बाप बेटी की चुदाई मालिनी की ज़ुबानी 3

बेटी की चुदाई

“रागिनी से बात करने के बाद जैसे ही मैंने फोन बंद किया मोबाइल की घंटी फिर से बज गयी। देखा तो संदीप सोलंकी का फोन था। चुदाई वाले खिलौनों वाला संदीप सोलंकी”।

“संदीप का फोन देख कर मुझे बड़ी हैरानी सी हुई। संदीप का फोन कभी भी नहीं आता था, हमेशा मैं ही उसे फोन करती थी जब कभी मुझे अपने गांड चूत में लेने वाले पुराने हो चुके खिलौने बदलने होते थे, या मुझे कुछ नए खिलौने मंगवाने होते थे – अपने लिए या किसी और के लिए – जैसे आगरा वाली नसरीन और मानसी के लिए मंगवाए थे”।

“खैर मैंने फोन उठाया और बोली, “हां संदीप बोलो, आज कैसे फोन किया”?

“उधर से संदीप बोला, “नमस्ते मैडम, कैसी हैं आप”?

“मैंने भी जवाब दिया, “मैं ठीक हूं, बोलो कुछ काम था क्या”?

“मेरी हैरानी अभी भी कम नहीं हो रही थी। मई सोच रही थी कि आखिर संदीप ने फोन ही क्यों किया। क्या मुझे चुदाई के लिए पटाने की कोशिश कर रहा था? अगर ऐसा था भी तो मेरा अभी भी संदीप से चुदाई करवाने का मन नहीं था। मैं संदीप को चुदाई से पहले अभी कुछ और परखना चाहती थी”।

“मैंने फोन पर कहा, “मैं तो ठीक हूं संदीप, तुम बताओ कैसे फोन किया? कुछ ख़ास काम था क्या”?

“संदीप बोला, “मैडम एक बिल्कुल नई तरह की चीज आयी है। मैंने सोचा सब से पहले आप को ही दिखाता हूं”।

“संदीप की आवाज में मिली-जुली अजीब सी हंसी और कुछ उतावलापन सा था”।

“नई तरह की चीज, मतलब नई तरह का चुदाई का खिलौना। मैंने सोचा ऐसा भी नया क्या होगा। चूत में लेने वाला मोटा लंड मेरे पास था। गांड और चूत में लेने वाला “C” की तरह का खिलौना भी मेरे पास था और चूत का दाना चूसने वाला भी था। तो अब नया क्या आ गया”?

“लेकिन संदीप की ये “नई तरह की चीज” वाली बात सुन कर मेरी चूत में खुजली मच गयी और चूत गीली होने लग गयी”।

“मैंने संदीप से कह दिया, “नई तरह की चीज? कुछ ख़ास है क्या”?

“संदीप उसी अंदाज में बोला, “ख़ास ही है मैडम। आपके पास नहीं है अब तक। ये नया वाला आता तो मेरे पास पहले भी था, पर आज कल एक-दम इसकी मांग बहुत बढ़ गयी है। इसलिए मैंने सोचा आप को भी दिखा दूं। हो सकता आप भी लेना चाहें”।

“मेरी उत्सुकता बढ़ गयी। मैंने सोचा ऐसा भी क्या होगा ये। मैंने संदीप से कहा, “ठीक है संदीप ले आओ, कब लाओगे”?

“संदीप तो जैसे घोड़े पर सवार था। एक-दम से बोला, “कब क्या मैडम मैं अभी आता हूं। आधे घंटे में पहुंचता हूं आपके पास”।

“संदीप मुझे कुछ ज्यादा ही उतावला लग रहा था। ये उतावलापन खिलौना दिखाने का था या फिर चुदाई के चक्कर में संदीप कुछ आगे बढ़ना चाहता था”।

“मैंने अपनी चूत में खुजली की और संदीप से कहा, “ठीक है संदीप आ जाओ। देखें क्या नई तरह की चीज आयी है”।

“संदीप ने फोन बंद किया और मैं पेशाब करने बाथरूम चली गयी। पेशाब करके और चूत की धुलाई करके मैं क्लिनिक में आ गयी और प्रभा को चाय के लिए बोल कर संदीप का इंतजार करने लगी”।

“ठीक आधे घंटे के बाद चौकीदार आया और उसने मुझे संदीप के आने की खबर दी। मैंने संदीप को क्लिनिक में ही बुलवा लिया, और प्रभा को संदीप के लिए भी चाय लाने के लिए फोन कर दिया”।

“संदीप आया, उसके हाथ एक थोड़ा बड़ा सा बॉक्स था। मैंने सोचा रबड़ के लंड का बॉक्स तो इतना बड़ा नहीं होता था। मुझे लगा कुछ ही तरह की चीज है”।

मैंने संदीप से कहा, “बैठो संदीप”।

“संदीप ने बॉक्स मेज पर रख दिया और सामने वाली कुर्सी पर चुपचाप बैठ गया”।

“मैं भी चुप-चाप प्रभा का इंतजार करने लगी”।

“पांच मिनट में ही प्रभा आ गई और चाय की ट्रे मेज पर रख कर वापस चली गयी”।

“मैंने चाय का एक कप संदीप के हाथ में पकड़ा दिया और बोली, “क्या लाये हो संदीप, क्या ख़ास तरह की चीज है? दिखाओ”?

“इससे पहले मैंने कभी भी संदीप को चुदाई के खिलौने का डिब्बा खोलने के लिए नहीं कहा था। पता ही होता था कि चूत में लेने वाला या गांड में लेने वाला लंड ही होगा”।

“जब मैंने कहा, “क्या लाये हो संदीप, क्या ख़ास तरह की चीज है? दिखाओ, तो संदीप ने मेरी बात सुन कर थोड़ा हैरान सा हुआ”।

“हैरानी से चाय का कप पकड़ते हुए कहा, “डिब्बा खोलूं क्या मैडम”? कहने के साथ ही संदीप ने पेंट में अपने लंड को ठीक किया”।

“मैंने मन ही मन सोचा, लंड खड़ा होने लगा है इसका – साला ठरकी भोसड़ी का”।

“संदीप से मैं चूत और गांड में लेने वाले इतने खिलौने मंगवा चुकी थी कि अब इन खिलौनों की बात करते हुए हमे शर्म या झिझक महसूस नहीं होती थी”।

“मैंने संदीप से कहा, “खोलो, देखें क्या नया है”।

“संदीप ने जल्दी से अपना चाय का कप खाली किया, और बॉक्स उठा कर खोले लगा”।

“गत्ते के बॉक्स के अंदर प्लास्टिक के दो और बॉक्स थे – बिल्कुल एक जैसे। संदीप ने एक बॉक्स मेरे हाथ में पकड़ा दिया और दूसरा बॉक्स खुद खोलने लगा। लंड वाली जगह पर संदीप की पेंट का उभार बढ़ता जा रहा था”।

“मैंने बॉक्स खोला और अंदर का सामान निकाल लिया। संदीप भी अपने हाथ वाला बॉक्स खोल चुका था ”।

“ये एक इलास्टिक की गुलाबी रंग की निक्कर की तरह कि चड्डी थी जिसके आगे सात रबड़ इंच का लंड लगा हुआ था, और लंड के नीचे रबड़ के दो टट्टे लटक रहे थे। बिल्कुल असली टट्टों की तरह के। गौर से देखा तो निक्कर के पीछे अंदर की तरफ भी कोइ छः इंच लम्बा और डेढ़ पौने दो इंच मोटा लंड जैसा ही लगा हुआ था”।

“मैं समझ गयी कि ये दो औरतों में आपस में मस्ती करने वाले खिलौने हैं। निक्कर पहन कर पीछे की तरफ अंदर लगा हुआ लंड अपनी ही गांड में डाल लेना होता है, और आगे वाला सात इंची लंड दूसरी औरत की गांड या चूत में डाल कर चुदाई करनी होती है”।

“ये नया खिलौना हाथ में पकड़े हुए मैंने कनखियों से संदीप की तरफ देखा। संदीप भी रबड़ के लंड पर हाथ फेरता हुआ मेरी तरफ ही देख रहा था। संदीप की पेंट का उभार हुए भी बढ़ चुका था”। “जैसे ही मेरी हुए संदीप की नजरें मिली, संदीप बोला, “मैडम हैं ना बिल्कुल नयी तरह के”?

“मैं बोली कुछ नहीं, मुस्कुराते हुए बस “हूं” करते हुए सर हिला दिया”।

“मेरी मुस्कराहट ने शायद संदीप को और बेशर्म कर दिया। संदीप के एक हाथ में रबड़ का लंड था। दूसरे हाथ से संदीप ने अपना लंड पेंट में ठीक से बिठाते हुए कहा, “मैडम इसे कहां ट्राई करेंगी”?

“संदीप का मतलब था कि क्या मेरी कोइ ऐसी लड़की फ्रेंड है जिसकी चूत या गांड में इस नए खिलौने को डाल कर चुदाई के मजे दिए जाएं, या फिर मेरी वो फ्रेंड इस मेरी चूत या गांड में डाले और मुझे चुदाई के मजे दे”।

“रबड़ के लंड हम दोनों के हाथ में थे। दोनों को ही पता था कि ये क्या हैं और इनका क्या करना है। शर्माने का तो सवाल ही पैदा नहीं होती था”।

“मैंने हंसते हुए बोल ही दिया, “तेरे ऊपर ही ना ट्राई करूं पहले”?

संदीप भी हंसते हुए बोला, “मैडम आप भी मजाक करती हैं। मेरे लिए नहीं है ये”।

“मैंने बात को आगे ना बढ़ाते हुए रबड़ का लंड वापस बॉक्स में रखते हुए दराज में से चेकबुक निकाली और संदीप से पूछा, “ये बता कितने के हैं”।

“संदीप लंड खुजलाता हुआ बोला, “नहीं मैडम इसका कुछ नहीं। ये मेरी तरफ से आपको गिफ्ट हैं”।

मैंने भी उसी तरह मुस्कुराते हुए, संदीप से बोला, “गिफ्ट? किस खुशी में गिफ्ट दे रहा है संदीप”?

संदीप बोला, “बस ऐसे ही जी”। फिर अपने लंड को खुजलाता हुआ जरा सा आगे की तरफ झुकता हुआ बोला, “आपने बहुत ऐसे वाले खिलौने लिए हैं मुझसे। अब एक बार मुझे भी सेवा का मौक़ा दीजिये”।

“ऐसे वाले खिलौने लिए हैं, सेवा का मौक़ा दीजिये”। दोनों बातों आपस में लिंक ही नहीं जुड़ रहा था”।

“संदीप पक्का ही मुझे चोदने के चक्कर में था। मगर सही-सही और साफ़-साफ़ बोल नहीं पा रहा था। शायद उम्र और रुतबे का भी फर्क था”।

“मगर एक बात तो थी, संदीप की बातें सुन सुन कर और उसके पेंट का उभार देख कर मेरी चूत तैयार होने लग गयी थी। मुझे लगा कि अगर अगर संदीप को जल्दी फारिग ना किया तो मुझे अपने कपड़े उतारने ही पड़ेंगे”।

“मैंने संदीप से थोड़ा साफ़ ही बोल दिया, “संदीप अभी तो तुम ये चेक लो, जब सही वक़्त होगा, तुम्हें सेवा का पूरा मौक़ा मिलेगा”।

“संदीप समझ गया कि उस दिन बात बनने वाली नहीं। फिर भी ढिठाई के साथ बोला, “कब मौक़ा मिलेगा मैडम”?

“मैंने भी साफ़ ही बोल दिया, “जल्दी ही। सब्र करो, सब्र का फल मीठा भी होता है और मजेदार भी”।

“ये कह कर मैंने संदीप के हाथ मैं चेक पकड़ा दिया। संदीप खड़ा हुआ तो उससे लंड वाली जगह का अपनी पेंट का उभार छुपाया नहीं जा रहा था। लेकिन इस बार संदीप ने पेंट का उभार छुपाने की कोशिश भी नहीं की, और पूरी बेशर्मी के साथ एक बार और लंड खुजलाया और बोला, “ठीक है मैडम अच्छा चलता हूं”।

“और मेरी चूत को घूरते हुए संदीप बाहर निकल गया”।

“संदीप को जाते देख कर मैंने मन ही मन सोचा इसको भी सेवा का मौक़ा दे ही देते हैं। देखें तो सही कैसी सेवा करता है”।

“दो दिन बाद शनिवार के दिन रागिनी आयी बिल्कुल ही नए अंदाज में थी। रागिनी ने हल्के हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाऊज हल्का पारदर्शी था और नीचे की गहरे हरे रंग की ब्रा साफ़ दिखाई पड़ रही थी”।

“ब्लाऊज के गले का कट इतना नीचा था कि आधे मम्मे दिखाई दे रहे थे। साड़ी इतनी नीची बांधी हुई थी कि जरा सी और थोड़ा नीचे हो तो चूत कि झांटों के बाल दिखाई दे जाते”। “ये तो भला था रागिनी अपनी कार से आयी थी, वरना कम से कम ऐसे कपड़ो में कानपुर में घर से बाहर निकलना तो मनचले चूतियों को चुदाई की दावत देने वाली बात होती है”।

“मैंने रागिनी से हंसते हुए कहा, “क्या बात है रागिनी आज तो बड़ा गजब ढा रही हो। पीछे-पीछे मनचलों की लाइन तो नहीं आयी”?

“रागिनी भी हंसी और मेरे सामने बैठ गयी”।

“रागिनी को मैंने मानसी के साथ हुई बातें बताई। नहीं बताया तो ये नहीं बताया कि कैसे मैंने और मानसी ने एक-दूसरे के साथ चुदाई जैसे मजे लिए, और ना ही मैंने रागिनी को चुदाई वाले खिलौनों के बारे में बताया जो मैंने मानसी को दिए थे”।

“हमारी बात-चीत चल ही रही थी। बात-चीत के बीच में ही रागिनी अपने असली वाले रंग में आ गयी। रागिनी बोली, “मालिनी जी मानसी के साथ तो आपकी बात-चीत ठीक ही रही। घर पर भी मानसी के बर्ताव में बहुत बदलाव आ गया है। अब जरा आप ये बताइये कि आज मेरा और आपका क्या प्रोग्राम है”?

“मैं समझ गयी कि रागिनी का मतलब चूत गांड के मस्ती लेने का है। मुझे इसमें क्या एतराज होना था। ऐसी मस्ती के लिए मैं तो हमेशा ही तैयार ही रहती थी”।

“मैंने रागिनी से कहा, “ये बात है? तो चलो तुम्हें आज का प्रोग्राम दिखाती हूं”।

“मैं और रागिनी पीछे वाले कमरे में चली गयी। मैंने रागिनी से कहा, “रागिनी बैठो, तुम्हें एक नई चीज दिखाती हूं, दो दिन पहले ही संदीप दे कर गया है”।

“ये कह कर मैंने संदीप का लाया हुआ इलास्टिक वाली चड्डी के ऊपर लगे हुए लंड वाला बॉक्स रागिनी के हाथ में पकड़ा दिया और दूसरा अपने हाथ में ले लिया और रागिनी से बोली, “लो खोल कर देखो, क्या है”।

“रागिनी ने बॉक्स खोला और इलास्टिक की निक्कर के साइज की चड्डी निकाल कर उलट-पलट कर देखा और फिर मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देख कर बोली, “मालिनी जी ये तो दो औरतों आपस की चुदाई करने का जुगाड़ लग रहा है”।

“तभी रगिनी के हाथ में अंदर की तरफ लगा हुआ लंड भी आ गया। रागिनी मुझसे या शायद अपने आप से बोली, “और ये क्या है”?

“दुनिया भर की चुदाई करवा चुकी रागिनी को जल्दी ही समझ आ गया कि वो छोटा लंड क्या था। रागिनी मेरी तरफ देखते हुए बोली, ओह तो मालिनी जी इसे ये चड्डी पहन कर अपनी गांड में डाल लेना है और आगे वाले लंड से फिर दूसरी औरत की चुदाई करनी है”।

“मैं क्या जवाब देती। बस मैं रागिनी को देख कर मुस्कुराती रही”।

“रागिनी ने ही पूछा, “मालिनी जी आप ने ट्राई किया है ये”?

”मैंने कहा, “नहीं रागिनी अभी तक नहीं। अब तुम आ ही गयी हो तो आज करते हैं”।

“रागिनी खुश हो कर बोली, “वाह मालिनी जी, क्या बात है! आज तो मजा ही आ जाएगा”।

“तभी रागिनी कुछ सोचते हुए बोली, “मालिनी जी आप कह रही थी संदीप ने भिजवाए हैं”?

मैंने कहा, “भिजवाए नहीं, खुद ले कर आया था। ये खिलौने वो खुद ही ले कर आता है”।

“रागिनी कुछ देर सोचती रही, फिर बोली, “मालिनी जी एक बात पूछूं अगर आप बुरा ना मान जाएं तो”?

“हालांकि मैं समझ चुकी थी कि रागिनी के दिमाग में क्या चल रहा था। रागिनी जरूर सोच रही थी कि अगर संदीप खुद ये खिलौने ले कर आता है तो फिर तो उसने मुझे जरूर चोदा होगा। फिर भी मैंने रागिनी को कहा, “पूछो”।

“मालिनी जी ये संदीप इस तरह के चूत गांड में ले कर चुदाई जैसे मजे लेने वाले खिलौने आपके पास ले कर आता है, तब तो आप में काफी साफ़-साफ़ बातें भी होती होंगी मेरा मतलब चूत, फुद्दी, गांड जैसी बातें”।

मैंने जवाब दिया, “नहीं रागिनी हममें ऐसी कोई बात नहीं होती। संदीप उम्र में मुझसे कोइ अठारह बीस साल छोटा है। इसलिए ऐसी बात करते हुए शर्माता है। इतना जरूर है कि जब भी ये खिलौने लेकर आता है तो मेरी चूत को घूरता रहता है और अपने पेंट में अपना लंड इधर-उधर करता रहता है”।

“रागिनी ने फिर पूछा, “तो क्या मालिनी जी जब आप उससे ये खिलौने लेती हैं और वो संदीप अपना लंड पेंट में इधर-उधर करता है तो इसका मतलब तो यही हुआ कि वो आपके साथ चुदाई वाला रिश्ता रखना चाहता है। क्या ये सब देख कर आपका भी मन नहीं करता उससे चुदाई करवाने का”?

“मैंने हंसते हुए कहा, “देखो रागिनी, ये सब देख कर मेरी चूत गीली तो हो जाती है, मगर मेरा एक उसूल भी है कि मैं कानपुर में चुदाई बहुत सोच समझ कर करवाती हूं। मैं ऐसे किसी मर्द को घास नहीं डालती, जिसके बारे में मुझे लगे कि एक बार चुदाई करवा कर वो पीछे ही पड़ जाएगा”।

फिर मैंने कुछ रुक कर कहा, “इस बार जब संदीप ये वाले खिलौने लेकर आया था तो चुदाई के लिए कुछ ज्यादा ही उतावला लग रहा था। इस बार ये पहली बार था कि उसने इन खिलौनों वाला बॉक्स खोल कर ये खिलौना मुझे दिखाया था। इससे पहले मैंने कभी भी उसके सामने बॉक्स नहीं खोला था”।

“फिर मैंने रागिनी की तरफ थोड़ा झुक कर कहा, “वैसे रागिनी इस बार संदीप का लंड उसे कुछ ज्यादा ही तंग कर रहा था”।

“रागिनी ने धीरे से बोली, “कमाल है मालिनी जी, इतना सब होने के बाद भी आपने अपने आप को रोक लिया। मैं होती तो अब तक कब की चूत खोल कर संदीप के सामने लेट चुकी होती”।

“मैंने हंस कर कहा, “चिंता मत कर रागिनी, मैं भी बस संदीप को भांप ही रही हूं। एक दो बार ऐसे ही संदीप अगर आता रहा और मुझे वो ठीक ठाक लगा, तो मैं भी यही करनी वाली हूं”।

“उसी तरह हंसते हुए मैंने कहा, “मैं भी वही करनी वाली हूं जो तुम करती – चूत खोल कर उसके सामने लेट जाती”।

“रागिनी ने मुझसे कहा, “कमाल है मालिनी जी, संदीप के साथ इतना कुछ होते हुए भी आपने अपने आप को रोक लिया? मैं होती तो अब तक चूत खोल कर संदीप के सामने लेट चुकी होती”।

“रागिनी के इस बात का जवाब देते हुए जब मैंने कहा कि वो दिन दूर नहीं जब मैं संदीप के नीचे चूत खोल कर लेटने वाली हूं। तो रागिनी मेरी बात पर हंस दी और बोली, “चलिए मालिनी संदीप के सामने चूत खोल कर लेटने का टाइम तो जब आएगा तब आएगा, अब आप ये बताईये, कि अभी करना क्या है”?

“मैं रागिनी की तरफ देख ही रही थी कि रागिनी लंड वाली चढ्ढी हिलाते हुए बोली, “बताईये मालिनी जी आपने मेरी फुद्दी में डालना है या मैं डालूं आपकी फुद्दी में”?

“फिर रागिनी चढ्ढी के साथ लगे सात इंच के लंड पर हाथ फेरते हुए बोली, “इसे तो गांड में लेने का भी बड़ा मजा आएगा”।

“मैंने भी हंस कर कहा, “रागिनी ये तो मैंने भी पहली बार इस्तेमाल करने हैं। फुद्दी गांड सब जगह डाल कर ट्राई करते हैं। चलो पहले तुम ही पहनो, और चोदो मुझे। दोनों को पता चल जाएगा चुदाई का कैसा मजा देते हैं ये”।

“रागिनी अपने कपड़े उतारते हुए बोली, “मालिनी जी ये वाला चुदाई वाला लंड तो एक बार में एक ही औरत इस्तेमाल करेगी, मतलब एक औरत इस ख़ास चढ्ढी को पहन कर इसके साथ लगा लंड दूसरी औरत की चूत या गांड में डालेगी। फिर ये दो का सेट क्यों है”?

“मैंने रागिनी से कहा, “ये दोनों आये तो एक ही पैकिंग में हैं। मैंने भी ये बात संदीप से या बात नहीं पूछी। मेरा ख्याल है कम्पनी की सोच यही रही होगी कि सब के पास अपने-अपने खिलौने होने चाहिये, जैसे अपने-अपने मर्दों के लंड होते हैं, अपनी-अपनी बीवियों की फुद्दीयां होती हैं”।

“रागिनी कपड़े उतार चुकी थी। रागिनी मुझसे बोली, “मालिनी जी वो जैल वाली टयूब देना ये चड्ढी के पीछे लगा हुआ लंड पहले गांड में तो डालूं, तभी आगे वाले लंड से काम लेने का मजा आएगा”।

“मैंने दराज में से जैल की टयूब निकल कर रागिनी को पकड़ा दी। रागिनी ने घुटने मोड़ कर अपनी टांगें चौड़ी की, आगे चूत के नीचे से टांगों बीच में से हाथ डाल कर जैल अपनी गांड के छेद पर लगाई और चड्ढी के पीछे की तरफ लगा हुआ साढ़े छह इंच वाला लंड अपनी गांड के अंदर डाल लिया और इलास्टिक वाली निक्कर जैसी चड्ढी ऊपर कमर तक चढ़ा ली”।

“चड्ढी के सामने लगा हुआ हल्के भूरे गुलाबी रंग का सात इंची लंड सीधा खड़ा था, और गहरे भूरे रंग के लंड के नीचे लटकते हुए दो टट्टे असली टट्टों की तह लटके हुए इधर-उधर हिल रहे थे”।

“रागिनी ने आगे तरफ लगा हुआ लंड हाथ में लिया और मुझसे बोली, “मालिनी जी पीछे से तो ये लंड गांड और चूत में दोनों में ही चला जाएगा, कोइ दिकक्त नहीं आएगी। ऊपर लेट कर चूत में कैसे जायेगा, ये देखना पड़ेगा”।

“मैने कपड़े उतारते हुए कहा, “तो फिर पहले ऐसे ही ट्राई कर लो, मेरे ऊपर लेट कर। मैं लेटती हूं नीचे अभी पता चल जाएगा कैसे चूत के अंदर जाता है”।

“मैंने कपड़े उतार कर एक मोटा तकिया अपने चूतड़ों के नीचे रखा और टांगें पूरी फैला दी। टांगें फैलाते ही चूत में हवा ठंडी ठंडी सी लगी, बिल्कुल ऐसे ही जैसे हवा चल रही हो और कोइ अपनी जुबान निकाले तो जुबान पर हवा ठंडी लगती है”।

“टांगें फ़ैलाने करने के कारण, जरूर मेरी चूत थोड़ी खुल गयी होगी, तभी चूत में हवा ठंडी-ठंडी लग रही थी”।

“रागिनी मेरी चूत में अंदर तक उंगली डालते हुए कहा, “मालिनी जी लग तो रहा है मस्त जाएगा आपकी चूत में”।

“ये कह कर रागिनी ने अपना मुंह मेरी चूत में घुसेड़ दिया और चूत का दाना चूसने लगी”।

“कुछ देर बाद रागिनी उठी और बोली, “मालिनी जी आपकी चूत तो बिल्कुल तैयार है”।

“ये बोल कर रागिनी घुटनों के बल आगे की तरफ आयी, लंड को चूत की दरार में ऊपर नीचे किया, और साथ ही हल्का-हल्का दबाती भी गयी। एक जगह लंड रुका और फिसलता हुआ एक चौथाई चूत में बैठ गया”।

“रागिनी थोड़ा रुकी और रागिनी ने मेरे कंधे पकड़े और एक झटका लगाया। एक बार में ही पूरा लंड टट्टों तक अंदर डाल दिया”।

“लंड अंदर डाल कर रागिनी ने मुझसे पूछा, “मालिनी जी अब आपको ही बताना पड़ेगा कि लंड अंदर तक गया या नहीं। मुझे इस लंड का तो पता नहीं चल रहा, मगर जो मेरी गांड में गया हुआ है वो जड़ तक बैठा हुआ पूरी मस्ती दे रहा है”।

“मैंने अपनी टांगे रागिनी के कमर के पीछे की और रागिनी को टांगों में जकड़ते हुए कहा, “रागिनी पूरा अंदर तक बैठा हुआ है, बस अब चुदाई चालू कर”।

“रागिनी ने भी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और धक्के लगाने लगी”।

“क्या मस्त खिलौने थे। रागिनी के धक्के मस्त मजा दे रहे थे। नीचे चुदाई करवाते हुए मेरे मन में ऐसे ही ख्याल सा आया ये खिलौने बनाने वाले अगर ऐसे ही नई-नई तरह के खिलौने बनाते रहे तो ये भोसड़ी वाले तो मर्दों की चुदाई का काम ही तमाम कर देंगे”।

“रागिनी मेरे साथ चिपकी हुई मस्त धक्के लगा रही थी। दोनों के मम्मे आपस में गड्ड-मगड्ड हुए पड़े थे। सात आठ मिनट में ही मेरी चूत का पानी निकलने वाला हो गया”।

“तभी मेरे चूतड़ अपने आप जोर से घूमे और मेरे मुंह सी आवाज निकली, “आआह रागिनी निकल गया”।

“रागिनी ने आठ-दस धक्के और लगाए और रुक गयी। कुछ सेकंड के बाद रागिनी ने लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे साथ ही लेट गयी। रागिनी की चड्ढी के पीछे वाला वाला लंड उसकी गांड के अंदर ही था”।

“मेरी तरफ सर घुमा कर रागिनी ने पूछा, “कैसा रहा मालिनी जी? मजा आया इसके साथ चुदाई करवाने का”? और इसके साथ ही रागिनी चड्ढी में हाथ डाल कर अपनी चूत रगड़ने लगी”।

“मैंने कहा, “बहुत मजा आया रागिनी। तुम्हारे धक्के बड़े मजेदार और जोरदार थे। पूरा लंड अंदर तक डाल रही थी तुम। तुम बताओ, तुम्हें कैसा लगा”?

“रागिनी बोली, “मालिनी जी ये आगे वाला लंड तो असल चुदाई करवाने वाली के मजे के लिया है, मगर फिर भी मजा तो मुझे भी आ ही रहा था। जब मैं अपनी चूत पर धक्का लगाती थी, तो लंड का पिछला हिस्सा मेरी चूत को दबाता था और उधर मेरी गांड में बैठा दूसरा लंड गांड के छेद के अंदर एक-दम जकड़ा जाता था”।

रागिनी फिर बोली, “मालिनी जी है तो बढ़िया। ये फैक्ट्रियों वाले भी कई तरह की खोज विचार करके ही बनाते होंगे ये ऐसे खिलौने। अब इसी खिलौने को ही ले लो। आगे वाला लंड आपको यानी चुदाई करवाने वाली को मजा देगा और ये पीछे वाला लंड गांड में गया हुआ चुदाई करने वाली को मजा देगा, कमाल है”।

“ये कहते हुए रागिनी अपनी चूत को जोर सी रगड़ने लगी और साथ ही चूतड़ ऊपर नीचे करने लगी”।

“मैंने रागिनी को अपनी चूत में उंगली करते देखा तो कहा, “रागिनी ये क्या कर रही हो? चूत में उंगली क्यों कर रही हो ? दो मिनट रुक जाओ, मैं देती हो तुम्हें इस लंड का मजा”।

“रागिनी चूत रगड़ते-रगड़ते बोली, “वो बात नहीं मालिनी जी। बस मेरा निकलने ही वाला है। असल में गांड में डाला हुआ लंड भी बड़ा मजा दे रहा है। आपकी चूत पर धक्के लगाते-लगाते मेरी अपनी चूत गरम हो गयी है”।

“रागिनी की एक उंगली उसकी अपनी चूत में थी। तभी रागिनी ने सिसकारी ली, “लो मालिनी जी, गयी मेरी चूत, निकल भी गया मेरी फुद्दी का पानी भी”।

“और इस सिसकारी के साथ ही दूसरे हाथ की उंगली रागिनी ने मेरी चूत में डाल दी। इस एक सिसकारी के साथ ही रागिनी ढीली हो गयी”।

“कुछ देर के बाद रागिनी उठी और चड्ढी के पीछे लगा हुआ लंड अपनी गांड में से निकाल कर चड्ढी उतार दी और गांड में से निकाले हुए लंड को देखते हुए बोली, “हे भगवान कितना मजा देते हैं ये खिलौने। फिर जैसे अपने आप से ही बोली, “कैसे कैसे चुदाई के खिलौने बनाते हैं ये फैक्ट्रियों वाले मादरचोद भी”।

“रागिनी तो ये बोल कर बाथरूम में चली गयी और मेरी रागिनी की इस बात पर कि” कैसे कैसे चुदाई के खिलौने बनाते हैं ये फैक्ट्रियों वाले मादरचोद भी”, हंसी छूट गयी”।

“अभी कुछ देर पहले रागिनी के नीचे चुदाई करवाते हुए यही तो सोच रही थी, ” ये खिलौने बनाने वाले अगर ऐसे ही नई-नई तरह के खिलौने बनाते रहे तो ये भोसड़ी वाले तो मर्दों की चुदाई का काम ही तमाम कर देंगे”।

“रागिनी दस मिनट बाथरूम में लगा कर आयी, और आकर मेरे पास ही लेट गयी”।

“कुछ देर के बाद रागिनी बोली, “मालिनी जी अब? अब आप डालेंगी मेरी फुद्दी में लंड? आप करेंगी मेरी चुदाई”?

“मैंने कोइ जवाब नहीं दिया और एक पलटी कर रागिनी के होंठ अपने होठों में लेकर चूसने लगी। रागिनी भी मस्ती से होंठ चुसवा रही थी। रागिनी होंठ चूसते-चूसते मुझे मानसी की बातें याद आ गयी”।

“मानसी का लाजवाब आइडिया कि खिलौने चूत और गांड के अंदर लेने के बाद मानसी नीचे लेट जाएगी और मैं मानसी के ऊपर लेट कर मर्द के तरह धक्के लगाते हुए चुदाई करने जैसी एक्टिंग करूंगी। इसके साथ ही दोनों गांड, चूत, लंड, रंडी, कुतिया, भोसड़ी, फुद्दी,चोद मेरी चूत, फाड़ मेरी चूत जैसी बातें बोलेंगी।

“मानसी का आइडिया मुझे बहुत पसंद आया था। और हमने इस तरह से दुनिया भर की बातें बोलते हुए मजे भी लिए थे”।

“रागिनी ने नया वाला खिलौना मेरी चूत में डाल कर मुझे चोदा था, मगर इस चुदाई के दौरान ना रागिनी ने ना मैंने ही इस तरह की कोई बात बोली थी जैसी मैंने और मानसी ने उस दिन बोली थी”।

“मैंने सोचा क्यों ना रागिनी के साथ भी वही सब बोला जाये, जैसा मैंने और मानसी ने आपस में खिलौने अपनी अपनी चूत में डाल कर बोला था – चूत, फुद्दी, गांड, लंड, कुतिया, रंडी, चूत का भोसड़ा”।

मैंने रागिनी से कहा, “रागिनी क्यों ना अब कुछ नया करें”।

हैरानी से रागिनी बोली, “नया मतलब? कैसा नया मालिनी जी”?

रागिनी अभी भी हैरान थी। मैंने रागिनी की हैरानी को दूर करने के लिए कहा, “रागिनी अबकी बार मैंने इस नए वाले खिलौने से तुम्हें चोदना है। ठीक”?

“रागिनी उसी हैरान से बोली, “बिल्कुल ठीक मालिनी जी, अब आपकी बारी है आपने ही चोदना है”।

“मैंने कहा, “रागिनी अभी जब तुम मुझे चोद रही थी, तब ना तुम कुछ बोली, ना मैं ही कुछ बोली – मतलब लंड, चूत, फुद्दी, भोसड़ा, फुद्दी की झाग निकालने जैसी बातें। ऐसी बातें तुम जब आलोक से चुदाई करवाती हो तब तो बोलती हो, अलोक भी तुम्हें चोदते हुए ऐसा ही कुछ-कुछ बोलता है”।

“रागिनी हैरानी से मेरी तरफ देख रही थी, कि ये मैं क्या और कैसी बातें कर रही हूं, और क्यों”।

“रागिनी ने कहा, “मालिनी जी बोलती तो हूं, आलोक भी बोलता है। चुदाई के वक़्त सभी औरतें और मर्द ऐसा बोलते हैं”।

“मैंने रागिनी की चूत सहलाते हुए पूछा, “एक बात बताओ रागिनी तुम और आलोक चुदाई करते हुए ये चूत, फुद्दी, चूत की झाग जैसी बातें क्यों बोलते हो। चुदाई तो लंड चूत की कर रहा होता है, फिर इन बातों का क्या मतलब? चुदाई तो इन सब बातों के बिना भी पूरी हो ही जाती है। चूत और लंड का पानी तो इन बातों के बिना भी निकल जाता है”।

“रागिनी ने मेरी बात का जवाब दिया, “मालिनी जी आपकी बात ठीक है, मगर ये बातें चुदाई का मजा दुगना कर देती हैं”।

“मैंने रागिनी से कहा, “तुमने बिल्कुल ठीक कहा, ये बातें चुदाई का मजा दुगना कर देती हैं। अब मेरी बात सुनो”।

“रागिनी मेरी तरफ देखने लगी”।

“मैंने फिर कहा, “रागिनी तुम मुझे चोदते हुए चुप रही। अब मैंने तुम्हें चोदना है तो फिर क्यों ना एक काम करें”?

“रागिनी मेरी तरफ देखती जा रही थी”।

“मैंने रागिनी से कहा, “अब मैंने तुम्हें चोदना है तो समझो मैं मर्द हूं, और तुम रागिनी ही हो। तुम नीचे लेट कर चुदाई करवाओगी और मैं ऊपर लेट कर तुम्हारी फुद्दी में ये लंड डाल कर तुम्हारी चुदाई करूंगी – मतलब करूंगा। और तब चुदाई करते हुए हम दोनों वही कुछ बोलेंगे जो व्हिस्की पीने के तुम और आलोक चुदाई करते हुए बोले थे”।

“रागिनी हंस दी और बोली, “मालिनी जी आइडिआ तो बढ़िया है, मजा आ जाएगा, मगर ऊपर से चोदने वाले मर्द का नाम भी तो होना चाहिए , जैसे संदीप या फिर आलोक”।

मैंने कहा, “संदीप नहीं रागिनी। संदीप से चुदाई करवाने का अभी मेरा कोइ इरादा नहीं, आलोक ही ठीक है”।

“रागिनी हंसते हुए बोली, “मालिनी जी मतलब आलोक से चुदाई करवाने का आपका इरादा है”?

“मैंने भी सोचा ये में क्या बोल गयी”।

“रागिनी बात को आगे ना बढ़ाते हुए कुछ सोचते हुए बोली, “मगर मालिनी जी उस दिन कुछ तो चुदाई का नशा था, कुछ शराब का भी असर था। नशे में मैं और आलोक कुछ ज्यादा ही मस्त हो गए थे। बिना शराब के इतना कुछ बोलना – कैसे बोलेंगे मालिनी जी”?

“रागिनी की बात सुन कर मैंने कुछ सोचा और बोली, “चलो इसका भी इलाज करती हूं मैं। मेरे यहां इस कमरे में ही व्हिस्की पडी है इम्पोर्टेड। ऐसा करते हैं दो-दो तीन-तीन पेग लगा लेते हैं”।

रागिनी बोली, “मालिनी जी नेकी और पूछ-पूछ? ये भी करके देख लेते हैं”।

“फिर रागिनी बोले, “मगर मालिनी जी मैं तो गाड़ी चला कर आयी हूं, दारू पी कर जाऊंगी कैसे”?

मैंने हंसते हुए कहा, “अरे हमने कौन सी बोतल चढ़ानी है। दो-दो पेग ही तो लगाने है। एक डेढ़ घंटा हमारी चुदाई वाली मस्ती चलेगी, तब तक दारू भी उतर जाएगी”।

“इसके बाद रागिनी ने मुझे अपने पास आने का इशारा करते हुए कहा, “चलो आलोक डालो गिलास में दारू और दो घूंट पी कर डालो मेरे फुद्दी में अपना लम्बा लंड, क्यों तरसा रहे हो। आज ऐसे रगड़-रगड़ कर चोदो आज जैसे रंडी को चोदते हैं। फाड़ ही दो आलोक मेरी गांड चोद-चोद कर”।

ये कह कर रागिनी हंस पड़ी। मेरी भी हंसी छूट गयी। मैंने शिवाज़ रीगल की बोतल निकाली और गिलास में एक-एक मोटा पेग डाल दिया और सोफे पर बैठ कर पीने लगीं”।

“पीते-पीते मैंने रागिनी की चूत में उंगली डाल दी और बोली, “क्या बात है रागिनी मेरी जान, तेरी चूत तो पानी से भरी पड़ी है। तगड़ी चुदाई करवाने का मन है क्या”?

रागिनी भी ये सुन कर मस्ती में आ गयी और बोली, “आलोक बड़े दिन हो गए ढंग से चुदी नहीं मेरी ये फुद्दी। आज तो आग लगी हुई है मेरी फुद्दी में। आज चोद-चोद कर झाग निकाल दो इसकी, ठंडी कर दो इसकी आग”।

“अपनी ऐसी बातों पर हम दोनों ही खुल कर हंस पड़ी”।

“इसके बाद मैंने लंड लगी हुई इलास्टिक वाली निक्कर पहन ली, और निक्कर के अंदर वाला लंड अपनी गांड में डाल लिया और रागिनी से कहा, “आजा मेरी चुदक्कड़ रागिनी खोल अपनी गुलाबी फुद्दी, आज सच में ही ऐसे रगड़-रगड़ कर चोदूंगा तुझे की तू भी याद रखेगी। ऐसे धक्के लगाऊंगा जैसे कुत्ता लगाता है कुतिया को – दीन दुनिया से बेखबर हो कर”।

“रागिनी चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगें ऊपर उठा कर लेट गयी, और मैंने रागिनी के ऊपर लेट कर उसकी चूत में लंड डाल कर दुनिया भर की छूट, फुद्दी, लंड, भोसड़ी, भोसड़ा, फुद्दी की झाग बोलते हुए खूब धक्के लगाए”।

“मुझे धक्के लगाते कोइ सात-आठ मिनट ही हुए होंगे की नीचे से रागिनी बोली, “जरा रुकना मालिनी जी – मेरा मतलब जरा रुकना आलोक”।

“मैंने कहा, “रागिनी, क्या हुआ मेरी रंडी? तेरी फुद्दी पानी छोड़ गयी क्या इतनी जल्दी, आठ मिनट की चुदाई भी नहीं झेल पायी तेरी फुद्दी। तू तो कहती थी आग लगी हुई हैं तेरी फुद्दी में। फिर अब क्या हुआ”?

“रागिनी बोली, “नहीं मेरे राजा, फुद्दी में तो अभी भी आग लगी हुई है। अब जरा पीछे से चुदाई कर। पीछे से लंड चूत में लेने का मन हो रहा है। चूत चोदते-चोदते चार झटके अपने इस मस्त लम्बे लंड के गांड में भी लगा देना”।

“मैं रागिनी की चूत में से लंड निकल कर खड़ी हो गयी। रागिनी उठी और बेड के किनारे पर चूतड़ पीछे करके उल्टा लेट गयी”।

रागिनी ने सर पीछे के तरफ घुमाया और बोली, “आजा आलोक दिखा दे तारे आज। पहले चूत की तसल्ली कर दे। फिर जैसे ही मेरी चूत पानी छोड़े, अपना ये लम्बा खूंटा मेरी गांड में डाल देना। आजा अब बस तरसा मत अपनी रागिनी को। और याद रखना रंडी कि तरह चोदना, रगड़े लगा लगा कर”।

“मैंने रागिनी को कमर से पकड़ा और निक्कर के साथ लगा हुआ लंड रागिनी की पानी से भरी हुई फुद्दी में डाल दिया। जैसे ही मैं लंड का धक्का लगाती थी, मेरी अपनी गांड में गया हुआ लंड भी गांड की अंदर की तरफ चला जाता था, और अजीब सा ही मजा देता था”।

रागिनी ने ठीक ही बोला था ,”कैसे-कैसे चुदाई के खिलौने बनाते हैं ये फैक्ट्रियों वाले मादरचोद भी”।

“चुदाई करते-करते हम आलोक और रागिनी बने हुए इतना कुछ 3बोल रही थी, कि हमे खुद भी पता था कि आखिर हम बोल क्या रही थी”।

“जब मैं पीछे से रागनी की चुदाई कर रही थी, तो रागिनी ने चूत रगड़ाई के साथ-साथ गांड में भी लंड लिया। रागिनी की गांड में लंड फिसलता हुआ अंदर तक चला गया”।

“रागिनी ने बताया ही था कि उसको गांड चुदवाने का भी शौक है और आलोक से अक्सर गांड चुदवाया करती है, लगातार की गांड चुदाई से रागिनी की गांड का छेद थोड़ा खुल चुका था”।

“मैं कभी रागिनी की गांड में और कभी चूत में लंड डाल कर जोर-जोर से धक्के लगा रही थी। उधर रागिनी भी खूब चूतड़ घुमा झटका रही थी”।

“एक बात तो थी, इस लंड से पीछे से चुदाई करने का ज्यादा मजा आ रहा था। कम से कम लंड अंदर-बाहर होता तो दिखाई दे रहा था। और पीछे गांड में गया हुआ लंड तो हर धक्के के साथ मजा दे ही रहा था”।

“असल में ऊपर लेट कर चोदने वाली औरत जब इस रबड़ के लंड को नीचे लेटी हुई औरत की चूत में डालती है, तो उसे लंड चूत के अंदर जाने का पता ही नहीं चलता। जबकि जब वही औरत दूसरी औरत को पीछे से चोद रही होती है। उसे लंड अंदर बाहर होता हुआ साफ़ दिखाई देता है, असली लंड की तरह”।

“खैर इस एक दूसरी की चुदाई करते हुए, दुनिया भर की चूत चुदाई फुद्दी भोसड़ी जैसी बातें बोलते-बोलते पता नहीं कितनी बार झड़ गये हम दोनों”।

“रागिनी तो नीचे लेटी हुई, और पीछे से मस्त चुदाई करवा रही थी। उसे तो पता नहीं कोई थकान हुई थी या नहीं हुई थी, मगर मैं जो आलोक बना हुआ आधे घंटे से उसकी चुदाई कर रहा था, धक्के लगाते लगाते मेरी कमर का बैंड बज चुका था”।

“आखिर मैंने रागिनी से कह ही दिया, “बस रागिनी अब और धक्के नहीं लग रहे। थक गया मैं। तेरी चूत ठंडी हुई या अभी भी गरम ही है”?

“रागिनी बोली, “आलोक चूत तो मेरी कब की पानी छोड़ कर ठंडी हो चुकी है, मगर तुम चोदना बंद ही नहीं कर रहे हो। तुम्हें मजा देने के चक्कर में चूतड़ घुमाते-घुमाते मेरी कमर भी दुखने लग गयी है”।

“मैंने रागिनी की गांड में से लंड निकाला और हम आस-पास ही लेट गयी”।

“रागिनी ही बोली, “मालिनी जी एक बात है, चुदाई में इस गंदी बकवास-बाजी का मजा तो बहुत आता है। मुझे तो बड़ा मजा आया”।

मैंने कहा, “सही बोल रही हो रागिनी। मुझे तो बातें सोच-सोच कर अभी भी मस्ती आ रही है”।

“मैंने लंड अपनी गांड में से निकाल कर निक्कर उतार ली और हम दोनों निढाल हो कर अगल-बगल ही लेट गयी”।

“थोड़ी देर के बाद हम दोनों उठी और बिना कपड़ों के ही सोफे पर जा कर बैठ गयी”।

“कुछ चुप रहने के बाद रागिनी बोली, “मालिनी जी मैंने तो आपसे वो आप जैसे खिलौने मंगवाने की बात करने वाली थी, मगर तो मुझे तो ये वाला भी बहुत बढ़िया मजा देने वाला लगा है”।

“जब आप संदीप से वो तीनों मंगवाएंगी तो साथ ही ये ऐसा वाला एक मंगवा देना मुझे। इससे तो सच में ही बड़ा मजा आता है। मैं प्रवीणा के साथ भी इस तरह की बातें बोलते-बोलते चुदाई करूंगी”।

“रागिनी बोल रही थी, “हस्पताल में कई भड़वे डाक्टर हैं जो हमे चोदते हुए यही कुछ बोलते रहते हैं। उन्हीं में से कोइ डाक्टर मैं बन जाऊंगी और प्रवीणा को चोदूंगी”।

“ये सब बोल कर रागिनी थोड़ा चुप हुई फिर बोली, “मलिनी जी आप मुझे संदीप का पता ही बता दीजिये, मैं ही जा कर ले लूंगी। बस आप एक फोन कर देना उसे। इसे बहाने में संदीप को देख भी लूंगी और अगर जम गया तो”।

“रागिनी ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी, मगर मैं समझ गयी चूत खोल कर लेटने वाली बात ही थी”।

“मैंने कहा, “रागिनी ये वाला तो तुम यही ले जाओ। मैंने दो क्या करने हैं। दूसरे खिलौनों के लिए मैं संदीप को फोन कर दूंगी, तुम मिल भी लेना और जांच-परख भी कर लेना। अगर चूत खोल कर उसके सामने लेटने का प्रोग्राम बन जाए, तो वो भी बना लेना”। ये कहते हुए में हंस दी।

“रागिनी भी हंसते हुए बोली, “अरे नहीं मालिनी जी वो तो मैं मजाक में कह रही थी। संदीप के शोरूम में कहां चुदाई-वुदाई का चक्कर चलेगा”।

“मैंने रागिनी के हाथ पर हाथ रख कर कहा, “ऐसी बात नहीं है रागिनी। जिस तरह संदीप यहां आ कर मेरी चूत की तरफ घूरता रहता है, मुझे तो पक्का चूत का पिस्सू लगता है”।

“रागिनी मेरी और देख रही थी”।

मैंने ही आगे कहा, “रागिनी एक बात बताओ, तुमने कभी घास काटने वाला घसियारा देखा है”?

“रागिनी हैरानी से मेरी तरफ देखते हुए हां में सर हिला दिया”।

“मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “उस घसियारे की कमर पर एक कपड़ा बंधा होता है जिसे कमरबंद कहते हैं। वो घसियारा उस कमरबंद में हर समय घास काटने वाला औजार रखता है। इस घास काटने वाले औजार को अंग्रेजी में सिकल, हिंदी में हंसिया या हंसली और पंजाबी में दरांती बोलते हैं। अब बताओ हर समय घास काटने का औजार कमरबंद में लटकाने की क्या जरूरत है”?

“रागिनी ने इस अंदाज में मेरी तरफ देखा जैसे कह रही हो आप ही बताईये”।

“मैंने ही अपनी बात पूरी की, “वो इसलिए हर समय हंसिया या हंसली अपने पास रखता है कि क्या पता कब और कहां घास मिल जाये और उसे घास कटनी पड़ जाये”।

रागिनी बोली, “मैं समझ गयी मालिनी जी। घसियारे की तरह संदीप ने भी चुदाई का कुछ ऐसा ही इंतजाम करके रखा हुआ होगा। क्या पता कब कोई लड़की चुदाई करवाने आ जाये”।

“मैंने ही फिर बात पूरी की। मैंने कहा, “बिल्कुल रागिनी ठीक पकड़ा है तुमने। रागिनी ये संदीप जैसे चुदाई के शौक़ीन लोग भी उस घसियारे की तरह अपना पूरा इंतजाम करके रखते हैं, क्या पता कब कोइ लड़की चूत खोल कर सामने लेट जाए और चुदाई करनी पड़ जाए”।

“मेरी इस बात पर रागिनी भी हंस दी”।

“फिर कुछ रुक कर मैंने रागिनी से कहा, “एक बात और रागिनी, “ये प्रवीणा के चक्कर में अलोक से चुदाई मत भूल जाना”।

“रागिनी बोली, “अरे मालिनी जी, ऐसा कैसे हो सकता है? बार-बार एक ही गलती नहीं होगी। वैसे भी आलोक आज-कल हर दूसरे तीसरे दिन मेरी चुदाई कर रहा है। कभी चूत रगड़ता है तो कभी गांड”।

“ये सेक्स टॉयज तो हस्पताल में दूसरी नर्सों के साथ मस्ती के लिए रहेंगे और ये निक्कर वाला खिलौना तो हस्पताल में ख़ास प्रवीणा के साथ मस्ती के लिए रहेगा”।

“रागिनी कि आलोक की गांड रगड़ने वाली बात सुन कर मेरी अपनी गांड में कुछ-कुछ हुआ और मैंने अपने चूतड़ सोफे पर इधर-उधर किये”।

“रागिनी ने भी मुझे सोफे पर चूतड़ हिलाते हुए देखा, मगर बोली कुछ नहीं ”।

“कुछ देर रागिनी बैठी रही। फिर हम दोनों उठी और कपड़े पहन कर आगे वाले क्लिनिक में आ गयी। मैंने मानसी के साथ हुई सारी बात रागिनी को बता दी सिवाए इसके कि मानसी और मैं भी चूत रगड़ाई के मजे ले चुके हैं और मानसी मुझे अच्छी लगने लगी है”।

“रागिनी को मैंने रजत के बारे में भी सारा कुछ बता दिया और ये भी बता दिया कि रजत के पापा आलोक को जानते हैं”।

रागिनी ये सुन कर बड़ी खुश हुई और बोली, ”अरे मालिनी जे ये तो बड़ी अच्छी बात है। रजत को तो मैं भी जानती हूं। CA कर रहा है। मानसी से दो साल आगे है”।

“अगर मानसी की मर्जी हुई तो CA पूरी होते ही उनकी शादी भी तय कर देंगे। फिर मानसी के पास अपने मन-पसंद का लंड होगा, मन-पसंद की चुदाई”।

“मैंने कहा, “रागिनी शादी ब्याह अभी दूर की बात है। इतना मत सोचो। आज कल के लड़के-लड़कियां जितनी जल्दी दोस्ती करते हैं उतनी जल्दी दोस्ती तोड़ भी देते हैं। बस आज का सोचो कि मानसी खुश रहे और अलोक से उसे चुदाई के जरूरत ना पड़े”।

“रागिनी कुछ सोचते हुए बोली, “ये बात तो आपकी सोलह आने सही है। मानसी को ही उसके भविष्य का फैसला लेने देते है”।

“रागिनी, थोड़ा मुस्कुरा कर बोली, “आलोक से चुदाई का फैसला भी तो उसी का था। अच्छा मालिनी जी अलोक को कब भेजूं आपके पास? उसे भी तो मानसी के साथ हुई बात-चीत बतानी होगी आपको”।

“ये बोलते हुई रागिनी ने अपनी चूत तो खुजाई ही, साथ ही खड़ी हो कर अपने चूतड़ों में से साड़ी निकालने वाला एक्शन भी कर दिया, और साथ ही हंस भी दी”।

मैंने हंस कर कहा, “रागिनी, तुम बड़ी शरारती हो। अच्छा ऐसा करना, आलोक को बोलना मुझे फोन करे, फिर देखते हैं कब का प्रोग्राम बनता है”।

रागिनी मेरे नजदीक आ कर बोली, जैसे बड़े राज की बात बताने जा रही हो, “मालिनी जी अलोक का लंड इस बार भी गांड में जरूर लेना। लम्बा लंड गांड में बड़ा मजा देता है”।

“अब मैंने रागिनी गाल पर हल्की चपत लगाई और बोली, “मुझे मालूम है। अच्छा रागिनी चल अब मैं फोन करके तेरे लंडों का जुगाड़ कर दूं”।

“मैंने रागिनी के सामने ही मोबाइल फोन उठा और शोरूम के मालिक संदीप सोलंकी को फोन मिला दिया, और फोन को स्पीकर पर डाल दिया, जिससे रागिनी भी पूरी बातें सुन सके”।

“मैंने फोन मिलाया और जैसे ही संदीप ने फोन उठा कर हेलो कहा, मैंने संदीप की उसकी आवाज पहचान कर कहा, “हेलो संदीप, मालिनी बोल रही हूं”।

“संदीप हंसते हुए बोला, “आज तो कमाल हो गया। अगर में कहीं दस करोड़ की लॉटरी निकलने की बात सोच रहा होता तो मेरी लॉटरी भी निकल जानी थी। मैडम मैं आपके बारे में ही सोच रहा था”।

“मैंने रागिनी की तरफ देखा, संदीप की बात से वो भी मुस्कुरा रही थी”।

“मैंने हंसते हुए कहा, “मेरे बारे में क्या सोच रहा था संदीप, कुछ ख़ास था क्या”?

संदीप बोला, “नहीं जी बस ऐसे ही, एक नए मॉडल वाला टॉय आया था सोचा आपको बता दूं। पहली आप बताईये आपने आज कैसे याद कर लिया”?

“नए मॉडल की बात सुन कर मेरे चूत में झुरझुरी सी हुई। कैसे ही मैंने अपनी चूत पर हाथ ऊपर-नीचे किया, रागिनी ने भी अपनी चूत को खुजलाया”।

“मैंने संदीप से कहा, “नए मॉडल के बारे में बताने से पहले मेरी बात सुन। वो खिलौनों वाला एक सेट चाहिए था, जैसा मेरे पास है”।

संदीप ने पूछा, “मैडम आपने अपने वाले बदलने हैं?

मैने कहा , मालिनी बोली, “अरे भई संदीप मुझे नहीं, ये मेरी एक मित्र को चाहिये”।

संदीप बोला, “जी अच्छा, ये बताईये कौन से वाले चाहिये। आपके पास तो तीन हैं वो छोटा वाला चूसने वाला, आगे डालने वाला और आगे और पीछे दोनों में डालने वाला”।

मैंने कहा, “हां संदीप वही तीन का सेट। ऊपर वाला, आगे वाला और आगे-पीछे दोनों में जाने वाला, जो तू बता रहा है”।

उस तरफ फिर संदीप ने पूछा, “और साइज़ कौन सा मैडम”?

जिस पर मैंने बोली, “एक मिनट रुक बताती हूं”।

“मैंने फोन को अपने से दूर किया और धीमी आवाज में रागिनी से पूछा, “रागिनी किस साइज के चाहिए। मतलब कितने मोटे और लम्बे”।

रागिनी बोली, “वही मालिनी जो अपने पास है, मोटे वाला। बढ़िया फिट होता है चूत में। वैसे भी मालिनी जी लम्बा लंड तो मेरे पास पहले से ही है, आलोक का”।

“मैंने फिर फोन पर बोली, “वही संदीप जो पिछली से पिछली बार लिए थे दो इंच और साढ़े सात इंच वाले। अब बता क्या नया मॉडल आया है”?

“संदीप बोला, “मैडम इसकी खासियत ये है कि एक तो इसके आगे वाले हिस्से की गोलाई पीछे वाले हिस्से से थोड़ी बड़ी है और इस पर छोटे-छोटे दानों के साथ-साथ ऊपर की सतह पर बारीक सी झिल्ली अलग से लगी हुई है जो थोड़ा सा आगे-पीछे भी होती है”।

“संदीप बोलता जा रहा था, “इसके ऊपर छोटे-छोटे दाने हैं। ये कुछ-कुछ वैसा ही है जैसा मैंने आपको कुछ दिन पहले दिया था। मगर ऊपर झिल्ली लगी हुई है। इसे आगे डालो या पीछे डालो, ये झिल्ली अलग से रगड़े लगाती है। साइज तो शायद इसका वही है मगर आगे का हिस्सा अलग से बड़ा होने के कारण देखने में पहले वालों से कुछ बड़ा लगता है”।

“फिर संदीप कुछ रुक कर बोला, “बड़ी अच्छी रिपोर्ट है मैडम इसकी। मेरे तो लगभग सारे ग्राहक अपने पुराने डिज़ाइन वाले के बदले ये नया वाला ले रहे हैं। मजा आ जाएगा आपको”।

“संदीप उन सेक्स टॉयज कि बात कर रहा था जो मैंने मानसी के लिए मंगवाए थे। आगे के हिस्सा बड़ा होने से संदीप का मतलब था कि लंड के सुपाड़े की गोलाई लंड से बड़ी थी, और उसके ऊपर असली लंड की तरह की झिल्ली थी जो आगे-पीछे भी होती थी, और जब लंड को आगे-पीछे करते थे तो ये झिल्ली चूत में अलग से रगड़ा लगाती थी”।

“संदीप की इस बात पर मैंने ने कहा, “ऐसी बात है क्या? तमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया”?

“संदीप ने कहा, “मैडम इसी लिए तो मैं आपको याद कर रहा था। मैडम आप तो मेरे लिए बहुत ख़ास हैं, जब तक मेरे ग्राहकों के तरफ से किसी खिलौने की पूरी ठीक-ठाक रिपोर्ट ना आ जाये तब तक मैं आपको खिलौना नहीं देता। मैंने बोला ही मैडम आप मेरी लिए बहुत ख़ास है”।

“फिर संदीप थोड़ा रुक कर मुझसे पूछता हुआ बोला, “वर्ना मैडम आप ही बताईये, कभी ऐसा हो सकता है कि ऐसे मजे लेने वाली कोइ नई चीज आये और आप तक ना पहुंचे”?

“फोन तो स्पीकर पर था ही। संदीप के बातें सुन-सुन कर रागिनी हंस भी रही थी, और अपनी चूत भी खुजलाती जा रही थी। हालत तो मेरे भी कुछ ऐसी ही थी। सामने बैठा संदीप तो फिर भी साफ़ बात करते हुए हिचकिचाता था, मगर फोन पर तो कुछ ज्यादा ही साफ़ बोल रहा था”।

मैंने संदीप से कहा, “ठीक है ठीक है संदीप, अब ज्यादा चमचागिरी मत कर और मेरी बात सुन। मेरी दोस्त – रागिनी नाम है उसका – रागिनी मेरी बिल्कुल वैसी ही खास है जैसी ख़ास तू मुझे बता रहा है। जरा बढ़िया से बात-वात करना”।

“ये कहते हुए मैं हंस दी और कहा, “तो ठीक है संदीप रागिनी को एक सेट तीन टॉयज वाला दे देना, इस नए वाले मॉडल के साथ। और एक नया वाले मॉडल वाला मुझे भी दे देना”।

उधर से फिर संदीप बोला, “ठीक है मैडम वो आपके क्लिनिक में ले आऊंगा। मैडम कब आएगी आपकी खासम-खास मित्र”?

“मैंने कहा, “मैं उसे बोल दूंगी। वो आने से पहले तुझे फोन कर लेगी”।

“मैं कभी संदीप के शोरूम में नहीं गयी थी, इसलिए मुझे पता नही था कि संदीप कहां बैठता है। इसलिए मैंने संदीप से पूछा, “संदीप तुम कहां मिलोगे शोरूम में या तुम्हारा अलग से ऑफिस है”?

“संदीप ने हंसते हुए कहां, “मैडम शोरूम में तो दिन में दो-तीन बार ही जाता हूं। अपने बैठने और बाकी के कामों के लिए बढ़िया ऑफिस प्राइवेट ऑफिस बनवाया हुआ है। सब कुछ वहीं से कंट्रोल करता हूं। ऑफिस में हर तरह की सुविधाएं हैं मैडम कोइ कमी नहीं है। ख़ास मेहमानों से तो मैं अपने ऑफिस में मिलता हूं। आप भी कभी दर्शन दीजिये”।

“मैंने संदीप की इस बात का जवाब ना देते हुए कहा, “तो ठीक है संदीप, तुझे फ़ोन करके मेरी फ्रेंड तुम्हारे ऑफिस वो तीनों खिलौने लेने आ जाएगी। फिर से बोल रही हूं मेरी ख़ास मित्र है, जरा ख्याल रखना। और वो मेरे वाला यही क्लिनिक में ले आना”।

संदीप बोला, “अरे मैडम कल ही मैं खुद लेकर आऊंगा”। इतना बोल कर संदीप ने फोन काट दिया।

मैंने सोचा, साला अब आएगा और मेरी चूत को घूरता रहेगा”।

“मैं सोच रही थी अगर ऐसे ही खिलौने बदलते रहे और संदीप आता रहा तो लगता है इसका लंड भी ले कर देखना ही पड़ेगा”।

“फोन बंद करके मैंने रागिनी से कहा, “रागिनी तुमने सारी बातें सुन ली। अब जब टाइम हो फोन करके संदीप के ऑफिस चली जाना”।

“फिर मैंने रागिनी का हाथ पकड़ कर कहा, “और रागिनी अगर संदीप के साथ मीटिंग बढ़िया रहे तो चूत खोल कर लेट जाना”।

“ये कह कर मैं हंस दी, मगर रागिनी थोड़ा सा शर्मा गयी, और बोली, “मालिनी जी मैं तो मजाक कर रही थी”। इसके साथ ही रागिनी ने अपनी चूत एक बार और खुजला दी”।

“रागिनी को मैंने पहली बार शर्माते हुए देखा था”।

“फिर मैंने, रागिनी की टांग पर हाथ मारते हुए कहां, “और अगर संदीप के साथ चुदाई हो जाये तो मुझे भी बताना, कुछ ख़ास है क्या उसकी चुदाई में? अगर कुछ ख़ास हुआ तो मैं भी चूत खोल कर उसके सामने लेट जाऊंगी”।

“मैंने एक कागज़ पर पता लिख कर देते हुए कहा, “तुमने सारी बातें तो सुन ही लीं हैं। सीधा संदीप के ऑफिस में जाना”।

“रागिनी हंसती हुई बोली,”मालिनी जी, देखते हैं संदीप कैसे पटाता है मुझे, कितना शौक़ीन है चुदाई का”।

“मैंने भी हंसते हुए कहा, “चुदाई का शौक़ीन तो लगता ही है। मुझे हमेशा ये रबड़ के लंड देने खुद आता है जबकि शोरूम में कम से कम पंद्रह काम करने वाले हैं। यहां आता है तो मेरी चूत जरूर घूरता है”।

“रागिनी उठते हुए बोले, “मालिनी जी आपका धन्यवाद। अगर मुझे इस नए लंड को इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत हुई तो आपके पास आऊंगी”।

“फिर मैंने रागिनी की टांग पर हाथ मार कर कहा, “तुम संदीप से लंड तो ले लो फिर जो भी तुम्हारी अगली छुट्टी आये, लेकर यहां मेरे पास आ जाना। एक बार और वही नए वाला लेकर मजे करेंगे”। ये कहते मैंने रागिनी की चूचियां दबा दी।

“रागिनी उठते हुए बोले, “मालिनी जी आपका धन्यवाद। अगर मुझे रबड़ के इस नए लंड को इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत हुई तो आपके पास आऊंगी”।

“फिर मैंने रागिनी की टांग पर हाथ मार कर कहा, “तुम संदीप के शोरूम से लंड तो लेलो, फिर जो भी तुम्हारी अगली छुट्टी आये तो वो लंड लेकर यहां मेरे पास आ जाना। एक बार उसी नए वाले से मजे करेंगे”। ये कहते मैंने रागिनी की चूचियां दबा दी।

“रागिनी उठते हुए बोली, “मालिनी जी आपको चूमने का मन कर रहा है”।

“मैंने कहा, “तो आ जाओ लेलो मेरा चुम्मा, सोच क्या रही हो”?

“रागिनी खड़ी हुई और मेरे होंठ अपने होठों में लेकर चूसने लगी। मैंने अपना मुंह थोड़ा सा खोल दिया”।

“रागिनी ने अपने जुबान मेरे मुंह में सरका दी। मैं रागिनी की जुबान चूसने लगी। इधर ये चुम्मा चाटी चल रही थी। उधर हम दोनों एक-दूसरी की चूतड़ सहला रही थी”।

“जल्दी ही दोनों की चूतें फिर गरम हो गयी। अब एक और चूत चुसाई के अलावा कोइ चारा नहीं था। हम दोनों की एक और चूत चुसाई और गांड में ऊंगली-बाजी में हमें आधा घंटा लग गया। चूत का पानी छुड़ाने के बाद फिर हम दोनों क्लिनिक में आ गए”।

“रागिनी बोली, “तो अब चलती ही हूं मालिनी जी। बहुत मस्ती रही आपके साथ। आलोक को बोलूंगी आपको फोन कर ले। इस बीच संदीप से बात करके अपने चुदाई के जुगाड़ भी ले आऊंगी और अगले हफ्ते की आने वाले छुट्टी पर यहां आ कर आपके सामने ट्राई कर लूंगी” I

“रागिनी जाने लगी तो मैंने रागिनी की टेप उसे पकड़ाते हुए कहा, “रागिनी ये लो तुम्हारी बताई बातों की टेप। अब इसका यहां कोइ काम नहीं। और हां इसे रखना मत, तोड़ मरोड़ कर फेंक देना। आलोक और मानसी की टेप भी मैं उनको दे दूंगी”।

“फिर मैंने रागिनी से कहा, “रागिनी परेशानी तो नहीं आएगी गाड़ी चलाने में? व्हिस्की तो अब एक उतर चुकी होगी”।

“रागिनी टेप पकड़ते हुए बोली, “नहीं मालिनी जी, नशा तो कब का खत्म हो गया”।

“रागिनी जाते जाते रुकी और बोली, “मालिनी जी बाकी सब बातें जो हैं, जैसी हैं, मगर आपका ये एहसान जिंदगी भर याद रखूंगी कि बाप बेटी में चुदाई के रिश्ते अब खत्म हो गए हैं। सच में ही ये आपकी बात करने के तरीके का ही करिश्मा है। मैं कैसे आपके इस एहसान का बदला चुकाऊंगी”।

“मैंने हंसते हुए कहा, “अरे रागिनी भूल गयी क्या? अगली छुट्टी में आ तो रही हो, मेरे इस एहसान का बदला चुकाने”।

“रागिनी भी हंसी और चली गयी। मैं भी बाथरूम चली गयी अपनी चूत की धुलाई करने। बड़ा पानी छोड़ रखा था चूत ने”।

“अगले ही दिन सुबह ग्यारह बजे ही संदीप आ गया, और वही चक्कर शुरू हो गया। बातें करते-करते मेरी चूत को घूरता जा रहा था और साथ-साथ अपना लंड भी सहलाता जा रहा था”।

“जिस तरह संदीप ने पिछली बार निक्कर वाला खिलौना बॉक्स में से निकल कर मुझे दिखाया था, इस बार भी संदीप ने बॉक्स खोल कर लंड निकाल लिया, और मुझे लंड के ऊपर की झिल्ली आगे-पीछे करके दिखाने लगा”।

“जिस तरह मुझे देखते हुए संदीप लंड के ऊपर की झिल्ली आगे-पीछे कर रहा था, मेरी जगह कोई और होती तो अब तक चूत खोल कर लेट चुकी होती”।

“उसी वक़्त मैंने फैसला कर लिया कि अगर रागिनी की संदीप के साथ चुदाई हो गयी और संदीप की चुदाई में जरा सी भी कुछ अलग वाली बात हुई, तो कुछ ही दिनों में मैं भी संदीप से चुदाई करवा ही लूंगी। अब ऐसी भी मैंने कसम नहीं खाई हुई थी कि कानपुर वाले मर्दों से चुदाई नहीं करवानी”।

“अब जिस आलोक के साथ मेरी चुदाई हो रही थी वो ही कौन सा लखनऊ या इलाहाबाद का था, वो भी तो कानपुर का ही था”।

“जितनी देर भी संदीप मेरे क्लिनिक में बैठा मेरी चूत की तरफ देखता और अपना लंड खुजलाता रहा”।

“संदीप को गए अभी आधा घंटा भी नहीं हुआ होगा कि रागिनी का फोन आ गया। रगिनी की संदीप से बात हो गयी थी, और और रागिनी ने मुझे यही बताने के लिए फोन किया था कि संदीप के शोरूम में चुदाई वाले टॉयज़ लेने जा रही है”।

रागिनी कि बात सुन कर मैंने कहा, “रागिनी, संदीप तो आधा घंटा पहले ही यहां से गया है। वो झिल्ली वाला लंड देने आया था। मेरे सामने ही लंड बॉक्स में से निकल कर ऊपर लगी झिल्ली को बड़ी ही बेशर्मी के साथ आगे-पीछे कर रहा था, और साथ मेरी चूत को भी घूरता जा रहा था”।

रागिनी हंसते हुए बोली, “आपका दीवाना लगता है मालिनी जी। मैं तो कहती हूं एक बार चुदवा ही लो उससे भी”।

मैंने भी हंसते हुए बोल दिया, “पहले तुम तो ले लो उसका लंड चूत में, फिर मुझे बताना कैसी चुदाई करता है”।

रागिनी ने हंसते हुए कहा, “ठीक है मालिनी जी रखती हूं। आलोक शायद परसों आएगा आपके पास। कल किसी क्लाएंट के पास जा रहा है। आने से पहले फोन करेगा। याद रखना मालिनी जी, आलोक का लंड लम्बा बहुत है। गांड चुदाई के लिए एक-दम मस्त”।

“अब मैं क्या कहती कि मैं आलोक का लंड देख भी चुकी हूं, चूस भी चुकी हूं, और चूत में डलवा भी चुकी हूं”।

“शाम सात बजे मैं ऊपर अपने कमरे मैं बैठी वाइन पी रही थी, साथ ही टीवी चल रहा था। तभी रागिनी का फोन आ गया”।

“रागिनी बोली, “मालिनी जी, ले आयी मैं खिलौने संदीप से”।

“मैंने पूछा, “अच्छा और? आगे”?

“रागिनी ने चहकते हुए कहा, “और आगे ये कि संदीप एक नंबर का मादरचोद और हरामी है”?

“मैंने पूछा, “क्या हुआ रागिनी, ऐसा क्यों कह रही हो – कुछ बदतमीजी की क्या संदीप ने”?

“इस बार रागिनी ने कुछ हंसते हुए कहा, “बदतमीजी तो ये की, कि पहले तो सारे खिलौने निकाल मुझे दिखाए और कौन सा खिलौना कैसे काम करेगा ये बताया। फिर जैसे उसने आपको उस वाले लंड कि ऊपर लगी झिल्ली आगे-पीछे करके दिखाई थी, ऐसे ही मुझे भी आगे-पीछे करके दिखाई। लंड दिखाते-दिखाते अपना लंड भी पेंट में इधर-उधर कर रहा था”।

“यह बता कर रागिनी थोड़ी चुप हुई तो मैंने पूछा, “फिर क्या हुआ रागिनी? तुम चूत खोल कर उसके आगे लेटी कि नहीं”?

“रागिनी बोली, “उसकी तो नौबत ही नहीं आयी मालिनी जी। ये रबड़ का लंड देखते-देखते मेरी चूत तो गीली हो ही चुकी थी। संदीप को लंड इधर-उधर करते देख मैंने भी चूत पर हाथ फेरा”।

“बस फिर क्या था। संदीप ने तो कमाल ही कर दिया। इससे पहले कि मैं कुछ सोचती या करती, संदीप ने अपना लंड पेंट से निकाला और सीधा मेरे सामने आ कर लंड मेरे मुंह में डाल दिया। मैं तो एक बार हैरान ही रह गयी, कि ये क्या हो रहा है”।

मेरे मुंह से बस इतना ही निकला “अरे”?

रागिनी ने कहा, “अब आगे सुनिए। संदीप का लंड लम्बाई में तो आलोक के लंड से बहुत छोटा है मगर मोटाई में डेढ़ गुना होगी। इतना मोटा लंड मैंने पहली बार देखा था। लंड के नीचे लटक रहे टट्टे भी कुछ ज्यादा ही बड़े थे। मेरा तो मुंह ही उसके लंड से भर गया। जल्दी ही मेरी चूत भी गरम हो गयी। मेरा मन संदीप का मोटा लंड चूत में लेने का होने लगा”।

“रागिनी कि बातों से मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी। इतना मोटा लंड है संदीप का? मैंने पूछा, “रागिनी फिर क्या हुआ? चुदाई हुई”?

“रागिनी बोली, “चुदाई नहीं मालिनी जी रगड़ाई हुई”।

“औरतें जब बोलें की चूत कि रगड़ाई हुई, तो इसका मतलब एक ही होता है कि मस्त चुदाई हुई है”।

“मैंने रागिनी से पूछा, “रागिनी अगर इतनी मस्त चुदाई की है संदीप ने तुम्हारी तो फिर तुम उसे एक नंबर का मादरचोद हरामी क्यों बोल रही थी”?

रागिनी बोली, “मालनी जी आगे तो सुनिये। संदीप का लंड चूसते-चूसते मेरी चूत गरम हो गयी तो मैंने लंड मुंह में से निकाल कर संदीप की तरफ देखा। वो समझ गया कि अब मेरा चुदवाने का मन था। उसने मुझे सोफे पर से खड़ा किया और मेरे कपड़े उतार दिए और साथ ही खुद भी नंगा हो गया”।

“मालिनी जी रीछ है आपका ये संदीप। पूरा जिस्म बालों से भरा हुआ है। सुना तो था कि ऐसे मर्द बहुत सेक्सी होते हैं और मस्त चुदाई करते हैं। और जब संदीप ने मेरी चुदाई की, तो ये सुनी सुनाई बात सच ही साबित हो गयी”।

“संदीप मुझे कोने लगे सिंगल बेड की तरफ ले गया। मैं समझ गयी कि अब चुदाई होने वाली है। मैंने सोचा संदीप मुझे बेड पर लिटा कर चूतड़ों की नीचे तकिया लगा कर चुदाई करेगा। मैं बेड पर लेटने ही वाली थी कि मगर संदीप ने मुझे घुमा दिया और झुका कर बेड के किनारे पर उल्टा लेटने का इशारा किया”।

“मतलब संदीप पीछे से मेरी चुदाई करने वाला था। वैसे तो पूरा लंड पीछे सी पूरा चूत में बैठता है। और मालिनी जी संदीप का लंड तो वैसे भी ज्यादा लम्बा नहीं है जैसा आलोक का है”।

“रागिनी इतनी बारीकी से अपनी चुदाई की कहानी बता रही थी कि मुझे लगा आज सोने से पहले रबड़ का लंड चूत में लेना ही पड़ेगा”।

“मैंने उत्सुकता से रागिनी से पूछा, “फिर रागिनी”?

“रागिनी बोली, “फिर मालिनी जी मैं चूतड़ पीछे करके उल्टा लेट गयी और संदीप कि लंड का इन्तजार करने लगी। मेरी चूत पानी से भरी पड़ी थी। तभी मालिनी जे संदीप ने एक अजीब सी हरकत की”।

“मुझे समझ नहीं आया कि पीछे चुदाई कि लिए तैयार खड़े संदीप ने ऐसा भी क्या किया होगा, जिसे रागिनी अजीब सी हरकत बता रही है। मैंने रागिनी से ही पूछा, “अजीब सी हरकत, मतलब”?

“रागिनी बोली, “मालिनी जी संदीप ने बेड कि बगल में रखी अलमारी में से छोटा तौलिया निकला और मेरी चूत चौड़ी करके अंदर का पानी पोंछने लगा। मैंने सोचा कि संदीप चूत चूसना चाहता होगा, इसलिए चूत साफ़ कर रहा है”।

मैंने रागिनी की बात पूरी होने से पहले ही कहा, “इसमें तो कोइ बड़ी बात नहीं रागिनी। कई लोगो को वहम होता है कि चूत के पानी में पेशाब भी मिला होता है। इस लिए चूत चूसने से पहले वो चूत साफ़ करते हैं। उन्हें खाली चूत चूसनी होती, चूत का पानी नहीं चाटना होता। कई लोगों को चूत के पानी कि खुशबू और इसका नमकीन स्वाद ही अच्छा लगता है। ये तो अपने अपने टेस्ट और आदत की बात होती है”।

रागिनी बोली, “मैंने भी तो यही सोचा था मालिनी जी कि हो सकता है संदीप चूत चूसना चाहता हो, इसलिए चूत का पानी साफ़ कर रहा है। मगर असल बात कुछ और थी मालिनी जी”।

“रागिनी कि बातें मेरी उत्सुकता बढ़ाती जा रही थी”।

“मालिनी कि संदीप ने कम से कम पांच मिनट मेरी चूत साफ की, यहां तक कि मेरी चूत तौलिये से पोंछ-पोंछ कर बिल्कुल सुखा दी। मैं तो बस संदीप की लंड इंतजार करते-करते यही सोचती जा रही थी, कि ये भड़वा कर क्या रहा है, चुदाई क्यों नहीं कर रहा”।

“तभी संदीप ने लंड मेरी सूखी चूत पर रखा और इससे पहले की मुझे कुछ समझ आता, संदीप ने मेरी कमर को पकड़ कर एक जोर का झटका लगाया और पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। मालिनी जी मेरी चूत में जलन सी हुई और मेरी चीख निकल गयी”।

“रागिनी कि बातें सुन कर मेरे मुंह से बस इतना ही निकला, “कमाल है”?

“रागिनी बोले, “कमाल ही था मालिनी जी, इसके बाद संदीप ने मुझे जो चोदना शुरू किया कि फिर वो नहीं रुका। चुदाई करते करते बस यही बोलता जा रहा था, आआआह मजा आ गया, आआआह मजा आ गया। कुछ ही धक्कों कि बाद मुझे भी मजा आने लगा। उधर संदीप था कि जोर-जोर से धक्के लगा रहा था”।

“संदीप के धक्के इतने जोरदार थे कि बड़े-बड़े टट्टे मेरी चूत पर टकराते हुए ठप्प-ठप्प कि आवाजें कर रहे थे”।

“मोटे लंड की चुदाई में मुझे मजा भी बहुत आ रहा था। मालिनी जी संदीप से चुदाई के दौरान मेरी चूत का पानी एक बार छूटा, फिर दूसरी बार छूटा। मगर संदीप था कि रुक ही नहीं रहा था। मजे कि मारे मैं भी चूतड़ आगे-पीछे कर रही थी। आधे घंटे की चुदाई के बाद जब मेरी चूत का तीसरी बार पानी छूटा, तो संदीप रुक गया”।

“मैंने सोच ही रही थी कि संदीप ने लंड का पानी अंदर क्यों नहीं छुड़ाया, कि संदीप ने मुझे उठा कर बिठा दिया, और लंड फिर से मेरे मुंह में डाल कर आआह मजा आ गया, आआह मजा आ गया बोलने लगा”।

“दस मिनट मैंने और संदीप का लंड चूसा। तब कहीं जा कर संदीप के लंड का पानी निकला। साले का लंड पानी भी इतना छोड़ता है कि मालिनी जी क्या बताऊं? मैं तो अब तक यही सोची थी कि आलोक का लंड ही इतना पानी छोड़ता है। ये संदीप का लंड उससे भी दो कदम आगे है”।

“बस मालिनी जी संदीप लंड का पानी मेरे मुंह में निकल कर बस इतना ही बोला, आज तो मजा ही आ गया रागिनी जी”। और इतना बोल कर अपने कपड़े उठा कर संदीप ऑफिस कि साथ लगे बाथरूम में चला गया”।

“जब मेरा मजा थोड़ा कम हुआ तो मुझे अपने चूत में हल्का-हल्का सा दर्द महसूस हुआ जैसा जवानी कि दिनों में पहली चुदाईयों कि बाद हुआ करता था। मैंने चूत पर हाथ लगाया तो मुझे चूत कि फांकें थोड़ी फूली-फूली सी लगी”।

“दस मिनट बाथरूम में लगा कर संदीप तैयार होकर आया और मुझसे बोला, “जाईये रागिनी जी आप भी फ्रेश हो जाईये”।

“मैं भी अपने कपड़े उठा कर बाथरूम में चली गयी। पेशाब करने बैठी तो चूत में हल्की सी जलन भी हुई। मुझे लगा आलोक से तीन-चार दिन चुदाई से दूर रहना पड़ेगा”।

“तैयार हो कर बाहर आयी तो मेज पर कॉफी रखी थी। चुदाई वाले खिलौने वापस बॉक्स में बंद थे। मैं चुप-चाप कॉफी पीने लगी। कॉफी पी कर मैंने पर्स खोला और संदीप से पूछा, “संदीप जी कितना हुआ। कितनी पेमेंट हुई”?

“संदीप बोला, “रागिनी जी आप मालिनी जी कि ख़ास हैं और मालिनी जी मेरे लिए ख़ास हैं। इन्हें आप मेरी तरफ से तोहफे समझ कर रख लीजिये”। और फिर भोसड़ी का बड़ी ही बेशर्मी कि साथ बोला, “वैसे भी रागिनी जी पेमेंट तो आप कर ही चुकी हैं वो भी एक-दम फर्स्ट क्लास”।

“संदीप ने उन खिलौनों कि बदले में एक पैसा भी नहीं लिया”।

“फिर रागिनी बोली, “सच कहूं मालिनी जी चुदाई में तो मुझे बड़ा मजा आया था। याद नहीं आता कभी ऐसे सूखी चूत की रगड़ाई हुई हो। मगर संदीप की इस बात से मुझे एक बात तो समझ में आ गयी कि संदीप आपको चोदने के लिए बहुत उतावला है, मरा जा रहा है आपको चोदने कि लिए”।

रागिनी की बात पर मैंने कहा, “अगर ऐसा है रागिनी तो फिर ऐसी चुदाई तो एक बार मैं भी करवा कर देखूंगी”।

फिर मैंने रागिनी से पूछा, “रागिनी कुछ और भी कहा संदीप ने”?

“रागिनी बोली, “बस इतना ही कहा, रागिनी जी आपका मोबाइल नंबर तो मेरे पास आ ही गया है। जब भी कोइ नया ऐसा खिलौना आएगा आपको फोन कर दूंगा”।

“मैं बॉक्स उठा कर चलने लगी तो संदीप बोला, “रागिनी जी खिलौनों को छोड़िये, वैसे ही मिलती रहिये। आप से मिल कर बहुत अच्छा लगा और मजा भी बहुत आया”।

“मालिनी जी चुदाई तो मेरी संदीप कर ही चुका था, मगर संदीप की ये बात सुन कर मुझे शर्म सी आ गयी”।

“इतनी बातें बता कर रागिनी ने फोन बंद कर दिया और मैं उठी और अलमारी में C की शक्ल वाला खिलौना और जैल की टयूब उठा लाई”।

“एक तो रागिनी और संदीप कि चुदाई सुन अब चूत का पानी छुड़ाए बिना नींद नहीं आने वाली थी, दूसरा अब संदीप का मोटा लंड भी चूत में लिए बिना चैन नहीं पड़ने वाला था”।

“गांड और चूत में C की शक्ल वाला खिलौना लेकर जब मैं लेटी तो मेरे सामने संदीप का मोटा लंड ही घूम रहा था। क्या मुझे भी संदीप ऐसे ही रगड़-रगड़ कर चोदेगा”?

“आधा घंटा ऐसे ही लेटने के बाद जब मुझे मजा आ गया तो मैंने खिलौना चूत और गांड में से निकाल लिया और सो गयी”।

“सुबह नींद भी देर से खुली। प्रभा चाय ले कर आयी तब आठ बज चुके थे। चाय पी कर मैं बाथरूम जा कर फ्रेश हुई और तैयार हो कर नीचे क्लिनिक में पहुंच गयी”।

“दस बजे के करीब संदीप का फोन आया। नमस्ते-नमस्ते के बाद संदीप सीधा मुद्दे पर आ गया। संदीप बोला, “मैडम आपकी ख़ास फ्रेंड रागिनी जी आयी थी, खिलौने मैंने उन्हें दे दिए थे। मैडम बहुत अच्छी हैं आपकी ख़ास फ्रेंड”।

“संदीप ‘ख़ास’ पर कुछ ज्यादा ही जोर दे रहा था”।

“मैंने संदीप से कहा, “संदीप तुमने रागिनी से खिलौनों की पेमेंट क्यों नहीं ली”?

“संदीप बोला, “मैडम पेमेंट तो पूरी करके गयी थी रागिनी जी”।

“मैंने कहा, “संदीप मगर रागिनी तो कह रही थी तुमने खिलौनों के बदले में एक पैसा भी नहीं लिया”।

“संदीप जैसे बड़ी ही राज भरे अंदाज में बोला, “मैडम अब पेमेंट सिर्फ पैसों से ही तो नहीं होती। रागिनी जी पूरी पेमेंट करके गयी हैं”।

“मैं समझ गयी कि संदीप का क्या मतलब था। रागिनी की चूत की सूखी रगड़ाई ही उसकी पेमेंट थी। उस वक़्त मुझे सच में ही संदीप मादरचोद और हरामी ही लगा, जैसा कि रागिनी ने कहा था”।

“कुछ रुक कर संदीप बोला, “मैडम आप भी तो आ कर कभी मेरे ऑफिस को पवित्र करिये”।

“तब तक संदीप की बातें सुन-सुन कर मेरी चूत गीली होने लग गयी थी। मुझे लग रहा था जैसे संदीप तौलिये से मेरी चूत का पानी साफ़ करके मेरे चूत की रगड़ाई की तैयारी कर रहा था”।

“वैसे भी रागिनी की संदीप के साथ चुदाई की कहानी सुन कर अब मैं भी ज्यादा देर इंतजार करने के मूड में नहीं थी। कानपूर के मर्दों से चुदाई ना करवाने का मन ही तो बनाया था, कोइ कसम तो नहीं उठाई थी। और फिर वही बात – आलोक ही कौन सा लखनऊ या इलाहाबद का था। वो भी तो कानपुर का ही था”।

“मैने संदीप से बोल ही दिया, “ठीक है संदीप, आती हूं किसी दिन”।

“मेरा इतना बोलने की देर थी कि संदीप चहक कर बोला, “वाह मैडम आज तो आपने दिल खुश कर दिया। मैडम जल्दी बनाईये प्रोग्राम”।

“मुझे लगा संदीप का मोटा लंड मेरे मुंह में है और मेरे मुंह से आवाज नहीं निकल रही। मैंने बस इतना ही कहा, “ठीक है संदीप”। और मैंने फोन काट दिया।

“क्लिनिक में बैठी मैं संदीप के बारे में ही सोच रही थी। जिस तरह से संदीप ने रागिनी कि चूत का पानी तौलिये से सुखा कर चूत की रगड़ाई की थी, और चोद-चोद कर रागिनी कि चूत फुला दी थी, ये अपने आप में अजीब और कमाल ही था”।

“इस तरह से भी चुदाई होती है, ये मैंने पहली बार सुना था”।

“कैसे-कैसे शौंक पालते हैं लोग”।

“मैं तो अब यही सोच रही थी कि बेकार ही इतने दिन चूत खोल कर संदीप के आगे नहीं लेटी। मैंने अपनी चूत को हाथ लगाया और सोचा, क्या ये भी संदीप से चुदाई के बाद वैसे ही फूल जाएगी, जैसे रागिनी की चूत फूल गई थी”?

“फिर मैंने यही सोचा – कोइ बात नहीं जो अब तक नहीं हुआ वो अब हो जाएगा। इसी को तो कहते हैं – देर आये दुरुस्त आये”।

“इन्हीं ख्यालों में दोपहर हो गयी। खाना खाने मैं ऊपर चली गयी, तभी आलोक का फोन आ गया”।

“आलोक के साथ अब आख़री मीटिंग होनी थी, बस ये जानने के लिए कि मानसी ने अब तो आलोक को चुदाई के लिए नहीं उकसाया, और मानसी का आलोक प्रति अब क्या रवैया है”?

“लेकिन ये तो थी मेरे पेशे से सम्बन्धित बातें थी। इसके अलावा आज मेरा आलोक के साथ ‘कुछ और’ भी होने वाला था”।

“मैं इस आखरी मुलाक़ात को यादगार मुलाक़ात भी बनाना चाहती थी”।

“आलोक ने फोन पर कहा, “नमस्ते मालिनी जी”।

“नमस्ते का जवाब देकर मैंने कहा, “नमस्ते आलोक, कैसे हो और मानसी कैसी है”?

“आलोक बोला, “ठीक ही लग रही है मालिनी जी। बस उसी सिलसिले में बात करनी है कि अब आगे क्या और कैसे करना है, जिससे मेरे और उसके बीच ये सब चुदाई-वुदाई वाला चक्कर अब कभी भी ना हो”।

मैंने कहा, “बोलो कब मिलना है”?

“आलोक बोला, “आप बताइये मालिनी जी, जब आप कहें मैं आ जाऊंगा”।

“मैंने कहा, “ठीक है आलोक, कल तो मैं बिज़ी रहूंगी। परसों आ जाओ बारह बजे”।

“बारह मैंने इस लिए बोला था कि चुदाई तो मैंने आलोक से करवानी ही थी। मगर अगर व्हिस्की पी कर पिछली बार की तरह आलोक का लंड लेने का प्रोग्राम बन गया तो सुबह-सुबह कौन दारू पियेगा। वैसे मेरा मन तो आलोक को वायग्रा खिला कर चुदाई करवाने का था”।

“मैं अभी तक असलम के साथ अपनी वायग्रा वाली चुदाई नहीं भूली थी, जिसमें आखिर में लंड का पानी मेरे मुंह में छुड़ाया था। और अब तो संदीप और रागिनी का किस्सा भी सामने था, जिसमें संदीप ने रागिनी के मुंह में पानी छुड़ाया था”।

“आलोक बोला, “ठीक है मालिनी जी, परसों ठीक बारह बजे पहुंच जाऊंगा”।

“मैंने अपनी चूत खुजलाई और अपनी दिनचर्या में लग गयी”।

“दो दिन बाद ठीक बारह बजे आलोक आ गया। कुछ रस्मीं बातों के बाद मैने पूछा, “हां तो आलोक अब बताओ मानसी कैसी है”?

“और फिर मैंने हंसते हुए कहा, “अब तो नहीं चूत खोल कर लेटती तुम्हारी आगे? या कहती हो पापा एक आख़री चुदाई कर दो”?

“आलोक थोड़ा शर्माता हुआ बोला, “नहीं मालिनी जी, अब तक ऐसा हुआ तो नहीं”।

“मैंने पूछा, “और रागिनी के साथ कैसी चुदाई चल रही है”?

“आलोक बोला, “मालिनी जी अब तो रागिनी एक दिन से ज्यादा चुदाई के बिना नहीं रहती। अगर मैं कभी थका हुआ भी होऊं तो चूस-चूस कर लंड खड़ा कर देती है। हां मगर मालिनी जी इस बार चार-पांच दिन हो गए मेरी और रागिनी की चुदाई नहीं हुई। रागिनी की तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी”।

“मैंने सोचा, तबीयत क्या ठीक नहीं थी, संदीप से चूत फड़वा कर आयी है। संदीप ने रागिनी की चूत सूखी ही रगड़-रगड़ कर फुला दी थी, इसलिए आलोक से चुदाई नहीं करवा रही”।

“अपने आप ही मेरा हाथ मेरी अपनी चूत पर चला गया”।

फिर आलोक बोला,”एक बात और बताऊं मालिनी जी, अब तो रागिनी को माहवारी भी कई बार चार-चार, पांच-पांच महीने के बाद आती है, वो भी बस एक दिन के लिए। मस्त चुदाई होती है अब तो हम लोगों में”।

“फिर कुछ सोचता हुआ आलोक बोला, “लेकिन मालिनी जी अगर मानसी ने मुझे कभी चुदाई के लिए बोल दिया तो? आखिर को मानसी ने भी तो मेरे लम्बे लंड कि मजे लिए ही हैं। कभी उसका दिल चुदाई का आ गया तो”?

“मैंने सोचा तो आलोक को भी अपने लंड के कुछ ज्यादा ही लम्बे होने का एहसास है, और उसे भी लगता है कि मानसी का दुबारा भी आलोक को उसे चोदने कि लिए कह सकती है”।

“मैंने कहा, “अगर मानसी चुदाई के लिए बोले तो चोद लेना। अब ऐसा भी तो नहीं कि तुम दोनों में अब तक चुदाई हुई ही ना हो। तुम दोनों में वैसी शर्म या हिचकिचाहट तो है नहीं। वैसे आलोक जिस तरह से मानसी से मेरी बातें हुई है मुझे लगता नहीं ऐसे नौबत आएगी”।

“फिर मैंने आलोक को बता दिया, “आलोक मानसी को मैंने तीनो सेक्स टॉयज मंगवा ही दिए हैं, जिसमें एक लंड है, एक चूत का दाना चूसने वाला खिलौना है और एक चूत और गांड में लेने वाला भी है”।

“आलोक मेरे तरफ देख रहा था। मैंने फिर कहां, “लेकिन मैंने रागिनी को इनके बारे में नहीं बताया। तुम भी मत बताना, और ना ही मानसी से ही इनका कोइ जिक्र करना। समझो मेरी तुम्हारी इस बारे में कोई बात नहीं हुई”।

“फिर मैं हंसते हुए बोली, ”जब कभी मानसी की चूत जिद पर आ ही जाएगी तो ये रबड़ के खिलौने उसके बहुत काम आएंगे। आलोक कमाल के खिलौने हैं ये। असली वाले लंड में वैसी वाली वाइब्रेशन नहीं होती है जैसी इन चुदाई के खिलौनों में होती”।

“मैंने उसी तरह से हंसते हुए रागिनी का बोला हुआ डायलॉग दोहरा दिया, “कैसे कैसे चुदाई के खिलौने बनाते हैं ये फैक्ट्रियों वाले मादरचोद भी”।

“मेरी इस बात पर आलोक भी खुल कर हंस दिया”।

“मैंने फिर आलोक को पूछा, “आलोक तुम किसी रजत को जानते हो”?

आलोक बोला, “रजत खत्री? जानता हूं मालिनी जी। रजत शशि भूषण खत्री का बेटा है। भूषण भी मेरी तरह ही CA है। रजत भी CA कर रहा है और मानसी से एक साल या शायद दो साल आगे है। दोनों एक ही कालेज में हैं। मगर आप क्यों पूछ रहीं हैं”?

मैंने कहा, “आलोक रजत मानसी में दिलचस्पी रखता है – बहुत पहले से रखता था। मगर मानसी ही उसे भाव नहीं देती थी। तब वो तुम्हारे साथ होती चुदाई के कारण उसे लड़को के साथ दोस्ती करने में कोइ दिलचस्पी ही नहीं थी”।

“मुझसे बात करने के दौरान ही उसने मुझे रजत के बारे में बताया। रजत की फोटो भी दिखाई”।

आलोक बीच में ही बोल पड़ा, “मालिनी जी मैं भी मिला हुआ हूं रजत से। रजत देखने में तो ठीक है, बात-चीत करने में भी अच्छा है”।

मैंने फिर जरा सा हंसते हुए कहा, “आलोक, रजत देखने और बात-चीत में ही अच्छा नहीं, रजत लंड का भी बढ़िया है, अच्छा खासा मोटा। वैसा लंड जैसा अक्सर लड़कियों को पसंद आता है”।

आलोक जरा हैरान हुआ और इतना ही बोला, “जी”?

मैंने हंसते हुए कहा, “आलोक हैरान क्यों हो रहे हो? ये मुझे मानसी ने बताया। मानसी रजत का खड़ा लंड एक बार हाथ में ले चुकी है”।

“मेरा ये बताने पर आलोक मुझे कुछ परेशान सा दिखाई दिया”।

“फिर मैंने आलोक की टेंशन दूर करने के लिए आलोक के हाथ को पकड़ा और कहा, “आलोक ज्यादा मत सोचो, ये चुम्मा-चाटी, लंड पकड़ना, चूत में उंगली करना, ये सब मामूली बातें हैं। ये लड़के-लड़किया आपस में करते रहते हैं। आखिर को मानसी की प्रभात के साथ भी तो चुदाई हुई ही है। इसके बाद मैंने आलोक को मानसी और रजत की मुलाकातों के बारे मैं सब कुछ बता दिया”।

आलोक को कुछ तसल्ली हुई और वो बोला, “मालिनी जी आप तो कमाल हैं। कोइ जादू है क्या आपके पास जो इतने कम वक़्त में इतना सब कुछ बदल दिया”?

मैंने हंसते हुए कहा, “कोइ जादू नहीं आलोक, बस ये साइकाइट्रिस्ट – मनोविज्ञान की डिग्री का कमाल है। लोगों के दिमाग को पढ़ना ही मेरा पेशा है। बीस साल की लड़की को अगर चुदाई की तलब ना भी हो तो भी उसे लड़कों का साथ चाहिए ही होता है”।

“लड़कों का छूना हल्की-फुल्की चुम्मा-चाटी। यही मानसी अभी तक रजत के साथ भी कर रही है। अब क्योंकि मानसी उस लड़के प्रभात और तुम्हारा लंड चूत में ले चुकी है, और चुदाई करवा चुकी है तो हो सकता है वो रजत से भी चुदाई करवा ले, अगर कभी मौक़ा मिल गया तो”।

“मैंने बात जारी रखते हुए कहा, “और आलोक अगर ऐसा होता है और तुम्हें पता चल जाता है ऐसा तो होने देना और परेशान मत होना। ये चुदाई ही मानसी को तुमसे दूर करेगी, वरना अगर उसे दुबारा चुदाई की तलब लगी और रजत या प्रभात से चुदाई का मौक़ा ना मिला तो फिर तुमसे ही चुदाई करवाएगी”।

“फिर मैंने आलोक की आखों में देखते हुए पूछा, “आलोक एक बात बिल्कुल सच-सच बताना। क्या तुम्हारा मन अभी भी मानसी को चोदने का करता है? आखिर को तो वो जवान है उसका जिस्म कड़क है, उसकी चूत भी टाइट होगी, कम से कम मेरी और रागिनी की चूत से तो ज्यादा टाइट ही होगी”।

“आलोक ने जवाब दिया, “मालिनी जी सच कहूं तो मुझे मानसी को चोदने का कभी भी वैसा मजा नहीं आया, जितना रागिनी को चोदने में आता है, या आपको चोदने में आया था। ऐसा वाला मजा जो चुदाई के बारे में सोच-सोच कर आता है”।

“मानसी की चुदाई में ऐसी कोइ बात नहीं होती। मानसी की चुदाई के ख्यालों से कोई मजा नहीं आता। बस तभी मजा आता था जब चुदाई के बाद लंड का पानी निकलता था, और मानसी की चूत में गिरता था। ऐसे मजे का क्या, ऐसा मजा तो मुट्ठ मार कर भी लिया जा सकता है”।

“रागिनी ने मुझसे जिस तरह की चूत और गांड चुदाई करवाई है, मानसी के साथ मेरी वैसी चुदाई कभी नहीं हो सकती। चुदाई के वक़्त मैं और रागिनी जो बोलते हैं, वो भी तो रागिनी ने आपको बताया ही है”।

“मैंने आलोक को बीच में ही टोकते हुए हंसते हुए कहा, “हां आलोक मुझे तो मालूम ही है”।

“आलोक नीचे कि तरफ देखते हुए बोला, “मालिनी जी मेरी और मानसी कि चुदाई में मैं तो कुछ बोलता ही नहीं था। बोलने का मन ही नहीं होता था। बस जब लंड का पानी मानसी की चूत में जाता था तो मजे के मारे बस इतना ही कहता था ले मानसी ले”।

“हां मानसी जरूर बोलती – आह पापा, ऐसे ही करो पापा, पूरा निकाल कर डालो पापा। और वो इस लिए बोलती थी क्योंकि चुदाई उसकी मर्जी से हो रही होती थी मेरी मर्जी से नहीं”।

“यहां तक कि ना तो मैंने कभी मानसी कि चूत चूसी, ना ही मैंने मानसी से कभी लंड चूसने को कहा”।

“फिर आलोक कुछ याद करता हुआ बोला, “हां मालिनी जी एक बार जरूर मैंने मानसी को अपने लंड पर झुका दिया था जब मानसी चूत फैला कर मेरे मुंह पर बैठ गयी थी। जिस दिन हमारी पहली चुदाई हुई थी। तब मैंने मानसी को अपने लंड के ऊपर झुका दिया था, और मानसी ने मेरा लंड मुंह में ले लिया था। उसके बाद अगर कभी मानसी ने मेरा लंड चूसा भी तो उसके लिए मैंने उसे कभी नहीं कहा”।

“मैंने आलोक की सारी बातें सुन कर कहा, “आलोक इस सिलसिले में आज हमारी आखरी मुलाक़ात है। रागिनी के साथ भी इस सिलसिले में दो दिन पहले आख़री मुलाक़ात थी। रागिनी के टेप मैंने रागिनी को दे दी है”।

“फिर मैंने आलोक की टेप भी आलोक को देते हुए कहा, “ये रही तुम्हारी बातों वाली टेप। अब इनकी कोई जरूरत नहीं। आलोक इसे संभाल कर मत रखना। तोड़ कर फेंक देना”।

“अब एक आख़री मुलाकात मानसी के साथ करनी है। वैसे आलोक मैंने मानसी को कहां था वो भविष्य में भी जब चाहे यहां आ सकती है मानसी तो मुझे बहुत अच्छी लगी है, उसके साथ तो मुझे लगाव सा हो गया है। उससे तो मैं मिलना-जुलना जारी रखूंगी”।

“आलोक कुछ रुक कर बोला, “तो मालिनी जी अब”?

“मैंने हंसते हुए कहा, “अब क्या? अब मेरी फीस अदा करो पीछे वाले कमरे में चल कर”।

“आलोक बोला, “मालिनी जी एक बात कहूं”?

“मैंने कहा, “हां आलोक बोलो”।

“आलोक बोला, ” मालिनी जी आज मैं आपकी फीस पूरी सूद समेत चुकाना चाहता हूं। आज आपको वियाग्रा की गोली खा कर चोदता हूं। मैं वियाग्रा ले कर आया हूं”।

“मैंने सोचा, मैं तो व्हिस्की के दो पैग लगा कर चुदाई करवाने के चक्कर में थी। जब आलोक ने वियाग्रा खा कर चोदने की बात की, तो मेरी चूत ने फुर्र से पानी छोड़ दिया। मैंने आलोक से कहा, “वाह आलोक क्या बात है! पहले से ही वियाग्रा खा कर चोदने का मन बना कर आये हो, मगर तुमने तो कहा था वियाग्रा खा कर तुम्हारा लंड पानी नहीं छोड़ता”।

“आलोक बोला, “वहीं तो करना है मालिनी जी आज। आज आपकी ऐसी चुदाई करनी है कि आप हमेशा याद रखें। रही लंड के पानी ना छोड़ने वाली बात, तो जब आपकी चुदाई करवा कर तसल्ली हो जाएगी, तब आप चूस कर लंड का पानी निकाल लेना”।

“मैंने हंस कर कहा,”वैसे ही जैसे रागिनी के मुंह में मुट्ठ मार कर तुम निकाला करते हो”?

“आलोक हंस दिया और ये कहते हुए मुझे असलम की याद आ गयी। वियाग्रा खाने के बाद उसने भी तो ऐसे ही मेरे मुंह में मुट्ठ मार कर लंड का पानी निकाला था और अब संदीप ने भी रागिनी से लंड चुसवा कर मुंह में पानी छुड़ाया था, और शायद अब संदीप मेरे भी मुंह में अपने लंड का पानी छुड़ाएगा”।

“साले सारे मर्द एक जैसे ही होते हैं”।

“तभी ना जाने आलोक को क्या हुआ। वो बोला, “मालिनी जी वैसे तो आपके साथ मेरी चुदाई हो चुकी है, मगर मुझ पर आपका बहुत बड़ा एहसान है। आपने हमारी मानसी को सही रास्ता दिखा दिया, जो शायद मैं और रागिनी ना कर पाते। सच मानिये, मेरा मन तो करता एक बार यहीं, अभी आपके पैर छू कर आपका शुक्रिया अदा करूं”।

“मेरे साथ ऐसा होता रहता है, जब मेरे पास मेरी सलाह के लिए आने वाले लोग भावुक हो कर इस तरह की बातें करने लगते हैं। मगर मैं किसी से भी अपने पैर नहीं छुआती”।

“मैंने आलोक से कहा, “देखो आलोक मानसी मेरी बेटी जैसी है। मैंने तुम्हें बताया ही है कि मानसी से मुझे लगाव सा हो गया है। मुझे उसकी मदद करके बहुत ज्यादा खुशी मिली है”।

“मैं बहुत अच्छे तरह से जानती हूं बाप-बेटी या मां-बेटे के बीच चुदाई के रिश्तों का कोइ भविष्य नहीं होता। बस यही मैंने असलम को भी समझाया था और यही मानसी को भी समझाया था और वो इस बात को समझ गयी थी”।

फिर मैंने आगे के तरफ झुक कर कहा, “आलोक रही बात शुक्रिया अदा करने की, तो उसके लिए तुम्हें इतना नीचे, मेरे पैरों तक जाने की जरूरत नहीं। ये शुक्रिया तुम मेरी चूत और गांड तक रह कर भी कर सकते हो”।

“और फिर मैंने आलोक को कहा, “चलो आलोक खा लो अब जमुनी रंग की वियाग्रा और जितना चाहो, जब तक चाहो और जैसा चाहो मेरा शुक्रिया अदा करो”।

“आलोक ने वियाग्रा खा ली। गोली का असर होने में कम से कम आधा घंटा लगना था। मैंने आलोक से कहा, “आलोक ये गोली तो अपना करिश्मा आधे घंटे की बाद दिखाएगी। तब तक तुम लंड चुसवाओ और चूत चूसो मेरी”।

“आलोक ने देर नहीं लगाई और पेंट उतार कर मेरे सामने आ गया। मैंने आलोक का लंड पकड़ा और मुंह में लेकर चूसने लगी। आलोक का लंड लम्बा तो था मगर उसे पतला नहीं कह सकते थे। मेरा मुंह आलोक कि लंड से ही भर गया था”।

“मैं बस यही सोच रही थी कि अगर आलोक कि लंड से मेरा मुंह इस तरह भर गया है तब जब मैं संदीप का लंड मुंह में लूंगी तब क्या होगा”।

“दस मिनट मैंने आलोक का लंड चूसा, और बेड पर लेट कर चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर आलोक से बोली, “अब तुम अपनी जुबान का कमाल दिखाओ आलोक”।

“आलोक आया और मेरी चूत का दाना चूसने लगा। आधा घंटा ये चुसाई चली और आलोक बोला, “बस मालिनी जी मेरे लंड का काम हो गया है। अब ये तैयार है, बोलिये कहां लेना है आगे या पीछे – चूत में या गांड में”?

“मैंने कहा, दोनों जगह डालो। मगर आज सारे काम पीछे से ही करो”।

“तभी मुझे संदीप और रागिनी की चुदाई का ख्याल आ गया। मैंने मेज की दराज से मुंह पोंछने वाला बड़ा सा रुमाल निकाला और अलोक के हाथ में दे कर बोली, “ये लो आलोक चुदाई से पहले मेरी चूत का पानी अच्छी तरह साफ़ करके लंड डालना”।

“आलोक ने रुमाल हाथ में लेकर रुमाल को उलट-पलट कर देखा, फिर कुछ सोचते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “क्या बात है मालिनी जी आज सूखी चूत चुदवाने का मन है क्या? रगड़ाई वाली चुदाई करवानी है क्या”?

“मैंने भी कह दिया, “हां आलोक आज हर वो काम करना है जिससे आज की चुदाई यादगार चुदाई बन जाए”।

“अलोक ने कहा, “ठीक है मालिनी जी, अब आप देखना, ऐसी चूत रगडूंगा, फुला दूंगा आपकी चूत रगड़-रगड़ कर”।

“आलोक की ये बात सुन कर मेरी आंखों के आगे रागिनी की फूली हुई चूत घूम गयी”।

“और फिर इसके बाद एक घंटा मेरी और आलोक की जम कर चुदाई हुई। वियाग्रा के असर से आलोक कि लंड का पानी तो छूट नहीं रहा था। मगर मेरी चूत रह-रह कर गीली हो रही थी। हर दस मिनट के बाद आलोक लंड चूत में से निकाल कर रुमाल से चूत का पानी साफ़ कर रहा था। आलोक का लंड खूब रगड़ा लगा-लगा कर मेरी चूत में जा रहा था”।

“क्या आलोक सच में ही रगड़-रगड़ कर चूत फुला देगा”?

“मैं बस यही सोच रही थी अगर आलोक का लंड इस तरह रगड़-रगड़ कर चूत में जा रहा है तो संदीप का मोटा लंड कैसी रगड़ाई करेगा”।

“आलोक ने मेरी चूत और गांड की जम कर रगड़ाई की और आखिर में असलम की ही तरह आलोक ने मुट्ठ मार कर लंड का पानी मेरे मुंह में निकाला”।

“बारह बजे का आया आलोक तीन बजे वापस गया। चुदाई के बाद आई सुस्ती से मैं ऊपर जा कर लेट गयी। चुदाई मेरी आलोक से हुई थी, मगर मेरे ख्यालों में संदीप ही घूम रहा था”।

“छः बजे प्रभा चाय ले आयी। चाय की चुस्कियां लेते लेते भी मैं संदीप के मोटे लंड की रगड़ाई के बारे में ही सोच रही थी”।

“मुझसे और रहा नहीं गया और मैंने संदीप को फोन मिला दिया”।

“अब जब संदीप से चुदाई का मन बना ही लिया था तो ज्यादा दिन इंतजार के मूड में मैं नहीं थी”।

समाप्त

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