माँ की अधूरी इच्छा 2

माँ बेटा
अरुण: ओके नहीं चलना तो कोई बात नहीं दवाई तो ले लो

सरला: नहीं ज़रूरत नहीं ठीक हू अभी।

अरुन :नहीं मैं पेनकिलर ले आया ले लो ।

सरला: अरुन रहने दे बोला न अपने आप ठीक हो जाएगा।अब वो उसे कैसे सम्झाए।

तभी अरुन को कुछ याद आया बोला-
माँ कहाँ दर्द हो रहा है।
सरला:बोला न बॉडी में
अरून :मगर ज्यादा कहाँ हो रहा है।

सरला: झुँझलाते हुए कमर में।

अरुन: समझ गया उसे याद आया उसके फ्रेंड्स बात कर रहे थे की जब लड़कियों की पीरियड्स होते है तो कुछ लड़कियों को पेन भी होता है
हो न हो माँ को पीरियड्स आये है।

सरला: अरुन को चुप देख कर क्या हुआ

अरुन:कुछ नहीं माँ आप आराम करो और कभी चलेंगे।

सरला:मन ही मन सोचते हुए इसे क्या हुआ कैसे मान गया।
अब वो क्या जाने आज के बच्चे कितने फॉरवर्ड हो गये है।

टाइम ऐसे ही गुज़रने लगा ।
रोज अरुन सरला की तबीअत पूछता और कुछ नहीं बोलता।
५थ डे अरुन कॉलेज से आया और बोला- माँ चले आज कहीं बाहर।

सरला: सोचते हुआ ४ दिन से कुछ नहीं बोला और आज डायरेक्ट पूछ रहा है।

आज सरला भी मना नहीं कर पाई

सरला -ओके
इन ४ दिनों मैं सरला ने काफी सोचा और डीसाइड किया अब वो और अपने पति का वेट नहीं करेगी अगर उसका बेटा उसका साथ दे रहा है तो क्यों न लाइफ में रंग भरा जाये कब तक घुट २ के अपनी ज़िन्दगी जियेगी।

अरुन: माँ क्या हुआ

सरला: कुछ नहीं कहाँ चलना है

अरुन :आप की मर्जि

सरला: अरुन घर का कुछ समान लाना है चलोगे मेरे साथ।

अरुन: क्यों नहीं माँ चले बाइक पे चले या ऑटो से

सरला :जैसे तेरे मन करे।

अरुन :चले बाइक से चलते है।

सरला: मैं तो कभी तेरी बाइक पे नहीं बैठी।

अरुन :कोई बात नहीं आज बैठ जाओ
ओर दोनों बाजार चले जाते हे
सरला को कुछ अजीब लगा बेटे के साथ बाइक पे बैठ के।

सरला : यही वो दिन था जिस ने मेरी और मेरे बेटे की ज़िन्दगी बदल दी ।
उस दिन के बाद से किसी भी काम के लिए मेरी फर्स्ट चॉइस मेरा बेटा होता और साथ बाहर जाने आने से हम दोनों मैं जो थोड़ा बहुत गैप था वो भर गया।
ओर हम और भी फ्री हो गये।

कैसे एक महीना हो गया बेटे के साथ बाहर जाते हुए

सरला: अरुन कल कॉलेज से जल्दी आ जाना बाजार जाना है कुछ घर का सामन लाने।
अरून: कल क्यों आज चलते है

सरला: पर जाना कल है।

अरुन: कल आप नहीं जओगी।

सरला: क्यों कल क्या है

अरुन; मन ही मन कल से आप के पीरियड्स आ जाएगे और आप नहीं जाओगी

सरला: क्या हुआ क्या सोच रहा है
अरुन: कुछ नहीं

सरला: कुछ तो

अरुण: कुछ नहीं मैं बोल रहा था कल आप की तबीयत ख़राब हो जायेगी फिर कैसे जाऒगी।

सरला: क्यों मेरी तबीयत क्यों ख़राब होगी।

अरुण: कुछ नहीं बोला।

सरला: बोल न ।

अरुण कैसे बोले
ओके कल चलेंगे।

कल दिन जैसे के अरुन ने आईडिया लगाये था सरला के पीरियड्स स्टार्ट हो गये

अरुन: कॉलेज से जल्दी लौट आया
सरला से चले माँ
सरला: मन में सोचते हुए इसे कैसे पता की पीरियड्स की बजह से मेरी तबीयत ख़राब हो जायेगी।

अरुण; क्या हुआ माँ ।चल।

सरला: नहीं आज नहीं फिर कभी।

अरुण: मैंने बोला था न की आज आप नहीं जाऒगी।

सरला: हाँ बाबा हो गई पर तूझे कैसे पता ।
अरुण: बस ऐसे ही गेस किया।ब बैक मैं पेन है ना।

सरला: है पर तुझे कैसे पता।

अरुन: पिछले महिने भी आप की इस दिन तबीयत ख़राब हुई थी।
सरला: मन ही मन क्या इसे पता है की मेरे पीरियड्स आ गये है।
तभी अरुन माँ आज फ्राइडे है ट्यूसडे को चलेंगे।
अब सरला को पक्का यकीं हो गया की इसको पता है की मेरी क्या प्रॉब्लम है।

सरला:ओके अरुण।

इसी कसमकस में सरला की ५ दिन बीत गये की अरुन को पता है या नहीं । या उसको पूछे की नही
कैसे पूछे वो उसका बेटा था पर एक महिने में सरला काफी हद तक अरुन से खुल गई थी।
और ट्यूसडे भी आ गया ।
और अरुन बिना सरला के बोले कॉलेज से जल्दी आ गया।

सरला: आज जल्दी कैसे
आ: बाजार नहीं जाना।

सरला: तुझे कैसे पता की आज जाना है

अरुण: मुह से निकल गया आज ५बा दिन है

सरला: मतलब

अरुण: कुछ नहि।

सरला को अब यकीन हो गया की अरुन ने गेस लगा के सही पता लगा लिया है की मेरे पीरियड्स है।

सरला ओके रेडी होकर आती हू।
चल तू भी रेड़ी हो जा।
अरुण:ओके मोम।

हाफ एन ऑवर मैं रेडी हो सरला और अरुन रेडी थे बाजार जाने की लिये।

अरुण: चले माँ ।
सरला: चल।

बाइक पे बैठ के

अरुन: कहाँ चलना है मोम
सरला:मॉल चले।
सरल: अरुन
अरुण: हाँ मोम।
सरला: एक बात पुछु।
अरुण : हाँ
सरला:तुझे कैसे पता था की मेरी तबीयत फ्राइडे को ख़राब होगी और ट्यूसडे को सही।

आरन: मन ही मन क्या जवाब दूँ
सरला: बता न किस तरीके की तबीयत ख़राब होगी मेरी जो ५ दिन में ठीक हो जाएगी।
सरला समझ चुकी थी की अरुन को पता है पर वो उसके मुह से सुनना चाहती थी।
बात करते २ मॉल आ गया।

बाइक पार्किंग मैं खड़ी करके दोनों शॉपिंग के लिए आ गये।
घर की ज़रूरत का सामन खरीदते हुए
सरला: जवाब नहीं दिया।
अरुण: माँ छोडो ना।
सरला: मन ही मन अरुन को परेसान देखते हुए खुश हो रही थी पर ये भी जानना चाहती थी की क्या जो वो सोच रही है वो सही है या उसकी गलतफहमि।
सरला: कुछ पूछ रही हूँ।
अरुन: माँ प्लीज मैं नहीं बता पाउंगा।
सरला: मेरे साथ बाजार आना है ये याद है बाकि याद नहि।
अरुण: हां
सरला: तो जवाब दे।
अरुण: थोड़ी देर खामोश रहने के बाद माँ जब लास्ट मंथ आप ने कहा की बैक में पेन हो रहा है तो मुझे डाउट हुआ की आप को हकलाते हुए पीरियड्स है जिस की बजह से आप की बैक पेन हो रही और फ्राइडे को वही डेट थी जो लास्ट मंथ थी इस लिए आईडिया लगाये और बोल दिया की तबीयत ख़राब हो जायेगि
ओर शांत हो गया।यह कहकर सरला से नज़र नहीं मिला रहा था और ऐसी ही हालत सरला की भी थी ।

ओर हो भी क्या न ये वो बात थी जिसको लड़की या तो अपनी माँ से या पत्नी हस्बैंड से शेयर करते है
ओर यहाँ माँ बेटे बात कर रहे थे।

सरला सच जानना भी चाहती थी और जान कर अजीब सा महसूस कर रही थी।

ऐसे ही मॉल में सामान लेने के बाद दोनों घर आ गये बिना बात किये हुए।
शाम को रमेश ऑफिस से आ गया और उस ने गौर किया की दोने माँ बेटा एक दूसरे को अवॉयड कर रहे है

रमेश सरला से : क्या हुआ

सरला: कहा।

रमेश: कहाँ क्या तुम और अरुन बात नहीं कर रहे।

सरला:ऐसा नहीं है आप को ऐसा क्यों लग रहा है
रमेश: ओके हो सकता है
ओर सोने चला जाता है।
सरला किचन मैं काम कर रही थी
और सोचती है अरुन से कैसे बात करे उसे शरम आ रही थी की उसने आज अपने बेटे से पीरियड्स पे बात की और अरुन को पता है की उसके पीरियड्स कब आये है यही सोचते २ वो सोने चली जाती है।

अगली सुबह
रमेश ऑफिस चला जाता है और अरुन कॉलेज के लिए निकल रहा होता है
तभी
सरला: उसे आवाज़ देते हुए ब्रेकफास्ट तो कर ले ।
अरुण;माँ मन नहीं है।
उसे पता था की उसकी माँ ने भी ब्रेकफास्ट नहीं किया होगा और जब साथ करेगे तो कुछ बात होगी और वो सरला को फेस नहीं करना चाहता था।

सरला: मैंने कहा न ब्रेकफास्ट कर और उसका हाथ पकड़ के डायनिंग टेबल पर बिठा देति है और ब्रेकफास्ट लेने किचन मैं चली जाती है
और फिर दोनों साथ बैठ कर ब्रेकफास्ट करते है
पर कोई बात नहीं करते।

अरुण: ब्रेकफास्ट करने के बाद माँ कॉलेज जा रहा हू।

सरला: ओके बेटे।

अरुण: बाय मोम।

अरुन के जाने के बाद सोचती है अरुन कितना बड़ा हो गया की सिर्फ बैक पेन से उसने आईडिया लगा लिए मेरे पीरियड्स के बारे में ।
और हँस देती है।
और घर के काम ख़तम करने के बाद खाली बैठी थी
और उसलसे अरुन का ख्याल आया है
और उसे कॉल करती है
सरला: हेलो अरुण
अरुण: है मोम
सरला: कहा हो
अरुण: कॉलेज में।
सरला: क्लास में।
अरुण: नहीं माँ ब्रेक है।
सरला:ओके और चुप हो जाती है।
अरुण: बोलो माँ ।
सरला: कुछ नाहि।
अरुण: कॉल क्यों की
सरला: बस ऐसे ही।
अरुण:कोई काम था।
सरला: क्या मैं अपने बेटे को कॉल नहीं कर सकती।
अरुण: नहीं ऐसी बात नहीं है।
सरला: चल ओके बाय।
अरुण: बाय मोम
सरला कॉल कटने के बाद सोचती है पहले तो मैं कभी अरुन को कॉल नहीं की बिना किसी इमरजेंसी के पर आज क्यों की।

उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है
ऐसे सोचते २ उसका टाइम पास हो जाता है इधर अरुन का कॉलेज से आने का टाइम हो जाता है
तो वो आईने के सामने खड़ी होके अपने मेकअप चेक करती है जो की उसने आज तक नहीं किया था अरुन के आने पर।

और आज सरला अरुन का इंतज़ार कर रही थी और आज अरुन लेट आया पूरे २ घंटे अपने टाइम से।

सरला सोच रही थी की उससे कॉल कर लुँ पर हिम्मत नहीं हो रही थी की क्या बात करती।
तभी डोर बेल्ल बजति है।
गेट खोलने पर अरुन सामने खड़ा था।
सरला: ये क्या टाइम है आने का।

अरुण: वो दोस्तों से साथ था टाइम पता ही नहीं चला।
सरला: हाँ सही है दोस्त ज्यादा जरुरी है माँ से।
सरला ने ये बोल तो दिया पर सोचने लगी मैंने तो कभी उससे ऐसा नहीं कहा पर आज क्यु।

अरुण:ऐसा नहीं है मोम।
और अंदर आ जाता है ।
और फ्रेश होने चला जाता है।

ईधर अरुन फ्रेश हो रहा था सरला किचन से आवाज़ देती है कॉफ़ी पियेंगा अरुण।

अरुण: हां मोम
और बाहर डायनिंग टेबल पर आ जाता हे।
सरला कॉफ़ी बना के लाती है और दोनों साथ कॉफ़ी पितें है।

और कुछ सोचते २ सरला अरुन से बोलति है बाहर चले ।
अरुण: कहा पे माँ ।
सरला: कहीं भी।
अरुण: कोई काम है ।
सरला: नहीं ऐसे हे अभी तेरे पापा को आने में टाइम है।
अरुण: ओके चलते है।
सरला: तो रेडी हो जा मैं भी रेडी होक आती हूँ।

अरुन रेडी होने चला जाता है
इधर सरला भी रूम में आ जाती है रेडी होने के लिये
पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है।
शायद कहीं उसके दिल में ये बात उससे कचोटने लगी थी की उसके हस्बैंड ने कभी इस बात की केयर नहीं करी की पीरियड्स मैं आराम कर लो और
करुन जैसे पिछले महिने ही पता पड़ा उसके पीरियड्स की और उसने उसे बोल दिया आप आराम करो पीरियड्स ख़तम होने के बाद जायंगे।

सरला ये सोच हे रही थी की अरुन की आवाज़ आई माँ रेडी हो गई क्या।
सरला: नहीं बेटे।
अरुण:क्या हुआ माँ जाना नहीं है क्या।
सरला: जाना तो है रूम का दरवाजा खोलते हुए पर कुछ समझ नहीं आ रहा क्या पहनु।।
अरुण: जो मन करे वो पहंन लो।
सरला: अच्छा तू बता क्या पह्नु।
सरला ने बोल तो दिया पर एकदम से चुप हो गयी की मैं अरुन से क्यों पूछ रही हूँ।
अरुण:माँ कुछ भी पहन लो आप पर सब अच्छा लगता है।
सरला: चल झुठ।
अरुण: सच मोम।
सरला: तो कौन सी साड़ी पहनू।
अरुण: वो ब्लैक वाली जो दीदी की शादी में पहनी थी।
सरला: तुझे याद है।
आ: हाँ माँ आप उसमे बहुत अच्छे लग रही थी।
सरला: चल ठीक है पर हम जायँगे कहाँ।
अरुण: अब बताओ
सरला: मूवी चलें
अरुण: ओके
सरला:ओके मैं १० मिनट में रेडी होक आती हूं।
दरवजा बंद कर के सरला राहत की साँस लेती है उसे क्या हो रहा है मूवी वो भी अरुन के साथ अकेले और उसकी पसंद की साड़ी पहन के।
सोचते हुए रेडी होती है की अरुन की १ साल पहले की बात याद है की मैंने कौन सी साड़ी पहनी थी
ओर एक मेरे हस्बैंड उनकी मेरा बरथ डे भी याद नहीं था ।
अरुण:माँ शो मिस हो जाएगा।
सरला; बस १० मिनटस।
अरुण: माँ २५ मिनट्स हो गये आपको रेडी होते हुऐ।
सरला; टाइम देखति है अरुन सही बोल रहा है और जल्दी २ रेडी ही जाती है ।
दरवाजा खोलके कैसे लग रही हूं।
अरुण: देखते रह जाता है सही भी है आज सरला ने फुल मेक उप किया था जैसे किसी शादी मैं जा रही हो
सरला: बोल भी या देखते रहेगा।
अरुण: अछि लग रही हो।
सरला: सिर्फ अच्छी
अरुण: बहुत अच्छी।
सरला; थैंक्स चल।
अरुण: माँ चस्मा नहीं पहनी हो।
सरला: मेरे पास कहा है।
अरुण;क्यों मैंने आप को आप के बर्थडे पे गिफ्ट किया था।
सरला; कब ।
अरुण; माँ रात मैं जब मैं पार्टी से आया था और पैकेट आप को दिया था।।
सरला: ओहो मैं तो भूल ही गयी ।
अभि देखती हु।
अरुण:माँ अभी तक आप ने मेरा गिफ्ट नहीं देखा।
सरला: रूम में जाते हुए सॉरी बेटा तूने भी याद नहीं दिलाया। और मुझे भी याद नहीं रहा।
और पैकेट ढूँढती है और जब उसे खोलती है चश्मा देख के खुश हो जाती है पर।
अरुण: पर क्या माँ ।
सरला: मुझपे अच्छा लगेगा।
अरुण: क्यों नहीं लगेंगा।
सरला; मतलब इस उमर में
अरुण: कॉमन माँ चस्मा लगाओ।
अब जल्दी करो लेट हो जायंगे।

घर निकल कर बाइक पे दोनों माँ बेटे चलते हुए
सरला: कहाँ चलना है।
अरुण: देखते है।
सरला:पहली बार अरुन के काँधे पे हाथ रखती है।
अरुण: माँ आ गये।
तभी सरला का ध्यान जाता है वो एक उस एरिया का पॉपुलर मल्टीप्लेक्स था और उस मैं सुल्तान मूवी लगी थी।
जो की सरला के फवौरेट एक्टर की मूवी थी
सरला: मन हे मन अरुन को मेरे कितने ख्याल है मूवी देखने आया वो भी मेरी फेवौरेट एक्टर की।

अरुण: माँ चलो।

सरला: चलो।

हॉल में सरला और अरुन एक साथ बैठे थे और मूवी एन्जॉय कर रहे थे।
जब मूवी ख़तम हुए सारा रश एक साथ बाहर निकला जीसकी बजह से सरला को धक्का लगा
अरुन ने तुरंत सरला का हाथ पकड़ा और चलने लगा
सरला: मन ही मन याद करते हुए जब रमेश के साथ मूवी देखने आई थी शादी के बाद पहली बार को उस टाइम भी यही हुआ था पर रमेश को कोई मतलब नहीं था।

अरुन और रमेश मैं कितना फ़र्क़ है
हॉल से बाहर आने के बाद
अरुण; माँ अब क्या करना है ।

सरला: मुझे क्या पता मैं तो तेरे साथ आई हु तू बता।

अरुण: ओके तो फिर रेस्टोरेंट चलते है अच्छा सा खाना खाते है फिर घर चलेंगे
सरल: जैसे तेरी मर्ज़ि

दोनो रेस्टोरेंट जाते है और अरुन सरला के पसंद का खाना आर्डर करता है।

सरला ये देख के खुश होती और साथ २ खाना खाते है
ओर फिर घर चल देते है
रमेश के आने से पहले दोनों घर आ जाते है
रमेश के आने के बाद खाना खा कर रमेश सोने चला जाता है।
सरला किचन के काम से फ्री हो कर अपने रूम में जाते २ अरुन के रूम मैं चलि जाती है।
आ: माँ आप
सरला: क्यों नहीं आना था।
अरुण: नहीं ऐसी बात नहीं है।
सरल: थैंक्स।
अरुण: क्यु।
सरला: आज के लिये।
अरुण: आज क्या।

सरला: आज मेरी लाइफ का पिछले १० साल का बेस्ट दिन था जो मैंने गुजरा तेरे साथ।
बर्ना मैं तो भूल हे गई थी ख़ुशी क्या होती है
अरुण: माँ मैं हूँ न ये फर्स्ट डे था पर लास्ट नहि।

सरला: देखते है।
ओक गुड नाईट।
अरुण: गुड नाईट मोम
सरला अपने रूम मैं चलि जाती है और रमेश की दिया दुःख याद कर दुखि होती है कैसे पति मिला है जिसको अपनी पत्नी से कोई मतलब नहीं है।
ओर दिन की बातों को याद करते हुए सो जाती है।

कईसे हे दिन बितत्ते जाते हैं और सरला अरुन की तरफ खिचती जाती है उसे पता ही नहीं पड़ता की ये क्या है
डेली उसका कॉलेज से आने का वेट करती है उसका मनपसंद का खाना बनाती है ।
कहते है न जब किसी के लिए मन में कुछ होता है तो उसके दूर जाने पर महशुश होता है वो हमारे लिए कितना इम्पोर्टेन्ट है या हम उसके बारे मैं क्या सोचते है।

ऐसे ही हुआ सरला के साथ एक दिन अरुन कॉलेज से लौट कर आया और सरला से बात करते हुआ उससे बोला मंडे को कॉलेज का ५ दिन का टूर है खन्ड़ाला का मैं भी जा रहा हु ।
सरला: क्या ।
अरुण: टूर है।
सरला: वो तो मैंने सुन लिया पर एक दम अचानक ।
अरुण:: अचनाक नहीं माँ मैंने लेट डीसाइट किया
मै तो जाने वाले नहीं था पर दोस्तों ने ज़िद की और मेरे पूछे बिना ही मेरा नाम लिखवा दिया इस लिए जाना पडेगा।

पर इस बात को सुन कर सरला उदास हो गई उससे समझ नहीं आ रहा था की क्या बोले ।
ओ कुछ नहीं बोली और मंडे भी आ गया अरुन सुबह ६ बजे रेडी हो गया
सरला: उसके रूम है आते हुए रेडी हो गया।
अरुण: हाँ माँ ।
सरला: सुब कुछ रख लिये।
अरुण: हाँ। चलता हूँ मोम
सरला: बड़ी जल्दी है ।
अरुण:: नहीं माँ वो ६:३० पर पहुचना है नहीं तो ट्रैन मिस हो जयेगि।
सरला: ओके जाओ ।
अरुण: बाय मोम।
सरला: बाय बेटा टेक केयर।

और अरुन चला जाता है।
अरून के जाने के बाद सरला को ऐसा लगता है घर खाली हो गया है जब की अरुन गया था न की रमेश उसका हस्बैंड्।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था अरुन पहले भी कई बात कॉलेज टूर पे गया है पर आज की तरह कभी मिस नहीं किया था सरला ने।
थोड़ि देर बाद उसने अरुन को कॉल कीया।
सरला: हेललो।

अरुण: हाँ मोम।
सरला: पहुच गया ।
अरुण: हाँ माँ ट्रैन आने वाली है।
सरल:ओके बोल कर चुप हो जाती है।
अरुण: बोलो माँ कॉल क्यों की ।
सरला: बस कन्फर्म करने के लिये।
तुम्हारे सारे दोस्त है साथ में।
अरुण: है माँ
सरला: एन्जॉय करना बाय।
अरुण: बाय मोम
और सरला कॉल डिसकनेक्ट कर देति है
ये क्या हो रहा है उसे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था अरुन को कॉलेज भी जाता है तो ५या ६ घंटे में लौट कर आया है और अभी तो १ घण्टा भी नहीं हुआ उसे गये हुए और वो उससे मिस कर रही थी।

सोचते २ और घर के काम मैं टाइम पास करने लगी और एक दो बार उस ने अरुन को कॉल भी की पर नेटवर्क की बजह से बात नहीं हो पाई जिस की बजह से उसका मन और भी उदास हो गया।

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