राज उसको देखकर बहुत ख़ुश हुआ । वह माँ के लिए पानी लाया।
नमिता पानी पीती हुई बोली:बेटा पढ़ाई कहाँ तक पहुँची?
वह उसके बग़ल में बैठ गया और बोला: माँ क़रीब क़रीब एक बार कोर्स ख़त्म होने वाला है। रात से दोहराना शुरू कर दूँगा। माँ कल भी अच्छे नम्बर आएँगे। फिर इनको ख़ूब चूसूँगा। उसने नमिता को गोद में गिरा लिया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए बोला।
नमिता भी चुदायी देख कर आयी थी और गरम भी थी। उसने उसकी गोद में लेटे हुए अपने गाल पर उसके लौड़े का अहसास किया और उसकी बुर खुजाने लगी।
अब राज ने उसकी साड़ी का पल्लू गिराया और उसके ब्लाउस के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। फिर उसने उसका ब्लाउस खोला और उसकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से दबा कर मस्त हो गया। उसका लौड़ा झटका मारने लगा।अब उसने उसकी बाहँ उठाया और उसकी बग़ल सूँघा और चाटा । फिर उसने दूसरी बाँह उठाके उसको भी सूँघा और चाटा। वह बोला: माँ आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मादक गंध है आपके पसीने की। प्लीज़ थूक भी निकालो ना जैसे सुबह निकाले था मुझे चाटना है।
नमिता ने अपने मुँह से थूक निकाला और राज झुक कर उसे चाटने लगा और फिर माँ के होंठ भी चूस लिया। नमिता बहुत गरम हो चुकी थी उसकी बुर गीली ही गई थी। वह अपना हाथ साड़ी के ऊपर से अपने बुर पर लेज़ाकर खुजा दी।
राज ने देखा तो बोला: माँ मैं खुजा दूँ?
नमिता हँसते हुए उसको एक चपत मारी और बोली: चल हट, नालायक कहीं का।
राज: माँ मेरी एक बात मानोगी?
नमिता: बोल क्या बात है?
राज: माँ आपके मुँह से गन्दी बात सुनकर मस्त होना चाहता हूँ।
नमिता: मतलब?
राज: जैसे माँ इसको आप किस नाम से बुलाओगी? उसने अपने लौड़े की तरफ़ इशारा किया।
नमिता: ये कैसा सवाल है? ये यो मेरे बेटे का प्यारा सा हथियार है।
ये कहते हुए वह उसे सहला दी और दबा दी।
राज: नहीं नहीं आप इसको उसके असली नाम से बुलाओ ना।
नमिता उसके लंड को दबाते हुए बोली: अच्छा , लंड । बस हो गया ख़ुश?
राज: माँ और भी एक नाम है ना?
नमिता: आह लौड़ा , बस अब ख़ुश?
राज: और माँ इसका क्या नाम है? उसने उसकी बुर को पेटिकोट के ऊपर से इशारा करके कहा।
नमिता: आह, चूत या बुर ।
राज: और उसके नीचे वाले छेद को?
नमिता: गाँड़।
राज : आऽऽऽऽऽऽह माँ आपके मुँह से ये शब्द बड़े उत्तेजित करते है मुझे।
राज उसकी चुचि दबाके बोला: और ये?
नमिता: चुचि ।
राज: माँ ये बताओ जब हम सेक्स करते है तब उसको क्या बोलते हैं?
नमिता: चुदाई।
राज : आऽऽह्ह्ह्ह्ह माँ आऽऽऽऽऽप बहुत अच्छी हो। कहते हुए उसकी गर्दन और चुचि चूमने लगा।राज अब उसकी ब्रा मेंक़ैद चुचि दबाकर बहुत उत्तेजित हो गया था ।
वह बोला: माँ उठो अब मेरा रस निकाल दो बहुत इच्छा हो रही है।
नमिता उठी तो राज ने उसकी साड़ी उतार दी, ब्लाउस तो पहले ही खुला हुआ था । अब वह चूतरों को सहलाकर पैंटी को ऊपर से ही छूकर बोला: माँ पैंटी भी उतार दो ना, प्लीज़।
नमिता चुपचाप आधा पेटिकोट उठाकर अपनी पैंटी भी निकाल दी जिसको उसके हाथ से लेकर राज फिर से सूँघने लगा।
वह बोला: माँ क्या मस्त गंध है। आपके बुर की, आऽऽऽह ।
अब वह भी खड़ा हुआ और नमिता ने उसका लोअर उतार दिया। अब चड्डी में उसका फूला हुआ बड़ा सा लौड़ा बहुत ही कामुक दिख रहा था। नमिता ने उसकी चड्डी में एक बड़ा सा धब्बा देखा और उसकी चड्डी उतार दी।
राज: माँ आप भी मेरी चड्डी सूँघो ना, प्लीज़।
नमिता हैरानी से उसको देखी पर बिना कुछ बोले उसकी चड्डी सूंघी और राज को दिखाकर उसकी चड्डी में लगा प्रीकम भी चाट ली।
राज का लौड़ा ऊपर नीचे होने लगा। वह आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह माँ क्या करूँ इसका कहके अपना लौड़ा हिलाने लगा।
अब नमिता सोफ़े पर चढ़ गयी और चौपाया बन गयी और अपने चूतरों को पेटीकोट समेत उठाके राज को इशारा की। राज उसके पीछे अपना लौड़ा सेट किया और पेटिकोट के ऊपर से ही अपना लौड़ा उसकी गाँड़ वाले एरिया में रगड़ कर उत्तेजना से ह्म्म्म्म्म्म आऽऽऽहहह माँआऽऽऽऽ करके अपनी कमर हिला कर मस्त हो रहा था।
नमिता को भी उसका नंगा लौड़ा उसकी बुर के दाने clit पर और गाँड़ के छेद पर महसूस हो रहा था। वह भी पीछे से कमर हिलाकर अपनी उत्तेजना में पेटिकोट के ऊपर से ही मानो चुदवा रही थी। अब राज की हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से चूचियाँ भी मसल रहा थे। अचानक नमिता आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैं गईइइइइइइइइइ करके झड़ने लगी। उधर राज भी अपना लौड़ा उसके पिछवाड़े में रगड़ते हुए हाऽऽय्य्य्य्य माँआऽऽऽऽऽ कहकर झड़ गया और उसके पेटिकोट पर अपना रस उँडेल दिया।
थोड़ी देर हाँफने के बाद दोनों बाथरूम गए अपने अपने कमरों में और सफ़ाई करके बाहर आकर थोड़ा आराम किए।
फिर नमिता ने खाना लगाया और दोनों खाना खाए।
राज: माँ आज बहुत मज़ा आया, आपके साथ।
नमिता: तेरी हरकतें बढ़ती ही जी जा रही हैं।
राज: माँ अब तो बस आख़िरी हरकत का इंतज़ार है।
नमिता: अच्छा?
राज: माँ जब तक आपको चोदूँगा नहीं शांति थोड़े ना मिलेगी!
नमिता: ओह आजकल कितनी गन्दी बातें करने लगा है तू?
राज: माँ अब तो आप भी मेरे साथ गन्दी बातें करने लगी हो, सच जब आप ये सब बोलती हो ना तो मैं बहुत मस्ती से भर जाता हूँ।
नमिता: ख़ुद तो गंदा है ही मुझे भी गन्दी बना दिया।
राज खाना खा कर उठा और सोफ़े पर बैठ गया।
नमिता भी आकर उसके पास बैठने लगी तो उसने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। अब वह उसके गाल चूमने लगा।
वह बोला: माँ, सच बताओ आज मज़ा आया या नहीं?
नमिता: हाँ बहुत मज़ा आया। पर इसके आगे अभी और नहीं होगा, क्योंकि नियम नहीं तोड़ना है।
राज: ठीक है माँ । अच्छा अब जाता हूँ बहुत पढ़ना है अभी ताकि कल आपके नंगे मम्मों को चूस सकूँ।
नमिता: बदमाश कहीं का , चल जा अब । ये कहते हुए वह उठी और अपने कमरे में जाकर आराम करने लगी।
राज भी पढ़ने बैठ गया। उस दिन और रात को आगे कुछ नहीं हुआ। डिनर करके फिर से राज पढ़ने बैठ गया और नमिता भी सो गयी।
अगले दिन राज का दूसरा पेपर था वह भी फ़िज़िक्स का!
अगली सुबह नमिता जब चाय लेकर राज के कमरे में गयी तो वह बहुत ध्यान से पढ़ रहा था।
राज: गुड मोर्निंग माँ ।
नमिता: गुड मोर्निंग । उसने चाय रखकर उसके गाल चूमे और बोली: बेटा कब उठे?
राज: माँ सुबह ४ बजे।
नमिता: ओह तो चल चाय पी ले।
राज किताब पढ़ते हुए हो चाय पीने लगा।
नमिता: बेटा कोर्स दुहरा लिया क्या?
राज: बस माँ अभी हो जाएगा।
नमिता चुप चाप चाय पीकर उसको पढ़ता छोड़के वापस किचन में आ गई। और अपने काम मेंलग गयी।
नमिता ने राज को समय पर नाश्ते के लिए आवाज़ दी।
वह आया और किताब पढ़ते हुए ही नाश्ता करने लगा।
नमिता ने उसको बिलकुल डिस्टर्ब नहीं किया ।
बाद में राज जब स्कूल जाने लगा तो उसने उसे दही शक्कर खिलाया और प्यार करके विदा किया। राज जाते हुए थोड़ा सा गम्भीर दिख रहा था।
नमिता: क्या बात है बेटा, सब ठीक है? थोड़ा परेशान दिख रहा है?
राज : माँ कुछ नहीं , बस आज का पेपर थोड़ा कठिन है ना इसलिए थोड़ा चिंतित हूँ।
फिर फीकी हँसते हुए बोला: कहीं ईनाम हाथ से नहीं निकल जाए।
नमिता: बेटा, परेशान ना हो, अगर पेपर इतना कठिन है तो मैं तुझे थोड़ी छूट दे दूँगी। ईनाम तो तुझे मिलेगा ही। चल जा बिना तनाव के पेटर दे।
राज: सच माँ ईनाम मिलेगा अगर नम्बर थोड़े से ऊपर नीचे भी हो गए?
नमिता उसको प्यार की और उसके दोनों हाथ अपने ब्लाउस के ऊपर से अपनी छातियों पर रख कर बोली: हाँ बेटा , आज तुझे ये दे दूँगी चाहे थोड़े कम नम्बर ही क्यों ना आएँ । ठीक है? अब मज़े से जा और बिना परेशानी के पेपर दे के आ।
राज माँ की बात से खिल उठा और उसकी छातियाँ दबा कर बोला: थैंक्स माँ , आपने मेरा टेन्शन दूर कर दिया। अच्छा बाई।
नमिता भी उसको बाई कहकर अपने से लिपटा कर प्यार की और विदा की।
राज के जाने के बाद नमिता तय्यार हुई और ऑफ़िस को चली गयी।
ऑफ़िस में वह अपने काम में व्यस्त हो गयी। उसने साक्षी का पता किया तो पता चला कि वह आज आयी नहीं है।
उसने सोचा बेचारी गाय को उस बड़े साँड़ ने ज़बरदस्त तरीक़े से घायल किया है।
तभी सुधाकर का बुलावा आया कि साहब बुला रहे हैं।
वह उठकर उसके कैबिन में गयी। सुधाकर फ़ोन पर बात कर रहा था। वह बैठी और सुधाकर फ़ोन रख कर बोला: कलवाला ऑर्डर देख लिया?
नमिता: जी देख लिया है और सिस्टम में एंट्री भी कर दिया है।
सुधाकर: मैं तुम दोनों के कल के काम से बहुत ख़ुश हूँ।
नमिता: पर बेचारी साक्षी की हालत बहुत ख़राब हो गयी थी। वह तो पूरा साँड़ था।
सुधाकर: मुझे भी इसका कोई अन्दाज़ नहीं था क्योंकि मैं कभी उससे मिला नहीं हूँ। बस फ़ोन पर ही बात हुई थी। आज जब मेरी साक्षी से बात हुई तो वह बतायी कि उसने तो फाड़ ही दी है उसकी बुर।
नमिता: हाँ वह बहुत चिल्लायी थी।
सुधाकर: हाँ आज फिर मैं ऑफ़िस आने से पहले अभी उसी के घर से ही आ रहा हूँ। मैंने उसकी बुर देखी काफ़ी बुरी हालत में है। लगता है साले का लंड गधे के जितना बड़ा था।
नमिता: हाँ साक्षी की बात से तो ऐसा ही लगता है।
उसने ये नहीं बताया कि वह उसका १० इंचि देख चुकी है।
सुधाकर: साक्षी की बुर देखकर मैंने डॉक्टर बुलाया और उसने क्रीम दी है वह मैं अभी उसकी बुर में लगा के आ रहा हूँ।
सुधाकर हँसते हुए: हा हा , वह भी हो गयी। उसने बड़े प्यार से मेरा लौड़ा चूसा और पूरा रस पी लिया। इसी लिए तो इतना शांत बैठा हूँ। वैसे साक्षी बहुत अच्छा चूसती है।
नमिता: चलो आपको मज़ा आ गया ये बढ़िया हो गया।
सुधाकर: हाँ सो तो है। तुमने तो बहुत दिन से मेरा लौड़ा नहीं चूसा है अच्छे से?
नमिता: आपको छोटी उम्र की लौंडियाँ तो मिली हुई है, उनसे ही मज़ा लीजिए। अच्छा अब मैं जाती हूँ। अपना काम ख़त्म करके आज भी जल्दी जाऊँगी।
सुधाकर: हाँ हाँ कोई बात नहीं। चली जाना। पर ये तो बताओ आज पैंटी किस रंग की पहनी है?
नमिता: ये क्या बात हुई?
सुधाकर: प्लीज़ बताओ ना।
नमिता: काले रंग की।
सुधाकर: वाह ! गोरे रंग की जाँघों पर काली पैंटी तो ग़ज़ब ढा रही होगी। चलो ना ज़रा साड़ी उठाके दिखा दो एक मिनट के लिए।
नमिता हैरान होकर: क्या बच्चों जैसे बात कर रहे हैं?
सुधाकर: प्लीज़ प्लीज़ एक बार दिखा दो ना।
नमिता: दरवाज़ा खुला है, कोई आ गया तो?
वह: अरे बंद कर दो ना उसको ।’
नमिता ने दरवाज़ा बंद किया और अपनी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसको अपनी पैंटी दिखायी।
सुधाकर उसकी गोरी और गदरायी जाँघों के बीच काली पैंटी देख कर बहुत उत्तेजित हुआ और बोला: आऽऽऽह क्या मस्त माल है । अब ज़रा घूम कर पीछे का भी दिखाओ ना?
नमिता घूम गयी और उसके बड़े बड़े गोल गोल गोरे चूतरों में पैंटी को देखकर वह घायल ही हो गया।
वह बोला: आऽऽहहह क्या गाँड़ है । पर रानी तुम पीछे से सिर्फ़ एक पतली पट्टी वाली सेक्सी सी पैंटी क्यों नहीं पहनती? उसमें तुम्हारे पूरे चूतर नंगे दिखेंगे। इसमें तो आधे आधे छुप ही जाते हैं।
नमिता हँसते हुए बोली: आपने कभी लेकर दी है मुझे ऐसी पैंटी ? और हाँ ,अगर देखना हो गया हो तो साड़ी नीचे कर लूँ?
वह: हाँ नीचे कर लो। मैं तुम्हारे लिए एक से एक पैंटी और ब्रा लाउँगा रानी, पहनोगी ना?
नमिता: आपका काम तो इनको उतारने से होता है तो पहनाना क्यों चाहते हैं?
वह हँसते हुए : हा हा सच कहा। पहले पहनाओ और फिर उतारो।
नमिता ने दरवाज़ा खोला और चलती हूँ कहकर बाहर चली गयी।
नमिता अपने ऑफ़िस का काम निपटायी और बाहर निकली तभी बारिश होने लगी। वह सोची कि अभी राज को आने में एक घंटा है इसलिए वह शांति से खड़ी होकर बारिश के बंद होने का इंतज़ार करने लगी।
तभी एक कार आकर रुकी और उसमें उसकी पड़ोसन का पति बैठा था। वह कभी कभी उसको देखती थी आते जाते। वो राजन था और उसकी पत्नी कभी कभी उसके घर आती थी और वह भी कभी कभी उसके घर जाती थी। उनका एक बेटा भी था जो दसवीं में पढ़ता था जिसके लिए सुषमा याने राजन की बीवी परेशान रहती थी।
राजन: आइए भाभीजी आपको घर छोड़ दूँगा। मैं भी घर खाना खाने जा रहा हूँ।
नमिता थोड़ा संकोच की फिर सोची कि आख़िर पड़ोसी है क्या हर्ज है लिफ़्ट लेने में?
वह आकर उसकी बग़ल वाली सीट में बैठ गयी।
राजन ने कार आगे बढ़ाई।
नमिता ने नोटिस किया कि वह उसकी छातियों को चोरी से देख रहा है बीच बीच में । उसने आह भरी सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। उसकी अच्छी ख़ासी बीवी है पर वह है कि उसको लाइन मार रहा है।
नमिता ने साड़ी ठीक को और अपनी छातियाँ पूरी ढक ली।
राजन: राज की पढ़ाई कैसी चल रही है।
नमिता: बहुत अच्छा कर रहा है वह आजकल ।
राजन: हमारा बेटा राजू तो पढ़ता ही नहीं। उसका ध्यान यहाँ वहाँ ही भटकता रहता है।
नमिता: इस उम्र में बच्चे थोड़ा बहक जाते हैं उनका ध्यान रखना पड़ता है।
राजन: हाँ सही कहा भाभीजी आपने।
नमिता: सुषमा उस दिन काफ़ी परेशान थी , उसकी पढ़ाई के लिए।
राजन: वह पढ़ाई में कभी भी बहुत अच्छा नहीं था पर पास तो हो जाता था, आजकल तो वह सभी टेस्ट में फ़ेल हो रहा है।
नमिता: हाँ इस उम्र में मोबाइल है और इंटर्नेट और सोशल मीडिया भी इनको भड़काने का काम करता है। मैंने तो अभी तक राज को मोबाइल दिलाया ही नहीं है।
राजन: अरे ये तो मोबाइल और लैप्टॉप सब लेकर रखा है।
नमिता: फिर तो आपको इसका और ध्यान रखना होगा।
राजन: जी हाँ सही कहा आपने। चलिए घर आ गया ।
नमिता उसको धन्यवाद देकर जाने लगी। तो वह बोला: भाभीजी क्या आपके पास कुछ समय होगा आज?
नमिता: जी क्या हुआ?
राजन: मैं आपको अभी फ़ोन करूँगा और हो सका तो आपके आप सुषमा के साथ आऊँगा ।
नमिता: ओह ठीक है। अभी राज को आने में क़रीब ४० मिनट हैं।
अब वह दोनों अपने अपने घर चले गए।
अभी नमिता फ़्रेश बाई हुई थी कि सुषमा का फ़ोन आ गया।
सुषमा: नमिता, मैं और राजन थोड़ी देर के लिए आ जाएँ क्या?
नमिता: हाँ क्यों नहीं। आ जाओ।
सुषमा: थैंक्स करके फ़ोन काट दी।
पाँच मिनट बाद वो दोनों नमिता के साथ ही बैठे थे।
नमिता: क्या हुआ सुषमा , आप दोनों परेशान लग रहे हो ?
सुषमा: अब क्या बोलूँ? बोलने में भी हिचक हो रही है।
नमिता: ऐसा क्या हो गया? बोलो ना जो भी मन में है।
राजन: असल में क्या है पिछले कुछ दिनों में हमें जो भी हमारे बेटे के बारे में पता चला है उसने हमें हिला दिया है।
नमिता: ऐसा क्या पता चला है आपको?
राजन: हमने नोटिस किया था कि पिछले एक दो महीने से वह ज़्यादा समय लैप्टॉप पर ही लगाता था। वह शाम को भी खेलने नहीं जाता था। मुझे लगा कि कहीं पोर्न साइट पर तो नहीं जाता है इसलिए मैंने उसका लैप्टॉप माँगा और चेक भी किया पर शायद वह हिस्ट्री डिलीट कर देता था इसलिए मैं कुछ ख़ास पता नहीं कर पाया।
फिर भी मैंने उसपर नज़र रखने का सोचा था।
फिर एक हादसा हुआ और हम लोग हैरान रह गए।
सुषमा: असल में तीन चार दिन पहले मैं सीढ़ियों से गिर गयी। राजू उस समय घर पर ही था। वो भाग कर आया और मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लेटा दिया और इनको फ़ोन लगाया। ये अभी पास ही थे सो वापस आ गए। इन्होंने कहा है मैं दर्द की क्रीम लाता हूँ और किचन के एक दवाई के बॉक्स में चेक किए। तभी इनको याद आया कि दवाई तो राजू के कमरे में है क्योंकि उसको कुछ दिन पहले चोट लगी थी तब वह लेकर गया था।
राजन: मैं जब उसके कमरे में पहुँचा तो मुझे दवाई मिल गयी। पर उस समय उसका लैप्टॉप चालू था। शायद अपनी माँ के गिरने की आवाज़ सुनकर वह भाग कर बाहर आया था। इसी हड़बड़ी में लैप्टॉप खुला रह गया था।
मैंने लैप्टॉप में सुषमा की एक फ़ोटो देखी जिसमें वह पूरी नंगी थी। मैंने ध्यान से देखा कि सिर तो उसका था पर बदन किसी और का था। मैं तो सन्न रह गया कि आख़िर इस लड़के के दिमाग़ में चल क्या रहा है
नमिता: ओह ये तो बड़ी अजीब हरकत है।
राजन: वही तो, अब मैं थोड़ा सा परेशान हुआ और मैंने कई विडीओ शॉर्ट कट देखे , जब उनको क्लिक किया तो मैं तो पागल ही हो गया।
नमिता: क्या था उन विडीओ में ?
सुषमा: अब क्या बताऊँ उस नालायक ने मेरे नहाते हुए का विडीओ बनाया हुआ था। और तो और हमारे बेडरूम में भी कैमरा लगा कर हमारी सेक्स की भी विडीओ बनाकर रखा हुआ था।
राजन: मेरा तो सिर ही घूम गया कि ये कैसा लड़का है जो अपनी माँ को नंगी नहाते हुए देख रहा है और अपने माँ बाप को सेक्स करते हुए देख रहा है। मेरा ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था और मैं नीचे आया तो देखा कि वह अपनी माँ की टाँग की चोट पर बर्फ़ लगा रहा था और इतनी भोली शक्ल बना रखी थी कि कोई सोच भी नहीं सकता कि वह इतना कमीना लड़का है।
नमिता: फिर आपने क्या किया?
राजन: मैंने उसको उठाया और बाथरूम में जाकर एक कैम ढूँढा और फिर बेडरूम में भी एक कैम ढूँढा और उसको एक थप्पड़ लगाकर पूछा कि ये सब क्या है?
वह रोने लगा और बाद में ये पता चला कि उसको इंटर्नेट से ये ख़याल आया कि इस तरह कैम लगाकर अपने माँ बाप की सेक्स विडीओ बनायी जा सकती है।
वह कुछ लड़कों से चैट किया था और वो उसको बताए थे कि वो भी ऐसा करते हैं।
सुषमा: जब इन्होंने मुझे ये सब बताया तो मेरे तो पैर से ज़मीन ही निकल गयी थी। बहुत समय लगा मुझे सामान्य होने में । मैंने तो उससे १० दिन बात ही नहीं की थी।
नमिता: ओह, अब क्या करता है वह दिन भर? स्कूल जाता है या नहीं?
सुषमा: इन्होंने उसका लैप्टॉप छीन लिया है। और वह बस हर समय अपने कमरे में ही रहता है पागल सा हुआ जा रहा है।
नमिता: ओह, मुझे लगता है उसे एक मनोवैज्ञानिक की ज़रूरत है। आप उसको डॉक्टर गुप्ता को दिखाइए । वह ज़रूर कोई हल निकाल देगा।
सुषमा: तुम उनको कैसे जानती हो?
नमिता हकला सी गयी, वह उनको राज के बारे में सब नहीं बताना चाहती थी। वह बोली: वह मेरे परिचित हैं और आप चाहो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ।
सुषमा: हाँ प्लीज़ करो ना।
नमिता उठकर थोड़ी दूर चली गयी क्योंकि उसको पता था कि वह उससे अश्लील बातें भी कर सकता है। उसने फ़ोन लगाया।
गुप्ता: हेलो, जानू कैसी हो?
नमिता: सर अभी मैं अकेली नहीं हूँ। आप मेरी बात ध्यान से सुनिए।
गुप्ता: अरे हम तो तुम्हारी सब बात ध्यान से ही सुनते हैं , तुम ही हो कि हमारा ध्यान नहीं रखती। देखो अब भी लंड सहला रहे है तुमको याद करके।
नमिता: सुनिए तो मैं आपके पास एक केस भेज रही हूँ । फिर वह उसको थोड़ा सा संक्षेप में राजू के बारे में बतायी।
गुप्ता: ओह तो ठीक है उनको बोलो कि वह तीनों कल दस बजे मेरे क्लीनिक में आ जाएँ। और राज कैसा है?
नमिता: वह अब बहुत ठीक है, मैं आपसे बाद में बात करूँगी। बाई।
अब नमिता राजन और सुषमा को बोली: आप तीनो कल १० बजे उनसे मिलो और उनको सब कुछ साफ़ साफ़ बता दो। वह कोई ना कोई हल निकाल देंगे।
अब वो दोनों उसको थैंक्स कहकर चले गए।
नमिता ने देखा कि राज के आने में अब १५ मिनट हो रह गए थे।
वह अपने कमरे में गयी और अपनी साड़ी उतार दी और पैंटी भी उतार दी। फिर उसने ब्लाउस और पेटिकोट मेंख़ुद को देखा और सोचने लगी कि आज ती राज उसकी चूचियों का बुरा हाल ही कर देगा। वह राजू और राज की तुलना करने लगी। उसने सोचा कि आह क्या ज़माना आ गया है?
फिर वह सोचने लगी कि राज आज थोड़ा सा नर्वस दिख रहा था पता नहीं उसका पेपर कैसा हुआ होगा।
उसने सोचा कि अगर थोड़ा कम नम्बर भी आए तो भी वह उसे अपनी चूचियाँ दे ही देगी मज़ा लेने के लिए। उसने सोचा कि कम से कम वह राजू से तो बेहतर है।
आज पता नहीं वह कैसे मूड में होगा और पता नहीं चूचियाँ पीने के बाद वह अपना संयम तो नहीं खो देगा और उसे चोद तो नहीं डालेगा। फिर वह सोची कि उसे राज से आख़िर में चुदवाना तो है ही फिर क्या फ़र्क़ पड़ता है कि आज चुदवाऊँ या कुछ दिन बाद।
यह सोचकर उसकी बुर गरम हो गयी। वह पेटिकोट के ऊपर से बुर खुजाने लगी।
पर वह फिर से सोची कि ये जो वह अपने आप और राज पर बंधन लगा रही है , आख़िर उसकी ही भलाई के लिए है। उसने सोच लिया कि नहीं वह नहीं चुदवायेगी आज किसी भी हालत में। उसे राज को अपना बदन आख़िरी पेपर के बाद ही देना होगा। वरना वह हर समय बस उसे चोदने की फ़िराक़ में ही रहेगा और पढ़ाई नहीं कर पाएगा।
उसने अपने मन को मनाया और उसके आने का इंतज़ार करने लगी।
तभी दरवाज़ा खुला और राज अंदर आया—————
राज आकर माँ के सामने घुटनों पर बैठ गया और उसके पेट में अपना मुँह घुसा दिया, और बोला: ख़ुशी की बात ही है। देखो मेरा बैग खोलकर पेपर ऊपर ही रखा है।
नमिता ने बैग खोला और सामने रखे पेपर को निकाला और उसको देखी और उसकी आँखें फट गयीं। २४/२५ यानी की ९६% !!!
वह ख़ुशी से झूम उठी और नीचे झुककर उसके पेट मेंघुसे हुए अपने बेटे के गाल और गर्दन और उसका सिर चूमने लगी।
वह बोली: बेटा आज मैं बहुत ख़ुश हूँ । सच अब मुझे विश्वास हो गया है कि तुम मेरा और अपने पापा का सपना ज़रूर पूरा करोगे। शाबाश मेरे बेटे। मुझे तुम पर गर्व है।
वह और ज़ोर से उससे लिपट गयी और उसको चूमे ही जा रही थी ।
राज ने अपना सिर उसके गोद से उठाया और उसकी आँखों में देख कर बोला: माँ आपको इतना ख़ुश मैंने बहुत दिन बाद देखा है। सच मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
नमिता: हाँ बेटा आज मैं बहुत ख़ुश हूँ।
अब राज ने अपना मुँह उसकी गोद में नीचे की ओर घुसा दिया और उसकी जाँघों को फैला दिया पेटिकोट के ऊपर से उसकी बुर की जगह में अपना मुँह डाल दिया और बोला: माँ फिर अपनी बुर दे दो ना आज प्लीज़, बहुत मन कर रहा है इसको देखने चूमने और चोदने का।
नमिता: चल हट बदमाश कहीं का, कोई नियम नहीं टूटेगा। समझा आज जो मिलना है वही मिलेगा।
राज आँख मारकर बोला: माँ क्या मिलेगा आज?
नमिता ने उसका हाथ अपनी छाती पर रख कर कहा: आज ये मिलेगा तुझे ।
राज थोड़ा ऊपर होकर उसकी आँखो में देखकर बोला: माँ ये क्या नाम बोलो ना?
नमिता: बदमाश, तू नहीं सुधरेगा। चल चूचियाँ मिलेंगी आज तुझे बस, अब ख़ुश?
राज हँसता हुआ खड़ा हुआ तो उसकी पैंट सामने से बहुत फुली हुई दिख रही थी।
वह बोला: माँ देखो क्या हाल है मेरे लौड़े का? इसको आराम दे दो ना।
नमिता ने उसके पैंट के ऊपर से लौड़े को पकड़ा और बोली: बेचारा इस तंग जगह में फंसा हुआ है। इसको बाहर निकालने से ही आराम मिलेगा। यह कहकर वह उसकी बेल्ट खोलने लगी और फिर उसने उसकी पैंट उतार दी और अब वह चड्डी में था और उसका खड़ा लौड़ा उसमें से बहुत कामुक दृश्य दिखा रहा था। नमिता ने लौड़े को चड्डी के अंदर हाथ डालकर टेढ़ा किया और फिर चड्डी उतार दी। उसका लौड़ा अब उसके सामने झटके मारते हुए ऊपर नीचे हो रहा था।
नमिता ने पूरा लंड अपने हाथ में लेकर उसके हर हिस्से को सहला कर महसूस किया और उसके भारी बॉल्ज़ भी हथेली में कप बनाकर उनको पकड़कर सहलायी । राज अपने हाथ को कमर में रख कर अपनी माँ की हरकतों को देखकर मस्ती से भरे जा रहा था।
राज: माँ लौड़ा चूस नहीं सकती तो क्या हुआ उसकी मिट्ठि तो ले सकती हो।
नमिता ने उसके लौड़े को सहलाते हुए राज की आँखों मेंदेखा और बोली: हम्म आज के नम्बर को देखते हुए ये तो बनता है बेटा।
अब वह उसके लंड को ऊपर उसके पेट की ओर झुका दी और उसके गोरे मोटे हिस्से को पूरी लम्बाई में छोटे चुम्बन देने लगी और नीचे से ऊपर की ओर चूमती गयी। फिर ऊपर से नीचे तक चूमती हुई वापस आयी और उसके बॉल्ज़ भी चूमने लगी।
राज के लिए यह दृश्य दुनिया का सबसे उत्तेजित करने वाला दृश्य था वह आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽऽऽ कहकर अपनी कमर हिलाने लगा। तभी नमिता ने देखा कि उसके सुपाडे पर छेद पर एक सफ़ेद सी बूँद प्री कम चमक रही थी। वह अब उसके सुपाडे को चूमती हुई उस बूँद को अपने मुँह में लेकर निगल गयी। अब उसकी बुर पूरी तरह गीली हो गयी थी। उसके निपल्ज़ भी अब कड़क हो उठे थे।
अब वह अपना मुँह उसके लंड से हटायी और बोली: ठीक है बस?
राज झुक कर अपने माँ के होंठ चूम लिया और बोला: आऽऽऽऽह माँ बहुत अच्छा लगा, थैंक्स।
फिर वह माँ को अपनी गोद में उठाकर नमिता के बेडरूम में ले गया और उसको बिस्तर पर लिटा दिया। अब वह अपनी क़मीज़ भी खोल कर पूरा नंगा हो गया। फिर वह नमिता के बग़ल में लेट गया और नमिता के आधे शरीर के ऊपर अपना मुँह रख कर उसके पेट को चूमने लगा। नमिता भी उसके बालों पर उँगलियाँ फेर रही थी।
अब वह उसके ब्लाउस भी उतारने लगा। नमिता ने हाथ उठाकर उसको ब्लाउस निकालने में उसकी मदद की। वह नमिता की नयी सेक्सी ब्रा से ख़ुश हो गया और बोला: माँ ये मेरे लिए ही पहनी है ना?
नमिता: और किसके लिए पहनूँगी?
राज ने उसकी बाहँ उठायी और उसकी बग़ल चूमने लगा। बारी बारी से उसकी बग़ल सूंघकर और चाट कर वो मदमस्त हो चला था।
अब वह उसको बोला: माँ ज़रा पेट के बल लेट जाओ ना। नमिता उसको देख कर बोली: क्या इरादा है?
राज हँसते हुए: कुछ ख़ास नहीं, सब नियम के अंदर।
नमिता पलट कर पेट के बल लेट गयी। अब राज उसकी नंगी और गुदाज पीठ को सहलाने लगा और बोला: माँ मुझसे मालिश करवा लिया करो जब आप थक जाया करो।
नमिता: ह्म्म्म्म्म तू मालिश के साथ साथ क्या क्या करेगा मुझे अच्छे से पता है।
राज हँसने लगा और उसकी पीठ को चूमने लगा। गर्दन से लेकर नीचे उसकी चूतरों के उभरे हुए हिस्से तक उसके होंठ घूम रहे थे। फिर उसने पेटिकोट के ऊपर से उसके बड़े चूतरों को दबाना चालू किया जैसे आटा गूँथ रहा हो। नमिता की आऽऽहहह निकल गयी।
अब वह नीचे पैरों के अँगूठों को चूसने लगा । नमिता झटके से आह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। अब राज के होंठ इंच दर इंच उसकी टांगों को चूमते हुए ऊपर जांने लगे। जब वह पिंडलियों से होकर उसके घुटनों तक पहुँचा तब नमिता ने उसको कहा: सुनो मेरे पेटिकोट को मोड़ लो मेरी जाँघों तक नहीं तो तुम नियम तोड़ दोगे।
राज: ठीक है आप अपना चूतर उठाओ । जब वह चूतर उठायी तब उसने उसके पेटीकोट को मोड़कर उसकी ऊपरी जाँघों के बीच फँसा दिया। अब नमिता ने कमर नीचे कर दिया। राज अब उसकी जाँघों को चूम रहा था और गदराये हुए मांसल बदन का आनंद लेने लगा। अब वह पेटकोट के ऊपर से उसके चूतरों को मसलने लगा, और एक हाथ उसकी दरार में डाल दिया । नमिता: हाऽऽऽऽऽऽऽयहय क्या कर रहा है? हाऽऽऽथ निकाऽऽऽऽऽल वहाँ से उइइइइइइइइओओ।
राज ने अपनी उँगलियाँ उसकी बुर और गाँड़ में पेटिकोट के ऊपर से दबा दिया और उसकी उँगलियाँ पेटिकोट मेंलगे गीले रस से गीली हो गई। वह उनको चाट कर बोला: माँ आपकी पेटिकोट में आपके बुर का रस लगा है , मैं उसे चाट रहा हूँ।
नमिता: आह्ह्ह्ह्ह्ह बस कर , अब ऊपर आ जा।
राज: अच्छा चलो अब पलटो और पीठ के बल लेट जाओ।
नमिता जल्दी से पलट गयी क्योंकि उसकी बुर की खुजली बहुत बढ़ गयी थी। अब राज उसके ऊपर आ गया और उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा।
राज: माँ अब इस ख़ज़ाने के दर्शन कर लूँ? वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए बोला।
नमिता: आऽऽऽऽहहह हाँ कर ले।
अब राज ने अपना हाथ पीछे लेज़ाकर उसकी ब्रा के हुक खोले।
नमिता भी साँस रोक कर उसकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगी।
अब राज ने ब्रा को उतरा और नमिता के बड़े बड़े गोरे दूध जिनके आगे काले बड़े लम्बे निपल थे उसकी आँखों के सामने थे।
फिर उसने अपना दोनों हाथ उनपर रखा और उनके सॉफ़्ट्नेस को महसूस किया । आह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त चूचियाँ थीं बड़ी बड़ी बिलकुल नरम और साथ ही फ़र्म भी। कहीं कोई कमी नहीं थी इन चूचियों में।
अब वह उनको दबाकर उन्हें महसूस कर रहा था और माँ को देख रहा था किउसकी आँखें भी मज़े से मुंदी सी जा रही थीं। फिर उसने निप्पल को मसला। अब नमिता हाऽऽऽऽऽऽयय्यय करके उससे लिपटने लगी। जब वह उनको जी भर कर मसल लिया तो उसने उसकी एक चुचि को हाथ में लिया और बोला: माँ देखो आपके दुद्दु मेरे हाथ मेंही नहीं आ रहे हैं ,अब मैं इसको वैसे ही पी लूँ जैसे जब मैं छोटा था तब पिया करता था?
नमिता: आह्ह्ह्ह्ह हाँ पी ले।
राज : माँ आप उठकर बैठो और अपने हाथ से मुझे वैसे ही पिलाओ जैसे तब पिलाती थी जब मैं छोटा था।
नमिता भी अब बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और वह उठ बैठी और राज उसकी गोद में लेट गया और अब नमिता ने झुक कर उसका मुँह चूमा और फिर अपने एक स्तन को अपने हाथ मेंलेकर उसके निपल को राज के मुँह में दिया। राज का लौड़ा झटके मारने लगा।
वह उसकी चुचि को मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर वह दूसरी चुचि दबाकर मस्त हो गया।नमिता उसके लौड़े को सहलाने लगी । थोड़ी देर चूसने के नाद नमिता ने अपना दूसर स्तन भी उसके मुँह में दिया, जिसे वह चूसने लगा। नमिता की भी हालत बहुत ख़राब हो रही थी । उसकी बुर पानी छोड़े जा रही थी। उसने खुलेआम अपना एक हाथ उसके सिर को अपनी गोद से एक तरफ़ को हटाया और अपनी बुर खुजाने लगी।
राज समझ गया कि वह बहुत उत्तेजित हो चुकी है, इसलिए वह उसको पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर आकर उसकी चूचियों को चूसने लगा। अब वो एक हाथ से एक चुचि दबा रहा था और दूसरी को चूस रहा था। उसका लौड़ा पेटिकोट के ऊपर से उसकी बुर को ठोकर मार रहा था । उसने नमिता की टाँगें फैलाकर उसके बीच में अपना लौड़ा रखा और उसको पेटिकोट के ऊपर से ही रगड़ने लगा।
नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह हाय्य्य्य्य्य्य चिल्ला रही थी।वह राज के चूतरों को दबाने लगी। राज मी कमर हिलाये जा रही थी। उसकी चुचि पीकर राज भी मस्त हो गया था और जल्दी ही आऽऽहहह ह्म्म्म्म्म्म करने लगा।
अब नमिता भी झड़ने के क़रीब आ गयी थी। वह चिल्लायी : आऽऽऽऽऽऽह उइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽ मैं झड़ीइइइइइइइइइइइ ।
राज भी हाँन्न्न्न्न्न्न्न माँआऽऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगा।
उसका रस उसके पेटिकोट को भर गया और नमिता का भी रस उसके पेटिकोट को भीगा गया। नतीजा ये हुआ कि पेटिकोट नीचे से पूरा कामरस से भीग गया था।
अब राज भी उसकी बग़ल में लेट गया। नमिता भी अब राज के लौड़े को सहलायी और देखी किवह अभी भी खड़ा था । उसने उस पर हाथ फेरा तो उसकी उँगलियाँ उसके चिपचिपे रस से बजे गयी। अब वह राज के सामने ही अपनी ऊँगली चाटने लगी। राज को बड़ी ख़ुशी मिली ये देख कर कि वह उसे इतना प्यार करती है कि उसका रस भी चाट रही है।
फिर वह उठी और बाथरूम में जाकर कोमोड पर बैठी तभी राज अंदर आ गया और बोला: माँ मैं आपको सु सु करते देखना चाहता हूँ।
नमिता: नहीं नियम नहीं टूटेगा। थोड़ी दिन और इंतज़ार कर ले।
तभी वह बोला: अच्छा सु सु करो , आवाज़ तो सुन लेने दो ।
नमिता की सु सु निकलने लगी। उसकी सीटी सी आवाज़ निकलने लगी। जिसको सुन कर राज बहुत उत्तेजित हो गया।
फिर वह उठी और अपना पेटिकोट उपर करके नाड़ा बाँध ली।
राज: माँ पेटिकोट तो बदल लो पूरा गीला हो गया है।
नमिता: तेरे जाने के बाद बदलूँगी नहीं तो तू पता नहीं क्या करेगा।
राज उसके कोमोड से उठने के बाद ख़ुद मूतने लगा और नमिता को बोला: माँ मुझे ही सु सु करा दो।
नमिता हँसते हुए उसके लौड़े को पकड़कर उसको सु सु कराने लगी।
राज भी अपनी माँ के नंगे दूध को सहलाने लगा सु सु करते हुए।
उसको सु सु कराके नमिता ने एक एक्स्पर्ट की भाँति उसका लौड़ा अच्छे से हिलायी और आख़री बूँद भी नीचे गिरा दी।
राज: माँ आप तो बड़ी अनुभवी लगती हो इस काम में भी।
नमिता हँसते हुए: तेरे पापा भी यह सब कुछ करवा चुके हैं।
राज: पापा और क्या क्या करवा चुके है। आपसे।
नमिता: सब करवा चुके हैं।
अच्छा अब चल बाहर जा, मैं भी कपड़े बदलूँगी और फिर खाना खाते है।
राज झुक कर उसकी चुचि चूसा और ठीक है कह कर वह चला गया।
नमिता ने अपना पेटिकोट बदला और सफ़ाई करके खाना लगाने लगी।
फिर ब्रा, ब्लाउस और पेटिकोट पहन कर वह खाना लगाने लगी। तभी राज भी आ गया और दोनों ने खाना खाया।
फिर राज पढ़ने चला गया और नमिता आराम करने लगी।
शाम को जब नमिता उठी तब वह किचन में जाकर चाय बनाई और राज के कमरे में गयी। वहाँ वह पढ़ने में मग्न था।
नमिता: चल बेटा अब चाय पी ले। वह उसको चाय देते हुए बोली।
राज ने अपना सिर किताब से उठा कर माँ को देखा कि वह ब्लाउस और पेटिकोट में है।
उसने माँ के चूतरों पर अपना पंजा जमा दिया और उसको सहलाते हुए बोला: माँ बिना पैंटी के आपके चूतरों को सहलाने में बहुत मज़ा आता है।
नमिता: अच्छा और क्या क्या करने में तुझे बहुत मज़ा आता है?
राज: आपके मम्मे चूसने में भी।
नमिता: आज दोपहर को इनको चूस चूस करके लाल तो कर दिया है तूने, बदमाश कहीं का।
राज: माँ फिर से वही बदमाशी करने की इच्छा हो रही है।
नमिता: चल हट, अभी पढ़ाई कर , रात को सोने के पहले फिर मस्ती कर लेना। वैसे परसों कौन सा पेपर है तेरा?
राज: केमिस्ट्री है और आपका टार्गट ८५% है, याद है ना अगर इतने आ गए तो आप सिर्फ़ पैंटी में मेरे सामने आएँगी।
नमिता हँसते हुए: हाँ याद है। और मुझे पक्का विश्वास है कि मेरा बेटा अच्छे नम्बर ज़रूर ही लाएगा।
राज: माँ वो तो लाना ही है क्योंकि आपको पैंटी में देख कर आपकी बुर को पैंटी के ऊपर से छू कर और सूंघ कर मदहोश जो होना है।
राज या सब बोलते हुए उसके चूतरों को दबा रहा था। अचानक उसने उसकी चूतरों के दरार में अपना हाथ डाल दिया और उसकी बुर और गाँड़ को सहलाने लगा।
नमिता झटके से पीछे हटी और उसको एक चपत लगाई और बोली: तू और तेरी बदमाशी से मैं भर पायी। कहा ना अब रात को ही करना। चल पढ़ाई कर ले।
ये कह कर वह जाने लगी। तभी राज बोला: माँ एक मिनट, देखो मैं क़रीब २ घंटे से लगातार पढ़ रहा हूँ। तो मेरा कुछ मनोरंजन तो कर दो।
नमिता दरवाज़े के पास रुक गयी और बोली: कैसा मनोरंजन?
राज: माँ, आप बुर नहीं दिखाना चाहती तो कोई बात नहीं, पर अपने मस्त चूतर तो दिखा सकती हैं ना? प्लीज़ एक बार पेटिकोट उठा कर अपने पिछवाड़े का दर्शन तो करा दो।
नमिता: देख ये सब करूँगी तो फिर से तू उत्तेजित हो जाएगा और अपनी पढ़ाई से ध्यान हटा बैठेगा।
राज : नहीं माँ, अल्टा होगा , मैं फ़्रेश हो जाऊँगा और ज़्यादा मज़े से पढ़ूँगा।
नमिता: ओह, सच कह रहा है, तेरी पढ़ाई का हर्ज नहीं होगा?
राज: पक्का नहीं होगा।
नमिता: उफ़्फ़्फ तेरे से मैं कभी जीत नहीं सकती,बाबा। चल ले देख ले , पर बस एक झलक, ठीक है?
राज: माँ, उससे क्या फ़ायदा? दिखाना है तो अच्छे से दिखाओ, वरना मत दिखाओ।
नमिता: अच्छा चल २ मिनट , काफ़ी है देखने के लिए, ओके?
राज: ओके माँ , ठीक है।
अब नमिता घूम गयी और उसने अपना पेटिकोट ऊपर उठा दिया कमर से भी ऊपर। और राज के सामने बड़े बड़े मोटे गोल गोल बहुत गोरे मांस के पिंड थे, वह अपना लौड़ा रगड़ते हुए आँखें फाड़कर अपनी माँ का नंगा पिछवाड़ा देखे जा रहा था।
तभी वह बोला: आह्ह्ह्ह्ह माँ क्या चूतर है आपके? बहुत मस्त। माँ,प्लीज़ एक बार गाँड़ भी दिखा दो ना? प्लीज़, प्लीज़।
नमिता ने कहा: अब तू हद से ज़्यादा आगे नहीं बढ़ रहा है क्या?
राज: प्लीज़ माँ एक बार, चूतरों को फैलाओ ना, गाँड़ दिखाओ।
नमिता ने आह भरी और अपने दोनों हाथ अपने दोनों चूतरों पर रखा और उनको फैलाया और अपने गाँड़ के भूरे छेद को अपने बेटे को दिखाने लगी।
राज को लगा कि वह झड़ ही जाएगा। आऽऽऽहहहह क्या दृश्य था कि उसकी अपनी माँ अपने चूतरों को फैलाकर अपनी गाँड़ ख़ुद ही दिखा रही थी।
राज: आऽऽऽहहह माँ तुम्हारी गाँड़ कितनी सुंदर है। सच माँ बहुत बढ़िया माल हो आप।
नमिता ने अब अपना पेटिकोट नीचे गिरा दिया और बोली: नालायक अपनी माँ को माल बोलता है?
राज: माँ , माल को माल बोलने में क्या बुरायी है? अच्छा ये तो बताओ कि पापा आपकी गाँड़ मारते थे क्या?
नमिता: हाँ मारते थे, वह भी तेरी तरह इसके दीवाने थे।
चल अब पढ़ने बैठ जा । अगर नहीं पढ़ पाएगा तो मैं तेरी मूठ्ठ मार दूँ? उसने उसके लौड़े को देखते हुए कहा जिसे अब राज ने बाहर निकाल लिया था और मूठिया रहा था।
राज: नहीं माँ मैं अभी ठंडा पानी डाल कर इसको ठंडा करूँगा।
नमिता : चल ठीक है अब देख लिया ना? चल अब पढ़ने बैठ जा।
राज: हाँ माँ बस अभी बैठ जाऊँगा। लेकिन रात को सोने से पहले थोड़ा मज़ा करेंगे, ठीक है ना?
नमिता: ठीक है। कर लेना ,मैंने कौन सा मना किया है?
नमिता के जाने के बाद वह बाथरूम मैं जाकर ठंडे पानी से अपने लौड़े को शांत किया और फिर पढ़ने बैठ गया।
नमिता घर के काम में लग गयी और खाना बनाने लगी। तभी उसका मोबाइल बजा। सुषमा थी उसकी पड़ोसन।
नमिता: बोल सुषमा कैसी है?
सुषमा: ठीक हूँ। डॉक्टर गुप्ता से मिली थी उसिके बारे में बात करनी थी। मैं आ जाऊँ क्या?
नमिता: नहीं नहीं, राज घर पर है, तू अकेली है क्या?
सुषमा: हाँ मैं अकेली हूँ।
नमिता:मैं आती हूँ। फिर बात करेंगे।
थोड़ी देर बाद वह राज को बोली: मैं ज़रा पड़ोस से आती हूँ।
राज ने हाँ में सिर हिला दिया।
नमिता सुषमा के घर पहुँची और सोफ़े पर बैठ गयी।
नमिता: हाँ बोल क्या हुआ गुप्ता के यहाँ?
सुषमा: कल हम तीनों गए थे । वह पूरी बात सुना,राजू के बारे में और वह हमको कल फिर बुलाया है। ये कहकर कि कल वह ज़रा ज़्यादा समय लेगा।
नमिता: आज क्या बातें हुईं?
सुषमा: आज तो पहले मैं और राजू के पापा ही मिले । राजू को हमने बाहर बिठा दिया था। राजू के पापा ने उनको राजू की हरकतों के बारे में बताया कि कैसे वह मेरी नहाते हुए और हमारे बेडरूम की गंदी विडीओ बना रहा था। और कैसे उसका पढ़ाई से तो ध्यान ही हट गया था। तो गुप्ता बोले कि वह राजू से अभी हमारे सामने बात करेगा ।
नमिता: फिर?
सुषमा: फिर उसने राजू को भी अंदर बुलाया और राजू ने सब सच मान लिया कि उसने इंटर्नेट में चैट करके ये सब हरकतें की है।
नमिता: ओह, फिर क्या बोला गुप्ता?
सुषमा: उसने कल फिर बुलाया है। विस्तार से इस पर बात करेगा और वह भी सिर्फ़ राजू से । पता नहीं हमको क्यूँ बुलाया है?
नमिता: चलो कर लो कल का भी सेशन उसके साथ। शायद कोई रास्ता निकल ही आए।
फिर थोड़ी देर और बात करके नमिता अपने घर आ गयी।
नमिता को उत्सुकता हुई उसने गुप्ता को फ़ोन किया: हेलो कैसे हैं
गुप्ता: अरे बस तुमको याद करके लंड हिला रहे हैं।
नमिता: छी आप भी ना , बस हमेशा गंदी बात ही करते हैं। ये बताइए कि राजू और उसके माँ बाप से मिलने के बाद आपका क्या विचार है।
गुप्ता: ये तो कल पता चलेगा। कल हम राजू से अकेले मेंबात करेंगे। तुमको अगर सुनना है कि हमारी क्या बात हुई तो आ जाओ और सुन लो पूरी बात।
नमिता: मैं सुनकर क्या करूँगी?
गुप्ता: अरे सुनोगी तब तो समझोगी कि आजकल के लड़कों के दिमाग़ में क्या चल रहा है। शायद इससे तुमने अपने बेटे का मन समझने में भी मदद मिले।
नमिता: इसका राज से क्या सम्बंध?
गुप्ता: सम्बंध तो आज कल के लड़कों की मानसिकता से है। शायद तुम्हें कुछ ज़्यादा साफ़ दिखे आज के लड़कों की सोच और उनके समझने का अन्दाज़।
नमिता: ऐसा क्या? पर सुषमा को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा कि मैं उसके व्यक्तिगत मामलों में टाँग अड़ाऊँ।
गुप्ता: अरे उसको पता ही नहीं चलेगा। मैंने उनको ११ बजे बुलाया है, तुम १५ मिनट पहले आ जाना । बाक़ी का मैं संभाल लूँगा।
नमिता : ठीक है, हो सका तो मैं ज़रूर आऊँगी।
फिर उसने फ़ोन काट दिया।
अब उसने राज को खाना खाने को बुलाया और दोनों ने खाना खाया।
राज: माँ सुषमा आंटी क्या बोल रही थी?
नमिता: बेटा, हर घर की अपने परेशानियाँ होती हैं। उसका लड़का पढ़ने मेंशुरू से ही अच्छा नहीं है सो बेचारी परेशान रहती है।
राज: ओह, चलो मेरा तो हो गया , मैं पढ़ने जा रहा हूँ, पर सोने के पहले एक बार आऊँगा आपके दुद्दु पीने।
नमिता: ठीक है आ जाना।
राज: माँ आप आज मेरे लिए सिर्फ़ पेटिकोट पहन कर ही रहना। ऊपर से पूरी नंगी रहना।
नमिता: भाग यहाँ से , कुछ भी कहते रहता है।
राज उठकर नमिता को चूमा और पढ़ने चला गया।
नमिता अपना काम ख़त्म करके थोड़ी देर TV देखी फिर अपने कमरे में जाकर बाथरूम में गयी और फ़्रेश होकर उसने अपने आप को शीशे मैं देखा और सोचने लगी कि ऐसा आख़िर उसमें क्या है जो राज उसपे फ़िदा रहता है।
उसने ब्लाउस में कसे अपने बड़े कबूतरों को देखा और मुस्कुरा उठी। उसे राज की बात याद आइ कि वह बोल रहा था कि सिर्फ़ पेटिकोट में ही रहना।उसने अपना ब्लाउस उतारा और ब्रा में अपने कबूतरों को देख कर वह मस्त हो गयी। फिर उसने ब्रा भी उतार दी और अपनी चूचियों को देख कर मुस्करायी । ये ही तो उसके अंग हैं जिसपर उसका बेटा पूरा फ़िदा है। वह अब पेटिकोट भी उतार दी और और अपने नंगे बदन को देख कर ख़ुद ही मुग्ध हो गयी। उसका बिलकुल संतुलित भरा हुआ और गोरा शरीर उसके सामने चमक रहा था। उसके पेट में कहीं भी अतिरिक्त चरबी नहीं थी। उसका पेड़ू और उसने क़रीने से कटे हुए बाल जैसे उसकी बुर को चार चाँद लगा रहे थे। उसकी बुर का ऊपरी सिरा ही दिख रहा था। उसने अपने बुर पर हाथ रखा और उसके चिकनेपन के अहसास से वह मस्त हो गई। उसने अपने बुर के बालों को हमेशा साफ़ रखा था। अब वह घूमी और शीशे मेंअपनी चिकनी पीठ और अपने बड़े नितम्ब देखी और मुस्कुराती हुई सोची कि उसका बेटा इनका भी तो दीवाना है।
