प्रीती ने टांगें उठाई हुए थी और हाथ नीचे करके अपनी फुद्दी की फांकें चौड़ी की हुई थी। प्रीती की गुलाब-गुलाबी गीली फुद्दी मेरे सामने थी। मेरी आंखें जवान प्रीती की गुलाबी फुद्दी से हट ही नहीं रही थी। मन तो कर रहा था, “मां चुदाने गयी चुसाई, सीधा लंड ही डालता हूं इस टाइट फुद्दी में और करता हूं इसकी चुदाई।”
प्रीती बोली, “क्या देख रहे हो लो पापा? क्या सोच रहे? ये तो रही आपकी बेटी की फुद्दी आपके सामने, आ जाओ, जो करना है करो – चूसो, चाटो, चोदो।”
मैं जैसे नींद से जागा और नीचे बैठ कर प्रीती की फुद्दी चूसने लगा। पंद्रह मिनट तक मैं सपड़-सपड़ करके प्रीती की फुद्दी का पानी चूसता चाटता रहा। ऐसा लग रहा था प्रीती की फुद्दी का पानी खत्म ही नहीं हो रहा। मैं चूसता जा रहा था और प्रीती की फुद्दी पानी छोड़ती जा रही थी।
तभी प्रीती ने मेरा सर अपनी फुद्दी पर दबा दिया और जोर से बोली, “पापा अब पानी छोड़ने वाली है मेरी फुद्दी, अब मत हटना। चूसो पापा, चूत का दाना चूसो पापा, मजा आने वाला है मुझे।”
मैंने अपनी जुबान प्रीती की फुद्दी के छेद में ऊपर-नीचे कर रहा था। मैंने जुबान छेद में निकाली और फुद्दी का दाना चूसने चाटने लगा। तभी प्रीती के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी, “आआह पापा आअह, चूसो पापा, और चूसो, और जोर से चूसो, आह निकला, निकला पापा, आह आ गया आह, आह।” और तभी प्रीती का जिस्म जैसे अकड़ गया। प्रीती ने मेरा सर अपनी फुद्दी पर दबा दिया।
ये तो शुक्र है कि मुझे इन औरतों की फुद्दी चूसने का तजुर्बा था, वरना जिस तरह से प्रीती ने मेरा सर अपने फुद्दी पर दबाया था तो मेरा दम ही घुट जाता।
असल में मेरी बीवी भूपिंदर भी जवानी में फुद्दी चुसवाते हुए यही कुछ करती थी। इसीलिए मुझे पता था कि जब लड़की को फुद्दी चुसवाते-चुसवाते मजा आ जाए, तो कैसे अपना दम घुटने से रोकना है।
पांच मिनट तक मैं ऐसे ही प्रीती की फुद्दी में मुंह डाले बैठा रहा। मेरे लंड सख्ती के कारण फटने लगा था। जैसे ही प्रीती जरा सी ढीली हुई, मैं उठ गया। प्रीती की टांगें तो चौड़ी ही थी, चूतड़ों के नीचे तकिया भी लगा ही हुआ था, मैंने प्रीति के घुटनों के नीचे हाथ डाल कर टांगें थोड़ी और ऊपर उठायी, और लंड फुद्दी के छेद पर रख कर पूरा लंड फुद्दी में डाल दिया।
प्रीती ने अपनी बंद आंखें जरा ऐसी खोली, मेरी तरफ देखा और बस इतना ही बोली,”आह पापा क्या लंड है, मजा आ गया।”
इसके बाद फिर से आंखें बंद कर ली और मजे लेने लगी। प्रीती की टांगें चौड़ी-चौड़ी ही थी, और मेरा लंड प्रीती की फुद्दी में अंदर तक गया हुआ था। मैंने प्रीती की टांगों पर से हाथ हटा कर प्रीती के बड़े-बड़े सख्त मम्मों के ऊपर हाथ रख दिए और प्रीती की चुदाई चालू कर दी।
दो मिनट के धक्कों के बाद ही प्रीती ने आंखें खोल दी, मेरी तरफ देखा और चूतड़ घुमाने लग। प्रीती के मुंह से फिर वहीं आवाजें आने लगी, “आह पापा सच में ही मस्त लंड है आपका, बढ़िया रगड़े लग रहे हैं फुद्दी में, बड़ा ही मस्त चोदते हो आप। जोर से चोदो पापा, और जोर से चोदो रगड़-रगड़ कर चोदो।”
प्रीती नीचे से चूतड़ हिलाते घुमाती हुई ऊंची आवाज़ में बोल रही। किसी का डर तो था नहीं, घर में हम दो ही तो थे।
पंद्रह मिनट की चुदाई के बाद मेरे लंड का पानी निकलने वाला हो गया। मैंने एक हाथ प्रीती के मम्मे पर से हटा लिया और हाथ नीचे करके अपने अंगूठे से प्रीती की फुद्दी का दाना रगड़ने लगा।
प्रीती के मुंह से “आअह पापा, आह पापा” की आवाजें निकलने लगी। तभी प्रीती ने अपनी टांगें बंद करके टांगें मेरी कमर के पीछे करके मुझे टांगों में जकड़ लिया और चूतड़ घुमाते हुए मेरी तरफ देखते हुए बोली, “पापा लगाओ चार-पांच जोरदार धक्के, मेरी फुद्दी का मजा बस अटका ही हुआ है, निकाल दो इसका पानी।”
मैंने प्रीती की फुद्दी का दाना जोर-जोर से रगड़ते हुए लम्बे-लम्बे धक्के लगाए। तभी मेरे लंड में से गर्म-गर्म शहद निकला और प्रीती की फुद्दी में चला गया। जैसे ही मेरे लंड ने पानी छोड़ा, प्रीति ने भी नीचे से जोर के चूतड़ झटकाये और जोर से बोली, “निकल गया पापा, आ गया मुझे भी मजा।” और इसके साथ ही प्रीती ढीली हो गयी।
मैंने प्रीती को बाहों से पकड़ कर उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैं भी प्रीती के साथ ही लेट गया। मैंने प्रीती की फुद्दी पर हाथ फेरते हुए कहा, “प्रीती मस्त फुद्दी है तुम्हारी, एक-दम टाइट और चुदाई भी तुम मस्त करवाती हो चूतड़ घुमा-घुमा कर, बिलकुल अपने मम्मी की तरह।”
प्रीती मस्ती में थी। प्रीती मेरा लंड पकड़ कर बोली बोली, “मम्मी की तरह पापा? बिशनी की तरह नहीं?”
मैं भी हंसा और बोला, “हां प्रीती, चूतड़ तो बिशनी भी खूब घुमाती है, लेकिन बोलती बस यही है – आह सरदार जी मजा आ गया, आह सरदार जी मजा आ गया। मगर प्रीती तुम्हारे इन गोल गोल सेक्सी चूतड़ों की वजह से तुम्हारी फुद्दी ऐसी ऊपर उठ जाती है कि लंड पूरा का पूरा अंदर जाता है। साफ़ पता चलता है कि लंड अब और आगे नहीं जाएगा।”
प्रीती ने भी मेरा लंड पकड़ते हुए कहा, “पापा आखिर बेटी किसकी हूं मैं? चुदाई तो आप भी मस्त करते हो अभी भी सुखचैन के लंड से कम दम नहीं है आपके लंड में। अभी भी आपके लंड की ना सख्ती कम हुई है और ना ही आपका चुदाई करने का दम और ही कम हुआ है। आज भी आपने मेरी फुद्दी की तसल्ली कर दी। और पापा फ़िक्र ना करो आप, मम्मी के आने के बाद भी मैं आपसे चुदाई बंद नहीं करवाने वाली।”
प्रीती बोली, “पापा चलूं अब अब डिनर की तैयारी करूं।” कह कर प्रीती उठी और मैंने शर्म हया छोड़ कर प्रीती से कहा, “प्रीती बेटा एक बार मेरा लंड तो चूसती जाओ।”
प्रीती बोली, “पापा मैं भी यहीं हूं और आपका लंड भी यहीं है।” ये कह कर प्रीती ने मेरा लंड मुंह में लिया और और थोड़ा चूसने के बाद बोली, “बस पापा, कहीं ऐसा ना हो ये आपका ये लंड फिर खड़ा हो जाये और डिनर बीच में ही रह जाए, फिर अभी तो रात शुरू ही हुई है।”
प्रीती जाने लगी तो मैंने कहा, “प्रीती कांता कह रही थी चिकन मेरीनेट – मसाले लगा कर रखे हैं, वही ओवन में डाल लो। रात को हल्का ही खाना ठीक रहेगा। चिकन ओवन में रख कर लाऊंज में ही आ जाना।” ये कह कर मैं हंस दिया।
प्रीती भी हंसते हुए बोली, “क्या पापा पूरी रात चोदना है क्या?”
मैंने भी वैसे ही कह दिया, “देखते हैं, कम से कम आज तो चोदूंगा ही। पूरी रात ना भी चोदा तो भी आधी रात तक तो चुदाई करूंगा ही। उससे कम चुदाई में तो आज ना तुम्हारे फुद्दी की तसल्ली होने वाली है और ही इस लंड की।”
प्रीती नंगी ही चूतड़ हिलती मटकाती किचन की तरफ चली गई और मैं भी बिना कपड़ों के लाउंज में आ गया।
प्रीती चिकन ओवन में लगा कर लाउंज में ही आ गयी और अपना जिन का भरा हुआ गिलास उठा कर मेरे पास ही बैठ गयी। प्रीती ने मेरा लंड हाथ में ले कर कहा, “पापा सच में बड़ा ही मस्त लंड है आपका। बड़ी ही किस्मत वाली है मम्मी जो जवानी में ऐसे लंड कि मजे लेती रही है।”
मैंने प्रीती की जांघ पर हाथ रखते हुए कहा, “प्रीती बताओ तो सही तुम कब से मेरी और भूपिंदर की चुदाई देखती रही हो?”
प्रीती बोली, “क्या बात है पापा मजे लेने हैं क्या कहानी के?”
और फिर बिना मेरे जवाब का इंतजार किये बोली, पापा ये तब की बात है जब इसको मैं फुद्दी भी नहीं बोलती थी – पेशाब वाली जगह बोलती थी। फुद्दी तो तब बोलना शुरू हुई जब समझ आयी के इसका असली मतलब लड़के का लंड इसमें डलवा कर मजा लेना होता है।”
“जब मैंने ये बात अपनी फ्रेंड सिमरन को बताई तो उसने तो जैसे पूरी पोर्न फिल्म ही चला दी।” ये कहते हुए प्रीती हंस दी और मेरा लंड दबा दिया।
अपनी बात जारी रखते हुए प्रीती बोली, “उस सिमरन ने ही मुझे बताया कि जिस छेद से ये लाल-लाल पानी निकला है उसे “फुद्दी” बोलते हैं। ये फुद्दी का छेद मजे लेने कि लिए होता है। लड़के की पेशाब वाली चीज जिसको लंड बोलते हैं, वो लड़की का ये वाला छेद देख कर एक-दम से लम्बा और मोटा हो जाता है, और फिर लड़के उसे लड़की के फुद्दी के अंदर डाल कर आगे पीछे करते हैं और दोनों को खूब सारा मजा आ जाता है।”
“पापा मैंने सिमरन से पूछा, “सिमरन तुझे ये सब कैसे पता है? क्या तेरे अंदर किसी ने डाला है क्या?”
“सिमरन बोली, “नहीं मेरे अंदर नहीं किसी ने नहीं डाला मगर हमारे घर काम करने वाली कमलेश दीदी ने मुझे बताया। कमलेश दीदी मेरे साथ बहुत से ऐसी बातें करती है और लड़कों का ”अपनी उसमें – पेशाब वाली जगह में” डलवाती है भी है।”
“पापा सिमरन ने मुझे जब मुझे ये बता रही थी तब पापा सिमरन की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी में कुछ-कुछ होने लगा था। जब मैंने सिमरन को ये बताया “सिमरन मेरी इसमें, मेरी फुद्दी में कुछ-कुछ हो रहा है।”
“पापा सिमरन बोली, “प्रीती मुझे पता है क्या हो रहा है और अब क्या करना है। कमलेश दीदी करती है मेरे साथ ये। अब तेरी फुद्दी मजा लेना चाहती है। चल टॉयलेट में चलते हैं, वहां मजे लेंगे।”
“हम मजे लेने के लिए कॉलेज के एक ही टॉयलेट में चलीं गयी। पापा कॉलेज में लड़कियों के टॉयलेट में एक ही टॉयलेट में दो लड़कियों का जाना बहुत आम बात होती है।”
“टॉयलेट में जा कर सिमरन ने अपनी स्कर्ट उठा कर अपना अंडरवियर नीचे कर दिया और मुझे भी ऐसा ही करने को बोली।”
“पापा मैंने भी ऐसा ही किया। उसके बाद सिमरन ने थूक लगा कर उंगली अपनी फुद्दी में ऊपर-नीचे करने लगी और मुझसे बोली, “चलो प्रीती तुम भी करो।” मैंने भी थूक लगा कर अपनी उंगली अपनी “नीचे वाली” में डाल कर ऊपर नीचे करनी शुरू कर दी।”
“पहले तो मुझे लगा के ये में क्या कर रही हूं, पर जल्दी ही मुझे अजीब सा लगने लगा। मैं तो उंगली ऊपर-नीचे कर ही रही थी कि सिमरन के मुंह से एक अजीब से आवाज निकली, “आह प्रीती, ओह प्रीती ऊंह ऊंह” बोलते हुए सिमरन ने मेरा कंधा जोर से दबा दिया। सिमरन की आंखे बंद थी। सिमरन लम्बे-लम्बे सांस ले रही थी।”
“मैंने सिमरन से पूछा,”सिमरन क्या हुआ?”
सिमरन बोली, “प्रीती मुझे तो मजा आ गया, तेरा नहीं निकला प्रीती?”
“मैंने अपनी फुद्दी में उंगली ऊपर-नीचे करते हुए जवाब दिया, “नहीं सिमरन – क्या निकलेगा?”
“ये सुनते ही सिमरन ने मेरी उंगली मेरी उसमें से मतलब फुद्दी में से निकाल दी और अपनी उंगली मेरी उसमें डाल कर ऊपर नीचे, अंदर-बाहर करने लगी।”
“दो मिनट में ही मुझे भी अजीब सा मजा आया जैसे मैं हवा में हूं। मैंने सिमरन को पकड़ लिया और बोली, “ये क्या हुआ था सिमरन?”
“सिमरन बोली, “प्रीती इसको कहते हैं फुद्दी का मजा। ये मजा सभी लड़कियों को आता है। अभी तो हमें ऐसे ही मजा लेना पडेगा, मगर बाद में ये मजा लड़के देंगे हमें अपना पेशाब वाला लंड हमारी पेशाब वाली फुद्दी में डाल कर।”
“मैं हैरान थी कि सिमरन को ये सब कैसे पता था।”
“पापा मैंने सिमरन से पूछा, “सिमरन तुझे ये सब कैसे पता था?
“सिमरन बोली, “प्रीती मुझे कमलेश दीदी ने ही एक दिन मुझे ये बताया था। ये जो मजा मैंने और तूने अभी अभी लिया है, कमलेश दीदी ऐसा मजा मुझे देती रहती है और वो लड़कों वाले बात भी उसने ही मुझे बताई थी। प्रीती मुझे कमलेश दीदी की इन बातों मैं बड़ा मजा सा आता था। मैं कमलेश दीदी की साथ जब भी टाइम मिलता यही लड़के-लड़कियों वाली बातें करने लग जाती।”
“फिर एक दिन जब मैं कमलेश दीदी के साथ फुद्दी लंड के बातें कर रही थी तो कमलेश दीदी बोली, “सिमरन तूने सच मैं ही देखना है लड़के-लड़की कैसे ये करते हैं?”
“मैंने हां में सर हिला दिया।”
कमलेश दीदी बोली, “सिमरन तो फिर एक काम करना, रोज़ रात को भाई भाभी के कमरे का दरवाजा जरा सा खोल कर देखना। किसी दिन वो ये सब कर रहे हुए देखेगी। तो तुझे देख कर सब समझ आ जाएगा।”
“प्रीती कमलेश दीदी की बात सुन कर मैं हर रोज रात भाई-भाभी के कमरे का दरवाजा जरा सा खोलती और अंदर देखती। मगर मुझे तो कुछ दिखाई ही नहीं देता था। मैं तो जब भी देखती वो दोनों सोए ही होते थे।”
“फिर एक दिन जब मैं कमलेश दीदी के साथ फुद्दी लंड के बातें कर रही थी, तो कमलेश दीदी बोली, “सिमरन तूने सच में ही देखना है लड़के-लड़की कैसे ये करते हैं? “मैंने हां में सर हिला दिया।” कमलेश दीदी बोली, “सिमरन तो फिर एक काम करना, रोज़ रात को भाई-भाभी के कमरे का दरवाजा जरा सा खोल कर देखना। किसी दिन वो ये सब कर रहे हुए दिखेंगे तो तुझे देख कर सब समझ आ जाएगा।”
प्रीती कमलेश दीदी की बात सुन कर मैं हर रोज रात भाई-भाभी के कमरे का दरवाजा जरा सा खोलती, और अंदर देखती। मगर मुझे तो कुछ दिखाई ही नहीं देता था। मैं जब भी देखती वो दोनों सोए ही होते थे।”
“पापा सिमरन बता रही थी, “फिर जब एक दिन मैंने भईया-भाभी के कमरे का दरवाजा जरा सा खोला, और फिर मैंने जो देखा, मेरे तो होश ही उड़ गए। मैंने देखा भाभी के हिप्स के नीचे दो तकिये रखे थे। भईया ने भाभी कि टांगें उठायी हुई थी और भाभी को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था।भईया कमर जोर-जोर से हिलाते हुए भाभी की फुद्दी पर कुछ-कुछ कर रहे थे।”
“प्रीती अब मैं क्या बताऊं, भैया भाभी को ये सब करते देख मेरा हाथ मेरी फुद्दी पर पहुंच गया और मैं अपनी पैंटी में हाथ डाल कर अपनी फुद्दी मैं उंगली करने लगी। मेरी टांगें तो जैसे जवाब ही गयी थी। मैं बस भईया-भाभी को ही देखती जा रही थी।”
“तभी भाभी ने अपने चूतड़ जोर से ऊपर-नीचे किया और भाभी ने भईया को कस कर पकड़ लिया। भईया ने भी जोर-जोर से कमर को आगे-पीछे किया। तभी दोनों कुछ बोले जो मुझे समझ नहीं आया।”
“इसके बाद भईया कुछ सेकण्ड ऐसे ही भाभी के ऊपर ही लेटे रहे। फिर जब भईया भाभी के ऊपर से उतरे, तब मुझे दिखाई दिया भईया का लंड भाभी के फुद्दी में से बाहर निकला। प्रीती क्या बताऊं, भैया का लटकता हुआ लंड मेरे हाथ से भी ज्यादा लम्बा दिख रहा था।”
“बस मैं तो भाग कर अपने कमरे में चली गयी, और रजाई ऊपर लेकर अपनी फुद्दी में उंगली करने लगी। जल्दी ही मुझे भी मजा आ गया जैसा आज आया है।”
“अगले दिन मैंने कमलेश दीदी को रात के सारी बात बताई तो कमलेश दीदी बोली, सिमरन कल रात जो तूने देखा है इसे चुदाई कहते हैं। लड़के लड़कियों के चुदाई करते हैं और लड़कियों बड़ा मजा आता है ये चुदाई करवाने में।”
“मैंने कमलेश दीदी से कहा, “कमलेश दीदी मुझे भी एक बार ऐसी चुदाई करवानी है।”
“कमलेश दीदी हंसते हुए बोली, “अभी सबर कर ले सिमरन। अभी तेरी उम्र नहीं हुई लड़कों का लंड लेने की और चुदाई करवाने की। अभी उंगली से ही काम चला। अभी अपने भईया-भाभी की चुदाई देख कर मजे ले। ज्यादा ही मन करे तो मुझे बोलना मैं तुझे मजा दे दिया करूंगी, जैसे आज दिया है।”
“सिमरन बोली, “बस प्रीती तब से मैं छुप-छुप कर भईया-भाभी की चुदाई देखती हूं।”
फिर सिमरन थोड़ा चुप हुई और बोली, “प्रीती तू भी क्यों नहीं देखती अपने मम्मी-पापा की चुदाई? एक बार ट्राई कर। बड़ा मजा आएगा अगर तूने उन्हें चुदाई करते देख लिया।”
प्रीति बोली, “बस पापा इसके बाद तो मैं आपकी और मम्मी की चुदाई देखने का मौक़ा ढूंढने लगी। और पापा मुझे इसके लिया ज्यादा वेट भी नहीं करनी पड़ी।”
“इससे तीसरे ही दिन रात को जब मैंने आपके कमरे का दरवाजा जरा सा खोला, तो जो मैंने देखा वो देख कर तो मेरा हाथ अपने आप ही मेरी फुद्दी पर पहुंच गया। मम्मी बेड के साइड में लेटी हुई थी, मम्मी ने अपनी टांगें ऊपर की हुई थी और आप मम्मी की फुद्दी को चाट रहे थे। थोड़ी देर के बाद जब आप उठे तो आपका आगे की तरफ सीधा हुआ पड़ा लंड देख कर तो मैं हैरान ही हो गयी।”
“पापा मैं सोचने लगी, इतना बड़ा भी होता है लंड? मैं सोच रही थी इतना बड़ा लंड फुद्दी में जाता कैसे होगा? फुद्दी तो बड़ी छोटी सी होती है।”
“बस पापा इसके बाद तो आपकी और मम्मी की चुदाई मैं हर दूसरे-तीसरे दिन देखती थी। मैंने मम्मी को आपका लंड चूसते और आपको मम्मी कि चूतड़ चाटते भी देखा है। पापा मैंने तो आपको मम्मी के चूतड़ों में अपना ये मोटा लंड डालते भी देखा है।”
“आप दोनों की चुदाई देखते-देखते ही मुझे मर्द औरत की चुदाई समझ आने लगी। मगर पापा मैंने कभी भी आपकी और मम्मी की चुदाई देखना नहीं छोड़ा।”
“आपका मोटा लंड मैंने कई बार मम्मी की फुद्दी में जाते हुए देखा है, और हर बार यही महसूस किया है कि आपका लंड मम्मी की नहीं मेरी फुद्दी में जा रहा है। जब आप मम्मी की फुद्दी और चूतड़ चाट रहे होते थे, तो मुझे लगता था आप मेरी ही फुद्दी और चूतड़ चाट रहे हो। जब मम्मी के मुंह में आपका लंड होता था, तो मैं अपने मुंह में आपका लंड महसूस करती थी।”
“पापा अब जा कर मेरे दिल की मुराद पूरी हुई है और आपका लंड मेरी फुद्दी में गया है। अब आप चोदो मुझे जैसा आपका मन चाहे, मेरी फुद्दी चूसो चाटो, मेरी चूतड़ों कि चाटो, मेरे चूतड़ों को दांतों से काटो, मेरी चूतड़ों में लंड डालो। पापा आप जो भी करना चाहो करो, दिन रात, जब चाहो तब चोदो।”
प्रीति की बातें सुन कर मैं उठा और बोला, “चल प्रीती, उल्टी हो जा, मेरा मन तेरे चूतड़ चाटने का हो रहा है।”
प्रीती उठते हुए बोली, “पापा क्या सिर्फ चाटोगे? लंड नहीं डालोगे चूतड़ों में?”
मैंने कहा, “ठीक है आज ही डालता हूं लंड तुम्हारी गांड में। चलो पहले कुछ खा पी ले।”
हम दोनों, मैं और मेरी “पापा की परी प्रीती” डिनर के लिए डाइनिंग हॉल में आ गए। प्रीती रोस्टेड चिकन ले आयी। मेरी व्हिस्की और प्रीती की जिन – चिकन खाने के साथ साथ हम अपने अपने गिलासों में से छोटे छोटे घूंट भी भर रहे थे।
नंगी बैठी प्रीती मस्त लग रही थी। बड़े-बड़े मम्मे, पतली कमर और कमर के नीचे के नरम मुलायम जो मुझे दिखाई तो नहीं दे रहे थे, मगर उनके ख्यालों से ही मेरा लंड सीधा खड़ा हो चुका था। मुझे बार-बार अपने लंड को हिलाना पड़ रहा था। प्रीती से भी ये छुपा नहीं था। आखिर में प्रीती ने बोल ही दिया, “पापा मेरी फुद्दी तो गीली होने लगी है, आपके लंड का क्या हाल है?
नंगा तो मैं भी था। मेरा लंड डाइनिंग टेबल के पीछे छुपा था। मैं खड़ा हो कर टेबल के एक साइड गया और कर कहा, “लो खुद ही देख लो।”
मेरे साढ़े सात इंची, सीधे खड़े लंड को देख कर हंसते हुए प्रीती बोली, “वैसे तो कमाल ही है पापा, आपका तो लंड हमेशा ही तैयार रहता है।”
मैंने भी बोल दिया, “प्रीती तुम्हारे जैसी खूबसूरत और सेक्सी जिस्म वाली लड़की अगर सामने हो, और वो भी बिना कपड़ों के तो किसका लंड तैयार नहीं हो जाएगा?”
प्रीटी लंड को देखती हुए बोली, “पापा बड़ा मस्त लंड है आपका। ऐसे लंड के तो लड़कियां सपने देखती हैं।”
फिर जैसे प्रीती अपने आप से बोली, “वैसे लड़कियों की फुद्दीयां भी अजीब ही होती हैं। इतने लम्बे-लम्बे मोटे लंड अपने अंदर समेट लेती हैं और उफ़ तक नहीं करतीं। उल्टे मोटे लम्बे लंड से चुदने का उन्हें ज्यादा मजा आता है। वो तो हमेशा सोने से पहले प्रार्थना भी करती रहती हैं कि उन्हें ऐसा पति मिले जिसका लंड ऐसा हो जैसा आपका है और जब चूत में जाए तो चूत के परखच्चे उड़ा दे – रगड़-रगड़ कर फाड़ दे चूत को।”
प्रीती की बात पर मेरी भी हंसी छूट गयी।
खाना खा कर हम उठे। प्रीती ने बर्तन डिश वॉशर में लगाए और हम मेरे कमरे की तरफ चल पड़े।
प्रीती बोली, “पापा आप कह रहे थे आज आपने गांड चोदनी है। अगर सच में ही गांड चोदनी है तो उधर ही चलते है मेरे कमरे में, सुखचैन ने गांड चोदने की क्रीम रखी है वहां।”
मैं तो भूल ही गया था कि मैंने प्रीती से गांड चुदाई की बात भी की थी। मैंने कहा, “चलो फिर वहीं चलते हैं।”
और हम प्रीती के कमरे – गेस्ट रूम – में आ गए। प्रीती ने ड्रेसिंग टेबल में से गांड चोदने के लिए इस्तेमाल होने वाली जैल – एक तरह की बहुत ही चिकनी क्रीम की ट्यूब निकाली और मेरे हाथ में दे दी और बोली, “लो पापा पकड़ो, बाकी तो आपको पता ही होगा। मम्मी की गांड भी तो चोदते ही होंगे आप।”
यह कह कर प्रीती सोफे की साइड पर घुटनों के बल चूतड़ ऊपर करके लेट गयी। पापा बेड ऊंचा है, आपका लंड चूतड़ों के छेद में आराम से नहीं जाएगा। ये सोफा ठीक है। सुखचैन भी ऐसे ही गांड चोदता है।”
हमारे सारे सोफे आम सोफों से थोड़े ज्यादा चौड़े हैं, लेकिन मैंने इस बात पर आज तक कभी ध्यान ही नहीं दिया था। प्रीती की ये बात सुन कर मुझे लगा प्रीती गांड चुदवाने मैं भी माहिर है। अब तो मुझे भूपिंदर की गांड भी ऐसे ही चोदनी पड़ेगी।”
प्रीती सोफे पर घुटनों के बल चूतड़ ऊंचे करके उल्टी लेट गयी। प्रीती के संगेमरमरी चिकने मुलायम चूतड़ किसी का भी ईमान खराब करने के लिए काफी थे। मैं प्रीती के चूतड़ चूमने-चाटने लग गया। नीचे बैठ कर मैंने चूतड़ों के फैलाया और प्रीती के चूतड़ों गुलाबी भूरा छेद मेरे सामने था – बिलकुल बंद – टाइट। मैंने खूब सारा छेद चाटा और खड़ा हो गया।
मैं भी सोच कहा था – वाह री “पापा की परी प्रीती”, तेरा भी जवाब नहीं।
मैंने जैल – चिकनी क्रीम – प्रीती के चूतड़ों के छेद पर लगाई और जब क्रीम उंगली से छेद के अंदर लगाने लगा, तो मुझे लगा प्रीती की गांड का छेद कुछ ज्यादा ही टाइट है, उंगली को भी टाइट लग रहा है तो लंड कैसे जाएगा।”
मैंने प्रीती को कहा, “प्रीती तुम्हारी गांड के छेद में तो उंगली भी ज़बरदस्ती डालनी पड़ी मुझे, मेरा मोटा लंड इसमें कैसे जाएगा?”
प्रीती ने सर मोड़ा और मेरे तरफ देखते हुए बोले, “पापा यही फ़र्क़ है आपमें और मेरे पति गांडू सुखचैन में। मैं आपकी अपनी हूं, आपको मेरी दर्द की फिक्र है। उस साले भोसड़ी वाले सुखचैन ने तो अब तक जबरदस्ती लंड मेरी गांड अंदर डाल कर मेरी गांड चोद भी दी होती। एक बार ट्राई तो करो। डालो पापा गांड में लंड, कुछ नहीं होगा। ये आपकी बेटी की गांड है, फटने वाली नहीं – डालो अपना लंड मेरी गांड में और चोदो मेरी गांड। टेंशन मत लो।”
“टेंशन मत लो”, मेरी तो हंसी ही छूट गयी। प्रीती की गांड के छेद पर अच्छी तरह क्रीम लगा कर मैंने अपना लंड पकड़ा और थोड़ा सा प्रीती की गांड के छेद के ऊपर रख कर अंदर की तरफ धकेला। लंड अंदर जा नहीं रहा था।
मैंने फिर थोड़ा जोर लगाया, मगर फिर भी लंड अंदर नहीं गया। मैं रुक कर सोचने लगा, अब क्या करूं? क्या ज़बरदस्ती डालूं?
जब प्रीती ने देखा मैं लंड अंदर नही डाल रहा तो प्रीती बोली, “पापा आपसे नहीं हो पायेगा। आपको डर लग रहा है कहीं गांड ही ना फट जाए। आप लेटो मैं ही लेती हूं आपका लंड अपने चूतड़ों में।”
मेरे जवाब का इंतजार किये बिना प्रीती आगे हो गयी और पलट कर बिस्तर पर बैठ गयी और मुझसे बोली, “आओ पापा अब देर मत करो, लेटो बिस्तर पर। मैं ही कुछ करती हूं। आपका लंड गांड में लेने के लिए मैं मरी जा रही हूं, और आप गांड में लंड डाल ही नहीं रहे हो।”
मस्ती के मारे प्रीती के गाल लाल हो चुके थे। आंखें गुलाबी हो चुकी थी। मैं बिस्तर पर लेट गया। मेरा लंड तना हुआ सीधा खड़ा था।
प्रीती उठी थोड़ी जैल और अपनी गांड के छेद पर लगाई और थोड़ी मेरे लंड पर मल दी। प्रीती ने अपनी टांगें मेरे दोनों तरफ कर दी। नीचे हाथ डाल कर प्रीती ने लंड को पकड़ा और अपनी गांड का छेद लंड पर रख कर उस पर बैठने लगी।
लंड बिलकुल छेद पर था। प्रीती थोड़ा रुकी और फिर नीचे की तरफ हुई। लंड जरा सा छेद अंदर चला गया। प्रीती फिर से रुकी, लंड को अपनी गांड के छेद से हटाया और अपने गांड के छेद और लंड के ऊपर थोड़ी क्रीम और लगा ली।
प्रीती फिर से पहले की तरह लंड पकड़ कर लंड पर बैठने लगी। इस बार प्रीती ने थोड़ा जोर लगाया। मुझे साफ महसूस हुआ लंड थोड़ा सा अंदर गया है। प्रीती फिर से रुक गयी।
लंड चूतड़ों के छेद में अपनी जगह बनाने लगा था। प्रीती ने अब लंड छोड़ दिया। लंड चूतड़ों के छेद पर अटका हुआ था। प्रीती ने अपने हाथ मेरी छाती पर रखे और थोड़ा नीचे की तरफ हुई। लंड थोड़ा और अंदर चला गया। प्रीती दर्द से थोड़ा कसमसाई और बोली, “पापा दर्द तो हो रहा है, मगर आज आपका लंड गांड में डाल कर ही रहूंगी।”
प्रीती फिर से रुकी और और दस बारह सेकण्ड के बाद थोड़ा और नीचे हुई। लंड थोड़ा और अंदर चला गया। प्रीती ने हाथ नीचे करके लंड पकड़ कर महसूस कि कितना लंड अंदर जा चुका है। प्रीती को लगा आधा लंड अंदर है। प्रीती बोली, “पापा आधा लंड अंदर चला गया है। बस अब पूरा जाने ही वाला है।”
प्रीती थोड़ा रुकी, लंड बाहर निकाला और अपनी गांड पर थोड़ी क्रीम और लगा ली। प्रीती फिर से लंड पर बैठी और बैठती ही चली गए। लंड अब अंदर जा रहा था। प्रीति जरा सा रुकी और एक ही झटके से लंड पर बैठ गयी। प्रीती के बड़े-बड़े चूतड़ मेरे टट्टों को छू रहे थे। लंड पूरा प्रीती की गांड कि अंदर था। प्रीती कुछ देर ऐसे ही लंड पर बैठी रही और फिर बोली, “लो पापा गया पूरा अंदर।”
फिर प्रीती उठते हुए बोली, “चलो पापा असली काम हो गया। आपका लंड मेरी गांड में आखिर तक चला गया है। चलो अब जैसे भी मर्जी है करो, चोदो मेरी गांड। अब ये अंदर जाएगा। अब आप पीछे से मस्त चुदाई करो गांड की। गांड चोदने चुदवाने का मजा पीछे से ही आता है।”
प्रीती का गांड चुदवाने का मन था, मगर प्रीती की टाइट गांड के छेद में मेरा लंड जा नहीं रहा था, और मैं ज़बरदस्ती करना नहीं चाहता था। आखिर जो भी था प्रीती थी तो मेरी बेटी ही। प्रीती मेरी उलझन समझ गयी। उसने खुद ही मेरा मोटा लंड अपनी गांड में डालने का फैसला कर लिया। प्रीती ने मुझे बिस्तर पर लेटने के लिए कहा और मेरे ऊपर आ कर अपनी गांड और मेरे लंड पर क्रीम लगा कर उस पर बैठ कर लंड अपनी गांड के अंदर लेने लगी।
अब प्रीती की गांड का छेद तो टाइट ही था और मेरा लंड भी मोटा था ही। फिर भी प्रीती ने हिम्मत नहीं हारी और वो रुक-रुक कर लंड पर क्रीम लगा रही थी, और लंड अंदर करने की कोशिश कर रही थी। प्रीती की इन कोशिशों के बाद मेरा आधा लंड प्रीटी की गांड के अंदर चला गया।
इसके बाद तो थोड़ी कोशिशों के बाद प्रीती लंड पर जो बैठी और तो फिर बैठती ही चली गयी। प्रीती के बड़े-बड़े चूतड़ मेरे टट्टों को छूने लगे थे, मतलब मेरा लंड पूरा प्रीती की गांड के अंदर जा चुका था। वो कुछ देर ऐसे ही लंड पर बैठी रही और फिर बोली, “लो पापा गया पूरा अंदर।” अब मैं उठती हूं, अब आप भी उठो और चलो अब जैसे भी मर्जी है चोदो मेरी गांड।
प्रीती को उठते देख मैं भी खड़ा हो गया। वो भी उठी और पहले ही की तरह जा कर तरह सोफे पर चूतड़ ऊपर करके घुटनों के बल लेट गयी।
मैं प्रीती के पीछे गया, प्रीती के रेशमी मुलायम चूतड़ों को चूमा, चाटा और लंड प्रीती की गांड के छेद पर टिका कर प्रीती की कमर पकड़ी और लंड गांड के अंदर धकेलने लगा। लंड आराम से तो नहीं मगर गांड के अंदर जा तो रहा ही था। जब आधा लंड गांड में चला गया तो मैं दो सेकण्ड के लिए रुका, प्रीती की कमर पकड़ी और बोला, “ले मेरी प्रीती” और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर बैठा दिया।
प्रीती ने जरा सा सर पीछे के तरफ घुमाया और बोली, “गया पापा – चलो पापा अब ज्यादा देर मत करो और चोदना शुरू करो और तब तक मत रुकना जब तक आपने लंड का गर्म-गर्म चिकना शहद मेरी गांड में निकल नहीं जाता।”
प्रीति के बात सुन कर मैंने प्रीती की गांड पर एक और धप्प लगाया और फिर प्रीती को कंधों पकड़ कर कहा, “ले मेरी प्यारी प्यारी परी प्रीती, ले मजा ले अपने पापा के लंड से गांड चुदाई का।”
और फिर इसके बाद जिस तरह से मैंने अपनी बेटी प्रीटी की गांड चोदी, इस तरह की ज़बरदस्त गांड चुदाई तो मैंने कानपुर वाली मालिनी अवस्थी की भी नहीं की जो ज़बरदस्त गांड चुदाई की शौक़ीन है।
मस्ती में मैं प्रीती की कमर पकड़ कर ऐसे लम्बे-लम्बे धक्के लगा रहा था, जैसे कोइ किसी रंडी की गांड में भी क्या लगाता होगा।
मैं भी आखिर क्या करता। प्रीती के चूतड़ थे ही मस्त, मोटे-मोटे, नरम-नरम, सफ़ेद रेशमी कपड़े की तरह मुलायम, और प्रीती भी ऐसे ही चुदाई चाहती थी। वैसे भी ऐसे चूतड़ और ऐसे मम्मे अब हमारे देश में कम ही लड़कियों के मिलते हैं। अपने शरीर की फिगर – शरीर को पतला रखने के चक्कर में अपने चूतड़ों और मम्मों की मां चोद देती हैं – और आखिर में होता क्या है? ऐसी लड़कियों के खसम गुदगुदे जिस्म वाली रंडियों के पास जाना शुरू कर देते हैं।
बड़ा ही लक्की है भोसड़ी वाला मेरा दामाद सुखचैन जिसे ऐसी ग़ज़ब की बीवी मिली चोदने के लिए। और अब मैं अपनी ऐसी ग़ज़ब की खूबसूरत और सेक्सी बेटी को चोद रहा था। यही तो है लक्क, मुकद्दर या किस्मत।
इसके बाद मेरी और मेरी परी जैसी बेटी प्रीती की ये चूत गांड चुदाई बिना किसी रुकावट के तब तक चली जब तक मेरी बीवी भूपिंदर कनाडा से वापस नहीं आ गयी। और फिर हफ्ते में एक दिन के लिए बिशनी तो थी ही। दो महीने के बाद भूपिंदर कनाडा से वापस आ गयी।
कनाडा से वापस आ कर भूपिंदर पहली ही रात से शुरू हो गयी और एक हफ्ते तक बिना रुके रात-रात भर चुदाई करवाई। चूत, गांड मुंह में सब जगह लंड लिया। रात को कमरे में जाते ही हम कपड़े उतार देते और ऐसे ऐसे काम करते कि जवान लड़के-लड़किया भी क्या करते होंगे। एक हफ्ते तक आधी-आधी रात तक हमारी चुदाई हुई।
रात-रात भर चुदाई की थकान के कारण भूपिंदर सुबह लेट उठती थी। एक दिन तो मैं उठा तो देखा प्रीती चाय बना रही थी। आवाज सुन कर प्रीती ने पलट कर मुझे देखा और बोली, “पापा लग रहा है मम्मी अभी भी छोड़ नहीं रही। कोई बात नहीं पापा दो महीने की कसर पूरी करेगी मम्मी। आप चोदो दबा-दबा कर मम्मी को – आगे से पीछे से।” और फिर प्रीती हंसते हुए चाय बनाने लग गयी।
कभी चूत, कभी गांड, कभी मुंह में, कभी चूत चुसाई कभी गांड चटाई – क्या-क्या नहीं हुआ मेरे और भूपिंदर के बीच इस एक हफ्ते में।
मगर एक दिन तो गज़ब ही हो गया। जब मैं भूपिंदर की गांड में लंड डालने लगा तो मैंने कहा, “भूपिंदर उधर सोफे पर उल्टा लेटो, चूतड़ों का छेद बिलकुल लंड के सामने होगा। एक-दम सीधा गांड में जाएगा।”
भूपिंदर ने मेरी तरफ देखा मगर बोली कुछ नहीं और चुप-चाप जा कर सोफे पर उल्टा, चूतड़ ऊपर करके लेट गयी। मुझे लगा कि “यार अवतार जोश-जोश में कुछ ज़्यादा ही बोल गया तू।”
भूपिंदर की गांड मैंने आज तक कभी भी उस सोफे पर नहीं चोदी थी – हमेशा बेड पर ही चोदी थी। ये सोफे पर गांड चुदाई का ज्ञान तो मुझे प्रीती से प्राप्त हुआ था।
मगर अब जो होना था वो तो हो चुका था। तभी तो सयाने बुज़ुर्ग कहते हैं – पहले तोलो फिर बोलो। गलत बोलने के बाद अपनी मां भी चुदवा लो तब भी कुछ नहीं होगा।
एक हफ्ते के बाद, जब चुदाई करवा-करवा कर भूपिंदर की फुद्दी और गांड की तसल्ली हो गयी तब भूपिंदर ने घर की सुध ली। उस दिन मैं और भूपिंदर लाउंज में बैठे सुबह चाय की चुस्कियां ले रहे थे, प्रीति वहां नहीं थी। भूपिंदर बोली, “अवतार तुमसे एक बात करनी है।”
मैंने कहा, “कहो भूपिंदर बोलो, ऐसी क्या बात है जो तुम मुझसे पूछ रही हो?”
भूपिंदर – मेरी बीवी बोली, “अवतार, एक बात बताओ – सुखचैन दो महीने से प्रीती से दूर है और रोज़ चुदाई करवाने वाली प्रीती के चेहरे पर उदासी की एक लाइन – एक झलक तक नहीं? ऐसा कैसे हो सकता है?”
मैंने बनावटी हैरानी से पूछा, “भूपिंदर उदासी की एक लाइन नहीं? क्या मतलब है तुम्हारा, जरा साफ़-साफ़ बोलो।”
भूपिंदर बोली, “अवतार मैं प्रीती को जानती हूं। प्रीती चुदाई की शौक़ीन है। चुदाई के बिना ज्यादा दिन नहीं रह सकती। अब सुखचैन दो महीने से यहां नहीं है तो उसका मतलब प्रीती की चुदाई भी नहीं हुई। फिर भी मुझे तो वो बिल्कुल भी उदास नहीं लग रही। ऐसे लग रहा है सुखचैन का लंड बिलकुल भी मिस नहीं कर रही।”
मैं चुप रहा। भूपिंदर कुछ रुक कर बोली, “अवतार ये बताओ जब सुखचैन आसाम चला गया था तो प्रीती कहीं आती-जाती थी?”
मैंने कहा, “जाती थी – मार्किट जाती थी। प्रीती चंडीगढ़ की पली बड़ी हुई है। पूरा चंडीगढ़ उसका जाना पहचाना है और सत्रह की मार्किट में तो वो बचपन से आती-जाती रही है। वहां के कई दुकानदार उसको पहचानते हैं।”
भूपिंदर बोली, “मैं उस तरह के आने-जाने की बात नहीं कर रही। मेरा मतलब है पांच छह घंटे के लिए घर से बाहर रहने वाली बात है।”
मुझे भूपिंदर की बात तो मैं समझ ही रहा था, फिर भी मैंने पूछा, “भूपिंदर साफ़-साफ़ बात करो। पांच-छह घंटे बाहर रहना, इससे क्या मतलब है तुम्हारा।”
मैं समझ चुका था कि जिस तरह प्रीती के चेहरे पर सुखचैन के साथ दो महीने से भी ज्यादा समय से चुदाई ना होने पर भी जरा सी भी उदासी की झलक तक नहीं थी, उससे मेरी बीवी भूपिंदर को शक हो गया कि प्रीती इन दिनों में पक्का ही किसी से चुदाई करवाती रही है।
बस अब एक ही सवाल था – किससे? भूपिंदर मुझसे पूछ रही थी कि क्या प्रीती किसी से चुदाई करवाती रही है? मुझे तो इस सवाल का जवाब मालूम ही था मगर मैं क्या बताता, मैं चुप रहा, अनजान बना रहा।
भूपिंदर चुप देख हर भूपिंदर बोली, “अवतार अब इतने भी अनजान भी मत बनो। साफ़ बात ये है अवतार कि मैं प्रीती को जानती हूं। प्रीती जवान है खूबसूरत है फिगर भी उसके ऐसे हैं जो सब के नहीं होते। लड़के तो इस पर शुरू से ही मरते रहे हैं। शादी भी गबरू-जवान सुखचैन से हुई है जो खाते-पीते घर से है और फ़ौज में भी अच्छे ओहदे पर है।”
इसके बाद भूपिंदर असली बात पर आ रही थी, “अवतार मुझे तो यहां तक मालूम है कि वो रोज सेक्स – चुदाई करते हैं। अब दो महीने से सुखचैन यहां नहीं है, मतलब कायदे से दो महीने से प्रीती की चुदाई नहीं हुई। मगर अवतार मुझे तो ऐसा नहीं लग रहा कि प्रीती की चूत में दो महीने से लंड ही ना गया हो, उसकी चुदाई ही ना हुई हो।”
मैंने कहा, “भूपिंदर अब इस बारे में मैं क्या बताऊं।”
भूपिंदर बोली, “अवतार तुम नहीं बताओगे तो कौन बताएगा? दो महीने तुम भी तो यहीं थे। तुम कह रहे हो दो महीने तक प्रीती बाहर नहीं निकली। इसका मतलब दो महीने तक उसकी चुदाई नहीं हुई। फिर भी वो इतनी हरी भरी, इतनी खुश कैसे है? मैं भी औरत हूं। मैं जानती हूं एक जवान तंदरुस्त लड़की को लंड चाहिए ही होता है। उसे फुद्दी का मजा चाहिए ही होता है, उसे गांड कि छेद में लंड चाहिए होता है, वो भी खास कर तब जब उसे बढ़िया चोदने वाला मर्द मिला हो जो उसकी रोज चुदाई करता हो और उसे अच्छी चुदाई की आदत हो चुकी हो।”
कुछ देर तो मैं चुप रहा, फिर बोला, “भूपिंदर तुम खुद ही प्रीती से ही क्यों नहीं पूछ लेती।”
भूपिंदर ने इसके बाद तो साफ़ ही बोल दिया, “प्रीती से भी पूछ लूंगी पहले तो तुम बताओ भोसड़ी के कहीं तुम ही तो नहीं चोदते रहे प्रीती को? तुम्हारे लंड में तो अभी तक वही जवानी वाला दम है। तुम ही कौन से कम हो, तुम्हें भी तो रोज चूत चाहिए होती है चोदने कि लिए। और फिर जवानी में मैं ही कौन सी कम थी जो मेरी बेटी ही मुझसे कम होगी।”
मैंने सकपकाते हुए कह, “ये क्या कह रही हो भूपिंदर? मैं प्रीती के साथ ऐसा कैसे कर सकता हूं?”
भूपिंदर, मेरी बीवी – को शक तो हो ही चुका था कि में अपनी बेटी प्रीती को चोदता रहा था, बस एक बार मेरे मुंह से भूपिंदर सुनना चाहते थी। जब मैंने भूपिंदर से कहा के में प्रीती को कैसे चोद सकता हूं, मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं तो समझो तूफ़ान ही आ गया।
अब भूपिंदर खुल चुकी थी और साफ़ ही बात करने के मूड में थी। भूपिंदर बोली, “क्यों? तुम ऐसा क्यों नहीं कर सकते? पूरे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में यही खेल चलता है। जब लड़के कहीं बाहर होते हैं नौकरी पर या किसी और वजह से तो उनकी जवान चुदाई की प्यासी बीवियों को घर के बाकी मर्द ही चोदते है।”
“अब खुद ही देखो हजारों ऐसे एक्ज़ाम्पल – उदाहरण हैं हमारे आस-पास। यहां के लड़के बाहर के मुल्कों में जाने के इतने शौक़ीन होते है अपनी जवान बीवियों, यहां तक की नयी ब्याहता बीवियों को भी यहां अपने बाकी परिवार के पास छोड़ कर अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड चले जाते हैं। वहां उन्हें ट्रक ड्राइवरी, बड़े-बड़े माल्स की टट्टियां साफ़ करना यहां ढंग का काम करने से ज्यादा पसंद आता है। एक ऐसा ही नमूना हमारे घर में भी तो है, हमारा बेटा अमनदीप यहां की लाखों की आमदन और करोड़ों प्रॉपर्टी छोड़ कनाडा गया हुआ है।”
भूपिंदर बोलती जा रही थी, “अब तुम बताओ ये जो चूतिये बाहर चले गए इनकी बीवियां अपने फुद्दी का क्या करें? बस यहीं से सारा खेल शुरू होता है। जवान होते देवर को भाभी फंसा लेती है क्योंकि उसका पति बाहर गया हुआ है, और उसे अपनी फुद्दी की आग ठंडी करने के लिए एक जवान सख्त लंड चाहिए। अगर घर में वो जवान होता देवर हो तो बात ही क्या। जवान होते देवर के लंड में से तो गर्म-गर्म मलाई भी कप भर-भर कर गिरती है भाभी की फुद्दी में”
“अधेड़ उम्र का जेठ अपने छोटे भाई की जवान बीवी, जिसका खसम अमरीका गया है, उसकी टाइट फुद्दी चोदता है, क्योंकि उसकी अपनी अधेड़ उम्र की बीवी की फुद्दी का बच्चे पैदा कर कर भोसड़ा बन चुका है, उसे चोदने का मजा नहीं आता। अपनी अधेड़ बीवी को चोदते हुए यही पता नहीं चलता कि उसका लंड किसी छेद में गया भी हुआ है या हवा में में ही लटक रहा है।”
“और अवतार यही क्या, अगर कोइ दूसरा मर्द घर ने नहीं है तो ससुर अपनी बहु के ऊपर चढ़ता है और उसे चोदता है।”
“क्या तुम्हें लगता है कि बाकी घर वालों को इसका पता नहीं होता – अवतार सब पता होता है। मगर सब नज़र दूसरी तरफ कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें भी लड़कियों की फुद्दी की जरूरतों का पता होता है। उन्हें भी यही डर लगता है अगर इन जवान घर की बहू, बेटियों, भाभियों की चूत के प्यास ना बुझाई तो वो किसी बाहर वाले का लंड ना ले लें, किसी बाहरी मर्द से, किसी नौकर से ही ना चुदवा लें – या फिर घर से ही ना भाग जायें किसी लम्बे मोटे वाले मर्द के साथ।”
तभी प्रीती गलियारे में से आयी मगर मुझे और भूपिंदर को सीरियस – संजीदा बात करते एक पल के लिए ठिठकी और उल्टे पैर वापस की गयी। भूपिंदर प्रीती को नहीं देख पायी, मगर मेरा मुंह क्योंकि गलियारे की तरफ था, मैंने प्रीती को देख लिया। मैं सोच रहा था, भूपिंदर कह तो ठीक ही रही थी। भूपिंदर बोली, “अब तुम बताओ अवतार क्या मैं गलत कह रही हूं?”
मैं चुप बैठा रहा। भूपिंदर बोली, “अब तुम बताओ अवतार अगर प्रीती घर से बाहर नहीं गयी तो तुमने पक्का ही उसे चोदा है। ये तो कहना मत कि तुमने प्रीती की चुदाई नहीं की – उसकी फुद्दी मैं लंड नहीं डाला, उसके मम्मे नहीं दबाये, उसकी फुद्दी नहीं चूसी, उसकी चूतड़ों का छेद नहीं चाटा।”
मैंने धीरे के कहा, “भूपिंदर तुमने अभी अभी जो भी बोला है वो सही है। यहां पंजाब हरियाणा के घरों में होता तो यही है, और शायद हमारे घर में भी यही हो गया है।”
कनाडा से वापस आने के बाद भूपिंदर ने आधी-आधी रात तक चुदाई करवाई। इस उम्र में भी भूपिंदर हट-हट कर मतलब चूतड़ घुमा-घुमा कर चुदाई करवाती थी।
वैसे तो चुदाई में उम्र कम ही आड़े आती है अगर इंसान का खाना-पीना ठीक-ठाक हो – रोज़ मीट मुर्गा, रोज़ शराब। अब मैं ही कौन सा कम था। वैसे कहने की बात हैं पंजाबी मर्द तो अस्सी साल की उम्र में भी चुदाई करते हैं।
एक हफ्ते के बाद जब चुदाई करवा-करवा कर भूपिंदर की तसल्ली हो गयी तो भूपिंदर को ध्यान आया कि सुखचैन यहां था नहीं, लेकिन ऐसा लग नहीं रहा कि प्रीती रोज़ फुद्दी चोदने वाले सुखचैन की चुदाई मिस कर रही थी। भूपिंदर को शक हो गया कि कहीं ना कहीं कुछ तो गड़बड़ थी।
सब से पहला शक भूपिंदर का मुझ पर गया कि हो ना हो मैं ही प्रीती को चोदता रहा हूं। बस भूपिंदर ने अगली सुबह ही मुझे घेर ही लिया और मेरे पीछे पड़ गयी कि मैं सच-सच बताऊं कि क्या सच में मैं ही प्रीती को चोदता रहा था।
भूपिंदर बोल रही थी और मैं चुप-चाप बैठा सुन रहा था। भूपिंदर का शक उस वक़्त यकीन में बदल गया जब मैंने उसे बताया की प्रीती ज्यादा देर तक तो घर से बाहर कभी भी नहीं जाती रही थी।
भूपिंदर बोली, “अब तुम बताओ अवतार अगर प्रीती घर से बाहर नहीं गयी – इसका मतलब है बाहर उसकी चुदाई नहीं हुई – तब तो तुमने पक्का ही उसे चोदा है। ये तो कहना मत कि तुमने प्रीती की चुदाई नहीं की, उसकी फुद्दी मैं लंड नहीं डाला, उसके मम्मे नहीं दबाये, उसकी फुद्दी नहीं चूसी, उसकी चूतड़ों का छेद नहीं चाटा।”
मैंने धीरे के कहा, “अब मैं क्या बताऊं भूपिंदर।”
“क्या कहा, अब मैं क्या बताऊं? मुझे गुस्सा तो मत दिलवाओ अवतार। तुम्हारी इस बात से एक बात तो साफ हो गयी कि प्रीती तुमसे चुदाई करवाती रही है। मुझे तो अब ये बताओ, ये शुरू कैसे हुआ? तुमने कोइ जोर ज़बरदस्ती की क्या प्रीती के साथ? या शराब के नशे में तो नहीं चढ़ गए अपनी बेटी के ऊपर और एक बार तुम्हारा ये साला गधे के लंड जैसा लंड अपनी फुद्दी में डलवा कर प्रीती भी मस्त हो गयी तुम्हारे लंड की? मजा आ गया तुम्हारा लंड फुद्दी और गांड में डलवा कर उसे और फिर तुम दोनों की रोज़-रोज़ की चुदाई चालू हो गयी।”
मैंने उसी धीमी आवाज में कहा, “ऐसा कुछ भी नहीं हुआ भूपिंदर।”
भूपिंदर अपना आपा खोते हुए उसी तीखी आवाज में बोली, “भोसड़ी के अवतार, अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर कैसा हुआ? क्या प्रीती ने उकसाया तुम्हें?”
मैं बोला कुछ नहीं मगर मैंने हां में सर हिला दिया।
“क्या मतलब है तुम्हारा? प्रीती ने उकसाया तुम्हें? क्या उसने तुम्हारे पायजामें का नाड़ा खोला, तुम्हारा लंड पकड़ कर पहले खड़ा किया और फिर अपनी फुद्दी में डाल लिया? प्रीती ने कैसे उकसाया तुम्हें, बताओ?”
मैंने उसी मरी हुई आवाज में कहा, “कुछ ऐसा ही किया प्रीती ने।”
भूपिंदर की शक्ल बता रही कि भूपिंदर का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंचने लगा था। मैंने सोचा अब किसी भी घरेलू कलह से बचने के लिए भूपिंदर को पूरी बात बताना ही ठीक था।
मैंने अपने ऊपर कंट्रोल किया और भूपिंदर से कहा, “भूपिंदर पहले तो अपना गुस्सा शांत करो यार, मैं पूरी बात बताता हूं, फिर तुम जो ठीक समझ वो कहना और करना।
भूपिंदर मेरी तरफ देखने लगी। मैंने भूपिंदर को सारी बात साफ़-साफ़ बता दी। सुखचैन के जाने से ले कर प्रीती के झीने कपड़े बिना ब्रा पैंटी घर में घूमना, उसका नहा कर नंगी ही बाहर आना – हमारी चुदाई होना और फिर रात को मेरी गोद में बैठ जाना। मैंने ये भी बता दिया की कई सालों से प्रीती हमारी चुदाई देखती रही है – जब से उसे पीरियड शुरू हुए हैं।
सारी बात सुनने के बाद भूपिंदर चुप-चाप बैठ गयी। मैंने भूपिंदर से कहा, “भूपिंदर सच बात तो ये है कि उस दिन सुबह मैं प्रीती को इस तरह नंगी देख कर अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं कर पाया। इतना सेक्सी जिस्म? खड़े मम्मे? ये बड़े-बड़े चूतड़? सच बताऊं भूपिंदर तेरी कसम, पहली चुदाई तो जोश-जोश में हो गयी थी, जब प्रीती नंगी मेरे सामने खड़ी थी। मैं मानता हूं मुझे से अपने पर कंट्रोल नहीं हुआ, वो मेरी गल्ती थी। मुझे पछतावा भी हुआ और उस पहली चुदाई के बाद मैंने प्रीती को समझाने की कोशिश भी की कि ये ठीक नहीं है, मगर वो मान ही नहीं रही थी।”
मैंने भूपिंदर का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, “और सब से बड़ी बात, तुम यहां थी नहीं, मैं सलाह करता भी तो किससे करता?”
“और फिर वही बात मेरे दिमाग में भी आयी, प्रीती जवान है खूबसूरत सेक्सी है, लंड लेने की शौक़ीन है। चंडीगढ़ के चप्पे-चप्पे से वाकिफ भी है और चंडीगढ़ में उसके लड़के-लड़कियां दोस्त भी हैं। ये तो छोड़ो चंडीगढ़ में शौक़ीन, अमीरजादों की कमी नहीं। प्रीती जैसी सेक्सी लड़की को चोदने के लिए वो हजारों भी खर्च कर सकते हैं।”
“और फिर भूपिंदर मैं ही कौन सा सारा दिन घर पर रहता हूं। फार्म पर तो मैं चलो रोज नहीं जाता पर सत्रह सेक्टर तो मुझे तकरीबन रोज ही जाना पड़ता है। मेरी गैरमौजूदगी में अगर प्रीती किसी से चुदाई करवा ले तो? यहां कालका से आगे हिमाचल में ऐसे होटलों की भरमार है जो घंटों के हिसाब से भी कमरे किराये पर देते हैं – आओ जी वेलकम जी – करो चुदाई और “फक एंड फ्लाई।”
“और फिर भूपिंदर एक बात बताओ एक बार भी अगर बाहर के किसी लड़के के साथ प्रीती की चुदाई हो जाती, तो फिर समझो सब खत्म। किसी का भी डर और झिझक सब खत्म और फिर इसके बाद चुदाई रुकने वाली ना होती।”
मेरी बात लग रहा था भूपिंदर को समझ आ रही थी। वो कुछ देर चुप-चाप बैठी कुछ सोचती रही और फिर बोली, “तो अवतार अब क्या करें? सुखचैन की तो अब कम से कम तीन-चार महीने से पहले ट्रांसफर नहीं होने वाली। इसका मतलब अभी उतनी देर और तो वो ढुबरी में ही रहेगा।”
मैं भी कुछ देर सोचता रहा, फिर बोला, “भूपिंदर सच कहूं तो इसका हल इतना आसान नहीं है, कम से कम अब तो नहीं। अगर ये इतना ही आसान होता तो मैं प्रीती की चुदाई ही ना करता।”
भूपिंदर मेरी तरफ देखने लगी। भूपिंदर को इस तरह मेरी तरफ देखते हुए मुझे परेशानी से होने लगी थी, टेंशन कि कारण मेरा सर दर्द करने लगा था।
मैंने उठते हुए कहा, “मैं चलता हूं भूपिंदर, अभी फार्म पर जाऊंगा। अगर कुछ सामान घर छोड़ना होगा तो छोड़ कर सत्रह सेक्टर चला जाऊंगा। तुम अपने तरीके से प्रीती से बात करना और मुझे बताना क्या हुआ। सच बताऊं भूपिंदर मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा।”
मैंने जुगनू को आवाज दी, “ओये कहां है जुगनू, चल आजा।”
जुगनू आया और बोला, “सरदार जी मैं तो यहीं था।”
मैंने गाड़ी में बैठते हुए जुगनू से कहा, “चल पहले फार्म पर।”
मैं फार्म पर गया। बिशनी अंदर काम कर रही थी। मुझे आया देख काम छोड़ कर मेरा लंड पकड़ कर बोली, “सरदार जी बड़े दिनों के बाद आये हो, क्या हो गया? आज तो जरा मस्ती से ‘कर’ दो, बड़ा मन कर रहा है।”
घर के माहौल के कारण बिशनी को चोदने का मेरा मन तो नहीं था थोड़ी टेंशन भी हो रही थी। मगर फिर भी दिमाग हल्का करने के लिए बिशनी को चोदने का मन बना लिया। बिशनी को मैंने बिस्तर लिटा दिया और आननफानन में बिशनी के सलवार उतार दी। फिर मैंने अपना पायजामा उतारा और बिशनी की चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर बिशनी की टांगें उठा दी और टांगें चौड़ी करके एक ही झटके में लंड बिशनी के चूत में डाल दिया।
बिशनी बोली, “क्या बात है सरदार जी आज बड़ी जल्दी में लग रहे हो? लंड पर रबड़ भी नहीं चढ़ाया, ना फुद्दी में उंगली डाली ना चूतड़ों में?
मैंने बिशनी की फुद्दी मैं धक्के लगाते हुए कहा, “कंडोम की मां की चूत! आज ऐसे ही चोदनी है तेरी फुद्दी बिशनी बिना कंडोम के।”
और ये कर मैंने बिशनी को बाहों में जकड लिया और चुदाई शुरू कर दी। मेरा ध्यान भूपिंदर की बातों के तरफ था, और मैं बिशनी को चोदता जा रहा था। बिशनी नीचे चूतड़ घुमा रही थी। बिशनी को एक बार मजा आया और फिर दूसरी बार मजा आ गया, मगर मेरा लंड ना ढीला हो रहा था और ना ही पानी छोड़ रहा था।
मैं बस बिशनी की चूत रगड़ता जा रहा था। जैसे ही बिशनी को तीसरी बार मजा आया तो बिशनी बोली, “आज क्या हो गया सरदार जी आपका लंड तो झड़ ही नहीं रहा। तीन बार मजा आ गया मुझे। अगर नहीं निकल रहा तो चूस कर दे दूं आपको मजा? नहीं तो गांड में डाल लो। थोड़े रगड़े लगेंगे तो निकल जाएगा।”
मैंने लंड बिशनी की चूत में से निकाल लिया और खड़ा हो कर बोला, “चल बिशनी घोड़ी बना जा आज तेरी गांड में ही निकालता हूं। बिशनी ने एक बार लंड पकड़ा और लंड दबाते हुए बोली, “सरदार जी आज कुछ बात तो है।”
ये कह कर बिशनी बेड की साइड में चूतड़ ऊपर करके उल्टी लेट गयी। बिशनी के चूतड़ सख्त थे मैंने बिशनी की गांड के छेद मैं थूक डाला और लंड गांड के छेद पर बिठा कर अंदर धकेलना शुरू कर दिया। बिशनी की गांड का छेद प्रीती की गांड की छेद जितना टाइट नहीं था। जरा सी मेहनत के बाद ही लंड बिशनी की गांड में पूरा बैठ गया।
मैंने बिशनी की कमर पकड़ी और चुदाई चालू कर दी। मेरा ध्यान अब प्रीती की गांड की तरफ था। प्रीती की गांड चोदते हुए मेरा मन था कि प्रीती के नरम मुलायम चूतड़ों पर जोर-जोर से हाथ मारूं। मगर प्रीती मेरी बेटी थी और मैं प्रीती के साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकता था।
मगर बिशनी के साथ ऐसा कुछ नहीं था। मेरा और बिशनी का सिर्फ चुदाई का रिश्ता था। मैंने बिशनी के चूतड़ों पर जोर-जोर से हाथ मारते हुए बोलना शुरू किया तो बस बोलता ही गया, “ले मादरचोद बिशनी ले, आज फाड़ता हूं तेरी गांड। ऐसे चोदूंगा कि चार दिन दुखती रहेगी। ले बिशनी ले। गया तेरी गांड में पूरा का पूरा। मैं बिशनी के चूतड़ों पर धप्प जमाता जा रहा था और गांड में लम्बे-लम्बे धक्के भी लगाता जा रहा था। बिशनी अपने आप को आगे गिरने बड़ी मुश्किल से रोक रहे थी। मैं बिशनी की गांड को वहशियों की तरह चोद रहा था और बिशनी मुड़-मुड़ कर मुझे देख रही थी।
पता नहीं बिशनी की गांड भी मैंने कितना टाइम चोदी, और आखिर को मेरा लंड पानी छोड़ गया। मेरे मुंह से जोर की आवाज निकली, “आह बिशनी, ले निकला तेरी गांड में।”
जैसे ही मेरे लंड से गरम रस निकलना बंद हुआ और मैंने बिशनी की कमर छोड़ी तो बिशनी एक-दम आगे की तरफ लुढ़क गयी।
मैं बाथरूम में चला गया और लंड की धुलाई करके वापस आया तो बिशनी सलवार नाड़ा बांध रही थी।
बिशनी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “सरदार जी आज क्या हो गया था? मेरा पूरा जिस्म तोड़ दिया आपने। ऐसा तो कभी नहीं हुआ। सरदार जी सच-सच बताना आपको मेरी कसम, कोइ दिमागी परेशानी है क्या आज? मुझे आपकी और मेरी चुदाई से ज्यादा आपकी सेहत की फ़िक्र है। सरदार जी आप ठीक-ठाक हो तो हम सब भी थी ठीक-ठाक हैं, वरना आपके बिना हम किस काम के?”
बिशनी की ये बात सुन कर तो मैं हैरान और परेशान ही हो गया। मुझे बिशनी पर बड़ा ही प्यार आया। मैंने पहली बार बिशनी की होठों को चूमा और बोला “नहीं बिशनी ऐसा कुछ नहीं है” और मैं बाहर की तरफ निकल गया।
जुगनू दूध की डिब्बे और अंडों का थैला लिए मेरा इंतजार कर रहा था। मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू जरा पूरन को बुला दे।”
जुगनू चला गया और मैं गाड़ी के पास खड़ा हो गया। पूरन आया तो मैंने पूछा, “पूरन कोइ काम तो नहीं कोइ, पैसा वैसा तो नहीं चाहिए?”
पूरन बोला, “नहीं सरदार जी सब ठीक है बस एक गाये अब गाभिन है और दूध कम दे रही है। बदलने वाली हो गयी है।”
मैंने कहा, “कोइ बात नहीं मैं सतपाल से बात कर लूंगा। ये गाये उसके मुल्लनपुर वाले फार्म में छोड़ आना और दूसरी ले आना जो जल्दी ब्याने वाली – बच्चा देने वाली हो।”
सतपाल मेरा दोस्त था और सुखना झील की बगल वाली बस्ती किशनगढ़ में बहुत बड़ा डेरी फार्म चलाता था। सौ के लगभग गायें भैंसे थी। आधे चडीगढ़ में सतपाल की दूध की सप्लाई थी। हमारे फार्म से थोड़ी दूरी पर ही उसका भी फार्म था जिसमें सिर्फ सब्जियां और गाये भैसों का चारा उगाया जाता था। फार्म में उसकी वही गायें भैंसें घूमती रहती थी, जो दूध नहीं देती थी और जिन्हें गाभिन करवाना होता था।
गायों की लिए दो जर्सी नस्ल के सांड थे और भैंसों की लिए मुर्रा नस्ल के दो झोटे थे। जब भी कोइ-कोइ गाये या भैंस गर्म होती थी उस पर चढ़ जाते थे।
सतपाल कभी किसी सूखी गाये या भैंस को – जो दूध देना बंद कर देती थी – उसे बेचता नहीं था। कहता था “भैंसों को कसाईखाने में ले जा कर काट देते हैं और गायों को बंगलादेश स्मगल कर देते हैं कटने के लिया। ये क्या बात हुई जब तक जानवर दूध देता है, तब तक तो सब ठीक है, दूध देना बंद कर दे तो निकाल दो?”
सतपाल को अपनी गायों भैंसों से बड़ा प्यार था।
वैसे सतपाल कहता तो ठीक ही था, “ये क्या बात हुई जब तक जानवर दूध देता है, तब तक तो सब ठीक है, दूध देना बंद कर दे तो निकाल दो? उस हिसाब से तो लोगों को अपने बुड्ढे मां-बाप को भी घर से निकाल देना चाहिए।”
पूरन “जी सरदार जी” कह कर चला गया।
मैं गाड़ी में बैठा और हम सेक्टर पांच की तरफ रवाना हो गए। घर आ कर मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू ये सामान अंदर छोड़ आ और बोलना हम सीधे सेक्टर सत्रह जा रहे हैं, कुछ जरूरी काम है।
