रजनी की चुदाई उसीकी की जुबानी 1

माँ की चुदाई

“कमर पकड़े पकड़े ही चोदता रहा दीपक मुझे। कभी लंड चूत में कभी गांड में”।

पंद्रह मिनट की धुआंधार चुदाई के बाद आखिर मैं झड़ गयी – निकल गया मेरा पानी।

जैसे ही मैंने एक लम्बी सिसकारी ली “ओह आह ओह ओह आ आ आह ”, दीपक समझ गया मेरा काम हो गया है।

उसने भी आठ दस तगड़े धक्कों के बाद अपना लेसदार सफ़ेद गर्मागर्म वीर्य मेरी चूत में उड़ेल दिया। मुझे साफ़ पता लग रहा था की मेरी चूत गर्म पानी से भर गयी है।

कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहने के बाद दीपक ने लंड चूत से बाहर निकाला और मैं वही ढेर हो गयी। थोड़ी देर में मैं उठी और बात रूम गयी, चूत और गांड की धुलाई की और बाहर आयी। देखा तो दीपक बेड पर लेटा हुआ था नंगा।

मैं भी उसके साथ नंगी ही लेट गयी।

बहुत तक गयी थी मैं। सफर की थकान, फिर सरोज और रजनी के साथ चूत चटाई और ऊंगली बाजी का खेल – और अब ये मस्त चुदाई। और चुदने की हिम्मत नहीं बची थी।

दीपक समझदार था। वो समझ गया की सफर की थकान और मस्त चुदाई ने मुझे थका दिया है, आज और नहीं चुद पाऊंगी।

वो खड़ा हुआ और बोला, “आभा कल का क्या प्रोग्राम है ? रजनी तो आज राकेश से चुद रही है। सरोज बताती है है मस्त गांड चोदता है” ।

मैंने सोचा, “यहां तो सब एक दुसरी की चुदाई के बारे में जानते हैं ”

मैंने कहा, “रजनी और सरोज ही बताएंगी कल के प्रोग्राम के बारे में “।

“सही बात है, सरोज को यहां का सब कुछ मालूम है।उससे कुछ नहीं छुपा “। दीपक कपड़े पहनते पहनते बोला। “चलो चलता हूं, देखते हैं कल कौन किससे चुदाई करवाती है “। वो मेरे पास आया, मेरे होंठ चूमे और चूसे – मेरी फुद्दी की चुम्मी ली, थोड़ी सी अपनी जुबान मेरी चूत में घुसाई और चूत चाट कर चला गया।

दीपक चला गया – मैं लेटे लेटे आने वाले दिनों की चुदाई के बारे में सोच रही थी। किसकी चूत में किसका लंड जाएगा और किसकी गांड बजेगी। वैसे मेरा तो मन कल भी दीपक से ही चुदवाने का था I दीपक के लंड के फूले हुए सुपाड़े से ध्यान हट ही नहीं रहा था – और फिर रजनी ने जो बताया था की कैसे वो नीचे लेटा था और कैसे रजनी उसके खूंटे जैसे लंड पर बैठी थी और पूरा लंड अंदर ले लिया था – वो सीन तो अभी बाकि था ।

मैं ख्यालों में ही थी की रजनी आ गयी। कपड़े हाथों में ही थे। कपड़े एक तरफ फेंक कर मेरे पास ही लेट गयी, “क्या गांड चोदता है साला राकेश – बिना रुके। गांड का भुर्ता बना दिया “।

मैंने पूछा, “क्या हुआ बता तो”।

रजनी ने बताया की एक तो राकेश का लंड बड़ा मोटा है, दुसरे वो जब पेलता है तो नीचे वाली की परवाह नहीं करता। बहुत ज्यादा चूत चाटने, गांड चाटने जैसे रस्म अदायगी में विश्वास नहीं करता। मगर जितनी भी चाटता है मस्त चाटता है। चूत खाली आखिर के पांच मिनट चोदता है वो भी पीछे से। लंड खूब चुसवाता है।

मेरी गांड में तो खुजली मच गयी, “अरेअच्छे से बता ना”।

रजनी बोली, ” तेरे दीपक के कमरे में जाने के बाद मैं और सरोज उनके कमरों की तरफ चल पड़े। राकेश अंदर ही था। सरोज ने मेरा परिचय करवाया – राकेश ये रजनी है जिनके बारे में मैंने तुम्हें बताया थ। बीबी जी की बेटी। शहर में पढ़ाई करती है हॉस्टल में रहती है। कुछ महीने पहले छुट्टियों में आयी थी, खूब मस्ती कर के गयी थी। तुम से नहीं मिल पाई। अब ये और इसकी सहेली आभा आई है मौज मस्ती करने। जब से मैंने भी तुम्हारी तारीफ़ की तब से ये तुम से मिलने को बेताब थी”।

राकेश बोला, ” भाभी आप भी कई बार झूठी तारीफ कर देती हो “। फिर रजनी की तरफ देख कर बोला, “रजनी जी वहाँ क्यों बैठी हो आप, यहां आओ ” अपनी जांघों की तरफ इशारा कर के बोला।

“मैं तो उसके हौंसले की कायल हो गयी”।

सरोज ने मुझे इशारा किया और मैं उठ कर राकेश की गोद में बैठ गयी। राकेश मेरी चूचियां दबाने लगा। मेरा मुंह उठा कर मेरे होठ अपने होठों में ले लिए। थोड़ी ही देर में उसने मुझे उठाया और अपने सामने ही नीचे बिठा दिया। अपना लंड निकला और मेरे मुंह के आगे लहराने लगा। “क्या लंड था आभा। मैं तो सोच रही थी मुंह में कैसे जाएगा – चलो मुंह में तो चला भी गया गांड में कैसे जाएगा”।

रजनी ने आगे बताया – मैंने सरोज की तरफ देखा। सरोज मेरी दुविधा समझ गयी और बोली, “अरे चिंता ना करो जीजी, राकेश सब जानता है। जब मेरी शादी राकेश के भाई संतोष से हुई थी, और पहली पहली बार इसने मेरी ‘खातिरदारी’ की थी तो मैं भी बहुत डरी थी। अब तो चस्का ही पड़ गया है। अच्छा चलो जीजी, पहले मैं ले लूंगी इसका और आप देखना – आपका डर निकल जाएगा। क्यों राकेश ” ?

“अरे भाभी इसमें डरने की क्या बात है ये आगे पीछे वाले छेद तो बने ही इसी काम के लिए हैं। कुछ नहीं होगा”।

राकेश ने मेरा सर पकड़ कर अपने लंड की तरफ खींचा और लंड मेरे मुंह में डाल दिया। पहले तो मुझे लगा की क्यों आ गयी मैं यहाँ, मगर फिर राकेश का लंड चूसने लगी – मजा आने लगा।

“राकेश ने खूब लंड चुसवाया मेरे से ” I

राकेश ने अपने कपड़े उतरने शुरू किये तो सरोज आ गयी और मेरे कपड़े उतरने लगी। राकेश अपने कपड़े उतारने लगा। राकेश का खिलाडियों जैसा शरीर और ज़बरदस्त लंड देख कर गांड में झुरझुरी होने लगी। अब तो पिलवाने का मन करने लगा।

उधर सरोज ने भी अपने कपड़े उतार दिए।

अब तीनो नंगे खड़े थे।

राकेश बोला, “अब ” ?

सरोज बोली “अब जरा मेरी गांड में ये खूंटा डाल और जीजी देखेगी। थोड़ी मेरी गांड चोद ले, तब तक इनका भी डर निकल जाएगा”। कह कर वो चूतड़ पीछे की तरफ कर के खड़ी हो गयी I

मैंने पहली बार किसी लड़की को इस तरह चूतड़ चौड़े किये लंड की इंतज़ार करते देखा था, हालाँकि हम दोनों (रजनी और मैं) भी ऐसी ही गांड चुदवा चुकीं थी।

राकेश सरोज के पीछे खड़ा हो गया। तना हुआ लंड सरोज की गांड के बिलकुल सामने था।

तभी राकेश मुझसे बोला, “रजनी ये लो जैल क्रीम, भाभी की गांड पर लगाओ। थोड़ी गांड में उंगली डाल कर अंदर भी लगा देना”।

राकेश ने अब मेरे नाम के साथ ‘जी’ नहीं लगाया। सही भी था जहां चूत गांड की चुदाई हो रही हो वहाँ इन फालतू की औपचारिता का क्या काम।

मैंने दो उँगलियों पर जैल क्रीम ली और सरोज की गांड के छेद पर मल दी। फिर एक उंगली से गांड के अंदर भी गहराई तक जैल लगा दी। जैसे ही मैंने ऊँगली सरोज की गांड में डाली उसकी सिसकारी निकल गयी। फिर मैंने जैल क्रीम राकेश के लंड पर डाली और पूरी हथेली से लंड पर मल दी।

“लंड पूरी तरह सख्त और गरम था “। मैं एक तरफ खड़ी हो गयी। राकेश ने सरोज को कमर से पकड़ा, लंड का टोपा ,,,,,,,”, मैंने बीच में ही टोक दिया ,”टोपा नहीं रजनी सुपाड़ा”।

“हां सुपाड़ा, राकेश ने लंड का सुपाड़ा सरोज की गांड के छेद पर रखा और अंदर धकेला। लंड का आधा ही सुपाड़ा अंदर गया”। राकेश सुपाड़ा बाहर निकल लिया और मुझे बोला, “रजनी जैल और लगाओ “।

मैंने जैल लगाई। गांड का छेद खुला हुआ था। अंदर का गुलाबी नजारा दिखाई दे रहा था।

“सच आभा मेरा तो तभी मन हुआ अपनी जुबान ही घुसेड़ दूँ सरोज की गांड के छेद में”।

रजनी ने बात जारी रक्खी, “राकेश ने फिर सुपाड़ा सरोज की गांड पर रक्खा और इस बार पूरा सुपाड़ा अंदर कर दिया और फिर थोड़ा रुक गया “।

राकेश ने फिर लंड बाहर निकाला और मुझे एक बार फिर सरोज की गांड में जैल लगाने को कहा।

“मैं सोचने लगी गांड चोदना गांड चुदवाने से मुश्किल है”।

चुदवाने के लिए तो घोड़ी की तरह गांड उठा कर खड़ी हो जाओ, “आओ जी डालो अपना लंड मेरी गांड में और करो चुदाई “।

मगर चोदने वाले को तो बहुत चीजों का ध्यान रखना पड़ता है।

मुझे लगा राकेश लंड पर भी जैल और लगानी चाहिए। मैंने उसके लंड पर भी जैल मल दी।

राकेश ने लंड का सुपाड़ा सरोज की गांड पर रक्खा और एक धक्के में सुपाड़ा अंदर डाल दिया।

“लग ही रहा था की इस बार सुपाड़ा आसानी से अंदर गया है”।

राकेश थोड़ा रुका और धीरे धीरे लंड अंदर धकेलने लगा। थोड़ा धकेलने के बाद वो रुक जाता था। पांच छे बार ऐसा करने बाद लंड पूरा जड़ तक सरोज की गांड में बैठ चुका था।

अब राकेश पूरे एक मिनट के लिए रुका और लंड पूरा बाहर निकल लिया और मेरी और देखा।

”मतलब था की एक बार जैल और लगाऊं “।

सरोज की गांड पर जैल लगाते हुए मैंने देखा गांड का छेद खुल चुका था और अंदर का गुलाबी भाग दिखाई दे रहा था। राकेश ने अपने लंड की तरफ इशारा किया और मैंने ढेर सी जैल राकेश के लंड पर भी मल दी।

“मैं सोचने लगी देखें अब राकेश क्या करता है “।

राकेश ने लंड सरोज की गांड पर रखा और एक ही बार में पूरा जड़ तक बिठा दिया। सरोज के गले से एक लम्बी सिसकारी नकली “आआआआह”।

अब राकेश केवल कुछ सेकेंड्स के लिए ही रुका और सरोज की गांड की चुदाई शुरू कर दी।

जब राकेश लंड बाहर निकलता था तो गांड के छेद की नरम नाजुक चमड़ी बाहर की तरफ आ जाती थी। जब लंड अंदर धकेलता था तो चमड़ी अंदर की तरफ चली जाती थी।

ऐसे ही राकेश सरोज को चोदता रहा। राकेश कस कस कर धक्के लगा रहा था। बीच बीच में पूरा लंड भी निकल लेता था और एक झटके से अंदर करता था। जब जब राकेश ऐसा करता था तो सरोज एक सिसकारी भरती थी आआआआह आआआआह।

“सच में पूछो तो आभा तो मुझे डर भी लग रहा था और गांड चुदाई का मन भी कर रहा था – बिलकुल वैसे ही जैसे दो साल पहले कुणाल से पहली बार चुदवाई थी। तब भी चूट की सील फटने से दर्द भी हुआ था और फिर मजा भी आया था “।

“मुझे पंकज से करवाई पहली चुदाई याद आ गयी ”

थोड़ी देर चुदने के बाद सरोज बोली “बस करो राकेश अब जीजी को चोदो, अगर थोड़ी देर तुम ऐसे ही मेरी गांड मारते रहे तो मैं पूरी चुदाई करवा के ही हटूंगी”।

राकेश ने लंड बाहर निकल लिया और खड़ा हो गया।

थोड़ी देर चुदने के बाद सरोज हँसते हुए बोली “बस करो राकेश अब जीजी को चोदो, अगर थोड़ी देर तुम ऐसे ही मेरी गांड मारते रहे तो मैं पूरी चुदाई करवा के ही हटूंगी और जीजी के लिए कुछ नहीं बचेगा “।

राकेश ने लंड बाहर निकIल लिया और खड़ा हो गया।

सरोज बोली, “आओ जीजी”।

मुझे डर भी लग रहा था मगर गांड चुदवाने के मजे का ख्याल डर पर हावी था।

अब मैं घोड़ी बन कर, चूतड़ पीछे कर के खड़ी हो गयी। सरोज मेरे चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी। तभी मुझे लगा की कोइ मेरी गांड के छेद को चूस रहा है। सरोज ही होगी मैंने सोचा। मैंने सर घुमा कर देखा सरोज ही थी।

सरोज ने मेरी गांड की थोड़ी चूमा चाटी करने के बाद गांड के छेद पर जैल लगानी शुरू की। उंगली गांड के अंदर करके भी जैल लगाई। काफी सारी जैल लगाने के बाद मुझे लगा की राकेश ने मेरी गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया था।

अजीब सी अनुभूति थी। सोच रही थी आगे क्या होगा। गांड तो मैं दीपक से भी मरवा चुकी थी और पंकज और कुणाल से भी, मगर राकेश के मोटे लंड के कारण थोड़ा डर लग रहा था।

राकेश ने लंड का सुपाड़ा अंदर किया। दर्द तो हुई, मगर सह ली मैंने।

फिर वही सब दुबारा हुआ जो सरोज के साथ हुआ था। तीन चार बार आधा सुपाड़ा अंदर करने के बाद राकेश ने पूरा सुपाड़ा अंदर कर दिया और रुक गया। फिर पांच सात बार ऐसे ही करता रहा और फिर लंड बाहर निकल लिया। सरोज ने गांड के अंदर बाहर फिर जैल लगाई।

“मैं समझ गयी की अब पूरा अंदर जाने वाला है”।

सरोज आगे आ कर मेरे सामने अपनी टांगें चौड़ी करके चूट खोल कर लेट गयी और मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिय।

मुझे समझ नहीं आया की सरोज ने ऐसा क्यों किया – मगर जैसे ही राकेश ने लंड पूरा अंदर किया दर्द के मारे मेरी चीख निकले को हुई। सरोज ने मेरा मुंह अपनी चूत में घुसेड़ लिया और मेरी चीख सरोज की चूत में दबी ही रह गयी।

राकेश रुका, लंड बाहर निकल कर मेरी गांड के अंदर तक जैल लगाई और लंड एक दम से पूरा अंदर डाल दिया।

इस बार दर्द थोड़ी कम हुई। लंड ने अपनी जगह बना ली थी।

राकेश थोड़ा रुका और फिर वही किया – लंड बाहर निकल कर जैल लगाई और लंड अंदर कर दिया। तीन चार बार यही करने बाद उसने चुदाई शुरू कर दी।

गांड का छेद अब मुलायम हो गया था और लंड का अभ्यस्त हो गया था।

मुझे गांड चुदाई का मजा आने लगा।

सरोज ने भी मेरा सर छोड़ दिया।

मैं सरोज की चूत चाटने लगी। सरोज समझ गयी की लड़की को अब दर्द नहीं हो रहा गांड चुदवाने का मजा आ रहा है ।

दस मिनट की चुदाई के बाद राकेश झड़ने को हो गया। मेरी भी चूत खुजला रही थी। सरोज ने ही मुझ से पुछा, “जीजी चूत में डाले राकेश ” ?

मैंने कहा, “हां सरोज, गांड में थोड़ा दर्द सा भी हो रहा है और चूत भी लंड मांग रही है “।

सरोज बोली, “राकेश कर दो जीजी की चूत को ठंडा “।

राकेश ने लंड गांड में से निकल कर एक ही बार में चूत के अंदर कर दिया और सीधी रगड़ाई चालू कर दी।

मैं तो गरम ही थी, सात आठ मिनट की चुदाई के बाद मेरा पानी छूट गया। राकेश ने भी एक लम्बी हुंकार के साथ गर्म वीर्य मेरी चूत में डाल दिया – “इतना ज़्यादा मजा आया आभा की बता नहीं सकती”।

चुदाई पूरी होने के बाद मैं उठ गयी कपड़े उठाये और चलने लगी। सरोज बोली, “जीजी आप चलो मुझे राकेश से बात करनी है”।

“मैं समझ गयी की सरोज अब पूरी गांड चुदवायेगी, और वैसे भी सरोज ने सोना तो वहीं था राकेश के साथ “।

मैंने सोचा, “रजनी की गांड चुदाई तो मस्त थी। मैं तो राकेश से अपनी गांड चुदवाई का सोचने लग गयी” ।

रजनी ने मुझ से पूछा, “अच्छा आभा अब तू बता, तेरी चुदाई दीपक के साथ कैसी रही ” ?

मैंने बताया “बहुत ही बढ़िया। और जो दीपक के लंड का सुपाड़ा बिलकुल वैसा ही मस्त है जैसा तूने बताया था। मजा ही आ गया “।

रजनी ने पूछा, “गांड चुदवाई क्या ” ?

मैंने जवाब दिया, “गांड ही ज्यादा चुदवाई “।

रजनी बोली, “दिखा जरा अपनी गांड, देखें क्या कह रही है ”

मैं उल्टी हो कर उकडू हो कर लेट गयी और गांड उठा दी। रजनी ने चूतड़ खोल कर गांड को देखा और बोली, “थोड़ी लाल है। मेरी तो लगता है थोड़ी सूजी हुई है। जरा देख के बता क्या हाल है मेरी गांड का”।

अब रजनी उकडू हो कर उलटा लेट गयी और गांड उठा दी। अब मैंने उसके चूतड़ खोले,गांड का छेद लाल भी था और थोड़ा सी सूजन भी थी। मैं उसकी गांड चाटने लगी।

“आह बड़ा आराम मिल रहा है। थोड़ा और चाट आभा। क्या सूजी हुई है ” ?

मैं बोली “ज्यादा तो नहीं, पर थोड़ी सी सूजन है। लाल भी हुई पड़ी है “। और फिर मैं रजनी की गांड चाटने लगी।

रजनी सिसकारियां लेने लगी। लग रहा था उसे बड़ा ही आराम मिल रहा है। मैं उसकी गांड चाटती रही जब तक रजनी ने मुझे कहा नहीं की बस करूं।

मैं भी उसकी बगल में ही लेट गयी , “रजनी अब कल ” ?

रजनी बोली, “आभा कल राकेश तो चला जाएगा मगर संतोष आ जाएगा। दीपक से इतनी जल्दी गांड चुदवाने की मेरी हिम्मत नहीं और वह गांड चोदे बिना मानेगा नहीं। कल तुम चली जाना उसके पास, मैं संतोष से चूत चुदाई करवाऊंगी। संतोष को गांड में कोइ दिलचस्पी नहीं । कल ही आगे का प्रोग्राम भी बना लेंगे “।

“ठीक है” और मैंने उठ कर लाइट बंद कर दी।

“मैं खुश हो गयी। मेरे मन की मुराद पूरी होने वाली थी – दीपक का फूला हुआ सुपाड़ा चूत और गांड में लेने की। अब इसके बाद राकेश का मोटा लंड ही गांड में लेना बचेगा जिसने रजनी की गांड सुजा दी।

दीपक के दोस्तों के साथ ग्रुप चुदाई भी ठीक थी लेकिन उसमें कोइ बहुत ख़ास बात हो ऐसा नहीं लगता था – अब अगर किसी लड़के का लंड ही कुछ अलग तरह का हो तो बात अलग है “।

करनाल में दूसरा दिन

दुसरे दिन सब देर से ही उठे। नाश्ता अदि करके सरोज बोली ,”अब जो होगा रात को ही होगा। एक काम करो दीपक को बोलो खेतों में ले जाए। डेरी फार्म भी देख लेना – एक पोल्ट्री फार्म भी है। दिन कट जाएगा “।

रजनी बोली, “सरोज तुम भी चलो हमारे साथ “।

“नहीं मैं दिन में सारा काम निबटा लूंगी “, और फिर धीरे से बोली,”रात का प्रोग्राम जल्दी शुरू करदेंगे “। सब हंस दिए।

दीपक ने जीप निकली और हम खेतों की और चल पड़े।

खेत ज्यादा दूरी पर नहीं थे। आधे घंटे में हम वहां पहुंच गए। वहीं संतोष से भी मुलाक़ात हो गयी।

बढ़िया हट्टा कट्टा था राकेश जैसा। “रजनी ने बस यही बताया था की चूत चुदाई अच्छी करता है “।

हम थोड़ा खेतों में घूमीं। फिर डेरी फार्म देखने गयीं। बहुत बड़ा डेरी फार्म था। सौ से ज्यादा गाये भैसें थी। एक तरफ पशुओं का बाड़ा था, जहां पशु बांधे जाते थे। दूसरी तरफ शायद छोटा सा पशु हस्प्ताल सा था। वहीं बहुत बड़े साइज़ के दो सांड थे और दो भैंसों के झोटे थे। दीपक ने बताया इनका काम केवल गाये या भैंसें, जब गरम हो जाती हैं, यानि उनको चुदाई की इच्छा होती है तो यहाँ लाया जाता है। ये सांड और झोटे उनकी चुदाई करके उनको प्रेगनेंट कर देते हैं “।

“यहाँ भी चूत और चुदाई हमारा पीछा नहीं छोड़ रही थी “।

रजनी ने पूछा मगर पता कैसे लगता है की किस गाये या भैंस को लंड चाहिए। हमारी तो चूत पानी छोड़ने लग जाती है और हम बोल देती हैं की हमे लंड चाहिए “।

दीपक बोला, “इनकी चूत भी पानी छोड़ती है। आओ दिखाता हूं।

दीपक हमें बाड़े में ले गया। एक गाये एक तरफ अलग बंधी थी। उसके पीछे से लेसदार कुछ निकल रहा था और वो बार बार जोर जोर से आवाज कर रही थी। दीपक ने बताया की “ये देखो इसकी चूत से लेसदार पानी निकल रहा है। मतलब इसको लंड चाहिए। जोर जोर से आवाज करके ये यही कह रही है – मुझे लंड चाहिए , मुझे लंड चाहिए “।

“तो अब क्या करोगे” ? मैंने पूछा।

दीपक ने कहा, “इसको आज ही उधर सांडों के पास ले जाएंगे। और एक बात,अगर आज ना लेकर गाये तो सांड इनकी आवाज सुन कर पागल हो जायेंगे “।

“कब लेकर जाओगे” ? रजनी ने पुछा।

दीपक हंसा,” क्यों क्या तुमने इनकी चुदाई देखनी है ? मेरा ख्याल है संतोष आज ही बोलेगा लेजाने के लिए। बहुत पानी छोड़ रही है ये और आवाज भी बहुत कर रही है “।

तभी संतोष भी आ गया, साथ एक आदमी भी था। उन्होंने गाये को खोला और सांडों वाले बाड़े की तरफ लेजाने लगा।

गाये को एक खूंटे से बांधने के बाद वो आदमी एक सांड को ले आया। “अच्छी खासी बड़ी गाये उस विशालकाय सांड के सामने छोटी से लग रही थी “।

गाये ने आवाज निकलने बंद कर दी और चुपचाप खड़ी हो गयी। सांड आया और उसकी चूत सूंघने लगा।सूंघत सूंघते वो सर ऊपर की तरफ कर अजीब तरीके से मुंह खोल लेता था।

“दीपक ने बताया ये सूंघ कर जानना चाहता ही क्या ये सच में ही लंड चाहती है। अगर इसकी चूत में वो ख़ास खुशबू हुई तो ये कुछ देर चूत चाटेगा और फिर चुदाई करेगा “।

मैंने पूछा, “कितना वक़्त लगेगा ” ?

दीपक फिर हंसा, “कुछ कह नहीं सकते। एक काम करो मैं कुर्सियां मंगवा देता हूं। बैठ जाओ और नजारा देखो, करना क्या है तुमने। मैं तब तक संतोष से पूछ लेता हूं की कुछ चाहिए तो नहीं शहर से ” ?

आईडिया ठीक था, हमने करना भी क्या था। चुदाई ही तो करवाने आईं थीं हम यहां – अब जानवर की चुदाई देखती भी चलतीं हैं।

हम बैठ गयी। सांड अब गाये की चूत चाट रहा था। गाये का पेशाब निकल गया, या उसने पेशाब कर दिया – सांड ने पेशाब भी चाट लिया।

मैंने रजनी से कहा, “रजनी, ये जानवर भी तो चुदाई से पहले हमारे मर्दों के जैसे ही काम करते हैं चूत चाटना, मूत चाटना “।

रजनी हंस दी। “मुझे तो लग रहा था ये मेरी ही चूत चाट रहा है “।

कुछ ही देर में वो विशालकाय सांड उस गाये के ऊपर चढ़ गया। चढ़ कर रुका। तभी उसकी नीचे की लटकती खाल में से बहुत ही लम्बा गुलाबी रंग का नोकदार लंड निकला – दो ढाई फुट से कम लम्बा क्या होगा – सांड ने एक लम्बा धक्का लगाया और पूरे क पूरा लंड गाये की चूत के अंदर था। सांड कुछ और रुका और बड़े बड़े चार पांच धक्के लगाए और ढीले लंड के साथ नीचे उतर गया। लंड वापस खाल के अंदर चला गया। गाये की चूत में से कुछ लेसदार सा पानी निकला – “शायद सांड का वीर्य होगा “। गाये ने ढेर सारा मूत किया और खड़ी हो गयी – शायद दुबारा चुदवाने के लिए।

“हम लड़कियाँ भी तो यही कुछ करती हैं “।

रजनी बोली, “आभा क्या होता अगर मर्दों का भी ऐसा हे नुकीला लंड होता “।

तभी दीपक आ गया, “अब चलें ? चलो तुम्हें पोल्ट्री फार्म भी घुमा देता हूँ ”।

मैं हंस कर बोली, “क्या वहां भी चुदाई देखने को मिलेगी ” ?

सब हंस दिए।

खेत और डेयरी घूम कर हम वापस आ गए। दीपक हमे छोड़ कर वापस खेतों में चला गया। “अब दीपक और संतोष शाम को ही आने वाले थे”।

सरोज ने सारा काम निबटा दिया था। रात के खाने के बाद चुदाई ही होनी थी।

मैंने सरोज से पूछा, “सरोज आज का कैसा प्रोग्राम बना है ” ?

सरोज बोली, “आभा जीजी, रजनी कह रही थी आज वो दीपक के पास नहीं जाएगी क्यों की कल रात की राकेश चुदाई से उनकी गांड थोड़ी दुःख रही है। मुझे दिखाई थी रजनी जीजी ने गांड। थोड़ी तो सूजी हुई है, लाल भी है। मैंने क्रीम लगा दी थी कल तक चुदाई के लिए तैयार हो जाएगी। आज संतोष को रजनी की चूत मारने देते हैं। वैसे भी संतोष को गांड चुदाई में कोइ दिलचस्पी नही। दीपक दोनों छेद रगड़ता है। आज आप चली जाना दीपक के पास”।

सरोज ने बात जारी रखी, “कल और शायद परसों भी संतोष फिर खेत वाले घर पर ही रुकेगा। दो गायों की और दो भैंसों ब्याहने (बच्चा देने वाली) हैं , क्या पता रात को ही बया जाएं – बच्चा दे दें। कल राकेश को आने के लिए फोन कर दूंगी। आभा जीजी आप राकेश के साथ गांड चुदाई के मजे ले लेना। अगर संतोष ने परसो भी डेयरी पर रुकना हुआ तो दीपक को बोलेंगे अपने दोस्तों को बुला ले। फिर सब मिल कर ग्रुप में चुदाई कवायेंगे “।

रजनी ने तो पूरी प्लानिंग ही बना रक्खी थी।

मैंने कहा, “चलो ठीक हैं मैं दीपक के पास चली जाऊंगी। रजनी संतोष से चुदवायेगी और मैं दीपक से, तो तुम क्या करोगी ? तुम भी दीपक के पास आ जाना हम तीनो, मैं तुम और दीपक चुदाई का खेल खेलेंगे “।

सरोज बोली ,”नहीं आभा जीजी, जब संतोष घर पर होता है तो मैं दीपक से नहीं चुदवाती “।

मैंने यों ही पूछ लिया, क्या संतोष को तुम्हारी और दीपक की चुदाई के बारे में मालूम नहीं ? तुम तो कह रही थी संतोष को तुम्हारी और राकेश की गांड चुदाई के बारे में मालूम है, मगर उसे कोइ एतराज़ नहीं “।

बात वो नहीं है आभा जीजी। मुझे नहीं मालूम की मेरी और दीपक की चुदाई के बारे में संतोष को मालूम है या नहीं। मगर मालूम होना एक बात है, एक दुसरे के सामने चुदाई करना दूसरी बात है”।

“एक बात और बताऊं जीजी” ? सरोज रजनी की तरफ देख कर बोली, “जब तक दीपक नहीं आया था, बाबू जी तो तब भी ज्यादातर खेतों पर ही रहते थे, तब बीबी जी की चूत पानी छोड़ती थी या गांड चुदवाने की तलब लगती थी तो बीबी जी की प्यास संतोष और राकेश ही बुझाते थे। मगर राकेश बीबी जी की गांड उस दिन चोदता था जिस दिन संतोष घर पर नहीं होता था। दीपक के आने के बाद से संतोष या राकेश ने बीबी जी को नहीं चोदा “।

मैं और रजनी दोनों हैरान हुई।

इस घर में चुदाई का पूरा खेल चल रहा था। “इस घर में हर मर्द घर की हर को औरत को चोदता था, मगर सब कुछ पूरी ईमानदारी और असूलों के साथ”।

रजनी ने पुछा, “और अगर दीपक कहीं बाहर गया और बाबू जी घर पर न हुए तो ” ?

“तो बीबी जी मुझे बताएंगी की उनकी चुदवाने की इच्छा है। अगर चूत चुदवाई करवानी हो तो संतोष और अगर गांड चुदवाने की इच्छा हो राकेश। मगर जब संतोष या राकेश कोई एक बीबी जी को चोद रहा हो तो दूसरा घर पर नहीं रुकता “।

रजनी बोली, “मेरी माँ तो पूरी चुदक्क्ड़ है “।

सरोज बोली, “ऐसा मत बोलो जीजी। चूत और लंड भगवान ने दिए हैं मजे लेने और मजे देने के लिए। अब अगर बाबू जी बीबी जी की चुदाई का ध्यान नहीं रखते तो बीबी जी क्या करें ? इधर उधर मुंह मारने से तो अच्छा है घर की बात घर में ही रहे। चुदाई भी होती रहे और बात बाहर भी न जाये”।

मैंने सोचा बात तो सरोज ठीक ही कह रही है। मैं और रजनी भी तो पंकज और कुणाल से ही चुदवाती है, इधर उधर लंड की तलाश में नहीं भटकती। मैंने रजनी को कहा, “रजनी बात तो सरोज ठीक ही कह रही है। हम दोनों भी तो पंकज और कुणाल के साथ यही करती हैं। और यही करने यहां करनाल आयी हैं “।

अब रजनी कुछ सहज हुई और सरोज से पूछा, अच्छा सरोज ये बताओ क्या तुम भी वहां होती हो जब राकेश या संतोष माँ की चूत या गांड मारते हैं ” ?

सरोज ने कहा, “नहीं नहीं जीजी, आखिर तो वो मालकिन ही हैं। चुदाई के वक़्त मेरा वहां रहना कुछ ठीक नहीं लगता “।

“पर सरोज, मां को ये तो पता ही होता है की तुम संतोष या राकेश के मां को चोदने की बात जानती हो। आखिर को संतोष या राकेश से चुदवाने के लिए मां कहती तो तुमसे ही है – फिर तुमसे कैसी शर्म “।

“बात शर्म की नहीं जीजी, लिहाज की है। ऐसे तो बीबी जी का कभी जब मन हो मुझ से चूत और गांड भी चुसवाती हैं “।

“कमाल है ” ?

रजनी ने पूछा, “फिर तो मां भी तुम्हारी गांड और चूत भी चूसती होंगी “।

सरोज बोली, “नहीं जीजी, उन्होंने कभी मेरी चूसने की इच्छा नहीं जताई और मैंने भी नहीं कहा “। फिर कुछ सोच कर बोली, “हाँ एक बार उन्होंने मेरी गांड चाटी थी और एक बार ही चूत चूसी थी “।

रजनी ने पूछा, “एक बार गांड, एक बार चूत – ये क्या बात हुई ” ?

“बात दरअसल ये है जीजी की एक दिन संतोष थोड़ा जल्दी आ गया। दीपक उन दिनों यहां नहीं था। संतोष की इच्छा मुझे चोदने की हो गई। दो चार बार उसने मेरी चूचिया दबाई, होंठ चूसे, चूत में उंगली की, और मेरी चूत भी पानी छोड़ गयी और मैं बिस्तर पर लेट गयी। संतोष ने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर मेरी चूत ऊंची की और मेरी चुदाई शरू कर दी। मैं झड़ने ही वाली थी और संतोष भी ताबड़तोड़ धक्के लगा रहा था, तभी बीबी जी की आवाज सुनाई दी – सरोज “।

वो मुझे बुला रही थी – शायद कुछ काम था। उन्हें नहीं मालूम था की उस दिन संतोष जल्दी आ गया है और मुझे चोद रहा है “।

सरोज ने बात जारी रखी, “अब जीजी हम दोनों – मैं और संतोष – दोनों का पानी छूटने वाला था। अब आपको तो मालूम ही है की ऐसे में चुदाई बीच में नहीं छोड़ी जाती। हमारे ध्क्के चालू रहे और थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गए “।

सरोज ने रजनी को बताते हुए कहा, “रजनी जीजी आप तो जानती ही हो की संतोष कितना पानी छोड़ता है – चूत ही भर जाती है “।

“ये सुन कर तो मेरी चूत ही खुजलाने लगी”।

सरोज कह रही थी, “बीबी जी की आवाज अब नहीं आ रही थी”।

“जल्दी जल्दी चुदाई खत्म करके मैं सलवार पहन कर बीबी जी के कमरे की तरफ भागी – चूत भी नहीं साफ़ की। चूत चिप चिप कर रही थी। संतोष के लंड का पानी टांगों पर भी बह रहा था। बीबी जी के कमरे में गयी तो बीबी जी ने पूछा,” संतोष आ गया है क्या ” ?

मेरी आवाज बड़ी मुश्किल से निकली, “हां बीबी जी”।

बीबी जी कुछ पल के लिए रुकी फिर पूछा ,”चुदाई कर रहा था क्या ” ?

मैं चुप रही।

बीबी जी बोली, “अरी शर्मा क्यों रही है – चोद रहा था तो चोद रहा था। मर्द तो औरतों को चोदते ही हैं। इधर आ मेरे पास “।

बीबी जी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने पास बिठा लिया और मेरी सलवार का नाडा खोलने लगी, ” दिखा जरा अपनी चूत”।

“मैंने कुछ नहीं किया – ना कुछ बोली ना बीबी जी को रोका”।

बीबी जी ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और मुझे लिटा कर मेरी टांगें चौड़ी कर दी। पक्का है की मेरी चूत और आस पास संतोष का लेसदार सफ़ेद पानी लगा हुआ होगा। बीबी जी ने हाथ मेरी चूत पर मला और लेसदार पानी चाट लिया। फिर बिना कुछ बोले मेरी चूत चाटने लगी। चाटते चाटते बीबी जी गरम हो गयी और बोली, “सरोज जा दरवाजा बंद करदे और इधर आ कर मेरा पानी छुड़वा “।

मैंने दरवाजा बंद किया और बीबी जी की चूत चाटने लगी। बीच बीच में उंगली भी कर रही थी और गांड भी चाट रही थी। ये सब मैं तब तक करती रही जब तक बीबी जी का पानी नहीं छूट गया। फिर बीबी जी की चूत का पूरा पानी साफ़ करके मैं उठ गयी।

बीबी जी ने कहा,”मजा आ गया सरोज,जा तू जा कर चूत साफ़ करले, मैं भी अपनी चूत साफ़ कर लेती हूँ – वैसे तो चाट चाट कर तूने हे साफ़ कर ही दी है”।

रजनी ने पूछा, “ये तो हो गयी चूत की चुसाई, अब मां तुम्हारी गांड कब चाटी ये भी बता दो “।

सरोज ने बताया, “ऐसे ही एक दिन शाम को राकेश से गांड चुदवा रही थी तो बीबी जी को मुझसे कुछ काम आया, और मैं मिली नहीं। एक बार उन्होंने मुझे आवाज लगाई फिर ऐसा लगा की वो जो कुछ भी काम था उन्होने खुद ही कर लिया। मगर मैं तो नहीं रुक सकते थी। जैसे ही राकेश ने मेरी गांड के अंदर अपना गर्मागर्म लेसदार पानी छोड़ा, मैं उठ गयी और अपनी गांड को कस कर बंद कर लिया जिससे बीर्य बाहर न बह जाए और बीबी जी को मेरी गांड चुदाई का पता ना चल जाए “। मैंने सोचा था बीबी जी का काम कर लूं फिर बाथ रूम में जा कर जोर लगा कर गांड से सारा लेसदार पानी निकल लूंगी और धुलाई कर लूंगी।

जैसे ही मैं बीबी के कमरे मैं पहंची, बीबी जी जूस पी रही थी – “जूस लाने के ही लिए बुलाया होगा “।

मुझे देखते ही पूछा, “राकेश आया हुआ है ” ?

“जी बीबी जी “। मैंने जवाब दिया। बीबी जी हंसी,”तब तो पक्का तेरी गांड चोद रहा होगा। गांड चोदने का बहुत शौक़ीन है – चोदता भी बहुत बढ़िया है। रगड़ रगड़ कर चोदता है “।

मैं चुप रही, “बोलती भी तो क्या बोलती “।

बीबी जी बोली, “अच्छा दिखा मुझे अपनी गांड, देखूं क्या हालत बनाई है तेरी नाजुक गांड की “।

“मैं भी बिस्तर पर उकडू हो कर कुहनियों और घुटनों के बल लेट गयी और चूतड़ ऊपर उठा दिए”।

बीबी जी ने मेरे दोनों तरफ के चूतड़ों को बाहर की तरफ किया जिससे गांड का छेद दिखाई दे सके।

“सरोज ये गांड भींच क्यों रखी है – बंद क्यों कर रखी है ? क्या राकेश की मलाई अंदर ही है ? खोल अपनी गांड को – ढीला कर इसको “।

“अब राकेश का वीर्य तो मेरी गांड के अंदर ही था”। मैंने गांड ढीली छोड़ दी। सारा लेसदार सफ़ेद पानी गांड में से निकल कर नीचे चूत की तरफ धीरे धीरे बहने लगा।

बीबी जी ने झट से इस लेसीले सफ़ेद पानी को चाटना शुरू किया। एक एक बून्द चाट कई बीबी जी और फिर बोली ,”कितना पानी छोड़ता है राकेश – पूरा एक कप “। और फिर मेरी गांड पर एक धप्प मार कर बोली, “चल उठ, गांड चाट मेरी, फड़कने लग गयी है “।

रजनी बोली, “बड़ी ही सेक्सी है मेरी मां। किसी को घर में छोड़ा भी है इसने” ?

अब ये नहीं पता की रजनी ख़ुशी से बोली थी या गुस्से से।

सरोज ने फिर कहा, “देखो जीजी, बीबी जी की एक बात की तो मैं भी कायल हूं। जब चुदाई कवाओ तो पूरी बेशर्मी से करवाओ – पूरा मजा लो और पूरा मजा दो”।

सरोज ने बात जारी रक्खी ,”ये तो संतोष और राकेश भी मानते हैं की बीबी जी से अच्छी चूत और गांड चुदाई कोइ नहीं करवा सकता – मैं भी नहीं “।

रजनी ही बोली, “ऐसा भी क्या करती है मेरे चुदक्क्ड़ मां ।

सरोज ने जवाब दिया, “जीजी एक दिन सतोष मेरी चुदाई कर रहा था। पता नहीं क्या हुआ, मेरी चूत मारते मारते बोला, ”चुदाई तो बीबी करवाती हैं”।

मैं हैरान हुई की ये चोद तो मुझे रहा है बात बीबी जी की कर रहा है।

मैंने पूछा, “ऐसा क्या करती हैं बीबी जी “चूत चुदवाने के लिए लेटना ही तो होता है – ज्यादा ज्यादा चूत ऊपर उठने के लिए कमर के नीचे तकिया रख देना है और टांगें चौड़ी कर देनी हैं जिससे चूत की फांकें खुल जाएं और चूत का छेद सामने आ जाये “।

सरोज ने अपनी बात जारी रक्खी ,”जीजी जो संतोष ने मुझे बताया सच ही उससे पहले मैंने नहीं किया था – मगर अब जब चुदाई होती है तो करने की कोशिश करती हूं “।

अब मैने पूछा, “ऐसा क्या करती हैं वो “।

रजनी ने भी मेरी हां में हां मिलाई, “सही बोल रही हो आभा, ऐसा भी क्या करती होगी मां जब चूत और गांड चुदवाती होगी “।

सरोज बोली, “आभा जीजी यही सवाल मैंने भी संतोष से किया था ”।

संतोष ने बताया की जब लंड बीबी जी के अंदर चला जाता है तो वो ऊपर वाले की कमर के पीछे हाथ डाल उसे जकड़ लेती हैं और नीचे से ऐसे चूतड़ घूमती हैं और ऊपर नीचे करती हैं की चोदने वाला पागल हो जाता है और दुगने जोश के साथ चुदाई करने लग जाता है।

यही बीबी जी गांड चुदाई के समय करती हैं। जैसे लंड अंदर गया की चूतड़ों को आगे पीछे करना शुरू कर देती है। जब लंड बहार निकलता है तो चूतड़ आगे करती हैं और जब लंड अंदर जाता है तो चूतड़ पीछे लंड की तरफ करती हैं । इस तरह लंड और टट्टे दुगनी स्पीड से चूतड़ों पर टकराते हैं, और जोर की आवाज आती है — फट्ट फट्ट फट्ट … पट्ट पट्ट पट्ट “।

मैंने सरोज से पूछा, “सरोज तुम करती हो ऐसे चूत चुदाई के समय चूतड़ घुमाना और गांड चुदाई के समय चूतड़ आगे पीछे करना “।

सरोज ने जवाब दिया, “आभा जीजी चुदाई के वक़्त चूतड़ घुमाने और आगे पीछे करने की कोशिश तो करती हूं – पर जीजी पता नहीं बीबी जी जैसा कर पाती हूं की नहीं “।

रजनी बोली, “आज जब मैं संतोष सी चूत चुदाई करवाउंगी तो मैं भी ऐसा ही करूंगी – तुम देख कर बताना सरोज कैसा कर रही हूं “।

मैंने भी कहा,” मैं भी आज रात दीपक से चूत और गांड चुदाई के समय ये करूंगी।

रात हो गयी – खाना सब खा ही चुके थे।

लड़कियों की चूत और गांड के छेद फड़क रहे थे और लड़कों के लंड फनफना रहे थे। सब चोदने चुदवाने के लिए तैयार थे।

मैंने सारे कपड़े उतार दिए थे और चद्दर ओढ़ कर लेट गयी और दीपक का इंतज़ार करने लगी। रजनी और सरोज उधर संतोष के पास जा चुके थे।

थोड़ी ही देर में दीपक आ गया – नंगा – खड़े लंड के साथ।

आते ही लेट गया। लंड खूंटे की तरह खड़ा था।

दीपक के फूले हुए सुपाड़े ने मेरी चूत गीली कर दी। मैं उठी और लंड मुंह में ले कर चूसने लगी। लंड चूसते चूसते मैं घूमी और अपनी चूत दीपक के चेहरे के ऊपर कर दी। दीपक मेरी चूत चाटने लगा।

कुछ ही देर में मैं उठी और सीधा लेट गयी। ये दीपक के लिए आमंत्रण था – “आओ और चोदो मुझे”।

दीपक भी उठा, मेरी टांगें अपने कंधों पर रखी और आगे की तरफ होने लगा। मेरे चूतड़ ऊपर उठते चले गए – साथ ही चूत भी उठ गयी। दीपक का लंड मेरी चूत की फांकों को छू रहा था। चूत पूरी गीली थी।

“दीपक को कल वाली बात याद थी”।

उसने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में डाला और बाहर निकल लिया।

“मेरी तो सिसकारी ही निकल गयी “। दीपक कुछ देर ऐसे ही करता रहा।

फिर दीपक ने पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया और धक्के लगाने लगा। मुझे सरोज की रजनी की मां की चूतड़ घुमाने वाली बात याद आ गयी ।

क्यों की मेरी टाँगें दीपक के कंधों पर थी, इस लिए मैं उसे अपनी बाहों में जकड़ तो नहीं सकती थी, मगर मैंने अपने चूतड़ नीचे से घुमाने और ऊपर नीचे करने शुरू कर दिए।

लगता है दीपक पर इसका असर हुआ उसने धक्कों की रफ्तार एकदम तेज़ कर दी – साथ ही अब वो पूरा लंड निकल कर मेरी चूत में डाल रहा था।

जल्दी हे मैं झड़ने को हो गयी। मैंने दीपक को बोला, “दीपक लेट जाओ “।

दीपक सीधा लेट गया – लंड सख्त हो चुका था।

मैंने दो चार मिनट लंड का सुपाड़ा चूसा और लंड के ऊपर बैठ गयी।

“अब मैं अपनी मर्जी की चुदाई कर रही थी – कभी लंड पूरा बाहर और फिर एक झटके के साथ अंदर। कभी अंदर ले कर चूत को टाइट करती थी। ऐसे करते करते दीपक का पानी छूट गया – गर्मागर्म लेसदार पानी मैं अपनी चूत के अंदर महसूस कर रही थी। तभी मेरी भी चूत झड़ गयी। मुझे चूत के अंदर सररररर सररररर सा कुछ महसूस हुआ”।

मैं कुछ देर ऐसे ही बैठी रही। जब दीपक का लंड ढीला होने लगा तो मैंने एक टांग उठाई और दीपक के ऊपर से उतरने लगी। मगर ऐसा करते हुए मैंने एक काम किया।

मैंने उतारते उतारते जोर लगाया और दीपक का पूरा वीर्य मेरी चूत में से निकला और उसके लंड और टट्टों पर फैल गया। मैंने उस सफ़ेद लेसदार हल्के नमकीन पानी को चाटना शुरू कर दिया।

“इसी लिए तो मैंने दीपक के ऊपर बैठ कर चुदाई की थी “। पूरी नमकीन मलाई चाटने के बाद मैं दीपक की बगल में ही लेट गयी।

दीपक बोला, “आभा आज तो बड़ा मजा दिया तूने “।

“तो सरोज ठीक ही कह रही थी। चुदाई के समय रजनी की मां का फॉर्मूला कामयाब है “।

दस मिनट लेटने बाद मैंने दीपक का लंड हाथ में ले लिया।

“दीपक अब ” ?

“अब गांड चुदाई करेंगे – कल ही की तरह “।

इसके बाद गांड चुदाई हुई। दीपक ने वैसे ही किया – सुपाड़ा अंदर बाहर और फिर चुदाई।

मैंने भी रजनी की मां की तरह गांड चुदाई के समय अपने चूतड़ों को खूब आगे पीछे किया। बड़ा मजा आया।

दीपक ने पूरा लेसदार पानी मेरी गांड में ही छोड़ दिया।

आज चुदाई के वक़्त रजनी की मां की सरोज की कही हुई वो बात याद आ गयी, जब उसने कहा था, “देखो जीजी, बीबी जी की एक बात की तो मैं भी कायल हूं। जब चुदाई करवाओ तो पूरी बेशर्मी से करवाओ – पूरा मजा लो और पूरा मजा दो”।

“रजनी की मां की उम्र भी तो बड़ी है – उसी हिसाब से चुदाई का तजुर्बा भी ज़्यादा था”।

दोनों कार्यक्रम – चूत चुदाई और गांड चुदाई – पूरे हो चुके थे।

“अब पीछे की छोड़ आगे का सोचना था – कल का”

थोड़ी देर हम यों ही लेटे रहे।

दीपक बोला, “आभा मूतवाना है “?

मैं बोली, “चलो”।

बाथ रूम में जा कर मैं बैठ गयी और दीपक ने ऊपर ढेर सारा मूत किया। फिर पता नहीं उसके मन में क्या आया, वो वहीं जमीन पर ही लेट गया और बोला, ” आभा अब तुम मेरे ऊपर मूतो “।

मैं टांगें चौड़ी कर के उसके अगल बगल रखी। खुली हुई चूत दीपक को दिख रही होगी। “सरररररररर सररररररर की आवाज के साथ मैंने दीपक के ऊपर गरम मूत की धार छोड़ दी। मूतने की साथ साथ मैं आगे पीछे भी हो रही थी। उसके चेहरे से शुरू हो कर उसके लंड तक गयी और फिर वापस आ कर सारा मूत उसके चेहरे पर छोड़ दिया। दीपक ने मुंह खोल दिया। मूत उसके मुंह में जा कर बाहर बह रहा था। मूत के साथ साथ उसका वीर्य मेरी गांड से टपक टपक कर मूत के साथ ही उसके ऊपर गिर रहा था।

मैंने पूछा, “दीपक क्या रजनी की मां भी मूतती है तुम्हार ऊपर और तुम ” ?

“आभा उनकी बात छोडो, वो सब कुछ करती है – उनकी एक बात का तो मैं भी कायल हूं। जब चुदाई करवाओ तो पूरी बेशर्मी से करवाओ – पूरा मजा लो और पूरा मजा दो”।

“बिलकुल यही बात सरोज ने भी कही थी”।

जब मैं मूत चुकी तो वो बोला,”आभा आओ जरा अपनी चूत चटवाओ – तुम्हारा नमकीन पेशाब चाटना है “।

मैं बेड पर लेट गयी और दीपक मेरी चूत चूसने चाटने लगा।

फिर अचानक से पता नहीं उसे क्या हुआ, उसने मेरी टांगें उठाई, अपने कंधों पर रक्खी और लंड चूत के अन्दर डाल कर चुदाई शुरू कर दी।

नॉन स्टॉप – बिना रुके, लगातार – सुपर फ़ास्ट चुदाई।

“जितनी तेज वो धक्के लगा रहा उतनी तेज तो मैं चूतड़ भी नहीं घुमा पा रही थी”।

ये दस मिनट की धुआधार चुदाई ने तो मेरी चूत का भी धुंआ निकल दिया।

मजा भी आया तो कस के आया। मजे के मारे तो मेरी सिसकारियां रुक ही नहीं रहे थी।

“रोज नया नया तजुर्बा हो रहा था चुदाई का ” – और अभी ये करनाल में हमारा दूसरा ही दिन था।

इस बार चुदाई के बाद दीपक उठा और चला गया।

“आखिर में तीन बार की चुदाई आसान तो नहीं होती”।

हम लड़कियों ने तो टांगें उठा फैला कर गांड और चूत के छेद आगे कर देने हैं, “आओ जी डालो अपने लौड़े इनमें और करो इनकी चुदाई घिसाई। बाकी असली मेहनत वाला काम तो मर्दों ही करते हैं “।

मैं भी लेट गयी और आने वाले दिनों का सोचने लगी।

अगले दिन राकेश के आने की उम्मीद थी। मुझे उसके मोटे लंड का अपनी गांड में इंतज़ार था रजनी की सूजी और लाल हुई गांड देख कर मुझे अपनी गांड फड़वाने की ठरक लग गयी थी।

संतोष से चूत चुदाई में अब मेरी ज़्यादा दिलचस्पी नहीं थी, “मैं सोच रही थी संतोष न भी चोदे तो कोइ बात नहीं। पंकज, कुणाल दीपक और आने वाले दिनों में दीपक के दोस्त – ये सब चूत ही तो रगड़ने वाले थे”।

राकेश का मोटा लंड गांड लेने की इच्छा जरूर थी।

मैं सोच रही थी की सरोज भी गयी होगी रजनी के साथ या नहीं, बातों से तो लगता था नहीं जाएगी। राकेश से गांड चुदाई के समय तो वो रजनी के साथ ही थी।

आधे घंटे के बाद रजनी आयी।

“दो ढाई घंटे तो मेरी और दीपक की चुदाई चली थी – ये रजनी कितना चुदी होगी, वो भी तब जब की इस बार गांड नहीं मरवानी थी”।

आ कर धड़ से लेट गयी।

मैंने पूछा “क्या हुआ रजनी बड़ा टाइम लग गया। तूने तो खाली चूत ही मरवानी थी, उसी में इतना समय लग गया और इतना थक गयी ” ?

रजनी बोली, “कुछ मत पूछ आभा, पिछली बार की चुदाई तो आज वाली चुदाई के सामने कुछ भी नहीं थी। ये संतोष तो जानवरों की तरह चोदता है, बिलकुल उस डेयरी वाले सांड की तरह।

पिछली बार लगता है सरोज ने ही समझाया होगा संतोष को कि लड़की नयी नकोर है इसका लिहाज करना। तभी सरोज उस बार पहले अकेली अंदर गयी थी और फिर मुझे भेजा था “।

“पर हुआ क्या ये तो बता”।

रजनी ने जो बताया वो सुन कर तो मेरा संतोष से ना चुदवाने का आईडिया ही बदल गया। अब तो मेरा मन कर रहा था अभी जाऊं और संतोष के सामने अपनी फुद्दी खोल कर लेट जाऊं और बोलूं, “चोद साले इसको भी, कचरा कर दे इसका जैसे रजनी की चूत का किया है “।

रजनी ने बताया, “सरोज और मैं सरोज के कमरे में चली गयी। संतोष बैठा शराब पी रहा था। सरोज ने बताया जब कभी थक कर आता है तो दो तीन पैग लगा लेता है। इससे शरीर की थकान भी दूर हो जाती है और चुदाई का जोश भी बढ़ जाता है। संतोष लगता है दो या तीन पैग पी चुका था। वो पैग खत्म करने के बाद उसने सरोज को ईशारा किया और सरोज ने सारा सामान उठा लिया”।

रजनी बोलती गयी,” फिर संतोष बाथ रूम में चला गया। नहाने की आवाज आ रही थी फ्रेश हो रहा था। सरोज ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैंने कहा संतोष को तो आने दो तो सरोज बोली ”अरे जीजी टाइम बचेगा’ नंगी हो कर मैं सोफे पर बैठ गयी।

संतोष आया, बिलकुल नंगा। आ कर मेरे सामने खड़ा हो गया। संतोष का लंड तो मैंने पिछली बार भी चूसा था। मैंने लंड मुंह में लिया और और सुपडे के ऊपर जुबान फेरने लगी। संतोष के मुंह से आह आह की सिसकारियां निकलने लगी। तभी सरोज ने कहा मैं चलती हूँ।

मैंने कहा, “तुम अब कहां जाओगी सरोज, यहीं रहो। दोनों करवायेंगी बारी बारी”।

संतोष ने कहा “ठीक ही कह रही है रजनी”।

“संतोष पूरी तरह गरम हो गया था। लंड उसका लकड़ी की तरह सख्त हो चुका था। उसने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। सरोज तकिया लाई और मैंने पैरों और कंधों के सहारे अपने चूतड़ उठा दिए। सरोज ने तकिया मेरे चूतड़ों के नीचे रख दिया”।

“मैंने नोट किया की तकिया कुछ ज्यादा ही मोटा था। मेरी चूत अच्छी खासी ऊपर उठ गयी थी। संतोष घुटनों के बल मेरी चूत के सामने बैठ चुका था”।

“मेरी टांगें खुदबखुद ऊपर उठ गयी। बाकी काम संतोष ने कर दिया। मेरी जांघों से पकड़ कर उसने मेरी टांगें चौड़ी की और एक ही झटके में लंड पूरा अंदर कर दिया। मजा तो बड़ा आया, पर हैरानी भी हुई”।

“पिछली बार तो इसने बड़े ही सबर के साथ चुदाई शुरू के थी और बड़े ही धीरे धीरे से चोदा था”।

“शायद इस लिए की पिछली बार मैं मेहमान थी और इस बार तो हम चुदाई के मजे लेने के लिए ही आये थे “।

रजनी बता रही थी -“अब जो संतोष ने धक्के लगाए, मेरा तो पूरा शरीर ही हिल गया। बिना रुके संतोष चोद रहा था। मैं भी नीचे से चूतड़ घुमा घुमा कर उसका साथ दे रही थी। पता नहीं कितने देर उसने मुझे चोदा। अचानक मेरी चूत का पानी छूट गया, मगर न तो संतोष का झड़ा ना ही वो रुका – चोदता गया चोदता गया। मेरी चूत बेतहाशा पानी छोड़ रही थी। अब चुदाई में फच फच फच फच फच की आवाजें आ रही थी I संतोष था की चोदता ही जा रहा था, चोदता ही जा रहा था”।

मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगी, “उई.. उई.. उई.. आह.. आह.. आह.. चोदो.. चोदो.. चोदो संतोष और जोर से चोदो – आह सरोज कितनी अच्छी है तू सरोज मजा आ गया सरोज उह.. उह.. ओह.. ओह.. आअह आह आआआह सरोज, और मैंने जोर से संतोष को जकड़ लिया। तभी मुझे लगा की संतोष के धक्कों की स्पीड बहुत बढ़ गई थी। मुझे लगा वो झड़ने वाला है। उसने मेरे कंधों के पीछे हाथ डाल कर मुझे जकड लिया “।

तभी संतोष ने गले से एक जोरदार घरररररर घरररर आअह अअअअअह की आवाज निकली और उस आवाज़ के साथ ही उसने ढेर सारा गर्म लेसदार पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं निढाल हो चुकी थी। चार पांच मिनट के बाद संतोष उठा – लंड मेरी फुद्दी में से निकाला और जा कर सोफे पर बैठ गया।

सरोज ने संतोष को एक व्हिस्की का पेग बना कर दिया और उसके सामने फर्श पर बैठ कर उसका लंड चूसने लगी।

“बीवी हो तो सरोज जैसी समझदार – और मर्द हो तो संतोष जैसा कड़क “। रजनी ने कहा।

जब लंड पर लगा मेरी चूत और संतोष के वीर्य का पानी सूख गया तो संतोष ने मेरी टांगें चौड़ी कर के मेरी फुद्दी चूसनी शुरू कर दी।

संतोष व्हिस्की की चुस्कियां ले रहा था और साथ अपना लंड भी सेहला रहा था।

संतोष का लंड खड़ा होने लगा। सरोज ने जब देखा तो जा कर फिर उसका लंड चूसने लगी।

संतोष का लंड पहले की ही तरह खड़ा हो चुका था। संतोष उठा, बाथरूम गया और पेशाब करके अगली चुदाई के दौर के लिए तैयार हो कर आ गया।

सरोज ने पूछा, “रजनी जीजी तैयार हो “?

मगर जवाब दिया संतोष ने, “दोनों आओ इस बार”।

“आखिर को संतोष सरोज को कैसे पीछे छोड़ सकता था – प्यारी बीवी थी उसकी” I वो बोला, “इस बार पीछे से तुम्हारी दोनों की चूत रगडूंगा “।

सरोज कुछ नहीं बोली, वो कुहनियों और घुटनों के बल बेड के किनारे पर चूतड़ पीछे कर के उकडू हो कर बैठ गयी। दीपक, पंकज और कुणाल ने तो हमे फर्श पर खड़ी कर के ही चोद दिया था, ये संतोष ऐसा क्यों कर रहा है। फिर मुझे ध्यान आया की संतोष की लम्बाई उन तीनो से ज्यादा है ।

“अगर संतोष ने गांड की चुदाई करनी हो फिर तो फर्श पर ही खड़ा करता, उससे उसका लंड हमारी गांड के छेद के बिलकुल आमने सामने आ जाता। मगर संतोष ने तो चूत चुदाई करनी थी, और चूत का छेद गांड के छेद से दो ढाई इंच नीचे होता है इस लिए चूत के छेद को ऊपर करके लंड की बराबरी पर लाने के लिए ही सरोज ने ये किया था और इस तरह चूतड़ पीछे कर के बेड के किनारे पर उकडू बैठी है।

“सरोज समझदार औरत है – ये तो मैं बता ही चुकी हूं “।

सरोज के ही साथ मैं भी वैसे ही चूतड़ पीछे कर के चूत चुदवाने उकडू बैठ गयी।

“हम दोनों चुदाई के अगले दौर के लिए तैयार थीं “।

संतोष पहले मेरे पीछे आया – “आखिर मैं मेहमान थी। मेहमान की खातिर पहले होती है इस लिए लंड भी मेरी चूत में ही पहले जाना था “।

संतोष ने मुझे कमर से पकड़ा और लंड मेरी चूत में धकेला – एक ही बार में जड़ तक बैठ गया। एक पल भी व्यर्थ ना करते हुए संतोष ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।

कुछ धक्कों के बाद वो सरोज के पीछे जा कर उसकी कमर पकड़ कर उसे चोदने लगा।

अब बारी बारी से हमारी चुदाई हो रही थी। “मैंने नोट किया की संतोष लगभग पचास साठ धक्कों के बाद एक की चूत में से लंड निकल कर दूसरी की चूत में डालता था। शायद सरोज ने भी ये बात नोट की “।

सरोज ने सर घुमा कर संतोष को कहा, “संतोष रजनी जीजी को ज्यादा रगड़ो, मैं तो यहीं हूं तुम्हारे पास। जीजी तो एक हफ्ते के लिए आयी हैं। ऐसी चुदाई करो के याद रखें और बार बार आएं ”

संतोष हंस पड़ा, “ठीक है सरोज, पर बाबू जी और बीबी जी भी कब कब यात्रा पर निकलते हैं। बाबू जी तो खेतों और डेयरी में ज़्यादा मस्त रहते हैं ”

“चुदाई करवाते करवाते भी हम हंस पड़ी”।

सरोज फिर बोली, और हां संतोष इस बार भी अपना लेसदार सफ़ेद गरम पानी जीजी के ही अंदर छोडना और बाद में मूतना भी मत”।

मैंने एक नज़र सरोज की तरफ डाली, “कितना ध्यान रख रही थी हमारा”।

संतोष फिर शुरू हो गया। मगर धक्कों का अनुपात अलग था। इस बार सरोज की चूत को संतोष लंड के अगर चालीस धक्के लग रहे थे तो मेरी चूत को सत्तर अस्सी धक्के लग रहे थे “।

मेरी इतनी चुदाई कभी हुई नहीं थी। पर मैं चाहती पर संतोष चोदता ही रहे चोदता ही रहे। सरोज मेरी तरफ देख रही थी। शायद उसे लगा की मैं इतने दमदार और धुआंधार चुदाई की अभ्यस्त नहीं हूं और मुझे थोड़ा आराम करना चाहिए।

सरोज ने संतोष की तरफ सर घुमा कर देखा, सरोज के इशारे को समझा। संतोष जो उस समय मेरी चुदाई में मस्त था – इक पल के लिए रुका
और लंड मेरी चूत से निकाल लिया और बोला “अब आप थोड़ा आराम कर लो रजनी, तब तक मैं सरोज को ठंडा कर लूं “।

मैं जा कर सोफे पर बैठ गयी और पति पत्नी कि चुदाई देखने लगी। एक हाथ मेरा मेरी चूत को मसल रहा था। “गीली हुई पड़ी थी और मुझे तो थोड़ी फूली भी लग रही थी”।

“क्या और कैसे चोदता है ये संतोष “।

मैं सोफे पर बैठी सरोज की चुदाई देख रही थी। उसे भी ऐसे ही चोद रहा था संतोष जैसे मुझे चोद रहा था – जोर जोर से लम्बे लम्बे धक्के लगा कर। पूरा बेड हिल रहा था। मैंने तो सोचा था की मेरी चुदाई इस लिए ज़बरदस्त कर रहा था क्यों की हम तो आये ही चुदाई के लिए थे – लेकिन नहीं, सतोष का चुदाई करने का तरीका ही यही था।

“कितनी किस्मत वाली है सरोज “।

सरोज चूतड़ हिला हिला कर साथ दे रही थी। पता नहीं कितनी देर चोदा संतोष ने। पता तब लगा जब सरोज एक बड़ी सिसकारी के साथ झड़ गयी। मां उईईई उईईई आआआआह आआआआह उईईई गयी मैं गयी उईईई” ।

पानी छूटने और मजा आने से सरोज ने जोर जोर से चूतड़ आगे पीछे करने लगी। संतोष अभी भी लंड के धक्के लगाता ही जा रहा था, लगाता ही जा रहा था। उसके मुँह से आवाज़ निकल रही थी “उँह उँह उँह उँह उँह उँह आह आह आह आह आह क्या चुदाई है आह आह आह”।

सरोज अब हिलना बंद हो गयी। अब उसके चूतड़ नहीं हिल रहे थे। संतोष ने धक्के रोक दिए। थोड़ी देर संतोष ऐसे ही खड़ा रहा और फिर धीरे से लंड सरोज की चूत में से निकाल लिया। सरोज बेड पर आगे की तरफ धड़ाम से लेट गयी – जैसे उसमें दम ही ना हो।

“मैंने सोचा मेरी रगड़ाई तो अभी और होनी है, मेरा क्या हो होगा “।

संतोष ने मेरी तरफ देखा – कुछ कहने की तो जरूरत ही नहीं थी। मैं उठी और चूतड़ पीछे संतोष की तरफ कर के उकडू बैठ गयी।

“मेरी इतनी ताबड़तोड़ चुदाई हुई की मेरे शरीर के सारे जोड़ हिल गए “। चूत पानी से भरी हुई थी – फट फट पट्ट पट्ट के बदले अब छप्प छप्प छप्प छप्प छपाड़ छपाड़ छपाड़ की आवाज आरही थी जैसे बरसात में सड़क पर चलने से आती है। लगता था चूत ने बहुत पानी छोड़ रखा था।

तभी मुझे मजा आ गया। “ओ मां …….. आआआआह आआआआह उईईई गयी मैं गयी आह आह आह संतोष तुमने आज स्वर्ग दिखा दिया “।

संतोष ने पंद्रह बीस जोरदार धक्के लगाए और जोरदार आवाज के साथ पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। संतोष का लंड अभी भी खड़ा ही था। लेसदार गरम गरम पानी मेरी चूत में ही रुका हुआ था। जैसे जैसे संतोष का लंड नरम होता जा रहा था, गरम लेसदार पानी मेरी चूत में से बाहर निकल रहा था और नीचे की तरफ बह रहा था।

सरोज की थकान कुछ कम हो गयी थी। उसने मुझे सहारा दे कर बेड पर लिटाया हुए मेरी चूत चाटने लगी।

“बड़े ही प्यार के चूत चाट रही थी “।

संतोष सोफे पर बैठा गिलास में से व्हिस्की की चुस्कियां ले रहा था। “इंतज़ार कर रहा होगा की कब हम में दम आये और बाथ रूम जाए और मैं अपना आज का आख़री फ़र्ज़ भी पूरा कर लूं इनके ऊपर मूत कर”।

सरोज ने चाट चाट कर मेरी चूत साफ़ कर दी। संतोष के वीर्य का एक कतरा भी नहीं रहने दिया मेरी चूत के अंदर और बाहर।

“पति पत्नी का प्यार हो तो ऐसा “।

हम दोनों उठीं और बाथ रूम चली गयीं। संतोष भी आ गया। सरोज पहले ही नीचे बैठ गयीं थी और चेहरा ऊपर उठा दिया था। मैं भी उसके पास ही चूतड़ से चूतड़ जोड़ कर बैठ गयीं।

संतोष ने मूतना शुरू किया। सरोज ने मुंह खोल लिया। संतोष का गरम गरम पेशाब उसके मुँह में जा कर, बाहर आ रहा था और नीचे की तरफ चूचियों होता हुआ चूत की तरफ जा रहा था। जब संतोष ने मूत की धार मेरी तरफ की तो मैंने भी मुंह खोल दिया। मुंह से निकल कर नीचे चूत की तरफ बहता पेशाब चूत तक पहुँचने ऊपर भी गरम ही था।

मैंने सोचा अगर कहीं जन्नत थी तो यहीं थे – करनाल में।

रजनी बता रही थी, “सारी चुदाई के बाद मैंने सरोज से पूछा, सरोज एक बात बताओ ये संतोष क्या ऐसे ही चूत चोदता है”?

सरोज बोली, “जीजी चोदता तो संतोष ऐसे ही है मगर आज इस लिए भी ज्यादा चुदाई कर रहा था क्यों की अगले दो तीन दिन इसको चूत नहीं मिलने वाली। डेयरी में जानवर ब्याने (बच्चा देने वाले हैं ) वाले है इस लिए इसको वहीं रहना है”।

सच में ही रजनी ने जो बताया वो सुन कर तो मेरा संतोष से ना चुदवाने का आईडिया ही बदल गया।

मेरा मन कर रहा था अभी जाऊं और संतोष के सामने अपनी फुद्दी खोल कर लेट जाऊं और बोलूं, “चोद साले इसको भी, कचरा कर दे इसका जैसे रजनी की चूत का किया है”।

मगर अभी तो चार पांच दिन और बाकी थे। पता नहीं कैसी कैसी चुदाई होनी थी।

पर ये तो पक्का था की अगले दो तीन दिन चूत चुदाई संतोष से तो नहीं ही होनी थी।

मैंने रजनी से पूछा, “रजनी तो क्या कल राकेश आएगा”?

रजनी बोली, “आएगा मेरी जान आएगा और सिर्फ तेरी गांड चोदेगा। मैं और सरोज कल दीपक से चुदवाएंगे। परसों दीपक के दो या तीन दोस्त आएंगे। हो सकता है उनके साथ उनकी गर्ल फ्रेंड्स भी हों – मगर ये कोइ पक्का नहीं। सरोज बता रही थी वो कुछ चूत गांड चुदाई के खिलौने भी ले कर आएंगे”।

मैंने बोली, “सेक्स टॉयज”?

“हां “, रजनी बोली, “और आख़री चुदाई तेरी होगी संतोष के साथ। अब उठ और आ मेरे ऊपर और अपनी फुद्दी खोल, मैंने चूसनी है – और तू मेरी चूत चूस”।

दिन भर की चुदाई के बाद रात को जैसे ही रजनी ने कहा “अब उठ और आ कर मेरे ऊपर और अपनी फुद्दी खोल, मैंने चूसनी है ” I मैं रजनी के ऊपर उलटा लेट गयी और उसकी चूत चाटने लगी। रजनी मेरी फुद्दी चूस रही थी

दोनों की चूतें अभी भी गीली थीं और नमकीन पानी छोड़ रही थी।

“करनाल में हमारी चूतें कभी सूखनी भी हैं या नहीं” ? मैंने मन ही मन अपने आप से सवाल किया।

चूत चूसते चूसते अब सेक्स टॉयज – “रबड़ के लंडो” का ध्यान आ गया – जो हो सकता है हमारी चूत और गांड में जाएं।

“हद्द है”। सोचा नहीं था की करनाल के इस ट्रिप में इतना कुछ होगा।

चूत और गांड की चटाई और धुआंधार चुदाई के कारण बड़ी ही गहरी नींद आयी। सुबह सरोज ने जगाया – चाय ले कर आयी थी। जब उठी तो पता चला हम नंगी ही सो गयी थी। मुझे और रजनी दोनों को बड़ी शर्म आयी। मगर सरोज ने जरा सा मुस्कुरा कर कहा चाय पी लीजिये और फ्रेश हो कर बाहर आ जाइये।

हम दोनों ने नंगी ही चाय पी बाथ रूम गयी और सारे काम कर के नहा कर ही बाहर निकली।

सरोज रसोई में नाश्ते की तैयारी कर रही थी। मैं और रजनी भी उसकी मदद करने लगीं । साथ साथ पिछले दो दिनों की चुदाई की बातें भी चल रही थी – एक दुसरे के साथ मजाक भी हो रहा था।

अब सारा दिन करने को कुछ नहीं था, जो होना था रात को ही होना था। “मोटे लम्बे लंड चूत और गांड में लेने के बाद उंगली करवाने का तो मन भी नहीं कर रहा था। सोच सोच कर ही मस्ती आ रही थी रात को मैंने राकेश से गांड मरवानी थी और रजनी और सरोज ने दीपक से चुदाई करवानी थी “।

रजनी सरोज दीपक की चुदाई में कुछ भी नया नहीं होने वाला था। वो पहले भी इकट्ठी चुदाई करवा चुकी थी, मुझे जरूर इंतज़ार था राकेश के मोटे लंड का। बार बार रजनी की लाल और सूजी हुई गांड आँखों के सामने आ रही थी।

“क्या मेरी गांड की वही हालत होगी जो रजनी की गांड की हो गयी थी ? क्या मेरी गांड भी राकेश चोद चोद कर लाल कर देगा ? क्या मेरी गांड भी चोद चोद कर सुजा देगा ” ?

“अब ये तो रात को ही पता चलेगा की क्या होगा और कैसा भुर्ता बनाएगा राकेश मेरी गांड का ” ?

रात होने का इंतज़ार हम लोगों ने सुबह से ही शुरू कर दिया।

“इंतज़ार की घड़ियां एक तो वैसे ही लम्बी होती है, और इंतज़ार अगर चुदाई करवाने के लिए हो तो और भी लम्बी हो जाती हैं”।

“दोपहर हुई, शाम हुई और रात भी आ गयी”।

राकेश आ चुका था। दीपक तो हमारे पास ही बैठा था।

गांड चुदाई के उतावलेपन ने तो मेरी भूख ही खत्म कर दी। जब थोड़ा सा खाना खा कर मैंने बस कर दिया तो सरोज मजाक में बोली, “क्या हुआ आभा जीजी, खाना तो पूरा खाओ। राकेश आज पूरी रात आपके सपुर्द है मन भर के गांड चुदाई करवाओ। चुदाई करवाने वाली की पूरी तसल्ली कर के ही रुकता है “। फिर रजनी की तरफ देख कर बोली, “क्यों जीजी “?

“रजनी हंस दी”।

मैंने कहा, “ऐसी बात नहीं, पूरा दिन कुछ ना कुछ खाते ही तो रहे हैं “।

सरोज बोली, “मैं तो मजाक कर रही हूं आभा जीजी। वैसे एक बात बोलूं , अगर चूत या गांड चुदवाने का प्रोग्राम हो तो खाना कम ही खाना चाहिए। पेट ज़्यादा भरा हो चुदाई में मजा नहीं आता “।

“कहा था ना मैंने की सरोज बड़ी समझदार औरत है ” !

“खैर, इंतज़ार की घड़ियां खत्म हुई और गांड चुदवाने का वक़्त आ गया।

सरोज बोली, “चलो आभा जीजी – और रजनी जीजी आप पहुंचो कमरे में दीपक भी आ जायगा – हो सकता है कमरे में इंतज़ार ही कर रहा हो। मैं आभा जीजी को राकेश के पास छोड़ कर आती हूं, समझा भी दूंगी आराम से गांड चोदे, कहीं मेरी गांड समझ कर ही ना शुरू हो जाए मुझे तो उसके लंड की अब आदत हो गयी है “। और वो हंस पड़ी I

मैं और सरोज, दोनों सरोज के कमरों की तरफ चल पड़े।

“राकेश के मोटे लंड का सोच सोच कर मेरी तो टांगें कांप रही थी – अब ये गांड फटने का डर था या गांड चुदाई का उत्साह, ये नहीं मुझे समझ नहीं आ रहा था “।

राकेश सोफे पर बैठा था।

सरोज बोली “अरे राकेश, तूने अभी तक कपड़े नहीं उतारे ? क्या कर रहा है, चल कपड़े उतार। आप भी उतरो आभा जीजी। जब तक मेरे सामने ये ” – सरोज ने राकेश के लंड की तरफ इशारा कर के कहा – “आपकी गांड में पूरा नहीं चला जाता मैं जाने वाली नहीं। रजनी जीजी और आप की गांड की सलामती की जिम्मेदारी मेरी है”।

“गांड की सलामती की ज़िम्मेदारी “। मेरी तो हंसी ही छूट गयी।

राकेश भी हंसा और कपड़े उतरने लगा। मेरी नज़र तो उसके लंड पर टिकी थी – “कब बाहर निकलेगा ”

सरोज ने मेरा कंधा पकड़ कर कहा, “आभा जीजी कपड़े उतारो। राकेश का लंड सारी रात आपके पास है, जितना चाहो देख लेना, जितनी बार चाहो गांड में चूत में जहां मन करे, जितनी बार मन करे ले लेना लो। और मुझे भी तो जाना है दीपक का लंड चूसना है “। और वो हंस दी।

सरोज ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार नीचे खिसका दी। ना तो मैंने उस दिन चड्डी डाली हुई थी ना ही चूचियों के ऊपर ब्रा।

“कौन इतने कपड़े पहने और क्यों पहने, जब उतारने ही हैं तो “।

अगले ही मिनट में मैं और राकेश बिलकुल नंगे थे।

“राकेश का लंड अभी खड़ा नहीं था, लेकिन जिस लड़की ने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा हो, उसे डराने के लिए काफी था “।

सरोज बोली “जाओ आभा जीजी, लंड का लौड़ा बना दो”।

मैं भी एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह गयी और राकेश के सामने घुटनो के बल फर्श पर बैठ गयी और लंड अपने मुंह में ले लिया। आधे मिनट में ही मुझे महसूस हुआ की मेरा मुंह पूरी तरह किसी चीज़ से भर गया है – मतलब लंड लौड़ा बन चुका था और फनफना रहा था।

मैंने देखने के लिया की कितना बड़ा है, मुंह से लंड निकाला, “हे भगवान, इतना मोटा ! ये गांड में जाएगा कैसे ” ? मगर फिर, सोचा रजनी भी तो ले चुकी है अपनी गांड में ये खूंटा। ”

और फिर हमारी गांड की सलामती की ज़िम्मेदार सरोज भी तो यहीं है”।

राकेश ने मुझे फर्श से उठाया और सोफे पर बिठा दिया, और सामने आ कर खड़ा हो गया।

“राकेश का लंड मेरे बिलकुल होठों के सामने था “। सोफे पर बैठे कर लंड चूसना ज़्यादा आरामदायक था।

सरोज ने पूछा, “राकेश, जैल क्रीम कहां रक्खी है ” ?

“उस मेज की नीचे वाली दराज़ में है भाभी “। सरोज जैल क्रीम की ट्यूब ले आयी।

मैं अभी भी राकेश का लंड चूस रही थी। सरोज ने देखा मुझे लंड चूसने में मजा आ रहा है।सरोज ने भी अपने कपड़े उतार दिए और बेड पर बैठ गयी और मुझे राकेश का लंड चूसते देखने लगी। सरोज की उंगली उसकी चूत पर घूम रही थी।

“बात भी सही थी, अगर एक लड़की लंड चूसने के मजे लूट रही हो तो दूसरी देखने वाली की चूत में खुजली हो ही जाती है “।

सरोज तब तक बैठी रही जब तक मैं राकेश का लौड़ा चूसती रही। जब मैंने लंड मुंह में से बाहर निकला तो सरोज बोली, “कैसा लगा आभा जीजी “।

“एक दम मस्त “, मैंने जवाब दिया।

सरोज खड़े होते हुए बोली, असली मस्ती तो तब देगा जीजी, जब गांड के अंदर जाएगा। इधर आ कर कुहनियां बेड पर रखिये और चूतड़ पीछे कर के खड़ी हो जाइये “। फिर उसने राकेश से पूछा, “तुम्हारा क्या हाल है राकेश ? जीजी की गांड चोदने के लिए तैयार हो” ?

राकेश ने अपने लंड की तरफ इशारा कर के कहा, “आप खुद ही देख लीजिये भाभी”।

“हां वो तो देख ही रही हूं”, कह कर सरोज सोफे पर बैठ गयी और राकेश को घुमा कर उसका लंड अपने मुंह में ले लिया – पूरा का पूरा।

“देवर भाभी का प्यार देख कर मन बड़ा ही प्रसन्न हुआ “।

मैं तो कुहनियां बेड पर रख कर चूतड़ पीछे कर के खड़ी हो गयी थी। ” बस लंड का इंतज़ार था , मगर सरोज राकेश का मोटा लौड़ा चूस रही थी “।
सरोज उठी और मेरी चिकनी सफ़ेद गांड पर हाथ फेरा, दोनों तरफ के नितम्बों – चूतड़ों को – खोला। मेरी गांड के छेद पर ठंडी ठंडी हवा लगी – “बड़ा ही मज़ा आया”।

सरोज ने मेरी गांड के छेद पर अपनी जुबान फेरी। मेरी तो सिसकारी निकल गयी “आआअह्ह्ह सरोज फिर से”।

सरोज ने खूब चाटा मेरी गांड के छेद को। मेरी चूत में से पानी टपक रहा था।

“बस करो सरोज, कहीं चूत का पानी ही ना निकल जाए। बोलो राकेश को डाले गांड के अंदर अपना लंड”।

सरोज उठी और मेरी चूतड़ खोल कर गांड के छेद पर ढेर सारी जैल क्रीम लगा दी। राकेश के लंड पर भी मल दी क्रीम।

“चलो राकेश डालो अंदर, पर वैसे ही धीरे धीरे शुरू करना जैसे रजनी जीजी को किया था “।

राकेश ने आधा सुपाड़ा अंदर डाला और रुक गया लंड बाहर निकाला तो सरोज ने मेरी गाड़ पर और अंदर और जैल लगा दी। राकेश ने फिर डाला – अभी भी आधा सुपाड़ा ही अंदर किया। लंड बाहर निकला, जैल लगाई, आधा सुपाड़ा अंदर किया। आठ दस बार राकेश ने ऐसे ही किया।

आठ दस ऐसे ही कर फिर राकेश ने पूरा सुपाड़ा अंदर कर दिया। फिर थोड़ा रुका। जब लंड के सुपाड़े ने अपनी जगह बना ली तो राकेश ने आधा लंड अंदर कर दिया।

थोड़ी दर्द हुई, मगर अच्छा भी लगा।

“इस सारे समय सरोज मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरती रही “।

सरोज ने राकेश को फुसफुसा कर कुछ कहा – “मुझे सुनाई नहीं दिया”।

राकेश ने लंड बाहर निकाल लिया। सरोज ने फिर क्रीम मेरी गांड के ऊपर, अंदर और राकेश के लंड पर लगाई।

राकेश ने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छेद पर रखा और आधा लंड अंदर कर के रुक गया।

सरोज ने पूछा, “जीजी कैसा लग रहा है “? मैंने कहा बहुत अच्छा लग रहा है।

“और सरोज पीछे हट गयी”।

राकेश ने एक धक्का लगाया और लंड पूरा अंदर था।

जब तक राकेश ने मेरी गांड चोदनी शुरू नहीं कर दी – मतलब नॉन स्टॉप लंड अंदर बाहर करना नहीं शुरू कर दिया, सरोज वहीं खड़ी रही। जब देख लिया की मैं राकेश का मोटा लंड अंदर ले लिया है और इसे झेल लूंगी तभी वो वहां से गयी।

मगर जाने से पहले सरोज मेरे चूतड़ों पर एक प्यार भरा धप्प मारना नहीं भूली। “जैसे बच्चे को किसी बहादुरी के काम के लिए शाबाशी देते हैं”।

“वैसे तो इतने मोटे लंड को गांड में लेना और रगड़ाई करवाना भी बहादुरी का ही काम है ”

रजनी मेरी गांड चुदाई की सारी तैयारी करवा कर चली गयी थी। “उसने भी तो दीपक से चुदना था “। राकेश अब पूरे जोर शोर से गांड मेरी चोद रहा था – रगड़ाई भी मस्त हो रही थी।

मैंने राकेश को कहा, “राकेश थोड़ी क्रीम लगा लो, लंड छेद को रगड़ रहा है “।

“क्रीम तो लगा दूंगा, मगर गांड चुदाई में मजा तो इसी रगड़ के कारण आता है। चूत में चुदाई का असली मजा तब आता है जब लंड चूत के अंदर की खुजली मिटाता है और गांड चुदाई का असली मजा तब आता है जब लंड गांड के छेद के सिरे की खुजली मिटता है। मुझे लग रहा है आभा की आपकी गांड को थोड़ा आराम की जरूरत है ” ,कह कर राकेश ने लंड गांड में से निकाला और चूत में डाल दिया।

“असल में बात राकेश ने ठीक ही कही थी “।

अब पीछे से चूत चुदाई चालू थी। मगर फर्श पर खड़ी होने के कारण चूत थोड़ी नीची थी और लंड पूरा अंदर तक नहीं बैठ रहा था।

मैंने राकेश को कहा, ” राकेश पोज़िशन बदल लेते हैं, लंड पूरा चूत के अंत तक नहीं जा रहा “।

राकेश ने लंड चूत में से निकल लिया और खड़ा हो गया। मैं बेड के किनारे पर लेट गयी और अपनी कमर के नीचे मोटा तकिया रख कर चूत और गांड दोनों ऊपर कर दी। अपनी टांगें उठाई और चौड़ी कर दी।

“पक्की बात है की मेरी फुद्दी और गांड के छेद राकेश को दिख रहे होंगे “।

तभी तो राकेश ने एक सेकण्ड भी नहीं लगाया और जांघों से पकड़ कर मेरी टांगें चौड़ी की और फच्च पट्ट की आवाज के साथ पूरा लंड अंदर बिठा दिया – “और फिर दे दनादन” – वो धक्के लगाए मेरी चूत में कि क्या बताऊं।

राकेश ने इतने तेज धक्के लगाए और मैंने ऐसे जोर जोर से चूतड़ घुमाए की मैं अगले डेढ़ मिनट भी नहीं रुक पाई और मेरा पानी छूट गया। चूत मेरी लबालब मेरे पानी भर गयी। मेरे चूतड़ हिलने बंद हो गए। राकेश समझ गया की मैं झड़ चुकी हूं।

राकेश खड़ा तो गया, और उसने धक्के लगाने भी बंद कर दिए, मगर अपना खड़ा तना हुआ सख्त लंड मेरी चूत में से बाहर नहीं निकाला।

“क्या अनुभूति थी – मैं गर्म लंड अपनी चूत में महसूस कर रही थी और झड़ने के बावजूद चाहती थी की ये ऐसे अंदर खड़ा रहे। मैंने चूत टाइट कि और फिर ढीली की।

मैंने राकेश का लंड जकड़ना और ढीला छोड़ना शुरू किया। मुझे इसमें भी बड़ा मजा आ रहा था। राकेश धक्के तो नहीं लगा रहा था मगर लंड जरा जरा आगे पीछे हिला रहा था। “मैंने नोट किया की जब मैं चूत को टाइट करती हूं तो राकेश जोर लगा के अपना लंड चूत की गहराई तक बिठा देता है और जब मैं लंड ढीला छोड़ती हूं तो वो लंड को चूत से जरा सा बाहर निकाल लेता है”।

मैंने कहा, “राकेश थोड़ा चूत को चाटो और चूसो “।

राकेश बैठ गया और मेरी चूत और गांड दोनों चूसनी शुरू कर दी , “लपड़ सपड़ लपड़ सपड़ लपड़ सपड़ “। मुझे लग रहा था की मेरी चूत के पानी को राकेश निगल रहा है – पी रहा है।

“हर्ज ही क्या है अगर राकेश ऐसा कर रहा है तो। शुध्द हल्का नमकीन पानी ही तो है – क्या हुआ जो फुद्दी में से निकला है । और फिर हम लड़कियां भी तो कई बार एक दूसरी की चूत पर से मर्दों का सफ़ेद लेसदार पानी चाट लेती हैं”।

राकेश चूत चूसते चूसते बीच बीच में गांड के छेद में भी अपनी जुबान घुसा देता था। बड़ा ही आनंद आ रहा था। “मैं एक बार झड़ चुकी थी और राकेश का लंड ऐसे का ऐसे खड़ा था।

मैं सोच रही थी की अगर राकेश इस चुदाई में दो बार झड़ता है, तो अभी और कितनी बार झडूंगी ?

“शायद दो बार और झडूंगी – इससे ज्यादा तो मुझ में भी दम नही। इतने में ही जोड़ हिला देगा ये करनाल का छोरा”।

राकेश ने मेरी चूत चूसनी बंद की और खड़ा हो गया। मेरी दोनों बाजू पकड़ी और बेड के किनारे पर बिठा दिया।

”मतलब साफ़ था, “आओ आभा और इस राकेश का मोटा लंड अपने मुंह में ले कर चूसो “।

मैंने भी देर नहीं की और राकेश का गीला लंड अपने मुंह में ले लिया। पांच मिनट की चुसाई के बाद, मेरी पहले से ही गीली चूत ने और पानी छोड़ दिया।

मैं फिर से धड़म से पीछे की तरफ गिर गयी। तकिया अपनी कमर के नीचे रखा और चूतड़ उठा दिए । टांगें हवा में उठाई और चौड़ी कर दी। गांड और चूत के दोनों छेद राकेश के लंड को बुला रहे थे।

“आओ राकेश के लंड घुसो अंदर “।

राकेश ने मेरी जांघों को पकड़ा और खोल दिया और पूछा, “कहां डालूं आभा ? आगे वाले छेद में या पीछे वाले छेद में ” ?

“जहां मर्जी डालो राकेश दोनों छेद तुम्हारे हवाले हैं, जैसे जी चाहे रगड़ो”। फिर मैंने पूछा, “इस बार लंड का गर्म पानी छोड़ना है क्या ” ?

“हां आभा, तुमने चुदाई करवाते हुए नीचे से जिस तरह से चूतड़ घुमाए, मैंने तो बस रोक ही रखा है अपने आप को। इस बार तुम्हारे झड़ने के साथ मै भी पानी निकाल दूंगा। बस ये बताओ की पानी गांड में छुड़वाना है की चूत में “।

अपने चूतड़ों के तारीफ सुन कर बड़ी खुशी हुई। मैंने भी पूछा, “तो फिर तुम भी ये बताओ राकेश चुदाई के कितने दौर और चलेंगे ” ?

राकेश ने कहा, मैंने दो बार झड़ना है। मैं हमेश एक चुदाई में दो बार ही झड़ता हूं। इस दौरान नीचे वाली चुदाई करवाने वाली चाहे दो बार झड़ जाये तीन बार झड़ जाये या चार बार “।

मैंने सोचा,”कितनी किस्मत वाली है सरोज जिसको इतनी मस्त चुदाई करने वाला देवर मिला है “।

मैंने कहा, “तो फिर ठीक है राकेश चोदो दोनों ही छेदों को। एक बार आगे वाले में लंड का गरम पानी छोड़ना, एक बार पीछे वाले में छोड़ना। और एक बात और, मेरे झड़ने की गिनती मत करना। जैसे चोदना चाहो चोदो, जितना चोदना चाहो आज चोदो “।

चुदाई की मस्ती और राकेश के लंड ने तो बेशर्म बना दिया था।

“और फिर रजनी की तजुर्बेकार मां भी तो यही कहती है – चुदाई करवाओ तो बेशर्मो से, पूरे मजे लो और पूरे मजे दो “।

“आज मैं वही कर रही हूं “।

राकेश ऐसे चोद रहा था जैसे फिर दोबारा चूत नहीं मिलेगी और मैं चुदवा रही थी जैसे दोबारा लंड नहीं मिलने वाला।

“मगर बात ये नहीं थी”।

“मुझे भी लंड मिलेंगे और राकेश को भी चूतें मिलेंगी – मगर हमे एक दुसरे की चुदाई का मौक़ा मिलेगा या नहीं, ये नहीं पता ”

मेरी चूत का पानी छूट गया, राकेश के लंड ने भी गर्म फव्वारा चूत में डाल दिया।

मुझ में हिलने की हिम्मत नहीं थी, राकेश पानी निकाल कर सोफे पर बैठ गया और मेरी तरफ देखने लगा। जब हमारी नजरें मिली तो बोला, “आभा बहुत मस्त चुदवाती हो। आज के लिए बस एक दौर और “।

चुदाई करवाते करवाते थक गयी थी पर मन नहीं भरा था। “मैंने भी हां में सर हिला दिया”।

“मोटे लंड का चस्का ही ऐसा था”।

तभी सरोज आ गयी – नंगी। “कैसी चल रही है आप लोगों की रगड़ाई पिलाई चुदाई “। मेरी तरफ देख कर बोली।

मैंने भी कहा,”खुद ही देख लो”।

“अच्छा दिखाओ”,सरोज आई और फर्श पर घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूत को खोला और बोली – “वाह ये तो भरी पड़ी है “। फिर राकेश की ओर तरफ मुंह करके बोली, “राकेश अभी पानी छोड़ा है क्या जीजी की चूत में ” ?

राकेश कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया। सरोज मेरी चूत चाट चाट कर राकेश का सफ़ेद लेसदार पानी साफ़ करने लगी।

“देखें गांड की क्या हालत है” ? सरोज ने मेरे चूतड़ों को बाहर की तरफ किया और झुक कर गांड के छेद को देखा। “ये क्या राकेश जीजी की गांड तो बिलकुल नई नकोर कुवांरी लग रही है। चोदी नहीं क्या ” ?

“चोदी है भाभी, मगर थोड़ा धीरे से सोच ज्यादा रगड़ा ही ना लग जाए “।

अरे राकेश, रगड़ के चोद, भुर्ता बना आभा जीजी की गांड का जैसे रजनी जीजी का बनाया था – लाल कर दे चोद चोद कर। सुजा दे, फुला दे I कुछ नहीं होगा। मैं क्रीम लगा दूंगी, एक दिन में ही ठीक हो जाएगी – अगली गांड चुदाई के लिए तैयार “।

सरोज ने मेरी गांड का छेद चूसा, चाटा, जुबान भी अंदर डाली और उठ कर राकेश के सामने बैठ कर उसका लंड चूसने लगी।

“भाभी की चुसाई में क्या जादू था, देवर का लंड फिर फनफनाने लगा”।

मेरी तरफ आ कर बोली, “आभा जीजी आप ने बोला था राकेश को धीरे धीरे गांड मारने को ” ?

“नहीं सरोज मैंने तो कुछ भी नहीं बोला। मैंने तो उलटा इस राकेश से कहा था, “ये रहे मेरी गांड और चूत के छेद, चोदो जैसे मर्जी – तुम खुद ही पूछ लो राकेश से”।

“तो चलो ठीक है फिर, मैं चलती हूं – उधर दीपक से गांड चुदवाने की मेरी बारी है। वो लंड हाथ में पकड़ कर मेरा इंतज़ार कर रहा होगा”। फिर राकेश की तरफ देख कर बोली, “राकेश ध्यान रखो जीजी का। रोज रोज थोड़ी आना है इन्होंने ” !

“राकेश ने भी आज्ञाकारी बालक की तरह हां में सर हिला दिया”।

सरोज चली गयी और राकेश आ कर मुझे चुदाई के लिए तैयार करने लगा।

उसका काम तो उसकी प्यारी भाभी कर ही गयी थी। “भाभी की दो मिनट के चुसाई ने ही देवर जी का लंड क़ुतुब मीनार की तरह सीधा कर दिया था “।

“अगले आधे घंटे में राकेश ने मेरा कचूमर निकाल दिया”।

मेरी चूत ने कितनी बार पानी छोड़ा मुझे नहीं पता – मेरा तो राकेश लंड के हर धक्के के साथ पानी छूट रहा था। अब तो हालत ये थी की मेरे चूतड़ अपने आप ही गोल गोल और आगे पीछे हिल रहे थे।

आखिर एक लम्बी हुंकार “आआआ…….आहहहहह” के साथ राकेश ने मेरी गांड को अपने गरम लेसदार सफ़ेद पानी से सींच दिया।

लग रहा था राकेश तीन बार झड़ा था, मुझे अपने झड़ने की तो गिनती ही नहीं पता थी। “मैं निढाल हो गयी”।

राकेश ने लंड मेरी गांड में से निकाला और मेरे साथ ही लेट गया। मैंने अपनी गांड का भींच लिया – छेद बंद कर लिया जिससे राकेश के लंड में से निकला सफ़ेद लेसदार पानी बाहर ना निकल जाए । क्या पता कुछ नया ही ना करना पड़ जाए। मैं भी उसकी बगल में ही लेट गयी।

थोड़ी देर के बाद जब थोड़ा दम आया तो मैं उठी और राकेश के ऊपर लेट गयी। मेरी चूचियां उसकी छाती से टकरा रहीं थीं। मेरी चूत राकेश के लंड के ऊपर थी। मैंने पीछे हाथ कर राकेश का लंड अपने नीचे से निकाल कर अपनी गांड की तरफ पीछे की तरफ कर दिया।

फिर एकदम मैंने अपनी चूत और गांड को ढीला छोड़ दिया और बाहर की तरफ जोर लगाया। मेरी चूत का सारा पानी और राकेश के लंड का सफ़ेद पानी, जो मेरी गांड के अंदर थे, निकल कर राकेश के लंड और टट्टों पर फ़ैल गए।

यही तो था “कुछ नया ” I मै कुछ देर ऐसे ही राकेश के ऊपर लेटी रही। फिर उठ कर राकेश के लंड के लंड और उसके टट्टों को चाट चाट कर अच्छी तरह साफ़ किया और खड़ी हो गयी।

राकेश ऐसे ही निढाल लेटा हुआ था।

“आखिर को मेहनत भी बहुत की थी उसने”।

मैंने कपड़े उठाए और रजनी के कमरे की तरफ बढ़ गयी।

रजनी की मां के कमरे में तो चुदाई चल रही होगी और अब मुझ में चुदाई करवाने की हिम्मत तो नहीं बची थी – कम से कम आज चुदवाने के लिए तो नहीं ही।

चुदाई करवा करवा कर मुझे इतनी थकान हो चुकी थी की अब बस सोने का मन था।

मैं बाथ रूम गयी, पेशाब किया – ना गांड धोई ना चूत, ना होठों पर लगा राकेश की लेस साफ़ की, बस बिस्तर पर ढेर हो गयी और सो गयी।

सुबह जब नींद से उठी तो रजनी मेरे साथ ही लेटी हुए थी, नंगी।

मैं उठी बाथ रूम गयी, सारे काम कर के नहा धो कर नंगी ही बाहर निकली। रजनी जाग चुकी थी।

“क्या बात है आभा, तू बड़ी जल्दी सो गयी रात को ? मैं और सरोज तो तेरी चुदाई की कहानी सुंनना चाहते थे, तेरी गांड की हालत देखना चाहती थे, पर तू तो बड़ी ही गहरी नींद में थी”। रजनी ने बिस्तर पर बैठे बैठे ही पूछा।

तभी चाय ले कर सरोज भी आ गयी।

सरोज रजनी को बोली, “जीजी रात को आभा जीजी मस्त चुदी है। तीन घंटे की चुदाई कम नहीं होती। राकेश तो अभी भी सोया हुआ है। रात को जब दीपक से चुदाई करवा के अपने कमरे में गयी तो राकेश लेटा हुआ था। मैंने उसका लंड चूसा की अगर खड़ा हो जाए तो आज रात आख़री एक गांड चुदाई गेम राकेश के साथ भी खेल ही लिया जाये, मगर उसका तो खड़ा ही नहीं हुआ।

सरोज ने बात जरी रखी, “राकेश तो दो बार तो चोदता ही है, मगर दो बार की चुदाई के बाद उसकी ये हालत नहीं होती मैंने कभी नहीं देखी। जरूर उसने दो बार से ज्यादा चुदाई की है। क्यों आभा दीदी ” ?

मैंने कहा, “मैंने गिनती नहीं की, मुझे तो इतना पता है की आख़री चुदाई में मेरी ये हालत हो गयी थी की मेरी चूत का पानी छूटना बंद ही नहीं हो रहा था। मेरा दिमाग सुन्न हो चुका था। जिंदगी में ऐसे चुदाई कभी नहीं हुई होगी। राकेश ने मेरी चूत और गांड एक कर दी”।

“सच सरोज तुम्हारा देवर बड़ा ही तगड़ा चुदकड़ है। तुम बड़ी किस्मत वाली हो की ऐसा बढ़िया चूत चोदने वाला पति और ऐसे बढ़िया गांड चोदने वारा देवर मिले हैं”।

रजनी ने कहा, “चलो गांड दिखाओ तो सही, हम भी तो देखें भाभी के देवर ने क्या हाल बनाया है गांड का”।

कपड़े तो मैंने पहने नहीं थे, मना करने का कोइ मतलब नहीं था। मैं कुहनियों और घुटनों के बल के उकडू लेट गयी और चूतड़ उठा दिए।

रजनी ने मेरे चूतड़ खोले और गांड का छेद देखा। “अरे आभा तेरी तो बड़ी रगड़ी लगती है राकेश ने । लाल हुई पड़ी है, फूली भी हुई है। दर्द तो नहीं हो रही। जरा देखना सरोज “?

मैंने कहा, “दर्द की बात करती हो ? ये सुन्न हुई पड़ी है – इतना रगड़ा राकेश ने है मेरी गांड को। लगता है हफ्ता लगेगा ठीक होने में “।

“अरे नहीं आभा जीजी “, सरोज बोली, “मेरे पास एक क्रीम है, रजनी जीजी की गांड पर भी लगाई थी। कभी कभी राकेश मेरी गांड भी इसी तरह चोद देता है। मैं तो वो क्रीम लगा लेती हूं। दो दिन में ही मेरी गांड फिर चुदने के लिए तैयार हो जाती है। राकेश को मैं कुछ कहती नहीं क्यों की इसी जोरदार रगड़ाई चुदवाई से तो मजा मिलता है “।

“अब कुछ पाने के लिए कुछ त्याग तो करना पड़ता ही है। अगर गांड चुदाई के मजे लेने हैं तो कभी कभी इतने सी तकलीफ सहने में क्या हर्ज है”।

“वैसे भी चूत की सील भी तो टूटती ही है – और तब दर्द भी होता है। पर फिर पूरी जिंदगी चुदाई के मजे भी तो आते हैं “।

” कमाल है, मैं क्या सोच रही थी और सरोज और रजनी क्या सोच रही थीं “।

सरोज और रजनी शायद सोच रही थी की राकेश ने मेरी गांड जरूरत से कुछ ज्यादा ही ज़बरदस्त चोद दी थी और मैं परेशानी में थी। और मैं सोच रही थी की करनाल के इस ट्रिप में अब राकेश से गांड चुदवाने का मौका नहीं मिलेगा “।

“अब क्या किया जाय, हर चीज़ अपनी मर्जी के हिसाब से तो नहीं होती”।

“सरोज मेरी गांड चाटने लगी। सच बड़ा ही मजा आ रहा था। गांड के छेद पर जहां राकेश के लंड ने रगड़ाई की थी वहां सरोज की जुबान हल्की हल्की खुजली कर रही थी। बिकुल ऐसा ही मजा आ रहा था जैसे कोइ सेक्सी चुदाई की फिल्म देखते हुए चूत के दाने को रगड़ने से आता है “।

सरोज बोली, “मैं क्रीम ले कर आती हूं”।

उसके जाने के बाद रजनी मेरी गांड का छेद चाटने लग गयी। क्या मजा आ रहा था। आराम भी मिल रहा था। बड़ी मुश्किल से अपने मजे की सिसकारियां रोक रही थी”।

सरोज करीम लाई और मेरी गांड के छेद पर लगा दी।

मैंने पूछा, “अब तुम लोग बताओ कैसी रही तुम लोगों की चुदाई “।

“बहुत ही बढ़िया, और साथ ही ग्रुप चुदाई में कुछ बदलाव भी किया है”। रजनी ने बताया।

फिर मुझ से पूछा, “आभा आज का क्या प्रोग्राम है”।

मैंने कहा, “आज चुदाई की छुट्टी करते हैं। बहुत रगड़ाई हो गयी”। आज हम तीनो बहनें मिल कर एक दूसरी की चूत और गांड चाटेंगी “।

सरोज ने बीच में ही बात काटी और कहा …….. “और एक दुसरे पर मूतेंगी भी, चुदाई का तो मेरा भी मन नहीं। कुछ ज्यादा ही हो गयी इन तीन दिनों में। क्यों रजनी जीजी “। उसने रजनी की तरफ मुंह कर के पूछा।

रजनी भी बोली, ” चुदाई तो कुछ ज्यादा ही हो गयी अब तक। आज वही करते हैं जो सरोज ने कहा है – एक दूसरी की चूत गांड चटाई और फिर मूत मुताई।

“अच्छा वो ग्रुप चुदाई में क्या बदलाव किया है ” ? मैंने पूछा।

रजनी ने जवाब दिया, “ये आईडिया दीपक और सरोज का है। इनका कहना है की हम लोगों के चूत और गांड की चुदाई, रगड़ाई, चुसाई सब बढ़िया हो चुकी है। जैसे चोदने वाले यानि दीपक, संतोष और राकेश यहां हैं – “मैंने सोचा पंकज और कुणाल भी तो हैं” – और जैसा उन्होंने हमे चोदा है, इससे अच्छी चुदाई नहीं हो सकती, इसलिए कुछ अलग करना चाहिए “।

मैंने कहा, “ठीक है – बिलकुल ठीक है, मगर वो अलग क्या है और क्या हो सकता है। तुम्हीं तो कहती थी रजनी चुदाई तो सब एकसी ही करते हैं, बस लंड ही थोड़े अलग अलग होते हैं “I मैंने रजनी की तरफ देखा।

रजनी ने कहा, “यही तो सरोज और दीपक का आईडिया है। मान लो अगर कोइ ऐसा आ जाये जिसने या तो चूत चोदी ही ना हो या नई नई चुदाई शुरू की हो तो वो कैसी चुदाई करेगा। ये चुदाई चूत और गांड के मजे के लिए नहीं उन नए नवेले, कोरे चुदक्क्ड़ों से चुदाई के मजे लेने के लिए होगा “।

“नए नवेले कोरे “? बात जम तो रही थी। मजा तो आएगा ये देख कर की जिसने अभी अभी चुदाई शुरू ही की हो उसका नंगीं लड़कियों की चूत और चूतड़ देख कर क्या हाल होगा। जब हम उनका लंड अपने मुंह में ले कर उनके सुपाड़े पर अपनी जुंबां फेरेंगी तब क्या होगा।

“मैं तो उन लौंडों की सफ़ेद गर्म मलाई अपने मुंह में छुटाऊंगी”, रजनी ने कहा। “मैं भी ,मैं भी”, मैं और सरोज भी बोल पड़ीं।

एक बात तो सरोज और दीपक की ठीक ही थी की जैसे बढ़िया चुदाई हमारी हो चुकी थी और चल रही थी इससे बढ़िया चुदाई तो क्या होग। अब तो कुछ नया करना चाहिए।

“करनाल की बढ़िया चूत और गांड की चुदाई – मोटे लंड, फूला हुआ लंड का सुपाड़ा, और सब से बड़ी बात कोइ दखलंदाजी नहीं। सब कुछ बढ़िया माहौल में”।

मगर मैंने पूछा, ” और संतोष के साथ मेरी चुदाई “?

सरोज बोली “तुम्हारी संतोष से चुदाई कल होगी। कल संतोष आएगा और परसों सुबह चला जायेगा। दिन में दीपक अपने दोस्त, या जो भी वो हैं, उनको ले कर आएगा। दिन भर उनके साथ मस्ती करेंगे – पता नहीं उन नए लौंडों के साथ चुदाई होती भी है या नहीं या होती भी है तो कैसी होती है। रात को राकेश आएगा उसके साथ कुछ नया करेंगे “।

“नया मतलब ” ? मैंने पूछा।

सरोज ने कहा, “कुछ सोचा नहीं। उसको आने दो, उसके बाद ही सोचेंगे”।

” और वो सेक्स टॉयज़ – रबड़ के लंडों वाली बात “। मैंने रजनी से पूछा।

रजनी बोली, “आभा ऐसे मोटे, फूले सुपाड़े वाले लंडों के बीच प्लास्टिक के लंडों का क्या काम। अच्छा बातें करते करते बड़ी देर हो गयी, मैं भी फ्रेश हो कर आती हूं, तू भी अब कपड़े पहन ले – दोपहर को फिर उतारने हैं, क्यों सरोज “।

“सब हंस पड़े “।

कुछ ही देर बाद हमारी काम क्रीड़ा शुरू हो गयी।

“एक दूसरी की चूत चटाई , चूत के दाने को चूसना , गांड के छेद पर जुबान फेरना , गांड के अंदर उंगली दाल कर गोल गोल घुमाना “।

एक बात हमने और शुरू की जो पिछली बार नहीं के थी। हम में एक नीचे लेट जाती थी और एक चूचियों के ऊपर अपने हाथ से अपनी चूत चौड़ी कर के नीचे वाली की चूची के निप्पल को अपनी चूत के अंदर लेतीं थी और निप्पल को अपनी चूत के पानी से गीला कर देती थी , और फिर अपनी चूत के इस पानी को निपल के ऊपर से चूसती थी ।

“चूत गांड चूची कहीं कुछ करने के लिए रह ना जाए”। और फिर इस सेक्सी फिल्म का अंत हुआ एक दूसरी के ऊपर मूतने से।

उस दिन और तो कुछ होना नहीं था, यही कुछ करते करते सारा दिन निकल गया।

शाम को खाना जल्दी खा लिया।

रजनी ने सुझाव दिया की क्यों की आज सरोज अकेली है – ना संतोष है ना राकेश – इस लिए वो हमारे ही साथ सो जाएगी।

“सुझाव सर्वसम्मती से पास हो गया”। सरोज आज हमारे साथ ही सोने वाली थी, बड़े वाले कमरे में, नंगी।

“नंगी इस लिए कि जितने दिनों से हम यहां थी, एक दिन भी हमने रात को कपड़े नहीं पहने – जरूरत ही नहीं पड़ी “।

आज घर में तीन गायें थी और एक सांड। गायें चुदाई नहीं चाहती थी। गायों ने एक दूसरी की फुद्दी गांड चाट चाट कर तस्सली कर ली थी I पर अगर सांड मस्ती में आ गया और गायों को चोदने का उसका मन किया तो?

“मेरे मन में ये ख्याल आया और मैंने रजनी और सरोज के सामने ये ख्याल रख दिया”।

रजनी और सरोज ने एक दुसरे की तरफ देखा। फिर कुछ सोच कर सरोज ही बोली, “देखो बहनो, माना की हमारी चुदाई बड़ी ही मस्त हो चुकी है और आज हमारी चुदाई की कोई इच्छा नहीं। मगर एक बात सोचो अगर घी को आग के पास लाया जय तो क्या होगा”?

“घी पिघल जाएगा” मैंने जवाब दिया।

“बिलकुल सही” सरोज ही बोली,” तीन तीन नंगी फुद्दियों और सख्त चूतड़ों को देख अगर दीपक का लंड खड़ा हो गया और दीपक ने चुदाई की इच्छा जताई तो चुदाई करवा लेंगीं – करवानी ही चाहिए। ऐसी सूरत में चुदाई से मना करना खुदगर्ज़ी होगी। हां अपनी तरफ से हम उसे चोदने के लिए नहीं कहेंगी, क्यों रजनी जीजी आप का क्या ख्याल है”?

रजनी बोली, “बिलकुल ठीक। हम आज रात चुदाई ना करवाने की बात ही तो कर रही हैं। चूत और गांड पर ताले तो नहीं जड़ दिए”?

सब हंस पडी।

सरोज ही बोली,थी” तीन तीन नंगी फुद्दियों और सख्त चूतड़ों को देख अगर दीपक का लंड खड़ा हो गया और दीपक ने चुदाई की इच्छा जताई तो चुदाई करवा लेंगीं – करवानी ही चाहिए। ऐसी सूरत में चुदाई से मना करना खुदगर्ज़ी होगी। हां अपनी तरफ से हम उसे चोदने के लिए नहीं कहेंगी,

बिलकुल वही हुआ जिसका अंदेशा था। दीपक आ गया नंगा, खड़े लौड़े के साथ।

आते ही पूछा, “क्या ? आज चुदाई की छुट्टी है “?

सरोज बोली, “छुट्टी का क्या मतलब, हम तीनों तो तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहीं थीं”। सरोज ने हमारी और देख कर एक आँख दबाई I “मगर आज हम कुछ नहीं करेंगी। जो करना है जैसे करना है तुमने करना है। जैसे चोदना है तुमने चोदना है। आज तुम्हारी मर्जी चलेगी, बस फिल्म का एक आख़री सीन हमारी मर्ज़ी का होगा “।

मुझे हैरानी हुई सरोज की बात सुन कर। “आख़री सीन “? अब ये “आख़री सीन” क्या बला है ?

मैंने हल्के से सर घुमा कर रजनी की तरफ देख इशारों इशारों में पूछा, उसने भी इशारे से बताया, “पता नहीं ”।

“तो फिर ठीक है”, दीपक बोला, “आ जाओ लंड चूसो मेरा लौड़ा बारी बारी से। फिर देखते हैं आगे क्या करना है”।

दीपक लेट गया, हमने बारी बारी से उसका लंड चूसा। लंड सख्त हो चुका था।

“हम तीनो बारी बारी से उसके लंड पर बैठी”।

दीपक ने कहा, “बस अब और मत तरसाओ। फुद्धियां खोलो और लंड लेने के लिए तैयार हो जाओ अब रगडूंगा”।

“हम तीनो एक लाइन में लेट गयी। एक तरफ सरोज। बीच में मैं और मेरी बगल में रजनी”।

दीपक ने सब से पहले सरोज की टांगें अपने कंधों पर रक्खी और ऊपर की तरफ उठा दी। सरोज के चूतड़ ऊपर उठ गए, साथ ही उसकी चूत भी ऊपर उठ गयी। दीपक ने लंड सरोज की चूत के अंदर डाला और बिना देर किये धक्के लगाने शुरू कर दिए ।

“गाड़ी ने आज लम्बा सफर तै करना था इस लिए इधर उधर की चूसा चुसाई ऊंगलीबाजी में वक़्त नहीं बर्बाद किया जा सकता था” ?

सरोज ज़बरदस्त तरीके से नीचे से चूतड़ घुमा रही थी और ऊपर नीचे भी कर रही थी ।

मस्त चुदवाती है सरोज। “मैं भी अब से ऐसे ही चुदाई करवाऊंगी पंकज से। पंकज तो हैरान ही रह जायेगा जब उससे चुदाई करवाते हुए ऐसे चूतड़ घुमाऊंगी”।

सरोज के बाद दीपक ने मुझे और रजनी को चोदा। दीपक अभी तक झड़ा नहीं था – झड़े तो हम भी नहीं थे। चूत का पानी तो हमारा भी नहीं छूटा था और गांड का छेद अभी भी फड़फड़ा रहा था। ।

इस तरह लेट के चुदाई करवाने के बाद चुदाई के अगले दौर के लिए के लिए हम कुहनियां बेड के किनारे रख कर, घोड़ी की तरह चूतड़ पीछे कर के खड़ी हो गयीं। मेरे बाएं सरोज और मेरे दाएं रजनी – मैं बीच में।

दीपक ने बारी बारी से हमारी चूत और गांड दबा कर चोदी।

“अब हम गर्म होने लग गयीं थी। चूतें हमारी पानी छोड़ने लग गयी थीं”।

जब दीपक सरोज की चूत – या हो सकता है गांड – चोद रहा था तो मैंने धीरे से रजनी के कान में कहा। “रजनी आज दीपक वियाग्रा की गोली खा कर आया लगता है जो झड़ ही नहीं रहा”। कहां तो हम सोच रही थी की आज चुदाई नहीं करवाएंगी, अब हालत ये थी कि हमारी चूतें पानी छोड़ने लग गयी थे और छप्प छप्प पट्ट पट्ट छप्प छप्प की आवाज के साथ चुद रही थी ।

मैं फुसफुसाई ,”लगता है सरोज गरम है, बड़े ही जोर जोर से चूतड़ आगे पीछे कर रही है”।

अभी मैं और रजनी बात कर ही रहीं थीं कि सरोज ने एक सिसकारी ली ,”उईईई मां….. निकल गया मेरा, दीपक लगा कस के धक्के लगा। जान निकाल आज – रगड़ मेरी चूत को…. चोद मुझे…. आआआआह, आआआह, दीपक मजा आ गया। जीजी…… गई मैं आआआह “। और सरोज धड़म से आगे बेड पर लेट गयी। दीपक का लंड अपने आप ही सरोज की चूत से बाहर निकल गया”।

दीपक अब मेरे पीछे आ गया। मेरी कमर पकड़ कर मेरे चुदाई शुरू कर दी। कभी चूत कभी गांड।

“जैसा दीपक लंड सख्त हुआ पड़ा था पक्का ही उसने वियाग्रा खाई थी “। मोटा सख्त लंड, ऊपर से फूला हुआ सुपाड़ा – सोने पर सुहागे वाली बात थी।

मैंने दीपक से कहा, “दीपक गांड रगड़ो आज”।

“लगता था गांड चुदवाने का चस्का पड़ गया था मुझे “।

दीपक गांड चोद रहा था – धुआंधार – मैं चूत का दाना रगड़ रही थी। चूतड़ों को जोर जोर से हिला हिला कर आगे पीछे कर रही थी। कुछ ही देर की गांड चुदाई और चूत के दाने की मालिश से मैं भी झड़ गयी और सरोज की बगल में ही ढेर हो गयी।

अब दीपक रजनी के पीछे था।

पता नहीं कितना चुदी रजनी भी। मैं और सरोज तो निढाल पड़ी थी।

तभी दीपक और रजनी की इक्क्ठी सिसकारियां निकली, “आआआआआह…… रजनी …..निकल गया मेरा पानी….. झड़ गया मेरा लंड”। दीपक के जोरदार धक्कों की आवाजे आ रही थीं,”धप्प धप्प ….. छप्प छप्प…. पट्ट पट्ट…..छप्प छप्प….धप्प धप्प “।

“रजनी की सिसकारियां दीपक की सिसकारियों में गुम हो गयी हो गई”।

कुछ रुकने के बाद दीपक ने लंड निकला और जा कर सोफे पर बैठ गया। हम तीनो ही बेड पर लेट गयी।

जब दम आया तो सरोज उठी और बोली। “चल दीपक अब फिल्म का आख़री सीन भी पूरा कर लें”। हमारी तरफ देख बोली “चलो रजनी जीजी आभा जीजी, तुम लोग भी उठो”।

सब खड़े हो गए और सरोज की अगले “आदेश” का इंतज़ार करने लगी।

सरोज बोली, “चलो सब बाथ रूम में”।

मैंने सोचा, तो ये मूतना है आख़री सीन। “पर ये तो हम पहले भी कर चुके हैं। इन मर्दों पर मूत भी चुके हैं इनसे मुतवा भी चुके हैं – और आपस में मूता मुताई तो की ही है”।

सरोज ने दीपक से कहा दीपक लेट जाओ आज, “तुम्हें गरम पानी से स्नान करवाएं”।

दीपक आज्ञाकरी बालक की तरह लेट गया।

हम टांगें चौड़ी कर उसके ऊपर अपनी चूतें खोल कर खड़ी हो गयी। खड़ी होने का क्रम भी वही था। सरोज खड़ी हुई दीपक के मुंह के ऊपर, मैं बीच में और रजनी दीपक के लंड ऊपर। सरोज का मुंह मेरी तरफ था।

सरोज बोली, “जब तक मैं ना कहूँ मूतना मत “।

ठीक है, “मैं और रजनी इक्क्ठे बोली”।

मैंने सरोज को कस के पकड़ लिया। रजनी ने हम दोनों को पकड़ लिया। हमारी चूचियां एक दूसरी के साथ दब रहीं थी।

तभी सरोज बोली,” एक ..दो..तीन…….मूतो”।

और दीपक पूरा गर्मागर्म मूत से नहा गया।

तो ये था फिल्म का “The End – सुखद अंत – हैपीज़…..एंडिंग्ज़ “।

दीपक को अपने पेशाब का स्नान करवा कर उसे उठाया और फिर हमने सबने अच्छे से स्नान किया। दीपक को बढ़िया से आगे पीछे – लंड के आस पास, टट्टों के नीचे, चूतड़ों की दरार के अंदर – सब जगह साबुन लगा कर हम तीनों ने अच्छे से धोया। तौलिये से पोंछ कर पानी सुखाया और एक एक चुम्मी उसके होठों पर और एक एक चुम्मी सब ने उसके लंड पर की और शुभ रात्री – गुड नाईट – की और वो अपने कमरे की और चला गया।

“अगर बेड और बड़ा होता तो उसे अपने साथ ही सुला लेते”।

फिर ऐसा ही ऐसे हम तीनों ने एक दूसरी की सफाई की । सारी जगहों को – चूचियों के बीच चूत में, चूत के दोनों तरफ, चूतड़ों की दरार में अच्छी तरह सफाई की, एक दूसरी को तौलिये से साफ़ किया और बिस्तर पर लेट गयी।

एक दूसरी पर हाथ फेरते फेरते न जाने कब नींद आ गयी।

करनाल में पांचवां दिन

सुबह सब से पहले मैं जब उठी तो सरोज और रजनी दोनों सोई हुई थी। मैं बाथ रूम गयी और फ्रेश होकर किचन में चाय बनाने चली गयी – नंगी ही।

मैं चाय बना कर लाई और बेड पर बैठ कर नंगी सरोज और रजनी दोनों की चूचियों को सहलाया, चूतों पर हाथ फेरा और उनको जगाया।

वो उठी, अभी भी आलस में थी।

मेरे हाथ में ट्रे देख कर सरोज बोली, “जीजी आप क्यों चाय बना कर लाई, मुझे क्यों नहीं जगाया”।

“अरे तो क्या हुआ “, तूने हमारा इतना ध्यान रखा, चूत और गांड को लंडों की कमी नहीं होने दी – मैंने चाय बना दी तो क्या हुआ”।

चाय पी कर हम तीनो बाथ रूम गए और सब काम कर के, नहा धो का बाहर निकलीं ।

दीपक अभी भी सोया हुआ था, नंगा ही।

मैं और सरोज चाय ले कर उसके कमरे में पहुंची। सरोज ने बड़े प्यार से उसका लंड मुंह में लिया और चूसने लगी। दीपक की जाग भी खुल गयी। देख कर ही लगता था की अभी और सोना चाहता है।

“तीन तीन देवियों को चोदना – उनकी चूत को ठंडा करना – हर के बस की बात नहीं है”।

खैर दीपक उठ गया। चाय पी कर बाथ रूम में चला गया।

हम लोगों ने भी कपड़े पहने और रसोई में नाश्ते की तैयारी करने लगे।

नाश्ता करते करते दीपक बोला, “मैं थोड़ी देर में खेतों पर चला जाऊंगा। आज शहर जाना है, संतोष से पूछ लूंगा कुछ लाना तो नहीं ? रात शहर में रहूंगा और कर सवेरे तीनों लौंडों बंटी सन्नी और मोनू को साथ ही ले के आऊंगा”।

“लौंडे – तो उनके नाम बंटी सन्नी और मोनू हैं – हमारे नए चुदकड़ खलीफे ” I

सरोज बोली, “दीपक संतोष को बोलना आज जल्दी आ जाएगा”।

“ठीक है” और दीपक हंस कर चला गया।

“मैं संतोष से चूत चुदाई के ख्यालों में डूब गयी”।

ऐसे ही इधर उधर डोलते, घूमते, लेटते चूत चूचियों और गांड की चूमा चाटी करते करते शाम के चार बज गए।

साढ़े चार बजे संतोष आ गया। आते ही सब को नमस्ते कर के बाथ रूम में घुस गया। शेव कर के नहा धो कर तैयार हो कर बाहर निकला और सरोज के पास बैठ गया। सरोज के होठों पर एक चुम्मी ली और उसकी चूचियों और चूत को सहलाया और पूछा, “कैसी है मेरी जान, कैसे गुज़रे दो दिन” ? “बढ़िया”, सरोज ने भी संतोष के लंड पर हाथ फेरते हुए कहा I

“पति हो तो सतोष जैसा। पत्नी हो तो सरोज जैसी। कितना प्यार और तालमेल है दोनों पति पत्नी में “।

सरोज ने बात जारी रक्खी ,”और आज का दिन यादगार वाला दिन बनाना है। दो तीन दिनों में रजनी जीजी और आभा जीजी ने वापस चले जाना है, इनकी खातिर में कोइ कमी नहीं रहने देनी। रजनी जीजी तो आती रहेंगी, आभा जीजी पता नहीं कब आएंगी “।

सतोष ने मेरी और देख कर कहा, “तो मतलब है आज आभा का ख़ास ध्यान रखना है ” ?

सब हंस पड़े सिवाए मेरे।

“मेरी तो चूत कुलबुलाने लगी थी”।

मेरी तो आँखों के आगे संतोष का मोटा लंड घूम रहा था। रजनी जैसी चुदाई का ख्याल मेरे दिमाग़ को सुन्न किये जा रहा था। ना मुझे कुछ सुनाई दे रहा था ना कुछ सुझाई दे रहा था – बस संतोष का लंड और ज़बरदस्त चुदाई ही ख्यालों में थी ।

छः बजे संतोष अपने कमरे में चला गया।

संतोष बोली, “मैं आती हूँ, संतोष को व्हिस्की का पेग बना कर दे आऊं, पूछ भी लूंगी कब आये आभा जीजी “।

मैंने बीच में ही सरोज की बात काटी,”मैं ही क्यों, हम सब चलेंगे – तीनो”।

रजनी बोली हम क्या करेंगी, में तो चुद चुकी संतोष से – मस्त चुदाई हो चुकी मेरी तो, और सरोज का तो घर ही है ये। घर भी यहीं घरवाला भी यही। जब चाहो चुदवा लो “।

मैंने कहा, “जो तुमने दोनों ने वहां ना रह कर दूसरे कमरे में करना है वही वहां कर लेना। और संतोष कोइ दीपक से कम तो नहीं – चूत चोदने में तो दीपक से इक्कीस ही है उन्नीस नहीं।

“अगर दीपक हम तीनो मस्त चुदाई कर के हमारी तीनों की तस्सली कर सकता है तो संतोष क्यों नहीं “।

रजनी और सरोज दोनों हंस पड़ी, “मतलब हां, ठीक है “।

सरोज संतोष का व्हिस्की का पेग बंनाने और प्रोग्राम पूछने चली गयी।

रजनी बोली, “आभा दो तीन दिनों में हम वापस चली जाएंगी, मगर करनाल का ये ट्रिप हमेशा याद रहेगा। अब जा कर चुदाई पिलाई छोड़ कर पढ़ाई करनी है – नंबर कम नहीं आने चाहिए, नहीं तो लंड ढंग का और मनमर्जी का नहीं मिलेगा।

“बात तो एकदम दुरुस्त ही थी रजनी की “।

संतोष ने एक ही घूंट में गिलास खाली किया, लंड मेरे मुंह से निकाला, मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया ।मैं संतोष का मोटा लंड अपनी चूत में महसूस करने के लिए बेचैन हो रही थी ।

करनाल का पांचवां दिन

अब तक आपने पढ़ा – सरोज संतोष का व्हिस्की का पैग बनाने और चुदाई का प्रोग्राम पूछने जा चुकी थी।

रजनी और मैं बातें कर रही थीं। रजनी बोली, “आभा दो तीन दिनों में हम वापस चली जाएंगी, मगर करनाल का ये ट्रिप हमेशा याद रहेगा। अब जा कर चुदाई पिलाई छोड़ कर पढ़ाई करनी है – नंबर कम नहीं आने चाहिए, नहीं तो मनमर्जी वाला लंड का नहीं मिलेगा।

“बात तो एकदम दुरुस्त थी ही रजनी की “।

अब आगे —- मैं और रजनी बैठी थीं। हमने ये तय कर लिया की करनाल की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद अब पढ़ाई की तरफ ध्यान लगाना है। नंबर किसी सूरत में कम नहीं आने चाहिए।

“अच्छी कमाई घर लाने वाला और अच्छी चुदाई करने वाला पति तभी मिलेगा “।

तभी सरोज आ गयी और पूछा, “तैयारी है आभा जीजी” ?

“तैयारी क्या करनी है सरोज ” ? रजनी बोली, ” कपड़े ही तो उतारने है और टांगें उठानी है, बाकी जो करना है वो तो संतोष ने ही करना है”। और वो हंस दी।

“तो फिर उतारो कपड़े”, सरोज बोली, “चलते हैं, शुभ काम में देर कैसी” ?

“यहीं उतारें ” ? मैंने सकुचाते हुए पूछा।

“तो और क्या ” सरोज बोली। “संतोष के मैं कपड़े मैं उतार आयी हूं – लंड सहला भी आयी हूं, चूस भी आयी हूं। खड़ा होना शुरू हो गया है, बाकी का काम आभा जीजी कर देंगी “।

हम लोगों ने कपड़े उतरे और एक कतार में सरोज के कमरे की तरफ बढ़ने लगी। आगे आगे सरोज, उसके पीछे रजनी और सब से पीछे मैं। कमरे में पहुंच कर सब से पहले मेरी नज़र संतोष के लंड पर पड़ी – मस्त था, मोटा ताजा। खड़ा भी हो चुका था। अब खाली सख्त ही करना था – और सब तैयार – चुदाई चालू ।

हम तीनो नंगी बेड पर बैठ गयीं।

संतोष के एक हाथ में गिलास था दूसरा हाथ लंड सहला रहा था। संतोष धीरे धीरे गिलास में से व्हिस्की की चुस्कियां ले रहा था।

जैसे ही गिलास खाली हुआ, सरोज उठी और बोली ,”मैं नया पैग बना कर लाती हूं, चलो आभा जीजी आप अपना काम शुरू करो”।

मैं उठी और जा कर संतोष की गोद में जा कर बैठ गयी।

“नीचे मेरी गांड पर संतोष का खड़ा लंड रगड़ खा रहा था”।

मैंने संतोष के होंठ अपने होठों में ले लिए और चूसने लगी। संतोष ने भी मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। संतोष का एक हाथ मेरे कमर के पीछे था और एक हाथ मेरी चूचियों पर। संतोष मेरी चूची का निपल मसल रहा था। “बड़ा मजा आ रहा था”।

कुछ देर हम ऐसे ही चूसा चुसाई करते रहे।

सरोज पैग बना कर ले आई थी और खड़ी इंतज़ार ही कर रही थी की कब हमारे होंठ अलग हों और कब वो संतोष के हाथों में पैग पकड़ाए।

“मेरी गांड के नीचे संतोष का लंड और ज़्यादा सख्त हो रहा था”।

मैंने अपने होंठ संतोष के होठों से अलग किये और उठ कर फर्श पर बैठ गयी। संतोष का मोटा लंड मैंने अपने मुंह में ले लिया और सुपाड़े के छेद पर जुबान फेरने लगी। संतोष का लंड एक दम फनफना उठा। सरोज ने व्हिस्की का गिलास संतोष के हाथों में दिया और बेड पर जा कर रजनी के साथ ही बैठ गयी।

तीन चार हल्के हल्के घूंट लेने के बाद संतोष ने एक ही घूंट में गिलास खाली कर दिया। लंड मेरे मुंह से निकाला, मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। सरोज और रजनी दोनों बेड से उठ गयीं।

” मैं संतोष का मोटा लंड अपनी चूत में महसूस करने के लिए बेचैन हो रही थी “।

सरोज मोटा तकिया ले कर आयी और मेरी कमर के नीचे रख के मेरे चूतड़ ऊपर उठा दिए । मेरी चूत भी ऊपर उठ गयी। मैंने अपनी टांगें उठा कर फैला दी।

संतोष ने जांघों से पकड़ कर मेरी टांगें चौड़ी कर दी। “पक्का ही संतोष को मेरी फुद्दी का गुलाबी छेद चूत की फांकों के बीच में दिखाई दे रहा होगा “।

आननफानन में संतोष ने अपना मोटा लंड एक ही झटके से लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। “आआआआआह ” मेरी सिसकारी निकल गयी।

थोड़ा चोदने के बाद संतोष उठा और मेरी फुद्दी का दाना चूसने लगा – साथ ही संतोष नीचे से हाथ डाल कर गांड में भी उंगली कर रहा था।

“मस्ती के मारे मेरी हालत खराब हो रही थी”।

मेरे चूतड़ अपनेआप ही हिलने शुरू हो गए। संतोष समझ गया अब मैं पूरी चुदाई चाहती हूं – फुल स्पीड वाली। वो उठा, मेरी टांगें चौड़ी की, अपने लंड का सुपाड़ा मेरी फुद्दी के छेद पर रक्ख़ा और फच्च की एक आवाज के साथ अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।

” चुदाई शुरू हो गयी – पूरी चुदाई – फूल स्पीड वाली चुदाई – लगातार नॉन स्टॉप वाले धक्के”।

मेरे कंधों के पीछे से हाथ डाल कर मुझी भींच लिया और जो उसने ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए। मुझे लगा मैं जन्नत कि सैर कर रही हूँ । इतना कस के पकड़ा हुआ था संतोष ने मुझे कि मैं अपने चूतड़ भी नहीं हिला पा रही थी। बस अपनी चूत को कभी टाइट कर रही थी कभी ढीला छोड़ रही थी।

अगले बीस मिनट संतोष ने मेरा कचूमर निकाल दिया”। पानी पानी हो गयी मेरी चूत। मेरी चूत में से चुदाई में आवाज़ें आने लग गयी, फच्च फच्च फच्च….फच्च फच्च फच्च ।

“अब मैं झड़ने को थी। मजा कभी भी आ सकता था – चूत का पानी कभी भी छूट सकता था”।

संतोष की चुदाई लगातार चल रही थी। तभी मुझे लगा की अब मेरी चूत मजे वाला पानी छोड़ने वाली है। मैंने संतोष को कस कर पकड़ लिया और चूतड़ हिलने की कोशिश करने लगी।

संतोष समझ गया की मेरा काम होने ही वाला है। उसने एक दम से धक्कों की स्पीड बढ़ा दी – और तभी मैं छूट गयी।

एक सिसकारी निकली मेरे मुंह से, “आआआआह संतोष चुद गई मैं, झड़ गयी मैं…..आआआह……आआआआह…….आआआआह…..उईईई……उईईई….आआह…..संतोष। सरोज…..रजनी…..मजा आ गया। निकाल दिया मेरी चूत का पानी संतोष ने। आआआआह…..ऊऊऊ…ओह्आ……आआआह I “मजे में पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी मैं।

संतोष ने धक्के लगाने बंद कर दिए लेकिन वो अभी भी नहीं झड़ा था। मैं उसका खड़ा सख्त लंड अपनी चूत में महसूस कर रही थी।

थोड़ी देर मेरे ऊपर वैसे ही लेटने के बाद, संतोष ने खड़ा लंड बाहर निकाला और सोफे पर बैठ गया।

पांच सात मिनट के बाद जब मैं कुछ हिली तो सरोज मेरे पास आयी, “कैसा लग रहा है आभा जीजी “।

“स्वर्ग की सैर करवा दी सरोज आज तेरे संतोष ने – क्या मस्त चोदता है। मजा ही आ गया”।

सरोज मेरे पास ही बैठ गयी और रजनी से बोली, “रजनी जीजी तुम संतोष के लंड का ध्यान रखो, मैं जरा आभा जीजी की चूत को अगले दौर के लिए तैयार कर दूं।

सरोज मेरी चूत चूसने लगी और रजनी संतोष का लंड चूसने लगी।

एकाएक रजनी उठी और संतोष का लंड अपने हाथ में ले कर अपनी चूत पर रक्खा और उस पर बैठ गयी। लंड रजनी की चूत के पूरा अंदर था। रजनी कि पीठ संतोष कि तरफ थी। संतोष ने भी पीछे से हाथ डाल कर उसकी चूचियां पकड़ ली।

इधर सरोज घूमी और अपने चूत मेरे मुंह पर लगा दी। अब सब व्यस्त थे।

“रजनी संतोष का लंड अपनी चूत में ले कर बैठी थी। मैं और सरोज एक दूसरी की फुद्धियाँ चूस चाट रही थी। सरोज की चूत गीली हो रही थी और मेरी चूत तो थी ही गीली”।

मेरी चूत फिर से गरम होने लगी और मेरे चूतड़ हिलने शुरू हो गए।

“समझदार को इशारा ही काफी होता है – सरोज समझ गयी कि मैं चुदाई करवाने के अगले दौर के लिए तैयार हूं”।

सरोज मेरे ऊपर से उतर गयी, रजनी ने जब देखा सरोज मेरे ऊपर से हट गयी है तो वह भी संतोष की गोद से खड़ी हो गयी। संतोष का खम्बे जैसा लंड रजनी की फुद्दी से बाहर आ गया। रजनी ने बड़े ही प्यार से संतोष के लंड को देखा और एक बढ़िया सा चुम्मा संतोष के लंड के सुपडे पर जड़ दिया।

संतोष खड़ा हो गया। उसका फूला हुआ लंड बिलकुल सीधा था।

संतोष फिर से मेरे ऊपर आया, मेरी टांगें चौड़ी की और लंड फच्च की एक आवाज के साथ पूरा अंदर डाल दिया।

“लगता है सरोज ने सब कुछ पहले से ही तै किया हुआ था “।

इस बार कि चुदाई से लग ही रहा था कि संतोष अपना लेसदार सफ़ेद गर्म वीर्य मेरे अंदर छोड़ेगा। मुझे भी अब इच्छा हो रही थी कि संतोष मेरी चूत को गर्मागर्म पानी से भर दे।

”पता नहीं कितनी देर चली वो तबाड़तोड़ चुदाई”।

मेरी चूत कि मस्त रगड़ाई ने मेरा दिमाग़ सुन्न कर दिया था। मेरे लिए चूतड़ हिलने मुश्किल थे लेकिन मैं फिर जोर लगा लगा कर चूतड़ हिला रही थी। मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने संतोष को कस के पकड़ लिया और अपनी गांड ऊपर नीचे करने कोशिश करने लगी।

संतोष के ध्क्के लम्बे हो गए थे। फच्च थच्च फच्च थच्च फच्च थच्च कि आवाजें आ रही थी।

अचानक से मेरी चूत का नमकीन पानी छूट गया। मेरे मुंह से फिर सिसकारियां निकल रही थी आआआह …आआआआह …आआआआह…उईईई…उईईई…आआ….आआआआह….ऊऊऊओह्आ….
आआआह “।

और तभी संतोष ने एक लम्बी हुंकार – आआआआह सरोज …….ओओओहहहह सरोज – के साथ मेरी चूत गरम मलाई के साथ भर दी।

संतोष चोद मुझे रहा था और जब मजा आया तो याद सरोज को किया। “ऐसा होता है पति पत्नी का सच्चा प्यार “।

थोड़ा ऐसे ही लेटने के बाद संतोष ने लंड मेरी चूत से बहार निकल लिया। पूरा गीला। मेरी चूत और उसकी अपनी मलाई से सना हुआ। संतोष जा कर सोफे पर बैठ गया।

सरोज उठी और जा कर अपने प्यारे प्यारे पति का लंड चूसने चाटने लगी।

रजनी मेरी चूत चाटने लगी। सपड़ सपड़ कि आवाजों के साथ मेरी चूत का सारा पानी साफ़ रही थी।

साफ़ क्या कर रही थी सपड़ सपड़ करके पी ही रही थी – मैं भी तो ऐसे ही करती हूं। सरोज भी ऐसे ही करती है । सारी लड़किया ही ऐसा करती हैं।

“चूत और लंड से निकला हल्का नमकीन पानी चाटने और पीने का भी अपना ही मजा है”।

सरोज ने संतोष का लंड चाट चाट कर साफ़ कर दिया और इधर रजनी ने मेरी चूत चाट चाट कर साफ कर दी। सरोज उठी, संतोष के होठों पर कस के एक चुम्मा दिया और पैग बनाने लगी।

पैग संतोष के हाथ में पकड़ा कर बोली, “संतोष अब तुमने हम तीनो को चोदना है – मगर अपना पानी इस बार भी आभा जीजी की चूत में ही छोडना है। आज कि तुम्हारी चुदाई केवल आभा जीजी के लिए है। मैं और रजनी तो बस साथ देने के लिए हैं। फिर रजनी कि तरफ देख कर बोली, “क्यों जीजी ” ?

रजनी ने भी सरोज कि हां में हां मिलाई ,”हां मैं तो संतोष से चुदाई करवाने के मजे ले ही चुकी हूं। जब से मैंने आभा को बताया कि संतोष मस्त चूत चुदाई करता है तभी से ये आभा संतोष का लंड लेने लिया उतावली हो रही थी”।

संतोष हल्के से हंसा और मेरी तरफ देख कर बोला ,” आभा को कोइ शिकायत का मौका नहीं मिलेगा ” फिर कहा ,”आभा कोइ थोड़ी सी भी चुदाई में कसर रह जाए तो बताना – एक चुदाई और कर दूंगा”।

सब हंस पड़े। मैंने भी हंसते हुए कहा, ” नहीं संतोष, उसकी जरूरत नहीं पड़ने वाली। तुम्हारा चोदना एक दम अव्वल है – फर्स्ट क्लास – मस्त। नीचे वाली की तस्सली कर के ही तुम अपना लंड बहार निकालते हो और नीचे उतरते हो।

सब एक बार फिर हंसी। सतोष बोला, तो फिर हो जाओ तैयार अगली चुदाई के दौर के लिए।

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