***** ***** पात्र (किरदार) पररचय
01॰ ताईजी-उम्र 45 साल, खूबसूरत, बड़ी-बड़ी चुचियाँ, बड़े-बड़े चूतड़, मोटी जांघें।
02॰ सुजाता-ताईजी की बड़ी लड़की, क़द 5’6” इंच, चुचियाँ भारी-भारी, शरीर औसत फिट, मस्त गाण्ड।
03॰ पूजा-ताईजी की छोटी लड़की
04॰ माँ-कहानी के हीरो की माँ
05॰ मैं-कहानी का हीरो
06॰ भोला-ताईजी का नौकर,
07॰ पार्वती-भोला की बीवी, सांवला रंग, साधारण कद-काठी,
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दोस्तों, एक बार मैं काफ़ी दिनों के बाद अपने गाँव जा रहा था। गाँव में मेरे ताऊजी जी का परिवार रहता है। ताई जी का स्नेह मुझ पर कुछ ज्यादा ही रहता था, वो मुझे कई बार बुला चुकी थी। अचानक ताऊजी को फालिस मार गई तो मैं अपने आपको गाँव जाने से नहीं रोक पाया। आज काफ़ी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रहा था।
मैं घर करीबन शाम के 4:00 बजे पहुँचा, ताईजी, सुजाता और पूजा मुझे देखकर खुश भी हुई क्योंकी मैं उनसे काफ़ी समय के बाद मिल रहा था। पर इस हादसे के चलते खुद को रोने से रोक भी ना पाई और मेरे सामने रो पड़ी। मैंने तीनों को संभाला और हौसला दिया कि सब ठीक हो जाएगा।
कुछ देर बाद वो शांत हो गये, और माँ मेरे लिए चाय बनाकर ले आई। जब मैंने ताईजी से पूछा ताऊजी के बारे में तो उन्होंने बताया कि काफ़ी दिनों से टेन्शन में थे, और काम का तनाव भी बढ़ गया था, सबसे बड़ा टेन्शन उन्हें सुजाता की शादी का था, इसी वजह से उन्हे फालिस हुआ है, और अब डाक्टर कहते हैं कि उन्हें ठीक होते-होते कम से कम एक साल लग जाएगा, अगर अच्छे से देख-भाल की तो, वरना मुश्किल है ताऊजी का ठीक होना। और वो यह सब घर दो बेटियाँ, खेती का काम कैसे देख पाएँगी? ऊपर से ताऊजी की सेहत का ध्यान भी रखना था, ताईजी काफ़ी टेन्शन में थी।
मैंने ताईजी को भरोसा दिलाते हुए कहा-“सब ठीक हो जाएगा और ताऊजी की तबीयत भी ठीक हो जाएगी…”
रात में सोते वक्त मैं, माँ और पापा बैठ कर बात कर रहे थे, और मैंने जो ताईजी ने मुझसे कहा था, वो उन्हें बताया।
पापा ने कहा-“बेटा हमें भी यह सब पता है, पर इसका कुछ ना कुछ रास्ता निकालना ही पड़ेगा, मैं अपनी भाभी और दो भतीजियों को ऐसे नहीं छोड़ सकता…”
कुछ देर बात करते-करते पापा ने कहा-“बेटा तुम क्यों नहीं देख लेते यह सब, जब तक ताऊजी ठीक ना हो जाएां?”
मैं अपना फाइनल एअर का एग्जाम दे चुका था। बस अब रिजल्ट आने की देरी थी, ताकी मैं आगे पढ़ाई के लिए एडमिशन ले सकूँ। मैंने पापा से कहा-“मैं अपनी पढ़ाई कैसे छोड़ सकता हूँ?”
उन्होंने मुझे काफ़ी समझाया। बाद में मम्मी भी पापा के सुर में सुर मिलाने लगी और यह तय हो गया कि मेरे रिजल्ट आने तक, जो दो महीने बाद आने वाला था, मैं ताऊजी के घर पे ही रहूँगा और ताईजी की हर काम में मदद करूँगा।
मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा पापा मम्मी का यह निर्णय। पर मैंने कुछ नहीं कहा और छत पर चला गया। रात के तकरीबन 11:00 बजे चुके थे, सब सो गये थे। मैं यह सोचने में बिजी था कि मैं अपना टाइम कैसे बताउन्गा? तभी मेरी नजर ताऊजी के रूम में पड़ी, छत से उनके रूम की खिड़की साफ दिखाई देती थी। मैंने देखा ताईजी ताऊजी की तेल से मालीश कर रही थी।
तब तक मेरे मन में ताईजी या किसी और घर की औरत के बारे में कोई गलत विचार नहीं था। मैंने देखा ताईजी ने साड़ी पहन रखी थी और वो ताऊजी के शरीर पे मालीश कर रही थी।
वैसे आपको ताईजी के बारे में बता दूाँ। उनकी उमर करीबन 45 साल है और वो थोड़ी खूबसूरत है, उनका शरीर थोड़ी हेवी है, खास कर उनकी गाण्ड और जाँघो का एरिया और उनकी चुचियाँ भी बड़ी-बड़ी हैं।
अचानक मैंने देखा कि तेल की बोतल जो कि बिस्तर पे पड़ी हुई थी वो गिर गई। सारा तेल बिस्तर पे फैल ना जाए इसलिए ताईजी उसे साफ करने में लग गई, और इस चक्कर में थोड़ा तेल ताईजी की साड़ी पे भी लग गया। ताईजी सब साफ कर बाथरूम में चली गई, शायद अपनी साड़ी साफ करने गई होंगी।
जब वो बाहर आई तो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। ताईजी का फिगर मेरी आाँखों के सामने था, और सच बताऊं तो उन्हें देखकर मेरे अंदर अजीब सी हलचल मच गई। कुछ मिनट में ही मेरा उन्हे देखने का नज़रिया बदल गया। फिर उन्होंने लाइट बंद की और सो गई। मैं बहुत निराश हुआ और सोने चला गया। मुझे पूरी रात नींद नहीं आई और मैं ताईजी के बारे में ही सोचता रहा।
किसी तरह सुबह हुई। दोनों छोटे चाचा उनका परिवार अपने घर जाने को तैयार थे। तभी पापा ने सबको बुलाया और बताया कि कुछ महीने मैं यहीं रहूँगा और ताऊजी के घर और घरवालों की देख-भाल करूँगा। सब यह सुनकर सब खुश हुए खास कर ताईजी। क्योंकी वो यह सब अकेले सांभालने में घबरा रही थी।
फिर पापा ने ताईजी से कहा-“आप निश्चिंत रहें, यह आप लोगों की देख-भाल अच्छे से करेगा…”
बस कुछ देर बाद नाश्ता कर दोनों चाचा ने अपने घर चलने की तैयारी की। दोपहर को सिर्फ़ मैं, पापा, मम्मी और ताऊजी का परिवार था। मैं पूरा दिन ताईजी को ही देखता रहा, क्योंकी अचानक वो मेरे लिए किसी हीरोइन की तरह हो गई थी, जिसे पाने के लिए मैं बेताब था। जब वो झाड़ू लगा रही थी तो पीछे से उनकी मोटी गाण्ड देखकर मन कर रहा था कि अभी जाकर अपने हाथों में भर लूँ उनके चूतड़ और उनकी गाण्ड मार दूं।
पर यह सब किसी सपने जैसा ही था, क्योंकी मैं जानता थाकि रास्ता आसान नहीं है। जब रात को सब सो गये तो मैं भी छत पे चला गया और ताईजी के रूम में आने का इांतजार कर रहा था। तभी कुछ देर बाद ताई रूम में आई। आज उन्होंने मालीश से पहले एक खराब कपड़ा बिस्तर पे रखा और वहीं खड़े-खड़े अपनी साड़ी उतार दी। गर्मियों का वक्त भी था और शायद ताईजी ने अपनी साड़ी के खराब होने के डर से भी उसे निकालना ठीक समझा होगा। ताईजी काले रंग के ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी, उनका रंग साफ था इसलिए खूबसूरती और भी निखर के सामने आ रही थी। जब भी वो झुकती तो उनकी चुचियाँ जो कि बाहर आने को तड़प रही थी, साफ नजर आ रही थी, और उनकी गाण्ड ने मुझे बेकाबू कर दिया था।
मैं वहीं छत पे बैठे-बैठे अपने लण्ड को मसल रहा था, और कैसे ताईजी को चोद सकूँ उस बारे में सोच रहा था। फिर जब ताईजी ने मालीश खतम की तो वो बाथरूम में चली गई, और जब बाहर आई तो मैं देखता ही रह गया। ताईजी सिर्फ़ पेटीकोट में बाहर आई, उन्होंने ब्लाउज़ निकाल दिया था, और अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा जो कि काले रंग की थी और पेटीकोट में थी। मैंने जितना सोचा था उससे ज्यादा बड़ी चुचियाँ थी उनकी, तभी उन्होंने गाउन पहन लिया और सो गई। 4
अब मेरा सिर्फ़ एक ही अरमान था किसी तरह ताईजी को चुदवाने के लिए तैयार करने करूँ। पूरी रात ताईजी के खयालों में ही निकल गई। सुबह जब उठा तो आँखे थोड़ी सूजी हुई थी और लाल भी थी। मैं जब अपने कमरे से बाहर आया तो सबसे पहले मुझे मेरी ताईजी ही मिली। मैंने उन्हें देखकर स्माइल दी।
तब ताईजी ने कहा-“बेटा तुम्हारी आँखे सूजी हुई क्यों है और लाल भी है?”
मैंने उनसे कहा-“ताईजी आपके बारे में सोच-सोचकर नींद नहीं आती…”
उनकी आँखे भर आई। उन्हें लगा कि मैं उनके लिए इतना सोचता हूँ पर उन्हें क्या पता था कि मैं उन्हें चोदने का प्लान बना रहा हूँ। फिर जब मैं नीचे आया तो देखा कि पापा मम्मी भी घर जाने की तैयारी कर रहे थे। मैंने मम्मी से पूछा-“इतनी जल्दी?”
तभी मम्मी ने बताया-“पापा के ऑफीस में ज़रूरी काम है अब वो और नहीं रुक सकते…” इस तरह दोपहर तक पापा मम्मी भी चले गये।
अब हम 5 लोग ही बचे थे घर में। पूजा अपने किसी दोस्त के यहाँ गई थी, क्योंकी उसके भी एग्जाम कुछ दिनों में थे। सुजाता घर का सब काम देखती थी और ताईजी खेत खलिहान और ताऊजी को। दोपहर को मैंने देखा कि ताईजी एक बड़ी सी पोटली, जिसमें बहुत सारे कपड़े थे, वो लेकर खेत की तरफ जा रही थी। मैंने उन्हें आवाज़ लगाई।
ताईजी रुक गई और पूछा-“क्या है बेटा?”
मैंने कहा-“ताईजी इतनी धूप में आप कहाँ जा रहे हो?”
ताईजी ने कहा-“बेटा यह सब चादर और बाकी घर के कुछ कपड़े हैं वो देने जा रही हूँ…”
मैंने कहा-“किसे देने जा रही हैं आप?”
तब ताईजी ने बताया-“हमारे पम्पहाउस पे एक मजदूर रखा है, वो वहीं रहता है अपनी बीवी के साथ। उसी की बीवी को धोने के लिए देने जा रही हूँ…”
मेरे पास भी कोई काम नहीं था तो मैंने कहा-“लाओ ताईजी मैं ले लेता हूँ…” फिर मैंने ताईजी के हाथ से पोटली ले लिया और उन्हें कहा-“चलिए…”
ताईजी मेरे आगे चल रही थी। ताईजी ने ब्लू कलर की साड़ी और मेचिंग ब्लाउज़ पहन रखा था, और गर्मी की वजह से उन्हें बहुत पसीना आ रहा था, इससे उनकी सफेद ब्रा भी दिख रही थी। ताईजी मेरे आगे चल रही थी और उनके मटकते हुए चूतड़ देखकर मन कर रहा था उन्हें वहीं चोद दूं, पर मैं मजबूर था। खैर, जब हम पम्पहाउस पर पहुँचे तो वहाँ कोई नहीं था। ताईजी ने आवाज़ लगाई। उस औरत का नाम पार्वती था। पर काफ़ी देर तक जब कोई नहीं आया।
तभी एक दूसरा मजदूर आया और उसने बताया कि भोला और पार्वती के किसी रिश्तेदार के यहाँ मौत हो गई है, वहाँ गये हैं, कल तक आ जाएँगे।
मैंने ताईजी से पूछा-“अब घर वापस चलें?
ताईजी ने कहा-“अब यहाँ तक आ ही गये हैं तो कपड़े धो ही लिए जाएां। क्या भरोसा यह लोग कल आएँ के ना आएँ?” फिर कहा-“क्या तू मेरी मदद करूँगा?
मैंने तुरंत हां कर दी।
फिर ताईजी पम्पहाउस में गई वहाँ से कपड़े धोने का सामान ले आई और हम ट्यूबवेल के पास चले गये। वहाँ जाते ही ताईजी ने अपनी साड़ी को थोड़ा ऊँचा कर उसे कमर में फँसा दिया, ताकी उनकी साड़ी गीली ना हो। उनकी गोरी टाँगे देखकर मन कर रहा था उन्हें छू लूँ और किस करूँ।
ताईजी एक पत्थर पर बैठ गई और सारे कपड़े एक तरफ रख दिए।
मैंने उनसे पूछा-“ताईजी मुझे क्या करना है?”
ताईजी ने कहा-“यह सारे कपड़े भिगो दे और फिर एक-एक कर देता जा…”
मैंने झट से सारे कपड़े भिगो दिए और थोड़ा वाशिंग पाउडर भी डाल दिया।
ताईजी कहने लगी-“तुझे तो सब पता है…”
मैंने कहा-“ताईजी हास्टल में सारा काम खुद ही करना पड़ता है…” कपड़े भिगोने के बाद मैं ताईजी के साइड में बैठ गया और उन्हें एक-एक कर कपड़े दे रहा था।
ट्यूबवेल के आस-पास की जगह पत्थर से बनाई हुई थी, कुछ काम ना होने की वजह से मैंने कहा-“लाओ मैं भी ब्रश मारने में आपकी मदद कर देता हूँ…”
ताईजी ने कहा-“रहने दे बेटा मैं कर लूँगी…”
मैंने कहा-“ताईजी ऐसे तो शाम हो जाएगी…”
ताईजी ने स्माइल दी और अपना काम करने लगी, फिर मैं ताईजी के सामने आकर बैठ गया, और भिगोये हुए कपड़ों को धोने लगा, तभी अचानक बाल्टी में हाथ डालते वक्त मेरे हाथ में ब्रा आ गई, जब मैंने उसे निकाला तो ताईजी थोड़ा शर्मा गई।
मैंने कहा-“ताईजी आप तो कह रहे थे चादर और दूसरे घर के कपड़े हैं?”
ताईजी शर्माते हुए बोली-“बेटा यह भी कई दिनों से धुले नहीं थे इसलिए सोचा इन्हें भी धुलवा दूँगी…”
फिर जब मैं ब्रा को गौर से देख रहा था तो उन्होंने हिचकिचाते हुए पूछा-“क्या देख रहा है?”
मैं अचानक चौंक गया हड़बड़ाते हुए कहा-“कुछ नहीं…”
ताईजी ने दबाव दिया तो मैंने कह दिया-“डिजाइन काफ़ी मॉर्डन है इसलिए देख रहा था…” फिर डरते-डरते मैंने पूछा-“क्या यह आपकी है?”
ताईजी शर्माते हुए कहने लगी-“हां यह मेरी है…” और शर्माने लगी।
उसके बाद हमारे बात करने के तरीके में डबल मीनिंग आ रहे थे।
ताईजी ने कहा-“तुझे बड़ा पता चलता है डिजाइन के बारे में?”
मैं कुछ नहीं बोला और मुस्करा दिया। मैंने हिम्मत कर कह दिया-“ताईजी यह तो आप पे खूब सजती होगी?”
ताईजी मेरी तरफ देखती ही रह गई और जैसे ही मैंने उनकी तरफ देखा वो शर्मा गई। अब इन सब बातों में उन्हें भी मजा आ रहा था। वो अचानक खड़ी हुई, और कहा-“मेरी कमर अकड़ गई है जरा सीधा कर लूँ…”
फिर थोड़ी देर बाद बैठ गई पर जब बैठी तो उन्होंने अपनी साड़ी और ऊपर कर ली। अब साड़ी घुटनों के ऊपर तक आ गई थी, ताईजी के गोरे पैर और थोड़ी-थोड़ी जांघें दिख रही थीं। मुझे पता ही नहीं चला कि मैं ताईजी की टाँगे देखने में इतना मस्त था कि कब उन्होंने मुझे देखते हुए पकड़ लिया। जब मेरी नजर उनपर पड़ी तो वो मेरी तरफ ही देख रही थी।
मैं थोड़ा डर गया पर उन्होंने कुछ नहीं बोला और स्माइल देकर अपना काम करने लगी। आधे कपड़े हम धो चुके थे, और आज तक जिंदगी में मुझे कपड़े धोने में इतना मजा कभी नहीं आया था। धूप तेज होती जा रही थी और गर्मी भी बढ़ रही थी।
ताईजी फिर खड़ी हुई, और कहने लगी-“अब उमर हो गई है इसलिए यह कमर भी जवाब दे रही है…”
मैंने कहा-“ताईजी किसने कहा आपसे कि आपकी उमर हो गई है, आप तो अभी भी किसी भी जवान लड़की को पीछे छोड़ दे…”
ताईजी शर्माने लगी और कहने लगी-“तू तो पागल है…”
मैंने कहा-“सच ताईजी आपको देखकर उमर का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता…”
ताईजी मुस्कराई और कहने लगी-“पता नहीं तुझे ऐसा क्यों लगता है?” फिर कहने लगी-“देख तो मेरी साड़ी भीग गई और पेटीकोट भी…”
मैंने कहा-“ताईजी यहाँ आपके और मेरे सिवाय कोई नहीं है, थोड़ी देर में कपड़े भी खतम हो जाएँगे तो आप अपनी साड़ी उतारकर सुखा दो…”
पहले तो ताईजी हिचकिचाई पर मेरे बोलने पे उन्होंने एक कोने में जाकर साड़ी निकाल दी और सुखाने डाल दी। जब वो आई तो मैं उन्हें देखता ही रह गया। ब्लू ब्लाउज़ और पेटीकोट में बड़ी कामुक लग रही थी। वो जान चुकी थी कि मैं उनके शरीर को ऊपर से नीचे तक देखे जा रहा हूँ पर कुछ बोली नहीं। वो बैठने जा रही थी।
तभी मैंने कहा-“अरे ताईजी सांभालना कहीं पेटीकोट और गीला ना हो जाए?”
इस पर ताईजी बैठने से पहले उसे जाँघो तक ऊपर कर बैठ गई। अब जब वो बैठी तो आधी जाँघो तक साफ नजर आ रहा था, और उनकी सफेद रंग की पैंटी भी दिख रही थी।
मैंने कहा-“ताईजी कमर ज्यादा दुख रही है क्या?”
ताईजी ने कहा-“हां दुख तो रही है बेटा पर कोई उपाय नहीं है, काम तो करना है ना…”
मैंने कहा-“मैं मालीश कर देता हूँ आपको अच्छा लगेगा…”
ताईजी बोली-“रहने दे बेटा, तू इतना काम करवा रहा है वोही बहुत है…”
मैंने जोर देते हुए कहा-“इसमें क्या हुआ? वैसे भी पापा ने मुझे कहा है कि मैं आपका अच्छे से ध्यान रखूां, तो यह तो मेरा फर्ज़ है ना…”
ताईजी मान गई और कहने लगी-“पहले कपड़े धो लेते हैं फिर देखते हैं…”
मेरी नजर उनकी जाँघो से हट ही नहीं रही थी।
ताईजी ने कहा-“कहाँ खोया है तू?”
मैंने कहा-“जगह बहुत अच्छी है यह, अच्छा लग रहा है…” और मैं यह सब कह रहा था ताईजी की जाँघो की तरफ देखकर।
ताईजी कहने लगी-“चल अब यहाँ वहाँ देखना छोड़, और यह कपड़े सुखाने में मेरी मदद कर…” हमने सारे कपड़े लिए और झाड़ियों पे सुखाने लगे।
ताईजी का पेटीकोट पूरा भीग चुका था और पैंटी भी। इसलिए कपड़ा उनके चूतड़ों से चिपक गया था। उन्होंने जानबूझ कर कपड़े सही नहीं किए। वो मेरे आगे खड़ी थी और मैं उन्हें कपड़े पास कर रहा था सुखाने के लिए। फिर मैं हिम्मत कर ताईजी के एकदम पीछे खड़ा हो गया। अब उनकी गाण्ड और मेरे लण्ड में सिर्फ़ एक या दो इंच का फासला था, और उनके पशीने की महक ने मुझे पागल कर रखा था।
जब ताईजी कपड़े लेने के लिए पीछे पलटी तो उनकी चुचियाँ मेरी छाती से टकरा गई। वो थोड़ा मुस्कराई पर पीछे नहीं हटी, और कपड़े मेरे हाथ से लेकर सुखाने लगी। जानबूझ कर वो भी थोड़ा पीछे आई, अब उनके चूतड़ हल्के-हल्के मेरे सख़्त लण्ड से टकरा रहे थे।
फिर जब सारे कपड़े सुखाने डाल दिए तो ताईजी बोली-“आ कुछ देर आराम करें…”
हम पम्पहाउस में चले गये। वहाँ थोड़ा बहुत रसोई का सामान था और एक खाट थी। पम्पहाउस की चाबी भोला और ताईजी के पास ही होती है। खैर, जब हम अंदर गये तो मैंने ताईजी को पानी दिया। उन्हें बहुत गर्मी हो रही थी। मैंने में हाथ पंखा उठाया और उन्हें हवा देने लगा। उन्हें बड़ा आराम मिल रहा था, और मुझे उनकी मदमस्त चुचियों को देखकर बड़ा आराम मिल रहा था।
ताईजी ने आँख खोली तो देखा मेरी नजर उनकी चुचियों की तरफ है, पर कुछ ना बोली और कहने लगी-“मैं बाथरूम होकर आती हूँ…”
जब ताईजी वापस आई तो वहीं आकर बैठ गई, पर मैंने देखा के उन्होंने ब्लाउज़ के दो हुक खोल दिए हैं और आँख बंद कर बैठ गई। मैं फिर से हवा देने लगा और उनकी चुचियों को देखने लगा। अब तक मैं जान गया था कि वो भी इांट्रेस्टेड है पर पहल करने में शायद शर्मा रही थी।
तभी मैंने कहा-“आपका कमर का दर्द कैसा है?”
ताईजी कहने लगी-“अब तो कमर के साथ पूरा शरीर टूट रहा है…”
मैं समझ गया। मैंने कहा-“आप लेट जाइए मैं मालीश कर देता हूँ थोड़ा आराम मिलेगा…”
ताईजी कहने लगी-“बेटा रहने दे तू भी थक गया होगा…”
मैंने कहा-“नहीं ऐसी कोई बात नहीं…”
फिर बार-बार कहने पे ताईजी खाट पे लेट गई। मैं सबसे पहले उनके पाँव की तरफ आकर बैठा और उन्हें दबाने लगा। उनके पाँव काफ़ी मुलायम थे। उन्हें काफ़ी अच्छा लग रहा था। कह रही थी बड़ा आराम मिल रहा है।
मैंने कहा-“ताईजी आप देखते जाओ मैं आपको किसी चीज में तकलीफ़ आने नहीं दूँगा…” फिर मैं कपड़े के ऊपर से घुटनों के नीचे तक दबा रहा था।
ताईजी आँखे बंद कर लेटी हुई थी।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनसे कहा-“ताईजी कपड़े गीले होने की वजह से मैं सही तरीके से दबा नहीं पा रहा हूँ। अगर आप कहें तो मैं थोड़ा ऊपर चढ़ा दूं?”
ताईजी ने कहा-“बेटा तुझे जैसे ठीक लगे कर… मुझे काफ़ी आराम मिल रहा है तेरे दबाने से…”
फिर मैंने पेटीकोट को घुटनों तक सरका दिया और दबाने लगा और अपना हाथ उनकी नंगी टाँगों पे घुमाने लगा। वो बीच-बीच में सिसकियाँ ले रही थी। फिर मैंने बिना पूछे पेटीकोट उनके घुटनों के ऊपर तक, यानी लोवर जाँघो तक चढ़ा दिया, अब आधे से ज्यादा टाँगें नंगी थी। मैं कभी उनकी टाँगें दबाता और लोवर जांघे महसूस कर रहा था। मेरा लण्ड मेरे पाजामे में टाइट हो चुका था, पर ढीले कपड़े होने के वजह से बाहर दिख नहीं रहा था। फिर कुछ देर ऐसे ही करने के बाद पेटीकोट को ऊपर जाँघो तक चढ़ाने गया।
ताईजी ने कहा-“क्या कर रहा है?”
मैंने कहा-“ताईजी ऊपर तक दबा देता हूँ…”
ताईजी बोली-“नहीं… ठीक है इतना काफ़ी है…”
मेरा मन किया कि अभी उनका बलात्कार कर दूं, पर सोचा कि मैं अभी जल्दबाजी कर खेल खराब नहीं करता हूँ। फिर मैंने उनसे कहा-“आप उल्टे लेट जाओ मैं थोड़ी कमर दबा देता हूँ…”
ताईजी उल्टा होकर लेट गई। मैं हल्के-हल्के कमर दबा रहा था, उन्हें मजा भी आ रहा था और आराम भी मिल रहा था।
फिर मैंने कहा-“ताईजी यह पेटीकोट का नाड़ा बीच में आ रहा है, मैं ठीक से मालीश नहीं कर पाउन्गा…”
ताईजी ने हल्के से अपने पेट को उठाया और नाड़ा खोल दिया, उससे पेटीकोट ढीला पड़ गया। कहने लगी-“अब जैसे चाहिए वैसे कर ले…”
मैंने कहा-“अगर मैं खाट पे बैठ जाउन्गा तो अच्छे से कर पाउन्गा…”
ताईजी बोली-“क्या मतलब?”
मैंने कहा-“अगर मैं घोड़े वाले पोज में आपके ऊपर आ जाउन्गा तो अच्छे से कर पाउन्गा…”
ताईजी बोली-“ठीक है…”
फिर मैं उनके ऊपर आ गया, मैंने अपना शरीर उनसे दूर रखा ताकी उन्हें गुस्सा ना आए।
फिर मैंने पेटीकोट को थोड़ा नीचे सरका दिया, उनकी सफेद रंग की पैंटी मेरे सामने थी। मैंने उसे भी थोड़ा नीचे कर दिया, अब ताईजी के चूतड़ों की लकीर साफ-साफ दिख रही थी। मैं कमर के निचले हिस्से से ब्लाउज़ तक मालीश कर रहा था, और जब नीचे की तरफ आता तो जानबूझ कर हाथ उनके चूतड़ों पे भी ले जाता। मैंने देखा ताईजी को मजा आ रहा था, और वो सिसकियाँ भी ले रही थी। अब मैंने अपना लोवर शरीर मालीश करते हुए उनके चूतड़ों पे रख दिया। मैंने एक साथ अपना वजन नहीं डाला, पर धीरे-धीरे अपना लण्ड ताईजी के चूतड़ों के बीच रख दिया। कपड़े गीले होने की वजह से लण्ड चूतड़ों के बीच में फँस गया।
और सच बताऊं तो बड़ा आनंद मिला। मैं जैसे ही अपना हाथ ऊपर की ओर ले जाता मेरा लण्ड उनके चूतड़ों के साथ घिसता, और मैं हर बार अपने लण्ड का दबाव बढ़ाता जा रहा था। ताईजी की सिसकियाँ अब जोर से आने लगी। हम दोनों ही खोए हुए थे।
मैंने ताईजी से पूछा-“कैसा लग रहा है?”
ताईजी सिसकते हुए बोली-“बहुत मजा आ रहा है बेटा…”
तभी अचानक कुछ आवाज़ हुई और हम दोनों के होश उड़ गये।
ताईजी ने फटाफट अपने कपड़े ठीक किए, साड़ी पहनी और बाहर जाकर देखा तो एक गाय थी जो चरते-चरते यहाँ तक आ गई थी। उन्होंने उसे भगाया और मुझे आवाज़ दी, बोली-“बेटा घर चलो, बहुत देर हो गई है…”
मैं निराश बाहर आया और अपने नशीब को कोस रहा था। ताईजी की शकल पे भी वैसी ही मायूसी थी। मैं समझ गया आग उधर भी बराबर लगी है। हम वापस चल पड़े घर के लिए, वो आगे चल रही थी।
मैंने बातों-बातों में पूछा-“ताईजी कुछ आराम मिला या नहीं?”
ताईजी कहने लगी-“आराम तो मिला पर पूरा नहीं…”
मैंने कहा-“मौका दो पूरा आराम दूँगा…”
ताईजी कहने लगी-“देखते हैं, कितना आराम देता है अपनी ताईजी को?”
फिर हम घर आ गए। सुजाता ने खाना तैयार रखा था और ताऊजी को भी जूस वग़ैरह दे दिया था, फिर ताईजी ने कहा-“क्या ताऊजी का मालीश वाला आया था?”
सुजाता ने कहा-“हां माँ आया था। अभी पापा सो रहे हैं…”
ताईजी ने कहा-“चल तू भी खा ले और सो जा, थक गई होगी…”
सुजाता बोली-“माँ मैं खा चुकी, आप और भैया ही बाकी हैं…”
ताईजी ने कहा-“जा तू आराम कर ले…”
सुजाता चली गई।
ताईजी ने कहा-“चल हाथ मुँह धो ले तो खाना खा ले, बहुत भूख लग रही है…”
मैंने कहा-“हां ताईजी भूख तो बहुत लगी है…”
ताईजी समझ गई मेरा इशारा, बोली-“चल पेट भर खा लेना पर अभी हाथ मुँह धो ले…”
जब हम बाथरूम में हाथ पैर धो रहे थे, ताईजी मेरे सामने अपनी साड़ी उपर जाँघो तक उठाकर झुक कर अपने हाथों पैरों को ठीक से धोने का बहाना कर अपनी गहरी क्लीवेज़ दिखा रही थी। फिर एक शरारती मुस्कान देकर बाथरूम से चली गई। मेरा लण्ड एकदम सख़्त हो रहा था, और इस अत्याचार को बंद करने के लिए कह रहा था। जब मैं खाना खाने नीचे बैठा उन्होंने मुझे खाना परोसा और फिर मेरे सामने आकर बैठ गई। पर बैठते वक्त उन्होंने अपने साड़ी कमर तक चढ़ा ली और मेरे सामने बैठ गई।
इस पोज में उनकी सफेद पैंटी मुझे साफ दिख रही थी। वो मुस्करा रही थी, कहने लगी-“कैसा है?”
मेरी नजर सीधा उनकी चूत पे थी। मैंने थोड़ा हड़बड़ाहट में कहा-“क्या ताईजी?”
ताई कहने लगी-“जगह कैसी है?”
मैं समझ गया कि उनका इशारा किस तरफ है। मैंने कहा-“बहुत सुन्दर, मन कर रहा है और अच्छे से देख लूँ…”
ताईजी हँसने लगी। खाना खाने के बाद हम सो गये, शाम में उठे तो सुजाता घर का काम कर रही थी, और पूजा भी अपने दोस्त के यहाँ से वापस आ गई थी। मैंने देखा ताईजी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।
मैंने सुजाता से पूछा-“दीदी ताईजी कहाँ हैं?”
सुजाता बोली-“भैया आप सो रहे थे, माँ पम्पहाउस गई है कपड़े लेने…”
मैंने पूछा-“कब गई हैं?”
सुजाता बोली-“अभी 10 मिनट पहले…”
मैंने बहाना बनाया-“मैं भी जरा चक्कर लगाकर आता हूँ…” और मैं ने तेजी से भागते हुए पम्पहाउस तक पहुँचकर देखा ताईजी अभी ही पहुँची थी वहाँ।
मुझे देखकर ताईजी हँसने लगी, कहने लगी-“तू क्यों आया?”
मैंने कहा-“ऐसे ही…”
फिर ताईजी ने वही नाटी स्माइल देते हुये कहा-“चल कपड़े निकालने में मदद कर…”
मैंने कहा-“इसीलिए ही तो आया हूँ…”
ताईजी बोली-“चल अब बातें बंद कर और काम कर ले थोड़ा…”
ताईजी झाड़ियों से कपड़े उठा रही थी और मैं उनसे ले रहा था। मैं कपड़े लेने के बहाने उनके एकदम पीछे जाकर खड़ा हो गया, और इस बार मैंने अपना शरीर उनकी गाण्ड से टच किया, वो पीछे देखकर मुस्कराई। अब मेरी भी हिम्मत भी बढ़ रही थी। मैं भी धीरे-धीरे अपना शरीर और चिपकाने की कोशिस करने लगा। जब भी वो आगे बढ़ती कपड़े निकालने के लिए मैं पीछे से अपने आपको उनकी तरफ पुश करता। मुझे बड़ा मजा आ रहा था।
फिर ताईजी कहने लगी-“देख बेटा यह कपड़ा झाड़ी में फँस गया है…”
मैं आगे ना जाकर पीछे से ही देखने लगा, और देखने के बहाने मैं अपने आपको ताईजी से पूरा चिपका दिया। अब मैं उनके कंधे के ऊपर से देख रहा था के कपड़ा कहाँ फँस रहा है।
मैंने मेरे हाथ में पकड़े कपड़े जमीन पर रखे और फिर से उसी पोज में आ गया। मैंने सपोर्ट लेने के बहाने एक हाथ ताईजी की कमर पर रख दिया और दूसरे हाथ से कपड़ा निकालने की कोशिस कर रहा था, और इसी बहाने मैं अपना लण्ड उनकी गाण्ड पे घिस रहा था। वो भी इसका आनंद उठा रही थी। वो अपने को पीछे की तरफ धकेल रही थी। हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।
मैंने कहा-“ताईजी लगता है कपड़ा बुरी तरह फँस गया है, निकल नहीं रहा है…”
ताईजी बोली-“कोशिस करते रहो निकल जाएगा…”
अब मैंने अपना हाथ पीछे से पूरा उनकी नाभि पर रख दिया और कपड़ा निकालने की कोशिस करने लगा।
ताईजी बोली-“यह क्या कर रहा है?”
मैंने कहा-“बैलेन्स ना बिगड़े इसलिए…” अब मैं खुद भी उनके पेट पर जोर लगाते हुए उन्हें पीछे खींच रहा था। मेरा लण्ड पूरी तरह उनकी गाण्ड में फँसा हुआ था। सच मानो दोस्तों स्वर्ग से कम नहीं था वो अनुभव। खैर, मैंने कपड़ा निकाल लिया और ताईजी से अलग हुआ।
ताईजी कहने लगी-“चल अब घर चलते हैं, अंधेरा होने को है…”
फिर हम घर की तरफ चल पड़े। रात में खाने के बाद में सुजाता दीदी और पूजा गप्पें मार रहे थे, तभी ताईजी ने पूजा को पढ़ने के लिए कहा और सुजाता से भी सोने के लिए कहा। वो दोनों माँ की आवाज़ सुनते ही चली गई, मुझे गुडनाइट बोलकर।
ताईजी फिर काम खतम कर बाहर आई और मुझसे पूछा-“सोना नहीं है?”
मैंने कहा-“नींद नहीं आ रही है…” मैंने उनसे पूछा-“आप सोने जा रही हो?”
ताईजी ने कहा-“नहीं मैं तेरे ताऊजी की मालीश करूँगी, बाद में सोने जाउन्गी…”
फिर मैं भी छत पे चला गया। ताईजी अपने रूम में आई, साड़ी निकाली और मालीश करने लगी। जब ताईजी खिड़की से बाहर देख रही थी तभी मैं उन्हें दिखाई दिया, फिर वो मालीश खतम कर छत पे आई और पूछने लगी-“नींद नहीं आ रही है क्या?”
मैंने कहा-“नहीं आ रही है, आपके बारे में ही सोच रहा था…”
ताईजी बोली-“सो जाओ और सुबह मेरे साथ शहर चलना थोड़ा काम है…”
मैं खुश हो गया, मैंने कहा-“कौन-कौन जा रहा है?”
ताईजी ने कहा-“तू और मैं…”
शहर ज्यादा दूर नहीं था पर रास्ता खराब होने की वजह से एक से दो घांटे लग जाते थे, और हमें जल्दी निकलना था ताकी 8:00 बजे तक वहाँ पहुँच सकें। मैंने पूछा-क्या काम है?
ताईजी ने कहा-“तेरे ताऊजी की कुछ दवाई लेने जाना है डाक्टर के पास…”
हम सोने चले गये, सुबह करीबन 6:00 बजे मेरे रूम पे नॉक हुआ। मैंने दरवाजा खोला तो ताईजी थी, क्या बताऊं दोस्तों कितनी खूबसूरत लग रही थी वो। वो नहा चुकी थी और बाल धोए थे, बड़ी ही प्यारी महक आ रही थी उनमें से।
ताईजी ने कहा-“खड़े-खड़े देखते रहोगे या कुछ बोलोगे?”
मैंने कहा-“ऐसी बात नहीं है, आप बहुत सुन्दर लग रही हो…”
ताईजी बोली-“तुझे सुबह-सुबह और कोई काम नहीं है क्या? चल जल्दी तैयार हो जाओ चलना है…”
मैं 15 मिनट में तैयार हो गया और हम बस स्टाप की तरफ चल दिए। बस स्टाप पे काफ़ी भीड़ थी, शायद सुबह-बहुत लोग काम पे जाते होंगे। बस आ गई।
मैंने ताईजी से कहा-क्या हमें इसी में चलना है या अगली बस ले लें?
ताईजी ने बताया कि इसके बाद की बस दो घांटे बाद की है। जैसे तैसे हम बस के अंदर घुस गये। बस में पाँव रखने की जगह नहीं थी। मैं और ताईजी दरवाजे पे खड़े थे, जैसे तैसे हमने अपने खड़े रहने की जगह बना ली। बस चली फिर रास्ते में काफ़ी खड्डे और उतार चढ़ाव थे। मेरा शरीर ताईजी से एकदम चिपका हुआ था। तभी किसी ने पीछे हटते हुए ताईजी के पाँव पे पाँव रख दिया और उनकी उंगली बुरी तरह से दब गई थी। हमने बस रुकवाओ और उतर गये। उतर के देखा तो ज्यादा तो नहीं था पर राइट टाँग की लास्ट दो उंगली सूज गई थी।
फिर मैंने कहा-“ताईजी जाना ज़रूरी है या घर चलें?”
ताईजी ने कहा-“जाना तो है, दवाई लानी है…”
तभी वहाँ से एक आटो पास हुआ। वो पसेंजर आटो तो नहीं था, शायद सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल करते होंगे और उसमें बहुत सामान था। मैंने उसे रुकवाया और अपनी तकलीफ़ बताई।
उसने कहा-“मैं एक व्यक्ति की सीट तो बना सकता हूँ पर दो नहीं हो पाएँगे…”
मैंने कहा-“भैय्या आप एक आदमी की जगह करो, हम दोनों अड्जस्ट कर लेंगे?”
उसने कहा-“मैं 100 रुपये लूँगा…”
मैंने नेगोशियेट कर 50 में मनवा लिया। फिर उसने सामान इधर-उधर कर एक आदमी के बैठने की जगह बना दी, उसकी आटो सिर्फ़ एक साइड से खुलती थी, और बाकी 3 तरफ से बंद थी।
फिर मैंने ताईजी से कहा-“पहले मैं बैठ जाता हूँ आप मेरी गोद में बैठ जाना…”
पहले तो उन्होंने मना कर दिया कि रिक्शे वाला क्या सोचेगा?
मैंने कहा-“उसे नहीं दिखेगा और वैसे भी यह हमारी मजबूरी है उसकी नहीं…”
फिर वो मान गई। तब मैं आटो में पहले बैठा और फिर ताईजी मेरी गोद में बैठ गई, 5 मिनट बाद ताईजी अनकंफर्टेबल महसूस कर रही थी। शायद उन्हें मेरे घुटनों की हड्डी लग रही होगी।
फिर मैंने कहा-“ताईजी आप थोड़ा पीछे होकर बैठ जाओ…”
ताईजी कहने लगी-“क्या चाहता है?”
मैंने कहा-“आप आराम से बैठें, वही चाहता हूँ…”
ताईजी हँसकर थोड़ा पीछे हो गई, अभी भी वो मेरी जाँघो पे बैठी थी। रास्ता काफ़ी खराब था, और झटकों की वजह से उन्हें बैठने में तकलीफ़ हो रही थी।
तभी मैंने कहा-“ताईजी आप जितना पीछे आकर बैठ सकती हैं, बैठ जाओ और मैं आपको पकड़ लेता हूँ, फिर आपको बैठने में दिक्कत नहीं होगी…”
ताईजी एकदम पीछे होकर बैठ गई, जब वो बैठ गई तो मेरा लण्ड सीधा उनकी गाण्ड के बीचोबीच फँस गया। सच बता रहा हूँ दोस्तों, इतना मजा आया कि पूछो मत, और फिर मैंने अपने दोनों हाथ ताईजी की कमर से लपेट लिए। अब उनकी कमर की कोमल स्किन मेरे हाथ में थी। बड़ा मजा आ रहा था।
मैंने ताईजी से पूछा-“आप कंफर्टेबल हो कि नहीं?”
ताईजी बोली-“हां बेटा अब ठीक है…”
मेरा लण्ड अब बड़ा हुए जा रहा था। उन्हें महसूस हो रहा था मेरा लण्ड, वो भी थोड़ा अड्जस्ट हुई और मेरा लण्ड पूरा अपनी गाण्ड के बीचोबीच ले लिया। रोड खराब होने की वजह से हिलने की ज़रूरत ही नहीं थी, फिर मैं धीरे से अच्छे से पकड़ने के बहाने अपने दोनों हाथ उनकी नाभि तक ले आया।
ताईजी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी, वो मुझसे बोली-“आटो वाला देखेगा तो क्या सोचेगा?”
मैंने कहा-“मैंने चेक किया है, उसे पीछे क्या हो रहा है वो बिल्कुल नहीं दिखेगा…”
तब ताईजी थोड़ी शांत हुई, और मेरे लण्ड का भरपूर आनंद लेने लगी। अब मैं धीरे-धीरे उनका पेट सहला रहा था।
ताईजी को भी बहुत अच्छा लग रहा था, वो कुछ बोल नहीं रही थी, पर आँख बंद कर सिसकियाँ ले रही थी, फिर मैं हिम्मत कर अपना हाथ ऊपर की तरफ ले गया और उनके ब्लाउज़ का बॉर्डर मेरे हाथ में टच हुआ। मेरा पूरा शरीर काँप गया, यह सोचकर के अब आगे क्या होगा? मेरा दिल बड़ा तेजी से धड़क रहा था, और शायद ताईजी का भी यही हाल था। मैं धीरे-धीरे हाथ ऊपर की तरफ ले जाने लगा और मेरी धड़कन तेज हो रही थी। ताईजी भी उत्तेजित हो रही थी। मैं अपना हाथ ताईजी की चुचियाँ तक ले गया।
अब हम दोनों जानते थे क्या हो रहा है पर किसी के मुँह से एक शब्द नहीं निकला, और ताईजी ने रोका नहीं, क्योंकी जानती थी कि शहर पहुँचने में अभी देर थी। मैंने धीरे-धीरे दाईं चूची को सहलाना शुरू किया। उनका निप्पल खड़ा हो गया, और अब मैंने उसे हल्के से दबाना शुरू कर दिया। वो आहें भर रही थी सिसकियाँ ले रही थी। अब मैंने थोड़ा और जोर से दाईं चूची को दबाया और निप्पल को उंगली के बीच दबाया।
ताईजी के मुँह से जोर से आह्हह्हह… निकल गई। वो आहें भरते हुए पूछी-“आह्हह… बेटा तुम यह क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा-“ताईजी मैं तो आपको कंफर्टेबल कर रहा हूँ ना… क्या आप कंफर्टेबल हो?”
ताईजी-“हां बेटा बड़ा अच्छा लग रहा है…”
फिर मैं दोनों हाथों से उनकी चुचियाँ दबाने लगा और निप्पल उंगलियों के बीच मसलने लगा। हम दोनों होश खो बैठे थे। फिर मैंने ब्लाउज़ के दो हुक खोल दिए।
ताईजी कहने लगी-“क्या कर रहे हो बेटा कोई देख लेगा?”
मैंने कहा-“कोई नहीं है यहाँ आपके और मेरे सिवाय…”
ताईजी रुकने के लिए कहती रही पर मैंने मेरा हाथ हटाया नहीं वहाँ से। फिर मैंने दो हुक खोलकर ब्लाउज़ को थोड़ा ऊँचा किया, पर पूरी तरह हो नहीं पा रहा था। फिर मैंने दो हुक और खोल दिए और अब ब्लाउज़ आलमोस्ट ऊपर हो चुका था। मैं ब्रा के ऊपर से चुचियों को मसल रहा था और पागल हो रहा था।
ताईजी भी मेरा पूरा साथ दे रहे थी, और कह रही थी-“ओह्हह… आह्हह… यह क्या कर रहे हो? हमें यह सब नहीं करना चाहिए, बेटा प्लीज़्ज़… रुक जाओ, आआआ… उईई माँ मर गई, उईई माँ…”
मैं भी बेकाबू होता जा रहा था। मैंने उनके मुँह को अपनी पीछे की ओर मोड़ा और उनके होंठ पे अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा। वो भी पूरा साथ दे रही थी, फिर मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी। उन्होंने मुँह खोला और उसे अंदर ले लिया और मेरी जीभ को चूसने लगी। कुछ देर किस करने के बाद वो फिर सीधी होकर बैठ गई और मैंने ब्रा के अंदर हाथ डालकर नंगी चुचियों को दबाना शुरू कर दिया।
ताईजी की आवाज़ बढ़ने लगी थी, वो कहें जा रही थी-“ओह्हह… आअह्हह…” वो धीरे-धीरे कह रही थी-“दबाओ और दबाओ, ओह्हह… आह्हह… मसल के रख दे…”
अब मैंने अपने हाथ चुचियों से हटाया और उनकी टाँगों पे घुमाने लगा। ताईजी समझ गई थी अब मैं कहाँ जा रहा हूँ पर कुछ नहीं बोली, बस अपना पूरा शरीर मेरे शरीर पे रखकर आँख बंद कर लेट गई। इस समय ताईजी मेरे बायें कंधे पे सिर रखकर लेटी हुई थी। उनकी पीठ मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उनका ब्लाउज़ आधे से ज्यादा खुला हुआ था और चुचियाँ बाहर थी। बड़ा ही उत्तेजक दृश्य था, और मैं सोच भी नहीं सकता था कि उन्हें पाने का अरमान एक सामान ले जाने वाले आटो में पूरा हो रहा है। अब मैं उनकी अंदरूनी जाँघो को महसूस कर रहा था।
ताईजी बस आँख बंद कर लेटी हुई थी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मैंने अब धीरे-धीरे साड़ी ऊपर करना शुरू किया। उनकी साँसे तेज हो रही थी पर वो कुछ बोली नहीं। अब मैं एक हाथ से उनकी नंगी चुचियों को दबा रहा था और दूसरे हाथ से साड़ी ऊपर कर रहा था। अब उनकी साड़ी जाँघो तक ऊपर आ चुकी थी, और उनकी जांघें बहुत चिकनी थी, और शायद ताईजी वेक्सिंग करवाती थी इसलिए बहुत मुलायम भी थी। अब मैं उनकी अंदरूनी जाँघो को महसूस कर रहा था।
ताईजी प्लेजर से कराह रही थी-“ऊओह्हह… आआह्हह…”
अब मैंने अपना हाथ उनकी चूत पे रख दिया। टाँगे जुड़ी होने की वजह से पूरी तरह हाथ नहीं घुमा पा रहा था, पर ताईजी अब बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। अब मैं उनकी पैंटी में साइड से उंगली डालने की कोशिस कर रहा था, और उनकी चूत के बाल मेरे हाथ में टच थे। मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई और मेरी उंगलियों का स्पर्श पाते ही ताईजी भी सहम गई। अब मैं अपनी उंगली उनकी चूत पे घुमा रहा था। वो काफ़ी गीली थी, और पूरी चूत चिकनी हो चुकी थी। मैंने वो उंगली बाहर निकाली तो ताईजी ने मेरी तरफ देखा। शायद वो नहीं चाहती थी के मैं रुकू। मैंने अपनी उंगली को पहले सूँघा और फिर उसे चाटने लगा। यह देखकर ताईजी शर्मा गई और मेरे मेरे बायें गाल पर किस कर दिया पर कुछ बोली नहीं।
तभी ताईजी ने टाइम देखा तो वो समझ गई कुछ ही देर में शहर आने वाला है। उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और तरीके से बैठ गई। कुछ ही मिनट बाद शहर आ गया, हम उतर गये। अब हम दोनों एक दूसरे से नजर नहीं मिला रहे थे।
मैंने उस रिक्शे वाले से पूछा-“आप वापस जाओगे उस एरिया में?”
उसने कहा-“हां। पर दो घांटे बाद यहीं से गुजरूंगा…” वो शहर में कुछ सामान देकर वापस आने वाला था, पर उसने कहा-“आटो खाली नहीं होगा, उसमें सामान होगा…”
मैंने कहा-“कोई बात नहीं…”
खैर, हम डाक्टर के पास थोड़ा चलकर पहुँचे। वहाँ से ताऊजी की दवाई और मालीश का तेल वग़ैरा लिया। ताईजी ने कहा-“मुझे घर का भी कुछ सामान लेना है…” फिर हम घर का सामान लेकर फ्री हो चुके थे। फिर ताईजी ने कहा-“मुझे फ्रेश होना है…” और हम एक छोटे गेस्टहाउस गये।
वहाँ हमने फ्रेश होने के लिए रूम माँगा तो रूम था नहीं, पर उन्होंने कहा कि अगर बाथरूम जाना है तो उनका बाथरूम इस्तेमाल कर सकते थे, फिर हम दोनों बारी-बारी कर फ्रेश हुए। तकरीबन दो घांटे बीत गये थे पर हम दोनों ने एक दूसरे से काम के अलावा कोई बात नहीं की।
फिर मैंने उनसे पूछा-“वापस जाने को कोई साधन मिलेगा?”
ताईजी ने बताया-“बस मिल जाएगी, जहां हम उतरे थे वहाँ से…”
फिर मैंने एक दुकान में जाकर दो-तीन कांडोम के पैकेट खरीद लिए, फिर हम चलते-चलते हाइवे पे पहुँच गये, बस स्टाप पे काफ़ी भीड़ थी। फिर जब बस आई तो इस बार ताईजी ने कहा इसे जाने दे अगली बस ले लेंगे। कुछ देर तक इंतजार करने के बाद वो आटो वाला फिर से वहाँ से गुजरा और हमें देखकर रुक गया।
मैंने ताईजी की तरफ देखा तो उन्होंने मुझे एक नाटी स्माइल दी, और कहने लगी-“लगता है इसी में जाना ठीक रहेगा…” फिर हम आटो के पीछे बैठ गये। उसने उतनी ही जगह बनाई जितनी सुबह थी।
पहले मैं बैठा और फिर ताईजी। शुरुआत में तो वो आगे की तरफ बैठी थी, फिर जब आटो स्टार्ट हुआ तो आराम से मेरे लण्ड पे बैठ गई। इस बार वो थोड़ा बोल्ड हो रही थी पर कुछ बोल नहीं रही थी। फिर जब मैंने उनके पेट पर हाथ रखा तो कुछ भी जवाब नहीं आया। मैं समझ गया कि वो भी उसी का इांतजार कर रही थी। फिर मैंने बिना हिचकिचाहट ब्लाउज़ के एक-एक कर सारे हुक खोल दिए और जोर-जोर से चुचियाँ ब्रा के ऊपर से दबाने लगा।
ताईजी सिसकियाँ भर रही थी। अब मैंने पीछे से ब्रा का हुक भी खोल दिया और नंगी चुचियों को अपने हाथ में लेकर भींचने लगा, और उनकी निपल्स को उंगली के बीच लेकर दबाने लगा। वो भी पूरे जोश में आ रही थी, और जोर-जोर से उिफ्फ़… आअह्हह… और जोर से… कराह रही थी। फिर मैंने उनकी साड़ी ऊपर कर दी और इशारे से उन्हें थोड़ा उठने के लिए कहा और जब वो उठी तो मैंने साड़ी कमर तक ऊपर ले ली।
अब आगे से अगर कोई देखता तो पता नहीं चलता के साड़ी पीछे से कमर तक चढ़ाई हुई है। फिर मैं अपना हाथ उनकी जाँघो और चूत के पास घुमाने लगा और पैंटी के ऊपर से ही चूत सहला रहा था। वो पागल हुए जा रही थी, उन्होंने मुझे बहुत टाइट पकड़ रखा था मतलब उनके हाथ मेरी टाँगों पे थे, और वो आहें भरे जा रही थी।
फिर एक बार मैंने उन्हें उठने का इशारा किया वो समझ गई और हल्का सा उठ गई।
फिर मैंने झट से उनकी पैंटी नीचे सरका दी, वो फिर से बैठ गई। अब मैंने हल्का सा उनकी टाँगों को फैलाया ताकी चूत पे अच्छे से हाथ घुमा सकूँ। उनकी उत्तेजना का ठिकाना नहीं रहा। उनके पाँव थरथरा रहे थे। पर दोस्तों इन सबके बीच हम एक दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे, क्योंकी हम जानते थे यह गलत है, पर अपने-अपने शरीर के हाथों मजबूर हो चुके थे। फिर मैं अपने हाथ से उनकी चूत को दबा रहा था, वो बहुत तेजी से साँसें ले रही थी और अपने होंठ अपने दातों तले दबा रही थी, ताकी आवाज़ आगे ना जा पाए।
फिर मैंने दोनों हाथों से उनकी चूत खोली, उसमें से बहुत सारा पानी मेरे हाथों में आ गया, और मेरे दोनों हाथों की उंगली गीली और चिकनी हो गई थी। फिर मैं उनकी चूत के दाने को सहलाने लगा, वो पागल हो गई और मेरी टाँगों को और जोर से दबाने लगी, और छटपटाने लगी। फिर मैंने उनकी चूत में उंगली डाल दी, हालाँकि उनकी चूत टाइट नहीं थी, पर काफ़ी कसी हुई थी उनकी उम्र को देखते हुए।
जैसे ही मैंने उंगली अंदर डाली ताईजी के मुँह से जोर से आह्हह्हह… निकल गई-“उईई माँ ऊऊह्हह… आह्हह…”
दोस्तों क्या बताऊं उनकी चूत कितनी गरम थी। मैंने उंगली अंदर तक डाल दी, और उसे बाहर निकालकर सूंघने और चाटने लगा, वो बहुत गरम हो चुकी थी पर कुछ कर या बोल नहीं पा रही थी। अब मैंने दो उंगली उनकी चूत में डाल दी।
ताईजी जोर से चिल्ला उठी-“हाऐईई दईय्या मर गई…”
और मैं उंगली अंदर-बाहर करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी और उंगली के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाई, वो भी मेरी उंगली का पूरा साथ दे रही थी, और जोर-जोर से सिसक कर रही थी।
फिर अचानक धीरे से ताईजी ने कहा-“राज और तेज…” शायद वो झड़ने वाली थी।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।
ताईजी उत्तेजना में-“ओह्हह… आअह्हह… हां हां और तेज और तेज… रुकना नहीं आह्हह… आह्हह…” फिर उनका शरीर अकड़ गया ।
मैं समझ गया कि या तो वो झड़ गई, या झड़ने वाली है, और फिर उनकी चूत से बहुत सारा गरम पानी निकला। सारा मेरे हाथ में गिर गया और कुछ मेरी पैंट पे गिर गया। मैंने पूरा पानी चाट कर साफ कर दिया, वो मुझे देखती ही रह गई, फिर उनका शरीर ढीला पड़ने लगा। वो मुझपे टेक देकर लेट गई। घर पहुँचने का टाइम भी हो रहा था।
फिर मैंने उनसे कहा-“शायद हम पहुँचने वाले हैं…”
ताईजी ने अपने कपड़े ठीक किए और सब कुछ ठीक ठाक किया और हम अपने घर के रोड पे उतर गये। हम घर की ओर पैदल ही जा रहे थे, हम दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे, न ही आँखे मिला पा रहे थे। हम जब घर के करीब पहुँचे तो देखा सुजाता दीदी बस स्टाप की तरफ आ रही थी।
हमने पूछा तो सुजाता ने बताया-“दुकान से कुछ सामान लेना है…”
फिर मैंने उनसे वो लिस्ट ली और सामान लेने चला गया। जब थोड़ी देर बाद सामान लेकर लौटा तो देखा सुजाता दीदी खाना लगा रही थी। मैंने उनसे पूछा-“ताईजी और पूजा कहाँ हैं?”
सुजाता कहने लगी-“माँ हाथ मुँह धो रही है और पूजा अपने दोस्त के यहाँ पढ़ने गई है…”
फिर हम तीनों ने मिल कर खाना खाया और इस दौरान ना ताईजी ने ना मैंने उनकी तरफ देखा। मैं और सुजाता ही बात कर रहे थे, फिर हम सोने चले गये। शाम करीबन 5:00 बजे जब मैं उठा तो देखा दीदी अपना घर का काम कर रही थी, और ताईजी गरम पानी में पाँव डाले बैठी थी, उनके पाँव की उंगलियाँ सूज गई थी। शाम ऐसे ही बीत गई। फिर रात में मैं बाहर निकल गया और देर से घर आया।
देखा तो ताऊजी के कमरे की लाइट भी ऑफ थी, सोचा सब सो गये होंगे। अब मेरा मन और कहीं नहीं लग रहा था, मैं बस ताईजी को चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। पर ऐसे ही बिना कुछ हुए काफ़ी दिन बीत गये। फिर एक दिन दीदी ने कहा के उन्हें यूनिवर्सिटी से कुछ पेपर लेने जाना है शहर, तो पूजा के साथ जाने के लिए ताईजी से पूछ रही थी।
ताईजी ने हां कर दी। दूसरे दिन सुबह तड़के वो दोनों शहर के लिए निकल गये। अब मैं, ताऊजी और ताईजी ही थे, सुबह जब मैं उठा तो ताईजी घर का सारा काम कर चुकी थी और मुझे देखकर कहा-“नाश्ता कर लो, फिर मुझे जाना है और दोपहर तक वापस भी लौटना है…”
मैंने हिचकिचाते हुए पूछा-“आप कहाँ जा रही हैं?”
ताईजी ने बताया-“ताऊजी की बीमारी के बाद खेत खलिहान पे ध्यान नहीं दिया है और वोही देखने जाना है…”
मैंने कहा-“मैं भी चलता हूँ आपके साथ…”
ताईजी ने कहा-“घर पे कौन रहेगा?”
मैंने कहा-“किसी नौकर को कह दो…”
ताईजी कुछ नहीं बोली और कहा-“पहले नाश्ता कर ले फिर देखते हैं…”
फिर नाश्ता करने बाद मैं तैयार बैठा था। तभी ताईजी नीचे आई और उन्होंने ब्राउन कलर की साड़ी पहनी थी और मेचिंग ब्लाउज़ भी पहना था। वो बड़ी ही सेक्सी लग रही थी। मैं उन्हें देखकर मुस्कराया। वो भी देखकर मुस्कराई और हम चल पड़े खेत की तरफ।
मैंने पूछा-घर पे कौन रहेगा?
ताईजी ने कहा-“चल तो सही…”
फिर हम पम्पहाउस पे पहुँचे। वहाँ भोला और पार्वती दोनों थे। मैंने दोनों पे ध्यान नहीं दिया। ताईजी को देखकर उन्होंने राम राम किया और ताईजी से वहाँ आने का कारण पूछा।
तभी ताईजी ने कहा-“भोला तुम और पार्वती घर जाओ, और भोला तुम मालिक का खयाल रखना और पार्वती तुम घर का काम और दोपहर का खाना बना लेना, और मेरे वापस आने तक वहीं रुकना…” वो यह सुनते ही घर की ओर चल दिए।
ताईजी भी आगे बढ़ गई। मैं भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ा, ताऊजी का खेती का बड़ा काम है। उनके पास बहुत जायदाद थी। ताऊजी ने हर खेत को किसी ना किसी को चलाने के लिए दिया था। काफ़ी देर चलने से ताईजी के पाँव दुखने लगे थे।
मैंने कहा-“थोड़ी देर आराम कर लो…”
ताईजी ने कहा-“थोड़ा दूर ही पम्पहाउस है वहाँ आराम कर लेंगे…”
हम दोनों पशीने से भीग गये थे, और शरीर में काफ़ी मिट्टी भी लग चुकी थी। पम्पहाउस पहुँचते ही मैंने देखा के बोर-वेल आन है। मेरा मन किया कि नहा लूँ, पर फिर कुछ कहा नहीं। हम दोनों पम्पहाउस के अंदर चले गये। ताईजी खाट पे बैठ गई और राहत की साँस लेने लगी। मैंने उन्हें पानी दिया और वो शायद बहुत प्यासी थी। उन्होंने पूरा पानी पी लिया। फिर मैंने एक और ग्लास भर के दिया, थोड़ा उनकी साड़ी पर से ब्लाउज़ पे गिर गया और उनकी काले रंग की ब्रा नजर आने लगी यह सब देखकर मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा था। मैंने ताईजी के लिए हाथ पंखा चलाया उन्हें काफ़ी आराम मिल रहा था। हम दोनों के कपड़े पशीने से भीग चुके थे।
मैंने कहा-“बहुत गर्मी है…”
ताईजी ने कहा-“हां है तो सही पर क्या कर सकते हैं?”
मैंने कहा-“मेरा तो नहाने का मन कर रहा है…”
ताईजी बोली-“मन तो मेरा भी कर रहा है पर यहाँ कैसे नहाएांगे?”
मैंने कहा-“आप कोई और कपड़ा पहन लो, वैसे इतनी तेज धूप में कौन आएगा और भोला और पार्वती तो घर पे हैं…”
ताईजी कुछ नहीं बोली थोड़ी देर। फिर कहने लगी-“कपड़े कहाँ है नहाने के?”
मैंने कहा-“आप कोई चादर या कपड़ा लपेट लो और अपने कपड़े सूखने डाल दो…”
ताईजी सोचने लगी और फिर कहा-“जा तू जाकर नहाना शुरू कर, मैं देखती हूँ कुछ…” और उन्होंने बताया की साबुन वग़ैरा कहाँ पड़ा है।
मैं बाहर चला गया और अपने सारे कपड़े उतार दिए और सूखने डाल दिए। वहाँ एक गमछा सूख रहा था, शायद भोला का था। मैंने वो बाँध लिया और पाइप से निकलते हुए ठंडे पानी के नीचे खड़ा हो गया, मुझे बड़ा आराम मिल रहा था। फिर थोड़ी देर बाद ताईजी बाहर आई। मैंने देखा उन्होंने पेटीकोट पहन रखा है शायद वो पार्वती का होगा। उन्होंने सारे कपड़े सुखाने डाल दिए। जब वो कपड़े सूखा रही थी तो मैंने देखा के उन्होंने भी मेरी तरह अंदर कुछ नहीं पहना था। मैं बहुत खुश हुआ और उनके पानी में आने का इांतजार करने लगा।
फिर उन्होंने मुझसे हटने को कहा और खुद पाइप के नीचे खड़ी हो गई।
जैसे ही पानी उनके ऊपर से बहने लगा पेटीकोट पूरा उनके शरीर से चिपक गया और उनके शरीर का शेप क्लियर दिखने लगा। ताईजी की गाण्ड जितना मैंने सोचा था उससे भी बड़ी थी। फिर क्या था उनकी गाण्ड देखकर मेरा लण्ड एकदम खड़ा हो गया। अब इतना बड़ा हो चुका था कि गमछे से बाहर दिखने लगा था। फिर ताईजी पत्थर पे बैठ गई और अपने आपको हाथ से साफ करने लगी। मैंने साबुन नहीं लगाया था अभी तक।
ताईजी ने मेरी तरफ देखा और कहा-“साबुन नहीं लगाया, जल्दी कर कोई आ जाएगा…”
मैंने कहा-“आप ही लगा दो ना?”
ताईजी बोली-“क्यों तू नहीं लगा सकता?”
मैंने कहा-“लगा तो सकता हूँ पर थक गया हूँ…”
ताईजी बोली-“तू पत्थर पे बैठ जा, मैं साबुन लगा देती हूँ…”
मेरी खुशी का तो ठिकाना नहीं था। फिर मैं पत्थर पे बैठ गया। ताईजी ने पहले मेरे सिर पे और फिर पीठ पे अच्छे से साबुन लगाया और फिर छाती और पेट पे लगाने लगी। वो जैसे नोर्मली साबुन लगाते हैं वैसे नहीं लगा रही थी, वो मेरे शरीर के एक-एक अंग को महसूस कर रही थी, और अपनी आँखे बंद करे मजा ले रही थी।
फिर ताईजी ने कहा-“चल खड़ा हो जा, बाकी शरीर में भी लगा देती हूँ…”
उनके स्पर्श से मेरा लण्ड एकदम टाइट हो चुका था, और जब मैं खड़ा हुआ तो उन्होंने मेरे लण्ड की तरफ देखा और मुस्कराने लगी। फिर वो मेरे आगे झुक के टाँगों पे साबुन लगा रही थी। इस पोजीशन में मेरा लण्ड उनके मुँह से कुछ ही दूर था। वो मेरी टाँगों पे साबुन लगाने के बाद ऊपर से नीचे तक हाथ घुमा रही थी। अब उनका हाथ ऊपर जाँघो पर भी टच हो रहा था।
ताईजी ने कहा-“गमछा निकाल दे, मैं अच्छे से साबुन लगा देती हूँ।
मैंने कहा-“मुझे शरम आती है…”
ताईजी हँस पड़ी और कहने लगी-“बचपन में तू नंगा ही घूमता रहता था घर में, और वैसे भी वो सब करते शरम नहीं आई जो अब शर्मा रहा है?” उनका मतलब पम्पहाउस और आटो की बात से था।
मैंने कुछ नहीं बोला और सिर झुका लिया। उन्होंने मेरा गमछा निकाल दिया और पहले मेरी कमर और निचले भाग में साबुन लगाया और फिर मेरी बाल्स पे और उसके नीचे साबुन लगाया, और फिर साबुन हाथ में मलते हुए मुझसे चिपक गई और मेरी गाण्ड पे साबुन लगाने लगी। इस पोजीशन में मेरा लण्ड उनकी चूत से टकरा रहा था, और मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मुँह से आवाज़ें निकल रही थी, पर मैं कुछ बोला नहीं और इस सिचुयेशन का आनंद उठा रहा था। वो भी मुझसे चिपक के खड़ी थी और मेरे लण्ड का मजा ले रही थी। हम दोनों ही एक दूसरे की शरीर का मजा ले रहे थे।
फिर थोड़ी देर बाद वो अलग हुई और दोनों हाथों में साबुन मलते हुए मेरे लण्ड पे साबुन लगाने लगी। सच बताऊं दोस्तों जैसे ही उनका नरम हाथ मेरे लण्ड पे पड़ा, मुझे लगा मैं स्वर्ग में हूँ, और वो बड़े प्यार से मेरे लण्ड पे हाथ घुमा रही थी और उसे घूरे जा रही थी। वो शायद मेरे लण्ड का साइज देखकर हैरान थी। कुछ देर बाद मुझे ऐसा लग रहा था कि वो मुझे मास्टरबेट करवा रही हैं, और एक पल तो ऐसा आया कि मैं झड़ने वाला था। पर उन्होंने शायद भाँप लिया और मेरे लण्ड से हाथ हटा दिया। मैं बड़ा निराश हुआ।
ताईजी ने मुझे बड़ी ही नाटी स्माइल दी, कहने लगी-“चल अब नहा ले और मैं भी साबुन लगाकर नहा लेती हूँ…”
मैंने उनसे पूछा-“क्या मैं भी आपको साबुन लगा दूं?”
ताईजी बोली-“नहीं मैं लगा लूँगी…”
पर मैं उनसे जिद करने लगा-“मैं लगा देता हूँ…”
ताईजी बोली-“ठीक है…”
अब मैं खड़ा था उनके सामने और वो बैठी हुई थी। अब मैंने पहले उनके सिर पे साबुन लगाया और अच्छे से उनके सिर पे हाथ घुमाया, उन्हें बड़ा आराम मिल रहा था। फिर साबुन हाथ में मलकर मैंने उनकी गर्दन और कंधे पे लगाया। उनका शरीर काफ़ी चिकना था एकदम मक्खन के जैसा। मुझे बड़ा मजा आ रहा था और वो भी आँख बंद किए साबुन लगवा रही थी और मजे ले रही थी। फिर मैंने साबुन को हाथ में मला और छाती का जो हिस्सा पेटीकोट से बाहर था उसपे लगाने लगा।
क्या बताऊं कितना मजा आ रहा था, मन कर रहा था पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर चुहिया को फिर से भीच दूं। पर मैंने उन्हें और सिडयूस करने का सोचा, और फिर उसी तरह मैंने पीठ का जो हिस्सा पेटीकोट से बाहर था उसपे साबुन लगाया।
अब मैंने ताईजी से कहा-“आप खड़ी हो जाइए, ताकी मैं बाकी के शरीर पे भी साबुन लगा सकूँ…”
ताईजी खड़ी हो गई। फिर जैसे ही मैंने साइड से नाड़ा खोलने की कोशिस की तो ताईजी ने मेरे हाथ को रोक दिया।
मैंने कहा-“क्या हुआ?”
ताईजी बोली-“रहने दे…”
मुझे कुछ समझ में नहीं आया, और मैंने उनसे पूछा-“तो मैं साबुन कैसे लगाउन्गा?”
ताईजी बोली-“ऐसे ही लगा ले…” फिर उन्होंने कहा-“यह खुली जगह है, कोई भी आ सकता है…”
मैंने समझ गया और कुछ नहीं बोला फिर मैंने साबुन अपने हाथों में लिया और घुटनों के बल नीचे बैठ गया और उनके पाँव पे साबुन लगाने लगा। मैंने साबुन अच्छे से अपने हाथों पे मला और पूरी टाँगों पे लगाने लगा। मैं उनके पाँव पे नीचे से ऊपर तक हाथ घुमा रहा था, पर मैं उनकी चूत पे नहीं गया, और फिर वैसे ही साबुन को हाथ में मलकर पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर टाँगों के पीछे के हिस्से में ऊपर से लगाने लगा। ताईजी की टाँगें गोरी थी और एक भी बाल नहीं था। उन्हें छूने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था।
अब मैं उनके पीछे खड़ा हो गया और हाथ में साबुन लेकर उनके पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर उसे कमर तक ऊँचा कर दिया और अब वो नीचे से पूरी नंगी थी। मेरे पीछे होने की वजह से मैं उनकी चूत तो नहीं देख पाया पर उनके चूतड़ ज़रूर देखे, एकदम गोरे-गोरे फूले हुए।
ताईजी बोली-“क्या कर रहा है?”
मैंने कहा-“साबुन लगा रहा हूँ…”
ताईजी कुछ नहीं बोली। अब मैंने साबुन लगा हाथ उनकी चूत पे रख दिया। वो काँप गई और अपने शरीर का वजन पीछे की तरफ करने लगी। फिर मैंने दोनों हाथों से उनकी चूत पर ऊपर से नीचे तक साबुन लगाया और अच्छे से हाथ घुमा रहा था। अब मैं उनकी चूत की लकीर पे उंगली घुमा रहा था, और वो एकदम गरम हो चुकी थी। मैंने उनकी चूत के दाने को दबाया तो उनके मुँह से हल्की सी चीख निकल गई। उन्होंने कुछ नहीं बोला और जोर-जोर से साँसे लेने लगी।
अब मैं थोड़ा झुका तो इस पोजीशन में मेरा लण्ड ताईजी की गाण्ड के छेद के सामने था। मैंने अपना लण्ड सीधा किया और उनके चूतड़ों के बीच सेट कर दिया। अब मैं उनकी चूत में उंगली कर रहा था और उनकी गाण्ड पे लण्ड भी घिस रहा था। ताईजी भी मेरे साथ दे रही थी, वो अपनी गाण्ड पीछे की तरफ पुश कर रही थी। उधर मेरी उंगली उनकी चूत की सैर कर रही थी। इतना अच्छा और रोमांचक अनुभव मुझे लाइफ में कभी नहीं मिला था। जैसे ही मैं झड़ने वाला था, मैंने अपने आपको रोक दिया और उनसे अलग हो गया।
यह देखकर ताईजी निराश हुई और गुस्से से मेरी तरफ देखा। मैंने वोही मुस्कान उन्हें वापस दी जो उन्होंने मुझे दी थी। जब उन्होंने मुझे बीच में छोड़ा था, जब मैं झड़ने वाला था तब।
खैर, मैं उनके सामने आकर खड़ा हो गया और फिर से अपने हाथ में साबुन लगाया और उनका पेटीकोट ऊँचा कर उसके अंदर हाथ डालकर उनकी गाण्ड पे साबुन लगाने लगा। वो तो खुश हुई ही, पर मुझे भी बड़ा मजा
आ रहा था। अब मेरा लण्ड उनकी चूत के सामने था। फिर मैंने उन्हें अपने से सटा लिया और गाण्ड पे साबुन लगाकर हाथ घुमाने लगा।
ताईजी भी ऊऊओ आअह्हह… हाआय करने लगी।
फिर मैंने उनके चूतड़ को फैलाया और उनके चूतड़ों के बीच हाथ घुमाने लगा। उनकी गाण्ड गरम थी। अब मैंने एक उंगली उनकी गाण्ड में घुसाने की कोशिस की। वो विरोध कर रही थी, पर मुझे हटाया नहीं और कुछ बोली भी नहीं। मैंने धीरे-धीरे उनकी गाण्ड में उंगली घुसा दी और उसे अंदर-बाहर करने लगा। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी औरत की गाण्ड में उंगली की थी। क्या मजा आया, उस आनंद को बयान करना मुश्किल है। उनकी गाण्ड अंदर से किसी भट्टी की तरह गरम थी। अब मेरा लण्ड उनकी चूत से टकरा रहा था। वाह… क्या मजा आ रहा था। मन कर रहा था लण्ड घुसेड़ दूं, पर अब मैं उनके मुँह से सुनना चाहता था। मैं ऐसे ही लण्ड छूता रहा, कई बार तो ऐसी पोजीशन में आया कि लण्ड उनकी चूत के मुँह पे ही अटक गया, पर मैंने पुश नहीं किया।
ताईजी समझ गई, कहने लगी-“चल नहा ले, बहुत साबुन लगा लिया…”
फिर उन्होंने मुझसे कहा-“तेरा साबुन सूख गया है चल तू खड़ा हो जा मैं नहला देती हूँ…”
फिर मैं बहते पानी की नीचे खड़ा हो गया और ताईजी ने पहले मेरे सिर को अच्छे से धोया फिर मेरी छाती धोई और काफ़ी देर तक उसपे हाथ घुमाती रही।
मैंने नहाते हुए पूछा-“ताईजी घर कब जाएँगे?”
ताईजी ने कहा-“अभी टाइम है पर तू क्यों पूछ रहा है?”
मैंने कहा-“ऐसी ही पूछा…”
फिर ताईजी ने मेरी पीठ धोई, जब वो पीठ धो रही थी वो मेरे पीछे खड़ी थी और उनकी चुचियाँ जब मैं पीछे होता तो टच होती थीं। फिर उन्होंने मेरे चूतड़ों को साफ किया और उन्हें दबाया भी, फिर वो नीचे झुक के टाँगे साफ करने लगी। अब वो खड़ी हुई और पीछे से पहले मेरे लण्ड के आस-पास का एरिया साफ किया और फिर मेरे लण्ड पे हाथ घुमाने लगी, और फिर उन्होंने मेरे लण्ड की चमड़ी को पीछे खींचा और मेरे लण्ड का टोपा धोने लगी। अब वो मेरे लण्ड को आगे-पीछे करने लगी। मुझे बड़ा अच्छा लगा ताईजी से मूठ मरवा कर,
फिर ताईजी ने एक बार मेरा पूरा शरीर फिर से धोया और बोली-“जा कपड़े पहन ले…”
मैंने कहा-“आपने मुझे नहलाया, मैं भी आपको नहलाउन्गा…”
ताईजी बोली-“ठीक है…”
मैं पीछे हो गया और वो बहते हुए पानी के सामने खड़ी हो गई। मैंने उनके बाल धोए और फिर गर्दन पे हाथ घुमाने लगा, आगे से पीछे तक। फिर मैंने पीछे उनके पेटीकोट को ऊपर किया और हाथ सीधा उनकी चुचियाँ पे ले गया, उन्हें पहले अच्छे से धोया और फिर उन्हें दबाने लगा। वो मदमस्त हुए जा रही थी। वो अपनी गाण्ड
मेरे लण्ड पे घिस रही थी और सिसकियाँ ले रही थी। उस दिन आटो में जम के दबा नहीं पाया था, आज खुले में नंगी चुचियों को मैं जोर-जोर से दबाए जा रहा था। मैं उनके निप्पल को पिंच भी कर रहा था।
अब मैं उनकी चुचियों को छोड़ कर घुटनों के बल बैठ गया, और उनकी गाण्ड साफ करने लगा। अच्छे से दोनों चूतड़ों को धोया और फिर गौर से देखने लगा। ताईजी ने पीछे मूड़ कर देखा मुझे पर कुछ नहीं बोला।
फिर मैंने वो किया जो उन्होंने कभी अनुभव नहीं किया था, ना ही सोचा था। मैं उनके चूतड़ों पे बारी-बारी किस कर रहा था और उन्हें चाट रहा था।
ताईजी चिल्ला उठी-“ओह्हह… क्या कर रहे हो? मैं पागल हो जाउन्गी…”
फिर मैंने उनके एक चूतड़ पे धीरे से काटा और दोनों को चाटने लगा। वो पागल हुए जा रही थी, फिर मैंने दोनों चूतड़ों को फैलाया तो उनकी गाण्ड का छेद मेरे पास आया। पानी बह रहा था, और उनकी गाण्ड से होते हुए नीचे जा रहा था। मैंने उनकी गाण्ड के छेद पे किस किया।
ताईजी उछल पड़ी और ऊऊऊ… ओह्हह… आअह्हह… करने लगी।
अब मैं उनके छेद पे अपनी जीभ फिराने लगा।
ताईजी तो पागल हुए जा रही थी-“ऊऊऊ… ओह्हह… राज्जा आअह्हह… मर गई यह लड़का क्या कर रहा है? उईईई माँ आअह्हह…”
फिर मैंने अपनी जीभ उनके छेद में घुसा दी।
