माँ और उसका बेटा 18

माँ बेटा
नमिता: वह कैसे?
राज: माँ आपको तीन मर्दों का मज़ा मिलेगा। पर हाँ एक बात है कि आपको यह बात अंकल को शादी के पहले बतानी होगी कि शादी के पहले भी मैं और मनीष आपको चोदते थे और शादी के बाद भी चोदेंगे।

नमिता: ओह ये मुश्किल बात होगी। मुझे नहीं पता कि वो मानेंगे या नहीं। और ये बताओ कि तुम और मनीष क्या शादी नहीं करोगे समय आने पर? क्या मुझे ज़िंदगी भर रगड़ते रहोगे?
राज: वो बाद में समय आने पर देखेंगे। अब वह गाउन की रस्सी खोल कर उसके सामने से नंगे बदन को देख कर मस्ती में आकर अपने से चिपका लिया और होंठ चूसते हुए उसकी छातियाँ दबाने लगा। नमिता भी उसके लोअर के अंदर हाथ डालकर उसके लौड़े और बॉल्ज़ सहलाने लगी।

राज: माँ, मैं तो ये सोचकर ही गरम हो रहा हूँ कि कभी मैं और मनीष और कभी हम तीनों आपको एक साथ चोदेंगे ।
नमिता: आऽऽऽहहह बहुत कमीना है तू, अपनी माँ को दूसरों से चुदवाना चाहता है।
राज: माँ, मैं जानता हूँ कि आपको उसमें बहुत मज़ा आयेगा। ये कहते हुए उसने उसकी बुर में दो ऊँगली डाली और उसे बिलकुल गीली पाकर बोला: माँ देखो आपकी बुर भी मेरी बातों से मस्त हो कर पनिया गई है।

नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी और वह बोली: आऽऽऽह सच में तूने मुझे गरम कर दिया है।
राज: तो माँ , अंकल से बात करना इस बारे में ।
नमिता: हाऽऽऽऽऽऽय्यय अच्छाआऽऽऽऽऽ देखूँगीइइइइइइइइ। उइओओओओओओ।
राज की उँगलियाँ अब बुर के अंदर बाहर हो रही थी।
नमिता: आऽऽहहह अब रुका नहीं जा रहा, चल फाड़ दे मेरी बुर अभी के अभी ।
राज: माँ, पहले बुर फाड़ूँगा और उसके बाद गाँड़ भी फाड़ूँगा।
नमिता: हाय्य्य्य्य जो करना है कर ले, मगर अब और ना तरसा।

अब राज ने अपनी भरे बदन की माँ को अपनी बाहों में किसी गुड़िया की तरह उठाया और बेडरूम की ओर चल दिया। उसके होंठ उसकी गर्दन और उसकी चूचियों पर घूम रहे थे ।
राज ने नमिता को बिस्तर पर लिटाया और उलटा करके पेट के बल लिटा दिया। अब वह उसकी गर्दन का पिछला हिस्सा चूमते हुए नीचे पीठ को चूमने लगा। फिर नीचे आकर उसने बड़े बड़े चूतरों को चूमा और दाँत से काटा भी। नीचे जाकर उसकी जाँघों और पिंडलियों को चूमते हुए उसके पैर के पंजे को चूमने और चाटने लगा। नमिता की आऽऽहहह निकलने लगी।
नमिता: आऽऽह क्या कर रहा है? ह्म्म्म्म्म्म
राज फिर उसके पावों को चाटते हुए ऊपर आया और उसकी चूतरोंकी दरार को खोल कर उसने अपना मुँह डालकर वहाँ भी चाटने लगा।

नमिता: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ उइइओइइइइइ
राज अब उसकी गाँड़ के छेद पर जीभ फिराने लगा।
नमिता: उइइइइओओओ
राज: माँ, थोड़ा चूतर ऊपर उठाओ ना।
नमिता ने अपना पिछवाड़ा उठाकर राज को मस्त कर गयी।
वह थोड़ी देर तक तो उसके पिछवाड़े की सुंदरता को निहारता रहा और सोचा की माँ भी क्या माल है? क्या गोरे गोल मांसल चूतर हैं। भूरि सिकुड़ी सी गाँड़ भी क्या मक्खन जैसी चिकनी है और नीचे बुर का नज़ारा तो ऐसा है की आदमी का दिल ही नहीं भरे। अब राज उसकी बुर भी चाटने लगा।

नमिता: हाऽऽऽय्य्य्य्य बेटाआऽऽऽऽ आऽऽऽऽज माऽऽऽर डाऽऽऽऽऽऽलेगा क्याआऽऽऽऽ।
राज फिर अपना लौड़ा उसकी बुर में रखा और उसने कहा: माँ, डालूँ?
नमिता: आऽऽहहह क्या पंडित बुलाऊँ और मुहूर्त निकलवाऊँ, अरे नालायक डाऽऽऽऽऽऽल नाआऽऽऽऽऽऽ।
राज: हा हा , पंडित क्या करेगा? पर आप बोलो की साले मादरचोद डाल, तभी डालूँगा।
नमिता: आऽऽऽहहह क्यों तंग कर रहा है? डाल दे ना। वह अपनी कमर को पीछे की ओर हिलाकर बोली।

राज: पहले बोलो तब डालूँगा। ये कहते हुए उसने उसकी बुर में अपना सुपाड़ा रगड़ा ।
नमिता: आऽऽऽऽहहह डाऽऽऽऽल्लल्ल कमीने साले मादरचोद ।
राज हँसते हुए बोला: क्या डालूँ माँ , बोल ना।
नमिता: मादरचोद, अपना मोटा लौड़ा और क्या डालेगा। हाय्य्य्य्य्य अब ड़ाऽऽऽऽल दे ना मेरा राजा बेटा।
राज ने अपना लौड़ा उसकी बुर में ठेला और बोला: लो मेरा लौड़ा अपनी बुर में । और उसने ज़ोर से धक्का मार कर अपना लौड़ा पूरा पेल दिया, जड़ तक। उसके बड़े बॉल्ज़ उसकी गाँड़ के छेद से रगड़ने लगे।

अब उसने चुदायी चालू की और धक्कों की स्पीड भी बढ़ाता चला गया। अब वह नमिता की लटकती हुईं चूचियाँ भी दबाने लगा और उसके अंगूर जैसे बड़े निपल्ज़ को भी मसलने लगा।
नमिता : आऽऽऽऽहहहह बहुत अच्छाआऽऽऽऽऽऽ लग रहाआऽऽऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ। और जोओओओओओओओओओर्रर्र से चोओओओओओओओओदो आऽऽऽहहह फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओओ । उइइइइइओइइइइइइइ मैं तो गयी । कहते हुए वह ज़ोर ज़ोर से पीछे को धक्का लगाने लगी और उसके लौड़े को अपनी बुर में ज़ोर से भींच लिया।

राज भी स्वर्गिक सूख का आनंद लेते हुए बोला: ले और ले । ह्म्म्म्म्म्म ले। आऽऽहहहह और ले साऽऽऽऽली क़ुतियाआऽऽऽऽऽऽऽऽ।
नमिता उसके मुँह से ये शब्द सुनकर थोड़ी देर के लिए हैरान हुई पर फिर अपनी वासना की आँधी में बहते हुए झड़ने लगी। राज को अहसास हो गया की उसकी बुर ने पानी छोड़ना चालू कर दिया है।

पर राज का तो कुछ और ही प्लान था। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और नमिता बिस्तर पर गिर सी गयी ।वह अब पेट के ही बल थी अभी भी।
नमिता: आऽऽहहह बेटा पानी पिला दे ना।
राज फ्रिज से पानी लाया और बोला: माँ मुझे माफ़ कर दो , मैंने आपको गालियाँ दे दीं।
नमिता पानी पीकर उसके अभी भी पूरे खड़े और रस से भीगे लौड़े को पकड़कर बोली : अरे कोई बात नहीं, मैं जानती हूँ तूने उत्तेजना वश ये कहा है , कोई बात नहीं।
राज: माँ अब गाँड़ मार लूँ, देखो मेरा तो हुआ ही नहीं।

नमिता मुस्कुरा के बोली: ये क्यों नहीं कहता कि क्योंकि गाँड़ मारनी है इसलिए रस बचा कर रखा है।
राज हँसकर : हा हा सच बात तो यही है।
नमिता उठते हुए बोली: तेरा इतना मोटा मैं ऐसे ही गाँड़ मैंने नहीं ले पाऊँगी। इसके लिए थोड़ी सी तय्यारी करनी होगी।
फिर उसने आलमारी खोली और वहाँ से गाँड़ में डालने वाला एक बट प्लग़ निकाली और उसके साथ ही एक क्रीम भी निकाली। राज हैरानी से ये सब देख रहा था।

नमिता ने कहा: ले ये क्रीम मेरी गाँड़ और इस प्लग़ ( जो एक छोटे से लौड़े के आकार का था ) में भी लगा दे। यह कहकर वह पेट के बल लेट गयी और उसने पेट के नीचे दो तकिए रखे और अपने चूतर ऊपर को करके अपनी गाँड़ राज को दिखायी। अब राज ने उस प्लग़ और नमिता की गाँड़ में अच्छे से क्रीम लगा दी। फिर नमिता के निर्देश के अनुसार उसने प्लग़ को नमिता की गाँड़ में डाल दिया और उसकी मशीन को चालू कर दिया। ह्म्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ के साथ वह नमिता की गाँड़ में हरकत करते हुए हिलने लगा। अब राज ने उस प्लग़ को गोल गोल घुमाते हुए अंदर बाहर करना चालू किया।

नमिता को सिसकियाँ निकल पड़ी और वह चिल्लायी: आऽऽह्ह्ह्ह्ह बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽ। आऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य्य ।
अब नमिता बोली: देख छेद खुला क्या? उसे बाहर निकाल ले।
राज ने उसे बाहर निकाला और देखा कि सच गाँड़ का छेद बड़ा सा और खुला हुआ दिख रहा था।

वह बोला: हाँ माँ ये तो मस्त खुल गया। फिर उसने उसने तीन उँगलियाँ डाली तो नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। वह बोली: थोड़ी देर और प्लग़ को हिला गाँड़ में फिर तेरे लौड़े के लायक हो जाएगा।

राज ने फिर से क्रीम लगाके प्लग़ को अंदर करके उसको चालू किया और नमिता की फिर से चीख़ें निकलने लगी। अब राज उसको गोल घूमाकर छेद को बड़ा करने लगा।
थोड़ी देर बाद उसने उसे निकाला और सच में अब तो छेद बहुत खुला सा दिख रहा था। आ। उसने अपने लौड़े और उसकी गाँड़ पर क्रीम लगाके उसकी गाँड़ में अपना सुपाड़ा डाल के धक्का दिया और खच से उसका सुपाड़ा अंदर चला गया।
नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी।
अब राज ने उसकी कमर को पकड़कर एक ज़बरदस्त धक्का दिया और नमिता की चीख़ निकल गयी: हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय माआऽऽऽऽऽऽऽर्रर्र डाआऽऽऽऽऽऽऽऽला रेएएएएएएएएए।
राज: माँ बस पूरा चला गया। अब नहीं दुखेगा।
नमिता: आऽऽहहह फट गयी मेरीइइइइइइइ। आह्ह्ह्ह्ह अब चूचि दबा बेटा और बुर की clit भी मसल।

अब राज उसकी चूचि दबाकर उसकी बुर के clit को भी सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गयी और बोली: आऽऽहहहह अब मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽय्यय्या ना। हाय्यय्यूय चल अब चोद मेरा राजा बेटा अपनी माँ की गाँड़ को। हाय्य्य्य्य्य्य्य्य।
अब नमिता की चुदायी सही माने में चालू हुई। राज के धक्कों से पूरा कमरा ठप ठप और पलंग भी चूँ चूँ कर रहा था। उसकी मर्दाना जाँघें नमिता के चूतरों से टकराकर मस्ती वाली ठप ठप की आवाज़ निकाल रही थी।

नमिता भी हाऽऽऽयय्यय बेएएएएएएएएएटा कहते हुए अपने चूतरों को पीछे की ओर दबाकर चुदायी का पूरा मज़ा ले रही थी।

राज के जवान जिस्म की पूरी ताक़त का अन्दाज़ अब नमिता को हो रहा था और हर धक्के के साथ वह सुख के गहरे सागर में गोते लगा रही थी। राज के हाथ उसकी clit और चूचि पर थे और वह अब फिर से स्खलन के क़रीब पहुँच चुकी थी। वह चिल्लायी: आऽऽऽऽहहह बेटा फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दे मेरीइइइइइइइइ गाँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ ।

राज भी आह्ह्ह्भ्ह्ह्ह्ह्ह क्याआऽऽऽऽऽऽऽ मस्त चिकनी गाँड़ है माँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ। हाऽऽऽयय्यय । कहते हुए झड़ने लगा। और नमिता की भी बुर का बाँध टूट गया और वह पानी छोड़ने लगी ।राज का पूरा हाथ उसके पानी से गीला हो गया।

अब नमिता पेट के बल नीचे हो गयी और राज उसकी गाँड़ में अपना वीर्य छोड़ता ही चला गया।

नमिता अपने बेटे के गरम गरम वीर्य का अहसास अपनी गाँड़ के अंदर पा कर मस्त हो गयी।
वह बोली: आऽऽह बेटा, आज तक अपनी गाँड़ मरवाने में मुझे कभी इतना मज़ा नहीं आया जो कि आज तूने दिया है। तू तो पक्का चोदू हो गया है।
राज उसके बग़ल में लेटकर बोला: माँ चोदू नहीं पक्का मादरचोद हो गया हूँ।
इस पर वह दोनों हँसने लगे।

राज: माँ गाँड़ दुःख तो नहीं रही है?
नमिता: आह इतना मोटा मूसल वहाँ जाएगा तो दुखेगी ही , पर सहने लायक है। ये दर्द उस मज़े के सामने कुछ भी नहीं है जो तुमने मुझे दिया है।
यह कहते हुए वह राज के होंठ चूसने लगी। राज भी नमिता के गदराए बदन से चिपक कर बहुत मस्त हो रहा था ।

अब नमिता बोली: चल हट अब मुझे बाथरूम जाना है।
राज: चलो मैं भी आपके साथ चलता हूँ और आपकी गाँड़ भी साफ़ कर दूँगा।
नमिता हँसते हुए बोली: आऽऽऽहहह पहले गंदा करता है और फिर साफ़ भी करेगा ।
बाथरूम में दोनों ने मूता और राज ने उसकी बुर और गाँड़ को साबुन पानी से अच्छी तरह से साफ़ किया। नमिता ने भी उसके लौड़े को अच्छी तरह से धोया।

अब दोनों बाहर आकर बिस्तर पर लेटे और जल्दी ही एक दूसरे से नंगे ही लिपटकर सो गए।
अगली सुबह जब नमिता की नींद खुली तो उसने देखा को राज पीठ के बल सोया हुआ है और पतली चादर से उसका मोर्निंग इरेक्शन साफ़ दिखाई पद रहा था। उसने गाउन पहना और वह उठकर बाथरूम गयी और फ़्रेश होकर चाय बनाई और राज को उठायी और चाय दी।
राज भी फ़्रेश होकर बाहर नंगा ही आ गया ।

राज: माँ गाँड़ दुःख तो नहीं रही है?
नमिता: नहीं बेटा अभी बिलकुल ठीक है।फिर वह उसके गाल को चूम ली।
नमिता बोली: बेटा लोअर पहन ले अभी नौकर आएँगे और सफ़ाई करके खाना बनाएँगे।
चलो हम बेडरूम की चादर बदल देते हैं क्योंकि उसमें हमारे रस गिरे हुए हैं।
दोनों ने मिलकर चादर बदली और नमिता ने उसे वॉशिंग मशीन में डाल दिया।
थोड़ी देर में तीन नौकर आए और सफ़ाई करने लगे। बहुत बड़ा घर था सो वो चुपचाप काम में लगे रहे। फिर एक कुक आया और उसने उनको नाश्ता कराया । नमिता ने उसे खाना बनाने को और टेबल पर रख देने को कहा। क़रीब ११ बजे सब नौकरों को नमिता ने विदा कर दिया ।
राज बोला: आह माँ मुझे तो लगा कि ये जाएँगे ही नहीं, चलो अब कुछ मज़ा करें।
नमिता हँसती हुई बोली: हम्म बोल क्या करना है?
राज: माँ चलें पूल में नंगे नहाएँ ।
नमिता: चल जो तू चाहेगा वही होगा।

पूल पर दोनों नंगे हुए और पूल में कूद गए और तैरने लगे।
अब राज नमिता को पकड़कर उसे अपने से लिपटा कर प्यार करने लगा ।
जल्दी ही वो दोनों गरम हो गए और राज बोला: माँ चलो ना बाहर चलें। मज़ा करते हैं।
नमिता: ठीक है चलो बाहर निकलो ।
अब दोनों बाहर आए और नमिता ख़ुद ही पूल के पास रखे ही एक शानदार तख़्त पर बैठ गयी जिसमें कुशन भी था। राज ने अपना लौड़ा उसके मुँह के सामने कर दिया और नमिता उसका लौड़ा चूसने लगी। राज भी अपनी कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगा। उसका हाथ नमिता की चूचि दबाने लगा था। अब राज ज़ोर ज़ोर से उसके मुँह को चोदने लगा। नमिता भी मस्त होकर चूसे जा रही थी। वह अब उसके बॉल्ज़ को भो सहला रही थी। राज जोश में आकर आऽऽऽहहह करके उसके मुँह में झड़ने लगा। नमिता भी उसका रस पीती ही चली गयी। उसकी आख़िरी बूँद भी वह चाट के पी गयी।
राज भी मस्त होकर अब नमिता के पास बैठ गया और बोला: आऽऽह माँ क्या चूसती हो आप, पागल कर देती हो।

नमिता: सच मज़ा आया ना, मुझे भी बहुत मज़ा आया। तुम्हारा रस बड़ा स्वाद है बेटा।
अब राज फिर से पूल में कूदा और तैरने का मज़ा लेने लगा। नमिता भी थोड़ी देर तैर कर बाहर आयी और तौलिए से पोंछ कर ड्राइंग रूम में चली गयी और एक गाउन पहन ली। राज भी पीछे से आया और नमिता से सट कर बैठ कर बोला: माँ आपकी बुर तो गरम हो गयी होगी मेरा लौड़ा चूस कर।
नमिता: हाँ गरम तो है पर अभी थोड़ी देर बाद कर लेना।
राज फिर नमिता की गोद में लेट गया और वो दोनों बातें करने लगे ।
राज: माँ एक बात बोलूँ थोड़ा सूना सूना सा नहीं लगता है यहाँ?
नमिता: बोर हो गया क्या?
राज: नहीं माँ , मतलब कि थोड़ा अकेलापन सा लग रहा है।
नमिता: अगर बोर हो गया हो तो कल ही वापस चले जाएँगे अपने घर।
राज: नहीं माँ जगह तो मस्त है, माँ एक बात बोलूँ आप नाराज़ तो नहीं होगी?
नमिता: बोल ना क्या बात है?
राज: माँ कल अपना आख़री दिन है ना, क्यों ना नदीम और उसकी माँ को भी बुला लें।
नमिता हैरान होकर बोली: मतलब? यहाँ बुलाएगा उनको?
राज: माँ आपको तो पता है ना की नदीम आपको चोदने के लिए मरा जा रहा है और वह कई बार कह भी चुका है। अगर वह और आयशा आंटी आ जाएँगे तो हमें भी उनका साथ मिल जाएगा और नदीम आपको और मैं आयशा आंटी को चोद लूँगा।

ये कहते हुए उसने नमिता की चूचि चूसनी शुरू कर दिया।
नमिता: बस एक दिन में ही माँ से बोर हो गया ? और आंटी की चुदायी का सोचने लगा।
राज: माँ आप बात को कहाँ से कहाँ ले जा रही हो? मेरा ये मतलब नहीं था।
उसने उसकी चूचि दबाते हुए कहा।

नमिता: तू सच ये चाहता है कि नदीम मुझे चोदे ?
राज: हाँ माँ और मैं भी आंटी को चोदूं साथ ही में।
नमिता कुछ देर बाद बोली: चल ठीक है जैसी तेरी मर्ज़ी।

राज ख़ुश होकर नमिता के होंठ चूम लिया। फिर बोला: माँ अपना फ़ोन दो ना।
नमिता से फ़ोन लेकर उसने नदीम को फ़ोन लगाया और स्पीकर पर रख कर बोला: हाय नदीम क्या हाल है?
नदीम: मैं ठीक हूँ और पेपर ख़त्म हो गए?
राज: हाँ यार आजकल छुट्टी चल रही है और कल आख़िरी दिन है छुट्टी का।
नदीम: अरे भाई तो आजा ना हमारे घर मज़ा करते हैं, अम्मी के साथ।

नमिता यह सुनकर राज को हैरानी से देखी कि नदीम को कितनी जल्दी है राज के साथ अपनी अम्मी को चोदने की?
राज: अरे सुन ना , एक काम कर तू और आंटी क्यों नहीं आ जाते हमारे पास?
नदीम: मतलब तूने आंटी को पटा लिया? चुदायी भी हो गयी क्या?
नमिता का चेहरा लाल हो गया कि हे राम ये लड़के कैसी बातें करते हैं!
राज: हाँ यार सब हो गया, तभी तो तुझे आंटी के साथ आने के लिए बोल रहा हूँ ताकि वो जो हमारी इच्छा है वह हम पूरी कर लें।

नदीम: सच यर मेरा तो तेरी बात सुनकर ही खड़ा हो गया है । आंटी मान गयीं हैं मुझसे चुदवाने के लिए?
नमिता अब और लाल हो गयी!
राज ने नमिता की चूचि सहलायी और बोला: हाँ वह तय्यार है , तू आएगा ना कल आंटी के साथ?
नदीम: ज़रूर आऊँगा, यार कितने बजे आऊँ?
राज: कल ११ बजे आ जाना पर मेरे घर नहीं एक फ़ार्म हाउस में । फिर उसने नदीम को विस्तार से बताया कि वह क्यों और कहाँ है ,और पूरा पता दे दिया।

नदीम: यार कल संडे है मेरी दुकान भी बंद रहेगी मज़ा आ जाएगा। यार एक बार आंटी से भी बात करा दे ना
नमिता ने सिर हिलाकर कहा कि मुझे बात नहीं करनी। पर राज नहीं माना और बोला: हाँ यार ले बात कर ना।
नमिता: हैलो ।

नदीम: नमस्ते आंटी जी , आप कैसी है ?
नमिता: मैं ठीक हूँ, तुम कैसे हो?
नदीम: आंटी बहुत ख़ुश हूँ, अभी अभी राज बोला कि आप और राज अब सिर्फ़ माँ बेटे नहीं रहे बल्कि वैसे ही आशिक़ बन गए हैं जैसे मैं और अम्मी हैं।
नमिता: हम्म
नदीम: और आंटी ये भी कि आप मुझसे भी मस्ती करने के लिए मान गयी है।
नमिता: हम्म
नदीम: आंटी मैं तो आपके रूप पर बहुत दिन से पागल हूँ। अब कल के इंतज़ार में कहीं पागल ना हो जाऊँ।
नमिता: चलो कल मिलते हैं, अब रखती हूँ। और उसने फ़ोन काट दिया।

नमिता: तूने क्यों मुझे फ़ोन पकड़ा दिया था? क्या अनाप शनाप बक रहा था वह।
राज उसकी चूचि दबाकर बोला: माँआपका सच्चा आशिक़ है वो। देखना कल कितनी सेवा करेगा आपकी
नमिता: और तू आयशा की सेवा करेगा, यही ना ?
राज उठा और नमिता का गाउन खोला और उसके सामने घुटनों के बल बैठ कर उसकी जाँघें फैला दिया और उसकी बुर में दो ऊँगली डाला और बोला: माँ आप तो बिलकुल चुदासि हो रही हो। उसने उसको अपनी गीली उँगलियाँ दिखाते हुए कहा और फिर उनको चाट लिया।
अब वह उसकी बुर को चाटने लगा और ऊँगली भी करने लगा जल्दी ही नमिता सिसकियाँ भरने लगी।

राज: माँ बोलो ना नदीम की बात से गरम हो गयी हैं ना आप?
नमिता: आऽऽऽहहह सीइइइइइइ हाँ अच्छा तो लगता है ये सब आऽऽहहह।
राज: तो माँ उससे आपने ठीक से बात क्यों नहीं की?
नमिता की बुर के clit को उसने जीभ से खुजाया।
नमिता: आऽऽऽहहह बेटाआऽऽऽऽ पहली बार में थोड़ी झिझक तो होओओओओओओओओती है नाआऽऽऽऽऽ आऽऽहहहह। क्या कर रहा है, मैं झड़ जाऊँगी। चल बिस्तर पर और चोद मुझे।

राज उठकर खड़ा हुआ और नमिता को गोद में उठाके बिस्तर पर लिटा दिया और ख़ुद भी उसके बग़ल में लेट गया। अब वो दोनों एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके लेटे थे ।नमिता ने अपनी एक टाँग राज के कमर में रखी और उसका लौड़ा पकड़कर अपनी बुर में रखा और कमर आगे को करके आधा लौड़ा अंदर करके आऽऽँहह करी।
राज भी अपनी कमर दबाकर अपना लौड़ा और गहरायी तक पेल दिया।

राज ने अपनी जीभ नमिता के मुँह में दे दी और वह उसको चूसने लगी। राज ने अपना हाथ उसके चूतरों पर रखा और उनको दबाकर ज़बरदस्त तरीक़े से कमर हिलाकर उसको चोदने लगा।अब नमिता भी गाँड़ हिला हिला कर उसका साथ दे रही थी। चुदायी की फ़च फ़च की आवाज़ें भी आ रही थी। और राज और नमिता दो साँपों की तरह एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे में समाए हुए थे।

नमिता की सिसकारियाँ निकल रही थीं, और वह हर धक्के के साथ आऽऽह करती थी और राज भी ह्म्म्म्म्म करते जा रहा था। करीब बीस मिनट की धुआँधार चुदायी के बात नमिता की उइइइइइइइइइइ और हाय्य्य्य्य्य्य्य के साथ मैं गयीइइइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ की आवाज़ें निकलने लगी और वह अपने आप को राज के लौड़े पर पूरा दबाकर स्खलन के आनंद से भर गयी । राज भी माँआऽऽऽऽऽऽ मैं भी झढाआऽऽऽऽऽऽऽऽ कहकर छोटे छोटे धक्कों के साथ अपना वीर्य नमिता की बुर में डाल दिया और दोनों शांत हो गए।

अब दोनों वैसे ही लिपटकर सो गए। दोपहर को नींद खुली और खाना खाकर वो tv देखने लगे।
एक दूसरे के बदन से खेलते रहे, फिर राज बोला: माँ पूल के आगे एक दरवाज़ा है, उसके बाद क्या है?
नमिता: मुझे नहीं पता । दरबान से फ़ोन पर पूछ लो।

राज को दरबान ने बताया कि पीछे सुंदर जंगल है और वो वहाँ घूम सकते हैं ।
राज टी शर्ट और लोअर पहना और नमिता ने भी एक राज का ही टी शर्ट और उसका ही लोअर पहना और दोनों बाहर आकर पीछे का दरवाज़ा खोलकर सामने के दृश्य को देखकर मस्त हो गए ।सामने हरियाली थी और घना जंगल था। वो दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर जंगल में प्रेमी जोड़े की तरह घूम रहे थे। राज ने नोटिस किया कि नमिता की चूचियाँ बिना ब्रा के टी शर्ट से क़ातिलाना लग रही थीं और उसके निपल्ज़ अलग से ही तने हुए दिख रहे थे। उसके लोअर से उसके बिना पैंटी के पिछवाड़ा भी बहुत मादक लग रहा था ।

राज का लौड़ा खड़ा होने लगा और वह नमिता को पीछे से पकड़ लिया और अपना लौड़ा उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा । उसने चूचियाँ भी अपने पंजों मे दबोच लीं।
नमिता: आऽऽऽहहज क्या करता है बेटा?
राज: माँ आप बहुत सेक्सी हो,मस्त माल हो।
नमिता: आऽऽह छोड़ ना मार ही डालेगा क्या?
राज: माँ चुदायी से कोई नहीं मरता। फिर उसने अपना लोअर नीचे किया और हवा में लौड़ा लहराकर नमिता को बोला: माँ थोड़ा सा चूस लो ना।

नमिता उकड़ूँ बैठी और उसका लौड़ा चूसने लगी। वह अपनी जीभ उसके बॉल्ज़ पर भी घुमाने लगी ।
सुनसान जंगल में राज की ह्म्म्म्म्म्म गूँजने लगी । अब राज ने नमिता को उठाया और उसके टी शर्ट को ऊपर करके उसकी चूचियाँ दबाने और चूसने लगा। नमिता आऽऽहहह सीइइइइइइइ कर उठी।

अब उसने नमिता का लोअर नीचे किया और उसकी बुर को ऊँगली करके उसके गीलेपन का अहसास कर के मस्त हो गया और नमिता को बोला: माँ इस झाड़ के सहारे खड़ी हो कर झुक जाओ , मैं पीछे से डालता हूँ। नमिता पेड़ के पास आकर उसका सहारा लेकर झुक गयी और राज उसके पीछे आकर अपना लौड़ा उसकी बुर में डाल और धीरे से चुदायी करने लगा। उसका एक हाथ नमिता की चूचियाँ दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़कर वह ज़ोर से धक्के लगाने लगा। नमिता भी हाय्य्य्य्य्य कहकर अपने चूतरों को पीछे की ओर दबाकर पूरे लौड़े का मज़ा ले रही थी। जंगल में एक दम शांति थी और उसमें उनकी चुदायी कि फ़च फ़च गूँज रही थी। नमिता की दबी सिसकारियाँ भी निकली जा रही थीं। फिर वह झड़ने लगी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिला रही थी और अपनी जाँघों में उसके लौड़े को भींच रही थी।

राज भी अब झड़ने लगा और वह भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर पूरा लौड़ा अंदर डालकर उसके चूतरों से चिपका ही रह गया। उसका वीर्य उसके अंदर गिरता चला गया।
फिर वह अपना लौड़ा बाहर निकाला और रुमाल से उसे साफ़ किया और फिर उसने नमिता की बुर को भी साफ़ किया।

राज: माँ इसलिए साफ़ किया कि आप पैंटी नहीं पहने हो सब रस लोअर में गिर जाता।
नमिता मुस्कुराते हुए बोली: तू मेरा कितना ख़याल रखता है!
अब दोनों वापस घूमकर फ़ार्म हाउस वापस आ गए।
नमिता ने नौकरों को शाम को आने को कहा था सो वो अपना काम कर रहे थे । उन दोनों को चाय पिलायी और खाना बनाकर वह ८ बजे चले गए।

बाद में वो खाना खाए और रात में एक चुदायी का दौर और चला और फिर वो दोनों सो गए।
अगली सुबह राज पहले उठ गया और नमिता को बग़ल में लेता देख कर उसको चूम लिया और चादर के अंदर वह भी नंगी ही थी। राज उठकर बाथरूम चला गया और बाहर आकर किचन में चाय बनाकर अपने लिए और नामिता के लिए लेकर आया। वह झुककर नमिता के होंठ चूमा और बोला: माँ उठो ना। चाय पी लो। ये कहते हुए उसने चादर हटाकर उसकी चूचियों को नंगा किया और झुक कर निपल्ज़ को चूस लिया।

नमिता : आऽऽह या तो दूध पी ले या फिर मैं चाय पी लूँ।
राज: हा हा माँ आप चाय पी लो।
अब दोनों चाय पीने लगे और फिर नमिता फ़्रेश होने चली गयी। राज भी लोअर पहन कर ड्रॉइंग रूम में TV देखने लगा। तभी नमिता आयी और फ़ोन से नौकरों को बुलायी। अब उसने भी एक गाउन डाल लिया था।

राज: माँ ये नौकर आने वाले हैं , इनके आने के बाद हम पूल में नहा लेंगे।
नमिता: हाँ बाद में हम नाश्ता कर लेंगे।

नौकरों के आने के बाद वह दोनों पूल का दरवाज़ा बंद करके आकर पूल के पास रखे तख़्तों पर लेट गए और बातें करने लगे।
राज: माँ क्या सोचा आपने सुधाकर अंकल से शादी की बात करोगी?
नमिता: पता नहीं करूँगी कि नहीं , उनको ये बताने में मुझे बहुत झिझक हो रही है की मैं तुमसे और मनीष से भी चुद रही हूँ।

राज: अरे अंकल खुले दिमाग़ के हैं, वह मान जाएँगे।
नमिता: पर उनकी एक बेटी भी है जो अब नानी के पास रहती है, शायद वह भी इस साल यहीं ११थ में भरती होने की सोच रही है। उसका क्या होगा?
राज: माँ उसको भी हम अपने ग्रूप में शामिल कर लेंगे।

नमिता: ओह, पता नहीं सुधाकर इस बात को कैसे लेंगे?
राज: माँ हो सकता है कि अंकल भी अपनी बेटी को चोदना चाहें, क्या पता?
नमिता: ओह, मुझे याद है एक बार हमारे ऑफ़िस की एक कमसिन लड़की साक्षी को वह किसी क्लाइयंट को ख़ुश करने को भेज रहे थे, वह मुझे आकर बोली कि मैं सर को बोली कि आप तो मेरे साथ सोते हो पर मुझे दूसरे लोगों के पास क्यों भेजते हो? अगर आपकी अपनी बेटी होती तो क्या उसको भी भेजते? इस पर सुधाकर उसको बोला था कि यही तो अफ़सोस है कि मेरी बेटी मेरे पास नहीं रहती, मेरी सास उसको हज़म कर ली है। वरना तुम जैसी लड़की की मुझे ज़रूरत ही नहीं होती।

राज: इसका मतलब ?
नमिता: हाँ, एक बात और साक्षी बोलती है कि वह उसको चोदते समय बेटी बेटी कहता है और साक्षी को भी कई बार बोलता है कि उसे पापा कहकर चुदवाए।

राज उछलकर बोला: ओह माँ तब तो पक्का है कि अंकल अपनी बेटी को चोदना चाहते हैं। और अगर आप दोनों की शादी हो गई तो अंकल की सास लड़की को आपके पास आपके भरोसे रहने को भेज देगी और आप बाप बेटी का मिलन करा देना।

नमिता आँख मारकर बोली: और भाई बहन का मिलन?
राज हँसते हुए: हा हा वह भी हो ही जाएगा। माँ क्या मज़ा आएगा हम तीन और आप दो, क्या मज़ा आएगा चुदाई का।
नमिता: मैं देख रही हूँ कि तुझे ग्रूप सेक्स का बड़ा चाव लग गया है?
राज: माँ जब मैं और नदीम आयशा आंटी को एक साथ चोदे थे तब बहुत मज़ा आया था।
नमिता: अरे हाँ नदीम और आयशा आने वाले हैं ना आज?
राज: हाँ प्लान तो था पर आज कोई फ़ोन नहीं आया, अब तक।

तभी नमिता का फ़ोन बजा और नदीम उठकर नमिता के तख़्त पर आकर बैठ गया और नमिता के गाउन को खोलकर उसके पेट को सहलाते हुए बोला: हाय नदीम कैसे हो?
नदीम: सब बढ़िया है।
राज स्पीकर पर रखकर बोला: तो तुम लोगों का क्या प्रोग्राम बना है?
नदीम: बस ११ बजे तुम्हारे साथ होंगे। क्या सामान लाना है?
राज: अरे कुछ नहीं चाहो तो एक जोड़ी कपड़े के आओ बस और कुछ नहीं। वैसे उनकी भी ज़रूरत नहीं होगी , नंगे रहने में ज़्यादा मज़ा आएगा।
नदीम: सही है यार नंगे ही रहेंगे। यार आंटी को नंगी देखने का सोचकर मेरा खड़ा हो गया।
नमिता ने बुरा सा मुँह बनाया।

राज: हाँ यार आंटी को मुझे भी चोदे काफ़ी दिन हो गए।
उसका लौड़ा भी खड़ा हो गया था। वह लोअर से उसको निकाला और नमिता को देखा। नमिता उसको सहलाने लगी। राज भी अपना हाथ नमिता को जाँघों के बीच लेज़ाकर उसको सहलाया और नमिता ने अपनी जाँघों को खोल दिया।

राज: अरे नदीम बस अब तू जल्दी से आजा और हम मज़े करेंगे।
नदीम: चल बस अब निकालता हूँ। बाई ।

नमिता: तुम लोग कितनी गंदी बातें करते हो?
राज ने अपनी उँगलियाँ उसकी बुर में डाली और उसको पूरा गीला पाकर बोला: माँ ये देखो पूरी गीली हो गई है आपकी बुर। आपको हमारी बातों में मज़ा आ रहा था तभी तो गीली हुई?
नमिता: आऽऽऽहहहह कर उठी। राज ने उसकी बुर के दाने को छेड़ दिया था।
राज उसकी जाँघों के बीच आया और उसकी बुर चाटने लगा। नमिता की आँहें निकलनी लगी। और वह राज को बोली: बेटा ६९ करते हैं, मुझे भी तेरा लौड़ा चूसना है।

अब राज नीचे लेटा और नमिता अपने बुर को उसके मुँह पर रख कर उसका लौड़ा चूसने लगी। राज भी उसके चूतरों को चूमते हुए उसकी दरार में मुँह डालकर उसकी गाँड़ चाटा और फिर मुँह को नीचे लेज़ाकर बुर भी चाटने लगा । अब उसने नमिता की गाँड़ में दो ऊँगली डाली और उसकी बुर चाटने लगा।

नमिता भी उसके लौड़े और बॉल्ज़ को चूसे जा रही थी। फिर उसने नीचे जाकर उसके चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ में भी जीभ फेरने लगी। राज की भी आऽऽहहह निकल गयी। अब नमिता ने भी एक ऊँगली उसकी गाँड़ में डाल दी और उसके लौड़े को डीप थ्रोट का मज़ा देने लगी।

थोड़ी देर बाद नमिता बोली: आऽऽऽहहह तू चोदेगा या ऐसे ही झाड़ देगा मुझे?
राज: आऽऽहहह क्या मस्त बुर है आपकी चूसने से दिल ही नहीं भरता। चलो उठो अभी चोदता हूँ।

उसने नमिता को चौपाया बनाया और उसकी गाँड़ ऊपर करके अपना गीला लौड़ा उसमें सेट किया और एक हल्का सा धक्का लगाकर पूरी गीली बुर में अपना आधा लौड़ा धकेल दिया।
नमिता आऽऽऽऽऽऽहहह कर उठी । अब वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए एक और धक्का मारकर अपना पूरा लौड़ा उसके अंदर डाल दिया और उसकी गरम बुर का अहसास अपने लौड़े पर करके मस्ती से भर उठा।

अब नमिता से नहीं रहा गया वह अपने चूतरों को पीछे धकेल कर बोली: हाऽऽय्य अब चोद ना आऽऽऽह किसका इंतज़ार कर रहा है।

राज: अब उसकी चुदायी में लग गया और धीरे धीरे धक्कों की स्पीड भी बढ़ाता चला गया।
अब नमिता की घुटी हुई सिसकारियाँ और फ़च फ़च को आवाज़ आने लगी। राज ने उसके चूतरों को हल्के से थप्पड़ भी मारा और नमिता हाऽऽय्य्य्य्य कहकर और ज़ोर से अपनी गाँड़ हिलाकर चुदवाने लगी।

राज अब उसके निपल्ज़ को मसल रहा था और वह मस्ती से चोदे भी जा रहा था।
नमिता: आऽऽऽऽऽह क्याआऽऽऽऽऽऽऽ मस्त चोओओओओओओओद रहाआऽऽऽऽऽ है मेराआऽऽऽऽऽऽऽ राआऽऽऽऽऽऽजा बेएएएएएएएएटा ।

राज: आऽऽऽऽहहह माँआऽऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ बुउउउउउउउउउउर है आपकीइइइइइइइइइ। ह्म्म्म्म्म्म्म मैं तो झड़ाआऽऽऽऽ।
नमिता भी आऽऽहहहह करके झड़ने लगी।

दोनों का ऑर्गैज़म एक साथ हुआ और नमिता की बुर उसके अपने पानी और राज के वीर्य से भर गई।
नमिता अब पेट के बल लेट गयी और राज भी अपना लौड़ा बाहर निकाल कर उसके साथ ही लेट गया।
अब दोनों अपनी साँसों पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रहे थे।
राज: माँ भूक लगी है चलो नाश्ता कर लें।

नमिता: चल पहले पूल में थोड़ा सा नहा लेते हैं फिर चलते हैं। अब दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर पूल में उतरे और एक दूसरे से चिपक कर नहाने लगे और थोड़ी देर तैरे भी।
फिर एक दूसरे को तौलिए से सुखाकर कपड़े पहने और वापस ड्रॉइंग रूम में आए। नमिता ने नौकरों को पूल के आसपास सफ़ाई के लिए भी भेजा ।

नाश्ता करने के बाद दोनों ११ बजने का इंतज़ार करने लगे। सभी नौकर खाना बना कर और साफ़ सफ़ाई करके चले गए।
क़रीब ११:१५ बजे दरबान का फ़ोन आया कि कोई नदीम आपसे मिलना चाहते हैं। राज ने उनको अंदर आने का बोल दिया।
अब तक नमिता ने साड़ी ब्लाउस डाल लिया था। राज भी टी शर्ट और लोअर में था।
राज उनको लाने के लिए बंगले से बाहर पोर्च तक आया। नदीम अपनी बाइक में अंदर आया और उसके पीछे उसके अब्बा बैठे थे और पीछे अम्मी बैठी थी जिसके हाथ में एक बैग भी था।
राज अंकल को देख कर हैरान रह गया।

ख़ैर उसने सबका स्वागत किया और दुआ सलाम की।
नदीम तो उससे गले मिला। अंकल और आंटी को उसने आदाब किया। आयशा ने काले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके गोरे दूधिया बदन पर बहुत फ़ब रही थी। अंकल पैंट टी शर्ट में थे।
राज सबको अंदर लेकर आया । वो सब ये शान ओ शौक़त देखकर हैरान थे। इतना शानदार मकान उन्होंने भी नहीं देखा था।

राज नदीम को एक तरफ़ ले जाकर पूछा: यार ये अंकल को क्यों ले आया?
नदीम: मैं क्या करूँ, इन्होंने ज़िद पकड़ ली कि मैं भी जाऊँगा। लाख मना करने के बाद भी नहीं माने तो अम्मी ने कहा की चलो ले चलते हैं। कोई चारा नहीं रह गया था।
राज: यार इनके कारण कोई परेशानी तो नहीं होगी?
नदीम: अरे ये तो बस देखेंगे हमको मज़ा लेते हुए , आगे तरी मर्ज़ी है चाहे तो उनको भी मज़ा लेने देना । वैसे भी तेरे लौड़े के वह दीवाने हैं।

राज: ओह, चलो माँ को मैं समझा लूँगा ।
तभी नमिता हाथ में पानी का ट्रे लेकर आयी और सबको पानी दी। सबने एक दूसरे को नमस्ते किया ।
फिर नमिता बोली: आप बैठो चाय बनाती हूँ।

आयशा: दीदी मैं भी आपकी मदद करती हूँ । ये कहकर उसके पीछे किचन में आ गयी।
नमिता ने किचन में आयशा का हाथ पकड़ा और बोली: आयशा, उस दिन के लिए मैं तुमसे माफ़ी माँगती हूँ जब मैं तुमसे लड़ने तुम्हारे घर आयी थी। मैं तुमको डाँट रही थी नदीम से सेक्स करने के लिए, और आज देखो मैं ख़ुद ही अपने बेटे के साथ ही वह सब कर रही हूँ।

आयशा: अरे दीदी, मुझे सब पता है कि हम अपने बच्चों मी भलाई के लिए और अपने परिवार को बचाने के लिए ही सब कर रहे हैं। वह सब मैं भूल चुकी हूँ।
ये कहते हुए वह नमिता का हाथ सहलाने लगी।

नमिता को लगा कि जिस तरह से वह उसका हाथ सहला रही है कहीं ये भी तो बाइसेक्शूअल नहीं है? उसने चेक करने का निश्चय किया।

नमिता: सच तुमने सब भुला दिया, तो आओ मेरे गले लग जाओ और हम सहेलियाँ बन जाएँ।
ये कहते हुए नमिता ने उसको अपनी बहाने में भींच लिया और उसकी गर्दन में एक चुम्बन लिया और अपना हाथ उसकी नंगी कमर पर रख कर सहलाने लगी।

आयशा भी उससे ज़ोर से चिपक गयी और वह भी नमिता की कमर को सहलाने लगी और उसने भी उसकी गर्दन का पिछला हिस्सा चूम लिया।
नमिता को लगा कि अब रियल टेस्ट कर लिया जाए।

नमिता ने उसको अलग किया और उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा: आयशा तुम्हारा एक चुम्बन ले लूँ, तुम बहुत प्यारी हो?
आयशा भी उसकी आँखों की हवस को समझ कर बोली: लो दीदी लो।

यह कहकर उसने अपने होंठ आगे करके नमिता के होंठ से लगा दिए और दोनों एक बहुत ही मादक चुम्बन लेने में मस्त हो गयीं। नमिता के हाथ अब उसकी छातियों तक पहुँचे और वह उनको दबा कर बोली: आऽऽह क्या मस्त टाइट चूचियाँ हैं, इसीलिए मेरा बेटा पागल है तुम पर।

आयशा भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, उसने भी नमिता की छातियों को दबाया और बोली: हाऽऽऽऽऽय आपकी तो बहुत बड़ी बड़ी हैं तभी नदीम पागल हुआ जा रहा है इनको चूसने को।
अब फिर से उनके होंठ एक दूसरे से चिपक गए।

तभी बाहर किसी के आने की आवाज़ आयी तो वो अलग होकर चाय बनाने लगी।
राज अंदर आया और बोला: माँ अंकल का तो आने का प्लान नहीं था पर अब आ ही गए हैं तो कुछ नहीं होता। वो सिर्फ़ देखेंगे कर तो कुछ नहीं सकते।

आयशा: हाँ दीदी उनकी तरफ़ से आपको कोई टेन्शन नहीं होगा। वो बेचारे तो नकारा ही हो गए हैं ऐक्सिडेंट के बाद से।
नमिता: कोई बात नहीं, मुझे राज ने सब बताया हुआ है।
चल राज तू ये ट्रे उठा और चाय ले जा मैं कुछ खाने के लिए भी लाती हूँ।

राज के जाने के बाद नमिता और आयशा खाने का सामान लायीं और सब चाय पीने लगे।
नमिता और आयशा एक सोफ़े पर बैठी थी और राज , नदीम और अंकल एक सोफ़े पर थे।
राज: माँ चलो ना इन लोगों को पूल दिखाते हैं।

नमिता: चलो चलते हैं।
अब सब बाहर आए और पूल देख कर वो भी बहुत हैरान हुए।
नदीम: यार ये तो बहुत सुंदर पूल है। पर मुझे तो तैरना नहीं आता ।
अंकल: मुझे और आयशा को आता है , हमने गाँव में सीखा था। नदीम शुरू के हिस्से में पानी कम होता है तुम वहाँ तक तो जा सकते हो।

राज: माँ चले, तैरें ?
नमिता: ठीक है तुम लोग उतरो पहले।
अब राज जानता था कि यही मौक़ा है ICE ब्रेकिंग का। याने सबकी शर्म तोड़ने का।
राज ने अपना टी शर्ट निकाला और उसकी मर्दानी छाती सबके सामने थी। फिर उसने अपना लोअर खोला और अब वह चड्डी में था।

चड्डी में उसका आधा खड़ा लौड़ा ग़ज़ब का सेक्सी दिख रहा था।
अब वह बोला: मेरे पास और चड्डी नहीं है, इसलिए मैं इसको गीला नहीं कर सकता हूँ। वैसे भी अभी जितने लोग यहाँ हैं सबने मुझे नंगा देखा हुआ है।

ये कहते हुए उसने अपनी चड्डी भी उतार दी। अब सबकी आँखें उसके नंगे बदन पर लग गयीं थीं। उसका लम्बा लौड़ा आधा खड़ा होने के कारण बहुत ही सेक्सी दिख रहा था। आयशा की बुर गीली होने लगी। नदीम भी मस्ती में आ गया और अपना टी शर्ट उतार कर अपनी बालों से भरी छाती का नज़ारा सबको दिखाते हुए अपनी जींस भी खोल दिया। अब काली चड्डी में उसका गोरा बदन जो बालों से भरा था चमक उठा। उसकी मोटी पुष्ट जाँघें बालों से भरी थीं। अब उसने भी अपनी चड्डी निकाल दी और उसका लौड़ा उत्तेजना से पूरा ही खड़ा था और क़रीब ६.५ इंच का मोटा गोरा लौड़ा राज से थोड़ा ही छोटा था।

अब राज बोला: माँ आंटी हम तो पानी में जा रहे हैं, आप भी आयिये ना। ये कहते हुए वह पानी में कूद गया और उसके पीछे नदीम भी कम पानी में उतर गया।
नमिता और आयशा ने एक दूसरे को देखा। तभी आयशा ने देखा कि उसका पति भी नंगा होने लगा है।जैसे ही वह नंगा हुआ उसका सुकड़ा हुआ हथियार देख कर नमिता बोली: सच में बिचारे के साथ बहुत अत्याचार हुआ है।
आयशा: सिर्फ़ उनके साथ हीं नहीं मेरे साथ भी।
नमिता: हाँ सच तेरे साथ भी।

आयशा ने देख तब तक वह भी पानी में उतर गया था।
राज गहरे पानी में तैर रहा था और उसका बालों से भरे कठोर चूतर अलग से दिख रहे थे। अब नदीम भी कम पानी में तैरने की कोशिश कर रहा था। पर बीच बीच में खड़े होने की वजह से उसका लौड़ा भी दिख जा रहा था।कमाल ( नदीम के अब्बा) भी तैरने लगा और उसका भी बड़ा सा पेंदा पानी के ऊपर से दिख रहा था।

अचानक राज चिल्लाया: अरे माँ आप और आंटी भी आओ ना।
नमिता मुस्करायी और अपनी साड़ी खोलने लगी। उसके कहने पर आयशा ने भी अपनी साड़ी खोल दी। अब नमिता ने ब्लाउस और पेटिकोट भी उतार दिए। ब्रा और पैंटी में मस्त गदराई हुई दिख रही थी, आयशा ने अपने होंठों पर जीभ फेरी।
उधर आयशा भी अब ब्लाउस और पेटिकोट में आ चुकी थी, और नमिता उसकी ब्रा में क़ैद चूचियाँ देख कर बोली: यार तुम तो मस्त माल हो। चलो ज़रा बाथरूम में चलते हैं।
वो पूल के साथ ही बने बाथरूम में घुसीं और नमिता ने आयशा को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठ चूसते हुए उसकी ब्रा खोलकर उसकी चूचियाँ दबाने लगी।

आयशा भी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके नमिता की ब्रा खोल कर उसकी चूचि चूसने लगी और बोली: हाय्य्य्य्य्य क्या मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ हैं। आऽऽऽऽऽह कितना रस इनमे । नमिता भी उसकी चूचि चूसी और फिर एकदम से नीचे बैठ कर उसकी पैंटी खोल दी और उसकी बुर में अपना मुँह डाल कर उसे चूमने और चूसने लगी।

आयशा भी हाय्य्य्य्य्य्य्य दीइइइइइइइइइइइदी कहकर उसका मुँह अपनी बुर में दबा दी।
अब आयशा भी बैठी नमिता की पैंटी उतारके उसकी फूली हुई बुर को चूसने लगी । अब दोनों गरम हो चुकी थीं।
नमिता: चल बाहर चलते हैं। हम बाद में पूरा मज़ा करेंगे।
आयशा उठके उसके साथ बाहर आयी और अब दोनों पूरी नंगी थीं।
राज और नदीम इनको इस रूप में देखकर मस्त होकर अपने लौड़े हिलाने लगे।
दोनों नंगी औरतें अब पूल में उतरने लगीं ।
राज और नदीम उन दोनों हसीन औरतों को नंगे पानी में उतरते देख रहे थे जो कि रिश्ते में उनकी माँ थीं, पर अभी वह उन दोनों को वासना भरी नज़रों से देखकर चुदायी के लिए जैसे पागल से हो रहे थे ।

राज तो ख़ैर आयशा को चोद चुका था पर नदीम के लिए नमिता एक ऐसा फल थी जिसे वह अभी भी चखा नहीं था। नमिता की हिलती हुई बड़ी बड़ी छातियाँ नदीम को घायल किए जा रही थीं। दोनों पानी में उतर कर तैरने लगी। राज भी तैरते हुए उनकी तरफ़ गहरे पानी में गया और जब वो दोनों एक किनारे पर सीढ़ी को पकड़कर सुस्ता रही थीं तो उनके पास जाकर बोला: माँ बहुत गहरायी में तैर रही हो आप।

नमिता: इसी में तो मज़ा आता है।
आयशा: तुमको तो गहरायी में डुबकी लगाने की आदत है।
और वह दोनों डबल मीनिंग वाली बात करके हँसने लगीं।
राज: आंटी मुझे नहीं इसको गहराई में जाने की आदत है।

ये कहते हुए वह बाहर आया और अपने लौड़े की तरफ़ इशारा किया।
अब वह उनके पास पानी में पैर लटका कर बैठा था। नमिता ने आयशा को देखा और इसके लौड़े को सहला कर बोली: कौन पहले चूसेगा तुम या मैं?
आयशा भी एक हाथ से अपने बदन को सहारा देती हुई पानी के अंदर से ही बोली: आपका अपना माल है, पहले मैं चूस देती हूँ। यह कहते हुए उसने भी लौड़ा सहला दिया।

नमिता: यहाँ गहरे पानी में दिक़्क़त होगी चलो वहाँ चलो जहाँ नदीम बैठा है वहाँ कम पानी है।
अब तक आयशा लौड़े के सुपाडे को चूमने लगी थी। अपनी जीभ उस पर फिराकर बोली: हाँ यहाँ गहरे पानी में तो एक हाथ अपने को सम्भालने में लग जाएगा। मुझे तो एक हाथ से बॉल्ज़ सहलाने में और दूसरे हाथ से लौड़ा पकड़के चूसने में मज़ा आता है।

अब राज उठकर नदीम के पास बैठ गया। दोनों औरतें भी तैर कर उनके पास चली आयीं। अब आयशा राज के लौड़े को सहलायी और उसके बॉल्ज़ को दूसरे हाथ से दबाने लगी। आयशा ने अब उसे चूसना शुरू किया और मज़े से उसके सुपाडे पर जीभ भी फेरने लगी। राज आऽऽहहह आंटी कहता हुआ उसके सिर को दबाके मज़े से भर गया।

नमिता भी यह सब देख कर गरम हो गयी और नदीम के लौड़े को पकड़ा और सहलाने लगी और अब वह भी उसके बॉल्ज़ को भी सहलाई और उनको एक एक करके चूसने लगी।
थोड़ी देर बाद वह उसके लौड़े को चूसने लगी। अब दोनों औरतें एक दूसरे के बेटे का लौड़ा चूसने लगी। दोनों के सिर ऊपर नीचे हो रहे थे। और राज और नदीम उनकी छातियाँ दबाकर मस्ती से भर रहे थे।

अब नदीम बोला: आऽऽऽहहह आंटी आप तो बहुत मस्त चूसती हैं।
राज: आऽऽऽहहह आंटी क्या चूस रही हो, मज़ा आ गया। चलिए ना चुदायी करते हैं।
नदीम: हाँ आंटी मुझसे भी रुका नहीं जा रहा है ।

राज: माँ, चलो ना वो सामने तख़्त पर चलते हैं।
अब दोनों औरतें अपना सिर उठायी और अपना मुँह पोंछती हुईं पानी के बाहर निकलीं । राज ने आयशा का हाथ पकड़ा और उसके हाथ को पकड़कर तख़्त पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसने लगा। आयशा भी उससे लिपट गई। आयशा का हाथ राज के लौड़े को सहलाने लगा ।

उधर नमिता को तख़्त पर लिटा कर नदीम उसकी चूचियों को दबाते हुए चूसने लगा। नमिता भी उसका सिर अपने सीने पर दबाकर सी सी कर रही थी।
दोनों तख़्त क़रीब एक फूट के ही दूरी पर थे। दोनों लड़के एक दूसरे की माँ पर चढ़े हुए थे।
अब नमिता ने अपनी जाँघें खोल दी और ख़ुद ही नदीम का लौड़ा अपने हाथ में ले लिया और उसको अपनी बुर में लगाकर नीचे से धक्का लगायी और उसके लौड़े को अपने अंदर समा लिया और चिल्लायी: आऽऽऽहहहह ।

अब नदीम भी उसकी चूचि पीते हुए अपनी कमर हिलाकर मस्ती से उसे चोदने लगा। अब नमिता की हाऽऽऽय्यय और उइइइइइइइइइइ की आवाज़ निकल रही थी।

राज भी आयशा की चूचि पीकर मस्त हो चला था और उसने भी आयशा की बुर में तीन ऊँगली डाली और उसके गीलेपन से ख़ुश होकर अपना लौड़ा वहाँ सेट किया और खचाक से एक धक्के में ही आधा अंदर कर दिया। अब आयशा की चीख़ निकली और हाय्य्य्य्य्य कहकर उसके चूतरों को दबाने लगी। उसने अपने दोनों पैर भी उसके चूतरोंपर रख दिया और नीचे से गाँड़ उछाल कर मज़ा लेने लगी।

दोनों जोड़ियों की चुदायी अब पूरे उफान पर थी और फ़च फ़च और आऽऽह और हाऽऽय्यय और मरीइइइइइइइ उईइइइइइइइइ और चोदोओओओओओओओ बेटाआऽऽऽऽऽ फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दो हम्म्म्म्म्म की आवाज़ें गूँज रही थी।
तभी नमिता ने देखा की राज आयशा की ज़बरदस्त चुदायी कर रहा है। उसकी आँख आयशा से मिली और दोनों मुस्कुराते हुए चूदने लगीं।

राज भी नदीम को देखा और दोनों ख़ुश दिखे और चुदायी को अपने अंजाम तक ले जाने लगे।
तभी नमिता ने देखा कि कमाल एकदम उसकी कमर के पास खड़ा होकर चुदायी का मज़ा ले रहा था। उसे थोड़ा अजीब लगा कि वह अपने सूखे हुए लौंडे को हिला भी रहा था।
नदीम: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह राज तेरी माँ मस्त चुदवा रही है, हाय्य्यय क्या मस्त बुर है साली की।
राज: ज़ोर से चोद साले , माँ को ज़बरदस्त चुदायी में ही मज़ा आता है।

नदीम: हाँ तू भी अम्मी को मज़े से चोद , इनको भी रँडी की तरह चुदवाने की आदत है।
राज: ह्म्म्म्म्म ले साली रँडी ले और ले । कहकर धक्का मारने लगा।
नदीम: आह्ह्ह्ह्ह आंटी आप भी रँडी हो ना? बोलो ना?
नमिता: आऽऽहहह हाँ मैं भी आऽऽहहहह रँडी हूँ और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह और ज़ोर से चोदोओओओओओओओ
अब राज और नदीम के लौड़े एंजिन के पिस्टन की भाँति चल रहे थे। और जल्दी ही चारों आगे पीछे ज़ोर से आह्ह्ह्ह्ह और ह्म्म्म्म्म्म करके झड़ गए।

जैसे ही वह चारों अपनी पीठ के बल लेटे , अचानक नमिता ने देखा कि कमाल आयशा की बुर में अपना मुँह डाल के उसकी बुर में से निकल रहा राज और आयशा का मिश्र रस चाट रहा है। उसके बाद वह राज के थोड़े से नरम पड़ चुके लौड़े का रस भी चाटने लगा।
अब वह दूसरे तख़्त पर आके पहले नदीम का लौड़ा चाटा और फिर नमिता की आँखों में झाँकते हुए उसकी बुर भी चाटने लगा । नमिता की हाय्य्यय निकल गयी यह सोच कर कि वह अपने ही बेटे का रस पी रहा है।

जब वह हट गया तब नदीम बोला: आंटी माफ़ कर दीजिए मैंने आपको गाली दी। असल में उत्तेजना में मेरे मुँह से निकल गयी।
नमिता: अरे बेटा कोई बात नहीं। बल्कि मुझे तो मज़ा आया और मेरी हवस और बढ़ गयी थी।
आयशा: हाँ सच अच्छा लगता है उस समय।

राज: किस समय आंटी?
आयशा उसके लौड़े को हिलाकर बोली: बदमाश उस समय जब तू इसको अंदर डालके चोदता है। हा हा ।
राज : आह आंटी सच में आज आपको इतने दिन बाद चोद कर मज़ा आ गया।
नदीम: हाँ आंटी आपकी भी बुर बहुत मस्त है सच मैं तो आपको चोद कर धन्य हो गया।
कमाल वही खड़ा सबकी बातें सुनकर मुस्कुरा रहा था और बोला: तुम लोगों को भूक नहीं लगी क्या?
नमिता: हाँ भाई जान चलिए मैं खाना लगती हूँ । बस एक बार पूल में डुबकी मार लूँ।
फिर सब पूल में नहाए और सुखाकर डाइनिंग टेबल पर बैठे।
नमिता और आयशा खाना लाने किचन में गयीं।

नमिता: मज़ा आ गया , तेरा बेटा तो मस्त ट्रेन हो गया है चुदायी में।
आयशा: हा हा और राज क्या कम चोदू है?
नमिता: हा हा हमने अपने बेटों को चुदायी की अच्छी ट्रेनिंग दी है। पक्के चुदक्कड हो गयें हैं दोनों। ये कहते हुए उसने आयशा की चूचि दबायी और बोली: हम दोनों का प्रोग्राम कब होगा
आयशा : आआऽऽऽऽह दीदी मैं भी तो मरी जा रही हूँ उसके लिए कि कब मैं इसको चूसूँगी? ये उसने नमिता की बुर सहलाते हुए कहा।
दोनों हँसने लगी और खाना लगायी ।
खाना खाते हुए दोनों की चूचियाँ टेबल पर रखी हुई थी। तीनों मर्द ये दृश्य देखकर मस्त हो रहे थे ।
खाना खाने के बाद सब सोफ़े पर बैठे। राज नमिता की गोद में लेट गया। और नदीम के दोनों तरफ़ उसके माँ बाप बैठ गए। सब TV देखते हुए बातें करने लगे।
आयशा ने नदीम को चूम लिया। सबकी आँखें वहाँ ही चिपक गयीं। जल्दी ही नदीम का लौड़ा सख़्त होने लगा और नदीम आयशा की चूचि पीने लगा। आयशा भी अपना हाथ उसके मर्दाना सीने पर फेर रही थी और उसके निपल्ज़ को नोच रही थी।
राज का भी लौड़ा खड़ा होने लगा। नमिता उसे सहलाने लगी। राज भी उसकी चूचि चूसने लगा।

तभी नदीम नमिता को बोला: आंटी आप अब्बा से अपनी बुर चटवाओ । आपको मज़ा आ जाएगा। क्यों अम्मी सच है ना?
आयशा : हाँ दीदी आप चटवा के देखो आपको मस्त मज़ा आ जाएगा।
राज बोला: माँ चलो ना एक राउंड और करते हैं।
नमिता: अरे थोड़ा साँस तो लेने दे अभी तो खाना खाया है। एक काम करो पीछे एक जंगल है राज, इनको घुमा कर लाओ ना।
राज: ठीक है माँ , नदीम चलो घूम कर आते है । वहाँ कोई भी नहीं होता इसलिए कपड़ा भी पहनने की ज़रूरत नहीं है।
कमाल: मैं भी चलता हूँ।

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