आठ बजे खाना खा कर माधवी अपने कमरे में चली गयी। जाने से पहले “गुड नाईट मम्मी, गुड नाईट धीरज” बोलते हुए माधवी सलवार के ऊपर से अपनी फुद्दी पर हाथ फेरना नहीं भूली।
मौसी की पैनी नजरों से माधवी का मुझे देखते हुए फुद्दी छूना छुपा नहीं। मौसी ने तिरछी नज़र से मेरी तरफ देखा मगर बोली कुछ नहीं।
माधवी अब अपने कमरे में चली गयी थी। अब वो सुबह से पहले बाहर नहीं आने वाली थी। दिव्या भी ऐसा ही करती थी। एक बार खाना खा कर अपने कमरे में गयी तो सुबह ही बाहर आती थी।
माधवी के जाते ही हम दोनों – मैं और मौसी, खाना खा कर कॉफ़ी के मग लेकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। इस दौरान मौसी चुप ही रही। मौसी की ये चुप्पी मुझे परेशान सी करने लगी थी। मौसी बातूनी थी, इस तरह चुप रहने वालों में से वो नहीं थी।
कॉफ़ी पीते-पीते अचानक से मौसी ने मुझसे कहा, “धीरज एक बात पूछूं?”
मैंने कहा, “पूछिए मौसी।”
मौसी ने साफ़ ही पूछ लिया, “धीरज इस बार माधवी कुछ ज्यादा ही खुश है, गुडगांव कुछ अलग हुआ है क्या?”
मैं थोड़ा सकपकाया और बोला, “अलग मौसी? अलग क्या होना था?”
मौसी थोड़ी तल्खी के साथ बोली, “ये तो तुम बताओ धीरज, दिव्या और माधवी के अलावा तुम ही तो थी घर पर। ऐसा भी क्या हुआ है जो इस बार इतनी खुश है, चहक रही है? ऐसा कभी पहले तो नहीं हुआ।”
मैंने फिर कहा, “मौसी मैं क्या बताऊं? आप माधवी से ही पूछ लीजिये ना।”
मौसी बोली, “उससे भी पूछ लूंगी, पहले तुम तो बताओ।”
जब मैं चुप रहा और मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो पांच मिनट के बाद मौसी उठते हुए बोली, “धीरज मैं अभी आती हूं, मुझे एक फोन करना है।”
मौसी अपने कमरे में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया।
मौसी “अभी आती हूं” बोल कर गयी थी मगर पूरे आधे घंटे के बाद बाहर आयी। मैं भी सोच रहा था ऐसा भी मौसी ने कौन सा फोन करना था।
मौसी के आने तक मैं अपनी कॉफ़ी खत्म कर चुका था। मौसी ने आ कर और कॉफ़ी बनाई और एक मग मुझे दिया और एक खुद लेकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी।
कुछ देर चुप रहने के बाद मौसी बोली, “धीरज मैं सुधा जीजी से बात करके आयी हूं।”
मैंने बस इतना ही कहा, “मम्मी से?”
मौसी बोली, “हां, जीजी से।” ये बोल कर मौसी फिर चुप हो गयी।
मौसी बोली, “धीरज मौसी ने काफी कुछ मुझे बताया है, मगर ढके छुपे शब्दों में।”
मैंने हड़बड़ाते हुए पूछा, “तो मौसी मम्मी ने क्या बताया?”
मैं चुप ही था और मौसी के जवाब का इंतजार कर रहा था। इसके बाद तो मौसी ने जैसे बम्ब ही फोड़ दिया। मौसी साफ़ ही बोली, “धीरज मैंने जीजी से पूछा जीजी इस बार माधवी कुछ ज्यादा ही खुश है, गुडगाँव में कुछ अलग सा हुआ है क्या?धीरज, जब जीजी इस पर कुछ नहीं बोली तो मैंने साफ़ ही बोल दिया, “जीजी मुझे लग रहा है माधवी ने सेक्स किया है।”
“इस पर भी जब जीजी चुप रही तो मैंने कहा, “जीजी माधवी की सेक्स – चुदाई से कोइ एतराज नहीं। उसके उम्र की लडकियां सेक्स करती है। मैं सिर्फ इतना जानना चाहती हूं कि माधवी ने चुदाई किसके साथ की और क्या ये चुदाई माधवी की मर्जी से हुई – बिना किसी जोर जबरदस्ती के हुई? अगर ऐसा कुछ हुआ है तो मुझे बताओ?”
मौसी बोली, “धीरज जीजी ने बताया कौशल्या चुदाई तो दिव्या और माधवी दोनों की ही हुई है, वो भी मस्त बिना किसी दबाव के उनकी अपनी मर्जी से, और धीरज इस बारे में सब जनता है – तुम धीरज से बात करो।”
मौसी थोड़ी चुप हुई और फिर बोली, “धीरज अब तुम बताओ, ये सब चक्कर क्या है? जीजी क्यों मुझे कुछ बता नहीं रही? दिव्या की और माधवी की चुदाई हो गयी तो गयी। अब इसमें ऐसी कौन सी बात है जो जीजी मुझे नहीं बता रही और तुम मुझे बताओगे? अब तुम बताओ किसके साथ चुदाई है दोनों की?”
मैंने सोचा, बता तो मम्मी भी सकती थी, फिर उन्होंने बताया क्यों नहीं? मुझे इसका एक ही कारण समझ में आया। मैं इस वक़्त रोहिणी में था। अगर मम्मी कुछ बताती और मौसी मुझसे पूछती तो हो सकता था दोनों की – मेरी और मम्मी की बातें आपस में मेल ना खाती। और फिर बहुत सी बातें ऐसी थी जो मम्मी किसी को भी बताना नहीं चाहती थी – जैसे मेरी दिव्या और मम्मी कि इकट्ठे चुदाई। मम्मी का दिव्या के साथ समलैंगिकों वाला काम। इसलिए मम्मी ने सोचा होगा की मौसी को चुदाई का शक तो हो ही गया यही तो फिर मैं ही बताऊं तो ठीक रहेगा।
मैंने कहा, “मौसी दिव्या और माधवी की चुदाई हुई है और मेरे साथ हुई है। मगर मौसी ये एक-दम से नहीं हो गयी। एक लम्बी कहानी है, और ये समझ लीजिये कि हालात ही ऐसे बन गए कि मुझे इन दोनों को चोदना ही पड़ गया।”
मौसी बिना किसी हड़बड़ाहट कि बोली, “धीरज ये शक तो मुझे तभी हो गया था जब माधवी इतना चहक रही थी। तुम्हें देख-देख कर बार बार अपनी फुद्दी छू रही थी। मैं तो तभी समझा गई थी कि दोनों को चोदने वाले तुम हो। अब मुझे अपनी चुदाई की “लम्बी कहानी” सुनाओ, बिना कुछ छुपाये – बिना किसे लाग-लपेट के। ऐसा भी क्या हो गया की तुम्हें अपनी बहनों को चोदना ही पड़ गया? और ये “चोदना ही पड़ गया”, क्या मतलब है इसका?”
मौसी की इस बात से मैं इतना तो समझ गया की अब बात को और नहीं छुपाया जा सकता। मौसी का सवाल एक-दम सटीक था कि ऐसा भी क्या हो गया कि तुम्हें अपनी बहनो को चोदना ही पड़ गया?”
मैंने कहा, “ठीक है मौसी, कहानी लम्बी है लेकिन जब तक ये ना पता चले कि ये शुरू कैसे हुई, तब तक आपको बात समझ नहीं आएगी कि ये क्यों और कैसे हो गया।”
मौसी मेरी तरफ देखने लगी और मेरे आगे कि बात बताने का इंतज़ार करने लगी।
मैंने हिम्मत बटोरी और बोलना शुरू किया, “मौसी ये बात तब की है, जब कुछ महीने पहले हमारे कालेज पूरे सात दिनों के लिए बंद थे और दिव्या यहां आपके पास आयी हुई थी। पापा भी किसी काम से एक हफ्ते के लिए कहीं बाहर गए हुए थे।”
मैं मौसी को बता रहा था, “मौसी मेरा गुडगाँव में छुट्टियों का पहला ही दिन था। रात हुई तो खाना खा कर मैं ऊपर अपने कमरे में बैठा टीवी देख रहा था। मेरा कमरा मम्मी पापा के कमरे के साथ वाला है। मौसी तभी मम्मी आयी और ज़रा सा दरवाजा खोल कर बोली, “धीरज बेटा जरा बात सुनना।”
“मैं मम्मी के कमरे में चला गया। देखा तो मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई थी – अजीब सी ड्रेस पहन कर। नीचे तो चलो सलवार थी, मगर ऊपर ढीली-ढाली छोटी सी कुर्ती। कुर्ती मम्मी का पूरा पेट भी नहीं ढक पा रही थी।”
“मुझे आया देख मम्मी बोली, “धीरज जरा मेरी पीठ की मालिश कर दे और जरा सी कमर दबा दे थोड़ी दुःख सी रही है।” ये बोल कर मम्मी उल्टी हो गयी और कुर्ती जरा सी ऊपर कर दी। मौसी मैं मम्मी के पास ही बिस्तर पर बैठ गया और हल्के हाथों से मम्मी की पीठ पर मालिश करने लगा।”
इसके बाद मेरे और मम्मी के बीच जो भी हुआ, जैसा भी हुआ – मम्मी कांधे चूतड़ और आधी फुद्दी नंगा करना। मुझे चुदाई के लिए उकसाना। मेरा मम्मी के चूतड़ों में और फुद्दी में उंगली करना। मम्मी का पापा का लंड सख्त ना होने की बात करना। मेरी और मम्मी की चुदाई होना और दिव्या का छुप कर मेरी और मम्मी की चुदाई होते हुए देख लेना। फिर दिव्या का मुहसे फुद्दी चुसवाना, मुझे अपनी चुदाई के लिए कहना – मैंने जस का तस जो-जो भी जैसे भी हुआ था सब कुछ मौसी को बता दिया।
मैं अगर कुछ नहीं बताया तो वो था मम्मी और दिव्या के बीच पनप चुका समलैंगिकों वाला रिश्ता और दिव्या और मेरी मम्मी की एक-दूसरे के सामने हो रही चुदाई।
सब कुछ बताने के बाद मैं बोला, “बस मौसी ये है पूरी कहानी। इसके बाद दिव्या और मेरी चुदाई हो गयी और दिव्या ने माधवी को भी मुझसे चुदवा दिया। मौसी अब सब कुछ आपके सामने है। अब आप ही बताएं मैं करता भी तो क्या करता? मम्मी की चुदाई से शुरू हुई ये कहानी दिव्या की चुदाई से होते हुए माधवी कि चुदाई तक पहुंच गयी।”
मौसी को सब साफ़-साफ़ बता कर मैंने कहा, “मौसी ये है पूरी कहानी। अब तो आपको अपने सवाल का जवाब मिल गया?”
तब तक पता नहीं मौसी कब अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर अपना हाथ सलवार के अंदर डाल चुकी थी। मेरी बात खत्म होते ही मौसी ने मेरे सामने ही सलवार में से अपना हाथ निकला नाड़ा बांधा और बड़े ही धीमी आवाज में बोली, “धीरज, जो प्रॉब्लम तेरे पापा – मतलब यश जीजा जी को है। वही प्रॉब्लम तेरे मौसा मनोहर की भी है। पिछले एक साल से वो भी मेरे साथ कुछ नहीं कर पा रहे।”
मुझे मौसी के बात पर हैरानी हुई और मैंने बस इतना ही कहा, “कमाल है मौसी जी – पापा को भी और मौसा जी को भी?”
मौसी बोली, “हां धीरज, दोनों को एक ही तरह की समस्या है।”
मगर इससे भी ज्यादा मौसी का मेरी बातें सुनते-सुनते अपना हाथ सलवार में डालना और फिर मेरी बात खत्म होने पर मेरी सामने ही सलवार में हाथ निकलना और मेरी सामने ही नाड़ा बाँधना मुझे हैरान कर रहा था। मुझे लगा मम्मी की ही तरह अब मौसी भी मुझे चुदाई की लिए उकसा रही थी। मौसी भी मेरा लंड अपने फुद्दी में लेना चाहती थी।
इतना सोचना था कि मेरी लंड में भी हरकत शुरू हो गयी। मैंने लंड पायजामे में ठीक से बिठाते हुए पुछा, “तो फिर मौसी अब आप क्या करेंगी?”
मौसी उठते हुए बोली, “अब ये कि तुम पहले अपने कमरे के पिछले बालकनी की तरफ खुलने वाले दरवाजे से हमारे कमरे में आ जाओ, फिर मैं देखूंगी क्या करना है।”
ये बोल कर मौसी मेरा जवाब सुने बिना उठी और अपने कमरे में चली गयी। अब आगे चलने से पहले, मौसा के घर का भूगोल समझना जरूरी है।
मौसा के घर में कुल आठ कमरे हैं। चार कमरे और किचन ऊपर की मंजिल पर है, चार कमरे और एक बड़ा सा स्टोर नीचे के मंजिल पर हैं। नीचे तो कमरों के आगे-पीछे बरामदा है – ऊपर के कमरों के आगे बरामदे हैं और पीछे के तरफ दो बालकनियां हैं। एक बालकनी तो माधवी के कमरे और ड्राईंग रूम के पीछे है, और दूसरी बालकनी दूसरे दो कमरों के पीछे है, जिनमें एक कमरा मौसा मौसी का है और दूसरा एक तरह का गेस्ट रूम है जिसमें मैं रुका हुआ था। इन सब कमरों के पीछे का दरवाजा बालकनी में खुलता है। मतलब माधवी पीछे के दरवाजे से ड्राईंग रूम में जा सकती है और गेस्टरूम और मौसी के कमरों के पीछे एक दरवाजों में से एक दूसरे के कमरों में आया जाया जा सकता है।
जब मौसी बोली, “अब ये कि तुम पहले अपने कमरे के पिछले बालकनी की तरफ खुलने वाले दरवाजे से हमारे कमरे में आ जाओ, फिर मैं देखूंगी क्या करना है”, तो मैं तभी समझ गया कि अब क्या होने वाला था – मतलब अब एक और औरत अब मुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार थी। मेरी मम्मी की छोटी बहन – मेरी कौशल्या मौसी।
मैंने चुदाई की पूरी तैयारी कर ली। मैंने अपना कुरता पायजामा उतार कर अंडरवियर और बनियान उतार दिए और कुर्ता पायजामा वापस पहन कर मैं पीछे के दरवाजे से मौसी के कमरे के तरफ चल पड़ा।
मौसी ने कमरे का दरवाजा खुला ही छोड़ा हुआ था। मैं अंदर गया तो देखा मौसी सोफे पर बैठी थी – बिलकुल नंगी। मेरा अंदाजा बिलकुल सही था। मतलब अब एक और औरत अब मेरा लंड अपनी फुद्दी में लेने की लिया – मुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार थी।
मौसी का जिस्म भी एक दम कड़क था – बिलकुल मम्मी के जिस्म की तरह।
कमरे का माहौल बड़ा ही रोमांटिक बन रहा था। कमरे में पूरी लाइट थी और कड़क जिस्म वाली औरत सोफे पर बैठी थी बिलकुल नंगी।
मौसी ने कमरे के पीछे वाला दरवाजा खुला ही छोड़ा हुआ था। मैं अंदर गया तो देखा मौसी सोफे पर बैठी थी – बिलकुल नंगी। मेरा अंदाजा बिलकुल सही था। मतलब अब एक और औरत अब मुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार थी।
मौसी का जिस्म भी एक-दम कड़क था – बिलकुल मम्मी के जिस्म की तरह। कमरे का माहौल बड़ा ही रोमांटिक बन रहा था। कमरे में पूरी लाइट थी और कड़क जिस्म वाली मेरी मौसी सोफे पर बैठी थी, बिना कपड़ों के – बिलकुल नंगी।
मौसी मम्मी से छोटी थी मगर मौसी का जिस्म मम्मी के जिस्म से ज्यादा भरा-भरा था – गदराया हुआ। मम्मी के मम्मों से बड़े बड़े मम्मे, मम्मी के चूतड़ों से बड़े-बड़े चूतड़। ऐसा जिस्म जिसे देख कर बड़े से बड़े ब्रह्मचारी का भी लंड खड़ा हो सकता था।
मौसी के इस तरह एक-दम से ही नंगा होने से मुझे बिलकुल भी हैरानी नहीं हुई। मम्मी की तरह मौसी की भी रगड़ाई वाली चुदाई नहीं हो रही थी और अब मौसी मम्मी, दिव्या और माधवी की चुदाई की कहानी सुन कर मुझसे चुदाई करवाना चाहती थी। मेरी चुदाई वाली कहानी सुनते-सुनते मौसी अपनी फुद्दी में उंगली तो कर ही चुकी थी – वो भी मेरे सामने।
समझ तो मैं गया ही था और तैयारी भी पूरे करके ही आया था, मगर फिर भी मैंने जल्दबाजी ना करते हुए नकली हैरानी के साथ पूछा, “मौसी आप और इस तरह? क्या बात है?”
मौसी बोली, “बात ये है धीरज, कि जो-जो भी तुमने जीजी, अपनी मम्मी की साथ किया अब वो मेरे साथ भी करो। अपना लंड मेरी फुद्दी में डालो और रगड़ो मेरी फुद्दी को दबा-दबा कर। मुझे भी जीजी की तरह की ही रगड़ाई वाली चुदाई चाहिए।”
फिर मौसी कुछ रुक कर बोली, “क्या बताऊं धीरज, साल भर से ऊपर हो चुका है जीजी की तरह मेरी भी साल भर से ढंग की चुदाई नहीं हो रही। जीजा जी की तरह तेरे मौसा का लंड खड़ा तो हो जाता है, फुद्दी में जाता भी है मगर सख्त नहीं हो पाता। फुद्दी की जो रगड़ाई के लिए लंड में जो सख्ती होनी चाहिए वो सख्ती लंड में होती ही नहीं और चुदाई का मजा ही नहीं आता। दूसरे धीरज बेटा मुझे गांड चुदवाने का भी शौक है – अब अगर लंड सख्त ही नहीं होगा तो गांड में जाएगा ही कैसे?”
“जीजा जी की तरह? जीजी की तरह मेरी भी साल भर से ढंग की चुदाई नहीं हो रही। जीजा जी की तरह तेरे मौसा का लंड खड़ा तो हो जाता है, फुद्दी में जाता भी है मगर सख्त नहीं हो पाता। फुद्दी की जो रगड़ाई के लिए लंड में जो सख्ती होनी चाहिए वो सख्ती लंड में होती ही नहीं और चुदाई का मजा ही नहीं आता।” मैं सोच रहा था मौसी को कैसे मालूम थी ये सारी बातें? क्या मम्मी ने बताई थी?
मगर उस वक़्त मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। एक नंगी औरत सामने चुदाई के लिए तैयार बैठे थी और मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और खड़े लंड के साथ मौसी के सामने जा कर खड़ा हो गया।
मौसी ने मेरा खड़ा लंड पकड़ते हुए कहा, “क्या मस्त लंड है, कितना लम्बा और मोटा। बड़ी किस्मत वाली हैं जीजी, जिनकी ऐसे लंड से चुदाई होती है।”
यह बोल कर मौसी ने मेरा लंड पकड़ा, एक बार लंड का चुम्मा लिया और लंड को मुंह में डाल लिया। जैसे ही मौसी ले लंड मुंह में लिया मैंने मौसी का सर लंड पर दबा दिया।
मौसी ने भी मेरे चूतड़ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मौसी मेरा लंड चूसने लगी। मौसी का लंड चूसने का तरीका मस्त था। मौसी ने खाली लंड का टोपा की मुंह में लिया हुआ था और ऐसे चूस रही थी जैसे लड़का-लड़की के मम्मों के निप्पल चूसता है। चूसने के साथ-साथ मौसी लंड को बीच में से पकड़ कर लंड अगर-पीछे कर रही थी। मेरा लंड एक-दम से ही सख्त हो गया। मस्ती में मैंने मौसी से कहा, “मौसी आप चिंता मत करो, मेरा लंड लगाएगा रगड़े आपकी फुद्दी में आपकी गांड मैं। मैं करूंगा आपकी मस्त चुदाई – मम्मी की तरह।”
मौसी ने एक सेकंड के लिए मुंह से निकाला और बोली, “धीरज बड़ा सख्त है तेरा लंड। मस्त रगड़े लगेंगे फुद्दी में पूरे एक साल के बाद।” मौसी मस्ती फिर से लंड चूसने लगी।
मैंने मौसी से कहा, “बस मौसी, चुसाई का मजा आ गया, चलो अब अपनी फुद्दी चुसवाओ।”
मौसी खड़ी होते हुए बोली, “बेटा अगले सात दिन सब कुछ करवाऊंगी तुझसे। फुद्दी भी चुदवाऊंगी, गांड भी चुदवाऊंगी, मुँह में भी निकलवाऊंगी और तेरे चूतड़ों का छेद चाट कर तुझे ऐसा मजा दूंगी जैसा मजा आज तक तुझे किसी ने नहीं दिया होगा – जीजी ने भी नहीं।”
जैसे ही मैं खड़ा हुआ मौसी ने मुझे बांहों में ले कर अपना मुंह खोल कर मेरे मुंह के साथ लगा दिया। मम्मी के साथ ये करने के बाद मैं समझ चुका था कि मुझे क्या करना था।”
मैंने अपनी जुबान मौसी के मुंह में डाल दी। मौसी मेरी जुबान चूसने लगी। फिर मौसी ने मेरी जुबान आपने मुंह में से निकाली और अपनी जुबान मेरे मुंह में डाल दी। अब मैं मौसी की जुबान चूस रहा था। इसमें भी अपना ही मजा था।
कुछ देर के बाद मौसी हटी और बोली, “आजा धीरज, मस्त मजा देती हूं तुझे फुद्दी चुदाई का – याद रखेगा बेटा तू भी कि कोइ फुद्दी चोदी थी तूने। चल आजा अब तुझ से फुद्दी चुसवाऊं।”
मौसी एक कुशल और पक्की चुदक्कड़ की तरह बेड के किनारे पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगें चौड़ी करके अपनी फुद्दी कि फांकें खोल कर बोली, “आजा मेरे राजा, ये रही तेरी मौसी की फुद्दी, और तेरी मौसी के चूतड़। चूस चाट, चोद जो तेरा मन चाहे वो कर। बस तू ये समझ तू इस रंडी औरत को सात दिनों के लिए रगड़ने के लिए पैसे खर्च करके लाया है, अब तू चाहे उसकी फुद्दी चोद, गांड चोद। तीन दिनों के लिए तू इस रांड का मालिक है। अब आजा मेरे राजा – अब और मत तरसा – देख ये रंडी तेरा लंड लेने के लिए मरी जा रही है इंतज़ार कर रही है।”
मौसी की बातें भी मम्मी की बातों जैसी ही थीं। बोलने में मम्मी और मौसी एक जैसी थीं। मगर मौसी तो ये सब बोलने में कुछ जल्दी ही शुरू हो गयी थी।
जिस तरीके से मौसी चुदाई से पहले ही ये सब बातें कर रहे थी, मैं समझ गया कि मौसी की आज कि चुदाई भी मौसी की बातों की तरह खुल कर होने वाली है। मौसी को चोदने का मजा कुछ अलग ही आने वाला है – मम्मी, दिव्या और माधवी की चुदाई से भी ज्यादा। ये सोचते ही मेरा लंड फटने को हो गया।
मैं नीचे बैठ गया और मौसी की फुद्दी और चूतड़ों का छेद चूसने चाटने लगा। मौसी की बातों से मैं समझ चुका था कि यहां शर्म की कोई जगह नहीं है। फुद्दी चाटते-चाटते मैं बीच बीच में भी बेशर्मों की तरह बोल रहा था, “देखती जा मेरी चुदक्कड़ मौसी क्या हालत करता हूं तेरी फुद्दी और तेरी गांड की।”
मौसी की फुद्दी भी मम्मी की फुद्दी की तरह नमकीन, खट्टे पानी से भरी पड़ी थी। इतना पानी तो दिव्या और माधवी की फुद्दीयों ने ही छोड़ा था जितना मौसी की फुद्दी छोड़ रही थी। लग रहा था मौसी चुदाई की मस्ती में पागल हुई पड़ी थी। जब मैं मौसी की फुद्दी का खूब सारा पानी चाट गया तो मैं थोड़ा और नीचे हुआ और मौसी के चूतड़ों का गहरा भूरा छेद चाटने लगा।
गांड का छेद अक्सर गुलाबी रंग का होता है, मगर गांड चुदवा-चुदवा कर लंड के रगड़ों के वजह से गुलाबी से भूरा हो जाता है, और फिर अगर और भी ज्यादा गांड चुदाई हो तो गांड की छेद का रंग गहरा भूरा हो जाता है। मम्मी की गांड का छेद भी अब तक गुलाबी ही था क्योंकि मम्मी या तो चुदवाती नहीं थी या फिर बहुत कम चुदवाती थी और दिव्या और माधवी की तो गांड मैंने ही चोदी थी पहली बार थी। मौसी की गांड के छेद के रंग से लग रहा था मौसी खूब गांड चुदवाती थी।
मैंने मौसी से पूछा, “मौसी लगता है काफी गांड चुदवाती रही हैं आप?”
ये सुन कर मौसी ने कहा, “हां धीरज चुदवाती तो हूं। असल में तो मेरी गांड तेरे मौसा ने शादी की पहली रात को ही चोद दी थी। उसके बाद गांड चुदाई का ये सिलसिला अब तक चल रहा है।”
इसके बाद तो मौसी अपने आप ही अपनी पहली रात की चुदाई की कहानी सुनाने। मौसी ने अपनी पहली रात की चुदाई की जो कहानी सुनाई वो चुदाई क्या वो तो जैसे पूरी चुदाई की पिक्चर ही थी।
टांगें उठा कर बेड पर लेटी-लेटी मौसी बोली, “कुछ ना पूछ धीरज, क्या-क्या हुआ था मेरे साथ मेरी शादी की पहली रात को। बड़ा तंग किया था तेरे मौसा ने उस रात को। शराब पी कर आय थे। चुदाई करते-करते तेरे मौसा का लंड ना तो ढीला हो रहा था और ना ही पानी छोड़ रहा था। सात आठ बार तो मेरी फुद्दी चोदी। मैं तो थक ही गयी थी, मगर तेरे मौसा थे कि मुझे छोड़ ही नहीं रहे थे। आखिर मैंने बोल ही दिया, “बस करिये जी, मुझे तो नीचे अब दर्द होने लगा है।”
“तेरे मौसा बोले, “कौशल्या, बड़ा मजा देती है तू। मजा आ गया आज तेरी फुद्दी चोद कर। बस एक आख़री बार गांड और चुदवा ले।”
“धीरज, मेरी हां ना का तो सवाल ही नहीं था। हम हिंदुस्तानी लड़कियों को यही सिखाया जाता है कि मर्द ने जो कह दिया उसके लिए ना नहीं करने चाहिए, और फिर हमारा तो और भी पुराना जमाना था। मैं कुछ नहीं बोली, बस लेटी रही। तेरे मौसा ने ही मुझे उठा कर सोफे पर उल्टा लिटा दिया। मेरे चूतड़ पीछे की तरफ थे। फिर उन्होंने मेरे चूतड़ चौड़े करके पहले मेरे चूतड़ चाटे फिर चूतड़ों के छेद के आस-पास और अंदर उंगली डाल कर कुछ लगाया और लंड गांड के छेद पर रख अंदर धकेल दिया। मुझे बहुत दर्द हुई। मेरी चीख निकल गई और मैं रोने लगी। मगर तेरे मौसा पर तो जैसे गांड चुदाई का भूत सवार था।”
मौसी अपनी शादी की पहली रात का किसा मुझे सुना रही थी, “धीरज मेरी फुद्दी की तरह ही मेरी गांड की रगड़ाई शुरू हो गयी। दर्द के मारे मैं मरी जा रही थी। मगर तेरे मौसा ने मेरी कमर इतने कस कर पकड़ी हुई थी जैसे एक बड़ा कुत्ता एक कुतिया को अपनी अगली टांगों में जकड़ लेता है और दीन-दुनिया से बेखबर कुतिया की फुद्दी में अपने दस इंच लम्बे लंड के ज़बरदस्त धक्के लगाता रहता है। कुत्ते को उस समय इस बात की कोइ परवाह नहीं होती की नीचे कुतिया के क्या हालत हो रही होगी। कुतिया की फुद्दी फट रही होंगे या उसमें से खून निकल रहा होगा। यही हाल मेरा भी था। नीचे लेटी मैं हिल भी नहीं पा रही थी। आधे घंटे के गांड चुदाई के बाद तेरे मौसा ने एक जोर की दहाड़ लगाई, “आह कौशल्य, मेरे जान, मेरी रानी, कौशल्या निकला मेरी जान, मजा आ गया। कौशल्या आह कौशल्या मस्त चुदाई हुई। आह आह आह कौशल्या मेरी जान मजा आ गया।”
“और इसके साथ ही तेरे मौसा के लंड के गर्म-गर्म पानी से मेरी गांड भर गयी। जैसे ही तेरे मौसा का लंड थोड़ा ढीला हुआ, उन्होंने लंड मेरी गांड में से निकाला। फार कपड़े भी नहीं पहने और वहीं बिस्तर पर लुढ़क गए। अगले ही पल वो खर्राटे भरने लगे। मैं भी बिस्तर पर लेट गयी। एक तो मेरी पहली गांड चुदाई। दूसरे तेरे मौसा ने नशे में बुरे तरीके से मेरी गांड चुदाई की थी। मेरी गांड में बहुत जलन हो रही थी। कुछ देर बाद मैंने हिम्मत की और मैं बाथरूम चली गयी। एक तो मेरी चुदाई देर रात तक हुई थी। ऊपर से गांड में हो रहे दर्द के कारण नींद भी नहीं आ रही थी, पता नहीं कितने बजे सोई मैं।”
“सुबह में देर से उठी तो तेरे मौसा नहा-धो कर कपड़े बदल कर सोफे पर बैठे हुए थे। मुझे जागा हुआ देख कर वो बाहर चले गए। थोड़ी ही देर में मेरी सास मेरे लिए चाय ले कर आ गयी और बिस्तर पर मेरे साथ ही बैठ गयी। पीछे तकिये के तरफ देखा तो उस पर खून लगा हुआ था। मेरी सास ने बिना कुछ कहे तकिये का कवर उतार लिया और लपेट कर अपने पास रख लिया।”
“जिस तरीके से मैं चुप बैठी हुई थी, मेरी सास दो मिनट में समझ गयी कि रात को क्या हुआ होगा। तेरे मौसा ने शराब पी कर मेरी चुदाई की थी और मुझे कुछ तकलीफ थी। मेरी सास ने तेरे मौसा की तरफ देखा और गुस्से से बोली, “मनोहर तूने शराब पी थी कल रात को?”
“तेरे मौसा की तो आवाज ही नहीं निकल रही थी। मेरी सास फिर वैसे ही गुस्से से तेरे मौसा को बोली, “शर्म आनी चाहिए तुझे, ये क्या कहीं भागी जा रही थी? जा बाहर।”
मौसी अपनी पहली रात की चुदाई की कहानी सुना रही थी।
“धीरज रात भर की ताबड़-तोड़ चुदाई से मेरा पूरा जिस्म दुःख रहा था। जिस तरीके से मैं चुप बैठी हुई थी, मेरी सास दो मिनट में समझ गयी कि रात को क्या हुआ होगा। मेरी सास ने तेरे मौसा की तरफ देखा और गुस्से से बोली, “मनोहर तूने शराब पी थी कल रात को?”
“तेरे मौसा की तो आवाज ही नहीं निकल रही थी। मेरे सास फिर वैसे ही गुस्से से तेरे मौसा को बोली, “शर्म आनी चाहिए तुझे, ये क्या कहीं भागी जा रही थी? जा बाहर।”
“तेरे मौसा बाहर चले गए। मेरी सास मुझसे बोली, “बेटा बहुत तंग किया क्या इसने? मैंने दबी आवाज में कहा, “नहीं मम्मी जी।”
मेरी सास समझ गई की मैं झूठ बोल रही हूं। मेरे सास बोली, “बेटा मैं तुझे एक गोली दे देती हूं, खा कर थोड़ी देर और सो जा।”
“मेरी सास बाहर गयी और दो गोलियां और एक क्रीम की ट्यूब ला कर मझे दी और गोलियां खिला कर दरवाजा बंद करके गयी चली गई। मैं समझ गयी की ट्यूब का क्या करना है। बाहर मेरी सास फिर से जोर-जोर से तेरे मौसा पर चिल्लाने लगी, “मनोहर तू पागल है क्या? पूरी जिंदगी यहीं रहना है उसने – तेरे पास। क्या सोच रही होगी तेरे बारे में वो, ये भी सोचा है? और फिर इस तरह पीते हैं?”
मौसी हंसते हुए बोली, “धीरज एक पल को तो मुझे लगा कहीं गुस्से में मेरी सास यही ना कह दे, “इस तरह पी कर चोदते हैं क्या अपनी बीवी को पहली रात में?”
“खैर, मैं बाथरूम गयी और क्रीम गांड के छेद पर लगा कर, और गोलियां खा कर फिर से सो गई। दोपहर दो बजे मैं सो कर उठी तो तबीयत कुछ ठीक थी। गांड का दर्द भी कम था। और नहा धो कर अपना हुलिया ठीक-ठाक करके कमरे से बाहर निकली। मेरी सास किचन में थी। सास को प्रणाम करके में मैं किचन में उनका हाथ बटाने लगी तो मेरी सास बोली, “बेटा उधर डाइनिंग टेबल पर बैठ जा और बारह दिन आराम कर।”
“रात हुई तो मैं डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी। खाना खा कर फिर कमरे में आ गयी और लेट गयी। थोड़ी देर के बाद तेरे मौसा आ गये और मेरे पास ही लेट गये। मुझसे बोले, “कौशल्या पीछे चूतड़ों का छेद दुःख रहा है क्या? जरा दिखाओ मुझे।”
“मैं जब नहीं हिली तो तेरे मौसा ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार उतार दी। और फिर मुझे उठा कर मेरे बाकी कपड़े भी उतर दिए। इसके बाद तेरे मौसा खुद भी नंगे हो गये और मुझे उठा कर उलटा कर दिया और मेरे चूतड़ फैला कर कर चूतड़ों का छेद देखने लगे।”
तेरे मौसा मुझे से बोले, “कौशल्या ये तो सूजी हुई है। सॉरी कौशल्या, आगे से ऐसा नहीं होगा।”
मैं सीधी होने लगी तो तेरे मौसा बोले, “एक मिनट कौशल्या ऐसे ही लेटी रहो मैं क्रीम लगा देता हूं।”
तेरे मौसा अलमारी में से क्रीम ले आये तो मैंने धीरे से कहा, “मम्मी जी भी क्रीम दे गयी हैं।”
“जब उन्होंने पूछा कहां है तो मैंने कहा बाथरूम में है।”
“तेरे मौसा बाथरूम में से क्रीम ले आये। तेरे मौसा ने पहले तो मेरी गांड का छेद खूब चाटा। तेरे मौसा के गांड का छेद चाटने से मुझे बड़ा आराम मिला। फिर तेरे मौसा ने गांड के छेद के साइडों में और छेद के अंदर भी क्रीम लगा दी और मुझे लिटा दिया।”
“तेरे मौसा मेरे पास ही लेट गए और मेरे मम्मों और फुद्दी के साथ खिलवाड़ करने लगे। कुछ देर के बाद मैंने देखा तेरे मौसा का लंड खड़ा हो गया है। तेरे मौसा ने मेरे मम्मों के निप्पल मुंह में लिए और चूसने लगे। उन्होंने मुझ से पूछा, “कौशल्या फुद्दी की चुदाई करवानी है, लंड लेना है फुद्दी में?”
“मैंने धीरे से कहा, “पता नहीं।” ये एक तरह से मेरी हां ही थी। गांड में दर्द जरूर थी, मगर मुझे पिछली रात को फुद्दी की चुदाई में मजा तो आया ही था।”
“फिर तेरे मौसा उठे और अलमारी में से दारू की बोतल में से दारू की तीन-चार घूंट भरे और बोले, “कौशल जब तक गांड का छेद पूरी तरह थी नहीं हो जाता पीछे से ही चुदाई करेंगे। ऊपर से करेंगे तो चूतड़ों पर जोर पड़ेगा और गांड के छेद में दर्द होगा। मैंने धीरे से “हां” में सर हिला दिया।”
मौसी नीचे लेटी हुई मुझे बता रही थी, “धीरज इसके बाद तेरे मौसा ने मुझे बेड के किनारे पर चूतड़ों के नीचे दो तकिये लगा कर, मुझे पीछे की तरफ लिटा दिया और मेरे आराम के लिए मेरे सर के नीचे भी रख दिया। फिर तेरे मौसा ने मेरी टांगें ऊपर की और अपना लंड मेरी फुद्दी के छेद पर रक्खा और हो गए शुरू।”
“बारह दिनों की चुदाई ने हम दोनों के बीच की शर्म तो खत्म ही कर दी थी। चुदाई के दौरान तेरे मौसा बोलते, “आह मेरे जान कौशल्या, क्या मस्त फुद्दी है, एक-दम टाइट, चोदने का मजा ही आ जाता है। दिल करता है दिन रात चोदता ही रहूं।”
“उधर मैं भी बोलती , “क्या मस्त लौड़ा है जी आपका, चूत में पूरा अंदर तक जाता है, पूरी फुद्दी ही भर जाती है जी आपके लौड़े से।”
“बस ऐसे ही एक महीना गुज़र गया और मेरी गांड का छेद बिलकुल ठीक हो गया। अब मेरा फिर से गांड चुदवाने का मन होने लगा। एक दिन जब तेरे मौसा मुझे चोदने लगे तो मैंने कह ही दिया, “एक दिन पीछे भी डालो जी, बड़ा मन कर रहा है।”
“तेरे मौसा ने पूछा, “पीछे कहां कौशल्या? गांड में”
“मैंने कहा, “जी गांड में अब तो गांड का छेद ठीक हो गया लगता है।”
“तेरे मौसा ने कहा, “ठीक है कौशल्या, इधर सोफे पर आ कर चूतड़ ऊपर करके लेट जा, आज तुझे गांड चुदाई का पूरा मजा दूंगा। पूरा गांड की गहराई तक जाएगा लंड।”
“ये बोल कर तेरे मौसा ने अपने कपड़े उतार दिए और फिर से अलमारी की तरफ चले गए और शराब की बोतल में से चार घूंट लगा कर बोले, “अजा मेरी जान मेरी रानी मेरे लंड की मलिका मेरी कौशल्या, तेरी गांड चोदने की लिए मैं हो गया तैयार।”
“मैं भी मस्ती में थी। मैंने भी कहा, “आजा मेरी फुद्दी, मेरी गांड के राजा”, और हाथ पीछे करके मैंने चूतड़ फैला दिए लिए और बोली, “लो ये रही मेरी गांड जी, जो करना है करो इसका।”
“और धीरज क्या मस्त गांड चुदाई हुई उस दिन। हम दोनों को गांड चुदाई की आदत ही हो गयी। आठ दस दिनों के बाद गांड चुदाई होती ही होती थी। उसके बाद तो गांड चुदाई का ये सिलसिला जो चला, आज से साल भर पहले ही जा कर रुका जब तेरे मौसा का लंड सख्त होना ही बंद हो गया।”
“मगर अब तेरे मौसा मेरी फुद्दी और गांड में एक रबड़ का लंड डाल कर मजा देते हैं। मुझे उलटा लिटा कर तेरे मौसा ने मेरी गांड में रबड़ का लंड डाला होता है और खुद अपने लंड की मुठ मारते है और जब लंड पानी छोड़ने लगता है तो रबड़ का लंड निकल कर अपना लंड मेरी गांड के छेद पर टिका देते हैं। रबड़ के लंड के कारण गांड का छेद तो खुला ही होता है, तेरे मौसा के लंड का सारा पानी मेरी गांड में चला जाता है।”
“मौसी ये सुना कर चुप हो गयी। मेरा का लंड अब भी मौसी की फुद्दी के ऊपर ही था। मैं बोला, “मौसी आपकी गांड चुदाई की कहानी तो गज़ब की सेक्सी – कामुक थी। मेरा तो मन अभी के अभी आपके गांड चोदने का होने लगा है।”
मौसी बोली, “धीरज बेटा बस दो रात और सबर कर ले – आज की रात और कल की रात तो तू मेरी फुद्दी की एक साल से लगी हुई आग बुझा, कल के बाद, परसों से तुझसे मस्त गांड भी चुदवाऊंगी, और तेरे चूतड़ चाट कर ऐसा मजा दूंगी की तू भी याद रखेगा। उसके बाद चार पांच दिन तू मेरे साथ साथ माधवी को भी चोद लेना। उसे भी तो लंड चाहिए अब। तू यहां है, तेरे लंड की ख्याल से फुद्दी में उंगली डाल कर मजे ले रही होगी।”
मैंने कहा, “लेकिन मौसी मेरा तो यहां का तीन दिनों का ही प्रोग्राम है।”
मौसी बोली, “उसकी तू फ़िक्र मत कर। मैं कल सुबह ही जीजी से तेरे यहां सात आठ दिन रुकने के बारे में बात करूंगी।”
अपनी गांड चुदाई की कहानी कौशल्या ने लेटे-लेटे ही सुना डाली थी। मौसी अब मेरा का लंड लेने फुद्दी में लेने के लिए उतावली थी। मौसी बोली, “बेटा डाल भी अब फुद्दी में, क्यों देर कर रहा है। आग लगी पड़ी है मेरी फुद्दी में।”
मैंने मौसी की टांगें थोड़ी और चौड़ी की – मम्मी की फुद्दी की तरह ही मौसी की फुद्दी भी हल्की सी खुल गयी और फुद्दी के अंदर का गुलाबी नजारा दिखाई देने लगा। मैंने एक झटके के साथ लंड मौसी ही फुद्दी में डाला और चुदाई शुरू कर दी।
इसके बाद तो उस दिन जो चुदाई क्या चुदाईयां हुई, जो रात दो बजे तक चली। कोइ गिनती ही नहीं रही की कितनी बार मौसी की फुद्दी ने पानी छोड़ा, और तब तक मौसी ने मुझे रुकने को नहीं कहा, जब तक मेरे लंड का गर्मा-गर्म सफ़ेद शहद मौसी की फुद्दी में निकल नहीं गया।
मौसी मस्ती में बोली, “आअह धीरज मजा आ गया, कितना पानी निकलता है तेरे लंड में से, पूरी फुद्दी भर जाती है।”
ये बोल कर मौसी ने आखें बंद कर ली। मौसी लम्बे-लम्बे सांस ले रही थी। मौसी बड़े ही मादक अंदाज में बोली, “आह मेरे राजा, क्या मस्त मजा दिया तूने आज। मेरे राजा, कल का दिन भी ऐसे ही मजा देदे। बस फिर, समझ मैं तेरी रंडी और तू मेरा मालिक। जब कहेगा, कपड़े उतार कर तेरे सामने फुद्दी खोल कर लेट जाऊंगी।”
उस दिन के चुदाई हो चुकी थी। तीन घंटे बीत चुके थे। मैं उठा और पीछे के दरवाजे से अपने कमरे में आ गया। सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गयी। मैं बाथरूम गया, नहा कर शेव वगैरह करके तैयार हो कर ही बाहर आया। साढ़े आठ बजे मैं नाश्ता करके फैक्ट्री के लिए निकल गया। उस दिन मैं बारह बजे ही फारिग हो गया। सात लाख के पेमेंट मेरे ब्रीफकेस में थी।
अकाउंटेंट उस दिन भी नहीं आया था।
ऑफिस में बैठा ऐसे ही इंतजार कर रहा था कि मौसा जी का फोन आ गया। इधर-उधर की बातें करते करते मौसा जी बोले, “धीरज बेटा कोई समस्या तो नहीं हो रही?”
मैंने कहा नहीं मौसा जी सब ठीक है। मैं कल और आज की पेमेंट की बात करने ही वाला था कि मौसा जी बोले, “वो छोड़ धीरज, वो मुझे मालूम है पार्टी पेमेंट करते ही मुझे भी फोन कर देती है। कल लास्ट पेमेंट होगी, उसके बाद दस बारह दिनों तक कोइ डिलीवरी नहीं जानी – तब तक मैं आ ही जाऊंगा। अकाउंटेंट का फोन आया थी, वो भी कल पहुंच जायेगा। अगर तूने गुडगाँव जाना हो तो कल चले जाना।”
मैंने कहा, “नहीं मौसा जी, मौसी कह रही थी तीन चार दिन और रुकने कि लिए। मैंने भी सोचा, इन दिनों में फैक्ट्री कि चक्कर लगा लूंगा, मुझे भी बहुत सी नई चीज़े देखने को मिल रही हैं, जो हमे इंजीनरिंग में नहीं पढ़ाई जाती।”
मौसा जी बोले, “ये हुई ना बात। मैं तो कहता हूं, जब तक तेरा रिजल्ट नहीं आ जाता तू यहीं रह और रोज़ फैक्ट्री जा।”
मैंने भी सोचा, “रोज़ दिन में फैक्ट्री जा और रोज़ रात मौसी की फुद्दी और गांड की चुदाई कर।”
मैंने हंसते हुए कहा, “ठीक है मौसा जी।”
एक बजे मैं घर के लिए रवाना हो गया।
घर पहुंच कर मैंने ब्रीफकेस मौसी को दिया और बोला, “मौसी ये साढ़े सात लाख की पेमेन्ट है।”
मौसी ने ब्रीफकेस डाइनिंग टेबल पर रख दिया और मुझे बाहों में लेकर बोली, “मां चुदा गए साढ़े सात लाख, तू इधर आ और मेरे फुद्दी चोद मेरे राजा। ये आज एक बजे से ही गरम हुई पड़ी है।”
मैंने हड़बड़ाते हुए पूछा, “एक बजे से? और मौसी माधवी?”
मौसी बोली, “माधवी की फ्रेंड शालिनी आयी थी तीन और लड़कियों के साथ – उसके साथ गयी है यूनिटी वन मॉल में। वहां घूमेंगे सवा तीन बजे का मूवी शो देखेंगे और शालिनी माधवी को आठ बजे तक यहां छोड़ेगी। मतलब मेरी फुद्दी के सरताज, आज पूरे पांच घंटे हैं हमारे पास। ये आज की लड़कियां, आठ बजे का बोल कर गयी हैं, नौ बजे से पहले नहीं आने वाली।”
मैं फैक्ट्री से वापस आया तो माधवी घर पर नहीं – और मौसी चुदाई के लिए तैयार बैठी थी।
मौसी मुझे लगभग घसीटती हुए बोली, “आजा आज बहुत टाइम है। आज ही देती हूं तुझे गांड चुदाई का मजा और साथ ऐसा मजा जो तूने अब तक नहीं लिया होगा। हुए उसके बाद रात को माधवी की टाइट फुद्दी चोद।”
फिर मौसी हँसते हुए बोली, “धीरज आज तेरे मजे ही मजे हैं।”
जिस तरह मौसी खुल कर चुदाई करवाती थी, मौसी को चोदने में अब मुझे भी मजा आने लगा था। चलते-चलते मैंने पूछा, “मौसी आपके मम्मी से बात हुई?”
मौसी ने हंसते हुए बोली, “हुई मेरे चोदू मुन्ना, बात हुई।”
मैंने फिर पूछा, “फिर मौसी, क्या बोली मम्मी?”
कौशल्या ने हंसते हुए जवाब दिया, “धीरज, सुधा जीजी ने क्या बोलना था। जीजी बोली जितना धीरज का लंड मेरा और दिव्या का है, उतना ही उसका लंड तेरा और माधवी का भी है। मजे लो धीरज के लम्बे मोटे लंड के – ऐसा लंड बहुत कम मर्दों का होता है – और धीरज तो दो-दो ढाई-ढाई घंटे की चुदाई की बाद भी नहीं झड़ता।”
फिर मौसी बोली, “धीरज अब मस्त बेधड़क होके चोद मां बेटी को। बस धीरज इतना ध्यान रखना, माधवी को ये पता नहीं चलना चाहिए की तू मुझे भी चोद रहा है।”
तब तक हम दोनों कमरे में पहुंच गए।
कमरे में पहुंचते ही मौसी ने अपने कपड़े उतार दिए और मुझे पकड़ कर मेरे मुंह के साथ अपना मुंह लगा दिया। अब मुझे मालूम ही था कि अब मुझे क्या करना था।
मैंने अपनी जुबान मौसी के खुले मुंह में डाल दी। मौसी मेरी जुबान चूस रही थी और मौसी हाथ से मेरी पेंट की ज़िप खोल रही थी। मौसी को पेंट की ज़िप खोलने में दिक्कत हो रही थी। मैंने अपनी पेंट के बटन ही खोल दिए और मेरे पेंट नीचे ढलक गयी। मौसी ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया।
नंगी मौसी का हाथ लगते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मौसी ने अपना मुंह मेरे मुंह से अलग किया और बोली, “आजा धीरज, कर अपनी मौसी की चुदाई।”
ये बोल कर मौसी जा कर बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर बोली, “आजा मेरे राजा, ये देख ये फुद्दी बुला रही है तुझे, बाढ़ आयी हुई है इसमें। आजा मेरे राजा, अब देर मत कर।”
मौसी कौशल्या मेरा का लंड लेने में कुछ ज्यादा ही उतावली हो रही थी। मैंने भी अपने बाकी के कपड़े उतारे और सीधा जा कर मौसी के ऊपर चला गया। बिना देरी किये मैंने लंड मौसी की फुद्दी में डाला, मौसी के होठ अपने होठों में लेकर मैं मौसी की चुदाई करने लगा। जल्दी ही मौसी मस्त हो गयी और मेरा लंड भी एक-दम सख्त हो गया।
मैंने मौसी के होंठ छोड़े और मौसी की फुद्दी जोरदार रगड़ाई वाले धक्के लगाते हुए बोला, “ले मेरी जान, ये रहा तेरे धीरज का लौड़ा तेरी फुद्दी में – मेरी रानी ले, ले मेरी जान ले, आज तबीयत से रगडूंगा तेरी टाइट फ़ुद्दी।”
मौसी जोर से बोली, “क्या बोल रहा है मादरचोद धीरज, मेरी जान …… मेरी रानी। साले कोइ ढंग की बात तो बोल, जिससे फुद्दी गर्म हो।”
मौसी बोली, “बोल ले मेरी कुतिया मौसी, तेरी मां का भोसड़ा मादरचोद मौसी, साली रंडी दुनिया भर की चुदाईयां करवा चुकी है और अब भी ऐसे नखरे कर रही है जैसे पहली बार चूत मरवा रही है – ऐसे पूरा लंड ले लेती है जैसे कभी लंड लिया ही ना हो। साली मादरचोद चुदक्कड़ रंडी मौसी, आज देख तेरी फुद्दी की क्या हालत करता हूं। मादरचोद कुतिया तेरी फुद्दी का कचरा ही कर दूंगा। एक रखैल एक रंडी की तरह चोदूंगा तुझे – जब देखो फुद्दी खोल कर चुदाई के लिए तैयार रहती है।”
“धीरज अगर तुम ये सब बोलो तो मेरा चुदाई का मजा दुगना हो जाएगा। एक बार बोलो धीरज, बस एक बार।”
मौसी अभी ये सब बोल कर ही हटी थी, कि मैं शुरू हो गया, “तेरी मां का भौंसड़ा मादरचोद कुतिया, चुप-चाप फुद्दी चुदवा, आज की रात तू रंडी है मेरी, पैसे खर्च किये हैं मादरचोद तुझे चोदने के लिए। साली कौशल्या, पूरी रात रगडूंगा तुझे तो आज, अभी तो तेरी फुद्दी में डाला है रंडी, अभी तो तेरी गांड भी फाड़नी है। साली दोनों बहने एक जैसी चुदक्कड़ हैं, लंड पूरा लेती हैं और चीखती तो ऐसे है जैसे पहली बार चूत मरवा रही हैं। तेरी तरह ही तेरी बहन भी फुद्दी में पूरा लंड लेती है, ऐसे चुदाई करवाती है जिसे सालों से चुदाई हुई ही ना हो।”
अभी मेरे मुंह से फूल झड़ ही रहे थे कि मौसी ने जोर से चूतड़ ऊपर किये एक जोर की सिसकारी ली, “आअह धीरज बेटा निकल गया मेरा। मजा आ गया बेटा आह आह धीरज, बड़ा मजा आ रहा है आह धीरज।” और इसके साथ ही मौसी ढीली हो गयी।
ढीली होने के बावजूद मौसी ने ना तो मेरी कमर से टांगें हटाई और ना ही मुझे छोड़ा। पांच सात मिनट भी नहीं हुए थे कि मौसी मेरे कान में फुसफुसाई, “धीरज बड़ा ही मस्त लंड है तेरा। पूरी फुद्दी भरी पड़ी है तेरे लंड से। और धीरज तू बोलता भी मस्त है और चोदता भी बड़ा मस्त है। बड़ी किस्मत वाली है तेरी मम्मी जो ऐसे लंड से चुदाई करवाती है, और बड़ी किस्मत वाली हैं दिव्या और माधवी जिनकी पहली चुदाई ही ऐसे मस्त लंड से हुई है।”
फिर मौसी बोली, “बेटा एक बार फुद्दी का मजा और देदे फिर आज ही गांड चुदवाऊंगी। आज माधवी के आने से पहले पहले पूरी चुदाई कर दे मेरी, फिर रात को तू माधवी के पास चले जाना। तेरे इस खूंटे जैसे लंड की चुदाई का असली मजा तो माधवी और दिव्या जैसी जवान लड़कियों को ही आना चाहिए।”
ये बोल कर मौसी ने अपना मुंह खोल कर मेरे मुंह पर लगा दिया। मौसी के चूतड़ ऊपर नीचे होने लगे। मौसी को एक और चुदाई चाहिए थी।
मैंने मौसी को बाहों में जकड़ लिया और लंड के धक्के लगाने शुरू कर दिए। जल्दी ही मौसी की फुद्दी फिर से गरम हो गयी और वो चूतड़ हिलाने घूमने के साथ-साथ कुछ भी बोलने लगी। मौसी के साथ-साथ मैं भी वैसे ही बातें बोलने लग गया। दोनों बस बोलते जा रहे थे। जल्दी ही मौसी ने एक जोरदार सिसकारी ली, “आह धीरज मादरचोद, साले फिर छोड़ने लगी मेरी फुद्दी पानी। ये तेरा लौड़ा है या क्या है, क्या रगड़े लगते हैं फुद्दी में। लगा, साले दो चार करारे धक्के लगा, फाड़ मेरी फुद्दी।”
ये सुन कर मैंने पूरा लंड फुद्दी में से निकाला और झटके के साथ वापस मौसी की फुद्दी में डाल दिया। मौसी बोली, “आअह धीरज क्या मस्त डाला लंड मेरे बेटे, एक-दो बार और डाल ऐसे ही।”
मैंने फिर से लंड पूरा निकाला और झटके के साथ फुद्दी में डाला, इस धक्के के साथ ही मौसी की फुद्दी पानी छोड़ गयी। मौसी जोर से बोली, “अरे धीरज निकल गया, छोड़ गयी मेरी फुद्दी पानी, मजा आ गया साले मुझे। क्या मस्त चोदता है तू।”
मौसे इस मजे के बाद ढीली हो गयी और अपनी टाँगें मेरी कमर से हटा ली। मतलब था चुदाई का ये दौर अब खत्म हो गया था। मैंने खड़ा लंड मौसी की फुद्दी में से निकाला और पलट कर मौसी के पास ही लेट गया। दस मिनट हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। फिर मौसी उठी और मेरा खड़ा लंड चूसने के बाद बोली, “चल धीरज, उठ जा, अब गांड चुदवाऊंगी तुझसे। तुझे भी बहुत बेसब्री है मेरी गांड चोदने की, और मुझे भी बहुत बेसब्री है तेरा मोटा लंड गांड में लेने की।आज तेरी ये ख्वाहिश भी पूरी कर दूंगी। चल उठ जा मेरे राजा, आजा।”
इतना बोल कर मौसी बेड से उठी और जा कर सोफे पर उल्टा लेट गयी। हाथों से चूतड़ चौड़े करके मौसी बोली, “ले धीरज, ये रही तेरी मौसी की गांड, अब डाल अपना लंड इसमें और गांड के टाइट छेद की रगड़ाई के मजे ले।”
मैं भी बहुत बेसब्री से इस पल का इंतज़ार कर रहा था। मैं उठा और मौसी के पीछे चला गया। नीचे बैठ कर मौसी के चूतड़ खोल कर गांड का छेद थोड़ा चाटा और फिर खड़ा हो कर थूक से मौसी की गांड का छेद और अपना लंड गीला किया और एक ही बार में पूरा लंड मौसी की गांड में बिठा दिया। मौसी हल्का सा चिहुंकी, और बोली, “अरे धीरज बेटा आराम-आराम से कर। इतनी जल्दी क्या है? मस्त मजा ले गांड चुदाई का, कोइ जल्दी नहीं। वैसे भी तेरी मौसी की गांड है, किसी रंडी की नहीं, फाड़ेगा क्या?”
मैंने बस इतना ही कहा, “हां मौसी फाड़ूंगा, जैसे मौसा जी ने फाड़ी थी सुहागरात वाली रात को।” इतना बोल कर मैंने ने मौसी को कमर से पकड़ लिया और लंड के लम्बे लम्बे धक्के मौसी की गांड में लगाने लगा।
इस बार मौसी ने नहीं कहा, “अरे धीरज बेटा आराम-आराम से कर इतनी जल्दी क्या है? मस्त मजा ले गांड चुदाई का, कोइ जल्दी नहीं। वैसे भी तेरी मौसी की गांड है, किसी रंडी की नहीं, फाड़ेगा क्या?”
मतलब मौसी भी गांड रगड़ाई का पूरा मजा लेती थी। आखिर गांड चुदाई की शौक़ीन भी तो थे दोनों मौसा और मौसी। मौसी की गांड का छेद मम्मी की गांड के छेद जैसा टाइट नहीं था और दिव्या और माधवी की गांडे तो अभी थी ही कुंवारी। फिर भी मेरे लंड पर लंड पर रगड़े तो लग ही रहे थे।
मैंने मौसी से कहा, “मौसी गांड चुदाई का भी अपना मजा है, बड़ा मजा आ रहा है आपकी गांड चोदने का।”
मौसी बोली, “बेटा अभी असली मजा तो तुझे देना है मैंने, तेरे चूतड़ों का छेद चाट कर। बस इतना ध्यान रखना लंड का पानी गांड में ना निकल जाए। तेरे लंड का पानी आज कहीं और निकलेगा। चल तू गांड चोदता रह, मैं मजा लेती हूं, चूत का दाना रगड़ कर।”
इतना कह कर मौसी ने एक हाथ नीचे किया और अपनी फुद्दी का दाना रगड़ने मसलने लगी। मौसी की गांड में मेरे लंड के धक्के चालू ही थे।
पांच मिनट में ही मौसी की फुद्दी गरम हो गयी। मौसी बोली, “धीरज जरा जोर-जोर के धक्के लगा बेटा। मेरी फुद्दी पानी छोड़ने वाली है। गांड के छेद और फुद्दी के छेद में कोइ दूरी तो होती नहीं। गांड चुदाई का मजा तो मैं ले ही चुका था। मौसी की कमर को पकड़े-पकड़े ही मैंने लंड मौसी की गांड में से निकाल कर उसकी फुद्दी में डाल दिया और बोला, “ले मौसी मेरी जान, अच्छे से मजा ले फुद्दी का। लम्बे मोटे लौड़े लेने वाली तेरी इस फुद्दी का उंगली से क्या होगा।” ये कह कर मैंने मौसी की फुद्दी चोदनी चालू कर दी।
जल्दी ही मौसी की फुद्दी पानी छोड़ गई।
गांड और फुद्दी चुदाई से फारिग होकर मैं और मौसी बिस्तर पर पास-पास ही लेट गए।
मौसी बोली, “धीरज, तेरे मौसा का महीने दो महीने में साऊथ का चक्कर तो लगता ही रहता है। तेरे पास टाइम हो तो आ जाया कर और मां-बेटी दोनों की फुद्दीयों में लगी आग बुझा जाया कर। पहले तो खाली मेरी ही फुद्दी लंड मांगती थी, अब तो माधवी भी लंड के मजे ले चुकी है – उसकी फुद्दी भी तो अब लंड मांगेगी। माधवी को तू ऐसे ही मस्त चोदता रहेगा तो इधर-उधर लंड नहीं ढूंढेगी।”
मैंने भी लेटे-लेटे मौसी की फुद्दी में उंगली डाली और कहा, “ठीक है मौसी आता रहूंगा। माधवी की बात नहीं है। माधवी तो गुड़गांव भी आती रहती है। उसे तो मैं वहां भी चोद दूंगा। दिव्या को भी तो लंड चाहिए अब। मम्मी तो अब मुझसे चुदाई करवा ही रही है, अब असली बात तो आपकी फुद्दी की है। आपकी फुद्दी को भी तो लंड चाहिए। आपकी फुद्दी की आग ठंडी भी तो ठंडे होनी चाहिए।”
मौसी ने मेरे होंठ चूसते हुए कहा, “मेरा राजा बेटा। चल उठ अब देती हूं तुझे तेरे चूतड़ चाट कर मजा। ऐसा मजा तूने आज तक नहीं लिया होगा।”
मौसी उठी और अपने चूतड़ों के नीचे दो तकिये रख कर फुद्दी ऊपर उठा दी। एक तकिया मौसी ने अपने सर के नीचे रखा और और बोली, “आजा धीरज, अपना लंड मेरे मम्मों के बीच रख दे और अपने चूतड़ मेरे मुंह पर रख और फुद्दी चूस मेरी। देख कैसा मजा आता है।”
सच में ये तो चुदाई का अजीब ही तरीका था। मजा लेने का ये बिलकुल अनोखा तरीका।
मौसी ने अपने चूतड़ों के नीचे दो तकिये रख कर फुद्दी ऊपर उठा दी। एक तकिया मौसी ने अपने सर के नीचे रखा और बोली, “आजा धीरज, अपना लंड मेरे मम्मों के बीच रख दे और अपने चूतड़ मेरे मुंह पर रख और फुद्दी चूस मेरी। देख कैसा मजा आता है। सच में ये तो चुदाई का अजीब ही तरीका था।
मैं मौसी के ऊपर उल्टा लेट गया। मौसी के चूतड़ों के नीचे दो तकिये थे, जिसके कारण, फुद्दी बिलकुल ऊपर हो गयी थी। मौसी ने टांगें फैलाई हुई थी जिससे फुद्दी थोड़ी सी खुल गयी थी। मैंने अपना खड़ा लंड मौसी के मम्मों के बीच रख दिया, अब मेरे चूतड़ मौसी के बिलकुल ही मुंह के ऊपर आ गए।
मौसी ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ खोले, और थूक लगा कर अपने दो उंगलियां, मेरे चूतड़ों के छेद में डाल दी। मैं सोचने लगा, ये मौसी क्या कर रही थी? मगर मैंने फिर सोचा, देखते है मौसी कौन से अलग से मजे की बात कर रही थी।
मैं मौसी की फुद्दी चूसने चाटने लगा। मुझे तो इस सब में बड़ा मजा आ रहा था।
तभी मौसी ने अपनी उंगलियां मेरे चूतड़ों में से निकाली और हल्के से खुल गए चूतड़ों के छेद में अपनी जुबान घुसेड़ कर जुबान ऊपर नीचे करते हुई चूतड़ों का छेद चूसने चाटने लगी।
फिर मौसी ने मेरे चूतड़ छोड़ दिए और हाथ नीचे करके अपने मम्मे मेरे लंड के ऊपर आगे-पीछे करने लगी। मौसी के नरम मुलायम मम्मों के बीच मेरा लंड था। मम्मे आगे पीछे करने से लंड की ऊपर की स्किन भी आगे-पीछे हो रही थी। लंड का टोपा मम्मों के साथ हल्की-हल्की रगड़ खा रहा था।
अब सीन ये था कि मेरी जुबान मौसी की फुद्दी में थी, और मौसी की जुबान मेरे चूतड़ों के अंदर थी और मेरा लंड मौसी के मम्मों में था और मौसी अपने मम्मों को आगे पीछे करते हुए एक तरह से मेरे लंड के साथ वही कर रही थी जो लंड फुद्दी के अंदर करता है, या जो लड़के मुट्ठ मारते वक़्त करते हैं।
सब से ज्यादा मजा मुझे मौसी की चूतड़ चुसाई का आ रहा था। पहली बार कोइ मेरे चूतड़ों का छेद इस तरह चूस चाट रहा था। जल्दी ही मुझे लगा कि मेरा लंड अब किसी भी वक़्त पानी छोड़ सकता था। मुझे मजा सा आने लगा था। मैंने भी चूतड़ आगे-पीछे करने शुरू कर दिए। इससे मेरा लंड भी मौसी के मम्मों के बीच आगे-पीछे होने लगा।
और इसके साथ ही मरे लंड में से ढेर सारा गर्म चिकना पानी निकला और मौसी के मम्मों पर फ़ैल गया। मैंने मौसी के फुद्दी से मुंह हटाया और मैं जोर से बोला, “मौसी मादरचोद रंडी, निकल गया मेरे लंड से पानी – कैसे-कैसे मजे देती है साली मादरचोद मौसी।”
थोड़ी देर में मेरे लंड की पूरी गरम-गरम सफ़ेद गांधी रबड़ी मौसी के मम्मों पर निकल गयी।
मौसी ने अपना मुंह मेरे चूतड़ों से हटा लिया। मैं मौसी के ऊपर से उतरा – नीचे देखा तो ढेर सारा सफ़ेद-सफ़ेद लंड का पानी पूरे लंड और आस-पास और मौसी के मम्मों पर लगा हुआ था।
मैंने मौसी से कहा, “मौसी मैं बाथरूम जा कर लंड साफ करके आता हूं।”
मौसी बोली, “अरे कहां जा रहा है, इधर लेट मैं करूंगी तेरा लंड साफ़।”
ये बोल कर मौसी ने पहले तो अपने हाथ से अपने मम्मों और पेट पर से मेरे लंड का पानी पोंछा और चाट लिया। फिर मौसी मेरे पास आयी और मेरे लंड पर और आस-पास जितना भी लंड का चिकना लेसदार पानी था, सारा चाट गयी। जब ये सब कुछ हो गया तो मौसी मेरे के पास ही लेट गयी और पूछा, “कैसा मजा आया धीरज?”
मैं बोला, “मौसी मजा तो बहुत आया, मगर कैसे-कैसे मजे लेते हो आप लोग।”
फिर मैं बोला, “मम्मी-पापा भी यही कुछ करते होंगे।”
मौसी हंसते हुए बोली, “वही क्यों मुन्ना, सभी लोग मजे के लिए यही कुछ करते हैं।”
फिर कुछ रुक कर मौसी बोली, “धीरज आज कल तो बस रबड़ के लंड – डिलडो से ही काम चलाना पड़ता है।”
फिर मौसी थोड़ा रुक कर बोली, “डिलडो मेरे पास है वैसा ही जीजी के पास भी है।”
मैंने मम्मी का डिलडो तो देखा ही था। फिर भी मैंने मौसी से कहा, “दिखाना मौसी कैसा है।”
मौसी उठी और बोली, “दिखाती हूं।”
मौसी अलमारी में से जो निकाल कर लाई वो रबड़ का वाइब्रेट करने वाला लंड था – एक-दम बिलकुल वैसा ही जैसा मम्मी के पास था – उतना ही लम्बा, उतना ही मोटा।
मैं सोच रहा था यहां तक तो ठीक है। मम्मी भी ऐसे ही रबड़ के लंड से काम चलाती होगी। मगर सवाल ये था कि किसी घरेलू औरत के लिए इस तरह के रबड़ के लंड खरीदना या मंगवाना ये कैसे मुमकिन है?
मैंने मौसी से पूछ ही लिया, “मगर मौसी, आपने ये डिलडो (रबड़ का लंड) मंगवाया या खरीदा कहां से?”
मौसी बोली, “धीरज ये मैंने नहीं मंगवाया। तेरे मौसा ने ही ला कर दिया है। मैंने तुझे बताया ही है तेरे मौसा का लंड खड़ा तो होता ही है, फुद्दी के अंदर भी जाता है, बस लंड में सख्ती नहीं आती इसलिए रगड़ाई वाली चुदाई नहीं हो पाती। अब तेरे मौसा ही इसे मेरी फुद्दी और गांड में डालते हैं और मुझे मजा देते हैं। ये फुद्दी या गांड के अंदर जा कर वाइब्रेट भी करता है, बस ऐसे काम चल रहा हैं।
फिर मौसी कुछ रुक कर दुबारा बोली, “धीरज, जीजी के लिए भी ऐसा ही एक डिलडो मैंने मंगवाया था। जीजी की प्रॉब्लम भी मेरी प्रॉब्लम जैसी ही हैं। जीजा जी के लंड में भी वो पहले वाली सख्ती नहीं हैं। वो भी ढंग से जीजी को नहीं चोद पाते।”
मौसी ने ही मम्मी के लिए भी ये रबड़ का लंड मंगवाया था, ये मेरे लिए नई बात थी। मम्मी को रबड़ का लंड मौसी ने ला कर दिया था। मम्मी ने इस बारे में मुझे को कुछ भी नहीं बताया था, या फिर शायद बताने का मौक़ा ही नहीं मिला।
शाम होने वाली थी। माधवी के आने का टाइम हो रहा था। मैंने मौसी से पूछा, “मौसी वो जैल पडी है? अगर माधवी का गांड चुदवाने का मन हो गया तो कैसे लंड जाएगा उसकी गांड में? उसकी गांड का तो छेद ही बड़ा टाइट है।”
मौसी बोली, “देखती हूं होनी तो चाहिए। तेरे तो मौसा ये वाईब्रेटर लंड मेरी गांड में जैल लगा कर ही डालते हैं।”
मौसी जैल क्रीम की टयूब ढूंढ कर ले आयी हुए और पकड़ा दी। मौसी से टयूब तो मैंने ले ली, मगर मेरे दिमाग में एक कीड़ा घूम रहा था। मम्मी के लिए ऐसा रबड़ का लंड मौसा जी ने ही ला कर दिया होगा, तो क्या मौसी ने मौसा को मम्मी पापा की प्रॉब्लम के बारे में भी बता दिया होगा?
मैंने मौसी से पूछा, ”मौसी एक बात बताएंगी?”
मौसी बोली, “पूछो बेटा क्या बात है?”
मैंने कहा, “मौसी आप कह रही हैं ऐसा ही एक वाईब्रेटर आपने मम्मी को भी दिया हैं। ये तो पक्का है अपने मौसा जी से ही वो मंगवाया होगा। मौसा ने पूछा नहीं ये दूसरा वाईब्रेटर किसके लिए है?”
मेरी इस बात पर मौसी एक-दम संजीदा हो गई और उसने मेरी बात का कोइ जवाब नहीं दिया। मुझे समझ नहीं आया कि मैंने ऐसा भी क्या पूछ लिया जो मौसी एक-दम संजीदा हो कर चुप हो गयी हैं।
कुछ देर मौसी चुप ही रही, और फिर बोली, “धीरज, जीजी – तेरी मम्मी मुझसे दो साल बड़ी जरूर हैं, मगर हम एक-दूसरी की बहनें होने से ज्यादा सहेलियां है। हमने कभी भी एक दूसरी से कोइ बात नहीं छुपाई।” ये कह कर कौशल्या फिर चुप हो गयी।
मैंने ने सोचा शायद अब मौसी कहेगी कि मम्मी ने पापा के लंड वाली प्रॉब्लम मौसी को बताई होगी, और मौसी ने मौसा जी से रबड़ का लंड मंगवा लिया होगा। मगर यहां तो जो मौसी ने मुझे बताया, उससे मेरा तो दिमाग़ ही हिल गया।
मौसी धीरे से बोली, “धीरज, एक बात बताऊं?”
मौसी जिस राजदार तरीके से बात कर रही थी, वो देख कर मैं हैरान था। मैं मौसी की तरफ देखने लगा।
आखिर को मौसी बोली, “बेटा धीरज, मैं तेरी मम्मी सुधा जीजी, यश जीजा जी और तेरे मौसा मनोहर – हम ग्रुप सेक्स करते हैं। ग्रुप सेक्स मतलब इकट्ठे चुदाई, – अदल-बदल कर। मैं जीजा जी से चुदवाती रही हूं और जीजी तेरे मौसा मनोहर से चुदाई करवाती है।
मुझे एक पल तो समझ ही नहीं आया कि मौसी ये बोल ही क्या रही थी। फिर धीरज ने पूछा, “मौसी ये क्या कह रही हो? आप और पापा-मम्मी और मौसा जी? इकट्ठे चुदाई? मतलब एक ही बिस्तर पर अदल-बदल कर?”
कौशल्या बोली, “हां धीरज, ज्यादातर इकट्ठे चुदाई एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर अदल-बदल कर। शुरू में एक दो बार ये अदल-बदल वाली चुदाई अलग-अलग कमरों में हुई। मतलब मैं और जीजा जी एक कमरे में, जीजी और मनोहर तेरे मौसा दूसरे कमरे में। मगर फिर जल्दी ही ये सब एक ही कमरे में होने लग गया – एक-दूसरे के सामने। और धीरज यहीं तक नहीं यश जीजा जी और मनोहर एक-दूसरे के सामने हमारे बारे ऐसी ऐसी गंदी-गंदी सेक्सी बातें बोलते हैं हमें नीचे चुदाई करवाते-करवाते भी हंसी भी आती और हैरानी भी होती है।”
मौसी बोल रही थी, “और धीरज ये कोइ हाल ही में ही शुरू नहीं हुआ, ये सब मेरी शादी के छह महीने के बाद से ही शुरू हो गया और अब तक – आज तक भी चल रहा है। जब से तेरे पापा और तेरे मौसा जी के लंड ढीले हुए हैं, उन्हें मालूम है कि उनके लंड फुद्दी में चले तो जाते हैं मगर सख्ती ना आने के कारण फुद्दीयों में रगड़े नहीं लगा पाते – तभी उन्होंने ये रबड़ के लंड ला कर दिए हैं। अब जब भी हम इकट्ठे चुदाई करते है, वो दोनों ये लंड लो हमारी फुद्दीयों में डाल कर हमें मजा देते हैं।”
मौसी ने मेरे के लंड पर हाथ रखा और बोली, “धीरज अब जो मजा मर्द के असली सख्त लंड से चुदाई का आता है वो इन रबड़ के लंडों से नहीं आता। यही कारण है सुधा जीजी ने तुझ से चुदाई करवाई, और अब मैं करवा रही हूं।”
पहले तो मैं परेशान सा हो गया। ग्रुप सेक्स? पापा-मम्मी, मौसी-मौसा का ग्रुप सेक्स? मौसी की शादी के छह महीने बाद से – और अब तक भी चल रहा है? लेकिन जल्दी ही मेरे दिमाग से सारा जाला साफ़ हो गया।
मैंने सोचा, अगर पापा-मम्मी, मौसी-मौसा ये चारों ग्रुप सेक्स कर रहे थे, तो मैं ही क्या कर रहा था? मैं भी तो अपनी मम्मी सुधा, सगी बहन दिव्या, मौसी कौशल्या और मौसेरी बहन माधवी को चोद रहा था। मम्मी अपनी बेटी के साथ मजे ले रही थी। मां-बेटी दोनों इकट्ठे – एक-दूसरे के सामने – मुझसे चुदाई करवा रही थी। यहां तक कि उसकी मौसी मुझे अपनी बेटी को चोदने दे रही थी। इतना कुछ हो रहा था तो क्या हो गया अगर मम्मी ने मौसा जी से चुदाई करवा ली और मौसी ने पापा से चुदाई करवा ली।
शायद मम्मी ने भी यही सोच कर “ये” मौसी को सब कुछ बता दिया होगा।
मैं अब नॉर्मल हो चुका था। मैंने मौसी से पूछा, “मगर मौसी आप ये सब करते कैसे हो, मेरा मतलब कहां?”
मौसी बोली, ये प्रोग्राम यहां हमेशा हमारे घर पर ही बनता था। बनता था क्या अभी भी यहीं बनता है। जीजा जी और जीजी शुक्रवार या शनिवार को आ जाते और सोमवार सुबह जाते। दो-तीन दिन मौका मिलते ही चुदाई शुरू हो जाती है और आधी-आधी रात तक चलती है।”
मौसी आगे बोली, “और धीरज, अगली सुबह जब इकट्ठे डाइनिंग टेबल पर बैठते है जीजा जी और तेरे मौसा एक-दूसरे को चुदाई की कहानी सुनाते हैं और हम सुन-सुन कर हंसती रहती है। अब हमें एक-दूसरे से शर्म तो आती ही नहीं। डाइनिंग टेबल पर चुदाई की बातें सुनाते-सुनाते लंड निकाल लेना, किसी के भी मुंह में डाल देना तो अब बहुत ही मामूली बात हो चुकी है।”
धीरज के पापा यश, मम्मी सुधा, मौसा मनोहर और मौसी कौशल्या तो खूब मजे करते थे। ग्रुप चुदाई में हर वो काम करते थे जो मजे के लिए किया जा सकता था।
मौसी आगे बोली, “धीरज इन चुदाईयों जब हम इकट्ठे बैठते थे या बैठते हैं तो समझो कमाल की ही बातें होती हैं। तेरे मौसा मनोहर – जीजा जी से पूछते हैं, “और भाई यश कैसी रही रात, कैसी रही साली कौशल्या के साथ चुदाई?”
“और यश जीजा जी बोलते हैं, “मस्त रही मनोहर, चार बार चोदा मैंने कौशल्या को। मस्त चुदाई करवाती है कौशल्या। फुद्दी भी मस्त है, खूब पानी छोड़ती है। मजा आ जाता है चूसने का। फिर जीजा जी ने मुझसे कहते है, “तुम ही बताओ कौशल्या कैसी रही चुदाई?”
“मैं भी हंसती हुई बताती, “मस्त रही मनु। जाते ही कपड़े तो हमने उतार ही दिए। मैं सोफे पर बैठे थी और जीजा जी खड़ा लंड लेकर मेरे सामने आ गए। मैंने जीजा जी का लंड फिर से मुंह में लिया – जीजा जी का लंड तो एक-दम फुंफकारे मारने लगा। बस फिर क्या था, जीजा जी ने मेरी फुद्दी चूसी, चूतड़ चाटे और आधी रात तक चार बार मेरी चुदाई की। मजा ही आ गया।”
“और धीरज वो दोनों यहीं नहीं रुकते। तेरे मौसा मनोहर अपने कहानी बताते है – यार यश, सुधा जीजी भी मस्त चुदाई करवाती है मैंने तो जीजी की गांड भी चोद दी एक बार। जीजी की गांड बड़ी ही टाइट है, बड़ा मजा आता है चोदने का।”
“फिर वो आपस में कहते है कुछ भी कह लो, ये अदला-बदली की चुदाई है तो बढ़िया यार। कभी छुट्टियां आएं तो पांच-सात दिनों का प्रोग्राम बनाओ, मजा आ जाएगा अदला-बदली की इकट्ठी चुदाई का।”
जीजी बोली, “अदला-बदली की इक्कठी चुदाई? इसमें इतना क्या सोचना है, जब मन करेगा तभी कर लेंगे।”
“एक दिन डाइनिंग टेबल पर बैठे ये सेक्स चुदाई की बातें हो रहीं थी कि तेरे मौसा मनोहर ने लंड फिर मौसा ने अपना लंड पायजामें में ठीक करते हुए कहा, “यश मेरा तो लंड खड़ा ही होने लगा है।”
“यश जीजा जी जीजी से बोले, सुधा जाओ, मनोहर के लंड का इलाज करो।”
जीजी बोली, “तुम लोगों की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी तो वैसे ही गर्म हुए पड़ी है।”
फिर जीजी मेरी तरफ देखते हुई बोली, “और कौशल्या तुम्हारी फुद्दी का क्या हाल है?”
“मैं भी बोली, “जीजी मेरी फुद्दी तो गरम ही रहती है, ठंडी होती ही कहां है।”
मेरी बात सुन कर सब हंस दिए। “फिर मैंने यश जीजा जी की तरफ देखते हुए पूछा, “क्यों जीजा जी चोदना है एक बार और?”
जीजा जी बोले, “अरे कौशल्या जब तुम्हारे फुद्दी गर्म ही है तो सोचना क्या – चलो, मेरा लंड भी तैयार है। तुम्हारी फुद्दी की तरह ये भी हमेशा तैयार ही रहता है – चाहो तो अपनी जीजी से पूछ लो।”
इस पर सब लोग एक बार और हंस दिए।
तेरे मौसा बोले, “तो फिर चलो एक ही कमरे में, आज ही कर लेते हैं अदला-बदली की इकट्ठी चुदाई। क्या ख्याल है जीजी।”
जीजी बोली, “मुझे तो इसमें कभी ऐतराज़ ही नहीं था, चलो”
“बस फिर क्या था। उस दिन हम चारों एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर आ गए और मेरे और जीजी की खूब अदल-बदल कर चुदाई हुई – जीजा जी और मैं, मनोहर और सुधा जीजी। फिर मैं और मनोहर, सुधा जीजी और जीजा जी।”
“तब तक एक-दूसरे के सामने चुदाई की बातें कर कर के हमारी शर्म खत्म हो ही चुकी थी। हमने एक-दूसरे के साथ अदल-बदल कर खूब मस्त चुदाई करवाई, और जो रही सही शर्म थी वो भी जाती रही।”
“उस दिन की चुदाई में तो कभी जीजा जी का लंड मेरी फुद्दी मैं और तेरे मौसा का लंड जीजी की फुद्दी में। फिर मनोहर मेरे ऊपर और जीजा जी जीजी के ऊपर। लंड कभी फुद्दी में, कभी गांड में और कभी मुंह में। क्या मस्त चुदाई थी।”
“धीरज इस इकट्ठी चुदाई में फुद्दी गांड मुंह में सब जगह लंड डल जाता। तेरे मौसा मनोहर को गांड चुदाई का बहुत शौक है। मेरी गांड तो उन्होंने पहली रात को ही रगड़ दी थी। उधर जीजा जी जीजी की गांड चोदते नहीं इसलिए जीजी के गांड का छेद मस्त टाइट है। मनोहर को ये बात मालूम है, इसलिए उसे जीजी की टाइट गांड में लंड डालने में बहुत मजा आता है। जीजी को भी गांड चुदाई का शौक नहीं, मगर मनोहर का मन जीजी की गांड चोदने का हो जाए तो जीजी कभी भी मनोहर को गांड चोदने से मना नहीं करती।”
“एक दिन तो मनोहर जीजी की गांड चोद रहा था और यश जीजा जी मेरी गांड – अजीब ही सीन था। हम दोनों बहनें चूतड़ उठा कर सोफे पर लेटी हुई थी और जीजा जी और तेरे मौसा पीछे से हमारी गांड चोद रहे थे, अदल-बदल कर। तीन घंटे चली इस अदला-बदली वाली चुदाई के बाद चारों फिर डाइनिंग टेबल पर आ गए। यश जीजा जी ने जीजी से पूछा, “सुधा मनोहर का लंड गांड में लेने का मजा आया?”
जीजी जो बोली वो मस्त बोली, “यश, गांड फुद्दी की चुदाई की बात तो छोड़ो, असल बात तो ये है कि ये अदल-बदल वाली पूरी चुदाई है ही मस्त। और तुम लोग जो बोलते हो – “यार यश, सुधा की गांड बहुत टाइट है भाई, जरा जीजी की गांड की तरफ भी ध्यान दिया कर। और यश तुम ही कौन से कम हो, तुम भी तो कह ही देती हो, भाई मनोहर सुधा की गांड का ध्यान तू ही रखा कर, मुझे कौशल्या की फुद्दी चूसने में ही बड़ा मजा आता है – वैसे गांड चुदाई की शौक़ीन कौशल्या गांड चुदाई मस्त करवाती ही है।”
“गांड चुदाई के दौरान कौशल्या जो चूतड़ आगे-पीछे करती है, मजा ही आ जाता है।” जीजा जी की इस बात पर तेरे मौसा बोले, “वैसे यार यश एक बार कौशल्या की गांड चुदाई जीजी को भी दिखानी पड़ेगी। जीजी अभी ये नहीं करती।”
मैंने मौसी की बातें सुन कर कहा, “मौसी आप तो पूरा मजा लेते हो चुदाई का। अच्छा मौसी ये बताईये, वो जो आपने मेरे चूतड़ चाट कर मुझे मजा दिया – आप लोग ये भी करते ही होंगे – ये कैसे करते हो आप लोग?”
मौसी बोली, “बिल्कुल करते हैं, और बहुत करते हैं – लेकिन बारी-बारी से, और वो इसलिए जब मैं मनोहर के चूतड़ चाटती हूं और मनोहर के लंड से जो पानी मेरे मम्मों पर और मनोहर के लंड पर गिरता है वो जीजी चाट कर साफ़ करती है। और जब जीजी जीजा जी के चूतड़ चाटती है और जीजा जी के लंड से पानी निकलता है और जीजी के मम्मों और जीजा जी के लंड पर गिरता है वो मैं चाट कर साफ़ करती हूं। चाट कर मम्मों और लंड की सफाई के चक्कर में ये काम हम बारी-बारी से करते हैं।”
मैं अभी भी सोच रहा था कैसे कैसे मजे लेते हैं ये लोग।
मैंने पूछा, “लेकिन मौसी, आप कह रही हैं आपकी शादी के छह महीने के बाद ही ये सब शुरू हो गया। ये तो बताईये ये सब शुरू कब और कैसे हुआ?”
मौसी बोली, “क्या बात है धीरज, हमारी ग्रुप चुदाई की कहानी में मजा आ रहा है? फिर खड़ा हो रहा है क्या?”
मैंने अपना लंड खुजलाते हुए कहा, “मौसी मजा तो आएगा ही, आप लोग आपस में चुदाई ही ऐसे मस्त करते हो। आपकी कहानी तो है ही बड़ी सेक्सी, ये तो किसी का भी लंड खड़ा कर देगी।”
मौसी खुल कर हंसते हुए बोली, “ठीक है सुनाती हूं, मगर याद रखना आज रात की तेरी असली चुदाई जवान माधवी के साथ ही होनी है, इसलिए इस वक़्त अपने लंड पर काबू रखना – ये जोश में आ कर तेरा ये जम्बो साइज़ का लंड कहीं मेरी फुद्दी ही ना ढूंढने लग जाए, और अगर इसने मेरी फुद्दी ढूंढ भी ली और उसके अंदर चला भी गया तो भी ध्यान रखना इसका गर्म-गर्म शहद माधवी की फुद्दी की लिए संभाल कर रखना।”
मैं लंड को हिलाते हुए बोला, “मौसी इसकी फ़िक्र ना करो आप, इस लंड का गर्म-गर्म शहद माधवी की फुद्दी या गांड में ही जाएगा आज।”
इसके बाद तो मौसी ने जो कहानी सुनाई, वो वाकई, कमाल की कहानी थी – उस कहानी पर तो अच्छी खासी ब्लू फिल्म – चुदाई की फिल्म – बनाई जा सकती थी।
मौसी ने बताना शुरू किया, “धीरज ये तो तुम्हें पता ही है जीजी, मतलब सुधा, तुम्हारी मम्मी मुझसे दो साल बड़ी है। जीजी ने बी-एड किया और जीजी बाईसवें साल में थी और जीजी की शादी हो गयी और जीजी यहां गुडगांव अपनी ससुराल आ गयी। हम लोग फरीदाबाद रहते थे जो गुडगांव से ज्यादा दूर नहीं है।”
“जीजी की शादी के बाद मैं अक्सर यहां गुडगांव आती-जाती रहती थी। मैं बीस की हो चुकी थी और अब फुद्दी में लंड लेने का मन करने लगा था। इस उम्र की लड़कियों को जीजाओं का बड़ा शौंक होता है और जीजे भी साले ऐसे हरामी होते हैं मौक़ा मिलते ही सालियों को चोद देते हैं। गुडगांव जीजी के घर की ऊपर की मंजिल पर ही जिस कमरे सोती थी, साथ वाले कमरे मैं ही जीजी और जीजा जी होते थे।”
“आधी-आधी रात तक जीजी और जीजा जी की कमरे से आवाजें आती रहती थी – चुदाई की दौरान होने वाले शोर की आवाजें – “आह यश और जोर से करो, मजा आ गया, आह यश क्या लंड है, क्या चुदाई है क्या चोदते हो यश। जीजा जी की आवाज आती थी, ले मेरी सुधा और ले, पूरा जा रहा है तेरी फुद्दी में।”
“ये आवाजें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी गरम हो जाती थी और मैं फुद्दी में उंगली डाल कर मजा लेती थी। कभी-कभी तो मन करता था किसी अनजान को ही पकड़ लूं और बोलूं आजा भैया, मेरी फुद्दी चोद कर जाना।”
एक दिन मैं गुडगांव में थी, जैसे ही जीजा जी ऑफिस गए, मैंने जीजी से कहा, “जीजी एक बात बोलूं?”
“जीजी बोली, “बोलो क्या बात है?”
“मैंने कहा सुधा जीजी से कहा, “जीजी मेरा जीजा जी से चुदाई करवाने का मन हो रहा है। आपके कमरे से आधी आधी रात तक चुदाई की आवाजें आते रहती है, और मेरी फुद्दी गरम हो जाती हैं। और फिर उंगली फुद्दी मैं डाल कर मुझे मजा लेना पड़ता है।”
“जीजी बड़ी ही सुलझी हुई औरत है। जीजी ने बड़े प्यार से मुझे समझाया, “देखो कौशल्या, मुझे तुम्हारी और यश की चुदाई से कोइ ऐतराज़ नही। जीजे तो सालियों को हमेशा से चोदते ही रहे हैं, इसमें कौन सी नयी बात है – तभी तो कहते हैं साली आधी घरवाली।”
“मगर कौशल्या, लड़की की फुद्दी की पहली चुदाई पर उसके पति का हक़ होता है। लड़की की फुद्दी की सील, उसके पति की लंड से ही टूटनी चाहिए। थोड़ा सा और सबर कर ले। तेरे लिए भी मम्मी-पापा लड़का ढूंढ ही रहे हैं। कुछ दिन और उंगली से काम चला ले। एक बार अपने हस्बैंड का लंड अपनी फुद्दी में ले ले, फिर यश से भी चुदाई करवा लेना।”
“धीरज जीजी की इस बात पर मैं चुप हो गयी और इसके छह महीने की बाद ही मेरी मनोहर के साथ शादी हो गयी। फरीदाबाद से मैं यहां रोहिणी आ गयी। रोहिणी में मनोहर – तुम्हारे मौसा जी का घर बहुत बड़ा था – पैसे वाले लोग थे। घर पर दो-दो कारें और ड्राइवर होता था। जीजी तब स्कूल में जॉब करने लगी थी। शनिवार इतवार जीजी को छुट्टी होती थी। मैं जब चाहती जीजी से मिलने गुडगांव आ जाती।”
“एक दिन शनिवार को मैं गुडगांव आयी तो जीजा जी घर पर थे और जीजी स्कूल गयी हुई थी। हम लोग यहां डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। मैंने जीजा जी से पूछा, “जीजा जी जीजी कहां है?”
जीजा जी ने कहा, सुधा स्कूल गयी है इलेक्शन आने वाले है, उसमे सुधा की कोइ डयूटी लगी है, उसी की ट्रेनिंग है। शाम को ही आयेगी।”
“इसके बाद यश जीजा जी मुझे अजीब से नज़रों से देखने लगे। अब जीजा साली का रिश्ता होता तो मजेदार ही है। कोइ ऐसा जीजा नहीं होता होगा, जिसने अपनी जवान साली की मम्मों पर हाथ ना फेरा हो या उसके चूतड़ों पर चलते-चलते धप्प ना लगाया हो।”
गुडगांव में जीजी घर में नहीं थी और मैं और जीजा जी घर में अकेले – जीजा जी अजीब सी ही नज़रों से मुझे देख रहे थे। जीजा जी के इस तरह देखने में मुझे अजीब सा मजा आ रहा था। मेरी फुद्दी में खजली मच चुकी थी।
मैंने हंसते हुए कहा, “और जीजा जी आप आज घर पर कैसे?”
“जीजा जी ने भी हंसते हुए, कहा, “मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था।”
“और ये कहते ही जीजा जी ने मुझे पकड़ लिया और मेरे मम्मे दबा दिए।”
