एक फैमिली ऐसी भी 4

माँ की चुदाई

मौसी कौशल्या अपनी और अपने जीजा जी यानी मेरे पापा के साथ हुई पहली चुदाई की कहानी सुना रही थी।

मौसी बता रही थी, “धीरज उस शनिवार को जब मैं गुडगांव पहुंची तो जीजी घर पर नहीं थी और मैं और जीजा जी घर में अकेले ही थे।”

“हम बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। जीजा जी अजीब सी ही नज़रों से मुझे देख रहे थे, और बार-बार अपना लंड खुजला रहे थे। जीजा जी के मुझे इस तरह देखने और बार-बार लंड खुजलाने से मुझे अजीब सा मजा आ रहा था। धीरज, फुद्दी तो मेरी भी गीली हो चुकी थी। मैं भी बीच-बीच में अपनी फुद्दी पर हाथ फेर रही थी।”

फुद्दी पर हाथ फेरते हुए मैंने हंसते हुए जीजा जी से पूछा, “और जीजा जी आप आज घर पर कैसे?”

“मेरे इतना कहने भर की देर थी कि जीजा जी ने मुझे पकड़ लिया और, “बताता हूं” बोल मेरे मम्मे दबा दिए।”

“मैंने हंसते कहा, “क्या हुआ जीजा जी, जीजी की याद आ रही है? रात का इंतजार तो कर लो, जीजी कहीं भागी तो नहीं जा रही।”

“जीजा जी बोली, रात की रात को देखेंगे, अभी तो तुम आओ।” कह कर जीजा जी ने मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए। जीजा जी का एक हाथ अब भी मेरे मम्मों पर ही था।”

“जैसे ही जीजा जी ने मेरे होंठ छोड़े, मैं हंसने लगी और बोली, “क्या हुआ जीजा जी?”

“लड़की अगर हंस दी तो समझो वो राजी है।”

“धीरज, जीजा जी बोले, कौशल्या चलो अंदर चलते हैं। अंदर चल कर बताता हूं। जीजा जी मुझे चोदने के मूड में आ चुके थे। जीजा जी से चुदाई के लिए तो हमेशा से तैयार थी ही।”

“जैसे ही जीजा जी बोले, “चलो कौशल्या अंदर चलते हैं, मुझे क्या ऐतराज़ होना था। जीजा जी के ऐसा कहते ही मैं खड़ी हो गयी।”

“मैं आगे-आगे और जीजा जी पीछे-पीछे चल पड़े। चलते-चलते जीजा जी ने मेरे चूतड़ों में उंगली डाल दी। मैंने सर पीछे घुमा कर हंसते हुए कहा, “जीजा जी अंदर जाने तक तो सबर कर लो। अब चल तो रहे ही हैं, इसमें भी डाल लेना। इसमें भी डलवाती हूं मैं।”

“जीजा जी बोले, “वाह कौशल्या, बहुत आगे तक चली गयी तू तो।”

“अब इस पर क्या बोलती मैं? मेरी गांड तो तेरे मौसा मनोहर ने पहले दिन ही फाड़ दी थी। फिर भी मैंने कहा, “जीजा जी, जब “करवानी” ही है तो नखरा कैसा?”

“मुझे “चुदाई करवानी ही है” बोलने में मुझे थोड़ी हिचकिचाहट सी हो रही थी।”

“जीजा जी तो जैसे मेरी फुद्दी चोदने के लिए कुछ ज्यादा ही जल्द-बाजी में थे।अंदर पहुंचते ही जीजा जी ने अपने कपड़े उतार दिए और मेरी सलवार का नाड़ा खोलने लगे। सलवार का नाड़ा जैसे ही खुला, सलवार नीचे ढलक गयी। जीजा जी ने मेरी चढ्ढी भी नीचे सरका दी और अपनी उंगली से मेरी फुद्दी टटोलने लगे।”

“अब खड़ी लड़की की फुद्दी में तो उंगली जा नही पाती। उधर मैं तो पूरी मस्ती मैं आ ही चुकी थी। मैंने अपनी एक टांग उठाई और सोफे पर रख दी और हंसते हुए बोली, “लो जीजा जी अब डालो जहां डालनी है – आगे पीछे जहां भी, सब जगह जाएगी आपकी उंगली अब। ये बोल कर मैं फिर से हंस दी।”

“जीजा जी ने उंगली मेरी फुद्दी मैं डाल दी। जीजा जी से चुदाई करवाने के ख्याल से मेरी फुद्दी पानी से भरी पड़ी थी। जीजा जी बोली, “कौशल्या, ये तो तैयार है।”

मैंने वैसे ही हंसते हुए कहा, “जीजा जी ये तो आपकी और जीजी की शादी के बाद से ही तैयार है, जीजी ने ही नहीं लेने दिया आपका लंड इसमें। आज तो मस्त मजा दे ही दो जीजा जी – आगे का भी और पीछे का भी। ये कह कर मैंने ऊपर के कपड़े भी उतार दिए।”

“मेरे कपड़े उतारते ही जीजा जी ने मुझे सोफे पर बिठा दिया अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने भी मस्त हो कर बड़े शौक से जीजा जी का लंड चूसा। जल्दी ही जीजा जी बोले, बस कौशल्या, चलो अब थोड़ी अपने फुद्दी चुसवाओ, फिर चुदाई करें।”

“मुझे तो वैसे ही जीजा जी से चुदाई की जल्दी थी, मैं उठ गयी और बेड के किनारे पर टांगें उठा कर लेट गयी। तेरे मौसा जी ऐसे ही मेरी फुद्दी चूसते चाटते थे। जीजा जे ने जैसे ही मेरी फुद्दी देखी, फुद्दी चुसाई तो वो भूल गए सीधा लंड फुद्दी मैं डाल कर चुदाई शुरू कर दी।”

“जीजा जी जोर-जोर से मेरी फुद्दी चोद रहे थे। जीजा जी के लंड के ऐसे जोरदार धक्के, मेरी फुद्दी दस मिनट भी नहीं झेल पायी और मेरी फुद्दी पानी छोड़ गयी। मेरे चूतड़ अपने आप ही घूमे और मेरे मुंह से सिसकारी निकली, “आह जीजा जी मजा आ गया, निकल गया मेरी फुद्दी का पानी।”

“जीजा जी ने चुदाई रोक दी। जैसे ही मैं जरा सी ढीली हुई। जीजा जी ने खड़ा लंड मेरी फुद्दी में से निकाला और नीचे बैठ मेरी फुद्दी चूसने लगे। जल्दी ही मेरी फुद्दी फिर से तैयार हो गयी। जैसे ही मैंने जरा से चूतड़ घुमाये, जीजा जी खड़े हो गए और बोले, “चलो कौशल्या, अब सही ढंग की चुदाई करेंगे।”

“सही ढंग के चुदाई, मतलब मैं सीधी लेट जाऊं, चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर फुद्दी उठा दूं, और जीजा जी मुझे मेरे ऊपर लेट कर मेरी चुदाई करें।” मनोहर को भी ऐसे ही चोदना अच्छा लगता है – सभी मर्दों को लगता है।”

“मैंने कहा, “ठीक है जीजा जी, मगर याद रखना गांड में भी डालना है आज अपने।”

जीजा जी बोले, “कौशल्या सुधा की गांड में तो मैं नही डालता, उसने कभी कहा ही नहीं पर आज तेरी गांड चुदाई का मजा मैं जरूर लूंगा।”

“बस धीरज, इसके बाद जीजा जी ने मुझे दो बार और चोद दिया – दो बार मेरी फुद्दी का पानी छुड़ाने के बाद जब मुझे चौथी बार मजा आया, तो मैंने फिर से जीजा जी को पूछा, “जीजा जी गांड में नहीं डालोगे?”

जीजा जी का लंड तो खड़ा ही था। जीजा जी ने भी वही जवाब दिया बोले, “कौशल्या, आज लंड का पानी तेरी गांड में ही निकालूंगा।”

“फिर जीजा जी जैसे अपने आप से ही बोले, “सुधा की गांड में तो मैं नहीं डालता। वो कहती ही नहीं गांड में डालने को। जहां तक मुझे याद है, सिर्फ एक बार मैंने सुधा की गांड में लंड डाला, वो भी उसने नहीं कहा था। उसके बाद ना उसने गांड चुदवाने के लिए कभी कहा ही नहीं और ना ही मैंने ही कभी सुधा से उसकी गांड चोदने की बात की।”

“मैंने हैरानी से पूछा, “जीजा जी जीजी गांड में नहीं लेती? कमाल है। मेरी और मनोहर की तो गांड चुदाई के बिना चुदाई ही पूरी नहीं होती।”

“जीजा जी बोले, “कोइ बात नहीं कौशल्या, आज मैं भी लूंगा तेरी गांड चुदाई का मजा। चल आजा बोल कैसे डालूं तेरी गांड में।”

“मैं जा कर सोफे पर चूतड़ पीछे करके लेट गयी और दोनों हाथों से अपने चूतड़ चौड़ी करके बोली, “आ जाओ जीजा जी।”

“धीरज इतनी चुदाईयों के बाद भी जीजा जी का लंड खूंटे की तरह खड़ा था।”

“जीजा जी ने मेरी गांड में थूक डाला और एक झटके में पूरा लंड गांड के अंदर बिठा दिया।”

इसके बाद तो हमारी मस्त गांड चुदाई हुई। उस दिन हर जगह लंड डाला जीजा जी ने जहां भी लंड जा सकता था – फुद्दी में, गांड में, मुंह में – बस ये समझो धीरज मजा ही आ गया।”

“मेरी और जीजा जी की चुदाई को चार घंटे हो चुके थे। चार चुदाईयां हो चुकी थी। शाम होने को थी। जीजी कभी भी आ सकती थी।”

“मैंने और जीजा जी ने कपड़े पहने हुए बाहर आ कर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। मैं चाय बना कर ले आई। अभी हम चाय पी ही रहे थे कि जीजी आ गयी।”

“मुझे देख कर जीजी बोली, “अरे कौशल्या तू? तू कब आयी?”

“मैंने कहा, “जीजी मैं तो दोपहर को ही आ गयी थी, मुझे तो पता ही नहीं था कि आपकी कोइ ट्रेनिंग-व्रेनिंग है।”

“जीजी कुछ चुप सी हो गयी – जैसे कुछ सोच रही थी।”

“फिर कुछ रुक कर जीजी बोली, “कौशल्या, तेरे जीजा जी ने तंग तो नहीं किया तुझे?”

“जीजी की बात सुन कर मैं तो एक-दम हड़बड़ा सी गयी और बोली, “अरे नहीं जीजी, जीजा जी भला मुझे क्यों तंग करेंगे?”

“मगर मेरी हड़बड़ाहट और जीजी का मास्टरी का तजुर्बा – जीजी ने सीधा जीजा जी से ही पूछ लिया, “क्यों यश मजा आया साली को चोदने का?”

“जीजी ने इतना साफ़ पूछा कि जीजा जी की तो एक तरह से गांड फट गयी। जीजा जी भी हड़बड़ा गए और जीजा जी ने हकलाते हुए पूछा, “अरे सुधा ये क्या बात कर रही हो?”

“जीजी बोली, “छोड़ो यश, मुझे तुम लोग कुछ नहीं छुपा सकते। ये कौशल्या तो अपनी शादी से पहले ही तुमसे चुदवाना चाहती थी, मैंने ही रोका हुआ था इसे – आज मौक़ा मिला तो क्या मैं मान लूं इसने तुमसे चुदवाई नहीं होगी?”

“और क्या मैं तुम्हें नहीं जानती यश? अब मुझे ये बताओ, कितनी बार चोदा तुमने कौशल्या को। अब छुपाना मत, चोदा तो तुमने है कौशल्या को, अब तो ये बताओ कितनी बार चोदा?

जीजा जी की तो जैसे बोलती बंद थी। जब जीजी ने दुबारा ये पूछा तो जीजा जी धीरे से बोले, “चार बार।” उधर मैं जीजी से नजर ही नहीं मिला पा रही थी।

“जीजी बोली, वाह क्या बात है – चार बार। पूरी सुहागरात ही मना ली तुम दोनों ने तो।”

“फिर जीजी ने मुझसे पूछा, “और अब तू बता कौशल्या, तू तो बहुत देर से यश का लंड अपनी फुद्दी में लेने के लिए मरी जा रही थी – अब मुझे तो बस ये बता कहां कहां लिया अपने जीजा का लंड?”

“मेरी भी आवाज नहीं निकल रही थी। मैं समझ गयी अब ना तो चुप रहने का कोई फायदा है ना कुछ छुपाने का। मैंने भी धीरे से कहा, “जीजी सच बोलूं आगे-पीछे मुंह में सब जगह लिया।”

जीजी फिर जीजा जी से बोली, “यश तुम तो गांड चोदते ही नहीं, और ये?”

जीजा जी अब थोड़ा नार्मल होने लगी थी। जीजी को नार्मल होता देख जीजा जी बोले, “यार सुधा, मैं तो कौशल्या की फुद्दी ही चोदना चाहता था, मगर कौशल्या ने ही मुझे गांड चोदने के लिए कहा, और कौशल्या के मुलायम चूतड़ देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया। लेकिन एक बात बताऊं सुधा, कौशल्या की गांड चोदने का मजा बहुत आया।”

“इसके बाद जीजी तो जैसे गुस्से में फट पड़ी।”

“जीजी बोली, “यश मादरचोद तेरी मां की चूत साले, कौशल्या की फुद्दी में चार चाँद लगे हैं जो मेरी फुद्दी में नहीं है? और साले क्या कहा, मुलायम चूतड़ देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया मादरचोद, और गांड चोदने का मजा बहुत आया? अगर इतना ही मजा लेना था गांड चुदाई का तो क्या मैं मर गयी थी? मुझे बोलता, मेरी गांड में भी तो डाल सकता था? अब मैं दिखाती हूं तुम्हें सालियों की फुद्दी और गांड चोदने का मजा।”

“जीजी को इतना गुस्से में मैंने कभी भी नहीं देखा था। जीजी का ये रूप देख कर मैं और जीजा जी चुप हो गए।”

“कुछ देर बाद जीजी का गुस्सा उतरा और जीजी नार्मल हो गयी और मुझसे पुछा, “अब तू ये बता कौशल्या, मजा आया जीजा का लंड आगे-पीछे मुंह में लेकर?”

जीजी को नार्मल होते देख मेरी जान में जान आयी और मैंने धीमी आवाज में कहा, “जीजी मजा तो आया।”

“जीजी कुछ देर सोचती रही और फिर जीजी जो बोली, उससे सबकी झिझक दूर हो गयी।

“जीजी बोली, “अब जो तुम लोगों ने कर लिया सो कर लिया, अब इस तरह मुंह लटका कर मत बैठो।”

“फिर जीजी बोली, “ये तो एक ना एक दिन होना ही था। जीजा साली की चुदाई ज्यादा दिनों तक नहीं टलती। तुम्हारी और कौशल्या की चुदाई भी ज्यादा दिनों तक नहीं टलनी थी।”

“जीजी कुछ देर चुप रही फिर जीजा जी से बोली, “यश मस्त चुदाई का मस्त मजा लेना है?”

“जीजा जी की अभी भी फटी ही पड़ी थी। बड़ी मुश्किल से जीजा जी के मुंह से आवाज निकली। जीजा जी बोले, “चुदाई का मस्त मजा? कैसे सुधा, मैं समझा नहीं।”

“जीजी बोली, “मस्त मजा – बीवी और साली को इकट्ठे चोद कर, एक-दूसरे के सामने। बोलो लेना है मस्त मजा?”

मौसी बता रही थी, “धीरज मेरी और जीजा जी की चुदाई तो हो ही चुकी थी, और जीजी भी इस चुदाई के बारे में जान भी चुकी थी।”

“पता नहीं क्या सोच कर जीजी बोली, “बोलो यश, लेना है मजा बीवी और साली को इकट्ठे एक-दूसरे के सामने चोद कर?”

“जीजा जी को समझ नहीं आया कि जीजी ये क्या और क्यों कह रही थी। एक-दूसरे के सामने चुदाई – जरूरत क्या थी?”

“धीरज सच कहूं तो जीजी की बात समझ मुझे भी नहीं आयी थी कि जीजी की इस बात का मतलब क्या था – मस्त मजा, बीवी और साली को इकट्ठे चोद कर, एक-दूसरे के सामने? क्यों जीजी ऐसी बात कर रही थी?”

“हमें चुप देख कर जीजी ने साफ़ ही बोल दिया, “यश क्या बात है चुप क्यों हो तुम लोग? ऐसा भी मैंने क्या बोल दिया जो तुम लोगों को समझ नहीं आ रहा? मैं तो बस ये कह रही हूं कि आज तुम मुझे हुए कौशल्या को इकट्ठे एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर, एक-दूसरे के सामने चोदो और मजे लो दो-दो चूतों को बेखटके चोदने के।”

जब जीजा जी इसके बाद भी चुप रहे फिर तो जीजी बोली, “अभी भी समझ आया या नहीं आया यश? आज मैं और कौशल्या इकट्ठे तुमसे चुदाई करवायेंगी – एक-दूसरे के सामने। इसमें क्या समझ में नही आ रहा तुम लोगों को जो तुम्हारी गांड फटी पड़ी है?”

“मैं और जीजा जी जीजी के इस बात पर हैरान थे। जीजी तो जैसे बम्ब पर बम्ब फोड़ रही थी, और मजे की बात ये थी कि मुझसे तो कोइ पूछ ही नहीं रहा था। पर इतनी बात तो जरूर थी धीरज, जीजी की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी में आग लगनी शुरू हो चुकी थी।”

“हमें तो समझ ही नहीं आ रही थी कि हम बोलें भी तो क्या बोलें। तभी अचानक से जीजी धीरे से बोली, “यश एक बात और बताऊं, तुम्हारी कौशल्या के साथ हुई इस चुदाई ने एक चुदाई का रास्ता और भी खोल दिया है।”

“जीजी की यह बात भी मुझे तो समझ नहीं आई, शायद जीजा जी को भी समझ नहीं आयी थी। जीजा जी हैरानी से बोले, “कैसा रास्ता सुधा, कौन सा रास्ता?”

“जीजी बोली, “वो मैं बाद में बताऊंगी – पहले तो तुम ये बताओ, क्या सोच कर तुमने कौशल्या को चोद दिया – यही कि साली आधी घरवाली होती है – पकड़ो और रगड़ दो। साली चोदने में जो रोमांच होता है, वो घरवाली को चोदने में नहीं होता। वैसे भी कहते ही हैं घर की मुर्गी दाल बराबर होती है?”

“जीजी की इस बात पर जीजा जी चुप हो गए, मैं भी चुप ही थी। मैं सोच रही थी असल में हुआ तो यही था।”

“मगर फिर भी – जब जीजी ने कहा था, “यश तुम्हारी कौशल्या के साथ हुई इस चुदाई ने एक चुदाई का रास्ता और खोल दिया है, तो कम से कम मैं तो हैरान हो गयी ये सोच कर कि ऐसे कौन से रास्ते की बात कर रही थी जीजी?”

“जीजा जी को चुप देख कर जीजी बोली, “अब मैं ही अपनी इस बात का जवाब दे देती हूं, तुम्हारी तो लगता है आज बोलती ही बंद है।”

इसके बाद जीजी की अंदर की मास्टरनी बोली, “यश तुम मुझे चोद रहे थे, कौशल्या मनोहर से मस्त फुद्दी और गांड चुदवा रही थी, फिर भी तुमने आपस में चुदाई कर ली? कभी सोचा है ऐसा क्यों हुआ?”

“मैं और जीजा जी चुप थे – जवाब देते भी तो क्या देते?”

“जीजी ही बोली, “यश ऐसा इसलिए हुआ क्यों की हर इंसान कुछ नया चाहता है, कुछ अलग करना चाहता है। कौशल्या की मनोहर के साथ मस्त चुदाई हो रही थी, मगर उसे कुछ नया चाहिए था। इसी तरह, तुम भी मेरी मस्त चुदाई कर रहे थे, मगर तुम्हें भी कुछ नया चाहिए था। उधर इक्कीस साल के जवान कौशल्या ने अपनी फुद्दी तुम्हें प्लेट में सजा कर परोस दी – ऐसे में तुम क्या यश कोइ भी होता तो इस कौशल्या को चोद ही देता। बस यही हुआ तुम्हारे साथ भी – जो तुम्हारी और कौशल्या की चुदाई हो गई।”

“जीजा जी बड़े मुश्किल से बोले, “सुधा असल में हुआ तो यही है। कौशल्या को यहां देख कर मुझसे रुका नहीं गया और कौशल्या ने भी मुझे चुदाई की लिए मना नहीं किया।”

“इसके बाद जीजी हल्की सी हंसी और बोली, “अरे छोड़ो यार यश – ये कोइ नई बात नहीं, मैं तो कह ही रही हूं जवान साली जवान जीजा से कब तक बची रह सकती है। यही हमारे यहां का दस्तूर है – यही हमेशा से होता आया है जीजे सालियों को चोदते ही हैं।”

“फिर जीजी जीजा जी से बोली, “चलो रात हो गयी है, चलो मजा दो हम दोनों को अपने घरवाली को और आधी घरवाली को – चोदो हमें एक-दूसरे के सामने। चलो उठो, अंदर चलते हैं।”

“इसके बाद भी जब जीजा जी नहीं हिले तो जीजी उठी और पायजामे के ऊपर से ही जीजा जी का लंड पकड़ कर बोली, “अरे अब उठ भी जाओ, कब तक देवदास बने बैठे रहोगे? ऐसे में तो लंड भी नहीं खड़ा नहीं हो पायेगा।”

“जीजा जी हिले तो नहीं, मगर इतना ही बोले, “सुधा ये क्या कर रही हो? कौशल्या बैठी है?”

“जीजी बोली, अरे! यश कौशल्या बैठी है तो? कौशल्या से अब शर्म कैसी? वो तो फुद्दी और गांड मुंह में सब जगह तुम्हारा ये लंड ले चुकी है। उससे अब क्या पर्दा?”

फिर जीजी मुझसे बोली, “क्यों कौशल्या, ठीक कहा ना मैंने?”

“धीरज उस वक़्त तो मुझे समझ ही नहीं आया कि जीजी मुझे ये ताना दे रही थी या संजीदा थी – और सच में ही जीजा जी से मेरी और अपनी इकट्ठी चुदाई करवाना चाहती थी। लेकिन धीरज सच बताऊं उस वक़्त मुझे शर्म भी आ रही थी। ये सब कुछ जो हो रहा था सब मेरी और जीजा जी की चुदाई के कारण हो रहा था।”

“मगर धीरज जीजी नार्मल हो चुकी थी थी। जीजी बोली, “इतना भी यश क्या सोच रहे हो, किस बात की हिचकिचाहट है यार? मेरी फुद्दी चोद चुके हो, गांड अगर नहीं चोदी तो वो लिए क्यों कि गांड चुदाई का ना तुम्हें शौक है और ना ही मुझे। मगर मुझे चोदते हुए मेरी गांड में उंगली तो डालते ही हो। और अब कौशल्या की भी फुद्दी और गांड दोनों चोद चुके हो। मैं तो बस इतना बोल रही हूं, जो काम तुमने अब तक अकेले में किया है वो एक-दूसरे के सामने करो, खुद भी मजा लो हम दोनों को भी मजा दो। कौशल्या की गांड भी चोदो, मेरी गांड में भी लंड डाल लो।”

“जब जीजा जी जीजी की इस बात पर भी सोचते ही रहे तो जीजी बोली, “हद्द ही है यार – दो जवान लड़कियां फुद्दी खोल कर तुम्हें चुदाई के लिए बुला रही हैं, और तुम इतना सोच रहे हो?”

“फिर जीजी खड़ी होती हुई बोली, “ठीक है अब तो मुझे ही कुछ करना पड़ेगा। मैं ही तुम लोगों का मूड बदलती हूं।”

“इतना बोल कर जीजी कोने में रखी अलमारी की तरफ चली गयी। इस अलमारी में जीजा जी की शराब की बोतलें रखी रहती थी। जीजी जोनी वॉकर स्कॉच और मालाबार जिन की दो बोतलें ले आयी, और बोली, जा कौशल्या तीन गिलास, फ्रिज में से सोडा और पेप्सी ले आ। अभी तेरे जीजा जी का लंड तैयार करती हूं।”

“मुझे हैरानी हो रही थी कि जीजी ये क्या कर रही थी। मुझे पता नहीं था कि जीजी पीती भी है, और मैंने कभी एक आध बार ही पी थी वो भी मनोहर ने जबरदस्ती पिला दी थी।”

“फिर भी मैं उठी और तीन गिलास, सोडा और पेप्सी ट्रे में लेकर आ गयी। मैं सोच रही थी आज कुछ अलग ही करने वाली थी जीजी – कुछ अलग तरह की चुदाई। मेरी फुद्दी में तो धीरज बाढ़ भी आने लग गयी थी।”

“जीजी ने जीजा जी के गिलास में व्हिस्की और मेरे और अपने गिलास में जिन डाल दी। जीजी ने गिलास उठा कर जीजा जी के हाथ में पकड़ा दिया। जीजा जी के गिलास में खाली व्हिस्की थी – ना सोडा ना पानी।”

“जीजा जी बस इतना ही बोले, “सुधा ये?”

“जीजी बोली, “यश अब “ये – वो” छोड़ो, और पियो।”

“जिस तरह से जीजी ने मेरे सामने पायजामें के ऊपर से जीजा जी का लंड पकड़ा था और जिस तरह की बातें जीजी कर रही थी, उससे जीजा जी अब कुछ कुछ मूड में आ चुके थे। जीजा जी के पायजामें खड़े होते लंड का उभार दिखाई देने लग गया था। जीजा जी ने गिलास उठाया और एक ही घूंट में गिलास खाली कर दिया।”

“हमारा एक पेग खत्म हुआ तो जीजी ने एक-एक पेग और बना दिया। पहले की ही तरह जीजी ने जीजा जी का आधा गिलास व्हिस्की से भर दिया। ये दूसरा पेग भी खत्म हो गया।”

“दो पेग पीने के बाद सब सुरूर में आ गए। जीजा जी तो कुछ ज्यादा ही सुरूर में लगने लगे थे। जीजी जीजा जी का पेग तो वैसे ही बड़ा बना रही थी। उधर जीजा जी बिना पानी सोडा मिलाये व्हिस्की नीट ही पी रहे थे। जीजा जी की आँखें गुलाबी हो गई। जीजी जीजा जी को नीट पीने से रोक नहीं रही थी, शायद जीजा जी का मूड हल्का करना चाहते थी और जान-बूझ कर जीजा जी को नीट पीने दे रही थी।”

“सुरूर में आये जीजा जी ने दो पेग पीने के बाद तीसरा पेग खुद ही बना लिया। जीजा जी ने आधा गिलास इसके से भर लिया और नीट ही पी गए।”

अचानक जीजी उठी और अपने सारे कपड़े उतार कर बोली, “चल कौशल्या तू भी उतार अपने कपड़े और चल अंदर, आज तेरे जीजा जी से ऐसी चुदाई करवाएंगे दोनों बहने कि यश को जन्नत का मजा आ जाए। भूलेंगे नहीं ये आज की चुदाई।”

“धीरज, जीजी को इस तरह बातें करते सुन कर मुझ पर भी इकट्ठी चुदाई की ठरक चढ़ गयी। मैं भी उठी और मैंने भी अपने सारे कपड़े उतर दिए। दो-दो जवान औरतें – औरतें क्या लड़कियां ही थी। जीजी तेईस की थी और मैं इक्कीस की। हमें इस तरह नंगा अपने सामने देख कर जीजा जी से रहा नहीं गया और जीजा जी ने भी कपड़े उतार दिए, और वापस कुर्सी पर बैठ गए।”

“जीजा जी ने अपना गिलास खाली किया और उसमे एक पैग और बनाया और नीट ही चढ़ा गए।”

“हम तीनों डाइनिंग टेबल पर ही नंगें बैठे हुए थे – अजीब ही सीन था।”

“तीन चार पेग नीट पीने के बाद जीजा जी नशे में आ चुके थे।”

“नशे में जीजा जी जीजी से बोले, “हां तो मादरचोद सुधा, क्या कहा था तुमने? आज तेरे जीजा जी से ऐसी चुदाई करवाएंगे दोनों बहने कि यश को जन्नत का मजा आ जाए। भूलेंगे नहीं ये आज की चुदाई।” यही कहा था ना तुमने मेरी जान? चलो अब तैयार हो जाओ दोनों बहनें, तुम दोनों की गांड और फुद्दीयों में लौड़ा डालता हूं आज, वो भी एक-दूसरी के सामने। ये बोल कर जीजा जी खड़े हो गए और जीजी के सामने आ गए। जीजा जी का लंड बिलकुल सीधा खड़ा था। जीजी ने कुर्सी पर बैठे-बैठे ही वहीं जीजा जी का लंड मुंह में ले लिया।”

“जीजी की मस्त चुसाई से जीजा जी के मुंह से आह सुधा, आह सुधा निकलने लगा।”

“जीजी की थोड़ी लंड चुसाई के बाद जीजा जी ने लंड जीजी के मुंह से निकाला और मेरे सामने आ गए और बोले, “ले मादरचोद तू भी ले, तू ही क्यों पीछे रहे। मैंने जीजा जी का लंड मुंह में लिया और चूसने लगी।”

“थोड़ी लंड चुसाई के बाद जीजा जी बोले, “चलो अब अंदर, चलो सोफे पर चूतड़ पीछे करके लेट जाओ। आज गांड से ही शुरू करते हैं। आज तुम्हारी गांडों का भोंसड़ा बनाता हूं।”

“जीजी बोली, “वाह ये हुई ना बात यश, मजा ही आ गया।”

जीजी मुझसे बोली, “चल कौशल्या उठ, आजा।”

“इसके बाद हम तीनो – जीजा जी, मैं और जीजी अंदर आ गए। जीजी ने मुझसे कहा, “कौशल्या, नशे में आज यश का लंड जल्दी नहीं झड़ने वाला अब बता कहा डलवाना है फुद्दी में या गांड में। यश तो गांड चोदने के पूरे मूड में लग रहा है।”

“मैंने कहा, “जीजी आज जीजा जी गांड से शुरू करेंगे – ऐसा लगता है। फिर मैंने कहा, “जीजी मुझे तो गांड चुदवाने के आदत है, आप अपना सोचो।”

“जीजी बोली, “कौशल्या कब तक बचेगी मेरी ये गांड लंड से, कभी ना कभी अगर गांड चुदाई होनी ही है – तो फिर आज ही क्यों नहीं?”

दारू की मस्ती में जीजा जी खड़े हो गए और जब जीजा जी ने हमारी तरफ देखते हुए कहा, “हां तो मादरचोद सुधा, क्या कहा था तुमने? आज तेरे जीजा जी से ऐसी चुदाई करवाएंगे दोनों बहने, कि यश को जन्नत का मजा आ जाए। भूलेंगे नहीं ये आज की चुदाई।”

“यही कहा था ना तुमने मेरी जान? चलो अब तैयार हो जाओ दोनों बहनें, तुम दोनों की गांड और फुद्दीयों में लौड़ा डालता हूं आज, वो भी एक दूसरी के सामने” – धीरज जीजा जी मुंह से ये सुन कर मुझे बड़ा मजा आया।”

“इसके बाद हम तीनों – जीजा जी, मैं और जीजी अंदर आ गए।

जीजी ने मुझसे कहा, “कौशल्या, यश पूरे नशे में है। नशे में आज यश का लंड जल्दी नहीं झड़ने वाला। अब बता कहा डलवाना है, फुद्दी में या गांड में? यश तो गांड चोदने के पूरे मूड में लग रहा है।”

“मैंने कहा, “जीजी मुझे तो लगता है आज जीजा जी गांड से ही शुरू करेंगे। फिर मैंने कहा, “जीजी मुझे तो गांड चुदवाने के आदत है, मैं तो हफ्ते में बार जरूर गांड में लंड लेती हूं, आप अपना सोचो।”

“जीजी बोली, “कौशल्या, तूने यश से गांड चुदवा कर यश को गांड चोदने का चस्का तो लगा ही दिया है। अब कब तक बचेगी मेरी ये गांड यश के लंड से? कभी ना कभी अगर गांड चुदाई होनी ही है – तो फिर आज ही क्यों नहीं?”

“जीजी की बात पर मैं हंसी और हम दोनों सोफे पर चूतड़ पीछे करके उल्टा लेट गए।”

“जीजी ने लेटे लेटे ही कहा, “कौशल्या एक एक मजा तो फुद्दी का ले ही लेते हैं, फिर डलवाएंगे गांड में।”

“फिर मैंने कहा, “वैसे तो जीजी मैं तो कहती हूं, आज जीजा जी पर ही छोड़ दो सब कुछ। जहां डालना चाहें डालने दो, कुछ मत बोलो – बस मजे लो। वैसे एक बात बोलूं जीजी, मर्दों को तो गांड चोदने में ज्यादा मजा आता है। लंड की रगड़ा-पच्ची मस्त होती है। एक बार जीजा जी को गांड चोदने का चस्का लग गया, तो हर हफ्ते पंद्रह दिनों के बाद आपकी गांड में लंड डाला करेंगे।”

“जीजी बोली, “चल कौशल्या ऐसे ही सही। मगर एक बात बोलूं, तू मुझसे उम्र में जरूर छोटी है। मगर चुदाई में तेरा तजुर्बा मुझे से कहीं ज्यादा है।”

“मैंने जीजी से कहा, “जीजी ये सब मनोहर की वजह से है, जिसने पहली ही रात शराब के नशे धुत्त हो कर चोद-चोद कर मेरी फुद्दी और गांड का भुर्ता बना दिया थे। अगली सुबह मेरी सास ने जब मेरी हालत देखी तो मनोहर को गुस्से में कमरे से ही बाहर निकाल दिया था। लेकिन जो भी था जीजी उस पहली रात की गांड चुदाई के बाद तो मुझे गांड चुदाई का ऐसा चस्का लगा कि जैसे ही मेरी गांड का छेद ठीक हुआ मैंने ही मनोहर से कह दिया, “आज पीछे डालो जी, बड़ा मन कर रहा है।”

“जीजी बोली, “कौशल्या अगर ऐसी बात है तो आज मैं भी गांड में ही डलवाती हूं।”

जीजी ने जीजा जी को शराब पिला कर नशे में तो कर ही कर दिया था। जीजा जी आये और आते ही मेरे गांड में लंड डाल दिया। जब गांड चुदवाते-चुदवाते मुझे फुद्दी का मजा आया और मैंने चूतड़ घुमाते हुए जोर के सिसकारी ली तो जीजा जी ने मेरी गांड से लंड निकाला और जीजी की गांड में डाल दिया। जीजी दर्द से चिहुंकी, मगर जीजा जी नहीं रुके और जीजी की कमर पकड़ कर जीजी की गांड रगड़ते रहे।”

“नशे में जीजा जी रगड़-रगड़ कर चोद रहे थे हम दोनों को। मस्त चुदाई की हम दोनों की जीजा जी ने। फुद्दी, गांड मुंह में सब जगह जीजा जी ने लंड डाल दिया उस दिन।”

“धीरज, उस रात दो बजे तक जीजा जी के साथ हमारी चुदाई चली। जीजा जी के लंड का पानी ही नहीं निकल रहा था। और आखिर में मैंने ही चूस कर जीजा जी के लंड का पानी अपने मुंह में निकाला।”

“जैसे ही जीजा जी के लंड का पानी मेरे मुंह में निकला तो जीजा जी दहाड़े, “ले मादरचोद सुधा निकल गया मेरे लंड का पानी, अब चाट जितना चाटना है। मतलब जीजा जी पूरे नशे में थे। जीजा जी को ये भी ध्यान नहीं था कि उनके लंड का पानी किसके मुंह में निकल रहा था।”

“लेकिन धीरज जो भी था, उस रात की चुदाई थी तो बड़ी मस्त। शराब के नशे में जीजा जी खूब गालियां दे रहे थे, खूब बोल रहे थे – चुदाई तो मस्त वो कर ही रहे थे।”

“अगली सुबह – इतवार को – हम तीनों टेबल पर बैठे चाय पी रहे थे। रात की चुदाई से माहौल हल्का हो चुका था।”

“जीजी ने जीजा जी से पूछा, “यश मजा आया रात को?”

जीजा जी मस्ती में बोले, “सुधा दो-दो जवान फुद्दीयां और दो-दो गांडें चोद कर किसको मजा नहीं आएगा सुधा – मस्त मजा आया?”

“धीरज की पहल से मेरी जीजी की और यश जीजा जी की इकट्ठी चुदाई हो गयी। अब जीजी आगे कुछ ऐसा कहने जा रही थी जो मैंने और शायद यश जीजा जी ने भी सोचा नहीं होगा।”

जीजी कुछ देर चुप रही फिर बोली, ‘यश तुमने दो दो फुद्दीयां और दो-दो गांडें चोद ली। कौशल्या दो-दो लंड अपनी फुद्दी और गांड में ले रही है – अब बचे मैं और मनोहर।”

मुझे जीजी की बात समझ नहीं आयी। जीजा जी ही बोले, “अब बचे तुम और मनोहर? क्या मतलब सुधा, मैं कुछ समझा नहीं।”

जीजी बोली, “यश मतलब साफ़ है। तुम दो दो फुद्दीयों को चोदने के मजे ले रहे हो। कौशल्या दो दो लंडों से चुदाई के मजे ले रही है, तो बताओ, मैं और मनोहर ही क्यों पीछे रहें?”

“जीजा जी कुछ चुप से हो गए। जीजी ने बात तो घुमा कर कही थी, मगर मतलब तो साफ़ ही था। मुझे समझ आ चुका था कि जीजी के कहने का क्या मतलब है। और धीरज अगर मुझे समझ आ गया था तो जीजा जी को भी समझा ही गया होगा। मगर जीजा जी बोले कुछ नहीं।”

“जीजी ही फिर बोली, “यश मेरे पास एक आईडिया है, एक नई तरह से सेक्स के मजे लेने का। अगर तुम्हें पसंद आये तो हां बोलना ना पसंद आये तो मना कर देना, बात यहीं खत्म हो जाएगी। कहो तो बोलूं?”

“जीजा जी बोले, “बोलो सुधा, तुम्हारा आडिया भला किसे पसंद नहीं आएगा?”
“जीजी बोली, “यश तुम्हें याद यही कल जब तुम्हारे और कौशल्या की चुदाई के बाद मैंने तुमसे पुछा था कि, क्या सोच कर तुमने कौशल्या को चोद दिया – यही कि साली होती है आधी घरवाली? तुम चुप रहे थे और अपनी बात का जवाब भी मैंने ही दिया था।”

“मैं और जीजा जी जीजी की तरफ देख रहे थे।”

“जीजी बोली, “यश मैंने कहा था यश तुम मुझे चोद रहे थे, कौशल्या मनोहर से मस्त फुद्दी और गांड चुदवा रही थी, फिर भी तुमने आपस में चुदाई कर ली? कभी सोचा है ऐसा क्यों हुआ? यश ऐसा इसलिए हुआ क्यों कि हर इंसान कुछ नया चाहता है। कुछ रोमांचक करना चाहता है। कौशल्या की मस्त चुदाई हो रही थी, मगर उसे कुछ नया चाहिए थी। इसी तरह, तुम भी मेरी मस्त चुदाई कर रहे थे, मगर तुम्हें भी कुछ नया चाहिए था। बस इसी बात पर तुम्हारी और कौशल्या की चुदाई हो गई। और यश तुमने इस पर कहा था सुधा असल में हुआ तो यही है।”

“मैं और जीजा जी चुप थे और जीजी की बातें सुन रहे थे।”

“और इसके बाद जीजी कुछ देर चुप बैठी रही और फिर बोली, “यश क्यों ना हम कुछ ना हम सब भी कुछ नया करना शुरू करें, कुछ रोमांचक।”

“जीजा जी बोले, “हम सब? कुछ नया, कुछ रोमांचक? क्या मतलब सुधा, साफ़-साफ़ बोलो?”

“जीजी आगे की तरफ थोड़ी झुकी और बोली, “यश क्यों ना हम ग्रुप सेक्स करें – तुम मैं, कौशल्या और मनोहर। तुम और मनोहर एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर एक-दूसरे के सामने अदल-बदल कर मेरी और कौशल्या – हम दोनों की चुदाई करो, हमारी फुद्दी और गांड में लंड डालो। चारों के मजे हो जायेंगे और घर की बात भी घर में ही रहेगी।”

“जीजी की बात सुन कर चुप्पी छा गयी, एक तरह का पूरा सन्नाटा – इंग्लिश में जिसको कहते हैं “पिन ड्राप साइलेन्स”

“जीजा जी बोली, “मगर सुधा एक-दूसरे के सामने? तुम्हारी और मनोहर की चुदाई? ये कैसे हो सकता है?”

“जीजी बोली, “क्यों नहीं हो सकता यश? अगर तुम अपनी साली, मनोहर की बीवी को चोद सकते हो, उसकी चुदाई के मजे ले सकते हो – वो भी मेरे सामने तो फिर मनोहर अपनी साली, तुम्हारी बीवी को क्यों नहीं चोद सकता – तुम्हारी बीवी की चुदाई के मजे नहीं ले सकता, तुम्हारे सामने? जो रिश्ता तुम्हारा और कौशल्या का है, वही रिश्ता मेरा और मनोहर का भी है – जीजा-साली का।”

“जीजा जी के पास जीजी की इस बात का कोई जवाब नहीं था। धीरज जीजा जी बस इतना ही बोले, “मगर सुधा?”

“जीजी बोली, “मगर क्या यश?”

“इसके बाद कोइ कुछ नहीं बोला। पांच मिनट बीत गए।”

“फिर जीजा जी ही बोले, “सुधा अगर तुम ऐसा चाहती हो तो ठीक है, मुझे कोइ एतराज़ नहीं। मगर क्या मनोहर मान जाएगा? उससे कौन बात करेगा?”

“जीजा जी के इस सवाल के जवाब में जीजी बोली, “मैं करूंगी बात, ये मास्टरनी की मास्टरी कब काम आएगी।”

“आखिर जीजा जी बोले, “सुधा अगर ऐसा है तो ठीक है। ये भी करके देख लेते हैं।”

जीजी बोले, “करके देख क्या लेते हैं यश कर लेते हैं – ये कोइ नई चीज़ नहीं जो हम पहली बार करेंगे – सारी दुनिया करती है।”

“जीजी की इस बात से मैं हैरान थी, जीजी ये क्या कह रही है और जीजी को ये सब कैसे पता, सारी दुनिया करती है? फिर ध्यान आया जीजी एक मास्टरनी है – जीजी का तो तरह तरह के लोगों से वास्ता पड़ता होगा।”

“जब जीजा जी ने कहा, सुधा अगर ऐसा है तो ठीक है ये भी करके देख लेते हैं”, तो जीजी ने बोली, “ठीक है तो यश अभी चलते है रोहिणी। आज इतवार है, मनोहर घर पर ही होगा।”

“जीजा जी बोले, “अभी?”

“जीजी बोली, “यश अभी क्यों नहीं? शुभ काम में देरी क्यों करनी। जब ये करना ही है तो फिर आज से ही क्यों नहीं? अगर बात बन गयी तो आज ही कर लेंगे ग्रुप चुदाई का मुहूर्त।”

“जीजा जी बोले, “सुधा क्या बात है ज्यादा ही उतावली हो रही हो मनोहर का लंड फुद्दी लेने के लिए।”

“जीजी ने कहा, “फुद्दी में ही क्यों, गांड में भी। रात की मस्त चुदाई के बाद अब तो मेरी फुद्दी और गांड भी मनोहर का लंड डलवाये बिना नहीं मानेगी। हां अगर मनोहर ही मना कर दे तो अलग बात है।”

“जीजा जी बोले, “मनोहर क्यों मना करेगा? उसे भी तो एक नई फुद्दी और नई गांड में लंड डालने का मजा आएगा। और सुधा तुम्हारी गांड का तो छेद तो वैसे ही बहुत टाइट है, मनोहर को तो मजा ही आ जाएगा।”

“जीजी बोली, “तो फिर चलो चलते हैं रोहिणी।”

“धीरज मैं तो बस जीजी और जीजा जी की बातें सुन ही रही थी। मगर धीरज मुझे कोइ फर्क नहीं पड़ रहा था। मनोहर का लंड तो मैं लेती ही थी, अब जीजा जी का लंड भी ले ही चुकी थी – और तो और मैं और जीजी के सामने जीजा जी से चुदाई भी करवा चुकी थी। जीजी की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी तो वैसे ही तैयार हो चुकी थी और मेरी गांड में खुजली मची पड़ी थी।”

“फिर हम तीनों तैयार हो कर रोहिणी के लिए रवाना हो गए। जीजा जी ने तेरे मौसा को फोन कर ही दिया था। हम पहुंचे तो तेरे मौसा हमारा इंतजार कर ही रहे थे। हमे देखते ही बोले, “क्या हुआ कौशल्या रात वहीं रुक गयी?”

“मैं ही बोली, “असल में मनु, मैं जब गुड़गांव पहुंची तो पता चला जीजी की कोइ ट्रेनिंग है, जीजी शाम को आयी तो जीजी ने मुझे रोक लिया।”

“जीजी हंसते हुए बोली, “क्या हुआ मनोहर, कौशल्या के बिना नींद नहीं आई क्या रात को?”

“तेरे मौसा बोले, “नहीं-नहीं जीजी ऐसी कोई बात नहीं, वो तो मैंने तो वैसे ही पूछ लिया।”

“जीजी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “अरे मनोहर क्या हुआ जो रात रुक गई कौशल्या। तुम तो रोज मजे लेते हो कौशल्या के साथ, थोड़ा जीजा साली को भी तो कुछ मजे लेने दो, आखिर को साली भी तो आधी घरवाली ही होती है। कौशल्या यश की आधी घरवाली है और जैसे मैं तुम्हारी आधी घरवाली हूं।”

“धीरज तेरे मौसा जीजी की बात पर बस हंस दिए।”

“इसके बाद तो जीजी ने जैसे बम्ब ही फोड़ दिया। जीजी ने सीधा ही तेरे मौसा से कह दिया, “मनोहर, तुमने मजे लेने हैं अपनी साली – आधी घरवाली के साथ?”

“जीजी ने इतना साफ़-साफ़ पूछा था कि तेरे मौसा हैरान परेशान से हो गए, कि जीजी सबके सामने ये कैसी बातें कर रही है?”

“तेरे मौसा बोले, “मजे जीजी? कैसे मजे, मैं समझा नहीं।”

“जीजी बोली, “अरे मनोहर, मजे मतलब मजे – मर्द कैसे मजे लेते है लड़कियों के साथ, वैसे मजे। बोलो लेने हैं?”

“इसके बाद तेरे मौसा जी सोच ही रहे थे कि जीजी बोल पड़ी, “मनोहर मैं कह रही हूं चुदाई के मजे मनोहर, फुद्दी चोदने के मजे।”

“तेरे मौसा को तो एक पल कि लिए समझ ही नहीं आया की जीजी ये बोल क्या रही है।”

एक बार जब हम तीनों की – मेरी जीजा जी और जीजी की ग्रुप सेक्स के लिए हां हो गयी – तो हम उसी दिन, इतवार को मनोहर से बात करने रोहिणी के लिए रवाना हो गए। वैसे धीरज मुझसे तो कोइ पूछ ही नहीं रहा था क्योंकि मैं तो एक तरह से पहले ही ग्रुप सेक्स कर रही थी।”

“रोहिणी पहुंच कर इधर-उधर के बातों के बाद जीजी ने थोड़ी ही देर में तेरे मौसा मनोहर से मुद्दे की बात शुरू कर दी, जिसके लिए हम रोहिणी आये थे।”

जीजी मनोहर से बोली, “मनोहर, तुमने मजे लेने हैं अपनी साली – आधी घरवाली के साथ? वैसे वाले मजे जैसे मजे मर्द लेते हैं लड़कियों के साथ, बोलो लेने हैं? और जब मनोहर ने पूछा, “कैसे मजे जीजी”, तो जीजी में साफ़ ही बोल दिया, “चुदाई के मजे मनोहर चुदाई के मजे, फुद्दी चोदने के मजे।”

“जैसे ही जीजी ने ये बोला तो तेरे मौसा तो जैसे सुन्न ही पड़ गए। तेरे मौसा को तो एक पल के लिए समझ ही नहीं आया कि जीजी ये बोल क्या रही है? चुदाई के मजे, फुद्दी चोदने के मजे।”

“मनोहर की तो जैसे आवाज़ ही बंद हो चुकी थी वो बस इतना ही बोले, जीजी ये आप क्या कह रही है, फुद्दी चोदने के मजे? चुदाई के मजे? किसकी फुद्दी जीजी, मैं समझा नहीं?”

“जीजी बोली, “हां मनोहर यही बोल रही हूं। फुद्दी चोदने के मजे, चुदाई के मजे, मेरी फुद्दी चोदने के मजे – अपनी साली, आधी घरवाली की फुद्दी चोदने के मजे – बोलो लेने हैं ये मजे? इसमें ना समझ में आने वाली कौन सी बात है?”

“जीजी की बात सुन कर तेरे मौसा तो परेशान ही हो गए और यश जीजा जी से बोले, “यार यश ये जीजी को क्या हो गया है, ये क्या बोल रही है?”

जीजा जी बोले, “मनोहर, मैं क्या बताऊं, तुम्हारी साली है, तुम खुद ही पूछ लो सुधा से वो क्या बोल रही है।”

“जब मनोहर कुछ नहीं बोले तो जीजी ही बोली, “मनोहर मेरी बात ध्यान से सुनना। मैं कह रही हूं हम चारों क्यों ना मिल कर ग्रुप सेक्स करें? तुम और यश और हम दोनों बहनें। तुम दोनों हम दोनों बहनों को चोदो, एक दूसरी के सामने – हमारी फुद्दी, गांड, मुंह में जहां मन करे लंड डालो और खुद भी मस्त मजे लो और हमें भी मस्त मजे दो।”

तेरे मौसा अब भी चुप थे मगर जीजी की इतनी साफ़ बातें सुन कर उनका लंड हरकत में आ चुका था। एक औरत-औरत क्या – तेईस साल की जवान लड़की ही तो थी तब जीजी। एक जवान लड़की अपनी फुद्दी प्लेट में सजा कर एक जवान मर्द को परोस रही थी तो भला किसा मन नहीं करेगा चुदाई का?”

मनोहर का लंड जीजी की फुद्दी, चुदाई की बातें सुन-सुन कर खड़ा होने लग गया था। मनोहर ने अपना खड़ा होता हुआ लंड खुजलाया। ये किसी से भी छुपा नहीं रहा। मनोहर को इस तरह लंड खुजलाते देख कर जीजी उठी और जा कर मनोहर की टांगो के ऊपर दोनों तरफ अपनी टांगें करके खड़े होते हुए लंड पर बैठ गयी और मनोहर के गले में बाहें डाल कर मनोहर के होंठ अपने होठों में ले लिए।”

“मनोहर कुछ देर तो बुत की तरह बैठे रहे, मगर अब तो मनोहर के लिए भी बहुत हो चुका था। मनोहर का एक हाथ जीजी के मम्मों पर पहुंच गया – दूसरा हाथ मनोहर ने जीजी को कस कर अपने से चिपका लिया। मनोहर ने जीजी के मम्मे से हाथ हटाया और हाथ नीचे करके जीजी की फुद्दी टटोलने लगे।”

“मैंने जीजा जी की तरफ देखा – मेरी और यश जीजा जी की नज़र मिली और जीजा जी ने अपना लंड खुजलाया और मैंने अपनी फुद्दी पर हाथ फेर दिया। पूरा माहौल ग्रुप चुदाई वाला बनने लगा था।”

“मनोहर ने अपना हाथ जीजी की फुद्दी से हटाया और जीजी को दोनों बाहों में जकड़ लिय। मतलब मनोहर जीजी को चोदने के लिए तैयार हो चूके थे।”

“कुछ मिनटों के बाद मनोहर ने जीजी के अपने से अलग किया और बोले, जीजी क्या सच में ही मेरा लंड लेना है आपने अपनी फुद्दी में?”

“जीजी ने एक बार फिर मनोहर के होंठ चूमें और बोली, “मनोहर तुम्हारे खड़े लंड पर बैठी हूं, अभी भी तुम्हें विश्वास नहीं हो रहा की मैं सच में ही तुम्हारा लंड अपनी फुद्दी में लेना चाहती हूं – तुमसे चुदाई करवाना चाहती हूं।”

“धीरज, अब बहुत हो चुका था, मनोहर बोले, “तो फिर चलिए जीजी अंदर चलते हैं, अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा।”

“जीजी खड़ी हो गयी। मनोहर भी खड़े हो गए, मनोहर का लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पायजामें में बाहर आने को हो रहा था।”

“मनोहर ने एक नज़र यश के तरफ देखा और जीजी की कमर पर हाथ रख कर जीजी को कमरे की तरफ ले जाने लगे। चलते चलते मनोहर ने हाथ पीछे किया और जीजी के चूतड़ों में उंगली दाल दी।” दी।”

“जीजा जी ने भी यही किया था जब जीजा जी गुडगांव में मुझे चोदने के लिए कमरे में ले जा रहे थे।”

“साले भोसड़े वाले असारे मर्द एक से ही होते हैं।”

“जीजी और तेरे मौसा कमरे में चले गए और दरवाजा बंद कर लिया।”

“अब रह गए मैं और जीजा जी। ग्रुप सेक्स की शुरूआत एक तरह से हो चुकी थी।”

जीजा जी मुझसे बोले, “कौशल्या, ये तो गए अब दो घंटे से पहले क्या आएंगे। हम भी चलें? मेरा लंड भी खड़ा फुद्दी ढूंढ रहा है।”

“मैंने कहा, “जीजा जी मेरी फुद्दी भी गर्म हुई पड़ी है – ये भी लंड ही ढूंढ रही है, चलिए, हम भी चलते हैं।”

“और हम भी अंदर दूसरे कमरे में चले गए।”

“अंदर जाते ही हमने देर नहीं लगाई और हम दोनों की ताबड़-तोड़ चुदाई शुरू हो गयी। एक ही बार में जीजा जी ने मेरी फुद्दी और गांड दोनों रगड़ दी – मजा ही आ गया। जीजा जी को भी गांड चुदाई में मजा आने लगा था।”

“ढाई घंटे की चुदाई के बाद, हम बाहर आये तो मनु और जीजी अभी भी अंदर कमरे में ही थे।”

“हम नंगे ही आधा घंटा बैठे रहे। जब आधे घंटे के बाद भी दोनों, तेरे मौसा जी और जीजी बाहर नहीं आये तो जीजा जी बोले, “कौशल्या लगता है कुछ ज्यादा ही मस्ती में आ गए है सुधा और मनोहर, मौज करने दो दोनों को, चलो हम भी चलें।”

“इसके बाद मैं और तेरे पापा यश फिर कमरे में चले गए और फिर हमारी देर रात तक चुदाई होती रही। चुदाई की थकान के कारण हम वहीं सो गए।”

“सुबह सात बजे हमारी नींद खुली और हम फ्रेश हो कर बाहर आ गए।”

“सुबह के आठ बज चुके थे, मगर मनोहर और जीजी अभी भी कमरे में ही थे। मैंने चाय बना ली। मैं और जीजा डाइनिंग टेबल पर बैठ चाय के चुस्कियां लेने लगे।”

“जीजा जी बोली, “कौशल्या, सच कहूं, तुम्हें चोदने का मजा बहुत मस्त आता है।”

“मैं हँसते हुए बोली, “जीजा जी लगता है मनोहर और जीजी भी चुदाई के मस्त मजे ले रहे हैं।”

“जीजा जी बस इतना ही बोले, “कमाल है, अभी तक भी अंदर ही है, कितना चोद रहा है मनोहर सुधा को, और ये सुधा ये भी कितना चुदवा रही है? ये लोग चुदाई कर रहे हैं या भक्ति कर रहे हैं?”

“चुदाई कर रहे हैं या भक्ति कर रहे हैं?जीजा जी की इस बात पर मेरे हंसी छूट गयी, और तभी मनोहर और जीजी कमरे से बाहर आ गए। दोनों नहा धो कर फ्रेश हो कर आये थे।”

“तेरे मौसा और जीजी बड़े खुश लग रहे थे। लगता था मस्त चुदाई हुई थी रात को।”

आते ही तेरे मौसा जी हंसते हुए बोले, “मजा ही आ गया यार यश, जीजी तो मस्त चुदाई करवाती है। ये ग्रुप सेक्स तो सच में ही बड़ी मस्त चीज़ है यार।”

“जीजी भी बड़ी खुश लग रही थी। जीजी बोली, “मनोहर अभी ग्रुप सेक्स हुआ ही कहां है? असली ग्रुप सेक्स तो तब होगा, जब सब मिल कर इकट्ठे एक ही कमरे में एक दुसरे के सामने चुदाई करंगे।”

“मनोहर बोले, “खैर जीजी ये बताओ कैसे रही रात की चुदाई?”

“जीजी हंसते हुए बड़ी ही बेशर्मी के साथ बोली, “यश मस्त चुदाई हुई रात को, सब जगह डाल लिया मनोहर ने लंड। चुदाई के साथ-साथ और बह बहुत कुछ किया मनोहर ने। मनोहर जो जो बोलता गया मैं करती गयी। अब जब चुदाई के मजे लेने ही हैं तो फिर ना किस बात की और नखरा किस बात का।”

“फिर तेरे मौसा तेरे पापा से बोले, “यश तुमने भी चोदा कौशल्या को?”

“इससे से पहले कि जीजा जी कुछ जवाब देते जीजी बोली, “मनोहर ये क्या पूछ रहे हो, यश और कौशल्या की चुदाई? ये सारी कहानी कौशल्या और यश के चुदाई से ही तो शुरू हुई है।”

“धीरज, फिर तो जीजी जो बोली तो बोलती ही गई। “जीजी बोली, “मनोहर आज जो कुछ भी हुआ है – जो भी हमारी ग्रुप चुदाई शुरू हुई है ये सब इस पागल कौशल्या की वजह से ही हुआ है।”

“ये कौशल्या तो कुंवारी होते हुए ही यश का लंड अपनी फुद्दी में लेने के लिए मरी जा रही थी, मैंने ही इसे रोक रखा था ये कह कर कि लड़की की पहली चुदाई पर उसके पति का हक़ होता है। उसकी फुद्दी की सील उसके पति के लंड से ही फटनी चाहिए, वरना ये तो यश के लंड से अपनी फुद्दी की सील फड़वा लेती।”

“जीजी मनोहर को बता रही थी, “मनोहर, उस वक़्त तो ये कौशल्या मान गयी, मगर कल जब इसे मौका मिला तो इसने यश से चुदाई करवा ली। मुझे जब पता लगा कि इन जीजा साली ने चुदाई कर ली है, तो मैंने सोचा कि एक जीजा साली ने आपस में चुदाई कर ली है तो फिर मैं और तुम ही क्यों पीछे रहें – मैं और तुम भी तो जीजा साली ही हैं और इसी लिए मैंने ही इनको ग्रुप सेक्स के लिए राजी कर किया।”

“फिर जीजी बोली , “सच कहूं मनोहर मुझे तो तुम्हारा लंड फुद्दी में और गांड में लेने का बहुत मजा आया।”

“मनोहर यश से बोला, “यार यश जीजी का आईडिया तो बुरा तो नहीं था। मजे के मजे और घर की बात घर में। और सच पूछो यश तो जीजी को चोदने का तो मुझे भी बहुत मजा आया।”

“फिर तेरे तेरे मौसा जीजी से बोले बोले, “जीजी आप के तो चरण छूने का मन करता है जो आपने कौशल्या की फुद्दी की सील मेरे लंड से फटने के लिए बचा कर रखी। जीजी सच में ही कौशल्या के फुद्दी की सील मेरे लंड से ही फटी। ढेर सारा खून निकला था पहली रात की चुदाई में कौशल्या की फुद्दी में से। मेरी मम्मी तो ऐसी चुदाई से इतने नाराज हुई थी कि मुझे कमरे से ही ये कहते हुए बाहर कर दिया था, की ये क्या कहीं भागी जा रही थी।”

“जीजी बोली, ये चरन वरन छूने की बात भूल फुद्दी चूसने की बात करो।” मनोहर जीजी की बात पर हंस दिए।”

“मनोहर की मम्मी जी वाली बात पर मैंने हंसते हुए कहा, “मनोहर क्यों झूठ बोल रहे हो यार। मम्मी जी तो इस लिए नाराज हुई थी क्योंकि तुमने शराब पी कर मेरी चुदाई की थी और पहली ही रात को मेरे गांड का कचरा कर दिया था। जिस तरह मैं बैठी हुई थी, मम्मी जी तो एक मिनट में ही समझ गए थी की तुमने मेरी गांड के साथ क्या किया होगा। मम्मी जी तो मुझे गांड पर लगाने के लिए क्रीम भी दे कर गयी था।”

“माहौल बड़ा ही शानदार हो चुका था। मेरी बात पर सब जोर जोर से हंसते लगे।”

“सब की हंसी बंद हुई तो मनोहर बोले, “यश जीजी को चोदने का तो मजा ही आ गया, अब आगे से ये ग्रुप सेक्स कैसे किया करेंगे?”

“जवाब जीजी ने दिया। जीजी बोली, “अब आगे से ये होगा की हर शुक्रवार या तो तुम दोनों गुडगांव आ जाया करना या हम यहां आ जाया करेंगे, और दो रात ऐसी ही चुदाई किया करेंगे – तुम मेरे साथ और यश कौशल्या के साथ। और आगे से जब हम ग्रुप सेक्स किया करेंगे तो इकट्ठे एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर दूसरे के सामने किया करेंगे – अदल-बदल कर।”

“इस पर तेरे मौसा का लंड खड़ा हो गया था। तेरे मौसा ने लंड खुजलाया और बोले, “एक-दूसरे के सामने? ये तो बड़ा मजा रहेगा। मगर जीजी वो कब करेंगे?

“जीजी बोली, “मनोहर आज रात ही करेंगे। डालना तुम दोनों अपने लंड हमारी आगे-पीछे बदल-बदल कर – कभी तुम और मैं कभी यश और मैं – कभी यश और कौशल्या, कभी तुम और कौशल्या।”

ग्रुप सेक्स की शरुआत तो अलग-अलग कमरों में एक-दूसरे की बीवी के साथ चुदाई से हुई। मगर जल्दी ही चारों एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर, एक-दूसरे के सामने चुदाई करने लग गए।

“सब की हंसी बंद हुई तो मनोहर बोले, “यश जीजी को चोदने का तो मजा ही आ गया। अब आगे से ये ग्रुप सेक्स कैसे किया करेंगे?” “जवाब जीजी ने दिया। जीजी बोली, “अब आगे से ये होगा कि हर शुक्रवार या तो तुम दोनों गुडगांव आ जाया करना, या हम यहां आ जाया करेंगे, और दो रात ऐसी ही चुदाई किया करेंगे, तुम मेरे साथ और यश कौशल्या के साथ। और आगे से जब हम ग्रुप सेक्स किया करेंगे, तो इकट्ठे एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर, एक-दूसरे के सामने किया करेंगे – अदल-बदल कर।”

“इस पर तेरे मौसा का लंड खड़ा हो गया था। तेरे मौसा ने लंड खुजलाया और बोले, “एक-दूसरे के सामने? ये तो बड़ा मजा रहेगा। मगर जीजी वो कब करेंगे?

“जीजी बोली, ” मनोहर आज रात ही कर लेंगे। डालना तुम दोनों अपने लंड हमारी आगे-पीछे बदल-बदल कर – कभी तुम और मैं कभी यश और मैं – कभी यश और कौशल्या, कभी तुम और कौशल्या।”

“फिर जीजी ने यश जीजा जी से पूछा, “क्यों यश, तैयार हो?”

“जीजा जी का लंड भी खड़ा हो चुका था। जीजा जी बोले, “मुझे क्या एतराज होगा, मुझे तो कौशल्या को चोद कर मजा ही बड़ा आया है। क्या मस्त गांड चुदवाती है ये। मगर अब क्या करूं मेरा लंड तो अभी ही खड़ा हो चुका है।”

“तेरे मौसा बोले, करना क्या है, अब जो काम रात को करना है, वो काम अभी कर लेते हैं – ग्रुप सेक्स, इकट्ठे चुदाई एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर – अदल-बदल कर, एक-दूसरे के सामने। मेरा लंड भी फुंफकारे मार रहा है।”

“मैं बोली, “थोड़ा सबर कर लो। अभी कामवाली आती होगी। उसे काम करके तो जाने दो, अभी दिन में ही कर लेंगे ये चुदाई भी। इतने में हम भी कुछ चाय पानी नाश्ता कर लेते है।”

“जीजी बोली, “ठीक है मैं बाथरूम जा कर आती हूं। मनोहर के लंड के अब तक पानी से भरी पड़ी है मेरी फुद्दी। फिर जीजी यश जीजा जी से बोली, “यश जरा तुम भी चलना मेरे साथ। जरा देखना क्या हालत की है इस मनोहर ने मेरी गांड की।”

“जीजा जी बोले, “अरे सुधा इसमें बाथरूम में क्या करना है? यही दिखाओ अपनी गांड। मनोहर भी तो देख ले क्या गुल खिलाया है इसके लंड ने। कहीं कौशल्या की पहले रात वाली गांड चुदाई के तरह तुम्हारी गांड का भी तो कचरा नहीं कर दिया?”

“इस पर मैं बोली, “सच में जीजी पहली रात को मनोहर ने तो मेरी इतने गांड चुदाई की कि मेरे गांड का कचरा ही कर दिया था। इसके बाद तो एक महीने तक गांड चुदाई नहीं करवाई मैंने मनोहर से।”

“धीरज, अब हम लोगों में शर्म तो एक ही दिन में खत्म हो चुकी थी।”

“जीजी उठी और अपने सलवार खोल कर चूतड़ हमारी तरफ कर दिए और दोनों हाथो से चूतड़ चौड़े कर दिये। जीजी की गांड लाल हुई पड़ी थी। यश जीजा जी बोले, “लो मनोहर देख लो भाई क्या किया तुमने मेरी बीवी की गांड का।”

“तेरे मौसा उठे और जीजी की गांड देख के गांड का छेद चाटने लगे। छेद चाटते हुए मनोहर बोले, “जीजी गांड लाल तो है। दुःख तो नहीं रही?”

जीजी बोली, “और अगर मैं कहूं दुःख रही है तो क्या आज नहीं डालोगे लंड मेरी गांड में?”

“मनोहर बोले, “बिलकुल जीजी अगर आप कहेंगी कि दुख रही है तो नहीं डालूंगा।”

“जीजी हंसते हुए बोली, “मनोहर आज तुम मेरी फिक्र मत करो। अगर मन करेगा तो फिर से डाल लेना इसमें लंड आज भी। आज हमारी ग्रुप चुदाई का मुहूर्त है किसी को किसी तरह की कोइ भी मनाही नहीं है – जो चाहो करो, जैसे चाहो वैसे चोदो।”

“थोड़ी ही देर में कामवाली आ गई।”
“सब लोग अपने अपने काम में लग गये। कोइ बाथरूम चला गया, कोइ अखबार पढ़ने लगा। मैं नाश्ता तैयार करने लग गयी।”

“कामवाली काम करके गई ही थी कि जीजा जी उठ खड़े हुए और बोले, “लो भाई चली गयी कामवाली। चलो फिर, अब देर किस बात की है?”

“जीजी और मनोहर हंस पड़े और जीजी बोली, “क्या हुआ यश, रहा नहीं जा रहा?”

“जीजा जी ने कुरता ऊपर किया और बोली, “लो खुद ही देख लो। जीजा जी का लंड पूरा खड़ा था।”

“हम चारों अंदर आ गये और आनन-फानन में कपड़े उतार दिए। जीजा जी और तेरे मौसा सोफे पर बैठ गये और जीजी ने तेरे मौसा का लंड मुंह में ले लिया और मैंने जीजा जी का। बस इसके बाद जीजा जी ने मुझे और तेरे मौसा जी ने जीजी के चोदा। हमें जब मजा आ गया तो अदल-बदल हो गया। अब जीजा जी जीजी के ऊपर थे और तेरे मौसा मेरे ऊपर।”

“एक-एक बार जब हमें दुबारा मजा आया तो तेरे मौसा जीजी बोले, जीजी अब कहो तो एक बार आपके गांड में डाल लूं? आपकी गांड बड़ी टाइट है, बड़ा मजा आता है।”

“जीजी भी बोली, “कैसे मना कर दूं मनोहर? मैं तो पहले ही कह चुकी हूं, आज हमारे ग्रुप चुदाई का मुहूर्त है किसी को किसी तरह की कोइ भी मनाही नहीं है – जो चाहो, जैसे चाहो वैसे चोदो। आ जाओ, चोद लो मेरी गांड।”

“तेरे मौसा जी जीजा जी से बोले, “यश तुम भी एक बार गांड ट्राई करो। कौशल्या की गांड में डालो, मस्त लेती है पूरा का पूरा लंड गांड में। ऐसे चूतड़ आगे-पीछे करेगी, तुम्हें कुछ करने मी जरूरत ही नहीं होगी। जीजी के गांड तो लगता है तुम चोदते नहीं, तभी जीजी की गांड का छेद बहुत टाइट है।” बस धीरज इसके बाद हमारी गांड चुदाई चालू हो गयी।”

“जीजा जी बोले, “मनोहर कौशल्या गांड चुदवा चुकी है मुझसे और सच में ही मस्त गांड चुदवाती है कौशल्या।”

“मनोहर बस इतना ही बोले, “सही बात है यश, गांड चुदवाने में कौशल्या का कोइ जवाब नहीं।”

“बस फिर क्या था, उन्होंने हम दोनों को सोफे पर अगल-बगल में ही उलटा लिटा दिया। हमारे चूतड़ पीछे थे। मनोहर जीजी के पीछे था और जीजा जी मेरे पीछे। अगले ही पल मनोहर का लंड जीजी की गांड में था और यश का लंड मेरी गांड में। मनोहर और यश हमारी गांड चुदाई करते करते ऐसी-ऐसी बातें कर रहे थे कि पूछो मत।”

“मनोहर बोल रहा था, “यार जीजी की गांड चोदने का मजा ही अलग है। पूरा लंड लेती है जीजी। और उधर तेरे पापा बोल रहे थे, “इधर भी पूरा लंड ले रखा है कौशल्या ने, बस टट्टे ही बाहर हैं।”

“फिर यश जीजा जी हंसते हुए मनोहर से बोले, “मनोहर ये तो भाई अपनी जीजी का धन्यवाद कर जो तुझे कौशल्या की सीन बंद फुद्दी चोदने को मिली, वरना ये तो मुझसे अपनी शादी से पहले ही चुदाई करवाना चाहती थी।”

“तेरे मौसा भी कौन से कम हैं। वो उसी लय में हंसते हुए बोले, “यश जीजी की उसी एहसान का तो बदला चुका रहा हूं इनकी गांड चोद कर।”

“ये कहते-कहते मनोहर ने जीजी गांड में जोर-जोर के धक्के लगाते हुए कहा, “ले सुधा और ले – क्या मस्त गांड है।”

“मैं और जीजी नीचे एक-दूसरे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी।”

“गांड चुदाई के दौरान हमने फुद्दी के दाने रगड़-रगड़ कर मजे ले लिए थे। फुद्दीयां पहले ही चुद चुकी थी, मगर मनोहर और जीजा जी के लंड अभी भी खड़े ही थे।”

“गांड चुदाई के बाद मैं और जीजी सोफे पर बैठी थी।”

“मनोहर बोला, “लो भाई यश इन दोनों का काम तो हो गया। आगे भी ले लिया इन्होने पीछे भी ले लिया। अब क्या करें हमारे लंड तो अभी भी खड़े ही हैं?”

“मनोहर ने जीजी से पूछा, ” जीजी आप बताओ, अब क्या करे?”

“जीजी बोली, “मनोहर अब एक ही जगह बची है, मुंह में लंड डाल कर मजा ले लो।”

“जीजी की बात सुन कर मैंने कहा, “जीजी मैं बताऊं, मेरे पास एक आईडिया है।”

“जीजी बोली, “बता।”

“मैं बोली, “जीजी मुंह में तो हम लेती ही हैं, क्यों ना हम इनके लंड की मुट्ठ मार कर इनके लंड का पानी अपने मुंह में गिराएं। जब सफ़ेद-सफ़ेद गरम-गरम मलाई निकलेगी इनके लंडों में से तो चाटने का मजा ही आ जाएगा।”

“जीजी बोली, “वाह कौशल्या ठीक है , तो फिर यही करते हैं अब।”

“बस फिर क्या था, मनोहर जीजी के आगे और जीजा जी मेरे आगे आ गए। मैंने और जीजा जी का और जीजी ने मनोहर का लंड पकड़ लिया और उनके लंडों की मुट्ठ मारने लगी।”

“मनोहर और जीजा जी आह जीजी आह कौशल्या ही बोलते जा रहे थे। दस मिनट लंड चूसने और मुट्ठ मारने के बाद मनोहर और जीजा जी को मजा आने वाला हो गया।”

“जीजा जी बोले, “कौशल्या मेरा निकलेगा अब।”

“उधर मनोहर भी बोले, “जीजी मेरा भी लंड मलाई छोड़ने वाला है। दो ही मिनट की बाद मनोहर जोर से बोला, “ले मादरचोद सुधा, निकला मेरा।”

“जीजी ने मुंह पूरा खोल लिया – और मनोहर की लंड से गाढ़ा सफ़ेद गरम शहद निकला और जीजी के मुंह में गिरने लगा। मनोहर का लंड पानी छोड़ता जा रहा था और जीजी गर्म सफ़ेद पानी चाटती जा रही थी। तभी जीजा जी भी बोले, “ले कौशल्या मेरी जान ले, मेरा भी निकला।”

“हम दोनों – मैंने और जीजी ने जीजा जी और मनोहर के लंड से निकले पानी की एक-एक बूंद चाट ली।”

“धीरज सच में मस्त मजा था – बिलकुल अलग ही तरह का।”

मैं सोच रहा था कि मौसी की ग्रुप सेक्स की कहानी तो बड़ी मस्त और मजेदार थी।
कहानी सुनाने के बाद मौसी बोली, “और बस धीरज ये सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो अब तक चल रहा है। अब तेरे मौसा जी और जीजा जी के लंड सख्त नहीं होता, मगर फिर भी ये ग्रुप सेक्स चालू है। अब दोनों हमारी फुद्दीयों और गांड में डिडलो – रबड़ के लंड डालते हैं या हमारी फुद्दीयां चूसते चाटते हैं और हमें मजा दी देते हैं – और हम उनके लंड चूस कर या मुट्ठ मार कर उन्हें मजा दे देती हैं।”

मौसी आगे बोली, “अब यहीं पर फर्क है। लंड का मजा तो मुठ मार आ गया मगर फुद्दी? फुद्दी के मजे के लिए फुद्दी के रगड़ाई भी तो होनी चाहिए, जो नहीं होती। बस धीरज इसीलिए मैं और जीजी तेरा लंड अपनी फुद्दी में डलवा रही हैं।”

ये कहानी सुना कर मौसी चुप हो गयी।
मैंने बस इतना ही कहा, “कमाल हो मौसी आप लोग भी।”

मैंने मौसी से पूछा, “अच्छा मौसी एक बात बताओ, मम्मी और मौसा जी के पूरी रात वाली वो चुदाई कैसी रही? क्या-क्या हुआ उसमें?”

मौसी बोली, “धीरज बंद कमरे में क्या हुआ, कैसे हुआ ये तो किसी ने किसी से कभी पूछा ही नहीं – पूछने के जरूरत ही नहीं पड़ी। अक्सर तो सारी चुदाईयां तो एक-दूसरे के सामने की होती थी। और जो कुछ बंद कमरे में होती भी थी, वो जब सब इकट्ठे बैठते थे तो खुद ही बता देते थे। उस रात भी जब पूरी रात बंद कमरे में रहने के बाद तेरे मौसा जी और जीजी बाहर आये तो थोड़ा तो उन्होंने ने खुद ही बता दिया।”

“उस दिन सुबह के आठ बजे होंगे, मैं और यश जीजा जी बैठे चाय पी रहे थे कि मनोहर जीजी कमरे से बाहर आ गए। आते ही तेरे मौसा जी बोले, “यार यश, जीजी तो मस्त चुदाई करवाती है, मजा ही आ गया। आगे-पीछे सब जगह ले लिया जीजी ने।”

“जीजी भी हंस दी और बोली, “आगे-पीछे क्या यश, जहां जहां मनोहर बोलता रहा, मैं लेती रही। अब जब चुदाई करवानी ही है तो बताओ नखरा कैसा?”

“बस धीरज इससे ज्यादा ना हमने पूछा, ना मनोहर और जीजी ने बताया ”

मौसी की बातें सुन-सुन कर मैं हैरान था। मैंने मौसी से पूछा, “मौसी और क्या-क्या करते रहे हो आप लोग?”

मौसी बोली, “धीरज सब कुछ करते रहे हैं, जो भी कुछ ग्रुप सेक्स में हो सकता है वो सब कुछ।”

फिर मौसी कुछ सोचते-सोचते हंस दी।

मैंने पूछा, “क्या हुआ मौसी, आप हंसी क्यों, कुछ याद आ गया क्या?”

मौसी बोली, “हां धीरज कुछ याद ही आ गया।”

फिर मौसी ही बोली, “धीरज एक दिन हम ग्रुप सेक्स कर रहे थे। यश जीजा जी मुझे चोद कर हटे थे। मुझे मजा आ चुका था, मगर जीजा जी के लंड ने पानी नहीं छोड़ा था और जीजा जी का लंड खड़ा ही था। मैं और जीजा जी सोफे पर बैठ गए। मेरे हाथ में जीजा जी का खड़ा लंड था।”

अपनी ग्रुप चुदाई की कहानी सुनाते-सुनाते मौसी कुछ सोचते-सोचते हंस दी। मैंने पूछा, “क्या हुआ मौसी, आप हंसी क्यों, कुछ याद आ गया क्या?”

मौसी बोली, “हां धीरज कुछ याद ही आ गया।”

फिर मौसी ही बोली, “धीरज उस दिन यश जीजा जी मुझे चोद कर हटे थे। मुझे मजा आ चुका था, मगर जीजा जी का लंड खड़ा ही था। मैं और जीजा जी सोफे पर बैठ गए। मेरे हाथ में जीजा जी का खड़ा लंड था।”

“सामने मनोहर जीजी को चोद रहा था। मनोहर फर्श पर खड़े थे और जीजी चूतड़ पीछे करके उल्टी लेटी हुए था। मनोहर ने जीजी की कमर पकड़ी हुई थी और जोर-जोर से जीजी की फुद्दी में लंड अंदर-बाहर कर रहे थे। अचानक जीजी ऊंची आवाज में बोली, “मनोहर रगड़ो दबा कर मुझे मजा आने वाला है।”

“मनोहर उन्ह-उन्ह करके जोर-जोर से जीजी की फुद्दी में लंड के धक्के लगाने लगे। तभी जीजा जी उठे और जा कर जीजी के दोनों तरफ टांगें करके लंड जीजी के मुंह के सामने करके लेट गए। जीजी ने एक पल के लिए आँखें खोलें और जीजा जी को देख कर जीजा जी का लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

“और तभी जीजी ने जोर से चूतड़ घुमाये और जीजा जी का लंड मुंह सी निकाल कर बोली, “साले मनोहर क्या चोदता है, निकल गया मेरी फुद्दी का पानी।” ये बोल कर चूतड़ घुमाते घुमाते जीजी ने जीजा जी का लंड दुबारा मुंह में ले लिया।”

“तभी जीजा जी ने जीजी का सर अपने लंड पर दबा दिया और बोले, “मादरचोद सुधा निकल गया मेरे लंड का पानी। चूस साली चाट सारा पानी।”

“मनोहर का लंड अभी भी जीजी के फुद्दी में ही था। उंगली करते-करते मेरी फुद्दी फिर से गरम हो चुकी थी। मैं उठी और जा कर जीजी की बगल में ही चूतड़ पीछे करके लेट गयी और मनोहर से कहा, “मनोहर साले अब रगड़ मेरी फुद्दी, चोद मुझे, निकाल मेरी फुद्दी का पानी। आग लग गयी है मेरी फुद्दी में तुम लोगों की चुदाई देख-देख कर।”

“मनोहर ने लंड जीजी की फुद्दी में से निकाला और मेरी फुद्दी में डाल दिया और मेरी कमर पकड़ कर मुझे चोदने लगे।”

“मेरी फुद्दी तो गरम ही थी, मनोहर भी जीजी को आधे घंटे से चोद रहा था। ये चुदाई पांच मिनट भी नहीं चली और मुझे मजा आ गया। मैं जोर से बोली, “मनोहर मजा आ गया मुझे।”

“मनोहर ने भी कस कर मेरी फुद्दी में धक्के लगाए और एक जोर की दहाड़ लगाई, “तेरी मां का भोसड़ा कौशल्या, साली मादरचोद निकल गया मेरा भी। यश यार क्या मस्त चुदाई करवाती हैं ये दोनों बहनें। एक नंबर की चुदक्कड़ हैं दोनों सालियां। कितना मजा देती हैं ये दोनों मादरचोद।”

“ये कह कर मनोहर थोड़ा रुका और जब उसके लंड का पूरा पानी निकल गया तो उसने लंड मेरी फुद्दी में से निकाला और जा कर सोफे पर बैठ गया।”

“जीजी ने भी यश जीजा जी का लंड मुंह से निकाल लिया और बिस्तर पर ही ढेर हो गयी। जीजा जी भी उठे और जा कर मनोहर क पास सोफे पर बैठ गए।”

“मैं भी उठी और जीजी के पास ही लेट गयी।”

“मौसी हंसते हुए बोली, “इतना काफी है धीरज या कुछ और भी बताऊं?”

“मैं हैरानी से बोला, “मौसी इससे आगे भी कुछ हो सकता है क्या? मौसी और भी कुछ करते थे क्या आप लोग? और क्या-क्या करते थे आप?”

“मौसी बोली, “धीरज, हमारा फाइनल काम होता थे इकट्ठे नहाना जिसमें हम एक-दूसरे के ऊपर पेशाब भी कर देते थे। अब ये कैसे करते थे, ये ना ही पूछे तो अच्छा है।” कह कर मौसी फिर से हंस दी।

“मुझे मम्मी का और दिव्या का मेरे मुंह में पेशाब करने वाला सीन याद आ गया।”

“मैं बस यही सोच रहा था, “क्या है यार हमारा खानदान हमारी फैमिली?”

“जो भी था, ग्रुप सेक्स का किस्सा जो मौसी ने सुनाया था, कमाल था। मैं सोच रहा था मम्मी-पापा, मौसा जी और मौसी तो बड़े मजे करते रहे हैं, वो भी पिछले चौबीस सालों से।

खैर ये तो हुआ हमारे खानदान का ग्रुप सेक्स का किस्सा। माधवी अपनी सहेली के साथ गयी हुई थी और दिन में मौसी की चुदाई तो मैं कर ही चुका था, रात को मैंने माधवी को चोदना था।”

“रात को मौसी, खाना खाने के बाद बोली, “माधवी, बेटा मेरा सर ज़रा भारी सा है, आज नींद की गोली खा कर जल्दी सोऊंगी।”

ये मेरी लिए इशारा था। माधवी को तो कुछ पता ही नहीं था। जैसे ही मौसी गयी और मौसी के कमरे का दरवाजा बंद हुआ तो मैंने माधवी से कहा, “माधवी आज चुदवानी है? मौसी तो गोली खा कर सोयेगी, तो समझो सुबह ही उठेगी।”

माधवी बोली, “ठीक है, मैं चलती हूं, कब तक आओगे?”

मैंने कहा, “आधे पौने घंटे में आता हूं, तब तक मौसी भी गोली खा कर सो चुकी होंगी।”

माधवी बोली, “ठीक है, तब तक मैं कंप्यूटर पर चुदाई की फिल्म देख कर अपनी फुद्दी गरम करती हूं। धीरज पीछे के दरवाजे से आना।”

मैंने सोचा, यार हद्द ही है इन लड़कियों की। चुदाई के लिए हर वक़्त तैयार।

माधवी गयी और मैं भी अपने कमरे में आ गया। दरवाजा अंदर से बंद करके पीछे की बालकनी से मौसी के कमरे में चला गया। मौसी ने दरवाजा खुला ही रखा हुआ था। बिस्तर पर मौसी नंगी ही लेटी हुई थी। मुझे देखते ही बोली, “धीरज मुझे मालूम ही था बेटा तू जरूर आएगा।”

मैंने अपने कपड़े उतारे और बोला, “मौसी मेरे लिए आप और मम्मी पहले हैं – दिव्या और माधवी बाद में। चलिए आपको मजा देता हूं, माधवी के कमरे में आधे घंटे के बाद जाना है। आज माधवी की गांड चोदने का मन हो रहा है। क्रीम भी लेनी है।”

मैंने मौसी से पूछा, “बोलो मौसी कैसे चुदवानी है?”

मौसी बोली, “पीछे से ही डाल धीरज, तेरा लम्बा लौड़ा पीछे से फुद्दी की गहराई तक जाता है – बड़ा मजा आता है। मगर धीरज आज लंड का पानी माधवी की गांड के लिए बचा कर रखना।”

इसके बाद मौसी की पूरे आधी घंटे मैंने चुदाई की। मौसी की फुद्दी दो बार जब पानी छोड़ गयी, तब मैं जा कर मौसी के पीछे से हटा मैंने कपड़े भी नहीं पहने और मौसी से क्रीम लेकर पीछे के दरवाजे से निकलने लगा।

मौसी बोली, “अरे धीरज, क्या ऐसे ही जाएगा? लंड को बैठने तो दे, माधवी क्या सोचेगी।”

मैंने कहा, “मौसी पूरे दो हफ्ते चोदा है मैंने दिव्या और माधवी को। उन्हें मेरी आदतों का पता चल चुका है।”

मौसी हंसी और बोली, “ये लड़कियां तो चुदाई के लिए जैसे मरी ही पड़ी हैं – पर तू ही कौन सा कम है। जा मजे ले बीस साल की टाइट फुद्दी के। कल नहीं जाने दूंगी तुझे कहीं भी – सारी रात चुदवाऊंगी।”

मैं बिना कपड़ों के खड़े लंड के साथ पिछले दरवाजे से माधवी के कमरे में पहुंचा तो माधवी भी नंगी ही बिस्तर पर लेटी हुई थी। मुझे दखते ही मेरे खड़े लंड की तरफ इशारा करते हुए बोली, “वाह मेरा भाई पूरी तरह से तैयार हो कर आया है।”

उस रात माधवी की मस्त चुदाई हुई। कितने बार मजा लिया माधवी ने इसकी तो कोइ गिनती ही नहीं रही। आखिर में माधवी ने गांड में भी लंड ले लिया। पूरा मजा लेने के बाद माधवी बोली, “धीरज अब मुंह में निकालो।”

मैंने कहा ठीक है, “चल लेट जा।” माधवी लेट गयी। मैंने माधवी की गांड और सर के नीचे तकिया रखा और माधवी के ऊपर उल्टा लेट गया।

मेरा लंड माधवी के मुंह में था और मेरा मुंह माधवी की फुद्दी में। माधवी मस्त लंड चूस रही थी। पंद्रह मिनट की चुसाई के बाद मुझे मजा आने वाला हो गया। मैंने माधवी से कहा, “माधवी मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है।”

इतना सुनना था कि माधवी मेरा लंड और भी जोर-जोर से चूसने लगी। जल्दी ही मेरे लंड से गर्म-गर्म मलाई निकली और माधवी के मुंह में जाने लगी। मेरा लंड मलाई छोड़ रहा था और माधवी उसे पीती जा रही थी। जब मेरा लंड पूरा पानी छोड़ चुका और ढीला हुआ तो माधवी ने लंड मुंह में से निकाला और बोली, “धीरज मजा आ गया।”

मैंने भी माधवी के ऊपर से उतरा और माधवी के पास ही लेट गया। फुद्दी, गांड और आखिर में मुंह में – मैं तो बस यही सोचता रहा -“बड़ी हिम्मत वाली हैं आज कल की लड़कियां, चुदाई के मामले में।”

अगले दो दिन तो बस मौसी के ही चुदाई हुई – वो भी मस्त। पूरे सात दिन रोहिणी गुजारने के बाद मैं वापस गुडगांव आ गया। इस बार का रोहिणी का ट्रिप पूरी मस्ती वाला था।

गुडगांव आया तो मम्मी बोली, “क्यों मेरे बच्चे कैसा रहा मौसी के घर का ट्रिप?”

मैंने जवाब दिया, “मम्मी ट्रिप तो मस्त था। मौसी और माधवी के मस्त चुदाई हुई। मगर मम्मी मौसी ने कुछ और भी बताया।”

मम्मी बिना किसी हैरानी के बोली, “अच्छा वो ग्रुप सेक्स वाली बात?”

मैं चुप रहा।

फिर मम्मी बोली, “अरे बेटा इसमें नया क्या है? मैं तुम और दिव्या भी तो यही कर रहे हैं। और अगर कौशल्या तुम्हे ना बताती तो भी मैं बता देती। इसमें तुमसे छुपाने वाली तो कोइ बात ही नहीं। अच्छा ये बता हमारी चारों के इकट्ठी चुदाई की कहानी सुनने का मजा आया या नहीं?”

मैंने कहा, “मम्मी मजा तो बहुत आया। मेरा तो पूरी कहानी के दौरान लंड ही खड़ा रहा। मगर मम्मी आपकी और मौसा जी की पहली रात वाली चुदाई का पूरा किस्सा तो मौसी जी को भी नहीं मालूम। इतना ही कह रही थी कि आप दोनों की पूरी रात चुदाई हुई। मौसी को भी उतना ही मालूम है जितना आपने और मौसा जी ने बताया। मम्मी पूरी कहानी तो बताईये। आखिर पूरी रात आप और मौसा जी करते क्या रहे?”

मम्मी बोली, “क्या बात है धीरज, अपनी मम्मी की मनोहर के साथ हुई चुदाई की कहानी सुनने को बड़ा उतावला है क्या?”

मैंने कहा, “नहीं मम्मी उतावली आपकी चुदाई की कहानी की नहीं, उतावली ग्रुप सेक्स की कहानी सुनने की है।”

मम्मी ने अपनी और मनोहर मौसा की उस रात हुई चुदाई की कहानी बतानी शुरू की।

मम्मी बोली, “धीरज सब कुछ ठीक हो गया सब लोग ग्रुप सेक्स के लिए तैयार हो गए। तो फिर आपस की शर्म भी खत्म ही हो गयी।”

“उस इतवार को तेरे मैं पापा और कौशल्या सब बैठे थे। जब मैंने मनोहर से चुदाई की बात साफ़ ही कर ली और मैं मनोहर की गोद में मनोहर के खड़े लंड पर बैठ गयी तो मनोहर से भी रहा नहीं गया। मनोहर मेरे मम्मे दबाने लगा। मैंने मनोहर के गले में बाहें डालें और मनोहर के होंठ अपने होठों में ले लिए।”

“मुझे साफ़ पता चल रहा था कि मनोहर का लंड सख्त हो चुका था। तभी तेरे मौसा मनोहर उठे, मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे कमरे की तरफ ले जाने लगे। मैं मनोहर के आगे आगे थी और मनोहर मेरे पीछे-पीछे। चलते-चलते मनोहर ने सब के सामने एक हाथ मेरे चूतड़ों में उंगली डाल दी। अब धीरज तू बता इससे ज्यादा और क्या शर्म जानी थी?”

मम्मी बता रही थी, “धीरज अंदर कमरे में जाते ही मनोहर ने मुझे बांहों में ले लिया और बेतहाशा मुझे चूमने लगा। मनोहर मुझे चूमता भी जा रहा था और बोलता भी जा रहा था, “आह मेरी जीजी, आज फुद्दी चोदने का मस्त मजा दूंगा आपको, गांड में भी डालूंगा जीजी आह जीजी।” मनोहर ऐसे मुझे छू चाट रहा था जैसे पहले बार कोइ जवान लड़की देखी हो।”

कुछ देर की बाद मनोहर ने मुझे छोड़ा और अपने कपड़े उतार दिए। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और नंगी हो गयी। तब मैं कितने साल के होऊंगी – 23 की। मेरा कसा हुआ जिस्म देख कर मनोहर का लंड एक-दम से ही फुंकारे मारने लगा।”

मैंने भी अपनी फुद्दी पर हाथ फेरते हुए कहा, “आजा मनोहर मेरी फुद्दी भी गरम हुई पड़ी है,आग लगी हुई है इसमें, आजा और बुझा मेरे फुद्दी की आग।”

“इसके साथ ही मैंने मनोहर का खड़ा लंड हाथ में पकड़ लिया।”

मनोहर ने पूछा, “जीजी अब? कहां लेना है लंड? आगे या पीछे?”

मैंने मनोहर का लंड दबाते हुए कहा, “मनोहर आज की इस चुदाई में तेरी मर्जी चलेगी। जो मर्जी कर, जैसे मर्जी कर, जहां मर्जी डाल अपना लंड।”

मम्मी अपनी और मनोहर मौसा की पूरी रात चली चुदाई की कहानी धीरज को सुना रही थी।

“मनोहर ने मेरे मम्मों पर पेशाब किया और मुझे उसमें भी बड़ा मजा आ रहा था। जैसे ही मनोहर का गर्म पेशाब मेरे मम्मों पर गिरा तो मेरे मुंह से निकला, “ये क्या कर रहा है मादरचोद मनोहर, साले बड़ा मजा आ रहा है।”

“इसके बाद इकट्ठे ही हमने स्नान किया और कपड़े पहन कर बाहर आ गए। तब तक आठ बज चुके थे। यश और कौशल्या बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।

“हमें देखते ही यश बोले, “मनोहर, पूरी रात?”

“तेरे मौसा जी हंसते हुए बोले, “हां यार यश, रात तीन बजे तक चुदाई चली। हम तो अभी भी कुछ करके ही आये हैं” ये बोलते हुए मनोहर ने मेरी तरफ देखा और हंस दिया।”

“पेशाब वाला सीन मेरी आंखों के आगे घूम गया और मैं भी हंस दी।”

मनोहर बोला, “जीजी तो मस्त चुदाई करवाती है यश, मजा ही आ गया। चुदाई में तो जीजी सब कुछ करती हैं। आगे-पीछे – सब जगह ले लिया जीजी ने। तू तो बड़े मजे लता होगा जीजी को चोदने के।”

मम्मी मुझसे बोली, “धीरज असली मजे की बात तो ये थी कि अब हम सब कुछ साफ़-साफ़ ही बोलने लग गए थे – लंड फुद्दी गांड चुदाई, सब कुछ।”

मैंने कहा, “मम्मी आपने तो मौसा जी के साथ पहली चुदाई में ही सब कुछ कर लिया।”

मम्मी बोली, “धीरज हमने तो ग्रुप चुदाई शुरू ही इसलिए की थी कि चुदाई के पूरे मजे लिए जा सकें। अब अगर इसमें भी शर्म ही करनी थी तो फिर ग्रुप चुदाई का फायदा ही क्या था?”

मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी एक बात और बताओ जब आप लोग एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पे एक-दूसरे के सामने चुदाई करते थे, आगे-पीछे मुंह में सब जगह लंड लेते थे, तब आपको सब से ज्यादा मजा किस्में आया था? मेरा मतलब क्या करने में सब से ज्यादा मजा आया था?”

मम्मी हंसते हुए बोली, “धीरज तू भी पूरे मजे ले रहा है अपने मम्मी की चुदाई की कहानी के। तुझे बताते बताते मेरी फुद्दी फिर से गरम होने लग गयी है।”

मैंने भी हंसते हुए कहा, “कोइ बात नहीं मम्मी, मैं अभी यहीं हूं। आपकी फुद्दी ठंडी करने के लिए। मेरा ये लंड कब काम आएगा। मेरा लंड भी तैयार ही है, लो देख लो।” ये कह कर मैंने अपना कुरता ऊपर किय। मेरे लंड का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था।”

मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया और बताने लगी, “धीरज सब से ज्यादा मजा मुझे दो बार आया था। पहला तो उस दिन जब मैं और मनोहर अकेले कमरे में थे। वो हमारी ग्रुप चुदाई का पहला दिन था।”

“रात भर के चुदाई के बाद जब अगली सुबह जब बाथरूम में जा कर मैंने और मनोहर ने एक-दूसरे के ऊपर पेशाब किया। मैं मनोहर के लंड पर पेशाब कर चुकी थी और टॉयलेट सीट पर बैठी थी। मनोहर मेरे सामने आया और उसने पहले तो लंड मेरे मुंह में डाल दिया, और फिर मुट्ठ मारने लगा। मुट्ठ मारते मारते जब मनोहर को मजा आया तो मनोहर ने लंड का गरम सफेद लेसदार पानी मेरे मम्मों पर गिरा दिया। मैंने मनोहर ले लंड से निकली मलाई के एक-एक बूँद चाट ली। इसके बाद मनोहर ने ने मेरे मम्मों पर पेशाब किया। सच में धीरज मस्त मजा आया था इसमें भी।”

दूसरा उस दिन आया जब हमने दोपहर को पहली बार इकट्ठे चुदाई की थी। हुआ ये था धीरज, मनोहर और यश हमारी फुद्दीयां चोद चुके थे। मनोहर गांड चोदने का बहुत शौक़ीन है और उधर कौशल्या भी कम नहीं है। मनोहर यश से बोला, “यश मेरा जीजी की गांड चोदने का मन है। बड़ा मजा आता है जीजी की गांड में लंड डालने का।”

“यश बोले, “अरे मनोहर तो इसमें कहने पूछने की क्या बात है। डालो सुधा की गांड में लंड, वो मना थोड़े है कर रही है। पहले भी तो तुमने डाला ही है सुधा की गांड में।”

“तभी कौशल्या बोली, “जीजा जी आप भी डालो ना मेरी गांड में।”

“बस फिर क्या था, उन्होंने हम दोनों को सोफे पर अगल बगल में ही उल्टा लिटा दिया।‌ हमारे चूतड़ पीछे थे। मनोहर मेरे पीछे था और यश कौशल्या के पीछे। अगले ही पल मनोहर का लंड मेरी गांड में था और यश का लंड कौशल्या की गांड में। मनोहर और यश हमारी गांड चुदाई करते करते ऐसी-ऐसी बातें कर रहे थे कि पूछो मत।”

“मनोहर बोल रहा था, “यार जीजी की गांड चोदने का मजा ही अलग है। पूरा लंड लेती है जीजी। और उधर तेरे पापा बोल रहे थे, “इधर भी पूरा लंड ले रखा है कौशल्या ने, बस टट्टे ही बाहर हैं।”

“फिर यश बोले, “मनोहर ये तो भाई अपनी जीजी का धन्यवाद कर जो तुझे कौशल्या की सील बंद फुद्दी चोदने को मिली। वरना ये तो मुझसे अपनी शादी से पहले ही चुदाई करवाना चाहती थी, सुधा ने ही इसे रोक दिया।”

“मनोहर हंसते हुए मेरी गांड में लंड आगे-पीछे करते हुए बोला, “यश जीजी के उसी एहसान का तो बदला चुका रहा हूं जीजी की गांड चोद कर।”

“कहते-कहते मनोहर ने मेरी गांड में जोर जोर की धक्के लगाते हुए कहा, “ले सुधा और ले – क्या मस्त गांड है। मनोहर ने इतना कस कर मुझे पकड़ा हुआ था कि मैं नीचे हिल भी नहीं पा रही थी।”

“यश और मनोहर की बातें सुन-सुन कर मैं और कौशल्या नीचे एक-दूसरे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी।”

मम्मी बोली, “तो धीरज ये थे वो दो मजे, जो मैं कभी नही भूल सकती – मस्त गांड चुदाई एक-दूसरे के सामने और एक जब गरम-गरम खुशबू वाला लंड का पानी टप-टप करता मम्मों पर में गिर रहा था।”

मम्मी बोली, “धीरज उसके बाद तो पेशाब करने वाला काम मैं तेरे पापा यश के साथ भी करने लग गयी।”

मैंने कहा, “मम्मी ये पेशाब करने वाला काम तो किसी दिन मैं भी करूंगा आपके साथ।”

मम्मी बोली, “किसी दिन क्यों बेटा आज ही करले। तुझे भी किसी चीज़ के ना नहीं है। एक बार अभी मेरी फुद्दी चोद कर मुझे फुद्दी का मजा दे दे, फिर चलते है बाथरूम में – करवाते हैं एक-दूसरे के फुद्दी लंड को स्नान।”

फिर मम्मी मेरा लंड पकड़ कर बोली, “लेकिन धीरज बाथरूम में तेरे लंड की मुट्ठ मैं मारूंगी। कई साल ही हो गए किसी जवान लड़के के लंड की मुट्ठ नहीं मारी और लंड का पानी नहीं पिया – चल आजा – तेरा लंड तो मलाई भी बड़ी छोड़ता है, मजा आ जाएगा चाटने का। तेरे पापा के लंड की मुट्ठ मारा करती थी जवानी में।”

मैं सोच रहा था मजे की लिए औरत आदमी क्या-क्या करते हैं। इसके बाद मैंने और मम्मी ने एक चुदाई की। जब मम्मी की फुद्दी दो बार पानी छोड़ गयी तो हम बाथरूम में आ गए। बस इसके बाद तो मेरे साथ भी वही कुछ किया मम्मी ने जो मम्मी ने मनोहर मौसा जी के साथ किया था पहली ग्रुप चुदाई में।

पहले मैं टॉयलेट सीट पर बैठा और मम्मी मेरे दोनों तरफ टांगें करके मेरी गोद में बैठ गयी, मुझे बाहों में ले लिया और मेरे लंड पर पेशाब किया। फिर मम्मी टॉयलेट सीट पर बैठ गयी और मैं मम्मी के सामने जा कर खड़ा हो गया।

मम्मी ने पहले मेरा लंड चूसा, और फिर मम्मी मेरे लंड की मुट्ठ मारने लगी। मम्मी बड़ी ही मस्ती से – बड़े ही प्यार मेरा लंड पकड़ कर मुट्ठ मार रही थी। मुट्ठ मारते-मारते मम्मी बीच-बीच में मेरा लंड चूम लेती और बोलती, “आह धीरज क्या मस्त लंड है, कितना बड़ा है। इतना बड़ा लंड तो तेरे पापा और मौसा मनोहर का भी नहीं है। मजा आ जाता है जब तू इसको फुद्दी में डालता है। इसीलिए मैं, तेरी मौसी कौशल्या, दिव्या और माधवी तेरे लंड के लिए पागल हुई रहती हैं।”

मम्मी के इस बात पर मुझे महेंद्र के घर चोदी हुई लड़कियां भी याद आ गयी। वो भी तो मेरे इस 3XL लंड के पीछे पागल ही थी।

जिस तरीके से मम्मी मेरा लंड पकड़ कर मुट्ठ मार रही थी, मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था – कोइ जल्दी नहीं थी मम्मी को और ना ही मुझे लंड का पानी छुड़वाने की कोइ जल्दी थी। ऐसा लग रहा थी कि मम्मी को लंड मेरी मुट्ठ मारने में बहुत मजा आ रहा था। जिस प्यार से मम्मी मेरे लंड की मुट्ठ मार रही थी, मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी। मन तो कर रहा था वही फर्श पर मम्मी को लिटा कर चोद दूं। मगर क्या जल्दी थी? चुदाई के मामले में तो मम्मी अब एक तरह से घर के मुर्गी थी, पकड़ो और कर लो चुदाई।”

बीस मिनट मुट्ठ मारने के बाद जा कर मेरे लंड ने पानी छोड़ा।‌ जैसे ही मेरे लंड का पानी निकलना शुरू हुआ , अपने आप ही मजे के मारे मेरे मुंह से निकला, “ले मम्मी साली मादरचोद रंडी निकल गया मेरा। क्या मस्त मुट्ठ मारी है – ले अब जो करना है कर इसका। क्या-क्या करती है तू मादरचोद मजे लेने के लिये। आह मम्मी निकल रहा है – बड़ा मजा आ रहा है।”

मेरे लंड से पानी निकल रहा था और मम्मी की मम्मों पर गिरता जा रहा था। मम्मी अपने मम्मों पर गिरता मेरे लंड का पानी हाथ से मल-मल कर चाटती जा रही थी। एक-एक बूंद चाटने की बाद मम्मी ने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
चूस-चूस कर मम्मी ने मेरा लंड बिल्कुल साफ़ कर दिया।

फिर मम्मी बोली, “चल धीरज डाल अपना गरम पेशाब मेरे मम्मों पर जैसे उस दिन मनोहर ने डाला था।”

मैंने लंड पकड़ा और लंड धार उधर करते हुए मम्मी के दोनों मम्मों पर पेशाब करने लगा। मम्मी मेरा पेशाब अपने मम्मों पर मलते-मलते बोलती जा रही थी, “आह धीरज, आह धीरज।”

जब मेरे लंड से पूरा पेशाब निकल गया तो मम्मी ने एक बार और मेरा लंड चूसा और फिर उठी और मुझे बाहों में लेकर चूमती हुई बोली, “धीरज मजा आ गया बेटा। वो पहली ग्रुप चुदाई याद आ गयी। क्या मस्त मोटी धार निकलती है तेरे लंड में से।”

“फिर जैसे मम्मी अपने आप से ही बोली, “कितना गर्म होता है इन मर्दों का पेशाब, कितना नमकीन, कितना मजा आता है अपने ऊपर पेशाब करवाने का।”

मैंने तो मम्मी, दिव्या और माधवी का पेशाब भी मुंह में लिया था। पेशाब तो लड़कियों का भी गर्म ही होता है, और नमकीन भी। खैर जो भी था मस्त मजा दे रही थी मम्मी ने मुझे।

मम्मी की मौसा जी की साथ चुदाई की कहानी सुनने की बाद मेरे जेहन – दिमाग – में एक बड़ा सवाल आया। मैंने मम्मी से पूछा, “तो मम्मी लोग ग्रुप सेक्स के दौरान अदल बदल कर चुदाई करते थे जब आप पापा और मौसा जी की लंडों का पानी भी तो आप दोनों की फुद्दीयों में जाता ही होगा।”

मम्मी बोली, “बिल्कुल जाता था, ऐसा ही होता था।”

मैंने पूछा, “तो मम्मी एक बात बताओ, हमें – मुझे दिव्या और माधवी को कैसे पता चलेगा कि कौन किसके लंड का बीज है?”

मम्मी को तो जैसे अंदाज़ा ही था कि इतना सब जानने के बाद मैं ये सवाल पूछूंगा ही।
बिना किसी हैरानी और हिचकिचाहट के मम्मी बोली, “अरे बेटा धीरज, क्या करना है ये पता करके कि कौन किसके लंड से निकला है? बस इतना समझो कि जो जिसके घर में पैदा हुआ, समझो उसी घर के मर्द के लंड का बीज है। ये बात ना कभी मैंने, ना कौशल्या ने, ना ही मनोहर ने और ना ही कभी तेरे पापा ने सोची। हो सकता है तुम सब ही यश के लंड से निकले हो या सब ही मनोहर के लंड से निकले हो। या फिर तुम और दिव्या मनोहर के लंड के बीज हो और माधवी यश के लंड का बीज – मतलब कुछ भी हुआ हो सकता है।”

मैंने फिर पूछा, “तो मम्मी क्या इसीलिए बवाना वाला करोड़ों का फैक्ट्री का शेड मौसा जी मुझे देने को तैयार हो गये और ना आपको कोइ एतराज हुआ ना मौसी को, पापा ने भी कोइ ख़ास एतराज़ नहीं किया?”

मम्मी बोली, “बिल्कुल धीरज, यही बात है। मनोहर को लगता है तुम उसके लंड के पैदाइश भी हो सकते हो और तुम्हें ज़िंदगी में कामयाब बनाना उसकी जिम्मेदारी है।”

इन सब बातों कि बाद तो मैंने कुछ सोचना ही बंद कर दिया। अगर मैं कुछ सोचता भी था तो वो ये कि कब और कैसे मम्मी, मौसी, दिव्या और माधवी की चुदाई करनी है। मम्मी, दिव्या, मौसी और माधवी का ख्याल आते ही मेरी आंखों के आगे उनकी फुद्दीयां और चूतड़ घूमने लगते थे – उनकी चुदाईयां याद आने लगती थी।

एक बात और हुई कि ये सब जान कर मैंने फैसला कर लिया कि मौसा जी के बवाना वाले शेड में ही अपने खुद की फैक्ट्री लगाऊंगा।

मेरी डिग्री पूरी हो गयी थी। नौ महीने की ट्रेनिंग भी गुडगांव की एक बड़ी फैक्ट्री में हो गयी। मौसा जी ने एक शेड मेरे नाम कर दिया। पापा और मौसा जी ने मिल कर ताईवान से सीएनसी मशीनें मंगवा ली।
महेंद्र की भी जॉब मानेसर – जो गुडगांव के पास ही है – वहां लग गयी है। दो तीन महीने के बाद जब कभी भी उसका घर खाली होता है, महेंद्र मुझे फोन कर देता है। अब तो मुझसे चुदाई करवाने के लिए महेंद्र की कामवाली नई-नई लड़कियां लाने लग गयी है। सब 3XL का कमाल है।

जो काम मौसा जी की फैक्ट्री में होता था, वही काम मैंने बढ़ा लिया और वो काम मेरी फैक्ट्री में भी होने लगा। मौसा जी के साउथ के टूर लगते रहते हैं। जब मौसा जी साउथ जाते है तब मैं रोहिणी में ही रहता हूं। उन दिनों में मौसी और माधवी कि मस्त चुदाई होती है।

अभी भी मम्मी और पापा अब भी शुक्रवार को रोहिणी आ जाते हैं। मैं और दिव्या भी साथ ही आते हैं। रात को दिव्या और माधवी एक कमरे में सोते हैं और मैं ड्राईंग रूम में सोता हूं। रात को मम्मी पापा पीछे के दरवाजे से मौसा मौसी की कमरे में चले जाते होंगे – मैं पीछे की दरवाजे से माधवी और दिव्या वाले की कमरे में चला जाता हूं। आधी-आधी रात तक हमारी चुदाई चलती है।”

मम्मी, दिव्या मौसी और माधवी – चार-चार फुद्दीयां, चारों मस्त चुदाई करवाती हैं।

फैमिली हो तो ऐसी।

समाप्त।

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