नसरीन के पूछने पर असलम जमाल के साथ होती रही नसरीन की चुदाई के पीछे की कहानी बता रहा था। इधर कहानी खत्म हुई, उधर असलम का लंड फिर से खूंटे की तरह खड़ा हो गया। नसरीन की चूत भी उसकी अपनी और जमाल की चुदाई की कहानी सुनते-सुनते गीली हो चुकी थी।
नसरीन अपनी कहानी जारी रखे हुए थी और टेप रेकार्डर चालू था, “जमाल के मुझे चोदने के पीछे की कहानी सुनाते-सुनाते ही असलम का लंड फिर खड़ा हो गया। असलम ने उंगली मेरी चूत में डाल दी, और ऊपर-नीचे उंगली हिलाने लगा। मेरी चूत में उंगली हिलाते-हिलाते असलम साथ-साथ बोलता जा रहा था, “आअह अम्मी आह आह अम्मी अम्मी आआह।”
“इधर मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था। चूत मेरी चिकनी हुई पड़ी थी, और मैं अब ज्यादा इंतजार करने के मूड में भी नहीं थी।
मैं उठी और अपनी टांगे लेटे हुए असलम के दोनों ओर करके असलम का मोटा खूंटा चूत की छेद पर बिठाया और लंड पर बैठ गयी।”
“असलम का लंड जड़ तक मेरी चूत के अंदर था। असलम बस इतना ही बोला, “अम्मी बड़ी गरम और चिकनी हुई पड़ी है आपकी फुद्दी आआआह।”
“मैं असलम के खड़े लंड पर उठक-बैठक करने लगी। दस मिनट चली ये चुदाई भी मस्त रही। दोनों का पानी इकट्ठे छूटा।”
“ऐसे ही वक़्त गुजरता गया। असलम की और मेरी मस्त चुदाई चलती रही। ऐसे ही कभी चूत, कभी गांड चुदाई करते-करते तीन साल गुज़र चुके थे।”
“तीन साल की चुदाई के बाद हमारी चुदाईयों में अब वो पहले वाला जोश और गर्माहट नहीं रही थी। चुदाई के वक़्त अब हमारे मुंह से वैसी चूत फुद्दी, लंड, गांड वाली सिसकारियां नहीं निकलती थी, जैसी पहले निकला करती थी।”
“अब कोई भी आआह अम्मी मेरी अम्मी आअह आअह अम्मी आपके चूतड़ आअह” आआह असलम क्या चोदता है बेटा तू मस्त लंड है तेरा आआह आआआह आआआह अम्मी अम्मी आआ, जैसा कुछ नहीं बोलता था।”
“इतना जरूर था कि जब दोनों का पानी छूटता, मजा आता, तो एक “आआआह आ गया मजा” जैसी छोटी सी सिसकारी ही बस मुंह से निकलती थी।
“इधर असलम चौबीस का हो चुका था, और मैं बयालीस पहुंचने वाली थी।”
“कई बार तो मैं सोचती थी कि असलम ने किसी और हम उम्र लड़की के साथ ऐसा रिश्ता बनाया था या नहीं?”
“अगर असलम ने ऐसा कोइ रिश्ता बनाया होता तो असलम मुझे जरूर बताता। हम दोनों में कोइ राज, कोइ पर्दा तो था नहीं।”
“अगर असलम ने किसी लड़की के साथ इस तरह का रिश्ता नहीं बनाया था, तो इसके दो ही कारण हो सकते थे। एक तो ये कि असलम को बैठे बिठाये चोदने के लिए एक चूत मिली हुई थी। दूसरा ये कि असलम सोचता था कि अगर दूसरी लड़की उसकी जिंदगी मैं आ गयी तो मेरी चुदाई अच्छे से नहीं कर पायेगा।
“मुझे अब अलग ही फ़िक्र होने लगी। मुझे लगने लगा अब वक़्त आ गया था, कि असलम को मेरी चुदाई की फ़िक्र छोड़ कर किसी अपनी उम्र की लड़की के साथ रिश्ता बनाना चाहिए।”
“असलम की उम्र अब शादी के लायक हो भी चुकी थी।”
“खुले शरीर वाला असलम, और जमा जमाया काम। असलम के लिए शादी के रिश्तों की लाइन लगी हुई थी। मगर असलम किसी लड़की के लिए हां ही नहीं कर रहा था।”
“एक बार तो मेरी और उसकी बहस भी हो गयी कि वो शादी के लिए मान क्यों नहीं रहा। उस दिन तो उसने मुझे साफ़ कह दिया, “अम्मी आप क्यों मेरी शादी के पीछे पड़ी है? अगर शादी सिर्फ चुदाई के लिए ही करनी है तो फिर आपकी चूत तो है ही – एक और चूत की क्या जरूरत है?”
“असलम बिना रुके बोलता ही जा रहा था, “और फिर अगर कोइ लड़की इस घर में मेरी बीवी बन कर आ गयी तो आपकी चुदाई कैसे होगी? कौन करेगा आपकी चुदाई? कौन ठंडा करेगा आपकी चूत की आग? कौन मजा देगा आपको? क्या आप कहीं बाहर लंड की तलाश करेंगी? यहां मेरी और आपकी चुदाई चार दीवारों के अंदर है। किसी को भनक तक नहीं कि हम दोनों में मां-बेटे के अलावा भी एक रिश्ता बना हुआ है। अगर अपने बाहर चुदाई करवाई और बात खुल गयी तो मालूम है अम्मी क्या होगा? क्या हो सकता है?”
“ये बोल कर असलम चुप हो गया लेकिन मैं गुमसुम पड़ गयी।”
“मैंने मन में सोचा तो ये कारण है असलम का शादी के लिए मना करने का, शादी के लिया हां ना करने का? मेरी चूत और चुदाई असलम की शादी के बीच में आ रही है। मुझे अपने आप पर ही गुस्सा आने लगा। मैं अपने आप को ही इसके लिए कुसूरवार समझने लगी।”
“मेरे और असलम की बहस में माहौल तो गरम हो ही चुका था। मैंने भी गुस्से में कह दिया, “असलम बहुत चूत चोद ली तूने अपनी अम्मी की चूत। अब बढ़ती उम्र के साथ मेरी चूत ढीली हो रही है। तेरा इतना मोटा लंड भी रगड़ कर अंदर नहीं जाता। मेरी गांड को भी तेरे इस मोटे लंड की आदत पड़ चुकी है। तू समझ नहीं रहा असलम, तेरा लंड अभी पूरी जवानी पर है। अब इसे एक सील बंद टाइट चूत और गांड चाहिए, जो एक नई लड़की के पास होती है।”
“मैं दिल से चाहती हूं कि एक नयी-नवेली नाजुक सी लड़की इस घर में तेरी बीवी बन कर आये जिसकी छोटी ्-छोटी चूचियों को तू दबाए उनको चूसे। उसकी चूत की सील तोड़े। उसकी गांड चोद-चोद कर फुला दे। दोनों अपनी जवानी भरी जिंदगी के मजे लो – जन्नत के मजे।”
“असलम, मेरा मन अब चुदाई के लिए इतना नहीं करता जितना पहले करता था। और फिर मैं कहीं जा थोड़े ही रही हूं – जब भी तेरी बीवी अपने मायके जाए, तू मुझे चोद लिया करना। मैं कोइ तुमसे चुदाई करवाने के लिए मना तो नहीं कर रही।”
नसरीन बता रही थी, “असलम मेरी बातों का कोइ जवाब ही नहीं दे रहा था। मैंने हर तरीका आजमा लिया, मगर असलम था की शादी ना करने की जिद पर अड़ा हुआ था।”
“एक दिन जब फिर ये बात छिड़ी, तो असलाम ने खुदकुशी तक करने की धमकी दे डाली। तब मुझे लगा कि मामला बहुत आगे जाता जा रहा था। इसी के चलते मैं आगरा की एक NGO के पास पहुंच गई और अब आपके सामने बैठी हूं। आप मेरी मदद करिये। आपका बड़ा एहसान होगा मुझ पर।”
इसके बाद नसरीन चुप हो गयी। नसरीन की बात पूरी हो चुकी थी।
मैंने रिमोट का बटन दबाया और क्लिक की एक आवाज के साथ टेप रिकार्डर बंद हो गया। मैंने टेप रिकार्डर में से टेप निकाल कर अपने सामने रख ली।”
नसरीन की पूरी बात सुनने के बाद ये तो समझ गयी कि मां बेटे – नसरीन और असलम की चुदाई परिवार में एक-दूसरे के लिए कुछ कर दिखाने के जज़्बे का नतीजा है।
अपने अब्बू की इंतकाल के बाद असलम से अपनी अम्मी नसरीन की उदासी देखी नहीं गयी, और उसने दुकान में काम करने वाले लड़के जमाल से अपनी अम्मी की चुदाई करवा दी।
और जब जमाल दुबई चला गया, तो अपनी अम्मी की चूत की प्यास को असलम ने अपने लंड से बुझाने की कोशिश की।
अब जब की नसरीन की उम्र बढ़ रही थी, उसकी चूत को लंड की तलब कम महसूस होती थी, और वो चाहती थी कि उसका बेटा असलम शादी करके अपना घर बसाए और एक नई श-नकोर कुंवारी लड़की के साथ टाइट चूत और टाइट गांड की चुदाई के मजे ले।
मेरी समझ में नसरीन की सोच बिल्कुल ठीक थी। तीन-चार साल पहले माँ बेटे में चुदाई वक़्त की जरूरत थी। अब वो जरूरत पूरी हो चुकी थी, और असलम को अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए था। असलम अब शादी के लायक हो गया था, और उसके लिए रिश्ते भी बहुत आ रहे थे। नसरीन चाहती थी कि असलम अब शादी कर ले।
उधर असलम कुछ अलग तरीके की सोच रखता था। असलम शादी से इस कारण इन्कार कर रहा था कि अगर उसकी शादी हो गयी तो उसकी अम्मी की चुदाई कैसे होगी – उसकी अम्मी की चूत की आग कैसे ठंडी होगी।
मुझे इसमें नसरीन ठीक लगी। नसरीन की उम्र बढ़ रही थी। नसरीन एक घरेलू औरत थी। उस तरह की घरेलू औरत जो एक बार ढलना शुरू होती हैं तो फिर पूरी तरह ढल कर ही रुकती हैं – मेरी तरह नहीं जिसने बावन में भी अपने आप को फिट रखा हुआ था, और अभी भी ऐसे चूत चटवाती थी चुदाई करवाती थी, जैसे पच्चीस की औरत चूत चटवाती है, और चुदाई करवाती है।
मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन तुम्हारी फाइल पढ़ने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंची हूं कि असलम ये सोचता है कि अगर उसकी शादी हो गयी, तो तुम्हारा जैसा ख्याल वो इस वक़्त रख यहा है, वैसा वो शादी के बाद नहीं रख पायेगा। मतलब तुम्हारी चुदाई कैसे होगी, कौन करेगा?”
नसरीन मेरी इस बात पर चुप रही, और मेरी तरफ देखती रही।
मैंने फिर नसरीन से कहा, “नसरीन मेरा तो मानना है कि अगर असलम को इस बात का यकीन हो जाये, कि उसकी शादी के बाद भी तुम ऐसे ही चुदाई के मजे लेती रहोगी जैसे अब ले रही हो, तुम्हारी चूत को लंड की कमी महसूस नहीं होगी, तुम्हारी चूत में ऐसे ही लंड जाता रहेगा, तो हो सकता है वो शादी केलिए हां कर दे।”
नसरीन ने बीच में ही मुझे टोकते हुए कहा, “मालिनी ये आप क्या कह रही हैं? मुझे तो मेरी जमाल के साथ और असलम के साथ चुदाई भी एक हादसे की तरह लगती है। मैं किसी और मर्द से चुदाई करवाने का सोच भी नहीं सकती। मुझे तो कभी-कभी जमाल और असलम के साथ चुदाई का भी अफ़सोस होने लगता है।”
मैंने नसरीन के हाथ पर हाथ रख कर कहा, “नसरीन तुम्हें कौन कह रहा है किसी और से चुदाई करवाने के लिए?”
नसरीन बोली, “तो फिर आप ये जो ” नसरीन ने बात बीच में ही छोड़ दी।
मैंने ही कहा, “देखो नसरीन जब तक जमाल का लंड तुम्हारी चूत में नहीं गया था तब तुम किसे चूत का मजा लेती थी? कैसे अपनी चूत का पानी छुड़ाती थी? तब तक तुम उस पैन के कवर को चूत में डाल कर मजा लेती थी। यही बात है ना?”
नसरीन ने हां में सर हिलाया।
मैंने फिर कहा, “अब जरा सोचो अगर उस पैन के कवर की जगह बिल्कुल लंड जैसा हूबहू ही कुछ मिल जाये तो?”
नसरीन ने बस “जी मैं समझी नहीं” ही कहा।
मैंने नसरीन को हाथ पकड़ कर उठाते हुए कहा, “नसरीन चलो मैं तुम्हें कुछ दिखाती हूं।”
मैं नसरीन को लेकर क्लिनिक के साथ लगे कमरे में ले गयी। नसरीन को सोफे पर बिठा कर मैं भी नसरीन के पास ही बैठ गयी और बोली, “नसरीन क्या तुम जानती हो मेरी उम्र 52 साल की है और मैंने अब तक शादी नहीं की?”
नसरीन हैरान हुई और बोली, ” मालिनी जी मुझे तो ये सब नहीं पता कि आपने अब तक शादी नहीं की। लेकिन अगर आप 52 की हैं भी तो भी आप लगती तो नहीं। आप तो अब भी जवान ही दिखती हैं। आपके चेहरे का नूर और आपकी तंदरुस्ती भी बता रही है कि आपको किसी चीज की कमी नहीं, मेरा मतलब वो जो आपने मुझसे कहा था चुदाई की कमी। चूत में लंड जाने की कमी।”
मैंने नसरीन से हंसते हुए कहा, “तुमने सही समझा है नसरीन। मुझे ना चुदाई की कमी है, ना चूत में लंड जाने की कमी। जहां तक चुदाई का सवाल है, मैंने जवानी में खूब चुदाई करवाई है। यहां तक कि मुझे मर्द के लंड के लिए कभी शादी की जरूरत महसूस नहीं हुई।”
“जब बढ़ती उम्र के साथ मर्दों से चुदाई की इच्छा और मर्द के लंड की ठरक कम होने लगी तो मैंने नकली लंड का सहारा लिया। रबड़ के लंड का – जिनका आज कल खूब चलन है।”
मैं बोल रही थी और नसरीन सुन रही थी, “कालेज के हॉस्टलों में ठहरने वाली लड़कियां, किट्टी पार्टियों में औरतें ऐसी पार्टियों में खूब इस्तेमाल करती हैं इनका। ये कई तरह के होते हैं ये रबड़ के लौड़े। चूत में लेने वाले। गांड में लेने वाले और चूत और गांड दोनों में इकट्ठा लेने वाले।”
मैं जब ये सब बता रही थी तो नसरीन अपनी चूत खुजला रही थी।
वैसे तो जिस बारीकी से नसरीन ने अपनी बशीर, जमाल और असलम के साथ हुई चुदाई की बातें बताई थी, मेरी तो अपनी चूत भी गीली हुई पड़ी थी।
मैंने पूछा, “नसरीन देखोगी?”
नसरीन के जवाब का इंतजार किये बिना मैं उठी और अपने ड्रेसिंग टेबल की दराज में से दो बक्से ले आयी।
एक में एक मोटा लंड और एक उंगली की तरह का खिलौना था और दूसरे में अंग्रेज़ी के शब्द C की तरह दिखने वाला खिलौना था, जिसके एक हिस्सी के आखिर में उंगली की तरह का लगभद ढाई इंच लम्बा सा कुछ लगा हुआ था।
मैंने जब बक्से खोल कर ये खिलौने नसरीन को दिखाए, तो नसरीन ये खिलौने देख कर हैरान हो गयी। घरेलू औरत नसरीन शायद ये पहली बार देख रही थी।
या शायद जमाल की दी हुई मैग्ज़ीनों में या फिर उन चुदाई की फिल्मों में ही अब तक देखे होंगे।
नसरीन ने उंगली की तरह का खिलौना उठाया और उसे उलट-पुलट कर देखने लगी। नसरीन को लगता था समझ नहीं आया कि ये क्या था। नसरीन मेरी तरफ देखने लगी।
मैंने नसरीन के हाथ से वो खिलौना ले लिया और बोली, “नसरीन नहीं समझ आया ये क्या है?”
नसरीन ने ना में सर हिला दिया। मैंने कहा, “मैं बताती हूं, इस उंगली की तरह की चीज का ये हिस्सा देखो।”
वो एक वो गोल सा हिस्सा था जो अंदर की तरफ दबा सा हुआ था।
मैंने नसरीन को कहा, “नसरीन अब अपने हाथ के उंगली इस दबे हुए हिस्से पर रखो।”
नसरीन ने ऐसा ही किया। मैंने खिलौने के नीचे की हिस्से से एक बटन दबाया तो खिलौने का आगे का हिस्सा ऐसे हरकत करने लगा, जैसे नसरीन की उंगली चूस रहा हो।
नसरीन ने मेरी तरफ देखा, जैसे उसे समझ नहीं आया था।
मैंने कहा, “अब जरा सोचो नसरीन जहां तुम्हारी उंगली है वहां तुम्हारी चूत का दाना हो तो?”
नसरीन के मुंह से निकला, “अल्लाह ये तो बड़ा ही मजा देगा।”
मैंने कहा “हां नसरीन बड़ा मजा देगा।” फिर मैंने नसरीन को मोटा लंड दिखाया। नसरीन को वो तो समझ आ ही गया। आखिर नसरीन बशीर, जमाल और असलम के लंड ले ही चुकी थी।
फिर नसरीन ने C की तरह का खिलौना उठाया और मेरी तरफ देखते हुए बोली, “और मालिनी जी ये?”
मैंने कहा, “नसरीन ये गांड, चूत और चूत के दाने की, तीनो की खातिरदारी करता है – वो भी इक्क्ठे।”
नसरीन के मुंह से बस यही निकला, “कमाल है।” और नसरीन ने फिर अपनी चूत खुजलाई।
मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन ले कर देखने हैं?”
नसरीन हैरानी से बोली, “जी?”
मैंने नसरीन की चूत की तरफ इशारा करके कहा, “अरे नसरीन मैंने पूछा लेने हैं इसमें?”
नसरीन का चेहरा गुलाबी हो गया। कुछ पल चुप रहने के बाद नसरीन ने फिर से चूत खुजलाई मगर बोली कुछ नहीं।
ये एक तरह से नसरीन की हां थी। मैंने फिर नसरीन को टटोला, “बोलो नसरीन लेकर देखने हैं?”
नसरीन ने फिर दुबारा अपनी चूत खुजलाई और इस बार बोली, “जैसी आपकी मर्जी मालिनी जी।”
लग ही रहा था नसरीन की चूत गरम थी। ये कह कर नसरीन अपनी सलवार का नाड़ा खोलने लगी।
नसरीन जब अपनी सलवार का नाड़ा खोल रही थी, तो मैंने नसरीन से पूछा, “नसरीन एक बात पूछूं?”
नसरीन बोली, “पूछिए मालिनी जी।”
“नसरीन, बशीर जमाल और अब असलम, तीनों तुम्हारी चूत चूसते थे और खूब चूसते थे। असलम तो अभी भी चूसता है। तुमने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्या होता है चूत में? क्या निकलता है औरत की चूत में से जो मर्दों को इसकी चुसाई में इतना मजा आता है जो वो अक्सर हर चुदाई से पहले वो चूत जरूर चूसते है?”
नसरीन बोली, “मालिनी जी आपकी बात तो बिल्कुल ठीक है। कुछ तो होगा ही चूत चुसाई में। बशीर जमाल और असलम ये तीनों ही जब भी मुझे चोदते थे खूब चूत चूसते थे। असलम को तो एक बार मेरी चूत चूसने के बाद चूत चूसने का चस्का ही लग चुका है। जब तक वो एक बार मेरी चूत चूस ना ले उससे ढंग से मेरी चुदाई ही नहीं होती।”
बातों-बातों में डाक्टर मालिनी नसरीन को चुदाई वाले खिलौने दिखाने के लिये पीछे के कमरे में ले गयी।
नसरीन की चूत अपनी चुदाई की कहानी सुनाते-सुनाते गीली हो चुकी थी। उधर मालिनी का भी यही हाल था। मालिनी की चूत नसरीन की चुदाई की कहानी सुनते सुनते गीली हो चुकी थी। दोनों की चूतें गीली हुई पड़ी थी। मालिनी का मन नसरीन से अपनी चूत चुसवाने का होने लगा। मालिनी ने नसरीन को चूत चुसाई वाली अपने मन की बात बता दी।
मेरी चूत चुसाई की बात सुन कर नसरीन बोली, “मालिनी जी, मुझे तो बस इतना पता है कि उनकी चूत चुसाई से मुझे बड़ा मजा आता था, अब भी आता है, जब असलम मेरी चूत चूसता है। कई बार तो ऐसा भी होता है मालिनी जी कि असलम इतनी देर तक जोर-जोर से चूत चूसता, चाटता हैं कि इस चुसाई में ही मैं झड़ जाती हूं – मेरी चूत का पानी निकल जाता है।”
मैंने नसरीन से पूछा, “यही तो मैं भी पूछ रही हूं नसरीन, कभी सोचा है कि आखिर ये सारे मर्द चूत चूसते ही क्यों हैं? आखिर क्यों? निकलता तो पेशाब ही है इसमें से।” ये कह कर मैं हंस दी।
नसरीन भी मेरी बात सुन कर हंसी, मगर बोली कुछ नहीं।
मैंने ही फिर कहा, “नसरीन पेशाब के अलावा भी कुछ तो निकलता ही होगा चूत में से जिसको चूसने का मजा इन मर्दों को आता है।”
नसरीन मेरी इस बात पर भी कुछ नहीं बोली।
फिर मैंने ही नसरीन को बताया,” नसरीन तुम भी एक औरत हो, ये तो तुम भी अच्छी तह जानती ही होगी कि कुदरत की तरफ ही जब लड़की या औरत चुदाई का सोचती है, या चुदाई करवाने के लिए तैयार होती है तो चूत में से एक चिकना सा पानी निकलने लगता है। ये पानी हल्की खुशबू लिए हुए होता है और स्वाद में हल्का सा नमकीन होता है।”
मेरी इस बात पर नसरीन ने हां में सर हिलाया, आखिर थी तो वो भी मस्त चुदाई करवाने वाली औरत ही।
मैंने बात जारी रखी, “अब नसरीन इस चिकने पानी की खासियत ये होती है कि ये जल्दी सूखता नहीं। ये चूत के अंदर और बाहर जहां झांटों के बाल होते हैं, वहां जमा हो जाता है। हवा के सम्पर्क से आने के कारण इसमें अजीब सी मस्त करने वाली गंध आने लगती है। यही गंध सूंघने वालों को पागल करती है।”
“नसरीन जैसे चूत चुसवाने में मजा आता है ऐसा ही चूत चूसने में भी मजा आता है। असल में तो चूत के इसी शहद की खुशबू और उसका हल्का नमकीन स्वाद ही तो है मर्दों का लंड एक-दम सख्त कर देता है। असलम ने भी तो यही कहा करता था तुमसे।”
नसरीन ने हंसते हुए हां में सर हिलाया और बस इतना ही कहा, “मालिनी जी आप भी ना।”
यह कहते हुए नसरीन ने अपनी चूत जरूर खुजला ली।
फिर मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन अब ये बताओ जब तक तुम चूत चूसोगी नहीं तो पता कैसे लगेगा कि चूत चुसाई क्या होती है, चूत के पानी का स्वाद कैसा मस्ती भरा होता है।”
मेरी इस बात पर नसरीन बोली, “मालिनी जी वैसे तो मुझे ये ख्याल कभी नहीं आया, और आता भी तो मैं क्या करती? चूसने के लिए चूत भी तो होनी चाहिए। कोई अपनी चूत तो चूस नहीं सकता।”
मैंने कहा, ” बिल्कुल ठीक है। चूसने के लिए चूत भी तो होनी चाहिए, कोइ अपनी चूत तो नहीं चूस सकता।”
फिर मैंने कुछ रुक कर कहा, ” नसरीन आज मन है चूत चूसने का? चूसोगी चूत? अभी – इसी वक़्त।”
नसरीन हैरानी से बोली, ” अभी इसी वक़्त? किसकी चूत मालिनी जी?”
मैंने कहा, “मेरी चूत नसरीन। चूसोगी मेरी चूत? जानना चाहोगी क्या निकलता है चूत में से जो मर्द चूत चुसाई के दीवाने रहते हैं। मेरी चूत इस वक़्त गीली हुई पड़ी है। मस्त मजा आएगा तुम्हें इसे इस वक़्त चूसने चाटने का।”
नसरीन लगभग चिल्लाते हुए बोली, “आपकी चूत मालिनी जी? आप चूत भी चुसवाती हैं?”
मैंने भी कहा, ” मेरी बात छोड़ो नसरीन, मैं मजे के लिए सब कुछ करती हूं। चूत चूसती भी हूं और चुसवाती भी हूं। लंड भी लेती हूं सब जगह – आगे पीछे मुंह में। बस एक ही बात होनी चाहिए, सामने वाला मर्द देखने भालने में बढ़िया हो और लंड और लंड का दम, वो भी दोनों बढ़िया हो।”
नसरीन हैरानी से मेरी तरफ देख रही थी।
नसरीन को इस तरह हैरान देख कर मैंने फिर कहा, “बोलो नसरीन चूसोगी? उतारूं कपड़े?”
नसरीन ने हां में सर हिलाया और बोली, “ठीक है अगर ये बात है मालिनी जी जरूर चूसूंगी। उतारिये कपड़े और लेटिए। चूत चूसने का मजा मैं भी तो लेकर देखूं। मगर मालिनी जी कोइ आ तो नहीं जाएगा?”
मैंने कहा, “उसकी चिंता मत करो नसरीन। यहां मेरे इस क्लिनिक में कोइ भी तब तक नहीं आता जब तक मैं बुलाऊं ना।”
और ये कह कर मैंने कपड़े उतार दिए।
मेरे कपड़े उतारते ही नसरीन की शर्म भी खत्म हो गयी और उसने भी अपने कपड़े उतार दिए। नसरीन भी नंगी हो चुकी थी। नसरीन का जिस्म इस उम्र में भी संगमरमर की तरह चिकना, मुलायम और कड़क था।
मैंने नसरीन को बाहों से पकड़ा और खींच कर अपने से चिपका लिया। दोनों के मम्मे एक दूसरी के मम्मों को दबा रहे थे। नसरीन ने एक सिसकारी ली,” आआह मालिनी जी” और मैंने नसरीन के होंठ अपने होठों में ले लिए और एक हाथ की उंगली नसरीन की चूत में डाल दी।
कुछ देर नसरीन के होंठ चूसने के बाद मैंने नसरीन को छोड़ा और कहा, “आ जाओ नसरीन दिखाओ अपने होठों और जुबान का कमाल।”
ये कह कर मैं लेट गयी। चूतड़ों के नीचे तकिया रख के चूत ऊंची कर दी और दोनों हाथ नीचे से डाल कर चूत की फांकें खोल दी।
मेरी गुलाबी चूत देख कर नसरीन ने मेरी चूत में उंगली दाल दी और एक सिसकारी ली, “अअअअअह… मालिनी जी… आपकी चूत।”
फिर नसरीन मेरी चूत की तरफ झुकते हुए बोली कुछ सोचते हुए बोली, “मालिनी जी क्या आप भी मेरी चूत चूसेंगी?”
मैंने जवाब दिया, ” बिल्कुल चूसूंगी, ऐसे थोड़े ही छोड़ दूंगी तुम्हे? बताया तो है नसरीन, मैं चूत चुस्वाती भी हूं और चूसती भी हूं और आज तुम्हारी चूत भी चूसूंगी।”
नसरीन मेरी चूत चूसने के लिया नीचे की तरफ झुक रही थी, और साथ ही हैरानी से मेरी तरफ देख रही थी, जैसे सोच रही हो ये कैसी मनोचिकित्स्क है।
नसरीन ने जिस तरह से पूरे जोर-शोर और जोश के साथ मेरी चूत चूसी, मुझे मजा ही आ गया। नसरीन इस तरह मेरी चूत चूस रही थी, जैसे मेरी चूत से निकल रहे पानी की एक-एक बूंद चाट जाना चाहती हो। दस मिनट की चूत चुसाई के बाद मैंने कहा, “बस नसरीन, मेरा तो कुछ अंदर लेने का मन हो रहा है। चल अब बारी-बारी से इन खिलौनों से मजा लेते हैं। आजा इसी तकिये पर चूतड़ रख कर लेट जा और चूत की फांकें खोल ले और दाना दिखा अपनी फुद्दी का। चल पहले चूत का दाना रगड़ने वाला लगाती हूं।”
नसरीन लेटने के लिए उठी और उठती उठती बोली, “मालिनी जी चूत चूसने का तो मजा ही बहुत आता है। चूत से उठती महक तो बड़ा मजा देती है। आपकी चूत की महक ने तो मेरी चूत ही पानी से भर दी और जो नमकीन स्वाद है चूत के पानी का – अब समझ आया क्यों चूत चोदने से पहले मर्द चूत चूसते चाटते हैं।
फिर कुछ रुक कर नसरीन बोली, “वैसे तो मालिनी जी जानवर भी यही करते हैं। सांड और कुत्ते को ही देख लो चुदाई की लिए गाये या कुतिया पर चढ़ने से पहले चूत सूंघते चाटते हैं।” नसरीन की इस बात पर मेरी हंसी छूट गयी।
नसरीन लेट गयी और चूत की फांकें खोल दी। मैंने उंगली शक्ल के खिलौने का आगे का हिस्सा नसरीन की चूत के दाने पर रक्खा। चूत का दाना पूरा खिलौने में बैठ गया। जैसे ही मैंने नीचे से बटन दबा कर वाइब्रेटर चालू किया, नसरीन की सिसकारी निकल गयी,” मालिनी जी मर गयी मैं, इतना मजा? आआआह आआआह।”
पांच मिनट के बाद ही नसरीन बोली, “बस मालिनी जी ,अगर और ये लगा रहा मेरी चूत के दाने पर तो मेरी तो चूत पानी ही छोड़ देगी। अब कोइ दूसरा डालिये।”
मैंने वो खिलौना हटा लिया और अंगरेजी के “C” शब्द की शक्ल का खिलौना निकाल लिया। जैल क्रीम लगा कर नसरीन की गांड का छेद चिकना किया और खिलौने का एक हिस्सा पूरा अंदर तक नसरीन की गांड में बिठा दिया।
इस खलौने के दूसरे हिस्से को चूत में जाने में तो कोइ समस्या ही नहीं हुई। नसरीन की चूत पानी से भरी पड़ी थी। प्लप्प से वो हिस्सा चूत में जड़ तक चला गया। इस हिस्से के आखिर में लगा हुआ उंगली जैसा हिस्सा चूत के दाने पर चिपक गया। सब तैयारी के बाद मैंने खिलौने के नीचे बटन चालू किया और पूरा खिलौना वाइब्रेट करने लगा। मजे के मारे नसरीन की चीख निकल गयी।
जब खिलौने अपना काम करने लगे और नसरीन को मजा आने लगा तो मैं उठी और नसरीन के मुंह पर अपनी चूत रख कर नसरीन के ऊपर उल्टा हो कर लेट गयी।
नसरीन समझ गयी कि मैं क्या चाहती हूं। नसरीन मेरी चूत चूसने लगी। मुझे मजा आने लगा। नसरीन तो चूतड़ हिलाती जा रही थी। एक बार नसरीन ने चूतड़ जोर से हिलाये और मेरी चूत में ही हूं हूं हूं करके सिसकारी ली और चूतड़ घूमने बंद कर दिए।
नसरीन को एक मजा आ चुका था। नसरीन की चूत एक पानी छोड़ चुकी थी। मगर नसरीन की चूत और गांड के अंदर बैठे खिलौने चालू ही थे। ना नसरीन ने मुझे इन्हें निकलने के लिए कहा, और ना ही मैंने नसरीन की गांड और चूत में से वो खिलौने निकाले।
मैंने रबड़ का लंड उठाया और पीछे हाथ करके अपनी चूत में बिठा कर वाईब्रेटर चालू कर दिया। मेरी चूत, और नसरीन की चूत और गांड सब भरी पड़ी थी। मैं अभी भी नसरीन के ऊपर ही थी। जल्दी ही नसरीन ने फिर चूतड़ घुमाने शुरू कर दिए। अगले बीस मिनट यही कुछ चलता रहा।
कौन कितनी बार झड़ा कितनी बार चूत का पानी निकला इसकी कोई गिनती नहीं थी। खूब सारे मजे लेने के बाद मैं नसरीन के ऊपर से हटी। नसरीन की चूत और गांड के अंदर बैठे हुए रबड़ के लंड की वाइब्रेशन बंद की। अपनी चूत के अंदर का खिलौना भी बंद किया और नसरीन की साथ ही लेट गयी।
नसरीन बोली, “मालिनी जी ये तो बड़े ही करिश्माई खिलौने हैं।”
“हां नसरीन ये करिश्माई खिलौने ही हैं, जो औरत की चूत और गांड को मर्द की असली चुदाई का मजा देते हैं।”
चूत चुसाई और खिलौनों के मजे लेने के बाद मैं फिर से असली मुद्दे पर आ गयी।
मैंने नसरीन से कहा, “बस नसरीन अब मुझे असलम को ये यकीन दिलाना है कि जब वो अपनी अम्मी, यानी तुम्हारी चुदाई बंद कर देगा तो तुम किस तरह काम चलाओगी – कैसे अपनी चूत का पानी छुड़ाओगी।”
“एक बार ये बात असलम के दिमाग मैं बैठ गयी कि उसकी उसकी चुदाई बंद करने के बाद भी तुम चुदाई जैसे मजे लेती रहोगी, तो मुझे लगता है शादी के बारे में उसका नजरिया बदल जाएगा।”
मेरी ये बात सुन कर नसरीन ने बड़ी ही तसल्ली से मुझे देखा, जैसे उसे विश्वास हो गया हो कि मैं असलम कोई शादी के लिए मना लूंगी।
कुछ देर बाद हम दोनों उठी। बाथरूम जा कर हाथ मुंह और चूत की धुलाई की। चेहरे मेकअप ठीक किया और क्लिनिक में आ गयी।
नसरीन के लिए उस दिन के लिए मेरे क्लिनिक में कुछ करने को नहीं था। अब मैंने असलम से बात करके इस मां बेटे की चुदाई के बारे में उसका, असलम का नजरिया जानना था और आगे क्या और कैसी करना है ये फैसला करना था।
नसरीन ने पूछा, “मालिनी जी अब? अब आप असलम से बात करेंगी? आप को लगता है असलम शादी के लिए हां कर देगा?”
मुझे लगा नसरीन असलम की शादी के लिए कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद है। मैंने उसे दिलासा देने वाले अंदाज में कहा, “देखो नसरीन पहली बात तो ये है कि अगर तुम मुझ से पूछो तो ये मां-बेटे, बाप-बेटी में बनने वाले चुदाईयों के रिश्तों का कोइ भविष्य नहीं होता। तुम असलम से चुदाई शुरू होने चार साल बाद इस बात को समझ चुकी हो, मगर असलम अभी भी नहीं समझा। मुझे बस उसे यही समझाना है, और मुझे पूरी उम्मीद है कि वो मान जाएगा।”
“दूसरी बात, असलम जो सोचता है कि अगर उसकी शादी हो गयी तो तुम्हारी चूत का पानी कौन और कैसे छूटेगा। तो उसका जवाब ये खिलौने हैं जो मैं मौका देख कर असलम को दिखाऊंगी, और उसे ये विश्वास भी दिलाऊंगी कि उसकी शादी के बाद भी तुम चुदाई के लिए तरसोगी नहीं और बाद में भी चुदाई जैसे मजे लेती रहोगी।”
नसरीन को मेरे इन बातों से बड़ा सुकून मिला।
मैंने फिर नसरीन को कहा, “अब तुम निश्चिन्त हो जाओ। कल मुझे असलम से बात करने दो, सब ठीक हो जाएगा। कल सुबह ग्यारह बजे असलम को मेरे पास भेज देना। कल तुम्हें आने की जरूरत नहीं। वैसे भी मैं असलम से अकेले में ही बात करूंगी।”
“ठीक है मालिनी जी” कह नसरीन जाने के लिए उठी तो मैंने पूछा, “नसरीन जाओगी कैसे?”
नसरीन बोली, “देखती हूं मालिनी जी कोइ ऑटो या टैक्सी मिल जाएगी।”
मेरा ड्राइवर शंकर उस दिन आया नहीं था। मैंने नसरीन से कहा “तुम बैठो नसरीन, मैं तुम्हारे लिए टैक्सी बुलवाती हूं।”
मैंने टैक्सी के लिए फोन किया और सात आठ मिनट के बाद ही टैक्सी आ गयी, और नसरीन चली गयी। अब अगले दिन सुबह असलम ने आना था, और मेरा इरादा नसरीन की टेप की हुई आवाज और बातें मैंने असलम को सुनाने का था।
नसरीन की बताई बातों में से असलम की अम्मी नसरीन और अब्बू बशीर की चूत चुदाई वाले हिस्से का असलम के इस केस से कुछ लेना देना नहीं था। लिहाजा असलम के सामने मैं वहीं से टेप चालू करना चाहती थी जहां से मामला असलम से जुड़ता था।
वैसे भी अब्बू अम्मी की चुदाई और उस चुदाई के दौरान होने वाली बातें एक बेटे के लिए सुनना ठीक नहीं था। भले हालातों के चलते हुए आज के दिन बेटा अपनी अम्मी की चुदाई ही कर रहा था।
मैंने टेप फिर से रिकार्डर में डाली और रिमोर्ट का बटन दबा दिया।
नसरीन की टेप चालू – क्लिक की आवाज के साथ टेप रेकार्डर चालू हो गया और मैं ध्यान से नसरीन की आवाज सुनने लगी।
नसरीन की शादी, बशीर की नसरीन के साथ पहली चुदाई। नसरीन की चूत की सील फटना। बशीर और नसरीन का चुदाई की फिल्म चला कर चुदाई करना। बशीर का नसरीन की गांड चोदना।
असलम की अम्मी अब्बू – बशीर और नसरीन की चुदाई का ये वाला हिस्सा सच में ही असलम के लिए नहीं था।
यहां मैंने टेप रोक दी और टेप रिकार्डर बंद कर दिया।
अगले दिन ठीक ग्यारह बजे असलम मेरे क्लिनिक पर पहुंच गया।
असलम अच्छे नैन नक्शों वाला जवान तंदरुस्त लड़का था।
असलम को देख कर मेरी चूत में झुरझुरी सी हुई। मैंने सोचा लंड भी बढ़िया होगा इसका I वैसे तो नसरीन ने बताया ही था कि असलम का लौड़ा कलाई के बराबर मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा लंड था।
पहले अक्सर घरों में जब कलाई की बराबर के बात करते थे तो मतलब होता था लगभग दो इंच ढाई इंच गोलाई और जब आधा हाथ कहा जाता है तो इसका मतलब होता था हाथ के बीच की उंगली से कुहनी तक की लम्बाई जो अक्सर चौदह इंच से ले कर बीस के बीच होती है।
इस आधे हाथ का मतलब तो हुआ सात से लेकर दस इंच लम्बा और दो इंच से ज्यादा मोटा? क्या इतना बड़ा लंड होगा असलम का?
इतना सोचते ही मेरी आंखों के आगे असलम का खड़ा लंड घूमने लगा और मेरी तो चूत और गांड दोनों खलबली मच गयी।
नसरीन जा चुकी थी। अगले दिन असलम मालिनी अवस्थी के क्लिनिक में आ गया। ढाई इंच गोलाई और सात इंच लम्बाई वाले लंड वाला असलम देखने में भी एक-दम मस्त था। असलम को देखते ही मालिनी की चूत में झुरझुरी और गांड में झनझनाहट होने लगी।
असलम कुर्सी पर बैठ गया। जब वो सहज हो गया तो मैंने, यानि मालिनी अवस्थी ने बात शुरू की।
“असलम तुम्हें पता ही होगा, कल मैं तुम्हारी अम्मी से बात कर चुकी हूं। तुम्हारी अम्मी मुझे सब कुछ – मतलब अपनी और तुम्हारी हर छोटी बड़ी बात बता चुकी है। मैंने तुम्हारी अम्मी की हर बात रिकार्ड की है और मैं तुम्हारी बातें भी रिकार्ड करूंगी। ये हमारा मनोचिकित्स्कों के काम करने का तरीका है।”
“जब तुम्हारा यहां काम खत्म हो जाएगा तो मैं टेप तुम्हें वापस कर दूंगी, या तुम्हारे सामने ही उसे डैमेज कर दूंगी। ठीक है?”
असलम ने भी कहा, “ठीक है मैडम, मैं समझता हूं। अम्मी ने भी मुझे ये बता दिया था।”
मैंने फिर कहा, “असलम चलो सीधे काम की बात करते हैं।”
“तुम्हारी अम्मी ने मुझे बताया है कि किन हालातों के चलते तुम्हारी अम्मी के जमाल के साथ जिस्मानी रिश्ते बन गए, और फिर हालात कुछ ऐसे बदले कि तुम और तुम्हारी अम्मी के बीच भी…।” मैंने यहां बात अधूरी छोड़ दी।
असलम मुझे थोड़ा परेशान सा लगा।
मैंने कहा, “देखो असलम कभी-कभी वक़्त ऐसे करवट लेता है कि चीजें इंसान के हाथ में नहीं रहती। मान लो अगर तुम्हारे अब्बू की बेवक़्त मौत ना हुई होती, तो तुम्हारी अम्मी दुकान पर जाना ही ना शुरू करती, और ना ही जमाल के साथ उनके जिस्मानी रिश्ते बनते।”
“और जमाल अगर दुबई ना जाता तो तुम्हारी और तुम्हारी अम्मी के भी इस तरह के जिस्मानी रिश्ते ना बनते।”
बात जारी रखते हुए मैंने कहा, “असलम साफ़-साफ़ बात ही करते हैं।”
मैंने कुर्सी थोड़ी सी आगे की ओर असलम से कहा, “मेरे कहने का मतलब ये है असलम कि तुम्हारी और तुम्हारी अम्मी कि चुदाई एक हादसे की तरह है और इस चुदाई में बहुत से ‘अगर-मगर और किन्तु परन्तु’ हैं।”
“एक मनोचिकित्स्क के हिसाब से – तुम्हारी अपनी अम्मी के साथ चुदाई पूरी तरह से हालात की देन है। अब वो बात अलग है कि हर चुदाई में औरत और मर्द दोनों को मजा आता है और हालातों के कारण बने रिश्ते धीरे-धीरे इंसानी और जिस्मानी जरूरत बन जाते हैं।”
“असलम तुम्हारी अम्मी की टेप की हुई पूरी बात सुनते हैं I फिर तुम मुझे बताना कि सब कुछ ऐसे ही हुआ, जैसे तुम्हारी अम्मी ने बताया है? इससे ये समझने की कोशिश करेंगे कि किन हालात में तुम्हारी अम्मी के जमाल और तुम्हारे साथ जिस्मानी रिश्ते बने और चुदाई चालू हुई। ये भी समझने जानने की कोशिश करेंगे कि अब आगे इन रिश्तों को ऐसे ही चलने देने की कितनी जरूरत है।”
मैंने असलम से कहा, “असलम आगे बढ़ने से पहले मुझे साफ़-साफ़ शब्दों में एक बार सिर्फ ये बताओ की तुम्हारी अम्मी चाहती हैं कि तुम्हारी शादी हो जाए, और तुम शादी करना नहीं चाहते। ऐसा क्यों है असलम? उम्र तो तुम्हारी शादी के लायक हो ही चुकी है।”
असलम का जवाब बड़ा सटीक था, “देखिये मैडम, अगर कोइ और मुझे ये सवाल करता तो मैं ये जवाब देता कि किसी को क्या लेना-देना है मेरी शादी से। मैं अभी शादी ना करूं या कभी भी ना करूं। अब आप एक मनोचिकित्स्क हैं, और अम्मी मुझे आपके पास लेकर ही इसलिए आयी है कि आप मुझे समझाएं और मैं शादी के लिए राजी हो जाऊं। इस लिए मैं आपको तो साफ़ ही बता देता हूं।”
असलम वैसे ही बोला, “मैडम मैं शादी इस लिए नहीं करना चाहता कि शादी के बाद मेरा प्यार और मेरा ध्यान दोनों बंट जाएंगे। ये भी हो सकता है कि मैं अम्मी का ध्यान ऐसा ना रख पाऊं जैसा मैं अभी रख रहा हूं। फिर अम्मी क्या करेगी?”
तो मेरा अंदाजा सही था। असलम अपनी अम्मी के ध्यान रखने यानी चुदाई करने के बारे में चिंतित था। उसका सोचना था उसकी चुदाई नसरीन – उसकी अम्मी और उसकी बीवी के बीच बंट जाएगी।
मैंने असलम से कहा , “असलम तुम्हारा जवाब बड़ा ही सही और सटीक है।”
“अच्छा असलम मैं तुम्हें तुम्हे अम्मी की टेप की हुई आवाज सुनाऊंगी। इसमें तुम्हारे बीच जिस्मानी रिश्तों – साफ़-साफ़ बात करते हैं – यानी चुदाई के रिश्तों की कहानी है। मतलब कि तुम्हारे अब्बू के इंतकाल के बाद तुम्हारी अम्मी की चुदाई कैसे और किन हालातों में वो चुदाई शुरू हुई और अब वो चुदाई कहां पहुंच गयी है।”
असलम के अम्मी अब्बू – नसरीन और बशीर की चुदाई का हिस्सा तो मैं फॉरवर्ड – आगे कर ही चुकी थी।
मैंने टेप वहां से चालू की जहां नसरीन कहती है, “असलम दस साल का था – अचानक मेरी सास फातिमा बेगम का इंतकाल हो गया। ये हमारे लिए बड़ी ही दुःख कि घटना थी। मुझे तो मेरी सास का बड़ा सहारा था। लेकिन मौत पर किसका जोर चलता है। सास के इंतकाल के बाद भी असलम अपनी दादी के कमरे में ही सोता था। जिंदगी कि गाड़ी चलती जा रही थी – वक़्त गुजरता जा रहा था।”
टेप चल रही थी और नसरीन की आवाज आ रही थी। नसरीन बोल रही थी कि उसकी जमाल के साथ चुदाई कैसे शुरू हुई। फिर जमाल का दुबई जाने का प्रोग्राम, जमाल के साथ नसरीन के आखरी सात दिनों की चुदाई, नसरीन की जमाल के साथ गांड चुदाई, असलम की परेशानी, असलम का मैगजीन लाना, असलम का अम्मी का चूत में पैन का कवर लेते हुए देखना, पहली बार असलम का पायजामे में ही लंड का पानी निकलना। नसरीन बता रही थी और सब कुछ असलम सुन रहा था।
जैसे-जैसे टेप चल रही थी, असलम का लंड अपने अम्मी की चुदाई की कहानी सुन सुन कर हरकत कर रहा था। जब भी नसरीन और जमाल की चुदाई के दौरान की हुई नसरीन और जमाल की बातें आती तो असलम को अपना लंड अपनी पेंट में दुबारा ठीक करना पड़ता।
टेप चल रही थी, और असलम की अम्मी नसरीन का आवाज आ रही थी। नसरीन बोल रही थी “टीवी की रौशनी असलम के लंड पर पड़ रही थी। नए-नए जवान हुए असलम का लंड बशीर और जमाल दोनों के लंडों से मोटा और लम्बा था। मेरी कलाई जितना मोटा और लम्बाई में मेरे आधे हाथ की लम्बाई से कम क्या होगा। मेरी चूत में ये सोच कर एक झनझनाहट सी हुई – ये लंड? क्या इतना मोटा लंड डालेगा असलम आज मेरी चूत में?” मैंने धीमी आवाज में असलम से पूछा, “असलम मेरी चूत में डालोगे इसे? चोदोगे आज अपनी अम्मी को?
नसरीन की इस बात के आते असलम फिर कुछ हिला और अपना लंड पेंट में ठीक से बिठाया।
यहां मैंने हाथ में पकड़े रिमोर्ट के साथ टेप रिकार्डर बंद कर दिया। साफ़ मालूम पड़ रहा था कि अपनी अम्मी के इतनी साफ़-साफ़ बातें सुनते-सुनते असलम का लंड हरकत करने लग गया था।
असलम ने खड़े होते हुए लंड को पेंट में ठीक करते हुए मेरी और देखा जैसे पूछ रहा हो क्या हुआ डाक्टर मैडम, बंद क्यों कर दिया? चुदाई की ऐसी साफ़-साफ़ दास्तान सुन कर असलम का लंड भी हरकत में आ गया था। पेंट के ऊपर से लंड का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था।
मैंने असलम के खड़े लंड की तरफ इशारा कर के पूछा, “क्या हुआ असलम? कुछ याद आ गया क्या?”
असलम ने मेरी बात का तो जवाब नहीं दिया मगर नीचे की तरफ देखते हुए कहा, “डाक्टर आपने टेप बंद क्यों कर दिया?”
मैंने कहा, “कुछ देर आराम कर लेते हैं – कुछ बातें करते हैं, टेप का क्या है, फिर चालू कर देंगे।”
फिर मैंने अपनी पहियों वाली कुर्सी असलम के पास खिसकाई और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा, “असलम क्या सच में ही तुम्हारा लंड इतना ही बड़ा है जितना तुम्हारी अम्मी बता रही थी – कलाई जितना मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा।”
असलम मेरी इतनी साफ़ बात सुन कर कुछ परेशान सा हुआ और इतना ही बोला, “जी?”
मैंने फिर अपना सवाल दोहरा दिया, “मैंने पूछा है क्या सच में ही तुम्हारा लंड इतना ही बड़ा है, जितना तुम्हारी अम्मी बता रही थी – कलाई जितना मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा। ये तो कम से कम साथ आठ इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा हुआ। क्या सच में इतना बड़ा लंड है तुम्हारा?”
असलम थोड़ा सा शर्माते हुए बोला, “जी पता नहीं।”
और वैसे भी लड़का असलम अपने से दुगनी उम्र की डाक्टर को क्या जवाब देता। उसे भी तो मालूम ही था कि उसकी अम्मी नसरीन ने डाक्टर को अपनी और अपने बेटे असलम में हो रही चुदाई के बारे में सब कुछ बता दिया होगा।”
मैंने हाथ असलम के कंधे पर रखे-रखे ही कहा, “अच्छा मुझे दिखाओ।”
असलम फिर परेशान हुआ और बोला, “जी क्या दिखाऊं?”
मैंने कहा “अरे असलम, मैं कह रही हूं मुझे अपना लंड दिखाओ। मैं बस ये देखना चाहती हूं, क्या सच में ही ये इतना बड़ा है जितना तुम्हारी अम्मी नसरीन बता रही थी या नहीं। चलो खड़े हो जाओ, इधर मेरे पास आओ।”
साथ ही मैंने असलम के लंड पर हाथ फेरा। मुझे साफ़ महसूस हुआ कि मेरे हाथ फेरते ही असलम का लंड और सख्त हो गया था।
असलम कुर्सी से उठ कर खड़ा तो हो गया, अगर अपनी जगह से हिला नहीं।
मैंने असलम का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसकी पेंट की ज़िप खोल दी। मैंने लंड बाहर निकलने की कोशिश की मगर लंड पूरा खड़ा हो चुका था और सख्त हुआ पड़ा लंड पेंट की ज़िप से बाहर नहीं निकल पा रहा था।
मैंने असलम की जींस के बटन खोले और पेंट नीचे खिसका कर लंड अंडरवियर में से बाहर निकाल लिया। असलम हैरान था कि ये क्या हो रहा था – ये मैं क्या कर रही थी।
असलम का लंड सच में ही बहुत बड़ा था। इतना बड़ा लंड बहुत कम लोगों का होता है ढाई इंच से लगभग मोटा और लगभग सात साढ़े सात इंच लम्बा।
ऐसा लंड देख कर मुझसे रहा नहीं गया। मेरा मन असलम का मोटा और लम्बा लंड अपनी चूत में डलवाने का होने लगा। मेरी चूत में खलबली मच गयी। मैंने एकाएक असलम का लंड मुंह में लिया, और चूसने लगी। कुछ पल तो असलम ऐसे ही खड़ा रहा। असलम को समझ ही नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा था।
लेकिन औरत की लंड चुसाई के सामने एक मर्द कर भी क्या सकता है। जल्दी ही असलम को चुसाई का मजा आने लग गया और उसने “आआह डाक्टर आआआह डाक्टर”, कहते हुए मेरा सर पकड़ कर अपने चूतड़ आगे-पीछे करने शुरू कर दिए।
असलम का लंड बांस की तरह सख्त हो चुका था। मुझे लगा जोश में असलम लंड का पानी मेरे मुंह में ही ना निकाल दे। मेरा मन असलम का खूंटा अपनी चूत और गांड में लेकर चुदाई करवाने का था।
थोड़ा सा और चूसने के बाद मैंने लंड मुंह से निकाला और असलम से पूछा, “असलम मेरी चूत में डालोगे इसे? चोदोगे आज मुझे?”
हैरान असलम के मुंह से बात ही नहीं निकल रही थी। मैं खड़ी हुई, असलम का हाथ पकड़ा और क्लिनिक के साथ लगे अपने कमरे में ले गयी।
मैंने कहा, “असलम कपड़े उतार लो।”
ये कह कर मैंने अपनी साड़ी, ब्लाऊज़ ब्रा और पेंटी उतार दी। असलम आंखें फाड़-फाड़ कर मुझे देख रहा था। उसने सोचा भी नहीं होगा कि इस उम्र की डाक्टर ऐसी कड़क होगी। और वही बात असलम ने बोली, “डाक्टर मैडम आपका जिस्म तो मेरी अम्मी के जिस्म की तरह है, एक-दम कड़क।”
मैंने हंस कर कहा, “अच्छा? चल फिर दिखाओ अपने इस लंड का कमाल और निकालो मेरे इस जिस्म की कड़की I चोदो मुझे भी वैसे ही जैसे तुम अपनी अम्मी को चोदते हो।”
असलम आगे आ गया और मेरे मम्मों को हाथ में लेकर मसलने लगा।
मैंने नीचे हाथ करके असलम का लंड पकड़ लिया।
असलम मेरी पीठ पर हाथ फेरते-फेरते अपना हाथ मेरे चूतड़ों पर ले गया। चूतड़ों की दरार में हाथ लगाते-लगाते एक-दम असलम ने मुझे घुमा दिया और मुझे पकड़ कर मेरे साथ चिपक गया। असलम का खड़ा लंड अब मेरे चूतड़ों को छू रहा था। अचानक असलम बोला, “डाक्टर आपके चूतड़ बड़े सेक्सी हैं।”
मैं कुछ नहीं बोली। असलम ने ही कहा, “डाक्टर मैडम आप गांड भी चुदवाती हैं?”
मैंने पूछा, “क्यों असलम तुम्हे गांड चोदनी है क्या?”
असलम बड़ी ही डेमी आवाज में बोला, “मन तो कर रहा है मैडम गांड चोदने का।”
मैंने फिर असलम से साफ़-साफ़ कहा, “असलम मुझे गांड चुदवाने का कोइ ख़ास शौक नहीं, मगर गांड चुदवाने से कोइ परहेज भी नहीं। मैं चुदवाती हूं गांड।”
“फिर मैंने असलम के कंधे पर हाथ रख कर कहा, “असलम मेरा एक उसूल है। जब मैं किसी मर्द के साथ होती हूं, तो चुदाई में अपनी मर्जी नहीं करती। सामने वाले मर्द की मर्जी के हिसाब से चलती हूं और मजे लेती हूं।”
“आज तुम, एक चौबीस साल का जवान मोटे लंड वाला मर्द मेरे सामने है, आज चुदाई में तुम्हारी मर्जी चलेगी। जो करना चाहता है करो – जैसे चुदाई करना चाहते हो वैसे करो। जो चोदना चाहते हो वो चोदो।”
फिर मैंने असला का चेहरा पकड़ा और उसे अपनी तरफ करती हुई बोली, “लेकिन असलम तुम्हारा इतना मोटा लंड क्या मेरी गांड में चला जाएगा?”
असलम एक कुशल गांडू की तरह बोला, “मैडम वो आप मुझ पर छोड़ दीजिये, ये लंड आपकी गांड के अंदर जाएगा भी और आपकी गांड की मस्त रगड़ाई भी करेगा।”
मैंने हंसते हुए कहा, “वाह असलम, ऐसा है क्या? चलो ठीक है मगर एक बात है, अगर गांड चोदनी है तो गांड चोदने के बाद चूत भी रगड़नी पड़ेगी और मेरी चूत का पानी निकालना पड़ेगा।”
असलम ने खाली सर हिला दिया। असलम का लंड बिल्कुल सीधा खड़ा था। मैंने असलम के लंड को एक बार पकड़ कर दबा कर छोड़ दिया और कहा, “आ जाओ असलम, अब क्या सोच रहे हो, किस बात की देर है?”
असलम ने हंसते हुए अपना गधे जैसा लंड हिलाते हुए कहा, “मैडम कोइ देर नहीं मैडम, मैं तो बस आपके कड़क जिस्म, आपकी गांड और चूत के बारे में ही सोच रहा थ।”
फिर आगे बढ़ते हुए असलम बोला, “मैडम बस अब आप देखते रहिये।”
ये बोल कर असलम मुझे बिस्तर की तरफ ले जा ही रहा था कि मुझे कुछ याद आ गया। मैंने असलम के साथ होने वाली इस चुदाई को यादगार चुदाई बनाने के सोची।
मैंने असलम को कहा, “एक मिनट रुको असलम, मैं आती हूं।”
असलम एक-दम से रुक गया और मैं दरवाजा खोल कर क्लिनिक में चली गयी। वापस आ कर मैंने असलम के हाथ में एक हल्के बैंगनी रंग की गोली दे दी। ये विआग्रा थी।
मैंने कहा, “असलम ये खा लो। जितना वक़्त तुम चुदाई करते हो, इसे खाने के बाद उससे दुगना-तिगुना वक़्त चुदाई करोगे। फिर मेरे मुंह में लंड डालना, चूत में डालना या गांड में डालना। जितना देर चोदना चाहो उतना चोदना और मजे लेना।”
असलम ने वियाग्रा की गोली पकड़ते हुए पूछा, “ये क्या है डाक्टर? कोइ ख़ास गोली है क्या?”
मैंने जवाब दिया, “ये वियाग्रा है असलम। इसे खाने से लंड की सख्ती बढ़ जाती है और चुदाई का टाइम दुगना-तिगुना हो जाता है। लंड झड़ने का नाम नहीं लेता। चूत के ऐसी रगड़ाई होती है कि चुदते-चुदते चूत लाल हो जाती है।”
ये कहते हुए मैं हंस दी और असलम से बोली, “एक बार ट्राई करो, मजा आ जाएगा आज। तुमने खाई नहीं आज तक?”
असलम ने बस इतना ही कहा, “खाई तो नहीं मैडम, मगर सुना जरूर है इसके बारे में। कहते हैं इसको खाने के बाद आदमी एक-एक डेढ़-डेढ़ घंटे चुदाई कर सकता है।”
मैंने कहा, “बिल्कुल ठीक सुना है असलम, ऐसा ही होता है। तुम भी आज, अभी ट्राई करो। मजा आ जाएगा।”
फिर मैंने एक आंख दबा कर कहा, “एक बार अपनी अम्मी को भी चोदना ये खा कर। वो भी क्या याद करेगी।”
असलम ने इस बात का तो जवाब नहीं दिया और गोली निगल ली।
मुझे मालूम था गोली का असर होने में आधा घंटा लगता है।
मैंने असलम को कहा, “असलम गोली अपना असर आधे घंटे में दिखाना शुरू करेगी, तब तक तुम मेरी चूत चूसो और अपनी जुबान का करिश्मा दिखाओ, जैसे अपनी अम्मी को दिखाते हो।”
ये बोल कर मैं बिस्तर पर चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगें उठा कर चूत चौड़ी कर दी। असलम आया और आ कर मेरी टांगों के बीच मेरी चूत पर अपना मुंह रख दिया और मेरी चूत का दाना चूसने लगा।
असलम सच में ही बढ़िया चुसाई करता था। नसरीन सच ही कह रही थी कि असलम मस्त चूत चुसाई करता है।
पंद्रह बीस मिनट की चुसाई के बाद ही असलम उठ गया और बेड से नीचे उतर कर बोला, “डाक्टर मेरा लंड फट जाएगा, पूरी तरह खड़ा हो गया है।”
मैं भी उठ गयी और बेड के किनारे पर बैठ कर असलम का लंड हाथ में पकड़ लिया। सच में ही असलम का लंड एक-दम लकड़ी के डंडे की तरह सख्त था। लगता था असलम पर वियाग्रा का असर जल्दी हो गया था।
असलम के खड़े मोटे लंड ने डाक्टर मालिनी अवस्थी को मस्त कर दिया था। मालिनी की चूत में बाढ़ आयी हुई थी। मालिनी असलम से चुदाई करवाने के लिए मरी जा रही थी। असलम से चुदाई का पूरा मजा लेने के लिए मालिनी ने असलम को वियाग्रा की गोली खाने के लिए दे दी। जल्दी ही वियाग्रा ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया, और असलम का लंड सख्त खूंटा बन गया।
मैंने असलम का लंड मुंह में ले लिया, और चूसने लगी। वियाग्रा अपना असर दिखाने लगी थी। असलम पर चुदाई का पागलपन सवार हो चुका था। असलम ने मेरा सर पकड़ा कर मेरे मुंह में ही लंड के धक्के लगाने लगा। असलम के मोटे लंड से मेरा दम घुट रहा था। मगर मेरी चूत और गांड दोनों में झनझनाहट हो रही थी।
कुछ देर यही करने के बाद असलम ने लंड मेरे मुंह में से निकाल लिया। मैंने असलम की तरफ देखा। असलम की आंखें विआग्रा के असर और चुदाई के खयाल से गुलाबी हो गयी थी।
असलम मेरे सामने खड़ा हो कर बोला, “चलिए मैडम उल्टी हो कर बेड के किनारे पर लेट जाईये और अपने मुलायम चूतड़ मेरी तरफ कर दीजिये। पहले मुझे आपकी गांड चोदनी है। आज तो आपकी ऐसी गांड रगड़ाई करूंगा, कि आप कभी भूलेंगी नहीं।”
मुझे क्या एतराज होना था। असलम को विआग्रा मैंने खिलाई ही इस लिए थी कि आज मैं असलम का लंड आगे-पीछे सब जगह लेना चाहती थी।
मैंने कह दिया, “ठीक है असलम, मैं क्रीम लाती हूं।”
क्रीम उसी कमरे में रखे मेज की दराज पड़ी थी। मैंने क्रीम के टयूब असलम के हाथ में दी और बोली, “ले असलम मेरी गांड और चूत अब तेरे हवाले हैं। जैसे मर्जी चुदाई करो।”
साथ ही मैं अपना रबड़ का लंड भी ले आयी। जब असलम मेरी गांड चोद रहा होगा, तब मैं ये लंड अपनी चूत में डाल कर चूत में चुदाई का मजा लूंगी। ये पहली बार नहीं हो रहा था। मैं हमेशा ही ऐसे ही करती हूं। जब भी मैं गांड चुदवाती हूं, अपना ये रबड़ का लंड अपनी चूत में डाल लेती हूं।
जब सब तैयारी हो गयी, तो मैं उल्टी हो कर बेड के किनारे पर लेट गयी।
असलम रबड़ के लंड को देख कर बोला, “मैडम इसको तो आज रहने ही दो। गांड चुदाई से जब आपका मन भर जाये तो आप मुझे जरा सा बोल देना। फिर पीछे से ही लंड आपकी चूत में डाल दूंगा।”
मैंने कहा, “असलम ये रबड़ का लंड तो गांड चुदाई का दौरान मैं चूत में डालूंगी। असली चूत चुदाई तो तुम ही करोगे।”
मेरा इतना बोलते ही अपनी उंगली मेरी चूत में घुसेड़ दी।
असलम अपना खड़ा लंड मेरे चूतड़ों पर इधर-उधर लगा रहा था, और साथ ही बोलता जा रहा था, “क्या मस्त चूतड़ हैं आपके मैडम, बिल्कुल मेरी अम्मी के चूतड़ों की तरह चिकने और मुलायम।”
मेरे चूतड़ और चूत देख कर चुदाई के ख्याल से असलम के लंड से चिकना-चिकना पानी निकलने लग गया था। असलम जब अपना लंड मेरे चूतड़ों पर फेर रहा था, तो असलम के लंड का चिकना पानी मेरे चूतड़ों फ़ैल रहा था, और मुझे चूतड़ों पर ठंडा-ठंडा सा लग रहा था।
जैसे औरत की चूत चुदाई से पहले चिकना लेसदार पानी छोड़ती है, ऐसे ही मर्द लंड में से भी चुदाई से पहले लेसदार चिकना पानी निकलता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि लंड में से ये पानी बहुत कम मात्रा में से निकलता है, और दूसरा फर्क ये होता है। जहां औरत की चूत का पानी हल्का सा नमकीन होता है, लंड में से निकला पानी खट्टा और ज्यादा नमकीन होता है।
मैंने सर मोड़ कर असलम की तरफ देखा और उसकी “क्या मस्त चूतड़ हैं आपके मैडम, बिल्कुल मेरी अम्मी के चूतड़ों की तरह” वाली बात पर मुस्कुरा दी और कहा, “तो फिर देर किस बात की असलम, चोदो जैसे मस्त अपनी अम्मी को चोदते हो। आज दिखाओ अपने इस घोड़े जैसे लंड का दम – गांड में भी और चूत में भी।”
असलम बोला, ” मैडम आप बस देखते रहिये कैसी मस्त चुदाई होने वाली है आज आपकी। आप एक बार मेरे लंड की हालत देखिये। फटने वाला है ये। आज लगता है ये लौड़ा आपकी इस टाइट गांड को फुला कर ही मानेगा।”
असलम की ऐसे सेक्सी बातें मुझे मस्त कर रही थी। मेरी चूत फर्रर्र फर्रर्र पानी छोड़ रही थी। गांड का छेद झनझना रहा था। मन कर रहा था अब तो बस डाल ही दे असलम अपना लौड़ा मेरी गांड में।
असलम ने मेरे चूतड़ खोले और नीचे बैठ कर गांड का छेद चाटने लगा। मेरे मुंह से सिसकारी निकली “आअह असलम क्या कर रहे हो, बड़ा मजा आ रहा है।”
कुछ देर गांड का छेद चाटने के बाद असलम खड़ा हुआ और अपने लंड पर जैल लगा ली। फिर असलम ने उंगली से जैल मेरी गांड के छेद के ऊपर और गांड के छेद के अंदर भी लगा दी।
असलम ने पहले चार-पांच बार एक जैल क्रीम से सनी एक उंगली मेरी गांड के अंदर डाली, और फिर दो उंगलियां मेरी गांड में डाल दी। मजे के मारे मेरे मुंह से निकला, “आआआह असलम मजा आ गया।”
नसरीन ने बताया ही था, उसकी गांड चुदाई के दौरान भी असलम यही कुछ किया करता था।
एक बार गांड का छेद अच्छी तरह चिकना करने के बाद असलम ने लंड गांड के छेद पर रक्खा, और धीरे-धीरे करके पहले लंड का सुपाड़ा और फिर आधा लंड मेरी गांड के अंदर तक बिठा दिया।
आधा लंड गांड मैं बिठाने के बाद असलम रुक गया, और वही लंड को इधर-उधर, अंदर-बाहर करने लगा।
कुछ रुकने के बाद असलम ने लंड फिर से बाहर निकाल दिया, और फिर से जैल गांड के अंदर-बाहर और लंड पर लगाई। जिस तरीके से असलम जैल लगा रहा था, और जैसे उंगली घुमाते हुए गांड में डाली थी, साफ़ पता चल रहा था कि असलम गांड चोदने का उस्ताद है।
नसरीन ठीक ही कह रही थी असलम के बारे में। गांड चुदाई का खूब तजुर्बा था असलम को। और वैसे भी आगरा के गांडू तो वैसे ही मशहूर हैं। पक्की बात है लड़कियों की नहीं तो लड़कों की खूब गांड चोदता रहा होगा असलम।
एक गांड ही तो है जो लड़कों और लड़कियों की एक जैसी होती है। फर्क सिर्फ इतना होता है, जहां लड़कियों के चूतड़ चिकने और मुलायम होते हैं, वहीं लड़कों के चूतड़ खुरदरे होते हैं और चूतड़ों पर बाल होते हैं।
चूतड़ उठाये हुए मैं मन ही मन सोच रही अच्छा है आज बढ़िया चुदाई करेगा ये जवान लड़का असलम। वैसे भी बड़े दिन हो गए थे ना ढंग से चूत चुदी थी ना गांड।
कुछ देर असलम आधा लंड ही अंदर बाहर करता रहा और फिर असलम ने लंड गांड के छेद पर रक्खा, और मेरी कमर पकड़ ली।
मैंने भी बहुत गांड चुदवाई थी। जैसे ही असलम गांड का छेद मुलायम करके आधा लंड गांड में डालने के बाद रुका, और जैसे उसने मुझे कमर से पकड़ा, मैं समझ गयी अब असलम मुर्गी हलाल करने वाला था।
मैं सर बाहों में ले लिया, और इंतजार करने लगी कि कब और कैसे असलम लंड गांड के अंदर डालेगा।
तभी असलम ने एक जोरदार झटका लगाया, और पूरा लंड गांड के अंदर डाल दिया। मेरे मुंह से मजे के सिसकारी निकली “आआह असलम क्या झटका देके अंदर डाला है, मजा आ गया। फिर एक बार ऐसे ही कर।”
असलम ने फिर से पूरा लंड बाहर निकाला और एक झटके से फिर से अंदर डाल दिया। असलम ने मुझे मेरी कमर से तो पकड़ा ही हुआ था। असलम जब झटके से लंड अंदर डालता था, साथ ही मुझे कमर पीछे की तरफ खींच लेता था। असलम के लटकते हुए टट्टे मेरी चूत पर ठप्प की आवाज के साथ टकराते थे।
दस-बारह बार ऐसे ही करने के बाद असलम ने मस्त गांड चुदाई चालू कर दी। बिना रुके दस मिनट जो असलम ने गांड में धक्के लगाए, उनसे मेरी तसल्ली हो गयी।
इधर असलम का लंड मेरी गांड के अंदर था, उधर नीचे से हाथ करके मैंने अपनी चूत में में रबड़ का सात इंची लंड लेकर बटन दबा कर मैंने लंड का वाईब्रेटर चालू कर दिया।
उधर गांड की रगड़ाई, इधर रबड़ के लंड की वाइब्रेशन, जल्दी ही मेरी चूत पानी छोड़ गयी।
असलम की गांड चुदाई चालू थी। एकाएक असलम के धक्के तेज हो गए और एक जोरदार आवाज “अअअअअह आअह मैडम आआह आआह आपकी गांड आआह, गया मेरा लौड़ा आअह मैडम आपकी गांड के अंदर, यह लो मैडम और लो आआह, अअअअअह आअह मैडम क्या गांड है, क्या चूतड़ हैं आआह आअह मालिनी जी आअह आपकी गांड आआह गांड आआह मजा आ गया। मैडम लो निकला आपकी गांड में ये लीजिये।
असलम की सिसकारियों से लग रहा था कि असलम का लंड पानी छोड़ने वाला था। मगर ऐसा नहीं था। विआग्रा का असर कम से कम पौना घंटा एक घंटा, या उससे भी ज्यादा रहने वाला था।
टाइट गांड की धुआंधार लगातार वाली चुदाई रगड़ाई ने असलम को थका दिया।
उधर मुझे भी याद नहीं आ रहा था इतने ज़बरदस्त तरीके से ऐसे कभी मेरी गांड भी चुदी हो।
गांड में कुछ और लम्बे-लम्बे धक्के लगाने के बाद असलम बोला, “मैडम अब आपकी चूत में डालता हूं। आपकी गांड के टाइट छेद की रगड़ाई से तो मेरा लंड ही दुखने लग गया है।”
असलम की बात सुन कर मैंने रबड़ का लंड अपनी चूत से बाहर निकाल लिया, और चूतड़ थोड़े और उठा दिए, जिससे मेरी चूत का छेद असलम के लंड के सामने आ जाये। थोड़ी देर तो असलम लंड गांड में डाले हुए ऐसे ही खड़ा रहा जैसे दम ले रहा हो, और फिर लंड चूत में डाल कर चुदाई करने लगा।
चूत चुदाई में भी विआग्रा का असर साफ़ पता चल रहा था। चूत के अंदर असलम के लंड की सख्ती साफ़-साफ़ महसूस हो रही थी।
आधा घंटा चुदाई करने के बाद असलम रुका और बोला, “ये क्या हो रहा है मैडम, ना लंड की सख्ती कम हो रही है ना लंड पानी छोड़ रहा है। उल्टा मेरा लंड तो थोड़ा थोड़ा दर्द करने लग गया है। मैडम आपका मजा निकला या नहीं?”
मुझे तो पता नहीं कितनी बार मजा आ चुका था। मैंने कहा, “असलम मेरी बात छोड़ो, मुझे मजा नहीं मजे ही मजे आ रहे हैं। पता नहीं कितनी बार मेरे चूत पानी छोड़ चुकी है। तुम थोड़ा आराम कर लो, अभी तुम्हारा लंड ढीला पड़ने वाला नहीं। अभी तो इतनी ही चुदाई और कर सकता है। यही तो खासियत है इस विआग्रा की।”
मैंने असलम से कहा, “असलम मुझे बड़ी जोर का पेशाब लग रहा है, में बाथरूम जा कर पेशाब करके आती हूं। फिर ऐसा ही गांड चुदाई और चूत चुदाई का एक दौर और चलाते हैं।” ये बोल कर में बाथरूम चली गयी।
में बाथरूम से वापस आयी तो मैंने असलम को लंड पकड़ कर मुट्ठ मारते हुए देखा और बोली, “असलम ये क्या कर रहे हो? मेरी गांड और चूत तो अभी भी तैयार हैं, मुझे बोलो कहां डालना है।”
असलम बोला, “वो बात नहीं मैडम, ये तो मैं ऐसी ही कर रहा था। लंड खड़ा था और आपकी गांड चुदाई का ध्यान आ गया, और रुका ही नहीं गया।”
इतना बोल कर असलम खड़ा हो गया और बोला, “चलिए मैडम सीधी लेट जाईये और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर चूत उठा दीजिये। अब चूत ही चोदूंगा, गांड चोदने का अब दम नहीं है।”
मैंने भी देर नहीं की और जाकर बिस्तर पर लेट गयी। चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर मैंने अपनी टांगें उठा कर फैला ली, और असलम से कहा, “आजा असलम ये देख मेरे चूत बुला रही है तेरे मोटे लौड़े को।”
असलम खड़े सख्त लंड के साथ आया और बिना एक सेकंड गंवाए लंड को सीधा मेरी चूत पर रक्खा और झटके के साथ लंड अंदर डाल दिया। अगले ही पल असलम ने मुझे बाहों में जकड़ लिया और चुदाई चालू कर दी।
विआग्रा का असर और जवानी का जोश, असलम चुदाई करते करते खूब सिसकारियां ले रहा था, “आआह मैडम मजा आ गया आज तो आपको चोदने का। क्या चूत है। क्या गांड है। क्या मस्त चुदाई करवाती हैं आप आआह आज की रगड़ाई तो याद रहेगी आआह, मैडम चोद-चोद कर फुला दूंगा आज आपकी चूत।”
फिर जो असलम ने चुदाई की वो यादगार चुदाई थी। मेरे से आधी उम्र का लड़का, ऊपर से कलाई जितना मोटा लौड़ा। जवान असलम के मोटे लम्बे लंड से हुई वो चुदाई सच में ही कभी ना भूलने वाली चुदाई थी।
बीस-पच्चीस मिनट चली इस चुदाई में मुझे दो बार मजा आ गया मगर असलम के लंड का पानी फिर भी नहीं निकला।
असलम अभी भी धक्के लगा रहा था। मेरी जवानी में कभी मेरी ऐसी चुदाई नहीं हुई होगी। बस मुझे इतना पता है हम दोनों के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी उन्ह उन्ह उन्ह आअह आअह क्या चुदाई है। इसी जबरदस्त चुदाई में हम दोनों का पानी निकल गया।
ठीक ही बोला था असलम, “मैडम चोद चोद कर फुला दूंगा आज आपकी चूत।” असलम ने जिस तरह की चुदाई की थी, उसने फुला ही दी होगी मेरी चूत।
असलम ने लंड मेरी चूत से बाहर निकाला, और मेरे पास ही लेट गया। असलम के लंड का पानी निकल चुका था, मगर असलम का लंड अभी भी खड़ा ही था।
पैंतालीस मिनट पचास मिनट चली इस चुदाई ने असलम को थका दिया था। थक तो मैं भी चुकी थी। अब और चुदाई करवाने का मुंझ में भी दम नहीं था।
उधर असलम का लंड ढीला ही नहीं हो रहा था। तभी असलम ने अपना लंड पकड़ा और मुट्ठ मारने लगा। ये देख कर मैं समझ गयी की झड़ने की बाद असलम का लंड खड़ा ही था। अब असलम को एक बार और मजा आने वाल हो गया है।
मैं उठी और उलटा हो कर असलम के ऊपर लेट गयी। मेरी चूत असलम के मुंह पर थी, और मैं असलम का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। असलम का मजा अटका ही हुआ था। अचानक से असलम ने मेरा सर पकड़ कर ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। साथ-साथ ही असलम जोर से चूतड़ हिलाने लगा। तभी अचानक असलम ने एक ऊंची आवाज की सिसकारी ली, “आआआह मालिनी मैडम निकल गया, आआआह आ गया मजा ये आया असली मजा” और साथ ही मेरा मुंह अपने लंड के गर्म पानी से भर दिया।
असलम के लंड से इतना पानी निकला कि मेरी अब तक की जिंदगी में लंड का इतना पानी मुंह में निकला हो, मुझे याद नहीं पड़ता।
मैंने असलम के लंड से निकले गरम लेसदार पानी की एक एक बूंद निगल ली, और थकी हुई असलम के साथ ही लेट गयी।
जब असलम का मजा उतरा तो वो बोला, “मैडम आज की चुदाई सारी उम्र याद रहेगी। ये वियाग्रा गोली तो बड़ी करामाती चीज है।”
मेरे मुंह से भी निकल गया, “आज की चुदाई तो मैं भी भूलने वाली नहीं। वैसे असलम तुम्हारा लंड है भी बड़ा मस्त और तुम चोदते भी बड़ा मस्त हो, और ऊपर से वियग्रा का कमाल। नसरीन तुम्हारी चुदाई के बारे में ठीक ही बोल रही थी।”
कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद असलम उठा और बाथरूम जा कर फारिग होकर आया और कपड़े पहन कर क्लिनिक में चला गया। मैं भी उठी, साड़ी पहनी, और मुंह धो कर मेकअप ठीक करके क्लिनिक में चली गयी।
मैंने घंटी बजा कर प्रभा को बुलाया और दो कप चाय लाने के लिए बोल दिया।
मैंने असलम से पूछा, “असलम तुम्हारा लंड और तुम्हारी चुदाई दोनों मस्त हैं। अपनी अम्मी की भी एसी ही जोरदार चुदाई करते हो?”
असलम ने मेरी इस बात का कोइ जवाब नहीं दिया।
प्रभा चाय ले कर आ गयी। मैंने कहा, “असलम काम शुरू करें? मैं तुम्हारी अम्मी की टेप वहीं से चलाती हूं जहां पर रोकी थी।
मैंने टेप थोड़ी सी रिवाइंड की, और अपने हाथ में पकड़े रिमोट से चालू कर दी।
इसमें नसरीन और असलम की चुदाई और नसरीन का असलम को शादी के लिए मनाने वाली बातें ही थी। टेप खत्म हो गयी और मैंने टेप रिकार्डर बंद कर दिया।
उस दिन का काम खत्म हो चुका था।
असलम चुप-चाप बैठा हुआ था।
अब मुझे बस असलम को समझाना था और शादी के बारे में उसके ख्याल बदलने की कोशिश करनी थी।
