बाप बेटी की चुदाई मालिनी की ज़ुबानी 2

बेटी की चुदाई

मानसी बता रही थी, “आंटी प्रभात के बहुत कहने पर भी मैंने प्रभात का लंड मुंह में नहीं लिया। प्रभात का लंड मुंह में लेने के ख्याल से ही मुझे तो उल्टी होने को हो गई। जब प्रभात अपना लंड मेरे मुंह में डालने के लिये आगे की तरफ आने लगा तो मैंने प्रभात को पीछे धकेल दिया”।

“प्रभात समझ गया कि मैं लंड मुंह में नहीं लेना चाहती। हंस कर प्रभात पीछे हटते हुए बोला, “मानसी, स्नेहा तो बड़े मजे से मेरा लंड चूसती है। तुम्हे तो चुदाई के लिए ट्रेंड होने में वक़्त लगेगा। चलो उठो, लेटो और अपने टाइट फुद्दी के दर्शन करवाओ। तुमने लंड नहीं चूसना कोइ बात नहीं, मुझे तो चुसवाओ अपनी कुंवारी फुद्दी?”

“यहां मैंने मानसी को बीच में ही टोकते हुए कहा, “लेकिन मानसी लंड चूसना तो कोइ बड़ी बात नहीं। लड़कियां तो अक्सर लंड मुंह में लेती ही हैं। तुम भी तो अपने पापा आलोक का लंड मुंह में लेकर चूसती हो”।

मानसी बोली, “लेकिन आंटी वो तो मेरे पापा हैं”।

“मानसी की इस बात पर मेरी हंसी निकल गई”।

“मुझे लगा मानसी का ये कहने का मतलब था कि मानसी को प्रभात के साथ चुदाई सिर्फ चुदाई थी। कोइ प्यार या लगाव वाली बात नहीं थी, मगर आलोक से मानसी का रिश्ता कुछ अलग तरह का था”।

“मैं मानसी की बात से समझ गयी कि अगर स्नेहा और प्रभात की चुदाई मानसी के सामने ना हुई होती और मानसी ने उन दोनों की चुदाई की सिसकारियां ना सुनी होती, जिन सिसकारियों को सुन कर मानसी की चूत गरम हो गयी थी, तो शायद प्रभात और मानसी के चुदाई भी ना होती। उधर आलोक के साथ मानसी की चुदाई मानसी की पूरी मर्जी के साथ हो रही थी”।

“खैर, मैंने फिर मानसी से पुछा, “अच्छा मानसी फिर प्रभात ने आगे क्या किया”?

“आंटी जब प्रभात ने कहा, तुम्हें ट्रेंड होने में वक़्त लगेगा, चलो उठो लेटो, और अपने कुंवारी फुद्दी के दर्शन करवाओ। मैं उठ गयी और उठ कर खड़ी हो गयी”।

“प्रभात बोला, मानसी कपड़े तो उतारो, क्या ऐसी ही चुदाई करवाओगी”?

“जब मैं फिर भी नहीं हिली तो प्रभात ने ही मेरे कपड़े उतार दिए और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया”।

“प्रभात ने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर मेरी चूत ऊपर उठाई और चूत की फांकें चौड़ी कर के चूत का दाना चूसने लगा। मुझे तो प्रभात के मुंह से फुद्दी-फुद्दी सुनने से ही बड़ा मजा आ रहा था। मेरी चूत पहले ही गीली हुई पडी थी। प्रभात की इस चूत चुसाई में तो मुझे और भी बहुत ही मजा आने लगा, और मेरी चूत ने फर्रर्र से पानी छोड़ दिया”।

“कुछ देर बाद प्रभात उठा, और बोला, “क्या मस्त खुशबू है मानसी तेरी फुद्दी की”।

फिर प्रभात जैसे अपने आप से ही बोला, “ये लड़कियों की फुद्दी में से ऐसी मस्त करने वाली खुशबू आती है, तभी तो लड़के फुद्दी सूंघते ही चुदाई के लिए पागल हो जाते हैं”?

“फिर प्रभात उसी तरह ही जैसे अपने आप से ही बोला, “वैसे तो जानवर भी यही करते हैं। कुत्ते और सांड़ भी तो चोदने से पहले फुद्दी सूंघते चाटते ही हैं”।

“आंटी प्रभात की ये बात सुन कर तो नीचे लेटे हुए भी मेरी हंसी छूट गयी”।

“फिर प्रभात उठ कर मेरे ऊपर आते हुए बोला, “मानसी लगता है तुम्हारी फुद्दी लंड लेने के लिए तैयार हो चुकी है। पानी से भरी पड़ी है”।

“ये बोल कर प्रभात ने मेरी टांगें चौड़ी करके लंड चूत के छेद पर रखा, और धीरे-धीरे लंड चूत में लंड ऊपर-नीचे करने लगा। कुछ देर ऐसा ही करने के बाद प्रभात ने लंड एक जगह रोक दिया और अंदर की तरफ हल्का सा दबाया”।

“मुझे साफ़ पता चल रहा था प्रभात का लंड मेरी चूत के छेद पर था। प्रभात धीरे-धीरे लंड चूत के अंदर करने लगा। आधा लंड चूत के अंदर करने के बाद प्रभात रुक गया”।

“प्रभात का लंड चूत में जाने से मैं मस्ती मैं आ चुकी थी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था। जब प्रभात आधा लंड चूत में डालने के बाद रुक गया तो मैंने सोचा प्रभात रुक क्यों गया, लंड पूरा डाल क्यों नहीं रहा”।

“तभी प्रभात ने अपनी बाहें मेरे पीछे करके मुझे जकड़ा और एक झटके से लंड पूरा बिठा दिया। मुझे चूत के अंदर बड़ी जलन सी हुई, दर्द भी हुई। मन कर रह था प्रभात को बोलूं थोड़ा रुक जाए। मगर प्रभात नहीं रुका और मुझे चोदने लगा”।

“दस मिनट की चुदाई के बाद अचानक मुझे मजा आने को हो गया। मेरे चूतड़ हिलने लगे। मैंने प्रभात को अपनी टांगों में जकड़ लिया। मेरे मुंह से आआह प्रभात… बड़ा मजा आ रहा है… आअह प्रभात लगाओ और… की आवाजें निकल रहीं थीं।

“प्रभात के लंड के कुछ और धक्कों के बाद मेरे चूतड़ अपने आप ही जोर से हिले और मुझे मजा आ गया। मेरी चूत झड़ गयी। पानी निकल गया मेरी चूत का”।

“तभी प्रभात ने मेरे कान में कहा, “मानसी मेरा निकलने वाला है , क्या करूं लंड निकाल लूं या अंदर ही छुड़ा दूं? जल्दी बोलो नहीं तो तुम्हारी चूत में ही निकल जाएगा”।

“मगर मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरा कुछ बोलने का मन ही नहीं हो रहा था”।

“जब मैंने प्रभात को नहीं छोड़ा, और प्रभात के पीछे से टांगें नहीं हटाई तो धक्के लगाते-लगाते तभी प्रभात ने जोर की आवाज निकाली, “आआह मानसी निकला मेरे लंड का पानी तेरी चूत के अंदर”।

“आंटी मुझे साफ़ लग रहा था प्रभात के लंड का गर्म-गर्म पानी मेरी चूत में गिर रहा था”।

“मजा मुझे भी आ चुका था मगर मैंने अपनी टांगें प्रभात के पीछे से नहीं हटाई और प्रभात को टांगों में जकड़े रखा। मैं एक बार और चुदाई का मजा लेना चाहती थी। मुझे एक चुदाई और चाहिए थी”।

“प्रभात भी समझ गया कि मैं एक बार और चुदवाना चाहती हूं। प्रभात ने मेरे होठ अपने होठों में लिए और चूसने लगा। कुंवारी टाइट चूत की एक और चुदाई के ख्याल से ही प्रभात का लंड फिर सख्त होने लगा”।

“प्रभात ने मेरे होंठ छोड़ कर कहा, “मानसी एक बार और चुदाई करवाओगी? मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है। मैंने प्रभात के पीछे टांगें कसते हुए बस “हूं-हूं ” की आवाज निकाली”।

“प्रभात ने मुझे फिर चोदना शुरू कर दिया। इस चुदाई मैं तो मजा ही मजा आ रहा था। मेरे चूतड़ अपने आप घूम रहे थे। अब मैं आअह्ह आह के साथ कुछ और भी बोल रही थी, “आह प्रभात ये तो बड़ा मजा आता है आआह प्रभात, हां ऐसे ही करो… हां और जोर से… आह प्रभात… आआआह”।

“उधर प्रभात भी बोल रहा था, ” आआह मानसी क्या चूत है तेरी… कसी हुई… टाइट… आअह लंड जकड़ा हुआ है तेरी फुद्दी ने मानसी”। कुछ देर की इस चुदाई के बाद प्रभात का गर्म पानी मेरी चूत में जैसे ही निकला मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया”।

“प्रभात कुछ देर मेरे ऊपर वैसे ही लेटा रहा फिर लंड मेरी चूत में से निकाल कर चला गया”।

“मैं चुदाई की मस्ती में कुछ देर ऐसे ही लेटी रही”।

“थोड़ी देर के बाद ही स्नेहा अंदर आयी और मेरे पास बैठ कर बोली, “क्या बात है मानसी, पहली बार में ही दो बार चुदवा ली? बड़ा खुश लग रहा था प्रभात। लगता है चुदाई का पूरा मजा दिया तूने उसे”।

“फिर स्नेहा ने मेरी चूत वाली जगह का बिस्तर देखा। वहां थोड़ा खून लगा हुआ था। स्नेहा बोली, “मानसी तेरी चूत कुंवारी थी। प्रभात ठीक ही बोल रहा था। कह रहा था उसने तेरी चूत की सील तोड़ी है। बोल रहा था तेरी चूत बड़ी टाइट है”।

“चल बाथरूम जा कर फ्रेश हो जा। मैं चद्दर बदल देती हूं”।

“मैं कपड़े उठा कर बाथरूम चली गयी। फ्रेश हो कर वापस ड्राईंगरूम में आई तो स्नेहा चाय बना चुकी थी। चाय पीते पीते मुझे स्नेहा ने एक गोली का रैप्पर दिया। वो i-pill का रैप्पर था। स्नेहा बोली, “मानसी मेरे पास ये गोलियां थी, मगर खत्म हो गयी हैं। किसी केमिस्ट से ये गोली ले कर 24 घंटे के अंदर खा लेना। प्रभात बता रहा था दोनों बार की चुदाईयों उसके लंड का पानी तेरी चूत में ही निकाला है”।

“फिर स्नेहा जैसे अपने आप से ही बोली, “साला चूतिया मजे के मारे वो लंड बाहर निकाल ही नहीं सका होगा”।

“मैंने रैप्पर तो ले लिया, मगर मुझे समझ नहीं आ रहा था केमिस्ट से गोली कैसे मांगूंगी”।

शाम को घर पहुंची तो मम्मी हस्पताल जा चुकी थी। अब घर में बस पापा ही घर पर थे। मैं सोच रही थी पापा को कैसे ये गोली लाने के लिए बोलूंगी। वो क्या सोचेंगे – उनकी बेटी चूत चुदवा कर आयी है”?

“पापा मिले तो मेरी उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत ही नहीं हुई। मैं सीधा अपने कमरे में चले गयी”।

“जब भी मैं घर लौटती थी, कभी भी पापा से बात किये बिना अपने कमरे में नहीं जाते थी। उस दिन जब मैं बिना पापा से बात किये बिना कमरे में चली गयी तो पापा को जरूर कुछ अजीब सा लगा होगा। थोड़ी देर में पापा कमरे में आ गए और बोले, “क्या बात है मानसी, तबियत तो ठीक है”?

“मैंने कोइ जवाब नहीं दिया तो पापा ने वही बात दुबारा पूछी, “मानसी तबियत ठीक है”।

“मैं परेशान हो रही थी कि क्या बात करूं, कैसे बात करूं। फिर मैंने सोचा कोइ और चारा नहीं है बोलना तो पड़ेगा ही। मैंने उन्हें रैप्पर देते हुए कहा, “पापा ये i-pill लानी है”।

“पापा ने i-pill का रैपर पकड़ते हुए रैपर को उलट-पलट कर देखा और पूछा i-pill? तूने i-pill क्या करनी है मानसी? क्या तू…? पापा ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी”।

“पहले तो मैं चुप रही फिर मैंने बता दिया मैं एक लड़के के साथ सेक्स करके आयी हूं”।

“मैंने पापा को ये भी साफ़-साफ़ बता दिया कि उस लड़के प्रभात ने मुझे दो बार चोदा और दोनों बार उसका जो भी निकला वो मेरे अंदर ही निकला था। मैंने पापा को ये भी बता दिया कि सेक्स के दौरान खून भी निकला था”।

“पापा उठ कर खड़े हो गये के चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था”।

“कुछ देर तो पापा ऐसे ही खड़े-खड़े कुछ सोचते रहे फिर पापा बिना मुझसे बात किये बाहर निकल गए और पापा ने बाजार से मुझे i-pill के चार पैकेट ला दिए”।

“इसके कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए। इस बारे में मेरी और पापा की इस बारे में कोई बात नहीं हुई”।

“मगर मैं प्रभात के साथ हुई अपनी चुदाई नहीं भूल पा रही थी। दो बार की चुदाई का भरपूर मजा लेने के बाद मैं तो यही सोचती रहती – ‘कमाल है, इतना मजा आता है चुदाई में? प्रभात और अपने चुदाई के बारे में सोचते सोचते मैं अपनी चूत में उंगली ले कर चूत का पानी छुड़वा लेती थी”।

“एक दिन शाम को मैं थकी हुई आई और अपनी जींस भी नहीं उतारी और सो गयी। पापा ड्राईंग रूम में बैठे TV पर कोइ मैच देख रहे थे। पता नहीं मैं कितनी देर सोती रही। उठी तो साढ़े दस ग्यारह बजे हुए थे”।

“ड्राईंग रूम के लाइट बंद थी। मेरे कमरे और ड्राईंग रूम का बाथरूम एक ही है। बाथरूम का एक दरवाजा मेरे कमरे में खुलता है, दूसरा ड्राईंग रूम में खुलता है”।

“मैं कपड़े बदलने के लिए बाथरूम गयी और पेंट उतार कर पायजामा पहनने के लिए खूंटी की तरफ देखा जहां मेरा पायजामा लटका हुआ था। देखा तो पायजामा वहां नहीं था”।

“ड्राईंग रूम का गलियारे की तरफ वाला दरवाजा खुला था। सामने पापा मम्मी के कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला था और अंदर छोटा बल्ब जल रहा था। मैं उत्सुकतावश नंगी ही कमरे के तरफ बढ़ गयी। मैंने ऐसे ही दरवाजे में से देखा तो जो मैंने देखा, वो देख कर मैं हैरान हो गयी”।

“मेरा पायजामा पापा के हाथ में था और पापा उसे सूंघते हुए कुछ-कुछ बोल रहे थे। मैं ये देख कर हैरान हो गयी। पापा ये मेरे पायजामे को क्या कर रहे है? मैंने धीरे से दरवाजा खोला और दबे पांव अंदर चली गयी”।

“मैं अंदर कमरे में बेड के पास पहुंची तो मुझे साफ़-साफ दिखाई देने लगा। पापा के एक हाथ में मेरा पायजामा था और दूसरे हाथ में अपने अपना लम्बा लंड पकड़ा हुआ था और पापा हाथ से लंड को आगे पीछे कर रहे थे, और साथ ही आआह रागिनी… आअह रागिनी बोल रहे थे”।

“मैं समझ गयी पापा मेरे पायजामे में से मेरी चूत की गंध ले रहे हैं। मुझे प्रभात की बात याद आ गयी जो उसने मुझे चोदने से पहले मेरी चूत चूसते हुए कही थी। प्रभात ने कहा था, “ये लड़कियों की फुद्दी में से ऐसी मस्त करने वाली खुशबू कैसे आती है”?

“सच आंटी मुझे सच में पापा पर बड़ा तरस आया और मुझे उस वक़्त बड़ा बुरा सा भी लगा कि पापा को मम्मी की चूत सूंघने चूसने को नहीं मिल रही इसलिए अब मेरी चूत की खुशबू लेते-लेते ही मुट्ठ मार कर मजा निकाल रहे हैं”।

“पापा की आंखे बंद थी, और पापा जोर जोर से लंड को आगे-पीछे कर रहे थे। नीचे से तो मैं नंगी ही थी। पापा का लंड देख कर मेरी चूत भी गीली सी होने लगी। मुझे अपनी और प्रभात की चुदाई याद आ गयी। मैंने कुछ सोचा और कहा, “पापा ये क्या कर रहे हो”?

“पहली बार तो पापा ने सुना नहीं। मैंने दुबारा आवाज लगाई और कहा, “पापा ये क्या कर रहे हो”? इस बार पापा ने आखें खोली, और मुझे नंगी बेड के पास खड़ी देख कर मुट्ठ मारना ही बंद कर दिया”।

मैंने फिर कहा, “पापा ये क्या कर रहे हो, मेरा पायजामा क्यों सूंघ रहे हो। मैं कहां थी? मुझे बुला लेते”।

“पापा हैरानी से मेरी तरफ देखते जा रहे थे मगर बोल कुछ नहीं रहे थे”।

“फिर ना जाने मुझे क्या सूझा, मैंने अचानक से पायजामा पापा के हाथ से ले कर बेड पर फेंक दिया और मैंने अपनी दोनों टांगें पापा के मुंह के दोनों तरफ करके घुटनों के बल पापा के मुंह के ऊपर बैठ गयी”।

“मैंने नीचे हाथ करके अपनी चूत की फांकें खोलीं और चूत पापा के मुंह से सटा दी और बोली, “लो पापा, अब जो भी करना है करो”।

“मेरे चूतड़ पापा के मुंह की तरफ थे और मेरा मुंह पापा के लंड की तरफ था। पापा का लंड डंडे की तरह खड़ा था। पापा का खड़ा लंड प्रभात के खड़े लंड से कम से कम डेढ़ गुना लम्बा था”।

“कुछ देर तो पापा ऐसे ही लेटे रहे। मैं चूत पापा के मुंह पर आगे-पीछे करती रही। मेरी चूत में से पानी टपक-टपक कर निकल रहा था। जल्दी ही पापा ने मेरी चूत चूसनी शुरू कर दी”।

“चूत चूसते-चूसते पापा मेरे चूतड़ों को सहला रहे थे”।

“चूत तो मेरी प्रभात ने भी चूसी थी, मगर पापा की चूर चुसाई में मुझे बहुत मजा आ रहा था। अचानक से चूत चूसते-चूसते पापा ने मेरी चूतड़ों से अपने हाथ हटाए पीछे अपने हाथ मेरी बाहों के नीचे से निकाल कर मेरी चूचियां पकड़ ली और धीरे-धीरे चूचियों के निपल मसलने लगे”।

“कुछ देर बाद ना जाने क्या हुआ, पापा ने मेरा सर अपने लंड पर झुका दिया। मुझे लगा पापा मुझे लंड चूसने के लिए कह रहे थे। मैंने पापा का लंड मुंह में लिया और चूसने लगी”।

“मेरी बीस साल के जवान चूत उस वक़्त लेसदार नमकीन पानी से भरी पड़ी थी, जो मेरी चूत ने पापा को मुट्ठ मारते देख कर छोड़ा था। पता नहीं पापा को मेरी चूत में कोइ खुशबू आ रही थी या पापा को मेरी चूत के पानी में कोइ स्वाद आ रहा था”।

“पापा जोर-जोर से मेरी चूत चाट रहे थे। उधर पापा मेरी चूत का पानी चाटते जा रहे थे, पीते जा रहे थे, इधर मेरी चूत फर्रर्र फर्रर्र और ज्यादा पानी छोड़ती जा रही थी”।

“अचानक पापा ने मुझे उठाया और कहा, “बस मानसी”।

इतना कह कर पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। पापा ने मेरे घुटनों के नीचे अपने कुहनियां फंसाई और मुझे आगे की तरफ कर दिया। मेरे चूतड़ और चूत ऊपर उठती चली गयी और टांगें चौड़ी होने के कारण चूत थोड़ी सी खुल गयी”।

“पापा अपना लंड मेरी चूत में ऊपर-नीचे कर रहे थे। लंड ऊपर नीचे करते-करते एक जगह पापा ने लंड रोक लिया। पापा के लंड को मेरी चूत का छेद मिल गया था। पापा ने एक पल के लिए लंड को वहीं रोक लिया। मुझे याद आ गया प्रभात ने भी कुछ ऐसे ही किया था”।

मानसी बता रहे थी, “आंटी पापा ने लंड ऊपर-नीचे करते हुए एक जगह लंड रोक लिया। पापा का लंड मेरी चूत के छेद पर सटीक बैठा हुआ था। प्रभात ने भी ऐसा ही किया था और इसके बाद धीरे-धीरे लंड अंदर डाला था। मैं सोच रही थी, क्या पापा भी वैसे ही लंड धीरे-धीरे अंदर डालेंगे”?

“मगर पापा कुछ भी नहीं कर रहे थे। मैं सोच रही थी पापा को जो भी करना है कर क्यों नहीं रहे, लंड अंदर क्यों नहीं डाल रहे”?

“तभी पापा ने मेरी टांगों के नीचे से ही मेरे कंधों को पकड़ा और एक झटका दिया। उस एक झटके से ही पापा का खड़ा सख्त लम्बा लंड मेरी चूत में बिल्कुल अंदर तक चला गया”।

“मेरे लिए तो ये स्वर्ग जैसा मजा था। क्या मजा आया था जब रगड़ता हुआ पापा का लंड मेरी चूत में अंदर तक चला गया था। मेरे मुंह से बस यही निकला, “आअह पापा”।

“इसके बाद जो पाप ने मुझे चोदना शुरू किया कि पापा रुके ही नहीं। मेरी चूत का पानी एक बार छूटा, फिर एक बार और छूटा, पर पापा थे कि मुझे चोदते ही जा रहे थे”।

“मैं बस यही बोलती जा रही थी, “आआह पापा आअह आअह पापा बड़ा अच्छा लग रहा है आआह पापा”।

“पता नहीं कितनी देर पापा मुझे चोदते रहे। तभी पापा के लंड में से गरम-गरम कुछ निकल कर मेरी चूत में गया और पापा बोले, “ले मानसी ले”।

“मेरी चूत पापा के लंड से निकले गर्म-गर्म पानी से भर गयी थी। प्रभात ने भी मेरी चूत में ऐसे ही पानी छोड़ा था, मगर जितना पानी पापा के लंड में से निकला था, प्रभात के लंड में से तो चुदाई के बाद इसका आधा भी पानी नहीं निकला था”।

“इसके बाद पापा कुछ देर तो मेरे ऊपर ही लेटे रहे। पापा का लंड ढीला होने लगा। पापा ने लंड मेरी चूत से निकाला, और मेरे साथ ही लेट गए।

“पापा के साथ हुई इस चुदाई में तो मुझे जैसे स्वर्ग जैसा मजा आया था”।

“कुछ देर बाद पापा उठ कर बैठ गए और बोले, “मानसी ये क्या हो गया? तू क्यों आई इस तरह हमारे कमरे में और ये क्या अनर्थ हो गया। मानसी मेरे-तेरे बीच ये सब होना पाप है। ये बोल कर पापा सर झुका कर बैठ गए”।

“पापा को इस तरह बोलते और सर झुकाये बैठे देख कर मैंने भी कह दिया, “क्या अनर्थ और कैसा पाप पापा? जो भी हुआ है ठीक ही तो हुआ। आप मेरे पायजामे को सूंघते हुए अपने लंड के साथ जो भी कर रहे थे, वो क्या था? आपका लंड चूत ही तो मांग रहा था। वो मिल गयी उसको”।

“फिर पापा ने कहा, “मानसी जाओ अपने कमरे में और भूल जाओ जो हुआ है। अब दुबारा ये नहीं होना चाहिए। ये गलत है बेटा। बाप-बेटी में ये रिश्ता गलत है”।

“मैं तो चुदाई के मजे की मस्ती में थी। मैंने बोल ही दिया, “पापा आप ये सोचो ही मत कि ये आपकी बेटी की चूत है। आप बस ये सोचो कि आपके सामने एक चूत है और आप एक चूत चोद रहे हो”।

“मैं कुछ देर वहीं लेटी रही। पापा भी चुप थे मैं भी चुप थी। कुछ देर बाद जब मेरा मजा उतरा तो मैं उठी, अपना पायजामा उठाया, और कमरे से निकल गयी”।

“इसके बाद कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए और मेरी और पापा की चुदाई नहीं हुई।

मानसी बोल रही थी, “आंटी मेरे और पापा के बीच कुछ हो तो नहीं रहा था, लेकिन मेरा मन पापा से एक बार और चुदाई करवाने का होने लगा था। जब भी मैं लेटती मेरी आंखों के सामने पापा का लंबा लंड आ जाता और मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पर पहुंच जाता”।

“जब मम्मी रात को ड्यूटी पर हस्पताल में होती है तो पापा अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद नही करते। मैं कई बार पापा के कमरे में झांकती और देखती पापा क्या कर रहे हैं। अक्सर पापा सो ही रहे होते या लेटे लेटे-टी.वी. देख रहे होते”।

“एक दिन जब मैंने पापा के कमरे का दरवाजा थोड़ा खोला और अंदर झांका तो देखा उस दिन की तरह पापा ने अपना पयजामा नीचे किया हुआ था, और पापा लंड पकड़ कर मुट्ठ मार रहे थे”।

“पापा को मुट्ठ मारते देख मुझसे रहा नहीं गया। मेरा मन कई दिनों से चुदाई करवाने का हो रहा था। मैंने सोचा आज मौक़ा है। मैं अंदर चली गयी, और पापा के पास लेट गयी”।

“पापा ने धीमे सी आवाज में से पूछा, “क्या हुआ मानसी, यहां क्यों आई हो इस वक़्त? जाओ अपने कमरे में”।

“पापा ने मुझे ये कहा तो जरूर, मगर मुझे जाने के लिए नहीं कहा। पापा का लंड तब भी उनके हाथ में ही था”।

“मैंने पापा का लंड हाथ में पकड़ लिया। जैसे ही मैंने पापा का लंड पकड़ा, पापा ने अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया, और जैसे पापा लंड की मुट्ठ मार रहे थे, मैं पापा के लंड की मुट्ठ मरने लगी। कुछ देर बाद मैं उठी और पापा का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी”।

“कुछ देर बाद पापा ने मेरे मुंह से अपना लंड निकाल लिया और मेरे कपड़े उतार दिए। पहले की तरह उस दिन भी पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया, और वैसे ही मेरी टांगों के नीचे अपनी बाहें डाल कर मेरी चूत उठा दी और लंड चूत में डाल कर मेरी चुदाई शुरू कर दी”।

जब मेरी चूत पानी छोड़ गयी, और पापा के लंड में से भी गरम पानी की धार मेरी चूत में निकला गयी पापा मेरे ऊपर से उतरे और मेरे पास ही लेट गए”।

“उस दिन की चुदाई के बाद पापा कुछ नहीं बोले, बस छत्त की तरफ देखते रहे। मैं भी चुप-चाप लेटी रही। हम दोनों ही चुप थे। कुछ देर बाद मैं उठी और अपने कपड़े उठा कर कमरे से बाहर निकल गयी”

“इसके बाद पंद्रह दिन या एक महीने के बाद जब भी मेरा मन चुदाई का होता तो मैं पापा के पास चली जाती। खुद ही अपने कपड़े उतार कर पापा के साथ लेट जाती, पापा का लंड पकड़ती, चूसती और हमारी – मेरी और पापा की चुदाई हो ही जाती”।

“कभी-कभी तो पापा चुदाई के बाद चुप-चाप लेट जाते। कभी-कभी पापा वहीं बात दोहराते, “मानसी ये ठीक नहीं बेटा, मुझे नहीं अच्छा लगता। तू समझती कयों नहीं? तू जिस तरह मेरा लंड चूसने लगती है और चूत खोल कर मेरे सामने लेट जाती है, इस सबसे मैं अपना आपा खो देता हूं और तुझे चोद देता हूं। पर ये गलत है मानसी, मेरी बेटी, ये ठीक नहीं है”।

“मगर आंटी अब मुझे पापा से चुदाई करवाने में मजा आने लग गया था। मैं पापा से चुदाई करवाए बिना बहुत दिन नहीं रह सकती थी। पापा के ऐसा कहने पर मैं भी वही बात बोल देती, “पापा आप ये सोचो ही मत कि ये आपकी बेटी की चूत है, आप बस ये सोचो कि आपके सामने एक चूत है और आप उसे चोद रहे हो”।

— और आलोक ने मानसी को चोदने से मना कर दिया।

“एक दिन जब मेरा मन चुदाई करवाने का हो रहा था। एक महीने से ऊपर हो गया था मेरी और पापा की चुदाई नहीं हुई थी। मेरी चूत पानी-पानी हुई पड़ी थी। मैं पापा कमरे में चली गयी। पापा सोने की तैयारी में थे। मैंने हमेशा की तरह अपने कपड़े उतारे और मैं पापा के पास लेट गयी, और पापा का नाड़ा खोलने लगी जिससे मैं पापा का लंड हाथ में ले सकूं”।

“पापा ने मेरा हाथ अपने पायजामे की नाड़े से हटा दिया। मुझे पापा के ऐसा करने पर थोड़ी हैरानी सी हुई। मैं तो पहले भी ऐसा ही करती थी, और पापा ने मुझे कभी भी पायजामे का नाड़ा खोलने से इस तरह नहीं रोका था। मैंने पापा से पूछा, “क्या हुआ पापा”?

“पापा ने साफ़ ही बोल दिया, “नहीं मानसी अब और नहीं। मैं ये नहीं कर सकता। मेरे तुम्हारे बीच ये नहीं होना चाहिए, ये ठीक नहीं है”।

“पापा ने मुझे चोदने से मना कर दिया। मेरी चूत गरम थी। मेरी चूत को लंड चाहिए था। मैंने एक बार फिर पायजामे के ऊपर से ही पापा के लंड को हाथ में लिया तो पापा ने फिर से मेरा हाथ अपने लंड से हटा दिया”।

“मैं तो पापा के कमरे में चुदाई का मजा लेने के लिए गयी थी। मुझे उस वक़्त चुदाई चाहिए ही चाहिए थी। पापा का इस तरह चुदाई के लिए मना करने पर मुझे गुस्सा आ गया और मैंने अपने कपड़े उठाये और पैर पटकती हुई मैं अपने कमरे में चली गयी”।

इतना बोल कर मानसी चुप हो गयी।

“मैंने मानसी से पूछा, “फिर क्या हुआ मानसी? क्या उस रात तुम्हारी चुदाई नहीं हुई”?

मानसी बोली, “हां आंटी, चुदाई तो हुई। पापा थोड़ी देर में मेरे कमरे में आ गए। पक्का ही पापा मेरे इस तरह उठ कर आ जाने से घबरा गए होंगे। आंटी असल में ये चुदाई वाली बात छोड़ भी दें तो भी पापा बचपन मुझसे बहुत प्यार करते हैं। उनसे मेरी उदासी, मेरा बीमार होना नहीं देखा जाता। मेरे इस तरह उठ कर बिना कुछ बोले आ जाने से पापा जरूर घबरा गए होंगे। पापा आ कर मेरे पास ही बैठ गए”।

“मेरे चूत गरम थी और चुदाई ना होने के कारण मुझे गुस्सा चढ़ा हुआ था। चूत गरम होने के बावजूद चूत में उंगली लेने का मेरा मन नहीं हो रहा था”।

“पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मैंने पापा का हाथ झटक दिया। जब मैंने ना पापा की तरफ देखा ना उनसे बात की तो पापा समझ गए कि मैं चुदाई ना होने के कारण नाराज थी”।

“कुछ देर तो पापा ऐसे ही बैठे रहे फिर पापा मेरी चूचियों पर हाथ फेरने लगे। मस्ती में तो मैं थी ही। मैंने पापा का हाथ अपनी चूची पर दबा दिया और पापा को अपनी तरफ खींच लिया”।

“पापा मेरे साथ ही लेट गए। मैं पापा का लंड हाथ में लेने के लिए पापा के पायजामे का नाड़ा खोलने लगी। इस बार पापा ने मुझे नाड़ा खोलने से नहीं रोका। मैंने पापा का पायजामा थोड़ा नीचे करके पापा का लंड हाथ में ले लिया। पापा का लंड उतना सख्त नहीं था जितना अक्सर चुदाई के वक़्त हुआ करता था”।

“मैं पापा का लंड पकड़ कर पापा के लंड की मुट्ठ मारने लगी। जल्दी ही पापा का लंड सख्त हो गया। मैं पापा के लंड की मुट्ठ मारती जा रही थी। तभी पापा ने कहा, “बस मानसी”।

“मुझे लगा पापा को मजा आने वाला है। मैं उठी और पापा के ऊपर उल्टा लेट गयी। मेरी चूत पापा के मुंह के ऊपर थी और मैं पापा का लंड चूस रही थी”।

“कुछ देर ऐसे ही मैं पापा का लंड चूसती रही। तभी पापा ने मेरी चूत चूसना बंद करके मेरे चूतड़ों को हिलाया। शायद पापा मुझे लंड चुसाई बंद करने के लिए कह रहे थे”।

“मैं पापा के ऊपर से उतरी। मुझे पेशाब लग रहा था। मैं बाथरूम गयी, पेशाब किया और वहीं सारे कपड़े उतार कर नंगी ही कमरे में चली गयी”।

“कमरे में जा कर मैं पापा के पास लेट गयी और पापा का लंड फिर से हाथ में ले लिया। कुछ ही देर में पापा उठे, उन्होंने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और मेरे चुदाई चालू कर दी”।

“साफ़ लग रहा था पापा की इस चुदाई में वो जोश वो दम वो रगड़ाई नहीं थी जो अक्सर हुआ करती थी। लेकिन मेरी चूत गरम थी मैं कुछ बोली नहीं। जल्दी ही मुझे मजा आ गया, जैसे ही मेरे मुंह से सिसकारी निकली आआआह पापा, तभी पापा के लंड ने भी पानी छोड़ दिया”।

“ये पहली बार हुआ था। पापा जब भी मुझे चोदते थे मेरी चूत जब दो-तीन बार पानी छोड़ चुकती थी तब पापा का लंड पानी छोड़ता था”।

“पापा मेरे ऊपर से उतरे और बिना मेरी तरफ देखे अपने कमरे में चले गए। इस चुदाई से मेरी चूत का पानी तो छूट गया था, मगर चूत की वैसी रगड़ाई नहीं हुई थी जैसी हुआ करती थी। मुझे रगड़ाई वाली चुदाई चाहिए थी जैसी अक्सर पापा किया करते थे”।

“सोचते-सोचते मैं अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी। जल्दी ही मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी। मेरी चूत फिर गरम हो गयी। मेरा मन दुबारा चूत में लंड लेने का होने लगा। मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठी और नंगी ही पापा के कमरे में चली गयी”।

“पापा चुप-चाप लेटे हुए थे। मैं जा कर पापा के पास ही लेट गयी और पापा से पूछा, “पापा नाराज तो नहीं हो”?

“पापा पहले तो कुछ नहीं बोले, फिर पापा ने कहा, “नहीं मानसी मैं नाराज नहीं हूं”।

“पापा का इतना कहना था कि मैंने पायजामे के ऊपर से ही पापा का लंड पकड़ लिया। पापा ने मुझे कुछ नहीं कहा। मेरे हाथ में पापा का लंड फिर से खड़ा होने लगा”।

“मैं उठी और पापा के पायजामे का नाड़ा खोल कर पापा का लंड मुंह में ले लिया। इस बार पापा ने मुझे लंड पकड़ने और मुंह में लेने से मना नहीं किया। थोड़ा सा ही चूसने के बाद पापा का लंड पूरा सख्त हो गया। मैंने लंड मुंह में से निकाला और बिस्तर पर लेट गयी। मैंने पापा का हाथ पकड़ा और बोली, “पापा इस बार अच्छे से करना”।

“पापा ने कुछ सोचा और मेरी टांगों के नीचे बाहें डाल कर आगे की तरफ होते हुए मेरे चूतड़ और चूत ऊपर उठा दी। पापा ने लंड को मेरी चूत की दरार में जरा सा ऊपर नीचे किया और जैसे ही पापा का लंड चूत के छेद पर रुका, पापा ने एक ही झटके में लंड पूरा मेरी चूत में डाल दिया”।

“इसके बाद जो पापा ने मुझे चोदा, वो वैसी ही चुदाई थी, जैसी चुदाई मुझे चाहिए थी, रगड़ाई वाली चुदाई। दस-पंद्रह मिनट चली इस चुदाई ने मेरी चूत की तसल्ली कर दी। मुझे मजा ही आता जा रहा थी। जैसे ही पापा के लंड ने पानी छोड़ा, पापा बोले, “ले मानसी निकला तेरे अंदर”।

“कुछ देर में जब पापा का लंड ढीला हो गया तो पापा मेरे ऊपर से उतरे और लेट गए। मैं भी उठी और पापा की तरफ देखते हुए बोली, “थैंक यू पापा, आप बहुत अच्छे हो”। ये बोल कर मैं अपने कमरे मैं चली गयी”।

“मानसी जिस बारीकी से अपने चुदाई की कहानी सुना रही थी उसे सुन कर तो मेरी चूत गीली भी गीली हो गयी”।

“मैंने मानसी से पूछा, “मानसी इसके बाद तेरी प्रभात के साथ चुदाई हुई”?

मानसी ने जवाब दिया, “नहीं आंटी नहीं हुई। वैसे तो आंटी उस दिन भी प्रभात के साथ मेरी चुदाई नहीं होनी थी। मैंने तो प्रभात को उस तरह से कभी देखा ही नहीं था, और ना ही मेरी प्रभात के साथ चुदाई में कोइ दिलचस्पी ही थी”।

“ये तो स्नेहा और प्रभात मेरे वहां होते हुए ही चुदाई करने लग गए और उनकी मस्ती वाली सिसकारियां सुन-सुन कर मेरी चूत में कुछ अजीब सा कुछ होने लगा। आंटी उस वक़्त तो मेरी चूत की ये हालत हो गयी थी कि अगर प्रभात की जगह कोइ और भी होता तो भी मैंने चुदाई करवा ही लेनी थी”।

“मानसी कुछ रुक कर बोली, “आंटी प्रभात के साथ मेरी चुदाई तो एक तरह से एक एक्सीडेंट की तरह थी”।

“मानसी की बात सुन का मेरी हंसी छूट गयी। मैंने सोचा मानसी क्या, किसी भी लड़की के सामने अगर चुदाई हो रही हो तो सामने वाली की चूत गरम हो ही जाती है”।

“मैंने मानसी से कहा, “मानसी ये कोइ बड़ी बात नहीं है अगर तुम्हारी सामने लड़का लड़की चुदाई कर रहे हों तो तुम्हारा मन भी चुदाई का होने ही लगता है”।

— मानसी की चुदाई की कहानी से डाक्टर मालिनी की चूत गीली हो गयी।

“मेरी चूत तो मानसी की चुदाई की बातें सुन सुन कर ही गरम हो चुकी थी। मेरा मन चूत में उंगली करने और रबड़ का लंड लेने का होने लगा था”।

मैंने मानसी से कह ही दिया, मानसी तुमने तो स्नेहा और प्रभात की चुदाई होते हुए देखी थी तब तुम्हारा मन चुदाई का हुआ था। यहां तो मेरी चूत तुम्हारी चुदाई का बातें सुन-सुन कर ही गीली हो गयी है”।

“मैंने चूत में खजली की तो मुझे देख कर मानसी ने भी अपनी चूत खुजलाई। चुदाई की कहानी सुनते-सुनते मानसी की चूत भी गरम हो चुकी थी”।

मानसी बोली, “आंटी, प्रभात और पापा की चुदाई याद करके मेरी तो अपनी भी पानी से भरी पड़ी है”।

मानसी कुछ चुप हुई फिर बोली, “आंटी अब आप क्या करेंगी? ऐसे में आप क्या करती हैं? किसी को बुलाएंगी क्या”?

आगले भाग में डाक्टर मालिनी मानसी को बताएगी की ऐसे मौकों पर जब उसकी चूत गरम हो जाती है तो कैसे वो चूत की गर्मी निकालती है, और चुदाई जैसा मजा लेती है।

– डाक्टर मालिनी ने मानसी को दिखाए चूत और गांड में लेने वाले लंड की शकल के रबड़ के खिलौने।

मेरी बात सुन कर मानसी बोली, “आंटी अब आप क्या करेंगी, ऐसे में आप क्या करती हैं, किसी को बुलाएंगी क्या”?

“जब मानसी ने मुझसे ये पूछा तो मैं समझ गयी कि पूछने का मतलब था, कि क्या मैं फोन करके कोई चुदाई करके चूत का पानी निकलने वाला बुलाऊंगी क्या? मानसी का सोचना भी ठीक था, कोइ चूत चोदने वाला मर्द तो वहां दिखाई नहीं दे रहा था”।

“मैंने मानसी के हाथ पर हाथ रख कर कहा, “नहीं मानसी, आगर मेरी चूत कुछ मांगने लगे तो ऐसी हालत में किसी को बुलाती-वुलाती नहीं”।

“फिर मैंने अपनी चूत को हल्का सा छूते हुए कहा, “मगर मानसी ऐसे मौकों पर इसका इलाज करने के लिए मेरे पास अलग तरह के दूसरे जुगाड़ हैं”।

“मानसी थोड़ा हैरान सी हुई और बोली, “अलग तरह के दूसरे जुगाड़? कैसे जुगाड़ आंटी”?

मैंने हंसते हुए कहा, “हींग लगे ना फिटकड़ी, रंग चोखा वाले जुगाड़। असली चुदाई जैसा मजा लेने वाले जुगाड़। देखने हैं”?

“मानसी ने फिर पूछा, “हां आंटी, मुझे भी दिखाईये वो जुगाड़। मुझे भी देखने हैं”।

“मुझे लगा यही मौक़ा है मानसी को सेक्स टॉयज दिखाने का। हो सकता है कोइ पसंद ही आ जाये और मानसी अलोक से चुदाई करवाने से वैसे ही हट जाए”।

मैंने मानसी से कहा, “मानसी सच में देखोगी”?

मानसी के चेहरा पर आश्चर्य के भाव थे।

मानसी बोली, “हां आंटी सच में देखूंगी। मुझे भी तो पता लगे ऐसे किस तरह के अलग जुगाड़ हैं जिनकी आप बात कर रही हैं”।

मैंने उठते हुए कहा, “आओ मेरे साथ”।

“और मैं मानसी को पीछे वाले क्लिनिक के साथ वाले कमरे में ले गयी”।

मैंने मानसी को सोफे की तरफ इशारा करके कहा, “बैठो मानसी”।

“मैं ड्रेसिंग टेबल की दराज में से तीनो बक्से ले आयी। असलम के लंड जैसे मोटे लम्बे लंड वाला बक्सा, चूत का दाना चूसने वाले खिलौने वाला बक्सा, और गांड और चूत में डालने वाला खिलौना। मैंने तीनों बक्से मानसी को दिए और बोली, “लो देखो मानसी अलग तरह के दूसरे जुगाड़ – एक नहीं तीन-तीन जुगाड़”।

“मानसी ने जैसे ही बक्से खोले, उसकी आंखें खुली की खुली रह गयी। वो हैरानी से बोली, “आंटी ये? ये आप लेती हैं”?

“मैंने सोचा आज कल तो लड़कियों को पंद्रह सोलह साल की उम्र में ही इन रबड़ के खिलौनों के बारे में पता लग जाता है, फिर मानसी क्यों नही जानती”?

“मैंने मानसी से पुछा, “मानसी क्या तुमने नहीं लिए ऐसे अपनी चूत में”?

“मानसी बोली, “नहीं आंटी, मैंने इनके बारे में सुना तो जरूर है मगर चूत में लेना तो दूर मैंने तो ये देखे भी पहली बार हैं”।

मानसी हाथ में लंड पकड़ कर उलटते-पलटते देखते हुए हैरानी से जैसे अपनी आप से ही बोली, “ये इतना मोटा चूत में घुसता कैसे होगा”?

“फिर बाकी दो को पकड़ कर बोली, “और आंटी ये दोनों, ये क्या हैं”?

“मैं मानसी के पास ही बैठ गयी। पहले लंड पकड़ा और उसके नीचे से बटन दबा कर उसका वाइब्रेटर चालू किया। और मानसी को कहा , “अब पकड़ कर देखो मानसी”।

“जैसे ही मानसी ने लंड पकड़ा और हैरानी से मेरी तरफ देख कर बोली, “आंटी ये अंदर डालने के बाद ऐसे करता है ? कमाल है, फिर तो ये तो बड़ा मजा देता होगा”?

“फिर चूत का दाना चूसने वाला खिलौना पकड़ कर बोली, “और आंटी ये क्या है ? ये तो बड़ा छोटा सा है। इसका क्या करते हैं”?

“मैंने मानसी से कहा, “मानसी अपने छोटी उंगली यहां रखो”।

“मैंने मानसी की उंगली उस खिलौने के एक आगे खुले से हिस्से पर रख दी, जिसकी शक्ल एक बहुत छोटे बच्चे के छोटे-छोटे होंठों जैसी गोल सी थी। मानसी की उंगली थोड़ी सी उसके अंदर चली गयी। मैंने उसका भी बटन दबाया तो खिलौना मानसी की उंगली चूसने लग गया।

“मानसी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “ओह आंटी मैं समझ गयी। इसे चूत के दाने पर बिठा कर कुछ करते होंगे”।

“मैंने मानसी को समझाया, “बिल्कुल मानसी, तुम ठीक समझ। इसे चूत के दाने पर लगा कर बटन दबा कर चालू कर देते हैं। फिर ये ऐसा ही मजा देता है जैसे कोइ मर्द तुम्हारी चूत का दाना चूस रहा है”।

“मानसी के मुंह से निकला “ओ माई गॉड”। मानसी फिर अंगरेजी के ‘C’ की शक्ल वाला तीसरा खिलौना उठा कर बोली, “और आंटी ये? ये तो कुछ अजीब सा लग रहा है। और इसके साथ ये उंगली जैसा क्या चूत के दाने पर लगेगा”?

“मैंने कहा, “हां मानसी बिल्कुल सही समझा तुमने। ये चूत के दाने पर ही लगेगा। मानसी खिलौना देखने मैं अजीब तो है, लेकिन मजा भी अजीब ही देता है। जन्नत का मजा”।

“मानसी मेरी तरफ देख रही थी”।

मैंने मानसी को बताना शुरू किया, “मानसी इसका ये वाला पतला वाला हिस्सा जो आगे से बिल्कुल गोल है, इसे पहले गांड के छेद के अंदर डाल लेते हैं। जब ये पूरा गांड के अंदर चला जाता है तो इस वाले हिस्से को जो लंड की शक्ल का है और मोटा भी है, इसे चूत में डाल लेते हैं। जब ये गांड और चूत में बैठ जाता है तो ये उंगली की तरह का छोटा सा हिस्सा अपने आप चूत के दाने के ऊपर आ जाता है। और फिर इसके नीचे का ये बटन दबाते हैं – ऐसे”।

“मैंने बटन दबा कर वो खिलौना मानसी के हाथ में पकड़ा दिया। मानसी बोली, “आंटी ये तो दोनों हिस्से वाईब्रेट कर रहे हैं।आपका मतलब है ये दोनों में, मेरा मतलब गांड और चूत के छेदों में साथ-साथ ही अपना काम करेगा”?

“मैंने कहा “हां मानसी, और मैं मानसी की तरफ देखने लगी कि देखें अब मानसी क्या बोलती है”।

“मानसी कुछ बोली तो नहीं लेकिन अपनी चूत खुजलाते हुए मेरी तरफ देखने लगी”।

“मैं उसका मतलब समझ गयी। मैंने पूछा, “मानसी ट्राई करने हैं”?

“मानसी बस इतना ही बोली , “मुझे नहीं पता आंटी”।

“मैंने मानसी से कहा, “मानसी अब शर्माओ मत। ट्राई करने हैं तो बताओ। मस्त मजा आएगा। असली चुदाई जैसा मजा”।

मेरे इतना कहने पर मानसी बोली, “सच में आंटी? अभी”?

“मैंने कहा, “हां मानसी सच, बिल्कुल सच, अभी। चलो कपड़े उतारो”।

“मानसी बोली ,”लेकिन आंटी कपड़े क्यों। ये तो चूत में लेने हैं ना”?

“मैंने कहा, “मानसी चुदाई करवाते हुए भी तो लंड ही चूत में जाता है। फिर पूरे कपड़े क्यों उतारते हैं”?

“जब मानसी कुछ नहीं बोली, तो फिर मैंने मानसी से पूछा, “मानसी पूरा मजा लेना है कि नहीं”?

“मानसी थोड़ा हिचकिचाई और बोली, “मजा तो लेना है आंटी लेकिन आंटी आपके सामने कपड़े…”? मानसी ने अपनी बात बीच में ही छोड़ दी”।

“मैंने हंस कर कहा, “अरे मानसी मेरे से शर्मा रही है? मेरे से कयूं शर्मा रही है? जैसी तू, वैसी मैं। वो नीचे जो तेरे पास है, वैसी ही नीचे मेरे पास है। जो-जो तू उसमें तू करवाती है वैसा वैसा ही मैं भी उसमें करवाती हूं – फिर शर्म कैसी? अच्छा चल मैं भी उतारती हूं। तेरे साथ-साथ मैं भी मजा ले लूंगी। मुझे भी बड़े दिन हो गए मजा लिए हुए”।

“ये कह कर मैंने भी कपड़े उतार दिए। मुझे नंगी देख मानसी ने भी कपड़े उतार दिए और एकटक मेरे खड़े मम्मों की तरफ देखने लगी। सोच रही होगी इस उम्र में भी मेरे मम्मी ढले नहीं थे”।

“सारा योगा और कसरत का कमाल था”।

“मैंने मानसी के हाथ पकड़े और अपने मम्मों पर रख कर दबा दिए। मानसी मेरे मम्मों को मसलने लगी। अचानक मैंने मानसी को पकड़ कर अपनी-अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ अपने होठों में ले लिए”।

“मानसी ने अपने हाथ मेरे मम्मों से हटाए और मुझे हाथ पीछे करके कस कर पकड़ लिया”।

“मैंने भी एक हाथ पीछे करके मानसी के चूतड़ों की दरार में उंगली ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी”।

“पंद्रह मिनट मानसी के होंठ चूसने के बाद मैंने मानसी को छोड़ा और मानसी से कहा, “चल लेट जा मानसी, चूतड़ों के नीचे तकिया रख और चूत उठा ले और टांगें चौड़ी कर ले जिससे चूत का छेद सामने आ जाये। तुझे जन्नत के सैर करवाती हूं”।

– मानसी की चूत और गांड में रबड़ के लंड।

“मानसी ने वैसा ही किया और बिस्तर पर लेट कर चूतड़ों के नीचे तकिया रख लिया। मैंने मानसी के हाथ में चूत का दाना चूसने वाला खिलौना दिया और बोली, “इस पर थोड़ा थूक लगा ले, या चूत का पानी लगा ले। फिर इन चूत के दाने पर रख और नीचे से बटन दबा – और फिर देख इसका करिश्मा”।

“मानसी ने वही किया। जैसे ही खिलौने में कम्पन – वाइब्रेशन चालू हुआ, मानसी की सिसकारी निकल गयी, “आह आंटी आअह आआह आंटी मजा आ गया। बड़ा मजा आ रहा है”।

“पांच मिनट में ही मानसी ने खिलौना चूत के दाने से हटा लिया और बोली, “आंटी अगर इसको और यहां रखा, तो ये तो चूत का पानी ही निकाल देगा I बड़ा मजा देता है ये तो। ये तो असली चूत चुसाई वाला मजा देता है”।

“मैंने हंसते हुए पूछा, “असली चूत चुसाई वाला मजा? जैसी प्रभात ने चूसी थी या जैसी पापा चूसते हैं”?

“मानसी बोली, “आंटी चूत चुसाई तो प्रभात की ही बढ़िया थी। पापा से चूत चुसवाने के लिए तो मुझे ही पापा के मुंह पर चूत रखनी पड़ती है। पापा ने कभी भी पहल करके मेरी चूत चूसते ही नहीं”I

“फिर मानसी धीरे से बोली, “चूत क्या पापा ने तो कभी मेरी चूचियां भी नहीं चूसते, मेरे होंठ भी नहीं चूसते। वो तो एक बार मैं ही पापा के ऊपर बैठ गयी थी, और ये सब शुरू हो गया था, नहीं तो शायद ये भी ना होता”।

“मानसी का ये बताना मेरे लिए ये एक अच्छी खबर थी”।

“मैंने मानसी के हाथ से वो चूत का दाना चूसने वाला खिलौना लेकर मानसी के हाथ में कलाई जितना मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा रबड़ का लंड पकड़ा दिया और कहा, “ये लो मानसी, अब इसे अपनी चूत में डालो, नीचे से बटन दबा कर इसका वाइब्रेशन चालू करो और चूत में आगे-पीछे करो और लो बढ़िया चुदाई के मजे”।

“मानसी बोली, “आंटी इतना मोटा मेरी चूत में जाएगा कैसे”?

“मैंने हंसते हुए कहा, “जाएगा मेरी जान। प्रभात का भी तो गया ही था। तुम्हारे पापा का भी तो जाता ही है। धीरे-धीरे करके डालो तो सही”।

“मानसी ने चूत के पानी से लंड को गीला किया और धीरे-धीरे आअह आआह की आवाजें निकलते हुए लंड पूरा चूत में बिठा दिया। फिर मेरी तरफ देख कर बोली, “आंटी ये तो चला गया पूरा, मगर ऐसा लग रहा है जैसे मेरी चूत भरी पडी है इससे”।

“ये कह कर मानसी लंड के नीचे उंगली से बटन दबा दिया। जिसे ही लंड का कम्पन – वाइब्रेशन चालू हुई, मानसी की चीख निकल गयी, “आह आंटी मर गयी मैं। बड़ा मजा आ रहा है”।

“ये कह कर मानसी ने लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया और सिसकारियां लेने लगी, “आआह आआह पापा आअह प्रभात

आअह और जोर से मजा आ गया आआह आंटी आंटी आह बड़ा मजा देता है ये तो आह”।

“मानसी की सिसकारियां सुन कर मेरी चूत भी गरम हो गयी। मैंने मानसी की कोई छोटी चूचियां पकड़ी और उन्हें मसलने लगी।

“मानसी बोले जा रही थी, “आआह पापा आआह पापा आआह आआह प्रभात आआआह आंटी आअह”।

“मैं मानसी की चूचियां चूसने लगी। मानसी एक से हाथ लंड अपनी चूत में जोर-जोर से अंदर-बाहर कर रही थी और दूसरे हाथ से उसने मेरा सर अपनी चूचियों पर दबा दिया”।

“दस मिनट में मानसी ने इतनी जोर से चूतड़ घुमाए और जोर से बोली, “आअह आंटी निकल गया मेरा, आह पापा, आअह आ गया आंटी आह आंटी, आह निकल गया मेरी चूत का और मानसी ने जोर से चूतड़ घुमाए और लंड चूत के अंदर ही छोड़ कर निढाल हो गयी”।

“मैंने मानसी की चूचियां चूसनी बंद की और लंड का बटन बंद कर दिया, मगर लंड मानसी की चूत में ही रहने दिया”।

“कुछ देर ऐसे ही लेटने के बाद मानसी ने आंखें खोली और मेरी तरफ देखा और बस इतना ही कहा, “आंटी”।

“मैंने उठी और जैसे मर्द चुदाई के लिए औरत के ऊपर लेटता है ऐसे मानसी के ऊपर लेट गयी, और मानसी के होठ अपने होठों में लेकर चूसने लगी”।

“मानसी मेरी पीठ हाथ फेरने लगी। कुछ देर बाद मैं उठी और मानसी से पूछा, “मानसी कैसा मजा आया? असली चुदाई जैसा मजा आया या नहीं”?

“मानसी बोली, “आंटी जन्नत का मजा आया। मैं तो पापा की और प्रभात की चुदाई भूल गयी”।

“मानसी उठने लगे तो मैंने कहा, “अरे मानसी उठ क्यों रही है। थोड़ा आराम कर फिर अगला स्पेशल खिलौना भी तो ट्राई करना है”।

“मानसी फिर लेट गयी और बोली, “आंटी क्या वो भी ऐसा ही मजा देगा”?

“मैंने कहा, “शायद इससे भी ज्यादा। ये मेरा फेवरिट – मनपसंद टॉय है”।

“मैं दराज में से जैल लेकर आयी और मानसी को टयूब दिखते हुए बोली, “मानसी गांड के छेद में डालने के लिए इसके जरूरत पड़ती है”।

“फिर मैंने की चूत का दाना रगड़ते हुए मानसी को कहा, “मानसी जब चूत फिर गरम हो जाये और चुदाई मांगने लगे तो बताना। फिर मैं इसका काम चालू करूंगी।इसका एक हिस्सा तुम्हारी गांड के अंदर जाएगा, एक हिस्सा चूत में जाएगा, और ये जो उंगली जैसा दिखाई दे रहा है ये तुम्हारी चूत के दाने पर रगड़े लगाएगा”।

“मानसी बोली, “आंटी गरम क्या होने है, मेरी चूत तो गरम ही है”।

“मैंने कहा, “मानसी ऐसा है तो फिर शुरू करते हैं। चलो टांगें थोड़ी और उठाओ जिससे गांड का छेद दिखाई देने लगे”।

“मानसी ने टांगें और ऊपर कर ली। मैंने मानसी की गांड के छेद पर जैल लगाई और उंगली पर जैल लगा कर उंगली गांड के अंदर डाल दी। मानसी की सिसकारी निकली, “आआह आंटी फिर से”।

“मैंने आठ दस बार उंगली गांड मैं घुसाई और टॉय का एक हिस्सा गांड में धकेल दिया। फिर दूसरा हिस्सा मानसी की गीली चूत में डाल दिया। लंड के हिस्से के आखिर में उंगली की तरह का हिस्सा मानसी की चूत के दाने पर आ गया”।

“तैयारी पूरी हो चुकी थी, बस अब खेल चालू होना था। मैंने नीचे से बटन दबाया और पूरा खिलौना वाइब्रेट करने लगा”।

“एक-दम से ही मानसी की सिसकारियां चालू हो गयीं, “आआह आआआह आआह”। मैंने खिलोने का बटन बंद किया और पूरा खिलौना मानसी की गांड और चूत में से निकाल लिया।

“मानसी एक-दम बोली, “क्या हुआ आंटी निकाल क्यों लिया। बड़ा मजा दे रहा था ये”।

“मैंने कहा, “मानसी अब तुम इसे अपने आप अपने अंदर लो जैसे मैंने किया था। इसको इस्तेमाल करने के लिए थोड़ी प्रैक्टिस चाहिए। तुम्हें अपने आप डालना और चालू करना आना चाहिए”।

“असल में मैं सोच चुकी थी कि मानसी को या तो ये तीनों खिलौने नए मंगवा दूंगी। मानसी के लिए मेरे वाला लंड थोड़ा मोटा था। कम उम्र की मानसी को अभी इतने मोटे लंड की जरूरत नहीं थी”।

“वैसे तो मेरी सोच के हिसाब से मानसी को इस उम्र में इन रबड़ के लंड और दूसरे खिलौनों की जरूरत ही नहीं थी। उसे तो इस उम्र में असली लंड की चुदाई का ही मजा लेना चाहिए था”।

“मगर मानसी के साथ दिक्क्त ये थी कि उसने अब तक चुदाई करने वाला कोइ दोस्त ही नहीं बनाया था। अभी तो बस मानसी को अलोक के लंड के बदले मजा लेने के लिए कोइ जुगाड़ चाहिए था”।

“मानसी ने थोड़ी कोशिश की और खिलौना गांड और चूत में डालने में कामयाब हो गयी”।

“फिर मैंने कहा, “चलो अब इसे चालू करो और जन्नत का मजा लो”।

“मानसी ने उंगली से स्विच ढूंढा और दबा दिया”।

“पूरे खिलौने का वाइब्रेशन चालू हो गया। पांच ही मिनट में मानसी मजे में आ गयी और चूतड़ हिलाने लगी”।

“इस खिलौने की खासियत ये थी कि चूत और गांड में लेकर बस मजे लेने थे। दोनों हाथ खाली थे। चाहे अपनी चूचियां दबाओ या कुछ और करो”।

“मानसी की सिसकारियां चालू हो गयी, और उन सिसकारियों को सुन कर मेरी चूत भी गरम हो गयी। मानसी बोलती जा रही थी, “आह क्या मजा आ रहा है गांड में चूत भी पानी छोड़ रही है, चूत भी, मजा आ रहा है। आह पापा आअह पापा प्रभात आआआह आंटी आह पापा आंटी आआह आंटी आआह।

“इधर मेरी चूत भी तैयार हो चुकी थी I मैंने रबड़ का लंड उठा कर मानसी के हाथ में पकड़ा दिया और कहा, “चलो मानसी डालो इसे मेरी चूत में, और करो मेरी चूत की चुदाई, और मजा दो मुझे भी”।

“ये कह कर मैंने अपनी टांगें मानसी की दोनों तरफ कर दी और अपने चूतड़ मानसी के सर की तरफ कर के अपने हाथ पीछे करके अपने चूत खोल दी”।

“मानसी ने रबड़ का मोटा लौड़ा मेरी चूत में जड़ तक बिठा दिया, और लंड का बटन दबा कर वाइब्रेशन चालू कर दिया, और साथ ही लंड अंदर-बाहर करने लगी”।

“मानसी का सब कुछ चुद रहा था और मेरी चूत चुद रही थी”।

“मुझे भी मजा आने लगा था। हम दोनों ही बोल रही थी, “आआआह मानसी रगड़ो मेरी चूत, मेरी फुद्दी, और जोर से आअह आआआह। आंटी ये क्या हो रहा है मेरी चूत को, मेरी गांड को आअह। मैं रोज लूंगी इसको, नहीं निकालूंगी अपनी गांड से आह पापा आआआह आंटी आअह मजा आ गया”।

“दस मिनट में हम दोनों की चूतें पानी छोड़ गयी और हमें पूरा मजा आ गया”।

“मजा आने के बाद मैं मानसी के ऊपर से उतरी, और सीधी बाथरूम जा कर पेशाब किया। मुंह हाथ धोया और वापस आ गई। उधर रबड़ वाला खिलौना अभी भी मानसी की गांड और चूत में ही था”।

“मानसी ने खिलौने का वाइब्रेशन बंद तो कर लिया था, मगर आंखें बंद कर के लेटी हुई मजे ले रही थी”।

“मैं मानसी के पास बैठ गयी और मानसी की चूचियों को सहलाती हुई बोली, “मानसी, मानसी बेटा आंखें खोलो। ये निकाल लो अपनी गांड और चूत में से”।

“मानसी ने आखें खोल कर मेरी तरफ देखा और इतना ही कहा, “हां आंटी” और फिर आंखें बंद कर ली। लग ही रहा था मानसी को अभी भी मजा आ रहा था, और अभी कुछ देर और रबड़ वाला “C” की तरह का लंड गांड और चूत में रखना चाहती थी”।

“मैं जा कर सोफे पर बैठ गयी, और इंतजार करने लगी कि कब मानसी खिलौना चूत में से बाहर निकले। मैं मानसी को मजा लेने देना चाहती थी। पांच सात मिनट के बाद मानसी ने आंखें खोली, और और खिलौना चूत और गांड में से निकाल लिया”।

“C” की तरह के खिलौने को मुझे दिखाते हुए मानसी बोली, “आंटी ये तो बहुत कमाल की चीज है। ये पास हो तो फिर किसी और से चुदाई की जरूरत ही नहीं”।

“मैंने मानसी को समझाया, “नहीं मानसी, ऐसा नहीं है I मर्द की चुदाई मर्द की चुदाई ही होती है। मर्द की जिस्म की खुशबू मस्त करने वाली होती है। मर्द जब बाहों में ले कर होंठ चूसते हुए चूत चोदता है तो उसका मजा ही अलग होता है”।

“मैं मानसी को बता रही थी, “या जब मर्द कमर पकड़ कर पीछे से चूत में या फिर गांड में लंड डालता है तब जो मजा आता है उसका कोइ जवाब नहीं। गांड में लंड के धक्के लगते हुए जैसे मर्द के टट्टे नीचे चूत पर टकराने से ठप्प-ठप्प की जो आवाज आती है, वो गांड चुदाई मजा दुगना कर देती है”।

“और वो जो सामने खड़ा हो कर लंड मुंह में लेने को बोलता है या लंड का अगला हिस्सा मम्मों के निप्पल पर रगड़ता हैं, वो सब ये प्लास्टिक के खिलौने नहीं कर सकते। ”

“और मानसी वो गरम-गरम ढेर सारा पानी – जो मर्द के लंड से निकल कर चूत या गांड में डलता है वो? वो इन रबड़ के लंडों में कहां। तुम्हारी चूत में भी तो जब तुम्हारे पापा के लंड का गर्म पानी निकलता है, तुम्हें भी तो बड़ा मजा आता है”।

“ये लंड इस लिए होते हैं कि अगर कहीं आधी रात को चूत या गांड में चुदाई की खुजली मच जाए तो चुदाई के लिए तरसना ना पड़े”।

“और फिर मैंने हंसते हुए कहा, “और मानसी वो जो बकवास-बाजी चुदाई के दौरान औरत और मर्द करते हैं वो चुदाई के मजे को दुगना-तिगुना कर देती हैं। वो सब इन रबड़ ले खिलौनों में कहां”।

“जब लंड चूत में डाल कर ऊपर लेटा हुआ मर्द चुदाई के दौरान बोलता है, “आआआ मेरी जान, रगडूं तेरी फुद्दी, करूं तेरी रगड़ाई वाली चुदाई, रंडी की तरह चोदूंगा आज तुझे, चूस जोर से मेरा लंड आआआह, और जोर निकाल साली जो भी है इसके अंदर से पीले, आअह तेरी चूत में मेरा लौड़ा ”।

“तेरी गांड चोदूं फाड़ दूं तेरी गांड, आआआह निकले वाला है मेरी जान, आआह मेरी जान ले ले निकला मेरा, मेरी रंडी आज आया चुदाई का असली मजा, ले भर दी तेरी चूत, तेरी फुद्दी, ले आआह आआआह निकला गया तेरी फुद्दी में, आज कुतिया की तरह चोदूंगा तुझे, निकला मेरे लंड का पानी तेरी फुद्दी में आआआह आआह”।

“मैं अभी बोल ही रही थी कि आगे मानसी ही बोल पड़ी, “और आंटी उधर लंड चूत में लंड डलवा कर नीचे लेटी हुई लड़की बोलती है, “आआह बना दे भोसड़ा इस चूत का, गांड तो फाड़ ही दी आह, रगड़ गांडू और रगड़ आआह, घुस जा मेरी चूत में आआआह, रंडी की तरह चोद, आज मुझे फाड़ डाल, मेरी फुद्दी फाड़, रगड़ो मेरी चूत, झाग निकाल दो इसकी इस फुद्दी की फाड़ दे मेरी चूत मेरी फुद्दी”।

“ये बोल कर मैं और मानसी दोनों खुल कर हसी। मैंने मानसी को बाहों में ले लिया, और उसके होंठ अपने होठों में लेकर चूसने लगी। मानसी भी मेरे साथ चिपक गयी”।

“कुछ देर बाद जब मैंने मानसी को छोड़ा तो मानसी बोली, “आंटी आप की बातों से तो मेरी चूत फिर से तैयार होने लगी है। मगर आंटी पापा मम्मी को चोदते हुए तो ऐसा बोलते हैं, मगर मुझे चोदते वक़्त ऐसा कुछ भी नहीं बोलते। और तो और प्रभात भी ऐसा कुछ नहीं बोला था”।

“मैंने कहा, “मानसी अलोक की और तुम्हारी चुदाई बाप-बेटी की चुदाई होती है, मर्द-औरत की नहीं। उसमें कहीं ना कहीं रिश्तों का लिहाज छुपा होता है। दिल के किसी कोने से दबी हुई आवाज आती है, ये गलत है”।

“वो बात अब अलग है कि अगर बीस साल की लड़की अपनी चूत खोल कर किसी मर्द के सामने लेट जाये – फिर चाहे वो उसका पापा ही क्यों ना हो, या भाई या बेटा ही क्यों ना हो, उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है, और गुलाबी चूत देख कर लंड खड़ा हो ही जाता है, और फिर चुदाई हो कर ही रहती है”।

“तुम्हारी और अलोक की चुदाई में यही हो रहा है। तुम अलोक के सामने चूत खोल कर लेट जाती हो, उस वक़्त अलोक को तुम एक बेटी नहीं एक लड़की दिखाई देती हो, जो अपनी चूत खोल कर चुदाई मांग रही होती है। नंगी लड़की और उसकी छोटी सी गुलाबी चूत – ऐसे में आलोक करे भी तो क्या करे? ऐसी कुंवारी चूत सामने देख कर आलोक का लंड खड़ा हो जाता है। अब इसमें इसमें आलोक के लंड का क्या कसूर”?

“उधर प्रभात तुम्हारा बॉयफ्रेंड नहीं। वो तो स्नेहा ने तुम्हें एक चुदाई के लिए अपना बॉयफ्रेंड उधार दिया था। तुम पर एहसान किया था। अगर प्रभात तुम्हें चोदते वक़्त ऐसा कुछ बोलता तो हो सकता है स्नेहा को भी ये पसंद ना आता। तुम अगर प्रभात से दुबारा चुदाई करवाना चाहो, तो स्नेहा कभी नहीं मानेगी”।

“मानसी एक बात मैं बता दूं, “जितनी तुम सुन्दर हो, अच्छी हो, हमेशा हंसती रहती हो, मैं नहीं मानती के स्नेहा भी इतनी ही सुन्दर होगी। उसे तो डर ही लगता रहेगा कि कहीं तुम उसके बॉयफ्रेंड प्रभात को उससे छीन ही ना लो”।

“फिर मैंने मानसी से पूछा, “मगर मानसी तुम मुझे एक बात बताओ, अभी जो तुमने बोला, “मगर आंटी पापा मम्मी को चोदते हुए तो ऐसा बोलते हैं, आआह बना दे भोसड़ा इस चूत का, गांड तो फाड़ ही दी, आह रगड़ गांडू और रगड़, आआह घुस जा मेरी चूत में आआआह, रंडी की तरह चोद आज मुझे, फाड़ डाल मेरी फुद्दी। ये सब कुछ तुमने कहां सुना है”?

“मानसी बोली, “आंटी ये मैंने पापा और मम्मी की चुदाई में ही सुना है”।

“अब हैरान होने की बारी मेरी थी। मैंने हैरानी से पुछा, “पापा और मम्मी की चुदाई में? क्या कह रही हो मानसी? तुमने उन्हें चुदाई करते हुए कब देख लिया”?

“मानसी बताने लगी, “आंटी, अब आप से क्या छुपाना। एक दिन क्या हुआ, मैं दोपहर को घर आयी I असल में उस दिन मेरी तबीयत कुछ अच्छी नहीं थी। मैं घर आई तो देखा पापा की गाड़ी बाहर ही खड़ी थी”।

“पापा की गाड़ी देख कर मैंने सोचा पापा के गाड़ी में कुछ दिक्क्त हो गयी होगी। अम्मी तो रात को हॉस्पिटल जाती थी और दिन में सोती थी। पापा दिन में ऑफिस होते थे। ऐसे मौकों पर मैं अपनी चाबी से ताला खोल कर अंदर चली जाती थी”।

“उस दिन भी जब मैं ताला खोल कर अंदर गयी, तो मुझे अंदर से अजीब-अजीब आवाजें आ रही थी – कम से कम वो बातें करने की आवाजें तो नहीं ही थी”।

“आवाजें सुन कर ये तो मुझे समझ आ गया कि पापा आज घर पर ही थे। मगर मैं सोच रही थी ये आवाजें कैसी आ रही थी।

मैं देखने के लिए आगे बढ़ी और खुले दरवाजे से कमरे में जो मैंने देखा, उसे देख कर तो मेरी चूत ने फर्रर्र से पानी छोड़ दिया। पापा और मम्मी बिस्तर पर लेटे हुए चुदाई कर रहे थे”।

“पास छोटी टेबल पर व्हिस्की की बोतल और दो गिलास रखे थे। बोतल आधी ही भरी हुई थी। पापा तो रोज व्हिस्की पीते थे, मुझे मालूम ही था। मगर दो गिलास? क्या मम्मी भी पीती हैं? मेरे पैर वहीं फर्श पर जम गए। मैं सोचने लगी पता नहीं कितनी देर मम्मी पापा कि ये चुदाई चल रही थी”।

“मैं वहां से हटना चाहती थी मगर फिर मैं सोचने लगी देखूं तो सही ये अब क्या करेंगे – देखें मियां बीवी में कैसे चुदाई होती है”।

“इसके बाद मानसी ने मुझे आलोक और रागिनी की सारी की सारी चुदाई ज्यों की त्यों सुना दी जैसी मुझे रागिनी ने बताई थी – जैसे रागिनी की एक चुदाई के बाद आलोक ने रागिनी की गांड चोदी थी। उसके बाद पीछे ही खड़े हो कर रागिनी की गांड में से लंड निकाल कर रागिनी की चूत में डाला था, और आखिर में रागिनी को लिटा कर उसके मुंह के ऊपर लंड करके मुट्ठ मर कर उसके मुंह में लंड का पानी निकाला था”।

(आलोक और रागिनी की पूरी चुदाई दुबारा पढ़ने के लिए इस कहानी का भाग 4 से लेकर 8 तक पढ़ें )

“मुझे तो सारी कहानी पहले से ही पता थी मगर मैंने फिर भी मानसी को बोलने दिया”।

मानसी बोल रही थे, “आंटी तभी मैंने ये सब बातें सुनी थीं”।

“मानसी ने मुझे बताया, “पापा और मम्मी पता नहीं क्या-क्या बोल रहे थे। रंडी कि तरह चोद मुझे, कुतिया की तरह चोद। फाड़ दे मेरी फुद्दी, भोसड़ा बना दे जैसी बातें। आंटी मैं तो हैरान हो रही थी, कि ऐसी बातें भी लोग करते हैं”?

मानसी बता रही थी, “पापा-मम्मी की चुदाई देखते हुए तो मुझे भी आधा-पौना घंटा हो ही चुका था। जब पापा मम्मी के मुंह के ऊपर लंड की मुठ मारने लगे, तो मुझ लगा कि शायद चुदाई का ये आख़री सीन है”।

“वैसे भी आंटी मुझसे इससे ज्यादा सुना देखा नहीं जा रहा था। मेरी चूत में बाढ़ आ चुकी थी। मैं दबे पांव अपने कमरे में गयी, सलवार के अंदर हाथ डाल कर चूत रगड़ने लगी। मेरी चूत मैं तो आग लगी पड़ी थी। एक मिनट मे ही मेरी चूत का पानी निकल गया। इसके बाद मैं वैसे ही दबे पांव बाहर निकल गयी”।

“पास के कॉफी हाउस मैं बैठ कर कॉफी पी और पौने घंटे के बाद वापस घर आ गई”।

“इस बार मैंने आवाजें करते हुए दरवाजा खोला, ये सोच कर की मेरी मम्मी-पापा के चुदाई अगर अभी भी जारी होगी, तो कम से कम दरवाजा ही बंद कर लेंगे”।

“अंदर आ कर मैं अपने कमरे में चली गयी। मम्मी को तो कोइ फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि ऐसे समय तो वो घर ही होती थी, और शाम को हस्पताल जाती थी। पापा जो अक्सर दोपहर के वक़्त ऑफिस में होते थे। मुझे देख कर पापा मेरे पास आये और बोले “क्या बात है मानसी, तबियत ठीक है”?

“मैंने कहा, “नहीं कुछ नहीं पापा ठीक है, मगर आज आप कैसे जल्दी घर आ गए”?

“पापा बोले, मैं कुछ जरूरी कागज़ घर भूल गया था, वही लेने आया था, बस अब निकल ही रहा हूं”। ये बोल कर पापा जाने लगे।

“मैंने भी सोचा कौन से कागज़ और कैसे कागज़। बड़े दिनों से मम्मी की चूत नहीं मिली होगी चोदने को, इसलिए मम्मी की चूत और गांड चोदने का मन आ गया होगा”।

“मैंने कहा, “ठीक है पापा बाय”।

मानसी फिर बोली, “इस तरह की चुदाई मैं पहली बार देख रही थी आंटी। मैं वहां से हट जाना चाहती थी, मगर मेरा मन पूरी चुदाई देखने का होने लगा था। ये सब बातें मैंने उसी दिन सुनी थीं”।

मगर आंटी मैं बहुत देर तक यही सोचती रही, चुदाई के वक़्त आदमी और औरत ऐसी बातें करते हैं? इतनी बेशर्मी वाली? चुदक्कड़, भोंसड़ा, रंडी की तरह चोदूंगा, कुतिया कि तरह चोदूंगा? गांड फाड़ दूंगा, मेरी चूत की झाग निकाल दे”?

मैंने मानसी की बात का जवाब दिया, “मानसी यही तो मैं बता रही थी। ये बातें ही तो हैं जो ये रबड़ के लंड नहीं कर सकते। इन्हीं बातों से तो चुदाई का मजा दुगना हो जाता है”।

मानसी बोली, “फिर भी आंटी चुदक्कड़, भोसड़ा, रंडी की तरह चोदूंगा कुतिया की तरह चोदूंगा? गांड फाड़ दूंगा, मेरी चूत की झाग निकाल दूंगा, ये तो बड़ी ही गंदी-गंदी बातें हैं।

मानसी ने बात जारी रखते हुए कहा, “चलो आंटी एक मिनट के लिए मान लेते हैं चुदक्कड़, भोंसड़ा तो चूत लंड फुद्दी की तरह ही हैं, मगर रंडी, कुतिया? ये क्या बात हुई”?

“मुझे लगा मानसी का ज्ञान वर्धन करना ही चाहिए”।

मैंने मानसी से कहा, “तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो मानसी चुदक्कड़, भोंसड़ा दोनों शब्द तो चूत लंड फुद्दी की तरह ही हैं, मगर रंडी और कुतिया कुछ अलग से लगते हैं। मगर मानसी ये सिर्फ मजे के लिए बोले जाते हैं, वो भी चुदाई से पहले और चुदाई के दौरान। एक बार चुदाई पूरी हो गयी, तब भी मर्द या औरत ये सब नहीं बोलते। तब ये शब्द गालियां लगते हैं”।

“अब मैं तुम्हें बताती हूं मानसी की रंडी और कुतिया जैसे शब्द चुदाई के दौरान बोलने के क्या मतलब निकलते हैं, और क्यों इनके बोलने सुनने में मजा आता है”।

“मानसी मेरी तरफ देखने लगी”।

मैंने मानसी से पुछा, “मानसी तुम्हारी गली में कुत्ते हैं”?

“मानसी हंस कर बोली, “लो आंटी आप भी क्या बात करती हैं। कानपुर की गालियां तो आवारा कुत्तों से भरी पड़ी हैं। यहां आपकी कालोनी में ही मैंने कुत्ते नहीं देखे, हमारी गली में तो बहुत हैं”।

“मानसी की बात पर मैं भी हंस दी और बोली, “अच्छा मानसी अब ये बताओ क्या तुमने कभी किसी कुत्ते को कुतिया के ऊपर चढ़े देखा हैं? मतलब कुत्ते को कुतिया को चोदते देखा है?

मानसी भी हंस कर बोली, “कई बार आंटी। हर तीन हर महीने चार महीने के बाद कुतिया आगे-आगे होती है और पीछे कुत्तों की लाइन चल रही होती है। कुत्ते कुतिया की चुदाई तो उन दिनों में आम सीन होता है”।

“लोग तो अपने बच्चों को घरों के अंदर ही भगाते रहते हैं जिससे वो कुत्ते को कुतिया की चुदाई करते ना देखें। मगर ये ठरकी बच्चे भी कौन से कम है। फिस्स-फिस्स कर के हंसते हुए दरवाजे के पीछे खड़े हो कर छुप-छुप कर कुत्ते को कुतिया की चुदाई करते हुए देखते रहते हैं”।

“मैंने भी कई बार कुत्ते को कुतिया के ऊपर चढ़े देखा हैं। पर आंटी लड़किया तो ये देख कर मुंह में दुपट्टा ठूंस कर हंसते हुए भाग जाती हैं”।

“मैंने मानसी से पूछा, “अच्छा मानसी अब ये बताओ कुत्ते के अगले पैर उस वक़्त कहां होते हैं, जिस वक़्त वो कुतिया के ऊपर चढ़ कर उसे चोद रहा होता है”।

मानसी कुछ सोचते हुए बोली, “आंटी उस वक़्त तो कुत्ते ने अगले पैरों में कुतिया को जकड़ रखा होता हैं हुए पीछे से जोर-जोर से धक्के लगा रहा होता। और आंटी ऐसा तब तक चलता है जब कुत्ता कुतिया के ऊपर से उतर जाता है और कुत्ता कुतिया पीछे की तरफ से आपस में जुड़ जाते हैं”।

मैंने फिर कहा, “अब जरा सोच कर ये बताओ मानसी कुत्ते ने किस तरह जकड़ रखा होता हैं कुतिया को और क्यों”?

मानसी कुछ सोचते हुए बोली, “मेरे ख्याल से तो आंटी कुत्ता इतनी जोर-जोर से धक्के लगा रहा होता है, कि अगर उसने कुतिया को जकड़ ना रखा हो तो कुतिया तो आगे की तरफ ही फिसल जाए”।

फिर मानसी हंसते हुए बोली, “या शायद कुत्ते ने कुतिया को इसलिए भी जकड़ रखा होता होगा कि कुतिया कहीं चुदाई अधूरी छोड़ कर भाग ही ना जाए”।

“मेरे क्लिनिक का माहौल कुत्ते कुतिया की चुदाई से बड़ा हल्का हुआ पड़ा था। मैं जो से हंसी और बोली, “तुम्हारी दोनों ही बातें सही हैं मानसी। कुतिया कुत्ते के जोरदार धक्कों से आगे की तरफ फिसल ना जाए या फिर बीच चुदाई भाग ना जाये”।

“मर्द औरत की चुदाई में भी कुत्ते कुतिया की तरह चुदाई का मतलब होता हैं कि ‘मैं तुझे ऐसे पकड़ कर चोदूंगा, कि तू ना तो फिसल कर आगे जा पाएगी और ना ही चुदाई बीच में छोड़ कर भाग पाएगी”।

मानसी हंसते हुए बोली, “और आंटी वो जो रंडी-रंडी बोलते हैं, वो? रंडी तो वेश्या होती है, कोठे वाली, पैसे लेकर चुदाई करवाने वाली। फिर बीवी को रंडी की तरह क्यों बोलते हैं”?

“मैंने मानसी की इस बात पर कहा, “मानसी सीधी सी बात है, पति के मन में पत्नी या प्रेमिका के लिए प्यार और अपनापन होता है। मगर ये प्यार और अपनापन किसी दूसरी पराई औरत के लिए नहीं होता और एक वेश्या या रंडी, जिसको मर्द पैसे देकर चोदता है, उसके लिए तो बिल्कुल भी नहीं होता”।

“जब मर्द पत्नी बीवी या प्रेमिका की चुदाई करता है तो उसके मन में ये ध्यान रहता है की बीवी को मजा आना चाहिए, उसे चुदाई में कोइ तकलीफ नहीं होनी चाहिए। मगर एक रंडी को चोदते हुए मर्द केवल अपने मजे की सोचता है चाहे रंडी को इससे तकलीफ हो क्यों ना रही हो”।

“अब मैं सीधी भाषा में कहूं तो बीवी को चोदते हुए हो सकता है मर्द जोर-जोर से लंड चूत या गांड में अंदर-बाहर करते हुए रगड़े वाली चुदाई ना करता हो जैसी वो रगड़ाई वाली चुदाई वो मर्द जब पैसे खर्च करके एक रंडी की करता होगा। बस यही रगड़ाई वाली चुदाई के लिए बीवी मर्द को बोलती है रंडी की तरह चोद। इसका ये मतलब हरगिज नहीं होता की बीवी रंडी ही बन जाती है”।

“मेरी बात सुन कर मानसी बोली, “आंटी आप तो बहुत कुछ जानती हैं”।

“जब मैंने मानसी को चुदाई के दौरान रंडी और कुतिया जैसे शब्दों के इस्तेमाल का असल कारण बताया तो मानसी बोली, “आंटी आप तो बहुत कुछ जानती है”।

“मानसी की बात सुन कर मैंने भी मानसी की चूचियों को दबाते हुए कहा, “बेटा मानसी, जब तू मेरी उम्र में आएगी, तुझे भी बहुत कुछ पता होगा। चुदाई के दौरान भोसड़ा, चुदक्कड़, फुद्दी, रंडी, कुतिया क्यों बोलते हैं, वक़्त आने पर तू भी तब समझ जाएगी। तुझे भी चुदाई करवाते हुए ये सब बोलने सुनने में मजा आने लग जाएगा”।

“जब मैंने मानसी को ये सब बता रही थी तो मानसी हैरानी से मेरी तरफ देख रही थी”।

“मेरी बातें सुन-सुन कर मानसी ने जरूर सोच रही होगी ये डाक्टर है या क्या है। क्या-क्या करती है, कैसी कैसी बातें करती है। पक्की चुदक्कड़ है ये डाक्टर”।

“वैसे तो मानसी अगर ऐसा सोच भी रही थी तो गलत क्या सोच रही थी”?

“मैंने हैरानी से देखती हुई देखती हुई मानसी का हाथ पकड़ कर मानसी को अपनी तरफ खींचा और बोली, “हैरान हो रही क्या कि मैं कैसी-कैसी बातें करती हूं”?

“इससे पहले कि मानसी कुछ बोलती मैंने मानसी को कहा, “चल छोड़ ये सब, तू पहले इधर आ मेरे पास”।

“मानसी जैसे ही मेरे पास आयी मैंने मानसी को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ अपने होठों में ले लिए। मानसी ने भी मुझे कस कर पकड़ लिया”।

“मुझे तो बीस साल की खूबसूरत मानसी को चूमने का मजा आता ही था, मानसी को भी मेरे चुम्मे का मजा आने लगा था”।

“कुछ देर बाद मानसी के होंठ चूसने के बाद मैंने मानसी को छोड़ दिया। मानसी वापस अपनी कुर्सी पर जा कर बैठ गयी”।

“मैंने मानसी से पूछा, “मानसी तुम कोइ बॉयफ्रेंड बनाती क्यों नहीं? तुम इतनी सुन्दर हो, अच्छी हो, तुम्हारी क्लास में भी तो कई लड़के होने जो तुम पर मरते होंगे। या तुम्हारा कोई दूर की रिश्तेदारी में तुम्हारी उम्र का लड़का हो? अपना एक बॉयफ्रेंड बनाओ, उसके साथ घूमों फिरो मस्ती करो, और मन करे तो “वो” भी कर लो”।

“फिर मैंने ही साफ़ कर दिया, “वो” मतलब सेक्स, चुदाई – उससे मस्त चुदाई करवाओ”।

अपनी बात जारी रखते हुए मैंने कहा, “अब तो तुम्हारी मम्मी की दिन की शिफ्ट होगी। पापा भी ऑफिस में होंगे दिन में। उसे अपने घर बुलाओ, या उसके घर जाओ और दोनों खूब चुम्मा-चाटी करो, खूब मस्ती करो”।

मानसी बोली, “आंटी घर पर कैसे? हमारी कालोनी में तो घर एक-दूसरे का साथ मिले जुड़े हुए हैं। सारा दिन औरतें बाहर ही खड़ी-खड़ी गप्पे हांकती रहती हैं। दो मिनट में बात का बतंगड़ बना देंगी”।

मैंने कहा, “कोइ बात नहीं मानसी अगर वहां मौक़ा नहीं मिल सकता तो मुझे फोन करो और अपने बॉयफ्रेंड को यहां लेकर आ जाओ, और इस कमरे में जितनी देर मर्जी, जैसी मर्जी मस्ती करो”I

“फिर मैंने हंसते हुए मानसी से कहा, “और मानसी यहां कोइ सुनने वाला भी नहीं। तुम्हें और भी ज्यादा मजा आएगा। अगर कहीं तुम्हारा चुदाई का प्रोग्राम बन जाये तो चोदते हुए तुम्हारा बॉयफ्रेंड बोलेगा, “आह्ह, मेरी जान चूस जोर से आअह, और जोर निकाल साली जो भी है इसके अंदर से। पीले मेरे लंड का पानी आअह तेरी चूत में मेरा लौड़ा आह आज चोदूंगा तुझे रंडी की तरह तेरी गांड में मेरा लौड़ा तेरी गांड के चीथड़े उड़ा दूंगा आज। भोसड़ी वाली गांडू ये लेले आआआह आआह”।

और उधर तुम बोलोगी, “आआह बना ही दे आज भोसड़ा इस चूत का गांड तो फाड़ ही दी आह रगड़ गांडू और रगड़ आआह घुस जा मेरी चूत में आह रंडी की तरह चोद आज। मुझे फाड़ डाल, मेरी फुद्दी कुतिया की तरह रगड़-रगड़ कर चोद। मुझे फाड़ मेरी फाड़ दे आआह आआह रगड़ो मेरी चूत झाग निकाल दो इसकी इस फुद्दी की”।

“इतना बोल कर मैंने मानसी की टांग पर हाथ मारते हुए पूछा, “क्यों मानसी ठीक कह रही हूं ना”?

मानसी शर्मा गयी और बोली, “बस आंटी, मुझे तो शर्म ही आने लग गयी है”।

मैंने हंस कर कहा, ” क्यों मानसी, शर्मा क्यों रही हो? मगर मुझे बताओ क्या मैंने कोइ गलत कहा है? तुमने खुद ही तो कहा था प्रभात और स्नेहा की चुदाई के दौरान की सिसकारियों ने तुम्हारी चूत गरम कर दी थी”।

“मेरी इस बात पर मानसी मुस्कुराने लगी”।

“मैंने फिर संजीदा होते हुए कहा, “मानसी मैं तुम्हे अपने पापा अलोक से चुदाई ना करवाने के लिए तो नहीं कहूंगी, मगर मानसी अपने पापा के साथ चुदाई मस्ती वाली चुदाई नहीं। इसमें बस तभी मजा आता है जब लंड पानी छोड़ता है, जब चूत पानी छोड़ती है। बाकी चुदाई के दौरान तो तुम यहीं सोचती होगी कि मेरे पापा मुझे चोद रहे हैं और अलोक सोचता होगा कि वो अपनी बेटी को चोद रहा है”।

“अब बताओ मानसी मैंने कहीं भी कुछ भी गलत कहा है”?

“मानसी ने पहली बार कहा, “नहीं आंटी आपकी सारी बातें सही हैं। मेरी और पापा की चुदाई के वक़्त बिल्कुल यही होता है। चुदाई के दौरान में कभी भी भूल नहीं पाती कि पापा का लंड मेरी चूत में है और मेरे पापा मेरी चुदाई कर रहे हैं”।

“फिर कुछ रुक कर बोली, “आंटी, ये आपके जैसे सेक्स टॉयज कहां मिलेंगे, ये कानपुर में मिलते हैं”?

“मैंने कहा, “हां मिलते हैं, मगर जान पहचान वाले को ही मिलते हैं। तुम्हें चाहिये तो मैं मंगवा दूंगी”।

“मानसी कुछ सोचते हुए बोली, “आंटी मजा तो बड़ा या इसको चूत में लेने का, मगर इतना मोटा लंड चूत में डालने से कहीं चूत खुली तो नहीं हो जायेगी”?

“मुझे मानसी की बात पर हंसी आ गयी। मैंने मानसी के गाल पर एक चिकोटी काटी और कहा, “नहीं मेरी जान, चूत का कुछ नहीं होगा। मगर सभी चूतें एक जैसी नहीं होती। अगर तुमने आज इसे अपनी चूत में ले लिया है और तुम्हें कोइ तकलीफ नहीं हुई तो ये तुम्हारी चूत के लिए बिल्कुल सही है”।

“फिर मैंने मानसी से कहा, “मगर मानसी तुम्हारी छोटी सी नन्हीं मुन्नी चूत को अभी इतने मोटे लंड के जरूरत नहीं है। तुम्हें इससे दो नंबर कम वाला लंड चाहिए, इससे पतला, मगर इतना ही लम्बा”।

“फिर मैंने मानसी से कहा, “अच्छा मानसी ये बताओ, तीनो चाहिये? लंड, दाना चूसने वाला और गांड और चूत में लेने वाला”?

मानसी बोली, “आंटी जब मंगवाने ही हैं तो तीनों ही मंगवा दीजिये, तीनों ही अलग-अलग हैं। मुझे तो तीनों में ही बड़ा मजा आया है”।

“मैंने कहा, “ठीक हैं मानसी तीनों ही मंगवा देती हूं”।

“फिर मैंने कुछ रुक कर कहा, “और एक बात का और ध्यान रखना। रोज-रोज इन सेक्स टॉयज का इस्तेमाल नहीं करना है। वो सेहत के लिए ठीक नहीं होता। अपना एक बॉयफ्रेंड बनाओ, और मस्त चुदाई करवाओ”।

“अब बताओ है कोई लड़का जिसे तुम अपना बॉयफ्रेंड बना सकती हो”?

“मानसी कुछ सोचने लगी और फिर बोली, “हां आंटी आपकी बातें सुनने के बाद मुझे एक लड़के का ध्यान आ रहा है। मेरी ही क्लास में CA कर रहा है। उसके पापा मेरे पापा को जानते भी हैं। रजत नाम है उसका। मुझे कई बार इशारों-इशारों में कह चुका है कि वो मुझे चाहता है”।

“मैंने पूछा, “और देखने में बात करने में कैसा है”?

“मानसी बोली, “देखने अच्छा है आंटी। बातें भी बड़े मजेदार करता है”।

“मैंने कहा, “तो बस, उसकी बातों का जवाब देना शुरू कर दो और प्रभात को भूल जाओ। अपने पापा से भी हो सके तो चुदाई कम कर दो। अगर तुम्हें मेरी बातें ठीक लग रहीं है तो मुझे बता दो मैं उसी हिसाब से तुम्हारी मम्मी और पापा से बात करूंगी”।

“मानसी कुछ सोचने लगी”।

“मैंने ही फिर कहा, “मगर मानसी तुम्हें अभी कुछ नहीं बताना। आराम से घर जा कर सोचो और दो-तीन दिन के बाद सोच कर मुझे बता देना। अब जब भी दो या तीन दिन के बाद तुम आओगी तो हो सकता है तब तक तुम्हारे तीनों खिलौने भी आ चुके हों। वो भी ले जाना। ठीक”?

“मानसी बोली, “ठीक आंटी”।

“मैंने कहा, “अब जाओ बाथरूम जा कर अपनी चूत की अच्छे से धुलाई करके तौलिये से साफ़ करो, बहुत पानी छोड़ चुकी होगी अब तक। अगर साफ़ ना किया तो कुछ देर में मस्त खुशबू छोड़ने लग जाएगी चूत। अब जाओ और वापस आ कर मुझे एक बढ़िया सा चुम्मा दो – मेरी आज की फीस”।

“फिर मैं हंसी और बोली, “अब तक के तुम्हारे चुम्मे, चूत चुदाई की बातें सुनते सुनते मस्ती आने के कारण लिए थे। अब का चुम्मा मेरी आज की फीस है”।

“मानसी हंसती हुई बाथरूम के तरफ चली गयी। पंद्रह मिनट के बाद अच्छे फ्रेश हो कर बाल ठीक करके आई। बड़ी ही प्यारी लग रहे थी”।

“आ कर सीधी मेरे पास आयी, और हल्के से होठ खोल कर मेरे सामने खड़ी हो गयी। मैंने मानसी को बाहों में लिया और उसके होठ अपने होठों में लेकर चूसने लगी। एक हाथ मेरा मानसी के सर के पीछे था और दूसरे हाथ से मैं मानसी के चूतड़ सहला रही थी। मानसी ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था”।

“दस मिनट होंठ चूसने के बाद मैंने मानसी को छोड़ और कहा, “मानसी कैसे जाओगी? शंकर को बोल देती हूं तुम्हें छोड़ देगा”।

“मानसी बोली, ” नही आंटी कोइ बात नहीं, सामने से ही ऑटो मिल जाएगा”।

“मैंने कहा, “अरे कहां ऑटो में जाओगी, रुको”।

“मैंने बैल लगाई और चौकीदार आ गया। चौकीदार को मैंने उसे शंकर को भेजने के लिए कहा। शंकर आया तो मैंने कहा, “शंकर मानसी को छोड़ आना ज़रा”।

शंकर बोला, “जी मैडम”।

“मानसी शंकर के साथ चली गई और मेरे मुंह में चुम्मे का मीठा नमकीन स्वाद छोड़ गयी”।

“उधर मैंने सोचना शुरू कर दिया, कि अब आलोक आएगा तो कैसे और क्या बात करनी है और साथ ही किस तरह की चुदाई करवानी है।

“सोचते-सोचते मैंने संदीप सोलंकी को फोन लगाया और मानसी के लिए तीनों सेक्स टॉयज का आर्डर कर दिया और साथ ही पूछा, “संदीप कब तक आ जायेंगे ये तीनो”?

“सोलंकी बोला, “लो मैडम, कल ही लो। मेरे पास स्टॉक रखा है, मैं कल ही तीनों ले कर आ जाता हूं”।

“मैंने मन ही मन सोचा, ‘साले भोसड़ी वाले संदीप, मैं सब जानती हूं। तू अब आएगा और मेरी चूत को ही घूरता रहेगा”।

“मैंने सोचा अगर मेरा उसूल कानपुर में हर किसी से चुदाई करवाने का ना होता तो अब तक तो मेरी और संदीप की चुदाई हो जानी थी”।

“मैंने बस इतना ही कहा, “वैरी गुड संदीप, मैं कल ग्यारह बजे इंतजार करूंगी”।

“अगले दिन संदीप आया और तीनों खिलौनों का पैकेट मेरे हाथ में देकर मेरी चूत को घूरने लगा। खिलौनों की पेमेंट लेने के बाद भी संदीप बीस मिनट तक मेरी चूत को घूरते हुए इधर-उधर की बकवास बातें करता रहा”।

“वैसे एक बात तो है, मुझे इस तरह संदीप का मेरी चूत घूरना अच्छा ही लगता है। मैं सोच रही थी इसको थोड़ा और जांचते परखते हैं फिर देखेंगे कि इससे चुदाई करवानी है या नहीं। देखने में तो संदीप भी हट्टा-कट्टा था, और दिखने में पूरा देहातियों जैसा लगता था”।

“ऐसे देहाती दिखने जैसे मर्द चुदाई रगड़-रगड़ कर करते हैं जैसे रंडी चोद रहे हों – जैसे कुत्ता कुतिया को चोद रहा हो”।

“अगले ही दिन रागिनी का फोन आया तो रागिनी बोली, “नमस्ते मालिनी जी, कैसी हैं आप”?

“मैंने भी जवाब दिया, “मैं तो ठीक हूं, तुम बताओ कैसी हो, मानसी कैसी है”?

रागिनी बोली, “मालिनी जी मानसी तो बड़ी बदली-बदली सी लग रही है। पहले तो मुझसे इस तरह बात नहीं करती थी। अब तो बड़ा हस-हस कर बात कर रही है। कुछ खास बात हुई है क्या मानसी से आपकी”?

“मैं भी कुछ हैरान सी हुई। क्या मानसी वाकई बदल गया थी – और वो भी इतनी जल्दी? मगर मैंने मानसी को दो-तीन दिन सोचने का टाइम दिया था। उसके बाद मानसी ने मेरे पास आना था”।

“मैंने रागिनी को कहा, “रागिनी मैंने तो अपनी तरफ से सब आम बातें ही की थी, जैसे तुम्हारे साथ की थी, जैसे आलोक के साथ की थी। अब मेरी कौन सी बात ख़ास बन जाये ये तो बाद में ही पता चलता है”।

“लेकिन रागिनी जब मेरी मानसी से बात हुई थी तब तो मानसी ने मुझे कहा था कि वो मुझे दो-तीन दिन के बाद फोन करेगी, और आगे मिलने का प्रोग्राम बताएगी। मतलब या तो कल फोन आएगा, या उससे अगले दिन”।

“उधर रागिनी मेरी बात चुप-चाप सुन रही थी”।

“मैंने ही बात जारी रखते हुए कहा, “रागिनी तुम एक काम करना। आज शनिवार है। परसों सुबह, सोमवार को मैं दो दिन के लिए बैंगलोर जा रही हूं, एक सेमिनार है। बुधवार को वापस आऊंगी। मानसी को बोलना अगर उसका मुझसे मिलने का प्रोग्राम बने तो वीरवार के बाद का प्रोग्राम बनाये”।

“एक बार मानसी से मिलने दुबारा बात हो जाये, तो उसके बाद मैं तुमसे मिलूंगी और आखिर में अलोक से और फिर अगर जरूरत हुई तो एक आख़री बार और मानसी से”।

“रागिनी बोली, “ठीक है मालिनी जी, नमस्ते”।

“सोमवार को मैं बैंगलोर चली गयी और बुधवार को शाम कानपुर वापस पहुंच गयी। मानसी का सामान, तीनों सेक्स टॉयज, तो संदीप दे ही चुका था”।

“बुधवार शाम सात बजे वाइन – शराब का गिलास लेकर डाइनिंग टेबल पर बैठी थी ही कि मानसी का फोन आ गया। जैसे ही मैंने फोन पर हैलो कहा उधर से मानसी चहकती हुई बोली, “नमस्ते आंटी, मैं – मानसी, आते कैसा रहा आपका बैंगलोर का ट्रिप”।

“मैंने कहा, “हां मानसी, पहचान लिया मानसी। कैसी हो बेटा? बैंगलोर का ट्रिप भी बढ़िया था”।

“फिर मैंने मानसी से कहा, “तुम सुनाओ कैसी हो। शनिवार को तुम्हारी मम्मी का फोन आया था, कह रही थी कि मानसी बड़ी बदली-बदली लग रही है। ऐसा ही है क्या मानसी”?

“मानसी हंसते हुए बोली, “ये तो मिल कर ही बताऊंगी आंटी”। और फिर धीमी आवाज में बोली, “और आंटी, आपको चुम्मा भी तो देना है”।

“मैं हंसी और बोली, “अच्छा? ऐसा है क्या? ठीक है तो, कल ही जाओ, बढ़िया चुम्मा लूंगी तुम्हारा, बिल्कुल नए तरीके का। और हां तुम्हारा सामान भी आ गया है। वो भी ले लेना”।

“मानसी ने बस इतना ही कहा, “वाओ, इतनी जल्दी आ भी गए”? ठीक है आती फिर तो कल ही आती हूं। आपके सामने एक बार ट्राई भी कर लूंगी”।

और फिर खनखनाती हंसी के साथ बोली, “बाए आंटी”।

“मानसी सच ही बड़ी खुश लग रही थी। मेरे मुंह में मानसी के चुम्मे का स्वाद आने लगा – हल्का गरम, हल्का मीठा, हल्का नमकीन”।

“मैंने सोच लिया अगर मौक़ा लगा तो इस बार चूत भी चूसूंगी मानसी की। बीस साल के जवान चूत पानी भी खूब छोड़ती है और चूत के पानी का स्वाद ही अलग होता है – कुछ-कुछ मीठा, कुछ-कुछ नमकीन”।

“ना जाने क्यों मुझे मानसी अच्छी लगने लगी थी”।

वीरवार सुबह-सुबह ही मानसी का फोन आ गया। नमस्ते करने के चहकती हुई बोली, “कितने बजे आऊं आंटी”?

“मैंने भी कहा, “जब मर्जी आजा मानसी, मैं आज बिल्कुल फ्री हूं”।

मानसी बोली, “ठीक है आंटी ग्यारह बजे तक आती हूं”।

“ग्यारह बजे के कुछ ही देर बाद मानसी आ गयी”।

“जींस और टी-शर्ट में बहुत ही स्मार्ट लग रही थी। छोटी-छोटी चूचियां टी-शर्ट से बाहर निकलने को हो रही थी I छोटे-छोटे चूतड़ पेण्ट में से बाहर निकलने को हो रहे थे। कुल मिला कर मानसी ऐसी लग रही थी कि मेरा मन उसी वक़्त उसे लिटा कर उसकी चूत चूसने का होने लगा”।

“मैंने कहा, “क्या बात है मानसी आज तो बिल्कुल बदली हुई लग रही हो। पापा ने खूब दबा-दबा कर रगड़ कर चुदाई की है, या फिर पापा की चुदाई छोड़ कर कोइ और चोदने वाला ढूंढ लिया है”?

“मानसी हंसते हुए बोली, “नहीं आंटी दोनों ही बातें नहीं हैं। फिर मानसी ने जींस की पीछे वाली जेब से अपना मोबाइल निकाला और मुझे बोली, “आंटी आप को कुछ दिखाना है”।

“ये कह कर मानसी ने एक फोटो दिखाई, जिसमें मानसी और एक बड़ा ही बढ़िया दिखने वाला लड़का था, दोनों गाल के साथ गाल जोड़ कर मुस्कुरा रहे थे।

मैंने पूछा, “रजत”?

“जब मानसी ने पेंट की जेब से मोबाइल निकाल कर उसमें एक लड़के की फोटो दिखाई, तो मैं समझ गयी कि ये लड़का रजत ही होगा। लड़का देखने में बढ़िया लग रहा था। दोनों गाल के साथ गाल चिपकाये हंस रहे थे”।

“मैंने मानसी से पूछा, “रजत”?

मानसी मुस्कुराते हुए बोली, “हां आंटी रजत”।

मैंने बस इतना ही कहा, “मानसी रजत देखने में तो अच्छा लग रहा है”।

मानसी ही फिर बोली, “आंटी मैंने तो आप को बताया ही था के रजत मुझ पर लट्टू है, मैं ही उसे घास नहीं डालती”।

मानसी बोल रही थी, “उस दिन जब रजत ने मुझसे कहा, “मानसी मुझसे दूर क्यों भागती हो तो मुझे लगा यही मौक़ा है, जैसे कि आपने मुझे समझाया था, रजत के पास आने का”।

मैंने कह दिया, “मैं कहां दूर भागती हूं रजत? तुमने ढंग से कभी मुझे बुलाया ही नहीं”?

“रजत को तो जैसे मेरी इस बात का ही इंतजार था। मेरे इतना कहने से ही वो तो इतना खुश हुआ, कि एक बार जो बोलना शुरू हुआ तो चुप ही नहीं हुआ”।

“बातों-बातों में रजत बोला, “तो चलो मानसी कहीं कॉफी पीने चलें”।

मैंने भी कह दिया, “हां-हां चलो”।

“और आंटी हम कानपुर के मशहूर कॉफी हाउस शौनक में चले गए। शौनक में कालेज के लड़के-लड़कियां खूब आते हैं। हम वहां जा कर एक हल्की रोशनी वाले कोने में बैठ गए। रजत ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, मानसी में तुमसे प्यार करता हूं”।

“आंटी आपसे एक ही दिन बात करके इतना तो मैं समझ ही गयी थी कि दुनिया को किस नजरिये से देखा जाना चाहिए। मैंने रजत के हाथों से अपना हाथ तो नहीं छुड़ाया मगर मैंने हंस कर कहा, “रजत क्या बात है? पहली ही मुलाकात में प्यार? कुछ और मुलाकातें होने दो। मुझे भी सोचने दो, तुम भी सोचो। ये प्यार-व्यार तो होता रहेगा”।

मानसी हंस कर बोली, “आंटी मेरा इतना कहते ही रजत तो हड़बड़ा ही गया और बोला, “नहीं मानसी मेरा वो मतलब नहीं, मेरा मतलब तो था कि मैं तुम्हें पसंद करता हूं”।

मैंने भी कहा, “रजत पसंद तो मैं भी करती हूं तुम्हें, मगर ये प्यार? वो अभी दूर की बात है”।

“मेरी ये बात सुन कर रजत कुछ पल के लिए चुप हो गया। फिर रजत ने मेरा हाथ अपने हाथ सी धीरे-धीरे दबाने लगा और हम इधर-उधर की बातें करने लगे। मैंने भी अपना हाथ रजत के हाथ के ऊपर रख दिया। तभी आंटी रजत थोड़ा आगे आया और अपना चेहरा मेरे चेहरे के पास ले आया”।

“मैं समझ गयी रजत मुझे किस्स करना चाहता है। आंटी उस वक़्त मुझे आपका चुम्मा याद आ गया। मुझे लगा रजत भी आपकी तरह मेरे होंठ का चुम्मा लेगा, और मेरे होंठ चूसेगा। मगर रजत ने खाली मेरे गाल पर किस्स किया और पीछे हट गया। रजत की इस झिझक से मेरी तो हंसी ही छूट गयी”।

मैंने कहा, “वाह मानसी, तो रजत के साथ बात आगे बढ़ रही है। और पापा के साथ चुदाई”?

“मानसी मेरे पास आ कर बोली, “पापा के साथ चुदाई बंद। अब मम्मी ध्यान रखेगी पापा के लंड का। अब मैं पापा के पास चुदाई करवाने नहीं जाऊंगी। हां अगर पापा का मन ही मुझे चोदने का आ गया तो मना भी नहीं करूंगी”।

“मानसी फिर रजत की बात करने लगी और बोली, “आंटी ये तो मैंने आपको बताया ही था कि रजत मुझमें दिलचस्पी रखता है – मैं ही उससे ओर दूर रहती थी”।

“मैंने हां में सर हिलाया”।

“आंटी”, मानसी मेरे हाथ पर हाथ रख कर बोली, ” मुझे ये मानने में जरा भी झिझक नहीं कि उस दिन जब आप मुझ से पापा की और मेरी चुदाई की बात कर रही थी तब आपने कहा था कि मानसी इस तरह के रिश्ते – जिनमें मां-बेटे में, बाप-बेटी में और भाई-बहन की चुदाई होती हो, ऐसे रिश्तों का कोइ भविष्य नहीं होता। ये कभी ना कभी खत्म होने ही होते हैं। और अगर वक़्त पर ना खत्म किये जाएं तो बहुत नुक्सान वाले भी हो सकते हैं”।

“मुझे याद आ गया जब मैंने मानसी से ये सब कहा था”।

मानसी फिर बोली, “इसके साथ ही मुझे पापा की बताई वो 44 साल की उम्र वाली बात भी याद आ गयी, जब आपने कहा था कि वक़्त के साथ-साथ उनके लंड की सख्ती कम होती जाएगी, मगर मेरी चूत को अभी भी कम से कम पंद्रह साल और सख्त लंड की चुदाई की जरूरत होगी”।

“तभी मुझे लगा था कि जब मेरी और पापा की चुदाई अगर हमेशा नहीं चलनी, और किसी ना किसी दिन खत्म होनी ही है। उसी वक़्त मैंने सोचा लिया अगर पापा-बेटी में चुदाई जब खत्म होनी ही है, तो फिर अभी ही क्यों नहीं”।

“फिर मानसी ने वही बात दोहराई और बोली, “आंटी अब मैं पापा के साथ चुदाई के रिश्ते अपनी तरफ से बंद करना चाहती हूं, मगर हो सकता है पापा को ही अब मुझे चोदना अच्छा लगता हो। अगर ऐसा हुआ और अगर पापा ने मुझे चुदाई के लिए बोला, तो मैं मना नहीं करूंगी”।

“ये बोल कर मानसी कुछ रुकी। मुझे लगा मानसी कुछ और भी कहना चाहती है। मैंने मानसी के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, “कुछ और भी बात है मानसी”?

“मानसी ने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, “आंटी एक बात ऐसी भी हुई जिससे लगा पापा की और मेरी चुदाई असली चुदाई नहीं, बस मेरा जूनून है पापा के नीचे लेट कर उनका लंड अपनी चूत में लेने का। जब लंड एक बार चूत में चला गया तो फिर मर्द चूत में लंड आगे-पीछे करके धक्के तो लगाएगा ही। और जब धक्के लगाएगा तो लंड पानी भी छोड़ेगा। मगर ये सही चुदाई नहीं है”।

“मानसी की इस बात से तो मुझे भी कुछ हैरानी सी हुई। मानसी बात सही कह रही थी, मगर ऐसा क्या हुआ जो मानसी अब ये सोच रही थी”?

“मैंने मानसी से पूछा, “मानसी बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो, मगर ये बताओ ये ख्याल तुम्हारे मन में कब और कैसे आया?

“मानसी मेरा हाथ पकड़ती हुई बोली, “आंटी एक बोलूं। मुझे आप बहुत अच्छी लगने लगी हैं। आपसे कुछ भी छुपाने का मन नहीं करता। ये ख्याल मेरे मन में तब से आया जब से मैंने मम्मी और पापा की उस दिन की शराब पीने के बाद वाली जबरदस्त चुदाई देख ली”।

फिर कुछ रुक कर मानसी बोली, “जो मुझे नहीं देखनी चाहिए थी”।

“जिस तरह पापा और मामी चुदाई कर रहे थे, जिस तरह की चूत, चुदाई, फुद्दी, रंडी, कुतिया वाली बातें दोनों बोल रहे थे, जिस तरह मम्मी नीचे अपने चूतड़ झटका रही थी, जिस तरह पापा धक्के लगाते हुए मम्मी के होंठ चूस रहे था, मुझे लगा यही असली चुदाई है”।

“मम्मी पापा की वो वाली चुदाई देख कर मुझे समझ आया मेरी और पापा के चुदाई चुदाई नहीं सिर्फ मेरा पागलपन है। मैं पापा के सामने चूत खोल कर लेट जाती हूं, और पापा का लंड मेरी खुली चूत देख कर खड़ा हो जाता है, और फिर चुदाई हो जाती है”।

“आंटी मेरी और पापा की चुदाई तो बस ऐसे होती है जिसमें बस चूत और लंड का पानी छूटना होता है। ना कोइ चूत चुदाई वाली बातें होती हैं, ना पापा मेरे होंठ चूसते हैं। मेरे तो चूतड़ भी तभी घूमते हैं जब मुझे मजा आता है और मेरी चूत पानी छोड़ती है”।

“मानसी की बात सुन कर मैंने सोचा यही बहुत है। मुझे यकीन था अगर मानसी ने एक बार रजत का लंड ले लिया, तो मानसी अलोक का लंड अपने आप ही भूलने लगेगी”।

“आखिर को लड़के-लड़की वाली असली चुदाई तो मानसी और रजत के बीच ही होगी, जिस चुदाई में वो बातें भी तो होंगी जो मानसी और

आलोक – बाप-बेटी – की चुदाई में नहीं होती”।

“जब रजत बोलेगा, “ले मानसी ले मेरी जान, ले तेरी गांड में मेरा लौड़ा, ये लेले निकला मेरा, ले मेरी जान मानसी, ले आआआह आआह, क्या चूत है मानसी तेरी, मजा ही आ गया, जकड़ लिया तेरी फुद्दी ने मेरा लंड मानसी”।

“और उधर चुदाई करवाते हुए मानसी बोलेगी, “आआह रगड़ मेरी चूत रजत, आअह आह रगड़ रजत, और रगड़, आआह घुस जा मेरी फुद्दी में रजत, आह दबा कर चोद आज मुझे रजत, रगड़ो मेरी चूत झाग निकाल दो इसकी इस फुद्दी की रजत”।

“मैं मन ही मन सोच रही थी कि एक ही बार बात करने से मानसी कितना बदल गयी थी”।

“मैंने मानसी से कहा, “मानसी अब इस शौनक कॉफी वाली मुलाक़ात के आगे क्या कुछ हुआ क्या, बात कुछ आगे बढ़ी क्या”?

“मानसी मेरे पास आती हुई बोली, “आंटी इसके आगे रजत के साथ तो जो हुआ सो हुआ, पहले आप भी तो मेरे साथ कुछ करिये”।

“ये बोल कर मानसी मेरे सामने आ कर खड़ी हो गयी और अपने होंठ हल्के से खोल दिए। मेरे बराबर की लम्बाई वाली मानसी का चेहरा बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने था”।

“मानसी मुझे चुम्मे के लिए कह रही थी। मानसी के इस तरह बोलने से मेरी चूत में झुरझुरी हुई और मैं भी एक-दम मस्ती में आ गयी”।

“मैंने भी मानसी को कमर से पकड़ा और उसे अपने साथ चिपका लिया। मानसी के मम्मे और मेरे मम्मे आपस में टकरा रहे थे, और हमारी फुद्दीयां आपस में सटी हुई थी। मैंने मानसी कि होंठ अपने होठों में ले लिए और उन्हें चूसने लगी”।

“मानसी कि होंठ चूसते-चूसते मैंने मानसी के गालों को जोर से दबाया, और मानसी का मुंह थोड़ा सा खुल गया। मैंने अपने जुबान मानसी के मुंह में डाल दी। मानसी मेरी जुबान चूसने लगी।

“दस मिनट मैंने मानसी के होठ चूसे। मानसी मेरी पीठ पर हाथ फेर रही थी, और मैं मानसी के चूतड़ दबाती जा रही थी। मेरा मन ही नहीं कर रहा था मानसी को छोड़ने का”।

“कुछ देर बाद मैंने मानसी को छोड़ा और बोली, “बैठो मानसी। अगर मैं लड़का होती तो दबा कर चोदती तुम्हें”।

“मेरे चुम्में से मस्त हुई पड़ी मानसी बोली, “तो क्या हुआ आंटी। आप अब भी मुझे चोद लो, जो चाहो कर लो मेरी चूत के साथ। ये रबड़ का लंड तो आ ही गया है। इसको मैं अपनी चूत में डाल लेती हूं, उसके बाद आप मेरे ऊपर लेट कर मेरी चुदाई कर लो, जैसे प्रभात ने की थी, जैसे पापा करते हैं, और जैसे अब रजत करेगा”।

“मानसी हंसते हुए बोली, “लड़कों की तरह चूत पर धक्के ही तो लगाने हैं, और लड़कों वाली बातें बोलनी हैं। बाकी चूत का पानी छुड़ाने का काम तो ये रबड़ का लंड और इसका वाईब्रेटर करेगा”। ये कह कर मानसी कुर्सी पर बैठ गयी।

“मैं भी हंसी और कुछ सोचने लगी, मगर मैंने मानसी की इस बात का कोइ जवाब नहीं दिया, और प्रभा को बुला कर चाय और कुछ स्नेक्स लाने के लिए कह दिया”।

मैंने मानसी से पूछ, “मानसी अब बताओ उस कॉफी वाली मुलाक़ात के बाद रजत तक कहां तक पहुंची तुम”?

“असल में मुझे भी नई-नई जवान हुई बीस साल की मानसी की प्रेम कहानी सुनने में मजा आ रहा था”।

“मम्मी पापा की चुदाई का हाल सुनाने की बाद फिर मानसी ने रजत की बात शुरू कर दी”।

“फिर आंटी हमारा एक दिन पिक्चर का प्रोग्राम बन गया। हम PVR में चले गए। आज कल सिनेमा हाल में भीड़ तो होती नहीं। हम अपनी मर्जी की सीटों पर बैठ गए। हमारे आस-पास कोइ भी नहीं बैठा था। आंटी, एक बात बताऊं, खूब चुम्मा-चाटी हुई हमारी। रजत का तो लंड ही खड़ा हो गया। उसने लंड पेंट में से निकाल कर मेरे हाथ में पकड़ा दिया”।

“आंटी क्या मस्त लंड है रजत का। बिल्कुल ऐसा ही जैसा वो रबड़ वाला आपके पास है। रजत का खड़ा लंड एक-दम गर्म-गर्म सा था। रजत का लंड हाथ में लेते ही मेरी तो चूत ने तो पानी ही छोड़ दिया”।

“आंटी रजत का खड़ा लंड हाथ में पड़ते ही मुझे पापा और मम्मी की वही चुदाई याद आ गयी, और मुझे लगा पापा और मेरे बीच हो रही चुदाई असली चुदाई नहीं है। उस वक़्त ऐसी ही मेरे मन में ख्याल सा आया कि अगर कभी मेरे और रजत की चुदाई हुई तो मैं भी ऐसी ही चुदाई करवाऊंगी जैसी मम्मी उस दिन पापा से करवा रही थी”।

“मगर मैंने रजत का लंड छोड़ते हुए कहा, “रजत ये क्या पागलपन है। अंदर करो इसको”।

“रजत ने लंड तो अंदर कर लिया, मगर आंटी मेरा मन बड़ा ही चंचल हो गया। मेरा मन किया किसी तरह ले ही लूं इसे अपनी चूत में। फिर मैंने सोचा, आप से बात कर के ही आगे बढ़ूंगी”।

“मानसी की बात सुन के मुझे बड़ा अच्छा लगा, मैंने कहा, “मानसी, तू तो बड़ी तेज निकली, बड़ी जल्दी पटा लिया छोरा”।

मानसी बोली, “आंटी रजत तो महीनों से मेरा दीवाना था, मैं ही पापा की चुदाई में मस्त थी। आंटी लड़का तो एक और भी है कार्तिक, वो भी मेरे पीछे-पीछे घूमता है, मगर मुझे रजत ही अच्छा लगता है”।

मैंने कहा, “मानसी बात चीत सभी से रखो, मगर सीरीयस दोस्ती एक से ही होनी चाहिए”।

“फिर मैंने मानसी से पूछा, “मानसी तुम कह रही थी कि रजत के पापा तुम्हारे पापा को जानते हैं। अगर ऐसा है तो ये तो और भी अच्छी बात है”।

“मानसी जहां तक आगे बढ़ने का सवाल है, आराम से, धीरे-धीरे आगे बढ़ो। चुम्मा-चाटी, लंड पकड़ना एक बात है, चुदाई होना दूसरी बात है। और फिर अब तो तुम्हारे पास एक नहीं तीन-तीन अपने जुगाड़ होंगे। चूत में ज्यादा खुजली मचे तो उनसे काम लो। चलो आओ दिखाती हूं तुम्हें तुम्हारे लंड”।

“मैं उठ कर पीछे वाले कमरे की तरफ जाने लगी”।

“मानसी भी मेरे पीछे-पीछे अंदर आ गयी। मैंने अलमारी में से डिब्बा निकाल लिया। अभी तक तो डिब्बा मैंने भी नहीं खोला था। लेकिन तीनो सेक्स टॉयज, चूत का दाना चूसने वाला, चूत में लेने वाला लंड और गांड और चूत में इकट्ठा डालने वाला – तीनो ही बिल्कुल नए तरीके के थे”।

“शोरूम वाला संदीप सोलंकी तो बता ही रहा था कि ये वाले पहले वालों से कुछ अलग से हैं”।

“मैंने तीनो टॉयज निकाल कर सोफे पर रख दिए। चूत का दाना चूसने वाला तो देखने पर वैसा ही लगा, मगर जब गौर से देखा जो कि चूत दाने ऊपर जो छोटे बच्चे के होंठ जैसा दाना चूसने वाला बना हुआ था। उसके अंदर भी छोटे-छोटे दाने से थे। मतलब खिलौने का बाकी हिस्सा तो चूत के दाने को चूसता और अंदर जो दाने थे वो चूत के दाने पर रगड़ लगाते”।

“लंड और दूसरे टॉयज में भी यही बात थी। लंड के जड़ में दो इंच पर उभरे हुए नरम नरम दाने थे, जो चूत को और अधिक रगड़ा लगाते। इसे तरह के दाने गांड और चूत में लेने वाले खिलौने में भी थे। दूसरी बात थी कि ये दोनों खिलौने गुलाबी रंग की पारदर्शी रबड़ के बने हुए थे और इनके ऊपर चुदाई करते हुए लड़का-लड़की की बहुत सी छोटे-छोटी फोटो थी”।

“मुझे लगा अब मुझे भी अपने खिलौने बदल लेने चाहिये। मैंने सोचा जल्दी ही संदीप से इन खिलौनों के लिए बात करनी पड़ेगी”।

“साला भोसड़ी वाला संदीप। खिलौने ले कर आएगा और आधा घंटा बेफिजूल की बातें करते हुए मेरी चूत को घूरता रहेगा”।

“मानसी इन खिलौनों को उठा कर उलट-पलट कर देख रही थी। तभी मानसी ने खिलौने वापस डिब्बे में रख दिए और अपनी चूत खुजलाने लगी”।

“अब मेरे और मानसी के बीच झिझक तो रही नहीं थी। मैंने मानसी से पूछा, “मानसी क्या हुआ लेने का मन हो रहा है”?

मानसी ने कुछ ज्यादा ही जोर से चूत खुजलाते हुए कहा, “हो तो रहा है आंटी”।

मैंने कहा, “तो शर्मा क्यों रही हो? उतारो कपड़े, और लो जहां लेना है और वाइब्रेटर चालू कर के चूत का पानी छुड़ाओ, और मजे लो”।

मानसी बोली, “आंटी आप भी लो ना। दोनों लेंगी तो और मजा आएगा”।

मैंने कहा “ठीक है”, और मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। फिर मैंने मानसी से पूछा, “मानसी तुमने कौन सा वाला लेना है”?

मानसी बोली, “आंटी मैं गांड और चूत में डालने वाला ये C वाला ही लूंगी। प्रैक्टिस भी हो जाएगी। अपने आप तो मैंने अभी तक एक बार ही लिया है”।

मैंने कहा “ठीक है”, और मैंने मानसी को दराज में से गांड में लगाने वाली जैल की टयूब निकाली और मानसी को पकड़ा दी”।

जब मैं लंड अपनी चूत में डालने की तैयारी कर रही थी तो मानसी बोली, “आंटी एक बात बोलूं”?

मैंने कहा “बोलो मानसी क्या बात है”?

मानसी बोली, “आंटी ये खिलौने अंदर लेने के बाद और वाइब्रेटर चालू करने के बाद मैं नीचे लेट जाऊंगी, और आप मेरे ऊपर लेट कर धक्के लगाइये और वैसे ही मुझे चोदिये जैसे मर्द औरत को चोदता है”।

“आप लड़कों की तरह मेरी चुदाई करिये कमर ऊपर नीचे करके – जैसे लड़के चुदाई करते हुए धक्के लगाते हैं और मैं लड़कियों की तरह चुदाई करवाऊंगी चूतड़ घुमा-घुमा कर”।

“और मानसी धीमी आवाज में बोली, “और आंटी साथ ही वो वाली गांड, चूत, लंड, रंडी, कुतिया भोसड़ी , फुद्दी वाली बातें भी बोलिये – मर्दों वाली। मैं भी बोलूंगी लड़कियों वाली – चोद मेरी चूत, फाड़ मेरी चूत”।

“मानसी की बात सुन कर मेरी हंसी भी छूट गयी और मेरी चूत ने फर्रर्र से पानी भी छोड़ दिया।

“मानसी का आडिया मुझे बहुत पसंद आया। वैसे मेरा भी ये उसूल है कि चूत गांड के मजे लेने के लिए कुछ भी किया जा सकता है, और करना भी चाहिए”।

“मानसी की बात सुन कर मैंने कहा, “वाह मानसी, क्या आईडिया आया है तेरे दिमाग में। मजा आ जाएगा आज”।

“जैसे ही मैं उठने लगी, मानसी मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली, “आंटी एक बात और”।

“मैं रुक गई और मानसी की तरफ देखने लगी”।

मानसी बोली, “आंटी, पापा ने मुझे चोदते हुए कभी भी कुछ नहीं बोला। आप बताईये अगर पापा कभी मुझे चोदते हुए कुछ बोलते, तो क्या बोलते”?

“मैं चुप-चाप मानसी के तरफ देखने लगी”।

“फिर मानसी धीरे से बोली, “पापा हुए मम्मी की जो चुदाई मैंने देखी थी, उसमें तो पापा ने मम्मी को चोदते हुए बहुत कुछ बोला था, और मम्मी भी कम नहीं थी। वो भी चुदाई करवाते हुए नीचे चूतड़ झटकाती घुमाती बहुत कुछ बोल रही थी। आंटी आज आपके नीचे लेट कर मैं भी वैसे ही करूंगी जैसे मम्मी कर रही थी”।

“आज आप मेरे ऊपर लेट कर मेरी चूत पर धक्के लगाते हुए कुछ ऐसा ही बोलिये जैसा पापा मम्मी को चोदते हुए उस दिन बोल रहे थे – रंडी, कुतिया, भोसड़ा बना दूंगा तेरी फुद्दी का जैसे शब्द। आंटी मैं भी वही सब बोलूंगी”।

“मुझे मानसी के इस बात पर थोड़ी हैरानी तो हुई, मगर मैंने सोचा अगर मानसी ऐसा ही कुछ चाहती है तो फिर ऐसे ही सही”।

मैंने कहा, “तो ठीक है सुन मानसी। अब जब कि तू फैसला कर ही चुकी है कि तू अब अपने पापा से चुदाई नहीं करवाएगी, तो आज पापा-बेटी की आख़री चुदाई करते हैं। चल मैं बनती हूं आलोक और तू बन मस्त चुदाई करवाने वाली बीस साल की मानसी और होने दे आज 44 साल के मर्द और बीस साल की लड़की की चुदाई ऐसी ही बेशर्मी वाली बातों के साथ”।

“और इसके साथ ही मैं शुरू हो गयी और मैंने बोल दिया, “चल मानसी मेरी बेटी चल उठ, अब अपने मुलायम चूतड़ों के नीचे तकिया रख और पहले अपने पापा को अपनी चूत का शहद चुसवा। मैं भी तो देखूं, मेरी बीस साल की बेटी की फुद्दी किस तरह का खट्टा-मीठा नमकीन शहद छोड़ती है”।

“जैसा मैंने बोला था मानसी वैसे लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर चूत ऊपर उठा दी, और अपनी टांगें चौड़ी कर दी। टांगें फैलाते ही मानसी की गुलाबी चूत थोड़ी सी खुल गयी”।

“मानसी ने अपनी चूत की फांकें थोड़ी और फैला दीं और बोली, “आओ पापा, ये लो तैयार है मेरी फुद्दी। आओ और चूसो जितनी चूसनी है”।

“मैं मानसी की चूत चूसने के लिए मानसी की चूत पर झुक गयी। मानसी की चूत के आस-पास छोटे-छोटे झांटों के भूरे घुंघराले बाल मुझे और भी ज्यादा मस्त कर रहे था। मैंने अपने हाथ के अंगूठों से मानसी की चूत की फांकें खोली और अपनी जुबान मानसी की चूत में डाल दी। मानसी की चूत हल्के नमकीन पानी से भरी पड़ी थी”।

“नई-नई जवान हुई लड़कियों की चूत चुदाई के ख्याल से पानी भी कुछ ज्यादा ही छोड़ती हैं”।

“मानसी की चूत तो गरम ही थी, पांच मिनट की मानसी की चूत चुसाई ने मेरी चूत भी गरम कर दी”।

मैंने कहा, “चल मानसी ले लंड अपनी चूत में और वाईब्रेटर चालू कर दे। तेरी चूत की खुशबू और स्वाद ने मेरी फुद्दी भी गरम हो गयी है। मैं भी एक लंड अपनी चूत में ले कर वाईब्रेटर चालू करती हूं”।

“हम दोनों ने लंड अपनी अपनी चूत में डाले और वाईब्रेटर चालू कर दिए”।

“मस्ती चालू हो चुकी थी। दोनों चूतें गरम थीं, लंड चूतों के अंदर वाइब्रेट कर रहे थे। दोनों चूतें पानी छोड़ रही थी।

“मैं मानसी के ऊपर लेट गयी, जैसे मर्द औरत को चोदने के लिए लेटता है। मैंने मानसी को बाहों में ले कर कहा, “आजा मेरी मानसी, कब तक अपने पापा को ऐसे तरसाएगी? देख पापा का लंबा लौड़ा तेरी फुद्दी में जाने के लिए कितना उतावला हो रहा है”?

“मानसी ने आगे से जवाब दिया, “मेरा भी वही हाल है पापा। डालिये अपना पूरा लौड़ा अपनी बेटी की फुद्दी के अंदर और ऐसी चुदाई करिये अपनी बेटी की, जैसी चुदाई आज तक किसी भी पापा ने अपनी बेटी की ना की हो”।

“मानसी की बात सुनते ही मैंने कस कर मानसी को अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने चूतड़ ऊपर-नीचे करने लगी, और मानसी की चूत पर धक्के लगाने लगी। दोनों की चूतें पानी से गीली हुई पडी थी। चूतें जब आपस में टकराती थी, तो आवाज आती थी ठप्प ठप्प फच्च फच्च”।

“पूरा माहौल ही चुदाईमय हो चुका था”।

“मानसी की चूत पर धक्के लगाते हुए मेरे मुंह से अपने आप ही निकलने लगा, “ले मानसी ले गया तेरे पापा का लम्बा लौड़ा तेरी फुद्दी में अंदर तक। मेरी जान मानसी, क्या टाइट फुद्दी है तेरी। जकड़ लिया इसने अपने पापा का लंड। मेरी जान, ले ले पापा का पूरा लंड। ले आज चोद-चोद कर बनाऊंगा तेरी टाइट फुद्दी का भोसड़ा”।

“रबड़ का लंड मेरी चूत में था ही। मानसी नीचे जोर-जोर से चूतड़ घुमा रही। चूत, लंड, फुद्दी बोलते-बोलते मेरी अपनी चूत पानी छोड़ने वाली हो गयी”।

“मजे की मस्ती में मेरी बातें और भी ज्यादा गंदी होती जा रही थी। मुझे कभी भी मजा आ सकता था”।

“और फिर वही हुआ। मैं बोलती जा रही थी, “आआआह आआह मानसी मेरी जान,‌ ले मानसी ले, आआआह आज तो मजा ही आ गया चुदाई का। क्या चूतड़ झटक रही है मेरी बेटी, मेरी जान मानसी। ले भर दी तेरी चूत ले आआह आआआह, गया तेरी फुद्दी में, ले गया तेरी गांड में। कैसी लंड की प्यासी हो गयी है तू, रंडी की तरह चूतड़ झटका-झटका कर चुदवाती है तू मानसी। ले अपने पापा का जड़ तक ले अपनी चूत में। पापा का लम्बा लौड़ा ले।

अब चूस मेरा लौड़ा अपने मुंह में लेले‌ मानसी, रंडी ले अपने पापा का लौड़ा मुंह में ले, चूस मेरे लंड को और जोर से चूस मानसी। ले अपने पापा के लंड की मलाई की एक एक बूंद निकाल ले”।

“उधर मानसी मस्त हो ही चुकी थी। उसका भी पानी छूटने वाला था”।

“वो भी बोले जा रही थी “आअह आंटी, रगड़ो मेरी चूत पापा, झाग निकाल दो इसकी इस फुद्दी की, फाड़ डालो इसको, आआह पूरा मजा दो पापा आज आआह आअह, मेरी जान आंटी, भर दो मेरी चूत अपने पानी से मेरी आंटी। आआह मेरे रजत आअह, और दबा कर चोद आआह मेरे राजा मेरे रजत, कुत्ते की तरह लगा धक्के गांडू, जोर-जोर से लगा, फाड़ दे मेरी चूत मेरी फुद्दी अअअअअह। आंटी लगाओ दबा कर धक्के। दबा कर चोदो पापा आज मुझे। आज फाड़ डालो मेरी फुद्दी आआहबा मस्त लौड़ा है पापा आपका”।

“मानसी पूरी मस्ती में थी। मानसी का मजा निकलने वाला था। मानसी जोर-जोर से बोलती जा रही थी। मानसी की इस तरह की बातें सुन कर मैं चुप हो कर मानसी की चूत पर धक्के लगाने लगी। मुझे अब मानसी की बातें सुनने में ही मजा आने लगा था”।

“मानसी की आखें बंद थी, और मानसी बिना रुके बोलती जा रही थी, “आआह रजतचोद और जोर से चोद रजत, आआआह फाड़ मेरी फाड़ दे आआह आआह पापा चोदो पापा, पापा कुतिया की तरह रगड़ो पापा मुझे, और जोर से पापा, मैं आपके लौड़े की चुदाई कभी नहीं भूलूंगी, पूरा लंड बाहर निकाल कर डालो पापा, आंटी आअह आपका मोटा लंड क्या मस्त चुदाई कर रही हो आप आंटी। पापा मेरे मुंह में निकालो पापा अपने लंड का गरम पानी आअह्ह। पापा आआआह पापा अअअअअ मजा आ रहा है पापा आआआह आंटी, आंटी आआह आअह आंटी”।

“बोलते-बोलते मानसी ने जोर के चूतड़ घुमाए और जोर से बोली, “गयी मैं आंटी, निकल गया मेरी चूत का पानी। आ गया मजा मुझे”।

“मानसी ढीली हो गयी और बोली, “आंटी बड़ा मजा आया आज”।

“जैसे ही मानसी की चूत ने पानी छोड़ा, मेरी भी चूत पानी छोड़ गयी। हम दोनों ही ढीली हो गयी”।

“कुछ देर बाद मानसी नीचे थोड़ा सा कसमसाई। शायद मुझे अपने ऊपर से उतरने के लिए कह रही थी”।

“मैं मानसी की ऊपर से उतरी और मानसी की बगल में ही लेट गई। हम दोनों ने रबड़ के खिलौने अपनी होनी चूत में से निकाल लिए।

“मैंने मानसी की चूत सहलाते हुए कहा, “मानसी आज आया चुदाई का असली मजा कहां थी तू इतने दिन मेरी जान”।

“मानसी भी बोली, “आंटी ये तो मुझे भी बड़ा मजा आया आज। लग रहा था जैसे सच में ही चुदाई हो रही है”।

“मेरा हाथ मानसी की चूत पर ऊपर-नीचे हो रहा था। मानसी की चूत ने इतना पानी छोड़ा था कि चूत बाहर तक गीली हुई पड़ी थी”।

“मानसी को भी समझ आ गया कि आज उसकी चूत ने बहुत पानी छोड़ा है”।

“मानसी बोली, “आंटी लग रहा है मेरी तो चूत ने बहुत पानी छोड़ा है आज, बाहर तक गीली हुई पड़ी है”।

मैंने कहा, “छोड़ा तो है मानसी। भरी पड़ी है तेरी चूत। चल मनसी टांगें उठा, तेरी चूत साफ़ करूं। मानसी ने टांगें उठा ली”।

“मैंने मानसी टांगें चौड़ी कर के अंगूठे से चूत की फांकें खोली और पूरे होंठ मानसी की चूत में घुसेड़ दिए। मानसी की फुद्दी पानी से भरी पड़ी थी। हल्के खट्टे और नमकीन पानी से। मैंने खूब पानी चाटा, खूब चूसा चूत का पानी। चूस-चूस कर सुखा दी मानसी की चूत”।

“अभी मैं मानसी की चूत चूस ही रही थी कि मानसी ने फिर जोर से चूतड़ घुमाये और आवाज निकाली, “आंटी फिर निकल गया मेरा। मुझे फिर मजा आ गया”।

“कुछ देर और चूत चूसने के बाद मैं मानसी की बगल में ही लेट गयी। मानसी की चूत चूस-चूस कर और चूत का पानी पी कर तसल्ली हो गयी थी”।

“अपने से बत्तीस साल छोटी कड़क और कसे जिस्म वाली बेतहाशा सुन्दर मानसी के साथ नंगी हो कर इस तरह से चुदाई जैसी हरकतें – चूचियां दबाना, चूत चुसाई, गांड चटाई, चूत का पानी चूसने और मानसी के होंठ चूसने से जितना मजा मुझे आया था। मैं खुद पर हैरान हो रही थी”।

“मुझे तो ऐसा भी लगने लगा था कि मानसी को जाने ही ना दूं। दिन रात उसके साथ यही कुछ – चुदाई जैसी हरकतें करती रहूं। ऐसे ही हम एक-दूसरे के ऊपर लेट कर, रबड़ के लंड अपनी गांड और चूत में लेकर बोलती रहें – “और जोर से चोदो मुझे मालिनी आंटी, बना दो अपनी रंडी, कुतिया समझ कर चोदो मुझे, चूत फाड़ दो मेरी चोद-चोद कर आंटी – ले मेरी जान, मानसी, गया तेरी गांड में, और ले मेरी गांडू रंडी, मादरचोद मानसी, तेरी गांड में मेरा लंड कुतिया”।

“सोचते-सोचते मुझे लगा मैं भी कहीं लेस्बियन ही तो नहीं बनती जा रही”?

“मगर फिर मुझे रागिनी की बात याद आयी जब उसने मुझे कहा था, “मालिनी जी आप ऐसे चूत चूसती चुसवाती हैं कि कोइ पक्की लेस्बियन भी क्या चूसेगी और क्या चुसवायेगी। क्या आप भी मेरी तरह नार्मल और लेस्बियन हैं या प्रवीणा की तरह पक्की लेबियन ही हैं”?

और मैंने हंसते हुए रागिनी से कहा था, “रागिनी मैं कोइ लेस्बियन नहीं हूं। खूब लंड लेती हूं और अच्छे मोटे लम्बे लंड मुंह में चूत और गांड दोनों सब जगह लेने की शौक़ीन भी हूं। मगर हर औरत के अंदर एक लेस्बियन छिपी होती है। हर औरत कभी ना कभी चूत चूसने-चुसवाने, गांड चाटने-चटवाने की और किसी लड़की के होंठ चूसने या चुसवाने की इच्छा रखती है”।

“जो लड़कियां और औरतें लेबियन नहीं भी होती, उनका भी कभी-कभी चूत गांड चूसने-चुसवाने का मन करता है। कभी-कभी औरतों को आपस में ये सब करने का मजा आता है। मुझे रागिनी के साथ भी ये सब करने में मजा आया था और अब मानसी के साथ भी वही सब करने में मजा आ रहा था”।

“ये सोचते-सोचते मुझे मानसी पर बड़ा प्यार आने लगा। मैं पलटी और मानसी के होंठ अपने होठों में लेकर फिर चूसने लगी। पंद्रह मिनट मानसी के होंठ चूसने के बाद मैंने मानसी को छोड़ा”।

“मानसी बोली, “क्या हुआ आंटी, एक बार और चोदने का मन है क्या”?

“मैंने हंसते हुए कहा, “नहीं मानसी, चोदने का नहीं चूसने का मन है, बस ऐसे ही प्यार आ गया था”।

“इसके कुछ देर हम दोनों ऐसे ही लेटी रही। फिर उठ कर कपड़े पहने। बाथरूम जा कर हुलिया ठीक किया, और क्लिनिक में आ गए”।

“मानसी के तीनों खिलौने मैंने वापस बक्से में पैक किये और मानसी को दे दिए। कुर्सी पर बैठते हुए मैंने कहा, “मानसी मजा गया आज”।

फिर मैंने मेज की दराज में i-pill के छह सात पैकेट निकाले और मानसी को दे दिए और बोली, ” ये लो मानसी, अगर रजत चुदाई हो जाये तो ले लेना”।

“और फिर मैं हंसते हुए बोली, “जब चुदाई हो तो मुझे बताना जरूर कि कैसी चुदाई करता है रजत। भूलना मत”।

“मानसी रबड़ के लंड वाला बक्सा और i-pill के पैकेट संभालती हुई बोली, “आंटी जब भी रजत के साथ चुदाई होगी, सबसे पहले आपको पूरी चुदाई की बातें बताऊंगी”।

“फिर मानसी चलते हुए बोली, “अब चलती हूं आंटी। आज का दिन कभी नहीं भूलूंगी”।

मैंने कुर्सी से उठते हुए कहा, “और हां मानसी याद है ना, ये रबड़ के लंड और दुसरे जुगाड़ केवल इमरजेंसी के लिए हैं। इनकी आदत नहीं पड़नी चाहिए। तुम्हारी उम्र अभी इनके साथ नहीं, असली वाले लंडों के साथ खेलने की है”।

मानसी हंसती हुई बोली, “याद है आंटी, कोशिश करूंगी इनकी जरूरत ना ही पड़े”।

मैंने कहा, “मानसी अगर कभी फिर मजा लेने का मन हो तो फोन करना। तुम्हारे साथ चुम्मा-चाटी और चुदाई का मुझे भी बड़ा मजा आया है”।

मानसी उठी और बोली, “आंटी मजा तो मुझे भी बहुत ज्यादा आया आज। दुबारा जरूर आऊंगी”।

फिर मानसी मेरे सामने खड़े हो गयी और बोली, “आंटी आप कुछ भूल रही हैं”।

मैंने हैरानी से पूछा, “भूल रही हूं? क्या भूल रही हूं मानसी”?

“मानसी ने अपने होठ थोड़े से खोल दिए”।

“मैंने सोचा तो इसकी बात कर रही थी मानसी? ये भूल रहे थी मैं”।

“मैंने मानसी को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और बोली “आजा मेरी जान मेरी मानसी” I

“ये कह कर मैंने उसके होंठ अपने होठों में ले लिए मानसी ने अपना मुंह जरा सा खोल दिया और मैंने अपनी जुबान मानसी के मुंह में सरका दी। मानसी मेरी जुबान चूसने लगी”।

“दस मिनट के बाद मैंने मानसी को छोड़ा। मैंने शंकर को बुलाया और मानसी को उसके घर छोड़ आने के लिए कह दिया”।

“जाते-जाते मानसी बड़ी ही खुश दिखाई दे रही थी। जिस तरह से मानसी मेरे साथ हिल मिल गई थी, लग ही नहीं रहा था कि अभी कुछ ही दिन पहले मानसी से मुलाक़ात हुई थी”।

“अगले दिन रागिनी का फोन आया। रागिनी बोली, “मालिनी जी, कैसी रही आपकी मुलाक़ात मानसी के साथ”।

मैंने कहा,”ठीक रही रागिनी। अब नहीं चुदवायेगी आलोक से। लेकिन ये उसने कह दिया है कि अगर आलोक उसे चोदने के लिए कहेगा तो वो ना नहीं करेगी”।

फिर मैंने कहा, “लेकिन उसके चिंता मत करो रागिनी। मुझे यकीन है आलोक उसे चुदाई के लिए नहीं कहेगा। बस तुम आलोक के लंड का ध्यान रखना”।

रागिनी बोली, “मालिनी जी वो गलती अब मैं दुबारा नहीं करने वाली। चूत और गांड दोनों चुदवाऊंगी आलोक से। आलोक को भी बोल दूंगी मानसी की चुदाई ना करे”।

मैंने कहा, “नहीं रागिनी तुम कुछ मत बोलना। अभी कुछ दिन देखो क्या होता है। कई बार इंसान वही करना चाहता है जो करने से हम उसे मना करते हैं। आलोक तो तुम्हारी बात मान जाएगा, मगर मानसी? कहीं मानसी ही ना आलोक से चुदवाने की जिद कर ले”।

मैंने रागिनी को समझाते हुए कहा, “मानसी और आलोक की चुदाई में भी तो यही हो रहा था। आखिर को मानसी है तो जवान ही। अगर कभी मानसी का मन आलोक का लम्बा लंड चूत में लेने का हो गया तो? या फिर आलोक का मन ही मानसी की टाईट चूत चोदने का आ गया तो? रागिनी होने देना जो होता है। आखिर को अब तक भी तो आलोक मानसी को चोद ही रहा था”।

फिर मैंने कुछ रुक कर फिर से कहा, “वैसे एक बात बताऊं रागिनी, मुझे लगता नहीं की अब बाप-बेटी में चुदाई की नौबत आएगी”।

तभी मुझे कुछ याद आ गया और मैंने सोचा की रागिनी को उन तीन रबड़ के खिलौनों के बारे में बताऊं या ना बताऊं जो मैंने मानसी को चूत और गांड का मजा लेने के लिए दिए थे। कुछ सोच कर मैंने ना ही बताने का फैसला किया”।

फिर मैंने कहा, “रागिनी तुम एक बार क्यों नहीं जाती यहां। मानसी के एक नए दोस्त रजत के बारे में भी तुमसे बात करनी है”।

रागिनी बोली, “मालिनी जी इस शनिवार मेरी छुट्टी है। शनिवार आ जाऊं? तसल्ली से बैठ कर बातें करंगे। क्लिनिक में भी और पीछे वाले कमरे में जा कर भी। आपका धन्यवाद भी तो करना है”।

ये कहते हुए रागिनी हंस दी।

“मैंने भी हंसते हुए कहा, “ठीक है रागिनी, मैं भी पूरी तैयारी करके रखूंगी”।

रागिनी ने कहा, “अच्छा मालिनी जी, शनिवार को पक्का मिलते हैं, नमस्ते”।

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