फार्म से वापस आ कर मैं अंदर भी नहीं गया। भूपिंदर के सामने जाने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी। मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू ये सामान अंदर छोड़ आ और बोलना हम सीधे सेक्टर सत्रह जा रहे हैं, कुछ जरूरी काम है।”
सेक्टर सत्रह पहुंच कर मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू ये साथ वाले फास्ट फूड वाले को बोल मैंने दो चिकन बर्गर मंगवाए है। एक तू रख लेना एक ऊपर ले आना मेरे पास।”
ऊपर अपने ऑफिस मैं जब कभी मैंने कुछ खाना होता था तो मैं इस साथ वाले फास्ट फूड से ही कुछ मंगवा लेता था। ये फास्ट फूड वाले मेरे किरायदार थे और जो भी भेजते थे वो स्पेशल ही होता था। अगर थोड़ा सा ही कुछ होता था तो ये मुझसे पेमेंट भी नहीं लेते थे। मगर जब कभी मेरे यार दोस्त भी मेरे साथ होते थे, तो वो बिल भेज देते थे जो किराये में एडजस्ट हो जाता था।
पंद्रह मिनट में जुगनू एक लिफ़ाफ़े में दो जम्बो साइज़ के चिकन बर्गर ले आया। एक मैंने जुगनू को दे दिया और जुगनू से कहा, “जुगनू उधर से पेप्सी का कैन निकाल ले अपने लिए।”
जुगनू मुझसे कभी कोइ सवाल नहीं करता था। जुगनू ने फ्रिज में से पेप्सी का कैन निकाल लिया और एक बर्गर लेकर नीचे चला गया।
मैंने फ्रिज में “टाइगर एशियन” – ऑस्ट्रेलिया की सुपर स्ट्रांग बियर – की दो बोतलें निकाली और सोफे पर बैठ कर चिकन बर्गर और बियर के मजे लेने लगा।
बिशनी की ताबड़तोड़ चुदाई करके और चिकन से भरा हुआ बियर के साथ बर्गर खा कर दिमाग हल्का हो चुका था।
शाम के चार बजने वाले थे, अब सोचने का वक़्त था कि भूपिंदर ने प्रीती से क्या बात की होगी। मैं उठा, मुंह हाथ धो कर फ्रेश हुआ और दरवाजा लॉक करते-करते सोचने लगा, “चलो जी घर चलें, देखें रात को किसकी फुद्दी चोदने को मिलती है – बीवी भूपिंदर की, बेटी प्रीती की – दोनों की या फिर किसी की भी नहीं – और मुट्ठ मार के सोना पड़ेगा।
सीढ़ियां नीचे उतरा तो मुझे देख कर जुगनू आ गया। मैं सीधा वाइन शॉप में चला गया। जुगनू भी अंदर ही आ गया। वाइन शॉप का मैनेजर गोगी मुझे जानता ही था। मुझे अंदर आते देख हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया।
मैंने कहा, क्या हाल है गोगी सेठ। चल एक काम कर, दो शिवाज़ रीगल स्कॉच, दो मालाबार जिन, दो टोकी जापानी व्हिस्की और एक क्रेट कूपर एक्स्ट्रा बियर निकाल दे।
गोगी बोला, “अभी लो सरदार जी। और फिर लड़के को आवाज़ दे कर बोला, “ओये चमन, ये सामान निकाल कर बाहर गाड़ी में रखवा। और सरदार जी?”
मैंने कहा, “बस कितने हुए।”
गोगी बोला, “अरे सरदार जी छोड़ो जी, पैसे कहीं भागे थोड़ी ही जा रहे हैं आते रहेंगे पैसे।” और फिर पक्के पंजाबी स्टाइल में गोगी ने साथ ही कैलकुलेटर पर हिसाब दिया और बोला, “ये हुए जी सरदार जी तेईस हजार आठ सौ। आप तेईस दे दो जी।”
मैंने मुक्तसरी कुर्ते के जेब में से पांच सौ के नोटों के गड्डी निकाली और गोगी के हाथ में दे कर बोला, “ले गोगी गिन कर निकाल ले।”
गोगी नोटों के गड्डी पकड़ते हुए बोला, “सरदार जी आप कभी नोट नहीं गिनते।”
गोगी ने तेईस हजार रुपये निकाले और बाकी के नोट मुझे वापस कर दिए। तब तक गोगी का लड़का बोतलें गाड़ी में रख आया। गोगी बोला, “सरदार जी वो मालिक साहब आपको पूछ रहे थे जी।” सुदर्शन मालिक वाइन शॉप का मालिक था। मैंने कहा, “क्या हो गया गोगी?”
गोगी बोला, “वो जी कुछ आगे की लीज़ की बात करनी थी जी।”
मैंने चलते हुए कहा, “मालिक को बोलना फोन करेगा मुझे।”
गोगी हाथ जोड़ कर बोला, “ठीक है जी।”
जुगनू ने सामान गाड़ी के डिक्की में रखवाया और चलने को तैयार हो गया। मैं जुगनू के साथ वाली सीट पर बैठ गया और बोला, “चल भाई जुगनू।”
बीस मिनट में हम घर पहुंच गए। दरवाजा प्रीती ने ही खोला। मैं अंदर गया तो पीछे पीछे जुगनू भी शराब और बियर की बोतलें लेकर आ गया। मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू, व्हिस्की बार में रख दे और चार-पांच बियर की बोतलें फ्रिज में लगा कर बाकी बार के नीचे वाले खाने में रख दे।”
प्रीती बोली, “पापा आप दोपहर को घर नहीं आये और सीधा सेक्टर सत्रह चले गए। खाना खाया या नहीं?”
मैंने कहा, “खाना खा लिया था, तुम बताओ मम्मी का क्या हाल है सुबह बड़ी परेशान थी”, कहते हुए मैंने प्रीती के मम्मों के तरफ देखा।
प्रीती भी मेरा नजरें भांप गयी और अपने मम्मे ऊपर के तरफ करती हुई बोली, “सब सही है पापा।”
फिर प्रीती ने जुगनू की तरफ देखा। जुगनू बार ठीक-ठाक करने में लगा हुआ था। प्रीती ने धीरे अपनी फुद्दी थपथपाई और धीरे से बोली, “आज से आपके मजे ही मजे हैं पापा, मां बेटी दोनों को चोदो और मजे लो, बाकी तो आपको मम्मी ही बताएगी।”
मैं जा कर लाउंज में बैठ गया।
प्रीती जुगनू से बोली, “जुगनू मेरी वेट करना। मार्किट जाना है।”
प्रीती फिर मुझ से बोली, “पापा मैं मटन ले आऊं। मटन नहीं है।”
मैंने कहा “ठीक है।”
मगर मैं समझ गया प्रीती मुझे भूपिंदर के पास अकेला छोड़ना चाहती है। प्रीती ने वहीं से आवाज लगाई , “मम्मी मैं जुगनू के लेकर मार्किट जा रही हूं। कुछ लाना तो नहीं है?”
भूपिंदर ने भी आवाज दी, “लाना तो कुछ नहीं प्रीती, चाय तो पीती जा।”
प्रीटी बोली, “नहीं मम्मी देर हो जाएगी।”
प्रीती चलते-चलते जैसे मेरे कान में बोली, “पापा तैयारी करके रखना। एक पेग एक्स्ट्रा लगाना आज।”
प्रीटी की बात सुनते ही मेरे लंड ने हरकत कर दी। प्रीती गयी और भूपिंदर आ गयी, हाथ में चाय की ट्रे लेकर। ट्रे टेबल पर रख कर बोली, “लगता है बिज़ी रहा आज का दिन अवतार?”
मैंने कहा, “हां रहा तो सही। पहले फार्म में काम था। एक गाये गाभिन है दूध नहीं दे रही। उसको सतपाल के फार्म में भेजना था और नई गाये लानी थी। पूरन को वही समझाते समझाते टाइम लग गया। फिर सत्रह जाना था। वहां वाइन शॉप की लीज़ खत्म होने वाली है। उसके बारे में बात करनी थे।”
भूपिंदर ने पूछा, “अवतार कितने साल की लीज़ बनती है इन दुकानों की?”
मैंने कहा, “इन दुकानों की लीज़ कम से कम तीन साल की बनती है। अगले साल फ़ास्ट फ़ूड वाले की भी लीज़ खत्म होने वाली है। वो तो पचास हज़ार महीने का किराया बढ़ाने की ऑफर तो अभी से दे रहा है। मगर मैंने कोइ वादा नहीं किया अब तक।”
भूपिंदर इसके बाद चुप हो गयी। भूपिंदर इस तरह चुप बैठने वाली औरतों में से नहीं थी। पक्का ही उसके मन में कोइ उलझन चल रही थी। वो कुछ बात करना चाहती थी, मगर उलझन के कारण बात नहीं कर पा रही थी। शायद भूपिंदर यही सोच रही थी कैसे बात शुरू करे।
कुछ देर के बाद भूपिंदर बोली, “अवतार मैंने प्रीती से बात की थी सुबह तुम्हारे जाने के बाद।”
मैं बोला कुछ नहीं, बस भूपिंदर को देखता रहा। भूपिंदर फिर चुप हो गयी। मैंने ही पूछा, “फिर क्या कहा प्रीती ने भूपिंदर?”
भूपिंदर बोली, “वही जो तुमने बताया था कि चुदाई की पहल तुमने नहीं उसने की थी। उसने ही तुम्हें उसे चोदने के उकसाया था। उसने तो यहां तक बता दिया कि सुखचैन के आसाम के लिए रवाना होने के दिन ही रात को वो झीने कपड़े पहन कर तुम्हारी सामने आ गयी। पारदर्शी गाउन की नीचे उसने गहरे रंग की ब्रा और पैंट पहनी थी और दूसरे दिन तो वो भी नहीं पहनी थी।”
“अवतार प्रीती तो बहुत ही साफ-साफ बातें कर रहे थी। उसने बताया कि अगले दिन कांता ने आना नहीं था, वो तीन दिनों के लिए किसी काम से बाहर गयी थी और घर में बस तुम और प्रीती ही थे। अगले दिन प्रीती ने जो पारदर्शी गाउन पहना उस गाउन के नीचे उसने ना ब्रा पहनी और ना ही पैंटी ही। नीचे उसके चूतड़ों के बीच की लाइन साफ-साफ दिखाई दे रही थी – यही हाल मम्मों का भी था। मम्मों के बीच की लाइन मम्मों कि निप्पल वगैरह साफ़ दिखाई दे रहे थे।”
“फिर उसने बताया कि इतने पर भी तुमने खाली उसकी कमर पर हाथ रखा इससे आगे नहीं बढ़े।”
“फिर प्रीती ने कहा, “मम्मी मैं चुदाई के बिना नहीं रह सकती थी – मैं क्या कोई भी मेरी उम्र की शादी-शुदा लड़की नहीं रह सकती जो चुदाई का मजा ले चुकी हो।”
“अवतार हद्द तो तब हुई जब प्रीटी ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोली, “मम्मी आप भी तो जवानी में इसी तरह चुदाई करवाती थी पापा से, इतना तो मुझे भी मालूम है।”
“और फिर अवतार प्रीती ने जो मुझसे कहा उससे तो मुझे तो शर्म ही आ गयी। प्रीती हंसते हुए बोली, “मम्मी मैं आप पर कोइ ताना नहीं कस रही, ना ही आपका मजाक बना रही हूं। उल्टा मुझे आप पर नाज़ है कि आप एक अच्छी बीवी हैं, और एक अच्छी मम्मी भी साबित हुई हैं। कनाडा से वापस आने के बाद पापा के लंड का पूरा ध्यान रखा है आपने। एक हफ्ता पापा से चुदवाने के बाद अपने अब घर की सुध ली है।”
“फिर प्रीती बोली, “चलिए मम्मी छोड़िये इस बात को भी। आपने कनाडा में चुदवाई किसी से – नहीं ना? क्यों? आप तो इस उम्र में भी कैसे हुए तंदरुस्त शरीर की मालकिन हैं। आपको देख कर कोइ भी नहीं कह सकता कि आप अपनी बेटी की शादी कर चुकी हैं। क्या चोदने वालों की कमी थी वहां कनाडा?”
“अवतार फिर प्रीती ने खुद ही अपनी बात का जवाब भी दे दिया, “नहीं मम्मी कोइ कमी नहीं थी वहां चोदने वालों की। आप एक इशारा भी कर देती तो दस गोरे और चूतिये सरदार लंड हाथ में लिए आपके पीछे-पीछे घूमते आपको चोदने कि लिए।”
“ये साले गोरे भड़वे तो वैसे भी हिंदुस्तानी लड़कियों की फुद्दियों के दीवाने होते हैं, और इन मीट मुर्गे खाने वाले शराबी सरदारों का लंड तो मरते दम तक खड़ा ही रहता है। मम्मी आपने इस लिए नहीं चुदवाई क्योंकि आपकी फुद्दी आपके हस्बैंड, मेरे पापा – आपके पति की अमानत है।”
“इसी तरह मम्मी मेरी फुद्दी भी मेरे पति सुखचैन की अमानत है। मैं इस फुद्दी के अंदर किसी गैर मर्द का लंड कैसे डलवा सकती हूं। मगर मम्मी पापा गैर नहीं हैं – वो मेरे आपके, हम दोनों के अपने हैं। मेरी फुद्दी पर मेरे पापा के लंड के मुहर है। आपकी फुद्दी में मेरे पापा का लंड से निकला बीज गया और मैं निकली आपकी फुद्दी में से। असल में तो मेरी फुद्दी पर पहला हक़ आपका और पापा का है। मम्मी, आप जितना चाहो चूसो चाटो मेरी फुद्दी – पापा भी जितना चाहें चोदें मेरी फुद्दी, मुझे कोइ एतराज नहीं।”
“अवतार, प्रीती बोलती ही जा रही थी, “और मम्मी जब तक सुखचैन यहां था, उसका लंड मेरी फुद्दी में जाता था तब तक तो मैंने पापा कि लंड की तरफ देखा भी नहीं। अब आप बताओ अगर मेरा फुद्दी चुदवाने का मन करे तो क्या मैं पापा से ना चुदवा कर मुहल्ले वालों से चुदवाऊं?”
“मम्मी कॉलेज में मैं सब से खूबसूरत और बिंदास लड़की थी – लम्बी ऊंची मस्त सेक्सी जिस्म वाली। लड़कियां जलती थी मुझसे मेरी कद काठी, मेरे जिस्म, मेरी ख़ूबसूरती की वजह से। आधे प्रोफ़ेसर और कालेज के लड़के मेरी फुद्दी चोदने को तो छोड़ो मम्मी मेरे मम्मों की, मेरी फुद्दी की एक झलक देखने के लिए भी कुछ भी करने को तैयार रहते थे।
मगर मम्मी मैंने छोटी मोटी चुम्मा-चाटी को छोड़ किसी को अपनी फुद्दी को हाथ भी नहीं लगाने दिया। मेरी सब से बड़ी खुशी ये है मम्मी की मैंने अपनी फुद्दी की सील भी सुखचैन की चुदवाई से ही तुड़वाई। अब आप बताओ मम्मी, क्या मैं किसी और लंड जाने दूं अपनी फुद्दी मैं या फिर पापा का लंड ही लूं इसमें?”
“अवतार प्रीती की इस बात ने तो मेरी बोलती ही बंद कर दी।” मैंने कुछ सोच कर प्रीती से कहा, “प्रीती अगर ऐसी ही बात है तो ऐसा करते हैं मैं दो-तीन महीने के लिए वापस कनाडा चली जाती हूं। तुम खुल कर चुदाई करवाओ अवतार, अपने पापा से। जब सुखचैन के आने का टाइम होगा तो मैं वापस आ जाऊंगी।”
“अवतार इसके बाद जो प्रीती ने मुझे कहा उसके बाद मेरे पास बोलने कि लिए कुछ भी नहीं बचा।”
“प्रीती ने कहा, “मम्मी पापा ने मेरे कहने से भले ही अपना लंड मेरी फुद्दी में डाल लिया है। ये भी हो सकता है पापा कहीं और भी लड़कियों को चोदते हो। पापा अच्छे खासे तंदरुस्त हैं, अमीर है, लम्बा मोटा उनका लंड है – मम्मी मगर वो प्यार, मुहब्बत आपसे ही करते हैं। चुदाई अपनी जगह है मम्मी और प्यार अपनी जगह है।”
“अगर आप सिर्फ ये बोल कर कनाडा चली जाएंगी कि आप कनाडा जा रही हैं ताकि मेरी और पापा की चुदाई चलती रहे – तो क्या आप समझती हैं कि पापा को ये ठीक लगेगा? मुझे ये ठीक लगेगा? आपको ठीक लगेगा?”
“कोई बड़ी बात नहीं आप के ऐसे जाने के बाद पापा का चुदाई का मन ही ना करे। मुझे नंगी देख कर भी उनका लंड ही खड़ा ना हो। या फिर पापा का लंड देख कर मेरी फुद्दी ही गीली ना हो, मेरा मन ही पापा का लंड ही अपनी फुद्दी में लेने का ना हो। उधर आप भी ये सोचती रहें के आपकी बेटी आपके प्रीती, अपने पापा से चुदाई करवा रही है। मम्मी ये तो हम तीनों की – मेरी आपकी और पापा की सेहत खराब करने जैसी बात हो जाएगी।”
मैं फार्म और सत्रह सेक्टर से वापस आ कर लाउंज में बैठा था। प्रीती बहाना बना कर मार्किट चली गई थी, ताकि मैं और भूपिंदर खुल कर बात कर सकें। भूपिंदर दिन में अपनी और प्रीती में हुई बातें बता रही थी।
भूपिंदर ने प्रीती से कहा कि अगर उसने मुझसे, अपने पापा से चुदाई करवानी ही है तो वो – मेरी पत्नी भूपिंदर – दो तीन महीने के लिए वापस कनाडा चली जाती है, ताकि प्रीती की और मेरी खुल कर चुदाई हो सके।
इस पर प्रीती ने भूपिंदर से कहा, “मम्मी, पापा आपसे बहुत प्यार करते हैं। मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूं। पापा के साथ मेरी ये चुदाई आपका दिल दुखाने कि लिए नहीं है, सिर्फ एक टाइम पास है, जब तक सुखचैन नही आ जाता, वो भी इस लिए मम्मी कि ये सेक्स ये चुदाई ये भी ज़िदगी का हिस्सा हैं – जरूरी हैं। मगर इसे मजबूरी समझ कर करने से कोइ फायदा नहीं बल्कि नुक्सान ही है। आप कहेंगी तो मैं पापा से चुदाई नहीं करवाऊंगी। किसी और से भी नहीं करवाऊंगी और सुखचैन का इंतज़ार करूंगी।”
भूपिंदर ने बताया, “अवतार प्रीती तो ये बोल कर चुप हो गयी और मैंने भी हथियार डाल दिए। प्रीती की बातों का मुझे कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। मैंने प्रीती को बाहों में ले लिया और कहा, “बेटा तेरी सारी बातें सही हैं। पर तू ही बता अब क्या करें? कैसे तेरे पापा तेरी और मेरी चुदाई करेंगे? पहले मेरे फुद्दी में लंड डाल कर मुझे चोदेंगे फिर तेरे कमरे में जाएंगे तुझे चोदने के लिए? या दोपहर को तुझे चोदेंगे और रात को मुझे? कैसे होगा ये सब?”
“अवतार इसके बाद तो जो प्रीती ने कहा वो तो कमाल ही था। प्रीती बोली, “मम्मी एक बात बताओ, जो आप कह रही हो दोपहर को रात को या जो भी इसकी जरूरत ही कहां है। आपको अब मालूम है पापा मुझे चोदते रहे हैं वो भी पूरे दो महीने तक। और आपकी और पापा की चुदाई तो सब को मालूम ही है क्योंकि आप पति-पत्नी हो। अब आपने मुझे ना जाने कितनी बार नंगा देखा है और मैंने भी आपको। मां बेटी तो इकट्ठे नहाती भी हैं और ये आम है।”
“मम्मी अब तो पापा भी मुझे नंगा देख चुके हैं हर तरफ से, आगे से पीछे से और मैं पापा को। तो अब आप ये बताओ अब क्या बचा है? किस बात का पर्दा है मेरे आप में और पापा में? हम तीनों इकट्ठे मजा कयों नहीं ले सकते? हम दोनों इकट्ठे पापा से चुदाई क्यों नही करवा सकते? क्यों भला पापा कभी आपके कमरे में जाएं आपको चोदने कि लिए, कभी मेरे कमरे में आएं मुझे चोदने के लिए।”
“जरा सोचिये मम्मी कैसा मजा आएगा। जब पापा आपको चोद रहे होंगे तो मैं सोफे पर बैठ कर आपकी चुदाई देखते-देखते अपनी फुद्दी में उंगली डाल कर मजा ले रही होऊंगी और जब पापा मुझे चोद रहे होंगे तो आप अपनी फुद्दी में उंगली डाल कर मजा ले रही होंगी।”
“और अगर पापा का मन दोनों को इकट्ठे चोदने का होगा तो दोनों चूतड़ उठाए, चूतड़ पीछे करके बिस्तर कि किनारे पर उल्टा लेटी हुई होंगी। पापा कभी आपकी चूत में लंड डालेंगे कभी मेरी चूत में – कभी बीवी की फुद्दी में लंड कभी बेटी के फुद्दी में लंड।”
“और मम्मी मान लो पापा का दोनों को चोदने का ना भी हो तो कोइ बात नहीं। हम में से एक चुदाई करवाएगा दूसरा चुदाई देखता हुआ चुदाई का मजा लेगा मजा लेगा। मम्मी मस्त रहेगा ये भी।”
“मम्मी जब पापा आपकी फुद्दी चूसते चाटते हैं तो कभी आपका भी तो मन करता होगा किसी के फुद्दी चूसने का। सुखचैन जब मेरी फुद्दी चूसता है तब मेरा तो बड़ा मन करता है किसी के फुद्दी चूसने का। हम तीनों रहेंगे तो मैं और आप एक-दूसरी की फुद्दी भी चूसेंगी एक-दूसरी के फुद्दी का पानी भी टेस्ट करेंगी।”
“अवतार इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाती, प्रीती ने मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए और मेरी चूत पर अपना हाथ फेरने लगी। फिर प्रीती ने मेरे होंठ छोड़े और बोली, “मम्मी अब मना मत करना। आज रात को ही हम दोनों पापा के लंड का मजा लेंगी।”
“और इसके बाद प्रीती ने मेरी चूत अपना हाथ हटाया और मेरा हाथ पकड़ा और अपनी फुद्दी पर रख दिया और बोली, “मम्मी एक बार ट्राई करने में क्या जाता है, नहीं मजा आएगा तो आगे से नहीं करेंगे।”
“अवतार मैं क्या बताऊं, प्रीती के ये बातें सुन-सुन कर तो मेरे फुद्दी पानी-पानी हो चुकी थी। मेरा तो मन उसी वक़्त चुदाई करवाने का होने लगा था। मन कर रहा था अभी कपड़े उतार कर लेट जाऊं और प्रीती को बोलूं, “आ प्रीती चूस मेरी फुद्दी और मुझे भी चुसवा अपनी।”
“मैंने प्रीती की फुद्दी पर हाथ फेरते हुए कह ही दिया ठीक है प्रीती आज ट्राई करते हैं। देखते हैं कैसी रहती है ये मां-बेटी की चुदाई। देखते है कैसे तेरे पापा हम दोनों की फुद्दियां चोदते हैं दोनों फुद्दियों का पानी छुड़ाते हैं।”
ये बोल कर भूपिंदर चुप हो गयी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही चुका था, लेकिन मैं चुप था।
भूपिंदर बोली, “तुम क्या कहते हो अवतार? क्या ये ठीक रहेगा?”
मैंने एक पल को सोचा कि वैसे इसके अलावा और दूसरा कोइ चारा भी तो नहीं है। मैंने यही बात भूपिंदर को भी बोल दी, “भूपिंदर सवाल मेरे ठीक समझने या ना समझने का नहीं। सवाल इस वक़्त ये है कि इसके अलावा और चारा भी क्या है। असल में तो प्रीती ने तुम्हें अपने दिल की बात साफ़-साफ़ बता दी है। तुम्हें प्रीती की बातें कैसी लगी?”
भूपिंदर बोली, “अवतार मैं भी यही सोच रही हूं कि इस वक़्त इसके अलावा और चारा भी क्या है। अगर ऐसा ही है तो फिर यहीं सही। तुम भी बीवी और बेटी को इकट्ठे चोदो – दो-दो चूतों को चोदने का मजा लो और दो-दो चूतों को चुदाई का मजा दो।”
ये बोल कर भूपिंदर उठी और मेरे लंड पर हाथ रख कर मुझे चूम लिया। मेरा खड़ा लंड पायजामे कि ऊपर से पकड़ कर हंसते हुए बोली, “लो, ये तो अभी से तैयार हो चुका है।”
तभी दरवाजे का ताला खुलने की आवाज आयी और भूपिंदर जा कर सामने सोफे पर बैठ गयी।
प्रीती वापस आ गयी थी। हाथ में थैला था। आते ही बोली , “चलो मम्मी पापा आप अब तक यहां ही बैठे हो? चलो फ्रेश हो जाओ, मैं भी फ्रेश हो जाती हूं फिर खाना खाते हैं और बनाते हैं आगे का प्रोग्राम।”
प्रीती ने सामन फ्रिज में रखा और गेस्ट रूम में चली गए जहां वो रह रही थी। मैंने भूपिंदर से कहा, “चलो भूपिंदर तुम भी तैयार हो जाओ, हमारी बेटी तो फुल मूड में लग रही है आज।”
भूपिंदर भी उठ गयी और बोली, “चलो मैं भी फ्रेश होती हूं, तुम भी फ्रेश हो जाओ।”
हम तीनों फ्रेश हो कर लाउंज में आ गये। मैंने शिवाज़ रीगल की बोतल खोल ली और प्रीती ने जिन की। भूपिंदर वाइन पीने लगी तो प्रीती बोली, “मम्मी ये क्या पी रही हो, ये तो गोरों का ड्रिंक है, आप जिन पियो जो मैं पी रही हूं मस्त मजा आ जाएगा।”
भूपिंदर ने भी वाइन की बोतल टेबल पर रख दी और प्रीती ने भूपिंदर के गिलास में एक जिन का पैग डाल दिया। एक-एक पैग के बाद हमने खाना खाया। खाना खाने के बाद हम गेस्ट रूम में चले गए जहां प्रीती रह रही थी। जाते ही प्रीती ने अपने और भूपिंदर के गिलास में थोड़ी जिन डाली और मेरा आधा गिलास व्हिस्की से भर दिया। प्रीती मस्त चुदाई के मूड में लग रही थी, मगर भूपिंदर थोड़ी चुप-चुप सी थी। हम तीनों, मैं मेरी परी जैसी बेटी प्रीती और और मेरी प्यारी बीवी भूपिंदर फ्रेश हो कर लाउंज में आ गये।
प्रीती भूपिंदर से बोली, “मम्मी कैसा लग रहा है, क्या बात है इतनी चुप-चुप क्यों हो?”
भूपिंदर मुझसे बोल तो गयी थी “तुम भी बीवी और बेटी को इकट्ठे चोदो – दो-दो चूतों को चोदने का मजा लो और दो-दो चूतों को चुदाई का मजा दो”, मगर जब रात को जब चुदाई का वक़्त आया तो भूपिंदर में वो चुदाई करवाने का जोश, वो दम, वो चुदाई करवाने का उतावलापन नहीं था। भूपिंदर हिचकिचा रही थी। पंजाबी में कहा जाए तो भूपिंदर की बेटी के सामने चुदाई करवाने से “गांड फट रही” थी।
उस दिन मतलब पहली ही रात को – अगर प्रीती ने पहल ना की होती सारा का सारा चुदाई का प्रोग्राम फ्लॉप हो जाना था। मेरा लंड भी खड़ा नहीं होना था, भूपिंदर की फुद्दी गरम नहीं होनी थी। ऐसे में प्रीती अकेली क्या कर लेती?
भूपिंदर मुझे कुछ हिचकिचाती सी दिखाई दी। वो अभी भी उलझन में लग रही थी कि बेटी के सामने कैसे उसके पापा – अपने पति से चुदाई करवाए, और कैसे अपने सामने अपने बेटी प्रीती को अपने पापा से चुदने दे।
मैं भूपिंदर की इस उलझन को समझ रहा था और प्रीती भूपिंदर की इस उलझन को समझ रही थी। किसी हद तक भूपिंदर की उलझन ग़लत भी नहीं थी। आखिर एक मां का अपने पति से अपनी बेटी के सामने चुदाई करवाना? बात तो इतनी आसानी से पचने वाली नहीं थी।
प्रीती भूपिंदर के पास जा कर बैठ गयी और भूपिंदर के कंधों पर हाथ रख कर बोली, “क्या बात है मम्मी, क्या मन नहीं कर रहा? मम्मी एक बार ट्राई तो करो, सब ठीक हो जाएगा। चलो मैं ही शुरू करती हूं।”
और ये कह कर प्रीती ने अपने कपड़े उतार दिए और फिर से जा कर भूपिंदर के पास बैठ गयी। प्रीती ने भूपिंदर का हाथ अपने मम्मों पर रक्खा और बोली, “ये देखो मम्मी क्या मस्त मम्मे दिए है आपने मुझे, और ये फुद्दी?” ये बोलते हुए प्रीती ने भूपिंदर का हाथ अपनी चूत पर रख दिया।
भूपिंदर ने प्रीती को देखा और प्रीती के मम्मे धीरे-धीरे मसलने शुरू कर दिए। शायद अब वो भी मस्त होने लगी थी।
प्रीती भूपिंदर से बोली, “मम्मी उठो, जरा फुद्दी चुसवाओ अपनी।” भूपिंदर नहीं उठी। उसकी हिचकिचाहट शायद जा नहीं रही थी।
प्रीती खड़ी हो गयी और बोली, “चलो मम्मी इतना भी मत सोचो – आओ।”
प्रीती ने भूपिंदर का हाथ पकड़ा और भूपिंदर खड़ी हो गयी। प्रीती ने भूपिंदर की सलवार का नाड़ा खोल दिया। भूपिंदर की सलवार नीचे गिर गयी। इसके बाद प्रीती ने भूपिंदर की कमीज उतारने के लिए ऊपर के ही थे कि भूपिंदर ने अपनी कमीज खुद ही उतार दी। प्रीती ने भूपिंदर से कहा, “मम्मी अब बैठ जाओ बेड पर, चूतड़ों की नीचे मोटा सा तकिया रखो और पीछे की तरफ लेट जाओ।”
भूपिंदर मुझसे भी फुद्दी ऐसे ही चुसवाती थी। शायद प्रीती ने मुझे भूपिंदर की फुद्दी चूसते हुए देख लिया होगा। भूपिंदर ने बिना कुछ भी कहे मशीन की तरह एक तकिया लिया और चूतड़ों की नीचे तकिये रख कर उस पर बैठ कर पीछे की तरफ लेट गयी और अपनी टांगें उठा दी और टांगें चौड़े कर दी।
प्रीती नीचे घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और भूपिंदर की फुद्दी की फांकें चौड़ी करके कुछ देर तो भूपिंदर की फुद्दी को देखती रही और फिर प्रीती भूपिंदर की फुद्दी चूसने चाटने लगी।
भूपिंदर भी तो आखिर को एक औरत ही थी – फुद्दी चुसवाने चुदवाने की शौक़ीन पंजाबन।
जल्दी ही भूपिंदर के फुद्दी गरम हो गयी। भूपिंदर ने प्रीती का सर अपनी फुद्दी पर दबा दिया और “आह प्रीती आह प्रीती” बोलने लगी। प्रीती ने फुद्दी थोड़ी और चूसी और खड़ी हो गयी। प्रीती मेरी तरफ देख कर बोली, “आ जाओ पापा मस्त लेटी हुई है मम्मी – लंड अपनी फुद्दी लेने को तैयार। ऐसे ही अपना लंड डाल दो मम्मी की फुद्दी में पूरा अंदर तक जाएगा लंड, डालो लंड और करो चुदाई।।”
प्रीती उठी और एक तरफ हो गयी और मैंने सोफे से उठा और भूपिंदर की टांगे थोड़ी और ऊपर कर की चौड़ी कर दी। लंड बिलकुल फुद्दी के छेद के सामने था। मैंने लंड छेद पर रखा और एक ही बार में लंड जड़ तक फुद्दी में बिठा दिया। भूपिंदर बस इतना ही बोली, “आह अवतार, पूरा गया है अंदर तक।”
उधर प्रीती मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए कहा, “पापा अब रुकना मत। आज ज़बरदस्त चुदाई करो मम्मी की, जैसे उस दिन सुबह मेरी चुदाई की थी।”
इसके बाद मैंने भूपिंदर की जोरदार चुदाई चालू कर दी। प्रीती पास ही खड़ी मेरा लंड भूपिंदर की फुद्दी में अंदर बाहर होता हुआ देख रही। तभी प्रीती झुकी और भूपिंदर के मम्मे चूसने लगी। जल्दी ही भूपिंदर के चूतड़ घूमने लगे और उसने प्रीती का सर अपने मम्मों पर दबा दिया। इसके बाद तो आठ दस ही धक्के लगे और भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “आह अवतार निकल गया मेरा आअह मजा आ गया क्या मस्त चुदाई हुई आज, आह प्रीती मजा आ गया।”
प्रीती खड़ी हुई और मुझसे बोली, “पापा अभी मत रुकना। चालू रक्खो मम्मी की चुदाई। एक बार और मजा आने दो मम्मी को फिर अपने लंड का गर्म शहद भी आज डाल देना मम्मी की फुद्दी में। मम्मी को पूरा मजा आएगा तभी खुल कर चुदाई करवाएगी आगे से।”
प्रीती की बात तो ठीक ही थी। मैंने भूपिंदर को चोदना जारी रखा। मेरे दोनों हाथ भूपिंदर के घुटनों के नीचे थे और मैंने भूपिंदर की टांगें उठाई हुई थी।
प्रीती भूपिंदर फुद्दी का दाना रगड़ने लगी। अगले ही मिनट भूपिंदर फिर से “आअह अवतार आआह अवतार” करने लगी। भूपिंदर दोनों हाथों से अपने मम्मों के निप्पल पकड़ लिए और मसलने लगी।
मेरा लंड भूपिंदर की फुद्दी में था, प्रीती भूपिंदर की चूत का दाना रगड़ रही थी और भूपिंदर खुद अपने मम्मों के निप्पल मसल रही थी। क्या सीन था।
भूपिंदर के चूतड़ फिर से घूमने लगे। भूपिंदर बोली, “आआह अवतार आअह ,,, लगाओ और जोर से।”
मैं अब पूरा लंड फुद्दी से निकाल कर झटके के साथ अंदर डालने लगा। मुझे भी मजा आने वाला था मगर मैंने मजा रोका हुआ था। मैं भूपिंदर के मजे के साथ ही लंड का पानी भूपिंदर की फुद्दी में डालना चाहता था।
भूपिंदर की चूतड़ जोर-जोर से हिलने लगे। प्रीती भी भूपिंदर की चूत का दाना जोर जोर से रगड़ रही थी। तभी भूपिंदर का हाथ प्रीती के हाथ पर पहुंच गया और भूपिंदर प्रीती का हाथ और भी जो से अपनी चूत कि दाने पर रगड़ने लगी।
तभी भूपिंदर ने एक जोर एक की सिसकारी ली, “आआह अवतार फिर निकल गया आअह। भूपिंदर प्रीती का हाथ वैसे ही अपनी चूत में ऊपर-नीचे करते हुए बोली, बस प्रीती और कितना मजा देगी मेरी बेटी, बस।”
भूपिंदर प्रीती को “बस” तो कह रही थी मगर प्रीती का हाथ अपनी चूत से हटा नहीं रही थी। प्रीती भी रुक नहीं रही थी और अपनी मम्मी भूपिंदर की चूत का दाना रगड़ती मसलती जा रही थी।
तभी मुझे भी मजा आ गया और मेरे लंड ने गरम पिचकारी छोड़ी और मैंने कहा, “ले भूपिंदर ले, निकला तेरी फुद्दी में ले, और मैंने और भी जोर के धक्के लगाते हुए कहा, “ले भूपिंदर और ले।”
मैं भूपिंदर को चोद रहा था। मेरी बेटी प्रीती, पास ही बैठी भूपिंदर – अपनी मम्मी, की चूत का दाना रगड़ रही थी। तभी मुझे भी मजा आ गया और मेरे लंड ने गरम पिचकारी छोड़ी और मैंने कहा, “ले भूपिंदर ले, निकला तेरी फुद्दी में ले, और मैंने और भी जोर के धक्के लगाते हुए कहा, “ले भूपिंदर और ले।”
भूपिंदर की फुद्दी दो बार पानी छोड़ने के बाद बाहर तक गीली हुई पड़ी थी। मेरे लंड के टट्टे जब भूपिंदर की चूत से टकराते तो एक मस्त आवाज आती “पट्ट पट्ट पट्ट।”
मेरा और भूपिंदर दोनों का मजा पूरा हो गया था। भूपिंदर ढीली हो चुकी थी। प्रीती ने अपनी मम्मी भूपिंदर की फुद्दी में से उंगली निकल ली और झुक कर भूपिंदर के होंठ चूसने लगी। मैंने लंड भूपिंदर की फुद्दी में से बाहर निकाला और जा कर सोफे पर बैठे गया।
भूपिंदर ने प्रीती के सर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। तभी प्रीती उठी और अपनी फुद्दी भूपिंदर की फुद्दी पर रख कर झुकी और फिर से भूपिंदर के होंठ अपने होठों में ले लिए।
तभी प्रीती ने कमाल कर दिया। प्रीती ने भूपिंदर की टांगें थोड़ी और ऊपर उठाई और अपनी फुद्दी अपनी मम्मी भूपिंदर की फुद्दी पर लगा कर फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ने लगी।
प्रीति अपनी फुद्दी भूपिंदर की फुद्दी पर ऐसे रगड़ रही थी जैसे दो लेस्बियन – समलैंगिक लड़कियां ये सब करती हैं। भूपिंदर के मुंह से उन्हह उन्हह की आवाजें निकलने लगी। भूपिंदर ने प्रीती के सर से हाथ हटाया और प्रीती को बाहों में लेकर अपने चूतड़ हिला हिला कर अपने फुद्दी प्रीती की फुद्दी के साथ रगड़ने लगी।
प्रीती की इस हरकत से तो मैं हैरान ही हो गया। प्रीति एक पक्की लेस्बियम की तरह अपनी फुद्दी भूपिंदर की फुद्दी पर रगड़ रही थी। क्या प्रीती अपनी मामी भूपिंदर की चूत का पानी एक बार और छुड़ा देगी?
कमाल तो ये था कि भूपिंदर भी प्रीती को हटा नहीं रही थी। भूपिंदर भी एक लेस्बियन की तरह अपने चूतड़ हिला-हिला कर प्रीती की फुद्दी के साथ फुद्दी की रगड़ाई का साथ दे रही थी। प्रीती का तो मुझे पता नहीं, हो सकता है वो ये अब अपनी सहेलियों के साथ ऐसा करती हो। मगर भूपिंदर? भूपिंदर का प्रीती का फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ने में इस तरह साथ देना मेरे लिए ये बिल्कुल नई बात थी।
प्रीती का ये फुद्दी पर फुद्दी रगड़ने का खेल चलते पंद्रह मिनट तो हो ही गए थे। भूपिंदर ने प्रीती को कस कर पकड़ा हुया था और जोर-जोर से चूतड़ हिला घुमा रही थी। प्रीती ने भूपिंदर के होठों से अपने होंठ हटा लिए और जोर-जोर से फुद्दी रगड़ते हुई “आह मम्मी आह मम्मी मेरा मजा निकलने वाला है” बोलने लगी।
तभी भूपिंदर फिर एक बार जोर से बोली, “प्रीती बेटा ये क्या हुआ, फिर निकल गया मेरा और साथ ही प्रीती के मुंह से भी एक सिसकारी निकली आह मम्मी”, और दोनों मां बेटी ढीली हो गयी।
ये अजीब नजारा देख कर मेरा लंड फुंफकारे मार रहा था। प्रीती उठी और मेरे पास आ कर खड़ी हो गयी। तभी भूपिंदर भी उठी और उठ कर मेरे पास बैठ गयी।
मेरी और प्रीती के तरफ देखते हुए भूपिंदर बोली, “ये आज क्या किया आज तुम दोनों ने। इतना मजा?”
उधर मेरा दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। मेरा लंड फटने को था और नंगी सेक्सी मेरी बेटी मेरी सामने खड़ी थी। मैं उठा और प्रीती को बेड के तरफ ले जा कर प्रीती को बेड पर लिटा दिया। आनन-फानन में मैंने एक तकिया प्रीती के चूतड़ों के नीचे रखा और बिना एक पर भी गंवाए लंड प्रीती की फुद्दी में डाला और कस कर प्रीती को पकड़ कर चुदाई शुरू कर दी।
जवान प्रीती की टाइट फुद्दी को चोदने का मजा भी बहुत आ रहा था। जल्दी ही प्रीती मस्ती में आ गयी और अपने चूतड़ घुमाने हिलाने लगी। जिस तरह प्रीती चुदाई करवाते हुए चूतड़ ऊपर नीचे करती थी उससे लंड पर मस्त रगड़े लगते थे। मेरी आंखों के सामने बिशनी की चुदाई घूम गयी, जब बिशनी को तीन बार मजा आया था और अंत में मेरे लंड का पानी बिशनी की गांड में निकला था।
मैंने प्रीती को उसी तरह चोदना शुरू कर दिया जैसे मैंने बिशनी को चोदा था – कस कर पकड़ कर – जोर-जोर से, दबा-दबा कर। प्रीती ने भी अपनी टांगें मेरी कमर के पीछे कर दी और मस्त चूतड़ घुमाने लगी। तभी प्रीती ने जोर से चूतड़ घुमाये और एक सिसकारी ली, “आअह पापा निकला मेरी फुद्दी का पानी, मजा आ गया पापा, मजा आ गया आज तो।”
मैंने प्रीति की फुद्दी चोदनी बंद नहीं की – बिशनी की भी बंद चुदाई ऐसे ही बंद नहीं की थी। भूपिंदर के सामने प्रीती को चोदने का अजीब सा ही मजा आ रहा थ। जरा सा सर घुमा कर मैंने भूपिंदर की तरफ देखा। भूपिंदर अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
प्रीती को एक मजा आ चुका था मगर प्रीती ने ना तो मेरी कमर से टांगें ही हटाई और ना ही मुझे चुदाई बस करने के लिए बोला। जवान प्रीती में चुदाई करवाने का अच्छा खासा दम-ख़म था। लग ही नहीं रहा था कि इतनी चुदाई के बाद भी प्रीती थकी हुई थी।
मेरे लंड के धक्के प्रीती की चूत में बदस्तूर चालू थे। जल्दी ही प्रीती को एक मजा और आ गया मगर मैं नहीं रुका। ऐसी टाइट फुद्दी की चुदाई करने का बहुत मजा आ रहा था। बिशनी भी जवान थी मगर बिशनी की फुद्दी भी इतनी टाइट नहीं थी जितनी प्रीती की थी।
भूपिंदर सोफे से उठ कर बेड पर आ गई और चुदाई करवा रही प्रीति के सर पर हाथ फेरने लगी। प्रीति ने जरा सी आंखें खोली और बड़ी ही धीमी आवाज में बोली, “मम्मी बड़ा मजा आ रहा है चुदाई का। बड़े ही रगड़े लग रहे हैं फुद्दी में, बड़ा ही मस्त लंड है पापा का।”
चुदाई चलती रही। भूपिंदर प्रीती के सर पर हाथ फेरती रही। तभी प्रीती को तीसरा मजा आने लगा और प्रीती बोली, “मम्मी ये देखो मुझे फिर मजा आ गया। आह पापा लगाओ तीन-चार जोर के, फाड़ो आज मेरी फुद्दी। आह मम्मी, आह पापा और जैसे ही प्रीती ने जोर के चूतड़ घुमाए मेरे लंड से भी गरम मलाई निकली और प्रीती की फुद्दी में जाने लगी।”
मेरे मुंह से भी निकला, “ले प्रीती मेरी जान ले निकला तेरी फुद्दी मैं। जकड़ ले बेटा मेरा लंड निचोड़ ले सारा पानी इसका आह प्रीती मजा ही आ गया आज तो। भूपिंदर आज की चुदाई तो बड़ी ही मस्त है। क्या मस्त फुद्दी वाली बेटी पैदा की है तूने, मस्त चुदाई करवाती है ये।”
मुझे खुद ही पता नहीं था कि मजे की मस्ती में मैं क्या बोल रहा हूं। भूपिंदर ने मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरा – बड़े ही प्यार से और बोली, “अवतार तुम्हारे जैसे इतने बड़े लंड और ऐसी बढ़िया चुदाई करने वाला तुम जैसा हस्बैंड, तुम जैसा चोदने वाला पापा भला किसको मिलेगा?”
लंड की मलाई निकलने के बाद मेरा लंड ढीला होने लगा था। मैं पल्टा और पल्प की आवाज़ के साथ लंड प्रीती की फुद्दी में से निकाल कर प्रीती के पास ही लेट गया।
प्रीती की आंखें अभी भी बंद ही थी। लगता था अभी भी मजा आ रहा था प्रीती को। भूपिंदर ने प्रीति के सर पर हाथ फेरते हुए प्रीती के होंठ अपने होठों में लिए और चूसने लगी। प्रीती ने भी भूपिंदर के सर को अपने मुंह पर दबा दिया।
तभी कुछ ऐसा हुआ जो अजीब था। तकिया अभी भी प्रीती के चूतड़ों के नीचे ही था। भूपिंदर ने एक पल्टी ली और प्रीती के ऊपर आ गयी। प्रीती की टांगें तो अभी भी फ़ैली ही हुई थी। अब भूपिंदर लड़कों की तरह प्रीती के ऊपर थी। भूपिंदर की फुद्दी प्रीती की फुद्दी के ऊपर थी। अब फुद्दी पर फुद्दी रगड़ने की धक्के लगाने की बारी भूपिंदर की थी। मेरे लंड का पानी भूपिंदर की फुद्दी से बाहर तक आ रहा था और अब प्रीती की फुद्दी से भी सफ़ेद पानी रिस रहा था।
दोनों मां बेटी की फुद्दियां चुदाई के बाद बाहर तक गीली और चिकनी हुई पड़ी थी। अब तक ना तो उन्होंने पेशाब ही नहीं किया था और ना ही फुद्दियों की धुलाई ही की थी।
मैं उठ कर सोफे पर बैठे गया सोफे पर बैठा सोच रहा था कि आज मां बेटी की चुदाई का पहला दिन है और ये हाल है – आगे आगे क्या होगा, ऊपर वाला ही जानता है।
मैंने व्हिस्की का गिलास हाथ में ले लिया और मां बेटी की लेस्बियन वाली चुदाई के मजे लेने लगा। मां बेटी का ऐसा सेक्सी सीन देख कर भी मेरा लंड हरकत नहीं कर रहा था। अब मेरे लंड को खड़ा होने के लिए कम से कम बारह घंटे का टाइम, बढ़िया मीट और बढ़िया शराब चाहिए थी।
जो भी था, मैं सोफे पर बैठा दारू के घूंट भर रहा था। भूपिंदर और प्रीती – मां और बेटी – की फुद्दी के ऊपर फुद्दी के रगड़ाई का ये सीन भी मस्त था। दुनिया से बेखबर दोनों मां बेटी इस फुद्दी से फुद्दी की चुदाई का मजा ले रही थी।
जल्दी ही दोनों के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी – “आह मम्मी, आह प्रीती।” दोनों मां बेटी ने एक-दूसरे को जकड़ा हुआ था और दोनों एक-दूसरे के ऊपर-नीचे चूतड़ घुमा रही थी।
तभी भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “प्रीती बेटा निकल गया मेरा।”
नीचे से प्रीती का भी लग रहा था मजा अटका ही हुआ है। प्रीति बोली, “मम्मी थोड़ा और रुक जाओ, मझे भी आने ही वाला है।
अभी भूपिंदर ने चार पांच ही धक्के लगाए होंगे और तभी प्रीती बोल पड़ी, लो मम्मी आ ही गया – निकल गया मेरा भी। ओह भगवान इतना मजा? ऐसी चुदाई? क्या मस्त लंड है पापा का। क्या मस्त चोदते हैं पापा। आज की चुदाई? मम्मी चुदाई का इतना मजा तो मझे सुखचैन से चुदाई करवाने में भी कभी नहीं आया।”
उस दिन की चुदाई खत्म हो चुकी थी। अब पेट पूजा का टाइम था। सब लोग – मतलब हम तीनों उठे। बाथरूम गए। दोनों ने अपनी फुद्दीयां साफ़ की, ढीले वाले कपड़े पहन लिए।
मैंने अपना लंड आगे-पीछे करके धोया और आधी बाजू का कुर्ता और ढीला पायजामा पहन कर डाइनिंग हॉल में आ गया। सब ने कपड़े पहन लिए थे, इसका मतलब था उस दिन के चुदाई की दौर खत्म हो चुका था।
चने की दाल और साथ में अंडा करी बनी थी। मैंने अपना गिलास भी साथ ही ले आया और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर हल्के-हल्के घूंट भरने लगा। प्रीती और भूपिंदर ने सामान डाइनिंग टेबल पर रख दिया और सब लोग बैठ कर डिनर करने लगे।
डिनर खत्म करके हम तीनों लाऊंज में आ गए। हमारे गिलास हमारे हाथों में ही थे। सब चुप से बैठे थे। बात प्रीती ने ही शुरू की। प्रीती ने भूपिंदर से पूछा, “मम्मी, सच बताना, आज की चुदाई का मजा आया या नहीं?”
भूपिंदर ने जो जवाब दिया उससे हम सब की हंसी ही छूट गयी। भूपिंदर बोली, “मजा? प्रीती चार-चार बार तो मेरी चूत पानी छोड़ गयी और तू पूछ रही है मजा आया या नहीं?”
प्रीति ने हंसते हुए ही पूछा, “चलो मम्मी एक बात बताओ, आपने मेरे ऊपर लेट कर मेरी मस्त फुद्दी चोदी – ये आपने कहां से सीखा, क्या कालेज में?”
भूपिंदर भी मूड में आ चुकी थी। भूपिंदर बोली, “पहले तो तू बता, पहले तो तूने मेरी फुद्दी चोदी थी जब तेरे पापा मेरी चुदाई करके हटे थे। तूने ही पहले मेरी टांगें चौड़ी करके अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी पर रगड़ी थी।”
प्रीती भी हंसते हुए बोली, “मम्मी हम तो कालेज में कई कुछ करती रही हैं। ये चंडीगढ़ है मम्मी चंडीगढ़, यहां कालेजों में क्या क्या होता है आपको भी तो पता ही होगा। आप भी तो कालेज की पढ़ी हुई हैं, वो भी चंडीगढ़ के कालेज की।”
भूपिंदर बोली, “हां गई हूं कालेज, मगर ये मैंने ये कहीं किसी कालेज में नहीं, यहीं सीखा है। पहली बार मैंने इसी घर में किया है, इसी कमरे में, इसी बिस्तर पर।”
अब हैरान होनी की बारी, मेरी और प्रीती की थी। हम दोनों पापा बेटी के मुंह से इकट्ठे आवाज निकली, “इसी घर में? इसी कमरे में? इसी बिस्तर पर? किसके साथ भूपिंदर – किसके साथ मम्मी?”
भूपिंदर हंसती बोली, “अरे सबर करो, बताती हूं।” फिर वैसे ही हंसते हुए बोली, “शकुंतला के साथ।”
हैरानी पर हैरानी। पहले “इसी घर, इसी कमरे में” फुद्दी के साथ फुद्दी की चुदाई और फिर वो भी शकुंतला के साथ?”
मेरी हैरानी खत्म ही नहीं ना हो रही थी। मैंने उसी हैरान के साथ पूछा, “शकुंतला? अपने जुगनू की मम्मी – कांता की सास?”
भूपिंदर उसी मस्ती में बोली, “हां अपने जुगनू की मम्मी शकुंतला, कांता की सास।”
प्रीती पूछा, “कमाल है। मगर मम्मी शकुंतला के साथ? ये सब कैसे शुरू हुआ?”
प्रीती और भूपिंदर एक-दूसरी की फुद्दी के साथ फुद्दी की चुदाई कर चुकी थी। जिस तरह भूपिंदर ने प्रीती की फुद्दी चोदी थी, मैं और प्रीती उससे हैरान थे। हम दोनों को ही लग रहा था कि भूपिंदर ऐसा कुछ फुद्दी वाला काम पहले भी कर चुकी थी।
प्रीती ने भूपिंदर से पूछ ही लिया “मम्मी एक बात तो बताओ, आपने मेरे ऊपर लेट कर जिस तरह से मेरी फुद्दी चोदी है, इससे तो लगता है आप पहले भी ये सब कर चुकीं हैं – ये आपने कहां से सीखा, क्या कालेज में?”
जब भूपिंदर ने बताया कि वो ये फुद्दी चुदाई शकुंतला के साथ करती थी तो हम हैरान हो गए। प्रीती ने भूपिंदर से पुछा, “मम्मी शकुंतला? जुगनू की मम्मी – कांता की सास?”
भूपिंदर बोली, “हां शकुंतला के साथ।” और फिर भूपिंदर बताने लगी कि ये सब कब और कैसे शुरू हुआ।
भूपिंदर प्रीती से बोली, “प्रीती ये सब शुरू हुआ जब तू पैदा हुई। शकुंतला तब एक जवान लड़की हुआ करती थी, बड़ी ही सुन्दर थी शकुंतला तब – एक-दम स्लिम ट्रिम। तब शायद उसकी नई-नई ही शादी हुई थी। जुगनू तो तब पैदा ही नहीं हुआ था, एक-दम कड़क जिस्म था शकुंतला का।”
भूपिंदर बोल रही थी और मैं और प्रीती सुन रहे थे। “एक दिन मेरी झाई जी – झाई जी मतलब मेरी सास, अवतार की मम्मी, तुम्हारी दादी – उनको सब झाई जी बोलते थे। झाई जी ने शकुंतला को बुलाया, इसी कमरे में और बोली, “शकुंतला बेटा तुझे तो पता ही है भूपिंदर की जचगी – जचगी मतजब डिलीवरी – मतलब बच्चा पैदा हुआ है। उसके चालीस दिन पूरे होने वाले हैं। शकुंतला बेटा तू दो महीने तक एक दिन छोड़ कर उसकी आगे पीछे टांगों छातियों की मालिश कर दिया कर नहीं उसकी छातियों में पीछे और पेट पर चर्बी बैठ जाएगी।”
शकुंतला बोली, “ठीक है झाई जी मैं समझ गयी – कर दिया करूंगी। कब से शुरू करनी है?”
झाई जी बोली, “कल भूपिंदर का चलिया – मतलब बच्चा पैदा हुए चालीस दिन पूरे हो जाने हैं, परसों से ही शुरू कर दे, उसके मैं तुझे अलग से पैसे दे दिया करूंगी।”
शकुंतला बोली, “झाई जी आप ऐसी बातें मत किया करो। पैसे वैसे की बात मत करो झाई जी, मुझे बड़ी ही शर्म आती है, मुझे अच्छा भी नहीं लगता। मैं भी तो आपकी बेटी ही हूं।”
झाई जी ने शकुंतला के सर पर हाथ फेरा बिल्कुल पंजाबी स्टाइल में और बोली, “जीती रह मेरी बेटी, वाहे गुरु जी की मेहर बनी रहे तुझ पर।”
भूपिंदर ने बताया, “बस तीसरे दिन से ही मेरी मालिश शुरू हो गयी। पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो कर मैं शकुंतला के आगे लेट जाती और शकुंतला मेरे मम्मों की, पेट की, जांघों की और फुद्दी की मालिश करती। फिर मैं उल्टा हो जाती और शकुंतला मेरी पीठ, कमर और चूतड़ों की मालिश करती।”
भूपिंदर बोल रही थी और हम दोनों सुन रहे थे। “आठ दस दिन तो खाली मालिश ही हुई और कुछ नहीं हुआ। मगर फिर शकुंतला मस्तियों पर उतर आयी। मेरे चूतड़ों के मालिश करते करते थोड़ी से उंगली मेरे चूतड़ों के छेद में भी कर देती थी,या मेरे चूतड़ चाटने लगती। मैं खाली उसकी तरफ देखती और मुस्कुरा देती।
शकुंतला जब मेरे मम्मों की मालिश कर रही होती तो मेरे मम्मों के निप्पल मसल देती। जब मेरी फुद्दी की मालिश कर रही होते तो हल्का सा मेरी फुद्दी का दाना रगड़ देती या फिर मेरी फुद्दी का चुम्मा ले लेती।”
“मुझे इन सब में बड़ा मजा आता था। दुबली-पतली कड़क जिस्म वाली शकुंतला जब ये सब करती थी तो हल्का सा हंस भी देती थी। वैसे तो शकुंतला कोइ मालिश वाली नहीं थी – घरेलू लड़की थी, मगर लगभग सारी मालिश वालियां ये करती हैं। जिनकी औरतों की वो मालिश करती हैं, उनको फुद्दी का मजा भी देती हैं। कई औरतें तो इन मालिश वालियों के इस मजे के अलग से पैसे भी देती हैं। ये कोइ नई बात नहीं है।”
“जब शकुंतला इस तरह कि ऊंगलीबाज़ी करती तो मैं बस इतना ही कहती, “शकुंतला बड़ी शरारतें करती है तू।” शकुंतला कुछ बोलती नहीं थे, मगर हल्का सा मुस्कुरा देती थी। आखिर शकुंतला की इन हरकतों से मजा तो मुझे भी आता ही था।
“ऐसे ही शायद दो हफ्ते गुज़र गए। शकुंतला की शरारतें बढ़तीं ही जा रहीं थी और मुझे इस सब में मजा भी आने लगा था। चूतड़ों की मालिश करते-करते शकुंतला अब उंगली चूतड़ों के छेद में पूरी अंदर करने लगी थी। फुद्दी का दाना भी दो दो तीन मिनट तक मसलती रहती। कभी कभी तो मुझे लगता मेरा मजा ही निकलने वाला हैं।”
“ऐसे ही एक दिन जब शकुंतला मेरी आगे पेट की मम्मों की मालिश कर रही थी। मालिश करते करते फुद्दी की मालिश पर आ गयी। शकुंतला फुद्दी की मालिश भी कर रही थी और साथ ही फुद्दी का दाना भी रगड़ रही थी। तभी शकुंतला मेरी फुद्दी थपथपाते हुई बोली, “दीदी इसका मजा लेना है?”
“पहले तो मुझे शकुंतला की बात ही समझ नहीं आयी। मैंने “पूछा क्या शकुंतला?”
“शकुंतला फिर से मेरे फुद्दी थपथपाते हुई बोली, “दीदी इसका मजा लेना है?”
मैने फिर शकुंतला से पूछा, “मजा लेना है क्या मतलब? कैसे मजा लेना है। शकुंतला क्या कह रही है तू?”
“शकुंतला वैसे ही हंसते हुई बोली, “दीदी मैं कह रही हूं, आपने इसका मजा लेना है? अपनी इस नाजुक मुलायम फुद्दी का? इस बार शकुंतला ने अपनी उंगली थोड़ी सी मेरे चूत के छेद के अंदर डाल दी?”
“मैंने हैरानी से पूछा, “इसका मजा? कैसे?”
“शकुंतला बोली, “दीदी पहले आप हां तो बोलो, फिर बताती हूं।”
अब प्रीती क्या बताऊं, उन दिनों तेरे पापा मेरी चुदाई भी बहुत कम करते थे, करते भी थे तो बड़ी ही धीरे-धीरे करते थे जैसे शीशे की बनी हुई है मेरी फुद्दी – जोर से चोदने में कहीं टूट ही ना जाए। रगड़ाई वाली चुदाई तो तेरे पापा करते ही नहीं थे।”
“वैसे प्रीती बेटा बात भी ठीक थी, पुराने लोग कहा करते थे जचगी – यानी बच्चा पैदा होने के बाद शरीर कच्चा होता है। चालीस दिन तो मर्द को औरत के पास जाना भी नहीं चाहिए और रगड़ाई वाली चुदाई भी जचगी के तीन महीने के बाद ही शुरू करनी चाहिए।
“शकुंतला की बातें सुन कर मेरी फुद्दी गीली तो होने लग ही गयी थी। मैंने कह दिया, “ठीक है शकुंतला, कैसे आएगा मजा?”
“बिना कोइ जवाब दिए शकुंतला उठी और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और अपने कपड़े उतर दिए। मैं तो मालिश करवाने के चक्कर में नंगी ही थी। पतले शरीर वाली शकुंतला के छोटे-छोटे मम्मे बिल्कुल तने हुऐ थे, चूत के आस पास हल्के भूरे बाल थे – रेशम जैसी झांटें।”
“शकुंतला मेरे पास आयी और तकिया उठा कर बोली, “दीदी धीरे-धीरे अपने चूतड़ उठाओ।” जैसे ही मैंने चूतड़ उठाये शकुंतला ने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया रख दिया। और मेरी टांगें चौड़ी करके मेरी फुद्दी चाटने लगी। मुझे सच में ही बड़ा मजा आ रहा था। फुद्दी तो मेरी अवतार भी चूसते चाटते थे लेकिन जिस तरह शकुंतला बड़े ही धीरे-धीरे मेरी फुद्दी चूस-चाट रही थी, मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।”
“मैंने सोचा शकुंतला ने ऐसे ही मेरी फुद्दी चूस-चूस कर मुझे मजा देना होगा। जैसे ही मजे के मारे मैंने जरा से चूतड़ घुमाये, शकुंतला उठी और अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी के ऊपर रख कर मेरे ऊपर लेट लेट गयी।”
“शकुंतला ने मुझे बाहों में ले लिया और मेरे होंठ चूसने लगी। तभी शकुंतला ने अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी के ऊपर रगड़नी शुरू कर दी। बीच बीच में शकुंतला मेरी फुद्दी पर हल्के-हल्के धक्के भी लगा देती थी जैसे मेरी चुदाई कर रही हो। जल्दी ही मुझे मजा आने वाला हो गया। मैंने शकुंतला के होठों से अपने होठ अलग किये और शकुंतला से कहा, “शकुंतला जरा जोर-जोर से रगड़, मुझे मजा आने वाला है।”
“शकुंतला ने जोर-जोर से अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी पर रगड़नी शुरू कर दी। जल्दी ही मुझे मजा आ गया। बड़ा अलग सा ही मजा था। बस जब तक मेरी मालिश चली ये सिलसिला भी चलता रहा। मालिश के दो महीने से ऊपर हो चुके थे। मुझे अब बहुत अच्छा महसूस भी होने लगा था। अब तो अवतार का पूरा लंड लेने का और जोरदार चुदाई करवाने का भी मन होने लगा था।”
“जब भूपिंदर ने कहा, “अब तो अवतार का पूरा लंड लेने का और जोरदार चुदाई करवाने का भी मन होने लगा था, तो प्रीती मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी।”
भूपिंदर बोली, “एक दिन जब शकुंतला मेरी मालिश कर के मेरे ऊपर लेट अपनी फुद्दी से मेरी फुद्दी चोद रही थी तो मैंने कहा, “शकुंतला, एक दिन मुझे भी तुम्हारी फुद्दी चोदनी है, तुम्हारे ऊपर लेट कर, जैसे तुम मेरी फुद्दी चोद रही हो मेरे ऊपर लेट कर।”
समझदार शकुंतला बोली, “दीदी आप भी चोद लेना मुझे, पर पहले भैया के साथ अपनी चुदाई ‘पहले की तरह’ शुरू हो जाने दो। अभी आपकी कमर को ज्यादा झटके नहीं लगने चाहिये।”
“सच बताऊं अवतार मैं शकुंतला की समझदारी वाली बातों से हैरान ही थी। तीन महीने के बाद जब मेरी और तुम्हारी”, भूपिंदर ने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा, “मेरी और तुम्हारी चुदाई पहले ही की तरह चालू हो गयी, तब मैंने एक दिन शकुंतला की फुद्दी चोदी। शकुंतला तो नीचे लेटी फुद्दी भी मस्त चुदवाती थी, चूतड़ घुमा-घुमा कर, झटका-झटका कर।”
“मालिश बंद होने बाद और अवतार के साथ मेरी चुदाई पहले के ही तरह शुरू होने के बाद मेरा और शकुंतला का फुद्दियां चोदने का सिलसिला खत्म सा हो गया, मगर पूरी तरह रुका भी नहीं। चार-छह महीने के बाद जब घर पर कोइ नहीं होता था तो मेरे और शकुंतला के बीच फुद्दी से फुद्दी की ये चुदाई हो ही जाती थी।”
“जब प्रीती चार साल की हो गई, और शकुंतला के भी बेटा पैदा हो गया – जुगनू – तब जा कर मेरी और शकुंतला की ये फुद्दी चुदाई बंद हुई।”
ये कह कर भूपिंदर तो चुप हो गयी मगर प्रीती बोली, “वाह मम्मी आप तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली।”
फिर प्रीती ने हंसते हुए भूपिंदर की चूत को छुआ और बोली, “मम्मी अब मझे समझ आया मैं चुदाई की इतनी शौक़ीन कैसे हूं, आखिर बेटी किसकी हूं।” फिर प्रीती ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “क्यों पापा ठीक है ना।”
अब मैं क्या जवाब देता, मगर मेरे दिमाग़ में ये बात आयी अगर शकुंतला ने भूपिंदर का इतना ध्यान रखा है तो हमें भी शकुंतला की कुछ मदद करनी चाहिए।
उस वक़्त ही मेरे दिमाग में आया, कब तक जुगनू ऐसे ही ड्राइवरी करता रहेगा। ये सब बता कर, जिन का अपना गिलास खाली करके भूपिंदर बोली, “अवतार मैं चलती हूं, मैं थक गयी हूं और मुझे नींद भी आ रही है।”
कमाल तो तब हुआ जब भूपिंदर ने प्रीती से पूछ ही लिया, “प्रीती बेटा तुमने नहीं जाना अभी या एक बार और पापा का मोटा लंड लेना है अपनी फुद्दी में – एक और चुदाई करवानी है अपने पापा से?”
प्रीती भी बोली, “पता नहीं मम्मी, लेकिन मैं अभी बैठूंगी, जिन का एक पेग और लूंगी।”
और इतना कह प्रीती ने मेरी तरफ देख कर आंख दबा दी, मतलब मुझे भी बैठने के लिए कह रही थी प्रीती। इतनी बार चुदाई करके मैं थका हुआ तो था लेकिन प्रीती के बात सुन कर मेरे लंड ने एक बार और हरकत कर दी और मेरी आंखों के आगे प्रीती की गुलाबी चूत और नरम, नाजुक चूतड़ और चूतड़ों का हल्का भूरा गुलाबी छेद घूम गया।
भूपिंदर मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखती हुई बोली, “अवतार फिर तो तुमने भी बैठना ही होगा।” और फिर चलते-चलते भूपिंदर बोली, “ये प्रीती तो जवान है अवतार, मगर तुम भी कुछ कम नहीं हो भोसड़ी वाले – पक्के मादरचोद हो तुम। चलो बैठे ही हो तो फिर कल रात का भी बढ़िया सी प्रोग्राम बना लेना – आज जैसा ही।”
भूपिंदर की ये बात सुन कर मैं और प्रीती एक-दूसरे की तरफ देख मुस्कुराये और मैंने सोचा, “वाह री मेरी सरदारनी भूपिंदर – तेरा भी जवाब नहीं।”
फिर हमारी तरफ देखती हुई भूपिंदर बोली, “गुड नाईट अवतार, गुड नाईट स्वीटी।” और भूपिंदर चली गयी।
लाउंज में अब मैं और प्रीती ही रह गए। हम दोनों चुप-चाप अपने-अपने गिलासों में से शराब के घूंट भर रहे थे। अचानक से प्रीति उठी और अपना गाऊन उतार दिया। अब नंगी प्रीटी मेरे सामने बैठी जिन के घूंट भर रही थी। मैं हैरान था कि यार ये क्या हो रहा था?
मैंने प्रीती से पूछा, “प्रीती क्या बात है, गाऊन क्यों उतार दिया? एक बार और लंड लेने का मन है क्या?”
प्रीती बोली, “पापा है तो सही, अगर आप थके हुए नहीं हैं और आपका ये हाथी की सूंड जैसा लंड एक बार और खड़ा हो सकता है तो।”
मैंने प्रीती से कहा, “प्रीती मेरे लंड की बात मत करो, तुम्हारे ये खड़े मम्मे, देख कर और तुम्हारी गुलाबी टाइट फुद्दी के ख्याल भर से ही इसमें दम आ जाता है। तुम्हारी फुद्दी की अंदर जाने के लिए तो ये हमेशा तैयार है।”
प्रीती चुप-चाप मेरी तरफ देखती रही। ये एक तरह से चुदाई की लिए हां ही थी।
मैंने ही कहा, “प्रीती एक एक पेग और लगा लें, अगर चुदाई का प्रोग्राम है तो मजा आ जाएगा चुदाई का।”
प्रीती बस इतना ही बोली बोली, “ठीक है पापा।” इतना बोल कर प्रीती अपनी चूत में उंगली करने लगी।
नंगी प्रीती को देख कर मेरा लंड भी हरकत करने लग ही गया था। गिलास में से हल्के घूंट भरता हुआ मैं बोला, “प्रीती बेटा अब बोलो क्या करना है?”
