शशांक खड़ा हो जाता है .. हाई उसे एक बच्चे की तरेह अपने गोद में उठा लेता है ….उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है और उसके कान में फुसफुसाते हुए कहता है ..
” शिवानी ..”
” हां भैया ..क्याअ .??.” उसकी आवाज़ भर्राई हुई थी
” आइ लव यू टू…”
यह चार शब्द शिवानी को उसके होश-ओ – हवास खो देने पर मजबूर कर देते हैं..
शिवानी , शशांक से बूरी तरेह चीपक जाती है ..उसके कमर को अपने पैरों से और गले को अपने हाथों से और भी जाकड़ लेती है … उस से ऐसे चिपकती है जैसे किसी पेड़ से लता …शिवानी के स्लॅक्स इतने पतले हैं कि शशांक को अपनी कमर के गिर्द शिवानी की जांघों की गर्मी , उसका मुलायम और मांसल स्पर्श इस तरेह लगता है मानों वो नंगी है….
दोनों एक दूसरे को चूमते जा रहे हैं ….चाट ते जा रहे हैं ..कहाँ , कितना और कब किसी को कुछ होश नहीं रहता ..पागल हो गये हैं दोनों…
शिवानी हाँफ रही थी… तभी वो अपना एक हाथ नीचे करते हुए भैया के बॉक्सर पर ले जाती है और वहाँ कड़क उभार को जोरों से दबाती है ….मुट्ठी में भर लेती है , और अपनी उखड़ी उखड़ी सी आवाज़ में सर उठा कर शशांक की ओर देखते हुए कहती है
” भैया …”
“हां शिवानी बोल ना ..” शशांक भी उसकी आँखों में झाँकता हुआ कहता है..
शिवानी और जोरो से उसके बॉक्सर के उभार को दबाती हुई बोलती है
” मुझे यह चाहिए ..मेरी दीवाली गिफ्ट , दो ना भैया…” अपनी ज़ुबान में जितनी मीठास , प्यार और चाहत ला सकती थी शिवानी ने लाते हुए कहा …और फिर नज़रें झूका लीं …
शशांक पहले तो आँखें तरेरते हुए उसे देखता है …..फिर उसके चेहरे को अपनी हथेली से थामते हुए अपने चेहरे के सामने करता हुआ कहता है
” शिवानी ..अभी नहीं ..अभी नहीं …..मेरी बहना ….अभी नहीं ….तुम्हें बहोत दर्द होगा ..मैं यह दर्द तुम्हें नहीं दे सकता …प्लीज़ अभी नहीं..”
” प्लीज़ भैया ..मैं यह दर्द हंसते हंसते झेल लूँगी .. आप का दिया दर्द भी तो मेरे लिए दवा से भी बढ़ के है ..” शिवानी उसकी मिन्नत करती है ….
” कुछ तो समझो शिवानी ..बस कुछ दिन और रुक जाओ ….प्लीज़..” शशांक समझाने की कोशिश करता है
” ठीक है भैया ..मुझे बस दीवाली गिफ्ट चाहिए …वरना मैं अपने अंदर मोम बत्ती डाल कर , आप के लिए रास्ता सॉफ करूँगी अभी के अभी ..फिर जो दर्द होगा मुझे ..आप बर्दाश्त कर लेना …” शांति ने एमोशनल ब्लॅकमेल का रास्ता अपनाया.. .उसकी इस .धमकी ने कुछ असर किया
शशांक जानता था शिवानी के लिए यह कुछ मुश्किल काम नहीं था ..अपनी ज़िद में कुछ भी कर सकती थी …और उसकी संकरी सी..पतली सी चूत में कॅंडल अंदर जाना और उसकी झिल्ली का फटना …यह सोच कर ही शशांक कांप उठा ..
वो बनावटी गुस्सा दिखाता हुआ उसके चेहरे पर एक हल्का सा थप्पड़ लगाता है
” तू पूरी पागल है ..पूरी ….”
” हां मैं पागल हूँ भैया ..मैं हूँ पागल …. बस मुझे दीवाली गिफ्ट चाहिए और अभी चाहिए ..अभी चाहिए ..भैया प्लीज़ अभी चाहिए ..” वो शशांक की गोद में कांप रही थी ….और बार बार शशांक के उभार को दबाती जा रही थी ..शशांक भी उसकी इस हरकत से सीहर उठ ता है
वो फिर से शिवानी का चेहरा अपनी तरफ करता है ….उसकी आँखों में देखता है ….उसे ऊन आँखों में एक बड़ी बेताबी , हसरत और ललक दिखाई दी … मानो भैया से गिफ्ट की भीख माँग रही हो…
” उफफफफ्फ़..यह लड़की ….” शशांक अपने मन ही मन कहता है ..
उसे अपने सीने से चीपका लेता है ….गोद में भर लेता है …उसके होंठों को अपने होंठों से जाकड़ लेता है ..उन्हें चूस्ते हुए अपने कमरे की ओर बढ़ता जाता है ….
शिवानी अपने आप को उसके मजबूत कंधों और चौड़े सीने पर छोड़ देती है…… अपने आप को भैया के सुपुर्द कर देती है ….. उसका पूरा शरीर ढीला है शशांक की बाहों में ….
आनेवाले पलों की कल्पना मात्र से शिवानी झूम रही है ..सीहर रही है ….
शशांक अपने कमरे का दरवाज़ा अपने पैर से धकेलते हुए पूरा खोल देता है और शिवानी को अपने कंधों पर लिए अंदर प्रवेश करता है…..
शशांक धीरे धीरे चलता हुआ अपने बेड तक पहूंचता है …अभी भी बिस्तर बेतरतीब हैं ….सुबेह उठने के बाद वैसे का वैसे ही पड़ा था उसका बीस्तर …..शशांक उसे लिटा देता है , उसके हाथ शिवानी के गले को थामे लिटा ता है..शिवानी की गर्दन तकिये पर है और उसके बीखरे बाल तकिये के बाहर और भी बीखर जाते हैं … … बिछी चादर , सलवटें पड़ीं और उस पर शिवानी अपने चमकते ,काले और महेकते बीखरे बालों सहित लेटी…ऐसा लग रहा था शिवानी भी शशांक के बीस्तर से कोई अलग चीज़ नहीं ..उसके बीस्तर का ही हिस्सा हो….उसके के जीवान का ही एक हिस्सा …शिवानी के होंठों पर हल्की सी मुस्कुराहट और आँखें बंद थीं ..
शिवानी के हाथ फैले हुए हैं ..दोनों टाँगें सीधी और थोड़ी फैली …. शशांक के अगले कदम की प्रतीक्षा में ….
स्लॅक्स के अंदर उसकी गीली पैंटी सॉफ दीख रही थी …
शशांक उस से लगता हुआ उसकी ओर चेहरा किए बगल में लेट जाता है …थोड़ी देर तक उसे निहारता रहता है….. उसके होंठों को चूमता है …और शिवानी के बालों को सहलाता हुआ कहता है …
” शिवानी …..”
” हां भैया ..बोलो ना ..” दोनों की आवाज़ भर्राई सी है….
” तू क्यूँ ज़िद पे आडी है बहना …अपने भाई को क्यूँ तकलीफ़ देने पर आमादा है..??”
” भैया …मैं जानती हूँ दर्द मुझे होगा और तकलीफ़ आप को …. पर कभी ना कभी तो होना ही है ना ..?क्या मैं जिंदगी भर कुँवारी रहूं ..?”
” शिवानी कुछ दिन और रुक जा ना..थोड़ी और बड़ी हो जाएगी ना …फिर आसानी होगी…”
” नहीं भैया ..मैं और नहीं रुक सकती ..बस मुझे आज चाहिए ..और भैया …मुझे अपने से ज़्यादा आप पर भरोसा है..मैं जानती हूँ आप मुझे कुछ भी दर्द महसूस नहीं होने दोगे …. इतने प्यार से , हिफ़ाज़त से मेरे कुंवारेपन को और कौन तोड़ेगा भैया … मुझे इतना अच्छा , प्यारा और यादगार गिफ्ट कौन देगा भैया ….प्लीज़ आप मुझे इस पल के महसूस से मत रोको .प्लीज़….”
और फिर शिवानी करवट लेती हुई शशांक के उपर आ जाती है ..उस से लिपट जाती है , अपने टाँगों के बीच उसके बॉक्सर के उभार को जकड़ती है और अपनी गीली पैंटी से बूरी तरेह दबाती जाती है
शशांक कराह उठा ता है इस अचानक मस्ती के झोंके से ….
” उफफफफफफफ्फ़..शिवानी…शिवानी तू क्या कर रही है…..आआआः …तू बहोत ज़िद्दी है …..”
” हां भैया ….मेरे प्यारे भैया …. आज मैं अपनी ज़िद मनवा के रहूंगी ……” वो शशांक को चूमती जाती है और अपनी गीली पैंटी से और जोरों से दबाती है ….
शशांक का उभार कड़ा और कड़ा होता जाता है..उसे ऐसा महसूस होता है उसके बॉक्सर को फाड़ते हुए उसका कड़ा लंड कभी भी बाहर आ जाएगा …..
वो सिहर जाता है…और धीमी आवाज़ में कहता है ..
” पर शिवानी मैने भी तो आज तक यह काम नहीं किया ….तुम्हें बहोत दर्द होगा बहना …..”
” मैं जानती हूँ भैया ..आज हम दोनों अपना अपना कुँवारापन एक दूसरे को गिफ्ट करेंगे …उफफफफ्फ़ …उुउउहह .भैया कितना अच्छा कोयिन्सिडेन्स है …… ”
अपनी गदराई चूचियों को शशांक के सीने से रगड़ते हुए शिवानी बोलती है…
शशांक की हिचक और विरोध कमजोर पड़ते जा रहे थे ….. वो भी इस आनंद और मस्ती के ल़हेर में बहता जा रहा था ….
अपनी टूट ती आवाज़ में शशांक कराहता है
” अयाया शिवानी ….ऊवू ..तू यह क्या कर रही है बहना ..उफ़फ्फ़..देख ऐसा मत सोचना मेरा दिल नहीं करता …बहोत दिल करता है शिवानी ..बहोत …पर फिर तेरा दर्द ..??”
” कम ऑन भैया …दर्द तो होना ही है भैया ….पर आप का दिया दर्द भी तो कितना मीठा होगा …आप यह मीठा दर्द मुझे महसूस करने दो ना ..प्लीज़ …”
और अब तक लोहे के समान हो चूके कड़े उभार को शिवानी अपने एक हाथ से जोरों से जकड़ते हुए अपनी गीली पैंटी पर दबाते हुए रगड़ देती है ….शशांक का पूरा बदन झन झना उठता है…सीहर जाता है , उसकी रही सही रुकावट का बाँध फूट जाता है ….
वो आआहएं भरता है ” आआआआआआः ..शिवाााआआआआआअनी…”
और फिर वो भी उसे अपने में जाकड़ लेता है पूरी तरेह…शिवानी उसकी जाकड़ में खो जाती है …अपने आप को भूल जाती है उसकी मजबूत बाहों में….. ..कुछ देर तक उसके सीने पर अपना सर रखे उसे निहारती रहती है …फिर कुछ सोचती है ..और .शिवानी अपने को अलग करती है , एक झटके में अपना टॉप और स्लॅक्स उतार देती है ….
नंगी हो जाती है बिल्कुल…और घूटनों के बल , जंघें फैलाए शशांक के सामने बैठ जाती है ..
शशांक के सामने उसकी गदराई और अनछुइ जवानी बे-परदा है …सिर्फ़ शशांक के लिए ….सिर्फ़ शशांक से मिलनेवाले मीठे दर्द के अहसास के लिए …
थोड़ी देर दोनों एक दूसरे को देखते हैं ..दोनों की आँखों में आग सुलग रही थी … एक ऐसी आग जिसकी लपट में दोनों झुलसने को बेताब हो उठ ते है…यह थी जवानी की आग…..
शशांक के सामने शिवानी का मक्खन जैसा पेट , जांघों के बीच टाइट फाँक , फाँक के बीच गीलापन , कड़क उछलती हुई गथीली चूचियाँ , फड़कते हुए रस से भरपूर होंठ …बड़ी बड़ी आँखें हसरत , ललक और चाहत से भरी …..
शिवानी ने अपने को पूरी तरेह उसके सामने रख दिया…..कुछ भी बाकी नहीं था अब …यह .शशांक की मर्दानगी को शिवानी की चुनौती थी ….
शशांक उठ ता है और खुद भी नंगा हो जाता है .. वो भी घूटनों के बल शिवानी के सामने बैठ जाता है…
उसकी मर्दानगी भी नंगी हो जाती है … ऐसी मर्दानगी जिसके आगोश में कोई भी औरत हंसते हुए अपना सब कुछ लुटा दे ..शिवानी बस आँखें फाडे उसे देखती है ..चौड़ा सीना , गठिला बदन ..मजबूत बाहें और फनफनाता और कडेपन से हिलता हुआ 8″ का लंड ..
शशांक ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली ….
वो उस से लिपट जाती है …उसके सीने पर सर रखे , अपनी बाहों से उसे जाकड़ लेती है …आँखें बंद और सर सीने में छुपा ….उसकी औरत ने आत्मसमर्पण कर दिया उस मर्द को ….शिवानी कांप रही थी
शशांक उसे फिर से अपनी गोद में उठाता है ..और उसे लिटा देता है …
पहली बार दोनों को नंगे शरीर से स्पर्श का अद्भुत और रोमांचक अनुभव होता है …नंगे शरीर की गर्मी , उसकी कोमलता , उसकी मांसलता का अहसास होता है…. शिवानी इस आनंद से चीख उठ ती है ….
उसकी चूत से पानी रिस रहा था ..उसकी चूचियाँ शशांक के हाथों के स्पर्श मात्र से कड़ी हो गयी थी…उसकी घुंडिया कड़ी हो गयी थी…
शशांक उसके उभरे स्तन को मुँह मे लेता हुआ घूंड़ी के उपर अपनी जीभ फिराता है..शिवानी कांप उठ ती है …. उसका सर दबाती है अपनी चूची की तरेफ ….शशांक उसे अपने मुँह में भर लेता है ..चूस्ता है ..शिवानी को ऐसा महसूस होता है उसका सब कुछ अब बाहर निकल जाएगा ‘..उसके चूतड़ अपने आप उछल पड़ते हैं …. शशांक का लंड शिवानी की जांघों के बीच टकराता जाता है …
शशांक का भी बूरा हाल है….
उसका कडपन अब उस से सहेन नहीं होता ..उसे लगता है इसे अब गर्मी चाहिए …उसे अब किसी कोमल घर्षण की ज़रूरत है ..और यह कोमल और मुलायम घर्षण उसे शिवानी के अंदर ही मिल सकता है …उफ़फ्फ़ यह कितना नॅचुरल रिक्षन था …किसी को बताने की ज़रूरत नहीं होती ..अपने आप होता जाता है…
वो शिवानी के चूतड़ो को उठाता है ..उसके नीचे तकिया रखता है ..शिवानी पैर फैलाती है ..उसकी कसी चूत में पतली सी फाँक दीखती है ..गुलाबी फाँक …बिल्कुल गीली …
शशांक उसकी जांघों के बीच आ जाता है , अपना कड़क हिलता हुआ लंड हाथों में लेता है ..शिवानी अगले कदम की कल्पना से सीहर उठती है ..आँखें बंद कर लेती है ..
शशांक सुपाडे को उसकी पतली फाँक पर लगाता है …. लंड की गर्मी शिवानी को महसूस होती है ..चूत बहोत गीली है , बहोत फिसलन है , बहोत कसी है ..लंड पर ज़ोर लगाता है शशांक , सुपडा अंदर जाता है ….शिवानी की जाँघ फैल जाती हैं … शशांक थोड़ा थूक लगाता है ….और ज़ोर लगाता है …शिवानी भी टाँगें पूरी फैला देती है….चूतड़ उपर उठाती है …उसका लंड और भी अंदर जाता है …
उफफफफफ्फ़ कितनी गर्म है , कितना टाइट है शिवानी की चूत , शशांक को ऐसा महसूस होता है मानो किसी के हथेलियों ने उसके लंड को बूरी तरेह जाकड़ रखा हो ..करीब आधे से ज़्यादा लंड अंदर है …
शिवानी की आँखों में पीड़ा है ..दर्द है पर होठों पर मुस्कान ..दर्द भरी मुस्कान …
शिवानी की आँखों से दर्द से भरे आँसू टपकते हैं ..पर होठों पर अभी भी मुस्कान है ….दर्द आख़िर मीठा है ना ….
शशांक उसकी ओर देखता है …..उसके आँसू को चूम लेता है ..चाट जाता है …
शिवानी आत्मविभोर है ….
शशांक फिर से धक्का लगाता है अब पूरा लंड जड़ तक अंदर है , शिवानी का शरीर अकड़ जाता है …
शिवानी की जाँघ थरथरा रही हैं … चूत की फांके फडक रही हैं … आँखों से आँसू बह रहे हैं और होंठों पे फिर भी मुस्कान है…. दर्द भरी मुस्कान
शशांक उसे अपने सीने से लगाए उसे चूम रहा है ..लंड अंदर ही है …
अंदर ही अंदर चूत रिस रहा है ..खून और रस से भरा …. शशांक का लंड और गीला होता है और उसकी चूत थोड़ी और ढीली हो जाती है …
शशांक अपना लंड आधा बाहर निकालता है और फिर धीरे धीरे अंदर करता है ..इस बार उतनी कसी नहीं थी ,लंड पतली फाँक को चीरते हुए पर आराम से अंदर जाता है …
शिवानी का दर्द कम होता जा रहा है ….
उफ़फ्फ़ यह कैसा दर्द है ….दवा से भी ज़्यादा कारगर …
अब शशांक के धक्के ज़ोर पकड़ते हैं ….शिवानी सिहर उठ ती है … हर धक्के पर , कांप उठ ती है
शशांक की कमर को अपने पैरों से जाकड़ लेती है ..और अपनी चूत की तरफ खींचती है …बार बार चूतड़ उपर करती है ….शशांक के धक्कों से ताल मिलाते हुए …
शशांक अब उसकी चूतड़ को नीचे से थामता हुआ थोड़ा और ज़ोर लगाता है अपने धक्के में ….शिवानी अब उछल रही है
शशांक को चूत के अंदर की गर्मी , उसके फांकों की कसी हुई पकड़ , और शिवानी का यह मचलता , मदमाता और मस्ती से भरा रूप पागल कर देता है उसे….
उसके धक्के ज़ोर और तेज हो जाते हैं …शिवानी भी पागल हो जाती है ..वो जैसे हवा में तैर रही थी …हर धक्के में उछल जाती और चीत्कार उठ ती .है …दर्द और मस्ती के मिले जुले अहसास से …
शशांक के हर धक्के में वो आनंद विभोर हो उठती है……दर्द अपनी सीमायें लाँघता हुआ अब एक आनंद से भरी अनुभूति की ओर पहूंचता है ..शिवानी मस्ती की उँचाइयों पर है ….
शशांक के धक्के तेज होते हैं और तेज ..शिवानी को कुछ होश नहीं रहता .वो किल्कारियाँ लेती है ,कभी सिसकियाँ लेती है ..कभी चिल्ला उठ ती है …उसे समझ नहीं आता यह कैसा दर्द है जिसमें सिर्फ़ मस्ती ही मस्ती है ….उफफफफ्फ़..यह क्या हो रहा है ……और वो जोरों से फिर से चिल्लाति है ..”भैय्ाआआआआआआआअ ..ऊओह…..”
शशांक भी शिवानी की मस्ती से पागल हो उठ ता है …
दोनों एक दूसरे से लिपट जाते हैं …शशांक अंदर ही अंदर चूत में झटके खाते हुए झाड़ता जाता है ..झाड़ता जाता है ….
शिवानी आँखें बंद किए अपने भैया के गर्म गर्म वीर्य की फूहार को महसूस करती है अपनी चूत में .इस गर्म से अहसास से शिवानी का पूरा शरीर गंगना उठता है …उसका भी रस निकलता है …चूतड़ उछलते है ..टाँगें काँपति हैं ..जंघें बार बार थरथराती हैं..
दोनों एक दूसरे से लिपटे …हान्फते हुए .. एक दूसरे की बाहों में सारी दुनिया से बेख़बर पड़े हैं ..मानों उन्हें सब कुछ मिल गया हो …. सब कुछ …एक चरम सूख की अनुभूति है उनकी आँखों में…उनके चेहरे में …
खोए हैं , सब कुछ भूल कर …इस पल उन्हें सिर्फ़ एक दूसरे का अहसास है …हम तुम और कुछ नहीं…
सारा संसार बस उन दोनों में सिमट कर रह गया है…
थोड़ी देर बाद दोनों वापस हक़ीकत की दुनिया में लौट आते हैं …
शशांक , शिवानी के थके थके से पर मुस्कुराते चेहरे पर नज़र डालता है ..उसके होंठों को चूमता है
” बहुत दर्द हुआ…???” शशांक पूछता है , उसकी आवाज़ में शिवानी के दर्द का अहसास भरा था ..
” भैया ….” शिवानी का गला रुंधा हुआ था और उसकी आँखों में फिर आँसू थे ….पर यह दर्द के नहीं , चरम सूख के आँसू थे .. ” यह दर्द जब तुम्हारे जैसे मर्द से मिलता है ना ….इस दर्द का अहसास उस औरत की जिंदगी का सहारा बन जाता है भैया …..ऊओह भैया ..भैया आइ लव यू सो मच..”
और शिवानी अपने भैया से फिर से लिपट जाती है ..उसके सीने में सर रखे सिसकती है और यह सिसकना अपने आप हो जाता है ..उसकी अंदर की भावना फूट पड़ती है ..एक औरत अपने को पूरी तरह समर्पित कर देती है …अपने मर्द का आभार मानती है ….
शशांक उसके सर पर हाथ फेरता है ..उसका चेहरा अपनी हथेली से थामता हुआ उपर उठाता है ,उसके होंठ चूम लेता है , उसकी आँखों से आँसू पोंछता है उसे गले लगाता है और बोलता है..
” आइ लव यू टू , शिवानी ….आइ लव यू सो मच ….”
शशांक और शिवानी दोनों का यह पहला अनुभव उनके जीवन का एक यादगार पल था….ऐसे यादगार पल कम लोगों को ही नसीब होते हैं… ख़ास कर लड़कियों के लिए …
शिवानी को इतने प्यार , लगाव और कोमलता से कौन उसके कुंवारेपन को तोड़ता ….कोई दूसरा अपनी मर्दानगी दीखाने की कोशिश में ही जुटा रहता और उसे देता सिर्फ़ बेशुमार दर्द और पीड़ा … पर शशांक के प्यार ने इस दर्द और पीड़ा को एक सुखद , मादक और आनंद से भरे महसूस में बदल दिया था …
और शशांक की बात करें तो शिवानी ने भी अपने दर्द और पीड़ा का उसे अहेसास नहीं होने दिया ..उसका संपूर्ण आत्मसमर्पण और उसके लिए शिवानी के प्यार ने उसकी मर्दानगी का पूरा सम्मान करते हुए उसे अपने पूरे दिल से अपनाया ..कहीं कोई हिचक नहीं थी ..कोई भी झीझक नहीं था …एक दूसरे में दोनों कितने खो गये थे…एक दूसरे का कितना ख़याल था …
काफ़ी देर तक दोनों पड़े रहते हैं …चूप चाप ..मानों उस बीते हुए क्षणों को…उस गुज़रे हुए पलों को अपने जहेन में समाए जा रहे हों …उस मीठी याद को संजोए जा रहे हों …एक अद्भुत अनुभव का स्वाद मन मश्तिस्क में बिठाते जा रहें हो …
शशांक चूप्पि तोड़ते हुए कहता है
” कैसी लगी मेरी दीवाली गिफ्ट ..शिवानी..?”
शिवानी उसकी ओर देखती है…. उसे गले लगाती है और फिर आंसूओं की धारा फूट पड़ती है ….सिसकती है और अपने रूंधे गले से भर्राइ आवाज़ में बोलती है
” भैया बता नहीं सकती .
…मेरे पास शब्द नहीं है भैया ..देख नहीं रहे मेरे आँसू बोल रहे हैं ….मेरा रोम रोम सिसक रहा है तुम्हारे आभार से ? तुम ने जो दिया ना भैया मुझे , किसी भी औरत के लिए इस से नायाब तोहफा और कुछ नहीं हो सकता ..कुछ नहीं …तुम ने एक औरत को उसके औरत होने पर फक्र करने का मौका दिया ..हां भैया ….इस से ज़्यादा मुझे और क्या मिलेगा …बोलो ना ..बोलो ना भैया ..?”
और वो फिर उस से लिपट कर बहोत भावक हो जाती है और उसकी आँखों से लगातार आँसू की धारा बहती है यह उसके आभार के आँसू थे …एक औरत का अपने मर्द का आभार.शशांक की आँखें भी नम हो जाती हैं और फिर वो बोलता है
” तुम ने भी तो मुझे अपना सब कुछ कितने प्यार से दे दिया शिवानी …बे झिझक ..पूरी तरेह …मुझे भी कितना अच्छा लगा ..मुझे तुम ने कभी भी अपने दर्द और पीड़ा का अहेसास ही नहीं होने दिया .. .मैने तुम्हें दर्द दिया तुम ने उसे प्यार से स्वीकार किया …मेरे प्यार को समझा , उसे इज़्ज़त दी ….हां शिवानी …आइ आम रियली सो हॅपी ..आइ फील सो फुलफिल्ड … ”
थोड़ी देर दोनों फिर एक दूसरे की ओर खामोशी से देखते हैं ..
शिवानी खामोशी तोड़ती है ..और फिर पूछती है
” अच्छा भैया ..एक बात पूछूँ..?”
” हां पूछो ना शिवानी …” शशांक उसकी ओर देखते हुए कहता है
” बूरा तो नहीं मनोगे ना ..??”
” अब देख पहेलियाँ मत बूझा , वरना ज़रूर बूरा मान जाऊँगा …जल्दी पूछ ना ..” शशांक अपनी बेसब्री जाहिर करते हुए बोलता है ..
” तुम किसे ज़्यादा प्यार करते हो..मुझे या मोम को..?” और ऐसा कहते अपना सर उसके सीने में छुपा लेती है ….
थोड़ी देर शशांक चूप रहता है , कुछ नहीं कहता … शिवानी सोचती है शायद उसे बूरा लगा होगा , उसे मनाने के लिए बोल उठती है
” देखो बूरा लगा ना भैया ..ठीक है मत बोलो अगर बूरा लगा हो तो …मुझे किसी से क्या लेना देना ..मेरा भैया मुझे प्यार करता है ना ..बस मैं खुश हूँ ….”
” अरे नहीं नहीं शिवानी ऐसी कोई बात नहीं ..मुझे तेरे सवाल का कोई बूरा नहीं लगा ..मैं तो सिर्फ़ सोच रहा था तुझे कैसे समझाऊं ..तुम दोनों का फ़र्क ..अच्छा हां तो सुन ..और सच पूछो तो मैं खुद चाहता था तुम्हें यह बताना…”
शिवानी उठ कर बैठ जाती है ..और अपना पूरा ध्यान उसकी ओर लगाते हुए कहती है ..
” अच्छा ..?? फिर तो जल्दी बताओ ना भैया ..प्लीज़ जल्दी..” और फिर उसके गले में बाहें डाल अपना चेहरा उपर कर लेती है और फिर से बोलती है ” हां बोलो ना ..”
शशांक उसकी ठुड्डी अपनी उंगलियों से उपर करता है और बोलता है
” देख शिवानी ..प्यार तो प्यार ही होता है ना बहना ..कोई किसी से कम यह ज़्यादा कैसे कर सकता है ?..प्यार की कोई सीमा भी होती है क्या ..?? तुम्हारे लिए यह किसी और के लिए होगा शिवानी ..मेरे लिए नहीं ..मैं किसी को कम या ज़्यादा प्यार नहीं कर सकता..सिर्फ़ प्यार कर सकता हूँ बे-इंतहा ….और मैं तुम दोनों को प्यार करता हूँ शिवानी ..बे-इंतहा ….”
और फिर चुप हो जाता है ….शिवानी शशांक का जवाब सून झूम उठ ती है …उसे उसकी जिंदगी मिल गयी थी , उसके प्यार का मकसद मिल गया था ..बिल्कुल पूरी तरेह …वो फूली नहीं समाती …और अपने नंगे बदन से अपने भैया के नंगे बदन के उपर लेट जाती है … और अपनी टाँगों के बीच उसके ढीले लंड को अपनी जांघों के बीच कर जांघों से रगड़ती है और उसे चूमती है ..कभी होंठों को , कभी गालों को ,,कभी उसकी गर्दन को…अपना बे-इंतेहा प्यार को उसके बे-इंतेहा प्यार से मिलने की जी जान से कोशिश में जूट जाती है …
“उफफफफ्फ़..तू भी ना शिवानी ..एक दम पागल है .. अरे बाबा मेरी बात तो पूरी हुई नहीं अभी … और तू टूट पड़ी ..अरे पूरी बात तो सून ले ..”
” मुझे नहीं सून नी पूरी बात ..बस अधूरी ही मेरे लिए इतना ज़्यादा है भैया ..पूरी सुन कर तो मैं मर जाऊंगी…”
‘” पर मुझे तो कहना है ना ..मैं जिस से प्यार करूँ उसे मेरी हर बात सून नी पड़ेगी ना ..”
शिवानी अपने जांघों की हरकतें जारी रखती है और मुँह की हरकतों पर रोक लगाते हुए बोलती है
” अच्छा बाबा बोलो ..ज़रा सूनू तो और क्या बाकी है तुम्हारे प्यार में ..” अपना चेहरा उसकी ओर कर लेती है
” बाकी कुछ भी नहीं शिवानी …बस थोड़ा सा फ़र्क है …” शशांक शिवानी के गालों को अपनी उंगलियों से दबाते हुए कहता है…
” ह्म्म्म्म … वो क्या कहा भैया..फ़र्क ??” ” फ़र्क ” शब्द सून कर शिवानी की पूरी हरकतें बंद हो जातीं हैं …वो एक दम से चौंक जाती है
शशांक उसके इस अचानक बदलाव पर हंस पड़ता है ….
” अरे मेरी प्यारी बहना चौंको मत फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि मैं मोम की पूजा करता हूँ ..उसे सुंदरता की देवी मानता हूँ …..और तू तो मोम की ही दूसरी अवतार है ना ..पूरी की पूरी उनका ही रूप …तो जब ओरिजिनल सामने है तो पूजा ओरिजिनल से ही करूँगा ना ….और प्यार दोनों से ….समझी ना..?”
” ऊवू भैया ..मैं तो डर गयी थी .. हां बाबा मुझे आप की पूजा उूजा की कोई ज़रूरत नहीं ..मुझे तो आप का प्यार चाहिए ..वो तो भरपूर मिल रहा है ..उफ्फ भैया यू अरे सो स्वीट ..और मैं भी तो उनकी पूजा करती हूँ ..शी ईज़ माइ रोल मॉडेल … ”
शशांक भी शिवानी की बातों से अश्वश्त हो जाता है ….अब कोई भी रुकावट नहीं थी ..कोई भी शंका नहीं था ….
दोनों फिर से लिपट जाते हैं एक दूसरे से ….
शिवानी की जंघें फिर से हरकत में आ जाती हैं और नतीजा यह होता है उसका लंड फिर से तन हो जाता है …और शिवानी की चूत गीली हो जाती है .
दोनों एक दूसरे को खा जाने को , एक दूसरे में समा जाने की होड़ में लगे हैं …
कराह रहे हैं ..सिसक रहें हैं …शशांक उसकी चूचियों को चूस रहा है ..मथ रहा है .. दबा रहा है ….
शिवानी उसके लंड को घीस रही है , जांघों से दबा रही है….अपने हाथों में भर अपनी चूत पर घीस रही है ..अपने अंदर लेने की कोशिश में जुटी है …
शशांक से रहा नहीं जाता ..’
उसे अपने नीचे कर लेता है …
शिवानी अपनी टाँगें फैला देती है ..उसकी जांघों पर उसके कुंवारेपन टूट ने के निशान अभी भी हैं..खून के कतरे लगे हैं … उसकी चूत में हल्की सी बहोत पतली फाँक है ..गुलाबी ..खून के कतरे वहाँ भी हैं …और बहोत गीली है अब
शशांक अपने लंड को हाथ से थामता हुआ उसकी चूत पर ले जाता है ,
शिवानी भी अपनी हथेली से उसे थामती है , अपनी चूत में लगाने में उसकी मदद करती है
” हां भैया ..हां अब रुकना मत …प्लीज़ अब डाल दो ना ..मेरे दर्द की परवाह मत करो..प्लीज़ डालो ना…”
शशांक को उसकी परवाह है ..वो झट तकिया उसकी चूतड़ के नीचे रख देता है …चूत थोड़ी और फैल जाती है..पर अभी भी फाँक संकरी ही है ..शिवानी जांघे और भी फैला देती है ….
” उफफफफ्फ़ भैया देर मत करो ना ….आओ ना …” शिवानी उसके कमर को अपने हाथों से जाकड़ लेती है और अपनी चूत की ओर खींचती है ..
शशांक भी साथ साथ दबाव बनाता है अपने लंड पर …फतच से रस , वीर्य और खून से सराबोर चूत में उसका लंड फिसलता हुआ जाता है …पर अंदर अभी भी काफ़ी टाइट है ..रास्ता सॉफ था ..पर संकरा था
शिवानी चीख उठ ती है .
“आआआः …हां भैया ..हां तुम रूको मत ..उफफफफफफ्फ़ ..यह कैसा मज़ा है ..अयाया ”
शशांक लंड बाहर करता है और फतच से फिर अंदर डालता है ..
शिवानी चिहुनक उठ ती है …” हां भैया …हां और ज़ोर से ..और ज़ोर से …डरो मत मुझे अब अच्छा लग रहा है …दर्द बिल्कुल नहीं है …हां हां …”
शशांक के धक्के ज़ोर पकड़ते जाते हैं ..शिवानी उसकी गर्दन में बाहें डाले उसे अपनी ओर खींचती है ..उस से चिपकती है ….
शशांक उसकी चूचियों में मुँह लगाता है ..चूस्ता है , चाट ता है ..दबाता है और साथ में उसकी चूत के अंदर लंड भी अंदर बाहर करता जाता है
दोनों मस्ती और आनंद के सागर में डुबकियाँ लगा रहे हैं ..एक दूसरे के बाहर और अंदर का पूरा मज़ा ले रहे हैं ..इस बार किसी को कोई झिझक नहीं ..कोई हिचक नहीं ….
शिवानी के चूतड़ हर धक्के में उछल जाते हैं …उसका लंड जड़ तक पहून्च जाता है ..जंघें आपस में टकराते हैं ..थप थप की आवाज़..कराहों की आवाज़ , सिसकियों और किल्कारियों से कमरा गूँज रहा है …
” हाआंन्न नननननननननननणणन् ….ऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह भैय्ाआआआआआआआअ ..” शिवानी उछल जाती है , वो इतनी उत्तेजित है, उठ बैठ ती है उत्तेजना से , शशांक का लंड अंदर लिए ही उस से लिपट जाती है बैठे बैठे , और अपने चूतड़ उछालते हुए रस की फुहार छोड़ती जाती है …शशांक का लंड भी उसके रस की धार से धार मिलाता हुआ पीचकारी छोड़ता है …
दोनों एक दूसरे से चीपके हैं और एक दूसरे को अपने रस से सराबोर कर रहें हैं …
शशांक शिवानी के होंठों को चूमता हुआ उसके उपर लेट जाता है ..
हाँफ रहे हैं दोनों , उनका सब कुछ एक हो जाता है ..साँसें..दिल की धड़कनें ..शरीर ..सब कुछ ..
और दोनों एक दूसरे की बाहों में सब कुछ भूल कर नींद के आगोश में चले जाते हैं …
दोनों भाई .बहेन एक दूसरे की बाहों में बेसूध पड़े सो रहे थे…उनके चेहरे पे हल्की सी मुस्कान और एक संतुष्ती थी , सब कुछ शांत था….. जैसे तेज़ तूफान के बाद सागर शांत हो जाता है…आज उनके अंदर से भी प्यार एक तूफान की शकल लिए उनके बाहर आ गया था …अब वह दोनों शांत थे…
शिवानी की नींद खुलती है ..अलसाई आँखों से दीवाल पर लगी घड़ी की ओर देखती है …दोपहर का एक बज रहा था …
” ओह माइ गॉड …पूरी सुबेह निकल गयी ….उफफफफ्फ़ कैसा खेल था यह हम दोनों का ….समय का कुछ अंदाज़ा ही नहीं रहा ..” शिवानी सोचती है , फिर बगल में सो रहे शशांक पर नज़र डालती है …
वो अभी भी गहरी नींद में था …एक बच्चे की तरेह शांत और निर्दोष चेहरा …. शिवानी ने उसे जगाना ठीक नहीं समझा …वो उठ ती है ….उसकी नज़र नीचे जाती है उसकी जांघों पर ..जांघों पर उन दोनों के तूफ़ानी मिलन के निशान सॉफ झलक रहे थे …वीर्य, खून के कतरे …और खुद उसके रस की सूखी पपड़ियाँ …उन्हें देख मुस्कुराती है …फिर बीस्तर से उठ ती है ….उसके सारे बदन में एक मीठा सा दर्द का अनुभव हो रहा था … जैसे उसके बदन को किसी ने बड़े प्यार से रौंद दिया हो .
वो बीस्तर छोड़ देती है और कपड़े पहेन बाहर निकल जाती है , दबे पावं…अपने बाथरूम जा कर अपनी चूत और जांघों को अच्छी तरेह सॉफ करती है ..,हॉट शवर लेती है ….और अब उसे काफ़ी हल्का महसूस होता है…फ्रेश टॉप और स्लॅक्स पहेन शशांक के कमरे में जाती है और उसे उठाती है
“भैया उठो ….”
शशांक जागता है अंगड़ाइयाँ लेता है …और फिर जमहाई लेते हुए पूछता है
“ह्म्म्म…टाइम क्या हुआ शिवानी …लगता है काफ़ी देर हो गयी है ..”
” हां भैया 2.00 बज रहे हैं ….चलो जल्दी उठो , फ्रेश हो जाओ ..मैं खाना लगाती हूँ …मुझे तो जोरों की भूख लगी है ..”
शशांक फ्रेश हुई शिवानी पर नज़र डालता है…उसके चेहरे पर अब कोई थकान नहीं थी ..एक दम तरो-ताज़ा और चमकता हुआ चेहरा … उसके बदन से खूशबू का झोंका उसकी उनिंदे चेहरे पर भी एक ताज़गी ले आता है , वो उसे खींच कर अपनी गोद में ले लेता है , उसके बालों को सून्घ्ता है …
शिवानी थोड़ी देर अपना सर उसके सीने से लगाए रखती है .उसे सूंघने देती है अपने बाल ..फिर अपने को अलग करती है ..
” उफफफफफफ्फ़..भैया अब तो छोड़ो ….मैं कहाँ भागी जा रही हूँ…चलो जल्दी उठो , मुझे बहोत काम करना है ..दीवाली का भी तक कुछ भी इंतज़ाम नहीं हुआ ….मोम के आने से पहले सब कुछ ठीक करना है ना ..प्लीज़ अब उठो..”
उसे अपने हाथों से पकड़ उठाती है और उसके बाथरूम की ओर उसे धकेलते हुए ले जाती है …
” यार तू तो मोम से भी ज़्यादा मस्त दीखने लगी है….”
” हां बस दीखाऊँगी अपना रुआब…. चलो जल्दी करो … एक अच्छे बच्चे की तरेह ….”
शशांक भी एक अच्छे बच्चे की तरेह हाथ जोड़ता है “हां मेरी अम्मा …जाता हूँ बाबा जाता हूँ …”
शिवानी किचन की ओर चली जाती है ..और फ्रीज़ से खाना निकाल कर गर्म करती है …
थोड़ी देर बाद शशांक नहा धो कर फ्रेश बॉक्सर ओर टॉप में बाहर आता है और डाइनिंग रूम की ओर जाता है ..
वहाँ शिवानी उसका इंतजार कर रही थी ..
वो सामनेवाली कुर्सी खींच उसके सामने बैठ जाता है ..दोनों चूप हैं ….खाना शूरू करते हैं ..कोई कुछ नहीं बोलता है ..मानों उनके पास अब कहने को कुछ नहीं बचा ..उनकी सारी मुरादें , इच्छायें और बातें पूरी हो गयीं थीं..उन्हें क्या मालूम था कि यह एक ऐसी आग थी जो कभी बूझती नहीं ,,जितना बूझाओ और भी भड़क उठ ती है ….
शिवानी चूप्पि तोड़ती है ..
” भैया …”
” हां शिवानी ..बोलो ना ” शशांक मुँह में कौर डालते हुए बोलता है
“तुम मुझे कितना बे-शरम समझ रहे होगे ना ..??”
” क्यूँ…शिवानी..ऐसा क्यूँ..??”
“मैं कैसी बेशरामी से चिल्ला रही थी …पर भैया ..सच बोलूं तो यह सब अपने आप हो गया ..उस समय मैं अपने होश-ओ-हवस खो बैठी थी….”
” हां शिवानी ..मैं भी तो होश खो बैठा था ….मैं भी तो कितना बेरहम हो गया था ….शायद हम दोनो के प्यार ने तुम्हें बे-शरम और मुझे बेरहम बना दिया …”
” हां भैया तुम ठीक कहते हो…हमारा प्यार….. ”
और फिर दोनों चूप चाप खाना खा कर उठ जाते हैं …
दोनों भाई बहेन दीवाली की तैयारी में जूट जाते हैं ….
पूरे घर में दिया सजाने में काफ़ी टाइम लग जाता है….शाम हो चूकि थी ..अंधेरा घिर आया था और दिए की रोशनी से सारा घर जगमगा उठा था ..शिवानी के लिए तो इस बार दिए से उठ ती लौ ने सिर्फ़ उसके घर को ही नहीं बल्कि उसके जीवन में भी एक नयी रोशनी ले आई थी ..वो बहोत खुश थी…
वो दिए की थाली अंदर रख कर शशांक के पास आती है…. उसकी ओर बड़े प्यार से देखती है और बोलती है ..
” भैया , पापा और मोम आते ही होंगे ..चलो तैयार हो जाओ …मैं भी तैयार हो जाती हूँ ..बताओ ना मैं क्या पहनूं..??””
” अरे तू तो कुछ भी ना पहनेगी ना तब भी कितनी अच्छी लगेगी …तेरा फिगर भी कितना मस्त है ..बिल्कुल मोम की तरेह ….” शशांक उसे छेड़ते हुए कहता है ..
शिवानी उसके गाल पर एक प्यारा सा चपत लगाती है …
” ह्म्म्म्म ..लगता है आज तुम ने मुझे कुछ ज़्यादा ही देख लिया …..अच्छा बाबा मज़ाक छोड़ो ना …बताओ ना क्या पहनूं ..?'”
” हां यार तुम ठीक बोल रही हो..मैने तुम्हें बिना कपड़ों के इतना देख लिया कि अब तू कपड़ों में अच्छी लगती ही नहीं …..” शशांक फिर छेड़ता है उसे ..
” ओओओः भैया तुम भी ना ..” उसके सीने पर मुक्का लगाती हुई बोलती है ‘” जल्दी बोलो ना , पापा मोम के आने का टाइम हो रहा है ..कुछ तो सोचो ना … ”
” ठीक है बाबा ..तू साड़ी पहेन ले …. वो शिफ्फॉन वाली है ना …”
और फिर शिवानी बिना देर किए मूड कर भागती हुई अपने कमरे की ओर चली जाती है अपने भैया की पसंद की साड़ी पहेन ने..
शशांक भी अपने कमरे में जाता है चेंज करने को …
शशांक गले वाला कुर्ता और मॅचिंग चूड़ीदार पाजामा पहेनता है …
दोनों भाई बहेन तैय्यार हो कर बाहर हाल में आते हैं ..दोनों एक दूसरे को बस एक टक देखते रहते हैं ..
शिवानी साड़ी में कितनी अच्छी लग रही थी . साड़ी नाभि से नीचे बाँध रखी थी उस ने ..पतली झीनी शिफ्फॉन उसके स्लिम फिगर में कितनी फॅब रही थी ….ब्लाउस छोटा सा …बस ब्रा को ढँकते हुए … उसकी हर चीज़ जितनी ढँकी थी उतनी ही दीखती भी थी …
यही तो है साड़ी का कमाल ..जितना ढँकती है उस से ज़्यादा उघाड़ती है….
शशांक का भी मस्क्युलर फिगर सिल्क के कुर्ते से उभर कर बाहर आ रहा था ..
शिवानी आरती की थाली हाथ मे लिए शशांक के साथ बाहर बरामदे में खड़ी अपने पापा और मोम का इंतेज़ार करती है …
थोड़ी ही देर में दोनों आ जाते हैं…
शिव और शांति कार से उतरते हैं , उनका घर दिए से सज़ा है ..जगमगा रहा है और दोनों भाई बहेन उनके स्वागत में खड़े हैं …
शिव शांति खुशी से फूले नहीं समाते अपने बच्चों के प्यार से ….
शशांक और शिवानी उनकी आरती उतारते हैं और उनके पैर छूते हैं
दोनों अपने मोम और पापा से गले मिलते हैं … आशीर्वाद लेते हैं ..
शांति जब शशांक को गले लगाती है , सीने से लगाती है ..उसके गाल चूमती है .. थोड़ा चौंक जाती है ..आज शशांक उस से गले लगता है..पर अपने आप को थोड़ा अलग रखता है अपनी मोम के सीने से ..रोज की तरेह चीपकता नहीं ….शांति समझ जाती है …. उसे यह भी समझ आ जाता है शशांक को कितनी परेशानी हो रही है अपने आप को रोकने में ….उसका शरीर इस कोशिश से कांप रहा था … किसी चूंबक से लोहे को जबरन अलग किया जाए तो बार बार वो चूंबक की ही तरफ जाएगा …पर ज़ोर अगर ज़्यादा हो तो लोहा हिलता ही रहेगा , चूंबक से चीपकने को……कुछ ऐसी ही हालत शशांक की थी …
शांति उसके इस बदलाव से कांप उठ ती है ….” उफफफ्फ़ …मुझ से इतना प्यार..?? ” उसकी आँखें भर आती हैं ..वो फ़ौरन अपना चेहरा दूसरी ओर करते हुए अपने कमरे की ओर जाने लगती है
” बच्चों तुम वेट करो ..मैं भी तैयार हो कर आती हूँ..” जाते जाते शांति कहती है..
हॉल में शिवानी और शशांक रह जाते हैं
शिवानी अपने भैया की हालत समझ जाती है ….वो बोल उठ ती है
” हां भैया तुम सही में मोम की पूजा करते हो ..यही फ़र्क है प्यार और पूजा में ….”
” शिवानी ….. “शशांक उसकी ओर देखता हुआ कहता है” अपनी सुंदरता की देवी पर , अपनी मोम के आँचल में कोई भी आँच नहीं आने दूँगा ..कभी नहीं …”..शशक की आँखों में एक दृढ़ता , एक निश्चय है …
” हां भैया मैं जानती हूँ …और मैं यह भी जानती हूँ कि आप की पूजा जल्द ही सफल होगी …”
थोड़ी देर में शांति और शिव दोनों बाहर आते हैं .. उनके साथ दीवाली मनाते हैं ..फुलझड़ियाँ छोड़ते हैं ..पटाखे चलाते हैं ..और यह दीवाली उनके जीवन में नयी रोशनी ..नयी आशायें और रिश्तों के नये रूप का धमाका ले कर आती है…
शिव शांति का परिवार बड़े जोश और उत्साह से दीवाली की जगमग रोशनी में , पटाको और फुलझड़ियों की चकाचौंध में डूबा है , चारों एक दूसरे के आनंद में शामिल हैं ….
शिवानी के तन -मन में तो पहले ही फुलझड़ियाँ फूट चूकी थीं , पटाखो की गूँज ने धमाका कर डाला था …वो अभी भी उन धमाकों की आवाज़ों में खोई थी ..
शशांक के करीब आने , उस से गले लग जाने का कोई भी मौका नहीं चूकती …
शशांक भी अपनी बहेन की खुशी में पूरा साथ दे रहा था…
पर शशांक ने अपनी मोम से शारीरिक करीबी की पतली सी लक्ष्मण रेखा हमेशा बरकरार रखी …..
शिवानी और शांति इस बात को अच्छी तरेह समझ रहे थे ..शांति को शशांक के अंदर इस लक्ष्मण रेखा को ना लाँघने की कोशिश में हो रहे धमाकों का भी अंदाज़ा था ..आख़िर वो उसकी माँ भी थी ना..और एक माँ से ज़्यादा अपने बच्चे को कौन जान सकता है ….और माँ अपने बच्चे का ख़याल ना करे यह भी कैसे हो सकता है…??
शांति के अंदर भी इस सवाल ने धमाका मचा रखा था …इन धमाकों से अपने आप को कैसे बचाए ?? ..कब तक बचाए ..??? और क्यूँ बचाए ????.इस आखरी सवाल ने उसे बूरी तरेह झकझोर दिया था …..
काफ़ी देर तक दीवाली की धूम मचती रही , पटाको का धमाका चलता रहा , पर शांति अपने अंदर और बाहर हो रहे दोनों धमाकों से बहोत परेशान हो जाती है …
” चलो भी अब …बहोत हो गया ….और रात फाइ काफ़ी हो चूकि है ….” शांति ने सब से कहा … सब अंदर जाते हैं …खाना वाना खा कर अपने अपने कमरे में घूस जाते हैं…गुड नाइट करते समय भी शशांक ने अपनी लक्ष्मण रेखा बरकरार रखी…पर उसकी आँखों में दर्द , पीड़ा और एक दृढ़ सहनशक्ति झलक रही थी …शांति अच्छी तरेह महसूस कर रही थी ..उसके अंदर भी धमाकों का शोर ज़ोर और ज़ोर पकड़ता जेया रहा था….शांति को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे इन धमाकों से उसके कान फॅट जाएँगे …..धमाकों के शोर उसकी बर्दाश्त से बाहर हो रहे थे..
शिव के साथ अपने कमरे में शांति कपड़े बदल लेट जाती है …पर उसके मश्तिश्क में अभी भी उन धमाकों की गूँज कम नहीं हो रही थी ..
शिव रोज की तरेह पलंग पर लेट ते ही थोड़ी देर शांति से दूकान की बात करते करते गहरी नींद में सो जाता है…
पर शांति की नींद उसके अंदर के धमाकों ने हराम कर रखी थी …नये सवाल उठ खड़े हो रहे थे और नये धमाके पुराने धमाकों के साथ जूड़ते जा रहे थे .. क्या बेटे के ख़याल में अपने पति को धोखा दे दे ?? ..उस पति को जो उसे इतना प्यार करता है.??..जिसे वो भी इतना प्यार करती है ..??
उसकी औरत उसे संभालती है उसे जवाब मिलता है “प्यार बाँटने से कम नहीं होता शांति …और बढ़ जाता है …एक से प्यार करने का मतल्ब यह थोड़ी है कि तुम दूसरे से कम प्यार करोगी ..?और वो भी कोई पराया मर्द नहीं तुम्हारा अपना खून ..अपना बेटा …आख़िर वो शिव का भी तो बेटा है ना ..क्या तुम शिव के बेटे को ऐसे ही छोड़ दोगि आग में झूलस्ने को ..??”
“पर फिर भी यह ग़लत है ना …!!!” शांति का संस्कार चीख उठता है….
” ग़लत सही कुछ भी नहीं शांति ..सब अपने विचारो का खेल है… मुस्लिम समाज में चचेरे ,ममेरे , मौसेरे भाई -बहेन आपस में शादी करते हैं …क्या ग़लत है..?? तेलुगु समाज में लड़की अपने मामा से शादी करती है ..क्या ग़लत है..???”
शांति चुप है , उसके पास कोई जवाब नहीं …
उसकी औरत उसे समझाती है ” शांति अपने बेटे को संभाल लो ..उसे अपना प्यार दे दो शांति ..वरना वो टूट जाएगा …आख़िर कब तक अपने आप को इस आग से बचाएगा ..इस से पहले की सब कुछ इस आग में झुलस कर स्वाहा हो जाए ..इस आग को बूझा दो शांति ….बूझा दो ….इसे ठंडा कर दो…””
” हे भगवान यह कैसी उलझन है…” शांति मन ही मन चिल्ला उठ ती है ..उसे लगता है उसके कान के पर्दों के चिथड़े हो जाएँगे ..अपने कान बंद कर लेती है …पर फिर भी धमाके बंद नहीं होते …
लगातार उसके कानों में उसकी औरत की आवाज़ आती रहती है “प्यार बाँटने से प्यार कम नहीं होता……….आग बूझा दे ..आग बूझा दे ..शांति ….शांति ..अपने बेटे को बचा ले…शांति …”
और फिर वो चूप चाप अपने पलंग से उठ ती है….शिव की ओर देखती है … वो अभी भी गहरी नींद में है……. .शांति की नज़र उस के चेहरे पर गढ़ी है…….वो मन ही मन बोलती है .
.” शिव मैं तुम्हारे बेटे के पास जा रही हूँ , उसे भी मेरा प्यार चाहिए शिव …वो मेरे प्यार का भूखा है , उसके बिना मर जाएगा …मैं तुम्हारे बेटे को , तुम्हारे ज़िगर के टूकड़े को, नयी जिंदगी दूँगी ..उसे बचा लूँगी शिव ..उसे कुछ नहीं होगा …कुछ नहीं होगा ..कुछ नहीं …”
शांति आगे बढ़ती है …. कमरे का दरवाज़ा खोलती है …अपने संस्कारों की बेड़ियाँ तोड़ डालती है….परंपराओं की जंजीरें काट फेंकती है …..और उसके कदम अपने आप शशांक के कमरे की ओर बढ़ते जाते हैं….
इधर शशांक भी अपने पलंग पर लेटा है ….नींद उसकी आँखों से भी दगा कर रही है …वो भी अपने अंदर के धमाकों से परेशान है ..
.”मोम ..मैं आखीर अपने सब्र का बाँध कब तक रोकू …उफ्फ ..कहीं टूट ना जाए ..कहीं मैं कुछ ऐसा ना कर बैठूं जिस से तुम्हारा आँचल मैला हो जाए ..मोम ..मोम मुझे बचा लो ….मोम …”
वो भी मन ही मन चिल्ला रहा है , बीलख रहा है ..रो रहा है…
तभी उसे अपने दरवाज़े पर किसी के बड़ी धीमी आवाज़ में खटखटाने की आवाज़ सुनाई पड़ती है ..
वो चौंक जाता है ..इतने रात गये कौन हो सकता है ..?
फ़ौरन उठ ता है…….”ज़रूर बदमाश शिवानी होगी ” बुदबुदाता हुआ दरवाज़े की ओर जाता है
दरवाज़ा खोलता है ..
बाहर मोम खड़ी थी……
एक पल के लिए शशांक को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं होता …. मोम ..उसकी देवी ..उसके सपनों की रानी..उसकी हसरत , उसकी दुनिया उसका सब कुछ ..खुद उसके सामने खड़ी है…वो अपनी आँखें मलता है दुबारा देखता है…..हां यह उपर से नीचे तक वोही है ..
मोम की आँखों में माँ की चिंता , एक औरत की हसरत और प्यार सब कुछ देख और समझ लेता है शशांक …
शशांक एक हाथ से दरवाज़ा खोलता है और दूसरे हाथ से मोम के कंधे पर हाथ रखे उसे अंदर खींचता है ….दरवाज़ा बंद कर देता है …मोम को अपनी गोद में उठाता है …और बड़े नपे तुले कदमों से बीस्तर के पास जा कर उसे लीटा देता है..
मोम की आँखों में अब कोई चिंता नहीं है ..शशांक की मजबूत बाहों के सहारे गोद में आते ही शांति को महसूस हो जाता है के उसके लंबे कदम जिन्होने उसके वर्षों की संस्कारों और परंपराओं को लाँघते हुए पीछे छोड़ दिया है…उसे सही ठिकाने तक पहूंचाया है .
शांति को उसकी मजबूत बाहों में बिल्कुल वैसा ही महसूस हो रहा था जैसा उसे उस रात सपने में हुआ था ….उसने इन बाहों में अपने आप को कितना महफूज़ पाया …इन बाहों का सहारा लिए वो जिंदगी के किसी भी तूफान का सामना कर सकती थी ..किसी भी भंवर से खींच निकालने की ताक़त उन बलिष्ठ भुजाओं में थी…. एक औरत को एक मर्द की मजबूत बाहों का सहारा मिल गया था ….. उसकी मंज़िल मिल गयी थी …शांति अब निश्चिंत है ..उसके अंदर धमाके अब शांत हैं …..
शशांक , शांति को बीस्तर पर लीटा कर उसकी बगल में बैठता है…उसे निहारता है ..अपनी मोम का यह बिल्कुल नया रूप अपनी आँखों से पीने की कोशिश करता है..बस देखता ही रहता है ….
शांति की बड़ी बड़ी आँखें खूली हैं ..चेहरे पे हल्की सी मुस्कुराहट है…. आँखों में एक ताज़गी है ..जो लंबी दूरी तय करने के बाद अपनी मंज़िल तक पहूंचने पर किसी की आँखों मे होती है… शांति ने भी तो सालों की मान्यताओं , नियमों को ठोकर मारते हुए एक लंबी दूरी तय कर आज शशांक के बीस्तर तक आई थी …उसके पाओं ने अपने कमरे से शशांक के कमरे तक सिर्फ़ चार कदमों का ही फासला तय किया था ..पर उसके दिल-ओ-दिमाग़ ने सालों से चली आ रही एक लंबी और विस्तृत परंपरा को लाँघने का लंबा सफ़र तय किया था ..
शशांक सब समझता था उसकी आँखों से शांति का आभार , उसकी पूजा , उसकी प्रशन्षा और सब से ज़्यादा उसके लिए असीम प्यार आँसू बन कर टपक रहे थे ….
अपनी मोम की ओर एक टक देखते हुए वो बोल उठता है…..” उफफफफफ्फ़ मोम …अट लास्ट……..”
उसके इन चार शब्दों में शांति ने उसकी तड़प , उसका आभार , उसका प्यार सभी कुछ महसूस किया ..
” हां शशांक अट लास्ट ….. तुम्हारे प्यार ने मुझे यहाँ तक आने को मजबूर कर दिया ….मेरे कदम खींचे चले आए ..हां शशांक …”
और अब शशांक अपने आप को रोक नहीं पाया …उसने लक्ष्मण रेखा तोड़ दी …..
मोम को अपनी बाहों में जाकड़ लिया ….उसके सीने में मुँह छुपाता हुआ फूट पड़ा ” हां मोम ..यस मोम …आइ लव यू ..आइ लव यू …उफफफफफफ्फ़ …मोम …..आइ लव यू सो मच ….. ”
” हां शशांक मैं जानती हूँ ..मैं समझती हूँ ..मैं महसूस करती हूँ ..बेटा…मेरी अंदर की औरत को तुम ने जगा दिया है शशांक …अपना सारा प्यार भर दो मेरी झोली में ….भर दो ….”
शांति अपनी बाहें उसके पीठ से लगाते हुए शशांक को अपने सीने से चीपका लेती है ….बार बार उसे अपनी तरफ खींचती है ..शशांक उसकी पीठ के नीचे बाहें डाले उसे बार बार अपनी तरफ खींचता है ..दोनों के सीने से चिपकते हैं…शांति की मदमस्त चूचियाँ अपनी सारी गोलाई और कोमलता लिए उसके सीने में सपाट हो जाती है , स्पंज की तरेह …. ..
शशांक उसे बार बार गले लगाता है . सीने से चिपकाता है….उसे चूमता है ..चाट ता है चूस्ता है शांति आँखें बंद किए इस प्यार को अपने अंदर महसूस करती है….अपने अंदर समा लेने की जी जान कोशिश में जुटी रहती है ….
शशांक प्यार लूटा रहा था शांति उसे अपनी झोली में समेट रही थी ….
अचानक शांति , शशांक को अपने उपर से हटा ती है ..शशांक चौंकता है
शांति कहती है ..” शशांक अपने प्यार के बीच अब यह परदा क्यूँ ??….शांति और शशांक के बीच कोई दूरी क्यूँ ??..उनके महसूस के बीच रुकावट क्यूँ ?? ……मुझे पूरे का पूरा शशांक चाहिए …..और शांति भी शशांक को पूरी मिलेगी …पूरी की पूरी बेपर्दा ……नंगी …..पूरी तरेह शांति …”
एक झटके में शांति अपनी नाइटी उतार फेंकती है , शशांक के सामने बिल्कुल बे परदा ..बिल्कुल नंगी ….सिर्फ़ शांति ……
शशांक की आँखें फटी की फटी रह जाती है शांति को देख……उफफफफफफफफ्फ़ ……सही में वो उसके सुंदरता की देवी है ….संगमरमर की मूर्ति की तारेह तराशा हुआ शरीर , शरीर कम एक देवी की मूर्ति ज़्यादा …..भारी भारी गोलाकार चूचियाँ ..गुलाबी घूंडिया ….दूधिया रंग …लंबी गर्दन …मुस्कुराता चेहरा ….भरे भरे होंठ ….मांसल पेट ….गहरी नाभि…..लंबी सुडौल टाँगें …भारी भारी जंघें ..जांघों के बीच हल्की सी फाँक लिए गुलाबी चूत , बीखरे बाल …..हाथ फैलाए ….
शशांक उसकी बाहों में जाने को अपने हाथ फैलाता है ..फिर रुक जाता है …..सोचता है इस संगमरमर की इतनी निर्मल , स्वच्छ और पवित्र मूर्ति उसके कपड़ों के स्पर्श से मैली ना हों जायें ….
अपने कपड़े उतार फेंकता है , अब सिर्फ़ शशांक , शांति के सामने है …नंगी और निर्मल शांति की बाहों में नंगा और निर्मल शशांक आ जाता है ..जिस तरह वो अपनी माँ की कोख से निकला था ..
दोनों एक दूसरे से बूरी तारेह चीपक जाते हैं …चीपके चीपके ही बीस्तर पर आ जाते हैं….मानों इतने दिनों से रुका हुआ प्यार का बाँध फूट पड़ा हो….. दोनों इस फूटे हुए बाँध के बहाव में बहते जाते हैं ….
एक दूसरे को चूमते हैं , गले लगते हैं ….ताकते हैं …अलग होते हैं …निहहरते हैं ..फिर सीने से लगते हैं ….उफफफफफफ्फ़ ..इस बहाव के झोंके में दोनों पागल हैं…
शांति को शशांक लीटा देता है….उसके उपर आ जाता है ..उसका तन्नाया लंड शांति की जांघों के बीच फँसा है …शांति की भारी भारी चूचियाँ अपने मुँह में ले लेता है , चूस्ता है …
.”हां शशांक अपनी मोम का दूध चूस ले बेटा ..चूस ले ..पूरा चूस ले ..” अपने हाथों से अपनी चूची दबाते हुए उसके मुँह में अंदर धँसाती है …..” ले ले मेला बेटा ..मेला दूध्दू पी ले ..”
शशांक का सर अपनी चूची की तरफ खींचती है …
दूसरी चूची शशांक हाथ से मसल रहा है ….
शांति कराह रही है..सिसकारियाँ ले रही है ..मस्ती की झोंकों में उसके चूतड़ उछल रहे हैं और उसकी गीली चूत शशांक के कड़े , लंबे और मोटे लंड को नीचे से घीसती जाती है ….शशांक इस प्रहार से सीहर उठ ता है..उसका सारा शरीर कांप उठ ता है….
शांति के होंठों को अपने मुँह में भर लेता है ..अपने होंठों से चूस्ता है..अपनी जीभ अंदर डाल देता है ..उसकी जीभ शांति की मुँह के अंदर उसकी तालू , उसके जीभ , उसके दाँत शांति के मुँह का कोना कोना चाट ता है …..शांति की जीभ अपने होंठों से जाकड़ लेता है ..उसे जोरों से चूस्ता है..शांति के मुँह का पूरा लार अपने अंदर ले लेता है..शशांक अपनी माँ का सब कुछ अपने अंदर ले रहा है..
शांति की चूत से लगातार पानी रीस्ते जा रहा है शांति तड़प रही है शशांक की बाहों में ..बार बार चूतड़ उछाल रही है ..लंड को अपनी चूत से घीसती जा रही है..उसे अंदर लेने को बूरी तरेह मचल रही है……
शहांक का लंड और भी तन्नाता जाता है…मानों उखड़ जाएगा ..उस से अलग हो जाएगा और अपनी माँ की चूत में घूस जाएगा …
वो फिर से शांति को चीपका लेता है अपने बदन से …उसके कठोर और मांसल शरीर शांति की कोमलता को स्पंज की तरह दबा रखा है ….वो इस तज़ुर्बे को अपने अंदर ले रहा है…देर तक चीपका रहता है..शांति उसके नीचे तड़प रही है ..बार बार उसके कड़क लंड को अपनी चूत से घीस रही है ..चूत के होंठ कितने फैले हैं ….उफफफफफफ्फ़ …शशांक का सुपाडा उसकी चूत के सतह पर चूत की पूरी लंबाई को घीस रहा है …शांति का बदन उसकी बाहों में उछल मार रहा है ..कांप रहा है ..
शांति अपनी टाँगें फैलाटी है …तभी अचानक शशांक का तननाया लंड उसकी बूरी तरेह गीली चूत के अंदर चला जाता है ………..
उफफफफफ्फ़…आआआः ..यह कैसा सूख है …शशांक के लिए बिल्कुल नया अनुभव..कितना गर्म , कितना मुलायम , बिल्कुल मक्खन की तरेह ….उस ने भी अपने आप को छोड़ दिया ..शांति अपनी चूतड़ उपर और उपर उठाती जा रही है….उसके लिए भी एक नया ही तज़ुर्बा था ..इतना कड़क . लंबा और मोटा लंड अपनी चूत में लेने का……उसकी चूतड़ उपर उठ ती जा रही है..लंड की लंबाई ख़त्म ही नहीं होती …
शशांक मोम की भारी भारी मुलायम चूतड़ो को अपने हाथ से थामता है , हल्के से अपना लंड अंदर डालता है …शांति की चूत को उसके लंड की जड़ मिल जाती है…उसकी पूरी लांबाई वो ले लेती है …
शांति इस तज़ुर्बे से थरथरा उठ ती है ..आँखें बंद किए शशांक के कमर को मजबूती से जाकड़ लेती है..उसका लंड कहीं बाहर ना निकल जाए ….शशांक भी लंड अंदर डाले अपनी माँ की चूत की गर्मी , उसका गीलापन , उसकी कोमलता महसूस करता है ..
आआआआः जिस चूत से वो निकला था ..उसी चूत में आज वो फिर से अंदर है ..अपने पूरे होश-ओ-हवस में ……उफफफफफफ्फ़ इस महसूस से शशांक पागल हो उठता है ..उसका पूरा शरीर इस सोच से सीहर उठ ता है …
वो लंड अंदर किए ही शांति को चूम रहा है ,उसके होंठ चूस रहा है..उसकी चूचियाँ दबा रहा है ..
शांति ने भी अपने आप को पूरी तरेह उसके हवाले कर दिया है ….
उसका लंड उसकी चूत के अंदर ही अंदर और भी कड़क होता जाता है ….
शांति इस महसूस से किलकरियाँ लेती है ..उसकी जाँघ फडक उठ ती हैं
अब शशांक से रहा नहीं जाता ,अपना लंड पूरा बाहर निकालता है , शांति की चूतड़ थामे जोरदार धक्के लगाता है..
उसका लंड मोम की कोख तक पहून्च जाता है..शशांक अपने लंड को उसकी कोख पर घुमाता है , उसे महसूस करता है ..शांति इस धक्के से निहाल हो जाती है ….जिस कोख ने उसे जन्म दिया उसी कोख को उसका बच्चा अपने लंड से छू रहा है ,टटोल रहा है…इस चरम सूख के अनुभव से शांति सीहर उठ ती है , उसके सारे बदन में झूरजूरी होने लगती है ….. शांति अपने आप को रोक नहीं पाती है
“आआआअह….उउउः शशााआआआआंक” चीख पड़ती है शांति ……
..चूतड़ उछाल उछाल कर झड़ती जाती है …झड़ती जाती है ….शशांक का लंड अपनी मोम के रस से सराबोर है ..
तीन चार धक्कों के बाद वो भी अपनी पीचकारी छोड़ते हुए मॉं की कोख को अपने गर्म गर्म वीर्य से नहला देता है …..
अपने बेटे के पवित्र रस से माँ की कोख पूरी तरेह धूल जाती है..
शांति कांप रही है , सीहर रही है , चीत्कार रही है आनंद विभोर हो कर किल्कारियाँ ले रही है
मानों उसके अंदर दीवाली की फूल्झड़ियाँ फूट रही हों
शशांक उसके सीने में , अपनी माँ की स्तनों में अपना चेहरा धंसाए हांफता हुआ लेट जाता है .
शांति अपने हाथ उसके सर पर रखे उसे अपने सीने में और भी अंदर भर लेती है …. आँखें बंद किए इस अभूत्पूर्व आनंद के लहरॉं में बहती जाती है….खो जाती है….
कुछ देर बाद शांति अपने होश में आती है …..उसका शरीर कितना हल्का था ..जैसे हवा में झोंके ले रही हो…
शशांक मोम की गोद की गर्मी पा कर सो गया था ..गहरी नींद में
शशांक के सर को अपनी हथेलियों से थामे बड़ी सावधानी से अपने सीने से हटा ती है और बीस्तर पर कर देती है …शशांक अभी भी नींद में हैं….उसका माथा चूमती है ….. बदन पर चादर डाल देती है ….खूद नाइटी पेहेन्ति है और दबे पाओं कमरे से बाहर निकल जाती है .
अपने कमरे में जाती है , शिव अभी भी गहरी नींद में था .
शांति उसके बगल लेट जाती है …
इस बार उसकी नींद उसे धोखा नहीं देती ….वो भी सो जाती है …
सूरज की पहली किरणों के साथ ही आज शशांक के जीवन में भी एक सुनहरे सवेरे का उदय होता है… एक ऐसी सुबेह जो उसकी जिंदगी में खुशियाँ , प्यार और मुस्कुराहटो का खजाना ले आती है ..उसके जीवन में रंगिनियाँ भर देती है …
उसका दिल-ओ-दिमाग़ , दीवाली के फूल्झड़ियों की चमक , दियों की शीतल रोशनी और पटाखो की चकाचौंध से जगमगा उठा था….दिल की गहराइयों तक पटाखो के धमाके गूँज रहे थे …
शांति और शिवानी के प्यार ने उसकी झोली , बे-इंतहा और बेशुमार खुशियों से भर दी थी …
उसकी नींद खुलती है ….अपने उपर चद्दर रखी हुई पाता है..उसकी आँखें मोम की ममता भरे लाड से आँखे नम हो जाती हैं ….वो कितना खुशनसीब है , कल रात मोम ने अपनी औरत का प्यार और माँ की ममता दोनों शशांक पर लूटा दी थी….. शशांक के प्यार को इतने ख़ूले दिल से स्वीकार कर लिया था …समेट लिया था..कुछ भी तो मोम ने बाकी नहीं रखा ..पूरे का पूरा उन्होने अपने में समा लिया और बदले में जो उन्होने दिया ..शायद शशांक समेट भी ना सके जीवन भर … उसकी औरत के प्यार का तो बदला चूका सकता था शशांक..पर माँ की ममता ..?? इसका बदला क्या कभी चूका सकता था ????
” मोम ….यू आर ग्रेट ..मोम आइ आम सो लकी … लेकिन मोम ..मैं आप के आँचल को कभी भी मैला नहीं होने दूँगा मोम ..कभी नहीं ….” उसकी आँखों से लगातार आभार के आँसू टपकते हैं…
वो पूरी तरेह जाग जाता है , अपने बदन से चादर हटा ता है , आँसू पोंछता है और अपनी हालत देख एक लंबी मुस्कुराहट उसके होंठों पर आ जाती है …
शशांक बिल्कुल नंगा था….उसका लंड भी सुबेह की ताज़गी को अपने लंबे , कड़क और हिलते हुवे आकार से सलामी दे रहा था …
तभी उसका दरवाजा एक जोरदार झटके के साथ ख़ूलता..है..वो झट अपनी चादर ओढ़ फिर से आँखें बंद कर सोने का नाटक करता है …
उसका लंड चादर के अंदर ही तंबू बनाए लहरा रहा था ..’
शिवानी अंदर आती है …शशांक के तंबू पर उसकी नज़र जाती है ..उसके होंठों पर एक बड़ी शरारती मुस्कान आ जाती है…वो फ़ौरन दरवाज़ा बोल्ट करते हुए …वापस उसके बगल खड़ी हो कर एक टक उसके लहराते हुए लंड को निहारती है …
फिर उसके बगल बैठ जाती है ..चादर के अंदर हाथ डालती है और शशांक के लंड को बूरी तरेह अपने हथेली से जाकड़ लेती है …उसे सहलाती हुई बोलती है ..
” गुड मॉर्निंग भैया ….वाह क्या बात है ..दीवाली की फूल्झड़ी अभी भी लहरा रही है …”
और तेज़ी से उसके लंड की चमड़ी उपर नीचे करती है …
शशांक सीहर उठ ता है
” उफफफफफफफफफ्फ़.यह लड़की …ना सुबेह देखती है ना शाम , बस हमेशा एक ही काम ..” शशांक प्यार से झुंझलाता हुआ जुमला कसता है….
” क्या बात है , क्या बात है..सुबेह सुबेह इतना शायराना मूड ..? ” शिवानी के हाथ और तेज़ चलते हैं
” शिवानी ..अरे बाबा यह सुबेह सुबेह .?? कुछ तो सोचो मोम कभी भी आ जाएँगी चाइ ले कर ….मुझे कपड़े तो पहेन ने दे ना यार..” वो खीझता हुआ कहता है …पर उसकी आवाज़ खोखली है ….वो भी मज़े में था ..
” अरे मोम की चिंता मत करो भोले राजा ..आज दीवाली के दूसरे दिन दूकान बंद है ..भूल गये क्या..? मोम और पापा आज देर से उठेंगे ….अभी तो सिर्फ़ 7 बजे हैं..9-10 बजे से पहले कोई चान्स नहीं उनके उठने का ..” वो मुस्कुराती हुई उसकी आँखों में देखती है ..पर अचानक अपने हथेली में कुछ खटकता है … हाथ की हरकत रोक लेती है … उसके लंड को देखती है ..जिस पर उसका वीर्य सूख कर पपड़ी बना था ..और उसकी जड़ तक कुछ और पपड़िया भी थीं ..जो चूत में अंदर जाने पर ही आती हैं …चूत रस से भींगे होने पर …
वो सोचती है ” मैं तो कल रात इसके पास आई नहीं ..फिर कौन हो सकता है …क्या मोम ..?? कोई तीसरी का तो कोई चान्स ही नहीं था,उसे इतना तो शशांक पर विश्वास था..ज़रूर कल रात मोम आई थी यहाँ “”
इस कल्पना से शिवानी बहोत खुश हो जाती है…उसके भैया की पूजा सफल हुई …
वो फिर से उसके लंड को बड़े प्यार से सहलाती है और शशांक से बोलती है
” भैया ….??”
” अब क्या है….?” शशांक उसका सहलाना अचानक बंद होने से थोड़ा झल्ला गया था
“अरे बाबा झल्लाओ मत ना ..इतने प्यार से तो तुम्हें सुबेह जगाने आई हूँ …अच्छा यह बताओ कल रात मोम आई थीं क्या आप के पास..?”
शशांक इस सवाल से अपने चेहरे पर कोई भी भाव नहीं आने देता , जैसे कुछ नहीं हुआ …
” अरे नहीं बाबा ..कोई नहीं आया …पर टू क्यूँ पूछ रही है..”
शिवानी उसके लंड को सहलाना फिर से बंद करती है और उसे थामे उसे दिखाती हुई बोलती है
” फिर यह आप के वीर्य की पपड़ी..??” और फिर लंड की जड़ में अपनी उंगली लगाती है ” और यह चूत के रस की जमी हुई पपड़ी ..? भैया झूट मत बोलो ..मेरे और मोम के अलावा यहाँ और कोई तो है नहीं ….डरो मत भैया . मुझे तो खुशी होगी …आपकी पूजा सफल हुई ..”
शशांक समझ गया अब और कोई बहाना अपनी बहेन के सामने नहीं चलनेवाला
वो चूप चाप मुस्कुराता हुआ ” हां ” में सर हिला देता है ….
शिवानी खुशी से झूम उठ ती है …शशांक का अपने पर विश्वास देख वो फूली नहीं समाती …
वो उस से लिपट जाती है , उसे चूमने लगती है
” ओओओओह्ह भैया आइ आम सो हॅपी फॉर यू ..सो हॅपी ….मैं सब समझ गयी ..अब आप कुछ मत बोलो , कुछ मत करो …लो मैं तुम्हें अपनी तरफ से गिफ्ट देती हूँ तुम्हारे विक्टरी पर ..तुम बस चूप चाप लेटे रहो….”
शशांक आँखें बंद किए लेटा रहता है …शिवानी की गिफ्ट की कल्पना में खोया हुआ ….
शिवानी अपने कपड़े उतार फेंकती है …अपनी नंगी और सुडौल टाँगें शशांक के मुँह के बगल फैला देती है और अपना मुँह उसके लंड के उपर ले जाती है ..उसके खड़े लंड के सुपाडे पर जीभ फिराती है ..शशांक चिहूंक जाता है..उसके गीली जीभ के स्पर्श से और फिर गप्प से लंड को मुँह में भर चूस्ति है ….उसका लंड काफ़ी मोटा और लंबा था ..पूरा लंड शिवानी की मुँह में नहीं जाता ..आधा ही जाता है …आधे लंड को चूस्ति जाती है आइस क्रीम की तरेह …और बाकी हाथ से थामे सहलाती है ..
शशांक इस दोहरे हमले से कांप उठ ता है ….कराह उठ ता है ….
शिवानी भी अपने मुँह में किसी के लंड को पहली बार अंदर लेने के आनंद से , एक बिल्कुल नयी तरेह के तज़ुर्बे से मस्त है ..क्या महसूस था ..ना कड़ा , ना मुलायम , ना गीला ना सूखा ….उफ़फ्फ़ …अद्भूत आनंद …वो चूसे जा रही है….मानो पूरे का पूरा लंड खा जाएगी ..हाथ भी तेज़ी से चला रही है..उसकी चूत भी गीली होती जा रही है …रस शशांक की फैली बाँहो को छूता है ..
शशांक उसकी टाँगें फैलाता है ..चूत की गुलाबी और गीली फाँक दीखती है उसे…उस से रहा नहीं जाता
शशांक उसकी जांघों को हाथों से फैलाता हुआ अपने मुँह पर ले आता है …उसकी चूत अब उसके मुँह पर है …टूट पड़ता है शिवानी की चूत पर ..अपने होंठों से उसकी चूत को जकड़ता हुआ जोरो से चूस्ता है ….शिवानी सीहर जाती है ..उसे लगता है उसके शरीर से सब कुछ निकल कर शशांक के मुँह में उसकी चूत से बहता हुआ चला जाएगा …
शिवानी की टाँगें थरथरा जाती हैं ..शशांक जांघों पर अपनी पकड़ बनाए है और चूस्ता जाता है ..चाट ता जाता है अपनी बहेन की चूत
शिवानी भी उसके लंड को ज़ोर और जोरों से चूस्ति है ..कभी दाँतों से हल्के काट ती है ..कभी जीभ फिराती है …हाथ भी चलाती जाती है उसके लंड पर
दोनों मस्त हैं , लंड और चूत की चुसाइ हो रही है..दोनों के मुँह में रस लगातार जा रहे हैं..उसे पीते जा रहे हैं …गले से नीचे उतारते जा रहे हैं
फिर शशांक का लंड कड़ा और कड़ा हो जाता है और अपनी चूतड़ उछालता हुआ शिवानी के मुँह में अपनी पीचकारी छोड़ देता है …शिवानी उसके लंड को मुँह खोले अंदर लिए है और अपने हाथों से कस कर थामे है ,,उसका लंड शिवानी के हाथों में झटका देता हुआ उसके मुँह में खाली होता जा रहा है..शिवानी के गालों पर ..उसके होंठों पर , उसके चेहरे पर शशांक के वीर्य के छींटे पड़ते हैं ..
इधर शिवानी अपनी चूतड़ के झटके लगाते झड़ती जाती है ..शशांक के मुँह में उसकी चूत का रस भरता जाता है ..शशांक गटकता जाता है….
दोनो भाई बहेन एक दूसरे का रस अपने अपने अंदर लेते जा रहे हैं ….
थोड़ी देर में दोनों खाली हो जाते हैं …
शिवानी अपने चेहरे पर लगे वीर्य के छींटों को हथेली से पोंछती है , और चाट जाती है …पूरा चाट जाती है ….
फिर दोनों आमने सामने हो जाते हैं , एक दूसरे से लिपट जाते है ..चूमते हैं ..चाट ते हैं
और हान्फते हुए एक दूसरे के उपर पड़े रहते हैं …
काफ़ी देर तक दोनों एक दूसरे पर चूप चाप पड़े रहते हैं ….
” भैया ….” शिवानी बोलती है
“हां शिवानी..बोलो ना ..??”
” इस बार की दीवाली कितनी अच्छी रही ..है ना..? ”
” क्यूँ शिवानी …” शशांक जान बूझ कर अंजान बनता हुआ पूछ ता है
शिवानी उसके सीने से लगे अपने सर को उपर उठा ती है ..उसकी आँखों में झाँकते हुए , उसके गालों को सहलाते हुए बोलती है
” देखो ना भगवान ने हम दोनों की बात सुन ली ..मुझे आप का प्यार मिल गया और आप को मोम का ….”
” हां शिवानी तू बिल्कुल ठीक कहती है …पर एक बात तो मुझे समझ में आ गयी अछी तरेह …”शशांक अपनी बहेन के गाल सहलाता हुआ बोलता है
” क्या भैया …बताओ ना ..”वो भी उसके गालों को सहलाते हुए बोलती है
शशांक पहले शिवानी के चेहरे को अपने हथेली से थामता है , उसके होंठ चूस्ता है ..फिर बोलता है
” प्यार बाँटने से ही तो प्यार मिलता है शिवानी ..मैने तुम्हें तुम्हारा प्यार दिया ख़ूले दिल से ..मुझे भी मेरा प्यार मिल गया ..”
क्या इस से बढ़ कर और कोई प्यार हो सकता है ??
” हां भैया .. यू आर सो राइट ब्रो’ ..सो राइट ..”
