पति ने दोस्त को बुलाके पत्नी को प्रेग्नेट करवया 11

बीवी की चुदाई

मेरी पिछली कहानी “पहले मजा और फिर सजा” में आपने पढ़ा होगा कि मैं और मेरे पति अशोक के पहले ग्रुप सेक्स के इवेंट में कैसी परेशानी आई और उसका जो अंतिम परिणाम था उसके बाद मैं डरी हुई थी।

फिर मेरे पति अशोक ने एक दिन अचानक मेरे सामने बात रखी कि वो फिर एक ऐसे इवेंट में जाना चाहते हैं जहां हम दूसरे कपल के साथ अपने पार्टनर्स को शेयर करेंगे और एन्जॉय करेंगे।

मैंने पति को बोला कि हमें नहीं जाना चाहिए पर वो तर्क दे रहे हैं कि पिछली बार गए हैं तो अब जाने में कोई बुराई नहीं और उनको अच्छे से पता था कि उनसे ज्यादा कहीं ना कहीं मैंने एन्जॉय किया था।

मैं इस शर्त पर हूं कि इस इवेंट में जाने के लिए मान गई कि इस बार कोई जान पहचान का नहीं होना चाहिए और कपल्स को भरोसा होना चाहिए।

पिछली बार की तरह हमने मेडिकल टेस्ट करवाया और पति ने जल्द ही 3 ऐसे जोड़े ढूंढ़ निकाले और मुझे भी उनका प्रोफाइल दिखाया। हमने एक दूसरे कपल्स को मेडिकल रिपोर्ट ऑनलाइन भेज कर वेरिफाई कर लिया।

हमने मिलने के लिए एक जंगल सफारी को चुना। जिस से हमारा घूमना फिरना भी हो जाएगा। हम कपल्स अलग-अलग जगह से दोपहर बाद एयरपोर्ट पर पहुंचें। वाहा से हम सब कपल्स का पिकअप था।

एक मिनी वैन में हम चारो कपल्स थे और पहली बार मिले। सब लोग अच्छे घरो के लग रहे थे. हमको रात को जंगल के अंदर एक झोपड़ी में रुकना था। एयरपोर्ट से वो जगह 2 घंटे दूर थी तो हमने एक दूसरे के पहचान दस्तावेजों से उनकी मेडिकल रिपोर्ट का मिलान कर सत्यापन कर लिया कि ये वही लोग हैं, फर्जी नहीं हैं।

हम लोगो ने एक दूसरे को इंट्रोड्यूस करना शुरू किया और यहां आने का मकसद बताया। उन 3 जोड़ों का ये पहला मौका था ऐसे इवेंट में जाने का। मैं और मेरे पति का ये दूसरा ग्रुप सेक्स का इवेंट था।

हम पति पत्नी ने अपना परिचय दिया और अपने आने का मकसद लाइफ में थोड़ा मसाला लाने का बताया। पिछली बार हमको मजा आया था तो हम फिर से ट्राई करना चाहते थे।

पहला कपल जो था उसमें मर्द को शिगरापतन यानी जल्दी झड़ने की बीमारी थी। उनका नाम याद रहे इसलिए मैं उनका नाम “श” से रखते हुए शुभम् और शिल्पा रख रही हूं।

शुभम एक एथलेटिक सी बॉडी वाला तुम्हारा लड़का था। वो रेगुलर जिम जाने वाला लग रहा था। शिल्पा एक आम गृहिणी की तरह थी और सलवार कुर्ता पहनने हुई थी। वैसे घर पर वो साड़ी पहनती हैं पट घुमने के लिए उसने ये कपड़े पहने थे।

शुभम: “हमारी शादी को 1 साल भी पूरा नहीं उआ हैं पर पहले दिन से मुझे शिगरापटन की बीमारी है। हम परिवार में शामिल हो गए हैं। मैं एकदम फिट हूं और डॉक्टर के हिसाब से मेरी शारीरिक समस्या शारीरिक नहीं है सिर्फ दिमागी ज्यादा है। मैंने बहुत कुछ ट्राई किया योगा, सेक्सी कपड़े, रोल प्ले वगेरह पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। इसलिए हम किसी के सुझाव पर यहां आए हैं। मेरा इलाज हो ना हो काम से कम शिल्पा पहली बार संतुष्ट हो जाए यही काफी होगा।”

शिल्पा: “मेरी सोच बहुत पुरानी है। शुभम् और मैंने सारे उपाय किए पर कुछ काम नहीं आया। एक बार मेरी सहेली ने सुझाव दिया कि हमें दूसरे कपल्स के साथ ट्राई करना चाहिए पर मैंने उसको डांट दिया था। फिर एक दिन शुभम् ने इस बारे में कहा। मैं तैयार नहीं थी पर फिर सोचा अगर एक बार यहां आने से इनकी समस्या का कोई समाधान हो सके तो इसमें कोई बुराई नहीं”

दूसरा जो जोड़ा था वो खुले विचारों वाला था, इसलिए उनका नाम “ओ” से रखा हुआ ओमी और ओजस्वी हैं। डोनो हाय 5 फीट 9 इंच के थे। ओमी हल्का सा भारी शरीर का पर मोटा नहीं था। ओजस्वो लंबी लड़की थी पर शरीर भरा हुआ था। लम्बे कद के साथ भरा हुआ शरीर उसको आकर्षण बना रहा था। उसके मम्मे बड़े थे और जींस में उसकी कैसी हुई जंघे उसके फिगर का खास हिसा थे।

ओमी: “हमारी अरेंज मैरिज को 4 साल हुए हैं और अब हम कुछ एक्सपेरिमेंट करना चाहते हैं, लाइफ को बोरिंग होने से बचाएं तो हम यहां हैं। हम दोनों ओपन माइंडेड हैं। शादी से पहले मेरी एक गर्लफ्रेंड थी जिसके साथ सिर्फ फिजिकल रिलेशन था। हम दोनों सिर्फ फिजिकल रिलेशन के लिए साथ थे, फिर दूर हो गए। मैंने ओजस्वी को शादी से पहले ही अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में मैंने बता दिया था।

ओजस्वी: “शादी के पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था जिससे मैं शादी करना चाहती थी पर घर वाले इसके लिए राजी नहीं थे। बहुत समस्या हुई और घर वालों की खुशी के लिए मैं उनके पसंद के लड़के से शादी करने को तैयार हुई। मैंने ओमी को सब कुछ पहली ही मुलाकात में बता दिया था जब उसने अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया था…

उसने मेरी मदद करने को बोला पर मैंने मना कर दिया। मुझे भाग कर अपने बॉयफ्रेंड से शादी नहीं करनी थी। मैं अपने परिवार की इच्छा से शादी करना चाहती थी। मुझे ओमी ने सब सच बताया तो मुझे ये पसंद आ गया। मेरा बॉय फ्रेंड भी मेरी परेशानी समझ गया था और हम अलग हो गए थे”

ओमी: “मैंने ओजस्वी के सामने स्मार्ट राखी की अगर वो अपने बॉयफ्रेंड से बात करना छोड़ दे तो ही हम शादी कर सकते हैं। वो मान गई और हमारी शादी हो गई। पहले ही साल हमारा बच्चा हो गया। हम बहुत खुश थे। 2 साल बाद हम मेरे मामा की लड़की की शादी में गए थे।” वाहा कुछ बदलाव हुआ”

ओजस्वी: “उस शादी में जाकर पता चला कि दूल्हा मेरा वही वाला बॉयफ्रेंड था। मैंने ओमी को सब बता दिया। ओमी ने हमें अपने बॉयफ्रेंड से बात करने की इजाजत दे दी क्यों कि अब हम दोनों रिश्तेदार हो गए थे। मैं और मेरा एक्स-बॉयफ्रेंड अब डर के रिश्ते में जीजा साली बन गए हैं”

ओमी: “ये बात मैंने अपनी कजिन सिस्टर को भी नहीं बताई थी। सब ठीक चल रहा था। अब जाकर हम दोनों ने सोचा कि हमें कुछ एक्सपेरिमेंट करना चाहिए। फिर सोचा एक्सपेरिमेंट ही करना है तो क्यू ना ओजस्वी को उसके बॉयफ्रेंड के साथ फिजिकल होने का मौका मिले। पर दिक्कत ये थी कि ये सब बात कजिन सिस्टर को बतानी होगी उसको कैसे बताएं”

ओजस्वी: “मैंने ही फिर एक दिन अपने एक्स-बॉयफ्रेंड से बात की और उसने अपनी पत्नी को भी मना लिया। आज वो हमारे साथ ही यहाँ आये हैं”

हम सब लोग आश्रय में पड़ गये। वो चौथा कपल था और कोई ओजस्वी का बॉयफ्रेंड नहीं था और ओमी की चचेरी बहन थी।

वो चौथा कपल 2 साल से शादीशुदा था और निसंतान था यानी उनको बच्चा नहीं हो रहा था। इसलिए इस कहानी में उनका नाम “एन” से रखा गया है निहाल और नियति रखा है।

निहाल: “ओजस्वी की शादी के बाद मैं टूट गया। फिर नियति से मिला और हमारी अरेंज मैरिज हुई। शादी में पता ही चला कि ओजस्वी मेरी रिश्तेदार बन गई हैं। मेरी शादी को अब दो साल हो चुके हैं पर हमें बच्चा नहीं हुआ”

नियति: “मुझे एक मेडिकल समस्या है जिसकी वजह से मैं अब कभी माँ नहीं बन सकती”

निहाल: “हम एक सरोगेट माँ की तलाश में थे तभी ओजस्वी ने बताया कि उसके पति कुछ प्रयोग करना चाहते हैं और वो मेरे साथ फिजिकल हो सकती हैं। मुझे लगा ओजस्वी मेरे बच्चे की माँ बन सकती है मुझे और नियति को पेरेंट बना सकती हैं”

नियति: “निहाल ने पूरी कहानी बताई और मुझे अजीब लगा पर मैं मान गई कि वो ओजस्वी के साथ इतना अच्छा है”

हमने पूछा तो फिर उन्हें यहां आने की क्या जरुरत थी वो लोग आपस में ही निपटते थे। ओमी ने बताया कि वो और उसकी चचेरी बहन, आपस में कुछ करने के लिए आरामदायक नहीं थे।

निहाल: “मैंने नियति को बोल दिया कि अगर वो किसी और के साथ नहीं सोएगी तो मैं भी ओजस्वी के साथ फिजिकल नहीं होऊंगा। इसलिए हम दूसरे कपल्स को भी शामिल करना चाहते हैं और इसलिए हम ओमी-ओजस्वी के साथ यहां आए”

नियति: “एक समस्या ये है कि ओमी ने अभी तक ओजस्वी को निहाल के साथ गर्भवती होने की अनुमति नहीं दी है। उसने सिर्फ ओजस्वी को निहाल के साथ फिजिकल होने की परमिशन ही दी है।”

ओजस्वी: “इसलिए हम यहां आए हैं। ताकि यहां जो कुछ भी हो उसको देखकर शायद ओमी का मन बदल जाए और वह मुझे गर्भवती होने की अनुमति दे दे और निहाल-नियति की मदद हो सके”

शिल्पा जो पुराने विचारों की हैं उनको ये सब सुन थोड़ा धक्का सा लगा कि ऐसा भी होता है पर वहा सभी कपल किसी ना किसी मकसद से आए थे।

हमारी वन जंगल के थोड़े अंदर जाकर झोपड़ी के वाहा पहुची। वो खुबसूरत जगह थी. हम चारो कपल के लिए एक ही कॉटेज बुक था जहां 2 बेडरूम और एक लिविंग रूम था।

शाम को 8 बजे फायर कैंप के साथ डिनर था। अभी हमारा समय था. ओजस्वी और निहाल थोड़े उत्साहित और उतावले थे कि उनको चार साल बाद फिर फिजिकल होने का मौका मिलेगा।

उन दोनों ने कहा कि 8 बजे तक मैं काफी टाइम पर था तो हम लोग एक राउंड कर सकते थे और सब लोग सहमत हो गए। हम सब लिविंग रूम में थे और बेडरूम से दोनों बिस्तर खींचकर हॉल में ले आए। वाहा अतिरिक्त बिस्तर भी जिनको हमने हाल में बिछा दिया।

हमको जोडिया बनानी थी. ओजस्वी और निहाल की जोड़ी तो पहले से ही बैन कर आई थी। नियति और ओमी की जोड़ी बन नहीं सकती थी क्योंकि वो कजिन्स थे, तो हम लोगों के पास 2-2 ऑप्शन थे।

हमने फैसला किया कि पहले कपड़े बदल कर तैयार हो जाते हैं फिर बाकी जोड़ियां बनाते हैं। हम लड़कियां एक बेडरूम में चली गईं और लड़के दूसरे रूम में चेंज करने लगे।

मैंने एक बटन डाउन स्लीप शर्ट पहनी बिना ब्रा के और साथ में डेनिम का शॉर्ट्स था।

मेरे बड़े मम्मो के आगे के तीखे-तीखे निपल बिना ब्रा के शर्ट के आगे से साफ दिख रहे थे। ये देख शिल्पा शर्मा गई। नियति ने टाइट टी शर्ट पहनना था जिस से उसके मम्मे उबर कर बाहर आ रहे थे और वो अच्छी लग रही थी।

ओजस्वी ने अपने बैग में रखे उसका शादी के कपड़े दिखाए। उसने कहा कि अगर ओमी ने उसको निहाल के बच्चे की मां बन जाने की इजाजत दे दी तो वो ये शादी के कपड़े पहनकर ही निहाल के साथ एक तरह से सुहाग रात मनाएगी।

फिल हाल ओजस्वी के पास परमिशन नहीं थी तो उसने एक ढीला गाउन पहन लिया जो घुटनो के थोड़ा ऊपर तक था। उसकी मजबुत सेक्सी जंघे दिख रही थी और आकर्षण लग रही थी।

हम लोगों को देख कर शिल्पा ने भी एक ट्रांसपेरेंट नाइट गाउन निकाला जो कि उसके पति ने उसको गिफ्ट किया था। वो उसको पहनने से हमेशा शरमाती थी पर आज से अच्छा मौका नहीं हो सकता था।

उसका गाउन पीछे की तरफ कंधे से कमर तक पारदर्शी था उसकी गोरी पीठ और कमर का आकार दिख रहा था। उसके बाद जंघो के ऊपर से पारदर्शी था। आगे से गाउन मम्मो को चोदकर सब तरफ से पारदर्शी था।

शिल्पा की पैंटी ट्रांसपेरेंट गाउन से दिख रही थी और वो शर्मा रही थी। हमने उसके गाउन की तारीफ की तो उसको थोड़ा कॉन्फिडेंस आया।

मर्द लोग कब के तैयार हो बाहर हाल में आ चुके थे। ओजस्वी बहार जाने को उतावली हो रही थी। उसको निहाल के साथ चुदवाने की जल्दी थी।

मैंने शिल्पा को उसकी ब्रा भी निकालने को कहा, ताकि पारदर्शी गाउन के पीछे से उसकी पीठ अच्छे से दिखे और उसकी ब्रा का स्ट्रैप न निकले। ओजस्वो जल्दीबाजी कर रही थी तो मैंने उसको और नियति को बाहर जाने को कहा।

उन दोनो के जाने के बाद शिल्पा ने अपना ब्रा निकाल कर सिर्फ गाउन में पैंटी पहन ली मेरे साथ शरमाते हुए बाहर आई।

सारे मर्दों की नज़र हम पर ही थी। खास तौर पर मेरे सीने पर जहां मेरे मम्मे उभरे हुए थे और उन्हें झकते हुए निपल उनको इनवाइट कर रहे थे। साथ ही उन्हें शिल्पा के गाउन की तारीफ की।

शुभम बिना शर्ट के बैठा था और उसकी साड़ी मसल्स साफ दिखाई दे रही थी और उसके पेट के 6 पैक एब्स भी थे। मर्दो में सबसे बड़ा आकर्षण वो था। बाकी लोगो ने टीशर्ट पहनी थी और साथ में शॉर्ट्स थे।

मेरे पति अशोक ने चित पर अपनी पसंद के जोड़ीदार का नाम लिखने का सुझाव दिया। सब लोगो ने एक चित ली और हमें पर अपनी पसंद के जोड़ीदार का नाम लिखा।

सबको बारी-बारी से अपना लिखा नाम बताना था और उसको चुनने के लिए कारण बताना था।

हम चार कपल्स ग्रुप सेक्स के लिए जंगल सफारी में मिले। मेरे और मेरे पति के अलावा सबका ये पहला ग्रुप सेक्स था। हम चार जोड़ी कुछ इस तरह थे:

प्रतिमा(मैं)-अशोक

शिल्पा-शुभम (शिगरापटन की बीमारी वाला पति)

ओजस्वी – ओमी (खुले विचारों वाला युगल)

नियति – निहाल (ओजस्वी का बॉयफ्रेंड है निहाल। नियति चचेरी बहन है ओमी की जो माँ नहीं बन सकती)

हम चारो कपल तैयार होकर ड्राइंग रूम में अपनी जोड़ी बनाने के लिए चित पर अपने पसंद के पार्टनर का नाम लिख रहे थे।

अब तक ओजस्वी सबसे ज्यादा उत्साहित थी और उसका नाम क्या होगा सबको पता था तो हमसे शुरू किया गया। ओजस्वी ने चित बताई हमें उसने निहाल की जगह शुभम का नाम लिखा था और सब लोग डांग रह गए।

उसका बॉयफ्रेंड निहाल जिसके लिए वो कब से तड़प रही थी उसका नाम नहीं लिखा था।

ओजस्वी: “निहाल तो मुझे कभी भी मिल जाएगा। इसलिए मैंने अभी-अभी शुभम को चुना है क्योंकि उसकी बॉडी बहुत प्रभावशाली लगी है और उसकी जो जल्दी झड़ने की समस्या है शायद उसका इलाज मैं कर सकती हूं।”

ओजस्वी के पास बैठे उसके पति ओमी ने अपनी चित दिखाई उसमें शिल्पा का नाम था।

ओमी: “शिल्पा को आज तक संतुष्टि नहीं मिली है तो मैं सबसे पहले उसे संतुष्ट कर के वो सुख देना चाहता हूँ”

उसके आगे मेरे पति अशोक बैठे थे अनहोने चित में नियति का नाम लिखा था।

अशोक: “नियति को चुनना क्यों कि वो बहुत क्यूट लग रही है”

उसके आगे मैं बैठी थी, मैंने भी शुभम का नाम लिखा था उसकी कसावट वाली बॉडी को देख कर उसे चुना था।

मेरे पास शिल्पा बैठी थी और उसने मेरे पति का नाम लिखा था।

शिल्पा: “मुझे लम्बा मर्द पसंद है। निहाल और अशोक दोनों लंबे हैं। मुझे लगा निहाल तो ओजस्वी को ही लेगा इसलिए चॉइस ईज़ी हो गई”

अगला नंबर शुभम् का था जिसका नाम मैंने और ओजस्वी ने लिखा था। मैं चाहती थी कि वो मेरा नाम लिखे पर उसने ओजस्वी का नाम लिखा था।

शुभम: “ओजस्वी की कद काठी बहुत मजबूत है और मैं खुद एक पहलवान टाइप हूं तो मुझे ऐसे शरीर को चोदने में ज्यादा मजा आएगा इसलिए ओजस्वी। खास तौर पर उसकी जांघें बहुत सेक्सी हैं जो अभी दिख रही हैं”

अगला नंबर नियति का था. उसने भी शुभा का नाम लिखा था। उसने भी शुभम की बॉडी देख कर उसका नाम लिखा था।

लास्ट मी नंबर था निहाल का जो ओजस्वी के पास बैठा था। हमें उसके लिए बुरा लग रहा था कि उसकी बिछड़ी हुई गर्लफ्रेंड ओजस्वी ने उसको नहीं चुना था।

निहाल की चित में मेरा नाम था. थोड़ी ख़ुशी थी कि किसी मर्द ने तो मेरा नाम लिखा वरना सबसे अच्छा फिगर होने के बाद भी किसी के द्वारा नहीं चुना जाना खल रहा था।

निहाल: “ओजस्वी को उसकी शादी के पहले बहुत बार चोदा है, इतने समय इंतजार किया थोड़ा और कर लूंगा पर प्रतिमा का फिगर देख कर मैंने सोचा उसको ही चुनना है। खास तौर पर हमारी शर्ट से जो उसकी निपल फाड़ कर बाहर आने को उतारू है उन्हें मैं सबसे पहले चूसना चाहता हूं”

उसकी बातें सुनकर मुझे अपने आप पर गर्व ही हुआ और थोड़ी शर्म भी आई। पर वो जगह शरमाने की तो नहीं थी।

ओजस्वी और निहाल जो बिछड़े प्रेमी थे, उन दोनों ने ही अपनी पसंद बदल ली थी। ओजस्वी और शुभम ने एक दूसरे का नाम लिखा था तो उन दोनों की जोड़ी बन गई। नियति की जोड़ी ओमी के साथ नहीं बन सकती थी तो उसके पास सिर्फ एक ही विकल्प बचा था अशोक।

ओमी ने शिल्पा का नाम लिखा था उसको वो मिल गई और निहाल ने मेरा नाम लिखा तो मैं उसकी हो गई। हम लोगों ने अपने-अपने बिस्तर पकड़ लिए।

हम ओरिजिनल कपल की जोड़ी कुछ इस तरह बदल गई थी:

मूल जोड़े:
अशोक-प्रतिसमय
शुभम्-शिल्पा
ओमी-ओजस्वी
निहाल-नियति

नई जोड़ी:
अशोक-नियति
शुभम्-ओजस्वी
ओमी-शिल्पा
निहाल-प्रतिमा

एक के बाद एक 4 बिस्तर लगे। नियति क्यों कि ओमी की चचेरी बहन थी और उनको एक दूसरे के सामने कपड़े खोलने में दिक्कत थी तो उनको एक दूसरे से सबसे दूर वाला, यानी पहला और आखिरी बिस्तार दिया। ओमी और शिल्पा की जोड़ी के पास मेरा और निहाल का बिस्तार था और उसके आगे के बिस्तार पर शुभम और ओजस्वी थे। सबसे आखिरी में नियति और मेरे पति अशोक थे।

निहाल ने सबसे पहले मेरा शर्ट खोला और मेरे मम्मो को प्यार से देखने लगा। उसने ऐसे टाइट मम्मे नहीं देखे थे। वो उन पर टूट पड़ा और चुस्ता ही रह गया।

मैंने भी उसको उसकी इच्छा पूरी करने दी। पास में शिल्पा शर्मा रही थी और ओमी उसका गाउन खोल कर उसके मम्मे चाट रहा था।

ओजस्वी ने शुभम को नीचे लिया और उसके लंड को हाथों से रगड़ते हुए उसका जूस निकालना शुरू किया। कुछ मिनटों की मेहनत के बाद शुभम् झड़ गया था। उसने टिशू पेपर से सफाई की।

नियति के गोल मटोल मम्मे अशोक के मुँह में थे और बड़े चाव से मसल रहे थे। नियति भी अच्छे से आनंद ले रही थी।

अब शुभम ने ओजस्वी का गाउन खोला और उसके मम्मो और झांगो पर फिदा हो उन्हें दबाना शुरू कर दिया।

निहाल ने मेरे मम्मे चूसने का मजा लेने के बाद अब मेरी पैंटी खोल दी थी और मेरी चूत पर मुंह रख कर चाटना शुरू कर दिया। मैं तो वैसे ही चूत चाटने पर कामजोर पैड जाती हूं।

उधर शिल्पा की सिसकियाँ निकालना शुरू हो गई थी क्योंकि ओमी ने अपनी उंगली और मुँह से शिल्पा की चूत को मजे दिलाना शुरू कर दिया था।

दूसरी तरफ़ नियति के सारे कपड़े निकल चुके थे और मेरे पति के भी। डोनो एक दूसरे के शरीर को छूने और चटनी का आनंद ले रहे थे।

इधर शुभम ओजस्वी के मम्मों को दबा रहा था तो ओजस्वी इसके बदले शुभम के नरम पड़े लंड को अपने हाथ से रगड़ कर जगा रही थी जो एक बार हाथों से ही झड़ चुका था।

निहाल ने अपना लंड आगे कर मेरे मुँह में डाल दिया और मैंने भी उसको निराश नहीं किया। थोड़ी ही देर में वो सिस्किया मारने लगा और उसका थोड़ा पानी मेरे मुँह में आने लगा।

मैंने उसका लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और उसे सुरक्षा प्रदान की और मुझ पर चढ़ गया। एक बार मेरी गरम चूत में लंड डालने के बाद वो नहीं रुका।

मेरे पास वाले बिस्तार पर शिल्पा के नंगे बदन पर लेट कर ओमी उसकी चूत को जोर जोर से धक्के मारता हुआ चोद रहा था। शिल्पा की सिसकियाँ अब गहराने लगी थी। पहली बार वो इतनी देर तक चुद रही थी, क्यू उसका पति शुभम तो थोड़ी देर में ही झड़ जाता है।

एक तरफ़ शुभम् अब नीचे लेता था और ओजस्वी उस पर सवार थी। शुबम उसके मम्मो से खेल रहा था और ओजस्वी अपनी गरम चूत उसके लंड पर रगड़ रही थी।

मेरे पति अशोक अब कभी नियति की तांगे उठा कर उसको बैठे-बैठे छोड़ जा रहे थे तो कभी हमें पूरा करने दो।

इधर निहाल के लगते पड़ते झटके से मैं चरम के करीब पहुंचने लगी थी और निहाल का भी यही हाल था।

तभी शिल्पा की जोर जोर से चीखें सुनाई दी। वो लम्बी लम्बी आहें भर रही थी और ओमी बहुत तेज गति से उसकी चूत को जैसे खोद रहा था।

शिल्पा शायद इतना जोर से कभी नहीं चिल्लाई थी क्योंकि वो इस मौद तक कभी नहीं पहुंची थी। उसकी ये सिसकियां अपने चरम पर पहुंच कर एक शांति में बदल गई।

उसके कुछ सेकंड में ओमी भी हफ़्ते हो गया। ओमी अब शिल्पा के शरीर से उठो। शिल्पा का शरीर तेज चलती सांसों से ऊपर नीचे पूरा हिल रहा था।

आख़िर शिल्पा को वो मिला जिसका इंतज़ार उसे साल भर से था। ओमी अपने आप को एक वीर योद्धा की तरह महसूस कर रहा था कि उसने शिल्पा को पहली बार ये अहसास दिलाया कि चोदने की संतुष्टि क्या होती है..

मेरा ध्यान भंग हुआ, निहाल के झटके कुछ ज्यादा ही जोर से मेरी चूत में पड़ रहे थे और मेरे काफी अंदर उतर रहे थे।

मेरी जोर की सिस्किया और आहेन शुरू हो गई और हमारे साथ दे रही थी नियति जिसको मेरे पति चोदते हुए उसके चरम पर ले आए थे।

तेज गुर्राते हुए मेरे पति ने उसको जोर के झटके मारे और उसको पूरा चोद दिया और झड़ गये। पता चला नियति पहले ही झड़ चुकी थी।

शुभम का लंड एक बार फिर कड़क हो चुका था और ओजस्वी अपनी चूत में घुसाए ऊपर नीचे उठक बैठक करते हुए चुद रही थी।

निहाल के झटको का सामना मैं अब और नहीं कर सका और मेरा पानी छूटना शुरू हो गया। निहाल भी जोर की आवाज करता हुआ मुझसे चिपकते हुए मुझे रगड़ रहा था।

इधर निहाल झड़ गया और धाराशाई हो गया तो मैंने खुद ही अपना जोर लगाया, उसके लंड को अपनी चूत में जकड़ लिया और अपने शरीर की हरकत से मैं तुरंट चिल्लाते हुए झड़ गई।

अब सिर्फ शुभम् और ओजस्वी बचे। शुभम ने अब ओजस्वी को नीचे ले लिया और उसकी जांघो के बीच बैठे बैठे उसको झटके मारते हुए चोदना शुरू किया। मैं बैठ कर अपने कपड़े पहनने लगी। बाकी लोग भी कपडे पहन चुके थे और शुभम् और ओजस्वी को देख रहे थे।

शुभम् बहुत तेज झटके मार रहा था और उसका किरदार बदन किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था। उसके तेज झटके के ओजस्वी के बड़े मम्मे हिलते हुए उछल रहे थे और सीने पर उसके निप्पल गोल गोल घूम रहे थे। वो एक सुखद नजारा था.

दो भरे हुए दर्द बदन आपस में टकरा रहे थे और कमरे में थाप थाप की आवाज गूंज रही थी। बीच बीच में ओजस्वी की तीखी सिस्किया आ रही थी.

शुभम् लम्बी रेस का घोड़ा लग रहा था। उसके शिग्रपतन की समस्या कहीं दिख नहीं रही थी। एक बार झड़ने के बाद उसकी ताकत दुगुनी हो गई थी और ओजस्वी ने उसका अच्छे से इलाज कर दिया था।

ओजस्वी को इसका फ़ायदा मिल रहा था। उसकी ऐसी चुदाई कभी भी ओमी और निहाल ने नहीं की होगी जो शुभम कर रहा था।

अगले कुछ मिनटों तक ये व्यायाम चलती रहेगी। फिर आया शुभम् का रोद्र रूप। उसने घरे झटके मारना शुरू किया और हर झटके के साथ ओजस्वी की एक लंबी चीख निकलती।

शुभम् के भारी झटको को सहन करने की ताकत किसी भरे हुए बदन में ही हो सकती थी और वहा ऐसा भारी बदन सिर्फ ओजस्वी का ही था।

नियति और मैंने भी शुभम को ही चुना था और अब ये चुदाई देख कर हमारा दिल मचलाने लगा था कि काश ओजस्वी की जगह हम
होटे.

शुभम् ऐसे ही तेज घरे झटके मारता रहा और ओजस्वी झलकते हुए झड़ गई। पर उस पर प्रहार लगतार जारी थे. शुभम ने कुछ मिनट और लगाए और उसके बाद वो शेर भी झड़ कर ढेर हो गया।

इस राउंड की दो खसियत थी, पहला शुभम् की परफॉर्मेंस और दूसरा शिल्पा को पहली बार संतुष्टि।

शिल्पा खुश थी कि उसके पति की समस्या सुलझती हुई दिख रही थी। शुभम् और ओजस्वी भी अपने कपड़े फिर पहन कर बैठ गए। हम लोगो का पहला राउंड ख़तम हो गया था। अभी थोड़ी देर में हमको डिनर के लिए कैंप फायर में जाना था। तो हमने तयार होकर जाने का फैसला किया।

हम लोग थोड़ी देर बाद अच्छे से तैयार हो कर हाल में मिले। हम फायर कैंप पाहुचे जहां दूसरे कॉटेज के लोग भी आये थे। सबसे पहले म्यूजिक लगाया गया ताकि लोग डांस का आनंद ले सकें।

उसके बाद सबने डिनर किया और उसके बाद मनोरंजन के लिए कार्यक्रम। हम सब लोगों ने अच्छे से आनंद लिया किआ और रात 11 बजे वापीस अपने कॉटेज में पहुंचे।

हम सब लोग हॉल में थे. मुझे लगा मुझे नियति और निहाल की मदद करनी चाहिए ताकि वो भी पैरेंट बन पाए तो मैंने सबके सामने एक टास्क रखा।

क्या टास्क में सब अपने नए जोड़ीदार को चैलेंज टास्क देंगे। कुछ लोगों की चिंता थी कि अगर कुछ लोगों ने टास्क करने से मन कर दिया तो।

फिर आपने तय कर लिया कि पहले सब अपना चैलेंज टास्क बताएंगे, फिर सबको पूछा जाएगा कि वो दिए गए चैलेंज लेने के लिए तैयार हैं या नहीं। अगर एक ने भी मना किया तो किसी को चैलेंज टास्क करना जरूरी नहीं।

सबको सोच समझ कर टास्क देना था वरना सब कैंसिल हो जाता। मैंने ये आइडिया दिया तो शुरुआत हमारी जोड़ी से होनी थी। मेरा जोड़ीदार था निहाल तो हम दोनों को एक दूजे को चैलेंज टास्क देना था।

निहाल ने मुझे टास्क दिया कि मुझे 3 कारण बताने हैं कि निहाल मेरे पति के मुकाबल चुदाई में क्यों बेहतर हैं।

मैंने निहाल को टास्क दिया कि वो ओजस्वी को प्रेग्नेंट कर दे ताकि नियति का मां बनने का सपना पूरा हो। ये सुनकर ओमी की शकल देखने लायक थी। ओमी ने अभी तक ओजस्वी को उसके बॉयफ्रेंड निहाल से प्रेग्नेंट होने की इजाजत नहीं दी थी।

अगला नंबर शुभम् और ओजस्वी का था। शुभम ने मुझे प्रेरित करके ओजस्वी को टास्क दिया कि वो निहाल के बच्चे की मां बन जाएगी।

ओजस्वी भी कहीं न कहीं यही चाहती थी। असल जिंदगी में वह निहाल की बीवी बन कर उसका बच्चा नहीं चुका सकती, लेकिन अब उसका बच्चा तो पैदा कर ही सकती है।

ओजस्वी मेरे मन की बात समझ गई और मुझे थैंक यू गिफ्ट के लिए उसने शुभम को चैलेंज टास्क दिया कि वो अगले राउंड में मुझे चोदने के लिए जोड़ीदार चुने।

मैं खुश हूं, अगर सब लोगो ने अपना चैलेंज स्वीकार कर लिया तो मुझे शुभम के बेटे से चुदने का मौका मिलेगा।

अगला नंबर उनके पास में बैठे मेरे पति अशोक और उनकी जोड़ीदार नियति का था। अशोक ने नियति को टास्क दिया कि वो अपनी चूत को ओमी से चटवाये।

ये सुन कमरे में सन्नाटा छा गया. सबको लगा ये अशोक ने क्या बोल दिया. ओमी और नियति तो चचेरे भाई बहन हैं, वो कैसे कर सकते हैं। शायद ओमी और नियति को अब बहुत गुस्सा आए और अशोक को कुछ उल्टा सीधा बोल दे।

ऐसा होने से पहले ही मैंने, शुभम, ओजस्वी और शिल्पा ने अशोक को समझाया ये क्या बोल रहे हो। अशोक ने जवाब दिया ये सिर्फ चुनौती है, स्वीकार करो तो करो।

नियति के मुंह पर एक खामोशी थी, उसने अशोक को अभी टास्क देने से मना कर दिया। हमें लग गया कि अब तो सब टास्क कैंसिल हो जाएगा, नियति नाराज हो चुकी थी।

अगला नंबर ओमी का था जिसे शिल्पा को टास्क देना था।

ओमी: “शिल्पा ने मेरे ऊपर आकर चोदने से मना कर दिया था। मैं चाहता हूं कि अगले राउंड में शिल्पा उसकी जोड़ीदार के ऊपर आकर चोदे”

शिल्पा ने ओमी को चैलेंज टास्क दिया कि वो मान जाए और ओजस्वी को निहाल के बच्चे की मां बन जाने दे।

नियति को छोड़ कर सब लोग टास्क दे चुके थे और 3 लोगो ने एक जैसा टास्क दिया था कि ओजस्वी को निहाल के बच्चे की मां बनना चाहिए। अब बारी थी ये जान लेने की कौन तैयार है और कौन नहीं।

दूसरे दौर की चुदाई से पहले हमने अपने पिछले जोड़ीदार को चैलेंज दिया और ज्यादा की कोशिश ये थी कि ओमी अपनी बीवी ओजस्वी को निहाल से प्रेग्नेंट होने दे।

अब देखना था कि सारे लोग अपने चैलेंज स्वीकार करते हैं या नहीं, अगर एक ने भी मन बोला तो सारे चैलेंज कैंसिल हो जाएंगे।

मैंने अपना चैलेंज स्वीकार कर लिया है कि मैं ये बताऊंगी कि मैं निहाल की चुदाई को अशोक से बेहतर क्यों मानती हूं। निहाल भी चैलेंज के लिए तैयार थे कि वो ओजस्वी को प्रेग्नेंट करेगी पर ओजस्वी को परमिशन और उसकी पति ओमी से लेनी थी।

ओजस्वी तो तैयार है हाय थी उसके चैलेंज के लिए कि वो अपने बॉयफ्रेंड निहाल से प्रेग्नेंट हो जाए।

शुभम भी अपने चैलेंज के लिए मान गया कि वो मुझे अगले राउंड में चोदेगा।

नियति अभी भी सदमे में चुपचाप बैठी थी क्योंकि अशोक ने उसको चैलेंज दिया था कि वो अपनी चूत अपने चचेरे भाई ओमी से चटवाए। नियति ने अपना चैलेंज टास्क अभी भी अशोक को नहीं दिया था। अशोक ने बोला कि नियति जो भी टास्क उसको देगी वो मान लेगा।

अभी तक सब लोग मान गए थे तो शिल्पा ने भी हिम्मत कर चैलेंज स्वीकार कर लिया था कि वो अगले राउंड में अपने जोड़ीदार को उसके ऊपर चाड कर छोड़ देगी।

सबकी नज़र अब नियत और ओमी पर थी। ओमी से पूछा गया और उसने कहा कि ओजस्वी को प्रेग्नेंट होने दें का फैसला उतना ही मुश्किल है जितना नियति के लिए अपने चचेरे भाई से चूत चटवाना।

ओमी ने कहा कि अगर नियति अपना चैलेंज स्वीकार करती है तो हिम्मत रखती हैं तो वो भी अपना चैलेंज स्वीकार करेगी और ओजस्वी को निहाल से प्रेग्नेंट होने देगी।

हम सब लोग खुश थे कि ओमी मान तो गया कि वो ओजस्वी को निहाल के बच्चे की मां बनने देगा। पर उसने मुश्किल राखी थी और वो ये थी कि नियति का चैलेंज स्वीकार करना चाहिए कि वो अपनी चूत को ओमी से चटवाए।

अब सब कुछ नियति पर निर्भर है। नियति को कहीं ना कहीं एक आशा की किरण दिखी। उसके भगवान ने मुझे ओजस्वी का भुगतान किया बच्चा आने की एक ही राह थी उसका चैलेंज स्वीकार करना और उसने हा बोल दिया। हम सब लोग उछल पड़े कि आखिर इनका यहां आना सफल हो गया और ओमी मान गया।

ना सिर्फ निहाल और ओजस्वी को 4 साल बाद एक होने का मौका मिलेगा और वो भी बिना डर ​​के चोद पाएंगे और बच्चा पैदा कर पाएंगे।

नियति को अब अशोक को चैलेंज देना था और उसने उसको चैलेंज दिया था कि वो उसके कोई 2 डर्टी सीक्रेट्स बताए। अशोक तो पहले ही नियति को टास्क के लिए हा बोल चुका था।

सबको अपनी चुनौती पूरी करनी थी। मेरी बारी सबसे पहले थी. मुझे 3 कारण बताने थे कि निहाल की चुदाई मेरे पति से बेहतर क्यों थी।

मैंने पहला कारण बताया कि निहाल का लंड थोड़ा लंबा है तो वो मेरी चूत के ज्यादा अंदर घुस कर ज्यादा मजा फैलाता है।

दूसरा कारण ये था कि वो मेरे पति के मुकाबले ज्यादा देर तक चोद पाया। तीसरा ये कि उसके लंड का स्वाद मेरे पति के लंड से ज्यादा अच्छा है।

मेरे पति ने चैलेंज के तहत अपने दो डार्क सीक्रेट बताए। पहला ये कि हमारे बच्चे का बाप वो नहीं हैं। ये सुन सभी लोग चौंक गए। अशोक ने इसका पूरा कारण भी बताया तो सबको सांत्वना मिली। इसके बारे में ज्यादा जाने के लिए आप मेरी पिछली कहानी “समझौता साजिश और सेक्स” पढ़ें।

दूसरा सीक्रेट ये था कि अशोक ने मेरी भाभी के साथ फिजिकल रिलेशन बनाया है। इसके बारे में जानने के लिए आप मेरी पिछली कहानी “पहला प्यार, चुदाई की बहार” पढ़ें।

सब लोग फिर से डर गए पर ये दोनो ही बातें मुझे पता थी। फिल हाल सबसे सनसनीखेज टास्क की बारी थी। नियति अपने चचेरे भाई ओमी को अपनी चूत चटवाने वाली थी।

नियति ने बोला कि वो खुद अपने कपड़े नहीं खोल पाएगी, ओमी को ही करना पड़ेगा। नियति अब अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ सीधे खड़े कर, टीका कर बैठ गई और अपने पांव आगे की तरफ लंबे कर दिए।

ओमी उसके सामने आया और नियति की जींस के बटन खोल कर उसको नीचे खिसका हुआ खोलने लगा। नियति का गोरा बदन अंदर से निकलता गया।

ओमी ने जब नियत की पैंटी खोली तो नियति ने अपनी आंखें बंद कर ली। नियति के पांव को घुटनों के बल मोड़कर ओमी ने नियति के पांव चौड़े किये और उसकी चूत को खोल दिया।

ओमी अब अपना मुँह उसकी चूत के पास ले गया और पहला किस किया। नियति की एक आह निकली. वो छत की तरफ मुँह कर आँखें बंद किये बैठी रही।

ओमी ने अब नियति की चूत को चाटना शुरू कर दिया था। इसी तरह वो बहुत देर तक चटाता ही रहा और हम लोग चुत चाटने की आवाज सुनते रहे। हमारे पास निर्णय लेने का समय ही नहीं था तो उन दोनो पर छोड़ दिया कि वो कब तक कर सकते हैं।

नियति की चूत अब अच्छे से गीली हो चुकी थी और ओमी के चाटने से चपड़ चपड़ की आवाज आने लगी। नियति की अब सिसकियाँ निकलनी शुरू हो गई थी।

कहा तो नियति अपने कपड़े भी ओमी के सामने खोलने को तैयार नहीं थी और अब अपनी चूत चटवा रही थी।

नियति अब अपनी हथेलियां बजाती हैं, गेंद अपने शरीर को टिकाने देती हैं और अपने पाव और भी चौड़े कर लेती हैं। ओमी अपनी जीभ से खोद खोद कर नियति की चूत को चाट रहा था।

ओमी अपने होठों से नियति की चूत के होठों को पकड़ पकड़ कर खींच रहा था। नियति अब सिस्किया निकलते हुए तड़प रही थी.

जब 10 मिनट तक ये चलता रहा तो हमने ओजस्वी को तैयार होने को भेज दिया क्यों कि वो निहाल के साथ चुदाई के लिए दुल्हन के कपड़े लेकर आई थी।

पता चला निहाल भी इसी तरह नये कपड़े लेकर आये थे। वो डोनो अपने-अपने कामरे में तैयार हो गए।

नियति अब लंबी आहेन भर रही थी और बाकी बचे हम दो कपल्स ने फैसला किया है कि जिस तरह से ओमी अभी नियति की चूत चाट रहा है और दोनों एन्जॉय कर रहे हैं तो अगले राउंड के लिए नियति और ओमी की जोड़ी ही बना दी जाएगी।

ये सुनकर ओमी और नियति की जैसी नींद टूटी। अनहोन टूरेंट अपना काम बंद कर दिया। उन दोनों को एहसास हुआ कि वो अपने काम में इतना डूब गए थे।

नियति ने तुरेंट अपनी जींस फिर से पहन ली। ओमी के होंथ नियति की चूत से निकले चिकने पानी से भर कर भीग गए। वो अपना मुँह धोने चला गया।

हमने ओमी के आने का इंतजार किया ताकि बाकी की तीन जोड़ी बना सके। तब तक निहाल दूल्हे के कपडे पहन बाहर आया।

ओमी के आते ही हमने जोड़ी बनाने की प्रक्रिया शुरू की। हम सबने बोला कि ये चैलेंज देखने के बाद इस दौर के लिए नियति की जोड़ी ओमी से बन जानी चाहिए।

ओमी और नियति कुछ नहीं बोले, उनकी खामोशी में उनकी सहमति थी। शुभम को जो चैलेंज मिला था उसके अनुरूप उसकी जोड़ी मेरे साथ बन गई।

फिर बचे मेरे पति अशोक और शिल्पा तो उनकी जोड़ी बानी। शिल्पा को अपना चैलेंज भी पूरा करना था। उसको अब मेरे पति के ऊपर आकर चोदना था।

तभी ओजस्वी दुल्हन के वेश में बहार आई। उन कपड़ों में उसकी ख़ूबसूरती दिखती ही बन रही थी। उसने लाल रंग का लहंगा पहना था। उसके ऊपर डिजाइनर चोली थी जो कि आगे से ढकी थी पर पीछे से जालीदार थी और उसकी पूरी नंगी पीठ हमें दिख रही थी।

उसने कुछ गहना भी पहन रखा था जो अपनी दूसरी सुहागरात के लिए लाई थी। उसको देख सारे मर्दों की नियत डोल गई पर अब हक सिर्फ निहाल का था।

हमने उन दोनों को विकल्प दिया कि वो अपनी सुहागरात हमारे बीच बाहर हॉल में मनाएंगे या अंदर बेडरूम में।

ओजस्वी ने अंदर का बेडरूम चुना तो शुभम और मेरे पति ने एक बिस्तर उठा कर हम लड़कियों के रूम में पलंग पर रख दिया।

निहाल और ओजस्वी हमसे विदा लेकर अपने कमरे में सुहागरात मनाने के लिए चले गए। बाहर हम तीन जोड़ी बची तो हमने अपनी चुदाई का राउंड शुरू किया।

अशोक ने पहले ही अपनी सच्चाई बता दी कि उसका स्पर्म काउंट कम होने से वो बाप नहीं बन सकता है, ये जान कर शिल्पा ने उसको बिना प्रोटेक्शन के चोदने को हा बोल दिया।

उधर नियति को मेडिकल समस्या थी कि वो माँ नहीं बन सकती थी, उसने भी ओमी को बिना प्रोटेक्शन के चोदने को हा बोल दिया था। अंदर कमरे में ओसवी और निहाल वैसे ही बिना प्रोटेक्शन के चोद रहे थे।

मैंने सुभम के साथ ओजस्वी वाली टेक्निक का इस्तेमाल किया और शुबम को अपने कपडे खोलने को कहा। उसने कपड़े खोले और मैंने पहला हाथ लगाया कर उसकी मसल्स को महसुस किया।

उसकी बॉडी टाइट थी और उसको छूकर अच्छा लगा। उसका लंड तो पहले ही कड़क हो खड़ा था। मैंने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा। वो एक लड़की के टुकड़े की तरह था।

उसके लंड की मांसपेशियाँ भी कड़क थीं और उसको रगड़ने से ही इसका एहसास हो रहा था। मैं कभी उसका लंड अपने मुँह में लेकर रगड़ती रही तो कभी हाथ से।

वो पहले ही शाम को दो बार झाड़ चुका था तो मुझे ओजस्वी के मुकाबले ज्यादा मेहनत करनी पड़ी पर अंत में मैंने उसका पानी निकल ही दिया।

अब उसकी बारी थी मुझे मजा दिलाने की। उसने अपनी सफाई की तब तक मैंने आस-पास देखा। शिल्पा अपने वादे के अनुसार मेरे पति पर चढ़ कर चोद रही थी।

शिल्पा को आदत तो थी नहीं इसलिए जल्दी ही थक कर वो उतर गई। मेरे पति ने उसके मम्मे और चूत को रगड़ कर उसका मूड और भी भड़काया।

शुभम् आ गया था और उसने अब मेरे मम्मो को चूसना शुरू किया। वो ऐसे चूस रहा था जैसा कोई आम चूस रहा हो।

मुझे उसका देसी अंदाज़ पसंद आया। एक हाथ से वो मेरी चूत को भी रगड़े जा रहा था। मैंने उसको चुत रगड़ने से मना किया। अपनी चूत में सिर्फ उसके लंड के लिए रखना चाहती थी।

वो मेरे मम्मे चुस्ता रहा और मैंने अपना ध्यान नियति की तरफ लगाया। मैंने देखा नियति ने ओमी का लंड अपने मुँह में ले रखा था और चूस रही थी। इस बीच ओमी लगतर नियति के मम्मे और चूत को रगड़ रहा था।

कहीं ना कहीं नियति भी अपने भाई से चुदवाने में दिलचस्पी रखती थी पर शर्म से बोल नहीं पाई थी। हां फिर वो ओमी का अहसान उतार रही थी कि उसने ओजस्वी को प्रेग्नेंट होने की इजाजत दे दी थी।

फिर उन दोनों ने अपनी पोजीशन बदली और नियति ने ओमी का लंड चूसना जारी रखा तो ओमी ने नियति की चूत को चूसना शुरू किया।

इधर शुभम ने मेरा ध्यान उसके लंड की तरफ डाला कि वो फिर से तैयार है चोदने के लिए। मैंने पूछा इतनी जल्दी कैसे तो उसने तारीफ की कि मेरा फिगर ही ऐसा है कि उसकी इच्छा हो गई।

शुभम ने कहा कि बाकी के तीनों मर्द बिना प्रोटेक्शन के चोद रहे हैं। अंदर कमरे में ओजस्वी को निहाल, यहां नियति को ओमी और शिल्पा को अशोक। इसलिए शुभम् भी मुझे बिना प्रोटेक्शन के चोदना चाहता था।

मेरे पिछले ग्रुप सेक्स के इवेंट में जो गलतिया हुई थी मैं डरी हुई थी तो मैंने उसको मना बोल दिया। पर वो अब बच्चों की तरह ज़िद करने लगा। मुझे जल्दी से जल्दी उसका लंड अपनी चूत में चाहिए था पर जोखिम नहीं लेना था।

अंततः मैंने उसको कहा कि थोड़ी देर में वो मुझे बिना प्रोटेक्शन के छोड़ सकता है पर पानी निकालने के पहले प्रोटेक्शन पहनना होगा।

वो मन गया. मैं भी उसके लंड को बिना किसी कवर के महसूस करना चाहती थी। वो मुझ पर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।

ऐसा लगा कोई मोती लकड़ी मेरे अंदर घुस रही हो। उसका उबर खाबाद लंड मेरी चूत में जाते हुए रगड़ खा रहा था और मुझे असीम आनंद मिल रहा था।

एक बार मेरी गर्म चूत में उसका गर्म लंड गया तो हम दोनो का ही कंट्रोल चला गया। वो तेजी से मुझे चोदने लगा.

उसका लंड इतना रगड़ खा रहा था कि मेरी चूत डबल स्पीड से मजा अनुभव कर रही थी। वो मेरे होठों पर अपने होठों पर मुझे छोड़ जा रहा था।

उसका शरीर मेरे बुरे से मम्मो को कुचलता हुआ ऊपर नीचे रगड़ रहा था।

उसका हर एक लंड का झटका मुझे ऐसा अहसास दिला रहा था जैसे उसके झटके से मैं झड़ ही रहूंगी। मुख्य सोचने लगी मेरा अब पानी निकलने वाला है, अब निकलने वाला है, पर पानी तो नहीं निकल रहा था पर मजा उतना ही आ रहा था।

ये मेरे जीवन की शायद सबसे अनोखी चुदाई थी। मैं इसका हर लम्हा जी रही थी। अब मैंने अनुभव किया कि मेरा पानी निकलना शुरू हो गया है।

मैं चाहती थी कि शुभम अब जोर के झटके मार कर मुझे चरम पर पहुंचा दे पर शुभम ने कहा कि उसका थोड़ी देर में होने वाला है तो वो बाहर निकलना चाहता है।

इस बीच उसने मुझे 2-3 झटके दिए और मार दिए और मैं झड़ने की कगार पर खड़ी थी।

मैंने उसको कहा 5-10 झटके जोर से मार कर चोदो फिर निकाल देना मेरा होने ही वाला है। उसने मेरा आदेश माना और अब तक के सबसे गहरे और तेज झटके मारे।

मैं तो उसके 6 झटके में ही झड़ कर ढेर हो गई पर मेरे कहे अनुसर उसने 10 झटके पूरे किए जिससे मुझे झड़ने के बाद भी मजा आता रहा।

शुभम् ने अपना लंड बाहर निकाला। मैंने उसको कहा कि मेरा हो गया है तो वो अब सुरक्षा पहन कर आ जाए और उसका भी पूरा कर ले।

उसने कहा कि उसका भी पूरा हो गया है और वो मेरे अंदर ही पानी छोड़ कर झड़ गया है। पिछली सारी यादें मेरे सामने आ गई।

दूसरे राउंड की चुदाई में चारो नई जोड़ी, बिना प्रोटेक्शन के चुदवा रही थी पर रिस्क सिर्फ मुझे था। शुभम और मेरी लापरवाही से उसने अपने लंड का पानी मेरी चूत में पूरा खाली कर पूरा चोद दिया था।

मुख्य परेशान हुई और उसको डाटा कि उसने पानी निकाला से पहले अपना लंड बाहर क्यों नहीं निकाला। पर उसने बताया कि जब मैंने उसको 5-10 जोर के झटके मारने को कहा था तब तीसरे चौथे झटके से ही उसके पानी की पिचकारी छूट गई थी और हर अगले झटके के साथ उसकी टंकी खाली हो गई।

अब उसका सारा माल मेरी चूत में जमा हो गया। मैं तुरंट उठी और वॉशरूम की तरफ भागी। वो भी मेरे पीछे पीछे आया।

मैं उस पर गुस्सा थी पर वो वॉशरूम से बाहर जाने को तैयार नहीं था। मैंने उसको कहा कि मुझे बाथरूम करना है बाहर जाओ पर उसने कहा जो भी करना उसके सामने करो।

इमरजेंसी देखते हुए मैं उसके सामने ही पॉट पर बैठ गई। बाथरूम करने की आवाज़ के साथ मुझे शर्म आ रही थी पर शुभम को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

उसके बाद मैं उठी और शॉवर कैप पहनकर शॉवर के नीचे खड़ी हो गई। वो भी शॉवर के नीचे आ गया. मैं अपनी चूत को साफ करने लगी तो उसने मुझसे कहा कि हम दोनों एक दूसरे के अंगो की सफाई करेंगे।

मैंने उसको अपनी चूत साफ करने दी। उसने मेरी चूत पर पानी डालते हुए दूसरे हाथ से मेरी चूत रगड़ साफ करने लगा।

मैंने उसको अन्दर से साफ करने को कहा तो उसने नीचे बैठ कर अपनी उंगली मेरी चूत में घुसा कर सफाई शुरू कर दी। Uski ungliya meri chut me jaate hi kuchh kuchh hone लगा.

अब मेरी बारी थी, मैंने शॉवर के पानी से उसके नरम पड़े लंड को धोया और एक हाथ से रगड़ कर साफ किया। रगड़ते हुए ही उसका लंड फिर खड़ा होने लगा और मोटा हो गया।

हमने कुछ मिनटों का सबूत लगा कर अच्छे से नहा लिया। उसके कहने पर मैंने उसके लंड पर और उसने मेरे मम्मों और चूत पर साबुन भी लगाया।

लंड पर साबुन लगाते वक्त भी उसका लंड ठीक ही था और वो मजे ले रहा था और मुझे भी उसके लंड को रगड़े हुए अच्छा लग रहा था।

नहाने के बाद शॉवर बंद किया और वहां पड़े तौलिये से हमने बदन पोंछ लिया। उसका लंड अभी भी कड़क हो कर आसमान में उठा हुआ था।

मुख्य जैसी ही पलटी उसने मुझे दीवार की तरफ मुंह कर खड़ा किया और अपना लंड पीछे से मेरी चूत में घुसाना चाहा।

मैंने उसको रोका कि एक बार फिर से वही गलती ना करे पर वो सुनने वाला नहीं था। उसने अपना लंड बिना सुरक्षा के मेरी चूत में डाल दिया।

मैं चिल्लाती रही पर वो कह रहा था कि एक बार कर दिया तो दूसरी बार में क्या समस्या है। कुछ होना होगा तो पहली बार में ही हो जाएगा।

मैं दीवार पर अपने दोनों हाथ टिकाए खड़ी हूं और चुदने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी। उसके झटके अब और भी तेजी से लग रहे थे।

मैं थोड़ी देर पहले ही झड़ी थी पर फिर भी उसके झटके से मजे के मारे मेरी सिसकियाँ निकल रही थी। वॉशरूम में मेरी सिसकियाँ गूँज रही थी और शुभम के भारी हाफने की आवाज़ आ रही थी।

मैं सोच रही थी ये क्या हुआ, हमारी आवाज सुन कर बाहर मेरे पति क्या सोचेंगे। थोड़ी देर पहले ही झड़ने के कारण शुभम् बहुत देर तक ऐसे ही खड़े खड़े मुझे चोदता रहा पर वो थक ही नहीं रहा था।

मैं बुरी तरह प्रशंसक चुकी थी। मेरे वहां से निकलने का एक ही रास्ता था कि शुभम थक कर हट जाए या झड़ जाए।

साइड में लगे मिरर में मैंने देखा, मैं एक दम नंगी खड़ी थी और मेरे पीछे चिपक कर शुभम झटके मार रहा था। खजुराहो की एक मूर्ति की तरह हमने विराम बना रखा था।

शुभम ने अब अपने दोनो हाथ मेरे आगे लाकर मेरे दोनो मम्मो को पकड़ कर दबाया और अपनी तरफ खिंचते हुए मुझे चोदना जारी रखा।

मुझे भी लगा कि एक बार बिना प्रोटेक्शन के छूट चुकी हूं तो अब दूसरी बार से क्या फर्क पड़ेगा। मैं भी हमारी चुदाई में डूब गयी।
मैंने अब अपने शरीर को आगे पीछे करना शुरू किया जिसमें मैं खुद ही चुदने लगी थी।

उत्साहित होकर शुभम का हौसला बढ़ाया और उसने तेज-तेज चोदना शुरू कर दिया और मेरी जान निकलने लगी।

मैं अब जोर जोर से चिल्लाते हुए सिसकियाँ निकाल रही थी। मेरी चूत में कुछ कुछ होने लगा था. मुझे लगा मेरा पानी फिर छूटने लगा है या फिर शुभम ने अपना पानी फिर छोड़ दिया है।

शुभम् फिर भी लगा हुआ था और मैं झड़ने को हो आया। मैंने महसुस किया मेरी टैंगो पर जूस बह रहा है। मैंने नीचे देखा तो मेरी टांगों पर लाल रंग की एक धार बह रही थी।

मैं डर गई कि शुभम ने इतने जोर से चोदा है कि मेरे अंदर से खून निकलने लगा। मैंने उसको रोकना चाहा पर उसने झटके जारी रखे। मैं भी अब झड़ने वाली थी और वो लाल धार बहती रही।

मैं एक बार फिर झड़ गई और शुभम भी कुछ देर में झड़ गया और अपना लंड बाहर निकल गया। मैं पीछे मुड़ी.

शुभम अपने लंड को ही घूर रहा था जो लाल पानी से भरा हुआ था। वो घबरा गया कि ये क्या हुआ।

मुझे माजरा समझ देर नहीं लगी। मैं उसको अपने गले से लगा लिया, जिस से उसका कड़क लंड मेरे पेट को छू गया और थोड़ा लाल पानी मेरे पेट पर लग गया।

उसको घबराया हुआ देख मैंने कहा कि मेरा पीरियड शुरू हो गया है। मैं अब प्रेग्नेंट नहीं होऊंगी. उसको भी बात समझ में आई।

मैंने तुरेंट हैंड शॉवर लिया और उसका लंड रगड़ कर धोने लगी। उसने चेन की सांस ली और मैंने भी। मेरा पीरियड 1 सप्ताह जल्दी आ गया था पर मुझे राहत मिली थी।

शुभम अब बाहर जाने को हुआ तो मैंने उसको मेरे बैग से सैनिटरी नैपकिन लाने को कहा। शुभम् बहार चला गया और मैंने अपने आप को भी साफ किया।

थोड़ी देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। मैंने दरवाजा थोड़ा खोला तो वाहा शिल्पा थी। शुभम् ने उसको सब बता दिया था।

शिल्पा ने बताया कि मेरा बैग तो अंदर कमरे में है जहां ओजस्वी और निहाल हैं इसलिए शिल्पा ने मुझे उसके पास जो नैपकिन लगाया था वो लाकर दिया। साथ ही वो मेरे कपड़े भी लेकर आई थी, क्योंकि मैं जब अंदर आई थी तो कपड़े बाहर ही छोड़ आई थी।

मैंने ख़ुशी ख़ुशी बाथरूम में तैयार हुई और बहार आई। वो लोग मुझे ही घूर रहे थे। शायद अंदर जो मैं शुभम् के साथ मिलकर कर रही थी उसके लिए।

बाकी के दोनो कपल पहले ही निपट चुके थे। मैंने वो सब मिस कर दिया था। पर पता चला कि शिल्पा ने मेरे पति के ऊपर आकर जबरदस्त चुदाई करवाई थी।

मेरे बहार जाते ही इस बात पर चर्चा शुरू हुई कि पीरियड के दौरान चोदना चाहिए या नहीं। शिल्पा इसके बिल्कुल खिलाफ थी। मैंने भी कहा कि स्वच्छता की वजह से ठीक नहीं है और अशोक ने भी सहमति जताई।

नियति ने भी मन की वो भी पीरियड में चुदाई नहीं करवाती। ओमी ने बताया कि आदमी की इच्छा हो तो काहा जाए! पीरियड्स में ओजावी मन करती है पर मैं चोदना चाहता हूँ। बहुत रोमांचक होगा पीरियड में चुदाई करना।

पर हम लड़कियों ने उसको समझा कि सिर्फ सोचने में अच्छा है पर असल में नहीं।

रात के 2 बजे थे और हमने सोने का फैसला किया कि अगली सुबह सफारी पर जाना था। परंतु ओजस्वी और निहाल अभी भी अपने कमरे से बाहर नहीं आये थे।

हमने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा। हम लड़कियों के रात को सोने के कपड़े अंदर उसके कमरे में थे इसलिए मैंने और शल्पा ने चेक किया अगर दरवाजा खुला हो।

दरवाज़ा अंदर से ताला नहीं था. मैंने थोड़ा सा दरवाजा खोला और देखा ओजस्वी का लहंगा और चोली वहां नीचे पड़े थे और साथ ही निहाल के कपड़े भी थे। मैंने अपना सिर दरवाजे के अंदर डाला और देखा कि दोनो सो रहे हैं। मैं दरवाजे के अंदर गई और मेरे पीछे शिल्पा आई।

हम लड़कियों के कपडे वही बहार बैग के पार पड़े थे तो उनको लिया। बिस्तर पर नजर पड़ी, निहाल और ओजस्वी पूरे नंगे लेते थे। नीचे निहाल था और उसके ऊपर ओजस्वी इस तरह लेती थी कि उसके मम्मे निहाल के सीने पर थे और तांगे बिस्तार पर थे।

निहाल का लंड नरम पड़ा था पर एक सफेद परत जमी थी जो उनके अंदर से निकले पानी की थी। शिल्पा और मैं ये देख खुश हुए कि बच्चा हो ही जाएगा।

हम बिना आवाज किये वहां से निकले और दरवाजा बंद किये बाहर आये। हम 3 लड़कियों ने दूसरे कमरे में जाकर अपनी रात के कपड़े पहने और बाहर आकर सो गए।

एक बिस्तार पर मैं और मेरे पति अशोक थे। उसके आगे नियति और ओमी एक बिस्तर पर साथ थे। तीसरे बिस्तार पर शुभम और शिल्पा थे।

सुबह मेरी आँख सबसे पहले खुली। मुझे पीरियड में नहाना था। याद आया मेरे पैड मेरे बैग में हैं, और बैग अंदर हैं, उस कमरे में जहां ओजस्वी और निहाल हैं।

मैंने पास के बिस्तर पर देखा, नियति मेरी तरफ मुँह करके सोई थी और उसके पीछे चिपक कर उसका चचेरा भाई ओमी लेता था। ओमी का एक हाथ नियति की कमर से होते हुए उसकी टीशर्ट में घुस गया उसके मम्मे पर था।

मैंने उनको इसी हाल पर छोड़ा और अंदर कमरे में धीरे से गई। देखा तो निहाल अभी ऊपर नीचे होता हुआ ओजस्वी को तेजी से चोद रहा है।

मुख्य कमरे में प्रवेश कर चुकी थी तो टुरेंट नीचे बैठ गई और अपने बैग से नैपकिन निकालने लगी। फिर ऐसे बैठे बैठे चलते हुए दरवाजे तक आई।

जैसे ही बाहर निकलने को हुई तो ओजस्वी की आवाज आई। उसने मुझे बुलाया. मैं उसके पास गयी. निहाल ने उसको अब धीरे-धीरे चोदना शुरू किया ताकि वो बात कर सके।

ओजस्वी ने बहार से एक तकिया लाने को कहा। मैं बाहर आई, मेरा तकिया वैसे ही फ्री था। मैं वो तकिया उठाया और फिर अंदर चली गई।

ओजस्वी ने वो तकिया उसके कमर के नीचे घुसाने को कहा। उसने अपना शरीर थोड़ा ऊपर उठाया और मैंने वो तकिया उसके कमर के नीचे घुसा दिया।

उसका नीचे का हिस्सा ऊपर उठ गया और निहाल ने मेरे सामने ही उसे जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया और ओजस्वी सिस्किया मारने लगी।

मैंने उनको बेस्ट ऑफ लक बोला और कहा कि सुबह की चुदाई बच्चे होने के लिए अच्छी है। ओजस्वी ने लहरती आवाज में कहा कि ये उनका तीसरी बार है। मैं अब बाहर आई, उन दोनों की एक ही रात में तीन बार चुदाई से बच्चा होने का मौका बढ़ जाएगा।

मैं बहार आई और नहाने चली गई। 15 मिनट के बाद मैं बाहर आ गई। देखा अभी भी ओमी नियति की टीशर्ट में हाथ घुसाया उसके मम्मे को पकड़ा था।

तब तक शिल्पा उठ चुकी थी। उसको भी फ्रेश होकर नहाना था। उसका टूथब्रश वगैरा और कामरे मेरे बैग में था। मैंने उसको कहा कि मैं अभी अंदर बेडरूम में आकर आई हूं तो वो भी जा सकती है।

शिल्पा ने नियति की तरफ इशारा किया कि ये भाई बहन कैसे सो रहे हैं। मैने कहा अब कैसे भाई बहन, अब तो सब कुछ कर ही चुके हैं।

शिल्पा अब अंदर गई और 5 मिनट तक बाहर ही नहीं आई। मुझे लगा कहीं वो उनके साथ थ्रीसम तो नहीं करने लगी। जब वो बहार आई तो उसके चेहरे पर हंसी थी।

मैं: “क्या हुआ?”

शिल्पा: “ओजस्वी अंदर निहाल के ऊपर चढ़ कर चोद रही थी और थक गई थी। जब मैं अंदर गई तो उसने मुझसे मदद मांगी कि मैं उसको आगे पीछे धक्का दू ताकी वो चोद पाई। मैंने उसके बाद ओजस्वी की गांड को पकड़ कर आगे पीछे धक्का दे खींचते हुए उनकी चुदाई की।” मैं मदद करता हूँ”

मैंने उसको कहा कि उसने एक नेक काम में मदद की है तो उसका भी अच्छा ही होगा।

हमारी हंसी सुन नियति की आंख खुल गई। उसका ध्यान भी ओमी के हाथ पर गया, जिसने उसकी मां अंदर से दबौच रखा था। हमने उसको इशारा किया कि यह ठीक है और कोई बात नहीं।

उसने ओमी के हाथ पर ही हाथ रख दिया और फिर सो गई। थोड़ी देर बाद शुभम और अशोक भी उठ गए। अनहोनी भी ओमी को इस तरह सोते देखा।

शुभम् अब मजे लेने लगा. उसकी आवाज सुन ओमी और नियति भी उठ गई।

शुभम: “अरे भाई ऐसे कैसे हो? कुछ तो शर्म करो, तुम्हारी बहन है”

ओमी: “अच्छा दूसरी तरह से सोता हूँ”

ये कह कर ओमी ने अपना हाथ नियति के टीशर्ट से निकाल दिया और एक झटके से पहले अपना शॉर्ट आला किया और फिर नियति को शॉर्ट आला खिस्का दिया और तेजी से उसकी गांड में अपना कड़क लंड घुसाने लगा।

इतनी देर नियति से चिपके रहने से उसका लंड पहले से ही कड़क तैयार था। नियति हलका सा चीख उठी और आगे चलकर हमसे दूर हुई और अपने कपड़े ठीक किये। सब लोग खिलखिला उठे.

बाकी बचे लोग भी उठ कर नहाने लगे। नियति के कपडे अंदर रूम में तो वो आखिरी तक इंतजार कर रही थी। आख़िरकार ओजस्वी और निहाल बाहर आ गए।

सब लोग उनकी तरफ उम्मीद भारी नजरों से देख रहे थे। उन्हें भरोसा दिलाया कि वे अपनी तरफ से पूरी मेहनत की हैं। ये कहते हुए ओजस्वी बुरी तरह से ब्लश कर रही थी।

हमारी सफारी 10 बजे शुरू होने वाली थी और हम सबने नाश्ता कर लिया। अभी एक घंटा बाकी था तो हमने फैसला किया कि हम लोग एक दूसरे को सफारी के लिए चैलेंज देते हैं जैसे कल रात को दिया।

लड़कियों ने मिलकर लड़कियों के लिए ड्रेस कोड चुना। लड़कियों को लड़कों के लिए ड्रेस कोड चुनना था। हमने लड़कों के लिए मजेदार चीजें चुनीं।

सफारी पर जाने के पहले लड़के और लड़कियों ने एक दूसरे के लिए चैलेंज के तौर पर ड्रेस कोड तय किया।

हमने शुभम को टॉपलेस रहने को कहा ताकि उसकी मांसपेशियां दिखें और होठों पर लिपस्टिक लगना था। ओमी को नाक में रिंग पहननी थी और काजल लगाना था। निहाल को दोनों हाथों में छुरी पहननी थी। अशोक को मेरे बजने वाली पायल पहनने को कहा।

लडको ने हमारी मौज लेने के लिए त्वचा दिखाने वाले कपडे चुने। ओजस्वी क्यू की हट्टी कत्थी है और उसका फीचर उसके ओवरसाइज मम्मे और कैसी हुई जंघे हैं तो उसको मिनी शॉर्ट पहनना था और मम्मो के ऊपर बिना ब्रा के सफेद टाइट टॉप पहनना था। ओजस्वी ने कहा उसके पास व्हाइट टॉप नहीं है तो मैंने उसको दिया।

मेरे फिगर ऑवरग्लास शेप में हैं तो मुझे नीचे पतले टाइट कपड़े पहनने थे और कमर को नंगा रखना था जिसमें नाभि के नीचे 2-3 इंच तक दिखना चाहिए और ऊपर ऐसा टॉप पहनना था कि मेरे झुकने पर मेरे मम्मो के बीच की सुरंग पूरी नजर आ गई।

शिल्पा बहुत शरमाती हैं तो उसको पूरी पीठ दिखाए ऐसा टॉप पहनना था और साथ में आगे से कपड़े सीने पर डीप कट हो। आला शॉर्ट्स पहनने थे ताकी उसकी पतली तांगे नंगी दिखे।

नियति को अपने मम्मों पर ब्रा की साइज का ऑफ शोल्डर टॉप पहनना था जिसे दोनों कंधे और नंगी रहे। आला शॉर्ट्स पहने थे.

सब लोग ड्रेस कोड के हिसाब से तैयार हो गए और बाहर हाल में आ गए। लड़के पहले से वाहा तयार खड़े थे.

ओजस्वी के मम्मे ओवरसाइज़ थे तो मेरा स्ट्रेचेबल व्हाइट टॉप पहनने के बाद वो आगे से थोड़ा ट्रांसपेरेंट हो गया था। उसके निपल के डार्क सर्कल साफ दिख रहे थे।

उसकी लंबी टैंगो पर टाइट बड़ी जंघे बहुत आकर्षक लग रही थी। सब मर्दो ने उसको घूरना शुरू किया तो वो शरमाने लगी।

ओजस्वी: “ऐसे इस टॉप में मैं बाहर नहीं जा सकती। सब लोग मुझे घूरेंगे। सब तो दिख रहा है इसमें”

शुभम: “जिसको जाना है जाओ, मैं तो ओजस्वी के साथ यहीं रहूंगा अगर वो ये कपड़े पहन कर रखे तो”

ओजस्वी और भी शर्मा गई। वो एकदम हॉट माल लग रही थी जैसे कोई भी मर्द उसको अभी यहीं चोद देगा।

शिल्पा को उल्टा मुड़ने को कहा। उसने अपना टॉप नियति से उधार लिया था। वो टॉप पीछे से सिर्फ दो डोरियों के सहारे कमर और बगीचे से बंधा था। उसका टॉप डीप “वी” शेप था जिसके मम्मो का उभार थोड़ा दिख रहा था।

नियति ने एक दुपट्टे को मोड़कर अपने मम्मो पर लगा दिया पीछे पीठ पर गांठ लगा कर बांध दिया। उसके ऊपर शरीर पर सिर्फ मम्मे ढके थे और पीछे नंगी पीठ पर पाटला सा एक दुपट्टा का गांठ बांधा था।

वो दुपट्टा ऊपर खींचती तो नीचे से मम्मे दिखने लगती और नीचे खिंचती तो ऊपर मम्मो के बीच की गली दिखती।

फिर मेरा नंबर था, मैंने छोटा टॉप और नीचे लेदर का पाटला काला ब्लैक पैंट पहना था। मुझे गम कर मेरी गांड का हिसा दिखाने को कहा। फिर मुझे मेरा पैंट थोड़ा नीचे खिसकाने को कहा ताकि नाभि से 3 इंच नीचे रहे।

फिर मुझे झुकने को कहा गया, मैं झुक गयी। मेरे मम्मे फिसले हुए टॉप से ​​थोड़े दिखने लगे। अनहोनी चेंज करने को कहा.

मुझे मेरा ब्रा निकलने को कहा और कोई बटन वाला टॉप पहनने को कहा। मैने फिर एक बटन डाउन शर्ट पहनी जो मम्मो से थोड़ी टाइट थी बाकी ढीली थी।

मैं फिर झुकी और उन्हें 2-3 बटन खोलने को कहा। 3 बटन खोलने के बाद वो खुश हुए। शर्ट क्यों की मम्मो के ऊपर टाइट थी तो बटन खुले होने से वाहा से शर्ट फेल हो गई और सीधा खड़े होने पर भी अब मेरा क्लीवेज काफी दिख रहा था।

मर्दो ने हमारे काहे अनुसार तयार थे और लड़कियो वाले गहने पहन कर शुरू में थोड़ा शर्मा रहे थे।

हमारी हालत देख कर लड़के का मन बदल गया और उन्हें कहा कि सफारी नहीं जाती है और यहीं रुक कर मजे लेते हैं, क्योंकि उनकी चोदने की इच्छा हो रही थी।

हम लड़कियों को लगा कि हम इतनी दूर आए हैं तो घुमने तो जाना चाहिए। पर वो एड गए कि दोपहर बाद आएंगे तब तक वो चुदाई का इंतज़ार नहीं कर सकते।

सफ़ारी कुछ मिनटों में निकलने वाली थी और अभी उतना समय नहीं था कि हम उनको कुछ करने दे। हमने बोल दिया कि हमको तो सफारी पर जाना ही है।

उन्हें शर्त रख दी कि फिर हम उनको सफारी के दौरे पर ही कुछ करने दे। हम लड़किया डर गई कि वहां दूसरे लोग भी होंगे। शुभम ने कन्फर्म किया कि सिर्फ 3 सफारी जीप हैं उनमें से एक हमारी है।

वो ड्राइवर से बात कर हमारी जीप को सबसे पीछे ही रखेगा। हमने जीप पहले ही देख ली थी, उसमें ड्राइवर केबिन में रहेंगे और हम लोग पीछे खुली ट्रॉली में बैठेंगे।

हम लड़कियाँ डोनो तरफ फैंस गई थीं तो हमने बस इतनी इज्जत दी कि चुदाई के अलावा वो कुछ भी कर सकते हैं। अगर उनकी ज्यादा इच्छा हुई तो ज्यादा से ज्यादा हम उनका लंड रगड़ कर पानी निकाल सकते हैं।

लड़के हमारी बात मान गई और हम लोग कॉटेज के बाहर आ गए जहां से सफारी शुरू होनी थी। सारी लड़किया शर्मा रही थी अपने दिखाउ कपड़ों की वजह से।

खास तौर पर ओजस्वी क्यों कि उसके निपल डर से ही साफ दिख रहे थे और वो टॉप मुश्किल से उसके मम्मों का वज़न संभाल पा रहा था।

ऐसा लग रहा था जैसे कभी भी वो टॉप फैट जाएगा और उसके मम्मे बाहर आ जाएंगे। दूसरी जीप के टूरिस्ट का ध्यान भी हम पर टिक गया।

दूसरे परिवारों के मर्द हमारे सीने को घूर रहे थे। एक बुजुर्ग महिला ने ओजस्वी का टॉप देख कर गंदा सा मुंह बनाया। हमारे पति लोग हंसते हुए मजे ले रहे थे। हालांकी लोग हमारे पतियो का मेकअप देख भी चुके हैं।

एक पर्यटक पति जो ओजस्वी के थोड़े पास था, आकर उसका सीना घूर रहा था, उसकी बीवी पकड़ कर खींच ले गई। हम लोग जल्दी से अपनी जीप में जाकर बैठ गए और मर्द खड़े रहे।

उन 3 जीपों में से हमारी जीप सबसे पीछे रही। हमारी जीप घने जंगल के अंदर घराई में जाने लगी।

मर्दो ने ओजस्वी के मम्मे देखे की डिमांड राखी और ओजस्वी ने बैठे बैठे ही अपना टॉप ऊपर कर अपने मम्मों को खोल थोड़ी ताज़ा हवा दिलवाई।

इतने टाइट टॉप से ​​बाहर आकर उसके मम्मों को भी शांति मिली और खिल गई। शुभम और अशोक ने आगे बढ़कर उसके मम्मों को दबाया कर थोड़ी देर मजे के लिए।

ओमी ने नियति को भी अपने मम्मे दिखाने को कहा। उसको वो दुपट्टा पीछे से खोलना पड़ा और वो टॉपलेस हो गई। ओमी ने आगे बढ़कर उसके मम्मे चूसना शुरू कर दिए।

निहाल ने मुझे आगे झुकने को कहा और मेरे झुकते ही मेरे मम्मे लगभाग शर्ट के बाहर आ गए थे। उसने अपना हाथ डाल कर उनको दबाओचा और मेरे शर्ट के बाहर निकाल दिया। थोड़ी देर दबाने के बाद ही मुझे सीधा होने दिया।

ओमी ने शिल्पा के टॉप के धागे पीछे से खोल दिए और उस ढीले टॉप में हाथ डाल कर मम्मे दबाने लगा। दूसरी तरफ अशोक आकर बैठ गया और अब शिल्पा के दोनों मम्मे दबा रहा था।

शुभम ने मुझे और ओजस्वी को अपने मम्मे आपस में दबाने को कहा। मुझे अपनी शर्ट के सारे बटन खोलने पड़े। ओजस्वी ने अपना टॉप ऊपर किया और हमने अपने मम्मे आपस में चिपका कर दबाये।

शुद्ध रास्ते वो ऐसे ही हमारे मजे लेते रहे। ना तो उन्हें सफारी के जानवर देखे ना ही हमें खतरे से देखने दिया।

शुभम ने ओजस्वी के सामने राखी की डिमांड की वो उसके मम्मो के बीच उसका लंड रख कर रगड़ेगा। ओजस्वी ने मन कर दिया कि यहां जीप में ऐसा नहीं कर सकती, कॉटेज पहुंच कर करेगी।

मर्दो ने बोला कि चुदाई के अलावा कुछ भी करने की बात हुई थी तो ये तो करना पड़ेगा। अब दूसरे मर्द भी आगे आ गये.

हमको डर लग रहा था कि कोई देख लेगा। मर्दो ने बोला कि जब दो लोग ये करेंगे तो बाकी के उनको घेर कर खड़े रहेंगे तो कोई नहीं देखेगा। वैसे भी वाहा आस पास कोई नहीं है।

हम लड़कियों को भी लगेगा कि एक बार ये मर्द झड़ जाएंगे तो फिर हमको परेशान नहीं करेंगे तो हम सब मान गए।

ओजस्वी बीच में बैठी और टॉप निकल दिया। सुभम ने अपना लंड बाहर निकाल दिया। हम बाकी लोगों ने उनके चारो और खड़े हो दीवार बना ली।

शुभम ने अपना लंड ओजस्वी के बड़े मम्मो के बीच रखा और ऊपर नीचे रगड़ने लगा। ओजस्वी ने अपने डोनो मम्मो पकड़ कर उसके लंड को अपने मम्मो के बीच दबा लिया।

ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और कुछ ही मिनटों में शुभम ने अपने लंड का पानी छोड़ कर ओजस्वी के मम्मों को गंदा कर लिया।

दोनो ने साफ सफाई की। अगला नंबर मेरा था और सामने था ओमी. मैंने शर्ट को आगे से पूरा खोला और ओजस्वी की तरह ओमी का लंड अपने मम्मों में फंसा दिया। ओमी अपना लंड रगड़ता रहा.

उसको शुभम् से ज्यादा टाइम लगा पर वो भी झड़ गया और मेरे मम्मे अपने पानी से चिकने कर दिए।

अशोक ने नियति को पकड़ा. उसने अपने मम्मो पर बांधा दुपट्टा खोला और टॉपलेस हुई। अशोक को और भी ज्यादा टाइम लगा और वो भी नियति के मम्मों को गीला कर झड़ गया।

शिल्पा घबरा रही थी, उसने ऐसा कभी नहीं किया था। निहाल ने जैसे ही अपना लंड उसके मम्मो के बीच रगड़ना शुरू किया, शिल्पा डर के मारे आवाज निकालती रही।

खास तौर पर जब निहाल का पानी निकलना शुरू हुआ तो वो कुछ ज्यादा ही घबराई और बोली “बहुत गाना पानी हैं”।

चारो मर्दों के झड़ने के बाद हम लड़कियों को थोड़ी शांति मिली। हम आराम से बचे हुए जानवर की सफारी को देख पाए। पर बीच बीच में मर्द कभी हमारे कमर तो कभी मम्मो को, तो कभी टैंगो पर हाथ फेर मजे ले रहे थे।

हमें भी कहीं ना मजा आ रहा था कि हमारी इतनी डिमांड हो रही है। ओजस्वी और निहाल हमेशा चिपके हुए ही रहे। उनके तो जैसे पुराने दिन वापस आ गये थे।

लड़को ने बोला कि उनको तो मजे मिल गए हैं और हम लड़कियां चाहे तो वो हमको भी मजा दिला सकते हैं पर हमने मना कर दिया।

हमें और कोई तमाशा नहीं चाहिए था। हम सब लोग शांति से बैठे तो ओमी लगातर शिल्पा की जांघो पर हाथ फेर रहा था। शिल्पा का ध्यान आस-पास जंगल के नज़ारों पर था।

जब शिल्पा का ध्यान हमने हमें तरफ दिलाया तो वो शर्मा गई। ओमी ने शिल्पा को उसके नीचे के कपडे खोलने को कहा पर शिल्पा ने शर्मा को मना कर दिया और हमने भी विरोध किया पर ओमी ने शिल्पा को कन्विंस कर लिया कि कुछ नहीं होगा और मजा आएगा।

शिल्पा ने डरते हुए अपने कपड़े निकाले और ओमी ने नीचे बैठ कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

हम बाकी लोगों ने घेरा बना कर दीवार बना ली। शिल्पा सिसकियाँ मारने लगी थी. उसकी सूखी हुई चूत थोड़ी ही देर में चिकनी हो चुकी थी। जब उसकी सिसकियाँ थोड़ी और बढ़ने लगीं तो उसने ओमी को रोका कि रुक ​​जाए वरना उसका हो जाएगा।

हमने भी शिल्पा को बोला कि पूरा मजा ले ले। ओमी उसकी चुत चटा रहा है और कुछ मिनटों में शिल्पा ने बोला कि उसका हो गया है और ओमी हट गया।

शिल्पा ने कपड़े पहने और संतुष्ट दिखे। मर्दो ने पूछा और कोई उम्मीदवार है। हम सबने मना कर दिया. निहाल जबरदस्ती मुझे पकड़ लाया कि वो मेरा करेगा पर उसको बताया गया कि मेरे पीरियड चल रहा है तो कुछ नहीं कर पाया।

ओजस्वी ने बोला मेरे कर दो और वो अपना शॉर्ट निकाल बैठ गई। इसके पहले कि निहाल कुछ करे अशोक आकर बैठ गया और ओजस्वी की चूत को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया और ओजस्वी सिस्किया मारती हुई आहेन भारती रह गई।

अशोक ने ओजस्वी की भारी जंघो को अपने हाथों में दबा कर फैला दिया और बड़ी सी चूत को अच्छे से चूसा रहा।

ओजस्वी की हालत चूसने से मजे के मारे खराब हो गई। उसको असीम आनंद मिल रहा था। उसकी चूत पूरी गिली हो चुकी थी और सफेद पानी की बूंदे उसकी चूत के बहार के बालों को गीला कर गई।

ओजस्वी के निपटने के बाद नियति को बोलने की जरूरत नहीं पड़ी। वो खुद ही आकर बैठ गई और शुभम ने उसकी चूत को चूसा, उसको भी अपना पानी छोड़ने को मजबूर कर दिया था।

मेरी भी बहुत इच्छा हो रही थी पर मजबूर थी। उन लोगों ने मेरी मजबूरी समझी और निहाल शुभम ने मेरे पास बैठकर मेरा एक-एक मम्मा सहलाया कर मुझे थोड़ा मजा दिलाने की कोशिश की।

सफ़ारी ख़तम होने के बाद हम लोग कॉटेज पर पहुँचे। लंच हमारे कॉटेज मा लाया गया पर सब लोगो ने फैसला किया कि लंच से पहले एक राउंड चुदाई का होना चाहिए।

सफारी से आने के बाद सुबह से चुदाई को तड़पते मर्दों को शांति देने के लिए चुदाई का तीसरा राउंड शुरू करना था।

सब लोगो से उनकी फंतासी पूछी गई और जिन 3 लोगो की सबसे अनोखी फंतासी होगी उनको मौका मिलेगा अपनी फंतासी पूरी करने का।

ओजस्वी: “मेरी फैंटेसी है कि मेरा पति और बॉयफ्रेंड मिलकर मुझे चोदे”

शुभम: “ये तो बहुत कॉमन फंतासी हैं। मेरी ये हैं कि दो लड़कियां नंगी होकर एक के ऊपर एक लेटे, और मेरे सामने 4 होल हो, चोदने के लिए”

नियति: “मेरी कोई कल्पना नहीं लेकिन एक बार सपना देखा था कि मैं लेती हुई हूं और मेरे पति निहाल मेरे सर की तरफ हैं और मेरी टांग ऊपर कर के पकड़े खड़े हैं और एक आदमी आकर मुझे चोद रहा है और निहाल उसको जोर जोर से चोदने को बोल रहे हैं”

शिल्पा: “मेरी फैंटेसी है कि मेरे पति मुझे पूरा छोड़ें और हम दोनों साथ में झड़ जाएं”

निहाल: “मेरी फैंटेसी है कि मैं और मेरा दोस्त एक दूसरे की बीवी को चोदे”

ओमी: “ये बहुत कॉमन हैं। मेरी फैंटेसी पूरी नहीं हो सकती पर ये हैं कि मैं अपनी बीवी को उसके पीरियड के समय चोदू, मगर वो करने ही नहीं देती”

अशोक: “मेरी फंतासी ये है कि मैं अपनी गर्लफ्रेंड को चोदू और उसका पति मेरी बीवी को”

ओजस्वी: “अशोक तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो तुम्हारी बीवी प्रतिमा की भाभी हैं। इसका मतलब प्रतिमा अपने भाई से चुदवाये?”

अशोक: “ये मेरी फैंटेसी थी, मुझे थोड़े ही पता था कि मेरी गर्लफ्रेंड मेरे साले से ही शादी करेगी”

शुभम: “चचेरे भाई बहन होते तो फिर भी काम हो सकता था जैसे ओमी और नियति का हुआ पर प्रतिमा का तो वो असली भाई हैं”

शिल्पा: “असली भाई बहन भी करते हैं आजकल। मेरी एक सहेली के साथ ये हुआ था”

निहाल: “तो तुम क्या चाहती हो प्रतिमा भी अपने सगे भाई के साथ चुदवा ले”

मैं: “अब ये बहस बंद करो, मैं अपने भाई के बारे में ऐसा नहीं सोचती। आगे बढ़ो”

अब मैंने उन्हें कैसे बताया कि एक बार मेरे भाई ने मुझे शायद चोद दिया था। पर मास्क लगा होने से मैं निश्चित नहीं थी। इस बारे में और जानने के लिए आप मेरी पिछली कहानी “पहला प्यार, चुदाई की बहार” पढ़ें।

मैं: “मेरी कोई फैंटेसी नहीं है, वैसे भी मुझे पीरियड हैं तो तुम लोग देख लो किसकी फैंटेसी पूरी करनी है”

शुभम: “अशोक की फैंटेसी यहां हो नहीं सकती और प्रतिमा ने अपनी फैंटेसी बताई ही नहीं। निहाल, ओजस्वी और शिल्पा की फैंटेसी सिंपल है। फिर बचे मैं, नियति और ओमी। अब ओमी की फैंटेसी पूरी हो नहीं सकती, क्योंकि ओजस्वी को पीरियड नहीं है।”

ओजस्वी: “मुझे नहीं तो क्या हुआ, प्रतिमा को तो पीरियड्स हैं। वो ओमी की फैंटेसी पूरी कर सकती हैं”

निहाल: “अरे, ये सही है। हो गए 3 लोग जिनकी फैंटेसी पूरी होगी”

मैं: “मुझे मत फँसाओ। ऐसी हालत में चुदवाना मुझे खुद को अच्छा नहीं लगेगा”

नियति: “सच सच बताना, तुमने कभी अशोक को पीरियड के दौरान चोदने नहीं दिया?…बोलो…बोलो…अशोक तुम बताओ”

अशोक: “3-4 बार किया है”

ओजस्वी: “हां तो फिर हो गया, वैसे भी सुबह तो पीरियड्स में, शुभम ने प्रतिमा को चोदा ही था, एक बार और सही”

प्रतिमा: “ओजस्वी तुम अपने हिससे का भार मुझ पर डाल रही हो। ओमी ने साफ कहा है कि वो अपनी बीवी को पीरियड में चोदना चाहती है”

निहाल: “ओमी तुम क्लियर करो, तुम्हें प्रतिमा के साथ रखना है तो अभी हो जाएगा, वरना घर जाकर तो ओजस्वी करने दे या ना दे भरोसा नहीं”

ओमी: “मुझे कोई भी चलेगा यार”

शुभम: “टू फाइनल हुआ, नियति, ओमी और मेरी फैंटेसीज पूरी होंगी। मुझे मेरी फैंटेसी के लिए दो लड़कियां चाहिए”

ओजस्वी: “नियति और प्रतिमा तो दूसरी फंतासी में होगी तो शिल्पा और मैं साथ दे देंगे”

अशोक: “तो ठीक है, नियति की फंतासी के लिए उसको चोदने के लिए अकेला मर्द मैं ही बच्चा”

निहाल: “मुझे क्या मिलेगा! बाबा जी का घंटा, मैं तो नियति की तांगे पकड़े सिर्फ उसको चोदते हुए देखता रह जाऊंगा!”

शुभम: “मेरे पास दो लड़कियाँ हैं, तुम भी आ जाना। एक काम करते हैं कि एक एक करके तीनो फैंटेसी करते हैं ताकि मेरी फैंटेसी हो तब निहाल फ्री रहे”

ओजस्वी: “हां तो शुरुआत तुम्ही करो फिर”

शुभम: “बिना प्रोटेक्शन के करने को तैयार हो? वैसे भी तुम्हें प्रेग्नेंट होना है”

ओजस्वी: “नियति को पूछो, बच्चे तो उसे मिलेगा। उसको निहाल का बच्चा चाहिए या किसी और का भी चलेगा। मुझे तो सिर्फ भुगतान करना है”

प्रतिमा: “कल रात को जो तुमने और निहाल ने कमरे में किया है, उससे तुम प्रेग्नेंट तो हो ही गई होगी। अब कोई कुछ भी करे क्या फर्क पड़ता है। मतलब तो बच्चे से है”

नियति: “मुझे कोई समस्या नहीं है, मुझे सिर्फ बच्चा चाहिए”

निहाल: “कोई बात नहीं, लेकिन इसके बदले मुझे भी बिना प्रोटेक्शन के चोदने को मिलना चाहिए सोच लो। शिल्पा भी क्या बिना प्रोटेक्शन के चुदेगी? बोलो शिल्पा तुम्हें चलेगी?”

शिल्पा: “मैं क्या बोलूं। मुझे बच्चा हुआ तो अपना तो शुभम को ही है। मां तो मैं ही रहूंगी”

शुभम: “अरे ऐसा कुछ नहीं है। सब लोग बिना सुरक्षा के ही करते हैं। प्रतिमा को वैसे भी पीरियड हैं इसलिए प्रैगनेंट नहीं होगी और नियति और अशोक को तो वैसी ही समस्या है”

ओजस्वी: “तो चलो जल्दी शुरू करो, मुझसे इंतज़ार नहीं हो रहा। शिल्पा मैं नीचे लेंगी और तुम मेरे ऊपर लेट जाना”

शुभम्, शिल्पा और ओजस्वी ने अपने सारे कपड़े निकाल लिए। ओजस्वी नीचे लेती और शिल्पा उसके ऊपर पीठ के बल लेट गई। डोनो ने तांगे चौड़ी की और उनके चारो छेद सामने थे।

एक के ऊपर दूसरी चूत का नजारा अदभुद लग रहा था, और दूसरे मर्दो की भी लार टपकने लगी थी ये नजारा देख कर।

शिल्पा: “ओजस्वी के मम्मे इतने बड़े हैं कि मुझे तकिया जैसा लग रहा है”

अब शुभम उन दोनों की टैंगो के बीच बैठ गया और अपना नरम पड़ा लंड उन चारो छेदों में ऊपर से नीचे रगड़ने लगा।

थोड़ी ही देर में उसका लंड एकदम कड़क हो गया और उसने बारी बारी से चारो छेदों में थोड़े थोड़े सेकेंड के लिए रख कर चोदा।

शुभम: “मुझे जल्दी झड़ने की बीमारी है तो मुझे दो मौका मिलेगा। निहाल बीच में आकर चोद लेगा”

जिस लड़की के छेद में लंड जाता है वो बहुत मारती है। दोनों की आह आह चलती रही. गांड में लंड जाने पर दर्द वाली आह होती और चूत में जाने में मजे वाली आह.

शुभम: “मेरा होने वाला है, बोलो किसके अंदर पानी डालू”

ओजस्वी: “मेरे मत डालना, अपनी बीवी के डालो”

शिल्पा: “मेरे नहीं, मेरी फंतासी हैं कि हम पति पत्नी दोनों साथ झड़ेंगे”

ओजस्वी: “अरे वाह, इसकी फैंटेसी भी इस बहाने पूरी हो रही है। कोई बात नहीं शुभम्, तुम मेरे अंदर पानी डाल दो”

शुभम ने अपना लंड शिल्पा की गांड से निकाल कर ओजस्वी की चूत में डाल दिया और जोर के झटके मारने शुरू कर दिया। साथ ही साथ उसने शिल्पा की चूत को अपनी उंगलियों से रगड़ना जारी रखा, जिस से शिल्पा को भी मजा मिल रहा था।

ओजस्वी: “मेरी गांड में पानी डालने को कहा था ना कि चूत में, पर ठीक है, यहां ज्यादा मजा आ रहा है तो चोद दे पूरा”

डोनो हाय लड़कियाँ सिसकियाँ मार रही थी और कुछ सेकंड के बाद हाय शुभम ने अपने लंड का पानी ओजस्वी की चूत में खाली कर दिया।

लड़किया ऐसे ही लेती रही और निहाल ने मोर्चा संभाल लिया। उसने दोनों की थोड़ी सफाई कर पहले से जमा पानी साफ किया। उसने अब बारी बारी से दोनों लड़कियों की चूत को चोदना शुरू कर दिया।

निहाल लंबी रेस का घोड़ा था और उसने बहुत देर तक बारी-बारी से दोनों लड़कियों को जी भर के चोदा। ज्यादा देर वो ओजस्वी को ही चोद रहा था।

निहाल: “अब मैं आ रहा हूँ। बोलो किसके अंदर डालू मेरा पानी”

ओजस्वी: “मेरी चूत को पिलाओ पानी, मुझे ज्यादा जरूरी है”

निहाल: “तुम्हारी चूत को तो रात भर पानी पिलाया है, थोड़ा सा शिल्पा को भी पिला देता हूँ और उसकी प्यास बुझा देता हूँ”

ये बोलकर निहाल ने अपना लंड शिल्पा की चूत में डाल कर जोर जोर से अपने आखिरी झटके मारने शुरू कर दिए और शिल्पा भी मजे लेते हुए सिस्किया मारने लगी। थोड़ी ही देर में निहाल ने अपना पानी पूरा शिल्पा की चूत में खाली कर दिया।

थोड़ा सा पानी शिल्पा की चूत से बहते हुए कुछ बूंदे नीचे लेटी ओजस्वी की चूत पर भी टपक गया। निहाल ने वो एक्स्ट्रा पानी साफ़ किया।

शुभम अपने दूसरे राउंड के लिए फिर तैयार था और निहाल के उठते ही वो बैठ गया और दोनों लड़कियों को दूसरी ताकत से चोदना शुरू किया। खास तोर से उसको ओजस्वी को चोदने में ज्यादा मजा आ रहा था।

पर जब वो ओजस्वी को चोदता तो शिल्पा की चूत बराबर रगड़ रही थी, जिस से शिल्पा गरम रह रही थी।

इस बार शुभम् बहुत देर तक चोदता रहा कि ओजस्वी नीचे लेटे थक गई। शुभम् अब शिल्पा को चोद रहा था और शिल्पा ने बोला कि उसका होने वाला है पर शुभम् का अभी बाकी था।

शुभम ने अपना लंड अब ओजस्वी की चूत में डाल कर सबसे तेज घरे झटके मारे और बीच बीच में शिल्पा को भी गरम रखा। कुछ ही सेकंड के बाद, शुभम का दूसरा बार झड़ने का टाइम हो गया तो उसने अपना लंड वापस शिपा की चूत में घुसाया।

उसने शिल्पा को अब उसकी तेज गति से गहरा नुकसान शुरू किया। शिल्पा इस हमले से पागल हो गई और जोर जोर से चिपकने लगी। डोनो एक दूसरे का नाम लेकर चोदने को बोल रहे थे।

नीचे लेती ओजस्वी ऊपर नीचे हिलते हुए “जल्दी ख़त्म करो” कह रही थी। जल्दी ही शिल्पा और शुभम लगभाग एक साथ चोदते हुए झड़ गए और शुभम झड़ते ही शिल्पा के ऊपर लेट गया।

नीचे लेती ओजस्वी उन दोनों के बाहर से दब कर चिल्लाने लगी। उन तीनो को अलग किया गया और दो लोगो की फंतासी एक साथ पूरी हुई। शुभम ने जहां दो लड़कियों को एक साथ छोड़ा, अपनी फंतासी पूरी की वही दूसरी तरफ शिल्पा पहली बार शुभम से संतुष्ट हुई थी।

शिल्पा को पहली बार शुभम ने झड़ने में मदद की थी तो उसने उसको गले लगा लिया।

अब बारी नियति की फंतासी पूरी करने की थी। वो कपड़े खोल कर पूरा नंगी नीचे लेट गई। निहाल उसके सर के पास आकर खड़ा हो गया और नियति ने अपनी तांगे ऊपर कर निहाल के हाथों में थमा दी।

अशोक अपने कपड़े खोल कर नियति की चूत के पास बैठ गया और एक झटके में अपना लंड नियति की चौड़ी हो चुकी चूत में घुसा दिया।

लंड अंदर जाते ही नियति कराह उठती है कि उसकी इस पोजीशन में अशोक के लंड के अंदर जाने का रास्ता कुछ ज्यादा ही खुल गया था।

अब जब अशोक ने धक्के मारने शुरू किये तो उसका लंड नियति की चूत में कुछ ज्यादा गहरा हो गया और उसकी चूत को रगड़ने लगा।

नियति ने इस पोजीशन में कभी नहीं चुदवाया था और उसकी फंतासी उसकी सबसे मजेदार चुदाई में बदल गई।

निहाल ने नियति के सपने के हिसाब से चिल्लाते हुए अशोक को भड़काया कि वो और जोर से चोदे। एक पति अपनी पत्नी को चोदने की रिक्वेस्ट इतनी जोर से कर रहा था कि अशोक का जोश और बढ़ गया और उसने अपने ज्यादा गहरे झटके मारे और नियति ऊह आह करते हुए सिसकियां मारने लगी।

निहाल: “जोर से चोद अशोक, जोर से चोद मेरी बीवी को। चूत फाड़ ले चोद चोद कर।”

नियति: “उई माँ, धीरे। आआह… ऊह… उहुहुहु। आहाहा.. आहाहा। ओह माँ, मर गई। आआह.. आह.. मर गई। उहुहुहू”

कुछ मिनट तक ये चिल्लाने, भड़काने और चोदने का खेल चलता रहा और नियति की गहरी सिसकियों से अशोक का हौसला बढ़ता गया और उसने अपनी स्पीड तेज कर दी।

उसके इन तेज झटके से जल्दी ही नियति झड़ने के करीब आ गई।

नियति: “हां हां हां आ चोद दे…हा चोद दे..उई ..उई..माँ…हा…याहा…हा यहाँ पर…आह आह आह”

थोड़ी देर में ही नियति झड़ गई पर अशोक ने अपने घरे तेज झटके जारी रखे। कुछ सेकंड के बाद अशोक हल्का हल्का चिल्लाने लगा और अपने झटके एक सेकंड के गैप पर जोर जोर से मार रहा था।

नियति ऐसे ही चिल्लाती रही और अब अशोक भी जोर की सिस्किया मारता हुआ उसकी चूत में झड़ गया। निहाल ने नियति की तांगे रिलीज कर दी और नियति दोनों हाथ फैलाए पड़ी रही। उसकी सारी एनर्जी ख़तम हो गई थी।

शुभम् और शिल्पा की फंतासी पूरी होने के बाद नियति की फंतासी पूरी हो चुकी थी जहां उसका पति उसकी तांगे पकड़े अशोक से चुदवाने की गुहार कर रहा था। अब नियति और अशोक दोनों झड़ चुके थे।

थोड़ी देर बाद उथकर नियति ने अपने कपड़े पहने। अब आखिरी बार ओमी की फंतासी थी और उसने मुझे चोदना था।

मैं: “एक बार फिर से सोच लो ओमी, बहुत गंदा होगा एक पीरियड वाली औरत को चोदना”

ओमी: “जिसे छोड़ रहा हूँ वो सबसे ख़ूबसूरत है, यही काफ़ी है”

मैंने वॉशरूम में जाकर अपना पैड हटा दिया और अपनी चूत की अच्छे से सफाई कर दी ताकि ओमी को गंदा ना लगे। अब मैं बाहर आ गई हूं और मैं अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो कर लेट गई।

निहाल और शुभम ने मेरा एक हाथ नीचे बिस्तार से सता कर पकड़ा और दूसरे हाथ से मेरा एक एक मम्मा पकड़ उसे हल्की सी मसाज देने लगे।

नियति मेरी एक आंख से लेकर कमर तक अपनी उंगली फिराते हुए सरसराहट सा करने लगी तो दूसरी तरफ ओजस्वी ने भी यहीं किया। शिल्पा ने मेरी दोनों टैंगो और जांगो पर अपनी उंगलियां चलाते हुए सांसनी करनी शुरू कर दी।

सबका मकसद अब एक पीरियड वाली औरत को पूरा मजा देने का था। इतनी सारी उंगली मेरे शरीर के अंगो पर मचलती हुई मुझे बहुत ज्यादा मजा दिला रही थी और मैं मजे के मारे लंबी लंबी आहेन भर रही थी।

ओमी ने सुरक्षा भी नहीं पहनी थी, वो मुझे खुल कर महसूस करना चाहता था। ओमी मेरी दोनों टैंगो को मोड़ कर थोड़ा चौड़ा करते हुए बीच में बैठ गया।

फिर उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी चिकनी चूत में उसका लंड फिसला हुआ अंदर चला गया। उसने मुझे चोदना अब शुरू कर दिया था। मेर दोनों हाथ निहाल और शुभम ने पकड़े हुए थे और तांगे ओमी ने पकड़ रखी थी।

मेरे शरीर पर एक साथ इतने लोग की उंगली घूम रही थी। ओमी का लंड जल्दी ही मेरी चूत के पानी से लिपट चुका था और आस-पास बैठे लोग आह ऊह की आवाज करने लगे।

शायद चोदते वक्त जब भी ओमी का लंड मेरी चूत से थोड़ा बाहर आता था तो वो उसके लंड को मेरी चूत के रंगीन पानी से भीगा हुआ देख पा रहे थे।

मेरी एक स्पेशल ट्रीटमेंट वाली चुदाई हो रही थी. ओमी का लंड मेरे अंदर के पानी से टकराते हुए तेज तेज आवाज कर रहा था। एक नशीला सा माहौल बन गया।

ओजस्वी: “ये देख कर मेरी भी पीरियड में चुदाई की इच्छा हो रही है। पर अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो लम्बे समय तक ओमी को मौका नहीं मिलेगा। ओमी जितना चोदना है, अभी जोर लगा के कर लो, फिर नहीं मिलेगा काफी महिनो तक”

नियति: “चिंता मत करो, नौ महीने में ओमी का ध्यान मैं रखूंगी। उसको जब चाहे मेरे पीरियड या बिना पीरियड के चोदना है तो चोद सकता है। निहाल तुम्हें कोई आपत्ति नहीं?”

निहाल: “थोड़ी देर पहले किया वैसे ही मैं तुम्हारे पाँव उठा कर बैठा रहूँगा और ओमी को खुश करता रहूँगा जब वो तुम्हें छोड़ेगा”

ओमी को ये सुनकर या फिर भी जोश आ गया और उसने और भी जोर लगा कर मुझे तेज-तेज झटके मार चोदना चालू किया।

इधर मैं झड़ने को आई और मेरी सिस्किया तेज हुई और दूसरे लोगो ने मुझे खुश किया कि “और जोर लगाओ, और जोर लगाओ” जैसे मैं चुदवा नहीं रही थी बाल्की बच्चा पैदा कर रही थी।

ओमी ने जोश में आकार और तेजी से झटके मारने शुरू कर दिए। मेरा फ्यूज उड़ चूका था और अब मैं दहाडे मरते हुए झड़ने लगी।

निहाल और शुभम् मेरे मम्मे लगतार दबाते हुए मुझे मजा दिला रहे थे। लड़कियों की उंगली मेरे शरीर को तरंगित किये जा रही थी।

अगले कुछ सेकंड में सब शांत हो गया और मैं झड़ गई, सिर्फ ओमी के मेरी चूत पर पड़ते झटकों की आवाज थी। अब बारी ओमी के दहाड़े की थी. आआह आह आह की तेज आवाज के साथ ओमी ने अपना पानी मेरी चूत में चोदना शुरू कर दिया और वो भी झड़ गया।

ओमी ने अपना लाल रंग से साना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और सब लोगो ने विजयी तालियां बजाई। शिल्पा ने भी माना कि पीरियड में भी लड़कियों को मजा लेने का अधिकार है।

ओमी को अच्छे से सफाई करने को बोला गया और मैंने भी अपनी सफाई की। मैं बहुत हल्का और संतुष्ट महसस कर रही थी। सारी थकान जैसे उतर गई थी.

हम लोगों ने आराम से बैठ कर लंच का मजा लिया। लंच के बाद हम लोग फिर तैयार थे. हम लोग बैठ कर सबके सीक्रेट पूछने लगे। फिर तय हुआ कि सब लोग अपने वो सीक्रेट बताएंगे जो उनके पार्टनर को भी नहीं पता।

रिश्ते ख़राब ना हो ये सोचते हुए सीक्रेट बताते हैं वक़्त वो अपने पार्टनर को काम से बाहर भेज सकते हैं जिसे वो सीक्रेट नहीं सुनाना चाहते।

निहाल, नियति, ओमी और ओजस्वी क्यों कि एक दूसरे को जानते हैं तो वो चारो जब अपना सीक्रेट सुनाएंगे तो वो बाकी तीनों को कमरे से बाहर भेज सकते हैं।

निहाल ने नियति और ओमी को बाहर भेजा क्यों कि वो दोनों भाई बहन हैं तो एक दूसरे को सीक्रेट बता सकते हैं।

निहाल: “ओजस्वी की शादी के बाद, ओमी के साथ मन करने पर भी मैं और ओजस्वी मिलते रहते थे और हमारे शारीरिक संबंध भी चालू थे”

शायद यही कारण था कि पहले दौर की चुदाई के वक्त निहाल और ओजस्वी ने एक दूसरे को नहीं चुना क्यों कि वो तो काफी समय से एक दूसरे को चोदते आ रहे हैं।

फिर नियति का नंबर था. उसने ओजस्वी, निहाल और ओमी को बाहर भेजा।

नियति: “शादी के पहले केवल शारीरिक संबंध, जिसकी वजह से मैं गर्भवती हो गई थी। जिसने मुझे गर्भवती किया वो बहुत करीब रिश्ते में थी तो शादी नहीं हो सकती थी और घर वालों ने घबरा कर मेरा गर्भपात करवा दिया था, इसी चक्कर में मैं अब कभी मां नहीं बन सकती।”

अगला नंबर ओमी का था और अपना सीक्रेट सुनाने से पहले उसने ओजस्वी, निहाल और नियति को बाहर भेजा।
ओमी: “एक बार मैं और मेरा दोस्त अपनी बीवी के साथ घूमने गए थे। हम दोस्तों को शरारत सूझी और अपनी बीवी को गोली देकर सुला दिया। फिर एक दूसरे की बीवी को चोदा। दोस्त ने बताया कि वो प्रोटेक्शन लगाना भूल गया था। उसके कुछ दिन बाद ही पता चला की ओजस्वी प्रेग्नेंट हैं मैंने ओजस्वी को नहीं बताया कि वो बच्चा मेरा नहीं है और अपने ऊपर ले लिया”

ओजस्वी ने ओमी और नियति को बाहर भेजा क्यों कि वो दोनों भाई बहन हैं तो आपस में बता सकते हैं।

ओजस्वी: “शादी के बाद भी निहाल से मिलने के दौरान एक बार हमने गलती से बिना प्रोटेक्शन के चुदाई की। उसके बाद मैं प्रेग्नेंट हो गई थी। हालांकी ओमी प्रोटेक्शन के साथ मुझे चोदता है फिर भी मैंने इल्जाम उस पर डाल दिया और वो मान भी गया। मेरा जो बच्चा है उसका बाप निहाल है ओमी को ये नहीं पता”

अब हम सब कन्फ्यूज हो जाएंगे. आख़िर ओजस्वी को गर्भवती किसने किया! ओमी के दोस्त ने या निहाल ने। पर इसका जवाब किसी के पास भी नहीं था।

अब मेरा नंबर था तो मैंने अशोक को बाहर भेजा
मैं: “मैं अपनी पड़ोसन के साथ एक शादी में गई थी और अपनी पड़ोसन के साथ कार में चुदवाया। उसके बाद उसकी मम्मी ने हमें पकड़ लिया था”
मेरी ये पूरी कहानी जानने के लिए मेरी पिछली कहानी “बेगानी शादी में सुहागरात मेरी” पढ़ सकते हैं।

अशोक ने सीक्रेट बताने से पहले मुझे बाहर भेज दिया था, मुझे नहीं पता उसने क्या सीक्रेट बताया होगा।

शिल्पा ने सीक्रेट बताया वक्त अपने पति शुभम को बाहर भेजा।

शिल्पा: “मेरे शुभम् के बड़े भाई से यानी मेरे जेठजी से नाजायज संबंध हैं। शुभम् की बीमारी से मैं टेंशन में रहती हूं। शुभम् तो सुबह काम पर चले जाते मगर दिन को उनके भाई घर पर ही रहते थे क्योंकि उनकी नाइट ड्यूटी रहती थी। उनकी बीवी टीचर हैं तो सवेरे जल्दी स्कूल जाती हैं…

एक दिन नहाने के बाद मैं अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी तभी जेठजी अचानक से मेरे कमरे में आ गए और फिर मैं मना नहीं बोल पाई और उनके साथ चुदवाया…

उस दिन के बाद जैसे ही सुबह भाभी और शुभम् काम के लिए जाते हैं जेठ जी मेरे कमरे में आकर मुझे चोद कर चले जाते हैं। मेरे चेहरे पर पकड़े जाने की टेंशन रहती है और शुभम को लगता है कि मैं संतुष्ट नहीं हूं इसलिए टेंशन है।”

शुभम् ने शिल्पा को बाहर भेजा और अपना सीक्रेट बताया।

शुभम: “शादी के पहले से मेरे मेरी भाभी के साथ संबंध हैं। भाई नाइट ड्यूटी पर रहता था और भाभी रात को मेरे साथ अकेले तो ऐसा चलता रहा। उसका वक्त मुझे पता चला कि मैं जल्दी झड़ जाता हूं…”

मेरी शिल्पा से शादी के बाद भी भाभी ने मुझे चोदना नहीं छोड़ा और मुझे उनके साथ चुदाई की डबल ड्यूटी करनी पड़ती थी। पहले शिल्पा को निपटने के बाद मैं भाभी के कमरे में जाता हूं। मेरी शादी के बाद अब भाभी को ज्यादा मजा आने लगा है”

सब लोगो ने वादा किया कि वो सुने हुए सीक्रेट किसी को नहीं बताएंगे। वैसे भी उनके सीक्रेट जानकर सब मेरे साथ ऐसा भी होता है।

अशोक ने बोला कि अब हम एक दूसरे को चैलेंज देते हैं, अगर किसी ने वो चैलेंज नहीं किया तो उसका डार्क सीक्रेट उसके पार्टनर को बता दिया जाएगा।

सब लोगो ने इसका विरोध किया कि ये नियम के खिलाफ हैं। मगर अशोक ने समझा कि सीक्रेट को सीक्रेट रखना है तो उसकी कीमत देनी होगी। इस से खेल और रोमांचक होगा तो करना चाहिए।

सब लोग डरे हुए थे कि सीक्रेट आउट हुआ तो बुरा होगा पर हमसे बचने का तरीका था कि चैलेंज पूरा कर ले, तो सबको थोड़ी राहत भी थी।

जब डर बहुत हो तो चुनौती का मजा भी बढ़ जाता है तो सारे मर्द मान गए पर हम लड़कियां बहुत सही हुई थीं। सब मर्दों के लिए ये मौका था कि वो अपने पार्टनर के सीक्रेट भी जान लें।

सारी लड़किया मान गई क्यों कि उनको अपने पति के सीक्रेट जाने थे। सबको अपने पार्टनर के सीक्रेट जान लेने की उत्कृष्टता थी तो सबको उनके पार्टनर ही चैलेंज देने वाले थे।

अगर कोई अपने चैलेंज से इंकार करता है तो उसका सीक्रेट उसके पार्टनर को बता दिया जाएगा। मुझे भी टेंशन थी कि कहीं मेरा सीक्रेट मेरे पति को पता चला तो मेरी क्या इज्जत रह जाएगी।

उनकी नजरो में मैं एक सीधी साधी औरत थी। ये बात सभी को पता थी कि उनके पार्टनर उनको मुश्किल चैलेंज देने वाले हैं। सबको 5 मिनट दिए गए अपना चैलेंज सोचने के लिए।

सबसे पहले शुभम् तैयार था। उसका तो यहां आने का मकसद ही था कि वो अपनी पत्नी को संतुष्ट कर पाए। उसने शिल्पा को चैलेंज दिया कि वो तीनो मर्दो से एक साथ चुदवाये।

ये सुन शिल्पा की हालत खराब हो गई है। हम सब में सबसे कम उम्र की थी और एक साथ 3 मर्दो से चुदवाना उसके लिए कहती थी।

वो थोड़ा सोच में पड़ गई कि हां बोलने पर उसके साथ क्या होने वाला है और ना बोला तो उसका उसके जेठजी के साथ संबंध उसके पति को पता लग जाएगा। उसको हा बोलना पड़ा.

अब शिल्पा की बारी थी शुभम को चैलेंज देने की। उसने चैलेंज दिया कि उसके पति को नंगा होकर 3 मिनट तक बालकनी में खड़ा रहना होगा।

सब लोग हंस पड़े क्यों कि बालकनी में दिन के उझाले में खड़े होना मतलब बाहर मौजुद सारे लोग एक नंगे मर्द को देख सकेंगे। शुभम का राज भी गहरा था, वो मन गया।

ओमी ने ओजस्वी को चैलेंज दिया कि वो अपनी गांड मारवाए क्यों कि वो कभी अपनी गांड नहीं मारने देती है। ओजस्वी को डर लगा कि उसका बच्चा उसके पति का नहीं है ये राज पति के सामने बाहर आ जाएगा, इसलिए उसका मन मार कर हा बोलना पड़ा।

अब बारी ओजस्वी की थी और उसने ओमी को बोला था कि “तुम्हें लड़कियों की गांड मारने में बहुत मजा आता है ना, तो तुम्हें भी महसूस होना चाहिए कि कितना दर्द होता है”। ओजस्वी ने ओमी को चैलेंज दिया कि वो किसी एक मर्द से अपनी गांड मरवायेगी।

ओमी का चेहरा देखने लायक था. उसने सोचा नहीं था कि उसका चैलेंज उसी पर भारी पड़ जाएगा। उसने ना बोल दिया. अगर वो हां बोल भी देता तो कौन सा मर्द दूसरे मर्द की गांड मारने को तैयार होता। वाहा सभी मर्द सीधे।

अब बारी निहाल की थी और उसने नियति का राज जानने के लिए उसको टास्क दिया कि वो बाहर जाए और किन्ही तीन मर्दों से अपने होठों पर किस करवा ले।

नियति को शायद कोई फर्क नहीं पड़ा कि उसका राज बाहर आ जाए तो उसने मना कर दिया। उसने अब निहाल को चुनौती दी कि वो एक मर्द का लंड चूसे। निहाल ने भी मन कर दिया. उसको कम जोखिम था क्योंकि नियति वैसे ही उसे अनुमति दे चुकी थी कि वो ओजस्वी को चोद सकता है।

मुझे अशोक को चुनौती देना था और मैंने सोचा कोई आसान चुनौती देती हूं ताकि वो भी मुझे आसान चुनौती दे। मैंने उसको चैलेंज दिया कि वो किसी भी एक लड़की से अपना लंड चुसवाने के लिए मना ले। ये तो उसके लिए अच्छा ही था तो उसने हा बोल दिया।

पर बाकी लोगो ने विरोध किया कि मैंने धोखा देकर आसान चुनौती दी है

अशोक ने मुझे अपना सीक्रेट छुपाए रखने के लिए एक चैलेंज दिया कि मैं बाहर किन्ही दो मर्दो से अपने मम्मे चूसते हुए सेल्फी लू। मैं ये नहीं कर सकती थी, सोचा वैसे भी यहां इतने मर्दों के साथ चुदवाया है तो पति को ये पता चल जाएगा कि मैंने उनके पड़ोस के साथ चुदवाया है तो क्या फर्क पड़ता है।

फिर सोचा मेरी इज्जत पति की नजरों में और भी गिर जाएगी। यहां मैंने सभी पति की अनुमति से किया है पर अपनी पड़ोसन के साथ तो मैंने पति की बिना अनुमति के किया है। डोनो तरफ प्रशंसक चुकी थी।

हालांकी अपने मम्मे दिखाना कोई बहुत बड़ा मुश्किल काम नहीं था पर इस अंजानी जगह पर सामने वाला मर्द पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचेगा और कहीं उसने कोई गलत हरकत कर दी तो!

मुझे मना ही करना पड़ा, और कोई उपाय नहीं था। मगर समस्या ये थी कि खुले में कैसे करूं, काफी लोग होंगे। कोई अकेला मैं होता तो फिर भी चलता।

खुले में कारवाने से बेहतर था कि अकेले में किसी मर्द को अपने मम्मे दिखा दूं। तो मैं चल पड़ी बाहर की तरफ। साथ में अपना पर्स ले लिया, जिसमें मेरा फोन था सेल्फी लेने के लिए।

एक ठरकी अंकल भी मिले जो सफारी पर जाने के दौरन हम लड़कियों को घूर रहे थे। हमसे मेरा काम हो जाता है पर मैंने हमसे बचना ही उचित समझा।

फिर एक विदेशी दिखाई दिया जो एक लड़की के साथ था। मैंने सोचा ये लोग खुले विचारों के होते हैं तो मेरा काम हो जाएगा।

हमारे विदेशी के साथ उसकी गर्लफ्रेंड थी या पत्नी ये नहीं पता था। मैं उनके पास गई मदद लेने के लिए।

मैंने उनको बताया कि हम दोस्तों में शर्त लगी है और मुझे क्या चैलेंज मिला है। वो दोनों अपनी स्थानीय भाषा में बात करने लगे जो मुझे समझ नहीं आया। वो डोनो हंस रहे थे.

उसने मुझे बताया कि वो लड़की उसकी गर्लफ्रेंड है और वो नहीं मान रही है। मैंने उस लड़की से रिक्वेस्ट किया पर वो नहीं मानी। मैं अब दूसरी तरफ चली गई जहां कोई अकेला मर्द मिले पर सारे या तो अपने परिवार या दोस्तों के साथ।

मैंने जितना सोचा था मुझे ये सब हमसे मुश्किल लग रहा था। मुझे दो जवान लड़के दिखा दिए। सोचा एक साथ दोनों से अपना चैलेंज पूरा कर सकती हूं पर डर भी लगा कहीं ये दोनों मेरे साथ गलत हरकत न कर दे।

मेरी नजर उन अधेड़ उम्र के आदमी से मिली जो पहले भी हम लड़कियों को घूर चुका था। मैंने अपनी नजर हटा ली और वहां से आगे चली गई। थोड़े आगे जाकर पीछे से किसी ने आवाज लगाई। देखा तो वही घूरने वाला आदमी था।

उसने आगे बढ़कर पूछा कि वो कोई मदद कर सकता है पर मैंने मना कर दिया। उसने फिर पूछा कि मैं कुछ ढूंढ रही हूं तो वह मदद कर सकता है और मैं उस पर भरोसा कर सकती हूं।

मुझे भी लगा कि ये सिर्फ जवान लड़कियो के करीब आकर उनको देखना चाहता है तो मैं उससे नाराज हो गई। उसकी नज़र मेरे सीने पर थी. मैं सोच में पड़ गई, क्या ये सही रहेगा।

मैंने उसको अपने चैलेंज के बारे में सब सही बताया। उसकी तो आंखें चमक उठीं और अपने हाथ मेरे शर्ट पर मम्मो के ऊपर रख दिया। मैने पीछे हट कर उसका हाथ हटा दिया।

मैंने उसको चेतावनी दी कि कोई बदतमीजी नहीं करनी, मैं जो बोलूंगी वही करना है। वो अपनी गर्दन हिलाते हुए बड़ी मुस्कान के साथ हा करता रहा।

वाहा कोई नहीं था पर खुली जगह थी, मैंने उसको थोड़ी साइड में आने को कहा। उसके कहने पर हम थोड़े आगे जाकर एक झड़ी के पीछे चले गए जहां कोई देख नहीं सकता था।

थोड़ा डर लग रहा था और दाए बाए देखते हुए मैंने अपनी शर्ट के बटन खोल कर मम्मे बाहर निकाल दिए।

मैंने अपना फोन पकड़ा और सेल्फी के लिए तैयार थी। हमें आदमी ने मेरे मम्मे अपने हाथों में दबा लिया और दबा दिया। मैं उसको दूसरे हाथ से झटका दे सकता हूं और उसे बता सकता हूं कि उसको सिर्फ मुंह में निप्पल लेना है।

पर वो तो मेरे मम्मे देख कर पागल हो चुका था। मैंने उसको थोड़ी देर के लिए बुलाया और अपने मम्मे फिर शर्ट के अंदर कर दिए।

मैंने उसको पूछा कि उसको मेरे हिसाब से करना है या नहीं। उसने अनुरोध किया कि मैं एक बार उसको चोदने दूं तो वो मेरी पूरी बात मान लेगा। मैंने उसको साफ बोल दिया कि मैंने जो बोला है उसे अललवा कुछ नहीं मिलेगा।

मगर वो मान ही नहीं रहा था और लगतार मुझे चोदने की बात करता रहा। मैंने अपनी शर्ट के बटन वापस लगाए और वहां से बहार आई और दूसरा मर्द ढूंढने लगी।

अगले कुछ मिनट तक भी कोई नहीं मिला। हा वो घूरने वाला आदमी 2-3 बार फिर से दिखा और डर से इशारा करता रहा।

इस बीच अशोक का फोन भी आ गया कि चैलेंज नहीं हो रहा तो आ जाओ और सीक्रेट बता दो। मैंने थोड़ा टाइम और मांगा. मेरे पीछे वही आदमी खड़ा था और फिर रिक्वेस्ट करने लगा।

मैंने उसको बोला कि मेरा पीरियड है और मैं कुछ नहीं करवा सकती। ज्यादा से ज्यादा वो मेरे मम्मे चूस सकता है। उसने बोला कि उसका एक दोस्त भी है तो उसको भी बुला ले।

उसने मेरे फोन पर बात सुन ली थी कि मुझे दो मर्दो की जरूरत है। मैंने उसको साफ बोल दिया कि बुला ले पर ज्यादा उम्मीद ना रखे। मैं उनको मम्मे चूसने देने के अलावा कुछ नहीं दे सकता।

मैं हमारे चैलेंज के लिए मना भी नहीं कर सकती थी, मन करती तो बाकी के लोग मेरा सीक्रेट मेरे पति को बता देते।

हमें आदमी ने फोन करके अपने दोस्त को बुला लिया। वो भी उसी की उम्र का था. उसने उसको सब कुछ बता दिया और वो मर्द भी बहुत खुश हुआ।

वो दूसरे आदमी पहले से भी ज्यादा ख़राब था। वो तो मुझसे डील करने लग गया। उसने कहा कि काम से कम गांड मारना होगा तो ही मानेंगे।

मैंने वहां से जाना ही ठीक समझा और ना बोल दिया। वो लोग थोड़ी देर मेरे पीछे-पीछे चलते हुए मुझे मनाते रहे। मुझे लगा वो लोग मेरी शर्तो पर मान जायेंगे पर वो लोग रुक गये।

मैं उनसे थोड़ा दूर आ गई और सोचने लगी कहा फैन्स गई। इतना सिंपल सा दिखने वाला टास्क नहीं हो पा रहा।

अब अगर मैं अपने लोगो को अपना चैलेंज बता कर रिक्वेस्ट करूंगी तो थोड़ी देर बाद यहां सब लोगो को पता चल जाएगा। दूसरे लोग पता नहीं क्या शर्त रखेंगे।

मैंने सोच लिया कि मेरा राज मेरे पति को पता चल कर ही रहेगा और जिंदगी भर मेरे पति हमसे बात का फायदा उठा कर मुझसे कुछ भी करवाएंगे।

तभी वो दोनों आदमी पास आ गए और बोले किसी एक को गांड मारने दो और दूसरे का लंड चूस लेना ताकि दोनों का काम हो जाए।

मुझे लगा कि इससे बेहतर डील नहीं मिलने वाली है। सीक्रेट बचाना है तो करना पड़ेगा और मैं मान गयी। हम तीनो अब उसकी झाड़ी के पीछे आ गये।

उन दोनों ने फैसला किया कि पहले वाले आदमी का मुख्य लंड चुसुगी और दूसरा वाला मेरी गांड मारेगा। मैंने उनको कहा कि पहले वो मेरे मम्मो को चूस कर सेल्फी लेने दे पर वो भी होशियार थे, नहीं माने।

मैने अब झुक कर खड़ी हुई और अपनी पैंट नीचे कर अपनी गांड दूसरे आदमी के तरफ की। मेरे सामने वो पहला आदमी आया और अपनी पैंट नीचे कर अपना लंड मेरे मुँह के पास ले आया।

इधर मैं उसका लंड पकड़े मुंह में लेने लगी तभी जोर का झटका लगा और दूसरे आदमी का लंड मेरी गांड में था।

दर्द से मेरी एक आह निकली और मैंने पहले आदमी का लंड अपने मुँह में ले लिया। मुझे चूसने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि उसने मेरे मुँह में ही लंड से धक्के मारने शुरू कर दिए थे।

मुझे पीरियड था तो मैंने अपनी चूत में टैम्पोन लगा रखा था तो ठीक था, वरना सेनेटरी पैड लगाया होता तो गांड मरवाने में दिक्कत होती।

फिल्हाल एक जवान लड़की को चोदने के मौके को पाकर वो दोनों अधेड़ उम्र के आदमी पागल हो चुके थे। डोनो बेरहमी से मुझे झटके मारते हुए चोद रहे थे।

खास तौर पर मेरी गांड में जोर जोर से झटके पड़ रहे थे और मैं दर्द से दर्द महसूस कर रही थी। मैं उसको धीरे-धीरे मारने को बोल रही थी पर वो माने को तैयार ही नहीं था, बल्की मेरी सिसकियाँ सुन और जोर से चोदने लगा।

मैंने सोचा मैंने गलत फैसला ले लिया जो यहां आ गई। पर अब तो जो होना ही था तो अब मना करने से कोई फ़ायदा नहीं था। मेरा पैंट जो जांघो पर अटका था, इन सब झटको में खिसका हुआ नीचे जोड़ी तक आ गया।

मेरे मुँह में लंड डाले आदमी ने हाथ आगे बढ़ा कर मेरा शर्ट हटाने की कोशिश की। मैंने मन किया पर उसने बोला कि मम्मे चूसने के लिए मुझे बाद में शर्ट हटाना ही पड़ेगा।

पीछे वाले आदमी ने भी गांड मारना रोक कर मेरा शर्ट उतारने की कोशिश की। मैं तो वैसे भी दर्द के मारे बेहाल थी तो थोड़ी देर गांड पर झटके से राहत मिलने से अच्छा लगा और उसको शर्ट निकाल दिया।

क्या चक्कर में मैं अब पूरी नंगी हो चुकी थी। मुझे पूरा नंगा देख कर उन दोनो के लंड और भी फुल गए और झटके तेज हो गए। मैंने उनको इशारों से बोला कि बहुत हुआ अब रुक जाएगा।

पर वो बोले कि बात तो पूरी मरने की हुई थी, बिना पूरी किये वो नहीं रुकेंगे। अगले कुछ सेकंड में उसका लंड मेरे मुँह में और भी अंदर घुस कर झटका मारना बंद हुआ और हल्के से कम्पन करता हुआ मेरे मुँह में गरम चिकना पानी डाल दिया।

मुझे बहुत गंदा लगा. उसने लंड मेरे मुँह से निकाला और मैंने सारा गंदा पानी अपने मुँह से बाहर उगल दिया। पीछे से गांड में झटके पड़ने जारी थे।

पहले आदमी ने मेरे मम्मो को मसलना शुरू कर दिया था। दूसरा आदमी घरे झटके मारता हुआ सिसकियाँ मारने लगा। मुझे लग गया कि अब ये भी झड़ने वाला है। अगले कुछ सेकंड में उसने भी अपना पानी मेरी गांड में खाली कर दिया।

मेरी गांड में थोड़ा दर्द होने लगा था और मैंने अपने पर्स से टिश्यू निकाल कर अपनी गांड को साफ किया। मुँह का स्वाद अभी भी गंदा था और पास में पानी नहीं था।

मैने अपने कपड़े पहन लिये। शर्ट के बटन खुले रखे ताकी वो सेल्फी ले पाउ। उन डोनो ने मेरे मम्मे चूसना चालू कर दिया और मैंने जल्दी से एक सेल्फी में डोनो को कैप्चर कर लिया।

मगर वो दोनो मेरे मम्मो को चूसते ही रहे और रुक ही नहीं रहे। थोड़ी देर रिक्वेस्ट करने के बाद भी वो नहीं माने तो मैंने उनको धमकी दी कि मैं चिल्ला कर लोगो को बुला लुंगी।

वो फिर भी नहीं माने, उनको पता था कि मैं नहीं चिल्लाऊंगी। मैंने उन दोनो को धक्का देते हुए पीछे हटी और उनको डांटते हुए अपनी शर्ट के बटन बंद किए और वहां से निकल कर कॉटेज की तरफ लगभाग भागे हुए आए।

मुझे अपने मम्मे दो अंजान लोगो से चुसवाने का चैलेंज पूरा करने के चक्कर में अपनी गांड और मुँह भी मारवाना पड़ा। मुहं में अभी गंदा गंदा स्वाद आ रहा था और उल्टी जैसा हो रहा था। जबरदस्त डाली हुई चीज किसको अच्छी लगती है।

मैने हमारे कॉटेज का दरवाजा 2-3 बार खटकाहटाया। अंदर से आवाज आई कौन है, मैंने कहा मैं हूं तो नियति ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर लिया। उसने बताया कि अंदर चलो, शिल्पा का चैलेंज शुरू हो चुका है।

अन्दर से शिल्पा की सिसकियाँ साफ सुनाई दे रही थीं। मैं और नियति बेडरूम का दरवाजा खोल बेडरूम में गई। कमरे में शिल्पा की हल्की चीखों की आवाज गूंज रही थी और बीच बीच में एक मर्द के जोर लगाने की आवाज आ रही थी।

मैंने देखा शिल्पा पूरी नंगी बेड पर लेती थी और निहाल उसको तेजी से चोद रहा था। शिल्पा के दोनों पांव मुड़कर हवा में और निहाल उसकी दोनों जांघों पर हाथ रखे जोर लगा रहा था।

अशोक और ओमी पास में ही शुद्ध नंगे हो कंडोम पहने खड़े थे। वो डोनो अपना लंड पकड़े थोड़ी देर में रगड़ कर कड़क रखे हुए थे।

थोड़ी देर में निहाल हटा और शिल्पा की चीखें बंद हो गईं। उसने अपनी तांगे नीचे कर पूरी सुला दी। निहाल की जगह मेरे पति अशोक ने ली और शिल्पा की टांगें एक बार फिर पहले की तरह उठा कर अपना लंड शिल्पा की चूत में डाल कर चोदना चालू किया।

शिल्पा एक बार फिर हल्की चीखें मारना शुरू हुई और अशोक ने भी सिस्किया मारना शुरू किया। इसी तरह हर 4-5 मिनट में वो मर्द बारी बारी से शिल्पा को चोद रहे थे।

इस बीच बाकी के लोगो ने मेरे चैलेंज के पूरा होने के बारे में पूछा और मैंने उनको बारी-बारी से सबूत वाली सेल्फी दिखाई।

सब लोग फोटो देख हंसने लगे और मेरी तारीफ करने लगे कि मैंने एक साथ दोनों मर्दों से अपना चैलेंज करवा लिया। अब तो मैं ही जानती थी कि इसके लिए मुझे क्या पापड़ बेलने पड़े।

शिल्पा की इस चुदाई में मैं भूल ही गई कि मेरा मुँह अभी भी उस आदमी के पानी से गंदा हुआ था। मैं वॉशरूम में गई और कुल्ला कर अपना मुंह साफ किया और अपनी गांड को पानी से साफ किया और फिर मैं सोचने लगी कि शिल्पा वाले को मेरा चैलेंज आसान ही था।

शिल्पा अब तक पूरी पसीना पसीना हो चुकी थी। जब भी कोई मर्द उसको चोदने के बाद दूसरे को मौका देता, हमें शिल्पा की चूत दिखती। वो इतनी देर तक चुदवाते हुए अब पूरी तरह से खुली रह गई थी और चूत के ऊपर का हिस्सा समझ कर थोड़ा फुल गया था।

पता चला शिल्पा को चोदते हुए 45 मिनट हो चुके हैं और फिर शुभम ने बोला कि अभी जो मर्द कर रहा है वो फाइनल है और फिर चैलेंज पूरा हो गया मान लेंगे।

हमें वक्त ओमी चोद रहा था। उसको पूरी खुली छूट मिल गई और उसने 4-5 मिनट के बाद तब तक चोदता रहा जब तक वो झड़ नहीं गया। क्या बीच पता नहीं शिल्पा कितनी बार झड़ चुकी होगी।

वो लेती रही और थोड़ा आराम करती रही। अपना सीक्रेट छुपाए रखने के लिए उसने बड़ी कीमत अदा की थी। एक तरह देखा जाए तो हम लोग अपने पुराने पाप को छुपाने की सजा भुगत रहे थे,

इधर शुभम् ने अपने कपड़े खोल कर शुरू करना शुरू कर दिया था। फिर वो अपने चैलेंज के लिए बालकनी की तरफ गया और हम सब लोग उसके पीछे। नियति ने आगे जाकर चेक किया था कि बाहर कुछ लोग खड़े थे जो बालकनी को देख सकते थे।

शुभम् बालकनी में गया और नियति को अपने गले लगा लिया। नियति ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की पर शुभम ने नहीं छोड़ा। उसको नियति के रूप में एक दीवार मिल गई।

3 मिनट होने के बाद ही उसने नियति को छोड़ा और अंदर भाग आया। कहने को तो उसने अपना चैलेंज पूरा कर लिया था और 3 मिनट तक वो बालकनी में था।

यहाँ पर उसने अपना दिमाग लगाया था। हलांकि उसने बताया कि 1-2 लोगो ने उसे देख लिया था इस तरह नंगे हो नियति को गले लगाते हुए। अब बारी थी ओजस्वी को उसका चैलेंज पूरा करना था।

ओमी अभी-अभी झड़ चुका था तो उसने मना कर दिया कि वो ओजस्वी की गांड नहीं मार सकती। निहाल ने बोला कि उसको भी ओजस्वी ने कभी गांड मारने नहीं दिया तो उसको मौका दिया जाए और शुभम तो पहले ही नंगा खड़ा था तो उसको भी ये मौका चाहिए था।

फैसला ओमी को करना था और सामने दो उम्मीदवार थे। तभी नियति की आवाज आई कि वो अपना चैलेंज करने के लिए तैयार हैं। निहाल ने बोला कि अब काफी देर हो चुकी है और वो पहले ही मन कर चुकी है तो उसका सीक्रेट बाहर आकर ही रहेगा।

सभी लोगो से पूछा गया और ये फैसला हुआ कि नियति को मौका मिलना चाहिए अपना सीक्रेट छुपाने का। शायद नियति मेरा चैलेंज पूरा होने से प्रेरित होकर अपना चैलेंज पूरा करने को मान गई थी। पर निहाल ने बोला कि अब वो चुनौती बदलेगा क्यों कि नियति ने पहले मना बोल दिया था।

बाकी लोगों ने भी सहमति जताई है कि बात तो सही है, नियति ने अपना फैसला बदला है तो निहाल को भी अपना चैलेंज बदलने का हक है।

निहाल ने अपना चैलेंज करने से वैसे ही मन बोल दिया था तो वो चाहता था कि अगर उसका सीक्रेट बाहर आये तो नियति का भी आये।

निहाल ने नया चैलेंज दिया कि अब नियति भी बाकी सब मर्दों से चुदवाये जैसा शिल्पा ने किया है। नियति ये सुन थोड़ा आगे हुई अपने फैसले पर।

नियति को सोचने का समय चाहिए था तब तक ओजस्वी का कार्य होना था। ओमी ने निहाल को ये मौका दिया। ताकी उसकी भी पुरानी इच्छा पूरी हो सके।

ओजस्वी ने अपने नीचे के कपड़े उतारे और नंगी हो गई। वो बिस्तर पर उल्टा लेट गई। निहाल ने अपना लंड उसकी गांड में जैसे ही घुसाया, ओजस्वी दर्द से कराह उठी।

निहाल ने अब पीछे से ओजस्वी को धक्के मार चोदना शुरू कर दिया और ओजस्वी पहली बार अपनी गांड चुदवाते हुए दर्द के मारे चीख रही थी।

थोड़ी ही देर में उसकी चीख एकदम शांत हुई और निहाल ने अपना लंड बाहर निकाल दिया था। उसने ओजस्वी को बिस्तार से उठा कर दीवार के पास खड़ा कर दिया और उसके पीछे आकार अपना लंड एक बार फिर ओजस्वी की गांड में डाल दिया और ओजस्वी और भी तेज दिखने लगी।

निहाल तेजी से धक्के मार रहा था जिस से ओजस्वी के बड़े भारी मम्मे ऊपर नीचे उछल रहे थे। ये देख शुभम् काबू नहीं रख पाया और आगे चलकर ओजस्वी का टीशर्ट निकलने लगा।

अब ओजस्वी पूरी नंगी खड़ी हो कर अपनी गांड मरवा रही थी। अब वो नजारा और भी हसीन हो गया था। अब हम ओजस्वी के नंगे मम्मो को उछालते हुए देख पा रहे थे। उसके निपल कील की तरह सामने खड़े थे।

शुभम एक बार फिर आगे गया और उसके मम्मो को दबा लिया। थोड़ी देर में अशोक भी आगे चला गया और शुभम को हटा कर खुद ओजस्वी के मम्मों को दबाने का मजा लेने लगा।

उसके बाद हम लड़कियों को भी मौका दिया। नियति और शिल्पा ने भी जाकर ओजस्वी के मम्मो को दबा कर देखा। मैं भी वाहा पहुची.

ओजस्वी के मम्मे तो मेरे छोटे छोटे हाथों में आ भी नहीं पा रहे थे। ऊपर नीचे उछलते हुए उसके मम्मे इतना तेज गति से हिल रहे थे कि मेरे हाथ पर चोट लग रही थी

उसके मम्मे सच में बहुत भारी थे। जैसी किसी पतली लड़की की छोटी गांड दबा रहे हो वैसे बड़े उसके मम्मे थे।

पीछे से चुदते हुए ओजस्वी और भी सेक्सी लग रही थी। उसकी सुडोल जंघे और गांड लुभा रही थी। दूसरे मर्दो की बीबी इच्छा हो रही थी कि वो भी उसकी गांड मारे।

वो भी ओजस्वी से अनुरोध करने लगे कि वो भी उसको मरने दे पर ओजस्वी तो दर्द के मारे चिल्ला रही थी।

नियति ने बोला कि वो अपने चैलेंज के बजाय ओजस्वी वाला चैलेंज कर सकती हैं। पर निहाल ने माना कर दिया कि उसका चैलेंज तो पहले वाला ही रहेगा।

निहाल चाहता था कि उसको नियति का राज़ पता चले। इसलिए मुश्किल टास्क रखा था। इतनी देर में निहाल जोर जोर से चोदते हुए ओजस्वी की गांड में झड़ गया और ओजस्वी को राहत मिली।

अशोक को चुनौती पूरी करनी थी। उसको किसी ने अपना लंड चुसवाना था और मैंने बाकी तीन लड़कियों को बोला कि वो ना माने।

अशोक ने तीन लड़कियों को मनाने की कोशिश की। ओजस्वी तो दर्द से अभी कर रही थी तो उसने मना बोल दिया। शिल्पा ने भी मना कर दिया।

नियति तयार हो गई थी. मैंने उसको मन बोला पर उसने कहा कि तुम अपने पति का सीक्रेट ना ही जानो तो अच्छा है। सुन लेने के बाद मैं चुप हो गई। पता नहीं ऐसा क्या राज़ था जो वो मुझे नहीं पता लगाना चाहता था।

अशोक ने अपना पैंट खोला और नियति ने बोला कि निहाल का चैलेंज भी मंजूर है जहां उसको बाकी के मर्दो से एक साथ चुदवाना है। नियति ने अब अशोक का लंड चूसना शुरू कर दिया ताकि अशोक का चैलेंज पूरा हो सके।

अब नियति ने अशोक के लंड को छोड़ा ही नहीं. चुस्ती ही गई. सब लोग समझ गए नियति क्या करना चाहती हैं। उसको बाकी तीनो मर्दो से चुदवाना है. ओमी पहला ही झड़ चुका है और अब वो अशोक का लंड चूसेगी भी झड़ा देगी। ताकी उसे सिर्फ शुभम से चुदवाना पड़े जो कि अकेला मर्द बचेगा।

सारा माजरा समझ कर अशोक ने अपना लंड नियति के मुँह से बाहर निकलने की कोशिश की पर नियति ने नहीं छोड़ा। आख़िर अशोक को धक्का देकर अपने आप को चुदवाना पड़ा।

नियति फिर अशोक के पास गई ताकि फिर चूस पाए पर अशोक नहीं माना। अब नियति को चुदवाना ही था बाकी के मर्दो से।

नियति को भी शिल्पा की तरह नंगा कर बिस्तर पर ले जाया गया और शुभम जो अब तक नंगा ही खड़ा था सबसे पहले तैयार था। वो सबसे पहले नियति पर टूट पड़ा और अपना पूरा जोर लगा कर तेज गति से नियति को चोदने लगा।

नियति उसकी स्पीड को देख कर पागल सी हो गई। वो ऊह आह करते हुए लगातार सिस्किया मार रही थी. इधर जल्दी ही शुभम अपनी बीमारी की वजह से झड़ने के करीब आ गया और झड़ने के पहले ही उसने अपना लंड बाहर निकाल दिया और अशोक को मौका दिया चोदने का।

अब अशोक ने नियति को चोदना शुरू कर दिया और नियति को आराम भी नहीं मिला। अशोक उसको कुछ मिनट तक चोदता ही रहा फिर शुभम ने बोला कि वो उसको मौका दे।

अभी शुभम् ने नियति को फिर पहले की तरह चोदना शुरू किया और एक बार फिर नियति तेज तेज सिस्किया मारने लगी थी, जब कि वो अशोक के साथ हल्की सिस्किया मार रही थी।

नियति की सिसकियाँ और आहों से पता चल रहा था कि कौन मर्द कितना तेज चोद रहा है। जैसे जैसे शुभम झड़ने के करीब पहुंचता उसका लंड और गहरी में जाता और नियति की सिस्किया और गहरी और तेज होती।

जल्दी ही शुभम् ने बोला का वो झड़ने वाला है और अब बदलाव नहीं करेगा। उसने घरे झटके मारे और उधर नियति मजे के मारे और सिसकियाँ मारने लगी।

नियति दिखते हुए झड़ गई और उसके बाद शुभम् भी झड़ गया। उसके हट जाने के बाद अशोक ने मोर्चा संभाल लिया और नियति को चोदना शुरू कर दिया।

नियति अपने झड़ने से संभल भी नहीं पाई थी और अशोक उसको चोद रहा था। थोड़ी देर वो शांत रही पर अशोक के पड़ते झटके से उसकी सिसकियाँ फिर शुरू हो गई।

इधर निहाल ने ओमी को कपडे खोल तयार रहने को कहा। नियति दिखते हुए निहाल को मना बोल रही थी। निहाल उसको कन्विंस कर रहा था कि वो चैलेंज को छोड़ दे वरना वो ओमी को भी चोदने के लिए भेज देगा।

अशोक ने अब चोदना बंद कर दिया और ओमी को आने दिया। नियति का दिमाग ख़राब हो गया। ओमी में इतना जोश नहीं बचा था तो धीरे-धीरे चोद रहा था।

नियति को इस से कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था। निहाल ने आगे बढ़कर ओमी को पकड़ कर आगे पीछे करना शुरू किया, ताकि जोर के धक्के लगे और उसका असर भी दिखा।

टेक धक्के से ओमी का भी मूड बनने लगा था और नियत को भी तेज घरे धक्के महसूस हो रहे थे। थोड़ी देर में निहाल भी थक गया और अशोक ने ओमी को उतारने के लिए बोला और उसकी जगह ले ली।

अशोक ने अब थोड़े आराम के बाद पूरी एनर्जी बटोर ली थी और तेज-तेज झटके मारते हुए नियति को चोदना जारी रखा। कुछ ही मिनटों में नियति तेज आवाज करते हुए एक बार फिर झड़ गई।

अशोक अब भी अपने उफान पर नियति को चोदता रहा और नियति पागल हुई जा रही थी। अगले कुछ मिनट बड़ी मुश्किल से निकले और नियति मजे में दिख रही थी और अशोक ने झड़ते हुए उसको और तेजी से चोदा।

हम अपने रहस्यों को सामने आने से बचाने के लिए दिए गए मुश्किल चुनौतियाँ कर रहे हैं। शिल्पा के बाद अब नियति भी सभी मर्दो से चुदवा रही थी।

अब आखिरी मर्द ओमी बच्चा था और वो आगे बढ़ गया। नियति ने बोला कि उसकी चूत अब थक चुकी है। निहाल ने बोला कि नहीं करने दिया तो तुम्हारा सीक्रेट बताने दो।

नियति अब उल्टा लेट गई और ओमी को कहा कि चूत की बजाय गांड मार दो भाई। निहाल ने आपत्ति जताई पर बाकी लोगों ने बोला कि कुछ भी मारो चलेगा।

ओमी ने अपनी बहन नियति को उठाया और ओजस्वी की तरह ही नियति को दीवार की तरफ मुंह कर खड़ा किया और उसको पूरा नंगा कर दिया। फिर उसने अपने कपड़े उतारे।

जिस तरह निहाल ने ओमी की बीवी ओजस्वी को नंगा कर खड़े-खड़े गांड मारी थी अब ओमी जैसा उसका बदला ले रहा था निहाल की बीवी नियति की गांड मार कर। ओमी ने नियति के पीछे जाकर अपना लंड डाल दिया पर नियति नहीं दिखी।

ओमी ने उसकी गांड की बजाई चूत में ही लंड डाल कर चोदना शुरू कर दिया था जहां नियति नहीं चाहती थी। ओमी खिलखिला कर हंस पड़ा। फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला और गांड में डाल कर चोदना शुरू किया।

नियति की गांड में जैसे ही ओमी का लंड घुसा तो उसके मुँह से जोर से “भाई” शब्द निकला और फिर “धीरे करो” के बोल फूटने लगे।

नियति एक बार फिर ठीक क्यों कि गांड चुदवाना आसान नहीं था। नियति भी ओजस्वी की तरह खड़े खड़े चुदवाती हुई बहुत सेक्सी लग रही थी।

दूसरे लोगो का भी मूड बन रहा था। अचानक लड़के बोले कि सब लड़कियों को एक साथ दीवार के पास खड़ा करके गांड मारते हैं तो अच्छा सीन बनेगा।

ओजावी उन पर चिल्लाई कि उसने अभी भी गांड मरवाई है। उधर शिल्पा तो 3 मर्दो से चुदवा चुकी थी तो बिल्कुल तैयार नहीं थी।

उन्हें मुझे पकड़ने की कोशिश की पर उन्हें क्या पता मैं खुद अपने चैलेंज के चक्कर में किसी अंजान से गांड मरवा के आई थी।

मगर मेरी कौन सुनता वहा, शुभम ने जबरदस्ती मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया और लगभाग मुझे उठाए हुए दीवार के पास खड़ा कर दिया।

मैंने उसको दुहाई दी कि मेरा पीरियड है पर उसने कहा कि वो लोग गांड मारेंगे ना की चूत। वो लगतार गुदगुदी करते हुए मेरे कपड़े खिसका रहा था।

मैं कुछ नहीं कर पा रही थी, जल्दी ही शुभम ने मेरा पैंट और पैंटी उतार कर मुझे नंगा कर दीवार के सहारे खड़ा किया।

मैं लगतार हिलते हुए अपने को बचाने की कोशिश कर रही थी। अगर पीरियड नहीं होता तो मैं शायद उनको करने भी देती। मेरे हिलने के कारण शुभम् कुछ कर नहीं पा रहा था। उसने निहाल की मदद मांगी.

निहाल ने मुझे पकड़ने की बजाय खुद नंगा हो गया और आगे आया। शुभम ने मुझे निहाल के हवाले किया और निहाल मेरे पीछे से चिपक गया।

थोड़ी देर पहले ही ओजस्वी की गांड मारने के बाद निहाल का लंड एक बार फिर कड़क था और मेरी गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था।

जब तक शुभम नंगा होता तब तक निहाल ने मेरे साथ मन नहीं बनाया, मेरी गांड में अपना लंड डाल ही दिया और चोदने लगा।

मेरी गांड तो पहली ही चुदी हुई पड़ी थी तो और भी बुरा लग रहा था पर उन लोगो की शरारत देख हंसी ज्यादा निकल रही थी। नियति और मुख्य पास खड़े होकर गांड मरवा रहे थे।

इस बीच शुभम नंगा हो खड़ा था और निहाल से अपना टर्न मांग रहा था पर निहाल ने अनसुनी कर मुझे चोदना जारी रखा।

ये देख शुभम् ने तुरत वाहा खड़े हो मजे ले रही ओजस्वी को पकड़ लिया और उसे मना करने के लिए मजबूर कर दिया। ओजावी भी फंस गई थी तो उसने शुभम के साथ डील कर ली वो गांड की बजाई चूत मार ले।

शुभम् मान गया और मेरे पास लाकर उसको ओजस्वी को भी दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया। जल्दी ही शुभम् ने ओजस्वी को खड़े-खड़े ही पीछे से चूत मारना शुरू कर दिया।

इतने में शिल्पा के चीखने की आवाज आई। अशोक ने उसको भी उठाया और दूसरी लड़कियों की तरह उसे भी दीवार के पास खड़ा कर उसके कपड़े उतारना चाहा।

शिल्पा ने खुद ही बोल दिया कि कपड़े मोटे जाएंगे तो वो खुद ही उतार देगी। Uski chut to pahle hi 3 mardo ne chodi thi तो usne gaand marne ko haami bhari.

जल्दी ही वो दोनों भी नंगे हो गए थे और अशोक ने शिल्पा की गांड मारना चालू किया और शिल्पा दिखने लगी। कमरे में चारो लड़कियाँ दीवार के पास पूरी नंगी हो कोई चूत तो कोई गांड मरवा रही थी।

थोड़ी देर बाद सब लोग एडजस्ट हो जायेंगे। शुभम ने बोला कि उसको भी गांड मारने की इच्छा हो रही है और ओजस्वी ने चिल्लाये हुए उसे मना किया तब तक शुभम ने छेद बदल दिया और ओजस्वी की गांड मारना शुरू कर दिया। सब लोग हंसने लगे पर ओजस्वी की हालत खराब हो गई।

अब चारो ही लड़की अपनी गांड किसी दूसरे मर्द से चुदवा रही थी। चारो की सिस्किया लगभाग एक साथ आ रही थी. मर्दो के झटके लड़कियों की गांड अप्रैल पैड कर एक मधुर आवाज पैदा कर जैसे तबला बजा रहे थे।

निहाल ने बोला कि चलो एक्सचेंज कर देते हैं और उसने शुभम के साथ लड़की बदल ली। अब शुभम ने मेरी गांड मारना शुरू कर दिया और निहाल ने ओजस्वी की चूत।

शुभम् का कड़क लंड और भी ख़तरनाक था। एक लकड़ी का टुकड़ा जैसा किसी ने मेरी गांड में डाल दिया था। मैं उसको धीरे करने को कहती रहती हूं पर वो नहीं मानता।

मैंने निहाल को बोला कि वो फिर आ जाए मेरी गांड मारने को ताकि मैं शुभम से बच पाऊं। ये सुनकर ओमी ने ऑफर दिया और शुभम् मान गया।

मुझे थोड़ा चैन मिला कि शुभम की जगह ओमी का लंड गांड मरवाना थोड़ा आसान था। पर इस एक्सचेंज में नियति को नुक्सान हुआ।

ओमी ने शुभम् से एक्सचेंज किया जिस से अब शुभम् को नियति की गांड मारनी थी। नियति की बहुत तेज झलक शुरू हो गई। मैं समझ सकती थी, शुभम का लंड अपनी गांड में लेना कितना मुश्किल हो सकता था।

सबसे पहला ओमी झड़ गया जो काफी देर से पहले से नियति की गांड मार रहा था और अभी मेरी मार रहा था। मुझे राहत मिली और अपनी सफाई करने के लिए वॉशरूम में चली गई।

जब मैं वापस आई तब तक शुभम भी नियति की गांड मार कर झड़ चुका था। मैं और नियति फिर कपड़े पहनकर तैयार हो चुकी थी पर निहाल और अशोक अभी भी लगे हुए थे।

जब वो दोनों भी झड़ चुके तो वो भी तैयार हो कर आ गए। खैर अब बारी थी उन लोगों के सीक्रेट बहार लाने की जिन्होंने अपना चैलेंज स्वीकार नहीं किया था।

सारी लड़कियों ने चैलेंज पूरा किया था तो उनके सीक्रेट बाहर नहीं आए पर लड़कों में निहाल और ओमी ने चैलेंज पूरा नहीं किया था।

ओमी ने अपना सीक्रेट ओजस्वी को बताया कि कैसे उसने दोस्त के साथ मिलकर एक दूसरे की बीवी को चोदा था। ओजस्वी हेयरां रह गई। ओजस्वी ने 2 और 2 चार जोड़ ही लिए।

उसको आज तक लगता था कि ये बच्चा निहाल का है और उसने इल्जाम अपने पति ओमी पर डाला पर असल में वो बच्चा ओमी के दोस्त का भी हो सकता था।

ओजस्वी: “तभी जब से हमारे टूर से आई हूं, तुम्हारा दोस्त मुझे घूर-घूर कर देखता है और एक बार तो मेरे पीछे से पकड़ भी लिया था। तब तो मैंने उसको धमाका कर डरया पर मुझे पता नहीं था कि वो तो मेरा इस्तेमाअल पहले ही कर चुका है…।”

मुझे इतनी गिनती आ रही है. तुमने तो बड़े मजे के लिए होंगे उसकी बीवी के, उसकी तारीफ तुम हमेशा करते रहते हो। अब मैं जब भी अपने बच्चे को देखूंगी तो मुझे तुम्हारे दोस्त की शकल सामने दिखेगी। क्या इससे अच्छा होता तुम राज़ बताते ही नहीं”

ओमी ने आकार ओजस्वी के कंधों पर हाथ रख उसको मनाने की कोशिश की पर उसने उसको झटका दिया और नाराज रही। नियति ने उसको अपने गले लगा थोड़ा शांत किया।

ओजस्वी: “अगली बार तुम्हारा दोस्त मेरे सामने आये तो क्या करु, कपड़े खोल कर खड़ी हो जाऊ कि आ मेरी चूत चोद दे और फिर माँ बना दे, जैसा पहले किया था!”

ओमी सर झुकाये खड़ा रहा, उसने जो किया था वो बिल्कुल गलत था। ओजस्वी ने रोते हुए उसको बहुत सुनाया। ये बात अलग थी कि अगर ओमी को ओजस्वी का सीक्रेट पता चलता तो मामला उल्टा हो सकता था। ओमी को भी ओजस्वी पर बहुत गुस्सा आता था पर ओजस्वी ने चुनौती पूरी कर अपना राज बाहर नहीं आने दिया था।

अब बारी निहाल की थी. ओजस्वी अब रोते-रोते अचानक रुक गई। निहाल का सीक्रेट बाहर आना मतलब ओजस्वी के लिए भी बुरा था। निहाल ने अपना सीक्रेट बता दिया कि वो ओजस्वी की शादी के बाद भी ओजस्वी को मिल रहा था जब ओमी ने मना किया था।

अब झटका खाने की बारी ओमी की थी. ओजस्वी ने भी ओमी का भरोसा तोड़ा था। अभी तक ओजस्वी जो गुस्सा थी अब वो डर रही थी और ओमी के शेर बनने की बारी थी।

दूसरे मर्दों ने मौका दिया कि नजाकत को देखते हुए ओमी को समझा कि क्या फर्क पड़ता है अब तो वैसे भी ये तुम्हारे कहने पर मिल रहे हैं और यहां तक ​​कि तुमने उसको निहाल के बच्चे की मां बन जाने की इजाजत दे दी है।

पर ओमी ने मौका देखा ओजस्वी को डेटने में कसर नहीं छोड़ी।

ओमी: “अगर निहाल की शादी नियति से नहीं हुई तो मेरी इच्छा के बिना तुम निहाल से मिलती ही रहती। क्या पता तुम दोनों सिर्फ मिलते थे या तुम्हारी कुछ और ही मिलती थी।”

ओजस्वी: “ऐसा कुछ नहीं है, हम सिर्फ बात करते थे। हमारे बीच वैसा कुछ नहीं हुआ था”

ये बात तो वाहा मौजुद अधिकारी लोगों को पता ही थी कि ओजस्वी ने निहाल के साथ शादी के बाद भी चुदवाया था। उन दोनों में थोड़ी देर बहस चलती रही, दोनों एक दूसरे को उनकी गलती लेकर सुनाते रहे।

नियति ने शुक्र मनाया कि उसने अपना चैलेंज पूरा कर लिया नहीं तो उसके घर में भी आग लग जाती है। सबसे ज्यादा शुभम् और शिल्पा खुश थे, उनके सीक्रेट बाहर आते तो दोनों का बहुत बुरा होता।

झगड़ा बढ़ता ही जा रहा था और बाकी लोग समझने की असली कोशिश कर रहे थे। हम बाकी लोगों को डर लग रहा था कि कहीं हमारा सीक्रेट भी ना खुल जाए लोगो के चक्कर में।

तभी नियति ओमी को एक तरफ कोने में ले गई और उसको धीमे से समझने लगी। उन्हें थोड़ी देर बहस चलती रही। धीरे-धीरे ओमी शांत होने लगा। तब तक निहाल ने ओजस्वी को दिलासा दिया।

सब लोगो ने मौका दिया कि नजाकत को समझा और झगड़ा रोका। अब हमारे जाने का टाइम भी हो गया था.

फिल्हाल सब लोगो ने उन दोनों को समझा कि पिछली गलती भुला कर मिल बात कर एक दूसरे की बीवी को चोदने के मजे लो, प्यार से रहो और ओजस्वी को जो बच्चा होगा उसको पालो।

उन्हें भी समझ आया कि वैसे ही अंजान लोगों से खुल कर चुदवा रहे थे, फिर पहले की गलती तो जान पहचान वालो के साथ की थी।

थोड़ी देर में हमारी वैन आ गई थी और हम सब वहां से निकल पड़े एयरपोर्ट की तरफ, जहां से हमने अपनी अपनी मंजिल की और जाना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *