बीवी के कारनामे 4

बीवी की सहेली की चुदाई

मैं आज अपने आप में एक नए कॉन्फिडेंस को महसूस कर पा रहा था,जो मुझे रेणु से किये गए अपने व्यवहार और काजल से मिले असीम प्यार का नतीजा था,आज काम के सिलसिले में मुझे शहर जाना था ,मोबाइल और मेसेज से तो काजल की हरकते पता ही नही चल पा रही थी तो सोचा क्यो ना आज शहर में काम निपटाकर उसके होटल ही चला चालू,ऐसे भी वहां मुझे कोई जनता नही और कजल या रॉकी मिल गए तो कह दूंगा की मिलने आया था,

शहर में मेरा काम होते ही शाम हो गया था,पता नही काजल मिलेगी या नही ,लगभग 6 बज चुके थे ,मैंने अपने मोबाइल से उसके मोबाइल को चेक किया लेकिन ना तो किसी से कोई खास बात ना ही कोई ऐसा क्लू जिससे मुझे कुछ रोमांचित सा महसूस हो,,,,,,मैं काजल के होटल के सामने जा कर खड़ा हो गया ,मैं शहर में रघु को छोड़कर उसे घूमने जाने को कह गया था,मैंने उसे ये नही बताया था की मैं होटल जा रहा हु,ऑटो से उत्तर कर मैं बाहर से ही होटल को देखने लगा ,सचमे बहुत कुछ बदलाव इसमें आ गया था,काच की संरचना बेहद आकर्षक लग रही थी ,साथ ही एक बड़ा आ फ़ोटो भी पास ही फ्लैक्स में लगा था जिसमे इस होटल के हेल्थ सेंटर का विज्ञापन था,और उसमे रॉकी और काजल की पिक थी,वाह मैंने कभी भी काजल के शरीर पर शायद इतना धयन नही दिया था वो पूरी तरह से बदल गयी थी ,फ़ोटो में कही भी उसके पेट में कोई भी चर्बी नही दिख रही थी ,वो जिम के कपड़ो में थी और बहुत ही बेहतरीन तरह से उसका शरीर का सुडौलपन दिख रहा था,पर मेरी नजर उसके चहरे के मासूमियत पर जाकर टिक गयी ,इतने मोडल की तरह से फ़ोटो खिंचने पर भी उसने अपने मांग का सिंदूर नही निकाला था,हाँ वो उतना गहरा तो नही था पर हल्के से और ध्यान से देखने पर मुझे समझ आ गया की फ़ोटो खिंचते समय उसने सिंदूर नही धोया होगा,,,,,,,,,,,,

शादी की इस परंपरा पर उसका इतना विस्वास और अपने पति से इतना प्यार और समर्पण उसकी की जाने वाली हरकतों से कोई भी साम्य नही रखती ,पर मैं जनता हु की वो दोनो में ही बहुत ही समर्पित है….

मैं अंदर गया तो वहां से सभी मजदूर जाने के लिए निकल रहे थे,किसी ने मेरी तरह कुछ खास ध्यान भी नही दिया ,वहां कोई ऐसा आदमी भी मुझे नही दिखा जिसे मैं काजल के बारे में पूछ सकू सभी मजदूर ही दिख रहे थे ,होटल इतना भी बड़ा तो नही था,पर एक वाचमैन मुझे दिखाई दिया मैंने काजल को पूछने से अच्छा रॉकी को पूछा…उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा ,

“आप कौन है”

मुझे गुस्सा आ गया

“तुझे क्या मतलब की मैं कौन हु तू बता ना कहा मिलेगा”

“अरे साहब यहां अभी सभी समान फैला हुआ है ना और रॉकी साहब ने 6 बजे के बाद किसी को भी यहाँ आने देने से मना किया है,सभी मजदूर भी चले गए है ,आप तो अंदर भी आ गए साहब ने तो गेट में ही रोकने को बोला था…”

“अच्छा यानी अभी साहब है यहां पर “

“जी साहब मेडम और साहब दोनो है “

मेरे दिल में जोर से हलचल हुई ,साले दोनो है यहां अकेले और रोज रहते है,ये तो हो ही नही सकता की वो कुछ ना कर रहे हो पर साला बहुत बड़ी मुश्किल तो ये थी की आज नही तो कल इस वाचमैन को पता लग ही जाता की मैं काजल का पति हु ,और वो उन्हें कभी बता भी सकता था की मैं यहां आया था,अगर इसे अभी बताया तो मुझे कुछ भी पता नही चलेगा,,क्या करू ??????????

मैंने फैसला कर लिया

“मैं इस होटल का शेयर होल्डर हु और रॉकी मेरे लिए काम करता है ,,…”

वो वाचमैन सीधा खड़ा हो गया ,

“सर मैं अभी उन्हें फोन लगता हु”

“नही रहने दो कहा है वो और काजल कहा है “

“सर दोनो जिम में होंगे “

“अच्छा और जिम कहा है”

“सर वो उधर सेकंड फ्लोर में “

‘ह्म्म्म ओके मैं वही जाकर मिल लेता हु “

वाचमैन मुझे रोकता है

“सर……. वो सर मुझे डांटेंगे की मैंने उन्हें नही बताया ऐसे भी मैं आपसे पहली बार मिल रहा हु “

मुझे उसकी बात समझ आ गयी की बेचारे की नॉकरी का सवाल हो सकता है और कोई भी मालिक बोलकर अंदर आ सकता था ,मैंने अपना मोबाइल निकाला और रॉकी को काल कर स्पीकर ऑन कर दिया

“हैलो”

रॉकी की हाँफने की आवाज आयी

“हैलो रॉकी मैं आकाश बोल रहा हु “

“हा हा सर बोलिये “इतने में ही वाचमैन को समझ आ चुका था की मैं जो बोल रहा हु वो सच ही रॉकी मुझे सर से संबोधित कर रहा था….मैंने वाचमैन को देखा वो धीरे से मुझे सॉरी कहा ,

मैं फिर से फोन का स्पीकर हटा लिया ,और उससे थोड़ी दूर चला गया

“हा बात ये है की मैं तुम्हारे होटल आ रहा हु ,कोई वाचमैन हो तो उसे बता देना की मैं आ रहा हु मुझे थोड़ा टाइम लगेगा अभी तुम लोग वहां हो या निकल गए ,और ऐसे सांसे क्यो ले रहे हो ठीक तो हो ना “

तब तक रॉकी अपनी सांसे सम्हालने की कोशिस कर रहा था और साथ में ही आवाज गूंजने लगी मुझे समझ आ गया की उसने अपना मोबाइल स्पीकर मोड़ में डाल दिया है…..

“वो वो सर मैं और काजल अभी एक्सरसाइज कर रहे है तो “

“ओके जिम में हो ,”

“जी सर आपको कितना समय लगेगा आने में “

“बस 5-10 मिनट में पहुचता हु तुम फिकर मत करो मैं जिम में ही आ जाऊंगा “

“ओके सर “

मुझे लास्ट में कुछ फुसफुसाने की आवाज आयी और मेरा लिंग एक झटके मारा,शायद ये झटका था उस कल्पना का की शायद दोनो लेटकर बिस्तर वाली एक्सरसाइज कर रहे है,…..मैं अभी तो कुछ नही कह सकता था पर मुझे काजल पर भरोसा जरूर था……ही ही ही

तुरंत ही वाचमैन के पास रॉकी का काल आ गया,उसने उससे कुछ कहा वाचमैन बस जी सर जी सर कर रहा था…

मैं वाचमैन से बिना पूछे ही आगे बढ़ गया और उसने भी मुझे रोकने की हिम्मत नही दिखाई,

जैसे जैसे मैं जिम के दरवाजे के पास जा रहा था मेरी धड़कन तेज हो रही थी,पता नही अंदर का क्या हाल होगा…

कांच से ऐसे तो अंदर का पूरा नजारा दिख रहा था लेकिन वो दोनो मुझे नही दिखे शायद अंदर कही होंगे जहा का नजारा यहाँ से ना दिखता हो,मैं दरवाजा खोलकर अंदर घुसा दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,ऐसा लग रहा था जैसे मैं चोर हु और कही चोरी करने आया हु,थोड़ा अंदर जाने पर मुझे कुछ फुसफुसाहट की आवाजें आयी मैं उधर ही चला गया…

मैंने आजतक जितने भी जिम देखे थे ये उनमे सबसे बड़ा था,सचमे ये हेल्थसेन्टर यहाँ का मुख्य आकर्षण बनने वाला था,मंहगे महंगे उपकरण,के साथ बहुत बड़ा स्पेस था मैंने जो कुछ भी उस कांच से देखा था वो बस एक झलक थी,अंदर जाने के बाद भी मुझे उन्हें ढूंढने में दिक्कत हो रही थी,की मुझे एक कोने से आती हुई कुछ हलचल सी दिखाई दी,कुछ मशीनों की आवाज भी साथ थी,ऐसे तो वहाँ का ac पूरी तरह से on था पर मेरे माथे पर पसीने की बूंदे आ चुकी थी,मैं उधर कदम बढ़ाया,देखा तो काजल पसीने से पूरी तरह से भीगी हुई अपनी सांसो को काबू में कर रही थी,हम दिनों की नजर मिली और मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी,मेरी नजर रॉकी पर गयी वो बेचारा भी एक डंबल पकड़कर कुछ करने की कोसिस कर रहा था,मुझे उनकी हरकते समझ मे आ रही थी,इन्हेंने जरूर उस वाचमैन से पूछा होगा कि साहब कहा पर है और उसने बता दिया होगा कि वो पहुच चुके है और जिम की तरफ जा रहे है,जल्दी जल्दी में उन्हें भी समझ नही आया होगा कि क्या करे….जैसे तैसे वो अपनी सांसो पर काबू कर पा रहे थे और जो हाथ मे आया वही एक्सरसाइज करने की कोसिस कर रहे है,दोनो के चहरे पर फैला वो डर मुझे बहुत ही सकून दे रहा था,जैसे तैसे काजल ने अपने चेहरे पर एक मुस्कान लायी और उठकर मेरे पास आकर मेरे गले से लग गयी,

“आपने बताया नही की आप आ रहे है”

“अरे कुछ काम से आया था सोचा मिलते चालू “

“बहुत अच्छा किया”वो मेरे गालो को एक किस दे गई, वही रॉकी आकर मुझसे हाथ मिलता है,

“ वेलकम सर”

मैंने उन्हें ध्यान से देखा रॉकी का लिंग अब भी तना हुआ था जी उसके लूस लोवर से बाहर आने की कोसिस में था वही काजल के जांघो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दे रहा था,बेचारे मेरे दो प्रेमी युगलों के मिलान में मैंने बाधा डाल दी,मुझे तो मजा आ रहा था लेकिन शायद दोनो ने मुझे दिल से गालिया दी होंगी,नही सिर्फ रॉकी ने मुझे गालिया दी होंगी मेरी जान काजल तो मेरे लिए हमेशा प्यार के शब्द ही निकलेगी वो मुझे गली नही दे सकती………..

मैंने रघु को काल कर होटल ही बुला लिया और रॉकी और काजल मुझे पूरा होटल घूमाने लगे.मैंने सभी कुछ। बड़े ही धयन से देखा और ना सिर्फ देखा बल्कि कुछ जगहों की फ़ोटो भी खिंच ली ताकि फिर जब मैं आउ तो उस वाचमैन को भी पता नही चले ,क्योकि भले ही मुझे उनकी तड़फ देखकर खुशी हो रही थी पर मैं काजल की रास लीला देखना चाहता था,मैं उसके चहरे का वो एक्सप्रेशन देखना चाहता था जो उसके चहरे पर उस वक़्त आता जब की कोई उसके अंदर अपना सरिया घुसा रहा होगा,,,,जब कोई चूहा या कोबरा उस बिल में जा रहा होगा जिसे समाज ने सिर्फ मेरे लिए मुझे दिया है,उस लाल लाल सी फांको के बीच कोई काला या गेहुआ से केला जब बार बार अंदर हो रहा होगा और मेरी जान के मुह से बस सिसकिया निकल रही होगी उस समय को याद कर पता नही क्यो मेरा भी लिंग अंगड़ाई लेने लगता है…एक झटका तो उसने भी मारा लेकिन मेरे जीन्स में ही दब कर घुटकर रह गया ,मैंने प्यार से अपनी काजल को अपने बांहो में खिंच लिया और जैसे ही रॉकी हमसे दूर हटा मैं उसके होठो को एक प्यार भरा चुम्मन दे दिया,साला कितने कोमल और गीले थे मेरी जान के वो रसीले होठ ,नरम नरम से गीले गीले जैसे अभी अभी किसी ने उसे अपने लार से भिगोया होगा,मैं उसे अपने तनाव का अहसास करना चाहता था ,मैंने उसे पीछे से पकड़ा और उसके भारी नितंबो में अपने लिंग रगड़ दिया,उसके होठ और भी खुल गए,और मैं उसमे अपनी जीभ घुसा दी पर अच्छे से एक और रगडें ने काजल की पोल खोल दी ,जी हा उसने अपने निकर के अंदर कुछ भी नही पहना था,एक तो उसका निकर भी उसकी जांघो के ऊपर तक ही था ,पूरी मांसल सी जांघ चमक रही थी और अंदर कुछ नही पहने होने का वो अहसास,उसकी कोमलता में मेरे तने हुए लिंग की वो रगडन ,शायद उसे भी अपने गलती का अहसास हो गया और वो मेरे से दूर जाने लगी और मैंने उसे अपनी ओर खिंचा और उसके उजोरो को सहलाने लगा ,जैसा की मुझे शक ही था उसने अपने स्पोर्ट टी शर्ट के अंदर भी कुछ भी नही पहना था ,और मैंने जोरो से उसे निचोड़ा की काजल के मुह से एक मादक सी आह निकल गई …

“हाय aaahhhhhhhhhh क्या कर रहे हो रॉकी आ रहा होगा,छोड़ो ना जान मुझे घर में करते है जल्दी से घर चलते है…….”

और काजल मेरे होठो को एक बार फिर से अपने होठो में भरकर अपना रस मुझे पीने दिया और हल्के से शरारती मुस्कान के साथ मुझसे अलग हो गयी…

रॉकी आया साथ ही रघु का भी काल आ गया वो भी नीचे ही खड़ा था,काजल चेंजिंग रूम में जाकर अपने कपड़े बदल लिए और मैं और काजल रघु के साथ वहां से निकल गए………

एक दूजे के प्यार के नशे में बेताब से हम दोनो ही घर पहुचे आज तो प्यार की इंतहा हो गयी थी ,जाने कब ये आग शांत हो ,बिस्तर में पहुचते ही मैं काजल पर टूट पड़ा,वो भी मुझे पागलो की तरह किस किये जा रही थी शायद उसकी भी आग आज ठंडी नही हुई थी जो रॉकी ने लगा तो दी थी पर बुझाना भूल गया था,मेरे लिए तो काम बहुत आसान हो गया था,लोहा पूरी तरह से गर्म था मुझे तो बस हथौड़ा मरना था,
काजल को बिस्तर पर पटकते ही मैं अपने कपड़े खोल कर फेक दिया और काजल के गालो को खाने लगा,उसके गुलाबी से गाल जो रस से भरे हुए थे ,मेने उसके गालो को पूरी तरह से भिगो दिया था,मेरे थूक से गिला हुआ उसका गाल अपनी नरमी से मुझे सुख दे रहा था और मैं और भी टूटकर उसके गालो को खा रहा था,अपने दांतो से मेने उसके गालो में निशान ही बना दिए जिसपर काजल ने मुझे एक शिकायत भरे निगाहों से देखा पर उसकी आंखों में अब भी वही प्यार था जो मैं हमेशा से ही मेरे लिए महशुस करता हु…………….
उसके बालो को अपने हाथो में फसाकर मैं उसे सहलाने लगा,और वो भी बेहद कामुक अंदाज में मेरे होठो पर टूट पड़ी,दो जिस्मो की गर्मी ने हमारे बदन में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया था,
मैं काजल के कपड़ो के तरफ रुख किया और उसके कपड़ो को धीरे धीरे उतारने लगा ,वो अभी भी वही कपड़े पहनी थी सुबह ही मैं उसे देखकर उत्तेजित हो गया था ,मैं उसके भरे हुए नितंबो को अपने हाथो से भरकर उसे मसलने लगा,काजल और भी गहरे से मुझे चूमने लगी ,मैं उसका शर्ट खोलकर फेक चुका था,शायद अब काजल को सहन नही हो रहा था और वो जल्दी से ही अपने कपड़े खोलने लगी,लेकिन मैंने उसको उसकी पेंटी खोलने से मना कर दिया वो मुझे फिर से शिकायत के भाव से देखने लगी ,मैं अपने पूरे कपड़े खोल कर नंगा हो कर उसके सामने खड़ा हो गया ,मेरे लिंग को देखकर वो हल्के से हँसी और उसे पकड़कर उसे इतने प्यार से चूसने लगी जैसे की वही वो चीज थी जिसके लिए वो इतनी प्यासी थी,…..
मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच रहा था और मैं झरने को बिल्कुल भी तैयार नही था,मुझे तो अभी जितनी देर हो सके अपनी जान के साथ खेलना था,मैं काजल के मुह से अपना लिंग निकल कर अलग किया ,वो जल्दी से अपनी पेंटी निकालने को हुई पर मैंने उसे फिर से रोक दिया वो मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगी ,और मेरे होठो में एक शरारती सी मुस्कान उभर आयी .,….
“नही ना जान करो ना “
उसने लगभग रोते हुए कहा ,वो आमतौर पर इतनी बेताब नही होती पर आज तो उसकी जगह पर कोई भी होता तो वो भी बेताब सा हो जाता,जब वो चरम के करीब पहुची थी तो मैं आकर उसके मजे का सत्यानाश कर दिया था ,और फिर से उसे भड़काकर छोड़ दिया रो ऐसे में कोई भी बेताब सा हो जाय,वो मछली जैसे तड़फने लगी और मुझे उसकी तड़फन बहुत ही मजेदार और मनमोहक लग रही थी ,मैं उसके पास जाकर उसे लिटा दिया और खुद उसके पेंटी के पास अपनी नाक ले जाकर जोरो से सूंघ लिया,उसके कामरस से भीगा वो अंतःवस्त्र इतने मादक खुसबू से भरा था की मैं फिर से उसे जोरो से सूंघने से अपने को नही रोक पाया,लेकिन मेरी इस हरकत से काजल की हालात और भी खराब हो गयी उसे होने वाले का अंदेसा हो चुका था और उसका शरीर छटपटाने लगा था वो अपनी कमर ऊपर कर मुझे आमंत्रण दे रही थी और जब मैं अपना नाक उसके योनि के भाग से लगाया वो अपने कमर को ऊपर कर मेरे नाक से अपनी योनि को रगड़ने लगी,काजल की योनि से बहता हुआ गिला गिला से प्यार की धार ने मेरे नाक को भी भिगो दिया और मेरे मुख से एक मुस्कान सी निकल गयी ….
वो बस झरने ही वाली थी और मैं उसे यू बेताबी में झरने नही देना चाहता था उसे भी वो मजा मिले जिसके लिए वो इतनी तड़फ रही थी ,मै उसकी पेंटी को उसकी योनि के ऊपर से हटा कर अपनी जीभ से उसे चाटने लगा,काजल का हाथ मेरे सर पर था और वो पूरे ताकत से उसे अपने अंदर लेने की चेष्टा कर रही थी पर शायद उसे वो आनंद नही मिल पा रहा था जिसके लिए वो तडफ रही थी और आखिर में वो हारकर मुझे अपने ऊपर खिंच ही लिया ,आज मैं काजल की ताकत देखकर दंग ही रह गया वो मुझे बिल्कुल ही आराम से उलटा कर के मेरे ऊपर चढ़ गयी ,अपने हाथ मेरे लिंग पर रख उसे अपने आग की उस भट्ठी में डाल दी जो पानी से भरी थी,……..
काजल अंदर से इतनी गर्म होगी मुझे पता नही था आज तो उसकी योनि मानो कोई भठ्ठी ही हो,मेरे लिंग के अंदर जाते ही काजल को ऐसे सुख का अहसास हुआ जैसे सालो से प्यासे को कोई अमृत ही पिला दे,
“aaaahhhhhh जाआआआआन लव यु बेबीईईईईई “
वो अपनी रफ्तार तेज करने लगी उसकी सिसकियों से ही मैं झट जाता इतनी मादकता अपने अंदर लिए है मेरी रानी काजल ……
“आह आह आह आह आह आह ,ओ ओ ओ आह जआआआननन आह जाआआआआआआनननन “
वो किसी पम्प की तरह मेरे ऊपर कूद रही थी और मेरे होश ही उड़ा रही थी मुझे पता था की काजल इतनी गर्म हो चुकी थी की वो ज्यादा समय तक नही टिकने वाली ,मेरी अकड़ को आज काजल शायद तोड़ ही देती वो बिल्कुल भी आराम के मूड में नही थी ,वो लगातार ही कूद रही थी ,
“लव यू बेबी ,लव यू ,फ़क मि जान आह आह आह ,”
“लव यू मेरी रानी “
हमारी सांसे कब उखाड़ जाती इसका कोई भी भरोषा ही नही था,पर आनद के उस सागर से मैं कभी भी बाहर नही निकलना चाहता था,लेकिन शायद काजल को जल्दी से ही झरना था वो अपनी बेताबी के इंतहा पर थी और वो उस ज्वाला को निकाल देना चाहती थी जो उसके अंदर भरी हुई थी ,काजल ने अपने स्तनों को मेरे मुह में ठूस दिया और मैं भी किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसके स्तनों का पान करने लगा मुझे उसमे कुछ लाल रेसेस दिखाई दिए शायद वो रॉकी की दें थे साले ने मेरी जान को बहुत ही निचोड़ा होगा,उसका चहरा मेरे दिमाग में आने पर मैं और भी उत्तेजित हो गया और उसे नीचे से ही और जोरो के धक्के देने लगा पर शायद वो जोर नही बन पा रहा था ,काजल भी अब कूदना बन्द कर जोरो से धक्के मारे जा रही थी मेरे अंडों में एक दर्द भर गया पर उसी दर्द का तो मजा था,,….
हम दोनो ही अपने तरफ से पूरी ताकत से धक्के दे रहे थे…
“आह वो आह आह आह आह जान जान आह “
दोनो के धक्के एक साथ मिलकर और भी तेज और प्रभावशाली हो जाते और दोनो के मुह से ही एक सिसकारी फुट पड़ती थी…उसके योनि से रगड़ते हुए मेरे लिंग की चमड़ी से उठाने वाला वो आनद मैं कभी भी खोना नही चाहता था पर वो एक धारा सी मेरे वृषनकोशों से आती हुई मुझे प्रतीत हुई और काजल भी अपने चरम के नजदीक ही थी हम दोनो ही अंतिम धक्कों पर अपनी पूरी की पूरी ताकत खर्च कर रहे थे ,और वो ज्वाला फूटा और काजल मेरे ऊपर झरने सी धार छोड़ती हुई लेट गयी,मेरा भी हाल उससे अन्यथा नही था और मैं भी उसके अंदर ही एक तेज फुहारे को छोड़ता हुआ हाँफने लगा,……………
दोनो ही हाफ रहे थे और दोनो ही उस आनंद में डूबे थे जो हमे अभी अभी मिला था…वो गीलापन हमारे यौन अंगों से बाहर आ रहा था,चिपचिपे वीर्य में मिला काजल का कामरस मुझे इच्छा तो हुई की उसे पी लू पर उठाने की हिम्मत ही नही जुटा पाया और मुझे पूरा यकीन था की यही हाल काजल का भी हो रहा होगा उसे भी मेरा वीर्यपान करना बहुत ही पसंद था ,खासकर जब गहरे संतोष की दशा हमे घेरे हुए हो …………………

उखड़ती सांसो में मेरा प्यार काजल के अंदर जा रहा था और वो भी मेरे वीर्य को अपनी योनि सिकुडकर अपने अंदर ही रखने का प्रयाश कर रही थी ,मैं उसे और भिगोना चाहता था पर मेरे अभी का कोटा पूरा हो चुका था …………..
गर्माहट के अहसास से भीगे हुए हम लेटे हुए थे,अब भूख भी लगनी शुरू हो गयी थी,दोनो उठकर तैयार हुए,रेणु ने खाना बना कर रखा हुआ था,दोनो खाना खा कर फिर से बिस्तर में जाने का प्लान कर रहे थे,तभी मुझे याद आया की प्यारे की तबियत खराब थी चलो हाल चाल पूछ लेते है,काजल भी साथ गयी,प्यारे ने काजल को ऐसे निगाहों से देखा की मुझे थोड़ी सी हँसी आ गयी,उसकी निगाहों में डर साफ था…..
“कैसे हो काका “
“अब ठीक हु साहब”
“हम्म ज्यादा काम मत किया कीजिये ,अब तो रेणु भी आ गयी है आपका हाथ बटाने के लिए “
“जी जी”
“चलिए ठीक है आराम कीजिए “
हम दोनो वापस आ गए ,
वॉयस आकर काजल बाथरूम में चले गयी ,मैं अपने मोबाइल से काजल का वाट्सअप चेक करने लगा,
थोड़ी देर पहले ही उसने प्यारे से बात की थी,मेरा माथा ठनका अच्छा जब हम खाना खा रहे थे तो काजल मोबाइल पकड़े हुए थी शायद उसी समय कुछ बात हुई थी ,…
‘मेडम मुझे माफ कर दीजिये ‘
‘कोई बात नही काका तबियत कैसी है आपकी और आप मुझे बहुरानी ही कहा कीजिए’
‘अब थोड़ी अच्छी है पर……”
“पर क्या’
‘छोड़िए ‘
‘बोल भी दो ‘
‘आप मिल जाती तो …..’
‘अच्छा क्या करोगे मिलकर “(शायद ये लिखते समय काजल के होठो में एक शरारती सी मुस्कान आयी होगी ,और प्यारे का दिल भी खिल गया होगा}
‘जो करते थे ‘
‘वो तो नही हो पायेगा ‘
‘ठीक है तो मिल बस लेने दीजिये ‘
‘ह्म्म्म ठीक है पर जल्दी से चले जाना ,’
‘ओक्के ‘
‘आ जाना मैं दरवाजा बंद नही करूँगी ,ये भी आज जल्दी ही सो जाएंगे “
“ओककक “प्यारे ने बहुत सी स्माइल भेजी….
अच्छा तो काजल को लगता है की मैं जल्दी ही सो जाऊंगा…काजल की ये बहुत बड़ी भूल थी आज तो मैं पूरे मूड में था …….
काजल के बाहर आने पर मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,मुझे पता था की प्यारे अब आने ही वाला होगा,या थोड़ी ही देर में आ जाएगा,क्योकि काजल को भी सुबह जल्दी जाना होता है…
“क्यो मन नही भरा क्या आपका “
“अरे मेरी जान तुझसे कैसे मेरा मन भर जाएगा ,तू तो मेरी रानी है”
काजल भी मेरे सीने में अपना सर रखकर मुझे जकड़ ली ,
“सोने दीजिये ना कल जल्दी ही जाना होगा,बहुत काम होता ही वहां भी ,”
“सो जाओ ना मैं कब मना कर रहा हु मेरी रानी,”
मैं उसके सर पर अपना हाथ फेरने लगा और तभी मुझे एक हल्की सी आहट हुई मैं और काजल दोनो ही समझ चुके थे की प्यारे अंदर आ गया है,उस आहट पर हम दोनो ही अनजान बनने की कोसिस कर रहे थे ,काजल मुझे जल्दी से सुलाना चाहती थी और मैं इन दोनो को सतना……..
मैं काजल को फिर से नीचे लाकर उसके होठो में अपने होठो को डाल दिया,मुझे पता था की काजल कभी भी मुझे मना नही करेगी..काजल ने एक प्यार भरी नजर मुझ पर डाली और मेरा साथ देने लगी दोनो के होठो के मिलन से एक चपचपाने की ध्वनि सी उत्पन्न हुई ,और वही आनद…………
काजल मेरे लिये हमेशा ही नई सी थी वही अदा वही समर्पण जो के नई नवेली दुल्हन में होता है मैंने उसमे हमेशा से वही बात पाई थी ,आज भी मुझे कभी ऐसा नही लगा की मैं इस लड़की के साथ इतना समय बिता चुका हु …वो किसी फूल सी ताजा लगती थी और उसकी खुसबू से मेरा मन हमेशा ही महक सा जाता था……
“आप भी ना “
काजल थोड़ा अलग होती हुई मुझे देखने लगी ,उसके फोन पर एक हल्की सी वाइब्रेशन हुई ,उसने msg टोन बन्द कर रखा था,पर मुझे क्या फर्क पड़ने वाला था,
“मैं पानी पीकर आता हु “मैं बिस्तर से खड़ा हुआ ,काजल की तो सांसे ही रुक गयी ,
“अरे पानी तो यही रखी है “,उसने एक बोतल मुझे देते हुए कहा
“अरे जान आज थोड़ा सर्दी सा है ना मुझे थोड़ा कुनकुना करके पियूँगा पानी “मैं जाने लगा
“आप रुकिए ना मैं ले आती हु “काजल भी उठ चुकी थी
“अरे मेरी जानेमन इतना भी खयाल ना रखा करो की आपकी बुरी आदत ही लग जाय,कुछ काम मुझे भी कर लेने दिया करो तुम रुको मैं अभी गया और अभी आया ,”
लेकिन काजल फिर भी जल्दी से खड़े हो कर मुझसे पहले हो ली ..
“आप भी ना मैं गर्म कर रही हु पानी “वो जोरो से बोलते हुए बेडरूम से निकल कर कीचन में चले गयी ,वो हाल को क्रोस करके बेडरूम में गयी थी पर उसने हाल की लाइट नही चालू की थी ,मैं उसके पीछे आया और हाल की लाइट चालू कर दिया काजल जैसे घबरा गयी ,वो मुझे देखने लगी पर मैं मुस्कुराते हुए उसे ही देखता हुआ किचन में चला गया और पीछे से उसको पकड़ लिया ,वो अपनी सांसो पर काबू करने की कोशिस तो कर रही थी पर उसकी उखड़ी हुई सांसो का आभास मुझे साफ हो रहा था,उसने जैसे तैसे पानी हल्का सा कुनकुना किया और मैं एक गिलास पकड़कर वहां से बाहर आया काजल की आंखे हाल को निहार रही थी मैने भी एक नजर पूरे हाल ने घुमाई प्यारे कही नही दिखा ,लेकिन मैंने सोफे के नीचे से उसकी परछाई की झलक पा ली,वो साला चुतिया सोफे के नीचे छुपा बैठा था,मुझे हल्के से हँसी आयी मैने काजल से कुछ पानी रूम में लाकर रखने को कहा वो एक बर्तन में पानी पकड़कर बैडरूम में चली गयी और किचन की लाइट बन्द कर दी ,मैं हाल की लाइट चालू रखकर बैडरूम में चला गया ,काजल पानी रखकर पलटने ही वाली थी की मैंने उसे दबोच लिया ,
“अरे हाल की लाइट तो चालू है “
“तो रहने दो ना “
“मैं बन्द करके आती हु ना ,”
“अरे जाने दो जान “
मैं उसे बेड में गिरकर उसके ऊपर चढ़ गया…..
काजल के मुह से आउच निकल गया जिसे शायद प्यारे भी सुन पा रहा होगा,मुझे बहुत ही एक्सएटमेंट की फीलिंग हो रही थी और मैं काजल पर ऐसे टूट पड़ा जैसे की कोई भूखा खाने पर,या कोई शेर अपने शिकार पर…
काजल को बेतहाशा चूमने लगा और जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसके जीभ से मिलाई काजल भी प्यार की उस आग में किसी मोम की तरह पिघलने लगी,मुझे हल्की सी आहट सुनाई दी और मैंने काजल को अपने ऊपर कर लिया मैं उसके होठो को अपने होठो में भर कर चुम ही रहा था की मेरी नजर दरवाजे पर पड़ी और मेरी योजना सफल हो गयी ,मुझे पता था की प्यारे साला अपना कमीनापन नही छोड़ेगा और जरूर दरवाजे से झांकने की कोशिस करेगा इसलिए मैंने हाल की लाइट जलने दी थी ताकि उसकी परछाई से मुझे ये समझ आ जाए की वो दरवाजे में आ चुका है ,हुआ भी वही एक परछाई दरवाजे के नीचे से मेरे बैडरूम ने प्रवेश कर रही थी और मेरे चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी ,ना जाने प्यारे ने काजल के साथ कितनी बार क्या किया है पर आज तो साले को मैं बताऊंगा की प्यार करना क्या होता है ,ये सोच कर ही मेरे लिंग में ऐसी अकड़ हुई की काजल के मुह से एक आह सी निकल गयी ,मैं अनजाने में ही उसके कपड़े के ऊपर से ही उसकी योनि में आघात कर रहा था,जब मुझे ये समझ आया तो मुझे हल्के से हँसी आ गयी ,काजल के ऊपर लेटे हुए मैं इतना धक्का देने में तो असमर्थ था की काजल की चीख निकल जाय मैंने उसे अपने नीचे पटक दिया और उसके कपड़ो को एक ही झटके में खोल दिया वो भी बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी ,मैं उसे चूमता हुआ ही अपने हाथो को बिस्तर के किनारे पर ले आया और वहां पड़े एक दर्पण को ऐसे सेट किया ताकि मैं दरवाजे से आते हुए उस प्रतिबिम्ब को देख सकू ,लाइट की वजह से प्यारे की परछाई का आभास मुझे हो पा रहा था लेकिन कुछ समझ नही आ रहा था की वो क्या कर रहा है,शायद काजल को भी उसके होने का आभास हो चुका था उसकी आंखों में एक अजीब सी मादकता उतर रही थी वही मैं उसके नजर को देख ही समझ चुका था की वो भी प्यारे की उस परछाई को देख चुकी है,वो मेरे बालो को अपने उंगलियों में ऐसे जकड़े हुए थी मैं सर ही ना हिला पाउ ,काजल के कोमल से वो गीले गीले से दोनो टांगो के बीच की नाजुक पंखुड़िया मेरे मोठे से लोहे की रॉड की तरह अकड़े हुए लिंग को अपने अंदर बुला रही थी और दोनो के गुप्तांगों के चमड़ी में वो खुजली होने लगी थी जिसे लोग कभी कभी प्यार का अहसास भी कहते है………
मैंने देर किये बिना अपने प्यार के अहसास की खुजली से काजल की खुजली को मिटाने के लिए उसके अंदर तक चला गया ,
“आआहहहहहहह मेरी जान “
काजल की आवाज पहले से थोड़ी तेज थी शायद वो भी प्यारे को हमारे प्यार की गहराई से अवगत कराना चाहती थी ,
“मजा आ रहा है मेरी रानी “
मैंने धक्कों को और जोर से किया और काजल की आहे पूरे कमरे में गूंजने लगी
“हाँ जान आह आह आह और जोर से और जोर से “
काजल कमर उठकर मेरे साथ ताल से ताल मिलाने लगी थी,दोनो की कमर के टकराव से एक ताल सी उत्पन्न हो रही थी और वो संगीत शायद ही किसी को पसन्द ना हो ,वो चिपचिपे से द्रव्यों के मिलान से उत्पन्न होने वाला संगीत जिसमे कमर के टकराने की आवाज भी मिली हो उस मादकता का क्या कहना ,साथ ही मिला हो एक सौदर्य की प्रतिमा की आहे और सिसकिया ….
बिस्तर भी हमारे प्यार को सलाम करता हुआ आवाजे करने लगा था ,आज मैं जानवर हो गया था और काजल भी जानवरो की तरह मुझे अपने अंदर ले रही थी ,वो सिसकिया नही बल्कि दहाड़ सी थी ,,,
प्यारे का क्या हाल हो रहा था ये तो मुझे नही पता पर मुझे तो बहुत ही मजा आ रहा था और फिर वो धार निकली जिसका निकल जाना प्यार का अंत होता है ,मेरे वीर्य ने किसी जवालामुखी की तरह काजल की गुफा को भिगो दिया वही काजल भी एक जोरो की धार छोड़ते हुए मुझे कसकर पकड़ ली ,
“आआहहहहहहह मेरी जान,आह ओ…”
काजल के नाखून मेरी पीठ पर गहरे से निशान छोड़ चुके थे वही काजल के वक्षो को मैंने अपने दांतो से लाल कर दिया था………
काजल और मैं एक दूजे को जोरो से पकड़े हुए बस उस गीलेपन के अहसास में दुबे हुए थे ,सांसे अब भी तेज थी और मन में एक अजीब सा सुकून था,दोनो एक दूजे से जुदा होना ही नही चाहते थे ,वीर्य और काजल के प्यार के रस की धार मिलकर बिस्तर पर फैल रही थी …..
मैंने हल्के से दरवाजे की ओर देखा प्यारे शायद वहां से जा चुका था ,हम ऐसे मगन हुए थे की हमे उसका आभास भी नही रहा …और मैंने मन में सोचा …
“माँ चुदाये “
28
ख्वाब जैसे मेरी बांहो में सोई थी काजल,जब मेरी आंखे खुली….उसके मासूम से चहरे को देखता हुआ मैं उसके नाज़ुकता को छूने लगा,वो हल्के से कसमसाई और अनजाने ही उसके चहरे पर एक मुस्कान सी खिल गयी…
बेहद प्यारी ,बेहद नाजुक पर मेरी….शरीर से नही जिस्म के इस्तमाल से नही ,बल्कि वो मेरी थी अपने मन से अपने दिल की गहराइयो से…
उसके नरम होठो को छुते ही मुझे एक झुनझुनी का अहसास हुआ और मेने उसके होठो पर अपने होठो को रख कर एक हल्की सी चुम्मन दे दी ,उसको जल्दी से उठाकर हम गार्डन की ओर चल पड़े,वो अपने स्किन टाइट कपड़ो को देख रही थी ,
“क्या हुआ जान पहन भी लो ,आज लेट हो गए है चलो जल्दी “
“वो इसे पहन कर गार्डन जाना थोड़ा अजीब लगता है,लेकिन इसमें एक्सरसाइज करना कंफेटेबल होता है,”
“तो पहन लो ना ,और जैसे कल ऊपर जैकेट पहना था वैसे ही आज भी डाल लेना,”
उसने हाँ में सर हिलाया,
फिर वही अंकल आंटी और बाकी वही लौण्डे,वही काजल को सबका रुककर देखना,लड़को का वही आहे भरना,
कभी कभी तो मुझे गुस्सा भी आता वही कभी अपने को मैं इतना नाशिबवाला मानता था की मुझे ऐसी लड़की मिली है जिसपर कितने लोग फिदा हो गए …कभी तो जलन होती तो कभी मैं उत्तेजित हो जाता ,
काम का इतना प्रेसर बढ़ रहा था की मैं परेशान ही हो गया,ऐसे तो मैं कोई भी गपला नही किया था ,पर अधिकारियों के गपलो को छुपाना पड रहा था,उनकी सभी बकचोदी मुझे सहनी पड़ रही थी ,दो दिन बीत गया और मैं काजल से ढंग से बात भी नही कर पता,दिमाग में इतना टेंशन हो रहा था की मैं घर पहुचते बहुत ही थक जाता था,वही हाल काजल का भी था ,पता नही वो रॉकी से कुछ करा रही थी या नही पर ये तो है की उसके भी चहरे पर वही थकान दिखती थी जो मेरे चहरे पर ,कुछ ही दिनों की बात थी,चलो देखते है,लेकिन तीसरे दिन काजल से रहा नही गया,
मैं जब आफिस से आया तो वो पहले से ही आ चुकी थी ,अधिकतर वो मेरे बाद ही आती थी ,वो आज थोड़ी कम थकी हुई लग रही थी ,आज रेणु को भी उसने जल्दी ही भेज दिया था…
जैसे ही हम बैडरूम में गए उसने मुझे जोरो से भीच लिया..
“जान थक गया हु ,सोते है ना “
“सुनिए ना मैं ये इनॉगरेशन का प्लान केंसिल करना चाहती हु “
मुझे एक झटका लगा ,
“क्यो जान “
“अरे देखो ना आपका भी अभी इतना वर्क लोड हो जा रहा है और मेरा भी ,क्या मतलब की हम ऐसे घर आये और मैं आपकी कुछ सेवा भी नही कर पा रही हु …”उसका चहरा सचमे उदास हो गया था,
“अरे क्या सेवा करना चाहती हो मेरा तुम ,………….अरे यार तुम पागल हो गयी हो क्या ,तुम्हे इतना अच्छा मौका मिला है वो तुम कैसे जाने दे सकती हो ,मेरे कारण तुम्हे ऐसे जगह पर रहना पड़ रहा है,जहा तुम्हारा कोई भी अच्छा फ्यूचर नही है ,अब अगर तुम ये भी नही की तो मुझे भी बुरा लगेगा ,मैं तुम्हे खुश देखना चाहता हु मेरी जान ………और उसके लिए मैं कोई भी सेक्रिफाइस कर सकता हु…”मेरे बोल मेरे दिल से निकल कर सीधे काजल के दिल तक पहुच रहे थे.

उसकी आंखों में भी मेरा ये प्यार देखकर आंसू आ गए और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया,थका होने के बावजूद भी हमने प्यार भरा एक राउंड लगा ही लिया ,उसके बाद तो सोने का मजा ही अलग होता है….

10 दिन पूरे हो चुके थे,आखिरकार मुख्यमंत्री को आना था,काजल के तीनो भाई और भाभियां काजल के स्पोर्ट के लिए एक दिन पहले ही आ गए थे मैं भी अपने काम से खुस था ,कम से कम मैं तो अपने आफिस से डांट नही खाने वाला था,

पहले मेरे आफिस का काम हो गया और मुख्यमंत्री जी शाम तक काजल के होटल पहुचने वाले थे ,मेरे पास बहुत टाइम था की मैं इनॉगरेशन में पहुच सकू…मुख्यमंत्री जी ने मेरी सबके सामने बहुत ही तारीफ की जिससे मेरे कुछ ऑफिसर भी जल गए ,खैर मुझे कुछ फर्क नही पड़ना था क्योकि वो मेरा कुछ भी नही उखाड़ने वाले थे ,और मंत्री जी के तारीफ की असली वजह भी मुझे पता चल चुकी थी वो थी ,काजल के बड़े भी और मिश्रा साहब की मेरे लिए की गयी सिफ़ारिशें,मुझे आज ही मिश्रा जी और भैया ने कहा था की हमने तेरे बारे में मंत्री जी से बात कर ली है हो सके तो तेरा प्रमोशन भी हो जाएगा,और हुआ भी वही मुझे प्रमोशन का वादा भी मिल गया.अब मैं शहर में बैठने वाला था ,मतलब जिस शहर में काजल का होटल था ,वही मेरा ऑफिस भी होने वाला था,मुझे इसकी खुसी थी ,लेकिन शायद मुझे उसी बंगले में रहना था जहा मैं अभी रहता हु .मेरे लिए कोई भी परेशानी नही थी क्योकि सरकारी गाड़ी भी थि और सरकारी ड्राइवर भी ,और बंगाला भी बहुत अच्छा था,

इधर मैं जल्दी से काजल के होटल पहुचा,मुझे वहां देखकर सभी बहुत खुश हो गये खासकर काजल ,वो तो मुझे देखकर रो ही डाली और मेरे बांहो में खुद को डालते हुआ बहुत इमोशनल हो गयी ,

“मुझे तो लगा था की आप नही आ पाओगे “

“अरे जान मंत्री जी तो शाम तक आएंगे ,और ये मिश्रा जी और भइया के कारण हुआ है की उन्होंने मेरी बहुत सिफारिश कर दी तो मुझे जल्दी से छुट्टी मिल गयी आज “

काजल ने मुझे और जोरो से कसा और फिर उसे जगह की नजाकत समझ आयी और वो मुझसे अलग हो गयी ,सभी भाभियां उसका मजाक उड़ाने लगी और भइया थोड़ा मुस्कुराने लगे,वही काजल शर्मा गयी और रॉकी ,,,,,,,,,,वो बेचारा क्या करता चुप चाप खड़ा देख रहा था…

मिश्रा जी अपनी मंडली के साथ पहुच चुके थे ,और फिर मंत्री जी भी आ गए ,ये न्यूज़ लोकल अखबारों की हेड न्यूज़ बन चुकी थी ,इसलिए बहुत संख्या में लोग भी जुट गए और कल भी ये मुख्यपृष्ट की खबर होनी थी इसलिए बहुत से पत्रकार भी वहां मौजूद थे मंत्री जी तो आधे घंटे में ही अपना काम निपटा कर चले गए माहौल तो अभी गर्म हुआ था,पत्रकार काजल और रॉकी का इंटरव्यू ले रहे थे ,वो अपने होटल और खासकर हेल्थसेन्टर की जोरो से खुबिया गिना रहे थे,और मैं खड़ा बोर हो रहा था ,क्योकि वहां सभी भैया या मिश्रा जी या काजल और रॉकी के इन्विटेड गेस्ट थे,और सभी अपने गेस्ट के साथ बाते कर रहे थे , तभी एक शख्स की इंट्री हुआ और उसे देखकर मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान सी आ गयी ,वो थे डॉ चुतिया ,

मैं उसके पास जाकर उनसे गले मिला …

“साले अभी आ रहा है”

“हां यार वो …”उसने एक नजर घुमाई

“साला क्या होटल बनाया है बे तूने,इतना पैसा कहा से आया बेटा”

“अरे यार काजल के भइया ने इन्वेस्ट किया है ,”

मैं उसे काजल की फेमिली से मिलने ले गया ,डॉ उसके भाइयो को पहले से जानता था वो भी उसे अच्छे से जानते थे तो उसे वहां घुलते हुई ज्यादा समय नही लगा ,लेकिन डॉ फिर से मेरे पास आ गया ,

“अपने घर से किसी को नही बुलाया है क्या “

“बुलाया तो था यार पर मैं ही फ्री नही था वरना जा कर ले आता ,माँ आना चाहती थी पर उसे पता चला की काजल के मां बाप नही आ रहे है तो वो भी नही आयी …”

“ह्म्म्म “डॉ ने रॉकी को देखा

“ये हेंडसम को है ,लग तो ऐसे रहा है की यही होटल का मालिक हो “

मुझे हँसी आ गयी और मैंने रॉकी के बारे में सब कुछ बता दिया बस उसके और कजल के रिलेशन को छोड़कर

“हम्म यानी ये भी काजल की ले रहा है ,”

मैंने डॉ को घूर के देखा

“साले मेरी बीवी को तू समझता क्या है ,”

डॉ कुछ नही बोला पर हसने लगा

“क्या हस रहा है”

“कुछ नही लगता है उसे भी देखकर तू बहुत मजे ले रहा है ….साले तेरे चहरे पर लिखा है की तू उनके रिलेशन से खुस है,”

मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी ,…..

सब कुछ खुशहाली से चल रहा था,होटल का काम जोरो में था काजल की खुशी बिस्तर में भी दिखाई देती थी,उसका गार्डन में योगा क्लास भी चालू हो चुका था,और लोग रॉकी और काजल को ही कपल समझते थे ,क्योकि दोनो ही सबको सिखाते थे ,मैं तो सीखने वालो के साथ ही खड़ा रहता था,योग,एरोबिक,आदि आदि की थोड़ी मोड़ी जानकारी वहां दी जाती थी और इससे वहां से कई लोग उसके हेल्थसेन्टर को भी जॉइन कर रहे थे,खासकर के नवजवान लड़के ,रॉकी को देखकर सबको बॉडी बनाने की हसरत पैदा हो जाती और काजल का मस्ताना और मादक शरीर उन्हें सेंटर जॉइन करने पर मजबूर कर देता ये बात मुझे पता चली जब मैं शहर में अपनी ड्यूटी जॉइन की ,वहां मुझे कोई भी नही पहचानता था ,हा काजल के चर्चे तो फैले ही हुए थे ,लेकिन कोई उसे रॉकी की गर्लफ्रैंड कहता तो कोई उसकी वाइफ और मुझे भी इसमें कोई भी इंटरेस्ट नही था की कोई क्या कहता है ,मेरे लिए तो यही अच्छा था की मैं किसी के नजर में ना आउ,…

शहर बड़ा था,लेकिन काजल की चर्चा हर जगह हो रही थी ,उसके और रॉकी के बड़े बड़े पोस्टरों से पूरा शहर लदा हुआ था,खासकर उन जगहों पर जहा पर युवकों की भीड़ हो…

एक दिन मैं जब ऐसे ही अपने ऑफिस से कुछ दूर टहलता हुआ चाय पीने चला गया ,ऐसे भी वहां काम तो कुछ खास होता नही था,जो भी काम हो वो वहां के छोटे कर्मचारी करते थे ,फील्ड का काम अब मेरा रह नही गया था और मैं दिन भर कुर्सियां तोड़ता हुआ बोर हो जाता था,

पास के ही चाय ठेले काम टापरी में पहुचा वहां वो टापरी वाला मुझे पहचान लिया….

“अरे सर आप, आप तो नए साहब हो ना वन विभाग वाले “

“हा एक चाय पिलाओ ,और एक सिगरेट” मैंने मुस्कुराते हुए कहा,

“साहब आप क्यो तकलीफ की हमे बुला लिया होता,छोटू को बोल कर” छोटू वहां का एक चपरासी था ,जिसका काम ही था लोगो के लिए समान लाना,सरकारी ऑफिस का एक टिपिकल सा चपरासी…मुह में पान और रिस्वत लेने को हमेशा तैयार …

“क्यो मैं आ गया तो तुम्हे पसंद नही आया क्या “

“अरे नही सर बैठिए ना “

उसने एक ख़ुर्शी आगे की ,वहाँ अधिकतर सभी सरकारी कर्मचारी चाय पीने आते थे ,पास में ही एक दो कॉलेज भी था ,जिसके अधिकतर लड़को के लिए वो अड्डा हुआ करता था,इसलिए वहां थोड़ी भीड़ भी होती थी,चाय वाला भी मेरी ही उम्र का रहा होगा शायद मुझसे कुछ कम ही रहा होगा और उसकी कमाई शायद मुझसे भी ज्यादा ,

वहां का माहौल देखकर मुझे मेरे कॉलेज के दिन याद आ गए,कॉलेज गोइंग लड़को की वहां भीड़ लगी थी ,जो लगभग हमेशा लगी रहती थी ,इसलिए उसे पोलिश और नगर निगम के लोगो को भी पैसे खिलाने पड़ते थे,

“यार मेरे लिए तू लेमन टी बना ,अच्छी मसाला वाली “

“जैसा आप कहे सर “

मैं चाय और सिगरेट पीता हुआ फिर से उन्ही कालेज के दिनो में पहुच गया ,की मेरी नजर रोड के उस पर लगे एक बड़े से फ्लेक्स पर पड़ी,बड़ा सा बेनर लगा था जिसमे काजल के होटल की एडवरटाइजिंग थी,साथ ही रॉकी और काजल का वही पोश जो मैंने उस दिन होटल के बाहर देखा था,आदित्य इंटरनेशनल एंड फ़इटनेश सेंटर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था,आदित्य काजल के बड़े भैया का नाम था ,पूरा पैसा उनका ही लगा था और काजल को 50% का शेयर मिला हुआ था,ऐसे तो भैया अपना नाम नही यूज़ करना चाहते थे और साथ ही 100% शेयर काजल के नाम से रखना चाहते थे पर काजल माने तब ना ,उसकी जिद थी की होटल का नाम बड़े भईया के नाम से ही होगा और वो बस 50% शेयर लेगी,बाकी के 40% आदित्य भैया के नाम से और 10% मेरे नाम से था,रॉकी को रेगुलर पेमेंट में रखा गया था,जो मेरी सेलरी से भी ज्यादा थी ,पर ये फैसला मुझे सही लगा क्योकि इससे वो हमारे कंट्रोल में ही रहता ,शेयर में हिस्सेदारी देने से वो आज नही तो कल हमारे ऊपर चढ़ने की कोशिस करता ,काजल के पास बिजनेस का दिमाग तो बहुत जायद था,उसने मुझे भी 10% दिला के रखा था जबकि मुझे इससे कोई भी मतलब नही था…इसका रीजन मुझे कुछ समझ नही आया पर ठीक है,क्या फर्क पड़ता है…

,मैं काजल के फ़ोटो को निहार रहा था की वो चायवाला बोल पड़ा ,

“अरे सर इसने तो तबाही ही मचा दी है यहां आकर जो लौण्डे कभी जिम के नाम सुनकर भी मुह बनाते थे साले सजधज कर जिम जाते है ,और साथ ही लडकिया भी जाती है ,इसने तो यह बवाल ही मचाया हुआ है ,साली रांड कही की “

मेरा दिमाग फिर गया ,इस मादरचोद की इतनी औकात की ये मेरे सामने मेरी ही बीवी को ….लेकिन थोड़ी ना पता होगा की ये मेरी बीवी है नही तो ये हिमाकत वो नही करता..

“तमीज से बात करो ,एक औरत है वो …”मेरे चहरे पर गुस्से के भाव साफ जिसे देखकर वो डर ही गया …

“अरे साहब आप तो गुस्सा हो गए मेरा वो मतलब नही था ,असल में मैं एक छोटे से जगह से आया हुआ हु और यहां इतने सालो से मैं ये काम कर रहा हु पहली बार ये हुआ है की कोई लड़की ऐसे कपड़ो में देखा हु,और इसके जिम में तो बाकी लडकिया भी ऐसे ही कपड़ो में जाती है,अब आप ही बताओ ना साहब ,सभी लड़के उसे गुरते रहते है ,कोई कही टच कर रहा है तो कोई कही ,सब कुछ तो इसके कपड़ो से दिखता है ,इतना ज्यादा फीस लेती है फिर भी साले मेरा उधारी तो देते नही लेकिन वहां पहुच जाते है,सिर्फ उसे देखने …लड़कियों को क्या ये सब सोभा देता है और साथ में ये और लड़कियों को भी बिगड़ रही है ,जिम नही साला रंडी खाना बना के रखा है “

उसकी इतनी छोटी सोच ने मेरा दिमाग ही घूम दिया ,मैं वहां से उठा और उसका कांच का गिलास जोरो से फोड़ दिया,उसके पसीने छूटने लगे,वो भी जनता था की मैं एक सरकारी अधिकारी हु,,और उसका ये टपरी सरकारी महकमे के कृपा से ही चल रहा है ,मैं अगर चाहू तो एक कंप्लेन से ही उसका ये टापरी उखाड़ सकता था,

“साहब गलती हो गयी ,दो जूते मार लो पर माफ कर दो ऐसे गुस्सा मत हो साहब “

“गुस्सा मैं तुझपर नही तेरी सोच पर हु,इसीलिए हमारी औरते अपनी मर्जी से कही जा नही सकती ,कुछ पहन नही सकती ,वो तो अच्छा काम करना चाहती है पर तुम जैसी सोच के लोगो के कारण बेचारियों को हर जगह बस ताने मिलते है और साथ में छेड़छाड़ का शिकार होती है ,वो जो भी पहने मुझे ये बाता जो वहां देखने जाते है वो गलत हुए या जो पहनती है वो ….साले देखना ही बन्द कर दो ना तुम्हे देखना भी घूर कर है और साथ ही दोष भी तुम लड़कियों पर ही लगते हो …आज के बाद तेरे मुह से ऐसे शब्द सुना तो तू और तेरा टपरी दोनो उठवा दूंगा “

मेरे इस कदम से वहां लोगो की भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी ,मैंने आगे कहा,इस बार मेरी आवाज थोड़ी धीरे और समझने वाले लहजा था ,

“देखो लड़की को देखना गुनाह नही है ,ये तो स्वाभाविक है,लेकिन ऐसी धरना बहुत गलत है…हमे अपने को देखना चाहिये की हम क्या करते है…हा यार उसकी फिगर सेक्सी है (मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,वो भी मुझे अजीब नजरो से देखन लगा ) लेकिन इसका मतलब ये नही की वो रंडी है ,और हा हो सकता ही की वो लड़को को उत्तेजित कर देती हो ,और उन्हें टीस करती हो पर यार अपनी भाषा सुधारो और कम से कम लड़कियों का सम्मान करना सीखो ,क्योकि तुम्हारी भी बेटी, माँ ,बीवी,बहन होगी …जब तुम ही लड़कियों का सम्मान नही करोगे तो तुम दुसरो से कैसे आशा कर सकते हो की वो सम्मान करे ,,और इसी सोच के कारण तुम अपनी बहनों को भी अच्छा काम करने से रोकते हो क्योकि तुम्हे लगता है की दूसरे उन्हें इन्ही नामो से बुलाएंगे जबकि तुम्हे भी पता है की वो गलत नही है,,तो पहले खुद को सुधार लो फिर दुसरो से उम्मीद करना ,चल अब एक और चाय बना और एक सिगरेट दे “

मैं हल्के से मुस्कुरा दिया ,किसी का धंधा खराब करना मेरा मकसद बिल्कुल भी नही था ,मेरे चहरे पर मुस्कान देख कर वो भी थोड़ा सा रिलेक्स हुआ और डरते हुए मुझे एक चाय दी….

“तेरा नाम क्या है “ मै उससे पूछा

“साहब भुवन “

“हम्म अच्छा है ,डरने की जरूरत नही है ,और यार बात तो तेरी सही है ऐसी सेक्सी लड़की बवाल तो मचा ही देगी “

वो हल्के से हँसा पर अभी भी थोड़ा सा डर रहा था …

मैं फिर से चाय पीता हुआ काजल को निहारने लगा………………

तभी मेरा फोन बजा ,

“हलो “

“हलो विकास मैं ,मिश्रा बोल रहा हु “

मिश्रा जी की आवाज तो मैं पहचान गया था,पर उनका नम्बर मेरे पास नही था,

“प्रणाम मिश्रा सर “

“अबे क्या सर सर लगा के रखा है अब मैं कोई अधिकारी नही हु “

मैं हल्के से मुस्कुराया ,

“जी कहिए “

“हम्म असल में मैंने तुझे इसलिए फोन किया है क्योकि मेरी एक पुरानी जान पहचान की बंदी आ रही है यहां पर मैं चाहता हु की तुम उसे पिकउप कर लो ,वो वही ट्रेन से उतरेगी वहां से मेरे घर छोड़ देना ,मैं रॉकी को कहने वाला था पर वो लोग देर से आते है और वो लड़की अभी कुछ देर बाद 4:30 को ही पहुच जाएगी ,”

“पर सर मेरा ऑफिस “

“अबे मैं जानता हु की तू कितना काम करता है,”

मिश्रा जी की बात तो सही थी और हम दोनो ही हँस पड़े ,

“अब बड़ा अधिकारी बन गया है ,बड़े अधिकारी काम करते नही करवाते है ,मेरे साथ रह मैं सब सीखा दूंगा…”

“जी ठीक है सर ,लेकिन मैं उसे पहचानूंगा यानी नाम या नम्बर “

“अरे ये स्टेशन कितना बड़ा है,ऐसे नाम है उसका मलीना और पहचानना आसान होगा क्योकि वो एक विदेशी है महिला है ,तो तुझे स्टेशन में जो भी विदेशी महिला दिखे उसे उठा लेना “

मिश्रा जी फिर जोरो से हँसे मैं भी हस पड़ा ,

“जी ठीक है मिश्रा जी “

मिश्रा जी थे बड़े ही कमाल के आदमी और ऐसे आदमी की दोस्ती कौन छोड़ता ,बड़े ही पावरफुल थे पर बड़े ही खुशमिजाज ,जिनके नाम से कभी बड़े बड़े अधिकारियों की हालात खराब हो जाया करती थी पर जिनसे वो दोस्ती निभाते उसे कभी कोई भी प्रॉब्लम नही आने देते ,चाहे वो अधिकारी हो या कोई मंत्री उनकी इज्जत सभी करते थे ,और ऐसे आदमी को ना बोलना मेरी औकात से बाहर था,और जब वो प्यार से बोले तो क्या फर्क पड़ता है,चलो आज जल्दी ही चल देंगे ….

मैं 4:15 को ही स्टेशन पहुच गया ,गाड़ी रुकते ही मैंने देखा की एक नवजवान सी युवती ,भूरे रंग की लेकिन काले बाल हाथ में बड़ा सा बेग लिए मैं और रघु दौड़कर उसके पास पहुचे ,उसके पास और भी लगेज था,मुझे पता नही था की ये इतना लगेज ले की आई है वरना किसी और को भी लाता अब सारा लगेज मुझे और रघु को ही पकड़ना पड़ता ….

“हैल्लो मेडम “ मैं उसके पास पहुचा

“विकास राइट “

“या वेलकम वेलकम “

“मिश्रा जी ने मुझे बताया था,प्लीज् ये समान उतारने में मेरी मदद करो “वो बड़े ही प्यार से लेकिन मुश्किल से इतना बोल पाई ,मुझे लगान के कैप्टन की याद आ गयी ,’दुगुना लगान देना पड़ेगा ‘

“ओह स्योर “ मैं और रघु जल्दी से सारा समान उठा कर चलने लगे वो एक छोटा सा पर्श पकड़े आगे आगे चल रही थी ,

“सर ये तो हिंदी बोलती है “

“हा तो क्या हुआ होगी विदेशी रहती इंडिया में होगी ,या आती जाती होगी ,या और कुछ होगा छोड़ ना यार जल्दी से चल साला समान बहुत भारी है ,एक अधिकारी को कुली बना दिया है …”

रघु मेरी बात को सुनकर हसने लगा ,मैंने ध्यान से उसके पिछवाड़े को देखा साला मिश्रा इसे महिला कह रहा था,ये तो कातिल सी जवानी थी ,24-25 की उम्र थी लगभग पतले स्कर्ट में उसकी जाँघे बहुत चमकीली लग रही थी ,सुडौल और मध्यम आकर के उसके उजोरो की खाई बड़ी ही प्यारी लग रही थी ,चहरा मासूम सा था,वो सेक्सी नही प्यारी लग रही थी जो उसका आकर्षण था ,

कार में समान लोड कर मैंने उसे पीछे बैठाया और रघु के साथ सामने बैठ गया …

“आप कहा से है मेडम …यानी वेयर…”

वो हँस पड़ी ,

“मुझे हिंदी आता है “

मैं हल्के से मुस्कुराया हा समझ आ गया की तुझे कितना हिंदी आता है ….

“मैं इटली से हु ,मैं एक एंथ्रोपोलॉजिस्ट हु और यहां कुछ असिएंट चीज को ढूंढने आया हु “

“ओह …”मैं मन में सोच रहा था की यहां कौन सी पुरानी चीज है जिसे ये ढूंढने आ गयी

रघु मुझे प्रश्नवाचक नजर से देखा

“ये पुरानी चीजो को खोजती है ,”मैंने रघु को बताया

“मतलब “अब मैं इसे कैसे समझता

“गाइड फ़िल्म देखी है देवानंद की “

“जी देखी है “

“तो जो हीरोइन का पति होता है ना वैसे ही ये भी है “

“ओह ….पर सर इससे इन्हें मिलता क्या होगा “

मुझे उसपर हल्के से गुस्सा आ गया

“तू अपना काम कर बे लौड़े “

रघु झेप कर आगे देखने लगा …

“हे विकाश ये लौड़े क्या होता है …”मलीना ने प्रश्न दाग दिया और रघु की हँसी निकल गयी पर मैंने जैसे ही उसे घूर कर देखा वो अपनी हँसी दबा कर आगे देखने लगा ,पर उसके चहरे पर मुस्कान अब भी थी …

“वो मेडम “

“मेडम नही हमे तुम मलीना ही बोलना ,और हमशे हिंदी में बात करो हम हिंदी सिख रहा है “

“ओक्के मलीना जी उसका मतलब होता है लड़का या बॉय …वो एक संबोधन है …”

“क्या है ???”

“वो its like addressing वर्ड …लड़को को प्यार से लवंडे बोल देते है या लौड़े …”

मैं झेंपते हुए बोल पाया लेकिन मन में यही सोच रहा था की मेरी बात को वो जल्दी से भूल जाय…

तभी रघु ने कहा ,

“शायद मेडम केशरगढ़ के किले को देखने आयी होगी “

“हो सकता है पर वहां तो केवल खण्डर है वहां क्या मिलेगा “

“एक्सीटॉली मैं वही देखने आयी हु …विकाश तुम भी मेरे साथ चलना “

“लेकिन मेडम सॉरी मलीना वहां आपको क्या मिलेगा वो तो बस खण्डर है “

मलीना के होठो पर एक मुस्कान सी आ गयी

“वही तो मेरा काम है “

हम मिश्रा जी के घर पहुच गए,मिश्रा जी का घर नही बंगाल था जहा वो अकेले ही रहते थे ,पता चला था की शादी के कुछ साल बाद ही उनका डिवोश हो गया था ,बाल बच्चे थे नही …

नॉकरो ने दौड़ाते हुए आकर कार से समान निकल लिया,,

वही मिश्रा जी आगे बड़े ,और मलीना भी उनके गले से लग गई …

“कैसे हो लौड़े ,बहुत पतले हो गए हो”

मलीना के बोल से मिश्रा जी तो संट हो गए और मैं अपना चहरा छिपने लगा ,मिश्रा जी ने मुझे घूर के देखा ,वही रघु हल्के हल्के हस रहा था …

“बेबी ये तुम्हे किसने सिखाया ,”

मिश्रा जी मुझे देखते हुए बोले,मलीना भी बहुत एक्साईटेड होकर बताने लगी

“विकाश ने मुझे आते हुए बताया ,देखो मैं कितनी जल्दी सिख गयी ,”

“ह्म्म्म ‘मिश्रा जी उसके साथ अंदर को चलने लगे और मुझे भी साथ बुला लिया उन्होंने नॉकर से उसका कमरा दिखाने को बोल दिया और उसे फ्रेश होने को ऊपर भेज दिया,एक महंगी सी शराब की बोतल बाहर निकाली,

“क्यो मेरे मेहमान को तुम ये सब सीखा रहे हो “

मैं शर्मिंदा हो गया

“सर वो गलती से मुह से निकल गया था ,ड्राइवर के लिए ,मलीना बार बार उसका मतलब पूछने लगी तो बताना पड़ा …”

मिश्रा जी हस्ते हुए एक ग्लास में विस्की भरकर मुझे बढ़ाया…

“कोई बात नही सुनो यार तुम यहां पर रहे हो और ये लड़की तुम्हारे ही उम्र की है तुम शायद इसकी मदद कर सकते हो ,इसे यहां के किले विले घुमा दो ,ये कुछ शोध करने आयी है ,इसके पिता मेरे भाई के अच्छे दोस्त है वो भी इटली में ही रहते है ,लड़की आधी इंडियन और आधी इटालियन है ,मा इसकी इंडियन है ….”

“ओह “

“तुम साथ चल दोगे तो मेरा एक टेंशन खत्म हो जाएगा “

“सर ऑफिस “

“वो फिकर मत करो मैं सम्हाल लूंगा ,तुम इसे सम्हालो ..जरूरत पड़ी तो चले जाना ऑफिस भी कभी कभी वरना अब तुम्हे इसीलिए वहां डलवाया है की तुम्हे भी आराम मिले ऐसे भी तुम रिस्वत तो लेते नही तो कम से कम आराम से तो रहो …”

“ओके सर “मैं हस्ते हुए बोला …

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