पापा की परी प्रीती 4

बाप बेटी

चुदाई के बाद भूपिंदर सोने जा चुकी थी, मगर मैं और प्रीती वहीं लाउंज में ही बैठे थे। मुझे लग रहा था प्रीती अभी और चुदाई करवाना चाहती थी।

जब मैंने प्रीती से पूछा कि प्रीती क्या एक बार और चुदाई करवानी है? जवाब में प्रीती ने जो मुझसे कहा वो हैरान करने वाला था। “पापा आज ऐसे चोदो मुझे, जैसे कोइ किसी रंडी क चोदता है। बस समझ लो मैं एक कालगर्ल – एक रंडी ही हूं और आप पैसे देकर एक रात के लिए मुझे चोदने के लिए लाये हो, और अपने पूरे पैसे मुझे चोद-चोद कर वसूलोगे – मेरी फुद्दी चोद-चोद कर, गांड चोद-चोद कर। पापा एक बार तो तोड़ दो मेरा जिस्म, जकड़ कर, चोद-चोद कर, भूल जाओ मैं आपकी बेटी हूं। एक बार ऐसे बेदर्द हो कर चुदाई करो मेरी, जैसे आपने चोद-चोद कर मेरी फुद्दी फाड़ ही देनी हो, चीखें निकाल दो मेरी। ऐसी चुदाई करो पापा जैसे आपने दस साल से चूत नहीं देखी, और आज ये चूत मिली है तो पता नहीं फिर कब मिलेगी।”

“पापा आप समझ रहे हो ना कि मुझे आपसे एक बार आपसे इस तरह की ताबड़तोड़ चुदाई करवानी है।”

प्रीती का बोलना जारी था, “पापा आपने कभी किसी बड़ी साइज़ के ताकतवर लेब्राडोर या जर्मन शेफर्ड कुत्ते को एक नाजुक सी छोटी कुतिया को चोदते हुए देखा है? कुत्ते का ग्यारह बारह इंच का लंड जब कुतिया की छोटी सी चूत में जा कर जब सख्त हो जाता है तो कुतिया दर्द से चिल्लाती है, बिलबिलाती है मगर वो कुत्ता अपनी अगली टांगों में कुतिया को ऐसे जकड़ लेता है कि कुतिया हिल भी नहीं पाती, बस दर्द से चीखती रहती है पीछे मुड़-मुड़ कर कूँ कूँ करती हुई कुत्ते को देखती रहती है कि कब ये अपना लंड मेरी चूत में से निकालेगा। और पापा कुत्ता लंड कुतिया की फुद्दी में से नहीं नहीं निकलता और ना ही कुतिया को हिलने ही देता है।”

“और पापा जब एक बार कुत्ते का लंड कुतिया की फुद्दी में फूल गया, उसके बाद तो ना कुत्ता ही अपना लंड कुतिया की चूत में निकाल पाता है और ना ही कुतिया के पास कोइ चारा रहता है सिवाए इसके कि वो भी दर्द भी सहे और दर्द के साथ-साथ उस कुत्ते के बारह इंच लम्बे लंड के मजे भी ले, और उसके बाद तो जब तक कुत्ते के लंड का सारा पानी निकाल नहीं जाता लंड ढीला नहीं पड़ता, और लंड कुतिया के फुद्दी में से बाहर ही नहीं निकलता।”

मैं सोच रहा था ये क्या हो गया है इस लड़की को आज? ये कैसी दीवानगी है चुदाई के लिए?

मैंने पूछ ही लिया, “क्या हो गया प्रीती ऐसी चुदाई करवानी है?”

प्रीती ही बोली, “हां पापा बस एक बार – आप का लंड है ही इतना मस्त है और खड़ा को कर इतना सख्त हो जाता है कि जब फुद्दी में जाता है तो मजा ही आ जाता है। पता नहीं क्यों मेरा हो मन हो रहा है एक बार आपसे ऐसी चुदाई करवाने का, एक बार गांड फड़वाने का।”

मुझे बिशनी की चुदाई याद आ गयी जब चुदाई कि बाद उसने मुझे बोला था, “सरदार जी आज क्या हो गया था। मेरा पूरा जिस्म तोड़ दिया आपने। ऐसा तो कभी नहीं हुआ?”

मुझे लगा अब कोइ चारा नहीं। अगर प्रीती का मन है तो उसे एक बार ऐसे चोदना ही पड़ेगा। प्रीती मेरे सामने नंगी बैठी थी। प्रीती का गोरा चिट्टा गुलाबी जिस्म देख कर मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था। आँखों की आगे प्रीती की गुलाबी गीली फुद्दी घूम रही थी।

मैंने अपना गिलास खाली किया और व्हिस्की से पूरा गिलास भर दिया और बिना पानी, सोडा मिलाये मैंने पूरा गिलास खाली कर दिया, खड़े हो कर अपने कपड़े उतारे और प्रीती से बोला, “चल मादरचोद चुदक्कड़ प्रीती आजा, तेरे जिस्म की, तेरी फुद्दी की, तेरी गांड की अकड़ निकालूं आज। आजा चल चोदूं तुझे कुतिया की तरह।”

प्रीती भी पूरी बेशर्म हो चुकी थी। वो बोली, “आजा? कहां आजा? चुदाई किसने करनी है, आपने या मैंने। अगर चोदना है तो अपनी गोद में उठाओ उस दिन की तरह और ले जाओ जहां लेजाना है, और चोदो ले जा कर।”

मुझे लगा प्रीती जिन के नशे में पक्का ही नशे में टुन्न हो चुकी है, मगर मुझे अभी भी वैसा नशा नहीं हुआ था।

मैं प्रीती को गोद में उठाने उसके पास गया। जैसे ही मैं उसके पास पहुंचा, उसने मेरा लंड पकड़ कर मुंह में लिया और चूसने लगी। थोड़ा चूसने के बाद प्रीती खड़ी हुई और, “बोली, चलो पापा ले चलो वहां जहां ले कर जाना कर चोदना है चोदो।”

मैंने प्रीति को गोद में उठाया और उसी के कमरे में – गेस्टरूम में ले गया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। बाकी का काम प्रीती ने खुद ही कर दिया। प्रीती ने एक तकिया लिया और अपने चूतड़ों के नीचे लगा कर टांगे उठा कर चौड़ी कर दी और टांगों के साइड से हाथ डाल कर अपनी फुद्दी की फांकें खोल दी। प्रीती की ग़ुलाबी फुद्दी मेरे सामने थी। कोई और दिन होता तो प्रीती की ग़ुलाबी फुद्दी चूस लेता।
फुद्दी की फांकें चौड़ी करने के बाद प्रीती बोली, “आ जाओ पापा, ये लो ये रही आपके बेटी की फुद्दी। जो करना है करो।”

जिस तरह से प्रीती चुदाई करवाने के लिए मरी जा रही थी, मैंने लंड प्रीती की खुली हुई फुद्दी के छेद पर रक्खा और एक ही झटके में लंड अंदर डाल दिया।

प्रीती ने एक मिनट नहीं लगाया और नीचे से हाथ निकाल मुझे कस कर पकड़ लिया और टांगें मेरी कमर पर रख कर मुझे कैंची की तरह अपनी टांगों में जकड़ लिया। मैंने भी बाहें प्रीती के पीछे करके प्रीती को चोदना शुरू कर दिया। मैं उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह की आवाजों के साथ प्रीती की फुद्दी में जोर-जोर के धक्के लगा रहा था, और प्रीती आअह आअह आअह आअह करती हुई चूतड़ घुमा रही थी।

प्रीती की फुद्दी ने एक बार पानी छोड़ा, दूसरी बार पानी छोड़ा, और जब तीसरी बार पानी छोड़ा तो प्रीती ने हल्की सी आखें खोली और बोली, “पापा आप कहां तक पहुंचे, मुझे तो तीन बार मजा आ भी गया।”

मैं उसी तरह धक्के लगाते हुए बोला, “मैं कहीं नहीं पहुंचा मेरी जान, अभी तो मैंने तुझे नाजुक सी छोटी कुतिया बना कर चोदना है।”

ये कह कर मैंने लंड प्रीती की फुद्दी में से बाहर निकाला और बोला, “चल हो जा उल्टी, बन जा कुतिया। चोदूं तुझे उस बड़े ”लेब्राडोर, जर्मन शेफर्ड” कुत्ते की तरह।”
प्रीती बेड के किनारे पर उल्टी लेट गयी और अपने चूतड़ उठा दिए। प्रीती की चूत का छेद बिलकुल मेरी लंड के सामने था, मगर गांड का छेद लंड से ऊपर था। गांड चोदने के लिए उसे सोफे पर ले जाना पड़ना था।

मैंने लंड प्रीती की चूत के छेद पर रख कर थोड़ा सा टिकाया और प्रीति की कमर पकड़ कर एक ही बार में पूरा लंड चूत में डाल कर प्रीती की चुदाई चालू कर दी। मेरे लंड की धक्के इतने ज़बरदस्त थे कि हर धक्के की साथ प्रीती आगे की तरफ खिसकती थी और मैं प्रीती को कमर से पकड़ कर वापस पीछे करता था।

कुतिया की चुदाई करते हुए कुत्ता भी ऐसा ही करता है। अपनी अगली टांगों से कुतिया को ऐसा जकड़ लेता है कि कुतिया चाहे भी तो आगे जा ही नहीं सकती। प्रीती बार-बार सर पीछे कर के मेरी तरफ देख रही थी मगर कुछ बोल नहीं रही थी।

क्या प्रीती मुझे रुकने के लिए बोल रही थी। मगर ऐसा कैसे हो सकता है? प्रीती तो चुदाई करवाने के लिए मरी जा रही थी। तो फिर? क्या प्रीती गांड में लंड डालने के लिए कह रही थी? शायद यही बात थी। प्रीती गांड में लंड लेना चाहती थी।

मैंने प्रीती की चूत में से लंड निकाला और प्रीती के चूतड़ों पर एक धप्पड़ लगाते हुए बोला, “चल मेरी चुदक्कड़ रंडी, चल अब सोफे पर उल्टी लेट जा चूतड़ ऊपर उठा कर कुतिया की तरह। अब तेरी गांड में लंड डालूंगा, गांड फाड़ूंगा तेरी। तू भी आज की चुदाई याद रखेगी।”

इससे पहले कि प्रीती कुछ बोलती मैंने प्रीती को बांह पकड़ कर उठाया और सोफे पर उल्टा घुटनों के बल लिटा दिया। मैंने प्रीती के चूतड़ ऊपर उठा कर चूतड़ों का छेद अपने लंड के बिल्कुल सामने किया और थूक लगा कर लंड छेद में अंदर धकेलना शुरू कर दिया।

प्रीती सर घुमा कर बोली, “पापा क्रीम तो लगा लो, कैसे जाएगा आपका ये मोटा लंड गांड के अंदर।”

मैंने कहा, “जाएगा मेरी जान ये लंड जाएगा भी और आज तेरी गांड भी फाड़ेगा। देखती रह जाएगा। कुत्ता ही कौन से क्रीम लगाता है जो उसका बारह इस लम्बा लंड छोटी सी कुतिया की फुद्दी में चला जाता और फूलने के बाद तो बाहर ही नहीं निकलता? और फिर वैसे भी तो पैसे के लिए चुदवाने के लिए आयी रंडी को तो ऐसे ही चोदा जाता है, बिना क्रीम के।”

ये कह कर मैंने लंड अंदर डालना चालू कर दिया। बिना क्रीम के लंड के अंदर डालने में दिक्कत तो हो रही थी, लेकिन मैं आज प्रीती कि गांड रगड़-रगड़ कर चोदना चाहता था।

मैंने थोड़ थूक गांड के छेद पर लगाया और थोड़ा जोर लगा कर लंड अंदर धकेला। लंड थोड़ा और अंदर चला गया। जब कोशिश करते-करते लंड आधा अंदर चला गया तो मैंने लंड बाहर निकला। ढेर सारा थूक प्रीती कि गांड पर लगाया और लंड गांड के छेद पर एक ही बार में पूरा का पूरा अंदर बिठा दिया।

प्रीती चिल्लाई, “ओह पापा क्रीम क्यों नहीं लगाई? बड़ा दर्द हुआ है। फाड़ोगे क्या मेरी गांड पापा?”

मैंने भी वैसे ही कहा, “हाँ फाड़ूंगा – अब बोल।”

मेरा लम्बा मोटा लंड प्रीटी की गांड में था और मैं प्रीती की गांड में बेतहाशा लम्बे लम्बे धक्के लगा रहा था और प्रीती को हिलने भी नहीं दे रहा था। जैसे ही प्रीती ने कहा, “बड़ा दर्द हो रहा है, फाड़ोगे क्या मेरी गांड पापा?”

फिर मैंने प्रीती की गांड में और भी जोर के धक्के लगते हुए कहा, “फ़िक्र ना कर मेरी रंडी, ये मेरी बेटी की गांड है फटने वाली नहीं।” और इतना कह कर मैंने प्रीती कि गांड जोरदार तरीके से चोदनी शुरू कर दी।

जैसे बड़े कुत्ते की टांगों में जकड़ी छोटी सी मजबूर कुतिया दर्द के मारे मुड़-मुड़ कर पीछे देखते है और कूँ कूँ ऊँ ऊँ चिल्लाती है मगर कुछ कर नहीं पाती – यही हाल मेरे मोटे लंड से सूखी गांड चुदाई में प्रीती का भी हो रहा था। प्रीती हिल तो पा नहीं रही थी, और बार-बार पीछे देखते हुए बोलती जा रही थी बस पापा दर्द हो रहा है, सच में दर्द हो रहा है।”

मुझे तो जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। मेरे कान में प्रीती की वही बातें घूम रही थी – “पापा ऐसे चुदाई करो मेरी एक बार, बस समझ लो मैं एक कालगर्ल – एक रंडी हूं और आप पैसे देकर एक रात के लिए मुझे चोदने के लिए लाये हो, और पूरे पैसे वसूलेंगे, मेरी फुद्दी चोद-चोद कर, गांड चोद-चोद कर। पापा एक बार तो तोड़ दो मेरा जिस्म जकड़ कर चोद-चोद कर।”

तभी प्रीती ने बड़ी ही मजबूर नज़र से मुझे देखा। प्रीती की आंखों में आंसू थे। प्रीती बस इतना ही बोली, “बस पापा, प्लीज़ बस करो।”

मेरी नज़र प्रीती के चेहरे पर पड़ी तो मुझे लगा कि प्रीती को सच में ही दर्द हो रहा था। प्रीती की गांड चुदाई रोक दी, मगर लंड अभी भी गांड के अंदर ही था। मैंने प्रीती की बाहें छोड़ दें और प्रीती से पूछा, “प्रीती क्या सच में ही दुःख रहा है?”

प्रीती बोली, “हां पापा सच में चूतड़ों में बहुत दर्द हो रहा है।”

मैंने कहा, “प्रीती अगर दर्द हो रहा था तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं। मझे कहा क्यों नहीं गांड चुदाई बंद करने के लिए।”

प्रीती बोली, “पापा मैं तो कितनी देर से कह रही हूं बस करो पापा बड़ा दर्द हो रहा है, मगर आप ना सुन रहे थे, ना रुक ही रहे थे।”

मैं बोला, “सॉरी मेरी बेटी प्रीती, सॉरी, मैं तो समझा था जैसे एक बड़े कुत्ते की टांगों में जकड़ी कुतिया करती है – पीछे देखती रहती है मगर ऊपर कुत्ता चुदाई बंद नहीं करता – ऐसे ही तुम भी कर रही हो।”

और फिर वो जो तुमने कहा था, “पापा ऐसे चुदाई करो मेरी एक बार। बस समझ लो मैं एक कालगर्ल – एक रंडी हूं और आप पैसे दे कर एक रात के लिए मुझे चोदने के लिए लाये हो, और पूरे पैसे वसूलेंगे, मेरी फुद्दी चोद-चोद कर। पापा एक बार तो तोड़ दो मेरा जिस्म जकड़ कर चोद चोद कर।”

मैंने लंड प्रीती की गांड में से निकाल लिया और प्रीती को उठा कर बेड की साइड पर ही बिठा कर प्रीती को बाहों में ले लिया और बोला, सॉरी बेबी, मैं तो तुम्हारी सिर्फ वैसी चुदाई करने की कोशिश कर रहा था जैसी चुदाई तुमने कहा था।”

प्रीती ने मेरे चूतड़ पकड़ लिए, “कोइ बात नहीं पापा, आपकी कोइ ग़लती नहीं, मैंने ही कहा थे मुझे आज रात इस तरह एक कुतिया की तरह, एक रंडी के तरह चोदने के लिए।”

फिर प्रीती को जैसे कुछ ध्यान आया। प्रीती बोली, “पापा आपके लंड का पानी नहीं निकला अब तक? मजा नहीं आया अब तक आपको?”

जैसी चुदाई प्रीती ने करने को कहा था – रंडी की तरह, कुतिया की तरह, वैसी ही चुदाई मैंने प्रीती की कर दी। प्रीती की गांड चोदते हुए गांड में क्रीम भी नहीं लगाई, और थोड़ा सा थूक लगा कर ही मोटा लंड गांड में डाल दिया। इस सूखी चुदाई से प्रीती को दर्द होने लगा, मगर मैं नहीं रुका।

प्रीती ने जब बार-बार सर मोड़ कर मेरी तरफ देखा तो मुझे लगा प्रीती को सच में ही दर्द हो रहा था। मैंने लंड प्रीती की गांड में से निकाल लिया और प्रीती को सोफे पर बिठा दिया। प्रीती ने मेरा लंड खड़ा देखा प्रीती ने मेरी तरफ देखरे हुए कहा, “पापा आपके लंड का पानी नहीं निकला अब तक? मजा नहीं आया अब तक आपको?”

ये बोल कर प्रीती ने मेरे सीधे खड़े लंड को अपने मम्मों के बीच ले लिया और मम्मी मेरे लंड पर ऊपर-नीचे करने लगी। प्रीती के मांसल मम्मों के बीच ऊपर-नीचे आगे-पीछे ऐसे हो रहा था जैसे कोइ बहुत ही नाजुक फुद्दी धीरे-धीरे मेरे लंड को चोद रही हो। ऐसा मेरे साथ पहली बार हो रहा था। मुझे बहुत ही ज्यादा मस्ती आ गई।

मैंने प्रीती के कंधो पर हाथ रख कर कहा, “प्रीती तू मेरी बहुत ही अच्छी बेटी है। सॉरी बेटा मैंने चुदाई के जोश में पागल हो कर तुझे कुतिया कहा, रंडी कहा। तू तो बहुत ही अच्छी है बेटा।”

मेरा मजा बढ़ता जा रहा था। प्रीती जोर-जोर से मेरे लंड को अपने मम्मों के बीच में पकड़े हुए आगे-पीछे कर रही थी। बिलकुल फुद्दी चोदने जैसा एहसास हो रहा था। मेरा लंड किसी भी वक़्त मलाई छोड़ सकता था।

मजे के मारे मैंने प्रीती का चेहरा अपने हाथों में ले लिया और कुछ भी बोलने लगा, “प्रीती मेरी प्यारी प्रीती, बड़ा मजा देती है तू अपने पापा को। बड़ा मजा आ रहा है प्रीती। बस अब निकलेगा – निकलने वाला है आह प्रीती मेरी जान, मेरी बेटी क्या फुद्दी चुदवाती है तू, क्या मस्त लंड लेती है चूत के अंदर, गांड के अंदर। पूरा का पूरा लंड ले लेती है अपनी टाइट फुद्दी और गांड में। कई बार तो तेरी फुद्दी में लंड डालते हुए ऐसा लगता है जैसी कुंवारी फुद्दी चोद रहे हों।”

मजे से मैं बोलता जा रहा था, “आह मेरी जान प्रीती, एक दिन तेरी फुद्दी का सारा पानी चाट कर, सुखा कर तेरी फुद्दी चोदूंगा। मस्त रगड़ कर जाएगा सूखी फुद्दी में लंड। मेरी जान, तुझे भी मस्त मजा आएगा सूखी फुद्दी में लंड डलवाने का। फुद्दी और गांड तो चुदवाती ही है तू और अब ये अपने मम्मे चुदवा रही है। आह प्रीती निकला आह प्रीती ये निकला आअह प्रीती, निकला मेरी जान आह ये ले निकला मेरी जान”, और मेरे लंड से ढेर सारी गरम सफ़ेद मलाई निकल कर प्रीती के मम्मों पर फ़ैल गयी।

प्रीती कुछ देर और मेरा लंड को अपने मम्मों में पकड़े हुए आगे-पीछे करती रही, और जब प्रीती ने देखा अब मेरा लंड से पूरी मलाई निकल चुकी है और लंड ढीला होने लगा है तो प्रीती ने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपने मुंह में ले लिया और दुसरे हाथ से मेरे लंड से निकला गाढ़ा पानी अपने मम्मों पर मलने लगी।

जब प्रीती ने मेरे लंड चूस-चूस साफ़ कर दिया और और मुझसे पूछा, “पापा आया मजा?”

मजा तो मुझे आया ही था, वो भी अजीब सा। मैंने कह दिया, “बहुत मजा आया प्रीती, मगर तुझे गांड चुदाई के वक़्त दर्द हुआ, ये मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा। दिखा जरा अपनी गांड का छेद देखूं। प्रीती वहीं सोफे पर हे उलटे हो कर लेट गयी और पीछे हाथ करके चूतड़ चौड़े कर दिये। प्रीती के गांड का छेद थोड़ा सा फूला हुआ था, मगर जरा गांड जरा सी भी छिली नहीं हुई थी बिलकुल ठीक थी।

मैंने प्रीती के चूतड़ों पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, “प्रीती तेरी गांड बिलकुल ठीक ठाक है, बस जरा सी फूली हुई है। कुछ और दिक्कत नही लग रही”, ये कह कर मैं प्रीती के गांड का छेद अपनी जुबान से चाटने लगा।

प्रीटी बोली, “पापा अब मेरी दर्द को भूल जाओ आप, और पापा इतनी तो गांड फूलेगी ही, मोटे लंड से इतनी रगड़ाई भी तो हई है – वो भी सूखी गांड की।

कुछ देर प्रीती के गांड चाटने के बाद मैं बोला, “चलूं प्रीती व्हिस्की की वजह से सर भारी सा है, चुदाई की भी थकान है, जा कर गर्म पानी से शावर – नहाता हूं, तभी बढ़िया नींद आएगी।”

प्रीती बोली, “पापा नहाना तो मैंने भी है आपके लंड की मलाई से मेरे मम्मे चिप-चिप कर रहे हैं, फुद्दी भी मजे के पानी से भरी पड़ी है। आप यहीं क्यों नहीं नहा लेते मेरे साथ ही। वहां मम्मी सो रही होगी, उनको भी डिस्टर्बेंस हो जाएगी।”

मैंने सोचा बात तो ठीक है। मैंने कहा, “ठीक है प्रीती, मै लाउंज से अपने और तुम्हारे कपड़े लेकर आता हूं।”

ये बोल कर मैं बाहर निकल गया और वापस आया तो प्रीती अभी भी वहीं खड़ी थी। हम दोनों बाथरूम में चले गए। प्रीती टॉयलेट सीट पर बैठ गयी मगर पेशाब नहीं किया। उधर मुझे भी जोर का पेशाब आया हुआ था। चार पेग व्हिस्की के और इतनी देर चुदाई हुई थी, मूता मैंने एक बार भी नहीं था। मैं बार-बार अपने लंड को पकड़ रहा था। प्रीती बोली, “क्या बात है पापा, जोर का पेशाब आया है?”

मैंने कहा, “आया तो है, तुम पहले पेशाब कर लो फिर मैं करता हूं।”

प्रीती बोली, “पापा मैं तो आपकी वेट कर रही हूं। आपके चक्कर में मैंने पेशाब रोका हुआ है। चलो पापा करो पेशाब मेरे मम्मों पर, मेरी फुद्दी पर और करो इनकी धुलाई।”

मैंने सोचा प्रीती के ऊपर पेशाब? मैं अभी सोच ही रहा था कि प्रीती बोली, “सोच क्या रहे हो पापा, चलो शुरू करो।” यह बोल कर प्रीटी ने मेरा लंड पकड़ा और अपने मम्मों के ऊपर लगा दिया। प्रीती बोली, “चलो पापा हो जाओ शुरू, डालो अपना गर्म-गर्म मूत मेरे मम्मों पर।”

मैं कुछ रुका और फिर मैंने लंड ढीला छोड़ दिया। मेरे लंड से पेशाब निकला और प्रीटी के मम्मों पर बहने लगा। प्रीती मम्मों पर हाथ फेरती हुई बोली, “आअह पापा मजा आ गया। क्या गर्म-गर्म हो रहा है मम्मों का।” तभी प्रीती ने भी अपनी फुद्दी ढीली छोड़ दी और सुर्र सुर्र सुर्र सुर्र की आवाज के साथ पेशाब करने लगी”

मेरे लंड से पेशाब निकल रहा था और सीधा प्रीती कि मम्मों पर गिर रहा था। प्रीती ने नीचे हाथ करके अपनी फुद्दी की फांकें चौड़ी कर दी। प्रीती के गुलाबी फुद्दी सामने थी। प्रीती बोली ,”पापा थोड़ा गर्म पानी का स्नान इसको भी करवा दो, इसे भी नहाना है।” ये बोलते हुए प्रीती हंस दी।

मैंने उंगली और अंगूठे से लंड पकड़ा और मूत की मोटी धार प्रीती की फुद्दी पर डाल दी। प्रीति आह पापा आह पापा बोलने के साथ-साथ अपनी फुद्दी थपथपा रही थी।

इन मूतने के काम से फारिग हो कर शावर में चले गए और गरम पानी चालू कर दिया। प्रीती पूरी मस्ती में थी। कम से कम दस बार प्रीती ने मेरा लंड चूमा, और मेरे गांड में उंगली डाली। मैं भी कभी प्रीती के मम्मे चूस रहा था कभी प्रीती की गांड में उंगली कर रहा था। हम दोनों एक-दूसरे को बाहों में ले कर चुम्मा-चाटी कर रहे थे और हंस रहे थे।

बढ़िया से नहा कर हम बाहर निकले और मैं कपड़े पहन कर अपने कमरे में चलने के लिए तैयार हो गया। मैं चलने ही वाला था के प्रीती बोली, पापा आज की कुतिया वाली चुदाई का थैंक यूं – मस्त चोदा आपने। पापा, गांड थोड़ा सा दुःख तो रही है, मगर गांड चुदवाने का मजा भी आ गया।”

मैं मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चला गया। भूपिंदर गहरी नींद में थी। मैं भूपिंदर के पास लेट गया और भूपिंदर के ऊपर हाथ रख दिया जल्दी ही मुझे नींद आ गयी। पता नहीं कितना सोया मैं। आठ बजे सुबह उठा तो भूपिंदर नहीं थे। मैं बाथरूम में चला गया और नहा धो कर बाहर आया। कांता और भूपिंदर किचन में थे। मेरी आवाज सुन कर भूपिंदर ने मुझे देखा और हंसती हुई बोली, “जाग गए?”

मैंने इधर-उधर देखा तो प्रीती दिखाई नहीं दी। मैंने भूपिंदर से पूछा, “भूपिंदर प्रीती नहीं दिखाई दे रही, उठी नहीं अभी?

भूपिंदर हंसते हुए बोली, “नहीं, रात देर से सोई होगी। चलो तुम लाउंज में बैठो, मैं चाय लाती हूं।”

मैं लाउंज में चला गया और पेपर पढ़ने लगा। थोड़ी देर में भूपिंदर चाय की ट्रे लेकर आ गयी। केतली और तीन कप्पों के साथ, और साथ में इंग्लैंड के बने डाइजेस्टिव बिस्कुट। भूपिंदर ने केतली में से कपों में चाय डाली और एक कप मेरे हाथ में पकड़ा दिया।

चाय की चुस्कियां लेते हुए भूपिंदर बोली, “अवतार रात को क्या हुआ? हुई चुदाई?”
मैंने कहा, “हुई और बहुत ही मस्त हुई। रात दो बजे सोया मैं। प्रीती भी उतने बजे ही सोयी होगी।”

भूपिंदर हंसते हुए बोली, “चलो सुनाओ क्या-क्या हुआ? पर एक बात तो है, बड़ा दम है तुम बाप-बेटी में। पहले शाम से ही चुदाई शुरू हो गयी थी, फिर रात को और? अवतार लंड खड़ा हो गया था तुम्हारा?”

मैंने भी हंसते हुए कहा, “भूपिंदर तुमने बेटी नहीं जादूगरनी पैदा की है। लंड कैसे खड़ा करना है ये वो अच्छे तरह जानती है।”

भूपिंदर वैसे ही हंसते हुए बोली, “अच्छा? चलो वो तो जादूगरनी है जवान भी है, और तुम? साले तुम ही कौन से कम हो – पक्के चूतिये हो तुम। कभी चुदाई से थकते भी हो तुम? मैं तो सोच रही थी इस बार तो चलो प्रीती यहां थी, मगर जब प्रीती यहां नहीं होती और मैं कनाडा गई होती हूं तब तुम क्या करते हो? क्या फ़ार्म में जा कर मुर्गियां चोदते हो? लगता है अब कनाडा जाना बंद ही करना पड़ेगा। बताओ क्या-क्या हुआ रात? मैं सुन कर ही मजा ले लेती हूं।”

मैंने शुक्र मनाया कि भूपिंदर को बिशनी का ध्यान नहीं आया नहीं तो क्लेश हो जाना था। मैंने पूरी की पूरी कथा ही सुना दी – बस कुछ नहीं बताया तो वो थी कुतिया और रंडी वाली बात। वो मुझे भी अच्छी नहीं लगी थी। बाकी सब मैंने वैसे का वैसे ही बता दिया, यहां तक की पेशाब वाली बात भी और इक्ट्ठे नहाने वाली बात के साथ-साथ गांड का छेद फूलने वाली बात भी।”

भूपिंदर बस इतना ही बोली, “कमाल है।”
तभी प्रीति भी आ गयी।

प्रीती नहा धो कर आयी थी। पहना तो गाऊन ही हुआ था, लेकिन गाऊन भारी कपड़े का था। आर-पार दिखाई नही दे रहा था। मगर जिस तरह से चलते हुए प्रीती के मम्मे हिल रहे थे ये जरूर लग कहा था कि प्रीती ने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी। मैंने सोचा अगर प्रीती ने ब्रा नहीं पहनी तो फिर नीचे पैंटी भी नहीं पहनी होगी। एक पल के लिए प्रीती की गुलाबी फुद्दी मेरी आँखों के आगे घूम गयी और मेरे लंड ने थोड़ी सी हरकत कर दी।

बालों को पीछे जूड़े की तरह बांधते हुए प्रीती बोली, “गुड मॉर्निंग मम्मी, गुड मॉर्निंग पापा” और भूपिंदर के पास ही बैठ गई।
भूपिंदर ने चाय कप में डाली और कप प्रीती की हाथ में देती हुए बोली,”लगता है रात बढ़िया निकली मेरी बेटी की।”

प्रीती मुस्कुराते हुए बोली, “हां मम्मी बढ़िया ही नहीं बहुत बढ़िया निकली – बाकी तो आपने पापा से पूछ ही लिया होगा आप भी कौन से कम हो।”

भूपिंदर बोली, “प्रीती बताया तो है अवतार ने, तुम दोनों ने तो बहुत कुछ किया रात को। मैं तो हैरान हूं, क्या-क्या कर लेते हो तुम दोनों आपस में।”

प्रीती बोली, “मम्मी एक बात बताऊं, जब चुदाई करवाओ दो सब भूल जाना चाहिए, तभी मजा आता है चुदाई का। मैं तो कहती हूं जो-जो रात को मैंने और पापा ने किया है, एक बार आप भी करके देखो। अभी तो आपने मेरी गांड नहीं देखी, चोद-चोद कर फुला दी मेरी गांड पापा ने। कांता चली जाए तब दिखाती हूं आपको।”

तभी कांता आ गयी, अपनी चुन्नी के पल्लू के साथ हाथ पोंछती-पोंछती और भूपिंदर से बोली, “बीजी बैंगन का भरता बना दिया है दोपहर के लिए। रात को क्या बनाना है?”

भूपिंदर मुझ से बोली, “बोलो अवतार क्या खाना है रात को?”

मैंने कहा, “मटन बना लेना कांता। तरी – ग्रेवी थोड़ी पतली रखना साथ में चावल बना लेना।”

कांता बोली, “ठीक है जी, मैं तैयारी करके जाती हूं, “मटन फिर शाम को आ कर बना लूंगी।”

कांता ये बोल कर चली गई।

भूपिंदर प्रीती से बोली, “प्रीती कितनी गांड चुदवा ली जो बोल रही हो फूल गयी है।”

प्रीती बोली, “मम्मी बात कितनी चुदवाने की नहीं। पापा का लंड देखा है? अगर सूखी गांड में डालेंगे बिना क्रीम लगाए तो क्या होगा? गांड तो फूलेगी ही। एक बार सूखी चुदवा कर तो देखो, तभी पता चलेगा।”

भूपिंदर बोली, “आज ही चुदवाती हूं।”

भूपिंदर और प्रीती की बातें सुन-सुन कर मेरा लंड खड़ा होने लग गया था। मैंने कहा, “तुम लोगों की बातें सुन-सुन कर तो मेरा लंड खड़ा भी होने लग गया है। लगता है प्रीती से एक बार थोड़ा सा चुसवाना पड़ेगा।”

तभी कांता आ गयी, बोली, “बीजी मटन के लिए मसाला भून लिया है, मटन शाम को बना दूंगी। अब चलती हूं।”

कांता जाने के लिए मुड़ी तो मैंने कहा, “कांता बाहर जुगनू होगा, उसे बोलना मैंने आज फार्म पर नहीं जाना, वो चला जाए और जो सामान लाना है ले आये। दोपहर बाद फिर सेक्टर सत्रह चलेंगे।”

कांता बोली, “जी ठीक है”, और ये बोल कर वो चली गयी।

कांटा के जाते ही प्रीती ने दरवाजा बंद किया और गाऊन ऊपर कर के चूतड़ उठा कर लेट गयी और चूतड़ फैला कर भूपिंदर से बोली, “लो मम्मी देखो आ कर मेरी गांड का हाल।”

भूपिंदर उठी और प्रीती के चूतड़ थोड़े और फैला कर गांड का छेद देखा और बोली, “प्रीती ज्यादा फूली तो नहीं हुई, मगर चूतड़ों के छेद की साइडों सी लाल जरूर है।”

मैं भी उठ कर प्रीती के पीछे चला गया। प्रीती के चूतड़ों का छेद किनारों से लाल हो गया था मगर अब गांड फूली नहीं। प्रीती के चूतड़ देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। मैंने पायजामा उतार दिया और बोला, “प्रीती की गांड देख कर तो लंड गांड में डालने का मन होने लगा है।”

प्रीती बोली, “डाल लो पापा मैं तो लेटी ही हुई हूं।”

हम लाऊंज में बैठे हुए थे और देर रात तक मेरी और प्रीती की चुदाई की बातें कर रहे थे। प्रीती ने भूपिंदर को अपनी सूखी गांड चुदाई के बारे में बताया तो भूपिंदर का मन भी ऐसे गांड चुदाई का होने लगा।

भूपिंदर ने प्रीती को एक बार गांड दिखाने को कहा। अभी कांता अंदर ही थी। जैसे ही कांता निकली, कांता के जाते ही प्रीती ने दरवाजा बंद किया और गाऊन ऊपर कर के चूतड़ उठा कर लेट गयी और चूतड़ फैला कर भूपिंदर से बोली, “लो मम्मी देखो आ कर मेरी गांड का हाल।” भूपिंदर उठी और प्रीती के चूतड़ थोड़े और फैला कर गांड का छेद देखा और बोली, “प्रीती ज्यादा फूली तो नहीं हुई, मगर चूतड़ों के छेद की साइडों सी लाल जरूर है।”

मैं भी उठ कर प्रीती के पीछे चला गया। प्रीती के चूतड़ों का छेद किनारों से लाल हो गया था मगर अब गांड फूली नहीं। प्रीती के चूतड़ देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। मैंने पायजामा उतार दिया और बोला, “प्रीती की गांड देख कर तो लंड गांड में डालने का मन होने लगा है।”

प्रीती बोली, “डाल लो पापा मैं तो लेटी ही हुई हूं।”

भूपिंदर बोली, “बस भी करो अब। मेरी भी तो गांड है, मेरी भी तो फुद्दी है, तुम दोनों ही मजे लेते रहोगे क्या?”

हंसते हुए नंगा मैं वापस सोफे पर आ कर बैठ गया। प्रीती सीधी होने लगी तो भूपिंदर ने कहा, “एक मिनट प्रीती, ऐसे ही लेटी रह – जरा अपने गांड चाटने दे।” ये बोल कर भूपिंदर नीचे बैठी और प्रीती की गांड के छेद पर जुबान फेरने लगी।

गांड चाटने के बाद भूपिंदर मुझसे बोली, “अवतार एक बार मेरी गांड भी चोदो ऐसे ही जैसे प्रीती के चोदी है। लाल कर दो मेरी गांड एक बार।”

मैंने कहा, “ठीक है, आज रात को ही लो।”

भूपिंदर बोली, “रात की रात को देखेंगे, एक बार तो अभी चोद दो सेक्टर सत्रह जाने से पहले।”

ये बोल कर भूपिंदर खड़ी हो गयी और प्रीती से बोली,”प्रीती मैं अंदर चलती हूं, तेरी गांड चाट कर तो मेरी फुद्दी भी गर्म होने लगी है। चल एक बार फुद्दी चुसवा ले मेरे से, बड़ा मन कर रहा है तेरी फुद्दी चूसने चाटने का।”

प्रीती बोली, “आप चलो मम्मी मैं पापा का थोड़ा लंड चूस कर आती हूं, देखो कैसे फुंफकारे मार रहा है।”

भूपिंदर बोली, “ठीक है जल्दी आना। कहीं फिर से गांड ही चुदवाने लग जाना।”

भूपिंदर ये बोल कर चली गयी। प्रीती मेरे सामने आ कर सोफे पर बैठ गयी और बोली, “चलो पापा खड़े हो जाओ, लंड चूसूं आपका।”

मैं खड़ा हो गया और प्रीती ने मेरा लंड मुंह में ले लिया। प्रीती की लंड चुसाई बहुत मस्त थी। भूपिंदर भी ऐसा लंड नहीं चूसती थी जैसा प्रीती चूसती थी।

प्रीती ने लंड थोड़ा और चूसा और खड़ी हो गयी और बोली, “जाओ पापा मम्मी चूतड़ उठा कर वेट कर रही होगी। कहीं ऐसा ना हो लंड मेरे मुंह में ही मलाई छोड़ दे। बढ़िया चुदाई करनी है आज आपने मम्मी की गांड की – लाल कर देनी है पापा आज चोद-चोद कर। पापा सूखी ही रगड़ना और हाथ भी पीछे करके पकड़ लेना, हिलने मत देना मम्मी को, जैसे मेरे पकड़े थे। जो मर्जी कहे मम्मी, छोड़ना मत आज।”

मैंने पायजामा उठाया और अंदर जाने लगा। पीछे-पीछे प्रीती भी चल पड़ी। अंदर कमरे में भूपिंदर नंगी हो कर सोफे पर बैठी हुई थी। जैसे ही मैं और प्रीती अंदर पहुंचे तो भूपिंदर प्रीती से बोली, “चल प्रीती थोड़ी फुद्दी चुसवा ले फिर गांड चुदवाऊं अवतार से।”

प्रीती ने गाऊन ऊपर किया और बेड के किनारे पर तकिया रख उस पर बैठ गयी और एक तकिया सर के नीचे रख कर लेट गई, अपनी टांगें उठाईं और नीचे से हाथ डाल कर अपनी फुद्दी की फांकें साइडों में फैला दीं। प्रीती की फुद्दी खुल गयी और भूपिंदर ने नीचे बैठ कर प्रीती की फुद्दी चूसने चाटने लगी।”

मैं सोफे पर बैठ गया। जिस तरह भूपिंदर गांड चुदाई के लिए उतावली थी, उससे मैंने सोचा था कि भूपिंदर प्रीती की फुद्दी थोड़ी सी ही चूसेगी, और फिर गांड चुदवाने आ जाएगी।

मगर अब तो लग रहा था भूपिंदर को फुद्दी चाटने-चूसने में मजा आ रहा था। वो प्रीती कि फुद्दी छोड़ ही नहीं रही थी। तभी प्रीती के चूतड़ हिलने लगे। प्रीती बोली, “मम्मी अब मत हटना, मुझे मजा आने वाला है, मेरी फुद्दी पानी छोड़ने ही वाली है।”

भूपिंदर ने भी हूं हूं करते सर हिला दिया और प्रीती कि फुद्दी चूसती रही। तभी प्रीती ने चौड़ी की हुई टांगें बंद करके भूपिंदर का सर अपनी टांगों में जकड़ लिया और ऊंची आवाज में बोली, “मम्मी निकल गया मेरा, मजा आ गया मम्मी।”

प्रीती ने टांगें खोल दी और भूपिंदर मुंह पोंछती हुई उठी और उठ कर प्रीति की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रगड़ने लगी। भूपिंदर के फुद्दी भी शायद गरम हो चुकी थी। फुद्दी पर फुद्दी रगड़ते हुए भूपिंदर बोलती भी जा रहे थे, “आह मेरी प्रीती क्या मस्त फुद्दी है तेरी। पानी से भरी हुई। कितना लक्की है सुखचैन, जो ऐसी मस्त फुद्दी को चोदता है।”

भूपिंदर ने प्रीती की पर अपनी फुद्दी पर अब धक्के लगा रही थी जैसे चुदाई कर रहे हो। तभी भूपिंदर बोली, “प्रीती मेरी बेटी, निकल गया मेरा आह प्रीती मेरी बेटी, मेरी अच्छी बेटी, आह।”

भूपिंदर को फुद्दी का मजा आ गया और प्रीती के ऊपर से हट कर भूपिंदर सामने आयी और बोली, “चलो अवतार, अब तुम करो जो करना है मेरी गांड के साथ, बोलो कहां लेटूं, कैसे लेटूं?”

मां बेटी की चूत चुसाई और फुद्दी चुदाई देख-देख कर मेरी हालत वैसे ही खराब हुई पड़ी थी। प्रीटी की चूत चुसाई और चुदाई करती हुई भूपिंदर के चौड़े चूतड़ देख कर मेरा लंड बार-बार उछल रहा था। जैसे ही भूपिंदर ने पूछा बोलो कहां लेटूं, मैं सोफे से उठ कर खड़ा हो गया और बोला, “आजा मेरी जान यहीं आजा, चूतड़ उठा कर लेट जा, फाड़ूं तेरी गांड।”

भूपिंदर चूतड़ उठा कर सोफे पर उलटा लेट गयी। मैंने एक तकिया भूपिंदर के चेहरे के नीचे रख दिया। भूपिंदर के चूतड़ों पर एक धप्प लगाते हुए मैंने कहा, “तुम दोनों मां-बेटी के चूतड़ भी बड़े मस्त है, देखते ही चाटने का मन होने लगता है। ये कह कर नीचे झुक कर मैंने भूपिंदर के चूतड़ चाटने शुरू कर दिए। एक बार भूपिंदर के चूतड़ चौड़े किया और गांड के छेद पर भी जुबान फेर दी।

चूतड़ों के छेद पर जुबान लगते ही भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “आह अवतार मजा आ गया, अब डालो लंड गांड में, रहा नही जा रहा।”

मैं खड़ा हुआ और भूपिंदर की गांड पर थूक लगा कर लंड छेद पर रखा और बोला, “अब देख तेरी गांड की क्या हालत करता हूं आज।”

मैंने लंड गांड में थोड़ा अंदर धकेल दिया। भूपिंदर की गांड का छेद प्रीती की की गांड के छेद जितना टाइट नहीं था, मगर फिर भी रगड़ाई के लिए ठीक था।

लंड थोड़ा अंदर गया मगर थोड़ा सा अंदर जाने के बाद आगे जा नहीं जा रहा था। मैंने लंड पर थोड़ा थूक और लगाया और दुबारा से लंड अन्दर डालना शरू कर दिया। थोड़ी जोर आजमाइश के बाद लंड आधा गांड में चला गया। बस अब एक तगड़ा झटका लगाने की बात थी।

मैंने लंड बाहर निकाल कर छेद पर थोड़ा थूक और लगाया और लंड गांड के छेद पर रख कर सर मोड़ कर प्रीती की तरफ देखा। प्रीती बेड पर ही बैठी हुई थी। मैंने प्रीती को एक इशारा किया और प्रीती आ कर मेरे पास खड़ी हो गयी। मैंने भूपिंदर के चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए धीरे से भूपिंदर के बाजूओं को पकड़ा और पीछे कर के पकड़ लिए। भूपिंदर कुछ भी नहीं बोली। शायद समझ नहीं पायी कि मैंने उसके हाथ क्यों पकड़े थे, मगर जल्दी ही भूपिंदर को समझा में आने वाला था जब मैंने गांड चुदाई के वक़्त उसे हिलने भी नहीं देना था।

मैंने भूपिंदर से पूछा, “भूपिंदर डालूं?”

भूपिंदर बोली, “क्या अवतार अभी भी सोच ही रहे हो, डालो। मेरी गांड तो कब से फड़क रही है?”

मैंने भूपिंदर के हाथ पकड़े और एक कस कर धक्का लगाया और लंड पूरा भूपिंदर के गांड में बिठा दिया।

भूपिंदर बोली, “अवतार इतनी जोर से। आराम से क्यों नहीं डाला?”

मैंने जोरदार धक्के लगाते हुए कहा, “गांड लाल करवानी है या नहीं?”

और फिर भूपिंदर की गांड में लम्बे-लम्बे धक्के लगाने लगा। प्रीती पास खड़ी लंड भूपिंदर की गांड में अंदर बाहर होता देख रही थी। थोड़े धक्कों के बाद ही गांड और लंड पर लगा थूक सूख गया, अब भूपिंदर की सूखी गांड में धक्के लग रहे थे। उधर भूपिंदर हिल भी नहीं पा रही थी।

भूपिंदर बोली, “अवतार थोड़ा थूक लगा लो, दर्द होने लगा है, मगर ना तो मैं रुका और ना कोइ जवाब ही दिया, बस भूपिंदर की गांड चोदता रहा।

भूपिंदर बोली, “अवतार मेरी तो फुद्दी भी गरम हो गयी है, एक बार लंड निकाल कर फुद्दी में डाल लो, इसका भी काम हो जाएगा।”

मगर मैंने तो जैसे सुना ही नहीं। लंड अब पूरा सख्त हो चुका था। हर धक्के के साथ भूपिंदर की के चूतड़ों के छेद की स्किन अंदर-बाहर हो रही थी। प्रीती की नज़र मेरे लंड पर से हट ही नहीं रही थे। भूपिंदर अब चिल्लाने लगी थी, “अवतार तुम्हें समझ नहीं आ रहा? मुझे दर्द हो रहा है।”

प्रीती आगे गयी और भूपिंदर के पास बैठ गयी। भूपिंदर प्रीती से बोली, “प्रीती मना कर अपने पापा को। नहीं चुदवानी मैंने गांड-गूँड। बहुत हो गया, मुझे दर्द हो रहा है।

प्रीती ने मेरी तरफ देख और एक आंख दबा ना में सर हिला कर बोली, “पापा बस करो मम्मी को सच में ही दर्द हो रहा होगा। गांड से निकाल कर मम्मी की फुद्दी में लगा लो आठ-दस धक्के।”

मगर प्रीती का आंख दबाना और नां में सर हिलाना – इसका मतलब था, “पापा चोदते रहो मम्मी की गांड।”

मैं भूपिंदर की गांड चोदने में मस्त था। मोटे सख्त के हर धक्के के साथ भूपिंदर के चूतड़ों के छेद की स्किन अंदर-बाहर हो रही थी। प्रीती की नजर मेरे लंड पर से हट ही नहीं रही थे। भूपिंदर की गांड में मोटे लंड की सूखी चुदाई के रगड़ों से दर्द हो रहा था, मगर मुझे तो भूपिंदर की गांड का छेद चोद-चोद कर फुलाना था। भूपिंदर मुझे गांड में से लंड निकालने कर फुद्दी में डालने को कह रहीं थी।

मगर मैं भूपिंदर की बात अनसुनी कर रहा था हुए गांड में धक्के लगाता जा रहा था। मुझे भी लंड का मजा आने वाला होने लगा था। मैंने जोर-जोर से धक्के लगाते हुए कह, “भूपिंदर ले मेरी जान, पूरा लंड जा रहा है तेरी गांड में। बस निकलने ही वाला है मेरा। मजा आ गया आज तो। क्या मस्त टाइट गांड है। तुम दोनों ही मां बेटी मस्त गांड चुदवाती हो आअह भूपिंदर मेरी जान।

प्रीती ने जब देखा मुझे मजा आने वाला है तो प्रीती खड़ी हो गयी और मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगी और साथ ही बोलने लगी आअह पापा मेरी गांड में भी कुछ-कुछ होने लगा है। आज रात को गांड ही चुदवाऊंगी आह पापा, क्या मस्त चोदते हो आप। प्रीती फिर सोफे पर बैठ गयी और नीचे हाथ करके भूपिंदर की चूत का दाना रगड़ने लगी।

भूपिंदर की चूत भी गरम हो चुकी थी। भूपिंदर अब गांड का दर्द भूल हर चुदाई का मजा ले रही थी और साथ ही बोल रही थी, “आह अवतार और जो से रगड़ो, फाड़ो मेरी गांड आज। आह प्रीती ये तो मजा आने लग गया है। प्रीती जरा जोर-जोर से रगड़, हां ऐसे ही। अवतार अब मत रुकना। मेरी फुद्दी बस पानी छोड़ने ही वाली है।

भूपिंदर को इस तरह बोलते सुन मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी और तभी मेरी जुबान से निकल गया, “ले मेरी कुतिया ले पूरा लंड तो ले रही हो तू अपनी गांड में ले, और ले। निकलेगा भूपिंदर मेरी जान अब निकलेगा।”

तभी जैसे भूपिंदर की फुद्दी ने पानी छोड़ दिया। भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “अवतार निकल गया मेरा। मजा आ गया मेरी फुद्दी में।”

फिर भूपिंदर बोली, “अब बस करो अवतार थक गयी मैं।

मैंने भूपिंदर की बाहें छोड़ दी, मगर कमर कस कर पकड़ ली। मैं भूपिंदर को हिलने भी नहीं दे रहा था। बस अब कभी भी मेरे लंड की मलाई निकल सकती थी।

तभी मुझे मजा आ गया, “आह भूपिंदर ले गया तेरी गांड में। निकल गया मेरे लंड से। जैसे ही मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ी मैंने भूपिंदर की कमर छोड़ दी। भूपिंदर एक दम से आगे हो कर सोफे पर ढेर हो गयी।
मेरे खड़े लंड से सफ़ेद गाढ़ी मलाई अभी भी टपक रही थी। प्रीती पास ही बैठी ही। जैसे ही उसने देखा की मेरे लंड से अभी भी पानी निकल रहा है, उसने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

जब तक मेरा लंड ढीला नहीं हो गया प्रीती लंड चूसती रही और फिर मेरा लंड छोड़ कर भूपिंदर से बोली, “मम्मी मजा आया गांड चुदवाने का?”

भूपिंदर सीधी हुई, “क्या मजा आया। मेरी तो गांड दुःख ही बहुत रही थी” और फिर गुस्से से मुझे बोली, “और तू अवतार, तुझे सुनाई नहीं दे रहा था, मैं बोलती जा रही थी दुःख रही है दुःख रही है – और तू? रुक ही नहीं रहा था। ऐसे चुदाई करते हैं क्या बीवी की गांडू भोसड़ी के अवतार?”

प्रीती ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी।

भूपिंदर की ऐसी सूखी गांड चुदाई हुई कि भूपिंदर तो चिल्लाने ही लग गयी, “अवतार, तुझे सुनाई नहीं दे रहा था, मैं बोलती जा रही थी दुःख रही है दुःख रही है – और तू? रुक ही नहीं रहा था। ऐसे चुदाई करते हैं क्या बीवी की गांडू, भोसड़ी के अवतार?”

मैं भूपिंदर के पास ही बैठ गया और बोला, “सॉरी भूपिंदर, चुदाई के मजे में मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।”

मेरे सॉरी बोलते ही भूपिंदर का गुस्सा उतर गया और भूपिंदर ने मेरा लंड पकड़ कर कहा, “अवतार बड़ा मोटा लंड है तुम्हारा। पता नहीं क्या हाल किया है इसने मेरी गांड का।”

मैंने कहा, “जा कर बाथरूम में फ्रेश हो आओ, फिर दिखाना कैसे हुई तुम्हारी गांड। तुम तो इसे चुदाई करवा-करवा कर लाल करना चाहती थी, अब देखते हैं लाल हुई या नहीं हुई। चुदाई तो गांड की रगड़ कर ही हुई है।”

भूपिंदर उठी और बाथरूम की तरफ चलते हुए बोली, “तुम लोग नहीं चलोगे? प्रीती आज मुतवाना नहीं पापा से अपनी फुद्दी पर?”

प्रीती बोली, “मम्मी मैं तो पापा से अपने मम्मों और फुद्दी पर मुतवाने के मजे ले चुकी, अब आज आप भी लेलो।”

मैं उठा तो प्रीती बोली, “पापा याद है ना, पहले मम्मी के मम्मों पर, और फिर मम्मी की फुद्दी पर मूतना है।”

इस मूतने के काम से फारिग हो कर हम नहाये और कपड़े पहन कर बाहर आ गए। बाथरूम में हमारा नहाना भी मस्त रहा। भूपिंदर ने कम से कम दस बार मेरा लंड चूसा। हमने एक-दूसरे की गांड में खूब उंगली की। भूपिंदर बीच में बोली, “अवतार जब तुम मेरी गांड में उंगली करते हो तो थोड़ी सी दर्द होती है। जरा एक बार देखो, क्या हाल है मेरी गांड का।”

ये कह कर भूपिंदर नीचे की तरफ झुकी और पीछे हाथ करके चूतड़ खोल दिए। मैंने नीचे झुक कर देखा, भूपिंदर की गांड का छेद भी हल्का लाल हो गया था। भूपिंदर की गांड देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने लंड का टोपा भूपिंदर की गांड में डाला और मुट्ठ मारने लगा।

भूपिंदर बोली, “अवतार क्या कर रहे हो, अब मत डाला लंड गांड में।”

मैंने कहा, “भूपिंदर गांड देख कर रहा नहीं गया, थोड़ा सा ही लंड अंदर डाला है, बाकी काम मुट्ठ मार कर करूंगा।”

भूपिंदर बोली, “क्या हो गया है अवतार तुम्हें, क्यों मुट्ठ मार रहे हो, आओ चूस कर निकाल देती हूं। मुझे भी मुंह में लेने का मजा आ जाएगा। गांड तो पहले ही दुःख रही है।”

मैंने कहा, “भूपिंदर ऐसे ही चलने दो, दो मिनट की ही तो बात है। निकालने दे गांड में ही।”

भूपिंदर ने कहा, “ठीक है निकाल लो, मगर अब दुबारा अंदर मत डालना।”

दो मिनट में ही लंड का पानी भूपिंदर की चूत में निकल गया। भूपिंदर टॉयलेट सेट पर बैठ गयी और नीचे हाथ कर के गांड साफ़ करने लगी। जब गांड में से मलाई निकलनी बंद हो गई तो‌ भूपिंदर उठी और हम बाहर आ गये। प्रीती भी कपड़े पहन चुकी थी। प्रीती बोली, “क्या हुआ मम्मी, बड़ा टाइम लगा दिया, क्या फिर से चुदाई हो का मन हो गया था?”

भूपिंदर बोली, “चुदाई तो नहीं हुई, मगर अवतार ने मुट्ठ मार कर लंड का पानी एक बार और मेरी गांड में निकाल दिया।” और भूपिंदर ने बाथरूम का सारा किस्सा प्रीती को सुना दिया। प्रीती ने एक बार मेरी तरफ देखा, मगर बोली कुछ नहीं।

जुगनू के आने का टाइम हो गया था। जुगनू आया और मैं दोपहर बाद मैं सत्रह चला गया। वापस आया तो रात को फिर वही मां-बेटी की चूत और गांड चुदाई शुरू हो गयी। अगले चार पांच दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा।

इतनी चुदाई के बाद मुझे थकान होने लगी थी। मुझे पहली बार लगा कि “यार” ये सेक्स – ये फुद्दी चुदाई, ये गांड चुदाई कुछ ज्यादा ही हो रही है। वैसे तो जिस दिन से सुखचैन गया था, उसके अगले दिन से जो सेक्स शुरु हुआ तो ऐसा था जिसे “नान स्टॉप” ही कहा जा सकता है। पहले हर रोज बेटी प्रीती, फिर बीवी भूपिंदर और अब दोनों मां-बेटी।

मुझे ऐस लग रहा था जैसे मैं खस्सी ही हो चुका हूं – खस्सी मतलब जिसका चुदाई का मन ही नहीं करता मैंने सोच लिया कि अब कुछ दिन इस सेक्स – इस चुदाई से दूर रहना का वक़्त आ गया है – खास कर अगर आगे भी ऐसी ही बढ़िया सेक्स लाइफ एन्जॉय करनी है – ऐसे ही मां बेटी दोनों को चोदते रहना है तो।

बस, तभी मैंने फैसला कर लिया कि अब एक हफ्ते तक कोइ चुदाई नहीं करनी – ना भूपिंदर की, ना प्रीती की और ना ही बिशनी की।

मैंने सोच लिया कि अब मैं कसौली जाऊंगा अपने हॉलिडे होम में। पहाड़ियों पर घुमूंगा बियर पीयूंगा पहाड़ी मच्छी खाऊंगा और सोऊंगा। अगर भूपिंदर, प्रीती ने साथ चलना है तो चलें, मगर चोदूंगा नहीं उन्हें, चाहे फुद्दी खोल कर मेरे आगे लेट ही क्यों ना जाएं।

अगले दिन सत्रह में ऊपर ऑफिस में जाते ही मुझे नींद गयी। ये पहली बार था कि ना तो मैंने अपने किसी दोस्त को बुलाया था और और ना ही बियर की बोतल ही खोली थी।

शाम को मैं घर आया तो बिल्कुल ढीला ढाला थी। प्रीती बोली, “क्या हुआ पापा तबीयत तो ठीक है?”

मैंने बस इतना ही कहा, “कुछ नहीं आज मैं जल्दी सोने के मूड में हूं।”

भूपिंदर तो नहीं समझी मगर प्रीती समझ गयी। प्रीती बोली, “मम्मी पापा को दो चार दिन आराम की जरूरत है। जब से सुखचैन गया है पापा रोज चुदाई कर रहे हैं। पहले मैंने पापा को नहीं छोड़ा, रोज़ चुदाई करवाई, फिर आप और अब हम दोनों। कितनी चुदाई कर लेंगे पापा भी, कितना चोद लेंगे हम दोनों को। अब हर वक़्त भी तो लंड खड़ा नहीं रहता।”

“औरतों का क्या, टांगें उठा आकर चौड़ी कर दी, फुद्दी खोली और बोल दिया, “आओ जी डालो इसमें लंड। या फिर चूतड़ उठा कर गांड खोल दी – मम्मी अब लंड भी तो तभी जाएगा ना जब खड़ा होगा।”

फिर प्रीती मेरे तरफ देखते हुए बोले, “क्यों पापा ठीक कह रही हूं ना मैं?” मैं चुप रहा। मेरे चुप्पी ही एक तरह से मेरी हां थी।”

भूपिंदर भी लगा समझ गयी। बोली, “कोइ बात नहीं प्रीती, कुछ दिन अवतार को आराम करने देते हैं।”

भूपिंदर मुझसे बोली, “अवतार तो फिर अब क्या प्रोग्राम है? एक हफ्ता फार्म पर गुजारें?” फिर प्रीती की तरफ देख कर बोली, “क्यों प्रीती?”

मैं तो कसौली जाने का सोच रहा था मगर ये फार्म वाला आईडिया भी ठीक था। प्रीती को भी आईडिया जमा और मुझे भी।

प्रीती बोली,”मम्मी बात तो ठीक है। क्या हर वक़्त भाग दौड़, भाग दौड़। कुछ वक़्त कुदरत के साथ, पेड़ पौधों के साथ, जानवरों के साथ भी गुजारना चाहिए।”

भूपिंदर प्रीती से बोली, “हां प्रीती ये ठीक रहेगा। अवतार को भी चुदाई से थोड़ा रेस्ट चाहिए और हमें भी। अगर हम फार्म पर रहते भी हैं तो अवतार को डिस्टर्ब नहीं करेंगे, और मैं और तुम मजे करेंगे – एक दूसरे की फुद्दी चूसेंगे, गांड चाटेंगे और एक दूसरी की फुद्दी की चुदाई करेंगे।”

फैसला हो गया, अगले दिन ही हम फार्म के लिए रवाना हो गए। फार्म पहुंच कर जुगनू को मैंने वापस भेज दिया। हमारा एक हफ्ते का प्रोग्राम था। एक हफ्ता जुगनू और कांता हमारे सेक्टर पांच वाले घर में ही रहने वाले थे। जुगनू को मैंने बोल दिया, “जुगनू अब तुम और कांता मौज करो एक हफ्ता। मुझे अगर कोइ काम होगा या हमने वापस चंडीगढ़ जाना तो मैं तुझे फोन कर दूंगा।”

जुगनू के चेहरा पर रौनक आ गयी। मैंने सोचा “अब ये चोदेगा कांता को दिन-रात।”
सात दिन फार्म में मस्त गुज़रे। इन दिनों बिशनी सुबह और हम को ही फार्महाउस के अंदर आती थी। दिन में हम अंदर तीनों ही होते थे।

मैंने एक बार भी भूपिंदर या प्रीती को नहीं चोदा मगर भूपिंदर और प्रीती ने दिन रात आपस में मजे किये। जब देखो दोनों मां-बेटी एक-दूसरी की फुद्दी चूस रही होती, गांड का छेद खोल कर चाट रही होते या फिर एक-दूसरी के ऊपर लेट कर एक दूसरी की फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ते हुए मजे ले रही होती।

मैं सोफे पर बैठा बियर या व्हिस्की के घूंट भरता हुआ उनको इस तरह मजे लेते हुए देखता रहता। रोज़ रात को मीट मुर्गा शारब – जैसे और कोइ काम ही नहीं।

सात दिन बाद जुगनू को मैंने फोन कर दिया। जुगनू आया तो मैंने भूपिंदर से कहा, “भूपिंदर तुम और प्रीती जुगनू के साथ चली जाओ और इसे वापस भेज देना। मैं शाम को आऊंगा। इन सात दिनों में बस खाना पीना ही हुआ है, जरा पूरन को बुला कर फार्म का काम काज भी देख लूं।”

भूपिंदर “ठीक है” कह बाहर के तरफ चल पड़ी। प्रीती मेरे पास आयी और धीरे से मेरे कान में बोली, “पापा बिशनी की फुद्दी गांड, जो भी चोदो बढ़िया से चोदना, मगर लंड की मलाई बिशनी की चूत या गांड में मत निकालना। रात आपने हमने भी चोदना है, हमने चाहिए आपके लंड की गर्म-गर्म मलाई।”

मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया। बाहर पूरन को बुला कर फार्म का काम काज समझाया। जो उसको चाहिए था उसके लिस्ट बनाई और फार्महाउस के अंदर आ गया। बिशनी मेरे पीछे-पीछे ही अंदर आ गयी।

मैं अंदर की तरफ जाने लगा और बिशनी भी मेरे पीछे पीछे ही आ गयी। अंदर आते ही मैंने बिशनी को बाहों में ले और बोला, “चल बिशनी बहुत दिन हो गए तेरी चुदाई नहीं हुई। चल आजा मस्त चुदाई करूं तेरी। बिशनी ने मेरा लंड पकड़ लिया मेरा लंड हाथ में लेकर बोली, “सरदार जी बड़े दिनों की बाद आज मौक़ा मिला है। मेरी फुद्दी तो पिछले दस दिनों आपके लंड के लिए तरस रही है, दस दिनों से गीले हुई पड़ी है सूख ही नहीं रही।”

बोल कर बिशनी ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए। बिशनी अक्सर सलवार ही उतारा करती थी जब चुदाई करवानी होती थी, पूरी तरह से नंगी वो नहीं होती थी। बिशनी को इस तरह नंगा देख कर मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए। बिशनी बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर टांगे चौड़ी कर दी।

मैंने लंड पर कंडोम चढ़ाया, बिशनी की टांगें पकड़ कर लंड बिशनी की चूत पर रखा और जैसी ही चुदाई शुरू करने लगा। बिशनी बोली, “सरदार जी उस दिन की तरह चोदना, जैसे उस दिन चोदा था, बाहों में जकड़ कर। रगड़ के रख दो आज फिर से मेरी फुद्दी, तोड़ कर रख दो मेरा जिस्म और निकाल दो मेरी फुद्दी का पानी तीन चार बार।”

मैंने बिशनी की मस्त चुदाई की और तीन बार जब बिशनी की चूत पानी छोड़ गयी तो मैंने खड़ा लंड बाहर निकाल दिया। बिशनी बोली, “क्या हुआ सरदार जी, निकाल क्यों लिया, लंड तो अभी खड़ा ही है। मजा तो लेलो चुदाई का।”

मैंने कहा, “नहीं बिशनी आज तेरी सरदारनी को भी ऐसी ही चोदना है जैसे तुझे चोदा है, रगड़ कर। आज उसका भी जिस्म तोड़ना है।”

बिशनी कपड़े पहनती हुई बोली, “ऐसा क्या हो गया सरदार जी, क्या बहुत दिनों से फुद्दी नहीं मारी उनकी? प्रीती दीदी ने मौक़ा नहीं दिया छोड़ने का?”

मैंने भी कपड़े पहनते हुए कहा, “कुछ ऐसा ही है बिशनी। मगर आज तुझे चोदने का मजा बहुत आया है।” मैंने बिशनी को बाहों में लेकर एक बार उसके होंठ चूसे और कहा बिशनी अगली बार तेरी गांड चोदूंगा।”

बिशनी बोली, “अगली बार क्यों सरदार जी आज ही चोद लो, लंड तो खड़ा ही है।”

मैंने कहा, “नहीं बिशनी आज नहीं, जिस दिन चोदनी होगी तसल्ली से चोदूंगा।” ये कह कर जा जरा देख जुगनू आ गया या नहीं?”

बिशनी आयी और बोली, “सरदार जी अभी तो नहीं आया।”

मैंने फ्रिज में से बियर निकाली और सोफे पर बैठ कर हल्के-हल्के घूंट भरने लगा।
पांच बजे जुगनू आ गया। घर पहुंच कर मैं सीधा बाथरूम चला गया। फ्रेश हो कर बाहर आया तो प्रीती मिल गयी। मुझे देख कर प्रीती ने एक आंख बंद की और बोली, “पापा मलाई तो साथ ही लाये हो ना।”
मैंने हां में सर हिला दिया।

रात हुई और हम हल्का खाना खा कर हम तीनों लाउंज में आ गए। कांता जा चुकी थी। मैंने शिवाज़ रीगल की बोतल खोल दी और प्रीती भूपिंदर ने जिन की बोतल खोल दी। प्रीती ने तो जिन पीने से पहले ही अपने कपड़े उतार दिए। इतने दिनों के बाद प्रीती का नंगा सेक्सी जिस्म देख कर मेरा लंड एक-दम से खड़ा हो गया। मैंने भी उठा और मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए।

भूपिंदर ही क्यों पीछे रह जाती। वो भी नंगी हो गयी एक एक पेग पीने के बाद ही सब लोग मस्ती में आ गए। दोनों मां-बेटी अपनी अपने फुद्दी में उंगली करने लगी। सब बार-बार टाइम देख रहे थे। नौं बजे आखिर प्रीती खड़ी हो गयी और बोली, “चलो पापा अब नहीं रहा जा रहा। डालो अपना मोटा लंड हमारी चूत में और रगड़-रगड़ कर चोदो आज।

हम सब प्रीती के कमरे में चले गए। रात दो बजे तक हमारी चुदाई चली। पहले भूपिंदर, फिर प्रीती। फिर भूपिंदर और फिर से प्रीती। फुद्दी में गांड में मुंह में सब जगह लंड गया मेरा।

बीच बीच में मां बेटी ने एक-दूसरी की फुद्दी चूतड़ सब चूस-चाट लिए, और एक-दूसरी के ऊपर लेट कर एक-दूसरी की फुद्दी भी चोद ली।

मेरे लंड की गर्म मलाई एक बार प्रीती के फुद्दी में निकली, एक बार भूपिंदर की गांड में निकली। भूपिंदर तो तो लग रहा थी गांड चुदवाने का चस्का ही लग गया था। फुद्दी से ज्यादा उसने मेरा लंड गांड में लिया। मस्त टाइम निकला।

जब तक सुखचैन नहीं आया, मस्त चुदाई होती रही। हफ्ते में एक बार मैं बिशनी को भी चोद आता था। इस बीच बिशनी की गांड भी चोद ली थी। बड़ी हिम्मत वाली थी बिशनी। सूखी गांड चोदी मैंने उसकी। गांड बिलकुल टाइट थी, मगर बिशनी ने एक बार भी चूं तक नहीं की पूरा-पूरा साथ दे कर गांड चुदवाई।

बिशनी तो अब “जिस्म तोड़” चुदाई करवाने लग गयी थी। फुद्दी के एक बार के सीधे-सादे मजे से उसकी अब उसकी तसल्ली नहीं होती थी।

बस अब एक कांता ही बची थी, मगर पता नहीं क्यों उसे चोदने का मन नहीं करता था। शायद उसने भी कभी मुझसे चुदवाने का सोचा नहीं था। एक बार मेरा खड़ा लंड देख ले तो शायद फिसल जाए, उसका भी मन हो जाए।

खैर वो बाद की बात थी। सात महीने ढुबरी रहने के बाद सुखचैन की नई पोस्टिंग डगशाई में हो गयी। इन सात महीनों में तकरीबन रोज ही प्रीती को चोदा मैंने।
डगशाई चंडीगढ़ से उतना ही दूर है जितना कसौली, मतलब कार से ढाई तीन घंटे का रास्ता।

जिस दिन प्रीती ने जाना था, सुखचैन तैयार हो कर बाहर मिलिट्री की जीप में बैठा प्रीती का इंतज़ार कर रहा था। प्रीती हमें बाए बोलने आयी और मेरे होंठ चूसते हुए लंड पकड़ के बोली, “पापा आपका मस्त लंड कभी नहीं भूलूंगी – पर पर पापा टेंशन मत लेना, महीने में दो तीन दिन आया करूंगी आपसे चुदाई करवाने – आपका लंड फुद्दी में, गांड में, मुंह में लेने।

फिर प्रीती भूपिंदर के पास गयी और भूपिंदर के होंठ चूसते हुए बोली , “मम्मी आप भी टेंशन मत लेना। जब भी आऊंगी आपसे फुद्दी जरूर चुसवाऊंगी।” और फिर भूपिंदर की चूत पर हाथ फेरते हुए बोली, “और मम्मी आपको फुद्दी से फुद्दी के चुदाई का मजा भी तो मैं ही दूंगी? ओके पापा, ओके मम्मी – आप बेस्ट मम्मी पापा हो।”

और पापा की परी प्रीती सुखचैन के साथ डगशाई के लिए रवाना हो गयी। अब रोज़ चुदवायेगी सुखचैन से लंड की शौक़ीन ‘पापा की परी प्रीती’।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *