माला दीदी एक प्रश्न, ” अनु ने कहा, “आपने हमे फोन पर जीजाजी
और सोना के बारे मे क्यों नही बताया?”
“जब मुझे पता चला मेने भी इससे यही पूछा था.” सीमा दीदी ने
कहा.
“कैसे बताती में. सोना की चूत विजय की अमानत थी.” माला दीदी ने
कहा, “तुम्हे बताने से पहले में विजय से पूछना चाहती थी.”
“सही मे जीजाजी बहोत आछे है.” अनु ने कहा.
“पर जीजाजी सोना का दिल तोड़ देंगे.” मेने हंसते हुए कहा.
“हां वो तो है, अच्छा वो टीना की क्या कहानी है?” मैने फिर पूछा.
सीमा दीदी अपन कहानी सुनाने लगी……………….
“थोड़े दिन बाद माला और विजय हमारे यहाँ रात के खाने
“पर आए तो माला ने हमे सोना के बारे मे बताया.”
“क्या वो चुदवाने के लिए तय्यार है?” अजय ने पूछा.
“विजय से तो चुदवाने के लिए तय्यार है, पर किसी और से चुदेगि
इसके बारे मे में कुछ कह नही सकती.” माला ने कहा.
“अरे इसकी तुम चिंता मत करो, में उसे इतना निराश और इंतेज़ार
करवाउन्गा की वो आख़िर मे कॅनटाल कर किसी भी से चुदवाने को तय्यार
हो जाएगी, अमित से भी.” विजय ने कहा.
“टीना के बारे मे क्या ख़याल है, क्या वो तय्यार होगी?” माला ने पूछा.
“मुझे शक है कि वो तय्यार होगी,” सीमा दीदी ने कहा, “एक बार अजय
ने उसे पीछे से बाहों मे भरा था तो वो चिल्ला पड़ी थी, “साबजी
अगर आपने मुझे दुबारा छूने की कोशिश की तो में मदन से कह
दूँगी और ये नौकरी भी छोड़ कर चली जाउन्गि. मेरी तो समझ मे
नही आ रहा कि क्या करू और सुमित के लिए कुँवारी चूत का इंतेज़ाम
कहाँ से करूँ.” सीमा ने कहा.
“उसे तय्यार करने के सौ रास्ते निकल आएँगे, मुझे सिर्फ़ उसके बारे
मे बताओ?” विजय ने कहा.
“हर गाँव की लड़की की तरह बड़ी धार्मिक है, रोज़ मंदिर जाती है
पूजा पाठ करती है और बड़ी संकीर्ण विचारों की है. उसे पंडित
और ज्योतिषों की बातों पर अंध विश्वास है.” मेने बताया.
“इस तरह की लड़कियाँ तो बड़ी भोली होती है,” माला दीदी ने
कहा, “और ये पंडित लोग उनके भोलेपन का फ़ायदा उठा उनको बहका
फूसला लेते हैं.”
“हाँ लगता तो कुछ ऐसा ही है, हमारे घर पर आने वाले एक पंडित
पर उसे पूरा भरोसा है और मुझे लगता है कि एक दिन वो उसके जाल
मे फँस जाएगी.” सीमा ने कहा.
“उनके परिवार मे कौन कौन है?” विजय ने पूछा.
उसके परिवार मे सिर्फ़ माता पिता है जिन्हे वो बहोत प्यार करती है.”
सीमा ने बताया.
“क्या उसके शरीर पर कोई जनम का निशान या ऐसा कोई निशान जो
बाहर से सब को नहीं दीखता हो?” विजय ने पूछा.
“उससे क्या होगा?” अजय ने पूछा.
“मेरे दीमाग मे कुछ आ रहा है शायद जिसे हमे मदद मिल जाए,
उसके शरीर पर है या नही सिर्फ़ इतना बताओ.” विजय ने कहा.
“मुझे तो कुछ ऐसा याद नही,” मैने जवाब दिया, “अरे रूको मुझे
याद आया उसकी चूत के बाईं तरफ एक काला बड़ा तिल है.” मैने
कहा
“तुम्हे कैसे पता?” माला ने हंसते हुए पूछा, “क्या तुम हमेशा अपनी
नौकरानी की चूत देखती रहती हो या फिर कुछ चल रहा है तुम दोनो
के बीच.”
“काश ऐसा कुछ होता हम दोनो के बीच तो उसे चुदवाने मे आसानी
होती.” मेने कहा.
“फिर तुमने उसकी चूत क्यों देखी?” माला ने ज़ोर देते हुए पूछा.
“मुझे देखनी पड़ी.” मेने कहा
“डार्लिंग लेकिन तुमने मुझे तो बताया नही.” अजय ने शिकायत करते
हुए कहा.
“कोई इतनी बड़ी बात नही थी कि में तुम्हे बताती.” मेने सफाई देते
हुए कहा
“ठीक है पहले बताओ फिर हम फ़ैसला करेंगे की बात बड़ी थी या
नही.” माला हंसते हुए बोली.
“टीना को काम करते हुए पंद्रह दिन हुए थे, एक सुबह मेने देखा की
वो बार बार अपनी चूत को खुज़ला रही है.” मेने कहा.
“टीना तुम अपनी चूत क्यों बार बार खुज़ला रही हो? मेने पूछा.
“मुझे नही पता मेडम, पर सुबह से ही बहोत खुजली हो रही है.”
टीना ने शरमाते हुए कहा.
“क्या तुमने देखा उस जगह को कि वहाँ खुजली क्यों मच रही है?”
मेने पूछा.
“देखा! मैं कैसे देख सकती हूँ. शस्त्रों मे लिखा है कि खुद के
नीज़ी अंग देखना पाप है.” उसने जवाब दिया.
“तो ठीक है फिर मुझे देखने दो?” मेने उससे कहा.
“ऑश नही मेडम मुझे बहोत शरम आएगी…. प्लीज़ आप मत
देखिए ना.” वो आँखों मे आँसू लिए बोली.
“ठीक है में नही देखूँगी, लेकिन फिर मुझे तुम्हे डॉक्टर के पास
लेकर जाना पड़ेगा.”
“नहीं मेडम में डॉक्टर के पास नही जाउन्गि, किसी अनाज्ने के सामने
नंगी होने से बेहतर है कि में मर जाउ. कहकर टीना रोने लगी.
“अब बात मेरे बर्दाश के बाहर हो रही थी.
“देखो टीना या तो मुझे देखने दो या फिर डॉक्टर के पास चलो, में
नही चाहती कि तुम साब के सामने और मेहमआनो के सामने हमेशा अपनी
चूत खुजाति रहो…..”
टीना समझ गयी कि में क्या कहना चाहती हूँ, उसने कहा, “ठीक है
फिर आप ही देख लीजिए.”
“एक काम करो मेरे बेडरूम मे जाओ और कपड़े उतार कर लेट जाओ, में
अभी आती हूँ.” मेने उससे कहा.
जब में कमरे मे आई तो मेने देखा कि टीना सारे कपड़े उतार नंगी
बिस्तर पर लेटी थी. सही बड़ा ही सुंदर बदन है उसका. मेने देखा
की आम 17-18 साल की लड़कियों की अपेक्षा उसका बदन ज़्यादा भरा हुआ
था, चूत पर झांते भी काफ़ी उग आई थी ऐसा लग रहा था की
जैसे कोई घना जंगल हो.”
“मेने उसकी चूत को चारों तरफ से देखा लेकिन मुझे कुछ दीखाई
नही दिया, “टीना कुछ तो है जिससे तुम्हारी चूत खुजा रही है,
लेकिन ये तुम्हारी झांतो की वजह से में अछी तरह देख नही पा
रही हूँ, मुझे इन्हे काटना पड़ेगा. मेने कहा.
“मेडम ऐसे ही देख लीजिए ना..इन्हे काटने की क्या ज़रूरत है?”
टीना ने कहा.
“टीना में जो कुछ कर रही हूँ तुम्हारे अच्छे के लिए ही कर रही
हूँ, इसलिए तुम चुप चाप लेटी रहो और मुझे आपना काम करने दो.”
में उसकी झाँते काटने लगी लेकिन फिर भी मुझे कुछ दीखाई नही
दिया तो में उसकी झाँते एकदम सॉफ करने लगी, एक बार तो विरोध मे
उठ बैठी लेकिन मुझे देखते ही वापस वैसे ही लेट गयी.
उसकी झांते सॉफ करने के बाद में उसकी टाँगे उठा उसकी चूत का
मुआएना करने लगी तभी मुझे वो तिल दीखाई दिया था. फिर मुझे
उसकी चूत की खुजली का भी पता चला उसकी चूत के पास उसे दाद
हो गये थे जिसकी वजह से उसकी चूत खुज़ला रही थी. मेने उसे
दाद की एक क्रीम निकाल कर दी.
“टीना ये क्रीम लो और दी बार आछी तरह दाद वाली जगन पर लगाना,
और भगवान के लिए बराबर अपनी चूत को देखती रहना कि ठीक हो
रहा है की नही, नही तो मुझे तुम्हे डॉक्टर के पास लेकर जाना
पड़ेगा.” मेने कहा.
“जी मेडम.” उसने धीरे से जवाब दिया.
“तुम्हारी झाँते बहोत घनी है, में तो कहूँगी कि इसे बराबर स्साफ
करती रहा करो जिससे दूबारा दाद ना होवे,”
“जी मालकिन.”
अब लोगों को समझ मे आया कि मुझे उस तिल के बारे मे कैसे पता
चला. ” मैने सबसे कहा.
“डार्लिंग वो नंगी कैसी दीखाई पड़ती है?” अजय ने पूछा.
“मुझे मालूम था तुम यही पूछने वाले हो.” मेने हंसते हुए
कहा, “ओह्ह डार्लिंग क्या बताउ, बहोत ही सुन्दर दीखाई देती है.
उसकी चुचिया बड़ी तो नही है लेकिन गोरा बदन और भरी हुई छोटी
चुचिया किसी नारंगी से कम नही लगती. उसकी चूत भी काफ़ी
सुन्दर है लेकिन उसका छेद बहोत छोटा है, मुझे तो एक उंगली
घुसाने मे ही इतनी तकलीफ़ हुई थी में तो सोच रही हूँ कि वो कौन
खुशनसीब होगा जो उसकी चूत को चोद कर उसके छेद को बड़ा
करेगा.”
“अजय उसकी चूत हमारे नसीब मे तो है नही, वो तो उन दोनो जुड़वा
भाई के ही नसीब मे है.’ विजय ने थोड़ा दुखी स्वर मे कहा.
“खैर ये सब तो चलता रहता है,” अजय ने एक गहरी सांस लेते हुए
कहा, “तुम्हारे दीमाग मे कोई आइडिया आया क्या?” अजय ने विजय से पूछा.
“हां एक प्लान दीमग मे आया तो है.”विजय ने जवाब दिया.
“प्लीज़ हमे बताओ न?” माला ने कहा.
“अभी नही बाद मे बताउन्गा पहले मुझे अछी तरह सोच कर तय्यार
तो कर लेने दो, अगर प्लान कामयाब हो गया तो जल्दी ही टीना कुँवारी
नही रहेगी.” विजय ने कहा.
जब खाने के बाद वो दोनो जाने लगे तब विजय ने पूछा, “तुम दोनो
रविवार की शाम को क्या कर रहे हो?”
“अभी तक तो कोई प्रोग्राम नही है.” अजय ने जवाब दिया.
“ठीक है फिर घर पर ही रहना शायद हम लोग आ जाएँ.” विजय ने
कहा.
रविवार की शाम को हम जब हम लिविंग रूम मे चाइ पी रहे थे
तभी दरवाज़े की घंटी बजी, “मुझे लगता है कि माला और विजय
आए होंगे.” मेने अजय से कहा.
“तभी टीना कमरे मे दौड़ती हुई आई, वो काफ़ी उत्साहित नज़र आ रही
थी, “मेडम एक साधुजी आए है.” उसने कहा.
“उसे वापस भेज दो,” मेने कहा, “ये साधु लोग सब ढोंगी होते है,
भगवान के नाम पर सिर्फ़ पैसा ऐंठना आता है उन्हे.”
“नही मेडम ये दीखने मे बहोत ज्ञानी और पहुँचे हुए महात्मा लग
रहे है, और फिर मेडम बाहर गर्मी भी तो कितनी है, क्यों ना उन्हे
अंदर बुलाकर एक गलास ठंडा पानी ही पीला दिया जाए?” टीना ने
कहा.
“ठीक है, लेकिन सिर्फ़ दो मिनिट मे उसे पानी पीलकर रफ़ा दफ़ा कर
देना.” अजय ने उससे कहा.
“कुछ देर मे ही टीना एक साधु जो गेहुए रंग की धोती और कुर्ता
पहने हुआ था अंदर लेकर आई. उसके सिर के बाल बिल्कुल सफेद हो
चुके थे और दाढ़ी भी काफ़ी बढ़ी हुई थी. हमने उन्हे आदर सहित
बैठने के लिए कहा.” माला ने कहा.
“जै श्री राम” कहते हुए साधुजी सोफे पर पालती मार कर बैठ
गये. टीना ने उन्हे एक ग्लास ठंडा पानी लाकर दे दिया.
साधु ने पानी लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया लेकिन तभी अचानक
उन्होने अपना हाथ पीछे खीच लिया.
“क्या बात है महाराज? आपने हाथ क्यों खीच लिया?” अजय ने पूछा.
“महाराज, पानी लीजिए, बिल्कुल सुद्ध है, मैने अपने हाथ से ग्लास
को दो बार धोया है.” टीना ने कहा.
“बात ये नही है बच्ची, मुझे इस घर मे किसी प्रेत आत्मा का वास
लगता है.” साधु ने जवाब दिया.
“प्रेत आत्मा वो भी हमारे घर मे?” हम दोनो चौंक उठे थे.
“हां एक ऐसी प्रेत आत्मा जो अपने साथ मौत और बर्बादी के सिवा कुछ
नही लाती, अगर मुझे पहले इसका ग्यान हो जाता तो में इस घर मे
कभी अपने चरण नही रखता.”
“महाराज इसका कोई तो उपाय होगा? अजय ने पूछा.
“उपाय तो तभी निकल सकता हो जब कि ये पता लगे कि उस प्रेत आत्मा
ने अपना वास कहाँ बना रखा है.” महाराज ने जवाब देते हुए
कहा, “पहले मुझे सोचने दो” कहकर महाराज ने अपनी आँखे बंद कर
ली.
“जब मैने इस घर मे पदार्पण किया तब मुझे इसका ज्ञान नही हुआ था
लेकिन जैसे ही मेने पानी के लिए हाथ बढ़ाया मुझे इस आत्मा की
उपस्थिति का ग्यान हो गया.” महाराज खुद मे बड़बड़ा रहे थे.
“तो महाराज वो कहाँ है, क्या पानी मे कोई खराबी है या फिर ग्लास
मे.” अजय ने पूछा.
“या फिर महाराज इस लड़की मे, मेने सुना है कि ऐसी आत्मा किसी ना
किसी प्राणी के शरीर मे ही वास करती है.” साधु ने हमे समझाते
हुए कहा.
अचानक साधु खड़ा होकर टीना की तरफ बढ़ा, एक बार को तो मुझे
लगा कि वो टीना को पकड़ लेगा लेकिन वो उसके पास जाकर उसे देखने
लगा. फिर गहरी नज़रों से वो उसके बदन का निरक्षण करने लगा,
पहले उसकी नज़रें उसकी उभरी हुई चुचियों पर ठहरी फिर उसकी
पीठ पर अपनी हथेली जमा देखने लगा. जब उसका हाथ उसकी कमर
और जाँघो की तरफ बढ़ा तो हमने देखा की उसका हाथ काँपने लगा
था.
“मुझे उस दुष्ट आत्मा का पता चल गया है, “साधु ने पलटते हुए
कहा, “उस आत्मा ने इस लड़की के शरीर के नीचले भाग मे अपना बसेरा
बना रखा है.”
“पर ये आत्मा है कौन महाराज?” अजय ने पूछा.
“ये कोई भटकती हुई दुष्ट आत्मा है जो अपना रास्ता भटक चुकी
है, ये हवा मे विचरण करती रहती है और किसी के शरीर मे भी
प्रविष्ट हो जाती हैं. थोड़े दिन अपनी मन मानी कर फिर उसके
शरीर को त्याग किसी नई शरीर की तलाश मे निकल जाती है.’ साधु
ने जवाब दिया. “लेकिन ये कभी किसी के शरीर के इतने नीचे तक
नही जाती, ज़रूर कोई ऐसी वस्तु है जिसने इस आत्मा को अपनी तरफ
आकर्षित किया है.”
“हां ज़रूर इसकी कुंवरी चूत ने आकर्षित किया होगा,” मैने मन ही
मन सोचा “के हम इसे ऐसे ही नही छोड सकते ये खुद बा खुद एक
दिन चली जाएगी.” मेने साधु से कहा.
“में इस बात की सलाह नही दे सकता ये इस बालिका को कोई हानि भी
पहुँचा सकती है,” साधु ने कहा, “मैने पहले ही बताया की इस
तरह की आत्मा अपने साथ मौत भी लाती है.”
“ओह्ह महाराज तो क्या में मर जाउन्गि.” टीना कहकर जोरों से रोने
लगी.
“बच्ची रोवो मत,”साधु ने उसे समझाते हुए कहा, “ऐसा बहोत कम
होता है कि जिसके शरीर मे वो प्रवेश करें उसकी मृत्यु हो जाए
लेकिन हां उसके परिवार मे से किसी की भी मृत्यु हो सकती है, जैसे
भाई बेहन या माता पिता….”
“महाराज मेरे परिवार मे मेरे माता पिता के सिवाय कोई नही है.” टीना
ने रोते हुए कहा.
“महाराज इस आत्मा को इसके शरीर और इस घर से भागने का कोई तो
उपाय होगा?” अजय ने पूछा.
“हर व्याघना का उपाय होता है बच्चा,” साधु ने कहा, “लेकिन मुझे
पहले इस आत्मा की शक्ति का अंदाज़ा लगाना होगा. बालिका क्या तुम्हारे
शरीर के नीचले भाग मे कहीं कोई तिल है?”
टीना थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली, “नही महाराज नही है.”
“हां महाराज है एक तिल है जो मेने खुद देखा है.” मेने झट से
कहा. मुझे लगा कि सही मे ये साधु तो काफ़ी ज्ञानी जान पड़ता है.
टीना मेरी तरफ गहरी निगाह से देखने लगी, “हां टीना है, मेने खुद
उस दिन देखा था.” मैने ज़ोर देते हुए कहा.
“किसी आत्मा की शक्ति की पहचान करने के लिए मुझे उस तिल का
निरक्षण करना होगा जिसने उस दुष्ट आत्मा को अपनी तरफ आकर्षित
किया है.” साधु ने कहा, “अगर लड़की मुझे आग्या दे तो क्या में
देख सकता हूँ.”
“ढोंगी साला,” मेने सोचा, “मुझे तो लगा था कि गयानी होगा लेकिन
ये और साधुओं के जैसे ही बहला फुसला कर इस लड़की को ज़रूर अपने
जाल मे फँसा लेगा.”
“महाराज आपको देखने की ज़रूरत नही है,” मेने विनम्रता से
कहा, “आप मुझे समझाइये में आपको देख कर बता दूँगी.”
“जैसी आपकी इच्छा,” साधु ने कहा, “आप मुझे उसका सही स्थान और
सही आकर देख कर बता दीजिए.”
जब में टीना की चूत देखने लगी तो मेने उसे एक आईना दिया जिससे
वो खुद भी उस तिल को देख सके.
“हे भगवान ये मेरे जनम से यहाँ है, और मुझे आज तक पता ही
नही था.” वो चौंकते हुए बोली.
“तुम कैसे पता चलता तुम तो हमेशा से खुद की चूत को देखना
पाप समझती आ रही हो.” मेने उससे कहा.
वापस कमरे मे आकर मेने साधु को उसका सही आकर और सही स्थान
बता दिया.
“ऑश… ये सही लक्षण नही है.” साधु अपनी आँखों को बंद कर
ध्यान लगाते हुए बोला.
“ऑश महाराज प्लीज़ मेरे माता पिता की जान बचा लीजिए,” टीना
रोने लगी, “आप जो उपाय बताएँगे में करने के लिए तय्यार हूँ.”
“ठीक है उपाय जानने के लिए मुझे इस दुष्ट आत्मा से संपर्क करना
होगा,” साधु ने उसे अपने पास बुलाया और अपना हाथ उसकी कमर पर
रख दिया, “में सिर्फ़ अपना हाथ लगाकर उस आत्मा से संपर्क बनाने की
कोशिश करूँगा इसलिए तुम घबराना मत.” कहकर साधु अपने हाथ को
उसकी जाँघो के बीच रख दिया.
हाथ रखते ही साधु का हाथ एक बार फिर काँपने लगा, और मैने
देखा कि वो अंगूठे से उसकी चूत को भी दबा रहा था.
“उईईई मा……” टीना सिसक पड़ी.
मुझे लगा की साधु सिर्फ़ परिस्थितियों का फ़ायदा उठा रहा है और
इसके पहले कि में उसे रोकती मैने अजय की और देखा जो वहाँ शांति
से बैठा मुक्सुरा रहा था. अजय को मुस्कुराते देख मे चौंक पड़ी,
वो साधु को टीना की चूत दबाते देख अपनी गर्दन हां मे हिला रहा
था.
इसके पहले भी में कुछ कहती साधु अचानक चिल्ला पड़ा, ऑश ये
नही हो सकता ऑश अच्छा.”
साधु के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी थी. वो कुछ बिडबुदा रहा था
जैसे की उस आत्मा से बात कर रहा हो. “अब मुझे सब ज्ञान हो गया
है.” साधु ने अपना हाथ टीना की चूत पर से हटाते हुए कहा.
“महाराज उस आत्मा ने क्या कहा?” टीना ने मुस्कुराते हुए कहा.
“वो आत्मा बहोत ही क्रोधित जान पड़ती थी,” साधु ने कहा, “उसका
कहना है कि तुमने जान बुझ कर तुमने उसे वहाँ क़ैद कर रखा
है.”
“पर महाराज मुझे तो पता भी नही है कि वो वहाँ पर है” टीना ने
भोलेपन से कहा.
“मेने भी यही बात आत्मा को समझाई तो वो थोड़ी शांत पड़
गयी, ” साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, “पर उसका कहना है कि उसे
बाहर जाने के लिए रास्ता नही मिल रहा है.”
“क्या वो जिस रास्ते से अंदर आई थी उसी रास्ते से बाहर नही निकल
सकती?” मेने पूछा.
“मेने भी उसे यहही सलाह दी थी लेकिन उसका कहना है कि ये लड़की
बहुत धार्मिक विचारों की है… क्या तुम पूजा पाठ करती हो.” साधु
ने टीना से पूछा.
“हां महाराज में नियम से रोज़ सुबह पूजा करती हूँ और हमेशा
भगवान का जाप करती रहती हूँ.” टीना ने गर्व के साथ कहा.
“यही बात मुझे आत्मा ने कही, उसका कहना है कि इन मंत्रों और
जापों की वजह से वा उसी रास्ते से नही निकल सकती…” साधु ने
कहा फिर टीना की और घूमते हुए पूछा, “बालिका क्या तुम्हारी शादी
हो गयी है?”
“नही महाराज.” टीना ने कहा.
“क्या किसीने ने तुझे…. क्या तेरा मालिक तुम्हे चोद्ता है?” साधु
ने शंकित नज़रों से अजय की ओर देखते हुए पूछा.
“नही महाराज.” टीना ने कहा, शरम के मारे उसका चेहरा टमाटर की
तरह लाल हो गया था, “मेरी चूत बिल्कुल कोरी है महाराज.”
“अब मेरी समझ मे आया कि वो आत्मा इस लड़की के नीचे के रास्ते से
क्यों नही निकल पा रही कारण की नीचे का रास्ता बंद है,” साधु
ने कहा और फिर टीना की ओर देख कर कहने लगा, “तुम समझ रही हो
ना में क्या कह रह हूँ.”
“हां महाराज मेरी समझ मे आ रहा है कि इस बुरी आत्मा को निकालने
के लिए मुझे अपनी चूत फड़वानी पड़ेगी.” टीना ने मुँह बनाते हुए
कहा.
“महाराज अगर बात सिर्फ़ नीचे का रास्ता खोलने की है तो वो में
बड़ी आसानी से कर सकता हूँ.” अजय ने मुस्कुराते हुए कहा.
“हां महाराज ये ठीक रहेगा साबजी मेरी चूत फाड़ कर रास्ता बना
देंगे.” टीना ने कहा.
“ये इतनी आसान बात नही है,” साधु ने जवाब दिया, “उस आत्मा के
निकलने के लिए रास्ता किसी खास दिन और ख़ास आदमी से बनवाना
होगा.”
“प्लीज़ महाराज मुझे बताइए में अपने माता पिता को बचाने के
लिए आपकी हर आग्या मानने को तय्यार हूँ.” टीना ने गिड़गिदते हुए
कहा.
“तो मेरी बात ध्यान से सुनो बालिका, तुम्हे किसी दूसरे सहर मे
जाना होगा, और वहाँ तुम्हे एक लंबा चौड़ा लड़का मिलेगा. तुम उसे
पसंद आओगी और वो तुम्हे अपने कमरे मे बुलाएगा. तुम्हे उसके कमरे
मे जाना है और उससे अपनी चूत फड़वाकर दुष्ट आत्मा के निकलने के
लिए रास्ता खोलना है. याद रहे तुम्हे बिना कोई प्रश्ना किए उस
लड़के की हर आग्या का पालन करना है.” साधु ने टीना को समझाते हुए
कहा.
“हां महाराज जैसा आपने कहा है में वैसे ही करूँगी.” टीना ने
हाथ जोड़ते हुए कहा.
“किंतु महाराज ये उस लड़के को पहचानेग्गी कैसे?” मेने पूछा.
“जगह और उस इंसान का नाम ‘स’ से शुरू होगा इसलिए पहचानने मे
कोई परेशानी नही होगी. अगर तुमने कहा नही माना तो उस आत्मा ने
मुझसे कहा कि वो तुम्हे श्राप दे देगी और तुम्हारे माता पिता की
म्रत्यु हो जाएगा.” साधु ने टीना से कहा.
जब साधु जाने लगा तो उसने कहा, “एक बात और, उस लड़के को ही
पहल करने देना तुम जल्दबाज़ी मत दीखाना.”
“हां महाराज हम सब वैसे ही करेंगे जैसा आपने बताया है.”
मेने कहा.
साधु ‘जै श्री राम कहते हुए वहाँ से चला गया.
शुक्र है भगवान का ये पाखंडी यहाँ से चला गया. तुमने देख कि
तरह वो टीना क चूत देखना चाहता था और जब मेने उसका प्लान
विफल कर दिया तो बहाने से उसकी चूत को कुरेद रहा था…. ढोंगी
साला.” मेने गुस्से मे अजय से कहा.
“तुम्हे उसे गालियाँ देने की बजाय उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए की
टीना चूत फदवाने को तय्यार हो गयी और अब अनुराधा की सब
परेशानी दूर हो जाएगी. महाराज ने कहा है कि ‘स’ से जिसका नाम
शुरू होगा वही उसकी चूत फड़ेगा और सुमित का नाम भी ‘स’ से
शुरू होता है. अब हमे इसे सिर्फ़ शिमला लेकर जाना है और सुमित को
वहाँ बुलाना है.” अजय ने मुझसे कहा.
“हां अजय तुम सही कह रहे हो.” मेने खुश होते हुए कहा, “में
इस महाराज के चक्कर में टीना उलझी हुई थी कि ये बात मेरे दीमाग
मे ही नही आई.”
“इतने मे टीना साधु को दरवाज़े तक छोड़ कर वापस लौट के
आई, “में किस तरह आप लोगों का शुक्रिया अदा करूँ कि आपने इस
साधु को घर मे आने दिया नही तो मेरे माता पिता की मृत्यु वक़्त से
पहले ही जाती.” उसने कहा, फिर थोड़ा उदास होते हुए बोली, “लेकिन
मुझे अब महाराज की आग्या मानकर अपने माता पिता को बचाना है.”
“भगवान पर भोरोसा रखो, सब अच्छा ही होगा, इसीलिए भगवान ने
महाराज को तुम्हारी मदद के लिए भेज दिया,” मेने उसे सांत्वना देते
हुए कहा.
शाम को हम दोनो सीमा और अजय के घर गये कि उन्हे ये खुशख़बरी
सुना दें. में इतनी खुश थी कि जैसे ही में उनके घर मे घूसी
मेने कहा, “सीमा तुम्हे पता है आज क्या हुआ?”
“यही ना टीना अपनी चूत फदवाने के लिए तय्यार हो गयी.” सीमा ने
मुकुराते हुए कहा.
“ज़रूर तुम्ही ने बताया होगा?’ मेने अजय से शिकायत की.
अचानक वो तीनो जोरों से हँसने लगे, “इतना ज़ोर से क्यों हंस रहे
हो तुम लोग.” मैने पूछा. मेरी बात सुनकर वो और ज़ोर से हँसने लगे.
“क्या तुम्हे पता नही चला वो साधु विजय ही था जो हमारे घर आया
था” अजय जोरों से हंसते हुए बोला.
“अजय में बहोत नाराज़ हूँ तुमसे,” मेने कहा, “अगर तुम्हे पता था
तो मुझे तो बताना चाहिए था.”
“मेरी जान गुस्सा मत करो.” अजय ने जवाब दिया, “शुरू मे मुझे भी
नही पता था, में भी इसके बहरूप से धोका खा गया था. लेकिन
जब टीना की चूत देखाने उसे लेकर कमरे मे गयी तब इसने मुझे
बताया. हम चाहते थे कि टीना के सामने तुम्हे पता ना चले इसलिए
हम चूप रहे.”
“विजय बधाई हो, तुम तो कमाल के कलाकार हो.” मेने कहा, “तुमने
मुझे अच्छे से बेवकूफ़ बनाया.”
“अगर तुम बेवकूफ़ बन गयी हो, तो में दावे के साथ कह सकता हूँ कि
टीना भी मेरी बातों मे आ गयी है.” विजय ने कहा.
“पर सीमा मेरी एक बात समझ मे नही आई, तुमने टीना की चूत
मुझे क्यों नही देखने दी.” विजय ने कहा.
“अगर मुझे पता होता कि साधु के भेष मे तुम हो तो शायद ज़रूर
देखने देती,” मेने जवाब दिया, “लेकिन तुमने बेचारी की चूत को
अंगूठे से दबा दबा कर उसका पानी छुड़वा दिया.”
“मुझे भी ऐसा ही लगा था.” विजय ने हंसते हुए कहा.
जब हम घर पहुँचे तो देख की टीना की आँखे रो रो कर लाल हो
गयी थी, और वो अब ही रोए जा रही थी.
“क्या हुआ टीना तुम रो क्यों रही हो?” मेने पूछा.
“ओह मेडम महाराज के अनुसार मुझे अपनी चूत फदवाणी होगी, और अगर
इस दौरान में प्रेग्नेंट हो गयी तो? उसने रोते हुए कहा, “मेरे माता
पिता तो शरम के मारे मर ही जाएँगे. ये तो उनके लिए मौत से
बदतर होगा.”
“बस इतनी सी बात है,” अजय ने कहा, “सीमा तुम इसे अपनी गर्भ वाली
गोलियाँ दे दो, तुम्हारे लिए में कल और ले आयुंगा.”
मेने उसे गोलिया लाकर दे दी और उसे समझा दिया कि किस तरह
लेनी है.
“शुक्रिया मेडम आपने मेरा बहोत बड़ा बोझ हल्का कर दिया.” टीना
खुश होते हुए बोली.
जब हमने टीना को बताया कि वो हमारे साथ शिमला छुट्टियों पर आ
रही है तो वो खुशी से उछल पड़ी.
तो इस तरह विजय ने टीना को तय्यार किया अपनी चूत फदवाने के
लिए. सीमा दीदी ने अपनी कहानी ख़तम करते हुए कहा.
दूसरे दिन शाम तक अमित और सुमित भी शिमला पहुँच गये. सीमा
दीदी ने अमित और सुमित का परिचय सोना और टीना से करवाया.
सोना ने उन्हे नमस्ते की, लेकिन टीना तो जैसे उछल पड़ी, “क्या कहा
दीदी आपने? इनका नाम सुमित है….. ओह पहले ‘स’ से शिमला अब ‘स’
से सुमित….. हे भगवान तू कितना दयालु है…. महाराज की सब
बात पूरी हो रही है” चिल्लाते हुए टीना कमरे से भाग गयी.
अमित और सुमित हैरत से उसे देख रहे थे, सुमित ने झल्लाते हुए
पूछा, “क्या हो गया इस लड़की को? क्या ये पागल है?”
“नही सुमित ये पागल नही है बस थोड़ा खुश हो गयी है.’ सीमा
दीदी ने कहा. फिर दीदी ने उन्हे सोना और टीना की कहानी सुना दी.
“सुमित एक बात याद रखना टीना के साथ तुम्हे ही पहल करनी है
वरना वो तुम्हे चोदने नही देगी.” विजय ने उसे समझाते हुए कहा.
फिर हम सब बैठ कर सोचने लगे कि आगे क्या करना चाहिए. सबने
मिलकर यही तय किया कि एक दो दिन रुक जाना चाहिए जिससे सब आपस
मे घुल मिल जाएँ.
अगले चौबीस घंटे मे कुछ नही हुआ पर मेने देखा की टीना कुछ
अजीब व्यवहार कर रही थी.
“दीदी ये अचानक टीना को क्या हो गया है,” मेने पूछा, “में देख
रही हूँ कि सुमित जहाँ भी जाता है ये उसके पीछे चली जाती है
और अगर वो किसी से प्यार से बात कर लेता है तो ये रोने लग जाती
है.”
‘हां मेने भी ये महसूस किया है,” सीमा दीदी ने जवाब
दिया, “सूमी… अभी टीना मे बचपाना है…. वो समझ रही है कि
भगवान ने सुमित को सिर्फ़ उसके लिए बनाया है….”
“में अभी जाकर उसे सब खुलासा बता देती हूँ.” मैने गुस्से मे
कहा.
“सूमी… बच्चो जैसी बात मत करो…” सीमा दीदी ने कहा. “थोड़ा
वक़्त जाने दो सब ठीक हो जाएगा, टीना एक बार चारों से चुदवा लेगी ना
तो सब अपने आप समझ जाएगी.”
दो दिन बाद हम सब चाइ पीने बैठे थे. “मुझे लगता है कि अब
हमे अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहिए.” मेने कहा.
“हां मुझे भी ऐसा ही लगता है, वो सोना भी मुझे तीन बार याद
दिला चुकी है.” जीजाजी ने कहा.
“क्या कहा तुमने उससे?” माला दीदी ने मुस्कुराते हुए पूछा.
“मेने उसे प्यार से समझा दिया कि में उसे उसकी मालकिन के सामने
छोड़ना चाहता हूँ जिससे घर पहुँच कर हमे चुदाई करने मे कोई
तकलीफ़ ना उठानी पड़े.” जीजाजी ने बताया.
“पर अब तुम उसे नही चोदोगे तो वो तुमसे बहोत नाराज़ हो जाएगी.”
सीमा दीदी ने हंसते हुए कहा.
“में भी तो यही चाहता हूँ कि वो मुझसे नाराज़ और गुस्सा हो जाए.”
जीजाजी ने कहा.
“अब तुम सब बातें ही करते रहेगो या कुछ करोगे भी,” सुमित ने
कहा, “में तो अब टीना को चोदे बिना रह नही सकता.”
“सुमित तुम्हे तो सिर्फ़ उसे बुलाने की देर है वो खुद तुम्हारे पास अपनी
टाँगे खोले चली आएगी,” माला दीदी ने कहा, “तुमसे ज़्यादा वो तुमसे
चुदवाने को बैचैन है.”
“मेरे दीमाग मे एक आइडिया आया है,” सीमा दीदी ने कहा, “विजय तुम एक
काम करो. सोना के सामने ही हम मे से किसी की चुदाई करो… वो
जलने लगेगी और खुद बा खुद ही अमित के बिस्तर मे घुस जाएगी.”
“हो सकता है आप सही कह रही हों” अमित ने कहा, “लेकिन मेने और
सुमित ने तय किया है कि हम दोनो सोना और टीना को सबके सामने
चोदेन्गे जिससे कि बाद मे सब उनकी कसी चूत का मज़ा उठा सके.”
“यार तुम दोनो का सोचना सही है.” जीजाजी खुश होते हुए
बोले, “हमे कोई दूसरा तरीका ढूंदना होगा.”
“मुझे लगता है आज रात को खाने के बाद ही शुरू कर दिया जाए,”
अजय जीजू ने कहा, “लेकिन सवाल ये है कि शुरुआत कैसे करें.”
“क्यों ना हम ताश खलेते है.” सुमित ने कहा.
“ताश से क्या होगा, क्या ये दोनो लड़कियाँ मान जाएँगी.” मेने कहा.
“मेरी मानो, में जो कहने जा रहा हूँ उससे मौका मिलेगा. हम तीन
पत्ती खेलेंगे, पैसे से नही. हम ऐसा गेम खेलेंगे जिसमे हारने
वाले को अपने शरीर का एक कपड़ा उतारना होगा, और जीतने वाला उससे
कुछ भी करने को कह सकता है.” सुमित ने कहा.
ओह तो तुम स्ट्रीप पोकर गेम खेलने को कह रहे हो.” अनु ने कहा.
“हां उससे क्या होगा कि एक बार वो नंगी हो जाएँगी तो उनकी आधी
शरम तो वैसे ही ख़तम हो जाएगी. और हम चारों को मौका मिल
जाएगा उन्हे चोदने का.” सुमित ने कहा.
“हां ये तो है,” मेने कहा, “लेकिन उस हालत मे क्या करोगे अगर हम
नंगी हो गयी और सोना और टीना के कपड़े नही उत्तरे तो?” मैने
पूछा.
“अरे तुम अमित को नही जानती इसकी बहोत सी खूबियाँ है, ऐसा हो
नही सकता कि उन दोनो के कपड़े ना उत्तरे.” सुमित ने कहा.
“अमित मुझे पता नही था कि तुम पत्तेबाज भी हो.” मैने हंसते हुए
कहा.
“इसके अलावा भी मेरी बहोत सी खूबियाँ है जिनके बारे मे तुम्हे नही
पता.” अमित मुस्कराते हुए बोला.
“पर नौकरणीयाँ हमारे साथ ताश खलेने को राज़ी हो जाएँगी इसकी
क्या गारंटी है.” मेने पूछा.
“मेने उसके बारे मे भी सोच लिया हिया, अगर इसकी नौबत आएगी तो
विजय सोना से कह सकता है कि ये सब उसके प्लान के तहत हो रहा है
और में देखूँगा कि टीना भी शामिल हो जाती है.” सुमित ने कहा.
“हां ये ठीक रहेगा, मोना और रीमा को तो पता ही है कि हम सब
यहाँ क्यों इकट्ठा हुए है.” अमित ने सुमित की बात का समर्थन
किया.
खाने खाते वक़्त सीमा दीदी ने कहा, “आज सब कोई मेरे कमरे मे
इकट्ठा होंगे. हम सब मिलकर एक गेम खलेंगे, और हां तुम चारों
को भी उसमे शामिल होना है.” दीदी ने नौकरानियों को इशारा करते
हुए कहा.
जब हम सब सीमा दीदी के कमरे मे इकट्ठा हो गये तो जीजाजी ने
कहा, “आज हम तीन पत्ती खेलेंगे.”
नौकरणीयाँ हमारी बात सुनकर विरोध करने लगी, “ये तो जुआ है और
जुआ खेलने के लिए हमारे पास पैसे कहाँ है?” सोना ने कहा.
“हां ये सही कह रही है,” टीना ने कहा, “और मुझे तो ये खेलना
भी नही आता.” मोना मेरे और अनु की तरफ देख रही थी जिसे हमने
इशारे मे समझा दिया.
“खेलना तो मुझे भी नही आता और मेरे पास भी पैसे नही है
लेकिन में फिर भी खेलूँगी शायद मज़ा आ जाए.” मोना ने कहा.
“फिर तो में भी खेलूँगी.” रीमा ने कहा.
“लड़कियो सुनो हम पैसे से नही खेलने वाले,” जीजू ने उन्हे समझते
हुए कहा, “हम एक मस्ती वाला खेल खेलेंगे, जिसमे हारने वाले को अपना
एक कपड़ा शरीर से उतारना होगा. और पीसने वाला उससे कुछ भी करने
को कह सकता है लेकिन शरीर के सिर्फ़ उस अंग से जो खुला हो.”
में सोना और जीजाजी को देख रही थी. सोना ने नज़रें उठा जीजाजी
की ओर देखा और जीजाजी ने उसे इशारा कर दिया.
“ठीक है में भी खेल कर देखना चाहूँगी.” सोना ने कहा.
टीना तुम्हारा क्या ख्याल है?” जीजू ने पूछा. वो अभी भी हिक्किचा
रही थी.
“क्यों घबरा रही हो टीना,” सुमित ने कहा, “ऐसा करो तुम तुम्हारी
मालकिन के पास बैठना इससे तुम्हारा हौसला बढ़ेगा.”
“अगर आप कह रहे है तो ठीक है में भी खेल लेती हूँ.” टीना ने
कहा.
“हमने एक चादर ज़मीन पर बिछा दी और सब कोई उस पर बैठ गये.
“अब दो बातें,” जीजाजी ने कहा, “सब कोई बारी बारी से पीसीगा
लेकिन एक ही जना पत्ते बाँटेगा…. सबको मंजूर है.”
अब सवाल ये उठा की कौन बाँटेगा, सब कहने लगे… में नही में
नही….. नौकराणीयाँ कहने लगी… हमे तो आता ही नही….
“अमित तुम क्यों नही शुरुआत करते?” सुमित ने कहा.
“पत्ते बाँटने से पहले एक बात, सभी के शरीर पर बराबर के कपड़े
होने चाहिए, जैसे की मेने चार पहन रखे हैं.” अमित ने कहा.
बाकी के तीनो मर्दों ने भी चार कपड़े ही पहन रखे थे, जैसे की
अंडरवेर, बनियान, शर्ट और शॉर्ट्स. औरतों मे सोना और टीना को
छोड़ कर जिन्होने पॅंटी नही पहन रखी थी सभी ने पाँच कपड़े
पहन रखे थे जैसे की सारी ब्लाउस पेटीकोआट, ब्रा और पॅंटी.
“या तो तुम चारों औरतें अपनी पॅंटी उतार दो या फिर सोना और टीना
को भी एक पॅंटी दे दो पहनने के लिए,” जीजू ने कहा, “जिससे इनके
भी पाँच कपड़े हो जाएँ.
“रीमा दोनो को मेरी पॅंटी दे दो पहनने के लिए.” अनु ने कहा.
“नही दीदी में और मोना अपनी पॅंटी दे देंगी इन्हे,” कहकर चारों
कमरे से बाहर चली गयी.
“अजय क्यों ना खेल के साथ ड्रिंक हो जाए?” विजय जीजाजी ने
कहा, “नशे से खेल कर और उन्हे तय्यार करने मे आसानी होगी.”
“सुझाव अच्छा है, में अभी सब समान लेकर आया.” जीजू ने कहा.
जब नौकरणीयाँ आई तो जीजू ने उन्हे उनके ग्लास पकड़ा दिए. मोना और
रीमा के साथ कोई परेशानी नही थी क्यों कि वो पहले भी हमारे
साथ ड्रिंक ले चुकी थी पर स्मास्या थी सोना और टीना के साथ.
“नही में नही लूँगी, मेने पहले कभी शराब नही पी है.” टीना
ने कहा.
सोना मेरे और जीजाजी के बीच बैठी थी, “सोना ग्लास ले लो ये सब
मेरे कहने पर ही हो रहा है.” जीजाजी उसके कान मे फुसफुसा.
सोना ने बिना कुछ कहे ग्लास उठा लिया.
“टीना देखो ना सोना भी पी रही है.” सुमित ने कहा, “इसमे डरने की
कोई बात नही है, ये तो अंगूर का रस ही तो है.” टीना सुमित को
मना नही कर पाई और उसने अपना ग्लास उठा लिया.
पहली बार पत्ते बाँटे गये. सीमा दीदी ने टीना के कान मे कुछ कहा.
“क्या कहा आपने? में जीत गयी तो हारा कौन?” टीना खुशी से
उछलती हुए अपने ग्लास एक बड़ा सा घूंठ भरते हुए बोली. रीमा हार
गयी थी.
“हां, अब तुम अपनी सारी निकाल दो.” टीना ने हुकुम देते हुए
कहा, “और झुक करो मुझे सलाम करो और कहो, मालकिन में आपके
हुकुम की गुलाम हूँ.”
“मुझे ये खेल पसंद आया,” टीना चहकते हुए बोली. थोड़ी देर बाद
में हार गयी और जीजू जीत गये.
“मुझसे क्या करवाना चाहते है?” मैने अपनी सारी खोलते हुए पूछा.
“जिसे तुम चाहती हो उसे चूम लो.” जीजू ने कहा.
मेने खिसकते हुए सुमित के पास गयी और गहरा चूँबन जड़ डाला,
में तिरछी नज़रो से टीना को देख रही थी. वो गुस्से मे मुझे
घूर कर देख रही थी फिर उसने अपना चेहरा घूमा लिया.
इसी शोर गुल के साथ खेल चल रहा था. फिर सोना हार गयी और
अमित जीत गया. “जिसे तुम प्यार करती हो उसे चूम लो.” अमित ने
कहा.
सोना उठी और जीजाजी के होठों को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी.
में माला दीदी को देख रही थी लेकिन उनके चेहरे के भाव वैसे ही
थे बल्कि वो ताली बजा कर सोना को उकसा रही थी… “हां सोना और
ज़ोर से चूसो.”
दो घंटे और शराब के कई दौर बाद अलाम ये था कि सभी मर्द अपनी
अंडरवेर मे बैठे थे. और हम सभी औरतों अपनी पॅंटी और ब्रा मे
थी सिर्फ़ सोना और टीना को छोड़ कर.
फिर अनु की बारी आई ब्रा उतारने की… अनु ने ब्रा उतारी और सोना
बोल पड़ी..”ऑश दीदी आपकी चुचिया तो बड़ी प्यारी है.”
“एम्म्म” अनु ने कोई जवाब नही दिया.
अगली बारी मे सोना हार गयी..”ओह साब क्या मुझे अपनी ब्रा उतारणी
पड़ेगी.” उसने जीजाजी से पूछा.
“भाई उतारनी तो पड़ेगी.. नियम तो नियम होते है ना.” जीजाजी ने
जवाब दिया.
हिचकिचाते हुए सोना ने अपनी ब्रा उतार दी.. “ओह्ह सोना तुम्हारी चुचि
तो कितनी सुंदर है.. दिल करता है कि इन्हे चूम लूँ भींच
लूँ.” सुमित ने कहा और अपना हाथ उसकी चुचि की ओर बढ़ा दिया.
“सुमित रुक जाओ.. तुम नही.. ये बाज़ी रीमा ने जीती है तुमने नही…
तो रीमा तुम सोना से क्या करवाना चाहोगी? जीजू ने बीच मे कहा.
रीमा कुछ देर तक सोचती रही फिर बोली, “ठीक है सोना तुम अपना
कोई नेपाली गाना सुना दो.”
सोना की आवाज़ सही मे काफ़ी मधुर थी.. जब वो गाना सुना रही थी तो
सुमित उसकी चुचियों को ही घूरे जा रहा था और उधर ये सब देख
टीना की आख्ने भर आई थी.
अगली दो बाज़ियों मे सुमित और जीजू की अंडरवेर भी उतर गयी. फिर
टीना की बारी आई और वो हार गयी. उसने अपनी ब्रा उतार दी और अपने
प्यारे मम्मे सुमित की ओर बढ़ा दिए पर उसने सिर्फ़ उन्हे देखा और
पूछा ,”जीता कोन है?”
वो बाज़ी अनु जीती थी वो चाहती थी कि टीना कोई गाना गाये, “पर
मुझे तो कोई गाना आता नही हा अगर आप चाहें तो में कोई भजन
सुना सकती हूँ.” टीना ने कहा.
“ठीक है वो ही सुना दो.” अनु ने कहा.
उसने गाना तो गाया लेकिन सुमित की बेरूख़ी ने उसे रुला दिया था वो
रोने लगी.
“मुझे नींद आ रही है और में आगे नही खेल पयूंगी,” कहकर
टीना ने अपना सिर सीमा दीदी की गोद मे रख लेट गयी. वहाँ सोना की
आँखों मे भी नींद भर आई थी.
“लगता है सब को काफ़ी नींद आ रही है,” जीजू ने कहा, ऐसा करते
है हम कल यहीं से शुरुआत कर खेल को आगे खेलेंगे.”
“जैसा आप कहे.” सोना और टीना ने कहा.
“मोना और रीमा तुम दोनो इन्हे अपने कमरे मे लेजाओ, और इन्हे बिस्तर
पर सुला कर वापस यहीं आ जाना.” सुमित ने कहा.
“तुमने सोना और टीना को क्यों भेज दिया,” सीमा दीदी बोली, “आज तुम
दोनो उनकी कुँवारी चूत चोद सकते थे.”
“हां ले तो सकते थे लेकिन वो नींद मे थी और ऐसे मे उनके साथ वो
सब करना अच्छा नही रहता,” अमित ने कहा, “हम उनकी कुँवारी चूत
तब फाड़ेंगे जब वो अपने पूरे होश मे हो और उन्हे पता हो कि उनके
साथ क्या हो रहा है.” तभी मोना और रीमा लौट कर आ गयी.
“तुम दोनो उन दोनो की चूत को तरोताज़ा रखना हम कल उनकी चूत
फाड़ेंगे.” सुमित ने कहा.
“हां सर हमे पता है हमे क्या करना है.” कहकर वो दोनो चली
गयी.
“अब हम क्या करेंगे?” अनु ने पूछा.
“आज की रात में और अमित तुम्हारी बहनों की चुदाई करेंगे.” सुमित
ने कहा.
“ये तो हमारी ख़ुसनसीबी होगी,” सीमा दीदी ने सुमित को बाहों मे
भरते हुए कहा, “पहले किसे चोदना पसंद करोगे?”
“में तो पहले अपनी बीवी की बेहन को चोदना पसंद करूँगा.” अमित ने
कहा, “तब तक हमारे जीजा लोग हमारी बीवियों को चोद सकते है.”
उस रात हमारे पतिदेव हमारी बहनो को चोद्ते रहे और हमारे जीजाजी
मुझे और अनु को चोद्ते रहे.
सुबह करीब 8.00 बजे मोना और रीमा सुबह की चाइ लेकर हमारे
कमरे मे आई.
जब हम चाइ पी रहे थे तभी सीमा दीदी ने पूछा, “वो दोनो क्या
कर रही है?”
“वो दोनो अभी सोकर उठी है.” मोना ने कहा.
“रीमा रात क्या हुआ था?” अमित ने पूछा.
“जब हम कमरे मे पहुँचे तो दोनो सो चुकी थी.” रीमा ने
कहा, “तब में सोना की पलंग मे घुस गयी और उसके होठों को
चूसने लगी साथ ही उसकी चुचियों को भी दबाने लगी तभी उसने
सिसकते हुए अपनी आँख खोल दी.”
“ओह्ह्ह रीमा कितना अछा लगरहा है ऑश” वो बड़बड़ाई.
“ये तुम्हे और अछा लगेगा.” कहकर मेने अपना हाथ उसकी पॅंटी मे डाल
उसकी चूत को मसल्ने लगी.
“ओह रीमा काश तुम मर्द होती.” उसने सिसकते हुए कहा था.
“माफ़ करना में तुम्हे चोद तो नही सकती लेकिन तुम्हे अछा लगे तो
में तुम्हारी चूत चूस सकती हूँ.” मैने जवाब दिया था.
“क्या सही मे?” उसने असचर्या से पूछा. जब मेने हाँ कहा तो
बोली, ‘हां रीएमा मेरी चूत चूस दो.”
तब में उसकी चूत चूसी और वो इस दौरान तीन बार झड़ी. फिर हम
दोनो एक दूसरे की बाहों मे लिपट सो गये. मुझे तो लगता है कि वो
चुदवाने के लिए मरी जा रही है.
“और मोना तुम्हारा टीना के साथ कैसा रहा?” सुमित ने पूछा.
जब में उसके बिस्तर मे घुसी तो वो गहरी नींद सोई हुई थी. मोना
अपनी कहानी सुनने लगी. ‘फिर मेने रीमा की तरह उसके होठों को
चूसा और उसकी चुचियों को मसला फिर भी वो नही जागी. बस
नींद मे आपका नाम बड़बड़ा रही थी.
‘फिर मैने अपना हाथ उसकी पॅंटी के अंदर डाला और उसकी फूली हुई
चूत को दबाने लगी’ तभी उसने चौंक कर अपनी आँखे खोल दी.
‘ओह तो ये तुम हो,’ उसने कहा, ‘मोना प्लीज़ रुक जाओ ये ग़लत है.’
“अगर तुम्हे अच्छा लगता है तो करने मे क्या बुराई है?” मेने उसे
चूमते हुए कहा.
“नही मोना ये ग़लत है.” उसने कहा, “दो औरतों को आपस मे ये करना
पाप है.”
‘तभी सोना ज़ोर से सिसक पड़ी. “सोना की तरफ देखो किस तरह वो और
रीमा आपस मे मज़े ले रहे है, क्या तुम भी वो मज़ा नही लेना
चाहोगी?” मेने पूछा.
‘हाँ.. … लेकिन’ वो कुछ कहना चाहती थी लेकिन मेने बीच टोक
दिया, ‘अब चुप रहो और मज़े लुटो’ कहकर में उसकी चूत चूसने
लगी पर थोड़ी देर बाद वो बोली, ‘मोना रुक जाओ मुझसे सहन नही
होता.’फिर हम दोनो भी एक दूसरे से लिपट कर सो गये.
“सर उसकी चूत का छेद बहोत ही छोटा है आपको मज़ा आएगा.” मोना
ने हंसते हुए कहा.
“ठीक है अब एक काम करो इन चाइ की ट्रे कोले जाओ.” सुमित ने हंसते
हुए कहा. “और जाकर उनसे कहो कि तुम दोनो ने विजय को अनु को
चोद्ते देखा और मुझे सीमा को चोद्ते देखा.”
जैसा हमने सोचा था वैसे ही हुआ, थोड़ी देर मे ज़ोर से दरवाज़ा
खुला और सोना और टीना दोनो नंगी मोना और रीमा के साथ कमरे मे
दाखिल हुई. सोना बोली तो कुछ नही लेकिन विजय को देखती रही जो
अनु को चोद रहा था.
वहीं टीना ज़ोर से चीखी, ‘श सर ये आप क्या कर रहे है?”
“क्या हुआ तू आँधी है? देख नही सकती वो मेरी बेहन को चोद रहे
है,” मेने उसके जख़्मो पर नमक डालते हुए कहा.
टीना मेरी बात पर कुछ कहना चाहती थी लेकिन माला दीदी बीच मे
बोल पड़ी, “क्या तुम चारों को एहसास है कि तुम सब नंगी हो.”
“हे भगवान,” कहते हुए वो सब अपनी चूत को हाथों से धकते हुए
कमरे से भाग गयी.
“अब जबकि हम जो चाहते थे वो हो चुका तो तुम दोनो अब चोदना बंद
करो.” जीजू बोले, “ये ताक़त रात के लिए बचा के रखो.”
सीमा और अनु तो खफा हो गयी जब सुमित और विजय ने अपने अपने लंड
उनकी चूत से निकाल उन्हे बीच मझधार मे छोड़ दिया. लेकिन समय की
नज़ाकत को समझते हुए उन्होने कुछ नही कहा.
“अजय हमारी चूत का पानी छूटने तक तो तुम रुक सकते थे.” सीमा
दीदी ने शिकायत करते हुए कहा.
“सॉरी डार्लिंग में रात के कार्यक्रम मे इतना खोया हुआ था कि मुझे
याद नही रहा.” जीजाजी ने माफी माँगते हुए कहा, “वैसे ये तुम्हारी
चूत चूस्कर तुम दोनो का पानी छुड़ा देंगे.”
ओह्ह लेकिन ये तो कोई बात नही हुई,” माला दीदी ने कहा, “मेरी और
सूमी की चूत कौन चूसेगा?”
फिर चारों हमारी चूत चूस चूस कर हमारी चूत का पानी
छुड़ाने
लगे..
जब हमारी चुसाइ ख़तम हुई तो जीजू ने मोना से पूछा तुमने उनसे
क्या कहा था?”
जब हम कमरे मे पहुँचे तो हम हंस रहे थे, “तुम हंस क्यों रही
हो? टीना ने पूछा.
“क्यों की मेरे मालिक तेरी मालकिन को चोद रहे है.” मेने जवाब
दिया.
“और साहेब क्या कर रहे थे?” सोना ने पूछा
“वो मेरी मालकिन को चोद रहे है.” रीमा ने जवाब दिया.
“उन दोनो को हमारी बात समझने मे थोड़ा वक़्त लगा लेकिन जब बात
उनकी समझ मे आई तो दोनो नंगी ही बिस्तर से उठ कर भागी.” मोना
ने खिलखिलाते हुए कहा.
“तुम दोनो ने अच्छा काम किया है.” सुमित ने कहा, “तुम दोनो को तो
शाबाशी मिलनी चाहिए.”
“क्या साब सिर्फ़ शाबाशी.” मोना ने कहा.
“थोड़ा सब्र करो तुम दोनो की चुदाई भी होगी.” सुमित ने कहा.
“वादा” दोनो ने पूछा.
“पका वादा” सुमित ने कहा. फिर दोनो कमरे से चली गयी.
नाश्ते के बाद चारों मर्द सहर चले गये बाज़ार से समान लाने
के लिए. हम औरतों ने सोचा क्यों ना तेल लगाकर सिर की मालिश करा
ली जाए.
सीमा दीदी के सिर मे तेल लगाते वक़्त टीना बार बार अपनी नाक पौंछ
रही थी, “क्या बात है टीना क्या तुम्हे सर्दी हो गयी है?” दीदी ने
पूछा.
“नही मेडम” टीना ने कहा, “मुझे लगता है कि में अपने माता पिता
को नही बचा पाउन्गि, वो तो मुझे पसंद ही नही करते.”
“बेवकूफी वाली बात मत करो, मुझे पता है सुमित तुम्हे बहोत
पसंद करता है.” सीमा दीदी ने जवाब दिया.
“में विश्वास नही करती,” टीना रोते हुए बोली, “मेने रात को देख
लिया वो मुझे कितना पसंद करते है. जब सोना अपनी चुचियाँ दीखा
रही थी तो कैसे मरे जा रहे थे उन्हे पकड़ने के लिए लेकिन जब
मेने अपनी चुचियाँ उन्हे पकड़ने के लिए दी तो उन्होने उनकी तरफ
देखा भी नही.”
“ऐसा कुछ नही,” सीमा दीदी ने कहा, “आज सुबह ही उसने कहा कि
तुमसे अच्छी चुचियाँ यहाँ किसी की नही है.”
“अगर ऐसी बात है तो आज शुबह वो आप को क्यों चोद रहे थे?”
टीना ने पूछा.
“टीना अब तुम अपनी हद पर कर रही हो… अपनी सीमा मे रहो,” दीदी
गुस्से मे बोली. फिर अपने गुस्से को काबू मे करते हुए बोली, “देखो ये
मर्दों की दुनिया है… वो मुझे चोदना चाहता था इसलिए मेने उसे
चोदने दिया.”
“मेडम मुझे माफ़ कर दो, मेरा कहने का ये मतलब नही था,” टीना ने
अभी रोते हुए कहा, “लेकिन मुझे लगता है कि वो मुझे पसंद ही
नही करते.”
“टीना ये जलन की भावना दिल से निकाल दो और थोड़ा सब्र करना
सीखो,” माला दीदी ने कहा, “में कहती हूँ आज सुमित तुम्हे दोपहर
को ज़रूर चोदेगा.”
“ओह सही में दीदी में कितनी खुश हूँ ये बात सुनकर.” टीना के
चेहरे पर फिर मुस्कान आ गयी और वो एक गीत गुनगुनाते हुए अपना
काम करने लगी.
दोपहर को खाने के बाद हम सभी सीमा दीदी के बेडरॉंम मे इकट्ठे
हंस रहे थे
“अब हम कल रात वाला खेल वहीं से खेलेंगे.” जीजू ने कहा “सभी
कोई अपने कपड़े उतारे और सिर्फ़ वो कपड़े पहने रहे जो रात को उनके
बदन पर थे.”
पहले तो मुझे लगा कि टीना विरोध कारगी लेकिन उसने मेरी सोच को
ग़लत ठहराते हुए अपने कपड़े उतार दिए.
खेल शुरू हुआ, पहली दो बाज़ी मे अमित और जीजी ने अपनी अंडरवेर
उतार दिए. आगे चार बाज़ी मे मेने, मोना, रीमा और अनु ने अपनी
पॅंटी उतार दी.
फिर अगली बाज़ी मे सोना हार गयी और अमित जीत गया, “अपनी पॅंटी
उतारो.” जीजू ने कहा.
“हां उतार दो.” सुमित ने कहा, “हम सभी को देखने दो कि क्या
तुम्हारी चूत भी उतनी ही प्यारी जितनी तुम्हारी चुचियाँ.” शरमाते
हुए सोना ने अपनी पॅंटी उत्तर दी.
“ओह सोना तुम्हारी चूत तो बहुत ही प्यारी.” चारों मर्द सीटी
बजाते हुए बोले.
अमित खड़ा हुआ और अपनी पॅंट को नीचे करते हुए कहा, “अब में
चोदना चाहता हूँ.”
“हाई मर्द का लॉडा इतना बड़ा और मोटा होता है.” सोना अमित के लंड
को देखकर ज़ोर से बोली.
“में सोच रहा हूँ कि टीना की चुदाई कर दूँ.” अमित ने कहा.
“नही मेरी नही,” टीना सीमा दीदी के पीछे छुपाते हुए बोली, “मेडम
मुझे बचाओ, में इनसे नही चुदवाउन्गि.”
“अमित तुम टीना को नही चोद सकते अभी इसकी पॅंटी नही उतरी है,”
जीजू ने बीच मे टोकते हुए कहा.
टीना जीजू की बात से खुश हो गयी और सीमा दीदी के पीछे से निकल
अमित को अपनी चूत की इशारा कर बताने लगी कि अभी भी उसने पॅंटी
पहन रखी है और साथ ही अंगूठा दिखा उसे चिडाने लगी.
“अगर ऐसी बात है तो में सोना को चोदुन्गा,’ अमित ने हंस कर कहा
और सोना की कमर मे अपनी बाहें डाल दी.
“नही आप मुझे नही चोद सकते.” सोना ने अमित की बाहें अपनी कमर
से हटाते हुए कहा,” शाब अमित बाबू मुझे चोदना चाहते हैं” उसने
जीजाजी से शिकायत की.
“अब इस खेल के नियम ही ऐसे है की में कुछ नही कर सकता, अगर
फाड़ना चाहता है तो फाड़ने दे.” जीजाजी ने अपने कंधे उचकते हुए
कहा.
सोना कुछ देर तक जीजाजी को गुस्से से घूरती रही फिर अमित के पास
आकर बोली, “में तय्यार हूँ आपकी जो मर्ज़ी हो कीजिए.”
अमित ने उसे बाहों मे भर लिया और अपने होंठ उसके होठों पर रख
उन्हे चूसने लगा.
“अब में भी किसी को चोदुन्गा,” सुमित ने अपनी पॅंट उतार अपने खड़े
लंड को बाहर निकालते हुए बोला और मोना और रीमा की तरफ देखने
लगा,
“किसी को क्यों सुमित बाबू आपकी टीना है ना आपसे चुदने के लिए,”
तुलसी उत्साहित होते हुए बोली.
“नही टीना नियम के हिसाब से तुम…….” जीजाजी ने बीच मे कहना
चाहा लेकिन टीना अब कहाँ सुनने वाली थी.
“भाड़ मे जाए आपके नियम,” कहकर उसने अपनी पॅंटी उतार
दी, “देखिए अब में बिल्कुल नंगी हूँ.” और उछाल कर सुमित की
बाहों मे आ गयी.
“ऐसे नही मेरी जान.” सुमित ने उसे चूमते हुए कहा, “पहले मुझे
तुम्हे चूमने दो फिर तुम्हारी इन प्यारी चुचियों के साथ खेलने दो
उसके बाद.”
“आपको मेरी चुचियाँ पसंद है,” टीना ने कहा, “लेकिन कल तो…..”
“कल की बात भूल जाओ,” सुमित ने जवाब दिया, “आज में इन सब के
सामने कहता हूँ कि तुम्हारी चुचियाँ इन सबमे सबसे सुन्दर और
प्यारी है.”
“सच मे” टीना खुशी से बोली और सुमित के लंड को अपनी चूत मे
घूसाने लगी.
“टीना थोड़ा रूको,” सुमित ने कहा, “में तुम्हे चोदुन्गा लेकिन पहले
अमित और सोना की चुदाई देख ले.”
“हां ये ठीक रहेगा,” टीना ने कहा, “मेने भी आज तक चुदाई नही
देखी है.”
इस दौरान अमित ने सोना को बिस्तर पर लीटा दिया था और सोना की
कुँवारी चूत को चाट रहा था. सोना थी कि मस्ती मे सिसक रही
थी.
“अब में तुम्हारी चूत के छेद को देखूँगा,” अमित ने सोना की टाँगो
को हवा मे उठाते हुए बोला.
“ऊऊ इसकी चूत का छेद तो बहोत ही छोटा है, इस में इतना बड़ा
और मोटा लॉडा कैसे घूसेगा? सोना की चूत का छेद देखकर टीना के
मुँह से निकल गया.
“मेरे पास मे आ, में तुझे दिखाता हूँ कि मेरा लॉडा तेरी चूत
मे कैसे घूस्ता है,” अमित ने टीना को चिढ़ाते हुए कहा.
“नही में तुम्हे मुझे चोदने नही दूँगी.” टीना सुमित के पीछे
छिपते हुए बोली.
“में तो मज़ाक कर रहा था.” अमित ने कहा और सोना के उपर चढ़
गया. टीना भी ज़मीन पर बैठ गयी जिससे कि वो अच्छी तरह से उनकी
चुदाई देख सके. अमित ने अपने लंड को सोना की चूत के छेद पर
रख हल्का सा दबाया.
“ऑश मार गयी….” सोना कराह पड़ी.
“ऊऊऊ अमित बाबू का सूपड़ा तो बहोत ही आसानी से सोना की चूत मे
घूस गया,” टीना चौंकते हुए बोली.
तभी अमित ने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और एक ज़ोर का धक्का
मारा. उसका लंड सोना की चूत की झिल्ली को फाड़ता हुआ अंदर घुस
गया.
‘ऑश मर गयी रे…. प्लीज़ निकाल लो बहुत दर्द हो रहा है.” सोना
दर्द से कराह पड़ी.
“मेडम क्या चुदाई मे बहोत दर्द होता है?” टीना ने पूछा.
“नही शुरू मे थोड़ा थोड़ा होता है.” सीमा दीदी ने जवाब
दिया, “लेकिन बाद मे मज़ा ही मज़ा आता है.”
“टीना अब में तुम्हे चोदुन्गा.” सुमित ने कहा.
“देर आए दुरुस्त आए” कहकर वो उछल कर बिस्तर पर लेट गयी और
आपी टाँगे हवा मे उठा दी, उसकी चूत का छेद हम सभीको दीखाई दे
रहा था.
“हे भगवान इसका छेद तो सोना से भी छोटा है,” मेने सोचा, “मोना
सही कह रही थी सुमित को मज़ा आएगा इसकी चूत मे लंड पेलने मे.”
सुमित टीना के उपर चढ़ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर रख
एक ज़ोर का धक्का मारा.
जैसे ही उसका लंड टीना की चूत को चीरता हुआ अंदर घुसा वो दर्द
से कराह उठी, “ऑश आइईईईई मर गयी”
“ओह मेडम बहुत दर्द हो रहा है,” टीना रोते हुए बोली.
“अभी दर्द कम हो जाएगा,” सुमित उसके आँसुओं को पीते हुए बोला, फिर
जीजाजी की ओर घूमा, “आप दोनो मोना और रीमा को क्यों नही चोद्ते?
देखिए कैसे उनकी चूत से रस टपक रहा है.”
अजय और विजय को दूबारा बोलने की ज़रूरत नही पड़ी, उन्होने तुरंत
मोना और रीमा को ज़मीन पर लिटाया और अपने लंड उनकी चूत मे
घूसा दिए.
थोड़ी ही देर मे कमरा मादक सिसकारियों से गूंजने लगा. चार चूतो
को चार लंड चोद रहे थे, चार चूतड़ उछाल उछाल कर लंड से ताल
से ताल मिला रहे थे.
“हाँ चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो ऑश हां फाड़ दो मेरी चूत को
ओःः और ज़ोर से ओ में तो गयी.’ सोना नेसिसकते हुए अपना पानी छोड़
रही थी और अमित ने भी दो तीन करारे धक्के मार उसकी चूत मे
अपना वीर्या छोड़ दिया.
थोड़ी ही देर मे टीना की कराहे भी सिसकियों मे बदल गयी.
“ओ सुमित बाबू चोदो और ज़ोर से चोदो मुझे नही पता था की
चुद वाने मे इतना मज़ा आता है ऑश हां कस कस के मारो मेरी चूत
को ओ फाड़ दो.”
टीना अब उछाल उछाल कर सुमित से चुद रही थी. थोड़ी ही देर मे
दोनो साथ साथ झाड़ गये. जब सुमित उसकी छूट के उपर से उठा तो
टीना उसे देखने लगी.
“क्यों साबजी पसंद आई आपको टीना की चूत?” टीना ने पूछा.
“हां टीना तुम्हारी चूत फाड़ने मे बहोत मज़ा आया,” सुमित ने
कहा, “सच कहूँ तो में कई कुँवारी चूतो को फाडा है लेकिन
तुम्हारी चूत जितनी कसी हुई चूत किसी की भी नही थी.”
“अगर ऐसी बात है तो में भी तो देखूं कि इसकी चूत कितनी कसी
हुई है.” अमित टीना के उपर चढ़ने की कोशिश करने लगा.
टीना ने तुरंत अपना हाथ अपनी चूत पर रख लिया, “नही में तुम्हे
चोदने नही दूँगी.” और उसने अपनी टाँगे सिकोड ली.
“टीना महाराज ने कहा था की नीचे का रास्ता बड़ा होना चाहिए और
तुम्हे सुमित से चुदवाना है, अब तुम्हारी चूत का रास्ता भी बड़ा हो
गया है और सुमित से भी चुद चुकी हो, महराज की दोनो बात तुम
पूरी कर चुकी हो…. अब जिंदगी के मज़े लो… देखो में भी तो इन
सभी से चुदवा कर मज़े लेती हूँ.” सीमा दीदी ने कहा.
“मेडम आपको विश्वास है ना कि मेरे माता पिता को कुछ नही होगा?”
टीना ने शंकित नज़रों से देखते हुए पूछा.
“हमारा विश्वास करो टीना हम सच कह रहे है.” जीजू ने कहा.
टीना थोड़ी देर सोचती रही फिर उसने अपने हाथ अपनी चूत पर से
हटा दिया और अपनी टाँगे भी फैला दी.
“अमित बाबू अगर आप मुझे चोदना चाहते है तो चोद सकते है.” टीना
ने कहा.
“अमित तुम टीना को चोदो तब तक में सोना की चूत देखता हूँ.”
सुमित ने कहा.
फिर चारों मर्दों ने चारों नौकरानियों को एक एक बार चोदा. हम
चारों उनकी चुदाई देख अपनी चूत मे उंगल करते रहे.
जब जीजाजी सोना को चोद चुके तो बोले, “सोना मेने अपना वादा निभाया
देखो तुम्हे अपनी बीवी के सामने चोद दिया.”
“हाँ वो तो है लेकिन आपने मेरी चूत तो नही फाडी ना?” सोना ने
कहा.
“हां लेकिन हालात ऐसे थे कि में कुछ नही कर सकता था, तुम
मुझसे नाराज़ तो नही हो ना? जीजाजी ने पूछा.
“पहले थी लेकिन अब नही हूँ, जाओ आपको माफ़ किया.” कहकर सोना ने
जीजाजी को चूम लिया.
समाप्त……………..
