मां बेटे की चुदाई एक मनोचिकित्सक की ज़ुबानी 1

माँ की चुदाई

जमाल और नसरीन की चुदाई मस्त चल रही थी। अभी जमाल का दुबाई जाने का प्रोग्राम बन गया। नसरीन इस खबर से परेशान और मायूस हो गयी। जमाल को जाने में बस दो ही हफ्ते बचे थे। जमाल और नसरीन ने फैसला किया कि इन पंद्रह दिनों में वो रोज चुदाई करेंगे। नसरीन का मन चुदाई की फिल्म देखते हुए चुदने का होने लगा। और फिर-

नसरीन की बात जारी थी, “उस दिन दोपहर एक बजे मैं ऊपर चली गयी, और जमाल चुदाई की फिल्म वाली कैसेट ले कर आ गया।”

“उस दिन वो हुआ जो जमाल के साथ पहले नहीं हुआ था। उस फिल्म में लड़का-लड़की की गांड चोदता दिखाया गया था। बिल्कुल वैसे ही जैसा मेरे और बशीर के फिल्म देखते हुए हुआ था।”

“जमाल ने पूछा, “भाभी आज ये करें? बशीर से एक बार गांड चुदवाने के बाद मैंने गांड नहीं चुदवाई थी। मुझे गांड चुदाई का कोइ शौक भी नहीं लगा था। मगर मैं जमाल को ना नहीं कर सकी।”

“मैंने अपनी और बशीर की गांड चुदाई की बात छुपाते हुए जमाल से कहा, ”जमाल मैंने तो कभी गांड चुदवाई नहीं, सुना है गांड चुदवाने में बड़ा दर्द होता है।”

“मगर जमाल तो जैसे उस दिन गांड का टाइट छेद चोदने का मन बनाये हुए था। जमाल ने मेरे मम्मों को दबाते हुए कहा, “कुछ भी दर्द नहीं होगा भाभी, उल्टा मजा ही आएगा। गांड चोदने का भी एक ख़ास तरीका होता है। मैं सायरा की भी गांड अक्सर चोदता हूं I उसे तो अब गांड चुदवाने इतना मजा आने लग गया है कि अगर मैं एक हफ्ता उसकी गांड ना चोदूं तो वो खुद ही गांड चोदने के लिए कह देती है।”

“जमाल अपनी बीवी सायरा की बात कर रहा था।”

“जमाल की बात सुन कर मैंने सोचा अगर जमाल गांड चुदाई में इतना ही माहिर था, और ऐसा कह रहा था, तो फिर तो जरूर गांड चुदवा कर देखना चाहिए।”

“वैसे भी जमाल के जाने के बाद मैं भी अब की चुदी ना जाने कब चुदूंगी। अगर जमाल का इतना मन कर ही रहा है गांड चोदने का, तो आज गांड भी चुदवा ही लेती हूं।”

“मैंने कह दिया, “ठीक है जमाल आ जाओ, चोद लो अपनी भाभी नसरीन की गांड भी। फिर मैंने थोड़ी उदासी सी से कहा वैसे भी जमाल अब की चुदी पता नहीं कब चुदूँगी।”

“जमाल वही बात बोला, भाभी आप अपनी चुदाई का इतना भी मत सोचो। इतना कह कर जमाल उठते हुए बोला, “भाभी मैं दस मिनट में गांड चुदाई वाली क्रीम ले कर आता हूं। तब तक आप इस फिल्म के मजे लो।”

“जमाल क्रीम लेने चला गया और मैं चुदाई वाली फिल्म देखने लगी।”

“मेरी गांड में ये सोचने भर से ही झनझनाहट होने लगी कि आज इसमें भी जमाल का लंड जाएगा। सोच रही थी कैसे चोदेगा जमाल मेरी गांड?कैसा लगेगा जमाल से गांड चुदवा कर? क्या गांड के छेद में वैसा ही दर्द होगा जैसा बशीर से चुदाई के वक़्त हुआ था?

“कुछ ही देर में जमाल क्रीम लेकर आ गया।”

“फिल्म में लड़का-लड़की की गांड चुदाई देखते-देखते मेरी चूत और गांड दोनों चुदाई करवाने के लिए बेचैन हो चुकी थी।”

“जमाल ने आते ही मेरे और अपने कपड़े उतार दिए। जो हालत जमाल के लंड की हुई पड़ी थी, लग रहा था जमाल भी मेरी ही तरह मेरी गांड और चूत चुदाई के लिए बेकरार था। जमाल का लंड एक-दम सख्त हुआ पड़ा था। जमाल ने आते ही मेरी टांगें चौड़ी की और मेरी चूत में अपनी जुबान घुसेड़ दी।”

“जमाल की चूत चुसाई में तो मानो जादू था। उधर मुझे तो चूत चुसाई की आदत ही पड़ गयी थी। जमाल चूत चूस कर और चाट कर हटा तो मैं उठ कर बैठ गयी और जमाल के लंड को देखने लगी। जमाल समझ गया कि मैं क्या करना चाहती थी। जमाल मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया। मैंने जमाल का लंड हाथ में पकड़ा और कर मुंह में लेकर चूसने लगी।”

“जल्दी ही जमाल बोला, बस भाभी अब और नहीं रहा जा रहा। अपने मुलायम चूतड़ इधर करो, लंड डालूं इसमें।”

“मैं बिस्तर पर घुटनों के बल उल्टी होकर लेट गयी और अपने चूतड़ उठा दिए। गांड के अंदर लंड लेने का दूसरी बार का तजुर्बा होने वाला था। सोच रही थी कि कहीं इस बार भी बशीर के गांड चुदाई की तरह ही दर्द ना होने लग जाए।”

“मगर फिर वही ख्याल आया, “अब की चुदी ना जाने कब चुदूंगी। मैंने चूतड़ उठा कर कहा, “आ जाओ जमाल, जाने से पहले कर लो अपनी गांड चुदाई की हसरत भी पूरी।”

“जमाल ने क्रीम के ट्यूब निकाली और ढेर सारी क्रीम मेरी गांड के छेद पर लगा कर अंगूठे से गांड के छेद पर धीरे-धीरे मलने लगा। मुझे तो तो इसमें भी बड़ा मजा आया। फिर धीरे से जमाल ने उंगली पर क्रीम लगाई और उंगली गांड के छेद में डाल दी। जिस तरह जमाल गांड के छेद पर क्रीम लगा रहा था, उससे लग रहा था कि जमाल अक्सर गांड चुदाई करता रहता है।”

“मैंने सोचा अगर गांड के छेद पर जमाल के उंगली लगाने से इतना मजा आया है तो जब जमाल लंड गांड के अंदर डालेगा तो क्या होगा। मैं अभी ये सोच ही रही थी कि जमाल ने दुबारा ढेर सारी क्रीम गांड के छेद पर रखी, और उंगली से गांड के अंदर तक क्रीम लगा दी। मैंने सोचा बशीर ने तो ऐसा नहीं किया था।”

“मेरे मुंह से बस इतना ही निकला, “आआआह… जमाल मजा आ गया फिर डालो गांड में उंगली।”

“उधर नीचे हाथ करके मैंने अपनी चूत का दाना रगड़ना शुरू कर दिया। जमाल ने पांच सात बार मेरी गांड में उंगली डाली। फिर जमाल ने धीरे-धीरे अपने हाथ की दो उंगलियां गांड के छेद में डाल दी, और गांड के अंदर उंगलियों को इधर-उधर घुमाने लगा।”

“जमाल के ऐसा करने से ही मुझे बड़ा मजा सा मिल रहा था। जमाल जो कुछ मेरी गांड के साथ कर रहा था लग रहा था, उससे तो ऐसा लग रहा था जैसे जमाल तो गांड चुदाई का माहिर है। कम से कम मुझे तो जमाल गांड चुदाई में बशीर से ज्यादा तजुर्बेकार लगा।”

“आठ-दस बार दो उंगलियां गांड के छेद में घुमाने के बाद जमाल ने लंड गांड के छेद पर रख कर थोड़ा जोर लगाया, और लंड का आगे का टोपा गांड के अंदर बिठा दिया और इसके बाद जमाल रुक गया।”

“कुछ देर जमाल ऐसे ही खड़ा रहा और मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरता रहा। फिर जमाल ने लंड फिर बाहर निकाला, गांड के छेद पर बाहर और अंदर फिर से क्रीम लगाई, लंड छेद पर रक्खा, और धीरे-धीरे अंदर करते हुए पूरा लंड बिठा दिया।”

“मुझे दर्द तो हुई, मगर मैं दर्द सह गयी। वैसे भी ये दर्द उतनी नहीं थे जितनी बशीर के लंड डालने के वक़्त हुई थी।”

“उधर जमाल मेरी गांड चोदने की तैयारी में था और इधर मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था कि मेरी चूत और गांड अब की चुदी पता नहीं फिर कब चुदेगी – चुदी भी नहीं कब चुदेगी। जमाल के जाने के बाद कौन चूसेगा मेरी चूत। कौन चोदेगा मेरी चूत और गांड। किसका लंड मुंह में लूंगी मैं।”

“मैं अभी इन्हीं ख्यालों में डूबी हुई थी कि जमाल ने मेरी कमर पकड़ी, लंड एक बार पूरा बाहर निकाला और एक झटके के साथ पूरा लंड गांड में बिठा कर चुदाई चालू कर दी।”

“ढेर सारी क्रीम के कारण लंड फिसल कर बाहर निकलता और फिसल कर ही अंदर जाता। दर्द का एहसास खत्म होता जा रहा था, अब तो मजा ही मजा आ रहा था।”

“जमाल ने मेरी कमर पकड़ी हुई थी और हुंह… हुंह… हुंह की आवाजों के साथ गांड के टाइट छेद की चुदाई रगड़ाई कर रहा था।”

“जल्दी ही मुझे मजा आने लगा और चूत पानी छोड़ने लगी। लंड जब गांड के छेद के सिरे को रगड़ता हुआ अंदर जाता तो एक अजीब से मस्ती का एहसास होता था। जमाल के लटकते हुए टट्टे ठप्प ठप्प ठप्प की आवाज के साथ चूत पर टकराते हुए अजीब सा मजा दे रहे थे।”

“जमाल मेरी गांड चोद रहा था मगर मुझे अपनी उंगली चूत में डालने से मजा नहीं आ रहा था। चूत में कुछ मोटा लेने का मन कर रहा था।”

“जमाल का लंड तो मेरी गांड के अंदर था। तभी मुझे उस पेन कवर की याद आयी।”

“मैंने जमाल से कहा, “जमाल वो TV के पास जो पेन का कवर पड़ा है वो पकड़ाना जरा।”

“जमाल समझ गया कि में क्या करने वाली हूं। जमाल ने लंड गांड में से निकला और पेन का कवर मुझे पकड़ा दिया। मैंने नीचे तरफ हाथ कर के पूरा का पूरा पैन का कवर चूत के अंदर कर लिया और उसे आगे-पीछे करने लगी।”

“मगर इस तरह चुदाई में मजा नहीं आ रहा था। मैं कुहनियों के बल उल्टा लेटी हुई थी। एक हाथ से पैन चूत में लेने के कारण एक कुहनी पर बैलेंस नहीं बन पा रहा था और मैं बार-बार जमाल के धक्कों के कारण आगे के तरफ लुढ़क रही थी।”

“जमाल ने लंड गाड़ में से निकाल लिया और बोला, “ऐसे बात नहीं बनेगी भाभी। सायरा को भी गांड चुदाई करवाते हुए ये दिक्क्त आती है। उसका भी एक कुहनी पर बैलेंस नहीं बन पाता।”

मैंने सर मोड़ कर जमाल की तरफ देखा जैसे पूछ रही हूं , “तो क्या करें?”

“जमाल बोला, “भाभी गांड चुदाई का तरीका थोड़ा बदलना पडेगा, मैं बताता हूं।”

“मैं उठ कर बैठ गयी और जमाल की तरफ देखने लगी।”

“जमाल ने वहीं बेड के किनारे पर मुझे सीधा लिया दिया और मेरे चूतड़ों के नीचे दो तकिये रख कर मेरे चूतड़ उठा दिए। मेरी गांड का छेद बिल्कुल जमाल के लंड के सामने आ गया।”

जमाल ने मेरी टांगें उठा कर चौड़ी की और अपना लंड एक ही बार में मेरी गांड में डाल दिया और पैन का कवर मेरे हाथ में देते हुए बोला, “लो भाभी अब डालो जो डालना है अपनी चूत में। अब सब सेट है।”

“मैंने हंसते हुए कहा , “जमाल तुम तो लगता है गांड चुदाई के उस्ताद हो, सायरा की खूब गांड चोदते हो क्या?”

“जमाल भी हंस दिया मगर बोला कुछ नहीं, बस मेरे गांड चुदाई चालू कर दी।”

“मेरे दोनों छेद पूरी तरह भरे हुए थे, और मुझे जन्नत का मजा मिल रहा था। मैंने जमाल से कहा, “जमाल ये तो सच में हे बड़ा मजा आ रहा है। चलो बढ़िया से चुदाई करो, बस अब मत रुकना।”

“ये सुनते ही जमाल ने मेरी कमर फिर से पकड़ी और गांड में जबरदस्त धक्के लगाने लगा।”

“मेरे गांड में जमाल का लंड था और चूत में पैन का कवर।”

“मजे के मारे मेरे मुंह से फिर वही लफ्ज़ और सिसकारियां निकलने लगीं , “आआह… आआह… जमाल दबा कर चोदो मेरी गांड… खोल दो इसको….. आआह – और रगड़ा लगाओ मेरी गांड को… मैं रगड़ रही हूं अपनी चूत को… बड़ा ही मजा आ रहा है जमाल… आआह… और जोर से… आआह… जमाल मेरे राजा… और जोर से चोद… आआआह… अअअअअह… डालो मेरी गांड में अपना पानी… भर दो मेरी गांड आज… कैसे जियूंगी तेरे इस लंड के बिना मेरे राजा… मेरे जमाल।”

“मुझे मजा आने वाला था। किसी भी पल मेरी चूत पानी छोड़ सकती थी।”

“उधर जमाल भी उन्ह उन्ह उन्ह की आवाजों के साथ बोल रहा था, “आअह मेरी भाभी मेरी नसरीन ले ले मेरा मेरा लौड़ा… ये गया तुम्हारी गांड में… आह भाभी मेरी जान… अअअअअह… मजा आ गया… मैं भी कैसे रहूंगा तेरी चूत और गांड चुदाई के बिना… मेरी नसरीन, आआआह तेरी गांड… आअह… नसरीन ले मेरा लंड…. पूरा का पूरा गया तेरी गांड के अंदर… अअअअअह… मेरी रानी… मेरी रानी नसरीन… ले मेरा लौड़ा… ले…‌ ले… नसरीन आअह… नसरीन मेरी नसरीन आज तो तुम्हारे मुंह में निकालना है… आअह… मेरी जान नसरीन ये ले निकल गया मेरे लंड का पानी तेरी गांड में।”

“मेरी और जमाल की इन गांड चूत चुदाई वाली बातों के साथ हम दोनों ही झड़ गए।”

“मैं सोच रही थी जमाल से पहले गांड क्यों नहीं चुदवाई। चूत चुसाई और चुदाई के साथ-साथ जमाल तो गांड चुदाई का भी माहिर था।”

“उसके बाद अगले सात दिन जमाल ने मेरी वो धुआंधार चुदाई की कि मुझे बशीर की चुदाई भी जमाल की इस चुदाई के सामने फीकी लगने लगी। जमाल ने चोद-चोद कर चूत और गांड के दोनों छेद फुला दिए, मगर हमारी चुदाई बंद नहीं हुई।”

“जैसे-जैसे दिन गुजरते जा रहे थे मेरी उदासी यही सोच सोच कर बढ़ती जा रही थी कि कैसे मेरी चूत की प्यास बुझेगी। कौन आएगा मेरी चूत की प्यास बुझाने, कौन डालेगा मेरी गांड की छेद में अपना लंड।”

“लेकिन यहां सिर्फ मैं ही उदास नहीं थी। असलम भी उदास था।”

“मैं तो इस लिए उदास थी कि जमाल के जाने के बाद अब मेरे चुदाई कौन करेगा। मगर असलम की उदासी का कारण मेरी समझ से बाहर था। असलम को तो उल्टा खुश होना चाहिए था कि BA पास करके खुद का चला चलाया काम संभालने वाला था।”

“एक बात और भी मेरे ध्यान में आयी। जब से जमाल ने अपनी दुबई जाने वाली बात बताई थी असलम कुछ ज्यादा ही मेरा ध्यान रख रहा था। बार-बार मुझसे बात करता और पूछता, “अम्मी कोई परेशानी तो नहीं? कुछ चाहिए तो नहीं?”

“मेरे पास असलम की इन बातों का कोई भी जवाब नहीं था।”

“चौदवें दिन मेरी और जमाल की आखरी चुदाई हुई।”

“जमाल पर तो मानो जूनून सवार था। जमाल ने पहले मेरी गांड चोदी, फिर चूत की चुदाई की और आखिर में मुझसे इतना लंड चुसवाया कि ढेर सारा गरम पानी मेरे मुंह में निकल कर मेरा मुंह भर दिया। जमाल मेरे मुंह से लंड निकाल ही नहीं रहा था। मैंने जमाल के लंड से निकला सारा का सारा पानी गटक लिया, और फिर से लंड चूसने लगी।”

“मेरी चुसाई जल्दी ही जमाल का लंड फिर खड़ा हो गया। जमाल ने कहा, “भाभी अब हमारी आख़री चुदाई है, बोलो कहां लेना है लंड, कैसे चुदवानी है?”

“TV पर चुदाई की कैसेट चल रही थी। जो सीन चल रहा था उसमें लड़का नीचे लेटा हुआ था और लड़की ने ऊपर बैठ कर लड़के का पूरा लंड अपनी चूत में ले रखा था और जोर-जोर से ऊपर-नीचे होती हुई चुदाई करवा रही थी।”

“मैंने TV की तरफ इशारा करके कहा, “ऐसे।”

“जमाल नीचे लेट गया और एक पतला तकिया अपने चूतड़ों के नीचे रख के लंड को थोड़ा ऊपर उठा लिया। मैंने अपनी टांगें जमाल के दाएं बाएं की, जमाल के खूंटे की तरह खड़े लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर रक्खा और ऊपर बैठ गयी। लंड पूरा अंदर चला गया। मुझे साफ़ पता चल रहा था कि लंड का अगला सिरा, चूत के अंदर किसी चीज को छू रहा था।”

“फिर मैंने जो चुदाई शुरू की कि पुराने पलंग से भी चूं-चूं की आवाजें आनी शुरू हो गयी। लेकिन ये चूं-चूं की आवाजें मेरी और जमाल की आवाजों में दब कर रह गयी।”

“कुछ देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैं जमाल के लंड से उठ गयी और मैंने जमाल से कहा, “जमाल अब तुम आओ ऊपर और मेरी टांगें अपने कंधों पर रख ऐसी चुदाई करो की सारी जिंदगी याद रहे।”

“अब मैं नीचे लेट गयी और मोटा तकिया अपने चूतड़ों के नीचे रख कर अपनी चूत उठा दी। मेरी चूत चिकनी तो हुई ही पड़ी थी। जमाल ने पहले दिन के चुदाई के तरह मेरी टांगें अपने कंधों पर रखी और आगे की तरफ होने लगा। मेरी चूत खुद-ब-खुद ऊपर उठने लगी।”

“जमाल ने लंड मेरी चिकनी हुई पड़ी चूत पर रखा और एक ही झटके के साथ पूरा लंड अंदर डाल कर बिना देर किये चुदाई चालू कर दी।”

“मैंने नीचे से चूतड़ घुमाने लगी। मेरे मुंह से मजे के सिसकारियां निकल रहीं थीं “आआह… आआह… जमाल दबा कर चोदो मेरी फुद्दी… आआह – और रगड़ा लगाओ मेरी फुद्दी को। बड़ा ही मजा आ रहा है जमाल। आआह… और जोर से… आआह… जमाल मेरे राजा… और जोर से चोद… आआआह… अअअअअह… आअह जमाल… बैठ गया जड़ तक अअअअअह।”

“उधर धक्के लगाते हुए जमाल भी बोलता जा रहा था, “यह ले भाभी… आआआह…  नसरीन तेरी चूत… तेरी फुद्दी… मेरी नसरीन… आअह… नसरीन ले मेरा लंड पूरा का पूरा गया तेरी फुद्दी के अंदर… अअअअअह… मेरी रानी… मेरी रानी नसरीन…‌ ले मेरा लौड़ा… ले… ले… नसरीन आआह।”

नसरीन बता रही थी, “और यही गांड, फुद्दी, चूत, लंड, मेरी राजा, मेरी रानी बोलते-बोलते हम दोनों एक साथ झड़ गए।”

“कुछ देर बाद जब जमाल का लंड ढीला हो गया और जमाल मेरे ऊपर से उतर गया तो मैं उठी और कपड़े पहनने लगी।”

“जमाल लेटे-लेटे बोला, “भाभी थोड़ा और रुक जाओ एक चुदाई और करेंगे। अब पता नहीं मौक़ा मिलेगा या नहीं।”

“जमाल के इतना कहने भर की देर थी, कि मैं फिर से जमाल की बगल में लेट गयी।”

“जमाल ने करवट लेकर अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी, और मैंने जमाल का लंड अपने हाथ में ले लिया, और उसे सहलाने लगी। जल्दी ही जमाल का लंड खड़ा हो गया। मैंने एक बार जमाल की तरफ देखा और पूछा, “अब जमाल?”

“जमाल कुछ नहीं बोला, बस लेटा रहा। लग ही रहा था जैसे मेरी तरह जमाल भी हम दोनों के अलग होने से परेशान था।”

“जब जमाल कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा, तो मैं ही उठी और उल्टी हो कर जमाल के ऊपर लेट कर अपनी चूत खोल दी। मेरी खुली चूत जमाल के मुंह पर थी और मैं जमाल का खड़ा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी।”

“हमारी आख़री चुदाई यही थी। जमाल ने मेरी चूत चूस-चूस कर मुझे मजा दिया, और मैंने जमाल का लंड चूस-चूस कर जमाल को मजा दिया। जमाल के लंड से निकली जमाल के लंड के पानी की एक एक बूंद चाटने के बाद मैं उठी, कपड़े पहने, और बस इतना ही कह पाई, “चलती हूं जमाल।”

“मुझे लग रहा था कि अगर मैं कुछ देर भी और रुकी तो मेरे आंसू निकल जायेंगे।”

“जमाल दुबई जा चुका था। मेरा दूकान पर जाना बहुत कम हो गया था। मैं जब जाती भी थी तो मुझे ऐसा लगता था जैसे उस्मान मुझे घूर रहा था। जैसे कह रहा हो, अरे भाभी हमारे नीचे भी लेट जाओ, हमारा लंड भी ले लो अपनी चूत में, अपनी गांड में जैसे जमाल का लिया था।”

“अब ये मेरा वहम था या हकीकत थी। मगर मुझे जमाल की वो बात अब तक याद थी जब जमाल ने कहा था कि अगर मैंने उस्मान से एक बार चुदाई करवा ली, तो उस्मान सब यारों दोस्तों को चढ़ा देगा मेरी चूत पर।”

“मुझे इस ख्याल से ही डर लगने लगा। मैंने अपने आप से कहा, “नहीं-नहीं, अगर ऐसा हो गया तो असलम का क्या होगा। वो बेचारा तो मर ही जाएगा। लिहाजा मैंने दुकान पर जाना बिल्कुल ही बंद कर दिया।”

“असलम मुझे कुछ मैगजीन और फिल्मों के कैसेट ला देता और मैं उन्हीं में अपना सुकून ढूंढती। मगर चाह कर भी मैं जमाल का ख्याल अपने मन से निकाल नहीं पा रही थी। मेरी भूख कम हो गयी थी। मैं हर वक़्त चुप-चुप रहने लगी थी। असलम से मेरी उदासी छुपी नहीं थी।”

“एक दिन खाना खा कर मैं बिस्तर पर अधलेटी टीवी देख रही थी कि असलम कमरे में आ गया और मेरे पास ही बैठ गया।”

“असलम ने पूछा, “क्या बात है अम्मी, मैंने आपसे पहले भी पूछा था कि आप इतनी उदास क्यों रहती हैं। मगर अपने कुछ बताया ही नहीं। अब तो मैं देख रहा हूं, आपका खाना-पीना भी कुछ ठीक नहीं है। उस दिन मैं आपकी मनपसंद बिरयानी लाया, वो भी आपने ठीक से नहीं खाई।”

“मैं चुप रही। क्या कहती – मेरी चूत में खुजली मची हुई है, मेरी गांड झनझना रही है? मेरी चूत को लंड चाहिए? मेरी गांड लंड मांग रही है? मैं लंड चूसना चाहती हूं? मुझे चुदाई चाहिए?”

“असलम ने नीचे की तरफ देखते हुए कहा, “अम्मी जिस दिन से जमाल गया है, उसी दिन से उदास हैं आप। जमाल चला गया है क्या इस लिए उदास हैं आप?”

“मैं सकपकाई और बोली, “अरे जमाल का मेरी उदासी से क्या लेना देना? उसके जाने से मुझे क्या?”

“असलम ने वैसे नीचे की तरफ देखते हुए बड़ी ही धीमी आवाज में कहा, “अम्मी, जमाल ने मुझे अपने और आपके बारे में सब बताया हुआ है।”

“मैं सकते में आ गयी। मेरी आवाज जैसे मेरे गले में ही फंस गयी। फिर मैंने लगभग फुसफुसाते असलम से पूछा, “क्या? क्या बताया हुआ है असलम क्या कह रहे हो?”

“असलम बोला, “अम्मी पहले तो आप परेशान ना होईये। जमाल अब्बू का बड़ा ही वफादार नौकर था। अगर उसे दुबई ना जाना होता तो वो कभी ये दुकान का काम छोड़ कर ना जाता, हमेशा आपकी खातिर करता।”

असलम खड़ा होते हुए बोला, “अम्मी जमाल मुझे अपनी हर बात बताता था।”

“और इतना बोल कर बिना मेरी तरफ देखे असलम चला गया।”

“मुझे बाकी की रात नींद ही नहीं आयी। मैं तो यही सोच-सोच कर परेशान थी कि आखिर जमाल असलम को क्या श-क्या बता गया होगा? क्या वो चुदाई वाली मैगजीन पढ़ने की बात? चुदाई की फ़िल्में देखने की बात? वो पैन का कवर चूत में लेने की बात? लंड चूत चुसाई या फिर चूत और गांड चुदाई – क्या बताया होगा जमाल ने? यही बातें सोच-सोच कर मेरी तो नींद ही उड़ गयी, और बाकी की रात मैं सो ही नहीं पाई।”

“अगले दिन सुबह मैं असलम से आंखें नहीं मिला पा रही थी। मगर असलम ऐसे पेश आ रहा था जैसे की कुछ हुआ ही ना हो। या फिर असलम ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहा था जैसे कि सब कुछ ठीक ठाक है। उसे मेरे और जमाल की चुदाई के बारे में कुछ नहीं पता।”

“एक तरफ ये परेशानी कि आखिर जमाल ने मेरे और अपने बारे में असलम को क्या क्या बता दिया, दूसरी तरफ ये ख्याल कि अब चूत और गांड में लंड नहीं जाएगा – मेरी चुदाई नहीं होगी।”

“मैं तो यहां तक सोचने लगी कि आखिर बशीर की मौत के बाद मैंने दुकान पर जाना शुरू ही क्यों किया, जमाल से चुदाई ही क्यों करवाई। ना मैं दूकान पर जाती, ना जमाल के साथ मेरी चुदाई होती, और ना ये दिन आता।”

“पर वहीं बात – जो कल गुजर गया, उसे बदला नहीं जा सकता और आने वाले कल को जो होने वाला है वो हमारे काबू में नहीं – जो होना है वो होना ही है।”

“मेरी परेशानी और चुदाई की प्यास मुझे मायूसी – डिप्रेशन की तरफ धकेल रही थी। मेरा कुछ भी करने को मन नहीं करता था। कई बार तो चूत में ऐसी आग लगती कि मन करता जाऊं और जा कर उस्मान से कहूं, “चोद साले भड़वे, चोद मुझे। ला अपने सारे यारों दोस्तों को और रिश्तेदारों को और चढ़ा उनको बारी-बारी मेरे ऊपर मेरी चुदाई करने के लिए। बुझा मेरी चूत की आग, निकाल मेरी चूत का पानी।”

“मैं तो परेशान थी ही, मेरी परेशानी से असलम परेशान हो रहा था – और उसकी ये परेशानी मेरी परेशानी को और बढ़ा रही थी।”

असलम रोज पूछता, “क्या बात है अम्मी, क्यों इतना परेशान हैं आप? कुछ तो बताईये, कुछ चाहिए आपको?”

एक दिन दूकान के लिए निकलते हुए असलम बोला, “अम्मी आपको दुकान से दो चार अच्छी सी मैगजीन और फ़िल्में ला देता हूं, आपका मन बहल जाएगा।”

“उस दिन शाम को असलम आया और खाना खा कर सोने जाने से पहले मुझे एक पैकेट पकड़ा दिया और बोला, “अम्मी इसमें आपके लिए कुछ मैगजीन, दो फिल्मों की कैसेट और कुछ दूसरा सामान है।”

“इससे पहले की मैं कुछ बोलती या पूछती, असलम ने मेरे हाथ में पैकेट पकड़ाया और चला गया। मैंने कमरे में आकर पैकेट खोला। जो मेरे सामने था उसने मेरा दिमाग बिल्कुल सुन्न कर दिया।”

“पैकेट में चुदाई वाली दो मैगजीन थी। दो चुदाई वाली फ़िल्में थी और साथ था वो डेढ़ इंच मोटा और छह इंच लम्बा पैन का कवर था जो मैं जमाल का लंड मिलने से पहले चूत में लया करती थी।”

“अब शक की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं थी कि असलम मेरी और जमाल की चुदाई के बारे मैं सब कुछ जानता था। मैं सोच रही थी अगर असलम ये सब जानता ही था तो फिर असलम ने मुझे रोका क्यों नहीं। क्या जमाल के साथ मेरी चुदाई असलम की रजामंदी से हो रही थी?”

“चुदाई की मैगजीन और कैसेट देख कर मेरी चूत पानी-पानी हुई जा रही थी। मेरा मन कर रहा था जल्दी से कैसेट चालू करूं और पैन का कवर चूत में डाल लूं।”

“मैंने दरवाजा अंदर से कुंडी लगा कर बंद कर दिया – कहीं ऐसा ना हो मेरे फिल्म देखते हुए असलम ही आ जाए। फिल्म चालू कर के मैंने सलवार उतारी और थूक लगा कर पैन का कवर चूत में डाल लिया। बड़े दिनों के बाद चूत में कुछ गया था। पांच ही मिनट में मेरी चूत पानी छोड़ गयी।”

“मैं ढीली हो गयी। पैन का कवर मेरी चूत में ही था उधर टीवी पर फिल्म चल ही रही थी। मेरी चूत फिर तैयार होने लगी।”

“कुछ देर रुक कर मैंने फिर पैन के कवर को चूत में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। इस बार दस मिनट ये सब हुआ और चूत पानी छोड़ गयी।”

“अगले दिन सुबह असलम कुछ खुश-खुश सा लगा, जैसे उसके भी मन से कोइ बोझ उतर गया हो। मेरी अपनी भी यही हालत थी। मुझे असलम से नजरें मिलाने में शर्म तो आ रही थी। मगर थोड़ा बोझ मेरे मन से भी उतर गया था।”

“नाश्ता करके जाते हुए असलम बोला, “अम्मी अगर मैगजीन और फिल्म देख ली हों तो दे दो, आज दूसरी ले आऊंगा। मैं एक कैसेट ले आयी और असलम को पकड़ा दी।”

“असलम बोला, “दूसरी फिल्म नहीं देखी अम्मी? और वो मैगजीन?”

“मैंने खाली ना में सर हिला दिया, बोली कुछ नहीं, मेरी आवाज ही नहीं निकल रही थी।”

“असलम ने कैसेट पकड़ी और साथ ही मेरा हाथ भी पकड़ लिया और बोला, “अम्मी, जमाल बहुत याद आता है?”

“मैंने बिना नजर उठाये ही हां में सर हिला दिया।”

“जिस तरह से असलम मैगजीन, कैसे और पैन का कवर लाया था, इसमें कोइ शक ही नहीं था कि असलम मेरी और जमाल की चुदाई के बारे में सब कुछ जानता था। शाम हुई और असलम आ गया साथ ही एक फिल्म की कैसेट भी लाया था। कैसेट देते हुए बोला, “अम्मी बिल्कुल नई है बिल्कुल अलग तरह की।”

“कैसेट देते हुए असलम ने मेरे हाथ को पकड़ लिया। ऐसे तो असलम मेरा बेटा था हाथ पकड़ना कोइ बड़ी और नई बात नहीं थी, मगर ना जाने उस वक़्त मेरे मन में ये बात क्यों आई कि असलम ने कैसेट, वो भी चुदाई की कैसेट देते हुए मेरा हाथ क्यों पकड़ा? क्या असलम के दिमाग में कुछ चल रहा था?”

“खैर, रात हुई। खाना खा कर असलम जल्दी सोने चला गया। मैं भी कमरे में आ गयी।”

“कैसेट लगा कर दरवाजा अंदर से कुंडी बंद करने ही वाली थी कि मेरे मन में ख्याल सा आया। असलम मुझे इस तरह की चुदाई वाली मैगजीन और कैसेट ला कर दे रहा है। पेन का वो वाला कवर भी असलम ने ला कर दे दिया जिसे मैं चूत में लेती थी। इन सब का क्या मतलब है?”

“और अगर असलम मेरी और जमाल की चुदाई के बारे में जानता है तो क्या वो भी मेरे साथ कोइ अलग रिश्ता बनाना चाहता है? चुदाई का रिश्ता?”

“मन में ये ख्याल आते ही चूत में झनझनाहट सी हुई और मैंने दरवाजा बंद तो कर दिया, मगर कुंडी नहीं लगाई। मैंने असलम की लाई हुई नयी वाली कैसेट चालू कर दी और बिस्तर पर लेट गयी।”

“फिल्म में ग्रुप में चुदाई दिखाई गयी थी। बहुत सारे लड़के और लडकियां थे। अदला-बदली करके लड़के-लड़कियों को चोद रहे थे। एक सीन में लड़की झुकी हुई खड़ी थी। एक लड़का खड़ा हो कर पीछे से लड़की को चोद रहा था और दूसरे लड़के ने झुकी हुई लड़की के मुंह में लंड डाला हुआ था। दो लड़किया उन दोनों लड़कों की गांड चूस रही थी, और साथ अपनी चूचियां मसल रही थीं।”

“वैसे तो तकरीबन सभी चुदाई की फिल्में एक सी ही होती हैं, मगर फिर भी ग्रुप सेक्स की ये फिल्म थोड़ी सी अलग थी। फिल्म देखते-देखते मेरी चूत गरम हो गयी। मैंने सलवार का नाड़ा खोल कर सलवार थोड़ी नीचे की और पैन के कवर पर थूक लगा कर उसे चूत में डाल लिया।”

“मैं लेटी हुई फिल्म देख रही थी और साथ ही कवर को चूत में धीरे-धीरे आगे-पीछे कर रही थी। मेरा पूरा ध्यान टीवी की तरफ थी। मुझे पता ही नहीं चला कब असलम आ कर बेड के पास खड़ा हो गया। मैं फिल्म देखने और पैन के कवर को चूत में अंदर-बाहर करने में ही मस्त थी।”

“कवर चूत में आगे-पीछे करते हुए मुझे लगा बेड के पास कोइ खड़ा है। मैं सर घुमा कर देखा, असलम खड़ा था। मैं हैरान और परेशान हो गयी। मेरा दिमाग सुन्न हो गया, मेरे मुंह से आवाज नहीं निकली। असलम और यहां?”

“तो मेरा अंदाजा सही ही था। असलम ये सब – मैगजीन, कैसेट, पेन का कवर मुझे ला कर दे रहा, जरूर असलम के दिमाग में कुछ कुछ चल रहा था।”

“असलम को उस वक़्त वहां देख कर मेरी तो बोलती बंद थी, असलम भी कुछ नहीं बोल रहा था।”

“मेरी हैरानी खत्म ही नहीं हो रही थी। असलम क्या सोच कर इस वक़्त कमरे में आया है? क्या असलम को पता था कि मैं चुदाई वाली कैसेट चालू करके पेन का ढक्कन अपनी चूत में डाला हुआ होगा?”

“जमाल भी तो ऐसे ही आया था जब मैंने कवर चूत में डाला हुआ था। तभी जमाल ने मेरी चूत चूसी थी और टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख कर पहली बार मुझे चोदा था।”

“मैं सोच रही थी क्या असलम भी जमाल की तरह ही कुछ करेगा? मेरी चूत चूसेगा, मेरी टांगें अपने कंधों पर रखेगा और मेरी चूत उठा कर अपना लंड मेरी चूत में डालेगा और जमाल की तरह मुझे चोदेगा?”

“मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। असलम ऐसे ही गुमसुम सा खड़ा मेरी चूत को घूरता जा रहा था। क्या असलम पहली बार किसी औरत की चूत देख रहा था?”

“असलम को इस तरह एक टक मेरी चूत की तरफ देखते हुए मैं परेशान हो गयी। परेशानी में मैंने असलम को पूछा ,”असलम तुम यहां क्या कर रहे हो और ऐसे गुम-सुम से क्यों खड़े हो?”

“असलम कुछ बोल ही नहीं रहा था, बस मेरी चूत की तरफ देखता जा रहा था जिसमें अभी भी पेन का कवर डला हुआ था।”

“मैं शर्म के मारे मरी जा रही थी। पेन का कवर अंदर तक मेरी चूत में था, टीवी पर चुदाई की फिल्म चल रही थी, और मेरा अपना बेटा मेरे पास खड़ा था और एक टक मेरी चूत को देखता जा रहा था।”

“मैंने फिर आवाज दी, “असलम …..असलम।”

“मगर असलम था कि ना हिल-डुल रहा था, ना कुछ बोल रहा था बस मेरी चूत को घूरता जा रहा था।”

“असलम को इस तरह चुप-चाप खड़े देख कर मुझे घबराहट होने लग गयी। मैंने असलम का हाथ पकड़ा और फिर दबी आवाज में पूछा, “असलम बेटा क्या हुआ, तुम ठीक तो हो?”

“असलम बोला कुछ नहीं और चुप-चाप बेड पर मेरी टांगों के पास बैठ गया। पैन का कवर तो मेरी चूत में ही था, असलम ने पेन का कवर पकड़ा और उसे मेरी चूत में आगे-पीछे करने लगा।”

“चूत तो मेरी पहले से ही गरम ही थी, और मजा मुझे आने वाला ही था। मैंने अपना हाथ असलम के हाथ पर रखा, मगर मैंने असलम को पेन का कवर चूत में आगे-पीछे करने से नहीं रोका।”

“मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगी… आह… असलम… आआह… नहीं असलम… ये क्या कर रहे हो असलम… बस करो… आआह।”

“मेरा हाथ असलम के हाथ पर था मगर ना मैंने पेन का कवर चूत से बाहर निकाला, ना असलम को कवर को चूत में अंदर-बाहर करने से रोका।”

“असलम एक हाथ से पैन का कवर मेरी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था और दूसरे हाथ से असलम ने अपना लंड पकड़ा हुआ था। छोटे रोशनी के बल्ब और टीवी की मंद रोशनी में असलम के पायजामे का उभार साफ दिखाई दे रहा था।”

“असलम का लंड खड़ा हो रहा था।”

“असलम ने एक हाथ से अपना खड़ा होता लंड जोर से हिलाया और बोला, “आअह… अम्मी ये क्या हो रहा है?”

“अचानक से असलम ने कवर मेरी चूत से बाहर निकला और मेरे ऊपर लेट गया और धक्के लगाने लगा।”

“असलम ने ना तो पायजामा उतारा हुआ था, ना असलम का लंड मेरी चूत में गया हुआ था। असलम का खड़ा लंड पायजामे के अंदर ही था।”

“असलम ने मुझे बाहों में ले लिया और ऊपर से ही मेरी चूत पर धक्के लगाने लगा। धक्के लगाते-लगाते असलम सिसकारियां ले रहा था जैसे उसे चुदाई का मजा आ रहा था। “आआआह… अम्मी… आअह… अम्मी… आआह… अम्मी… मेरी अम्मी…

“मैं नीचे लेटी हैरान से हो रही थी कि ये असलम क्या कर रहा था?”

जमाल के दुबई जाने के बाद असलम एक दिन अपनी अम्मी नसरीन के लिए दुकान से चुदाई के कैसेट और पेन का कवर ले आया जो नसरीन अपनी चूत में डाला करती थी। उस रात नसरीन फिल्म देखते हुए कवर अपनी चूत में आगे-पीछे कर रही थी कि असलम वहां आ गया।

असलम ना कुछ बोल रहा था ना कुछ कर रहा था, बस खड़ा नसरीन की चूत की तरफ एक टक देखता जा रहा था। तभी अचानक असलम खड़े लंड के साथ बिना पायजामा उतरे ही अपनी अम्मी के ऊपर लेट गया, और चुदाई की तरह धक्के लगाने लगा।

नसरीन अपनी बात रिकार्ड करवा रही थी, “असलम पायजामे के ऊपर से ही खड़े लंड से मेरी चूत पर धक्के लगाता जा रहा था, जैसे मेरी चुदाई कर रहा हो। मुझे साफ़ महसूस हो रहा था कि असलम का लंड खड़ा था और सख्त भी हुआ पड़ा था।”

“एक पल के लिए मुझे ख्याल सा आया कि अगर असलम मेरे ऊपर लेट कर मेरी चूत पर चुदाई जैसे धक्के लगा सकता है तो असलम को लंड चूत में डालने कौन सी बात रोक रही थी।”

“तभी असलम के धक्कों की रफ्तार बढ़ गयी – साथ ही सिसकारियां भी बढ़ गयी, आआआह अम्मी आअह अम्मी ये क्या हो रहा है अम्मी।”

“असलम ने कस कर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। जोर-जोर से धक्के लगाते हुए असलम के मुंह से घर्र घर्र हुंह हुंह आआह आअह की आवाजें निकल रही थी।”

“तभी असलम ने एक जोर की “आआह अम्मी ये तो निकल गया” सिसकारी ली और ढीला हो कर मेरे ऊपर ही लेट गया।”

“असलम का लंड बैठने लगा। क्या असलम को मजा आ गया था? क्या असलम का लंड पायजामे में ही पानी छोड़ गया था?”

“हां यही हुआ था, असलम का मजा पायजामे में ही निकल गया था।”

“कई तरह के सवाल मेरे ज़हन में घूम रहे थे।”

“असलम की नीचे लेटी हुई मैं सोच रही थी, क्या असलम ने अब तक किसी लड़की की चूत नहीं देखी थी? क्या असलम ने अब तक किसी लड़की की चुदाई नहीं की थी। अक्सर पहली बार चूत देखने और पहली बार चुदाई में ही ऐसा होता है जब लड़कों को अपने मन और लंड पर काबू नहीं रहता।”

“अगर असलम ने मेरे ऊपर लेट कर मेरी चूत पर लंड के धक्के ही लगाने थे तो लंड मेरी चूत में डाल कर पूरी तरह मुझे चोद भी तो सकता था। तो फिर असलम ने ऐसा क्यों नहीं किया? क्या असलम अपने पर काबू नहीं रख पाया और ऐसे ही मेरे ऊपर लेट कर अपने लंड का पानी छुड़ा लिया, या फिर असलम अपनी अम्मी की चूत में लंड डालना नहीं चाहता था?”

“मैंने असलम से कान में पूछा, “क्या हुआ असलम?”

“असलम ने बस इतना ही कहा, “सॉरी अम्मी।” और वो मेरे ऊपर से लुढ़क कर मेरे पास ही लेट गया।”

“मुझे लगा, कि मुझे ही असलम को कुछ दिलासा देना होगा, कुछ कुरेदना होगा कि उसने आखिर ऐसा क्यों किया।”

“मैंने असलम के ढीले लंड पर हाथ रखते हुए कहा, “कोई बात नहीं असलम, ऐसा हो जाता है।”

“पायजामे के ऊपर मुझे मेरे हाथ पर कुछ गर्म गीला-गीला चिपचिपा सा महसूस हुआ।”

“असलम के लंड से निकला पानी था।”

“मैं उठ कर तौलिया लाई और असलम के पायजामे का नाड़ा खोल कर पायजामा थोड़ा नीचे किया और बोली, “कोइ बात नहीं असलम बेटा, मैं साफ़ कर देती हूं।”

“असलम कुछ नहीं बोला, बस ऐसे ही लेटा रहा। असलम के लंड का ढेर सारा पानी लंड के ऊपर और आस-पास फैला हुआ था। मैंने सारा सफ़ेद-सफ़ेद चिकना पानी तौलिये से पोंछ कर साफ कर दिया।”

“लंड और आस-पास साफ़ करते हुए मेरा हाथ लगने से असलम का लंड खड़ा और सख्त होने लग गया। मेरी तो अपनी चूत लंड के लिए तरस रही थी। मुझे जाने क्या हुआ कि मैंने असलम का लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।”

“असलम वैसे ही लेटा रहा। असलम के लंड के आस-पास छोटे-छोटे रोंएदार घुंघराली झांटे उगने लगी थी। मैंने उन झांटो पर भी जुबान फेरी और मेरी चूत फुर्रर से पानी छोड़ गयी। मुझसे नहीं रहा जा रहा था। कुछ ही मिनटों में असलम का लंड पूरा खड़ा हो गया।”

“कमरे की हल्की रौशनी असलम के लंड पर पड़ रही थी। मैंने असलम का खड़ा लंड देखा तो मैं हैरान रह गयी।”

“नए-नए जवान हुए असलम का खड़ा लंड मेरी कलाई जितना मोटा और लम्बाई में आधे हाथ की लम्बाई से कम क्या होगा। असलम का इतना बड़ा लंड देख कर मैं हैरान हो गयी। मैंने चुदाई की फिल्मों में ही इतने बड़े लंड देखे थे। असलम का लंड तो वैसा वाला बड़ा था – बशीर और जमाल दोनों के लंडों से मोटा और लम्बा।”

“ऐसा लंड देख कर मेरी चूत में एक झनझनाहट सी हुई और मेरी चूत फुर्र से पानी छोड़ गयी। मैं सोचने लगी, ये लंड? क्या कुछ ऐसा हो सकता है कि इतना मोटा लंड असलम आज मेरी चूत में डाल कर मुझे चोद दे?”

“मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने असलम के लंड को हाथ से दबाते हुए धीमी आवाज में असलम से कहा, “असलम मेरी चूत में डालोगे इसे? चोदोगे आज अपनी अम्मी को?

“असलम कुछ नहीं बोला, बस ऐसे ही लेटा रहा।”

“मैंने धीमी आवाज में असलम से फिर पूछा, “असलम अंदर डालोगे इसे? चोदोगे आज अपनी अम्मी को?”

“असलम ने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने धीरे से दुबारा असलम के कान में कहा, “असलम, लंड अंदर डालोगे मेरी चूत में? चोदोगे आज मुझे? जैसे तेरे अब्बू चोदते थे, जैसे जमाल चोदता था?”

“साथ ही मैं असलम के लंड को हल्के-हल्के दबाते ही जा रही थी। मैंने कह ही दिया, “असलम, बड़ा मन कर रहा है लंड चूत में लेने का।”

“मेरे ऐसा बोलने पर असलम ने करवट ली और “अम्मी” बोलते हुए अपनी उंगली मेरी चूत की दरार में डाल कर ऊपर-नीचे करने लगा। मेरी चूत चिकनी हुई पड़ी थी।”

“कुछ देर चूत में ऐसे ही उंगली करने के बाद असलम उठा और मेरी चूत की फांके फैला कर जुबान से मेरी चूत का दाना चूसने लगा। बीच-बीच में असलम मेरी चूत जुबान से चाट भी लेता था।”

“बड़े अरसे बाद चूत के चुसाई हुई थी, बड़ा मजा आ रहा था। चूत की बुरी हालत थी। लंड लेने के चक्कर में मेरे चूतड़ हिलने लगे।”

“मैंने असलम के सर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बस असलम बेटा, अब डाल दे अंदर। अब और नहीं रहा जा रहा।”

“असलम ने जैसे ही चूत के ऊपर से मुंह हटाया मैंने पास पड़ा तकिया उठा कर अपने चूतड़ों के नीचे रख दिया, और टांगें हवा में उठा कर चौड़ी कर दी।”

“असलम फिर से मेरी चूत को वैसे ही देखने लगा, जैसे पास खड़ा पहले देख रहा था।”

“कुछ देर ऐसे ही चूत को देखते हुए असलम उठा, मेरी टांगें थोड़ी और चौड़ी की, और लंड मेरी चूत में ऊपर-नीचे करने लगा। असलम को चूत का छेद ढूंढने में दिक्कत आती लग रही थी।”

“मैं समझ गयी कि पक्का ही असलम ने अब तक किसी लड़की की चूत नहीं चोदी थी।”

“मैंने नीचे हाथ करके असलम का लंड पकड़ा और चूत के छेद पर रख दिया। जैसे ही मैंने असलम का लंड छोड़ा, असलम ने एक जोर का धक्का लगाया और एक ही बार में फचाक से लंड पूरा चूत के अंदर बिठा दिया।”

“मेरी चूत तो पहले ही पानी छोड़ चुकी थी। चिकनी हुई चूत में असलम का मोटा लंड चूत कि साइडों को रगड़ता हुआ फिसल कर अंदर चला गया।”

“मेरे मुंह से बस यही निकला, “आआह असलम।” ये कहते हुए मैंने नीचे से असलम को अपनी टांगों में जकड़ लिया।”

“असलम ने भी अपनी बाहें पीछे करके मुझे अपने सीने के साथ चिपका लिया। असलम का मुंह बिल्कुल मेरे कान के पास था। असलम मेरे कान में धीरे से बोला, “अम्मी ये चूत के पानी का स्वाद तो बड़ा मस्त, मजेदार होता है।”

“असलम की बात सुन कर मेरे हंसी छूटने को हो गयी। यकीनन असलम की आज पहली चुदाई हो रही थी। पहली चुदाई, वो भी अपने अम्मी के साथ।”

“असलम के मोटे लंड से मुझे अपनी चूत भरी-भरी सी महसूस हो रही थी। मैं चाह रही थे कि असलम अब लंड के धक्के लगाए, चोदे मुझे। मैंने चूतड़ घुमाने शुरू कर दिए।”

“मेरे चूतड़ घुमाने से असलम का लंड थोड़ा-थोड़ा मेरी चूत के अंदर-बाहर होने लगा। असलम को भी इससे मजा आने लगा होगा। असलम ने मुझे कस कर पकड़ लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।”

“पांच मिनट के धक्कों के बाद असलम के धक्कों कि रफ्तार बढ़ गयी। धक्के लगाते लगाते असलम बोल रहा था, “ये लो अम्मी लो ये लो।”

“बीस साल का असलम बड़ी ज़बरदस्त चुदाई कर रहा था। ऐसी चुदाई तो मेरी बशीर ने की थी शादी के बाद पहली रात को, सुहागरात को, जब बशीर ने मेरी चूत सील तोड़ी थी। बिस्तर की चादर खून से भर गयी थी।”

“असलम के नए-नए जवान लंड में बड़ा दम था। एक तो लम्बा और मोटा लंड, दूसरा पता नहीं असलम ने अब तक चूत चोदी भी थी या नहीं, या अपनी अम्मी की चूत की चुदाई ही उसकी पहली चुदाई थी। चूत की खुशबू ने असलम का लंड बिल्कुल बांस की तरह सख्त कर दिया था।”

“खैर असलम ने बीस मिनट तक चोदा मुझे और दो बार मेरा पानी छुड़ा कर खुद भी झड़ गया।”

“मैं तो बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारियां रोके हुई थी, मगर चुदाई के मजे से असलम कुछ-कुछ बोले रहा था, “आआह अम्मी आआह मेरी अम्मी कितना अच्छा लग रहा है मेरी अम्मी, आअह अम्मी लेलो मेरा, गया अंदर अअअअअह अम्मी, ये लो मेरा आअह, लेले अम्मी आआह आआह आआह अअअअअह।”

“असलम की सिसकारियों में बस एक लंड चूत बोलने की ही कमी थी, बाकी सब हो रहा था। मैं अपने बेटे असलम से चुदाई करवाते हुए चुप ही थी।”

“असलम झड़ गया। असलम के लंड का पानी निकल गया मगर असलम के जवान लंड के सख्ती तो लंड का पानी निकलने के बाद भी बनी रही। पानी भी असलम के लंड से इतना निकला था कि मेरी चूत गरम गरम पानी से भर गयी लग रही थी। ऐसा लग रहा था असलम के लंड में से तो आधा कप गरम सफ़ेद लेस वाला पानी निकला ही होगा।”

“कुछ देर तो असलम ऐसे ही लेटा रहा, फिर असलम उठा और बिना कुछ बोले चला गया।”

“असलम के साथ पहली चुदाई के बाद से हम मां बेटे के बीच एक नया रिश्ता बन गया। मर्द और औरत का रिश्ता। एक ऐसी चुदाई का रिश्ता जिसे कोइ नाम नहीं दिया जा सकता।”

“अगले दिन सुबह जब मैं उठी तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। असलम की चुदाई ने मेरी चूत की तसल्ली कर दी थी, और दिमाग हल्का कर दिया था। अब कम से कम ये चिंता नहीं थी कि चूत अब लंड के लिए नहीं तरसेगी।”

“चूत चुदाई की फ़िक्र तो खत्म हो चुकी थी, लेकिन अब मेरी मुश्किल ये थी कि मैं असलम के सामने कैसे जाऊं तो कैसे जाऊं, उससे नज़रें कैसे मिलाऊं। असलम रात की चुदाई के बारे में क्या सोच रहा होगा – वो कैसे पेश आएगा। कहीं अम्मी से चुदाई करने का अफ़सोस तो नहीं हो रहा होगा असलम को?”

“मेरी ये मुश्किल असलम ने ही दूर कर दी। मैं नहा कर कमरे से बाहर निकली तो असलम से सामना हुआ। असलम बिल्कुल नार्मल था जैसे कुछ हुआ ही ना हो। असलम ने बस इतना ही पूछा, “अम्मी कैसी हैं आप।”

“तैयार हो कर नाश्ता करके जब असलम जाने लगा तो बोला, “अम्मी वो मैगजीन और कैसेट अगर देख ली हैं तो ला दीजिये, आज दूसरी लेता आऊंगा।”

“मतलब असलम को अब मेरे साथ हुई चुदाई का कोइ अफ़सोस नहीं था और दूसरी कैसेट लाने के लिए कहने का ये मतलब भी था आगे भी चुदाई करने से कोइ परहेज नहीं होने वाला था।”

“अगर मां बेटे की चुदाई गलत थी तो भी कम से कम ये एक अच्छी बात थी कि किसी को कोइ पछतावा नहीं था, वरना अगर ऐसे रिश्ते में चुदाई के बाद पछतावा होने लगे तो इसका अंत खतरनाक भी हो सकता है।”

“मैंने दोनों मैगजीन और कैसेट असलम को दे दिए। असलम चला गया और मैं लेट कर रात को हुई मस्त चुदाई के बारे में सोचने लगी।”

“मैं समझ गयी कि जमाल के जाने के बाद अब मुझे लंड की कमी नहीं रहने वाली। मेरी चुदाई पहले ही की तरह फिर से शुरू होने वाली है।”

“वक़्त और हालात बड़ी ही अजीब सी करवट ले चुके थे।”

“शाम हुई और असलम आ गया। मेरे हाथ में पैकेट दे कर बोला “लीजिये अम्मी।” असलम बिल्कुल ही नार्मल था I

“खाना खा कर हम अपने अपने कमरे में चले गए। दरवाजा बंद करके मैं बिस्तर पर लेट गयी। कुंडी मैंने लगाई नहीं थी।”

“जब एक बार चूत में अपने बेटे असलम का लंड ले कर चुदाई करवा ही ली तो दरवाजे की कुंडी क्या और सलवार का नाड़ा क्या। जब एक बार खुल ही गए तो अब क्या बंद करने। मैंने दरवाजे की कुंड और सलवार का नाड़ा खुले ही छोड़ दिए। बस अब तो यही सोच रही थी असलम खुले दरवाजे से अंदर आये और खुली सलवार उतर कर चुदाई कर दे।”

“बस यही चल रहा था दिमाग में, क्या आज फिर आएगा असलम चुदाई करने?”

“मेरी आंखों के सामने असलम आ मोटा लंड घूम रहा था। सोचते-सोचते मेरी चूत हल्की-हल्की गीली होने लगी थी।”

“आधा घंटा ऐसे ही सोचते-सोचते निकल गया। मैं चूत में पैन का कवर डालने ही वाली थी कि असलम आ गया।”

“आते ही असलम बोला, “अम्मी क्या हुआ वो पिक्चर नहीं लगाई?”

“और असलम मुड़ा और वो चुदाई वाली फिल्म लगा कर लाइट बंद की और मेरी बगल में ही लेट गया।”

“थोड़ी सी फिल्म ही चली होगी कि असलम के पायजामे में उभार आ गया। असलम का लंड खड़ा हो गया था। मैंने अपना हाथ पायजामे के ऊपर से असलम के लंड पर रख दिया।”

“जैसे ही मैंने अपना हाथ पायजामे के ऊपर रखा, असलम ने पायजामे का नाड़ा खोला और लंड निकाल लिया। बिल्कुल सीधा खड़ा लंड। असलम ने मेरा हाथ पकड़ा और फिर से अपने लंड पर रख दिया। मोटा गरम फनफनाता हुआ लंड।”

“अचानक मुझे ना जाने क्या हुआ, मैं उठी और असलम का लंड मुंह में ले कर चूसने लगी। कुछ ही देर में असलम आआआह अम्मी आआह अम्मी आआह की सिसकारियां लेने लगा और कमर हिलाने लगा। मुझे लगा कहीं असलम लंड का पानी मेरे मुंह में ही ना निकाल दे।”

“मैं जैसे ही लंड मुंह से निकलने लगी कि असलम ने मेरा सर लंड के ऊपर दबा दिया और इतना ही कहा, “नहीं अम्मी, अभी नहीं।”

मैंने भी सोचा, “चलो आज ऐसे ही सही। वैसे भी मुंह में लंड का पानी निकालना मेरे लिए ये कोइ पहली बार तो हो नहीं रहा था।”

“मैंने असलम का लंड कुछ ही देर और चूसा होगा कि असलम ने जोरदार सिसकारी ली, “अम्मी आआह अम्मी, अम्मी अअअअअह” और असलम ने मेरा सर कस कर पकड़ लिया और मेरा मुंह असलम के लंड से फर्र फर्र करते हुए निकलते लेसदार गर्म पानी से भर गया।”

“असलम का लंड पानी भी बहुत छोड़ता था।”

“असलम ढीला हो कर लेट गया। कुछ ही देर में जैसे ही मैंने लंड मुंह से निकाला, लंड के साथ ही ढेर सारा पानी मुंह से निकला और असलम के लंड के आस-पास फ़ैल गया। मैंने लंड और लंड के आस-पास चाट-चाट कर सारा पानी साफ़ कर दिया और असलम के पास ही लेट गयी।”

“कुछ देर में असलम उठा और “सॉरी अम्मी” बोल कर पायजामा उठा कर चला गया।”

” उधर टीवी पर चुदाई की फिल्म चल रही थी, और मेरी चूत चुदाई के लिए गरम हुई पड़ी थी। मुझे चुदाई चाहिए थी और असलम बिना मुझे चोदे चला गया था।

“कुछ देर तो मैं ऐसे ही चूत में उंगली करती लेटी रही और सोचती रही कि असलम आएगा और मेरे चूत को ठंडी करेगा। जब कुछ देर असलम नहीं आया तो मैंने पैन का कवर ही चूत में लेने की सोची।”

“मैंने यही सोचा कि असलम की पहली लंड चुसाई हुई होगी जो इतनी जल्दी झड़ गया, वरना कल रात हुई चुदाई में तो मेरा दो बार पानी छुड़ाने के बाद झड़ा था।”

“फिर मैंने यही सोचा कि एक दो बार लंड और चूसूंगी तो चुसाई की आदत पड़ जाएगी। फिर इतनी जल्दी नहीं झड़ेगा। मैंने सलवार उतार दी और पैन का कवर ले कर चूत में डालने ही वाली थी कि असलम आ गया। बिल्कुल नंगा, खड़े लंड के साथ।”

“असलम बोला कुछ नहीं, बस मेरी कमीज उतारी – सलवार तो उतारी ही पड़ी थी। असलम ने मेरी टांगें खोली और लंड चूत में डालने ही वाला था कि मैंने कहा, “रुको असलम।”

“असलम रुक गया और हैरानी से मेरी और देख कर बोला, “क्या हुआ अम्मी, सब ठीक तो है?”

नसरीन की लंड चुसाई से असलम के लंड का पानी नसरीन के मुंह में ही निकल गया। दुबारा जब असलम नंगा वापस और अपनी अम्मी नसरीन की चूत चोदने ही वाला था कि नसरीन ने उस रोक दिया। हैरान असलम ने नसरीन से पूछा, “क्या हुआ अम्मी, सब ठीक तो है?”

नसरीन बता रही थी, “मैंने कहा, “सब ठीक है असलम। मैं तो बस ये कहने वाली थी आज क्या बात है, आज चूत के पानी का स्वाद नहीं लेना? ये कहते हुए मैं हल्का सा हंस भी दी और बोली, “जरा चूत चूसो, बड़ा मजा आता है चुसवाने में।”

“असलम ने कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुराया और कहा, “अम्मी आपकी चूसने में तो मुझे भी बड़ा मजा आया था?”

“असलम अभी चूत वगैरह बोलने में शर्मा रहा था।”

“दस मिनट असलम ने मेरी चूत चूसी, और मेरी तसल्ली कर दी।”

“असलम की चुसाई मेरी चूत पानी-पानी हो चुकी थी, इसे अब असलम का मोटा लंड चाहिए था।”

“मैंने कहा, “बस असलम, अब अंदर डाल कर बाकी का काम कर, मजा दे मुझे।”

“असलम उठा , मेरी टांगें चौड़ी करके लंड मेरी चूत पर ऊपर-नीचे कर रहा था और साथ ही बोलता भी जा रहा था, “अम्मी इसका पानी तो बड़ी ही अजीब सी मस्त करने वाली खुशबू वाला होता है। सीधा लंड पर असर पड़ता है। इसकी खुशबू ने ये देखिये मेरे इसका का क्या हाल बना दिया है, एक दम बेसब्र है अंदर जाने के लिए।”

“असलम कुछ रुका और बोला, “अम्मी एक बात बताओ, क्या सभी की ये ऐसा ही पानी छोड़ती है, मस्त करने वाली खुशबू वाला?”

“मैंने कहा, “असलम क्या ‘इसका,उसका, ये’ लगा रखा है। सीधा बोल ना चूत का पानी।”

“असलम के जवाब का इंतजार किये बिना फिर मैंने ही असलम से कहा, “हां असलम सभी लड़कियों औरतों की चूत ऐसा ही पानी छोड़ती हैं। ये कुदरती है। हल्का सा नमकीन, हल्की सी मस्त करने वाली खुशबू वाला। तभी तो मर्द चुदाई से पहले चूत जरूर चूसते हैं।”

“असलम ये सुन कर मुस्कुराया, थोड़ा खुला और बोला, “अम्मी एक बात बताईये, जमाल भी आपकी चूसता था?”

मैंने कहा, “असलम जमाल ही नहीं तेरे अब्बू भी खूब चूसते थे। सारे मर्द ही चूसते हैं। असल में चूत के पानी का हल्का नमकीन स्वाद और खुशबू उनके लंड को सख्त कर देती है। तू भी तो अभी यहीं कह रहा था कि मेरी चूत की खुशबू ने तेरे लंड को एक-दम तैयार कर दिया है।”

“असलम सुन रहा था और मैं ज्ञान बांट रही थी, “लड़कियां और औरतें ही क्यों असलम, जानवरों में भी तो यही होता है। तूने देखा नहीं सांड, घोड़े, कुत्ते, सब चुदाई के लिए चढ़ने से पहले गाये, घोड़ी, कुतिया की चूत सूंघते चाटते हैं?”

“असलम मेरी इस बात पर हंस पड़ा और लंड हाथ में ले लिया। अपनी अम्मी को चोदने की तैयारी में था।”

“मैं पीछे की तरफ लेटी ही हुई। टांगें मेरी हवा में ही थी। असलम के खड़े लंड ने मुझे मस्त कर दिया। मैंने पीछे से हाथ कर के चूत की फांकें खोली और बोली, “चल आजा अब असलम, बहुत हो गई ज्ञान ध्यान की बातें। चल अब असली काम कर। डाल लंड अंदर जन्नत दिखा आज अपनी अम्मी को।”

“मेरी ये सुनते ही असलम ने एक मिनट नहीं लगाया और मेरी चूत के छेद पर लंड टिका दिया। आलम ने एक करारा झटका लगाया हुए लंड जड़ तक चूत के अंदर चला गया। असलम एक पल के लिए रुका, अपने चूतड़ हिला कर लंड को चूत में ठीक से बिठाया और चुदाई चालू कर दी।”

“इस बार तो असलम को छेद ढूंढने की भी जरूरत नहीं पड़ी थी। असलम का खड़ा लंड सीधा चूत के छेद पर ही जा कर अटका था।”

“चार दिनों की चुदाई में ही असलम के लंड को चूत का रास्ता याद हो गया था।”

“असलम की चुदाई बड़ी ही जोरदार और मस्त होती थी। मुझे इस बात को मानने में कोइ हिचकिचाहट नहीं कि नए-नए जवान असलम की चुदाई बिल्कुल बशीर की शुरू शुरू वाली चुदाई जैसी थी – जोरदार, ताबड़तोड़। लंड भी असलम का बशीर के लंड से ज्यादा मोटा और लम्बा था, और असलम चुदाई भी मस्त करता था।”

“चुदाई करवाते-करवाते ऐसे ही मेरे ज़हन में ख्याल आया की बड़ी किस्मत वाली होगी असलम की बीवी जिसे ऐसा मोटा लम्बा लंड मिलेगा और साथ ही मिलेगी ऐसी बढ़िया चुदाई।”

“असलम आह उन्ह आह की आवाजों के साथ धक्के लगाता जा रहा था।”

“असलम के मोटे लंड के धक्कों से मेरी चूत पांच सात मिनट में ही पानी छोड़ गयी। उधर असलम का लंड खड़ा ही था और वो धक्के लगाता जा रहा था।”

“गीली चूत पर असलम के लंड और टट्टे फचक छप्प फचक छप्प की आवाजें कर रहे थे।”

“असलम ने कुछ ही धक्के लगाए होंगे कि मेरी चूत फिर से एक और चुदाई के लिए तैयार हो गयी।”

“मैंने मस्ती में नीचे फिर चूतड़ हिलाने शुरू कर दिए। दस मिनट चोदने के बाद असलम सिसकारियां लेने लगा, “मेरी अम्मी, आअह अम्मी, मेरी अम्मी, मेरी अम्मी प्यारी, अम्मी लो मेरा आअह, लेले अम्मी। कितना मजा देती हैं आप। आअह, मजा आने वाला है। अम्मी अम्मी आअह  अम्मी आआआह ये निकला आआह”, और असलम ने फर्र से मेरी चूत अपने लंड से निकले आधे कप गरम पानी से भर दी।”

“मेरा मजा भी बस अटका ही हुआ था। असलम के लंड का पानी चूत में जाते ही मेरे चूतड़ भी अपने आप जोर से हिले और मेरे मुंह से निकला, “आअह असलम क्या चुदाई करता है बेटा तू आआह, आआह आआह असलम दबा कर, और जोर से, हां ऐसे ही असलम आआह आआआह  आआह मजा आ रहा है। असलम, मेरा बेटा असलम, रगड़ असलम, हां ऐसे आआह, बस ऐसे ही चोदता रह अपनी अम्मी को आआह। मुझे मजा आ गया और मैं ढीली हो गयी।”

“जवान असलम का लंड झड़ने के कुछ टाइम बाद तक भी खड़ा रहता था। कुछ देर मेरे ऊपर ही लेटा रहा। जब असलम का लंड बैठ गया तो असलम ने लंड चूत में निकाला और बिना कुछ बोले चला गया।”

“असलम के बिना कुछ बात किये चले जाने से मुझे लगा कहीं ऐसा तो नहीं चुदाई के बाद असलम को अपनी मां को चोदने का अफ़सोस होता हो। मैंने सोचा या तो चुदाई खुल कर होनी चहिये, या नहीं होनी चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि चुदाई का पल भर का मजा असलम की सेहत ही खराब कर दे।”

“असलम से मस्त चुदाई करवाने का मजा तो आ ही चुका था। अब चुदाई की पिक्चर देखने का मन नहीं था, और नींद भी आयी हुई थी। जल्दी ही मैं सो गयी।”

“सुबह उठी तो पहले की ही तरह असलम ने प्यार से पूछा, “अम्मी कैसी हैं आप? कैसी कटी आपकी रात?”

मतलब वैसी कोइ बात नहीं थी जैसी मैंने सोची था। असलम को अपनी अम्मी की चुदाई का अफ़सोस नहीं था। मैंने भी कहा, “ठीक हूं असलम और रात भी अच्छी कटी, नींद भी बढ़िया आयी।”

“असलम के साथ अब चुदाई का सिलसिला चल पड़ा था। हर दूसरे-तीसरे दिन चुदाई होने लग गयी थी।”

“अक्सर चुदाई की पिक्चर देखते-देखते ही हम चुदाई करते थे। कभी-कभी तो चुदाई की पिक्चर इतनी मस्त होती थी कि तीन चार दिन हम लगातार वहीं कैसेट देखते। ऐसे मौकों पर तो रोज ही चुदाई हो जाती थी।”

“एक दिन मुझे माहवारी आयी हुई थी और असलम का चुदाई का मन बन गया।”

“असलम रात को आया तो मैं बिना टीवी चलाये लेटी हुई थी। असलम का लंड सीधा खड़ा था। रात को जब भी असलम आता था कपड़े उतार कर ही आता था। असलम ने आते ही पूछा, “अम्मी क्या हुआ, आज टीवी क्यों बंद है? तबियत तो ठीक है आपकी?”

“मैंने जवाब दिया, “कुछ नहीं असलम नीचे आज लाल झंडी है, मुझे माहवारी चालू हो गयी है।”

“असलम ने एक बार अपना लंड पकड़ा और मायूसी सी से बोला, “ओह अम्मी कोइ बात नहीं, मैं चलता हूं।”

“असलम का खड़ा लंड देख कर मेरी चूत में झनझनाहट तो हुई, मगर मजबूरी थी।”

“जैसे ही इतना बोल कर असलम जैसे ही जाने के लिए मुड़ने लगा, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया और बोली, “क्या हुआ, जा कहां रहा है। चूत का छेद ही तो बंद है बाकी छेद तो खुले ही हैं। आजा तेरा लंड चूस कर तेरे लंड का पानी निकल कर तुझे मजा देती हूं। तेरा लंड चूसने में मुझे भी बड़ा मजा आता है।”

“असलम जाते-जाते रुक गया और लंड मेरे मुंह के सामने करके खड़ा हो गया।”

“मैंने असलम का लंड मुंह में डाला और चूसने लगी।”

“अभी मैंने असलम का लंड थोड़ा ही चूसा होगा कि असलम ने मेरा सर पीछे की तरफ कर दिया। असलम का खड़ा लंड मेरे मुंह से बाहर निकल गया।”

“मैंने असलम की तरफ देखा, उसने लंड मुंह में से निकाल क्यों दिया था? उसे तो लंड चुसवाने में बड़ा मजा मिलता था, और अभी तो असलम का लंड झडा भी नहीं था।”

“असलम मेरी तरफ देखते हुए बोला, “अम्मी एक बात बोलूं?”

“मैंने खाली हूं हूं ही कहा – मतलब “बोलो।”

“असलम मुस्कुराता हुआ शरारत भरी आवाज में बोला, “अम्मी एक छेद और भी तो है आपके पास।”

“मैं हैरान सी हुई। ये असलम कौन से छेद की बात कर रहा था? क्या गांड के छेद की बात कर रहा था?”

“मैंने फिर भी अनजान बनते हुए पूछा, “एक छेद और? और कौन से छेद की बात कर रहा है असलम?”

“असलम ने मुस्कुराते हुए कहा, “पीछे वाला छेद अम्मी, आपके पीछे भी तो एक छेद है, उसमें भी तो लंड जाता ही है।”

“इतनी चुदाईयों के बाद असलम मेरे साथ खुल चुका था। असलम से इतनी बार चुदने के बाद इतना तो अब तक मैं भी जान चुकी थी कि असलम की और मेरी चुदाई असलम की पहली-पहली चूत चुदाई थी। मैंने सोचा, जब असलम ने चूत ही पहली बार चोदी थी तो गांड के छेद के बारे मैं असलम कैसे जानता था?”

“तभी मुझे ध्यान आया आगरा, अलीगढ, मेरठ, लखनऊ के लड़के तो बहुत जल्दी गांड-गांड खेल चुके होते हैं।”

(लखनऊ की गांडू युग त्रिपाठी की कहानी पढ़िए “अजब गांडू की गजब कहानी” जिसमे गांडू युग की पत्नी चित्रा की चुदाई उसके अपने ससुर देसराज और युग की दोस्त राज की साथ हो गयी)”।

“असलम भी तो आगरा का ही था। इसका मतलब वो भी लड़कों के साथ गांड चुदाई कर चुका था?”

“मेरे जेहन में ये ख्याल घूम रहे थे और असलम खड़ा मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुरा रहा था।”

“मैंने ही कहा, “असलम क्या तू गांड के छेद की बात कर रहा है?”

“असलम बोला तो कुछ नहीं, बस ही हीहीही करके हंसता रहा।”

“उस वक़्त हंसता हुआ असलम मुझे असलम में मेरा बेटा नहीं एक मर्द दिखाई दे रहा था। हर तरह की चुदाई करने वाला मर्द।”

“हममें लंड चुसाई, चूत चुसाई और चुदाई तो शुरू हो ही चुकी थी। असलम की इस पीछे वाले, गांड के छेद वाली बात से मैं समझ गयी कि अब आने वाले वक़्त में असलम और मेरे बीच हर तरह की चुदाई हुआ करेगी।”

मैंने कह ही दिया, “क्या बात है असलम आज तेरा गांड चोदने का मन कैसे हो गया?”

असलम बोला, “अम्मी मन तो बड़े दिनों से है, पर कह ही नहीं पाया। आपके चूतड़ ही इतने मुलायम हैं, मैं तो जब भी आपके चूतड़ देखता हूं, आपके चूतड़ों के छेद में लंड डालने का मन होने लगता है। आज जब आपने कहा, “चूत ही बंद है बाकी छेद तो खुले ही हैं”, तो मेरा मन आपसे गांड चुदाई की बात करने का हो गया।”

“फिर अपने खड़े लंड के तरफ इशारा कर के बोला, “अम्मी देखो इसकी हालत, चुसाई से इसका कुछ नहीं होने वाला। इसे तो छेद चाहिए।”

“पहली बार मुझे महसूस हुआ कि मेरा बेटा असलम पूरा और पक्का मर्द बन चुका है।”

“मुझे बशीर और जमाल से गांड चुदवाते वक़्त की दर्द याद आ गयी। यहां तो असलम का लंड उन दोनों के लंडों से ज्यादा मोटा था।”

“मैंने कह ही दिया, “मगर असलम तेरा लंड तो बहुत मोटा है। जाएगा भी मेरी गांड में?”

“असलम भी हंसते हुए बोला, “इसकी फ़िक्र आप मत करो अम्मी, ये जाएगा और मस्त जाएगा।”

“असलम की इस बात से मुझे पक्का यकीन हो गया कि असलम गांड चुदाई करता था। और करे भी क्यों ना? आगरा का लड़का है, ढंग की गांड चुदाई तो आनी ही चाहिए। जमाल भी तो अपनी बीवी सायरा की गांड चोदता था।”

“कोइ और दिन होता तो उस दिन असलम से मैंने गांड चुदवा ही लेती मगर माहवारी के जोर के कारण मेरी तबीयत सच में ही ठीक नहीं थी। ये तो असलम का खड़ा लंड देख कर मुझे मस्ती सी आ गयी थी और मैंने उसका लंड मुंह में ले लिया था। असलम से तो उस दिन किसी भी तरह की चुदाई का मेरा मन नहीं था।”

“मैंने असलम से कह दिया, “असलम माहवारी के कारण मेरी तबियत जरा ढीली है, मजा नहीं आ पायेगा। आज रहने देते हैं। दो-तीन दिन की ही तो बात है, फिर जैसा तो कहेगा वैसा ही करेंगे। आज मैं लंड चूस कर तुझे मजा दे देती हूं।”

“असलम भी बोला,” ठीक है अम्मी जैसा आप कहती हैं। ये बोल कर असलम ने अपना लंड फिर से मेरे होठों पर टिका दिया।”

“मैंने असलम का लंड फिर से मुंह में ले लिया और चूसने लगी। जल्दी ही असलम की एक सिसकारी, “आआह अम्मी निकला” के साथ असलम के लंड का पानी निकल गया।”

“दो दिन गुजर गए। उस दिन सुबह जब असलम दुकान पर जाते हुए हमेशा की तरह बोला, “अच्छा अम्मी चलता हूं।”

“मैंने भी हमेशा की तरह कहा, “ठीक है असलम।”

“असलम जाते-जाते रुका और मेरे पास आ कर मेरे हाथ पकड़ कर बोला, “अम्मी आज तबियत ठीक है आपकी?”

“असलम की उतावली देख कर मेरी हंसी छूट गयी। मैंने हंसते-हंसते असलम से पूछा, “तबियत तो आज मेरी बिल्कुल ठीक है मगर क्या बात है तू बड़ा उतावला हो रहा है?”

“असलम वैसे ही बोला, “हां अम्मी आज रात आपके दूसरे वाले छेद में डालने का मन हो रहा है।”

“मैं तो दो दिन पहले वाली “दूसरे छेद” वाली बात भूल सी गयी थी, मगर असलम की बातों से लगा ये लड़का अपनी अम्मी के गांड चोदे बिना मानेगा नहीं।”

“मैं चुप रही, हां-ना में कोइ जवाब मैंने नहीं दिया।”

“मुझे चुप देख कर असलम बोला, “क्या हुआ अम्मी? गांड में लेने का मन नहीं है?”

“असलम के गांड में लंड डालने वाली बात से मेरी गांड में झनझनाहट तो मची ही हुई थी, मगर असलम का मोटा लंड गांड में लेने में डर सा भी लग रहा था।”

“मैंने बात ताल दी और असलम से बोली, “तू दुकान पर तो जा, रात की बात रात को देखेंगे को देखेंगे।”

“असलम ने मेरी इस बात को हां समझा और बोला, “तो फिर ठीक है अम्मी आज रात वही करेंगे। ये कहते-कहते असलम चला गया।”

“मैं समझ गयी, ये लड़का गांड में डाले बिना मानने वाला नहीं। और मैं रात को होने वाली गांड चुदाई के बारे में सोचने लगी। मेरी आंखों के आगे असलम का मोटा लंड घूमने लगा।”

“उस वक़्त भी मैं यही सोच रही थी कैसे जाएगा इतना मोटा लंड मेरी गांड में।”

“शाम हो गयी और असलम आ गया। साथ एक कैसेट भी लाया था। असलम ने कैसेट मेरे हाथ में देदी और बोला, “लो अम्मी बड़ी ख़ास चुदाई है इसमें।”

“मैं समझ गयी असलम जरूर गांड चुदाई क बात कर रहा है।”

“रोज की तरह खाना खा कर रात को मैं कमरे में चली गयी और कैसेट चला दी और बिस्तर पर लेट गयी “।

लगभग पंद्रह मिनट के बाद असलम भी आ गया, नंगा, जैसे अक्सर रात को आया करता था। आ कर असलम मेरे पास ही लेट गया। असलम का लंड खड़ा था। फिल्म में चूत चुदाई का सीन चल रहा था।”

“जल्दी ही चूत चुदाई के बाद गांड चुदाई का सीन आ गया। जैसे ही गांड चुदाई वाला सीन आया असलम ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और बोला, “वो देखो अम्मी क्या पीछे से क्या मस्त चुदवा रही है लड़की।”

नसरीन की माहवारी बंद हो गयी थी। उस रात असलम का अपनी अम्मी की गांड चोदने का मन हो गया। असलम दुकान से आते वक़्त गांड चुदाई वाली पिक्चर की कैसेट ले आया। दोनों मां बेटा लेटे-लेटे पिक्चर देख रहे थे। असलम अपनी अम्मी नसरीन की चूत सहला रहा था और नसरीन असलम के खड़े सख्त हुए पड़े लंड पर हाथ फेर रही थी। तभी फिल्म में गांड चुदाई वाला सीन आ गया।

नसरीन बता रही थी, “रोज की तरह खाना खा कर रात को मैं कमरे में चली गयी और कैसेट चला दी, और बिस्तर पर लेट गयी।”

“लगभग पंद्रह मिनट के बाद असलम भी आ गया, नंगा, जैसे अक्सर रात को आया करता था। आ कर असलम मेरे पास ही लेट गया। असलम का लंड तो खड़ा ही था। फिल्म में चूत चुदाई का सीन चल रहा था।”

“जल्दी ही सीन बदला और गांड चुदाई वाला सीन आ गया। जैसे ही गांड चुदाई वाला सीन आया असलम ने मेरा हाथ अपने लंड पर दबा दिया और बोला, “वो देखो अम्मी क्या पीछे से क्या मस्त चुदवा रही है लड़की।”

“सख्त हुए पड़े लंड को हाथ में लेते ही मेरी चूत गीली होने लगी और मेरी गांड में झनझनाहट होने लगी। मेरा मन असलम का लंड मुंह में लेने का होने लगा।”

“कुछ देर ऐसे तो मैं असलम का लंड हाथ में पकड़ कर दबाती रही, फिर मैंने असलम से कहा, “असलम चल चुसवा जरा अपना लंड।”

“असलम एक-दम से उठ कर फर्श पर खड़ा हो गया। मुझ से ज्यादा असलम को लंड चुसवाने की उतावली रहती थी। मैं बेड के किनारे पर बैठ गयी और असलम का लंड मुंह में ले लिया।”

“फिल्म में गांड चुदाई का वही सीन चल रहा था। दो लड़कियां थी और दो ही लड़के थे। बारी-बारी दोनों लड़के लड़कियों की गांड चोद रहे थे।”

“तभी असलम ने अपना लंड मेरे मुंह से निकाला और मुझे खड़ा कर के मुझे घुमा कर मुझे बाहों में ले लिया। मेरे चूतड़ असलम की तरफ थे और असलम का मोटा खड़ा लंड मेरे चूतड़ों की दरार में ऊपर-नीचे हो रहा था। चूत तो मेरी गीली ही थी। असलम का लंड मेरे चूतड़ों पर ऊपर-नीचे होने से मेरी गांड में भी झनझनाहट होने लगी। असलम ने पीछे से हाथ डाल कर मेरे मम्मे पकड़ लिए और दबाने लगा।”

“असलम चूचियां दबाते हुए मेरे कान में बोला, “अम्मी बताईये, डलवाएंगी आज गांड में?”

“मैंने जरा सा सर घुमा कर कहा, “क्या बात है असलम बहुत ज्यादा मन हो रहा है क्या गांड चोदने का?”

“असलम जल्दी से बोला, “हो तो रहा है अम्मी, आज से नहीं कई दिनों से हो रहा है। बस आपसे कह ही नहीं पाया।”

“फिर असलम कुछ रुक कर बोला, “अगर आपको नहीं चुदवानी तो रहने देते हैं।”

“असलम से गांड चुदवाने में मुझे कोइ दिक्कत नहीं थी। मैं जानती थी कि जिस तरह की चूत चुदाई असलम के साथ शुरू हो चुकी है, गांड चुदाई होना तो बस वक़्त की बात थी – कभी भी हो सकती थी।”

“बशीर और जमाल की साथ भी तो यही हुआ था। उनके साथ भी तो चूत चुदाई होते-होते गांड चुदाई हो गयी थी।”

“असलम मेरे मम्मे दबाता जा रहा था। बीच-बीच में असलम मेरे मम्मों के निपल मसल देता और साथ ही अपना खूंटे जैसा लंड मेरे चूतड़ों पर रगड़ रहा था। मेरा अपना मन भी गांड चुदाई का होने लग गया, बस मुझे डर था तो बस ये कि असलम का इतना मोटा लंड बिना दर्द किये गांड में जाएगा कैसे।”

“मैंने असलम से कह दिया, “नहीं असलम ऐसी बात नहीं। अगर तेरा मन गांड चोदने का हो रहा है तो मेरी तरफ से ना नहीं है। चल आजा।”

“मेरी इस बात पास असलम खुश हो गया। मैं हंसते हुए बोली, “हां मगर असलम गांड चोदने के बाद चूत का पानी भी निकालना पड़ेगा।”

“मेरा इतना कहते ही असलम के लंड ने एक बार झटका लिया और असलम ने मेरे मम्मे जोर से दबा दिए। गांड चुदाई के ख्याल ने असलम को मस्त कर दिया था”।

“मैंने असलम की तरफ देखते हुए कहा, “बता असलम कैसे करेगा? कैसे लेटूं? सीधा या घुटनों और कुहनियों के बल उल्टा लेटूं जैसे वो फिल्म वाली लड़की लेटी हुई है।”

“असलम ने मुझे पीछे से हल्का सा धक्का दिया बेड के किनारे पर झुका दिया और बोला, “अम्मी बेड के किनारे पर उल्टा लेट जाईये, पीछे से ही पूरा मजा आएगा, आपको भी और मुझे भी।”

“मैं बेड के किनारे पर घुटनों और कुहनियों के बल उल्टा लेट गयी।”

“असलम मेरे पीछे खड़ा हो गया। असलम ने मेरे चूतड़ फैला दिए और चूतड़ों का छेद चाटने लगा।”

“मैं सोच रहे थी ये सारे मर्द एक से ही होते हैं। असलम भी तो वो सब कुछ कर रहा है जो बशीर और जमाल किया करते थे।”

“कुछ देर चूतड़ों का छेद चाटने के बाद असलम उठा और बोला, “अम्मी आप ऐसे ही रहना, मैं क्रीम लेकर आता हूं।”

“क्रीम? अब तो मेरे मन में शक की जरा सी भी गुंजाइश नहीं थे कि असलम लड़कों की गांड चुदाई करता है।”

“एक मिनट में असलम क्रीम की ट्यूब ले आया और मेरे चूतड़ फैला कर छेद पर क्रीम लगाने लगा।असलम गांड में धीरे-धीरे उंगली अंदर बाहर करके गांड के अंदर भी क्रीम लगा रहा था।”

“जैसे ही असलम मेरी गांड की अंदर उंगली करता, मेरी सिसकारी निकल जाती, “आआह असलम, बड़ा मजा आ रहा है।”

“मेरी सिसकारी सुन कर असलम बार-बार उंगली अंदर-बाहर करने लगा। असलम क्रीम से सनी उंगली गांड की छेद के अंदर डालते-डालते बोलता भी जा रहा था, “ये लो अम्मी और लो। अम्मी आपकी गांड का छेद बड़ा टाइट है, उंगली को ही टाइट लग रहा है, मेरा लंड डालने के लिए अच्छे से मुलायम करना पड़ेगा।”

“वैसे भी अम्मी। गांड का छेद आठ-दस बार चुदवाने के बाद ही खुलना शुरू होता है।”

“मैंने जरा सा सर घुमा कर हंसते हुए असलम से पूछा, ” क्या बात है असलम, बहुत बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है। लगता है तू तो खूब गांड चुदाई करता है?”

“असलम ने कोइ जवाब नहीं दिया और छेद पर क्रीम मलता रहा।”

“पहले असलम ने एक उंगली गांड के छेद में डाली फिर धीरे-धीरे दो उंगलियां अंदर डाल दी। असलम कुछ देर दो उंगलियां ही गांड में अंदर-बाहर करता रहा। मेरी गांड का छेद अब मुलायम और चिकना हो चुका था।”

“जब असलम लगा कि क्रीम अपना काम कर चुकी है तो एक आख़री बार असलम ने ढेर सारी क्रीम आपने लंड पर भी लगाई और मेरे चूतड़ फैला कर लंड का सुपाड़ा छेद के ऊपर टिका दिया। असलम ने मेरी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे करके थोड़ा-थोड़ा लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छेद के अंदर धकेलने लगा।”

“असलम जरा सी भी उतावली नहीं कर रहा था। कुछ ही कोशिशों के बाद असलम ने आपने मोटे लंड का सुपाड़ा गांड के अंदर बिठा दिया।”

“सुपाड़ा अंदर जाते ही मुझे दर्द तो हुआ, मगर इतना भी नहीं कि सहा ही ना जा सके। दर्द की साथ-साथ गांड का छेद थोड़ा खुलने के कारण मजा भी आया।”

“असलम बोला, “अम्मी ठीक हो?”

“मैंने जवाब दिया, “ठीक तो है, मगर हल्का सा दर्द भी हो रहा है।”

“असलम ने लंड की सुपाड़े को थोड़ा आगे पीछे किया और बोला, “अभी ठीक हो जाएगा अम्मी। शुरू-शुरू में ऐसा होता है। ये कहते हुए असलम ने थोड़ा और लंड और अंदर धकेल दिया।”

“असलम की लंड थोड़ा और अंदर करने पर मुझे फिर से दर्द हुआ, मगर इस बार थोड़ा ज्यादा। मैंने हाथ पीछे करके असलम को रोकने की कोशिश की।”

“असलम ने लंड बाहर निकाल लिया और मैंने चैन की सांस ली।”

“असलम का लंड जमाल के लंड से मोटा था, दर्द कुछ ज्यादा ही हुआ था और अभी तो आधा लंड भी अंदर नहीं गया था।”

“असलम ने मेरी गांड और अपने लंड पर दुबारा से क्रीम लगाई और लंड गांड के छेद पर रख दिया, और वैसे ही धीरे-धीरे लंड को गांड के अंदर करने लगा। ढेर सारी क्रीम की कारण लंड फिसल कर आधा गांड के अंदर बैठ चुका था।”

“असलम अब रुक गया और आधा लंड ही अंदर-बाहर करने लगा। एक माहिर गांड चोदने वाले की तरह असलम बीच-बीच में लंड पर और गांड में क्रीम भी लगा देता था। चार-पांच मिनट ये सब करने के बाद असलम रुक गया।”

“मैंने सोचा असलम इस बार भी थोड़ा सा ही अंदर डालेगा और अगर मुझे दर्द होगा तो रुक जाएगा।”

“मगर ऐसा नहीं हुआ।”

“आधा लंड तो गांड के अंदर ही था। असलम थोड़ा सा रुका। मैं अभी सोच ही रही थी कि अब आगे क्या होगा कि असलम मुझे मेरी कमर से कस कर पकड़ा और एक ही झटके से पूरा लंड मेरी गांड के अंदर बिठा दिया।”

“मेरे मुंह से जोरदार चीख निकली, “असलम मर गयी मैं। बहुत दर्द हो रहा है। निकाल ले अपना लंड। तेरा लंड मेरी गांड फाड़ देगा असलम।”

“निकालना तो दूर, असलम ने गांड में “उन्ह आह… आह उन्ह उन्ह ले अम्मी… ले… आह… की आवाजों के साथ जबरदस्त धक्के लगाने शुरू कर दिए। नया-नया जवान हुआ असलम कहां रुकने वाला था, वो और भी जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। जिस तरह असलम मुझे कमर से पकड़ कर पागलों की तरह मेरी गांड चोद रहा था, मैं हिल ही नहीं पा रही थी।

“मैं समझ गयी असलम गांड चुदाई में बशीर और जमाल से इक्कीस ही था उन्नीस नहीं।”

“असलम की इस तरह पागलपन वाली गांड चुदाई से मुझे उस वक़्त मुझे असलम पर बड़ा गुस्सा आ रहा था। असलम को कम से कम इतना तो लिहाज करना ही चाहिए था कि वो अपनी अम्मी की गांड चोद रहा था किसी रंडी की नहीं।”

“पांच-सात मिनट की गांड के रगड़ाई के बाद पता नहीं क्या हुआ। मेरी गांड सुन्न हो गयी। दर्द का एहसास खत्म हो गया। असलम उन्ह उन्ह आह आह अम्मी अम्मी की आवाजों के साथ गांड चोद रहा था। इधर मेरी चूत गरम हो रही थी।”

“जवान असलम का चुदाई का दम कमाल का था। असलम ने जिस तरह रगड़े लगाए उनसे तो मेरी चूत ही गर्म हो चुकी थी। मुझे चूत में कुछ चाहिए था।”

“पेन का कवर मेरे सामने ही था। मैंने कवर उठाया और अपने चूत में डालने लगी।”

असलम ये देख कर बोला, “छोड़ दो अम्मी इस प्लास्टिक के ढक्कन को। गांड चोदने के बाद मैं आपकी चूत का भी पानी निकालूंगा – बस मुझे एक बार गांड में लंड का पानी छुड़ाने दो। बड़ा मजा आ रहा है। बड़ी ही टाइट है आपकी गांड, बड़े रगड़े लग रहे हैं लंड पर।”

“असलम ने धक्के जारी रक्खे। साथ ही जारी रक्खी अपनी मस्त कर देने वाली आवाजें , “आह… क्या गांड है आपकी टाइट… पूरा गया आपके अंदर। जकड़ लिया आपने मेरे लंड को आआह अम्मी आह।”

“तभी मेरी चूत झनझनाने लगी। मुझे भी मजा आने लगा, “आआह असलम लगा, और जोर से लगा‌, आआह असलम, मेरे असलम निकलने वाला है तेरी अम्मी की चूत का पानी। आअह असलम लगा रगड़े। आआह… हां ऐसे ही रगड़ मेरा बेटा।

“असलम मेरी गांड चोद रहा था लेकिन मजा मुझे चूत में आ रहा था। मेरी चूत आपने आप ही पानी छोड़ गयी। मुझे मजा आ गया और मैं ढीली हो गयी।”

“असलम ने ये देखा तो बोला, “क्या हुआ अम्मी? लगता है आपका तो चूत का पानी छूट गया। चलिए कोइ बात नहीं। ऐसे ही लेटी रहिये मेरा मजा भी बस निकलने ही वाला है। उसके बाद मैं लंड चूत में डाल कर आपको दुबारा मजा देता हूं।”

“असलम इस तरह से मर्दों वाली बातें कर रहा था मानो चुदाई उसके लिए कोइ नयी चीज नहीं थी।”

“इतना बोल कर असलम ने मोटे लंड के लम्बे-लम्बे धक्के मेरी गांड में लगाने शुरू कर दिए। फिर लम्बी आआआह के साथ असलम का लंड गांड में पानी छोड़ गया।”

“असलम के लंड का पानी मुझे अपनी गांड में महसूस हो रहा था। “जैसे ही असलम के लंड का गर्म पानी मेरी गांड में निकला मुझे जन्नत का सा मजा आया और मेरी गांड का दर्द और मेरा गुस्सा सब खत्म हो गए?”असलम का लंड बैठने लग गया। असलम ने लंड निकाला और मेरी गांड में से असलम का पानी निकल कर मेरी चूत की तरफ बहने लगा।”

“असलम की ताबड़-तोड़ गांड चुदाई ने तो जैसे मन की मुराद पूरी कर दी थी।”

“असलम एक तौलिया लाया और मेरी गांड पोंछी और लंड चूतड़ों पर रगड़ने लगा।”

“जल्दी ही असलम का लंड फिर खड़ा हो गया। असलम घुटने मोड़ कर जरा सा नीचे हुआ, मेरे चूतड़ थोड़े से ऊपर उठा कर चूत का छेद अपने लंड के सामने किया और एक ही बार में लंड मेरी गीली हुई पडी चूत में बिठा दिया।”

“असलम ने वैसे ही मेरी कमर पकड़ जैसी मेरे गांड चोदते हुए पकड़ी थी, और मेरी चूत चोदनी शुरू कर दी। बीच-बीच में असलम मेरी गांड में भी उंगली कर देता था।”

“गांड चोदने के बाद तो असलम दुगने जोश के साथ चूत चुदाई कर रहा था। पंद्रह बीस मिनट की चुदाई में मजा आ गया। असलम ने एक जोरदार सिसकारी ली, “आआह अम्मी निकल गया फिर से। आज तो मजा ही आ गया।”

“इस बार मेरी चूत और असलम के लंड का पानी इकट्ठे निकला। मैं और असलम इकट्ठे झड़े।”

“असलम ने लंड चूत में से निकाल लिया और वहीं बिस्तर पर लेट गया। मैं भी सीधी हुई और असलम के पास ही लेट गयी।”

“बहुत बुरी तरह गांड चोदी थी असलम ने मेरी। पता नहीं क्या हाल बनाया था मेरी गांड के छेद का। मुझे असलम से इस तरह की रगड़ा पच्ची वाली गांड चुदाई के उम्मीद नहीं थी। मैं सोच रही थी आखिर को असलम था तो वो मेरा बेटा ही, इस तरह क्यों गांड चुदाई की उसने मेरी। मेरे कहने ऊपर वो रुका क्यों नहीं?”

“पिक्चर शायद थोड़ी सी बाकी थी। अब लड़का-लड़की को पीछे से चोद रहा था। मैंने असलम को कहा, “असलम तुम रुके क्यों नहीं जब मैंने कहा था। पता है मुझे कितना दर्द हो रहा था।”

असलम ने करवट ली और मेरी चूत को सहलाते हुए पूरी ढिठाई के साथ बोला, “अम्मी एक बात बताओ, जब अब्बू ने शादी के बाद आपको पहली बार चोदा था तो दर्द हुआ था कि नहीं। आपकी चूत सील टूटी थी कि नहीं, खून निकला था कि नहीं?”

मैंने कहा “हां दर्द भी हुआ था सील भी टूटी थी और खून भी निकला था।”

“असलम मेरी चूत को उसी तरह सहलाते हुए बोला, “तो अम्मी क्या अब्बू ने आपकी चुदाई बंद कर दी थी?”

“मैं चुप हो गयी I मुझे जवाब मिल गया था। ये सब बोलते-बोलते और टीवी पर पीछे से लड़की की चुदाई देख कर असलम का फिर खड़ा हो गया।”

“असलम ने आव देखा ना ताव। मुझे बोला चलिए अम्मी फिर वैसे ही उल्टा लेट जाईये। उस लड़के की तरह आपकी चूत में लंड डालूंगा।”

“मैंने कहा असलम थोड़ा तो रुक जा, मैं कहीं जा तो नहीं रही। थोड़ा आराम करले।”

“असलम ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया, “अम्मी आप इसे देखिये। रुकने वाला लग रहा है ये आपको?” असलम का लंड की सीधा खड़ा था। मैंने लंड पकड़ा, लकड़ी की तरह सख्त हुआ पड़ा था।”

“अब मुझे समझ आया बीस इक्कीस साल के लड़के की चुदाई क्या होती। लंड देख कर मेरी चूत ने भी फर्र से पानी छोड़ दिया जैसे कह रही हो आने दो अपने बेटे के लंड को अंदर।”’

असलम और नसरीन की गांड चुदाई और चूत चुदाई हो चुकी थी। टीवी पर पिक्चर अभी भी चल रही थी। पिक्चर में लड़के ने लड़की की चूत में पीछे से लंड डाला हुआ था। पिक्चर देखते-देखते असलम का लंड फिर से खड़ा हो गया। असलम नसरीन को बोला, “अम्मी फिर वैसे ही उल्टा लेट जाईये।”

“नसरीन अपनी आप बीती में बता रही थी, “असलम के इतना कहने पर मैं उल्टा हो कर घुटनों और कुहनियों के बल लेट गयी, जैसे गांड चुदवाते हुए लेटी थी। मैंने अपने चूतड़ थोड़े ऊपर उठा लिए, जिससे मेरी चूत का छेद असलम के लंड के सामने आ जाए।”

“असलम ने एक बार चूत में उंगली डाली, और लंड चूत के छेद पर बिठाया और फच्च की आवाज के साथ पूरा लंड एक ही बार में जड़ तक चूत में बिठा दिया, और एक सेकण्ड की भी देरी किये बिना चुदाई चालू कर दी।”

“चुदाई की मस्ती में हमारे मुंह से निकलती आवाजें माहौल को और भी सेक्सी बना रही थी।”

“हर चुदाई के बाद चुदाई के वक़्त होती हमारी बातें बेशर्मी की सभी हदें पार कर रही थी – ये और भी गंदी और भी सेक्सी होती जा रही थी

असलम बोलता, “आआह अम्मी क्या चूत है आपकी मजा आ गया। आआह अम्मी मेरी अम्मी आअह आअह अम्मी अम्मी लेलो मेरा लौड़ा, पूरा का पूरा गया लौड़ा आपकी गुलाबी फुद्दी के अंदर। अअह मेरी अम्मी, आआह आआह आआह क्या मस्त चुदती हैं आप। बड़ा मजा आता है आपकी चुदाई करके आअह।”

ये बोलते-बोलते असलम मेरे चूतड़ों पर एक धप्पड़ जमा देता और साथ ही पूरा लंड चूत से बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का भी लगा देता।”

“मजे की मारे मेरी भी हालत वैसी ही हो जाती थी। मैं भी वही कुछ भी बोलती थी। आआह असलम क्या चोदता है बेटा तू, मस्त मोटा लंड है तेरा आआह क्या रगड़ा लगा कर जाता है। अंदर चूत भरी पड़ी है मेरी आह, लगा रगड़ा और अपनी अम्मी की चूत फुला दे। इसको चोद-चोद कर आआह दबा, और जोर से डाल। हां ऐसे ही, हां ऐसे ही असलम आआह आआआह जरा और जोर से अअअअअह, आअह असलम आआह गया अंदर आआह असलम दबा कर रगड़, हां ऐसे ही आआह।”

“कुछ ही दिन पहले के शर्मीला असलम अब पक्के चुदकड़ मर्द की तरह चुदाई करता था। कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहने के बाद असलम ने लंड मेरी चूत में से निकाला और पहले की तरह चुदाई कर के मेरे पास ही वहीं लेट गया।”

“मैं भी असलम की बगल में ही लेट गयी। जब चूत के मजे का जूनून सर से उतरा तो लगा गांड के छेद पर जलन सी हो रही है। मैंने असलम से कहा, “असलम मेरे गांड की छेद पर जलन सी हो रही है। जरा देख तो बेटा, कहीं तेरे मोटे लंड से हुई चुदाई में छिल तो नहीं गया?”

असलम ने कहा, “दिखाओ अम्मी, वैसे तो गांड का छेद छिलता नहीं, और मैंने तो छेद पर क्रीम तो बहुत लगाई थी। पर आपकी गांड ही बड़ी टाइट थी। चलिए दिखाईये, देखता हूं कितनी फूल गई है।”

“मैंने उल्टा हो कर चूतड़ उठा दिए और हाथ पीछे कर के चूतड़ फैला दिए। असलम ने चूतड़ों को थोड़ा और खोला और बोला, “अम्मी छिली तो नहीं पर थोड़ी लाल हुई पड़ी है और थोड़ी सी मोटी भी हुई पड़ी है।”

“ये कह कर असलम ने मेरी गांड के छेद पर जुबान फेरने लगा। मुझे बड़ा ही सुकून मिला। बशीर ने भी ऐसा ही किया था, जमाल भी यही करता था।”

“तो क्या सारे मर्द ऐसा ही करते हैं ? पहले चोद-चोद कर गांड का छेद सुजा देते हैं, फिर चाट-चाट कर उसकी सूजन दूर करते हैं?”

“असलम बोला, “अम्मी मेरे पास शेव करने के बाद लगाने वाली क्रीम है। आप ऐसे ही लेटे रहिये मैं लाता हूं।”

“मैं ऐसे ही चूतड़ उठा कर लेटी रही। असलम क्रीम लाया और उंगली से गांड के छेद के बाहर और अंदर लगा दी। जैसे ही असलम ने उंगली छेद के अंदर डाली, मुझे फिर मजे का एहसास हुआ। मन किया एक बार और चुदवा लूं।”

“मैंने कहा, “बस कर असलम। नहीं तो फिर चुदवाने का मन हो जाएगा। आजा लेट जा मेरे पास। असलम मेरे पास ही लेट गया और बोला, “अम्मी अब पांच-सात दिन गांड मत चुदवाना।”

“मैंने भी बेशर्मी के साथ कह दिया, “पांच सात दिन कह ले, या आठ दस दिन कह ले, गांड तो मेरी जब भी चोदनी है तूने ही चोदनी है। मैं तुझे गांड का छेद रोज दिखा दिया करूंगी। जिस दिन तुझे लगे अब ये तेरा मोटा लंड झेलने के लिए तैयार है, उस दिन डाल लेना। ये बोलते हुए मैं हंस दी।”

“असलम “ठीक है अम्मी” बोल कर हंस दिया।”

“मेरी और असलम की हफ्ते में चार-पांच चुदाईयां हो रही थी। मुझे लगने लगा था, ये कुछ ज्यादा ही हो रहा था। कई बार मुझे ख्याल सा आता था कि इतनी ज्यादा चुदाई से असलम की सेहत ही ना बिगड़ जाए। अब जब बात निकल ही आयी थी, तो मैंने सोचा अब बात कर ही लेनी चाहिए।”

मैंने कहा, “असलम गांड ही क्या, मैं तो कहती हूं चूत भी रोज-रोज नहीं चोदनी चाहिए। कुछ दिन रुक-रुक कर चुदाई करेंगे तो मजा भी बहुत आएगा। तेरे लंड से ढेर सा पानी तुझे भी मजा देगा, और मुझे भी।”

असलम कुछ सोचने लगा और फिर बोला, “ठीक है अम्मी, जैसा आपको ठीक लगे।”

मैंने ही फिर से कहा, “असलम अब से जब भी तेरा मन करे चुदाई का, तू मुझे बता देना, जब भी मेरा मन करे चुदाई का, मैं तुझे बोल दिया करूंगी।”

“असलम ने हां सर हिलाया।”

“असलम हल्के-हल्के प्यार में मेरी चूत सहला रहा था।”

लेटे-लेटे मैंने असलम की तरफ मुंह करके से कहा, “असलम एक बात बताएगा ?”

असलम बोला, “जी अम्मी पूछिए।”

“मैंने हिचकिचाते हुए असलम से पूछा, “असलम, तुझे याद है जब कुछ दिन पहले मैं उदास सी रहती थी तो तूने मुझसे पूछा था अम्मी जमाल बहुत याद आता है?”

“असलम ने जवाब दिया, “हां अम्मी याद है।”

“मैंने फिर पूछा, “असलम, क्या जमाल ने तुझे सब कुछ बता दिया था?”

“असलम ने फिर जवाब दिया, “हां अम्मी सब कुछ बता दिया था – हर बात बता दी थी।”

“असलम के इस जवाब से ये तो साबित हो गया कि जमाल ने अपनी और मेरी चुदाई की हर बात असलम को बता दी थी।”

“मैंने फिर पूछा, “असलम, जमाल की बातें सुन कर तुझे मुझ पर गुस्सा नहीं आया?”

“अब जो असलम ने बताया वो मुझे हैरान करने के लिए काफी था।”

असलम बोला, “अम्मी मुझे क्यों गुस्सा आता? जमाल के साथ आपका जो कुछ भी चल रहा था, उसके लिए जमाल ने मुझसे पहले इजाजत ली थी। आपकी और जमाल की चुदाई, ये सब मेरी रजामंदी के चलते हो रहा था।”

“मैंने हैरानी से कहा, “ये तू क्या कह रहा है असलम? अपनी अम्मी को किसी दूसरे से चुदाई करने के लिए हां कर दी? क्यों?”

“फिर असलम ने मुझे पूरी बात बताई, “अम्मी अब्बू की अचानक मौत से सब लोग सकते में थे। आप, मैं और यहां तक कि जमाल भी। आप पर तो मुसीबत का कहर ही टूट पड़ा था। मगर ये होनी थी, जिसे कोइ टाल नहीं सकता था। अब्बू की मौत को साल गुजर चुका था। आपकी उदासी दूर ही नहीं हो रही थी।

“फिर जैसा कि आप जानती है, जमाल के कहने पर मैंने आपको दुकान पर जाने के लिए बोला। कुछ दिन ठीक चला। जमाल का आपकी चुदाई का कोइ इरादा नहीं था। मगर सैंतीस अड़तीस साल की उम्र में चुदाई के बिना रहना आसान होता है क्या? औरतें तो 50 – 55 की साल की उम्र तक मस्त चुदाई करवाती हैं। आपकी चूत को भी चुदाई चाहिए थी।”

“तभी आपके हाथ वो चुदाई वाली मैगजीन लग गयी। आपको वो मैगजीन की फोटो और कहानियां अच्छी लगने लगी। ऐसे कामुक कहानियां पढ़ते-पढ़ते आपके मन में चुदाई की इच्छा जागने लगी होगी।”

“एक दिन जब आप ऊपर कमरे में वो मैगजीन देख रही थी, और चूत में वो पेन का कवर डाला हुआ था, तभी एक जमाल का कोइ मेहमान आया था। जमाल उसे घर छोड़ने जाना चाहता था और आपको बताने ऊपर गया तो आपको पेन के कवर से अपनी चूत चोदते देख उलटे पांव वापस हो गया।”

“इसके बाद जमाल ने आपको तीन-चार बार ऐसा करते देख लिया। फिर एक दिन जमाल मुझसे बोला, “असलम भाई आप से एक बात करनी है।”

“उस वक़्त जमाल मुझे कुछ परेशान सा लग रहा था। मैंने कहा, ” बोलो जमाल, क्या बात है, कोइ परेशानी है क्या?”

“जमाल ने मुझे आपकी मैगजीन देखने वाली, पैन का कवर चूत में लेने वाली – सारी बात बता दी और बोला, “असलम भाई भाभी की उम्र अभी सैंतीस अड़तीस साल की ही है। ये उम्र कुछ ज्यादा नहीं। इस उम्र में औरतों की कुछ जिस्मानी जरूरतें रहती हैं, और फिर भाभी तो एकदम तंदरुस्त हैं।”

“फिर जमाल धीरे से नीचे देखते हुए बोला, “असलम भाई, भाभी को मर्द का साथ चाहिए। सीधी भाषा में बताऊं असलम भाई तो भाभी की चूत लंड मांग रही है। भाभी को एक मर्द का साथ और उसकी चुदाई चाहिए।”

“मुझे जमाल पर गुस्सा भी आया मगर साथ ही उसकी बात में वजन भी लगा। जमाल बात तो ठीक ही कह रहा था। अब हमारे खानदानों में शौहर के गुज़र जाने के बाद औरत की दूसरी शादी कर दी जाती है। मैंने जमाल से पूछा, “जमाल तुम्हारा मतलब अम्मी की दूसरी शादी?”

“जमाल एक दम से बोला, “नहीं-नहीं असलम भाई मेरा ये मतलब नहीं। क्या मालूम दूसरी शादी के बाद भाभी को कैसा मर्द मिले?”

“हमारी दुकान बड़े मौके की है, और इस वक़्त करोड़ों की है। दुकान लालच में और भाभी के साथ मजे लेने के लिए इस वक़्त कोइ भी तैयार हो जाएगा। मगर शादी कोइ पांच सात दस साल का खेल तो है नहीं और भाभी भी हमेशा तो ऐसी सुन्दर और जवान तो नहीं रहेगी। एक बार भाभी ढलना शुरू हुई, तो फिर वो मर्द भाभी को कैसे रखेगा क्या मालूम?”

“जमाल बड़ी ही अक्लमंदी वाली बात कर रहा था। मैंने अब जमाल से कहा, “जमाल मुझे तुम्हारी बात अब समझ आ रही है, तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। अब तुम साफ़-साफ़ बात करो तो अच्छा है।”

“असलम बता रहा था कि जमाल ने खंखार कर गला साफ़ किया और बोला, “असलम भाई मुझे माफ़ करना, असल में तो भाभी को चुदाई चाहिए। उनकी चूत लंड मांग रही है।”

“जमाल ने कहा, “असलम भाई चुदाई की ठरक और चूत गर्मी को ठंडा करने के लिए अगर भाभी कहीं इधर-उधर से लंड ले लिया और चुदाई करवा ली तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं। आप को तो मालूम ही है ज़माने का।”

“अगर चुदाई करने वाला शरीफजादा ना हुआ, तो पूरी जिंदगी का झंझट हो जाएगा। चौराहे की रंडी बना देगा भाभी को – दस लोगों की रखैल बना कर छोड़ देगा। भाभी को भी समझ तब आएगा, जब उनकी चूत चुदाई करवा-करवा कर खुल कर भोसड़ा बन जाएगी, और भाभी उम्र से पहले ही बूढ़ी हो जाएगी।”

“जमाल की ये वाली बात सुन कर तो मैं परेशान हो गया। जमाल की सारी बातें सच थी, और ऐसे कई किस्से लोगों से मैंने भी सुने थे। मैंने जमाल से पूछा, “जमाल तो फिर क्या करें, तुम्ही बताओ।”

“जमाल धीरे से बोला, “असलम भाई एक सलाह दे सकता हूं। हो सकता है आपको अच्छी ना लगे। लेकिन मौजूदा हालात मुझे तो में वही ठीक रास्ता लगता है।”

“मैंने कहा, “बताओ तो सही जमाल। उसके बाद देखते हैं।”

“जमाल कुछ देर चुप रहा और फिर बोला, “असलम भाई अब आप जवानी की तरफ बढ़ रहे हो। आप का लंड जवान हो रहा है। आपके लंड को भी तो चुदाई चाहिए। आप चोद कर दिया करो भाभी को। घर की बात घर में रहेगी।”

“मैंने बीच में ही टोक कर कहा, “जमाल ये क्या बोल रहे हो। वो मेरी अम्मी है। अपनी अम्मी के साथ चुदाई का रिश्ता कैसे बना सकता हूं।”

“जमाल बोला, “असलम भाई नाराज मत होईये। इस मजबूरी का और कोइ हल नहीं है। चार-पांच साल की ही तो बात है। फिर भाभी की चूत की आग भी ठंडी होने लगेगी और आपकी भी शादी हो जाएगी। घर में नई बहू आएगी तो भाभी का मन वैसे ही लग जाएगा।”

“मैं गहरी सोच में पड़ गया। मुझे सलाह दे कर जमाल अपने काम में लग गया था, मगर मेरा दिमाग हिला गया।”

“उस दिन तो मैंने जमाल से कुछ नहीं कहा। अगले दिन जब मैं दुकान पर गया तो मैंने जमाल को बुलाया और कहा, “इधर आओ जमाल मैंने तुमसे कुछ बात करनी है।”

“जमाल मेरे सामने बैठ गया। मैं कुछ देर सोचता रहा कि बात कैसे और कहां से शुरू करूं। मैंने सीधा मुद्दे पर आने की सोची।”

“मैंने जमाल को कहा। “जमाल मेरी बात सुनो। तुम कह रहे हो अम्मी मर्द का साथ चाहती है, अम्मी की चूत को लंड चाहिए। तुम मुझे अम्मी को चोदने के लिए कह रहे हो। जमाल मेरा मन अम्मी के साथ जिस्मानी रिश्ते बनाने का नहीं मानता।”

“फिर मैंने धीमी आवाज में जमाल से कहा, “तुम मेरी बात सुनो। तुम पर अब्बू का बड़ा भरोसा था। मैं भी तुम पर उतना ही भरोसा करता हूं। मेरी एक बात मानोगे?”

“जमाल बोला, “कहिये असलम भाई।”

“मैंने जमाल से कहा, “जमाल तुम बना लो अम्मी के साथ जिस्मानी रिश्ते। तुम चोद लिया करो अम्मी को। तुम कर लिया करो उनकी चुदाई। दोपहर को कोइ ग्राहक नहीं आता। दुकान का शीशे का दरवाजा बंद ही रहता है। ना किसी को पता चलेगा। ना कोइ झंझट। मुझे तुम्हारी और अम्मी की इस चुदाई से कोइ एतराज नहीं होगा।”

“जमाल ने कहा, “असलम भाई ये क्या कह रहे हो आप। मैंने भाभी को उस नजर से कभी नहीं देखा। और फिर मेरी शादी हो चुकी है। मैं अपनी बीवी सायरा के साथ दगा कैसे कर सकता हूं।”

“मैंने कहा, “जमाल तुम्हें कोइ भी किसी से भी दगा करने को नहीं कह रहा। तुम ये समझो ये एक चालू और हालिया इंतजाम है, तुम्हारी जिम्मेदारी का हिस्सा है।”

“फिर मैंने कुछ रुक कर कहा, “और फिर तुम बताओ जमाल – ये एक बेटे की अपनी अम्मी की चुदाई से तो ठीक ही है।”

“जमाल कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला, “ठीक है असलम भाई जैसा आप ठीक समझें, लेकिन मैं भाभी को चुदाई के लिए कैसे कहूंगा? मैंने तो उनसे नजर मिला कर कभी बात भी नहीं की।”

“मैंने कहा, “जमाल हालात अगर यहां तक पहूंच गए हैं तो आगे भी कुछ ना कुछ हो ही जाएगा। तुमने कौन सा आज ही चुदाई करनी है। जब कभी मौक़ा आये और तुम्हें लगे कि अब कुछ हो सकता है तब अम्मी की साथ जिस्मानी रिश्ते बना लेना।”

“असलम बोला, “बस अम्मी, इस तरह आपके और जमाल की बेच चुदाई का रिश्ता बन गया।”

“असलम ये पूरी कहानी सुना कर चुप हो गया। असलम का हाथ अभी भी मेरी चूत को सहला रहा था।”

“मैंने असलम से कहा, “कमाल है असलम, और मुझे जरा सा भी शक नहीं हुआ कि मेरी चुदाई जमाल तुम्हारी रजामंदी से कर रहा था – अपनी जिम्मेदारी समझ कर?”

“असलम बोला, “अम्मी ये तो ऐसे ही चलता रहना था अगर जमाल का दुबई जाने की बात-बीच में ना आती। उसने ऐसे ही आपको चोदते रहना था और मेरी और आपको चोदने की जरूरत ही नहीं पड़नी थी।”

“इतना बोल कर असलम चुप हो गया। मैं सोचने लगी इतना कुछ हो गया और मुझे कुछ समझ ही नहीं आया। असलम और जमाल सब मुझे खुश देखना चाहते थे। उसके लिए एक बेटा अपनी अम्मी को एक नौकर से चुदवाने को तैयार हो गया? और जब हालात ने एक ऐसी करवट लेली तो वो बेटा खुद अपनी अम्मी की चुदाई कर रहा है?”

“मैने बस इतना ही कहा, “असलम तू मेरी खुशी लिए इतना कुछ कर रहा था, और मुझे पता ही नहीं था?”

“मेरा हाथ अचानक से असलम के लंड पर चला गया। असलम का हाथ तो मेरी चूत पर ही था।”

“मैं असलम के लंड पर हाथ फेर रही थी और असलम मेरी चूत सहला रहा था। असलम का लंड फिर से खड़ा होने लगा, और मेरी चूत फिर पानी छोड़ने लगी।

“असलम के लंड को खूंटा बनने में दस मिनट भी नहीं लगे और मेरी चूत में बाढ़ आ गयी।”

“अब कुछ नहीं हो सकता था सिवाए एक और चुदाई के। मसला खाली ये था कि चुदाई होनी कैसे थी।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *