असलम के साथ हुई मस्त गांड और चूत चुदाई के बाद मालिनी के पास बस असलम को शादी के लिए हां करने के लिए मनाना बाकी था। कैसे रबड़ के लंड असलम को दिखा कर मालिनी ने असलम को मनाया, अब ये जानिये।
मैंने घंटी बजाई और प्रभा को फिर से चाय के लिए बोल दिया। ड्राइवर शंकर कही इधर-उधर ना खिसक जाए, इसलिए जब प्रभा चाय लेकर आयी तो मैंने प्रभा को शंकर को बुलाने के लिए कहा।
मैंने चाय का कप असलम के हाथ में पकड़ाया। तभी क्लिनिक के बाहर वाले से दरवाजे से शंकर आया और बोला, “जी मैडम, आपने बुलाया?”
मैंने शंकर से कहा, “शंकर आधे घंटे बाद इनको”, मैंने असलम की तरफ इशारा करके मैंने कहा, “इनको होटल छोड़ आना।”
“जी अच्छा” कह कर शंकर चला गया।
फिर मैंने असलम से पूछा, “असलम तुमने अपनी अम्मी की पूरी टेप सुनी। उन्होंने बड़े अच्छे से सारी बात मुझे बताई है। अब मुझे तुम ये बताओ जो कुछ तुम्हारी अम्मी ने कहा, क्या तुम दोनों में चुदाई का सिलसिला बिल्कुल हूबहू वैसा ही तुम दोनों के बीच शुरू हुआ, और यहां तक पहुंच गया?
असलम ने कहा, “जी हां मैडम, अम्मी की बताई सारी बातें एक-दम सच हैं। जो कुछ भी मेरे और अम्मी के बीच हुआ वो बिल्कुल वैसा ही हुआ जैसा की अम्मी ने आपको बताया है।”
मैंने कहा, “असलम बाकी बातें तो मैं कल तुम दोनों से तुम्हारे और तुम्हारी अम्मी के सामने करूंगी, अभी की लिए तुम मुझे साफ़-साफ़ बस इतना बताओ कि तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि तुम्हारी अम्मी तुम्हारी शादी के बाद ऐसी खुश नहीं रह पाएगी जैसी वो अब है?”
असलम को चुप देख कर मैंने फिर पूछा, “क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि तुम्हारी दुल्हन आने के बाद तुम अपनी अम्मी की चुदाई नहीं कर पाओगे और तुम्हारी अम्मी चुदाई के लिए तरसेगी?”
फिर असलम खुल कर बोला, “मैडम आप ही बताईये क्या ऐसा नहीं होगा? क्या घर में बीवी के रहते मैं अम्मी के चुदाई कर पाऊंगा?”
असलम एक पल के लिए चुप हुआ फिर बोला, “पापा के गुजर जाने के बाद अगर अम्मी कि चुदाई शुरू ही ना हुई होती तो बात अलग थी। अब अम्मी जमाल का लंड ले चुकी है, और अब मुझसे भी मस्त चुदाई करवाती है। और अब तो अम्मी को तो लंड लेने की और मस्त चुदाई करवाने की आदत पड़ चुकी है। आप ही बताईये अम्मी बिना चुदाई करवाए वो कैसे रह पाएगी?”
असलम बोल रहा था, “और ये भी तो सोचिये मैडम अगर मैंने शादी के बाद अम्मी को ना चोदा और कहीं अम्मी ने चूत की आग ठंडी करने के लिए इधर-उधर से चुदाई करवा ली, तो क्या होगा – क्या हो सकता है?”
मुझे इसी बात का अंदेशा था और मैं असलम से ऐसी ही किसी जवाब की उम्मीद कर रही थी।
मैंने फिर कहा, “असलम मैं ये नहीं कहती कि जो कुछ तुम अपनी अम्मी के बारे में सोच रहे हो गलत है। उल्टा मैं तुम्हारे जज़बातों की कदर करती हूं कि तुम्हें अपनी अम्मी कि इतनी फ़िक्र है।”
“अब मेरी बात जरा ध्यान से सुनो। मैं उम्र के उस दौर से उजर रही हूं जिस उम्र से अभी तुम्हारी अम्मी नसरीन को गुजरना है। हमारे घरों की घरेलू औरतें 44-45 की उम्र के बाद एक-दम से ढलती हैं और जब 50 की होने लगती हैं तो उनका जिस्म और चूत दोनों फ़ैल चुके होते हैं और दोनों का बैंड बज चुका होता हैं। औरतें ऐसे लगने लग जाती हैं जैसे कोइ गेहूं से भरा ड्रम जा रहा हो।”
मैंने फिर कहा, “इस उम्र में हमारी घरेलू औरतों की हालत तो ये हो जाती है कि वो अपने आप को शीशे में देखने भी डरने लग जाती हैं। चुदाई के नाम से ही भागने लगती हैं या ये कह लो कि उनकी चूत गरम ही नहीं होती। चूत लंड मांगती ही नहीं और ये थुलथुली औरतें लंड देख कर ऐसे आंखें बंद करती हैं जैसे भूत देख लिया हो।”
मेरी ये बात सुन कर असलम जरा सा हंसा और मेरे बात बीच में ही काटता हुआ बोला, “मैडम पर आपका तो ना जिस्म फैला है, ना ही चूत फ़ैली है, और ना ही गांड। आपके तो ना जिस्म का बैंड बजा है ना चूत का। आप गेहूं के ड्रम की बात छोड़िये, आप तो केले के पेड़ का चिकना तना लगती हैं। आप तो हर तरफ से ही कड़क हैं, हर तरफ से टाइट हैं ऊपर से भी, नीचे आगे से भी और पीछे से भी।”
असलम की इस बात पर मेरी भी हंसी छूट गयी।
मैंने असलम से कहा, “अच्छा ये बात है? तो आओ फिर मैं तुम्हें दिखाती हूं मैंने अपने आप को इतना फिट कैसे रखा हुआ है। क्यों मैं ऊपर से नीचे आगे से पीछे से टाइट हूं। क्यों मैं गेहूं का ड्रम नहीं बनी, क्यों अभी भी केले के पेड़ के चिकने तने की तरह हूं।”
इतना कह कर असलम को लेकर मैं क्लिनिक के पीछे के कमरे के साथ लगे दूसरे कमरे में ले गयी। ये कमरा एक जिम था और इसमें कई तरह की कसरत करने की मशीने थी।
मैंने असलम को बताया, “ये देखो असलम, ये मेरा जिम है। सुबह मैं पांच बजे उठती हूं, और आधा घंटा चालीस मिनट सामने वाले पार्क में सैर करती हूं। सात बजे मेरी एक पर्सनल ट्रेनर आती है जिसकी देख रेख में मैं सात से आठ बजे तक एक घंटा हल्की कसरत और स्वामी रामदेव वाला योगा करती हूं।”
“इसके बाद आठ बजे मेरी मालिश करने वाली आ जाती है जो मेरे पूरे शरीर की मालिश करती है।”
“पूरा शरीर मतलब पूरा शरीर। चेहरे की, पेट की, चूतड़ों की, चूत की और चूचियों की मालिश करती है जिससे इन जगहों पर चर्बी ना जमा हो पाए। यही कारण है कि मेरा शरीर अभी भी केले के पेड़ के तने की तरह चिकना है, और आगे से पीछे से सब कुछ टाइट है, तुम्हारी अम्मी नसरीन के जिस्म की तरह।”
फिर मैंने असलम के कंधे ओर हाथ रख कर कहा, “असलम तुम्हें क्या बताना, तुमने तो देखा ही है।”
यहां असलम थोड़ा सा मुस्कुराया, और साथ ही अपना मोटा लौड़ा अपनी पेंट में हिला कर ठीक किया।
मैंने फिर कहा, “असलम ये तो थी मेरी बात। तुम्हारी अम्मी नसरीन एक घरेलू किस्म की सीधी सादी औरत है। उसके पास ये सब तामझाम करने के लिए वक़्त नहीं है। कुछ सालों बाद वो अपने आप को ऐसा फिट नहीं रख पाएगी, जैसी वो इस समय है। इस बात का एहसास उसे होने लग गया है। ये भी एक कारण है कि वो अब तुम्हारे साथ चुदाई बंद करने का कर तुम्हारी शादी के लिए तुम पर दबाव डाल रही है।”
मैं बोल रही थी और असलम सुन रहा था, “चलो मान लिया नसरीन गेहूं का ड्रम ना भी बनी, तो भी पांच सात साल बाद जब नसरीन 50 की होने वाली होगी तो उसकी चुदाई करवाने की इच्छा तकरीबन खत्म हो चुकी होगी और तुम तब 29 के होगे। तुम्हारा लंड ऐसा ही होगा जैसा अभी है। तुम्हारा लंड तो तब भी टाइट चूत ढूंढेगा और तुम्हें भी मस्त चुदाई की जरूरत होगी।”
असलम पूरे ध्यान से मेरी बात सुन रहा था, “तब 29 की उम्र में हो सकता है तुम्हें वैसी टाइट चूत ना मिले जैसी अब मिल जाएगी। कारण बताऊं?”
असलम ने मेरी और देखा जैसे कह रहा हो “बताईये कारण।”
मैंने ही बात जारी रखते हुए कहा, “उस समय फिर अगर तुम्हारा इरादा शादी का बन गया तो 29-30 साल की उम्र में तुम्हें लड़की भी तो 25-26 या 27 की उम्र वाली ही मिलेगी। असलम क्या तुम्हें लगता है कि उस उम्र की लड़की आज के ज़माने में चुदी हुई नहीं होगी?”
“चलो ये चुदी हुई होने वाली बात भी एक मिनट के लिए छोड़ देते हैं। मान लेते है वो लड़की चुदी हुई नहीं होगी, मगर 25-27 साल की लड़की, लड़की नहीं औरत होती है। ऐसी औरत घर में घर के बाकी लोगों के साथ आसानी से ताल मेल भी नहीं बिठा पाती जितनी आसानी से 20-21 साल की लड़की बिठा लेती है।”
“अभी अगर तुम शादी के लिए हां करोगे तो तुम्हें भी इसी उम्र लड़की मिलेगी 20-21 साल की कुंवारी, सील बंद चूत वाली और वो तुम्हारी अम्मी के साथ तालमेल भी बैठा लेगी। लेकिन 25-26 साल की औरत अगर चुदी हुई नहीं भी होगी तो भी आसानी के साथ तुम्हारी अम्मी नसरीन के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएगी।”
मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “असलम मुझे तो तुम्हारी अम्मी की एक-एक बात – एक-एक लफ्ज़ सही लगा है। नसरीन का ये सोचना कि उम्र और वक़्त के साथ साथ इंसान के शौक और शरीर की जरूरतें बदलती हैं। इंसान को भी इनके साथ साथ बदलना पड़ता है, बदलना चाहिए। वक़्त के साथ ना बदलने वाला इंसान पिछड़ जाता है और जब उसे इस बात का एहसास होता है तो बहुत देर हो चुकी होती है।”
“मुझे तो नसरीन, तुम्हारी अम्मी एक बहुत ही सुलझी हुई औरत लगी है जो कल क्या हो सकता है वो आज ही समझ रही है।”
ये कह कर मैं चुप हो गयी, और असलम के जवाब का इंतज़ार करने लगी। असलम कुछ सोच रहा था। वो कुछ भी नहीं बोला।
मैं ही फिर बोली, “असलम अब आते हैं तुम्हारी दूसरी बात पर जिसका डर तुम्हें सता रहा है। तुम कह रहे हो बीवी के रहते तुम अपनी अम्मी की चुदाई नहीं कर पाओगे। तो फिर कहीं ऐसा ना हो के चूत की आग ठंडी करने के लिए तुम्हारी अम्मी किसी बाहरी मर्द से चुदाई के चक्कर में पड़ जाये।”
मैं कुछ रुक कर बोली, “असलम तुम्हारी इस बात का भी जवाब है मेरे पास।” ये बोल कर मैं कुछ पल के लिए चुप हो गयी।
असलम ने मेरी और देखा जैसे पूछ रहा हो, ”आप ही बताईये कैसे अपनी चूत की आग को ठंडा करेगी’?
असलम को इस तरह मेरी तरफ देखते हुए मैं बोली, “असलम तुम यही सोच रहे हो ना कि अगर तुम अपनी अम्मी की चुदाई नहीं भी करोगे, तो फिर वो कैसे अपनी चूत का पानी छुड़ाएगी, कैसी अपनी चूत की आग को ठंडा करेगी? मैं तुम्हें बताती हूं। ऐसे हालात में, जब तुम्हारी अम्मी को तुम्हारा मोटा लंड नहीं मिलेगा, मैं तुम्हारी अम्मी चूत का पानी छुड़ाने के लिए और मजा लेने के लिए क्या करेगी।”
ये कह कर मैं अंदर और अपना रबड़ के लंड वाला डिब्बा ले कर आ गयी और खोल कर असलम को दिखाते हुए बोली, “इससे काम चलायेगी।
असलम ने रबड़ का लंड हाथ में लिया और उलट-पलट कर देखा और बोला, “मैडम ये तो बिल्कुल खड़े हुए असली लंड जैसा ही महसूस होता हैं। असली लंड जैसा सख्त और मुलायम है और ये इसके ऊपर उभरी हुई धारियां भी ऐसी लग रही है जैसे खड़े लंड पर उभरी हुई नसें होती हैं।
मैंने कहा, “हां असलम रबड़ का ये लंड बिल्कुल असली लंड जैसा ही है और काम भी असली जैसा ही करता है, असली जैसा क्या असली से भी बढ़िया करता हैं।”
असलम लंड को उलट-पलट कर देख रहा था। मैंने फिर हंसते हुए कहा, “बस इसमें एक ही कमी है कि ये असली लंड की तरह गरम लेसदार पानी नहीं छोड़ता।”
मैंने असलम के हाथ से रबड़ का लंड लेते हुए कहा, “लाओ मुझे दो, मैं दिखाती हूं कैसे ये असली लंड से भी ज्यादा मजा देता हैं।”
ये बोल कर मैंने लंड के नीचे से बटन दबा कर लंड का वाईब्रेटर चालू किया और लंड वापस असलम के हाथ में पकड़ते हुए बोली, “देखो इसमें क्या हो रहा है। यही काम जब ये चूत के अंदर या गांड के अंदर करेगा तो सोचो औरत की चूत या गांड का क्या होगा, कैसा मजा आएगा।”
असलम लंड का कम्पन महसूस करते हुए हैरान हो रहा था।
मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “असलम मैंने शादी नहीं की। जवानी में बहुत लंड लिए। मगर कभी किसी रात को अगर चूत में खुजली मच जाये और मर्द आस-पास ना हो तो औरत क्या करे? तब ये लंड काम आता है। मैं भी इसी को चूत में डाल कर मजा लेती रही हूं। अब भी लेती हूं। चूत के मजे के लिए मैं ना कभी मर्द के लंड की मोहताज रही ना अब हूं।”
असलम रबड़ का लंड वापस मेरे हाथ में देता हुआ बोला, “मैडम ये तो कमाल के चीज है। सच ही चूत के अंदर डाल कर अगर ये ऐसा कम्पन करेगा तो चूत तो एक-दम ही पानी छोड़ देती होगी।”
मैंने जवाब दिया, ” बिल्कुल असलम इसके अंदर डालने से और वाईब्रेटर चालू करने से चूत जल्दी पानी छोड़ देती है और मजा भी बहुत ज्यादा आता है।”
फिर मैंने असलम से कहा, “असलम ऐसा ही एक लंड मैं नसरीन को देने वाली हूं जब तुम लोग कल या परसों यहां आओगे।”
फिर मैंने असलम के कंधे पर हाथ रख कर कहा, “ये तो एक तरह का है। मेरे पास अलग-अलग तरह के तीन हैं। एक चूत का दाना चूसने वाला, एक ये वाला जो तुम्हारे हाथ में है, और एक है जो गांड, चूत दोनों में जाता है और साथ ही चूत का दाना भी चूसता है।”
असलम बस इतना ही बोला, “कमाल है ये तो।”
मैंने फिर कहा, “असलम इससे से भी बड़ा एक कमाल और भी है।”
असलम मेरी तरफ देखने लगा।
मैंने ही कहा, “असलम ये रबड़ का लंड मैं तुम्हारे अम्मी नसरीन को भी दिखा चुकी हूं और नसरीन इन्हें अपने गांड, चूत में डाल कर के मजा भी ले चुकी है।”
मेरी ये वाली बात सुन कर असलम जरा सा कुर्सी पर हिला, और साथ ही अपना लंड भी पेंट में जरा सा हिला दिया।
मैंने असलम से कहा, “मैं कोशिश करूंगी कि कल ही दो नए लंड आ जाये। इस लंड से अगले साइज़ के – बिल्कुल तुम्हारे लंड जितने मोटे और उतने ही लम्बे, एक नसरीन के लिए और दूसरा मेरे लिए।”
और फिर मैंने धीरे से कहा, “अब नसरीन को तुम्हारे लंड से छोटे साइज़ के लंड से क्या मजा आएगा। सही पूछो तो मेरा भी वही हाल है, मुझे भी अब तुम्हारे लंड के साइज का ही लंड चाहिए।”
असलम अब थोड़ा निश्चिन्त सा लग रहा था।
मैंने फिर कहा, “कल या परसों जब भी तुम लोग दुबारा यहां आओगे तो वो लंड नसरीन को दूंगी। फिर तो ठीक है? फिर तो तुम्हें नहीं लगेगा कि अगर नसरीन, तुम्हारी अम्मी को जब कभी भी लंड की तलब लगेगी तो वो क्या करेगी?”
“उसके पास अपना खुद का एक लंड होगा। उसे चूत का पानी छुड़ाने के लिए तुम्हारे लंड कि जरूरत नहीं होगी। तुम मस्त हो कर अपनी नई नवेली बीवी की चूत चूसना, गांड चाटना और उसकी चुदाई करना।”
असलम ने मेरी और देखा और मुस्कुराया। साथ ही असलम ने अपना खड़ा होता हुआ लंड पेंट में ठीक से बिठाया और बोला, “मैं सब कुछ समझ गया डाक्टर मैडम, अब मैं चलता हूं।”
असलम के चेहरे से ही लग रहा था कि मेरी इन बातों से उसे बड़ी तसल्ली हुई थी। उसे लग रहा था कि उसका अपना लंड अगर उसकी अम्मी की चूत में ना भी गया तो भी अम्मी चुदाई का मजा ले सकेगी – इस खासमखास कम्पन करने वाले लंड से।
मैंने उठी और असलम के साथ बाहर चल पड़ी, “चलो मैं तुम्हें बाहर तक छोड़ आती हूं। ड्राइवर तुम्हें होटल छोड़ देगा। तुम और नसरीन सुबह ग्यारह बजे तक यहां आ जाना।”
चलते चलते मैंने असलम से पूछा, “वैसे असलम तुम और कितने दिन और हो कानपुर में?”
असलम बोला, “अम्मी तो यहां का काम खत्म होने के बाद चली जाएगी, मैं उसके बाद भी दो तीन दिन रुकूंगा, मुझे दुकान का कुछ सामान लेना है।”
मैंने असलम को अपना कार्ड देते हुए कहा, “असलम इस कार्ड पर मेरा नबर लिखा है। फोन करके एक बार और आना यहां।”
असलम की हसरत भरी नजरें मेरे चेहरे से होती हुई एक बार मरे मम्मों पर टिकीं और सीधा मेरी चूत पर जा कर रुक गयी। असलम ने बस यही कहा, “जी जरूर आऊंगा। अच्छा चलता हूं नमस्ते।”
और वो चला गया मगर जाते हुए भी अपना लंड दुबारा से पेंट में ठीक करना नहीं भूला।
डाक्टर मालिनी असलम को रबड़ के लंड की फायदे समझा चुकी थी। असलम समझ चुका था कि शादी के बाद अगर वो नसरीन, अपनी अम्मी की चुदाई नहीं करेगा तो उसकी अम्मी अपनी चूत का पानी रबड़ का लंड चूत में लेकर कैसे छुड़ाएगी।
थकी हुई मैं अंदर बिस्तर पर लेट गयी, और असलम के साथ हुई मस्त चुदाई याद करने लगी।
सोच रही थी काश ऐसी ही मस्त चुदाई असलम के साथ दुबारा हो जाए। असलम का लंड तो मस्त था ही, असलम चुदाई भी मस्त करता था।
लेटे-लेटे मैंने शोरूम वाले संदीप सोलंकी को फोन लगाया और पहले वाले लंड से दो बड़े वाले लंड भेजने के लिए बोल दिया – कलाई जितने मोटे और आधे हाथ जितने लम्बे।
संदीप बोला, “ठीक है मैडम। मगर ये जो आप साइज बता रही है मैडम ये तो तकरीबन ढाई इंच मोटा और साढ़े सात आठ इंच लम्बा हो गया। इसी साइज की बात कर रही हैं ना आप?”
मैंने मन ही मन सोचा, क्या संदीप सोच रहा है इतना बड़ा लंड मैं चूत में ले नहीं सकती? मैंने भी हल्का सा हंसते हुए कहा, ” हां भई संदीप यही वाले चाहिये। ये बताओ कब तक मंगवा दोगे।”
संदीप सोलंकी मेरा बड़ा पुराना जानकार है, और इस तरह के ख़ास चुदाई के खिलौनों का सब से बड़ा डीलर भी है। मेरे सारे चुदाई के खिलौने संदीप के ही शोरूम से आते हैं। कई बार तो जब कोई नया खिलौना आता है तो संदीप ही मुझे फोन कर देता है।
संदीप बोला, “मैडम कल ही ले आऊंगा।”
मैंने पूछा, “अरे संदीप, इतनी जल्दी कैसे आ जायेंगे?”
संदीप बोला, “मैडम आज कल औरतों की किट्टी पार्टियों में ये और इससे भी अगला साइज चल रहा है। बहुत डिमांड है इनकी। मेरे पास पड़े हैं इस साइज के।”
संदीप से तो मैं खुली ही हुई थी। मैंने संदीप से कह ही दिया, “हद्द है संदीप, इन किट्टी पार्टी की औरतों की। कहा जा कर रुकेंगी ये भोसड़ी वाली चुद्दकड़ औरतें? अगली बार ये तीन इंच गोलाई और दस इंच का लंड मांगेंगी क्या?”
संदीप मेरी इस बात पर खुल कर हंसा।
मैंने सोचा, मैं किट्टी वालियों की बात कर रही हूं, मैं ही कौन सी कम हूं।
अगले दिन दस बजे ही संदीप आ गया और दो डिब्बे मेरे हाथ में दे कर बोला, “ये लीजिये मैडम आपका सामान।”
ये बोलते-बोलते संदीप के नजर मेरे मम्मों से फिसलती हुए मेरी चूत पर जा अटकी। पहले भी जब कभी संदीप मेरे क्लिनिक में आता था, तो मेरी चूत को घूरते हुए अपना लंड पेंट में ठीक करना नहीं भूलता था।
संदीप की एक आदत थी। वो जब भी किसी काम से सिविल लाइन्स आता था, तो मुझसे पांच सात मिनट के लिए मिले बिना नहीं जाता था। इन पांच-सात मिनट में ही वो कम से कम दस बार पेंट में अपना लंड इधर-उधर करता था।
वैसे मेरा एक उसूल है। मैं चुदाई के मामले में मैं कोइ रिस्क नहीं लेती, यहां कानपुर में तो विशेष कर। जानकार मर्दों से तो तब तक चुदाई नहीं करवाती जब तक ये सुनिश्चित ना हो जाए कि सामने वाला एक बार चुदाई करने के बाद चूत का पिस्सू बन कर पीछे ही नहीं पड़ जाएगा।
संदीप से भी इसी कारण अब तक चुदाई करवाने के लिए मैंने पहल नहीं की। देखने भालने में अच्छे संदीप ने भी अभी तक तो मुझे चुदाई के लिए नहीं कहा। अगर कभी कहेगा तो देखूंगी क्या करना चाहिए।
संदीप मुझे रबड़ के लंडों के डिब्बे देकर मेरी चूत को घूरता हुआ चला गया। ग्यारह बजे ऑटो में नसरीन और असलम आ गए। नसरीन के हाथ में एक प्लास्टिक का थैला था, और वो बड़ी ही खुश लग रही थी।
असलम ऑटो वाले को पैसे दे रहा था। नसरीन जल्दी-जल्दी क्लिनिक में मेरे पास आयी और आते ही मेरी हाथ अपने हाथ में लेकर बोली, “मालिनी जी ये तो कमाल हो गया। एक ही मीटिंग में क्या जादू कर दिया आपने? असलम शादी के लिए मान गया है। लीजिये मुंह मीठा कीजिये।”
नसरीन ने कानपुर के मशहूर “ठग्गू के लड्डू” वाले का लड्डूओं का डिब्बा निकाला और मेज पर रख दिया। मैंने कहा, “अरे, ये तो वाकई कमाल हो गया। बधाई है नसरीन। अब जल्दी से बहु ले आओ घर में।”
ख़ुशी से हंसते हुए नसरीन बोली, “जी हां मालिनी जी, बस अब आगरा जा कर सब से पहले यही काम करना है। वैसे मालिनी जी बताईये तो सही कि आपने ये जादू किया तो किया कैसे। एक ही बार की मीटिंग से असलम शादी के लिए कैसे मान गया?”
मैंने कहा, “नसरीन ये मेरा नहीं उस रबड़ के खिलौनों का कमाल है जो परसों तुमने अपनी चूत और गांड में डाल कर मजे लिए थे। असलम की असली समस्या ही ये थी, कि वो सोचता था कि शादी के बाद अगर वो तुम्हारी चुदाई ना कर पाया तो तुम्हारी चूत का पानी कौन छुड़ाएगा।”
“वो तो यहां सोचने लग गया था कि अगर उसने तुम्हारी चुदाई बंद कर दी तो कहीं ऐसा ना हो चूत का पानी छुड़ाने के लिए तुम किसी बाहरी मर्द से ही चुदाई का चक्कर ही ना चला बैठो।”
“जब मैंने असलम को ये लंड दिखाए और बताया कि तुम इनसे काम चलाओगी, इन्हें अपनी चूत में डाल कर इनसे अपनी चूत का पानी छुड़ाओगी और असली चुदाई जैसे मजे लोगी, तो उसे अपने सारे सवालों के जवाब मिल गए। इस रबड़ के लंड ने उसकी सारी समस्या और चिंताएं दूर कर दी। बस हो गया काम।”
तब तक असलम भी ऑटो वाले को पैसे दे कर आ गया।
कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद नसरीन बोली, “अब हम चलेंगे मालिनी जी। मैं तो कल सुबह आगरा वापस चली जाऊंगी। असलम अभी रुकेगा दो तीन दिन। दुकान का कुछ सामान लेना है।
मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन एक मिनट बैठो।”
मैंने असलम को कहा, “असलम मुझे तुम्हारी अम्मी से अकेले में कुछ बात करनी है। तुम थोड़ी देर के लिए उधर पीछे वाले कमरे में बैठो।”
असलम साथ वाले कमरे में चला गया जहां मेरी और असलम के पिछले दिन चुदाई हुई थी।
असलम के जाने के बाद मैंने रबड़ के लंड का डिब्बा नसरीन के हाथ में दे दिया, जो एक घंटा पहले संदीप दे कर गया था।
नसरीन ने हैरान हो कर पूछा, “ये क्या है मालिनी जी।”
मैंने कहा, “खोल कर देखो।”
नसरीन ने जैसे ही डिब्बा खोला ,उसके आंखें फ़ैल गयी और वो बोली, ” मालिनी जी ये तो…।”
मैंने कहा, “हां नसरीन ये लंड ही है, बिल्कुल नया रबड़ का लंड।”
नसरीन ने लंड हाथ में लिया और बोली, “मालिनी जी ये तो उस दिन वाले लंड से बड़ा लग रहा है।”
मैंने कहा, “हां नसरीन ये बड़ा ही है। तुम्हारी कलाई जितना मोटा और तुम्हारे आधे हाथ जितना लम्बा।” ये बोलते हुई मैं और नसरीन दोनों हंस दी।
मैंने लंड डिब्बे में से निकाला और बोली, “देखो मैं तुम्हें चला कर दिखाती हूं।” फिर मैंने नसरीन को सब समझाया कि कहां बैटरी डलती है। कैसे वाइब्रेटर काम करता है।
सब समझ कर नसरीन बोली, “मालिनी जी आपने ये मेरे लिए मंगवाया है?”
मैंने कहा, “नसरीन ये ख़ास मैंने तुम्हारे लिए ही मंगवाया है। इसी रबड़ के लंड की चुदाई के भरोसे पर तो असलम शादी के लिए तैयार हुआ है।”
मैंने समझाया, “देखो नसरीन अभी मैंने तुम्हें क्या बताया था? असलम की असली समस्या यही थी कि अगर कभी उसकी शादी के बाद तुम्हारा चुदाई करवाने का मन हो हो कैसे और कौन चुदाई करेगा तुम्हारी? कैसे तुम्हारी चूत का पानी निकलेगा? असलम की बीवी के घर में होते हुए असलम तो तुम्हें नहीं चोद पायेगा।”
“मेरे पास ये लंड पड़ा ही था। जब मैंने उसे इसे लंड के बारे में बताया, और उसे ये लंड दिखाया, तो मुझे लगा उसे चीजें समझ आ रही है, और उसका शादी ना करने का इरादा बदल रहा है।”
“फिर जब मैंने वो रबड़ का लंड असलम के हाथ में ही दे दिया तो उसे बड़ी ही तसल्ली सी हुई, और वो धीरे से बोला, “मालिनी जी ये तो बिल्कुल असली लंड जैसा ही दिखता है।”
मैंने नसरीन के कंधे पर हाथ रख कर कहा, “जब मुझे लगा कि ये लंड देख कर असलम का शादी ना करने का इरादा बदल रहा था, तो मैंने उसी वक़्त इस लंड का आर्डर दे दिया। तुम्हारी कलाई जितना मोटा और तुम्हारे आधे हाथ जितना लम्बा।”
मैंने जरा सा हंसते हुए कहा, “अब तुम्हारा जब भी मन करे इसे चूत में लेकर मजे ले सकती हो। अगर अभी एक बार चूत में लेकर देखना है तो देख लो।”
नसरीन बोली, “अभी? यहां? कोइ आ गया तो?”
मैंने कहा, “नसरीन मैंने तुम्हें बताया ही है यहां जब तक मैं ना बुलाऊं कोइ नहीं आता, और वैसे भी चूत में डाल कर ही तो देखना है। दो मिनट भी नहीं लगेंगे।”
नसरीन बोली, “ठीक है मालिनी जी एक बार डाल कर के देख लेती हूं। मगर मालिनी जी कितने का आया ही ये।”
मैंने कहा, “नसरीन तुम उसकी चिंता ना करो। मेरी चूत चुसाई करके तुम पहले ही इसकी पेमेंट कर चुकी हो। चलो उतारो सलवार और चूत में डाल कर एक बार ट्राई कर लो।”
मेरे ये कहने पर नसरीन ने सलवार उतारी और क्लिनिक के कोने में लगे बेड पर चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर लेट गयी और टांगें चौड़ी करके नीचे हाथ डाल कर चूत की फांकें खोल दी।
नसरीन की खुली हुई गुलाबी चूत देख कर मुझसे रहा नहीं गया, और मैंने अपना मुंह नसरीन की चूत में डाल कर चूत का दान चूसना शुरू कर दिया। नसरीन के मुंह से बस “आआआआह… मालिनी जी… आआआआह” निकला।
नसरीन की चूत में से हल्की-हल्की खुशबू उठ रही थी। मेरा मन तो अभी भी नसरीन की चूत चूसने का था मगर ना वक़्त था ना मौक़ा।
मैं कुछ देर नसरीन की चूत चूसने के बाद मैं उठी और मैंने लंड नसरीन के हाथ में देकर उससे कहा, “नसरीन तुम खुद अपने आप इसे चूत में डाल कर देखो। तुम्हें इसे इस्तेमाल करने का तरीका भी अच्छे से समझ आ जाएगा। ऐसा करो इसके ऊपर थोड़ा थूक लगा लो, और चूत के अंदर बिठा लो।”
नसरीन हंसते हुए बोली, “मालिनी जी थूक लगाने की जरूरत नहीं, मेरी चूत तो पहले ही इस लंड को देख कर गीली हुई पड़ी थी, बाकी काम आपकी चुसाई ने कर दिया है। बिल्कुल तैयार हुई पड़ी है ये। लाईये डालती हूं इसे अंदर।”
ये कहने के बाद भी नसरीन ने लंड पर थूक लगाया, और लंड को चूत के छेद पर रखा और पूरा का पूरा लंड चूत के अंदर बिठा दिया।
फिर मैंने नसरीन की उंगली पकड़ी और लंड के नीचे की तरफ वाइब्रेटर के बटन पर रख दी और नसरीन से कहा, “नसरीन, एक बार इस बटन को दबाने से लंड का वाइब्रेटर चालू हो जाएगा, और दुबारा दबाने से वाइब्रेटर बंद हो जाएगा।”
नसरीन ने बटन दबाया और वाइब्रेटर चालू हो गया। लंड के वाइब्रेट करते ही नसरीन बस इतना ही बोली, “कमाल है? मालिनी जी ये तो बड़ा मजा देता है, असली वाले लंड से भी ज्यादा।”
मैंने कहा, “हां नसरीन बहुत मजा देता है। बस एक ही कमी है मर्द के लंड की तरह पानी नहीं छोड़ता। दूसरे जब मर्द ऊपर लेट कर या पीछे से कमर पकड़ कर चुदाई करता है, उसकी तो बात ही अलग होती है।”
नसरीन मजे की सिसकारियां लेते हुई बोली, “मालिनी जी तीन-तीन लंड ले लिए अब तक, बहुत चुदवा ली मर्दों को ऊपर लिटा कर और पीछे से कमर पकड़वा कर। अब यही ठीक है… अअअअअह बड़ा मज़ा आ रहा है।”
“बहुत चुदवा ली मर्दों को ऊपर लिटा कर और पीछे से कमर पकड़वा कर”, मैंने मन ही मन कहा, नसरीन ने बात तो बड़ी सही और सटीक कही थी।
मैंने कहा, “नसरीन पानी छुड़ाना है चूत का? मजा लेना यही पूरा?”
नसरीन बोली, “मालिनी जी अब तो पानी छुड़ाना ही पड़ेगा। इसने तो मेरी चूत एक मिनट में ही गरम कर दी।”
मैंने कहा, “ठीक है नसरीन जितनी देर तक चाहो मजा लो, तब तक मैं उधर पीछे के कमरे में असलम से बात करती हूं।”
नसरीन ने हां कहते सर हिला दिया। मैं साथ के कमरे में गयी असलम सोफे पर बैठा था। मैंने उसे सारी बात बताई और कहा, “चल असलम, लंड निकाल और चुसवा।”
बिना कुछ पूछे असलम ने लंड निकाल लिया और मेरे सामने खड़ा हो गया। मैंने पांच मिनट ही लंड चूसा होगा कि लंड बांस की तरह सख्त हो गया। मेरा मन चुदाई का होने लगा।
मैंने कहा, “चल असलम आजा चोद दे एक बार। मैंने साड़ी कमर तक उठाई और चूतड़ पीछे करके बेड के किनारे उल्टा लेट गयी।
असलम बोला , “मैडम कहीं अम्मी आ गयी तो?”
मैंने हंसते हुए कहा, “वो नहीं आने वाली। तुम्हारी अम्मी ने अपनी चूत में तेरे लंड जितना रबड़ का लंड डाला हुआ है, और मजे ले रही है।”
असलम अपने आप से बोला, “देखूं क्या कर रही है अम्मी।”
असलम ने क्लिनिक का दरवाजा हल्का सा खोला और अंदर झांका और वापस आ कर बोला, “अम्मी तो मस्त हुई पड़ी है। आंखें बंद करके चुदाई जैसे मजे ले रही है।”
फिर असलम पेंट उतारते हुए बोला, “मालिनी मैडम आप तो कमाल करती हैं।”
फिर असलम ने पूछा,” बताईये डाक्टर मैडम कहां लेना है चूत में कि गांड में।”
मैंने कहा, “चूत में ही डाल दे गांड चुदाई के लिए कहां जैल लगाता फिरेगा।”
चूतड़ पीछे करके तो मैं लेट ही चुकी थी। मेरा इतना कहने भर की देर थी कि असलम ने फचाक से लंड मेरी चूत में डाला और मुझे कमर से पकड़ कर चुदाई चालू कर दी।
उधर क्लिनिक से हल्की-हल्की सिसकरियों की आवाजें आ रही थी।
असलम की दस मिनट की चुदाई से मेरा पानी निकल गया। अगले पांच मिनट में ही असलम का भी लंड पानी छोड़ गया। मस्ती भरी फटाफट वाली चुदाई भी बढ़िया रही।
मजा आने के बाद असलम ने लंड मेरी चूत में से निकाला और जाकर सोफे पर बैठ गया। मैं भी साड़ी नीचे करके बोली, “देखूं असलम नसरीन का क्या हाल है। अब तक अगर लंड उसकी चूत में ही है तब तो वो दो तीन बार झड़ चुकी होगी।”
मैं क्लिनिक में गयी और देखा लंड अभी भी नसरीन की चूत में ही था। मैं जा कर नसरीन के पास खड़ी हो गई। नसरीन की चूत में लंड का वाइब्रेटर चालू था। नसरीन लंड को जोर-जोर से आगे-पीछे कर रही थी। एक हाथ उसका मुंह पर था। शायद मजे की सिसकारियां रोक रही थी।
मैंने नसरीन के कंधे पर हाथ रखा, और नसरीन ने आंखें खोली, और मुझे देख कर बोली, “मैडम बड़ा मजा आया आज तो। बस अब बंद कर दीजिये इसे।”
मैंने नसरीन का हाथ नीचे करके लंड के बटन पर रखा, और नसरीन से कहा, “नसरीन इसे दबाओ”
नसरीन ने बटन दबाया, और लंड की वाइब्रेशन बंद हो गयी। नसरीन उठ गयी और सलवार का नाड़ा बांध लिया, और लंड वापस डिब्बे में रख लिया और बोली, “बड़ी ही करामती चीज है ये तो मालिनी जी। अगर कहीं से पहले हाथ लगी होती तो ना जमाल से चुदवाने की जरूरत पड़नी थी, ना असलम से ही।”
मैंने नसरीन को कुर्सी पर बिठाया, और हंसती हुई बोली, “चलो ठीक है नसरीन, छोड़ो पुरानी बातों को। तुम्हें अब चूत या गांड चुदवाने के लिए असलम को तंग नहीं करना पड़ेगा। उधर असलम बेफिक्र होकर अपनी बेगम को चोदा करेगा, इधर ये लंड अपनी चूत में लेकर बशीर,जमाल या असलम, किसी के भी सपने देखते हुए चुदाई के मजे लेना।”
ये बोल कर मैं पीछे वाले कमरे से असलम को बुलाने चली गई। असलम आ गया। हम तीनों बैठे कुछ इधर-उधर की बातें करते रहे। बातों-बातों में नसरीन बोली, “मालिनी जी, आपने ने तो एक ही बार में सारी समस्या ही खत्म कर दी। असलम की शादी का कार्ड मैं खुद देने आऊंगी आपको। जमाल और उसकी बीवी सायरा भी आएंगे दुबई से।”
फिर नसरीन बोली, “अगर मैं नहीं आ पायी तो असलम आएगा। आपको आना जरूर होगा असलम की शादी में।”
मैंने भी कहा “जरूर, क्यों नहीं।”
फिर नसरीन कुछ हिचकिचाते हुए बोली, “एक बात पूछूं मालिनी जी? आपकी फीस क्या हुई?”
मैंने नसरीन के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, “नसरीन इस तरह की मदद की मैं कोइ फीस नहीं लेती।”
तभी मेरी आंखों कि आगे असलम का खूंटे जैसा खड़ा लंड और असलम के साथ हुई मस्त चुदाई घूम गयी। मेरे मुंह से अनजाने में निकल गया, “और वैसे भी फीस तो मुझे असलम दे ही चुका है।”
नसरीन ने हैरानी से असलम की तरफ देख कर कहा, “असलम?”
उधर असलम भी घबराया।
बातों-बातों में जब नसरीन ने डाक्टर मालिनी से फीस की बात की, तो मालिनी ने असलम के साथ हुई मस्त चुदाई के ख्यालों में बोल दिया कि फीस तो असलम दे चुका है। मालिनी की इस बात पर नसरीन हैरान हो गयी, और असलम परेशान हो गया। लेकिन डाक्टर मालिनी ने बात संभाल ली और बोली, कि असलम का शादी के लिए हां करना ही उसकी फीस है।
मैंने भी सोचा, ये मैं क्या बोल गयी। मैंने फ़ौरन बात संभालते हुए कहा, “मेरा मतलब है नसरीन, असलम की शादी के लिए हां करना ही मेरी फीस है।”
असलम को मेरी इस बात से बड़ी तसल्ली हुई। दो चार मिनट के बाद ही असलम और नसरीन दोनों वापस जाने कि लिए बाहर चले गये। अगले ही मिनट असलम वापस आ गया।
मैंने पूछा, “क्या हुआ असलम? कुछ भूल गया क्या?”
असलम कुछ हिचकिचाते हुए बोला, “मैडम आपकी वो फीस वाली बात ने तो एक मिनट कि लिए मुझे परेशानी में डाल दिया था।”
मैंने भी कहा, “असलम तुमने मेरी चुदाई ही ऐसी मस्त की थी, कि अनजाने में मेरे मुंह से वो निकल गया। तो क्या यही बताने तुम वापस आये हो?”
असलम जल्दी-जल्दी में बोला, “नहीं-नहीं मैडम ये बताने नहीं आया।”
फिर असलम नीचे कि तरफ देखता हुआ बोला, “मैडम वो वाली गोली पड़ी है आपके पास, जो आपने मुझे खिलाई थी चुदाई करवाने से पहले?”
मैंने पूछा, “वियाग्रा की बात कर रहे हो? असलम तुमने वियाग्रा का क्या करना है?”
तभी मुझे कुछ ख्याल सा आया और मैंने असलम से पूछा, “क्या बात है असलम, अपनी अम्मी के लिए चाहिए? क्या नसरीन को चोदना है वियाग्रा खा कर?
असलम नजरे झुका कर बोला, “जी मैडम।”
असलम आगे बोला, “मैडम असल बात ये है कि कल मैंने यहां से वापस जा कर अम्मी को बताया कि मैं शादी के लिए तैयार हूं तो अम्मी बेतहाशा खुश हो गयी और ख़ुशी के मारे मुझे बाहों में ले लिया।”
“अब मैडम आपको तो मालूम ही है मेरे और अम्मी के बीच किस तरह का रिश्ता बन चुका है। जैसे ही अम्मी ने मुझे बाहों में लिया तो अम्मी के खड़े सख्त मम्मे मेरी छाती पर दबने लगे। मेरा लंड बिल्कुल अम्मी कि चूत के सामने था। मेरा लंड खड़ा हो गया।”
“मैडम मेरा खड़ा लंड जैसे ही अम्मी की चूत पर लगा अम्मी ने पेंट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और कुछ देर ऐसे ही मुझे बाहों में लेकर मेरा लंड पकड़े खड़ी रही।”
“मैडम मेरा लंड एक-दम कड़क हो गया और मैंने पीछे हाथ करके अम्मी के चूतड़ दबाने शुरू कर दिए। हम दोनों ही मस्ती में आ गए।
मैं अम्मी से बोला, “अम्मी करना है?”
अम्मी भी बोली, “हां असलम मन तो कर रहा है, चलो।”
फिर अम्मी ने दोनों हाथ मेरे कंधों पर रख दिए और बोली, “असलम आज मैं बहुत खुश हूं। आज मेरी ऐसी चुदाई कर जो यादगार चुदाई बन जाए।”
“तभी मुझे अपनी और आपकी चुदाई का ध्यान आ गया, और साथ ही ध्यान आ गया उस जमुनी, बैंगनी रंग की गोली का जो चुदाई से पहले आपने मुझे दी थी और जिसके खाने बाद मेरा लंड ढीला ही नहीं हो रहा था।”
“उस वक़्त तो मैंने ऐसे ही अम्मी को चोद दिया मगर तभी मैंने सोच लिया था कि आज रात अम्मी की इस तरह चुदाई करूंगा जैसे आपकी की थी।”
“अब मैडम आज मैं अम्मी को ऐसे चोदना चाहता हूं कि आज की चुदाई सचमुच ही यादगार चुदाई बन जाए। उसके बाद अब वापस आगरा जा कर अम्मी को नहीं चोदूंगा। इसलिए वो गोली लेने आया हूं।”
असलम की बात सुन कर मैंने बस इतना ही कहा, “वाह असलम इतनी सी बात? रुको अभी देती हूं।”
मेरे पास तो वियग्रा का स्टॉक रहता ही है, ना जाने कब जरूरत पड़ जाए।
मैंने मेज की दराज में से वियाग्रा की चार गोलियों वाला एक पत्ता असलम के हाथ में पकड़ा दिया और बोली, “ये लो और आज मस्त यादगार वाली चुदाई करो नसरीन की।”
असलम गोलियों वाला पत्ता पकड़ते हुए बोला, मैडम चार? चार का मैं क्या करूंगा एक ही काफी है।”
“हां असलम ये चार गोलियां हैं, खानी मगर एक ही है। नहीं तो लंड की हालत ऐसे हो जाएगी, कि एम्बुलेंस बुलानी पड़ जाएगी I फिर तुम्हारे लंड का इलाज नसरीन की चूत या गांड में नहीं हस्पताल में होगा।” ये बोलते हुए मैं हंस दी।
फिर मैंने असलम से कहा, “रख लो असलम, ये तो सब कहने की बात है कि आगरा जा कर तुम्हारी और तुम्हारी अम्मी के बीच चुदाई नहीं होगी। तुम दोनों की चुदाई तो तुम्हारी शादी होने तक चलती रहेगी, हां ये हो सकता है चुदाई थोड़ी कम हो जाए।”
असलम बस मुस्कुरा दिया।
मैंने ही फिर कहा, “अब जब भी चोदना अपनी अम्मी को वियाग्रा खा कर चोदना। अब से तुम्हारी हर चुदाई यादगार चुदाई ही होने चाहिए।” ये सब बोलते हुए मेरी हंसी भी निकल गयी।
असलम ने गोलियां पकड़ी और जाने के लिए मुड़ा ही था कि मैंने कहा, “और हां असलम आगरा जाने से पहले एक बार यहां आना जरूर। यहां भी तुम्हें कुछ यादगार बनाने वाला काम करना है।” साथ ही मैंने बोल दिया, “और हां असलम आने से पहले फोन जरूर कर लेना, और ये वियाग्रा साथ लाने की जरूरत नहीं। इन्हें आगरा के लिए बचा कर रखना।”
असलम सर हिला कर जाने लगा तो मैंने फिर आवाज लगाई, “असलम एक बात और सुनो।”
असलम वापस आ गया और बोला, “जी मैडम?”
मैंने असलम के कंधे पर हाथ रख कर कहा, “असलम ये वियाग्रा इम्पोर्टेड है, यहां बहुत मंहगी मिलती है। अगर और चाहिए हों तो यहां इंडिया की बनी हुई भी ऐसी गोलियां मिलती हैं सुहाग्रा 100 या फनटाइम 100 के नाम से, वो भी इस इम्पोर्टेड वियाग्रा के चौथाई दाम में।”
असलम ने फिर हां में सर हिलाया। मैंने असलम को समझाने वाले अंदाज में कहा, “सुनो असलम अब एक सबसे जरूरी बात सुनो और गांठ बांध लो। एक तो ये वियग्रा, सुहाग्रा या फनटाइम जैसी गोलियां खा कर केवल अपनी अम्मी को ही चोदना, वो भी जब बहुत मन करे तब।”
“दूसरी बात, अपनी नयी नवेली कुंवारी बीवी को भूल कर भी ये गोलियां खा कर मत चोदना। उस उम्र की लड़की को कुदरती चुदाई ही अच्छी लगती है, ये गोलियों वाली नक़ली चुदाई नहीं। तुम्हारा लंड और तुम्हारी चुदाई वैसे ही बड़ी जबरदस्त है।”
“ये गोलियों-वोलियों के साथ तुम्हारी अम्मी नसरीन या मेरी उम्र की औरतें ही चुदाई करवाती हैं, जिनको छोटी मोटी, हल्की फुल्की चुदाई से मजा नहीं मिलता, उनकी चूत की तसल्ली नहीं होती।” ये बोलते ही मेरी जोर की हंसी छूट गयी।
असलम मेरी ज्ञान भरी बातें सुन कर मुस्कुराता हुआ सर हिलाता हुआ चला गया। अगले दो दिनों में मैं नसरीन की चुदाई की आपबीती वाली टेप दस बार सुन चुकी थी। नसरीन ने बशीर, जमाल और असलम के साथ हुई अपनी चुदाई की दास्तान इतनी बारीकी से सुनाई थी कि टेप सुनते-सुनते मुझे तो ऐसा लगता था जैसे कि बशीर जमाल और असलम नसरीन को नहीं मुझे ही चोद रहे हैं।
नसरीन के आवाज सुनते-सुनते मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उस दिन बशीर ने नसरीन की नहीं मेरी पहली चुदाई की थी। बशीर की चुदाई से मेरी चूत की सील फटी थी नसरीन की नहीं, मेरी चूत में से खून निकला था नसरीन की नहीं।
जमाल ने नसरीन की नहीं मेरी टांगें उठा कर अपने कंधों पर रखी, और आगे के तरफ हो गया। चूत नसरीन की नहीं बल्कि मेरी ऊपर उठ गयी थी। जमाल ने लंड नसरीन की नहीं मेरी चूत पर रखा और एक ही झटके से फच्च के आवाज के साथ लंड मेरी चूत में बिठा दिया।
असलम के लंड का पानी पायजामे में नसरीन के चूत के ऊपर धक्के लगाते हुए नहीं मेरी चूत ऊपर धक्के लगते हुए निकला था।
ये सब सोचते-सोचते मुझे असलम की उस दिन वाली चुदाई याद आ गयी जब असलम ने मेरी कमर पकड़ ली थी, लंड गांड के छेद पर रक्खा था और रुक गया था। मैं समझ गयी थी अब असलम मुर्गी हलाल करने वाला था। तभी असलम ने एक जोरदार झटका लगाया था, और पूरा लंड गांड के अंदर डाल कर साथ के साथ ही गांड चोदनी शुरू कर दी थी।
मुझे बार-बार ये सब याद आ रहा था। ये यादें मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रही थी।
यादगार गांड चुदाई हुई थी मेरी। मस्त गांड चोदी थी असलम ने। अगर मैं पहले से ही गांड ना चुदवा चुकी होती तो उस दिन नसरीन की तरह असलम ने मेरी गांड भी चोद-चोद लाल कर देनी थी।
अब मुझे असलम के फोन का इंतज़ार था, वो आये और फिर से आये और अपने कलाई जैसे मोटे और आधे हाथ जितने लम्बे लंड से चोद-चोद कर मेरी चूत और गांड लाल कर दे। वैसे तो असलम जल्दी नहीं झड़ता था, मगर मैं उस दिन उससे एक लंड की प्यासी रंडी की तरह घंटों चुदाई करवाना चाहती थी। मैं खुद हैरान थी कि आखिर मुझे क्या हो गया था? चुदाई के लिए इतने बेताबी?
एक दिन बाद असलम फोन करके फिर आ गया। दोपहर ग्यारह बजे जैसे ही असलम ने कमरे में कदम रखा, उसके आते ही मेरी आंखों के आगे उसका लंड घूम गया और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और गांड में झनझनाहट मच गयी।
असलम नमस्ते करके बैठ गया और मेरी तरफ देखने लगा।
मैंने पूछा, “असलम अम्मी गयी वापस?” असलम ने जवाब दिया, “जी डाक्टर मैडम परसों ही चली गयी थी।”
मैंने पूछा, “और अब तुम्हारा क्या प्रोग्राम है?”
असलम ने कहा, “जी मैडम मेरी भी दूकान की शॉपिंग पूरी हो गयी है। मैं भी कल दोपहर की गाड़ी से जा रहा हूं।”
मैने ऐसे ही अपनी चूत खुजलाते हुए पूछा, “असलम वो गोली वियाग्रा खा कर चोदा नसरीन को? यादगार बनाई चुदाई?
असलम ने कहा, “जी हां डाक्टर मैडम, मस्त चुदाई हुई हमारी। वियाग्रा कि गोली खा कर मैंने अम्मी को चोदा। दो घंटे लगातार अम्मी की चूत और गांड की चुदाई हुई। लाल हो गयी थी अम्मी की गांड, मगर मैं ना रुका ना झड़ा यहां तक कि अम्मी ने भी मुझे चुदाई करने से मना नहीं किया। सच-मुच में ही करामती गोली है ये।”
असलम बता रहा था, “मैडम क्या बताऊं उस दिन तो अम्मी ने भी पूरा चुदाई में पूरा साथ दिया। अम्मी चीख-चीख कर, चूतड़ घुमा-घुमा कर चुदाई करवा रही थी। ऐसा लग रहा था कोइ घरेलू औरत नहीं बल्कि कोइ रंडी चुदाई करवा रही हो।”
“गोली का असर और अम्मी के चीखें और उनका नीचे से चूतड़ घुमाना। इन सब मुझे भी इतना जोश आ गया कि मैंने अपनी अम्मी को कस कर बाहों में जकड़ लिया और बांस की तरह सख्त हुए पड़े लंड के जोरदार धक्के लगाने लगा। मैंने भी अपनी अम्मी को अपनी अम्मी ना समझ कर एक रंडी की तरह चोदना शुरू कर दिया।”
“मुझे हैरानी तो इस बात पर थी कि गोली मैंने खाई थी, मगर अम्मी को क्या हो गया था, जो इस तरह से चुदाई करवा रही थी। नीचे से चूतड़ घूमते हुए अम्मी इस तरह से सिसकारियां ले रही थी कि मुझे तो डर ही लगने लगा कि साथ वाले कमरे में अम्मी की आवाज ही ना जा रही हो।”
असलम की बात सुन कर मेरी चूत पानी पानी हो गयी। मैंने असलम से कहा, “असलम आज भी वियाग्रा खा कर ही चुदाई करेंगे।”
असलम बोला, “क्या बात है डाक्टर मैडम आज फिर?”
मैंने भी कहा, “हां असलम। नसरीन की ऐसी चुदाई सुन कर मेरा भी मन वैसी ही चुदाई का होने लगा है। चीख-चीख कर, चूतड़ घुमा-घुमा कर एक रंडी की तरह चुदाई करवाने। और सुनो असलम तुम भी आज मुझे रंडी समझ कर ही चोदना।”
ये कह कर मैंने अलमारी में से जामुनी रंग की वियाग्रा निकाली और असलम को दे दी। “लो और दिखा दो आज अपने लंड का दम।”
गोली खाने के बाद आधे घंटे में वियाग्रा ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। असलम का लंड खड़ा हो गया। असल बोला, “आईये डाक्टर मैडम, चलिए आज आप कि चूत और गांड की झाग निकालता हूं।”
हम अंदर चले गए। मेरे कपड़े उतारने कि देर थी की असलम ने मुझे बेड के किनारे पर उल्टा लिटा दिया। मुझे ये ही समझ नहीं आ रहा था कि असलम गांड चोदने वाला था या चूत। मगर जैसे असलम ने जैल क्रीम नहीं मांगी थी, मुझे लगा, असलम चूत ही चोदेगा।
मगर असलम का तो कुछ और ही इरादा था। असलम ने गांड के छेद पर थूक लगाया, लंड गांड के छेद पर रखा, और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती एक ही झटके से पूरा लंड गांड के अंदर डाल दिया। दर्द के मारे मेरी चीख निकल गयी और मैं चिल्लाई, “असलम साले चूतिये जैल तो लगा लेता। गांड फाड़ेगा क्या?”
मगर असलम ने नहीं सुना, और ही ही करके हंसते हुए बोला, “मैडम रंडी की गांड में ऐसे ही लंड डाला जाता है बिना क्रीम के। आज ऐसे ही सूखी ही गांड चोदूंगा आपकी – तभी तो रंडी की चुदाई की तरह की यादगार बनेगी ये चुदाई। तभी तो याद करेंगी आप इस चुदाई को।”
पौना घंटा असलम ने मेरी गांड रगड़ी। मेरी गांड दुखने लग गयी थी। मैंने ही कहा, “असलम बस कर। और दम नहीं गांड चुदवाने का बस।”
तब असलम रुका और खड़ा लंड मेरी गांड में से निकाल लिया और लेट गया। एक घंटे कि कसरत से असलम का सांस फूल रहा था।
मैं भी असलम के पास ही लेट गयी। मेरी गांड दुःख रही थी। मुझे लग रहा था कि गांड का छेद सूज गया है। पर मैं असलम को क्या बोलती। असलम को रंडी की तरह चोदने के लिए मैंने ही तो कहा था। मुझे ही शौक लगा हुआ था रंडी की तरह चुदवाने का।
पंद्रह मिनट आराम के बाद असलम का सांस ठीक हुआ और उसमें नया दम आ गया। लंड तो खड़ा ही था। असलम ने एक पलटी मारी और मेरी ऊपर आ गया। मेरी टांगें अपने कंधों पर रक्खी और आगे की तरफ हुआ। मेरी चूतड़ और चूत दोनों उठ गए।
मरे आंखों के आगे नसरीन और जमाल की चुदाई का सीन आ गया। जब जमाल ने नसरीन की टांगें उठा कर अपने कंधों पर रखी थी, और आगे की तरफ हो गया था। नसरीन की चूत ऊपर उठ गयी थी। जमाल ने लंड नसरीन की चूत पर रक्खा, और एक ही झटके से फच्च के आवाज के साथ लंड उसकी चूत में बिठा दिया था।
बिल्कुल यही असलम ने मेरी चूत के साथ किया। अगला एक घंटा मेरी चूत इतनी जोरदार तरीके से चुदी, कि मेरे मुंह से अजीबो-गरीब आवाजें निकलनी शुरू हो गयी। “आआआह आआह असलम दबा कर आआह और जोर से आआह मजा आ रहा है असलम असलम रगड़ असलम हां ऐसे ही असलम आआह आह रगड़ गांडु और रगड़ आआह घुस जा मेरी चूत में आआआह।”
असलम ने मुझे कस कर पकड़ लिया, और मेरी ऐसी चुदाई की जैसी मुझे याद नहीं कभी मेरी, मेरे जवानी के दिनों में भी हुई होगी। चौबीस साल का जवान असलम, मोटा लम्बा लंड और ऊपर से वियाग्रा। अगर मैं कहूं भुर्ता बना दिया असलम ने मेरी गांड का – और अब चूत का भुर्ता बना रहा था – तो ये सही था।
चूत भी पैंतालीस मिनट से कम क्या चुदी होगी। मेरी चूत पता नहीं कितनी बार पानी छोड़ गयी। अब तो ये हाल जो गया था मजा बंद ही नहीं हो रहा था। असलम का हर धक्का मजा दे रहा था।
मैं चुदाई करवाते-करवाते थक चुकी थी। मैंने ही असलम से कहा, “बस असलम अब और दम नहीं।” मगर असलम नहीं रुका। असलम का मजा अटका हुआ था, मगर निकल नहीं रहा था। असलम धक्के पर धक्के लगाता जा रहा था।
वियाग्रा खाने के बाद यही होता है।
मैंने फिर कहा , “असलम बस कर मेरी कमर और चूत सब दुखने लगी हैं।”
अब असलम रुका और खड़े लंड के साथ ऊपर ही लेटा रहा। कुछ देर बाद असलम ने पलटी मारी। असलम का मोटा लंड मेरी पानी से भरी चूत में से ‘बल्प’ की आवाज के साथ चूत में से बाहर निकल गया।
असलम सीधा लेटा हुआ था – उसका लंड भी बिल्कुल सीधा खड़ा था। मैं भी असलम के साथ ही लेटी थी।
मैंने असलम का लंड पकड़ा। बिल्कुल लकड़ी की तरह सख्त था। मैंने असलम से पूछा, “असलम एक बात बताओ, जब तूने ये वियाग्रा खा कर अपनी अम्मी को चोदा था, तब भी यही हुआ था? तम्हारे लंड का पानी नहीं निकला था?”
असलम ने जवाब दिया,”जी हां ऐसा ही हुआ था।”
फिर कुछ रुक कर असलम बोला, “तब अम्मी ने आखिर लंड को जोर-जोर से चूसा था और साथ ही लंड लंड की मुट्ठ मारी थी, तब जा के लंड ने गरम पानी छोड़ा था। अम्मी की तो चूत ही फिर से गरम हो गयी थी। एक हाथ से अम्मी अपनी चूत रगड़ रही थी, दूसरे हाथ से लंड की मुट्ठ मार रही थी और साथ ही लंड चूस रही थी।”
“उस दिन मैंने अम्मी की मुंह में लंड का पानी निकाला था। मेरे लंड में से इतना पानी निकला था मेरे लंड में से अम्मी का तो मुंह ही भर गया था मेरे लंड के गरम पानी से। मेरे लंड से पानी निकलता जा रहा था और अम्मी पीती जा रही थी। कम से कम आधा मिनट निकलता रहा था मेरे लंड में से पानी। इतना मजा आया था, जितना पहले कभी भी नहीं आया था। आज भी लगता है वही होने वाला है।”
असलम की बातें सुन कर मेरी चूत फिर से गरम हो गयी। मैंने भी असलम की अम्मी की तरह एक हाथ से असलम के लंड की मुट्ठ मरने लगी। दूसरे हाथ से मैंने अपनी गीली चूत का दाना रगड़ना चालू कर दिया, और असलम का लंड तो मेरे मुंह में था ही। मैं असलम का लंड जोर-जोर चूसने लगी।
डाक्टर मालिनी ने असलम को वियाग्रा की गोली खिला कर चुदाई करवाई। असलम ने एक रंडी की तरह मालिनी को चोदा। असलम का लंड एक घंटे की चुदाई के बाद भी खड़ा ही था। मालिनी ने असलम का लंड जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया।
पंद्रह बीस मिनट की लंड चुसाई के बाद असलम ने मेरा सर पकड़ लिया, और बोलने लगा, “आआ जोर से आह और जोर निकालो जो भी है इसके अंदर से पी लो। आअह आपकी चूत में मेरा लौड़ा अअअअह मेरी जान, आआआह निकलने वाला है मेरी जान आआह, मेरी जान। निकला आआह ले ले पी पी और पी ले पी ले ले सारा का सारा पी ले पी।”
असलम मेरा सर पकड़ कर अपने लंड को मेरे मुंह में आगे-पीछे कर रहा था, और साथ-साथ बोले जा रहा था। मैं मुंह में लंड लिए मन ही मन सोच रही थी, ये भी क्या और कैसी चुदाई है।
असलम बोलता जा रहा था, और मेरा मजा बढ़ता जा रहा था। असलम की गंदी-गंदी बातें मेरे मजे को दुगना कर रही थी। मेरा तो अपना मन कर रहा था कि मैं भी बोलूं, “आआह असलम चोद मुझे सारी जिंदगी चोद मुझे रंडी की तरह ही चोद फाड़ मेरी गांड आआह आआह साले कैसे चोदता है असलम।”
चुदाई के वक़्त औरत मर्द होश खो बैठते है। ऐसी-ऐसी बातें बोलते हैं कि होश के वक़्त वो ये बातें सोचने भर से उन्हें शर्म आ जाए।
तभी असलम ने एक आवाज निकाली, “आआआह मेरी जान, ये ले निकला तेरे मुंह में मेरी जान”, और असलम के लंड से पानी की पिचकारी मेरे मुंह में निकल गयी।
मुझे असलम की बात याद आ गयी – “इतना पानी निकला था मेरे लंड में से अम्मी का तो मुंह ही भी गया था मेरे लंड के गरम पानी से। मेरे लंड से पानी निकलता जा रहा था, और अम्मी पीती जा रही थी। कम से कम एक मिनट निकलता रहा मेरे लंड में से पानी।”
यही अब मेरे साथ हो रहा था। असलम के लंड में से पानी निकलता जा रहा था, और मैं पानी पीती जा रही थी। पता नहीं कितना पानी निकला असलम के लंड में से। पूरी तरह झड़ कर असलम निढाल हो कर लेट गया। मैंने भी मुंह पोंछा और असलम के बगल में ही लेट गयी। दस मिनट बाद जब दिमाग पर से मजे के बादल छंटे तो असलम बोला, “डाक्टर मैडम, आज तो आपको चोदने का मजा ही आ गया।”
मैंने भी कहा, “असलम मेरी तो खुद ऐसे चुदाई हुई है जैसे पहले कभी नहीं हुई।”
असलम ने क्या गांड चुदाई की थी, मजा ही आ गया। मगर मजे के साथ गांड का छेद दुःख भी रहा था। मैंने सोचा, “कहीं ऐसा तो नहीं असलम के मोटे लंड की रगड़ाई से छिल ही गया हो?”
मैंने असलम को कहा, “असलम मेरी गांड का छेद दुःख रहा है, जरा देखना क्या हाल है इसका – क्या हाल किया है तेरे मोटे लंड ने इसका?” ये कह कर मैं उल्टा लेट गयी, चूतड़ उठा दिए, और गांड खोल कर छेद असलम के सामने कर दिया।
असलम ने चूतड़ थोड़े और बाहर की तरफ किए, और गांड का छेद देख कर बोला, “मैडम थोड़ी फूली हुई है बस।” ये कह कर असलम ने अपनी जुबान गांड के छेद पर फेरी। मेरी चूत और गांड में फिर झनझनाहट हुई।
मैंने असलम से कहा, “असलम मत कर ऐसे, फिर गरम हो जायेंगे ये दोनों छेद। क्या फिर चोदेगा इनको?”
असलम हंसा और बोला, “मैडम कुछ नहीं है, कोइ भी क्रीम लगा लेना। दो ही दिन में फिर लंड लेने के लिए तैयार हो जाएगी।”
मैंने कहा, “असलम मैं अपने चूतड़ चौड़े करती हूं, तुम मेरे मोबाइल से गांड के छेद का फोटो लो। देखूं तो सही क्या हाल किया है तुमने मेरी गांड का।”
मैंने दोनों हाथों से चूतड़ खोले और असलम ने मेरे मोबाइल से मेरी गांड के छेद के दो-तीन फोटो लिए और मोबाइल मुझे पकड़ा दिया। गांड के छेद का फोटो देख कर समझ आया कैसी ताबड़-तोड़ गांड चुदाई की थी असलम ने।
गांड के छेद के सिरे थोड़े फूले हुए थे और साथ ही कुछ कुछ लाल हुए पड़े थे। गांड की ये हालत देख कर एक बार तो मन किया असलम के मोटे लंड का एक चुम्मा ले लूं और बोलूं, “इतनी मस्त चुदाई क्या मस्त चोदा है असलम तूने।”
असलम उठ खड़ा हुआ। मैं भी उठ गयी। दोनों ने कपड़े पहन लिए। दो बज चुके थे। असलम की आगरा के लिए अगले दिन की दोपहर की गाड़ी थी। असलम जाने को तैयार था।
मैंने नसरीन की और असलम की आवाज की दोनों कैसेट असलम को पकड़ा दिए और कहा, “ये लो असलम। अब इनका यहां कोइ काम नहीं। लेकिन इन्हें तबाह कर देना, भूल कर भी रखना मत। कहीं गलती से भी किसी के हाथ पड़ गयी तो मुसीबत हो जाएगी।”
असलम ने कहा, ” मैं इन्हें यहीं तबाह कर देता हूं डाक्टर मैडम?” और असलम ने दोनों किस्तों के बीच में से टेप की रील निकली और तोड़-मरोड़ कर कूड़ेदान में डाल दी।
असलम चला गया और धुआंधार चुदाई की यादें छोड़ गया।
दो महीने के बाद एक दिन नसरीन का फोन आया। आने वाले रविवार को नसरीन और असलम कानपुर आ रहे थे। शादी का कुछ सामान लेना था, और साथ ही मुझे कार्ड भी देना था।
मैं तो तकरीबन-तकरीबन नसरीन हुए असलम के बारे में भूल ही चुकी थी। नसरीन का फोन आते ही असलम का मोटा लंड मेरी आंखों के आगे घूम गया और चूत एक-दम से गीली हो गयी। मैं सोचने लगी क्या असलम से एक और चुदाई का मौक़ा मिलेगा?
रविवार दोपहर करीब ग्यारह बजे दोनों आ गए।
असलम नसरीन को क्लिनिक में मेरे पास छोड़ गया, और खुद कुछ खरीददारी चला गया। जाते-जाते एक घंटे के बाद आने के लिए बोल गया। नसरीन बड़ी खुश नज़र आ रही थी। दुआ सलाम हाल चाल पूछने के बाद नसरीन बोली, “मैडम आपके कारण ही असलम की शादी तय हुई है। बड़ी ही सुन्दर लड़की है। निकहत नाम है – बी.एड. कर रही है। आगरा में ही रहते हैं वो लोग। अभी निकहत लड़कियों के छोटे से स्कूल में पढ़ाती है।”
ये बोलते हुए नसरीन ने अपने पर्स में से एक फोटो निकाली और मेरे हाथ में दे दी। पांच लड़कियों की ग्रुप फोटो थी। नसरीन बोली, “मालिनी जी ये बीच में खड़ी लड़की ही निकहत है।”
निकहत सब लड़कियों से लम्बी थी। खड़ी चूचियों वाली निकहत बेहद खूबसूरत लग रही थी।
मैंने कहा, “नसरीन लड़की तो बहुत सुन्दर ढूंढी है तुमने असलम के लिए।”
नसरीन बोले, “जी हां मैडम, बड़ी सुन्दर लड़की है निकहत, एक दम गोरी। मैडम, सब आप के कारण हुआ है। मैं आपका ये एहसान कभी भी नहीं भूलूंगी।”
फिर नसरीन ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा, “तीन हफ्ते बाद अगले महीने की दस तारीख को शादी है, आप शादी में आना जरूर। जमाल और सायरा भी दुबई से आ रहे हैं।”
नसरीन सच में ही बड़ी खुश लग रही थी। खुशी की बात भी तो थे। नसरीन की मन की मुराद पूरी हो रही थी।
मैंने नसरीन से पूछा, “नसरीन एक बात बताओ, असलम अभी भी चोदता है तुम्हें?”
नसरीन थोड़ा शरमाई और बोली, “मैडम यहां से जाने के बाद चोदता तो है, लेकिन जब मैं कहती हूं तब। अब अपनी तरफ से पहल नहीं करता। अब हमारी पंद्रह बीस दिनों में एक चुदाई होती है। लेकिन जब भी चोदता है, पागलों की तरह चोदता है, और घंटा-घंटा भर चुदाई करता रहता है।”
फिर कुछ रुक कर नसरीन बोली, “और मैडम बीच मैं अगर मेरा चूत का पानी छुड़ाने का मन होता है तो मैं आपका दिया लंड चूत में डाल कर चालू कर देती हूं और मेरा काम हो जाता है।”
“मैडम सच बताऊं असलम जिस तरह से मेरी चुदाई करता है, कई बार तो सोचती हूं कितनी खुशकिस्मत है निकहत जिसको ऐसा बढ़िया चुदाई करने वाला शौहर मिल रहा है।”
नसरीन की इस बात पर तो मेरी चूत खुजलाने लगी, और गांड में झनझनाहट मच गयी। मन किया कह ही दूं नसरीन से, “नसरीन एक बार मुझे चुदवाने दे असलम से। उसे क्या पता था असलम कितनी चुदाई कर चुका था मेरी।
मुझे चूत खुजलाता देख नसरीन बोली, “क्या हुआ मैडम, लगता है आपकी ये भी कुछ मांग रही है।”
मैंने भी कह ही दिया, “नसरीन जिस तरह तुम असलम के मोटे लंड की चुदाई के किस्से बताती हो, मन तो करता है एक बार ले कर देखूं असलम का लंड अपनी चूत में।”
नसरीन बोली, “अरे मैडम ये क्या? नेकी और पूछ-पूछ? असलम अभी मुझे लेने आएगा, चुदवा लो एक बार। एक डेढ़ घंटा ही तो लगेगा। मस्त चोदता है। बारह बजे आने का बोल गया है। दो घंटे चुदवाओ आप। एक बार चुदवाने के बाद भूल नहीं पाएंगी उसकी चुदाई।”
मैंने मन ही मन सोचा, “भूल ही तो नहीं पा रही असलम के साथ अपनी चुदाई।”
तभी नसरीन थोड़ा आगे आयी और धीरे से बोली, “मालिनी जी, असलम को आने में तो अभी टाइम है। चूत नहीं चुसवानी आज?”
मैं चुप तो रही, लेकिन मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। गांड के छेद में झनझनाहट होने लगी। मैंने मस्ती में मोबाइल निकला और गांड फूले हुए छेद की फोटो देखने लगी। मेरी चूत तो गीली हुई ही पड़ी थी। मैंने कहा, “चलो दोनों ही चूस लें एक दूसरे की चूत।”
हम दोनों अंदर गयी, कपड़े उतारे, और नसरीन नीचे लेट गयी। नसरीन ने तकिया लगा कर चूत ऊपर उठाई, और पीछे से हाथ कर कर चूत की फांकें खोल दी। मैं उल्टा नसरीन के ऊपर लेट गयी। मेरी चूत नसरीन के मुंह पर थी, और मेरा मुंह नसरीन के चूत में घुसा हुआ था।
लपड़-लपड़ चपड़-चपड़ की आवाजों के साथ हम एक-दूसरे की चूत चूस रही थी – चाट रही थी। थोड़ी ही चूसा-चुसाई के बाद हम दोनों की चूतें पानी छोड़ गयी।
कुछ देर ऐसे हे लेटने के बाद हम उठी, हमने कपड़े पहने, और हुलिया ठीक करके क्लिनिक में आ गयी।
बारह बजे के करीब असलम आ गया और नमस्ते कर के बैठ गया। कुछ देर इधर-उधर की बात करते रहे। फिर नसरीन असलम से बोली, “असलम, मालिनी मैडम तुझे एक आख़री नसीहत देना चाहती हैं – अकेले में।”
फिर मेरी और देख कर बोली, “मैं यहां बैठी हूं मैडम आप उधर अकेले में बात कर लीजिये।”
असलम हैरान हुआ कि मुझे अकेले में उससे क्या बात करनी थी। उम्मीद मुझे भी नहीं थी नसरीन ऐसा भी कुछ कर देगी। मैं तो यही समझ रही थी नसरीन मजाक कर रही थी जब उसने कहा था, “अरे मैडम ये क्या? नेकी और पूछ-पूछ? असलम अभी मुझे लेने आएगा, चुदवा लो एक बार। एक डेढ़ घंटा ही तो लगेगा। मस्त चोदता है असलम। एक चुदवाओ आप। एक बार चुदवाने के बाद भूल नहीं पाएंगी उसकी चुदाई।”
मैं क्या कहती कि मैं तो पहले से ही असलम से हुई चुदाई नहीं भूल पा रही थी। मुझे लगा अब इन्कार ना करके चुदाई के मजे ले ही लेने चाहिये। उधर नसरीन ने असलम से दुबारा कहा, “जाओ असलम, सारी बातें ध्यान से सुन और समझ लेना।”
हैरान सा असलम उठ कर पीछे वाले कमरे में चला गया।
मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन मैंने तो मजाक में कहा था और तुम तो ” मैंने बात बीच में ही छोड़ दी।
नसरीन बोली, “मैडम चुदवा के देखो तो सही एक बार। असलम का कलाई जितना मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा लंड अपनी चूत की तसल्ली करवा देगा।”
असलम के साथ हुई चुदाई को याद करते करते में जाने के लिए मुड़ी, तभी मुझे कुछ याद आ गया।
जब से संदीप नए बड़े वाले लंड देकर गया था, मेरा पुराना वाला रबड़ का लंड यहीं क्लिनिक में ही पड़ा रहता था। मैंने मेज की दराज में से पुराने वाला लंड नसरीन को दे दिया और हंसते हुए बोली, “नसरीन अगर हमारी नसीहत की आवाजें सुन कर तुम्हे जरूरत पड़े तो ये ले लेना।”
नसरीन ने हंस कर लंड पकड़ लिया और बोली, मालिनी जी मैं तो सोच ही रही थी कि आज लगता है उंगली से ही काम चलना पड़ेगा। मगर आप तो लगता है मन की बात पड़ने में माहिर हैं।”
पीछे कमरे में पहुंची तो असलम सोफे पर बैठा हुआ था। हैरानी से असलम ने पूछा, मैडम ये सब क्या हो रहा है?”
मैंने असलम को सारी बात बता दी और साथ ही अपने सारे कपड़े भी उतार दिए।
असलम बस यही बोला, “कमाल है ये अम्मी भी। ये नसीहत दिलवाना चाहती थी मुझे आपसे?”
मैंने कहा, “चलो छोड़ो ये कमाल-वमाल असलम, उतारो कपड़े और लो और मेरी नसीहत ध्यान से सुन लो।”
असलम हंसता हुआ कपड़े उतारने लगा और लंड पकड़ कर हिलाता हुआ मेरी और देखते हुए बोला, “जी मैडम कहिये क्या नसीहत है?”
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा, “नसीहत ये है कि हमारे पास डेढ़ घंटा है। इस डेढ़ घंटे में तुमने मेरे चूत के परखच्चे उड़ा देने हैं। चोद चोद कर फुला देना है मेरी चूत को जैसे मेरी गांड का छेद फुला दिया था।”
ये कह कर मैं बेड पर लेट गयी। चूतड़ उठा दिए और नीचे तकिया रख कर चूत ऊंची कर दी, और हाथ से चूत की फांकें खोल कर बोली, “आजा असलम दिखा अपने मोटे लौड़े का कमाल।”
असलम ने दो उंगलियां मेरी चूत में डाल कर चूत का चिकना पानी चूत के दाने पर लगाया और दाने को धीरे-धीरे रगड़ने लगा।
मरे मुंह से बस यही निकला, “आआह मजा आ गया।”
असलम ने लंड चूत के छेद पर रखा, और झटके के साथ अंदर डाल कर चुदाई शुरू कर दी।
आधा घंटा मस्त चुदाई हुई। इस आधे घंटे की चुदाई के दौरान मैं एक बार मजा ले चुकी थी।
असलम का लंड मेरी चूत में ही था।
मैंने असलम को कहा, “बस असलम और नहीं, अब गांड चोदो एक बार।”
मेरी बात सुन कर असलम ने लंड मेरी चूत में से निकाल लिया और एक तरफ खड़ा हो गया।
मैं उठी और अलमारी में से नया वाला लंड निकाल कर असलम को बोली, “असलम अबकी बार तुमने पूरा ध्यान मेरी गांड चुदाई पर लगाना है। अपनी चूत का ध्यान में खुद रख लूंगी।”
फिर नया वाला रबड़ का लंड असलम को दिखाते हुए कहा, “ये नए लंड तुम्हारे लंड के बराबर साइज़ के हैं। ऐसा ही एक लंड मैंने तुम्हारी अम्मी नसरीन को भी दिया था।”
असलम बोला, “हां मैडम मुझे मालूम है। अम्मी ने मुझे दिखाया था। कई बार अम्मी मुझे अपने साथ लिटा उस लंड को अपनी चूत में ले कर मजा लेती है।”
असलम का लंड सख्त हो चुका था। असलम ने लंड पकड़ा और मेरे पास आ कर बोला, “चलिए मैडम मरा लंड तो तैयार है। कहिये कैसे चुदवानी है? उस दिन की तरह – रंडी की तरह?”
मैंने भी मस्ती मैं कह दिया, “ठीक है असलम आज भी रंडी की तरह ही चोद।”
ये कह कर मैं बेड के किनारे पर उल्टा लेट गयी। चूतड़ उठा दिए, और फैला कर गांड का छेद खोल दिया, और असलम से कहा, “ले असलम थूक लगाओ और चालू हो जाओ – कर दो चुदाई शुरू। समझो रंडी चोद रहे हो।”
असलम ने जैल ढूढ़ने कि ज़हमत नहीं उठाई। थूक लगा कर ही लंड गांड के अंदर बिठा दिया।
फिर जो असलम ने रगड़-रगड़ कर गांड चोदी कि मजा ही आ गया। असलम जिस तरह आआआह ऊंह आआआह, ऊंह आआह बोलते हुए मेरी गांड चोद रहा था, मेरा मन कर रहा था मैं भी जोर-जोर से सिसकारियां लूं।
मैं तो यही सोच कर मैं चुप थी, कि अगर नसरीन ने सुन लिया तो क्या सोचेगी – ‘कैसी चुद्दकड़ औरत है’।
असलम की गांड रगड़ाई से गांड की तसल्ली हो गयी थी।
असलम का लंड अभी भी गांड के अंदर ही था। असलम बोला, “मैडम मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है। बोलिये कहां निकालना है गांड में या चूत में।”
मेरा पानी चूत चुका था मगर मन नहीं भरा था। मन तो किया से बोलूं , “जहां मर्जी निकाल असलम मगर एक बार और ऐसे ही चोद और फाड़ दे गांड।”
मगर वक़्त कम था मैंने सोचा इतना ही बहुत है की नसरीन ने असलम से मेरी चुदाई करवा दी।
मैंने कह दिया, “गांड में ही निकल दे असलम। चूत में तो रबड़ वाला लंड अपना काम कर रहा है।”
असलम गांड में धक्के लगा रहा था और इधर रबड़ के लंड के वाइब्रेशन से मेरी चूत एक बार फिर पानी छोड़ गयी।
मजा आने के बाद अब और चुदाई की इच्छा नहीं थी, मगर असलम का लंड अभी भी खड़ा ही था।
मैंने एक पल सोचा और कहा, “असलम बस हो गया मेरा। अब कुछ अलग कर जैसे पिछली बार किया था। आजा मेरे मुंह में निकाल दे अपने लंड का पानी।”
असलम ने ऐसा ही किया और मेरा मुंह में लंड डाल कर अपने लंड की मुट्ठ मारने लगा।
सात आठ मिनट मुट्ठ मरने के बाद असलम के लंड में से सफ़ेद चिकने पानी की धार निकली, और मेरे मुंह में जाने लगी। असलम ने अपने लंड के पानी से मुंह भर दिया। गरम-गरम लंड का पानी मुंह में इस तरह डलवाने का भी अपना ही मजा आया।
असलम ने ढीला होता हुआ लंड मुंह में से निकाला, और नंगा ही सोफे पर बैठ गया।
मेरी भी इस चुदाई से तसल्ली हो चुकी थी। मैंने असलम से कहा, “असलम जाओ जा कर देखो नसरीन क्या कर रही है।
असलम नंगा ही क्लिनिक की तरफ गया और दरवाजा जरा सा खोला और अंदर देख कर बोला, “मैडम लगता है अम्मी को मेरी मदद की जरूरत है।” ये कह कर असलम क्लिनिक वाले कमरे में दाखिल हो गया।
मैं बाथरूम में चली गयी। गांड को धोया तो छूते ही साफ़ पता लगा फिर से थोड़ी फूली हुई है – थोड़ी दर्द भी हो रही थी। बिना जैल से गांड चुदवाने का यही नतीजा होता है। मैंने गांड के छेद पर क्रीम लगाई, मुंह धोया और कपड़े पहन कर क्लिनिक की और चली गयी।
दरवाजा खोलते ही देखा तो रबड़ का लंड नसरीन की चूत में था, और असलम का मोटा लंड नसरीन के मुंह में। असलम दोनों हाथों से नसरीन की चूचियां मसल रहा था। नसरीन रबड़ के लंड को चूत में आगे-पीछे कर रही थी, और साथ ही जोर-जोर से असलम का लंड चूस रही थी।
मैं वापस कमरे में आ कर असलम का इंतजार करने लगी। असलम के कपड़े तो कमरे में ही थे। कुछ देर में असलम कमरे में आया और कपड़े पहन कर बोला, “अम्मी का भी हो गया मैडम।” और ये कह कर असलम क्लिनिक में चला गया।
पांच मिनट के बाद मैं भी क्लिनिक में चली गयी।
असलम और नसरीन कुर्सियों पर बैठे हुए थे। मैं भी जा कर अपनी कुर्सी पर बैठ गयी।
नसरीन बोली, “मालिनी जी आपके साथ की मुलाक़ात मैं कभी नहीं भूलूंगी और आपका एहसान तो मुझे हमेशा याद रहेगा।”
मैंने नसरीन का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, “नहीं नसरीन, इसमें एहसान वाली कोइ बात नहीं। लोगों की व्यग्तिगत समस्याएं हल करना ही हम मनोचिकित्स्कों का पेशा है। इस दौरान कई बार सलाह मशविरे के लिए आने वालों के साथ हमारे कुछ अलग तरह के रिश्ते बन जाते हैं। तुम लोगों के साथ भी यही हुआ है।
कुछ पल कमरे में चुप्पी छाई रही। फिर नसरीन बोली , “मालिनी जी अब हम चलेंगे।”
“ठीक है नसरीन मैं टैक्सी मंगवाती हूं।” ये कह कर मैंने टेक्सी के लिए फोन कर दिया।
हम इधर-उधर की बातें करने लगे। दस मिनट बाद टैक्सी आ गयी।
असलम और नसरीन दोनों उठे और मुझसे विदा लेते हुए नसरीन बोली, “मालिनी जी अब हम चलते हैं असलम की शादी में जरूर आइएगा।”
नसरीन चलने लगी तो मुझसे बोली, “मालिनी जी आपसे जरा अकेले में बात करनी थी।”
असलम ने ये सुना तो बोला, “मैं बाहर टैक्सी में इंतजार करता हूं।” ये कह कर असलम बाहर चला गया।
मैं हैरान थी कि अब नसरीन ने क्या बात करनी थी। नसरीन मेरे पास आयी और बोली, “मालिनी जी कैसी रही असलम के साथ चुदाई।”
मैंने जवाब दिया, “एक-दम मस्त। असलम का लंड और चुदाई दोनों मस्त हैं। निकहत बड़ी खुशकिस्मत लड़की है कि उसे असलम जैसा चुदाई करने वाला शौहर मिलेगा।”
नसरीन मेरे थोड़ा और करीब आयी और मेरे हाथ पकड़ कर धीमी आवाज में बोली, “मालिनी जी एक बार मुझे बाहों में लेकर मेरे होंठ वैसे ही चूसिये जैसे आपने पहली मुलाकात के दौरान चूसे थे ”
मुझे नसरीन की इस बात पर हैरानी तो हुई, मगर एक मनोचकित्स्क होने के नाते मैं जानती थी कि जब कोइ किसी का बहुत ज्यादा एहसानमंद होता है कुछ इसी तरह कि पेशकश करता है। असलम के शादी के लिया हां करने से नसरीन मेरी बहुत एहसानमंद हो गयी थी।
मैंने नसरीन को बाहों में ले लिया। हम दोनों के खड़े मम्मे एक-दूसरे के मम्मों को दबा रहे थे। मैंने नसरीन के होंठ अपने होंठों में ले लिए और उन्हें चूसने लगी। नसरीन ने आंखें बंद कर लीं और मुझे कस कर पकड़ लिया।
पांच मिनट नसरीन के होंठ चूसने के बाद मैंने नसरीन को छोड़ा।
नसरीन बस इतना ही बोली, “मालिनी जी आपका बहुत एहसान है हम पर। शादी में जरूर आईयेगा।”
ये कह कर नसरीन बाहर कि तरफ जाने लगी। मैंने असलम की शादी का कार्ड संभाल लिया और मुस्कुराती हुई नसरीन के पीछे-पीछे चल पड़ी।
असलम टैक्सी के पास ही खड़ा नसरीन का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही नसरीन और असलम टैक्सी में बैठने के लिए मुड़े, मेरी चूत में फिर से खुजली सी हुई और चूत ने फुर्ररर से पानी छोड़ दिया।
मैं जानती थी ये खुजली भी एक हफ्ता और जाने वाली नहीं थी।
मैं असलम को देख रही थी और यही सोच रही थी, “असलम निकहत की छोटी-छोटी चूचियां दबाएगा उसकी चूत का पानी चाटेगा और चूत की सील तोड़ेगा।”
निकहत के ख्याल से ही मुझे अपने मुंह में निकहत की कुंवारी चूत के पानी का नमकीन नमकीन सा स्वाद आने लगा। सोचते-सोचते मैंने मुंह में जुबान से चटाक से एक चटकारा लिया।
मुंह में निकहत की चूत का तो नहीं असलम के लंड के पानी का स्वाद आ रहा था।
समाप्त
