अब तक आपने पढ़ा – सरोज संतोष का व्हिस्की का पैग बनाने और चुदाई का प्रोग्राम पूछने जा चुकी थी।
रजनी और मैं बातें कर रही थीं। रजनी बोली, “आभा दो तीन दिनों में हम वापस चली जाएंगी, मगर करनाल का ये ट्रिप हमेशा याद रहेगा। अब जा कर चुदाई पिलाई छोड़ कर पढ़ाई करनी है – नंबर कम नहीं आने चाहिए, नहीं तो मनमर्जी वाला लंड का नहीं मिलेगा।
“बात तो एकदम दुरुस्त थी ही रजनी की “।
अब आगे —- मैं और रजनी बैठी थीं। हमने ये तय कर लिया की करनाल की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद अब पढ़ाई की तरफ ध्यान लगाना है। नंबर किसी सूरत में कम नहीं आने चाहिए।
“अच्छी कमाई घर लाने वाला और अच्छी चुदाई करने वाला पति तभी मिलेगा “।
तभी सरोज आ गयी और पूछा, “तैयारी है आभा जीजी” ?
“तैयारी क्या करनी है सरोज ” ? रजनी बोली, ” कपड़े ही तो उतारने है और टांगें उठानी है, बाकी जो करना है वो तो संतोष ने ही करना है”। और वो हंस दी।
“तो फिर उतारो कपड़े”, सरोज बोली, “चलते हैं, शुभ काम में देर कैसी” ?
“यहीं उतारें ” ? मैंने सकुचाते हुए पूछा।
“तो और क्या ” सरोज बोली। “संतोष के मैं कपड़े मैं उतार आयी हूं – लंड सहला भी आयी हूं, चूस भी आयी हूं। खड़ा होना शुरू हो गया है, बाकी का काम आभा जीजी कर देंगी “।
हम लोगों ने कपड़े उतरे और एक कतार में सरोज के कमरे की तरफ बढ़ने लगी। आगे आगे सरोज, उसके पीछे रजनी और सब से पीछे मैं। कमरे में पहुंच कर सब से पहले मेरी नज़र संतोष के लंड पर पड़ी – मस्त था, मोटा ताजा। खड़ा भी हो चुका था। अब खाली सख्त ही करना था – और सब तैयार – चुदाई चालू ।
हम तीनो नंगी बेड पर बैठ गयीं।
संतोष के एक हाथ में गिलास था दूसरा हाथ लंड सहला रहा था। संतोष धीरे धीरे गिलास में से व्हिस्की की चुस्कियां ले रहा था।
जैसे ही गिलास खाली हुआ, सरोज उठी और बोली ,”मैं नया पैग बना कर लाती हूं, चलो आभा जीजी आप अपना काम शुरू करो”।
मैं उठी और जा कर संतोष की गोद में जा कर बैठ गयी।
“नीचे मेरी गांड पर संतोष का खड़ा लंड रगड़ खा रहा था”।
मैंने संतोष के होंठ अपने होठों में ले लिए और चूसने लगी। संतोष ने भी मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। संतोष का एक हाथ मेरे कमर के पीछे था और एक हाथ मेरी चूचियों पर। संतोष मेरी चूची का निपल मसल रहा था। “बड़ा मजा आ रहा था”।
कुछ देर हम ऐसे ही चूसा चुसाई करते रहे।
सरोज पैग बना कर ले आई थी और खड़ी इंतज़ार ही कर रही थी की कब हमारे होंठ अलग हों और कब वो संतोष के हाथों में पैग पकड़ाए।
“मेरी गांड के नीचे संतोष का लंड और ज़्यादा सख्त हो रहा था”।
मैंने अपने होंठ संतोष के होठों से अलग किये और उठ कर फर्श पर बैठ गयी। संतोष का मोटा लंड मैंने अपने मुंह में ले लिया और सुपाड़े के छेद पर जुबान फेरने लगी। संतोष का लंड एक दम फनफना उठा। सरोज ने व्हिस्की का गिलास संतोष के हाथों में दिया और बेड पर जा कर रजनी के साथ ही बैठ गयी।
तीन चार हल्के हल्के घूंट लेने के बाद संतोष ने एक ही घूंट में गिलास खाली कर दिया। लंड मेरे मुंह से निकाला, मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। सरोज और रजनी दोनों बेड से उठ गयीं।
” मैं संतोष का मोटा लंड अपनी चूत में महसूस करने के लिए बेचैन हो रही थी “।
सरोज मोटा तकिया ले कर आयी और मेरी कमर के नीचे रख के मेरे चूतड़ ऊपर उठा दिए । मेरी चूत भी ऊपर उठ गयी। मैंने अपनी टांगें उठा कर फैला दी।
संतोष ने जांघों से पकड़ कर मेरी टांगें चौड़ी कर दी। “पक्का ही संतोष को मेरी फुद्दी का गुलाबी छेद चूत की फांकों के बीच में दिखाई दे रहा होगा “।
आननफानन में संतोष ने अपना मोटा लंड एक ही झटके से लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। “आआआआआह …… ” मेरी सिसकारी निकल गयी।
थोड़ा चोदने के बाद संतोष उठा और मेरी फुद्दी का दाना चूसने लगा – साथ ही संतोष नीचे से हाथ डाल कर गांड में भी उंगली कर रहा था।
“मस्ती के मारे मेरी हालत खराब हो रही थी”।
मेरे चूतड़ अपनेआप ही हिलने शुरू हो गए। संतोष समझ गया अब मैं पूरी चुदाई चाहती हूं – फुल स्पीड वाली। वो उठा, मेरी टांगें चौड़ी की, अपने लंड का सुपाड़ा मेरी फुद्दी के छेद पर रक्ख़ा और फच्च की एक आवाज के साथ अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।
” चुदाई शुरू हो गयी – पूरी चुदाई – फूल स्पीड वाली चुदाई – लगातार नॉन स्टॉप वाले धक्के”।
मेरे कंधों के पीछे से हाथ डाल कर मुझी भींच लिया और जो उसने ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए। मुझे लगा मैं जन्नत कि सैर कर रही हूँ । इतना कस के पकड़ा हुआ था संतोष ने मुझे कि मैं अपने चूतड़ भी नहीं हिला पा रही थी। बस अपनी चूत को कभी टाइट कर रही थी कभी ढीला छोड़ रही थी।
अगले बीस मिनट संतोष ने मेरा कचूमर निकाल दिया”। पानी पानी हो गयी मेरी चूत। मेरी चूत में से चुदाई में आवाज़ें आने लग गयी, फच्च फच्च फच्च….फच्च फच्च फच्च ।
“अब मैं झड़ने को थी। मजा कभी भी आ सकता था – चूत का पानी कभी भी छूट सकता था”।
संतोष की चुदाई लगातार चल रही थी। तभी मुझे लगा की अब मेरी चूत मजे वाला पानी छोड़ने वाली है। मैंने संतोष को कस कर पकड़ लिया और चूतड़ हिलने की कोशिश करने लगी।
संतोष समझ गया की मेरा काम होने ही वाला है। उसने एक दम से धक्कों की स्पीड बढ़ा दी – और तभी मैं छूट गयी।
एक सिसकारी निकली मेरे मुंह से, “आआआआह संतोष चुद गई मैं, झड़ गयी मैं…..आआआह……आआआआह…….आआआआह…..उईईई……उईईई….आआह…..संतोष। सरोज…..रजनी…..मजा आ गया। निकाल दिया मेरी चूत का पानी संतोष ने। आआआआह…..ऊऊऊ…ओह्आ……आआआह I “मजे में पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी मैं।
संतोष ने धक्के लगाने बंद कर दिए लेकिन वो अभी भी नहीं झड़ा था। मैं उसका खड़ा सख्त लंड अपनी चूत में महसूस कर रही थी।
थोड़ी देर मेरे ऊपर वैसे ही लेटने के बाद, संतोष ने खड़ा लंड बाहर निकाला और सोफे पर बैठ गया।
पांच सात मिनट के बाद जब मैं कुछ हिली तो सरोज मेरे पास आयी, “कैसा लग रहा है आभा जीजी “।
“स्वर्ग की सैर करवा दी सरोज आज तेरे संतोष ने – क्या मस्त चोदता है। मजा ही आ गया”।
सरोज मेरे पास ही बैठ गयी और रजनी से बोली, “रजनी जीजी तुम संतोष के लंड का ध्यान रखो, मैं जरा आभा जीजी की चूत को अगले दौर के लिए तैयार कर दूं।
सरोज मेरी चूत चूसने लगी और रजनी संतोष का लंड चूसने लगी।
एकाएक रजनी उठी और संतोष का लंड अपने हाथ में ले कर अपनी चूत पर रक्खा और उस पर बैठ गयी। लंड रजनी की चूत के पूरा अंदर था। रजनी कि पीठ संतोष कि तरफ थी। संतोष ने भी पीछे से हाथ डाल कर उसकी चूचियां पकड़ ली।
इधर सरोज घूमी और अपने चूत मेरे मुंह पर लगा दी। अब सब व्यस्त थे।
“रजनी संतोष का लंड अपनी चूत में ले कर बैठी थी। मैं और सरोज एक दूसरी की फुद्धियाँ चूस चाट रही थी। सरोज की चूत गीली हो रही थी और मेरी चूत तो थी ही गीली”।
मेरी चूत फिर से गरम होने लगी और मेरे चूतड़ हिलने शुरू हो गए।
“समझदार को इशारा ही काफी होता है – सरोज समझ गयी कि मैं चुदाई करवाने के अगले दौर के लिए तैयार हूं”।
सरोज मेरे ऊपर से उतर गयी, रजनी ने जब देखा सरोज मेरे ऊपर से हट गयी है तो वह भी संतोष की गोद से खड़ी हो गयी। संतोष का खम्बे जैसा लंड रजनी की फुद्दी से बाहर आ गया। रजनी ने बड़े ही प्यार से संतोष के लंड को देखा और एक बढ़िया सा चुम्मा संतोष के लंड के सुपडे पर जड़ दिया।
संतोष खड़ा हो गया। उसका फूला हुआ लंड बिलकुल सीधा था।
संतोष फिर से मेरे ऊपर आया, मेरी टांगें चौड़ी की और लंड फच्च की एक आवाज के साथ पूरा अंदर डाल दिया।
“लगता है सरोज ने सब कुछ पहले से ही तै किया हुआ था “।
इस बार कि चुदाई से लग ही रहा था कि संतोष अपना लेसदार सफ़ेद गर्म वीर्य मेरे अंदर छोड़ेगा। मुझे भी अब इच्छा हो रही थी कि संतोष मेरी चूत को गर्मागर्म पानी से भर दे।
”पता नहीं कितनी देर चली वो तबाड़तोड़ चुदाई”।
मेरी चूत कि मस्त रगड़ाई ने मेरा दिमाग़ सुन्न कर दिया था। मेरे लिए चूतड़ हिलने मुश्किल थे लेकिन मैं फिर जोर लगा लगा कर चूतड़ हिला रही थी। मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने संतोष को कस के पकड़ लिया और अपनी गांड ऊपर नीचे करने कोशिश करने लगी।
संतोष के ध्क्के लम्बे हो गए थे। फच्च थच्च फच्च थच्च फच्च थच्च कि आवाजें आ रही थी।
अचानक से मेरी चूत का नमकीन पानी छूट गया। मेरे मुंह से फिर सिसकारियां निकल रही थी आआआह …आआआआह …आआआआह…उईईई…उईईई…आआ….आआआआह….ऊऊऊओह्आ….
आआआह “।
और तभी संतोष ने एक लम्बी हुंकार – आआआआह….. सरोज …….ओओओहहहह….. सरोज – के साथ मेरी चूत गरम मलाई के साथ भर दी।
संतोष चोद मुझे रहा था और जब मजा आया तो याद सरोज को किया। “ऐसा होता है पति पत्नी का सच्चा प्यार “।
थोड़ा ऐसे ही लेटने के बाद संतोष ने लंड मेरी चूत से बहार निकल लिया। पूरा गीला। मेरी चूत और उसकी अपनी मलाई से सना हुआ। संतोष जा कर सोफे पर बैठ गया।
सरोज उठी और जा कर अपने प्यारे प्यारे पति का लंड चूसने चाटने लगी।
रजनी मेरी चूत चाटने लगी। सपड़ सपड़ कि आवाजों के साथ मेरी चूत का सारा पानी साफ़ रही थी।
साफ़ क्या कर रही थी सपड़ सपड़ करके पी ही रही थी – मैं भी तो ऐसे ही करती हूं। सरोज भी ऐसे ही करती है । सारी लड़किया ही ऐसा करती हैं।
“चूत और लंड से निकला हल्का नमकीन पानी चाटने और पीने का भी अपना ही मजा है”।
सरोज ने संतोष का लंड चाट चाट कर साफ़ कर दिया और इधर रजनी ने मेरी चूत चाट चाट कर साफ कर दी। सरोज उठी, संतोष के होठों पर कस के एक चुम्मा दिया और पैग बनाने लगी।
पैग संतोष के हाथ में पकड़ा कर बोली, “संतोष अब तुमने हम तीनो को चोदना है – मगर अपना पानी इस बार भी आभा जीजी की चूत में ही छोडना है। आज कि तुम्हारी चुदाई केवल आभा जीजी के लिए है। मैं और रजनी तो बस साथ देने के लिए हैं। फिर रजनी कि तरफ देख कर बोली, “क्यों जीजी ” ?
रजनी ने भी सरोज कि हां में हां मिलाई ,”हां मैं तो संतोष से चुदाई करवाने के मजे ले ही चुकी हूं। जब से मैंने आभा को बताया कि संतोष मस्त चूत चुदाई करता है तभी से ये आभा संतोष का लंड लेने लिया उतावली हो रही थी”।
संतोष हल्के से हंसा और मेरी तरफ देख कर बोला ,” आभा को कोइ शिकायत का मौका नहीं मिलेगा ” फिर कहा ,”आभा कोइ थोड़ी सी भी चुदाई में कसर रह जाए तो बताना – एक चुदाई और कर दूंगा”।
सब हंस पड़े। मैंने भी हंसते हुए कहा, ” नहीं संतोष, उसकी जरूरत नहीं पड़ने वाली। तुम्हारा चोदना एक दम अव्वल है – फर्स्ट क्लास – मस्त। नीचे वाली की तस्सली कर के ही तुम अपना लंड बाहर निकालते हो और नीचे उतरते हो।
सब एक बार फिर हंसी। सतोष बोला, तो फिर हो जाओ तैयार अगली चुदाई के दौर के लिए।
सरोज बेड के किनारे पर घुटनों और कुहनियों के बल उकडू हो कर बैठ गयी और चूतड़ पीछे की तरफ कर के उठा दिए। “चूत का गुलाबी छेद सामने दिखाई दे रहा था”। सरोज की देखादेखी हम भी वैसे ही बैठ गयीं – उकडू – चूतड़ पीछे कर के चूतड़ ऊपर उठा के ।
“हमारी चूतों के गुलाबी छेद भी दिखाई दे रहे होंगे”।
सरोज बेड के किनारे पर घुटनों और कुहनियों के बल उकडू हो कर बैठ गयी और चूतड़ पीछे की तरफ कर के उठा दिए। “चूत का गुलाबी छेद सामने दिखाई दे रहा था”। सरोज की देखादेखी हम भी वैसे ही बैठ गयीं – उकडू – चूतड़ पीछे कर के चूतड़ ऊपर उठा के ।
“हमारी चूतों के गुलाबी छेद भी दिखाई दे रहे होंगे”।
संतोष आया और सब की चूत में बारी बारी से लंड डाला, मगर धक्के नहीं लगाए। पहले एक एक बार लंड हमारी चूतों में डाला, फिर दो दो बार फिर शायद पांच पांच बार और ऐसे ही बढ़ते बढ़ते चुदाई शुरू हो गयी।
तीनों की चुदाई एक साथ चल रही थी। दीपक ने भी तो ऐसे ही चोदा था हमें।
धुआंधार चुदाई के बाद हमारी चूतें पानी छोड़ने लगी। हम तीनो के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी “आआआआह अहहहहह”। जब एक की चुदाई हो रही होती थी तो बाकि दो अपनी फुद्दी का दाना रगड़ के मजे ले रही होती थीं।
इस बार जब संतोष मुझे चोद रहा था तो बोला, “आभा अब से तुम्हारी चूत में कम धक्के लगाऊंगा। सरोज और रजनी का पानी छुड़ा कर फिर तुम्हारी चूत को रगडूंगा – लाल करना है तुम्हरी चूत को। यही सरोज का हुकुम है “। और सरोज के चूतड़ों पर एक धप्प मार कर बोला, “क्यों सरोज “?
सरोज हंस दी।
चोद चोद कर संतोष ने सरोज और रजनी का पानी छुड़ा दिया। दोनों बेड पर निढाल पड़ी थी। अब संतोष मुझे चोद रहा था।
लगातार की चुदाई ने मेरी चूत पानी से भर दी थी। पानी जरूर चूत में से बाहर तक टपक रहा होगा।
”मगर संतोष नहीं रुका। चोदता रहा चोदता रहा , हुंह…..हुंह……हुंह…..हुंह…. की आवाज़ों के साथ
मुझे लगने लगा की मैं अब झड़ जाऊंगी। मेरे चूतड़ आगे पीछे और गोल गोल घूमने लगे। संतोष ने धक्कों के रफ्तार बढ़ा दी …. धप्प धप्प धप्प छप्प छप्प छप्प ….. फच्च फच्च फच्च …. और फिर ऊंची आवाज की सिसकारियों – “आआआआह आआआआह उईईई उईईई आआ आआआआह ओह् आआआआह ” के साथ मैं झड़ गयी। पानी निकल गया मेरा।
“फुद्दी भर गयी मेरी – मेरे अपने गरम नमकीन पानी के साथ। मगर संतोष चोदता ही रहा। चोदने से नहीं रुका”।
संतोष के धक्के लगते गए चलते गए। मेरी चूत तो गीली थी ही, गांड भी गीली हो गयी। जब संतोष के लंड का आखरी हिस्सा मेरी चूत और गांड पर टकराता था तो आवाज़ होती थी ठप्प ठप्प..फच्च फच्च..ठप्प ठप्प.. फच्च फच्च। संतोष चुदाई से रुक ही नहीं रहा था।
सरोज उठी और अपनी फुद्दी मेरे मुंह के आगे करके लेट गयी। मैंने उसकी चूत चूसनी शुरू करदी।चूत में से निकला नमकीन पानी। मजा आ गया चाट कर।
“आगे चूत और पीछे लंड”।
लगातार की चुदाई ने मेरी चूत में फिर गर्मी भर दी। मैंने सरोज की चूत जोर जोर से चटनी शुरू कर दी। अब मैं चूतड़ भी आगे पीछे कर रही थी। सरोज उठ गयी और उसकी जगह ले ली रजनी ने। अब मैं रजनी की फुद्दी चाट रही थी। संतोष हुंह हुंह हुंह उन्ह उन्ह हुंह हुंह …ओह ओह…उन्ह उन्ह…हुंह हुंह आह आह…उन्ह हुंह हुंह की आवाजों के साथ चुदाई जारी रखे हुए था।
“ठप्प ठप्प…फच्च फच्च…ठप्प ठप्प…फच्च फच्च…उन्ह उन्ह…हुंह हुंह ओह..उन्ह उन्ह…आह आहआह…हुंह हुंह ओह…आह “, ये आवाजें मेरी मस्ती को दुगना कर रही थी।
मैंने दबी आवाज में कहा, “संतोष मैं झड़ने वाली हूं – -रगड़ो मुझे दबा कर – -और जोर से –संतोष रोक कर रखना अपनी गर्म मलाई को — इक्क्ठे पानी छोड़ेंगे — आह….आह….आह…आह — सतोष गयी मैं — संतोष फाड़ दो आज मेरी चूत आआह…..आह…आ गया…..ओह मेरी मां…सरोज…संतोष…चोदो…चोदो और जोर से चोदो…आ चोदो संतोष चोदो , और जोर से चोदो आअह्गया… संतोष…..गयी मैं सरोज मर गयी मैं आज…..रजनी…..आआआआह…आआआआह… उईईई…उईईई…आआ…संतोष,,,, क्या कर दिया संतोष आआआआह… ओह्आ… आआआह। और मैं झड़ गयी।
तभी संतोष ने भी एक आवाज निकली -आआआआह…ओओओहहहह …आआआआह…ओओओहहहह …आआआआह …ओओओहहहह और संतोष ने मेरी चूत अपनी गर्मागर्म रबड़ी से भर दी।
संतोष अब रुक गया। थोड़ा दम ले कर बड़े ही प्यार से लंड मेरी फुद्दी से बाहर निकला। लेसदार मलाई से भरी चूत में से लंड फिसल कर बाहर निकल गया और आवाज आयी — बलप्प।
संतोष सीधा बाथ रूम चला गया। मैं भी सीधी लेट गयी। रजनी ने मेरी चूत में से संतोष का सारा लेसदार पानी चाट लिया। सरोज मेरी चूचियां चूस रही थी।
मैंने सरोज से पूछा। “सरोज एक बात बताओ, संतोष तो बड़ी ज़बरदस्त चुदाई करता है। उसने जब तुम्हारी पहली बार चुदाई की थी सुहागरात वाले दिन, तो कैसे झेल गयी थे ऐसे ताबड़तोड़ चुदाई “।
सरोज ने कहा, “जीजी, संतोष जितना तगड़ी चुदाई करने वाला तो है जी, उतना ही समझदार चुदाई करने वाला भी है”।
सरोज ने अपनी संतोष के साथ पहली चुदाई की कहानी सुनाई, “जीजी जब पहली रात संतोष मेरे पास आया, मैं तब तक चुदी नहीं थी। मेरी चूत की सील नहीं टूटी थी। संतोष लंड रखते ही समझ गया की लड़की की पहली चुदाई है। संतोष ने चार दिनों तक केवल लंड का सुपाड़ा ही अंदर किया। तब चार दिनों के बाद मेरा डर खत्म होता गया और मैं पूरी चुदाई की इच्छा करने लगी”।
संतोष ने अपनी बात जारी रक्खी, “पांचवें दिन जब संतोष ने सुपाड़ा अंदर डाला तो मैंने नीचे से थोड़े चूतड़ हिलाये। संतोष समझ गया की लड़की लेना चाहती है। संतोष ने थोड़ा लंड और अंदर किया और रुक गया। जब संतोष रुका रहा तो मैं नीचे से फिर थोड़ा हिली और चूतड़ ऊपर नीचे किये” I
“ये मेरी फुद्दी के गर्म होने की निशानी थी। संतोष कुछ देर वहीं अपना लंड रगड़ता रहा। शायद मेरी चूत के पानी छोड़ने का इंतज़ार कर रहा था। मेरी चूत अब लंड मांग रही थी। लेसदार पानी से भर गयी थी। जब मैंने चूतड़ लगातार हिलने शुरू किये तो संतोष ने एक झटके से लंड अंदर डाल दिया। दर्द के मारे मेरी चीख निकल गयी। बाद में पता लगा की चूत की सील फटने से खून भी बहुत निकला। मगर अब संतोष नहीं रुका। ऐसे ही चोदा जैसे अभी आप को चोदा है। थोड़ी देर की चुदाई के बाद तो मैं जन्नत में थी। वो चुदाई मैं कभी नहीं भूल सकती”।
“उस रात की चुदाई के बाद संतोष ने रोज़ मुझे चोदा जब तक मुझे उस महीने की माहवारी नहीं आ गयी ” I सच ही संतोष की सुहागरात वाली चुदाई का जवाब नहीं था।
कुछ देर बाद मैं और रजनी अपने कमरे की तरफ चलीं, सरोज वैसे ही लेटी रही – निढाल । शायद थक गयी थी या फिर उसका एक बार और चुदाई का मन था।
“कसूर सरोज का भी नहीं था, संतोष चोदता ही ऐसा था की मन ही नहीं भरता था “।
हम कमरे में आ गयी और नंगी ही लेट गयी।
मैंने कहा, “रजनी, संतोष बहुत बढ़िया चुदाई करता है। ऐसा ही मोटे लंड वाला, ऐसी ही चुदाई करने वाला पति मिलना चाहिए हमें भी – गांड चोदने का शौकीन हो तो और भी बढ़िया”।
रजनी बोली, “आभा पंकज और कुणाल भी अच्छे लड़के हैं, कमाते भी अच्छा हैं। उनके तो लंड भी अजमाए हुए हैं। चूत भी अच्छी रगड़ते हैं, गांड भी मारते है। अब से उनको उस नज़रिये टटोलना चाहिए”।
मैंने सोचा कोई हर्ज़ तो नहीं अगर ऐसा हो जाए तो, “मगर रजनी पहली बात तो ये कि हम ने उन्हें उस नज़रिये से देखा नहीं। दूसरे उन्हें हमारी चुदाई के बारे में सब पता है, हो सकता है वो इसे ठीक ना समझें और ना मानें “।
रजनी तैश में आ कर बोली, “अगर हम चुद रहीं हैं तो वो भोसड़ी वाले भी तो चुदाई कर रहे हैं। वो क्या दूध के धुले हैं ? अगर उनको हमसे केवल चुदाई ही चाहिए तो फिर भाड़ में जाएं, लंडों की कमी नहीं “।
सही कह रही थी रजनी। “जब तक हमने इस बारे में नहीं सोचा था तो नहीं सोचा था, अब सोच रहीं हैं तो उनको टटोलना चाहिए। इसमें क्या बुराई है “।
“हम चुपचाप आने वाले कल के बारे में सोचने लगीं – बंटी सन्नी मोनू”। ना जाने कब हमारी आँख लग गयी।
करनाल में छटा दिन
सुबह हुई, सरोज हाथ में चाय की ट्रे ले कर आ गयी, मगर नंगी।
रजनी न पूछा,” क्या हुआ सरोज क्या बाद में फिर चुदी थी ? क्या फिर पकड़ लिया था संतोष ने ? सरोज, वैसे बड़ा मस्त चोदता है तुम्हारा संतोष “।
सरोज बोली ,”जीजी हम में अगर एक की चुदाई की मर्ज़ी हो तो दूसरा भी मना नहीं करता। संतोष का मन भी एक बार और चूत मारने का था इस लिए मैंने भी मना नहीं किया। और जीजी ऐसे चुदाई रोज रोज नहीं होती, ये तो आप आये हो तो इतनी चुदाई हो रही है, नहीं तो वही होती हैं हफ्ते में तीन चार दिन – चूत, एक दो बार गांड “।
हफ्ते में तीन चार दिन – चूत, एक दो बार गांड I “कम है क्या” ?
रजनी और मैं इक्क्ठे बोले, “तुम्हारे तो मजे ही मजे हैं सरोज। दो दो चूत चोदने वाले, एक गांड चोदने वाला”……रजनी ने कहा, “और एक मेरी चुदकड़ मां भी तो है जो चूत और गांड दोनों चुदवाती भी है चुसवाती भी है – सब बैठे बिठाये मिल रहा है “।
“सब हंसने लगे”।
मैंने सरोज से पूछा, “सरोज चूत धो कर आयी हो ” ?
“नहीं जीजी आप लोगों से मिले बिना कैसे धो सकती थी ” ?
“चल आ फिर लेट इधर, तेरी चूत की खुशबू भी लूं और स्वाद भी लूं “। सरोज टांगें चौड़ी करके लेट गयी। मैंने और रजनी ने बारी बारी से चूत चाट चाट कर बिलकुल साफ़ कर दी।
जब सब हो गया तो सरोज उठी और बोली, जीजी आप फ्रेश हो जाओ फिर हल्का नाश्ता कर लेते हैं। दस बजे तक दीपक लौंडों को ले कर आ जाएगा और कॉमेडी फिल्म शुरू हो जाएगी “।
“सरोज तूने कभी इन लौंडों लड़कों से चुदाई करवाई है “?
सरोज बोली, “नहीं जीजी मेरा भी ये पहला मौक़ा है। दीपक कह रहा था बड़ा मजा आएगा। एक बात बोलूं जीजी, दीपक चुदाई पिलाई के मामले में बड़ा सही है। अगर कह रहा है बड़ा मजा आएगा तो जरूर आएगा। कुछ तो अलग जरूर होगा I मेरा तो मन है एक बार चूस चूस कर गरम गरम मलाई अपने मुंह में निकलवाऊं “।
हमे भी ये आडिया जंचा। मैं और रजनी इक्क्ठे बोली “बिलकुल ठीक सरोज, ये भी कर ही लेना चाहिए – कुछ रह ना जाए।
“चूत गांड चुदाई,चटाई, चुसाई, मुताई वो सब तो हो ही चुका है – बस यही रह गया है करना करनाल में – लंड से सीधा मुंह में गरम लेसदार मलाई डलवाना। ये भी कर ही लेते हैं”।
सब हंस पड़े। सब ने हां में हां मिलाई, “तो हो गया फैसला, यही से शुरू से करेंगीं। बाद में पता नहीं गरम गरम गाढ़ी रबड़ी मलाई उनके लंडों में से निकले न निकले – या मुंह भर कर ना निकले “।
रजनी ने पूछा, “लेकिन सरोज लड़के हैं कौन, तूने पूछा था दीपक से” ?
“पूछा था जीजी। दीपक बता रहा था की जिस फ्लैट में दीपक ग्रुप चुदाई के लिया जाता है, उस फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में रहते है, अभी पढ़ते है, अमीरज़ादे हैं । दीपक से कह रहे थे, भैया हमे भी चूत दिलवाओ। चूत का नाम लेते ही उनके मुंह पानी टपकने लगता है और आंखे गुलाबी हो जाती है। चुदाई के समय जरूर कुछ अलग कॉमेडी करेंगे ये चूतिये ” ।
मैंने हंसी और सरोज से पूछा, “ये तीन होंगे और हम भी तीन, तो दीपक क्या करेगा ” ?
सरोज बोली, “अरे जीजी कभी ऐसी बस में बैठी हो जिसमे बहुत सारी सीटें खाली हों और बस में एक बच्चा हो “।
हम लोगों को कुछ समझ नहीं आया।
सरोज आगे बोली,” अब बस में वो बच्चा क्या करता है ? जो भी सीट खाली हो जाती है उस पर बैठ जाता है। कोई जब सवारी आती है तो उठ जाता है, जब सीट फिर से खाली होती है तो भाग कर उस पर बैठ जाता है”। फिर हंस कर बोली, “यही आज दीपक करेगा। हम तीनों में से जिस भी घोड़ी के ऊपर सवार नहीं होगा उसी पर चढ़ जाएगा। ये लौंडे दीपक संतोष राकेश की तरह एक एक घंटा थोड़े ही चुदाई कर सकते हैं। नए लौंडे है झड़ेंगे भी जल्दी जल्दी”।
जैसे ही सरोज ने कहा, “हम तीनों में से जिस भी घोड़ी के ऊपर सवार नहीं होगा दीपक उसी पर चढ़ जाएगा। ये लौंडे दीपक संतोष राकेश की तरह एक एक घंटा थोड़े ही चुदाई कर सकते हैं। नए लौंडे है झड़ेंगे भी जल्दी जल्दी”।
“सरोज भी कभी कभी कमाल की बात करती है” ,सरोज की इस बात से हमारी हंसी छूट गयी।
साढ़े दस बज चुके थे दीपक को तो अब तक आ जाना चाहिए था। नए नवेले लंड लेने को हम बेताब थीं। तभी जीप की आवाज सुनाई दी I
“लगता है आ गए हमारे चोदू ”। सरोज हंसी।
दीपक आ गया, पीछे पीछे आ गए तीनो लौंडे। देख़ने में तो ठीक थे, सुन्दर, मध्यम लम्बाई के मगर दुबले पतले – हट्टे कट्टे तो नहीं ही थे। बालों के स्टाइल वही कालेज के फुकरों वाले – साइड से बिलकुल छोटे, ऊपर से लम्बे। महंगे ब्रांडेड कपड़ों और जूतों से लग ही रहा था की अमीर घरानों से हैं।
आ कर खड़े हो गए और हमें घूरने लगे। दीपक बाथ रूम में फ्रेश होने चला गया।
सब चुप थे। सरोज ही बोली, “तुम आये हो चुदाई करने” ?
कुछ देर चुप रहने के बाद तीनों ने हां में सर हिला दिए, बोले कुछ नहीं।
सरोज ही बोली, “लंड कैसे हैं दिखाओ”।
“लड़के परेशान। उनकी तो बोलती ही बंद हो गई”।
तब तक दीपक भी आ गया, “ये मोंटू है, ये सन्नी और ये बंटी है “। “नामों से हमे क्या लेना देना था, हमने तो एक दिन की चुदाई की मस्ती करनी थी”।
“दीपक ये तो शर्मा ही बहुत रहे हैं, चुदाई कैसे करेंगे ” ? रजनी बोली।
“नए हैं इस लिए शर्मा रहे हैं। मुझे तो हमेशा कहते थे भैया हमे भी चूत दिलवाओ हमे भी चुदाई करनी है “। तीनो एक दुसरे की तरफ देखने लगे, मगर हमसे नजरें चुरा रहे थे।
दीपक बोला, “हम लोगों को ही पहल करनी पड़ेगी”, कह कर दीपक ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और लंड हिलाते हिलाते हमें बोला, “आप लोग भी कुछ ऊपर नीचे आगे पीछे खोल कर चूत और गांड के गुलाबी छेदों के जलवे दिखाओ इनको, तभी खुलेंगे ये – तभी शर्म हटेगी इनकी और लंड खड़े होंगे “।
फिर से सरोज ने ही पहल की और नंगी हो गयी। “तीनों – मोंटू , बंटी और सन्नी के मुंह खुले रह गए”।
तीनों आखें फाड़ फाड़ कर सरोज के गदराय गठीले शरीर को देख रहे थे। तनी हुई चूचिया, मोटे चूतड़ सफाचट चूत। एक बाल नहीं चूत पर। “बस एक लाइन दिखाई दे रही थी जिसके अंदर स्वर्ग छिपा था”।
हमने भी कपडे उतार दिए। वो तीनों बुत की तरह खड़े थे।
दीपक बोला, “आगे आओ सालो भोसड़ी वालो, ऐसे ही मुंह खोल कर खड़े रहोगे कि चूत गांड में लंड भी डालोगे “I
एक एक कर के तीनों ने कपड़े उतार दिए और नंगे हो गए ।
हिचकिचाहट के मारे हमारी फुद्धियां देख कर भी उनके लंड ही खड़े नहीं हुए थे। हमने उनको अपने पास बुलाया और उनके लंड पकड़ लिए।
बस लंड पकड़ने भर कि देर थी कि उनके लंड खड़े होने शुरू हो गए। तीनो देखने में तो लड़के ही लगते थे मगर लंड उनके अच्छे खासे लौड़े बन चुके थे – मोटे ताजे और लम्बे। चुदाई का मजा आने वाला था।
जो जो लड़का जिसके सामने था, उसने उसीका लंड चूसना शुरू कर दिया। लंड सख्त हो गए। मेरे और रजनी वाले लड़कों के लंडों का सुपाड़ा सामने था, मगर सरोज वाले लड़के बंटी का सुपाड़ा चमड़ी से ढका हुआ था। सरोज ने चमड़ी पीछे करने कि कोशिश की मगर चमड़ी टाइट थी, सुपाड़े से पीछे नहीं गयी।
सरोज ने पूछा , “तूने अभी चुदाई नहीं की” ?
बंटी घबराहट में बोला, “की है दीदी”। सरोज जोर हंसी ,”अबे चुदाई करने आया है की राखी बंधवाने “?
बंटी एक दम सम्भला, “की है जी “।
सरोज बोली, “तेरे सुपाड़े की चमड़ी पीछे नहीं जाती तो चुदाई के वक़्त परेशानी नहीं होती ” ?
बंटी चुप्प रहा। सरोज ही बोली और बड़े ही ज्ञान की बातें बताई ,” देख मुन्ना, कई लड़कों में ये समस्या होती है। इस में कोइ बुराई नहीं, ये कोई बीमारी नहीं। मगर कई बार अगर जोश एकदम से लंड झटके के साथ चूत के अंदर डालने की कोशिश की और चूत अगर ज़्यादा चुदी ना हुई – और टाइट हुई – तो सुपाड़े के नीचे की नस जो सुपाड़े की चमड़ी के साथ जुडी होती है कट जाती है और खून निकलने लगता है। अगर कभी ऐसा हो जाये तो घबराना मत – बस नस को दबा देना, एकदम खून बंद हो जाएगा। फिर डाक्टर के पास चले जाना “।
बंटी हैरान परेशान सा दिख रहा था। उसका तो लंड ही बैठ गया था।
सरोज ने उसकी परेशानी दूर करने की कोशिश की ,”मुट्ठ मारता है ” ?
बंटी चुप्प – सरोज बोली,”तुझ से ही पूछ रही हूं, मुट्ठ मारता है “?
अब सब इस बातचीत को सुन रहे थे। बंटी ने कहा “मारता हूं जी”।
“तो मुट्ठ मारते वक़्त भी ये चमड़ी ऐसे ही रहती है, सुपाडे के ऊपर ” ?
“जी”, लड़का अब दूसरे लड़कों की तरफ देखने लगा।ये बात तो उनको भी पता ही थी। तीनो इक्क्ठे ही तो मुट्ठ ही मारते थे।
“देख अब से जब भी मुट्ठ मारने का मन हो तो बैठे लंड में ही चमड़ी पीछे कर लेना। जब लंड खड़ा हो जायेगा तो चमड़ी पीछे ही रह जाएगी। मुट्ठ मारने का मजा भी बहुत आएगा”।
सरोज बोली, “ये तो हो गयी आगे की बात, आज का तेरा इंतजाम मैं कर देती हूं “। सरोज ने दीपक की और देख कर कहा, ” दीपक वो जैल क्रीम देना, लगता है बंटी से चुदवाने के लिए गांड में तो क्रीम लगानी ही पड़ेगी चूत में भी लगानी पड़ेगी”।
चलो सामने आओ हमारे। हम तीनों ने उनकी लंड अपने अपने मुंह में ले लिए। सरोज ने बंटी का मैंने मोनू का और रजनी ने सन्नी का। हमने उनके लंड चूसने शुरू कर दिए। उनके चूतड़ हिलने शुरू हो। थोड़ा थोड़ा आगे पीछे होने लगे।
लंड पूरे खड़े हो चुके थे। लड़के हल्के थे मगर लंड अच्छे खासे मोटे और छः सात इंच लम्बे थे। सरोज के सामने वाले लड़के बंटी का लंड तो कुछ ज़्यादा ही लम्बा था।
दस मिनट की चुसाई हुई थी की सन्नी बोला, मेरा छूटने वाला है। बंटी बोला मेरा भी।
सरोज ने बंटी का लंड मुंह से निकाल कर कहा, “थोड़ा रोक के रख, इतनी जल्दी झड़ेगा क्या ? शादी बाद बीवी की चुदाई के वक़्त इतनी जल्दी झड़ गया तो तेरी बीवी तुझे छोड़ तेरे बाप के साथ चुदाई करेगी। बंटी हंस पड़ा। बाकी भी हंस पड़े “।
हंसी तो हमारे भी छूट रही थी पर लंड मुंह में थे।
“ये सरोज भी क्या चीज़ है”।
सरोज ने फिर कहा, “अभी तुमने हमारे मुंह में ही अपना सफ़ेद माल निकलना है। हमे भी पता तो चले की तुम हमारे चूत और गांड में अपनी रबड़ी डालने के लायक हो भी की नहीं “।
ये कह कर सरोज फिर बंटी का लंड चूसने लगी। लड़कों के मुंह से आवाज़ें आनी शुरू हो गयी आआह…..आआह….आआह…..आआह…..आआह….अऔ….अऔच…आ….आररर….घररर….घररर…घररररर ओओओ….अअअअअह…..अअअअअह….आह….आह और थोड़ी ही देर बाद एक लम्बी आआआआह के साथ ही तीनों एक के बाद एक झड़ गए।
कम से कम तीस चालीस सेकण्ड तक उनके लंड से मलाई निकलती रही।
हम लोगों के तो मुंह ही भर गए थे। हमने उनके चूतड़ कस के पकड़े हुए थे जिससे जब तक हम न वो चाहें लंड हमारे मुंह से ना निकल पाएं I
थोड़ी देर ऐसे ही खड़े रहने बाद उनके लंड बैठ गए।
उनके मुंह से निकलने के वक़्त गर्म लेसदार मलाई बाहर ना निकल जाए इस लिए हमने अपने होंठ भींच लिए और उनको पीछे कर के उनके लंड बाहर निकल दिए।
तीनो हमारे और देख रहे थे की हम उनकी रबड़ी मलाई का क्या करती हैं।
हम तीनो ने उनके लंड से निकला हल्का नमकीन गर्म पानी गले नीचे उतार दिया। “मजा ही आ गया – ये भी अजीब ही मजा था। लड़कियों को लंड की मलाई भी पीनी चाहिए – अगर रोज़ नहीं तो कभी कभी तो पीनी ही चाहिए “।
सरोज ने फिर उनको बुलाया और लंड चूसने लगी। हमने भी सरोज की तरह बाकी दोनों सन्नी और मोनू के लंड चूसने शुरू कर दिए।
जब हम चूस चूस कर मुहं में मलाई लेकर – पीकर फारिग हो गयी तो दीपक ने क्रीम सरोज के हाथ में दे दी। “ये लो सरोज तुमने मंगवाई थी “।
सरोज ने दीपक के हाथ से क्रीम ली साथ ही दीपक का लंड भी मुंह में ले लिया। खूब चूसने के बाद ही मुहं से दीपक का लंड निकाला।
क्रीम रख कर सरोज ने बंटी का लंड चूसना शुरू कर दिया और बोली, “टेंशन मत ले बंटी, बढ़िया चुदाई करेगा तू आज “।
इतना कहने भर से ही बंटी का लंड फिर से फनफनाने हो गया।
” बोली थी ना मैं की सरोज बहुत समझदार है “।
अब हम भी मोनू और सन्नी के लंड चूसने लगीं। तगड़े लम्बे मोटे लंड थे। अब चुदाई कैसी करते हैं ये देखने वाली बात थी।
सरोज ने बंटी का लंड पूरा खड़ा कर दिया था, “चल आ जा बंटी, कैसे चोदेगा, ऊपर लेट कर, पीछे से या नीचे लेटेगा और मैं बैठूं तेरे लंड के ऊपर और ऊपर से चुदाई करूं”। बंटी ने कोइ जवाब नहीं दिया।
सरोज ने बंटी को पकड़ा, बेड की तरफ ले गयी और किनारे पर घुटनों और कुहनियों के बल उकड़ू हो कर चूतड़ पीछे कर के बैठ गयी – सब से उत्तेजित करने वाली पोज़िशन होती है ये। इसी लिए सरोज ऐसे बैठी थी। “बंटी चूस मेरी फुद्दी को “।
बंटी ने चूत की फांकें खोली और सरोज की चूत के छेद को चाटने लगा। बीच बीच में वो चूतड़ों को खोल कर गांड का छेद भी चाट रहा था। ये सीन देख कर मोनू और सन्नी भी उत्तेजित हो गए और हमारा मन भी चूत और गांड चटवाने का करने लगा। हम भी सरोज के साथ वैसे ही उकड़ू हो कर बैठ गयीं। सन्नी और मोनू हमारी चूत और गांड चाटने लगे – बड़ी जोर जोर से चाट रहे I
“साले गांडू इतनी जोर जोर से चूत गांड चूस चाट रहे थे की डर लगा कहीं दांत ही ना मार दें चूत या चूतड़ों पर “।
मेरी चाटने वाला शायद सन्नी था, बहुत तेजी से चूत और गांड चूस रहा था। जोर जोर की सपड़ सपड़ की आवाज आरही थी। बिलकुल आपे से बाहर हो गया लगता था। शायद कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। वो खड़ा हुआ और मेरी चूत में लंड डाल कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा – इतनी जोर जोर से की मैं हैरान हो रही थी। पांच ही मिनट में वो झड़ गया। लेकिन उसके लंड में से इतना अधिक वीर्य निकला की कम से कम आधे मिनट तक वो पानी ही छोड़ता रहा।
“अभी कुछ देर पहले इतनी ही गर्म नमकीन मलाई मेरे मुंह में छोड़ी थी” I
झड़ने के बाद सन्नी ने मेरी चूत में लंड निकाला और सोफे पर बैठ गया। सन्नी गया और दीपक आ गया और एक झटके के साथ मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया – अंदर तक।
“एक घोड़ी खाली हुई थी, घोड़ी का सवार अभी अभी नीचे उतरा था”।
बाए बाए मस्त करनाल I फिर बुलाना – ज़रूर आएंगे I
“एक घोड़ी खाली हुई थी, घोड़ी का सवार अभी अभी नीचे उतरा था”।
सन्नी मुझे चोद कर मेरी चूत में अपनी मलाई डाल कर हट चुका था। एक घोड़ी खाली थी। “दूसरा सवार दीपक सवारी के लिए खड़े लंड के साथ तैयार था”।
दीपक ने मुझे कमर से पकड़ा और धक्के लगाने शुरू कर दिए। अभी दीपक ने मुझे दस मिनट ही चोदा होगा की सन्नी फिर से आ गया, खड़ा लंड ले कर। दीपक ने लंड मेरी चूत में से निकाल लिया और सोफे पर बैठ गया – “इस इंतज़ार में की कोई और घोड़ी खाली हो और वो उसकी सवारी करे”।
इस बार जो सन्नी ने मेरी ऐसी चुदाई की कि मजा ही आ गया। नया लड़का था, इतनी तेज़ तेज़ धक्के लगा रहा था मेरी तबियत हरी हो रही थी।
उधर मोनू रजनी की चुदाई कर रहा था पूरे जोर शोर से। मोनू लगता था चुदाई करता रहता था ।
बंटी क्रीम लगा कर सरोज की चूत में लंड डाल चुका था।
आधा घंटा हम लोगों की चुदाई हुई। रजनी और सरोज का तो पता नहीं, मैं इस एक आधे घंटे में एक बार झड़ चुकी थी।
उधर सरोज के पीछे वाले बंटी ने एक दम धक्कों की स्पीड बढ़ा दी – लगता था झड़ने वाला है। सरोज चूत का दाना रगड़ रही थी। एक सिसकारी आआआआईईईईईई के साथ वो झड़ गयी मगर बंटी नहीं झड़ा। सरोज ने सर मोड़ कर कहा बंटी क्रीम लगा कर लंड गांड में डाल।
बंटी ने क्रीम लगाई और लंड को सरोज की गांड में डालने की कोशिश करने लगा, मगर लंड गया नहीं।
सरोज ने सोचा कहीं लंड के सुपाड़े की नस ही ना कटवा ले, उसने कहा, “तू नीचे लेट “। बंटी लेट गया।
बंटी का लंड बड़ा लम्बा था। सरोज ने अपनी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और बंटी के लंड पर बैठने लगी। थोड़ा लंड गांड के अंदर लिया – फिर थोड़ा और। जैसे जैसे लंड गांड में जगह बना रहा था वैसे वैसे सरोज लंड गांड के अंदर ले रही थी। पांच सात बार कोशिश करने पर बंटी का लंड पूरा अंदर बैठ गया। सरोज घुटनो के बल बंटी ऊपर बैठ गयी और बोली, “लगा धक्के नीच से I डाल अपना लम्बा लंड मेरी गांड में अंदर तक – किस दिन काम आएगा ये”?
बंटी का पूरा लंड सरोज की गांड के अंदर जड़ तक घुसा हुआ था और वो नीचे से धड़ा धड़ धक्के लगा रहा था। जब सरोज की गांड का छेद मुलायम हो गया तो सरोज ऊपर से उठ गयी और बंटी से बोली, “चल अब पीछे से गांड मार, अब चला जाएगा अंदर “। और वो उकड़ू हो कर बेड के किनारे पर गांड पीछे कर के बैठ गयी।
“क्रीम लगा ले बंटी थोड़ी और”। बंटी ने क्रीम लगाई और लंड पूरा जड़ तक अंदर डाल दिया। सरोज ने एक सिसकारी ली, आआआआआह ……. और बोली, “बढ़िया – चल चोद अब मेरी गांड को लगा लम्बे लम्बे धक्के “। बंटी ने फिर तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए।
तीनो लड़के लगे पड़े थे। रजनी के पीछे वाला मोनू झड़ गया और जा कर सोफे पर बैठ गया। रजनी भी झड़ गयी थी। बेड पर ही लेट गयी। उधर सरोज कि गांड में बंटी ने पूरी मलाई की धार छोड दी। जैसे लंड बाहर निकला की सफ़ेद सफ़ेद मलाई बाहर गिरने लगी। ये सीन देख कर मोनू का लगता था फिर खड़ा हो गया। जैसे ही बंटी हटा, मोनू ने सरोज की गांड में लंड डाल दिया और चोदने लगा। सरोज ने एक बार मुड़ कर देखा और सर नीचे करके गांड चुदाई का मजा लेने लगी।
रजनी लेटी हुई थी और मैं और सरोज चुद रहीं थी। बंटी सोफे पर बैठा लंड सहला रहा था। रजनी उठी और फर्श पर बैठ कर बंटी का लंड मुंह में ले लिया। जल्दी ही बंटी का लंड फनफनाने लगा। रजनी ने हमे चुदाई करवाते देखा और बंटी को ले कर दूसरे कमरे में चली गयी – क्रीम साथ ले गयी ।
बेड पर हम दोनों किनारे पर पीछे से चुदवा रही थी। रजनी शायद लेट कर चुदाई करवाना चाहती थी, और जैसे हम चुद रही थी ऐसे तीसरी के लिए लेट कर चुदाई मुश्किल थी।
मानना पडेगा की लड़के बढ़िया चोद रहे थे। आधा घंटा चोदने के बाद सन्नी और मोनू झड़ गए। चोदा भी अच्छा था, गर्म रबड़ी भी खूब गिराई थी हमारे छेदों में।
सन्नी और मोनू सोफे पर बैठ गए, मैं और सरोज एक दूसरी के ऊपर लेट कर एक दूसरी की गांड और चूत चाटने लगी।
अभी हम एक दूसरी की चाट ही रही थीं की वो फिर से आ गए – खड़े लंडों के साथ। हम हैरान हो गयीं, “इतने पागल हैं ये चुदाई के पीछे” !!
अब हम बेड के किनारे पर सीधी लेट गयी तकिये हम ने अपनी गांड के नीचे रख लिए और चूतड़ उठा दिए – टांगें चौड़ी कर दी। लड़के कद के थोड़े छोटे थे इसलिए चूत और गांड दोनों चोद सकते थे।
सरोज ने कहा चलो हो जाओ शुरू, गांड और चूत दोनों छेद रगड़ना – और अदला बदली भी करना।दो दो चूतों और दो दो गांड के छेदों का मजा लो। दोनों ने चुदाई शुरू कर दी। मस्त चोद रहे थे। कभी गांड में कभी चूत में। कभी सन्नी मुझे कभी मोनू मुझे।
तभी बंटी आ गया। झड़ गया होगा। रजनी नहीं आयी थी। बंटी आ कर दीपक से बोला,”आपको बुला रही हैं “।
दीपक खड़े खूंटे के साथ उठा और रजनी के पास चला गया।
बंटी सोफे पर बैठ गया। हमारी चुदाई देख उसका फिर खड़ा हो गया। वो आ कर हमारे पास खड़ा हो गया। मैंने पूछा, “क्या हुआ, फिर चोदना है क्या ” ? उसने हां में सर हिला दिया।
सरोज बोली “ठीक है एक लाइन बना लो। मुझे सन्नी चोद रहा है और मोनू आभा जीजी को चोद रहा है। मोनू तू हट जा सन्नी तू जा आभा जीजी को चोद और बंटी तू मेरे ऊपर आ जा। फिर सन्नी हट जाएगा और बंटी आभा जीजी को चोदेगा और मोनू मुझे। समझ गए ” ?
तीनों खुश हो गए और बारी बारी से हम दोनों को चोदने लगे। बंटी को लगता है गांड चुदाई ज्यादा अच्छी लगी। वो गांड ही चोद रहा था, बाकी के दोनों चूत रगड़ रहे थे।
कहां तो हमने सोचा था की ये नए लौंडे हैं क्या चूत गांड चुदाई करेंगे और कहां ये एक बार शुरू हुए और अब इनके लंड थक ही नहीं रहे थे। एक झड़ता भी था तो दुसरे को चुदाई करते देख फिर उसका खड़ा हो जाता था।
तभी दीपक आ गया। आते ही बंटी को बोला, “बंटी तू गांड चोद रहा था उधर ” ?
“हां भैया “। बंटी ने जवाब दिया।
दीपक बोला, “जा दुबारा। गांड चुदाई करवानी है रजनी को”।
बंटी चला गया। अब दो खलीफे हमे बारी बारी चोद रहे थे। बंटीकी गांड चुदाई की बात सुन कर हमारी भी गांड चुदवाने की इच्छा हो आई। हम ने भी सन्नी और मोनू को गांड चोदने के लिए कहा। उनको भी टाइट छेद रगड़ने में मजा आ रहा था। नए लौंडे थे, बिकुल राकेश की तरह गांड चोद रहे थे।
सुबह ग्यारह के करीब शुरू हुई ये चुदाई चुसाई की कवायद दोपहर बाद चार बजे तक चली।
जब सब थक कर चूर हो गए और लड़कों के लौंड़ों में भी दम नहीं बचा तो दीपक ने कहा, “इनका काम तो हो गया मैं इनको शहर छोड़ कर आता हूं “।
लड़कों ने कपड़े पहन लिए। जब चलने लगे तो बंटी ने दीपक से बोला, “फिर कब आएंगे भैया” पूछ वो दीपक से रहा था मगर सरोज की तरफ रहा था।
सब हंस पड़े, जवाब किसी ने नहीं दिया। दीपक लड़कों को छोड़ने चला गया। हम भी उठी अगले दिन सुबह हमने भी निकलना था। सारी पैकिंग करनी थी। .
छः दिन की चूत गांड की चुदाई और इन लौंडों साथ मजे ने तबीयत प्रसन्न कर दी थी।
“हमने सोचा नहीं था कि ये नए लड़के एक बार शर्म उतार कर चोदना शुरू करेंगे तो इतनी मस्त चुदाई कर देंगे। चूत तो मस्त चोदते ही थे गांड चुदाई भी मस्त करते थे। और साले चूत को चाटते तो ऐसे थे जैसे बच्चा जल्दी जल्दी इसक्रीम खाता है – इस डर से कि कोइ और ना ले ले”।
सरोज बोली, “पहले पता होता ये भोसड़ी वाले चुदाई के ऐसे भूखे हैं और ऐसे चोदते हैं और इतना पानी छोड़ते हैं कि मुंह में छुड़वाओ तो मुंह भर जाता है और चूत में छुड़वाओ तो चूत भर जाती है, तो हम तो इनको एक बार पहले भी बुला लेते”।
“चलो जो होना था हो गया जो नहीं होना था नहीं हुआ। अब आज की बाकी रात का सोचो I आज की आखरी रात अभी बाकी है “।
तीन गायें और एक सांड जो दिन भर उन लौंडों के कारण ढंग से चुदाई भी नहीं कर सका था। बस एक रजनी ही चुदी थी उससे – वो भी सिर्फ एक बार। अब वह चढ़ेगा तीनो पर – आगे भी और पीछे भी I
वो रात भी वैसे ही निकल गयी। दीपक ने बारी बारी हम तीनो की चुदाई की और हमे निहाल कर दिया। जिस तरह की धुआंधार दीपक ने चुदाई उस दिन की थी और जैसा सख्त उसका लंड था , मुझे लग रहा था की उस दिन भी दीपक ने विआग्रा खाई होगी – या फिर दीपक था ही ऐसा मस्त चोदने वाला।
दीपक ने दो दो बार हमारी चूतों पानी छुड़वा दिया। गांड ऐसे चोदी कि चोद चोद सुजा दी। चलते समय पता लग रहा था छेद कुछ फूला फूला सा है – लाल तो कर ही दी होगी।
मैंने रजनी से कहा ,”रजनी मैं सोच रही थी दीपक ने पक्का वियाग्रा खाई है। ऐसा कमाल हम पंकज और कुणाल से चुदाई में देख ही चुके थे। और अगर दीपक बिना वियाग्रा के ही इतनी चुदाई कि है तो बड़ी खुशकिस्मत होगी वो लड़की जिस के साथ दीपक कि शादी होगी और वो ऐसी चूत और गांड चुदाई करवाएगी “।
रजनी बोली, “फिलहाल अगर आज कि बात करें तो ऐसी खुशकिस्मत तो मेरी चुदक्क्ड़ मां ही है। मैं अपनी आँखों से देख चुकी हूं दीपक को मेरी मां को चोदते हुए – ऐसे ही रगड़ रगड़ कर चोदता है मां की चूत और गांड भी, जैसे हमारी चोदी है। चूत और गांड लाल कर देता है I और फिर संतोष का लंड मां की चूत में और राकेश का मां की गांड में – और सरोज तेरी चुसाई चटाई अलग। और एक औरत को इससे ज़्यादा क्या चाहिए ? घंटा”?
सभी नीचे मुंह कर के या इधर उधर देख कर हंस दिए।
करनाल में सातवां और आख़री दिन
अगले दिन सुबह नौ बजे निकलने लगे – दीपक ने टैक्सी बुला ली थी।
सरोज रजनी से बोली ,”जीजी अब कब आओगे। इस बार का आप लोगों के आने से चुदाई का तो तो मजा ही आ गया। जब भी आओ, आभा जीजी को भी ले कर आना। बड़ा मजा रहेगा।
रजनी बोली “अब क्या पता कब मां बाबू जी तीर्थ यात्रा पर जायेंगे। वो तीर्थ यात्रा पर जाएं तभी हमारी चूत और गांड चुदाई का मुहूर्त निकलेगा और इन दोनों छेदों के भाग्य खुलेंगे “।
सब हंस पड़े। हम दोनों टैक्सी में बैठ गयी
सात दिन का हमारा करनाल का ट्रिप सफल रहा
