहाने अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. नीलम ने फिर से मूवी कॅमरा शर्मा जी के लंड के उभार पे फोकस कर दिया. शर्मा जी को तो पता ही नहीं था कि नीलम उनका वीडियो बना रही है क्योंकि उनका मुँह तो बिटिया की स्कर्ट के नीचे च्छूपा हुआ उसकी चूत का आनंद ले रहा था. अब तो कंचन की पॅंटी उसके चूत के रस से गीली होने लगी थी. उसे डर था कि कहीं पापा को पता ना लग जाए. आख़िरी बार ज़ोर से पापा के मुँह में चूत को रगड़ती हुई बोली,

“ पापा ठीक हो गया नीचे उतारिये.”

शर्मा जी ने भी आख़िरी बार बेटी की पूरी चूत को मुँह में ले कर चूमा और बेटी को नीचे उतार दिया. शर्मा जी का चेहरा लाल हो रहा था और बिटिया के पेशाब से उनके होंठ नमकीन हो रहे थे. उनकी पॅंट तो ऐसे फूल गयी थी जैसे अंडरवेर पहना ही ना हो. शर्मा जी जल्दी से दूसरी ओर घूम गये और अंडर जाते हुए बोले,

“ चलो बच्चो खाना खा लो. कंचन बेटी नीलम को भी ले आओ.”

“जी पापू.” दोनो लड़कियाँ भी अंडर चली गयी. लेकिन शर्मा जी का ध्यान खाने में कहाँ. उनके मुँह में तो बिटिया की चूत का स्वाद था. खाना खा के वो उस स्वाद को खराब नहीं करना चाहते थे. जैसे ही शर्मा जी ऑफीस गये, दोनो सहेलियाँ वीडियो देखने लगी जिसमे शर्मा जी के लंड का उभार सॉफ नज़र आ रहा था. कंचन ये सोच कर बहुत खुश थी कि उसके पापा का लंड उसकी वजह से खड़ा हो गया था.

नीलम उसके चूतरो पे हाथ फेरते हुए बोली,

“हाई कंचन आज तो तेरे पापा ने तेरी चूत का स्वाद भी चख लिया. अब देख वो तेरे कैसे दीवाने हो जाते हैं.”

“हट पागल! तू तो सुचमुच बड़ी खराब है.”

“हाई मेरी जान, ये बता तुझे कैसा लगा?”

“हट ना.. मुझे तो शरम आती है.”

“हाई, अब कैसी शरम? जब अपने पापा के मुँह में चूत दे दी थी टब तो शरम आई नहीं. बता नाअ… मज़ा आया?” नीलम कंचन की चूत दबाती हुई बोली.

“इसस्स.. ये क्या कर रही है? छोड़ ना मेरी चूत. सच बताउ? आज ज़िंदगी में पहली बार किसी मरद के होंठ मेरी चूत पे लगे. ऊफ़! पापा ने मेरी चूत को काट क्यों नहीं लिया?”

“काटेंगे, काटेंगे. आज तो पहला दिन था. बिटिया की चूत मुँह में ले के उनकी भी नींद हराम हो जाएगी. अभी देख आगे आगे क्या होता है.” नीलम पॅंटी के ऊपर से ही कंचन की चूत मसल्ने लगी. कंचन की चूत रस छोड़ रही थी और उसकी पॅंटी बुरी तरह गीली होने लगी.

“इसस्सस्स…..आआईयईई… नीलम! छोड़ नाअ.. देख मेरी पॅंटी खराब हो रही है.”

“तेरी पॅंटी ही तो खराब करनी है. आज इस पॅंटी को पापा के बाथरूम में छोड़ देना. कल तक अपनी पॅंटी को पहचान नहीं पाएगी.”

अब तो कंचन का भी साहस बढ़ गया था. उसे अपने पापा को तड़पाने में बड़ा मज़ा आने लगा था. लेकिन वो पापा का लंड भी महसूस करना चाहती थी. उस दिन जब शाम को शर्मा जी ऑफीस से वापस आए तो कंचन अब भी उसी स्कूल की छ्होटी सी स्कर्ट में थी.

“अरे बेटी तुमने अभी तक कपड़े नहीं बदले?”

“नीलम अभी अभी गयी है. हम दोनो पढ़ रहे थे.”

“अच्छा बेटी मैं ज़रा नहा के आता हूँ.”

“नहीं पाप्पो आप बाद में जाना, मैं एक मिनिट में नहा के आती हूँ.”

“बिटिया तुम तो बहुत टाइम लगाती हो.”

“आप देख लेना मैं बस गयी और आई.”

“ठीक है जल्दी जाओ.”

कंचन ये ही तो चाहती थी. बाथरूम में जाते ही कंचन ने पेशाब किया और पॅंटी फिर से ऊपर चढ़ा के पेशाब का दाग लगा दिया. फिर उसने सारे कपड़े उतार दिए. पॅंटी को उतार कर उसने दरवाज़े के पीछे लगे हुक पर टाँग दिया. पॅंटी पर पेशाब का दाग सॉफ नज़र आ रहा था. कंचन ने देखा कि पॅंटी पे उसकी झांतों का एक बॉल भी चिपका हुआ है. कंचन ने अपनी चूत रगड़ कर तीन चार बाल और निकाल कर पॅंटी पे चिपका दिए. फिर वो जल्दी से नहा के बाहर निकल आई,

“जाइए पाप्पो. मैं नहा चुकी.”

शर्मा जी भी नहाने बाथरूम में चले गये. जैसे ही उन्होने बाथरूम का दरवाज़ा बन्द किया उनकी नज़र उसके पीछे हुक पर तंगी बेटी की पॅंटी पर गयी. शरमाजी का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. आज करीब साल भर के बाद उन्हें बिटिया की पॅंटी इस तरह तंगी हुई मिली थी. सवेरे इसी पॅंटी में कसी हुई बिटिया की चूत उनके मुँह में थी. शर्मा जी ने काँपते हुए हाथो से बेटी की पॅंटी को अपने हाथ में लिया और पॅंटी के मुलायम कपड़े पर हाथ फेरने लगे. तभी शर्मा जी की नज़र पॅंटी पे चिपके हुए बिटिया की झांतों के बालों पे गयी. शर्मा जी का लॉडा फंफना गया. उन्होने जी भर के बिटिया की पॅंटी को चूमा और चाता. फिर जहाँ पेशाब का दाग लगा था उसे अपने तने हुआ लॉड के सुपारे पे रख उसकी चूत का गीलापन महसूस करने लगे. बिटिया की चूत की कल्पना करते हुए पॅंटी को अपने लंड पे रगड़ते हुए उन्होने ढेर सारा वीर्य उसकी पॅंटी में उंड़ेल दिया. जब रात को शर्मा जी सो गये तो कंचन चुपके से बाथरूम में गयी और अपनी पॅंटी देख कर उसका दिल धक धक करने लगे.

वीर्य तो वो पहले भी देख चुकी थी मम्मी की चूत और गांद में से बाहर बहता हुआ लेकिन आज ज़िंदगी में पहली बार मरद के वीर्य को हाथ लगा के देखा था. कंचन ने अपनी मम्मी को पापा का वीर्य पीते हुए देखा था. उससे ना रहा गया और उसने अपनी पॅंटी में लगे हुए वीर्य को चाट लिया. पापा का वीर्य चाटते हुए उसे बहुत खुशी हो रही थी क्योंकि ये अनुभव अभी तक सिर्फ़ उसकी मम्मी ने ही किया था. कंचन को अब अपनी मम्मी से थोड़ी थोड़ी जलन सी होने लगी थी.

नीलम अब कंचन के पीछे पड़ गयी की जिस दिन मम्मी वापस आने वाली हो उस दिन भी वो कंचन के साथ रहना चाहती थी. नीलम को पता था कि जिस दिन मम्मी वापस आएगी उस दिन फिर से सारी रात चुदाई का नज़ारा देखने को मिलेगा. वही हुआ. जिस दिन मम्मी वापस आई उस रात सिर दर्द का बहाना बना कर जल्दी ही सोने चली गयी. कंचन को लगा कि आज तो चुदाई देखने नहीं मिलेगी, पर नीलम बोली, “कंचन तू इतनी भोली क्यों है? सिर दर्द का तो बहाना है. तेरी मम्मी चुदवाने के लिए उतावली हो रही है.” हम दोनो जल्दी से अपने कमरे में पहुँच गये. नीलम की बात बिल्कुल सच निकली. मम्मी बिस्तेर पर चादर ओढ़ के लेटी हुई थी. जैसे ही पापा अंडर आए, बोली,

“ कितनी देर से इंतज़ार कर रही हूँ ? आ भी जाइए.”

पापा ने मम्मी की चादर उतार दी. मम्मी एकदम नंगी थी. उसके बाद का नज़ारा तो कंचन की ज़िंदगी का एक और यादगार नज़ारा बन गया. पापा ने मम्मी को पूरी रात कयि नयी नयी मुद्राओं में चोदा. नीलम और कंचन ने एक बार फिर से एक दूसरे की चूत चाट के अपनी प्यास को ठंडा किया. इसके बाद मम्मी पापा की चुदाई का नज़ारा एक बार और देखने को मिला . इतने में शर्मा जी ने एक कमरा घर के ऊपर बनवा लिया था. पापा मम्मी उस कमरे में शिफ्ट हो गये. ये कमरा कंचन के कमरे के ठीक ऊपर था. अब तो कभी कभी जब मम्मी ज़्यादा जोश में होती थी तभी उनके मुँह से चुदाई की आवाज़ें नीचे तक आती थी. पापा मम्मी की चुदाई देखने के बाद से कंचन की कामुकता बढ़ती जा रही थी. नीलम ने भी कंचन की चूत पर हाथ फेर फेर कर तंग कर रखा था. नीलम तो सुधीर से चुदवा कर अपनी प्यास बुझा लेती लेकिन कंचन तड़पति रह जाती. कंचन को अब एक मोटे लंबे लॉड की सख़्त ज़रूरत महसूस होने लगी थी. पापा का तना हुआ लंड अक्सर उसकी आँखों के सामने घूम जाता. कंचन की अब एक ही तमन्ना थी कि उसकी शादी ऐसे मर्द से हो जिसका लंड मोटा तगड़ा हो और उसे चोदने का शोक हो. जब से अपने भाई विकी के लंड के बारे में सुना था तब से उसके लंड की कल्पना से ही कंचन की चूत गीली हो जाती. अब जब भी नीलम कंचन के घर आती वो दोनो घंटों एक दूसरे के बदन के साथ खेलते और एक दूसरे की चूत चाटते. बड़ा मज़ा आता था, लेकिन वो मज़ा तो नहीं आ सकता था जो एक मरद के साथ आता है.

आख़िर मरद का मज़ा कंचन को शादी के बाद ही मिला.

रात के 12 बज रहे थे. मम्मी मेरे कमरे में नींद की गोली खा कर बेख़बर सो रही थी. लाइट आने का कोई अंदेशा नहीं था. बाहर तूफान अब भी ज़ोरों पर था. इधर मेरे दिल और दिमाग़ पर भी बचपन की यादों ने ज़ोर का तूफान ला दिया था. इतने में पापा के आने आवाज़ सुनाई दी. मैं झट से कॅंडल जला के मम्मी के बिस्तेर पे पेट के बल लेट गयी और चादर से मुँह धक लिया, लेकिन पेटिकोट को चूतरो तक ऊपर चढ़ा लिया. मेरी मांसल जांघें बिल्कुल नंगी थी. ध्यान से देखने वाले को जांघों के बीच से झँकति हुई गुलाबी पॅंटी की झलक भी मिल जाती. पापा कमरे में आए. शायद काफ़ी पी रखी थी. लरखरा रहे थे. अंडर आके उन्होने कपड़े उतारने शुरू किए. मेरे मन में एक बार आया की कह दूं मम्मी मेरे कमरे में सो रही है. मैं इसी उधेर बुन में थी कि पापा बिल्कुल नंगे हो गये. अब तो बहुत देर हो चुकी थी. अब तो जो होगा देखा जाएगा. मेरी नज़र उनके लॉड पे पर गयी. बिल्कुल सिकुदा हुआ नहीं था लेकिन खड़ा भी नहीं था. कॅंडल की रोशनी में बहुत मोटा और डरावना लग रहा था. बाप रे ! खड़ा हो के तो बहुत ही मोटा हो जाएगा. आज कयि बरसों के बाद पापा के लंड को देखा था. पहले से कहीं ज़्यादा काला और मोटा लग रहा था. पापा ने एक नज़र मेरी तरफ डाली. मेरी गोरी गोरी मांसल नंगी जांघें कॅंडल की लाइट में चमक रही थी. पापा थोड़ी देर तक मेरी नंगी टाँगों को देखते रहे. उनके लंड ने हरकत शुरू कर दी थी. उन्होने मेरी नंगी जांघों की ओर देख कर धीरे धीरे अपने लंड को दो तीन बार सहलाया और फिर बाथरूम में पेशाब करने चले गये. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. वापस आ के उन्होने मेरी ओर ललचाई नज़रों से देखा. उनका लंड थोड़ा और बड़ा हो चुक्का था. लंड में तनाव आना शुरू हो गया था. उनका इरादा सॉफ था. फिर उन्होने कॅंडल को बुझा दिया और नंगे ही बिस्तेर पे आ गये और मुझसे चिपक गये. मेरी पीठ उनकी ओर थी. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. धीरे धीरे मेरे चूतरो को सहलाने लगे. उनका लंड तन चुका था और मेरे चूतरो की दरार में चुभ रहा था. मैं गहरी नींद में होने का बहाना कर रही थी. पापा ने मेरा पेटिकोट मेरे चूतरो के ऊपेर खिसका दिया. अब तो मेरे विशाल नितुंबों की इज़्ज़त मेरी छ्होटी सी पॅंटी के हाथ में थी. पेटिकोट ऊपर करके पॅंटी के ऊपेर से ही मेरे चूतरो को सहलाते हुए बोले,

“कविता, सो गयी क्या? इतना तो मत तडपाओ मेरी जान. आज बरसों बाद तो तुम्हें चोदने का मौका मिला है.” मैं चुप रही. अब पापा ने मेरी टाँगों के बीच हाथ सरका दिया और पॅंटी के ऊपेर से मेरी चूत सहलाते हुए बोले,

‘क्या बात है मेरी जान आज तो तुम्हारी चूत कुच्छ ज़्यादा ही फूली हुई लग रही है?’ मैं तो बिल्कुल चुपचाप पड़ी रही. मेरी चूत अब गीली होने लगी थी. कोई जबाब ना मिला तो बोले,

“ समझा, बहुत नाराज़ लग रही हो. माफ़ कर दो मेरी जान, थोरी देर हो गयी. देखो ना ये लॉडा तुम्हारे लिए कैसा पागल हो रहा है.” यह कहते हुए उन्होने अपना तना हुआ लॉडा मेरे चूतरो से सटा दिया और एक हाथ सामने डाल कर धीरे धीरे मेरी चूचियाँ सहलाने लगे. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. मेरी हिम्मत टूट रही थी लेकिन अब कोई चारा नहीं था. धीरे धीरे पापा ने मेरे ब्लाउस के बटन खोलने शुरू कर दिए. ब्रा तो पहना नहीं था. पीठ नंगी हो गयी. उनके मोटे लॉड ने मेरी पॅंटी को चूतरो की दरार में धकेल दिया था. मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो गयी थी. अब पापा ने मेरी बारी बारी नंगी चूचिओ को सहलाना शुरू कर दिया. मेरे निपल तन गये थे. अचानक पापा ने मेरी चूचिओ को पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया और मुझे अपनी तरफ पलटने की कोशिश की. चूचियाँ इतनी ज़ोर से दबाई थी कि अब और नींद का नाटक करना मुश्किल था.मैने हड़बड़ा के गहरी नींद में से उठने का नाटक किया,

“ क्क्क…कौन ? पापा आप !”

पापा को तो जैसे बिजली का झटका लगा. नशे के कारण मानो सोचने की शक्ति ख़तम हो गयी थी. उनके हाथ अब भी मेरी चुचिओ पे थे.

“कंचन तुम ! बेटी तुम यहाँ कैसे ?” पापा हड़बड़ाते हुए बोले.

“ज्ज्ज्जी… मम्मी के सिर में बहुत दर्द हो रहा था, तबीयत बहुत खराब थी इसलिए उन्होने हमे यहाँ सुला दिया और वो हम कमरे में सो रही है. आप कब आए हमे पता ही नहीं चला.”

“ बेटी मैं तो अभी अभी आया. मैने समझा कि मम्मी यहाँ सो रही है.”

मैं उनके बदन पे हाथ रख के चौंकते हुए बोली,

“ हाई राम ! आप तो बिल्कुल नंगे…….. हमारा मतलब है… आपके…..आपके कपड़े..? और …और… ऊई.. माआ ये क्या ?…! हमारा ब्लाउस ……..?”

पापा अब बुरी तरह घबडा गये थे.

“देखो बेटी, हमें क्या मालूम था कि तुम यहाँ लेटी हो. हम तो समझे कि तुम्हारी मम्मी लेटी है.” पापा का लंड भी अब सिकुड़ने लगा था.

“लेकिन हमारे कपड़े क्यों….?”

“बेटी तुम तो शादीशुदा हो, तुम्हें तो समझना चाहिए. हमने तो मम्मी समझ के तुम्हारे कपड़े….”

“ओ ! समझी. आपको मम्मी की ज़रूरत है. ठीक है मम्मी को ही आपके पास भेज देती हूँ.”

“नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है. उन्हें सोने दो. तबीयत खराब है तो क्यों डिस्टर्ब करती हो. लेकिन बेटी, मम्मी को आज जो कुच्छ हुआ उसका पता नहीं लगना चाहिए. नहीं तो अनर्थ हो जाएगा. हम से जो कुच्छ हुआ अंजाने में हुआ.”“ आप फिकर क्यों करते हैं पापा ?. मम्मी को कुच्छ नहीं पता चलेगा.”

पापा खुश हो गये और मेरे गालों पे किस करते हुए बोले,

“ शाबाश, कंचन तुम सुचमुच बहुत समझदार हो. लेकिन तुमने हमे पहले क्यों नहीं बताया ?”

“ कैसे बताती ? हमारी तो आँख लग गयी थी. लेकिन कॅंडल तो जल रही थी ना. आपने हमें पहचाना कैसे नहीं?”

“ कैसे पहचानते? एक तो तुम पेट के बल लेटी हुई हो ऊपर से तुम्हारा मुँह भी ढका हुआ था, और पीछे से तुम बिल्कुल मम्मी की तरह लगती हो.”

“ क्या मुतलब आपका ?”

“ बेटी तुम्हारा डील डोल बिल्कुल मम्मी की तरह है. ऊपर से सोती भी तुम बिल्कुल मम्मी के ही अंदाज़ में हो.”

“ मम्मी के अंदाज़ में सोती हूँ? मैं कुच्छ समझी नहीं?”

“ वो भी जब सोती है तो उसके कपड़े कहाँ जा रहे हैं उसको कोई खबर नहीं होती है. तभी तो हमसे आज ग़लती हुई.”

“हाई राम ! तो क्या हमारे कपड़े….?”

“ हां बेटी तुम्हारा पेटिकोट भी मम्मी की तरह जांघों के ऊपर तक चढ़ा हुआ था और पूरी टाँगें नंगी नज़र आ रही थी.”

“ हाअ….पापा ! आपने हमे ऐसी हालत में देख लिया ?”

“ तो क्या हुआ बेटी ? बचपन में तो हम ना जाने कितनी बार तुम्हें नंगी देख चुके हैं.” अब पापा का डर थोड़ा दूर हो गया था और शायद उनके लंड में फिर से जान आ रही थी.

“ जी बचपन में और अब में तो बहुत फरक है.” मैं शरमाती हुई बोली.

“ फरक है तभी तो हम तुम्हें पहचान नहीं सके. अब तो तुम्हारी जांघें बिल्कुल तुम्हारी मम्मी की तरह हो गयी हैं. इसके इलावा एक और भी कारण था जो हम समझे कि यहाँ मम्मी लेटी है.”

“ और क्या कारण था ?”

“ नहीं छोड़ो वो हम नहीं बता सकते.”

“ प्लीज़ बताइए ना पापा.”

“ नहीं बेटी वो बताने लायक नहीं है.”

“ ठीक है नहीं बता सकते तो हम कल ही मम्मी को बता देंगे की आपने हमारे कपड़े…..”.

“ नहीं नहीं बेटी ऐसा अनर्थ मत करना.”

“ तो फिर बता दीजिए.”

“ समझ नहीं आता कैसे बताएँ.”

“ अरे पापा हम भी तो शादी शुदा हैं. और फिर अपनी बेटी से क्या च्छुपाना ? बता दीजिए ना.” मैने पापा को उकसाते हुए कहा. मुझे पता था कि अभी तो शराब के नशे में वो सब कुच्छ बता सकते हैं.

“ ठीक है बता देते हैं. देखो बेटी बुरा मत मानना. सोते वक़्त तुम्हें कम से कम अपने कपड़ो का तो ध्यान रखना चाहिए. आज तो तुम्हारा पेटिकोट बिल्कुल ऊपर तक चढ़ा हुआ था और सच कहें बेटी, तुम्हारे नितूंब भी बिल्कुल तुम्हारी मम्मी की तरह बड़े बड़े हैं. यहाँ तक की तुम्हारी जांघों के बीच में से तुम्हारी गुलाबी पॅंटी भी नज़र आ रही थी. तुम्हारी मम्मी के पास भी बिल्कुल ऐसी ही पॅंटी है. सोते पे तुम पैर भी अपनी मम्मी की तरह फैला के सोती हो. तभी तो तुम्हारे वहाँ के….. हमारा मतलब है…… तुम्हारी जांघों के बीच के बॉल भी पॅंटी में से बाहर निकाल रहे थे. तुम्हारी मम्मी भी जब टाँगें फैला कर सोती है तो उसके वहाँ के बॉल पॅंटी से बाहर निकले हुए होते हैं. हमे ये बहुत ही मादक लगता है. इसलिए तुम्हारी मम्मी अक्सर हमे रिझाने के लिए भी जान बुझ कर ऐसे सोती है. हमे लगा कि तुम्हारी मम्मी हमें रिझा रही है.बस इसी कारण ग़लती ही गयी.”

“सच पापा हमे तो बहुत शरम आ रही है. आपने तो हमारा सब कुच्छ देख लिया.”

“अरे बेटी इसमें शरमाने की क्या बात है ? सब कुच्छ कहाँ देखा . थोड़ा बहुत देख भी लिया तो क्या हुआ ? आख़िर हम तुम्हारे पापा हैं.”

“ हमे तो अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि आप हमे पहचान नहीं सके.”

“तो तुम सोचती हो कि हमने जान बुझ के तुम्हारे कपड़े उतारे ? नहीं बेटी, तुम्हें बिल्कुल अंदाज़ नहीं है कि तुम कितनी अपनी मम्मी की तरह लगने लगी हो. आज तो दूसरी बार है, हमे तो पहले भी एक बार बहुत ज़बरदस्त धोका हो चुक्का है.” मैं ये सुन कर चौंक उठी.

“ पहले कब आपको धोका हुआ ?”

“ बेटी एक दिन किचन में पानी पीने गया था. तुम शायद नहा के निकली थी और सिर्फ़ पेटिकोट और ब्लाउस में ही थी. बदन गीला होने की वजह से ब्लाउस और पेटिकोट भी तुम्हारे बदन से चिपके जा रहे थे. तुम्हारी पीठ मेरी तरफ थी और तुम आगे झुक कर फ्रिज में से कुच्छ निकाल रही थी. मैं तो समझा की तुम्हारी मम्मी है.”

“ फिर क्या हुआ ?”

“ बस बेटी अब आगे बताने लायक बात नहीं है.”

“ बताइए ना….प्लीईएआसए पापा..” मैने बारे ही मादक स्वर में कहा. मैं उनकी वासना की आग फिर से भड़का देना चाहती थी ताकि वो खुल कर मुझसे बात कर सकें.

“ तुम तो बहुत ही ज़िद्दी हो. सच बेटी , पीछे से तुम बिल्कुल अपनी मम्मी जैसी लग रही थी. बिल्कुल मम्मी की तरह ही फैले हुए नितूंब हैं तुम्हारे. मुझे शक इसलिए भी नहीं हुआ क्योंकि तुमने वोही गुलाबी रंग की पॅंटी पहनी हुई थी जो आज पहनी है और जैसी मम्मी के पास भी है. और ठीक उसी तरह वो पॅंटी तुम्हारे इन नितुंबों के बीच में सिमटी जा रही थी जैसे ये मम्मी के नितुंबों के बीच में सिमट जाती है.” पापा फिर से मेरे चूतरो को पॅंटी के ऊपर से सहलाते हुए बोले.मेरा पेटिकोट तो पहले से ही कमर तक ऊपर चढ़ा हुआ था.

“ हाई पापा ! आपने तो अपनी बेटी की पॅंटी तक देख ली ?. और आज तो दूसरी बार देखी है. सच, हमे तो ये सोच सोच के ही बहुत शरम आ रही है.”

“ क्या करता बेटी ? एक तो तुम झुकी हुई थी और ऊपर से गीला पेटिकोट तुम्हारे नितुंबों पे चिपका जा रहा था. पॅंटी सॉफ नज़र आ रही थी. बस एक बहुत बड़ी ग़लती होते होते बची.”

“ कैसी ग़लती पापा?”

“ मैं तो पीछे से हाथ डाल के तुम्हें मम्मी समझ कर पकड़ने ही वाला था.”

“तो इसमें कैसी ग़लती ? एक बाप ने बेटी को पीछे से पकड़ भी लिया तो क्या हुआ ?”

“ नहीं नहीं तुम समझी नहीं. हम तो वो चीज़ पकड़ने जा रहे थे जो एक बाप अपनी बेटी की नहीं पकड़ सकता.”

“ ऐसी भी क्या चीज़ है हमारे पास पापा जो आप नहीं पकड़ सकते ?”

“ बस बेटी अब ज़िद ना करो. आगे हम नहीं बता सकते.”

“क्यों पापा….? प्लीईआसए…! बताइए ना…”

“नहीं नहीं अब आगे नहीं बता सकते. ज़िद ना करो.”

“ठीक है मत बताइए. हम ही कल सुबह मम्मी को सुबकुच्छ बता देंगे.”

“ऊफ़.. तुम तो बहुत खराब हो गयी हो. अच्छा बेटी बता देते हैं. हम तुम्हें मम्मी समझ कर तुम्हारी टाँगों के बीच में से हाथ डाल कर तुम्हारी उसको पकड़ने वाले थे.”

“ हाई राम ! पापा आप तो सुचमुच बहुत खराब हैं. क्यों इस तरह परेशान करते हैं आप मम्मी को ?” मैं पापा के साथ चिपकते हुए बोली. अब तो उनका लंड लोहे की रोड की तरह तना हुआ था. इस बातचीत के दौरान उनके हाथ अब भी मेरी चूचिओ पर थे, लेकिन अभी तक उन्हें इस बात का एहसास नहीं था.

“ हम नहीं, तुम्हारी मम्मी हमें परेशान करती है. उसकी है ही ऐसी कि जब तक दिन में एक दो बार ना पकड़ लें, हमे चैन नहीं आता.” अब तो पापा का लंड मेरे चूतरो में चुभ रहा था. मेरी चूत भी उनकी बातें सुन के गीली हो गयी थी. उनका डर दूर हो गया था और अब शराब का सरूर फिर असर कर रहा था. मैने उन्हें और बढ़ावा देते हुए पूचछा,

“ सच बहुत प्यार करते हैं आप मम्मी से. लेकिन ऐसा भी क्या है मम्मी कि उसमें जो आप हमेशा उतावले रहते हैं ?”

“ हाई बेटी क्या बताएँ, तुम तो शादीशुदा हो इसलिए तुम्हें बता सकते हैं. तुम्हारी मम्मी की वो तो बहुत फूली हुई है. बहुत ही जानलेवा है. हमने सोचा कि क्यों ना दिन की शूरवात अपनी प्यारी बीवी की फूली हुई उसको पकड़ के करें. हमने तो सपने में भी नहीं सोचा था की तुम हो. हमारे आने की आहट सुन के जब तुम सीधी हुई तब हमे पता चला कि वो मम्मी नहीं तुम थी. नहीं तो अनर्थ हो जाता. बोलो बेटी अब भी कहोगी कि एक बाप ने बेटी को पीछे से पकड़ लिया तो क्या हुआ ?”

“ हम तो अब भी वही कहेंगे पापा. अगर ग़लती से आपने हमारी वो पकड़ भी ली होती तो क्या हुआ. ग़लती तो सभी से हो जाती है.” मैं अब पापा को उकसा रही थी.

“ बेटी वोही ग़लती आज रात भी होने जा रही थी.”

“ तो क्या हुआ? ग़लती किसी की भी हो माफ़ कर देनी चाहिए और फिर आप तो हमारे पापा हैं, हम आपकी ग़लती माफ़ नहीं करेंगे तो फिर किसकी माफ़ करेंगे .”

पापा बारे प्यार से फिर मेरे गालों को चूमते हुए बोले,

“सच हमारी बिटिया तो बहुत समझदार है. लेकिन आज हमे, तुम्हारे और मम्मी के बीच एक फरक ज़रूर नज़र आया.”

“वो क्या पप्पू?”

“तुम्हारी वो तो मम्मी से भी ज़्यादा फूली हुई है.”

“हाई राम! आपको कैसे पता?” मैने चोन्क्ने का नाटक करते हुए पूचछा.

“बेटी अभी जब तुम गहरी नींद में सो रही थी तो हमने मम्मी समझ के तुम्हारी उसको सहला दिया था.”

“हे भगवान!…….सच?”

“देखो बुरा ना मानो बेटी, तुम जानती हो ये अंजाने में हो गया.”

“और क्या क्या फरक देखा आपने? ज़रा हमें भी तो पता लगे.”

“ बस एक और फरक ये है की तुम्हारी छातियाँ बहुत सख़्त और सुडोल हैं और तुम्हारी मम्मी की अब ढीली होती जा रही हैं.”

“लगता है आपकी ये ग़लती हमें कुच्छ ज़्यादा ही महेंगी पड़ रही है. और बताइए, और क्या क्या फरक देख लिया आपने?”

“बस बेटी इतना ही. उसके बाद तो तुम जाग गयी.”

“मान लीजिए मैं नहीं जागती, तो फिर क्या होता?”

“तब तो अनर्थ हो जाता.”

“क्या अनर्थ हो जाता?”

“देखो बेटी तुम तो जानती हो हम आज 15 दिन बाद आए हैं. हम तुम्हारे साथ वो ही कर बैठते जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है.”

“लेकिन पापा आप तो कल फिर दो महीने के लिए जा रहे हैं. आप तो इस वक़्त मम्मी को बहुत मिस कर रहे होंगे?” पापा लंबी साँस लेते हुए बोले,

‘क्या करें बेटी किस्मत ही खराब है.”

इस बात पे मैं बनावटी गुस्सा करते हुए बोली,

“अच्छा! तो आप मुझे कोस रहे हैं, कि मैं क्यूँ यहाँ सोने आ गयी?”

“नहीं बेटी ऐसी बात नहीं है. तुम यहाँ लेटो हमे तुम्हारे पास भी बहुत अच्छा लग रहा है.” ये कहते हुए पापा ने फिर मेरे गालों को चूम लिया.

मैं ठंडी साँस भरती हुई बोली,

“ये तो आप हमे खुश करने के लिए बोल रहे हैं. एक बात पूछु, सच सच बताएँगे?”

“पूच्छो बेटी.”

“आपने आज हमारी दो चीज़ें देखी. देखी ही नहीं बल्कि हाथ भी लगाया. वो दोनो चीज़ें मम्मी की ज़्यादा अच्छी हैं या हमारी?”

“ये कैसा सवाल है? ये हम कैसे कह सकते हैं?”

“क्यूँ नहीं कह सकते. मम्मी की उन चीज़ों को तो आप रोज़ ही हाथ लगाते हैं, और आज आपने हमारी उनको भी हाथ लगा के देख लिया है. बताइए ना प्लीज़…” मैने अपने चूतरो को पापा की ओर उचकाते हुए कहा. पापा का लंड अब तना हुआ था और मेरे चूतरो की दरार में फँस गया था. अब पापा भी वासना की आग में जल रहे थे. उन्होने मेरी चूत को अपनी मुट्ठी में कस लिया और सहलाते हुए बोले,

“तुम्हारी अच्छी हैं बेटी. तुम्हारी ये तो कहीं ज़्यादा फूली हुई है. तुम्हारी छातियाँ भी कहीं ज़्यादा सख़्त और कसी हुई हैं. तुमने तो हमें सुहाग रात की याद दिला दी”

“आऐईयईई……..इसस्स्स्स्सस्स……पापा ! ये क्या कर रहे हैं? प्लीज़….से ! छोड़िए ना…. ऊपफ़ आपने तो अपनी बेटी की ही पकड़ ली. अपनी बेटी के साथ…….”

“ बेटी अभी अभी तुम ही ने तो पूचछा था, किसकी अच्छी है. हम तो सिर्फ़ एक बार फिर चेक कर रहे हैं कि तुम्हारी कितनी अच्छी है.” पापा मेरी चूत को सहलाते हुए बोले.

“इसस्सस्स…..एयाया…… अब छोड़ भी दीजिए. चेक तो कर लिया ना.” लेकिन मैने अपने आप को छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की. बल्कि अपने बदन को इस तरह से अड्जस्ट किया कि मेरी चूत अच्छी तरह से पापा के हाथ में समा जाए.

“बस थोड़ा और चेक कर लें ताकि शक की कोई गुंजाइश ना रहे.” पापा मेरी फूली हुई चूत को अपनी मुट्ठी में मसल्ते हुए बोले.

“ हाई राम ! पापा… ! कितने खराब हैं आप? कितनी चालाकी से हमारी वो पाकर ली.” अब तो पापा खुले आम मेरी चूत को मसल रहे थे और सहला रहे थे.

“ ईइसस्सस्स…. छोड़िए ना….पापा…आआआअ…. प्लीज़.… अब तो देख लिया ना आपकी बेटी की कैसी है, अब तो छोड़ दीजिए.”

“इतनी जल्दी कैसे पता चलेगा ? हमे अच्छी तरह देखना पड़ेगा.”

“अब और कैसे देखेंगे… छोड़िए भी.”

“सच बेटी टाँगों के बीच में तो तुम अपनी मम्मी से भी दो कदम आगे हो.”

“ क्या मट्लब है आपका ?”

“तुम्हारी वो तो बिकुल डबल रोटी की तरह फूली हुई है.”

“ हाई पापा ऐसी तो सभी लड़कियों की होती है.”

“नहीं बेटी सभी की इतनी फूली हुई नहीं होती.”

“अच्छा जी ! तो और कितनों की पकड़ चुके हैं आप ?”

“ सच तुम्हारी मम्मी की छोड़ के और किसी की नहीं.”

“झूट !”

“तुम्हारी कसम बेटी. हमने आज तक किसी दूसरी औरत के बारे में सोचा तक नहीं, उसकी वो पकड़ना तो दूर की बात है.”

मैं ये बात तो अच्छी तरह जानती थी कि पापा ने मम्मी को कभी धोखा नहीं दिया. वो तो मम्मी के ही दीवाने थे. पिच्छाले 25 सालों से उन्होने सिर्फ़ एक ही औरत को चोदा था. और वो थी मेरी मम्मी. लेकिन मैने सोच लिया था कि आज की रात वो एक दूसरी औरत को चोदेन्गे — उनकी प्यारी बेटी.

“अगर हम सबूत पेश कर दें कि आपने दूसरी औरत की भी पकड़ी है तो ?”

“हम ज़िंदगी भर तुम्हारे गुलाम बन जाएँगे.” पापा बड़े विश्वास के साथ बोले.

“सोच लीजिए.”

“इसमें सोचना क्या है?”

“ अच्छा, तो इस वक़्त आप इतनी देर से मम्मी की मसल रहे हैं ?”

“ओह…! ये कोई दूसरी औरत थोड़े ही है. ये तो हमारी प्यारी बिटिया रानी है.” पापा ने फिर से मेरे गाल को चूमते हुए मेरी चूत को अपनी मुट्ठी में ज़ोर से दबा दिया.

“ आआईयइ…ईईस्स्स्स्स्स्स………धीरे……तो क्या बेटी औरत नहीं होती है ?”

“ औरत होती है लेकिन दूसरी औरत नहीं कहलाती है. वो तो अपनी ही होती है ना.”

“अगर आपने अच्छी तरह चेक कर लिया हो कि आपकी बिटिया की कितनी फूली हुई है तो अब हमारी छोड़ भी दीजिए प्लीज़…..”

“ठीक है छोड़ देते हैं लेकिन थोड़ा ऊपर भी चेक करना पड़ेगा.”

ये कहते हुए पापा ने मेरी चूत छोड़ के मेरे खुले हुए ब्लाउस के नीचे से हाथ डाल के चूचिओ को पकड़ लिया और सहलाते हुए बोले,

“ कंचन तुम तो ऊपर से भी बिल्कुल मम्मी जैसी हो. अब हमे समझ में आया कि हम तुम्हें बार बार मम्मी क्यों समझ लेते हैं. लेकिन तुम्हारी छातियाँ तो सुचमुच बहुत सुन्दर और कसी हुई हैं.”

“इससस्स….आअहह…. धीरे प्लीज़…” पापा पीछे से मेरे साथ चिपके हुए थे और मेरी बड़ी बड़ी चूचिओ को सहला रहे थे. उनका तना हुआ मोटा लंड मेरे चूतरो की दरार में घुसा हुआ था और मेरी पॅंटी को भी मेरे चूतरो के बीच की दरार में घुसेड दिया था. मैं भी पापा का लंड पकड़ना चाहती थी.

“ऊओफ़.. पापा ये क्या चुभ रहा है ?”

ये कहते हुए मैं हाथ पीछे की ओर ले गयी और पापा के लंड को पकड़ लिया जैसे कि मैं चेक करना चाहती हूँ कि क्या चुभ रहा है. पापा का लंड हाथ में आते ही मैने हाथ एकदम वापस खींच लिया.

“हाई राम ! पापा ! आपका तो खड़ा हुआ है. हे भगवान ! कहीं आपका अपनी बेटी के लिए तो नहीं खड़ा है ?” मैं झूठा गुस्सा करते हुए बोली.

“नहीं नहीं बेटी, देखो आज हम 15 दिन के बाद वापस आए हैं और कल फिर दो महीने के लिए चले जाएँगे. तुम तो शादीशुदा हो और समझदार हो. अगर तुम्हारा पति इतने दिनों के बाद वापस आए और उसे अगले दिन फिर दो महीने के लिए जाना हो तो वो तुम्हारे साथ क्या करेगा ?”

जी हमें क्या पता ?”

“अब क्यों भोली बनती हो, बोलो ना.”

“जी कैसे बोलें हमे तो बहुत शरम आ रही है.”

“बेटी अपने पापा से क्या शरमाना. बोलो , जबाब दो”

“जी वो तो….वो तो……हमारा मट्लब है…”

“अरे शरमाओ नहीं बोलो.”

“जी वो तो सारी रात ही……”

“सारी रात क्या बेटी ?”

“जी हमारा मतलब है कि वो तो सारी रात हमे तंग करते.”

“ कैसे तंग करता बेटी ?”

“ जैसे एक मरद अपनी बीवी को करता है.”

“ ओ ! अगर वो तुम्हें सारी रात तंग करता तो तुम उसे तंग करने देती ?”

“जी ये तो उनका हक़ है. हम कौन होते हैं उन्हें रोकने वाले.”

“ तुम्हारा मट्लब है तुम उसे इसलिए तंग करने देती क्यूंकी ये उसका हक़ है, इसलिए नहीं कि तुम्हें भी तंग होने में मज़ा आता है ? बोलो ?”

“ तंग होने में तो हर औरत को मज़ा आता है.”

“ तो तुम्हें तंग करने के लिए उसका खड़ा तो होता होगा ना बेटी ?”

“ कैसी बातें करते हैं पापा ? बिना खड़ा हुए कैसे तंग कर सकते हैं ?”

“ बस ये ही तो हम भी तुमसे कहना चाहते हैं. हमारा भी इसीलिए खड़ा है क्योंकि हम भी आज तुम्हारी मम्मी को तंग करना चाहते थे. लेकिन तुमने तो हाथ ऐसे खींच लिया जैसे ये तुम्हें काट खाएगा. तुम भी देख लो कि हमारा ये तुम्हारी मम्मी के लिए कितना परेशान है.” ये कहते हुए पापा ने मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया. मेरी तो मानो बरसों के मुराद पूरी हो गयी. मैं शरमाने का नाटक करती हुई बोली,

“ हाई पापा ये क्या कर रहे हैं हमे तो बहुत शरम आ रही है.”

“ बेटी शरम की क्या बात है ? किसी मरद का पहली बार तो पकड़ नहीं रही हो. ठीक से पाकड़ो ना. तुम्हें अक्च्छा नहीं लगा हमारा ?”

बाप रे ! क्या मोटा लॉडा था. इतना मोटा की मेरी उंगलिओ के घेरे में भी नहीं आ रहा था. मैं उनके लॉड पे हाथ फेरते हुए बोली,

“हाई राम! ये तो कितना मोटा है!”

“पसंद नहीं आया?”

“ नहीं पापा आपका तो बहुत अक्च्छा है. लेकिन सच ! ये तो बहुत ही मोटा है !”

“तुम्हारे पति का ऐसा नहीं है ?”

“ जी इतना मोटा नहीं है. बेचारी मम्मी कैसे झेलती है इसे ?”

“ हाई बेटी क्या बताएँ, तुम्हारी मम्मी तो इसे बहुत प्यार करती है. सच वो इसके बिना रह नहीं सकती है. काश इस वक़्त वो यहाँ होती. लेकिन कोई बात नहीं हमारी प्यारी बिटिया तो है ना हमारे पास.” अब मैं पापा के मोटे लॉड को बड़े प्यार से सहला रही थी. अब मैने पापा की ओर करवट ले ली थी. पापा भी मेरी चूचिओ को सहला रहे थे. मैं पापा के लॉड को दबाते हुए बोली,

“ हाई पापा आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे बीवी नहीं तो बेटी ही चलेगी.”

“ क्यों नहीं चलेगी ? बेटी बिल्कुल बीवी जैसी ही तो लगती है. लेकिन लगता है हमारी बेटी को हमारा पसंद नहीं आया.”

“नहीं पापा हमे तो आपका बहुत पसंद आया. हम तो सोच रहे हैं कि इस मोटे राक्षस ने तो अब तक बेचारी मम्मी की उसको बहुत चौड़ा कर दिया होगा.”

“ नहीं बेटी हम 25 साल से तुम्हारी मम्मी को चोद रहे हैं लेकिन अभी तक उसकी बहुत टाइट है.” पापा ने पहली बार चोदने जैसे शब्द का इस्तेमाल किया. मैं समझ गयी कि पापा अब धीरे धीरे लाइन पे आ रहे थे.

“ सच पापा, काश हम आपकी बेटी ना हो के आपकी बीवी होते !. हम आपको आज इस तरह तड़पने नहीं देते.”

पापा मेरे विशाल चूतरो पे हाथ फेरते हुए बोले,

“ बेटी हम तो तुम्हें बिकुल मम्मी ही समझ रहे हैं. देखो ना तुम्हारे ये विशाल नितूंब बिल्कुल मम्मी की तरह ही फैले हुए हैं. और ये तुम्हारी पॅंटी भी इनके बीच में ठीक मम्मी की पॅंटी की तरह ही घुसी जा रही है.” पापा ने पॅंटी के ऊपर से ही एक उंगली मेरी गांद के छेद पे टिका दी.

“ इसस्सस्स…पापा ! ये पॅंटी अपने आप हमारे नितुंबों के बीच में नही घुसी जा रही है. इसे तो आपके इस डंडे ने धकेल के हमारे नितुंबों के बीच में घुसेड दिया है. अक्च्छा हुआ हमने पॅंटी पहनी हुई है नहीं तो राम जाने आज आपका ये मोटा डंडा कहीं और ही घुस जाता.”

“ अक्च्छा होता अगर घुस जाता. आख़िर अंजाने में ही तो घुसता.” पापा ने अब मेरी पॅंटी के अंडर हाथ डाल के मेरे चूतरो को सहलाना शुरू कर दिया था.

“ कंचन एक बात पूच्छें, बुरा तो नहीं मानोगी ?”

“ नहीं पापा पूच्हिए ना. बुरा क्यों मानेंगे ?”

“ बेटी जब तुम 10थ में थी तब एक बार तुम्हारी मम्मी ने हमे बताया था कि तुम्हारी चूत पे बहुत घने और लंबे बाल हैं. क्या ये बात सच है? हम इस लिए पूछ रहे हैं क्योंकि आज भी जब हम आए तो तुम्हारी फैली हुई टाँगों के बीच में से , पॅंटी से बाहर निकले हुए तुम्हारी चूत के बाल नज़र आ रहे थे.” अब तो पापा खुल के चूत जैसे शब्द इस्तेमाल करने लगे. शायद वासना की आग और शराब के नशे का असर था. पापा के मुँह से अपनी चूत की बात सुन के मेरे तन बदन में वासना की आग लग गयी. मैं बहुत भोले स्वर में बोली,

“जी पापा, हम क्या करें, बचपन से ही हमारे वहाँ बहुत घने बाल हैं. 12 साल की उमर में ही खूब बाल आ गये थे. और 16 साल की होते होते तो बिल्कुल जंगल ही हो गया था. हमारी सहेलियाँ हमे चिढ़ाती थी कि क्या जंगल उगा रखा है. हमे तो स्कूल में भी बहुत शरम आती थी. हमेशा बाल पॅंटी से बाहर निकले रहते थे और लड़के हमारी स्कर्ट के नीचे झाँकने की कोशिश करते थे.”

“ हाई कितने नालायक थे ये लड़के जो हमारी बेटी की स्कर्ट के नीचे झाँकते थे. वैसे बेटी जब तुम 16 साल की थी तो एक बार हमारी नज़र भी ग़लती से तुम्हारी स्कर्ट के नीचे चली गयी थी.”

“हाई राम! ना जाने क्या दिखा होगा आपको ?” मैं पापा के लॉड को बारे प्यार से सहलाते हुए बोली.

“अब बेटी तुम बैठती ही इतनी लापरवाही से थी कि तुम्हारी स्कर्ट के नीचे से सब दिख जाता था.”

“ हाई 16 साल की उमर में आपने हमारा सब कुच्छ देख लिया ?”

“ अरे नहीं बेटी सब कुच्छ कहाँ दिखा. हां तुम्हारी पॅंटी ज़रूर नज़र आ रही थी. सिर्फ़ पॅंटी नज़र आती तब भी हम ध्यान नहीं देते लेकिन पॅंटी में कसी हुई तुम्हारी चूत का उभार तो हम देखते ही रह गये. हम तो सोच भी नहीं सकते थे कि 16 साल की उमर में ही हमारी बेटी की चूत इतनी फूली हुई होगी. सच हम तो उसी दिन से अपनी बिटिया रानी के दीवाने हो गये थे.” शराब का नशा और वासना की आग में अब पापा बिना किसी झिझक के अपनी बेटी की चूत के बारे में बातें कर रहे थे. मेरे पास उनसे सब कुच्छ उगलवाने का बहुत अच्छा मोका था.

“झूट ! बिल्कुल झूट. आप तो हमेशा मम्मी के ही आगे पीछे घूमते रहते थे. हमारी तरफ तो आपने कभी देखा ही नहीं. हम कब जवान हुए और कब हमारी शादी हो गयी, आपको तो पता ही नहीं चला होगा.” मैं पापा के बारे बारे बॉल्स सहलाते हुए बोली.

“ नहीं बेटी, ऐसा ना कहो. तुम्हारी बड़ी होती चूचिओ पे तो हमारी नज़र बहुत पहले से ही थी लेकिन जिस दिन पॅंटी में कसी हुई तुम्हारी फूली हुई चूत देखी तब से तो हम तुम्हारी चूत के भी दीवाने हो गये. हमेशा तुम्हारी स्कर्ट के नीचे झाँकने का मोका ढूढ़ते थे. लेकिन ये सब तुम्हारी मम्मी की नज़र बचा के करना आसान नहीं था. बाथरूम में जा के तुम्हारी उतारी हुई पॅंटी को एक बार जब सूँघा तो ज़िंदगी में पहली बार एक कुँवारी चूत की खुश्बू का नशा कैसा होता है, पता चला. सच हमारी बिटिया रानी की चूत की खुश्बू हमे पागल बना देती थी. और तुम्हारी झांतों के लंबे लंबे बाल भी कभी कभी तुम्हारी पॅंटी में लगे मिलते थे. हम तो वो दिन कभी भुला नहीं सकते. ज़रा देखें हमारी बिटिया की चूत पे अब भी उतने ही बाल हैं की नहीं.” ये कहते हुए पापा ने मेरी पॅंटी नीचे सरका दी और मेरी घनी झांतों में हाथ फेरने लगे.

“ इसस्स्सस्स…आआआआअ…..बहुत लंबे हैं ना बाल पापा ?”

“ हां बेटी बहुत ही घने हैं. जब औरत नंगी हो जाती है तो औरत की चूत के बाल ही उसकी लाज होते हैं, उसका गहना होते हैं और उसका शृंगार होते हैं.”

“ लेकिन पापा, मम्मी की में और हमारी में ऐसा क्या फरक था ? सभी औरतों की एक ही सी तो होती है.”

“तुम नहीं समझोगी बेटी. एक कुँवारी चूत और कई बार चुदी हुई चूत की खुश्बू में बहुत फरक होता है. सच तुम्हारी कुँवारी चूत की खुश्बू ने तो हमे पागल कर दिया था. जिस दिन स्कर्ट के नीचे से तुम्हारी पॅंटी में कसी हुई चूत की झलक मिल जाती हम धन्य हो जाते.” पापा मेरी चूत को ज़ोर से मसल्ते हुए बोले.

“ इसस्स..आऐ….अगर आपको हमारी इतनी अच्छी लगती थी तो कभी लेने की इच्छा नहीं हुई ?”

“ बहुत मन करता था. लेकिन अपनी 16 साल की फूल सी बेटी की कुँवारी चूत लेते हुए डर भी लगता था. और फिर तुम्हारी मम्मी भी हमेशा घर में होती थी.”

“ झूट ! जिसका लेने का दिल करता है वो किसी भी तरह ले लेता है. आप हमारी लेना ही नहीं चाहते होंगे. मम्मी की तो आप रोज़ लेते थे और कभी कभी तो सारी सारी रात लेते थे.”

“ ये सब तुम्हें कैसे पता बेटी ?”

“ मम्मी की मुँह से आवाज़ें जो आती थी.”

“ किसी आवाज़ें ?”

“ वैसी आवाज़ें जो एक औरत के मुँह से उस वक़्त निकलती हैं जब कोई दमदार मरद उसकी ले रहा होता है.” मैं पापा के मोटे लॉड को दबाते हुए बोली. “और उस वक़्त तो आपको अपनी बेटी की याद भी नहीं आती होगी.”

“बेटी तुम्हारी कसम, जब से तुम्हारी पॅंटी में कसी हुई चूत के दर्शन हुए तब से हम चोदते तुम्हारी मम्मी को ज़रूर थे लेकिन ये सोच सोच के कि हम अपनी 16 साल की प्यारी बिटिया की कुँवारी चूत चोद रहे हैं. एक बार तो मम्मी को चोदते हुए हमारे मुँह से तुम्हारा नाम भी निकल गया . बड़ी मुश्किल से हमने बात पलटी थी नहीं तो तुम्हारी मम्मी को शक हो जाता.” पापा के चूत पे हाथ फेरने से मेरी चूत बुरी तरह गीली हो चुकी थी और चूत का रस बाहर निकल कर मेरी झांतों को भी गीला कर रहा था. पापा की उंगलियाँ भी शायद चूत के रस में गीली हो गयी थी क्योंकि अचानक पापा ने एक उंगली मेरी गीली चूत में सरका दी.

“ऊऊिइ….इससस्स…पापा ! … अगर आपने सचमुच हमारी 16 साल की उमर में ले ली होती तो आज हमारी वो किसी और के लायक नहीं रह जाती.”

“ऐसा क्यों कहती हो कंचन ?”

“आपका ये कितना मोटा है. हमारी कुँवारी चूत का क्या हाल कर देता. कभी सोचा भी है ? हमारे पति को सुहाग रात को ही पता चल जाता.” अब तो मैने भी ‘चूत’ जैसे शब्द का इस्तेमाल कर लिया. मैं जानती थी कि लोहा अब काफ़ी गरम था.

तभी तो हमने अपनी बिटिया की उस वक़्त नहीं ली.” पापा ने इस बार मेरे होंठों को चूमते हुए कहा.

“लेकिन अब तो हम शादीशुदा हैं.”

“क्या मतलब?”

“पापा, 16 साल की उमर में आप अपनी बेटी की लेना चाहते थे, लेकिन अब अपनी बेटी की लेने का मन नहीं करता?”

“बहुत करता है बेटी.”

“तो फिर ले क्यूँ नहीं लेते अपनी प्यारी बिटिया की चूत? देखिए ना आपके मोटे लॉड के लिए कितना तरस रही है.”

“तुम तो हमारी बेटी हो.” पापा थोड़ा हिचकिचाए. लेकिन मैं अच्छी तरह जानती थी कि अपनी बेटी को चोदने के लिए वो हमेशा से ही पागल थे.

“ओफ! पापा बेटी के पास चूत नहीं होती क्या? अच्छा चलिए हमें मम्मी समझ के चोद लीजिए.”

“नहीं, नहीं मम्मी समझ के क्यों, हम अपनी बेटी को बेटी समझ के ही चोदेन्गे.” ये कहते हुए पापा ने मेरे पेटिकोट का नाडा खींच लिया और पेटिकोट को मेरे बदन से अलग कर दिया. फिर उन्होने मेरा ब्लाउस भी उतार दिया. अब पापा पागलों की तरह मेरे बदन को और चूचिओ को चूमने और चाटने लगे. मेरे मुँह से भी वासना से भरी सिसकारियाँ निकलने लगी.

“कंचन बेटी तुम्हारा बदन तो बिल्कुल वैसा है जैसा तुम्हारी मम्मी का सुहाग रात के वक़्त था.”

“हाई पापा, अपनी सुहाग रात समझ के अपनी बेटी को चोद लीजिए.” धीरे धीरे पापा मेरे बदन को चूमते हुए मेरी टाँगों के बीच में पहुँच गये.

“ईइस्स्स…अया…पापा मेरी इस पॅंटी ने ही तो आपको इतना तंग किया है ना, उतार दीजिए अपनी बेटी की पॅंटी अपने हाथों से.”

“हाँ बेटी तुम्हारी इस पॅंटी ने तो बरसों से मेरी नींद हराम कर रखी है. आज तो मैं इसे अपने हाथों से उतारूँगा.” ये कहते हुए पापा ने मेरी पॅंटी खींच के मेरी टाँगों से निकाल दी. अब मैं बिल्कुल नंगी पापा के सामने टाँगें फैलाए पड़ी हुई थी. पापा ने मेरी टाँगें चौड़ी की और अपने होंठ मेरी जलती हुई चूत पे टिका दिए. मैं आज अपने ही बाप से चुदने जा रही थी, ये सोच के मेरी वासना की आग और भी भड़क रही थी. मैने चूतेर उचका के अपनी चूत पापा के होंठों पे रगड़ दी. अब तो पापा पागलों की तरह मेरी चूत चाट रहे थे. आज तक तो सिर्फ़ मेरी पॅंटी सूंघ कर ही मेरी चूत की खुश्बू लेते थे, लेकिन आज तो असली चीज़ सामने थी. मैं पापा का सिर अपनी चूत पे दबाते हुए बोली,

“पापा, किसकी खुश्बू ज़्यादा अच्छी लगी, मेरी पॅंटी की या चूत की?”

“अरे बिटिया, दोनो ही बहुत मादक हैं. पति के घर जाने से पहले अपनी पॅंटी हमें ज़रूर देती जाना.”

“हाई पापा, अब तो ये चूत और पॅंटी दोनो आपकी है, जब मन करे ले लीजिए.” काफ़ी देर चूत चाटने के बाद पापा खड़े हुए और अपने मोटे लॉड का सूपड़ा मेरे होंठों पे टीका दिया. मैने जीभ निकाल के सुपरे को चॅटा और फिर पूरा मुँह खोल के उस मोटे काले मूसल को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी. बड़ी मुश्किल से मैने उनका लंड मुँह में लिया. पापा का लंड चूस के तो मैं धन्य हो गयी. आज तक तो इस मूसल को सिर्फ़ मम्मी ने ही चूसा था. सपनों में तो मैं ना जाने कितनी बार चूस चुकी थी. पापा मेरे मुँह को पकड़ के मेरे मुँह को चोदने लगे. उनके मोटे मोटे बॉल्स नीचे पेंडुलम की तरह झूल रहे थे. फिर उन्होने मेरे मुँह से लंड निकाला और मेरे होंठों को चूमते हुए बोले,

“कंचन मेरी जान, अब अपनी प्यारी चूत को चोदने दो.” मैने चुदवाने की मुद्रा में अपनी टाँगें चौड़ी कर के मोड़ ली. अब मेरी चूत पापा के सामने थी.

“लीजिए पापा, अब मेरी चूत आपके हवाले है.” पापा ने अपना मोटा सुपरा मेरी चूत के मुँह पे टीका दिया. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक धक करने लगा. आख़िर वो घड़ी भी आ गयी थी जब पापा का लंड मेरी चूत में जाने वाला था. पापा ने लॉड के सुपरे को मेरी चूत के कटाव पे थोड़ी देर रखा और फिर धीरे से मेरी चूत में दाखिल कर दिया. मेरी आखों के सामने तो जैसे अंधेरा सा च्छा गया.

“आआऐईईइ…..इसस्स्स्सस्स….ऊऊऊई माआआ….. मर गयी. आअहह…इससस्स…आ.” पापा के मोटे लॉड ने मेरी चूत के छेद को इतना ज़्यादा चौड़ा कर दिया था, ऐसा लगता था कि मेरी चूत फॅट ही जाएगी.

“क्या हुआ बेटी?” पापा ने लंड थोड़ा सा और अंडर सरकाते हुए पूचछा.

“पापा, ईीीइसस्स….बहुत…एयेए… बहुत मोटा है आआपका. आप तो हमारी चूत फाड़ डालेंगे.”

“हम अपनी प्यारी बिटिया की चूत कैसे फाड़ सकते हैं?” पापा मेरे होंठों का रसपान करते हुए बोले.

पापा ने मेरी दोनो टाँगें मोड़ के मेरे घुटने मेरी चुचिओ से चिपका दिए थे. अब तो मैं बिल्कुल लाचार थी और मेरी चूत पापा के मोटे काले लॉड की दया पे थी. हलाकी अब तक तो पति, देवर, ससुरजी और छ्होटे भाई के लंबे तगड़े लंड मुझे चोद चुके थे, लेकिन आज पापा का लंड झेलना भारी पड़ रहा था. मैं ये सोच कर काँप उठी कि अगर 16 साल की उमर में ही पापा ने मुझे चोद दिया होता तो मेरी चूत का क्या हाल हो जाता. इतने में पापा ने अपना लंड थोड़ा सा मेरी चूत के बाहर खींचा और फिर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. आधे से ज़्यादा लॉडा मेरी चूत में समा गया.

“आाआऐययईईईईईई….ऊऊऊीीईईईई माआआआ……..आहह धीरे….अया…धीरे..ईीीइससस्स….”

इससे पहले कि मैं कुच्छ संभलती पापा ने फिर से अपना लंड सुपरे तक बाहर खींचा और इस बार एक और भी भयंकर धक्का मार के पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया.

“आआअहह…आाऐययइ…..मार डाला.. फाड़ डालिए. …… आपको क्या? इससस्स.. बेटी की चाहे फॅट जाए.” पापा का मोटा लॉडा आख़िर जड़ तक मेरी चूत में घुस गया था और उनके मोटे मोटे बॉल्स मेरी गांद के छेद पे दस्तक दे रहे थे. मेरा बदन पसीने में नहा गया था. पापा थोरी देर बिना हिले मेरे ऊपेर पड़े रहे और मेरी चूचिओ और होंठों का रास्पान करते रहे. मेरी चूत का दर्द भी अब कम होने लगा था.

“बेटी थोड़ा दर्द कम हुआ?” पापा मेरी चूचिओ को दबाते हुए बोले.

“हाँ पापा, अब जी भर के चोद लीजिए अपनी प्यारी बिटिया को.” मैं उनके कान में फुसफुसाते हुए बोली. अब पापा ने पूरा लंड बाहर निकाल के मेरी चूत में पेलना शुरू कर दिया. सच! ज़िंदगी में किसी मरद से चुदवाने में इतना मज़ा कभी नहीं आया था. अब मुझे एहसास हुआ कि क्यूँ मम्मी रोज़ चुदवाने के लिए उतावली रहती है. मेरी चूत बहुत गीली हो गयी थी उसमें से फ़च…फ़च…फ़च का मादक संगीत निकल रहा था. कुच्छ देर तक चोदने के बाद उन्होने अपना लंड मेरी चूत से बाहर खींचा और मेरे मुँह में डाल दिया. पापा का पूरा लंड और बॉल्स मेरी चूत के रस में सने हुए थे. मैने पापा का लंड और बॉल्स चाट चाट कर साफ कर दिए. अब पापा बोले,

“कंचन मेरी जान, अब थोड़ा कुतिया बुन जाओ. अपने इन जान लेवा नितुंबों के दर्शन भी तो करा दो.”

“आपको मम्मी के नितूंब बहुत आछे लगते हैं ना?” मैं पापा के बॉल्स सहलाते हुए बोली.

“हां बेटी बहुत ही सेक्सी नितूंब हैं तुम्हारी मम्मी के.”

“ और हमारे ? हमारे नितूंब नहीं अच्छे लगे आपको?”

“तुम्हारे नितूंब तो बिल्कुल जान लेवा हैं बेटी. जुब नहा के टाइट पेटिकोट में घूमती हो तो ऐसा लगता है जैसे पेटिकोट फाड़ के बाहर निकल आएँगे. तुम्हारे मटकते हुए चूतेर देख के तो हमारा लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो जाता है.”

“हाई पापा इतना तंग करते हैं हमारे नितूंब आपको? ठीक है मैं कुतिया बन जाती हूँ. अब ये नितूंब आपके हवाले. आप जो चाहे कर लीजिए.” ये कह कर मैने जल्दी से पापा के लंड के मोटे सुपरे को चूम लिया और फिर कुतिया बन गयी. अब मेरी चूचियाँ बिस्तेर पे टिकी हुई थी और चूतेर हवा में लहरा रहे थे. मैने चूतेर चुदवाने की मुद्रा में उचका रखे थे. पापा मेरे विशाल चूतरो को देख कर दंग रह गये. उन्होने मेरे दोनो चूतरो को अपने हाथ में दबोचा और अपना मुँह उनके बीच में घुसेड दिया. अब मैं कुतिया बनी हुई थी और पापा मेरे पीछे कुत्ते की तरह मेरे चूतरो के बीच मुँह दिए मेरी चूत चाट रहे थे. फिर उन्होने मेरे चूतरो को पकड़ के चौड़ा किया और मेरी गांद के छेद के चारों ओर जीभ फेरने लगे. मैं तो अब सातवें आसमान पे थी. बहुत ही मज़ा आ रहा था. इतने पापा ने अपनी जीभ मेरी गांद के छेद में घुसेड दी. मैं ये ना सह सकी और एकदम से झाड़ गयी. काफ़ी देर तक इसी मुद्रा में मेरी चूत और गांद चाटने के बाद उन्होने दोनो हाथों से मेरे चूतरो को पकड़ा और अपने मोटे लंड का गरम गरम सुपरा मेरी लार टपकाती चूत पे टिका दिया……..

मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. तभी पापा ने एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया और उनका लंड चूत को चीरता हुआ पूरा अंडर समा गया.

“ आाऐययईईई….आआअहह….आह.” मेरे मुँह से ज़ोर की चीख निकल गयी.

“बेटी ऐसे चिल्लाओगी तो मम्मी जाग जाएगी.”

“आप भी तो हमें कितनी बेरहमी से चोद रहे हैं पापा.” पापा के मोटे मूसल ने मेरी चूत को बुरी तरह से फैला के चौड़ा कर दिया था. मुझे डर था की कहीं मेरी चूत सुचमुच ही ना फॅट जाए. अब पापा ने मेरी कमर पकड़ के धक्के लगाना शुरू कर दिया. आसानी से उनका लंड मेरी चूत में जा सके इसलिए अब मैने टाँगें बिल्कुल चौड़ी कर दी थी. मीठा मीठा दर्द हो रहा था. मैं अपने ही बाप से कुतिया बन के चुदवा रही थी.

“ कंचन बेटी तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है.” फ़च फ़च.. फ़च…..फ़च फ़च….फ़च… की आवाज़ें ज़ोर ज़ोर से आ रही थी. मेरी चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी. मैं इतनी उत्तेजित हो गयी थी की अपने चूतेर पीछे की ओर उचका उचका के पापा का लंड अपनी चूत में ले रही थी.

“ कंचन मेरी जान, तुम्हारी मम्मी को चोद कर भी आज तक इतना मज़ा नहीं आया.”

मैं तो वासना में पागल हुई जा रही थी. शायद अपने ही बाप से चुदवाने के एहसास ने मेरी वासना को और भड़का दिया था. पापा मेरे चूतरो को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए बोले,

“कंचन बेटी. सच इन चूतरो ने तो हमारा जीना ही हराम कर रखा था. और तुम्हारा ये गुलाबी छेद!” ये कहते हुए उन्होने एक उंगली मेरी गांद में सरका दी.

“आआआहह…….. ईीइससस्स… ये क्या कर रहे हैं पापा?”

“बेटी तुम्हारे पति ने कभी इस छेद को प्यार किया है?” पापा अब मेरी गांद में उंगली अंडर बाहर कर रहे थे.

“आआी…ईईस्स्स्स… जी उन्होने तो कभी नहीं किया.” मैं समझ गयी थी कि अब पापा मेरी गांद भी मारना चाहते थे.मुझे मालूम था कि पापा को मम्मी की गांद मारने का बहुत शौक है. अपने ही बाप से गांद मरवाने की बात सोच सोच कर मैं बहुत उत्तेजित हो गयी थी और मेरी चूत तो इतनी गीली थी कि रस बह कर मेरी टाँगों पे बह रहा था. आख़िर वही हुआ जिसका मुझे अंदेशा था.

पापा मेरी गांद में उंगली करते हुए बोले,

“ कंचन बेटी हम तुम्हारे इस गुलाबी छेद को भी प्यार करना चाहते हैं.”

“हाई पापा आपको हमारे चूतेर इतने पसंद हैं तो कर लीजिए जी भर के उस छेद से प्यार. आज की रात मैं पूरी तरह से आपकी हूँ.”

“शाबाश मेरी जान , ये हुई ना बात. हमे पता था की हमारी प्यारी बिटिया हमे गांद ज़रूर देगी. अब अपने ये लाजबाब चूतेर थोरे से और ऊपर करो” मैने चूतेर ऊपर की ओर इस तरह उचका दिए कि पापा का लंड आसानी से मेरी गांद में जा सके. पापा ने मेरी गांद से उंगली निकाली और नीचे झुक के अपनी जीभ मेरी गांद के छेद पे टीका दी. मेरी तो वासना इतनी भड़क उठी थी की अब और सहन नहीं हो रहा था. शराब के नशे में वो धीरे धीरे मेरी गांद चाट रहे थे और कभी कभी जीभ गांद के छेद में घुसेड देते. एक हाथ से वो मेरी लंबी लंबी झाँटें सहला रहे थे.

“सच बेटी तुम्हारी गांद बहुत ही ज़्यादा स्वादिष्ट लग रही है. तुम्हारी गांद मैं से बहुत मादक खुश्बू आ रही है.” मुझे आज तक ये बात समझ नहीं आई थी कि मरद लोगों को औरत की गांद चाटने में क्या मज़ा आता है. अब पापा ने मेरी चूत के रस में से सना हुआ लंड मेरी गांद के छेद पे टिका दिया. हाई राम ! मेरे पापा मेरी गांद मारने जा रहे थे. मैं भी कुतिया बनी उस पल का इंतज़ार कर रही थी जब पापा का लंड मेरी गांद में प्रवेश करेगा. पापा ने मेरे चूतरो को पकड़ के चौड़ा किया और साथ ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ आआईयईई……आआआअहह….इसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” जैसे ही लंड का मोटा सुपरा मेरी गांद में घुसा मेरे मुँह से चीख निकल ही गयी.

“हाई मेरी जान ! क्या मस्ट गांद है तुम्हारी!” पापा ने मेरे चूतेर पाकर के एक ज़ोर का धक्का लगा के आधे से ज़्यादा लंड मेरी गांद में उतार दिया.

“आआईईईआआआआआ……..ऊऊऊऊऊओ……….ईईस्स्स्स्स्स स.” मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था. मुझे पक्का विश्वास था कि आज तो मेरी गांद ज़रूर फटेगी, लेकिन पापा से गांद मरवाने की चाह ने मुझे अँधा कर दिया था.

“कंचन बेटी जितना मज़ा तुम्हारी गांद मार के आ रहा है उतना मज़ा तो तुम्हारी मम्मी की गांद मार के कभी नहीं आया.” मुझे सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की थी की मुझे चोदने में उन्हें मम्मी से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था. इस बार उन्होने पूरा लंड बाहर खीच कर एक ज़बरदस्त धक्के के साथ पूरा लंड जड़ तक मेरी गांद में पेल दिया.

“ऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई………………आआआआआआआआआआ आ……..आआआआआअहह….मर गयी….ईीइससस्स”

अब पापा ने ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मार के लंड मेरी गांद के अंडर बाहर करना शुरू कर दिया था. हर धक्के के साथ उनके बॉल्स मेरी चूत पे चिपक जाते. मेरी आखों के सामने कई बरसों पहले देखा हुआ नज़ारा घूमने लगा जब मैने और नीलम ने पापा का मूसल मम्मी की गांद के अंडर बाहर होता देखा था. उस सीन की याद आते ही मैं कंट्रोल ना कर सकी और एक बार फिर झाड़ गयी. पापा के धक्के अब तेज़ होते जा रहे थे और शायद वो झड़ने वाले थे. अचानक मुझे अपनी गांद में गरम गरम पिचकारियाँ सी महसूस हुई. पापा झाड़ गये थे. मेरी गांद लाबा लब उनके वीर्य से भर गयी थी. उन्होने जैसे ही मेरी गांद से अपना लंड बाहर खींचा, वीर्य गांद में से निकल कर मेरी चूत और जांघों पे बहने लगा. मैं पीठ के बल लेट गयी और अपनी गांद से निकला हुआ पापा का लंड अपने मुँह में ले लिया. किसी मरद का लंड चूसने में आज तक इतना मज़ा नहीं आया था जितना पापा का लंड चूसने में आ रहा था. पूरा लंड, बॉल्स और जांघें मेरी चूत के रस और उनके वीर्य के मिश्रण में सनी हुई थी. उनके लंड से मेरी चूत और गांद दोनो की गंध आ रही थी. मैने बारे प्यार से उनके लंड और बॉल्स को चाट चाट के सॉफ किया. पापा भी 2 घंटे से मुझे चोद रहे थे. वो भी तक कर निढाल हो गये थे. इतने में मुझे ख़र्राटों की आवाज़ सुनाई दी. पापा शराब के नशे और थकावट के कारण सो गये थे. मैने जी भर के उनके लंड को सहलाया, चूमा और चाता. थोरी देर मैं बिस्तेर पे पड़ी रही और पापा के लंड और उनके बॉल्स को सहलाती रही.

मैं अब धीरे से बिस्तेर से उठी. मेरी गांद में से पापा का वीर्य निकल के बह रहा था. मैं जल्दी से दूसरे बाथरूम में गयी और अपनी चूत और गांद को सॉफ किया. फिर मैने वापस जा के अपना पेटिकोट और ब्लाउस पहना और अपने ही बेडरूम में मम्मी के पास जा कर सो गयी. सच कहती हूँ चुदाई का ऐसा आनंद आज तक कभी नहीं आया था. मेरी गांद में फिर हल्का हल्का दर्द शुरू हो गया था. शायद फिर से थोड़ी फॅट गयी थी. अगले दिन मैं पापा से आँख नहीं मिला पा रही थी. अच्छा हुआ वो दो महीने के लिए टूर पे चले गये लेकिन मेरी चूत और गांद में मीठा मीठा दर्द छोड़ गये.

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