दिव्या और मम्मी समलिंगी चुदाई के लिए तैयार थी।
दिव्या मम्मी को कह रही थी, “मम्मी मेरी फुद्दी चोदते हुए कुछ-कुछ बोलती रहना। जैसे आप धीरज से चुदाई करवाते हुए बोलती हो। और बहुत मजा आएगा। पहली बार आप बोलना, फिर मैं भी बोलूंगी।”
जो कुछ मम्मी और दिव्या बोल रही थी, मेरी हैरानी की कोइ हद्द ही नहीं थी। मैं बस यही सोच रहा था, “ये दोनों मां-बेटी ही हैं?”
दिव्या की इस बात पर हंसती हुई मम्मी ने कमाल की बात की। मम्मी बोली, “मेरी बेटी, तुझे तो अपनी फुद्दी में लंड डलवाये, चुदाई शुरू करवाए चौबीस घंटे भी नहीं हुए। कितनी बार लंड लिया होगा फुद्दी में? चार बार? पांच बार? और दिव्या मैं चौबीस सालों से चुदाई करवा रही हूं। चौबीस सालों से लंड डलवा रही हूं अपनी फुद्दी में। चौदह हजार से ज्यादा बार लंड डलवा चुकी हूं अपनी फुद्दी में इन चौबीस सालों में।”
मम्मी बोल रही थी, “जब तक धीरज पैदा नहीं हुआ था, तीन-तीन चार-चार बार चोदते थे तुम्हारे पापा मुझे। पहले दो साल तो दिन में पांच-पांच बार भी चुदाई हो जाती थी। ये तो पिछले एक डेढ़ साल से ही तेरे पापा का लंड जवाब दे रहा है। डेढ़ साल पहले तक भी हममें मस्त चुदाई होती थी। और दिव्या तू तो मुझे ऐसे समझा रही है, जैसे मैं आज पहली बार चुदाई करवा रही हूं।”
दिव्या बोली, “अरे मम्मी ऐसी बात नहीं है। वो मैं इसलिए कह रही हूं कि अगर आपने सेक्स का, चुदाई का असली मजा लेना है तो ये भूलना पड़ेगा हम दोनों आपस में मम्मी-बेटी है।”
मम्मी बोली, “अच्छा तो ये बात है।”
और इसके बाद तो जब मम्मी ने बोलना शुरू किया, तो बस कमाल ही कर दिया।
मम्मी बोली, “अरे मेरी चुदक्कड़ रानी दिव्या, मेरी रखैल मादरचोद दिव्या, इतना मुझे भी मालूम है। चल तैयार हो जा तेरी फुद्दी फाड़ती हूं आज चोद-चोद कर। करती हूं तेरी फुद्दी के साथ-साथ गांड का भी कचरा आज। देखना ऐसे चोदूंगी तुझे जैसे एक कुत्ता कुतिया को चोदता है। (अपनी अगली टांगों में जकड़ कर) साली मादरचोद रंडी दिव्या, हिलने भी नहीं दूंगी तुझे। भोसड़ा ना बना दिया तेरी फुद्दी का चोद-चोद कर, साली चुदक्कड़ कहीं की।”
दिव्या हंसती हुए बोली, “वाह मम्मी आप तो दो कदम और भी आगे हो। अब ये भी बता दो, मैं फुद्दी चुदवाती हुई क्या बोलूं?”
मम्मी बोली, “तू बोलना, आजा मेरी फुद्दी के राजा, देख तेरे लंड की रानी, तेरी रंडी, तेरे सामने फुद्दी खोल के लेटी हुई है। आजा अब और मत तरसा, आजा चढ़ जा मेरे ऊपर और डाल दे अपना खूंटा मेरी कुंवारी फुद्दी में। तोड़ दे इसकी सील। फाड़ दे इस फुद्दी को। एक बार फुद्दी फड़वा लूं, फिर करूंगी अपनी गांड तेरे आगे। उसका भी आज कचरा करना है मेरे राजा आज। बस ये सोच ले मैं कुतिया हूं। पकड़ ले मुझे कमर से और हिलने मत देना मुझे। लाख कूं-कूं चूं-चूं करूं, छोड़ना मत मुझे, आजा अब घुस जा मेरी फुद्दी में, गांड भी चुदवाऊंगी तुझसे आज।”
मस्ती में मम्मी और दिव्या जिस बेशर्मी के साथ अजीब-अजीब बातें और हरकतें कर रही थी। ये तो बिलकुल भी नहीं लग रहा था कि दोनों मां-बेटी हैं। पक्की चुदक्कड़ लग रही थी।
मम्मी की बातें सुन कर मेरी और दिव्या, दोनों की हंसी छूट गयी।
दिव्या बोली, “मम्मी मैं और माधवी इतना कुछ नहीं बोलती। अब तो मैं माधवी के साथ भी यही बोला करूंगी। ये बोलने-सुनने में तो बड़ा ही मजा आता है।”
फिर दिव्या मुझसे बोली, “धीरज तुम भी ऐसा ही कुछ बोलना जब तुम मेरी चुदाई करोगे।”
मम्मी खड़ी हुई और दिव्या की टांगें थोड़ी और खोल कर फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ते हुए बोली, “दिव्या तेरी इस फुद्दी की साथ फुद्दी की चुदाई से फारिग हो कर आज अपने बेटे से गांड चुदवाऊंगी मैं, और उसके लंड की गरम-गरम मलाई अपनी गांड में डलवाऊंगी।”
मम्मी दिव्या से बोली, “मेरी मान मेरी चुदक्कड़ बिटिया, तू भी लेले एक बार धीरज का गधे के लंड जैसा लम्बा मोटा लंड अपनी गांड में, और मजे ले। साथ में जब माधवी आये तो उसके गांड भी फड़वा देना अपने भाई के लंड से। जब अपने भाई से चुदाई करवानी ही है, तो फिर पूरी तरह ही करवाओ। आगे, पीछे, मुंह में सब जगह डलवाओ अपने भाई का लंड।”
इसके बाद मम्मी अपनी कमर को आगे-पीछे करते हुए बोली, “ले मेरी रंडी दिव्या, मेरी कुतिया, तेरी मां का भोंसड़ा, साली मादरचोद चुदक्कड़ रंडी, आज तेरी फुद्दी का कचरा करके ही छोडूंगी तुझे, तेरी मां का भोंसड़ा। एक रखैल, एक रंडी की तरह चोदूंगी तुझे आज – फाड़ दूंगी तेरी फुद्दी। अपना मोटा लंड अभी तेरी गांड में डालती हूं, तेरी चीखें निकल दूंगी साली मादरचोद।”
मम्मी ने भी दिव्या की तरह मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोली, “बेटा धीरज, याद कर ले ये सब, तू भी बोलना यही जब तू मेरी या दिव्या की गांड में लंड डालेगा।”
मम्मी की ऐसे बातें मुझे हैरान कर रही थी। मम्मी अब चुदाई में दिव्या के साथ भी यही कुछ बोलने को कह रही थी। मैंने हां में सर हिला दिया और सोचा, “यार अगर मम्मी और दिव्या को ये सब सुनने में इतना ही मजा आता है, तो फिर मैं ही क्यों शरमाऊं, मैं भी ये सब बोलने के क्यों ना मजे लूं? अब तो मुझे भी बोलना ही चाहिए, मम्मी को और दिव्या को तो इसमें बहुत मजा आता है।”
थोड़ी देर मम्मी ऐसे ही दिव्या की फुद्दी पर अपनी फुद्दी के धक्के लगाती रही।
फिर दिव्या बोली, “वाह मम्मी आप तो सच में है मेरी मम्मी हैं। बड़ा मजा आएगा आपके साथ इस फुद्दी चुदाई का चलो अब आप लेटो मैं आती हूं ऊपर और फाड़ती हूं आपकी फुद्दी चोद-चोद कर।”
अब दिव्या की जगह मम्मी लेट गई और अपनी टांगें उठा कर टांगें चौड़ी कर दी। जब दिव्या लेटी थी और उसने अपनी टांगें चौड़ी की थी, तब दिव्या की कुंवारी फुद्दी की फांकें बंद ही रही थी। मगर मम्मी ने जैसे ही अपनी टांगें चौड़ी की, मम्मी की चौदह हजार से ज्यादा बार चुदी हुई फुद्दी की फाकें अपने आप ही थोड़ी सी खुल गयी और अंदर की गुलाबी फुद्दी दिखाई देने लगी। मस्ती के कारण मम्मी की फुद्दी चिकने पानी से भरी पड़ी थी और चमक सी रही थी। ये नजारा देख कर मेरा लंड एक-दम सख्त हो गया।
दिव्या ने मम्मी की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रखी और धक्के लगाने शुरू कर दिए। कुछ देर तो दिव्या कुछ नहीं बोली, बस मम्मी की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रगड़ती रही। मगर जैसे ही दिव्या की फुद्दी गर्म हुई, तो दिव्या धक्के लगाने के साथ-साथ बोलने लगी, “ले मेरी रंडी मम्मी, मेरी कुतिया, तेरी मां का भोंसड़ा, साली चौदह हजार बार लंड ले चुकी अपनी इस फुद्दी में, और कैसे चिल्ला रही है मादरचोद। जैसे कि पहली चुदाई हो रही इस कुतिया की।
मादरचोद चुदक्कड़ रंडी, देखती रह गांडू आज तेरी फुद्दी का कचरा करके ही छोडूंगी तुझे। साथ ही आज तेरी गांड भी नहीं छोडूंगी – साली तेरी मां का भोंसड़ा। ऐसे चोदूंगी जैसे कि कोइ किसी रंडी को भी क्या चोदता होगा। अभी अपना मोटा लंड अभी तेरी गांड में डालती हूं तेरी चीखें निकल दूंगी साली मादरचोद।”
नीचे से मम्मी बोल रही थे, “अरे भोंसड़ी वाले मादरचोद, साले, मैं तो पहले बोल चुकी हूं, मैं तो तेरे पास आयी ही अपनी मां चुदवाने, अपनी फुद्दी और गांड का कचरा करवाने। अब आजा मेरे राजा, देख तेरी रानी, तेरी रंडी, तेरे सामने फुद्दी खोल के लेटी हुई है। पूरे पैसे वसूल मझे चोद-चोद कर गांडू। आजा अब और मत तरसा, डाल दे अपना खूंटा मेरी फुद्दी में अब तो बस ये सोच ले मैं कुतिया हूं। पकड़ ले मुझे, हिलने मत देना मुझे जब तक मेरी फुद्दी की मां ना चुद जाए, आजा। लाख कूं-कूं चूं-चूं करूं, छोड़ना मत मुझे, आजा अब घुस जा मेरी फुद्दी मैं।”
मैं पहले ही हैरान था कि मम्मी ऐसा भी कुछ बोल सकती है – वो भी दिव्या के साथ – और अब तो दिव्या भी शुरू हो चुकी थी।
तभी मम्मी के चूतड़ जोर-जोर से हिलने लगे। मम्मी “वो” वाली बातें भूल गयी और दिव्या से बोली, “दिव्या बेटी मेरी तो फुद्दी तो फिर से तैयार होने लग गयी है। दिव्या जब धीरज यहां नहीं हुआ करेगा तो मैं और तुम दिन में ये किया करेंगी।
दिव्या ने एक बार फिर मेरी ओर देखा, मगर इस बार ना कुछ इशारा किया, ना ही कुछ बोली।
मम्मी की फुद्दी के ऊपर फुद्दी रगड़ते हुए दिव्या बोली, “मम्मी देखती जाओ, अभी और मजा आएगा। जब दोनों की फुद्दीयों का पानी बाहर तक आ जाएगा और दोनों फुद्दीयां गीली हो कर फच्च-फच्च की आवाजें करने लगेंगी।”
मम्मी चूतड़ घुमाने लगी और बोली, “आह दिव्या बेटी बड़ा मजा आ रहा है, मेरी फुद्दी तो लगता है पानी छोड़ने वाली है। ये तो बड़ा जल्दी मजा आ गया इस बार।” जब दिव्या को लगा मम्मी को सच में ही मजा आने वाला हो गया है तो दिव्या मेरी तरफ मुड़ी और बोली, “धीरज ये तो मम्मी को सच में ही मजा आने वाला हो गया भाई। आजा अपना मोटा लंड डाल मम्मी की फुद्दी में और मजा देदे इनको। मम्मी को असली मजा तो लंड फुद्दी की अंदर जाने पर ही आएगा।”
दिव्या के बुलाने से मैं उठा, लंड तो मेरा खड़ा ही था उठा, दिव्या मम्मी की फुद्दी से हट गयी और मैंने मम्मी की टांगें थोड़ी और ऊपर उठायी और मम्मी की फुद्दी को अपने लंड के सामने ले आया। मैंने लंड मम्मी की फुद्दी के छेद पर रक्खा और फचाक से लंड मम्मी की फुद्दी में डाल दिया मम्मी को चोदना शुरू कर दिया। मम्मी ने एक सेकंड के लिए मेरी तरफ देखा और फिर से आँखें बंद कर लीं।
दिव्या की फुद्दी चुदाई से मम्मी की गर्म हुए पड़ी फुद्दी तो मेरे लंड के बीस धक्के भी नहीं झेल पायी और मम्मी ने एक जोर की सिसकारी, “आह धीरज, आह दिव्या कैसी गर्म कर दी बेटा तुम लोगों ने मेरी फुद्दी।” बोलते हुए मम्मी ने जोर से चूतड़ घुमाये और मम्मी ढीली हो गयी। जब मम्मी का मजा उतरा तो मम्मी दिव्या की तरफ देखते हुए बोली, “दिव्या बेटी बहुत महीनों के बाद ऐसा मजा आया है।”
मम्मी को मजा आ चुका था, मगर मेरा लंड अभी भी खड़ा ही था। असल में तो मैं मम्मी के गांड चोदने के मूड में था, और मम्मी की गांड में ही लंड की पिचकारी डालना चाहता था।
जैसे ही मम्मी की फुद्दी का पानी निकलने लगा मम्मी ने आँखें बंद कर ली और मजा लेने लगी। मैं दिव्या से बोला, “दिव्या आजा मेरी बहन वापस आजा और फिर से मम्मी की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रगड़। जब तुम दोनों की ये फुद्दी चुदाई खत्म हो जाएगी, तब मैं इनकी गांड में लंड डालूँगा। दिव्या आज मैंने मम्मी की गांड चोदनी ही चोदनी है। आज बिना मम्मी की गांड चोदे ना तो मेरा लंड ढीला होने वाला है, और ना ही मुझे नींद ही आने वाली है।”
दिव्या बोली, “समझ गई धीरज ” और दिव्या फिर से मम्मी की फुद्दी पर फुद्दी रगड़ने लगी। जल्दी ही मम्मी का मजा पूरा उतर गया और मम्मी दिव्या से बोली, “बस दिव्या बस मजा आ चुका मुझे।” मम्मी उठने लगी तो दिव्या बोली, “मम्मी अभी ऐसे ही लेटी रहो, मैं भी आ रही हूं। धीरज ने हम दोनों की फुद्दीयां चूसनी हैं, फिर आज धीरज आपकी गांड चोदेगा।”
फिर हंसती हुई दिव्या बोली, “मम्मी धीरज आज आपकी गांड चोदे बिना नहीं मानने वाला और ना ही धीरज का लंड आपकी गांड चोदे बिना ढीला ही होने वाला है, ना ही उसे आज नींद ही आने वाली है। दिव्या की बात सुन मम्मी फिर से वैसे ही लेट गयी और दुबारा से टांगें उठा कर टांगें चौड़ी कर दी।
दिव्या भी मम्मी के पास ही लेट गई और अपने चूतड़ों के नीचे तकिया सरका कर अपने चूतड़ उठा लिया और अपने टांगें खोल दी। मैं बारी-बारी से दोनों की फुद्दीयां चूसने-चाटने लगा।
मझे दोनों की फुद्दीयां चूसते हुए लग रहा था की मम्मी की फुद्दी मैं तो बहुत कम पानी था मगर दिव्या की फुद्दी पानी से भरी पड़ी थी। लेकिन मम्मी की फुद्दी में एक अलग बात थी। मम्मी की फुद्दी का पानी नमकीन और खट्टा था, मगर दिव्या की फुद्दी के पानी में ये खट्टापन बहुत ही कम था। मम्मी की फुद्दी के पानी में अजीब सी तीखी महक भी थी जो मेरे लंड को और भी सख्त कर रही थी। दिव्या की फुद्दी में ये महक बहुत कम थी
मैं दिव्या की फुद्दी चूसता जा रहा था और दिव्या की फुद्दी पानी छोड़ती जा रही थी। तभी दिव्या के चूतड़ हिलने लगे। लगता था दिव्या की फुद्दी फिर से गरम हो रही थी। मुझे मम्मी और दिव्या की फुद्दी के पानी में स्वाद और महक में फर्क भी साफ़ महसूस हो रहा रहा।
दिव्या बोली, “ये क्या धीरज तुमने मेरी फुद्दी को फिर से गरम कर दिया। मम्मी मेरी फुद्दी तो फिर तैयार हो गई है। धीरज डाल मेरी फुद्दी में लंड और एक चुदाई और कर दे। मैं खड़ा हुआ और दिव्या की फुद्दी में लंड डाल दिव्या की चुदाई शुरू कर दी।”
मैं अभी अभी मम्मी के फुद्दी में लंड डाल कर हटा था, और अब मेरा का लंड दिव्या की फुद्दी में था। दोनों फुद्दीयों का फर्क मुझे साफ़-साफ़ महसूस हो रहा था। मम्मी की फुद्दी के सामने दिव्या की फुद्दी बहुत ही ज्यादा टाइट थी। तभी मुझे मम्मी की वो बात याद आ गयी, जब मम्मी ने दिव्या से कहा थी, “दिव्या, तुझे चुदाई करवाए अभी चार घंटे भी नहीं हुए और मैं पिछले चौबीस सालों से चुदाई करवा रही हूं। तूने अब तक चार चुदाईयां ही करवाई हैं, और मेरी फुद्दी में चौदह हजार से ज्यादा बार लंड जा चुका है।”
मैं सोच रहा था कि मैं कितना किस्मत वाला हूं, जो मैंने एक पूरी तरह से कुंवारी लड़की के फुद्दी की सील तोड़ी है और ये ख्याल आते ही कि जल्दी ही मैं एक और कुंवारी लड़की की फुद्दी की सील तोडूंगा, मेरे लंड की सख्ती एक-दम बढ़ गयी।
दिव्या की चुदाई पूरी होने के बाद जब हम तीनो इकट्ठे बैठे तो मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी एक बात पूछूं?”
मम्मी बोली, “पूछो, इसमें कहने की क्या बात है?”
मैंने कहा, “मम्मी दिव्या की फुद्दी का पानी बहुत हल्का नमकीन है और उसमें महक भी हल्की-हल्की सी आती है, और खट्टा तो बिलकुल भी नहीं है। मगर मम्मी आपकी फुद्दी का पानी नमकीन भी ज्यादा है, खट्टा भी है और उसकी महक भी तीखी है। ऐसा क्यों?”
मम्मी बोली, “धीरज बेटा बात ये है कि दिव्या की फुद्दी से निकले चिकने पानी में पेशाब की एक बूंद भी नहीं होती, इसलिए उसकी फुद्दी के पानी में खट्टापन ना के बराबर है। मगर धीरज मेरी फुद्दी के पानी में पेशाब की बूंदे मिक्स हो जाती हैं, इसलिए फुद्दी के पानी में खट्टापन होता है। इसीलिए ये नमकीन भी ज्यादा होता है और महक भी तीखी उसी पेशाब के कारण ही होती है ये खट्टापन असल में पेशाब का स्वाद होता है।”
मम्मी बोलती जा रही थी, “धीरज दिव्या जानती होगी कि फुद्दी का छेद और पेशाब वाला छेद बिल्कुल पास-पास होते हैं।”
मम्मी ने ये कह कर दिव्या की तरफ देखा।
दिव्या बोली “हां मम्मी दोनों छेद ऊपर नीचे, बिलकुल पास-पास ही होते हैं।”
मम्मी ने बात जारी रखते हुए कहा, “अब होता क्या है धीरज, दिव्या जैसी जवान लड़की का अपने दोनों छेदों पर – चूत के छेद और पेशाब वाले छेद पर पूरा-पूरा कंट्रोल होता है। जब तक जवान लड़की ना चाहे उसके पेशाब वाला छेद बिलकुल टाइट बंद रहता है। इसीलिए चुदाई की मस्ती में जब जवान लड़की की फुद्दी जब पानी छोड़ती है, तब भी लड़की नहीं चाहती की पेशाब वाला छेद खुले, क्योंकि पेशाब तो उसने करना ही नहीं होता – और वो पेशाब वाला छेद नहीं खुलता।”
“धीरज बेटा अब यही कंट्रोल हमारी उम्र की औरतों में, जिनकी लगातार की चुदाई हुई होती है, कम हो जाता है और पेशाब वाला छेद थोड़ा ढीला हो कर हमेशा हल्का सा खुला ही रहता है। दूसरे चुदाई के ख्याल से ही जब हमारी चूतों में आग लगती है और चूतें पानी छोड़ती हैं, तब पेशाब वाला छेद ना चाहने पर भी थोड़ा सा और ज्यादा खुल ही जाता है और पेशाब की बूंदे टप-टप टप-टप कर चूत के पानी में मिक्स होने लगती हैं। ये उस पेशाब का ही स्वाद है।”
फिर मम्मी ने अपनी वही बात दोहरा दी, “अब देखो दिव्या अब तक कितनी चुदी है? चार बार। और मैं इन चौबीस सालों में चौदह हजार से ज्यादा बार तुम्हारे पापा का लंड अपनी चूत में ले चुकी हूं। यही वजह हैं कि मेरे फुद्दी के पानी में थोड़ा सा पेशाब भी मिला रहता है। इसीलिए मेरी फुद्दी के पानी में से तीखी महक आती है और उसमें खट्टापन भी होता है।”
मैंने फिर पूछा, “अच्छा मम्मी एक बात और बताओ। जब मैं आप दोनों के फुद्दीयां चूस रहा था, तब दिव्या के फुद्दी तो पानी छोड़ती जा रही थी। मगर आपकी फुद्दी का पानी थोड़ी चुसाई के बाद खत्म हो गया था।”
मम्मी बोली, “धीरज बेटा तुमने दिव्या की फुद्दी के पानी में एक चीज़ और नोट की है?”
मैंने पूछा, “क्या मम्मी?”
मम्मी बोली, “दिव्या की उम्र की लड़कियों की फुद्दी का ये पानी चिकनाहट या चिपचिपापन लिए भी होता है। ये कुदरत का एक तरीका है फुद्दी को चिकना रखने का। जवान लड़की की फुद्दी टाइट होती है, उसमें लंड आराम से जाए, बिना किसी तकलीफ से जाए। इसलिए उसकी फुद्दी में चिकनाहट या चिकनापन ज्यादा होना चाहिए जिससे लंड फुद्दी में जाते हुए लड़की कोइ परेशानी ना हो, कोइ तकलीफ ना हो, और लंड फुद्दी में जाने का मजा पूरा आये। चुदाई के दौरान फुद्दी चिकनी रहे, इसीलिए ही कुदरती जवान लड़की की फुद्दी पूरी चुदाई के दौरान चिकना पानी छोड़ती रहती है।”
मम्मी बोल रही थी, “मगर धीरज हमारी उम्र की औरतों की फुद्दी जो बहुत सारी चुदाईयों के बाद ढीली हो जाती है, उसे चुदाई के दौरान ज्यादा चिकनाहट की जरूरत नहीं होती। क्योंकि ऐसी ढीली फुद्दी में लंड वैसे ही आराम से चला जाता है, इसलिए इस तरह का चिकनाहट वाला पानी फुद्दी में से ना के बराबर ही निकलता है। ये सब एक तरह से कुदरत का करिश्मा है।”
मम्मी ने फिर कहा, “लेकिन मम्मी मुझे मजा तो आपकी फुद्दी का पानी चाटने में ज्यादा आया है, ज्यादा नमकीन, ज्यादा खट्टा, तीखी महक वाला। आपकी फुद्दी के खट्टे नमकीन पानी की महक से तो मेरा लंड फटने को हो रहा था। मन कर रहा था उठूं और तभी की तभी चोद दूं आपको।”
मम्मी ने हंसते हुए बोली, “इसमें तुम्हारा कसूर नहीं है धीरज, सब मर्दों का – जानवरों यही हाल होता है। अब जानवरों को ही लेलो। सांड, घोड़ा, कुत्ता ये फुद्दी में लंड डालने से पहले फुद्दी चाटते है। जैसे ही ये – सांड, घोडा, कुत्ता फुद्दी चाटने लगते है, गाय, घोड़ी, कुतिया पेशाब ही कर देती है और इन्हे चोदने आये इनका सांड, घोड़ा, कुत्ता इनका पेशाब भी चाटने लगते हैं। यही हाल तुम मर्दों का भी होता है।”
मैंने मम्मी और दिव्या दोनों की फुद्दीयां चूसी थी। मगर मुझे मम्मी की फुद्दी चूसने में ज्यादा मजा आया। मम्मी की फुद्दी का पानी ज्यादा नमकीन और तीखी महक वाला था और इसमें खट्टापन भी था। उसे चूसने चाटने में ज्यादा मजा आ रहा था।
मैंने फिर कहा, “लेकिन मम्मी मुझे मजा तो आपकी फुद्दी का पानी चाटने में ज्यादा आया है, ज्यादा नमकीन, ज्यादा खट्टा, तीखी महक वाला। आपकी फुद्दी के खट्टे नमकीन पानी की महक से तो मेरा लंड फटने को हो रहा था। मन कर रहा था उठूं और तभी की तभी चोद दूं आपको।”
फिर मैं बोला, “मम्मी मैं भी एक बार आपका पेशाब चाटूंगा। एक बार और आपके पेशाब का टेस्ट करूंगा।”
मम्मी ने हंसते हुए कहा, “ठीक एक बार हम सब आज की चुदाई से फारिग हो जाएं, फिर आज ही चाट कर टेस्ट कर लेना मेरा पेशाब।”
दिव्या बोली, “धीरज मम्मी का ही क्यों, मेरा पेशाब भी टेस्ट करना पड़ेगा।”
मैंने भी कहा, “ठीक है दिव्या तेरा पेशाब भी चाट लूंगा, तेरा ही क्यों जब माधवी आएगी तो उसका पेशाब भी चाट लूंगा।”
दिव्या मस्ती से बोली, “वाह धीरज, ये हुई ना बात। खूब मजा रहेगा।”
मम्मी बता रही थी, “और वैसे भी मैंने तो इतनी चुदाई करवा ली है अब तो मेरी फुद्दी ने तो कई सालों से ही पानी छोड़ना बंद कर दिया था। जैसे दिव्या की फुद्दी लंड और चुदाई के ख्याल से ही गीली हो जाती है, मेरी फुद्दी अब इस तरह गीली नहीं होती – और कई बार तेरे पापा का खड़ा लंड देख कर भी फ़ुद्दी पानी नहीं छोड़ती थी।”
”बहुत बार तो ऐसा भी होता था कि मेरी फुद्दी बिलकुल सूखी ही रह जाती थी और तेरे पापा को लंड डालने से पहले फुद्दी में थूक डाल कर इसे चिकना करना पड़ता था। और अब तो पिछले एक डेढ़ साल से मेरी फुद्दी में लंड ढंग गया ही नहीं। मेरी ढंग से चुदाई ही नहीं हुई। ये तो जब मैंने धीरज का इतना बड़ा और सख्त लंड देखा तो ऐसे मस्त लंड से चुदाई करवाने के ख्याल से मेरी फुद्दी ने फुर्र से पानी छोड़ा दिया।”
फिर मम्मी बोली, “धीरज कई सालों के बाद मेरी फुद्दी ने इतना पानी छोड़ा है।”
मैंने मम्मी की फुद्दी में उंगली डालते हुए कहा, “मम्मी मैं अब आपकी फुद्दी को लंड के लिए नहीं तरसने दूंगा। जब भी आपका मन करेगा, जब भी आप कहेंगी आपकी फुद्दी में लंड ड़ालूंगा और आपको चोदूंगा।”
दिव्या बोली, “हां मम्मी धीरज तो यहां हमेशा नहीं रहता, मैं भी आपको फुद्दी के मजे के लिए तरसने नहीं दूंगी। दिन में जब पापा ऑफिस गए होंगे तो आपकी फुद्दी चूसा करूंगी, आपसे फुद्दी चुसवाया करूंगी और फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ कर आपको मजा दिया करूंगी।”
मम्मी ने मुझे और दिव्या, दोनों को बाहों में ले लिया और बोली, “मेरी अच्छे बच्चे।”
फिर मम्मी बोली, “चल बेटा धीरज चल अब डाल अपनी मम्मी की गांड में लंड और निकाल अपने लंड की गर्म मलाई अपनी मम्मी की गांड में, अब रहा नहीं जा रहा बेटा। मेरी गांड में कुछ-कुछ होने लगा है।”
ये कह कर मम्मी बेड से उतरी और जा कर सोफे पर उल्टी लेट गयी और अपने चूतड़ पीछे करके ऊपर उठाते हुए बोली, “आजा बेटा, देख तेरी मम्मी की गांड बुला रही है तुझे।”
मैं मम्मी के पीछे चला गया और चूतड़ खोल कर मम्मी की गांड का छेद चाटने लगा। गांड का छेद चाटने में बड़ा ही मजा आ रहा था। गांड का छेद चाटते-चाटते मैं मम्मी के चूतड़ों को हल्के से काट भी लेता था। मम्मी के चूतड़ बहुत ही मुलायम थे। ऐसे मुलायम चूतड़ों छेद देख कर मेरा लंड फटने को हो गया।
चूतड़ चाटने के बाद मैं अलमारी में से वैसलीन लाया और मम्मी की गांड के छेद पर लगा दी।
थोड़ी वैसलीन उंगली के साथ मम्मी की गांड के छेद के अंदर भी लगा दी और लंड का टोपा मम्मी की गांड के छेद पर रख कर लंड अंदर दबाने लगा। लंड फिसल कर अंदर जाने लगा। मैंने सोचा मम्मी तो कह रही थी कि मम्मी की गांड चुदाई बहुत ही कम हुई है, मगर मुझे तो ऐसा नहीं लगा।
मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी आप तो कह रही थी पापा आपकी गांड नहीं चोदते, पर मम्मी आप की गांड का छेद तो थोड़ा खुला हुआ। मेरा लंड आराम से अंदर जा रहा है।” इस पर मम्मी ने कोइ जवाब नहीं दिया और मैंने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
मैं थोड़ा रुक-रुक कर मम्मी की गांड में लंड डालने लगा। दिव्या पास ही खड़े-खड़े मुझे मम्मी की गांड में लंड डालते देख रही थी। जब मुझे लगा कि लंड ने अपनी जगह बना ली है, तो मैंने थोड़ा जोर लगा कर अंदर धकेल दिया। लंड तकरीबन पूरा अंदर जा चुका था।
दिव्या जो मेरे पास ही खड़ी थी बोली, “धीरज तुम्हें इतनी देर क्यों लगाई मम्मी की गांड में लंड डालने में? क्या गांड में आराम से लंड नहीं जाता, क्या सभी गांडों के साथ क्या ऐसा ही होता है?”
मैंने कहा, “हां दिव्या, असल में फुद्दी के छेद की तरह गांड के छेद में लचीलापन नहीं होता, और फुद्दी की तरह गांड में से चिकना पानी भी नहीं निकलता। इसलिए पहली तीन चार चुदाईयों में लंड गांड के छेद में आराम से नहीं जाता। थोड़ी दिक्कत होती है। तीन-चार बार जब लंड गांड में चला जाता है, तब ही लंड गांड में जाना शुरू होता है। मगर दिव्या चिकनाहट के लिए क्रीम फिर भी लगाने ही पड़ती है और लंड भी धीरे-धीरे ही गांड में डालना पड़ता है।
मम्मी गांड चुदवा कर हटी थी, मगर चूतड़ पीछे करके ही लेटी हुई थी। तभी दिव्या ने मम्मी के गांड में उंगली डाल दी। मम्मी की गांड का छेद तो मोटे लंड की चुदाई से थोड़ा खुला ही था। दिव्या की उंगली फिसल कर मम्मी की गांड में चली और मेरे लंड की मलाई मम्मी की गांड से बाहर आने लगी।
दिव्या ने मुझसे पूछा, “धीरज ये क्या है?”
मैंने कहा, “दिव्या यही तो है मेरे लंड की का चिकना पानी जो मम्मी की गांड में गया है।”
दिव्या अपनी उंगली चाटती हुई बोली, “बाहर निकल कर तो वेस्ट हो रहा है – या तो गांड के अंदर ही रहे, जैसे मेरी फुद्दी के अंदर ही रहा था। तुम्हारे लंड का पानी तो मेरे फुद्दी से बाहर नहीं आया।” और ये कह कर दिव्या नीचे बैठ गयी और मम्मी की फुद्दी में से निकलता हुआ मेरे लंड का गाढ़ा सफ़ेद पानी चाटने लगी।”
मम्मी ने सर घुमाया और मुझसे पूछा, “धीरज ये दिव्या क्या कर रही है?”
मैंने जवाब दिया, “मम्मी आपके चूतड़ों के छेद से मेरे लंड का गाढ़ा सफ़ेद पानी बाहर आ कर नीचे फुद्दी के तरफ बह रहा था। दिव्या बोली ये तो वेस्ट हो रहा है, और नीचे बैठ कर वो अपनी गांड पर से इसे चाट रही है।”
मम्मी कुछ नहीं बोली और पहले की ही तरह लेटी रही। गाढ़ा सफ़ेद पानी मम्मी की गांड में से बाहर बह रहा था और दिव्या चाटती जा रही थी। बीच-बीच में मम्मी अपनी गांड में थोड़ा नीचे के तरफ जोर भी लगा देती थी। इससे गाढ़े पानी की दो-चार बूँदें और बाहर निकल आती थी। जल्दी ही सारा सफ़ेद पानी निकल गया और दिव्या ने एक एक बूंद इस पानी की चाट ली।”
जब दिव्या ने चाट-चाट कर मम्मी की गांड बिलकुल साफ़ और सूखी कर दी, तो दिव्या खड़ी हो गयी और बोली, “हो गया धीरज, मजा आ गया लंड का गाढ़ा पानी चाटने का।”
मम्मी भी खड़ी हो गई और मुझसे बोली, “बेटा धीरज आज तूने मेरी पूरी तसल्ली कर दी, तेरे मोटे लंड को गांड में लेने का अलग सा ही मजा आया है।”
दिव्या बोली, “मम्मी ये लंड का सफ़ेद पानी तो बड़ा टेस्टी होता है, हल्का सा नमकीन, मगर इसकी महक तो बड़ी ही मस्त करने वाली होती है। मैं तो मम्मी मुंह में भी डलवाऊंगी धीरज के लंड से ये पानी, धीरज को बोलूंगी अपना लंड चुसवाये मुझसे।”
फिर दिव्या ने मेरी तरफ देख कर बोली, “क्यों धीरज?”
मैंने कहा, “चुसवाऊंगा, भला मुझे क्या प्रॉब्लम होगी, तुम्हारी फुद्दी की चुदाई तरह तुम्हारी लंड चुसाई भी मस्त रहेगी – तुम्हारी फुद्दी की तरह कुंवारी। जैसे तुम्हारी फुद्दी में अब तक कोइ लंड नहीं गया था, तुम्हारे मुंह में भी नहीं गया होगा।”
मम्मी ने दिव्या की तरफ देखते हुए बोली, “दिव्या क्या-क्या करवाएगी धीरज से? फुद्दी तू चुदवा ही चुकी है, गांड चुदवाने के सोच ही रही है, और अब मुंह में भी लंड लेगी?”
दिव्या बोली, “हां मम्मी सब कुछ करूंगी जो लड़का-लड़की आपस चुदाई करते हुए करते हैं – कर सकते हैं। धीरज का लंड तो मैं चूस ही चुकी हूं, बस धीरज के लंड का पानी ही नहीं निकलवाया मुंह में।”
मम्मी हंसते हुए बोली, “चल ठीक है, ये भी कर लेना। जब एक बार धीरज से चुदाई करवा ही ली, फुद्दी की सील तुड़वा ही ली तो फिर बचा ही क्या? अब तो जो भी तेरा मन करता है कर। गांड चुदवा, मुंह में ले, अपने मम्मों पर भाई के लंड की मलाई गिरवा – जो करना है कर। खुद भी मजा ले और धीरज को भी मजा दे।”
और फिर मम्मी मेरी तरफ मुड़ कर बोली, “चल धीरज, चल बाथरूम में। तू कह रहा था तुमने हमारा पेशाब टेस्ट करना है। चल तुझे पेशाब टेस्ट करवाएं। आजा दिव्या तू भी आजा। आज की मस्त चुदाई में बस यही एक काम रह गया है।”
मैं मम्मी और दिव्या, हम तीनों बाथरूम में आ गए। मैंने ने इधर-उधर देखते हुए मम्मी से पूछा, “मम्मी कैसे पेशाब डालोगी मेरे मुंह में? कहां बैठूं मैं? टॉयलेट सीट पर बैठ कर तो पेशाब मुंह में जाएगा नहीं। नीचे लेटूं क्या और आप मेरे ऊपर खड़े होकर मेरे मुंह पर पेशाब करो।”
मम्मी बोली, “नहीं धीरज, ऐसा कुछ नहीं है। उधर कोने में छोटा स्टूल पड़ा है, बैठ कर कपड़े धोने वाला, वो ले आ और बैठ जा उसके ऊपर।”
मैं स्टूल ले आया और उस पर मुंह खोल कर बैठ गया। पहले मम्मी आयी अपनी टाँगें चौड़ी करके अपने हाथों से अपनी फुद्दी की फांकें खोली और आगे हो कर पेशाब की धार सीधी मेरे मुंह में डाल दी और बोली, “ले बेटा, पी अपनी मम्मी का पेशाब।”
मम्मी का गर्म-गर्म पेशाब अजीब सी तीखी महक वाला था। पेशाब मेरे मुंह में जा कर बाहर निकलता हुआ उसके लंड ऊपर गिर रहा था। कुछ देर में मम्मी का सारा पेशाब निकल गया और मम्मी मेरे मुंह में मूतने से फारिग हो गयी।
मम्मी का पेशाब तो मेरे मुंह में गिर कर बाहर बह चुका था, बस पेशाब की कुछ बूंदें ही मुंह में बची हुईं थी। मैंने वो सारी बूंदें निगल ली। मम्मी का पेशाब तीखी महक वाला तो था ही, साथ ही नमकीन और खट्टा सा भी था।
जैसे ही मम्मी हटी, तो दिव्या आ गयी और मम्मी की तरह ही टांगें चौड़ी करके फुद्दी की फांकें खोल कर मेरे मुंह में पेशाब करने लगी। जहां मम्मी के पेशाब की धार मोटी थी और नीचे की तरफ गिर रही थी। दिव्या के पेशाब की धार पतली थी और सीधी मेरे गले में जा रही थी। मैं बड़ी मुश्किल से दिव्या का पेशाब अपने अंदर जाने से रोक पा रहा था। पेशाब करते हुए दिव्या की फुद्दी में सुर्र-सुर्र की तेज आवाज के साथ निकल रहा था। सुर्र-सुर्र की आवाज इतनी तेज थी की शायद पास खड़ी मम्मी को भी वो आवाज सुनाई दे रही होगी।
दिव्या ने भी पूरा पेशाब मेरे मुंह में किया और हट गयी। मम्मी के पेशाब की तरह ही दिव्या का पेशाब भी मेरे के मुंह से बाहर निकलता हुआ लंड पर गिर कर बह रहा था। दिव्या के पेशाब करने के बाद भी दिव्या के पेशाब की कुछ बूंदे मेरे के मुंह में थी। मैंने मम्मी के पेशाब की तरह ही दिव्या के पेशाब भी निगल लिया।
दिव्या का पेशाब भी गर्म था मगर उतना नमकीन नहीं था जितना मम्मी का पेशाब था, और ना ही उतना खट्टा ही था। मगर दिव्या के पेशाब की महक तो मम्मी के पेशाब जैसी ही थी – या शायद उससे कुछ ज्यादा ही तीखी थी।
इस मूतने के काम से जब सब फारिग हुए तो मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी आप लोग जाओ, मैं नहा कर आपका मूत धो कर आता हूं नहीं तो और जयदा महक छोड़ेगा।”
मम्मी बोली, “चल दिव्या, धीरज को नहाने दे, हम बाहर रात के खाने का काम करें।”
मैं नहा कर बाहर निकला और कपड़े पहन लिए और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया। मम्मी और दिव्या अभी भी नंगी ही बैठी थी।
मम्मी ने मुझसे पूछा, “हां तो बेटा धीरज क्या रिपोर्ट है मेरे और दिव्या के पेशाब की खुशबू और टेस्ट के बारे में?”
मैंने कहा, “मम्मी, ये लड़कियों का तो पेशाब भी कमाल है, जैसे ही आपने मेरे मुंह में पेशाब किया, गर्म-गर्म पेशाब और इसकी खुशबू ने तो मेरा तो लंड ही हरकत में ला दिया था। अगर मैंने आज इतनी बार आपकी और दिव्या की फुद्दी ना चोदी होती, तो मैंने तो वहीं बाथरूम के फर्श पर लिटा कर आपको और दिव्या को वहीं का वहीं चोद देना था। आपको अंदर ला कर बिस्तर पर लिटाने का भी इंतजार नहीं करना था। मम्मी जानवर भी इसीलिए पेशाब चाटते और सूंघते हैं। उनके लंड में भी एक-दम से हरकत आ जाती होगी।”
मम्मी और दिव्या दोनों हंस दी। मैं बोला, “मम्मी आपका पेशाब तीखी महक वाला, नमकीन और खट्टा था। दिव्या का पेशाब उतना नमकीन भी नहीं था जितना आपका पेशाब था, और ना ही उतना खट्टा ही था। मगर दिव्या के पेशाब के पेशाब निकलने की आवाज तो बड़ी तेज़ थी।”
मम्मी बोली, “धीरज दो औरतों के मूत के टेस्ट में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है, मगर दिव्या के मूतने से जो पतली धार और सुर्र-सुर्र की आवाज आ रही थी, वो इसलिए थी, क्योंकि दिव्या का मूतने वाला छेद भी दिव्या की फुद्दी की तरह ही अभी टाइट है, खुला नहीं है जैसे मेरा पेशाब वाला छेद खुल चुका है मेरी फुद्दी की तरह।”
फिर मम्मी बोली, “धीरज अब खाने का क्या प्रोग्राम है बेटा?”
मुझे तो चुदाई की थकान के कारण नींद सी आ रही थी। सुबह से चुसाई चुदाई ही हो रही थी। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी मेरा मन तो खाने का है नहीं, इतनी चुदाईयों के बाद अब मुझे थकान सी लग रही है, मैं तो अब सोऊंगा।”
मम्मी बोली, “ठीक है धीरज, आज असली मेहनत तो तेरी ही हुई है। तू जा, बाकी मौज मस्ती अब हम मां बेटी करेंगे।” फिर मम्मी ने दिव्या के तरफ देखते हुए कहा, “क्यों दिव्या बेटा, देगी ना मम्मी को फुद्दी चूस कर मजा?”
दिव्या बोली, “मम्मी फुद्दी चूसूंगी भी चुसवाऊँगी भी और अपनी फुद्दी चोदूंगी भी।”
मम्मी ने दिव्या की छोटी-छोटी तनी हुई चूचियों पर हाथ फेरते हुए कहा, “मेरी प्यारी प्यारी बेटी।”
सात दिनों का गुडगाँव में घर का प्रोग्राम मस्त रहा – एक तरह से जन्नत का मजा था। चुदाई-चुसाई और फ़ी चुदाई – बस यहीं होता रहा। सात दिनों के इस प्रोग्राम में पहले दो दिन तो मम्मी की चुदाई हुई। फिर जब तीसरे दिन दिव्या दिल्ली से वापस आ गयी तो तीन दिन मम्मी और दिव्या की मस्त चुदाई हुई। बस दिव्या की गांड चुदाई नहीं हो पाई। दिव्या लंड गांड में लेने के लिए तो तैयार बैठी थी। मगर दिव्या के गांड का छेद ही इतना टाइट था कि लंड अंदर जा ही नहीं पाया।
छठे दिन पापा आ गए। अब मम्मी के साथ तो चुदाई हो नहीं सकती थी, मगर दिव्या को उस रात मैंने फिर से चोद दिया। रात साढ़े दस बजे चुप-चाप, धीरे से मैं नीचे दिव्या के कमरे में गया और दिव्या को चोद कर दो बजे दिव्या के कमरे से बाहर निकला।
जैसे ही साढ़े दस बजे मैं नीचे दिव्या के कमरे में पहुंचा तो देखा दिव्या नंगी ही बिस्तर पर लेटी हुई थी। मुझे देखते ही दिव्या बोली, “धीरज मुझे मालूम ही था तुम जरूर आओगे। चलो आओ और बताओ कैसे चुदाई करनी है।”
उस दिन भी दिव्या को मैंने मस्त चोदा। दिव्या अब मस्त चुदाई करवाने लग गयी थी। दिव्या की फुद्दी तीन बार पानी छोड़ गयी, तीन बार मजा आ गया दिव्या को – मगर मेरा लंड खड़े का खड़ा ही था।
धुआंधार चुदाई कि बाद मैंने दिव्या से पुछा, “दिव्या, एक बज गया है एक बार और चुदवानी है तो बता। मेरा लंड तो अभी भी खड़ा ही है? अगर तू कहेगी तो इस बार तेरी फुद्दी मैं निकाल दूंगा लंड की गर्मा-गर्म मलाई।”
दिव्या बोली, “धीरज चुदवानी तो है तेरे लंड का गर्म पानी अपने अंदर डलवाने के लिए, पर धीरज मेरा गांड चुदवाने का मन हो रहा है।”
मैंने कहा, “कोइ बात नहीं दिव्या, चल अजा आज तेरी गांड में ही डालता हूं।”
दिव्या फट से चूतड़ ऊपर कर के उल्टी हो कर लेट गयी। मैंने दिव्या की अलमारी में से मुंह पर लगाने वाली क्रीम निकाली और दिव्या की गांड के छेद पर लगा कर एक उंगली गांड में डाल दी। एक उंगली तो दिव्या की गांड में चली गई, मगर जब मैंने दो उंगलियों पर क्रीम लगा कर दो उंगलियां दिव्या की गांड में डालने की कोशिश की तो मेरे दो उंगलियां भी दिव्या की गांड में बड़ी मुश्किल से जा पायी।
इतने से ही मुझे समझ आ गया दिव्या की गांड में उसकी दो उंगलियां इतनी मुश्किल से जा रहीं हैं तो फिर चार उंगलियों की बराबर की मोटाई वाला उसका लंड दिव्या की गांड में कैसे जाएगा।
मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या आज गांड चुदाई रहने देते हैं, नहीं जा पायेगा मेरा लंड तेरी कुंवारी गांड में। मैं जब मई-जून की छुट्टियों में आऊंगा तो गांड चुदाई की एक स्पेशल क्रीम होती है – जैल बोलते हैं उसे – वो लेता आऊंगा। ये जैल बेहद चिकनी क्रीम होती है और गांड चुदाई की शौक़ीन इसे इस्तेमाल करते हैं। नई कुंवारी सील बंद फुद्दी को भी मर्द ये जैल लगा कर ही चोदते हैं। लंड फिसल तो फुद्दी के अंदर जाता है और लड़की को दर्द भी कम होता है। ये वाली जैल लगा कर ही तेरी और माधवी के गांड चुदाई करूंगा। मम्मी की गांड चुदाई के बाद अब तो तुम्हारी और माधवी – तुम दोनों की गांड चोदने के बिना मुझे भी चैन नहीं मिलने वाला।”
पापा आ चुके थे। मम्मी की और मेरी चुदाई बंद थी, मगर दिव्या को मैंने उस रात को चोद दिया।
दिव्या को चोदने के लिए नीचे दिव्या के कमरे में चला गया। मस्त चुदाई हुई। जब दिव्या को दो बार मजा आने के बाद भी मेरे लंड ने पानी नहीं छोड़ा, तो मैंने दिव्या से पूछा की क्या उसे एक चुदाई और करवानी है? तब तक एक बज चुका था।
दिव्या बोली, “तो फिर ठीक है धीरज। अब तुम लेट जाओ और मैं उस दिन की तरह – जब मम्मी ने तुम्हारे लंड पर बैठ कर मजा लिया था, वैसा ही मजा मैं भी लेती हूं। जब तुम्हारे लंड का पानी मेरे फुद्दी में निकल जाएगा, तो मम्मी की ही तरह फुद्दी खोल कर तुम्हारे लंड का पानी बाहर निकाल कर चाटूंगी। मेरी तुम्हारी चुदाई में ये काम भी क्यों रह जाए।” ये बोल कर दिव्या हंस दी।
मैंने मन ही मन सोचा, “यार कैसे कैसे मजे लेती है ये लड़कियां। मैं बिस्तर पर लेट गया। मेरा लंड बिलकुल सीधा खड़ा था। दिव्या ने अपनी टांगें मेरे दोनों तरफ की और लंड को पकड़ कर फुद्दी के छेद पर रखा और एक ही बार में लंड पर बैठ गयी।
दिव्या बोली, “आह धीरज मजा आ गया यार, पूरा का पूरा फुद्दी में बैठा है तेरा लौड़ा।”
लौड़ा! मुझे हंसी आ गयी। दिव्या मस्त चुदाई के मूड में लग रही थी। मुझे तो खुद लंड के अगले सिरे – लंड के टोपे पर – कुछ नरम-नरम छूता हुआ महसूस हो रहा था।
दिव्या ने दोनों हाथ मेरे कंधों पर रखे और मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी। दिव्या की टाइट फुद्दी और फुद्दी के अंदर तक जाता हुआ लंड – मजा ही मजा आ रहा था मुझे – चुदाई का असली मजा।
तभी दिव्या ने एक हाथ मेरे कंधे से हटाया और अपनी फुद्दी का दाना रगड़ने लगी।
अब दिव्या मम्मी की जितनी तजुर्बेकार तो थी नहीं। जैसे ही दिव्या ने एक हाथ, मेरे कंधे से हटाया, दिव्या का बैलेंस थोड़ा बिगड़ा और दिव्या को मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने में दिकक्त आने लगी।
मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या तुम चुदाई पर ध्यान दो, तुम्हारी फुद्दी का दाना मैं रगड़ता हूं।”
दिव्या ने अपनी फुद्दी से हाथ हटा कर फिर से मेरे कंधे पर रख दिया और उछल-उछल कर लंड फुद्दी में अंदर-बाहर करने लगी। मैं अपने हाथ के अंगूठे से दिव्या के फुद्दी का दाना रगड़ने मसलने लगा।
जल्दी ही दिव्या मस्ती में आ गयी और सिसकारियां लेने लगी, “आह आह धीरज, क्या मस्त मजा आ रहा ही, धीरज यार क्या लंड है। आह धीरज मजा आने वाला है। बस आने ही वाला हैं। क्या मस्त लंड है धीरज आह आह धीरज निकल गया साले निकल गया।”
दिव्या की मेरे लंड के ऊपर के उछल कूद से मुझे भी मजा आ गया। मेरे लंड में से भी गर्म-गर्म मलाई निकल कर दिव्या की फुद्दी में गिरने लगी।
मजे में मैं बोलने लगा, “मेरी लंड की प्यासी कुंवारी बहन, साली पूरा लंड ले लेती है फुद्दी मैं आह दिव्या निकल रहा है मेरे जान, आह दिव्या मेरी जान निकल गया।” और इसके साथ ही मुझे पूरा मजा आ गया।
दिव्या कुछ देर तो लंड के ऊपर ऐसे ही बैठी रही। फिर मम्मी की ही तरह, जरा सी ऊपर उठी और हाथ नीचे करके फुद्दी की फांकें खोल दी – मम्मी की तरह। मेरे लंड का गाढ़ा सफ़ेद पानी दिव्या की फुद्दी से निकल कर मेरे लंड के ऊपर और आस-पास फ़ैल गया।
जब दिव्या को लगा कि सारा गाढ़ा पानी उसकी फुद्दी से निकल गया है, तो दिव्या उठी और झुक कर मेरे लंड और टट्टे चाटने लगी। दिव्या ने चाट-चाट कर मेरा लंड साफ दिया – एक-एक बूंद मेरे लंड की मलाई की चाट गयी।
उसके बाद दिव्या उठी और बोली, “लो धीरज, हो गई तेरे लंड की सफाई। अब जा और सो जा, तेरी चुदाई से मेरी तसल्ली हो गई, मजा आ गया, वो भी पूरा, अब मैं भी सोऊंगी आराम से। अब जब आएगा मई या जून में तब असली मजा आएगा।” रात की दो बजे मैं दिव्या की कमरे से निकला और अपने कमरे में आ गया।
अगले दिन मैं अपने कालेज आ गया। अब चुदाई को भूल कर पढ़ाई का टाइम था। मई आ गया और एग्जाम भी हो गए। जिस दिन परीक्षा खत्म हुई, उसी दिन महेंद्र मेरे पास आया और बोला, “आजा भाई धीरज, दो दिनों के लिए घर खाली है, आज निर्मला आएगी अपने साथ किसी लड़की को लेकर। देखते हैं उसकी ये नई लड़की कैसी है, और क्या करवाती है।”
मेरे 3XL वाले साइज़ के ख़ास लंड के कारण फुद्दीयां अपने आप ही मेरे पास आ जातीं थी। मेरी मम्मी भी तो एक बार चुदाई करवाने के बाद मेरे लंड की दीवानी हो गयी थी और यही हाल दिव्या का भी था, और यही माधवी का भी होने वाला था।
मैं महेंद्र के साथ उसके घर चला गया। उनके पहुंचने के दस मिनट के बाद ही निर्मला आ गई। निर्मला के साथ आयी सुमन और साथ में एक कमसिन लड़की।
मुझे तो देखने में वो छोटी उम्र की लग रही थी। छोटी उम्र की लड़की चोदने में जोखिम ही जोखिम था और मुझे इस तरह का जोखिम लेने में कोइ दिलचस्पी नहीं थी – मुझे कौन सी फुद्दीयों की कमी थी।
निर्मला आते ही मुझ से बोली, “धीरज ये मेरी ननद है कमलेश, मेरे घर वाले की छोटी बहन। तुम्हारा लंड इसकी फुद्दी में डलवाने लाई हूं। फिर सुमन की तरफ इशारा करके बोली, “और इसे तो तुम लोग जानते ही हो, चुदाई भी कर चुके हो इसकी।”
अंदर आते ही सब ने अपने कपड़े उतार दिए। कमलेश पतले जिस्म वाली लड़की थी। छोटे-छोटे मगर तने हुए मम्मे। छोटे-छोटे चूतड़ और बिना बालों की फुद्दी।
कमलेश तो मुझे शुरू से ही कच्ची उम्र की लग रहे थी। मैंने साफ़ ही निर्मला से कहा, “निर्मला में तो नहीं चोदूंगा इसे, मुझे तो ये छोटी उम्र की लग रही है।”
निर्मला बोली, “अरे धीरज, कोइ छोटी-वोटी नहीं है। चार साल पहले दसवीं पास कर चुकी है। आठ साल से तो इसे महीना आ रहा है। देखने में ही छोटी लगती है अपने भाई, मेरे खसम की तरह। वैसे 20 साल की है।”
“कमलेश घरों में काम नहीं करती, बस एक घर में ही जाती है और वहां भी बच्चा संभालती है। दोनों मियां-बीवी नौकरी करते हैं और उनका बच्चा छोटा है। किसी एजेंसी के जरिये उन्होंने इसे काम पर रखा है। धीरज ये एजेंसीयां छोटी उम्र की लड़कियों को काम पर नहीं रखवाती। इसके पास एजेन्सी का दिया कार्ड भी है। चाहो तो देख लो।”
निर्मला बता रही थी, “ये तो इसने एक दिन मेरी और अपने भाई की चुदाई देख ली और तभी से मेरे पीछे पड़ी है। इसे भी चुदाई करवानी है। ये तो बोलती है इसने अभी तक चुदाई नहीं करवाई, कुंवारी है। मैंने भी सोचा अगर लंड लेना ही है इसने तो फिर मस्त लंड ही ले। इसलिए मैं धीरज का लंड उसकी फुद्दी में डलवाने के लिए इसे यहां ले आई।”
ये सुन कर हम सब ने अपने कपड़े उतार दिए। मैं तो दिव्या की कुंवारी फुद्दी चोद ही चुका था – फुद्दी की सील तोड़ ही चुका था। मैंने महेंद्र से कहा, “चल भाई महेंद्र चढ़ जा कमलेश पर, तब तक में निर्मला की गांड चोदता हूं – बाद में मैं चोद दूंगा इसे।”
वैसे भी महेंद्र के मुझ पर काफी एहसान थे। चार-चार फुद्दीयां चुदवा चुका था मुझसे महेंद्र।
निर्मला बोली, “अरे-अरे धीरज, इतनी भी क्या जल्दी है? पहले जरा लंड तो चुसवाओ।”
ये बोल कर निर्मला ने महेंद्र का लंड मुंह में ले लिया और कमलेश से बोली, “जा कमलेश चूस धीरज का लंड – देख ले ये भी जाएगा तेरी फुद्दी में।” सुमन लंड चूसने की अपनी बारी का इंतजार कर रही थी।
कमलेश ने मेरा लंड मुंह में ले लिया। इस थोड़ी चुसाई के बाद निर्मला सुमन से बोली, “आजा सुमन तू भी चूस ले धीरज का लौड़ा, फिर मैं गांड में डलवाऊं।”
कमलेश ने ये सुन कर धीरज का लंड मुंह में निकाल लिया और सुमन ने आ कर मेरा लंड मुंह में ले लिया। निर्मला कमलेश से बोली, “जा लेट जा बिस्तर पर और ले महेंद्र का लंड अपनी फुद्दी में। उसके बाद लंड की जगह लौड़ा जाएगा तेरी फुद्दी में।” ये बोल कर निर्मला हंस दी।
अब सुमन मेरा लंड चूस रही थी। कुछ देर लंड चूसने के बाद सुमन उठी और निर्मला से बोली, “चलो निर्मला डलवाओ धीरज का लंड अपनी गांड में।”
निर्मला भी उठी और सोफे पर उल्टी लेट गया और बोली, “चलो धीरज अब डालो मेरी गांड में अपना डंडा और महेंद्र को चोदने दो इस कमलेश को। बड़ी लंड की प्यासी हुई पड़ी है ये।”
गांड चोदने चुदवाने का इसी बढ़िया कोई तरीका है ही नहीं। गांड का छेद बिलकुल लंड के सामने होता है।
महेंद्र बोला, “निर्मला, लंड पर कंडोम चढ़ाऊं, या अंदर ही निकाल दूं लंड का पानी कमलेश की फुद्दी में?”
इस बार सुमन बोली, “महेंद्र क्यों लड़की की पहली चुदाई का कचरा कर रहे हो? बिना लंड के गर्म-गर्म पानी के फुद्दी में गिरने के मजा कैसे आएगा चुदाई का? वही तो असली मजा आएगा इसे, जब गर्म गर्म आधा कप, इसकी फुद्दी में जायेगा। बेधड़क हो कर चोदो इसे, गोली रहती है हमारे पास।” फिर जैसे सुमन अपने आप से बोली, “क्या जाने कौन कब फुद्दी चोद दे। हम काम वालियों के पीछे तो मर्द पड़े रहते हैं, क्या नए-नए जवान होते लड़के, क्या साले खड़ूस बुढ्ढे।”
तब तक मैं निर्मला की गांड में लंड डाल कर चुदाई चालू कर चुका था। मैंने निर्मला की कमर कस के पकड़ी हुई थी और धड़ा-धड़ धक्के लगा रहा था। दो-तीन चुदाईयों में पानी तो मेरे लंड का नहीं निकलना था।
महेंद्र भी गया और कमलेश के चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर कमलेश की टांगें चौड़ी की और उसकी फुद्दी में लंड ऊपर-नीचे कर की फुद्दी का छेद ढूंढा और एक ही झटके में लंड कमलेश की फुद्दी में डाल दिया।
जैसे ही महेंद्र का लंड कमलेश की फुद्दी में गया दोनों एक साथ बोल पड़े। महेंद्र बोला, “अरे धीरज, यार लगता है पक्की कुंवारी है कमलेश, बड़ी टाइट फुद्दी है यार।” और कमलेश बोली, “भाभी बड़ी जलन हुई है।”
निर्मला बोली, “कमलेश अभी सब ठीक हो जाएगा। अभी तो लंड ही गया है तेरी फुद्दी में। अभी मजा आना शुरू हो जाएगा।”
फिर निर्मला बोली, “मेरी बन्नो, अभी तो महेंद्र का लंड ही गया है – जब इस धीरज का लौड़ा जाएगा तेरी फुद्दी में फिर देखना कैसा मजा आता है।”
निर्मला की बात पर मैं, महेंद्र, सुमन और खुद और निर्मला हंस पड़े। मैं निर्मला की गांड चोद रहा था और महेंद्र कमलेश की फुद्दी। निर्मला अपने हाथ से अपनी फुद्दी का दाना रगड़ रही थी।
जल्दी ही निर्मला और कमलेश दोनों की फुद्दीयां पानी छोड़ गयी। अब सुमन की बारी थी।
मैंने सुमन से पूछा, “हां तो सुमन, तुमने क्या चुदवानी है, गांड या फुद्दी?”
सुमन बोली, “मेरी छोड़ो धीरज, इस गर्मा-गर्म कुंवारी फुद्दी का इलाज करो। मैं महेंद्र से ही चुदवा लूंगी। तुम अपना खूंटा डालो इस कमलेश की फुद्दी में। वैसे मैं आज यहां गांड चुदवाने ही आयी हूं।”
महेंद्र बोला, “आजा भाई धीरज, अब तू डाल कमलेश की फुद्दी में अपना खूंटा और मैं चोदता हूं, निर्मला की गांड।”
महेंद्र निर्मला की पीछे आ गया और मैं कमलेश की ऊपर चढ़ गया। जैसे ही मेरा लंड कमलेश की फुद्दी में गया, कमलेश बोली, “आह धीरज भैया, ये तो मजा ही आ गया, भाभी मेरी फुद्दी तो भर गयी इनके लौड़े से।”
निर्मला हंसते हुए बोली, “चल मजे ले कमलेश, धीरज भैया से चुदवाने के, ऐसे लंड भी सब की नहीं होते। किस्मत वाली है जो तेरी पहली चुदाई ही मस्त हो रही है।”
दो घंटे चली इस चुदाई में मजा आ गया। कमलेश, सुमन और निर्मला ने मस्त चुदाई करवाई। सुमन और निर्मला ने गांड चुदवाई और निर्मला तो कमलेश को लाई ही फुद्दी चुदवाने थी। चुदाई खत्म हो गयी। जब निर्मला सुमन और कमलेश, जाने लगी तो कमलेश निर्मला से बोली, “भाभी अब कब आएंगे?”
निर्मला हंसते हुए बोली, “क्या हुआ कमलेश, एक ही बार फुद्दी में लंड डलवा कर – एक बार की चुदाई में मस्त हो गयी? अब पता नहीं कब आएंगे। महेंद्र तो अब पता नही कहां जाएगा। अगर यहीं गुडगांव में ही इसकी नौकरी पक्की हो गयी, फिर तो आते-जाते रहेंगे, नहीं तो कुछ पता नही।”
फिर निर्मला बोली, “पर तू फ़िक्र मत कर मेरी बन्नो। तेरी चुदाई का जुगाड़ तो मैं अब कर ही दूंगी। मुझे अपनी फुद्दी का लिए भी तो बढ़िया सा लंड ढूढ़ना होगा। तेरे भैया की “लुल्ली” से मेरे फुद्दी की प्यास भी तो नही बुझती, और गांड में तो तेरे भैया के लंड का पता ही नहीं चलता कि गया भी है या नहीं।”
निर्मला की इस बात पर धीरज और महेंद्र ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुरा दिए।
मैं तो ये सोच सोच कर ही खुश था कि अब अपनी मम्मी और दिव्या को फिर से चोदूंगा – और वो उसकी मौसेरी बहन माधवी? उसकी फुद्दी की सील भी तो टूटेगी उसके लंड से।
दिव्या और माधवी कुंवारी जरूर थी, मगर चुदाई मम्मी ही मस्त करवाती थी। मम्मी की चुदाई मुझे भूल ही नहीं रही थी।
दिव्या मुझे मम्मी की गांड में लंड डालता देख रही थी। दिव्या बोली, “धीरज एक बार मेरी गांड में भी डालना किसी दिन।”
मैंने कहा, “दिव्या तेरी गांड तो मम्मी की गांड से और भी ज्यादा टाइट होगी। तेरी गांड में नहीं जा पायेगा मेरा मोटा लंड।”
दिव्या बोली, “नहीं जाएगा तो मत डालना, एक बार ट्राई करने में क्या हर्ज़ है? मम्मी की गांड में तुम्हारा लंड जाते हुए देख कर मेरा मन भी गांड में लेने का” होने लगा है।”
मैंने कहा, “ठीक है, पहले एक गांड तो चोद लूं”, और मैंने मम्मी की कमर पकड़ ली और मम्मी की गांड चुदाई करने लगा।
मेरा लंड मम्मी के गांड में टट्टों तक बैठ रहा था। गांड चोदते-चोदते मैंने मम्मी से कहा, मम्मी मस्त रगड़े लग रहे है लंड पर। बड़ा मजा आ रहा है।”
मम्मी बोली, “रगड़ बेटा मुझे भी मजा आ रहा है। तेरी कुतिया तेरे नीचे ही है, ऐसे जकड़ कर गांड चोदना जैसे एक कुत्ता कुतिया को अपनी अगली टांगों में जकड़ कर चोदता है। फाड़ अब मेरी गांड अपने मोटे लंड से। फुला दे इसकी गांड चोद-चोद कर। बेटा भूल जाना कि ये तेरी मम्मी के गांड है। ऐसे चोदनी है जैसी तू अपनी मम्मी की नहीं एक रंडी की गांड चोद रहा है। चल लगा मस्त रगड़े।”
मम्मी की बातों ने तो मेरा तो मेरा दिमाग़ ही घुमा दिया। ये क्या बोल रही है मम्मी, वो भी दिव्या के सामने? दिव्या मुस्कुराती हुए मेरे तरफ देख रही थी।
जो भी था, मैं भी वैसी ही बातें बोलते हुए – जैसी बातें मम्मी बोल रही थी और मम्मी की गांड चोदने लगा। मैं मम्मी की गांड में धक्के भी लगा रहा था और साथ-साथ बोलता भी रहा था, “ले मेरी रंडी, मेरी कुतिया, मेरी चुदक्कड़ मम्मी, ले और ले पूरा ले अपनी गांड में साली मादरचोद रंडी।”
मम्मी की और मेरी बातें सुन-सुन कर दिव्या मुस्कुरा ही जा रही थी। मम्मी अपने चूतड़ जोर-जोर से आगे-पीछे कर रही थी। मम्मी जिस तरीके से गांड चुदवा रही थी लग ही नहीं रहा था कि मम्मी गांड नहीं चुदवाती थी। जो भी था मम्मी के इस तरह चूतड़ आगे-पीछे करने से गांड चुदाई का मजा मस्त आ रहा था।
मुझे महेंद्र के घर पर कामवालियों की गांड चुदाई याद आ रही थी। मैंने वहां भी गांड चोदी थी, लेकिन मम्मी जिस तरीके से गांड चुदवा रही थी उसका तो कोइ जवाब ही नहीं था।
अब हो ये रहा था, जब मम्मी चूतड़ आगे करती तो मैं लंड पीछे कर लेता था, और जब मम्मी चूतड़ पीछे करती मैं एक झटके के साथ लंड आगे कर देता था। इससे लंड एक-दम से पूरा अंदर बैठता था और मेरे बड़े-बड़े टट्टे मम्मी की चिकने पानी से गीली हुई फुद्दी पर पट्ट-पट्ट की आवाज़ के साथ टकराते थे।
दिव्या पास ही खड़ी गौर से मेरा लंड को मम्मी की गांड में अंदर-बाहर होते हुए देख रही थी। दिव्या ने अपनी दो उँगलियों में मेरा लंड हलके से पकड़ लिया, बिलकुल मम्मी के गांड के छेद के पास से। अब मेरा लंड दिव्या उंगलियों को छूता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था।
आठ-दस मिनट की गांड चुदाई के बाद मम्मी ने अपना हाथ नीचे करके अपनी फुद्दी का दाना रगड़ना शुरू कर दिया।
मम्मी को ऐसा करते देख दिव्या ने भी अपनी एक टांग सोफे के ऊपर रख ली और वो भी मम्मी की तरह अपनी फुद्दी में उंगली करने लगी।
मैं मम्मी की गांड चुदाई में मस्त था। मम्मी और दिव्या दोनों अपनी अपनी फुद्दीयों का दाना रगड़ रही थी। मम्मी गांड के छेद के अंदर बाहर होने से मेरे लंड पर बहुत रगड़े लग रहे थे। मुझे कभी भी मजा आ सकता था।
अभी मैंने मम्मी की गांड आठ-दस मिनट ही और चोदी थी कि मम्मी ने एक ने एक सिसकारी ली, “आह धीरज बेटा क्या मस्त गांड चोद रहा है तू, मेरी चूत पानी छोड़ गयी।”
इसके साथ ही दिव्या ने मेरे चूतड़ कस कर पकड़ लिये और जोर से बोली, “धीरज मेरा भी निकल गया। मम्मी मुझे तो एक बार और मजा आ गया।”
इस तरह मां-बेटी को मजा आता देख कर मेरा का लंड भी मलाई छोड़ गया। मजे के मारे मैं भी बोला, “ले मेरी मम्मी, निकला तेरी गांड के अंदर मेरे लंड का शहद। इतना मजा आ रहा था मुझे, ऐसा लग रहा था मेरे लंड से गर्म-गर्म शहद निकलना बंद ही नहीं हो रहा था।
मजे के मारे मैं बोल रहा था, “आह मेरी मम्मी, अभी भी निकल रहा है मेरी जान। मम्मी क्या गांड है आपकी, क्या गांड चुदाई करवाती हैं आप अपने मोटे मुलायम चूतड़ आगे-पीछे करके मजा ही आ गया आज तो, अभी भी निकल रहा है मम्मी, अभी भी निकल रहा है।”
दिव्या मेरी तरफ ही देखती जा रही थी – शायद सोच रही थी ये मैं क्या बोल रहा हूं – या फिर ये चाहते थी कि मैं उसे चोदते हुए भी यही कुछ बोलूं।
थोड़ी देर में मेरे लंड में से गर्म-गर्म मलाई निकालनी बंद हो गयी और मेरा लंड ढीला हो गया तो मैंने लंड मम्मी की गांड में से निकाला और एक तरफ खड़ा हो गया।
मम्मी अभी वैसी ही चूतड़ ऊपर करके लेटी हुई थी। दिव्या भी मस्ती में वहीं मम्मी के पास ही खड़ी मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी। मम्मी मजा आने के बाद की सुस्ती से अभी भी वैसे ही चूतड़ पीछे करके लेटी हुई थी।
तभी दिव्या ने मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेरते-फेरते मम्मी की गांड के छेद में उंगली डाल कर उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी।
दिव्या को ऐसा करते देख कर मैं जा कर सोफे पर बैठ गया। मम्मी की टाइट गांड चोदने की इच्छा पूरी हो चुकी, अब किसी दिन दिव्या की गांड में लंड डालना था। मैं सोच रहा था – अगर मम्मी की गांड चुदाई में लंड पर इतने रगड़े लगे हैं तो पता नहीं दिव्या और माधवी की गांड चुदाई मैं कितने रगड़े लगेंगे – या उनकी कुंवारी गांडों में मेरा मोटा जा भी पायेगा या नहीं। फिर मुझे दिव्या की बात याद आ गयी, “नहीं जाएगा तो मत डालना, एक बार ट्राई करने में क्या हर्ज़ है।”
हमारे एग्जाम हो चुके थे और डेढ़ महीने की छुट्टियां शुरू हो गई थी। मैं सोच-सोच कर ही खुश था कि अब अपनी मम्मी और दिव्या को फिर से चोदूंगा। और वो मेरी मौसेरी बहन माधवी? उसकी फुद्दी की सील भी तो टूटेगी मेरे लंड से। जो भी था मम्मी की चुदाई मैं नहीं भूल पा रहा था – मम्मी चुदवाती ही ऐसी मस्त थी।
वहीं बात – तजुर्बा भी तो कुछ मायने रखता ही है। छुट्टियों में मैं जब घर आया तो माहौल बड़ा ही शानदार था। डेढ़ महीने के बाद घर आने से मम्मी और दिव्या बड़ी ही खुश थी। अगर मुझे दोनों मां-बेटी की फुद्दी चोदने की ठरक थी तो उन्हें भी तो अपने बेटे और भाई का लंड फुद्दी में डलवाने की ठरक थी।
पहले ही दिन, पापा के ऑफिस और कामवाली के काम करके जाते ही दिव्या मम्मी से बोली, “चलो मम्मी चलो शुरू करें, बड़े दिनों के बाद धीरज आया है। मेरी फुद्दी तो सुबह से ही गीली हुई पड़ी है।”
मम्मी बोली, “अरे दिव्या मेरा भी वही हाल है, फुद्दी क्या मेरी तो गांड में भी खुजली मची हुई है।”
हम ने देर नहीं की और अंदर आ कर तुरंत कपड़े उतार दिए।
मम्मी बोली, “देखो धीरज, अब माधवी यहां होगी, और तुमसे चुदाई भी होगी। माधवी को मेरी और तुम्हारी चुदाई के बारे में भनक भी नहीं लगनी चाहिए, और दिव्या, तूने भी अपने और मेरे बारे में माधवी से कुछ नहीं कहना है। माधवी मेरी छोटी बहन की बेटी है, और मेरी बहुत इज़्ज़त भी करती है। मैं नहीं चाहती कि मेरे बारे में वो कुछ गलत धारणा बना ले।”
मैं और दिव्या दोनों ही बोले, “ठीक है मम्मी।”
इसके बाद हमारी चुदाई शुरू हो गई। दिव्या ने फुद्दी में लंड लिया और मम्मी ने फुद्दी और गांड दोनों में। दोपहर से शुरू हुई चुदाई शाम चार बजे तक चली। मजा ही आ गया।
दो दिनों की बाद मम्मी-पापा ने दो हफ्ते के लिए जाना था। अगले दिन मम्मी बोली, “धीरज बेटा दिल्ली से माधवी को ले आ। तेरे पापा को तो टाइम नहीं मिलेगा, और तेरे मौसा का तो तुझे पता ही है, उनके पास भी फुर्सत नहीं है।”
मैं तो इसी बात से खुश था एक और फुद्दी मिल रही है चोदने को – जवान लड़की की – कुंवारी, सील बंद, एक-दम टाइट फुद्दी।
अगले दिन मैं सुबह-सुबह कार से रोहिणी के लिए निकल गया। मैं मौसी कौशल्या के घर पहुंचा तो माधवी मुझे देखते ही खुश हो गई। दोपहर का खाना खा कर तीनों – माधवी, कौशल्या और मैं बैठे हुए थे तो मौसी बोली, “धीरज सुधा बता रही थी उनका बारह तेरह दिनों का प्रोग्राम है। बेटा दो हफ्ते की बाद तेरे मौसा जी ने भी साऊथ के ट्रिप पर जाना है – कोइ सात आठ दिनों का प्रोग्राम है उनका। उससे पहले माधवी को यहां छोड़ जाना। इतने बड़े घर में तो मुझे अकेले डर सा ही लगता है।”
मैंने कहा, “ठीक है मौसी।”
दोपहर बाद में और माधवी गुडगांव के लिए निकल गए। पूरे रास्ते माधवी चहकती रही और कम से कम बीस बार उसने अपने फुद्दी खुजलाई। बस यही रहा कि उसने मेरा लंड नहीं पकड़ा। पक्की बात है दिव्या ने उसे बता ही दिया होगा मेरी और अपनी चुदाई की बारे में।
गुड़गांव पहुंच कर दिव्या और माधवी नीचे कमरे में बंद हो गए। में ऊपर बैठा था। खाना खा कर मम्मी पापा तो अपने कमरे में चले गए। अगले दिन उन्हों सुबह सुबह निकलना था। पैकिंग वगैरह करनी थी।
दिव्या आयी और बोली, “धीरज रात को आओगे नीचे हमारे कमरे में? माधवी बहुत उतावली हो रही है, तुमसे अपनी फुद्दी की सील तुड़वाने के लिए।”
मैंने जवाब दिया, “दिव्या आज रहने देते हैं। मम्मी-पापा पैकिंग वगैरह करनी है, कुछ काम आ गया और मुझे कमरे में ना देख कर कहीं नीचे ही मुझे ढूढते-ढूंढते ही ना आ जाएं।”
दिव्या बोली, “हां धीरज ये तो है।” फिर दिव्या बोली, “धीरज पांच मिनट के लिए ही आ जाओ, माधवी को लंड देखना है तुम्हारा।”
मैंने कहा, “चलो ठीक है, तुम चलो में आता हूं।”
दिव्या और माधवी नीचे चली गयी और मैं भी पीछे पीछे उनके कमरे में चला गया। जाते ही मैंने अपने पायजामे का नाड़ा खोला और लंड बाहर निकाल लिया और माधवी से बोला, “लो माधवी देख ले ये जाएगा तेरी कुंवारी फुद्दी में। माधवी बड़े गौर से लंड देख रही थी।
दिव्या बोली, “अरे माधवी, पकड़ कर देख, मुंह में ले, अब फुद्दी में तो कल ही जाएगा।”
माधवी के जैसे ही लंड हाथ में लिया, मेरा लंड तो एक-दम से खड़ा ही हो गया।माधवी दिव्या से बोली, “दिव्या ये तो सच में ही बहुत बड़ा है।” ये बोल कर माधवी नीचे बैठ गयी और लंड मुंह में ले लिया।
मैंने कहा, “चलो माधवी, बस करो, बाकी का काम कल करेंगे।”
माधवी ने कहा, “धीरज, बस एक मिनट और चूसने दो।”
थोड़ा और चूसने के बाद माधवी ने मेरा का लंड मुंह में से निकाल दिया। मैंने पायजामा ऊपर किया और नाड़ा बांध कर ऊपर अपने कमरे में आ गया।
अगले दिन मम्मी पापा सुबह-सुबह ही निकल गए, उसके बाद तो दिव्या और माधवी भी ऊपर ही आ गयी – माधवी के सामान के साथ।
उस दिन जैसे ही काम वाली काम करके निकली, दिव्या मुझसे बोली, “चलें धीरज, माधवी से अब रहा नहीं जा रहा। रात को इतनी चुसाई करवाई फुद्दी की इसने, कि क्या बताऊं, पानी से भरी पड़ी थी इसकी फुद्दी रात से ही, फिर दिव्या अपने आप से बोली, “वैसे धीरज मेरे फुद्दी का भी वही हाल है।”
हम तीनों ही अपने के कमरे में आ गए। अम्मी पापा का बेड कुछ ज्यादा ही बड़ा था। हम तो तीन ही थे, उस बेड पर तो चार लोगों की भी मस्त चुदाई हो सकती थी।
मेरी तो अपने लंड की हालत खराब थी, एक कुंवारी टाइट फुद्दी चोदने के बाद, एक और कुंवारी फुद्दी चुदने के लिए उतावली हो रही थी। मेरा लंड तो कामवाली के जाते ही माधवी की कुंवारी फुद्दी के बारे में सोच-सोच कर ही खड़ा हो चुका था।
अगले दिन जैसे ही कामवाली काम करके निकली, दिव्या मुझसे बोली, “चलें धीरज, माधवी से अब रहा नहीं जा रहा। रात को इतनी चुसाई करवाई फुद्दी की इसने कि क्या बताऊं। चिकने पानी से भरी पड़ी थी इसकी फुद्दी रात से ही।” फिर दिव्या अपने आप से बोली, “वैसे धीरज मेरे फुद्दी का भी वहीं हाल है।”
हम तीनों ही अपने के कमरे में आ गए। मम्मी-पापा का बेड कुछ ज्यादा ही बड़ा था। हम तो तीन ही थे, उस बेड पर तो चार लोगों की भी मस्त चुदाई हो सकती थी।
मेरी तो अपने लंड की हालत खराब थी, एक कुंवारी टाइट फुद्दी चोदने के बाद, एक और कुंवारी फुद्दी चुदने के लिए उतावली हो रही थी। मेरा लंड तो कामवाली के जाते ही माधवी की कुंवारी फुद्दी के बारे में सोच सोच कर ही खड़ा हो चुका था।
फिर मुझे कुछ याद आ गया। मैं बोला, “और दिव्या मैं वो जैल क्रीम भी ले आया हूं। आज फिर तेरी गांड में लंड डालने की ट्राई करूंगा और माधवी की फुद्दी भी जैल लगा कर चोदूंगा। एक-दम फिसल कर जाएगा बिना किसी तकलीफ के। माधवी की पहली ही चुदाई मस्त मजे से होगी।”
ये बोल कर मैंने अपने कपड़े उतार दिए और दिव्या और माधवी भी नंगी हो गयी। बीस साल की जवान लड़कियों के जिस्म क्या मस्त थे। मुझे तो लगा कहीं मेरा लंड फुद्दी में जाने से पहले ही ना झड़ जाये।
मैं अपने कमरे से जैल क्रीम लेने चला गया। जैल लेकर वापस आया तो मेरे हाथ से जैल की ट्यूब लेकर दिव्या बोली, “अरे ये तो बढ़िया रहेगा। धीरज अभी पहले एक चुदाई तुम माधवी की कर लो। माधवी को भी तो पता लगे जब हाथी की सूंड जैसा लंड फुद्दी में जाता है तो कैसा मजा आता है। फिर मेरी गांड में डालने की ट्राई कर लेना।”
शुक्र है दिव्या ने गधे के लंड जैसा लंड नहीं बोला। दिव्या भी खूब बातें कर रही थी, “धीरज मजा तो तुम्हें जल्दी आता नहीं, तुम्हारा लंड तो एक-एक दो-दो घंटे की चुदाई की बाद भी मलाई नहीं छोड़ता। माधवी को चोदने के बाद फिर मेरी गांड या फुद्दी, जो भी हो, चोद कर फिर से माधवी को चोद लेना – लेकिन आज तुम्हारे लंड की गर्म-गर्म मलाई माधवी की फुद्दी में ही डलनी है। उसके बाद देखेंगे और हमने और क्या-क्या करना है।”
ये बोल कर दिव्या हंस दी। मैं भी हंसा और बोला, “ठीक है मेरी जान, अब यह भी बता दे कि माधवी को चोदते हुए वही बातें भी बोलनी हैं, जो मैंने तुम्हें चोदते हुए बोली थी?”
यहां मेरे मुंह से “तुम्हें और मम्मी को चोदते हुए” निकलता-निकलता रह गया – नहीं तो पोपट ही हो जाना था।
दिव्या हंसते हुए बोली, “अरे धीरज, चाहो तो उससे भी आगे बोल देना। अब तो मैं और माधवी भी एक-दूसरी की फुद्दी चोदते हुए। वही सब – और उससे भी ज्यादा बोलने लग गयी है। माधवी को भी इसमें मजा आता है। अब तो ये भी खूब बोलती है जब से तुमसे चुदाई की बाद मैंने इसके साथ बोलना शुरू किया है।”
ये बोल कर दिव्या और माधवी दोनों ही फिस्स-फिस्स करके हंस दी।
माधवी बोली, “दिव्या मुझे जोर का पेशाब लग रहा है मैं पेशाब करके आती हूं।”
दिव्या बोली, “माधवी, पेशाब करने के बाद फुद्दी मत धोना। धीरज को फुद्दी चूसने चाटने का बड़ा शौक है, उसको पेशाब का टेस्ट बड़ा मजेदार लगता है।”
माधवी मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बाथरूम में जाते हुए बोली, “क्यों दिव्या धीरज ने मेरा पेशाब नहीं टेस्ट करना क्या?”
ये सुन कर दिव्या हंस दी। जैसे ही माधवी बाथरूम में गयी दिव्या बोली, “धीरज मम्मी की अलमारी के ऊपर वाले खाने में एक वाईब्रेटर वाला मोटा लम्बा लंड पड़ा है, फुद्दी का मजा लेने के लिए, वो ले आओ।”
मैं फटाफट उठा और मम्मी की अलमारी से वाईब्रेटर ले आया और दिव्या को पकड़ा दिया।
दिव्या बोली, “धीरज मुझे लग रहा है कि मम्मी पिछले डेढ़ साल से, जब से पापा का लंड ढीला हुआ है, इसी वाईब्रेटर को ही अपनी फुद्दी में ले कर मजा लेती रही होगी। पिछली बार जब तुम हम दोनों की चुदाई करके कालेज गए ये, तब मम्मी ने मुझे भी इससे मजा दिया था। इसे फुद्दी में डाल कर वाईब्रेटर चालू करने से एक-दम ही फुद्दी पानी छोड़ देती है। तुम ये माधवी की फुद्दी में भी लगाना और मेरे फुद्दी में भी। मगर माधवी को ये मत बोलना की ये मम्मी का है। बोलना तुम लेकर आये हो, तुम्हारे किसी दोस्त का है।”
मैं क्या बोलता। मैंने बस इतना ही सोचा, “कमाल है।”
माधवी बाथरूम से मूत कर आयी और आते ही बोली, “बताओ धीरज कहां और कैसे लेटूं? कैसे चूसनी है मेरी फुद्दी? फुद्दी की धुलाई नहीं की है मैंने।”
माधवी तो लग रहा था चुदाई के मामले में कुछ ज्यादा ही बिंदास साबित होने वाली थी। मैं सोच रहा था इस कुंवारी माधवी को चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आने वाला था।
मैंने कहा, “बेड के साइड पर लेट जाओ, चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर – चूतड़ का छेद भी चाट लूंगा।” माधवी, जैसे मैंने कहा वैसे ही लेट गयी और टांगें उठा कर टांगें फैला दी। दिव्या की कुंवारी फुद्दी की तरह ही माधवी की फुद्दी बस एक लाइन सी ही थी।
फुद्दी दोनों फांकें आपस में जुड़ी हुई थी – बिल्कुल दिव्या की फुद्दी की तरह। मैं नीचे बैठ गया और दोनों हाथों के अंगूठों से फुद्दी खोल कर फुद्दी को चूसने-चाटने लगा। माधवी की फुद्दी नमकीन चिकने पानी से भरी पड़ी थी। लग रहा था खूब सारा पेशाब मिक्स था फुद्दी के पानीं में।
मैं पानी से भरी फुद्दी जुबान से चाटता था तो अजीब सी सपड़-सपड़ की आवाज आती थी। माधवी, “आह धीरज, उह धीरज, बड़ा ही मजा आ रहा है”, बोलती जा रही थी और उधर दिव्या सोफे पर बैठी अपनी फुद्दी में उंगली कर यही थी।
थोड़ी देर के बाद माधवी बोली, “बस धीरज हो गया। अब लंड चुसवाओ, और डालो लंड मेरी फुद्दी में, बिलकुल तैयार हो चुकी है अब चुदाई के लिए, अब रहा नहीं जा रहा यार।”
मैं उठ कर खड़ा हो गया और लंड माधवी के मुंह के आगे लहराने लगा। माधवी ने लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। पांच मिनट की लंड चुसाई के बाद माधवी ने लंड मुंह से निकाला और बोली, “चलो धीरज, अब बताओ बिस्तर पर सीधा लेटूं? दिव्या कह रही थी बिस्तर पर सीधा लेट कर जब तुम ऊपर से चुदाई करोगे तो चुदाई मस्त होती है।
मतलब दिव्या ने सब कुछ ही बता दिया था माधवी को। मेरे जवाब का इंतजार किये बिना ही माधवी बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर टांगें चौड़ी कर ली। मैंने उंगली से जैल माधवी की फुद्दी में लगाई और लंड फुद्दी के ऊपर रख कर हल्का सा दबाया। माधवी की फुद्दी भी बिल्कुल दिव्या की फुद्दी की तरह ही टाइट थी।
जैसे ही मैंने लंड माधवी की फुद्दी में पूरा डाला, तो माधवी के मुंह से हल्की सी दर्द भरी चीख निकली, “आह धीरज बड़ा मोटा लंड है भाई तेरा तो, बड़ी जलन हुई है फुद्दी में।”
लंड डालते हुए मुझे भी महसूस हुआ था कि माधवी के फुद्दी का छेद भी दिव्या की फुद्दी के छेद की तरह ही टाइट है। एक बार तो मेरा मन तो किया कि माधवी से पूछे, “माधवी कोई प्रॉब्लम तो नहीं हो रही?”
मगर मैं माधवी से ये पूछते-पूछते रुक गया।
मगर मुझे दिव्या की बातें याद आ गयी, जब उसने यही सवाल दिव्या से किया था, और दिव्या ऊंचे आवाज में बोली थी, “भोसड़ी के धीरज, साले मादरचोद तू अभी भी यही सोच रहा है कि तू अपनी छोटी बहन को चोदने जा रहा है। अबे चूतिये, यहां मैं तेरा पूरा लंड अपनी फुद्दी में अंदर तक लेने के लिए मैं मरी जा रही हूं और तुझे मेरी प्रॉब्लम की पड़ी है? ऐसे चोद धीरज जैसे पैसे देकर एक रंडी को चोदने के लिए लाया है। चोद-चोद कर फाड़ मेरी फुद्दी, सुजा इसको, झाग निकाल फुद्दी में से चोद-चोद कर फुद्दी में से धीरज ज्यादा सोच-सोच मेरा दिमाग खराब मत कर, चोद मुझे अब।”
बस इसके बाद तो मैंने आव देखा ना ताव और लंड एक बार पूरा का पूरा माधवी के फुद्दी से बाहर निकाल कर एक झटके साथ लंड पूरा का पूरा माधवी की फुद्दी में बिठा दिया। माधवी जोर से चिल्लायी, “मर गयी दिव्या, ये तो बड़ा दर्द कर रहा है।”
दिव्या उठ कर आ गई और माधवी के गालों पर हाथ फेरती हुई बोली, “माधवी, बस एक-दो मिनट की ही बात है, उसके बाद मजा ही मजा है।”
जल्दी ही माधवी की टांगें मेरे पीछे थी और माधवी ने मझे अपनी टांगों में जकड़ा हुआ था और जोर-जोर से चूतड़ ऊपर-नीचे कर रही था। जैसे ही माधवी ने मस्ती में चूतड़ घुमाने शुरू किये दिव्या वापस सोफे पर चली गई और मम्मी का डिलडो – रबड़ का लंड अपनी फुद्दी में डाल लिया।
माधवी की फुद्दी पूरी गरम हो चुकी थी। माधवी जोर-जोर से चूतड़ घुमाते हुए वो सब कुछ बोल रही थी जो मम्मी और दिव्या ने चुदाई करवाते हुए बोला था। कुतिया की तरह चोद मुझे, रंडी हूं मैं तेरी, फाड़ दे मेरी फुद्दी चोद-चोद कर, रगड़ मेरे फुद्दी धीरज, आह मुंह में भी लूंगी तेरा लंड, गांड में भी लूंगी, तेरे लंड का पानी भी पियूंगी।”
माधवी को इस तरह बोलते और चूतड़ घूमते देख दिव्या समझ गयी, माधवी को असली लंड की चुदाई का पहला मजा आने वाला था। वो उठ कर वापस बैड पर आ गयी और माधवी के गालों पर हाथ फेरने लगी।
माधवी ने जरा सी आँखें खोली और दिव्या से बोले, “दिव्या ये लंड तो बड़ा मजा देता है आज तो पूरी रात चुदवाऊंगी धीरज से। चूतड़ों में भी डलवाउंगी, मुंह में भी लूंगी।”
यही बातें दिव्या ने भी बोली थी जब मम्मी की सामने दिव्या ने मुझसे चुदाई करवाई थी।
तभी माधवी जोर के चूतड़ घुमाए और तेज़ आवाज में बोली, “आ गया, निकल गया। धीरज मजा आ गया मुझे। ओह माय गॉड धीरज क्या मजा आया है – अभी भी आ रहा है। बड़ा मजा आता ही लंड फुद्दी में लेने का आह, उफ्फ दिव्या मजा आ गया गया।”
इसके बाद माधवी चुप तो कर गयी, मगर मुझे अभी भी अपनी टांगों में जकड़ा ही हुआ था। दिव्या ने भी अपनी पहली चुदाई में यहीं किया था।
मैने दिव्या से कहा, “दिव्या इसका एक बार पानी और छुड़ा दूं, फिर तेरी गांड में डालूंगा। ये माधवी भी अपनी पहली चुदाई में, जब तक तीन-चार बार मजा नहीं ले लेगी, इसकी भी तसल्ली नहीं होने वाली।”
दिव्या हंसते हुए बोली, “तो धीरज मेरी भी कहां हुई थी। तेरे से पहली बार चुदाई में मैंने भी तो पांच बार मजा लिया था। और फिर छठी बार मजा तब था जब तूने मेरी चूत चोदी थी और तब तूने मलाई डाली थी मेरी फुद्दी में। और मैं तो वो मजा तो मैं ज़िंदगी भर नहीं भूल सकती जब तेरे लंड कप भर के गर्म गर्म शहद मेरी फुद्दी में गया था। अब ये माधवी कौन सी अलग है, इसने भी तो मेरी तरह कहां फुद्दी की सील तुड़वाई है – चोद इसे, एक मजा और देदे फिर आजा मेरी पास, बस ये याद रखना, अपने लंड की गर्म-गर्म मलाई इसकी फुद्दी में ही डालनी है आज तूने। पहली चुदाई है – मस्त होनी चाहिए। चल मेरी भाई, मस्त हो के चोद अपनी दोनों बहनों को। एक बार मेरे गांड चोद ले, फिर सारी रात के लिए माधवी तेरे पास रहेगी इसी बिस्तर पर और मैं मजे लूंगी तुम दोनों के चुदाई देख देख कर।”
और दिव्या हंसते-हंसते वापस सोफे पर चली गई और मम्मी का डिलडो अपनी फुद्दी में डाल लिया।
मैंने कहा, “दिव्या मेरी बहन देखती रह – इस माधवी को भी आज छह बार मजा आएगा और तुझे भी पूरा मजा दूंगा।”
दिव्या के जाते ही मैंने ने माधवी को फिर से चोदना शुरू कर दिया। पहली चुदाई के मजे की मस्ती में दूसरी बार की चुदाई माधवी दस मिनट भी नहीं झेल पायी और उसे फिर से मजा आ गया।
दिव्या की चुदाई की तरह जब माधवी को भी चार-पांच बार मजा आ गया, तब मैंने लंड माधवी की फुद्दी में से निकाला।
माधवी की चुदाई हो चुकी थी। मस्त मजा लिया था माधवी ने भी – दिव्या की तरह ही।
जैसे ही माधवी जरा सी ढीली हुई, मैंने अपना लंड माधवी की फुद्दी में से निकाल लिया और सोफे पर बैठी दिव्या के पास चला गया। मैंने दिव्या से कहा, “चल दिव्या यहीं उल्टी हो जा सोफे पर, तेरी गांड चुदवाने की इच्छा आज पूरी करूं।”
दिव्या की गांड चुदाई-
दिव्या उल्टी हो कर चूतड़ ऊपर करके लेट गयी। मैं पापा की शराब वाली अलमारी के पास गया और उस दिन की ब्लैंन्डर प्राइड की खुली बोतल ले आया। आज मुझे इसकी जरूरत पड़ने वाली थी। मैंने अभी चार बार माधवी को मजा देना था और एक बार दिव्या की गांड और एक बार फुद्दी रगड़नी थी। बोतल में से मैंने नीट ही तीन घूंट चढ़ा लिए।
दिव्या के मुलायम चूतड़ देख कर मुझे तो मजा ही आ गया। मैंने दिव्या की चूतड़ खूब चूसे चाटे काटे। चूसने चाटने की मस्ती की बाद, मैंने जैल दिव्या की गांड के छेद के अंदर और अपने पूरी लंड पर लगा दी।
दो उंगलियों पर जैल लगा कर मैंने दोनों उंगलियां दिव्या की गांड में डाल दी। उस दिन जब दिव्या को चोदा था, उस दिन थूक लगी उंगलियां दिव्या की गांड में नहीं जा पाई थी। मगर जैल की चिकनाई ने अपना काम कर दिया और उंगलियां गांड में पूरी चली गयी।
इसके बाद तो बस लंड गांड में डालना था। मैंने लंड दिव्या की गांड की छेद पर रखा और अंदर धकेला। लंड थोड़ा गया तो सही, पर छेद टाइट ही था। मैं थोड़ा रुक गया और लंड को अपनी जगह बनाने दी। फिर मैंने लंड एक बार बाहर निकाला और जैल थोड़ी और लगा दी। इसके बाद फिर से लंड दिव्या की गांड की छेद पर रखा और अंदर धकेला। इस बार लंड आधा अंदर चला गया।
मैं एक बार और रुका और लंड को फिर से अपनी जगह बनाने दी। मैंने लंड बाहर निकाला। फिर से जैल क्रीम दिव्या की गांड पर लगाई और धीरे-धीरे पूरा लंड दिव्या की गांड में अंदर डाल दिया। लंड पूरा दिव्या की गांड में बैठ गया, टट्टों तक।
मैंने दिव्या से कहा, “ले दिव्या, लंड तो पूरा जा चुका गांड में।”
दिव्या ने सर पीछे करके कहा, “धीरज, सच में पूरा चला गया है?”
मैंने कहा, “दिव्या तो खुद हाथ लगा की देख ले टट्टों तक अंदर है लंड, नहीं तो माधवी को बुला कर पूछ ले।”
दिव्या ने हाथ पीछे करके लंड टटोला। दिव्या के हाथ में लंड नहीं टट्टे आये तो दिव्या बोली, “कमाल है धीरज, तेरा इतना लम्बा लंड गांड में पूरा चला गया? चल अब कर दे चुदाई गांड की, मैं अपनी फुद्दी का दाना रगड़ कर मजा लेती हूं।”
मैने दिव्या की कमर पकड़ी और दिव्या की गांड चोदनी शुरू कर दी। दिव्या की गांड चुदाई देखने माधवी भी उठ बिस्तर से कर आ गई और सोफे के पास ही खड़ी हो गयी।
माधवी बड़े गौर से मेरा का लंड दिव्या की गांड के अंदर-बाहर होते हुए देख रही थी। तभी माधवी ने अपनी एक उंगली और अंगूठे में लंड को हल्के से पकड़ लिया। जैल क्रीम के कारण लंड माधवी की उँगलियों में भी फिसल रहा था।
तभी माधवी, ने सिसकारियां लेनी शुरू कर दी, “आह धीरज ऐसा लग रहा है, तुम्हारा लंड मेरी गांड के अंदर बाहर हो रहा है, आह दिव्या, बड़ा मजा आ रहा है।” माधवी ने मेरा लंड छोड़ा और दिव्या के चूतड़ों के बीच हाथ फेरने लगी। माधवी चूतड़ों में हाथ भी फेरती जा रही थी साथ में आह आह भी करती जा रही थी।
तभी दिव्या ने पीछे की तरफ सर किया और माधवी के तरफ देखती हुई बोली, “क्या हुआ माधवी, फुद्दी फिर से गरम हो गयी क्या?”
माधवी बोली, “दिव्या मेरा तो गड चुदवाने का मन होने लगा है। मुझे भी गांड चुदवानी है।”
दिव्या बोली, “माधवी तो इसमें इतना क्या सोचने वाली बात है? तू भी ले ले धीरज का लंड अपनी गांड। हम दोनों ही चुदवायेंगी गांड। आजा तू भी मेरे पास ही लेट जा। तू भी लेले धीरज का लंड अपनी गांड में।”
माधवी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “धीरज लेट जाऊं? चोद दोगे अभी?”
मैंने कहा, “लेट जा मेरी जान माधवी, तू भी लेट जा चूतड़ उठा कर। दो दो कुत्तियां और एक कुत्ता मजा आ जाएगा गांड रगड़ाई का मुझे भी।”
माधवी ने भी देर नहीं की और दिव्या के साथ ही वो भी लेट गयी। दो-दो गोल-गोल मुलायम चूतड़, मेरा लंड एक-दम से और भी ज्यादा सख्त हो गया। मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या निकलता हूं तेरी गांड में से लंड, तू भी ऐसे ही लेटी रहना, आज दोनों के गांड चोदूंगा।”
दिव्या बोली, “ठीक है धीरज डाल अपना लंड इस माधवी की टाइट गांड में, दे इसको भी मजा।”
दिव्या की साथ-साथ माधवी की भी गांड चुदाई-
मैंने लंड दिव्या की गांड में से निकाला और माधवी के पीछे चला गया। जो कुछ मैंने दिव्या की गांड चोदने से पहले दिव्या के साथ किया था। क्रीम लगा कर पहले एक उंगली डाली थी गांड में, फिर दो डाली थी, फिर लंड का टोपा बिठाया था फिर थोड़ा रुका था – मतलब जो भी मैंने दिव्या की गांड के साथ किया था, वही सब उसने माधवी की गांड के साथ किया और जल्दी ही उसका लंड माधवी की गांड में भी टट्टों तक बैठ गया।
मैंने माधवी को कहा, “ले मेरी कुतिया, ले लिया तूने भी मेरा लंड अपनी गांड में पूरा का पूरा। अब तैयार हो जाओ दोनों कुत्तियां चुदने के लिए।” मैं ये सब इस लिए बोल रहा था क्योंकि मुझे दिव्या ने कहा था कि चुदाई के दौरान ये सब बोलने, सुनने में उन्हें बड़ा मजा आता है।
माधवी ने सर पीछे किया और बोली, “चोद भी अब साले। आज तो हम आयी ही हैं तेरा लंड आगे, पीछे, मुंह में लेने के लिये।”
मम्मी और दिव्या तो बोलती ही थी, माधवी भी खूब बोल रहे थी। मैंने बारी-बारी से दिव्या और माधवी की मस्त गांड चुदाई की। दोनों ने अपनी फुद्दी में उंगली करके फुद्दी का मजा लिया। जब दोनों को मजा आ गया तो मैंने लंड गांड में से निकाला और बोला, “ले दिव्या, तुम्हारी दोनों की गांड चुदाई की इच्छा भी पूरी हो गयी। अब माधवी की फुद्दी में लंड का गर्म चिकना पानी डालने के बारी है।”
मैंने माधवी से कहा, चल माधवी एक बार और लेट जा बिस्तर पर, अब दूंगा तुझे जन्नत का मजा। अब डालूंगा तेरी फुद्दी में अपने लंड की मलाई।”
माधवी और दिव्या दोनों सीधी हो गयी। दिव्या माधवी से बोली, “जा माधवी, अब ले असली चुदाई का मजा, जिस मजे के लिए लड़कियां मरती हैं।”
माधवी उठी और बिस्तर पर लेट गयी और खुद ही अपने चूतड़ों के नीचे तकिया लगा लिया। लड़कियां अब चुदाई करवाने में उस्ताद हो चुकी थी – अब उनको पता था कैसे असली चुदाई का मजा आता है।
मैं गया और माधवी की फुद्दी में लंड डाल कर माधवी को चोदने लगा। माधवी को एक मजा आ गया और जैसे ही दूसरी बार माधवी की फुद्दी ने पानी छोड़ा, मेरे लंड का भी पानी निकल गया। जैसे ही मेरे लंड में से पानी निकल कर माधवी की फुद्दी में गया, माधवी जोर से बोली, “दिव्या निकला धीरज का भी – जा रहा है मेरी फुद्दी में। आह धीरज मजा ही आ गया।”
बस अगले दो हफ्ते तो दिव्या और माधवी की मस्त चुदाई हुई। दोनों खूब मजे लेती थी। मेरे लंड में से एक दिन में एक बार ही पानी निकलता था। बारी-बारी से मैं दिव्या और माधवी की फुद्दीयों मैं पानी निकालता था।
दिव्या और माधवी ने चुदाई में कोइ कसर नहीं छोड़ी। आगे, पीछे, मुंह में, सब जगह लंड लिया और सब जगह लंड का पानी भी छुड़ाया। दो-दो जवान फुद्दीयां चोदते-चोदते मेरी हालत तो ये थी कि मेरा लंड खड़ा सा ही रहता था। अगर मुझे रोज़ फुद्दी नहीं मिलती थी चोदने के लिए, तो मुझे नींद ही नहीं आती थी। लेकिन दिव्या और माधवी ने खूब साथ दिया मेरा। खूब चुदाई करवाई।
रात को चुदाई के बाद हम नंगें ही सो जाते थे। सुबह अगर मेरी नींद जल्दी खुल जाती थी तो दो-दो नंगी लड़कियों बगल में लेटे देख कर मेरा लंड एक-दम खड़ा हो जाता था। उस वक़्त चुदाई तो नहीं होती थी, मगर मैं जब तक दोनों कि फुद्दीयां चूस चाट नहीं लेता था, मुझे चैन नहीं आता था।
और ये दोनों मेरी बहने ही कौन से कम थी। दोनों को मेरे मुंह में अगल बगल खड़े हो कर पेशाब करने में मजा आता था। दोनों टांगें चौड़ी करके मेरे मुंह में पेशाब करती और एक-दूसरे के तरफ देखती हुई हंसती। सब से ज्यादा मजा उन्हें मेरे टट्टे चूसने में आता था। मेरे टट्टे पूरे मुंह में लेकर दस-दस मिनट तक चूसती रहती थी।
ये टट्टे चूसने वाला काम – ऐसा तो अब तक मम्मी ने भी नहीं किया था। तेरह दिन ऐसे ही मस्ती में गुजर गए। मम्मी पापा भी वापस आ गए। अब मुझे माधवी को रोहिणी छोड़ने जाना था। मौसा जी का भी फोन आया था कि उनका अकाउंटेंट छुट्टियों पर था और उनका साउथ का ट्रिप लगना था। उन्हें दिनों कुछ मॉल जाना था और उस मॉल की नकद पेमेंट आनी थी। मौसा जी चाहते थे कि मैं अकाउंटेंट के आने तक वहीं ही रूकूं और बवाना की फैक्ट्री में आने वाली पेमेंट लूं।
मुझे इसमें कोइ एतराज नहीं था। मेरी तो छुट्टियां ही चल रही थी। मैं माधवी को ले कर रोहिणी रवाना हो गया। पूरा रास्ता माधवी चहकती रही। माधवी कभी अपनी फुद्दी को हाथ लगाती और कभी मेरे लंड को। कम से कम दस बार तो माधवी ने बोला, “धीरज यार चुदाई का मजा आ गया।”
रोहिणी पहुंचे तो मौसा जी फैक्ट्री जा चुके थे। मौसी जी घर पर ही थी। माधवी तो जैसे चुदाई की मस्ती में खुशी से पागल ही हुई पड़ी थी। माधवी का चहकना बंद ही नहीं हो रहा था।
मौसी जी से रहा नहीं गया। मौसी जी बोली, “क्या बात है माधवी बड़ी खुश लग रही हो?”
माधवी वैसे ही चहकते-चहकते बोली, “हां मम्मी, इस बार खूब मजे किये मैंने और दिव्या ने।”
ये कहते-कहते माधवी ने अपनी फुद्दी पर हाथ फेर लिया। ये बात मुझसे छुपी नही रही – मौसी जी से भी नहीं छुपी रही होगी।
मौसी जी ने एक बार मेरी तरफ देखा और बोली, “अच्छा? खूब मजे किये तुमने और दिव्या ने? और धीरज भी तो था वहां।”
माधवी ने अजीब से नज़रों से मेरी तरफ देखा और बोली, “हां मम्मी धीरज भी था।”
और ये बोल कर माधवी हंस भी दी। तभी मुझे मम्मी की वो बात याद आ गयी जब उन्होंने कहा था कि लड़की अपनी पहली पहली चुदाई के बाद ऐसे चहकती है – ऐसे खुश होती है कि औरतें तो देखते ही जान जाती हैं कि लड़की मस्त चुदी है।
पक्की बात है जिस तरीके से माधवी उछल कूद कर रही थी खुश हो रही थी – चहक रही थी – मौसी भी समझ गई होगी कि माधवी की चुदाई हुई थी। बस इसके बाद तो मौसी सीरियस ही हो गयी।
मैंने मौसी से पूछा, “मौसी, मौसा कुछ बोल कर गए हैं?”
मौसी ने बड़े ही अनमने ढंग से कहा, “हां बोल रहे थे कि धीरज आये तो उसे फैक्ट्री भेज देना, माल की डिलीवरी देगा और पेमेंट ले लेगा।”
मैंने कहा, “ठीक है तो मौसी मैं चलता हूं।”
मौसी ने बस इतना ही कहा, “ठीक है तो मौसी चलता हूं।” साफ़ पता चल रहा था की मौसी का दिमाग कहीं और था।
इसके बाद मैं फैक्ट्री के लिए निकल गया। मौसा जी ने मुझे पेमेंट का सारा काम समझा दिया। काम कुछ ख़ास नहीं था। सब कुछ पहले से तय था। सुपरवाईज़र सब जानता था। बस मुझे डीलरों से नकदी लेनी थी और माल देना था।
शाम को हम घर के लिए रवाना हो गए। अगले दिन सुबह मौसा जी की फ्लाइट थी। घर पहुँच कर मौसा जी ने जाने की तैयारी की और हम जल्दी खाना खा कर सो गए।
अगली सुबह जब मैं उठा तो मौसा जी जा चुके थे।
दस बजे मैं तैयार हो कर फैक्ट्री के लिए रवाना हो गया। उस दिन दो पेमेंट होनी थी – कोइ दस लाख की। शाम को मैं घर लौटा और रुपयों से भरा बैग मौसी को दे दिया। मौसी अभी भी चुप-चुप ही थी। मुझे लग रहा था की मौसी को माधवी की चुदाई की हल्की से भनक तो हो गयी थी। माधवी जिस तरीके से उछल-कूद कर रही थी वो और दिनों से कुछ तो अलग था।
इसके बाद रात तक कोइ ख़ास बात नहीं हुई। मुझे लग रहा था मौसी मुझसे कुछ कहना चाहती थी, मगर माधवी के सामने कुछ कह नहीं पा रही थी।
