आंटी उछलकर बैठती हुई बोली – ये क्या कह रहे हो …..मै उसकी माँ हूँ ..वो मेरा बेटा है ….मै उसके साथ कैसे ….नहीं ……नही….बिल्कुल नहीं …….. मैंने आंटी की मुलाएम जाँघों को सहलाते हुए कहा – अगर वो आपका बेटा है तो मै भी आपके बेटे सरीखा हूँ ….जब मै आपको चोद सकता हूँ तो वरुण क्यों नहीं …..? फिर भी सोंच लीजिये जिस बेटे को बचाने के लिए बेटे के दोस्त से अपनी ये मखमली चूत ( तब तक मैंने अपनी बीच की ऊँगली उनके बुर में पेल दिया ) मरवा ली , वही बेटा अगर आपकी चूत चोदकर ठीक हो सकता है तो क्यों नहीं …… तुम समझते क्यों नहीं ……आंटी खींजे स्वर में बोली – शायद वह भी तैयार न हो ….उसकी बात मै नहीं जानती , मै खुद ही उसके बारे में कल्पना नहीं कर सकती ….ना …ना …..हमारा समाज इसकी इजाजत ही नहीं देता | मै सब समझता हूँ आंटी ……मै उनको पुचकारते हुए बोला – जहाँ तक समाज का सवाल है ..उसे मारीये गोली ….इकलौता बच्चा आपका वर्वाद हो रहा है , समाज को क्या पड़ी है ….और उसे बताने कौन जाएगा ….मै ?……वरुण ?………या आप ? ..और हाँ ! जहां तक आपकी मानसिक असमंजस की स्थिति है मै उसमे आपकी सहायता कर सकता हूँ |
आंटी उत्सुकता से पूछी – वो कैसे ? मै प्यार से बोला- मै जब भी आपकी चूत बजा रहा होऊं तो आप ये कल्पना करना की वरुण आपको चोद रहा है …..सिर्फ सोंचना ही नहीं है बोलना भी है …..इसी तरह जब आप बोल-बोल के बार -बार चुदाएंगी तभी आप मानसिक रूप से तैयार हो पाएंगी ….देखिये आपको अपना बेटा बचाना है … फिर इसके बाद उसे seduce (रिझाना ) भी है ,वैसे आपकी बड़ी-बड़ी चुन्चियों का वह पहले से ही दीवाना है …..ललचाइये उसे …. फिर भी …..आंटी हल्का विरोध सी करती हुई बोली –फिर भी अपने ऊपर उसकी कल्पना नहीं कर सकती | मैंने कहा – फिर आँखे बंद करके मुझे वरुण समझिये | अरे नहीं ……आंटी ने प्रतिवाद किया – जब भी आँख खोलूंगी तुम्हे ही तो देखूंगी …फिर कल्पना कैसे होगी | अब मुझे लगा की आंटी अब लाइन पर आ रही है , मैंने बोला – वो मुझ पर छोड दीजिये …… फिर मैंने कुर्सी पर रखी उनकी चुन्नी उठाकर आंटी के पीछे जाकर उनके आँखों पर पट्टी की तरह बाँध दिया ……… चुन्नी बिल्कुल काली पट्टी की तरह काम कर रही थी | मैंने फिर आंटी को लिटा दिया और गौर से उनके पुरे शारीर को निहारने लगा | क्या मस्त लग रही थी …हलकी झांटो से भरी बुर को मै नजदीक से देखने लगा ……तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैंने अपना मोबाइल उठाकर उसे साइलेंट मोड पर करके फटाफट आंटी के तीन-चार स्नैप्स ले लिया …फिर बुर को ज़ूम करके दो फोटो निकाली | तभी मेरे शैतानी दिमाग में एक और आइडिया सुझा ….अब मै आंटी को चुदाई करते हुए उनकी विडियो बनाना चाहता था ….लेकिन उसमे एक रिस्क था …मै अपनी आवाज उसने नहीं रखना चाहता था | इसलिए मैंने आंटी को बोला – आंटीजी ! मै धीरे धीरे फुसफुसा कर बोलूँगा ..वो बोली – क्यों ? मै बोला – जब मै धीरे धीरे सेक्सी और husky voice में बोलूंगा तो आपको और सेक्स चढ़ेगा और आपको अपने बेटे के बारे में imagine करने में सुविधा होगी |
आंटी बोली – ठीक है … अब मेरा पूरा प्लॉट तैयार था | मोबाइल को विडियो मोड पर रखकर अपने पीछे टेबल पर सेट कर दिया , वहां से मेरी पीठ विडियो में आ रही थी ,पर आंटी का पूरा चेहरा ..पूरा जिस्म विडियो में कैद हो रहा था फिर धीरे से फुसफुसाया – मम्मी ! मै आपका दूध पिउं ?…. हाँ बेटा! पी ले …इसी दूध को पीकर तू बड़ा हुआ है …..लेकिन अब तेरे दांत निकल आये है ….काटना नहीं … मै अब आंटी की दोनों चुचियों को पकरकर सहलाने लगा और बारी-बारी से दोनों चूचको को चुभलाने लगा ज्यों-ज्यों मै चूचको को चुभला रहा था , त्यों – त्यों वो अग्रिम प्रत्याशा में कड़ी होती जा रही थी | आंटी उतेजना में गहरी साँसे लेनी शुरू कर दी ….बीच -बीच में अपनी छाती उछालकर अपने अप्रतिम आनंद की अभिव्यक्ति कर रही थी लगभग ५ मिनट तक मै चूसता रहा …मेरा मुह दुखने लगा तो मै आंटी के गालों की तरफ चढ़ा | मम्मी ! केवल दांत ही नहीं……मेरे शारीर में अब कांटे भी निकल आयें है …ये पकड़ो …..अपना लौड़ा आंटी के हांथो में पकडाते हुए उनके कान में फुसफुसाया ……..और आंटी के कान के लबों पर अपना जीभ फिराया ….. आँ……आउच..( जब मैंने कान के लबों को दांतों से काटा , फिर अपना जीभ उनके गालों पर फिर फिराने लगा ) आ …ह …….इ स्स……………….आंटी हलके – हलके सिसिया रही रही थी फिर मै आंटी के गालों को चाटने लगा ….बीच-बीच में गालों पर हल्के दांत भी गडाने लगा ..मुझे बहुत मजा आ रहा था …आंटी भी मेरे लंड को सहलाकर …..मसलकर( जब मै दांतों से गालों को काटता तो वो लंड को मुठ्ठी में पकड़कर मसलने लगती ) मूसल बना रही थी |
अब मैंने आंटी के होंटों को अपने होंटों से दबाकर चूसने लगा और अपने दोनों हांथो से उनकी बड़ी बड़ी चुन्चियों को मसलने लगा …. आ…ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………..आंटी मेरे मुंह से अपना मुंह हटाते हुए सिसकी ……….बेटा ! इतनी बेदर्दी से मेरी चूचियां मत दबाओ….आखिर , मै तुम्हारी माँ हूँ ……. मै फुसफुसाया – तू माँ नहीं एक नंबर की चुदक्कड़ रंडी है …..अपने बेटे का लंड मसल रही है ……तेरी बुर चुदने के लिए तडफड़ा रही रही है …….बोल चुदेगी अपने बेटे से …. अचानक पता नहीं क्या हुआ …आंटी उतेजना में जोर जोर से बोलने लगी – हाँ , वरुण बेटा हाँ ! …..आज चोद ले अपनी माँ को जी भरके …….मै तेरे लंड के लिए तड़प रही हूँ ……घुसा दे अपने मुसल को मेरी बुर में ……देख यही से तो तू आया है ….(आंटी ने मेरा लंड छोड़कर अपनी बुर को अपने हांथो से छितराकर दिखाने लगी ) मै भी उठकर बैठ गया और आंटी की छितराई बुर को देखने लगा | आह …मजा आ गया ……बुर के अन्दर की बिल्कुल सफ़ेद मांस दिख रहा था जिसमे से रिसकर मदनरस बाहर आ रहा था …. मैंने अपना मोबाइल उठाया और बुर का क्लोजअप शॉट लेने लगा , फिर मैंने ऑडियो पर ऊँगली रखकर (अपना आवाज छिपाते हुए ) आंटी से कहा – मम्मी ! जरा अपनी बुर को उँगलियों से चोदो , मुझे तुम्हे मास्टरवेट करते हुए देखना है …. उईईइ….(आंटी ने बुर में अपनी दो उँगलियाँ डाली )……..बदमाश कही के ! घोड़े जैसा लंड रखकर भी अपनी माँ को उन्ग्लीचोदन के लिए कह रहा है ………..आ…ह…ह………इ…स्स…..स्स………अब ….बर्दास्त…. नहीं ….हो रहा है …….पेल दे ….आ..ह….बेटा …अपनी …माँ को क्यों तडपा रहा है …..बस….अब चोद ….मुझे .. मै फटाफट इतने अच्छे दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर रहा था , अब लेकिन मेरे लिए भी रुकना मुश्किल हो रहा था | ऑडियो पर ऊँगली रखते मै फिर बोला- मम्मी! तू तो मस्त चुदासी है …अपने बेटे के लंड खाने के लिए मरी जा रही है ….अब देख मै कैसे फाड़ता हूँ तेरी बुर ……चाहे तू जितना चिल्ला …..बिना फाड़े नहीं मानूंगा ……ले संभाल अपने बेटे का गदहलंड ….. मैंने आंटी के जांघो को पकड़कर अपने कंधे पर डाला और उनके ऊपर झुककर अपना मूसल उनके ओखल में एक ही झटके में धांस दिया …..४० साल की फटी बुर मेरे प्रथम प्रहार से और फटती हुई बिलबिला उठी…… मार…. दिया….. रे ……..हाय रे…….. मेरे…. जालिम……चोदू…….आ……ह्ह्ह्ह्ह,,,,,,,,,फ..ट….गयी…मेरी………………………..अपनी….माँ….को….इतनी…..बेदर्दी…..से…ना…………..चो..द………..इ….स्स……………..मै गयी…..इ..इ…इ…..ई……..|
ये क्या…… आंटी तो दो तीन झटको में ही झड़ने लगी , मै सबेरे से तीन बार झड चूका था मै इतनी जल्दी तो कभी नहीं आ सकता था …….इसलिए मै लगातार चोदे जा रहा था ….लगभग १० मिनट तक मै दनादन चोदता रहा………आंटी के बुर से पानी नहीं झड़ना बह रहा था …..पूरा कमरा फच-फच …घच-घच…की आवाज से गूंज रहा था …..इस दौरान आंटी का शारीर कई बार तना और रिलैक्स हुआ | मै एक हाथ से आंटी की चुदते हुए एक्सप्रेशन की विडियो बना रहा था , फिर विडियो बंद कर मैंने आंटी के आँखों की पट्टी को खोल दिया | आंटी बार-बार छोड़ दे बेटा ….छोड़ दे बेटा ….अब मत चोद…..मेरे में अब जान नहीं है ….मेरी बुर भी चनचना रही है ( शायद मेरे लंड ने बुर का कोई कोना छिल दिया था )……..| मै अब भी झड़ा तो नहीं था ,लेकिन एक ही आसन में चोदते-चोदते थोडा थक गया था | मैंने आसन बदलने के लिए लंड को बाहर निकाला तो आंटी जान में जान आई , वो तुरंत छिटककर बिस्तर के किनारे बैठ गयी |
मै बिस्तर के नीचे खडा हो गया …..मेरा लंड अब भी फुफकार रहा था …… मैंने कहा – मम्मी …घोड़ी बन जा …अब मै पीछे से चोदुंगा ….. वो बोली – अरे नही बेटा ! …..बस अब बहुत हो गया ….. मैंने प्रतिवाद किया – मेरा मन अभी भरा नहीं है …….देख माँ ! .मेरा लंड भी अभी झडा नहीं है …… नहीं बेटा ….तू समझता क्यों नहीं है …..मेरे बुर में जलन हो रही है ….. मैंने कहा – तू घोड़ी तो बन …..पीछे से तेरी बुर देखकर मै मुठ मारूंगा ….. वो अनमने मन से घोड़ी बन गयी ……….. चूँकि मै घर से तैयारी करके चला था , मैंने फटाफट नीचे पड़ी पैन्ट की जेब से वेसलिन निकाला और अपने दाहिने हाथों में चुपड़कर आंटी के पीछे खडा हो गया ……..बाएं हाथ से अपना लंड सहला रहा था और दाहिने हाथ की उँगलियों से गांड के छेद को सहलाते हुए धीरे धीरे वेसलिन की सहायता से गांड में ऊँगली पेल रहा था ..आंटी एक दो बार ऊँगली घुसने पर चिहुंकी और पीछे मुडकर देखि …मुझे एक हाथ से मुठ मारते हुए देखकर फिर अपनी आँखे बंद कर मजा लेने लगी | धीरे धीरे मैंने ढेर सारी वेसलिन आंटी के गांड में डाल दिया |अब मैंने बाए हाथ की उँगलियाँ आंटी गांड को लगा दिया और वेसलिन चपड़े हाथों से लंड मुठीयाने लगा |
आंटी को लग रहा था की मै मुठ मारकर शांत हो जाउंगा पर मेरा इरादा कुछ और था ……..धीरे धीरे मैंने लंड को गांड के छेद के पास लाया और फिर इससे पहले की आंटी कुछ समझती मैंने झटके से आंटी को दबोच कर आंटी के गांड में अपना लंड पेल दिया ….आंटी जोर से चिला उठी ….आह….मर….गई …….ये क्या किया……….और बंधनमुक्त होने के लिए छटपटाने लगी ….लेकिन मैंने मजबूती से पकड़ रखा था वो निकल नहीं पाई | वो चिल्लाती रही और मै अपने एक तिहाई लंड से उनकी गांड मारता रहा …..अंत में उन्होंने अपना शारीर ढीला छोड दिया और बडबडाने लगी ,,,,मार ले बेटा …..अपनी मम्मी की गांड भी मार ले ……..शायद अब उनको मजा ….फिर मै जोर जोर से आंटी की गांड मारने लगा ……आंटी भी मेरे हर धक्के का जबाब अपनी गांड पीछे करके दे रही थी … .और अंत में एक जोरदार हुंकार के साथ फलफलाकर उनके गांड में ही झड़ने लगा…..अब आंटी निढाल होकर पेट के बल पड़ी थी और उनके गांड से जीवनश्रृष्टिरस थोड़े थोड़े अंतराल पर निकलकर मखमली चूत को भिगोते हुए बिस्तर के चादर में समा रहा था | मैंने उनको उसी अवस्था में छोड़कर अपना कपड़ा पहनकर मोबाइल लेकर घर आ गया ……… इसके बाद मैंने आंटी को कई बार चोदा और गांड भी मारी |
पहले शुरुआत में तो उनके आँखों को पट्टी बांधकर ही वरुण के बारे में इमेजिनेशन करवाई , परन्तु बाद में आंटी खुली आँखों से भी मेरे से चुदते वक्त अपने बेटे की कल्पना करने लगी थी …वास्तव में वो अपने बेटे को सही दिशा दिखाना चाहती थी |इसलिए वो कई बार मुझसे पूछ लेती—वरुण को अपनी तरफ कैसे आकर्षित करूँ…… बेटा बताओ ? मैंने बताया – आंटी आप अपने चूचियां जान- भुझकर वरुण को दिखाइये …कभी किसी बहाने…..कभी किसी और बहाने से …अपनी खुली फड़कती बुर दिखाइए बहाने से …..फिर देखिये …..किसी न किसी दिन वरुण आपको पकड़ के चोदेगा जरुर ……. हाँ ! वो अगर आपको चोदते समय फेल भी हो जाए ….मेरा मतलब है कि आपको संतुष्ट न कर पाए तब भी आपको उसका हौसला बढ़ाना है , ये याद रखियेगा | आंटी को टिप्स बताकर , फिर उनको जी भरके चोदकर घर तो आ जाता, पर मेरा खुद का मन व्याकुल रहने लगा ……जब भी घर पर आंटी की चुदाई की विडियो मोबाइल पर देखता …जिसमे वो वो मुझसे बेटा .-बेटा कहकर चुदवा रही है ……मेरा मन अपनी माँ के इर्द-गिर्द घुमने लगता…………………क्या वो भी कभी मेरे साथ ………………….?……………….??
थोड़े दिनों बाद आंटी चुदने में आनाकानी करने लगी …..काफी जोर देने पर वो बोली – देखो राजन ! वरुण अब सुधर रहा है , मै नहीं चाहती की तुम वक्त -वेवक्त यहाँ आया करो , तुम्हे मेरे साथ देखकर कही वो फिर से न बिगड़ जाए | मै हल्के गुस्से में बोला – तो यूँ कहो ना कि अपना बेटा ही तुमको आजकल चोद रहा है ……फिर बेटे के दोस्त से चुदवाने कि क्या जरूरत है | मेरे मन में आया कि मोबाइल में कैद विडियो के बारे में बताकर रंडी को रुला रुला के चोदता हूँ …फिर सोंचा पहले धमकी देके ही देख लेता हूँ ,फिर मै बोला – ठीक है ……मादरचोद वरुण का ही गांड मारूंगा | वो दौड़कर मुझसे लिपटती हुई बोली – अरे बेटा नहीं …..मेरी गांड मार ले …..मेरी बुर चोद ले ……लेकिन प्लीज …..मेरे बेटे का नाम न ले …………………………..प्लीज | और तुरंत घोड़ी बनकर अपनी साडी और पेटीकोट कमर तक उठा ली , अब उनकी बुर और गांड दोनों मेरे सामने थी …मरवाने को तैयार …….च्वाइस मेरी थी क्या मारूं ?…? हांलांकि इसमें आंटी कि चुदने कि ललक से ज्यादा मज़बूरी नजर आ रही थी ,पर फिर भी मैंने आंटी को अपनी समझ से आखिरी बार कसकर बजाया और फिर निकल आया | एक दिन बाजार में घूमते समय मैंने अपने एक अन्य मित्र राहुल को एक बहुत ही खुबसूरत मॉडल टाइप लड़की के साथ शौपिंग करते हुए देखा | जब मैंने छुपकर पीछा किया तो देखा कि…. वह, लड़की के साथ अपने घर चला गया | जरुर वो रिश्तेदार होगी , मैंने सोंचा |
जब मैंने राहुल से अगले दिन इसका जिक्र छेड़ा, तो पता चला कि वो तो उसकी अपनी बड़ी शादीशुदा बहन है जिसकी शादी अभी छह महीने ही हुई है और उसके पति को ( जो सॉफ्टवेयर इंजिनियर है ) अभी-अभी अमेरिका कम्पनी के प्रोजेक्ट पर एक साल के लिए जाना पड़ गया है ……इसलिए शालिनी अपने मायके आकर रह रही है | मेरे शैतानी दिमाग ने अपना रंग दिखाना शुरू किया ……आह ..क्या माल है ……….. थोड़ी चुदी हुई …………..पर थी पूरी चुदासी, थोड़ी लंड खाई हुई , अगले साल तक लंड की प्यासी | चुदने को बिलकुल तैयार माल थी | जरुरत थी तो…… थोड़ी घनिष्ठता की …..अपने हलब्बी के दीदार कराने की …..और आखिर में थोड़े एकांत की …………………………मै पहले स्टेप पर चल पडा …राहुल से दोस्ती बढाई और उसके घर आना जाना शुरू कर दिया | छोटा परन्तु थोडा संपन्न परिवार था , राहुल का | पापा बिजनेसमैन थे ..मोटर ऑटो पार्ट्स का दूकान था उनका , राहुल की मम्मी का तीन साल पहले गुर्दे के कैंसर के कारण निधन हो गया था | घर में राहुल , उसकी बड़ी दीदी शालिनी , उसकी छोटी बहन गुड्डी (जो राहुल से दो साल छोटी थी और दसवीं में पढ़ती थी) के अलावा केवल दादी(जो हमेशा घुटने के दर्द से परेशान रहती थी ) रहती थी | हालांकि गुड्डी भी सुन्दर थी लेकिन जबरदस्त माल तो उसकी बड़ी बहन शालिनी थी …ये बड़ी-बड़ी आँखे ….लम्बे रेशमी सिल्की बाल …भरे -भरे गाल, जिसमे हंसने पर गढ्ढे पड़ते थे …कमल पंखुड़ी सा रसीले होंठ ( जिसे हमेशा चूसते रहने या चाटते रहने का मन करता था )….लम्बी सुराहीदार गर्दन …उसके नीचे उसकी सुडौल …एकदम परफेक्ट राउंड बूब्स ( जिसके गठिलेपन का एहसास कपड़ों के ऊपर से भी होता था )…उसके नीचे बिलकुल समतल पेट (जिसके मध्य स्थित मजेदार नाभी..जिसे मैंने देखा तो नहीं था पर हर रोज उसमे उन्लिपेलन की कल्पना करता था )….और अंत में उसके लम्बे लम्बे पैर…जिसके जोड़ पर स्थित उसकी मस्तानी …चूत…जिसकी कल्पना करके मै पता नहीं कितनी बार सरका मार चूका था|
कुल मिलाकर गजब की जानमारू थी | मै हर रोज लगभग दो-दो तीन-तीन घंटे राहुल के घर गुजारता , वहां पढ़ाई के अलावा राहुल और उसकी बहनों के साथ कैरम ,लूडो और ताश खेलता | कॉलेज में मै राहुल को सेक्सी और गंदे-गंदे चुटकुले सुनाता | धीरे-धीरे उसका इंटरेस्ट भी सेक्स की तरफ बढ़ने लगा | एक दिन मैंने उसे मैंने मस्तराम की बुक ‘ बंद दरवाजे ‘ पढने को दिया , उसमे भाई बहन की सेक्स की कहानियाँ खुल्लम – खुल्ला लिखा हुआ था | अगले दिन ही वो बुक मुझे लौटाते हुए कहा – यार ! इसमें तो सारी हदे पार कर गई है | मै उसे एक और किताब देते हुए कहा – यार, उसमे तो कुछ भी नहीं है …इसे पढो ….इसमें एक बेटा अपनी माँ को और एक बाप अपनी बेटी को कैसे चोद रहा है | वो तुरंत वो किताब अपने बुक्स बैग में रखते हुए घर चला गया | इसप्रकार वो भी कुछ दिनों में सेक्स किताबों का शौक़ीन बन गया | इधर धीरे धीरे मैंने उसके घर में पैठ बना लिया | फिर एक दिन राहुल बोला – राजन यार ! सेक्स किताबों में तो काल्पनिक बाते लिखी रहती है , भला हिन्दुस्तान में भाई – बहन … माँ -बेटा …और बहु -ससुर जैसे सम्बन्ध संभव है ? नहीं यार ….पॉसिबल नहीं है …लेकिन साला संबंधो का discription इतना उतेजक होता है कि पूछो मत ..यार , मै तो मुठ मार मार के थक चुका हूँ …अब तो बस असली बुर चाहिए ….चलो किसी रंडी के पास चलते है , थोड़े पैसे ही तो लगेंगे …मै दे दूंगा …बस अब मुझे ‘ बुर ‘ दिला| मैंने कहा – पागल हो गए हो क्या ? रंडीखाने जाकर बीमारियाँ मोल लेनी है क्या ?….सोंचना भी मत | हाँ , जहां तक चूत का सवाल है , वो मै दिला दूंगा | वो उत्साहित होता हुआ बोला- वाह यार ! तू तो कमाल कि चीज हो …कोई पटा रक्खी है क्या ? यार प्लीईईज ……मुझे भी दिलवा दो न….फिर वो मुझे खुशामद करने लगा | मै थोड़ी देर चुप रहा , फिर बोला – अच्छा ये बता ! तुम्हे सेक्स कहानियों में बिलकुल सच्चाई नहीं लगती |
उसने बोला – बिलकुल नहीं | मै बोला – नहीं यार , ऐसी बात नहीं है ….ये ठीक है कि सेक्स कहानियाँ प्रायः काल्पनिक होती है …..लेकिन पारिवारिक सम्भोग सम्बन्ध ( incest ) हिन्दुस्तान में निराली नहीं है ….. पश्चमी सभ्यता से प्रभावित भी नहीं है और ना ही नई है …..ये तो पुरातन युग से चली आ रही है ……..ये होते थे ….आज भी होते है ……हाँ , ऐसी बाते …ऐसे सम्बन्ध खुलकर सामने नहीं आते | राहुल बोला – तुम कहना क्या चाह रहे हो, मै समझ नहीं पा रहा हूँ | मै बोला – मै कहना नहीं, समझाना चाहता हूँ ……अच्छा एक बात बताओ – जब तुम भाई बहन की सेक्स की कहानियां पढ़ते हो तो तुम मुठ मारने पर मजबूर हो जाते हो , क्यों ? आह …भैया पेलो….. ..फाड़ दो मेरी बुर …जैसे विवरण पढ़ते हो , तब कहानी की नायिका की जगह क्या तुम अपनी शालिनी दीदी को स्थापित नहीं कर रहे होते हो …बोलो … चुप क्यों हो गए ? मैंने देखा राहुल का चेहरा तमतमाता हुआ लाल भभूका हो रहा था | फिर गुस्से से फूटता हुआ बोला – साले, तुम निहाइत ही गंदे किस्म के इंसान हो ….मेरी बहन पर गन्दी नजर रखता है …सर फोड़ दूंगा साले …समझ क्या रक्खा है ?(मै तो उसका चेहरा देखकर ही सकपका गया ….दांव उल्टा पड़ गया था ..अब मुझे फिर से संभालना था ) मैंने कहा – यार ! मैंने तो एक उदाहरण दिया था …तुम हो गए आग बबूला | तुमने मुझे चूत दिलाने की बात कही थी ….मै तो चूत का पता बता रहा था | वो फिर भड़का – तो क्या मै अपने घर में …. नहीं यार , मेरे घर में -मै जल्दी से बोला (बोलते समय मेरे दिमाग में मेरी ममेरी बहन रागिनी दीदी घूम रही थी जिसे मै चोद चुका था और शायद मनुहार करने पर मेरे दोस्त को भी दे देती ) ….क्या कहा तुम्हारे घर में ….राहुल चौंका – लेकिन घर में तो शायद…. केवल तुम्हारी माँ है मैंने कहा – अबे बहनचोद …..साले , तू तो सीधा मादरचोद बनाने की ख्वाइश रखता है ….साले , मेरी एक ममेरी बहन है जिसे मै कई दफा चोद चुका हूँ, इसलिए मै तुझे पारिवारिक सम्भोग सुख की विस्तृत जानकारी दे रहा था क्योंकि मैंने खुद भी ये सुख लिया है ….तू कहे तो मै तुझे भी उसकी दिलवा दूंगा |
दिलवा दे यार …दिलवा दे …राहुल अब मेरी मिन्नते करने लगा | लेकिन बेटा, मुफ्त में ही मेरी बहन चोदना चाहता है ….मुफ्त में इस दुनिया में कुछ भी नहीं मिलता | तो तू क्या पैसे लेगा ….राहुल मेरी तरफ अजीब निगाहों से देखता बोला नहीं बेटा , पैसा नहीं ….मै उसे लाइन पर आता देख झूमते हुए बोला – पैसा नहीं ….बहन के बदले बहन ……तू मेरी बहन चोदेगा तो मै तेरी शालिनी दीदी को चोदुंगा …साले , जरा अपनी बहन पर तरस खा …तेरा जीजा एक साल तक तो आने वाला तो है नहीं …वो अपनी चूत की गर्मी कैसे शांत करती होगी ..ऊँगली डाल के या मोमबत्ती डाल के ….अच्छा भाई है तू | राहुल फिर ऐंठा – यार तू तो अपनी बहन को कर चूका है इसलिए तुम्हे दिलवाने में कोई दिक्कत नहीं होगी , लेकिन मै तो दीदी से ठीक से बात भी नहीं कर पाता…..तेरे लिए कैसे पटाउंगा | मैंने कहा – तू उसकी चिंता मत कर ….अपने घर में ही मुझे किसी तरह उसके आस-पास रहने का मौक़ा बार – बार निकाल … बाकी सब मै संभाल लूंगा …..जब ग्रीन सिग्नल होगा तो मुझे उसके साथ बिलकुल एकांत की व्यवस्था तुझे ही करनी पड़ेगी| आस- पास रहने से तू दीदी को पटा लेगा ……राहुल के स्वर में अनिश्चितता का पुट था – अगर दीदी नहीं तैयार हुई या झिड़क दी तो मुझसे कुछ आशा मत करना ….लेकिन मुझे तेरी बहन की चूत तो मिलेगी न ? मै बोला – तू निश्चिन्त रह …..पहले तू ही लेगा ……मुझे तेरी बहन की चूत मिलती है या नहीं …ये मेरी किस्मत | अब राहुल के घर मै बेधड़क जाया करता और खेल में चाहे ताश हो या कैरम मै और गुड्डी पार्टनर बनते और आमने सामने बैठते और शालिनी दीदी को हमेशा मेरे बगल में बैठती | खेल -खेल में ही कई बार कई बार बॉडी पोज बदलने में कई बार जानबूझकर अपने हाथ -पैर से दीदी को स्पर्श करने का प्रयास करता और कई बार सफल भी रहता | जब भी मौका मिलता तो किसी न किसी बहाने उनकी सुन्दरता की तारीफ़ कर देता |
औरतों को भगवान ने अद्भुत शक्ति दी है ….वो आपके आँखों की भाषा और हरकतों से अपने प्रति पुरुषों की भावना समझ जाती है | शालिनी दीदी भी सब समझ रही थी …. तभी वो एक दिन छत पर खेल के बाद जब शाम ढल गयी तो गुड्डी चाय बनाने गयी और राहुल जानबूझकर अपने कमरे में चला गया तो शालिनी दीदी ने मुझसे पूछा – तुम्हारी तो ढेर सारी गर्ल – फ्रेंड होगी …बाते अच्छी बना लेते हो | मैंने निराशा जताते हुए कहा – एक भी नही क्यों ? कोई आप जैसा सुन्दर नहीं मिला न ..आप ही बन जाओ न मेरी गर्ल – फ्रेंड अरे बुध्धू मै शादीशुदा हूँ … शादीशुदा है तो क्या हुआ …मै आपको बहुत पसंद करता हूँ ….हमेशा आपके पास रहना चाहता हूँ (यह कहते हुए मै धीरे से उनके पास सरक गया)……आप है ही इतनी सुन्दर और मस्त कि…… खुदा भी रश्क करता होगा (यह कहते मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ लिया ) हूँ ……………….मुझमे इतना भी क्या है जो तुम दीवाने हुए पड़े हो … ये आप मुझसे पूछ रही हैं ……आईने से पूछिए (अब मै बिल्कुल उनसे सटते हुए उनके कान में धीरे से बोला) …….आपकी आँखे नशीली है ,आपके होंट रसीले है आपकी गोलाईयां तीर कि तरह चुभती है आपके प्यार कि बरसात में हम पुरे गीले हैं | (ये कहते हुए उनके पकडे मुलाएम हाथ को अपने ठनकते जूनियर पर दबा दिया और दुसरे हाथ से उनके द्वय पृष्ठ उभारों में से एक को पकड़ कर दबा दिया) आह………………(एक महीन मादक ध्वनि निकली और वो मेरा हाथ घुड़ाकर नीचे भाग गयी ) अपनी जल्दबाजी पर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था …पर अब क्या कर सकता था ……हालांकि हाव भाव से लगता था कि वो नाराज नहीं थी , लेकिन औरतों का क्या भरोसा …..तभी मेरी नजर शालिनी दीदी के मोबाइल पर पडा जो ऊपर टेबल पर ही रह गया था ……मेरे मन में एक आशा जगी …..जो होगा देखा जाएगा , दीदी को अपना हथियार तो दिखाऊं …….फिर मैंने अपना एक मुठ मारता हुआ विडियो क्लिप अपने मोबाइल से उनके मोबाइल पर ब्लूट्रुथ से स्थान्नान्त्रित कर दिया और फिर घर चला आया |
मै फैसला कर चुका था ….आर या पार | मैंने एक कागज़ पर साफ़ साफ़ लिखा – मै तुम्हे बहुत चाहता हूँ , मुझे लगता है की तुम भी मुझे चाहती हो …मै तुम्हे बाहों में भरना चाहता हूँ ….अगर सचमुच तुम भी मुझसे प्यार करती हो तो कल ११ बजे मेरे घर चली आना …मेरा घर तो तुमने देखा ही है….तुम्हारे हुश्न का दीवाना राजन | शाम जब मै राहुल के घर पहुंचा तो बाहर एक पडोसी का बच्चा खेल रहा था , मुझे खुद जाकर शालिनी दीदी को ‘प्रेम कम चुदाई निमंत्रण पत्र ‘ देने से अच्छा बच्चे के हाथ से भिजवाना ठीक लगा , इसलिए बच्चे को समझाकर पत्र को राहुल की बहन को देने के लिए उसके हाथ अन्दर भेज दिया और वापिस चला आया | सारी रात टेंसन में गुजरी …..कल या तो शालिनी दीदी की चूत मिलने वाली थी या सदा के लिए उनके घर के दरवाजे मेरे लिए बंद थे | अगले दिन सुबह से जैसे समय ही नहीं कट रहा था | जैसे ही मम्मी कॉलेज गयी , मैंने फ़टाफ़ट तैयारी शुरू कर दी | जैसे ही ११ बजने वाले थे मेरा दिल धडकने लगा …क्या सचमुच शालिनी दीदी आएगी …उसके जैसी सुन्दर और गदराई लड़की की चूत कैसी होगी …कसी होगी या फटी होगी …….क्योंकि ऐसी औरत का पति बिना उसकी फाड़े मानेगा भला | मेरी कसमसाहट जारी थी कि दरवाजे पर बेल बजी
थोड़ी देर बाद मैंने धीरे से कहा .- .दीदी , आप और जीजाजी बहुत अच्छे हो , लेकिन ………………… लेकिन क्या ? ………..दीदी उत्सुकता से पूछी देखिये आप दोनों मेरी बहुत मदद कर रहे है , इसलिए आपको सच्चाई बताने को दिल कर रहा है ……. लेकिन क्या ? उन्होंने दुहराया मैंने गहरी सांस लेते हुए कहा -आपको पता है …….आपके मायके में सब गड़बड़ हो रहा है ………बल्कि यूँ कहें की वर्वादी के कगार पर खडा है …….. साफ़ साफ़ कहो , पहेलियाँ मत बुझाओ …….दीदी आशंकित होते हुए बोली मैंने थोड़ा पॉज लिया और रुक रुक कर बोलने लगा , जैसे बताते हुए डर रहा हूँ ……………. सुनो दीदी …..है तो ये बहुत ही शर्मनाक , लेकिन ……………………….( फिर पॉज) लेकिन क्या ?? …………….(दीदी अधीर हो रही थी ) लेकिन ……….आप्पकी माँ का ……अपने बेटे के साथ …….वासनात्मक सम्बन्ध है …………………… ( शीला आसमान से गिरी …… उसके चेहरे पर कुछ ही क्षणों में कई रंग बदले ……….फिर रोद्र रूप में बहुत ही कठोरता से बोली ) तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी घिनौनी , गन्दी और झूटी बाते कहने की ….गंदे लड़के ! अभी के अभी निकल जाओ मेरे घर से …… चूँकि ऐसी प्रतिक्रया प्रत्याशित था , इसलिए मै घबराए बिना बोला- मेरी हिम्मत इसलिए हुई कि यह बात झूटी नहीं है और न ही मै आपके परिवार का बदनामी चाहता हूँ …….बल्कि मै आपके परिवार का शुभचिंतक हूँ …………इसलिए अभी तक आपका परिवार बदनामी के लोक लाज से बचा है …………वरना मुझे क्या जरुरत थी आपको बताने की…दीदी ………………………………………..(उनको चुप देख मेरा हौसला बढ़ा ) अगर सम्बन्ध थे भी तो वो घर की चारदीवारी में ही रहना चाहिए ……….लेकिन यह बात घर की सीमा लांघ चुका है …….और इस बात को घर से बाहर किसी और ने नहीं वरुण ने ही किया है ……. ………..उसने अपनी मम्मी के साथ सेक्स का विडियो बनाया और उसे अपने मोबाइल में सुरक्षित रखा ………वह विडियो क्लिप अनजाने में ही उसके एक और मित्र के हाथ लग गया ……….अब वह आंटी को ब्लैकमेल करना चाहता है ………..उसे दोनों चीज चाहिए – पैसा भी और आंटी का जिस्म भी …….. लेकिन साला सामने आने से डरता है कि कहीं पुलिस का लफडा न हो जाए ………..इसलिए साले ने क्लिप की एक कॉपी मेरे मोबाइल पर ट्रान्सफर किया और बोला तू वरुण के घर आता जाता रहता है , अब तू ही आंटी को जाकर विडियो दिखाओ और उनको बोलो मुझे पचास हजार रुपयों के साथ आंटी कि एक पूरी रात चाहिए ……हालांकि मैंने उसे झिड़क दिया था कि मुझे इस पचड़े में क्यों फसा रहे हो तो मुझे धमकी देते हुए बोला कि अगर नहीं करेगा तो मै ये विडियो क्लिप इंटरनेट पर अपलोड कर दूंगा ……फिर वरुण और उसकी मम्मी के साथ साथ तू भी फ़ास्ट फ्रेंड होने के नाते बदनाम होगा ……..अगर मेरा काम किया तो तुम्हे दस हजार रूपये भी दूंगा ……..तुम्हारा काम सिर्फ आंटी को ये क्लिप दिखाकर मेरा डिमांड पहुंचाना है ………………. इतना कहकर मै चुप हो गया था …………..फिर गहरी सांस लेकर बोला – अगर विश्वास न हो तो ये विडियो देखिये …..मैंने विडियो चलाकर दीदी को थमा दिया , जिसमे .मैंने आंटी की आँखों पर पट्टी बांधकर चोदते हुए फिल्माया था ……….जिसमे न तो मेरा चेहरा था और ना ही मेरा स्पष्ट आवाज …………था तो .बस आंटी का नग्न जिस्म और चुदास भरी कराहट …………आह वरुण बेटे ………..ऐसे ही पेलते रहो ……..फाड़ दो आज अपनी माँ की बुर ………………. क्लिप देखने के बाद दीदी सर पकड़कर बैठ गयी और फिर जैसे अपने आप में बडबडाने लगी ……..गड़बड़ तो लग ही रहा था , वरुण सारा दिन मम्मी के पीछे पीछे ही घूमता रहता था और मै समझती रही कि यह माँ बेटे का ममता भरा प्यार है ……..हाय मम्मी , तूने ये क्या किया ?……….( और सुबक सुबक कर रोने लगी ) थोड़ी देर बाद जब दीदी अपना सर उठाई तो चेहरा आंसुओ से तर था , फिर वो अपने आंसूं पोछते हुए दृढ़ता से बोली – उस लड़के को पैसा ही चाहिए तो वो मै आज ही दे देती हूँ , जाकर उसे दे देना …..लेकिन तुम दोनों को यह क्लिप डिलीट करना पड़ेगा ………. दीदी , आप मेरी चिंता न करे ….लीजिए यह क्लिप तो मै अभी डिलीट कर देता हूँ ……( मैंने डेस्कटॉप पर विडियो कॉपी किया हुआ था )……..मुख्य समस्या तो उस कमीने कि है …..सिर्फ पैसे कि बात मै उससे पहले भी कर चुका हूँ …….पर साले को पैसे के साथ आंटी भी चाहिए ………वैसे , आपके कहने पर मै दुबारा बात कर लेता हूँ ……….. लौटकर मै झुट मुट का नाटक करते हुए बोला – नहीं दीदी रहने दो …..ये नहीं हो सकता…. क्यों ? वो माना नहीं ……दीदी निराशात्मक स्वर में बोली दीदी , साला पूरा कमीना है ……पैसे के साथ उसे जिस्म की एक रात चाहिए ही चाहिए …..कुत्ता कहता है आंटी नहीं तो उसकी बेटी ही सही ……….
दीदी छोड़ो , आप क्यूँ इस लफड़े में पड़ते हो …..जिसने किया है वही भरेगा …..मै वहीँ जाकर देखूंगा की क्या हो सकता है ……. नहीं राजन ………तुम इस विडियो को किसी भी हालत में मेरी मम्मी को नहीं दिखाओगे …….जाने किस बहाव में आकर गलती कर चुकी है , अगर उसे पता लग गया कि यह बात सार्वजनिक हो चुका है तो वो आत्महत्या भी कर सकती है …..और बात फैलने कि देर है , जैसे ही इनको ( जीजाजी को ) पता लगेगा तो वो मुझे घर से निकाल देंगे ….फिर मै तो कहीं कि नहीं रहूंगी ……….इसलिए ( गहरी सांस लेते हुए )……….बहुत सोंच – समझकर कह रही हूँ – मुझे उस लड़के की सारी शर्ते मंजूर है ……पुछो उससे , कैसे करना है ( मेरा मन बल्लियों उछलने लगा ) मैंने भरी मन का दिखावा करते हुए मोबाइल पे नंबर डायल करता हुआ कमरे से बाहर निकल गया …….और लौटकर बड़े बुझे मन से बोला – दीदी , वो पूरा कमीना है …….साले को सबकुछ चाहिए भी …पर सीधे सामने आने से डरता भी है …….पूछ रहा था की मै कोई जाल तो नहीं बिछा रहा हूँ ……….अगर ऐसा नहीं है तो पहले मै आपके साथ विडियो बनाऊं तब वो मानेगा ……….दीदी , मैंने साफ़ मना कर दिया है ये बोलकर कि – साले , एक क्लिप से तू इतना ब्लेकमेल कर रहा है …एक और विडियो देकर हमें मरना है क्या ? तो वो कमीना कह रहा था कि विडियो मुझे देना मत …..सिर्फ दिखा देना ताकि मुझे तस्सल्ली हो जाए कि कोई ट्रैप नहीं है ……अगर विडियो बनाने को आप तैयार न हो तो ऑडियो भी सुना दे तो काम चलेगा …….क्योंकि ऑडियो से ब्लैकमेल नहीं हो सकता परन्तु उसे तसल्ली हो जाएगा …………. हूँ ……. नहीं दीदी, मै ये नहीं कर सकता ….. दीदी उठकर आलमारी से पैसे निकालकर मेरे हाथों में रखते हुए बोली – हमारे पास कोई चारा बचा है क्या ?….. मै दस हजार लौटाते हुए कहा – मेरे हिस्से के पैसे तो आपके ही है , रख लीजिये ………और हाँ , हम विडियो नहीं ऑडियो बनाएंगे वो भी बिना कुछ किये ……….आप कागज़ और एक पेन दीजिये ……….मै कागज़ पर लिख लेता हूँ जो हमें बोलना है ………हम अगल बगल बैठकर सिर्फ पढेंगे परन्तु उस हरामी को लगेगा की हमने सेक्स किया है …………….
दीदी खुश हो गयी , उसे लगा की इस तरह कम से कम मेरे सामने तो उसकी इज्जत रह जाएगी ……फिर बोली – राजन भैया , तुम बहुत अच्छे लड़के हो ……( परन्तु कहाँ …..मेरे जैसा शातिर तो ढूंढे ही मिले ………मैंने कागज़ पर मजबून लिखकर दीदी के हवाले कर दिया और धीरे से उनके बगल में लेट गया ……….अब दीदी ने पढ़ना शुरू किया ……….मैंने अपना मोबाइल ओन करके बीच में रख दिया …….) भा….भाई…….. ये क्या कर रहे हो ……मेरी चूं….चुंची (दीदी चुंची बोलने में हकला गयी ) क्यों दबा रहे हो …… कमाल करती हो दीदी , तुमने ही तो कहा था की जीजाजी इसे ठीक से नहीं दबाते …….देख अभी जीजाजी नहीं है …..अभी तो आराम से दबवा ले ……… .आह…..तो आराम से दबा न ……….. आउच …….इतनी बेदर्दी से क्यूँ मसल रहा है भाई …….आखिर बहन हूँ तुम्हारी …….अरे ……अरे ……धीरे से खोल न …….ऐसे जोर से खींचेगा तो…… मेरी ब्लाउज फट जाएगी ………रुक मै खुद खोल देती हूँ ……….. दीदी , तुम्हारी चूंचियां तो लाजबाब है …….मन करता है की ……….( मै धीरे से दीदी के कान में बोला ) क्या मन करता है …….बोल न…… मन करता है कि………दिन रात इन मदमस्त चूंचियों को चूसता ही रहूँ …… तो चूस न ……..मै कहाँ मना कर रही हूँ ……….आउच ……..भाई, मैंने चूसने के लिए बोला है …..काटने के लिए नहीं ……तू दांतों से क्यूँ काट रहा है …….अगर तेरे जीजाजी ने निशान देख लिया तो मुझे मार मार कर घर से बाहर निकाल देंगे ……. ये भी तो हो सकता है कि घर से बाहर निकालने के बजाय चोद-चोद कर तुम्हारी चूत का भुरता बना दे कि साली मै नहीं दबाता हूँ तो औरों से कटवाती है ……ठहर रांड , मै आज तेरी बूर का बाजा बजाता हूँ ….. काश ! ऐसा होता ……मुझे चोदते समय उनको ज़रा सा भी जोश आ जाता , तो मेरी लाइफ़ बन जाती …….वो तो बस मेरी नाईटी उठाते है और अपना लं …लंड मेरी बू ….बूर (लंड और बूर बोलने में वो फिर हकलाई) में धांस देते है ….और आठ दस धक्के मारकर , अपना माल झाड़कर सो जाते है …… दीदी , जीजाजी क्या पैंटी उतारने का भी कष्ट नहीं करते ……… अरे मेरे भोले भाई ……घर में मै पैंटी नहीं पहनती ……. दीदी ! ……..तो क्या अभी भी तू नीचे से नंगी है ……. हाँ , मेरे भोले भाई …….मै नीचे से पूरी नंगी हूँ उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म…………………. ( मैंने देखा अब शीला दीदी पर वासना पूरी तरह चढ़ गया था और मेरे लिखे पेपर पढने में अब इंजॉय कर रही थी ) एक बात पूछूँ दीदी …… क्या ?……… मुझे अपनी रसीली बूर के दर्शन नहीं कराओगी……. अगर मै ना भी दिखाऊं तो क्या तुम मेरी बूर देखे बिना मान जाओगे ……. अरे दीदी ….ऐसा मत बोलो …….अब तो तुम्हारी बूर देखे बिना पागल हो जाउंगा …… तो हो जाओ पागल ……मै नहीं दिखाती …….( मैंने पेपर में लिखा था अब पेट के बल लेटकर चुतर उचकाना है ) दीदी अब तक तो बैठी बैठी पढ़ रही थी ….
अब सचमुच पेट के बल लेट गयी और साडी सहित अपने चुतर हवा में थोड़ा उठा दी ….. ( इसके बाद पेपर के अनुसार , दीदी को सिर्फ आँ…..उं…….. उफ्फ….इस्स्स….आउच……इत्यादि आवाज निकालने थे ऑडियो के लिए ताकि सुनने वाले को महसूस हो कि अब मै दीदी को जबरदस्ती पकड़ कर चोद रहा हूँ …..लेकिन मै अब बिना लिखा बोलना शुरू किया ताकि पता चल सके कि दीदी इस सेक्स गेम में कितना इन्वोल्व हुई है ) दीदी …पागल कुछ भी कर सकता है ….अगर मै कुछ कर दूँ तो फिर मुझे कुछ मत कहना …. यही तो देखना चाहती हूँ कि पागल कया कर सकता है …… तडाक……..( मैंने सचमुच उसके उभरे चुतरों साडी के ऊपर से ही पर एक तमाचा जड़ा ) आउच ……( पहली बार सच्ची दर्द कि कराहट निकली )………मुझे मार क्यूँ रहे हो …… पागल हूँ न ……और तू ने ही मुझे पगलाया है ………अब सह मेरा पागलपन …….. तड- तड …तडाक – तडाक ……..(मैंने तीन चार तमाचे पूरी ताकत से जमा दिए ) अब दीदी सचमुच सुबक सुबक कर रोने लगी …….. क्या , ज्यादा जोर से लग गए दीदी ….. ( उनके बगल में लेटकर मैंने उनके चुतरों को सहलाते हुए पूछा ……जैसे ही मैंने चुतरों को सहलाते सहलाते उनके गांड के दरार में ऊँगली फिराई …दीदी के सारे शारीर में कनकपाहट दौड़ गयी ….धीरे धीरे चुतरों को सहलाते हुए मै दीदी की साडी और पेटीकोट ऊपर खींच रहा था ….थोड़ी देर में मेरी हथेली उनके नंगे चुतर को सहला रहे थे ….और दीदी दर्द और आनंद से सराबोर आँखें मूंदे पड़ी थी ) सौरी ……घबराओ मत दीदी ……मै प्यार से तुम्हारा सारा दर्द आनंद में परिवर्तित कर दूंगा ……ये कहते हुए उठकर मैंने दीदी के नंगे चुतरों को देखा ……मेरे हाथ के उँगलियों के लाल निशान स्पष्ट थे …….मै झुककर निशानों को चूमने लगा … दीदी अब उतेजना में कांपने लगी थी ……..अब मै झुककर गांड की तरफ से ही उनकी बूर चाटना प्रारंभ कर दिया ……..आना दीदी की दर्द भरी कराहट वासनामयी सिसकी में बदल चुकी थी ………. इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स फिर मैंने बूर चुसना छोड दिया और दीदी को कमर पकड़कर सीधा पलट दिया ….लेकिन बुर कि एक झलक मात्र ही मिल पया था कि दीदी शर्म से पेटिकोट नीचे कर अपना बुर ढक ली ….मुझे गुस्सा आ गया और मैंने पेटिकोट के गैप में हाथ डालकर जोर से खींचा ….. चर्र्र र र र र्र्र ………… पेटीकोट आधी फट गयी …………..दीदी चिल्लाते हुए मेरे सीने पर मुक्का मार रही थी ……कमीने, तूने मेरा पेटीकोट फाड़ दिया ………
फटेगी ही …..थोड़ा दिखा के फिर ढकती क्यों है ………………..कहते हुए मै फटे पेटीकोट को दोनों जाँघों की तरफ खींचते हुए उनकी खुली और चिपचिपी बुर में अपनी दो दो उंगलियाँ पेलना शुरू कर दिया ………….दीदी पूरी तरह चुदासी हो चुकी थी और उनके मुंह से अस्पष्ट आवाजें आ रही थी ……आं………….उ .म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म ………………….. इधर मै दुसरे हाथ से अपना पैन्ट खोल चुका था और कच्छा सरकाकर अपने हाथों से ही अपना लंड मसल रहा था …………….फिर मै उनके जाँघों के बीच बैठ गया और उनकी अधफटी पेटीकोट को पूरा फाड़ा और उनके चूत पर अपना लंड दो चार बार पटका ……..मेरे लंड की सख्ती का अंदाजा दीदी को हो चुका था और इससे पहले की वो हाथ बढ़ाकर मेरा लंड टटोले …………मैंने अपना लंड दीदी के चूत के मुहाने पर रखकर एक जोरदार झटका मारकर अन्दर कर दिया ……जो चूत से बहते चिकनाई से एक तिहाई तो झटके से अन्दर चला गया परन्तु बाकी लंड और चूत की मिसमैच के कारण जोर लगाने पर भी मुश्किल से ही इंच इंच आगे बढ़ पा रहा था ………….चूँकि मुझे उनके चींखने का पूरा अंदाजा था ….इसलिए मेरे हाथ उनके मुह पर ढक्कन की तरह पड़ चुके थे ……और उनके मुह से बस गूं..गूं …गूं …की आवाज आ रही थी …….इधर नीचे लगातार मेरा लंड उनके बुर को चीरता अन्दर घुसता जा रहा था ……………इसी तरह दीदी को दबोचे मै लगातार १५ मिनट तक उनको पेलते रहा और जब मै झड कर अपना लंड बाहर निकाला तो दीदी की आँख फटी की फटी रह गयी …………….हाय , कितना लंबा और मोटा है तुम्हारा ………मेरी तो फट गयी है ……और बैठकर अपनी चुदी हुई बुर निहारने लगी ………………… अगले दिन सुबह उठकर नहा धोकर तैयार हो गया | खाना खाने के बाद जीजाजी जाने से पहले, मुझे दोपहर कि गाड़ी पकड़ने के लिए एक बजे तक घर से निकाल जाने को समझाया और ऑफिस के लिए निकाल गए |जैसे ही दीदी दरवाज़ा बंद करके लौटी, मैने दीदी को आपने बाँहों में दबोच लिया और उनकी नाईटी उठाकर उनकी नंगी बुर सहलाने लगा | दीदी मुझे चूमते हुए बोली – कमरे में चल …..सब कुछ यहीं करेगा फिर मैंने दीदी को छोड़ दिया | दीदी कमरे की ओर चल पड़ी ….उनके चुतर मटक रहे थे … मैंने कहा ….दीदी , अपनी नाईटी पीछे से उठा कर अपनी गांड दिखाती चल …….दीदी ने फट से अपना नाईटी पीछे से उठा लिया और चुतरों को और मटकाती हुई कमरे में चली गयी …….मै अपना पैजामा ढीला कर चुका था और आज तो मैंने भी चड्डी नहीं पहना था ……..कमरे में पहुँचते ही मैंने दीदी को पीछे से पकड़ लिया ……खडा लंड उनकी गांड से टकराया …..उनके सारे शारीर में सिहरन दौड़ गयी …..फिर मैंने दीदी को पेट के बल बिस्तर पर गिरा दिया और उनकी पीठ पर सवार हो गया …..मेरे शर्ट के जेब से मेरा मोबाइल उछलकर बिस्तर पर गिडा…..मैंने उसे ऑन कर दिया , मै दीदी की नेचुरल moaning को रिकॉर्ड करना चाहता था ….. मै उनकी गर्दन चूम रहा था और नीचे से मेरा लंड उनकी गांड को ठोकर मार रहा था …..दीदी ने हाथ पीछे कर मेरा लंड पकड़ ली …वो शायद मेरे लंड से खेलना चाहती थी …….
अब मैंने दीदी को सीधा कर पीठ के बल कर दिया और बैठकर दीदी की बुर निहारने लगा ….दीदी मेरा लंड मुठिया रही थी ….. भाई , तुम्हारा लंड बहुत जानदार है ….जिससे तुम्हारी शादी होगी वो बहुत खुशनसीब होगी …..दीदी की खुमारी भरी आवाज सनाई पड़ी इस जानदार लंड को अपने मुँह में नहीं लोगी , दीदी ………………. हूँ…………………………………. फिर उनके लेटे लेटे ही उनके मुँह के दोनों तरफ पैर करके मैंने अपना लंड उनके मुँह में घुसा दिया …. गूं…गूं …गूं…. वो थोड़ा सा अन्दर लेती….सुपाडे पर जीभ फिराती ….थोडा चूसती और फिर लंड को बाहर कर गहरी सांस लेने लगती …..बहुत मोटा है तुम्हारा राजन …….. मेरे मजे में व्यवधान आ रहा था …..लंड चूसने में बिलकुल अनारी थी ……. फिर मैंने उसके बाल पकडे और लंड उसके मुँह में धांस दिया ….वो अपना मुँह बंद करने का प्रयास कर रही थी और मै जोर लगाकर अन्दर पेले जा रहा था …………अब मै उसका मुँह चोद रहा था …..उसके गालों में दर्द होने लगा था , इसलिए उसने पूरा मुँह खोल लिया था …..अब मै आधा लंड अन्दर बाहर कर रहा था …..उसके मुँह का लार मेरे लंड के अलावा उसके गालों पर भी भर गया था …….अब मेरा लंड उसके गले तक पहुँच रहा था …..वो चींख भी नहीं पा रही थी , पर पैर पटक पटक कर अपने दर्द का इजहार कर रही थी …..मुझे लगा कहीं बेहोश न हो जाए ………मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया …….दीदी जोर से खांसी …….और छाती पकड़कर गहरी साँसे लेने लगी |
जब थोड़ा नार्मल हुई तो अपना मुँह पोछकर मुझे एक थप्पड़ रशीद करते हुए बोली – मार ही डालोगे क्या ? सौरी दीदी ………मै पागल हो गया था …..और दीदी के बगल में लेटकर उनके गालों को चुमते हुए उनकी चूंचियाँ मसलने लगा ……..दीदी फिर उतेजित होने लगी …….दुसरे हाथ से मै दीदी के बुर में ऊँगली करना शुरू कर दिया …….पहले एक ऊँगली ….फिर दो ऊँगली एक साथ उनके बुर में अन्दर बाहर करने लगा ……..दीदी पूरी मस्ती में थी ……. अब लंड डाल न ….कब तक ऊँगली करता रहेगा …… अब मैंने दीदी के दोनों पैरों को फैलाया और लंड को बुर के मुहाने पर टिकाकर पेला ……………. आँ…….आँ ………….आँ …………….दीदी कराही ……….सच मुच ……तुम्हारा …..ब…बहुत ….मोटा….है …..रे….. एक बात बताओ ……तुम्हारे दोस्त का भी इतना ही मो …मोटा है क्या ? मुझे नहीं पता …..मैंने उसका देखा थोड़े ही है ……………क्यूँ दीदी ?……तुम्हे मोटे लंड पसंद है …….. मोटे और लम्बे लंड तो हर औरत का सपना होता है ……..लेकिन तुम्हारे जैसा लंड अगर उसका भी हुआ तो …..नहीं ……नहीं …..इतना मोटा दो दो लंड मै एक साथ कैसे सम्भालुंगी ………… अरे दीदी ……अपना लंड दीदी की बुर में पूरा पेलते हुए कहा ……..मैंने एक साथ चोदने की बात कभी नहीं कहा ….और ना ही उसने ऐसी डिमांड रखी है ……..लगता है तुम अपना गैंग- बैंग की कल्पना कर रही हो ………ऐसी बात है तो तुम्हारा सपना जरुर साकार होगा ……. अरे नहीं …..(दीदी का चेहरा शर्म और वासना से लाल हो चुका था ) मै तो इसलिए पूछ रही थी की अगर वो हरामी मुझे चोदेगा उस समय तुम खड़े खड़े देखोगे तो नहीं …..मै जानती हूँ ,तुम भी जरुर चोदोगे … अब तो जरुर चोदेंगे…….दीदी रानी ……सैंडबिच बनने के लिए तैयार रहो अरे नहीं …….दीदी चिल्लाई …..बाद की बात बाद में ……….उई माँ ……हाय तेरा मूसल मेरे पेट में ठोकर मार रहा है …..आह………….उई …………….छोड दे ….मत फाड़ मेरी बुर …………आह……………………. अब मै कहाँ रुकने वाला था …….दीदी की कराहट को नजरअंदाज करते हुए मै ताबड़तोड़ धक्का लगाए जा रहा था ….तभी दीदी अकड़ने लगी …..शायद झड रही थी ……भा……ई…………….जल्दी……से आ ………….मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी …………..प
र मै अभी झडनेवाला नहीं था …….पूरा कमरा फच ….फच ….की आवाज से गूंज रहा था …….मै दनादन पेलता रहा आधे घंटे तक .और फिर एक जबरदस्त हुंकार के साथ मेरा शारीर तनने लगा और मै झड़ने लगा ………इस दरम्यान दीदी लगभग ६ या ७ बार झड चुकी थी ……मल्टिपल ओर्गज्म का सुख शायद दीदी ने पहली बार भोगा था ……इसलिए मेरे झड़ते समय वो कसकर मुझे बांहों में भींच लिया और मुझे चूमने लगी …….नीचे मेरी पिचकारी दीदी के बुर में खाली हो रही थी …..फिर निढाल होकर मै दीदी के ऊपर से उतारकर बगल में लेट गया ………दीदी वैसे ही पड़ी रही … इसके बाद मैंने शीला दीदी को दो बार चोदा और एक बार गांड मारने का असफल प्रयास भी किया और फिर दोपहर की गाडी पकड़कर घर की ओर रवाना हो गया …..मेरे पास अपने कमाए चालीस हजार रूपये थे | रास्ते में राहुल को फोन करके बता दिया कि उसका काम हो गया है और अगले सप्ताह ही उसका कुंवारापन समाप्त हो जाएगा | कालेज में गर्मियों की छुट्टी शुरू हो चुका था परन्तु माँ को तो ऑफिस जाना पड़ता था ….हमारे मजे ही मजे थे | अगले दिन माँ के कॉलेज जाने के तुरंत बाद ही राहुल मेरे पास आ गया ….वो बहुत उद्विग्न था ….मैंने उसे ऑडियो सुनाया ….वो तो पागल हो गया ……उसने मुझे गले लगाया और बोला – यार तुम तो सचमुच गुरु हो …..गुरूजी , अब आप ही मेरी नैया पार लगाओगे |गुरु , लेकिन एक बात बताओ ….दीदीजी मुझे कमीना क्यूँ कह रही थी ……. साले …..तू उसे चोदने की फिराक में है …..तो तुझे कमीना नहीं तो और क्या कहेगी …….. अबे साले ….अपनी बहन तू खुद चुदवा रहा है और कमीना मुझे कह रहा है ……राहुल हँसता हुआ बोला हाँ…..अभी तू ठीक कह रहा है ….तेरी शालिनी दीदी की नमकीन चूत अभी मैंने देखा कहाँ है ……अब मै हँसते हुए बोला (राहुल की हँसी पर तुरंत ब्रेक लग गया ) थोड़ी देर बाद राहुल बोला – यार , जैसा तेरी दीदीजी ऑडियो में कह रही थी ….क्या तुम्हारा सचमुच बहुत बड़ा और मोटा है ? मैंने तुरंत अपना लोअर नीचे कर अपना गदहलंड….. जो ऑडियो सुनकर और शालिनी की बात छेड़कर खडा था दिखाते हुए बोला ….पता नहीं यार , लेकिन लडकियां और औरते ऐसा ही कहती है ……..
मेरा लंड देखकर राहुल सोंच में पड़ गया ……….. क्या सोंच रहा है राहुल ……अरे तेरी दीदी की फटेगी नहीं …..बल्कि उसे बहुत मजा आयेगा ….तू मत घबरा …. अरे नही …..मै तो सोंच रहा था कि कहीं तेरी दीदी के सामने मेरी भद्द न पिट जाए ……..( राहुल जल्दी से बोला ) (शायद मेरा लंड देखकर उसके अन्दर हीन भावना आ गया था ) मैंने कहा ……तू तो चोदने से पहले ही डर गया ….जो डर गया सो मर गया ……लंड छोटा बड़ा से कुछ नहीं होता …बस चोदने आना चाहिए (डर तो मै खुद गया था ….साला कहीं हमारे अदला बदली प्रस्ताव से मुकर न जाए और मेरे उसके घर जाने पर अपनी बहनों से चिपका न रहे ……..लेकिन………..गुड्डी तो इसके बंधन में अब नहीं रह सकेगी ……शेरनी को प्रथम मानव गंध मिल चुका है …..बिना खाए अब क्या मानेगी वो ? …..) न जाने किस सोंच में गुम राहुल ….अच्छा चलता हूँ ….कहकर घर से निकल लिया | अभी उसके गए आधे घंटे भी नहीं बीते होंगे कि दरवाजे कि घंटी बजी …….गुड्डी आयी थी ……..लेकिन साथ में शालिनी दीदी भी थी | ……..एक तरफ जहां शालिनी को देखकर हार्दिक खुशी हुई , वहीँ इस बात का अफ़सोस…….. की आज गुड्डी की चिकनी चूत देखने को नहीं मिलेगी | हम दोनों यहीं पास में शौपिंग के लिए आयीं थी ….काफी दिन हो गए थे , सोंचा तुमसे मिलती चलूँ ……शालिनी की आवाज मेरे कानो में संगीत की तरह पड़ी | मैंने ध्यान से देखा -शालिनी चुस्त सलवार सूट में थी और गुड्डी स्कर्ट -टॉप में …..काश ! आज मौक़ा मिल पाता | मैंने औपचारिकतावश दोनों को ड्राइंग रूम में बिठाया और खुद चाय बनाने चला गया | थोड़ी देर बाद किचेन में किसी ने मुझे पीछे से अपनी बाहों में भरा …..बाहें भरी भरी और पीठ पर चुभती चुंचिया मांसल थी ……ये गुड्डी नहीं हो सकती …..तो शालिनी ……………..मै रोमांच से गनगना गया ……….. इतने दिनों से कहाँ थे …..आग लगाकर घर आना भी छोड़ दिया ……चार दिन से जल बिन मछली की तरह तड़प रही हूँ ….. मै तुरंत मुड़ा और शालिनी दीदी को अपने सीने से लगाते हुए उन्हें चूमने लगा …….मै शालिनी दीदी के होंटों को चूमने लगा ….फिर कोमल पंखुरिओं पर लगे हल्के लिपिस्टिक को चूसने लगा …….उसने भी मेरे होंटों को अपने होंटों से दबा रक्खी थी …..
फिर मेरे मुंह में अपना जीभ ठेल दी , जिसे प्यार से मैंने चूसना शुरू कर दिया ….अब मेरे हाथ दीदी के पीठ से सरककर उनके उभरे नितम्बो पर जम गए थे , जिसे मै प्यार से हल्के हल्के दबा भी रहा था …..और नीचे मेरा लंड खडा होकर दीदी के बुर के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था …………….तभी …….. मुझे दरवाजे पर गुड्डी नजर आयी …..मेरे मुंह से निकला …………………..गुड्डी ……………………और हडबडाकर दीदी से अलग होने लगा ……शालिनी भी मुड़कर देखी……….चेहरे पर क्रोध का जलजला लिए गुड्डी खड़ी थी …..थोड़ी देर हम दोनों को इसी तरह देखती रही ….फिर पैर पटकते हुए ड्राइंग रूम में चली गयी …… गुड्डी को प्यार से समझाना पडेगा ……शालिनी बुदबुदाई ……. इधर मै चाय छानकर और ट्रे लेकर , दीदी के साथ ड्राइंग रूम में जाने लगा …….मन ही मन मै अप्रत्याशित हमले से बचाव की तैयारी कर रहा था …… कमरे में निःशब्द ख़ामोशी छाई थी…..गुड्डी खिड़की के बाहर देख रही थी ……कोई कुछ नहीं बोल रहा था …. चुप्पी को तोड़ते हुए दीदी बोली ….गुड्डी …क्या हुआ हुआ ? …..तुम इतनी अपसेट क्यूँ हो गयी ??….. ( गुड्डी मुड़ी…..गुस्से में बोलने के लिए मुंह खोला…परन्तु बोल नहीं पायी ….उसके कानो के पास की गालों की हड्डियाँ उठ बैठ रही थी …..लगता था जैसे गुस्सा पीने की कोशिश कर रही हो ……फिर मुंह फेरकर दुबारा खिड़की की तरफ देखने लगी ) थोड़ी देर बाद मैंने कहा – गुड्डी चाय पी लो ठंडी हो रही है …….वो फिर मुड़ी …..फिर वही गुस्से से तमतमाया चेहरा …….. चाय तो ठंडी हो जाएगी …….अपना कलेजा कैसे ठंडा करूँ ?…………गुड्डी सिंग मारते अंदाज में बोली देखो गुड्डी …….(अपने शब्दों में भरसक मिठास घोलते हुए मैंने सच बोलने का फैसला किया .. ) तुमने जो देखा है वो सच है , मै शालिनी दीदी से बहुत प्यार करता हूँ ……मैंने अपना तन मन इन्ही को दिया है …… और मेरे साथं क्या किया है …………………..दीदी , इसकी बातों को जरा भी कान मत देना ……..बहुत बड़ा जालसाज और फरेबी है …..इधर तुम्हारे साथ प्यार की पींगे बढ़ा रहा है और उधर मेरे साथ ………… ( शालिनी की प्रश्वाचक दृष्टि मेरी तरफ उठी ………मैंने अपना गांड फटता हुआ महसूस किया …..मेरे दोनों पैर अलग अलग नावों पर सवार थे और दोनों नाव बिपरीत दिशा में भागी जा रही थी ………….) गुड्डी ……मैंने तुम्हारे साथ कोई झूठा वादा नहीं किया है …….मैंने हडबडाते हुए तुरंत बोला …….
तुम्हरे हाथ जो पत्र लगा था वो मैंने तुम्हे नहीं शालिनी दीदी को लिखा था ……..और याद करो …….तुम्ही ने मुझे गले लगाकर मेरे ऊपर चुम्बनों की झड़ी लगा दी थी …..आखिर में मुझे प्रतिउत्तर में तुम्हारे साथ जुड़ना पडा था …आखिर मै मर्द हूँ ….तुम मुझे चूम रही हो तो मै कबतक अलग थलग रह सकता हूँ ……. ( गुड्डी का चेहरा उतर गया था ……लगता था जैसे आसमान से गिरी हो ….लेकिन सच यही था ) उसे चुप देख मेरा साहस बढ़ा ………लेकिन तुम इतना तो मानती हो न की इसके वावजूद मैंने तुम्हारे साथ सेक्स नहीं किया ……इसके लिए मुझे तुम्हारी दीदी की इजाजत लेनी थी ……… ( इस एक ही तर्क से जहां मैंने गुड्डी को निरुत्तर कर दिया , वहीँ शालिनी के मन में अपने लिए प्यार के साथ सम्मान भाव भी जोड़ लिया ) गुड्डी ….क्या ये सब सच है ? ( बेचारी गुड्डी क्या बोलती )……..तुम्हे थोड़ा सब्र करना चाहिए ….तू अभी बच्ची है …….. शालिनी ने धीरे से कहा मै अब बच्ची नहीं हूँ ….(गुड्डी अपना अविकसित सीना उभारते हुए बोली )…….और सब्र मुझे नहीं , तुम्हे करना चाहिए दीदी ……ये राहुल भईया के दोस्त हैं …..मेरे से ही थोड़े बड़े ….मै इनके साथ शादी करना चाहती हूँ ……पर तुम …….तुम तो आलरेडी शादीशुदा हो …..एक पति है तुम्हारा जिससे तुम जिस्म की ऐठन मिटा सकती हो …..मै कहाँ जाउंगी …बोलो … ( बहुत सटीक बोल रही थी गुड्डी …..मुझे लगा की शालिनी जबाब नहीं दे पाएगी …..लेकिन वो भी जबरदस्त हाजिरजबाब थी …..) जिसे तुम जिस्म की ऐठन कहती हो …….उसे लड़कियां दबा कर रख सकती है , लेकिन तभी तक जब तक मर्द का संसर्ग न हो ……..उसके बाद सिर्फ खाज ही खाज होती है …..जिसे मिटा भी मर्द ही सकता है ……..हाँ मै शादीशुदा हूँ …..लेकिन कहाँ है मेरा पति ? ……कब तक आयेगा मेरा पति ??……दिनों में ….हफ़्तों में ….महीनो में …सालों में ………….गुड्डी मेरी बहन ……तू अभी मर्द संसर्ग से बंचित है ….तू अपनी भूख दबा सकती है …..मै कहाँ जाऊं ……..इसलिय जब इसने मेरी तरफ हाथ बढाया तो मै खिंची चली आयी ………. लेकिन मै तो इनसे शादी करना चाहती हूँ , इस तरह तो ….गुड्डी प्रतिवाद पर उतर आयी थी | शादी …शादी का रट क्यूँ लगा रही है …दीदी उसकी बात बीच में काटते हुए बोली …….
अभी तेरी उम्र नहीं है शादी करने की ….. अभी ढंग से पढाई लिखाई कर ….अपना कैरियर बना …..फिर जिससे मर्जी हो शादी कर लेना ……..लेकिन हाँ , मै मौज मस्ती के लिए मना नहीं कर रही हूँ …..कुछ भी कर …….लेकिन ध्यान अपने कैरियर पर ही फोकस रख …… सच दीदी ….मै मौज मस्ती कर सकती हूँ न ….गुड्डी थोड़ा उत्साहित होती हुई बोली…. हाँ री बावरी हाँ …….चाहे तो अभी से शुरुआत कर सकती है ……..शालिनी मेरी तरफ इशारा करती हुई बोली अब मै गुड्डी की तरफ बढ़ते हुए बोला – गुड्डी ….अब तो दीदी ने भी इजाजत दे दी है …..आ मै तुझे मौज मस्ती कराता हूँ … ना बाबा ना ….गुड्डी सोफे से उठते हुए बोली …….मस्ती और आपके साथ ……आप बड़े शैतान हो ……नहीं …..और मुझसे बचते हुए भाग भागकर मुझे चिढाने लगी ….. और जब मै सोफे के पीछे जाकर उसे पकड़ने की कोशिश किया तो वो दरवाजे से बाहर भागी …..मै उसके पीछे भागा ….लड़की को स्कर्ट में भागते देख मेरा जूनियर पूरी ताकत से उठकर खडा हो गया था …..वो मेरे कमरे में घुस गई …..वहां उसने ज्यादा भागने की चेष्टा नहीं की ….फिर मैंने उसे पीछे से पकड लिया और बिस्तर पर गिरा कर उसके पीठ पर सवार हो गया ………और उसके बूब्स को दबाते हुए उसके गालों को पीछे से ही चूमने लगा और साथ ही अपना कमर हिलाकर उसके लगभग नंगी गांड के दरारों में अपना लंड अडजस्ट कर रहा था ……… वो मस्ती में हलके हलके कराहने लगी थी……. मै उसके होंटों को अपने मुंह में भरकर चूसना चाहता था ……इसलिए उसके ऊपर से उतरकर मैंने उसे सीधा पीठ के बल लिटा दिया और उसके बगल में लेटकर उसके मुँह के ऊपर झुककर उसके होंटो को चूमने -चूसने लगा ….दाए हाथ से उसके बाल सहला रहा था और बाएं हाथ को उसके पेट से फिसलाते हुए बूब्स तक ले जाकर उन्हें धीरे धीरे दबा रहा था …….लगभग ५ मिनट मै गुड्डी के होंटो को मस्त चूसता रहा ……..अचानक ……………उसने मेरे मुँह से अपना मुँह अलग किया और अपने होंटो को मादक ढंग से काटते हुए आँखे बंद करके मचलने लगी
…….आह…………ओह………………माआआआआआआ………… मै असमंजस में पड़ गया …अभी तो हौले -हौले सिर्फ मम्मे ही दबा रहा हूँ …..पर साली रांड… ऐसे मचल रही है , जैसे मैंने चूत की जड़ तक लंड पेल दिया हो …….फिर चूत का ख्याल आते ही मम्मे दबाना छोड़ मेरी निगाहें उसकी चूत की तरफ उठी .. अल्लाह ………मेरी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था ……… शालिनी दीदी बेड के किनारे घुटनों के बल बैठी हुई थी और गुड्डी के स्कर्ट को उपर कर ….उसकी चड्डी को साइड में खिसकाकर उसकी चिकनी चूत पर आहिस्ते आहिस्ते जीभ से चाट रही थी ……. चूत में घुसेड़ने के बजाय चूत के कपोतों के चारो तरफ हलके से स्पर्श करते हुए दीदी अपनी जीभ चला रही थी …..मै हतप्रद दीदी के कारनामे को देख रहा था ……अब मैंने दीदी के बालों में उँगलियाँ फिराई …….दीदी ने अपना सर उठाकर मेरी तरफ नशीली आँखों से देखते हुए फिर से अपनी लम्बी जीभ निकालकर गुड्डी की छोटी बुर की पूरी दरार में फिराया ….गुड्डी छट्पटाकर अपने मम्मे , टॉप के ऊपर से ही अपने दोनों हांथों से मसलने लगी …….उसकी सिसकी तेज हो रही थी और दीदी लगातार उसकी जांघो से लेकर बुर तक मेरी आँखों में देखते हुए अपनी जीभ से सहला रही थी …….फिर दीदी ने गुड्डी का स्कर्ट और पैंटी उतारकर उसे नीचे से नंगी कर दिया ………और मेरे देखते ही देखते दीदी ने बुर के उपरी दानो को अपनी जीभ से छेड़ना प्रारंभ कर दिया ….गुड्डी जोर से उछली और सिसकी …..उई माँ ……….. तब मैंने गुड्डी को फिर से पकड़ा और उसके मम्मे दबाते हुए उसके होंटों पर अपनी उँगलियाँ फिराने लगा …फिर मैंने अपनी छोटी ऊँगली उसके मुंह में पेल दिया …..गुड्डी मजे लेकर जैसे लंड चूसते है , चूसने लगी ……मै गनगना गया …….ऊँगली चुस्वाने में भी इतना मजा आता है …पहली बार महसूस किया ….सार शारीर रोमांच से भर गया तभी शालिनी दीदी ऊपर आकर , गुड्डी के मम्मों से मेरा दुसरा हाथ हटा कर उसकी उँगलियाँ अपने मुंह में लेकर चूसने लगी …….आह ….इतना आनंद मुझे कभी नहीं हुआ था ……….मजे से मेरी आँख भी मूंद गयी थी ……ऐसा कबतक रहा मुझे याद नहीं …मै तो अलग दुनिया में था और वहां से तब बाहर आया ……..जब दीदी ने मेरी उंगलियाँ चुसना छोड़ दिया …….फिर मैंने भी अपनी ऊँगली गुड्डी के मुंह से निकाली …….और गुड्डी के टॉप में ही पोंछ दिया ………..
तभी दीदी ने टोक दिया …..अरे नहीं…. टॉप ख़राब हो जाएगा …..इससे अच्छा है इसे निकाल दो …….फिर मैंने गुड्डी के टॉप को ऊपर खींचकर उसके सर से बाहर निकाल दिया …और दीदी ने उसके ब्रा का हुक खोलकर उसे पूरी तरह नंगी कर दिया …………..अब गुड्डी के दोनों कबूतरी आजाद होकर अपने पंख फडफडाने लगे थे ……. अब मै और दीदी गुड्डी के दोनों तरफ लेट गए और उसके एक एक मम्मे को पकड़कर निप्पलस को अपने मुंह से चूसने लगा…….. तभी मैंने देखा दीदी निपल्स चूस नहीं रही थी बल्कि उसके चारो तरफ अपनी जीभ चला रही थी और मुझे देखे जा रही थी ……. फिर मैंने दुसरा निप्पलस छोड़ दिया और दीदी जिस निप्पलस से जीभ से खेल रही थी उसी निप्पल के चारो तरफ मैंने भी अपना जीभ घुमाना शुरू कर दिया …….बीच बीच में मै और दीदी दोनों निप्पलस को चुभलाते चुभलाते एक दुसरे की जीभ को चुसना शुरू कर देते …. दीदी ने अपना हाथ गुड्डी के बुर पर फेरती हुई उँगलियों से उसके बुर को खोद रही रही थी …..इसलिए मैंने भी अपना हाथ बढ़ाकर गुड्डी की चूत से खेलना शुरू कर दिया परन्तु दीदी ने मेरा हाथ पकड़कर मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा ….ऊँगली अन्दर नहीं डालो…..सिर्फ दानो को छुओ और छेड़ो…… मै वैसा ही करने लगा ……… कमरे में गुड्डी की मादक सिसकारी फ़ैल रही थी ……..इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स ……ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह….. तभी पता नहीं दीदी ने क्या किया ………. गुड्डी जोर से चींखी और अपने बुर पर फिसलती हमारे हांथो को जोर से पकड़ी और अपने बुर पर जोर से दबा कर रगड़ी और झटककर अपनी बुर से अलग कर दिया ………मै उसकी चींख से घबराकर उसके मम्मे छोड़कर बगल से उठकर उसकी बुर की तरफ देखा ……..गुड्डी के चरमानंद का मदनरस एक पतली धार का शक्ल ले उसकी चूत से निकला ………… ये मेरे लिए आश्चर्यजनक चीज था …..उत्तेजना से चूत को भींगते हुए देखा था …..परन्तु धार के रूप में कभी नहीं देखा …. ये बात मैंने दीदी से पूछा ………..तब दीदी ने घोषणा किया की गुड्डी ने ‘ मूत ‘ दिया है …… गुड्डी शरमाकर अपनी पैंटी उठाते हुए बाथरूम की तरफ भागी
शालिनी दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी , मैंने दीदी को पकड़कर अपनी ओर खींचा और अपनी गोद में बिठा लिया और उनके बगलों से अपने हाथ निकालकर उनकी चूचियाँ दबाना चालु कर दिया , साथ ही उनकी गालों को अपने गालों से सहलाने लगा | दीदी आँखे मूंदकर मजे लेने लगी | दीदी …… उंह… दीदी तुम हमारे साथ बीच में कैसे शामिल हो गयी …जहां तक मुझे लगा था की गुड्डी तुमसे पर्दा करने के लिए ही दीवानखाने से भागी थी क्योंकि मेरे कमरे में वो बिलकुल इधर उधर नहीं की …. जरुरी था ….तुमसे ज्यादा मै उस हरामजादी को जानता हूँ ….जब तुम हमारे घर आओगे या मै तुम्हारे पास आउंगी तो वो मेरे साथ होगी ही ….. मै कभी भी अकेले बाहर नहीं निकल सकती ….फिर मै कैसे खुल के इंजॉय कर सकती थी इसलिए तो उसे इस खेल में शामिल करना जरुरी था …….. (दीदी अपना हाथ मेरे लंड पर लोअर के ऊपर से फेरकर उसे मुठिआने लगी , मैंने सोंचा …चलो किसी को तो इस बेचारे का ख्याल आया ) अब तक मै दीदी के समीज में पीछे से हाथ डालकर उसे दबा रहा था ….आह क्या मुलाएम चूचियाँ थी …. दीदी ने मेरा लोअर नीचे कर मेरा तना हुआ डंडा बाहर निकाल कर उसका स्ट्रेंथ चेक करने लगी …… वाउ …..क्या मस्त है तुम्हारा (शालिनी मेरी आँखों में झांकती हुई बोली ….उसकी आँखों में चमक थी ) दीदी, मेरे इस मस्ताने लंड ने तुम्हारी बूर को कई बार फाड़ा है ………..सपने में ……..कई बार तुम्हारे नाम की मुठ मार चुका हूँ ……… वो तो कई बार मै इअर फोन लगाकर तुम्हारे मुठ मारने वाली विडियो में सुन चुकी हूँ …….शालिनी दीदी ….शालिनी दीदी …ऐसे ही …बस ऐसे ही चूसती रहो …..और फिर झड़ते समय भी मेरा नाम ले लेकर चिल्ला रहे थे …उसी सीन ने तो मुझे तुम्हारी तरफ आकृष्ट किया है …… तो अब सपने को हकीकत में बदल दो न दीदी …… शालिनी मेरे गोद से उतरकर मेरे लंड की तरफ झुकी और सुपाडे पर एक चुम्मी ली ….फिर उसपर अपना जीभ फिराने लगी ….मै दीदी के बालों में हाथ फेर रहा था और धीरे धीरे अपना कमर उठाकर उनके मुँह में लंड ठुसने की कोशिश कर रहा था ……फिर दीदी ने लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी ….मेरे सारे शारीर में रोमांच की लहर दौड़ने लगा इधर दीदी तन्मय होकर चूसने में व्यस्त थी …मै दीदी के गांड पर सलवार के ऊपर से हाथ फेर रहा था …..फिर मैंने झटके से दीदी का सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार के साथ पैंटी को नीचे खिसकाकर उनकी नंगी गांड को सहलाया ….
आह जबरदस्त गांड थी ……ऐसी सुडौल और बिलकुल गोल गोल चुतर मै पहली बार देख रहा था …. मेरा लंड झटके देने लगा जिसे बड़ी मुश्किल से दीदी पकड़कर चूस रही थी ….दीदी चूसते चूसते डौगी स्टाइल में पीछे से अपना चुतर उठा दी ….. हल्की झांटों की झुडमुटों से झांकती दीदी की पनिआइ चूत मै पहली बार देख रहा था, जो चूतरों की गोल गुम्बदों की आड़ में छिपकर मुझे ललचा रही थी…….मैंने गुम्बदों को सहलाते सहलाते अपनी एक अंगुली पीछे से चूत में पेल दिया …… आउच ………दीदी चूसना छोड़कर एक बार चिहुंकी और फिर अपने मीनार सरीखे टांगो को फैलाते हुए गोल गुम्बदो के बीच गैप बनाकर लंड चूसने लगी …..अब मै आराम से उनके बूर में ऊँगली कर रहा था …..बहुत मजा आ रहा था …..मजे से मेरी आँख मूंद गयी ….. मै आँख बंद कर मजे ले रहा था कि एक और सिसकारी सुनकर मैंने अपना आँख खोला ….. उधर दरवाजे पर गुड्डी पैंटी में खडी थी और अपना बूब्स मसलते हुए हमें देख रही थी ….. मैंने पास आने का इशारा किया …… जैसे ही वो पास आयी मैंने उसके पैटी को नीचे खींचकर उसकी बिना बालों वाली सफाचट चूत पर दुसरा हाथ फेरना चालू कर दिया और झुककर उसके मम्मो पर मुँह लगा दिया ……. मेरे दोनों हाथ दो बिभिन्न चूतों पर थिरक रहे थे ….एक के मुँह में मेरा लंड था और दुसरे की चूचियाँ चूस रहा था …….अप्रतीम आनंद …….ओह ……….जिन्दगी के सबसे अनोखे पल से गुजरने लगा……………………………………तभी दीदी चुसना छोड़कर उठी और अपनी समीज उतारती हुई मेरे सीने पर बैठ गयी और अपनी बूर उभारकर जंगली बिल्ली की तरह मेरे मुँह पर घिसने लगी और अपनी ब्रा खोलकर फेंक दी …. गुड्डी हडबडाकर दूर हट कर अपनी दीदी को देख रही थी …. मै अपना जीभ निकालकर दीदी की बूर चाटने लगा ……….दीदी जोर जोर से अपनी बूर घिस रही थी …..मैंने जीभ अन्दर पेल दिया ….वो चिल्लाई …….आह …..और फिर शांत होने लगी ……वो झड चुकी थी और उनकी चूत का नमकीन पानी मेरी जीभ तर कर रहा था ……
थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को चित लिटा दिया ….अब वह पूर्ण नग्न थी …. मै उसकी सुन्दरता निहारने लगा …फिर झुककर उनकी चूचियां बारी बारी से चुभलाने लगा …..उधर गुड्डी दीदी के जाँघों के बीच घुसकर मेरी चाटी हुई बूर दुबारा चूसने लगी … दीदी फिर गर्म होने लगी …..अब उनके हाथ मेरे सर पर फिर रहे थे ….. मैंने गुड्डी को उनकी बूर से हटाया और अरसे से अपनी बारी का इन्तजार करते अपने खड़े लंड को दीदी की बूर में चांपा … दीदी चिल्लाई ……इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स ……………..अहिस्ते से भाई ………ये किसी रंडी की नहीं तेरे दोस्त की बहन की बूर है ……फाड़ो मत प्लीज ……. फिर मैंने अन्दर ठेलना रोककर उनके दर्द के कम होने का इन्तजार करने लगा ….. थोड़ी देर में उनके चेहरे पर दर्द के जगह जोश आने लगा और जब उन्होंने अपना कमर चलाना शुरू किया तब मैंने फिर लंड अन्दर करना चालु कर दिया ….. फिर मंथर गति से उनको चोदने लगा ……लगभग १० मिनट बाद जब मै झड़ने वाला था तब मैंने तूफानी गति पकड़ ली …लंड तेजी से अन्दर बाहर होने लगा …….दीदी लगातार सिसिक रही थी ………फिर हम दोनों एक साथ झडे………….. थोड़ी देर बाद दोनों बहने अपने अपने कपडे पहन कर जाने लगी …. जाते जाते दीदी ने मुझे चुमते हुए कहा – राजन तुमने आज मुझे स्वार्गिक आनंद दिया है – थैंक यू ….लेकिन यहाँ आना थोडा मुश्किल है ….तुम घर आते रहना मै पूरी तरह संतुष्ट था ….अब मुझे चूत के लिए भटकने की जरुरत नहीं थी …..इसलिए मैंने रेस्ट करने के बाद पूरी शाम पढ़ाई की | अगले दिन सुबह भी मै अच्छे से पढ़ा…. माँ भी मुझे इस तरह पढता देखकर खुश थी |
माँ के कॉलेज जाने के बाद मै नहा धोकर रेस्ट कर रहा थी कि दरवाजे की बेल बजी …. मैंने अनिक्छा से दरवाजा खोला ……सामने गुड्डी खड़ी थी …अकेली …सलवार और फ्रॉक में ….. ( मैंने मन ही मन कहा …..इस कुतिया की अभी चुदाई नहीं हुई है, इसलिए लंड की तलाश में भटक रही है ….चलो, साली को चोद ही देता हूँ ….चाहे इसकी फटे या बचे ……..अच्छा है ..इसे अभी चोदता हूँ ..और शाम को इसके घर जाकर दीदी को चोदूंगा………) कोई देख न ले ..इसलिए मैंने झट से उसे अन्दर किया और दरबाजा बंद करते ही उसके टांगों के बीच हाथ डालकर उसकी चूत सलवार के ऊपर से मसलने लगा और फिर उसे गोद में उठाकर अपने कमरे में ले जाकर बेड पर पटक कर उसकी सलवार खोलने लगा थोड़ी देर में ही सलवार और पैंटी दोनों कमरे के फर्श को चूम रहे थे ……. फिर फ्रॉक को ऊपर कर उसके सर से निकाल दिया गुड्डी मेरे इस त्वरित आक्रमण के लिए शायद तैयार नहीं थी इसलिए जैसे ही नग्न हुई तो उसने अपना दोनों हाथ चूत के ऊपर रख ली ….. गुड्डी…….. चुदने आयी है तो मजे ले …..अपनी चूत क्यूँ ढक रही है ?…….. भैया …..आज चो…..चोदोगे क्या ? हाँ………..आज तेरी जरुर लूंगा ले लेना भैया …..लेकिन आहिस्ते आहिस्ते …..आपका बहुत बड़ा और मोटा है ……….फाड़ना नहीं ….जैसे कल आपने दीदी की ली थी ……. दीदी की पहले से चुदी हुई थी …..तेरी फटेगी, चीखना नहीं … तेरी चूत में पहला लंड घुसेगा ……मै पहला ही हूँ न ? …..या किसी और से भी चुदवाई है पहले ??……. दीदी की पहले से चुदी हुई थी …..तेरी फटेगी, चीखना नहीं … तेरी चूत में पहला लंड घुसेगा ……मै पहला ही हूँ न ? …..या किसी और से भी चुदवाई है पहले ??……… नहीं …… तो बोल ना ……..मै पहला ही हूँ न तुझे पेलने वाला …. हाँ………… पूरा बोल ….. पूरा क्या ?…… यही की तेरी बुर चोदने वाला मै पहला व्यक्ति हूँ …. जबाब में गुड्डी ने मेरे सीने पर प्यार से मुक्का मारा……आप बड़े बेशरम हो भईया…. बोल …..नहीं तो नहीं चोदूंगा हाँ भैया …..आप ही वो पहले मर्द हो जिसने जिसने मेरी बुर को छुआ…..उसमे ऊँगली की और आप ही हो जो मुझे पहली बार चोदोगे ….आपकी ही अमानत है मेरी बुर …प्यार से मारना ….और शरमाकर दोनों हाथो से अपना चेहरा ढक ली …..
मै गुड्डी के शब्दों को सुनकर गनगना गया ….मैंने उसे भरपूर मजा देने का ठान लिया था मैंने उसके जांघो को फैलाया और उसके बीच अपना चेहरा घुसाकर उसकी छोटी सलोनी बुर को अपने जीभ से चाटने लगा ……… आआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ………………………ईईईईईईइस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स ………. गुड्डी की मादक सिसकारी पुरे कमरे में फ़ैल रही थी उसके बुर के अन्दर से उसका आनंद रस का स्त्राव हो रहा था और उस नमकीन रस का हर एक बूंद मै चाटे जा रहा था …. फिर मैंने गुड्डी को बेड से उतारा और अपने कपडे उतारते हुए अपना खडा लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया ….वो मेरा इशारा समझ गयी …….. उसने अपना प्यार सा मुंह खोलकर मेरा लंड अपने मुंह में लेने लगी ……वो पहले भी दो बार मेरा लंड चूस चुकी थी ..इसलिए अब प्यार से लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी ….. मै जन्नत में था ……….तभी ……………… ये क्या हो रहा है ?…….एक अपरिचित आवाज ने हम दोनों को फ्रिज कर दिया …….मै घुमा …..मेरा लंड गुड्डी के मुंह से निकलकर स्प्रिंग की तरह उछला …… कमरे के दरवाजे पर मेरी पड़ोसन … मिसेज मेहरा ….सोनिया मेहरा…..खड़ी थी …………… ये बहन की लौड़ी कहाँ से आ गयी ….मैंने मन ही मन सोंचा ….मेन डोर तो मैंने ठीक से बंद कर दिया था…शायद छत से … तभी मेरा ध्यान अपने फड़कते खम्भे की तरफ गया जो अपने मजे में व्यवधान उत्पन्न करने वाली दरवाजे पर खड़ी अवांछित अतिथि की ओर तना हुआ था |
मै शरमाकर बेडशीट पकड़ कर लपेटना चाहा ….लेकिन बेडशीट को तो गुड्डी पहले ही लपेटकर बेड के साईड में बैठ गयी थी ….मेरे लिए अपने खम्भे को छुपाने के लिए हाथ से ढकने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था मै खिड़की से देखती थी इस समय ये लड़की रोज आती है , कल तो अपनी सहेली भी लेकर आयी थी …….मै तो यही देखने आयी थी की तुम लोग आखिर करते क्या हो ?……छिः तुम लोग कितने गंदे हो …..तुम्हारी ये उमर है ये सब करने की …ठहरो , मै तुम्हारी माँ को सब बताती हूँ ………कहते हुए मिसेज मेहरा डाइनिंग हॉल की तरफ बढ़ी …. मुझे काटो तो खून नहीं …………. चेहरा सफ़ेद पड़ गया और लंड डर से सटक कर लटक गया आंटी के हटते ही गुड्डी जल्दी जल्दी अपने कपडे पहनने लगी तो मुझे भी अपना लोअर पहनने का ख्याल आया | गुड्डी तेजी से बाहर जाने लगी …मै भी अपनी बेइज्जती कराना नहीं चाहता था इसलिए मै भी उसके साथ बाहर चला गया और पंद्रह -बीस मिनट बाद लौटा …लौटना तो था ही क्योंकि घर खुला था लेकिन मै उम्मीद कर रहा था बल्कि इश्वर से प्रार्थना कर रहा था की मिसेज मेहरा चली गयी हो |
लौट कर देखा मिसेज मेहरा डाइनिंग हॉल के पास नहीं थी …शायद इश्वर ने मेरी प्रार्थना सुन ली थी | मैंने जल्दी से दरवाजा बंद किया और ओने कमरे में आकर लेट गया | आज जो हुआ वो होना नहीं चाहिए था ….मिसेज मेहरा का कोई भरोसा नहीं …वो माँ को बोल भी सकती है ……….फिर मै उसके बारे में सोंचना शुरू कर दिया ……………………… हमारे पड़ोस वाला मकान, जिसका छत हमारी छत से जुडा हुआ था मेहरा परिवार ने साल भर पहले ही ख़रीदा था और पिछले छह सात महीने से रह रहे थे | मिसेज मेहरा कभी कभार शाम को माँ से मिलने आ जाया करती थी | उनकी उमर तो कम से कम सैंतीस -अडतीस साल होनी चाहिए क्योंकि मुझसे एक साल बड़ा उनका बेटा है जो बी. टेक. फर्स्ट ईयर में है, परन्तु वो लगती तीस से ज्यादा नहीं थी ..अपने आपको काफी मेनटेन रखा था ….बाल बॉय हेयर-कट थे जो बस कंधे को छुते भर थे … प्रायः साडी पहनती थी लेकिन ब्लाउज हमेशा स्लीवलेस और अपनी बगलों को हमेशा साफ़ रखती थी … तुमने अभी तक अपनी माँ का फोन नंबर नहीं दिया , वहाँ फोन के पास भी नहीं लिख रखा है ……इस आवाज को सुनते ही मेरी तन्द्रा भंग हुई और मैं चौंककर दरवाजे की तरफ देखा ….कहते है न चुड़ैल का नाम लो और चुड़ैल हाजिर ………… दरवाजे पर मिसेज मेहरा दोनों चौखटों पर हाथ डाले खड़ी थी ….. आप गयी नहीं ?…..मैंने धीमी आवाज में पूछा तुम्हारी माँ को बताये बिना नहीं जाउंगी ……..वो तेज स्वर में बोली ….घर को रंडीखाना बना दिया है जाने भी दीजिए …प्लीज , बात को मत बढाइए ….मै कसम खाता हूँ कि आज के बाद कभी किसी लड़की को यहाँ नहीं बुलाउंगा …..मैंने आहिस्ते से कहा लेकिन …बाहर जरुर रंगरेलियां मनाऊँगा…..मिसेज मेहरा शब्दों को चबाते हुए बोली ……….वाह रे आजकल के लड़के ! वाह ….कसम भी खाता है तो मार्जिन रख कर ….. नहीं ..ऐसा नहीं है ………….मैंने लगभग मिमियाते हुए कहा तो कैसा है ?……अपना पूरा रोब मुझपर डालती हुई मिसेज मेहरा बोली ….अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है ….और वो लड़की …लड़की क्या बच्ची है ……लेकिन करतब तो देखो …..हाय राम ! कैसे मुँह में लेकर चूस रही थी ?….छिनाल……. साथ में भईया..भईया भी बोल रही थी ………बोल कौन है वो लड़की जो तुझे भईया भी बोलती है और छिनाल …..नंगी होकर तेरा चूसती भी है …………….. मै चुप …आँखे जमीन में गडी हुई …… बोल राजन , ……..मै तुमसे पूछ रही हूँ मेरे दोस्त की छोटी बहन है ……मैंने आँखे नीची किये ही बोला शरम कर ….दोस्त की बहन अपनी बहन जैसी होती है ………पर तुमलोगों का क्या है ..तुम्हारा बस चले तो अपनी बहन को भी ……………….मिसेज मेहरा ने कटाक्ष किया ……………….नहीं ..नहीं ….तुम्हारी माँ को बताना ही पडेगा ……… अब बस भी कीजिए आंटी …..
मै आपके हाथ जोड़ता हूँ ( मैंने वास्तव में अपने हाथ जोड़ लिए ) आंटी ?? …..मै क्या आंटी दिखती हूँ …….अब हाथ क्या …. पैर भी पड़ोगे तो भी, मै बता कर ही रहूंगी ………मिसेज मेहरा गुस्साते हुए मेरी स्टडी वाली आरामकुर्सी पर बैठती हुई बोली ( मै मन ही मन अपने आपको कोसने लगा कि क्यों मेरे मुँह से आंटी शब्द निकल गया ……अब क्या करूँ ? फिर मैंने आंटी के पाँव पकड़कर माफ़ी मांगने का फैसला किया ) मिसेज मेहरा ….मुझे माफ़ कर दीजिए ……गलती से आंटी निकल गया …..प्लीज माँ को कुछ मत बताइये ..मै आपके पाँव पड़ता हूँ …..और ज्योंही मै सोनियाजी के पाँव छूने झुका उन्होंने तुरंत अपने दोनों पाँव खींचकर कुर्सी के ऊपर कर लिए और तेज स्वर में बोली ….. दूर रहो गंदे लड़के …..पहले गलती करता है और फिर माफ़ी माँगता है ….. ( मिसेज मेहरा हड़बड़ी में अपने पैर उठाकर अपने हाथो से पकड़ तो ली थी लेकिन उन्हें पता नहीं था उनका ढीला साडी-पेटीकोट का आधा हिस्सा कुर्सी की सतह पर ही रह गया था और पैर उठ जाने के कारण उनकी जांघे अनावृत हो चुकी थी ….आह क्या चिकनी जांघे थी ….डर से सटके मेरे लंड ने एक जम्हाई लिया …मन हुआ कि साली को यहीं पटककर चोद दूँ … …..इस विचार ने थोड़ा हौसला दिया …..आखिर वो भी तो नहीं जा नहीं रही थी ..उसके मन में भी कुछ जरुर होगा …इसलिए मुझे ट्राई करना चाहिए …जितनी बेइज्जती कर चुकी है उससे ज्यादा क्या करेगी ….ज्यादा हो -हल्ला करेगी तो मै माँ को फोन करके बता दूंगा कि मिसेज मेहरा मेरे कमरे में आकर मुझसे गलत काम करने को कह रही है …उसे भी जबाब देना पडेगा कि वो मेरे कमरे में कैसे आयी और क्या कर रही थी … रही बात गुड्डी की…तो मै सारा सेट कर लूंगा कि मेरे से कुछ पूछने आयी थी …….ऐसी स्थिति में माँ मेरा ही साथ देगी …..अब मै नए साहस के साथ मिसेज मेहरा की नंगी जांघो को खड़े खड़े देखने लगा….फिर लगा कि अगर मै थोडा झुक जाऊं तो शायद मिसेज मेहरा की पैंटी भी दिखाई दे जाए …… ) गलती किया है इसीलिए तो माफ़ी मांग रहा हूँ …..कहते हुए मै मिसेज मेहरा के पैरों के पास घुटने के बल बैठा … मेरी नजर सीधे उनके आखिर तक दिखाई दे रहे जाँघों के जोड़ तक चली गयी ….मेरा हलक सुख गया ……मिसेज मेहरा पैंटी भी नहीं पहनी थी …..उनकी मस्तानी पाँवरोटी के सामान फूली बूर साफ़ दिखाई दे रही थी ……
आप कहें तो आपके पैरों पर नाक भी रगड़ने को तैयार हूँ ……कहते हुए मै अपना चेहरा उनके पैरों कि तरफ बढाया …. नहीं……….दूर रहो ……….कहते हुए वो अपना पैर अपने हाथों से पकड़कर और ऊपर उठा दी …..फलस्वरूप मेरा मुँह जो उनके पैरों को स्पर्श भर कर पाया था , फिसलकर उनकी चिकनी जांघो से जा सटा ….मैंने मौक़ा हाथ से न गँवाते हुए अपनी जीभ निकालकर उनकी जांघो को चाटा….. इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स………………मिसेज मेहरा की सिसकी निकली …….. ये क्या कर रहे हो गंदे लड़के ?…अरे मै तुम्हारी माँ की उमर की हूँ …….मेरी जांघ क्यों चाट रहे हो ??…..यह कहते हुए उसने अपने पैरों को छोड़कर अपने हाथों से साडी के ऊपर से ही मेरा सिर पकड़कर ठेलने लगी …. सर के ऊपर पेटीकोट और साडी के आ जाने के कारण अन्दर अन्धेरा छा गया ….लेकिन मुझे मंजिल का पता था …मै आगे सरकते और चाटते हुए जांघो के जोड़ तक पहुँच गया और सीधे उनकी मखमली बूर को मुँह लगा दिया …..अब मै अँधेरे में ही उनकी सलोनी बूर की दरारों को नीचे से ऊपर तक चाट रहा था …….. आ…आ….आ…..आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ……………ये क्या किया लड़के तूने ……….इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स….. मेरी ……बू………..बूर चाट लिया………मुझे …लगा ही था…की…. तू…. पूरा …….चो…….चोदू…..है….. मै अन्दर तेज गति से अपना जीभ चलाने लगा ……. थोड़ी ही देर में मिसेज मेहरा चरम सीमा पर थी……अब वो अपने हाथों से मेरे सर को जकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी और अपनी गांड उठा उठकर मेरे मुँह पर रगड़ रही थी ….. मेरा दम घुटने लगा …मै छटपटाकर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा …लेकिन मिसेज मेहरा मेरा सर कसकर पकडे थी …..फिर मिसेज मेहरा का शारीर ऐठने लगा और वो फलफलाकर झड़ने लगी ……. कामरस की फुहार के छींटे मेरे चेहरे को भींगा रही थी और मिसेज मेहरा का कसाव मेरे सर पर क्रमशः ढीला पड़ता जा रहा था ……. जब मै मिसेज मेहरा की साडी के नीचे निकला तो मेरा चेहरा पूरी तरह चुतरस से सना हुआ था ….मैंने जल्दी जल्दी लम्बी साँसे लेकर अपने घुटते दम को राहत पहुचाया …..थोडा सांस आने के बाद मैंने देखा मिसेज मेहरा कुर्सी पर पुश्त टिकाये आँखे बंद किये बैठी थी ….साडी कमर तक उठा हुआ था …और उनकी फैली लपलपाती बूर अपने मर्दन का आमंत्रण दे रही थी …….
मेरा लंड चूत मिलने की आकांक्षा में तन्न्याया हुआ लोअर को फाड़ रहा था …..मैंने लोअर को निकाल दिया …. तौलिये से अपना चेहरा पोछा.और अपने फनफनाते लंड को हिलाते हुए कहा …..ज़रा, इसका भी ख्याल कीजिए मिसेज मेहरा…ये देखिये, यह कैसे व्याकुल हो रहा है ?………. मिसेज मेहरा ने अपनी आँखे खोली ……मेरे मोटे और लम्बे लंड को देखकर उनकी आँखों में चमक आयी ……. मेरी बू ..बूर चाट तो लिया …..अब क्या ?…… अब चोदूंगा…… चल हट …..बड़ा आया चोदनेवाला …..कुछ भी कर.. आज चोदने नहीं दूंगी………मिसेज मेहरा नखरे करती हुई कुर्सी से उठी और जोरदार अंगराई ली ….. मैंने लपककर उन्हें बाहों में भर लिया ….वो मचलकर मेरे बंधन से निकलकर दूर जाने लगी ….मैंने उनकी साडी का पल्लू पकड़ लिया और खींचने लगा ….. आधी साडी खुलकर जमीन चूमने लगी ………… मिसेज मेहरा तेज आवाज में चिल्लाई ……छोड़ ……मेरी फट जाएगी मै तो प्यार से उतारने की कोशिश कर रहा था …आप ही खींचा-तानी कर रही है …फटेगी ही …कहते हुए मैंने उनकी साड़ी को जोर से खींचा …..उनकी बची-खुची साडी खुलकर जमीन पे आ पड़ी …अब मिसेज मेहरा अर्धनग्न अवस्था में मेरे सामने पेटीकोट और ब्लोउज में खड़ी थी | अरे मै साडी फटने की बात नहीं कर रही थी …..मिसेज मेहरा मुस्कुराते हुए बोली तो किसकी ?…. इसकी ……अपने बूर की इशारा करते हुए बोली ……….तुम्हारा कितना मोटा है …. .और मेरे नजदीक आकर मेरा लंड पकड़ ली ये तो पहले से ही फटी है ….अब और क्या फटेगी ….मैंने मिसेज मेहरा की बूर को पेटीकोट के ऊपर से ही मुट्ठी में भरा ये तो पहले से ही फटी है ….अब और क्या फटेगी ….मैंने मिसेज मेहरा की बूर को पेटीकोट के ऊपर से ही मुट्ठी में भरा तुम्हे मेरी फटी हुई लगती है ……पहले कभी चोदा है किसी को नहीं …..मैने सफ़ेद झूठ बोला फिर तुम्हे क्या पता की मेरी फटी है या सिली है …. मेरे से बड़ा बेटा इससे निकाल दिया …क्या वो फटने से बची होगी …. मैंने पेटीकोट उठाकर बुर पर अपनी हथेली फेरता हुआ बोला अरे जब निकला था तो बड़ा नहीं छोटा था ….उसके बाद बुर अपने आप प्राकृतिक रूप से सिकुड़कर मर्द को मजे देने लायक बन जाती है ….तू मचल मत …
तुझे तो मै ऐसा मजा दूंगी जिसे तुमने सपने में भी नहीं सोंचा होगा …….कहते हुए मिसेज मेहरा मेरे सामने घुटने के बल बैठ गयी और मेरे लंड को पकड़कर आलू सरीखे सुपाडे पर अपनी जीभ फेरने लगी …. आ……..आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………. मैंने उत्तेजना में उनका सर पकड़ लिया मिसेज मेहरा तन्मय होकर मेरा लंड चुसे जा रही थी धीरे धीरे वो मेरा पूरा लंड निगल चुकी थी ….आज पहली बार किसी ने मेरा पूरा लंड जड़ तक मुँह में भरा था लंड चूसने में जबरदस्त माहिर खिलाड़ी थी ….. मुझे लगा की अगर मैंने उन्हें चूसने से नहीं रोका तो मै बह जाउंगा …..मैंने मिसेज मेहरा का सर पकड़कर दूर धकेलने की कोशिश की परन्तु उन्होंने मेरा लंड छोड़ा नहीं ……. मै ऐठने लगा ……फिर भलभलाकर झड़ने लगा …. .मैंने अपनी आँखे मूंद ली … मेरे अन्दर की अंतराग्नि पिघल पिघलकर मिसेज मेहरा के मुख में समाने लगा …लेकिन उन्होंने मेरा लंड नहीं छोड़ा…..थोड़ी ही देर में उनका मुँह मेरे रस से भर गया जिसे वो पूरा निगल गयी और मेरा लंड तब तक चूसती रही जब तक लंड अपनी कठोरता खोकर नरम नहीं पड़ गया …. ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ……………………वास्तव में यह एक सपना था …..मेरी हमेशा ही औरत के मुँह में झड़ने की चाहत थी लेकिन हमेशा ही मेरी पार्टनर मेरे झड़ने के समय अपना मुँह अलग कर लेती थी … ये क्या किया आपने ?…..मै मिसेज मेहरा के बालों को सहलाते हुए बोला ……आपको चोदने के लिए अब मुझे थोड़ा इन्तजार करना पडेगा ….. इसे खडा होने में टाइम लगेगा……… और इसे खडा होने की चिंता मत कर , बच्चे ….इसे तो मै दो मिनट में खडा कर दूंगी …….…..दरअसल तुम्हारे फौलाद को देखकर मुझसे रहा नहीं गया …. अब मिसेज मेहरा उठकर बिस्तर पर बैठती हुई बोली ……….आज बरसों बाद ऐसा लंड देखने को मिला है …मै अपने आपको रोक नहीं पायी …. बरसों बाद ?…….मै उनके पेटीकोट का नाड़ा खोलते हुए पूछा……..क्या मिस्टर मेहरा आपको पेलते नहीं है ?? नहीं रे …..वो तो जब भी घर में होते है, बिना चोदे छोड़ते कहाँ है …मुझे संतुष्ट भी करते हैं ….लेकिन …. लेकिन क्या ? …..मैंने आहिस्ते से उनको पकड़कर लिटाते हुए और उनकी गाल से अपनी गाल रगड़ते हुए मदहोश स्वर में पूछा …..फिर मैंने एक हाथ से उनके ब्लॉउज के बटनों को खोलने लगा …. लेकिन ….उनका तुम्हारे जैसा फौलाद नहीं है ….ऐसा तो लाखों में एक का होता है …
मैडम ….लगता है आपने अपने पति के अलावा भी कईयों से चुदवाया है …. चुप कर ….बड़ा चालाक बनता है ….अपना काम करता रह …… ( मै अबतक उनका ब्लाउज और ब्रा निकाल चुका था …..अब मिसेज मेहरा मादरजात नंगी मेरे बगल में लेटी थी और मै उनके बदन पर अपना एक हाथ नीचे जांघो से सहलाते हुए ऊपर बढ़ता …..बूर की दरारों में ऊँगली चलाता…फिर हाथ ऊपर ले जाकर उनकी बड़ी बड़ी चुचियों को दबाता ….फिर जांघ के जोड़ की तरफ बढ़ा देता ……और एक हाथ उनकी गर्दन के नीचे डालकर अपने होंटों से उनकी गालों और होंटो को चूस रहा था ……) बोलिए न ….मुझे मजा आयेगा , तभी तो मै भी आपको मस्त करूंगा …..कितनो ने चोदा है आपको ?……. मिसेज मेहरा चुप रही … चुप क्यों हो गयीं आप ?…..बताइये न कितने लंडो ने आपकी चूत का रसपान किया है ??…….. मै गिनती थोड़े ही करती हूँ …..वो बड़बड़ाई .. वाह ….लगता है कई लोगों ने आपको पेला है …..बताइये न …कौन कौन लोगों ने आपको चोदा है …. सबसे ज्यादा मजा किसके साथ आया … मेरे बारे में जानकार क्या करोगे ?….. हिनहिना कर घोड़े जैसा चोदुंगा आपको …..और क्या ?……और कुछ करवाने की ख्वाइश है तो वो भी कर दूंगा …बस आप हुक्म कीजिए …..न ….न …पहले बताइये ….किससे चुदवाकर आपको सबसे ज्यादा मजा आया ??….. …… …… वो मुझे अपनी बांहों में कसती हुई मेरे कान में फुसफुसाई …………………..पापा से …….. क्या ?……..मै उछलकर बिस्तर पर बैठ गया …. …. क्या कहा ??……पापा से ……….ओह माई गॉड………..सोनियाजी….. आपने अपने पापा से भी चुदवा लिया …… आप तो कमाल की चुदक्कड निकली …..ये कहते हुए मैंने अपना हाथ उनकी बुर की तरफ बढ़ाते हुए दो उँगलियाँ एक साथ सीधे पापा की सोंच से पनियाई बुर में पेल दिया …… आह……………क्या करते हो…………दुखती है ……..ऊँगली ही करना है तो धीरे धीरे घुसाकर पेल …..जैसे .. जैसे ?…………….
मैंने दुहराया जैसे ………………मेरे पापा मुझे पेला करते थे .(अब वो खुलकर बोल रही थी ) खुद तो अपने पापा से चुदवा चुकी हो ..और मुझे दोस्त की बहन चोदने भी न दी ….क्यों मैडमजी ?….मैंने दुसरे हाथ से उनकी गदराई चूची मसलते हुए पूछा…. उस लड़की के भलाई के लिए ………अरे वह तो छोटी सी बच्ची है …उसका काम तो छोटे मोटे नूनी से भी चल जाएगा …..ये ( मेरा लंड पकड़कर ) उसके लायक नहीं है …..अगर ऐसे लौड़े से उसकी चूत का उदघाटन होता तो जीवन भर उसे कोई दूसरा लंड संतुष्ट नहीं कर पाता….ये बात मेरे से ज्यादा कौन समझ सकता है …
एक बात बताइये सोनियाजी ?….. क्या ?…….. आपकी कच्ची चूत का उदघाटन आपके पापा ने कैसे और कब किया …..मतलब आपकी उम्र क्या थी ??…. पंद्रह -सोलह साल …….लेकिन मेरी चूत का उदघाटन मेरे पापा ने नहीं किया …… तो किसने .??…….. परिवार के ही किसी और सदस्य ने ???……… अरे नहीं …..मेरे परिवार में तो सिर्फ मै , दम्मे की बीमारी से ग्रसित मेरी माँ , पिताजी और बूढ़े दादाजी थे …..पिताजी रियल एस्टेट ब्रोकर एजेंट थे और आगरे में अपना काम करते थे …हमारा गाँव आगरे के पास ही था …पिताजी प्रायः शहर में ही रहते थे , पर बरसात में कारोबार के ऑफ़ सीजन में दो महीने घर रहते थे ……मै उस समय नवी कक्षा में पढ़ती थी और पुरे गाँव में सबसे सुन्दर थी ….. ये बात दशहरे के समय की है …..गाँव में रामलीला चल रहा था ..रात के आठ बजे से बारह बजे तक ..लेकिन ठण्ड के कारण न मेरी माँ खुद जाती थी और न अकेले मुझे जाने देती थी ……एक रात पड़ोस की सुखिया बुआ, माँ को मना के मुझे अपने साथ रामलीला दिखाने ले गयी ….. मै रामलीला देखने में तल्लीन थी …लगभग एक घंटे बाद सुखिया बुआ ने मेरे कान में धीरे से बोली – मुझे पेशाब लगी है , मूतने जा रही हूँ …तुझे चलना है तो चल …मैंने इनकार में सर हिलाया और सीता स्वयंबर देखने लगी ….तभी मेरा माथा ठनका … …….बुआ आधे घंटे पहले ही तो मूत के आयी थी और उससमय भी मूतने में उसने काफी समय लिया था उसने …….. थोड़ी देर में मै भी उठकर चल पड़ी जिधर सुखिया गयी थी …….गली के मोड़ पर मेरे पाँव ठिठक गए क्योकि गली के आखरी घर में सुखिया घुस रही थी …… बुआ गिरजा चाची के घर में क्यों घुस रही है …गिरजा चाची तो रामलीला देख रही है ……….सुखिया कही चोरी तो नहीं ……..नहीं ..ऐसा नहीं हो सकता क्योकि घर में चाची की बहु और फौजी भैया की बीबी कंगना भाभी तो होगी ही ……. अँधेरे में लपकते हुए मै घर के पास पहुँच गयी ……. तू फिर आ गयी ….अभी अभी तो मेरे चेले से मरवा के गयी थी …….. …..एक मर्दाना आवाज अन्दर से आया आपका चेला तो आपके सामने पिद्दी है …….
मालिक आप एक बार कर लो न …….मुझे आपसे मरवानी है ………….पिछले दशहरे में तो रोज आप ही लेते थे मेरी ….अब इस कमीनी पर दिल आ गया …………………..अन्दर से सुखिया की आवाज आयी और तुझे उस बुढिया पर नजर रखने को कहा था न…….फिर वही आवाज अन्दर क्या हो रहा है , ये देखने के लिए मै बेचैन हो उठी …….फिर घर के पीछे की तरफ गयी ….वहां हल्का उजाला था …अन्दर से रौशनी खिड़की से छनकर आ रही थी …..खिड़की थोडा खुला था ….अन्दर से वासनामयी आहें …आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…….और …चोदो……आ रही थी … मै अन्दर झाँकने लगी ………. नजारा देखते ही मेरे सारे शारीर में चीटियाँ रेंगनी शुरू कर दी …… खिड़की के पास ही नीचे जमीन पर एक जवान साधू लेटा था और पड़ोस गाँव की सब्जी बेचने वाली औरत उसके ऊपर चढ़कर उसे चोद रही थी और आहे भर रही थी ………. कंगना भाभी नंगी बिस्तर पर पैर पटकते हुए छटपटा रही थी क्योंकि उसके ऊपर ‘भगन्दर बाबा’ ( जो हर साल दशहरे में ही हमारे गाँव में आते थे और किसी के भी यहाँ दस दिनों के लिए टिक जाते थे ….पिछली बार सुखिया के यहाँ टिके थे और इसबार गिरजा चाची के यहाँ ) चढ़कर हुमच हुमच कर पेल रहे थे ….सुखिया बुआ अपनी साडी -पेटीकोट एक हाथ से अपने पेट तक उठाकर दुसरे हाथ से अपने बुर को मसलती बाबा के सामने खड़ी अपनी बारी का इन्तजार कर रही थी ….. मै कमरे में नजर दौराइ…..और कोई नहीं था ….. पूरा कमरा ……. सिसकी ..आहों …और फच…फच…..से गूंज रहा था ….. मै कामवासना में जलने लगी ……… मेरा हाथ स्वमेव ही मेरे टाईट पैजामी में घुस गए और मै अपनी अविकसित चुचियों को मसलते हुए दुसरे हाथ से अपनी चूत रगड़ने लगी ….. तभी मेरी गांड की दरार में कोई चीज चुभी और किसी ने मुझे पीछे से पकड़ा ….. मै तेजी से पलटी ……….मेरे सामने बड़ी बड़ी दाढ़ी और मुछों वाला इंसान खडा था …..पलटते ही मेरी चीख निकल गयी क…क…. कौन है? …बाबा की हड़बडाती आवाज आयी ….. बाबा नया माल है …..मुझे पकडे पकडे मेरी चुतरों की गोलाइयों को अपने हांथो से दबाते हुए आगंतुक जवान साधू ने जबाब दिया ….डर से मेरी घिग्घी बंध गयी थी. फ़ौरन दरवाजा खुला …..चेला साधू जो मुझे पकडे था मुझे उठाकर अन्दर ले गया ….और खडा कर दिया ….और दरवाजा बंद कर दिया … कौन है तू? और यहाँ क्या कर रही है ??….
भगन्दर बाबा ने कड़कदार आवाज में पूछा …….मै डर कांपने लगी थी … देखा तो सारे लोग अपने बदन को थोड़ा बहुत ढक चुके थे …बाबा भी लंगोट में थे तू यहाँ क्यों आयी …सुखिया बुआ मुझे डांटते हुए बोली …….फिर बाबा की तरफ मुड़कर बोली ….ये मेरे साथ है …इसे जाने दीजिए …किसी से कुछ नहीं कहेगी | आयी है तो थोडा प्रसाद लेकर ही जाएगी …. जाने दीजिए अभी बच्ची है ….. कोई बात नहीं मैंने बहुत बच्चियों को भी प्रसाद दिया है …….हाँ मै किसी के इच्छा के बिना प्रसाद नही देता , ये बात तुम्हे मालुम होना चाहिए ….. मेरी जान में जान आयी …… तुम लोग चालू हो जाओ ….मै थोड़ा भोग लगाता हूँ अभी आये चेले ने सुखिया बुआ और सब्जी वाली दोनों को नंगा कर घुटनों के बल बिठाया और अपना लम्बा लौड़ा निकालकर दोनों के मुंह में बारी बारी से देने लगा दुसरा चेला कंगना भाभी को पीछे से पकड़कर उनकी पेटीकोट को खोलकर नंगा कर दिया और भाभी की चुचियों को मसलते हुए उन्हें लेकर कुर्सी पर बैठ गया फिर कंगना भाभी की दोनों जांघो को फैलाकर कुर्सी के दोनों हत्थों पर चढ़ा दिया …..भाभी की फूली हुई बुर मेरे सामने फ़ैल गयी …..जिसमे वो चेला नीचे से हाथ डालकर भाभी के पिछवाड़े को रगड़ते हुए ऊँगली करने लगा …… मै गनगना रही थी …… बालिके !….भगन्दर बाबा ने एक हाथ प्यार से पीठ पर रखा ……. मेरे शारीर में आवेश का तरंग लहराया …… चुदाई देखोगी ?……….कहते हुए बाबा ने अपना हाथ पीठ से सरकाकर मेरे गांड पर पैजामी के ऊपर टिकाया ..और हटाने से पहले दरारों को कपडे के ऊपर से ही हलके से रगडा ….. आउच …..मेरे मुंह से निकला …. बाबा मुझसे हट के पीछे कुर्सी पर बैठ गए और सोमरस का पान करने लगे ….एक पैग पीने के बाद हुंकारे …..चेलों चुदाई शुरू करो …. दोनों चेलो ने तीनो औरतों को बारी बारी घचाघच घचाघच चोदने लगा ….. मै उत्तेजना में बहकने लगी …. धीरे धीरे मै फिर अपने हाथों से अपनी कबूतरी दबा रही थी …..अब मै चाह रही थी की बाबा मुझे गोद में लेकर मेरे बोबे दबाये और मेरे शारीर से खेले ….. मेरे सारे बदन में चीटियाँ रेंग रही थी ….मेरे पैर थडथाडाने लगे थे ….. मेरा खडा रहना मुश्किल हो गया ……… मै झुक कर बिस्तर पर अपने दोनों हाथ की केहुनी टिका दिया और सामने कंगना भाभी और सुखिया बुआ की बुर में घुसते निकलते लंड को देखने लगी ….. तभी मेरे पिछवाड़े पर किसी मूसल का दबाब बना ….मै सिहर उठी …..मै समझ गयी बाबा ने मेरी पीड़ा समझ ली है और पीछे से ही आशीर्बाद दे रहें है ….. उनका मूसल पैजामी को समेटते हुए मेरे पिछवाड़े में घुसता जा रहा था ……लगभग दो तीन मिनट तक वो अन्दर ठेलते रहे…फिर अचानक पैजामी के ऊपर से ही मेरी गांड को चोदने लगे ……
मेरा पूरा शारीर एक मीठी खाज से भरने लगा …………. मैंने दोनों हाथों से अपनी पैजामी की इलास्टिक पकड़कर पैंटी के साथ नीचे घुटनों तक सरका दिया …… मेरा पिछवाड़ा नंगा हो गया …….. लेकिन बाबा ने अपने हथियार को मेरी नंगी गांड पर दबाने बजाय हटा लिया ……फिर पूछा …..पहले बोल तेरी मर्जी है …. हाँ बाबा …… क्या मर्जी है ?…… जो आपकी इच्छा है …सब कर लो …बाबा ….मै मना नहीं करुँगी…. फिर ये तो मेरी मर्जी हुई …….नहीं …..बोल तेरी मर्जी क्या है … आपसे करवाने की …..कहते हुए मैंने अपना मुंह बिस्तर में छुपा लिया …..अच्छा था बाबा की तरफ मेरी पीठ थी .. क्या करवाने की ……साफ साफ बोल चुदवाने की ….. क्या चुदवाने की ….और किससे……पूरा बोल बिटिया बाबा मेरे साथ शब्दों का खेल खेल रहे थे …..मै चुदास से भर गयी थी …. मैंने सीधा होते हुए कहा – बाबा …..मुझे अपनी बुर चुदवानी है ,आपसे …..प्लीज अपने लंड से मेरी बुर चोदिये …… ये हुई न बात ……. और मेरी नंगी चूत पर हाथ फेरने लगे ….. फिर कमंडल से सोमरस मेरी चूत पर डाला और झुककर मेरी चूत चाटने लगे …. मै उत्तेजना की पंखो पर सवार सातवें आसमान की सैर कर रही थी ….. बाबा अब चोदिए मुझे ……मेरे मुँह से निकला अब बाबा ने मेरी पैजामी और पैंटी खींचकर निकाल दिया और मेरी टांगो को फैलाया ….धीरे धीरे एक ऊँगली मेरी चूत में डाला मुझे दर्द होने लगा …… बाबा …दर्द हो रहा है ….मै सिसकी बाबा ने मेरी गालों को चुमते हुए कहा …एक बार थोडा दर्द तो होगा बिटिया ….पर उसके बाद बहुत मजा आएगा ……………………..अब चोदूं…. ठीक है बाबा …..चो..चोदिए ….. बाबा ने अपना लंगोट निकाला….मै उनका लंड देखने के उठने का उपक्रम किया …उन्होंने फिर मुझे लिटा दिया और मेरे जांघो के बीच पोजीशन लेकर अपना लंड मेरी छोटी चूत के मुहाने पर रखा ….और मेरे ऊपर आकर मुझे अच्छी तरह से जकड लिया … मै हिल भी नहीं पा रही थी …बाबा ने अपना मुसल थोडा मेरे अन्दर सरकाया ……मै कसमसाई ….लगा जैसे गर्म लोहे का रॉड अन्दर घुसा तभी बाबा ने एक जोर का झटका मारा …मेरी चूत ककरी की तरह फट गयी ……… मै जोर से चिल्लाई ……..आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ….छोड़ दो बाबा …मै मर जाउंगी …. . मेरी चींख सुनकर सभी चेले और औरते हमारे पास चारो तरफ इकट्ठे हो गए …..बाबा ने फ़ौरन मेरे मुँह को अपने होंटों से दबा दिया …मै छटपटाने लगी …. सुखिया बुआ मेरे बालों में हाथ फेरने लगी ….. बाबा मुझे दनादन चोदे जा रहे थे ….. थोड़ी देर बाद मुझे कुछ भी याद नहीं रहा …मै बेहोश हो गयी …. जब मुझे होश आया ….तो देखा सभी मेरे आसपास बैठे थे और बाबा कुर्सी पर चिलम पी रहे थे …… मुझे अपनी चूत में तेज जलन महसूस हुआ ….
नीचे देखा तो जांघो पर भी खून लगा हुआ था …..बाबा ने मेरी कच्ची चूत के चीथड़े उड़ा दिए थे …. सोनिया की कहानी सुनकर मै गनगना गया था …… मेरे लंड कुलाचे मारने लगा …..मै मिसेज मेहरा के ऊपर चढ़ गया और दन से अपना लौड़ा उनकी फैली ..पनिआइ बुर में पेल दिया ….. आउच ……आराम से …..तेरा भी कोई कम तगड़ा नहीं है …. मै तूफ़ान गति से उनको चोद रहा था ….. मिसेज मेहरा की मादक सिसकी पुरे कमरे में फ़ैल रही थी …. जब मै झड़कर शांत हुआ और उनके ऊपर से उतरा…….तो देखा मिसेज मेहरा अपने सूखे होंटो पर अपनी जीभ फेर रही थी ……
मिसेज मेहरा बिस्तर से उठी …मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया और उनके नितम्बो को दबाते हुआ बोला- पापा ने कैसे चोदा आपको …ये तो बताया ही नहीं आपने ?……….. अभी नहीं …रात को …….मेरे गालों को चूम कर मेरे ऊपर से उठती हुई बोली रात को ! …….आप रात को फिर छत से आएंगी ? ……….मैंने कौतूहल से पूछा नहीं रे …….वो मुस्कुराते हुए बोली …..वो इंतजाम तुम मुझपर छोड़ दो , उन्होंने फिर अपने कपडे पहने और चली गयी | शाम को जब मै और मम्मी टी वी देख रहे थे , तब मिसेज मेहरा आयी और मम्मी के पास बैठ गयी …वो टेंशन में लग रही थी | क्या हुआ सोनिया ?…..मम्मी ने पूछा क्या बताऊँ , मेरे घर में इतना बड़ा साँप निकला था ……. अपने हाथ को फैलाते हुए मिसेज मेहरा ने मम्मी को दिखाया ……माली ने मार दिया है , लेकिन मुझे डर लग रहा है …..मेरे पतिदेव भी दिल्ली गए हुए है ,कल लौटेंगे …….मैने आज वहां नहीं सोना है …..आप कहे तो मै यहीं सो जाऊं ? मार दिया है न …फिर क्यों डर रही है ……मम्मी ने समझाते हुए कहा …….वैसे भी घर खाली नहीं छोड़ना चाहिए , तुम्हे तो पता ही है की …… आप समझती नहीं है , मुझे बहुत डर लग है ……एक दिन की तो बात है कल वो आ ही जाएंगे ……नहीं तो प्लीज राजन को बोलिए की एक रात के लिए मेरे घर रह ले …..बगल के कमरे में रहेगा तो हिम्मत रहेगी …. चलो , ये कोई प्रॉब्लम नहीं है ….राजन बेटा ! ( मम्मी मेरी तरफ मुखातिब होकर बोली ) आज रात इनके घर सो जाना ठीक है मम्मी ….अभी मै बाहर घुमने जा रहा हूँ , आप लोग बाते करो मै सड़क पर चलते चलते सोंच रहा था …..क्या क्लास की चुदैल और हरामिन है ये मिसेज मेहरा …… रात के दस बजे मै माँ को सुलाकर मिसेज मेहरा के घर पहुंचा | जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला …मै उनको देख के दंग रह गया ……
मिसेज मेहरा पूरी सजी धजी थी लगता है आप किसी फंक्शन से आ रही है ….मैंने उत्सुकता से पूछा नहीं रे …..आज फंक्शन घर पर ही है ………….दरवाजे को बंद करके मेरे गालों पर हलकी चपत जमाते हुए उन्होंने कहा ……तेरे लिए ही तो सजी हूँ , बुदधू कही के ….. मुझे लगा मुझे नशा हो रहा है …मुझसे कम से कम बीस साल बड़ी औरत मेरे लिए नवविवाहिता की तरह सजी थी … सोचते ही मेरे मस्ताने जूनियर ने अपना सीना फुलाते हुए सलाम ठोका ………..मैंने तुरंत उस सलाम का एहसास मिसेज मेहरा को पीछे से बाहों में भरकर करा दिया मिसेज मेहरा ने अपना हाथ नीचे लाकर पैजामे के ऊपर से मेरे जूनियर के सर से पाँव तक पीठ सहलाते हुए बोली ….इसको समझाओ की थोडा ठण्ड रखे , आज पूरी रात इसकी ही है ………आज इसने दिन में दो बार उल्टी की है …..तुम मेरे बेडरूम में चलो मै इसके लिए दवा लेकर आती हूँ जब थोड़ी देर बाद मिसेज मेहरा कमरे में आयी तो उनके हाथ में दूध का ग्लास था …. पता नहीं उस दूध में क्या क्या मिलाया था , लेकिन दूध पीने के साथ ही मेरे अन्दर गर्मी जग गयी …. मैंने मिसेज मेहरा को अपने ऊपर खींच लिया और उन्हें चूमने लगा ….वो भी मेरा साथ दे रही थी …मै धीरे धीरे उनकी सारी लिपिस्टिक चाट गया ….फिर मैंने उनकी साडी और पेटीकोट कमर तक सरका दिया …..उन्होंने लाल कलर की पैंटी पहन राखी थी …… मैंने पैंटी के ऊपर ही उनके चूत पर मुँह लगाकर चाटने लगा …..उनके होंटों की लाल लिपिस्टिक मेरे मुँह के माध्यम से उनकी पैंटी पर पहुँचने लगी …… मिसेज मेहरा अब हौले हौले सिसक रही थी ……. इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स………………. धीरे धीरे उनकी पूरी पैंटी मेरे लार से गीली हो गयी …. मैंने दांतों से उनकी पैंटी की इलास्टिक पकड़ कर नीचे खींचकर जाँघों तक सरका दिया और उनकी नंगी बूर को चाटने लगा चाटते चाटते जैसे ही मै ऊपर बूर की उपरी दानो को अपनी जीभ से छेड़ा……वो तड़प गयी …..आह ……
ऐसा मैंने कई बार महसूस किया ……इस पॉइंट पर मिसेज मेहरा को गजब अतिरिक्त मजा आ रहा था ….यह मेरे लिए नया अनुभव था ….. फिर क्या था मैंने उसी दानो को अपनी जीभ से लगातार छेड़ रहा था मिसेज मेहरा की सिसकियाँ पुरे कमरे में फ़ैल रही थी ….. अचानक उन्होंने मेरे सर के बाल पकड़ लिया और अपना बुर मेरे मुँह पर जोर जोर से रगड़ते हुए झड़ने लगी ……. जब शांत हुई तो उनकी आँखों में आश्चर्य था ….. तू तो बड़ा जबरदस्त बूर चूसता है ….. बता तुमने मुझसे पहले किसका बुर चूसा है ….जरुर किसी अनुभवी औरत ने तुम्हे बूर चुसना सिखाया है …….कौन है बोल…………कहीं तेरी माँ तो नहीं …. क्या बात करती है आप ?………मैंने उन्हें धकेलते हुए उठकर खडा होकर पुरजोर विरोध करते हुए बोला……मेरी माँ ऐसी नहीं है ….. तेरी माँ कैसी है तुझे क्या पता ?……..हर औरत को कभी न कभी एक बलिष्ठ लंड की जरुरत महसूस होती है …..हर औरत जमकर चुदना चाहती है चाहे पति हो या कोई और वशर्ते कि उसकी बदनामी न हो ……जो ज्यादा बदनामी से डरती है वो ऊँगली या मोमबत्ती डालकर काम चला लेती है नहीं मेरी माँ ऐसी नहीं है, मैंने उनको कभी संदेहास्पद स्थिति में नहीं देखा ….हर औरत एक सामान थोड़े ही होती है …………………….मैंने प्रतिवाद किया लेकिन जरुरत सबकी लगभग एक सी होती है …तू कहे तो मै तेरी माँ की चूत में ऊँगली करके दिखाऊं ….बोल ……देखेगा अपनी माँ की बुर….चोदेगा अपनी माँ को ……………मिसेज मेहरा पुरे आत्मविश्वास से बोली नहीं ……..मै तुनक कर बोला साले ! बोलता कुछ है और सोंचता कुछ और ……. मिसेज मेहरा माँ चोदने के ख्याल से झटका खाते मेरे लंड को पैजामे के ऊपर से मरोड़ते हुए बोली फिर मेरे पैजामे को ढीलाकर मेरे फनफनाते लंड को बाहर निकालकर सुपाडे पर जीभ फिराने लगी ….फिर धीरे से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ………..मेरे मुँह से कामुक कराहट निकली अब मेरा लंड उसके मुख में पूरी तरह समा गया था और वो तन्मय होकर मेरा लंड चूसने के साथ साथ मेरे गोटियों से भी खेल रही थी …….. मै अन्तत्रिक्ष की सैर कर रहा था , मुझे लगा
मैंने इसे अभी नहीं रोका तो जरुर सुबह की तरह इसके मुँह में ही झड जाउंगा …….इसलिए मैंने उसके मुँह से अपना लंड खींचकर बाहर किया और बोला …….मै अब चोदूंगा किसे चोदोगे ?……वो पूछी आपको ….और किसको ?……..मै उद्वेलित होकर बोला मै कौन हूँ ?……….वो फिर पूछी आपको क्या हो गया है मिसेज मेहरा ?………ऐसा क्यूँ पूछ रही है आप ??………मै खींजते हुए बोला चलो शुक्र है तुमने मेरा ही नाम लिया ……पूछना पड़ता है बच्चे …….क्योंकि कहीं तुम मुझे तुम अपनी माँ समझकर चोदते, तो मुझे अपना बॉडी कड़ा करके रखना पड़ता न ….वर्ना, हुमच हुमचकर चोदते चोदते तुम मेरी बुर के चीथड़े उड़ा देते …….. चीथड़े उड़वाने की आपकी अति बलवती इच्छा जरुर पूरी होगी …..मै उसकी जाँघों को छितराकर बुर पर हाथ फेरते हुए बोला ऐसे नहीं मेरे राजा…….वो घोड़ी बन कर अपनी बड़ी बड़ी चुतरों के उभारों को मेरे सामने उठाकर अपनी कटीली बुर को दिखाती हुई बोली …..आज मुझे पीछे से चोदो…..मुझे कुतिया की तरह चुदने में बहुत मजा आता है …..हाँ, सिर्फ बुर ही चोदना…..’ पडोसी ‘ पर नियत खराब मत करना …… मैंने अपने गरमाए लौड़े को उसकी बुर के मुहाने पर टिकाकर घिसने लगा …..और अपने हाथो के अंगूठे से ‘ पडोसी ‘ की भूरी छेद को कुरेदने लगा ………’ पडोसी ‘ भी खेली खाई थी, लेकिन लगता था……. किसी ने अरसे से उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया था , इसलिए अपने आप में सिमटकर संकुचित हो गयी थी …… मै झुककर अपने आप में सिमटी उस छुइमुई को चूमना चाहा …लेकिन दरवाजे से निकलती दुर्गन्ध ने मुझे आगे बढ़ने से रोक दिया ….मै पहले उसे नहलाना चाहता था …मैंने इधर उधर नजर दौराया …..तभी टेबल पर टूथपेस्ट नजर आया …..मैंने टूथपेस्ट उठाकर उसका ढक्कन खोलकर उसके मुँह को ‘पडोसी ‘ के मुख में डालकर आधा टूथपेस्ट खाली कर उसे नहला दिया ……टूथपेस्ट की ठंढक ने मिसेज मेहरा की उत्तेजना को और बढ़ा दिया ….वो पिघलने लगी …… तभी मैंने एक जोरदार धक्का मारकर अपना आधा लंड झटके के साथ उनकी बुर में पेल दिया ….. इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…………………..मार डाला रे ……..निकाल बाहर ……मादरचोद ….ये तेरी माँ की चूत नहीं है कि जैसे मन हुआ पेल दिया…….पहले ही बोला था, चोदना हो तो धीरे धीरे ही चोदना …पर आजकल के लौंडे समझते कहाँ है ….बुर देखी नहीं की कचकचा के पेल दिया …जरा भी सबर नहीं है तुम लोगो को ….
मैंने भी मिसेज मेहरा को तडपाने के लिए लंड को बुर से बाहर खीँच लिया और लंड को डंडे की तरह उनके उभरे नितम्बो पर मारते हुए बोला ……चोदुंगा तो मै ऐसे ही , चाहे आपकी चूत फटे या रहे …..बोलिए चुदवाना है की नहीं …… अब क्या अपनी माँ से पूछकर मुझे चोदेगा ?…….चोद हरामी ….जैसे मर्जी है चोद …..फाड़ दे मेरी बुर ……..अब क्यूँ तडपा रहा है ??……..वो अपनी चुतर को उचकाये अपने दोनों हाथो से अपनी बुर फैलाते हुए बोली मैंने भी देर करना उचित नहीं समझा …….मेरा लंड अब तक टूथपेस्ट से सराबोर होकर चूत के मुहाने से गांड के दहाने तक अपनी कठोरता से लकीर खीँच रहा था …..मैंने अपना निशाना साधा और बिना मिसेज मेहरा को संभलने का मौक़ा दिए बगैर उनके कमर को पकड़कर अपने फडकते लंड को दनदनाकर उनके गांड में पेल दिया ……….. आउच ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ……….मर गई ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई …….. वो चिल्लाते हुए मेरी गिरफ्त से निकलने के लिए छटपटा रही थी लेकिन अच्छी तरह से उनको दबोचे हुए अपनी कमर का जोर लगाकर लगातार मै अपना लंड अन्दर गांड में पेले जा रहा था जो ‘टूथपेस्ट चिकनाई मार्ग’ पर धीरे -धीरे पर सीना ताने आगे बढ़ रहा था ….फिर उसने फिनिश लाइन को छू लिया ….अर्थात मेरा पूरा लंड गांड के अन्दर था और मेरे बॉल्स उसके नितम्बो को थपथपा रहा था ये…क्या..किया…जालिम ……आह….मेरी ….गांड ….फट गयी …… मै धीरे से उनकी पीठ से चिपककर उनकी गर्दन को चूमने लगा और हाथ नीचे ले जाकर उनके ब्लोउज के बटनों को खोलकर उनकी चुन्चियों को मिंजने लगा और धीरे धीरे अपने मूसल को गांड में अन्दर बाहर करने लगा ….. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………………… मिसेज मेहरा को अब मजा आने लगा था क्योंकि अब वो खुद ही अपनी गांड उठा उठा कर मरवा रही थी और जोर से बेटा……मार ले मेरी गांड ………आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह……..फाड़ र्र्र्र्र्र्र्र्र्र.दे मेरी गांड ……… और अपनी बुर में ऊँगली करती हुई वो झड़ने लगी ….वो मुझे छोड़ देने का आग्रह कर रही थी ….लेकिन मै लगातार उनकी गांड लगभग आधे घंटे तक मारता रहा……जब झड़ा तो निढाल होकर उनके ऊपर ही पडा रहा ……… सो गए क्या ?……मेरे बालों को सहलाती हुई मिसेज मेहरा बोली मैंने आँख खोलकर देखा ….मिसेज मेहरा मेरे ऊपर लगभग लदी हुई थी …उनका चेहरा मेरे चेहरे से दो इंच के फासले पर था और उनके ब्लाउज के बटन वैसे ही खुले पड़े थे और उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरे सीने में धंस रही थी ……
मैंने उनकी चूंचियों को सहलाने लगा और अपना मुँह आगे बढ़ाकर उनके गालों को चूमने लगा …… मिसेज मेहरा …….मैंने धीरे से पुकारा हूँ …………. प्लीज बताइये न …. क्या ?…. वही…..कि आपके पापा ने आपको कैसे चोदा ? बड़े उतावले हो ……..बिना सुने मानोगे नहीं … बिलकुल नहीं …..घर के सदस्यों के बीच मर्यादा की जबरदस्त सीमा रेखा होता है …. मै जानना चाहता हूँ कि कैसे और किन परिस्थियों में उस सीमा का अतिक्रमण हुआ …..और कैसे आपके पापा ने आपको चोद दिया पापा ने मुझे नहीं चोदा…….मिसेज मेहरा खिलखिलाई ……मैंने ही पापा से चुदवाया …. कैसे? …..बताइये कैसे ??…..मैंने उतावलेपन में उनकी चुचियो को बेदर्दी से मसल दिया आह ….धीरे से दबा न ….तभी मै कुछ सुना सकुंगी आराम से सुनाइए ..एक एक चीज पूरा डिटेल में …..पूरा दृश्य साफ़ हो जाए …. ताकि मै ये महसूस कर सकूँ की आपके पापा की जगह मै आपको चोद रहा हूँ …… अच्छा बच्चू !…..मेरा बाप बनकर मुझे चोदेगा …………नहीं जँचेगा ……फिलहाल तो तू बेटे की तरह मुझे अपनी माँ समझकर चोद….. नहीं चोदूंगा…जबतक आप पापा से चुदने का वाकया मुस्तालिफ से नहीं बताती …. तू बहुत जिद्दी है …..अच्छा सुन ….. हाँ …हाँ ……सुनाइये ……………………मै अधीरता से उनके बोलने का इन्तजार करने लगा दशहरे की उस रात के बाद भगन्दर बाबा और उनके चेलों ने अगले सात दिनों तक खूब भोगा ……मेरी चूत सूजकर पकौड़ा हो गयी थी और इतनी सम्बेदनशील कि अगर कोई चीज उसे छू भर जाती तो सारे शारीर में झनझनाहट होने लगती ….हरामजादो ने मेरी गांड का भी कचूमर बना दिया ……सात दिनों में ही मेरी चूचियां मीज मीजकर सालो ने दोगुना फुला दिया …… उसके बाद वो लोग तो चले गए लेकिन मेरे अन्दर जमाने भर की खाज भर गए …..दिन रात मेरी चूत कुलबुलाती रहती ….. इसी दरम्यान स्कूल के कई लडको के साथ मेरे चक्कर चले , लेकिन कोई हरामी ठीक से चोद नहीं पाया …प्रायः लड़के तो ऊपर ऊपर से ही दबा कर भाग जाते ….एक आध ने पेलने कि हिम्मत तो दिखाई …पर पूरा पेल भी नहीं पाया …..अन्दर डालते ही खलास ……सभी नामर्द साले केवल आग लगाने का ही काम करते थे …मै जलती रहती …..हालत ये थी कि उस समय अगर कोई भी मुझसे चुदने को पूछ भर लेता तो मै उसके नीचे बिछने को तैयार थी ……
मैंने मिसेज मेहरा के साडी के अन्दर हाथ डालकर पेटीकोट समेत साडी को समेटकर कमर तक पहुँचा दिया और उनकी नंगी बुर को अपने हथेलियों में भींचकर बोला… क्या गजब की चुदासी रही होंगी आप उस समय ? …उत्कट कामुकता से भरी हुई …निम्फोमैनियक…..काश ! मै आपके स्कूल में होता तो आपको पेले बिना नहीं छोड़ता…. हां, मेरे राजा ……….मिसेज मेहरा अपनी चूचियों को अपने हाथो से पकड़कर मेरे मुँह में डालती हुई बोली ……उस समय मुझे बिलकुल तुम्हारे जैसे चोदू की ही तलाश थी ….पर हाय रे मेरी किस्मत ! …..सारी रात उँगलियों से अपनी चूत रगडती हुई वासना में तड़पती रहती …. छह महीने इसी तरह बीत गए …..ग्रीष्म की गर्म हवाओं ने मेरे अन्दर धधकती आग को और भड़का दिया ….जिसे बर्षा की फुहार भी ठंडा नहीं कर पा रही थी ….होती भी कैसे ? ….जिस्म की आग, जिस्म के अन्दर की बारिश से ही बुझ सकती है …बाहर की बारिश तो और धधकाती है | हमारे घर में तीन कमरे है ….एक में मै और मम्मी और दुसरे में दादाजी रहते थे …तीसरा कमरा सामान रखने के काम में आता था ….घर से थोड़ी दूर पर हमारा दालान था जिसमे हमने एक कमरा बना रखा था ,जो मेहमानखाने के रूप में प्रयुक्त होता था ….पापा जब भी घर आते तो दिन में वहीँ रहते | ऐसे में पापा कुछ दिनों के लिए गाँव आये | उस दिन मैंने माँ से अपने नए कपड़ों के लिए पैसे मांगे …माँ ने भगा दिया ….अभी तो तेरे पापा आये हुए है …..जितने भी पैसे चाहिए , जा अपने बाप से ले ले | पापा खाना खाकर दालान पर चले गए थे …….दोपहर की कडकती धुप की परवाह किये बिना मै मेहमानखाने की ओर चल पड़ी …..
