अगली सुबह मैं उठके बाहर गया तो नानू तो अखबार पढ़ रहे थे। मम्मी नहाने गई थीं। रीना मौसी जॉगिंग करने गई थीं। प्रतिक्षा मौसी और सविता आंटी किचन में थीं। लेकिन राजीव मौसा और प्रिया मौसी कहीं दिख नहीं रहे थे। मैंने नानी से पूछा तो उन्होंने कहा कि वो बाज़ार से नाश्ता लेने गए हैं। उसके बाद मम्मी भी नहा के आ गई थीं।
अब मैं चला गया था फ्रेशन अप होने। थोड़ी देर बाद जब मैं आया तब राजीव मौसा और प्रिया मौसी भी नाश्ता लेकर आ गए थे और रीना मौसी भी अपनी एक्सरसाइज़ करके आ चुकी थीं और प्रतिक्षा मौसी भी चाय लेकर आ गई थीं। हम सब नाश्ता कर रहे थे। मैं सबको देख रहा था, सोच रहा था कि इतना कुछ होने के बाद भी सारे खुश हैं और उनको खुश देखके मैं खुश था। तभी मम्मी ने बोली:
माँ: कल ये भी आ जाएँगे।
मैं: पापा कल आ रहे हैं?
माँ: हाँ।
रीना: बढ़िया। फाइनली जीजू आएँगे।
नानी: हाँ जमाई जी से मिले हुए काफ़ी टाइम हो गया है।
मैं: वो तो होगा ही ना नानी। कितना टाइम हो गया।
प्रिया: वैसे उम… दीदी उम…
माँ: हाँ प्रिया बोल।
प्रिया: आपने जीजू को कुछ बताया क्या?
माँ: हाँ मैंने बताया। ये सब जो हुआ सब सुनके वो बहुत शॉक में थे। उनको यकीन ही नहीं हो रहा था।
मैं: वो तो होगा ही। हममें से ही किसी को यकीन नहीं हुआ था कि वो अजीत इतना कमीना इंसान होगा।
राजीव: सही में। पर सबसे अच्छी बात ये थी कि आरव था।
प्रिया: बिलकुल सही कहा आपने। आरव नहीं होता तो शायद ये सब कभी खत्म ही नहीं होता।
माँ: मैंने भी इनको बताया था। ये सुनके ये बहुत खुश हुए थे कि आरव ने इतना कुछ किया।
मैं: अब आप सब मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं। अब मैं अपनी फैमिली के लिए इतना नहीं कर सकता? और अगर आपको किसी को थैंक यू बोलना है तो राजीव मौसा को बोलो।
राजीव: मुझे! मुझे क्यों?
मैं: क्यों नहीं। मौसी के साथ इतना कुछ हुआ उसके बाद भी आपने मौसी का साथ नहीं छोड़ा था।
सविता: हाँ राजीव जी ये तो सही कह रहा है आरव।
राजीव: उसमें थैंक यू वाली क्या बात है। अगर मैं इसका साथ नहीं देता इसके बुरे समय में तो हमारी शादी का क्या मतलब था? और ऐसा भी नहीं था जो कुछ हुआ उसमें इसकी गलती थी।
प्रतिक्षा: दीदी आप लकी हो कि आपको राजीव जीजू जैसे पति मिले। नहीं तो…
मैं: मौसी मैंने बोला भूल जाओ उस आदमी के बारे में। मत बात करो। उसकी आपकी और हर्ट ही होगी।
सविता: आरव ठीक कह रहा है। भूल जा उस आदमी को। और मैं तो कहती हूँ जो हुआ उसे सब भूल जाओ। शादी का घर है। खुशियाँ मनाओ। वैसे भी शादी की डेट पास आ रही है। और शादी के घर में ऐसे मातम वाला माहौल नहीं रखते।
नानी: वही तो। कितनी देर से देख रही हूँ सब ऐसी बातें कर रहे हैं। चुपचाप अपना नाश्ता करो और शादी की तैयारियों में लगो। संगीत के लिए डांस प्रैक्टिस करो। शॉपिंग करनी है शॉपिंग करो। लेकिन खुशी रखो।
मैं: वही। अब सब खुश रहेंगे। कोई पुरानी बातें याद नहीं करेगा।
उसके बाद हम सबने नाश्ता किया और अपने-अपने काम में लग गए। लेकिन मेरे दिमाग में अब भी ये ही चल रहा था कि क्या मैं सबको साथ में चोद सकता हूँ। मैं बहुत सोच में पड़ गया। लेकिन अंततः मैंने ये तय कर लिया कि मैं सबको चोदूँगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन उसके लिए हमेशा की तरह मुझे सविता आंटी की मदद लगेगी और वो रंडी मेरी मदद करेगी नहीं लेकिन कोशिश करने में क्या जा रहा है। मैं सीधा मेरे कमरे में गया। वहाँ पे सविता आंटी मौजूद थीं। मैंने जाते ही कमरा बंद किया और सविता आंटी को मेरी बाहों में भरके चूमने लगा।
सविता: उम्म… आरव क्या कर रहा है?
मैं: काफ़ी टाइम से तुम्हारा स्वाद नहीं लिया। वही ले रहा हूँ।
सविता: लेकिन उम… आरव कोई देख लेगा।
मैं: कोई नहीं देखेगा। और थोड़ी ही देर की तो बात है।
सविता: ठीक है ठीक है। वैसे भी तू मानेगा नहीं।
उसके बाद मैं और आंटी एक-दूसरे को पागलों की तरह किस करने लगे।
मैं: आंटी मुझे ना आपकी मदद चाहिए।
ये सुनते ही उन्होंने मुझे धक्का दे दिया।
सविता: अच्छा बेटा अब समझी। इतना चिपक क्यों रहा है तू। मदद चाहिए किस काम के लिए चाहिए।
मैं: वो…
सविता: रुक मैं बताती हूँ। हम सबको साथ में चोदने के लिए मदद चाहिए है ना?
मैं: हाँ।
सविता: हाह्हा नहीं।
ये बोलके वो जाने लगी। मैंने उनको रोका।
मैं: आंटी आंटी आंटी रुको रुको प्लीज़ मेरी बात तो सुनो।
सविता: क्या बात सुनो कि तुझे सबको चोदना है साथ में। आरव कितने बेकार आइडिया। तुझे लगता है कि वो सब एक साथ चुदवाने के लिए मानेंगी?
मैं: मानेंगी। बिलकुल मानेंगी अगर हम मनाएँगे तो। देखो आप और मम्मी की तो कोई टेंशन नहीं है। मेरे को रही बात प्रतिक्षा मौसी और प्रिया मौसी की तो बस उनको थोड़ा सच बताना है और वो मान जाएँगी।
सविता: मान जाएँगी हलवा है ना।
मैं: हाँ हलवा ही है। सोचो तो सही। दोनों ने मेरे साथ सेक्स किया है। मना भी नहीं कर सकतीं और अपना सबके कैरेक्टर पे भी सवाल नहीं पूछ सकतीं क्योंकि खुद ने भी वही हरकत की है। और क्या बोलेंगी कि अपनी सगी बहनों के साथ नहीं सगे भांजे के साथ प्रॉब्लम नहीं हुई बहनों के साथ हो जाएगी? वाह मैं बोल रहा हूँ ना कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।
मेरी बात सुनके सविता आंटी थोड़ा सोच में पड़ गईं।
सविता: ठीक है चल इनकी तो कोई दिक्कत नहीं। रीना वो तो ऐसी नहीं है। उसका क्या करेगा?
मैं: उनके लिए ही तो आपकी मदद चाहिए। प्रतिक्षा मौसी और प्रिया मौसी को मैं बताता हूँ। जब तक आप रीना मौसी को पटाने का प्लान सोचो।
सविता: चल ठीक है। मान लिया। सब रेडी भी हो गए फिर भी सेक्स कहाँ करेंगे? घर पे अंकल, आंटी, तेरे पापा, राजीव जी सब होंगे।
मैं: उसकी टेंशन मत लो। उसके लिए प्लान है। लेकिन वो बाद में बताऊँगा। पहले सब रेडी करना होगा तो मैं प्रतिक्षा मौसी और प्रिया मौसी को देखता हूँ। आप जब तक रीना मौसी के लिए प्लान बनाओ।
सविता: ठीक है।
ये बोल के वो जाने लगी। जाते-जाते ही मैंने उनकी गांड पे चाँटा मारा।
मैं: सॉरी बेब। काफ़ी टाइम से नहीं किया था। मौका दिखा कर दिया।
सविता: कभी-कभी मन करता है तेरी गांड मार दूँ।
मैं: लेकिन होता हमेशा उल्टा है। मारता मैं हूँ।
उसके बाद वो मुझे हल्की सी स्माइल देके कमरे से चली गईं। अब मैं बिस्तर पे बैठ के सोचने लगा कि प्रतिक्षा मौसी और प्रिया मौसी को कैसे बताऊँ। थोड़ा सोचने के बाद मेरे दिमाग में आया कि इनको साथ में ही बताना होगा। और मुझे पता था ये ज़्यादा रिएक्ट भी नहीं करेंगी क्योंकि क्या ही बोलेंगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोनों ने सेम ही हरकत की है। अब बस मुझे सही समय ढूँढना था जहाँ ये दोनों साथ में मिल जाएँ। थोड़ी देर बाद मैं वापस बाहर चला गया। बाहर गया तो प्रिया मौसी मिल गईं। उन्होंने पूछा कि वो मॉल जा रही हैं। मैं भी चलूँगा। मैंने कहा ठीक है। और प्रिया मौसी ने कहा राजीव मौसा से मॉल के लिए पर मौसा जी को नानू के साथ मार्केट जाना था।
प्रिया: तो फिर अब मॉल कैसे जाऊँगी मैं।
प्रतिक्षा: मैं चलती हूँ ना दीदी।
ये सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए। ये सबसे बढ़िया मौका था दोनों को साथ में पकड़ने का।
मैं: हाँ ये कर सकते हैं। और साथ में अगर मौसी आपको कुछ खरीदना हो तो खरीद लेना।
प्रतिक्षा: हाँ ठीक है।
प्रिया: ठीक है फिर मम्मी हम जाके के आते हैं ठीक है।
नानी: ठीक है।
उसके बाद हम मॉल के लिए निकल गए। प्रिया मौसी और प्रतिक्षा मौसी आगे बैठे थे और मैं कार में पीछे बैठा था। मेरे मन में बस ये ही चल रहा था कि एक सही समय आए जहाँ इनको बता सकूँ। थोड़ी देर बाद हम मॉल पहुँच गए और प्रतिक्षा मौसी ने कार मॉल की पार्किंग में ले ली। मॉल की पार्किंग में बिलकुल सन्नाटा था। मेरे को यही सबसे सही समय लगा। जैसे ही प्रतिक्षा मौसी ने गाड़ी पार्क की मैंने आगे झुकके प्रिया मौसी और प्रतिक्षा मौसी के बूब्स को दबा दिया। दोनों ने शॉक में आके मेरा हाथ हटा दिया।
प्रिया: आरव ये क्या बतमीज़ी है?
प्रतिक्षा: हाँ आरव क्या कर रहे हो ये?
मैं: ओह प्लीज़ एक-दूसरे से कोई बात छुपाने की ज़रूरत नहीं। मैंने आप दोनों के साथ सेक्स किया है।
ये सुनते ही दोनों के होश उड़ गए।
प्रतिक्षा: क्या दीदी आपने आरव के साथ?
प्रिया: हाँ… और तूने भी?
प्रतिक्षा: हाँ।
प्रिया: कब?
प्रतिक्षा: उस दिन जब मैं घर से चली गई थी और हम होटल में गए थे। और आपने…
प्रिया: जब ये आए थे उसके अगले दिन। आरव को अजीत के बारे में पता चल गया था। उसने बोला कि वो मेरी मदद करेगा और फिर उसने मुझसे सेक्स के लिए पूछा। मैं भी उस टाइम अपनी इज़्ज़त खो तो चुकी थी तो इसके साथ कर लिया।
प्रतिक्षा: ये सब अजीत का किया धरा है। मेरा वाला भी उसी की वजह से हुआ था।
मैं: वेल मैंने जितना सोचा था उतना ही शॉक लगा है आप दोनों को।
प्रिया: वो तो होगा ही। ऐसा तो नहीं है कि हम एक-दूसरे को जज करें।
प्रतिक्षा: हाँ क्योंकि कांड तो सेम ही किया हमने।
मैं: खैर मेरा आपको सच बताने का एक रीज़न है।
प्रिया: क्या?
मैं: वो मैं बाद में बताऊँगा। आप दोनों बस एक काम करना। रात को मेरे कमरे में आ जाना।
प्रतिक्षा: पर तेरे कमरे में तो सविता होंगी ना।
मैं: मौसी जिस इंसान ने अपनी सगी मौसियों की चुदाई कर दी क्या वो अपनी माँ की दोस्त को नहीं चोद सकता?
प्रिया: तूने सविता को भी?
प्रतिक्षा: हे भगवान। एक मिनट। मतलब जो तूने मुझे बताया था वो तेरी गर्लफ्रेंड्स के बारे में वो ये दोनों थीं?
मैं: हाँ। खैर अभी शॉपिंग करते हैं। और रात को याद से मेरे कमरे में आ जाना। प्लीज़ कुछ बात करनी है।
प्रिया: ठीक है।
उसके बाद हमने आराम से अपनी शॉपिंग की और उन दोनों को देखके ऐसा लग नहीं रहा था कि उनको कोई बहुत बड़ी बात पता चली है। ओब्वियसली दोनों ने सेम कांड जो किया था। क्या ही टेंशन लेती। खैर हमने शॉपिंग कंप्लीट की और घर आ गए। घर आके उन्होंने सबको सामान दिखाया और मैं किचन में मम्मी के पास गया और उनकी गांड को मसलने लगा। लेकिन उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ: हाथ पागल है क्या? कोई आ जाएगा।
मैं: कोई आए ना आए। आपको आना है।
माँ: मेरे को कहाँ?
मैं: रात को मेरे कमरे में कुछ बात करनी है।
माँ: क्या?
मैं: वो रात को ही बताऊँगा। बस ध्यान से आना। रीना मौसी के सोने के बाद।
माँ: ठीक है।
उसके बाद टाइम बीता। रात हुई। सब खाना-वाना खाके फ्री हुए और सोने चले गए। थोड़ी देर बाद दरवाज़े पे नॉक हुई। मैंने खोला तो मम्मी थीं। मैंने उनको अंदर बुलाया।
माँ: बता क्या बात इतनी रात को बुलाया?
मैं: एक मिनट रुको बताता हूँ।
सविता: हाँ रुको थोड़ा सा और भी कोई आ रहा है।
माँ: और… कौन आ रहा है?
मैं: वो…
तभी गेट पे नॉक हुई और प्रिया मौसी और प्रतिक्षा मौसी भी आ गए थे।
मैं: आओ अंदर आओ।
प्रतिमा: प्रिया प्रतिक्षा तुम दोनों भी… आरव क्या बात है? हमको यहाँ क्यों बुलाया है?
मैं: हाँ बताता हूँ बताता हूँ। लेकिन उससे पहले प्रिया मौसी प्रतिक्षा मौसी याद है मैंने आपको दिन में क्या बताया था?
प्रिया: हाँ।
फिर मैंने मम्मी की तरफ़ उँगली पॉइंट करके सिर हिलाया। प्रिया मौसी और प्रतिक्षा मौसी पहले तो थोड़ा सोच में पड़ गईं लेकिन थोड़ी देर बाद उनको समझ आया और उनका मुँह खुला का खुला रह गया।
प्रिया: आ… आार… आरव तू… तूने अपनी माँ को भी?
मैं: हाँ।
प्रतिक्षा: स… सच में?
मैं: अरे हाँ।
प्रतिमा: अरे क्या चल रहा है?
मैं: कुछ नहीं। मैं बस इनको बता रहा हूँ कि मैंने और आपने भी सेक्स किया है।
प्रतिमा: अच्छा अच्छा सेक्स किया है। एक क्या आरव तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या? प्रिया, प्रतिक्षा ये पागल हो गया है। बहकी-बहकी बातें कर रहा है। और एक मिनट क्या मतलब है मैंने और आपने भी?
मैं: क्योंकि इस रूम में जो मौजूद हैं मैंने उन सबके साथ सेक्स किया है।
ये सुनते ही कमरे में सन्नाटा छा गया।
माँ: कि… कि… क्या?
मैं: पूछ लो।
माँ: प्रिया, प्रतिक्षा।
प्रतिक्षा: हाँ दीदी वो सच कह रहा है।
प्रिया: पर दीदी हम तो इसकी मौसियाँ हैं। हमारा तो फिर भी ठीक है। आप तो इसकी माँ हो। आपने कैसे?
माँ: ये जो रंडी बैठी है ना यहाँ पे इसकी वजह से।
सविता: ओह ओह क्या मेरी वजह से? तेरे बेटे की वजह से ये सारी इसकी दिमाग की खुराफात थी।
माँ: अच्छा और इसे चुदाई कर-चुदत कर ये किसने मेरे दिमाग में डाला था?
मैं: लेडीज़ प्लीज़। यू ऑल आर ग्रोन एडल्ट्स। सो ऐक्ट लाइक वन। और क्या आप सब एक-दूसरे को जज कर रहे हो? सबने एक जैसी ही हरकत की है तो प्लीज़ काम डाउन। अब जिस बात के लिए मैंने बुलाया है वो सुनो। देखो मैंने आप सबके साथ सेक्स किया है है ना। अब मैं चाहता हूँ कि क्यों ना हम सब एक साथ सेक्स करें। मतलब ग्रुप में। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
प्रिया: आरव क्या बोल रहे हो? साथ में कैसे?
मैं: क्यों अकेले करने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी आपको। साथ में क्या दिक्कत है? हम बताओ क्या दिक्कत है।
सविता: वैसे मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
प्रतिक्षा: मुझे भी कोई दिक्कत नहीं है।
माँ: अब ठीक ही है। मतलब कुछ बुरा तो नहीं है।
मैं: मौसी?
प्रिया: ठीक है। पर करेंगे कहाँ पे?
मैं: उसके लिए मेरे पास एक प्लान है। लेकिन उससे पहले एक और जाना बाकी है।
माँ: कौन?
मैं: रीना मौसी।
प्रिया: क्या!
प्रतिक्षा: आरव आर यू मैड? उसकी शादी है।
मैं: हाँ जानती हूँ। और आप भी जान लो उनके साथ भी सेक्स कर चुका हूँ।
माँ: कब?
सविता: उस दिन जब ये कॉटेज गए थे और स्नो स्टॉर्म आया था।
माँ: तुझे पता था।
मैं: मैंने ही बताया था। और कॉमन प्लीज़। आई मीन कितना अधूरा-अधूरा लगेगा कि हम सब साथ में करेंगे और एक वो अलग रह जाएँगी। मेरे साथ करने के बाद भी।
प्रिया: बात तो सही है।
मैं: पर एक दिक्कत है। वो इतनी आसानी से नहीं मानेंगी जैसे आप लोग माने।
माँ: तो कैसे मनाएँगे उसको?
मैं: ये है सविता आंटी। ये बताएँगी कोई प्लान।
प्रतिक्षा: आरव मैं क्या कहती हूँ। हम लोग काफी हैं। क्यों बुलाना है रीना को? उसका पक्का भी नहीं। मान ले उसने नहीं माना फिर पूरा प्लान खराब होगा। और अगर उसने बता दिया सबको तो प्रॉब्लम हो जाएगी।
मैं: अरे बोल रहा हूँ ना कुछ नहीं होगा। वो किसी को नहीं बताएँगी। क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो फिर मैं भी वो कॉटेज वाली बात बता दूँगा। और वो भी ये जानती हैं। और वैसे भी मैंने महसूस किया था रीना मौसी के अंदर वो हवस को। बस उस हवस को बाहर निकालना होगा। प्लीज़ उसमें आप सबकी मदद चाहिए और इनके प्लान की।
माँ: ठीक है। तू इतना कह ही रहा है तो।
प्रिया: ठीक है।
मैं: ओह थैंक यू। आई लव यू ऑल। बस अब ये कोई प्लान बनाएँ। फिर अपना काम हो जाएगा।
सविता: ठीक है। बनाती हूँ कोई प्लान।
और उनको साथ में सेक्स करने के लिए मना लिया था। अब बस रीना मौसी बची थीं। लेकिन उनको मनाना मुश्किल था। इसलिए मैंने सविता आंटी को बोला कोई प्लान बनाने को। अब आगे। अगली सुबह मैं सोके उठा और बाहर गया तो मैं रीना मौसी से टकरा गया।
रीना: आरव आराम लगा तो नहीं?
मैं: नहीं-नहीं मैं ठीक हूँ। आप क्या जॉगिंग पे जा रही हो?
रीना: ओह नहीं, एक्चुअली वॉक पे।
मैं: वॉक पे क्यों? आप तो जॉगिंग पे जाती हो ना।
रीना: हाँ लेकिन क्या है ना कल रात को मेरा पैर हल्का सा ट्विस्ट हो गया था इसलिए।
मैं: तो मौसी आपको आराम करना चाहिए। आप कहाँ वॉक पे जा रही हो?
रीना: अरे नहीं आरव, ज़्यादा नहीं हुआ है। हल्का सा ट्विस्ट है। वॉक कर पा रही हूँ लेकिन जॉग नहीं कर सकती। और दूसरा क्या है, इसको थोड़ा मूवमेंट रखना पड़ेगा।
मैं: ओके ओके ओके। मैं भी चलूँ।
रीना: चल।
मैं: बस थोड़ी देर में आया।
उसके बाद मैं फटाफट अपने कमरे में जाके अपना ट्रैक सूट डालके आ गया।
मैं: मौसी चलो।
रीना: हाँ।
उसके बाद हम वॉक पे चले गए।
मैं: ठंड बहुत है।
रीना: वो तो होगी ही। पिछले कितने दिन से बर्फ गिर रही है।
मैं: हाँ इस बर्फ से मुझे वो दिन याद आ गया।
ये बोलते ही मुझे रियलाइज़ हुआ कि मैंने क्या बोल दिया और मैं जानता था कि मौसी को भी समझ आ गया है।
मैं: मौसी सॉरी। गलती निकल गई मुँह से।
रीना: कोई बात नहीं। होता है। और ऐसा भी नहीं है कि उस रात को हम भुला दें आसानी से। उस दिन जो हुआ हमारे बीच वो नॉर्मल नहीं था। हम चाहे भी उससे भुला नहीं सकते आरव।
मैं: मौसी एक बात कहूँ? बुरा मत मानना। एक्चुअली अभी इस टॉपिक पे बात कर रहे हैं इसलिए मैं बोल रहा हूँ। उस दिन मुझे मज़ा आया था आपके साथ। जो भी हमारे बीच हुआ, सही-गलत उसको साइड में रख दे थोड़ी देर के लिए तो मुझे उस दिन सच में सेक्स में बहुत मज़ा आया।
रीना (हल्का सा हँसने लगी): बुरा तो नहीं लगा लेकिन थोड़ा सा अजीब ज़रूर लगा कि मेरा भांजा ही मेरा साथ किए हुए सेक्स को रिव्यू दे रहा है। लेकिन ऑनेस्टली बताऊँ तो मज़ा तो मुझे भी आया था। लेकिन वो सब उस हीट में हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं: हाँ उस हीट में ही हुआ था। मैंने अगले दिन आपका मेंटल ब्रेकडाउन देखा था। मुझे पता था जो हुआ आप उसके लिए पूरा रेडी नहीं थीं। बस बॉडी ने रिएक्ट किया था।
रीना: हाँ पर डिनाय भी नहीं कर सकती कि मज़ा तो आया था। और ये ही चीज़ मुझे अंदर से खा रही है कि मैंने शादी से पहले किसी के साथ सेक्स कर लिया। मुझे ऐसा लग रहा है मैंने अपने फ़ियाँसे पे चीट किया है।
मैं: हम्म… एक मिनट। आपने कहा शादी से पहले सेक्स। यानी कि उस दिन तक आपने सेक्स नहीं किया था?
रीना: नहीं।
मैं: एक मिनट। यानी आप वर्जिन थीं और आपने अपनी वर्जिनिटी मेरे साथ लॉस की?
रीना: हाँ।
मैं: मौसी आई एम रियली सॉरी।
रीना: तू क्यों सॉरी बोल रहा है आरव? गलती तो मेरी भी है। मैं तुझे रोक सकती पर नहीं रोका है ना। इसलिए इस चीज़ पे इतना ज़ोर मत डाल ठीक है।
मैं: मौसी आपको कुछ बताना है।
रीना: मुझे? क्या?
मैं: यहाँ नहीं। रात को आप मेरे कमरे में आना। वही बताऊँगा।
रीना: आरव सब ठीक है ना? कुछ सीरियस?
मैं: वो तो आप पे डिपेंड करता है कि सुनने के बाद आपको क्या वो बात सीरियस लगती है कि नहीं। इसलिए प्लीज़ मैं आपको यहाँ नहीं बता पाऊँगा। प्लीज़ रात को मेरे कमरे में आ जाना।
रीना: ठीक है ठीक है। मैं रात को आती हूँ। अभी चलो, अभी बहुत वॉकिंग बाकी है।
मैं: ओह हाँ चलो।
उसके बाद हम थोड़ा-बहुत वॉक करके घर आ गए।
नानी: सुबह-सुबह मौसी-भांजा कहाँ गए थे?
मैं: वॉकिंग पे गए थे नानी। मौसी का पैर मुड़ गया है।
नानी: क्या पैर मुड़ गया? कैसे?
रीना: अरे मम्मी कुछ नहीं है। हल्का सा मुड़ा है। ठीक है।
नानी: क्या ठीक है? तू आराम कर पागल लड़की। थोड़े दिन में शादी है और तू अभी और दर्द बढ़ा लेगी।
रीना: ठीक है ठीक है। शांत हो जाओ झाँसी की रानी। मैं आराम करती हूँ।
नानी: हाँ। और आरव तू नहीं बोल सकता था इसको?
मैं: मैंने बोला था। इन्होंने ही बोला था कुछ नहीं है।
नानी: तू कढ़ी क्या है नहा-धो के आराम कर।
रीना: ओके ओके।
नानी: और आरव तू भी फटाफट नहा-धो के रेडी हो जा। आज तेरे पापा आ रहे हैं ना।
मैं: अरे हाँ कितने बजे आ रहे हैं?
नानी: पता नहीं। तेरी मम्मी को पता हो जा।
उसके बाद मैं मम्मी के पास गया।
मैं: मम्मी पापा कितने बजे आएँगे?
माँ: इन्होंने बोला था कि दिन तक आएँगे।
प्रिया: ठीक है। फिर मैं और आरव जाके ले आएँगे जीजू।
मैं: हाँ।
सविता: मैं भी चलूँगी। मुझे कुछ लेना भी है मार्केट से।
प्रिया: ठीक है।
माँ: तो फिर जल्दी से सब फ्रेशन अप हो जाओ और नाश्ता कर लो ताकि इन कामों से तो फ्री हो।
उसके बाद सब नहा-धोके नाश्ता वास्ता करके फ्री हो गए और देखते ही देखते पापा की ट्रेन का समय भी होने वाला था तो मैं, प्रिया मौसी और सविता आंटी निकल गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं: फिर सविता आंटी कुछ प्लान बना?
सविता: नहीं यार ये मामला थोड़ा हार्ड है। कुछ तगड़ा प्लान बनाना होगा।
मैं: मेरे पास एक आइडिया है।
प्रिया: क्या?
मैं: यही कि उनको भी रात को मेरे कमरे में बुलाके सब बता देते हैं।
सविता: …वाह क्या वहियात प्लान है। तुझे क्या लगा मेरे दिमाग में ये नहीं आया होगा? लेकिन मुझे पता है कि वो ये सुनके नहीं मानेगी।
मैं: मानेगी। मैं बोल रहा हूँ ना। आज सुबह जब हम वॉक पे गए थे तो हम उस दिन की बात कर रहे थे और मैं महसूस कर पा रहा था कि वो उस दिन को याद करके हल्का-हल्का मुस्कुरा रही थीं। और साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि मेरे साथ करने में उनको मज़ा तो आया था। अब सोचो जब रात को आप सब उनको समझाओगी तो क्या वो मानेगी नहीं?
प्रिया: वैसे आरव सही तो कह रहा है। आई मीन सोचना हम सबने इसके साथ सेक्स किया है। अगर हम उसे समझाएँगे तो समझेगी नहीं? हाँ मानती हूँ उसको समझाना आसान नहीं होगा पर कोशिश कर सकते हैं।
सविता: पता नहीं यार मुझे थोड़ा डाउट है इस प्लान पे।
मैं: देखो मैं जानता हूँ रिस्की है पर आप प्लान सोच नहीं पा रहे हो और शादी की डेट पास आ रही है। हम ज़्यादा वेट नहीं कर सकते। इसलिए ट्राई करना पड़ेगा। और मान लेते हैं कि वो नहीं भी मानी तो भी वो ये किसी को नहीं बताएगी। क्योंकि उनको पता है अगर उन्होंने ये बात बताई तो फिर मैं भी उस दिन की बात बता दूँगा और वो ये रिस्क लेंगी नहीं।
सविता: ठीक है ट्राई करते हैं।
मैं: ठीक है। फिर रात को आप, प्रिया मौसी, आप मम्मी और प्रतिक्षा मौसी सब आ जाना। और रीना मौसी के आने से पहले आ जाना।
प्रिया: ठीक है।
उसके बाद हम बातें करते-करते पहले मार्केट और फिर रेलवे स्टेशन पहुँचे पापा को लेने।
मैं: पापा।
पापा: आरव कैसा है?
मैं: बढ़िया हूँ। आप कैसे हो?
पापा: मैं भी बढ़िया।
प्रिया: नमस्ते जीजू।
पापा: नमस्ते नमस्ते। और सविता भी हैं।
सविता: बिलकुल।
प्रिया: तो जीजू आपको फाइनली समय मिल ही गया।
पापा: हाँ यार फ्लाइट्स का लास्ट टाइम पे शेड्यूल चेंज हुआ इसलिए मेरा शेड्यूल बिगड़ गया। नहीं तो मैं तो इनके साथ ही आने वाला था।
सविता: खैर आप गए ना बस बात खत्म।
मैं: हाँ। और सारी बात यहीं करोगे क्या? घर चलते हैं।
प्रिया: हाँ।
उसके बाद हम घर पहुँचे।
नानू: अरे बेटा आ गए।
पापा: जी पापा प्रणाम।
नानू: जीते रहो जीते रहो।
पापा: और आप कैसे हो?
नानू: मैं बढ़िया। आप कैसे हो?
पापा: मैं भी बढ़िया।
रीना: जीजू आ गए आप।
पापा: नहीं अभी फ्लाइट में हूँ। अभी प्लेन लैंड होगा उसके बाद आऊँगा।
रीना: जीजू…
पापा: सॉरी सॉरी।
पापा: अरे राजीव जी कैसे हैं आप?
राजीव: मैं बढ़िया। आप बताइए।
पापा: मैं भी बढ़िया।
प्रतिक्षा: नमस्ते जीजू।
पापा: ओह प्रतिक्षा कैसी हैं?
प्रतिक्षा: ठीक हूँ।
पापा: मैं जानता हूँ जो कुछ भी वो बहुत बड़ी चीज़ है पर ऐसे घर से भाग जाना ये ठीक नहीं था।
प्रतिक्षा: भटक गई थी। आरव ने रास्ता दिखाया।
पापा: अरे हाँ आरव। आई एम प्राउड ऑफ यू बेटा। तूने जो किया वो सही में काबिल-ए-तारीफ है।
मैं: अब क्या तारीफ कर रहे हो मेरी। वो इंसान मेरे फैमिली को नुकसान पहुँचाने की फिराक में था। कैसे उसे करने देता।
रीना: नहीं आरव फिर भी जो तूने किया वो एक्चुअली बहुत अप्रिशिएबल है।
प्रिया: नहीं सच में। तूने सिर्फ़ मेरे को नहीं बचाया बल्कि घर की सारी औरतों की इज़्ज़त बचाई है।
नानी: अरे तो दोता किसका है?
नानू: किसका है?
नानी: मेरा।
नानू: हाँ और मेरा तो किराएदार लगता है ना ये।
सब हँसी-मज़ाक में लग गए। पूरा एनवायरनमेंट फ्रेश हो गया। मम्मी सबके लिए चाय बनाके लाई और सबने चाय पी। साथ ही रीना मौसी भी प्रतिक्षा मौसी के कमरे में शिफ्ट हो गई थीं क्योंकि उनके कमरे में मम्मी और पापा रुकने वाले थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सब चाय वाई पीके बातें-वातें खत्म करके अपने-अपने काम में लग गए। मैं भी छत पे जा रहा था कि तभी मैंने रीना मौसी के कमरे से कुछ आवाज़ सुनी। उनके कमरे के साइड में एक खिड़की थी। मैं वहाँ गया और कमरे में झाँकने लगा तो देखा कि पापा मम्मी पागलों की तरह किस कर रहे हैं।
माँ: उम्म छोड़ो कोई सुन लेगा।
पापा: सुन लेगा तो सुन ले। अपनी पत्नी से ही प्यार कर रहा हूँ किसी पराई औरत से नहीं।
माँ: पर फिर भी आआ क्या बात है आज इतना प्यार।
पापा: वो तो होगा ही ना। काफ़ी टाइम से जो तुम्हें नहीं देखा। कितना मिस किया मैंने तुम्हें।
माँ: मुझे? या मेरी बॉडी। ये प्यार नहीं कर रहे हो हवस है हवस।
पापा: जो भी है एक पति की उसकी पत्नी के लिए ही है। और तुम्हारे जैसी पत्नी हो और इंसान में हवस ना आए हो सकता है।
माँ: सारे मर्द एक जैसे होते हैं।
पापा: सारे और कितनों से मिली?
माँ: मैं नहीं। मेरी सहेलियाँ तो मिली हैं। उनके एक्सपीरियंस पता है मुझे। तुम सब एक जैसे होते हो।
पापा: खैर जो भी है अभी कोई भी नहीं है। 2 मिनट में कर लेंगे।
माँ: तुम्हारा 2 मिनट में नहीं होता। 2 मिनट 2 मिनट बोलके 30 मिनट तक करते हो।
पापा: और क्या? तुम्हें मज़ा नहीं आता?
माँ: वो उम्म…
पापा: चलो आप। तुम्हें पता है क्या करना है।
उसके बाद पापा बिस्तर पे लेट गए और मम्मी बैठ गईं। और उसके बाद मम्मी ने पापा की पैंट खोली और उनका लंड बाहर निकाला। सच में पापा का लंड भी कुछ कम नहीं था। इनफैक्ट उनका लंड मेरे से एक इंच लंबा ही होगा पर मुझसे मोटा नहीं था।
खैर मैं देखता रहा और फिर मम्मी ने सीधा पापा का लंड अपने मुँह में डाल लिया और उनको ब्लो जॉब देने लगीं। और ये देख के मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। तभी मम्मी ने मुझे मिरर से देख लिया पर उन्होंने कुछ रिएक्ट नहीं किया। उल्टा मुझे टीज़ करने लगीं।
माँ: श्श्श हाहाहा कितना मिस किया इस छोटे नवाब को। पता कितनी आग लगी है मेरी चूत में।
पापा: तुम कहो तो अपनी धार से बुझा दूँ।
माँ: बुझा दो प्लीज़।
उसके बाद दोनों ने अपने कपड़े खोले और थोड़े और फोरप्ले के बाद वो मिशनरी पोज़िशन में आ गए और चुदाई करने लगे। मैं अपने खुद के मम्मी-पापा की चुदाई देख रहा था और मम्मी ने सही कहा था। पापा पूरे 45 मिनट तक खिंच गए और फिर मम्मी के मुँह में अपना वीर्य छोड़ दिया। मम्मी भी उसको पी गईं। और मैं भाई फटाफट वहाँ से चला गया। मैं छत पे गया तो वहाँ पे प्रतिक्षा मौसी धूप सेक रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं: मौसी क्या कर रही हो?
प्रतिक्षा: धूप सेक रही हूँ ताकि गर्मी ले सकूँ।
मैं: आपको और गरम होने की क्या ज़रूरत है। आप तो ऑलरेडी हॉट हो।
प्रतिक्षा: हट बदमाश।
मैं: सॉरी सॉरी। खैर सुनो। रात को मेरे कमरे में आ जाना। रीना मौसी को सब बताना।
प्रतिक्षा: सब बताना है? वो मान गई?
मैं: नहीं। तभी तो बताना है।
प्रतिक्षा: मतलब?
मैं: वो मैं आपको रात को बताऊँगा। बस रीना मौसी से पहले आ जाना। ठीक है?
प्रतिक्षा: ठीक है।
उसके थोड़ी देर बाद मैं अपने कमरे में चला गया तो थोड़ी देर बाद मम्मी कमरे में आईं और अलमारी में कुछ ढूँढने लगीं।
मैं: क्या ढूँढ रही हो?
माँ: अरे वो सविता का कुछ सामान है। वो ही ढूँढ रही हूँ।
मैं शांति से बिस्तर से खड़ा हुआ और चुपचाप गेट लॉक कर दिया और उसके बाद जाके मम्मी को पीछे से पकड़ लिया और उनकी चूत को साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा।
माँ: आआ मदरचोद छोड़ क्या कर रहा है?
मैं: देख रहा हूँ इस चूत में कितनी गर्मी।
माँ: अच्छा वो। शो कैसा लगा? बढ़िया था ना बेटा।
मैं: बढ़िया तो था पर लगता है आपकी चूत की गर्मी अब भी बहुत ज़्यादा है।
माँ: हाँ वो तो है। लेकिन अब मेरे हसबैंड हैं ना मेरी गर्मी निकालने के लिए।
मैं: साली तू रुक। ग्रुप सेक्स में तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा।
माँ: चूतिए पहले ग्रुप सेक्स करवा तो ले। मेरी गर्मी उसके बाद निकालना।
मैं: उसकी चिंता आप मत करो। वो भी हो जाएगा। बस रात को मेरे कमरे में आना। रीना मौसी को सब बताना।
माँ: सब बताना है? वो मान गई क्या?
मैं: नहीं। तभी तो बताना है।
माँ: मतलब।
मैं: वो मैं आपको रात को बताऊँगा। बस आजाना और रीना मौसी से पहले आ जाना।
माँ: ठीक है ठीक है। अब छोड़ मुझे। सविता का सामान लेकर जाना है।
मैं: अरे ऐसे कैसे? काफ़ी टाइम से मुझे भी गर्मी है। बस आपको कुछ नहीं करना है। अपने मुँह यूज़ करना है।
माँ: आरव अभी टाइम नहीं है। मुझे जाना है।
मैं: तो मैं भी तो वही बोल रहा हूँ। आपके पास टाइम नहीं। आपको जाना है। जल्दी से मेरी गर्मी निकालो और जाओ। देखो आप खुद का टाइम वेस्ट कर रहे हो।
माँ: ठीक है ठीक है।
उसके बाद मम्मी अपने घुटनों पे बैठ के मेरे पजामे को नीचे करने लगीं और उसके बाद मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं।
मैं: हा हा हा हा हा मम्मी मज़ा आ रहा है। कितना टाइम हो गया था आपसे लंड चुसाई कराए।
माँ: म्म्म ग्घ ह्घ्ग.
करीब 5 मिनट बाद मैं मम्मी के मुँह में ही झड़ गया और मम्मी भी मेरा सारा वीर्य पी गईं।
माँ: हो गया। जाऊँ अब।
मैं: हाँ जाओ।
उसके बाद मम्मी कमरे से चली गईं। अब बस मुझे रात होने का इंतज़ार था।
शाम हो चुकी थी और प्रिया मौसी और सविता आंटी किचन में खाना बना रही थीं और बाहर मम्मी, रीना मौसी, नानी, प्रतिक्षा मौसी सब बैठके मटर छील रही थीं। दूसरी तरफ़ पापा, राजीव मौसा और नानू शादी की तैयारियाँ कर रहे थे।
मैं: क्या बन रहा है आज?
रीना: मटर पनीर।
मैं: क्या बात है।
माँ: है ना। अब बैठ और मटर छिलवा।
मैं: अरे?
प्रतिक्षा: क्या अरे। बैठ जा फटाफट। काम हो जाएगा।
मैं: ठीक है ठीक है।
नानू: ये हलवाई का कैंसिल कर दो।
राजीव: क्यों पापा क्या हुआ?
नानू: वो उस अजीत का जानकार है। मैं नहीं चाहता कि मेरी बेटी की शादी में कोई भी उसका जानकार हो।
राजीव: पर पापा…
नानू: पर-वर कुछ नहीं। जमाई जी बस उसका कोई भी जानकार नहीं चाहिए।
पापा: ठीक है पापा शांत हो जाइए।
राजीव: ठीक है हम कैंसिल करवा देंगे।
मैं: वैसे आप कैटरिंग क्यों नहीं करवा लेते। वो ज़्यादा बेहतर पड़ेगा।
रीना: हाँ आरव ठीक कह रहा है। कैटरिंग करवाओ ना।
नानू: पर कैटरिंग कितनी महँगी पड़ेगी।
पापा: शायद नहीं पड़ेगी। मेरा एक दोस्त है। उसने बोला था कि वो शिमला शिफ्ट हो गया है। काफ़ी टाइम से उससे बात नहीं हुई है। उसने बताया था उसका कैटरिंग का बिज़नेस है। एक बार पहले मैं उसे बात करके देख लूँ उसके बाद देखते हैं।
नानू: ठीक है जमाई जी।
उसके बाद पापा ने अपने दोस्त से बात की।
पापा: हाँ मेरी उससे बात हो गई है। उसका बिज़नेस अब भी चल रहा है लेकिन एक बार उसके ऑफिस जाके बात करनी पड़ेगी।
राजीव: ठीक है फिर कल चलते हैं।
पापा: हाँ।
उसके बाद सारे मटर भी छिल गए और खाना भी बन गया और सब खाना-वाना खाके बातचीत करने लगे। काफ़ी टाइम बाद घर में इतनी भीड़ थी इसलिए सबने सोचा कि गेम खेलते हैं तो हम सब दम शतरंज खेलने बैठ गए और करीब 1 घंटे तक खेलने के बाद हम सब सोने चले गए।
लेकिन मैं और सविता आंटी नहीं सोए थे। हम अपने कमरे में बैठे थे और बाकियों का वेट कर रहे थे। करीब आधे घंटे बीत गए थे। तब प्रिया मौसी और मम्मी आए और उनके आने के 10 मिनट बाद प्रतिक्षा मौसी रीना मौसी को लेकर आ गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रीना: क्या बात है आप सब यहाँ और आरव क्या बात करनी थी तुझे जो इतनी रात को बुलाया?
मैं: वो मौसी उम…
प्रिया: देख हम जो बात करेंगे हो सकता है तुझे सुनके थोड़ा सा झटका लगे।
प्रतिक्षा: और हो सकता है तू हमसे बात भी बंद कर दे।
माँ: लेकिन प्लीज़ हमारी पूरी बात सुनना।
सविता: और उसके बाद ही कुछ सोचना।
मैं: प्लीज़।
रीना: ऐसी क्या बात है कि मैं आप सबसे नाराज़ हो सकती हूँ।
उसके बाद सबने रीना मौसी को बिस्तर पे बिठाया और मैंने रूम का गेट लॉक किया।
सविता: देख रीना हम सबको पता है उस दिन तेरे और आरव के बीच में क्या हुआ था।
रीना: क्या?
मौसी चिल्लाते हुए खड़ी हुईं।
(मैं, सविता, माँ, प्रतिक्षा, प्रिया): श्श्श्श.
सविता: धीरे। सबको जगाएगी क्या?
रीना: आपको पता कैसे… आरव तूने बताया?
मैं: हाँ।
रीना: क्यों?….. देखो जो हुआ था उस दिन वो सिर्फ़ एक गलती थी। मैंने जान-बूझके नहीं किया। प्रतिमा दीदी मुझे माफ़ कर दो प्लीज़। गलती हो गई।
माँ: शांत हो जा। ठीक है मैं नाराज़ नहीं हूँ। यहाँ कोई भी नाराज़ नहीं है तुझसे ठीक है।
रीना: सच में?
माँ: हाँ।
प्रिया: इनफैक्ट हम तेरे से नाराज़ नहीं हो सकते क्योंकि हमने भी वही हरकत की है।
रीना: मतलब?
प्रतिक्षा: मतलब तेरे अलावा हम सबने भी आरव के साथ सेक्स किया है और अब भी कर रहे हैं।
ये सुनते ही कमरे में एक अजीब सी खामोशी छा गई।
रीना: क्य… क्या.. क्या कहा आपने?
सविता: वो सच कह रही है।
रीना: एक मिनट एक मिनट। मैंने शायद गलत सुना। आप सबने…
प्रिया: हाँ।
रीना: मतलब सबने। मतलब प्रतिमा दीदी आपने भी?
माँ: हाँ।
रीना: आप सबका दिमाग खराब हो गया है क्या? और खास करके प्रतिमा दीदी। आपका बेटा है आपका। वो और प्रिया दीदी प्रतिक्षा दीदी भांजा है वो अपना और सविता तुम्हारी दोस्त का बेटा है वो कैसे मतलब छी।
प्रतिक्षा: तू क्या छी कर रही है? तूने भी किया है।
रीना: हाँ किया लेकिन जिस तरह आप लोग की तरह उसके साथ उस चीज़ को कंटिन्यू नहीं किया। अरे गलती थी मेरी लेकिन आप लोग तो जान-बूझके। और प्रिया दीदी आप कैसे कर सकती हो? एक बार राजीव जीजू को धोखा दिया ना तो फिर वापस क्यों दे रही हो? और प्रतिक्षा दीदी आप? आप कैसे कर सकती हो ऐसा? और सब छोड़ो। प्रतिमा दीदी आप सगी माँ हो उसकी। जन्म दिया है उसको। खून है आपका। उसके साथ कैसे छी।
प्रिया: रीना… मैंने राजीव को धोखा नहीं दिया था। अजीत ने मुझे मजबूर किया था। और जहाँ तक रही बात तो हाँ किया मैंने और शर्म नहीं है। क्यों? पता है क्यों? मैं मेरे पति से बहुत प्यार करती हूँ लेकिन मेरी कुछ ज़रूरत है जो आरव ने पूरी की। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
प्रतिक्षा: उस दिन मरने ही वाली थी मैं। आरव नहीं होता ना तो तेरी बहन खो चुकी होती।
माँ: और हाँ मेरी गलती है। लेकिन मैं इसे सुधारना नहीं चाहती। क्यों? ये मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत गलती है। जो मुझे आरव के साथ महसूस हुआ वो मुझे आज तक अजय के साथ भी महसूस नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि मैं अजय से प्यार नहीं करती लेकिन कुछ है जो मुझे फोर्स करता है इसके साथ रहने के लिए। हो सकता है कि शायद ये वो माँ-बेटे का नाजायज़ रिश्ता है। पता नहीं क्या। बस मैं इसे रोकना नहीं चाहती।
रीना: और हो सकता है कि आप सब का दिमाग खराब हो। दिमाग के डॉक्टर दिखाओ।
माँ: देख रीना मैं जानती हूँ तू अभी बहुत गुस्से और कन्फ्यूज़न में है। प्लीज़ शांत हो जा और हमारी बात सुन एक बार प्लीज़।
रीना: मेरे को आपकी कोई बात नहीं सुननी। जा रही हूँ मैं।
प्रिया: प्लीज़ एक बार हमारी बात ठंडे दिमाग से सुन ले प्लीज़।
प्रतिक्षा: प्लीज़।
रीना: ठीक है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैंने आप सबको माफ़ कर दिया है।
माँ: ठीक है ठीक है। लेकिन प्लीज़ एक बार हमारी बात सुन ले।
प्रिया: ठीक है। मैं शुरू करती हूँ। देख रीना तुझे सब पता है अजीत और मेरे साथ क्या हुआ। तुझे आइडिया भी नहीं है मैं उस टाइम कैसी कंडीशन में थी। ज़रा सोच कि आप रोज़ मार रहे हो और किसी को बता भी ना सको तो। जब आरव मेरे पास आया और उसने मुझे बताया कि उसे सब पता है और फिर जब मैंने उसे सब बताया ऐसा लगा कि मेरा कोई बोझ उतर गया।
और जब उसने मुझसे सेक्स के लिए पूछा मैं खुद को नहीं रोक पाई। और इतने टाइम की शादी के बाद भी राजीव मुझे खुश नहीं कर पाए थे। मैं ये नहीं कह रही हूँ कि मुझे राजीव से प्यार नहीं पर जो सच है वो है। और फिर अजीत ने जो मेरे साथ किया इन सब के बाद जब आरव ने मेरे साथ सेक्स किया मुझे एक अलग ही फीलिंग आई। ऐसी फीलिंग जो मैंने कभी भी फील नहीं की थी। और मैं उस फीलिंग को भुलना नहीं चाहती। इसलिए मैंने इसके साथ रिश्ता जारी रखा।
प्रतिक्षा: अजीत के धोखे के बाद मैं बिलकुल टूट गई थी। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ कहाँ जाऊँ। सिर्फ़ एक चीज़ दिमाग में चल रही थी कि मैं किसी लायक नहीं हूँ और मुझे मार जाना चाहिए। और इसलिए मैं घर से चली गई थी।
मैं तो ब्रिज से कूदने ही वाली थी अगर आरव नहीं आया होता तो मैं आज यहाँ नहीं होती। आरव ने मुझे समझाया। एक औरत होने का एहसास कराया। मैं नहीं भूल सकती वो। उस अजीत ने जितना हमारी पूरी मैरिज लाइफ में मुझे प्यार नहीं किया उससे ज़्यादा प्यार आरव ने एक रात में दिखा दिया। अब तू बता कैसे नहीं बनाऊँ इससे रिश्ता।
प्रिया मौसी और प्रतिक्षा मौसी की बात सुनके रीना मौसी थोड़ा शांत हुईं।
रीना: ठीक है। मैंने मान लिया। आप जो कह रहे हो वो ठीक है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैं इसके सपोर्ट में। खैर आप दोनों का मैं समझ सकती हूँ। प्रतिमा दीदी आप… आप कैसे कर सकती हो? इसकी सगी माँ हो आप। इसको 9 महीने पाला है। आपने अपने इसको पैदा किया है। एक माँ-बेटे का रिश्ता सबसे पवित्र होता है। उसको कैसे आपने कैसे दीदी।
रीना मौसी की बात सुनके रूम में एकदम से सन्नाटा छा गया।
माँ: तू ठीक कह रही है रीना। अगर कोई यहाँ पे सबसे बड़ा पापी है तो मैं ही हूँ। माँ-बेटे के रिश्ते को ताक में रख देना ताकि मैं अपनी इच्छाएँ पूरी कर सकूँ। सही में मुझे नरक में भी जगह नहीं मिलेगी। लेकिन एक चीज़ और है। हाँ मैं और ये माँ-बेटे हैं लेकिन हम एक आदमी और औरत भी हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पहले मैं भी तेरी तरह ही सोचती थी लेकिन फिर मैंने सोचा कि इन सबका क्या मतलब है। ये माँ-बेटे, बाप-बेटी, भाई-बहन वगैरह-वगैरह ये सब नियम समाज ने बनाए हैं। ये ना हो तो कोई भी किसी के साथ भी सेक्स कर लेगा। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया है। मैंने मेरी और मेरे बेटे की खुशी किसी भी समाज से ऊपर रखी है।
रीना: आप क्या बोल रही हो दीदी? खुद भी सुन रही हो? एनिवे आप बची हैं। मैडम आप भी बोल दीजिए।
सविता: उम्म मुझे सिर्फ़ जवान लंड और मस्त सेक्स से मतलब था। इसके पास दोनों था तो…
रीना: वाह क्या बात है। सारे जवाब इतने अजीब थे कि इनका ज़्यादा नॉर्मल लग रहा है। एनिवे ठीक है। मैंने आप सबकी बात सुन ली। अब मेरी एक बात का जवाब दो। अपने पतियों के बारे में सोचा? एक बार भी बुरा लगा उनको धोखा देते हुए? और कभी सोचा क्या होगा अगर उनको पता चल गया तो? या फिर अगर आप सब प्रेग्नेंट हो गईं फिर?
प्रतिमा: नहीं पता चलेगा। क्योंकि हम संभाल के रहते हैं। घर पे स्ट्रिक्ट रूल है कि अजय अगर घर पे हैं तो हम एक-दूसरे को छुएँगे भी नहीं। और जहाँ तक रही बात प्रेग्नेंसी की तो वो नहीं हो सकता है। मैं मेडिकेशन लेती हूँ क्योंकि अजय जब घर पे होते हैं तो ये प्रोटेक्शन नहीं यूज़ करते।
प्रतिक्षा: जीजू प्रोटेक्शन यूज़ नहीं करते?
प्रतिमा: नहीं। इनफैक्ट उनके प्रोटेक्शन नहीं यूज़ करने की वजह से ही आरव हुआ था। इसको प्लान थोड़ी किया था।
मैं: क्या? एक मिनट…
रीना: अरे बकवास कर रहे हो आप सब।
मैं: सॉरी।
प्रिया: देख रीना मैं समझती हूँ ये जो कुछ भी है तेरे लिए हैंडल करना बहुत मुश्किल है लेकिन प्लीज़ ट्राई टू अंडरस्टैंड।
रीना: क्या ट्राई टू अंडरस्टैंड कि मेरी बहनें कैरेक्टरलेस औरतें हैं जो सिर्फ़ अपने सुख के बारे में सोचती हैं या फिर मेरा भांजा थरकी है जिसकी गंदी नज़र अपने ही घर की औरतों पे रहती है।
सविता: रीना…
रीना: बस मैंने आपकी बात सुन ली है। मुझे और कुछ नहीं सुनना है। मुझे जाने दो।
रीना मौसी उसके बाद जाने लगीं।
प्रिया: रीना… प्लीज़ इसके बारे में किसी को बताना मत प्लीज़।
रीना: प्रिया दीदी मेरा ना दिमाग नहीं खराब हुआ है जो जाके सबको बता दूँ कि कितने गिरे हुए लोग हो आप सब में। इमेजिन भी नहीं कर पा रही हूँ अगर ये बात किसी को पता लगी तो क्या होगा। मम्मी-पापा तो शर्म से मर जाएँगे और राजीव और अजय जीजू वो तो देखो। आप जो करना है करो। बस मुझसे दूर रहो और प्लीज़ कोशिश करना कि ये बात किसी को पता ना लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके बाद वो वहाँ से चली गईं।
सविता: वाह आरव व्हाट अ प्लान। कांग्रेचुलेशन।
मैं: अरे मेरी क्या गलती।
प्रतिमा: नहीं आरव तेरी गलती है इसमें।
मैं: अरे।
सविता: मैंने कहा था रुक जा। मेरे को प्लान सोचने दे लेकिन तूने नहीं सुनी क्योंकि तुझे जल्दी से ग्रुप सेक्स करना था। आप करो ग्रुप से।
मैं: पर…
प्रिया: वो सही कह रही है आरव। गलती तेरी है।
प्रतिक्षा: येस आरव थोड़ा सब्र रखना चाहिए था तुम्हें।
उसके बाद मम्मी, प्रिया मौसी और प्रतिक्षा मौसी वहाँ से चले गए।
मैं: अरे यार।
सविता: अब पछताए हो क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। अब सो जा।
मैं बिलकुल उदास हो गया था क्योंकि जैसा सोचा था उसका बिलकुल उल्टा हो गया। मुझे नींद भी नहीं आ रही थी। करीब रात के 2 बज रहे थे। मैं उठा और कमरे से बाहर चला गया और सीधा छत पे गया। जब मैं छत पे पहुँचा तो देखा वहाँ पे कोई खड़ा था।
मैं: कौन है?
रीना: ओह आरव क्या कर रहे हो यहाँ पे। जाओ मुझे कोई बात नहीं तुमसे।
मैं: आपसे बात करने नहीं आया हूँ। नींद नहीं आ रही थी इसलिए आया हूँ।
रीना: क्यों?
मैं: जैसा सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ। सोचा था आपको भी ग्रुप में शामिल करूँगा लेकिन यहाँ तो सब मेरे से ही नाराज़ हो गए।
रीना: क… क्या ग्रुप? एक मिनट… अच्छा अब समझी। इसलिए मुझे सब बताया ताकि मुझे भी अपने ग्रुप में शामिल कर सको। डिस्गस्टिंग। अपनी ही घर की औरतों के बारे में कोई ऐसा सोचता है। सच बताऊँ आरव तुममें और उस अजीत में कोई अंतर नहीं है।
मैं: अच्छा अगर मेरे में और उस अजीत में कोई अंतर नहीं होता ना तो आपको मनाने के लिए इतने पापड़ नहीं बेल रहा होता। सीधा बिस्तर पे लेटा चुका होता। और ज़रा बताना क्या गलत किया मैंने। प्रिया मौसी खुश नहीं थीं मौसा जी से तो क्या उनको सुख देकर मैंने कुछ गलत किया?
या प्रतिक्षा मौसी जो अपनी जान देने जा रही थीं उनको बचाने के लिए जो किया वो गलत था? या मम्मी का अकेलापन दूर किया क्या वो गलत था? खुले में तो कुछ नहीं कर रहे ना किसी के साथ। कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं ना। अपने बारे में ही तो सोच रहे हैं जैसे आपने सोचा था।
रीना: मैंने कभी अपने बारे में नहीं सोचा था।
मैं: आपने सोचा था उस दिन।
रीना: वो एक गलती थी।
मैं: नहीं थी। आप शुरुआत में ही रोक सकती थीं। इतनी मर्यादा तो आपके जैसे औरतों में होती ही है कि किसी भी सिचुएशन में कुछ लाइन नहीं क्रॉस करना चाहिए। आपने वो लाइन तब ही क्रॉस कर दी थी जब आपने बॉडी टू बॉडी हीट के लिए एग्री किया था।
और उसके बाद भी कई मौके आए। आप रोक सकती थीं लेकिन आपने नहीं रोका। पता है क्यों? क्योंकि आपमें भी वही हवस है जो इनमें है। लेकिन पता आपमें और इनमें क्या अंतर है? ये कम से कम अपनी हवस को छुपा तो नहीं रही हैं। लेकिन आप एक परफेक्ट लड़की, सामाजिक लड़की बनने के चक्कर में अपने बारे में नहीं सोच रही हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रीना: तुम सिर्फ़ बकवास कर रहे हो।
मैं: मुझसे तो झूठ बोल सकती हो। आप खुद से नहीं बोल सकतीं।
रीना: आरव तुम अब फालतू की बातें कर रहे हो।
मैं: कैसी पागल औरत हो। खुद के अते-पते नहीं हैं और मैं फालतू की बातें कर रहा हूँ। मौसी आपके पास ना अब भी टाइम है। अपना ये जो मुखौटा पहन रखा है ना इसे उतार दो वरना बहुत पछताओगे।
उसके बाद मैं वहाँ से अपने कमरे में चला गया और जाके सो गया। रात को देर से सोने की वजह से मेरी नींद भी लेट खुली थी। जब मैंने मेरी आँखें खोलीं तो देखा रीना मौसी मेरे बिस्तर के साइड में ही खड़ी हैं। हाथ बाँधे मुझे घूर रही हैं और उनके हाथ में चाकू भी है। मैं एकदम से देख के सोक हो गया।
मैं: उम्म मौ… मौ… मौसी आप क्या कर रही हो यहाँ पे?
रीना: तुझसे बात करनी थी।
मैं: ओह ओह अच्छा तो… तो ये चाकू क्यों?
रीना: लौकी काट रही थी।
मैं: क्या?
मैं चीखते हुए उठा और मेरा अंडरवियर में हाथ डालके देखने लगा।
रीना: अरे हो लौकी सब्जी वाली।
मैं: क्या? अच्छा सब्जी वाली। मुझे लगा… खैर मेरे कमरे में काट रही थी आप लौकी। और एक मिनट लौकी बन रही है?
रीना: रोज़ 5 पकवान नहीं बन सकते घर में। और नहीं मैं लौकी नीचे काट रही थी लेकिन कुछ बात करनी थी इसलिए आई हूँ।
मैं: ओह तो क्या बात करनी थी आपको?
रीना: वही जो कल हुआ।
मैं: अरे यार…
रीना: तू सही कह रहा था।
मैं: हाँ क्या?
रीना: जो भी तूने रात को छत पे कहा वो सब सच है। उस दिन जो कुछ हुआ था मैं रोक सकती थी लेकिन मैं रोकना नहीं चाहती थी। क्योंकि मैं वर्जिन थी और उस दिन मुझे कुछ हुआ। मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। और फिर जब तूने अपनी हरकतें शुरू कीं तो रोक नहीं पाई और ना चाहती थी।
मुझे भी मज़ा आ रहा था। मैं भी इनके जैसी ही हूँ। शायद इनसे भी ज़्यादा। और हाँ मैं एक मुखौटा पहनके रखती हूँ। पता नहीं क्यों। शायद सोसाइटी की वजह से। पर जो कुछ भी कल हुआ उसे मैंने एक चीज़ सोची कि जब मेरी बहनें परवा नहीं कर रही हैं सोसाइटी की तो मैं क्यों सती-सावित्री बनके रहूँ। इसलिए ग्रुप में अब भी भर्ती हो रही हूँ क्या?
मैं: हाँ चल रही है। एक काम करना। सविता आंटी को अपना नाम लिखवा देना। और सबके साथ मुझे रात को मेरे कमरे में मिलना। डैम ये बात आप कल ही समझ जातीं तो इतना नाटक ही नहीं होता।
रीना: जब भी हुआ अक्ल तो आई।
मैं: वो भी है। ठीक है। फिर रात को मिलना। मुझे कमरे में सबके साथ।
रीना: ठीक है।
उसके बाद रीना मौसी कमरे से चली गईं और मैं भी एक छोटी सी झपकी लेने लगा।
रात को देर से सोने की वजह से मैं थोड़ा लेट उठा था। जब मैं बाहर गया तो देखा कि सब पहले ही खाना-वाना खाकर फ्री हो चुके थे, और सिर्फ़ मैं ही बचा हुआ था।
माँ: अरे वाह राजा साहब, उठ गए आप?
मैं: हाँ, उठ गया हूँ।
माँ: अब जल्दी तैयार होकर खाना खा लो।
मैं: हाँ।
उसके बाद मैं नहा-धोकर फ्रेश हो गया और खाना खाने बैठ गया। खाना-वाना खाकर मैं सीधा पर गया- सविता आंटी से मिलने।
मैं: सुनो…
सविता: बोलो।
मैं: रीना मौसी मान गईं।
सविता: क्या? कैसे?
मैं: वो मैं बाद में बताऊँगा। बस अभी के लिए इतना जान लो कि वो मान गई हैं।
सविता: ओके… और तूने उन्हें ग्रुप सेक्स के बारे में बता दिया?
मैं: नहीं, वो मैं रात को बताऊँगा। और प्लान भी बताऊँगा कि कैसे करना है। तो सब रात को मेरे कमरे में आ जाना। सबको ये बात बता देना।
सविता: ठीक है।
उसके बाद मैं नीचे चला गया और रात होने का इंतज़ार करने लगा। दिन बीता, शाम हुई, सबने शाम की चाय पी, रात हुई, सब खाना खाकर अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। मैं और सविता आंटी हमारे कमरे में थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं: काफी टाइम हो गया, सबको बताया तो था ना?
सविता: अरे हाँ, सबको बता दिया था।
मैं: तो फिर अब तक आए क्यों नहीं?
थोड़ी देर बाद दरवाज़े पर किसी ने नॉक किया। मैंने गेट खोला तो प्रतिक्षा मौसी और रीना मौसी थीं।
मैं: अरे वाह, आ गईं! अंदर आओ, अंदर आओ।
रीना: क्या हुआ आरव? फिर से रात को क्या बात करनी है?
मैं: कुछ बताना है आपको।
रीना: नहीं फिर नहीं… अब क्या बताना है? कल ही तो तुम लोगों ने बम फोड़ा था, एक और?
मैं: अरे कुछ बड़ा नहीं है, बस एक आइडिया है।
रीना: आइडिया? कैसा आइडिया?
मैं: मम्मी और प्रिया मौसी को आने दो, फिर बताता हूँ।
काफी देर बाद दरवाज़े पर फिर नॉक हुई। गेट खोला तो मम्मी और प्रिया मौसी थीं।
मैं: अरे यार, इतनी देर क्या कर रहे थे?
माँ: मैं क्या करती? तेरे पापा छोड़ ही नहीं रहे थे। एक तो वो जब से आए हैं, मेरी चूत ही चोदे जा रहे हैं।
मैं: ओह अच्छा… और आप?
प्रिया: मेरा भी सेम। राजीव भी आज पागल हुए पड़े थे, छोड़ ही नहीं रहे थे। लेकिन आज उनके साथ करके मज़ा आया।
मैं: ओह ओके… वेल, आप लोगों की सेक्स लाइफ हेल्दी चल रही है, बढ़िया है। अब अपनी सेक्स लाइफ की प्लानिंग कर लेते हैं।
माँ: हाँ।
मैं: वेल, पहले रीना मौसी सुनो… हम कुछ प्लान कर रहे हैं।
रीना: क्या?
मैं: मैं सोच रहा हूँ कि हम सब एक साथ सेक्स करें।
रीना: क्या?!
मैं: हाँ।
रीना: आरव देखो, सेक्स में प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन तुम्हें नहीं लगता ये थोड़ा एक्सट्रीम हो जाएगा? मतलब अकेले में सेक्स तो ठीक है, पर सब साथ में… अजीब नहीं लगेगा? अपनी ही बहनों के साथ?
मैं: मौसी, आपकी सारी बहनों को कोई दिक्कत नहीं तो आपको क्यों हो रही है? और अपने भांजे के साथ तो आप पहले ही सेक्स कर चुकी हो। और जहाँ तक एक्सट्रीम की बात है, तो हाँ वही तो चाहिए! सोचा हम सब एक साथ- बिस्तर पर, फर्श पर, किचन में, बाथरूम में… जहाँ जगह मिली, वहाँ सेक्स, सेक्स और सेक्स!
रीना: ठीक है… अगर किसी को दिक्कत नहीं तो मुझे भी नहीं।
प्रिया: एक मिनट… सारी बात साइड में। मैडम ये चेंज कैसे एकदम से? कल तो हमें बहुत सुना रही थीं, कैरेक्टर का ज्ञान दे रही थीं। अब क्या हुआ?
उसके बाद मैंने सबको सब कुछ बता दिया कि क्या हुआ था।
प्रतिक्षा: ओह तो मैडम प्रिटेंड करती थीं कि वो सबसे अच्छी लड़की हैं?
माँ: हाँ, नहीं कल ही मान जातीं तो इतना नाटक नहीं होता।
रीना: गाइज़ गाइज़, सॉरी… लेकिन अब तो मान गई ना?
मैं: हाँ यार, रात गई बात गई। भूल जाओ।
सविता: तू तो भूलेगा ही… एक साथ 5 चूतें जो मिलेंगी, तेरा भूलना तो बनता है।
रीना: ओके ओके, अब झगड़ा करने का कोई मतलब नहीं। anyway… ओके आरव, हम मान चुके हैं ग्रुप सेक्स के लिए। लेकिन सेक्स करेंगे कहाँ और कैसे? घर पर तो कर नहीं सकते, रिस्क बहुत है।
माँ: हाँ, सेक्स करेंगे कहाँ?
मैं: मुझे पता था ये सवाल आपके दिमाग़ में आएगा ही आएगा। इसलिए मैंने पहले से ही एक फुलप्रूफ प्लान बना रखा है।
सविता: क्या?
मैं: सुनो… हम सब सेक्स कॉटेज में करेंगे।
प्रिया: कॉटेज में?
मैं: हाँ। देखो, हमें ऐसी जगह चाहिए जहाँ कोई और न हो, दूर-दूर तक कोई और रहे ना। तो कॉटेज सबसे बढ़िया रहेगा। कोई होगा नहीं हमारे अलावा। और देखो, होटल में जाने का रिस्क नहीं ले सकते। रेड पड़ गई या वीडियो शूट हो गया तो हम सब 12 के भाव बिक जाएँगे।
प्रतिक्षा: आरव ठीक कह रहा है।
माँ: लेकिन कॉटेज क्या बोलकर जाएँगे?
मैं: बैचलर्स पार्टी।
रीना: बैचलर्स पार्टी?
मैं: हाँ! आपकी बैचलर्स पार्टी। ज़रा सोचो… आपकी शादी होने वाली है तो क्या उससे पहले आप बैचलर्स पार्टी नहीं करोगी? ऑब्वियस बात है। और इसकी वजह से किसी को शक भी नहीं होगा। और इस बहाने आप सब कॉटेज जा सकती हो।
प्रिया: एकदम अच्छा आइडिया।
रीना: याह।
माँ: पर एक मिनट… हम सब चले जाएँगे, तू कैसे आएगा?
सविता: बोल देंगे आरव को लेकर जाएँगे ताकि कोई प्रॉब्लम हो तो आरव हेल्प कर सके। और फोटोज़ खींचने के लिए… क्योंकि इससे बेहतर फोटो तो पूरे घर में कोई नहीं खींचता।
मैं: वेल, दैट्स ब्रिलियंट!
प्रतिक्षा: ठीक है, पर प्रोग्राम रखना कब है?
मैं: कल। क्यों? देखो कल ही टाइम है आपके पास। क्योंकि परसों से हम सब रिसॉर्ट चले जाएँगे, फिर मौका नहीं मिलेगा। इसलिए कल सबसे बेस्ट है। शाम को निकलेंगे, 7 बजे तक पहुँच जाएँगे।
प्रिया: तो फिर ठीक है। कल का प्लान फिक्स- 6 बजे यहाँ से निकलेंगे कॉटेज के लिए।
मैं: अच्छा हाँ… कल कुछ सेक्सी गारमेंट्स पहनना।
माँ: हट बदमाश!
उसके बाद वो सब चली गईं और मैं और सविता आंटी भी सो गए। अगली सुबह वैसे ही गई जैसे हर सुबह जाती है। मैं उठा, फ्रेश हुआ, चाय पी वगैरह-वगैरह। तो वैसे ही सब चाय पी रहे थे, तब मैंने रीना मौसी को इशारा किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रीना: मम्मी…
नानी: हाँ?
रीना: यार मैं बोल रही थी कि मेरी शादी हो जाएगी, मैं हर काम में बिज़ी हो जाऊँगी।
नानी: हाँ तो?
रीना: तो मैं बोल रही थी शादी से पहले एक बैचलर पार्टी कर लूँ।
नानी: बैचलर्स पार्टी?
रीना: हाँ, आई मीन… बहुत कम टाइम है मेरे पास एंजॉय करने के लिए। तो मैं और मेरी बहनें कॉटेज पर जाएँगी और पार्टी करेंगी।
पापा: अच्छा… और हम क्या करेंगे?
माँ: आप लोग खाना खाना और सो जाना।
पापा: अरे!
माँ: अरे वरे कुछ नहीं, ये हम लेडीज़ की नाइट आउट है बस।
नानी: ठीक है ठीक है, चले जाओ। वापस कब तक आओगे?
प्रिया: रात को वहीं रुकेंगे, अगले दिन सीधा रिसॉर्ट आएँगे।
पापा: ठीक है, कोई दिक्कत नहीं।
रीना: ओके, सब लोग अपना सामान पैक कर लो। और आरव, कैमरा रख लेना।
पापा: एक मिनट… आरव क्यों कैमरा रखेगा?
मैं: क्योंकि मैं इनके साथ जा रहा हूँ ना।
पापा: अरे ये क्या बात हुई? तुमने तो कहा था सिर्फ़ लेडीज़ अलाउड हैं तो आरव…
रीना: जीजू, हमें कोई तो चाहिए ना जो बढ़िया फोटोज़ खींचे। और पूरे घर में सबसे बेस्ट फोटोज़ तो आरव ही खींचता है ना। और दूसरी बात, आप सब बड़े हो, आरव अभी बच्चा है।
पापा: हाँ 18 साल का बच्चा।
राजीव: अरे रहने दो… हम पतियों के जीवन में तो कहीं एंजॉयमेंट…
पापा: सही बोल रहे हो।
प्रिया: देखो, ज़्यादा इमोशनल होने की ज़रूरत नहीं। जब आप अपने दोस्तों के साथ रात-रात भर पार्टी करते हो, मैंने कुछ बोला? एक दिन हमने क्या माँग लिया, आपको मिर्ची लग गई?
राजीव: अरे सॉरी मेरी माँ, सॉरी… मज़ाक कर रहा था। खैर, संभल के जाना और पहुँच के कॉल कर देना।
प्रिया: हाँ।
उसके बाद हम सब रेडी होकर शाम 6 बजे कॉटेज के लिए निकल गए
हम आखिरकार कॉटेज पहुँच चुके थे। मैं, प्रिया मौसी, रीना मौसी, मम्मी, सविता आंटी और प्रतिक्षा मौसी — सब कॉटेज के अंदर गए। अंदर घुसते ही मैंने मम्मी की गांड पकड़ ली, जिसकी वजह से वो एकदम से चौंक गईं।
प्रिया: अरे आरव, आराम से… सब्र रख।
सविता: बिलकुल मिलेगी, मिलेगी। सिर्फ तेरी माँ की नहीं, हम सबकी गांड और चूत मिलेगी।
मैं: कब मिलेगी?
प्रतिक्षा: मिलेगी, पहले थोड़ा मूड तो सेट करने दे।
माँ: हाँ बेटा, बैचलर्स पार्टी का बोलकर आए हैं तो बैचलर पार्टी तो मनानी पड़ेगी। घर पर फोटोज़ भी तो दिखानी हैं।
मैं: हाँ, तो क्या करें?
रीना: सबसे पहले तो थोड़ी साँस लेते हैं, फिर खाने-पीने का सामान और म्यूजिक सिस्टम लगाते हैं।
प्रिया: बिलकुल सही बोला रीना।
रीना: आरव, गाड़ी से जाकर वो म्यूजिक सिस्टम ले आ।
मैं: ठीक है मौसी।
प्रतिक्षा: ठीक है, जब तक मैं और दीदी भी सबके लिए कुछ पीने के लिए लाते हैं। चलो दीदी।
माँ: हाँ चल।
उसके बाद मैं फटाफट गाड़ी से म्यूजिक सिस्टम लेकर आया।
मैं: लो, ये म्यूजिक सिस्टम कहाँ रखूँ?
रीना: एक काम कर, स्विच बोर्ड के पास रख दे और प्लग इन करके गाने चला दे।
मैंने म्यूजिक सिस्टम स्विच बोर्ड के पास रख दिया, उसे ऑन करके गाने चला दिए। फिर मैं और रीना मौसी डांस करने लगे। थोड़ी देर बाद प्रिया मौसी और सविता आंटी भी हमारे साथ डांस करने लगीं। कुछ देर बाद मम्मी और प्रतिक्षा मौसी खाने-पीने का सामान लेकर आ गईं।
अब हम सब कभी कुछ खा रहे थे, कभी पी रहे थे और डांस भी चल ही रहा था। साथ ही मैं फोटोज़ भी खींच रहा था ताकि घर पर सबको दिखा सकूँ। खैर, ये सब करते-करते करीब 2 घंटे हो चुके थे और हम सब थककर सोफे पर बैठ गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ: ओह, मज़ा आ गया। काफी समय बाद ऐसी पार्टी की है।
सविता: सही में यार।
प्रिया: खैर, पार्टी कर ली। अब वो करें जिसके लिए आए हैं।
रीना: हाँ, अब वो करते हैं।
प्रतिक्षा: हाँ, क्यों? मुझे नहीं लगता कि आरव से अब सब्र हो रहा है।
उसके बाद वो सब मुझे देखने लगीं।
मैं: तो देर किस बात की? कपड़े खोलो अपने।
उसके बाद हम सब नंगे होने लगे। थोड़ी ही देर में हम सबने अपने सारे कपड़े उतार दिए। कसम मेरे घर की सारी औरतों को देखकर मेरा लंड इतना सख्त हो गया था कि क्या बताऊँ। उसके बाद मैं सोफे पर बैठ गया।
मैं: अब आप सब एक काम करो मेरे लिए — गांड हिला-हिलाकर डांस करो। आप सबमें से जिसकी गांड सबसे बेहतरीन हिलेगी, उसे मैं सबसे पहले चोदूँगा।
ये सुनते ही वो सब अपनी-अपनी गांड हिलाने लगीं। इतना शानदार सीन दिख रहा था कि क्या बताऊँ। मम्मी, सविता आंटी और मेरी तीनों मौसियाँ अपनी गांड को हिलाने की पूरी कोशिश कर रही थीं और सब बहुत बढ़िया कर रही थीं। करीब दस मिनट तक गांड हिला-हिलाकर नाचने के बाद उन्होंने पूछा कि कौन सबसे बेहतरीन गांड हिलाकर नाच रही थी।
मैं: वेल, सबसे अच्छा रीना मौसी ने किया। आप सबने भी बहुत अच्छा किया, लेकिन रीना मौसी बाजी मार गई। इसलिए पहले मैं रीना मौसी को ही चोदूँगा।
प्रिया: खैर, कोई बात नहीं। हर-जीत तो लगी ही रहती है।
माँ: हाँ, अब क्या कर सकते हैं।
मैं: यहाँ आकर मेरा लंड चूस सकती हो।
उसके बाद वो सब मेरे से चिपक गईं। मम्मी, प्रिया मौसी और रीना मौसी मेरा लंड चूसने लगीं। प्रतिक्षा मौसी और सविता आंटी दोनों मुझे किस करने लगीं। फिर थोड़ी देर बाद वो दोनों भी मेरा लंड चूसने लगीं। रीना मौसी मेरे मुँह पर अपनी चूत लेकर बैठ गईं.
और दूसरी तरफ मम्मी और प्रिया मौसी 69 पोजीशन में एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। इस तरह पूरा कमरा हमारी सिसकारियों से भर गया था। फिर मैंने रीना मौसी को सोफे पर लिटा दिया और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा, जिसकी वजह से रीना मौसी और बेचैन होने लगीं।
रीना: आरव, और मत तड़पा… सीधा डाल दे अंदर।
मैंने भी पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया, जिसकी वजह से उनकी चीख निकल गई। और फिर मैंने उनकी चुदाई शुरू कर दी, जिसकी वजह से वो और चीखने लगीं। इधर मैं रीना मौसी को चोद रहा था, उधर बाकी सब अपने काम में लगी हुई थीं — कोई किसी की चूत चाट रही थी तो कोई किसी की गांड। करीब 15 मिनट तक मौसी को चुदाई करने के बाद मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और उनकी गांड में लंड डालने लगा।
गांड का छेद टाइट होने की वजह से लंड घुसने में दिक्कत आ रही थी, जिसकी वजह से मौसी को बहुत दर्द हो रहा था। उसके बाद मैंने लंड पर तेल लगाया और फिर से डालने लगा। छेद टाइट था लेकिन लंड घुस गया और मैंने उनकी गांड मारनी शुरू कर दी। रीना मौसी की चीखें बढ़ती ही जा रही थीं, लेकिन मैं रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। बाकी भी अपना काम रोककर हमारी चुदाई देख रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रीना: आआआ आरव… आआआअ आराम से… आआआआ आआआ मर गई… आआआआआअ आआआआआअ.
प्रिया: दीदी, आरव तो बहुत बुरा चोदता है।
माँ: अभी तो इसने ढंग से चोदना शुरू भी नहीं किया है।
सविता: अभी हमारी बारी भी बाकी है।
प्रतिक्षा: आज तो ये लड़का हमें मारके ही दम लेगा।
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं मौसी की गांड में ही झड़ गया। मौसी बिलकुल सोफे पर लेटी रह गईं। उनकी पूरी एनर्जी खत्म हो गई थी। उसके बाद मौसी नीचे फर्श पर लेट गईं और मैं सोफे पर।
मैं: अब आ जाओ, जिसको आना है।
प्रतिक्षा मौसी और सविता आंटी फटाफट आ गईं। प्रतिक्षा मौसी मेरे मुँह पर बैठ गईं ताकि मैं उनकी चूत चाट सकूँ और सविता आंटी मेरे लंड पर, प्रतिक्षा मौसी की तरफ मुँह करके बैठ गईं ताकि वो मुझे चोद सकें। अब जैसे ही मैंने सविता आंटी की चुदाई और साथ ही प्रतिक्षा मौसी की चूत चाटना शुरू किया, वो दोनों चीखने और सिसकारियाँ लेने लगीं। थोड़ी देर बाद वो दोनों एक-दूसरे को किस करने लगीं।
प्रतिक्षा: आआ आआआअ मज़ा आ रहा है… आआआआअ.
सविता: आआआ आआ आआआअ आआआआआअ… और तेज़ आरव… और तेज़।
दूसरी तरफ रीना मौसी मम्मी और प्रिया मौसी के साथ अपना अलग कर रही थीं। हम सब पूरी तरह से काम-वासना में डूब चुके थे। ऐसे ही 30 मिनट तक सविता आंटी और प्रतिक्षा मौसी की चुदाई करने के बाद मैंने प्रिया मौसी को अपने पास बुलाया और उन्हें डॉगी स्टाइल में लाकर उनकी गांड पर चांटे मारने शुरू कर दिए, जिससे वो चिल्लाने लगीं। थोड़ी देर बाद मैं किचन में गया और तीन खीरे लेकर आया।
मम्मी को बोला — “इसे अपनी चूत और गांड में डालो”।
मम्मी ने किया। उनके चूत और गांड में खीरा चला गया।
मम्मी ने पूछा — “ये तीसरा खीरा किसके लिए?”
मैं: आपके लिए ही है। मुँह खोलो।
और फिर वो तीसरा खीरा मैंने मम्मी के मुँह में डाल दिया।
मैं: अब जब तक मैं प्रिया मौसी की चुदाई करूँगा, तब तक ये खीरे आपके किसी भी छेद से बाहर नहीं आने चाहिए। ठीक है?
ये बोलकर मैं प्रिया मौसी की चुदाई करने चला गया। मैं सविता आंटी की चूत चोद रहा था और दूसरी तरफ मम्मी पूरी कोशिश कर रही थीं कि कोई खीरा उनके किसी भी छेद से न निकले। दूसरी तरफ रीना मौसी और प्रतिक्षा मौसी सिसरिंग कर रही थीं और सविता आंटी बस लेटी हुई आराम कर रही थीं।
मैंने भी प्रिया मौसी की चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी। थोड़ी देर बाद मैंने उनकी गांड में लंड पेल दिया और उन्हें चोदने लगा। साथ ही उनके बूब्स के साथ खेलने लगा। काफी देर उनकी चुदाई करने के बाद मैंने उनके मुँह पर अपना सारा माल निकाल दिया। उसके बाद मैं मम्मी के पास गया।
सबसे पहले उनके मुँह से खीरा निकाला और अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया। उन्हें मुँह चोदने लगा। मैंने अपना लंड पूरा हलक तक डाल दिया था, जिससे मम्मी खाँसने लगीं और मेरा लंड भी उनकी लार से भर गया। उसके बाद मैंने खीरा वापस उनके मुँह में डाल दिया और फिर उनकी चूत का खीरा निकाला।
मैं लेट गया और उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया और उछल-उछलकर चुदने लगीं। मुझे काफी मज़ा आ रहा था। 10 मिनट बाद मैं मम्मी की चूत में ही झड़ गया। उसके बाद मैंने मम्मी की चूत में वापस खीरा डाल दिया और अब उनकी गांड वाला खीरा निकाला। फिर मैं उनकी गांड मारने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उनकी गांड इतनी ज़ोर से मार रहा था कि वो चीख रही थीं, लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थीं क्योंकि उनके मुँह में खीरा था और उनके मुँह से सिर्फ लार ही बह रही थी। मैंने और तेज़ उनकी गांड चोदनी शुरू कर दी। अब मम्मी ने पूरा खीरा अपने मुँह से काट दिया, जिसकी वजह से आधा खीरा बाहर गिर गया और बचा हुआ उनके मुँह में रह गया, जिसे उन्होंने बाहर थूक दिया। और अब वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगीं। मुझे गालियाँ देने लगीं।
माँ: आआआअ मर गई… आआ मादरचोद… आआआअ थोड़ाआआ धीरे चोद… आआआआअ आआआअ रंडी नहीं हूँ… आआआअ.
मैं: किसने कहा रंडी नहीं हो? मेरी रंडी हो तुम। तुम सब मेरी रंडी हो।
और फिर मैं उनकी ही गांड में झड़ गया। हम सब ऐसी चुदाई करते रहे और देखते-ही-देखते सुबह हो गई। हम सब नीचे फर्श पर लेटे हुए थे, बिलकुल थके हुए। हममें से किसी में भी खड़े होने तक की ताकत नहीं थी। हम सबकी बॉडी बुरी तरह दर्द कर रही थी। मम्मी मेरी बाहों में सो रही थीं और बाकी भी कहीं न कहीं पड़ी थीं। फिर भी धीरे-धीरे एक-एक करके सब खड़ी हुईं और नहा-धोकर रेडी हुईं। मैं और मम्मी साथ में नहाने गए। फिर हम सब नाश्ता करने बैठ गए। हमने वही तीन खीरे काटकर खाए जो मम्मी के अंदर थे, साथ में पोहा।
करीब दिन तक आराम करके हम सब घर के लिए निकल गए। जब तक हम घर पहुँचे, तब तक हम कल रात की ही बात कर रहे थे। फिर हम घर पहुँचे, थके-हारे और घर जाते ही सो गए। शाम को हमने सबको बैचलर्स पार्टी की फोटोज़ और वीडियोज़ दिखाई। ऐसे ही समय बीता और आखिरकार रीना मौसी की शादी भी हो गई। मैं, मम्मी, सविता आंटी और पापा भी घर वापस आ गए। लेकिन वो पल जो शिमला में बने, वो मुझे हमेशा याद रहेंगे।
