रोहित- संध्या के होंठो को चूम कर हाँ वो तो है डार्लिंग पर अब आगे का क्या प्लान है,
संध्या- खिड़की से बाहर बैठक की ओर धीरे से देखती है और उसे मम्मी और पापा बैठे हुए दिखाई देते है जो बिल्कुल करीब बैठ कर कॉफी की चुस्किया ले रहे थे,
संध्या- लगता है संगीता अपने रूम मे है, इनका रूम कुछ ऐसा था कि संगीता के रूम से ही उसके मम्मी-पापा का रूम सटा हुआ था और उसके मम्मी-पापा के रूम के पास मे बुआ का कमरा था, संध्या के रूम से पूरे बैठक का नज़ारा और मम्मी पापा और बुआ के रूम के अंदर आने जाने वाला साफ नज़र आता था लेकिन संगीता का रूम थोड़ा साइड मे था,
संध्या- रोहित अभी थोड़ा वेट करना पड़ेगा मम्मी पापा सामने ही बैठे है जब वह अपने रूम मे चले जाएगे तब हम दोनो संगीता के रूम मे चलेगे,
रोहित- ठीक है
संध्या- रोहित एक बात कहु
रोहित- हाँ बोलो जानेमन क्या बात है
संध्या- केवल एक दिन के लिए मुझे अपने मम्मी पापा के पास घुमाने ले चलो ना मैं बहुत दिनो से उनसे नही मिली हू मुझे बहुत याद आ रही है,
रोहित- वो तो ठीक है लेकिन तुम मुझे क्यो ले जा रही हो, तुम अकेली भी तो जा सकती हो
संध्या- अरे वो बात नही है, बल्कि मम्मी का कल फोन आया था और वह खुद कह रही थी कि दामाद जी को साथ लेती आना बहुत दिनो से उनसे मिली नही हू, अब क्या है ना रोहित मेरा कोई भाई भी नही है इसलिए उनका भी दिल मिलने के लिए करता होगा,
रोहित- यार वो तो ठीक है पर तुम वहाँ जाकर अपनी मम्मी के साथ रम जाओगी और मुझे तुम्हारे पापा को बेकार मे झेलना पड़ेगा मैं तो बोर हो जाउन्गा,
संध्या- अरे नही रोहित तुमने कभी उनसे खुल कर बात नही की इसलिए तुम्हे ऐसा लगता है, जबकि तुम्हे पता नही है, मेरे मम्मी और पापा दोनो बहुत अड्वान्स है, और पापा तो ठीक ही है वह तो पीने के बाद शुरू होते है पर मम्मी से तुम ज़्यादा खुल कर बात करोगे तो उनकी बाते सुन कर हैरान रह जाओगे, तुम नही जानते मैं तो अपनी मम्मी से सभी बाते शेर कर लेती हू,
रोहित- मुस्कुराते हुए और अपने पापा मनोज से
संध्या- मेरे पापा तो मेरी जान है मैं उनसे बहुत प्यार करती हू पर सबसे उन्होने तुम्हारे जैसा पति मुझे दिया है तब से मैं उनसे और भी प्यार करने लगी हू,
रोहित- और तुम्हारी मम्मी गीता उनसे प्यार नही करती
संध्या- मेरी मम्मी तो मेरी सहेली है, वह तो मेरी हमराज़ है और तुम नही जानते वह तुम्हे भी बहुत चाहती है, जब तुम उनसे खुल कर बात करोगे तब तुम्हे पता चलेगा कि वह कितने मस्त लोग है,
रोहित- खेर जिसकी बीबी इतनी मस्त हो उसके मम्मी पापा तो मस्त होंगे ही, ठीक है हम कल या परसो तुम्हारे घर भी चलते है ओके
संध्या- उसका गाल चूमते हुए ओके और फिर संध्या जब बाहर झाँक कर देखती है तो उसे सोफे पर कोई दिखाई नही देता है और वह रोहित का हाथ पकड़ कर उसके साथ संगीता के रूम मे पहुच जाती है,
संगीता जैसे ही दोनो को अपने रूम मे देखती है मुस्कुरा देती है
संध्या- क्या बात है ननद रानी हमारा ही इंतजार था क्या
संगीता- भाभी मैं तो कब से आप दोनो का इंतजार कर रही थी
संध्या-अच्छा सुन तेरे भैया तुझे पूरी नंगी देखना चाहते है चल जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दे
संगीता- मुस्कुराते हुए अपने भैया की ओर देखती है और रोहित संगीता को अपने सीने से लगा कर उसके रसीले होंठो को चूस लेता है,
संध्या- संगीता की स्कर्ट उपर करके उसकी पेंटी नीचे सरका देती है और रोहित को कहती है
संध्या- देखो रोहित संगीता के चूतड़ कितने मोटे हो गये है,
संगीता- हस्ते हुए भाभी आपसे से तो छ्होटे ही है,
रोहित- संगीता ज़रा अपने चूतड़ पूरे नंगे करके मुझे दिखा ना और फिर संगीता वही अपनी स्कर्ट और पेंटी पूरी उतार कर अपने भारी चुतडो को अपने भैया को दिखाने लगती है,
संध्या- अरे पगली ऐसे नही पहले तू पलंग पर चढ़ कर खड़ी हो जा उसके बाद अपने हाथो से अपनी मोटी गंद फैला कर अपने भैया को दिखा ताकि वह आराम से तेरी गंद का छेद चाट सके,
संगीता अपनी भाभी को मुस्कुरकर देखती हुई पलंग पर चढ़ जाती है और जब अपने दोनो चुतडो के पाटो को फैला कर अपने भैया को दिखाती है तो रोहित अपनी जवान बहन के गोल मटोल चूतड़ उसकी गुदा और गुदा के नीचे पाव रोटी जैसी फूली गुलाबी चूत को देख कर सीधे अपना मूह अपनी बहन की गंद मे भर कर एक ज़ोर से चुम्मा ले लेता है और संगीता हाय भाभी करके रह जाती है,
संगीता- पलट कर भाभी तुम भी नंगी हो जाओ ना मुझे अकेले शरम आती है
संध्या- उसकी बात सुन कर अपने सारे कपड़े खोल कर एक दम से पूरी नंगी होकर संगीता से चिपक जाती है और रोहित दोनो रंडियो को चूमने और सहलाने लगता है,
संध्या- अरे पहले हम तुम्हारे मम्मी पापा के रूम मे झाँक कर तो देखे क्या चल रहा है
मनोहर- मंजू अब तुम जल्दी से नंगी होती हो कि नही
मंजू-मनोहर को धकेल कर हस्ते हुए नही होंगी जब तक तुम मुझे यह नही कहते कि तुम्हारा लंड अपनी बहन रुक्मणी की मस्त गंद को चोदने के लिए बार-बार खड़ा हो जाता है,
मनोहर-हस्ते हुए मंजू के दूध दबा कर मेरी रानी जब तुम सब जानती हो तो मेरे मूह से क्यो सुनना चाहती हो
मंजू- मुझे तुम्हारे मूह से सुनना है नही तो आज मैं इस तगड़े लंड को ऐसे ही अपने हाथो से दबोच-दबोच कर इसका सारा रस निचोड़ दूँगी,
मनोहर- अच्छा बाबा मैं खुद अपने मूह से कहता हू जाओ मेरी प्यारी बहन रुक्मणी को बुला लाओ आज मैं उसकी खूब तबीयत से गंद मारना चाहता हू और तुम अपने हाथो से अपने पति के लंड पर तेल लगा कर अपनी ननद की मोटी गंद मे डालना,
संगीता- हाय भाभी मम्मी और पापा तो आज बुआ की गंद लगता है तबीयत से मारेंगे, पापा का लंड कितना जोरो से तना हुआ है
रोहित- संगीता की गंद मे उंगली डाल कर मसल्ते हुए, मेरी रानी जब कोई भाई अपनी बहन की नंगी गंद को याद करता है ना तो ऐसे ही लंड पूरे ताव मे आ जाता है
संध्या- संगीता की चूत सहलाते हुए और मेरी ननद रानी जब कोई बेटी अपने बाप का ऐसा टॅना हुआ लंड देखती है तो उसकी चूत से ऐसे ही पानी बहने लगता है मुझे लगता है तुम्हारा दिल कर रहा होगा कि तुम अभी जाकर पापा के मोटे लंड पर अपनी चूत फैला कर बैठ जाओ,
संगीता- अरे भाभी मन तो आपका भी यही कर रहा है ना
तभी रोहित ने दोनो को चुप रहने का इशारा करते हुए सामने देखने को कहा उन दोनो जैसे ही सामने देखा दरवाजे से रुक्मणी अंदर आती है और रुक्मणी को देख कर मंजू कहती है
मंजू- लो आप तो यू ही मरे जा रहे थे अपनी बहन के लिए वो खुद ही हाजिर हो गई
रुक्मणी- क्या बात है भाभी क्या बाते चल रही है,
मंजू- अरे कुछ नही आ तू मेरे पास बैठ जा और फिर एक साइड मे रुक्मणी जाकर बैठ जाती है,
मनोहर का लंड अपनी लूँगी मे उठा हुआ था और रुक्मणी की नज़र अपने भैया के मस्त औजार पर टिकी हुई थी, मंजू यह बात भली भाती जानती थी उसे बस शुरू करने की देरी थी,
मंजू- अरे रुक्मणी तेरे भैया नाराज़ है कहते है तुम मेरी बात नही मनती हो
रुक्मणी- पर आपने भैया की कोन सी बात नही मानी
मनु- अरे वही तो , ये मुझसे कह रहे है कि जो पेंटी तुम खरीद कर लाई हो उसे एक बार रुक्मणी को पहना कर दिखाओ,
रुक्मणी- का चेहरा लाल हो चुका था और उसने कहा भाभी क्यो आप मज़ाक करती हो
मनोहर- खड़ा होकर नही रुक्मणी, मंजू ठीक कह रही है, मैं देखना चाहता हू वह पेंटी तुम पर कैसे फिट बैठती है, जाओ और अभी उस पेंटी को पहन कर आओ, तुम जानती हो ना बचपन मे भी जब तुम हमारा कहना नही मानती थी तो हम तुम्हे क्या सज़ा देते थे,
रुक्मणी- भैया ऐसी सज़ा ना देना तुम बहुत ज़ोर से मारने लगते हो,
मंजू – हाँ मैं भी जानती हू तेरे भैया तुझे बेड पर उल्टा लेटा कर तेरे चूतादो पर थप्पड़ मार -मार कर लाल कर देते है, अब बोलो तुम्हे अपने इन भारी भरकम चूतादो पर अपने भैया के थप्पड़ थाने है या ब्रा और पेंटी पहन कर यहाँ आना है,
रुक्मणी- शरमाते हुए, भैया वह ब्रा और पेंटी तो मैने अभी पहन रखी है
मनोहर का लंड उसकी बात सुनकर झटका देने लगता है,
मनोहर- तो फिर अपने कपड़े उतार कर दिखाओ तुम कैसी लग रही हो
रुक्मणी अपने भैया की बात सुन कर अपनी भाभी की ओर देखने लगी तब मंजू ने मुस्कुराते हुए रुक्मणी के पिछे जाकर उसके ब्लौज की डोर को पिछे से खोल दिया, डोर के खुलते ही उसके तने हुए चुचो ने बड़ा सा आकर ले लिया और मस्त फैल गये, मंजू ने बुआ के दूध को अपने हाथो मे भर कर दबाते हुए कहा
मंजू – क्यो ननद रानी तुम तो कह रही थी कि तुमने ब्रा पहन रखी है तो फिर यह क्या है
रुक्मणी- शरमाते हुए भाभी ब्रा छ्होटी पड़ गई पेंटी तो मैं जबरन फसा कर आई हू मेरी मोटी गंद तो उसमे भी नही समा पा रही है और मेरी चूत की दोनो फांके एक-एक तरफ से बाहर निकली हुई है और पेंटी बीच मे फसि हुई है,
उसका इतना कहना था कि मंजू आगे आकर उसका नाडा खिच देती है और रुक्मणी सिवाय एक छ्होटी सी पेंटी पहने अपना मस्त हुस्न दिखला कर रोहित और उसके बाप दोनो के लंड को तडपा रही थी,
संध्या ऐसे क्षणो के लिए हमेशा तैयार रहती है और वह रोहित के लंड को पकड़ कर मसल्ने लगती है रोहित भी अपने आगे संगीता को करके उसके मोटे-मोटे बोबो को कस-कस कर मसल्ने लगता है, कभी-कभी रोहित अपनी बहन संध्या की ठोस चुचियो को इस कदर कस कर दबा देता है कि संगीता की चूत से पानी बहने लगता है,
उधर जब रोहित इन दोनो रंडियो से अपना ध्यान हटा कर जब सामने देखता है तब संध्या और संगीता दोनो रोहित से कस कर चिपक जाती है, सामने मंजू नई ब्रा और पॅंटी मे खड़ी थी उसकी गुदाज जंघे भारी चूतड़ देख कर रोहित का लंड झटके मारने लगा, रोहित देख रहा था कि कैसे उसकी मम्मी की पॅंटी का वह भाग फूला हुआ था जहाँ चूत होती है, संध्या ने रोहित का लंड पकड़ लिया और उसको सहलाते हुए कहने लगी, रोहित क्या दिल कर रहा है, क्या मम्मी अच्छी लग रही है,
रोहित- मेरी रानी देखो तो सही मेरी मम्मी का फिगुर कितना मस्त है इतनी उमर मे भी उनकी गंद और उनकी मोटी जाँघो का भराव देखो, इतनी मस्त होगी किसी की मम्मी,
संध्या- रोहित के कान मे अपना मूह लगा कर कहते हुए, मेरे राजा तुमसे ज़्यादा मस्त फिगुर तो मेरी मम्मी का है, तुमने अगर उसे नंगी देखा होता तो ऐसी बात नही करते,
रोहित- क्या सचमुच तुम्हारी मम्मी का जिस्म मेरी मम्मी के जिस्म से ज़्यादा मस्त है,
संध्या- मुस्कुराते हुए, नही तो क्या मैं मज़ाक कर रही हू,
संध्या रोहित के करीब आकर उसके गालो को चूमती हुई उसके लंड को कस कर दबा लेती है और उसके कान मे कहती है रोहित मेरी मम्मी को चोदोगे,
रोहित कस के संध्या के दूध को दबा कर उसके होंठो को चूम लेता है
रोहित का लंड संध्या की बाते और सामने का नज़ारा देख कर पूरी तरह गरम हो चुका था,
मनोहर- मंजू ज़रा रुक्मणी को पीछे तो घूमाओ मैं देखना चाहता हू कि इसकी पेंटी ने इसकी गंद पूरी धक रखी है या उसके चूतड़ बाहर ही नज़र आ रहे है
मम्मी ने झट से बुआ के नंगे उठे हुए पेट पर हाथ फेरते हुए अपने पति मनोहर की तरफ देखा और पुछा, क्यो जी अगर तुम्हारी मा भी रुक्मणी जैसी गदराई होती तो उसकी गंद भी तुम ऐसे ही मारने के लिए तड़प्ते,
पापा अपने लंड को मसल्ते हुए मम्मी की पेंटी मे फूली उनकी चूत को अपने हाथो मे भर कर मसल्ते हुए कहते है मेरी रानी अगर मेरी मा तेरे जैसी या रुक्मणी जैसी माल होती तो मैं उसको नंगी करके तबीयत से उसकी मस्त गंद मारता और तू भी ऐसी नंगी मत घुमा कर नही तो तेरा बेटा रोहित किसी दिन तेरी गंद मे अपना लंड ज़रूर गढ़ा देगा,
संगीता- क्या बात है भैया पापा तो आपके लिए अभी से मम्मी की गंद को सहला रहे है, मम्मी पर तो तुम्हारा खूब चढ़ने का मन हो रहा होगा ना,
संध्या- अरे ननद रानी मेरा रोहित तो अपनी मम्मी मंजू और अपनी बहन संगीता को एक साथ पूरी नंगी करके चोदने के फिराक मे है, और देखना जब रोहित मम्मी की मस्त गंद चोदेगा तब तेरी मम्मी मस्त घोड़ी की तरह अपनी गंद उठा-उठा कर मरवाएगी,
रुक्मणी- अरे भैया तुम नही जानते रोहित तो वैसे भी अपनी मम्मी की गंद जहाँ भी देख लेता है उसके पिछे अपना लंड लिए घूमने लगता है, वह बहुत छुप-छुप कर अपनी मम्मी की मोटी गंद को देखता रहता है लगता है बेटा अपनी मा की मोटी गंद का दीवाना हो गया है,
पापा- मम्मी को झुका कर उनकी पेंटी को खींच कर उसके पूरे गोरे-गोरे चूतादो को पूरा नंगा करके एक जोरदार थप्पड़ मम्मी की गोरी गंद मे मारते है और रोहित
अपनी मम्मी की भारी गंद पर पड़ने वाले थप्पड़ से मस्त हो जाता है,
पापा- क्यो री रंडी मेरे बेटे को तड़पाती है कल से तू उसे मेरे सामने ही पूरा प्यार देगी, और फिर पापा एक थप्पड़ और मम्मी की गोरी गंद पर मार कर उनकी मस्त गंद को लाल करते हुए बोल अपने बेटे को उसके बाप के सामने प्यार करेगी या नही,
मम्मी- कराहते हुए हाँ मेरे स्वामी कल से मैं अपने बेटे को अपनी गोद मे बैठा कर भरपूर प्यार करूँगी
मनोहर- मम्मी की मोटी जाँघो को पकड़ कर तीन चार थप्पड़ ज़ोर-ज़ोर से मारते हुए, कुतिया तू उसे अपनी गोद मे नही बैठाएगी बल्कि तू उसकी गोद मे बैठेगी,
मम्मी- पर मेरे स्वामी क्या रोहित अपनी मम्मी को अपनी गोद मे चढ़ा लेगा
पापा- अरे रंडी वह तो तुझे अपने लंड पर भी बैठा लेगा आख़िर बेटा किसका है, और फिर मनोहर बुआ की ओर देख कर, तू छीनाल वहाँ क्यो खड़ी है चल अपनी गंद उठा कर इस बेड पर झुक जा आज मैं तेरी भी तबीयत से गंद मारता हू,
संध्या- रोहित देख रहे हो पापा का लंड बुआ और मम्मी की गुदाज गंद देख कर कैसे मस्त तना हुआ है,
रोहित- संगीता और संध्या की चूत मे उंगली डाल कर कस कर दबाता हुआ, मेरी दोनो रंडिया पापा के लंड के लिए बिल्कुल मरी जा रही है, पापा का लंड जब तुम दोनो अपनी चूत मे लोगि तो ऐसा बड़ा सा छल्ला बन जाएगा तुम्हारी चूत मे की तुम दोनो पानी-पानी हो जाओगी,
संगीता- हस्ते हुए क्यो भाभी जब भैया मम्मी या बुआ जैसी गदराई घोड़ियो से पूरे नंगे होकर चिपकेगे तब उनका तो मूत ही निकल जाएगा, और फिर संगीता रोहित के लंड को पकड़ कर मसल्ते हुए
देखो भाभी भैया का लंड अपनी मम्मी की मोटी गंद और उठी हुई चूत देख कर कैसे तना हुआ है और फिर संगीता अपने भैया के लंड को अपने हाथो से पकड़ कर पिछे से अपनी चूत मे भिड़ा लेती है और रोहित जब देखता है कि उसके पापा उसकी मम्मी और बुआ दोनो को बेड पर घोड़ी बना कर झुका चुके है और मम्मी की गुदा को अपनी उंगलियो से सहलाते हुए अपनी जीभ निकाल कर बुआ के भारी चूतादो की खाई को चाटते हुए उसकी चूत की फांको को अपनी जीभ से दबोच लेते है और बुआ आह भैया कह कर सिसकी लेती है तब रोहित अपने लंड का एक तगड़ा धक्का अपनी बहन संगीता की चूत मे मार देता है,
उधर मनोहर पूरी तरह ताव मे आ चुका था और वह कभी अपनी बहन रुक्मणी की गंद और चूत की फांके फैला कर चाटने लगता है कभी अपनी बीबी मंजू की चूत को सूंघने लगता है बीच-बीच मे पापा जब मम्मी और बुआ की गंद मे थप्पड़ मारते है तो पूरे कमरे मे मस्त आवाज़ गुजती है और रोहित संध्या की गंद को दबा-दबा कर सहलाते हुए अपनी बहन संगीता की चूत को पिछे से ठोकने लगता है,
संगीता चुद्ते हुए पूरी मस्त हो रही थी और रोहित अपने मूह से उसके गालो को चूमते हुए अपने लंड को पेले जा रहा था और संध्या ने संगीता के बोबो को अपने हाथ मे पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था रोहित संगीता को चोद्ते हुए उसके कान उसके गालो और उसके होंठो को चूस रहा था और संध्या की मोटी गंद मे अपनी उंगली पेल रहा था,
संगीता आह भैया तुम कितना अच्छा चोद्ते हो मुझसे थोड़ी गंदी बाते भी करो ना मुझे बहुत मज़ा आता है, भाभी बोलो ना भैया को कि मेरी चूत मारते हुए मुझसे खूब गंदी बाते करे,
रोहित- किसके बारे मे सुनना चाहती है मेरी रानी बहना
संगीता- भैया मुझे तो अपनी मम्मी सबसे बड़ी रंडी नज़र आती है उसी की बात करो ना
संध्या- संगीता तू ही कुछ बोल ना अपनी मम्मी के बारे मे फिर देखना तेरे मूह से अपनी मम्मी की बाते सुन कर तेरे भैया कितना मस्त चोद्ते है तुझे, मुझे तो जब भी तेरे भैया का लंड पूरी तबीयत से लेना होता है मैं उनसे उनकी रंडी मम्मी की बाते शुरू कर देती हू, और फिर क्या तेरे भैया कई बार तो मुझे अपनी मम्मी बना कर ही चोद्ते है, संगीता ठीक है भाभी मैं मम्मी की बात करती हू फिर आप मुझसे पापा की बाते करेगी
संध्या- संगीता की मोटी चुचियो को दबाते हुए, मेरी ननद रानी तू फिकर क्यो करती है अबकी बार जब हम दोनो पापा के सामने नंगी जाएगी तो मैं खुद पापा से कह दूँगी कि पापा अपनी बेटी संगीता को अपने इस मोटे लंड से खूब रगड़-रगड़ कर चोदो,
संगीता- भाभी मम्मी भी पापा का लंड खूब रगड़-रगड़ कर लेती है ना
संध्या- हाँ संगीता तेरी मम्मी बड़े मस्त-मस्त लन्द ले चुकी होगी,
संगीता – आह ओह भैया ओर ज़ोर से, भाभी मम्मी 45 साल के आस पास होगी ना
संध्या- हाँ लगभग, और तू नही जानती संगीता जब औरते इस उमर मे आती है तो उन्हे सबसे प्यारा अपने बेटे का लंड ही लगता है, तू देखना संगीता अपने पति के लिए उसकी मम्मी की गंद मे खुद अपने हाथो से फैलवँगी और फिर उनका प्यारा बेटा अपनी मम्मी की मोटी गंद मे मेरे सामने ही अपना लॅंड डालेगे,
पापा ने मम्मी और बुआ की चूत और गंद का बड़ा सा छेद चाट-चाट कर पूरा लाल कर दिया था, मम्मी और बुआ दोनो मस्ती मे झुकी हुई अपने चुतडो को हिला रही थी उनके भारी चूतड़ हमारे इतने करीब नज़र आ रहे थे कि रोहित का दिल कर रहा था कि अभी अपना मूह अपनी बुआ और मम्मी की फूली हुई चूत की फांको मे डाल दू और उनके नंगे मोटे-मोटे दूध को खूब सहलाऊ और दबौउ,
पापा बेड पर पेर झूला कर बैठ गये और मम्मी और बुआ दोनो सीधी होकर उनके लंड को वही झुक कर चाटने लगी, एक बार बुआ पापा के लन्द के टोपे को अपने मूह से पीती और दूसरी बार मम्मी पापा के लंड के टोपे को अपने मूह से भर कर पीने लगती, कभी मम्मी उनके टोपे को चाट्ती और कभी बुआ,
पापा अपना हाथ लंबा करके दोनो की मस्त चिकनी भोसदियो को अपनी उंगली से खुरेद-खुरेद कर सहला रहे थे और बीच-बीच मे दोनो रंडियो के मोटे-मोटे दूध को दबा रहे थे,
तभी मम्मी और बुआ कुतिया की तरह अपनी जीभ निकाल कर पापा के लंड के टोपे को चूसने के लिए लड़ने लगी,
कभी बुआ अपनी जीभ से चाट लेती और कभी मम्मी अपनी जीभ से उनका लंड चाटने लगती तभी बुआ और मम्मी की जीभ एक बार मिल गई और फिर क्या था बुआ ने अपना मूह खोल कर मम्मी की जीभ अपने मूह मे भर कर चूसने लगी, तभी मम्मी ने बुआ की एक चुचि को कस कर दबाते हुए बुआ की जीभ को अपने मूह मे भर लिया,
पापा दोनो मदरजात रंडियो की मस्ती देख कर मस्त होने लगे और हम सब भी उस नज़ारे को बड़ी दिलचस्पी से देख रहे थे,
पापा उठ कर एक तरफ जाकर कुर्सी पर बैठ गये और अपने लंड को मसल्ने लगे और मम्मी और बुआ दोनो रंडियो के भारी भरकम जिस्म पूरे बाद पर मस्ताने लगे दोनो ने एक दूसरे को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया और दोनो बाद पर लेट कर गुत्थम गुत्थ हो गई, कभी मम्मी अपनी मोटी गंद उठा कर बुआ के उपर चढ़ जाती और उनकी चुचिया दबाते हुए उनके होंठ चूसने लगती और कभी बुआ मम्मी के उपर चढ़ कर उनकी गंद को अपनी चूत से दबाते हुए उसके होंठो को पीने लगती,
तभी मम्मी बुआ को बॅड पर चित लेता कर उसकी दोनो मोटी और गुदाज जाँघो को उपर तक उठा कर मम्मी अपने घुटनो पर झुक कर अपने भारी चूतड़ उठा कर बुआ की रसीली फूली हुई बुर को खूब फैला कर चाटने लगती है,
मम्मी की उठी हुई गंद को देख कर संगीता आह भैया करती हुई कहती है, भैया देखो मम्मी का मस्त भोसड़ा कितना फूला हुआ नज़र आ रहा है और उनकी चूत की फांके कैसी फैल कर अपना गुलाबी रस से भीगा छेद दिखा रही है,
रोहित संगीता की चूत को तबीयत से ठोकने लगता है उधर पापा जाकर मम्मी की मोटी गंद को फैला कर अपनी जीभ उनकी चूत के छेद मे डाल देते है और मम्मी के गदराए चुतडो को अपने हाथो से कस-कस कर दबाते हुए उनकी रसीली चूत के छेद को चूसने लगते है,
अपनी मम्मी की मोटी गंद को इस तरह चाटते देख रोहित अपनी बहन की चूत को खूब कस-कस कर ठोकने लगता है और तभी पापा अपने लंड को पकड़ कर पिछे से मम्मी की मस्त चूत मे एक ही झटके मे पेल देते है,
मम्मी सीसियाते हुए अपने पूरे मूह मे बुआ की रसीली चूत को भर कर चाटने लगती है,
पापा मम्मी की गंद दबा-दबा कर खूब कस-कस कर उनकी चूत मार रहे थे और पूरे कमरे मे ठप-ठप की आवाज़ गूँज रही थी, इधर रोहित ने संगीता की चूत मे एक करारा धक्का अपनी मम्मी की चूत देखते हुए मार दिया और उसका लंड उसकी बहन के गर्भाशय से टकरा गया और संगीता की चूत से ढेर सारा पानी बहता हुआ उसकी गुदाज मोटी जाँघो तक पहुच गया,
रोहित सतसट अपनी बहन को चोदे जा रहा था तभी संगीता ने अपने भैया का लंड पकड़ कर निकाल लिया और उसे बैठ कर चूसने लगी, संध्या भी नीचे बैठ कर संगीता की चूत मे अपनी दो उंगलिया डालने लगी तब संगीता ने अपने भैया का लंड पकड़ कर अपनी भाभी को झुका कर उसकी फूली चूत मे पेल दिया और रोहित अब अपनी मस्त बीबी की फैली हुई गंद को दबोच-दबोच कर उसकी चूत कूटने लगा,
इधर मनोहर अपने तगड़े लंड से मंजू की चूत मार-मार कर जब लाल कर देता है तब मंजू सीधे रुक्मणी के पेट के उपर लेट जाती है और अपनी चूत रुक्मणी की चूत से रगड़ाती हुई ढेर सारा पानी छ्चोड़ने लगती है मनोहर का लंड पूरा चिकना हो कर विकराल नज़र आने लगा था जिसे देख कर संध्या अपनी गंद के तगड़े झटके रोहित के लंड पर मारने लग जाती है, तभी मनोहर अपना लंड मंजू की चूत से बाहर निकाल कर नीचे नज़र आ रही रुक्मणी की मस्त भोसड़ी मे पेल देता है
और रुक्मणी अपनी भाभी मंजू के बोबे दबोचते हुए हाय भैया मर गई रे कितना कड़ा लंड है तुम्हारा, मनोहर मंजू की गंद पर लेट कर अपनी बहन रुक्मणी की चूत मे गहरे धक्के मारने लगता है, इधर संध्या थापा-ठप अपनी गंद अपने पति के लंड पर मार रही थी उधर मनोहर अपने मोटे डंडे से आज अपनी बहन रुक्मणी की गुदाज चूत चोद रहे थे,
तभी पापा उठे और उन्होने मम्मी को हाथ पकड़ कर उठा दिया और फिर बुआ को बेड पर घोड़ी बना दिया बुआ की 42 साइज़ की भारी गंद पूरी खुल कर हमारे सामने आ गई अब पापा ने मम्मी की ओर इशारा किया और मम्मी अलमारी से तेल निकाल कर ले आई पापा ने अपने हाथ मे खूब सारा तेल निकाल कर बुआ की चूत से लेकर गंद तक मलना चालू कर दिया उधर मम्मी ने अपने हाथ मे तेल निकाल कर पापा के पूरे लंड और उनके अंदको मे लगाने लगी,
जब बुआ की गंद पूरी तेल मे तर हो गई तब मम्मी ने पापा के लॅंड को पकड़ कर बुआ की गंद के च्छेद से लगाने लगे, बुआ कीगंद थोड़ी उँची थी तब पापा ने बुआ की गंद मे कस कर थप्पड़ मारा और बुआ ने अपनी गंद हिलाते हुए थोड़ा झुका लिया अब मम्मी ने पापा के लंड को बुआ की गुदा को फैला कर उसमे सेट कर दिया और नीचे झुक कर अपने दोनो हाथो से बुआ की भारी गुदाज जाँघो को सहलाते हुए पापा की ओर मुस्कुराकर इशारा किया और पापा ने एक करारा धक्का बुआ की कसी हुई गंद मे मार दिया,
रुक्मणी- ओह भैया मर गई भैया निकाल लो बहुत मोटा है भैया आह मे मर जाउन्गि, तभी मम्मी बोली चुप कर कुतिया इतनी मोटी गंद को देख कर तो तेरा बेटा भी यहाँ होता तो तेरी गंद ठोके बिना ना रह पाता, फिर अब तो तेरी गंद को तेरे अपने भैया चोद रहे है,
मंजू- मारो मनोहर अपनी बहन की गंद खूब कस-कस कर मारो रंडी की गंद आज फाड़ दो,
बुआ- अरे मेरी रंडी भाभी तू चिंता मत कर तेरी मोटी गंद को तेरे बेटे रोहित से ना चुदवाया तो कहना आह आह ओह भैया आह मर गई रे,
पापा लगातार बुआ की गंद मे अपने लंड को जड़ तक ठोक रहे थे वह बिल्कुल भी रहम नही कर रहे थे और उनके भारी गोटे बुआ की फूली हुई चूत पर ठोकर मार रहे थे, पापा ने अपनी स्पीड बहुत तेज कर दी और सतसट बुआ की गंद को ठोकने लगे,
बुआ हाय भैया हाय भैया कहती हुई अपने चूतड़ मटका रही थी और पापा उनकी गंद मे अपना लंड जड़ तक ठोक रहे थे,
संध्या- हाय रोहित बहुत मज़ा आ रहा है ऐसा लग रहा है पापा मेरी ही गंद मार रहे है, और चोदो रोहित अपनी रंडी बीबी को और चोदो, तुम बहुत मज़ा दे रहे हो रोहित मैं भी तुम्हे खूब मज़ा दूँगी, आज से मैं तुम्हे अपनी मम्मी की भी चूत और गंद मारने का पर्मिट तुम्हे देती हू बोलो रोहित अपनी बीबी की मम्मी को चोदोगे, बोलो रोहित
रोहित- संध्या की गंद को मसल्ते हुए हाँ मेरी रानी मैं तुम्हे और तुम्हारी मम्मी दोनो को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदुन्गा, पर संध्या जब मैं तुम्हारी मम्मी को चोदुन्गा तब तुम्हारे पापा को ऐतराज हुआ तो फिर,
संध्या- अरे नही मेरे राजा जब तुम मेरी मम्मी को पूरी नंगी करके चोदोगे ना तब मैं अपने पपाजी के मोटे लंड पर बैठ जाउन्गि और फिर मेरे पापा तुम्हारी बीबी को चोदेन्गे और तुम उनकी बीबी को चोद लेना.
संगीता- अपनी चूत मसल्ते हुए, भाभी आप दोनो की बातो से मेरी चूत बहुत पानी छ्चोड़ रही है, भैया एक बार मुझे भी अपनी मम्मी समझ कर चोदोगे,
रोहित- अपनी बहन संगीता के ठोस दूध को अपने मूह मे भर कर चूसने लगता है और संध्या कहती है ले संगीता तेरे भैया तुझे अपनी मम्मी समझ कर तेरे मस्त चुचो को पी रहे है, संगीता अपने दूध को अपने हाथो से दबा-दबा कर अपने भैया के मूह मे डालती हुई कहती है ले बेटा रोहित अपनी मम्मी के दूध पी ले फिर तेरी मम्मी तुझे अपनी चूत खोल कर भी पिलाएगी,
दोनो ही कमरो मे चुदाई का मस्त महॉल था और औरत और मर्द के जनाना अंगो से उठती गंध ने पूरे महॉल को नशिला कर दिया था, पापा अपने मोटे लंड को अपनी बहन की गंद मे दल-दल कर उसे मस्त कर देते है बुआ ज़ोर-ज़ोर से अपनी गंद पीछे की ओर मारती हुई खूब सीसीयाने लगती है, तभी बुआ मम्मी की जाँघो को पकड़ कर अपने मूह की ओर खिच लेती है और मम्मी की पाव रोटी की तरह फुल्ली चूत को चाटते हुए अपने भैया का लंड अपनी गंद मे गहराई तक लेने लगती है, इधर संध्या भी संगीता की चूत मे दो उंगलिया डाल कर हिलाने लगती है,
तभी रोहित एक करारा धक्का संध्या की चूत मे मार देता है और संध्या पापा के लंड को देखती हुई ओह पापा कह कर झड़ने लगती है उधर बुआ की गंद मे जब पापा एक तगड़ा झटका जड़ तक मार देते है तो बुआ मस्त होकर मम्मी की चूत के छेद मे अपनी जीभ डाल देती है, मम्मी अपनी चूत का पानी बुआ को चटाते हुए झाड़ जाती है और बुआ पापा के लंड से निकले पानी को अपनी मोटी गंद मे पूरा निचोड़ लेती है,
संध्या और संगीता रोहित के लंड का पानी एक साथ चाटने लगती है और चाट-चाट कर रोहित के लंड को पूरा चमका देती है,
उस चुदाई के बाद पापा बुआ और मम्मी को लेकर बॅड पर लेट कर दोनो रंडियो को अपनी बाँहो से चिपका कर लेट जाते है और इधर तीनो थक जाने के कारण बॅड पर जाकर चिपक कर लेट जाते है, रोहित अपनी बहन और बीबी को चूमता रहता है और संध्या और संगीता बारी-बारी से रोहित के लंड और गोटू से खेलती रहती है,,
सुबह-सुबह मनोहर अपने ऑफीस जा चुका था और रोहित और संगीता और उसकी मम्मी मंजू बैठक रूम मे
बैठक कर चाइ पी रही थी, और दूसरी और बुआ जाकर संध्या के रूम मे संध्या से बाते करने लगी और संध्या
अपने रूम की सफाई करती हुई बुआ से बाते कर रही थी,
बुआ- बड़े गौर से संध्या के उठे हुए चुतडो को देख कर बोली, बहू रानी जब तुम यहाँ आई थी तब एक दुबली
पतली और लंबी सी लोंड़िया लगती थी और अब तुमने अपने इन भारी चुतडो को कभी गौर से देखा है कितने फैल
गये है, ल्गता है रोहित दिन भर तुम्हारे चुतडो मे ही अपना मूह घुसाए रहता है,
संध्या- मुस्कुराते हुए, बुआ जी मेरे चूतड़ आपकी मोटी और गुदाज गंद से तो छ्होटे ही है,पर आप कभी नही
बताती कि आपकी गंद इतनी चौड़ी कैसे हुई है
बुआ- बहू मैं तो खाते पीते घर की हू इसलिए मेरी गंद बहुत मोटी हो गई है,
संध्या- नही बुआ जी खिलाई पिलाई तो हमारे पापा ने भी हमारी खूब अच्छे ढंग से की है पर हमारे चूतड़
तो इतने नही बढ़े,
बुआ- बेटी कुछ औरतो पर उनके बाप की खिलाई पिलाई का असर नही होता है अब देखना जब तुम अपने ससुर का माल
खओगि तब देखना तुम्हारे चुतडो का साइज़ मेरे जैसा हो जाएगा, पहले तेरी सास मंजू की गंद भी इतनी मोटी नही
थी फिर भैया ने जब उन्हे अपना माल खिलाया अब तुम खुद ही देख रही हो की तुम्हारी सास की गंद कितनी गुदाज और
ठोकने लायक हो रही है,
बुआ- अच्छा बहू तेरे पापा तुझे बहुत प्यार करते है क्या,
संध्या- मुस्कुराते हुए, बुआ मैं तो आज भी जब पापा के पास जाती हू तो वह मुझे अपनी गोद मे बैठा कर
मुझे खूब प्यार करते है,
बुआ- हाय राम तू इतनी बड़ी घोड़ी है उसके बाद भी तेरे पापा तुझे अपनी गोद मे चढ़ा लेते है,
संध्या- हस्ते हुए क्यो मैं तो फिर भी छ्होटी हू आप तो 40 पार कर रही है और आज भी अपने भारी चुतडो के
साथ अपने भैया की गोद मे बैठ जाती हो,
बुआ- सकपकाते हुए तूने कब देख लिया मुझे भैया की गोद मे बैठे हुए,
संध्या- मुस्कुराते हुए मैने तो वह भी देखा था जो आपने भैया के पास बैठ कर अपने हाथ मे पकड़
रखा था और उसे बड़े प्यार से सहला रही थी,
बुआ- चुप कर रंडी तूने कैसे देख लिया मुझे तो यकीन नही हो रहा है,
संध्या- बुआ इसमे तुम्हारी कोई ग़लती नही है तुम्हारे चूतड़ है ही इतने भारी की कोई भी देखे उसका लंड खड़ा
हो जाए, यहा तक कि रोहित तो आपके बेटे जैसा है ना
बुआ- हाँ वह मेरा बेटा ही है
संध्या- आपका रोहित भी आपके भारी चुतडो को देख-देख कर बहुत मस्त हो जाता है,
बुआ- मूह फाडे हुए क्या, क्या रोहित ने मेरे बारे मे तुझसे कुछ कहा है
संध्या- बुआ वह तो आपको चोदने के लिए तड़प रहा है, कहता है एक बार बुआ को पूरी नंगी करके अपने सीने से
चिपका ले तो उसका ख्वाब पूरा हो जाए,
बुआ- मंद-मंद मुस्कुराते हुए चल झूठी कही की, मुझे बुध्धु बना रही है,
संध्या- आप की कसम बुआ मैं झूठ नही बोल रही हू और उनका लंड भी पापा के लंड के जैसा ही दिखता है बिल्कुल
टू कॉपी नज़र आता है, कल रात को ही जब वह मुझे चोद रहे थे तो जानती हो उनके मूह से क्या शब्द निकल रहे
थे, हाय बुआ कितनी टाइट गंद है तुम्हारी कितनी फूली चूत है तुम्हारी, जब मैने कहा रोहित मैं संध्या हू तब
उन्होने कहा, मेरी रानी आज तुम मुझे बुआ की तरह नज़र आ रही हो कुछ देर के लिए यह समझ लो कि तुम मेरी
बुआ हो,
रुक्मणी की चूत संध्या की बात सुन कर गीली हो जाती है और वह अपनी चुस्त सलवार पहने पिछे की ओर दीवार से
टिक कर अपने दोनो पेरो के घुटनो को मोड हुए बैठी रहती है उसकी जाँघो की जड़ो मे जहाँ उसकी फूली हुई चूत
का उभार उसकी सलवार से साफ नज़र आ रहा था वह हिस्सा पूरा गीला हो चुका था और संध्या की नज़र जैसे ही बुआ
की फूली हुई सलवार पर पड़ी तो संध्या ने एक दम से बुआ की बुर को उसकी सलवार के उपर से दबोच लिया,
बुआ- एक दम से अपनी जाँघो को मिलाते हुए, हाय दैया बहू क्या कर रही है पागल हो गई है क्या,
संध्या- बुआ जी आपने सलवार के अंदर पॅंटी नही पहनी है ना,
बुआ- हाँ बहू तभी तो मेरी सलवार वहाँ से गीली हो गई,
संध्या- बुआ की फूली हुई चूत को दबाती हुई बुआ तुम जानती हो रोहित को तुम्हारी उमर की औरतो की फूली हुई चूत
बहुत अच्छी लगती है, और तुम्हारी चूत को देखो यह इतनी गुदाज पाव रोटी की तरह फुल्ली है कि सच बुआ रोहित अगर
इस समय तुम्हारी इस फुल्ली बुर को देख ले तो अपना मोटा लंड एक धक्के मे ही तुम्हारी बच्चेदनि से भिड़ा दे,
संध्या की बातो से बुआ की चूत से और भी पानी आने लगता है, संध्या बुआ की चूत को सहलाते हुए जब अपनी उंगली
उसकी बुर के उपर हल्के से दबाती है तो अचानक बुआ की सलवार की सिलाई वहाँ से उधाड़ जाती है जहाँ पर उसकी मस्त
चूत फूली हुई नज़र आ रही थी,
संध्या बहुत खुराफाती तो थी ही उसने जब देखा कि बुआ की सलवार थोड़ी सी उसकी चूत के यहाँ से फटी है तो
संध्या ने बुआ से चिपकते हुए कहा बुआ तुम्हारी चूत का साइज़ बराबर रोहित के लंड के लायक है और फिर
संध्या धीरे से बुआ की सलवार की सिलाई को और भी उधेड़ देती है, तभी संध्या अपनी एक उंगली बुआ की मस्त बुर के
गुलाबी छेद मे एक दम से पेल देती है और बुआ आह संध्या क्या कर रही है, बुआ संध्या के उंगली डालने से
मस्त हो जाती है और संध्या आराम से बुआ की दोनो जाँघो को फैला कर उसकी सलवार उसकी चूत के पास से अच्छे
से फाड़ कर ऐसी कर देती है की बुआ की पूरी खुली हुई गुलाबी चूत और उसका छेद साफ नज़र आ रहा था,
संध्या बुआ की चूत मे अपनी तीन उंगलिया डाल कर आगे पिच्चे करती हुई बोलो ना बुआ कैसा लग रहा है
बुआ- बहुत अच्छा लग रहा है बेटी आह सी आह
संध्या- बुआ रोहित का मोटा लंड चुसोगी,
बुआ- आह पर कैसे बेटी वह क्या चूसने देगा
संध्या- तुम एक बार हाँ तो कहो बुआ उसे तो तुम्हे चोदना भी पड़ेगा और जब वह तुम्हे नंगी करके चोदेगा
तब देखना तुम्हे पूरी मस्त कर देगा,
बुआ- लेकिन कैसे बेटी
संध्या बुआ की चूत से अपनी उंगली निकाल कर उसे कान मे कुछ समझाती है
बुआ- नही संध्या कही रोहित कुछ ग़लत समझ लेगा तो
संध्या- अरे भाई जब मैं खुद आपके साथ हू तो आप फिकर क्यो कर रही हो उसके बाद संध्या बाहर चली जाती है
और रुक्मणी वही दीवार से पीठ लगाए अपने दोनो पेरो को लंबा करके एक के उपर एक टांग रख कर बैठी रहती
है ,
संध्या बाहर जाकर देखती है तो उसकी सास और संगीता कही जाने के लिए तैयार थी संध्या ने पुछा तो मंजू
ने कहा बेटा मेरा भाई बहुत दिनो बाद आ रहा है इसलिए हम उसे स्टेशन लेने जा रहे है तुम लोग खाना खा
लेना हमे थोड़ी देर हो जाएगी,
उनके जाने के बाद संध्या रोहित के पास आकर चलो कमरे मे आज तुम्हे बुआ की चूत
का मज़ा दिल्वाति हू बस
डरना मत और हिम्मत करके आज बुआ को चोदना है मोका बड़ा अच्छा है मैं बाहर का गेट लगा कर आती हू
रोहित अपने रूम मे आकर बुआ के पेरो की तरफ बैठने लगता है और बुआ एक दम से अपने पेर सिकोड कर अपने पेरो
के दोनो घुटने मोड़ लेती है वह जैसे ही घुटने मोड़ती है उसकी फूली हुई चूत एक दम से खुल कर उसकी फटी सलवार
से साफ दिखने लगती है और रोहित अपनी बुआ की मस्तानी चूत को अपने इतने करीब से देख कर एक दम से मस्त हो जाता
है,
बुआ जब रोहित के चेहरे की तरफ देखती है तो वह समझ जाती है कि रोहित ने उसका मस्त भोसड़ा देख लिया है,
बुआ- किसी जनम्जात रंडी की तरह मुस्कुरा कर क्या हुआ रोहित मम्मी कहाँ गई
रोहित- बुआ वो मेरे मामा है ना चंदू वह आ रहे है इसलिए मम्मी उन्ही को लेने गई है
बुआ- मैने सुना है तेरे मामा से तेरी बहुत बनती है,
संध्या- चाइ देते हुए अरे बुआ जी वो क्या है ना रोहित के मामा रोहित से 7 साल बड़े है पर कुछ बाते इन दोनो की
इतनी मिलती है कि यह साथ रहते-रहते दोस्त की तरह बन गये अब इन्हे देखिए ये अपने मामा से अपनी सभी बाते
शेर कर लेते है और इनके मामा भी इन्हे हर बात बता देते है,
बुआ- हस्ते हुए बहू कुछ बाते ऐसी भी होती है जो कोई किसी को नही बताता है,
संध्या- हस्ते हुए बुआ जी हम भी तो नही जानते थे कि आप पापा से इतना प्यार करती है,
बुआ- मुझसे तेरे पापा ही नही तेरा पति भी बहुत प्यार करता है, क्यो रोहित
रोहित- बुआ मेरी तो दो-दो मम्मी है एक मम्मी और दूसरी आप
संध्या- हस्ते हुए, रोहित पापा की भी तो दो-दो बिबिया है,
बुआ-मुस्कुराते हुए तुम दोनो बहुत बदमाश हो अपनी बुआ के मज़े ले रहे हो
संध्या- अरे नही बुआ हम आपके मज़े नही ले रहे है बल्कि हम दोनो तो आपके बच्चे है और आपको पूरा
मज़ा देना चाहते है क्यो रोहित चलो बुआ को तुम अपनी मम्मी समझते हो ना तो उनके पेरो को थोडा दबाओ जैसे
अपनी मम्मी के पेरो को दबाते हो और फिर संध्या भी बुआ की एक टांग पकड़ कर दबाने लगती है,
बुआ- अरे नही बेटा रहने दे
रोहित- अरे तो क्या हुआ बुआ आप मेरी मम्मी समान है तो क्या मैं आपके पैर नही दबा सकता और फिर एक तरफ
संध्या और दूसरी और रोहित बुआ की एक-एक टांग पकड़ कर उसे फोल्ड करके दबाने लगते है,
रोहित की नज़रे बुआ की
मस्त फूली हुई चूत पर थी जो फटी सलवार से पूरी तरह बाहर आ चुकी थी, संध्या बुआ की मोटी जाँघो को मसल्ते
हुए उसके पैरो को और चौड़ा कर रही थी और बुआ अपनी आँखे बंद किए मंद-मंद मुस्कुरा रही थी,
रोहित ने बुआ की मोटी और गुदाज जाँघो को अपने हाथो मे भर रखा था और बुआ की पाव रोटी की तरह फूली हुई
चूत देख कर सोच रहा था कि उसकी मम्मी मंजू की चूत कैसी होगी, मंजू का नंगा बदन भी पूरा बुआ के
नंगे बदन की तरह ही है तब तो मम्मी की बुर भी इसी तरह फूली हुई होना चाहिए,
अपनी मम्मी की चूत को
इतना करीब से अगर देखना हो जाए तो उसका मज़ा ही कुछ और होता है,
रोहित अपनी बुआ की बुर देख कर अपनी मम्मी की यादो मे खोया हुआ था और संध्या रोहित की स्थिति को भाँप गई
थी और ऐसे मोके पर वह रोहित को और भी उत्तेजित करके अपने पति को ज़्यादा मज़ा दिलाने की कोशिश करती है,
संध्या- बुआ मम्मी तो आप से उमर मे बड़ी है ना पर दिखती वो बिल्कुल आप की उमर की है आप दोनो जब पापा
के साथ खड़ी होती हो तो दोनो उनकी बिबिया लगती हो,
बुआ- अरे बहू तेरी मम्मी मंजू का बदन थोड़ा कसा हुआ है और कुछ नही पर पेट तो उनका मुझसे भी ज़्यादा
बाहर निकला हुआ है,
संध्या- बुआ की जाँघो को उपर तक भिचते हुए, पर बुआ जी लगता तो वही पेट सुंदर है ना, मेरा कहने का
मतलब है कि जब औरत 40 पर करने लगे तो उसका पेट जितना उठ कर उभरेगा वह उतनी ही मस्त नज़र आएगी,
और एक बात और भी है बुआ जिन औरतो का पेट उठा हो और गहरी नाभि पेटिकोट और साडी के बाहर दिख रही हो ऐसी
औरतो के पिछे मर्द बहुत भागते है,
बुआ- अरे बहू मर्दो का क्या है कैसी भी दे दो वह तो मा चुदवा ही लेगे ना,
संध्या-हस्ते हुए बुआ अब गरम हो गई हो तो उतार दो ये सलवार कुर्ता और हो जाओ पूरी नंगी,
बुआ- तेरा मरद बैठा है तेरे सामने तू क्यो नंगी नही हो जाती है,
संध्या- ठीक है तुम कहती हो तो मैं ही नंगी हो जाती हू और फिर संध्या ने अपने एक-एक कपड़े उतारने चालू कर
दिए, बुआ मूह फाडे संध्या की ओर देख रही थी,
और अंत मे संध्या ने अपनी गुलाबी पैंटी को दूसरी ओर मूह करके अपनी गुदाज गंद दिखाते हुए उतार दिया,
रोहित अपनी जगह पर बैठा अपनी मस्तानी बीबी के नंगे बदन को देखते हुए बुआ जी की जाँघो की जड़ो को सहला
रहा था,
बुआ जी का गला सूखने लगा था और उसकी चूत से पानी आना शुरू हो रहा था,
संध्या अपनी चिकनी फूली बुर को दिखाती हुई बुआ के पास आ जाती है और बुआ की जाँघो को चौड़ा करके बुआ की चूत
मे हाथ मारते हुए अरे बुआ जी तुम्हारी तो चूत दिख रही है,
संध्या का इतना कहना था कि रोहित ने बोला कहाँ है चूत और अपना मूह बुआ की चूत से लगा दिया बुआ रोहित का मूह
अपनी धधकति भोसड़ी पर लगने से तड़प उठी और अपने ही हाथो से अपने दोनो मोटे-मोटे दूध को पकड़ कर
मसना चालू कर दिया,
रोहित ने बुआ की चूत को चाटते हुए अपने हाथ से सलवार मे थोड़ी और ताक़त लगा कर बुआ की सलवार को और फाड़
दिया और बुआ की पाव रोटी जैसी चूत और उसकी गहरे भूरे रंग के बड़े से गंद के छेद को बाहर ले आया,
संध्या ने जब पूरे आकार मे बुआ की मस्त चूत को देखा तो उसने अपने हाथो से रुक्मणी की चूत को और फैला
लिया और रोहित की ओर इशारा करते हुए उसे चाटने को कहा,
रोहित ने अपनी जीभ निकाल कर बुआ जी की चूत को चाटना शुरू कर दिया बुआ जी हाय रोहित बेटे क्या कर रहा है,
रोहित- कुछ नही बुआ बस थोड़ा सा रस पी रहा हू
बुआ- बेटा मत पी प्लीज़ मत पी,
संध्या- अरे बुआ पी लेने दो ना मम्मी पिलाएगी और ना तुम पिलाओगे तो बेचारे किसका पिएगे,
बुआ- हाय तो क्या मैं ही बची हू संगीता का पी ले और तेरा तो पीता ही होगा बुआ ने संध्या की ओर देख कर कहा
संध्या- बुआ रोहित ने संगीता की भी पी ली है अब उसका मन तुम्हारी पीने का है,
रोहित – अरे चुप रहो संध्या बुआ ने मुझे मना ही कहाँ किया है और तुम बेकार मे बहस कर रही हो
रोहित- मुस्कुराते हुए बुआ को देख कर, क्यो बुआ नही किया ना मना, और फिर रोहित अपने मूह को बुआ की चूत से
भिड़ा देता है,
संध्या बुआ के मूह के पास उकड़ू बैठी थी और उसकी दो फांको मे बटी मस्त चूत बुआ के मूह के बिल्कुल करीब थी
बुआ अब अपने आप को ना रोक सकी और उसने अपने मूह को संध्या की मस्तानी चूत से लगा दिया,
बुआ की इस हरकत से संध्या थोड़ा चौकी और फिर बुआ को देख कर रोहित को देख मुस्कुराने लगी,
रोहित ने अब अपना लंड बाहर निकाल लिया और उधर बुआ चूत चाटने मे मस्त थी तभी रोहित ने खूब सारा थूक बुआ
की मस्त चूत मे लगाया और अपने लंड के टोपे को बुआ की चूत मे सेट करके उसकी मोटी जाँघो को अपने हाथो मे
थाम लेता है और संध्या की ओर देखता है तो संध्या कहती है रोहित तुम्हारी मम्मी की चूत भी बुआ की चूत
जैसी मस्त फूली हुई है,
रोहित का इतना सुनना था कि उसने एक कस के धक्का बुआ की चूत मे मार दिया और तभी
संध्या ने अपनी पूरी चूत उठा कर बुआ के मूह पर रख दी, बुआ की आवाज़ जो रोहित के धक्के से निकलने वाली थी
वह वही के वही दब कर संध्या की चूत मे समा गई,
संध्या ने बुआ के मूह मे अपनी चूत को अच्छी तरह रगड़ा तब तक रोहित रफ़्तार पकड़ चुका था, बुआ की
मखमली चूत मे रोहित का लंड सतसट अंदर बाहर हो रहा था,
रोहित को तभी अपने पापा की याद आ गई और
उसने बुआ की गोरी गंद मे ज़ोर से थप्पड़ मारते हुए उसकी चूत मे लंड पेलने लगा,
रोहित के थप्पड़ मारने से बुआ की मोटी गंद पूरी लाल नज़र आ रही थी और ऐसी लाल गंद चोदने मे रोहित को बड़ा
मज़ा आ रहा था रोहित जितना तेज अपने लंड का धक्का बुआ की चूत मे मारता बुआ भी उतनी तेज़ी से संध्या बहू की
चूत को अपने मूह मे भर लेती थी,
अब रोहित की स्पीड पूरे जोश मे आ चुकी थी और वह बुआ को सतसट चोद रहा था बुआ ज़ोर-ज़ोर से कहने लगी हाय
बेटे चोद बेटे चोद अपनी मम्मी की चूत खूब कस के मार बेटे, उधर बुआ की चूत मे ठोकर पड़ रहे थे इधर
संध्या ने बुआ के बड़े-बड़े दूध को मथना चालू कर दिया संध्या कभी बुआ के दूध के निप्पल को काटने
लगती और कभी उसके दूह दबोच कर चूसने लगती थी, तभी रोहित ने बुआ के भारी चूतादो को कस कर भिचते
हुए 8-10 धक्के ऐसे मारे कि बुआ का पानी निकल गया और वह रोहित और संध्या से बुरी तरह चिपक कर हफने
लगी,
रोहित ने अपना लंड बुआ की चूत के अंदर तक फसा रखा था और बुआ उसके लंड को अपनी चूत की गहराई मे
दबोचे हाफ़ रही थी, संध्या धीरे-धीरे बुआ के दूध दबा-दबा कर सहला रही थी,
कुच्छ देर बाद संध्या ने बुआ को उठाते हुए कहा
संध्या- बुआ जी मस्ती आई या और लेना है, आज तो रोहित का लंड ले कर आपकी चूत मस्त हो गई होगी,
बुआ- मुस्कुराते हुए, सच बहू बड़ा मस्त लंड पाया है तूने, अगर तेरी मम्मी मंजू ऐसा लंड ले लेगी तो वह
तो अपने बेटे के लंड की दीवानी बन जाएगी,
तभी कॉल बेल की आवाज़ सुन कर रोहित गेट खोलने जाता है और अपनी मम्मी और बहन के साथ अपने मामा अजय को
देख कर अरे मामा क्या बात है बड़े दिनो बाद आए हो,
अजय- मुस्कुराते हुए, अरे रोहित अब क्या बोलू यार तू तो जानता है मैं काम धंधे के चक्कर मे कभी आ ही
नही पाता हू,
रोहित चलो मामा चाइ पी लो फिर मैं तुम्हे घुमा कर लाता हू और फिर रोहित अपने मामा को चाइ पिलाने के बाद
घुमाने ले कर चला जाता है,
अजय- यार रोहित आज तो दारू चखने का मन हो रहा है
रोहित- तो मामा श्री चखो ना किसने मना किया है, पर मैं तुम्हारी आदत जानता हू तुम्हे दारू के बाद चोदे
बिना मज़ा भी तो नही आता है,
अजय- हाँ यार रोहित जब तक कोई मस्त चूत मारने को नही मिल जाती दारू का मज़ा आधूरा ही रहता है,
रोहित- पर मामा तुम इतने चुदासे हो तो मामी को तो रोज ही चोद्ते होंगे अब कैसी दिखती है मामी
अजय- अरे अब क्या बताऊ दोस्त तेरी मामी बिल्कुल तेरी मम्मी मंजू जैसी है, जैसे उरोज और नितंब तेरी मम्मी
मंजू के है बिल्कुल ऐसे ही,
रोहित- लगता है मामा तुम मेरी मम्मी के बारे मे मुझसे बात करने मे असहज महसूस कर रहे हो तभी तो
उरोज और नितंब जैसे शब्द यूज़ कर रहे हो
अजय- मुस्कुराता हुआ अरे नही रे वो भी मेरी बहन है और तेरी मम्मी है पर
रोहित पर क्या मामा जब तुम मामी की मस्तानी चूत का वर्णन मेरे सामने कई बार कर चुके हो तो फिर मेरी
मम्मी के बारे मे बात करने मे काहे की झिझक
अजय- मुझे लगा तुझे कुच्छ आच्छा ना फील हो इसलिए,
रोहित- खेर क्या मामी पूरी मम्मी जैसी ही गदरा गई है,
अजय- अरे तेरी मामी की मोटी गंद बिल्कुल तेरी मम्मी की तरह ही दिखाई देती है और उसके दूध भी मंजू दीदी की
तरह ही लगते है, और जंघे भी तेरी मम्मी जैसी मोटी और गुदाज है,
अजय- अच्छा रोहित संगीता भी खूब कसी कसाई है अभी जब हम आ रहे थे तो वह हमारे आगे -आगे चल रही
थी तब मैने उसकी जीन्स मे से उसकी मोटी गंद को देखा तो सच मानो मेरा लंड खड़ा हो गया तभी तेरी
मम्मी ने मुझे अपने लंड को अड्जस्ट करते देख लिया और मुझे मुस्कुराकर देखते हुए मेरे गालो को चूम
लिया सच रोहित तेरी मम्मी के होंठ बहुत रसीले है जब हम ऑटो मे बैठे तो एक तरफ मंजू दीदी की मोटी
जंघे और दूसरी तरफ संगीता की जंघे सहलाते हुए मैं तो मस्त हो गया,
रोहित और अजय ने पीना स्टार्ट कर दिया और दोनो नशे मे मस्त हो रहे थे,
रोहित- अच्छा मामा सच बताओ तुमने मम्मी को चोद रखा है ना,
अजय- शरमाते हुए अरे भान्जे अब तुझे क्या बताऊ तेरी मम्मी जब भी मेरे घर आती है मैं उसे पूरी नंगी
करके रात भर चोद्ता हू, सच रोहित तेरी मम्मी बड़ी मस्त माल है रंडी को चोदने मे आदमी मस्त हो जाता है
रोहित- क्या मम्मी बड़ी मस्त तरीके से चुदवाति है
अजय- अरे रोहित जब तेरी मम्मी की चूत मे खुजली होती है तो वह बड़ी मस्त हो जाती है और इतने मस्त तरीके से अपनी
गंद और चूत उठा-उठा कर दिखाती है कि तू देख ले तो रंडी को चोदे बिना नही रह सकता,
तेरी मम्मी को
सबसे ज़्यादा मज़ा अपनी चूत चटाने और अपनी गंद मरवाने मे आता है और सबसे सुंदर तो उसका उठा हुआ
गदराया पेट है, जब तू अपनी मम्मी के नंगे पेट को घूर कर देखेगा तो तुझे उसकी चूत का एहसास अपने आप हो
जाएगा और तेरा लंड खड़ा हो जाएगा,
रोहित- मामा बहुत दिनो से तुमने मम्मी की चूत नही मारी है ना
अजय- हाँ यार लास्ट टाइम जब तेरी मम्मी आई थी तब वह 15 दिन रुकी थी और 15 दिन तक मैं उसे तेरी मामी के साथ
नंगी ही रखता था जब भी मैं काम से आता तो तेरी मम्मी और मामी दोनो नंगी ही घर का कम करती रहती थी
फिर मैं दोनो को एक साथ रात भर छोड़ता था,
अजय-तेरी मम्मी की गंद बहुत हेवी है तू अपनी मम्मी का नंगा पेट और नाभि उसकी गंद दबोच कर एक बार
अपने मूह से चूम ले तो तू पागल हो जाएगा इतनी गरम है तेरी मम्मी ,
अजय- क्या तेरा बहुत मन करता है अपनी मम्मी को चोदने का
रोहित- हाँ मामा मेरा बड़ा दिल करता है उसे चोदने का एक बार मुझसे अपनी चूत
मरवा लेगी तो मस्त हो जाएगी,
अजय- पर एक बात है रोहित अपनी बीबी के साथ अपनी मम्मी या बहन को चोदने मे बड़ा मज़ा आता है तू जब भी
अपनी मम्मी को चोदना अपनी बीबी के साथ ही चोदना
रोहित- पर मामा आज तुम्हारा मन किसे चोदने का कर रहा है
मामा- सच पुंछ भान्जे तो आज तेरी बहन संगीता की चूत मारने का खूब मन कर रहा है जबसे उसकी जीन्स
मे उठी मोटी गंद और उसकी टीशर्ट मे कसे हुए उसके मालदार दूध देखे है तब से बस संगीता की नंगी गंद
ही गंद नज़र आ रही है, वैसे तूने तो अपनी बहन को चोद लिया होगा ना,
रोहित- हाँ मामा मैने संगीता की खूब तबीयत से चुदाई की है उसकी सील मैने हो तोड़ी थी बड़ी टाइट थी साली की चूत
मैं तो संगीता को चोद-चोद के मस्त हो गया था,
अजय- तेरी मम्मी की सील भी बहुत टाइट थी रोहित सच तेरी मम्मी की सील तोड़ने मे पसीना आ गया था
रोहित- फिर तो मामा मम्मी की गंद भी बहुत टाइट होगी
अजय- हाँ तेरी मम्मी की गंद बहुत कसी हुई है और वह हर किसी से अपनी गंद नही मरवाती है कहती है जिसके
साथ चुदवाने मे उसे सबसे ज़्यादा मज़ा आता है उसी से अपनी गंद ठुकवाटी है,
रोहित- मामा आज तुमने मेरे तन बदन मे आग लगा दी है मेरी रंडी मम्मी की गंद और चूत की बात कर-कर के
आज मेरा बड़ा दिल कर रहा है अपनी मम्मी के नंगे बदन से चिपकने का उसका गुदाज पेट इतना उठा हुआ है तो
उसकी चूत कितनी फूली होगी,
चलो मामा अब घर चले मेरा मन अपनी मम्मी की गुदाज भरी हुई जवानी देखने का
बड़ा मन कर रहा है,
रोहित- चलते हुए, मामा तुमने कभी मम्मी की चूत से पेशाब पिया है
अजय- नही भान्जे वह मेरे कहने पर कभी मुतती ही नही है
रोहित- मामा मेरा तो बड़ा दिल करता है अपनी मम्मी को मुतते हुए देखने का और जब वह मुते तो मैं अपना
मूह उसकी चूत से लगा कर उसका सारा पेशाब पी जाउ,
मामा- भान्जे अगर तेरा ऐसा मन करता है तो अपनी मम्मी की चूत को दोनो हाथो से फैला कर अपनी जीभ से
उसकी चूत चूस्ते जाना और कहते जाना मूत रंडी मूत मेरे मूह मे फिर देखना वह तेरे मूह मे ज़रूर मूत देगी
दोनो मामा भान्जे का लंड पूरी तरह तना हुआ था और दोनो अपने घर पहुच जाते है
रात को सभी खाना खा कर बैठक मे बैठे हुए थे एक सोफे पर पापा, बुआ और पापा के दूसरी तरफ संगीता बैठी थी उनके सामने वाले सोफे पर मामा, मम्मी और रोहित बैठे थे, संध्या तभी सबके लिए कॉफी बना कर लाती है और फिर पापा के पीछे जा कर खड़ी हो जाती है, संध्या की कॉफी पीने से पहले यह सब ग्रूप मे बात कर रहे थे और जब कॉफी पीने लगे तो इनकी बाते आपस मे शुरू हो गई,
मंजू- अजय तू भैया संगीता वाले रूम मे सो जाना या तेरा मन हो तो गेस्ट रूम मे रुक जा, अजय- अरे दीदी तुम जहाँ कहोगी मैं तो वहाँ सो जाउन्गा तुम उस सब की फिकर मत करो, फिर मामा ने मम्मी की गुदाज जाँघो पर हाथ रख कर दबाते हुए कहा, दीदी अपने रोहित की तरफ भी ज़रा ध्यान दो अब वह भी बड़ा हो गया है, मंजू- रोहित के गाल खींच कर मुस्कुराती हुई अभी तो मेरा बेटा बच्चा है मुझे तो इसमे कोई भी बडो वाले गुण नही नज़र आए, रोहित का लंड तो वैसे ही अपनी मम्मी के बदन से आती हुई भीनी-भीनी खुश्बू के कारण खड़ा हो गया था पर जब उसकी मम्मी के बोलते समय उसके रसीले होंठो को अपने इतने करीब से देखा तो उसका दिल करने लगा कि अभी अपने होंठ अपनी मम्मी के रसीले होंठो से लगा दे,
रोहित- मम्मी मैं बड़ा हू या छ्होटा लेकिन मुझे हमेशा बडो मे दिलचस्पी रही है,
मामा- अरे दीदी रोहित अब जवान मर्द हो चुका है यह बात संध्या से बेहतर कोन जान सकता है चाहो तो पुंछ कर देख लो संध्या सारी बात आपको बता देगी,
उधर मनोहर अपने एक हाथ को संगीता के कमर मे डाले हुए उसकी चिकनी कमर का मज़ा ले रहा था वही दूसरे हाथ से बुआ की गदराई जाँघो को पकड़ रखा था, मनोहर की निगाहे बुआ के बड़े-बड़े थनो और उसके बड़े से ब्लौज के उपर से उभरे निप्पलो पर,
रोहित ने संध्या की ओर देखा और संध्या ने रूम मे चलने का इशारा किया और रोहित उठ कर अपने रूम मे निकल गया, उसके जाने के कुच्छ देर बाद वहाँ से संध्या भी अपने रूम मे आ गई और रोहित के उपर आकर उसके होंठो को चूमती हुई,
संध्या- जानू थोड़ा दबाओ ना,
रोहित- संध्या के दोनो दूध को अपने हाथो मे भर कर उसके होंठो को चूमता हुआ कस कर दबा देता है और संध्या की चूत से पानी आ जाता है, संध्या अपनी चूत को सहलाती हुई सच रोहित तुम्हारे एक बार चूमने भर से मेरी चूत मे पानी आ जाता है,
रोहित- आ जाता है ना, लेकिन मम्मी को क्या पता
संध्या- रोहित मम्मी ने कुच्छ कहा है क्या
रोहित- हाँ कहती है रोहित तो अभी बच्चा है उसमे मर्दो वाले उन्हे तो कोई गुण नज़र नही आते है,
संध्या-अपनी नाक पर गुस्सा चढ़ाते हुए ऐसा कहा उन्होने, मेरे मर्द को बच्चा कह रही है, रोहित अब ये संध्या तुम्हे तुम्हारी मम्मी की चूत और गंद दोनो खूब कस-कस कर चोदने को दिलवाएगी,
रोहित- खुश होते हुए सच मेरी जान, एक बार बस मुझे मेरी मम्मी की चूत और मोटी गंद मारने को मिल जाए फिर देखना संध्या मैं कैसे अपनी मम्मी की गंद और चूत मार-मार कर फाड़ता हू, रोहित अपना लंड मसल्ते हुए सच संध्या मम्मी की गंद और चूत फाड़ ना दी तो कहना, तब समझ मे आएगा कि मैं बच्चा हू या उनका बाप,
रोहित अपने पेंट की चैन खोले अपने लंड को अपने हाथो से सहलाता हुआ बोला पर संध्या हम कैसे मम्मी को चोदने मे कामयाब होगे,
संध्या रोहित के खड़े लंड को जाकर अपने हाथ से पकड़ लेती है और उसके लंड से अपनी चूत को लगा कर उसके लंड पर चढ़ने की कोशिश करती है और रोहित उसकी मोटी गंद के नीचे हाथ लगा कर उसे अपने लंड पर बैठा लेता है, संध्या के मूह से एक मस्त सिसकी निकल जाती है रोहित का मोटा लंड उसकी पूरी चूत को खोल कर अंदर तक फस चुका था संध्या ने रोहित के कंधो को अपने दोनो हाथो से थमते हुए अपनी चूत को लंड से अड्जस्ट किया और फिर अपने दोनो पेरो को रोहित की कमर से लपेट कर अपने पूरे पेट को रोहित के पेट से चिपका लिया रोहित का पूरा लंड संध्या की चूत मे फिट हो चुका था,
अब रोहित संध्या की गंद के दोनो पाटो को अपने हाथ से पकड़ कर फैलाए हुए उसकी चूत मार रहा था और संध्या उसके होंठो से अपने होंठ चिपकाए चूस रही थी,
फिर रोहित ने संध्या की पूरी गंद को एक ही हाथ से थाम लिया और दूसरे हाथ से संध्या के दूध को कस-कस कर मसालने लगा, कुछ देर बाद रोहित ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और संध्या की चूत मे कस-कस कर 8-10 धक्के मारे और अपना पानी उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया, संध्या पूरी तरह रोहित के लंड पर मचल उठी और फिर शांत होकर नीचे उतर आई,
दोनो बिस्तेर पर लेट गये और हफने लगे, कुछ ही देर मे संध्या और रोहित की नींद लग गई,
उधर मामा जी और मम्मी सोफे पर बैठे बैठे कर रहे थे और पापा भी संगीता और बुआ के बीच बैठे हुए थे, तभी संगीता उठ कर अपने मामा के बगल मे बैठ जाती है, संगीता की टीशर्ट से झाँकते उसके नुकीले चुचो की कठोरता को महसूस करके मामा का लंड झटके मारने लगा, तभी मम्मी ने कहा संगीता आज तू अपने मामा जी को अपने बिस्तेर मे सुला लेगी ना,
संगीता- क्यो नही मम्मी मैं तो यही चाह रही थी की आज मैं मामा जी के साथ सोऊ,
मंजू- ले अजय अब ठीक है ना दोनो मामा भांजी आराम से जाकर सो जाओ सुबह मिलते है ओके
मामा और संगीता अपने रूम मे चले गये और इधर मम्मी उठ कर सीधे पापा के बिल्कुल करीब बैठ गई और अब सोना भी है कि रात भर यही बैठे रहना है,
पापा- उठते हुए भाई मैने कब मना किया है चलो और फिर वहाँ से उठ कर अपने रूम मे जाने लगते है,
पापा रूम के अंदर चले जाते है तब मम्मी बुआ को कहती है आ ना रुक्मणी अभी से कहाँ तुझे नींद आ जाएगी,
रुक्मणी ने आज दिन मे ही अजय का मस्त लंड अपनी चूत मे लिया था इसलिए आज उसका कुच्छ खास मन नही था और उसने कहा नही भाभी आज मेरा मन नही है आप लोग बाते करो मैं जाकर सो जाती हू,
मम्मी- हस्ते हुए सच कह रही है या कोई और बात है
बुआ- शरमाते हुए अरे नही भाभी और कोई बात माही है आज वो क्या है ना दिन मे रोहित ने मेरे बदन की बहुत तबीयत से मालिश कर दी थी बस तब से भाभी पूरे रोम-रोम मे दर्द उठ रहा है,
मम्मी- ऐसी कैसी मालिश की है रोहित ने कही तूने वहाँ भी मालिश तो नही करवाई,
बुआ- अब भाभी जब पूरे बदन की बात कर रही हू तो समझ जाओ
मम्मी- हे भगवान तूने रोहित से ही अपनी चूत मरवा ली, फिर मम्मी हस्ते हुए चल कोई बात नही वैसे भी रोहित तो अभी बच्चा है,
बुआ- अरे भाभी भरोसे मत रहना उसका मस्त लंड अगर तुम्हारी चूत मे घुस जाए तो तुम्हारी चूत की धज्जिया उड़ा देगा, एक बार लेके तो देखो पसीने ना च्छुटा दे तुम्हारे तुम्हारा बेटा तो कहना,
मम्मी- थोड़ा आश्चर्या से देख कर बोलती है क्या बहुत बड़ा और मोटा है उसका लंड, तुझे खूब चोदा है क्या उसने,
बुआ- मेरी तो चूत मे अभी तक दर्द है और गंद अलग दर्द कर रही है,
मम्मी- क्या तेरी गंद भी मारी है उसने,
बुआ- तुम अपनी गंद बचा के रखना भाभी
मम्मी-क्यो
बुआ- क्यो कि वह तो तुम्हारी गंद का दीवाना है वह तुम्हे खूब मस्त तरीके से ठोकना चाहता है,
मम्मी- चल झूठी कही की
बुआ- तुम्हारी कसम भाभी उसकी नज़र हमेशा तुम्हारी मोटी गंद पर रहती है,
बुआ की बाते सुन कर मम्मी की चूत मे पानी आ जाता है और वह बुआ से और खोद-खोद के पुच्छने लगती है,
मम्मी- उसने क्या तुझे पूरी नंगी कर दिया था,
बुआ- हाय भाभी मुझे शर्म आती है
मम्मी- बता ना रंडी चुद चुकी है और शर्मा रही है, मस्त भोसड़ा मरवा चुकी है और मुझे बताने मे शर्म आ रही है अब बोल भी,
बुआ- अरे भाभी उसने तो मुझे पूरी नंगी कर दिया था और जब अपने मोटे लंड को मेरी चूत मे भर कर मुझे चोदा तो मैं तो मस्त हो गई, सच भाभी तुम्हारा बेटा बहुत मस्त तरीके से चूत ठोकता है, एक बार तुम अपने बेटे का लंड अपनी चूत मे ले लोगि तो मस्त हो जाओगी,
मंजू की चूत अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के नाम से पनिया गई थी और वह अपनी चूत को अपने हाथो से मसल्ते हुए,
मंजू- हफ्ते हुए और बता ना मेरे बारे मे क्या कह रहा था, क्या वह अपनी मम्मी को भी चोदना चाहता है,
बुआ- हाँ भाभी वह कह रहा था कि उसे सबसे सुंदर मम्मी लगती है मम्मी के रसीले होंठो को पीने के लिए वह पागल रहता है और उसे सबसे अच्छे तो तुम्हारे ये चौड़े चूतड़ लगते है, कभी देखना उसे कैसे खा जाने वाली नज़रो से तुम्हारी मोटी गंद देखता है,
मम्मी- हाई राम मैं तो उसे बच्चा समझती थी मुझे क्या पता वह अपनी मम्मी की चूत का ही प्यासा है,
बुआ- दीदी मैं तो जब से उससे चुद कर आई हू मेरा सारा बदन टूट रहा है गजब चुड़क्कड़ बेटा पेदा किया है तुमने अब वह तुम्हारी ही चूत कूटने के चक्कर मे है,
मम्मी- क्या संध्या भी साथ थी तुम लोगो के
बुआ- अरे बहू तो पक्की चुदेल है वही तो उकसाती है उसे तुम्हे चोदने के लिए, कहती है रोहित मुझे अपनी मम्मी समझ कर चोदो,
मंजू मन ही मन खुस होते हुए कितना ख्याल है मेरी बहू को मेरा,
मंजू- अच्छा तू अब हमारे साथ सोएगी या अकेली, आना हो तो आ जा, तेरे भैया को वैसे ही तुझे चोदे बिना नींद नही आएगी,
रुक्मणी- आज भैया को तुम अपनी चूत चटवा दो मैं कल देखूँगी आज तो मेरी चूत मे तुम्हारे बेटे के लंड की चुभन ही महसूस होने दो आज बहुत दिनो बाद किसी जवान लंड ने चोदा है अलग ही मिठास पेदा हो रही है,
बुआ के जाने के बाद मंजू अपने पति के पास जाकर बैठ जाती है और मनोहर एक बात .
मनोहर- मंजू का गुदाज उठा हुआ पेट सहलाते हुए हाँ पुछो रानी,
मंजू- क्या मैं बहुत सुंदर हू और क्या बहुत सेक्सी लगती हू,
मनोहर- मेरी रानी तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो तुम्हारे चेहरे को देख कर ही काम रस टपकता है
मंजू- क्या मुझे देख कर किसी का लंड भी खड़ा हो स्कता है
मनोहर- हाँ मेरी जान तुम्हारी गुदाज जवानी को देख कर किसी का लंड भी खड़ा हो सकता है
मंजू- क्या मेरे बेटे का लंड भी मुझे देख कर खड़ा होता होगा
मनोहर -क्यो नही तुम इतनी मस्त चोदने लायक लगती हो कि तुम्हारे बेटे का लंड भी तुम्हे देखते ही खड़ा हो जाता होगा, और तो और तुम्हारा बेटा तो तुम्हे अपने ख़यालो मे ही कई बार पूरी नंगी करके चोद चुका होगा, तुम्हे मालूम नही अपनी मम्मी को चोदने मे बेटो को कितना सुख मिलता है,
अगर तेरे जैसी खूबसूरत रंडी मेरी मम्मी होती तो मैं तो तेरी चूत अपने लंड से चोद-चोद के भोसड़ा बना देता, दिन रात तेरी गंद रंडियो की तरह चोद्ता,
मनोहर- लेकिन आज तुम यह सब अचानक क्यो पुच्छने लगी कही रोहित ने तुम्हारी चूत मे हाथ तो नही मार दिया या फिर तुम्हारी मोटी गंद को दबा दिया,
मंजू- नही ये बात नही है पर आज कल मैने देखा है वह मेरे चुतडो की तरफ बहुत देखने लगा है,
मनोहर- तुम्हारी जवान गंद देख कर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए फिर वह तो तुम्हारा बेटा है उसका लंड तो अपनी मा की गदराई जवानी देख कर खड़ा होना ही है,
उधर अजय अपनी भांजी संगीता के पास पहुच जाता है और संगीता अपनी टीशर्ट और स्कर्ट पहने बैठी रहती है,
मामा- संगीता यहाँ आओ अब तो तुम कितनी बड़ी हो गई हो और मामा संगीता के गालो को चूम लेता है,
संगीता अपने मामा से चिपकती हुई ओह मामा तुम कितने दिनो बात आए हो अब तो तुम्हारी भांजी तुम्हारे साइज़ की हो गई है,
मामा- संगीता की गुदाज जवानी और उसके कठोर दूध जो की टीशर्ट मे एक बड़ा सा शॅप बनाए हुए नज़र आ रहे थे को देख कर कहता है मेरी रानी तुम तो बहुत ज़्यादा जवान हो गई हो और पूरी अपनी मम्मी पर गई हो, कुछ दिनो मे ही तुम्हारी ये जंघे और तुम्हारी ये गुदाज गंद अपनी मम्मी जैसी ही मस्त फैल जाएगी और फिर देखना तुम्हारी जवानी को पीने के लिए लोगो का दिन मचल जाएगा
संगीता अपने सीने को उपर की ओर तान कर अंगड़ाई लेते हुए हे मामा जी पूरा बदन टूट रहा है
मामा – अरे बेटी मैं आज तेरे बदन के हर हिस्से मे अच्छी मसाज कर देता हू,
दोनो एक दूसरे को सहलाते हुए बातो मे मगन थे तभी उन्हे किसी के आने की आहट होती है और संगीता चुपचाप आँख बंद करके लेट जाती है और मामा जी दरवाजे की ओर देखने लगते है
मामा- अरे दीदी अभी तक सोई नही तुम
मंजू- हाँ रे नींद नही आ रही थी फिर मंजू अपनी बेटी संगीता की ओर देखने लगी जो अपने दोनो पेरो के घटनो को मोड हुए सोने की आक्टिंग कर रही थी, मम्मी ने देखा संगीता की मूडी हुई टाँगो के बीच का हिस्सा साफ नज़र आ रहा था और उसकी जंघे बहुत चिकनी गोरी और मस्त लग रही थी और उसकी पॅंटी का वह हिस्सा इतना फूला हुआ लग रहा था जहाँ संगीता की मस्त बिना झांतो वाली चूत दबी हुई थी,
मामा जी की नज़रे भी संगीता की मस्त पॅंटी के उपर से फुल्ली नज़र आ रही चूत पर थी, मम्मी ने मुस्कुराते हुए मामा जी से पुछा अभी सोई है क्या,
मामा- हाँ दीदी
मंजू- और सुना भाभी और बच्चे की याद तो नही आ रही है
मामा- मम्मी की नशीली आँखो मे देखते हुए अपने लंड को सहला कर दीदी तेरी बेटी संगीता को तो तुमने एक दम मस्त माल बना दिया है देख उसकी गुदाज बुर कितनी फूली लग रही है और फिर मामा ने संगीता की दोनो टाँगो को और भी ज़्यादा चौड़ा कर दिया और संगीता की गुलाबी चूत पॅंटी के एक साइड से झाँकने लगी,
मम्मी – मामा के सामने अपना गुदाज उठा हुआ पेट सहलाते हुए, उसके पास जाकर मुस्कुराती हुई उसके सर पर हाथ फेर कर, क्या बात है भाई इतने क्यो परेशान दिख रहा है,
मामा- ने अपने मूह को मम्मी को गुदाज पेट से लगा दिया और अपने हाथ को मम्मी की मोटी गंद के पिछे लेजा कर दबाते हुए, हे दीदी तुम्हारी लोंड़िया भी बिल्कुल तुम्हारी तरह चिकनी दिखने लगी है मैं तो बहुत तड़प रहा हू
मम्मी- मामा के लंड को अपने हाथो मे थाम कर, अरे पगले चुपचाप संगीता की गंद से चिपक कर उसकी चूत और बोबे थोड़े दबा दे वह खुद ही कुछ देर मे उठ जाएगी, पर हाँ अभी कुँवारी है बड़े प्यार से उसकी चूत मारना और हाँ अपनी बेटी समझ कर ही चोदना समझे,
मामा- मम्मी के होंठो को चूस कर दीदी संगीता इतनी कसी हुई माल है फिर भी जीजाजी ने अभी तक अपनी बेटी की चूत नही मारी क्या बात है,
मम्मी- अरे जब से उनकी बहन रुक्मणी आई है तब से वह उसको ही ज़्यादा चोद्ते है इसलिए उनका ध्यान नही गया और फिर संगीता की चूत की सील भी तो तेरे लंड से टूटना लिखी थी,
उधर संगीता अपने मन मे सोचती है तुम क्या खाक मेरी सील तोडोगे मैं तो कब की अपने भैया से अपनी चूत मरा चुकी हू,
मामा- दीदी आज मैं तेरी चिकनी बेटी की चूत फाड़ कर रख दूँगा
मम्मी- मुस्कुराते हुए वो तो तेरा खड़ा लंड ही बता रहा है कि तू मेरी चिकनी लोंड़िया को देख कर कैसे तड़प रहा है,
मामा- दीदी थोड़ा सा शहद है क्या
मम्मी- क्यो अब शहद का क्या करेगा
मामा- दीदी मैं जब भी कुँवारी लोंदियो की चूत चाट्ता हू तो शहद लगा कर चाटने मे बड़ा मज़ा आता है
मम्मी- बड़ा आया कुँवारी लोंदियो को चोदने वाला तूने अभी तक किसी कुँवारी लोंड़िया को चोदा भी है,
मामा-अब क्या करू दीदी कभी मोका ही नही लगा
मम्मी- जब तेरी खुद की बेटी थोड़ी बड़ी हो जाए तब उसे चोदना फिर देखना अपनी ही बेटी की चिकनी चूत चूसने मे तुझे कितना मज़ा आएगा,
मामा- दीदी अब तुम यहाँ से जाओ नही तो मैं तुम्हारी चूत मे अपना लंड फसा दूँगा
मम्मी- जाती हू बाबा पर तेरे लिए शहद तो ला दू फिर थोड़ी देर बाद मम्मी शहद देकर चली गई और मामा दरवाजा बंद करके संगीता के पेरो के पास बैठ गये संगीता एक दम से उठ कर बैठ जाती है और अपने मामा का मोटा लंड पकड़ते हुए,
संगीता- मामा जी आज अपनी बेटी को चोदने वालो हो क्या
मामा- संगीता के रसीले होंठो को एक दम से अपने मूह मे भर लेता है और उसकी शर्ट उतार देता है जब मामा संगीता की कसी हुई गुदाज चुचिया देखता है तो उसका लंड झटके मारने लगता है और वह अपनी भांजी के दूध को पागलो की तरह मसल्ने लगता है,
संगीता- आह मामा जी बहुत जोश मे लग रहे हो आज अपनी बेटी की बुर पीने का बड़ा मन कर रहा है आपका पर मामा जी मेरी रंडी मम्मी को भी यही चोद देते, बहुत बड़ी रंडी है वो तुमने तो खूब उसकी चूत खोल -खोल के सूँघी होगी ना,
मामा- संगीता के दूध के निप्पल मे शहद की बूंदे टपका कर उसके एक निप्पल को कस कर अपने दांतो से काट कर चूस्ते हुए, हाय मेरी रंडी भांजी तेरी मम्मी अपनी गंद मारने को मुझे नही देती है नही तो साली की गंद मार-मार कर लाल कर दू,
संगीता- आह मामा जी कितना अच्छा चूस्ते हो अब सीधे मेरी चूत मे शहद डाल कर चाट लो तो मज़ा आए,
मामा- संगीता की पॅंटी को एक झटके मे उतार कर उसकी जाँघो को खूब कस कर फैला देता है और फिर अपनी भांजी की गुलाबी चूत को देख कर उसको चूमते हुए उसमे खूब सारा शहद लगाने लगता है और संगीता आह आह करने लगती है,
संगीता- मामा जी मेरा दिल करता है कि कोई मेरी मम्मी को खूब रंडी की तरह चोदे, इतना चोदे इतना चोदे कि रंडी का मूत निकाल दे मेरी मम्मी किसी चुदी हुई कुतिया की तरह अपनी गंद हिलाती पड़ी रहे और उसकी गंद और चूत मे तगड़े लंड घुस-घुस कर उसे चोद्ते रहे,
मामा तब तक संगीता की बुर मे शहद डाल कर उसे चाटने लगा था वह जितना संगीता की गुलाबी चूत को फैला कर चाट्ता संगीता उतना ही सी सी की आवाज़ निकालने लगती, मामा पागल कुत्ते की तरह संगीता की चूत को चाट रहा था और उसकी चूत एक दम लाल हो चुकी थी तभी मामा जी ने संगीता को उठा कर उसकी जगह खुद लेट गये और संगीता को उठा कर उसकी गंद को अपने मूह से सटा लिया इस तरह संगीता मामा के पेट पर लेट गई और उनके लंड पर शहद लगा कर चाटने लगी, अब इधर मामा संगीता की गंद और चूत दोनो को फैला-फैला कर चाट रहा था उधर संगीता अपने मामा का मोटा लंड चूस रही थी,
संगीता-मामा जी मम्मी की चूत का रस ज़्यादा अच्छा है या मेरा
मामा- बेटी अभी तो तेरी चूत के रस से अच्छा कुछ भी नही लग रहा है, पर एक बात बता तुझे सबसे ज़्यादा चुदने का मन किससे होता है,
संगीता- मामा जी मुझे तो पापा का लंड सबसे अच्छा लगता है, जब पापा मेरे उपर चढ़ कर मेरी मस्त गंद ठोंकेगे तब देखना मैं अपने पापा को अपने भोस्डे मे भर लूँगी,
मामा- संगीता की चूत की फांको को पिछे से पूरी तरह खोल कर उसके गुलाबी छेद मे अपनी नुकीली जीभ डाल कर उसका रस चूस लेता है और संगीता अपनी चूत मामा के मूह मे दबा देती है,
मामा- बेटी जब तेरे पापा तेरी चूत मे अपना लंड पेल देंगे तब उन्हे भी अपनी बेटी को चोदने मे मज़ा आ जाएगा और फिर मामा जी संगीता को अपने मूह से उतर कर उठ कर बैठ जाते है,
और संगीता की जाँघो को फैला कर देखते हुए, उसकी चूत का दाना सहलाते हुए संगीता बहुत खुजली हो रही है ना,
संगीता- हाँ मामा जी अब जल्दी से मेरी चूत मे लंड डाल दो और मुझसे खूब गंदी-गंदी बाते करो
मामा- हैरानी से संगीता की ओर देखते हुए बेटी तू बिल्कुल अपनी मम्मी पर गई है जब तेरी मम्मी अपनी चूत मरवाती है तो उसे भी खूब गंदी बाते करने का मन होता है,
संगीता अपनी चूत को फैला कर अपनी टाँगे हवा मे उठा लेती है और मामा जी अपने लंड को उसकी चूत के छेद मे लगा कर एक कस कर धक्का उसकी फूली बुर मे मार देते है और संगीता आह मामा जी मर गई आह आह
मामा जी प्लीज़ थोड़ा धीरे डालो बहुत मोटा लंड है, तभी मामा जी संगीता की चिकनी जाँघो को अपने हाथो मे दबोच कर दूसरा धक्का कस कर देते है और उनका पूरा लंड संगीता की चूत मे फिट हो जाता है औ संगीता ओह ओह मामा मार डाला रे कुत्ते कितना तेज धक्का मार दिया,
मामा जी बस मेरी रानी बस अब बहुत धीरे-धीरे तुझे चोदुन्गा और मामा जी अपने लंड को संगीता की बुर मे पेलने लगे, संगीता अपनी गंद उठा कर मामा के लंड पर दबाने लगी और जल्दी ही संगीता की चूत बहुत चिकनी होकर अपने मामा का लंड लेने लगी,
मामा जी संगीता के रसीले होंठो को चूस्ते हुए उसकी कसी हुई चुचियो को दबा-दबा कर उसकी बुर मे गहराई तक लंड पेलने लगते है,
संगीता-आह आह ओह मामा जी कितना मस्त लंड है तेरा, बहुत बढ़िया चोद रहे हो मामा जी
मामा- बेटी बस आज ऐसे ही रात भर तेरी चूत को तेरा मामा चोदेगा बस तू आराम से अपनी जाँघो को फैलाए रह,
संगीता- आह अच्छा मामा जी आदमियो को सबसे ज़्यादा किसकी चूत मारने मे मज़ा आता है
मामा- बेटी किसी भी आदमी को सबसे ज़्यादा मज़ा उसकी खुद की मम्मी को चोदने मे आता है, मा को अपने बेटे का लंड लेने का बड़ा मन करता है और अपने बेटे के लंड को सोच-सोच कर खूब अपनी चूत मरवाती है,
और एक बाप को अपनी कुँवारी बेटी को चोदने मे बड़ा मज़ा आता है, और अगर बेटी शादीशुदा होती है तो बाप को अपनी बेटी को चोदने मे और भी मज़ा आता है,
संगीता- आह आह मतलब जब मेरी शादी हो जाएगी तो पापा और भी मस्त तरीके से मुझे चोदने के लिए तड़प उठेगे,
मामा- हाँ बेटी उस समय तेरी गंद तेरी मम्मी की गंद की तरह मोटी और गुदाज हो जाएगी तेरा पेट बच्चे पेदा करने से और भी उभर कर सामने आ जाएगा और तेरे ये दूध और भी मोटे हो जाएगे तब देखना तेरे पापा तेरी गदराई जवानी को देख कर तेरी मस्त तरीके से चूत मारेंगे,
एक बाप के सामने जब उसकी बेटी एक भरी पूरी औरत बन कर आएगी तब देखना तेरे पापा का लंड तुझे देखते से ही खड़ा हो जाएगा,
मामा जी ने संगीता की गंद के नीचे हाथ डाल कर उसकी गंद को अपने हाथो मे भर कर उपर उठा लिया और अपने पेरो के पंजो के बल पर बैठ कर संगीता की चूत को खूब कस-कस कर ठोकने लगे और संगीता हाय मामा ओह मामा मर गई और तेज मारो खूब चोदो मामा जी और चोदो की आवाज़ लगाने लगी,
पूरा कमरा उनकी चुदाई की ठप से गूँज उठा और मामा जी सतसट अपने लंड को संगीता की चूत मे पेलते जा रहे थे,
संगीता अपनी चूत को खूब उठा-उठा कर मामा के लंड पर मार रही थी और संगीता की सूजी हुई लाल चूत देख कर मामा उसे खूब रगड़-रगड़ कर चोद रहे थे, लगभग एक घंटे का खेल होने के बाद मामा ने अपना माल संगीता की बुर मे जैसे ही छ्चोड़ा संगीता मामा के लंड से अपनी चूत को पूरी तरह चिपकाते हुए हफने लगी और उसकी बुर ने ढेर सारा पानी छ्चोड़ दिया,
अगले दिन मनोहर अपने ऑफीस निकल गया और बुआ और संगीता मार्केट चली गई उसके बाद रोहित और मामा भी इधर उधर घमते हुए पान की दुकान पर खड़े होकर बाते करने लगे, घर मे संध्या और मंजू आमने सामने बैठ कर काम करने लगी, उधर मनोहर के पास ऑफीस मे सपना का फोन आता है कि उसको उसके पापा रतन ने बुलाया है,
मनोहर कुछ देर बाद रतन के कॅबिन मे पहुच जाता है और तभी सपना रतन की गोद से उठ कर मनोहर को मुस्कुराकर देखते हुए बाहर चली जाती है तभी रतन सपना को दो कॉफी का इशारा कर देता है और फिर-
रतन- यार मनोहर मुझे तो एक बात आज पता चली और साले तूने भी बताया नही
मनोहर- कौन सी बात
रतन- यही कि मेहता तो तेरा समधी है
मनोहर- अपने सर पर हाथ फेरते हुए हाँ यार तुझसे मैने यह राज च्छूपा रखा था
रतन- तभी तो कहु की मेहता तेरे एक कहने पर कैसे मान गया, पर तूने यह भी नही बताया कि आख़िर तूने उस पर ऐसा क्या एहसान कर रखा है जो वह तेरी बात कभी नही टालता है,
मनोहर- उसका एक बहुत बड़ा कारण है रतन, यह एक घटना है जो बस घट गई
रतन- बता तो हुआ क्या था
मनोहर- यार यह एक ऐसी घटना है जिसे तू एक अनोखा हादसा कह सकता है और यही घटना थी जिसकी वजह से मैने अपने बेटे रोहित की शादी बड़ी सादगी से मेहता की बेटी संध्या से कर दी थी,
रतन- मेहता का पूरा नाम मनोज मेहता है ना, और मेरे ख्याल से उसकी तो बस एक बेटी ही है
मनोहर- मुस्कुराते हुए क्यो रतन उसकी बीबी ममता को भूल गया क्या,
रतन- हाँ-हाँ याद आया लेकिन हुआ क्या था जो तुझे और मेहता को अपने बच्चो की शादी इतने सादगी भरे अंदाज मे कर दी,
मनोहर- चल अब तूने पुरानी याद ताज़ा कर दी है तो मैं तुझे बता ही देता हू, एक बार मैं अपनी कार से सुनसान रोड पर चला जा रहा था, रोड के आस पास जंगली इलाक़ा था, तभी मुझे एक लड़की की चीखने की आवाज़ सुनाई दी और मैने जल्दी से कार रोक कर आवाज़ की तरफ जाने लगा और जब मैं थोड़ा जंगल के अंदर गया तो वहाँ एक काला सा आदमी एक लड़की के उपर चढ़ा हुआ था और वह उसे पूरी नंगी कर चुका था लड़की का जीन्स और उसकी टीशर्ट साइड मे पड़े थे मैं उन दोनो से बस थोड़ी दूरी पर था तभी उस काले आदमी ने उस लड़की की जाँघो को फैलाया और अपने लंड का एक तेज झटका उसकी चूत मे मार दिया लड़की बिल्कुल अन्छुइ और कुँवारी थी जिसके कारण उस काले का मोटा लंड का टोपा ही अंदर घुसा होगा
और मैं ज़ोर से वहाँ से आवाज़ लगा कर उसकी और दौड़ा, मुझे देखते ही वह काला आदमी अपने लंड को निकाल कर बहुत तेज़ी से दूसरी ओर भाग गया,
रतन- फिर क्या हुआ
मनोहर- वह जगह बिल्कुल सुनसान थी और उसके आगे एक तालाब था, मैं जब उस लड़की के पास पहुचा तो वह कराहती हुई नंगी अपनी जंघे फैलाए पड़ी थी और उसकी चूत से थोड़ा सा खून निकल रहा था मैं समझ गया कि लड़की की सील पर धक्का लगने से थोड़ा सा खून आ गया है मुझे खुशी थी कि मैने उसे पूरी तरह चुद से बचा लिया था नही तो उस आदमी का क्या भरोशा था कि वह उसे चोदने के बाद जिंदा छ्चोड़ देता,
मैने जब उस लड़की के गुदाज रसीले बदन उसकी चिकनी जंघे उसके कसे हुए पपीते की तरह दूध उसका सपाट चिकना पेट और उसकी मस्त गोरी और फैली हुई गंद देखी तो सच मानो रतन मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया, मैने उस लड़की के सर के नीचे हाथ डाल कर उसे उठाया तो वह एक दम से मेरे सीने से चिपक कर रोने लगी, मैने उसके आँसू पोछ्ते हुए उसके गालो पर हाथ फेरा और उसकी गोरी नंगी पीठ सहलाते हुए उससे कहा चुप हो जा बेटी वह कमीना भाग गया है,
वह लड़की सिसकिया लेते हुए मुझसे बुरी तरह चिपकी हुई थी और मैं उसके नंगे बदन को सहलाते हुए उसे लगभग अपनी गोद मे बैठाए था, मैने उससे कहा अच्छा अब रोना बंद करो और मुझे अपना नाम बताओ
उसने मुझे अपना नाम संध्या बताया और फिर उसने बताया कि वह इस काले से लिफ्ट लेकर आ रही थी लेकिन उसके बाद उसने उसकी गाड़ी जंगल मे मोड़ दी और मुझे उतार कर जबदस्ती करने लगा, फिर वह फुट-फुट कर रोने लगी और कहने लगी मुझे छ्चोड़ दो मैं मर जाना चाहती हू मैं अपने पापा के पास अब क्या मूह लेकर जाउन्गि, मुझसे कौन शादी करेगा,
मेरा हाथ एक दम से उसके कसे हुए दूध पर चला गया और मेरा लंड झटके देने लगा, मैने उसके रसीले होंठो और गालो पर हाथ फेरते हुए उसे चुप कराया और उससे कहा ठीक है अगर मैं तेरी शादी अपने बेटे से करवा दू तब तो मरने के बारे मे नही सोचेगी, तब कही जाकर वह थोड़ा शांत हुई और फिर उसे जब अपने नंगे बदन का ख्याल आया तो मेरे पास से उठते हुए बोली हटिए मुझे कपड़े पहनने दीजिए,
वह जैसे ही अपनी मोटी गंद उठा कर मेरे सामने खड़ी हुई मेरा तो लंड पानी-पानी हो गया,
बस फिर क्या था मैं जज्बाती हो गया और मैने उससे कहा, देखो लड़की तुम्हारा बलात्कार हुआ है और अगर तुम
यह चाहती हो कि समाज मे तुम्हारी इज़्ज़त बरकरार रहे तो जैसा मैं कहता हू वैसा ही करो और फिर मैने उसे नंगी ही अपनी गोद मे उठा लिया और उसे तालाब के पास ऐसी जगह पर ले गया जहाँ से किसी को भी हम दिखाई नही देते, वह मेरी गोद मे नंगी चढ़ि हुई थी और उसका गुदाज गोरा बदन और भारी चुतडो ने मेरे लंड को पूरी तरह खड़ा कर दिया था,
मैने उसे उगी हुई घास पर बैठा दिया और फिर मैं उसकी दोनो जाँघो को फैला कर उसकी चूत को देखने लगा तो उसने अपनी जंघे कस कर चिपकाते हुए कहा अंकल यह आप क्या कर रहे है,
मैने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा देखो बेटी पहले तो बिल्कुल भी घबराव मत यह समझ लो कि अब तुम अपने पापा की गोद मे आ चुकी हो और दूसरी बात तुम्हारे अंगो से खून आ रहा है इसे पानी से अच्छे से धोने दो और फिर मैने जब उसकी जाँघो को चौड़ा किया तो वो भी अपनी जाँघो को चौड़ा करते हुए अपनी चूत देखने लगी और उसे मेरी बात पर यकीन आ गया कि मैं ठीक कह रहा हू,
मैने ठंडे पानी से उसकी फूली हुई मस्त चूत को धोना शुरू कर दिया और फिर जब मेरा हाथ उसकी गोरी मुलायम बिना बालो वाली चूत पर पड़ा तो मैं तो मस्त हो गया और मैने उसकी चूत को पानी से अच्छे से रगड़ना चालू कर दिया,
रतन- हस्ते हुए लोंदियो की नब्ज़ पकड़ना तुम अच्छी तरह जानते हो मनोहर
मनोहर- रतन उस समय तू उसे पूरी नंगी देखता तो वह तेरी मा भी होती तो उसे चोदे बिना नही रह पाता
रतन- हस्ते हुए अच्छा भाई फिर क्या हुआ,
मनोहर- फिर क्या था दोस्त मैं जानबूझ कर उसके भज्नाशे को पानी डाल-डाल कर रगड़ने लगा और वह मस्ताने लगी, मैं बड़े गौर से उसकी गुलाबी बुर देख रहा था और वह मुझे अपनी चूत धोते हुए बड़े प्यार से देख रही थी, फिर वह कुच्छ शरमाने लगी और फिर से अपनी जंघे बंद कर ली,
मैने उसको देख कर कहा क्या हुआ बेटी तब उसने मुझसे कहा अंकल प्लीज़ अब रहने दो मुझे शर्म आ रही है,
मैने उससे कहा बेटी उस गंदे आदमी के कारण तुम्हे कोई इन्फेक्षन ना हो इसलिए पानी से धोना ज़रूरी है, और फिर इस बार मैने उसकी दोनो जाँघो को पूरी तरह चौड़ा कर दिया और उसकी मस्त गुलाबी चूत खिल कर पूरी सामने आ गई, अब मैं संध्या की चूत मे पानी डाल-डाल कर रगड़ते हुए उसके भज्नाशे को जैसे ही छेड़ता वह एक दम से अपनी गंद उठाने लगती उसका चेहरा अब कामुक हो चला था और मैं देख रहा था कि अब उसे भी मज़ा आने लगा था तभी मैने उसके दूध के निप्पल को देखा तो मस्त हो गया उसके दूध के गुलाबी निप्पल पूरी तरह तन कर खड़े हो गये थे,
वह अपनी मस्ती मे मस्त हो रही थी और मैने धीरे से अपनी बीच वाली उंगली उसकी चूत के लाल छेद मे डाल दी जिससे वह गन्गना उठी और एक दम से मुझसे चिपक गई,
मैं बिल्कुल भी जल्दिबाजी नही करना चाहता था और मैने उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके कसे हुए दूध बुरी तरह मेरी छाती से दबने लगे, लेकिन मैने उसकी चूत से हाथ नही हटाया था और अपनी उंगली को धीरे-धीरे उसकी बुर मे दबाता जा रहा था,
अब मेरी उंगली मे यह एहसास हो चला था कि उसकी चूत से चिकनाहट बाहर आ रही है, जब मैने उसकी चूत से अपनी मोटी उंगली को बाहर निकाल कर देखा तो उसकी चूत से मलाई मेरी उंगली पर लग गई थी, मैने धीरे से उंगली वापस उसकी चूत मे डाल कर उसे चूम लिया और वह कराह उठी और फिर मुझसे कस कर चिपक गई उसका मन शायद अपने बोबे मसलवाने का होने लगा था वह अपने दूध मुझसे रगड़ रही थी और यह भी कह रही थी अंकल प्लीज़ अब छ्चोड़ दीजिए,
मैने उसे नंगी ही उठा कर अपनी गोद मे बैठा लिया और उसके मोटे-मोटे दूध को कस कर अपने हाथो मे भर कर मसल्ने लगा और उसके होंठो को चूम लिया,
मेरा लंड सीधे उसकी चूत और गंद के बीच रगड़ खाने लगा और उसने मुझसे शरमाते हुए कहा अंकल प्लीज़ छ्चोड़ दीजिए मुझे, और फिर वह मेरे सीने से कस कर चिपकती हुई बोली अंकल आप ही ऐसा करेगे तो फिर आपमे और उस काले मे क्या फ़र्क रह जाएगा,
मैने कहा पहली बात तो तुम मुझे अंकल मत कहो पापा कहो और दूसरी बात उस काले मे और मुझमे यह फ़र्क है कि वह सिर्फ़ तुमको दर्द देता और मैं तुमको दर्द के साथ मज़ा भी दूँगा और मैने उसके दूध को कस कर दबा दिया,
वह नंगी तो पहले से ही थी और मेरे सहलाने से उसकी चूत मे पानी आ गया और फिर रतन बाबू उस दिन मैने अपनी बहू संध्या को वही जंगल मे तालाब किनारे खूब कस कर चोदा, जब मैं संध्या को चोद चुका तब वह अपने कपड़े पहन कर रेडी हो गई और मैं उसे लेकर उसके पापा के पास पहुच गया,
रतन- फिर
मनोहर- फिर क्या था मैने उसके बाप के हाथ मे उसकी बेटी को दिया और उससे कहा कि आज तुम्हारी बेटी का बलात्कार हुआ है और फिर उस काले वाली बात मेहता को बता दी, मेहता अपनी बेटी को अपने सीने से लगा कर उससे पुच्छने लगा और संध्या ने रोते हुए उसे सब बता दिया और कहा आज अगर ये अंकल वहाँ नही आते तो मैं आपके सामने जिंदा ना खड़ी होती,
मेहता बुरी तरह घबरा गया और कहने लगा मैं पोलीस को फोन करता हू लेकिन मैने उसे बदनामी का डर बता कर मना कर दिया और फिर जब मैने उसकी चुदी हुई
बेटी से अपने बेटे की शादी का ऑफर किया तो मेहता मेरे पेरो मे घिर पड़ा और बस फिर क्या था संध्या और रोहित की शादी हो गई,
रतन-मुस्कुराते हुए वाकई दिलचस्प थी तुम्हारी कहानी खेर तुम्हे जान कर खुशी होगी कि आज रात मैने एक छ्होटी सी पार्टी रखी है और तुम्हारे लिए एक मस्त माल का भी इंतज़ाम किया हुआ है
मनोहर-हस्ते हुए कमिने ज़रूर अब तेरी नज़र किसी और मुनाफ़े मे अटक गई है नही तो फ्री मे तू मुझे क्या माल ऑफर करेगा, हाँ अगर सोदा तेरे फ़ायदे का हो तो तू अपनी मा को भी दाव पर लगा दे ऐसा आदमी है तू,
रतन- भाई मनोहर रतन का तो हिसाब ऐसा है कि जो चीज़ उपयोग की है उसका उपयोग हो और जो चीज़ उपभोग की हो उसका पूरी तरह उपभोग होना चाहिए,
मनोहर- हस्ते हुए तू साले कभी नही सुधरेगा अच्छा अब मैं चलता हू
रतन- शाम को टाइम पर आ जाना और भाभी जी से कह देना आज रात तू रतन का मेहमान रहेगा,
मंजू आज सुबह से ही खूब चुदासी हो रही थी रात भर उसके ख्वाबो मे अपने बेटे रोहित का लंड उसकी मोटी गंद मे चुभता रहा, रात मे कई दफ़ा तो उसने अपनी गंद
मे अपनी उंगलिया तक डाल ली थी, उसकी चूत खूब खुज़ला रही थी, घर मे कोई नही था बस संध्या किचन मे कुछ काम कर रही थी,
मंजू- सोफे पर बैठते हुए, संध्या बेटी ज़रा पानी तो पीला दे,
संध्या- अभी लाई मम्मी और फिर संध्या पानी लेकर आती है, संध्या ने अपनी साडी को काफ़ी नीचे करके बाँधा था वहअपनी पूरी नाभि और उठा हुआ पेट दिखाती हुई अपनी सास के पास बैठ गई,
मंजू संध्या का गाल चूमते हुए क्या बात है संध्या आज कल बहुत
खोई -खोई रहती है रोहित तेरा अच्छे से ख्याल नही रखता है क्या, और फिर मंजू संध्या के गुदाज पेट को दबा कर सहलाती हुई क्या बात है तेरा पेट काफ़ी उभर आया है कही कुछ है तो नही,
संध्या- मुस्कुराते हुए, अरे नही मम्मी ऐसा कुछ नही है और फिर अगर पेट उभरने से उसमे बच्चा मान लिया जाय तो आपका गुदाज पेट तो मुझसे भी बड़ा है तो क्या मैं यह सोच लू कि रोहित का भाई आने वाला है,
मंजू- हस्ते हुए बहुत बड़ी -बड़ी बाते करने लगी है, मेरे रोहित को कही बच्चा तो नही बना दिया तूने
संध्या- मैं क्या उन्हे बच्चा बनाउन्गि उन्होने तो खुद मुझे अपनी मम्मी बना लिया है
मंजू- वह कैसे
संध्या- अब देखो ना मम्मी वह मुझे कहते है कि मुझे अपनी मम्मी की तरह दूध पिला
मंजू संध्या के दूध को पकड़ कर हल्के-हल्के मसल्ते हुए, तो क्या हो गया बेटी अगर वह तेरा दूध नही पिएगा तो किसका पिएगा,
संध्या भी समझ गई कि मम्मी की चूत पानी छ्चोड़ रही है और अपने बेटे का लंड उनकी आँखो के सामने झूल रहा है,
संध्या- धीरे से मम्मी की मोटी जाँघो को सहलाते हुए, मम्मी मेरा भी बदन आपके जैसा भरा हुआ होना चाहिए था,
मंजू- क्यो क्या कमी है तेरे बदन मे
संध्या- अरे वो बात नही है, अब इन्हे देखो ना इनका वो तो इतना मोटा और लंबा है कि मैं तो पस्त हो जाती हू सच मम्मी उनका लंड तो आपके लायक है, आप अगर मेरी जगह होती तो बड़े आराम से उनका लंड सह लेती,
मंजू- क्यो बहुत बड़ा हो गया है क्या रोहित का
संध्या- अरे जब आप देखेगी तो कहेगी ऐसा लंड आज तक आपने नही देखा होगा,
मंजू- संध्या की चुचियो को थोड़ा ज़ोर से दबाती हुई क्यो तुझे मज़ा नही आता क्या उसके लंड से
संध्या- नही वो बात नही है मज़ा तो बहुत आता है ऐसा लगता है रात भर करते रहे, फिर संध्या अपनी सास के दूध के निप्पल को सहलाती हुई उसके गालो को चूम कर, एक बात कहु मम्मी
मंजू-क्या
संध्या- उन्हे आप बहुत अच्छी लगती हो कभी-कभी तो मुझे चोद्ते हुए मेरे गालो को काटने लगते है और कहते है मम्मी तुम कितनी मस्त हो
मंजू- अपनी आँखे बंद कर लेती है और अपनी जाँघो को थोड़ा सा फैला देती है और संध्या का हाथ पकड़ कर अपनी साडी के उपर से फूली हुई गुदाज चूत पर दबाने लगती है, संध्या उसका इशारा समझ कर उसकी फूली हुई चूत को दबा-दबा कर सहलाने लगती है,
मंजू- आह बेटी तू नही जानती मैं तुझसे कितना प्यार करती हू, मुझे तो संगीता से भी
ज़्यादा तेरा मोह हो गया है
संध्या समझ गई कि अब उसकी सास पूरी मस्ती मे आ चुकी है,
संध्या- पर मम्मी आपका बेटा तो मुझसे भी ज़्यादा आपको प्यार करता है,
मंजू- नही रे पगली वह तुझे बहुत चाहता है अब मैं उसकी मम्मी हू तो प्यार तो करेगा ही,
संध्या- अपनी सास की चूत की फांको को खोलने की कोशिश करती है और मंजू अपनी जंघे और खोल लेती है, मम्मी मुझे तो कही-कही लगता है कि आपका बेटा आपको ही चोदना चाहता है,
मंजू- संध्या के दूध को कस कर दबाते हुए उसे चूम कर क्या रोहित ने तुझसे ऐसा कहा है कि वह मुझे चोदना चाहता है,
संध्या- वह तो जब भी मुझे चोद्ते है यही कहते है कि मैं अपनी मम्मी को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदना चाहता हू,
मंजू- क्या वह बहुत अच्छे से तेरी चूत मारता है
संध्या- खूब रगड़-रगड़ कर उपर से ओह मम्मी ओह मम्मी की आवाज़ अलग निकालते है, जैसे वह मुझे नही आपको चोद रहे हो, और फिर संध्या जैसे ही सोचती है कि सासू मा की साडी के अंदर हाथ डाले तभी बुआ और संगीता आ जाती है और मंजू और संध्या सीधी होकर बैठ जाती है,
मंजू- संध्या की ओर इशारा करती हुई बेटी इस बारे मे हम दोनो अकेले मे बात करेगे
संध्या- बिल्कुल मम्मी आप जब कहोगी मैं आ जाउन्गि और फिर संध्या किचन की ओर चल देती है,
उधर दोनो मामा भांजा पान की दुकान पर खड़े-खड़े आती जाती औरतो की मटकती गंद और मोटे-मोटे चुचो को देख कर एक दूसरे की ओर इशारा कर रहे थे,
मामा- यार रोहित उस औरत की कमर और गंद देख बिल्कुल तेरी बीबी संध्या जैसी लग रही है,
रोहित- सच कहा मामा अगर वह नंगी हो जाए तो बिल्कुल संध्या जैसी नज़र आएगी,
मामा- संध्या को तो तू दिन रात चोद्ता होगा ना बड़ी मस्त चूत होगी उसकी
रोहित – मामा जी इतना तड़प रहे हो तो आज दिखा दू क्या आपको संध्या की चूत, सूंघते ही पानी छ्चोड़ दोगे
मामा- अरे वो तो ठीक है पर उस लाल साडी वाली औरत को देख और बता किसके जैसी लग रही है
रोहित- मामा वह तो पूरी मम्मी जैसी लग रही है, उसकी मोटी गंद देखो बिल्कुल मम्मी की गंद की तरह मटक रही है,
मामा- भान्जे तेरी मम्मी का भोसड़ा बड़ा ही मस्त है और मुझे ताज्जुब है कि तूने अभी तक अपनी मम्मी को नही चोदा है, मैं तेरी जगह होता तो रोज रात को उसकी चूत मारता,
रोहित- अपने लंड को मसल्ते हुए अरे मामा उस रंडी पर तो मेरी कब से नज़र है बस एक बार अच्छा सा मोका लग जाए फिर देखना सारी रात उसकी चूत और गंद रगड़-रगड़ कर चोदुन्गा,
मामा- अरे बेटे तेरी मम्मी जब मुतती है तो सबसे ज़्यादा आवाज़ आती है मैं तो उसके मूतने की आवाज़ सुन कर ही पागल हो जाता हू, पर रोहित कल रात संगीता को चोदने मे बड़ा मज़ा आया बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिपकती है साली
रोहित- संगीता के दूध बहुत कसे हुए है और उसकी चूत तो इतनी मस्त और कसी हुई है सच मामा बहुत टाइट लंड गया था उसकी चूत मे,
मामा- आश्चर्या से रोहित को देख कर तो क्या तू उसे चोद चुका है
रोहित- हाँ
मामा- लो गई भैस पानी मे मैं तो सोच रहा था कि उसकी सील मैने ही तोड़ी है,
रोहित- अच्छा मामा मम्मी ने अपना ओप्रेशन करवा रखा है या नही
मामा- हस्ते हुए क्यो तू अपनी मम्मी को चोद कर वापस मा बनाना चाहता है क्या
रोहित- हाय मामा अपनी मम्मी का उठा हुआ पेट देख कर दिल करता है कि उसे चोद-चोद कर फिर से गर्भवती कर दू, साली बहुत भरे बदन की है बहुत मोटी गंद है उसकी
मामा- चल अब ज़्यादा अपनी मम्मी के बारे मे मत सोच नही तो यही पानी निकाल देगा चल अब घर चले और फिर दोनो घर की ओर चल देते है,
संध्या- मम्मी जी मैं और रोहित आज अपने पापा के घर होकर आ जाए क्या,
मंजू- ठीक है लेकिन कल लॉट आओगे ना
संध्या- जी बिल्कुल
रोहित जब घर आता है तो संध्या उसे लेकर अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए चल देती है रोहित अपनी बाइक पर संध्या से बाते करता हुआ चला जा रहा था,
रोहित-संध्या आज रात तुम किसके साथ बीताओगी मेरे साथ या अपने पापा के साथ
संध्या- मुस्कुराते हुए फिकर मत करो जैसा तुम्हे अच्छा लगे वैसा कर लेना पर मुझे नही लगता जब तुम मेरी मम्मी को देख लोगे तो फिर मेरे साथ सोने की इच्छा रहेगी या नही
फिर संध्या रोहित के लंड पर हाथ लेजा कर सहलाती हुई पापा को फोन करके बता देती हू कि हम आ रहे है वह बहुत खुस हो जाएगे,
संध्या जब अपने पापा को फोन करके बता देती है तब उसके पापा उसकी मम्मी के पास जाते है, उसकी मम्मी ममता का बदन बहुत हेवी और भरा हुआ था उसके दूध बहुत मोटे उसकी जंघे और गंद बहुत भारी थी उसे देख कर कोई भी बस उसकी गंद ही मारना चाहे,
मेहता- अरे सुनती हो संध्या और रोहित आ रहे है बस 1-2 घंटे मे पहुच जाएगे,
ममता- सच कह रहे हो और फिर ममता कहती है मैं तैयार हो जाती हू नही तो रोहित मुझे देख कर क्या सोचेगा कि उसकी मम्मी जी कैसी गंदी दिख रही है,
मेहता-क्या बात है बड़ा खुस हो रही हो, मैं जानता हू तुमने जब पहली बार रोहित को देखा था तभी से तुम्हे वह बहुत अच्छा लगता था,
ममता-मूह बनाते हुए मेहता के पास आती है और मेहता की लूँगी के उपर से उसका मोटा लंड जो की पूरी तरह तना हुआ था उसको अपनी मुट्ठी मे भर कर कस कर मसल्ते हुए, मुझे कहते हो और खुद का लंड तो देखो अपनी बेटी का नाम सुनते ही यह खड़ा हो गया, लगता है आज सारी रात उसे पूरी नंगी करके चोदोगे,
मेहता- अपनी पत्नी के मोटे-मोटे दूध को दबाता हुआ अपना एक हाथ ममता की साडी के अंदर डाल कर उसकी चूत मे सीधे उंगली डाल कर बाहर निकाल कर दिखाते हुए, देखो तुम्हारी चूत रोहित के लंड की कल्पना मे कितना पानी छ्चोड़ रही है,
मेहता अपनी बीबी के होंठ चूमते हुए ओह बेटी संध्या एक बार अपने पापा को अपनी रसीली जीभ चुसाओ ना
ममता- अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेहता को दिखाती है और मेहता उसकी जीभ को अपने मूह मे भर कर चूस्ते हुए उसकी चूत दबाने लगता है,
ममता- सीस्यते हुए मनोज आज मैं रोहित से रात भर चुदना चाहती हू
मेहता- आज मैं भी अपनी बेटी संध्या को पूरी नंगी करके रात भर चोदना चाहता हू,
ममता- मेहता का लंड पकड़ कर दबाते हुए सच मनोज आज तुम्हे अपनी बेटी संध्या को चोदने मे मज़ा आ जाएगा जब तुम उसे नंगी करके देखोगे ना तो मस्त हो जाओगे,
मेहता- क्या उसमे बहुत चेंजस आ गया होगा
ममता- अरे तुमने जब देखा था तब तो वह कुँवारी थी अब शादी के बाद उसका बदन पूरा भर गया होगा और पूरी औरत बन चुकी होगी अपनी बेटी का भरा हुआ मसल नंगा बदन देख कर तुम्हारा मस्त लंड पागल हो जाएगा,
मेहता- डार्लिंग चलो आज थोड़ा मूड बना लेते है फिर वो लोग आते ही होंगे
ममता- लेकिन रोहित के आने के बाद पीते तो ज़्यादा अच्छा रहता,
मेहता- अरे फिकर क्यो करती हो वह आ जाएगा तब और पी लेंगे, उसके बाद मेहता अपनी बीबी ममता के साथ मस्त ठंडी बियर का मज़ा लेते हुए उसके रसीले होंठो को चूसने लगा ओए ममता अपने पति के लंड पर बियर की ठंडी-ठंडी बोतल लगाते हुए बियर पीने लगी, कभी-कभी वह थोड़ी बियर मेहता के लंड के टोपे पर डाल कर फिर उसका लंड चूसने लगती है,
संध्या- रोहित आज तो बहुत गर्मी है चलो कोल्ड्ड्रिंक पीते है रोहित अपनी बाइक साइड से लगा कर पहले पान की दुकान से सिगरेट लेता है उसके बाद वह जैसे ही पलट कर देखता है उसे बियर की दुकान नज़र आ जाती है वह संध्या के पास आता है और डार्लिंग बियर पियोगी क्या,
संध्या-यहा कहाँ पिएगे,
रोहित- दो बोतल ले लेते है बाइक पर चलते हुए मार लेंगे,
संध्या-ठीक है ले लो मज़ा आ जाएगा
संध्या और रोहित मस्त बियर पीकर जैसे ही संध्या के घर पहुचते है संध्या के मम्मी और पापा बाहर आ जाते है,
मेहता जब संध्या को साडी और ब्लौज मे देखता है तो उसकी नज़र सबसे पहले अपनी बेटी के भरे हुए मोटे-मोटे चुचो पर जाती है ब्लौज के उपर से ही संध्या के चुचे बहुत मोटे और ठोस नज़र आ रहे थे फिर जब मेहता ने अपनी बेटी के नंगे पेट पर नज़र डाली तो उसका लंड एक दम से लूँगी मे तन कर खड़ा हो चुका था,
संध्या के गुदाज उठे हुए पेट और उसकी गहरी नाभि देख कर मेहता ने उसको सीधे अपने सीने से दबा लिया और पागलो की तरह उसके होंठ और गालो को चूमने लगा और बियर के नशे मे उसे उसकी बेटी का गुदाज बदन इस कदर उत्तेजित कर गया कि वह अपनी बेटी के मोटे-मोटे दूध को ब्लौज के उपर से ही कस कर मसल्ते हुए उसके होंठो को चूसने लगा,
संध्या भी बियर पीकर एक दम मस्त घोड़ी की तरह अपने बाप के लंड पर झूम पड़ती है और उनका लंड लूँगी के उपर से पकड़ कर अपने जिस्म का भार अपने पापा पर डालते हुए ओह पापा आप कितने अच्छे है तभी मेहता संध्या के भारी चुतडो का जयजा लेता है और जब अपनी बेटी की कसे हुई भारी गंद को अपने हाथो से सहलाता है तो उसका लंड फंफना उठता है,
उधर रोहित जब अपनी गोल मटोल चिकनी सास को देखता हुआ उनके पास जाता है तभी ममता रोहित को सीधे अपने मोटे-मोटे दूध से दबा लेती है, अपनी सास के बदन से उठती भीनी खुश्बू रोहित को मस्त कर देती है और वह अपनी सास की मोटी गंद को अपने लंड की ओर दबाते हुए ओह मम्मी कितने दिनो बाद आपको गले लगा रहा हू और फिर रोहित अपनी सास के होंठो को अपने मूह मे भर कर चूसने लगता है,
कुछ देर चारो लोग एक दूसरे को चूमते सहलाते है फिर घर के अंदर आकर सोफे पर बैठ जाते है,
ममता-आप दोनो बैठो मैं और संध्या चेंज करके आते है,
मेहता- लो रोहित तुम्हारे आने की खुशी मे हमने पहले से ही बियर का बंदोबस्त कर लिया था,
रोहित-पापा जी मैं तो पहले ही जानता था आप हमारा स्वागत कुछ इस तरह से ही करेगे, दोनो ससुर दामाद बियर पी कर मस्त हो रहे थे और नशा पूरे शबाब पर था तभी तभी संध्या आकर अपने पापा की गोद मे बैठ जाती है वह केवल एक छ्होटा सा गाउन पहने हुए थी जिससे उसकी मोटी गुदाज जंघे भी साफ नज़र आ रही थी, उधर ममता भी एक वाइट कलर का गाउन पहन कर अपने जवाई के पास आकर बैठ जाती है दोनो रंडियो ने ब्रा और पॅंटी पहले ही निकाल दी थी,
मेहता-बेटी तेरा बदन तो बहुत गदरा गया है और फिर उसके पतले से गाउन के उपर से अपनी बेटी की मोटी गंद को दबाते हुए, बेटी तेरी गंद भी पहले से बहुत मोटी हो गई है
संध्या- अपने पापा के लंड को दबाती हुई पापा क्या करू रोहित का मस्त लंड रोज आपकी बेटी की चूत मारता है मुझे सारी रात नंगी ही रखता है और खूब जम कर आपकी बेटी को चोद्ता है,
मेहता-संध्या के गाउन को उतार कर उसे पूरी नंगी करके अपनी गोद मे बैठा लेता है और उसका उभरा हुआ पेट सहलाते हुए, बेटी तेरा पेट कितना उठा हुआ और मस्त है, तेरी चूत मार-मार के रोहित ने तेरा पेट उठा दिया है कही रोहित का बच्चा तो नही है तेरे पेट मे
संध्या- नही पापा आपकी बेटी ने तो अभी तक अच्छे से अपनी चूत ही नही मरवाई और आप अपनी बेटी की चूत फाड़ने का सपना देख रहे है अगर बच्चा पेदा कर लिया तो मेरी चूत भी मम्मी की तरह पूरी फट जाएगी,
मेहता- अपनी बेटी की फूली हुई चूत से मूह लगाते हुए, बेटी तेरी चूत फट भी जाएगी तो तेरे पापा उसे खूब चुसेगे उसे खूब प्यार करेगे, अच्छा यह बता क्या रोहित के पापा भी तुझे चोद्ते है,
संध्या- अरे पापा मैं तो कब से उनका लंड लेना चाहती हू पर अभी तक मोका ही नही लगा
उधर ममता अपने जवाई से कहती है बेटा तुम्हे अपनी मम्मी की ज़रा भी याद नही आती थी
रोहित -अपने हाथो से सासू मा को बियर पिलाते हुए थोड़ी बियर उसके मोटे-मोटे दूध पर गिरा कर उसका गाउन उसके दूध से हटा कर एक दम से ममता के निप्पल अपने मूह मे भर कर चूसने लगता है और ममता रोहित के लंड को प्यार करने लगती है,
तभी रोहित जब अपनी
सास को पूरी नंगी करके उसकी भारी भरकम गंद देखता है तो वह सोफे पर अपनी सास को झुका कर उसकी गंद को चाटने लगता है,
रोहित-मम्मी जी आपकी गंद तो बहुत गजब की है इसे चाटने मे बड़ा मज़ा आ रहा है तभी मेहता कहता है रोहित बेटे अपनी मम्मी की गंद के साथ उसकी फूली हुई चूत की फांको को थोड़ा खोल कर उसकी चूत का रस चॅटो तुम्हारी मम्मी बहुत पानी छ्चोड़ती है,
संध्या- पापा आपने मम्मी की गंद मार-मार कर बहुत मोटी कर दी है
मेहता- संध्या की गंद मे अपनी उंगली भर कर कस कर दबाते हुए, बेटी मैं तेरी भी गंद ऐसी ही मोटी कर दूँगा,
संध्या- पापा मेरा पेट भी मम्मी जैसा और उभर जाए तो मज़ा आ जाएगा जब भी मम्मी बाजार जाती है तो कई लोग उनके उभरे हुए पेट और नाभि और उनकी गदराई गंद को देख कर अपना लंड खूब मसल्ते है,
मेहता- तो तू क्या चाहती है लेग तेरी गंद और पेट देख कर अपना लंड मसले
संध्या- पापा मैं चाहती हू कि जब मेरा बेटा पेदा हो तो वह बड़ा होकर जब मुझे देखे तो मेरी गंद और पेट देख कर ही उसका लंड खड़ा हो जाए
मेहता- चिंता मत कर बेटी तू इतनी सुंदर है कि तेरा बेटा भी तुझे अपने लंड पर बैठा-बैठा कर तेरी चूत मारेगा, देखना तुझे तो रात-रात भर नंगी करके चोदेगा,
ममता- चलो अब हम लोग बिस्तेर मे चल कर आराम करते है और फिर क्या था मेहता ने अपनी नंगी बेटी को अपनी गोद मे उठा लिया और उसकी गंद और चूत का साइज़ देख कर रोहित ने भी अपनी सास को अपनी बाँहो का सहारा देते हुए बिस्तेर पर आ गये अब बीच मे दोनो रंडियो को लिटा कर रोहित और मेहता आजू बाजू से उन दोनो को दबोच लेटे है और फिर मेहता और रोहित कभी उनकी गंद को दबाते है कभी उनके दूध को दबाते है,
तभी संध्या और ममता एक दूसरे से पूरी तरह चिपक जाती है और मेहता सीधे संध्या की मोटी गंद से चिपक कर अपना लंड पिछे से अपनी बेटी की चूत मे पेल देता है, तभी रोहित अपने मूह से थूक निकाल कर अपने लंड पर लगाता है और अपनी सास की गंद मे अपने लंड को लगा कर अपने दोनो हाथो से सासू मा की गंद को फैला कर एक कस कर शॉट मारता है और उसका आधा से ज़्यादा लंड उसकी मम्मी जी की चूत मे उतर जाता है ,
ममता हाय मैं मर गई संध्या और फिर ममता संध्या से कस कर चिपक जाती है और अपनी बेटी के दूध को पीने लगती है उधर मेहता अपनी बेटी की चूत मे अपने लंड को गहराई तक ठुसे हुए उसके दूध दबाते हुए उसे चोदने लगता है, रोहित अपनी सासू के होंठ चूसने लगता है तभी सासू मा अपनी जीभ निकाल कर रोहित के मूह मे दे देती है और रोहित अपनी मम्मी की जीभ को चूस्ते हुए उसकी गंद मारने लगता है,
तभी मेहता को जोश आता है और वह अपनी बेटी संध्या की पूरी गंद के उपर चढ़ कर खूब कस-कस कर उसकी चूत ठोकने लगता है और कमरे मे ठप-ठप की आवाज़ आने लगती है, संध्या ओ पाप ओ पापा आह आह हाँ और तेज खूब कस कर चोदो पापा आज फाड़ तो अपनी बेटी की चूत, और चोदो पापा और कस कर चोदो बहुत मज़ा आ रहा है सी आह आह ,
उधर रोहित भी सासू मा की गंद मे अपने लंड को फसाए उसकी चूत मे भी तीन उंगली डाल कर उसकी गंद कूटने लगता है और ममता आह आह ओह ओह बेटे सबाश बेटे और तेज फक मी बेटे खूब कस कर चोद बेटे अपनी मम्मी को खूब हचक -हचक कर चोद बेटे आज फाड़ दे अपनी मम्मी की गंद आह आह करती हुई कराहने लगती है,
तभी संध्या का पानी छूट जाता है और मेहता अपने मूह को अपनी बेटी की चूत से लगा देता है वह अपनी बेटी की फूली हुई चूत की फांको को थोड़ा फैला कर अपनी जीभ से उसके भज्नाशे को रगड़ने लगता है और संध्या धीरे-धीरे अपने पापा के मूह से अपनी फटी चूत रगड़ने लगती है, उधर रोहित सासू मा को घोड़ी बना कर अपनी दो उंगलिया मम्मी जी की गंद मे डालके दबाते हुए उनकी पाव रोटी की तरह उठी हुई चूत को चाटने लगता है,
दोनो रंडियो की आह आह पूरे कमरे मई गूँज रही थी और दोनो ससुर जवाई अपनी बेटी और सास को बड़े प्यार से सहलाते हुए उनकी चूत पी रहे थे, कुच्छ देर बाद पापा जी ने संध्या को नंगी ही अपनी गोद मे उठा कर उसको डाच से अपने लंड पर बैठा लिया और उसकी मोटी गंद को अपने हाथो से थाम कर उसके दूध के निप्पल को चूस्ते हुए उसे चोदने लगे,
वह जितना तेज धक्का अपनी बेटी की चूत मे मारते संध्या उतनी ही तेज़ी से अपने पापा के लंड पर बैठ जाती और आह पापा आह और तेज खूब कस कर चोदो पापा और फिर संध्या अपना हाथ नीचे लेजकर अपने पापा के बॉल्स को पकड़ कर मसल्ने लगी और मेहता बिल्कुल मस्ती मे आकर अपनी बेटी को चोदने लगा,
इधर रोहित ने मम्मी जी की गंद मार-मार कर लाल कर दी मम्मी जी की गुदा से जब रोहित ने लंड बाहर निकाला तो उनकी गुदा बार-बार सिकुड और फैल रही थी रोहित ने मम्मी जी की गंद और भोसड़ा दोनो को चूस्ते हुए उनके चूतादो को अपने हाथो से खूब दबोच रहा था और अपनी जीभ को उनके छेद मे डाल कर सहला रहा था,
रोहित ने मम्मी जी की गंद मे ही अपना पानी छ्चोड़ा और पापा जी ने अपनी बेटी की चूत को अपने वीर्य से भर दिया, दोनो रंडिया पूरी मुस्ती मे नंगी ही बिस्तेर पर एक दूसरे से चिपक कर सो गई,
कुच्छ देर बियर की मस्ती मे सभी लेटे रहे, कुछ देर बाद संध्या उठी और तीनो को सोया देख फ्रेश होकर बैठक रूम मे टीवी ऑन करके बैठ गई लगभग 10 मिनिट बाद मेहता भी आ कर संध्या के पास बैठ गये,
संध्या ने मुस्कुराते हुए अपने पापा को गुड मॉर्निंग कहा,
दोनो टीवी देख रहे थे और बीच-बीच मे मेहता अपनी बेटी की गाउन मे क़ैद मस्त उठी हुई चुचियो को भी किसी भूखे भेड़िए की तरह देख रहा था, मेहता अब संध्या के गुदाज बदन को च्छू लेना चाहता था उसके पारदर्शी गाउन से उसकी ब्रा और पॅंटी साफ नज़र आ रहे थे उसकी जाँघो का भराव उसकी गंद का उठाव, हर एक अंग उसकी बेटी का साँचे मे ढला था, उपर से वह चुदी चुदाई औरत बन के उसे चोदने को मिल रही थी मेहता का लंड पूरी तरह तन चुका था,
मेहता- संध्या बेटी चलो थोड़ी-थोड़ी बियर और चखि जाय
संध्या-अपने पापा के गले मे हाथ डाल कर, पापा मेरी तो अभी पहले वाली ही नही उतरी है,
मेहता- अरे इसी लिए तो कह रहा हू बेटी उतरा लेना पड़ता है नही तो बहुत समय तक प्राब्लम रहती है,
संध्या- तो ठीक है चलो ले लेते है और फिर मेहता ने दो ग्लास बियर भर कर एक गेलस संध्या के हाथो मे पकड़ा कर दूसरा अपने हाथ से अपने होंठो पे लगा लेते है और फिर संध्या और मेहता दो-दो ग्लास और लेते है और फिर संध्या सोफे से खड़ी होकर अपने पापा को मुस्कुरा कर देखती है और कहती है पापा आज गर्मी कुच्छ ज़्यादा है ना और फिर अपना गाउन उतार देती है, अब संध्या सिर्फ़ पिंक कलर की पॅंटी और ब्रा मे थी,
मेहता का लंड अपनी बेटी की ऐसी गदराई जवानी को देख कर झटके मारने लगता है और मेहता के मन मे आता है कि मेहता वाकई तेरी बेटी तो तबीयत से ठोकने लायक है, इसको तो रात भर नंगी रख कर इसे चोदना चाहिए,
मेहता धीर-धीर संध्या की ओर बढ़ने लगा तभी संध्या ने आगे आकर मेहता को पकड़ कर सोफे पर बैठा दिया और खुद भी उसके बगल मे बैठ गई, मेहता ने संध्या को अपनी गोद मे उठा कर बैठा लिया और वो पहले उसके मोटे-मोटे खरबूजो को दबा कर उसके गालो और होंठो को चूमने लगे, मेहता जब संध्या के दोनो ठोस उभारो को अपने हाथो मे भर कर दबोच रहा था तब संध्या अपने हाथो को मेहता के दोनो हाथो पर रखे हुए सीसीया रही थी,
मेहता सीधे संध्या के दूध को मसल-मसल कर लाल कर रहा था
उधर मम्मी जी और रोहित की नींद एक साथ खुली और मम्मी जी जैसे ही बाथरूम मे जाकर मुतने बैठी रोहित ने पिछे से जाकर मम्मी जी के भारी चूतादो के बीच से हाथ डाल कर उनकी चूत को पकड़ लिया, मम्मी जी एक दम से सन्न रह गई लेकिन जब उन्हे रोहित के होने का एहसास हुआ तब कुछ नॉर्मल हुई, उन्होने कहा बेटा मूत तो लेने दो फिर आराम से कर लेना,
रोहित – मम्मी जी आप मुतो ना मैने तो बस अपना हाथ लगा रखा है मैं तो बस आप मुतती जाना और मैं आपकी चूत को सहलाता जाउन्गा बस,
मम्मी- सी अया बेटे ऐसे पेशाब नही आएगा पानी आएगा,
रोहित- मम्मी कोशिश करो तब तक मैं आपके इस लहसुन को रगड़ता हू,
मम्मी जी मूतने की कोशिश करने लगी और फिर एकदम से उन्होने एक तेज धार मारना शुरू कर दी और फिर क्या था वह रुक-रुक कर मूतने लगी और रोहित उनकी चूत को सहलाता रहा, मूतने के बाद मम्मी जी ने साडी नीचे की और बिस्तेर पर आ गई, रोहित मम्मी जी की मोटी गंद को सहलाते हुए उनकी साडी पूरी कमर तक करके उनकी चूत को फैला लेता है चूत से मूत की गंध सूंघते ही रोहित मम्मी जी की चूत को पागलो की तरह चाटने लगता है
और मम्मी जी आह बेटे आह रोहित करते हुए उसका सर सहलाने लगती है, मम्मी जी की चूत फूल के कुप्पा हो जाती है और उनकी गुलाबी सूजी हुई चूत की फांको को फैला-फैला कर रोहित चूसने लगता है, कभी वह बुर के दाने को चूस्ता है कभी चूत के गुलाबी छेद को चाट्ता है, उसके बाद रोहित अपना लंड गछ से मम्मी जी की चूत मे पेल देता है और मम्मी जी आह आह करते हुए अपनी गंद हिलाने लगती है,
इधर रोहित मम्मी जी की चूत की मस्त ठुकाई कर रहा था और उधर संध्या अपने पापा के मस्त लंड पर कूदने लगी थी, मेहता ने संध्या को खड़े होकर अपने लंड पर टांग लिया था और खूब कस-कस के अपनी बेटी की चूत मार रहा था, उस पूरा दिन मेहता ने अपनी बेटी की मस्त ठुकाई की और रोहित ने भी अपनी मम्मी जी की चूत मार-मार कर एक दम लाल कर देता है, रात को मेहता एक बार अपनी बीबी को चोद्ता है
और रोहित संध्या को उसके बाद रोहित और सासू जी एक साथ सोते है और संध्या अपने पापा के पास पूरी नंगी होकर सोने चली जाती है, रात भर संध्या की चूत उसके पापा मस्त तरीके से ठोकते है उधर रोहित भी अपनी सास की खूब तबीयत से चुदाई करता है,
अगले दिन रोहित और संध्या वहाँ से विदा लेकर अपने घर की ओर चल देते है जब घर पहुचते है तो पता चला बुआ जी सुबह ही अपने घर चली गई उनके यहाँ कुच्छ ज़रूरी काम निकल आया था
संध्या और रोहित घर पहुचते है और सामने से मंजू आ जाती है,
मंजू- मुस्कुराते हुए घूम आए दोनो, क्या बात है संध्या बहुत खुस नज़र आ रही है लगता है बहुत दिनो बाद अपने पापा से मिली है,
संध्या- मम्मी मज़ा तो बहुत आया पर रोहित को शायद मज़ा नही आया, क्यो रोहित
रोहित- नही मम्मी बहुत मज़ा आया पर आप कहाँ बन ठन के जा रही है,
मंजू- मैं तो कही नही जा रही हू बस आज नई साडी पहन कर सजने का मन किया तो पहन ली
संध्या- मम्मी कुछ भी कहो आज आप बहुत सुंदर लग रही है,
मंजू- अच्छा अब तारीफ बंद करो और रोहित देख तेरा मामा तेरा कब से इंतजार कर रहा है मेरे कमरे मे बैठा है,
संध्या- मम्मी पापा कहाँ गये है और संगीता भी नही नज़र आ रही है,
मंजू- बहू संगीता और तेरे पापा छत पर बैठे है तू जा कर कपड़े बदल ले मैं अभी पड़ोसी के यहाँ से आती हू,
मम्मी की बात सुन कर संध्या दबे पाँव छत की ओर चल दी और जब छत पर पहुच कर देखा तो पापा कुर्सी पर बैठे थे और संगीता को अपनी गोद मे बैठा कर उसकी मस्त ठोस चुचियो को मसल रहे थे, संध्या ने जानबूझ कर घुघाट कर लिया और अपने ब्लौज के दो बटन खोल कर सीधे पापा के सामने चली गई और उनके पेर च्छू लिए,
मनोहर- अरे संध्या तू कब आ गई बेटी
संगीता- वाह भाभी बड़े टाइम पर आई हो पापा अभी तुम्हारी ही बाते कर रहे थे,
मनोहर- संगीता जा हम तीनो के लिए चाइ बना ला यही बैठ कर चाइ पीते है तब तक मैं संध्या बेटी से कुछ बाते करना चाहता हू
संगीता- ठीक है पापा मैं अभी आती हू और संगीता वहाँ से नीचे चली जाती है,
मनोहर- संध्या का हाथ पकड़ अपने करीब खीच लेता है और उसे अपनी गोद मे बैठा कर उसके मोटे-मोटे दूध को सहलाते हुए, बहू तुम एक दिन के लिए क्या जाती हो तुम्हारे बिना मन ही नही लगता है,
संध्या- पापा मेरी भी तो यही हालत है मुझे भी आपकी बहुत याद सता रही थी,
मनोहर- अपने पापा से मिली, मेहता तो बहुत खुस हो गया होगा तुझे देख कर, तूने बताया नही उसे कि हम भी अपनी बहू को अपनी पॅल्को पर बैठा कर रखते है,
संध्या- हस्ते हुए पापा मैने यह नही कहा कि आप मुझे अपनी पॅल्को पर बैठा कर रखते है बल्कि मैने तो यह कहा कि आप तो हमे अपने …..
मनोहर- संध्या के दूध दबाता हुआ, बोलो- बोलो बहू तुमने क्या कहा अपने पापा से
संध्या- मनोहर के मोटे लंड को उसकी लूँगी से बाहर निकाल कर उसके सूपदे को खोलती हुई पापा हमने तो अपने पापा से यही कहा है कि मेरे ससुर तो मुझे दिन रात अपने मोटे लंड पर बैठाए रहते है,
मनोहर- संध्या के गालो को चूमता हुआ उसकी नाभि से नीचे हाथ लेजा कर उसकी साडी के अंदर हाथ डाल कर अपनी बहू की मस्त गुदाज चूत को अपने हाथो मे भर कर, बेटी फिर तुम्हारे पापा ने क्या कहा
संध्या- पापा ने कहा कि ऐसे ही अपने ससुर जी की सेवा करती रहना आज उन्ही के कारण तुम्हारी जिंदगी खुशहाल है
मनोहर- नही बेटी इसमे मेरा कोई हाथ नही है सब अपनी किस्मत का खाते है,
संध्या- नही पापा आपका वह एहसान कभी नही भुलाया जा सकता है, अगर आप मुझे नही बचाते तो मैं आज शायद जिंदा ही ना होती,
मनोहर- चलो छ्चोड़ो इन पुरानी बातो को और फिर मनोहर ने संध्या को सीधा करके उसकी साडी को उसकी मोटी गंद तक उठा दी और उसकी फूली हुई चूत जो उसकी पॅंटी मे कसी हुई थी को अपने मूह से दबा-दबा कर चूमने लगा और अपने दोनो हाथो से अपनी बहू के भारी चुतडो को सहलाने लगा,
संध्या- आह पापा आपकी इसी हरकत ने तो मेरी चूत मे पानी भरना शुरू कर दिया था तभी तो पहली मुलाकात मे ही आपका मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ चुका था, पापा सच आपसे अपनी चूत मराने मे बहुत मज़ा आता है,
तभी संगीता दूसरी ओर से आते हुए, लीजिए गरमा-गरम चाइ का आनंद लीजिए और फिर संध्या और पापा दोनो को चाइ देकर संगीता भी वही बैठ कर चाइ पीने लगी,
संगीता- भाभी पापा तुम्हे कल से ही याद कर रहे थे कह रहे थे संध्या के बिना घर मे अच्छा नही लगता है, पापा अगर भाभी आपकी बहू ना होती बल्कि बेटी होती तब,
मनोहर- हस्ते हुए तब तू मेरी बहू होती और क्या,
संध्या- अरे संगीता पापा अपनी बहू और बेटी मे अंतर नही समझते है,
संगीता- अच्छा अभी पता चल जाएगा, अच्छा पापा बताओ भाभी ज़्यादा सुंदर है या मैं
पापा- बेटी औरतो की सुंदरता देखने के लिए उन्हे पूरी नंगी होना पड़ता है तभी तो मैं बता सकता हू कि कौन ज़्यादा सुंदर है,
संगीता- तो ठीक है और फिर संगीता जाकर छत का दरवाजा लगा कर आ जाती है और फिर अपने पापा के सामने अपनी स्कर्ट और शर्ट उतार कर ब्रा और पॅंटी मे पापा के पास खड़ी होकर उनका लंड सहलाते हुए देखो पापा अब मैं कैसी लग रही हू,
मनोहर- मुस्कुराते हुए संगीता की मोटी गंद को अपने हाथो से दबाते हुए बेटी अभी तेरी भाभी ने कहाँ कपड़े उतारे है तब संगीता ने झट से मेरी साडी को पकड़ कर खींच दिया और मैं एक बार गोल घूम गई और अब मैं ब्लॉज और पेटिकोट मे अपने ससुर के सामने खड़ी थी मेरी कसी हुई मोटी चुचिया ब्लौज फाड़ कर बाहर आने को मचल रही थी चूत तो पहले से ही गीली हो गई थी तभी संगीता ने मेरे पेटिकोट का नाडा भी खींच दिया और मेरा पेटिकोट देखते-देखते मेरे पेरो मे जा गिरा और मेरा गुदाज उठा हुआ पेट गहरी नाभि और मेरी पॅंटी के उपर से उभरी हुई चूत देख कर मेरे ससुर जी की आँखो मे चमक आ गई, हालाकी संगीता का बदन भी बहुत भरा हुआ और सेक्सी था लेकिन मैं थोड़ा ज़्यादा चुदी हुई थी इसलिए मेरे बदन पर थोड़ी चर्बी चढ़ जाने से मैं बहुत ही गुदाज और मस्त नज़र आने लगी थी,
पापा ने मुझे और संगीता की गंद को थाम कर अपने मूह की तरफ खींचा और पहले संगीता की चूत को उसकी पॅंटी के उपर से चूम लिया और फिर मेरी चूत को भी पॅंटी के उपर से चूमने लगे पापा ने मेरी चूत से अपने मूह को कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से दबा दिया और मैं सिहर उठी,
संगीता- अब बोलिए पापा कौन ज़्यादा सुंदर है
मनोहर- मुस्कुराते हुए, बेटी अभी तो तुम दोनो ने कपड़े पहने हुए है तभी संगीता ने थोड़ी दूर जाकर अपनी भारी गंद हमारी तरफ घूमाकर अपनी पॅंटी धीरे से नीचे सरकाना शुरू कर दिया वह जैसे-जैसे अपनी पॅंटी नीचे सरक रही थी वैसे ही वह अपनी गंद के छेद को भी फैला कर हमे दिखा रही थी उसकी गुलाबी गंद का छेद बहुत लपलपा रहा था और मैं पापा के लंड को सहला रही थी और पापा मेरी चूत और गंद को बुरी तरह दबा-दबा कर मज़ा ले रहे थे,
संगीता ने अपनी पॅंटी पूरी उतार दी और फिर झुक कर अपनी गंद और चूत के छेद को फैला-फैला कर मुझे और पापा को दिखाने लगी, फिर संगीता ने अपनी ब्रा का हुक्क खोल कर अपने मोटे-मोटे दूध को भी नंगा कर दिया और अपने हाथो से अपने दूध को दबाते हुए कहने लगी चलो भाभी अब तुम्हारी बारी है आ जाओ जल्दी से और फिर मैने जब पापा की ओर देखा तो उन्होने खुद ही मेरी पॅंटी उतार दी और मेरे नंगे चूतादो की दरार को उंगली से सहलाते हुए मुझे उधर जाने के लिए धकेल दिया मैं उनकी मंशा समझ गई और संगीता की ओर अपनी मोटी गंद हिलाते हुए जाने लगी पापा मेरी मोटी गंद को देख कर मस्त होने लगे,
जब मैं संगीता के पास पहुच गई तब मैं सीधी होकर खड़ी हुई तब मेरी चिकनी फूली चूत पापा के सामने आ गई मैने धीरे से अपनी चूत को सहलाते हुए अपनी ब्रा का हुक्क खोल कर उसे उतार दिया और इसके साथ ही मेरे मोटे-मोटे दूध जो की संगीता से भी काफ़ी बड़े थे एक दम से बाहर आ गये,
मैं अच्छी तरह जानती थी कि पापा को मेरा जिस्म संगीता से भी ज़्यादा अच्छा लगता है लेकिन मैं और पापा संगीता के सामने ऐसी कोई बात नही करते थे कि उसका मन छ्होटा हो,
संगीता- अब बोलिए भी पापा अब तो हम दोनो पूरी नंगी हो गई और फिर संगीता ने एक बार घूम कर अपनी गंद अपने पापा को दिखाई और फिर मुझे भी पकड़ कर एक बार घुमा कर मेरे चूतादो को फैला कर पापा को दिखाया,
मनोहर- मुस्कुराते हुए, भाई तुम दोनो ही हुस्न की परी हो तुम दोनो ही बहुत खुब्शुरत हो बस एक ही अंतर है तुम दोनो मे,
संगीता- वह क्या
मनोहर- यही की जब मैं तुम्हे चोदने का मन करता हू तो तुम्हे आगे से चोदने का मन होता है और जब संध्या को चोदने का मन करता है तो संध्या को पिछे से चोदने का मन होता है,
संगीता- इसका मतलब आप यह कहना चाहते है कि आपको मेरी चूत बहुत पसंद है और भाभी की मोटी गंद बहुत पसंद है,
मनोहर- हाँ बस ऐसा ही समझ लो, फिर क्या था हम दोनो धीरे से पापा के पास जाकर उनसे चिपक गई और पापा कभी मेरी गंद को सहलाते कभी मेरी चूत मे उंगली डाल कर हिलाते और कभी संगीता की चूत को सहलाने लगते,
हम दोनो घुटने के बल वही बैठ गई और पापा का मोटा लंड निकाल कर चूसने लगी, कभी मैं पापा का टोपा चुस्ती तो संगीता उनके गोते चूसने लगती और कभी मैं उनके गोटे सहलाती तब संगीता उनके लंड के फूले हुए सूपदे को चूसना शुरू कर देती,
पापा भी बारी-बारी से कभी मेरे दूध दबाते और कभी संगीता के दूध को मासल्न लगते थे, कुछ देर बाद पापा कुर्सी से खड़े हो गये और उनका मोटा लंड आसमान की ओर सर उठा कर खड़ा हो गया पापा ने हम दोनो की गंद पर थपकीया मारते हुए हमे घोड़ी बना कर झुका दिया और फिर पापा ने मेरी गंद और चूत को पागलो की तरह फैला-फैला कर चाटना शुरू कर दिया मैं एक दम मस्ती मे मस्त होने लगी और अपनी गंद पापा के मूह पर मारने लगी,
तभी पापा ने संगीता की चूत को अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया, पापा संगीता की चूत चूस्ते हुए मेरी चूत मे तीन उंगलिया डाल कर आगे पिछे करने लगे उधर संगीता कुछ ज़्यादा ही रसीली हो रही थी और कह रही थी,
संगीता- ओह पापा चतो और चतो अपनी बेटी की चूत चाट-चाट कर लाल कर दो बहुत चुदासी बेटी है आपकी खूब चूसो आह आ आह आ
तभी पापा नीचे लेट गये और मेरी गंद को पकड़ कर अपने मूह पर रखने लगे और मैं अपनी दोनो जाँघो को खोल कर पापा के मूह के उपर अपनी चूत रख कर बैठ गई और पापा मेरी चूत को खूब फैला कर चाटने लगे, उधर संगीता पापा के लंड पर अपनी चूत रख कर धीरे-धीरे आँखे बंद करके बैठने लगी तभी पापा ने नीचे से एक कस कर धक्का संगीता की चूत मे मार दिया और संगीता आह करके धम से पापा के लंड पर बैठ गई और उसकी चूत मे पापा का पूरा लंड फस गया,
थोड़ी देर बाद मैं खड़ी हुई और अपना मूह संगीता की ओर करके वापस पापा के सीने पर बैठ गई पापा ने जैसे ही अपनी जीभ से मेरी मोटी गंद के छेद को सहलाया मैने संगीता के होंठो को अपने होंठो मे भर लिया संगीता भी मुझसे चिपक गई और मेरे मोटे-मोटे दूध को खूब कस-कस कर मसल्ने लगी मैने भी संगीता के दूध को खूब कस-कस कर निचोड़ा, पापा जितनी ज़ोर से मेरी गंद के सुराख मे अपनी जीभ रगड़ते मैं भी उतनी ही ज़ोर से संगीता के दूध को मसल्ने लगती,
उधर पापा अपनी कमर उठा-उठा कर संगीता की चूत जितनी ज़ोर से ठोकते संगीता उतना ही मुझसे चिपकने लगती,
मैने संगीता के निप्पल अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया और पापा ने मेरी चूत के छेद मे अपनी जीभ घुसा कर रस चूसने लगे, अब पापा बड़ी तेज़ी से संगीता को चोद रहे थे और संगीता भी खूब ज़ोर-ज़ोर से पापा के लंड पर कूद रही थी इधर जितनी तेज़ी से पापा संगीता की चूत मार रहे थे उतनी ही तेज़ी से मेरी चूत को भी चूस रहे थे,
संगीता- ओह पापा और तेज खूब कस कर मारिए और मारिए हाँ ऐसे ही खूब चोदिये आह आह आ
इधर मैं भी पापा के मूह से अपनी चूत रगड़ते हुए ओह पापा खूब ज़ोर से चातिए खूब चुसिये अपनी बहू की चूत ओह ओह आह आ सी सी आह,
कुछ देर बाद संगीता ने पानी छ्चोड़ दिया और उधर पापा ने मेरी चूत का पानी भी चूस-चूस कर झाड़ा दिया, संगीता तो लुढ़क कर हफने लगी पर शायद पापा का पानी नही च्छुटा था और वह खड़े हो गये मैं समझ गई पापा जब तक मुझे नही चोद लेते उनका पानी नही निकलेगा, मैं बिना कुछ कहे सीधे घोड़ी बन गई और फिर
पापा ने मेरी चूत को खूब कस-कस कर ठोकना शुरू कर दिया,
पापा चूत मारने मे एकदम माहिर थे उन्होने मेरी गंद को सहलाते हुए मुझे खूब हुमच-हुमच कर चोदना शुरू कर दिया और मैं किसी कुतिया की तरह अपनी गंद उठाए उनका तगड़ा लंड गपगाप अपनी रसीली चूत मे ले रही थी और सीसीया रही थी ओह पापा और चोदो खूब कस कर चोदो आज फाड़ दो अपनी बहू की चूत आह आह आह
ओह ओह ओह पापा मैं गई और फिर पापा ने एक जबार्दुस्त धक्का मेरी चूत मे ऐसा मारा कि उनका मोटा लंड मेरी बच्चेदनि से टकरा गया और मैं वही पेट के बल लेट गई और पापा मेरी चूत मे जड़ तक अपने लंड को फसाए मेरी गंद के उपर लेट गये और हफने लगे, जब हम दोनो कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे तब संगीता को मस्ती सूझी और वह पापा के उपर आ कर पेट के बल उनसे चिपक कर लेट गई,
कुछ देर बाद मैने जब हरकत की तब पापा ने संगीता को उठा कर खुद भी मेरे उपर से उठ गये और फिर हम तीनो ने जल्दी से कपड़े पहने और नीचे आ गये,
मामा- क्यो भाई रोहित खूब ससुराल के माल का मज़ा ले रहे हो हमे नही बताओगे क्या-क्या हुआ वहाँ
रोहित- अरे मामा बस ये समझ लो हमारे यहाँ ससुराल के जो मज़े है वह दुनिया मे कही नही है बस मस्ती ही मस्ती छाई रहती है,
मामा- यार रोहित एक बात कहु अगर तू बुरा ना माने तो
रोहित- कहो मामा क्या बात है
मामा- रोहित संगीता को चोदने का वैसा मज़ा नही आ पाया जैसा मैं चाहता था बिल्कुल आराम से सारी रात उसे नंगी करके चोदने मे ही ज़्यादा मज़ा आएगा,
रोहित- अरे मामा तुम एक काम क्यो नही करते, मम्मी से बात करके संगीता को कुछ दिनो के लिए अपने घर ले जाओ और फिर 10-15 दिन तक जब तुम रोज संगीता की चूत मरोगे तब तुम्हारा मन भी भर जाएगा और सारी-सारी रात तुम उसे नंगी लेकर पड़े भी रहोगे,
मामा- वाह भान्जे क्या आइडिया दिया है तूने चल अभी दीदी से बात करते है तभी सामने से मंजू आ जाती है,
मंजू- क्या बात करना है भाई दीदी से
मामा- अरे दीदी मैं तो यह कहना चाहता था कि संगीता की मामी कह रही थी कि कुछ दिनो के लिए संगीता को अपने यहाँ लेकर आ जाओ वह भी अपने मामा मामी का घर देख लेगी,
मंजू- अरे तो इसमे तुझे मेरी पर्मिशन की क्या ज़रूरत है तेरी बेटी है जब चाहे ले जा,
मामा- ठीक है दीदी तुम संगीता को कह देना कल तैयार हो जाएगी मैं कल घर जा रहा हू
मंजू- अरे इतनी जल्दी क्या है अभी तुझे आए दिन ही कितने हुए है,
मामा- नही दीदी वहाँ बड़ा काम पड़ा है और घर पर देखभाल करने वाला भी कोई नही है,
अगले दिन संगीता अपने मामा के साथ उनके यहा चली जाती है और घर मे रोहित संध्या और मंजू और मनोहर रह जाते है,
शाम को संध्या और रोहित बालकनी मे खड़े थे रोहित संध्या के दूध दबाता हुआ नीचे से जाती हुई औरतो की गंद देख रहा था और संध्या से उनके बारे मे बाते कर रहा था,
रोहित- देखो संध्या उस औरत की गंद कितनी मोटी है
संध्या- हाँ बिल्कुल मम्मी जी की गंद की तरह लग रही है,
रोहित- संध्या- अभी तक मम्मी को चोदने की इच्छा मन मे ही है तुम कुछ आइडिया क्यो नही बताती हो
संध्या- लगता है मुझे कुछ करना ही पड़ेगा, खेर तुम चिंता मत करो और मैं जैसा कहती हू वैसा ही करना हो सकता है आज रात को ही तुम्हे अपनी मम्मी की चूत और गंद को चोदने का मोका मिल जाए पर जब तुम मम्मी को चोदोगे तब मैं क्या करूँगी,
रोहित- मेरी रानी तुम काफ़ी होशियार हो मैं जानता हू जिस दिन मैं मम्मी की चूत और गंद को चोद रहा होऊँगा उस दिन तुम भी पापा के मोटे लंड से खूब अपनी चूत मरवा रही होगी,
संध्या- सच रोहित पापा से चुदने मे एक अलग ही मज़ा आता है, उनका लंड भी बड़ा मस्त है
रोहित- तुम्हे तो कम से कम यह तो पता है कि पापा से चुदने मे कितना मज़ा आता है पर मुझे तो यह भी नही पता की जब मैं अपनी मम्मी को चोदुन्गा तो कितना मज़ा आएगा,
संध्या- चलो आज तुम्हारी इच्छा पूरी कर देती हू लेकिन जैसा मैं कह रही हू वैसा ही करना और फिर संध्या और रोहित वहाँ से अंदर आ जाते है, रात को 9 बजे पापा टीवी के सामने बैठे थे और संध्या उनके पास जाकर बैठ जाती है उधर मंजू अपने रूम मे थी और रोहित अपने रूम से संध्या और पापा को देख रहा था,
संध्या- पापा
मनोहर- हाँ बहू बोलो क्या बात है
संध्या- पापा मुझे दारू पीना है
मनोहर- संध्या को हैरत भरी निगाहो से देखता हुआ, क्या बात कर रही हो बेटी,
संध्या- पापा आज बहुत मन कर रहा है कम से कम बीआर ही पीला दो,
मनोहर- लेकिन बेटी रोहित देखेगा तो क्या बोलेगा, आप फिकर ना करो एक बोत्तेल उनके लिए भी मॅंगा लीजिए ना मैं उन्हे अंदर देकर आ जाउन्गि वह पी लेंगे फिर मैं आपके पास आकर आपके साथ पीना चाहती हू,
मनोहर- लेकिन मंजू ने कुछ कहा तो
संध्या- तो आप मम्मी को कोल्ड्ड्रिंक मे बियर मिला कर उनको भी पिला दीजिए ना,
मनोहर- बहू आज तुम किसी अलग मूड मे लग रही हो क्या बात है साफ-साफ बताओ,
संध्या- पापा मैं चाहती हू आज आप मेरे सामने मम्मी को पूरी नंगी करके चोदिये और फिर उसके बाद आप मुझे मम्मी के सामने पूरी नंगी करके चोदिये, होश मे शायद मम्मी शरमाने लगे इसलिए मैं यह सब कह रही हू,
मनोहर- मुस्कुरकर संध्या की मोटी गंद को सहलाते हुए, एक शर्त पर मैं यह सब कर सकता हू
संध्या- मुझे आपकी सभी शर्त मंजूर है
मनोहर- पहले शर्त तो सुन लो बाद मे कही पलट गई तो
संध्या- मुझे पता है आपकी शर्त, आप आज रात को मेरी गंद मारना चाहते हो ना,
मनोहर- आश्चर्या से संध्या को देखता हुआ, तुम्हे कैसे पता मैं यही शर्त कहने वाला हू
संध्या- पापा उपर वाला भी एक जैसे विचारो वाले लोगो को जल्द ही मिलवा देता है चाहे हिन्दी सेक्सी कहानियाँ के थ्रू ही क्यो ना मिलवाए,
मनोहर- पर बेटी रोहित का क्या करेगे,
संध्या- अरे पापा रोहित भी मम्मी जी को चोद लेगा, हम चारो मिल कर मज़ा लेंगे
मनोहर- पर बेटी यह कैसे संभव है रोहित क्या अपनी मम्मी को चोदेगा
संध्या- क्यो नही पापा जब आप रोहित की बीबी को चोद सकते हो तो रोहित आपकी बीबी को क्यो नही चोद सकता है,
मनोहर मुस्कुराते हुए ठीक है लेकिन यह सब के लिए बियर का नशा काफ़ी नही रहेगा, तो फिर आप क्या लेकर आओगे,
मनोहर- बेटी इसके लिए तो आज मुझे वोद्का लेकर आना पड़ेगी लेकिन ध्यान रखना मंजू को भनक ना लगे कि कोल्ड्ड्रिंक मे वोद्का है,
संध्या- आप फिकर ना करो पापा मैं सब संभाल लूँगी और फिर संध्या वहाँ से उठ कर अपने रूम मे आ जाती है,
रोहित अपनी बीबी की प्लॅनिंग से खुस हो जाता है और संध्या के आते ही उसके होंठो को चूम कर उसकी मोटी गंद पर थप्पड़ मारते हुए मुस्कुरकर वाकई रानी तुम कमाल की प्लॅनिंग करती हो,
संध्या- चलो अपना लंड बाहर निकालो आज मैं इसकी सरसो के तेल से अच्छी मालिश कर देती हू आख़िर आज यह अपनी मम्मी की मोटी गंद को और फूली चूत को जो फाड़ने वाला है और फिर संध्या रोहित के खड़े मोटे लंड को तेल से नहलकर उसकी मालिश करने लगती है, और उसे रात की प्लॅनिंग बताने लगती है,
रोहित सारी बाते ध्यान से समझ कर संध्या की प्लॅनिंग की तारीफ करते हुए उसे चूम लेता है तभी बाहर से पापा की आवाज़ आती है अरे संध्या बेटी ज़रा यहाँ आना और संध्या अपने तेल से भीगे हाथ को ऐसे ही लेकर पापा के पास पहुच जाती है और
संध्या- क्या बात है पापा
मनोहर- अरे यह तेरे हाथ मे इतना तेल कैसे लगा रखा है
संध्या- कुछ नही बस सोचा आपके मोटे लंड पर थोड़ा तेल लगा दू आख़िर आज आप अपनी बहू की मोटी गंद जो मारने वाले हो और फिर संध्या पापा के लंड पर तेल मलने लगती है और अपने रूम की ओर मुस्कुरकर देखती है और रोहित भी उसकी छीनल्पने को देख कर मुस्कुरा देता है,
शाम को पापा शराब लेने के लिए चले गये और मैं और मम्मी छत पर खड़ी होकर रोड का नज़ारा लेने लगी
मंजू- क्यो संध्या तूने बताया नही अपने पापा के यहाँ तूने और रोहित ने कितने मज़े मारे थे, मुझे तो तब
पता चला जब इन्होने मुझे बताया, अपने ससुर को तो झट से बता देती है पर मुझे बताने मे तुझे शर्म
आती है क्या,
संध्या- अरे नही मम्मी ऐसी बात नही है बस मुझे मोका ही नही लगा नही तो क्या मैं आपसे ऐसी बाते
छुपाटी,
मंजू- अच्छा तो यह बता क्या तेरे पापा ने तुझे खूब चोदा था,
मम्मी के सवाल को सुन कर मैं समझ गई कि आज मेरी रंडी सास खूब चुदासी लग रही है आज साली को इतना गरम
कर देती हू कि यही खड़ी-खड़ी मूतने लगे,
संध्या- हाँ मम्मी मेरे जाते ही पापा ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे मोटे-मोटे दूध को खूब
कस-कस कर दबाने लगे और मेरे होंठो को चूमने लगे,
मंजू- फिर तूने क्या किया
संध्या- मैने मम्मी झट से पापा का लूँगी मे खड़ा मोटा लंड अपने हाथो मे पकड़ कर दबोच लिया
मंजू- क्या खूब मोटा है तेरे पापा का लंड
मैने मम्मी का हाथ पकड़ कर कहा मम्मी पहले मेरी चूत मे हाथ डाल कर उसे सहलाती जाओ तब मैं आपको
सारी बात बता देती हू, मम्मी ने तुरंत अपने हाथ को मेरी साडी मे डाल कर मेरी फूली चूत को अपनी मुट्ठी मे
भर लिया और दबाते हुए कहने लगी,
मंजू- फिर क्या हुआ संध्या बता ना
संध्या- फिर क्या था मम्मी, पापा मेरे चूतादो को खूब कस-कस कर दबाने और मसल्ने लगे
मंजू- सच संध्या तेरे चूतड़ पहले से काफ़ी मोटे हो गये है तेरे पापा को तो तेरी मोटी गंद दबोचने मे
मज़ा आ गया होगा,
संध्या- हाँ मम्मी मैने झट से पापा के मोटे लंड को अपने मूह मे भर कर चूसना चालू कर दिया,
मंजू- और रोहित क्या कर रहा था
संध्या- रोहित मेरी मम्मी की मोटी गंद को खूब कस-कस कर मसल रहा था
मंजू- क्या रोहित को तेरी मम्मी की गंद बहुत पसंद है
संध्या- हाँ मम्मी रोहित ने मम्मी को वही झुका दिया और उनकी साडी उनकी गंद से उठा कर उनकी पॅंटी उतार दी
और फिर रोहित ने कम से कम आधे घंटे तक मम्मी की गोरी-गोरी मोटी गंद को चाट-चाट कर लाल कर दिया,
सच मम्मी रोहित बहुत मस्त तरीके से चूत और गंद चाट्ता है और मोटी-मोटी गंद का तो वह दीवाना है उसे
औरतो के भारी चूतड़ बहुत अच्छे लगते है तभी तो वह दिन रात बस आपकी गंद चोदने के बारे मे सोचता है
मंजू- क्या रोहित को मेरी गंद बहुत अच्छी लगती है
मैने मम्मी की बात सुन कर उनकी साडी के अंदर हाथ डाल कर उनकी चूत को जैसे ही दबोचा ढेर सारा पानी मेरे
हाथो मे लग गया और मैं समझ गई साली पूरी भीग चुकी थी,
संध्या- हाँ मम्मी रोहित तो आपको पूरी नंगी करके चोदना चाहता है
मंजू- क्या उसने तुझसे ऐसा कहा है कि वह मुझे पूरी नंगी करके चोदना चाहता है
संध्या- हाँ मम्मी वह तो कई बार मुझे अपनी मम्मी बना कर भी मेरी गंद मारते है
मंजू- खूब मोटा लंड है ना रोहित का खूब मज़ा आता होगा ना तुझे
संध्या- हाँ मम्मी जब रोहित का मोटा लंड मेरी गंद मे जाता है तो ऐसा लगता है कि रोहित खूब कस-कस कर
अपने लंड को मेरी गंद मे मारे और मुझे खूब रगड़-रगड़ कर चोदे और फिर मैने मम्मी के मोटे-मोटे
दूध को दबाते हुए एक हाथ से मम्मी की गुदा सहलाते हुए कहा मम्मी जब रोहित का मोटा लंड आपकी मोटी
गंद मे जाएगा तब देखना आप मस्त हो जाओगी और खुद ही रोहित से कहोगी की ठोंक बेटा खूब कस-कस कर मार
अपनी मम्मी की मोटी गंद अपने मोटे लंड से मम्मी मेरी बात सुन कर मुझसे बुरी तरह चिपक गई और मैने
मम्मी के होंठो को अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया और फिर मैने मम्मी से कहा
संध्या- बोलो मम्मी अपने बेटे का मोटा लंड अपनी इस भारी गंद मे घुसाने का मन कर रहा है ना और फिर
मैने मम्मी की मोटी गंद को कस कर दबोच लिया
मंजू- आह आह हाँ हाँ बेटी मेरा दिल कर रहा है कि रोहित अभी मुझे खूब रगड़-रगड़ कर चोदे मेरी चूत और
गंद अपने मूसल से फाड़ कर रख दे,
मैने मम्मी की चूत मे फिर से अपना हाथ डाल कर मम्मी से कहा बोलो मम्मी चुद्वओगि अपने बेटे से और
फिर मैने अपनी उंगली मम्मी की चूत मे भर दी और मम्मी मुझसे पागलो की तरह लिपट गई और मुझे चूमते
हुए कहने लगी
मंजू- हाय संध्या एक बार मेरी चूत मे रोहित का लंड डलवा दे अया आ आ ओह संध्या
मैने मम्मी की चूत मे तीन उंगलिया डाल कर खूब ज़ोर से उनकी चूत मे आगे धकेलने लगी और मम्मी ने अपनी
टाँगे और चौड़ी कर ली, मैं बड़े आराम से मम्मी की चूत मे उंगली डालने लगी और मम्मी सीसियाते हुए कहने
लगी संध्या बता ना कब मेरी चूत मे तू रोहित का लंड डालेगी, कब मेरा बेटा अपनी मम्मी को पूरी नंगी करके
उसकी चूत मे अपना लंड डालेगा,
संध्या-मम्मी अभी आपको रोहित से चुदवा दूँगी पर आपको भी मेरी एक इक्च्छा पूरी करनी होगी
मंजू- कौन सी इक्च्छा
संध्या- मेरा दिल करता है कि एक बार आप और पापा दोनो मिलकर मुझे चोदो
मंजू- क्यो नही बेटी आज रात तू हमारे रूम मे आ जाना और मेरे और अपने पापा के बीच मे सोना फिर देखना
हम दोनो मिलकर तुझे पूरी तरह मस्त कर देगे
संध्या- नही मम्मी आपके रूम मे नही बल्कि बैठक वाले रूम मे जहाँ से रोहित भी हमे अपने रूम से
देख सके, आप नही जानती रोहित आपको पूरी नंगी देखने के लिए मरा जा रहा है इसलिए आज आप उसे अपनी मोटी
गंद खूब उठा -उठा कर दिखना फिर देखना वह आपकी गंद देख कर आपको नंगी ही उठा कर अपने बेड पर ले
जाएगा और खूब कस-कस कर चोदेगा,
रात को पापा सोफे पर बैठे टीवी देख रहे थे और मैं उनके पास जाकर बैठ गई रोहित पूरा नंगा होकर अपने रूम
से हमे देख रहा था, तभी सामने से मम्मी आ गई मम्मी ने मेकप किया हुआ था और बहुत सेक्सी लग रही
थी वह जैसे ही पापा के पास आ कर खड़ी हुई पापा ने मम्मी की चिकनी कमर को थाम कर उन्हे अपनी गोद मे
खींच कर बैठा लिया और उनके मोटे-मोटे दूध को खूब कस कर दबा दिया,
मंजू- हस्ते हुए अरे छ्चोड़ो ना क्या कर रहे हो सामने बहू बैठी है,
मनोहर- अरे मेरी रानी बहू भी जानती है कि आज तुम्हारी चूत से बहुत पानी आ रहा है खूब मोटा लंड लेने का
मन कर रहा है ना,
मंजू- मुस्कुराते हुए, छ्चोड़िए भी संध्या क्या सोच रही होगी
मनोहर- अरे संध्या से क्यो शर्मा रही हो, लो मैं अभी तुम्हारी शरम दूर कर देता हू और फिर पापा ने
मुझे भी अपनी गोद मे खींच कर बैठा लिया अब पापा एक हाथ से मम्मी के दूध मसल रहे थे और दूसरे
हाथ से मेरे दूध मसल रहे थे,
मंजू- बहुत बेशरम हो तुम, मैं जा रही हू सोने,
संध्या- मम्मी ज़रा बैठिए तो सही मैं अभी कुच्छ खाने पीने के लिए लेकर आती हू और फिर मैं सीधे रोहित के
पास गई और सभी के लिए लार्ज ग्लास ड्रिंक बना कर ले आई, पहले पापा ने एक ग्लास उठा कर एक ही घुट मे ख़तम
कर दिया फिर पापा ने दूसरा ग्लास उठा कर मम्मी के गालो को चूमते हुए कहा ले रानी यह सोमरास पी ले फिर आज
तुझे मस्ती से चोदुन्गा,
मम्मी मेरी ओर देख रही थी और मैने इशारे से उन्हे पीने के लिए कहा और फिर मम्मी पूरा ग्लास पी गई और
मम्मी के चेहरे पर एक मस्ती सी दिखाई देने लगी,
संध्या- पापा मुझे भी अपने हाथो से पिला दो ना
मंजू – बहू तू अपने पति के हाथ से पी
संध्या- नही मम्मी मुझे तो पापा के हाथो से ही पीने मे मज़ा आता है,
मैने देखा मम्मी को सुरूर आने लगा था और वह अब धीरे से पापा के मोटे लंड को दबाने लगी थी, तभी
पापा ने मेरे लबो से ग्लास लगा दिया और मेरे मोटे-मोटे दूध को खूब कस-कस कर दबाते हुए मुझे पिलाने
लगे,
मैने जैसे ही ग्लास ख़तम किया पापा ने सीधे मेरे रसीले भीगे होंठो को अपने मूह मे भर कर चूस
लिया और मैं एक दम से मस्त हो गई, मम्मी ने जब मुझे पापा से चिपकते देखा तो वह भी पापा के लंड को
बाहर निकाल कर सहलाने लगी, पापा मेरी ओर ज़्यादा ध्यान दे रहे थे और मेरे ब्लौज को खोल कर पापा मेरी सफेद
रंग की ब्रा के उपर से मेरे सुडोल भरे हुए दूध को मसल रहे थे,
मम्मी पूरी मस्ती मे आ चुकी थी तभी पापा ने कहा संध्या बेटी एक-एक ग्लास और लेकर आओ तब तक मैं
तुम्हारी मम्मी को पूरी नंगी कर देता हू,
मैं जल्दी से अंदर गई तो रोहित ने मुझे दबोच लिया उसका मोटा लंड
पूरी तरह खड़ा हुआ था और वह अपने लंड पर तेल लगा-लगा कर मसल रहा था, रोहित ने मुझे पिछे से
दबोचते हुए कहा मेरी रंडी बीबी मेरे पापा से बहुत चिपक रही थी, बहुत पसंद है तुझे पापा का लंड,
और फिर रोहित ने मेरी साडी और पेटिकोट भी उतार दिया और मैं ब्रा और पॅंटी मे रह गई,
फिर रोहित ने मेरी पॅंटी
भी उतार दी और ब्रा को भी खोल दिया और मेरी गंद के पिछे से अपने लंड को रगड़ने लगा,
रोहित के लंड पर तेल की खूब चिकनाई थी और मेरी चूत भी पूरी गीली थी अचानक रोहित ने थोडा ज़ोर लगाया और उसका
मोटा लंड सॅट से मेरी चूत मे अंदर तक समा गया और रोहित मेरे होंठो को पागलो की तरह चूमने लगा,
संध्या- आह क्या बात है रोहित मम्मी की गुदाज गंद और ब्लॅक ब्रा पॅंटी देख कर तुम्हारा लंड कुच्छ ज़यादा
ही झटके मार रहा है,
रोहित- मेरी रानी आज मैं तुझे और मम्मी को दोनो को एक साथ पूरी नंगी करके चोदुन्गा,
संध्या- ठीक है चोद लेना पर पहले पापा को तो फ्री कर दू चलो अब लंड बाहर निकालो और अपनी मम्मी के लिए
एक लार्ज ग्लास बना दो तभी तो वह खूब गंद उठा-उठा कर तुमसे चुद्वयेगि,
रोहित- अच्छा ठीक है और फिर मैं पूरी नंगी ही उन लोगो के लिए ड्रिंक ले कर चली गई रोहित मुझे जाते हुए मेरे
नंगे भारी चुतडो को देख कर लंड मसल रहा था, मैने जैसे ही पापा की ओर ट्रे बढ़ाया पापा ने मम्मी
को बीच मे बैठा लिया और मैं मम्मी के साइड मे बैठ गई,
मनोहर- बेटी संध्या अब तुम और मैं दोनो तुम्हारी मम्मी को ड्रिंक पिलाएगे लेकिन पहले हम दोनो अपना वाला
ग्लास ख़तम कर देते है उसके बाद पापा ने मम्मी के ब्लौज के बटन खोलना शुरू कर दिए, मम्मी मस्ती
मे लगातार पापा का लंड मसले जा रही थी और पापा मम्मी की ब्रा खोल कर उनकी साडी और पेटिकोट भी उतार देते
है,
अब मम्मी की गुदाज भारी भारी जंघे मोटी मोटी फैली हुई गंद, बड़े बड़े मोटे मोटे दूध और उठा हुआ
गुदाज मसल पेट सब कुच्छ सामने था, पापा ने ड्रिंक को मम्मी के मोटे-मोटे बोबो पर डालते हुए उनके निप्पल
को चूसना शुरू कर दिया और मम्मी आह सी आह करने लगी,
पापा की यह हरकत मुझे भी पसंद आई और मैने भी मम्मी के दूसरे दूध को खूब कस कर दबोचते हुए
उसके उपर थोड़ी ड्रिंक डाल कर उसे चूसना शुरू कर दिया, हम तीनो सोफे से टिक कर बैठे थे फिर मैने और पापा
ने मम्मी की दोनो टाँगो को उपर उठा कर मोड़ दिया और अब मम्मी की एक मोटी जाँघ पापा दबा रहे थे और
दूसरी मोटी जाँघ मैं दबाने लगी तभी पापा ने मम्मी की दोनो जाँघो को खूब फैला कर उनकी फूली हुई चूत की
एक फाँक को अपनी ओर खींचा तब मैने भी मम्मी की चूत की दूसरी फाँक को अपनी ओर खींचा,
सामने से रोहित यह नज़ारा देख कर पागल हुआ जा रहा था उसके सामने उसकी मम्मी की मस्त फूली हुई चिकनी चूत
पूरी तरह खुली हुई थी और पापा और मैं एक-एक फांको को पकड़ कर अपनी ओर खींच रहे थे,
कुच्छ देर बाद हम सभी नशे मे मस्त हो चुके थे और रोहित से भी रहा नही जा रहा था,
रोहित ने मुझे
देखते हुए पूच्छा कि वह भी आ जाए क्या तब मैने उसे आने का इशारा कर दिया और मैं जाकर पापा के मोटे
लंड के उपर बैठ गई मेरी चूत मे पापा का पूरा लंड उतार गया और उन्होने मुझे अपने सीने से लगा लिया,
मम्मी आँखे बंद करके अपनी जाँघो को फैलाए अपनी चूत सहला रही थी तभी रोहित आ गया और उसने
मम्मी की गुलाबी चूत से अपनी जीभ लगा दी और उनकी बुर चाटने लगा,
मम्मी ने और भी अपनी टाँगे फैला दी, तभी पापा ने मुझे उठाया और अपने लंड पर खड़े होकर पूरी तरह
बैठा लिया मेरी चूत मे उनका मोटा लंड पूरी तरह फसा हुआ था और मैं उनके सीने से अपने मोटे-मोटे दूध को
दबाए हुए चिपकी हुई थी,
पापा नीचे से मेरी चूत मे तबीयत से लंड पेल रहे थे और मैं हाय पापा आह आह
बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे ही मुझे अपने लंड पर चढ़ाए हुए चोद्ते रहिए, पापा मेरे होंठो को
चूस्ते हुए लगातार मेरे बोबे मसल-मसल कर मेरी चूत को ठोंक रहे थे,
फिर वहाँ जगह कम होने के कारण पापा मुझे उठा कर बिस्तेर पर ले गये और वहाँ मुझे घोड़ी बना कर खूब
हुमच हुमच कर मुझे चोदने लगे,
रोहित ने भी मम्मी को खड़ी कर के उनसे रूम के अंदर चलने को कहा और मम्मी आगे आगे चलने लगी और
रोहित मम्मी की मोटी गंद को दबोचते हुए उनके पिछे पिछे चलने लगा, रोहित ने अपनी एक उंगली मम्मी की
गंद के छेद से लगा रखी थी और दूसरे हाथ से मम्मी के मोटे मोटे चूतादो को थपकीया रहा था, रोहित को
मम्मी की मोटी गंद बहुत अच्छी लगी और रोहित ने मम्मी को पेट के बल बिस्तेर पर लेटा दिया और मम्मी की
गंद को दबोचते हुए उस पर थप्पड़ मारने लगा रोहिर अपने लंड को सहलाते हुए अपनी मम्मी की गंद मे जैसे
ही थप्पड़ मारता उसकी मम्मी की गंद लाल हो जाती और मंजू आह रोहित बेटे क्या कर रहा है,
रोहित- मम्मी आपके चूतड़ बहुत मस्त है लगता है इन्हे खूब चाँते ही चाँते मार मार कर लाल कर दू
मंजू- आह सी बेटे जब तू मेरी गंद पर थप्पड़ मारता है तो मेरा दिल करता है कि मेरी गंद मे तू अपना लंड
फसा कर खूब चोद दे, बेटे मेरी गंद मे थप्पड़ मारते हुए उसे चाट्ता भी जा, मैं जानती हू तुझे औरतो की गंद
और चूत चाटने मे बहुत मज़ा आता है,
रोहित ने मम्मी की गंद को फैला कर उसे चाटना शुरू कर दिया वह मम्मी की चूत को उपर से लेकर नीचे तक
चाट्ता फिर मम्मी की गंद के छेद को चाट कर उसकी गुदा मे उंगली डाल देता था,
रोहित जब पापा को देखता है कि वो मुझे खूब कस कस कर झुकाए हुए मेरी गंद मार रहे है तब रोहित भी
मम्मी को वही घोड़ी बना कर उसकी मोटी गंद मे अपने तेल से सने लंड को लगा कर मम्मी के मोटे-मोटे
चूतादो को खूब फैला कर उनकी गंद मे एक करारा धक्का मार देता है और रोहित का लंड मम्मी की मोटी गुदा
को फैलाते हुए गच्छ से अंदर फस जाता है,
मंजू- ओह मा मर गई कितना मोटा लंड है बेटे तेरा पूरी गुदा खोल कर फैला दिया हे रोहित मार डाला रे, मैने
जब रोहित के लंड को मम्मी की गंद मे घुसा देखा तो रोहित की ओर इशारा किया कि खूब तबीयत से अपनी मम्मी
की गंद मारो, रंडी पर बिल्कुल रहम मत करो खूब कस कस कर उसकी गुदा को चोदो तभी उसे मज़ा आएगा,
रोहित मेरा इशारा समझ गया और इस बार उसने ऐसा झटका सासू मा की गंद मे मार दिया कि सासू मा क़ी एक दम से
बोलती ही बंद हो गई, रोहित का मोटा लंड पूरा उसकी मम्मी की मखमली गंद के छेद मे समा गया और मंजू
ओह ओह सी सी करते हुए अपने चूतादो को इधर उधर मटका कर अड्जस्ट करने लगी, मैं भी पापा के लंड को सटा सॅट
अपनी गंद मे ले रही थी लेकिन पापा मुझे बड़े आराम से मेरी बुर को सहलाते हुए चोद रहे थे लेकिन रोहित
मम्मी के चुतडो पर थप्पड़ मारते हुए उनकी गंद के छेद को खूब हुमच हुमच कर चोद रहा था,
पापा कभी मेरे बोबे मसल देते कभी मेरी गंद दबा देते और कभी मेरी चूत को दुलार्ने लगते,
रोहित ने मम्मी के मूह को पकड़ कर अपनी ओर मोड़ लिया और उनके होंठो को पीते हुए उनकी गुदा को ठोकना
शुरू कर दिया, रोहित के हर धक्के के साथ सासू मा उह उह आह आह करने लगती थी, लगभग एक आधे घंटे तक
पापा और रोहित ने मुझे और मम्मी को खूब कस कर चोदा उसके बाद पलंग पर पापा और रोहित मुझे और
मम्मी को लेकर लेट गये मैं और मम्मी पूरी नंगी एक दूसरे से नशे मे चिपकी हुई थी और एक दूसरे के रसीले
होंठो को चूस्ते हुए एक दूसरे के बोबो को खूब मसल रही थी,
उधर रोहित और पापा दोनो मेरी और मम्मी की गंद के पिछे से चिपके हुए थे पापा मेरे चूतादो को दबोच
दबोच कर सहला रहे थे और रोहित मम्मी की गंद मे अभी भी लंड फसाए उन्हे गहराई तक धक्के दे रहा
था,
अब मैं और मम्मी एक दूसरे से पूरे चिपक गये और रोहित और पापा हम दोनो के पिछे से पूरी तरह अपना
अपना लॅंड फसा कर चिपक गये और फिर हम दोनो को खूब कस कस कर ठोकने लगे, उन दोनो के धक्के जब
हमारी गंद मई पड़ते तो मेरे और मम्मी के बदन आपस मई खूब चिपक जाते, जैसे जैसे रोहित और पापा का
जोश बढ़ रहा था वैसे वैसे मेरे और मम्मी के बीच की दूरी कम हो रही थी, फिर जब पापा और रोहित को
खूब मज़ा आने लगा तब दोनो हमारी गंद पर चढ़ चढ़ कर हमे ठोकने लगे, चुदाई और उसकी ठप की
थपथपाहट पूरे कमरे मे गूँज रही थी और पापा और रोहित मुझे और मम्मी को लेकर पूरी तरह गुत्थम
गुत्थ हो रहे थे, हम दोनो की गंद चुद चुद कर पूरी लाल हो चुकी थी, तभी रोहित ने एक तगड़ा झटका मार दिया
और पापा ने मेरी गंद मे भी अपना मूसल खूब अंदर तक दबा दिया,
मंजू- आह आह चोद बेटा चोद खूब चोद और मार अपनी मम्मी की गंद आज फाड़ दे बेटा आह आ आह सी सी
संध्या- ओह पापा और चोदिये खूब चोदिये आज फाड़ दीजिए अपनी बहू की चूत आह आह आह ओह ओह सी सी
पापा और रोहित हमे चोद चोद कर पूरी मस्त कर दिया और फिर पापा मुझे चोद्ते हुए मम्मी की चूत सहलाने
लगे और रोहित मम्मी की गंद ठोकता हुआ मेरी चूत सहलाने लगा, मैं मम्मी के दूध मसल रही थी और
मम्मी मेरे दूध मसल रही थी, तभी रोहित और पापा के धक्के पूरी मस्ती मे मेरी और मम्मी की गंद मे
पड़ने लगे और हम दोनो रंडियो ने एक दूसरे को खूब कस कर दबोचते हुए अपनी अपनी चूत का पानी छ्चोड़ना
शुरू कर दिया तभी पापा ने अपना गरम गरम वीर्य मेरी गुदाज गंद मे पूरा भर दिया और उधर रोहित ने
मम्मी की मोटी गंद मे अपना वीर्य छ्चोड़ कर उनकी गंद की गहराई मे अपने लंड को पूरा दबा दिया,
उस रात पापा और रोहित ने हम सास बहू की दो बार और खूब तबीयत से चुदाई की और पूरी रात रंडियो की तरह दोनो
बाप बेटो ने मिल कर हमे दबोचा चोदा और हमारा रस पिया,
एक दिन मैं और पापा दोनो मार्केटएमई घूम रहे थे कि अचानक मुझे वही आदमी नज़र आ गया जिसने मेरा
बलात्कार करने की कोशिश की थी, मैने इशारे से पापा को बताया तो पापा ने कहा कि उसे पोलीस के हवाले करे
क्या मैने कहा अब रहने दो लेकिन चलो उससे थोड़ी बात करते है, मैं और पापा उसके पास पहुचे,
और मैने
उससे कहा कहो भैया क्या हाल है आपके,
उसने मुझे गौर से देखा और कहा बहन जी मैने आपको पहचाना नही,
संध्या- हस्ते हुए, भैया आपकी वजह से ही आपकी बहन आज मस्त शादी शुदा जिंदगी जी रही है, सच भैया
आपका मुझ पर बड़ा अहसान है बस इतना कह कर मैं और पापा वहाँ से हस्ते हुए चल दिए और वह काला आदमी
अपना मूह फाडे हमे देखता रह गया शायद वह समझ नही पाया कि उसने मेरे उपर कब और कौन सा एहसान
किया है, बस इतना ज़रूर था कि वह कुच्छ दिन तक यह सोच कर परेशान रहेगा कि इतना मस्त माल कौन था और
मैने उस पर क्या एहसान किया था और कब किया था,
दोस्तो ये कहानी यही ख़तम होती है फिर मिलेंगे किसी नई कहानी के साथ
समाप्त
